Adultery Kundali Bhagya - Page 6 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 23

रंजन ने मुझे लकडिया काटने को कहा था, मुझे गयम भी जाना था तो में जल्दी जल्दी लकडिया काट रहा था. और रंजन उसे इकठ्ठा कर के एक जगह रख रही थी. लकडिया काट ते हुए भी मेरी नजर बार बार उसकी और जा रही थी, और वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. में नहीं जनता पर मुझे अब लड़कीओ को देख कर कुछ कुछ होने लगता था, और वैसे भी रंजन और में बहोत कुछ कर चुके थे तो उसे देख कर मेरे अंदर कुछ कुछ हो रहा था. (रंजन भी बार बार उसे देख रही थी, उसका दिल भी मचल रहा था)





जैसे hi काम ख़तम हुआ में उसके पास गया, वो अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी रही और मुस्कुराने लगी, मेने उसका चेहरा उठाया तो वो जाट से मुझसे लिपट गयी, (रंजन कब से अपने आप को रोके हुए थी, पर अब उसका भी बांध टूट hi gaya)mene उसका चेहरा उठाया और उसके होठो को हलके से चूमा पर वो तो मुज पे टूट hi पड़ी. उसकी भावनाओ को समझते हुए मेने भी उसके होठो को चूसना चालू कर दिया. एक दूसरे को बहो में भर कर हम किश करने में लगे हुए थे. मेरी उत्तेजना भर रही थी तो में उसके रसीले छोटे आम जैसे दोनों बूब्स को मसलते हुए उसके होठो को गिला करने लगा. (रंजन मदहोस सी होने लगी, उसकी छूट ने उठे हुए लुंड की चुभन को पहचान लिया और वो अपनी छूट शिव के लुंड पे रगड़ने लगी. दोनों इस खेल का आनंद ले रहे थे.) मेरा दिल कर रहा था उसके कच्ची चुचिओ को नंगा देखने का तो में उसकी कुर्ती को ऊपर उठाने लगा. (रंजन ने जैसे hi महसूस किआ की शिव उसकी कुर्ती उठा रहा है तो उसने किश को रोका और शिव को देखने लगी, उसका दिल भी यही चाहता था पर फिर भी उसे लड़कीओ वाली शर्म आ hi जाती थी. ) उसे ऐसे मुझे देख ते देख में भी रुक गया और उसे देखने लगा.

शिव : (मेरी आवाज उत्तेजना में कैंप रही thi)Muje देखना है, देखु?

रंजन : (शिव के प्यार भरे प्रस्ताव को सुन रंजन अपना शिर साइड में घुमा कर मुस्कुराते हुए) hmmm(Wo कैसे अपने आशिक़ के प्रस्ताव को मन कर शक्ति थी, आखिर उसका भी दिल तड़प रहा था इन सब के लिए)

(उसकी सहमति पते hi में उसका कुरता ऊपर उठाने लगा. पहले उसकी पतली सी कमर बेपर्दा हुई, अब में समाज रहा था की स्नेहा मैडम के मुकाबले वो कितनी छोटी कमर थी. ये एक लड़की थी और वो औरत. उसकी नाभि का वो खड़ा देख मेरे लुंड ने ठुमका मारा. रंजन बड़ी मदहोशी में मुझे देख रही थी, मेने हलके से उसके होठ पर किश किआ और उसकी कमर को सहलाने लगा, मेने कुर्ती और ऊपर उठादि और उसकी कच्छी चुचिओ को देखने लगा.





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स्नेहा मैडम के मुकाबले ये भी बहोत छोटी थी पर रंजन का शरीर पतला था और उसके मुकाबले उसकी चूचिया काफी बड़ी लग रही थी, एकदम तानी हुई चूचिया और उसके ऊपर का पूरी तरह तना हुआ निप्पल देख मेरे अंदर अजीब सी हलचल होने लगी , निप्पल के आस पास में छोटा सा घेरा बना हुआ था. में काफी उत्तेजित हो रहा था इस कठोर चुचिओ को देख कर जो पूरी तरह तानी हुई थी में अपनी उंगलिओ से निप्पल को चुने लगा तो रंजन की सांसे तेज होने लगी और उसके चुके भी ऊपर निचे होने लगे. मेने एक चुकी को अपने हाथो में भरलीआ और दबाने लगा.

रंजन : शीइइइइइव, ahhhhh.(Mene रंजन को देखा और अपना मुँह झुका कर एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा.) आठ शिवववव... शह्ह्ह्ह, धीरी. आयी, इतनी जोर से नहीं, शह्ह्ह्ह (वो मेरे सर के बालो को नोचने लगी और मेरे शिर को अपनी चुकी पे दबाने लगी. में समाज नहीं प् रहा था की उसे दर्द हो रहा है की मज़ा आ रहा hai)Aah ...mmmmm....ohhhh Shiv...haaaaa...shhhh शिव आहिस्ता शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शिव shhhhh...aahhhh ....





(वो मेरे सर को सहलाने लगी, में उसकी चुकी को चूस रहा था तो मेरा शिर निचे झुका हुआ था और मेरी नजर उसकी छूट वाले भाग पर पड़ी, मेने अपना एक हाथ बढ़ाया और उसकी छूट पे रख दिया और उसे दबाने laga)Oooomaaaa, एआईईईई शिव ....आआह्ह्ह्ह क्या कर रहे होऊ. वह नहीं शिव शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiv(Muje कपडे के ऊपर से उसकी छूट की दरार का आभास हो रहा था तो में उसे अपनी एक ऊँगली से उस दरार को सहलाने laga)Shiv अह्ह्ह ऐसा न karo...shiiiiii...mujse सेहन नहीं हो रहा शहहह अह्ह्ह्हह्हह मुझे कुछ हो रहा है shiv....(Thodi hi देर में मुझे अपनी ऊँगली पे गीलापन महसूस होने लगा, में अपनी ऊँगली को और अंदर दबाते हुए रगड़ने लगा. रंजन की कमर आगे पीछे हिलने लगी, वो मेरे बालो को बड़ी सख्ती से खींचने लगी. में दोनों चुचिओ के निप्पल को बरी बरी चूस रहा था. मेने अपना हाथ उसकी छूट से हटाया और उसकी पजामी के अंदर डालने लगा) ओह्ह्ह शिव मात करो, आठ मुझे कुछ हो रहा hai(Usne मुझे रोका नहीं ,में अपना हाथ अंदर डालने लगा सपाट चिकनी कमर के बाद मुझे कुछ बालो का एहसास हुआ, में उन बालो को सहलाते हुए आगे बढ़ा तो फिर छूट के होठो का एहसास हुआ, उसकी दरार में ऊँगली फिरते हुए मेने उसकी छूट को नंगी hi दबोच लिए.) शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव ऐसा मूत करो अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह शीइइइइइव ahhhhh(MecChut की दरार को अपनी उंगलीसे सहलाने लगा और साथ में दबाव भी बढ़ने लगा जिस से ऊँगली छूट की फैंको को फैलाकर दरार के ुंदेरतक चालीगयी. मेरी ऊँगली को उसकी छूट का छेद मिलचुका था. वो रास से पूरी ररहा भीगा हुआ था और छूट के मुकाबले वो भाग बहोत hi ज्यादा गरम था. मेरी भी उत्तेजना बहोत बढचुकि थी. में उस गरम छेड़ को ऊँगली से कुरेद ने लगा. रंजन ने अपनी छूट को आगे की और कर दिया, अपनी छूट के छेड़ पर शिव की ऊँगली को महसूस करने पर उसकी छूट में चींटिया रेंगने लगी थी, वो इस एहसास से पागल हो रही थी, उसे ऐसा लग रहा था की वो ऊँगली उसके छेड़ में चली जाये इस लिए वो अपनी छूट को आगे धक्के दे रही thi)Shhhhhhh शिव्व्व अह्ह्ह क्या कर रहे हो, शठ में पागल हो जाउंगी शहहहहह शिईयिव अह्ह्ह्हह्हह अंदर डालो न शिव शहहहहह (उसकी कमर अपने आप hi झटके देने लगी थी की मेरी ऊँगली उस छोटे से छेद में थोड़ी अंदर चली hi गयी. वो जगह इतनी छोटी थी की मेरी ऊँगली पर छूट का छल्ला में साफ महसूस कर रहा था) (खुमारी में रंजन ने ऊँगली तो डलवा ली पर उसे अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा दर्द महसूस हुआ पर उसके सामने मज़ा और बढ़ गया था).( मेरी ऊँगली थोड़ी सी hi अंदर थी, मुझे अपनी ऊँगली पे पड़ने वाले दबाव से लग रहा था की वो छेड़ बहोत hi छोटा है, में अपनी ऊँगली को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)(Ranjan अपने अंदर इतना कुछ महसूस कर रही थी की उस से रहा नहीं जा रहा था, वो शिव को पकड़ने के लगी पर उसके हाथ में शिव का लुंड आ गया, अपने हाथ में इतने सख्त डंडे को महसूस कर के वो पागल सी होने लगी, वो जोर से लुंड को दबाने लगी ोोोोीीी मा, शिवववव में मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत कुछ हो रहा है, शिव में पागल हो jaungi....Aahhhh shivvvvv...aiiiiiii.(Meri ऊँगली और आगे नहीं जा रही थी तो में बस उतनी hi ऊँगली से जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.)Shivvvv आठ मुज से रहा नहीं जा रहा ,,, अह्ह्ह्ह शिव मूत दूंगी आह्ह्ह्ह ....आईईईई आअह्ह्ह्ह शिव ममममम मेरा मूत निकल जायेगा सीईव रुको आअह्ह्ह्हह मेरा निकल जायेगा शीइइइइइइव (और वो झटके कहती हुई झड़ने लगी, उसे रहा नहीं गया तो वो शिव से कास के लिपट गयी, और उसने शिव की कलाई भी पकड़ ली, उसकी छूट से रास की बौछार होने लगी. शिव का पूरा हाथ भीग गया)( रंजन ने मेरी कलाई पकड़ ली थी तो में रुक गया.)

(रंजन जोर जोर से सांसे ले रही थी और वो शिव को अपने अंदर खिंच लेना चाहती हो ऐसे लिपटी हुई थी,) (वही थोड़ी दुरी पर कड़ी विणा ये खेल कब से देख रही थी, वो अपनी आंखे फाडे कबसे ये कामलीला देख रही थी, उसे भी अपनी छूट से बेहटा रास महसूस हो रहा था जो उसकी झांघो से बह रहा था, वो अपनी झंघे आपसमे रगड़ रही थी. जब उसने देखा की दोनों शांत खड़े है कुछ कर नहीं रहे है तो वो बिना आवाज किये वह से लौट गयी.) जब रंजन अपना पूरा रास बहचुकि तो उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ, वो शर्म से भर गयी, उसे एंटी शर्म आ रही थी की वो सोच रही थी की वो शिव से कैसे नज़ारे मिलाएगी. पर ऐसे वो कबतक कड़ी रहती, उसने अपना चेहरा उठाया और शिव को देखा जो उसकी hi आँखों में देख रहा था. वो शर्म से सिंहर उठी, पर नज़ारे झुकाने की बजाये वो शिव के होठो पे टूट पड़ी. शिव भी उसके होठो का रसपान करने लगा. उतने में दूर से सरिता दीदी की आवाज आयी जो उन्हें पुकार रही थी.

सरितादिदी : (सरिता को भी आभास था तो वो दूर से hi पुकार रही thi)Shiiiiiiv, राजाआं. हो गया क्या तुम्हारा. (सरिता जान बुज कर ऐसा बोली थी, ये वाक्य लकडिओ के काम के लिए भी था और उनके काम के लिए भी tha)(Shiv और रंजन, दोनों पहले थोड़ा घबरा गए पर जल्द hi शिव ने सँभालते हुए उन्हें जवाब दिया.

शिव : है दीदी, हो गया है, अभी आते है.

सरितादिदी : ठीक hai.(Wo चली गयी)

शिव : (उसकी आँखों में देखते hue)Tumhe बुरा तो नहीं लगा मेने तुम्हे वह छुआ तो.?

रंजन : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे झुकाते हुए अपनी गर्दन न में हिलने लगी. उसका चेहरा बता रहा था की वो बहोत खुस thi)Tum पहले जाओ में थोड़ी देर में आती हु.

शिव : (मेने भी मुस्कुरा कर kaha)Thik hai(Mene रंजन को गले लगाया तो वो भी उस से कास के लिपटगाई, शिव ने उसके गाल पर एक पप्पी दी) जल्दी आना

रंजन ने शरमाते हुए हामी भरी, फिर में वह से निकलकर अंडर चला गया. रंजन अपनी हालत दुरस्त करने लगी. आज उसे बड़ा मज़ा आया था. वो मुस्कुरा रही थी और अपनी छूट को पोछ कर साफ कर रही थी. उसके छूट के रास से आगे का भाग पूरी तरह से भीग गया था. जैसे तैसे उसने अपने आपको ठीक किआ और वो भी अंदर चली गयी, उसकी हालत ऐसी थी की वो सबके सामने नहीं आना चाहती थी तो सबसे बच कर सीधे अपने रूम में घुस गयी. उसने कपडे बदले और बहार चली आयी.

रंजन किसी से बात किये बिना अपने काम में लग गयी. काम करते हुए उसकी आंखे बार बार शिव पे जा रही थी और जब उसकी नज़ारे मिलती तो वो शर्म से मुस्कुराते हुए अपनी नज़ारे निचे कर लेती थी. विणा बड़े गौर से उन्दोनो को hi देख रही थी.

शिव : सुनो Ranjan.(Ranjan ऊपर से निचे तक कैंप गयी, उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी की शिव उस से अभी बात करेगा) कल तुम और विणा तैयार रहना, में तुम्हे स्कूल लेने आऊंगा, फिर वही से यूनिफार्म लेने जाएँगी.

रंजन : (वो बोलने की स्थिति में नहीं thi)Hmmmm.

शिव : (विणा की और देख kar)Thik hai(Usne भी है में गर्दन हिलायी)

मुझे अब जाना था तो में वह से गयम के लिए निकल गया. गयम में सब की एंट्री करवाने के बाद में भी एक्सरसाइज करने लगा. जब छूटने में दस मिनट बाकि थे तो में कसरत वाले कमरे से बहार निकला, जैसे hi में बहार आया तो मेरी नज़र अंडर आती हुई स्नेहा मैडम पर पड़ी.
 
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अपडेट 24

Devilal(Manager) एक आलीशान से ऑफिस में बैठा हुआ था, उसके सामने एक सख्स अपनी बड़ी कुर्शी में बैठा एक फाइल के पैन पलट कर कुछ बड़े गौर से देख रहा था. थोड़ी देर वो सब देखने के बाद देवीलाल की और देखता है.

सख्स: अभी फ़िलहाल के लिए दो मैच है, एक की अभी जरुरत नहीं है पर थोड़े दिनों बाद उसकी जरुरत पड़ेगी, और एक अभी चाहिए.

देवीलाल : (वैसे तो उसे कोई फर्क नहीं पद रहा था पर फिर भी जान ने की उत्सुकता से उसने पूछा) कोण है वो दोनों सर.

सख्स : (कागज पर नाम को गौर से पढ़ने के बाद) गुड्डू और लता.

देवीलाल : पर सर, गुड्डू तो अभी बच्चा है, और लता, नहीं सर, लता नहीं, गुड्डू की फिर भी कोई प्रॉब्लम नहीं पर लता नहीं.

सख्स : गुड्डू हमें इस लिए चाहिए की एक बहोत बड़े आदमी के बेटे को हार्ट का प्रॉब्लम है, वो पैसे खर्चने के लिए तैयार है, और तक़रीबन गुड्डू की आगे का hi है. और लता. एक शेख है, जिसकी एक बेगम को किडनी का प्रॉब्लम है, ट्रांसप्लांट जरुरी है. वो अपनी बेगम से बहोत प्यार करता है उसके लिए वो पैसा पानी की तरह बहा शक्ति है. पर अभी उसके वीसा का इंतजाम भी वो करेगा तो उसे थोड़े दिन लगेंगे. तो लता की जरुरत थोड़े दिन बाद पड़ेगी.

देवीलाल : नहीं सर, लता नहीं. (वो ये तो नहीं कह शक्ति था की उसे लता अपनी रखेल बनाने के लिए चाहिए तो उसने दूसरी तरीके से बात की) आप तो जानते है मुझे, अनाथालय के डोनेशन के लिए कहा कहा घूमना पड़ता है. मेरी गैरहाजरी में वही अनाथालय संभालती है. अगर वो नहीं होगी तो मेरा निकलना बंद हो जायेगा, नहीं सर, लता नहीं.

