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- Dec 5, 2013
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अगली सुबह, शेठ जी के फ़ोन पर किसी से बात करने की ऊँची आवाज़ आरती के कानो में पड़ी, और उसकी नींद खुल गयी.. उसने थोड़ा नींद में hi अपने बगल वाली जगह पर हाथ मारा, पर वो खली thi—uska पति अरविन्द रात को भी नहीं आया था.
आरती एक ठंडी सांस लेकर उठ कर बैठ गयी. उसने अपने बिखरे हुए बाल बांधते हुए थोड़ी देर तक खली कमरे को देखा, फिर एक गहरी सोच के साथ कहा ..
अरविन्द का तोह यही रोज़ का है, पर पापा जी subah-subah किस्से इतनी गर्मी में बात कर रहे हैं?'
अरविन्द का रात भर न आना आरती के लिए नयी बात नहीं थी, पर आज उसे थोड़ा अजीब लग रहा था. उसने मिरर के सामने खड़े होकर अपनी सदी ठीक की फिर एक गहरी सोच के साथ नहाने चली गयी.
जब वो नाहा कर बहार आयी, तोह शेठ जी अब भी फ़ोन पर लगे हुए थे. आरती ने अपने गीले बालों को टॉवल से सुखाते हुए सोचा,
"अरविन्द का न आना तोह अब आम बात हो गयी है, पर पापा जी subah-subah इतने परेशां क्यों हैं?"
आरती ने naha-dhokar अपने गीले बालों को एक झटके से सुलझाया और उन्हें बांधते हुए कमरे की खिड़की से बहार देखा... नवाज़ के कमरे की और. रात की थकन अभी पूरी तरह उत्तरी नहीं थी, पर नवाज़ का ख्याल आते hi उसकी थकन पता नहीं कहाँ चली गयी.
उसने देखा की उसके रूम का दूर ओपन hi था. ये सोच कर आरती मैं hi मैं कहने लगी,
"दूर ओपन है... कहाँ चले गए नवाज़ जी subah-subah? रात में इतना लेट सोकर भी... कैसा आदमी है ये, थोड़ा सा भी रेस्ट नहीं करते. ात लीस्ट नाश्ता करके तोह चले जाते."
आरती ने खिड़की से हटकर जल्दी से अपनी सदी सही की और निचे किचन की तरफ भागी. उसे लगा शायद नवाज़ किचन में आया होगा ..नाश्ते के लिए . पर वहां सिर्फ ख़ामोशी थी. उसने टेरेस से निचे झाँका तोह नवाज़ की गाडी भी वहां नहीं थी.
आरती का दिल थोड़ा बैठ गया. वो अभी ये सोच hi रही थी की नवाज़ बिना बताये कहाँ जा सकता है, तभी उसे बहार गार्डन से किसी के बात करने की आवाज़ आयी. वो भागते हुए बालकनी तक गयी और देखा की शेठ जी गुस्से में किसी से कह रहे थे,
नवाज़, अभी सो रहा hai..maine hi कहा है उसे थोड़ा आराम करने को ..
आरती ने जब नवाज़ को शेठ जी से बात करते सुना, तोह उसने रहत की सांस ली. उसके मैं में एक सुकून सा आया, "मतलब गए नहीं हैं, अभी यहीं हैं... मैं तोह खामखा डर गयी थी."
लेकिन उसके दिमाग में अब कुछ और hi चल रहा था. वो वापस अपने बैडरूम में गयी. उसने आईने के सामने खड़े होकर हल्का सा मेकअप किया और अपने पसंदीदा परफ्यूम की खुशबु से खुद को महका लिया. उसने अपनी सदी उतरी और उसकी जगह एक रेड सेक्सी लिंगेरी पहनी, और ऊपर से एक निघ्त्य दाल ली जो उसके बदन पर नरम लग रही थी.
