अपडेट 12ा

यहाँ लता और सरिता दोपहर में काम निपटा कर साथ में लेते हुए थे. लता कुछ बोल नहीं रही थी तो सरिता ने hi पहल की.
सरिता : अब्ब बता भी क्या हुआ है?
लता उसकी और देख ने लगी, उसकी आंखे जैसे गहरी सोच में डूबी थी. क्या बताये और कैसे बताये उसे समाज नहीं आ रहा था. सरिता ये देख कर इतना तो समाज गयी की कुछ तो हुआ है. तो उसने अपने हाथ में उसका हाथ थम लिया और बड़े प्यार से कहा
सरिता : ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है, तू और में बचपन से साथ है और हम अच्छी सहेलिया भी है. तू कुछ भी मुझसे कह सकती है. हमारा और है भी कौन. तू दर मात कैसी भी बात हो तू मुझे बता सकती है. तू मुज पे इतना तो भरोसा करती है न?
लता : (उसको गले लगा kar)Hum एक दूसरे के सहारे तो है यहाँ, और तुजपे भरोसा नहीं करुँगी तो किस पे करुँगी. में जानती हु की तूने मेरे लिए क्या क्या किआ है. वो हैवान आज भी मुझसे दूर है उसकी वजह भी तो तू hi है. वर्ण वो कब का मुझे भी नोच चूका होता.
सरिता

उस से दूर हो कर उसकी आँखों में देखते हुए) छोड़ उस नीच को, और ये बता क्या बात है?
लता : (उसके गाल शर्म की वजह से लाल होने लगे और उसकी नज़ारे निचे हो gayi)Wo कल रात शिव के साथ...
सरिता : है मेरी बन्नो, क्या सुहागरात मन ली?
लता : (शरमाते हुए वो उसे हलके से मरती hai)Dhatt, पागल कही की. ऐसा कुछ नहीं हुआ.
सरिता : (मुँह बनाते hue)To फिर इतना शर्मा क्यों रही है?
लता : वो ...wo..Kal रत को... और पिछली कुछ रातो se...(Apni नज़ारे निचे karke)Shiv के साथ कुछ न कुछ होता रहता है.
सरिता : क्या होता रहता है, शिव ने कुछ किआ क्या.
लता : (शर्मा kar)Kabhi वो करता है कभी में.
सरिता

झुंझलाते hue)Kya करते हो?
लता : जब वो मुझे सोया समझता है तब वो mere...(Muskurane लगती है)
सरिता

झुंझलाते hue)Kya?
लता : तू गुस्सा क्यों हो रही है?
सरिता

अपने आप को शांत करते hue)Me गुस्सा नहीं हो रही हु, पर तू बिच में बात क्यों अधूरी छोड़ देती है.
लता : मुझे कितनी शर्म आ रही है, तू क्या जाने.
सरिता : अब बता भी.
लता : वो वो मेरे होठ पर अपने होठ रखता है और कभी कभी मेरे स्तन पर भी हाथ रखता है.
सरिता : नींद में हो जाता होगा, आईएसएम में क्या.
लता : नहीं वो जागते हुए करता है, उसे लगता है की में सोई हुई हु.
सरिता: तो तू इसीलिए उस से दूर हो रही है?
लता : नहीं, पर में भी कभी kabhi...(Uske रुकते hi सरिता के चेहरे पर गुस्सा dekh)me भी कभी कभी वैसी हरकत करलेती हु.
सरिता : तू क्या करती है?
लता : (अपनी नज़ारे झुका ke)Me नहीं बता शक्ति, में बहोत गन्दी हु.
सरिता

