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- Dec 5, 2013
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अपडेट 18
अनाथालय में कुछ और hi माहौल था. यहाँ एक डॉक्टर की टीम आयी हुई थी. वो अपना सामान मैनेजर की ऑफिस में रख रहे थे. बहार एक बड़ी सी एम्बुलेंस जैसी वैन कड़ी थी.
रंजन : ये किसलिए आये है didi.(Usne लतादिदी से पूछा)
लतादिदी : पता नहीं, (सरिता ko)Tuje पता है?
सरिता : नहीं, मुझे भी पता नहीं है, में पूछती हु. (वो मैनेजर के पास जाती है) ये किसलिए आये है?
मैनेजर : (तीखी आवाज में) क्यों भूल गयी, पहले भी ये लोग आते थे न, ये तुमलोगो के हेल्थ check-up के लिए आये है.
सरिता : पर यहाँ तो कोई बीमार नहीं फिर क्यों?
मैनेजर : ज्यादा जबान मात चला, तुजे कहा न ये check-up के लिए आये है. ये सब का चेक उप करेंगे., और कुछ नहीं. जाओ सब को बोल दो, तैयार रहे.
सरिता : (डरते hue)Ha सबको, बच्चे और बड़े सब?
मैनेजर : है सब. जैसे जैसे डॉक्टर बुलाये, बरी बाटी सब मेरी ऑफिस में आ जाना.
सरिता ने सब को बता दिया. पहले भी ऐसा हुआ था, पर उस बात को काफी टाइम हो गया था. सब लड़कीअ दर रही थी और जो बच्चे थोड़े समझदार थे वो भी दर कर अपने कमरेमे दुबक गए थे. सब सामान सेट करने के बाद डॉक्टर ने बुलाया तो कोई जाने को तैयार नहीं था. मैनेजर गुस्से में बहार आया.
मैनेजर : एक बार सब को बोलै समाज नहीं आता, चलो अंदर, पहले तू आ लता. तू बड़ी है और सब तेरी बात मानते भी है.
लता : Ji...(Wo भी अंदर से दरी हुई थी पर कर भी क्या सकती थी, वो डरते डरते अंदर गयी)
डस्टर ने उसकी ब्याह पर एक पत्ता बंधा और उसका ब्लड परेसुरे चेक किआ. फिर उसकी जबान, उसका तापमान. फिर उसकी ब्याह पर एक पट्टी कसके बंधी और इंजेक्शन ले कर एक आदमी आया. जिसे देख लता दर गयी.
मैनेजर : कुछ नहीं होगा, ये थोड़ा सा खून लेगा, और कुछ नहीं.
लता बहोत दर रही थी, उसने अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया, उस आदमी ने सुई घुसाई तो थोड़ा सा चुभा पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ. फिर बरी बरी सब के साथ यही किआ गया.
मैनेजर : वो कामचोर कहा है, दिखाई नहीं दे रहा.
लता : वो अभी स्कूल से आया नहीं.
मैनेजर : इतना टाइम हो गया फिर भी अभी आया नहीं, आवारा कही का, जैसे hi आता है उसे पहले अंदर भेजना.
मैनेजर : डॉक्टर से, वैसे तो सब हो गया है, सिर्फ एक लड़का नहीं आया है.
डॉक्टर : अभी थोड़ी देर है हम यहाँ, अगर आ जाता है तो ठीक है. में ये सब सैंपल की रिपोर्ट सर को दे दूंगा.
मैनेजर : (धीमी आवाज me)Waise किस के लिए ये जाँच कर रहे हो.
डॉक्टर : वो में नहीं बता सकता, तुम अपने काम से काम रक्खो, अगर किसी का सैंपल मैच हो जाता है तो फिर तुम्हे फ़ोन करेंगे.
मैनेजर : (मान me)Pata नहीं इस बार किसकी बलि चढ़ेगी, मुझे क्या मुझे तो पैसो से मतलब है. एक तो वैसे भी अब यहाँ लड़कीअ बची नहीं है, वो साला भी कहा रह गया, अगर इस बार उसका नंबर लग जाये तो मज़ा आ जाये. लड़कीओ में तो सिर्फ चार hi बची है और अभी तक मेने किसी की सील भी नहीं तोड़ी. मुझे जल्दी करनी होगी.
इन सब से बेखबर में स्नेहा मैडम के साथ था. स्नेहा मैडम ने मुझे अपने पैरो से ऐसे जकड़ा था की में हिल भी नहीं प् रहा था तो मैंने चेहरा ऊपर उठाते हुए स्नेहा मैडम को देखा तो में चौंक गया. उनकी आँखों से आंसू बेहराहे थे. और उनके चेहरे पर दर्द की लकीरे साफ देखि जा शक्ति थी. में दर गया और उठने लगा.
स्नेहा
जब स्नेहा को ये एहसास हुआ की शिव उठ रहा है तो उसने अपनी आंखे खोली और साथ में शिव को अपने हाथो से जकड़ते हुए उठने से रोकने लगी. (मुझे कुछ समाज नहीं आया तो में रुक गया. में स्नेहा मैडम को hi देख रहा था.) (शिव की आँखों में देखते हुए भीगी आंखोसे वो मुस्कुरायी )अभी हिलना मूत ऐसे hi मेरे ऊपर लेते raho.(Wo शिव खींचती है और उसे वापस अपनी बहो में भर लेती है. वो चाहती थी की अंदर का वीर्य बहार न निकल जाये इस लिए वो शिव को लुंड निकलने से मन कर रही थी) (में ऐसे hi उनके ऊपर लेता रहा).
शिव : (थोड़े चिंतित स्वर में) Madam?.....Durd हो रहा है?
स्नेहा : (मुस्कुराते हुए )है थोड़ा थोड़ा.
शिव : सॉरी मैडम, मुझे पता नहीं था ऐसा होगा.
स्नेहा : (उसके गाल से अपने गाल रगड़ते हुए ) मुझे भी पता नहीं था ऐसा होगा, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं हुआ है. होता है ऐसा. मुझे ताज्जुब इस लिए है की मेरे साथ ऐसा hua.(Shiv को कुछ समाज नहीं आया तो में थोड़ा ऊपर हुआ और सवालिया नजरो से उनको देखने लगा),( स्नेहा मुस्कुराते hue)Are पागल जब लड़की पहलीबार ऐसा करती है तो उसे दर्द होता है. पर मुझे हुआ इस लिए मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ. पर तुम्हारा वो इतना बड़ा है तो ताज्जुब की कोई बात नहीं, पर ऐसा होगा ये मैंने नहीं सोचा था.
शिव : अगर आप को दर्द हो रहा है तो मुझे निकल लेने दीजिये.
स्नेहा : (उसका गाल सहलाते hue)Pagal ये होगा तभी तो में माँ बनूँगी. तू चिंता मत कर अभी ठीक हो जायेगा. अच्छा ये तो बता तुजे कैसा लगा ये सब? क्या तुजे मज़ा aya?(Maine शरमाते हुए है में गर्दन हिलता hai)To शर्माता क्यों hai.(Fir उसकी और प्यार से देखते हुए) क्या तुजे में अच्छी lagi?(Maine फिर है में गर्दन hilayi)Aise नहीं, बोल न, में तुजे कैसी लगी?
शिव : है मैडम आप बहोत खूबसूरत और प्यारी है. मेने सोचा नहीं था की आप ऐसा भी करती होगी.
स्नेहा : (वो मुस्कुरायी) क्या तुजे, मुझे छूने का, चूमने का मान कर रहा है? (मैंने फिर शर्माके है में सर हिलाया ,
स्नेहा मैडम
मुस्कुराते hue)Mene बोलै न बोल के बता. अच्छा ये बता, क्या छूने का मान कर रहा hai?(Meri नजर उनके चुचो की और चली गयी पर में बोलै कुछ nahi)Kya तुजे ये अच्छे लगते है? (मैंने सिर्फ मुस्कुराकर उन्हें देखा ) बता न क्या तुम्हे ये अच्छे लगते है, क्या इसे दबाना चाहते हो.
शिव : जी ...जी मैडम.
स्नेहा मैडम: (पता नहीं पर आज स्नेहा को उसके साथ ऐसी बाते करने में बहोत मज़ा आ रहा था, वो बहोत खुस थी, वो अपने इस नवयुवक साथी के साथ खुल कर मज़ा लेना चाहती थी, शिव का हाथ पकड़ कर वो अपनी छाती पे रख देती hai)Isse दबाओ शिव, जो मर्जी हो करो इसके साथ, मुझे भी बड़ा मज़ा आता है जब तुम इसके साथ ऐसा कुछ करते हो.
वो खुद मेरे एक हाथ को अपनी एक चुकी पे रख कर उसे दबाने के लिए बोल रही थी. ब्रा में कैद उस नरम गोले को दाबाँदे में मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, में भी एक हाथ से एक चुकी दबाते हुए दूसरी को मुहमे लेकर चूसने लगा. इन बड़े बड़े नरम गुब्बारों से खेलना और उसके ऊपर कड़क डेन को चूसना मुझे बहोत पसंद आ रहा था. (स्नेहा ने अपनी ब्रा को निचे खिसका दिया जिस से उसका निप्पल बहार आ गया, निप्पल को देख शिव उस पर टूट पड़ा, वो उसे जोर जोर से चाटने लगा, स्नेहा को थोड़ा दर्द हुआ पर उसने शिव को रोका नहीं, स्नहे महसूस कर रही थी की थोड़ी देर पहले लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर अकड़ने लगा. उसकी छूट में एकबार फिर पानी बहाने लगी. वो अब मचलने लगी थी. वो खुद अपनी कमर हिलने लगी, जिस से लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगता है. उसके पति ने कभी उसे दूसरी बार नहीं छोड़ा था)
स्नेहा मैडम : एक मिनट Shiv(Me रुक गया और उन्हें देखने लगा, उन्होंने अपने सरे कपडे निकल दिए, वो पूरी तरह से नंगी हो गयी, में उन्हें देखता hi रह गया, उनके चुके बहोत बड़े लग रहे थे, गहरे रंग का एक बड़ा सा गोल आकर बना हुआ था और बिच में चूचक पूरी तरह से खड़ा था, उन्हें देख कर मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गयी, मेने कास के दोनों चुचो को पकड़ लिया और मसल diya)Shhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धीरीईईए (में झुक कर एक चूचक को मुँह में लिया और उसे जोरो से चूसने लगा, बरी बरी दोनों चूचिया मसलते हुए में चुचकों को चूस रहा tha)Dhireeeee बाबू शहहहहह में कही भागी नहीं जा रही shhhhhhhhhhh(Me इतना उत्तेजित हो गया था की में सुन hi नहीं रहा था, मेने अपनी कमर का जोर से धक्का diya)Mumiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhh में यही हु बाबू धीरीईई शह्ह्हह्ह्ह्ह में कही नहीं जा रहीइइइइइइइइ शहहहहह aiiiiiiiiiii धीरीईई बाबूउऊउउउ.

