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मुझे यकीं नहीं हो रहा था अभी जो कुछ भी हुआ था. मेने आंटी के साथ सेक्स कर लिया था. वो कितनी अच्छी है, वो मेरे साथ कितना अच्छा सलूक करती है, मेने उनका वो रूप देखा था, जिसमे ममता था, मेरे लिए प्यार था. पर आज जो कुछ भी हुआ वो कुछ अलग hi था. अब में इतना तो समझने लगा था की हर औरत आउट मर्द की कुछ जरूरते होती है, शारीरिक तौर पर भी उन्हें कुछ चाहिए होता है. किसी की माँ हो भाई हो बहन हो या कोई भी रिश्ते में हो हर कोई मर्द और औरत भी होते है, चाहे वो हर किसी के साथ उस तरह से नहीं रहते पर कभी न कभी कही न कही वो उस सम्बन्ध से रहते hi है. और उसमे कुछ गलत भी नहीं है, क्यों की अगर ये चाहत ये सम्बन्ध न होते तो दुनिया कब की ख़तम हो गयी होती. मुझे आंटी का ऐसा करना कुछ भी गलत नहीं लगा, वो भी एक औरत है और अगर उन्होंने ऐसा कुछ कर लिया तो वो बुरी नहीं बन गयी. मुझे उनका चेहरा याद आ रहा था, सेक्स के दौरान उनके चेहरे पर एक अलग hi नूर था, वो कितना आनंदित थी, यही सब सोचते हुए में साइट पर चला गया. में काफी लेट पंहुचा था, सब खाना खा कर फिर से काम में लग गए थे. मेने देखा की जहान्वी मैडम की गाडी पड़ी हुई है, हो शक्ति है की वो ऑफिस नुमा माकन में हो, पर में चलते हुए अंदर की और चला गया, कुछ मकानों में दो चार दो चार लोग काम कर रहे थे, में एक माकन के पास से गुजरा तो मुझे झुमरी ने आवाज दी तो में उस और चला गया. वह दूसरे भी लोग काम कर रहे थे, कमली भी थी. में उनसे बात कर रहा था की भोली भी आ गयी. मेने उन्हें काम करने को कहा और में दूसरी जगहों पर भी घूम कर मुआइना करने लगा. थोड़ी देर बाद पिंकेशभाई मुझे ढूंढते हुए आये.
पिंकेशभाई : तुम यहाँ हो?
शिव : क्या हुआ पिंकेशभाई?
पिंकेशभाई : कुछ नहीं, वो जहान्वी मैडम तुम्हे बुला रही है.
शिव : क्यों?
पिंकेशभाई : मुझे क्या पता, कई बार तुम्हारे बारेमे पूछ चुकी है?
शिव : ठीक है में जाता हु.
मेरी समाज में नहीं आ रहा था की उनकी प्रॉब्लम क्या है, क्यों की अगर साइट के बारेमे कुछ भी जानकारी लेनी हो तो वो मुझसे बेहतर पिंकेशभाई बता शक्ति है, तो मुझसे बात चित का तो कोई मतलब hi नहीं है, में चलते हुए उस माकन में पंहुचा, ऊपर के मेल पर ऑफिस जैसा था वह कुर्शी पर वो बैठी हुई थी. ब्लू जीन्स और काळा रंग की चुस्त t-shirt में बैठी हुई थी, बालो की छोटी बाँध रक्खी थी, खूबसूरत तो वो थी hi साथ में भरा हुआ जिस्म था उनका, स्तन भी काफी बड़े थे, जिस पर नजर चली hi जाये.
शिव : में आ शक्ति हु?
जहान्वी : (वो बैठी बैठी कुछ सोच hi रही थी, शिव की और देख kar)To आगये तुम? (उनका टाउन ऐसा था की जैसे मेरा मज़ाक उदा रही हो)
शिव : जी, कहिये क्यों बुलाया था?
जहान्वी : ये कोई वक़्त है आने का?
शिव : देखिये मैडम, में पहले भी बता चूका हु, टाइम के बारे में मेरी बात पवनसीर से हो चुकी है, फिर बार बार आप क्यों उस टॉपिक पर बात करती है?
जहान्वी : अकड़ तो देखो साहब की, जब मर्जी आना, जब मर्जी जाना, मेरी समाज में ये नहीं आता की तुम आते क्यों हो अगर काम नहीं करना है तो.
शिव : वो में और पवनसीर देख लेंगे, आप को क्या दिक्कत है वो बताइये.
जहान्वी : तुम समझते क्या हो अपने आपको, ये कोई तरीका है मुझसे बात करने का, मात भूलो की में कौन हु.
शिव : मुझे सब पता है, में ऐसे hi काम करूँगा, मेरी ये समाज में नहीं आ रहा है की इतनी साडी साइट पर काम चल रहा है आप को इसी साइट में क्यों इतनी दिलचस्पी है?
जहान्वी : ये मेरी मर्जी है, तुम पूछनेवाले कोण होते हो, मेरी मर्जी में यहाँ औ या कही और जाऊ, में हर जगह का काम देखती हु, मुझे सिर्फ तुम्हारा hi काम पसंद नहीं आ रहा है. में पापा से कहनेवाली हु की वो तुम्हे निकल दे, वैसे भी तुम करते क्या हो जो तुम्हे यहाँ बुलाया जाये.
शिव : आपको जो करना है वो करिये, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर और कोई काम न हो तो में जाऊ.
जहान्वी : (कड़ी हो कर वो मेरे सामने कड़ी हो गयी और मेरा गिरेबान पकड़ kar)Tumhari हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ इस लहजे में बात करने की.
शिव : देखिये मैडम, मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.
जहान्वी : क्या कर लोगे, अगर नहीं छोड़ा तो, मरोगे मुझे, लम्बे चौड़े हो तो तुम्हे ये लगता है की तुम मुज पर हाथ उठाओगे.
शिव : मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, आप अपने आप hi बोल रही है, मेने बस इतना कहा की मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.
जहान्वी : नहीं छोड़ती, क्या कर लेगा. (वो मेरा गिरेबान और खींचते हुए मेरी आँखों में देख रही थी, मुझे भी गुस्सा आ रहा था, मेने उनका हाथ छुड़ाना छः तो वो और जोर से मेरे गिरेबान को पकड़ ने लगी, पतानहीं वो क्यों इतनी जिद कर रही थी)
शिव : छोड़ दीजिये मैडम, में आखरी बार कह रहा हु.
जहान्वी : नहीं छोड़ती. (मेने उनका हाथ पकड़ा हुआ था, अगर में ज्यादा जोर करता तो मेरा शर्ट भी फैट जाता क्यों की उन्होंने मजबूती से पकड़ा हुआ था, मुझे क्या हुआ की मेने अपना हाथ छोड़ा और उनके शिर के पीछे के बाल पकड़े और सीधा उनके होठो पर टूट पड़ा, उनके होतो को जोर जोर से चूसने laga)(Jhanvi अचानक हुए हमले से हड़बड़ा गयी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की ये लड़का ऐसा भी कुछ करेगा, वो उसके होठो को बुरी तरह से चूस रहा था, उसने शिव को धक्का देना सुरु किआ, पर उसने उसे बहोत मजबूती से पकड़ा था, वो अपना मुँह हटाना चाहती थी पर उसने उसके बालो को भी मजबूती से पकड़ा हुआ tha)(wo मुझे धक्का दे रही थी मतलब उन्होंने मेरा गिरबान छोड़ दिया था, मेने उन्हें छोड़ दिया तो वो दो कदम पीछे हैट गयी, वो हांफ रही थी, उन्होंने गुस्से से मुझे देखा)
जहान्वी : (चिल्लाते hue)Tumhari हिम्मत कैसे हुई कमीने.
शिव : ज्यादा चिल्लाइये नहीं. सब पूछेंगे की क्या हुआ तो क्या कहेंगी आप की शिव ने ये किआ.
