Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी - Page 8 - SexBaba
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Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी

यहां पर story सबंधि ही बात करिये.
 
Part 15





एक अकेला आर्यन दोनों माँ बेटा पर हावी हो गया था. वैशी मनसूबो और असामान्य ताकत के मद मे चूर आर्यन इंसान नहीं बचा था, एक भेड़िया बन गया था, एक भेड़िया जो आसान शिकार को ढूंढता है, उसपर घात लगाता है, रेकी करता है फिर उचित समय पर जिंदा ही नोचने लगता है. एक भेड़िया जो उसके और उसके शिकार के बिच आने वाले दूसरे कमजोर शिकारिओ को अपने इलाके से दूर खदेड देता है. ठीक इसी तरह आर्यन उर्वशी का शिकार कर रहा था और बिच मे आने वाले शुभम को खदेड रहा था.





शुभम ये सब देख कर मरनासन्न मनोदशा मे डूब रहा था. आज शुभम के घर का दृश्य बहोत ही जंगली बना हुवा था जैसे किसी चूजों वाली मुर्गी को चूजों के सामने ही कोई मुर्गा टोचन(breed)लगाने लगता है और बेबस चूजे तीतरबितर हो जाते है उसी तरह आज शुभम के mom को उसी के सामने आर्यन टोचन(breed) कर रहा था और शुभम चूजे की तरह तीतरबितर हो गया था. और उर्वशी किसी बेबस मुर्गी जैसी फडफड़ा रही थी. उसी के आँखो के सामने उसकी धक्के खाती हुईं mom को देख कर शुभम का दिल तारतार हो गया था, शुभम ने उर्वशी को आर्यन के चंगुल से बचाने की हर संभव कोशिश करी थी. आर्यन के असामान्य ताकत के आगे शुभम कमजोर पड़ गया था. शुभम को वहा से धकेल कर आर्यन फिर किसी मुर्गे जैसा उर्वशी के ऊपर breed करने चढ गया...

अंततः बेबस शुभम को जय ने किया हुवा वादा याद आया, "हा अब जय ही mom को इस जंगली भेड़िये से आझाद करा सकता है, चाहे ये नंगी सच्चाई जय जान भी ले, मैंने जो देखा वह जय देख भी ले तब भी घाटा नहीं कुछ भी हो जाय mom को इस से बचा के रहूँगा" यह सोच कर शुभम ने हिम्मत बांधी और पिछला दरवाजा खोल कर तेजी से ऊपर की सीढ़िया चढ़ने लगा. ऊपर वाले flat मे जय रहता था वहा जा धमका, दरवाजा अंदर से locked था. शुभम ने आव देखा न ताव बस जोर जोर से दरवाजा ठोकने लगा, जय को पुकारने लगा. रोने लगा.





ठक...ठक... ठक... ठक...जय uncle plz दरवाजा खोलो....उहूँ हूँ हूँ... 🥹😭

ठक...ठक... ठक... ठक...जय uncle plz दरवाजा खोलो....उहूँ हूँ हूँ....🥹😭

ठक...ठक... ठक... ठक...जय uncle plz दरवाजा खोलो....उहूँ हूँ हूँ... 🥹😭

अदनान job के सिलसिले मे बंगलुरु गया हुवा था. बस जय ही अकेला था. अप्रेल की गर्मी वाली रात मे बनियान और under wear लगा कर अध नंगा जय कूलर on कर घोर निद्रा मे सो रहा था. रात के घोर अँधेरे मे शुभम की आवाज सन्नाटा चिर कर बड़ी दूर तक जा रही थी पर फरफ़राती हुईं कूलर के ठंडी हवा शुभम के किलकारीओ को दबा रही थी, शुभम के घनघोर दरवाजा पीटने पर अंततः जय की नींद खुल ही गई, शुभम की करुण पुकार आखिर कार जय ने सुन ली थी.