किचन में जाकर उसने बड़े चाव से नवाज़ के लिए अच्छा सा नाश्ता तैयार किया. दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ थी, पर इरादे पक्के थे. एक हाथ में नाश्ते की ट्रे और दूसरे में अपना फ़ोन उठाकर, वो दबे पाऊँ किचन से निकली और सीधे नवाज़ के रूम में दाखिल हुई.
कमरे में हल्का अँधेरा था और नवाज़ शायद थकन की वजह से गहरी नींद में था. आरती ने ट्रे साइड टेबल पर राखी और एक बार मुद कर दरवाज़े की तरफ देखा, फिर अपनी नज़रें नवाज़ के सोये हुए चेहरे पर टिका दी.
आरती ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से धीरे से बंद किया. उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी की उसे खुद सुनाई दे रही थी. वो दबे पाऊँ नवाज़ के बीएड के पास गयी. नवाज़ गहरी नींद में था, उसकी छाती हर सांस के साथ dheere-dheere ऊपर नीचे हो रही थी.
आरती ने सोचा,
"इन्हे उठाऊ या थोड़ी देर देखती रहूँ? रात भर कितनी म्हणत की है इन्होने..."
पर फिर उसके दिमाग में एक शरारत आयी. वो चुपचाप नवाज़ के पास बीएड के किनारे पर बैठ गयी. उसके परफ्यूम की तीखी खुशबु पुरे कमरे में फेल गयी थी. आरती ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और नवाज़ के बिखरे हुए बालों को छूने hi वाली थी की नवाज़ ने नींद में थोड़ी करवट ली.
आरती ठिठक गयी, उसका सांस रुक गया. अगर नवाज़ इस वक़्त जाग गया और उसे इस हालत में (निघ्त्य में) अपने इतने करीब देखा, तोह वो क्या सोचेगा? पर आरती के मन में एक अजीब सा सुकून tha—Arvind की बेरुखी ने उसे उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ उसे नवाज़ की सादगी और म्हणत में अपना पैन दिखने लगा था
आरती के मैं में uthal-puthal मची हुई थी. एक तरफ नवाज़ की शराफत थी और दूसरी तरफ उसका अपना अकेलापन, जो अरविन्द की वजह से और गहरा हो गया था.
आरती ने फ़ोन निकलने का ख्याल झटक दिया, क्यूंकि वो इस पल को किसी स्क्रीन में क़ैद करने के बजाये महसूस करना चाहती थी. उसने धीरे से नवाज़ की तरफ रुख किया और उसके कान के पास झुक गयी. उसके गीले बालों की एक बूँद नवाज़ के गाल पर गिरी.
आरती ने बिलकुल धीमी, मदहोश आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा,
"नवाज़ जी... उठिये न. कब तक सोते रहेंगे? आपके लिए नाश्ता लायी हु."
नवाज़ ने नींद में hi उसकी परफ्यूम की खुशबु महसूस की और अपनी आँखें खोलीं. जैसे hi उसने सामने आरती को इस हाल में और इतने करीब देखा, उसकी नींद उड़ गयी और उसकी नज़रें आरती की रेड लिंगेरी की झलक और निघ्त्य पर ठीक गयी
अभी भी दोनों एकदूसरे को देख रहे थे
वो नवाज़ उसे देखता ही रह गया था . आरती ने एक सेक्सी लिंगेरी पेहेन राखी थी रेड कलर की जो की अक्सर वो अपनी शादी के जस्ट बाद अरविन्द क साथ पहना करती थी शुरुवाती दिनों me…aarti को इस रूप में देखकर तोह नवाज़ पगला हो gya…Tv की हेरोइनेस भी आरती की खूबसूरती की आगे पानी भर्ती नज़र आ रही thee…wahin नवाज़ का लुंड तोह जैसे अंडरवियर फाड़कर बहार आने को होगया…. आरती को ऐसे अपनी इतने करीब बैठे हुई देख के नवाज़ का मुँह खुला का खुला ही रह gya….wahin नवाज़ की ऐसी हालत देखकर आरती के फेस पैर भी स्माइल आ गयी थी..