जहान्वी : कमीने, तुजे क्या लगता है की में तुजे छोड़ दूंगी, तू रुक में बताती हु की अब तेरी क्या हालत होती है. (वो गुस्से में वह से चली गयी, में वही खड़ा सोच रहा था, मुझे भी लगा की मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, पर गुस्से में जो होना था वो हो गया था, अगर उन्होंने पुलिस कम्प्लेन कर दी तो, में सच में दर गया, में जनता था की उसका बाप मला है, में अपने आपको डांटने लगा, ये सब पहले नहीं सोच सकता था, खैर अब जो हो गया था उसे तो में बदल नहीं सकता, मुझे ये भी पता था की भार्गवी मैडम भी बहार है, और होती तो भी कुछ नहीं कर शक्ति, क्यों की कानून में लड़कीओ को कुछ ज्यादा hi पावर दी हुई है, में अपना शिर पकड़ कर वही बेथ गया)
यहाँ बड़े से हॉल में एक आदमी कुछ कागजो को देख रहा था और साथ में कुछ गिनती कर रहा था, भगवे कलर का चोला पहना हुआ था, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथ में भी रुद्राक्ष का ब्रासलेट पहना हुआ था, कपल पर चन्दन का लपे और बिच में एक बड़ा सा तिलक लगा हुआ था. सामने उदयसिंह, उनकी पत्नी कामना देवी, साथ में चंद्रभान सिंह और नर्मदादिवि भी बैठी हुई है, ममता, बिना और पद्मा साथ में बैठे हुए है. बिना का पति जिग्नेश भी बैठा हुआ है. पृथ्वीसिंह नहीं आया था. सब की निगाहे बाबा पर hi थी. बड़ी मुस्किलो से उन्हें मन कर चंद्रभान उन्हें ले आया था. काफी देर से वो वह बिछी कुन्डलीओ में से देख देख कर एक कागज पर सब लिख रहे थे और बाकि सब उन्हें hi देख रहे थे. आखिर कार उन्होंने सब देखने के बाद अपनी आंखे बंद की और किसी गहे सोच में दुब गए. कामनादेवी ने नर्मदेवी की और देखा, दोनों कुछ बोले तो नहीं पर उनके चेहरे पर परेशानी साफ़ दिख रही थी. बीचमे बोलने की हिम्मत किसीमे नहीं थी, उदयसिंह को इन सब पर कोई भरोसा नहीं था, पर अपनी पत्नी की जिद के चलते वो यहाँ आया था. पृथ्वीसिंह ने साफ़ साफ़ मन कर दिया था, वैसे भी वो किसी काम से बहार था. करीब दस मिनट बाद बाबा ने आंखे खोली और सब की और देखा. हाथ जोड़ कर कामनादेवी ने hi बात सुरु की
कामनादेवी : क्या बात है बाबाजी?
बाबा : आप चिंतित मात होईये, वैसी कोई बात नहीं है, में किसी और बात के लिए चिंतित हु, जहा तक में समाज प् रहा हु, जो बुरा समय था वो बिट चूका है, अब आपके घर में खुशिया लौटनेवाली है, पर उसके लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा.
कामनादेवी : कैसा अनुष्ठान बाबाजी?
बाबा : सबकी सुधि के लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा, इस अनुष्ठान के बाद आप सब के ऊपर जो काळा साये है वो हैट ते जायेंगे.
कामनादेवी : तो कीजियेना, हम तैयार है.
बाबाजी : ये इतना भी आसान नहीं है, इस अनुष्ठान के लिए आपके पुरे परिवार को एक साथ भाग लेना होगा.
कामनादेवी : तो इसमें दिक्कत क्या है, हम सब भाग लेंगे.
बाबाजी : आप मेरी बात को समाज नहीं रही है, सब से मेरा मतलब है सब, आपका पूरा परिवार, आप आपके पुत्र, आपकी बहु, आपकी पूर्ति, जितने भी आपके ससुर के पुत्र पुत्रिया है और उनके पुत्र, पुत्रिया बहु सब.
कामनादेवी : (ये सुन कर वो सोचमे पद gayi)Par बाबाजी, सब तो मुमकिन नहीं है, कुछ लोग हमारे साथ नहीं रहते, और कुछ कई दिक्कतों के चलते यहाँ नहीं आ शक्ति.
बाबाजी : में सब जनता हु की आप क्या कहना चाहती है, पर अगर ये अनुष्ठान करना है तो सबकी हजारी जरुरी है.
उदयसिंह : ये मुमकिन नहीं है, जिन्हे मेने घर से निकल दिया है उन्हें में वापस नहीं बुला सकता और जो मर चुके है उन्हें भी में नहीं बुला सकता.
बाबाजी : देखिये जन्मान, मेरा कर्त्तव्य था की आप को बता दू, अब करना न करना आपकी मर्जी पर है.
उदयसिंह : (कुछ सोच kar)Ek बार मान भी लेते है की में उन्हें बुला लौ, पर जो मर चुके है उन्हें कैसे बुला शक्ति है, और कुछ लोग अस्पताल में बिस्तर पर है, आप रहने दीजिये.
बाबाजी : जैसी आपकी मर्जी जजमान, मेरा कर्त्तव्य था बताना मेने बता दिया.
ममता और बिना बिना कुछ बोले सब सुन रही थी, बिना का ससुराल था तो वो कुछ बोल नहीं शक्ति थी, वो कैसे बताती की इन सब की जरुरत नहीं है, वो आलरेडी माँ बन ने वाली है. वो बस चुप चाप सुन रही थी. पर ममता से न रुका गया.
ममता : इस सब की कोई जरुरत नहीं है, इन सब से कुछ नहीं होता, जो होता है वो सब उपरवाले की मर्जी से hi होता है.
नर्मदादेवी : तुम बिच में मात बोलो, जब तुम्हे कुछ पता hi न हो तो बिच में नहीं बोलना चाहिए.
ममता : आप नहीं जानती कुछ मम्मी, ये सब से कुछ फर्क नहीं पड़ता, आप किस ज़माने में जी रही हो? कोई जरुरत नहीं है इन सब चीजों की. (बाबाजी मुस्कुराये) आप क्यों मुस्कुरा रहे है, आपको लटगा है आप सब जानते है?
नर्मदादेवी : ये क्या बदतमीजी है ममता, इससे माफ़ कर दीजिये बाबाजी, ये अभी नादाँ है. (बाबाजी फिर मुस्कुराये)
ममता : में कोई नादाँ नहीं हु, और न कोई छोटी बच्ची हु जो में ये समाज नहीं सकती.
नर्मदादेवी : चुप हो जाओ.
ममता : पर मम्मी...
नर्मदादेवी : चुप हो jao(Thoda सख्ती से कहा)
बाबाजी : शांत हो जाइये, तुम सही कह रही हो बेटी, में कुछ नहीं जनता, जो कुछ करता है वो इस्वर hi करता है, में तो बस समझने की कोशिस करता हु, और सब समाज सकू इतना बड़ा भी नहीं हो gaya(Babaji में शांत लहजे में कहा) अगर में तुम्हारे बारेमे कुछ बताऊ तो कोई दिक्कत है तुम्हे?
ममता : Achchha,kya बताएँगे?
बाबाजी : क्या तुम चाहती हो की में सबके सामने बता दू?
ममता : है है, बता दीजिये, में भी तो सुनु की आप क्या बताना चाहते है.
बाबाजी : (भगवन का नाम लेते hue)Shiv, शिव. अगर तुम चाहती हो की में सबके सामने बताऊ तो जैसी शिव की मर्जी. (बाबाजी के मुँह से शिव का नाम सुन कर वो अंदर तक कैंप गयी, हलाकि बाबाजी ने सिर्फ भगवन शिव का जाप किया था, पर फिर भी वो अंदर तक हिल गयी thi)(Babaji ने बिना की और देखते hue)Tumhare मान भी ऐसे hi कई सवाल है, है न पुत्री. (बिना कुछ भी बोले बगैर बाबाजी की और देखने lagi)Shiv की कृपा से तुम भी इन सब में विस्वास नहीं करती है न? (बिना अंदर से कैंप रही थी, बाबाजी ने जिस तरह से शिव की कृपा कहा था वो थोड़ी भयभीत दिख रही thi)Bhaybhit होने की आवस्यकता नहीं है पुत्री, में कोई नादान नहीं हु जो किसी के भी उकसाने पर कुछ भी बोल दू, जिस तरह तुम दोनों पर शिव की कृपा है उस तरह मुज पर भी भोले शम्भू की कृपा है, में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलता.
नर्मदादेवी : बाबाजी आप क्या बात कर रहे है हमें कुछ भी समाज नहीं आ रहा.
बाबाजी : माताजी, में आपकी बहु और पुत्री से अकेले में कुछ वार्तालाप करना चाहता हु, अगर आप सबकी अनुमति हो तो.
नर्मदादेवी : इसमें अनुमति कैसी बाबाजी, आप जैसा कहेंगे. (ममता se)Babaji को उस कमरे में ले जाओ, जाओ बहु.
बाबाजी : किसी कमरेमे नहीं, हम आपके मंदिरवाले कक्ष में जायेंगे.
नर्मदादेवी : जी बाबाजी, बीटा उन्हें मंदिरवाले कमरे में ले जाओ.