रात के ढाई बजे शुभम की रुदन किलकारीया सुन कर जय गंभीर घबरा गया. अचानक क्या हुवा है इस सोच विचार मे जय का दिल अश्व गति से धड़कने लगा. उसने ताबड़तोड कमर पर तौलिया बांध लिया, तेजी से दौडा, और दरवाजा खोल दिया. दरवाजा खुलते ही जय के आगे शुभम मरण रुदन करने लगा.





शुभम : जय अंकल....! उहूँ हूँ हूँ हूँ... 🥹😭....!

उहूँ हूँ हूँ हूँ... 🥹😭.....!

उहूँ हूँ हूँ हूँ... 🥹😭....!

जय : अरे क्या हुवा...!

जय के प्रश्न के उत्तर शुभम के पास कहा थे और शुभम बताता भी क्या, जय को देख कर उसमे हिम्मत भी आगई थी, जय अब साथ है यह जान कर उसने तेजी से धूम ठोकते हुवे वहा से निचे दौड़ने लगा, कुछ तो गंभीर हुवा है यह सोच कर शुभम के पीछे पीछे जय भी तेजी से दौड़ता हुवा निकल पड़ा.

इन सब कशमकश मे लगभग 5-6 मिनिट बीत चुके थे, अब बहोत देरी हो चुकी थी, इतने समय मे आर्यन अपना कार्यक्रम पूर्ण कर चूका था. बेड़िया बिल्ली मार चूका था....



 
Part 16

दौड़ते भागते हुए शुभम और जय दोनों निचे पहोचे, अब नजारा बदल चूका था, उर्वशी के रूम से ac की ठंड हवा hall तक ठंडा कर रही थी. hall मे बहोत चीजे बिखरी पड़ी थी, सोफा अपना स्थान बदल कर पीछे खिसका हुवा था. का दरवाजा खुला हुवा था बार बार हिल भी रहा था मानो किसी ने तेजी से खोल कर पटक के बंद कर दिया हो.

जय ने शुभम की और एक टक देखा पर शुभम ने नजरें झुका कर अपना चेहरा मानो छिपा सा लिया, आखिर उसके पास जय के नजरों मे छिपे सवालों के जवाब देने के लिए शब्द भी नहीं थे. उर्वशी की चीखे सुन कर नींद तोड़ने मे शुभम ने देरी कर दी और शुभम का रुदन सुनने मे जय ने देरी कर दी थी. घर के मर्दो की नजरअंदाजी ने बेचारी उर्वशी free मे चुद गई थी.

जय कदम दर कदम बढ़ाता मानो के एक एक सारा नजारा निहार कर हुईं हुईं घटना की कल्पना करना चाह रहा हो, बारीकी से inspection कर रहा हो. जय के पीछे पीछे शुभम जय के कदमो पर कदम रख चल रहा था. आगे बढ़ कर जय वहाँ पहोंचा जहाँ अपने स्थान से खिसका हुवा सोफा पड़ा था उसपर बेबस उर्वशी चुद कर पड़ी हुईं थी. जय उर्वशी को बड़ी गंभीरता से देख रहा था, उर्वशी के नंगे पड़े बदन को देख कर जो वारदात हो गई उसका जायजा ले रहा था. अभी भी उर्वशी वैसी ही घोड़ी बनी उलटी पड़ी हुईं थी जैसे के कोई दूल्हा घोड़ी से उतर के शादी के मंडप मे चला गया हो.

उर्वशी की हालत विचित्र थी, कदाचित ही उर्वशी की इस हालत की उसने कल्पना भी की हो. माथे से सोफा के निचे तक बिखरे हुए बाल, आँखो का फैला हुवा काजल, ओठों से चूसी हुईं लाली गालो तक फैली हुईं थी. उर्वशी का पिछवाड़ा जो अभी भी हवा मे ऊपर खुला हुवा था उसको निहारता जय मामला समझ रहा था,

उर्वशी के पिछवाड़े के दोनों गोल नितंब और दोनों गोल स्तनों पर पंजो के साफ निशान छाप कर आर्यन चला गया था. फैले नितंम्बो के बिच खुला हुवा गुदाद्वार वीर्य से भर कर ऐसे दिख रहा था जैसे के किसी ने अभी अभी गहरा कुआँ खोदा हो.