सख्स : ज्यादा नाटक मात कर, तुज जैसे कमीने को में अच्छी तरह जनता हु, तुजे अगर उसमे इंटरेस्ट है तो किसलिए है वो मुझे पता है. इस बार पैसे भी ज्यादा मिलेंगे, उनने पैसे में तो दू दो चार और लड़कीअ रख सकता है. और लता तो चाहिए hi. उस शेख की बीवी का मैचिंग कही नहीं मिल रहा है, वो काफी टाइम से उसकी तलाश कर रहा है. वो बहोत से देशो में धुंध चूका है. लता का उसके साथ परफेक्ट मैच हो गया है. तो तू लड़की के बारे में नहीं पैसो के बारे में सोच. और मुझे मत समजा की तू किस लिए घूमता है, तू अनाथालय के लिए नहीं अपने लिए घूमता है ये मुझे पता है.

देवीलाल :(गन्दी हसी हस्ते हुए) ठीक है जी, आप ने कह दिया तो फिर करना hi पड़ेगा. और पैसे दुबले लगेंगे जी, में कह देता हु.

सख्स : आ गया न अपनी औकात पर. तुज जैसे कमीनो की वजह से hi ये धंधा चलता है.

देवीलाल : सही कहा आपने सर, पर आप तो हम जैसे कमीनो के भी बाप hai.(Dono हसने लगते है)

गयम में छूटने में दस मिनट बाकि थे तो में कसरत वाले कमरे से बहार निकल आया क्यों की मुझे रजिस्टर में सब की एग्जिट करनी थी. पर जैसे hi में निकला मुझे सामने, अंडर आती हुई स्नेहा मैडम देखि. बंद गले की वाइट टीशर्ट और ब्लू जीन्स पहने वो क़यामत लग रही थी. भरे हुए स्तन क़यामत ध रहे थे, बालो को पोनी किया था और गॉगल्स सर पे चढ़ा हुआ था. लिपस्टिक भी लगायी हुई थी. में उनको देखने में hi इतना खो गया था की में कुछ भी नहीं बोलै तो स्नेहा मैडम ने hi मुझे कहा.

स्नेहा मैडम : गुड evening.(Unki आवाज में मिठास थी)

शिव : (हड़बड़ाते hue)Good..good इवनिंग मैडम. कैसी है आप.

स्नेहमड़ाम : (मुस्कुराते hue)Thik हु.

स्नेहा मुस्कुराती हुई पवन के केबिन में चली गयी. पवन तो आये नहीं थे तो उनकी चेयर पे hi वो बेथ गयी. वो वह से भी शिव को hi देख रही थी. मदनसीर ने स्नेहा मैडम आते हुए देखा था, एक बार तो उनके मुँह से भी लार टपकने लगी, वह कसरत कर रहे दूसरे लड़को का भी यही हल था. टाइम ख़तम होनेवाला था और सब जाने hi वाले थे तो वो भी बहार निकले और केबिन में स्नेहा मैडम के पास चले गए.

मदनसीर : गुड इवनिंग मैडम, व्हाट ा प्लेसंट सरप्राइज. आप इस वक़्त.

स्नेहा मैडम : गुड इवनिंग मदन जी. (जब स्नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया तो)

मदन सर : आप यहाँ, कोई काम था ?

स्नेहा मैडम : Ji...Nahi कोई काम नहीं था, पवन है नहीं और में यहाँ से गुजर रही थी तो सोचा देखलु इस लिए आ गयी. कोई दिक्कत मदनजी?

मदन सर : नहीं मैडम दिक्कत कैसी, में तो इस्सलिये पूछ रहा था की टाइम ख़तम होने वाला है और आप आयी इस लिए.

स्नेहमड़ाम : वो तो बस ऐसे hi आ गयी, आप अपना काम ख़तम कीजिये, में भी थोड़ी देर में निकलती हु. और अगर आप का काम ख़तम हो गया हो तो आप जाइये.

मदन सर : नहीं ऐसी कोई बात नहीं अगर आप कहे तो में रुक सकता हु.

स्नेहा मैडम: (सपाट स्वर me)Nahi मदनजी उसकी कोई जरुरत नहीं, आप जा सकते है.

मदनसीर : (ज्यादा भाव न मिलने से उनका चेहरा लटक गयठिक है मैडम, शिव अभी यही है उसको आधा घंटा लगे गए सब निपटने में. में चलता हु, गुड नाईट मैडम.

स्नेहा मैडम : गुड नाईट.

ज्यादा कोई रिस्पांस न मिलने से मदनसीर अपना लटका हुआ चेहरा लेकर केबिन से बहार निकल आये. दूसरे भी सब निकलने लगे. जब सब चले गए तो मेने रजिस्टर बंद किआ अपना काम करने लगा. मुझे समाज नहीं आ रहा था की मैडम इस वक़्त क्यों आयी है, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ था. और उनके साथ बने सम्बन्ध से मुझे उनसे आंख मिलाने में थोड़ी शर्म भी आ रही थी. में अपने खयालो में खोया हुआ अपना काम कर रहा था तब मुझे एहसास हुआ की मेरे पीछे कोई है तो मेने मुड़कर देखा तो स्नेहा मैडम कड़ी थी. में खड़ा दो गया और उनको देखने लगा. हमारे बिच जो कुछ भी हो चूका था इस वजह से मुझे हिचकिचाहर हो रही थी, और दूसरा वो इस वक़्त ऐसी लग रही थी की मुझे इच्छा हो रही थी की उनको पकड़ कर किश कर दू पर नहीं कर शक्ति था क्यों की जो भी हो वो थी तो मालकिन. वो भी ऐसे hi कड़ी थी, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, न में कुछ बोल रहा था न वो. शानता छाया हुआ था हम दोनों के बिच. वो आगे बढ़ी और मेरी कमर से हाथ गुजरते हुए मेरे साइन से चिपक कर कड़ी हो गयी. में बूत बना ऐसे hi खड़ा रहा, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो बाला की खूबसूरत कैसे मुझसे लिपट के कड़ी थी. उनके शरीर से इतर की खुसबू मेरे अंदर उतर रही थी. जब मेने कुछ न किया तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर अपने आप को मेरी बहो में लेने का इषारा दिए, में होश में आया और मेने उनको अपनी बहो में दबोच लिया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. (स्नेहा सुबह से बेचैन थी, पर अब उसके दिल को रहत का एहसास हो रहा था. उसने बहोत रोका अपने आप को पर आखिरकार वो यहाँ चली hi आयी.) स्नेहमड़ाम अपना शिर उठाकर मेरी आँखों में देखने लगी, में भी उन्हें hi देख रहा था. फिर उनकी नज़र मेरे होठो पे टिक गयी और उन्होंने अपना चेहरा और ऊपर उठाया तो मेने उनके तड़पते होठो पे अपने होठ रख दिए. वो आहिस्ता से मेरे होठो को चूसने लगी और में भी. पर धीरे धीरे होठो को चूमने की रफ़्तार बढ़ने लगी. उनकी लिपस्टिक उनके होठो के आसपास फैलने लगी, बहोत साडी मेरे होठो पे और होठो के आस पास लगने लगी. दोनों की सांसे तेज होने लगी. थोड़ी देर बाद वो मेरे होठो से हटी और वापस अपना चेहरा मेरी छाती में छुपाते हुए

स्नेहा : ओह शिव! ये तुमने क्या कर दिया है, में पागल हो गयी हु, सुबह से बस तुम्हारे hi खयालो में खोयी हु, शिव में पागल हो गयी हु तुम्हारे लिए.

शिव : में भी सुबह से आपको hi याद कर रहा था.

स्नेहा मैडम : (ये सुन के स्नेहा के चेहरे पर खुसी छलकने लगती है, चहकते हुए उसने शिव की और dekha)Kya सचमुच, ओह Shiv(Keh कर वापस मेरे होठो को चूमने लगी hai.Thodi देर बाद वो मेरे शाइन में वापस अपना मुँह छिपलेटी hai)Shiv आगे का मैं गेट बंद कर दो.

शिव :(में समाज गया की स्नेहा मैडम क्या चाहती है और सच कहु तो उन्हें देख कर hi मेरे अंदर भी ऐसी hi भावनाये उमड़ रही thi)Ji मैडम.

में गया और मैं दरवाजा जो लकड़ी का था वो बंद कर दिया, अब बहार से कोई अंदर नहीं देख सकता था. जब मेने ने पीछे मुद कर देखा तो वो वही रूम में कड़ी मुझे देख रही थी, में तेज कदमो से उनके पास गया और अपनी बाहोंमे भरते हुए उनके होठो पे टूटपड़ा, वो भी पूरी तरह गरम थी तो वो भी मेरे बालो को पकड़ते हुए मेरे होठो पे टूटपड़ी.

स्नेहा मैडम : शिव, ज्यादा टाइम नहीं hai(Sneha को शर्म भी आ रही थी पर उत्तेजना उसके ऊपर हावी थी, उसने अपने जीन्स के बटन खोले और उसे घुटनो तक सरका दिया, उसने शिव का ट्रॉउज़र भी सरका दिया, सही पड़ी बैंच का सहारा ले कर वो झुक गयी, जल्दी करो शिव)

मेने उन्हें देखा, उनके बड़े बड़े चुत्तड़ फैले हुए थे, ये नज़र देख मेरी हालत ख़राब होने लगी, मेरा लुंड लोहे की तरह सख्त हो गया. में हाथ आगे बढ़ा कर कूल्हों को सहलाने लगा. वो और झुक गयी और उनकी छूट साफ नज़र आने लगी. में उसे फैला कर देखने लगा.

स्नेहा मैडम : शह्ह्ह्ह शिव ज्यादा टाइम नहीं है. (मेने उनकी बात मानते हुए लुंड को छूट पर लगाया और अंदर डालने लगा,

स्नेहा मैडम : अह्ह्ह्ह शिव, उस पर थूक लगाओ पहले. (मुझे याद आया की कैसे में लतादिदी के अंदर डालने की कोशिस कर रहा था पर वो जा नहीं रहा था. मेने अपने हाथ में ढेर सारा थूक निकला और उसको लुंड पे लगा दिया, वो वैसे hi झुकी हुई मुझे देख रही थी. मेने उन्हें देखा तो उन्होंने मुझे हां का इस्सर किया तो में अपनी पोसिटिव लेने लगा. आज में छूट को ध्यान से देख रहा था. स्नेहा मैडम ने अपना हाथ पीछे ला कर मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के छेड़ पर लगाया, में बड़े ध्यान से देख रहा था की लुंड कहा जा रहा है. पहली बार में इतने उत्साह में था की में ठीक से देख नहीं पाया था, पर लता दीदी के अंदर नहीं गया तो मुझे देखना था की कोण सी सही जगह होती है. जब लुंड छेद पर लग गया तो वो मुझे अपनी और खींचने लगी. में आगे होता गया और मेरा लुंड छूट को फैलते हुए अंदर जाने लगा. मुझे छूट की रगड़ और उसकी गर्मी अपने लुंड पर साफ महसूस हो रही thi.(Sneha भी अपनी छूट को फैलते हुए अपने अंदर घुसते लुंड को अपनी आंखे बंद किये हुए महसूस कर रही थी. आज भी उसे तकलीफ हो रही थी पर उसने शिव को रोका नहीं.) में निचे hi देख रहा था अपने लुंड को अंदर जाते हुए. जब पूरा लुंड अंदर चला गया तो में रुक गया और मेने स्नेहा मैडम को देखा तो वो आंखे बंद किया अपने दांतो को भींचे हुए थी. शायद उनको तकलीफ हो रही थी. में बस उन्हें hi देख रहा था. (थोड़ी देर बाद स्नेहा ने आंखे खोली और शिव को देखा जो उसे बड़े गौर से देख रहा था. उसके चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी. वो मुस्कुरायी और उसके गाल को सहलाते हुए)

स्नेहा मैडम: कुछ नहीं हुआ मुझे, तुजे कैसा लग रहा है?

शिव : आप को दर्द हो रहा है?

स्नेहमड़ाम :(मुझे खींच कर अपने ऊपर झुकाती है और मेरे होठो को चूसने लगती है. मेरा एक हाथ पकड़कर अपने स्तन को दबाने का इसरा करती है,) मुझे कुछ नहीं हुआ शिव, मुझे प्यार करो, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, तुम्हारा वो बड़ा है तो थोड़ी सी तकलीफ होती है पर सच में मुझे बहोत अच्छा लग रहा है. (में उसके एक चुके को हलके हलके मसलने लगा),( स्नेहा उसके चेहरे को देखते hue)Tuje मेरे साथ ये सब करने में मज़ा तो आता है न शिव?

शिव : (मेने उनके चेरे को देखा जो अब खुसी दर्शा रहा था, मुझे भी ये खेल बहोत पसंद आ रहा tha)Ha मैडम.

स्नेहमड़ाम : (वो अपनी आँखों से ुअपनी छूट की और इसरा करते hue)Dekh कैसे तू मेरे अंडर समां चूका है. में तुजसे झूठ नहीं कहूँगी पर पिछले दो तीन सालो से ये एक्सिटमेंट, ये उत्तेजना मुझे महसूस hi नहीं हो रही थी. जब तेरे साथ ये किआ तो वापस मुझे वही उत्तेजना फील हो रही है, अब आहिस्ता आहिस्ता आगे पीछे kar.(Me अपना लुंड आगे पीछे करने लगा, जब लुंड बहार निकला तो मेने देखा है की लुंड पूरी तरह से भीगा हुआ है, में हलके हलके धक्को के साथ अंदर बहार कर रहा था.) Aahhhh,....ahhhh.ahhhh, ओह शिव में बता नहीं सकती मुझे कैसा महसूस हो रहा है, आह्हः shiv,,,oh शिव, है ऐसे hi, थोड़ा tej(Muje उस गरम चिकनी गुफा ने घुसे अपने लुंड पर अजीब सी सरसराहट हो रही थी. मेरी रफ़्तार थोड़ी बढ़ने लगती hai)(Apni छूट की दीवारों पर मिल रही रगड़ से स्नेहा काफी उत्तेजित हो रही thi)oooomaaaa. Ha..ha..haaa...oh शिव, और tej....(apne होठ दांतो से दबाते hue)ummm...hhmmmm...ahhhhhh.....shhhhhiiiiii)Shiv मुझे तुम पागल कर के hi छोडो गए, शिव मेरा निकलने वाला hai.....(Sneha सुबह से गरम थी तो थोड़ी hi देर में चरम पर पहुंचने लगी थी, लुंड अंदर बहार हो रहा था, छूट से निकलता रूस निचे बह रहा tha)mummmmyyy....haa शिव करते raho.(Muje भी बहोत मज़ा आ रहा था, मेने उनकी कमर को पकड़ लिया और जोर जोर से धक्के लगाने laga)oooo maaaa.....mummyyyy, aahhhhh...haaaaa ऐसे hi अह्ह्ह ऐसे hi ahhh(Sneha मैडम के स्तन उछलकूद कर रही थे और पूरी बॉडी थरथरा रही थी (मुझे अपने लुंड पर सिकुड़ती फैलती छूट के मसल्स महसूस हो रहे थे. थोड़ी hi देर में मेरे लुंड पर गरम गर्म तरल बेहटा महसूस हो रहा था. मेने उनके कूल्हों को थमा और धक्के लगाने लगा, (स्नेहा उसे देखती है, पर रोकती नहीं, कुछ देर उसके लुंड के धक्के खाने से स्नेहा फिर से गरम होने लगती है), मुज से भी अब बर्दास्त नहीं हो रहा था, मेरे धक्को से उनका पूरा शरीर हिल रहा तह, उनके उछलते स्तनों को अपने हाथमे ले कर मसलने लगा, (स्नेहा शिव की हरकतों से खुस हो रही थी और उसे देख कर मुस्कुराती है)( में उनके चुत्तड़ो को दबाते हुए धक्के लगा रहा था. मेरा ध्यान बार बार उस sikudte-khulte गांड के भूरे छेड़ पर जा रहा था. मैंने चुत्तड़ो को और फैलाया और धक्के लगाने लगा. (स्नेहा अपनी छूट पर हो रहे हमले से हिल रही थी तो उसने अपने हाथ बेंच पर टिका दिए. जब उसका ध्यान शीशे पर गया तो उसने पाया की शिव उसके चुत्तड़ो को ध्यान से देख ते हुए उसे छोड़ रहा था. वो अपने आपको चुड़ते हुए देख कर शर्माने लगी पर साथ साथ और उत्तेजित होने लगती है और उसकी आहे बढ़ने लगती है. शिव ने उसके चुत्तड़ो को छोड़ उसकी कमर को थम लिया और जोर जोर से धक्के लगा ने लगा. स्नेहा पूरी तरह हिल रही थी. एक में भी दोनों के पशीने निकलने लगते है. शिव अपनी t-shirt भी निकल देता है. वो स्नेहा मैडम की कमर को थामे जोर जोर से धक्के लगाने लगता है. अब उसको भी लग रहा था की उसका निकलने वाला है. स्नेहा उसके धक्को की तीव्रता को भाप चुकी थी की वो अब छूटने वाला है. शिव उसकी कमर पकड़े जोर जोर से धक्के लगा रहा था, स्नेहा उसके ऐसे मरदाना धक्को से और उत्तेजित होने लगगति है, कैसे एक अभी अभी जवान हुआ लड़का उसके जैसी गदरायी औरत को अपनी कायल बना रहा था.) (शिव अपनी धुन में जोर जोर से धक्के लगा रहा था वो अब बहोत नजदीक था. उसके मुँह से भी humm...hummm...hummmm निकल रहा था था, )(स्नेहा भी पूरी तरह चरम पर थी वो आंखे बदन किये अपनी कुटाई करवा रही थी, शिव इतने तेज धक्के लगा रहा था की अब स्नेहा से बर्दास्त नहीं हो रहा था. वो कराहने लगी थी और उसके धक्को को झेल रही थी. आखिर कर शिव ने एक जोरदार धक्के के साथ अपने लुंड को जड़ तक लगा दिया और स्नेहा अपनी बच्चे दानी के मुँह पर निकलते लावा को महसूस कर के झड़ने लगी. दोनों कांपते हुए हलके हलके ढको के साथ झड़ने लगे, अब सिर्फ दोनों के हाफने की आवाज सुनाई दे रही थी. पसीने से उसके कपडे भीग चुके थे, लुंड, छूट में अंदर तक घुसा हुआ था.

थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद जब मेने लुंड बहार निकला तो छूट से ढेर सारा सफ़ेद रास निकलने लगा, में उसे देखते हुए उनके कूल्हों को सहलाने लगा.

स्नेहा मैडम : शहहह, अभी मन नहीं भरा tumhara?(Unhone खड़े होते हुए अपनी जीन्स ऊपर चढ़ा ली)

शिव : आप बहोत खूबसूरत है, आप को देखना अच्छा लगता है.

स्नेहा madam:(Sharatbhare lehjeme)Aur ये करना?

शिव :(मुस्कुराते hue)Wo तो और ज्यादा अच्छा लगता है. और आप को?

स्नेहा मैडम: मुझे भी बहोत मज़ा आता है शिव. सुबह से कितनी बैचैन थी में, अब जेक सकूँ मिला है मुझे. दिल यही छह रहा है की ऐसे hi तुम्हारे साथ राहु पर तुम्हे जाना भी है ये पता है. कल मिलोगे मुझसे?

शिव : कब?

स्नेहा मैडम : जब भी तुम्हे टाइम मिले?

शिव : और पवनसीर?

स्नेहा मैडम : वो कल बहार जा रहे है, सुबह.

शिव : ठीक है कल सुबह 10:30 तक आता हु.

स्नेहा मैडम : पर तुम्हारा स्कूल?

शिव : (स्नेहा मैडम के बालो को सहलाते hue)Kal छुट्टी ली है मैंने.

स्नेहा : (खुस होते hue)Are वह तो कल पुरदीन मेरे साथ रहना. (शिव अभी भी नंगा hi खड़ा था उसके सामने, लुंड पूरा भीगा हुआ था, उसने अपनी जेब से रुमाल नीलका और बेंच पर बेथ कर उसे पोछने लगी)

शिव : (मुझे अजीब लगा, कैसे वो मेरे लुंड को साफ कर रही थी, मेने मुस्कुराते हुए kaha)Nahi रह सकता, सादे बारह तक रहूँगा, फिर मुझे मेरे अनाथालय की लड़कीओ के साथ यूनिफार्म लेने जाना है और उसके बाद जूही मैडम से साथ जाना है.

स्नेहा मैडम: (सवालिया नजरो से देखते हुए) जूही के साथ क्यों?

शिव : वो मुझे उनके कोच से मिलवाना चाहती है.

स्नेहा मैडम : वो तुम्हे कोच से क्यों मिलवाना चाहती है?

शिव : वो कहती है की वो मुझे एथलीट की ट्रेनिंग दिलवाएगी.

स्नेहा मैडम : (उसके लुंड को साफ़ कर रही थी तो वो फिर अकड़ना सुरु हो गया और उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेरे लुंड को कहती hai)Saitan कही का, अभी टाइम नहीं है कल aana.(Ye कहते हुए उसको सहलाती है और उसकी चुम्मी लेती है. वो अपना हाथ शिव की और बढाती है तो शिव उन्हें खींच कर खड़ा कर देता है और अपनी बहो के घेरे में ले लेता hai)Ha तुम हो भी किसी एथलीट की तरह. जूही अच्छी लड़की है और वो खुद एथलीट है तो वो तुम्हे एथलीट बन ने में हेल्प कर सकती hai.(Shishe में दिख रहे उनके चुत्तड़ देखकर मेरा मन बहकने लगा, में दोनों हाथ से उन्हें पकड़ के मसलना सुरु कर diya)Aahhh, Shiv...aaiiisa मत करो, ,,,मेने बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोका हुआ hai(Mera लुंड पूरी तरह से अकड़ चूका था, मेने शीशे में देखते हुए उनको पलटा, अब उनकी पीठ मेरी छाती से चिपकी थी और हम दोनों की नज़ारे शीशे पर थी, मेने उनके बड़े बड़े चूहों को अपने पंजो में कैद कर लिया और उन्हें मसलने laga)Ohhhh Shiv...me पागल हो jaungi....maat करो न aisa....(Wo एकदम घूम गयी और मेरे होठो को चूमने लगी तो में वापस उनके कूल्हे मसलने लगा, मेरा लुंड उनकी छूट को छूटे हुए उनकी झांघो के बिच चला गया,) शिव टाइम नहीं hai..please मान jao...warna में फिर बाहेक jaungi(Mene टाइम देखा तो 9 बजने वाले थे तो मुझे घर भी जाना था)

शिव : (मेने उनके होठो को बहोत जोर से चूमा और उनकी आंखोमे देखते hue)Abhi टाइम नहीं है warna....kal जल्दी मिलते है.

स्नेहा मैडम:( मेरे साइन से लिपट gayi)Shiv में इंतजार करुँगी, जल्दी आना.

में कपडे पहन ने लगा, बिच बिच में वापस चुम्मा छाती हो जाती थी, टाइम की वजह से, वर्ण फिर एक रौंद हो hi जाना था. दोनों ने अपने आप को बहोत संभाला था. कपडे पहन ने के बाद हमने गयम लॉक किआ. हम लोग उनकी गाड़ी में बैठे, उन्होंने मुझे देखा मैंने उन्हें देखा और फिर होठ वापस जुड़ गए.

स्नेहा मैडम : (किश के बाद हफ्ते hue)hmmm..hmmm शिव ये मैं क्या क्या कर रही हु, क्या हो रहा है मेरे साथ. तुम मुझे पागल करके छोड़ोगे.

फिर उन्होंने गाड़ी स्टार्ट की और मेरे घर की और निकल दिए. वो मुझे छोड़ के अपने घर लौट गयी. में अंदर गया तो.
 
अपडेट 25

स्नेहा मैडम मुझे घर छोड़ने आयी.

गेट के पास उन्होंने गाड़ी रोकी, जैसे hi में उतरने लगा उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, रास्ता सुमसान था और अनाथालय का दरवाजा, गेट से काफी दूर था, में उन्हें देखने लगा.

स्नेहा : कल जल्दी आना. (उनकी आवाज में बेचैनी साफ़ झलक रही थी)

शिव : ठीक है. (में उतरना चाहता था पर वो मेरा हाथ छोड़ hi नहीं रही थी, तो में उनकी आँखों में देखने लगा, वो मेरी और झुकी और मुझे भी अपनी और खिंचा, उन्होंने अपने होठ मेरे होठो पे रख दिए, उनकी तड़प में साफ़ महसूस कर रहा था, पर यहाँ ऐसे सड़क पर ये ठीक नहीं था तो मेने जल्द hi किश ख़तम की) में जल्दी आ जाऊंगा मैडम. (उन्होंने है में शिर हिलाया)

मुझे छोड़ के वो अपने घर के लिए निकल गयी. में अंदर गया तो सामने hi सरितादिदी मुझे मिल गयी. वो बहार की और hi देख रही थी. मुझे घर कर देखते हुए वो पूछने लगी,

सरिता दीदी: कहा था? इतनी देर क्यों हुई? और ये कौन थी जो तुजे छोड़ने आयी थी?

शिव : काम था दीदी तो देर हो गयी, और ये गयम की मालकिन थी, वो यहाँ से गुजर रही थी तो मुझे छोड़ने आ gayi.(Utne में पीछे से लतादिदी की आवाज आयी)

लता : (सरिता ko)Kyu तंग कर रही है उसे, (शिव ko)ja तू जल्दी कपडे बदल कर आ फिर खाना कहते hai.(Mene वह से भागने में hi अपनी भलाई समाजी, तो में जल्दी से वह से भाग लिया और अपने कमरे में घुस गया.

सरिता : (मेरे जाने के बाद, लतादिदी से बात करती hai)Iske लक्षण ठीक नहीं है, अब एक और नयी उसे छोड़ने आयी थी.

लता : तो तुजे क्यों जलन हो रही है, शिव है hi ऐसा. वो अच्छा तो उसके साथ सब अच्छे.

सरिता : तू समाज नहीं रही पर में सब समाज रही हु. कोई बात नहीं उसे तो में ठीक करती हु.

फिर वो दोनों सबको खाना निकल कर देने लगी, में भी कपडे बदल कर आ गया और उनके साथ खाना खाने बेथ गया. जब मेरी नजर रंजन पर गयी तो वो मुझे hi देख रही थी, जैसे hi हमारी नज़ारे मिली वो मुस्कुरा दी. में ने भी स्माइल की. हम सबने मिलकर खाना खाया. फिर खाना ख़तम कर के में अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद किताबे ले कर रंजन और विणा के साथ पढ़ाई करने बेथ गया.

इतनी रात होने पर भी Bina(Shiv की क्लास टीचर) को नींद नहीं आ रही थी. उसकी वजह थी उसकी सहेली नव्या से फ़ोन पे हुई बाते. अकेले अकेले खाना खाने के बाद वो बोर हो रही थी तो उसने थोड़ी देर टीवी देखा फिर अपनी सहेली नव्या को फ़ोन लगा दिया. ये उसकी पक्की सहेली थी. स्कूल और कॉलेज दोनों ने साथ में किया था. स्कूल कॉलेज की मस्तिया भी दोनों ने साथ की थी, हलाकि बिना पढ़ाई को लेकर गंभीर थी पर नव्या उड़ती तितली थी, वो मज़े करने में यकीं रखती थी.

नव्या : Hi मेरी जान, इतने दिनों बाद मेरी याद आ hi गयी.

बिना : ऐसा क्यों कह रही है, में तो फ़ोन कर hi लेती हु जब भी टाइम मिलता है. तूने कभी किआ है क्या?

नव्या : अरे गुस्सा क्यों होती है, में करू या तू करे, बात तो एक hi है, छोड़ वो सब, बता फ़ोन क्यों किआ?.

बिना : मैंने तो ऐसे hi फ़ोन किआ था, अकेले अकेले बोर हो रही थी.

नव्या: क्यों बोर हो रही थी? तुजे पता नहीं है यार तू कितनी लकी है जो अकेले रहती है, न कोई रोकनेवाला न कोई टोकनेवाला , न किसी का दर. अगर में तेरी जगह होती न to...(Usne बात को अधूरा छोड़ दिया)

बिना :तो ... तो क्या करती?

नव्या : रहने दे, अभी में कुछ कहूँगी तो तू बुरा मान जाएगी. में तुजे जानती हु.

बिना : में क्यों बुरा मान ने लगी, बूल क्या करती अगर मेरी जगाय होती तो? मुझे भी तो पता चले की में अपनी बोरियत काम करने के लिए क्या कर सकती हु.

नव्या: तो सुन, अगर में तेरी जगह होती तो कोई बॉयफ्रेंड बनलेति और उसके साथ मज़े करती.

बिना : (थोड़े गुस्से me)Ye क्या बकवास कर रही hai?(Fir अपने आपको सँभालते हुए शांत होती है, और शांति से कहती है) अब हम कॉलेज की लड़कीअ नहीं है, शादीशुदा है.

नव्या : शादीशुदा है तो क्या हुआ, शादी हो गयी तो क्या जिंदगी ख़तम हो गयी?

बिना : ऐसी बात नहीं पर शादी के बाद पति hi सबकुछ होता है, तो ऐसी बाटे सोचना भी पाप है.

नव्या : देखा, मैंने कहा था न की तू नाराज हो जाएगी.

बिना : नहीं में नाराज नहीं हु, में तो बस तुजे बता रही हु.

नव्या: अगर तू कुवारी होती तो समाज में आता, पर अब शादी के बाद भी तू अकेले कैसे रेहपति है यार?

बिना : ऐसा क्यों कह रही है, शादी के बाद अकेलेकैसे रेहपति हु से तेरा क्या मतलब है, इसमें क्या अलग है?

नव्या : आरी, शादी से पहले तो हमने सेक्स किआ नहीं होता तो चल जाता है पर अब तो उसके बगैर रहना, में तो नहीं कर शक्ति यार.

बिना : (उसे समाज नहीं आता) इसमें कोनसी बड़ी बात है, और सेक्स में ऐसा क्या है जो उसके बगैर रह नहीं शक्ति?

नव्या : क्या? ये क्या कह रही है तू? तुजे सेक्स में मज़ा नहीं आता. यार में तो सेक्स के बगैर रह hi नहीं सकती.

बिना : ऐसा सेक्स में कुछ भी नहीं है की में सेक्स के लिए इतनी पागल बनु.

नव्या : लगता है तूने ढंग से कभी सेक्स किआ hi नहीं है.

बिना : दो साल हो गए मेरी शादी हुए. तुजे क्या लगता है क्या वो सब हुआ नहीं होगा?

नव्या : तो फिर तू ऐसा क्यों कह रही है? क्या तुजे सेक्स में मज़ा नहीं आता?

बिना : पता नहीं तू क्या कहना चाहती है, दो तीन मिनट में ऐसा क्या मज़ा आ जाता है, जिसके बिना रह न सके?

नव्या: (ये सुन के नव्या को झटका लगता है) ये क्या कह रही है तू? दो तीन मिनट, पागल हो गयी है क्या तू?

बिना :(बिना को कुछ समाज नहीं aata)Kya कहना चाहती है तू?

नव्या: अब कैसे संजो तुजे? मुझे लगता है तूने सेक्स को समजा hi नहीं, और कभी ठीक से मज़ा लिया hi नहीं. हम सेक्स करते है तो 10 -15 मिनट तो सिर्फ फोरप्ले में hi चला जाता है, और सेक्स भी कमसे काम 15 से 20 मिनट तो होता hi है.

बिना : (confused)Foreplay मतलब?

नव्या: (नव्या को अब चिंता होने लगी thi)Foreplay मतलब, सेक्स से पहले एक दूसरे के सरीर के साथ खेलना, सहलाना, चूमना, चेतना. क्या तुम कभी ऐसा नहीं करते?

बिना : (उसने शरमाते हुए kaha)Ha वो थोड़ी देर मेरे स्तन दबाते है, फिर सेक्स करते है.

नव्या : क्या तूने कभी तेरे हस्बैंड का मुहमे लिया है?

बिना : छी ! ये क्या बकवास है?

नव्या : क्या उन्होंने कभी तेरी छूट छाती है?

बिना : Chhiiiiiiiiii ! ये क्या बकवास किए जा रही है तू?

नव्या : (थोड़े चिंतित स्वर me)Sorry यार पर मुझे लगता है तूने कभी ढंग से सेक्स किआ hi nahi.(Dono और थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रहती hai)Hello...hello, बिना सुन रही है तू?

बिना : है ! सुन रही हु.

नव्या : यार मुझे यकीं नहीं हो रहा, क्या सच में तुजे नहीं पता सेक्स कैसे करते है? तूने वो वाली फिल्मे देखि है कभी?

बिना : वो वाली, मतलब?

नव्या : पोर्न फिल्म, जिसमे सेक्स दिखते है.

बिना : क्या, ऐसी भी फिल्म होती है?

नव्या: (चिंतित hokar)Yar मुझे लगता है तूने कभी पढ़ाई किताबो से बहार देखा hi नहीं. में एक काम करती हु, में तुजे एक लिंक भेजती हु तू देख लेना. फिर बात करेंगे.

बिना : कैसी लिंक?

नव्या : अरे तू लिंक खोलेगी तो तुजे पता चल जायेगा, तू देखलेने फिर कल बात करेंगे, ठीक है.

बिना :ठीक है bye.

नव्या : Bye.

