Adultery Kundali Bhagya - Page 5 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 18

अनाथालय में कुछ और hi माहौल था. यहाँ एक डॉक्टर की टीम आयी हुई थी. वो अपना सामान मैनेजर की ऑफिस में रख रहे थे. बहार एक बड़ी सी एम्बुलेंस जैसी वैन कड़ी थी.

रंजन : ये किसलिए आये है didi.(Usne लतादिदी से पूछा)

लतादिदी : पता नहीं, (सरिता ko)Tuje पता है?

सरिता : नहीं, मुझे भी पता नहीं है, में पूछती हु. (वो मैनेजर के पास जाती है) ये किसलिए आये है?

मैनेजर : (तीखी आवाज में) क्यों भूल गयी, पहले भी ये लोग आते थे न, ये तुमलोगो के हेल्थ check-up के लिए आये है.

सरिता : पर यहाँ तो कोई बीमार नहीं फिर क्यों?

मैनेजर : ज्यादा जबान मात चला, तुजे कहा न ये check-up के लिए आये है. ये सब का चेक उप करेंगे., और कुछ नहीं. जाओ सब को बोल दो, तैयार रहे.

सरिता : (डरते hue)Ha सबको, बच्चे और बड़े सब?

मैनेजर : है सब. जैसे जैसे डॉक्टर बुलाये, बरी बाटी सब मेरी ऑफिस में आ जाना.

सरिता ने सब को बता दिया. पहले भी ऐसा हुआ था, पर उस बात को काफी टाइम हो गया था. सब लड़कीअ दर रही थी और जो बच्चे थोड़े समझदार थे वो भी दर कर अपने कमरेमे दुबक गए थे. सब सामान सेट करने के बाद डॉक्टर ने बुलाया तो कोई जाने को तैयार नहीं था. मैनेजर गुस्से में बहार आया.

मैनेजर : एक बार सब को बोलै समाज नहीं आता, चलो अंदर, पहले तू आ लता. तू बड़ी है और सब तेरी बात मानते भी है.

लता : Ji...(Wo भी अंदर से दरी हुई थी पर कर भी क्या सकती थी, वो डरते डरते अंदर गयी)

डस्टर ने उसकी ब्याह पर एक पत्ता बंधा और उसका ब्लड परेसुरे चेक किआ. फिर उसकी जबान, उसका तापमान. फिर उसकी ब्याह पर एक पट्टी कसके बंधी और इंजेक्शन ले कर एक आदमी आया. जिसे देख लता दर गयी.

मैनेजर : कुछ नहीं होगा, ये थोड़ा सा खून लेगा, और कुछ नहीं.

लता बहोत दर रही थी, उसने अपना चेहरा दूसरी और घुमा लिया, उस आदमी ने सुई घुसाई तो थोड़ा सा चुभा पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ. फिर बरी बरी सब के साथ यही किआ गया.

मैनेजर : वो कामचोर कहा है, दिखाई नहीं दे रहा.

लता : वो अभी स्कूल से आया नहीं.

मैनेजर : इतना टाइम हो गया फिर भी अभी आया नहीं, आवारा कही का, जैसे hi आता है उसे पहले अंदर भेजना.

मैनेजर : डॉक्टर से, वैसे तो सब हो गया है, सिर्फ एक लड़का नहीं आया है.

डॉक्टर : अभी थोड़ी देर है हम यहाँ, अगर आ जाता है तो ठीक है. में ये सब सैंपल की रिपोर्ट सर को दे दूंगा.

मैनेजर : (धीमी आवाज me)Waise किस के लिए ये जाँच कर रहे हो.

डॉक्टर : वो में नहीं बता सकता, तुम अपने काम से काम रक्खो, अगर किसी का सैंपल मैच हो जाता है तो फिर तुम्हे फ़ोन करेंगे.

मैनेजर : (मान me)Pata नहीं इस बार किसकी बलि चढ़ेगी, मुझे क्या मुझे तो पैसो से मतलब है. एक तो वैसे भी अब यहाँ लड़कीअ बची नहीं है, वो साला भी कहा रह गया, अगर इस बार उसका नंबर लग जाये तो मज़ा आ जाये. लड़कीओ में तो सिर्फ चार hi बची है और अभी तक मेने किसी की सील भी नहीं तोड़ी. मुझे जल्दी करनी होगी.

इन सब से बेखबर में स्नेहा मैडम के साथ था. स्नेहा मैडम ने मुझे अपने पैरो से ऐसे जकड़ा था की में हिल भी नहीं प् रहा था तो मैंने चेहरा ऊपर उठाते हुए स्नेहा मैडम को देखा तो में चौंक गया. उनकी आँखों से आंसू बेहराहे थे. और उनके चेहरे पर दर्द की लकीरे साफ देखि जा शक्ति थी. में दर गया और उठने लगा.

स्नेहा:( जब स्नेहा को ये एहसास हुआ की शिव उठ रहा है तो उसने अपनी आंखे खोली और साथ में शिव को अपने हाथो से जकड़ते हुए उठने से रोकने लगी. (मुझे कुछ समाज नहीं आया तो में रुक गया. में स्नेहा मैडम को hi देख रहा था.) (शिव की आँखों में देखते हुए भीगी आंखोसे वो मुस्कुरायी )अभी हिलना मूत ऐसे hi मेरे ऊपर लेते raho.(Wo शिव खींचती है और उसे वापस अपनी बहो में भर लेती है. वो चाहती थी की अंदर का वीर्य बहार न निकल जाये इस लिए वो शिव को लुंड निकलने से मन कर रही थी) (में ऐसे hi उनके ऊपर लेता रहा).

शिव : (थोड़े चिंतित स्वर में) Madam?.....Durd हो रहा है?

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए )है थोड़ा थोड़ा.

शिव : सॉरी मैडम, मुझे पता नहीं था ऐसा होगा.

स्नेहा : (उसके गाल से अपने गाल रगड़ते हुए ) मुझे भी पता नहीं था ऐसा होगा, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं हुआ है. होता है ऐसा. मुझे ताज्जुब इस लिए है की मेरे साथ ऐसा hua.(Shiv को कुछ समाज नहीं आया तो में थोड़ा ऊपर हुआ और सवालिया नजरो से उनको देखने लगा),( स्नेहा मुस्कुराते hue)Are पागल जब लड़की पहलीबार ऐसा करती है तो उसे दर्द होता है. पर मुझे हुआ इस लिए मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ. पर तुम्हारा वो इतना बड़ा है तो ताज्जुब की कोई बात नहीं, पर ऐसा होगा ये मैंने नहीं सोचा था.

शिव : अगर आप को दर्द हो रहा है तो मुझे निकल लेने दीजिये.

स्नेहा : (उसका गाल सहलाते hue)Pagal ये होगा तभी तो में माँ बनूँगी. तू चिंता मत कर अभी ठीक हो जायेगा. अच्छा ये तो बता तुजे कैसा लगा ये सब? क्या तुजे मज़ा aya?(Maine शरमाते हुए है में गर्दन हिलता hai)To शर्माता क्यों hai.(Fir उसकी और प्यार से देखते हुए) क्या तुजे में अच्छी lagi?(Maine फिर है में गर्दन hilayi)Aise नहीं, बोल न, में तुजे कैसी लगी?

शिव : है मैडम आप बहोत खूबसूरत और प्यारी है. मेने सोचा नहीं था की आप ऐसा भी करती होगी.

स्नेहा : (वो मुस्कुरायी) क्या तुजे, मुझे छूने का, चूमने का मान कर रहा है? (मैंने फिर शर्माके है में सर हिलाया ,

स्नेहा मैडम :(मुस्कुराते hue)Mene बोलै न बोल के बता. अच्छा ये बता, क्या छूने का मान कर रहा hai?(Meri नजर उनके चुचो की और चली गयी पर में बोलै कुछ nahi)Kya तुजे ये अच्छे लगते है? (मैंने सिर्फ मुस्कुराकर उन्हें देखा ) बता न क्या तुम्हे ये अच्छे लगते है, क्या इसे दबाना चाहते हो.

शिव : जी ...जी मैडम.

स्नेहा मैडम: (पता नहीं पर आज स्नेहा को उसके साथ ऐसी बाते करने में बहोत मज़ा आ रहा था, वो बहोत खुस थी, वो अपने इस नवयुवक साथी के साथ खुल कर मज़ा लेना चाहती थी, शिव का हाथ पकड़ कर वो अपनी छाती पे रख देती hai)Isse दबाओ शिव, जो मर्जी हो करो इसके साथ, मुझे भी बड़ा मज़ा आता है जब तुम इसके साथ ऐसा कुछ करते हो.

वो खुद मेरे एक हाथ को अपनी एक चुकी पे रख कर उसे दबाने के लिए बोल रही थी. ब्रा में कैद उस नरम गोले को दाबाँदे में मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, में भी एक हाथ से एक चुकी दबाते हुए दूसरी को मुहमे लेकर चूसने लगा. इन बड़े बड़े नरम गुब्बारों से खेलना और उसके ऊपर कड़क डेन को चूसना मुझे बहोत पसंद आ रहा था. (स्नेहा ने अपनी ब्रा को निचे खिसका दिया जिस से उसका निप्पल बहार आ गया, निप्पल को देख शिव उस पर टूट पड़ा, वो उसे जोर जोर से चाटने लगा, स्नेहा को थोड़ा दर्द हुआ पर उसने शिव को रोका नहीं, स्नहे महसूस कर रही थी की थोड़ी देर पहले लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर अकड़ने लगा. उसकी छूट में एकबार फिर पानी बहाने लगी. वो अब मचलने लगी थी. वो खुद अपनी कमर हिलने लगी, जिस से लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगता है. उसके पति ने कभी उसे दूसरी बार नहीं छोड़ा था)

स्नेहा मैडम : एक मिनट Shiv(Me रुक गया और उन्हें देखने लगा, उन्होंने अपने सरे कपडे निकल दिए, वो पूरी तरह से नंगी हो गयी, में उन्हें देखता hi रह गया, उनके चुके बहोत बड़े लग रहे थे, गहरे रंग का एक बड़ा सा गोल आकर बना हुआ था और बिच में चूचक पूरी तरह से खड़ा था, उन्हें देख कर मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गयी, मेने कास के दोनों चुचो को पकड़ लिया और मसल diya)Shhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धीरीईईए (में झुक कर एक चूचक को मुँह में लिया और उसे जोरो से चूसने लगा, बरी बरी दोनों चूचिया मसलते हुए में चुचकों को चूस रहा tha)Dhireeeee बाबू शहहहहह में कही भागी नहीं जा रही shhhhhhhhhhh(Me इतना उत्तेजित हो गया था की में सुन hi नहीं रहा था, मेने अपनी कमर का जोर से धक्का diya)Mumiiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhhhhh में यही हु बाबू धीरीईई शह्ह्हह्ह्ह्ह में कही नहीं जा रहीइइइइइइइइ शहहहहह aiiiiiiiiiii धीरीईई बाबूउऊउउउ.





exclude duplicates

वो ऐसे मुझे छोड़ रहा था की में पूरी हिल रही थी, में बिस्टेर में गढ़ी जा रही थी. जिंदगी में पहली बार उसे छूट का मज़ा मिल रहा था, उसका उत्साह में समाज सकती थी, और सच कहु तो मुझे भी ऐसे मज़ा आ रहा था. ऐसी चुदाई तो मेरी कभी नहीं हुई थी. में उस बड़े लुंड के धक्को से पागल हो रही थी. उसका लुंड मेरी छूट में घमासान मचाये हुए था, में ज्यादा देर टिक न पायी और झड़ने लगी.





स्नेहा मैडम : ोोोू मायआ शीइइइइइइइ में गईइइइइइइइ अह्ह्ह्हह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह रुको अह्ह्ह्हह्हह रुको शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में रुक गया, और उन्हें देखने लगा, वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी, जूते गुस्से se)Pagal हो गए हो क्या, इतना तेज कोई करता है भला. में तुम्हारी तरह मजबूत नहीं हु, नाजुक सी लड़की हु, बहार निकालो इससे.

शिव : (मुझे और करना था, मुझे लगा मेने गलती कर di)Sorry मैडम, में धीरे से करूँगा.

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मन नहीं कर रही हु, अभी थोड़ी देर रुको, मुझे तुम्हारा देखना है( मेने मुस्कुराते हुए अपना लुंड बहार निकल लिया, पक्क्क की आवाज के साथ लुंड बहार निकल aaya)Ahhhhhhhhh, (स्नेहा बेथ कर अपनी छूट देखने लगी, ढेर सारा वीर्य उसकी छूट से निकल कर बिस्तर पर गिरने लगा, उसने देखा की वो थोड़ा लाल भी था, वो समाज गयी की उसकी छूट अंदर से फटी है. उसे कोई परवाह नहीं थी, उसने अपनी साड़ी से लुंड को साफ किआ और उस अजूबे को पकड़ कर देखने लगी.





उस बड़े से दैत्याकार लुंड को देख वो मोहित होने लगी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा लुंड वो अपनी छूट में ले चुकी है. वो उसे चूमने और चाटने लगी.





में देख रहा था कैसे मैडम मेरे लुंड को चाट रही है, जब मेने उन्हें पहली बार देखा था तब अगर मुझे कोई कहता की मैडम ऐसा कर रही थी तो में यकीं hi न करता. वो कितनी खूबसूरत थी और दिखने में कितनी शालीन और सभ्य दिखती है. प्यारी सूरत के साथ उनकी आवाज भी कितनी मीठी है, में एक नए अनुभव को सिख रहा था. में अपने घुटनो पर खड़ा था और वो मेरे लुंड को चाट रही थी. में देख रहा था की वो ऐसे चाट रही है जैसे छोटा बच्चा कुल्फी को चाट ता है. (स्नेहा जैसे जैसे लुंड को चाट रही थी वैसे वैसे वो और उत्तेजित हो रही थी, लुंड से निकलनेवाली वो गंध उसके नथुनों में भर रही थी, शिव के वीर्य और उसकी छूट की मिली जुली गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी, उसकी छूट से अभी भी शिव का वीर्य टपक रहा था, उसने लुंड के सुपडे को अपने मुँह में भर लिया, उसका पूरा मुँह भर गया था, उसके होठ लुंड के इर्द गिर्द लिपट गए the)(Madam ने मेरा लुंड मुँह में भर लिया था, उनके मुँह की गर्माहार में अपने लुंड पर महसूस कर रहा था, वो ऐसे झुकी थी की उनके बड़े कूल्हे बहार उभर आये थे, मेने झुक कर उन्हें पकड़ा और दबा कर महसूस करने लगा. वो मखमली गद्देदार कूल्हे दबाने में मुझे बहोत मज़ा आने लगा.