exclude duplicates
वो ऐसे मुझे छोड़ रहा था की में पूरी हिल रही थी, में बिस्टेर में गढ़ी जा रही थी. जिंदगी में पहली बार उसे छूट का मज़ा मिल रहा था, उसका उत्साह में समाज सकती थी, और सच कहु तो मुझे भी ऐसे मज़ा आ रहा था. ऐसी चुदाई तो मेरी कभी नहीं हुई थी. में उस बड़े लुंड के धक्को से पागल हो रही थी. उसका लुंड मेरी छूट में घमासान मचाये हुए था, में ज्यादा देर टिक न पायी और झड़ने लगी.

स्नेहा मैडम : ोोोू मायआ शीइइइइइइइ में गईइइइइइइइ अह्ह्ह्हह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह रुको अह्ह्ह्हह्हह रुको शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में रुक गया, और उन्हें देखने लगा, वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी, जूते गुस्से se)Pagal हो गए हो क्या, इतना तेज कोई करता है भला. में तुम्हारी तरह मजबूत नहीं हु, नाजुक सी लड़की हु, बहार निकालो इससे.
शिव : (मुझे और करना था, मुझे लगा मेने गलती कर di)Sorry मैडम, में धीरे से करूँगा.
स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मन नहीं कर रही हु, अभी थोड़ी देर रुको, मुझे तुम्हारा देखना है( मेने मुस्कुराते हुए अपना लुंड बहार निकल लिया, पक्क्क की आवाज के साथ लुंड बहार निकल aaya)Ahhhhhhhhh, (स्नेहा बेथ कर अपनी छूट देखने लगी, ढेर सारा वीर्य उसकी छूट से निकल कर बिस्तर पर गिरने लगा, उसने देखा की वो थोड़ा लाल भी था, वो समाज गयी की उसकी छूट अंदर से फटी है. उसे कोई परवाह नहीं थी, उसने अपनी साड़ी से लुंड को साफ किआ और उस अजूबे को पकड़ कर देखने लगी.

उस बड़े से दैत्याकार लुंड को देख वो मोहित होने लगी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा लुंड वो अपनी छूट में ले चुकी है. वो उसे चूमने और चाटने लगी.

में देख रहा था कैसे मैडम मेरे लुंड को चाट रही है, जब मेने उन्हें पहली बार देखा था तब अगर मुझे कोई कहता की मैडम ऐसा कर रही थी तो में यकीं hi न करता. वो कितनी खूबसूरत थी और दिखने में कितनी शालीन और सभ्य दिखती है. प्यारी सूरत के साथ उनकी आवाज भी कितनी मीठी है, में एक नए अनुभव को सिख रहा था. में अपने घुटनो पर खड़ा था और वो मेरे लुंड को चाट रही थी. में देख रहा था की वो ऐसे चाट रही है जैसे छोटा बच्चा कुल्फी को चाट ता है. (स्नेहा जैसे जैसे लुंड को चाट रही थी वैसे वैसे वो और उत्तेजित हो रही थी, लुंड से निकलनेवाली वो गंध उसके नथुनों में भर रही थी, शिव के वीर्य और उसकी छूट की मिली जुली गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी, उसकी छूट से अभी भी शिव का वीर्य टपक रहा था, उसने लुंड के सुपडे को अपने मुँह में भर लिया, उसका पूरा मुँह भर गया था, उसके होठ लुंड के इर्द गिर्द लिपट गए the)(Madam ने मेरा लुंड मुँह में भर लिया था, उनके मुँह की गर्माहार में अपने लुंड पर महसूस कर रहा था, वो ऐसे झुकी थी की उनके बड़े कूल्हे बहार उभर आये थे, मेने झुक कर उन्हें पकड़ा और दबा कर महसूस करने लगा. वो मखमली गद्देदार कूल्हे दबाने में मुझे बहोत मज़ा आने लगा.