थोड़ी देर में बिना के वाट्सप पर एक लिंक आती है. जब वो उसे खोलती है तो उसके होश hi उड़जाते है. मोबाइल के स्क्रीन पर उसे लड़के और लड़की की नंगी तस्वीर नजर आती है. जाट से वो अपना फ़ोन hi निचे फेंक देती है और लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए अपने आप को सँभालने लगती है. थोड़ी देर सँभालने के बाद वो कांपते हुए फ़ोन उठती है और स्क्रीन की और देखती है, लड़के और लड़कीअ पूरी तरह नंगे थे, लड़को का वो भी स्पस्ट दिख रहा था, वो गौर से सब देखने लगाती है, उसका शरीर पशीने से भीग गया था, वो एक फोटो पर क्लिक करती है तो उसके सामने एक फिल्म सुरु हो जाती है. जिसे देख कर उसके और पशीने छूट जाते है. पहले तो उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की लोग ऐसा भी करते होंगे. पर वो अपनी आँखों से वो सब देख रही thi.Thodi देर देखने के बाद उस से बर्दास्त नहीं होता तो वो मोबाइल बंद करके बिस्तर पर बैठी सोचमे दुब जाती है.

में, रंजन और विणा पढ़ रहे थे, उतने में सरिता दीदी दरवाजे पर दिखी.

शिव : अरे दीदी आप.

सरिता : एक मिनट बहार आ (रंजन और विणा भी सरितादिदी को देखने लगी, में उठ कर उनके पास gaya(Dhimi आवाज me)Aaj पढ़ाई जल्दी ख़तम कर देना. फिर नहाने आ जाना.

शिव :(उनकी बात सुन कर में खुस हो गया, पर फिर लतादिदी का ख्याल आया, धीमी आवाज me)Par लतादिदी.

सरिता : तू उसकी चिंता मत कर में उसे बोल दूंगी, बस तू जल्दी से आ जाना.

शिव : ठीक है didi.(Jaise hi वो गयी में वापस पढ़ने बेथ गया)

रंजन : क्या कह रही थी दीदी?

शिव : कुछ नहीं वो आते की बोरी निकालनी थी तो वही कह रही थी.

रंजन : तो इसमें, तुजे वह बुलाने की क्या जरुरत थी, वो वही से भी कह शक्ति थी.

शिव : जासूसों की रानी, अपना छोटा दिमाग ज्यादा मात चला. पढ़ाई पे ध्यान दे, और मुझे भी पढ़ने दे, आज मुझे जल्दी सोना है.

रंजन : अब जल्दी क्यों सोना है?

शिव : तू पढ़ न मेरी माँ.

अब सेक्स का नाम सुन कर hi में गरम होने लगता था, स्नेहा मैडम के साथ सेक्स करने के बाद भी मेरी गर्मी शांत नहीं हुई थी, सरिता दीदी के ऐसे आमंत्रण से में खुस हो गया. मेरे और शारिता दीदी के बिछ बहोत कुछ हो चूका था, और अब तो मुझे भी पता था की सेक्स क्या है तो अब शायद दीदी के साथ भी कुछ न कुछ होने की सम्भावना थी. मेने उन्हें बता दिया की में अभी 11 बजे चला जाऊंगा और कल उनको स्कूल लेने आऊंगा. जब में वह से निकला तो निकलते वक़्त रंजन ने मुझे फ्लाइंग किश दी, में ने विणा की और देखा तो वो पढ़ने में व्यस्त थी तो मेने भी फ्लाइंग किश दे कर रिप्लाई किआ. में अपने रूम में आ गया. लतादिदी बिस्तर पर लेती हुई थी. मुझे देख कर वो बिस्तर पर बेथ गयी.

शिव : कितनी गर्मी है न दीदी?

लतादिदी : है, बहोत गर्मी है, पंखा भी असर नहीं कर रहा है.

शिव : मेरा तो नहाने का मान कर रहा है, में नहाकर आता हु. (उन्होंने कोई आनाकानी नहीं की)

लतादिदी :ठीक है, नाहा ले.

में बाथरूम की और चला गया. अंदर कोई नहीं था तो मेने अपने कपडे उतरे और सिर्फ अंडरवियर में नाहा ने लगा. अभी मेने अपना शरीर भिगोया hi था की आहत हुई, मेने पीछे मुड़कर देखा तो सरिता दीदी हाथ में कुछ कपडे और टॉवल लेकर अंडर आ रही थी. मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

सरिता दीदी: अकेले अकेले hi सुरु हो gaya?(Unhone कपडे लटकाये और साथ में अपनी चुन्नी भी तंग di)Thodi देर रूक नहीं सकता था? ला मुझे दे में नहलाती हु.

और उन्हों ने मेरे हाथ से पानी का डिब्बा ले लिया और मुज पर पानी डालने लगी और साथ में मेरे जिस्म पर अपना हाथ भी फिरने लगी. उनकी नाजुक सी उंगलिया मेरे शरीर पर गुदगुदी सी कर रही थी. में आंखे बंद कर के मुस्कुरा रहा था. पानी डालने के बाद वो साबुन ले कर मेरे पुरे बदन पर मलने लगी. पता नहीं पर उनके स्पर्श से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी. वो मेरे पीछे बेथ कर मुझे साबुन लगा रही थी, उन्होंने मेरे कंधे, पीठ और छाती पर साबुन लगा दिया. उन्होंने मुझे खड़ा होने के लिए कहा तो में खड़ा हो गया. वो मेरे पैरो पर साबुन लगाने लगी. वो मेरे पीछे घुटने मोड़कर बैठी मुझे साबुन लगा रही थी.

सरिता दीदी: मेरी तरफ घूम जा.

शिव : (मेरा लुंड खड़ा हो गया था तो में दर रहा तह ) क्यों दीदी ....

सरिता दीदी : चल घूम जा bolana(Aur मेरा हाथ पकड़ कर मुझे घूमने लगी तो में घूम गया, मेरे खड़े लुंड पर नजर पड़ते hi वो मुस्कुराने lagi)To इसी लिए शर्मा रहा था? क्या लड़कीओ की तरह शर्माता है, क्या मेने पहले नहीं देखा क्या? वो मेरे पैरो पर आगे से साबुन लगाने लगी. मेरी नजर ब्लाउज के ऊपरी भाग से निकले हुए उनके स्तनों की घाटी पे चली गयी. मेरे ऊपर होने की वजह से वो जगह काफी अंदर तक दिख रही थी और साबुन लगाने से वो हिल भी रही थी. (सरिता की नज़र शिव के चेहरे पर गयी तो उसे पता चलगया की वो कहा देख रहा हे तो मुस्कुराते हुए) क्या देख रहा है?

शिव : (हड़बड़ाते hue)Nnnnahi तो, ककककुछभी नहीं.

सरिता दीदी : मुझे पता है क्या देख रहा hai.(unhone अंडरवियर के निचे से हाथ डालदिया और मेरे लुंड पर साबुन लगाने लगी तो मेरे मुँह से अहह निकल gayi)Kya हुआ?

शिव : कककुछ नहीं दीदी.

सरिता दीदी: अच्छा कुछ nahi(Mera अंडरवियर पकड़ कर खींचते हुए निचे गिरा दिया और हसने lagi)Itna बड़ा डंडा लिए घूम रहा है और लड़कीओ की तरह शर्मा रहा hai.(Wo मेरे लुंड पर और आसपास अच्छे से साबुन लगाने लगी उनकी नज़र मेरे लुंड को hi घूरे जा रही थी, अब में भी थोड़ा संभल गया था)

शिव : अच्छा मुझे बोलती हो की लड़कीओ की तरह शर्माता हु और aap?(Thoda रुक kar)Muje तो पूरा नंगा कर दिया. अगर आप को शर्म नहीं आती तो आप भी अपने कपडे उतर दो.

सरिता didi:(Sarita के चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Tuje बड़ी जल्दी है मुझे नंगी देखने की. अगर इतनी जल्दी है तो खुद उतर दे.

शिव :(ये काया बोल दिया दीदी ने, क्या वो चाहती है में उनके कपडे उतारू, मेने कन्फर्म करने के लिए puchha)Aap डाँटोगी तो नहीं?

सरिता दीदी :(मुस्कुराते hue)Agar डांटना होता तो यहाँ तेरे साथ होती क्या?

मुझे अब निश्चित हो गया था तो मेने सरिता दीदी को पकड़ कर खड़ा कर दिया. (सरिता उसे देख कर मुस्कुराये जा रही थी). मेने उनकी आंखोमे देखा फिर ब्लॉउज पर नजर डालते हुए अपने हाथ बढ़ाये और उसे खोलने का प्रयत्न करने लगा पर में उसे खोल नहीं पाया.

सरिता दीदी: (खिलखिलाकर हस्ते hue)Bada आया मुझे नंगी करने वाला, एक हुक तो खुल नहीं रहा hai.(Fir उन्होंने अपने हाथ से एक हुक खोल कर dikhaya)Aise खोलते है बुद्धूराम.

लता अपने कमरे में बेचैनी से करवाते बदल रही थी. सरिता ने उसे बता दिया था की वो शिव के साथ नहाने जा रही है. इसी लिए उसने शिव को रोका नहीं था. वो बिस्तर पर लेते लेते करवाते बदल रही थी, उसे चैन hi नहीं आ रहा था. वो ये सोच सोच कर परेशान हो रही थी की वह क्या चल रहा होगा. वैसे तो वो जानती थी की आज सरिता क्या िर्रादा लेकर गयी है, पर फिर भी उसे यकीं नहीं हो रहा था की क्या शिव ये सब करेगा, और करेगा तो कैसे करेगा. जब उस से रहा न गया तो वो बिस्तर पर अपने घुटने मोड़ कर बेथ गयी. अपनी आंखे बंद किये उसने अपना शिर घुटनो पर टिका दिया. तो थोड़ी देर ऐसे hi शांत बैठी रही. वो मान में सोच रही थी की देखने जाऊ की नहीं. वो कड़ी हो गयी और दरवाजे तक भी गयी, पर फिर उसकी हिम्मत नहीं हुई और वापस कमरे में आ गयी, वो यु hi चक्कर लगा रही थी.

लता : (मान में) शिव को उसके साथ भेज दिया, पागल हो गयी है तू, थोड़ी हिम्मत करती तो अभी उसके साथ तू होती. बेवकूफ, पागल. (अपने आपको शांत करते hue)Wo गयी है तो क्या लूट गया, शिव कहा भगा जा रहा है. इस छोटी सी उम्र में उस बेचारी ने भी बहोत सहा है. तो क्या बुराई है अगर वो थोड़ी खुशिया ले ले. पर क्या शिव ये सब करेगा, क्या उसे आएगा ये सब करना. कैसे पता chalega.(Wo अपने हाथ मलते हुए कमरे में चक्कर लगा रही थी) मुझे देखना चाहिए की क्या चल रहा है.

हिम्मत कर के वो बहार आयी, उसने आस पास देखा तो सन्नाटा फैला था. वो बिना आवाज किये रंजन और विणा के कमरे के पास पहुंची, दरवाजा बंद था और अंदर से कोई आवाज भी नहीं आ रही थी. आहिस्ता आहिस्ता दबपव वो बाथरूम की और बढ़ने लगी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था.
 
अपडेट 26

में सरितादिदी के साथ बाथरूम में दीदी के ब्लाउज के हुक खोलने लगा. जैसे जैसे हुक खुल्राहे थे वैसे वैसे उनके स्तन बेपर्दा हो रहे थे. जैसे hi सरे हुक खुल गए, मेरे सामने दीदी के भरे हुए स्तन थे जो ब्रा में कैद थे. में उन्हें देख रहा था, दीदी को ऐसे देखना मुझे बहोत उत्तेजित कर रहा था. स्नेहा मैडम मेरे लिए अनजान थी पर दीदी को में बचपन से जनता था, और उनके साथ ऐसी हालत में रहना मेरे लिए बहोत hi ज्यादा उत्तेजक था. उन्होंने अपने घाघरे (पेटीकोट) का नाडा दिखाया, तो में मुस्कुराने लगा. मेने नाडा पकड़ा और खिंच दिया, घाघरा खुलते hi वो निचे गिर पड़ा. दीदी मेरे सामने ब्रा और पंतय में कड़ी थी. उनका रंग स्नेहा मैडम जितना गोरा तो नहीं था पर उजाले गेहुए रंग की थी वो. उनसे पतली थी और उनके स्तन आकर के हिसाब से स्नेहा मैडम से छोटे थे पर उनके जिस्म पर उनके स्तन काफी बड़े लग रहे थे. (सरिता, शिव को hi देख रही थी, शिव जिस तरह से उसके स्तन को देख रहा था वो अंदर hi अंदर खुस हो रही थी.

सरितादिदी : ऐसे क्या घर रहा है, मुझे शर्म आती है.

शिव : दीदी, आप बहोत खूबसूरत हो.

सरितादिदी : (मुस्कुराते hue)Aisi हालत में हर लड़की खूबसूरत hi लगती है.

शिव : (झेपते hue)Nahi दीदी सचमे आप खूबसूरत हो.

सरितादिदी : चल ठीक है, अब नाहा ले.

शिव : ऐसे नहीं, में पूरा नंगा हु, और आप नहीं.

सरितादिदी : (अपने मुँह पर हाथ रख kar)Kya, इससे भी निकलू. ये बहोत हो गया है शिव, इससे तो रहने दे.

शिव : नहीं दीदी ये, चीटिंग है.

सरितादिदी : (वो तो वैसे hi नखरा कर रही थी) ठीक है सिर्फ ऊपर का. (उसने अपनी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसे भी उतर diya)Golakar आउट तने हुए स्तन पे डार्क ब्राउन रंग का गोलाकार और उसके बिच कड़क हो चूका निप्पल मुझे ललचा रहा था. उन्होंने कपड़ो को संभल कर तंग दिया. मुझे ऐसे घूरते देख वो शर्माने लगी) शिव (अपने आप को छुपाते hue)Aise मत देखो, शर्म आती है.





शिव : अभी तो मुझे कह रही थी, वो भी उतरो न दीदी.

सरितादिदी : तू बहोत बिगड़ गया है, में तो समझती थी की तू बहोत सीधा है. (उन्होंने अपनी पंतय भी निकल दी) अब खुस, और ऐसे क्या देख रहा है? तूने कहा तो मेने भी कपडे निकल दिए. अब तो ठीक है न?

शिव :(हिचकिचाते hue)Aap बहोत खूबसूरत हो didi,Kya में आप को नेहलौ?





सरिता दीदी : (मेरे नजदीक आकर मेरा गाल सहलाते हुए, प्यार se)Tuje जो करना है वो कर, में किसीभी चीज के लिए मन नहीं करुँगी.

उनकी और से सहमति मिलने पर मेने पानी लिया और उनके उनपर डालने लगा. जब वो पूरी भीग गयी तो मेने साबुन लिया और उनके उनपर मलने लगा. उनके दोनों हाथ पर साबुन लगाने लगा, उनके हाथ पर छोटे छोटे बल थे, साबुन लगा कर में बेथ गया और उनके पैरो पर साबुन लगाने लगा. उनके पैरो पर भी छोटे छोटे बल थे, जब में बैठा था तो उनकी छूट मेरी आँखों के सामने थी. हलके कटे हुए बालोंवाली छूट के दोनों होठ थोड़े ज्यादा गहरे रंग के थे. साबुन लगते वक़्त मेरी नजर बार बार वही अटक रही थी. झांघो पे साबुन लगते हुए मेरा हाथ कभी कभी छूट को छू रहा था. (सरिता मुस्काती हुई शिव की हरकतों का आनंद ले रही थी. आज पहली बार उसकी मर्जी से कोई उसे छू रहा था और ये एहसास उसको बहोत अच्छा लग रहा था.) मेने उन्हें घुमाया तो उनके कूल्हे मेरे सामने आ गए. पतानहीं पर मुझे ये नज़ारा बहोत उत्तेजित कर रहा था, मेरा लुंड पूरा कड़क हो चूका था. मेने हाथ बढाकर उनके कूल्हों पे साबुन लगाने लगा. वो नरम नरम मांस के गोले दबाने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, में अच्छी तरह से उनको गोल गोल रगड़ रहा था. दीदी दीवाल का सहारा लेते हुए थोड़ी आगे झुक गयी जिस से उनके कूल्हे और उभर कर मेरे सामने आ गए. आकर में स्नेहमड़ाम से छोटे सही पर उनकी पतली कमर के मुकाबले बड़े लग रहे थे. में उन्हें मसलते हुए उनपे साबुन लगा रहा था. ऐसे एक नंगी लड़की को नहलाना एक अलग अनुभव था मेरे लिए. मेरा लुंड तो कड़क हो कर ठुमके मर रहा था. जब कूल्हों की दरार में मेरा हाथ गया तो वो जगह काफी गर्म लग रही थी. में रगड़ रगड़ कर दरार को साफ करने लगा तो सरिता दीदी धीमी आवाज में आहे भरने लगी. जब मेरा हाथ छूट पर गया तो वह चिकनाहट थी, रास निकल कर टपकने लगा था. मेरे फिसलते हाथ, कूल्हों की मालिश कर रहे थे. अच्छे से कूल्हों पर साबुन लगा दिया तो में खड़ा हो गया और उनकी पीठ पे साबुन लगाने लगा, मेरा खड़ा लुंड उनके कूल्हों को ठोकर मर रहा था. मेने अपने हाथ आगे करके उनके स्तनों पर भी साबुन लगाने लगा. वो मुझे जरासा भी नहीं रोक रही थी. मेरे हाथ पुरे स्तन को अपनी गिरफ्त में ले रहे थे. उनकी हलकी हलकी आहे, बाथरूम में गूंज रही थी.