मेरे हाथ काफी लम्बे थे तो में अपनी ऊँगली से पूरी दरार को सहलाने लगा, जैसे hi मुझे छूट का छेड़ मिला मेने अपनी ऊँगली अंदर दाल दी. छूट पूरी चिप छिपी थी, उस गरम जगह में मेने अपनी उंगली घुसा दी और आगे पीछे करने लगा.

(स्नेहा अपनी छूट में अंदर बहार हो रही ऊँगली से और उत्तेजित होने लगी, उसे ऐसा लग रहा था की उसकी छूट में लुंड है, वो और जोर जोर से लुंड को चूसने लगी, उसने सोचा नहीं था की एक hi दिन में इतना सब हो जायेगा. कहा वो ये सोचे बैठी थी की एक hi बर्टो करना है, और अभी उसका दिल hi नहीं मान रहा था. इतनी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी, या यु कहे की काफी सालो से वो इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी, शादी के शुरुआती दिनों में वो जरूर उत्तेजित हो जाती थी, पर धीरे धीरे वो सब काम हो गया था. में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी तो में सीधी लेट गयी, वो भी बेसबारा हो रहा था जैसे hi में लेती वो अपनी पोसिटिव लेने लगा, मेने अपनी एक तंग उठा कर उसे जगह दी तो उसने अपना लुंड पूरा अंदर दाल दिया. वो जल्दी जल्दी मुझे छोड़ने लगा. वो मेरे पेअर को पकड़ कर उसे चाटने लगा तो मुझे गुदगुदी होने लगी.





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स्नेहा मैडम : आआह्ह्ह्ह शीइइइइइइइव क्या कर रहे हो, शहहह गुदगुदी हो रही है, (उसका लुंड जिस रफ़्तार से अंदर बहार हो रहा था, मेरी हड्डिया तक आवाज करने लगी थी,) ओह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह तुम मुझे शहहहहह आआ पागल कर डोज अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : (ये कैसा मज़ा था, मेरा लुंड उस छोटी सी सुरंग में अंदर बहार होने से मुझे एक अजीब तरह का आनंद मिल रहा था. मेने सोचा नहीं था की इस खेल में इतना मज़ा आता हो गए. मैडम के नरम नरम होठ, चूसने में भी मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, मेरी कमर तो अपने आप hi हिल रही थी, छूट की अंदर की मॉस पेशिया मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, में पशीने से भीग गया था, मैडम का भी यही हल था, मेरे चेहरे से पसीना टपक कर उनके शरीर पर गिर रहा था.)





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स्नेहा मैडम : (इतने तेज धक्के में पहली बार झेल रही थी. उसकी ताकत देख मुझे ताज्जुब हो रहा था, यहाँ मेरी छूट की हालत बहोत ज्यादा ख़राब हो रही थी पर दिल मान नहीं रहा था, शरीर में ऐसी ऐसी तरंगे उठ रही थी, मेरा रोम रोम खड़ा हो रहा था, वो मेरे शरीर पर पूरा छाया हुआ था, और धक्को की बरसात हो रही थी)





मेने उसके होठो पर टूट पड़ी, दोनों के मुख से निकल रहा रास पुरे चेहरे को भिगोने लगा था, वो मेरे स्तनों की चाट ता मेरी गर्दन चाट ता, पर उसके धक्के लगातार चल रहे थे. ये मेरा पहला अनुभव था की में इतनी देर से चुद रही थी. पिछले आधे घंटे से वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, वो जरा भी नहीं थका था, उसका स्टेमिना देख मुझे हैरानी हो रही थी. मुझे उस पर इतना प्यार आ रहा था की में लगातार उसके होठो को चूस रही थी.





आखिर कर वो वक़्त भी नजदीक आ गया, में जान गयी की वो झड़ने वाला है, उसकी रफ़्तार इतनी तेज थी की मेरी हालत पतली हो रही थी,





स्नेहा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आराम से ाः धीरे शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे अह्हह्ह्ह्ह shhhhhh(Akhir कर जोर से झटके लगते हुए वो अपना वीर्य मेरे अंदर भरने लगा और में भी झड़ने लगी, मेने उसे अपने गले से लगा लिया,





वो और में दोनों जोर जोर से सांसे ले रहे थे, पुरे कमरे में सिर्फ सांसो का शोर था. मेरी छूट पूरी वीर्य से भर गयी थी, में महसूस कर रही थी की वीर्य निकल कर मेरी गांड की दरार से बह रहा था, उसके लुंड की पल्स में अपनी छूट में महसूस कर रही थी. मेरी छूट लुंड को कास के निचोड़ रही थी, मुझे छोड़ने की पूरी ख़ुशी उसने दी थी, में पूरी तरह से उस पर मर मिटी thi.Usne थोड़ा ऊपर उठ के मेरी और देखा तो मेने अपनी नाक उसकी नाक से सत्ता दी.





में पूरी तरह संतुस्ट थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने दुनियाकी सबसे बड़ी खुसी प् ली हो. में उसकी पीठ सहलाते हुए उसके इस अद्भुत कारनामे का इनाम दे रही थी. में उस से बेल की तरह लिपट गयी थी.

वह गयम में पवन बेचैन था. अच्छा सरीर था उसके पास पर जो एक मर्द को मर्द बनता है वो hi नहीं था. वो चुदाई तो अच्छी कर लेता था, स्नेहा भी खुस थी उस से पर आज उसे अपनी प्यारी और खूबसूरत बीवी को किसी और की बहो में देना पड़ा था. वो सोच सोच के पागल हो रहा था की वह क्या हो रहा होगा. क्या शिव मन होगा. कैसे स्नेहा बात करेगी. उसने जान बुज कर शिव को चुना था क्यों की वो एक नादाँ लड़का था, वो इस चुदाई के खेल को नहीं जनता था तो वो उसके लिए कोई खतरा नहीं था. वो स्नेहा को भी जनता था, वो एक संस्कारी और अच्छी लड़की थी. वो सोच रहा था की फ़ोन कर के स्नेहा से बात करे की नहीं.

शिव और स्नेहा , जब दोनों शांत हो गए तो शिव अलग होने के लिए उठने लगा तो स्नेहा ने फिर उसे पकड़ते हुए उठने नहीं दिया.

स्नेहा : अभी ऐसे hi रहो शिव, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : पर मैडम मुझे गयम भी जाना है.

स्नेहा : तुम उसकी चिंता मत करो में फ़ोन कर दूंगी अभी.

शिव : आप क्या कहेगी? और ये सब पवनसीर को पता चल गया तो?

स्नेहा : (उसका गाल सहलाते हुए) तुम इन सबकी चिंता मत करो, में हु न. वो सब छोडो ये बताओ तुम्हे कैसा लगा ये सब.

शिव : (शरमाते और मुस्कुराते hue)Bahot मज़ा आया मैडम, और आप को?

स्नेहा : मुझे भी बहोत मज़ा आया शिव. तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न मेरे साथ ये सब करने में?

शिव : सच कहु तो मेने कभी सोचा नहीं था की ऐसा भी करते है, और आप कितनी खूबसूरत और अच्छी दिखती है फिर भी...

स्नेहा मैडम : (मुस्कुराते hue)Achchhi हु तो क्या अब बुरी हो गयी? लड़की चाहे कितनी भी अच्छी हो या सीधी हो, हर कोई ये करती है, यही कुदरत है. अगर लड़की हो कर ये सब न करे या लड़का हो कर ये सब न करे तो प्रॉब्लम है.

थोड़ी देर दोनों ऐसे hi एक दूसरे के साथ बाटे करने लगे. पर स्नेहा ने महसूस किआ की शिव का लुंड फिर से उसकी छूट में अपना आकर बढ़ने लगा और कड़क भी होने लगा था. उसने शरत से शिव को देखा और पूछा

स्नेहा मैडम: (मुस्कुराते हुए) क्या फिर से मन कर रहा है? (मैंने मुस्कुराते हुए है kaha)Thodi देर रुको में बाथरूम हो आती hu.(Wo कड़ी हुई और चद्दर लपेट कर बाथरूम की और जाने लगी, वो थोड़ी लंगड़ा रही थी और कभी कभी उनके मुँह से कराहने की आवाज भी आ रही thi.(Jab सबीहा बाथरूम में मूतने बैठी तो उसको अपनी छूट में दर्द महसूस हुआ, उसने झुक कर देखा तो उसकी छूट से मूत के साथ साथ बहोत सारा सफ़ेद फिर्या निकल रहा था. वो ये देख कर और ज्यादा उत्तेजित होने लगी. आज पहलीबार उसने देखा था इतना ढेर सारा वीर्य. थोड़ी देर में वो बाथरूम से आ गयी, (में भी बाथरूम चला गया)

स्नेहा मैडम :(पवन को फ़ोन lagaya)Hello.

पवनसीर : Hello स्नेहा, क्या हुआ? सब ठीक तो है न? क्या शिव मन.?

स्नेहा मैडम : आप समझने की कोशिस कीजिये, उसने कभी सेक्स किआ नहीं है और मुझे भी कितनी शर्मिंदगी महसूस हो रही है उसके साथ ऐसी बात करने में, में धीरे धीरे उसे समजा रही hu.(Aaj पहली बार स्नेहा अपने पति से जूथ बोल रही थी) मुझे लगता है अभी टाइम लगे गए. वो आज गयम न आये तो चलेगा.

पवनसीर : कोई बात नहीं, तुम्हे जैसे ठीक लगे वैसे आगे बढ़ना, सॉरी यार मेने तुम्हे इन सब में धकेला, अगर तुम्हारा मान न मने तो रहने देना.

स्नेहा मैडम : ये सुब हम हमारे बच्चे के लिए hi तो कर रहे है, आप फ़िक्र न करे में सब मैनेज कर लुंगी, अच्छा अब रखती हु.

स्नेहा मान में सोचने लगी की क्यों वो पवन से झूठ बोली, क्यों वो शिव के साथ और वक़्त बिताना चाहती है, उसने तो अपना काम कर दिया है फिर भी क्यों वो उसे जाने नहीं देना चाहती. वो इन सब खयालो में खोयी हुई थी की शिव बाथरूम से आया. आहात सुन कर उसने शिव की और देखा वो बिलकुल नंगा hi था. उसका लुंड लटक रहा tha.(Unke ऐसा देखने से मुझे थोड़ी शर्म आने लगी, उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने बाजु में लेता दिया, एक हाथ से मेरा लुंड पकड़ कर वो मुझे किश करने लगी, लुंड को सहलाने से लुंड अकड़ने लगा. फिर दोनों की काम क्रीड़ा सुरु हो गयी.

(और दो बार उनकी चुदाई चली थी.) चौथी बार मैडम के साथ करने के बाद में बाथरूम चला गया, जब वापस आया तो मेने देखा की स्नेहा मैडम कड़ी हो रही है पर उनसे खड़ा हुआ नहीं जा रहा है तो मेने स्नेहा मैडम को अपनी बहो में उठा लिया. स्नेहा मैडम ने अपनी बहे मेरे गले में लपेटे हुए मुझे बड़े प्यार से देखने लगी. रास्तेमे उन्होंने मेरे होठो को भी चूमा. फिर मेने उन्हें बाथरूम में खड़ा किआ और बहार आ गया. बहार आ कर अभी जो हुआ उसके बारेमे सोचने लगा. अभी भी मुझे ये सपने जैसा लग रहा था. क्या सच में मैंने मैडम के साथ ये सब किआ था? उन्होंने मुझे आवाज दी तो में अंदर गया, वो शर्मा रही थी, में उन्हें बहार ले आया और उनको बिस्तर पर लेता दिया. मेने कपडे पहन लिए. स्नेहा मैडम ने मुझे अलमारी से 5000 निकल ने को कहा, मेने निकल कर उन्हें दिए.

स्नेहा : (शिव का हाथ पकड़ kar)Shiv में ये पैसे इस लिए नहीं दे रही की तुमने मेरे साथ ये सब किआ. पर ये तुम्हे जरुरत है इस लिए दे रही हु. अगर तुम्हे इस वक़्त जरुरत न होती तो में ये पैसे तुम्हे नहीं देती. हमारी बात भले hi पैसो की len-den से सुरु हुई थी, सायद मुझे और कोई रास्ता नहीं सूज रहा था पर मेरा यकीं मनो हमारे इस रिश्ते का और इस पैसो का कोई लेनादेना नहीं है, तुम समाज रहे हो न मेरी बात.

शिव : जी मैडम.

स्नेहा मैडम : और दूसरी बात आगे जब भी जरुरत हो तो मुझसे मांग लेना. जरा सा भी झिझकना नहीं. समाज गए. तुम थोड़ी देर बैठो में कपडे चेंज कर लेती हु फिर तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ देती हु.

शिव : (मुझे पता था की उनको दर्द है to)Aap रहने दीजिये में चला जाऊंगा.

स्नेहा : नहीं शिव, में तुम्हे छोड़ने आ रही हु.

शिव : नहीं मैडम आप को दर्द हो रहा है, आप रहने दीजिये में चला जाऊंगा, आप आराम कीजिये.

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए मुझे अपने पास बुलाया और मेरे गले लग gayi)Itna भी दर्द नहीं है. तुम चिंता मत करो.

