Adultery Kundali Bhagya - Page 4 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 12ा





यहाँ लता और सरिता दोपहर में काम निपटा कर साथ में लेते हुए थे. लता कुछ बोल नहीं रही थी तो सरिता ने hi पहल की.

सरिता : अब्ब बता भी क्या हुआ है?

लता उसकी और देख ने लगी, उसकी आंखे जैसे गहरी सोच में डूबी थी. क्या बताये और कैसे बताये उसे समाज नहीं आ रहा था. सरिता ये देख कर इतना तो समाज गयी की कुछ तो हुआ है. तो उसने अपने हाथ में उसका हाथ थम लिया और बड़े प्यार से कहा

सरिता : ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है, तू और में बचपन से साथ है और हम अच्छी सहेलिया भी है. तू कुछ भी मुझसे कह सकती है. हमारा और है भी कौन. तू दर मात कैसी भी बात हो तू मुझे बता सकती है. तू मुज पे इतना तो भरोसा करती है न?

लता : (उसको गले लगा kar)Hum एक दूसरे के सहारे तो है यहाँ, और तुजपे भरोसा नहीं करुँगी तो किस पे करुँगी. में जानती हु की तूने मेरे लिए क्या क्या किआ है. वो हैवान आज भी मुझसे दूर है उसकी वजह भी तो तू hi है. वर्ण वो कब का मुझे भी नोच चूका होता.

सरिता :(उस से दूर हो कर उसकी आँखों में देखते हुए) छोड़ उस नीच को, और ये बता क्या बात है?

लता : (उसके गाल शर्म की वजह से लाल होने लगे और उसकी नज़ारे निचे हो gayi)Wo कल रात शिव के साथ...

सरिता : है मेरी बन्नो, क्या सुहागरात मन ली?

लता : (शरमाते हुए वो उसे हलके से मरती hai)Dhatt, पागल कही की. ऐसा कुछ नहीं हुआ.

सरिता : (मुँह बनाते hue)To फिर इतना शर्मा क्यों रही है?

लता : वो ...wo..Kal रत को... और पिछली कुछ रातो se...(Apni नज़ारे निचे karke)Shiv के साथ कुछ न कुछ होता रहता है.

सरिता : क्या होता रहता है, शिव ने कुछ किआ क्या.

लता : (शर्मा kar)Kabhi वो करता है कभी में.

सरिता :(झुंझलाते hue)Kya करते हो?

लता : जब वो मुझे सोया समझता है तब वो mere...(Muskurane लगती है)

सरिता :(झुंझलाते hue)Kya?

लता : तू गुस्सा क्यों हो रही है?

सरिता :(अपने आप को शांत करते hue)Me गुस्सा नहीं हो रही हु, पर तू बिच में बात क्यों अधूरी छोड़ देती है.

लता : मुझे कितनी शर्म आ रही है, तू क्या जाने.

सरिता : अब बता भी.

लता : वो वो मेरे होठ पर अपने होठ रखता है और कभी कभी मेरे स्तन पर भी हाथ रखता है.

सरिता : नींद में हो जाता होगा, आईएसएम में क्या.

लता : नहीं वो जागते हुए करता है, उसे लगता है की में सोई हुई हु.

सरिता: तो तू इसीलिए उस से दूर हो रही है?

लता : नहीं, पर में भी कभी kabhi...(Uske रुकते hi सरिता के चेहरे पर गुस्सा dekh)me भी कभी कभी वैसी हरकत करलेती हु.

सरिता : तू क्या करती है?

लता : (अपनी नज़ारे झुका ke)Me नहीं बता शक्ति, में बहोत गन्दी हु.

सरिता :(लता का नाथ प्यार से थमते hue)Tu क्यों दर रही है, में कुछ भी गलत नहीं सोचूंगी तुम्हारे बारेमे, और कुछ भी गलत है भी नहीं. तू दर मत और बता.

लता : यार मैंने बहोत गन्दी हरकते की है, में नहीं बता शक्ति.

सरिता : क्या गन्दा किआ होगा तूने, उसका लुंड पकड़ा या उसका लुंड चूसा, अपनी छूट में तो लिया नहीं है फिर क्या गन्दा कर दिया.

लता : (अपनी फटी आँखों से उसे देखती hai)Ye तू कैसे बोल रही है.

सरिता : इसमें कुछ भी गन्दा नहीं होता, चल मन लिया की तूने ये सब किआ, पर ये बता प्रॉब्लम क्या है?

लता : यार वो मुझे दीदी कहता है और में उसके साथ ये sab..(Lata गंभीर हो जाती है) और जब ..usee..pata चलेगा to...wo क्या सोचेगा मेरे बारेमे.

सरिता : अगर तुजे इतना hi बुरा लग रहा है तो मत कर उसके साथ.

लता : (नज़ारे jhukaye)Wohi तो प्रॉब्लम है, में बहोत कोशिस करती हु पर अपने आप को रोक नहीं पति hu.(wo अपना मुज छिपा के रोने लगती है)

सरिता : (उसको गले लगते हुए उसकी पीठ को सहलाती hai)Tu चाहती क्या है, क्या तू चाहती है की वो तेरे साथ कुछ करे या ये चाहती है की वो कुछ न करे.

लता : (रट hue)Kya करू कुछ समाज नहीं आ रहा. एक तरफ तो लगता है की वो मेरे साथ सबकुछ करे जो एक लड़का एक लड़की के साथ करता है पर दर भी लगता है की वो ऐसा न करना छाए और उसे ये बुरा लगा और उसने मुझे छोड़ दिया तो.

सरिता : तू ऐसे hi दर रही है. जितना में उसे जानती हु वो तुजे कभी नहीं छोड़ेगा. और रही बात इस सम्बन्ध की तो, पहल तो तुजे hi करनी पड़ेगी. उसे थोड़ा थोड़ा करके रिझा, और देख की वो तुजे भी उस नजर से दखता है की नहीं.

लता : (शरमाते hue)Wo ...वो कभी कभी ऐसे देखता है और मेने कहा न की वो रत को मेरे साथ...

सरिता : (हस्ते hue)To फिर प्रॉब्लम क्या है. जो वो देखना चाहता है वो दिखा दे उसे.

लता : तू बहोत गन्दी है. क्या में उसे वो सब दिखाउंगी?

सरिता : तो मात दिखा, मुझे क्या?, वो किसी और की देख लेगा, और उसके पीछे पड़ेगा, फिर तू रोटी रहना.

लता : वो ऐसा नहीं है.

सरिता : अरे मेरी जान अभी उसने ये रास चखा नहीं है इस लिए, जिस दिन उसने ये रास चख लिया फिर कहना. वो तुजे भी अपने निचे दबाके तेरे ऊपर चढ़ जायेगा.

लता : (और शर्मा जाती hai)hat गन्दी कही की, वो कभी ऐसा नहीं करेगा.

सरिता : (उसे छेड़ते hue)To तू चाहती है की वो कभी तेरे ऊपर न चढ़े, है न?

लता : (फ़ौरन वो बोलती hai)Mene ऐसा कब kaha(Fir जब उसे एहसास होता है की वो क्या बोल गयी तो वो शर्मा जाती है)

सरिता : देखो तो अभी से उसे अपने ऊपर चढाने के सपने देख रही है. तू चिंता मत कर वो एक दिन तुजपे चढ़ेगा भी और अच्छे से तेरी खोलेगा bhi.(Lata शर्मा जाती है) तू थोड़ा शर्माना छोड़, इन सब में थोड़ा बेशरम बन न पड़ता है. सब से पहले तो उस अनादि को खिलाडी बनाना पड़ेगा.

लता : क्या मतलब है तेरा?

सरिता : में ये कह रही हु की उसे ये खेल सीखना पड़ेगा. उसे सीखना पड़ेगा की लड़की के साथ प्यार कैसे किया जाता है और उसमे कितना मज़ा आता है.

लता : (सोचते hue)Wo कैसे?

सरिता : उसके साथ वो वाला प्यार करके, और कैसे?

लता : में अभी भी सामजी नहीं, तू क्या कहना चाहती है?

सरिता : अरे पागल में चुदाई की बात कर रही हु, उसे सीखना पड़ेगा की चुदाई होती क्या है और कैसे की जाती है.

लता : हट गन्दी, ये कैसी गन्दी गन्दी बाते कर रही है.

सरिता : (चिढ़ते hue)Me गन्दी? तो छोड़ ये बाते, तुजे जैसा ठीक लगे वैसा कर, में चलती hu.(Ye कहकर वो उठने लगती है)

लता : (उसका हाथ पकड़ते hue)Gussa क्यों होती hai,(aobe हथियार डालते हुए) अच्छा ठीक है, बता क्या कह रही थी तू.?

सरिता :(वापस बैठते hue)Me ये कह रही थी की उसे पता hi नहीं होगा की लड़की के साथ प्यार कैसे किआ जाता है मेरा मतलब चुदाई कैसे की जाती है तो वो तेरे साथ कैसे वो करेगा.? तो उसे सीखना पड़ेगा.

लता : कैसे सीखना पड़ेगा?

सरिता : उसके साथ ये सब कर के और कैसे?

लता : (शरमाते hue)Par मुझे भी कहा आता है?

सरिता :अरे उसे अपने ऊपर चढ़ा दे और अपनी मुनिया में उसका घुसवा ले, दोनों को आ जायेगा.

लता :(शर्मजाति hai)Me ऐसा नहीं कर सकती, मुझे उसके साथ बहोत शर्म आती है, पर है वो अगर मेरे साथ ऐसा करेगा तो में उसे रोकूंगी नहीं.

सरिता : पर जब उसे पता hi नहीं होगा तो वो करेगा कैसे?

लता : ये भी सही है. तो फिर क्या करे?

सरिता : (कुछ सोचते hue)Agar तुजे बुरा न लगे तो एक रास्ता है पर...

लता : पर क्या? तू बता तो सही.

सरिता : देख पहले hi कह देती हु तुजे बुरा लगेगा.

लता : (सवालिया नज़रो से उसे देखती hai)Tu बता तो सही, में बुरा नहीं मानूंगी.

सरिता : (हिचकिचाते hue)Tuje भी नहीं आता और उसे भी नहीं आता पर मुझे तो आता hai(Wo रुक जाती है और लता के बदलते भाव को ध्यान से देखती hai.)Dekh मेने पहले hi तुजे कहा था तुजे बुरा लगेगा.

लता : (उसे सरिता की बात बुरी तो लगी फिर सोचा की शायद यही सही है, )अरे में क्यों बुरा मानूंगी. वैसे भी जैसे में हु वैसे hi तू भी है. पर क्या तू उसके साथ वो सब करना चाहती है?

सरिता : (अपनी नज़ारे झुकाते हुए) देख में तुजसे जूथ नहीं बोलूंगी पर मैनेजर के साथ करना मेरी मजबूरी है में कभी दिल से उसके साथ वो सब नहीं कर पायी hu(Uski आँखों में आंसू आ जाते है) वो सिर्फ मुझे नोचता है. में भी चाहती हु की मेरी पसंद का कोई मेरी मर्जी से, वो सब मेरे साथ करे.

लता : (उसके आंसू पोछते hue)To क्या तू भी शिव को चाहती है?

सरिता : अब में क्या कहु, में ये नहीं कह सकती की में उसे चाहती हु, क्यों की वो कहा और में कहा, वो कितना खूबसूरत है, और उसके सामने में कुछ भी नहीं, ऐसे लड़के के साथ जो भी पल बितालु वही मेरी खुशनसीबी होगी. है में ये कह सकती हु की वो मुझे भी पसंद है और तू जानती है वो कितना अच्छा है. वो ऐसा है की वो तो सबको hi पसंद होगा, उन में से में भी एक हु.

लता :(बड़े प्यार से) अगर तेरा इतना hi मन है तो करले उसके साथ.

सरिता : पर तुजे बुरा नहीं लगेगा.

लता : अब में क्या खु, मुझे खुद पता नहीं है की वो मेरे साथ वो सब करेगा या नहीं करेगा. वो इस तरह से मुझे कभी देख पायेगा या नहीं. और ये सब करने की हिम्मत में कभी जूता पाऊँगी की नहीं. पर अगर वो तेरे साथ वो सब कर लेता है और तुजे भी ख़ुशी मिलती है तो में क्यों बुरा मानूंगी.

सरिता : (उसको गले लगते hue)Tu चिंता मत कर हम दोनों उसके साथ प्यार करेंगे और उसे भी खूब मज़ा देंगे. वो तेरे साथ भी वो सब karega.(Uski बाटे सुन लता बस हवा में देखती रहती है)

लता : हम्म्म. पता नहीं कैसे?

सरिता : कोई न कोई रास्ता मिल hi जायेगा. चल अब सोते है फिर काम भी करना पड़ेगा.

दोनों अपनी अपनी सोच में दुबे सो जाते है. यहाँ रेसस्स में मेरी नजर एक बार वैस्वी से मिली. कुछ पल के लिए हम दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे. चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. महेश के कुछ कहने पर मैंने उसकी और देखा, फिर बाते करते हुए हम बहार निकल गया. जब वापस आया तो भी हमारी नज़ारे एक बार फिर मिली. हम अपनी जगह जा कर बेथ गए. और तो कुछ ज्यादा नहीं हुआ पर सब को अगले हफ्ते से यूनिफार्म में आने की हिदायत दी गयी. मुझे समाज नहीं आ रहा था की अब यूनिफार्म कैसे आएगा. नौकरी तो अभी अभी लगी है और पगार आने में अभी समय है. मैंने सोचा की टीचर से बात करके देखता हु तो में स्टाफ रूम में चला गया.

वह हमारी क्लास टीचर बिना madam(age 25) बैठी हुई थी. में उनके पास चला गया.

शिव : मैडम क्या में आपसे दो मिनट बात कर सकता हु?

बिना मैडम : (मेरी और देखते hue)Ha बोलो.

शिव :(वह दूसरे टीचर्स भी थे तो मुझे शर्म आ रही thi)Madam अकेले में बात कर सकते है?

बिना मैडम : (एकबार मुझे ध्यान से देखा फिर बाजु में बैठी दूसरी टीचर को देखा फिर कुछ सोच कर वो कड़ी hui)Chalo. (हम लोग दरवाजे से थोड़ी दुरी पर आ gaye)Ha बोलो.

