अपडेट 42
(नव्या, अजय के रूम में मिलने उसके कमरे में गयी)
नव्या : (में देख प् रही थी वो बहोत शर्मिंदा है, वैसे गलती उसकी थी भी नहीं, मुझे लगा की उसको संजना चाहिए) मुझे तुम से कुछ बात करनी hai(Wo दरवाजे से साइड में हो गया और मुझे अंदर आने का रास्ता दिया. में अंदर चली गयी और बीएड पर बेथ गयी, वो मेरे पास आकर खड़ा रहा, अब भी वो निचे शिर झुकाये खड़ा tha)Mene कहा न तुम्हारी कोई गलती नहीं है, आओ बैठो yaha(Mene उसको मेरे पास बैठने का इस्सर किआ तो वो हिचकिचाते हुए बेथ gaya)Sorry वो मुझे लगा घर में कोई नहीं तो मेने दरवाजा बंद नहीं किआ था. तुम कैसे जल्दी आ गए थे?
अजय : हड़ताल की वजह से कॉलेज जल्दी छोड़ दिया था. मैंने दरवाजा खटकाया पर आप नहीं आयी तो मैंने अपनी चाबी से दरवाजा खोल दिया. सॉरी.
नव्या : (उसके हाथ पर हाथ रखते hue)Mene कहा न तुम्हारी कोई गलती नहीं है. जो हुआ उसे भूल जाओ. हो जाता है कभी कभी.
अजय : पर आप ऐसा क्यों कर रही थी bhabhi?(Uske सवाल से मेने उसको देखा तो वो झेपते हुए निचे देखने laga)Sorry.
Navya

Apne आप को सँभालते hue)Ho जाता है कभी कभी, तुम नहीं करते क्या?
अजय : (एक बार मेरी और देखा, फिर वापस अपनी नज़ारे झुका li)Nahi.
नव्या : क्यों तुम्हे लड़कीओ को देख कर कुछ नहीं होता क्या?
अजय : क्या होता है भाभी?
नव्या: (नव्या ने देखा था जब अजय दरवाजे पर खड़ा था तो उसका लुंड खड़ा tha)Tumne मुझे वैसे देखा tha(Thodi देर रुक kar)to तुम्हे क्या हुआ था.
अजय : (सवालिए नजरो से मेरी और देख kar)Kya हुआ था?
नव्या :क्यों वो ....वो तुम्हारा खड़ा नहीं हो गया tha.(Meri बात से वो शर्मा gaya)hua था की nahi(Pata नहीं पर मुझे, उसे ऐसी बात करने में मज़ा आ रहा tha)Fir तुम ने क्या किआ.
अजय: कक्क कुछ नहीं?
नव्या : (मैंने देखा की उसका लुंड अभी खड़ा हो चूका था, मुझे भी कुछ कुछ हो रहा था, पर वो मेरा देवर था, हमारे बिच एक मर्यादा थी, मेने हिचकिचाते हुए kaha)Dekho अभी भी तुम्हारा वो खड़ा हो गया hai.(Usne झेपते हुए अपने हाथ से उसे धक् दिया और खड़ा हो कर पलट गया, वो दर रहा था, या शर्मा रहा tha)Isme शर्मा ने की जरुरत नहीं है अजय, ये तो अच्छी बात है, इस से पता चलता है की तुम अब बड़े हो गए हो.
अजय

बिना पीछे mude)Par ऐसा क्यों होता है भाभी?
नव्या : (एक तो में पहले से सेक्स को तरस रही थी. खड़ा लुंड देख कर में भी गरम होने लगी thi)Ye कुदरती है अजय, इस में शर्माने वाली या घबरानेवाली कोई बात नहीं. पहले कभी तुम्हे ऐसा नहीं हुआ.?
अजय : वो सुबह में ऐसा होता है भाभी.
नव्या : फिर तुम क्या करते हो?
अजय : कुछ नहीं, वो अपने आप hi छोटा हो जाता है.
Navya