शिव : फिर भी आप नहीं आएँगी, प्लीज आप आराम कीजिये, में चला जाऊंगा.

स्नेहा मैडम : ठीक है, ध्यान से जाना.

में उन्हें bye बोल कर वह से निकल गया. में रस्ते में वही सब सोचते हुई hi चल रहा था. आज मैंने जाना था किसी लड़की के साथ, लड़के के कैसे सम्बन्ध होते है. दिखने में वो कितनी प्यारी और सीधी थी पर फिर भी वो ये सब कर रही थी. कैसे वो मेरे साथ पूरी नंगी थी. शायद लड़कीओ को भी मज़ा आता होगा, जैसे मुझे मज़ा आया था वो सब कर के. में यही सोचते हुए चल रहा था की मुझे बिना मैडम दिख गयी. उनके हाथ में सामान था जिसे उठाकर वो चल रही थी. मैं उनके पास चला गया........
 
अपडेट 19

जूही अपने घर आयी हुई थी. शाम को वो और उसकी भाभी घर के आंगन में खटिया पे बैठे हुए थे. भाभी सब्जी काट रही थी और जूही सलवार कमीज पहने उसके साथ बैठी हुई थी.

जूही : माँ भी अजीब है, ऐसे अचानक फ़ोन कर के मुझे बुला लिया. में दर गयी थी की ऐसी क्या आफत आ गयी जो ऐसे अचानक मुझे बुला लिया. यहाँ आकर ये सब देखने को मिला. मेने कितनी बार कहा है में अभी शादी नहीं करना चाहती फिर भी कोई समझने को तैयार नहीं.

मंतभाभी : क्यों शादी नहीं करनी, अब तू बड़ी भी हो गयी है और नौकरी भी करती है. अब क्या परेशानी है. और तेरा जितना कद है उस हिसाब से तो लड़का मिलना बहोत मुश्किल है. कुछ गिने चुने लोग hi होंगे जो तेरे जितने भी होंगे. ये जो लड़का तुजे देखने आया था वो अच्छे घर का है. जमीं जायदाद भी अच्छी है. सरकारी नौकरी करता है. और ऊंचाई में भी लगभग तेरे बराबर hi लगता है. ऐसा रिस्ता फिर नहीं मिलेगा.

जूही : अगर माँ कुछ दिन पहले कहती तो शायद मान भी जाती. पर अब मेने फैसला कर लिया है की अब में अपने स्पोर्ट्स में hi आगे बढ़ूंगी.

ममता : अब ऐसा क्या हो गया है?

जूही : मुझे एक लड़का मिला है.

ममता : क्या लड़का, मतलब तू उस से शादी करनेवाली है? पागल हो गयी है, घर में बबल हो जायेगा. और लोगो से क्या कहेंगे.

जूही : अरे भाभी रुको... थोड़ा ठहरो, में शादी के बारे में नहीं कह रही, और वैसे भी वो मुज से छोटा है. में ये कह रही थी की में उसे ट्रैन कर रही हु, और अगर आगे चल कर वो स्पोर्ट्स में अपना नाम बनता है तो उसके साथ मेरा नाम भी जुड़ेगा. स्पोर्ट्स जगत में मेरा भी नाम होगा.

ममता : ऐसी बात है, पर तू कह रही है की वो तुजसे छोटा है, जब तू लड़की हो कर इतनी लम्बी है फिर भी स्टेट लेवल से आगे नहीं बढपई तो वो तो लड़का है, वो कैसे कर पायेगा.

जूही : वो छोटा है से मेरा मतलब है, उम्र में छोटा है, ऊंचाई में तो वो मुज से भी 6 इंच लम्बा है.

ममता : (अपने मुँह पर हाथ रखलेति है) क्या? तुज से भी लम्बा? तू hi इतनी लम्बी है जितने तो तेरे भैया भी नहीं है. खड़े खड़े अगर तुज से बात करू तो गर्दन अकड़ जाती है और वो तुजसे भी लम्बा है, बापरे, कैसा दीखता होगा?

जूही : आप को देखना है?

मंटा : क्या? तेरे पास उसकी तस्वीर भी है? Baata...(Juhi ने अपने मोबाइल में शिव कीतस्वीर दिखाई जिसमे वो भी उसके साथ कड़ी thi)Hey भगवन, सचमे, ये तो तुज से भी लम्बा है, और दिखने भी कितना खूबसूरत है, लगता है हमारी ननन्द्राणी का दिल आ गया है.

जूही : (जूही शर्मजाति hai)Kya भाभी आप भी. ऐसा कुछ नहीं है, मेने कहा न की वो मुझसे छोटा है.

ममता : तो क्या हुआ, मुझे नहीं लगता वो ज्यादा छोटा है, शायद एक दो साल का hi फरक होगा. जरा फोटो बड़ी कर तो, उसका चेहरा नजदीक से दिखा.

जूही : लगता है आप का दिल आ गया hai?(Juhi हसने लगती है)

ममता : (उसे मरते hue)Shaitan कही की, अगर मेरा दिल इस पर आ गया तो तेरे भैया का क्या होगा? और तेरा क्या hoga(Wo खिलखिला कर हसने लगती है) में इस लिए नहीं कह रही, मुझे इसकी शकल कुछ जनि पहचानी लग रही है इस लिए कह रही हु.

जूही : क्या भाभी आप भी, इसकी शकल कैसे जनि पहचानी लग रही है आपको? वो तो यहाँ से कितनी दूर रहता है, और कभी न वो यहाँ आया है न कभी आप उस तरफ आयी है.

ममता : (सोचते हुए, वो गौर से शिव के चेहरे को देखती hai)Tu सच कहती है, पर पता नहीं क्यों इसकी शकल जनि पहचानी लग रही है, याद नहीं आ रहा पर मुझे ऐसा लगता है जैसे मेने इससे कही देखा है.

जूही : क्या भाभी आप भी? मेने कहा न की वो यहाँ कभी नहीं आया और वैसे भी ये अनाथ है. और अनाथालय में hi पला बड़ा है.

ममता :है बेचारा, ऊपरवाला भी न जाने क्या क्या खेल खेलता है.

जूही : वो सब छोडो, ये माँ अभी तक क्यों नहीं आयी, अगर अब मेरी जरुरत न हो तो मुझे वापिस भी जाना है.

ममता : आरी इतने टाइम बाद तो आयी है, थोड़े दिन हमारे साथ भी रह न. तू आयी है तो कितना अच्छा लगता है, वर्ण मजी अपने में व्यस्त और तेरे भइया का तो तुजे पता hi है, वो और अपना काम. माजी किसी की गोदभराई में गयी है, उन्हें थोड़ी देर होगी.

जूही : आप नहीं गयी भाभी?

ममता : (उसके चेहरे पर वेदना चालक आती hai)Nahi में नहीं जा शक्ति.

जूही : आप नहीं जा शक्ति, ऐसा क्यों भाभी?

ममता : छोड़ न वो सब, अच्छा ये बता क्या खायेगी आज, तेरी मनपसंद का कुछ बनती हु.

जूही : (उनके हाथ पर अपना हाथ रख kar)Kya हुआ भाभी? आप क्यों उदास हो गयी?

ममता : (उसकी आँखों में पानी भर आया) कुछ नहीं, छोड़ न इन बातो को.

जूही : प्लीज भाभी बताओ न क्या बात है, आपको मेरी कसम.

ममता : आरी इसमें कसम क्यों देती है, तू क्या इतनी सस्ती है, लाखो में एक है मेरी नानन्द. पहले तो में भी जाती थी पर...

जूही : अब क्या भाभी?

ममता : (आंसू टपकने लगते hai)Pehle सब प्यार से बुलाते थे, पर अब पीठपीछे बाते करते है, कोई सामने से तो कहने की हिम्मत नहीं करता पर, (वो कहते कहते रुक गयी, जूही को लगा की कोई गंभीर बात है, उसने भाभी का हाथ अपने हाथ से दबा diya)Ab लोग मुझे बांज कहने लगे है, इतने साल हो गए शादी को, और अभी तक में माँ नहीं बन payi.(Unhone अपनी आंखे अपनी हथेली से छुपा ली पर आंसू टपक कर उनकी साड़ी पे गिर रहे थे)

जूही : दिल छोटा न करो भाभी. आप भी जल्द hi माँ बजाओगी. अभी आपकी शादी को टाइम hi कितना हुआ है. आप किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखती.

ममता : मेने बोलै था तेरे भैया को, पर वो मान नहीं रहे. वो कह रहे है की मुज में कोई कमी नहीं, अगर इलाज करवाना है तो अपना करवाओ.

जूही : आने दो भैया को, में बात करती हु.

ममता : (डरते darte)Nahi नहीं, तू उनसे ऐसी बात मात करना, वो मुज पर गुस्सा करेंगे. तू रहने दे जो होगा मेरे भाग्य में वही hoga.(Baat को बदलते hue)Issi लिए कह रही हु, शादी कर ले, यही उम्र है शादी करने की, तेरा बच्चा हो जायेगा तो में उसे hi अपना बच्चा समाजलूँगी.

जूही : (शर्मजाति hai)Kya भाभी आप भी, आप चिंता मात करो , में भगवन से प्रार्थना करुँगी, जल्दी hi वो आप को अपने नाम के मुताबिक ममता के सुख का आशीर्वाद देगा.

ममता :(मुस्कुराते hue)Dekha मेने कहा था न, कितनी समझदार हो गयी है मेरी nanand.(Fir दोनों खिलखिलाकर हसने लगती है)

शिव, स्नेहा मैडम के घर से अपने घर की और जा रहा था की उसे बाजार में बिना मैडम दिखी थी, जो काफी सामान उठाये चल रही थी. उन्हें देख शिव दौड़ते हुए उनके पास पहुंच गया.

शिव : गुड इवनिंग मैडम.

बिना मैडम :(मुझे देखते hue)Oh! शिव. गुड इवनिंग.

शिव : लाइए मैडम में उठा लेता hu.(Me उनके हाथ से सामान लेने लगा)

बिना मैडम : अरे नहीं! रहने दो, इसकी कोई जरुरत नहीं.

शिव : (सामान लेते hue)Aisa कैसे मैडम, आप ये उठाकर चल रही है और में देखता rahu.(Me सामान उथलेटा हु, कुछ बैग्स थी)

बिना मैडम : अरे में रिक्शा ढूंढ रही थी, अभी मिल जाएगी, इतना भी भरी नहीं है, इतना तो में उठा hi सकती हु.

शिव : आप उठा सकती है पर अगर में यहाँ हु और आप उठाओ ये अच्छा नहीं लगता न

बिना मैडम : अभी घर नहीं गए तुम, स्कूल बैग लिए घूम रहे हो.

शिव : है, वो थोड़ा काम था तो गया था वर्ण इस वक़्त मुझे गयम जाना होता है.

बिना मैडम : अच्छा गयम, बॉडी बनाने का इरादा है. है आजकल सब को ये शौख चढ़ा हुआ है, सबको अपनी बॉडी बनाकर हीरो जैसे दिखना होता है.

शिव : नहीं मैडम, में गयम में नौकरी करता हु.

बिना मैडम : क्या तुम नौकरी करते हो? अरे वह! ये तो अच्छी बात है. (वो जानती थी की शिव अनाथ है और उसे पैसो की जरुरत के लिए नौकरी करनी पद रही होगी) अच्छा शिव, अगर अभी तुम्हारे पास टाइम है तो मेरे घर चल सकते हो?

शिव : है है क्यों नहीं मैडम, कोई काम है आप को?

बिना मैडम : तुम चलो तो में बताती हु. .(एक रिक्शा दिख गयी तो मैंने जोरसे आवाज लगा कर रोका.)

शिव : (मेने सामान रख दिया और मैडम बेथ गयी, में उनके बाजु में बेथ गया)

फिर हम दोनों रिक्शा में बेथ कर उनके घर चले गए. एक सोसाइटी थी वो. आमने- सामने क़तर में घर थे. अँधेरा होने को आया था तो बहार लोग काम hi थे. एक घर के सामने उन्होंने रिक्शा रुक्वाः. मेने उतर कर घर को देख रहा था. ग्राउंड फ्लोर hi था, आगे थोड़ी जगह थी दरवाजे पर लॉक लगा हुआ था. उन्होंने लॉक खोला.

बिना मैडम : आओ शिव.

शिव : (अंदर जाते हुए) घर पर क्यों लॉक लगा था मैडम, घर में और कोई नहीं है?

बिना मैडम : नहीं , जॉब की वजह से में अकेली रहती हु यहाँ. तुम बैठो में अभी आयी.

शिव :(में वह सोफे पर बेथ गया, स्नेहा मैडम के घर के मुकाबले ये छोटा था और सामान भी काम hi था. सामने एक कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, वह एक कोने में टेबल पर कंप्यूटर रक्खा हुआ था, आगे रूम में टीवी और कुछ सामान. थोड़ी देर में हाथ में कुछ पैसे लिए वो आयी)

बिना मैडम : (सामने बैठते hue)Maine तरय किआ शिव पर तुम्हारे लिए यूनिफार्म नहीं मिला. ये पैसे ले लो, इस से नया बनवा लेना.

शिव : (में कभी पैसे देखता तो कभी उनको, अभी अभी स्नेहा मैडम ने पैसे दिए थे muje)Nahi मैडम रहने दीजिये, इस्सकी कोई जरुरत नहीं है.

बिना मैडम : मन मात करो, और सामने की भी कोई जरुरत नहीं. में जानती हु की तुम अनाथ हो और तुम्हारे लिए पैसे जुटाना आसान नहीं है. वैसे तुम ने कहा की तुम जॉब करते हो फिर क्यों पुराण मांग रहे थे?