सरिता दीदी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शीवववव.

वो थोड़ा पीछे खिसकी और मुज से चिपकने लगी. मेरा खड़ा लुंड उनके कूल्हों की दरार में घुसने लगा, उन्होंने अपनी गान उठा कर लुंड को ऐसे एडजस्ट किआ की वो दोनों पैरो के बिच से निकलता हुआ छूट को रगड़ते हुए उनकी झांघो के बिच चला गया. हम दोनों के मुँह से आह निकल गयी. मेरे बड़े बड़े पंजो में उनके पुरे स्तन समां गए थे. उन्होंने अपनी गर्दन पीछे करके मेरी छाती पे टिका दी तो में थोड़ा झुक गया और उनके गाल से मेरे गाल को सत्ता दिया और रगड़ ने लगा. उन्होंने अपना हाथ पीछे करते हुए मेरे सर को पकड़ लिया और मेरे बालो में हाथ घूमने लगी.

सरिता दीदी : (धीमी मादक आवाज me)Shiv में तुजे पसंद हु न?

शिव : है दीदी, आप बहोत अच्छी हो, पर ऐसे क्यों पूछ रही हो.

सरिता दीदी: (वही मादक awaz)Tuje मेरे साथ ये सब करने में मज़ा आ रहा है न शिव?

शिव : है दीदी, बहोत मज़ा आ रहा hi.( साबुन की वजह से मेरा लुंड और उनकी झंघे चिकनी हो चुकी थी तो वो अपनी कमर चलने लगी और अपनी छूट को मेरे लुंड पर रगड़ने लगी. में उनके दोनों स्तनों को अच्छी मसल रहा था.)

सरिता दीदी: (मदहोस आवाज me)Shiv...muje और प्यार करो, तुम्हारी जो मर्जी हो वैसा करो मेरे sath.(Madhoshi में मेरे गाल पे अपना गाल घिस रही थी और हलके हेल अपनी कमर मेरे लुंड पर चला रही थी, एक हाथ मेरे बालमे घुमा रही थी और दूसरे हाथ को पीछे कर के मेरी कमर को थामे उसे खींच रही thi)Me तुजे पसंद तो हु न शिव? में तेरे साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं कर रही न?

शिव : (मेने उन्हें घुमाया और सीधा करदिया, वापस अपने लुंड को आगे से उनकी झांघो के बिच पंहुचा दिया और उन की कमर पे अपने हाथ लपेट ते हुए उन्हें कमर से अपने से चिपका लिया और उनकी आँखों में देखते hue)Aise क्यों पूछ रही हो दीदी? आप बहोत खूबसूरत और प्यारी हो, आप मुझे अच्छी भी लगती हो पर आप ऐसा क्यों पूछ रही हो की में जबरदस्ती नहीं कर रही न?

सरिता दीदी: बिना किसी की मर्जी या उसको पसंद किये अगर उसके साथ ये सब किया जाये तो उतना मज़ा नहीं आता शिव, इसीलिए में पूछ रही हु.

शिव : दीदी आप उलटीसीधी बाटे मत सोचो, आप बहोत खूबसूरत हो और उपरसे आपका चेहरा बहोत प्यारा है, मेने कभी सोचा नहीं था आप मेरे साथ ऐसे भी होंगी. मेरा तो मान कर रहा है ki...(Me बोलते बोलते रुक गया)

सरिता दीदी: (नशे में दुबे चेहरे के साथ शिव के गाल पे हाथ रखते hue)Kya मन कर रहा है तेरा?

शिव : दीदी आप बुरा मन जाओगी.

सरिता दीदी : में कुछ भी बुरा नहीं ममानूँगी, बताना क्या करना चाहता है?

शिव : वो दीदी, वो....

सरिता दीदी: अब बताना, मेने कहा न में बुरा नहीं मानूंगी, तू जो चाहे कह सकता hai.(Halaki उसे पता था वो क्या कहेगा)

शिव : Didi..wo एक लड़का एक लड़की के साथ जो करता है न वो...

सरिता दीदी: (ंसुस्कुराते hue)Tuje पता है लड़का क्या करता है लड़की के साथ?

शिव : (शरमाते hue)Ha दीदी थोड़ा थोड़ा.

सरिता दीदी: क्या तूने किया है कभी?

शिव :(पहले तो में थोड़ा हड़बड़ाया, फिर सँभालते hue)Nahi दीदी.

सरिता दीदी: तो तुजे कैसे पता है की लड़का लड़की के साथ क्या करता है.

शिव : वो दीदी मेने सुना है.

सरिता दीदी : अच्छा क्या सुना है?

शिव : वो दीदी वो ..वो..

सरिता दीदी: (उसके चेहरे को सहलाते hue)Ab बता भी दे.

शिव : वो दीदी वो लड़का अपना वो लड़की के अंदर डालता है.

सरिता दीदी: (मुस्कुराते hue)Kaha डालता है?

शिव : (थोड़ा शरमाते hue)Wo दीदी वह निचे.

सरिता दीदी : तूने देखा है कहा डालते है?

शिव : नहीं दीदी.

सरिता दीदी: (मुस्कुराते hue)Thik है, में तुजे बताती हु, पहले नाहा लेते है.

ये कह कर उन्होंने मेरे ऊपर और अपने ऊपर पानी डालकर सारा साबुन निकल दिया. फिर वो निचे बेथ गयी और मुझे भी निचे बैठा दिया,

सरिता दीदी: (सरिता को पहली बार इतनी शर्म आ रही थी, पर साथ में उत्तेजना भी हो रही थी, वो किसी लड़के को पहली बार अपनी छूट खोल कर दिखा रही थी, ऐसा तो आज तक उसने कभी नहीं किआ तह, पर उसे ऐसा करते हुए एक अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी, उसने आहिस्ता से अपनी टंगे फैलाई )यहाँ आओ शिव मेरे पास aao.(Me खिसकते हुए उनके पास बेथ गया, उन्होंने अपनी छूट फैलाई और छूट का छेड़ दिखाया) यहाँ डालते hai.(Sneha मैडम के साथ करके मुझे पता तो पता चल गया था पर में ये जान न चाहता था की क्या सबका छेड़ अलग होता है, स्नेहा मैडम के छेड़ में तो मेरा चला जाता था पर लतादिदी के छेड़ में नहीं गया था, क्या सरितादिदी के छेड़ में जायेगा, में अपनी सोच में था की दीदी की आवाज सुनाई di)Dikha तुजे छेड़.

शिव : है दीदी पर ये तो बहोत छोटा दीखता है.





सरिता दीदी : है दीखता छोटा है पर वो फ़ैल जायेगा. अगर तुजे देखना है तो छू कर देख le.(Bolte बोलते उसकी आवाज कैंप रही thi)(Me भी काफी उत्तेजित था, मेरे भी हाथ कैंप रहे थे, मेने छूट के होठो को फैला कर देखा, छेड़ वाकई छोटा सा hi था)

शिव : दीदी, में इसमें ऊँगली दाल कर देखु?

सरिता दीदी :(कांपते hue)Haaa देख le.(Mene अपनी ऊँगली से उस छेड़ को छुआ, वो काफी चिकना tha,)Shhhhhh Shiiiiiiiiiv(Mene दीदी को देखा, उनका चेहरा जैसे नशे में डूबा लग रहा था, मेने ऊँगली अंदर डाली, तो वो सरकती हुई अंदर चली gayi)Shhhhhhhhh ahhhhhhhh(Mene देखा तो सरिता दीदी आंखे बंद किये हुए जोर जोर से सांसे ले रही थी)

शिव : दीदी, दर्द हो रहा है?





सरिता दीदी : नहीं शिईयिव, शहहहहह बहोत अच्छा लग रहा है, अपनी ऊँगली आगे पीछे kar(Me अपनी ऊँगली अंदर बहार करने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : ये तो अंदर चली गयी दीदी.

सरिता दीदी : हआ शहहहहह तेरा वो भी चला जायेगा, shhhhhhhhhh.

शिव : (में हैरानी से उन्हें देखने laga)Aap डालने डौगी दीदी?

सरिता दीदी :(उन्होंने आंखे खोली और मुस्कुराते hue)Ha शिव. मेने कहा न जो चाहे तू मेरे साथ कर सकता है, मुझे पता है तू क्या चाहता है, इसीलिए तो में तुम्हे ये सब समझा रही हु. तू चाहता है न ऐसा करना?

शिव : है दीदी, पर क्या आप चाहती है?

सरिता दीदी: (वो शिव को देखने लगी, आज पहली बार कोई उसकी मर्जी पूछ रहा था, उसका दिल भर आया tha)Ha शिव में भी चाहती हु तेरे साथ ये सब करना. पर उसके पहले तेरे लुंड को गिला करना पड़ेगा, वो बहोत बड़ा hai.(Unke मुँह से लुंड सुन कर में आश्चर्य से उन्हें देखने लगा,) (सरिता भी समाज गयी की वो क्या बोल गयी पर बोल गयी तो बोल गयी, वो मुस्कुराती हुई boli)Kyu इससे कुछ और कहते है?

शिव :(में शर्मा रहा tha)Nahi दीदी, पर आपके मुँह से सुनकर कुछ अजीब लग रहा है.

सरिता दीदी: अच्छा तो अभी तुजे कहना हो की तूने ऊँगली कहा डाली है तो तू क्या कहेगा?

शिव : (शरमाते hue)Kya दीदी आप भी.

सरिता didi:(Aisi बाटे उसे बहोत मदहोश कर रही थी, अपनी नशीली आँखों से पूछती hia)Batana क्या कहेगा शिव, तूने ऊँगली कहा डाली है?

शिव :(मेने देखा की सरिता दीदी पूरी मदहोश है और वो कतई मज़ाक नहीं कर रही है वो तो इन बातो से और उत्तेजना महसूस कर रही है. मुझे भी उत्तेजना हो रही थी तो मेने भी अटकते हुए कह hi diya)Mene आप की छूट में ऊँगली डाली हुई है didi.(Dono के चेहरे पे हसी नहीं थी दोनों बहोत कामुक हो चुके थे)

सरिता दीदी : मेरी छूट को प्यार करना चाहता है?

शिव : वो कैसे दीदी?

सरिता दीदी : जैसे मुँह के होठो के साथ किआ जाता है वैसे hi मेरी छूट के होठो के साथ कर के. है पर तुजे अच्छा लगे तो. (में झुक कर नजदीक से उनकी छूट को देखा, फिर में खड़ा हो गया, मेने दीदी को भी हाथ दिया और उन्हें भी खड़ा kia)(Sarita को कुछ समाज नहीं आया पर वो कड़ी हो गयी.





सरितादिदी : (शिव को सवालिया नजरो से देखते हुए) क्या हुआ शिव, अच्छा नहीं लगा तुजे.

शिव : (मेने कोई जवाब नहीं दिया और उनके चेहरे को पकड़ कर उन्हें किश करने लगा), (पहले तो सरिता हक्की बाकी रह गयी पर जब उसे एहसास हुआ की शिव उसे किश कर रहा है तो वो खुस हो गयी उसने सोचा नहीं था की शिव ऐसा भी कर शक्ति है.





वो भी कहा पीछे रहनेवाली थी वो भी शिव के बालमे हाथ घूमते हुए उसके होठो को चूसने लगी, सरिता को आज पहली बार किश करने में मज़ा आ रहा था . आज वो दिल से किसी को किश कर रही थी, या यु कहे की आज पहलीबार वो किसी को किश कर रही थी वर्ण वो कमीना hi उसके होठ चुस्त था, दोनों थोड़ी देर किश करते रहे, आज पहली बार शारिता को पता चला था की किश में कितना मज़ा आता है. किश कर के जब मेने उन्हें देखा तो वो निचे देख शर्मा रही थी,)

शिव : जब करना hi है तो तरीके से करते है न दीदी, और इस खेल की शुरुआत किश से hi तो होती hai.(Me दीदी का ये अलग रूप देख रहा था, वो अब शर्मा रही थी, में ने फिर से किश करना चालू कर दिया और साथ में उनके कूल्हों को मसलने लगा)

सरितादिदी : उम्म्म्म उम्मम्मम उम्मम्मम (जब सरिता का साँस लेने मुश्किल हो गया तो उसने अपना मुँह छुड़ाया और जोर जोर से सांसे लेने lagi)hhhhh hhhhhhhhh(Me उनके गले को चाटने लगा और उनके स्तन के ऊपर उनको किश करने लगा) शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्ह तुजे तो बहोत कुछ आता है शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.





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शिव : कुछ चीजे सीखी नहीं जाती, वो अपने आप hi आ जाती है didi.(Mene उन्हें पलट दिया और उनके स्तन पकड़ लिए, मेरा लुंड गांड की दरार में घुस चूका था, सच में दीदी के साथ मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था, वो इस लिए की में उनको सालो से जनता था और उनके साथ मुझे जरा भी हिचकिचाहट नहीं हो रही थी, में उनके स्तन को मसलने लगा)

सरितादिदी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरीई शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव आराम से शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : दीदी आपकी ये मस्त है.

सरितादिदी : हा पर धीरे भाई दुखता है शहहहहह.

शिव : ठीक है दीदी, (मेने एक हाथ निचे ले जा कर उनकी छूट को सहलाने लगा, उन नरम होठो का स्पर्श, मुझे रोमांचित कर रहा था, में उन्हें मसलते हुए ऊँगली दरार में फिरने लगा)

सरितादिदी : शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह तुजे तो बहोत कुछ आता है शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : क्यों आप को मज़ा नहीं आ रहा दीदी?

सरितादिदी : शहहह अह्ह्ह्ह मुजीई तो शहहह बहोत मज़ा आ रहा है शहहह आज तक ऐसा एहसास नहीं हुआ मुझे शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : (मेने एक ऊँगली अंदर दाल दी) अह्ह्ह डीडीईई, यहाँ तो कितना गरम है.





सरितादिदी : तूने hi आग लगायी है, शहहह अह्ह्ह्हह अब तुहि उसे ठंडा करना शहहहहह.

शिव : दीदी आप बोल रही थी न उसे प्यार करने के लिए.

सरितड्डी : तू करे ga(Mene है में गर्दन hilayi,Wo अपनी टंगे फैलाये दीवाल से सात गयी, में घुटनो के बल निचे बेथ गया, मेने छूट के होठो को फैलाया तो मुझे गुलाबी छेड़ नज़र आने लगा. वह से अजीब सी महक आ रही थी, मैंने अपने होठ लगाए और जैसे किश करने laga)Shhhhhhh हआ ऐसे hi अह्ह्ह अपनी जीभ निकल के उसे चाट Shiv(Me वैसे hi करने लगा, दीदी मचल रही थी, मुझे भी वो स्वाद अच्छा लग रहा था तो में छूट को फैलाकर अच्छे से चाटने laga)Ahhhhhh शीइइइइव बड़ा मज़ा आ रहा है, शहहहहह चाट ले मेरी छूट शहहहहह ahhhhh.(Me काफी देर तक छूट को चाट ता रहा)





सरिता दीदी: मेरा सर पकड़ कर ऊपर खींचकर अपने चेहरे के पास ले आयी, वो मेरी आँखों में अपनी अधखुली आँखों से देखते hue)Tu ..तू mujee....Chodna ...चाहता.. haina?(Kitni उत्तेजक बात कही थी unhone,Mene है में गर्दन hilayi)Aise नहीं बोल कर बता शिव, मुझे बोलकर बता की तू मेरे साथ क्या करना चाहता hai(Wo अपना चेहरा मेरे चेहरे से रगड़ रही thi,Mahol बहोत गरम हो चूका था)

शिव : है दीदी में आपको छोड़ना चाहता हु.