Me देख रही थी की वो कितना भोला है अभी, में गर्म हो गयी थी ऐसी बातो से, मेरी छूट भी गीली होने लगी थी, मुझे लग रहा था की मुझे लुंड चाहिए, मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, मुझे बस एक hi ख्याल आ रहा था, मुझे छोड़ना है, मैंने कुछ सोचते hue)Ajay, मेरी और घूमो. में देखना चाहती हु की कही तुम में कोई गड़बड़ तो नहीं.
वजह : (डरते hue)Kaisi गड़बड़ भाभी?
नव्या : बताती हु, पहले मेरी और ghumo(Wo हिचकिचाते हुए मेरी और घूम गया पर अपना हाथ अपने उभर पर hi रखा हुआ था, मेने उसके हाथ को पकड़ते हुए उसकी और dekha)Muje देखने दो अजय की सब ठीक है na.(Usne हिचकिचाते हुए अपने हाथ हटा दिए, उसके पंत में तम्बू बना हुआ था, मेरे मुँह में पानी आने laga)Ajay (मेने उसकी आँखोने देखा) ये सब किसी को बोलेगा तो नहीं?
अजय : क्या भाभी?
नव्या : अभी जो में करने जा रही हु वो तू किसी को कहेगा तो नहीं? में तेरी भलाई के लिए hi ये कर रही हु.

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अजय : में क्यों किसी को कहूंगा, आप तो मेरी मदद hi कर रही हो भाभी.
नव्या : वैसे भी ये सब किसी को बताना भी नहीं चाहिए, लोग इससे गन्दा बोलते है, पर तू मेरा देवर है तो मई ये कर रही hu.(Maine उसके लुंड के फुले हुए उभर पर हाथ रक्खा तो वो कैंप गया)
अजय : शहहहहह भाभीई.
नव्या : शहहहहह, मुझे देखने de(Mai उसके लुंड को दबा दबा कर देखने लगी, बहार से hi बड़ा लग रहा था, मेरी छूट पानी बहाने लगी थी,) यहाँ लेट जा अजय (वो मेरी और देखते हुए बिस्तर पर सीधा लेट गया, मेने उसकी पंत खोली और उसे घुटने तक सरका दिया, अंडरवियर में लुंड अब अच्छे से दिख रहा था, मुज से अब रहा नहीं जा रहा था, मैंने उसके अंडरवियर को पकड़ा और उतरने लगी)

अजय

मेरा हाथ पकड़ते hue)Bhabhi....
नव्या : (उसकी और देखते hue)Shhhhh, कुछ नहीं होगा, मुझे देखने de.(Usne मेरा हाथ छोड़ दिया, मैंने उसका अंडरवेअर निचे खिसकाया तो उसका लुंड उछाल कर बहार निकल आया, में उसे बड़े गौर से देखने लगी, अपने हाथ में ले कर उसको दबा कर देखा,
अजय : शहहह भाएअभीइइइइइ,
नव्या : (मेरी खुद की हालत ख़राब हो रही थी, अजय अपनी आंखे बंद कर चूका था, उसकी और देख कर में लुंड को सहलाने लगी, वो मेरे पति से भी बड़ा था, अब रुकना मेरे बस में नहीं था. में अपना चेहरा लुंड के पास ले गयी, उसकी गंध मेरे नथुनों में भरने लगी. मेने अपना गाल उस लुंड पर रगड़ने लगी.)
अजय : अह्हह्ह्ह्ह, भाभीयी, अह्ह्ह्ह ाआआप अह्ह्ह्ह भाभीई अह्ह्ह्हह मुझे कुछ हो रहा है भाभी.
नव्या

