Part - 13

आर्यन के लिए आज उसने जो श्रृंगार किया था वो अभी भी उसके बदन पर सज रहा था. Transparent लाल रेशमी साड़ी, transparent लाल ब्लाउज. लाल चुडिया, लाल लिपस्टिक. उसपर घने काले कमर तक रंगने वाले लंबे गेसु. गोरा ग़दराया तराशा हुवा दिखने वाला बदन. किसी परी जैसी खूबसूरत दिखे ऐसा कुदरत ने उसे हुस्न तो दिया था, पर पति साथ न होने के वजह से न वो जी भर कर हुस्न का मजा ले सकी न दे सकी. आखिर भरे हुए बदन की गर्मि बेचारी कब तक सहती. इसी जवानी के गर्मि ने उर्वशी को जवान मर्द धुंढ़ने के लिए मजबूर कर दिया. भला नसीब के जय जैसा नेक लड़का उसे मिला था. पर अब उसके कदम घर की चौखट लाँघ चुके थे.
जय के साथ उर्वशी ने बेशक़ मजे किये पर अब उसने नया नया नवजवान हुवा आर्यन की ताकद आजमा चुकी थी. उसका लंबा चौडा भाला देख चुकी थी. उसकी power झेल चुकी थी. Wollyball का खिलाडी आर्यन उर्वशी के मैदान मे एक पारी (inning) पहले भी खेल चूका था. पहली ही पारी मे उर्वशी आर्यन के धुवधार बल्लेबाजी से घबरा गई थी. ज़ख्म कर देने वाला आर्यन का लंबा चौडा भाले के वार से उर्वशी डरती तो थी पर फिर भी कही न कही उसके खूबसूरत muscular भाले की चाह आज भी उर्वशी के मन मे थी. पावडर के नशे मे धुत उसकी धीरे धीरे खुलती बंद होती आँखो मे चढ़ता नशा साफ दिख रहा था. वासना की गर्मी में मिली हुईं पावडर की ठंडी से उर्वशी अजीब मादक ठंड अनुभव कर रही थी. कामतुर हो कर बेड पर अर्ध नग्न अवस्था मे तड़पती उर्वशी मन मे सम्भोग की कल्पना सजा कर खुद के ही ऊँगलीओ से योनि के ओठ(labia) छेड रही थी. गोरे गदराये जांघो को खोलती- बंद करती, खोलती-बंद करती उंगलिओ से फूली हुईं योनि सहलाती. बार बार खुलती-बंद होती उर्वशी मोटी गोरी जांघे किसी उड़ते तितली जैसी फडफड़ा रही थी.

साड़ी तो कब की खुल चुकी थी.साप जैसा लिपटा साड़ी का पल्लू कमर से कंधो तक जा कर उसके नंगे बदन को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहा था. नाड़े से बंधा पेटीकोट कमर तक सरक कर लिपटा हुवा था. उर्वशी ने ब्लाउज के बटन खोलना सुरु किये... क्लिट... क्लिट... ब्लाउज के अंदर pink जालीदार ब्रा उर्वशी के मोटे स्तनों को बंदि बना कर भींच रहे थे. जैसे ही उर्वशी ने ब्रा के हूक खोले उसके दोनों स्तन किसी जेली जैसे हिलते हुए बंधन मुक्त हो गए. ब्लाउज और ब्रा से मुक्त गोरे सूड़ोंल संतरेनुमा बड़े बड़े भरे हुए गोलाकार स्तन और उनके बिच की cleavage किसी बर्फीले पर्वत valley जैसे दमक रहे थे. दोनों स्तन पकडे उसे भिचे सहलाये हिलाये फिर निप्पल नोच रही थी. बेड पर पड़ी पड़ी तड़प रही थी....
आर्यन परदे के पीछे घात लगाए खड़ा था. उर्वशी की हर गतिविधि का मन ही मन विश्लेषण करता हुवा एक perfect time का इंतजार मे सब्र बांधे हुवा था. आज उसके मनोअभिलाषा पूर्णता की और जाते दिख रही थी. उसके चेहरे पर अजीब हवस भरी मुस्कुराहट छाई हुईं थी. ओठों पर जीभ फेर फेर कर सूखे पड़े ओठों को नमी देता आएन उर्वशी को अध नंगी देख कर आर्यन मानो भेड़िया जैसे लार टपका रहा था. पढ़ाई मे below avarage दो साल fail रह चूका एक basketball player आर्यन का पढ़ाकू शुभम से कोई मेल था ही नहीं.