शिव : ये सच है की में जॉब करता हु, पर जॉब मैंने अभी अभी सुरु की है, और 2500 रुपये सैलरी है पर अभी महीना पूरा नहीं हुआ. और मेरे साथ और दो लड़कीअ भी है जो स्कूल में पढ़ती है. उनके लिए भी मुझे यूनिफार्म लेने है. यूनिफार्म तो यूनिफार्म है, अगर पुराण हो तो भी क्या, वैसे भी हम, लोगो के दिए हुए पुराने कपडे hi पहनते है. यूनिफार्म से अगर पैसे बच जाये तो वो दूसरी किताबे और नोटबुक खरीदने के लिए काम आएंगे.

बिना मैडम : (वो शिव को बड़े आदर से देखती hai)Are वह! इतनी सी उम्र में hi इतनी जिम्मेदारी से रह रहे हो, बहोत अच्छी बात है. इसी लिए में कह रही हु ये पैसे रख लो तुम्हारे काम आएंगे.

शिव : इसकी जरुरत नहीं मैडम, मैं जहा नौकरी करता हु उनसे मैंने पैसे मांगे थे तो उन्होंने दिए है.

बिना मैडम : फिर भी रख लो, तुम्हारे काम ayenge.(Mere हाथ में पैसे जबरदस्ती देते hue)Tum बैठो में सरबत बनती हु. गर्मी भी कितनी बढ़ रही है.

शिव : रहने दीजिये मैडम, आप क्यों तकलीफ कर रही है.

बिना मैडम : इसमें तकलीफ कैसी. में रोज स्कूल से आने के बाद अपने लिए बनती hi हु, आज मुझे कंपनी मिल जाएगी. रोज तो में अकेले अकेले hi पीती हु.

मैंने कुछ नहीं कहा. वो किचन में चली गयी. में पैसो को देख रहा था. मैंने गिने तो पुरे 3000 रुपए थे. स्नेहा मैडम ने पैसे देने पर मुझसे, क्या hi मांग लिया था अब ये पैसे दे रही है. पता नहीं वो क्या मांगेंगी, और ऐसे hi किसी से पैसे लेना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था. में सोचमे डूबा था, वो सरबत बना कर आयी मुझे पता hi नहीं चला. मुझे यु सोच में डूबा देख.

बिना मैडम : क्या सोच रहे ho.?(Sarbat और नास्ता टेबल पर रकते हुए)

शिव : जी वो ये पैसे मैं कैसे लौटाऊंगा वही सोच रहा था.

बिना मैडम : इसकी कोई जरुरत नहीं. तुम नास्ता करो.

शिव : पर मैडम....

बिना मैडम : मैंने कहा न लौटने की कोई जरुरत नहीं. तुम चाय करो.

बिना मैडम सच में बहोत अच्छी थी. फिर हम इधर उधर की बाते करते रहे. बातो से मुझे पता चला की उनके पति दूसरे सहर रहते है. उनके पति की भी जॉब है, वो भी टीचर है. पिछले साल hi इनको यहाँ जॉब मिली है तो वो यहाँ अकेली रहती है. वो दिखने में जितनी खूबसूरत थी उतनी hi दिल की भी अच्छी थी. वो मुझसे बहोत अच्छे से बाते कर रही थी.

शिव : (कंप्यूटर की और देखते hue)Aap को कंप्यूटर आता है, मैडम?

बिना मैडम : है थोड़ा बहोत, स्कूल का छोटा मोटा काम होता है जैसे रिजल्ट वगैरह बनाना, वो सब कंप्यूटर से आसानी से हो जाता है. क्यों तुम्हे कप्यूटर नहीं आता. अब तो स्कूल में भी सिखाते है.

शिव : स्कूल में सब्जेक्ट तो था पर उसके लिए अलग से फीस थी तो में नहीं कर पाया.

बिना मैडम : कंप्यूटर तो आज कल हर जगह होते है, तुम्हे ये सीखना चाहिए, ज्यादा नहीं तो बेसिक्स तो सीखना hi चाहिए, कल जाके तुम कही भी जॉब करोगे तो तुम्हे काम आये गए. अगर तुम्हे सिखने का मान है तो तुम यहाँ भी आ सकते हो.

शिव : (खुस होते hue)Kya सच में, मैडम. आप सिखाएंगी मुझे.

बिना मैडम : है क्यों नहीं, स्कूल के टाइम के अलावा में वैसे भी बोर hi होती हु, तुम आ सकते हो.

शिव : वो मैडम स्कूल के टाइम के अलावा तो मुझे गयम पे जाना होता है और वो इस लिए भी जरुरी है क्यों की वह मेरी ट्रेनिंग भी चल रही है, उसके अलावा भी मुझे ट्रेनिंग करनी पड़ती है. रोज तो मौका नहीं मिलेगा, फ़िलहाल तो सिर्फ संडे hi मिलता है.

बिना मैडम : (आश्चर्य se)Kis चीज की ट्रेनिंग करते हो तुम?

शिव : वो एक मैडम है, जूही मैडम. वो मुझे एथलीट बन ने की ट्रेनिंग दे रही है. वो कहती है में अच्छा रनर बन सकता हु.

बिना मैडम : अरे बाप रे! कितना करते हो तुम, तुम्हारी आगे में बच्चे आवारागर्दी से ऊपर नहीं आते और तुम. वैसे बहोत अच्छी बात है, और तुम्हे देख कर लगता है की तुम सही रस्ते पर हो. सच में तुम इतने लम्बे हो की तुम ये कर सकते हो.

शिव :(शरमाते hue)Kya मैडम आप भी, में इतना भी लम्बा नहीं हु.

बिना मैडम : (हस्ते hue)Lambe! तुम किसी खम्भे जितने लम्बे ho(Khil खिला कर हस्ती है, में उन्हें यु हस्ता देख रहा था, स्कूल में सीरियस रहनेवाली मैडम हस्ते हुए बहोत hi आकर्षक लग रही थी, वो अपने आप को हसने से रोकते hue)Sorry, मेरे कहने का मतलब है तुम्हारी हाइट अच्छी है, पता है में भी मेरे घर में सब से लम्बी हु, पर तुम्हे देख कर मुझे लगा की में कितनी छोटी हु. तुम सच में अच्छे दीखते हो.

शिव : नहीं मैडम, अच्छी तो आप दिखती हो, पता है सब लड़के स्कूल me...(Me ये क्या बोल रहा tha,Me कहते कहते रुक तहा)

बिना मैडम : (आश्चर्य se)Kya सब लड़के स्कूल में...?

शिव : (डरते hue)Nahi कुछ नहीं...

बिना मैडम : (घर कर देखते hue)Shiiiiiiiv, क्या कह रहे थे?.

शिव : आप बुरा मान जाएँगी मैडम.

बिना मैडम :(हस्ते हुए) अब बताओ भी! में कोई बुरा नहीं मानूंगी.

शिव : (सँभालते hue)Madam वो बहोत कुछ कहते है, वो सब तो में आप को नहीं बता सकता पर उन सबका मतलब यही होता है की आप बहोत hi ज्यादा खूबसूरत हो और आकर्षक हो.

बिना मदाम :(उसे अपनी तारीफ बहोत पसंद आती है, वो खिल खिलाकर हस्ती है, फिर अपने आप को रोक कर मेरी और देखती है) बाकि सब को में खूबसूरत लगती हु, इसका मतलब तुम्हे नहीं लगती.

शिव : (हड़बड़ाते hue)Nahi मैडम, मेरा मतलब है आप हो, पर पर में वैसा सब नहीं बोलता.

बिना मैडम :(मुस्कुराते hue)Me तो मज़ाक कर रही थी.

शिव : एक बात कहु मैडम, आप जैसी स्कूल में हो उस से आप बिलकुल अलग हो.

बिना मैडम : वो कैसे?

शिव : स्कूल में आप कितनी सीरियस दिखती हो, मुझे तो लगा था की आप कभी हस्ती hi नहीं होंगी, और यहाँ आप कैसे है रही है, और कितनी खूब... मेरा मतलब है की आप हस्ते हुए अच्छी दिखती है.

बिना मैडम : (मेरी और देख कर मुस्कुराते hue)Wo स्कूल है, और सच कहु तो आज में कितने दिनों बाद ऐसे हसी हु. अकेले अकेले बोर हो जाती हु. इसी लिए तो कह रही हु अगर तुम्हे टाइम मिले तो आते रहना.

शिव : जी मैडम, अब तो आना hi पड़ेगा, कंप्यूटर जो सीखना है.

ऐसे hi हमने कुछ देर बाते की फिर में वह से अनाथालय आ गया. जब में अंदर जा रहा था तो सरिता दीदी सामने मिल गयी.

सरिता : क्या बात है, स्कूल से घर नहीं आया, सीधे कही चला गया था क्या?

शिव : है दीदी वो काम था तो गया था. तेरी लतादिदी कब से तेरी रह देख रही है, कितनी बार पूछ चुकी है, ‘शिव आया?’ शिव आया?’.
 
अपडेट 20

अनाथालय पहुंच कर में अंदर जा रहा था तो सामने सरितादिदी मिल गयी.

सरिता : क्या बात है, स्कूल से घर नहीं आया, सीधे कही चला गया था क्या?

शिव : है दीदी वो काम था तो गया था.

सरितादिदी : तेरी लतादिदी कब से तेरी रह देख रही है, कितनी बार पूछ चुकी है, ‘शिव आया?’ शिव आया?’

में अंदर चला गया. मुझे दीदी दिखी नहीं तो में कपड़ेबदलने अपने रूम में गया. जब में कपडे बदल रहा था तो लतादिदी कमरेमे आयी.

लता : कहा था तू? स्कूल से घर भी नहीं आया?

शिव : वो दीदी थोड़ा काम था तो में स्कूल से सीधे पवनसीर के घर चला गया था.

लता : ऐसा क्या काम था की भूखे hi चला गया?

शिव : वो दीदी स्कूल यूनिफार्म के लिए पैसे चाहिए थे तो गया था.

लता : तो गयम में मांगलेता, घर जाने की क्या जरुरत थी.

शिव : क्यों की अभी अभी नौकरी पे लगा हु तो वो ओफ्फिसिअल्ली तो नहीं दे सकते थे तो उन्होंने व्यक्तिगत तोर पे पैसे देने थे तो घर बुलाकर दिए.

लता : चल ठीक है. चल तू जल्दी से आ जा भूखा होगा न?

शिव : नहीं दीदी उन्होंने जूस पिलाया था. आप यु hi परेशान हो रही है. आप चलिए में आता हु.

लता : है एक और बात, आज सबका चेकउप करने डॉक्टर आये थे, तू आया नहीं तो वो मैनेजर बहोत गुस्सा हो रहा था.

शिव : उसकी क्या जरुरत थी, सब तो ठीक hi है.

लता : वो पता नहीं, सब का खून भी लिया जाँच के लिए. मैनेजर डॉक्टर के साथ hi गया है, आएगा तो तुज पर गुस्सा करेगा.

शिव : कोई बात नहीं दीदी, में देख लूंगा.

दीदी अपने काम के लिए चली गयी. में कपडे बदल रहा था तो मुझे स्नेहा मैडम के साथ हुई आज की घटना याद आगयी. मुझे यकीं hi नहीं हो रहा था की मेने ऐसा किआ था. में उस मज़े को याद करते हुए कपडे बदले और खाने के लिए चला गया. रात को जब हम पढ़ने बैठे तो मेने विणा और रंजन को बताया की अब उन्हें पुराने यूनिफार्म लेने की जरुरत नहीं है हम नए लेंगे. ये सुन कर वो दोनों बहोत खुस हो गयी. पर फिर भी रंजन ने पूछ hi लिया.

रंजन : नए लेने के लिए पैसे कहा से आये?

शिव : तू क्यों फ़िक्र करती है? में जहा नौकरी करता हु वह से एडवांस मांग लिए है, वो सब छोडो चलो पढ़ाई करते है. और बताओ स्कूल में सब कैसा चल रहा है?

विणा : वैसे तो सब ठीक है, और सच में अब पढ़ने में भी मज़ा आता है. अब सब समाज में भी आता है.

शिव : अच्छी बात है, हमे आगे बढ़ना है तो यही एक रास्ता है हमारे लिए. अच्छा पढ़ेंगे तभी कोई ढंग की नौकरी मिले गई और तभी हम अपना भविस्य बना पाएंगे.

फिर हम पढ़ने बेथ गए. आज भी आखिर में विणा बाथरूम चली गयी. मुझे नहीं पता था की ये उन दोनों की प्लानिंग होती थी. जैसे hi वो गयी रंजन मेरे सामने देखने लगी. उसकी आँखों में निमंत्रण साफ़ देखा जा सकता था पर अब में समाज रहा था ये रास्ता कहा जाता है.

शिव : रंजन एक बात कहु?

रंजन : है कहो, इसमें पूछनेवाली क्या बात है.

शिव : देखो जो ये हम कर रहे है वो ठीक नहीं है.

रंजन : (मेरी और देखते hue)Thik नहीं है? तुम कहना क्या चाहते हो शिव.

शिव : जो हम ये कर रहे हे वो मर्द और औरत बच्चा पैदा करने के लिए करते है, और अगर हमने ऐसा किआ और तुम्हे बच्चा पैदा हो गया to..,hum अभी छोटे है, तुम समाज रही हो न में क्या कहना छह रहा हु?

रंजन :(मुस्कुराते hue)Tumhe किसने कहा की ऐसा करने से बच्चा पैदा होता है?

शिव : वो पढ़ाई में आया tha(Juth).

रंजन : क्या किश करने से बच्चा पैदा होता है?

शिव : नहीं.

रंजन : तो फिर.

शिव : पर कभी न कभी तो वो सब होगा hi जिस से बच्चा पैदा होता है.

रंजन : (शर्मा जाती है, फिर संभल कर, धीमी आवाज me)Bachcha न पैदा हो उसके लिए भी कई रस्ते होते है.

शिव : (में उसे आश्चर्य से देखने laga)Wo कैसे?

रंजन : वो सब बाद में बताउंगी, अभी किश करने से तो बच्चा नहीं होने वाला न, विणा आती होगी.