आरती और नवाज़ के बीच की ख़ामोशी अब गहरी होती जा रही थी. नवाज़ की फटी हुई आँखें और आरती की शरारत भरी मुस्कराहट ने कमरे का माहौल पूरी तरह बदल दिया था.
नवाज़ को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की शेठ जी की बहु .. जिसे पूरा गाँव हमेशा इज़्ज़त की नज़र से देखता है, उसके इतने करीब इस लिबास में बैठी होगी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसे लगा शायद आरती को सुनाई दे रहा हो.
आरती ने अपनी नज़रें नवाज़ की नज़रों में गड्ड दी और बड़े अदा के साथ कहा,
"गुड मॉर्निंग नवाज़ जी... हो गयी क्या आप की नींद?"
आरती की ये बात सुनकर नवाज़ की धड़कनो ने जैसे रफ़्तार पकड़ ली. वो बस tak-taki लगाए आरती को देखता रहा था , जैसे उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की जो वो सुन रहा है वो सच है
नवाज़ ने थूक निगलते हुए दबी आवाज़ में जवाब दिया,
"हो गयी..."
आरती ने थोड़ा और करीब झुकते हुए, उसकी आँखों में शरारत भर कर पूछा,
"कैसे रही रात?"
नवाज़ के दिमाग में कल रात का वो सुनसान रास्ता और आरती का साथ बिताये हुई पल घूमने लगे.. उसने धीरे से कहा,
"आरती रानी , अब तेरे बिना कैसे कटेगी..."
आरती ने खिलखिलाकर हस्ते हुए, अपनी निघ्त्य का पल्ला थोड़ा संभाला और गहरी नज़र से उसे देखते हुए बोली,
"क्यों फ़िक्र करते हो जी ? कल से तोह मेरे साथ hi कटेगी..."
ये कह कर आरती ने अपनी ऊँगली नवाज़ के सीने पर हलकी सी फेरी. नवाज़ को महसूस हो रहा था की उसका कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा है. आरती का ये रूप, वो रेड लिंगेरी, और ये baatein—sab मिलकर उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी. उसने आरती का हाट पकड़ लिया, जो उसके सीने पर खेल रहा था
आरती ने देखा की नवाज़ की नज़रें उसकी रेड लिंगेरी पर जैम गयी हैं, वही पुराणी लिंगेरी जो कभी अरविन्द को रिझाने के लिए पहनी थी, पर आज उसका असर नवाज़ पर कहीं ज़्यादा गहरा हो रहा था. नवाज़ का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी हालत देख कर आरती के चेहरे पर एक जीत वाली मुस्कराहट आ गयी.
आरती ने धीरे से अपना हाथ नवाज़ के घुटने पर रखा और कान के पास झुक कर फुसफुसाई,
"क्यों नवाज़ जी... ऐसे क्या देख रहे हो? क्या मुझसे डर लग रहा है या खुद से?"
नवाज़ की सांसें तेज़ हो गयी थीं. उसने हिम्मत जूता कर कहा,
"आरती रानी , .. मुझे उम्मीद नहीं थी की तू इतने सुबह सुबह मेरे लिए इतने सजधज के साथ जाएगी
आरती ने उसके होंठों पर अपनी ऊँगली रख दी और बड़े नरम लहजे में बोली,
"रात को तोह पापा जी ने कहा था न की हम परिवार है.. और वैसे भी तो मई आप की बेगम हु और आप मेरे शोहर .. बेगम आपने शोहर के लिए इतना तो कर सकते है न
आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ ने आरती की मदहोश आँखों में देखा, तोह उसकी साड़ी शर्म और मर्यादा dheere-dheere पिघलने लगी. उसने महसूस किया की आरती सिर्फ उसे सत्ता नहीं रही थी, बल्कि वो भी उतनी hi तड़प रही थी जितना की वो. नवाज़ ने अपना एक हाथ आरती की कमर की तरफ बढ़ाया, और उसके कमर पर रख दिया .
