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- Dec 5, 2013
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Part -1
कहानी के किरदार :
1) उर्वशी
- एक पत्नी, एक माँ, एक जवानी के आग मे पति से दूर खूबसूरत मादा.
2) शुभम
- year 18+ का नादान लड़का जो पिता के प्यार की खोज कर रहा है.
3) जय
- 6 फिट ऊंचा 25 साल का मजबूत जवान नर.
4)अदनान
- कम उमर ने जीवन की नंगी सच्चाई समझ गया ऐसा किरदार.
Hello दोस्तों! आज की story उस जवान होते हुए बच्चे की है जो नादन बचपना और चालबाज जवानी के बिच मे झूलसते हुए बड़ा हो रहा है.. कहानी के उस किरदार का नाम शुभम है जो पूना का रहने वाला है . शुभम स्वभाव से पहले से ही शांत, मासूम और एकांत मे रहने वाला पढ़ाकू लड़का है, इस कारण मेरे फ्रेंड्स बहोत कम रहे पर जितने भी रहे वह बड़े समझदार और अच्छे घर से रहे.

यह घटना तब की है ज़ब शुभम 1st year मे पढ़ रहा था. कहानी की सुरुवात बुधवार, अगस्त के महीसे हो रही जिस दिन बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी, दोपहर के 2 बज रहे थे, college छूटने का समय हो रहा था. जैसे ही छुट्टी हुईं अचानक घने काले बादल छाने लगें शुभम समझ गया के अब यदि लेट हुवा तो यही अटकना पड़ेगा. जैसे तैसे सायकल निकाली और आव देखा न ताव जोर जोर से पेडल मारे के जल्द पोहोच जाऊ फिर भी बिच रास्ते मे थोड़ा बारिश का मार तो पड़ा ही.
अंततः घर पोहोच ही गया पर काफी भीग चूका था.
"शुभम के mom का नाम उर्वशी है और वह हॉउस वाइफ है. पिताजी merchant नेवी मे होने के कारण लग भग तीन तीन महीने के अंतराल मे घर आ पाते है इस लिए घर का सारा भार उर्वशी पर ही होता है. उस समय उर्वशी की आयु मुश्किल से 38 साल या उस से कम ही रही होगी.... उर्वशी एक सुलझीहुईं, जिम्मेदार पर चलाक, गोरी साफ रंगत लिए हुए मादक, गदराये हुए शरीर की मालकिन है. उसकी hight 5फिट, 8इंच, संतरे जैसे गोल बड़े बड़े दूध, पतली सकुची कमर, मटके जैसी गोल गांड, और मोटी चरबिदार जाँघो से उसका उर्वशी नाम सार्थक लगता है. कमल नयनी, नक्षीदार नाक, धनुषाकार eyebrows और गुलाब की पखुडियो जैसे ओठ के साथ उर्वशी के चेहरे पर अजीब नखरेभरा आकर्षन है जो उसको किसी बोल्ड स्टार से कम नहीं बना देता था.... उर्वशी ज़ब चलती थी तब उसको देख कर सख्त लौंडों का भी मन मचल जाता था. कॉलोनी के नवजवान से वायस्को पुरुष भी उर्वशी को बखूबी जानते और उसपर आँख सेखते रहते थे. उर्वशी का मदमस्त फिगर और मटकती हुईं गजगामीनी चाल के कई नवयुवक घायल थे, उसकी गदराई हुईं जवानी को देख क़र बूढ़ो के मुरझाये हुए लिंग मे भी जान आजाती थी".
खैर शुभम ज़ब घर पोहोचा उसने आवाज लगाई-
मै : मम्मी!.. मम्मी....!
उर्वशी : "तोलिया और कपड़े लाते हुए" अरे भीग गए हो क्या! लो सर पोछ लो, और जाओ कपड़े बदल लो.
शुभम सीधे बाथरूम के तरफ बढ़ा और सर पोछने, कपड़े बदलने लग गया, पर उस दिन पता नहीं क्यों उसे अजीब सी सुगंध आ रही थी. उसे लगा के नया साबुन होगा उसी की सुगंध होगी पर ज़ब साबुन को सुंग कर देखा तो लिरिल साबुन थी जो नीबू वाली सुगंध दे रही थी. पर वहाँ जो सुगंध आ आरही थी वह अधिक ही मोहक और थोड़ी सी तेज किस्म की थी. खैर मउसने सोचा के होगी कोई इतना क्या सोचना कपड़े बदल कर बाहर आ गया. चु के उसे Tuition की भी तैयारी करनी थी.तौलिया लपेट क़र शुभम बाहर निकल आया
पर उस दिन बारिश काफी हो रही थी....

शुभम : मम्मी! आज तो टूशन मे test है जाना कैसे होगा
बारिश भी है मै क्या करू.