शिव :(में उसकी बात समाज गया तो मेने उसको खड़ा किआ और दिवार से लगा diya.)Tumhe मज़ा आता है न ऐसा करने me?(Wo मेरी आँखों में देख कर मुस्कुरायी) मैंने उसके पतले लबो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उसको चूमने लगा. वो भी मेरे बालो में हाथ घूमते हुए मुझे किश करने लगी. आज में अच्छी उसके चूचिया दबा रहा था. वो मचलते हुए मेरे होठो को भिगो रही थी. मेने एक हाथ पीछे ले जाते हुए उसके एक नितम्ब को पकड़ लिया और उसे दबाने लगा. वो चौक गयी और अपनी आंखे बड़ी कर के मुझे देखने लगी, पर थोड़ी देर में hi वो शांत हो गयी. में उसको किश करते हुए उसके नितम्ब को दबाने लगा. स्नेहा मैडम के मुकाबले उसके नितम्ब छोटे थे पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरा लुंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था जिसे में उसकी छूट पे दबा रहा था. वो और उत्तेजित होते हुए अपनी साडी उत्तेजना मेरे होठो को चूसते हुए निकल रही थी. जब हमें विणा की आहत सुनाई दी तो हम अलग हुए. दोनों हांफ रहे थे. मेने दोबारा एक हलकी किश की और गूडनिघत बोल कर अपने कमरे की और निकल गया. जब विणा कमरे में आयी तो रंजन को दिवार से चिपके हुए खड़े पाया जो अभी भी आंख बंद किये अपनी सांसे दुरुस्त कर रही थी.

विणा : क्या हुआ? यहाँ क्यों ऐसे कड़ी है?

रंजन : (उसको देखती है फिर शर्माकर मुस्कुराते हुए निचे देखते हुए) कुछ नहीं.

विणा : है है मुझे सब पता है क्या हुआ होगा. (नरम आवाज में पूछती hai)Tuje उसके साथ ऐसा करते हुए शर्म नहीं आती?

रंजन : (मुस्कुराते हुए उसे देखती hai)Agar शर्म करती रहूंगी तो हो चूका. तुजे में समजा नहीं सकती कितना मज़ा आता है जब वो मेरे साथ वो सब करता है तो.

विणा : क्या सच में बहोत मज़ा आता है?

रंजन : है यार बहोत मज़ा आता है, ऐसा लगता है में आसमान में उड़ रही हु, दिल करता है वो ये करता hi रहे करता hi रहे कभी न रुके.

विणा :(सोचमे दुबे हुए उसके चेहरे को देखती रहती hai)Chal ठीक है अब सोना नहीं है क्या?

फिर दोनों सब ठीक करके सोने लगती है. जब में कमरे में पंहुचा तो दीदी वैसे hi ब्लाउज और पेटीकोट में सोई हुई थी. मेरी आहात सुन कर उन्होंने आंखे खोली. मेने भी कपडे बदले और सिर्फ अंडरवियर में उनके बाजु में लेट गया. रंजन के साथ जो अभी कर के आया था तो में थोड़ा गरम था तो मेने दीदी को अपनी और खींचते हुए अपने शाइन से चिपका लिया और आंखे बंद कर ली. उन्होंने भी अपना एक हाथ मेरे छाती पे रखते हुए उसे सहलाने लगी और अपनी आंखे बंद कर ली.

लता : कितने पैसे दिए उन्होंने?

शिव : 5000 रुपए.

लता : (आंखे खोलते hue)Kya, इतने शेयर? क्यों ?

शिव : दीदी मेरे और उन दोनों के कपड़ो के लिए पैसे तो चाहिए न.

लता : पर इतने पैसे तुजे दे दिए. तू तो कह रहा था की तेरी तन्खा ढाई हज़ार hi है.

शिव : दीदी आप को तो पता है हम अनाथो पर कई बार लोग अपनी दया दिखा देते है. ऐसा hi समज लो की उन्होंने हमें दान दिया है. और मेरी टीचर ने भी 3000 दिए है.

लता : उनसे क्यों लिए?

शिव : में तो मन कर रहा था दीदी, उन्होंने जबरदस्ती दिए.

लता : (फिर अपनी आंखे मुंड लेती hai)Chal कोई बात नहीं, और सही कहा तूने हम जैसे अनाथो पर लोग दया दिखते है. चल अच्छा है तेरी टेंशन तो दूर हो गयी.

फिर हम दोनों ऐसे hi सोने लगे. थोड़ी देर बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी बार बार स्नेहा मैडम के साथ हुई वो घटना मेरे दिमाग में आ रही थी. अनजाने में hi में आंखे बंद किये हुए दीदी की पीठ सहलाने लगा. ऐसे hi काफी समय गुजरा होगा और मेरा हाथ फिसल कर दीदी के नितम्ब तक पहुंच गया. उनके भरे हुए पृष्ठ नितम्ब को हलके हलके दबाने लगा जिस से मेरा लुंड अकड़ने लगा. अपने खयालो में घूम में दीदी के नितम्ब को दबाये जा रहा था की अचानक मुझे स्थिति का बहन हुआ की में क्या कर रहा हु, में दर गया और डरते हुए आंख खोल दी. में दीदी के चेहरे को देखने लगा. दीदी की आंखे बंद थी वो सो चुकी थी, मुझे थोड़ा सकूँ मिला. मेने अपना हाथ हटा लिया और दीदी के चेहरे को देखने लगा. सचमुच वो कितनी प्यारी थी. छोटे बच्चे जैसा मासूम सा चेहरा और उनकी बोलती आंखे जो अभी खामोश थी मतलब की बंद थी. पतले प्यारे होठ देख कर मेरा मन ललचाने लगा, पर मेने अपने आपको कण्ट्रोल किआ और उन्हें देखने लगा. सुनिश्चित करने के लिए मेने दीदी को एक दो बार पुकारा पर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मेने मान लिया की दीदी गहरी नींद में सगाई है. (पर लता जग रही थी वो जानबुज कर ऐसे दर्शा रही थी की वो सो रही है. वैसे वो सो चुकी थी पर अपने नितम्ब पर शिव के हाथ को महसूस करके वो जाग गयी थी पर सोने का नाटक करती रही.) जब मेने देखा की दीदी सो रही है तो मेने आहिस्ता से अपने होठ दीदी के होठो के पास ले गया और उनसे टच करा दिए और अपना हाथ उनके नितम्ब पर दोबारा रखदिया. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. एक तरफ तो मुझे लग रहा था की ऐसा नहीं करना चाहिए पर में अपनी भावनाओ को सँभालने में असमर्थ था. मुझे अपने होठो पर दीदी की सांसे महसूस हो रही थी, मेरा शरीर काफी उत्तेजना महसूस कर रहा था तो मेने धीरे धीरे दीदी का पेटीकोट ऊपर की और उठाया और अपना हाथ उनके नंगे हो चुके नितम्ब पर रख कर उसे सहलाने लगा. मेने कब दीदी के होठो चूसना चालू कर दिया मुझे पता hi न चला. (लता बड़ी मुस्किलो से अपने आपको संभाले हुए थी. मैं थोड़ा आगे खिसकते हुआ अपने लुंड को लतादिदी की छूट से लगा दिया जो कपडे के पीछे थी. दीदी के होठ हलके हलके कम्प रहे थे, उनके मुँह की मिठास मुझे और ललचा रही थी, में उनके लबो को हलके हलके चूसने लगा. जब मुज से रहा न गया तो मेने डरते हुए बड़ी सावधानी से पेटीकोट का आगे का हिस्सा भी ऊपर सरका दिया जिस से लतादिद की छूट निर्वस्त्र हो गयी. मेने अपनी चड्डी भी निचे सरकायी और अपना लुंड बहार निकल लिया और उसे छूट से लगा दिया. लुंड उनकी छूट के बालो से लगा हुआ था, मेने आहिस्ता से उनके पेअर को उठा ते हुए अपने ऊपर चढ़ा लिया और वो थोड़ा आगे खिसक लिया. (लता अपनी छूट पे शिव के नंगे लुंड को महसूस करके बेकाबू होने लगी. वो बड़ी मुश्किल से अपनी बढ़ती सांसो को काबू किये हुए थी. उसकी छूट से बहोत रास निकल रहा था. उसकी हालत और ख़राब होने लगी जब शिव अपने लुंड को एडजस्ट करते हुए उसकी छूट की दरार पे रगड़ रहा था तो उसकी छूट से रास की नदिया निकल कर शिव के लुंड को भिगोने लगी, शिव के लुंड हिलने पर उसकी पूरी छूट गीली हो रही थी. जब उसे एहसास हुआ की शिव ने अपना लुंड उसके के छेद पर टिका दिया ये तो उसकी धड़कने तेज हो गयी, शिव के लुंड को महसूस करके वो पूरी तरह सेउत्तेजित हो चुकी थी.) में अपने लुंड पर वो चिकनाहट और छेद की गर्मी महसूस कर रहा था. मेने थोड़ा दबाव डाला तो छूट की फांके फैलने लगी और लुंड के टोपे ने पूरी तरह से छूट के छेद को धक् दिया. मेने थोड़ा और दबाव बढ़ाया पर लुंड अंदर नहीं जा रहा था. (लता पागल हो रही थी, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, उसे दर भी लग रहा था पर वो तैयार थी इसके लिए. शिव कोशिस कर रहा था पर लुंड थोड़ा भी अंदर नहीं जा रहा था. शिव की कोशिस करते हुए हलके हलके ढके लगा रहा था. लता से ये बर्दास्त न हुआ और वो झटके कहते हुए झड़ने लगी.) दीदी को झटके कहते हुए देख में दर गया और अलग होने लगा पर दीदी के पेअर ने मुझे ऐसे जकड रक्खा था तो में दूर हो न सका, में वैसे hi रुका रहा. थोड़ी देर में लतादिदी शांत हो गयी. मुझे पता चल गया था की दीदी जाग रही है, मेरे पसीने छूट रहे थे, मुझे दर लग रहा था की दीदी को क्या जवाब दूंगा. मेने डरते हुए उन्हें hi देख रहा था पर दीदी की आंखे बंद hi रही. (शिव को लगा की वो सोई हुई है तो उसने अब ज्यादा रिस्क लेना सही न समजा और ऐसे hi अपने खड़े लुंड के साथ सोने की कोशिस करने लगा). और उसको नींद भी आ भी गयी.) (जब काफी देर तक कोई हरकत न हुई तो लता ने अपनी आंख हलके से खोल कर शिव को देखा जो सो चूका था. वो उसके प्यारे से चेहरे को निहारने लगी फिर आगे खिसक कर उसके होठो से अपने होठ जोड़ दिए , वो ऐसे hi लेती रही और नींद में खो गयी.)

यहाँ जब पवन घर पंहुचा तो उसने स्नेहा को बिस्तरमे लेता हुआ पाया. दरवाजा भी लॉक नहीं था. वैसे तो ये सेफ इलाका था तो डरने की कोई बात नहीं थी, पर फिर भी उसे चिंता हुई. वो फ़ौरन अपनी बीवी को धुंध ने लगा तो वो उसे बैडरूम में hi मिली.

पवनसीर : क्या हुआ डार्लिंग? अभी से सो रही हो.

स्नेहा : आ गए aap(Wo बिस्तर से उठनेकी कोशिस करती है) Ahhhhhh(Wo वापस लेट जाती है)

पवनसीर : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ तुम्हे? तुम ठीक तो हो?

स्नेहा : (क्या बताती अपने पति को की क्या हुआ hai)Kamar में दर्द है थोड़ा सा.

पवनसीर : ये कैसे हो गया? ध्यान रक्खा करो अपना. में तुम्हे दवाई देता hu(Usne बदन दर्द की दवाई दी) इस से तुम्हे आराम आ jayega.(Sneha को बहोत शर्म आ रही थी वो अपना चेहरा दूसरी और कर के लेट gayi)(Pawan को पुच्छने में शर्म भी आ रही thi)muje पूछना तो नहीं चाहिए पर क्या सब हो गया?

स्नेहा :Hmmmm(Usne संक्षिप्त में hi उत्तर दिया)

पवनसीर : (अपना शिर झुकाये hue)Sorry स्नेहा, मेने तुम्हे ऐसी शर्मिंदगी भरी परिस्थिति में डाला.

स्नेहा : (उसने पवन को देखा जो बहोत शर्मिंदा दिख रहा tha)Sorry मत कहिये, में समझती हु आप को कितना दुःख हो रहा है.

पवनसीर : तुम्हे क्या लगता है? सब ठीक हो जायेगा.

स्नेहा : क्या कहना चाहते हे आप?

पवनसीर : मेरा मतलब है, तुम कह रही थी की ये उसका पहली बार था, तो सब ठीक से हो गया.

स्नेहा : (अब आप को क्या कहु पवन, मेरी क्या हालत कर दी usne)Hmmmm.

स्नेहा : तुम्हे बुरा नहीं लग रहा पवन? तुम अपनी hi बीवी को दूसरे के साथ...

पवनसीर : लग रहा hi स्नेहा, बहोत बुरा लग रहा है, पर शायद मेने अपने आपको समजलिया है. ठीक है तुम आराम करो में खाना बहार से ले आता हु.

स्नेहा अपनी आंखे बंद किये डॉक्टर से हुई बात को याद करने लगी जो उसने शिव के जाने के बाद की थी.

स्नेहा : (डॉक्टर को फ़ोन लगाती hai)Hello डॉक्टर, में स्नेहा बोल रही हु, सॉरी आप को इस वक़्त फ़ोन करने के लिए.

डॉक्टर : (वो एक लेडी थी) कोई बात नहीं मरस स्नेहा, बोलिये किसलिए फ़ोन किआ?

स्नेहा : मैडम एक बात पूछनी थी, क्या एक दिन सेक्स करने से बच्चा रह शक्ति है?

डॉक्टर : मैंने कहा था न आप को की आप के पति के शुक्राणु काम है तो ये पॉसिबल नहीं है.

