Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी - SexBaba
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Adultery उर्वशी🧚.... माँ-बेटे की अनोखी प्रेम कहानी

hotaks

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Part -1

कहानी के किरदार :

1) उर्वशी👸- एक पत्नी, एक माँ, एक जवानी के आग मे पति से दूर खूबसूरत मादा.

2) शुभम🙇- year 18+ का नादान लड़का जो पिता के प्यार की खोज कर रहा है.

3) जय🧔‍♂️- 6 फिट ऊंचा 25 साल का मजबूत जवान नर.

4)अदनान👨‍🎓- कम उमर ने जीवन की नंगी सच्चाई समझ गया ऐसा किरदार.

Hello दोस्तों! आज की story उस जवान होते हुए बच्चे की है जो नादन बचपना और चालबाज जवानी के बिच मे झूलसते हुए बड़ा हो रहा है.. कहानी के उस किरदार का नाम शुभम है जो पूना का रहने वाला है . शुभम स्वभाव से पहले से ही शांत, मासूम और एकांत मे रहने वाला पढ़ाकू लड़का है, इस कारण मेरे फ्रेंड्स बहोत कम रहे पर जितने भी रहे वह बड़े समझदार और अच्छे घर से रहे.





यह घटना तब की है ज़ब शुभम 1st year मे पढ़ रहा था. कहानी की सुरुवात बुधवार, अगस्त के महीसे हो रही जिस दिन बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी, दोपहर के 2 बज रहे थे, college छूटने का समय हो रहा था. जैसे ही छुट्टी हुईं अचानक घने काले बादल छाने लगें शुभम समझ गया के अब यदि लेट हुवा तो यही अटकना पड़ेगा. जैसे तैसे सायकल निकाली और आव देखा न ताव जोर जोर से पेडल मारे के जल्द पोहोच जाऊ फिर भी बिच रास्ते मे थोड़ा बारिश का मार तो पड़ा ही.

अंततः घर पोहोच ही गया पर काफी भीग चूका था.

"शुभम के mom का नाम उर्वशी है और वह हॉउस वाइफ है. पिताजी merchant नेवी मे होने के कारण लग भग तीन तीन महीने के अंतराल मे घर आ पाते है इस लिए घर का सारा भार उर्वशी पर ही होता है. उस समय उर्वशी की आयु मुश्किल से 38 साल या उस से कम ही रही होगी.... उर्वशी एक सुलझीहुईं, जिम्मेदार पर चलाक, गोरी साफ रंगत लिए हुए मादक, गदराये हुए शरीर की मालकिन है. उसकी hight 5फिट, 8इंच, संतरे जैसे गोल बड़े बड़े दूध, पतली सकुची कमर, मटके जैसी गोल गांड, और मोटी चरबिदार जाँघो से उसका उर्वशी नाम सार्थक लगता है. कमल नयनी, नक्षीदार नाक, धनुषाकार eyebrows और गुलाब की पखुडियो जैसे ओठ के साथ उर्वशी के चेहरे पर अजीब नखरेभरा आकर्षन है जो उसको किसी बोल्ड स्टार से कम नहीं बना देता था.... उर्वशी ज़ब चलती थी तब उसको देख कर सख्त लौंडों का भी मन मचल जाता था. कॉलोनी के नवजवान से वायस्को पुरुष भी उर्वशी को बखूबी जानते और उसपर आँख सेखते रहते थे. उर्वशी का मदमस्त फिगर और मटकती हुईं गजगामीनी चाल के कई नवयुवक घायल थे, उसकी गदराई हुईं जवानी को देख क़र बूढ़ो के मुरझाये हुए लिंग मे भी जान आजाती थी".

खैर शुभम ज़ब घर पोहोचा उसने आवाज लगाई-

मै : मम्मी!.. मम्मी....!

उर्वशी : "तोलिया और कपड़े लाते हुए" अरे भीग गए हो क्या! लो सर पोछ लो, और जाओ कपड़े बदल लो.

शुभम सीधे बाथरूम के तरफ बढ़ा और सर पोछने, कपड़े बदलने लग गया, पर उस दिन पता नहीं क्यों उसे अजीब सी सुगंध आ रही थी. उसे लगा के नया साबुन होगा उसी की सुगंध होगी पर ज़ब साबुन को सुंग कर देखा तो लिरिल साबुन थी जो नीबू वाली सुगंध दे रही थी. पर वहाँ जो सुगंध आ आरही थी वह अधिक ही मोहक और थोड़ी सी तेज किस्म की थी. खैर मउसने सोचा के होगी कोई इतना क्या सोचना कपड़े बदल कर बाहर आ गया. चु के उसे Tuition की भी तैयारी करनी थी.तौलिया लपेट क़र शुभम बाहर निकल आया

पर उस दिन बारिश काफी हो रही थी....