ममता : (अंदर तक हिल गयी thi)Aiye बाबाजी. (वो तीनो मंदिरवाले कक्ष में चले गए, सब उन्हें देख रहे थे, खास करके पद्मा, वो भी इस खंडन की बहु थी, पर फिर भी बाबाजी ने उसे नहीं बुलाया था, वो सोच रही थी की आखिर इन दोनों से क्या बात करनी होंगी, पर वो कुछ बोल नहीं पायी, वो तीनो मंदिर के सामने बैठे हुए दिख रहे थे पर वो दूर थे तो उनकी बाते नहीं सुनाई दे रही थी)
बाबाजी : तो बेटी आपको प्रश्न है इस अनुष्ठान को ले कर, है na?(Mamta कुछ नहीं बोली) तुम्हे लगता है की में ये अनुष्ठान संतान प्राप्ति के लिए कर रहा हु है न? (वो अभी भी कुछ नहीं बोली) तुम्हे ये लगता है की इसकी कोई आवस्यकता नहीं है क्यों की तुम पहले से hi मातृत्व प्राप्त कर चुकी हो. (ममता बुरी तरह से चौंक गयी, क्यों की अभी तक उसने यहाँ किसी को भी ये बात नहीं बताई thi)(Beena की और देख kar)Aur तुम्हे भी यही लग रहा है क्यों की वैसी hi परिस्थिति तुम्हारी है, हैना पुत्री. (बिना की आंखे चौड़ी हो गयी, उसने ममता को देखा, ममता उसे hi देख रही थी, दोनों को आश्चर्य था. ममता सोच रही थी की भाभी भी माँ बन ने वाली है, और बिना सोच रही थी की ममता भी माँ बन ने वाली है) इसमें इतना आश्चर्य करने के जरुरत नहीं है, मेने कहा न की भोले शम्भू की कृपा से में भी कुछ कुछ समाज सकता हु. अब तुम दोनों को ये प्रश्न होगा की अगर मुझे पता है की शैतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करने की जरुरत नहीं है तो फिर में ये अनुष्ठान कर क्यों रहा हु, है न. (दोनों आंखे फाडे बाबाजी को देख रही थी, बाबाजी मुस्कुराये) में ये अनुस्तान इन बालको के पिता के लिए कर रहा हु. (बिना ने सोचा की बाबाजी जिग्नेश की बात कर रहे है और ममता ने सोचा की वो उसके पति चंद्रपाल की बात कर रहे hai)(Babji फिर muskuraye)Kuchh बोलोगी नहीं पुत्री? (उन्होंने ममता की और देख कर कहा, ममता ने बीणाभाभी को देखा, वो अभी भी मान ने को तैयार नहीं थी)
ममता : बाबाजी, मेरे पति को चोट लगी है, पर वो ठीक है, और उनके लिए मेरे घरवाले और वो भी सरे के सरे, इनको अनुष्ठान करने की क्या जरुरत है?
बाबाजी : (मुस्कुराये, फिर बिना की और देखा )तुम्हे कुछ नहीं कहना पुत्री?
बिना : में क्या कहु बाबाजी, अगर आप जिग्नेश के लिए कुछ करना चाहते है तो में क्या कह शक्ति हु.
बाबाजी : (उनकी मुस्कान गहरी हो gayi)Dekho बीटा, में इस तरह की बात कहना तो नहीं चाहता, पर मुझे उसके लिए कहना पड़ेगा, उसने बहोत कुछ सहा है, उसने कभी किसीका कुछ नहीं बिगाड़ा पर फिर भी उसको बहोत कुछ सहना पड़ा है, मुझे खुद पर यकीं नहीं हुआ था, पर जब मेने यहाँ शुभसंकेत पढ़े तो मुझे यकीं हो गया की मेरा अनुमान सत्य था. भगवन की कृपा से वो सहीसलामत है, पर भी भी उसके ऊपर से पूरी तरह से खतरा टाला नहीं है, तो में उसके लिए hi ये अनुष्ठान करना चाहता हु. (बिना और ममता दोनों के चेहरे पर लाखो उलझाने थी, उन्हें कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था की बाबाजी क्या बोल रहे है)
ममता: बाबाजी आप क्या बोल रहे है, मुझे कुछ भी समाज में नहीं आ रहा है, क्या मेरे पति पर कोई खतरा है?
बाबाजी : में इस बच्चे के बाप की बात कर रहा हु. (ममता कैंप रही थी, बाबाजी क्या बोल रहे थे वो समाज रही थी, पर फिर भी वो विस्वास नहीं कर प् रही थी, अभी भी उसे यकीं था की बाबाजी को ये पता नहीं होगा की उसके होनेवाले बच्चे का बाप शिव है, उसकी आवाज लड़खड़ा गयी, पर फिर भी उसने अपना बचाव kiya)Me भी तो वही कह रही हु, मेरे पति के बारे में. (बाबाजी मुस्कुराये)
बाबाजी : (बिना को देख kar)Ye अनुष्ठान तुम्हारे होनेवाले बच्चे के बाप के लिए भी है.
बिना : जी बाबाजी.
बाबाजी : तुम नहीं पूछो गई की किसके लिए? (बिना अंदर से थार थार कैंप रही थी, पता नहीं पर ये राज़ अगर ममता के सामने खुल गया तो क्या होगा, वो ये सोच सोच कर hi परेशान थी, वो इतनी घबरा रही थी की मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था, पर वो चुप भी तो नहीं रह शक्ति थी)
बिना : आप जिग्नेश की hi बात कर रहे है न? (उसकी हालत ऐसी हो गयी थी की वो अभी रो देगी, क्यों की जिस तरह से बाबाजी बात कर रहे थे उसे यकीं हो गया था की बाबाजी सब जानते है, कैसे वो उसे नहीं पता था पर इतना तो वो समाज गयी थी की बाबाजी जिग्नेश की बात तो कर hi नहीं रहे है, पर वो ममता की वजह से अपना बचाव कर रही थी)
बाबाजी : तुम दोनों को लग रहा होगा की मुझे तुमसे अकेले में बात करनी चाहिए थी, है न (दोनों दरी हुई नजरो से बाबाजी को देख रही thi)Kyu बेटी (ममता se)tum तो कह रही थी की सबके सामने मुझे बात करनी चाहिए और यहाँ सिर्फ तुम्हारी भाभी है फिर भी तुम्हारे चेहरे पर दर है. (ममता ने नज़ारे झुका ली) में तुम्हे डरा नहीं रहा हु पुत्री, और तुम्हे डरने की जरुरत भी नहीं है, मेने खास वजह से तुम दोनों को साथ में बुलाया है. में चाहता हु की तुम्हारा जो राज़ है वो तुम दोनों को पता हो. (दोनों नज़ारे झुकाये बैठी हुई थी, दोनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की वो नज़ारे उठाये) मेरी और देखो पुत्री, दोनों. (दोनों ने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपनी नजर उठायी) अब में जो बता रहा हु वो ध्यान से सुनो. मेने कहा की में इस होनेवाले बच्चे के पिता के लिए ये अनुष्ठान करना चाहता हु तो वो अलग अलग नहीं है, वो एक hi इंसान है. (बिना और ममता को यकीं नहीं हो रहा था की बाबाजी क्या कह रहे है, उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी)
ममता : (रुवासी आवाज me)Ye क्या कह रहे है आप बाबाजी?
बाबाजी : शांत रहो पुत्री, जो सच है वो hi कह रहा हु, जिसका अंश तुम्हारे गर्भ में पल रहा है (बिना को देख कर) उसीका ाँस तुम्हारे गर्भ में भी है. (वह सन्नाटा फ़ैल गया, न बाबाजी बोल रहे थे न वो दोनों, थोड़ी देर बाद बाबाजी ने hi मौन तोडा) में ज्यादा खुल कर तो नहीं बताऊंगा, पर तुम दोनों एक hi सूत्र से जुडी हुई हो, और तुम दोनों को hi उसकी ताकत भी बन न है. अभी फ़िलहाल इस से ज्यादा में कुछ नहीं बता पाउँगा. तुम दोनों यही बैठो, भगवन शिव के चरणों में, अपने मान को शांत करो. और है, ये राज़ अपने तक hi रखना, अभी किसी को भी कुछ भी बताने की आवस्यकता नहीं है. में चलता हु. (बाबाजी बहार आ गए)
कामनादेवी : (उसको भी मिर्ची लगी थी, क्यों की बाबाजी नर्मदा की बहु और बेटी को अपने साथ ले गए थे, उसकी बहु को नहीं बुलाया था, पर वो कुछ बोली नहीं) क्या हुआ बाबाजी, हमे भी तो कुछ पता चले.
बाबाजी : माताजी, मुझे जो कहना था वो में कह चूका हु. मेने कहा था की अगर ये अनुष्ठान करना है तो सब को साथ होना hi पड़ेगा, आप प्रयत्न कीजिये, फिर जैसी शिव की मर्जी. में चलता हु. (बाबाजी वह से चले गए)
उदयसिंह : अब सब क्लियर है, में तो पहले से hi कह रहा था की इन सब बातो का कोई मतलब नहीं है, में सिर्फ तुम्हारी वजह से यहाँ सब बकवास सुन ने आ गया था. अब तो सबको पता चल गया न की ये मुमकिन नहीं है.
चंद्रभान : आप कहना क्या चाहते है भाईसाहब.
उदयसिंह : तुमने सुना न वो बाबा क्या बोलके गया, तुम्हे क्या लगता है की योगेंद्र और उसकी बीवी यहाँ आ पाएंगे, और सबको लेन को बोल रहा था वो, उसे नहीं पता की एक तो आलरेडी मार चूका है, वो कहा से आएगा, उसने काबा की बेटी, बीटा, बहु सब चाहिए. मेरी बेटी मार चुकी है मेरे लिए, में उसको नहीं बोलनेवाला.
चंद्रभान : अगर मर चुकी है और कोई रिस्ता नहीं है तो फिर उसे मेरी बेटी क्यों कह रहे है?