हुर परी सी खूबसूरत उर्वशी जय और शुभम के सामने नंगी पड़ी बड़ी गंदी दिख रही थी.

जय : शुभम...! देखो कही glucose होगा पानी मे मिला कर ले आओ...!

शुभम किचन मे जा कर झट से glucose wate ले आता है. जय उर्वशी को glucose पीला देता हैं.

फिर जय बोल पड़ा.. जाओ बाथरूम gijar on कर दो...

शुभम जाता है और उर्वशी के बेडरूम मे जो बाथरूम थी उसका gijar on कर देता है...

(घर की नंगी सच्चाई ज़ब सामने आती है तब एक तो कोई बवाल मचा देता है या कोई चुप्पी साध जाता है. शुभम की हालत बवाल मचाने वालों मे से नहीं थी. ना जय घर का सदस्य था जो बवाल मचाये. तीनो मे एक अजीब शांति भरा conversation हो रहा था. तीनो ही एक दुसरो की मनोदशा को भाप कर एक दुसरो से मानसिक connection बना चुके थे, जहाँ अब लफ्जो की कमी और feelings की भरमार हो गई थी. एक बेबसी भरी नजरो से शुभम ने जय के और देखा, एक बेटा अपनी नंगी माँ को हाथ नहीं लगाना चाहता था जय समझ चूका था. शुभम की चुप्पी और उसके आँखो मे झलकती छिपी बेबसी जय को permission दे रही थी.





जय ने शुभम की मज़बूरी समझते हुए अब उर्वशी को आराम से उठाया, उसके बगल और जांघो को बाजुओं मे पकड़ कर उठा लिया और बेडरूम मे ले आया, बेडरूम मे आते ही जय बोला)

जय : शुभम... मुझे तुम्हारे help की जरुरत पड़ेगी... तुम्हारे help बिन मै ये सब नहीं कर पाउँगा...!

शुभम : जी uncle... मै आप के साथ हूँ...!

बेबस शुभम अब किसी आज्ञाधारी बालक के जैसे जय के आगे पीछे डोल रहा था, जय जो कुछ भी करेगा भला ही करेगा इतना उसे पक्का भरोसा था. जय उर्वशी को बाथरूम मे ले गया, जय ने उर्वशी को खड़ा करना चाहा पर उर्वशी मे अभी उतनी ताकत नहीं थी, आगे से शुभम उर्वशी को support दे रहा था. पर नशे ने मानो उर्वशी का सारा बल चूस लिया था और आर्यन ने उसका सारा खून सूखा दिया था.

जय : भाबी....! आप खड़ा होने की कोशिश तो करिये... बस पांच मिनिट.

उर्वशी खुद अपने कर्मो की जिम्मेदार थी. पति बिन रहने वाली अकेली उर्वशी उसका कुसूर बस इतना था की वो अपने वासना पर काबू ना पा सकी. ज्वार के भार मे बह कर ज़ब कोई मछली दूसरा आशियाना धुंढ़ने की कोशिश करती है, समंदर का खारा पानी लाँघ जाती है तब किनारे बैठे हुए केकडे और कव्वे उसे नोच खा जाते है ऐसे ही उर्वशीने जब मर्यादा का खारा पानी लाँघ दिया तब उसे आशियाना तो नहीं मिला पर उसकी दुर्दशा मछली जैसी ही हो गई, अब वो कही की न रही. बेटे के सामने भी जलील हुईं और आशिक के सामने भी सम्मान खो गई. उर्वशी लज्जा से पानी पानी हो रही थी, अपने स्तन अपने ही हाथो से ढकना चाहती थी. आगे से बगले पकड़े हुवा बेटा और पीछे से उसका आशिक जय आज उसको संभालने की कोशिस कर रहे थे.