शुभम : मम्मी! आज तो टूशन मे test है जाना कैसे होगा 🙄 बारिश भी है मै क्या करू.

उर्वशी : अरे देखो यदि बारिश रुकी तो जाओ वर्ना घर मे पढ़ लो.

वैसे पढ़ाकू शुभम tution या स्कूल बंक हो जाये तो बडा बोर सा होता जाता है. उसका घर काफी बढ़ा है. एक hall, 3 rooms, बडा सा किचन, एक store room.

इन मे एक बाथरूम+टॉयलेट जो उर्वशी के room मे था और दूसरा store room मे attached है. और ऊपर भी दो room है जिसका रास्ता बाहर से निकलता है यह सब जिस घर मे दो लोग ही है उनके लिए तो काफी बडा हो जाता है. इसी लिए उर्वशी ने ऊपर के दो room किराये पर देने का निर्णय किया था.

खैर उर्वशी ने शुभम को कुछ नास्ता दिया जिसे पूर्ण कर के मै मेरे room मे पढ़ने चला गया. Home work finished कर के शुभम सो भी गया था. फिर ज़ब नींद खुली तब 4.30 बज रहे थे.

जैसे तैसे रात हुईं.

मम्मी : बेटा! चलो खाना लगा रही हु, हाथ धो कर आ जाओ.

शुभम : बस एक मिनिट! आया मम्मी.....

मैंने देखा के उस दिन मम्मी ने मटर पनीर, पराठे, हलुवा, जीरा राइस और दाल बनाई थी. और सब आवश्यकता से अधिक ही लग रहा था.

शुभम : मम्मी आज कुछ ख़ास है क्या 🤔 और इतना सारा क्यों बनाई हो 🤔

उर्वशी : कुछ ख़ास ही हो तो बनाती हु क्या..? बदमाश..! अब अच्छे से भोजन कर लो, और हा जल्दी सो जाना. इतने मे लेट उठ रहे हो.

शुभम : जी मम्मी.

शुभम भोजन पूर्ण कर के शुभम room मे चला आया और उर्वशी किचन मे चली गई.

(महीनों पति के गर्म रगड़ से दूर रहती उर्वशी अब बदल चुकी थी, उसके अंदर जवान मर्दो की चाहत ने बड़ा तेज तूफान ला कर खड़ा कर दिया जिस से उसजे जवानी का शोला उफान करता हुवा उबले जा रहा था. मर्द के पकड़ और रगड़ से दूर जा चूका उसका शरीर अब उसे बंधन तोड़ने पर मजबूर कर रहा था. रास्ते से उसके भरे हुए बदन को घूरति हुईं जवान मर्दो की नजरो के तीखे इशारे उर्वशी को बेशर्मी पर उतारने के लिए मजबूर कर रहे थे, मदमस्त हाथनी जैसी उर्वशी की चाल और उसके कपड़ो से ढके हुए उसके शरीर के मोटे उभार, सुरीली कमर, और संतरेनुमा मोटे गोल दूध देख कर बूढ़ो के भी मुरझाये हुए लन्ड भी फूल कर खिल जाते थे)

लग भग रात के 9 बजे होंगे ज़ब शुभम सुसु करने बाथरूम गया. तब store room से उसे फिर वही सुगंध आई जो जो पहले बाथरूम से आई थी, पर अब की बार सुगंध काफी तेज थी. लग रहा था के अभी अभी ही किसी ने वह सुगंध स्प्रेड की हो. उसे फिर से अजीब लगा. और हा उस दिन बाथरूम मे भी पेशाब की गंध आ रही थी जैसे के कोई सुसु कर गया हो पर flush ना किया हो. ज़ब की इस बाथरूम मे शुभम ही जाता था दूसरा कोई था भी तो नहीं . ज़ब की उर्वशी का तो अलग सेपरेट बाथरूम था, और शुभम उर्वशी के सुसु की गंध भी पहचानता था. पर इस बार कुछ अलग ही था शुभम घर मे घूम रहे अजीब बदलाओ का जायजा लेने की कोशिश उसके समझ से बाहर की थी, घर मे अचानक आने वाले बदलाव से अंजान शुभम अजीब खयालो मे खो गया, उर्वशी उसकी हवस भरी हसरत पूरी करने के लिए जो बहार खुद के जीवन मे ला रही थी उस से शुभम के जीवन मे पतझड़ सुरु होने वाली थी, जिस से कच्चे बीज सा शुभम अब नादान बालक से भोगी नर मे बदलने वाला था)

खैर शुभम सुसु कर के सोने चला गया. पर नींद नही आ रही थी तो थोड़े देर laptop पर fb पर अपडेट देखने लगा. फिर सो गया.