शिव : (हिचकिचाते hue)Madam आप ने यूनिफार्म के लिए बोलै है पर मेरे पास अभी पैसे नहीं है, तो क्या आप किसी स्टूडेंट का पुराण यूनिफार्म मुझे दिलवा सकती है.

बिना मैडम : (एक बार फिर मेरी और ध्यान से देखते hue)Kya तुम्हारे maa-baap गरीब है? तो तुमने यहाँ एडमिशन कैसे लिया?

शिव : (धीमी आवाज me)Mere ma-baap नहीं है मैडम, में अनाथ हु और अनाथालय में रहता हु. स्कॉलर्शिप मिलने की वजह से में यहाँ एडमिशन ले पाया हु.

बिना मैडम : ओह! ठीक है में देखती हु. कोई ट्वेल्थ का स्टूडेंट जो यहाँ से पास करके निकला हो अगर उसका कोई कांटेक्ट होता है तो देखती hu.(Fir मुझे ऊपर से निचे तक देखते हुए) वैसे तुम्हारी साइज का मिलना थोड़ा मुश्किल है. फिर भी में कोशिस करुँगी.

शिव : थैंक यू मैडम.

बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए) कोई बात नहीं.

में वह से निकल गया. बिना स्टाफ रूम में वापस गयी तो उसके साथ में बैठी दूसरी टीचर जिनका नाम वर्षा (आगे 27)था उन्होंने पूछा.

वर्षा : क्या कह रहा था?

बिना मैडम : वो नोटिस गयी है न की सबको यूनिफार्म लाना है तो उसी सिलसिले में बात कर रहा था.

वर्षा :ओह! (मुस्कुराते hue)muje लगा तुम्हे लव लत्तेर तो देने नहीं आया.

बिना : क्या तुम भी, वो स्टूडेंट है ऐसी बदतमीज़ी थोड़े hi कर सकता है वो.

वर्षा : अरे तू नहीं जानती आज कल के लड़को को, कुछ साल पहले एक लड़का मुझे भी ऐसे hi लत्तेर देने आया था.

बिना :(हैरान होते hue)Kya कह रही हो? क्या सच में? फिर?

वर्षा : फिर क्या, मैंने दन्त दिया, और क्या, और धमकाया की अगर वो ऐसी हरकत दोबारा करेगा तो प्रिंसिपल से कह कर स्कूल से निकलवा दूंगी. उसके बाद वो हमेशा मुझे घूरता रहता था पर फिर कभी ऐसी हरकत नहीं की.

बिना : क्या सच में ऐसा भी होता है? पर ये लड़का ऐसा नहीं है, पढ़ने भी होशियार है. दरअसल वो अनाथ है तो उसके पास यूनिफार्म खरीदने के लिए पैसे नहीं है तो वो बोल रहा था की अगर किसी का पुराण मिल जाये तो उसे दिलवाडु.

वर्षा : ओह! ऐसा है, चल में भी देखती हु अगर कुछ होता है तो. फिर दोनों अपने काम में लगजाति है.
 
अपडेट 13

महेश और हर्ष दोनों खड़े थे मेरा इंतजार करते हुए.

हर्ष : क्या हुआ बे, कहा गया था?

शिव : कुछ नहीं वो टीचर से थोड़ा काम था.

हर्ष : चल बेथ आज हम तुजे छोड़ देते है तेरे घर.

शिव : नहीं में चला जाऊंगा.

महेश : आबे चल न.

मुझे खींच कर उसने बाइक पर बिठा दिया. हम तीनो चल पड़े. में रास्ता बताता गया और हम अनाथालय पहुंच गए. वो दोनों मुझे छोड़ कर निकल गए. और में अंदर चला गया. आज शारिता दीदी सामने दिखी.

सरितादिदी : अरे वह स्कूल में नए दोस्त भी बना लिए.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ha दीदी.

सरितादिदी : चल अच्छा है. कोई गर्लफ्रेंड भी बनायीं की नहीं?

शिव : क्या दीदी आप भी.

में मुस्कुराते हुए अंदर चला गया और वो भी मुस्कुराती हुई अपने काम में लग गयी. मेने फटाफट कपडे बदले और लता दीदी के पास चला गया. मेने उसको पीछे से पकड़ा और उनके गाल पर किश किआ.

लतादिदी : आज जल्दी आ गया तू. चल नास्ता कर ले.

शिव : है दीदी वो मेरे दोस्त छोड़ ने आये थे तो जल्दी आ गया.

मेने नास्ता किआ और फिर उनको bye बोल कर गयम के लिए निकल ने लगा. रस्ते में रंजन मिल गयी. वो मेरी और देख रही थी जैसे कुछ कहना चाहती हो तो में उसके पास चला गया.

शिव : क्या हुआ?

रंजन : (मेरी आँखों में देखते hue)Kuchh नहीं.

शिव : चल बोल न, मुझे पता है तुजे कुछ कहना है.

रंजन : (वो मुस्कुरायी फिर जिजकते हुए) Wo..wo स्कूल में...

शिव : (चिंतित स्वर me)Kuchh हुआ क्या स्कूल में? किसी ने परेशान किआ?

रंजन : (एकदम se)Nahi नहीं ...वैसी बात नहीं है. Wo..wo

शिव : (प्यार se)Chal अब बता न मुझे देर हो रही है.

रंजन : (नज़ारे झुकाते hue)Wo स्कूल में यूनिफार्म के लिए बोलै है

शिव : ओह! मुझे भी बोलै है. मेने टीचर से बात की है की किसी का पुराण यूनिफार्म मिल जाये तो वो मुझे देदे. तुम भी बात कर के देखो अगर मिलजाता है तो ठीक है वर्ण कुछ करते है.

रंजन : ठीक है.

शिव : (मुस्कुराते हुए) और कुछ?

रंजन : (शर्मा के नज़ारे जुकाते हुए मुस्कुराती hai)Kuchh नहीं.

मैंने चारो और नज़ारे दौड़ाई, कोई नज़र नहीं आया तो उसका चेहरा उठा कर होठो पर हलके से किश करदी और वह से निकल गया. जब मैंने पीछे मुड़कर रंजन को देखता तो वो हैरानी से मुझे hi देख रही थी तो मैंने मुस्कुराकर bye का इस्सर किया तो उसने भी मुस्कुराकर bye का इस्सर किआ. फिर में गयम पहुंच कर अपने काम में लग गया. सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, मेरे दिमाग में यूनिफार्म के बारे में hi चल रहा था, और अब तो रंजन और विणा के लिए भी लेने था. मेने देखा की पवनसीर केबिन में hi बैठे हुए थे. में सोच रहा था की क्या उन से बात करू. पर हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर सोचा एक बार बात करके देख ने में कोई हर्ज़ नहीं है. मेने पवनसीर की केबिन के दरवाजे पर दस्तक दी.

शिव : मई ी के इन सर.

पवनसीर : शिव!, आओ , (में अंदर चला gaya)bolo क्या हुआ?

शिव : (हिचकिचाते hue)Sir एक काम था.

पवनसीर : है है बोलो.

शिव : सर मुझे कहते हुए ठीक नहीं लग रहा पर... हमारे स्कूल में हमे यूनिफार्म लेने है, वैसे तो मैंने मेरे क्लास टीचर को केहड़िया है की किसी की पुराणी यूनिफार्म मिलजाए तो वो अर्रंगे करवादे पर agar......Sir, par...agar... न हुआ तो क्या आप... सैलरी से थोड़ा एडवांस दे सकते है?

पवनसीर : (वो गौर से मेरी और देखते है फिर कुछ सोच kar)Waise तो ये मेरे रूल्स के खिलाफ है पर में सोचता हु में क्या कर सकता हु.

शिव : ठीक है सर. थैंक यू.

में वह से निकलकर अपनी जगह जाकर बेथ गया और अपना काम करने लगाई. पवन सर आज जल्दी निकल गए और उन्होंने मेरी बात के लिए कुछ नहीं कहा तो में मायूस हो गया. रात को जब में घर पंहुचा तो भी अपने ख़यालोमे hi था. में सोच रहा था की कैसे पैसो का इंतजाम किया जाये. खाई रत के खाने के बाद हम पढ़ाई करने बेथ गए. विणा थी तो कुछ हुआ नहीं और रंजन भी थोड़ा दूर hi बैठी थी. जब हमारी नज़ारे मिलती तो वो मुस्कुरा देती थी. जब पढ़ाई ख़तम हुई तो विणा बाथरूम की और चली गयी तो मेने रंजन के हाथ पर हाथ रक्खा. वो नज़ारे झुकाये शर्मा रही थी.

शिव : क्या हुआ नाराज हो?

रंजन : (मेरी आंखोमे देखते हुए ‘ना’ में गर्दन हिलायी)

शिव : इतनी दूर दूर बैठी थी तो मुझे लगा की नाराज़ हो, ठीक है फिर में चलता हु.

उसने सिर्फ ‘है’ में गर्दन हिलायी, मेने उसके गाल पर किश किआ और निकलने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़लिअ. मेने उसकी और देखा तो वो मेरी आंखोमे देख रही थी. की तभी बाथरूम के दरवाजे की अव्वज हुई.

शिव : में जाऊ?

उसने हां में सर हिलाया और में वह से निकल कर अपने रूम में चला गया. दीदी शायद सोई हुई थी. मेने अपने कपडे निकले और सिर्फ अंडरवियर में आ गया. मेने दीदी की और देखा तो उनकी आंखे बंद थी वो पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए थी. पेअर पुरे ढके हुए थे पर उनका पेट नंगा था उसके ऊपर उनके उभर ब्लौसमे से भी अपना आकर स्पस्ट दिखा रहे थे. ऊपर निचे होते उनके उन्नत उभारो को कुछ पल में देख रहा था.

लतादिदी : अब ऐसे hi देखता रहेगा या आ कर सोयेगा.

मेने उनके चेहरे की और देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. में झेप गया और जल्दी से उनकी बगल में जा कर लेट गया. कुछ देर हमारे बिच चुप्पी छायी रही तो उन्होंने करवट लेकर अपना शिर मेरी बाजपे रखदिया और अपना हाथ मेरी छाती पे रखदिया. ऐसा लग रहा था जैसे दो pati-patni अपने कमरे में लेते हुए हो.

लतादिदी : (मेरे चेहरे की और देखते हुए) क्या हुआ? क्यों चुप चुप सा है?

शिव : (उनकी और करवट लेते hue)Kuchh नहीं दीदी ऐसे hi.

लतादिदी : तू कुछ परेशान है, बताना क्या हुआ?

शिव : नहीं ऐसी कोई खास बात नहीं दीदी, वो यूनिफार्म लेनी है उसी के बारे में सोच रहा था.

लतादिदी : में मैनेजर से बात करू?

शिव : (थोड़ी सख्त आवाज me)Nahi दीदी आप को उस से बात करने की कोई जरुरत नहीं. मेने टीचर से और गयम के मालिक से बात की है देखते है क्या होता है.

लतादिदी : विणा और रंजन को भी तो चाहिए होंगे.

शिव : है, मेने उन्हें भी बोलै है अपने टीचर से बात करने के लिए, किसी का पुराण मिल जाये तो.

लतादिदी : तो फिर टेंशन क्यों ले रहा है? हो जायेगा कुछ न कुछ.

शिव : (मुस्कुराता hai)Me कोई टेंशन नहीं ले रहा बस सोच रहा tha.(Mene लतादिदी को अपनी और खींचता है और उनके गाल पर पप्पी di)Good नाईट दीदी.

लतादिदी : (अपनी आंखे बंद करके उसके शाइन से लग kar)Goodnight.

दो तीन दिन गुजर गए पर न पवनसीर ने पैसो के बारेमे कुछ कहा, और न बिना मैडम ने कुछ कहा. मैंने एक बार सोचा की क्यों न जूही मैडम को कहु, पर हिम्मत नहीं हो रही थी. बिच बिच में महेश बाइक ले आता था तो हम तीनो उस पर थोड़ा बहोत घुमलेते the.Kabhi कभी मेरी नजर वैस्वी से टकरा जाती. सच कहु तो ऐसी कोई फीलिंग मेरे दिल में नहीं थी, पर मेरी नजर कभी कभी उसकी और चली जाती थी. उसका चेहरा भी सपाट hi रहता था, वो भी बस ऐसे hi मुझे देखती थी. पहले में मज़बूरी में दौड़ता था पर अब मुझे दौड़ना अच्छा लग रहा था. जब भी मौका मिलता में दौड़ लगा लेता. गयम में कसरत से भी मेरा शरीर अब अपना आकर बदल रहा था.

एक दिन जब में जूही मैडम के घर पंहुचा तो वह टाला लगा हुआ था. तो मैंने गयम की और दौड़ लगा दी. जब में वह पंहुचा तो कोई नहीं था तो में वही खड़ा इन्तेजारकरने लगा. थोड़ी देर में वह पवनसीर आये उनके साथ में एक खूबसूरत सी लेडी भी थी. पवनसीर ने मुझे चाबियां दी और मेने गेट खोल्दिए. हम सब अंदर आ गए.

पवनसीर : शिव ये मेरी वाइफ है स्नेहा.

शिव : (मेने हाथ जोड़ते hue)Goodmorning मैडम.

स्नेहा : (बड़ी शालीनता se)Goodmorning शिव.

पवनसीर : जूही दो दिन के लिए बहार गयी है तो तुम जरा संभल लेना शिव.

शिव : कोई बात नहीं सर.

वो दोनों केबिन में चले गए और में साफसफाई करके अपनी चेयर पर बेथ गया. थोड़ी देर में सब आने लगे. जब सब आ गए तो में उनके साथ एक्सरसाइज जोन में चला गया और कसरत करने लगा. आज सब अपने आप hi कसरत कर रहे थे. मेने ट्रेडमिल पे थोड़ी दौड़ लगायी फिर जूही मैडम के सिखाई हुई कसरत करने लगा. कुछ औरतोने मेरी हेल्प मांगी तो में बिच बिच में उनको भी कसरत करने में मदद करने लगा. (कुछ औरते जिनको इतनी हेल्प की जरुरत नहीं होती फिर भी वो जानबुज कर शिव को बुला रही थी.) में उन्हें कसरत करवा रहा था की किसी की मधुर ध्वनि मेरे कानो में गुंजी “शिव”. मेने मुद कर देखा तो स्नेहा मैडम थी. तो में उनके पास चला गया.

