Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 38 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

अगली सुबह, शेठ जी के फ़ोन पर किसी से बात करने की ऊँची आवाज़ आरती के कानो में पड़ी, और उसकी नींद खुल गयी.. उसने थोड़ा नींद में hi अपने बगल वाली जगह पर हाथ मारा, पर वो खली thi—uska पति अरविन्द रात को भी नहीं आया था.

आरती एक ठंडी सांस लेकर उठ कर बैठ गयी. उसने अपने बिखरे हुए बाल बांधते हुए थोड़ी देर तक खली कमरे को देखा, फिर एक गहरी सोच के साथ कहा ..

अरविन्द का तोह यही रोज़ का है, पर पापा जी subah-subah किस्से इतनी गर्मी में बात कर रहे हैं?'

अरविन्द का रात भर न आना आरती के लिए नयी बात नहीं थी, पर आज उसे थोड़ा अजीब लग रहा था. उसने मिरर के सामने खड़े होकर अपनी सदी ठीक की फिर एक गहरी सोच के साथ नहाने चली गयी.

जब वो नाहा कर बहार आयी, तोह शेठ जी अब भी फ़ोन पर लगे हुए थे. आरती ने अपने गीले बालों को टॉवल से सुखाते हुए सोचा,

"अरविन्द का न आना तोह अब आम बात हो गयी है, पर पापा जी subah-subah इतने परेशां क्यों हैं?"

आरती ने naha-dhokar अपने गीले बालों को एक झटके से सुलझाया और उन्हें बांधते हुए कमरे की खिड़की से बहार देखा... नवाज़ के कमरे की और. रात की थकन अभी पूरी तरह उत्तरी नहीं थी, पर नवाज़ का ख्याल आते hi उसकी थकन पता नहीं कहाँ चली गयी.

उसने देखा की उसके रूम का दूर ओपन hi था. ये सोच कर आरती मैं hi मैं कहने लगी,

"दूर ओपन है... कहाँ चले गए नवाज़ जी subah-subah? रात में इतना लेट सोकर भी... कैसा आदमी है ये, थोड़ा सा भी रेस्ट नहीं करते. ात लीस्ट नाश्ता करके तोह चले जाते."

आरती ने खिड़की से हटकर जल्दी से अपनी सदी सही की और निचे किचन की तरफ भागी. उसे लगा शायद नवाज़ किचन में आया होगा ..नाश्ते के लिए . पर वहां सिर्फ ख़ामोशी थी. उसने टेरेस से निचे झाँका तोह नवाज़ की गाडी भी वहां नहीं थी.

आरती का दिल थोड़ा बैठ गया. वो अभी ये सोच hi रही थी की नवाज़ बिना बताये कहाँ जा सकता है, तभी उसे बहार गार्डन से किसी के बात करने की आवाज़ आयी. वो भागते हुए बालकनी तक गयी और देखा की शेठ जी गुस्से में किसी से कह रहे थे,

नवाज़, अभी सो रहा hai..maine hi कहा है उसे थोड़ा आराम करने को ..

आरती ने जब नवाज़ को शेठ जी से बात करते सुना, तोह उसने रहत की सांस ली. उसके मैं में एक सुकून सा आया, "मतलब गए नहीं हैं, अभी यहीं हैं... मैं तोह खामखा डर गयी थी."

लेकिन उसके दिमाग में अब कुछ और hi चल रहा था. वो वापस अपने बैडरूम में गयी. उसने आईने के सामने खड़े होकर हल्का सा मेकअप किया और अपने पसंदीदा परफ्यूम की खुशबु से खुद को महका लिया. उसने अपनी सदी उतरी और उसकी जगह एक रेड सेक्सी लिंगेरी पहनी, और ऊपर से एक निघ्त्य दाल ली जो उसके बदन पर नरम लग रही थी.

किचन में जाकर उसने बड़े चाव से नवाज़ के लिए अच्छा सा नाश्ता तैयार किया. दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ थी, पर इरादे पक्के थे. एक हाथ में नाश्ते की ट्रे और दूसरे में अपना फ़ोन उठाकर, वो दबे पाऊँ किचन से निकली और सीधे नवाज़ के रूम में दाखिल हुई.

कमरे में हल्का अँधेरा था और नवाज़ शायद थकन की वजह से गहरी नींद में था. आरती ने ट्रे साइड टेबल पर राखी और एक बार मुद कर दरवाज़े की तरफ देखा, फिर अपनी नज़रें नवाज़ के सोये हुए चेहरे पर टिका दी.

आरती ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से धीरे से बंद किया. उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी की उसे खुद सुनाई दे रही थी. वो दबे पाऊँ नवाज़ के बीएड के पास गयी. नवाज़ गहरी नींद में था, उसकी छाती हर सांस के साथ dheere-dheere ऊपर नीचे हो रही थी.

आरती ने सोचा,

"इन्हे उठाऊ या थोड़ी देर देखती रहूँ? रात भर कितनी म्हणत की है इन्होने..."

पर फिर उसके दिमाग में एक शरारत आयी. वो चुपचाप नवाज़ के पास बीएड के किनारे पर बैठ गयी. उसके परफ्यूम की तीखी खुशबु पुरे कमरे में फेल गयी थी. आरती ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और नवाज़ के बिखरे हुए बालों को छूने hi वाली थी की नवाज़ ने नींद में थोड़ी करवट ली.

आरती ठिठक गयी, उसका सांस रुक गया. अगर नवाज़ इस वक़्त जाग गया और उसे इस हालत में (निघ्त्य में) अपने इतने करीब देखा, तोह वो क्या सोचेगा? पर आरती के मन में एक अजीब सा सुकून tha—Arvind की बेरुखी ने उसे उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ उसे नवाज़ की सादगी और म्हणत में अपना पैन दिखने लगा था

आरती के मैं में uthal-puthal मची हुई थी. एक तरफ नवाज़ की शराफत थी और दूसरी तरफ उसका अपना अकेलापन, जो अरविन्द की वजह से और गहरा हो गया था.

आरती ने फ़ोन निकलने का ख्याल झटक दिया, क्यूंकि वो इस पल को किसी स्क्रीन में क़ैद करने के बजाये महसूस करना चाहती थी. उसने धीरे से नवाज़ की तरफ रुख किया और उसके कान के पास झुक गयी. उसके गीले बालों की एक बूँद नवाज़ के गाल पर गिरी.

आरती ने बिलकुल धीमी, मदहोश आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा,

"नवाज़ जी... उठिये न. कब तक सोते रहेंगे? आपके लिए नाश्ता लायी हु."

नवाज़ ने नींद में hi उसकी परफ्यूम की खुशबु महसूस की और अपनी आँखें खोलीं. जैसे hi उसने सामने आरती को इस हाल में और इतने करीब देखा, उसकी नींद उड़ गयी और उसकी नज़रें आरती की रेड लिंगेरी की झलक और निघ्त्य पर ठीक गयी

अभी भी दोनों एकदूसरे को देख रहे थे

वो नवाज़ उसे देखता ही रह गया था . आरती ने एक सेक्सी लिंगेरी पेहेन राखी थी रेड कलर की जो की अक्सर वो अपनी शादी के जस्ट बाद अरविन्द क साथ पहना करती थी शुरुवाती दिनों me…aarti को इस रूप में देखकर तोह नवाज़ पगला हो gya…Tv की हेरोइनेस भी आरती की खूबसूरती की आगे पानी भर्ती नज़र आ रही thee…wahin नवाज़ का लुंड तोह जैसे अंडरवियर फाड़कर बहार आने को होगया…. आरती को ऐसे अपनी इतने करीब बैठे हुई देख के नवाज़ का मुँह खुला का खुला ही रह gya….wahin नवाज़ की ऐसी हालत देखकर आरती के फेस पैर भी स्माइल आ गयी थी..

आरती और नवाज़ के बीच की ख़ामोशी अब गहरी होती जा रही थी. नवाज़ की फटी हुई आँखें और आरती की शरारत भरी मुस्कराहट ने कमरे का माहौल पूरी तरह बदल दिया था.

नवाज़ को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की शेठ जी की बहु .. जिसे पूरा गाँव हमेशा इज़्ज़त की नज़र से देखता है, उसके इतने करीब इस लिबास में बैठी होगी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसे लगा शायद आरती को सुनाई दे रहा हो.

आरती ने अपनी नज़रें नवाज़ की नज़रों में गड्ड दी और बड़े अदा के साथ कहा,

"गुड मॉर्निंग नवाज़ जी... हो गयी क्या आप की नींद?"

आरती की ये बात सुनकर नवाज़ की धड़कनो ने जैसे रफ़्तार पकड़ ली. वो बस tak-taki लगाए आरती को देखता रहा था , जैसे उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की जो वो सुन रहा है वो सच है

नवाज़ ने थूक निगलते हुए दबी आवाज़ में जवाब दिया,

"हो गयी..."

आरती ने थोड़ा और करीब झुकते हुए, उसकी आँखों में शरारत भर कर पूछा,

"कैसे रही रात?"

नवाज़ के दिमाग में कल रात का वो सुनसान रास्ता और आरती का साथ बिताये हुई पल घूमने लगे.. उसने धीरे से कहा,

"आरती रानी , अब तेरे बिना कैसे कटेगी..."

आरती ने खिलखिलाकर हस्ते हुए, अपनी निघ्त्य का पल्ला थोड़ा संभाला और गहरी नज़र से उसे देखते हुए बोली,

"क्यों फ़िक्र करते हो जी ? कल से तोह मेरे साथ hi कटेगी..."

ये कह कर आरती ने अपनी ऊँगली नवाज़ के सीने पर हलकी सी फेरी. नवाज़ को महसूस हो रहा था की उसका कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा है. आरती का ये रूप, वो रेड लिंगेरी, और ये baatein—sab मिलकर उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी. उसने आरती का हाट पकड़ लिया, जो उसके सीने पर खेल रहा था

आरती ने देखा की नवाज़ की नज़रें उसकी रेड लिंगेरी पर जैम गयी हैं, वही पुराणी लिंगेरी जो कभी अरविन्द को रिझाने के लिए पहनी थी, पर आज उसका असर नवाज़ पर कहीं ज़्यादा गहरा हो रहा था. नवाज़ का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी हालत देख कर आरती के चेहरे पर एक जीत वाली मुस्कराहट आ गयी.

आरती ने धीरे से अपना हाथ नवाज़ के घुटने पर रखा और कान के पास झुक कर फुसफुसाई,

"क्यों नवाज़ जी... ऐसे क्या देख रहे हो? क्या मुझसे डर लग रहा है या खुद से?"

नवाज़ की सांसें तेज़ हो गयी थीं. उसने हिम्मत जूता कर कहा,

"आरती रानी , .. मुझे उम्मीद नहीं थी की तू इतने सुबह सुबह मेरे लिए इतने सजधज के साथ जाएगी

आरती ने उसके होंठों पर अपनी ऊँगली रख दी और बड़े नरम लहजे में बोली,

"रात को तोह पापा जी ने कहा था न की हम परिवार है.. और वैसे भी तो मई आप की बेगम हु और आप मेरे शोहर .. बेगम आपने शोहर के लिए इतना तो कर सकते है न



आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ ने आरती की मदहोश आँखों में देखा, तोह उसकी साड़ी शर्म और मर्यादा dheere-dheere पिघलने लगी. उसने महसूस किया की आरती सिर्फ उसे सत्ता नहीं रही थी, बल्कि वो भी उतनी hi तड़प रही थी जितना की वो. नवाज़ ने अपना एक हाथ आरती की कमर की तरफ बढ़ाया, और उसके कमर पर रख दिया .

तब आरती खुद hi थोड़ा और करीब हो गयी, इतना करीब की उसकी निघ्त्य का रेशमी कपडा नवाज़ के बदन को छूने लगा
 
तब नवाज़ सोते सोते hi उसको अपनी और खिंच लेता है..

ोुछ

आरती के झटका देने के बावजूद, नवाज़ कहाँ बाज़ आने वाला था. उसने sote-sote hi अपने मज़बूत हाथ से आरती की कलाई पकड़ी और एक hi झटके में उसे अपनी तरफ बीएड पर खिंच लिया.