जय ने नल सुरु किया और नल से गरम पानी की धारा बहने लगी.... सर सरा सर....! जैसे तैसे जय उर्वशी का बदन साफ करना चाहता था. गरम पानी के बकेट मे जय तौलिया डुबोता उसे मरोड़ता उस से उर्वशी का बदन साफ करता. गर्दन से एड़ी तक उर्वशी का सारा बदन जय साफ करने लगा. आगे से उर्वशी के बगले थामे शुभम उर्वशी को सहारा दिया हुवा था और उसी के बल पर उर्वशी खड़ी थी. जय ने उर्वशी की दोनों टांगे एक दूसरे से जुदा कर दी, निचे बैठा और उर्वशी के नितंब पर गरम तौलिया घुमाने लगा...जहाँ आर्यन ने पंजे मारे थे, निशाने छाप छोड़े थे वहा गर्म पानी का तौलिया touch होते ही उर्वशी कर्राह जाती.... ओ....हो... हो... हो....!🥹

शुभम : mom.... रो मत mom... 🥹 रो मत... 🥹

सब मेरी ही गलती है, वो मेरा ही दोस्त है ना mom... आप का कोई कुसूर नहीं...!( दूसरी तरफ शुभम खुद को कसूरवार मान रहा था, मेरी mom की ये दुर्दशा मेरे ही दोस्त ने की है, ना मै उसे घर लाता न ये कांड होता यह सोच उसे खाये जा रही थी)

शुभम की इन बातो को जय बड़ी गहराई से सुन रहा था सुन रहा था. उर्वशी की ये हालत उसके दोस्त ने ही की है अब जय ये जान गया था. पर फिर भी उर्वशी की टांगे फैला कर जय उर्वशी की गुदा पोंछने लगा, जिस पर आर्यन का वीर्य अंदर तक समाया हुवा था. आर्यन के सख्त लिंग से घर्शन खा कर उर्वशी के गुदाद्वार मोटे मोटे ओठों जितने फूल चुके थे, लाल लाल हो चुके थे. रगड़न से जो टिस पैदा हुईं थी उस सलसल ठनक कर दर्द कर रहे थे. गर्म कपडे के touch से गुदाद्वार की ठनक तेज हो कर अब धीरे धीरे शांत होने लगी....

अब जय तौलिया बकेट मे डुबोटा पिरोता और शुभम को दे रहा था, शुभम उस तौलिये से उर्वशी को आगे से पोछ रहा था. उर्वशी के बिखरे बाल सवार कर बगल मे सरकाता, आँखो का काजल जो बिखरा था ओठों की लाली जो चोरी हो चुकी थी चुकी थी ऊन सब को शुभम इत्मीनान से पोछ रहा था. उर्वशी के झूमते, चहलाते स्तन आज परकटे चिड़िया जैसे दिख रहे थे, उनपर शुभम गर्म पानी का झोक लगा कर जान फुकने की कोशिश कर रहा था. शुभम की हिम्मत बस इतनी ही थी, वो अपनी mom के अछूत स्थान को देखना या छूना नहीं चाहता था, शुभम बार बार जय को देखता, जय शुभम के आँखो मे छिपी मजबूरी को भाप गया, और आगे आ कर उर्वशी की जांघे और योनि को साफ करने लगा. योनि पर तौलिया रगड़ते ही फल फला फल करता हुवा कामरस योनि से निचे तपकने लगा...जय ने ये भी पोछ कर साफ कर दिया.

जैसे तैसे जय और शुभम ने उर्वशी को सहारा दे कर उसका बदन पोछ कर साफ कर दिया. अब जय उर्वशी को फिर उठा कर बेडरूम मे ले जाने लगा....
 