शिव : जी मैडम?.

स्नेहा : क्या तुम मुझे एक्सेरसिस सिखाओगे?

शिव : मैडम मुझे भी अभी इतना पता नहीं है एक्सेरसिस के बारे में, यहाँ तो जूही मैडम hi सिखाती है. आज वो नहीं आयी तो में यहाँ था.

स्नेहा : में भी ये एक्सेरसिस कहा रेगुलर करती हु पर आज यहाँ आयी थी तो सोचा थोड़ा वर्कआउट कर लू.

शिव : जी जैसा आप कहे. तो किस तरह की एक्सेरसिस करना चाहती है आप.

स्नेहा : (मेरी और सवालिया नजरो से देखते hue)Kis तरह की से तुम्हारा क्या मतलब है? किस किस तरह की एक्सरसाइज होती है?

शिव : जी वो आप अपनी बॉडी के साथ क्या करना चाहती है उस पर निर्भर करता है. अगर आप अपनी बॉडी को मजबूत करना चाहती है तो उस प्रकार की कसरत होती है, अगर आप अपनी बॉडी को टोन करना चाहती है मतलब किसी हिस्से को शेप में लाना चाहती है तो उसकी कसरत अलग होती है, वगैरा वगैरा.

स्नेहा : (स्नेहा मैडम पता नहीं पर मुझे बड़े गौर से देख रही thi)Are वह एक्सेरसिस भी इतनी प्रकार की होती है मुझे पता नहीं था. वैसे तुम्हे क्या लगता है मुझे किस तरह की एक्सेरसिस करनी चाहिए.

शिव : (मैंने उन्हें ऊपर से निचे तक देखा, वो थोड़ी भरी हुई थी पर शेप में थी, हाइट भी अच्छी थी और रंग भी गोरा था, कुल मिलकर वो बहोत खूबसूरत और अट्रैक्टिव thi)Muje लगताहै आप को एरोबिक्स hi करनी चाहिए क्यों की आप पहलवान बन न तो चाहती नहीं होगी और न hi आप मोती है तो आप को तो बस अपना शेप मेन्टेन करने की जरुरत है, बस शरीर को मेन्टेन रखने के लिए hi आप को एक्सेरसिस करनी चाहिए.

स्नेहा :(स्नेहा को उसकी बाते अच्छी लग रही थी, वो इस नवयुवक से काफी प्रभावित दिख रही थी, उसने धीरे से शिव से kaha)Kya तुम्हे लगता है की में शेप में hu?(Fir मुस्कुरा देती है)

शिव :(थोड़ा झेपते hue)Ji ...जी आप सच में है.

स्नेहा :(सब लोग होने की वजह स्नेहा से बात को ज्यादा खींचना नहीं चाहती thi)To बताओ मुझे क्या करना चाहिए.

शिव : जी आप पहले ट्रेडमिल पे थोड़ा चल लीजिये फिर थोड़ा दौड़ लीजिये जिस से आप की बॉडी गरम हो जाएगी.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Thik है अगर तुम्हे लगता है की में गरम नहीं हु तो में गरम हो जाती हु.

उनकी बात सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा पर जब मैंने उनकी बात पे गौर किआ तो मुझे शर्म आ गयी की उन्होंने क्या मतलब निकला मेरी बात का. फिर वो ट्रेडमिल पर चढ़गई और चलनेलगी. शिव भी एक बार देखता hi रह गया, उनके भरे हुए कूल्हे किसी को भी आकर्षित करने के लिए काफी थे. कुछ औरतोकि निगाह भी उसपर hi तिकी थी, में तुरंत संभल गया, वो यहाँ की मालकिन थी, वो जो चाहे करे में क्या कह सकता था. में वापस अपने काम में लग गया. मेने अलग अलग तरह की एक्सेरसिस स्नेहा मैडम करवाई . टाइम होने पर सब लेडीज निकलने लगी तो में भी अपनी जगह चला गया और सब की एंट्री की.. सब के चलेजाने के बाद मदनसीर भी आ गए थे और लड़के का बैच सुरु हो गया था. सब अंदर थे तो पवनसीर और मैडम केबिन में से निकले, जाते जाटवों मेरे पास आ कर रुक गए.

स्नेहा : सचमे पवन आज मुझे यहाँ बहुतकुछ सिखने को मिला. शिव काफी जानकारी रखता है. मुझे लगता है मुझे भी कभी कभी आते रहना चाहिए.

पवन: क्यों नहीं डार्लिंग, तुम्हारा अपना गयम है. जब भी तुम्हारा मन करे तुम आ शक्ति हो.

स्नेहा : है पर जब भी में यहाँ औ तो शिव मेरी हेल्प करेगा. क्यों करोगे न शिव?

शिव : जी ..जी मैडम ये भी कोई पूछने की बात है?

स्नेहा : तो ठीक है शिव फिर मिलते hai(keh कर वो अपना हाथ आगे बढाती है).

शिव : (मेने भी अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनसे हाथ milaya)Ji मैडम.

स्नेहा : (मेरे हाथ को देखते hue)Tumhara पंजा कितना बड़ा है शिव, है न पवन? देखो, मेरा हाथ तो किसी छोटी बच्ची जैसा दिख रहा hai.(Main थोड़ा शर्मा गया)

फिर वो दोनों वह से चलेगये. में भी एक्सेरसिस करने लगा. फिर सब निपटा कर घर निकलगया. लतादिदी और सरितादिदी काम में लगी हुई थी और विणा और रंजन दूसरे बचो को संभल रही थी.

लता : आ गया तू, जा नाहा फिर में नास्ता लगाती हु.

शिव : जी दीदी.

में वह से निकल कर अपने रूम में गया और कपडे लेकर बाथरूम की और जा रहा था की सरितादिदी आयी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

सरिता : (मुस्कुराते hue)Lata ने तुजे नहलाने को बोलै है.

शिव : क्यों दीदी? में नहालुंगा.

सरिता : कहा न, में नहलाऊंगी, तू जा में आयी.

में क्या कहता पर मुझे उनकी आँखों में शरारत नजर आ रही थी. वैसे ये कोई नयी बात तो नहीं थी, कई बार सरिता दीदी ने मुझे नहलाया है और लतादिदी भी नहलाती है, पर अब में बड़ा हो गया हु तो थोड़ी शर्म आ रही थी. और छतवाली मुलाकात के बाद सरितादिदी से बाथरूम में मिलना, पता नहीं क्या होनेवाला था.
 
अपडेट14

में वह से निकल कर अपने रूम में गया और कपडे लेकर बाथरूम की और जा रहा था की सरितादिदी आयी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

सरिता : (मुस्कुराते hue)Lata ने तुजे नहलाने को बोलै है.

शिव : (Jheptehue)Uski कोई जरुरत नहीं, में नहालुंगा.

सरिता : लता ने बोलै है की शिव को अच्छे से रगड़ के नेहला दे और उसका शिर भी धो दे. अगर तुम्हे कोई ऐतराज है तो लता को जा कर बोल.

शिव : (अपने हथियार डालते हुए आखरी कोशिस ki)Par दीदी इसकी कोई जरुरत नहीं, बाद में लतादिदी नेहला देंगी.

सरिता : क्यों में नहीं नेहला सकती क्या?

शिव : ऐसी बात नहीं दीदी पर.

सरिता : पर वॉर छोड़ और जल्दी चल फिर तुजे स्कूल भी जाना है.

अब मेरे पास कहने को कुछ बचा नहीं था तो में बाथरूम में घुस गया. सरितादिदी भी मेरे पीछे पीछे अपनी चुन्नी को ठीक से अपनी कमर में लपेट ते हुए बाथरूम में आ गयी.

सरितादिदी :चल जल्दी कपडे निकल. कितना टाइम लगता hai.(Wo शिव की हालत पर अंडर अंडर मुस्कुरा रही थी, उसके दिल में भी हलचल मची हुई थी, भले hi वो पहले सेक्स कर चुकी थी पर ऐसे शिव के साथ उसे भी शर्म आ रही थी, फिर भी वो इस पल का मज़ा लेना चाहती थी)

मेने अंडरवियर छोड़ कर बाकि सब कपडे निकलडिये और निचे बेथ गया. सरितादिदी ने पहले मेरे ऊपर पानी डाला फिर साबुन लेकर मुझको रगड़ रगड़ के नहलाने लगी. उनके नरम नरम हाथ मेरे पुरे श्री पर घूम रहे थे, उनके हाथ को महसूस कर मेरे लुंड महाराज खड़े होने lage(Sarita भी शिव के सख्त सरीर को महसूस कर के गरम होने लगी थी. उसने शिव के चेहरे पर साबुन लगाया तो शिव ने अपनी आंखे बंद कर्ली. फिर उसके एक पेअर को खींच कर सीधा किआ और उस पर साबुन लगाने लगी. उसकी झंगो को मलते हुए उसके जोड़ तक अपने हाथ फिर ताहि थी तो शिव हिल रहा था.)

सरितादिदी : सीधा रह न इतना हिल क्यों रहा है.

शिव : दीदी गुदगुदी हो रही है.

सरितादिदी : थोड़ा सहन कर ले क्या बच्चो के जैसा कर रहा है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya दीदी, अभी बच्चा hi तो हु, कोनसा बड़ा हो गया हु.

सरितादिदी : (उसके खड़े लुंड को देखते hue)Wo मुझे दिख रहा है की तू कितना बच्चा hai.(Ye कहते हुए वो उसकी झंघे अच्छे से रगड़ रही थी और उसका असर भी दिख रहा था. अंडरवियर का वो भाग पूरा फूल गया था. सरिता की नज़र उसपर hi तिकी हुई थी. शिव की आंखे बंद होने की वजह से वो सरिता को नहीं देख प् रहा था. सरिता इस बात का पूरा फायदा उठा रही थी. सरिता दूसरे पेअर को भी रगड़ रगड़ के साफ करने लगी.)

शिव : (मुझे शर्म आ रही थी, क्यों की में जनता था की दीदी क्या कह रही है, फिर भी मेने अनजान बनते हुए kaha)Aisa क्या देख रही है दीदी जो आप को पता चल गया की में बड़ा हो गया हु.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Me देख रही हु की तू कितना लम्बा हो गया है, (उसकी नज़र तो लुंड पर hi थी) ऐसा लग रहा है की अभी फाड् कर बहार निकल जायेगा.

शिव : क्या फाड् कर बहार निकल जायेगा दीदी.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Tu और कोण, ऐसा लगता है की तू छत फाड़कर बहार निकल जायेगा.( वो शिव के पीछे चालीगयी और उसकी पीठ मलने लगी. पूरी पीठ मलते हुए उसने अपना हाथ उसके अंडरवियर के अंदर तक दाल दिया और उसके कूल्हों को मलने लगी.)

शिव : ये क्या कर रही हो दीदी?

सरितादिदी : (मुस्कुराते hue)Nehla रही हु, क्यों, क्या हुआ?

शिव : (Sharmatehue)Waha क्यों हाथ दाल रही है?

सरितादिदी : तो क्या हुए, हर एक जगह साफ करनी पड़ती है नहीं तो लता बोलेगी अच्छे से नहलाया nahi(Usne अपना हाथ नहीं रोका और अपना काम चालू hi रक्खा). तू सब साफ नहीं करता क्या?

शिव : करता हु दीदी, आप रहने दीजिये में अपने आप कर लूंगा.

सरितादिदी : लड़कीओ की तरह क्यों शर्माता है (मजाक उड़ाते hue)Ladki है क्या?

शिव: (Chidkar)Me लड़की नहीं हु दीदी, ठीक है अगर आप को शर्म नहीं आती तो आप को जो करना है वो करिये में कुछ नहीं kahunga.(Me अपने घुटनो पर हाथ रख कर तन कर बेथ गया.)

सरितादिदी : अच्छा ये बात है, चल देखते है कोण शर्माता है? चल अब तू खड़ा हो जा.

में खड़ा हो गया. (सरिता भी अब मूड में आ चुकी थी. वो पीछे से उसकी पूरी पीठ को रगड़ रही थी और अपना हाथ उसके पुरे नितम्ब पर घुमा रही थी.) पहले तो मुझे थोड़ा अजीब लगा फिर मैंने भी थान लिया था jaise.Maine उनको नहीं रोका. वैसे तो मुझे उनका यु छूना, मज़ा hi दे रहा था. पर मेरा लुंड अब लोहे की तरह सख्त हो कर खड़ा हो गया था. सरितादिदी भी जैसे चलेंगे एक्सेप्ट किआ हो ऐसे अच्छे से मेरे कूल्हे रगड़ रही थी. मेरे सख्त नितम को दबा भी रही थी और उसकी दरार को भी रगड़ कर साफ कर रही थी. मेरा लुंड पूरा अकड़ चूका था. (सरिता ने पीछे से hi अपने हाथ आगे करके उसकी छाती को रगड़ने लगी. जब सरिता ने उसके निप्पल को महसूस किआ तो वो अच्छे से उसपर उंगलिया फिरने लगी.) मुझे गुदगुदी सी हो रही थी तो में कभी कभी हिल रहा था और है भी रहा था.

शिव : क्या कर रही हो दीदी.

सरितादिदी : चुप चाप खड़ा रह बोलना.

(सरिता को भी मस्ती चढ़ी हुई थी, जब उसकी नजर अंडरवियर में बने तम्बू पर पड़ी तो चकित हो गयी. इतने बड़े उभर को देख कर उसके अंदर गुदगुदी होने लगी. वो अब शिव के दाहिने साइड में कड़ी थी और एक हाथ से उसकी पीठ और दूसरे हाथ से उसकी छाती रगड़ रही थी पर उसकी निगाह उस तम्बू पे जमी हुई थी. उसकी छूट में चींटिया दौड़ने लगी. उसके हाथ रुक गए, एक बार उसने शिव के चेहरे को देखा जो आंखे बंद किए खड़ा था. सरिता की छूट गीली होने लगी थी. उसने पेट को रगड़ते हुए अपना हाथ निचे उसकी झंगो पर ले गयी पर ऐसे लगाई जिस से उसका हाथ उस तम्बू से टकराये. शिव के मुँह से आउच निकला और उसने झुकते हुए अपने लुंड को पीछे खींच लिया.