स्नेहा : नहीं मैडम में किसी और के लिए पूछ रही हु.

डॉक्टर : देखिये, ऐसा सूरे तो नहीं कह शक्ति, एक बार में हो भी शक्ति है और नहीं भी, नॉर्मली अगर किसी महिला के लास्ट पीरियड के बाद चौदवे दिन से लेकर एक हफ्ते तक रोज़ या तो फिर कमसे काम दो दिन में एक बार सेक्स किआ जाये तो चान्सेस ज्यादा बढ़ जाते है.

स्नेहा : थैंक यू मैडम, और एक बार फिरसे सॉरी, इस टाइम डिस्टर्ब करने के लिए.

डॉक्टर : कोई बात नहीं, स्नेहजी. और कुछ?

स्नेहा : नहीं मैडम, थैंक यू.

स्नेहा अपनी आँखे बंद किये यही सोच रही थी की अब उसे क्या करना चाहिए. क्या शिव के साथ dobara...uska दिल तो कह रहा था की उसे करना चाहिए पर उसके संस्कार मन कर रहे थे. भले hi उसने बच्चे के लिए ये सब किआ था पर उसे पवन के लिए दुःख भी फील हो रहा था. वही दूसरी तरफ जो उसने शिव के साथ समय बिताया था वो उसे बार बार याद आ रहा था. वो कभी उदास हो जाती तो कभी मुस्कुराने लगती.

रोज की ररहा जब में सुबह उठा तो दीदी को अपने ऊपर आधे से ज्यादा चढ़े हुए पाया. मुझे रात वाली घटना याद आ गयी तो मुझे थोड़ा दर भी लगा, पर दीदी को ऐसे निश्चित सोये देख मुझे भी शकुन मिला. मेरा नंगा लुंड दीदी के पेअर के निचे दबा हुआ था. बड़ी सावधानी से दीदी के पेअर को हटाया और अपनी जगह तकिया रखदिया और खड़ा हो गया. जब मेने खड़े हो कर दीदी की और देखा तो उनका एक पेअर मुदा हुआ था और उनके नंगे चुत्तड़ दिख रहे थे.





स्नेहा मैडम से तो छोटे थे पर बहोत आकर्षक लग रहे थे. उसे देख मेरा लुंड खड़ा होने लगा. मेने अपने आप को बहोत गालिया दी, बड़ी मुश्किल से मेने अपने आप को संभाला और पेटीकोट से उस नज़ारे को धक् दिया और लम्बी साँस छोड़कर बाथरूम की और बढ़ गया. (जैसे hi शिव गया लता ने आहिस्ता से उसकी और देखा. जब वो चलागया तो वो मुस्कुराने लगी.)

लता : किसने रोका है तुम्हे? कर लेता जो करना चाहता है. अब में थोड़े hi कहूँगी की आ कर ले मेरे साथ. आगे तो तुम्हे hi बढ़ना होगा शिव. मुझे भी उस पल का इंतजार है.

शरमाते हुए लता ने अपना चेहरा छुपालिया और वापस सो गयी. शिव तैयार हो कर निकलने लगा तो सामने सरितादिदी को देखा तो वो उनके पास चला गया. शिव को देख कर वो भी उसकी तरफ hi चल दी.

शिव : गुड मॉर्निंग दीदी.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Good मॉर्निग, तो चल दिए काम पर.

शिव : जी दीदी.

सरिता : (तीखी मुस्कान के sath)To फिर कब चल रहे हो नहाने?

शिव : (उनकी बातो से मुझे थोड़ी शर्म आ गयी) क्या दीदी आप भी.

सरिता : तो तुजे अच्छा नहीं लगा मेरा नहलाना, है न? चलो कोई बात नहीं.

शिव : क्या दीदी आप भी?

सरिता: अगर अच्छा लगा तो कह न?

शिव : (शरमाते hue)Ji दीदी.

सरिता : तो फिर कब चलेगा मेरे साथ नहाने ?

शिव : (मुस्कुराते हुए) जब आप कहे.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Chal ठीक है, करती हु कुछ.

वो दिन पूरा ऐसे hi गुजर गया. दूसरे दिन जब में जूही मैडम के घर के पास से गुजर्राह था तो मेने देखा की घर में लाइट जलीहुई है तो में उस और मुद गया.
 
सॉरी फ्रेंड्स,

ी ट्राइड तो गिव अपडेट टुडे बिफोर मिडनाइट.
 
अपडेट 21

एक दिन बाद जब में जूही मैडम के घर के पास से गुजर्राह था तो मेने देखा की घर में लाइट जलीहुई है तो में उस और मुद गया. मेने बेल्ल बजायी पर कोई नहीं आया, मेरे पिछले अनुभव से मुझे याद आया की शायद वो बाथरूम में होंगी तो वही खड़ा उनका वेट करने लगा. थोड़ी देर में दरवाजा खुला तो मेने मैडम को हफ्ते हुए पाया.

शिव : क्या हुआ मैडम, आप हांफ क्यों रही है?

जूही : मुझे लगा तुम चले जाओगे इस लिए दौड़ते हुए आयी न इस लिए.

शिव : मेने लाइट देखि, इस लिए आ गया. क्या आज आप चलरही है?

जूही : है है, तुम अंदर आओ?

में अंदर दाखिल हुआ, आज वो तौलिये में नहीं थी, न जाने क्यों पर मुझे मायूसी हुई. वो नाहा चुकी थी और उन्होंने जो पहना था वो भी बहोत hi ज्यादा हॉट था.





(देक्लैमेर: इमेज उप्लोडेड फ्रॉम इंटरनेट)

उन्होंने चुस्त चड्डी पहन रक्खी थी जिसमे से भरे हुए पोस्ट नितम्ब अपना ाकारस्पस्ट दर्शा रहे थे और चलने की वजह से वो थिरक भी रहे थे. वो ऐसे चल रही थी की जैसे हवा चल रही हो, एक दम नपे तुले कदम और लहराता हुआ बदन. सच में जूही मैडम एक कमल की लड़की थी. (जूही थोड़ा आगे जा कर रुकी और पीछे मुड़कर देखा तो शिव को अपने नितम्ब को घूरते पाया. वो जैसे किसी और hi दुनिया में था. वो इतने ध्यान से उसे देख रहा था जैसे वो कोई अलौकिक चीज देख रहा हो. वो मुस्कुरा कर अंदर चली गयी. वो अंदर जा कर भी मुस्कुरा रही थी. वैसे तो कई लोग उसे घूरते है और उसे वो अच्छा भी नहीं लगता था. वो सोचती थी की कैसी गन्दी नजरो से उसे देख रहे है पर जब आज शिव उसे ऐसे देख रहा था तो उसे वो अच्छा लगा, उसे ऐसा नहीं लगा की शिव उसे गन्दी नज़रो से देख रहा है, आज तक उसे कोई पसंद hi नहीं आया था या यु कहे की वो अपने खेलकूद के जीवन में इतनी व्यस्त थी की उसने कभी उस बारे में सोचा hi नहीं. पर जब से वो शिव से मिली थी तब से न जाने उसके दिल में क्या उथल पुथल मची हुई थी. वो रोज उसके सामने ऐसे तौलिये में जाती थी ताकि वो उसको ऐसे देख सके. जब वो उसे ऐसे देखता था तो उसे भी अच्छा लगता था. आज जब वो तौलिये में नहीं थी तो शिव के चेहरे की वो मायूसी उसे साफ़ नजर आयी थी. (वो मुस्कुराती हुई यही सब सोचते हुए दूध बना रही थी अभी उसने इस से ज्यादा कुछ सोचा नहीं था. वो थी भी तो पूरी तरह से कुवारी. तन से और मान से. पर शिव के साथ कसरत करते हुए उसे चुना और उसकी छुअन को महसूस करना उसे बहोत अच्छा लगता था. वो भी समझती थी की ये ठीक नहीं, क्यों की वो उस से छोटा है तो आगे कुछ तो मुमकिन नहीं था पर फिर भी उसे ये सब अच्छा लगता था या यु कहे की वो शिव को बहोत पसंद करने लगी थी. उसने दूध बनाया और शिव को दिया.)

शिव: आप ऐसे बिना बताये कहा चालीगयीथी?

जूही : (मुस्कुराते hue)Kyu मुझे याद कर रहे थे?

शिव : और नहीं तो क्या, ऐसे अचानक चली गयी.

जूही : अपने घर गयी थी, माँ का फ़ोन आया था तो जाना पड़ा.

शिव : सब ठीक है न? मेरा मतलब है ऐसे अचानक फ़ोन आया और आप चालीगयी इस लिए पूछ रहा हु.

जूही : है सब ठीक है, वैसे कल क्या तुम स्कूल से छुट्टी ले सकते हो ?

शिव : (सोचते hue)Ha क्यों नहीं मैडम, पर क्यों ? कोई काम है.

जूही : कल दोपहर को हमे कही जाना है, में तुम्हे किसी से मिलवाना चाहती हु.

शिव : मुझे मिलवाना चाहती hai,kis से मैडम ?

जूही : मेरे कोच सर से.

शिव : आप के कोअक्सीर, वो क्यों मैडम?

जूही : वो सब तुम्हे वही पताचलजाएगा. कल 2 बजे निकलेंगे. शाम को देर हो सकती है तो तुम घर पे बोल देना और पवनसीर से में बात करलूँगी. वैसे स्कूल में भी में तुम्हारी मैडम से बात करलूँगी.

शिव : ठीक है madam.(Hum दोनों ने दूध ख़तम कर लिया था)

जूही : में कपडे चेंज करलेती हु फिर मेरे स्कूटर से hi चलते है. दौड़ने की कसार ट्रेडमिल पे पूरी करलेंगे.

फिर हम गयम चले गए. पवनसीर से मुझे शर्म महसूस हो रही थी. मेने उनकी बीवी के साथ वो सब किआ था. मेने उनसे जितनी हो शेक दुरी बनाये रक्खी, वो भी अपने काम में बिजी रहे और में अपने. जूही मैडम उनसे मिलने गयी और कल के लिए उन्होंने मेरे बारे में बात कर लिथि. जब जूही मैडम कहे तो वो मन तो करने से रहे. गयम में उन्होंने मुझे बहोत कसरत करवाई. फिर जूही मैडम मुझे घर तक छोड़ने आयी. मेने उन्हें अंदर आने के लिए कहा पर उन्होंने कहा की उनको अभी काम है तो वो चली गयी. जब में अंदर पंहुचा तो सब किचन में थे. मेने लता दीदी को कहा की में आ गया तो पीछे से आवाज आयी. “ आज एक नयी गाड़ी छोड़ने आयी थी राजकुमार को” मेने पीछे मुड़कर देखा तो सरिता दीदी थी. में मुस्कुराता हुआ वह से भाग गया.

सरिता : (लता ko)Dekh उसको छोड़ने आने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ती hi जा रही है. संभल अपने शिव को नहीं तो वो उड़न छू हो जायेगा.

लता : तू उसकी छोड़ और अपने काम में ध्यान लगा.

सरिता : तुजे बड़ी जल्दी है, में मन लुंगी उसे और सीखा भी दूंगी तू चिंता मात कर.

लता : तुजे और कुछ सूझता नहीं है क्या, (किचन की और इस्सर कर ke)me इस काम की बात कर रही हु. घडी देख कितना टाइम हो गया है, अभी सब को खाना चाहिए होगा.

सरिता : (अपना मुँह बनाते hue)Ha है, करती हु.

वो दोनों ऐसे hi बाते करते हुए अपना काम करने लगी. तैयार हो कर मेने नास्ता किआ और स्कूल की और निकल गया. जब में रस्ते में दौड़ते हुए जा रहा था तो मेने देखा की दो लड़के एक लड़की जो अपनी साइकिल लिए कड़ी थी उसके साथ बात कर रहे थे. मेने ध्यान से देखा तो लगा वो लड़की रो रही है और वो लड़का उसके साथ जबरदस्ती बात कर रहा है. कुछ गाड़िया गुजर रही थी पर रास्ता तक़रीबन सुमसान hi था. जब में नजदीक पंहुचा तो देखा की उस लड़की के पास स्कूल बैग भी है जो साइकिल पे रक्खे हुए था. वो लड़का जिस तरह से उस से बात कर रहा था तो मुझे लगा वो उसे धमका रहा है. मुझे कुछ गड़बड़ लगी तो में उनके पास चला गया.

लड़का : देख में तुजे समजा रहा हु, मेरी बात मन ले, ऐश karegi.(Wo लड़की डरते हुए उसे देख रही थी, उसकी आँखों से बहते ासु उसे गाल से बह रहे थे, लड़की दिखने में खूबसूरत थी और तक़रीबन मेरी आगे की hi लग रही थी)

शिव : क्या चल रहा है?

लड़का : (मेरी और घर कर देखते hue)Chal फुट बे यहाँ से?

शिव : (मेने लड़की की और देखा , वो मुझे जनि पहचानी लगी तो मेने उसी से puchha)Kya हुआ है?

लड़की : (रट हुए) मेरी साइकिल पंचर हो गयी है और ये लोग मुझे परेशान कर रहे है.

शिव : (लड़को के सामने देखते हुए) क्यों , क्या परेशानी है तुम दोनों को?

लड़का : (अपने से ऊँचे कद के लड़के को देख कर वो अंदर से तो दर गया था पर लड़की के सामने वो जाहिर नहीं करना चाहता था) देख बे सेल, तू मुझे जनता नहीं, चुप चाप यहाँ से निकल ले इसी में तेरी भलाई है.

शिव : देखो भाई, में चला जाऊंगा, पर ऐसे किसी लड़की को परेशान नहीं करना चाहिए.

लड़का : तुजे क्या, तू काम कर अपना, जा यहाँ से वर्ण पिटेगा तू जनता नहीं मुझे.