आरती सीधा नवाज़ के सीने पर आ गिरी. उसके मुंह से एक हलकी चीख निकली,

"ोुछ! नवाज़ जी... ये क्या बदतमीज़ी है? Subah-subah शुरू हो गए?"

नवाज़ ने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे और कसके पकड़ लिया. उसका चेहरा अब आरती के बिलकुल करीब था, और उसकी आँखों में वही पुराणी शैतानी चमक थी.

"बदतमीज़ी नहीं रानी... ये तोह 'गुड मॉर्निंग' है,"

नवाज़ ने उसके कान के पास फुसफुसाया.

"तूने hi तोह कहा की कल से रातें तेरे साथ काटेंगी... तोह आज से प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं."

आरती ने उसके सीने पर हाथ रख कर उसे दूर धकेलने की नाकाम कोशिश की, पर उसके चेहरे पर एक मीठी मुस्कान थी.

"आप बहुत बड़े गुंडे हो! छोड़िये मुझे, कोई देख लेगा तोह अनर्थ हो जायेगा."

नवाज़ ने उसके नरम गाल पर एक हलकी चुटकी काटी और कुटिलता से बोलै,

"देखने दे... आज मेरा मूड बहुत 'स्पेशल' है. कल की खेत वाली सुहागरात का इंतज़ार मुझसे अब और नहीं हो रहा."

आरती शर्मा गयी और उसने अपनी नज़रें झुका ली.

"बस थोड़ा सबर और मेरे राजा... कल हम खेत निकल जायेंगे, फिर वहां कोई हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं होगा."

नवाज़ ने उसके लबों के इतने करीब अपना मुँह लाया की उनकी सांसें टकराने लगी.

"पक्का न? फिर वहां कोई 'नुसरत आप' या 'अरविन्द' बीच में नहीं आएगा?"

आरती ने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फसायी और धीरे से बोली,

"वहां सिर्फ मैं होउंगी... और मेरा ये बेशरम राजा."

तब नवाज़ ने आरती को अपनी तरफ खींचा, वो सीधा उसके सीने पर आ गिरी. आरती ने हड़बड़ाकर अपने हाथ नवाज़ के मज़बूत कन्धों पर टिका दिए, पर नवाज़ की पकड़ उसकी कमर पर और भी कास गयी.

"नवाज़ जी... छोड़िये न, कोई आ जायेगा,"

आरती ने भांपते हुए कहा, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए वही पुराणी 'ठरक' और दीवानगी साफ़ दिख रही थी.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसके चेहरे के बिखरे हुए बालों को कान के पीछे किया और फुसफुसाया,

"कोई नहीं आएगा रानी... ये सुबह सिर्फ तेरी और मेरी है."

नवाज़ ने धीरे से अपना हाथ आरती की गाउन पर रखा .. शोल्डर के वह और उसे थोड़ा सरका दिया. आरती का गोरा कन्धा अब बेपर्दा हो चूका था. नवाज़ ने वहां अपने गरम लैब रख दिए, जिस से आरती के पूरे जिस्म में एक सिहरन दौड़ गयी.

"आआह्ह्ह... नवाज़... प्लीज... इतना मत तड़पाओ,"

आरती ने सिसकते हुए अपना सर नवाज़ के गले में छुपा लिया.

नवाज़ ने उसके नरम बदन को अपने निचे दबा लिया और उसके लबों को बड़ी शिद्दत से चूसना शुरू किया. आरती ने भी हर बार की तरह इस बार कोई परहेज़ नहीं किया और नवाज़ के बालों में अपनी उँगलियाँ फसा कर उसके इस जुनूनी किश का साथ देने लगी.

"कल खेत में तोह मैं तुझे दिखाऊंगा की असली सुहागरात किसे कहते हैं,"

नवाज़ ने किश के बीच में hi भांपते हुए कहा.

आरती ने उसकी आँखों में देखा, जो अब उत्तेजना से लाल हो चुकी थी.

"

मैं सब कुछ करने दूँगी मेरे राजा... बस थोड़ा सबर और."

साबरा तो होता नहीं है रानी .. एक बार करने दे न

तब थोड़ा उठ के उसका हाथ को झटका देती है और वह से बीएड के दूसरे कोने मई चली जाती है और नखरे से कहती है

"नहीं, बिलकुल नहीं! आप हमेशा बस अपनी hi चलाते हैं,"

वह थोड़ा मुंह बनाकर, आँखें घूमते हुए कहती है.

"पहले hi कह चुके हु ..सब कुछ करने दूंगी पर यहाँ नहीं ..कल सुहागरात मई .. पर आपको तोह बस अभी चाहिए और हर बार शरारत सूझ रहती है.

तब नवाज़ बीएड से उतने लगा

अब वहीँ रहिये, मेरे पास आने की कोशिश भी मत कीजियेगा!"

वह अपने बिखरे हुए बालों को झटक कर पीछे करती है और पीछे वाले टेबल पर ऐसे बैठ जाती है जैसे सच में बहुत नाराज़ हो, पर उसकी आँखों की चमक बता रही होती है की यह सब बस एक प्यारा सा नखरा है

नवाज़ बीएड से उठते हुए रुका, उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी. उसने देखा की कैसे वह गुस्से का नाटक करते हुए टेबल पर जा बैठी है, पर उसकी चमकती आँखें साफ़ बता रही थी की यह नाराज़गी नहीं, बल्कि कल का इंतज़ार और थोड़ा नखरा है.

नवाज़ ने वही बैठे बैठे दोनों हाथ उठा दिए, जैसे हार मान ली हो. उसने धीरे से कहा,

"ठीक है बाबा, अब मैं यही रहूँगा जहाँ तूने कहा है. पर एक बात बताओ... इतनी दूर बैठ कर कल का इंतज़ार मुश्किल नहीं हो जायेगा?"

ऐसा कह के वो आरती को थोड़ा करीब आने का इशारा करता है पर आरती वही रुकी रहती है , आरती के बिखरे बालों और उस अदा को देख कर निहारने लगता है.

"कल सुहागरात का वादा है न? तोह ठीक है, आज का दिन और रात यह 'दूरी' hi सही. पर याद रखना, कल जब यह नखरे होंगे, तब मैं इतनी आसानी से पीछे नहीं हटूंगा."

उसने आँख मरते हुई उसे चिडया, जिससे आरती के चेहरे पर एक प्यारी सी लाली छ गयी
 
तभी नवाज़ का फ़ोन बज उठा .. आरती जिस टेबल पाई बैठी हुई थी मोबाइल वही रखा हुआ था ..आवाज़ आते hi दोनों मोबाइल की और देखने लगे

किस का है

आप का

उठा ले

नवाज़ ने जब आरती से फ़ोन उठाने को कहा, तोह आरती के चेहरे पर थोड़ा डर और थोड़ी झिझक साफ़ दिख रही थी. कल रात की साड़ी बातें उसके दिमाग में घूम रही थी.

"नवाज़, उठा और बात कर,"

नवाज़ ने अब थोड़े रूब से कहा.

आरती ने हिचकिचाते हुए पूछा,

"मैं क्या बात करू?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और आरती की आँखों में देखते हुए बोलै,

"तेरी नानन्द है... तू भाभी है उसकी. अब रिश्ता है तोह निभाना तोह पड़ेगा न?"

आरती का चेहरा लाल हो गया.

"हाँ पर... फिर भी..."

"फिर भी क्या?"

नवाज़ ने उसे छेड़ते हुए पूछा.

आरती ने नज़रे झुका ली और बहुत धीरे से फुसफुसाई,

"शर्म आती है... उन्होंने हॉस्पिटल वाली बात पकड़ ली थी, अब वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में?"

नवाज़ ने ज़ोर से एक ठहाका लगाया और उठ के आरती के पास चला गया और उस का हाथ पकड़ कर फ़ोन उसके हाथ में थमा दिया.

"शर्म को थोड़ा साइड में रख रानी. अगर तू मेरी 'बेगम' बनना चाहती है, तोह ये शर्म परसो खेत के लिए बचा कर रख. अभी तोह बस भाभी वाला फ़र्ज़ निभा."

आरती ने गहरी सांस ली और कांपते हाथों से फ़ोन उठाया. स्क्रीन पर 'नुसरत आप' का नाम चमक रहा था. उसने फ़ोन कान से लगाया और बड़ी नरम और इज़्ज़त भरी आवाज़ में बोलै:

"Hello... आप?"

नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था, ये देखने के लिए की उसकी 'सोफिस्टिकेटेड' मालकिन अब उसकी बहन से कैसे रिश्ता निभाती है.

आरती इज़्ज़त और लिहाज़ से बात शुरू की

नुसरत: (थोड़ा हैरत से)

"Hello ... कौन? आरती मेमसाब बोल रही हो क्या ?"

आरती: (शर्म से नज़रें झुकाते हुए) "

जी आप... मैं आरती. कल रात के लिए माफ़ी चाहती हूँ, वो नवाज़ जी थोड़े परेशां थे तोह..."

नुसरत: "अरे नहीं , माफ़ी क्यों मांग रही हो? नवाज़ तोह है hi थोड़ा ढीट, पर तुमने जो कल अब्बू के लिए किया, उसके बाद तोह मेरा सर फकर से ऊंचा हो गया. सही में तुमने 'बहु' वाला फ़र्ज़ निभाया है."

आरती ने नवाज़ की तरफ देखा, जो बड़े गर्व से उसे घर रहा था.

आरती: "नहीं आप, वो तोह मेरा फ़र्ज़ था. अब्बू अब कैसे हैं? डॉक्टर ने क्या कहा?"

नुसरत: "अब्बू अब बिलकुल ठीक हैं. डॉक्टर कह रही थी की आज शाम तक शायद छुट्टी मिल जाये. पर नवाज़ कहाँ है? वो तोह कल से गायब hi है."

आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जिसमे परसो के खेत वाले प्लान की चमक थी.

आरती: "वो... वो मेरे साथ hi हैं आप. हम अभी खेत की तरफ जा रहे हैं, वहां थोड़ा काम देखना है."

नुसरत: (हस्ते हुए)

"Achha-achha! खेत की चिंता है या एक दुसरे की? चलो ठीक है, ध्यान रखना अपना. और नवाज़ को बोलना की अब सुधर जाये, इतनी अछि बीबी मिली है उसे!"

आरती का चेहरा लाल टमाटर हो गया. उसने "जी आप" कह कर फ़ोन काट दिया और नवाज़ की तरफ मुद कर बोली:

"देखा? वो इतनी अछि हैं और आप उन्हें 'बुद्धि' और पता नहीं kya-kya बोलते हो! उन्होंने तोह मुझे 'भाभी' hi मान लिया है."

नवाज़ ने आरती की कमर में हाथ डाला और उसे अपने करीब खींचते हुए फुसफुसाया,

"Maan-na hi पड़ेगा रानी... जब परसो खेत में हमारी सुहागरात होगी, तब तू पूरी तरह से इस घर की मालकिन बेगम बन जाएगी."

नवाज़ ने ऐसे कहते hi आरती एकदम से नवाज़ से लिपट गयी जिससे लिंगेरी मई कैद उसके मॉटे गोल ब्रैस्ट ज़ोर से नवाज़ की चेस्ट पैर डाब gye…dono की साँसे तेज़ hogyi..phir नवाज़ ने अपने हाथ आरती की बैक पैर से होते हुए उसकी गांड तक फेरने शुरू केर दिया और उसकी सॉफ्ट एंड टाइट वेल शेप्ड गांड को सहलाना शुरू केर diya….jisse आरती की सिसकारी निकालनी शुरू होगयी….

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

….
 
आरती ने नवाज़ को प्यार से ,

"अब छोड़िये मुझे और नाश्ता कीजिये."

नवाज़ ने शरारत भरी नज़रों से देखा और बोलै,

"खिला फिर अपने हाथों से."

आरती मुस्कुरायी और बोली,

"हाँ, खिलाती हूँ न."

वो बड़े प्यार से निवाला बनाकर नवाज़ को खिलने लगी. दोनों ek-doosre में खोये हुए hi थे की तभी बहार से शेठ जी की कड़क आवाज़ गूंजी.

"नवाज़!"

आरती और नवाज़ दोनों बुरी तरह चौंक गए. नवाज़ के चेहरे पर गुस्सा आ गया था ..

