Adultery Kundali Bhagya - Page 8 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

ी ऍम वाचिंग ब्रह्मास्त्र मूवी राइट नाउ. ी can't बिलीव तहत थे हीरो इस ऑर्फ़न एंड हिज नाम इस शिवा. बिलीव में गाइस, ी ऍम वाचिंग आईटी फर्स्ट टाइम. सम थॉट एंड डायलाग अरे शामे. आईटी इस जस्ट कोइंसिडेन्स.
 
अपडेट 36

रंजन के बोलने से मैनेजर गुस्सा हो गया था.

मैनेजर : (मान में सोच रहा था) साली कुटिया, मुज से जबान लड़ती है, तू देख में तेरा क्या हाल करता हु. तुजे रंडी बनाकर न रख दिया तो कहना. मुझे आंखे दिखती है. ...

मुझे आज बिना मैडम के घर भी जाना था तो में उनके घर की और निकल गया. दोपहर का तिमहोनेवाला था तो सोसाइटी में बहार कोई दिख नहीं रहा था. एक दो आवारा कुत्ते बैठे हुए थे जो मुझे देख रहे थे. में उनके घर के सामने पहुंच गया और बेल्ल बजादि. थोड़ी देर तक कोई जवाब नहीं आया तो मेने दोबारा बेल्ल बजायी. अंदर से मैडम की आवाज आयी “आती हु” थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला तो बिना मैडम मैडम थोड़ी पशीने से भीगी हुई थी, बाल बिखरे थे. उन्होंने घर में पहन ने वाले कपडे पहने हुए थे. निचे लेंगी और ऊपर टॉप था. लेंगी स्कीन टाइट थी जो उनकी झांघो के आकर को स्पस्ट दर्शा रही थी.

शिव : (शर्मिंदा होते hue)Sorry मैडम! मैंने आप को डिस्टर्ब किआ.

बिना मैडम : नहीं कोई बात नहीं. आज संडे है तो में थोड़ी साफ़ सफाई कर रही थी. तुम अंदर आओ.

वो मुड़कर अंदर चली गयी और में उनके पीछे अंदर दाखिल हो गया. सुरु में hi हॉल था तो में सोफे पे जा कर बेथ गया

बिना मैडम : (बिना पीछे mude)Tum बैठो में अभी आयी.

शिव : जी मैडम.

वो पानी लेकर आयी और मुझे दिया. पानी पिने के बाद गिलास मैंने वही टेबल पर रख दिया.

शिव : सॉरी मैडम, मेने आप को डिस्टर्ब किआ. आप कहे तो में बाद में औ.

बिना मैडम : मेने बोलै न कोई बात नहीं. वैसे भी में तुम्हारा hi इंतजार कर रही थी, फिर सोचा की थोड़ी सफाई hi कर लू.

वो बैठे बैठे अपने बाल को खोल कर फिर से हाथ से सवार कर वापस एक रबर की मदद से बांधने लगी. दिखने में मैडम वैसे भी खूबसूरत थी और चेहरा भी प्यारा था, वो ऐसे बल सवारते हुए बहोत प्यारी लग रही थी. उनकी आंखे थोड़ी बड़ी थी जो उनके चेहरे को और आकर्षक बना रही थी. छोटी सी तीखी नाक के निचे छोटा सा मुँह जो पतले आकर्षक होठो से सजा हुआ था. कुल मिलकर देखने में वो काफी अच्छी थी. रंग भी गोरा और साफ़ था.

शिव : नहीं मैडम आप को तकलीफ करने की जरुरत नहीं है.

बिना मैडम : इसमें कैसी तकलीफ. गर्मी बहोत है तो सरबत hi पिटे है, चलेगा न?

शिव : जी मैडम, जैसा आप कहे.

वो सरबत बना ने जाने लगी, वो चल रही थी तो उनके मटकते कूल्हों को देख मेरी हालत ख़राब होने लगी. सच में वो थिरकते गोलों को देख मेरे अंदर हलचल सी होने लगी. वो मेरी मैडम थी मुझे उनको ऐसे नहीं देखना चाहिए. मेने अपनी नज़ारे घुमा ली और इधर उधर देखने लगा. वो सरबत ले कर आयी और मेरे सामने बेथ गयी. जब वो आ रही थी मेरी नजर उनके हिलते हुए स्तनों पर चली गयी. वो ऐसे हिल रहे थे की नज़र चली hi जाये. शायद उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी. ये मेरे साथ क्या हो रहा है. अगर मैडम को पता चला तो पक्का नाराज हो जाएगी. और में बिलकुल ऐसा नहीं चाहता था. मेने उनसे सरबत लिया और पीना चालू किआ.

बिना मैडम : तो, कैसी चल रही है पढ़ाई.

शिव : बस चल रही है, मैडम. प्रैक्टिस की वजह से टाइम थोड़ा काम मिलता है.

बिना मैडम : तुम्हे ध्यान रखना होगा शिव, ज्यादातर स्पोर्ट्स में रहनेवाले, पढ़ाई नहीं कर पते. है अगर तुम स्पोर्ट्स में एक मक़ाम हनषील कर लेते हो तो अच्छा है पर अगर न कर पाए तो ये पढ़ाई hi है जो तुम्हे काम लगेगी.

शिव : आप ठीक कह रही है मैडम, पर में क्या करू?

बिना मैडम : इतना भी टेंशन लेने की जरुरत नहीं है. तुम वैसे भी होशियार हो, मेने बस ये कहा की ध्यान रखना. और मुझे यकीं है की तुम स्पोर्ट्स में भी अच्छा hi करोगे.

शिव : ठनक यू मैडम, जो आप ऐसा सोचती है.

बिना मैडम : नहीं सच में, तुम हे देख कर hi लगता है की तुम ये कर शक्ति हो.

बिना मैडम : (हमारा शरबत ख़तम हो चूका था, वो दोनों के गिलास अंदर रख आयी) चलो फिर कंप्यूटर सीखते है.

शिव : पर मैडम आप सफाई कर रही थी वो.

बिना मैडम : वो बाद में हो जाएगी.

शिव : नहीं, पहले सफाई करते है फिर कंप्यूटर सीखेंगे.

हम दोनों सफाई करने लगे. ज्यादा सामान तो था नहीं, इस लिए निचे का सब जल्दी hi साफ़ हो गया. ऊपर चाट पर जले लगे हुए थे, मैडम से झाड़ू पहुंच नहीं रहा था. मेने उनसे झाड़ू ले लिया, और साफ़ करने लगा.

बिना मैडम : तुम सच में बहोत लम्बे हो शिव. (में शर्माने लगा) इसमें शर्माने की क्या बात है. ये तो अच्छी बात है. (एक दो जगह ऐसी थी की मेरा भी हाथ नहीं पहुंच रहा था.) रेहनेदो उसे वो चलेगा.

शिव : सब साफ़ हो गया बस इतना hi बचा है, उसकी वजह से ख़राब दीखता है. आपके पास स्टूल है है?

बिना मैडम : नहीं, ऐसा तो नहीं की उस पर चढ़ सके, वो आगे रक्खा है न वो कांच वाला hi है.

शिव : (हम दोनों सोच रहे थे की क्या करे, मेरे मुँह से निकल gaya)Me आप को उठता हु, आप साफ़ कर देना. (में सामान्य तौर पे hi बोल गया था, पर फिर मुझे एहसास हुआ की में ऐसा नहीं कर शक्ति)

बिना मैडम : (वो मेरी बातसँ कर मुस्कुरायी, वो भी सहज तरीके से hi ले रही थी, वो भी शिव से अब काफी खुल चुकी थी) तुम मुझे ूथपाओगे.

शिव : (वो ऐसे मेरी और देख रही थी जैसे मेरा मजाक उदा रही हो, मेने भी आव देखा न ताव, में उनके पास गया और उनको घुटनो के पास से पकड़ कर पूरा ऊपर उठा लिया)

बिना मैडम : अरे , अरे क्या कर रहे हो, में गिर जाउंगी, सीईव. (पर मेने उन्हें उठा hi diya)(Jab बिना को लगा की शिव नहीं गिरायेगा, वो उसे आराम से उठा के खड़ा है तो वो ताज्जुब से उसे देखने लगी) तुम तो सच में बहोत ताकतवर हो. लाओ वो झाड़ू दो. (मेने उन्हें एक हाथ से पकड़ के दूसरे हाथ से झाड़ू भी उठा के दिया तो वो और ज्यादा आश्चर्य से भर गयी) बाप रे! तुम में बहोत ताकत है शिव.

में बस मुस्कुराया और वो ऊपर सफाई करने लगी. पहले तो में ऊपर hi देख रहा था जाया वो सफाई कर रही थी, पर अचानक मेरी नजर उनके छूट वाले भाग पर चली गयी, कासी हुई लेंगी की वजह से वो भाग स्पस्ट दिख रहा था. मुझे उनकी पंतय की आउटलाइन भी दिख रही थी. मेरा गाला सूखने लगा, मेने जैसे तैसे थूक निगला. मेने ऊपर बिना मैडम की और देखा तो वो ऊपर देख कर सफाई कर रही थी. यहाँ से देखने पर उनके स्तनों का आकर भी मुझे स्पस्ट दिख रहा था. आकर में बड़े जैसे दो पर्वत खड़े हो, उनके बिच में से दिखरहा उनका चेहरा, जैसे रात में चाँद निकला हो. में कभी उनके स्तन को तो कभी उनके छूट के फुले हुए भाग को देख रहा था, वो मेरे चेहरे से इतना नजदीक था की मुझे उसकी खुसभी भी महसूस हो रही थी. मेरा लुंड अकड़ने लगा. मैडम साफ़ कर रही थी, तो में अपना चेहरा छूट के और करीब ले गया और अपनी नाक छूट पर स्टडी और उसे सूंघने लगा. वो मादक गंध, मेरे नथुनों में भरने लगी. में जोरो से साँस लेते हुए उसे सूंघने लगा. मेरा लुंड ठुमके मरने लगा.

बिना अपने काम में लगी हुई थी. उसे एहसास हुआ की उसकी छूट को कुछ छू रहा है, उसने निचे देखा तो वो चौक गयी. शिव का चेहरा उसकी छूट वाले भाग से चिपका हुआ था. उसकी आंखे बांध थी, वो उसकी छूट को ऐसे सूंघ रहा था जैसे वो किसी बहोत hi प्यारी खुसबू सूंघ रहा हो. पहले तो उसे बहोत शर्म आयी, पर जल्द hi उसको भी उत्तेजना महसूस होने लगी. शिव की नाक उसे अपनी छूट पर महसूस हो रही थी. ये एहसास उसके लिए नया था. उस स्पर्श के सुखद एहसास से उसकी भी आंखे बंद होने लगी. उसकी छूट गीली होने लगी. जिसकी खुसबू से बाहेक कर शिव नाक और ज्यादा अंदर घुसाने लगा. बिना का हाथ हवामे रुका हुआ था, वो भी अपनी आंखे बंद किये इस नए अनुभव रे रोमांचित हो रही थी.

थोड़ी hi देर में बिना संभल गयी और उसने शिव को पुकारा.

बिना मैडम : हो गया, अब मुझे उतर दो. (में तो किसी और hi दुनियामे था, ये देख बिना, शर्म से पानी पानी होने लगी, उसने कनपटी आवाज में एक बार और pukara)Shiiiiiv.(Me हड़बड़ा गया और उनकी और dekha)Muje निचे उतरो, हो गया.

शिव : हहह, है. (मेने अपने हाथ की पकड़ ढीली की तो वो नीचे सरकने lagi,)(Jab बिना ने वो कड़क आंग अपनी झांघो से सरकते हुए अपनी छूट पर महसूस किआ तो सिसकी रोकने के लिए उसने अपने होठो को दांतो टेल दबा diya)(Shiv को अपने हाथ पर वो नरम नरम कूल्हे मेहुस, हुए तो उसने मैडम को कास कर अपनी और दबा दिया, जिस से लुंड छूट के होठो को फैलते हुए अंदर तक घुस गया, ये ऐसे hi खुमारी में हो गया था, पर में जल्द hi संभल गया और मेने उन्हें निचे उतरदिया, उनको मेरा उभर न दिखे इस लिए में दूसरी और घूम gaya)(Par बिना ने वो देख लिया था)

बिना मैडम : तुम आगे बैठो, hath-muh धो कर आती हु.

शिव : जी मैडम, (में फटाफट वह से आगे के रूम में चला गया और बेथ गया)

फिर वो मुझे कंप्यूटर सीखने लगी. पिछली बार भी उन्होंने बहोत कुछ सिखाया था. हम दोनों कंप्यूटर के सामने दो दो चेयर रखकर उस पर बैठे हुए थे. चेयर पर हाथ रखने के लिए हैंडल नहीं थे. उन्होंने मुझे कंप्यूटर के सामने बिठाया था और वो साइड में बैठी थी. फिर वो कंप्यूटर सीखने लगी, जब भी मुझे स्क्रीन पर कुछ दिखाना होता तो वो अपनी ऊँगली वह रख कर मुझे दिखती, पर ये करने के लिए उन्हें मेरी और झुकना पद रहा था और एक दो बार तो उन्होंने सहारा लेने के लिए अपना हाथ मेरी झंघ पर भी रखा. में लगातार उनकी और, और स्क्रीन की और देख रहा था. वो सच में सीखने में hi व्यस्त थी. मुझे अपने आप पर शर्म आयी और मैंने भी अपने मान में आये विचार को त्यागा और अच्छे स्टूडेंट की तरह सिखने लगा. करीब एक घंटा वो मुझे सिखाती रही. अब वो बिना संकोच झुक रही थी तो उनके स्तन मेरी बाह से स्पर्श हो रहे थे. मैंने बहोत कोशिस की पर उनकी नर्माहट को अपनी बाह पर महसूस कर के मेरे लुंड ने अकड़ना शुरू कर दिया.

Me(Bina) अपनी धुन में शिव को सब सीखा रही thi.Mera ध्यान hi नहीं गया की में शिव से इतना सात कर सीखा रही हु. वैसे भी वो मेरा स्टूडेंट था और एक अच्छा लड़का था. क्या फर्क पड़नेवाला था. आज सुबह नव्या से बात हुई थी. नव्या का hi फ़ोन आया था.

नव्या : Hi, किसी है?

बिना : क्या यार, ये क्या भेजा था तूने?

नव्या : क्यों लिंक ओपन नहीं हुई थी क्या?

बिना : नहीं वो ओपन तो हुई थी.

नव्या : To....Tune देखा?

बिना : तू कितनी गन्दी हो गयी है.

नव्या : (सीरियस टोन me)Tuje ऐसा लगता है?

बिना : तो और क्या कहु, वो सब क्या था? कैसी कैसी फिल्म थी.

नव्या : अब हम छोटी बच्चिया नहीं है बिना, बचपन से हमे सिखाया जाता है की ये सब गन्दा है इस से दूर रहो, और जैसे hi शादी होती है वही लोग कहते है ये सब करना पड़ता है. जो गन्दा था वो अब सही हो गया. पहली hi रात एक मर्द हमारे सरे कपडे उतर कर वही सब गन्दा हमारे साथ करता है. तो अब बच्चोंवाली बाटे छोड़ और बड़ी बन.

बिना : (नव्या काफी सीरियस थी, और वो जो कह रही थी वो भी सही tha)Ha यार, पर...

नव्या: तूने देखा?

बिना : (शरमाते hue)Ha एक दो देखि.

नव्या : तो तुजे पता चला, औरत और मर्द क्या क्या करते है. अब ये बता क्या तुम्हारे जीवन में ये सब या इनका कुछ प्रतिशत होता है?

बिना : नहीं यार, ऐसा तो हम कुछ भी नहीं करते.

नव्या : देख बिना, ये छोटी बात नहीं है. अब ये बता, तुम करते क्या हो?

बिना : (उसे शर्म आ रही थी, पर नव्या सीरियस thi)Wo, ....वो रत को wo...aate है, जब उन्हें वो सब करना होता है तो वो लाइट बंद करने के बाद फिर wo.....wo मेरे स्तन को दो चार बार दबाते है फिर मेरे निचे का कपडा ऊपर कर के वो अंदर दाल देते है और एक दो मिनट में सब करके कम सो जाते है.

नव्या : तू गवर है क्या, इतना पढ़ी लिखी पर कोई फायदा नहीं हुआ.

बिना : ऐसा क्यों बोल रही है, हमे क्या ये सब पढ़ाया जाता है, और पढ़ने में इतना व्यस्त थे, और सब कहते थे ये गन्दा है तो कभी उस बारेमे सोचा hi नहीं.

नव्या : अरे पर दो साल हो गए तेरी शादी को, अब तो कुछ सिख लेती.

बिना : मुझे क्या पता, मुझे लगा ऐसा hi सब होता होगा.

नव्या : चल कोई बात नहीं, अब मेरी बात ध्यान से सुन, वो वीडियो देखना और अगर तुजे मान हो की कुछ करू तो हिचकिचाना नहीं, तुजे जो अच्छा लगे वैसा करना, कुछ गन्दा नहीं होता.

बिना : तू कहना क्या चाहती है, मुझे जो अच्छा लगे वो करू से क्या मतलब है.

नव्या : पागल, अगर वीडियो देखते वक़्त तुजे लगे के तुजे अपनी नीचेवाली जगह को छूना है सहलाना है या उसमे ऊँगली डालनी है या जो भी तेरा मान करे, उसकी बात कर रही हु.

बिना : ये तू क्या कह रही है यार, ऐसा भी करते है.?

नव्या : उन वीडियो में अकेली औरत की भी वीडियो होंगी उसे देखना तू समाज जाएगी . चल अभी मुझे काम भी निपटना है. फिर आराम से बात करते है.

जब में घर के काम कर के थोड़ा थक गयी तो मेने वीडियो देखि, में बड़े ध्यान से सब देख रही थी, लड़कीअ कितनी बेशर्मी से सब कर रही थी. ये सब करते हुए मर्द और औरत दोनों कितने मज़े ले रहे थे. एक वीडियो में एक लड़की ऐसे hi वीडियो देखते हुए अपने साथ सब कर रही थी वो देख कर मुझे भी अपने बदन से खेलने का मान होने लगा तो में भी और अपने स्तन और अपनी छूट से खेल रही थी की तभी शिव आ गया था. (अभी जब बिना शिव के साथ थी तो उसके मान में ऐसे कोई भी ख्याल नहीं थे. और शिव उसके लिए एक स्टूडेंट hi था, वो चाहती थी की अगर उसके ज्ञान से किसी का भला होता है तो ये उसे करना चाहिए, इसी लिए वो शिव को सीखा रही थी)

जब में शिव को सीखा रही थी तो मुझे मेरे हाथ पर कुछ अजीब महसूस हुआ, पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया पर मेरा दिमाग मुझे बार बार उसी तरफ ले जा रहा था. मैंने गौर किआ तो मेरा हाथ जो मेने शिव की झंघ पर रखा था उसके निचे कुछ लम्बा और सख्त था. मैंने गौर से ध्यान दिया तो मेरे होश hi उड़द गए. इतना तो में समाज गयी की वो क्या है. में जो पढ़ा रही थी वो बोलते बोलते रुक गयी, मेरी सांसे अटकने लगी, मेने डरते डरते शिव को देखा तो वो कंप्यूटर स्क्रीन की और hi देख रहा था, और उसका चेहरा सामान्य था. जब में बोलते बोतले रुक गयी तो शिव ने मेरी और देखा, तो मैंने अपना हाथ निचे से हटा लिया और वापस पढ़ने लगी. पर मेरा ध्यान बार बार वही जा रहा था. सच कहु तो ये पहली बार था की मैंने ऐसे किसी लड़के का वो अंग छुआ था. नव्या ठीक hi कहती है में सच में गवर hi हु. शिव को पढ़ते हुए भी बार बार मेरा ध्यान शिव के उस अंग पर hi जा रहा था. उसका आकर स्पस्ट दिख रहा था. मेने जैसे तैसे पढ़ना जारी रखा पर मेरा दिल नहीं मान रहा था. मेने बड़ी हिम्मत कर के अपना हाथ उस अंग के करीब रखा, अपनी कनखीओं से मेने शिव को देखा जो बिना किसी प्रतिक्रिया के स्क्रीन को देख रहा था. मेरी धड़कने तेज चल रही थी, पर शिव का ध्यान नहीं था तो मुझे थोड़ी रहत हुई की शिव को इस बारेमे पता नहीं. थोड़ी देर बाद मेने अपनी उंगलिओ को उस अंग से टच करवाया, फिर कनखीओंसे शिव को देखने लगी. थोड़ा थोड़ा करके मैंने अपना पूरा हाथ उस अंग पर रख दिया. मुझे समाज hi नहीं आ रहा था की में क्या कर रही हु. पर मुझे कुछ कुछ हो रहा था. मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल हो रही थी. अब मुझे शिव को पढ़ने में थोड़ी दिक्कत आ रही थी, मेरा ध्यान भटक रहा था. मेने बड़ी मुश्किल से शिव को कहा

बिना मैडम : शिव, मैंने तुम्हे जो सिखाया है उसे रिपीट करो, में देखती हु.

शिव : जी मैडम.

में ऐसे hi उस अंग को अपने हाथ पर महसूस कर रही थी, में अपने हाथ को जरा भी हिला नहीं रही थी. वीडियो में कैसे वो लड़कीअ उस अंग के साथ खेलती थी वो मुझे याद आने लगा. में हलके से उस अंग का जायजा लेने लगी, उसको छूने से मुजमे एक अलग तरह की भावनाये उमड़ रही थी. में अपने आप को रोक नहीं प् रही थी. मेरी नजर स्क्रीन की और थी पर में कनखियों से शिव को भी देख रही थी. मुझे पता था की शिव अपने काम में खोया है, उसे कुछ पता नहीं है.