पर उसके अंदर जन्मजात आसामन्य जिस्मानी कुंवत थी. आसामन ताकद के भरोसे एक खिलाडी का किरदार उसमे पहले से ही था. इसी जिस्मानी ताकद ने उसके अंदर की हवस अनियंत्रित हो गई थी. और इसी हवस के रंगीन ख्वाब पूरा करने के लिए उर्वशी उसे आसान शिकार दिखने लगी. असामान्य ताकदवर शरीर मे हवस की आग ज़ब उसके रग रग से होते हुए लंड की नसों मे फ़ैलती तब उसका लंड किसी anaconda जैसा भीषण रुप धारण कर जाता.

जिसे वो चाह कर भी नियंत्रण में नहीं ले पाता था. उर्वशी की हालत देख कर आर्यन ने कदम बढ़ाये... चुपके से उर्वशी के पास पहोच गया. कानो के पास मुंह कर के एक creepy सी आवाज लगाई......
आंटी जी मै आ गया हु...
अचानक आई आवाज से उर्वशी दचक गई, बेड पर बैठ गई. उसने साड़ी का पल्लू स्तन पर ढक दिया. पेटीकोट निचे सरका दिया. नशा नस नाड़ीओ से होते हुए सारे बदन पर छाया हुवा था

. सब धुंधला सा दिख रहा था. आर्यन उर्वशी के काफ़ी नजदीक बैठा था. उर्वशी ने आँखे बार बार मीचकाई, नशे भरी आँखो से उसने देखा. उसे एक धुंधला चेहरा नजर आया, पतले से लाल ओठ, उसपर सुनहरी चमक लिए काली पतली मुछे. लंबी सीधी नाक, अश्लीलता पूर्ण चमक लिए almond shaped आँखे, उसपर बड़ी घूमावदार eyebrows और लंबा साडे छे फिट का नवजवान शरीर देख कर उर्वशी बोल पड़ी.
उर्वशी : क क क कौन.... आर्यन...! स स स सोये नहीं....
आर्यन : आंटी नींद नहीं आ रही है. कुछ देर आप के पास सो जाता हु...!
उर्वशी : पर बेटा...! शुभम के पास जाओ...!
आर्यन : शुभम ने ही भेजा है आंटी...!
मासूम सा चेहरा बना कर उर्वशी को निहार रहा आर्यन चुदाई के निच अरमान से घिरा हुवा साम दाम दंड भेद की नीति पर उतारू हो गया था. कुछ भी कर के आज उसे उर्वशी के पाव भारी करने ही थे. शुभम ने ही भेजा है भी या नहीं उर्वशी ये सोच सके इतनी समझ भी नशे ने निगल ली थी. पावडर का ये कौनसा पता नहीं कौनसा नशा था जिस के आगोश में उर्वशी की सोच समझने की ताकद सुन्न हो चुकी थी. जवानी जाग चुकी थी. ऊपर से वासना का तूफान आगे जवान नर भला एक औरत क्या ही करती.
उर्वशी : hmm hmm ... स.. स.. स सो जाओ...!
उर्वशी ने बेड किनारे पड़े चादर को अर्ध नंगे शरीर पर गले तक ले के ओँधे मु लेट गई. नशे से उसका बदन ठंडा पड रहा था, और आँखे भारी. उर्वशी ने आँखे बंद कर दी. आर्यन ने चुपके से dressing table पर पड़ा AC का रिमोट उठा कर AC 5° कर लिया. जिस से ठंड और भी बढ़ने लगी. T-SHIRTS aur lower pant निकाल कर बेड पर लेट गया. चुदाई के हसीन अरमान सजाये आर्यन का सख्त बदन तप रहा था. धीरे धीरे चादर में घुसता हुवा आर्यन उर्वशी के अधिक पास जाने लगा. जैसे ही दो बदन एक दूसरे को touch हुए उर्वशी की ठंडी और आर्यन की गर्मी एक होने लगें. आर्यन के बदन की गर्मी उर्वशी को चाहिए चाहिए सी लगने लगी इसलिए आर्यन की हलचल उर्वशी नजरअंदाज करने लगी. इंच इंच बढ़ता हुवा आर्यन उर्वशी को बाहो में लेने लगा. उर्वशी को पकड़ कर उसके बगल के निचे से हाथ डाल कर उसकी पीठ सहलाने लगा. दोनों के टांगो से टांगे टकराने लगी