Part 17

किसी चोटी बच्ची जैसे जय ने मोटी ताजी उर्वशी को एक ही झटके मे उठा लिया. उर्वशी को गोदी मे उठा कर जय hall मे ले आया, और बेड पर सुला दिया. उर्वशी के bedroom मे तीन अलमारीया थी. तीनो अलमारिया एक ही रंग की और एक समान ही थी. तीनो अलमारिया तीनो अलमारीया locked रहती थी. ऊन मे से एक मे उर्वशी की sanitary napkins, bra, panty, पेटीकोट, साड़ीया and dresses रखी हुईं रहती थी. दूसरी मे jwelery, cash, जरुरी कागजात and शुभम के पापा के कपडे रखे रहते थे. तीसरी मे क्या है यह शुभम भी नहीं जानता था.

जय : शुभम तुम्हारी mom को कपडे पहनाना है, अलमारी की चाबी कहा है....?

शुभम : uncle मुझे भी नहीं पता... 😥

जय को चाबी का ठिकाना पता ही था, पर वो जान बुझ कर शुभम के आगे बन कर पूछ रहा था. शुभम को पता ना होने से जय ने खुद बेड के निचे वाला drawer खींचा... खर्रर्रर्रर्र.... और चाबी निकाल कर drawer बंद कर फिया खर्रर्रर्रर्र... फट...!

जय ने अलमारी के lock मे चाबी डाली... घुमाई और अलमारी unlock कर दी. वहा से उसने एक bra, एकजालीदार panty और एक रेशमी silk black gown dress निकाल कर अलमारी lock कर दी. जय ने सब कुछ इतने आसानी से धुंढ़ निकाला जैसे के उसे अलमारी मे कौनसी चीज कहा रखी है ये सब पता ही था, जय के इस हरकत को शुभम देखता रह गया. उर्वशी की टांगे उठा कर जय ने उर्वशी को panty पहना रहा था, चिकने चिकने बदन पर सरसराती हुईं panty अपने मुकाम तक पोहोच कर उर्वशी का घोसला सुरक्षित करने लगी. उर्वशी की बाहे खोल कर जय ने उसे bra पहनाई और उसके दोनों नोचे हुए रसभरे आम bra मे कैद कर दिए. देखते ही देखते उर्वशी को gown dress पहना कर उर्वशी का नंगा बदन ढक दिया. नंगी पड़ी उर्वशी अब फिर से कपड़ो मे ढक चुकी थी. जय ने अपना मानवता का कर्तव्य पूरी ईमानी से निभाया था, पर अब उसके नजरों मे वह प्यार नहीं बचा था जिस प्यार भरी नजरों से वो उर्वशी को ताड़ता था. उसके स्पर्श मे वो इज्जत नहीं थी जिस इज्जत से वो उर्वशी को नंगी किया करता था.

शुभम ने कई बार उर्वशी अधनंगा देखा था. कई बार सुसु करते हुए, कई बार panty पहनते हुए, तो कई बार वासना की आग मे ऊँगली करते हुए देखा था. एक ही घर मे रहने वाले लोग अक्सर एक दूसरे को कभी न कभी कपडे बदलते हुए या नहाते हुए या panty पहनते हुए अधनंगा देखते ही है. पर कोई पराया मर्द किसी घरेलु औरत को नंगी करते हुए या कपडे पहनाते हुए देखने का दुर्भाग्य शुभम के नसीब मे लिखा हुवा था. जहाँ आर्यन शुभम की mom को नंगा कर के चढ़ा हुवा था तो उसी घर मे जय शुभम की नंगी पड़ी mom को कपडे पहना रहा था. एक ही रात मे शुभम को ये सब देखना पड़ रहा था. ऐसी मनहूस रात थी के उसे उसकी mom को पराये मर्द हाथो नंगी होते और कपड़े पहनाते हुए दिखा रही थी.