सेठ जी की आवाज़ सुनते hi आरती के होश उड़द गए. उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगा की उसे लगा सीना चीयर कर बहार आ जायेगा. नवाज़ ने गुस्से में बड़बड़ाते हुए कहा,

"आ गया बुद्धा! हर बार गलत टाइम पर टपक पड़ता है."

आरती ने हड़बड़ाकर अपनी निघ्त्य को संभाला और नवाज़ को पीछे धकेला. उसका चेहरा डर और शर्म से लाल हो चूका था.

"नवाज़ जी! जल्दी से बहार जाओ... वर्ण वो अंदर आ जायेंगे तोह अनर्थ हो जायेगा!"

आरती ने कांपते हाथों से अपने बिखरे हुए बाल ठीक किये.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी . उसने आरती की कमर पर एक आखरी बार हाथ फेरा और उसके कान में फुसफुसाया

, "डर मत रानी, अभी जा रहा हूँ. पर याद रखना, कल खेत में कोई सेठ जी हमारे बीच नहीं आएंगे."

आरती ने उसे दरवाज़े की तरफ धकेला,

"हाँ हाँ, सब याद है! अब जाइये जल्दी."

नवाज़ ने अपना शर्ट ठीक किया और कमरे से बहार निकलते हुए ज़ोर से आवाज़ दी,

"जी सेठ जी! आया... बस नाहा रहा था!"

आरती ने जल्दी से कमरे का दरवाज़ा अंदर से भिड़ाया और वही दीवार से टिक कर गहरी सांसें लेने लगी. उसका पूरा बदन अभी भी नवाज़ के स्पर्श से थरथरा रहा था.

सेठ जी की आवाज़ सुनकर आरती की तोह जान hi निकल गयी थी. वो हड़बड़ाकर अपना होश संभालती है और झटपट अपनी निघ्त्य के बिखरे हुए बटन और बाल ठीक करती है. उसका चेहरा अभी भी नवाज़ के रोमांस की वजह से लाल टमाटर हो रहा था.

इधर नवाज़ बहार सेठ जी को बातों में फंसने की कोशिश कर रहा था.

सेठ जी: "अरे नवाज़, आरती कहाँ है? उसे आवाज़ दी पर जवाब नहीं मिला."

नवाज़: (ढीठपन से मुस्कुराते हुए) "

जी सेठ जी, वो... वो शायद घर के अंदर hi होंगी."

सेठ जी: "नहीं है अंदर, मैंने देख लिया. शायद पीछे की तरफ गयी होगी?"

नवाज़: "हाँ... हो सकता है सेठ जी. चलिए, देख लेते हैं."

नवाज़ जैसे hi सेठ जी को लेकर पीछे की तरफ मुड़ता है, आरती तब तक बड़े hi सोफिस्टिकेटेड अंदाज़ में दुश्री तरफ से घूम कर बहार आ जाती है. उसने अपने चेहरे पर आयी घबराहट को छुपाने की पूरी कोशिश की थी.

नवाज़: (आरती को देख कर कुटिल मुस्कान के साथ)

"ओहो! वो रहिये मेमसाब... वो तोह वहां हैं सेठ जी!"

सेठ जी ने आरती को देखा और सुकून की सांस ली.

"अरे आरती बेटी, कहाँ थी तुम? हम तुम्हे hi ढून्ढ रहे थे."

आरती ने थोड़ा शरमते हुए पर ढीट बनते हुए कहा,

"बस कमरे में थोड़ा सामान देख रही थी... आपने आवाज़ दी क्या?"

नवाज़ वही खड़ा आरती की आँखों में आँखें दाल कर उसे छेड़ रहा था. उसे पता था की आरती अंदर से कितनी काँप रही है. नवाज़ ने धीरे से फुसफुसाया ताकि सिर्फ आरती सुने,

"बड़ी जल्दी निघ्त्य ठीक कर ली रानी..."

आरती ने उसे घर कर देखा पर सेठ जी के सामने सिर्फ मुस्कुरा कर रह गयी
 
सेठ जी और नवाज़, दोनों hi आरती के पास आ गए. सेठ जी की आँखों में थोड़ी फ़िक्र थी, पर नवाज़ की नज़रों में वही शैतानी चमक बानी हुई थी.

सेठ जी: "बीटा, कहाँ थी तुम? इतनी देर से आवाज़ दे रहे हैं."

आरती: (अपने बिखरे बाल कान के पीछे करते हुए) "बस यहीं थी पापा... थोड़ा काम में बिजी थी."

सेठ जी: "अच्छा... वो नीता का कॉल आया था क्या तुम्हे?"

आरती: "नहीं तोह पापा. क्यों, क्या हुआ?"

सेठ जी ने थोड़ा परेशां होकर सर खुजलाया और फिर नवाज़ की तरफ मुद गए.

तुम दोनों का क्या चक्कर चल रहा है

सेठ जी की बात सुनकर आरती के दिल की धड़कन एक पल के लिए रुक गयी. उसे लगा कहीं नवाज़ और उसके बीच का मामला सेठ जी ने भाप तोह नहीं ली?

कहा है नीता

नीता का नाम लेते hi आरती समज गयी की पापा का इशारा तोह नीता और नवाज़ के चक्कर की तरफ था.

"नवाज़, तू बता... नीता कहाँ है?"

नवाज़: (ढीठपन से मुस्कुरा कर)

"मुझे क्या पता सेठ जी! मैं उसका चौकीदार थोड़ी न हूँ."

सेठ जी: (चिढ कर)

"तुझे नहीं पता तोह किसको पता होगा? दिन भर तोह उसके पीछे घूमता रहता है."

तभी आरती ने मौका देखा और एक कुटिल मुस्कान के साथ नवाज़ की तरफ इशारा किया. उसका दिल अभी भी नवाज़ के रोमांस की वजह से तेज़ी से धड़क रहा था, पर वो सेठ जी के सामने एक दम सोफिस्टिकेटेड बन गयी.

आरती: (हँसते हुए)

"हाँ पापा... नवाज़ को पक्का पता होगा! ये तोह नीता के हर एक कदम की खबर रखता है. क्यों नवाज़ जी, बताइये न... कहाँ छुपा रखा है उसे?"

सेठ जी: "हाँ बेटी, तूने सच कहा है... इसको पक्का पता होगा. मुझे तोह लग रहा है इन दोनों (नवाज़ और नीता) का कुछ चक्कर चल रहा है... तू क्या कहती है बेटी.. इन् दोनों का कुछ है क्या..

आरती ने एक गहरी सांस ली और अपनी निघ्त्य का गाला थोड़ा सँभालते हुए, नवाज़ की आँखों में शरारत से देखा. नवाज़ वही खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा था, जैसे उसे आरती को इस dharm-sankat में देख कर मज़ा आ रहा हो.

आरती: (थोड़ा हिचकिचाते हुए पर ढीट बनते हुए)

"मुझे पक्का पता नहीं पापा... पर हो सकता है. नवाज़ जी के नखरे तोह आप जानते hi हैं, और नीता भी उनसे काफी ghul-mil गयी है आज कल. शयद कुछ चक्कर होगा "

नवाज़ ने आरती को घर कर देखा. उसे पता था की आरती उसे सेठ जी के सामने फसा रही है ताकि कल के खेत वाले प्लान से ध्यान भटक जाये.

तब नवाज़ ने आरती के तरफ देखते हुई धीरे से फुसफुसाया,

"मेमसाब, मेरे और नीता के चक्कर की फ़िक्र छोड़िये... कल खेत में हमारा जो चक्कर शुरू होने वाला है, उसकी तयारी कीजिये."

आरती ने उसे घर कर देखा पर उसके लबों पर एक मीठी मुस्कान थी. उसका बदन अभी भी नवाज़ की गर्मी महसूस कर रहा

था.

शेठ जी - कोनसा चक्कर

नवाज़ ने एक तिरछी नज़र आरती पर डाली और थोड़ा आगे बढ़ते हुए बोलै,

"अरे सेठ जी, मेमसाब तोह मुझ पर इलज़ाम लगा रही हैं! मेरा चक्कर किसके साथ है, ये तोह सिर्फ मेमसाब hi बेहतर जानती हैं."

आरती का चेहरा शर्म से तमतमा गया. उसे दर था की ये 'गुंडा' कहीं कल वाला किस्सा न उगल दे. उसने तुरंत बात पलट दी.

आरती:

"पापा, आप इनकी बातों में मत आइये. नवाज़ जी हमेशा ऐसे hi पहेलियाँ बुझाते हैं. आप चलिए, मैं आपके लिए चाय बनवाती हूँ."

उसने दबे पाऊँ आरती की तरफ एक कदम बढ़ाया और धीरे से बोलै,

"मेमसाब, आप तोह मेरे सारे राज़ खोल रही हैं... कहीं मैं आपका राज़ न खोल दूँ!

आरती की हंसी एक पल के लिए ठिठक गयी, पर उसने तुरंत बात संभाली.

नवाज़ की बात सुनते hi आरती के चेहरे की रंगत एक पल के लिए उड़ गयी. उसके दिमाग में तुरंत वो कल वाला किस्सा और नवाज़ का वो बेबाक रोमांस घूम गया. उसे लगा कहीं ये पागल नवाज़ सेठ जी के सामने कुछ उगल न दे.

पर आरती भी काम खिलाडी नहीं थी. उसने तुरंत अपनी हंसी को संभाला और नवाज़ की आँखों में आँखें दाल कर बड़े hi सोफिस्टिकेटेड अंदाज़ में बोली:

"अरे नवाज़ जी, आपके पास मेरा कौनसा राज़ होगा? सिवाए इसके की मैं किचन में थोड़ी कामचोर हूँ!"

आरती ने हँसते हुए सेठ जी की तरफ देखा.

"देखिये पापा, ये अभी से धरना शुरू कर रहा है... मुझसे डर कर बात निकलवाना चाहता है."

सेठ जी ने ठहाका लगाया,

"हाँ नवाज़, तू आरती को नहीं डरा सकता. पर ये बता, नीता का क्या चक्कर है? वो कल से फ़ोन नहीं उठा रही."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और आरती की कमर के बिलकुल पास से गुज़रते हुए फुसफुसाया,

"मेमसाब तोह बहुत तेज़ निकली..."

फिर सेठ जी से बोलै,

"सेठ जी, नीता शायद अपने पुराने दोस्तों के साथ कहीं बिजी होगी. आप फ़िक्र मत कीजिये, मैं पता लगवा लूंगा."

आरती ने सुकून की सांस ली, पर नवाज़ की नज़रें अब भी उसे छेड़ रही थी. उसने नवाज़ को इशारा किया की वो वहां से जाये, वर्ण उसकी निघ्त्य और बिखरे बाल कहीं सेठ जी की नज़र में न आ जाएं.

तभी नवाज़ थोड़ा आगे जेक पलट कर देखा और बोलै,

"मेमसाब, कल खेत चलना है न? सामन तैयार रखना... बहुत काम है वहां!"

आरती का दिल फिर से ज़ोर से धड़कने लगा. उसने सिर्फ सर हिला दिया, क्यूंकि वो जानती थी की

कल खेत में सिर्फ 'काम' नहीं, उनकी सुहागरात होने वाली है

सेठ जी: "मैं तोह चाहता हूँ इन दोनों की शादी करवा दूँ. घर का नौकर है, पर ईमानदार है. नीता के साथ इसकी जोड़ी जमेगी, क्यों बेटी?”

सेठ जी की ये बात सुनते hi आरती के दिल की धड़कन जैसे एक पल के लिए ठिठक गयी. सेठ जी तोह नवाज़ और नीता की शादी के सपने देखने लगे थे, और इधर आरती के बदन पर अभी भी नवाज़ के रोमांस की गर्मी बाकी थी.

आरती ने एक कुटिल मुस्कान के साथ नवाज़ की तरफ देखा. नवाज़ वही खड़ा ढीठपन से मुस्कुरा रहा था, जैसे वो आरती के साबरा का इम्तेहान ले रहा हो. आरती ने थोड़ा नखरे से और अपनी निघ्त्य का पल्लू सँभालते हुए जवाब दिया.

आरती: "हाँ पापा... करवा दीजिये! बहुत अच्छा होगा. नवाज़ जी को भी एक पक्की 'मालकिन' मिल जाएगी जो उन्हें ढंग से हैंडल करेगी."