लता का नाथ प्यार से थमते hue)Tu क्यों दर रही है, में कुछ भी गलत नहीं सोचूंगी तुम्हारे बारेमे, और कुछ भी गलत है भी नहीं. तू दर मत और बता.
लता : यार मैंने बहोत गन्दी हरकते की है, में नहीं बता शक्ति.
सरिता : क्या गन्दा किआ होगा तूने, उसका लुंड पकड़ा या उसका लुंड चूसा, अपनी छूट में तो लिया नहीं है फिर क्या गन्दा कर दिया.
लता : (अपनी फटी आँखों से उसे देखती hai)Ye तू कैसे बोल रही है.
सरिता : इसमें कुछ भी गन्दा नहीं होता, चल मन लिया की तूने ये सब किआ, पर ये बता प्रॉब्लम क्या है?
लता : यार वो मुझे दीदी कहता है और में उसके साथ ये sab..(Lata गंभीर हो जाती है) और जब ..usee..pata चलेगा to...wo क्या सोचेगा मेरे बारेमे.
सरिता : अगर तुजे इतना hi बुरा लग रहा है तो मत कर उसके साथ.
लता : (नज़ारे jhukaye)Wohi तो प्रॉब्लम है, में बहोत कोशिस करती हु पर अपने आप को रोक नहीं पति hu.(wo अपना मुज छिपा के रोने लगती है)
सरिता : (उसको गले लगते हुए उसकी पीठ को सहलाती hai)Tu चाहती क्या है, क्या तू चाहती है की वो तेरे साथ कुछ करे या ये चाहती है की वो कुछ न करे.
लता : (रट hue)Kya करू कुछ समाज नहीं आ रहा. एक तरफ तो लगता है की वो मेरे साथ सबकुछ करे जो एक लड़का एक लड़की के साथ करता है पर दर भी लगता है की वो ऐसा न करना छाए और उसे ये बुरा लगा और उसने मुझे छोड़ दिया तो.
सरिता : तू ऐसे hi दर रही है. जितना में उसे जानती हु वो तुजे कभी नहीं छोड़ेगा. और रही बात इस सम्बन्ध की तो, पहल तो तुजे hi करनी पड़ेगी. उसे थोड़ा थोड़ा करके रिझा, और देख की वो तुजे भी उस नजर से दखता है की नहीं.
लता : (शरमाते hue)Wo ...वो कभी कभी ऐसे देखता है और मेने कहा न की वो रत को मेरे साथ...
सरिता : (हस्ते hue)To फिर प्रॉब्लम क्या है. जो वो देखना चाहता है वो दिखा दे उसे.
लता : तू बहोत गन्दी है. क्या में उसे वो सब दिखाउंगी?
सरिता : तो मात दिखा, मुझे क्या?, वो किसी और की देख लेगा, और उसके पीछे पड़ेगा, फिर तू रोटी रहना.
लता : वो ऐसा नहीं है.
सरिता : अरे मेरी जान अभी उसने ये रास चखा नहीं है इस लिए, जिस दिन उसने ये रास चख लिया फिर कहना. वो तुजे भी अपने निचे दबाके तेरे ऊपर चढ़ जायेगा.
लता : (और शर्मा जाती hai)hat गन्दी कही की, वो कभी ऐसा नहीं करेगा.
सरिता : (उसे छेड़ते hue)To तू चाहती है की वो कभी तेरे ऊपर न चढ़े, है न?
लता : (फ़ौरन वो बोलती hai)Mene ऐसा कब kaha(Fir जब उसे एहसास होता है की वो क्या बोल गयी तो वो शर्मा जाती है)
सरिता : देखो तो अभी से उसे अपने ऊपर चढाने के सपने देख रही है. तू चिंता मत कर वो एक दिन तुजपे चढ़ेगा भी और अच्छे से तेरी खोलेगा bhi.(Lata शर्मा जाती है) तू थोड़ा शर्माना छोड़, इन सब में थोड़ा बेशरम बन न पड़ता है. सब से पहले तो उस अनादि को खिलाडी बनाना पड़ेगा.
लता : क्या मतलब है तेरा?
सरिता : में ये कह रही हु की उसे ये खेल सीखना पड़ेगा. उसे सीखना पड़ेगा की लड़की के साथ प्यार कैसे किया जाता है और उसमे कितना मज़ा आता है.
लता : (सोचते hue)Wo कैसे?
सरिता : उसके साथ वो वाला प्यार करके, और कैसे?
लता : में अभी भी सामजी नहीं, तू क्या कहना चाहती है?
सरिता : अरे पागल में चुदाई की बात कर रही हु, उसे सीखना पड़ेगा की चुदाई होती क्या है और कैसे की जाती है.
लता : हट गन्दी, ये कैसी गन्दी गन्दी बाते कर रही है.
सरिता : (चिढ़ते hue)Me गन्दी? तो छोड़ ये बाते, तुजे जैसा ठीक लगे वैसा कर, में चलती hu.(Ye कहकर वो उठने लगती है)
लता : (उसका हाथ पकड़ते hue)Gussa क्यों होती hai,(aobe हथियार डालते हुए) अच्छा ठीक है, बता क्या कह रही थी तू.?
सरिता