में अपना पूरा चेहरा उसके लुंड पर रगड़ रही थी, अपनी जीभ से उसे चाटने लगी thi)Kuchh नहीं होगा अजय, थोड़ी देर शांत रहो और मुझे चेक करने दो ,( मान me)ahhhhhh तुम्हारा लुंड मस्त है अजय मुझे अब इससे अपनी छूट में लेना hi है , shhhhhhh,(Ajay से) अजय ये सब किसी को कहेगा तो नहीं? अह्ह्ह तुम्हारी भाभी क्या कर रही थी, शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अजय, तुम्हे अच्छा लग रहा है?
अजय : अह्हह्ह्ह्ह भाभी, बहोत अच्छा लग रहा है, में किसी को नहीं कहूंगा, भाभी,
पर शहहह भैया को पता चल गया तो
नव्या : कुछ पता नहीं चलेगा, क्या तू बताएगा?
अजय : नहीं भाभीईईई, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में क्यों बताऊंगा?
नव्या : में भी नहीं बताउंगी, (मैंने उसका लुंड अपने मुँह में भर लिया)

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अजय : Bhabhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii, ये क्या कर रही होओओओओ, shhhhhhhhhhhh, भाभीइइइइइइइ कुछ निकलने वाला है
नव्या :निकल जाने दे अजय, निकल दे मेरे मुँह me(Uski कमर भी हिलने लगी थी, में उसके कूल्हों को दबाते हुए उसका लुंड चूस रही थी, उसका लुंड मेरे गले में जा रहा था पर में इतनी ज्यादा उत्तेजित थी की में उसके लुंड को छोड़ना hi नहीं चाहती थी. आखिर कर उसने अपना वीर्य मेरे मुँह में भर दिया, पिचकारी सीधे मेरे गले में गिरी तो में खस्ने लगी, उसका वीर्य मेरे होठो के कोनो से बह कर बहार निकलने लगा. मेने उसका लुंड बहार निकला और अपने मुँह को पोछा.
ये सब सुन कर बिना बोल hi पड़ी.
बिना : हाय कामिनी, तूने ये क्या काण्ड कर दिया, वो बिचारा भोला भला और तूने उसको hi लपेटे में ले लिया.
नव्या : क्यों वो भोला है तो क्या साडी उम्र भोला hi रहेगा, उसे भी तो ये सब सीखना hi था, किसी और से सीखता तो मैंने hi सीखा दिया.
बिना : तुजे शर्म नहीं आयी थी?
नव्या : सच कहु तो बहोत शर्म आ रही थी यार पर ये शरीर की आग पता नहीं क्या करवा गयी. अब सुन आगे क्या हुआ.
अजय बिस्तर पर लेता हुआ था और अपनी सांसे दुरस्त कर रहा था. उसका लुंड अभी भी थोड़ा कड़क था. छूटने की वजह से थोड़ा नरम जरूर हुआ था पर भी भी खड़ा था. में उसके लुंड को देखते हुए उसकी बगल में लेती और उसके चेहरे को सहलाने लगी.
नव्या : कैसा लगा अजय.
अजय: बहोत अच्छा, बहोत मज़ा आया भाभी. भाभी क्या में ठीक हु? मेरा मतलब है अपने कहा था आप चेक कर के बताएंगी.
नव्या : है, अब तक तो सब ठीक है पर अभी पूरी तरह चेक करना बाकि है.
अजय : तो चेक कीजिये न भाभी.
नव्या : पर उसके लिए तुम्हे कुछ करना पड़ेगा.
अजय : क्या करना पड़ेगा भाभी.?
नव्या : (मुझे उस पर इतना प्यार आ रहा tha)Pehle में कर के बताती हु फिर तुम करना.
में उसके ऊपर होते हुए उसके होठो को चूसने लगी, वो बस सीधा लेता रहा, में उसके होठो को निचोड़ ने लगी, में इतनी उत्तेजित हो रही थी की मैंने उसके मुँह में अपनी जबान घुसा दी और उसकी जबान से खेलने लगी और साथ में उसके लुंड को पकड़ा जो अब पूरी तरह फिरसे कड़क हो चूका था. में उसे जोरो से किश करने लगी.
नव्या : (थोड़ी देर baad)Aab तुम मुझे karo.(Me सीधी लेट गयी और वो थोड़ा हिचकिचाते हुए मेरे ऊपर आया और कुछ देर मेरे होठो को देखने लगा, में उसी को देख रही थी, वो बस देखे जा रहा था तो मैंने उसका शिर पकड़ा और उसे अपनी और खींचा और उसके होठो पे अपने होठ रख दिए, वो भी समाज गया और मेरे होठो को चूसने लगा, जैसे जैसे वो चूस रहा था उसका दबाव बढ़ रहा था. थोड़ी देर में वो और में बहोत गरम हो गए थे.) अभी रुको Ajay.(Me बिस्तर पर बेथ गयी, में जो करने जा रही थी उस से मुझे बहोत शर्म आ रही थी पर नशा ऐसा चढ़ा था की में विवश थी. मेने अपना ब्लूजे निकल दिया, वो आंखे फाडे हुए मुझे देख रहा था, उसके ऐसे देखने से मुझे बहोत शर्म भी आ रही थी, मेने अपनी नज़ारे झुकाई और अपनी ब्रा भी खोल दी. वो ऐसा नज़ारा पहली बार hi देख रहा था जो में उसके चेहरे के हावभाव से समाज शक्ति थी. मैंने उसके हाथ को मेरे स्तन पर रखा और उसे दबाने का इस्सर किआ,