उर्वशी का नशा उतर चूका था, वो सब समझ रही थी, कैसे जय और शुभम उसका खयाल रख रहे है वो ये भी देख रही थी और ऊन दोनों के चेहरे पर जो तिरस्कार का भाव था उसे समझ भी रही थी. जय के हाथो का तिरस्कारपूर्ण खुर्दरा स्पर्श, शुभम की घृणास्पद नजरें और दोनों की त्यागपूर्वक साधी हुईं चुप्पी उर्वशी को लज्जित कर रही थी. ना बेटा उससे बात कर रहा था न उसका आशिक उसका चेहरा देख रहा था. वो शुभम और जय के ही नहीं तो वो खुद की नजरों मे भी गिर चुकी थी. अपने बेटे के सामने आर्यन से हुईं चुदाई और अपने नंगे बदन पर होता हुवा जय का स्पर्श उसे उसके निच नग्नता का अहसास दिला रहा था. आखिर ये सब हुवा कैसे इसका उर्वशी अनुमान लगा रही थी, नशे के पीछे का राज समझने की कोशिश कर रही थी. आर्यन के हाथो से दूध पिने के बाद ही यह सब सुरु हुवा और सब आर्यन का ही किया धरा है ये बात उर्वशी जान गई. अब मेरा क्या होगा, मेरा तो आशिक भी रूठ जायेगा और बेटा भी मुझेसे दूर हो जायेगा. यह विचार कर कर के वो अंदर ही अंदर व्यथित होने लगी. उसके आँख मे आंसू भर आये, मुरझाये हुए चेहरे पर रुदनमुद्रा से ओठ कपकपाने लगें और एकदम से फुट फुट कर रोने लगी....

उर्वशी : उहूँ हु हु...! ऊहु हु हु...! अब बर्बाद हो गई... उहूँ हु हु....! बेटा शुभम....! उहूँ हु हु....! मुझसे गलती हुईं थी... उहूँ हु हु...पर तुम्हारी बाते सुन कर मै बदल रही थी बेटा... उहूँ हु हु..! मैं सुधरने की कोशिश कर रही थी, सब affairs ख़त्म करने वाली थी, अब तुम्हारे future पर ही ध्यान देने की सोच रही थी.... उहूँ हु हु...! फिर अचानक कैसे बदलाव हुवा मै नहीं जानती... उहूँ हु हु ....मै कही की नहीं रही....! उहूँ हु हु हु....! मेरे एकलौते बेटे को exams सर पर होते हुए मुझे इस हालत मे देखना पड़ रहा है...! उहूँ हु हु...! आज मै किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचि बेटा...! उहूँ हु हु...!

तुम्हारे सोने के बाद आर्यन यहाँ आया था...उहूँ हु हु...! उसने मुझे तुम्हारी कसम दिला कर दूध पिलाया था उहूँ हु हु हु....! उसके बाद मुझे बेहोशी छाने लगी मै बहोत तेज नशे मे धुत हो गई थी.... उहूँ हु हु हु...! उसके बाद मेरे साथ क्या हो रहा है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.... उहूँ हु हु...!

उर्वशी की बात सुनकर जय अंदाजा लगाने लगा, आखिर चीज का नशा उर्वशी को कराया गया था ये जानना भी जरुरी था. खोजबीन किये बिन जय मानने वाला कहा था. जय गंभीर आवाज मे बोला...

जय : आर्यन यहां क्यों और कब आया था...!

शुभम : उसकी family out of city चली गई है , उसके घर मे वो अकेला था इसलिए यहां सोने आया था. रात 8 बजे आया था.

जय : साथ मे कुछ लाया भी था..? कुछ food या जूस...

शुभम : कुछ भी नहीं...!बस bag ले कर आया था...!