उर्वशी : अरे देखो यदि बारिश रुकी तो जाओ वर्ना घर मे पढ़ लो.
वैसे पढ़ाकू शुभम tution या स्कूल बंक हो जाये तो बडा बोर सा होता जाता है. उसका घर काफी बढ़ा है. एक hall, 3 rooms, बडा सा किचन, एक store room.
इन मे एक बाथरूम+टॉयलेट जो उर्वशी के room मे था और दूसरा store room मे attached है. और ऊपर भी दो room है जिसका रास्ता बाहर से निकलता है यह सब जिस घर मे दो लोग ही है उनके लिए तो काफी बडा हो जाता है. इसी लिए उर्वशी ने ऊपर के दो room किराये पर देने का निर्णय किया था.
खैर उर्वशी ने शुभम को कुछ नास्ता दिया जिसे पूर्ण कर के मै मेरे room मे पढ़ने चला गया. Home work finished कर के शुभम सो भी गया था. फिर ज़ब नींद खुली तब 4.30 बज रहे थे.
जैसे तैसे रात हुईं.
मम्मी : बेटा! चलो खाना लगा रही हु, हाथ धो कर आ जाओ.
शुभम : बस एक मिनिट! आया मम्मी.....
मैंने देखा के उस दिन मम्मी ने मटर पनीर, पराठे, हलुवा, जीरा राइस और दाल बनाई थी. और सब आवश्यकता से अधिक ही लग रहा था.
शुभम : मम्मी आज कुछ ख़ास है क्या
और इतना सारा क्यों बनाई हो 
उर्वशी : कुछ ख़ास ही हो तो बनाती हु क्या..? बदमाश..! अब अच्छे से भोजन कर लो, और हा जल्दी सो जाना. इतने मे लेट उठ रहे हो.
शुभम : जी मम्मी.
शुभम भोजन पूर्ण कर के शुभम room मे चला आया और उर्वशी किचन मे चली गई.
(महीनों पति के गर्म रगड़ से दूर रहती उर्वशी अब बदल चुकी थी, उसके अंदर जवान मर्दो की चाहत ने बड़ा तेज तूफान ला कर खड़ा कर दिया जिस से उसजे जवानी का शोला उफान करता हुवा उबले जा रहा था. मर्द के पकड़ और रगड़ से दूर जा चूका उसका शरीर अब उसे बंधन तोड़ने पर मजबूर कर रहा था. रास्ते से उसके भरे हुए बदन को घूरति हुईं जवान मर्दो की नजरो के तीखे इशारे उर्वशी को बेशर्मी पर उतारने के लिए मजबूर कर रहे थे, मदमस्त हाथनी जैसी उर्वशी की चाल और उसके कपड़ो से ढके हुए उसके शरीर के मोटे उभार, सुरीली कमर, और संतरेनुमा मोटे गोल दूध देख कर बूढ़ो के भी मुरझाये हुए लन्ड भी फूल कर खिल जाते थे)
लग भग रात के 9 बजे होंगे ज़ब शुभम सुसु करने बाथरूम गया. तब store room से उसे फिर वही सुगंध आई जो जो पहले बाथरूम से आई थी, पर अब की बार सुगंध काफी तेज थी. लग रहा था के अभी अभी ही किसी ने वह सुगंध स्प्रेड की हो. उसे फिर से अजीब लगा. और हा उस दिन बाथरूम मे भी पेशाब की गंध आ रही थी जैसे के कोई सुसु कर गया हो पर flush ना किया हो. ज़ब की इस बाथरूम मे शुभम ही जाता था दूसरा कोई था भी तो नहीं . ज़ब की उर्वशी का तो अलग सेपरेट बाथरूम था, और शुभम उर्वशी के सुसु की गंध भी पहचानता था. पर इस बार कुछ अलग ही था शुभम घर मे घूम रहे अजीब बदलाओ का जायजा लेने की कोशिश उसके समझ से बाहर की थी, घर मे अचानक आने वाले बदलाव से अंजान शुभम अजीब खयालो मे खो गया, उर्वशी उसकी हवस भरी हसरत पूरी करने के लिए जो बहार खुद के जीवन मे ला रही थी उस से शुभम के जीवन मे पतझड़ सुरु होने वाली थी, जिस से कच्चे बीज सा शुभम अब नादान बालक से भोगी नर मे बदलने वाला था)
खैर शुभम सुसु कर के सोने चला गया. पर नींद नही आ रही थी तो थोड़े देर laptop पर fb पर अपडेट देखने लगा. फिर सो गया.