पहले वो आहिस्ता से दबा रहा था, मेरी आंखे बंद हो चुकी थी, उसका दबाव बढ़ता जा रहा था, थोड़ी hi देर में वो मेरे स्तन को पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा, मुझे दर्द हुआ पर मैंने उसे रोका नहीं, में उसका चेहरा सहलाने लगी, )
इससे अपने मुँह में ले कर चुसो अजय,
(उसने एक बार मेरी और देखा तो मेने है का इस्सर किआ. वो टूट पड़ा मेरे निप्पल पर और चूसने लगा, वो इतनी जोरो से चूस रहा था की मेरी हालत ख़राब हो रही थी,)

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आह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अजय्यियय शहहह धीरे देवरजी शह्ह्ह्ह (मेने उसके मुँह से निप्पल छुड़ाया तो वो दूसरे निप्पल पर टूट पड़ा और उसे भी चूसने लगा, में आंखे बंद किये हुए शिस्किअ ले रही और उसको जो करना था वो मेने करने दिया, वो मेरे निप्पल को अपनी ऊँगली और अंगूठे से मसलने लगा )अह्हह्ह्ह्ह अजय, हाआआ ऐसे hi shhhhhhhhhh(Ek दबा रहा था दूसरा चूस रहा था, ऐसे hi वो खेल रहा था, उसके चेहरे से लग रहा था, उसे बहोत मज़ा आ रहा hai)Ab रुको Ajay.(Wo रुक गया, एक बार मैंने उसकी और देखा, मुझे शर्म आ रही थी क्यों की में नंगी होने जा रही थी उसके सामने, पर में कुछ भी करने को तैयार थी. मेने अपनी पूरी सदी निकल दी और पेटीकोट भी निकल दिया. में सिर्फ पंतय में thi.)Ajay इसे तुम nikalo.(Wo आश्चर्य से मुझे देखने लगा फिर उसने मेरी पंतय की और देखा. उसने कपट हुए अपने हाथ बढ़ाये, पंतय में दिख रही मेरी फूली छूट को उसने ऊपर से छुआ और उसे सहलाया. मुज से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था) शहहहहह , उसे निकल दो Ajay.(Usne मेरी पंतय को पकड़ा और धीरे धीरे कर के उसे पूरी निकल दी, वो मेरी बालो वाली छूट को हैरत से देख रहा tha)Ghabrao नहीं अजय, छू कर देखो