पर लगभग 2 बजे अचानक नींद खुल गई तो देखा लाइट्स off हो गई थी. बिजली गुल और भारी बारिश हो रही थी. हवाएं मानो ऐसे चल रही थी के हवा का घुसा खिड़की पर चल रहा हो.... हवा का सायsss....सायssss.... की आवाज, अंधेरा और खिड़कीओ का खड़खाहट से वातावरण अत्यंत डरावना लग रहा था....
 
(part 2)

शुभम : मम्मी..! मम्मी...! मम्मी....!

उर्वशी : "दौड़ कर आते हुए" अरे क्या हुवा...! डर रहे हो क्या?

शुभम : "घबराकर" हा मम्मी मै यहां नहीं सोऊंगा. नहीं सोऊंगा plz.

उर्वशी : अच्छा घबराओं नहीं. चलो मेरे room मे सो जाओ.

शुभम तो यही चाहता था, क्यों के शुभम अँधेरे से बहोत घबरा जाता है . इस लिए एक night bulb चला के ही सोता था. पूर्ण अंधेरा हो तो उसे बढ़ा डर सताने लगता है.ईसलिए शुभम तूफान मे lights गुल होते ही उर्वशी के पास जा के सोता रहा.

जैसे ही शुभम उर्वशी के room मे आया सीधे उर्वशी के bed मे रजाई ओढ़ कर ऐसे छुप गया जैसे सांप को देख कर चुहा छूप जाता हो. उर्वशी शुभम की यह मजबूरी जानती है सो अक्सर लाइट्स गुल होने के बाद वही शुभम को ले जाती रही.

अब डर के मारे शुभम रजाई सर से पाव तक पूर्ण लपेट कर सो गया. अचानक अजीबो गरीब आवाजो से ज़ब उसकी nind खुली तो उर्वशी बेड पर दिख नहीं रही थी, मोमबत्ती का उजाले से बस बहोत कम ही दिख रहा था, तभी नादान शुभम ने फच...फचा....फच.... फच फचा... फच.... फच....फचा....फच... फच... फचा फच.....ऐसे आवाज के साथ उर्वशी के चूडियो की खन खन और उर्वशी के पायल की झनझन सुनी जो बाथरूम से बार आ रही थी.





.(जवानी की नंगी बेशर्म हकीकत से बेखबर नादान शुभम दो बदन के मिलन की आवाज नहीं समझ पा रहा था. ना ही उसने कभी दो बदनों के टकरासे निर्माण होने वाली आवाजे कभी सुनी थी.) शुभम बाथरूम के पास जाने लगा पर बाथरूम का दरवाजा बस आधा ही खुला हुवा था, अब शुभम वहाँ आ कर खड़ा था जहाँ से कुछ देखा जा सकता था, कमर से चेहरे तक ही दिखती हुईं उर्वशी, एक टांग उठा कर नल पर रखी हुईं थि जिस से उसकी चरबिदार मोटी गोरी टांग शुभम के सामने थी, दोनों हाथों से दीवाल का सहारा लिए हुए उर्वशी पीछे की और कमर उठा कर खड़ी थी, दातो से night ड्रेस पकड़ कर ऐसे उठा रखा था के उसके निचे से उसके दूध बाहर लटक रहे थे , उर्वशी की अर्ध नग्न कमर पर चमकती हुईं गोंडन watch बता रही थी के किसी के पंजे ने उर्वशी को जकड़ रखा है और वो ही उर्वशी को पीछे से झटके मार मार कर जोर जोर से हिलने पर विवश कर रहा था, उर्वशी ने उनका night ड्रेड ऊपर उठा कर पकड़ रखा था, जिस के निचे से लटकते, झूलते हुए उर्वशी के मोटे रसीले संतरे शुभम देख पा रहा था