उर्वशी की टांग खोल कर कर टांगो में टांग डाल कर set करने लगा. आर्यन की काले बालो से भरी सख्त muscular टांग रगड़ उर्वशी के नर्म मुलायम मांस भरे चर्बीदार जांघो को चक्की जैसे पीस पीस रगड़ रही थी.उसके panty से ढकी हुली हुईं योनि पर आर्यन के जांघो के बाल रगड़ कर मानो ब्रश कर रहे थे. धीरे धीरे पकड़ मजबूत बना कर आर्यन ने उर्वशी को किसी अजगर जैसे जकड़ रखा था. आर्यन का नवजावान गर्म शरीर उर्वशी के बदन की ठंडी सोकने लगा. ठंडी पड़ चुकी उर्वशी को भी इस गर्म अहसास की सख्त जरुरत थी. आर्यन के हलचल को सहमति देते हुए उर्वशी ने आर्यन के बालो को प्यार से सहलाना सुरु किया. बस अब क्या बाकि बचा था, थोड़े ही देर पहले शुभम के बोली से जी ममता जाग चुकी थी, जो संस्कारी गृहनी संभल चुकी थी वही ममता और संस्कार भुला कर फिर उर्वशी उसी के बेटे के साथ नशे में नंगी सो रही थी..
आधी रात का अंधेरा, उसमे टीमटिमता मुरझाया सा zero wat के बल्ब का उजाला, रात के कीड़ो की किर किर आवाजे, और AC की ठंड में एक 38-39 वर्ष की हुर परी जैसी मादा और एक नवजवान ताकतवर नर एक दूसरे से बदन का तापमान अदला बदली कर रहे थे, नजदीकिया और बढ़ी दोनों की सांसे एक दूसरे को टक्कर दे रही थी. उर्वशी आँखे बंद कर पड़ी थी हवस भरा आर्यन उसके चेहरे को निहार रहा था. सुन्न पड़ी उर्वशी को active करने के लिए उसने उर्वशी के जांघो को उसकी जांघ से दबाव बना कर जोर से दबोचा इस दबाव के दर्द से व्याकुल उर्वशी ने ओठों को खोल कर एक आह सी भरी और एक ही पल में दोनों के लबो से लब टकराने लगें. उसने उर्वशी के ओठ अपने ओठों में जकड़ लिए.

ओठों को चूसता सरकाता आर्यन की लपलपाती हुईं जीभ उर्वशी के मुंह को चोदने लगी. उर्वशी भी बड़े प्यार से आर्यन की जीभ चूसने लगी और घनघोर चुम्बन सुरु हो गया. मन ही मन आर्यन सोचने लगा उर्वशी के बदन का पूरा मजा लेना है तो इसे थोड़ा होश मे लाना ही पड़ेगा, इस सोच विचार से उसने उर्वशी के दोनों स्तनों पर पकड़ बना ली कभी जोर से दबोचता तो कभी सहलाता, कभी उर्वशी के दोनों जांघो के बिच फसी जांघ आर्यन जोर से उर्वशी के योनि पर रगड़ता. इस से उर्वशी हलचल में आने लगी. और भी व्याकुल होने लगी. अब उर्वशी ने आर्यन के ओठों को सरकाते हुए उसकी नमकीन लारभरी नर्म जीभ आर्यन के मुंह में set कर दी. आर्यन उर्वशी के जीभ को किसी chocolate tofee जैसे चूस रहा था... सर्ल सर्लप्... सर्ल सर्लप....!