सरिता दीदी: ओह! Shiiiiiv,(Wo मेरे होठो पे टूट पड़ी और मेरे होठो को चूसने लगी, मुझे उन्होंने खड़ा किआ और लुंड को पकड़ लिया, मेरी छाती, मेरे पेट को चाट ते हुए वो मेरे लुंड तक पहुंच गयी, में उन्हें hi देख रहा था, मेरे सामने देख कर एक मुस्कराहट दे कर उन्होंने मेरे लुंड को अपने मुँह के अंदर ले लिया,





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मेरी आंखे बंद हो गयी, वो मेरे लुंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, गरम गरम मुँह से मुझे लुंड पर अजीब सी गुदगुदी हो रही थी, वो लुंड को चाट रही थी चुम रही थी. अपने हाथ से हिलाते हुए लुंड को अपने मुँह में ले रही थी. वो जितना मेरे लुंड से खेल रही थी उतना hi मुझे मज़ा आ रहा था. वो घुटनो के बल बेथ कर मेरे लुंड को चूस रही थी, में उन्हें देख रहा था कैसे वो मेरे लुंड को चूस रही थी. थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे देखा और निचे लेटने लगी, उन्होंने बहे फैला कर मुझे बुलाया तो में उनके ऊपर झुकते हुए उनके होठो को चूमने लगा, अपने दोनों हाथ उनके बगल में टिका दिए और उनके होठो को चूसने लगा. वो मेरे बालो को नोचते हुए मुझे बड़ी बेरहमी से चूस रही थी. उन्होंने चाट चाट कर मेरे होठ मेरा नक् और होठो के आस पास के सरे हिस्सों को भिगो दिया. मेरा लुंड उनकी छूट पे रगड़ खाने लगा था. उन्होंने मेरे होठ छोड़े) ओह शिव, इतना मज़ा आता है ये मेने कभी सोचा नहीं tha(Wo मेरे पुरे चेहरे के चूमने लगी , मेरा लुंड छूट के छेद पे लग गया था जिसका एहसास होते hi वो और जल्दी जल्दी मुझे चूमने लगी और अपने ऊपर खींचने लगी.





सरितादिदी : शहहह अह्ह्ह अब मुझसे रहा नहीं जा रहा शिव, शठ अब छोड़ ले मुझे.( में झटका गया उनके ऊपर और मेरी कमर ने एक धक्का दिया तो मेरा लुंड छूट को फैलते हुए थोड़ा घुस गया, छूट पूरी तरह से चिकनी थी और रगड़ने की वजह से मेरे लुंड का टोपा भी भीगा हुआ था तो टोपा छूट को फैलता हुआ अंदर घुस गया.)( सरिता को अचानक से हल्का दर्द हुआ और वो “उउइइइइ मायआ” करती हुई शिव के गले से जोरो से लिपट गयी). (में रुक गया. हम दोनों बिना हिले डुले एक दूसरे से चिपके रहे.





सरिता दीदी : ओह शिव बहोत बड़ा है तेरा.

शिव : (घबराते hue)Nikal लू kya,didi?

सरिता दीदी: पागल है क्या, (अपने होठ भीचते हुए) अभी ऐसे hi रुको. मुझे विस्वास नहीं हो रहा मुझे दर्द हो रहा है.

शिव : वो क्यों दीदी?

सरिता दीदी : (वो निचे अपना शिर टिकड़ेटी है और लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए शिव की और देखते हुए मुस्कुराती hai)Jab पहलीबार कोई लड़का लड़की के साथ ऐसा करता है तभी दर्द होता है बाद में नहीं.

शिव : है तो आप पहलीबार तो मेरे साथ कर रही हो तो दर्द हुआ.

सरिता दीदी: (शिव की ऐसी भोली बात सुन कर वो मुस्कुराते हुए उसके गाल को सहलाती hai)Aise नहीं पगले जब लड़की जिंदगी में पहलीबार किसी लड़के के साथ करती है तब दर्द होता है.

शिव : तो आप पहलीबार नहीं कर रही क्या?

सरिता दीदी: (मायूस होते हुए अपनी नज़ारे फेर लेती hai)Nahi शिव.

शिव : तो आप ने पहले किसके साथ किआ है?

सरिता दीदी : (मेरे होठो को चुम kar)Sab बताउंगी तुजे, पर अभी नहीं, बाद में, में इस सुहाने पल में वो बाटे याद नहीं करना चाहती. अभी तो जो मुसीबत मेने मोल ली है उसीका आनंद लेना चाहती हु. (फिर शिव को समजनेवाले लहजे me)Dekh शिव थोड़ा आगे पीछे करना और फिर जोर से धक्का लगा देना, फिर थोड़ा आगे पीछे करना और फिर जोर से धक्का लगाना जब तक तुम्हारा पूरा अंदर न चला जाये और जब अंदर चलजाये तो रुकजाने.

शिव : पर दीदी आपको दर्द होगा.

सरिता दीदी: (मुस्कुराते hue)Hone दे, जितना दर्द होता है होने de(Aur अचानक उनकी आँखों से आंसू गिरने लगते है) शिव, में बता नहीं शक्ति की में कितनी खुस हु, आज में अपनी मर्जी से अपने पसंद के लड़के के साथ ये सब कर रही हु और मेरा दर्द ये प्रमाण है की मेरी नन्ही पारी तुम्हे मज़ा देगी. क्यों की लड़को को लड़की की कासी हुई छूट खोलने में मज़ा आता है.

शिव : (उनके सर पे हाथ फिरते hue)Nahi दीदी मुझे ऐसा कोई मज़ा नहीं चाहिए जिसमे आपको दर्द हो.

सरिता दीदी: ये दर्द तो हर उस लड़की को सहना होगा जो तुजसे प्यार करना चाहती है. में तो खुस हु पागल के मुझे, तुजसे दर्द मिलरहा है. और तू चिंता मत कर दर्द थोड़ी देर hi होगा बाद में मुझे भी मज़ा hi आएगा. वो टॉवल दे muje.(Mene उन्हें टॉवल दिया) तू जरा भी घबराना मत, में ये इस लिए कर रही हु ताकि बहार किसी को पता न चले, मुझे अच्छा hi लगेगा, तू बस वो करना जो मेने तुजे कहा है, ठीक hai(Mene है में शिर हिलाया तो उन्होंने टॉवल अपने मुँह में थुश लिया और मेरी और गर्दन है में हिला कर इसरा दिया, जैसा दीदी ने संजय था मेने लुंड को थोड़ा आगे पीछे किआ और धक्का लगा दिया, छूट अंदर से ज्यादा संकरी thi,didi की आंख से आंसू निकल आये थे फिर भी वो अपना शिर हिलाये मुझे करने को बोल रही थी, दो बार में मैंने अपना पूरा लुंड उनकी संकरी छूट में उतरदिया, और में रुक गया, उन्होंने अपनी आंखे बंद कर ली, उनके चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था)





शिव : (मेरा पूरा लुंड अंदर चला गया था, पर दीदी की हालत देख कर मुझे उनपर दया आ रही थी. उनके सर पर हाथ फेरते hue)Aap ठीक तो हो न दीदी.

सरितादिदी: (उन्होंने आंखे खोली जो पूरी पानी से भरी हुई थी, मेरे चेहरे पर चिंता देख कर उन्होंने अपने मुँह से टॉवल nikala)Muje कुछ नहीं हुआ Shiv,(Halaki उनके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था फिर भी मुस्कान के sath)Me पहले कर चुकी हु फिर भी मेरा ये हल है तो जो तेरे साथ पहलीबार करेगी उसकी तो पता नहीं क्या हालत होगी उसकी. अगर किसी लड़की के साथ पहलीबार कर रहा हो तो उसका ख्याल रखना.

शिव : मुझे तो लगता है मुझे किसी के साथ करना hi नहीं चाहिए.

सरिता दीदी : तू चाहे जितना भी मन कर ले पर तेरी चाहने वाली तुजे अपने ऊपर चढ़कर hi मानेगी. तू उसमे कुछ नहीं कर सकता. और ये दर्द पहले पहले hi होता है बादमे नहीं. मेरी चिंता में अब तेरा थोड़ा ढीला पड़ने लगा है, मेरी चूचिया तुजे अच्छी लगती है न, इससे दबा और chus.(Me दीदी के हलके नरम चुचो को और नरम करने लगा, में उनके निप्पल को मुँह में ले कर चूसने लगा, दीदी की सिसकारियां सुन मेरा लुंड कड़क होने लगा. दीदी अपनी कमर हिलने लगी जिस से मेरा लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगा.

मुझे दीदी पर बड़ा प्यार आ रहा था तो मेने उनके होठो को चूसने लगा और अपने लुंड को आगे पीछे करने लगा. दीदी भी मेरे होठो को चूसते हुए अपना प्यार दर्शा रही थी. थोड़ी देर बाद उनकी किसिंग तीव्र होने लगी, मेने उनके स्तन को पकड़ा और उसे सहलाने और मसलने लगा. दीदी मुझे अपने ऊपर खींचने लगी. मेरा भी लुंड अब पूरी तरह कड़क हो चूका था और अच्छी अंदर बहार हो रहा था तो मेने धक्के लगाने सुरु कर दिए.

सरिता दीदी: (मेरे कण को चाट ते hue)Muje छोड़ना अच्छा लग रहा है शिव?

शिव : है दीदी, बहोत अच्छा लग रहा है.

सरिता दीदी : मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा हे शिव, अपने बड़े लुंड से मेरी छोटी छूट को छोड़ ले, ये तेरे प्यार के लिए तरस रही है. (मेने उनके होठो को चूमा, फिर उनके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा. वो मेरे बालो को सेहला रही थी और एक हाथ से मेरी कमर को खींच रही थी. उन्होंने अपनी टंगे पूरी फैलाराखि थी. मेरे धक्के लगातार चल रहे थे.

सरिता दीदी : ोोू maaaa....Shiv मुझे बहोत मज़ा आ रहा है, ऐसे hi करो, छोड़ो मुझे (मेरी आँखों में देहते hue)Tumhe मेरी छूट मज़ा दे रही है न?,

में : है दीदी आपकी छूट बहोत टाइट है, मेरे लुंड को पकड़ रही hai.(Pata नहीं पर ऐसी बातो से मेरा जोश और बढ़ रहा था, मुझे ऐसे शब्द और उत्तेजित कर रहे थे)

सरिता दीदी : मेरी छूट को तेरा लुंड बहोत पसंद आ गया है शिव , शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह ैई ैई ैई शिव तेरा अह्ह्ह अह्ह्ह बहोत बड़ा है और बहोत मस्त है शिव शहहह अहह अहह अहह अहह शठ पर मज़ा भी बहोत दे रहा है आई शठ शठ मममम मममम .





शिव : आप को वो अच्छा लगा didi.(Me उनके दोनों बूब्स को मसलते हुए धक्के लगा रहा था)

सरिता दीदी : (अपनी आंखे बंद करते hue)Ha शिव बहोत मज़ा आ रहा है, करता रह aahhh(Wo अपने दोनों हाथ मेरे कूल्हे पर रखकर खींच रही थी और अपनी छूट लुंड पर मर रही thi)Itna मज़ा तो मेरी जिंदगी में कभी नहीं मिला, मुझे छोड़ो शिव, अच्छी छोड़ो, ahhhh,....ha..haa....hummm.. (वो जोरसे मुझे खींच रही थी, उनकी आंखे बंद थी, मेने दोनों हाथ जमीं पर टिका दिए थे और उन्हें छोड़ रहा था, छूट की मांसपेशिया मेरे लुंड को जोरो से पकड़ रही थी, मेरे सुपडे पर उनकी छूट की गोलाई मुझे साफ महसूस हो रही थी ) (सरिता अपने अंदर घुसे उस कड़क लुंड को महसूस कर के बावली हो रही थी, अपने ऊपर चढ़े इस सख्त शरीर को महसूस कर के वो और उत्तेजित हो रही थी, छूट से निकल रहे पानी का तो कोई हिसाब hi नहीं था, शिव के धक्को से हिलते हुए वो उसे खींच रही थी, उसकी छूट पूरी भर चुकी थी, लुंड की ठोकर उसकी छूट के आखरी छोर पर पड़ती तो वो मदहोश हो रही थी, ये संसर्ग उसके अनुमान से कही ज्यादा सुखदायक था, आज उसे शिव से छोड़ने में इतना मज़ा आ रहा था की वो पागल हुए जा रही थी, आज पहलीबार उसे लग रहा था की उसका पूरा होनेवाला है, मैनेजर के साथ उसे थोड़ा थोड़ा मज़ा तो आता था पर कभी उसे ऐसा नहीं लगा था की बस अब में गयी, आज शिव के बड़े लुंड से छोड़ने पर उसे महसूस हो रहा था की उसके अंदर से कुछ निकलने वाला hai)Shiv मुझे कुछ हो रहा है, मेरे अंदर से कुछ निकलने वाला hai...aahhhhh, शिव मुझे पकड़ो, शिव मुझे जोर जोर से छोड़ो, तुम्हारा लुंड मुझे अंदर तक महसूस हो रहा है शिव, मुझे छोड़ो शिव, जोर जोर से छोड़ो, अह्ह्ह्हह माआ मेरा निकलने वाला है शिव, ये क्या हो रहा है मुझे, aaiiiiiiiiiiiiiiii.(Wo झटके कहते हुए झड़ने लगी, वो पूरी ढीली पद गयी और आंखे बंद किये जोर जोर से सांसे ले रही थी, में रुक गया तू उनकी चूचियों से खेलने. (सरिता लगभग बेहोश hi हो गयी थी, उसे पता hi नहीं चल रहा था की वो कहा है, वो सिथिल हो कर नीचे लेती हुई थी, थोड़ी देर बाद अपनी चुकी की चुसाई से उसे होश आने लगा, जब उसे ज्ञात हुआ की वो अभी बाथरूम में है और शिव से चुद रही है, लुंड अभी भी उसकी छूट में पूरा घुसा हुआ था, शिव उसकी चुचिओ से खेल रहा था. उसने शिव के बालो में हाथ डाला और उसे सहलाने लगी.)

शिव : आप ठीक हो दीदी.

सरितादिदी :मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होठो को चुम कर, है शिव, ये कैसा अनुभव था.

शिव : आप का स्खलन हुआ था didi.(Didi की हालत देख मुझे लगा किआ बस अब यही रोक देना चाहिए तो में अपना लुंड निकलने लगा)

सरिता दीदी :(उसे लगा की शिव लुंड निकल रहा है तो, फ़ौरन उसकी कमर पकड़ li)Kya कर रहे हो?

शिव : आप घूम जाइये दीदी.

सरितादिदी : (वो जानती थी शिव क्या चाहता है, वो समाज रही थी की शिव उतना भोला नहीं जितना दीखता है, पर वो अभी उस बात को कर के मूड को ख़राब नहीं करना चाहती थी तो वो घूम गयी, शिव ने पीछे से छूट में लुंड दाल diya)ahhhhhh शह्ह्ह्हह्ह. मम्मी शह्ह्ह्हह्ह





शिव : दीदी आप अभी ठीक है न.

सरितादिदी : है शिव में ठीक हु, तू kar.(Fir शिव मुझे पकड़ कर, मुझे छोड़ने लगा, सच में आज पहली बार पता चल रहा था की चुदाई क्या होती है, आज तक कभी इतनी देर तक वो नहीं चूड़ी थी, उसे पता hi नहीं था की कितना टाइम हो गया है. वो पूरी दुनिया भुलाये बैठी थी, उसे सिर्फ अपनी छूट में अंदर बहार हो रहा लुंड hi महसूस हो रहा था. शिव उसके कूल्हों को मसलते हुए तेज तेज धक्के लगा रहा था, लुंड, छूट की आखरी दीवाल से टकरा रहा था. ऐसा अनुभव आज पहलीबार हो रहा था. उसे पता चल रहा था की अंदर भी छूट की दीवाल है. वो खुद अपनी गांड पीछे धकेल रही थी. शिव ने उसकी पतली से कमर पकड़ ली थी और उसे धक्के लगा रहा था, वो पूरी हिल रही थी, वो जोर जोर से चीखना चाहती थी, उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो चिल्ला कर सब को सुनना चाहती थी. वो बड़ी मुश्किल से अपना मुँह दबाये आवाज को रोकने का प्रयास कर रही थी. शिव ने अपने हाथ बढाकर मेरी चुचिअ पकड़ ली थी और धक्के तो उसके लगातार चल रहे the.)Shhhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह में फिर झाड़नेवाली हु शिव शहहह अह्ह्ह्ह शिईयिव अह्ह्ह्हह. ऐसे hi शहहह अह्ह्ह जोर से शिव अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह जोर से भाई शहहहहह अह्ह्ह्हह. में गईइइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह ऊऊऊ मायआ shhhhh.(Wo रुक गया था, में अपनी खुमारी में झाड़ रही थी. जैसे hi शिव ने लुंड निकला में धड़ाम से फर्श पर लेट गयी, मेने बड़ी मुश्किल से आंख खोल कर शिव को dekha,wo बैठा मुझे देख रहा था, में सीधी लेट गयी और अपनी टंगे फैला दी)

शिव : रहने दो दीदी, आप थक गयी हो.

सरिता दीदी : पर अभी तेरा हुआ नहीं है.

शिव : कोई बात नहीं, फिर कभी.