(पर वो यहाँ गलत थी. में बेचारा कब से अपने आप पर हो रहे अत्याचार को सेह रहा था. अत्याचार इस लिए की में इसके सामने कुछ कर नहीं शक्ति था. ये मेरी क्लास की क्लास्तीचेर थी. उनके साथ में ऐसी वैसी हरकत नहीं कर शक्ति था.) में काफी उत्तेजित हो चूका था. बिना मैडम का हाथ मेरे लुंड पर कब से था. वो हलके हाथो से उसे दबा रही थी. मुझे लग रहा था की वो भी स्नेहा मैडम की तरह मुज से वैसा रिलेशन बनाना चाहती है. उनके सॉफ्ट स्तन मेरी बाह को छू रहे थे और उनका हाथ कब से मेरे लुंड को दबा रहा था. मुज से अब रहा नहीं जा रहा था. मेने हिम्मत इक्कट्ठी की और उनकी और देखा तो वो थोड़ी दर गयी और अपना हाथ हटा लिया. वो थोड़े दर से मेरी आँखों में देखने लगी. में खड़ा हो गया तो वो भी कड़ी हो gayi.(Bina कुछ समाज नहीं प् रही थी की अब वो क्या करे, शायद शिव को उसकी हरकत का पता चल गया था, वो शर्मिंदगी महसूस कर रही थी, वो लाचारी से शिव को देखने लगी) मुझे लग रहा था की मैडम को भी मुज से वही चाहिए जो स्नेहा मैडम को चाहिए था, तो मेने उनके सर को पकड़ा और उनके होठो पर अपने होठ रखदिये और उसे चूसने लगा, साथ में एक हाथ से उनका स्तन पकड़ा और उसे दबाने laga.(Bina, शिव की इस हरकत से हक्की बक्की रह gayi)Me काफी उत्तेजित हो गया था तो में उनके होठो को जोरो से चूस रहा था और साथ में स्तन को भी दबा रहा था, एक बार तो मुझे लगा वो मुज से छूटना छह रही है पर मेरे ऊपर उत्तेजना इतनी हावी थी की में कुछ समाज hi नहीं प् रहा tha.(Shiv का ऐसे मेरे होठो को चूसना मुझे अजीब लग रहा था, वो मेरे स्तन को भी दबा रहा था, मुझे अपने बदन में एक अजीब सा एहसास होने लगा था, शिव लगातार मेरे होठो को चूस रहा था और मेरे स्तन को दबा रहा था सेहला रहा था, पता नहीं पर मुझे बहोत hi अच्छा लग रहा था, शिव मेरे मुँह में अपनी जीभ डाली और मेरी जीभ से खेलने लगा, मेरी आंखे बंद हो गयी, में बस बूत की तरह कड़ी थी, अचानक शिव ने एक हाथ से मेरी छूट को पकड़ लिया और दबाने लगा, मेरी छूट पूरी गीली हो गयी थी, मेरे अंदर एक अजीब से तरंग दौड़ रही थी, मेने अपने पेअर थोड़े खोल दिए, अब शिव मेरी पूरी छूट को मसल रहा था, मेरी छूट से निकल रहे रास को में साफ साफ महसूस कर रही थी, में कही खोटी जा रही थी, अचानक मुझे होश आया की शिव क्या कर रहा है, में ऐसा नहीं कर शक्ति. मेने छूटने की कोशिस की पर शिव ने मुझे बहोत मजबूती से पकड़ रक्खा था) में उन को एक हाथ से थामे उनकी फूली हुई छूट को दबोच रहा था, उनकी छूट से बह रहे रास से मेरी उंगलिया चिप छिपी हो रही थी, मुझे पता hi नहीं चला की वो मुज से छूटने का प्रयास कर रही है. में तब होश में आया जब मेरे गाल पर एक जोर का चांटा पड़ा. में अपने गाल पर पड़े चांटे से सन्न रह गया. मैंने बिना मैडम को देखा तो वो गुस्से से मुझे देख रही थी.
 
अपडेट 37

में तब होश में आया जब मेरे गाल पर एक जोर का चांटा पड़ा. में अपने गाल पर पड़े चांटे से सन्न रह गया. मैंने बिना मैडम को देखा तो वो गुस्से से मुझे देख रही थी.

बिना मैडम : (गुस्से में जोर se)Ye क्या घटिया हरकत है.

शिव : (मुझे समाज नहीं आ रहा था वो क्यों गुस्सा कर रही है, कब से वही मेरे लुंड को दबा रही thi)Me.....wo...

बिना मैडम : दफा हो जाओ यहाँ se....geeeeet ोुउउउउउउत.

शिव : (डरते hue)Sorry मैडम.

बिना मैडम : मेने कहा न जाओ यहाँ से.

में दर गया और जल्दी से वह से निकल gaya.Muje कुछ समाज नहीं आ रहा था. एक तो वो hi कब से मेरे लुंड से खेल रही थी और जब मेने ये किआ तो उल्टा वो मुज पर hi भड़क गयी. में इन्ही विचारो में जा रहा था की रस्ते में एक गाड़ी मेरे पास रुकी, जब शीसा निचे हुआ तो मेने देखा स्नेहा मैडम थी.

स्नेहा मैडम : इतनी धुप में कहा घूम रहे हो?

शिव : जी वो एक काम था तो गया था.

स्नेहा मैडम : (स्नेहा ने देखा की शिव के चेहरे पर परेशानी hai)Pehle अंदर baitho.(Me अंदर बेथ गया, अंदर ठंडक thi)Koi परेशानी है?

शिव : (फीकी मुस्कान के sath)Nahi, ऐसी कोई बात नहीं.

स्नेहा : ठीक है, नहीं बतानी तो मात बताओ, कहा जा रहे हो?

शिव : जी घर hi जा रहा था.

स्नेहा मैडम :(मुस्कान के sath)Jaldi है क्या?

शिव : (सच में स्नेहा को देख कर hi मेरा मूड ठीक होने लगा था. सच कहु तो सिर्फ सेक्स का रिस्ता hi नहीं था, उसके अंदर कुछ और भी था जो मुझे उसकी और खिंच रहा था, मुस्कुराते हुए मेने न में गर्दन हिलाते हुए kaha)Nahi जल्दी तो नहीं है.

स्नेहा मैडम : (मेरे हाथ पर हाथ रख kar)Ghar चलोगे?

शिव : (मेने उनकी आंखोमे देखा, उनकी आँखों में प्यार चालक रहा था, मेने मुस्कुराते हुए kaha)Chalo.

वो खुस हो गयी, फिर में उनके साथ उनके घर गया. स्नेहमड़ाम सचमुच कमल थी. उनके साथ मज़ा भी बहोत आता है. और अब वो मुझसे गर्लफ्रेंड की तरह पेस आती है तो और ज्यादा मज़ा आता है. उनका भरा हुआ शरीर मसलने में एक अलग hi एहसास होता है. हम उनके घर पहुंचे और अंदर जाते hi मेरे होठो को चूसते हुए मुझसे लिपट गयी. मेने भी उन्हें कास के बहो में भर लिया, कपड़ो के ऊपर से उनकी गांड सहलाते हुए में उन्हें किश करने लगा. थोड़ी देर किश करने के बाद वो मुझे देख कर मुस्कुरायी. वो मुझे अपने बैडरूम में ले गयी. हम दोनों ने कपडे निकलडिये, मेने उन्हें पकड़ा और उनके होठो पर टूट पड़ा.

उनके पुरे शरीर पर पप्पीो की बरसात कर दी, वो मुझे देखते हुए आहे भरने लगी.





मेने उन्हें बीएड पर लेटाया और उनकी मांसल झांघो को फैलाकर उनकी छूट को चाटने लगा.





उनकी छूट पर हलके हलके बल निकल आये थे, गोरी त्वचा पर काळा बल अलग hi रंगत दे रहे थे, वो थोड़ी ऊपर उठी और मुझे अपनी छूट चाट ते हुए देखने लगी.

स्नेहमड़ाम : अह्ह्ह शहहह शठ शठ अह्ह्ह शिव तुम्हारे लिए तड़प काम hi नहीं हो रही, दिन बा दिन बढ़ती hi जा रही है. (मेने उनकी नहंहो और उनके पैरो को किश करते हुए अपने लुंड को उनकी छूट में उतर दिया, धक्के लगाने से उनकी छूट से पानी निकलने लगा, गुलाबी होठ फ़ैल कर लुंड से लिपट गए.





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वो मेरी गॉड में बेथ गयी और उछाल उछाल कर अपनी छूट में लुंड लेने लगी, वो मुझे किश कर रही थी और में उनके स्तन और उनकी भरी हुई गांड को दबाते हुए उन्हें छोड़ रहा था.

में उन्केशरीर पर हलके हल्के काट रहा था जिस से निशान न बने. उनको भी बहोत मज़ा आ रहा था. उनको उल्टा कर घोड़ी बनाकर अपना लुंड दाल दिया. उनके कूल्हे मसलते हुए में उन्हें छोड़ने लगा, कूल्हे थपकीओ से थिरकने लगे, और लुंड छूट को फैलाये अच्छे से अंदर बहार होने लगा, कफीडेर छोड़ने के बाद मेने उन्हें बिस्तर पर उल्टा लेता दिया





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और उनके पहाड़ जैसे कूल्हों को फैला कर छूट और गांड के छेड़ को चाटने लगा.

के बिच से होते हुए अपना लुंड छूट में दाल दिया. उन्होंने अपने पेअर फैला दिए, में उनकी गर्दन को काट ते . चुम ते धक्के पे धक्के मर रहा था, पूरा कमरा सिसकीओ और अहो से गूंज रहा था. पुरे नंगे हो कर उनको अच्छे से छोड़ा और उनके अंदर अपना माल भर दिया.





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हम दोनों बहो में लिपटे थे और उनकी छूट से सफ़ेद वीर्य बह रहा था.

शिव : कैसा लगा स्नेहा?

स्नेहा : बहोत मज़ा आया, तुम्हे?

शिव : तुम्हारे साथ मज़ा न आये ऐसा हो शक्ति है, तुम हो hi kamal.(Wo मुस्कराते हुए मेरी छाती पे हाथ फिरने लगी.) एक बात पुछु? पहलीबार तुम्हे कैसा लगा था, मेरा मतलब है खून निकला था? तुम्हे दर्द हुआ था?

स्नेहा : (मेरी और सवालिया नज़रो से देखते हुए) तुम्हारे साथ पहली बार?

शिव : नहीं, सबसे पहली बार.

स्नेहा : क्यों पूछ रहे हो?

शिव : मुझे जान न है. क्या लड़की को पहली बार बहोत दर्द होता है?

स्नेहा : है दर्द तो हुआ था, और खून भी निकला था. उस वक़्त तो ऐसा लग रहा था की में ऐसा क्यों कर रही हु, पर बाद में सब ठीक हो गया. पर तुम क्यों पूछ रहे हो? कही मेरी कोई सौतन तो नहीं धुंध ली.

शिव : ये सौतन क्या होती है?

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Buddhu, मेरे तुम्हारे साथ सम्बन्ध है, और अगर किसी और लड़की के साथ भी तुम्हारे सम्बन्ध है तो वो मेरी सौतन हुई. क्या सच में कोई पसंद आ गयी है? (थोड़ी भावुक हो kar)Ek न एक दिन तो ये होना hi था, (मुज से लिपट ते hue)Muje भूल तो नहीं जाओगे न शिव, मुझसे भी मिलोगे न.?

शिव : (उसके बालो में हाथ फेरते hue)Aisa क्यों कह रही हो? अभी तो फ़िलहाल कोई नहीं hai(mene जूथ बोलना hi उचित समाज, और वैसे भी में लतादिदी के बारेमे तो बता नहीं सकता था, लतादिदी के व्यव्हार से तो यही लग रहा था की ये सब जल्द होगा, मुझे उनके लिए चिंता हो रही थी इसलिए में ये सब जान न चाहता था) मेने बस सुना था तो पूछ लिया. पर तुम्हे ऐसा क्यों लगा की में तुमसे दूर चला जाऊंगा.

स्नेहा : ये हम लड़कीओ की फितरत होती है शिव, जैसे मुझे तुम्हारा किसी और के साथ सम्बन्ध अच्छा नहीं लगेगा वैसे hi उसको भी हमारा सम्बन्ध अच्छा न लगे. वो चाहेगी की तुम सिर्फ उसीके हो कर रहो. लड़का सिर्फ एक लड़की से और लड़की सिर्फ एक hi लड़के से सम्बन्ध बनाये इसे hi समाज में अच्छा समाज जाता है.

शिव : ऐसा क्यों? तुमने भी तो पवनसीर के रहते मुज से सम्बन्ध बनाये न. (वो मेरी आँखों में देखने लगी)

स्नेहा : वो मेरी मज़बूरी थी शिव, पहले मेने तुम्हारे साथ सम्बन्ध मज़बूरी में बनाये, पर अब तो मुझे ये भी गलत नहीं लगता, क्या इंसान को किसी और से प्यार नहीं हो शक्ति? हम कई रिस्तो में एक से ज्यादा से प्यार करते है, जैसे कई बहने होती है, कई भाई होते है, कितने सरे दोस्त भी होते है, तो सिर्फ इसी रस्ते में एक से hi प्यार क्यों? सवाल तो मेरे मान में भी आते है पर शायद यही इस समाज की ृत है. मुझे भी अपने मान से तैयार होना hi पड़ेगा की तुम्हारे जीवन में भी और कोई आ शक्ति है और मुझे उसे भी अपनाना hi होगा. (फिर मेरी और मुस्कुराते हुए देखती है और समजनेवाले लहजे में) अगर उस लड़की का पहली बार है तो थोड़ा ध्यान से करना, वर्ण बेचारी की हालत ख़राब हो जाएगी.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

स्नेहा : (मेरे लुंड को हाथ में पकड़ कर सहलाते hue)Iss की वजह से, तुम्हारा ये बाकिओ के मुकाबले बड़ा है, इतने सालो बाद भी इससे लेने में मुझे तकलीफ होती है तो वो तो बेचारी पहलीबार अपने अंदर ले रही hogi.(Unke लुंड सहलाने से लुंड वापस कड़क हो गया) वाइज एक बात है, एक बार वो इससे ले लेगी तो फिर तो ये उसे मज़े hi करवाएगा. (वो मेरे लुंड को फिर से चाटने लगी,





में मुस्कुराते हुए उसका शिर सेहला रहा था, जब मेरा लुंड पूरा कड़क हो गया तो वो मेरे लुंड पर चढ़ गयी और लुंड को अपनी छूट में ले लिया.)





आज मुझे दर लग रहा है शिव, तुम मुझे छोड़ मत देना, चाहे कभी कभी hi सही पर मुझसे मिलते रहना, मिलोगे न?

शिव : क्या तुम भी पागलो जैसी बाते कर रही हो, तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे ये हमारा आखरी बार है. ऐसा कुछ नहीं है, मुझे नहीं पता ये गलत है या सही, में ये भी नहीं जनता की एक से ज्यादा के साथ ऐसे सम्बन्ध सही है या गलत, में बस ये जनता हु की में अगर किसी को ख़ुशी दे सकता हु तो में पीछे नहीं हटूंगा (उनके बड़े कूल्हों को मसलते हुए निचे से धक्के लगाने लगा, फिर चुदाई सुरु हो गयी









और एक बार फिर मेने अपना वीर्य उनकी छूट में भर दिया.)





हम दोनों ने मिलकर नास्ता भी किआ. वो मुझे छोड़ने आना चाहती थी पर मैंने मन कर दिया. उनको किश कर के में घर आ गया और फिर कपडे बदल कर जूही मैडम के साथ स्टेडियम चला गया. जूही मैडम और में बहोत दौड़े. उन्होंने कैसे और स्टेमिना बढ़ाना चाहिए वो सब संजय. वो मुझसे सिर्फ काम की hi बात कर रही थी. मुझे उनका ये बर्ताव चुभ रहा था.

जूही मैडम : शिव, अगर तुम सच में एथलिट बन न चाहते हो तो तुम्हे बहोत म्हणत करनी पड़ेगी, इतने से नहीं होगा, तुम्हारे सामने आने वाले लोग कई सालो से म्हणत कर रहे होंगे. सिर्फ हाइट की वजह से तुम नहीं जित सकते. तुम्हे जब भी समय मिले तुम्हे दौड़ना होगा. तुम्हे याद hi होगा की कोच सर के वह वो लड़का था, वो स्टेट के लिए तयारी कर रहा था, तुम उस से भी हर गए थे. ये इतना भी आसान नहीं होता, इसके लिए मेहनत लगती है. तुम दौड़ लगाओ, मुझे थोड़ा काम है में आती हु.

वो अंदर बिल्डिंग में चली गयी, में ग्राउंड के चक्कर लगाने लगा. जूही अपना काम ख़तम करके लौट रही थी तो उसे वो गार्ड मिल गया जो कल लड़ई के वक़्त था.

गार्ड : मैडम.

जूही : (वो रुक गयी और उस गॉर्ड को देखने lagi)Ha बोलो.

गार्ड : मैडम एक बात केहनी थी. वो जगदा हुआ था न उस बारेमे.

जूही : है बोलो, क्या कहना है?

गार्ड : मैडम, उस लड़के की कोई गलती नहींथी, जो आप के साथ होता है. वो दूसरे लड़के थे न वो आपके बारेमे गन्दी बाते कर रहे थे इस लिए उस लड़के ने जगहदा किआ था. वो तो कल आप उस लड़के पर गुस्सा कर रही थी, इस लिए मेने आप को बताया. वो आपके लिए hi लड़ रहा था मैडम.

जूही ने ज्यादा कुछ नहीं पूछा, वो समाज गयी थी की लड़के क्या बाते करते है. उसे शिव पर प्यार आने लगा. उसने गार्ड का सुक्रिया किआ और भर जाने लगी. उसके चेहरे पर मुस्कान फिर लौट आयी थी.

में दौड़ रहा था तो मैडम आयी. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मुझे उनका कुछ समाज नहीं आ रहा था, कभी वो गुस्सा होती है कभी मुस्कुराती है. उसके बाद वो मेरी स्ट्रेचिंग करवाने लगी. उन्होंने मेरे पेअर को मोड़ कर स्ट्रेचिंग करवाई, फिर हाथो की. वो हाथो को कंधे से पकड़ कर पीछे की और खींचती थी, वैसे तो ये रोज़ होता था पर आज मुझे लगा की वो ज्यादा टाइम ले रही है, उन्होंने मुझे पीछे से बहो में जकड रखा था, उनके स्तन मेरी पीठ पर अपना एहसास दिला रहे थे. एक बार तो मुझे लगा वो मेरे गले पर किश कर रही है. मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, जब में उन्हें स्ट्रेचिंग करवा रहा था तो उनके पैरो को दोनों तरफ फैलाकर दबाया, मुझे छूट का भाग स्पस्ट दिख रहा था, एक बार तो मेरी नजर वही अटक गयी, जब मेने जूही मैडम की और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, एक दो पल हम ऐसे hi देखते रहे, मेने अपनी निगाहे झुका ली और वापस अपने काम में लग गया. अपने हाथ उनकी बगल से निकल कर उनके कंधे थम कर उन्हें दये बाये करने laga.(Juhi को शिव का लुंड अपनी पीठ पर महसूस होने लगा, उसकी आंखे बंद हो गयी, जब शिव उसे छोड़ने लगा तो उसने बहाना बनाकर थोड़ी देर और करने को कहा) में उनको स्ट्रेचिंग करवाने के चक्कर में उनसे इतना नजदीक था की मुझे भी एहसास हो रहा था की शायद मेरे लुंड का एहसास उन्हें हो रहा है. उनके बदन से आती पशीने की खुसबू मुझे विचलित कर रही थी. में दुविधा में था, दिल कर रहा था की उनको बहो में भर लू पर में ऐसा नहीं कर शक्ति था, पहले hi बिना मैडम ने थप्पड़ मर दिया था, कुछ सिखने को मिल रहा था वो भी हाथ से जाता रहा. अगर जूही मैडम के साथ कुछ वैसा hi हो गया तो मेरा कर्रिएर hi ख़तम हो जायेगा. मेने जैसे तैसे अपने आपको संभाला.

मेने उन्हें छोड़ दिया, उन्होंने मुद कर मेरी और देखा तो मेने अपनी नज़ारे झुका ली न वो कुछ बोली न में. हम लोग वह से निकल गए, वो मुझे घर छोड़ गयी. घर पर आज काम था तो में काम में लग गया. विणा और रंजन दोनों आज हेल्प कर रही थी. जब थोड़ा सा काम बचा था तो विणा थक गयी हु कह कर वह से चली गयी. अँधेरा हो गया था और वह एक माध्यम रौशनी का बल्ब जल रहा था. जब काम ख़तम हुआ तो मेने रंजन को देखा तो वो मुस्कुराने लगी. में उसके कबीब जाकर खड़ा हो गया वो मेरी आँखों में देख रही thi.Uske चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी और आँखों में निमंत्रण. मेने अपना एक हाथ उसके गाल पर रखा तो उसकी आंखे बंद हो गयी. मेने उसे किश किआ.

थोड़ी देर बाद हम दोनों अंदर आ गए, हमे सामने विणा मिली, हमे ऐसे हाथ में हाथ डेल देख उसका मुँह खुला का खुला रह गया. जब रंजन की नजर लतादिदी पर पड़ी तो उसने हाथ छोड़ दिया, लतादिदी का हमारी और ध्यान नहीं था. हमने हाथ मुँह धोया. में रूम में चला गया और वो अपने काम में लग गयी. वो सचमुच कमल की लड़की है. रात को हम पढ़ने बैठे तो में उसके सामने बैठा तो वो अपनी नाराजगी जाहिर करने लगी और आँखों के इससरए से अपने बाजु में बेथ ने को बोलने लगी. मेने इससरए से मन कर दिया और पढ़ाई में ध्यान देने को बोलै तो वो अपना मुँह बनाते हुए पढ़ने लगी. उसका चेहरा देख मुझे हंसी आ गयी तो पढ़ने के बहाने में उसके बाजु में बैठगया तो वो बहोत खुस हो गयी. उसका चेहरा खिल उठा. ऐसे hi हमने पढ़ाई की और में अपने रूम में आ गया. दीदी अपनी आंखे बंद किये हुए लेती थी. में बिना आवाज किये अपने कपडे उतरने लगा और अंडरवियर में आ गया. जब में लेटने लगा तो दीदी मो मुस्कुराते पाया.

शिव : मुझे लगा आप सो गयी है.

लता दीदी: तेरे बगैर नींद कहा आती है?

शिव : कितनी गर्मी है न दीदी, ऊपर से बारिश है की आने का नाम hi नहीं ले रही. पता नहीं आप इतने कपडे पहन कर कैसे सो पति है.

लतादिदी : मुझे भी बहोत गर्मी होती है, पर में तेरी तरह तो नहीं सो सकती न.

शिव : आप सरितादिदी के साथ जा कर सो जाईये, वह तो आप को दिक्कत नहीं होगी.

लतादिदी : वह तू थोड़े न होगा. में गर्मी तो सेह सकती हु, पर तुज से दूर नहीं रह शक्ति.

शिव : (हिचकिचाते हुए) तो उतरदो न, में दूसरी और करवट ले कर सो जाता हु, में नहीं देखूंगा.