. कुछ मस्ती की जाए यह आर्यन सोच ही रहा था. कुछ नटखट भरे विचार मन में भर कर बोल पड़ा.
आर्यन : आंटी..! आप की जीभ मेरे मुंह में डालिये तो एक जादू दिखाता हूँ...!
उर्वशी : जादू दिखाओगे बच्चू..! लो...!
साप के जीभ जैसे लपलपा कर उर्वशी की जीभ बाहर डोल रही थी. आर्यन ने पहले तो उसे बहोत प्यार से चूसना सुरु किया. चिप....चाप...चोप...! उर्वशी इस अंदाज का full लुफ्त उठा रही थी. अब आर्यन ने पुरे जोर से मुंह में vaccum बना कर उर्वशी की जीभ अंदर खींच ली....फिर छोड़ दी....फिर खींच ली.... उर्वशी का मुंह जबरन पकड़ कर आर्यन ये खींचातानी खेल जारी रखता है. इस जोर जबरदस्ती से उर्वशी की जीभ मानो जड़ से खींची जा रही थी. एकदम से उसकी सांसे फूल गई मानो के आर्यन ने उसकी जीभ के साथ फेफड़ों में भरी सांसे ही खींच ली हो. आह्ह आह्हः आह्ह....कर्राहते हुए उर्वशी ने आर्यन के पीठ पर नाख़ून गाड़ दिए. और आर्यन के सामने से मुंह हटा लिया...
आर्यन : क्या हुवा आंटी...
उर्वशी : ओह ओह ओह... मेरी सास फूल रही है...!
आर्यन : sorry आंटी...! मै तो बस आप को मजा देना चाहता था...!
आर्यन की मजबूत गर्म पकड़ और चुम्मा चाटी से उर्वशी कामज्वर से भर कर मचलने लगी, उसकी तड़पन से उसके दोनों गोल मस्ताने स्तन आर्यन के सामने लटकने लगें. अब आर्यन ने उसके बदन पर सफ़ेद चादर सरका दिया. उर्वशी के दोनों रसभरे फलो का दीदार करने लगा. वो धीरे से निचे सरकने लगा. उर्वशी के काले घने काले बालो की लटे उसके गोरे स्तनों पर ऐसे लिपटी हुईं थी मानो कई काले नाग उसका पोष्टीक दूध पिने लिपटे हो. गोरे स्तनों पर मंडरा रहे ऊन काले नाग समान लटाओ को आर्यन उंगलिओ से सरका कर बड़े प्यार से उर्वशी के स्तन मर्दन कर रहा था. दोनों स्तनों को पकड़ कर बारी बारी उनके बटन(areola) पर जीभ गोल गोल घुमा रहा था. बारी बारी दोनों निप्पल अंदर खींच कर जीभ से उसे कुरेद रहा था. पंजो से मसल मसल कर मुंह में vaccum बना बना कर अजीब अंदाज में चूस रहा था जैसे कोई बच्चा आम को मसल कर चूस कर रस निकाल कर पीना चाहता हो.