तब आरती खुद hi थोड़ा और करीब हो गयी, इतना करीब की उसकी निघ्त्य का रेशमी कपडा नवाज़ के बदन को छूने लगा
आरती एक ठंडी सांस लेकर उठ कर बैठ गयी. उसने अपने बिखरे हुए बाल बांधते हुए थोड़ी देर तक खली कमरे को देखा, फिर एक गहरी सोच के साथ कहा ..
अरविन्द का तोह यही रोज़ का है, पर पापा जी subah-subah किस्से इतनी गर्मी में बात कर रहे हैं?'
अरविन्द का रात भर न आना आरती के लिए नयी बात नहीं थी, पर आज उसे थोड़ा अजीब लग रहा था. उसने मिरर के सामने खड़े होकर अपनी सदी ठीक की फिर एक गहरी सोच के साथ नहाने चली गयी.
जब वो नाहा कर बहार आयी, तोह शेठ जी अब भी फ़ोन पर लगे हुए थे. आरती ने अपने गीले बालों को टॉवल से सुखाते हुए सोचा,
"अरविन्द का न आना तोह अब आम बात हो गयी है, पर पापा जी subah-subah इतने परेशां क्यों हैं?"
आरती ने naha-dhokar अपने गीले बालों को एक झटके से सुलझाया और उन्हें बांधते हुए कमरे की खिड़की से बहार देखा... नवाज़ के कमरे की और. रात की थकन अभी पूरी तरह उत्तरी नहीं थी, पर नवाज़ का ख्याल आते hi उसकी थकन पता नहीं कहाँ चली गयी.
उसने देखा की उसके रूम का दूर ओपन hi था. ये सोच कर आरती मैं hi मैं कहने लगी,
"दूर ओपन है... कहाँ चले गए नवाज़ जी subah-subah? रात में इतना लेट सोकर भी... कैसा आदमी है ये, थोड़ा सा भी रेस्ट नहीं करते. ात लीस्ट नाश्ता करके तोह चले जाते."
आरती ने खिड़की से हटकर जल्दी से अपनी सदी सही की और निचे किचन की तरफ भागी. उसे लगा शायद नवाज़ किचन में आया होगा ..नाश्ते के लिए . पर वहां सिर्फ ख़ामोशी थी. उसने टेरेस से निचे झाँका तोह नवाज़ की गाडी भी वहां नहीं थी.
आरती का दिल थोड़ा बैठ गया. वो अभी ये सोच hi रही थी की नवाज़ बिना बताये कहाँ जा सकता है, तभी उसे बहार गार्डन से किसी के बात करने की आवाज़ आयी. वो भागते हुए बालकनी तक गयी और देखा की शेठ जी गुस्से में किसी से कह रहे थे,
नवाज़, अभी सो रहा hai..maine hi कहा है उसे थोड़ा आराम करने को ..
आरती ने जब नवाज़ को शेठ जी से बात करते सुना, तोह उसने रहत की सांस ली. उसके मैं में एक सुकून सा आया, "मतलब गए नहीं हैं, अभी यहीं हैं... मैं तोह खामखा डर गयी थी."
लेकिन उसके दिमाग में अब कुछ और hi चल रहा था. वो वापस अपने बैडरूम में गयी. उसने आईने के सामने खड़े होकर हल्का सा मेकअप किया और अपने पसंदीदा परफ्यूम की खुशबु से खुद को महका लिया. उसने अपनी सदी उतरी और उसकी जगह एक रेड सेक्सी लिंगेरी पहनी, और ऊपर से एक निघ्त्य दाल ली जो उसके बदन पर नरम लग रही थी.
किचन में जाकर उसने बड़े चाव से नवाज़ के लिए अच्छा सा नाश्ता तैयार किया. दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ थी, पर इरादे पक्के थे. एक हाथ में नाश्ते की ट्रे और दूसरे में अपना फ़ोन उठाकर, वो दबे पाऊँ किचन से निकली और सीधे नवाज़ के रूम में दाखिल हुई.