नवाज़ ने जब आरती के मुंह से अपनी शादी की बात सुनी, तोह उसकी आँखों में एक शैतानी चमक आ गयी. उसने एक कदम आरती की तरफ बढ़ाया और सेठ जी के सामने hi बड़े ढीठपन से बोलै:

नवाज़: "अरे सेठ जी, मेमसाब तोह बड़ी जल्दी मेरी शादी करवाने पर तुली हैं! पर मेमसाब से पूछिए न... क्या उन्हें लगता है की नीता जैसी लड़की मुझे संभल पायेगी? या फिर मुझे कोई ऐसी 'सोफिस्टिकेटेड' औरत चाहिए जो मेरे इस gunde-pan को समझ सके?"

आरती का चेहरा शर्म और गुस्से से तमतमा गया. उसे पता था की नवाज़ सीधा उस पर निशाना साध रहा है.

आरती: (बात पलटते हुए)

"पापा, आप इनकी बातों में मत आइये. ये बस मज़ाक कर रहे हैं. आप चलिए, मैं चाय लेकर आती हूँ."

सेठ जी हस्ते हुए कहते है,

"ठीक है बेटी, पर सोचना ज़रूर इस बारे में."

किस बारे इन् दोनों के शादी के बारे मई क्या .. उसके बारे मई क्या सोचना है .. करवा दीजियेगा इनकी शादी

सेठ जी: "हाँ बेटी, शादी तोह करवा देते, पर सुना है नीता का एक्सीडेंट हो गया है. मुझे लगा नवाज़ को पता होगा, पर ये तोह अनजान बन रहा है. एक काम कर, तू जाके उसे देख आना

. उस बारे मई सोचने के लिए बोल रहा था "

सेठ जी की बात सुनकर आरती के चेहरे पर थोड़ी हैरान और फ़िक्र के भाव आ गए.

आरती: (नरम लहज़े में) "

जी पापा, मैं चली जाउंगी. पर जायेंगे कैसे?"

आरती ने तिरछी नज़र से नवाज़ की तरफ देखा, जो वहां खड़ा अपनी कुटिल मुस्कान छुपाने की कोशिश कर रहा था.

सेठ जी:

"वो ड्राइवर का नंबर नहीं लग रहा है, वर्ण वो तुम्हे ले जाता गाडी में. अब कैसे जाएगी?"

आरती ने मौका देखा और निघ्त्य और बिखरे बालों की शर्म को थोड़ा साइड में रख कर ढीठपन से बोलै:

आरती: "पापा, उसका रहने दीजिये... ये (नवाज़) मुझे ले जायेंगे."

सेठ जी: "कैसे? इसकी फरफटी (पुराणी बाइक) पर? इतनी धुप में जा पाएगी?"

आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जिसमे कल के खेत वाले प्लान की गर्मी पहले से hi थी. उसे पता था की बाइक पर नवाज़ के इतने करीब बैठना उसके लिए कितना उत्तेजित होने वाला है.

आरती: (हँसते हुए) "हाँ पापा, गाओं में hi तोह जाना है... चली जाउंगी. वैसे भी बाइक पर रास्ता जल्दी काट जाता है."

सेठ जी: "फिर ठीक है... जाओ. पर ध्यान से जाना, और नवाज़, तू मेमसाब को सही सलामत लेकर आना."

जी शेठ जी

सेठ जी जैसे hi अंदर मुड़े, नवाज़ ने आरती के बिलकुल पास आकर उसके कान में अपनी गरम सांसें छोड़ी और फुसफुसाया:

"बड़ी समझदार हो रानी... एक्सीडेंट के बहाने बाइक पर मेरे इतने करीब बैठने का इंतेज़ाम कर लिया? अब तैयार हो जाओ, रस्ते में इतने झटके दूंगा की तू अभी से 'सुहागरात' के सपने देखने लगेगी."

आरती शर्मा गयी और उसने अपनी निघ्त्य को थोड़ा और कसके पकड़ा.

"चुप रहिये बेशरम! पहले नीता को देखने दीजिये, फिर कल का सोचेंगे."

नवाज़ ने देखा शेठ अंदर चले गए ..सेठ जी के अंदर जाते hi नवाज़ ने लपक कर आरती का हाथ पकड़ लिया और उसे दीवार से सत्ता दिया. उसने उसके कान के पास झुक कर फुसफुसाया,

"बड़ी जल्दी मेरी शादी करवा रही थी रानी? भूल गयी कल खेत में हमारी 'सुहागरात' होने वाली है? क्या नीता को भी वहां बुला लून?"

आरती ने उसके सीने पर हाथ रखा और सिसकते हुए बोली,

"नवाज़ जी... छोड़िये! पापा यहीं हैं. और वो शादी की बात... वो तोह बस उन्हें बहलाने के लिए थी."

नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और बोलै,

"याद रखना रानी... तू मेरी है, और परसो खेत में मैं तुझे बताऊंगा की तेरा असली शौहर

कौन है."
 
नवाज़ ने उसकी थोड़ी ऊपर उठायी और बोलै,

"याद रखना रानी... तू मेरी है, और परसो खेत में मैं तुझे बताऊंगा की तेरा असली शौहर

कौन है."

हां बता देना ..

नवाज़ की पकड़ और मज़बूत हो गयी. आरती की सिसकारियों ने वह की ख़ामोशी को एक अजीब से जूनून से भर दिया . उसने आरती के कान के पास झुककर नरम मगर भरी आवाज़ में कहा,

"अभी तोह सिर्फ छुआ है रानी, और तेरा ये हाल है? परसो खेत की मिटटी गवाह बनेगी जब तू सच में मेरी बेगम बनेगी."

आरती ने अपना चेहरा नवाज़ के कंधे में छुपा लिया, शर्म और उत्तेजना का mila-jula एहसास उसे कपकपा रहा था.

नवाज़ के हाथ अब उसकी गांड को हलके से दबाने लगे थे, जिससे आरती के बदन में एक करंट सा दौड़ गया. उसने दबी हुई आवाज़ में कहा,

"नवाज़... बस कीजिये... कोई आ जायेगा."

नवाज़ ने एक शरारत भरी मुस्कान के साथ उसे थोड़ा पीछे हटाया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

"यहाँ कोई नहीं आने वाला. लेकिन ठीक है, तेरा ये सबर मैं कल तक संभल कर रखना चाहता हूँ. तब तक, तैयार रहना."

आरती ने लड़खड़ाती साँसों के साथ खुद को संभाला और अपनी बिखरी हुई ज़ुल्फ़ों को ठीक करने लगी. उसका चेहरा अब भी टमाटर की तरह लाल था, और नवाज़ की नज़रें अब भी उस पर जमी हुई थी.

तभी नवाज़ को कुछ याद आया ..

उसने थोड़े बड़ी आवाज़ में कहा,

"शादी? और मेरी नीता के साथ? बहुत दिमाख चल रहा है क्या .. कभी नहीं हो सकती "

आरती ने जब नवाज़ की आँखों में देखा, तोह वो डर के मारे अंदर की तरफ भागी.

नवाज़ ने बिना वक़्त गंवाए उसके पीछे दौड़ लगा दी. आरती अपने बैडरूम में घुसी और दरवाज़ा बंद करने hi वाली थी की नवाज़ ने तेज़ी से अपना पेअर दरवाज़े के बीच में फसा दिया.

"नवाज़ जी! छोड़िये... कोई देख लेगा!"

आरती ने पूरे ज़ोर से दरवाज़ा धकेलने की कोशिश की, पर नवाज़ की ताक़त के आगे वो बेबस थी.

नवाज़ ने एक झटके में दरवाज़ा अंदर की तरफ धकेला और खुद अंदर दाखिल होकर पीछे से कुण्डी लगा दी. आरती पीछे hat-te हुए बीएड से जा टकराई. उसका बदन डर और उत्तेजना से थरथरा रहा था, और उसकी निघ्त्य के बिखरे बाल उसकी हालत बयान कर रहे थे.

"बड़ी ख़ुशी हो रही थी न मेरी और नीता की शादी की बात सुनकर?"

नवाज़ ने उसकी तरफ कदम बढ़ाते हुए कुटिलता से पूछा.

"तू मेरी रानी है, और परसो खेत में हमारी सुहागरात होनी है. फिर ये शादी का नाटक क्यों?"

आरती ने भांपते हुए कहा,

"वो... वो तोह पापा को बहलाने के लिए था... प्लीज नवाज़ जी, अभी बहार जाइये."

नवाज़ ने लपक कर उसकी कमर पकड़ी और उसे दीवार से सत्ता दिया. उसने उसके कान के पास अपनी गरम सांसें छोड़ी और फुसफुसाया,

"पहले सजा मिलेगी... नीता का नाम लेने की सजा."

नवाज़ ने जैसे hi आरती को दीवार से सताया, उसके जिस्म की गर्मी आरती को महसूस होने लगी. आरती ने हड़बड़ाकर उसके सीने पर हाथ रखा, पर नवाज़ ने उसकी दोनों कलाइयां पकड़ कर दीवार के साथ ऊपर चिपका दी.

"नवाज़ जी... कोई आ जायेगा, छोड़िये न,"

आरती ने भांपते हुए कहा, पर उसकी आँखों में डर से ज़्यादा नवाज़ के लिए एक अजीब सी कशिश थी.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसके कान के पास अपने होंठ ले जा कर धीरे से फुसफुसाया,

"कैसे छोड़ दूँ रानी? तूने बड़े मज़े से मेरी शादी नीता से करवाने की हामी भरी थी न? अब उसकी सजा तोह भुगतनी पड़ेगी."

नवाज़ ने अपनी गर्दन नीचे की और आरती के नरम गले पर अपने गरम लैब रख दिए. आरती ने एक लम्बी और गर्म सिसकी ली और अपनी आँखें मूँद ली. नवाज़ उसकी निघ्त्य के बिखरे हुए कालर के पास अपनी जीभ फेर रहा था, जिस से आरती का पूरा बदन थरथरा उठा.

"आआह्ह्ह... नवाज़... प्लीज... ऐसे मत कीजिये,"

आरती ने सिसकते हुए अपना सर पीछे दीवार से टिका दिया.

नवाज़ ने उसकी कलाइयां छोड़ी और अपना एक हाथ उसकी निघ्त्य के नीचे से उसकी नंगी जांघ पर रखा और उसे ऊपर की तरफ सरकाने लगा.

"ये तोह सिर्फ शुरुआत है रानी... नीता का नाम लेकर तूने मुझे भड़काया है, अब खेत जाने से पहले मुझे थोड़ा सुकून चाहिए."

आरती ने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फसा दी और बिना चाहते हुए भी उसके इस जुनूनी रोमांस में खोने लगी.

"आप बहुत बड़े गुंडे हो... जो चाहते हो वही करवाते हो मुझसे."

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट के साथ उसकी आँखों में देखा और बोलै,

"वही तोह मज़ा है रानी... अब चलो, बीएड मई चलते है . नीता के घर जाने से पहले कुछ मस्ती करते है और नीता के घर के रस्ते में तुझे और सजा भी देनी है."

नवाज़ ने बैडरूम का दरवाज़ा अंदर से लॉक किया हुआ था और एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती को लेके बीएड की तरफ बढ़ा. आरती बीएड से टिक कर कड़ी हो गयी , उसका सीना तेज़ी से upar-neeche हो रहा था.

"नवाज़ जी, पापा बहार hi हैं... प्लीज जाइये,"

आरती ने गिड़गिड़ाए हुए कहा.

पर नवाज़ पर तोह जूनून सवार था. उसने लपक कर आरती की कमर पकड़ी और उसे झटके से अपने सीने से सत्ता दिया. उसका एक हाथ आरती की गर्दन पर था और दूसरा उसकी कमर पर.

"सजा तोह पूरी लेनी पड़ेगी रानी... तूने बड़े मज़े से मेरी शादी नीता से करवाने की हामी भरी थी न?"

नवाज़ ने उसके कान के पास गरम सांसें छोड़ते हुए फुसफुसाया.

आरती ने सिसकते हुए अपना सर नवाज़ के कंधे से टिका दिया. नवाज़ ने उसके लबों को बड़ी शिद्दत से चूसना शुरू किया.