सरितादिदी : (सरिता की आवाज बदल चुकी थी अब वो दन्त ते हुए नहीं जैसे रिक्वेस्ट कर रही हो ऐसे टोन में कह रही thi)Kya करता है? सीधा खड़ा रहना.

उनकी आवाज़ में आये बदलाव को में महसूस कर रहा था, उनकी आवाज मादकता से भरी हुई थी. मैं भी अब काफी गरम हो चूका था तो फिर सीधा खड़ा हो गया. मेने भी सोचलिअ था की उन्हें जो करना है वो करे. (सरिता की आंखे मदहोस हो चुकी थी और अब उसका पीछेवाला हाथ वापस से अंडरवियर में घुस चूका था और उसके नितम्ब को दबा रहा, अब वो नेहला नहीं रही थी, वो उसे दबा रही थी, एक बार उसने शिव को देखा और अपना हाथ लुंड के उभर की और बढ़ाया, वो कोई रंडी नहीं थी, वो भी अरमानो से भरी एक लड़की थी, उसे हिचकिचाहर हो रही थी, लुंड के पास जा कर उसका हाथ रुक गया, उसने अपनी मुट्ठी बंद की, एक बार फिर उसने शिव को देखा, वो गोर लम्बे कद का प्यारा सा लड़का था. उसे वो बहोत पसंद था, आज पहली बार वो अपनी मर्जी से किसी के लुंड को छूनेवाली थी, ये एहसास कुछ अलग था, उसने हिम्मत इकट्ठी की और अपना हाथ उसके लुंड के उभर पर रख दिया और उसे हल्का सा दबा दिया. )

शिव : (मदहोशी में, धीमी आवाज me)Shhhhh दीदी. क्या कर रही हो?

सरिता : (फुसफुसाते hue)Awaj मात कर (सरिता बहोत गर्म हो गयी थी, उसका चेहरा पूरा कामुक हो गया था, वो लुंड को हलके हलके दबाते हुए सहलाने लगी, इतने बड़े लुंड को छू कर वो बावली हो रही थी

शिव : ष्ठीी दीदी (मुझे अजीब भी लग रहा था पर मज़ा भी आ रहा था. मुझे सरितादिदी का यु मेरे लुंड को छूना, मस्त किये जा रहा था). (धीमी आवाज me)Kya कर रही हो दीदी?

सरितादिदी : (धीमी आवाज में )तुजे अच्छा नहीं लग रहा?

शिव : Shhiiii,,,,didiiiii आअह्ह्ह्ह, बहोत अच्छा लग रहा है दीदी.

सरिता : तो करने दे न मुझे जो में कर रही हु.

फिर में कुछ नहीं बोलै बस धीमी आवाज में ष्ठीय,, आह्ह्ह्ह hi कर रहा था.( अब सरिता को जैसे लाइसेंस मिल गया हो वैसे वो अच्छे से अपना हाथ लुंड पे घुमा रही थी और पकड़ कर आगे पीछे हिला भी रही थी. उसे एहसास हो चूका था की लुंड बहोत बड़ा है. वो बस मैनेजर के लुंड को hi जानती थी उसके सामने ये तो बहोत hi बड़ा था. वो पूरी तरह मदहोस हो चुकी थी. उसने अपना हाथ अंडरवेअर अंदर दाल दिया और नंगे लुंड को पकड़ लिया.)

शिव : (फुसफुसाते hue)Aahhh दीदी क्या कर रही हो.

सरिता : (थोड़ा चिढ़ते हुए) थोड़ी देर चुप रह न.

शिव : शहहह पर दीदी मुझे बहोत कुछ हो रहा है शहहहहह.

सरिता : आवाज मत कर. कोई सुन लेगा.

(अपने हाथ में वो बादसा डंडा पकड़ते हुए सरिता को यकीं hi नहीं हो रहा था. एक बार तो उसकी आंखे अपने आप बंद हो गयी, और वो उस अंग को दबा दबा कर जांचने लगी. वो अपना हाथ आगे पीछे करना चाहती थी पर अंडरवियर की वजह से ठीक से हो नहीं प् रहा था तो उसने अपना हाथ बहार निकला और शिव के सामने जा कर कड़ी हो गयी. एक पल उसने शिव के चेहरे को देखा और फिर अपना हाथ बढाकर अंडरवियर के शिरो को थम कर उसे निचे सरकने लगी.) मेने उनका हाथ पकड़ लिया.

सरितादिदी : (धीमी आवाज में) प्लीज शिव, मुझे देखने दे.

शिव : पर दीदी????

सरिता : (उसकी आवाज इतनी मदहोश हो चुकी थी, वो शिव से भीख मांग रही thi)Muje देखने दी शिव, शहहह मुझे देखना है इससे.

मैं भी काफी उत्तेजित हो चूका था तो मैंने भी उन्हें रोकना मुनासिब न समजा. मैंने उनके हाथ छोड़िये. (सरिता आहिस्ता आहिस्ता उसका ुंडेरवेरा सरकने लगी. उसकी धड़कन तेज चल रही थी और वो जोर जोर से सांसे ले रही थी. उभर इतना ज्यादा था की उसे अंडरवेअर सरकने में दिक्कत हो रही थी फिर भी उसने जोर लगाकर उसको निचे खींचा तो स्प्रिंग की तरह उछाल कर लुंड उसके सामने आ गया. एक पल के लिए वो दर गयी और पीछे हैट गयी पर फिर अपने आपको संभल ते हुए वो इस अजूबे को देखने लगी. वो अपना शिर घुमाकर कभी लैंड को दये से देखती तो कभी बाये से. वो इस बड़े से लुंड को वशीभूत होकर देखरही थी. उसने कपट हाथो से लुंड के इर्दगिर्द अपनी उंगलिया लपेटी, दोनों के मुँह से सिसकी निकल गयी.





शिव : अह्ह्ह्ह डीडीई.

सरितादिदी : शहहह आवाज मत कर. (वो धीरे धीरे अपने हाथ को आगे पीछे करने लगी. उसने लुंड पकड़ा था पर उसका अंगूठा और उंगलिया आपस में मिल नहीं रही थी.)

शिव :( मुझे कुछ हो रहा था) डीडीई, (आज पहलीबार कोई मेरे लुंड से ऐसे खेल रहा था, ये नया अनुभव मुझे बहोत भ रहा tha.)Didiiii, शहहह अह्ह्ह्हह. बहोत अच्छा लग रहा है

सरितादिदी : शह्ह्ह्ह, जोर से आवाज मत कर, एक बात कहु शिव, ये बहोत बड़ा hai(aage पीछे हिलाते hue)kitna लम्बा है और मोटा भी बहोत है.





(सरिताने लुंड को आगे पीछे हिलने लगी. उसकी छूट से नदिया बह रही थी. उसने अपना दूसरा हाथ अपनी छूट पे रख दिया और उसे ऊँगली से कुरेदने लगी. उसने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकला और लुंड के सुपडे को नेहला दिया. वो लुंड की चमड़ी को आगे पीछे करने लगी.) में तो पागल हुआ जा रहा था. दीदी का ऐसे मेरे लुंड को हिलना मुझे बेहद पसंद आ रहा था. जैसे जैसे सरिता दीदी मेरे लुंड को हिला रही थी मेरे अंदर कुछ कुछ हो रहा था. (सरिए काफी देर से उसके लुंड को हिला रही थी. उसका मान हो रहा था की वो इस बड़े लुंड को अपने मुँह से चूसे पर अभी भी वो थोड़ी हिचकिचा रही थी.)

शिव : दीदी, मुझे कुछ हो रहा hai.(Sarita समाजगायी की शिव का अब निकलने वाला है. वो और तेजी से शिव का लुंड हिलने लगी और अपनी छूट में भी ऊँगली तेज तेज चलने लगी.) मेरा अब बर्दास्त से बहार हो रहा था मुझे लगने लगा जैसे मेरे लुंड से कुछ निकलने वाला है, में खुद अपनी कमर आगे पीछे करने लगा और अचानक मेरे लुंड से कुछ निकलने लगा. (अचानक शिव के लुंड से पिचकारी निकली, समः रहते सरिता थोड़ी साइड में हो गयी और पिचकारी सामने की दिवार से टकराई. जिंदगी में पहलीबार शिव का पानी निकला था और वो ये आनंददायक पल को महसूस कर रहा था. उसे आज अजीबसी ख़ुशी मिली थी. उसका पानी निकल रहा था फिर भी सरिता उसे हिलाये जा रही थी, सरिता ने भी अपना पानी निकल दिया. उसने देखा की शिव ने बड़ी बड़ी तीन चार पिचकारी मरी थी और उसका गधा सफ़ेद रास निकला था और उसका हाथ भी चिपचिपा हो गया था.) तभी दरवाजे पर थक थक हुई.

लतादिदी : हो गया की नहीं? जल्दी करो टाइम हो रहा है.

सरितादिदी : (हड़बड़ाते hue)Bas 5 मिनट लता.

फिर उसने जल्दी जल्दी शिव के ऊपर पानी दाल कर उसको नहलाया. दोनों को अब शर्म आ रही थी. पर सरिता जल्द संभल गयी.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Kaisa लगा शिव?

शिव : (शरमाते हुए) दीदी बहोत मज़ा आया.

सरिता : देख ये सब किसीको बताना मत ये अपना सेक्रेट है.

शिव : जी दीदी.

और वो मुझे तौलिया दे कर बहार निकल गयी. मैंने अपने आप को पोछा और कपडे पहन कर बहार आ गया. लतादिदी ने मुझे खाना दिया. सरितादिदी मुझे नजर नहीं आ रही थी. थोड़ी देर बाद वो आयी पर वो बिना मेरी और देखे अपने काम में लग गयी. (सरिता बार बार चुपके से शिव को देखती थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी. लता ने भी ये देखा पर वो बोली कुछ नहीं.) में भी चुपके से सरितादिदी को देख रहा था. जब दोनों की नज़ारे मिलती तो दोनों hi शर्मा जाते थे. मेने भी फटाफट खाना खाया और निकल गया स्कूल.

जब में वह पंहुचा तो महेश और हर्ष दोनों पार्किंग में बाइक के पास खड़े थे. हर्ष टेंशन में लग रहा था.

शिव : क्या हुआ ये मुँह क्यों लटका रक्खा है?
 
अपडेट 15

सरितादिदी के नहलाने के बाद में तैयार हुआ. आज दीदी ने एक अलग तरह के आनंद से रूबरू करवाया था. आज में किसी लड़की के साथ इस अवस्था में था ये सोच कर hi मेरे चहेहरे पर मुस्कराहट तैर रही थी. खैर में तैयार हुआ और स्कूल के लिए निकल गया. जब में वह पंहुचा तो महेश और हर्ष दोनों पार्किंग में बाइक के पास खड़े थे. हर्ष टेंशन में लग रहा था.

शिव : क्या हुआ, यु मुँह क्यों लटका रक्खा है?

महेश : भाई साहब आते आते एक जगह टकरा गए और बीके में थोड़ी टूटफूट हो गयी है. अब इनकी लगी पड़ी है.

हर्ष : अबे सेल तुजे मज़ाक सूज रहा है, मेरे भाई को पता चलेगा न तो मुझे बहोत डांटेंगे और फिर कभी बाइक नहीं देगा.

शिव : तो उन्हें पता चले उसके पहले रिपेयर करवले.

हर्ष : है जैसे मेरा बाप ढेरो पैसे देता है न रोज़. थोड़े से है अब क्या करू समाज नहीं आ रहा

महेश: एक काम हो सकता है, वो जाहिरभै का गेराज है न वह सस्ते में मिल जायेगा.

हर्ष : पर मेने सुना है वह चोरी का सामान बिकता है.

महेश : तो क्या हुआ, वह हमे सामान सस्ते में मिलजायेगा. और तू कर भी क्या सकता है?

हर्ष : सही केहरहा है तू चल वही चलते है.

महेश : अभी नहीं शाम को लौट ते वक़्त चले जायेंगे.

हम लोग बात कर रहे थे की वैस्वी आयी और थोड़ी दूर अपना स्कूटर पार्क किआ. मेरी नजर उसकी और चली गयी और उसने भी मेरी और देखा. वो ऐसे देख रही थी जैसे मुज पर गुस्सा हो. फिर वो क्लास की और निकल गयी. मुझे समाज नहीं आ रहा था की मेने इसके साथ कुछ जानबुज कर तो किआ नहीं. फिर ये क्यों ऐसी रहती है. मुझे क्या, हम भी बात करते हुए क्लास की और निकल गए. आदत के मुताबित मेरी नज़र फिर से वैस्वी की और गयी वो उलटी थी तो उसके सामने बैठी लड़की ने मेरी और इस्सर किआ तो वो पलटी और मेरी और देखा. मेने अपनी नज़ारे घुमा ली और अपनी जगह चला गया. फिर क्लास सुरु हो गया. बिना मैडम ने मेरी और देखा पर कहा कुछ नहीं. ज्यादातर लड़के, उनकी सदी से झक्ति कमर को देख रहे थे. वो सचमे सुन्दर थी, और मेरी भी नज़र कभी कभी चली जाती थी.

यहाँ सरिता और लता काम करते करते बाते कर रहे थे.

लता : क्या हुआ था सुबह.

सरिता : (लता की और देखती है, वापस अपनी नज़र काम में लगाती hai)Tu छोड़ न उस बात को. तू बस अपने काम से काम रख, मेने तुजे कहा हैना की वो तेरे साथ सब करेगा फिर ये मुझपर छोड़ दे की मई ये कैसे करती हु.

लता : तुजे देखकर तो लगता है जरूर कुछ न कुछ हुआ है, (बिनती भरे lehjeme)Ab नखरे मात कर, प्लीज बता न.

सरिता : तुजे बुरा लगेगा.

लता : कोई बुरा नहीं लगेगा और अब सीधे सीधे बता.

सरिता : (उसने बाथरूम में हुआ सब बता diya)Ye हुआ था.

लता : (अपने मुँह पे हाथ रखते हुए) पहले hi दिन तू इतना kargayi.(Puchhne वाले स्वर me)Tuje ये सब करने में शर्म नहीं आती, मेरा मतलब है ऐसे अचानक से...