सव्वेदनशील बटन(areola) पर रेंगते हुए आर्यन की जीभ से उर्वशी मस्त मस्तानी हो कर मचल रही थी. आर्यन भी उसकी मस्तानी मस्ती को दबोच कर मसल रहा था.
(सभ्य परिवार की बेटी उर्वशी ने शादी से पहले अपने स्तन किसी के हाथो लगने नहीं दिए. शादी के बाद से उर्वशी के स्तनों को आज तक कई पुरुष पी चुके थे, एक तो पति, दूसरा बेटा शुभम यहां तक सब जायज था. पर तीसरी बार भाभी देवर का रिश्ता जोडे जय को भी उर्वशी ने स्तनपान कराया था. अब आर्यन इन स्तनों को पकड़ने वाला चौथा मर्द था. पति बिन रहने वाली पत्नी का बदन कितना भी ढका क्यों न हो समाज की नजरे उसे नंगी ही देखना चाहती है. आखिर कब तक अकेली औरत सभ्यता के चौखट में घुटती रहे, एक न एक दिन गंदी नजरें उसे भी भाने ही लगती है. यहि हाल उर्वशी का था. उर्वशी उसी समाज के हवसी नजरो का शिकार हो चुकी थी. सुंदर बदन, उसपर पड़ती हवसी नजरें और अकेलापन लिए हुईं राते इन सब से परेशान हो कर उर्वशी दूसरी बार चौखट लाँघ रही थी. और God knows...! पता नहीं आगे और कितने बार उर्वशी मर्यादा की चौखट लाँघने वाली थी)
आर्यन के मस्तिभरे अंदाज ने उर्वशी को गर्म कर दिया था. अब नशे में धुत उर्वशी भी जोश में थी. उसने करवट बदली आर्यन के पंजो से स्तन छुड़ा कर उठ बैठी, एक टक आर्यन को देखा, टांग उठाई आर्यन के कमर पर दोनों टांग set करि और आर्यन के ऊपर चढ गई.

आर्यन को बड़े प्यार से चाटने लगी. आर्यन की थोड़ी(chin) चूसने लगी. कोई गाय किसी बछड़े को चाट कर साफ करती हो ऐसे ही उर्वशी आर्यन को चाटने चूमने लगी.

लपलपाती हुईं उर्वशी की जीभ आर्यन का नवजावान भूरे बालो वाला चेहरा पकड़ पागलो जैसे चाने लगी. थोड़ी(chin) से माथे तक सरसराती हुईं उर्वशी की लार भरी जीभ आर्यन के चेहरे पर रेंग रेंग कर उसे अजीब गुदगुदी का स्वर्गीय सुख प्रदान करवा रही थी. इस सुख से आर्यन फुले नहीं समा रहा था. उसके सामने झूला झूलते उर्वशी के मोटे दूध को पकड़ कर आर्यन किसी पुराने horn के भोपू जैसे दबा रहा था. निचे से आर्यन कमर उचका कर उर्वशी के पेटीकोट से ढके गोलाकार मटके जैसे नितांम्बो में लंड रगड़ रहा था. 8-9 इंच लंबा नेपाली खुखरी जैसा दिखने वाला, muscle Mass से भरा लंड उसके under wear से बाहर निकल चूका था. कलाई जितना मोटा लंड पर हरि लाल फूली हुईं नस नाड़ीया देख कर ऐसे लग रहा था के मानो वो कोई लंड न हो कर wwe champion हो. तन कर टेढ़ा हो चूका लंड उर्वशी के गांड के gap में टकरा रहा था. उर्वशी भी मस्ती में भर कर बेड पर उछलकूद मचा रही थी. आर्यन को चाट रही थी. इस उछलकूद से उर्वशी के पेटीकोट आर्यन के लंड ने सरका कर उसके जालीदार panty तक पहोच बना ली थी.
आर्यन के ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था, भला उसे आज तक किसी ने ऐसा चाटा नहीं था, सिर्प...सर्प.. सुर्प... सिर्प..सर्प...सुर्प.. चाटने चूमने की आवाजे और आर्यन के हा

हा

ही

ही

ही

करती हुईं हसीं की गूंजे रूम में गूंजने लगी. गुदगुदी भरी इस स्वर्गीय सुख से आर्यन फुले नहीं समा रहा था....
आर्यन : आंटी....

ही...

ही..

ही.. बस करिये आंटी...

हा...

हा...