सरिता दीदी :(मेने उसे खींच कर उसके होठो को चूमते hue)Me ठीक हु, तुजे मेरी कसम जो बिना अपना पानी निकले खड़ा हुआ तो. पागल में पूरी तरह ठीक हु, सच कहु तो इतनी ठीक कभी नहीं थी, (मेने उसका लुंड पकड़ कर अपनी छूट के छेड़ पर लगा दिया, अपनी कमर हिला कर लुंड को अंदर दाखिल करवा दिया, में अपनी कमर आगे पीछे करने lagi)Muje बहोत मज़ा आ रहा है शिव, तू कर, छोड़ मुझे. शिव : (में फिर से दीदी को छोड़ने लगा, उनके पेअर अपने कंधे पर ले लिए जिस से उनकी गांड ऊपर उठ गयी, मेरा लुंड छूट को पूरी तरह फैलाये हुए अंदर बहार हो रहा था , सच में दीदी की छूट छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा था और दीदी मेरी अपनी थी तो और ज्यादा मज़ा आ रहा था, आखिर कर मेरा भी होनेवाला था)

शिव : दीदी मेरा होनेवाला है.

सरिता दीदी : अंदर hi निकल न मेरे भाई, में उसे महसूस करना चाहती हु, पर अभी थोड़ी देर और करो शिव मेरा भी होनेवाला hai,(Mere धक्के तेज होगये थे थे, और वो भी सामने से जोर जोर से अपनी छूट को लुंड पर मर रही thi)Oh shiv...ahhh shiv.Dekh लता तेरा भाई कितना अच्छा छोड़ता hai(Latadidi का नाम सुनते hi में चौंक गया और साथ में मुझे कुछ होने भी लगा, मेरे सामने लतादिदी का चेहरा आगया, जैसे दीदी कह रही थी, हां भाई छोड़ मुझे, और छोड़ भाई, छोड़ अपनी दीदी को, मेरी आंखे बंद हो गयी और मेरे धक्के और ज्यादा तेज लगने लगे, (सरिता ने शिव के सामने देखा तो उसकी आंखे बंद thi)Aur जोर से मेरे भाई, अह्ह्ह शहहह, (उसको समाज आ गया माज़रा) है शिव और जोर से छोड़ मुझे, छोड़ अपनी लतादिदी ko,(Mere कानो में ये शब्द गूंजने लगे और मेरे कमर जोर जोर से धक्के लगाने लगी, सरिता दीद अपने चरम पर पहुंच गयी और मेरे कूल्हों में अपने नाख़ून घडते हुए झड़ने लगी. उनकी छूट मेरे लुंड को और ज्यादा जकड रही थी. मेरा भी अब होने वाला था तो मेरे धक्के और तेज होने lage),Shiv भर दे मेरी chut(Mere कानो में ये शब्द पड़े और मेने अपनी आंखे खोली, मेने है में गर्दन हिलायी, मेने उनके पैरो को मोड़ कर उनकी छाती से चिपका दिए लुंड आगे किसी दिवार से टकरा रहा था, अपनी बच्चेदानी पर पड़ते प्रहार को सरिता सेह नहीं पायी )

शिव : दीदी मेरा छूटने वाला हीी..

सरिता दीदी : (उन्होंने है में गर्दन हिलायी) शिव, और जोर से करो, हां ऐसे hi छोड़ो मुझे, आह Shiv,aaj पता चला चुदाई क्या होती है, शिव छोड़ो मेरी छूट को ahhhh....hummmhummmm(Ghhappp गहहैपपप की आवाज आ रही थी मेरा छूटने वाला tha)Me फिर गयी shiv(me भी अपने लुंड से पिचकारियां छोड़ने लगा.)





सरिता अपनी छूट में हो रही गर्म बरसात से पूरी तरह तृप्त हो गयी. वो अपनी आंखे बंद किये हुए लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. में भी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. हमारी जानकारी के बहार लतादिदी बहार से सब सुन रही थी. (लता भी अपना पानी बहा चुकी थी, वो बिना आवाज किये वह से रूम में लौट गई)
 
अपडेट 27

(भर कड़ी लता अपने कण लगाए बड़े ध्यान से कब से सब सुन रही थी. उनकी छूट ने भी अपना पानी बहा दिया था. वो बिना आवाज किये वह से रूम में चली गयी). जब हम शांत हुए तो सरिता दीदी ने मेरे गले में अपनी बहे डाली और बड़े प्यार से पूछने लगी

सरिता दीदी : मज़ा आया शिव,

शिव : (मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन hilatehue)Ha दीदी भोत मज़ा आया.

सरिता दीदी : (कड़ी होते hue)Ahhh मा.

शिव : क्या हुआ दीदी दर्द हो रहा है?

सरिता दीदी : कुछ नहीं हुआ शिव, चल जल्दी नाहा लेते है बहोत टाइम हो गया, मुझे नहीं पता था की तू इतना टाइम lagayega.(Hum नहाने lage)Ek बात बता, लता का नाम सुन के क्या हो गया था?

शिव : (हड़बड़ाते hue)Kya हो गया था? और आपने क्यों उनके बारे में ऐसा बोलै?

सरितादिदी : क्यों तुजे बुरा लगा?

शिव : आप जानती है, वो मेरी दीदी है.

सरितादिदी : और में?

शिव : आप भी मेरी दीदी hi हो, पर दीदी, लतादिदी से मेरा रिस्ता अलग है.

सरितादिदी : ऐसा क्या अलग रिस्ता है तेरा, वो भी यही अनाथालय में पाली बड़ी और में भी, बचपन से hi में भी तेरे साथ हु और वो भी तो फिर क्या अलग है?

शिव : आप जानती है, फिर भी ऐसा कह रही है. उन्होंने बचपन से मेरा ख्याल रक्खा है, अगर वो न होती तो पता नहीं मेरा क्या हुआ होता, जब से मेने होश संभाला है मुझे और कुछ याद नहीं, बस यही याद है की उन्होंने मेरी देखभाल की, मुझे पढ़ाया लिखाया और आज इस काबिल बनाया. में उनके बारे में ऐसा नहीं सोच सकता.

सरितादिदी : और अगर वो चाहे तो? अगर वो तेरे साथ ऐसा रिस्ता बनाना चाहे to?(Me हैरानी से उन्हें देखने laga)Dekh शिव, हम सब अनाथ है, हमारे जीवन में खुशिया बड़ी मुश्किल से आती है. में ये नहीं कहती की तू उसके साथ भी ऐसा कर पर अगर लता कुछ ऐसा कहे या करे तो तू बुरा मत मन न.

शिव : पर दीदी आप जानती हो, उनसे मेरा रिस्ता अलग है. वो मुझे ऐसा वाला प्यार नहीं करती.

सरितादिदी : और अगर करे to?....kya तुजे बुरा lagega(Me सोचमे डूबा उन्हें देख रहा था) उसे भी प्यार की जरुरत है शिव. क्या तू अपनी दीदी को ख़ुशी नहीं देना चाहता.

शिव : पर दीदी वो मुझसे वैसवाला प्यार नहीं करती, आप समाज क्यों नहीं रही है.

सरितादिदी : अगर करेगी तो तू उनसे ैसवाला प्यार करेगा?

शिव : (मुझे समाज नहीं आ रहा था की में क्या जवाब du)Pata नहीं दीदी. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा.

सरितादिदी : कोई बात नहीं, तू अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत दे, पर अगर कभी भविस्य में ऐसा कुछ हो, अगर वो भी तुम से ऐसे प्यार की आशा रक्खे तो तू इंकार मत करना, उसे भी अपना प्यार देना, ठीक है.

शिव : (में और क्या kehta)Ji दीदी.

फिर हमने नहाया और में अपने कमरेमे आने से पहले सरिता दीदी को उनके कमरे में छोड़ आया क्यों की उन्हें चलने में तकलिग हो रही थी. जब में कमरेमे आया तो दीदी सोई हुई thi(Halaki वो जग रही थी). मद्धम रौशनी में में उनको देखने लगा. वो कितनी प्यारी थी. में उनकी बगल में अंडरवियर में hi लेट गया. थोड़ी देर करवट लिए हुए में उनको देख रहा था, वो सीधी लेती हुई थी तो उनके उभर ऊपर निचे हो रहे थे. मेरा स्नहेमदं और सरिता दीदी के साथ ऐसा जिस्मानी सम्बंद हो चूका था, तो मेरी नजर स्वाभाविक तौर पर लड़कीओ के खास अंग पर चली hi जाती थी. रोज दीदी को बाहोंमे लेके सोने की आदत सी हो गयी थी पर में उनको जगाना नहीं चाहता था तो ऐसे hi लेता रहा. में अपने और सरितादिदी और स्नेहमड़ाम के सम्बन्धो के बारे में सोच रहा था. में लड़कीओ के जिस्म के साथ का सम्बन्ध मुझे अच्छा भी लग रहा था. इस खेल में सच में कितना मज़ा आता था. में अपने विचारो में छत तो टेक हुए लेता रहा पर नींद नहीं आ रही थी. काफी देर लेते रहने के बावजूद मुझे नींद न आयी, मेरे दिल को चैन नहीं आया तो आहिस्ता से में लतादिदी के शिर को ऊपर कर के उनके निचे अपनी बाह घुसा दी. उन्होंने भी करवट लेते हुए अपनी तंग मेरे ऊपर चढ़दी और एक हाथ भी मेरे ऊपर करते हुए मेरी छाती से चिपक गयी. मेने उनके चेहरे को देखा तो उनके चेहरे पर शुकुन दिख रहा था. मुझे पता था की वो नींद में है तो मेने उनके होठो को हलके से चूमा फिर अपनी आंखे बंद कर के सोने लगा. (थोड़ी देर बाद लता ने थोड़ी सी आंख खोल कर शिव को देखा तो उसकी आंखे बंद थी. उसके चेहरे पर स्माइल फ़ैल गयी और उसने और कास के शिव को पकड़लिअ और सोने लगी.)

(यहाँ शिव के कमरे में subah)Subah जब में उठा तो लतादिदी दूसरी तरफ मुँह किये हुए मेरी छाती से अपनी पीठ को चिपकाये सोई हुई थी और मेरा हाथ उनके एक स्तन को दबोचे हुए था और मेरा लुंड उनके कूल्हों के बिच धसा हुआ था. पता नहीं पर मुझे ये बहोत अच्छा लग रहा था तो में 5 मिनट ऐसे hi लेता रहा. फिर मुझे जाना था तो में आहिस्ता से उठा और बाथरूम की और निकल गया. चारो और सन्नाटा पसरा हुआ था. जब में बाथरूम के पास पंहुचा तो मुझे आहत से पता चला की कोई बाथरूम में है फिर अंदर से शह्ह्ह्हह्ह की आवाज aayi(Mutne की सिटी). थोड़ी देर बाद अंदर से विणा निकली. मुझे देख कर एक बार तो वो थोड़ी हड़बड़ाई पर फिर संभल कर मुझे स्माइल दी.

शिव : गुड मॉर्निंग.

विणा : गुड ...गुड मॉर्निंग शिव.

शिव : क्या हुआ इतना घबरा क्यों रही हो?

विणा : Nahi..nahi तो में कहा घबरा रही हु?.

शिव : आज जल्दी उठ गयी.

विणा : है वो पेशाब लगी थी तो...

एक दम उसे होस आया की वो क्या बोल गयी तो वो शर्मा गयी और वह से मुस्कुराते हुए मुज से नज़ारे चुराते हुए भाग गयी. मुझे भी हसी आ गयी और में उसे जाते हुए देख कर मुस्कुराने लगा. थोड़ी दूर जा कर उसने पीछे मुड़कर देखा, जब हमारी नज़ारे मिली तो वो फिर से शर्मा गयी और अपने कमरे में घुस गयी. में मुस्कुराते हुए बाथरूम में घुस गया और तैयार हो कर जूही मैडम के घर पहुंच गया. आज भी वो भीगी हुई hi दरवाजा खोल रही थी. मुझे समाज नहीं आ रहा था की रोज ऐसा क्यों होता है. क्या मुझे थोड़ा लेट आना चाहिए. हम दोनों ने एक दूसरे को गुडमॉर्निंग विश किआ और वो मुझे अंदर बुला कर वापस मुद गयी. में उन्हें जाता हुआ देख रहा था. उनकी मसल झांघो से टपकता पानी और उनके थिरकते नितम्ब बहोत hi आकर्षक लग रहे थे. में मंत्रमुग्ध ऐसे hi खड़ा रहा. उन्होंने पीछे मुद कर देखा तो मुझे घूरते पाया तो वो मुस्कुरा कर बोली

जूही मैडम : ऐसे क्यों खड़े हो, बेथ जाओ.

शिव : (हड़बड़ाते hue)Ha..haaa..Me बेथ hi रहा था.

फिर हमने दूध पिया और दोपहर के प्रोग्राम का थोड़ा डिसकसे करते हुए गयम पहुंच गए. पवनसीर आये हुए थे वो थोड़ी देर बैठे फिर वो निकल गए. मेने भी अच्छी कसरत की और घर वापस आ गया. में गेट के अंदर जा hi रहा था तभी मैनेजर भी बहार से आ रहा था. मुझे देखते hi,

मैनेजर : कहा से आ रहा है?

शिव : जी, नौकरी के लिए गयम गया था.

मैनेजर : जब check-up के लिए डॉक्टर आये थे तो आया क्यों नहीं.

शिव : मुझे पता नहीं था की डॉक्टर आये हुए है, उस दिन काम की वजह से में लेट आया था.

मैनेजर : अब कमाने लग गया है तो कब तक यहाँ अनाथालय पे बोझ बना रहे गए. अब अपना इंतजाम खुद कर le.(Waise भी शिव, उसके आंख में खटक रहा था, शिव की वजह से वो लता पे हाथ नहीं दाल पाया था, ऐसा नहीं था की वो शिव से डरता था पर जब देखो तब लता, शिव के साथ hi चिपकी रहती होती थी और उसके साथ hi सोती थी तो कभी ऐसा मौका hi नहीं मिला. पर अब उसे पता था की कुछ न कुछ करना hi पड़ेगा, अभी फ़िलहाल के लिए तो लता पे कोई खतरा नहीं पर जल्द hi लता को भेजना पड़ेगा, और हो शक्ति है की लता मर भी जाये, तो उस से पहले वो लता को छोड़ कर उसकी सील तोड़ना चाहता था. उसके लिए शिव को रस्ते से हटाना जरुरी था)

शिव : जी में अभी इतना नहीं कमा रहा, ये तो बस पढ़ाई के लिए थोड़े एक्स्ट्रा पैसे चाहिए होते है इस लिए में काम कर रहा हु. (पता नहीं ये इतनी आराम से क्यों बात कर रहा है, वर्ण हमेशा ये मुज पर चिल्ला hi रहा होता है, दोनों अंदर तक पहुंच गए थे)

मैनेजर : देख, हमारा काम होता है छोटे बच्चो को पलना, जब तक की वो अपने पैरो पर खड़े न हो जाये, जब वो अपनी जिम्मेदारी उठाने लायक हो जाते है तब उन्हें यहाँ से जाना होता है. ये तो में लता की वजह से तुजे यहाँ रहें दे रहा हु. तो जितना जल्दी हो शेक अपना इंतजाम कही और कर ले. समजा. जा सरिता को भेज.

में क्या कहता, पर मुझे लगने लगा था की अब मुझे जल्द hi यहाँ से निकलना होगा. पता नहीं में क्या करूँगा, कैसे करूँगा. में इन्ही विचारो में लता दीदी और सरिता दीदी काम कर रही थी वह पहुंच गया.

शिव : सरितादिदी, वो मैनेजर आप को बुला रहा है.

सरिता दीदी : क्या वो, आ गया. तुजे क्या हुआ, तेरा चेहरा क्यों उतरा हुआ है.

शिव : कुछ नहीं दीदी, बस ऐसे hi. (शिव का चेहरा देख लता को भी चिंता होने लगी)

सरितादिदी : क्या हुआ शिव, बता मुझे.

शिव : वो मैनेजर कह रहा था की अब में बड़ा हो गया हु तो मुझे अपना इंतजाम खुद करलेना चाहिए और यहाँ से चले जाना चाहिए.

सरितादिदी : वो साला होता कोण है, भले hi वो हमें डरता रहता है पर हमारे बिना उसका कुछ काम होनेवाला नहीं है. तू क्यों चिंता करता है, हम है न.

शिव : वो आप लोगो को नहीं मुझे जाने के लिए कहता है.

सरितादिदी : तू पागल है, अगर वो तुजे यहाँ से जाने के लिए कहेगा तो क्या लता यहाँ रुकनेवाली है, क्यों Lata?(Lata दीदी ने न में शिर हिलाया) और में भी नहीं रुकनेवाली, हम देख लेंगे अपना. पर वो कुछ नहीं कर पायेगा. वो ऐसे hi तुजे डरा रहा है. ये सब छोड़, और तू अपनी पढ़ाई पे ध्यान दे. कोई तुजे यहाँ से नहीं निकल शक्ति. जा, नाहा ले और तैयार हो जा.