मेरे हाथ काफी लम्बे थे तो में अपनी ऊँगली से पूरी दरार को सहलाने लगा, जैसे hi मुझे छूट का छेड़ मिला मेने अपनी ऊँगली अंदर दाल दी. छूट पूरी चिप छिपी थी, उस गरम जगह में मेने अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगा.
(स्नेहा अपनी छूट में अंदर बहार हो रही ऊँगली से और उत्तेजित होने लगी, उसे ऐसा लग रहा था की उसकी छूट में लुंड है, वो और जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, उसने सोचा नहीं था की एक hi दिन में इतना सब हो जायेगा. कहा वो ये सोचे बैठी थी की एक hi बर्टो करना है, और अभी उसका दिल hi नहीं मान रहा था. इतनी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी, या यु कहे की काफी सालो से वो इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी, शादी के शुरुआती दिनों में वो जरूर उत्तेजित हो जाती थी, पर धीरे धीरे वो सब काम हो गया था. में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी तो में सीधी लेट गयी, वो भी बेसबारा हो रहा था जैसे hi में लेती वो अपनी पोसिटिव लेने लगा, मेने अपनी एक तंग उठा कर उसे जगह दी तो उसने अपना लुंड पूरा अंदर दाल दिया. वो जल्दी जल्दी मुझे छोड़ने लगा. वो मेरे पेअर को पकड़ कर उसे चाटने लगा तो मुझे गुदगुदी होने लगी.

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स्नेहा मैडम : आआह्ह्ह्ह शीइइइइइइइव क्या कर रहे हो, शहहह गुदगुदी हो रही है, (उसका लुंड जिस रफ़्तार से अंदर बहार हो रहा था, मेरी हड्डिया तक आवाज करने लगी थी,) ओह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह तुम मुझे शहहहहह आआ पागल कर डोज अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.
शिव : (ये कैसा मज़ा था, मेरा लुंड उस छोटी सी सुरंग में अंदर बहार होने से मुझे एक अजीब तरह का आनंद मिल रहा था. मेने सोचा नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आता हो गए. मैडम के नरम नरम होठ, चूसने में भी मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, मेरी कमर तो अपने आप hi हिल रही थी, छूट की अंदर की मॉस पेशिया मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, में पशीने से भीग गया था, मैडम का भी यही हल था, मेरे चेहरे से पसीना टपक कर उनके शरीर पर गिर रहा था.)

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स्नेहा मैडम : (इतने तेज धक्के में पहली बार झेल रही थी. उसकी ताकत देख मुझे ताज्जुब हो रहा था, यहाँ मेरी छूट की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो रही थी पर दिल मान नहीं रहा था, शरीर में ऐसी ऐसी तरंगे उठ रही थी, मेरा रोम रोम खड़ा हो रहा था, वो मेरे शरीर पर पूरा छाया हुआ था, और धक्को की बरसात हो रही थी)

मेने उसके होठो पर टूट पड़ी, दोनों के मुख से निकल रहा रास पुरे चेहरे को भिगोने लगा था, वो मेरे स्तनों की चाट ता मेरी गर्दन चाट ता, पर उसके धक्के लगातार चल रहे थे. ये मेरा पहला अनुभव था की में इतनी देर से चुद रही थी. पिछले आधे घंटे से वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, वो जरा भी नहीं थका था, उसका स्टेमिना देख मुझे हैरानी हो रही थी. मुझे उस पर इतना प्यार आ रहा था की में लगातार उसके होठो को चूस रही थी.

आखिर कर वो वक़्त भी नजदीक आ गया, में जान गयी की वो झड़ने वाला है, उसकी रफ़्तार इतनी तेज थी की मेरी हालत पतली हो रही थी,

स्नेहा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आराम से ाः धीरे शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे अह्हह्ह्ह्ह shhhhhh(Akhir कर जोर से झटके लगते हुए वो अपना वीर्य मेरे अंदर भरने लगा और में भी झड़ने लगी, मेने उसे अपने गले से लगा लिया,

वो और में दोनों जोर जोर से सांसे ले रहे थे, पुरे कमरे में सिर्फ सांसो का शोर था. मेरी छूट पूरी वीर्य से भर गयी थी, में महसूस कर रही थी की वीर्य निकल कर मेरी गांड की दरार से बह रहा था, उसके लुंड की पल्स में अपनी छूट में महसूस कर रही थी. मेरी छूट लुंड को कास के निचोड़ रही थी, मुझे छोड़ने की पूरी ख़ुशी उसने दी थी, में पूरी तरह से उस पर मर मिटी thi.Usne थोड़ा ऊपर उठ के मेरी और देखा तो मेने अपनी नाक उसकी नाक से सत्ता दी.