..... यह सब देख कर समझने की कोशिश करता हुवा नादान शुभम वही कही खो गया. शुभम ने कई बार उर्वशी पीछे से ड्रेस उठा कर सुसु करते हुए देखा था. पीछे से ड्रेस उठा कर मोरनी बनती हुईं उर्वशी गांड फुला कर सुसु करने ज़ब फुदी फैलाती थी तब कुकर के सिटी जैसी होने वाली आवाज भी शुभम सुन चूका था. इस लिए उर्वशी कभी खड़ी हो कर सुसु नहीं करती है यह शुभम जानता था,

शुभम ने दरवाजा खोल कर अंदर झाखने की कोशिश की तब अर्ध नग्न उर्वशी शुभम को अंदर की और आते देख ड्रेस सवारते हुए वही खड़ी हुईं और दरवाजा खुलने से रोकने लगी, अब उर्वशी के कमर को जकड़ा हुवा golden handwatch वाला वो पंजा वही कही गायब हो गया,,,,

उर्वशी : अरे शुभम बेटा तुम सोये नहीं अब तक... उर्वशी हड़बड़ी मे ड्रेस ठीक करते हुए बोलि.

शुभम : मम्मी ये फच.. फचा फच.. फच... फचा... फच की आवाजे कहा से आ रही है.🤔

(शुभम के प्रश्न सुन क़र उर्वशी के चेहरे की रंगत उड गई थी, शरीर सुख प्राप्ति के आनंद मे डूबी हुईं उर्वशी अचानक शुभम को देख क़र सहमा सी गई, किसी प्रकार उसके साथ जो बाथरूम मे जो नवजवान मर्द था उसे छुपाना चाह रही थी, दूसरी तरफ शुभम को के सवालों का सटीक जवाब न दे पाने के कारण उर्वशी हड़बड़ा रही थी.)

उर्वशी : अरे बेटा वो ना नल टुट गया था मै उसे ठीक कर रही हूँ बस..... तुम जा कर सो जाओ...! जाओ....!

शुभम : अच्छा मम्मी पर मुझे डर लगता है.... 😥

उर्वशी : डरो नहीं मै यही तो हूँ...! जाओ सो जाओ बेटा.... उर्वशी दरवाजा बंद करती हुईं बोलि....!

शुभम वापस आ कर बेड मे सोने की कोशिश करता हुवा शुभम , बाथरूम मे जो कुछ हो रहा था उस का मन ही मन मे नाकाम विश्लेषण कर रहा था. के थोड़े der बाद उर्वशी भी बेड मे आ गई.....

शुभम जिस बाजू करवट पर सोया हुवा था उसी को सट कर शुभम के आगे उर्वशी लेट गई. शुभम के गहरी नींद को टटोलते हुईं उर्वशी ने उसका हाथ शुभम के कमर पर लपेट लिया था. उर्वशी के अचानक बदले हुवे रूप से सहमा हुवा शुभम चुपके से सब समझना चाह रहा था. और थोड़ी ही देर मे शुभम ने रजाई मे कुछ हलचल महसूस की मानो के कोई ठंड के मारे रजाई तान रहा हो और किसी भार के मारे bed एक बार तो किर से आवाज कर गया. यह सब शुभम के समझ से बाहर का था,...

शुभम : सोचने लगा क्या कोई भुत तो नहीं जो उसके साथ कमरे मे पीछा कर हरकते कर रहा है...? Mom के नंगी कमर पर चमकते हुईं golden hand watch पहने हुए हाथ क्या किसी भुत का तो नहीं था.... शुभम सोच मे डूब गया.....
 
Part 3

इस सब घटनाओ से शुभम के दिमाग़ के घोड़े और दिल की धड़कन धड़ाधड़ तेजी से गति कर रहे थे.थर्रा देने वाली ठंड मे तूफान वाली रात, उस कारण घर की हुईं lights off और काला अंधेरा, एक टीमटीमाती हुईं मोमबत्ती का थोड़ा सा उजाला और अचानक उर्वशी के बेडरूम मे बदलती हुईं गतिविधिया इस से शुभम के दिल की धड़कन घोड़े जैसी तेज दौड़ रही थी.

शुभम सोचने लगा : " सब बड़ा अजीब हो रहा है अब तो ऐसा लग रहा है के कोई तो है. मम्मी भी रह रह कर हल्की हल्की आगे पीछे यु हिल रही है मानो के कोई उनके पीछे से उनको आगे धकेल रहा हो. बस इतना ही नहीं था, रुक रुक के मम्मी धीरे धीरे आगे सरक रही है पर फिर वो फिर से पीछे सरक जाती.... ऐसा क्यों हो रहा है......