लतादिदी : तू पागल हो गया है क्या? में ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : क्यों आप को मुज पर भरोसा नहीं. में सच में नहीं देखूंगा.

लतादिदी : एक मरूंगी, मुझे तुज पर भरोसा नहीं होगा क्या. तू देखना चाहता है की मुझे तुज पर कितना भरोसा है. ठीक है थोड़ी देर उधर घूम जा.

पता नहीं दीदी क्या करना चाहती थी, में घूम गया, मुझे बस उनकी चुडिओ की आवाजे सुनाई दे रही थी. थोड़ी देर बाद सब शांत हो गया. मेने मुद कर देखा तो वो एक चद्दर ओढ़े लेती हुए थी.

शिव : (उन्हें ऐसे चद्दर ओढ़े देख मुझे आश्चर्य hua)Itni गर्मी क्या काम थी की आपने चद्दर ओढ़ ली दीदी.

लता दीदी : (आज पता नहीं लता ने भी मान में क्या थान लिया था, वो जैसे तय करके बैठी थी) ये चद्दर किस लिए ोध्राखि है ये तू चद्दर हटा कर देख ले.

में उनको सवालिया नज़रो से देखते हुए चद्दर हटाई तो में हैरान रह गया. वो पूरी नंगी थी, में हैरान हो गया, दीदी पूरी नंगी, ये में क्या देख रहा था.





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लतादिदी : देख लिया, मुझे कितना भरोसा है तुज पर.

शिव : दीदी !, (में उन्हें हैरानी से देख रहा था, उनके सुडौल स्तन ऊपर को उठे हुए थे, एक काळा घेरे के बिच मन मोहक चूचक उठा हुआ था, निचे सपाट पेट और गहरी नाभि थी. बालो से ढकी हुई छूट फूल कर अपना आकर दिखा रही thi)Aap ने ऐसा क्यों किआ दीदी.

लता दीदी : (मेरी आँखों में देखते हुए), क्यों की में तुजसे प्यार करती हु, और मुझे इस पूरी दुनिया में तुज से ज्यादा भरोसा किसी पर नहीं.

शिव :(मेने उन्हें अपनी बहो में भर लिया, वो भी मुज से बिना किसी संकोच के लिपट गयी, मेने मज़ाक़िआ लहजे me)Aur अगर किसी दिन मेने आप के साथ कुछ कर दिया तो?

लता दीदी : (मेरी आँखों में प्यार से देखते हुए) तुजे जो करना है कर ले, में तुजे कभी नहीं रोकूंगी.

शिव : (उनके बोलने से में हड़बड़ा गया फिर मुस्कुराते hue)Aap कमल हो, ऐसे किसी लड़के के साथ ऐसी हालत में सोना चाहती हो, और फिर भी आप को कोई फ़िक्र नहीं.

लता दीदी : में किसी लड़के के साथ नहीं हु, में अपने शिव के साथ hu.(Unhone मेरी अंडरवियर भी निकल दी) ले अब तू भी पूरी तरह से आज़ाद है, कर ले जो करना है.

शिव : दीदी, आप पागल हो गयी हो, किसी अच्छे दिमाग के डॉक्टर को दिखाना hoga.(Unhone अपना पेअर मेरे ऊपर चढडिया जिस से मेरा लुंड उनकी छूट की दरार में घुस गया, में घबरा gaya)Kya कर रही हो दीदी.

लता दीदी : मुझे ऐसे hi रहना है.





शिव: (सच में मुझे सीए एहसास कभी किसी के साथ नहीं हुआ, दीदी पूरी तरह से नंगी मेरी बहो में थी, पर फिर भी मुझे उन्हें प्यार करने का hi मान हो रहा था, सेक्स करने का नहीं.

(में उनकी पीठ पर अपने हाथ से सेहला ने लगा, उनका शरीर गर्म था, गर्मी में में और गर्म हो रहा था, मुनके शरीर से आती मादक गंध मुझे बेहला रही थी, उनके नाजुक हाथ मेरी को सेहला रहे थे, उनका मखमली शरीर मुझे अपनी और खिंच रहा था, में उन्हें सहलाते हुए दबा रहा था. वो मुझे अपनी बहो में कास टी जा रही थी, दोनों पुरे नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए थे, मुझे एहसास हो रहा था की मेरा लुंड उनकी छूट के छेद पर लगा हुआ है, उस चिपचिपे गरम छेद को अब मेरा लुंड बचत अच्छे से पहचानता था, वो ठुमके लगाने लगा था, उसे अंदर जाना था. पर इतना सब हो जाने के बाद भी मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी आगे बढ़ने की, हम दोनों आंखे बंद किये बस एक दूसरे को महसूस करते हुए सेहला रहे थे. थोड़ी देर में दीदी हम दोनों hi सो गए.

कुछ लड़के रात के सन्नाटे में बैठे दारू पि रहे थे. किसी के हाथ में बियर की बोतल तो किसी के हाथ में इसके के गिलास थे. सबको नशे ने घेर रक्खा था. एक सख्स जो गुंडा था, नाम था उसका चमन लुक्खा वो अपनी लड़खड़ाती जबान में बोन लगा.

चमन : क्या मिककीभाई, मुझे बोलना था न, (दूसरे बैठे लड़को की और इस्सर करके) इन चुतियो को क्यों ले गए थे, अभी ये बच्चे है, सके खुद भी मार खा आये और आप को भी मार खाने दिया. कल आप मेरे साथ चलना. उस लौंडे को मर मर कर उसका भरता न बना दिया तो कहना. और फिर उस लौंडिया को आपके कदमो में रख dunga.(Mikky पेग लगते हुए उसकी और देख रहा था, ये वही लड़का था जो संयम के पीछे पड़ा था)

मिक्की : (अपना गिलास ख़तम होने par)E साली, पेग bana(Ek लड़की थी वह, सिर्फ पंतय पहने थी, वो पेग बनाने लगी, मिक्की ने उसका निप्पल पकड़ कर मरोड़ दिया)

लड़की : आईईईई

मिक्की : चुप कर साली रंडी, अगर तुज में उल्टा मजा आता तो मुझे उसके पीछे न घूमना पड़ता. (अपना पेग लेते हुए) ले चूस मेरा लुंड, कल उस कुटिया को मेरा लुंड चुसवाऊँगा. साली, मुझे मन करती है, वो जानती नहीं मुझको. ऐसी हालत करूँगा की याद रखेगी, साली रंडी.

चमन : आप फ़िक्र मात करो भाई, कल वो आपके निचे होगी.
 
अपडेट 38

मैनेजर एक होटल में बैठा चाय पि रहा था. उसके दिमाग में यही चल रहा था की कैसे वो रंजन को अपने जाल में फसाये. वो सोचने लगा की जैसे सरिता को फसाया था क्या वैसे hi रंजन को फसाये. सच कहे तो सरिता अपने आप hi जाल में फंस गयी थी. लता और दूसरे बड़े बच्चे स्कूल गए हुए थे. सरिता को उस दिन पेट में दर्द था तो वो स्कूल नहीं गयी थी. वैसे भी उसे पढ़ाई में खास रूचि नहीं थी तो उसने उस दिन स्कूल से छुट्टी ले ली थी. उस बेचारी को क्या पता था की ये उसकी बहोत बड़ी गलती है. वो अपने कमरेमे आराम कर रही थी. दूसरे छोटे बच्चे कमरे में सो रहे थे.

तभी मैनेजर आया.

मैनेजर : (बड़े प्यार से) क्या हुआ सरिता, तुम स्कूल नहीं गयी?

सरिता : (वैसे भी वो मैनेजर से बहोत डर्टी थी, वो था भी ऐसा, बात बात पे गुस्सा और मरने लगता था, उसे आश्चर्य भी हुआ की ये इतने प्यार से क्यों बात कर रहा है) जी... जी वो तबियत ख़राब है, इस लिए नहीं gayi.(Wo उठ बैठी थी)

मैनेजर : (वो उसके पास अपने घुटने मोड़ कर बेथ गया और उसकी पीठ सहलाते हुए) क्या हुआ? मुझे कह देती, डॉक्टर के पास जाना है.

सरिता : (घबराते hue)Nahi, इसकी कोई जरुरत नहीं, अभी ठीक हो जायेगा. (वो जिस तरह से उसे छू रहा था वो उसे जरा भी अच्छा नहीं लग रहा था)

मैनेजर : (अपने सब्डोमे सेहद जैसी मिठास लेट hue)Are बीटा, मुझे कह तो देती, अभी रुको में तुम्हे दवाई देता हु (वो अपने ऑफिस में गया और दवाई ले आया और उसे सरिता को देने लगा)

सरिता : (हिचकिचाते hue)Nahi नहीं में ठीक हु.

मैनेजर : ऐसे कैसे ठीक हो, ये दवाई तो तुम्हे लेनी hi पड़ेगी lo(Usne जबरदस्ती दवाई खिला दी) अभी थोड़ी देर में सब ठीक हो jayega.(Wo वह से बहार चला गया)

सरिता को मैनेजर के व्यव्हार से बड़ा आश्चर्य हो रहा था. वो वापस लेट गयी. थोड़ी hi देर में उसका शिर घूमने लगा, उसे लगने लगा जैसे पूरी धरती गोल गोल घूम रही है. फिर सब शांत हो गया. वो अपनी आंखे खोलना चाहती थी पर वो खोल नहीं प् रही थी. उसके तन बादाम में गर्मी लगने लगी थी. वो चाहती थी की वो अपने सरे कपडे उतर दे. पर वो हाथ भी नहीं हिला प् रही थी. तभी उसे लगा की कोई उसके स्तन को दबा रहा है. उसे बहोत अच्छा लग रहा था, धीरे धीरे वो हाथ उसकी छूट को कपड़ो के ऊपर से hi सहलाने लगे. वो मचलने लगी, ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था. धीरे धीरे उस सख्स ने उसके सरे कपडे निकल दिए. और वो उसकी टंगे फ़ैलाने लगा. उसे अपनी छूट पर एक डंडे जैसा चुभने लगा, उसके शरीर को वो सब बहोत अच्छा लग रहा था, तभी वो डंडा उसकी छूट को चीरता हुआ उसके अंदर घुस गया, उसे तेज दर्द का एहसास हुआ, उसने आंखे खोल दी तो वो मैनेजर था, वो उसे धकेलने लगी, पर वो लगातार उसे नोचने लगा

(आगे जो कुछ भी हुआ वो में विस्तार में लिख नहीं शक्ति क्यों की सरिता उस वक़्त बालिग नहीं thi,)Jab सब ख़तम हुआ तो वो रो रही थी. वो मैनेजर ने उसे धमकी दी थी की अगर किसी को कुछ बता या तो वो उसे यहाँ से निकल देगा. वो बहोत दुखी थी, उसे दर्द भी हो रहा था, इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं था जो उसे सहारा देता. वो अकेले अकेले रो रही थी. एक दो घंटे बाद वो जैसे तैसे उठी और बाथरूम में अपने आप को साफ़ किआ. उसकी झंगो पे खून लगा हुआ था. वो रट हुए अपने आपको साफ़ कर रही थी., उसने किसी को कुछ नहीं बताया क्यों की वो बहोत दर गयी थी. लता ने भी उसे आराम करने दिया क्यों की उसे बहोत दर्द हो रहा था.

तब से लेकर आज तक मैनेजर उसे नोचते आ रहा था.

मैनेजर : उस वक़्त तो सब छोटे थे तो कोई दिक्कत नहीं हुई, पर अब कैसे रंजन को फासो. (वो मान में सोचते हुए चाय की चुस्किअ ले रहा था)

मिक्की और उसके दोस्त और चमन लुक्खा, सब मिल कर संयम के जानेवाले रस्ते पर खड़े थे. वो लोग ऐसे खड़े थे ताकि संयम उन्हें दूरसे न देख पाए. अगर वो देख लेती है तो हो शक्ति है वो वापस लौट जाये. इस लिए वो लोग छुप कर उसका इंतजार करने लगे.

संयम अपने रूटीन के मुताबित तैयार हुई. जब उसने साइकिल नहीं ली तो उसकी बहन नाज़िआ ने इसकी वजह पूछी.

संयम : आप, मेरी सहेली वैस्वी अपने स्कूटर पर लेने आनेवाली है.

नाज़िआ आप : (घबराते hue)Kya, पागल हो गयी है तू, शिव को क्यों मन कर दिया. वो तेरे साथ होता तो अच्छा था न.

संयम : मैंने भी वैस्वी से यही कहा था, पर वो नहीं मणि, वो कह रही थी की अगर उस लड़के ने कुछ किआ तो वो अपने पापा को बता देगी. उसके पापा बहोत बड़े आदमी है.

नाज़िआ आप : अरे बेवकूफ लड़कीओ, वो बताएगी तब बताएगी, उस से पहले कुछ ऊंच नीच हो गयी तो. नहीं नहीं तू शिव के साथ hi जा.

संयम : (वो दोनों चलते चलते रस्ते पर आ चुकी थी) अभी तो में साइकिल भी नहीं लायी आप. आज वैस्वी के साथ hi चली जाती हु, फिर देखते है. (तभी वैस्वी अपना स्कूटर लेकर वह आ गयी, नाज़िआ ने देखा की शिव भी दूसरी और से दौड़ते हुए आ रहा है, नाज़िआ ने शिव को आवाज दे कर बुलाया, ये देख वैस्वी के चेहरे का रंग बदल गया)

शिव : (में उनके पास पंहुचा) गुडमॉर्निंग दीदी, Hi संयम, (थोड़ा रुक kar)hello वैस्वी.

नाज़िआ आप : देखो न ये दोनों अकेली, जा रही है, मुझे तो बहोत दर लग रहा है, अगर वो लड़का फिर आ गया तो. नहीं नहीं, शिव तुम hi संयम को ले जाओ.

वैस्वी : (शिव की और गुस्से से देखा, फिर नाज़िआ दीदी को देख kar)Didi आप चिंता मात करो, में संयम को ले जा रही हु, कुछ नहीं होगा.

नाज़िआ आप : तुम क्या कर लोगी, तुम भी एक लड़की हो, उसने तुम्हारे साथ भी कुछ गलत किआ तो.

वैस्वी : आप फ़िक्र मात करो दीदी, अगर वो लड़का आया तो मेरे पापा का नाम सुन कर hi वह से भाग जायेगा. हमे देर हो रही है, चलो Samim.(Samim ने असहायता से नाज़िआ दीदी और शिव को देखा और वो स्कूटर पैर बेथ गयी) आप फ़िक्र मात करो कुछ नहीं होगा. (उसने स्कूटर चालू किआ और निकल गयी)

नाज़िआ आप : शिव, तुम इनके पीछे जाओ, ये दोनों तो बेवकूफ है, कुछ समझती hi नहीं.

शिव : आप चिंता मात करो दीदी में जाता हु.

नाज़िआ आप : न जाने मेरा दिल क्यों घबरा रहा है, तुम जल्दी जाओ.

शिव : ठीक है दीदी.

मैंने भी वह से दौड़ लगा दी. मेरी रफ़्तार भी तेज hi थी.

चमन : अरे, मिक्की भाई, आप इतना टेंशन क्यों ले रहे हो, में हु न. में सब संभल लूंगा. (वैसे भी वो हत्ता कट्टा 6 फिट का कला संध hi था. मिक्की के बाप के साथ वो कई सालो से काम कर रहा था. उसका यही काम था, लोगो को धमकाना, मरना पीटना. मिक्की का बाप मला था, लोगो के सामने तो वो शरीफ hi था पर , अंदर उसेक बहोत से ऐसे काम होते थे जिसे पूरा करने के लिए चमन जैसे कई गुंडों का सहारा लेना पड़ता था.)

मिक्की : (चमन की और देख kar)Tu उसे जनता नहीं, वो तेरे से भी लम्बा है.

चमन : अरे भाई, लम्बा है तो क्या हुआ, है तो अभी स्कूल में पढ़नेवाला बच्चा hi न. लम्बे होने से कोई ताक़तवर नहीं बन जाता. ऐसे लोगो को ठीक करना hi मेरा काम है. आप फ़िक्र मात करो, में उस सेल की हड्डी पसली एक कर दूंगा.

एक लड़का : मिक्की भाई, वो आ रही है, पर वो किसी लड़की के साथ आ रही है.

मिक्की : (वो उस और देखने लगा जहा से संयम आ रही थी, वो जिस लड़की के पीछे बैठी थी उसे देख कर वो चौंक गया) वैस्वीी. इ छूप जाओ.

चमन : क्या हुआ भाई.

मिक्की : बाद में बताता हु. (वो सब छुप गए, वो दोनों लड़कीअ वह से निकल गयी)

चमन : कोण थी वो जो आप छुप गए.

मिक्की : वो हमारे फॅमिली फ्रेंड की लड़की है. पर ये इसके साथ क्या कर रही है.

चमन : तो इसमें डरनेवाली क्या बात है.

मिक्की : डरनेवाली बात नहीं है, में उसे पटाने की कोशिस कर रहा हु, और में उसके सामने अच्छा बना हुआ हु. अगर उसे मेरे बारेमे पता चल गया तो सब गड़बड़ हो जाएगी.

एक लड़का : अरे भाई, वो लम्बू भी जा रहा है,

मिक्की : (उसने देखा की वो लड़का भी दौड़ते हुए जा रहा है) अभी जाने दे, बाद में देख लेंगे. कुछ सोचना पड़ेगा. चलो अभी यहाँ से.

में दौड़ते हुए स्कूल पहुंच गया. मुझे रस्ते में कोई नहीं दिखा. ये देख कर मुझे रहत हुई. मेने सोचा की पिछली बार की मार की वजह से शायद वो अब संयम को परेशां नहीं करेगा.

में स्कूल पंहुचा तो, संयम और वैश्वि स्कूटर पार्क करके जा रही थी. संयम ने पलट कर नेरी और देखा तो मेने मुस्कुराकर शिव हिलाया. उसने भी मुस्कुराकर शिर हिलाया. वैस्वी ने मेरे सामने घर कर देखा. पता नहीं इस लड़की को क्या परेशानी है मुज से.

वैस्वी : (संयम ko)Aage देख कर चल.

संयम : पता नहीं तुजे क्या परेशानी है शिव से.

वैस्वी : मुझे कोई परेशानी नहीं है, में चाहती हु तू परेशान न हो इस लिए कहती हु दूर रह ऐसे लड़को से.

संयम : वो ऐसा नहीं है.

वैस्वी : है तुजे बड़ा पता है, चल अब्ब.

वो दोनों भी स्कूल में चली गयी, में भी अपने दोस्तों के साथ क्लास में आ गया. थोड़ी देर में बिना मैडम आयी तो मेरी हालत ख़राब होने लगी. में नीचे देख कर अपने काम में होने का ढोंग करने लगा. हजारी लेने के बाद उन्होंने पढ़ना सुरु किआ. एक बार मेरी नजर उनसे टकराई तो उन्होंने मुझे घर कर देखा तो मेने फ़ौरन अपनी नज़ारे झुका ली. मुझे सचमे दर लग रहा था. एक तो स्कालरशिप पे एडमिशन मिला हुआ है, अगर मैडम ने कोई कम्प्लेन कर दी तो मेरी क्या हालत होगी. में ऐसा रिस्क नहीं ले शक्ति था तो मेने उनसे दूर hi रहने का फैसला किआ. है कंप्यूटर सिखने का नुकसान होगा पर अब में कुछ नहीं कर शक्ति था. मेने अपनी नज़ारे निचे hi रक्खी, जब वो बोर्ड पर कुछ लिखती तो hi में ऊपर देखता था, पर वो जैसे hi घूमती में अपनी नज़ारे झुका लेता था.

शाम को स्टेडियम फिर गयम. रात को वैसे hi में दीदी के साथ सो गया. एक दो दिन कुछ खास न हुआ. पवनसीर ने उस दिन सब को सैलरी दी. मुझे तो आशा थी नहीं पर मुझे बी सैलरी दी गयी. मेने पवनसीर को बोलै भी की मुझे क्यों दे रहे है, मुझे तो आपको पैसे लौटने है. तो उन्होंने कहा की उसके बारे में तुम स्नेहा से बात कर लेना. जूही मैडम उस वक़्त नजदीक hi थी. जब जूही ने ये सुना तो उसे कुछ समाज नहीं आया. पर वो बोली कुछ नहीं.

मेने घर जा कर सैलरी के पैसे लतादिदी के हाथ में दे दिए. ये मेरी कमाई के पहले पैसे थे. दीदी ने मुझे गले लागलिया और मेरी तरक्की की प्रार्थना की.

हमने खाना खाया, और पढ़ने चला गया. जब में अपने कमरेमे पंहुचा तब लता दीदी कपडे पहन कर लेती हुई थी.

शिव :क्या हुआ दीदी कपडे क्यों पहन रक्खे है?

लता दीदी: आज ऐसे hi ठीक है.

शिव : क्या हुआ दीदी बतावा?

लता दीदी :(झिझकते और शरमाते hue)Periods चालू हो गए है.

शिव : इसका क्या मतलब है दीदी?

लता दीदी : (शर्मा रही thi)Wo हर महीने लड़की को होता है न वही.

शिव : (अंडरवियर पहने उनके पास लेट ते हुए) हर महीने क्या होता है दीदी?

लता दीदी :(मेरी आँखों में देखते hue)Rehne दे, तू नहीं समजेगा.

शिव :क्या दीदी, आप समजाओगी तो पता चलेगा न.

लता दीदी : Wo...ladki को हर महीने खून निकलता है न वही.

शिव : (चिंतित होते हुए बेथ जाता hai)Aap को खून निकल रहा है? आप फिर भी इतनी शांत है? बताइये कहा खून निकल रहा है? आप पहले बोलती तो डॉक्टर के पास चले जाते. सरिता दीदी को बुलाऊ?

लता दीदी: (मुस्कुराते hue)Pagal, कुछ नहीं हुआ मुझे. ये नार्मल है, हर महीने हर लड़की को होता है.

शिव : क्या सचमुच? मतलब सबको? पर बिना चोट लगे कैसे खून निकलता है और कहा से निकलता है?

लता didi:(Sharmate hue)Tu न बिलकुल पागल है. वो ...वो निचे से.

शिव : निचे से?

लता दीदी :(झुंझलाते hue)Tuje समाज नहीं आता.

शिव : ओह! छूट se(Usko एहसास होता है की वो क्या बोल gaya)Sorry दीदी, वो मुँह से निकल गया.

लता दीदी: (सरमाती hai)Koi बात नहीं?

शिव : पर अगर खून निचे से निकल रहा है तो अपने ऊपर क्यों कपडे पहन रक्खे है?