में पूरी तरह संतुस्ट थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने दुनियाकी सबसे बड़ी खुसी प् ली हो. में उसकी पीठ सहलाते हुए उसके इस अद्भुत कारनामे का इनाम दे रही थी. में उस से बेल की तरह लिपट गयी थी.
वह गयम में पवन बेचैन था. अच्छा सरीर था उसके पास पर जो एक मर्द को मर्द बनता है वो hi नहीं था. वो चुदाई तो अच्छी कर लेता था, स्नेहा भी खुस थी उस से पर आज उसे अपनी प्यारी और खूबसूरत बीवी को किसी और की बहो में देना पड़ा था. वो सोच सोच के पागल हो रहा था की वह क्या हो रहा होगा. क्या शिव मन होगा. कैसे स्नेहा बात करेगी. उसने जान बुज कर शिव को चुना था क्यों की वो एक नादाँ लड़का था, वो इस चुदाई के खेल को नहीं जनता था तो वो उसके लिए कोई खतरा नहीं था. वो स्नेहा को भी जनता था, वो एक संस्कारी और अच्छी लड़की थी. वो सोच रहा था की फ़ोन कर के स्नेहा से बात करे की नहीं.
शिव और स्नेहा , जब दोनों शांत हो गए तो शिव अलग होने के लिए उठने लगा तो स्नेहा ने फिर उसे पकड़ते हुए उठने नहीं दिया.
स्नेहा : अभी ऐसे hi रहो शिव, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.
शिव : पर मैडम मुझे गयम भी जाना है.
स्नेहा : तुम उसकी चिंता मत करो में फ़ोन कर दूंगी अभी.
शिव : आप क्या कहेगी? और ये सब पवनसीर को पता चल गया तो?
स्नेहा : (उसका गाल सहलाते हुए) तुम इन सबकी चिंता मत करो, में हु न. वो सब छोडो ये बताओ तुम्हे कैसा लगा ये सब.
शिव : (शरमाते और मुस्कुराते hue)Bahot मज़ा आया मैडम, और आप को?
स्नेहा : मुझे भी बहोत मज़ा आया शिव. तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न मेरे साथ ये सब करने में?
शिव : सच कहु तो मेने कभी सोचा नहीं था की ऐसा भी करते है, और आप कितनी खूबसूरत और अच्छी दिखती है फिर भी...
स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Achchhi हु तो क्या अब बुरी हो गयी? लड़की चाहे कितनी भी अच्छी हो या सीधी हो, हर कोई ये करती है, यही कुदरत है. अगर लड़की हो कर ये सब न करे या लड़का हो कर ये सब न करे तो प्रॉब्लम है.
थोड़ी देर दोनों ऐसे hi एक दूसरे के साथ बाटे करने लगे. पर स्नेहा ने महसूस किआ की शिव का लुंड फिर से उसकी छूट में अपना आकर बढ़ने लगा और कड़क भी होने लगा था. उसने शरत से शिव को देखा और पूछा
स्नेहा मैडम: (मुस्कुराते हुए) क्या फिर से मन कर रहा है? (मैंने मुस्कुराते हुए है kaha)Thodi देर रुको में बाथरूम हो आती hu.(Wo कड़ी हुई और चद्दर लपेट कर बाथरूम की और जाने लगी, वो थोड़ी लंगड़ा रही थी और कभी कभी उनके मुँह से कराहने की आवाज भी आ रही thi.(Jab सबीहा बाथरूम में मूतने बैठी तो उसको अपनी छूट में दर्द महसूस हुआ, उसने झुक कर देखा तो उसकी छूट से मूत के साथ साथ बहोत सारा सफ़ेद फिर्या निकल रहा था. वो ये देख कर और ज्यादा उत्तेजित होने लगी. आज पहलीबार उसने देखा था इतना ढेर सारा वीर्य. थोड़ी देर में वो बाथरूम से आ गयी, (में भी बाथरूम चला गया)
स्नेहा मैडम
पवन को फ़ोन lagaya)Hello.
पवनसीर : Hello स्नेहा, क्या हुआ? सब ठीक तो है न? क्या शिव मन.?
स्नेहा मैडम : आप समझने की कोशिस कीजिये, उसने कभी सेक्स किआ नहीं है और मुझे भी कितनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है उसके साथ ऐसी बात करने में, में धीरे धीरे उसे समजा रही hu.(Aaj पहली बार स्नेहा अपने पति से जूथ बोल रही थी) मुझे लगता है अभी टाइम लगे गए. वो आज गयम न आये तो चलेगा.
पवनसीर : कोई बात नहीं, तुम्हे जैसे ठीक लगे वैसे आगे बढ़ना, सॉरी यार मेने तुम्हे इन सब में धकेला, अगर तुम्हारा मान न मने तो रहने देना.
स्नेहा मैडम : ये सुब हम हमारे बच्चे के लिए hi तो कर रहे है, आप फ़िक्र न करे में सब मैनेज कर लुंगी, अच्छा अब रखती हु.
स्नेहा मान में सोचने लगी की क्यों वो पवन से झूठ बोली, क्यों वो शिव के साथ और वक़्त बिताना चाहती है, उसने तो अपना काम कर दिया है फिर भी क्यों वो उसे जाने नहीं देना चाहती. वो इन सब खयालो में खोयी हुई थी की शिव बाथरूम से आया. आहात सुन कर उसने शिव की और देखा वो बिलकुल नंगा hi था. उसका लुंड लटक रहा tha.(Unke ऐसा देखने से मुझे थोड़ी शर्म आने लगी, उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने बाजु में लेता दिया, एक हाथ से मेरा लुंड पकड़ कर वो मुझे किश करने लगी, लुंड को सहलाने से लुंड अकड़ने लगा. फिर दोनों की काम क्रीड़ा सुरु हो गयी.
(और दो बार उनकी चुदाई चली थी.) चौथी बार मैडम के साथ करने के बाद में बाथरूम चला गया, जब वापस आया तो मेने देखा की स्नेहा मैडम कड़ी हो रही है पर उनसे खड़ा हुआ नहीं जा रहा है तो मेने स्नेहा मैडम को अपनी बहो में उठा लिया. स्नेहा मैडम ने अपनी बहे मेरे गले में लपेटे हुए मुझे बड़े प्यार से देखने लगी. रास्तेमे उन्होंने मेरे होठो को भी चूमा. फिर मेने उन्हें बाथरूम में खड़ा किआ और बहार आ गया. बहार आ कर अभी जो हुआ उसके बारेमे सोचने लगा. अभी भी मुझे ये सपने जैसा लग रहा था. क्या सच में मैंने मैडम के साथ ये सब किआ था? उन्होंने मुझे आवाज दी तो में अंदर गया, वो शर्मा रही थी, में उन्हें बहार ले आया और उनको बिस्तर पर लेता दिया. मेने कपडे पहन लिए. स्नेहा मैडम ने मुझे अलमारी से 5000 निकल ने को कहा, मेने निकल कर उन्हें दिए.
स्नेहा : (शिव का हाथ पकड़ kar)Shiv में ये पैसे इस लिए नहीं दे रही की तुमने मेरे साथ ये सब किआ. पर ये तुम्हे जरुरत है इस लिए दे रही हु. अगर तुम्हे इस वक़्त जरुरत न होती तो में ये पैसे तुम्हे नहीं देती. हमारी बात भले hi पैसो की len-den से सुरु हुई थी, सायद मुझे और कोई रास्ता नहीं सूज रहा था पर मेरा यकीं मनो हमारे इस रिश्ते का और इस पैसो का कोई लेनादेना नहीं है, तुम समाज रहे हो न मेरी बात.
शिव : जी मैडम.
स्नेहा मैडम : और दूसरी बात आगे जब भी जरुरत हो तो मुझसे मांग लेना. जरा सा भी झिझकना नहीं. समाज गए. तुम थोड़ी देर बैठो में कपडे चेंज कर लेती हु फिर तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ देती हु.
शिव : (मुझे पता था की उनको दर्द है to)Aap रहने दीजिये में चला जाऊंगा.
स्नेहा : नहीं शिव, में तुम्हे छोड़ने आ रही हु.
शिव : नहीं मैडम आप को दर्द हो रहा है, आप रहने दीजिये में चला जाऊंगा, आप आराम कीजिये.
स्नेहा : (मुस्कुराते हुए मुझे अपने पास बुलाया और मेरे गले लग gayi)Itna भी दर्द नहीं है. तुम चिंता मत करो.
शिव : फिर भी आप नहीं आएँगी, प्लीज आप आराम कीजिये, में चला जाऊंगा.
स्नेहा मैडम : ठीक है, ध्यान से जाना.
में उन्हें bye बोल कर वह से निकल गया. में रस्ते में वही सब सोचते हुई hi चल रहा था. आज मैंने जाना था किसी लड़की के साथ, लड़के के कैसे सम्बन्ध होते है. दिखने में वो कितनी प्यारी और सीधी थी पर फिर भी वो ये सब कर रही थी. कैसे वो मेरे साथ पूरी नंगी थी. शायद लड़कीओ को भी मज़ा आता होगा, जैसे मुझे मज़ा आया था वो सब कर के. में यही सोचते हुए चल रहा था की मुझे बिना मैडम दिख गयी. उनके हाथ में सामान था जिसे उठाकर वो चल रही थी. मैं उनके पास चला गया........
अनाथालय में कुछ और hi माहौल था. यहाँ एक डॉक्टर की टीम आयी हुई थी. वो अपना सामान मैनेजर की ऑफिस में रख रहे थे. बहार एक बड़ी सी एम्बुलेंस जैसी वैन कड़ी थी.