जय : सोया कहा था वो निच...! उसने bag कहा रखी थी...!

शुभम : मेरे बेडरूम मे ही सोया था... वही रखी थी bag...!

जय : जाओ देखो तो bag है या नहीं...!

शुभम जल्दी जल्दी दौड़ता हुवा जाता है और रूम मे देखता है के bag है या नहीं. आर्यन bag वही छोड़ कर भगा था. उसकी bag अब भी टेबल पर पड़ी थी. पड़ी हुईं bag को उठा कर शुभम फिर उर्वशी के रूम मे ले आता है. Bag को अच्छे से खंगालता(check) करता है. Bag के एक पिछले वाले कोने से शुभम के हाथो Tablets Strip लगती है जिन मे से दो गोलिया निकाली हुईं होती है. और एक पुड़िया लगती है. एक चोटी सी फुटी हुईं पुड़िया जिसमे सफ़ेद पावडर था.

शुभम : ये क्या है....! ये कौनसी tablets strip है...?कौनसा पावडर है जय ankle...?

जय : क्या चीज दिखाओ तो....!

उस tablets strip को देख कर जय जान जाता है के ये तो नींद की गोलिया है. पर पावडर क्या था ये जानने के लिए जय उस फूटी हुईं पुड़िया का पावडर जीभ के नोक पर रख कर चकता है.....! सुंगता है... सुं सुं सुं...!

उस पुड़िया के सफ़ेद पावडर स्वाद ऐसा था मानो समुन्दर खारे पानी मे तीखी खटाई मिली हो. गंध ऐसी थी मानो बरसात के बाद मिट्टी सूखने से जो नमी भरी मोहक गंध आती है कुछ कुछ वैसे थी.

उस सफ़ेद महीन पावडर का रंग, स्वाद और गंध से जय जान जाता है के ये कोई पावडर नहीं बल्कि एक प्रकार का drugs है. उस 21 साल के लड़के के bag मे प्रतिबंधित drugs की पुड़िया देख कर जय दंग रह जाता है. उसके चेहरे पर एक शून्यता और आश्चर्य की मिली जुली रेखा खींच जाती है.

शुभम : जय uncle बताओ ना ये क्या है...!

जय : अरे बाप रे बाप....! अरे ये तो नींद की गोलिया और कोकन(Cocaine) है...! बहोत ही ख़तरनाक और नशीला drug है...!

शुभम : uncle...! मुझे दूध आज कड़वा सा लगा था....! मै जब बाथरूम गया था तब आर्यन मेरे रूम मे अकेला था और दूध का glass भी वही था. आर्यन ने मुझे ही नींद की गोलिया दी होंगी...! मै 12 बजे तक पढ़ाई करता हु... पर 10 बजे से पहले ही सो गया था... आँखे बहोत भारी हो चुकी थी. बहोत तेज नींद आ रही थी uncle...!

अपने माँ की नशे से सूजी लाल आँखे और बरसाती पानी सा ठंडा हो चूका शरीर उसकी बाते सच साबित कर रही थी. उसके गिरते हुए आंसू और उसके बदन पर जो निशान बने हुए थे उस से उसके ऊसपर ज्यादती हुईं थी इसका जिंदा सबूत बने हुए थे. मेरे दोस्त ने मेरे साथ बहोत बड़ा धोखा किया है. मेरी माँ सच बोल रही है, उसको फसाया गया है, मेरी माँ दर्द से रो रही है, आर्यन को मै समझ ना सका, वो इतना गिरा हुवा और बुरी नियत वाला था मै कैसे जान न सका.

जय के हाथ मे जो tablets strip और पाउडर पाउछ था उस से जो सच्चाई सामने आई ये सब देख कर शुभम गहरे सदमे मे था. उसके हाथ पाव ढीले पड़ गए और मन पीड़ा से भर गया, चेहरे पर घोर अपराधी भाव छा गया था. शुभम ने खुद के माथे को पकडा और धड़ाल कर निचे जमीन पर बैठ गया. शुभम अब सब समझ गया था. शुभम के मन मे तो विचारों का तूफान सा आ गया.