वापस बैठते hue)Me ये कह रही थी की उसे पता hi नहीं होगा की लड़की के साथ प्यार कैसे किआ जाता है मेरा मतलब चुदाई कैसे की जाती है तो वो तेरे साथ कैसे वो करेगा.? तो उसे सीखना पड़ेगा.
लता : कैसे सीखना पड़ेगा?
सरिता : उसके साथ ये सब कर के और कैसे?
लता : (शरमाते hue)Par मुझे भी कहा आता है?
सरिता :अरे उसे अपने ऊपर चढ़ा दे और अपनी मुनिया में उसका घुसवा ले, दोनों को आ जायेगा.
लता

शर्मजाति hai)Me ऐसा नहीं कर सकती, मुझे उसके साथ बहोत शर्म आती है, पर है वो अगर मेरे साथ ऐसा करेगा तो में उसे रोकूंगी नहीं.
सरिता : पर जब उसे पता hi नहीं होगा तो वो करेगा कैसे?
लता : ये भी सही है. तो फिर क्या करे?
सरिता : (कुछ सोचते hue)Agar तुजे बुरा न लगे तो एक रास्ता है पर...
लता : पर क्या? तू बता तो सही.
सरिता : देख पहले hi कह देती हु तुजे बुरा लगेगा.
लता : (सवालिया नज़रो से उसे देखती hai)Tu बता तो सही, में बुरा नहीं मानूंगी.
सरिता : (हिचकिचाते hue)Tuje भी नहीं आता और उसे भी नहीं आता पर मुझे तो आता hai(Wo रुक जाती है और लता के बदलते भाव को ध्यान से देखती hai.)Dekh मेने पहले hi तुजे कहा था तुजे बुरा लगेगा.
लता : (उसे सरिता की बात बुरी तो लगी फिर सोचा की शायद यही सही है, )अरे में क्यों बुरा मानूंगी. वैसे भी जैसे में हु वैसे hi तू भी है. पर क्या तू उसके साथ वो सब करना चाहती है?
सरिता : (अपनी नज़ारे झुकाते हुए) देख में तुजसे जूथ नहीं बोलूंगी पर मैनेजर के साथ करना मेरी मजबूरी है में कभी दिल से उसके साथ वो सब नहीं कर पायी hu(Uski आँखों में आंसू आ जाते है) वो सिर्फ मुझे नोचता है. में भी चाहती हु की मेरी पसंद का कोई मेरी मर्जी से, वो सब मेरे साथ करे.
लता : (उसके आंसू पोछते hue)To क्या तू भी शिव को चाहती है?
सरिता : अब में क्या कहु, में ये नहीं कह सकती की में उसे चाहती हु, क्यों की वो कहा और में कहा, वो कितना खूबसूरत है, और उसके सामने में कुछ भी नहीं, ऐसे लड़के के साथ जो भी पल बितालु वही मेरी खुशनसीबी होगी. है में ये कह सकती हु की वो मुझे भी पसंद है और तू जानती है वो कितना अच्छा है. वो ऐसा है की वो तो सबको hi पसंद होगा, उन में से में भी एक हु.
लता

बड़े प्यार से) अगर तेरा इतना hi मन है तो करले उसके साथ.
सरिता : पर तुजे बुरा नहीं लगेगा.
लता : अब में क्या खु, मुझे खुद पता नहीं है की वो मेरे साथ वो सब करेगा या नहीं करेगा. वो इस तरह से मुझे कभी देख पायेगा या नहीं. और ये सब करने की हिम्मत में कभी जूता पाऊँगी की नहीं. पर अगर वो तेरे साथ वो सब कर लेता है और तुजे भी ख़ुशी मिलती है तो में क्यों बुरा मानूंगी.
सरिता : (उसको गले लगते hue)Tu चिंता मत कर हम दोनों उसके साथ प्यार करेंगे और उसे भी खूब मज़ा देंगे. वो तेरे साथ भी वो सब karega.(Uski बाटे सुन लता बस हवा में देखती रहती है)
लता : हम्म्म. पता नहीं कैसे?
सरिता : कोई न कोई रास्ता मिल hi जायेगा. चल अब सोते है फिर काम भी करना पड़ेगा.
दोनों अपनी अपनी सोच में दुबे सो जाते है. यहाँ रेसस्स में मेरी नजर एक बार वैस्वी से मिली. कुछ पल के लिए हम दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे. चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. महेश के कुछ कहने पर मैंने उसकी और देखा, फिर बाते करते हुए हम बहार निकल गया. जब वापस आया तो भी हमारी नज़ारे एक बार फिर मिली. हम अपनी जगह जा कर बेथ गए. और तो कुछ ज्यादा नहीं हुआ पर सब को अगले हफ्ते से यूनिफार्म में आने की हिदायत दी गयी. मुझे समाज नहीं आ रहा था की अब यूनिफार्म कैसे आएगा. नौकरी तो अभी अभी लगी है और पगार आने में अभी समय है. मैंने सोचा की टीचर से बात करके देखता हु तो में स्टाफ रूम में चला गया.
वह हमारी क्लास टीचर बिना madam(age 25) बैठी हुई थी. में उनके पास चला गया.
शिव : मैडम क्या में आपसे दो मिनट बात कर सकता हु?
बिना मैडम : (मेरी और देखते hue)Ha बोलो.
शिव