लता दीदी : (बेथ ते हुए अपनी चोली उतारते hue)Thik है ले बस उतर दी.

शिव :(मुस्कुराते hue)Thik है, पर दीदी अगर खून निकल रहा है तो बिस्तर पर क्यों नहीं गिरा?

लता दीदी : क्यों की मैंने पद लगा रक्खा है.

शिव : पद ?

लता दीदी : (Jhunjhlakar)Tuje हर बात समजनि पड़ेगी क्या? अलमारी में पैकेट रक्खा है ले aa(Me वो पैकेट ले आया , एक पद दिखते hue)Ye पद वह रख देते है जो सारा खून सोख लेता है. अब खुस या और भी कुछ पूछना है?

शिव : (अपना शिर खुजाते हुए) क्या दीदी अगर कुछ जान न है तो आप से नहीं पूछूंगा तो किस से पूछूंगा.

लता दीदी : चल ठीक है अब तो सब समाज गया न, चल सो जाते है.

शिव : ठीक है दीदी.

फिर दोनों एक दूसरे को बाहोंमे लिए सोने लगे. थोड़ी देर में दीदी तो सो गयी पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. में सरिता दीदी को देखने उनके रूम में गया तो वो वह नहीं थी.
 
अपडेट 39

लतादिदी सो गयी, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. मेने उन्हें तकिये पे सुलाया और दरवाजा बंद कर के बहार निकल गया. में सरिता दीदी को देखने उनके रूम में गया तो वो वह नहीं थी. में बच्चो वाले रूम में गया तो वो वह सो रही थी. में उनके पास गया तो वो सोई हुई थी. मुझे उन्हें जगाना ठीक नहीं समजा तो में वापस जाने लगा.)

सरितादिदी : Shiv.(Unki आवाज सुन कर में रुक gaya)Kya हुआ?

शिव : कुछ नहीं दीदी, में तो बस यु hi आया था.

सरितादिदी :(कड़ी हो गयी, मेरा हाथ पकड़ kar)Kya हुआ?

शिव :कुछ नहीं दीदी बस आप की याद आयी तो देखने चला आया. (सरिता समाज गयी की इतनी रात शिव को उसकी याद क्यों आ रही थी)

सरितादिदी : चल, ऊपर चलते है. (वो मेरा हाथ पकडे मुझे ऊपर छत पर ले गयी, ऊपर ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, उनके बालो की कुछ लेट हवा में लहरा रही थी, उनकी चुन्नी भी उड़ रही थी, उनका पेट कभी कभी बेपर्दा हो रहा था, मेरी नज़र वह जा रही थी जिसे दीदी देख रही thi)Kya हुआ शिव, मान कर रहा hai?(Maine चौक कर उनके चेहरे को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, में शर्मा gaya)Sach कहु तो मेरा भी मान कर रहा था, पर तू लता के साथ था तो क्या कर शक्ति थी.

शिव :(खुस होते hue)Sach दीदी?

सरिता दीदी : तो क्या सिर्फ तेरा hi मान करता है, मेरा भी मान करता है. और ये लड़कीओ की तरह शर्माना छोड़, तू एक लड़का है, सब लड़कीअ ऐसी नहीं होती की वो तेरी तरफ बढ़ेगी, तुजे भी उनकी और बढ़ना hoga.(Maan में ‘बढ़ा था दीदी चांटा पड़ा muje’)Kya सोच रहा है, अगर तुजे मुज से कुछ चाहिए तो खुद hi लेना पड़ेगा.

में समाज रहा था, मेने उनके चेहरे को सहलाया, हवामे उड़ती उनकी लातो को साइड में किआ, उनके सर को पकड़ा और झुक कर उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मुज से लिपट गयी और मुरे होठो को चूसने लगी, में उनको बहो में भर के मसलते हुए उनके होठ चूसने लगा. मेरे हाथ उनके कूल्हों पर चले गए. में उनके कूल्हों को घाघरे के ऊपर से hi मसलने लगा, दीदी गरम हो गयी और मेरे होठो को जोर जोर से चूसने लगी. में इतना उत्तेजित हो गया था की मेने उन्हें कूल्हों से पकड़ कर पूरा हवा में उठा hi लिया. उन्होंने अपनी बहे मेरे गलेमे दाल दी और अपने पेअर मेरी कमर पर लपेट दिए. ये गरमा गरम किश थोड़ी ज्यादा देर चली.

सरिता दीदी : (हफ्ते हुए, मेरी और dekha)Abhi ज्यादा समय नहीं है. कोई उठ सकता hai.(Mene उन्हें निचे उतरा और अपना लुंड बहार निकला जो पूरी तरह कड़क हो गया था. दीदी ने मेरे लुंड को पकड़ा और झुक कर अपने मुँह में भर लिया, उनके गरम मुँह में मुझे बहोत मज़ा आने लगा. वो झुकी हुई थी तो मेने उनके कूल्हों पर से उनका घाघरा ऊपर उठाया. हलकी रौशनी में वो गोलाकार कूल्हे मेरे सामने थे. में उन्हें मसलने लगा. वो मेरे लुंड को अपने मुँह में ले कर चूस रही थी. अपना शिर ऊपर निचे करते हुए मेरे लुंड को अपने मुँह में ले रही थी. मैंने एक ऊँगली उनकी रास टपकती छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. उनके मुँह से ‘hmmmmm’hmmmm’ की आवाजे निकल रही थी. उन्होंने लुंड छोड़ा और छत की बॉउंड्री को पकड़ते हुए झुक gayi.)Chal अब दाल दे Shiv.(Me उनको ऐसे झुका हुआ देख रहा था, उनके फैले हुए कूल्हे मुझे अपनी और खींच रहे थे. मेने निचे बैठते हुए उनके कूल्हे फैलाये और छूट को चाटने laga)Aahhhh सीईव, (में अपनी जीभी से उनकी पूरी छूट को चाटने लगा, छूट के होठो को चूसने लगा. वो मेरी और देख रही thi)Shiv अभी टाइम नहीं है, कोई आ जायेगा.

शिव : दीदी सब सो रहे है, कोण आएगा? आप को मज़ा नहीं आ रहा क्या?

सरितादिदी : मुझे इतना मज़ा आ रहा है की में कह नहीं शक्ति, तुजे मेरी छूट चेतना पसंद है.

शिव : है दीदी, आपकी छूट से बेहटा रास स्वादिस्ट hai.(Lata अपने आपको छिपाये हुए ये नज़ारा देख रही थी, वो देख रही थी उसका भोला भला भाई कैसे उसी की सहेली की छूट चाट रहा है, उसका अपना हाथ भी कब अपनी छूट पर चला गया जहा पद था उसे गुस्सा आ रहा था अपनी परिस्थिति पे, अगर वो इस परिस्थिति में न होती तो वो शिव को कही जाने hi न देती)

सरितादिदी : बस शिव, में छूट जाउंगी, अब दाल दे मेरे ander.(Me खड़ा हो गया और अपने लुंड के टोपे को छूट पर घिसा, अँधेरे में मुझे दिख नहीं रहा था तो मेरा लुंड उनके गांड के छेड़ पर आ gaya.)Shiv वह nahi(Unhone अपने हाथ से मेरा लुंड पकड़ा और सही जगह lagaya)Abhi वह दाल देता तो सब जग जाते.

शिव : वो क्यों दीदी?

सरितादिदी : मैंने कभी वह करवाया नहीं? और पहलीबार में तेरा मोटा लुंड अगर वह चला जाता तो मेरी चीख निकल न तय था.

शिव : कहा चला जाता दीदी?

सरितादिदी: मेरे पिछवाड़े में, तूने लुंड गांड पर सेट कर दिया था.

शिव : ऐसा क्या, सॉरी दीदी.

सरितादिदी : ारे सॉरी क्यों, एक दिन वह भी तुजे डालना hi है.

शिव : क्या? वह भी डालते है दीदी?

सरितादिदी : है मैंने सुना तो है. पर अभी तो मेरी छूट में hi dal.(Maine अपना दबाव बढ़ाया तो लुंड छूट में उतरने laga)Aiiiiii, आराम से शिव, आआह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ. रूक, माआआ. अहिंसा आहिस्ता थोड़ा आगे पीछे कर. है ऐसे hi , मुम्ममइईईई, shhhhhhhhhhhh.

शिव : दीदी दर्द हो रहा है? निकल लू?

सरितादिदी : पागल है क्या, लड़की की छूट में डालने के बाद काम पूरा किये बगैर निकलना नहीं चाइये.

शिव : पर दीदी आप को दर्द हो रहा है न.

सरितादिदी : वो तो अभी ठीक हो जायेगा. पहलीबार लता के साथ करे तो आराम से करना, उसको दर्द हो फिरभी निकल मत लेना.

शिव : क्या दीदी आप भी. में लतादिदी के साथ ऐसा कर सख्त हु क्या?

सरितादिदी : और अगर वो कहे की शिव ये सब कर मेरे साथ तो?

शिव : वो कभी ऐसा कहेंगी hi नहीं.

सरितादिदी : और अगर कहे तो,.. करेगा?

शिव :(में सोचमे पद गया, पर जैसे दीदी मेरे साथ रहती है तो ये हो भी शक्ति है, फिर भी मेने सरितादिदी को kaha)Wo कभी ऐसा कह hi नहीं सकती.

सरितादिदी : क्यों वो लड़की नहीं है क्या, उसके पास भी छूट है जिसे लुंड चाहिए.

शिव : दीदी आप उनके बारे में ऐसा मात बोलिये.

सरितादिदी : मुझे लता को बताना पड़ेगा की ये लड़का तेरे साथ कुछ नहीं करनेवाला अगर तुजे छुड़वाना है तो तुजे hi उसके ऊपर चढ़कर अपनी फडवणी padegi.(Lata ये सुन रही थी, उसे शर्म भी आ रही थी और गुस्सा भी की वो शिव के साथ उसके बारेमे कैसी कैसी बाते कर रही है, )चल छोड़ अभी उस बात को, अभी तो तेरी ये दीदी तेरा लुंड लिए बैठी है उसे अच्छे से छोड़. मेरे साथ तो तुजे कोई दिक्कत नहीं न.

शिव : क्या दीदी आप भी.

मैंने उनकी कमर पकड़ी और अपना लुंड आगे पीछे करने लगा, उनके हिलते चुत्तड़ देख मुझे और जोश आ रहा था. उनकी संकरी गलीमे जाते मेरे लुंड पर हो रहे एहसास का आनंद महसूस कर के मेरी स्पीड बढ़ रही थी. मेरा पूरा लुंड अंदर तक जा रहा था.

सरितादिदी : ऊऊऊ माआआ, कितना बड़ा है, अह्हह्ह्ह्ह, पूरी छूट भर दी है मेरी, अह्ह्ह्ह शिव, अह्हह्ह्ह्ह छोड़ मुझे, तेरे लुंड से छोड़ना तो कमल है. कितना मज़ा देता है.

शिव : दीदी अब दर्द तो नहीं हो रहा?

सरितादिदी : नहीं, बहोत मज़ा आ रहा है, छोड़ मेरे भाई, छोड़ अपनी दीदी को. कितना मज़ा देता है तू.

शिव : दीदी आप इतना खुलम खुल्ला क्यों बोलती है?

सरितादिदी : अब जो है उसे वो नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे? तू भी बोल शक्ति है, तुजे भी मज़ा आएगा. क्या तुजे, मुझे छोड़ने में मज़ा नहीं आ रहा?

शिव : है दीदी मज़ा आ रहा है.

सरितादिदी : तो बोलने में क्या हर्ज़ है?

शिव : सही कहती हो दीदी. (मेरे धक्के लगातार चल रहे थे, मेने दीदी को थोड़ा ऊपर उठाया और उनके चुके दबाते हुए उनको धक्के लगाने laga)Didi आपकी छूट कमल की है, अंदर से भी छोटी है, मेरे लुंड को पकड़ रही है, अह्ह्ह्ह आपको छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा है दीदी.

सरितादिदी :( खुस होते हुए उन्होंने अपना शिर मेरे कंधे पर टिका diya)Chod ले मेरे bhai,muje भी तेरा बड़ा लुंड बहोत मज़ा दे रहा है. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह shhhh(Unke चुचो को मसलते हुए में उन्हें छोड़ रहा था, ऊपर से धनुष आकर में मुड़ी हुई थी, उनकी गांड बहार उभर आयी थी, में काफी देर उन्हें ऐसे hi छोड़ता रहा)

शिव : दीदी आगे घूम जाओ na.(Mene उन्हें आगे की और घुमाया और एक पेअर को अपने हाथ से पकड़ते हुए अपना लुंड छूट में उतर दिया, दीदी मेरे गले को पकड़ते हुए झूलने लगी)

सरितादिदी : आठ, ऐसे तो बहोत मज़ा आता है शिव, मेरी छूट का दाना तेरे लुंड के साथ रगड़ खा रहा है, आह्ह्ह्हह, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ahhhhh(Har धक्के पर उनके मुँह से अहह निकल रही थी, मेने एक हाथ से उनके कूल्हे को दबाते हुए अपनी और खींच रहा tha)Aahhhh, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह, बहोत कुछ सिख गया है, अह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शिव, (मेने उन्हें पूरा उठा लिया और छोड़ने लगा) शहहह अह्ह्ह्ह सीईव अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शठ शहहह मेरी पूरी भर गयी है अहह शठ मेरी छूट की ऐसी चुदाई सिर्फ तू hi कर शक्ति है, अह्ह्ह शठ मेरा होनेवाला है.

शिव : मेरा भी होनेवाला है दीदी.

सरितादिदी : जब निकलनेवाला हो तो बोल देना, अह्ह्ह्ह शहहह (वो पूरी हिल रही thi)Ha और ज़ोर से शिव, तुम्हारा लुंड मेरी बच्चेदानी को ठोकर मर रहा है. में गयी शिव अह्ह्ह्ह में गयी, मम्मीयी अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh,

शिव : मेरा भी निकलनेवाला है( मेने उन्हें नीचे उतरा तो वो तुरंत निचे बेथ गयी और मेरे लुंड को अपने मुहमे ले लिया, मेरे लुंड ने फुच फुच कर के पिचकारियां छोड़ दी. मेरी आंखे बंद हो गयी.

सरितादिदी : (वो लुंड को अपने मुँह में लिए सारा रास जमा करने लगी, आखिर कर में शांत हुआ, उन्होंने लुंड बहार nikala)Kitna माल निकलता है tu.(Mene देखा तो वो अपने मुँह से सफ़ेद सफ़ेद रास अपनी हथेली में उढेल रही thi.)Agar एक बार भी ये अंदर जायेगा तो यक़ीनन तेरे बच्चे की माँ बन jaungi.(Unhone मेरी और हाथ बढ़ाया तो मेने उन्हें खड़ा kia)Tu जा में आती हु.

शिव : क्यों दीदी, चलो साथ चलते है.

सरितादिदी : तू जा न मुझे (बोलते बोलते रुक गयी, थोड़ी शर्म के साथ) मुझे मूतना है.

शिव : तो करलो न.

सरितादिदी : तेरे सामने? ( वो शिव को देखने लगी, फिर कुछ सोचते हुए) चल ठीक है, वो बरसाती पानी निकलने वाले पाइप के पास बेथ गयी, रात के शांत वातावरण में उनकी सिटी जोर से सुनाई दे रही थी, में उनके फैले हुए गोल गोल चुत्तड़ो को देख रहा था. पता नहीं पर ये नज़ारा मुझे बहोत अच्छा लग रहा था. मूतने के बाद वो कड़ी हुई, मेरे पास आकर) देख लिया, अब खुश.

शिव : दीदी आप लोगो की ये सिटी क्यों बजती है?

सरितादिदी : (मुस्कुराते हुए) वो तो पता नहीं पर बजती है. तुजे अच्छी लगी?

में मुस्कुरा दिया. हम दोनों निचे आ गए और अपने अपने कमरेमे गया. दीदी सो रही थी. वो थोड़ी हांफ रही थी. मुझे लगा वो कोई सपना देख रही है तो मेने उन्हें अपने गले से लागलिया, वो भी मुज से लिपट गयी (लता दौड़ के निचे आयी थी तो हांफ रही थी) उसका बहोत मान कर रहा था पर वो मजबूर थी, ऐसे hi लेते लेते दोनों सो गए.

सुबह में जूही मैडम के घर गया तो उन्होंने बताया की, इस सैटरडे, संडे को कोच सर के पास ट्रेनिंग के लिए जाना है. उन्हें कुछ काम है तो तो वो नहीं आ शक्ति. मुझे अकेले hi जाना है. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी तो मेने है कहा.

हम दोनों गयम पहुंच गए. आज एक घटना हो गयी गयम में. एक लड़की जो करीब 27 से 30 सालकी होंगी नाम काव्य था, उनकी कसरत करते हुए पेअर की नस खींच गयी. जूही मैडम उनके पास गयी और उनसे पूछने लगी. वो मैडम को बताने लगी की कहा नाश खींच गयी है. दूसरे लोग भी उनको देख रहे थे, वो सब डिस्टर्ब हो रहे थे तो जूही मैडम ने उन्हें चेंजिंग रूम में चलने के लिए कहा. मैडम ने उन्हें खड़ा करने की कोशिस की पर उन्हें दर्द हो रहा था.

जूही मैडम : शिव जरा इधर आओ.

काव्य : (धीरे से) आप उसे क्यों बुला रही है, वो लड़का है.

जूही मैडम : लड़का है तो क्या हुआ. (इतने में में वह जा pahucha)Tum उस हाथ को पकड़ो में इस तरफ से पकड़ती हु. इन्हे चेंजिंग रूम लेजाना है.

शिव : जी madam.(Hum दोनों ने सहारा दे कर उन्हें खड़ा किआ पर उनको पेअर में दर्द था तो वो पेअर निचे रख hi नहीं प् थी. हम ने बहोत कोशिस की पर वो दर्द की वजह से अपना पेअर रख hi नहीं प् रही थी, एक कदम भी वो नहीं बढ़ा रही थी. मुझे कुछ समाज नहीं आया अब क्या किआ जाये तो मैंने उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया. वो दोनों और दूसरे भी मुझे आश्चर्य से देखने lage.)Madam दरवाजा खोलिये.

जूही मैडम : H....ha...ha.(Unhone दरवाजा खोला और में उन्हें उठा कर चेंजिंग रूम की और बढ़ने लगा. काव्य जी को दर लग रहा था तो उन्होंने मेरे गले में अपना हाथ दाल कर मुझे पकड़ लिया जो की एक सामान्य रिएक्शन होता है जब हमें कोई ऐसे उठता है. मेरा पूरा ध्यान उन्हें लेजाने में था पर वो मेरी और hi देख रही थी.)

जूही mdam:Yaha बेंच पे बिठा do.(Room में पड़ी एक बेंच पर मैंने उन्हें रखने लगा तो वो गिरने से डरने लगी और मेरे गले को और कास कर पकड़ लिया, एक बार के लिए ऐसा लगा जैसे वो मेरे गले लगी हुई थी. ये भी एक सामान्य प्रतिक्रिया hi थी.) (काव्य जी se)Doctor को बुलाऊ क्या?

शिव : इसमें डॉक्टर को बुलाने की कोई जरुरत नहीं. वह जा पैन हो रहा है वह थोड़ी मालिस कर देंगी तो ठीक हो जायेगा, ज्यादा कसरत की वजह से मांसपेशी में खिंचाव हो जाता है, ये आम बात है, मालिश कर के आप वह वो दर्दनिवारक स्प्रे लगा देना, सब ठीक हो जायेगा.

जूही मैडम : वो कैसे.

शिव : मैडम आप को कहा दर्द हो रहा है?( मैंने काव्यमादाम से पूछा तो उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए अपनी झंघ के जोड़ और कूल्हे के नीचे से ले कर घुटने तक का हिस्सा बताया. मतलब पिछले हिस्सा, तो मेने जूही मैडम से kaha)Inhe उल्टा लेता कर ऊपर से नीचे तक अंगूठे के प्रेसर से इनकी मालिश कीजिये ये अभी ठीक हो जाएगी. शायद कसरत की वजह से मसकले में क्रैम्प आ गया है.

जूही मैडम : मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा शिव. तू hi कर de.(Kavya जी जूही को देखने लगी पर उन्हें दर्द इतना हो रहा था तो वो बोली कुछ नहीं, उनके पास और कोई चारा भी नहीं था) तू मालिश कर में स्प्रे लेकर आती हु.

शिव : जी madam(Maine उन्हें सहारा देकर उल्टा लेटाया, वो भरे हुए शरीर की मालकिन थी तो उनकी झंगे बहोत बड़ी थी. मैंने उन्हें आहिस्ता से लेटाया तो एक बार मेरी नजर चुस्त लेंगिस में कैद उन बड़े बड़े कूल्हों पर चली गयी. मेरा ध्यान उनकी कराह सुन कर टुटा, मेने अपने मान को संभाला और उनकी झंघ के उस हिस्से को अपने अंगूठे से परेसुरे देते हुए ऊपर से निचे तक रगड़ना सुरु किआ. वो दर्द से थोड़ी देर कराहती रही पर फिर उनकी आवाज काम होने लग गयी और आखिर कर बंद हो गयी. वो अपनी आंखे बंद किये लेती थी. मैंने उनसे पूछा )अभी कैसा लग रहा है.

काव्य जी: (शरमाते hue)hmmmm, अच्छा लग रहा hai.(Abhi मेरे मान में कोई भी विचार नहीं था, विचार था तो बस उन्हें ठीक करना, मैं उनकी झंघ को पकड़ कर मसलते हुए उनके पूरी झंघ की मालिश करने लगा. उन्होंने पूरी लेंगी पहनी हुई थी. थोड़ी देर में जूही मैडम स्प्रे ले कर आगयी.)

जूही मैडम : ये लो.

शिव : इससे सीधे स्किन पर लगाना होगा तो में बहार जाता हु आप लगा dijiye.(Juhi मैडम समाज गयी की लेंगिज उतरनी पड़ेगी, तो मैं बहार निकल गया और उन्होंने वो दर्द निवारक स्प्रे लगा कर मुझे आवाज दी. मैंने फिर थोड़ी देर उनकी मस्सगे की. अब वो शांति से लेती हुई थी. ) अब तो आपको दर्द नहीं है na.(Unhone कहा ‘ थोड़ा थोड़ा है पर आराम है’) अब आप खड़े होने की कोशिस kijiye.(Juhi मैडम और मैंने उनको खड़ा किआ तो वो अब कड़ी हो गयी थी, हमने सहारा दे कर एक दो कदम चलवाया तो वो चल भी रही thi.)Abhi दर्द तो नहीं है न.