हा...!
पर उर्वशी कहा मानने वाली थी, अजीब पावडर का ये नशा hasheesh के नशे समान ही था. इस नशे में सराबोर उर्वशी एक ही काम वासना के अजीब loop में चक्कर मार रही थी. उस से निकल ही नहीं रही थी. आर्यन के रोके रुक नहीं रही थी.
इस मजे से आर्यन छुटकारा पाना चाहता था, पावडर का ये असर है और इस में उर्वशी अटकी हुईं है यह वो जान गया. उस loop से उर्वशी को बाहर निकलने के लिए क्या किया जाय यह सोचने लगा. हा दर्द से ही अब उर्वशी इस loop से बाहर निकलेगी यह जान कर उसने उर्वशी के दोनों स्तन प्यार से पकड़े, निप्पल से जड़ तक पकड़ बनाई शरीर की सारी ताकद पंजो में समा कर जोर लगा कर दबोच दिए....
आह्हः आह्हः अह्ह्ह अह्ह्ह... करती हुईं उर्वशी आर्यन के ऊपर से उठ कर बेड के निचे आ गई, दोनों स्तनों को पकड़ ऊपर उठा कर देखने लगी. नाड़ा ढीला होने से पेटीकोट उसकी कमर से सरसराता हुवा जमीन पर गिर पड़ा , उसके गांड के गोलो को सरका कर panty बिच gap में फसी हुईं थी. दर्द से कर्राती हुईं उर्वशी बेडरूम से हॉल में भागने लगी. उसकी बजती हुईं चुडिया और पायल की छम छम से घर गूंज से रात के किर किर करने वाले कीड़े शांत हो गए. इस भागा दौड़ी से उर्वशी की गांड के पल्ले किसी तितली जैसे फडफड़ाते दिख रहे थे.
आर्यन ने जितना सोचा उस से ज्यादा ही ताकद लग जाने से उर्वशी का बुरा हाल हुवा. अब चोदने देगी भी या नहीं यह सोच कर पीछे पीछे आर्यन दौड़ा. अजीब नजारा था एक मादा के पीछे पीछे एक नर लंड ताने भाग रहा था.( रात के सन्नाटे में उर्वशी के भारी कदमो से दौडने और उसके पीछे आर्यन के भागने से मची धूम से वातावरन धीर गंभीर हो गया, किर किर करने वाले कीड़े अचानक शांत हो गए. उस तेज कदमो के दबाव से जमीन से गुजरता हुवा vibration दरवाजो तक कंपन होने लगा. सच्चाई कितनी भी छिपाई जाए आखिर घर की चार दीवाले उसे देख ही रही होती है. इस घर की इन चौखटो और दीवालों ने उर्वशी के समागम को कई बार ढका था. ये दीवाले और दरवाजे उर्वशी के नाजायज संबध के गवाह भी थे. आज आर्यन से पीछा चुडवा कर भागती हुईं उर्वशी को देख कर ये दरवाजे और दीवाले vibrat हो कर मानो चीख चीख कर सुभम को जगा रही थी, मानो कह रही थी... उठ जा...! जाग जा...! नहीतो तेरा दोस्त तेरी mom पर जबरन चढ जायेगा. समाज की मर्यादा लाँघ कर ज़ब भी कोई नर मादा नाजायज सम्बन्ध बना कर नंगे होते है तब भले भी ऊंचे compound की दीवारे और घर की चार दीवाल उसे ढक दे पर कही न कही घर के दरवाजे और चौखट उस नंगी चुदाई के मुर्दा सबूत बन रहते ही है)
उर्वशी hall में जा कर सोफा पर बैठने ही वाली थी के आर्यन ने उसे बड़े इज्जत से बाहो में पकड़ा, उसकी गांड पर सहलाने लगा और मासूम सा चेहरा बना कर बोलने लगा.
आर्यन : क्या हुवा आंटी...! Sorry plz मुझे माफ कर दो..!
उर्वशी : उहूँ... हूँ...! उहूँ... हूँ...! बहोत दर्द हो रहा है..! ये देखो तुमने मेरे स्तनों के साथ का क्या किया...!
दर्द से उर्वशी के आँखो में आंसू भर आये. लाल पीला पड़ा चेहरा उसके यातना का साफ इजहार कर रहे थे. उसने पकड़ दोनों स्तन आर्यन को दिखाए, उर्वशी के स्तनों पर आर्यन के पंजो की छाप साफ दिखाई दे रहे थे, मजबूत पकड़ से गोरे स्तनों पर हरे लाल छाप बन चुके थे. जीभ से कुरैदे जाने से निप्पल छिल गए थे. स्तनों के बटन(areola) पर दांतो के गहरे गंभीर निशान पड़ चुके थे.
आर्यन : sorry आंटी...!
आर्यन उर्वशी के आगे खड़ा हो कर प्यार से मनाने लगा. उसको लिपट लिपट कर नौटंकी करने लगा. आर्यन का भाले जैसा गर्म लंड उर्वशी के दोनों मुलायम जांघो के बिच से आरपार होता हुवा नितंब तक जा रहा था जैसे कोई चाकू cake काट रहा हो. ....Sorry आंटी...! गलती से हुवा...! plz माफ कर दीजिए...!
उसके नकली मासूमियत के पीछे छिपा भेड़िया उर्वशी पहचान नहीं सकी, उसके चेहरे पर जो नकली मायूसी थी उसे देख कर उर्वशी का दिल पिघलने लगा, आखिर एक माँ जो थी, उसी के बेटे का आर्यन दोस्त भी था. पावडर के नशे की धुंद में वैसे भी सोचने समझने की कुंवत खो चुकी थी. अब तो बस उर्वशी आर्यन की बोली हुईं बातो को झट से मानने लगी थी. आखिर नशे ने उसे गुलाम बना ही दिया था....
उर्वशी : उहूँ.. हूँ...बहोत दर्द हो रहा है...!
आर्यन : आंटी.... चलिए आप के दर्द का इलाज किये देता हूँ...!
आर्यन ने उर्वशी को सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया. बड़ी प्यार से उसकी कमर उठाई, इलास्टिक वाली panty में एक ऊँगली डाली खींची और छोड़ दी...चट...! फिर ऊँगली डाल कर खींची और छोड़ दी... चट..! Panty की इलास्टिक उर्वशी के बदन पर बज कर चट चट सी आवाजे गूंजने लगी. आर्यन इत्मीनान से उर्वशी की panty निकाल रहा था. Panty निकालते ही उर्वशी के योनि से एक गंध वातावरण में छाने लगी.