कमरे में हल्का अँधेरा था और नवाज़ शायद थकन की वजह से गहरी नींद में था. आरती ने ट्रे साइड टेबल पर राखी और एक बार मुद कर दरवाज़े की तरफ देखा, फिर अपनी नज़रें नवाज़ के सोये हुए चेहरे पर टिका दी.
आरती ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से धीरे से बंद किया. उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी की उसे खुद सुनाई दे रही थी. वो दबे पाऊँ नवाज़ के बीएड के पास गयी. नवाज़ गहरी नींद में था, उसकी छाती हर सांस के साथ dheere-dheere ऊपर नीचे हो रही थी.
आरती ने सोचा,
"इन्हे उठाऊ या थोड़ी देर देखती रहूँ? रात भर कितनी म्हणत की है इन्होने..."
पर फिर उसके दिमाग में एक शरारत आयी. वो चुपचाप नवाज़ के पास बीएड के किनारे पर बैठ गयी. उसके परफ्यूम की तीखी खुशबु पुरे कमरे में फेल गयी थी. आरती ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और नवाज़ के बिखरे हुए बालों को छूने hi वाली थी की नवाज़ ने नींद में थोड़ी करवट ली.
आरती ठिठक गयी, उसका सांस रुक गया. अगर नवाज़ इस वक़्त जाग गया और उसे इस हालत में (निघ्त्य में) अपने इतने करीब देखा, तोह वो क्या सोचेगा? पर आरती के मन में एक अजीब सा सुकून tha—Arvind की बेरुखी ने उसे उस मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ उसे नवाज़ की सादगी और म्हणत में अपना पैन दिखने लगा था
आरती के मैं में uthal-puthal मची हुई थी. एक तरफ नवाज़ की शराफत थी और दूसरी तरफ उसका अपना अकेलापन, जो अरविन्द की वजह से और गहरा हो गया था.
आरती ने फ़ोन निकलने का ख्याल झटक दिया, क्यूंकि वो इस पल को किसी स्क्रीन में क़ैद करने के बजाये महसूस करना चाहती थी. उसने धीरे से नवाज़ की तरफ रुख किया और उसके कान के पास झुक गयी. उसके गीले बालों की एक बूँद नवाज़ के गाल पर गिरी.
आरती ने बिलकुल धीमी, मदहोश आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा,
"नवाज़ जी... उठिये न. कब तक सोते रहेंगे? आपके लिए नाश्ता लायी हु."
नवाज़ ने नींद में hi उसकी परफ्यूम की खुशबु महसूस की और अपनी आँखें खोलीं. जैसे hi उसने सामने आरती को इस हाल में और इतने करीब देखा, उसकी नींद उड़ गयी और उसकी नज़रें आरती की रेड लिंगेरी की झलक और निघ्त्य पर ठीक गयी
अभी भी दोनों एकदूसरे को देख रहे थे
वो नवाज़ उसे देखता ही रह गया था . आरती ने एक सेक्सी लिंगेरी पेहेन राखी थी रेड कलर की जो की अक्सर वो अपनी शादी के जस्ट बाद अरविन्द क साथ पहना करती थी शुरुवाती दिनों me…aarti को इस रूप में देखकर तोह नवाज़ पगला हो gya…Tv की हेरोइनेस भी आरती की खूबसूरती की आगे पानी भर्ती नज़र आ रही thee…wahin नवाज़ का लुंड तोह जैसे अंडरवियर फाड़कर बहार आने को होगया…. आरती को ऐसे अपनी इतने करीब बैठे हुई देख के नवाज़ का मुँह खुला का खुला ही रह gya….wahin नवाज़ की ऐसी हालत देखकर आरती के फेस पैर भी स्माइल आ गयी थी..
आरती और नवाज़ के बीच की ख़ामोशी अब गहरी होती जा रही थी. नवाज़ की फटी हुई आँखें और आरती की शरारत भरी मुस्कराहट ने कमरे का माहौल पूरी तरह बदल दिया था.