काव्य जी : नहीं, बहोत काम है.

जूही मैडम : आप आगे सोफे पर बैठिये. थोड़ी देर आराम करेंगी तो ठीक हो जायेगा. (वापस हमने उनको सहारा दे कर सोफे पर बैठा दिया. और हम अपने अपने काम में लग गए. मेने नोटिस किआ की वो काव्य जी चोरी चोरी मुझे देख रही थी. जब हमारी नज़रे टकराती तो वो कही और देखने लगती. जब जूही मैडम का टाइम ख़तम हुआ तो जूही मैडम ने उनसे puchha)Aab कैसा लग रहा hai.(Wo सोफे का सहारा ले कर अपने आप कड़ी हुई, हलाकि हल्का हल्का दर्द था उन्हें पर फिर भी वो काफी हद तक ठीक थी.)

काव्य जी: ठीक है, ज्यादा दर्द नहीं है. थैंक यू.

जूही मैडम : आप को लिमिट में hi कसरत करनी चाहिए, ज्यादा जोर देने पर ऐसा हो जाता है. और थैंक यू मुझे नहीं शिव को कहिये, उसीने तो सब किआ है.

काव्य जी : (मेरी और देख kar)Thank यू शिव.

शिव : इसमें थैंक यू की क्या बात है. आप ठीक है वही बहोत है मेरे लिए.

काव्य जी : वैसे तो सब ठीक है पर क्या तुम मुझे बहार तक छोड़ शक्ति हो.

शिव : है है क्यों नहीं. Chaliye.(Juhi सोचने लगी, पहले तो शिव से मदद लेने से कतरा रही थी, अभी कह रही है मुझे बहार छोड़ दो) (मैंने काव्यजि को सहारा दे कर बहार तक छूने गया, वो कार लेकर आयी थी, फिर वो थैंक यू बोल कर चली गयी, में अंदर आ गया.)

जूही मैडम : गयी वो?

शिव : है मैडम, वो गयी.

जूही मैडम : थैंक यू शिव, वैसे काफी कुछ सिख गए हो.

शिव : ये तो बस ऐसे hi.

जूही मैडम : अरे नहीं अच्छी बात है, सीखना hi चाहिए, पता नहीं कब क्या काम आ जाये. चलो फिर में भी चलती हु, तुम टाइम से चले जाना.

शिव : जी मैडम.

में घर जा कर तैयार हो कर स्कूल के लिए निकल गया. नाज़िआ दीदी वह कड़ी मिली. मुझे देख कर.

नाज़िआदिदी : अभी अभी वो दोनों निकली है, तुम जल्दी जाओ.

शिव : जी दीदी.

में वह से निकल गया. रस्ते में कुछ न हुआ, वो दोनों स्कूल पहुंच गयी थी. में भी क्लास में चला गया. जैसे hi बिना मैडम आयी में निचे अपनी किताब में देखने लगा. (बिना ने भी ये नोटिस किआ की शिव ऊपर देख hi नहीं रहा है, सोचविचार करने पर उसे लगने लगा था की गलती उसी ने की थी, और शिव को थप्पड़ मर दिया. वो देख रही थी की शिव उस से कितना डरा हुआ है. उसने हजारी ली और सब को पढ़ने लगी)

अनाथालय में दोपहर में सब अपने काम में लगे हुए थे. पीरियड्स की वजह से लताईदी आराम कर रही थी. उतने में मैनेजर अंदर दाखिल हुआ. सब पर नज़र दौड़ा कर वो अपने ऑफिस में चला गया. सरिता ने उसे देखा तो वो उसके पीछे पीछे ऑफिस में दौड़ी.

मैनेजर : लता कहा है? दिख नहीं रही.

सरिता : वो बीमार है तो सोई हुई है.

मैनेजर : वो निठल्ला कहा है?

लता : जी, वो वो स्कूल गया है.

मैनेजर : जब देखो बहार hi घूमता रहता है, उसको बोलो अगर बहार hi रहना है, यहाँ का कुछ काम नहीं करना तो निकल जाये यहाँ से.

सरिता : (डरते hue)Wo कहा जायेगा, अभी उसकी पढ़ाई भी चल रही है. और वो अपना सब काम कर के hi जाता है.

मैनेजर : तू उसकी कुछ ज्यादा hi तरफदारी करने लगी है, ये साली लता की वजह से उसे में बर्दास्त कर रहा हु, और वो भी साली हाथ नहीं लगाने देती.

सरिता : आप लता के पीछे क्यों पड़े है? मैं हु न.

मैनेजर : तू तो है hi, पर ये साला लुंड कहा मानता है, इससे तो नयी नयी छूट चाहिए होती है. तुजे तो छोड़ लिया अब उसकी बरी है. फिर दुस्सरि दो भी तैयार हो गयी है.

Sarita:(Man में बहोत गुस्सा आ रहा था, पर अपने आप को सँभालते hue)Aap उनकी जिंदगी ख़राब मात कीजिये. आप मेरे साथ तो कर hi रहे है, उन्हें छोड़ दीजिये.

मैनेजर : ज्यादा दिमाग ख़राब मात कर, जिसे भी यहाँ रहना है उसे मेरी बात मन नई hi पड़ेगी वर्ण चलते बने. और ये यूनिफार्म टंगे हुए थे वो कहा से आये.

सरिता : जी वो शिव ने रंजन और विणा को लेकर दिए है.

मैनेजर : उसके पास पैसे कहा से आये?

सरिता : वो नौकरी करता है न.

मैनेजर : नौकरी तो अभी अभी लगा है, इतने पैसे पहले hi महीने, कुछ तो गड़बड़ है.

सरिता : कोई गड़बड़ नहीं है, शिव बहोत अच्छा लड़का है.

मैनेजर : साली तुजे बोलै न उसकी तरफदारी मात कर. चल थोड़ी देर मेरा लुंड चूस तब तक में हिसाबकिताब देख लेता हु.

सरिता :(उसका बिलकुल मान नहीं tha)Wo, बहोत काम पड़ा हुआ है.

मैनेजर : मैंने बोलै न की चूस तो फिर chus.(Sarita उसका गुस्सा देख कर समाज गयी की उसे चूसना hi पड़ेगा, वो निचे बेथ कर उसका लुंड बेमन से चूसने लगी, रंजन छुपके से सब सुन रही थी वो दबे पाव वह से लौट गयी.)
 
अपडेट 40

आज स्कूल में छूती थी. किसी बड़े आदमी का जन्मदिन था. में सबह गयम के लिए निकल गया. गयम से जुहीमदाम के साथ स्टेडियम गया और रनिंग प्रैक्टिस की. मुझे घर छोड़ के जूही मैडम चालीगयी.

आज खली दिन था, अगर बिना मैडम के साथ वो सब हुआ न होता तो में उनके घर कंप्यूटर सिखने चला जाता. पर अब वो मुमकिन नहीं था तो में स्नेहा मैडम के घर की और चला गया. मान में दर भी था की कही पवनसीर घर होंगे तो क्या कहूंगा. मेने बेल्ल बजायी तो स्नेहा मैडम ने दरवाजा खोला. जैसे hi उनकी नजर मुझपर पड़ी उनका चेहरा खिल उठा और वो मुझसे लिपट गयी.

स्नेहा मैडम : व्हाट ा प्लेसंट सरप्राइज!

शिव : क्या कर रही है आप, कोई देखलेगा तो?

स्नेहा मैडम : (झेपते हुए मुझे देखती है फिर मेरा हाथ खींचकर मुझे अंदर ले गयी, जैसे hi में अंदर आया, उनहोनेदरवाजा बंद करदिया और मुझसे फिर लिपटगाई और मेरे होठ चूसने लगी, मेने भी उनको बाहोंमे भर लिया और उनके होठो को चूसने लगा, फिर अचानक मुझे कुछ याद आया.)

शिव : सर?

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Nahi hai(Fir वो मेरेहोठो को चूसने लगी मैंने भी इत्मिनानसे उनके होठो को चूसा और उनके बूब्स दबाने laga)Aah शैतान ruko(Wo मुस्कुराते हुए मेरे सामने देखने lagi)Pata है में तुम्हे hi याद कर रही थी. (वो मेरे साइन से लग gayi)Shiv मुझे नहीं पता था में तुम्हे इतना मिस karungi.(Meri आँखों में देखते hue)Tumhe मेरी याद नहीं आयी?

शिव : (होठो को चुम kar)Bahot आयी, पर क्या करू, टाइम hi नहीं मिला. जैसे hi आज मिला में आगया.

स्नेहा मैडम : अगर आज न आये होते तो में तुम्हे लेने तुम्हारे घर hi आने वाली थी.

शिव : (मुस्कुराते हुए) अच्छा, वो क्यों?

स्नेहा मैडम : क्यों क्या? एक तो इतने दिनों से मिले नहीं थे और मुझे तुम्हे कुछ बताना था.

शिव : (स्नेहा मैडम को सवालिया नज़रो से देखते hue)Kya बताना था?

स्नेहा मैडम :(चेहरे पे ख़ुशी समां नहीं रही thi)Mere पीरियड मिस हो गए है.

शिव : (अब उसे पता था पीरियड के बारे me)Kyu? कोई प्रॉब्लम है? डॉक्टर को दिखाया?

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Buddhu! लड़की के पीरियड कब मिस होते है?

शिव : (सवालिया नजरो se)Kab होते है?

स्नेहा मैडम :(शरमाते हुए उसके गले लगती है) जब वो माँ बननेवाली होती है.

शिव : ओह! क्या? Sachme,Aap माँ बनने वाली है इसका मतलब में...

स्नेहा मैडम : है तुम बाप बनने वाले हो, अभी कन्फर्म नहीं है पर मेरे पीरियड के दिन के ऊपर तीन दिन हो गए है, मैंने अभी पवन को भी नहीं बताया है. में सबसे पहले तुम्हे बताना चाहती थी.

शिव : (मुझे थोड़ा अजीब लगरहा था, में बाप बन ने वाला tha)Aap खुस हो?

स्नेहा मैडम : आप नहीं तुम, है में बहोत खुस हु. कितने सालो बाद मेरे नसीब में ये खुसी आयी hai(Unki आँखों से आंसू बहने lage)Me बता नहीं सकती में कितनी खुस हु शिव, थैंक यू, थैंक यू मुझे ये खुसी देने के liye(Unhone मेरा शिर पकड़ा और मुझे झुकाते हुए मुझे किश करने लगी, वो बड़े प्यार से मेरे होठो को चूसने लगी तो मेने भी उन्हें अपनी बाहोंमे भरते हुए उनको चूमने लगा. जब हम अलग हुए तो उन्होंने अपने आंसू पोछते hue)Tum बैठो में तुम्हारे लिए मुँह मीठा करने के लिए कुछ लती हु.

शिव :(मुस्कुराते hue)Par मेने तो मुहमिता कर लिया.

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते हुए मुझे सोफे पर बिठाती है और वापस एक छोटी सी किश करती hai)Badmash.(Fir वो अंदर से काजू कतली लेकर आयी और मुझे खिलाई, मेने आधा टुकड़ा उनको वापस खिलाया)

शिव : इस ख़ुशी की तुम्हे बहोत बधाई.

स्नेहा मैडम : (मेरा हाथ पकड़ कर उसे चूमते hue)Tumhe भी बहोत बधाई. अच्छा ये बताओ इस वक़्त तुम यहाँ कैसे? कोई काम था क्या?

शिव : नहीं कोई काम नहीं था, बस तुम्हारी याद आयी इस्सलिये आया था.

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते हुए) मेरी याद आयी थी या मेरी उसकी.?

शिव : (मुस्कुराते hue)Tum दोनों अलग हो क्या?

स्नेहा मैडम : में तो मज़ाक कर रही थी. पर शिव अभी हम नहीं कर शक्ति, हलाकि मेरा भी बहोत मान है पर में इतने बरसो बाद में माँ बन ने वाली हु तो शुरुआत के दिनों में मैं कोई खतरा नहीं लेना चाहती. है थोड़े दिनों बाद हम कर शक्ति है.

शिव :(सचमे में थोड़ा निराश हो गया था. रस्ते में पता नहीं क्या क्या सोचते हुए आ रहा था, पर उनकी बात भी सही thi)Nahi कोई बात नहीं, तुम्हारी तबियत सब से पहले है.

स्नेहा :(उसके चेहरे को समाज जाती है, वो अपने होनेवाले बच्चे के बाप को कैसे नीरस कर शक्ति थी तो वो उसके लुंड पर हाथ फिरने लगती है)

शिव : क्या कर रही हो? अभी तो तुम कह रही थी की...

स्नेहा : में वो नहीं कर शक्ति पर और तो कुछ कर hi शक्ति hu.(Meri पंत खोल कर खींच कर निकल दी और मेरे पैरो के बिच में आ कर मेरे लुंड को अपने हाथो से सहलाने lagi)Jaise तुम्हे मेरी जरुरत है वैसे hi मुझे भी तुम्हारी जरुरत है और इसको भी तो थैंक यू बोलना है. मैं भले वो नहीं कर शक्ति पर इसको खुस करने के मेरे पास और भी रस्ते hai.(wo मेरे लुंड को हिलाते हुए चूसने लगी और चाटने लगी मैंने सोफे पर आराम से बेथ कर उनको चूसते हुए देखने लगा.) ये भीगा हुआ क्यों है? क्या मेरी इतनी याद आ रही थी की ये आंसू बहाने लगा tha.(Wo मेरी और देखती है फिर अपने मुहमे मेरा लुंड ले कर ऊपर निचे होने लगती है)

शिव : सॉरी स्नेहा पर मुझे सचमुच इसकी जरुरत थी.

स्नेहा : इसमें सॉरी की क्या बात है? सब को जरुरत होती hai.(Pura लुंड उनके थूक से सना हुआ था वो मेरे लुंड को हिला रही थी और चूस भी रही thi)Ye कुदरती है इसमें अफ़सोस करने की कोई बात नहीं, न hi गिलटी फील करने की जरुरत है. ये उपरवालेने hi डाला है सबमे, ताकि ये दुनिया चलती रहे.

शिव : तुम सचमे बहोत अच्छी हो और समझदार bhi.(Me थोड़ा आगे बढ़कर उनके एक चुके को दबाने लगा)

स्नेहा : (मेरी और शरारत से देखते hue)Mere बाबू को ये पसंद hai?(Wo अपना ब्लॉउज उतरने लगी)

शिव : नहीं रहने दो.

स्नेहा : (थोड़े नखरे se)Kyu रहने दू? जब तुम्हे ये पसंद है तो क्यों रहने du?(Muje प्यार से देखते hue)Maine तुम्हे मेरे शरीर के हर हिस्से पर हक़ दिया है. (अपना ब्लॉउज निकल कर मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रखदिया, में उस मखमली गोलों को सहलाते हुए दबाने लगा, उनके सॉफ्ट और बड़े स्तन वाकई कमल थे, उन्होंने अपने पुरे कपडे निकल दिए और पूरी नंगी हो गयी)

शिव : तुम क्यों कपडे निकल रही हो, अभी तो मन कर रही थी.

स्नेहा : अगर तुम्हारा मान है तो मैं मन नहीं कर शक्ति शिव.

शिव : (उनका प्यार और समर्पण देख कर मेने उनको खींच कर अपनी अगोसमे ले लिया) नहीं स्नेहा इसकी कोई जरुरत नहीं है. क्यों इतना प्यार करती हो मुझसे?

स्नेहा : पता नहीं शिव? में खुद नहीं समाज प् रही हु. पर सच में मुझे तुमसे बहोत प्यार है और अब तो तुम मेरे होनेवाले बच्चे के बाप हो तो प्यार और बढ़ गया है (में अपना लुंड वापस पंत में डालने लगा तो मेरा हाथ पकड़ते hue)Ye क्या कर रहे हो?

शिव : अब इसकी जरुरत नहीं है स्नेहा, ये अपने आप शांत हो जायेगा.

स्नेहा : नहीं शिव तुम्हे मेरी कसम है, में तुम्हे स्खलित हुए बगैर नहीं जाने dungi.(Unhone मेरे सरे कपडे निकल diye)Aao मेरे साथ. (वो मुझे बैडरूम में ले गयी, अलमारी से कुछ निकल कर मेरे हाथ में दिया, मेने देखा की वो एक क्रीम थी, वो बीएड पर घोड़ी बन gayi)Shiv मेरी योनि के ऊपर एक दूसरा छेद दिख रहा है?

शिव : (मैंने देख की वो अपनी गांड के छेड़ की बात कर रही thi)Ha

स्नेहा : ये क्रीम अपनी ऊँगली की मदद से उसके अंदर तक लगा दो.

शिव : स्नेहा मेने कहा न इसकी जरुरत नहीं है?

स्नेहा :(मेरी और देखते hue)Shiv मेरा भी बहोत मान कर रहा है तुम्हारे साथ करने का. मैं आगे से नहीं कर शक्ति तो क्या हुआ पीछे से तो कर hi सकती हु. और मैंने कभी वह करवाया भी नहीं है तो मेरी भी इच्छा थी. और आज का दिन यादगार बनाने का इस से अच्छा आईडिया नहीं है मेरे पास. मैंने सुना है की लड़को को यहाँ करना पसन् आता है तो में ये पहला अनुभव तुम्हारे साथ लेना चाहती हु. अब ज्यादा सोचो मत और आनंद लो और मुझे भी आनंद दो.

सच कहु तो उनकी गद्देदार गांड देख कर मुझपे भी खुमारी चढ़ने लगी थी. मेने कभी सोचा नहीं था की इस छेड़ में भी करते है. मैं नज़दीक गया और उस गोर गोर गोल गोल कूल्हों को सहलाने लगा.





उनको दबाते हुए में उन्हें चूमने और चाटने लगा, उस गद्देदार कूल्हों से अपना चेहरा रगड़ते हुए में उस मखमली एहसास का आनंद लेने लगा. (स्नेहा अपनी आंखे बंद किये मुस्कुरा रही थी.) बगैर क्रीम लगाए में उस छेड़ पे अपनी ऊँगली रगड़ने लगा तो उसके अस्स पास के मसल्स sikudne-khulne लगे. मुझे वो इतना प्यारा लगा की मेने अपना मुँह वह लगा दिया और अपनी जीभ निकल कर उसे कुरेदने लगा.

स्नेहा : शहहह, अह्ह्ह्हह Shhhhiiiiiv(Mene देखा की उनको भी मज़ा आ रहा है तो में और कुरेदने लगा साथ में उनके कूल्हों को मसलने laga)Shiiiv, मुझे बहुत अच्छाआ लग रहा हैईईई, shhhhh.(Me अपनी नाक, गाल चेहरा सब उनके कूल्हों पर रगड़ने laga)Shiiiv तुम्हे पसंद है एई.

शिव : (में क्या कहता, पता नहीं लड़कीओ के इस अंग में क्या आकर्षण होता है जो इसके पिच्छे मर्द दीवाना हुआ जाता hai)Haaa स्नेहा, ये बहोत आकर्षक और कमलके है.

स्नेहा : तो इन्हे प्यार करो शिव मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा है जब तुम इससे मसलते हो, तुम्हारे सख्त हाथ मेरे नरम शरीर को मसलते है तो में उत्तेजना से भर जाती हु शह्ह्ह्ह है ऐसे hi





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(थोड़ी देर मसलने के बाद मैंने क्रीम निकली और ऊँगली पर लेकर छेड़ पर लगाने laga)Ha Shiiiv(Mene अपनी ऊँगली थोड़ी अंदर की तो वो छेड़ फैलता चला gaya)shhhhh, अह्ह्ह्हह, और क्रीम lagao.(Maine और क्रीम लगनी सुरु कर दी, क्रीम लगते हुए मेरी पूरी ऊँगली अंदर दाल दी, अंदर जैसे गरम भट्टी थी, एकदम गरम गरम, क्रीम लगते हुए में ऊँगली अंदर बहार करने laga)Shiiiv, एक अजीब सी संसहि हो रही है, एक अजीब सा आनंद मिल रहा है, हां ऐसे hi करते रहो, अच्छे से क्रीम लगा दो. अंदर तक लगा दो, मैं उनके फैले हुए गोर गोर कूल्हों को मसलते हुए क्रीम लगा रहा था, उनकी आहे चालू थी. जब क्रीम अच्छी लगा दी तो वो पलटी और मेरे हाथ से क्रीम ले कर मेरे लुंड पर लगाने लगी. बहोत साडी क्रीम उन्होंने आगे के भाग पर लगायी और वापस घूम गयी और मेरे लुंड को पकड़ कर छेड़ से सत्ता दिया)





अंदर डालो शिव, धक्का मत लगाना सिर्फ दबाव banao(Maine वैसे hi किआ, में दबाव बनाने लगा, वो चीड़ अंदर की और डसने लगा, स्नेहा ने अपने कूल्हे पकड़ कर फ़ैलाने लगी, में और दबाव बनाने लगा की अचानक वो छेद फ़ैल गया और मेरे लुंड का सूपड़ा गप्प से अंदर घुस गया.)





ाऊछ, maaaaaaa(Unki दर्द की हलकी चीख सुनकर में घबरा गया, मेरा लुंड जैसे कही फास गया था और उसपर और दबाव बढ़ रहा था, जैसे कोई उसका गाला दबा रहा ho)Ruko शिव, एक मिनट, शह्ह्ह्ह mumiiiiiiii(Unhone अपना शिर निचे गद्दे पर रख दिया और अपनी मुट्ठी में चद्दर को दबाने लगी)

शिव : स्नेहा तुम ठीक हो? (मुझे चिंता हो रही thi)Nikal लू क्या?

स्नेहा :(अपने हाथ पीछे लेकर मेरा हाथ धुंध कर उसे पकड़ ते hue)Nahi, बस थोड़ी देर रुक जाओ शह्ह्ह्ह तुम्हारा कुछ ज्यादा hi मोटा है शहहहहह अभी हिलना maat.(Wo अपने आप को सँभालने में लगी थी, हुनके चेहरे से दर्द साफ़ झलक रहा था, वो लम्बी लम्बी सांसे छोड़ रही थी, हम थोड़ी देर ऐसे hi रहे, में उनके कूल्हे और पीठ को सहलाते हुए उनके चुके को भी सेहला ने लगा. थोड़ी देर बाद उन्होंने वापस अपना शिर उठाया और मुड़कर मेरे सामने देख कर मुस्कुराने lagi)Muje नहीं पता था यहाँ भी इतना दर्द होगा.

शिव : तुम्ही तो कह रही थी की पहलीबार में दर्द होता है.