पर लगभग 2 बजे अचानक नींद खुल गई तो देखा लाइट्स off हो गई थी. बिजली गुल और भारी बारिश हो रही थी. हवाएं मानो ऐसे चल रही थी के हवा का घुसा खिड़की पर चल रहा हो.... हवा का सायsss....सायssss.... की आवाज, अंधेरा और खिड़कीओ का खड़खाहट से वातावरण अत्यंत डरावना लग रहा था....
कहानी के किरदार :
1) उर्वशी
2) शुभम
3) जय
4)अदनान
Hello दोस्तों! आज की story उस जवान होते हुए बच्चे की है जो नादन बचपना और चालबाज जवानी के बिच मे झूलसते हुए बड़ा हो रहा है.. कहानी के उस किरदार का नाम शुभम है जो पूना का रहने वाला है . शुभम स्वभाव से पहले से ही शांत, मासूम और एकांत मे रहने वाला पढ़ाकू लड़का है, इस कारण मेरे फ्रेंड्स बहोत कम रहे पर जितने भी रहे वह बड़े समझदार और अच्छे घर से रहे.

यह घटना तब की है ज़ब शुभम 1st year मे पढ़ रहा था. कहानी की सुरुवात बुधवार, अगस्त के महीसे हो रही जिस दिन बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी, दोपहर के 2 बज रहे थे, college छूटने का समय हो रहा था. जैसे ही छुट्टी हुईं अचानक घने काले बादल छाने लगें शुभम समझ गया के अब यदि लेट हुवा तो यही अटकना पड़ेगा. जैसे तैसे सायकल निकाली और आव देखा न ताव जोर जोर से पेडल मारे के जल्द पोहोच जाऊ फिर भी बिच रास्ते मे थोड़ा बारिश का मार तो पड़ा ही.
अंततः घर पोहोच ही गया पर काफी भीग चूका था.
"शुभम के mom का नाम उर्वशी है और वह हॉउस वाइफ है. पिताजी merchant नेवी मे होने के कारण लग भग तीन तीन महीने के अंतराल मे घर आ पाते है इस लिए घर का सारा भार उर्वशी पर ही होता है. उस समय उर्वशी की आयु मुश्किल से 38 साल या उस से कम ही रही होगी.... उर्वशी एक सुलझीहुईं, जिम्मेदार पर चलाक, गोरी साफ रंगत लिए हुए मादक, गदराये हुए शरीर की मालकिन है. उसकी hight 5फिट, 8इंच, संतरे जैसे गोल बड़े बड़े दूध, पतली सकुची कमर, मटके जैसी गोल गांड, और मोटी चरबिदार जाँघो से उसका उर्वशी नाम सार्थक लगता है. कमल नयनी, नक्षीदार नाक, धनुषाकार eyebrows और गुलाब की पखुडियो जैसे ओठ के साथ उर्वशी के चेहरे पर अजीब नखरेभरा आकर्षन है जो उसको किसी बोल्ड स्टार से कम नहीं बना देता था.... उर्वशी ज़ब चलती थी तब उसको देख कर सख्त लौंडों का भी मन मचल जाता था. कॉलोनी के नवजवान से वायस्को पुरुष भी उर्वशी को बखूबी जानते और उसपर आँख सेखते रहते थे. उर्वशी का मदमस्त फिगर और मटकती हुईं गजगामीनी चाल के कई नवयुवक घायल थे, उसकी गदराई हुईं जवानी को देख क़र बूढ़ो के मुरझाये हुए लिंग मे भी जान आजाती थी".
खैर शुभम ज़ब घर पोहोचा उसने आवाज लगाई-
मै : मम्मी!.. मम्मी....!
उर्वशी : "तोलिया और कपड़े लाते हुए" अरे भीग गए हो क्या! लो सर पोछ लो, और जाओ कपड़े बदल लो.
शुभम सीधे बाथरूम के तरफ बढ़ा और सर पोछने, कपड़े बदलने लग गया, पर उस दिन पता नहीं क्यों उसे अजीब सी सुगंध आ रही थी. उसे लगा के नया साबुन होगा उसी की सुगंध होगी पर ज़ब साबुन को सुंग कर देखा तो लिरिल साबुन थी जो नीबू वाली सुगंध दे रही थी. पर वहाँ जो सुगंध आ आरही थी वह अधिक ही मोहक और थोड़ी सी तेज किस्म की थी. खैर मउसने सोचा के होगी कोई इतना क्या सोचना कपड़े बदल कर बाहर आ गया. चु के उसे Tuition की भी तैयारी करनी थी.तौलिया लपेट क़र शुभम बाहर निकल आया
पर उस दिन बारिश काफी हो रही थी....

शुभम : मम्मी! आज तो टूशन मे test है जाना कैसे होगा
उर्वशी : अरे देखो यदि बारिश रुकी तो जाओ वर्ना घर मे पढ़ लो.