आर्यन ने उर्वशी की दोनों टांगे फैला कर योनि को मुक्त कर दिया. किसी फूली हुईं कचोरी जैसे उभार लिए हुए उर्वशी की गोरी गुलाबी फुदी आर्यन के सामने दमक रही थी. उंगलिओ से योनि के ओठ खोलने लगा. अंदर का नजारा तो बड़ा अजीब था. गुलाबी झिल्लीओ में भरा सफ़ेद शैम्पू जैसा तरल चिक बाहर रिसने लगा. आर्यन पहली बार किसी की फुदी का अंदरूनी जायजा ले रहा था. एक लंबी सास भर कर खुले हुए योनि में जोर से फुक मारी. कोई छिल जैसे किसी शिकार पर अचानक झपट्टा मारता हो वैसे ही आर्यन उर्वशी के योनि पर झपट पड़ा.

योनि के परदे(labia) ओठों में पकड़ कर चूमने लगा. चूसने लगा. सुंगने लगा. सिर हिला हिला कर योनि के परदो(labia)में ओठ रगड़ने लगा. चप चप चर्लप्....! चप चप चर्लप्उ...! र्वशी इस मुख मैथुन के सुख से झूम उठी, उसके निचले द्वार को जिस अंदाज में आर्यन चुम रहा था उस से उर्वशी के बदन में current से लगने लगा.
उर्वशी : आह...! आअह्ह्ह...! उहूँ...! हूँ..! उम्म्म...! उई माँ ये लड़का मेरे फुदी पर कैसे खेल रहा है....!
इस आनंद से सराबोर उर्वशी की अश्लील आवाजे घर में गूंजने लगी.
आर्यन ने उसकी ऊँगली उर्वशी के मुंह में भर दी. जैसे कोई leech किसी प्राणी पर चिपक कर खून चूसता हो वैसे ही आर्यन के ओठ उर्वशी के फुदी पर चिपक कर अंदर का रस चूस रहे थे.... चप चप चर्लप्...! सर सर सर्लप्...!