सरिता : (मुस्कुराकर उसकी और देखती hai)Dekh ये ऐसा खेल है जिसमे शर्म छोड़नी hi पड़ती है. तू hi बोलती थी न की शिव अभी बच्चा है तो देख ले उसने भी सब करने दिया न. इसीलिए बोलती हु की अगर तेरे दिल में उसके लिए वैसी वाली फीलिंग्स है तो फिर शर्माना छोड़ वर्ण कोई और ले उड़ेगी उसे. और उसके पास जो है उसे देख कर तो कोई भी लड़की उसके लिए पागल हो जाएगी.

लता : (उसे अंदाजा तो था की सरिता किस बारेमे बात कर रही है क्यों की उसने भी उसे थोड़ा सा देखा था और छुआ भी था फिर भी उसने दिखावा kia)Aisa क्या है उसके पास.

सरिता : अब ज्यादा भोली मात बाण मुझे पता है तूने क्या क्या किआ था उसके sath.(Fir हवामे देखते hue)Yar सचमुच कितना बड़ा है न उसका. मुझे भी एक बार तो दर लगरहा था. मुझे तो ये सोच कर hi तुज पर दया आ रही है, पता नहीं वो तेरी क्या हालत करेगा.

लता : (शर्मजाति hai)Kya वो ज्यादा बड़ा है?.

सरिता : उस कमीने का, मेरा मतलब है उस मैनेजर का शिव से आधा भी नहीं है चाहे लम्बाई हो या मोटाई, सोच वो तेरी क्या हालत करेगा.

लता : (सोचते hue)Kya सचमुच पहलीबार बहुत दर्द होता है?

सरिता : है ऋ दर्द तो होता hi है. जहा जगह hi न हो वह अगर वो घुसेगा तो फटनी तो तय है पर हमारी वो बानी hi इसके लिए है तो तू ज्यादा टेंशन मत ले एकबार सेहन करना पड़ेगा पर फिर तो मज़े hi मज़े.

लता : (शरमाते hue)Tu बड़ी बेसरम हो गयी है.

सरिता : अब जो हु सो हु और वैसे भी अगर उसे सिखाऊंगी तभी तो वो तेरे साथ अच्छी कर पायेगा नहीं तो पता नहीं अनाड़ीपन में अगर तेरी फाड़ेगा तो तू पूरी दुनिया को सुनाई दे इतना जोर से चीखेगी .

लता : (उसे मरते hue)Hat बेशरम.

सरिता : अभी तो मुझे बेशरम बोल रही है एक बार ले लेगी न फिर देखती हुए तू कितनी शर्मीली रहती है. अगर खुद तू उसके ऊपर चढ़कर अपनी न छुड़वाओ तो नाम बदल देना मेरा.

लता : (मुस्कुराते hue)Chupkar कामिनी कुछ भी बोलेजा रही है.

सरिता : तुजे पता hi है, में बेमन से उस कमीने के साथ करती हु फिर भी ये कमीना शरीर ऐसा है की मज़ा आ hi जाता है तो सोच अपने चाहनेवाले के साथ करने में कितना मज़ा आता होगा.

(दोनों में यु hi जाप शाप होती रही)

वह स्कूल में कुछ खास न हुआ पर तीनो शाम को गेराज चले गए, बाइक ठीक करवाने. सिटी से थोड़ा बहार ये गेराज था. दिखने में तो ये एक सामान्य गेराज जैसा hi दिख रहा था. कई लोग वह कुछ बाइक और स्कूटर को रिपेयर कर रहे थे. हर्ष ने वह काम करनेवाले एक आदमी से बात की.

हर्ष : हमे कुछ सामान चाहिए, बाइक के लिए.

आदमी : किसने भेजा है?

हर्ष : किसीने नहीं. मेरी बाइक में कुछ टूट गया है तो उसके लिए hi हमे सामान चाहिए.

आदमी : सामान चाहिए तो किसी ऑटोपर्ट्स वाले की दुकान पे जाओ. यहाँ रिपेयरिंग होता है. सामान नहीं मिलता.

महेश : पर हमने तो सुना है यहाँ सस्ते में सामान मिल जाता है.

आदमी : (हम तीनो को बड़े गौर से देख रहा था) स्कूल में पढ़ते हो?

महेश : है, प्लीज भाई, हम नया सामान नहीं खरीद सकते, हमने सुना है यहाँ पुराण सामान मिल जाता है.

आदमी : रुको, में पूछ कर आता हु.

वो आदमी वह एक केबिन में चला गया. केबिन कांच की थी तो हमे सब दिख रहा था. वो वह बैठे किसी से बात कर रहा था. उस आदमी ने वह से हमे देखा फिर उस आदमी से कुछ कहा. वो आदमी फिर हमारे पास आया.

आदमी : क्या chahiye?(Harsh ने अपनी बाइक बताई और जो सामान टुटा था वो बताया. वो अंदर चला गया. 15-20 मिनट बाद वो सामान के साथ आया और उसने बाइक में लगा दिया. उसने जो पैसे कहे थे वो सच में काफी काम थे)

हम आपस में बात करने लगे.

महेश : देखा, कितने काम में काम हो गया.

हर्ष : है यार, अच्छा हुआ तुजे पता था.

महेश : चोरी का सामान होता है तो सस्ते में मिल जाता है.

आदमी : (डट ते hue)E छोकरे, यहाँ कोई चोरी का सामान नहीं मिलता समजा, ये पुराणी गाड़िओ का सामान है.

हर्ष : (डरते hue)Ji...bahi, हम हो ऐसे hi बात कर रहे थे.

आदमी : पैसे दो और निकालो यहाँ से.

हर्ष ने पैसे दे दिए और हम वह से निकल गए, उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया. ऐसे hi एक दो दिन निकलगाये. जूही मैडम अभी भी नहीं आयी थी. मेने बिना मैडम से भी पूछा, पर अभी तक यूनिफार्म का इंतजाम नहीं हुआ था. विणा और रंजन का भी यही हल था. उस दिन मेने मौका देख कर फिर हिम्मत करके दोबारा पवनसीर से बात की.

शिव : सर, wo...wo मैंने आप को कहा था न, वो यूनिफार्म के लिए पैसे चाहिए थे.

पवनसीर : अरे है, सॉरी मेरे दिमाग से निकल गया था. तुम ऐसा करना, शाम को मेरे घर चले जाना. में स्नेहा से कह दूंगा, वो तुम्हे दे देगी. में ऑफिशियली पैसे नहीं दे रहा पर तुम अच्छे लड़के हो इस लिए पर्सनल तौर पर तुम्हे दे रहा हु.

शिव : थैंक यू सर. आप सैलरी से काटलेना.

उन्होंने अपना एड्रेस मुझे दे दिया. शाम को स्कूल से सीधे उनके घर के लिए चला गया. वैसे तो में स्नेहा मैडम को जनता था. उस दिन गयम में वो बड़े फ्रेंडली बेहवे कर रही थी. में ढूंढते ढूंढते उनके घर पहुंच गया.

पवन सर का घर काफी बड़ा था. देख कर hi लग रहा था की पवनसीर काफी पैसेवाले है. बहार बड़ा गेट था, में वो खोलकर अंडर चलागया. वह कार के लिए पार्किंग बना हुआ था, एक गाड़ी पार्क भी थी. वह छोटा सा गार्डन बना हुए था जहा किनारेपर फूल के पौधे लगे हुए थे. मैंने मैं गेट पर जा कर दुर्बल बजायी तो स्नेहमड़ाम ने दरवाजा खोला. उनसे में मिल चूका था पर पता नहीं वो मुझे पहचानेगी भी या नहीं. पर उन्होंने दरवाजा खोल कर स्माइल के साथ कहा “आओ शिव”. सच में वो बहोत खूबसूरत लग रही थी. अच्छे से कटे हुए खुले बल और गुलाबी सदी में सचमुच वो एक गुलाब hi लगरही थी.

शिव : गूदेवेनिंग मैडम.

स्नेहा मैडम :(स्माइल के sath)Good evening.(Unke चेहरे पर स्माइल तो थी पर वो थोड़ी हिचकिचा भी रही thi)Aao अंदर आओ.

उन्होंने मुझे बैठने को कहा तो में जाकर उस बड़े से सोफे पे बेथ गया. ये बड़ा सा हॉल था जहा एक बड़ा सा टीवी दिवारपे लगा हुआ था और ऊपर कांच का झूमर लगा हुआ था. घर बहोत अच्छी तरह से सजा हुआ दिख रहा था. पवनसीर और मैडम की एक खूबसूरत तस्वीर भी लगी हुई थी. उस तस्वीरमे मैडम जीन्स और टॉप में थी और मुस्कुरा रही थी. सचमुच वो बहोत खूबसूरत थी. इतने में वो पानी लेकर आयी तो में खड़ा होगया.

शिव : मैडम इसकी क्या जरुरत थी.

स्नेहा : (प्यार से मुस्करातेहुए) स्कूल से सीधे आये हो तो प्यास तो लगी होगी.

शिव : (प्यास तो लगी hi थी तो मेने पानी पीलिया और गिलास वापस देते hue)Thank यू मैडम.

स्नेहा : कुछ खाओगे.

शिव : नहीं मैडम थैंक यू पूछने के liye.(Hichkichate हुए) मैडम वो सर ने कुछ कहा था क्या आपको.

स्नेहा : (थोड़ा गंभीर होते हुए और अपनी नज़ारे निचे करते hue)Ha कहा था. (फिर थोड़ा सँभालते hue)Tum रुको पहले में तुम्हारे लिए कुछ लती हु. तुम पहलीबार हमारे घर आये हो खुछ खाये बगैर तो में तुम्हे नहीं जाने दूंगी.

वो इतना सीरियस क्यों होगयी थी मुझे समाज नहीं आया. पर उनका व्यव्हार बहोत hi शालीन और मिलनसार था. जो दर्शाता था की वो बहोत अच्छी है. में उन्हें मन करता रहा पर वो नहीं मणि और किचेन में चालीगयी.

किचेन में जाते hi स्नेहा ने चैन की साँस ली और खुद को शांत करने लगी. उनकी सांसे तेज चलरही थी. उसे याद आने लगा जब पवन ने उसे फ़ोन करके बताया था की शिव शाम को घर आरहा है पैसे लेने. फिर उसे वो सब भी याद आता गया जो पिछले कुछ दिनों से उनके बिच का मुख्या मुद्दा बना हुआ tha.(Kuchh दिन पहले की बात है) पवन जब रात को घर लौटा तो उसकी खूबसूरत बीवी खाना लगा रही थी. उसे पता था की उसके पति के आने का समय हो गया है तो वो पहले से तयारी कर रही थी. वो एक सुखी सम्पन परिवार की बेटी थी और एक अच्छे परिवार में बिहाई गयी थी. वो बहोत खुस थी क्यों की पति भी बहोत अच्छा मिला था और aish-o-aram की भी कोई कमी नहीं थी. सास ससुर गांव में रहते थे और वो यहाँ अपने पति के साथ रहती थी. उसका पति भी उस से बहुत प्यार करता था. पर शादी के 8 साल बाद भी उनको कोई बच्चा नहीं था. कुछ समय पहले जब वो गांव गए थे तो अपने सास ससुर को पवन के साथ बच्चो के बारे में बात करते सुना था. वो बहोत मायूस हो गयी थी ये सुन कर. सहर में उन्होंने डॉक्टर से कंसल्ट किआ तो पता चला की पवन में शुक्राणु की कमी है जिसके चलते ये प्रॉब्लम हो रही है. डॉक्टर ने टेस्ट तुबे बेबी का सुझाव दिया था पर पवन के शुक्राणु बहोत ज्यादा कमजोर होने की वजह से उन्होंने किसी डोनर का सहारा लेने का सुझाव दिया था. रात को जब पति पत्नी अपने शयन कक्ष में थे तो पवन ने स्नेहा को अपने शाइन से चिपका ये उसके सर पे शेहलाते हुए बात छेड़ी

पवन : एक बात कहु स्नेहा बुरा तो नहीं manogi.?(Upar छत को ताकते hue)Doctor ने test-tube बेबी की सलाह दी है जिसमे वो किसी और का स्पर्म इस्तेमाल करेंगे (थोड़ी देर ख़ामोशी छ जाती है) बच्चा तो माँ या बाप या दोनों का मिलाजुला रूप लेता है. हमे कैसे पता चलेगा की उसका बायोलॉजिकल बाप कैसा इंसान है, कैसा दीखता है. ऐसे वीर्य का डोनेशन लोग पैसो के लिए करते है तो वो ऐसे किसी शराबी का या ऐसा कोई भी aire-gaire का होगा तो..... एक अख़बार में मैंने ऐसे hi एक व्यक्ति का इंटरव्यू पढ़ा था. वो तक़रीबन 60 से 70 बच्चो का बाप बना था ऐसे hi. वो दिखने में गांजा और मोटा भी था.

स्नेहा : (वो भी सोच में पड़जाति hai)Aap कहना क्या चाहते है?

पवन : में ये चाहता हु की हम ऐसे व्यक्ति का स्पर्म ले जिसे हम पसंद करे.

स्नेहा : (उठ कर उसके सामने बैठ्जाति hai)Ye कैसे मुमकिन है? और हम ऐसे किसका ...

पवन : तुम सोचो अगर कोई खूबसूरत और अच्छे व्यक्ति का बच्चा होगा तो वो भी वैसा hi होगा न. क्या तुम नहीं चाहोगी ऐसा बच्चा?

स्नेहा : (स्नेहा को भी उनकी बात सही लगी पर ये कैसे मुंकिन है ये उसे समाज नहीं आ रहा था, फिर अचानक उसके दिमाग की बत्ती jali)Kya तुम ने किसीके बारे में सोचा है? मुझे लगता है तुम ने किसी को पसंद किआ हे इस काम के लिए, है न.

पवन : है तुम सही सोच रही हो, है कोई मेरी नज़र में. पर बात इतनी hi नहीं है और भी hai(Usne एक लम्बी साँस ली फिर bola)Jo कुदरत ने रचा है हम उसे ऐसे टेस्ट तुबे में करेंगे तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो सकती hai(Wo रुक कर स्नेहा की और देखता है) में ये चाहता हु की ये सब कुदरती तटीके से हो.

स्नेहा : (पहले तो उसको कुछ समाज नहीं आया पर जब उसकी बात को गौर से सोचा तो उसका मुँह खुला का खुला रह gaya)Kyaaaa? ??.. तुम ye...keeeh..rahe ho...ki में उसके sath...(Gusse se)Tum ऐसा सोच भी कैसे सकते हो पवन.