उदयसिंह : (गुस्से से देखता hai)Muje कोई बहेश नहीं करनी, में जा रहा हु (अपनी पत्नी को देखते hue)Tum चल रही हो की नहीं (कामनादेवी कुछ न बोली, क्यों की उन्हें रुकना था, किसी भी तरह इस गुत्थी को सुलझाना था.) ठीक है, अगर तुम्हे रुकना है तो रुको फिर, अपने आप आ जाना, में जा रहा हु. (वो गुस्से में वह से चला गया)
वही दूसरी और ज़ोयायन्तय कड़ी थी, वो अभी भी शिव के बारेमे और जो कुछ भी हो चूका था उस बारे में सोच रही थी, जो खुमार था वो अब उतर चूका था, जो सेक्स दिमाग पर चढ़ गया था वो उतर चूका था, अब वो महसूस कर रही थी की वो दो बच्चो की माँ थी और उम्र में कही ज्यादा तजुर्बेकार थी, उसे ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था, उसे बच्चो के बिच नहीं आना चाहिए था. वो थोड़े उदास मान से अपने कमरे की और बढ़ी जहा उसकी बेटी नाज़िआ उलटी हो कर लेती हुई थी, वो जानती थी की ऐसा उल्टा लेटने का क्या कारन था. उसे अपनी बेटी की चिंता होने लगी, वो उसके पास गयी और उसके शिर पर हाथ फिरते हुए पूछने लगी.
अम्मी : क्या ज्यादा दर्द हो रहा है बेटी?
नाज़िआ : (हल्का मुस्कुराते hue)Nahi ामी, थोड़ा है.
अम्मी : गरम पानी का शेक करना है वह?
नाज़िआ : (उसे जरुरत तो थी पर ऐसे अम्मी के सामने बताना उसे बुरा लग रहा tha)Nahi अम्मी में ठीक हु.
अम्मी : क्या ठीक हु, तुजे पता है की वो कितना बड़ा है, फिर भी उसे वह लेने की क्या जरुरत थी?
नाज़िआ : आपने देखा था ammi?(Zoya को रीलीज़ हुआ की उसने खुद अपनी पोल खोल दी है)
अम्मी : नहीं, वो मेरे कहने का मतलब, वो तू ऐसे लेती है तो, मेने सोचा...
नाज़िआ : (सीधी हुई, और बिस्तर पर बेथ गयी, बैठने में उसे दर्द हुआ जो उसके चेहरे पर भी छलक आया, फिर सँभालते हुए उसने अपनी अम्मी का हाथ pakada)Ammi, आप यहाँ बैठो, मेरा पास (उसने खिंच कर अम्मी को अपने पास बिठा diya)Ammi आपको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है, में बहार आयी थी, मेने बाथरूम से आती आवाजे सुनी thi.(Usko पसीना आने लगा, वो दर के मरे कड़ी हो गयी) अम्मी, आप दर क्यों रही है, मुझे नहीं पता की वो सब कैसे हुआ, आपने ऐसा क्यों किआ, या शिव ने ऐसा क्यों किआ, में समझना भी नहीं चाहती, मुझे पता है की कुछ भी मुमकिन है, और सबकी अपनी निजी वजह होती है, यकीं मनो अम्मी मुझे कोई गिला शिकवा नहीं है, न में आपको गलत समझती हु. (ज़ोया ने डरते डरते अपनी बेटी को dekha)Ammi आपको डरने की या शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं है.
अम्मी : (थोड़ी हिम्मत बटोर kar)Nahi बेटी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मुझे अपने आप पर सयम रखना चाहिए था.
नाज़िआ : क्यों अम्मी?
अम्मी : क्यों क्या, में दो बड़ी बड़ी लड़कीओ की अम्मी हु, किसी की बीवी हु, मुझे सोभा देता है क्या, जो गलत है वो गलत है.
नाज़िआ : वो अम्मी आपका सोचना है, और वो आपका फैसला है, आपने जो किआ वो भी और आगे आप जो करोगी या नहीं करोगी, ये सब आपका फैसला है, पर एक बात याद रखियेगा, में आपके साथ हु, किसी भी परिस्थिति में, मुझे पता नहीं है की आपके और अब्बू के बिच क्या चल रहा है, उसके चलते या सिर्फ ऐसे hi, किसी भी वजह से आपने ये किआ है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, में आपको गलत नहीं समझती, में भी एक औरत हु, में समाज सकती हु आपको. तो अपने दिल में कोई गुबार मत रखियेगा.
अम्मी : तो मेरी बेटी अब बड़ी हो गयी है.
नाज़िआ : है अम्मी, एक उम्र के बाद लड़कीअ बड़ी हो hi जाती है, अब मुझे आप अम्मी नहीं, मेरी दोस्त लगती हो, मेरी सहेली हो आप, आपने मुझे हर जगह सहारा दिया है, हर जगह मेरी मदद की है, अपने अम्मी से ज्यादा मेरी सहेली का रोले ऐडा किआ है, आप ये मात समझना की में आपके अहसान के चलते आपसे ऐसा कह रही हु, पर में अब समझती हु की, हर किसी की अपनी निजी जिंदगी होती है, अपनी निजी ख्वाहिसे होती है, आपने अपनी निजी ख्वाहिस पूरी कर ली तो आप बुरी नहीं बन गयी, आप अभी भी मेरी प्यारी अम्मी और अब मेरी प्यारी सहेली भी हो. (वो अपनी अम्मी के गले लग गयी)
अम्मी : (उसकी पीठ सहलाते hue)Par बीटा ये अच्छा थोड़ी न लगता है, वो तेरे साथ भी और मेरे साथ भी.
नाज़िआ : एक बात कहु, आप बुरा मत मान न, मुझे तो ऐसा लग रहा है की जल्द hi तीसरी भी आनेवाली है.
अम्मी : (नाज़िआ को दूर हटा कर उसका चेहरा देखते hue)Ye क्या कह रही है तू, क्या tu....(Wo तो बोल भी नहीं प् रही थी)
नाज़िआ : है में संयम की hi बात कर रही हु.
अम्मी : क्या बकवास है ये, वो अभी बच्ची है, और शिव ऐसा कैसे कर शक्ति है, वो भी दुसरो की तरह hi निकला, जहा लड़की देखि वही...
नाज़िआ : क्या अम्मी आप भी, क्या आपको शिव ऐसा लगा, क्या उसने आपके साथ जबरदस्ती की?
अम्मी : नहीं, पर ऐसे सबके साथ वो थोड़ी न सम्बन्ध बना सकता है, तेरी और मेरी बात अलग है, संयम की बात अलग है, उसे अभी शादी भी करनी है, अगर उसने संयम को ख़राब कर दिया तो उसको दिक्कत हो सकती है.
नाज़िआ : अम्मी, इसमें शिव की गलती नहीं है, और अभी उनके बिच ऐसा वैसा कुछ है भी नहीं, पर जैसा में संयम की आँखों में देखती हु, वो बता रही हु, शिव उसे वैसे नहीं देखता, पर संयम शिव को वैसे देखती है.
अम्मी : नहीं, तुम्हे शिव से बात करनी होगी, उसे कह की वो संयम के साथ ऐसा वैसा कुछ न करे.
नाज़िआ : शिव कुछ नहीं करेगा, जो कुछ करेगी वो संयम करेगी, जहा तक मुझे लग रहा है.
अम्मी : तो समजा उसे, समजा की ये सब गलत है, शादी से पहले ये सब वो नहीं कर शक्ति.
नाज़िआ : क्यों नहीं कर शक्ति, क्या सब ठेका लड़कीओने hi ले रक्खा है?
अम्मी : में कुछ नहीं जानती, जो समाज में चल रहा है, वो hi चलता है, अगर वो हमारे मजहब का होता तो में उन दोनों की शादी भी करवा देती.
संयम : किसकी शादी की बात हो रही है (वो आंखे मलते हुए रूम में दाखिल हुई, अभी अभी वो नींद से जगी थी)
नाज़िआ : तेरी शादी की (नाज़िआ ने चुटकी ली)
संयम : मेरी शादी? मुझे नहीं करनी शादी वादी, अभी मुझे बहोत पढ़ना है, उसके बाद नौकरी. तो अभी इन सब को दिमाग से निकल hi दो.
नाज़िआ : (नाज़िआ फूल मज़ाक के मूड में thi)Achchha, में तो अम्मी को बता रही थी की संयम की शादी शिव से करदेते है.
संयम : (चहकते hue)Kya?
नाज़िआ : देखो अम्मी, इसका चेहरा तो देखो, मेने कहा था न.
संयम : Ammiiiiiiiiii.
अम्मी : ये सब मज़ाक नहीं है नाज़िआ, ऐसे मज़ाक में भी मात बोलो.
नाज़िआ : सॉरी अम्मी.
अम्मी : जा पानी गरम कर के थोड़ी देर सिकाई कर ले, दर्द काम हो जायेगा.
संयम : क्या हुआ आप को?
अम्मी : कुछ नहीं हुआ है, तू जा और अपनी पढ़ाई कर.