स्नेहा : वो आगे, यहाँ तोडना कोई सील होता है. ये छेड़ तो बचपन से hi खुला हुआ होता है पर शायद ये पहलीबार इतना फ़ैल रहा है तो दर्द हुआ. तुम्हे कैसा लगरहा है?

शिव : मुझे ऐसा लग रहा है की किसी गर्म गुफा में मेरा वो फंसा हुआ है

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए) अब ऐसे hi आहिस्ता आहिस्ता और अंदर जाने देना , अब ज्यादा दर्द नहीं होगा क्यों की अंदर से ये खुला हुआ hi होता है.

शिव : ऐसा क्यों?

स्नेहा : वो हमारे सरीर की बड़ी ात है तो खुली तो होती hi है. तुम वो सब छोडो अभी आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करो और मज़े करो और करवाओ.

शिव : (मुस्कुराते hue)Tum न बड़ी बदमाश हो गयी हो, शकल से तो इतनी भोली दिखती हो, की लगता है इससे भोली, और नादाँ लड़की को कुछ भी पता नहीं होगा पर तुम उतनी hi चांट भी हो.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Jaisi भी हु तुम्हे तो पसंद हु न me?(Me muskuraya)Bas तो फिर मुझे और क्या चाहिए. अब अपनी गर्लफ्रेंड की गांड अच्छे से मारो.

शिव : क्या कहा तुमने.?

स्नेहा : वही जो तुम कर रहे ho,(Meri और अपने होठो को सिकुड़कर किश दिखते hue)Chalo अब करो अपनी स्नेहा को.





में मुस्कुराते हुए उस कैसे छेड़ में अपना लुंड डालने लगा, आधे से ज्यादा अंदर चला गया तो अंदर बहार करने लगा. सचमुच ये एक अलग hi एहसास था. एक तो नज़ारा इतना हसीं था, दो बड़े बड़े थिरकते कूल्हे और उनके बिच अंदर बहार होता बड़ा सा लुंड. क्रीम की वजह से अंदर इतनी चिकनाई हो चुकी थी की लुंड अच्छे से अंदर बहार हो रहा tha.Me वो देखते हुए कूल्हे मसल ते हुए धक्के लगा रहा था.

स्नेहा : शिव अह्ह्ह सच में बड़ा मज़ा आ रहा है शिव, तुम्हारा ये सचमुच बड़ा कमल का है. कितना अंदर तक जा रहा है, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह धीरे जानऊ, अह्ह्ह्ह में जानती हु शहहह तुम्हे बहोत पसंद है मेरी ये गांड अह्ह्ह्ह धीरे अह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे मेरी गांड पूरी फैलचुकि है, अह्ह्ह अंदर बड़ा अजीब सा लग रहा है शिव,( में आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार कर रहा था, थोड़ी देर बाद उसने मुझे रोका) एक मिनट shiv(Me रुक गया वो बिस्तर पर लेटने लगी, वो पेट के बल लेट गयी और मेरा लुंड अभी भी गांड के छेड़ में tha)Aab karo.(Me भी उनके उनपर झुक गया तो उन्होंने अपना चेहरा थोड़ा घूमाः और साइड से मेरी और देखने लगी)





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मेरी गांड मरने में मज़ा आरहा है माय स्वीट lover.(Unki बाते मेरे अंदर पता नहीं क्या असर कर रही थी, मेने झुक कर उनके होठो को साइड से चूसने लगा और उनके गाल को चाटने लगा. मेरे धक्के आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगे थे)

शिव : (पूछनेवाले अंदाज में) स्नेहा तुम्हे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए.

स्नेहा : है आती तो है, मैंने कभी सोचा नहीं था की मैं ऐसी बाते भी करुँगी पर सच कहु तो मज़ा भी आता है, (मेरे होठो को चुम कर ) मुझे ऐसा लगता है जैसे हम दोनों के बिछ कोई पर्दा नहीं है, में खुल कर तुम्हारे साथ जो मर्जी बात कर शक्ति हु, क्यों तुम्हे मज़ा नहीं आता ऐसी बातो से?

शिव : मुझे तो बहोत मज़ा आता है और तुम पर बहोत सारा प्यार भी.

स्नेहा : (अपनी आंखे नाचते hue)Kisme मज़ा आ रहा है? मेरी बातो में की मेरी ये बड़ी बड़ी गांड मरने में.

शिव : स्नेहा तुम सचमुच कमल हो sweety(Gaddedar गांड में लुंड ठोकते hue)Tumhara शरीर भी कमल है और तुम्हारी बाते भी, मेरा लुंड तुम्हे दर्द तो नहीं दे रहा?

स्नेहा : नहीं मेरे सोना, ये सिर्फ मज़ा देता है, वैसे मैंने कभी सोचा नहीं था की कोई मेरी गांड भी मरेगा, मैं जब ये कही सुनती या पढ़ती तो लगता की छी, लोग भी कैसी जगह करते है पर आज पता चल रहा है की इस में भी कितना मज़ा आता है. में सीधी हो कर लेट jau?(Mene लुंड बहार निकला तो पक्क की आवाज हुई और उनके मुँह से आह निकल गयी, वो सीधी लेट गयी और अपनी टंगे फैलते हुए ऊपर उठा ली जिस से गांड का छेड़ उभर कर बहार आ gaya.)Thod और क्रीम लगा दो Shiv.(Me क्रीम लगाने लगा)

शिव : इस पोज़ में तुम बहोत कामुक लग रही हो.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)matlab?

शिव : जिसे देख कर रहा न जाये और उसे छोड़ने का मान करे वैसी.

स्नेहा : तो डाल्दो और छोड़ो मुझे, रोका किसने hai.(Meine लुंड लगाया और पुश किआ तो वापस घप्प करके अंदर चला gaya)Ahhhhhh





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शिव : दर्द hua?(Na में गर्दन हिलती है)

स्नेहा : तुम्हारा िता मोटा है तो थोड़ा तो होगा न. पर तुम उसकी चिंता न करो वो जितना दर्द देता है उस से कही ज्यादा मज़ा देता hai.(Me उनके ऊपर हो गया और उनकी चूचियों को चूसते हुए गांड मरने लगा. अब वो सीधी थी और टंगे फैली तो मेरा पूरा लुंड गांड में घुस रहा था. वो मज़े से सिस्किअ ले रही थी. मेने उनके होठो को चूसा तो वो मुज से लिपट गयी, अपनी टंगे हवा में ऊपर उठाये वो लुंड से चुद रही थी. गांड का छेड़ भी मुझे बहोत मज़ा दे रहा था, मेरे धक्को से उनके मुँह से उम् उम् उम् की आवाज़े निकल रही थी, वो मुझे अपनी बाहोंमे कसने लगी, धक्के तेज होने लगे थे) शठ अह्ह्ह्ह आआ आए आए आए शहहह शठ ाः बहोत मज़ा आ रहा है, शहहह शठ आह ाः आह थोड़ा जल्दी शिव मेरा होनेवाला है

शिव : मेरा भी. स्नेहा तुम्हारी गांड बहोत मज़ा दे रही है.

स्नेहा : तुम्हारे लिए hi है बाबू, अपने इस बड़े लुंड से जब चाहे उसे फाड् सकते हो, अह्ह्ह्ह शहहहहह यह तुम्हारा लुंड बहोत बड़ा है शिव पर मज़ा भी ज्यादा देता है, सीईव में छूटनेवाली हु, थोड़ा ज़ोर से करो, है ऐसे hi मारो मेरी gand(Dhakke लगने lage)Shiv और जल्दी, मुंईईई, आईईईई शीइइइइइव में गयीईइ अह्ह्ह्हह में गईइइइइइ शीइइइइव मम्मीयिययीय अह्हह्ह्ह्ह बस जानऊउउउउ

शिव : थोड़ी देर जान मेरा भी होने वाला hi है, अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारी गांड मुझे कास के पकड़ रही है अह्ह्ह्ह में अय्या स्नेहा

स्नेहा : भर दो मेरी गांड को अह्ह्ह्ह शिव्व्व भर दो





शिव : अह्ह्ह्हह में gayaa(Fachh फच्च कर के वीर्य निकलने लगा)

स्नेहा : शहहहहह कितना गरम गरम है, अह्ह्ह्ह , हैईईई, कितना शुकुन मिल रहा है, तुम्हारा पूरा लुंड अंदर समां गया है. अह्हह्ह्ह्ह शिव, ी रॉय लव यू, sona.(Mere होठो को चूमने लगी)

दोनों पशीने पशीने हो गए थे और एक दूसरे को बाहोंमे भरे बिस्तर पर लेते रहे. शिव ने लुंड बहार निकला तो उसके साथ वीर्य भी गांड के छेड़ से निकलने लगा. शिव निकलते वीर्य को देख रहा था. कितना कामुक और उत्तेजक लग रहा था.

स्नेहा : (अपनी गांड को ऐसे देखते हुए शिव को देखती hai)Aur करना है बाबू?

शिव : (मुस्कुराते हुए उसकी बगल में लेट गया)

हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे, थोड़ी देर शुकुन से आंखे बंद किये हम लेते रहे. हम ने नास्ता किआ फिर मेने उन्हें बताया की मुझे अब्ब प्रैक्टिस के लिए जाना है.

स्नेहा : कहा जाना है?

शिव : जाना तो स्टेडियम है. पर पहले जूही मैडम के घर जाना है.

स्नेहा : में उसे यही बुला लेती हु यही से चले जाना. इस बहाने तुम मेरे साथ और थोड़ा रहो गए.

शिव : नहीं, हम क्या कहेंगे की में यहाँ क्यों हु?

स्नेहा : कह देंगे की किसी काम से मेने तुम्हे बुलाया था. तुम उसकी चिंता मत करो. और ये दर मुझे होना चाहिए तुम्हे नहीं. तुम टेंशन मत लो में उसे फ़ोन करदेती हु.

फिर उन्होंने जूही मैडम को फ़ोन करदिया. वो आयी तब हम हॉल में बैठे थे. वो मुझे बड़ी अजीब नज़रो से देख रही थी. में दर के मरे उनसे नज़ारे चुरा रहा था. स्नेहा ने उन्हें बताया की उनको काम था तो शिव को बुलाया था. जूही मैडम संतुस्ट तो नहीं लगी पर उन्होंने कुछ नहीं कहा. स्नेहा मैडम ने काजू बादाम वाला दूध पिलाया और हम स्टेडियम चले गए. जुहीमदाम मुझसे ज्यादा बात नहीं कर रही थी. बस उतनीही जितनी जरुरी हो.

आज छुट्टी थी और बिना अपने घर में अकेले अकेले बोर हो रही थी. बर्बर उसे पिछले संडे हुई घटना याद आ रही थी. नव्या ने उसे दो तीन बार कॉल भी किआ था पर उसने उठाया नहीं. वो पिछले कुछ दिनों से परेशान थी, वो इन सोच में डूबी थी की नव्या का फिर कॉल आ गया. कुछ सोच कर उसने कॉल उठालिया.

नव्या : Hello, (सामने से कोई जवाब nahi)Hello बिना?

बिना : हम्म्म्म.

नव्या : क्या हुआ तुजे, तू फ़ोन क्यों नहीं उठा रही, सब ठीक तो है?

बिना : सब तेरी वजह से हो रहा है.
 
अपडेट 41

आज छुट्टी थी और बिना अपने घर में अकेले अकेले बोर हो रही थी. बर्बर उसे पिछले संडे हुई घटना याद आ रही थी. नव्या ने उसे दो तीन बार कॉल भी किआ था पर उसने उठाया नहीं. वो पिछले कुछ दिनों से परेशान थी, वो इन सोच में डूबी थी की नव्या का फिर कॉल आ गया. कुछ सोच कर उसने कॉल उठालिया.

नव्या : Hello, (सामने से कोई जवाब nahi)Hello बिना?

बिना : हम्म्म्म.

नव्या : क्या हुआ तुजे, तू फ़ोन क्यों नहीं उठा रही, सब ठीक तो है?

बिना : (भड़कते hue)Sab तेरी वजह से हो रहा है.

नव्या : मेरी वजह से, क्या हुआ मेरी वजह से. तू ठीक तो है? तुजे पता है में कितनी टेंशन में थी, तू मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी?

बिना : (उसकी चिंता देख पिघल गयी, आखिर वो उसकी बेस्ट फ्रेंड जो thi)Nahi कुछ नहीं, में थोड़ी अपसेट थी इसलिए.

नव्या : क्या हुआ है, जरा साफ साफ बता, देख मुझे टेंशन हो रही है.

बिना : कुछ नहीं, वो एक लड़का है मेरे स्कूल का, वो मेरे घर आया था उसने ....उसने.

नव्या : क्या किआ उसने? तू ठीक तो है?

बिना: है ठीक हु, उसने मुझे किश की थी.

नव्या : क्या? जबरदस्ती की उसने तेरे साथ?

बिना : है थोड़ी.

नव्या : तूने कम्प्लेन की? ऐसे कमीनो को तो जेल में डालदेना चाहिए.

बिना : नहीं वैसा नहीं है जैसा तू सोच रही है, wo...wo तो...

नव्या :(नरम लहजे me)Kya हुआ बिना, देख में तेरी सहेली हु, तुजे डरने की जरुरत नहीं, तू कुछ भी कह सकती है मुझसे, दर नहीं.

बिना : सब तेरी वजह से हुआ है, न तू वो साडी फिल्मे मुझे दिखती न ये सब होता.

नव्या : क्या हुआ, जरा समाज में आये ऐसा बोल.

बिना : मेरी क्लास का एक लड़का है, अनाथ है तो मेने उसकी मदद की थी. उसे कंप्यूटर सीखना था तो वो मेरे घर आता था. उस दिन में थोड़ी बाहेक गयी थी तो...

नव्या : तो? क्या हुआ था, दर मत जो हुआ है बता मुझे.

बिना : मुझे शर्म आ रही है, तू क्या सोचेगी मेरे बारे में.

नव्या : (उसको समजनेवाले लहजे me)Tu जो हो मुझे बता सकती है, में कुछ भी गलत नहीं समझूंगी तेरे बारे में, यार तू टेंशन मत ले, बता क्या हुआ था.

बिना : में उसे पढ़ा रही थी तो मेरा हाथ कब उसकी झंघ पर चला गया मुझे पता नहीं चला. मुझे तब पता चला jab(Thoda रुक kar)Jab मेरे हाथ के निचे मुझे उसका वो महसूस हुआ.

नव्या : वो ? वो क्या? तेरे कहने का मतलब लुंड तो नहीं.

बिना : है वही, गन्दी कही की.

नव्या : (हस्ते hue)Kya तूने सच में उसका पकड़ लिया था.

बिना : (उसे हस्ता देख उसने झुंझलाते हुए kha)Ja मुझे कोई बात नहीं करनी.

नव्या : सॉरी यार, चल ठीक है में नहीं हसूँगी, अब बता, फिर क्या हुआ?

बिना : तेरी फिल्मो की वजह से मेरा दिमाग पहले से ख़राब हो रहा था तो उसे छू कर मुझे कुछ होने लगा, तो मेने अपना हाथ नहीं हटाया और उसको महसूस करने लगी.

नव्या : है सच में तूने उसका लुंड महसूस किआ, कैसा था?

बिना : बहोत लम्बा था, मेरे पंजे से भी लम्बा लग रहा था, सच कहु तो मुझे यकीं नहीं हो रहा था की ये इतना लम्बा है और इसी लिए में उसे चेक कर रही थी.

नव्या : यकीं नहीं हो रहा था से क्या मतलब है, कहना क्या चाहती है तू?

बिना : Wo...wo बहोत बड़ा लग रहा था.

नव्या : जीजाजी से भी बड़ा?

बिना : इतने सालो में दो तीन बार उन्होंने अपना पकड़ाया था वो भी अँधेरे में पर वो ऐसा नहीं था.

नव्या : वैसा नहीं था से क्या मतलब है तेरा.

बिना : वो नरम होता था और ये बहोत कड़क था, जैसे हड्डी होतीहै वैसा.

नव्या : फिर?

बिना : फिर क्या, मुझे यकीं नहीं हो रहा था तो में यही चेक कर रही थी की वो सचमुच वही हैजो में समाज रही हु, या की कुछ और है. और उतने में उसने,...

नव्या : उसने क्या?

बिना : वो वो मुझे पकड़ कर किश करने लगा.

नव्या : (नव्या हसने lagi)Isme उस बेचारे की क्या गलती है?, अगर तू उसके लुंड को पकड़ेगी तो वो गरम हो hi जायेगा.

बिना : देखा तू मुज पर है रही है न, जा में नहीं बताती

नव्या : सॉरी सॉरी यार, अब नहीं हसूँगी, फिर क्या हुआ.

बिना : वो मुझे पकड़ कर मेरे होठो को चूस रहा था और उसने मेरे निचे भी हाथ लगाया, में दर गयी थी तो मैंने उसे एक चांटा मर दिया.

नव्या : क्या? गलती तेरी और चांटा उसे मर दिया.

बिना : तो और क्या करती, वो मेरे स्तन को दबा रहा था और उसने मेरे निचे भी हाथ रखा था.

नव्या :(खिलखिला कर हस्ते hue)To इसमें कोनसी नयी बात हो गयी, अगर तूने hi उसको गरम किआ है तो वो तो यही समजेगा न की तुजे छोड़ना है, तो वो तो वैसा hi करेगा.

बिना : तू कितनी गन्दी हो गयी है, मुझे वैसा कुछ नहीं करना था, ये सब तेरी उस फिल्म की वजह से हुआ है.

नव्या : पर एक बात है, उसकी कोई गलती नहीं थी फिर भी तूने उसे मर दिया. अगर तूने hi सब किआ था तो करवालेति उसके sath.(Hasne लगती है)

बिना : देखा, में इसी लिए तुज से बात करना नहीं चाहती थी.

नव्या : (शांत हो गयी, और थोड़े गंभीर लहजे me)Nahi यार में तो मज़ाक कर रही थी, (सेरिओस टोन me)me सीरियसली कह रही हु, अगर तेरा मान कर रहा था तो कर लेती उसके साथ.

बिना : तू पागल हो गयी है क्या, में शादीशुदा हु, तुजे शर्म नहीं आती ऐसा कहते हुए.

नव्या :(थोड़ा गंभीर होते hue)Isme शर्म की क्या बात है बिना, अगर मान करे तो करवालेना चाहिए. और ये साडी बंदिशे क्या सिर्फ हम औरतो के लिए है, ये मर्द कभी भी किसी के भी साथ कर लेते है तो कोई उनको कुछ कहता है क्या.

बिना : तू पागल है क्या, अगर तू मेरी जगह होती हो क्या तू अपने पति को धोका देती.

नव्या : इसमें धोका देने की क्या बात है, क्या हमे खुस होने की या मज़े करने की कोई आज़ादी नहीं. और रही बात तेरे सवाल की तो है में उसके साथ सब करती.

बिना : कहना और करना, ये दोनों अलग बाते है.

नव्या: तू मेरी सहेली है इसी लिए तुजे बता रही हु, में अपने पति के अलावा भी किसी के साथ सेक्स कर रही हु.

बिना : क्या? ये क्या कह रही है तू? तुजमे शर्म नहीं है क्या? तू ऐसा कैसे कर शक्ति hai?Kiske साथ कर रही है तू?

नव्या : अब तुजे लग रहा होगा की में कितनी गिरी हुई हु, है न?

बिना : (हिचकिचाते hue)Nahi....aisa तो नहीं है...

नव्या : रहने दे, यही हमारी मानसिकता है, अगर एहि बात मर्द अपने दोस्तों को कहता तो वो लोग उसे मान से देखते और कहते वह यार तेरे तो मज़े है, और अगर औरत कहे तो लोग उसे धृणा से देखते है.

बिना : सॉरी यार मेरा वो मतलब नहीं था पर.....

नव्या : कोई बात नहीं, तू अकेली नहीं , सब लोगो की मानसिकता यही होती है. दूसरी औरत को छोड़ने वाला शेर और दूसरे मर्द से छुड़नेवाली रंडी. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. में नहीं मानती. मुझे भी खुस रहने का पूरा हक़ है.

बिना : सही कहती है तू, पर तू क्यों ऐसा कर रही है, तुजे क्या जरुरत थी, और किसके साथ कर रही है.

नव्या : लम्बी कहानी है. फिर कभी बताउंगी.

बिना : नहीं अभी बता, वर्ण ये सोच सोच के मेरा दिमाग फैट जायेगा.

नव्या : ठीक है बताती हु, तुजे तो पता hi है तेरे जीजाजी अपने काम के सिलसिले में हफ्तों तक बहार रहते है, तो मेरा भी मान कर रहा था, ऐसे hi एक दिन में गर्म हो गयी थी. ....

में और मेरे पति यहाँ सहर में रहते है. पढ़ाई के लिए मेरा देवर अजय हमारे साथ में रहने आया हुआ था. वो एकदम सीधा और सरल सा लड़का है. अपनी पढ़ाई में ध्यान देने वाला. एक बार की बात है, उनको गए तीन दिन हो गए थे और मुझे कुछ कुछ हो रहा था. घर में कोई नहीं था, अजय कॉलेज गया हुआ था, तो में अपने बिस्तर पर नंगी लेती अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी.





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मेरा देवर शाम को आता है तो बिंदास हो कर में ऊँगली कर रही थी. मेरी बदकिस्मती कहु या खुशकिस्मती पर उस दिन उनके कॉलेज में हड़ताल हो गयी और वो जल्दी घर आ गया. उसने दरवाजा खटकाया पर में ऊपर के कमरे में थी और में अपने में लगी हुई थी तो मुझे सुनाई नहीं दिया, एक चाभी उसके पास भी थी तो वो दरवाजा खोल कर अंदर आ गया. (ये सब उसी ने muje(Navya को) बाद में बताया था). जब वो मेरे कमरे के पास से गुजर रहा था तो दरवाजा थोड़ा खुला था और में निचे से पूरी नंगी लेती थी.





मुझे ऐसी हालत में देख कर वो बूत बन गया. वो अपनी hi भाभी को ऐसे नंगा देख रहा था जो अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी और अपनी आंखे बंद किये आहे भर रही थी. उसका लुंड खड़ा हो गया. उसने कभी किसी लड़की की छूट नहीं देखि थी और आज वो अपनी सगी भाही को नंगी देख रहा था. जब मेरा पानी छूटा तो मेरी नजर दरवाजे पर खड़े अजय पर पड़ी.