सरिता वह से मैनेजर के कमरे में गयी. वैसे तो उसे मैनेजर से दर लगता था पर अब उसमे भी हिम्मत आने लगी थी. वो मैनेजर के कमरे में गयी तब वो कुर्शी पर बैठा हुआ था.

सरिता : आप ने बुलाया मुझे.

मैनेजर : है ऋ मेरी रंडी, तेरे बगैर मेरा काम चलता है.

सरिता : देखि ये ऐसे मुझे मात बुलाइये, और आज मेरी तबियत ख़राब है.

मनगर : (उसकी तबियत ख़राब है उसके बारे में सुन कर उसे एक आईडिया आया) अरे क्या हुआ तुजे, देखा मेने इसी लिए सब का चेकउप करवाया था. उस चेक उप में ये पता चला की वो गुड्डू है न उसके अंदर कुछ प्रॉब्लम है, तो उसके लिए डॉक्टर ने दवाई भेजी है.

सरिता : पर वो तो बिलकुल ठीक है. खेलता कूदता भी है.

मैनेजर : वो बहार से ऐसा दीखता है पर अंदर से बहोत प्रॉब्लम है. में उसके लिए दवाई भी लाया हु. (उसने दवाई निकल कर टेबल पर रक्खी) ले ये दवाई उसे दिन में तीन बार खिला देना. और अपना भी ध्यान रक्खा कर. जा आराम कर.

सरिता को भी मैनेजर के ऐसे बर्ताव से आश्चर्य हुआ. वो ठरकी कमीना कभी भी ऐसे पेश नहीं आता था. उसने दवाई ली और बहार चली गयी.

मैनेजर : (मान me)Ye दवाई खाये गए तो उसकी तबियत बिगड़ेगी, और फिर उसे में वह पंहुचा दूंगा जहा से वो कभी वापस नहीं आएगा.

स्कूल में रेसस्स में रंजन और विणा बाथरूम हो कर आ रही थी, उनके स्कूल में एक लड़कीओ की टोली थी जो हमेशा मस्ती करती रहती थी. बड़े बाप की लड़कीअ थी, पढ़ने लिखने में कोई इंट्रेस्ट नहीं, सिर्फ मस्ती करने के लिए hi स्कूल आती थी. इस टोली की लीडर थी कीर्ति. रंजन और विणा को देख कर

कीर्ति : ो फर्तीचर, यहाँ aa.(Ranjan और विणा उसे देखने lagi)Ha तुजे hi कह रही हु, यहाँ aa.(Ranjan और विणा उसके पास चली गयी) ले ये पैसे, वह जा कर चिप्स के पैकेट ले आ.

रंजन : में क्यों लौ, जा तुजे लेने है तो खुद जा.

कीर्ति : ो फर्तीचर, साली, मुज से जबान लड़ती है. जितना बोलै है उतना कर.

विणा : क्यों इनसे उलझ रही है, चल न ले आते है.

कीर्ति : ये कबूतरी समझदार लगती है, जा ले आ.

रंजन : (विणा, रंजन को चिप्स लेने खिंच कर ले गयी) क्या जरुरत थी तुजे.

विणा : क्यों बिना बात के जगदा करना. शिव ने क्या बोलै था, हमे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना है, उनलोगो को कोई फर्क पड़नेवाला नहीं, पर इस जगदे से नुकसान हमारा होगा, जगदा बढ़ेगा हुए नुकसान हमारा होगा. उनके पीछे उनके घरवाले है, हमारे पीछे कोण है. अगर स्कूल से हमे निकल दिया तो हमारा क्या होगा. हमे ऐसी छोटी छोटी बातो पे ध्यान नहीं देना चाहिए.

जब में स्नेहा मैडम के घर के लिए घर से निकला तो थोड़ी दुरी पर hi वो कार लिए कड़ी दिखी. में उनके पास पहुंच गया.

शिव : गुड मॉर्निंग स्नेहा मैडम. में आप के यहाँ hi आ रहा था.

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Good मॉर्निंग, मुझे पता है, इसीलिए तो में तुम्हे लेने आ गयी. आओ betho.(Pata नहीं इस लड़के ने क्या जादू कर दिया है सुबह से चैन hi नहीं था. उसको अनाथालय से मेरे घर आने में आधा घंटा वास्ते हो जाता इसीलिए में सामने से लेने भी चली आयी थी.)

में दरवाजा खोलकर गाड़ी में बेथ गया. गाड़ी इतर की खुसबू से महक रही थी जो मैडम ने लगाया हुआ था. वो बड़ी मोहक मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी. सच कहु तो मुझे शर्म आ रही थी. उनके साथ जिस्मानी सम्बन्ध के बावजूद अभी तक में इतना खुल नहीं पाया था.

जैसे hi शिव बैठा मेने गाड़ी चला दी. में बार बार उसे hi देख रही थी. में अपने आप को रोकने का प्रयास कर रही थी पर मेरी नजर वही काली जा रही थी. वो भी मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था, उसकी मुस्कराहट में एक शर्म थी. सच में हम दोनों के बिच जो सम्बन्ध स्थापित हो चूका था वो न मेरे लिए आसान था और न शायद उसके लिए. उसका भोला और माशूम चेहरा इतना आकर्षक है की में उसे देखे बिना रह hi नहीं प् रही हु. में पहले तो कभी ऐसी न थी, मेने सीधे hi शादी की थी, न कभी किसी से प्यार का चक्कर हुआ न और कुछ. में खुस भी थी अपने पति से, बस एक कमी के चलते मेरे और शिव के बिच ये सम्बन्ध बन गए. उस से मिलने के लिए दिल भी कितना तड़प रहा था, ऐसा लग रहा था की उड़कर पहोच जाऊ उसके पास. हद तो तब हो गयी जब आने से पहले तैयार होने में कितनी बार कपडे बदले थे मेने. ऐसे तैयार हो रही थी जैसे डेट के लिए तैयार हो रही हु. आखिर कर एक घुटने से थोड़ा निचे तक का वाइट स्कर्ट जिसपर छोटे छोटे फ्लावर्स की डिज़ाइन थी और हलके पिले रंग का टॉप पहना . बालो को भी अच्छे से स्टाइल किआ हुआ था. वो खुद को देख कर hi शर्मा गयी थी की कैसे वो तैयार हो रही थी जैसे अपने बॉयफ्रेंड को रिझाना चाहती हो. न वो कुछ बोल रहा था न में. में जल्दी जल्दी से गाड़ी घर ले जाना चाहती थी.

(हम दोनों घर पहुंच गए मेने दरवाजा खोला और शिव को अंदर आने को कहा, मुझे कितनी शर्म आ रही थी ये में hi जानती थी, में किसी लड़के को अपने घर लायी थी वो सब करने के लिए)

स्नेहा : आओ न शिव. (शिव मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था और मुझे ऊपर से निचे तक देख भी रहा था, उसके ऐसे देखने से में और शर्मा रही thi)Aise क्या देख रहे हो. अंदर आओ na(Mene उसका हाथ पकड़ कर उसे अंदर आने को कहा).

शिव :(में भी अब संभल चूका था तो मेने मुस्कुराते हुए kaha)Aap बहोत खूबसूरत तो हो hi और ऊपर से आज आप बहोत प्यारी भी लग रही ho.(Sach में वो बहोत प्यारी लग रही थी)

स्नेहा :(शरमाते हुए मुस्कुराती hai)Kyu.... ऐसा क्यों लग रहा है tumhe.(Shiv मेरे करीब आया, मेरी धड़कने बढचुकि थी, आकर उसने मेरी कमर में हाथ डालते हुए मुझे अपनी और खींच liya)ahhh...(Humari कमर के निचे का हिस्सा एक दूसरे से सात गया था, में उसकी इस हरकत से हैरान भी थी और खुस भी)

शिव : मुझे ऐसा लग रहा है की जैसे आप मेरी गर्लफ्रेंड हो.

स्नेहा :(मेरा चेहरा लाल होने लगा, मेरी मुस्कान तो जैसे रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी, ,मेने उसकी आंखोमे dekha)To क्या नहीं हु?

शिव : मुझे लगा की आप सिर्फ एक वजह से मेरे साथ जुडी है.

स्नेहा : (थोड़ा गंभीर होते हुए उसकी आंखोमे देखती hai)Ha शायद, (शिव का हाथ पकड़ते hue)Par शिव अब बात बदल गयी है, (आंखोमे आंसू छलकने लगते hai)Muje लगता है में तुमसे प्यार करने लगी हु.

शिव : (उनकी आँखों में देखते हुए में hasa)To इसमें रो क्यों रही है?

स्नेहा : (में उसके शाइन पे हाथ फेरते हुए भीगी आँखों से भी muskurayi)Tum नहीं संजोगे शिव, में शादीशुदा हु, और में अपने पति से बहोत प्यार भी करती हु पर में अपने आप को तुमसे प्यार करने से रोक नहीं प् रही hu.(Wo उसके शाइन पर अपना शिर रख देती है)

शिव : तो इसमें प्रॉब्लम क्या है?

स्नेहा : पता नहीं पर मुझे ऐसा लगता है की में उन्हें धोखा दे रही हु.

शिव : आप ऐसे hi सब सोच रही है. आप कोनसा उनसे अलग हो रही है. वैसे भी जब आपको बच्चा हो जायेगा तो फिर तो हम अलग हो hi जायेंगे न?

स्नेहा : (शिव की आँखों में देखते हुए) यही तो प्रॉब्लम है, (फिर मेरी आँखों से आंसू बहने लगते hai)Muje नहीं लगता में तुमसे कभी जुड़ा हो पाऊँगी Shiv.(Me शिव से कास के लिपट गयी और रोने लगी)

शिव : आप रो क्यों रही है? अभी तो में यही हु न, अभी तो में आपको छोड़ के कही जा भी नहीं रहा फिर..

स्नेहा : (अपने आंसू पोछते हुए मुस्कुराती hai)Me भी कितनी पागल हु, तुम्हे घर बुलाया और तुम्हारी खातिरदारी भी नहीं कर रही और ये सब करने लगी. तुम बैठो में तुम्हारे लिए बादाम का दूध लेकर आती hu.(Aur में वह से किचन में चली गयी, मेने दूध बनाने लगी, में बना रही थी की कब शिव मेरे पीछे आके खड़ा हो गया मुझे पता hi नहीं चला. जब उसने मुझे कमर से पकड़ा तो पहले में चौकी फिर मेरे पेट पर रेंगते हाथो को महसूस कर मेरी आंखे बंद हो गयी और मेरा शिर अपने आप hi पीछे झुक गया और उसकी छाती पे टिक gaya.)Kya कर रहे हो शिव तुम बैठो न में आती hu.(Shiv ने बोलै तो कुछ नहीं पर मेरी कमर से हाथ उपरकी और लेजाने लगा और मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथो में थम लिया, उस आनंद से मेरे मुँह से आह निकल gayi)Shiiiivv(Wo मेरे स्तनों को दबाने लगा और उसका खड़ा लुंड मेरे कूल्हों की दरार में चुभने लगा) सीईव अह्ह्ह्ह थोड़ी डीएर रुको न.

शिव : आप अपना काम करो न मेने कहा रोका है आप को.

स्नेहा : आह्ह्ह्ह तुम मेरे साथ, शहहह ऐसा करोगे तो, अह्ह्ह्हह मेई काम कैसे karungiiiiiii.(Wo कुछ न बोलै और मेरे स्तनों को मसलने लगा, मुझे उसकी हरकते मज़ा दे रही थी, में जैसे तैसे उसके लिए दूध बनाने लगी)

संयम अपनी साइकिल ले कर स्कूल के लिए निकल गयी थी. उसे पता था की शिव इसी रस्ते से जाता है तो उसने थोड़ी देर इंतजार भी किआ था पर जब वो नहीं आया तो वो स्कूल के लिए निकल गयी. वो जा रही थी की उसकी नजर उस लड़के पर पड़ी जो उस दिन उसके साथ बदतमीज़ी कर रहा था. उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसे देख कर वो लड़का उसकी और बढ़ा, उसके साथ दो तीन और लड़के भी थे.

लड़का : रुक...

संयम : (वो दर तो रही थी फिर भी हिम्मत करके boli)Kya है, मुझे परेशान मात करो, मुझे स्कूल जाना है.

लड़का : वो तेरा आशिक़ कहा है?

संयम : मुझे नहीं पता, वो आया नहीं. मुझे जाने दो, मुझे लेट हो रहा है.

लड़का : तो तूने क्या सोचा, मुज से फ्रेंडशिप करेगी की नहीं.

संयम : मुझे नहीं करनी, जो लड़का ऐसे अकेली लड़की को देख कर उस पर रॉ जड़ने आ जाता है, ऐसे लड़के के साथ में फ्रेंडशिप करुँगी? अगर तुज में हिम्मत होती तो उस दिन शिव से लड़ता, न की भाग जाता.

लड़का : तो उसका नाम शिव है. तुजे तो में बाद में देख लूंगा, तू उसके नाम से उछाल रही है न तो पहले उस का hi पत्ता साफ़ करता हु.

संयम : (शिव के नाम से वो थोड़ा दर gayi)Dekho, में अभी भी कह रही हु, मुझे तुमसे कोई लेना देना नहीं है, मुझे परेशां मात करो.

लड़का : अरे मेरी रानी तू लेगी भी और देगी भी. पहले तेरे उस आशिक़ से निपट लू. चल मेरा वडा है तुज से, जब तक में उस को सबक न सीखा दू में तुजे परेशां नहीं करूँगा, पर उसके baad....(Wo गन्दी मुस्कान देने laga)Bol देना उसे में कल यही मिलूंगा. (अपने दोस्तों ko)Chalo...

संयम गुस्से से उनलोगो को देखती रही जब तक वो निकल न गए. पता नहीं क्यों पर उसे आज उतना दर नहीं लगा था. उसे शिव की चिंता होने लगी. वो सोचने लगी अच्छा हुआ वो आज नहीं आया. वो यही सब सोचते हुए स्कूल की और निकल गयी. जब वो स्कूल पहुंची तो वैस्वी उसीका वेट कर रही थी. उसने साइकिल स्टैंड की और वैस्वी की और बढ़ गयी. थोड़ी दुरी पर महेश और हर्ष भी खड़े थे, वो लोग शिव की रह देख रहे थे.

वही थोड़ी दुरी पर लड़को का एक और ग्रुप था. वो लोग भी आती जाती लड़कीओ को देख रहे थे और आपस में बाते कर रहे थे. उन लोगो में एक लड़का था विक्रम. वो वैस्वी को देख रहा था.

पार्थ : (विक्रम का dost)Kyu बे, रोज़ देखता हु तू, उस लड़की को hi घूरता रहता है, पसंद आ गयी है क्या?

विक्रम : है यार, क्या पटाखा है न, दिखने में किसी मॉडल जैसी दिखती है.

रिज़वान : मेरा भी दिल उसके बाजूवाली पर आ गया है. वो भी माल लगती है.

पार्थ : ऐसे बाते करने से कुछ नहीं होगा, अगर पसंद है तो जाओ बात करो, फत्तू सेल, यहाँ बेथ कर बाते करने से कुछ नहीं होनेवाला.

विक्रम : सेल, हमे फत्तू बोलता है, अगर तेरी गांड में दम है तो कोई लड़की पता के दिखा.

पार्थ : भाई अपनी तो सेटिंग अपने घर के पास है, मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं. तुम लोग बस ऐसे ताड़ते hi रहो.

विक्रम : क्या बोलता है रिज़वान, चल बात करे.

रिज़वान : है chal.(Dono वैस्वी और संयम के पास पहुंच गए)

विक्रम : Hi, मेरा नाम विक्रम है, और ये मेरा दोस्त रिज़वान.

विवि :(उनकी और घर कर देखते hue)To...

विक्रम : में तुमसे दोस्ती करना चाहता hu.(Vaiswi को)

रिज़वान : और में तुम se(Samim को)

वैस्वी : (गुस्से se)Jao यहाँ से, मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है ऐसी बातो में.

विक्रम : में तो बस दोस्ती के लिए कह रहा हु.

वैस्वी : जाओ यहाँ से, वर्ण में प्रिंसिपल से शिकायत कर दूंगी. चलो Samim.(Dono सहेलिया वह से क्लास की और निकल गयी, वो लड़के उन्हें जाते हुए देखते रहे) पता नहीं कैसे कैसे लोग होते है, न जान न पहचान और चले आते है दोस्ती करने. अगर में पापा से शिकायत करुँगी तो पता नहीं इनकी क्या हालत karenge.(Samim ने कोई जवाब नहीं दिया, वैसे भी वो शिव के बारे में hi सोच रही थी, वो दोनों क्लास में चले gaye)(Mahesh और हर्ष भी क्लास में चले गए)
 
गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स
 
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