(फिर वह सब अपने अपने काम में लग गए)
मुझे यकीं नहीं हो रहा था अभी जो कुछ भी हुआ था. मेने आंटी के साथ सेक्स कर लिया था. वो कितनी अच्छी है, वो मेरे साथ कितना अच्छा सलूक करती है, मेने उनका वो रूप देखा था, जिसमे ममता था, मेरे लिए प्यार था. पर आज जो कुछ भी हुआ वो कुछ अलग hi था. अब में इतना तो समझने लगा था की हर औरत आउट मर्द की कुछ जरूरते होती है, शारीरिक तौर पर भी उन्हें कुछ चाहिए होता है. किसी की माँ हो भाई हो बहन हो या कोई भी रिश्ते में हो हर कोई मर्द और औरत भी होते है, चाहे वो हर किसी के साथ उस तरह से नहीं रहते पर कभी न कभी कही न कही वो उस सम्बन्ध से रहते hi है. और उसमे कुछ गलत भी नहीं है, क्यों की अगर ये चाहत ये सम्बन्ध न होते तो दुनिया कब की ख़तम हो गयी होती. मुझे आंटी का ऐसा करना कुछ भी गलत नहीं लगा, वो भी एक औरत है और अगर उन्होंने ऐसा कुछ कर लिया तो वो बुरी नहीं बन गयी. मुझे उनका चेहरा याद आ रहा था, सेक्स के दौरान उनके चेहरे पर एक अलग hi नूर था, वो कितना आनंदित थी, यही सब सोचते हुए में साइट पर चला गया. में काफी लेट पंहुचा था, सब खाना खा कर फिर से काम में लग गए थे. मेने देखा की जहान्वी मैडम की गाडी पड़ी हुई है, हो शक्ति है की वो ऑफिस नुमा माकन में हो, पर में चलते हुए अंदर की और चला गया, कुछ मकानों में दो चार दो चार लोग काम कर रहे थे, में एक माकन के पास से गुजरा तो मुझे झुमरी ने आवाज दी तो में उस और चला गया. वह दूसरे भी लोग काम कर रहे थे, कमली भी थी. में उनसे बात कर रहा था की भोली भी आ गयी. मेने उन्हें काम करने को कहा और में दूसरी जगहों पर भी घूम कर मुआइना करने लगा. थोड़ी देर बाद पिंकेशभाई मुझे ढूंढते हुए आये.
पिंकेशभाई : तुम यहाँ हो?
शिव : क्या हुआ पिंकेशभाई?
पिंकेशभाई : कुछ नहीं, वो जहान्वी मैडम तुम्हे बुला रही है.
शिव : क्यों?
पिंकेशभाई : मुझे क्या पता, कई बार तुम्हारे बारेमे पूछ चुकी है?
शिव : ठीक है में जाता हु.
मेरी समाज में नहीं आ रहा था की उनकी प्रॉब्लम क्या है, क्यों की अगर साइट के बारेमे कुछ भी जानकारी लेनी हो तो वो मुझसे बेहतर पिंकेशभाई बता शक्ति है, तो मुझसे बात चित का तो कोई मतलब hi नहीं है, में चलते हुए उस माकन में पंहुचा, ऊपर के मेल पर ऑफिस जैसा था वह कुर्शी पर वो बैठी हुई थी. ब्लू जीन्स और काळा रंग की चुस्त t-shirt में बैठी हुई थी, बालो की छोटी बाँध रक्खी थी, खूबसूरत तो वो थी hi साथ में भरा हुआ जिस्म था उनका, स्तन भी काफी बड़े थे, जिस पर नजर चली hi जाये.
शिव : में आ शक्ति हु?
जहान्वी : (वो बैठी बैठी कुछ सोच hi रही थी, शिव की और देख kar)To आगये तुम? (उनका टाउन ऐसा था की जैसे मेरा मज़ाक उदा रही हो)
शिव : जी, कहिये क्यों बुलाया था?
जहान्वी : ये कोई वक़्त है आने का?
शिव : देखिये मैडम, में पहले भी बता चूका हु, टाइम के बारे में मेरी बात पवनसीर से हो चुकी है, फिर बार बार आप क्यों उस टॉपिक पर बात करती है?
जहान्वी : अकड़ तो देखो साहब की, जब मर्जी आना, जब मर्जी जाना, मेरी समाज में ये नहीं आता की तुम आते क्यों हो अगर काम नहीं करना है तो.
शिव : वो में और पवनसीर देख लेंगे, आप को क्या दिक्कत है वो बताइये.
जहान्वी : तुम समझते क्या हो अपने आपको, ये कोई तरीका है मुझसे बात करने का, मात भूलो की में कौन हु.
शिव : मुझे सब पता है, में ऐसे hi काम करूँगा, मेरी ये समाज में नहीं आ रहा है की इतनी साडी साइट पर काम चल रहा है आप को इसी साइट में क्यों इतनी दिलचस्पी है?
जहान्वी : ये मेरी मर्जी है, तुम पूछनेवाले कोण होते हो, मेरी मर्जी में यहाँ औ या कही और जाऊ, में हर जगह का काम देखती हु, मुझे सिर्फ तुम्हारा hi काम पसंद नहीं आ रहा है. में पापा से कहनेवाली हु की वो तुम्हे निकल दे, वैसे भी तुम करते क्या हो जो तुम्हे यहाँ बुलाया जाये.
शिव : आपको जो करना है वो करिये, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर और कोई काम न हो तो में जाऊ.
जहान्वी : (कड़ी हो कर वो मेरे सामने कड़ी हो गयी और मेरा गिरेबान पकड़ kar)Tumhari हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ इस लहजे में बात करने की.
शिव : देखिये मैडम, मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.
जहान्वी : क्या कर लोगे, अगर नहीं छोड़ा तो, मरोगे मुझे, लम्बे चौड़े हो तो तुम्हे ये लगता है की तुम मुज पर हाथ उठाओगे.
शिव : मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, आप अपने आप hi बोल रही है, मेने बस इतना कहा की मेरा गिरेबान छोड़ दीजिये.
जहान्वी : नहीं छोड़ती, क्या कर लेगा. (वो मेरा गिरेबान और खींचते हुए मेरी आँखों में देख रही थी, मुझे भी गुस्सा आ रहा था, मेने उनका हाथ छुड़ाना छः तो वो और जोर से मेरे गिरेबान को पकड़ ने लगी, पतानहीं वो क्यों इतनी जिद कर रही थी)
शिव : छोड़ दीजिये मैडम, में आखरी बार कह रहा हु.
जहान्वी : नहीं छोड़ती. (मेने उनका हाथ पकड़ा हुआ था, अगर में ज्यादा जोर करता तो मेरा शर्ट भी फैट जाता क्यों की उन्होंने मजबूती से पकड़ा हुआ था, मुझे क्या हुआ की मेने अपना हाथ छोड़ा और उनके शिर के पीछे के बाल पकड़े और सीधा उनके होठो पर टूट पड़ा, उनके होतो को जोर जोर से चूसने laga)(Jhanvi अचानक हुए हमले से हड़बड़ा गयी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की ये लड़का ऐसा भी कुछ करेगा, वो उसके होठो को बुरी तरह से चूस रहा था, उसने शिव को धक्का देना सुरु किआ, पर उसने उसे बहोत मजबूती से पकड़ा था, वो अपना मुँह हटाना चाहती थी पर उसने उसके बालो को भी मजबूती से पकड़ा हुआ tha)(wo मुझे धक्का दे रही थी मतलब उन्होंने मेरा गिरबान छोड़ दिया था, मेने उन्हें छोड़ दिया तो वो दो कदम पीछे हैट गयी, वो हांफ रही थी, उन्होंने गुस्से से मुझे देखा)
जहान्वी : (चिल्लाते hue)Tumhari हिम्मत कैसे हुई कमीने.
शिव : ज्यादा चिल्लाइये नहीं. सब पूछेंगे की क्या हुआ तो क्या कहेंगी आप की शिव ने ये किआ.