आरती ने शुरुआत में उसके कन्धों को धकेला, पर नवाज़ की पकड़ और उसकी मरदाना गर्मी ने उसे ढीला कर दिया. उसने भी नवाज़ के बालों में अपनी उँगलियाँ फसा दी और उसके इस जूनून का साथ देने लगी.

नवाज़ का हाथ अब आरती की निघ्त्य के नीचे से उसकी नरम जाँघों पर सरकने लगा. उसने उसकी गोरी चमड़ी को मसलते हुए उसे बीएड पर गिरा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया.

"आआह्ह्ह... नवाज़... कल खेत में सब करने दूँगी... अभी छोड़िये..."

आरती ने भांपते हुए कहा.

नवाज़ ने उसकी आँखों में देखा, जो अब उत्तेजना से लाल हो चुकी थी.

"वहां तोह पूरी रात होगी रानी... पर अभी तोह सिर्फ नीता का नाम लेने का हिसाब चूका रहा हूँ."

नवाज़ ने उसकी गर्दन पर एक गहरा निशान छोड़ दिया, जिस से आरती ज़ोर से सिसक उठी. वो दोनों बैडरूम में एक दुसरे में खोये हुए थे, बहार सेठ जी की मौजूदगी का डर अब कहीं पे

छूट गया था.
 
"वहां तोह पूरी रात होगी रानी... पर अभी तोह सिर्फ नीता का नाम लेने का हिसाब चूका रहा हूँ."

नवाज़ ने उसकी गर्दन पर एक गहरा निशान छोड़ दिया, जिस से आरती ज़ोर से सिसक उठी. वो दोनों बैडरूम में एक दुसरे में खोये हुए थे, बहार सेठ जी की मौजूदगी का डर अब कहीं पे छूट गया था.

अब बहुत हुआ

ऐसा कहा के आरती नवाज़ को जोर से पीछे ढकेल देती है और आरती नवाज़ से अलग होती हैं..

और फिर आरती मुस्कुराते हुए फ़ौरन बीएड से उठ के सीधा पीछे हो जाती हैं........ वार्डरॉब के पास .. और वह कड़ी हो जाती है .. वहीँ नवाज़ उसी को hi देख रहा था.. तब इस बार आरती अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेती हैं ..... शायद शर्म से.....

नवाज़- तुजे मजा तो आ रहा था न आरती..

नवाज़ ने बेशर्मी से अपनी बत्तीसी फाड़ते हुए kaha.tab आरती ने बड़ी मुश्किल से अपनी ऑंखें खोल कर नवाज़ की तरफ देखा..

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आरती- मेरे मजे से आप को क्या करना है..

नवाज़- और मज़ा देना है..

आरती- मुझे नहीं करने है आप के साथ मज़े..

नवाज़- क्यों..

आरती ने नज़रे नीचे की तरफ झुकाये ........बिलकुल खामोश थी वो ........

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" ......मुज्जझीी टटटूऊंम्म सीए ...... durrrrrrrr...llaaagggtaaaaa haiiinnn.n.n......."

और आरती फिर से धीरे से बोल पड़ती हैं

" क्यों!!!!! क्यों लगता हैं तुम्हें मुझसे दुर्र........."

तब अड्डा के साथ नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

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"तुम??? "

सॉरी आपको.. क्या आपके साथ मैंने जबरदस्ती की...

आरती न मई गर्दन हिलती है

या मैंने तुमसे...

तब आँखे उतके नवाज़ की तरफ देखते है .. पर कहते कुछ नहीं है..

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या मैंने आपसे कुछ कहा ..

इस बार नवाज़ ने सॉरी नहीं कहा ........

आरती ने न मई गार्डन हिलाये ..

या fir.....main कोई डरने की चीज़ हूँ......

तब आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती hai..tab नवाज़ बीएड से उठ के आरती के पास जाने लगा

तो क्यों दार लगता है आप को मेरा

और आरती हौले से बोल पड़ती हैं

मुझे नहीं पता

जो कुछ भी कहना हैं मेरी आँखों में आँखें डालकर कहो ....... देख लेना तुम्हारा ये दुर्र हमेशा के लिए ख़तम हो जायेगा.......

आप क्यों आ रहा हो मेरे पास

मुझे कुछ बात करनी है

तब उसकी तरफ देखते हुई आरती है





मुझे आप से कोई बात नहीं करने है..

 क्यों

क्यों की आप हो hi ऐसे

कैसा हु मई

लड़कियों पटाने मई माहिर

ऐसा क्यों लगा आपको

थोड़े hi दिनों मई मैं आप के बारे मई बहुत कुछ जान चुकी हु..

अच्छा.. ऐसा क्या..

हाँ जी

तब नवाज़ उसके पास जाता है और आपने हाथ आरती के सर के पीछे ले जाता है और उसके हेयरपिन निकल देता है..

तब आरती गुस्से से उसके तरफ देखती है.. इस मई गुस्सा काम और नखरा ज्यादा था..

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इसलिए मैंने कहा मई आप को अच्छे से जान गए हु

क्या क्या जान गए हो आप

बहुत कुछ

ऐसा कहके उसके हाथ से हेयरपिन लेने की कोशिश करने लगे.. जो नवाज़ नहीं दे रहा था..

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ये बहुत कुछ का मतलब क्या है मेमसाब

मुझे नहीं पता

दोनों हेयरपिन को लेकर एक एक हाथ से चटपट करने लगे..

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वो नवाज़ को कैसे हैंडल करे ये सोच रही थी ... मगर सोचने से तो कुछ होता हैं नहीं ........ आखिर वो कुछ फैसला करने वाली थी की उसी वक़्त नवाज़ हौले से अपना एक हाथ आरती के कमर के पीछे से उसके नाज़ुक से कमर पर रख देता है..

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नवाज़ के इस हरकत से आरती की धड़कनें और तेज़्ज़ होती चली जाती हैं ....... दुर्र से उसका चेहरा लाल पीला हो चूका था .......... मुँह से लफ्ज़ नहीं निकल रहे थे........ वो बस अपनी नज़रें नीचे झुकाये बिलकुल खामोश कड़ी हुई थी......

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आरती नवाज़ को लेकर बहुत परेशां थी ........ उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो नवाज़ को आखिर कैसे हैंडल करे ........

वो आपने आप से कहने लगे .. मेरी नज़रें एक पल के लिए भी नवाज़ से हटाए क्यों नहीं हुत्त रही है ....... जो भी है .. जैसा भी hai.......magar कुछ तो बात है इस कमीने में........... जो मैं चाह कर भी इसे कुछ बोल नहीं पा रही हु ......क्यों इसका हाथ आपने कमर पर से हटा नहीं प् रही hu..ek अजीब सी डोर मुझे बार बार उसकी तरफ खींच रही है.............. क्यों हो रहा है मेरे साथ ऐसा..

नवाज़ का यु उसके कमर पर हाथ रखना आरती की बेचैनी को पल पल बढ़ता जा रहा था ........ मगर उसके अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं थी की वो नवाज़ का हाथ आपने कमर से हटा ले .......... वहीँ नवाज़ की नज़रें उसपर hi तिकी हुई thi.......wo बड़े गौर से आरती के साडी हरकतों को एक तुक देख रहा था ......

" आआआआप्पप्प… डडूओररररर ...... r.aahhhooooooooo....mujjjjhhssseee.e..... और मेरे कमर पाई का आपने हाथ हटाओ .. "

जैसे तैसे आरती हकलाते हुए अपनी बात कहती हैं वहीँ नवाज़ कोई रिएक्शन नहीं करता और उसी हाल में वैसे hi चुप चाप खड़ा रहता हैं ...

" आरती ........ मेमसाब आप को मुझसे घबराने की ज़रुरत नहीं हैं..... विश्वास करो mera......main आप को कोई चोट नहीं पहुंचाऊंगा ........... और आप के साथ ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करूँगा.. "

नवाज़ धीरे से अपनी बात कहता हैं ..... वहीँ आरती अभी भी दरी hui......sehma हुई se.......wahin नवाज़ इस बार हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं .... मगर वो एक पल के लिए भी अपना हाथ आरती के कमर से नहीं हटाता ......हालाँकि अब आरती बार बार नवाज़ का हाथ उसके कमर से हटाने की कोशिश कर रही थी.........

तभी नवाज़ उसके कमर पर अपनी पकड़ और पक्की करता है.. मतलब उसके कमर को और जोर से दबोच लेता है और आपने चेहरा उसके हूंतो के और करीब लता है...

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ोूछहः..

ऐसा कहते हुई इस बार आरती ने थोड़ा जोर से उसका हाट आपने कमर से हटाया .. और उसे पीछे धकेलते हुई कहा..

" ये क्या कर रहे हो जी ................ये सब करना हो तो नीता के साथ करो.. ..........यहाँ नहीं!!!!!! जाओ उसके पास .. और उसके साथ करो.. जो करना चाहते हो "

आरती जैसे तैसे अपनी साँसे संभालती हुई बोल पड़ी ...............मगर उसकी आवाज़ में न तो वो बात थी और न ताक़त थी .. और न गुस्सा.. जिससे नवाज़ पर कोई दुर्र या फर्क padta.............balki उसकी हिम्मत और भी बढ़ चुकी थी................

अब आरती अड्डा के साथ उसके सामने खड़े थी.





और नवाज़ उसकी तरफ टकटकी लगाए बस देकता रहा और उसकी नज़रें आरती के दोनों चूचियों पर आकर जैसे ठहर gayi............lumbi लुम्बी सांस लेने की वजह से उसके ये दोनों बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रही थी जिससे नवाज़ के लुंड में फिर से हलचल होनी शुरू हो गयी थी..... वो ललचायी हुई नज़रों से आरती के दोनों चूचियों को बस घूरे जा रहा था मनो आरती को कहना चाह रहा हो की इसका रूस पीला दो और इसको अपने कठोर हाथों से बस मसलता रहूं .... अब आरती को नवाज़ की ये गन्दी नज़र भी ाची लग रही थी..................

आरती ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और जैसी वो कड़ी थी वैसे hi बस कड़ी रही............ और नवाज़ बस उसकी चूचियों को जी भरकर बस घूरता रहा.......

नवाज़ की नज़रें अभी भी उसपर तिकी हुई थी..........

आरती ठीक उसके सामने कड़ी थी …उसकी नज़र ठीक उसके चूचियों पर thi..ye सब देख और आरती मैं ए बदलाव के बारे मैं सोच कर नवाज़ के मान मैं पता नहीं क्या आया….. वो फ़ौरन आरती के पास गया और अपना एक हाथ आरती के गलों पर ले जाता हैं और उसके कोमल गलों पर धीरे धीरे फेरने लगता हैं .....

नवाज़ के ऐसे करने से आरती एक दम से चौंक गयी….. और उसकी तरफ घबरते हुए देखने लगी ……. नवाज़ उसकी घबराहट ताड़ gaya……aur उसकी और देखते हुए बोलै……

कुछ नहीं मेमसाब आप के गोर गोर कोमल से गाल को महसूस कर रहा हु

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती का चेहरा शर्म से पूरा लाल पढ़ जाता हैं और उसकी बेचैनी एक बार फिर से बढ़ने लगती हैं.....

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दिल में अब दुर्र धीरे धीरे और भी गहराता जा रहा tha........wahin उसका जिस्म पसीने से भीगने लगा tha........A.C चलने के बावजूद उसका बदन भीगता जा रहा था जो अब नवाज़ की नज़रियों से नहीं छुपा था.......

" मेमसाब .........मेरी तरफ dekho.......meri इन आँखों mein............kya आप को मुझसे दुर्र लगता हैं......."

वहीँ आरती एक बार फिर से अपनी नज़रें नवाज़ से चुरा लेता hain.........par कहते कुछ नहीं है..

कुछ तो बोलो मेमसाब .........ी ऍम वेटिंग ...... जब तक आप नहीं बताओगे.. तब तक मुझे कैसे पता चलेगा की आप मुझसे क्यों डरते हो..

नवाज़ दुबारा से बोल पड़ता hai..par इस बार भी आरती कुछ नहीं बोलती..

तब नवाज़ कहता है..