पवन : (बहोत hi ज्यादा गंभीर स्वर me)Dekho स्नेहा तुम्हारे लिए ये जितना मुश्किल है उतना hi मेरे लिए भी ये मुश्किल है पर एक बार मेरी बात को जरा गौर से सोचो फिर कोई निर्णय लेना.

स्नेहा : पर पवन में आप के अलावा किसी और के साथ...

पवन : हम कर भी क्या सकते है स्नेहा, अगर हमें बच्चा चाहिए तो ये करना hi पड़ेगा.

स्नेहा : ऐसे कैसे में.... कैसे किसी के भी साथ, और पतानहीं वो कैसा ho..(Fir जैसे कुछ याद आया ho)ek मिनट तुम ने सोचा है मतलब तुम्हारी नज़र में ऐसा कोई है, कोण है वो?

पवन : मेरे गयम में काम करता है. शिव नाम है उसका. अभी पढता है. पर दिखने में बहोत खूबसूरत है और लम्बा भी बहोत है. देखो स्नेहा में तुम पर कोई फाॅर्स नहीं करूँगा पर एक बार उसको देख लो फिर निर्णय करना.

फिर दोनों में थोड़ी देर और बहस होती रही. थोड़ी देर बाद दोनों अपने अपने खयालो में खोये हुए नींद की आगोश में चले गए. दूसरे दिन दोनों साथ में गयम पहुएच्ते है जहा पवन, स्नेहा को शिव से मिलवाता है. शिव को देख कर सचमुच स्नेहा खुद, उसपर मोहित सी हो गयी. वो एक लम्बे कद का, दिखने में एकदम भोले भले चेहरे वाला एक गोरचित्ते युवक था. वो शिव से काफी प्रभावित हो चुकी थी. उसे लग रहा था अगर वो उसके साथ स्कूल में पढ़ती होती तो यक़ीनन वो उसपर मारे टी. उसकी नजर शिव से हैट hi नहीं रही थी. उसके चेहरे में लड़कीओ सी नजाकत और एक युवक की सख्ताई दोनों का मिश्रण था. उसकी मुस्कान पे तो वो फ़िदा हो चुकी थी. और ये सोच कर की खुद उसका पति इस युवक के साथ सम्बन्ध बनाने को बोल रहा है वो अंदर से रोमांचित हो रही थी पर वो चेहरेसे ये जाहिर नहीं करना चाहती थी. जब वो और पवन दोनों केबिन में गए तो पवन ने तुरंत hi पूछा.

पवनसीर : क्या कहती हो स्नेहा?

स्नेहा : (अंडर से तो वो काफी खुस थी पर वो ये जाहिर नहीं करना चाहती thi)Jaisa तुम कहो पवन, तुम ने सोचसमझ कर hi फैसला लिया होगा.

पवनसीर : पर तुम्हारी मर्जी भी जरुरी है. अगर तुम नहीं चाहती तो में तुम पर दबाव नहीं दाल सकता.

स्नेहा : अगर सिर्फ बच्चे की बात है तो ठीक है, जैसा तुम चाहो.

पवनसीर : (खुस होते hue)Thank यू स्नेहा, मुझे समझने के लिए.

स्नेहा : पर पवन शिव से क्या कहोगे, मेरा मतलब है वो राज़ी होगा.

पवनसीर: मेने सब सोचलिया है. शिव एक अच्छा लड़का है पर अनाथ है और उसको पैसो की जरुरत है. मुझे लगता है वो जरूर मान जायेगा. अभी तुम उसके पास जाओ और उस से थोड़ा मेलजोल बढ़ाओ.

स्नेहा : ठीक है.

और वो शिव के पास चली गयी थी और एक्सेरसिस के बहाने उस के साथ mel-jhol बढ़ा रही थी. वो जितना उसके साथ रहती है उतना hi और ज्यादा उसकीऔर आकर्षित हो रही थी. फिर आज का दिन आगया जब शिव उसके घर पे था. पर सोचना और करना, दोनों में काफी अंतर होता है. शिव यहाँ था पर वो बहोत घबरा रही थी. पवन ने सब उसके ऊपर छोड़ दिया था शिव को इस बात के लिए राज़ी करने के लिए. वो अंदर से काफी दर रही थी. कैसे वो बात को चालू करे उसे कुछ सूज hi नहीं रहा था.
 
अपडेट 16

अपने पति के कहने पर स्नेहा तैयार तो हो गयी थी पर आज तक उसने ऐसा कुछ किया नहीं था. ऐसे किसी अनजान लड़के के साथ सेक्स की बात सोच कर hi उसके पशीने छूट रहे थे.

स्नेहा: (मन me)Kya करू कुछ समाज नहीं आ रहा. क्या में ये सही करने जा रही हु. कैसे में उसे सेक्स करने के लिए कह सकुंगी. वो क्या सोचेगा मेरे बारे में. उसे लगेगा में एक गिरी हुई औरत हु. हे भगवन मेरी मदद कर. (वो यु hi कुछ देर गुमसुम कड़ी रही, फिर जैसे उसने मान में निश्चय कर लिया) अब ज्यादा सोचने से क्या फायदा, जो होगा देखा जायेगा. वैसे भी में ये सब मज़े के लिए नहीं कर रही. एक बार बच्चा हो जाये तो सब सही हो जायेगा. सिर्फ सेक्स hi तो करना है कोनसा उसके साथ प्यार का रिस्ता जोड़ना है. जैसे तैसे वो मेरी कोख में अपना बीज भरदे बस वही मेरे लिए काफी है. है स्नेहा यही सही है, सिर्फ उसके साथ सेक्स करके पेट से hi तो होना है.

ऐसे hi खयालो में खोये हुए वो शिव के लिए जूस बना रही थी. जूस लेकर वो हॉल में उसके सामने आयी उसने शिव को वो जूस दिया. उसके हाथ कैंप रहे थे. वो वही सामने बेथ गयी, जब तक शिव जूस पि रहा था दोनों में चुप्पी छायी रही. स्नेहा कभी शिव को देख रही थी कभी नीचे देखते हुए अपनी सोच में खो जाती थी. Maine(Shiv) ने जूस ख़तम कर लिया और गिलास को रखकर स्नेहा मैडम की और देखा तो उन्हें किसी सोच में डूबा पाया.

शिव : Madam(wo सोच में घूम thi)...Madam.(Mene थोड़ा जोर से पुकारा)

स्नेहा : (चौकते हुए हक़ीक़त में लौट ayi)Ha..ha ओह! पीलिया तुमने.

शिव : जी madam,(Fir दोनों के बिच वही ख़ामोशी, मुझे समाज नहीं आ रहा था वो गभरायी हुई क्यों है) (फिर मैंने थोड़ा झिझकते hue)Wo मैडम पैसे?

स्नेहा : (एक लम्बी साँस लेते हुए अपने आपको शांत करते हुए शिव की और देखती है) शिव.., में पैसे दू उस से पहले मुझे तुमसे कुछ कहना है. में जानती हु तुम्हे पैसे की जरूरत है पर बदलेमे मुझे भी तुम्हारी हेल्प chahiye.(Usne बहोत नरम आवाज में ये कहा पर कहते कहते उसकी सांसे चढ़ने लगी थी, वो रुक गयी)

शिव : (मुझे कुछ समाज नहीं आरहा tha)Kaisi हेल्प मैडम?

स्नेहा : (फिर वो सोचने लग जाती है, कहे की न कहे, वो अपने हाथ को मसल रही थी, वो उलजन में थी, फिरभी मान मजबूत करते हुए उसने kaha)Shiv मुझे हेल्प चाहिए पर पहले वडा करो इस बारेमे तुम किसी से कुछ भी नहीं कहोगे.

शिव : (मुझे समाज नहीं आ रहा था की माजरा क्या है, फिर सोचते hue)Ji मैडम में किसी से कुछ नहीं कहूंगा, पर बताईये तो सही क्या हेल्प चाहिए?

स्नेहा : वो... वो

(ये कहते हुए उसका गाला भर जाता है, आँखों से ासु तक बहने लगते है. ऐसे भी किसी सरीफ औरत के लिए ये कहना कितना मुश्किल होता है. वो अपने दोनों हाथ में अपना मुँह छुपकर रोने लगी.) उनको देख कर मेरी हालत ख़राब होने लगी, में दर गया, पता नहीं क्या बात है. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था की क्या करू? मैंने हिम्मत बटोरी और उनके पास जाकर बेथ गया. वो अभी भी अपना मुँह छुपाये रो रही थी. मैंने डरतेदारते अपना हाथ उनके कंधेपर रखा.

शिव : प्लीज मैडम रोइयेमत. जो भी है वो कहिये, मेरा यकीं कीजिये में किसी से कुछ नहीं कहूंगा.

में बस इतनाही बोलण्या. स्नेहमड़ाम ने अपना शिर उठाकर अपनी भीगी आँखों से मुझे देखा, अचानक वो मुज से लिपटगाई और जोर जोर से रोनेलगी. में एकदम शोकेड था. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, मैंने एक हाथ उनकी पीठ पर रख कर सहलाने लगा, और उन्हें चुप होने के लिए बार बार कहता रहा. ऐसे hi कुछ देर चलता रहा. अब स्नेहमड़ाम का रोना धीरे धीरे बंद होने लगा , फिर भी सिसकिया ले रही थी. वो मुज से अलग हुई और अपना चेहरा झुकाये हुए hi अपनी आंखे साफ करने लगी. फिर उन्होंने अपने भीगे नयनो से मुझे देखा और फिर अपना चेहरा झुका लिया.

स्नेहा : शिव मेरे लिए ये कहना बहोत मुश्किल है पर मेरे लिए और कोई रास्ता भी नहीं है. शिव में तुम्हे पैसे दे दूंगी, तुम चाहे मेरी मदद करो या न करो. में पैसे के बदलेमे तुम्हारी हेल्प नहीं मांग rahi(bolte बोलते उनका गाला भर आया).

शिव : (मैंने उनका एक हाथ अपने दोनों हाथो से थमते हुए) प्लीज रोइयेमत मैडम, जो भी है वो कहिये, में वडा करता हु चाहे आप पैसे न भी दे तो भी में आपकी मदद करूँगा. प्लीज आप शांत हो जाई ये और मुझे बताईये आप क्या हेल्प चाहती है?

स्नेहा : (एकबार उसकी और देखती है फिर अपना शिर निचे झुका कर बोलने लगती है) शिव हमारी शादी को 8 साल हो चुके है. पर अभीतक में माँ नहीं बन पायी हु. हमने डॉक्टर का सहरभी लिया पर, उनके कहे अनुसार मेरे पति में कुछ प्रॉब्लम है तो वो बाप नहीं बन sakte...(Wo फिर शांत होजाती है)

शिव : (मुझे कुछ समाज नहीं आरहा था, जब उन्होंने बोलना बंद किआ तो मैं भी शांत रहा, फिर ) पर मुझे ये समाज नहीं आरहा की इसमें में आपकी क्या मदद कर शक्ति हु?

स्नेहा : (उसकी और देखती है और उसके भोले पैन पे मुस्कुरादेति है, फिर मुस्कुराते hue)Shiv तुम्हे पता है बच्चा कैसे होता है.

शिव :(कुछ सोचते hue)Ha मैडम मुझे पता है.

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए उसकी और देखरही thi)To बताओ कैसे होता है?

शिव : जब मेल का शुक्राणु फीमेल के अंडकोष से मिलता है तब बच्चा बनने की प्रक्रिया शुरू होती है और फिर वो गर्भाशय में स्थापित हो जाता है जहा वो बढ़ता है और फिर 9 महीने बाद वो बहार आता hai.(Usne बड़े hi भोले पैन से ये बताया जो उसने किताब से सीखा था)

स्नेहा : (अब थोड़ी सहज हो चुकी थी और उसे उसके भोलेपन से स्नेहा के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी) अरे वह तुम तो बहोत कुछ जानते ho.(Wo अपनी भीगी आंखे साफ करते हुए मुस्कुरा कर पूछती है) और ये शुक्राणु और अंडकोष मिलते कैसे है?

शिव : (में सोचनेलगा, ये तो कही लिखा hi नहीं था) वो तो पता नहीं मैडम. उसके बारेमे कुछ नहीं लिखा.

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए ऐसा तब होता है जब कोई पुरुष अपना बीज किसी औरत की कोख में डालता है. और मुझे इसके लिए hi तुम्हारी हेल्प चाहिए.

शिव : (कुछ सोचते हुए) तो आप चाहती है की में वो बीज लेकर आप की कोखमे दालु. बस इतना hi काम है. आप तो खामखा इतना दर रही थी. आप बताईये मुझे कहासे लाना है में अभी ले आता हु.

स्नेहा : (जोर जोर से हॅसनेलगती है उसे इतनी हसी आ रही थी की उसकी आंखे फिर से भैजति है पर ये दुखवाले आंसू नहीं the)Oh शिव तुम सचमे बहोत भोले हो. (फिर शांत होती है और उसकी और देखते hue)Tumhe वो बीज कहिसे लेन की जरुरत नहीं है वो तुम्हारे पास hi है.

शिव : (फिर में सोचने लगा, पर मुझे कुछ याद नहीं आया )नहीं मैडम मेरे पास कोई बीज नहीं है, में सच बोल रहा हु.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Wo तुम्हारे पास hi है शिव, तुम्हारे अंदर.

शिव : मेरे अंदर कहा?.

स्नेहा : अगर तुमने ठीक से पढ़ा है तो याद करो शुक्राणु तुम्हारे अंदर कहा बनते है?

शिव : (कुछ देर सोचता hu)Are है वो वो शुक्राशय में होते है. (फिर मुझे याद आता है की वो शक्राशय कहा होता है तो में थोड़ा शर्मा गया और अपनी नज़ारे झुकाली)

स्नेहा : (उसे ऐसे शरमाते देख,) तो तुम्हे पताचल गया शुक्राणु कहा होते है?

शिव : (शरमातेहुए मैंने अपनी गर्दन है में हिलायी) जी मैडम, (फिर सोचते hue)par मैडम वो देते कैसे है वो मुझे नहीं पता.