(मेने अपनी छूट के होठो को फैला कर उसे दिखाया, उसने अपने कप्टा हाथ छूट की और बढ़ाया, वो दर रहा था, पर फिर भी उसने छूट के बालो को छुआ और उसके होठो की दरार को सहलाया, मेने उसकी ऊँगली पकड़ कर मेरी छूट के छेद में घुसते हुए) यहाँ छेड़ है अजय, अपनी ऊँगली अंदर डालो (वो आश्चर्य से देखते हुए ऊँगली अंदर डालने laga)Aur अंदर डालो, शठ घबराओ nahi(Usne अपनी पूरी ऊँगली मेरी छूट में दाल दी) है शह्ह्ह्ह अब अपनी ऊँगली अंदर बहार karo(Wo ऊँगली को अंदर बहार करने लगा)

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अजय : दोपहर में आप ऐसा hi कर रही थी न भाभी?
Navya

Sharma कर) हा अजय, शहहह अह्ह्ह्ह ऐसा hi कर रही थी, पर तेरी ऊँगली से ज्यादा मज़ा आ रहा है, और कर अजय, शह्ह्ह्ह तुजे कैसा लग रहा है.
अजय : अंदर बहोत गर्म है भाभी.
नव्या : है अजय, अंदर बहोत गर्मी है, तुजे hi निकालनी है ये गर्मी. अजय क्या तू उसे कहते गए?
अजय : किसे भाभी?
नव्या : उसे hi जिसमे तेरी उंगली है, बो न chatega?(Usne है में गर्दन हिलायी, तो मैंने उसे लेता दिया और अपनी टंगे फैला कर उसके मुँह पर अपनी छूट रख di)Abhi जैसे तू मेरे होठो को चूस रहा था वैसे hi इससे भी चूस Ajay.(Usne आज्ञाकारी बच्चे की तरह मेरी छूट के होठो को चूसने लगा,

पहले वो हलके हलके से कर रहा था फिर उसका दबाव बढ़ने लगा और उसकी जीभ भी मेरी छूट के छेद में जाने lagi)Ha अजय, ऐसे hi, मेरी छूट को चाट ले मेरे प्यारे देवरजी , शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , हाआआ अपनी भाभी की छूट को चाट ले, शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा चाट ता है तू, शहहहहह ऊऊऊमायआ हआ बहोत मज़ा आ रहा है Ajay(Me उसके शिर को अपनी छूट पर दबाने लगी, अब मेरी छूट को लुंड चाहिए था, मैंने उसके लुंड को पकड़ा और अपनी छूट के छेड़ पर लगा दिया और अपना दबाव बनाते हुए में लुंड पर बेथ गई.

अजय : भाभीईई, मेरा वो....
नव्या : शह्ह्हह्ह्ह्ह, कुछ नहीं हुआ, वो वही है जहा उसे होना चाहिए.
अजय : भाभी वो आपके अंदर चला गया है.
नव्या

उसका चेहरा सहलाते hue)Ha अजय, वो मेरी छूट में चला गया है, तुजे कैसा लग रहा है.?
अजय: बहोत अच्छा लग रहा है बहभी.
नव्या : (अपनी गांड को ऊपर नीचे उठा कर वो लुंड को अपनी छूट में लेने lagi)Ab कैसा लग रहा है.

अजय : अह्हह्ह्ह्ह भाभी, बहुओट अच्छा लग रहा है. शहहहहह
नव्या : आ रहा है न मज़ा, इससे चुदाई कहते है मेरे प्यारे देवर जी, आज तेरी भाभी तुज से चुद रही है, अह्ह्ह्हह्हह हाआआआ अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, मेरे स्तन भी दबा अजय इसके निप्पल को भी चूस,
अजय : भाभी क्या आप को मज़ा आ रहा है?
नव्या : है देवरजी, बहोत मज़ा आ रहा है. अब मुझे कभी ऊँगली नहीं करनी पड़ेगी, तुम छोड़ोगे न रोज मुझे.
अजय: है भाभी, में रोज छोडूंगा आपको, अह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है, आपकी छूट बहोत गीली हो गयी है भाभी.
नव्या : उसे भी तुम्हारा लुंड बहोत पसंद आया है dewarji.(Thodi देर वो दोनों इसी तरह लगे हुए थे, नव्या उसके होठो को कफहसते हुए पूरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी, काफी देर उछलने के बाद भी अजय का पानी नहीं निकला तो वो रुक गयी) अजय अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ.
अजय : वो कैसे bhabhi?(Me मुस्कुराती हुई उठी तो उसका लुंड पक से मेरी छूट से निकला, में सीधी हो कर लेट गयी गयी, अपनी टंगे फैला कर)