रंजन : ये किसलिए आये है didi.(Usne लतादिदी से पूछा)
लतादिदी : पता नहीं, (सरिता ko)Tuje पता है?
सरिता : नहीं, मुझे भी पता नहीं है, में पूछती हु. (वो मैनेजर के पास जाती है) ये किसलिए आये है?
मैनेजर : (तीखी आवाज में) क्यों भूल गयी, पहले भी ये लोग आते थे न, ये तुमलोगो के हेल्थ check-up के लिए आये है.
सरिता : पर यहाँ तो कोई बीमार नहीं फिर क्यों?
मैनेजर : ज्यादा जबान मात चला, तुजे कहा न ये check-up के लिए आये है. ये सब का चेक उप करेंगे., और कुछ नहीं. जाओ सब को बोल दो, तैयार रहे.
सरिता : (डरते hue)Ha सबको, बच्चे और बड़े सब?
मैनेजर : है सब. जैसे जैसे डॉक्टर बुलाये, बरी बाटी सब मेरी ऑफिस में आ जाना.
सरिता ने सब को बता दिया. पहले भी ऐसा हुआ था, पर उस बात को काफी टाइम हो गया था. सब लड़कीअ दर रही थी और जो बच्चे थोड़े समझदार थे वो भी दर कर अपने कमरेमे दुबक गए थे. सब सामान सेट करने के बाद डॉक्टर ने बुलाया तो कोई जाने को तैयार नहीं था. मैनेजर गुस्से में बहार आया.
मैनेजर : एक बार सब को बोलै समाज नहीं आता, चलो अंदर, पहले तू आ लता. तू बड़ी है और सब तेरी बात मानते भी है.
लता : Ji...(Wo भी अंदर से दरी हुई थी पर कर भी क्या सकती थी, वो डरते डरते अंदर गयी)
डस्टर ने उसकी ब्याह पर एक पत्ता बंधा और उसका ब्लड परेसुरे चेक किआ. फिर उसकी जबान, उसका तापमान. फिर उसकी ब्याह पर एक पट्टी कसके बंधी और इंजेक्शन ले कर एक आदमी आया. जिसे देख लता दर गयी.
मैनेजर : कुछ नहीं होगा, ये थोड़ा सा खून लेगा, और कुछ नहीं.
लता बहोत दर रही थी, उसने अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया, उस आदमी ने सुई घुसाई तो थोड़ा सा चुभा पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ. फिर बरी बरी सब के साथ यही किआ गया.
मैनेजर : वो कामचोर कहा है, दिखाई नहीं दे रहा.
लता : वो अभी स्कूल से आया नहीं.
मैनेजर : इतना टाइम हो गया फिर भी अभी आया नहीं, आवारा कही का, जैसे hi आता है उसे पहले अंदर भेजना.
मैनेजर : डॉक्टर से, वैसे तो सब हो गया है, सिर्फ एक लड़का नहीं आया है.
डॉक्टर : अभी थोड़ी देर है हम यहाँ, अगर आ जाता है तो ठीक है. में ये सब सैंपल की रिपोर्ट सर को दे दूंगा.
मैनेजर : (धीमी आवाज me)Waise किस के लिए ये जाँच कर रहे हो.
डॉक्टर : वो में नहीं बता सकता, तुम अपने काम से काम रक्खो, अगर किसी का सैंपल मैच हो जाता है तो फिर तुम्हे फ़ोन करेंगे.
मैनेजर : (मान me)Pata नहीं इस बार किसकी बलि चढ़ेगी, मुझे क्या मुझे तो पैसो से मतलब है. एक तो वैसे भी अब यहाँ लड़कीअ बची नहीं है, वो साला भी कहा रह गया, अगर इस बार उसका नंबर लग जाये तो मज़ा आ जाये. लड़कीओ में तो सिर्फ चार hi बची है और अभी तक मेने किसी की सील भी नहीं तोड़ी. मुझे जल्दी करनी होगी.
इन सब से बेखबर में स्नेहा मैडम के साथ था. स्नेहा मैडम ने मुझे अपने पैरो से ऐसे जकड़ा था की में हिल भी नहीं प् रहा था तो मैंने चेहरा ऊपर उठाते हुए स्नेहा मैडम को देखा तो में चौंक गया. उनकी आँखों से आंसू बेहराहे थे. और उनके चेहरे पर दर्द की लकीरे साफ देखि जा शक्ति थी. में दर गया और उठने लगा.
स्नेहा
शिव : (थोड़े चिंतित स्वर में) Madam?.....Durd हो रहा है?
स्नेहा : (मुस्कुराते हुए )है थोड़ा थोड़ा.
शिव : सॉरी मैडम, मुझे पता नहीं था ऐसा होगा.
स्नेहा : (उसके गाल से अपने गाल रगड़ते हुए ) मुझे भी पता नहीं था ऐसा होगा, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं हुआ है. होता है ऐसा. मुझे ताज्जुब इस लिए है की मेरे साथ ऐसा hua.(Shiv को कुछ समाज नहीं आया तो में थोड़ा ऊपर हुआ और सवालिया नजरो से उनको देखने लगा),( स्नेहा मुस्कुराते hue)Are पागल जब लड़की पहलीबार ऐसा करती है तो उसे दर्द होता है. पर मुझे हुआ इस लिए मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ. पर तुम्हारा वो इतना बड़ा है तो ताज्जुब की कोई बात नहीं, पर ऐसा होगा ये मैंने नहीं सोचा था.
शिव : अगर आप को दर्द हो रहा है तो मुझे निकल लेने दीजिये.
स्नेहा : (उसका गाल सहलाते hue)Pagal ये होगा तभी तो में माँ बनूँगी. तू चिंता मत कर अभी ठीक हो जायेगा. अच्छा ये तो बता तुजे कैसा लगा ये सब? क्या तुजे मज़ा aya?(Maine शरमाते हुए है में गर्दन हिलता hai)To शर्माता क्यों hai.(Fir उसकी और प्यार से देखते हुए) क्या तुजे में अच्छी lagi?(Maine फिर है में गर्दन hilayi)Aise नहीं, बोल न, में तुजे कैसी लगी?
शिव : है मैडम आप बहोत खूबसूरत और प्यारी है. मेने सोचा नहीं था की आप ऐसा भी करती होगी.
स्नेहा : (वो मुस्कुरायी) क्या तुजे, मुझे छूने का, चूमने का मान कर रहा है? (मैंने फिर शर्माके है में सर हिलाया ,
स्नेहा मैडम
शिव : जी ...जी मैडम.
स्नेहा मैडम: (पता नहीं पर आज स्नेहा को उसके साथ ऐसी बाते करने में बहोत मज़ा आ रहा था, वो बहोत खुस थी, वो अपने इस नवयुवक साथी के साथ खुल कर मज़ा लेना चाहती थी, शिव का हाथ पकड़ कर वो अपनी छाती पे रख देती hai)Isse दबाओ शिव, जो मर्जी हो करो इसके साथ, मुझे भी बड़ा मज़ा आता है जब तुम इसके साथ ऐसा कुछ करते हो.
वो खुद मेरे एक हाथ को अपनी एक चुकी पे रख कर उसे दबाने के लिए बोल रही थी. ब्रा में कैद उस नरम गोले को दाबाँदे में मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, में भी एक हाथ से एक चुकी दबाते हुए दूसरी को मुहमे लेकर चूसने लगा. इन बड़े बड़े नरम गुब्बारों से खेलना और उसके ऊपर कड़क डेन को चूसना मुझे बहोत पसंद आ रहा था. (स्नेहा ने अपनी ब्रा को निचे खिसका दिया जिस से उसका निप्पल बहार आ गया, निप्पल को देख शिव उस पर टूट पड़ा, वो उसे जोर जोर से चाटने लगा, स्नेहा को थोड़ा दर्द हुआ पर उसने शिव को रोका नहीं, स्नहे महसूस कर रही थी की थोड़ी देर पहले लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर अकड़ने लगा. उसकी छूट में एकबार फिर पानी बहाने लगी. वो अब मचलने लगी थी. वो खुद अपनी कमर हिलने लगी, जिस से लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगता है. उसके पति ने कभी उसे दूसरी बार नहीं छोड़ा था)
स्नेहा मैडम : एक मिनट Shiv(Me रुक गया और उन्हें देखने लगा, उन्होंने अपने सरे कपडे निकल दिए, वो पूरी तरह से नंगी हो गयी, में उन्हें देखता hi रह गया, उनके चुके बहोत बड़े लग रहे थे, गहरे रंग का एक बड़ा सा गोल आकर बना हुआ था और बिच में चूचक पूरी तरह से खड़ा था, उन्हें देख कर मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गयी, मेने कास के दोनों चुचो को पकड़ लिया और मसल diya)Shhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धीरीईईए (में झुक कर एक चूचक को मुँह में लिया और उसे जोरो से चूसने लगा, बरी बरी दोनों चूचिया मसलते हुए में चुचकों को चूस रहा tha)Dhireeeee बाबू शहहहहह में कही भागी नहीं जा रही shhhhhhhhhhh(Me इतना उत्तेजित हो गया था की में सुन hi नहीं रहा था, मेने अपनी कमर का जोर से धक्का diya)Mumiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhh में यही हु बाबू धीरीईई शह्ह्हह्ह्ह्ह में कही नहीं जा रहीइइइइइइइइ शहहहहह aiiiiiiiiiii धीरीईई बाबूउऊउउउ.