स्नेहा : (अब स्नेहा काफी रिलैक्स फील कर रही थी, इस युवक के साथ और उसके भोलेपन पे वरि जा रही thi)Wo में तुम्हे सिखदूँगी पर क्या वो तुम मुझे देना चाहोगे?

शिव : क्यों नहीं मैडम, अगर इस से आपकी हेल्प हो जातीहै तो मुझे क्या प्रॉब्लम होगी.

स्नेहा : (अपना दूसरा हाथ उसके हाथ पर रख कर थमते हुए) सचमुच तुम बहोत अच्छे हो शिव. और थैंक यू की तुम मेरी हेल्प करने के लिए राज़ी हुए.

शिव : है पर आपको वो खुद hi लेना होगा मुझे देना नहीं आता.

स्नेहा (उसके भोले पैन से खिलखिलाकर हुसनेलगती है, फिर ये सोचकर की उसकी बात का क्या मतलब होता है वो खुद hi शर्मजाति है फिर कुछ सोचकर ) शिव तुम्हे पता चलगया न की वो तुम्हारा बीज कहा है तो अगर में वो लू तो तुम शरमाओगे तो नहीं.

शिव : (मुझे पता था की वो अंग मेरे दो पैरो के बिच में है तो अब मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी तो में चुप hi रहा)

स्नेहा : (अपना एक हाथ उसके गाल पे रखते हुए बड़े प्यार से उसका चेहरा ऊपर उठाते हुए बड़े प्यार से पूछती hai)Kahona शिव शरमाओगे तो nahi.(Ye बोलते बोलते स्नेहा को थोड़ी उत्तेजना महसूस होने लगती है क्यों की वो शिव को छोड़ने के लिए तैयार कर रही थी)

शिव : (शरमाते हुए मैंने न में गर्दन हिलायी).

स्नेहा : ओह शिव थैंक यू ...थैंक यू (केहरे हुए वो मेरे गले लग गयी. )

ऐसे गले लगने से दोनों के गर्म जिस्म एक दूसरेपर अपना जादू चलना सुरु करदेते है. मासूम से दिखनेवाले इस युवक के ऐसे मजबूत शरीर का स्पर्श स्नेहा को उत्तेजित करने लगा था. वो और उस से चिपकने लगती है. पर ऐसे साइड से बेथ कर वो सही से उसे गले नहीं लगा प् रही थी. वो कड़ी हुई.

स्नेहा : (अपना हाथ शिव की और बढ़ाते hue)Mere साथ आओ Shiv.(Mene उन्हें अपना हाथ दिया तो वो मुझे अपने साथ एक रूम में ले गयी, आलीशान कमरा था, वह डबल बीएड बिछा हुआ था, टीवी भी था. एक और गुलदस्ता लगा हुआ था. एक बड़ा सा ड्रेसिंग टेबल भी था जिस पर बड़ा ऐना लगा हुआ था. हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, स्नेहा को शिव बहोत पसन् आ रहा था, वो अपने आप पर का काबू खोते जा रही थी, वो उसकी काली आँखों में डूबती जा रही थी, वो उसके मुकाबले काफी लम्बा था, उसके पति से भी लम्बा., वो शिव के नजदीक खिसकी और अपना चेहरा ऊपर उठाने लगी, जब शिव निचे न झुका तो उसने अपना हाथ बढ़ा कर उसके शिर को पकड़ा और उसे झुकाने लगी)

शिव : (में थोड़ा झिझक रहा था, शायद वो मुझे किश करने जा रही थी, ऐसे अचानक एक अनजान औरत को किश... मेने उन्हें करने दिया जो वो करना चाहती थी, वो मेरे होतो को हलके हलके चूसने लगी, उनकी सांसे तेज चल रही थी, उनके ऐसे भीगे होतो का स्पर्श मेरे अंदर हलचल पैदा करने लगा, मेरी आंखे बंद होती गयी और मेरे होठो ने भी हरकत सुरु करदी, में भी उनके होठो को चूसने लगा, मेने उन्हें अपनी बहो की गिरफ्त में ले लिया और उनके होठो को चूसने लगा)

स्नेहा : (अपने आस पास लिपटी उन सख्त बहो को महसूस कर और जोर से शिव को किश करने लगी, जब उसकी सांसे उखाड़ने लगी तो वो अपने होठ छुड़ा कर उसकी छै पर अपना शिर टिकाये हांफने लगी, ऐसी किश तो जैसे वो पहली बार hi कर रही हो ऐसा महसूस हो रहा था, पता नहीं किस तरह का आनंद था की उसका पूरा शरीर कैंप गया था, उसने शरमाते हुए शिव को देखा, और शिकायत se)Itni जोर से कोई पकड़ता है भला, देखो मेरा दिल कैसे धक् धक् कर रहा है.





उनका दिल जोरो से धड़क रहा था, मेरा हाथ उनके स्तन के बहोत करीब था, अब मुझे थोड़ा तो पता चल गया था की क्या होनेवाला है और मैडम मुज से क्या चाहती है. मेने आहिस्ता से मेरा हाथ निचे सरकाया और उनके स्तन के ऊपर रख दिया.

स्नेहा : (शिव की हरकत से वो सिहर uthi)Shhhiiiiiiiv.

शिव : (मुझे लगा शायद मेने गलती कर दी तो मेने अपना हाथ हटा लिया)

स्नेहा : (उसके हाथ हटाने से, उसकी और देखते hue)Hath क्यों हटा दिया शिव?

शिव : मुझे लगा आप को अच्छा नहीं लगा.

स्नेहा : ऐसा क्यों लगा तुम्हे शिव, मुझे बहोत अच्छा लगा. जो हम करने जा रहे है इन में ये सब करना hi होता hai.(Sneha को पता था की वो शर्माती रहेगी तो ये सब होने से रहा, तो उसने बेशरम होना hi बेहतर samja)Tum इससे छू सकते हो शिव.

शिव : (मेने उनकी आँखों में देखा, वो अपने स्तन छूने के लिए कह रही थी, मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, वैसे भी स्नेहा मैडम, भरे हुए बदन की औरत थी, सच कहु तो वो औरत नहीं एक लड़की जैसी hi दिख रही थी, लतादिदी, सरितादिदी के मुकाबले ये ज्यादा भरी हुई थी और उनके स्तन भी बड़े बड़े थे, जब वो hi कह रही थी तो मुझे क्या दिक्कत होती, मेने अपना हाथ उनके स्तन पर रख दिया और उसे दबाने भी लगा, स्नेहा मैडम अपनी आंखे बंद किये हुए कड़ी थी और मुझे करने दे रही थी, में उनका स्तन दबाने लगा, मेने दूसरा हाथ भी रख दिया और दोनों को दबाने लगा)

स्नेहा : (शिव बड़ी सख्ती से उसके स्तन दबा रहा था, उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी, आज पहली बार उसके पति अलावा कोई गैर उसके स्तन को दबा रहा था, उसकी छूट गीली होने लगी थी, शिव उसके पीछे चला गया और अपने दोनों हाथ उसकी बगल से निकलते हुए उसके स्तन दबाने लगा तो वो पीछे खिसक कर उस से चिपक ने लगी, पर उसे अपने कूल्हों पर कुछ चुभा, वो समाज गयी ये क्या है, अपने कूल्हों पर लुंड का एहसास होते hi उसका रोम रोम बहकने laga)Shhhh अह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्ह (वो अपनी गांड शिव के लुंड पर रगड़ने lagi)Shhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhhh(Jab उस से सहन न हुआ तो वो पलट कर शिव के शाइन से लग गयी और उसे अपनी बहो में कास लिया, पर ऐसा करने से शिव का लुंड उसके पेट पर चुभने लगा, वो और कास के शिव से लिपट गयी, वो सब भूल चुकी थी वो कोण है, वो किसी की बीवी थी पर इस वक़्त वो शिव के साथ थी, उसे बस वही दिख रहा था, अब उसे आगे बढ़ना था पर कैसे, एक पड़ाव तो पर कर चुकी थी वो)

स्नेहा मैडम : (कनपटी आवाज में बिना शिव की और dekhe)Shiv, हमे कपडे उतरने पड़ेंगे.

शिव : जी madam.(Pata नहीं क्यों पर अब में भी उतावला हो रहा था, मेने मेरी शर्ट के बटन खोले, शर्ट निकल कर साइड में रखड़ी. में ऊपर से नंगा हो गया.)

स्नेहा:( ऐसे लम्बा मजबूत शरीर और उस्क्पर म्हणत की वजह से बने हुए कटाव देखकर स्नेहा मोहित हो रही थी. स्नेहा कैंप रही थी, हकलाते हुए उसने शिव की पंत की और इसरा कर ke)Ise bhi...(Me थोड़ा हिचकिचाया पर फिर अपना पंत निकल दिया, में अंडरवियर में खड़ा tha)(Sneha शिव के लुंड का उभर देख उत्तेजना और शर्म के मिले झूले एहसास से कैंप रही थी, उसका दिल जोरोसे धड़क रहा था)

शिव : (में खड़ा उन्हें देख रहा था, उन्होंने एक बार मुझे देखा, फिर उनकी आंखे झुकती चली गयी, वो उलटी घूम गयी)

स्नेहा : (मुझे बहोत शर्म आ रही थी, अपने कपडे उतरने थे, में जानती थी वो मेरी और hi देख रहा होगा, इतनी जल्दी अपने कपडे उतरने में मुझे शर्म आ रही थी, और जो करना था उसके लिए सब कपडे उतरने की जरुरत नहीं थी, मेने आगे से अपनी साड़ी उठायी और अपनी पंतय निकल दी, मेने देखा तो पंतय आगे से पूरी भीग चुकी थी, मुझे बहोत शर्म आयी, और शर्म भी, मेने अपनी पंतय बीएड के निचे छुपा दी.) शिव, मुझे बहोत शर्म आ रही है, में कपडे नहीं उतर पाऊँगी.)

शिव : (में क्या कहता उनको में बस खड़ा उन्हें देख रहा था, वो जा कर बीएड पर सीधी लेट गयी और अपनी आँखों पर अपना हाथ रख दिया)





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स्नेहा मैडम : (स्नेहा को बहोत शर्म आ रही थी और साथ में बहोत ज्यादा उत्तेजना भी महसूस हो रही थी, उसका दिल बहोत तेजी से धड़क रहा था. उसने हिचकिचाते हुए अपनी गर्दन घुमाई और शिव को देखा तो वो उसको देख रहा था, उसे बहोत शर्म आयी तो उसने अपना चेहरा घुमा लिया, कनपटी आवाज me)Yaha आओ शिव. (में उनके नजदीक चला गया, वो दूसरी और hi देख रही thi)Yaha betho(Unhone अपने पेअर के पास इस्सर किआ तो में वह बेथ gaya)(Sneha का दिल जोरो से धड़क रहा था, वो क्या कहने जा रही थी ये सोच कर hi उसके पशीने छूट रहे the)Saree उठाओ.
 
अपडेट 17

स्नेहा मैडम ने मुझे उनकी साड़ी उठाने को कहा था, उनके स्वर लड़खड़ा रहे थे. ये पहला मौका था मेरे लिए, मेरे भी हाथ कैंप रहे थे, मेने देखा की उनके गोर पेअर में पायल पहनी हुई थी, मेने निचे से उनकी साडी पकड़ी और ऊपर उठता गया. जैसे जैसे में उठा रहा था उनके गोर पेअर मेरे सामने बेपर्दा हो रहे थे. मेने देखा की उनके पैरो पर कोई बल नहीं थे, गोरी त्वचा एकदम चिकनी थी. मेने उठाते उठाते उसे झांघो के ऊपर तक चढ़ा दिया. उनकी भरी हुई मांसल झंघे मेरे सामने नंगी थी, मेरा मन कर रहा था उन्हें छूने का, मेरा लुंड अब अकड़ने लगा था. उनकी साड़ी ऊपर नहीं उठ रही थी तो उन्होंने अपने नितम्ब ऊपर उठाये तो साड़ी ऊपर खिसकने लगी. (स्नेहा शर्म से घडी जा रही थी, ऐसे एक अनजान लड़का उसका वो खजाना देखने जा रहा था जिसे, उसके पति के अलावा किसी ने नहीं देखा था. शर्म के साथ साथ उसे उत्तेजना भी महसूस हो रही थी.) मेने जैसे hi साड़ी उठायी मुझे लड़कीओ का खास अंग मेरी आँखों के सामने दिखने लगा.





छोटे छोटे बालो से सजा हुआ था, होठ फुले हुए थे, एक दरार नज़र आ रही थी जो आपस में चिपकी हुई थी. मेने मैडम की और देखा तो वो अपना चेहरा अपने हाथो से ढके दूसरी और देख रही थी. उनके शरीर के रंग के मुकाबले वो होठ थोड़े गहरे रंग के थे, मेने देखा की वह एक जगह चिप छिपा रास लगा हुआ tha.(Sneha निचे से नंगी थी, उसे बहोत शर्म भी आ रही थी. जब उसने देखा की शिव कुछ नहीं कर रहा है तो उसने अपनी कनखियों से शिव की और देखा, वो उसके खजाने को बड़े गौर से देख रहा था, उसको ऐसे देखते हुए देख उसकी छूट से दो चार बुँदे और बहार टपक ने लगी. उसे पता था शिव को इस खेल के बारे में कुछ पता नहीं है तो जो करना था उसे hi करना पड़ेगा.)