जहान्वी : कमीने, तुजे क्या लगता है की में तुजे छोड़ दूंगी, तू रुक में बताती हु की अब तेरी क्या हालत होती है. (वो गुस्से में वह से चली गयी, में वही खड़ा सोच रहा था, मुझे भी लगा की मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, पर गुस्से में जो होना था वो हो गया था, अगर उन्होंने पुलिस कम्प्लेन कर दी तो, में सच में दर गया, में जनता था की उसका बाप मला है, में अपने आपको डांटने लगा, ये सब पहले नहीं सोच सकता था, खैर अब जो हो गया था उसे तो में बदल नहीं सकता, मुझे ये भी पता था की भार्गवी मैडम भी बहार है, और होती तो भी कुछ नहीं कर शक्ति, क्यों की कानून में लड़कीओ को कुछ ज्यादा hi पावर दी हुई है, में अपना शिर पकड़ कर वही बेथ गया)
यहाँ बड़े से हॉल में एक आदमी कुछ कागजो को देख रहा था और साथ में कुछ गिनती कर रहा था, भगवे कलर का चोला पहना हुआ था, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथ में भी रुद्राक्ष का ब्रासलेट पहना हुआ था, कपल पर चन्दन का लपे और बिच में एक बड़ा सा तिलक लगा हुआ था. सामने उदयसिंह, उनकी पत्नी कामना देवी, साथ में चंद्रभान सिंह और नर्मदादिवि भी बैठी हुई है, ममता, बिना और पद्मा साथ में बैठे हुए है. बिना का पति जिग्नेश भी बैठा हुआ है. पृथ्वीसिंह नहीं आया था. सब की निगाहे बाबा पर hi थी. बड़ी मुस्किलो से उन्हें मन कर चंद्रभान उन्हें ले आया था. काफी देर से वो वह बिछी कुन्डलीओ में से देख देख कर एक कागज पर सब लिख रहे थे और बाकि सब उन्हें hi देख रहे थे. आखिर कार उन्होंने सब देखने के बाद अपनी आंखे बंद की और किसी गहे सोच में दुब गए. कामनादेवी ने नर्मदेवी की और देखा, दोनों कुछ बोले तो नहीं पर उनके चेहरे पर परेशानी साफ़ दिख रही थी. बीचमे बोलने की हिम्मत किसीमे नहीं थी, उदयसिंह को इन सब पर कोई भरोसा नहीं था, पर अपनी पत्नी की जिद के चलते वो यहाँ आया था. पृथ्वीसिंह ने साफ़ साफ़ मन कर दिया था, वैसे भी वो किसी काम से बहार था. करीब दस मिनट बाद बाबा ने आंखे खोली और सब की और देखा. हाथ जोड़ कर कामनादेवी ने hi बात सुरु की
कामनादेवी : क्या बात है बाबाजी?
बाबा : आप चिंतित मात होईये, वैसी कोई बात नहीं है, में किसी और बात के लिए चिंतित हु, जहा तक में समाज प् रहा हु, जो बुरा समय था वो बिट चूका है, अब आपके घर में खुशिया लौटनेवाली है, पर उसके लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा.
कामनादेवी : कैसा अनुष्ठान बाबाजी?
बाबा : सबकी सुधि के लिए एक अनुष्ठान करना पड़ेगा, इस अनुष्ठान के बाद आप सब के ऊपर जो काळा साये है वो हैट ते जायेंगे.
कामनादेवी : तो कीजियेना, हम तैयार है.
बाबाजी : ये इतना भी आसान नहीं है, इस अनुष्ठान के लिए आपके पुरे परिवार को एक साथ भाग लेना होगा.
कामनादेवी : तो इसमें दिक्कत क्या है, हम सब भाग लेंगे.
बाबाजी : आप मेरी बात को समाज नहीं रही है, सब से मेरा मतलब है सब, आपका पूरा परिवार, आप आपके पुत्र, आपकी बहु, आपकी पूर्ति, जितने भी आपके ससुर के पुत्र पुत्रिया है और उनके पुत्र, पुत्रिया बहु सब.
कामनादेवी : (ये सुन कर वो सोचमे पद gayi)Par बाबाजी, सब तो मुमकिन नहीं है, कुछ लोग हमारे साथ नहीं रहते, और कुछ कई दिक्कतों के चलते यहाँ नहीं आ शक्ति.
बाबाजी : में सब जनता हु की आप क्या कहना चाहती है, पर अगर ये अनुष्ठान करना है तो सबकी हजारी जरुरी है.
उदयसिंह : ये मुमकिन नहीं है, जिन्हे मेने घर से निकल दिया है उन्हें में वापस नहीं बुला सकता और जो मर चुके है उन्हें भी में नहीं बुला सकता.
बाबाजी : देखिये जन्मान, मेरा कर्त्तव्य था की आप को बता दू, अब करना न करना आपकी मर्जी पर है.
उदयसिंह : (कुछ सोच kar)Ek बार मान भी लेते है की में उन्हें बुला लौ, पर जो मर चुके है उन्हें कैसे बुला शक्ति है, और कुछ लोग अस्पताल में बिस्तर पर है, आप रहने दीजिये.
बाबाजी : जैसी आपकी मर्जी जजमान, मेरा कर्त्तव्य था बताना मेने बता दिया.
ममता और बिना बिना कुछ बोले सब सुन रही थी, बिना का ससुराल था तो वो कुछ बोल नहीं शक्ति थी, वो कैसे बताती की इन सब की जरुरत नहीं है, वो आलरेडी माँ बन ने वाली है. वो बस चुप चाप सुन रही थी. पर ममता से न रुका गया.
ममता : इस सब की कोई जरुरत नहीं है, इन सब से कुछ नहीं होता, जो होता है वो सब उपरवाले की मर्जी से hi होता है.
नर्मदादेवी : तुम बिच में मात बोलो, जब तुम्हे कुछ पता hi न हो तो बिच में नहीं बोलना चाहिए.
ममता : आप नहीं जानती कुछ मम्मी, ये सब से कुछ फर्क नहीं पड़ता, आप किस ज़माने में जी रही हो? कोई जरुरत नहीं है इन सब चीजों की. (बाबाजी मुस्कुराये) आप क्यों मुस्कुरा रहे है, आपको लटगा है आप सब जानते है?
नर्मदादेवी : ये क्या बदतमीजी है ममता, इससे माफ़ कर दीजिये बाबाजी, ये अभी नादाँ है. (बाबाजी फिर मुस्कुराये)
ममता : में कोई नादाँ नहीं हु, और न कोई छोटी बच्ची हु जो में ये समाज नहीं सकती.
नर्मदादेवी : चुप हो जाओ.
ममता : पर मम्मी...
नर्मदादेवी : चुप हो jao(Thoda सख्ती से कहा)
बाबाजी : शांत हो जाइये, तुम सही कह रही हो बेटी, में कुछ नहीं जनता, जो कुछ करता है वो इस्वर hi करता है, में तो बस समझने की कोशिस करता हु, और सब समाज सकू इतना बड़ा भी नहीं हो gaya(Babaji में शांत लहजे में कहा) अगर में तुम्हारे बारेमे कुछ बताऊ तो कोई दिक्कत है तुम्हे?
ममता : Achchha,kya बताएँगे?
बाबाजी : क्या तुम चाहती हो की में सबके सामने बता दू?
ममता : है है, बता दीजिये, में भी तो सुनु की आप क्या बताना चाहते है.
बाबाजी : (भगवन का नाम लेते hue)Shiv, शिव. अगर तुम चाहती हो की में सबके सामने बताऊ तो जैसी शिव की मर्जी. (बाबाजी के मुँह से शिव का नाम सुन कर वो अंदर तक कैंप गयी, हलाकि बाबाजी ने सिर्फ भगवन शिव का जाप किया था, पर फिर भी वो अंदर तक हिल गयी thi)(Babaji ने बिना की और देखते hue)Tumhare मान भी ऐसे hi कई सवाल है, है न पुत्री. (बिना कुछ भी बोले बगैर बाबाजी की और देखने lagi)Shiv की कृपा से तुम भी इन सब में विस्वास नहीं करती है न? (बिना अंदर से कैंप रही थी, बाबाजी ने जिस तरह से शिव की कृपा कहा था वो थोड़ी भयभीत दिख रही thi)Bhaybhit होने की आवस्यकता नहीं है पुत्री, में कोई नादान नहीं हु जो किसी के भी उकसाने पर कुछ भी बोल दू, जिस तरह तुम दोनों पर शिव की कृपा है उस तरह मुज पर भी भोले शम्भू की कृपा है, में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलता.
नर्मदादेवी : बाबाजी आप क्या बात कर रहे है हमें कुछ भी समाज नहीं आ रहा.
बाबाजी : माताजी, में आपकी बहु और पुत्री से अकेले में कुछ वार्तालाप करना चाहता हु, अगर आप सबकी अनुमति हो तो.
नर्मदादेवी : इसमें अनुमति कैसी बाबाजी, आप जैसा कहेंगे. (ममता se)Babaji को उस कमरे में ले जाओ, जाओ बहु.
बाबाजी : किसी कमरेमे नहीं, हम आपके मंदिरवाले कक्ष में जायेंगे.
नर्मदादेवी : जी बाबाजी, बीटा उन्हें मंदिरवाले कमरे में ले जाओ.