में हक्की बक्की रह गयी, मैंने पास पड़ी चादर से अपने आपको ढाका और घबराते हुए दरवाजे पर देखा तो वो जा चूका था. में अपने आपको कोष रही थी की काम से काम दरवाजा तो बंद कर लेती. मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी की बहार जाऊ तो में दरवाजा बंद कर के सो गयी. शाम को में नीचे गयी और किचन में काम करने लगी. में बड़ी दुविधा में थी की अब अजय का सामना कैसे करुँगी. मैंने रात का खाना भी बना लिया पर अजय नहीं दिख रहा था. मुझे चिंता होने लगी तो में धड़कते दिल से उसके कमरे की और गयी. डरते डरते मैंने दरवाजा खटकाया पर कोई जवाब नहीं मिला. जब दो तीन बार खटकने से भी जवाब नहीं मिला तो मेरे मान में शंकाये उठने लगी. मेने जोर जोर से दरवाजा खटकाया और उसको पुकारने लगी. थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला तो में उस पर बरस पड़ी.

नव्या : क्या कर रहा था? कितनी देर से आवाज दे रही thi(Meri आँखों में आंसू तक आ गए the)Me कितनी घबरा गयी थी पता है?

अजय : सॉरी भाभी.

नव्या : (गुस्सा चढ़ा हुआ था मुज par)Kya सॉरी, मेरी आवाज नहीं सुनाई दे रही थी तुजे, क्या कर रहा था.?

अजय: अभी के लिए नहीं भाभी, ....दोपहर के लिए सॉरी बोल रहा हु.

नव्या : (मुझे वो घटना याद आ गयी, में हड़बड़ा गयी, क्या कहु कुछ समाज नहीं आ रहा था, में शांत हुई और थोड़ी नरम आवाज me)Tumhari कोई गलती नहीं थी, मेरी hi गलती थी, खाना बन गया है चलो.

में निचे चली गयी, वो भी मेरे पीछे पीछे निचे आ गया. हम दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था. खाना कहते वक़्त भी मेने देखा की वो अपना शिर झुकाये खाना खा रहा था. मैंने खाने के बर्तन रक्खे तब तक वो अपने कमरे में चला गया. में वही कड़ी कड़ी ऊपर की और देख रही थी. मुझे समाज नहीं आ रहा था की क्या करू. सब काम निपटा कर में अपने रूम में जा रही थी की मेरी नजर अजय के कमरे की और गयी. में धड़कते दिल से वह गयी और दरवाजा खटखटाया. उसने दरवाजा खोला और मुझे देख कर वो नीचे देखने लगा.
 
अपडेट 42

(नव्या, अजय के रूम में मिलने उसके कमरे में गयी)

नव्या : (में देख प् रही थी वो बहोत शर्मिंदा है, वैसे गलती उसकी थी भी नहीं, मुझे लगा की उसको संजना चाहिए) मुझे तुम से कुछ बात करनी hai(Wo दरवाजे से साइड में हो गया और मुझे अंदर आने का रास्ता दिया. में अंदर चली गयी और बीएड पर बेथ गयी, वो मेरे पास आकर खड़ा रहा, अब भी वो निचे शिर झुकाये खड़ा tha)Mene कहा न तुम्हारी कोई गलती नहीं है, आओ बैठो yaha(Mene उसको मेरे पास बैठने का इस्सर किआ तो वो हिचकिचाते हुए बेथ gaya)Sorry वो मुझे लगा घर में कोई नहीं तो मेने दरवाजा बंद नहीं किआ था. तुम कैसे जल्दी आ गए थे?

अजय : हड़ताल की वजह से कॉलेज जल्दी छोड़ दिया था. मैंने दरवाजा खटकाया पर आप नहीं आयी तो मैंने अपनी चाबी से दरवाजा खोल दिया. सॉरी.

नव्या : (उसके हाथ पर हाथ रखते hue)Mene कहा न तुम्हारी कोई गलती नहीं है. जो हुआ उसे भूल जाओ. हो जाता है कभी कभी.

अजय : पर आप ऐसा क्यों कर रही थी bhabhi?(Uske सवाल से मेने उसको देखा तो वो झेपते हुए निचे देखने laga)Sorry.

Navya:(Apne आप को सँभालते hue)Ho जाता है कभी कभी, तुम नहीं करते क्या?

अजय : (एक बार मेरी और देखा, फिर वापस अपनी नज़ारे झुका li)Nahi.

नव्या : क्यों तुम्हे लड़कीओ को देख कर कुछ नहीं होता क्या?

अजय : क्या होता है भाभी?

नव्या: (नव्या ने देखा था जब अजय दरवाजे पर खड़ा था तो उसका लुंड खड़ा tha)Tumne मुझे वैसे देखा tha(Thodi देर रुक kar)to तुम्हे क्या हुआ था.

अजय : (सवालिए नजरो से मेरी और देख kar)Kya हुआ था?

नव्या :क्यों वो ....वो तुम्हारा खड़ा नहीं हो गया tha.(Meri बात से वो शर्मा gaya)hua था की nahi(Pata नहीं पर मुझे, उसे ऐसी बात करने में मज़ा आ रहा tha)Fir तुम ने क्या किआ.

अजय: कक्क कुछ नहीं?

नव्या : (मैंने देखा की उसका लुंड अभी खड़ा हो चूका था, मुझे भी कुछ कुछ हो रहा था, पर वो मेरा देवर था, हमारे बिच एक मर्यादा थी, मेने हिचकिचाते हुए kaha)Dekho अभी भी तुम्हारा वो खड़ा हो गया hai.(Usne झेपते हुए अपने हाथ से उसे धक् दिया और खड़ा हो कर पलट गया, वो दर रहा था, या शर्मा रहा tha)Isme शर्मा ने की जरुरत नहीं है अजय, ये तो अच्छी बात है, इस से पता चलता है की तुम अब बड़े हो गए हो.

अजय :(बिना पीछे mude)Par ऐसा क्यों होता है भाभी?

नव्या : (एक तो में पहले से सेक्स को तरस रही थी. खड़ा लुंड देख कर में भी गरम होने लगी thi)Ye कुदरती है अजय, इस में शर्माने वाली या घबरानेवाली कोई बात नहीं. पहले कभी तुम्हे ऐसा नहीं हुआ.?

अजय : वो सुबह में ऐसा होता है भाभी.

नव्या : फिर तुम क्या करते हो?

अजय : कुछ नहीं, वो अपने आप hi छोटा हो जाता है.

Navya:(Me देख रही थी की वो कितना भोला है अभी, में गर्म हो गयी थी ऐसी बातो से, मेरी छूट भी गीली होने लगी थी, मुझे लग रहा था की मुझे लुंड चाहिए, मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, मुझे बस एक hi ख्याल आ रहा था, मुझे छोड़ना है, मैंने कुछ सोचते hue)Ajay, मेरी और घूमो. में देखना चाहती हु की कही तुम में कोई गड़बड़ तो नहीं.

वजह : (डरते hue)Kaisi गड़बड़ भाभी?

नव्या : बताती हु, पहले मेरी और ghumo(Wo हिचकिचाते हुए मेरी और घूम गया पर अपना हाथ अपने उभर पर hi रखा हुआ था, मेने उसके हाथ को पकड़ते हुए उसकी और dekha)Muje देखने दो अजय की सब ठीक है na.(Usne हिचकिचाते हुए अपने हाथ हटा दिए, उसके पंत में तम्बू बना हुआ था, मेरे मुँह में पानी आने laga)Ajay (मेने उसकी आँखोने देखा) ये सब किसी को बोलेगा तो नहीं?

अजय : क्या भाभी?

नव्या : अभी जो में करने जा रही हु वो तू किसी को कहेगा तो नहीं? में तेरी भलाई के लिए hi ये कर रही हु.





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अजय : में क्यों किसी को कहूंगा, आप तो मेरी मदद hi कर रही हो भाभी.

नव्या : वैसे भी ये सब किसी को बताना भी नहीं चाहिए, लोग इससे गन्दा बोलते है, पर तू मेरा देवर है तो मई ये कर रही hu.(Maine उसके लुंड के फुले हुए उभर पर हाथ रक्खा तो वो कैंप गया)

अजय : शहहहहह भाभीई.

नव्या : शहहहहह, मुझे देखने de(Mai उसके लुंड को दबा दबा कर देखने लगी, बहार से hi बड़ा लग रहा था, मेरी छूट पानी बहाने लगी थी,) यहाँ लेट जा अजय (वो मेरी और देखते हुए बिस्तर पर सीधा लेट गया, मेने उसकी पंत खोली और उसे घुटने तक सरका दिया, अंडरवियर में लुंड अब अच्छे से दिख रहा था, मुज से अब रहा नहीं जा रहा था, मैंने उसके अंडरवियर को पकड़ा और उतरने लगी)





अजय :(मेरा हाथ पकड़ते hue)Bhabhi....

नव्या : (उसकी और देखते hue)Shhhhh, कुछ नहीं होगा, मुझे देखने de.(Usne मेरा हाथ छोड़ दिया, मैंने उसका अंडरवेअर निचे खिसकाया तो उसका लुंड उछाल कर बहार निकल आया, में उसे बड़े गौर से देखने लगी, अपने हाथ में ले कर उसको दबा कर देखा,

अजय : शहहह भाएअभीइइइइइ,

नव्या : (मेरी खुद की हालत ख़राब हो रही थी, अजय अपनी आंखे बंद कर चूका था, उसकी और देख कर में लुंड को सहलाने लगी, वो मेरे पति से भी बड़ा था, अब रुकना मेरे बस में नहीं था. में अपना चेहरा लुंड के पास ले गयी, उसकी गंध मेरे नथुनों में भरने लगी. मेने अपना गाल उस लुंड पर रगड़ने लगी.)

अजय : अह्हह्ह्ह्ह, भाभीयी, अह्ह्ह्ह ाआआप अह्ह्ह्ह भाभीई अह्ह्ह्हह मुझे कुछ हो रहा है भाभी.

नव्या :(में अपना पूरा चेहरा उसके लुंड पर रगड़ रही थी, अपनी जीभ से उसे चाटने लगी thi)Kuchh नहीं होगा अजय, थोड़ी देर शांत रहो और मुझे चेक करने दो ,( मान me)ahhhhhh तुम्हारा लुंड मस्त है अजय मुझे अब इससे अपनी छूट में लेना hi है , shhhhhhh,(Ajay से) अजय ये सब किसी को कहेगा तो नहीं? अह्ह्ह तुम्हारी भाभी क्या कर रही थी, शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अजय, तुम्हे अच्छा लग रहा है?

अजय : अह्हह्ह्ह्ह भाभी, बहोत अच्छा लग रहा है, में किसी को नहीं कहूंगा, भाभी,

पर शहहह भैया को पता चल गया तो

नव्या : कुछ पता नहीं चलेगा, क्या तू बताएगा?

अजय : नहीं भाभीईईई, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में क्यों बताऊंगा?

नव्या : में भी नहीं बताउंगी, (मैंने उसका लुंड अपने मुँह में भर लिया)





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अजय : Bhabhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii, ये क्या कर रही होओओओओ, shhhhhhhhhhhh, भाभीइइइइइइइ कुछ निकलने वाला है

नव्या :निकल जाने दे अजय, निकल दे मेरे मुँह me(Uski कमर भी हिलने लगी थी, में उसके कूल्हों को दबाते हुए उसका लुंड चूस रही थी, उसका लुंड मेरे गले में जा रहा था पर में इतनी ज्यादा उत्तेजित थी की में उसके लुंड को छोड़ना hi नहीं चाहती थी. आखिर कर उसने अपना वीर्य मेरे मुँह में भर दिया, पिचकारी सीधे मेरे गले में गिरी तो में खस्ने लगी, उसका वीर्य मेरे होठो के कोनो से बह कर बहार निकलने लगा. मेने उसका लुंड बहार निकला और अपने मुँह को पोछा.

ये सब सुन कर बिना बोल hi पड़ी.

बिना : हाय कामिनी, तूने ये क्या काण्ड कर दिया, वो बिचारा भोला भला और तूने उसको hi लपेटे में ले लिया.

नव्या : क्यों वो भोला है तो क्या साडी उम्र भोला hi रहेगा, उसे भी तो ये सब सीखना hi था, किसी और से सीखता तो मैंने hi सीखा दिया.

बिना : तुजे शर्म नहीं आयी थी?

नव्या : सच कहु तो बहोत शर्म आ रही थी यार पर ये शरीर की आग पता नहीं क्या करवा गयी. अब सुन आगे क्या हुआ.

अजय बिस्तर पर लेता हुआ था और अपनी सांसे दुरस्त कर रहा था. उसका लुंड अभी भी थोड़ा कड़क था. छूटने की वजह से थोड़ा नरम जरूर हुआ था पर भी भी खड़ा था. में उसके लुंड को देखते हुए उसकी बगल में लेती और उसके चेहरे को सहलाने लगी.

नव्या : कैसा लगा अजय.

अजय: बहोत अच्छा, बहोत मज़ा आया भाभी. भाभी क्या में ठीक हु? मेरा मतलब है अपने कहा था आप चेक कर के बताएंगी.

नव्या : है, अब तक तो सब ठीक है पर अभी पूरी तरह चेक करना बाकि है.

अजय : तो चेक कीजिये न भाभी.

नव्या : पर उसके लिए तुम्हे कुछ करना पड़ेगा.

अजय : क्या करना पड़ेगा भाभी.?

नव्या : (मुझे उस पर इतना प्यार आ रहा tha)Pehle में कर के बताती हु फिर तुम करना.

में उसके ऊपर होते हुए उसके होठो को चूसने लगी, वो बस सीधा लेता रहा, में उसके होठो को निचोड़ ने लगी, में इतनी उत्तेजित हो रही थी की मैंने उसके मुँह में अपनी जबान घुसा दी और उसकी जबान से खेलने लगी और साथ में उसके लुंड को पकड़ा जो अब पूरी तरह फिरसे कड़क हो चूका था. में उसे जोरो से किश करने लगी.

नव्या : (थोड़ी देर baad)Aab तुम मुझे karo.(Me सीधी लेट गयी और वो थोड़ा हिचकिचाते हुए मेरे ऊपर आया और कुछ देर मेरे होठो को देखने लगा, में उसी को देख रही थी, वो बस देखे जा रहा था तो मैंने उसका शिर पकड़ा और उसे अपनी और खींचा और उसके होठो पे अपने होठ रख दिए, वो भी समाज गया और मेरे होठो को चूसने लगा, जैसे जैसे वो चूस रहा था उसका दबाव बढ़ रहा था. थोड़ी देर में वो और में बहोत गरम हो गए थे.) अभी रुको Ajay.(Me बिस्तर पर बेथ गयी, में जो करने जा रही थी उस से मुझे बहोत शर्म आ रही थी पर नशा ऐसा चढ़ा था की में विवश थी. मेने अपना ब्लूजे निकल दिया, वो आंखे फाडे हुए मुझे देख रहा था, उसके ऐसे देखने से मुझे बहोत शर्म भी आ रही थी, मेने अपनी नज़ारे झुकाई और अपनी ब्रा भी खोल दी. वो ऐसा नज़ारा पहली बार hi देख रहा था जो में उसके चेहरे के हावभाव से समाज शक्ति थी. मैंने उसके हाथ को मेरे स्तन पर रखा और उसे दबाने का इस्सर किआ,





पहले वो आहिस्ता से दबा रहा था, मेरी आंखे बंद हो चुकी थी, उसका दबाव बढ़ता जा रहा था, थोड़ी hi देर में वो मेरे स्तन को पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा, मुझे दर्द हुआ पर मैंने उसे रोका नहीं, में उसका चेहरा सहलाने लगी, )

इससे अपने मुँह में ले कर चुसो अजय,

(उसने एक बार मेरी और देखा तो मेने है का इस्सर किआ. वो टूट पड़ा मेरे निप्पल पर और चूसने लगा, वो इतनी जोरो से चूस रहा था की मेरी हालत ख़राब हो रही थी,)





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आह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अजय्यियय शहहह धीरे देवरजी शह्ह्ह्ह (मेने उसके मुँह से निप्पल छुड़ाया तो वो दूसरे निप्पल पर टूट पड़ा और उसे भी चूसने लगा, में आंखे बंद किये हुए शिस्किअ ले रही और उसको जो करना था वो मेने करने दिया, वो मेरे निप्पल को अपनी ऊँगली और अंगूठे से मसलने लगा )अह्हह्ह्ह्ह अजय, हाआआ ऐसे hi shhhhhhhhhh(Ek दबा रहा था दूसरा चूस रहा था, ऐसे hi वो खेल रहा था, उसके चेहरे से लग रहा था, उसे बहोत मज़ा आ रहा hai)Ab रुको Ajay.(Wo रुक गया, एक बार मैंने उसकी और देखा, मुझे शर्म आ रही थी क्यों की में नंगी होने जा रही थी उसके सामने, पर में कुछ भी करने को तैयार थी. मेने अपनी पूरी सदी निकल दी और पेटीकोट भी निकल दिया. में सिर्फ पंतय में thi.)Ajay इसे तुम nikalo.(Wo आश्चर्य से मुझे देखने लगा फिर उसने मेरी पंतय की और देखा. उसने कपट हुए अपने हाथ बढ़ाये, पंतय में दिख रही मेरी फूली छूट को उसने ऊपर से छुआ और उसे सहलाया. मुज से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था) शहहहहह , उसे निकल दो Ajay.(Usne मेरी पंतय को पकड़ा और धीरे धीरे कर के उसे पूरी निकल दी, वो मेरी बालो वाली छूट को हैरत से देख रहा tha)Ghabrao नहीं अजय, छू कर देखो





(मेने अपनी छूट के होठो को फैला कर उसे दिखाया, उसने अपने कप्टा हाथ छूट की और बढ़ाया, वो दर रहा था, पर फिर भी उसने छूट के बालो को छुआ और उसके होठो की दरार को सहलाया, मेने उसकी ऊँगली पकड़ कर मेरी छूट के छेद में घुसते हुए) यहाँ छेड़ है अजय, अपनी ऊँगली अंदर डालो (वो आश्चर्य से देखते हुए ऊँगली अंदर डालने laga)Aur अंदर डालो, शठ घबराओ nahi(Usne अपनी पूरी ऊँगली मेरी छूट में दाल दी) है शह्ह्ह्ह अब अपनी ऊँगली अंदर बहार karo(Wo ऊँगली को अंदर बहार करने लगा)





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अजय : दोपहर में आप ऐसा hi कर रही थी न भाभी?

Navya:(Sharma कर) हा अजय, शहहह अह्ह्ह्ह ऐसा hi कर रही थी, पर तेरी ऊँगली से ज्यादा मज़ा आ रहा है, और कर अजय, शह्ह्ह्ह तुजे कैसा लग रहा है.

अजय : अंदर बहोत गर्म है भाभी.

नव्या : है अजय, अंदर बहोत गर्मी है, तुजे hi निकालनी है ये गर्मी. अजय क्या तू उसे कहते गए?

अजय : किसे भाभी?

नव्या : उसे hi जिसमे तेरी उंगली है, बो न chatega?(Usne है में गर्दन हिलायी, तो मैंने उसे लेता दिया और अपनी टंगे फैला कर उसके मुँह पर अपनी छूट रख di)Abhi जैसे तू मेरे होठो को चूस रहा था वैसे hi इससे भी चूस Ajay.(Usne आज्ञाकारी बच्चे की तरह मेरी छूट के होठो को चूसने लगा,





पहले वो हलके हलके से कर रहा था फिर उसका दबाव बढ़ने लगा और उसकी जीभ भी मेरी छूट के छेद में जाने lagi)Ha अजय, ऐसे hi, मेरी छूट को चाट ले मेरे प्यारे देवरजी , शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह , हाआआ अपनी भाभी की छूट को चाट ले, शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा चाट ता है तू, शहहहहह ऊऊऊमायआ हआ बहोत मज़ा आ रहा है Ajay(Me उसके शिर को अपनी छूट पर दबाने लगी, अब मेरी छूट को लुंड चाहिए था, मैंने उसके लुंड को पकड़ा और अपनी छूट के छेड़ पर लगा दिया और अपना दबाव बनाते हुए में लुंड पर बेथ गई.





अजय : भाभीईई, मेरा वो....

नव्या : शह्ह्हह्ह्ह्ह, कुछ नहीं हुआ, वो वही है जहा उसे होना चाहिए.

अजय : भाभी वो आपके अंदर चला गया है.

नव्या :(उसका चेहरा सहलाते hue)Ha अजय, वो मेरी छूट में चला गया है, तुजे कैसा लग रहा है.?

अजय: बहोत अच्छा लग रहा है बहभी.

नव्या : (अपनी गांड को ऊपर नीचे उठा कर वो लुंड को अपनी छूट में लेने lagi)Ab कैसा लग रहा है.





अजय : अह्हह्ह्ह्ह भाभी, बहुओट अच्छा लग रहा है. शहहहहह

नव्या : आ रहा है न मज़ा, इससे चुदाई कहते है मेरे प्यारे देवर जी, आज तेरी भाभी तुज से चुद रही है, अह्ह्ह्हह्हह हाआआआ अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, मेरे स्तन भी दबा अजय इसके निप्पल को भी चूस,

अजय : भाभी क्या आप को मज़ा आ रहा है?

नव्या : है देवरजी, बहोत मज़ा आ रहा है. अब मुझे कभी ऊँगली नहीं करनी पड़ेगी, तुम छोड़ोगे न रोज मुझे.

अजय: है भाभी, में रोज छोडूंगा आपको, अह्ह्ह अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है, आपकी छूट बहोत गीली हो गयी है भाभी.

नव्या : उसे भी तुम्हारा लुंड बहोत पसंद आया है dewarji.(Thodi देर वो दोनों इसी तरह लगे हुए थे, नव्या उसके होठो को कफहसते हुए पूरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी, काफी देर उछलने के बाद भी अजय का पानी नहीं निकला तो वो रुक गयी) अजय अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ.