क्या आप मुझसे डरते हो

इधर आरती का दुर्र से गाला सूख रहा था ......... वो आज बुरी तरह से फंस गयी थी ......उसका जी तो कर रहा था की वो यहाँ से बहार भाग जाये........ पर उसे पता था नवाज़ उसे इतनी आसानी से कहाँ जाने देने वाला नहीं है .... नवाज़ फिर से पूछता है तब आरती अपना सर हाँ में धीरे से हिला देती हैं.......

तब नवाज़ अपना हाथ हौले हौले आरती के गलों पर फेरते हुए उसके सर पर अपने हाथ फेरने लगता hain.......wahin आरती बिलकुल खामोश थी और चुप चाप नवाज़ के चेहरे को एक तुक देखे जा रही थी.......

" muujjhhheeeeeee........naaahhiinnnnn मालूम कुछ .. और मुझे नहीं कक्कीेहहह्णनाआआ कुचछह........ मुझे चूर दो और आप भी छहहाआलललली jaaawwwwoooooooooo..... यहहै से.. बहार पापा जी है "

इस बार आरती नवाज़ की आँखों में आँखें डालकर धीरे से बोलती हैं.. पर ये बोलते हुई एआरटी की जुबान एक बार फिर से लड़खड़ा जाती हैं......... वहीँ नवाज़ आरती के मासूम से चहरे पर से अपनी नज़रें नहीं हटा पता..

दो मिनट बाद नवाज़ उसके होंटो के करीब आपने हूंठ लता है..

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ऐसे कैसे चले जय मेमसाब..

ये कह कर उसने अपने चहरे को आरती के चहरे के एक डैम नज़दीक लाया ..….

इतने नज़दीक से खड़े होने की वजह से एक दूसरे की साँसे दोनों महसूस कर रहे the..Nawaz के नथुनु से बहार आ रही गरम सांसो को महसूस करके आरती के बदन मई वासना के खुमारी चने lagee…..Uski गरम साँसों से आरती धीरे धीरे मदहोश हो रही थी..

नवाज़ उसकी अंदर छुपी हुई वासना को जगाने की कोशिश कर रहा था.. आरती बिलकुल भी नहीं समझ पा रही थी की नवाज़ उसके साथ आखिर करना क्या चाहता है... क्यों की उनका कल का तै हुआ तह ........वैसे वो कुछ कुछ समाज पा रही थी पर पूरा नहीं .. उसे यकीं था की वो उसके नज़दीक आना चाहता है पर उसके आगे और कुछ करना चाहता है या नहीं ये उसे नहीं पता था.. अगर उसने कुछ किया तो.. इसलिए वो कन्फ्यूज्ड थी..

यही सोचकर आरती का जी चाह रहा था की वो वहां से फ़ौरन भाग जाये....... मगर उसके अंदर इतनी भी हिम्मत होती तो वो भगति ...... ये साब सोचकर उसकी सांसें पूरी तरह से बेकाबू थी.......... उसका जिस्म थार थार दुर्र से काँप रहा था .......... नवाज़ को अपने इतने करीब पाकर आरती की क्या हालत हुई थी ये बस वही जानती थी .........मगर शायद नवाज़ भी अब आरती को इतनी आसानी से अब नहीं चोर्ने वाला था......

और फिर नवाज़ थोड़ा और आगे बढ़ता है .. मतलब उसको चिपक के खड़ा हो जाता है.. .....नवाज़ के इस हरकत से आरती की रही सही हिम्मत भी जवाब दे जाती hain........aaj तक उसके पति के अलावा कभी कोई लड़का उसके इतने करीब नहीं आया था ........ नवाज़ का यु इतने करीब आने से आरती का दुर्र से गाला सूखने लगता hain........wo थोड़ा संभालती तभी नवाज़ धीरे से अपना एक हाथ आरती के पिट के तरफ ले जाता हैं और उसको पीछे से दबाता है.. इस वजह से आरती के चूचियों नवाज़ के छठ्ठी मई दस जाती है .. नवाज़ के इस हमले से आरती के मू से आअह्ह्ह निकल जाती है... आरती के चूचियों का मखमली एहसास नवाज़ को जैसे पागल करता जा रहा था....... इससे वजह से नवाज़ उसके नंगे पीट को वो बड़े प्यार सहलाये जा रहा था .... नवाज़ का लुंड पूरी तरह से सख्त हो गया था और उसका लुंड आरती के थेइ को महसूस हो रहा था.. इन् सब की वजह से आरती मदहोश हो चुकी थी... तभी नवाज़ आपने चेहरा आरती के गोर गोर गालों पाई रखता है..

तब आरती हस्ते हुई ओपपोसे करने लगे और no no कहने लगे.. और नवाज़ को पीछे धकेलने लगे..

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पर नवाज़ सुन hi नहीं रहा था..

चोरो मुझे नवाज़..

आरती के विरोध मई ज्यादा दम नहीं था.. वो है रही थी नवाज़ के जबरदस्ती पर.. वैसे इससे जबरदस्ती नहीं कहा सकते पर इस मई आरती की हामी भी नहीं थी..

दो मिनट ये ऐसे hi चल रहा था.. आरती ओपपोसे कर रही थी और नवाज़ उसके गाल को किश कर रहा था..
 
पर नवाज़ सुन hi नहीं रहा था..

चोरो मुझे नवाज़..

आरती के विरोध मई ज्यादा दम नहीं था.. वो है रही थी नवाज़ के जबरदस्ती पर.. वैसे इससे जबरदस्ती नहीं कहा सकते पर इस मई आरती की हामी भी नहीं थी..

दो मिनट ये ऐसे hi चल रहा था.. आरती ओपपोसे कर रही थी और नवाज़ उसके गाल को किश कर रहा था..

तब नवाज़ आरती के आम पर धीरे धीरे अपने दोनों हांथो को रख diya…Ispar आरती कुछ नहीं बोलती है

आरती- मुझे चोरो.. पापा भी बहार है.. वो आ जायेंगे…

नवाज़- नहीं आएंगे ..रूम लॉक किया है मैंने

ऐसे कहते हुई उसके कान के पास हूंठ रख दिए और वह चुम लिया..





आरती- आआह्ह्ह्हहए… पागल हो गए हो क्या .. किसी ने देख लिया तो..

नवाज़- कोई नहीं देखेगा

ऐसे कहते हुई आपने दोनों हाथो के उंगुलियों से उसके दोनों निप्पल्स को छेड़ने laga.aise छेड़ने hi वजह से आरती गरम होने लगाती है..

आरती- नहीं मई ऐसा कुछ नहीं कर सकती यहाँ

नवाज़ का लुंड उसकी गांड पर निघ्त्य के ऊपर से दस्तक दे रहा था.

नवाज़- कल तो किया था न..

आरती- कल हम यहाँ नहीं थे ..

उससे क्या फरक पड़ता है

बहुत फरक पड़ता है

कुछ फरक नहीं पड़ता

मेरे पीछे क्यों पड़े हो..

नवाज़- तुम क्या पता तुम क्या हो.. तुम क्या चीज़ हो

नवाज़ ने आरती की चूचियां के ऊपर हाथ रखा हुआ था . उसकी चूचियां उसके साँसों के साथ ताल मिला कर ऊपर नीचे हो रही थी..

आरती- क्या हु मई

आरती ने शरारती अंदाज़ मई कहा…

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नवाज़ ने उसी पोजीशन में आपने हाथ आरती के चूचियां पर धीरेसे इधर उधर हिलाया.. आरती ने कुछ नहीं कहा और कोई इशारा किया नहीं .. अब आपने दोनों हाथ को उसकी दोनों चूची पर नवाज़ ने इस तरह से रख दिया जिससे वो पूरी तरह धक् जय. मतलब आपने हाथो मई आरती की पूरी चूचियां समां ली..

उसने आरती के चूचियानं को महसूस किया.. उनका अहसास असीम सुखदायी था. नवाज़ का जी तो चाहा उन मस्तियों को अभी अपने हाथों से निचोड़ कर उनका सारा रास निकल ले और पी जय.. पर.. वो सोचहाता है अभी नहीं.. उसने आरती के निप्पल को छुआ .. बहुत सकत हुई थे उसके निप्पल.. तब नवाज़ को ध्यान मई आया की ये उप्पर से नखरा कर रही है पर ये अब गरम हो चुकी है..

नवाज़- तुम्हारी ये हिघ्त, तुम्हारे ये mote-mote गोल आम..

ऐसे कहते हुई उसके आम को दबाता है ..

आरती- आआहाआआआ.. ओहूऊओऊ…. Sssssssssssssssssssssssss….

नवाज़- तुम्हारी ये पतली कमर और भरे हुए हुई ये गांड..

एक हाथ ले जेक गांड को दबाता है..

aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhaa… उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़… ummmmmmmmmmmmm…

नवाज़- केले के तने के जैसी दो lambi-lambi गोरी टाँगे और उनके बीच में छोटे बालो से ढकी छूट.. कितना लाजवाब है तुम्हारा बदन..

इसपर आरती नखरा दिखते हुई कहती है..

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आरती- कितने गंदे तरीके से टैरिफ करते हो.. आप को तो लड़कियों की टैरिफ करना भी नहीं आती है..

तब अचानक नवाज़ ने पीछे से hi कमर को जोर से जतका दिया वैसे हे उसका कड़क लुंड आरती के गांड पर जोर से टकराया ….जिसे से आरती सिसक उठी..

आरती- ोुछहहहहह.. नवाज़… क्या कर रहे हूँ…

नवाज़- क्या हुआ..

आरती- चूब रहा है..

नवाज़- क्या..

आरती शरमाते हुई कहती है ..

आरती- मुझे नहीं पता..

फिर उसने आरती की चुच्यों को बेहरमी से मसलना शुरू कर दिया…

आआआआह्ह्हह्हआआआ…. बब्यीयययययय… ये क्या कर रहे हूँ..

नवाज़- आआआआअह्ह्ह्हहआ… बब्यीय…

उसके तरफ अड्डा के साथ देखते हुई आरती ने कहा ..

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आरती- आहहहआ.. …बेबी नहीं तो कोण हो आप मेरे ..

नवाज़: अहह साली क्या चूचिया है tere….aaj तो इनको निचोड़ दूंगा……

आरती : नवाज़ आप ये ठीक नहीं कर रहे हो….

नवाज़ : चुप साली रांड अब्ब जायदा नखरे किये तो यही छोडूंगा तुजे ..

आरती : अह्ह्ह प्लीज ऐसे ना करो ….हम पर थोड़ा सा रेहम खाओ….

नवाज़ उसके हर आंग को दबा कर उसके शरीर का नाप लेने मई लगा था.. आरती भी किसी दरीहुई बकरी की तरह उसके हर हमले से काँप सी जाती ….

अब नवाज़ आरती को घुमा देता है.. फिर नवाज़ ने अपने होंटो को आरती के होंटो के तरफ बढ़ाना शुरू कर diya…..abb आरती अपने होश हवस खोना शुरू हो गया था …..आरती ने अपनी ऑंखें बंद कर ली….





वैसे उसने आरती के हूंतो पर आपने हूंठ रख दिए...





वो भूखे जानवर के तरह आरती के होंटो को सूचक करने लगा…

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वो कभी उसके नीचे वाले होंठ को चुस्त, तो कभी ऊपर वाले होंठ को कभी वो अपने डेंटन को आरती के होंटो मैं गधा deta……aab आरती के हूंतो से खून भी आने लगा था.. तब आरती को दर्द का अहसास होता है … आरती के लिए ये नया एहसास था.. आज तक किसने भी उसके पति ने भी कभी उसके हूंतो को ऐसा चूसा नहीं था.. और कल नवाज़ ने भी नहीं .. आज नवाज़ उसे बदला बदला सा लग रहा था

आरती का पूरा बदन मस्ती के कारन कनाप उठा.. वो अब अभी जीभ आरती के मू मई डालता है.. आरती ने भी उसके जीभ का आपने मू मई स्वागत किया .. आपने जीभ को उसके जीभ लगाके .. अब आरती आपने बहे उसके खंड पर दोनों बाजु से रख देते है और उसके बालो मई आपने हाथ घूमने लगाती hai..uski वजह से नवाज़ जोश मई आ जाता है.. और उसका एक हूंठ आपने दोनों उप्परवाले और नीचेवाले दांतो मई लेके कटाने लगता है..