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वो ऐसे मुझे छोड़ रहा था की में पूरी हिल रही थी, में बिस्टेर में गढ़ी जा रही थी. जिंदगी में पहली बार उसे छूट का मज़ा मिल रहा था, उसका उत्साह में समाज सकती थी, और सच कहु तो मुझे भी ऐसे मज़ा आ रहा था. ऐसी चुदाई तो मेरी कभी नहीं हुई थी. में उस बड़े लुंड के धक्को से पागल हो रही थी. उसका लुंड मेरी छूट में घमासान मचाये हुए था, में ज्यादा देर टिक न पायी और झड़ने लगी.

स्नेहा मैडम : ोोोू मायआ शीइइइइइइइ में गईइइइइइइइ अह्ह्ह्हह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह रुको अह्ह्ह्हह्हह रुको शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में रुक गया, और उन्हें देखने लगा, वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी, जूते गुस्से se)Pagal हो गए हो क्या, इतना तेज कोई करता है भला. में तुम्हारी तरह मजबूत नहीं हु, नाजुक सी लड़की हु, बहार निकालो इससे.
शिव : (मुझे और करना था, मुझे लगा मेने गलती कर di)Sorry मैडम, में धीरे से करूँगा.
स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मन नहीं कर रही हु, अभी थोड़ी देर रुको, मुझे तुम्हारा देखना है( मेने मुस्कुराते हुए अपना लुंड बहार निकल लिया, पक्क्क की आवाज के साथ लुंड बहार निकल aaya)Ahhhhhhhhh, (स्नेहा बेथ कर अपनी छूट देखने लगी, ढेर सारा वीर्य उसकी छूट से निकल कर बिस्तर पर गिरने लगा, उसने देखा की वो थोड़ा लाल भी था, वो समाज गयी की उसकी छूट अंदर से फटी है. उसे कोई परवाह नहीं थी, उसने अपनी साड़ी से लुंड को साफ किआ और उस अजूबे को पकड़ कर देखने लगी.

उस बड़े से दैत्याकार लुंड को देख वो मोहित होने लगी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा लुंड वो अपनी छूट में ले चुकी है. वो उसे चूमने और चाटने लगी.

में देख रहा था कैसे मैडम मेरे लुंड को चाट रही है, जब मेने उन्हें पहली बार देखा था तब अगर मुझे कोई कहता की मैडम ऐसा कर रही थी तो में यकीं hi न करता. वो कितनी खूबसूरत थी और दिखने में कितनी शालीन और सभ्य दिखती है. प्यारी सूरत के साथ उनकी आवाज भी कितनी मीठी है, में एक नए अनुभव को सिख रहा था. में अपने घुटनो पर खड़ा था और वो मेरे लुंड को चाट रही थी. में देख रहा था की वो ऐसे चाट रही है जैसे छोटा बच्चा कुल्फी को चाट ता है. (स्नेहा जैसे जैसे लुंड को चाट रही थी वैसे वैसे वो और उत्तेजित हो रही थी, लुंड से निकलनेवाली वो गंध उसके नथुनों में भर रही थी, शिव के वीर्य और उसकी छूट की मिली जुली गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी, उसकी छूट से अभी भी शिव का वीर्य टपक रहा था, उसने लुंड के सुपडे को अपने मुँह में भर लिया, उसका पूरा मुँह भर गया था, उसके होठ लुंड के इर्द गिर्द लिपट गए the)(Madam ने मेरा लुंड मुँह में भर लिया था, उनके मुँह की गर्माहार में अपने लुंड पर महसूस कर रहा था, वो ऐसे झुकी थी की उनके बड़े कूल्हे बहार उभर आये थे, मेने झुक कर उन्हें पकड़ा और दबा कर महसूस करने लगा. वो मखमली गद्देदार कूल्हे दबाने में मुझे बहोत मज़ा आने लगा.