स्नेहा : (धीमी आवाज me)Use छू सकते ho.(Mene उनकी और देखा तो उन्होंने वापस अपनी आंखे बंद कर ली, वो अद्भुत नज़ारा मुझे सम्मोहित कर रहा था, मेने अपने कांपते हाथ बढ़ाये और उस अंग के पास उनकी गोरी झंघ पर रख diya)Shhhhhhhh(Sneha कसमसाई, शिव की ये छुअन उसके अंदर उत्तेजना की एक लहर भर gayi)(Unki आवाज से मेने उनकी और देखा, वो वैसे hi लेती थी, में हलके से उन गोरी झंघ को दबा कर उसे महसूस करने लगा, एक मखमली एहसास मेरे अंदर भरने लगा, में उसे सहलाने लगा, मेरा लुंड पूरी तरह से कड़क हो चूका था, जो मुझे दुःख रहा था तो मेने उसे एडजस्ट किआ. आहिस्ता से मेने अपना हाथ उस अंग के ऊपर उगे बल पे रक्खा और उसे सहलाते हुए महसूस करने लगा, ये किस तरह का रोमांच था में नहीं जनता था पर एक अजीब सी हलचल मेरे अंदर हो रही थी, वो मुझे रोक नहीं रही थी तो मेरी हिम्मत बढ़ने लगी, मेने अपना अंगूठा उस दरार पे फिराया, मैडम के शरीर ने एक झटका खाया और उन्होंने एक हाथ से चद्दर को मिट्ठी में भर लिया. मेरा अंगूठा उस दरार को फैलते हुए अंदर धसने लगा, मेरे अनूठे पर वो चिप छिपा रास लगने लगा, जैसे जैसे में अंगूठा फिर रहा था वो होठ भी चिकने हो रहे थे. में हलके दबाव से उस दरार को सेहला रहा था





मैडम के मुँह से हलकी हलकी आवाज निकल रही थी, उनकी आवाजे मुझे और उत्तेजित कर रही थी. मुझे पता चल रहा था की वह एक छेड़ है जिसमे से ये चिकना रास निकल रहा है, वो काफी गरम भी था. अब आगे क्या करना है उसके लिए में रुक रहा और मैडम की और देखा.

स्नेहा : (शिव को रुका देख उसने फिर अपनी उंगलिओ की दरार से उसे देखा, वो उसे hi देख रहा था, उसके अंगूठे की छुअन से पहले hi वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उसने कनपटी आवाज में kaha)Apna अंडरवियर utaro.(Wo खड़ा हुआ और उसने अपना अंडरवियर निचे उतरा जिसे स्नेहा बड़े गौर से देख रही थी, जैसे hi उसकी नजर के सामने वो बड़ा सा अंग आया, उसकी सांसे हलक में घुटने लगी, ऐसा अंग वो पहलीबार देख रही थी, उसे देख उसके पशीने छूटने लगे, वो पूरी तरह से खड़ा था, उसकी लम्बाई और मोटाई देख एक तरफ तो वो डरने लगी, दूसरी और उसकी छूट से पानी का एक झरना बहने लगा. वो उत्तेजना में कंपनी लगी. उसके मान में शंका होने लगी की क्या वो उसके अंदर जायेगा. पर करना तो था hi, उसने आंखे बंद की और अपने आप को संभाला, उसने अपने पैरो के बिछ इस्सर kia)Yaha आ जाओ. (उसकी आवाज में गभरहट साफ झलक रही थी, उसके सब्द उसका साथ नहीं दे रहे the)(Me उनके पैरो के बिच जा कर बेथ गया, उन्होंने अपने पेअर फैलाये.





में उनके पैरो के बिच जा कर बेथ गया, उनको ऐसी स्थिति में देख मेरी हालत ख़राब हो रही थी. एक खूबसूरत महिला जो मेरे बॉस की बीवी थी वो मेरे सामने इस अवस्था में थी. उनकी टंगे फैली हुई थी और उनकी छूट के चिपके हुए होठ अब थोड़ा सा खुल गए थे, वह मुझे एक गुलाबी छेड़ नज़र आ रहा था जो बहोत छोटा था. में इतना भी नादाँ नहीं था, मुझे इतना तो पता था की मुझे मेरा लुंड यहाँ डालना है. पैर फिर भी में सूरे नहीं था तो में मैडम के अगले आदेश का इंतजार कर रहा था.

स्नेहा, शर्म और उत्तेजना के मिले जुले एहसास के कैंप रही थी. उसने अपनी आंखे बंद hi रक्खी और अपने हाथ से अपनी छूट को फैलाया. अपनी छूट को छूटे hi उसे पता चल गया की उसकी छूट कितनी गीली हो चुकी है, वो खुद अपनी छूट की इस अवस्था को देख कर हैरान थी. उसने अपनी छूट के होठो को फैलाया और एक ऊँगली उस हवन कुंड में डाली. सच में वो आज एक आग की भट्टी के सामान तप रही थी.





स्नेहा : (कनपटी , धीमी आवाज me)Tumhara...wo ...yaha....is jagah...ander....dalna hai.(Bolte बोलते उसकी सांसे इतनी तेज हो गयी थी की वो हांफने लगी)

मुझे समाज नहीं आ रहा था की जहा मैडम बता रही थी वह तो एक छोटा सा छेड़ था, और मेरा लुंड उसमे कैसे जा शक्ति था. मैंने उनकी बात मानते हुए थोड़ा आगे खिसका और मेरे लुंड को उस छेड़ पर लगाया. क्या गजब का एहसास था, वो जगह अत्यधिक गरम भी और चिकनी तो इतनी थी की मेरा लुंड फिसल रहा tha.(Apni छूट के मुहाने लगे उस सुपडे को महसूस कर स्नेहा ने अपना निचला होठ अपने दांतो टेल दबा दिया, उसकी छूट में सरसराहट होने लगी, आज एक अनजान लड़का उसकी छूट में अपना लुंड डालने जा रहा था इस एहसास से hi उसकी छूट से नदिया बहने लगी, उसकी कमर हिलने लगी थी जिस से लुंड का सूपड़ा उसकी छूट पर घरसँ पैदा कर रहा था, उसने दो तीन बार अपनी कमर हिलायी.

स्नेहा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिव डालो अंदर shhhhh.(Muje पता नहीं चल रहा था की कैसे दालु इतने से छेड़ में, मेने अपनी स्थिति सही की और अपने लुंड पर दबाव बढ़ाया तो मेरे आश्चर्य की सिमा न रही, वो उस छेड़ को फैलते हुए उसके अंदर घुस gaya.)Shhhhhhhhhh aiiiiiiiiiiiiiiiii





(स्नेहा अपने अंडे घुसते उस अंग की मोटाई को महसूस कर तड़प उठी, उस अंग ने उसकी छूट को अपने चरम तक फैला दिया था, उसे हल्का हल्का दर्द भी होने लगा था, उसने चद्दर को जोरो से अपनी मुट्ठी में दबा दिया. शिव लगातार अपना अंग मेरे छेड़ में घुसेड़ रहा था, आखिर कर मुज से बर्दास्त न हुआ तो मेने उसके पेट पर हाथ रख कर उसे रोकने lagi)Ahhhhhhhh शीइइइइइइव रुकुओवो shhhhhhhhh.(Me रुक गया, उस गरम गरम छोटा सा छेड़ मेरे लुंड पर अपना दबाव बढ़ा रहा था, ये किस तरह का आनंद था मुझे पता नहीं चल रहा था, पर मुझे बहोत hi ज्यादा अच्छा लग रहा था, मेरा लुंड गरम गरम चिकनी मांस पेहसीओ से लिप्त हुआ था, अपने लुंड पर कशी हुई वो गोलाई में साफ महसूस कर रहा tha)(Itne सालो छोड़ने के बाद मुझे यकीं नहीं हो रहा था की मुझे दर्द हो रहा है, उस बड़े से अंग ने मेरे छेड़ को पूरी तरह से फैला दिया था, मेरे पशीने छूट रहे थे, मुझे इतनी गर्मी लग रही थी की पहने हुए कपडे मुझे काट रहे थे.)

शिव : (उन्होंने मुझे रुकने को कहा तो में रुक गया, उनके चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था, मुझे चिंता होने लगी, कही मेने कुछ गलत तो नहीं कर diya)Sorry मैडम, में वापस निकल lu(Kehte हुए में अपना लुंड निकलने लगा)

स्नेहा : (तुरंत उसे रोकते hue)Nahi शिव, बहार मत निकलना. अह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर ऐसे hi रुको.

शिव : पर आप को दर्द हो रहा है, मैंने कुछ गलत तो नहीं कर दिया?

स्नेहा : (उसके चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी, इतना हत्ता कट्टा और साथ में इतने बड़े अंग का मालिक, पर दिल बिलकुल बच्चे जैसा, उसे देख स्नेहा को उस पर प्यार आने laga)Yaha aao.(Me उनके ऊपर झुकने लगा, उन्होंने अपने हाथ से मेरा चेहरा sehlaya)Tumne कुछ गलत नहीं किआ, पर तुम्हारा वो बहोत बड़ा hai(Kehte कहते वो शर्मा गयी, फिर मुस्कुराते hue)Muje किश करो शिव.

शिव : (ये क्या हो रहा था मुझे समाज नहीं आ रहा था, उन्हें दर्द हो रहा है, फिर भी मुस्कुरा रही है और मुझे किश करने को बोल रही है, में झुका और उनके होठो को किश करने लगा)

स्नेहा : उम्म्म उम्म्म्म ummmm(Wo शिव के होठो पर टूट सी पड़ी और उसकी पीठ पर अपने हाथ फिरने लगी)





वो ऐसे किश कर रही थी तो में भी उनके होठो को चूसने लगा, थोड़ी hi देर में वो किश करते करते अपनी कमर हिलने लगी, मुझे लगा वो मेरे लुंड को चूस रही है, मेरी भी कमर आगे पीछे होने लगी, क्या एहसास था, उस चिकनी गरम सुरंग में मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था, ये किश तरह का आनंद था मुझे पता नहीं चल रहा था, मेरा शरीर अपने आप आगे पीछे हो रहा था और मेरे लुंड पर इतना अच्छा लग रहा था की में जल्दी जल्दी आगे पीछे करने laga.(Sneha खुद इतनी गरम हो गयी थी की वो भी अपनी कमर हिला कर धक्के लगाने लगी, उसे दर्द तो हो रहा था पर जो आनंद मिल रहा था उसके सामने वो दर्द कुछ भी नहीं था. उसके शरीर में इतनी गर्मी बढ़ रही थी की उसने अपने एक हाथ से ब्लॉउज के हुक खोल दिए. और शिव के हाथ को पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया)

(धक्के लगते हुए में मैडम की चुकी को पकड़ कर दबाने लगा, वो बड़ी बड़ी नरम नरम चुकी मेरे अंदर एक अजीब तरह का जोश भर रही थी, मेरी कमर जोर जोर से हिल रही thi)(Apne अंदर उतारते लुंड को स्नेहा साफ़ तौर पर महसूस कर रही थी, शिव का लुंड उसकी छूट को और गहरा और गहरा खोले जा रहा था, दर्द एक तरफ और उस नए अनुभव का आनद उसे बहोत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वो इतने बड़े लुंड से चुद रही है, उसके चेहरे पर ांदन साफ़ झलक रहा था, उसके हर धक्के पर उसकी आहे तेज हो रही थी)





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स्नेहा : ओह्ह्ह्हह सीईव शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह और जोर से शहहहहह.

शिव : (उनको दर्द हो रहा था तो में अपने अधेलुंड से hi अंदर बहार कर रहा था, उनके ऐसा कहने से मेरे अंदर जोश बढ़ने लगा, मुझे भी उस छेड़ में अंदर बहार करने में बहोत मज़ा आ रहा था)

स्नेहा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव इतना मज़ा शहहहहह अह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्ह अह्ह्ह जोरसे अह्ह्ह्ह शीइइइइइव ahhhhhhh.(Muje भी बहोत मज़ा आ रहा था, में भी जोर जोर से धक्के लगाने लगा, उस छेड़ का घर्षण मेरे लुंड पर बहोत कुछ असर दाल रहा था, में उनके ऊपर झुक कर उनके होठो को बुरी तरह निचोड़ने laga)aiiiiiiii मुम्मीईईई शहहहहह अह्ह्ह्हह धीरीई अह्ह्ह्हह्हह (में अब पचता रही थी उसे जोर से कहने का बोल कर, उसके धक्के बहोत ज्यादा तेज हो गए थे, ऐसे तो मुझे कभी पवन ने भी नहीं छोड़ा था, दर्द और मज़े से मेरी हालत ख़राब थी, एक और में उसे रोकना चाहती थी पर में स्खलन के बहोत नज़दीक थी, उसका लुंड मेरी छूट के और अंदर और अंदर घुस रहा था, दर्द से भी हालत ख़राब थी) धीरीई अह्ह्ह्ह धीरीई शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह धीरीईए आईइइइइइइइ शहीइइइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह मुमीइइइइइइ aiiiiiiiiiii(Jab वो नहीं रुक रहा था तो मेने उसके होठो को जोर से चूसना सुरु कर दिया, उसकी पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ने लगी, उसके बाल जोरो से खींचने लगी पर ऐसा करने से वो और जोर से धक्के लगाने laga)hummmm हम्म्म्म हम्म्म्म (मेरे मुँह से आवाज भी नहीं निकल रही थी, उसने मुझे अपने शाइन में दबोच लिया, में उसके निचे दबी, उसके धक्को की रफ़्तार को सेह रही थी, उसका लुंड इतना अंदर घुस चूका था की मेरी बच्चे दानी से टकराने लगा, मेरी हालत बहोत ख़राब थी, इतनी बुरी तरह से में कभी नहीं चूड़ी थी, पर एक तरह का आनंद मुझे और जोश दिला रहा tha,)Me गयी शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह में गईइइइइइ ओह्ह्ह्हह्हह माआआ में मर जाउंगी शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुम्मीईईई (शिव भी अपने आखरी पड़ाव पर था, वो उस नाजुक से जिस्म को अपनी अघोस में दबाये अपना लुंड उसकी गहराईयो में दाल रहा था)





शिव : (ये किश तरह का आनंद था मुझे पता नहीं, उस सुरंग में मुझे इतना मज़ा आ रहा था की में जोर जोर से अपनी कमर हिला रहा था, मैडम की आवाजे मुझे आ रही थी पर में अपनी hi धुन में था, ऐसा एहसास मुझे पहली बार हो रहा था, में अपनी कमर बड़ी तेजी से हिला रहा था, मेरे अंदर से कुछ निकलने वाला था, में तेज तेज धक्के लगते हुए आखिर कर छूट गया और मेरे अंदर एक आनंद की अनुभूति होने लगी, मेरे अंदर से कुछ निकल रहा था, मेने अपना पूरा लुंड छूट की गहराईयो में थोक diya)(Apne अंदर हो रही गर्म बरसात को महसूस कर स्नेहा शिव से जोरो से लिपट गयी)
 
अपडेट थोड़ा बाकि है...

हो सकेगा तो रात को

वार्ना कल सुबह..
 




गुड मॉर्निंग स्टूडेंट्स.

. बिना मैडम.
 
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