वह दूसरे टीचर्स भी थे तो मुझे शर्म आ रही thi)Madam अकेले में बात कर सकते है?
बिना मैडम : (एकबार मुझे ध्यान से देखा फिर बाजु में बैठी दूसरी टीचर को देखा फिर कुछ सोच कर वो कड़ी hui)Chalo. (हम लोग दरवाजे से थोड़ी दुरी पर आ gaye)Ha बोलो.
शिव : (हिचकिचाते hue)Madam आप ने यूनिफार्म के लिए बोलै है पर मेरे पास अभी पैसे नहीं है, तो क्या आप किसी स्टूडेंट का पुराण यूनिफार्म मुझे दिलवा सकती है.
बिना मैडम : (एक बार फिर मेरी और ध्यान से देखते hue)Kya तुम्हारे maa-baap गरीब है? तो तुमने यहाँ एडमिशन कैसे लिया?
शिव : (धीमी आवाज me)Mere ma-baap नहीं है मैडम, में अनाथ हु और अनाथालय में रहता हु. स्कॉलर्शिप मिलने की वजह से में यहाँ एडमिशन ले पाया हु.
बिना मैडम : ओह! ठीक है में देखती हु. कोई ट्वेल्थ का स्टूडेंट जो यहाँ से पास करके निकला हो अगर उसका कोई कांटेक्ट होता है तो देखती hu.(Fir मुझे ऊपर से निचे तक देखते हुए) वैसे तुम्हारी साइज का मिलना थोड़ा मुश्किल है. फिर भी में कोशिस करुँगी.
शिव : थैंक यू मैडम.
बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए) कोई बात नहीं.
में वह से निकल गया. बिना स्टाफ रूम में वापस गयी तो उसके साथ में बैठी दूसरी टीचर जिनका नाम वर्षा (आगे 27)था उन्होंने पूछा.
वर्षा : क्या कह रहा था?
बिना मैडम : वो नोटिस गयी है न की सबको यूनिफार्म लाना है तो उसी सिलसिले में बात कर रहा था.
वर्षा :ओह! (मुस्कुराते hue)muje लगा तुम्हे लव लत्तेर तो देने नहीं आया.
बिना : क्या तुम भी, वो स्टूडेंट है ऐसी बदतमीज़ी थोड़े hi कर सकता है वो.
वर्षा : अरे तू नहीं जानती आज कल के लड़को को, कुछ साल पहले एक लड़का मुझे भी ऐसे hi लत्तेर देने आया था.
बिना

हैरान होते hue)Kya कह रही हो? क्या सच में? फिर?
वर्षा : फिर क्या, मैंने दन्त दिया, और क्या, और धमकाया की अगर वो ऐसी हरकत दोबारा करेगा तो प्रिंसिपल से कह कर स्कूल से निकलवा दूंगी. उसके बाद वो हमेशा मुझे घूरता रहता था पर फिर कभी ऐसी हरकत नहीं की.
बिना : क्या सच में ऐसा भी होता है? पर ये लड़का ऐसा नहीं है, पढ़ने भी होशियार है. दरअसल वो अनाथ है तो उसके पास यूनिफार्म खरीदने के लिए पैसे नहीं है तो वो बोल रहा था की अगर किसी का पुराण मिल जाये तो उसे दिलवाडु.
वर्षा : ओह! ऐसा है, चल में भी देखती हु अगर कुछ होता है तो. फिर दोनों अपने काम में लगजाति है.