अजय : वो कैसे bhabhi?(Me मुस्कुराती हुई उठी तो उसका लुंड पक से मेरी छूट से निकला, में सीधी हो कर लेट गयी गयी, अपनी टंगे फैला कर)





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नव्या : मेरे ऊपर आजाओ. (वो मेरे ऊपर आ गया, मेने लुंड को पकड़ कर अपने छेद पर सेट kia)Ab अपना लुंड दाल दो देवरजी, मुज से रहा नहीं जा रहा, भर दो मेरी छूट अपने बड़े लुंड se.(Usne पोसिटिव ली और वापस अपना लुंड मेरी छूट में घुसा दिया और धक्का लगाने laga)Ahhhhhh, आहिस्ता Ajay,(Usne जोर से धक्का दे दिया था, फिर वो आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगा, मेने उसे अपने ऊपर पूरी तरह खिंच लिया और उसके होठो को चूसते हुए उस से छोड़ने लगी) ममममममम अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhh(Uski गति बढ़ने लगी थी, थोड़ी hi देर में वो तीव्र गति से मेरी छूट मरने laga)Ajayyyyyyyy, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह थोड़ा धीरे छोड़ो, अह्ह्ह्ह अजय्यिययी shhhhhhhh(Me पूरी हिल रही थी, मेरे स्तन ऊपर निचे कूद रहे थे )अह्ह्ह्हह देवरजी, शहहहहह धीरे छोड़ो अह्ह्ह मुमय्यययययय, शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊऊऊओ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देवरजी थोड़ा धीरे अह्हह्ह्ह्ह (जब वो नहीं मन तो मेने उसे अपनी टैंगो में दबा दिया, पर वो नहीं रुका, वो मेरी छूट लगातार मर रहा था, दोनों पशीने पशीने हो गए थे, मुझे मज़ा भी आ रहा था, मेरे पति ने भी कभी मुझे इतनी जोरो से नहीं छोड़ा था, मेरी छूट में थोड़ा दर्द भी हो रहा था जो मेरे चेहरे पर झलक भी रहा था. )

अजय : अह्ह्ह्ह भाभी आप कमल हो, अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह आपकी छूट भी कमल है, भाभीईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह, भाभी मेरा लुंड अह्ह्ह्हह मेरा लुंड आह्ह्ह्हह्ह बहोत मज़ा आ रहा है, आपकी छूट में मेरा लुंड अह्ह्ह्हह भाभी बहोत मज़ा आ रहा hai(uske धक्के मेरी छूट में अंदर तक लग रहे थे, पसीना उसके चेहरे से टपक रहा था, )

नव्या : है देवरजी अह्हह्ह्ह्ह छोड़ लो मुझे, अह्ह्ह्हह जितना मर्जी छोड़ो मुझे, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह और छोड़ो अह्ह्ह्हह मेरा होने वाला है, अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह और अंदर डालो अह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii(Mechhut गयी पर उसके धक्के काम hi नहीं हो रहे the)Ahhhh देवरजी बसससससस बससससस

अजय : थोड़ी देर भाभी, अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह (वो पूरी ताकत से मेरी छूट मर रहा था, मुझे भी मज़ा आने लगा) अह्ह्ह्ह भाभीईई अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह आपकी छूट आअह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह आपपपप आह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह भाभीईईई अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मेरा निकलने वाला है भाभीईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह





वो पूरी तरह मुझसे चिपक गया और मेरी छूट में गरम गरम वीर्य भरने लगा, मैंने उसे कास के पकड़ लिया और अपनी छूट में भर रहे गरम तरल को महसूस करते हुए झटके कहते हुए में दोबारा झड़ने लगी, में उसके साथ इतनी सख्ती से चिपक गयी थी की कभी छूटनेवाली hi न हु. वो मेरे ऊपर लुढ़क सा गया था, में उसको सेहला रही थी. उस रत और फिर कई रेट, दिन वो मुझे छोड़ रहा है.

बिना : तुजे बुरा नहीं लगता, अपने hi देवर के साथ.

नव्या : तुजे जो सोचना है सोच, मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगता. वो भी खुस है और मेरे पति भी खुस है. मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता. ये हमे सोचना होता है की हमारी ख़ुशी किस्मे है. लोग नहीं तय करेंगे की हमारी ख़ुशी किस्मे है.

बिना : बात तो तुम्हारी सही है यार पर फिर भी ऐसी बाटे अगर बहार पता चल जाये तो बहोत बदनामी होती है.

नव्या : इसीलिए तो मेने अपनी ख़ुशी घर में hi धुंध ली. हमे कोई न कोई तो ऐसा मिल hi जाता है बस हमे पहचान न होता है. थोड़ा सा जान ने पर पता चल hi जाता है की कोण कैसा है. जैसे तुम्हे जो लड़का मिला वो अच्छा नहीं था है न?

बिना : किसने कहा ऐसा? वो अच्छा hi है, वो तो मेरी वजह से....

नव्या : (हस्ते hue)Ab समाज में आया? अगर तुजे अच्छा लगे तो अपने सम्बन्ध बना शक्ति है पर ये तुजे डीडे करना है की तुजे खुस होना है की नहीं.

बिना : चल ठीक है, में सोचूंगी, तू मज़े कर अपनी जिंदगी में.

फ़ोन रखने के बाद बिना, शिव के बारेमे सोचने लगी. शिव का चेहरा उसकी आँखों के सामने आने लगा. उसे वो सब आने लगा जो उस दिन हुआ था.

बिना : कैसा बेशरम है शिव, में उसकी टीचर हु फिर भी वो मेरे साथ ये सब करने लगा, (उसकी किश याद करते टूट) कैसे उसने मेरे होठो को चूसा था, मेरे मुँह में जीभ भी दाल दी थी, पर उसका ऐसा करने से मुझे कितना अच्छा लग रहा tha(Uski जुबान खुद बा खुद बहार निकल आयी और उसके होठो पे घूमने लगी) अह्हह्ह्ह्ह मेरे होठो को कितनी जोर से चूस रहा था, मेरी जुबान को भी वो चूस रहा था, ऐसा तो मेरे पति ने भी कभी नहीं किआ, और कितनी जोर से मेरा स्तन भी दबा रहा था tha.(Usne खुद अपना एक हाथ अपने स्तन पर रख कर दबाया तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी) बेशरम कही का, कोई दबाता है ऐसे अपनी टीचर के स्तन, शहहह अह्ह्ह्हह शिईयिव धीरे शह्ह्ह्ह, (उसकी सूरत याद आते hi उसकी मुस्कान होठो पर आ gayi)Wo है भी कितना हैंडसम, अगर में उसके क्लास में पढ़ती होती तो पक्का उसकी गर्लफ्रेंड बन जाती. मैंने ऐसे hi उसे चांटा मर दिया, करने देती वो जो कर रहा था. वो तो मेरी योनि को भी कैसे दबोच रहा था, और ये भी निगोड़ी गीली हो गयी थी, शहहह अह्ह्ह्ह शिव आए कर ले जो करना है शहहह में कुछ नहीं कहूँगी शहहहहह. पर अब क्या करू? कैसे उस से बात करू? जब में उसे क्लास में देखती हु तो वो मेरे सामने देखता भी नहीं. ओह! मेने ये क्या कर दिया, प्लीज शिव, आओ न मेरे घर, में कुछ नहीं कहूँगी, तुम्हे जो करना है वो कर लेना, बस एक बार आ जाओ.
 
अपडेट 43

स्नेहा मैडम के घर से निकलने के बाद में और जूही मैडम स्टेडियम चले गए. जब हम अंदर गए तो वो आगे आगे चलने लगी. मेने देखा की विकर्म और उसके दोस्त वह आ कर बाते कर रहे थे. उनका ध्यान हमारी तरफ गया पर फिर वो सब अपनी बातो में लगे रहे. उस दिन की घटना के बाद वो शायद पन्गा नहीं करना चाहते थे. मेने और जूही मैडम ने कसरत करना चालू कर दिया. पहले थोड़ा वार्म उप किआ. आज उनमे ज्यादा उत्साह नहीं था, वो बात भी नहीं कर रही थी. में उनके चेहरे को देखता तो वो अपने खयालो में hi खोयी हुई लग रही थी. वार्म उप करने के बाद हमने दुआदना शुरू किआ, पहले वार्मअप दौड़ की. उसके बाद जब हमने रेस जैसी दौड़ लगायी तो वो हार गयी. मुझे आश्चर्य हुआ, क्यों की ऐसा तो था नहीं की में ज्यादा तेज दौड़ने लगा था. जूही मैडम hi ठीक से नहीं दौड़ रही थी. दो तीन बार हमने दौड़ लगायी पर वो मुज से हर बार हार रही थी. मुझे लगने लगा था की शायद मेरा स्नेहा मैडम के घर होना उन्हें अच्छा नहीं लगा था. में शायद अंदर hi अंदर ये बात जनता था इसीलिए में स्नेहा को मन कर रहा था. पर जो हो चूका था उसे तो में बदल नहीं शक्ति था. जब हमने सब ख़तम किआ और हम वापस लोट रहे थे तो स्कूटर के पास मैंने उनसे पूछ hi लिया.

शिव : क्या हुआ है मैडम आप मुझसे ठीक से बात नहीं कर रही हो.

जूही मैडम : (थोड़ी बेरुखी se)Baat कर तो रही हु.

शिव : नहीं आप ठीक से बात नहीं कर रही.

जूही मैडम : (झुंझलाते hue)Aisi कोई बात नहीं है.

शिव :ठीक है आप बताना नहीं चाहती तो कोई बात नहीं. आप जाईये में अपने आप चला jaunga.(Me मुड़कर जाने लगा,)

जूही मैडम : ( जूही शिव को जाते हुए देख रही थी, वो वही कड़ी अपने खयालो में थी, जब शिव उसकी नज़रो से ोजल हुआ तो उसने स्कूटर चालू किआ और शिव के पास जा कर रोक दिया, में नहीं रुका और चलने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ liya.)Betho,

शिव : आप जाइये, में चला जाऊंगा.

जूही मैडम : मेने कहा न बैठो, गयम चलकर बात करते hai.(Mene भी ज्यादा बहस नही की और पीछे बेथ गया और हम गयम पहुंच गए)

गयम में सब लोग थे तो वो सोफे पर बेथ गयी. थोड़ी देर बाद एक एक करके सब निकलने लगे. मेने सब की एंट्री की और लास्ट में मदन सर भी चले गए. उन्होंने भी जूही मैडम से बात करने की कोशिस की पर उन्हें भी पता चल गया की जूही मैडम का मूड ठीक नहीं है तो उन्होंने भी ज्यादा बात नहीं की. जब सब चले गए तो फिर मेने पूछ hi लिया.

शिव : बताईये आप क्यों मुझसे ऐसे बर्ताव कर रही है?

जूही मैडम : तुम्हारे और स्नेहा के बिच क्या चलरहा है?

शिव : (उनके ऐसे सीधे और स्पस्ट सवाल से पहले तो में थोड़ा घबराया पर फिर संभल कर मेने जवाब diya)kya कहना चाहती है आप. हमारे बिछ क्या चलरहा है? से आप का क्या मतलब है.

जूही मैडम : (जूही मैडम की आंखे आंसू से भरने लगी) अंधी नहीं हु me(Apna मुँह छुपकर रोने लगती है)

शिव : (में घबरागायक की ये रो क्यों रही hai)Aap रो क्यों रही है?

जूही मैडम : सच सच बताओ शिव क्या चल रहा है तुम दोनों के बिच.

शिव : आप यकीं कीजिये हमारे बिच कुछ नहीं चलरहा, और आप किस बारेमे ये पूछ रही है मुझे कुछ पता नहीं चल रहा और आप प्लीज रोईए मत.

जूही मैडम : (मेरा हाथ पकड़ कर अपने शिर पर रखदेति hai)Agar तुम्हारे दिल में मेरे लिए थोड़ी सी भी इज्जत है तो खाओ मेरी कसम और कहो की तुम दोनों के बिछ कुछ नहीं है.

शिव :(अब में फंस गया था, अगर में मेरे और स्नेहमड़ाम के बारेमे बता दूंगा तो पक्का जूही मैडम मुझसे दूर हो जाएँगी और फिर में कभी एथलीट नहीं बन पायूँगा, और स्नेहा मैडम की बदनामी होगी वो alag)Aap क्यों जान न चाहती है? क्या इस बात से मेरे एथलिट बन ने पर कोई असर पड़ता है.?

जूही मैडम :नहीं.

शिव : तो फिर क्यों जान न चाहती है आप.

जूही मैडम : (जोर se)Kyu की मुझे फर्क पड़ता है. मुझे फरक पड़ता है की तुम्हारे और स्नेहा के बिच क्या चल रहा है, बताओ मुझे तुम्हारे और स्नेहा के बिछ क्या है.

मेने सोचा अब जो होगा देखा जायेगा. मेने जूही मैडम को सुरु से सब बताने लगा. कैसे मुझे पैसो की जरुरत पड़ी थी, फिर कैसे मेरे और स्नेहा मैडम के बिछ, किस वजह से सम्बन्ध बने. जुहीमदाम मूरत बानी सब सुन रही थी. कभी वो गुस्सा हो रही थी तो कभी शांत हो कर सुन रही थी. जब मेने सब बता दिया.

शिव : बस यही बात है. उन्होंने मेरी मदद की मैंने उनकी.

जूही मैडम : (मुज पर भड़कते hue)Bevakuuuuuf, तुम्हे पता है तुमने क्या किया है, उसने तुम्हे फसा कर अपना काम निकलवाया है. कुटिया साली, और अगर तुम्हे पैसे hi चाहिए थे तो मुझसे कहता, में दे देती.

शिव : आप उस वक़्त यहाँ नहीं थी.

जूही मैडम : तो रुकजाता एक दो दिन, ऐसा कोनसा पहाड़ टूट पड़ा था.

शिव : अगर आप यहाँ होती तो भी में आप से पैसे क्यों मांगता? में जहा जॉब करता हु जहा से मुझे सैलरी मिलनेवाली थी वही तो मांगूंगा न. इसमें मेने क्या गलत किआ.

जूही समाज रही थी की शिव ने कोई गलती नहीं की. उसे पवन और स्नेहा ने मिलकर फसाया है.

जूही मैडम : ठीक है, जो हुआ सो हुआ. चलो पहले यहाँ का काम निपटाते है फिर में तुम्हे छोड़ देती हु.

शिव : रेहनेदीजिये मैडम में कर लूंगा और चला भी jaunga.(Muje उनकी बात याद आ रही थी, “मुझे फर्क पड़ता है”)

जूही मैडम : मेने कहा न में छोड़ने आ रही हु.

उन्होंने मेरी एक बात न सुनी और सब काम करने तक रुकी भी और मुझे छोड़ने भी आयी. है वो ज्यादा बात नहीं कर रही थी बस कुछ सोच जरूर रही थी. उन्होंने मुझे अनाथालय छोड़ा और में अंदर चला गया. (जूही बहोत गुस्से में थी, शिव को छोड़ कर वो सीधे गयी पवनसीर के घर की और.)

जब में अंदर पंहुचा तो सब किचन में hi मिल गए. में रूम में गया और कपडे चेंज किये और दीदी को बोलकर लकडिया काटने चला गया. थोड़ी देर बाद रंजन भी वह आ गयी. आ कर उसने मुझे देखा और मुस्कुराई तो मेने भी मुस्कुराके जवाब दिया. हम दोनों काम में लग गए.

रंजन : कैसा चल रहा है तेरा?

शिव : सब ठीक है, क्यों पूछ रही है?

रंजन : ऐसे hi. वैसे तेरे स्कूल में आने के बाद हमारी सहेलिया बढ़ गयी है.

शिव : (उसकी बात मुझे समाज नहीं aayi)Wo क्यों?

रंजन : वो तो पता नहीं पर पहले जो कभी हमसे बात भी नहीं करती थी वो सब अब हमसे बाते भी करती है और दोस्ती करने के लिए भी सामने से आयी. और बातो बातो में तेरे बारे में पूछ भी रही थी.

शिव : (लकडिया काट ते hue)Kya पूछ रही थी?

रंजन : यही की कोण है तू, क्या करता है? हमें लेने क्यों आया था? हमारा कोण लगता है? ऐसा hi सब.

शिव : क्यों? मेरे बारे में क्यों जान न है उन्हें?

रंजन : मुझे लगता है तुम्हे देख कर तुम पर लट्टू हो रही है.

शिव : क्या? मुज पर, पागल है क्या वो?

रंजन : है तो नहीं पर लगता है तुम्हे देख कर हो रही है.

काम ज्यादा था तो समय का पता hi न चला. जब सरिता दीदी ने खाने के लिए आवाज लगायी तब हमें ध्यान आया. अभी थोड़ा काम बाकि था तो रंजन ने कहा के खाने के बाद ये करलेंगे. मुझे उसकी बात सही लगी तो हम खाने के लिए निकल गए. हम सब खाना खा रहे थे की मैनेजर आया. उसके चलने के ढंग से लग रहा था की उसने शराब पि हुई है. वो सीधे अपने ऑफिस में चला गया. खाना खाने के बाद सब अपने काम में व्यस्त हुए तो में थोड़ी देर छोटे बच्चो के साथ खेलने चला गया और फिर वापस लकड़ियों के काम के लिए आ गया. अंदर सब अपने काम निपटा कर रूम में चले गए. हमने भी अपना काम निपटा लिया था. जब काम ख़तम हुआ तो मेने रंजन को देखा तो उसने मेरी आँखों में देखा और शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली. में उसके पास गया, वो निचे देख रही थी तो मेने उसकी थोड़ी (चीन) को ऊँगली से ऊपर उठाया तो वो मेरी आंखोमे देखने लगी. वो मुस्कुरा रही थी. उसकी प्यारी मुस्कुराहा से में उसकी और झुकता चला गया.

रंजन आज फ्रॉक पहन कर आयी थी. शायद वो सब सोच कर hi ऐसे कपडे पहन कर आयी थी ताकि सब आसानी हो. उसकी आँखों में देखते हुए मेने एक हाथ उसके उन्नत हो रहे स्तन पर रखदिया और उसे दबाने लगा. वो पुरे मेरे हाथ के पंजो में समां गए थे. में उसे आहिस्ता से मसलने लगा. उसने एक बार अपनी आंखे बंद की फिर मेरी और देखने लगी. उसकी आंखे नशेमे डूबी हुई थी. में उसके होठो पर झुकते हुए अपने दूसरे हाथ से उसके फ्रॉक को ऊपर उठाया और उसके फैले हुए छोटे कूल्हों को थम लिया और उसे मसलने लगा. उसने अपनी दोनों बहे मेरे शिर पे लपेटली और मेरे होठो को कास के चूसने लगी. मैंने उसकी पंतय पीछे से थोड़ी निचे खिसका दी और उसके नंगे कूल्हों को मसलने लगा. उसके छोटे छोटे कूल्हे मेरे हाथ से मसलने में मज़ा आ रहा था. वो बहोत गरम हो गयी थी. उसने अपने एक हाथ से मेरा लुंड पकड़ लिए और उसे दबाने लगी. दोनों के अंदर जवानी का तूफान उमड़ रहा था. वो मेरी चैन खोलने लगी.

शिव : (होठो को चूसना छोड़ उसके सामने देखता hai)Kya कर रही हो? कोई आ जायेगा.

रंजन : आने दो जिसे आना है.

शिव : पागल मत बनो, कोई आ गया तो क्या जवाब देंगे.?

रंजन :(वो मेरी बात सुन hi नहीं रही थी, वो अपना काम करती रही और मेरा लुंड को बहार निकल liya)Koi नहीं आएगा. (मेरे लुंड को सहलाते hue)Shiv ये मुझे बहोत अच्छा लगता है, कितना बड़ा है न ye.(Ghutno के बल बैठते हुए मेरे लुंड को देख रही थी. अपने हाथ के पंजे से नाप भी रही थी, फिर आगे पीछे हिलने lagi)Shiv ये बहोत प्यारा hai.(Uske हिलने से मुझे मज़ा आने लगा और एक बार मेरी आंखे बंद हो गयी, वो हिलाते हुए उसे कभी ऊपर कर रही थी कभी दाहिने साइड तो कभी बाये. वो उसे सब जगह से देख रही थी. अपने आप को सही करते हुए अपना मुँह फैलते हुए मेरे लुंड को मुँह के अंदर ले लिया, पर फिर वापस निकल दिया) शिव ये दिन बा दिन बड़ा हो रहा है क्या?, मेरा मुँह पूरा फ़ैल जा रहा है. (वो उसे देखते हुए वापस अपने मुँह में लेने लगी. उसके गरम गरम मुँह का एहसास मेरे लुंड पर हो रहा था. वो उसे चूसने का प्रयत्न कर रही थी.

विणा : रंजन ो रंजन.

में घबरा गया और अपना लुंड पीछे खींच लिया और पंत में ठूसने लगा.

रंजन : (झुंझलाते hue)Kya है?

विणा : दीदी पूछ रही है कितनी देर है?

रंजन :थोड़ी देर है जा बोल de.(Vina चली गयी, उसने देखा की मेने लुंड वापस अंदर दाल दिया है to)Nikalona शिव, अंदर क्यों दाल दिया?

शिव : अभी टाइम नहीं है बाद में.

रंजन : रात को मेरे रूम में आओगे?

शिव : पागल होगयी हो क्या, वह विणा होगी.

रंजन : तुम उसकी चिंता मत करो वो गहरी नींद में सोती है.

शिव : इतनी उतावली क्यों हो रही हो? लता दीदी मेरे साथ होती है अगर में आया और वो जाग गयी तो गड़बड़ hojayegi.(Fir उसका चेहरा पकड़ kar)Chinta मात करो, कभी न कभी मौका मिलजायेगा.

रंजन : (मायूस चेहरे के साथ अपने कपडे ठीक करती है) ठीक है, पर जल्दी करना ऐसा न हो की मेरे साथ कोई हादसा हो जाये.

शिव: एक झापड़ लगाऊंगा अगर ऐसा दोबारा बोलै तो.

रंजन : तुम नहीं जानते शिव, यहाँ क्या चल रहा है?

शिव : ऐसा क्या चल रहा है?

रंजन : में तुम्हे बताना तो नहीं चाहती थी पर लगता है अब वक़्त आ गया है, की तुम्हे सब बताना hi होगा.

शिव : पहेलियाँ मत बजाओ बताओ क्या हो रहा है?

रंजन : (मान में : सॉरी लतादिदी, आपने मन किआ था की शिव को कुछ मात बताना, अगर उसने गुस्से में कुछ कर दिया तो अनर्थ हो जायेगा. पर दीदी जो कुछ आज मेने सुना उस से लगता है की पानी नाक से ऊपर निकल गया है, अगर अभी कुछ न किआ तो ना आप बचेंगी न में. और अगर ऐसा हो गया तो शिव भी नहीं बचेगा. मुझे पता है की अगर शिव को आपके बारेमे पता चल गया की मैनेजर आपके साथ क्या करता है या करना चाहता है तो वो उसे फंसे मार देगा, इस लिए में आपके बारेमे तो कुछ न बताउंगी पर सरितादिदी के बारेमे तो बता hi शक्ति हु, मुझे माफ़ करना दीदी)
 
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