आरती उसके मू मई hi सिसकती hai..nawaz का मू आरती के मू से सत्ता होने की वजह से आरती की आवाज बहार नहीं आती है.. और वो मस्ती मई hi नवाज के सर को पीछे से प्यार से चपत लगाती है.. अब आरती गरम हुई है ये देख कर नवाज आरती के सर को जो आपने दोनों हाथो से पकड़ा था वो चोर देता hai..usne आपने सर पर के दोनों हाथ निकले है ये देखते हुई आरती आपने दोनों हाथ से उसके सर को आपने मू पर दबा देते है ..तब नवाज़ अपनी दोनों हाथ आरती के गांड पर रख देता है और वह दबाने लगता hai..aur साथ मई आरती को चूसने लगता hai..aarti भी अब उसे चूसने लगाती है .. अब नवाज़ आपने एक हाथ थोड़ा निचे ले जाने लगता है और दूसरा हाथ फिर से आरती के सर के पीछे रख कर उसको आपने मू मई दबाता hai..uska हाथ नीचे कहा जा रहा है ये आरती को पता चलते hi वो मू मई hi no नू कह रही थी साथ मई अपनी गार्डन न न मई हिला रही थी .. अब नवाज़ का हाथ आरती के निघ्त्य के निचले वाले पोरशन तक पहुँच gaya..tab अचनाक आरती आपने मू नवाज़ के मू से पीछे हटती है .. और कहती है..

आरती- वह हाथ मत लगाओ.. और उसे उप्पर मत उठाओ..

नवाज़- मुझे एक बार छोड़ने दे न

ऐसा कहके आरती के दोनों शोल्डर को पकड़ा और पीछे वाल को सत्ता diya..aur फिर से उसके हूंतो को चूसने लगा..

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अब आरती के दोनों हाथ नवाज़ के बालो से खेल रहे थे ..तब आपने एक हाथ को आरती के सर पर पीछे से रख कर आरती को थोड़ा निचे जुका दिया और आपने दूसरे हाथ से आरती की निघ्त्य उप्पर उठा ली.. फिर से वो आरती को लेके खड़ा हो गया और उसके हूंतो को चूसने लगा.. अब दूसरे हाथ से भी उसकी निघ्त्य उप्पर कर के उसने आपने दोनों हाथ आरती के नंगे गांड पर रख दिए.. उसको किश करते hi नवाज़ आरती के गांड मई उंगली दाल थी.. आरती का मू नवाज़ के मू मई था इसलिए वो कुछ नहीं कह पायी… मू मई hi सिसक गयी..

उउउउउउउम्मम्मम्मम्म….

और गर्दन न न मई हिलती रही.. और झट से आपने एक हाथ वह ले जेक नवाज़ की आपने गांड मई की उंगली निकल ली.. नवाज़ फिर से डालने की कोशिश करता रहा पर आरती ने उसका वो हाथ को जोर से पकड़ा और उसे आगे नहीं बढ़ाने दिया..

वो 5 मिनट तक आरती के होंटो को निचोड़ता रहा ….और साथ मई उसके गांड के द्वार से खलेलने लगा और जब उसका मान भर गया तो नवाज़ ने आरती के हूंतो को चोर दिया ..

आरती उसे कुछ कहती नहीं है बस उसके आँखों मई देखते रहते है.. उसने जबरदस्ती आरती को किश किया था इस बात का आरती को गुस्सा नहीं tha..wo सिर्फ उसे देखे जा रही थी.. नवाज़ तो पहले से hi हवस का पुजारी था पर अब आरती के आँखों मई भी हवस नज़र आ रही थी .. नवाज़ ने कब का आरती के सर के पीछे का हाथ निकल दिया था पर भी आरती वह से नहीं जा रही थी बल्कि नवाज़ को देख रही थी.. नवाज़ को अब पता चल गाय था की ये अब रेडी है.. नवाज़ आरती के हूंतो के पास आपने चेहरा ले जाता है पर उसको किश नहीं करता है..

आरती किश के लिए बेताब थी.. नवाज़ किश नहीं कर रहा है ये जानकर आरती किश के लिए आपने चेहरा आगे की और ले जाती hi वैसे hi नवाज़ आपने चेहरा पीछे लेता है..

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नवाज़ के चहरे पर हसी आ जाती है.. फिर आरती के चहरे पर भी हसी आ जाती है ..

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आरती अब नवाज़ की तरफ आपने फेस करती है वैसे नवाज़ा आपने चेहरा पीछे लेता है.. दोनों एक दूसरे को बात नहीं कर रहे थे पर देखे जा रहे the..jaise hi आरती आगे आती है वैसे hi नवाज़ पीछे जाता है.. पीछे वाल तक नवाज़ पहुँच जाता है.. तब आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती hai..wo उसे किश का िश्रा करती है ..

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नवाज़- क्या .. आरती.. सब कुछ सही है न..

उसके जिंदगी का ये इस तरह का जंगली टाइप का पहला किश था.. उसके पति ने उसे किश किया था ..लेकिन ऐसा नहीं.. उनका सेक्स तो अँधेरे मई निघ्त्य उप्पर उतके उसका पति उसके छूट मई अपनी छोटी सी उंगली जैसा लुंड दाल देता बस.. और कुछ नहीं ..

आरती अब उसके पास आकर कड़ी हो गयी.. 2 फुट की दूरी पर..

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नवाज़ इतने करीब से उसके ऊठे हुई निप्पल देख प् रहा था…

आरती ने अब अपनी आँखे बंद कर दी .. उसके होंठ कैंप से रहे थे.. उसने नवाज़ का हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया और जैसे hi उसका हाथ आरती के आम को टच करता है वो सिसक उठी..

Sssssssssssssssssssssssssssssssssssss… ummmmmmmmmmmmmmmmmmm

तब नवाज़ आपने हाथ से उसके आम को फिर से एक बार जोर से दबाता है… फिर से वो सिसकती है…

आआआआअह्ह्हह्हआआआ.. ऐसी.. करो.. dhireeeeeee..seeeeeeeeee..

तो मई किश कर लू तुजे अब आरती

आरती आँखे बंद कर के किश इमेजिन करने लगी.





नवाज़- आजाओ आरती

नवाज़ का इतना कहना था की अपनी आँखे खोल कर वो किसी लोमड़ी की तरह नवाज़ पर जापति और आपने गर्म गुलाभी होंठ उसने नवाज़ के काळा होंठो पर रख दिए..

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और उसे ज़ोरो से पिसते हुई बुड़बुड़ी..

आरती- ummmmmmmmmmmm… ी लव यू.. नवाज़.. ी लव यू..

नेहटी hi खूबसूरत आरती एक काळा आदमी को ी लव यू बोल रही थी..

ये कहने के बाद आरती को समाज आ गया की उसने क्या कहा है.. आरती को खुद hi समाज मई नहीं आया की उसने ऐसा क्यों कहा..

नवाज़ : तो इसका मतलब.... है की अब हमारी आरती मैडम हमसे पैर करने लग गयी है न.

एकदम से आपने उप्पर ऐसा प्रहार होता देखकर उसकी सीटीपीटी घूम हो गयी.. आरती का चेहरा गुलाबी सा हो उठा.... और पहली बार नवाज़ ने उसे शर्माकर अपनी आँखे चुराते हुए देखा...





वो धीरे से बोली : हम्म्म...

फिर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ.. उसने बोल तो दिया था पर अन्दर hi अन्दर वो जानती थी की उसे ऐसा बोलना नहीं चाहिए था.. हड़बड़ी और हवस मई बोल गयी..

आरती- नहीं नहीं.
 
नवाज़- आजाओ आरती

नवाज़ का इतना कहना था की अपनी आँखे खोल कर वो किसी लोमड़ी की तरह नवाज़ पर जापति और आपने गर्म गुलाभी होंठ उसने नवाज़ के काळा होंठो पर रख दिए और उसे ज़ोरो से पिसते हुई बुड़बुड़ी ..

आरती- ummmmmmmmmmmm… ी लव यू.. नवाज़.. ी लव यू..

नेहटी hi खूबसूरत आरती एक काळा आदमी को ी लव यू बोल रही थी..

ये कहने के बाद आरती को समाज आ गया की उसने क्या कहा है.. आरती को खुद hi समाज मई नहीं आया की उसने ऐसा क्यों कहा..

नवाज़ : तो इसका मतलब.... है की अब हमारी आरती मैडम हमसे पैर करने लग गयी है न.

एकदम से आपने उप्पर ऐसा प्रहार होता देखकर उसकी सीटीपीटी घूम हो गयी.. आरती का चेहरा गुलाबी सा हो उठा.... और पहली बार नवाज़ ने उसे शर्माकर अपनी आँखे चुराते हुए देखा...

वो धीरे से बोली :

हम्म्म...

फिर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ.. उसने बोल तो दिया था पर अन्दर hi अन्दर वो जानती थी की उसे ऐसा बोलना नहीं चाहिए था.. हड़बड़ी और हवस मई बोल गयी..

आरती- नहीं नहीं.

तो मई किश कर लू तुजे अब आरती ..

आरती उसके और करीब आये और उसके आँखों मई झंकार उसे कहती है …

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मैंने कब मन किया है ..

फिर नवाज़ उसे किश करना शुरू करता है..





दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चूस रहे थे..

आरती को नवाज़ अब ऊपर से नीचे तक चूमना शुरू कर diya...sabase पहले तो होंठ आये उसके मुंह में, आरती भी प्यासी लोमड़ी की तरह उसके लिप्स को काट रही थी.... चूस रही thi....aur नवाज़ इतने इत्मीनान से उसे चुम रहा tha....nawaz ने आँखे खोल कर देखा तो वो बंद आँखे कर के उसके किश का मज़ा ले रही थी .... नवाज़ ने किश थोड़ थी और उसे देखने लगा. आरती ने आँखे खोल दी और बोली..

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क्या हुआ कमीने .... रुक क्यों गए.... करो न.... कितना मज़ा आ रहा था...

इतना कहते हुए उसने नवाज़ का हाथ पकड़ कर अपने ब्रेस्ट पर रख दिया.. फिर नवाज़ आरती के आम zor-zor से दबाने लगा... फिर नवाज़ ने उसके निघ्त्य के उप्पर के दो बटन निकलने लगा ..आरती ने आपने निचला होंठ दांतो टेल दबा लिया और शरारती हंसी हंसती हुई बोली ..

कमीने…...... ये क्या कर रहे हो.... पापाजी आ गयी तो...

नवाज़- bas.....upar-upar से देखूंगा.....

मुझे क्या पागल समज रखा है क्या.. मई आप को अच्छे से जानती हु.. आप और उप्पर से देखेंगे.. ये कभी भी नहीं हो सकता..

आला कसम… तू तो बहुत चालू है ...

आरती नॉटी स्माइल देते है..

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नंगी औरत मिल जय तो आप आप के भगवन को भूल जाओगे..

ट्रस्ट मि.. पक्का प्रॉमिस..

नवाज़ पक्का promis....bra मत निकलना ..

नहीं निकलूंगा ..

आरती तो वैसे भी तैयार hi थी , बस, थोड़ा नखरा कर रही थी ..

ओके ...आप कहते हो तो दिखा देते हु ....पर लिमिट में रहना, समझे.. उप्पर उप्पर से देखना .. ब्रा नहीं निकलेंगे ...

और उसने मुस्कुराते हुए अपनी निघ्त्य के एक दो बटन खुद hi निकल दिए ...जैसे hi उसके मुम्मे कासी हुई ब्रा में नवाज़ के नज़रों के सामने आये , वो सांस लेना hi भूल gaya...ye शायद आरती के लिए पहला मौका था की उसने अपनी कीमती आम को आपने पति के अलावा किसी के सामने ब्रा मई दिखाया तह ...इसलिए उसे शर्म आ रही थी .... इसलिए उसने आपने गर्दन निचे जुका दी ..