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नव्या : मेरे ऊपर आजाओ. (वो मेरे ऊपर आ गया, मेने लुंड को पकड़ कर अपने छेद पर सेट kia)Ab अपना लुंड दाल दो देवरजी, मुज से रहा नहीं जा रहा, भर दो मेरी छूट अपने बड़े लुंड se.(Usne पोसिटिव ली और वापस अपना लुंड मेरी छूट में घुसा दिया और धक्का लगाने laga)Ahhhhhh, आहिस्ता Ajay,(Usne जोर से धक्का दे दिया था, फिर वो आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगा, मेने उसे अपने ऊपर पूरी तरह खिंच लिया और उसके होठो को चूसते हुए उस से छोड़ने लगी) ममममममम अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhh(Uski गति बढ़ने लगी थी, थोड़ी hi देर में वो तीव्र गति से मेरी छूट मरने laga)Ajayyyyyyyy, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह थोड़ा धीरे छोड़ो, अह्ह्ह्ह अजय्यिययी shhhhhhhh(Me पूरी हिल रही थी, मेरे स्तन ऊपर निचे कूद रहे थे )अह्ह्ह्हह देवरजी, शहहहहह धीरे छोड़ो अह्ह्ह मुमय्यययययय, शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊऊऊओ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देवरजी थोड़ा धीरे अह्हह्ह्ह्ह (जब वो नहीं मन तो मेने उसे अपनी टैंगो में दबा दिया, पर वो नहीं रुका, वो मेरी छूट लगातार मर रहा था, दोनों पशीने पशीने हो गए थे, मुझे मज़ा भी आ रहा था, मेरे पति ने भी कभी मुझे इतनी जोरो से नहीं छोड़ा था, मेरी छूट में थोड़ा दर्द भी हो रहा था जो मेरे चेहरे पर झलक भी रहा था. )
अजय : अह्ह्ह्ह भाभी आप कमल हो, अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह आपकी छूट भी कमल है, भाभीईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह, भाभी मेरा लुंड अह्ह्ह्हह मेरा लुंड आह्ह्ह्हह्ह बहोत मज़ा आ रहा है, आपकी छूट में मेरा लुंड अह्ह्ह्हह भाभी बहोत मज़ा आ रहा hai(uske धक्के मेरी छूट में अंदर तक लग रहे थे, पसीना उसके चेहरे से टपक रहा था, )
नव्या : है देवरजी अह्हह्ह्ह्ह छोड़ लो मुझे, अह्ह्ह्हह जितना मर्जी छोड़ो मुझे, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह और छोड़ो अह्ह्ह्हह मेरा होने वाला है, अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह और अंदर डालो अह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii(Mechhut गयी पर उसके धक्के काम hi नहीं हो रहे the)Ahhhh देवरजी बसससससस बससससस
अजय : थोड़ी देर भाभी, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह (वो पूरी ताकत से मेरी छूट मर रहा था, मुझे भी मज़ा आने लगा) अह्ह्ह्ह भाभीईई अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह आपकी छूट आअह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह आपपपप आह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह भाभीईईई अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मेरा निकलने वाला है भाभीईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