उर्वशी : उहूँ.. ऊ... ऊ.. बेटा दांत लग रहे है...!
आर्यन : चुप करो आंटी... आप का इलाज कर रहा हूँ...!

आंटी इतना तो लगेगा ही...!
अब उर्वशी उठ खड़ी हुईं.
उर्वशी : बहोत हो गया अब मै तुम्हारा इलाज करती हूँ...!

दक्का मार कर आर्यन को सोफे पर लिटा दिया. आर्यन की under wear khich कर निकालने लगी. बाहर निकलते ही आर्यन का लिंग किसी नाग जैसा फ़ना निकाल कर झूलने लगा. उर्वशी ने देरी न करते हुए उसका फन पकड़ लिया. किसी गर्म तपे हुए पत्थर जैसा सख्त हो चूका था. आर्यन का लंड इतना मोटा था के पंजा फैला कर ऊँगलीओ के पकड़ में नहीं आ रहा था.
उर्वशी : बेटा छोटी सा नुनु इतना बड़ा कैसे हो सकता है....!
आर्यन : आंटी... आप जैसी औरतों की ख्वाहिशे पूरी करने के लिए ही कुदरत ने मुझे ये औजार बक्शा है...! उर्वशी ने उसे पकड़ लिया और उसका टोपा चूमने लगी. जबरन मुंह में भरने लगी.... गप गपा गप...

गोप...

गोप..

गोप..! लंड के टोपे से जड़ तक तक उर्वशी के ओठ फिसल फिसल कर गोरा लंड लार से चमक कर लाले लाल हो गया था. आर्यन उर्वशी के पीछे से उसके गांड की कली सहलाने लगा. जिस से उत्तेजित उर्वशी का हौसला और भी बुलंद हो गया.

आर्यन :

ओ...हो... ओ... हो... आंटी जी मस्त... क्या कर रही हो आंटी....!
उर्वशी : इंजेक्शन तैयार कर रही हूँ....

सर्ल....सर्ल...सृप
(एकांत ने वासना की आग ज़ब छा जाती है तब पुरुष हो या नारी. सभी भेद भाव छोड़ कर एक पुरष नर शुद्ध बन जाता है और नारी शुद्ध मादा. ऐसे में पति से दूर कोई यौव्वन सुंदरी के साथ नवतरुण मर्द रात गुजारें तब तो मिलन की सम्भावना और भी बढ़ जाती है. वासना मिले नशे में उर्वशी इतनी बावली हो गई थी के वो एक माँ है, घर में बेटा है, सो रहा है भी या नहीं, या जागा है, इसका भान उसे कहा था. उसे तो बस बदन की आग ठंडी करनी थी. शुभम के तो नसीब में यहि सब था. अपनी mom को पहले जय के साथ नंगी देख चूका था. उस देखे हुए दृश्य को भुला कर फिर भी संभलने की कोशिश कर रहा था. और आज उसी का दोस्त उसकी mom को उसी के घर में नंगी कर रहा था. इस बदनसीब को न बाप की छाया मिली न दोस्तों का ईमान. उसके जीवन में एक बगैरत mom और उसके नये नये आशिक बस यहि था. बड़ा ख़राब नसीब था. ऐसा जीवन किसी दुश्मन को भी नसीब न हो)
लपक लपक कर उर्वशी आर्यन का मोटा लिंग chocobar ice cream जैसी चूस रही थी.... सप.. सप.. सर्लप् ... श्रुल्प..!

आर्यन का टोपा इतना मोटा था के मुंह पूरा खोलने पर भी मुश्किल से अंदर भर पा रहा था. आर्यन झटके मार रहा था जिस से उर्वशी का मुंह किसी गुब्बारे जैसा फूल गया था. अब आर्यन तैयार था, सोफा से उठ खड़ा हुवा, उर्वशी के बाल पकड़ कर उर्वशी को बोलने लगा...
आर्यन : आंटी.... इंजेक्शन तैयार है चलिए अब घोड़ी बनिये... आप के इलाज का वक़्त आ गया है....!