वैसे पढ़ाकू शुभम tution या स्कूल बंक हो जाये तो बडा बोर सा होता जाता है. उसका घर काफी बढ़ा है. एक hall, 3 rooms, बडा सा किचन, एक store room.
इन मे एक बाथरूम+टॉयलेट जो उर्वशी के room मे था और दूसरा store room मे attached है. और ऊपर भी दो room है जिसका रास्ता बाहर से निकलता है यह सब जिस घर मे दो लोग ही है उनके लिए तो काफी बडा हो जाता है. इसी लिए उर्वशी ने ऊपर के दो room किराये पर देने का निर्णय किया था.
खैर उर्वशी ने शुभम को कुछ नास्ता दिया जिसे पूर्ण कर के मै मेरे room मे पढ़ने चला गया. Home work finished कर के शुभम सो भी गया था. फिर ज़ब नींद खुली तब 4.30 बज रहे थे.
जैसे तैसे रात हुईं.
मम्मी : बेटा! चलो खाना लगा रही हु, हाथ धो कर आ जाओ.
शुभम : बस एक मिनिट! आया मम्मी.....
मैंने देखा के उस दिन मम्मी ने मटर पनीर, पराठे, हलुवा, जीरा राइस और दाल बनाई थी. और सब आवश्यकता से अधिक ही लग रहा था.
शुभम : मम्मी आज कुछ ख़ास है क्या
उर्वशी : कुछ ख़ास ही हो तो बनाती हु क्या..? बदमाश..! अब अच्छे से भोजन कर लो, और हा जल्दी सो जाना. इतने मे लेट उठ रहे हो.
शुभम : जी मम्मी.
शुभम भोजन पूर्ण कर के शुभम room मे चला आया और उर्वशी किचन मे चली गई.
(महीनों पति के गर्म रगड़ से दूर रहती उर्वशी अब बदल चुकी थी, उसके अंदर जवान मर्दो की चाहत ने बड़ा तेज तूफान ला कर खड़ा कर दिया जिस से उसजे जवानी का शोला उफान करता हुवा उबले जा रहा था. मर्द के पकड़ और रगड़ से दूर जा चूका उसका शरीर अब उसे बंधन तोड़ने पर मजबूर कर रहा था. रास्ते से उसके भरे हुए बदन को घूरति हुईं जवान मर्दो की नजरो के तीखे इशारे उर्वशी को बेशर्मी पर उतारने के लिए मजबूर कर रहे थे, मदमस्त हाथनी जैसी उर्वशी की चाल और उसके कपड़ो से ढके हुए उसके शरीर के मोटे उभार, सुरीली कमर, और संतरेनुमा मोटे गोल दूध देख कर बूढ़ो के भी मुरझाये हुए लन्ड भी फूल कर खिल जाते थे)
लग भग रात के 9 बजे होंगे ज़ब शुभम सुसु करने बाथरूम गया. तब store room से उसे फिर वही सुगंध आई जो जो पहले बाथरूम से आई थी, पर अब की बार सुगंध काफी तेज थी. लग रहा था के अभी अभी ही किसी ने वह सुगंध स्प्रेड की हो. उसे फिर से अजीब लगा. और हा उस दिन बाथरूम मे भी पेशाब की गंध आ रही थी जैसे के कोई सुसु कर गया हो पर flush ना किया हो. ज़ब की इस बाथरूम मे शुभम ही जाता था दूसरा कोई था भी तो नहीं . ज़ब की उर्वशी का तो अलग सेपरेट बाथरूम था, और शुभम उर्वशी के सुसु की गंध भी पहचानता था. पर इस बार कुछ अलग ही था शुभम घर मे घूम रहे अजीब बदलाओ का जायजा लेने की कोशिश उसके समझ से बाहर की थी, घर मे अचानक आने वाले बदलाव से अंजान शुभम अजीब खयालो मे खो गया, उर्वशी उसकी हवस भरी हसरत पूरी करने के लिए जो बहार खुद के जीवन मे ला रही थी उस से शुभम के जीवन मे पतझड़ सुरु होने वाली थी, जिस से कच्चे बीज सा शुभम अब नादान बालक से भोगी नर मे बदलने वाला था)
खैर शुभम सुसु कर के सोने चला गया. पर नींद नही आ रही थी तो थोड़े देर laptop पर fb पर अपडेट देखने लगा. फिर सो गया.
पर लगभग 2 बजे अचानक नींद खुल गई तो देखा लाइट्स off हो गई थी. बिजली गुल और भारी बारिश हो रही थी. हवाएं मानो ऐसे चल रही थी के हवा का घुसा खिड़की पर चल रहा हो.... हवा का सायsss....सायssss.... की आवाज, अंधेरा और खिड़कीओ का खड़खाहट से वातावरण अत्यंत डरावना लग रहा था....




