(घर के किसी सदस्य पर ज़ब बाहरी मुसीबते बेरानण पड़ती है तब उसके दोष देखे नहीं जाते, उसके गुनाहो को भुला कर उसके साथ खड़े होने वाले जो होते है वही अपने होते है और वही परिवार कहलाता है. शुभम उर्वशी के कांड कारनामें जानता था, उसकी माँ का जय के साथ का affair चल रहा है यह भी वो जान गया था, आर्यन के साथ उर्वशी जो गुलुगुलु कर रही थी ये भी शुभम भाप गया था, पर फिर भी उसने अपनी माँ को भला बुरा ना कभी कहा न कभी नीची नजरो से देखा. आज की घटना से पहले ही उसने अपने सुलझे हुए अंदाज से अपनी माँ को समझाने की कोशिश भी करी थी)

अपनी माँ के गिरते आंसू और उसकी हो चुकी दुर्दशा देख कर आखिर शुभम का दिल पिघल गया, आखिर शुभम बेटा था. माँ के गिरते आँसू देख कर कैसे न पिघलता. माथे पर हाथ रख कर खुद के बाल नोंचने लगा, और फुट फुट कर रोने लगा.





शुभम : आज मै सोता नहीं तो ये सब नहीं होता जय ancle ... उहूँ उहूँ उहूँ हु हु....! घर मे मै हो कर भी कुछ ना कर सका...! उहूँ उहूँ उहूँ हु...!

जय : शुभम..!... रो मत....संभाल खुद को...!... Strong बन...! बहोत Strong बन...! मै हु बेटा... तुम्हारे साथ मै हु ना...! जो होना था हो गया...! रो मत..!

जय शुभम को संभाल रहा था, हिम्मत दे रहा था, अपने हाथो से उसके आंसू पोछ रहा था. .

शुभम को रोता देख उर्वशी भी फुट फुट कर रोने लगी. शुभम जमीन से उठ खड़ा हुवा और तेजी से जा कर अपनी माँ को लिपट गया. पीड़ा युक्त वात्सल्य से भरी हुईं उर्वशी और लाचारी मिश्रित करुणा से भरा शुभम दोनों पीड़ित माँ बेटे एक दूसरे से लिपट लिपट रोने लगें. इस शैतानी रात के मनहूस वक़्त ने आर्यन को तो खूब मजे दिए पर एक माँ और बेटे को खूब पीड़ित कर दिया था.

दोनों माँ बेटे का करुण रुदन और वात्सल्य मिलन देख कर जय की आँखे भर आई, जो हादसा हुवा था उसका अंदाजा जय लगा चूका था. अब जय ने शुभम और के साथ खड़ा रहने का फैसला ले लिया.

जय : खुद को संभालो भाबी...! ये सब बहोत बुरा हुवा....!होना ही नहीं चाहिए था...!पर आप दोनों को ये सब भूलना पदेगा...! संभलना पड़ेगा...!
 
आप ने सारे update पढ़े है कि नहीं... नहीं पढ़े हो तो पढलीजिएगा
 
कोशिश है के आज ही update दू... Updates पर आप आपका opinion जरुर देते रहे💐
 
अक्सर ऐसे हालात बनते है... ज़ब कोई जवान और खूबसूरत औरत अकेली हो तब कही न कही वो अकेलापण दूर करने के चौखट लाँघ जाती है तब जवानी की आग उसे फसा देती है, समाज मे छिपे हुए भेड़िये भी ऐसी औरत की तलाश मे रहते ही है
 
धन्यवाद 💐

पर आप ने जैसा कहा वो possible नहीं है. Story की एक दिशा है वो दिशा बदलना possible नहीं है...
 
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