वो पूरी तरह मुझसे चिपक गया और मेरी छूट में गरम गरम वीर्य भरने लगा, मैंने उसे कास के पकड़ लिया और अपनी छूट में भर रहे गरम तरल को महसूस करते हुए झटके कहते हुए में दोबारा झड़ने लगी, में उसके साथ इतनी सख्ती से चिपक गयी थी की कभी छूटनेवाली hi न हु. वो मेरे ऊपर लुढ़क सा गया था, में उसको सेहला रही थी. उस रत और फिर कई रेट, दिन वो मुझे छोड़ रहा है.
बिना : तुजे बुरा नहीं लगता, अपने hi देवर के साथ.
नव्या : तुजे जो सोचना है सोच, मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगता. वो भी खुस है और मेरे पति भी खुस है. मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता. ये हमे सोचना होता है की हमारी ख़ुशी किस्मे है. लोग नहीं तय करेंगे की हमारी ख़ुशी किस्मे है.
बिना : बात तो तुम्हारी सही है यार पर फिर भी ऐसी बाटे अगर बहार पता चल जाये तो बहोत बदनामी होती है.
नव्या : इसीलिए तो मेने अपनी ख़ुशी घर में hi धुंध ली. हमे कोई न कोई तो ऐसा मिल hi जाता है बस हमे पहचान न होता है. थोड़ा सा जान ने पर पता चल hi जाता है की कोण कैसा है. जैसे तुम्हे जो लड़का मिला वो अच्छा नहीं था है न?
बिना : किसने कहा ऐसा? वो अच्छा hi है, वो तो मेरी वजह से....
नव्या : (हस्ते hue)Ab समाज में आया? अगर तुजे अच्छा लगे तो अपने सम्बन्ध बना शक्ति है पर ये तुजे डीडे करना है की तुजे खुस होना है की नहीं.
बिना : चल ठीक है, में सोचूंगी, तू मज़े कर अपनी जिंदगी में.
फ़ोन रखने के बाद बिना, शिव के बारेमे सोचने लगी. शिव का चेहरा उसकी आँखों के सामने आने लगा. उसे वो सब आने लगा जो उस दिन हुआ था.
बिना : कैसा बेशरम है शिव, में उसकी टीचर हु फिर भी वो मेरे साथ ये सब करने लगा, (उसकी किश याद करते टूट) कैसे उसने मेरे होठो को चूसा था, मेरे मुँह में जीभ भी दाल दी थी, पर उसका ऐसा करने से मुझे कितना अच्छा लग रहा tha(Uski जुबान खुद बा खुद बहार निकल आयी और उसके होठो पे घूमने लगी) अह्हह्ह्ह्ह मेरे होठो को कितनी जोर से चूस रहा था, मेरी जुबान को भी वो चूस रहा था, ऐसा तो मेरे पति ने भी कभी नहीं किआ, और कितनी जोर से मेरा स्तन भी दबा रहा था tha.(Usne खुद अपना एक हाथ अपने स्तन पर रख कर दबाया तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी) बेशरम कही का, कोई दबाता है ऐसे अपनी टीचर के स्तन, शहहह अह्ह्ह्हह शिईयिव धीरे शह्ह्ह्ह, (उसकी सूरत याद आते hi उसकी मुस्कान होठो पर आ gayi)Wo है भी कितना हैंडसम, अगर में उसके क्लास में पढ़ती होती तो पक्का उसकी गर्लफ्रेंड बन जाती. मैंने ऐसे hi उसे चांटा मर दिया, करने देती वो जो कर रहा था. वो तो मेरी योनि को भी कैसे दबोच रहा था, और ये भी निगोड़ी गीली हो गयी थी, शहहह अह्ह्ह्ह शिव आए कर ले जो करना है शहहह में कुछ नहीं कहूँगी शहहहहह. पर अब क्या करू? कैसे उस से बात करू? जब में उसे क्लास में देखती हु तो वो मेरे सामने देखता भी नहीं. ओह! मेने ये क्या कर दिया, प्लीज शिव, आओ न मेरे घर, में कुछ नहीं कहूँगी, तुम्हे जो करना है वो कर लेना, बस एक बार आ जाओ.