मेरे हाथ काफी लम्बे थे तो में अपनी ऊँगली से पूरी दरार को सहलाने लगा, जैसे hi मुझे छूट का छेड़ मिला मेने अपनी ऊँगली अंदर दाल दी. छूट पूरी चिप छिपी थी, उस गरम जगह में मेने अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगा.
(स्नेहा अपनी छूट में अंदर बहार हो रही ऊँगली से और उत्तेजित होने लगी, उसे ऐसा लग रहा था की उसकी छूट में लुंड है, वो और जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, उसने सोचा नहीं था की एक hi दिन में इतना सब हो जायेगा. कहा वो ये सोचे बैठी थी की एक hi बर्टो करना है, और अभी उसका दिल hi नहीं मान रहा था. इतनी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी, या यु कहे की काफी सालो से वो इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी, शादी के शुरुआती दिनों में वो जरूर उत्तेजित हो जाती थी, पर धीरे धीरे वो सब काम हो गया था. में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी तो में सीधी लेट गयी, वो भी बेसबारा हो रहा था जैसे hi में लेती वो अपनी पोसिटिव लेने लगा, मेने अपनी एक तंग उठा कर उसे जगह दी तो उसने अपना लुंड पूरा अंदर दाल दिया. वो जल्दी जल्दी मुझे छोड़ने लगा. वो मेरे पेअर को पकड़ कर उसे चाटने लगा तो मुझे गुदगुदी होने लगी.

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स्नेहा मैडम : आआह्ह्ह्ह शीइइइइइइइव क्या कर रहे हो, शहहह गुदगुदी हो रही है, (उसका लुंड जिस रफ़्तार से अंदर बहार हो रहा था, मेरी हड्डिया तक आवाज करने लगी थी,) ओह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह तुम मुझे शहहहहह आआ पागल कर डोज अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.
शिव : (ये कैसा मज़ा था, मेरा लुंड उस छोटी सी सुरंग में अंदर बहार होने से मुझे एक अजीब तरह का आनंद मिल रहा था. मेने सोचा नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आता हो गए. मैडम के नरम नरम होठ, चूसने में भी मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, मेरी कमर तो अपने आप hi हिल रही थी, छूट की अंदर की मॉस पेशिया मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, में पशीने से भीग गया था, मैडम का भी यही हल था, मेरे चेहरे से पसीना टपक कर उनके शरीर पर गिर रहा था.)

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स्नेहा मैडम : (इतने तेज धक्के में पहली बार झेल रही थी. उसकी ताकत देख मुझे ताज्जुब हो रहा था, यहाँ मेरी छूट की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो रही थी पर दिल मान नहीं रहा था, शरीर में ऐसी ऐसी तरंगे उठ रही थी, मेरा रोम रोम खड़ा हो रहा था, वो मेरे शरीर पर पूरा छाया हुआ था, और धक्को की बरसात हो रही थी)

मेने उसके होठो पर टूट पड़ी, दोनों के मुख से निकल रहा रास पुरे चेहरे को भिगोने लगा था, वो मेरे स्तनों की चाट ता मेरी गर्दन चाट ता, पर उसके धक्के लगातार चल रहे थे. ये मेरा पहला अनुभव था की में इतनी देर से चुद रही थी. पिछले आधे घंटे से वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, वो जरा भी नहीं थका था, उसका स्टेमिना देख मुझे हैरानी हो रही थी. मुझे उस पर इतना प्यार आ रहा था की में लगातार उसके होठो को चूस रही थी.

आखिर कर वो वक़्त भी नजदीक आ गया, में जान गयी की वो झड़ने वाला है, उसकी रफ़्तार इतनी तेज थी की मेरी हालत पतली हो रही थी,

स्नेहा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आराम से ाः धीरे शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे अह्हह्ह्ह्ह shhhhhh(Akhir कर जोर से झटके लगते हुए वो अपना वीर्य मेरे अंदर भरने लगा और में भी झड़ने लगी, मेने उसे अपने गले से लगा लिया,

वो और में दोनों जोर जोर से सांसे ले रहे थे, पुरे कमरे में सिर्फ सांसो का शोर था. मेरी छूट पूरी वीर्य से भर गयी थी, में महसूस कर रही थी की वीर्य निकल कर मेरी गांड की दरार से बह रहा था, उसके लुंड की पल्स में अपनी छूट में महसूस कर रही थी. मेरी छूट लुंड को कास के निचोड़ रही थी, मुझे छोड़ने की पूरी ख़ुशी उसने दी थी, में पूरी तरह से उस पर मर मिटी thi.Usne थोड़ा ऊपर उठ के मेरी और देखा तो मेने अपनी नाक उसकी नाक से सत्ता दी.