शिव : (लड़की की और देख kar)Kya तुम इस से बात करना चाहती ho?(Ladki ने न में शिर hilaya)dekhliya, वो तुम से बात नहीं करना चाहती, अब्ब जाओ यहाँ से.

लड़का : (शिव को धक्का देते hue)Tuje बोलै न निकल यहाँ से. तुजे समाज नहीं आता.

मुझे वैसे भी दर नहीं लगता, और क्या था मेरे पास जो में दारू, पर फिर भी लड़ाई जगहदा करना अच्छी बात नहीं होती.

शिव : देखो भाई, लड़की अगर राज़ी है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं, तुम सराफत से उसके साथ बात करलो, में यही खड़ा हु.

लड़की : (मुझे देख उसके अंदर भी थोड़ी हिम्मत आ गयी थी, उसने रोना बंद कर दिया था और मेरे पीछे कड़ी हो gayi)Muje कोई बात नहीं करनी इस से. मेने इससे मन भी किआ पर ये जबरदस्ती मेरे साथ बात कर रहा है.

लड़का : मेने तेरी मर्जी पूछी साली. इससे देख कर उछाल मात. पहले इससे ठीक करता hu.(Meri और बढ़ kar)To तू नहीं जायेगा यहाँ se.(Usne मुझे एक घुसा मारा, पर में वही खड़ा रहा, वो मेरी और आश्चर्य से देखने लगा)

शिव : देख भाई जगदे में कुछ नहीं रक्खा, अभी भी कह रहा हु, इस से बात करनी है तो अच्छे से कर ले, अगर ये मानती है तो ठीक है, और अगर वो नहीं मानती तो जबरदस्ती मात कर.

लड़का : अपने आप को हीरो समझता hai(Ye कह कर उसने मेरे चेहरे पर घुसा मरना चाहा, पर मेने अपना शिर हटा लिया, तो उसका घुसा हवा में hi लगा, उसे और गुस्सा आया और वो मुझे मरने के लिए तरय करने लगा पर में बच hi जाता था.)

लड़का :(दूसरे लड़के से पकड़ इससे, उस लड़के ने मेरी और डरते हुए dekha)abe पकड़ isse.(Wo लड़का दर रहा था वो मेरे पास hi नहीं आया)

लड़का : सेल तुजे तो me...(Kehte हुए मुझे घुसा मरने लगा तो में हैट गया और उसे एक झापड़ मारा, झापड़ लगने से उसको दिन में टारे दिखने लगे, वो अपना शिर झटक कर अपने आप को ठीक करने की कोशिस कर रहा था)

शिव : कोण है बे तू? कब से बोल रहा है, जनता नहीं मुझे, जनता नही मुझे.

लड़का : (जोरदार तमाचे से उसके कानो में सांता छ गया था. पीछे खिसकते hue)Me देख लूंगा तुम्हे सेल, (कहते हुए वो नजदीक पड़ी अपनी बाइक की तरफ भागने laga)Tuje बता ता हु में कोण हु. तू तो अब गया सेल.

शिव : (हाथ से इस्सर कर के बुलाते hue)Yaha आ और बता कौन है tu.(Me उसकी और बढ़ा तो वो अपनी बीके चालू कर के भाग गया.)

लड़की : थैंक यू शिव.

शिव :(चौकते हुए, में उस लड़की को देखने लगा, ये मुझे जानती थी, मेरा नाम भी पता था use)Kya तुम जानती हो मुझे?

लड़की : क्या तुम मुझे नहीं जानते?

शिव : (सोचते hue)Muje लगता तो है की मेने तुम्हे कही देखा है, पर याद नहीं आ रहा, कोण हो तुम?

लड़की : क्या शिव, एक hi क्लास में पढ़ते है फिर भी मुझे नहीं पहचानते ,में वैस्वी की फ्रेंड हु संयम.

शिव : (चौकते हुए मान में “ो तेरी, है याद आया ये वैस्वी की बाजु में तो बैठती है.” मेने हमेसा वैस्वी की और hi देख था तो मुझे ये लड़की का इतना ध्यान hi नहीं tha)Sorry, वो मुझे ध्यान नहीं रहा. तुम स्कूल hi जा रही हो न तो चलो साथ में चलते है, रस्ते में साइकिल वाले को दे देना और छूट ते वक़्त ले लेना. में उसकी साइकिल को ले कर चलने लगा और वो मेरे साथ में.

संयम : एक बात पुछु? क्या तुम्हे वैस्वी अच्छी लगती है?

शिव : (अचानक हुए इस सवाल से में चौक gaya)Nahi ऐसी तो कोई बात नहीं? पर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?.

संयम : जूथ मत बोलो मेने तुम्हे कई बार उसको देखते हुए देखा है, और इसीलिए तो उसके बाजु में बैठती हु फिर भी तुमने मुझे नहीं पहचाना.

शिव : नहीं, सचमुच ऐसी कोई बात नहीं है, तुम दोनों आगे बैठती हो और में पीछे. जब सुरुआतमे हमारे मार्क्स डिसकसे हुए थे तब मुझे पता चला था की वैस्वी के मार्क्स जस्ट मेरे पीछे है तो में उसे देखना चाहता था की कौन है वो. पर कभी उसका चेहरा दिखा hi नहीं. अक्सर उसका पिछले हिस्सा hi दीखता था. और जब में वह से गुजरता तो वो अक्सर तुमसे बात करती होती थी तो उसका चेहरा कभी देख नहीं पाया. मुझे तो बस इतना देखना था की वो कौन है? इसी लिए में उसे देख रहा था. वो भी एक दिन मुज से टकरा गयी थी तो मेने उसको भी नहीं पहचाना था. पर शायद वो मुझे जानती थी. तो मेरे न पहचान ने पर वो भी गुस्सा हो गयी थी. जैसे तुम अभी मुज पर गुस्सा हो रही हो.

संयम : (हस्ते hue)Me गुस्सा नहीं हु, वैस्वी को मेने hi बताया था की तुम उसे देखते हो और तुमने उसे पहचाना hi नहीं तो वो गुस्सा तो करेगी hi. तुम थोड़े न मुझे देखते थे की में मनु की तुम मुझे जानते हो. पर फिर भी इतना तो दुःख है की तुम मेरे बाजु में बैठी लड़की को देखते हो पर कभी तुम्हारी नज़र मुज पर नहीं पड़ी.

शिव : उसके लिए सॉरी संयम, पर मेने तुम्हे बताया न की, में वह लड़कीअ है इस लिए नहीं देख रहा tha,me इस लिए देख रहा था की जिसके मार्क्स जस्ट मेरे से पीछे है तो वो है कोण. और वैसे भी में लड़कीओ को नहीं घूरता.

संयम : (छेड़ते hue)Kyu लड़कीअ अच्छी नहीं लगती?

शिव : (हस्ते hue)Aisi बात नहीं है? पर ये सब मेरे लिए नहीं है, में अपनी पढ़ाई पर hi ध्यान देना चाहता हु.

संयम : पढ़ाई पर तो में भी ध्यान देती हु पर इसका मतलब ये तो नहीं की सब कुछ भूलकर सिर्फ पढ़ाई hi करे. भले hi आप ऐसे वैसे चक्करो में न पड़े पर फिर भी दोस्त तो बना hi सकते है.

शिव : संयम तुम्हे मालूम नहीं है की में एक अनाथ लड़का हु, और आज तक का मेरा अनुभव है की लोग अक्सर मुझसे दोस्ती करना पसंद नहीं करते, या उनके पेरेंट्स उन्हें मुझसे दूर रहने को कहते है. तो इसी लिए मेने कभी किसी के साथ दोस्ती नहीं की. है यहाँ क्लास में मुझे दो दोस्त जरूर मिल गए है.

संयम : ओह , मुझे पता नहीं था, सॉरी, पर तुम अनाथ हो तो इस से क्या फर्क पड़ता है?

शिव : पता नहीं, पर लोग तो हमेसा हमें कुछ अलग नज़र से hi देखते है जैसे हम अछूत हो.

संयम : मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, और अगर तुम्हे सही लगे तो में तुम्हारी दोस्त बनना चाहूंगी.

शिव : (उसकी और देखते hue)Tum सचमुच अच्छी हो.

संयम : दिखने में भी?

शिव : (मेने भी नौटंकी करते हुए उसकी और गौर से देखने की एक्टिंग की, थोड़ा मुँह बनाते हुए न में गर्दन हिलायी, वो भी रोने जैसी सुकरात बनाने लगी, फिर हस्ते hue)Ha दिखने में भी अच्छी हो.

हम दोनों जोर से हसने लगे. रस्ते में साइकिल रिपेयरिंग वाले की दुकान स्कूल के पास hi थी तो उसको को साइकिल देदी. वह से हम दोनों चलते चलते स्कूल पहुंच गए.( वैस्वी दोनों को दूर से देखलेति है. संयम को शिव के साथ देख कर पता नहीं क्यों पर उसे जलन होती है और वो दूसरी और मुँह कर लेती है जैसे उसने देखा hi न हो. थोड़ी दूर महेश और हर्ष भी खड़े हुए थे जिन्होंने भी इन दोनों को देखा.) गेट के अंदर दाखिल हो कर हम दोनों ने एक दूसरे को bye बोलै और अपने अपने दोस्तों की और चल्दीए. संयम, वैस्वी के पास पहुंची.

संयम : Hi, वैस्वी.

वैस्वी : ओह! आगयी तुम.

संयम : है , चलो क्लास में चलते है.

वैस्वी : (जब संयम ने सामान्य रह कर hi जवाब दिया तो उसने संयम से पूछ hi liya)Kiske साथ आयी तुम?

संयम : (हस्ते hue)Muje पता है तुमने मुझे शिव के साथ देखा था, नाटक क्यों करती है?

वैस्वी : तू उसके साथ? क्यों?

फिर संयम उसे जो हुआ वो सब बता देती है. उसके और शिव के बिछ हुई बातो को छोड़ कर. यहाँ शिव भी अपने दोस्तों को सब बता देता है,

महेश : कोण थे वो लड़के?

शिव : पतानहीं यार. छोड़ उनको हमें क्या लेना उनसे. चलो क्लास का टाइम हो गया है वर्ण मैडम घुसने नहीं देगी.

जब शिव और उसके दोस्त क्लास में एंटर होते है तो वैस्वी शिव की और देखती है पर शिव की आंखे संयम की और थी और वो अपनी गार्डन हिला कर “hi” करता है तो वो भी मुस्कुरा कर रिप्लाई में मुस्कुराती है. ये देख वैस्वी पूरी तरह जलभुन जाती है. पर वो बोलती कुछ नहीं. क्लास सुरु हो जाती है और हम पढ़ने में व्यस्त हो जाते है.
 
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फ्रेंड्स
 
होली की वजह से अपडेट नहीं दे पाया...

कल...

हैप्पी होली.
 
अपडेट 22

शिव स्कूल में पढ़ रहा है और यहाँ अनाथालय में सरिता और लता काम से निपटने के बाद रूम में बेथ कर बाटे कर रही थी.

सरिता : क्या बात है? कब से देख रही हु खयालो में खोयी हुई लगरही है और बिना बात के hi मुस्कुराये जा रही है?

लता : (शर्मा के निचे देखने लगाती hai)Nahi ऐसी तो कोई बात नहीं.

सरिता : अब बता भी दे, कुछ हुआ था क्या रात को?

लता : (उसकी और हेरानीसे देखते hue)Tuje कैसे pata.(Fir लता को ख्याल आता है उसने खुद hi अपना राज़ खोल दिया है तो वो शर्मा जाती है और अपनी नज़ारे चुराने लगती है)

सरिता : क्या सच मच? क्या हो गया, तेरा और शिव का?

लता : धत! ऐसा कुछ नहीं हुआ.

सरिता : तो बताना क्या हुआ फिर, और अब ये नाटक बंद कर और सच सच बता नहीं तो में तुजसे बात नहीं करुँगी.

(फिर लता जो भी हुआ था वो बतादेति है)

सरिता : अरे वह! तो अपने शेर के मुँह आखिर खून लग hi गया. मेरे कहने का मतलब है की उसे पता चल hi गया की उसका वो बादवाला डंडा किस काम में आता है. पर मुझे ये समाज नहीं आता, इतना कुछ तो हो चूका था फिर पूरा hi करलेते दोनों.

लता : उसे थोड़ेही पता था की में जाग रही हु, उसे तो ये दर लगरहा होगा की कही में जाग न जाऊ. (फिर सरिता की और देख कर) पर यार एकबात समाजमे नहीं आयी, वो अंदर डालने की कोशिस कर रहा था पर अंदर जा hi नहीं रहा था.

सरिता : (कुछ सोचते hue)Wo गलत जगह दाल रहा होगा?

लता : नहीं यार जगह तो बिलकुल सही थी, वो दबाव भी काफी लगा रहा था पर फिर भी उसका अंदर नहीं gaya(Wo सवालिया नजरो से सरिता को देख रही थी).

सरिता : अरे मेरी लड़ो, अभी तेरा वो छेड़ बंद है, थोड़े से दबाव से वो नहीं खुलने वाला. उसके लिए तो ताक़त से धक्का लगाना पड़ता है. और जितना बड़ा शिव का है उसके लिए तो उसे बहोत जोर से धक्का लगाना पड़ेगा और अगर वो तेरे अंदर गया तो तू पुरे घर को जाएगा दे ऐसे चिल्लायेगी.

लता : वो क्यों? क्या इतना दर्द होता है?

सरिता : देख में जूथ नहीं कहूँगी, दर्द तो होता है मेरी लड़ो, पर एक hi बार, एक बार वो छेड़ खुल जाये फिर तो मज़े hi मज़े है.

लता : तुजे भी दर्द हुआ tha?(Ye सुन कर सरिता उदास हो जाती hai)Sorry यार में तेरी उस बात को याद नहीं दिलाना चाहती , में तो बस ऐसे hi पूछ रही थी.