ममता : (अंदर तक हिल गयी thi)Aiye बाबाजी. (वो तीनो मंदिरवाले कक्ष में चले गए, सब उन्हें देख रहे थे, खास करके पद्मा, वो भी इस खंडन की बहु थी, पर फिर भी बाबाजी ने उसे नहीं बुलाया था, वो सोच रही थी की आखिर इन दोनों से क्या बात करनी होंगी, पर वो कुछ बोल नहीं पायी, वो तीनो मंदिर के सामने बैठे हुए दिख रहे थे पर वो दूर थे तो उनकी बाते नहीं सुनाई दे रही थी)
बाबाजी : तो बेटी आपको प्रश्न है इस अनुष्ठान को ले कर, है na?(Mamta कुछ नहीं बोली) तुम्हे लगता है की में ये अनुष्ठान संतान प्राप्ति के लिए कर रहा हु है न? (वो अभी भी कुछ नहीं बोली) तुम्हे ये लगता है की इसकी कोई आवस्यकता नहीं है क्यों की तुम पहले से hi मातृत्व प्राप्त कर चुकी हो. (ममता बुरी तरह से चौंक गयी, क्यों की अभी तक उसने यहाँ किसी को भी ये बात नहीं बताई thi)(Beena की और देख kar)Aur तुम्हे भी यही लग रहा है क्यों की वैसी hi परिस्थिति तुम्हारी है, हैना पुत्री. (बिना की आंखे चौड़ी हो गयी, उसने ममता को देखा, ममता उसे hi देख रही थी, दोनों को आश्चर्य था. ममता सोच रही थी की भाभी भी माँ बन ने वाली है, और बिना सोच रही थी की ममता भी माँ बन ने वाली है) इसमें इतना आश्चर्य करने के जरुरत नहीं है, मेने कहा न की भोले शम्भू की कृपा से में भी कुछ कुछ समाज सकता हु. अब तुम दोनों को ये प्रश्न होगा की अगर मुझे पता है की शैतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करने की जरुरत नहीं है तो फिर में ये अनुष्ठान कर क्यों रहा हु, है न. (दोनों आंखे फाडे बाबाजी को देख रही थी, बाबाजी मुस्कुराये) में ये अनुस्तान इन बालको के पिता के लिए कर रहा हु. (बिना ने सोचा की बाबाजी जिग्नेश की बात कर रहे है और ममता ने सोचा की वो उसके पति चंद्रपाल की बात कर रहे hai)(Babji फिर muskuraye)Kuchh बोलोगी नहीं पुत्री? (उन्होंने ममता की और देख कर कहा, ममता ने बीणाभाभी को देखा, वो अभी भी मान ने को तैयार नहीं थी)
ममता : बाबाजी, मेरे पति को चोट लगी है, पर वो ठीक है, और उनके लिए मेरे घरवाले और वो भी सरे के सरे, इनको अनुष्ठान करने की क्या जरुरत है?
बाबाजी : (मुस्कुराये, फिर बिना की और देखा )तुम्हे कुछ नहीं कहना पुत्री?
बिना : में क्या कहु बाबाजी, अगर आप जिग्नेश के लिए कुछ करना चाहते है तो में क्या कह शक्ति हु.
बाबाजी : (उनकी मुस्कान गहरी हो gayi)Dekho बीटा, में इस तरह की बात कहना तो नहीं चाहता, पर मुझे उसके लिए कहना पड़ेगा, उसने बहोत कुछ सहा है, उसने कभी किसीका कुछ नहीं बिगाड़ा पर फिर भी उसको बहोत कुछ सहना पड़ा है, मुझे खुद पर यकीं नहीं हुआ था, पर जब मेने यहाँ शुभसंकेत पढ़े तो मुझे यकीं हो गया की मेरा अनुमान सत्य था. भगवन की कृपा से वो सहीसलामत है, पर भी भी उसके ऊपर से पूरी तरह से खतरा टाला नहीं है, तो में उसके लिए hi ये अनुष्ठान करना चाहता हु. (बिना और ममता दोनों के चेहरे पर लाखो उलझाने थी, उन्हें कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था की बाबाजी क्या बोल रहे है)
ममता: बाबाजी आप क्या बोल रहे है, मुझे कुछ भी समाज में नहीं आ रहा है, क्या मेरे पति पर कोई खतरा है?
बाबाजी : में इस बच्चे के बाप की बात कर रहा हु. (ममता कैंप रही थी, बाबाजी क्या बोल रहे थे वो समाज रही थी, पर फिर भी वो विस्वास नहीं कर प् रही थी, अभी भी उसे यकीं था की बाबाजी को ये पता नहीं होगा की उसके होनेवाले बच्चे का बाप शिव है, उसकी आवाज लड़खड़ा गयी, पर फिर भी उसने अपना बचाव kiya)Me भी तो वही कह रही हु, मेरे पति के बारे में. (बाबाजी मुस्कुराये)
बाबाजी : (बिना को देख kar)Ye अनुष्ठान तुम्हारे होनेवाले बच्चे के बाप के लिए भी है.
बिना : जी बाबाजी.
बाबाजी : तुम नहीं पूछो गई की किसके लिए? (बिना अंदर से थार थार कैंप रही थी, पता नहीं पर ये राज़ अगर ममता के सामने खुल गया तो क्या होगा, वो ये सोच सोच कर hi परेशान थी, वो इतनी घबरा रही थी की मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था, पर वो चुप भी तो नहीं रह शक्ति थी)
बिना : आप जिग्नेश की hi बात कर रहे है न? (उसकी हालत ऐसी हो गयी थी की वो अभी रो देगी, क्यों की जिस तरह से बाबाजी बात कर रहे थे उसे यकीं हो गया था की बाबाजी सब जानते है, कैसे वो उसे नहीं पता था पर इतना तो वो समाज गयी थी की बाबाजी जिग्नेश की बात तो कर hi नहीं रहे है, पर वो ममता की वजह से अपना बचाव कर रही थी)
बाबाजी : तुम दोनों को लग रहा होगा की मुझे तुमसे अकेले में बात करनी चाहिए थी, है न (दोनों दरी हुई नजरो से बाबाजी को देख रही thi)Kyu बेटी (ममता se)tum तो कह रही थी की सबके सामने मुझे बात करनी चाहिए और यहाँ सिर्फ तुम्हारी भाभी है फिर भी तुम्हारे चेहरे पर दर है. (ममता ने नज़ारे झुका ली) में तुम्हे डरा नहीं रहा हु पुत्री, और तुम्हे डरने की जरुरत भी नहीं है, मेने खास वजह से तुम दोनों को साथ में बुलाया है. में चाहता हु की तुम्हारा जो राज़ है वो तुम दोनों को पता हो. (दोनों नज़ारे झुकाये बैठी हुई थी, दोनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की वो नज़ारे उठाये) मेरी और देखो पुत्री, दोनों. (दोनों ने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपनी नजर उठायी) अब में जो बता रहा हु वो ध्यान से सुनो. मेने कहा की में इस होनेवाले बच्चे के पिता के लिए ये अनुष्ठान करना चाहता हु तो वो अलग अलग नहीं है, वो एक hi इंसान है. (बिना और ममता को यकीं नहीं हो रहा था की बाबाजी क्या कह रहे है, उनकी सांसे तेज तेज चलने लगी थी)
ममता : (रुवासी आवाज me)Ye क्या कह रहे है आप बाबाजी?
बाबाजी : शांत रहो पुत्री, जो सच है वो hi कह रहा हु, जिसका अंश तुम्हारे गर्भ में पल रहा है (बिना को देख कर) उसीका ाँस तुम्हारे गर्भ में भी है. (वह सन्नाटा फ़ैल गया, न बाबाजी बोल रहे थे न वो दोनों, थोड़ी देर बाद बाबाजी ने hi मौन तोडा) में ज्यादा खुल कर तो नहीं बताऊंगा, पर तुम दोनों एक hi सूत्र से जुडी हुई हो, और तुम दोनों को hi उसकी ताकत भी बन न है. अभी फ़िलहाल इस से ज्यादा में कुछ नहीं बता पाउँगा. तुम दोनों यही बैठो, भगवन शिव के चरणों में, अपने मान को शांत करो. और है, ये राज़ अपने तक hi रखना, अभी किसी को भी कुछ भी बताने की आवस्यकता नहीं है. में चलता हु. (बाबाजी बहार आ गए)
कामनादेवी : (उसको भी मिर्ची लगी थी, क्यों की बाबाजी नर्मदा की बहु और बेटी को अपने साथ ले गए थे, उसकी बहु को नहीं बुलाया था, पर वो कुछ बोली नहीं) क्या हुआ बाबाजी, हमे भी तो कुछ पता चले.
बाबाजी : माताजी, मुझे जो कहना था वो में कह चूका हु. मेने कहा था की अगर ये अनुष्ठान करना है तो सब को साथ होना hi पड़ेगा, आप प्रयत्न कीजिये, फिर जैसी शिव की मर्जी. में चलता हु. (बाबाजी वह से चले गए)
उदयसिंह : अब सब क्लियर है, में तो पहले से hi कह रहा था की इन सब बातो का कोई मतलब नहीं है, में सिर्फ तुम्हारी वजह से यहाँ सब बकवास सुन ने आ गया था. अब तो सबको पता चल गया न की ये मुमकिन नहीं है.
चंद्रभान : आप कहना क्या चाहते है भाईसाहब.
उदयसिंह : तुमने सुना न वो बाबा क्या बोलके गया, तुम्हे क्या लगता है की योगेंद्र और उसकी बीवी यहाँ आ पाएंगे, और सबको लेन को बोल रहा था वो, उसे नहीं पता की एक तो आलरेडी मार चूका है, वो कहा से आएगा, उसने काबा की बेटी, बीटा, बहु सब चाहिए. मेरी बेटी मार चुकी है मेरे लिए, में उसको नहीं बोलनेवाला.
चंद्रभान : अगर मर चुकी है और कोई रिस्ता नहीं है तो फिर उसे मेरी बेटी क्यों कह रहे है?