में पूरी तरह संतुस्ट थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने दुनियाकी सबसे बड़ी खुसी प् ली हो. में उसकी पीठ सहलाते हुए उसके इस अद्भुत कारनामे का इनाम दे रही थी. में उस से बेल की तरह लिपट गयी थी.
वह गयम में पवन बेचैन था. अच्छा सरीर था उसके पास पर जो एक मर्द को मर्द बनता है वो hi नहीं था. वो चुदाई तो अच्छी कर लेता था, स्नेहा भी खुस थी उस से पर आज उसे अपनी प्यारी और खूबसूरत बीवी को किसी और की बहो में देना पड़ा था. वो सोच सोच के पागल हो रहा था की वह क्या हो रहा होगा. क्या शिव मन होगा. कैसे स्नेहा बात करेगी. उसने जान बुज कर शिव को चुना था क्यों की वो एक नादाँ लड़का था, वो इस चुदाई के खेल को नहीं जनता था तो वो उसके लिए कोई खतरा नहीं था. वो स्नेहा को भी जनता था, वो एक संस्कारी और अच्छी लड़की थी. वो सोच रहा था की फ़ोन कर के स्नेहा से बात करे की नहीं.
शिव और स्नेहा , जब दोनों शांत हो गए तो शिव अलग होने के लिए उठने लगा तो स्नेहा ने फिर उसे पकड़ते हुए उठने नहीं दिया.
स्नेहा : अभी ऐसे hi रहो शिव, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.
शिव : पर मैडम मुझे गयम भी जाना है.
स्नेहा : तुम उसकी चिंता मत करो में फ़ोन कर दूंगी अभी.
शिव : आप क्या कहेगी? और ये सब पवनसीर को पता चल गया तो?
स्नेहा : (उसका गाल सहलाते हुए) तुम इन सबकी चिंता मत करो, में हु न. वो सब छोडो ये बताओ तुम्हे कैसा लगा ये सब.
शिव : (शरमाते और मुस्कुराते hue)Bahot मज़ा आया मैडम, और आप को?
स्नेहा : मुझे भी बहोत मज़ा आया शिव. तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न मेरे साथ ये सब करने में?
शिव : सच कहु तो मेने कभी सोचा नहीं था की ऐसा भी करते है, और आप कितनी खूबसूरत और अच्छी दिखती है फिर भी...
स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Achchhi हु तो क्या अब बुरी हो गयी? लड़की चाहे कितनी भी अच्छी हो या सीधी हो, हर कोई ये करती है, यही कुदरत है. अगर लड़की हो कर ये सब न करे या लड़का हो कर ये सब न करे तो प्रॉब्लम है.
थोड़ी देर दोनों ऐसे hi एक दूसरे के साथ बाटे करने लगे. पर स्नेहा ने महसूस किआ की शिव का लुंड फिर से उसकी छूट में अपना आकर बढ़ने लगा और कड़क भी होने लगा था. उसने शरत से शिव को देखा और पूछा
स्नेहा मैडम: (मुस्कुराते हुए) क्या फिर से मन कर रहा है? (मैंने मुस्कुराते हुए है kaha)Thodi देर रुको में बाथरूम हो आती hu.(Wo कड़ी हुई और चद्दर लपेट कर बाथरूम की और जाने लगी, वो थोड़ी लंगड़ा रही थी और कभी कभी उनके मुँह से कराहने की आवाज भी आ रही thi.(Jab सबीहा बाथरूम में मूतने बैठी तो उसको अपनी छूट में दर्द महसूस हुआ, उसने झुक कर देखा तो उसकी छूट से मूत के साथ साथ बहोत सारा सफ़ेद फिर्या निकल रहा था. वो ये देख कर और ज्यादा उत्तेजित होने लगी. आज पहलीबार उसने देखा था इतना ढेर सारा वीर्य. थोड़ी देर में वो बाथरूम से आ गयी, (में भी बाथरूम चला गया)
स्नेहा मैडम
पवनसीर : Hello स्नेहा, क्या हुआ? सब ठीक तो है न? क्या शिव मन.
स्नेहा मैडम : आप समझने की कोशिस कीजिये, उसने कभी सेक्स किआ नहीं है और मुझे भी कितनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है उसके साथ ऐसी बात करने में, में धीरे धीरे उसे समजा रही hu.(Aaj पहली बार स्नेहा अपने पति से जूथ बोल रही थी) मुझे लगता है अभी टाइम लगे गए. वो आज गयम न आये तो चलेगा.
पवनसीर : कोई बात नहीं, तुम्हे जैसे ठीक लगे वैसे आगे बढ़ना, सॉरी यार मेने तुम्हे इन सब में धकेला, अगर तुम्हारा मान न मने तो रहने देना.
स्नेहा मैडम : ये सुब हम हमारे बच्चे के लिए hi तो कर रहे है, आप फ़िक्र न करे में सब मैनेज कर लुंगी, अच्छा अब रखती हु.
स्नेहा मान में सोचने लगी की क्यों वो पवन से झूठ बोली, क्यों वो शिव के साथ और वक़्त बिताना चाहती है, उसने तो अपना काम कर दिया है फिर भी क्यों वो उसे जाने नहीं देना चाहती. वो इन सब खयालो में खोयी हुई थी की शिव बाथरूम से आया. आहात सुन कर उसने शिव की और देखा वो बिलकुल नंगा hi था. उसका लुंड लटक रहा tha.(Unke ऐसा देखने से मुझे थोड़ी शर्म आने लगी, उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने बाजु में लेता दिया, एक हाथ से मेरा लुंड पकड़ कर वो मुझे किश करने लगी, लुंड को सहलाने से लुंड अकड़ने लगा. फिर दोनों की काम क्रीड़ा सुरु हो गयी.
(और दो बार उनकी चुदाई चली थी.) चौथी बार मैडम के साथ करने के बाद में बाथरूम चला गया, जब वापस आया तो मेने देखा की स्नेहा मैडम कड़ी हो रही है पर उनसे खड़ा हुआ नहीं जा रहा है तो मेने स्नेहा मैडम को अपनी बहो में उठा लिया. स्नेहा मैडम ने अपनी बहे मेरे गले में लपेटे हुए मुझे बड़े प्यार से देखने लगी. रास्तेमे उन्होंने मेरे होठो को भी चूमा. फिर मेने उन्हें बाथरूम में खड़ा किआ और बहार आ गया. बहार आ कर अभी जो हुआ उसके बारेमे सोचने लगा. अभी भी मुझे ये सपने जैसा लग रहा था. क्या सच में मैंने मैडम के साथ ये सब किआ था? उन्होंने मुझे आवाज दी तो में अंदर गया, वो शर्मा रही थी, में उन्हें बहार ले आया और उनको बिस्तर पर लेता दिया. मेने कपडे पहन लिए. स्नेहा मैडम ने मुझे अलमारी से 5000 निकल ने को कहा, मेने निकल कर उन्हें दिए.
स्नेहा : (शिव का हाथ पकड़ kar)Shiv में ये पैसे इस लिए नहीं दे रही की तुमने मेरे साथ ये सब किआ. पर ये तुम्हे जरुरत है इस लिए दे रही हु. अगर तुम्हे इस वक़्त जरुरत न होती तो में ये पैसे तुम्हे नहीं देती. हमारी बात भले hi पैसो की len-den से सुरु हुई थी, सायद मुझे और कोई रास्ता नहीं सूज रहा था पर मेरा यकीं मनो हमारे इस रिश्ते का और इस पैसो का कोई लेनादेना नहीं है, तुम समाज रहे हो न मेरी बात.
शिव : जी मैडम.
स्नेहा मैडम : और दूसरी बात आगे जब भी जरुरत हो तो मुझसे मांग लेना. जरा सा भी झिझकना नहीं. समाज गए. तुम थोड़ी देर बैठो में कपडे चेंज कर लेती हु फिर तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ देती हु.
शिव : (मुझे पता था की उनको दर्द है to)Aap रहने दीजिये में चला जाऊंगा.
स्नेहा : नहीं शिव, में तुम्हे छोड़ने आ रही हु.
शिव : नहीं मैडम आप को दर्द हो रहा है, आप रहने दीजिये में चला जाऊंगा, आप आराम कीजिये.
स्नेहा : (मुस्कुराते हुए मुझे अपने पास बुलाया और मेरे गले लग gayi)Itna भी दर्द नहीं है. तुम चिंता मत करो.
शिव : फिर भी आप नहीं आएँगी, प्लीज आप आराम कीजिये, में चला जाऊंगा.
स्नेहा मैडम : ठीक है, ध्यान से जाना.
में उन्हें bye बोल कर वह से निकल गया. में रस्ते में वही सब सोचते हुई hi चल रहा था. आज मैंने जाना था किसी लड़की के साथ, लड़के के कैसे सम्बन्ध होते है. दिखने में वो कितनी प्यारी और सीधी थी पर फिर भी वो ये सब कर रही थी. कैसे वो मेरे साथ पूरी नंगी थी. शायद लड़कीओ को भी मज़ा आता होगा, जैसे मुझे मज़ा आया था वो सब कर के. में यही सोचते हुए चल रहा था की मुझे बिना मैडम दिख गयी. उनके हाथ में सामान था जिसे उठाकर वो चल रही थी. मैं उनके पास चला गया........