सरिता : (उदास स्वर me)Us बात को याद करती हु तो मान भरी हो जाता है, चल छोड़ उस कमीने को, पर ये सच है पहलीबार में दर्द होता है, और उस कमीने का तो इतना बड़ा भी नहीं है फिर भी मुझे लगा था की जान निकल जाएगी. और अगर उसके साथ ऐसा हुआ था तो सोच शिव का लेने पर तो सचमुच hi जान निकल जाएगी तेरी.

लता : (उदास होते हुए) क्या सचमुच में मर जाउंगी?

सरिता : (हस्ते hue)Ari में तो मज़ाक कर रही थी. अगर ऐसे hi लड़की मर जाती तो रोज कितनी hi डैम तोड़ देती. अपनी ये हैना वो बानी hi है उसे लेने के लिए, फिर घबराना कैसा. जिंदगी भर के मज़े के लिए एक बार दर्द सहने में कोई बुराई नहीं. और हम जिसे प्यार करते है उस से अगर ये दर्द मिलता है तो बिलकुल भी बुराई नहीं है.

लता : सच कहती है तू, अगर मुझे पता भी हो की में मर जाउंगी फिर भी में शिव के साथ करना पसंद करुँगी.

सरिता : कुछ नहीं होगा, तू दर मत. रही बात शिव की तो उसे में सीखा दूंगी कैसे तेरे साथ प्यार से करे.

लता : (सरिता की और देखते hue)Kya तू सचमुच उसके साथ करेगी?

सरिता : मेरा तो पूरा मान है, पर है अगर तू मन करेगी तो नहीं करुँगी. आखिर वो तेरा शिव है.

लता : आरी न, में क्यों मन करने लगी, जितना वो मेरा है ुनतहि वो तेरा भी तो है.

सरिता : सच कहा तूने, वो हम सबका है, तेरा मेरा hi नहीं उसके पीछे जमाना पागल है.

लता : ये क्या कह रही है तू.

सरिता : तूने देखा नहीं, कैसे उसे वो स्कूटर वाली छोड़ने आती है. और तू बहार क्यों जाती है अपने घरमे भी तो उसकी दीवानी है.

लता : क्या? अपने घर में. तू किसकी बात कर रही है?

सरिता : (आंखे नाचते hue)Ranjan.

लता : क्या बकवास कर रही है तू, वो तो अभी बच्ची है.

सरिता : वो तुजे बच्ची लगती है, वो शिव के जितनी hi है. और तुजे पता नहीं है, वो शिव के साथ चुप चुप के अपनी चोंच लड़ती रहती है.

लता : (थोड़े गुस्से me)Kya? आनेदो उसको में खबर लेती हु उसकी.

सरिता : देखा, इसीलिए में तुजे नहीं बता रही थी. देख हमारी जिंदगी की किताबमे पता नहीं उपरवाले ने क्या लिखा है. पहले hi हम अपने घरवालों के साये से महरूम है. घरवालोने तो हमे फेंक दिया जैसे हम कचरा हो. एक दूसरे के साथ रहकर hi हम एक दूसरे का सहारा बनते गए. तो उसमे हर्ज क्या है अगर वो शिव के साथ कुछ करती है. और शिव किसीको पसंद न आये ये तो हो hi नहीं सकता. अभी तो वो हमारे साथ है पता नहीं कब वो हम से दूर चलजाये.

लता : वो क्यों कही जायेगा?

सरिता : अरे तो क्या पूरी जिंदगी वो यहाँ सड़ेगा. वो होसियार है और काबिल भी तो उसे आगे बढ़ने के लिए कभी न कभी तो यहाँ से जाना hi पड़ेगा. वो जब तक यहाँ है तब तक तो हम उसके साथ खुशियों के पल बिता hi सकते है.

लता : पर रंजन अभी बच्ची है अगर उन दोनों ने कुछ उल्टा सीधा कर दिया तो?

सरिता : क्या बच्ची बच्ची लगा रक्खा है, वो कोई बच्ची नहीं है वो तुज से भी ज्यादा समझदार है. तू उसकी चिंता छोड़, वो अपना देख लेंगी, तू अपनी सोच तू क्या करेगी और कैसे करेगी.

लता : में क्या करुँगी? जो करना है वो उसे करना है.

सरिता : पागल, करेगा वही पर उसको तैयार करना पड़ेगा न, उसको उकसाना पड़ेगा की वो तेरे साथ कुछ करे. और भी बहोत कुछ होता है, सिर्फ ये नहीं की वो तेरी उसमे अपना दाल दे.

लता : (हैरानी se)Aur क्या होता है?

सरिता : जो प्यार करते है वो एकदूसरे को चूमते है, चाट ते है और चूसते भी है?

लता : चूमते है वो समाज में आया पर ये चाट ते है और चूसते है इसका क्या मतलब हुआ?

सरिता : (है kar)Hye मेरी भोली बन्नो, वो तेरी मुनिया को चाटेगा और चूसेगा भी और तुजसे अपना डंडा चुसवायेगा भी.

लता : (अपने मुँह पर हाथ रखते hue)Haye हाय, क्या ऐसा भी करते है लोग?

सरिता : अरे इसीमे hi तो मज़ा है, जब हम उनका अपने मुँह में लेकर चूसते है और चाट ते है तो उन्हें बड़ा मज़ा आता है, वैसे hi जब वो हमारी चाट ते है तो हमे भी बड़ा मज़ा आता है. अगर एक बार तूने इसका आनंद ले लिया तो फिर बार बार अपनी चटवायेगी और उसका चूसेगी भी.

लता : (हड़बड़ाते hue)Na न, में ऐसा कभी न करू.

सरिता : तो फिर वो किसी और से चुसवाने चला जायेगा.

बुकमार्क

लता : पर वो जगह गन्दी होती है न? फिर कैसे लोग...

सरिता : जब उसने तेरी मुनिया को छुआ था तो तुजे कैसा लगा tha?(Lata शर्मजाति hai)Ari बता न कैसा लगा था? अच्छा लगा था की नहीं?

लता : है, अच्छा तो लगता है.

सरिता : वैसे hi जब हम उनका हिलाते है या चूसते है तो उनको अच्छा लगता है. ये खेल मज़ा लेने का और देने का खेल है. अगर तू सिर्फ मज़ा लेगी, देगी नहीं तो वो किसी और से मज़े लेने चला जायेगा. क्या तू ऐसा चाहेगी.

लता : न न, में ऐसा क्यों चाहूंगी?

सरिता : तो फिर अपने आप को तैयार कर ले, तुजे भी उसका अपने मुँह में ले कर चूसना पड़ेगा. और वैसे भी मैंने जब से उसका देखा है तब से मेरा तो मन करता है उसे अपने मुँह में लेकर चुस्ती राहु. वोटो पहलीबार hi था तो सिर्फ हाथ से हिलाया था, अबकी बार तो छोड़ने वाली नहीं में उसको. उसका चूसूंगी भी और अपनी छूट में दलवाउंगी.

लता : छी, कितनी गन्दी है तू, कैसा गन्दा गन्दा बोलती है.

सरिता : तेरी मर्जी, अगर तू ये सब न सीखी तो फिर ऐसा न हो की वो कहे की लता दीदी आज में सरिता दीदी के साथ सो जाऊ?

लता : वो कभी मुझसे दूर नहीं होगा.

सरिता : अगर तू नहीं देगी तो वो तो जायेगा hi, तू लिख के रख ले. चल छोड़ ये सब अभी सो लेते है फिर शाम का काम भी सुरु हो जायेगा.

ऐसे hi दोनों बाते करते रहे. यहाँ स्कूल में रेसस्स टाइम में वासवी और संयम बातो में लगे हुए थे. संयम ने देखा की वैस्वी का चेहरा मुरझाया हुआ है.

संयम : तुजे क्या हुआ? तू क्यों मुँह फुलाए बैठी है?

वैस्वी: मुझे क्या हुआ, कुछ भी तो नहीं.

संयम : तो आज तू ज्यादा बात भी नहीं कर रही, या फिर में शिव के साथ आयी इस लिए ऐसा कर रही है?

वैस्वी : मुझे क्या, तू शिव के साथ आये या किसी और के साथ, मुझे क्यों फर्क पड़ने लगा?

संयम : देख मैंने hi तुजे कहा था की शिव तुजे देखता है, मुझे लगा था की जैसे दूसरे लड़के करते है वैसे hi वो तुजे लाइन मर रहा होगा. पर आज उस से बात हुई तो पता चला ऐसा नहीं है.

वैस्वी : (संयम की बात सुन कर उसे जतका लगा, ऐसा नहीं है की उसके दिल में शिव के लिए कुछ है पर वो सोच रही थी की शिव उसके पीछे पड़ा है, ये सोच कर उसे अच्छा लगता था, और संयम के ऐसा कहने पर जतका लग्न स्वाभाविक था, संयम की और सवालिया नज़रो से देखते hue)Kya पता चला? और तूने ऐसी भी बात की उसके साथ?

संयम : वो तो हम दोनों चलते हुए आ रहे थे, साथ चलते चलते कुछ तो बात होगी hi, मैंने सोचा की वैसे भी वो तेरी और देखता है, तो मेने सोचा की तेरे लिए वो क्या सोचता है ये जानलिया जाये, इसी लिए मैंने बात की.

वैस्वी : तो क्या पता chala?(Vaiswi ऐसा दिखने की कोशिस कर रही थी की उसे कोई फर्क नहीं पद रहा पर उसका चेहरा कुछ और hi कह रहा था)

संयम : पर तुजे तो कोई फर्क hi नहीं पड़ता न, फिर क्यों पूछ रही hai?(Samim भी उसे छेड़ने का मज़ा ले रही थी)

वैस्वी : चल अब ज्यादा होशियार मत बन, सीधे सीधे बता क्या कहा उसने?

संयम : उसके साथ बात कर के लगा की वो एक अच्छा लड़का है, मेने तेरे बारे में पूछा तो उसने कहा की वो तुजे लाइन नहीं मर रहा था, वो तो बस तुजे देखना चाहता था, वो भी इस लिए की तेरे मार्क्स उसके जस्ट पीछे है तो वो बस देखना चाहता था की वो कोण है?. पीछे से वो हमें देख नहीं सकता था तो आते जाते देखने का प्रयत्न कर रहा था. और जब भी वो ऐसा करता तब हम दोनों बात कर रहे होते तो वो तुजे कभी देख नहीं पाया, इसीलिए उसने तुम्हे उस दिन पार्किंग में भी नहीं पहचाना था जब तुम्हारी उसके साथ टक्कर हुई थी.

वैस्वी : (टॉन्ट मरते हुए )लगता है बहोत बाते हुई तुम दोनों में.

संयम : (संयम ने ध्यान नहीं diya)Ha वो सरल सा लड़का है, कोई दिखावा नहीं करता, तो हो गयी बाते.

वैस्वी : लगता है बहोत पसंद आ गया है तुजे.

संयम : है पसंद तो वो मुझे पहले दिन से hi है. में उस तरह से नहीं कह रही, वो अच्छा दीखता है तो है, मुझे लगा था की वो तुम्हे पसंद करता है तो मैंने तुम्हे बता दिया था. अगर कभी वो मुझे पूछेगा तो में तो मन करने से रही.

वैस्वी : (तन बदन में आग सी लग जाती है, अपने दन्त पिस्टे hue)To जा न फिर उसीके पास, यहाँ क्यों बैठी है?

संयम : (मुस्कुराते हुए) तू क्यों इतना जल रही है, अभी तूने hi कहा न की तुजे कोई फर्क नहीं पड़ता और शिव ने भी कहा की वो तुजे लाइन नहीं मर रहा तो अगर कभी भविस्य में अगर हमारे बिच कुछ होता है तो तुजे क्या फर्क पड़नेवाला है, जैसे की तुमने hi कहा है. और मुझसे जगहाड़ना बंद कर वो बोल रहा था की उसको इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं है, वो अपनी पढ़ाई पर hi ध्यान केंद्रित करना चाहता है. और हमे भी यही करना चाहिए. अभी से इन् चक्करो में नहीं पड़ना चाहिए. चल मुँह फूलना छोड़ जो हुआ नहीं उसे लेकर क्यों झगड़ना. अगर तुजे पसंद नहीं तो में उसके साथ बात नहीं करुँगी बस, अबतो नार्मल हो ja.Fir दोनों हास्पदति है.

वह स्नेहा सुबह से बेचैन हो रही थी. बार बार उसे शिव की याद आ रही थी. शिव को याद कर के वो इतनी गरम हो रही थी की सुबह सुबह hi उसने पवन के साथ सेक्स कर लिया, पर उसकी बेचैनी काम होने का नाम hi नहीं ले रही थी. सेक्स करते वक़्त भी वो पवन में शिव को ढूंढ रही थी. न चाहतेहुए भी वो पवन की तुलना शिव से कर बैठती थी. फिर पवन काम के लिए बहार चले गए पर वो गुमसुम सी ख़यालोमे hi खोयी रही. स्नेहा के दिल में उथलपुथल मची हुई थी की क्या वो सिर्फ बच्चे के लिए hi शिव के पास जाना चाहती है या और भी कोई वजह है? उसे बार बार शिव का चेहरा और उसके साथ बिताये हुए पल याद आ रहे थे. कैसे उसने उसके साथ सेक्स किआ था वो सुहाने पल वो बार बार याद कर रही थी और उसकी पंतय भी गीली हुए जा रही थी.

शाम को जब स्कूल छूती तो महेश और हर्ष दोनों मुझे छोड़ने अनाथालय तक ए. वो सोच रहे थे की अगर शाम को उस लड़के ने फिर से आ गया तो. मेने भी संयम को कहा था की तुम आगे चलो हम तुम्हारे पीछे hi है, संयम उसकी साइकिल पे आगे आगे चल रही थी और हम उसके पीछे. हमने रस्ते भर देखा पर वो लड़का दिखा नहीं. पर कोई दिखा नहीं. जब में नास्ता कर रहा था तो रंजन ने मुझे लकडिया काटने के लिए उसके साथ आने को बोलै...
 
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