उदयसिंह : (गुस्से से देखता hai)Muje कोई बहेश नहीं करनी, में जा रहा हु (अपनी पत्नी को देखते hue)Tum चल रही हो की नहीं (कामनादेवी कुछ न बोली, क्यों की उन्हें रुकना था, किसी भी तरह इस गुत्थी को सुलझाना था.) ठीक है, अगर तुम्हे रुकना है तो रुको फिर, अपने आप आ जाना, में जा रहा हु. (वो गुस्से में वह से चला गया)
वही दूसरी और ज़ोयायन्तय कड़ी थी, वो अभी भी शिव के बारेमे और जो कुछ भी हो चूका था उस बारे में सोच रही थी, जो खुमार था वो अब उतर चूका था, जो सेक्स दिमाग पर चढ़ गया था वो उतर चूका था, अब वो महसूस कर रही थी की वो दो बच्चो की माँ थी और उम्र में कही ज्यादा तजुर्बेकार थी, उसे ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था, उसे बच्चो के बिच नहीं आना चाहिए था. वो थोड़े उदास मान से अपने कमरे की और बढ़ी जहा उसकी बेटी नाज़िआ उलटी हो कर लेती हुई थी, वो जानती थी की ऐसा उल्टा लेटने का क्या कारन था. उसे अपनी बेटी की चिंता होने लगी, वो उसके पास गयी और उसके शिर पर हाथ फिरते हुए पूछने लगी.
अम्मी : क्या ज्यादा दर्द हो रहा है बेटी?
नाज़िआ : (हल्का मुस्कुराते hue)Nahi ामी, थोड़ा है.
अम्मी : गरम पानी का शेक करना है वह?
नाज़िआ : (उसे जरुरत तो थी पर ऐसे अम्मी के सामने बताना उसे बुरा लग रहा tha)Nahi अम्मी में ठीक हु.
अम्मी : क्या ठीक हु, तुजे पता है की वो कितना बड़ा है, फिर भी उसे वह लेने की क्या जरुरत थी?
नाज़िआ : आपने देखा था ammi?(Zoya को रीलीज़ हुआ की उसने खुद अपनी पोल खोल दी है)
अम्मी : नहीं, वो मेरे कहने का मतलब, वो तू ऐसे लेती है तो, मेने सोचा...
नाज़िआ : (सीधी हुई, और बिस्तर पर बेथ गयी, बैठने में उसे दर्द हुआ जो उसके चेहरे पर भी छलक आया, फिर सँभालते हुए उसने अपनी अम्मी का हाथ pakada)Ammi, आप यहाँ बैठो, मेरा पास (उसने खिंच कर अम्मी को अपने पास बिठा diya)Ammi आपको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं है, में बहार आयी थी, मेने बाथरूम से आती आवाजे सुनी thi.(Usko पसीना आने लगा, वो दर के मरे कड़ी हो गयी) अम्मी, आप दर क्यों रही है, मुझे नहीं पता की वो सब कैसे हुआ, आपने ऐसा क्यों किआ, या शिव ने ऐसा क्यों किआ, में समझना भी नहीं चाहती, मुझे पता है की कुछ भी मुमकिन है, और सबकी अपनी निजी वजह होती है, यकीं मनो अम्मी मुझे कोई गिला शिकवा नहीं है, न में आपको गलत समझती हु. (ज़ोया ने डरते डरते अपनी बेटी को dekha)Ammi आपको डरने की या शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं है.
अम्मी : (थोड़ी हिम्मत बटोर kar)Nahi बेटी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मुझे अपने आप पर सयम रखना चाहिए था.
नाज़िआ : क्यों अम्मी?
अम्मी : क्यों क्या, में दो बड़ी बड़ी लड़कीओ की अम्मी हु, किसी की बीवी हु, मुझे सोभा देता है क्या, जो गलत है वो गलत है.
नाज़िआ : वो अम्मी आपका सोचना है, और वो आपका फैसला है, आपने जो किआ वो भी और आगे आप जो करोगी या नहीं करोगी, ये सब आपका फैसला है, पर एक बात याद रखियेगा, में आपके साथ हु, किसी भी परिस्थिति में, मुझे पता नहीं है की आपके और अब्बू के बिच क्या चल रहा है, उसके चलते या सिर्फ ऐसे hi, किसी भी वजह से आपने ये किआ है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, में आपको गलत नहीं समझती, में भी एक औरत हु, में समाज सकती हु आपको. तो अपने दिल में कोई गुबार मत रखियेगा.
अम्मी : तो मेरी बेटी अब बड़ी हो गयी है.
नाज़िआ : है अम्मी, एक उम्र के बाद लड़कीअ बड़ी हो hi जाती है, अब मुझे आप अम्मी नहीं, मेरी दोस्त लगती हो, मेरी सहेली हो आप, आपने मुझे हर जगह सहारा दिया है, हर जगह मेरी मदद की है, अपने अम्मी से ज्यादा मेरी सहेली का रोले ऐडा किआ है, आप ये मात समझना की में आपके अहसान के चलते आपसे ऐसा कह रही हु, पर में अब समझती हु की, हर किसी की अपनी निजी जिंदगी होती है, अपनी निजी ख्वाहिसे होती है, आपने अपनी निजी ख्वाहिस पूरी कर ली तो आप बुरी नहीं बन गयी, आप अभी भी मेरी प्यारी अम्मी और अब मेरी प्यारी सहेली भी हो. (वो अपनी अम्मी के गले लग गयी)
अम्मी : (उसकी पीठ सहलाते hue)Par बीटा ये अच्छा थोड़ी न लगता है, वो तेरे साथ भी और मेरे साथ भी.
नाज़िआ : एक बात कहु, आप बुरा मत मान न, मुझे तो ऐसा लग रहा है की जल्द hi तीसरी भी आनेवाली है.
अम्मी : (नाज़िआ को दूर हटा कर उसका चेहरा देखते hue)Ye क्या कह रही है तू, क्या tu....(Wo तो बोल भी नहीं प् रही थी)
नाज़िआ : है में संयम की hi बात कर रही हु.
अम्मी : क्या बकवास है ये, वो अभी बच्ची है, और शिव ऐसा कैसे कर शक्ति है, वो भी दुसरो की तरह hi निकला, जहा लड़की देखि वही...
नाज़िआ : क्या अम्मी आप भी, क्या आपको शिव ऐसा लगा, क्या उसने आपके साथ जबरदस्ती की?
अम्मी : नहीं, पर ऐसे सबके साथ वो थोड़ी न सम्बन्ध बना सकता है, तेरी और मेरी बात अलग है, संयम की बात अलग है, उसे अभी शादी भी करनी है, अगर उसने संयम को ख़राब कर दिया तो उसको दिक्कत हो सकती है.
नाज़िआ : अम्मी, इसमें शिव की गलती नहीं है, और अभी उनके बिच ऐसा वैसा कुछ है भी नहीं, पर जैसा में संयम की आँखों में देखती हु, वो बता रही हु, शिव उसे वैसे नहीं देखता, पर संयम शिव को वैसे देखती है.
अम्मी : नहीं, तुम्हे शिव से बात करनी होगी, उसे कह की वो संयम के साथ ऐसा वैसा कुछ न करे.
नाज़िआ : शिव कुछ नहीं करेगा, जो कुछ करेगी वो संयम करेगी, जहा तक मुझे लग रहा है.
अम्मी : तो समजा उसे, समजा की ये सब गलत है, शादी से पहले ये सब वो नहीं कर शक्ति.
नाज़िआ : क्यों नहीं कर शक्ति, क्या सब ठेका लड़कीओने hi ले रक्खा है?
अम्मी : में कुछ नहीं जानती, जो समाज में चल रहा है, वो hi चलता है, अगर वो हमारे मजहब का होता तो में उन दोनों की शादी भी करवा देती.
संयम : किसकी शादी की बात हो रही है (वो आंखे मलते हुए रूम में दाखिल हुई, अभी अभी वो नींद से जगी थी)
नाज़िआ : तेरी शादी की (नाज़िआ ने चुटकी ली)
संयम : मेरी शादी? मुझे नहीं करनी शादी वादी, अभी मुझे बहोत पढ़ना है, उसके बाद नौकरी. तो अभी इन सब को दिमाग से निकल hi दो.
नाज़िआ : (नाज़िआ फूल मज़ाक के मूड में thi)Achchha, में तो अम्मी को बता रही थी की संयम की शादी शिव से करदेते है.
संयम : (चहकते hue)Kya?
नाज़िआ : देखो अम्मी, इसका चेहरा तो देखो, मेने कहा था न.
संयम : Ammiiiiiiiiii.
अम्मी : ये सब मज़ाक नहीं है नाज़िआ, ऐसे मज़ाक में भी मात बोलो.
नाज़िआ : सॉरी अम्मी.
अम्मी : जा पानी गरम कर के थोड़ी देर सिकाई कर ले, दर्द काम हो जायेगा.
संयम : क्या हुआ आप को?
अम्मी : कुछ नहीं हुआ है, तू जा और अपनी पढ़ाई कर.
(फिर वह सब अपने अपने काम में लग गए)




