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और आपने ब्रा पर अपना हाथ रख दिया... उसपर नवाज़ ने हाट रख दिया.. नवाज़ की हालत कुछ ऐसी थी की वो खुद hi समझ नहीं प् रहा था.... जब नवाज़ ने आरती का हाथ हटा कर उसके मम्मी को अपने हाथों में पकड़ा तो वो अपनी sudh-budh खोटी चली गयी और उसे कुछ भी होश नहीं रह गया की वो नवाज़ के बारे में क्या सोच रही थी ....उसके पुरे शरीर में चींटियां सी रेंग रही थी , और खास कर उसके निप्पल्स par....wo अंदर से चाह रही थी की नवाज़ उसके निप्पल्स को ज़ोर से दबा dale.....unhe चुभला कर ज़ोर से काट ले.

अब फिर से नवाज़ उसको किश करने लगता है..

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किश करते hi आरती के पीठ पर उसके हाथ चल रहे थे .. आरती के निघ्त्य को पीछे से बटन थे खोलने के लिए और कमर से बेल्ट से निघ्त्य उसने बंद राखी thi..uski निघ्त्य थोड़ी मॉडर्न टाइप की थी.. नवाज़ ..उसके निघ्त्य के बटन के साथ खेलते खेलते hi एक बटन खिंच के तोड़ता है ..

आरती मू मई hi uuuuuuuuuuooooo . करती है.. और इशारे से कहती है उसको थोड़ा क्यों.. और अपनी गार्डन न न मई हिलती hi..waise hi नवाज़ आरती के बचे हुई 3-4 बटन फटाफट थोड़ देता है .. आरती मू मई hi ऊऊऊओ.. ऊऊओ.. कर रही थी.. और न न मई गार्डन हिला रही thi..aab नवाज़ के दोनों हाथ आरती के पीठ पर थे… चाहे तो आरती आपने मू हटा सकती थी.. और उसे आपने मू से कह सकती थी.. ऐसा क्यों किया पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया .. और सिर्फ गार्डन हिलती रही ..

अब नवाज़ का हाथ एआरटी के नंगी पीठ पर घूम रहा था.. और घूमते घूमते वो आपने हाथ उसके ब्रा के बटन के पास पहुंचता है.. आरती को लगता है ये ब्रा hi तोडग.. वो झट से आपने दोनों हाथ पीछे ले जाती है और नवाज़ के हाथो को पकड़ लेते है..

इधर उनका किश अभी भी चल रहा था.. आरती नवाज़ का हाथ पकड़ते हुई न न मई गार्डन हिला कर उसे इशारे मैं न तोड़ने को कह रहे थी.. पर नवाज़ सुन नहीं रहा था.. और वो आरती के हाथो को पकड़ते हुई hi ब्रा को खिंच रहा था है.. आरती समाज जाती है ये अब मानाने वाला नहीं है… इसलिए वो गार्डन हां मई हिला कर मई निकल थी हु ऐसे कह देते है और ब्रा के हुक खोलते है..

ब्रा का हुक निकालता hi नवाज़ उसका किश तोड़ता है.. उसकी निघ्त्य शोल्डर से झटके मई निकालता है.. बेल्ट की वजह से निघ्त्य कमर पे अटक जाती है.. निचे नहीं गिरती.. नवाज़ आधा खुला ब्रा निकल कर फेक देता है ..
 
किश ख़तम होते hi नवाज़ आरती के बालो को पकड़ता है और जोर से खिंच कर बैडरूम मई एक चेयर थी उसपे आरती को बिठा देता है..

नवाज़ ने आरती की तरफ देखा तो उसके हूंठ काँप रहे थे.. नवाज़ आरती की तरफ वासना की नज़र से देख रहा था.. इस बार आरती को साबरा नहीं हुआ और उसने नवाज़ को गले से लगा लिया.. और जल्द hi वो दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया.. उनका किसिंग करने का तरीका एकदम जंगली था.. जैसे लाइफ मई पहली और आखरी बार किसिंग कर रहे हो..

आरती किश करते वक़्त बड़बड़ा रही थी..

ोुहुओ…. बब्यीयीय…… उम्मम्मम… आआह्ह्हआआ…

आरती के पुरे शरीर मई ऐसा महसूस हो रहा था जैसे चींटिया रेंग रही है … नवाज़ के हाथ उसके पुरे शरीर पर घूमने लगे थे .. उसने उसकी निघ्त्य निचे से उप्पर उठा ली..

फिर नवाज़ ने आरती को और ऊपर उठा लिया…. उसने आरती के निघ्त्य को दोनों तरफ से पकड़ कर उसके कमर तक ऊपर उठा diya.aur आरती के दोनों थांगे थोड़े उप्पर उठाकर एक दूसरे से थोड़ी दूर की ….. आरती को समाज मैं नहीं आ रहा था की अब्ब वो क्या करने वाला है…. आरती ने निघ्त्य के नीचे एक काली पंतय पहन राखी थी ..

तभी नवाज़ अपना मन रख देता है उसकी पंतय पर...





आरती को एकदम झटका लगता hai....wo उसका मू उप्पर उअतने की कोशिश करती hai.....nawaz को मौका मिल जाता है और ओह झट से आरती की पंतय निचे कर देता hai...panty निचे होते hi नवाज़ को आरती की गुलाबी छूट नज़र आ जाती hai...jiske आस पास सुनहरे छोटे छोटे बाल the...aarti जल्दी से अपनी छूट छुपा लेती है अपने गोर हाथो से....

तब उस पंतय को खिंच कर नवाज़ ने एक hi झटके मई फाड़ देता है.. आरती नवाज़ के तरफ पहले गुस्से से देखती है और बाद मई उसके गालो पाई प्यार से चपपट लगाती है… और कहती है..

कमीना कही का..

कमीना .. चूड़ाकड कही का .. ऐसा बोल .. रांड..

इस बात पर आरती कुछ नहीं बोलती है .. अब नवाज़ के सामने आरती की छूट बेपर्दा थी.. आरती की गुलाभी छूट को नवाज़ लगातार देखने लगा.. एक पल के लिए तो नवाज़ अपनी आँखे झपकना भूल hi गया था … आरती की छूट देख के.. अरविन्द के बाद आरती की छूट देखने वाला नवाज़ पहला बाँदा था .. पर शयद अरविन्द ने भी इस तरह से प्यासी नज़रो से इतने देर तक आरती की छूट नहीं देखि honge..iss वजह से शर्माकर आरती आपने चेहरा आपने दोनों हाथो मई छुपा लेते है..

नवाज़ ने आरती के छूट के क्लीट को अपनी उंगलयों मैं लेकर मसलते हुए कहा…..

नवाज़- वाह तेरी छूट तो अभी तक पनाये हुए है..

फिर उसने आरती की गांड को दोनों तरफ से पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठाया.. नवाज़ उसके गोर जिस्म को उप्पर से निचे तक आँखे फाड़े देख रहा था .. फिर उसने आरती का एक आम मू मई बरकार जोर से चूस डाला .. इसपर आरती जोर से चिलए..

ाहहाआ…. धीरे करररो … जीई.. ....... आअह्ह्ह्ह.... कमीने… uffffffffffff…. क्या कह रहे हो जीई आप… कमीना… छुडाकाड..

और हँसाने लगी..

ज्यादा मत है नहीं तो तेरा बुद्धा ससुर अन्दर आ जायेगा…

अब नवाज़ अपनी लम्भी जीभ को उसके निप्पल पर फेरकर उसके पुरे आम को मू मई भरकर चूस रहा था ..

फिर उसने आरती की गांड को दोनों तरफ से पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठाया.. नवाज़ उसके गोर जिस्म को उप्पर से निचे तक आँखे फाड़े देख रहा था .. फिर उसने आरती का एक आम मू मई बरकार जोर से चूस डाला .. इसपर आरती जोर से चिलए..

ाहहाआ…. धीरे कररर… कमीने… uffffffffffff…. क्या कह रहा था तू… कमीना… छुडाकाड..

और हँसाने लगी..

ज्यादा मत है नहीं तो तेरा बुद्धा ससुर अन्दर आ जायेगा…

अब नवाज़ अपनी लम्भी जीभ को उसके निप्पल पर फेरकर उसके पुरे आम को मू मई भरकर चूस रहा था ..

अब आरती जावेद के सर को पकड़कर उप्पर उठा लेती है और वो नवाज़ के गले मई बहे डालकर उसे अब बेहताशा चूमने लगी ..





पहले उसके गलो पर.. फिर माथे पर.. फिर आँखे… और फिर एक गहरी सांस लेकर अपनी शरबती हूंठ नवाज़ के हूंतो पर रख दिए .. और उसे चूमने लगी.. वो चुम्बन इतना गहरा और नशे से भरा था की नवाज़ भी आपने होश खो बैठा..

नवाज़ ने इससे पहले बहुत सरे औरत और कुंवारी लड़की को चूस चूका था .. उनके हूंतो का शहद चख चूका था .. लेकिन शायद आरती के लिए ये पहला मक्का था.. उसके हस्बैंड ने उसको किस्स्स तो बहुत बार किया था लेकिन इस तरह एक दूसरे मई डूबकर एक दूसरे को हूंतो को चूसा नहीं था.. आपने हूंतो का रास नवाज़ को जैसे पीला रही थी और उसका रास जैसे पि रही थी .. ऐसा आरती ने कभी आपने हस्बैंड के साथ नहीं किया था..

वो अपनी पूरी ताकत से नवाज़ के हूंतो को चूस रही थी.. ऐसा करते हुई वो अब बड़ी बेहरमी से अपनी नोक वाली चटिया नवाज़ के साइन पर रगड़ रही थी..

उसके छूट मई हो रही खुजली को वो उसके चूड़े साइन से घिसकर मिटा रही थी..

पहले से बेहतर लग रहे है तेरे हूंठ .. आरती ..

मतलब..

मैंने पहले तुम्हारे हूंठ चूसे थे तब से अब बेहतर हैं

क्यों झूठ बोल रहे हो जी

क्या झूठ… तुमको चूसा नहीं..

ओनली टच किया था.. बाद मई चूसा था

तो अब फिर से चुस्त हु..

आरती चहरे पर नखरा दिखते हुई कहती है..

अभी और क्या चूसना बाकि है..

इस वक़्त नवाज़ अच्छी तरह से जान चूका था की खुद से ज्यादा आरती ये सब करने के लिए उतावली हो चुकी है .. और वैसे भी कोनसा मर्द नहीं चाहेगा उसे आरती जैसे आवर्त के छूट मई उंगली डालने का अवसर मिले .. उसके छूट को चाटने का.. उसे चूमने का .. उसके मम्मी दबाने का और चूसने का .. हर कोई चाहेगा .. और नवाज़ जैसा कमीना तो ये अवसर कभी भी नहीं चोरनेवाला था..

और फिर नवाज़ ने आपने हाथ को उसके नवल पर रख दिया .. तब आरती तड़प ुति..

aaahhhaaaaaaaaaa….

और फिर धीरे धीरे उप्पर करते हुई उसके छाती तक ले गया .. और वैसे hi नवाज़ ने वह जोर से दबा दिया..





aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaa…… nnnnnnaaawaaaa….zzzzzzzzzzz…. जरा dhire..seee.. नाआ.. मुजीई… मारर्र दाल ने का इरादा है क्या….

Uuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmm…………..

मेरे ससुर ायंदर आ जायेंगे…

अब नवाज़ बड़े hi प्यार से उसे दबाने लगा .. जैसे जैसे वो आरती के मम्मी दबा रहा था आरती की आँखे उप्पर की तरफ होती चली गयी.. जैसे उसे कोई मिर्गी का दूर पड़ा हो.. लेकिन वो कोई दौरा नहीं था तो ात्त्याधिक उत्तेजना की वजह से उसके अन्दर एक जोरदार ऑर्गैजम का निर्माण हो चूका था. और नवाज़ जैसे जैसे उसके मम्मी को दबा रहा था वो हवा सीधा उसके ऑर्गैजम मई जाकर उसे और ज्यादा फुला रही थी..

अब नवाज़ उसके मम्मी आपने मू मई लेकर चूसने लगा .. और जैसे hi नवाज़ ने उसके निप्पल को मू लेकर चूसा उसके चेयर के हैंडल को जोरसे पकड़ कर आपने गांड ऊपर उठा ली

aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaa….

Maaarrrrrrrrrrrrrrrrrrr…. Gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…

नवाज़ उसके नुकीली निप्पल्स को अभी भी चूस रहा था … साथ मई आपने मू मई लेकर उन चबा भी रहा था
 
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