नवाज़ को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे. उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की शेठ जी की बहु .. जिसे पूरा गाँव हमेशा इज़्ज़त की नज़र से देखता है, उसके इतने करीब इस लिबास में बैठी होगी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसे लगा शायद आरती को सुनाई दे रहा हो.
आरती ने अपनी नज़रें नवाज़ की नज़रों में गड्ड दी और बड़े अदा के साथ कहा,
"गुड मॉर्निंग नवाज़ जी... हो गयी क्या आप की नींद?"
आरती की ये बात सुनकर नवाज़ की धड़कनो ने जैसे रफ़्तार पकड़ ली. वो बस tak-taki लगाए आरती को देखता रहा था , जैसे उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की जो वो सुन रहा है वो सच है
नवाज़ ने थूक निगलते हुए दबी आवाज़ में जवाब दिया,
"हो गयी..."
आरती ने थोड़ा और करीब झुकते हुए, उसकी आँखों में शरारत भर कर पूछा,
"कैसे रही रात?"
नवाज़ के दिमाग में कल रात का वो सुनसान रास्ता और आरती का साथ बिताये हुई पल घूमने लगे.. उसने धीरे से कहा,
"आरती रानी , अब तेरे बिना कैसे कटेगी..."
आरती ने खिलखिलाकर हस्ते हुए, अपनी निघ्त्य का पल्ला थोड़ा संभाला और गहरी नज़र से उसे देखते हुए बोली,
"क्यों फ़िक्र करते हो जी ? कल से तोह मेरे साथ hi कटेगी..."
ये कह कर आरती ने अपनी ऊँगली नवाज़ के सीने पर हलकी सी फेरी. नवाज़ को महसूस हो रहा था की उसका कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा है. आरती का ये रूप, वो रेड लिंगेरी, और ये baatein—sab मिलकर उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी. उसने आरती का हाट पकड़ लिया, जो उसके सीने पर खेल रहा था
आरती ने देखा की नवाज़ की नज़रें उसकी रेड लिंगेरी पर जैम गयी हैं, वही पुराणी लिंगेरी जो कभी अरविन्द को रिझाने के लिए पहनी थी, पर आज उसका असर नवाज़ पर कहीं ज़्यादा गहरा हो रहा था. नवाज़ का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी हालत देख कर आरती के चेहरे पर एक जीत वाली मुस्कराहट आ गयी.
आरती ने धीरे से अपना हाथ नवाज़ के घुटने पर रखा और कान के पास झुक कर फुसफुसाई,
"क्यों नवाज़ जी... ऐसे क्या देख रहे हो? क्या मुझसे डर लग रहा है या खुद से?"
नवाज़ की सांसें तेज़ हो गयी थीं. उसने हिम्मत जूता कर कहा,
"आरती रानी , .. मुझे उम्मीद नहीं थी की तू इतने सुबह सुबह मेरे लिए इतने सजधज के साथ जाएगी
आरती ने उसके होंठों पर अपनी ऊँगली रख दी और बड़े नरम लहजे में बोली,
"रात को तोह पापा जी ने कहा था न की हम परिवार है.. और वैसे भी तो मई आप की बेगम हु और आप मेरे शोहर .. बेगम आपने शोहर के लिए इतना तो कर सकते है न
आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ ने आरती की मदहोश आँखों में देखा, तोह उसकी साड़ी शर्म और मर्यादा dheere-dheere पिघलने लगी. उसने महसूस किया की आरती सिर्फ उसे सत्ता नहीं रही थी, बल्कि वो भी उतनी hi तड़प रही थी जितना की वो. नवाज़ ने अपना एक हाथ आरती की कमर की तरफ बढ़ाया, और उसके कमर पर रख दिया .
तब आरती खुद hi थोड़ा और करीब हो गयी, इतना करीब की उसकी निघ्त्य का रेशमी कपडा नवाज़ के बदन को छूने लगा