🤔

अब तो शुभम के डर का कोई ठिकाना न रहा, डर के मारे शुभम ने उर्वशी के तरफ मुख कर के करवट बदल ली और उर्वशी के कमर मे हाथ डाल कर काफी पास हो गया, पर न जाने क्यों उर्वशी ने शुभम के गले मे उसका हाथ और कमर पर उसकी एक टांग डाल दी.

जवानी के जलन से पीड़ित हवस से भरी उर्वशी के अंदर आज दो रूपी मादा वास क़र रही थी. एक तरफ उर्वशी उसके पीछे से लिपटे उस अज्ञात मर्द के आगोश मे मदमस्त मजे लूट रही थी तो दूसरी तरफ उर्वशी उसके सामने ही उसका बेटा शुभम जो अँधेरे से डर खा क़र सहमा हुवा पड़ा था उसके डर को ममता भरे स्पर्श से दूर करना चाहती थी. वासना और ममता के दो डोरी से बँधी उर्वशी और चिंता मे डूबा हुवा उसका बेटा शुभम दोनो माँ बेटे एक दूसरे से चिपक कर सैट होने लगें . दोनों के हरकतों से अब सुजाता के मोटे खचाखच मलाई से भरे हुए दोनों दूध के निप्पल शुभम के चेहरे के सामने सटने लगें .....

बार बार चेहरे के सामने झूमते हुए उर्वशी के नर्म गर्म मुलायम दूध की गर्मी, शुभम के अंदर बसा हुवा डर और उस रूम मे बने हुए रंगीन माहौल से परेशान शुभम ने उसके ओठ खोल दिए जिसमे बड़े वर्षो बाद आज उसी के माँ के दूध का निप्पल स्वाभाविक खींचा चला गया जिसे शुभम ने बड़े प्यार से ओठों के अंदर भर कर उसी अंदाज से चूसना सुरु किया जिस अंदाज से वो कभी पहले घंटो चूसता रहता था.





पीछे से अज्ञात मर्द द्वारा उर्वशी को पड़ रहे हल्के हल्के झटको से रगड़ खाती हुईं उर्वशी के हिलते हुए भारी भरकम झूलते हुए स्तन जो शुभम के सामने उसे उसका बचपन याद दिला रहे थे, उसी बचपन को याद क़र डर को भुलाता शुभम बिना किसी परेशानी से स्तनपान की कोशिश और जिस से जागी हुईं शुभम की बालक बुद्धि से प्रेरित शुभम ने बिना हचकीचाहट हाथ आगे कर दिए और दोनों स्तन को पकड़ कर धीरे धीरे दूध पिने लगा, शुभम के कोमल ओठो के बिच मसलते हुए उर्वशी के निप्पल उर्वशी को ममता के चरम सीमा याद दिलाने लगी, कामवासना और ममता के प्रकोक से मदहोश हो चुकी उर्वशी अब पर्णतः गर्मी से भरी हुईं मादा बन चुकी थी, जो बस नर का संग चाह रही थी., और सही मायने मे शुभम आज से नर बनने की प्रक्रिया मे प्रवेश कर चूका था. दोनों मा बेटे समय के मारे आज अजीब मोड़ पर खड़े थे. ना शुभम को अजीब लग रहा था न उर्वशी समझदार होते हुए भी पीछे हट रही थी. पीछे के भारीभरकम नर की मजबूत जकड़न, और झटके और आगे से शुभम के ओठों की नर्म पकड़ से बिच मे बेसुध सी हुईं उर्वशी आज वह सुख प्राप्ति कर रही थी जो नसीबवान को भी न मिला हो.....

....

ये शुभम के जीवन की वह पहली घटना है जिसको वो कभी भुला नहीं पाया, अब शुभम महसूस कर पा रहा था के उर्वशी के दोनों के टांगो के ऊपर एक तगडी मजबूत मर्दाना बालो वाली टांग उर्वशी को जकड़ कर लिपटी है, और एक सख्त हाथ उर्वशी के ऊपरी बगल के निचे से उर्वशी का कंधा मजबूती से किसी ने पकड़ रखा है उसी की हलचल से उसकी मम्मी हिली जा रही है, इस हलचल को रोकने की कोशिश करता हुवा शुभम ने उर्वशी के दोनों दूध कपो पर उसके पंजो की पकड़ मजबूत कर दी थी ता के बड़े दिनों बाद उसके दूधपान के कार्य मे बाधा न आये. नादान शुभम अंजानी मे उर्वशी को जिस प्रेम से भोग रहा था उसे उर्वशी खोना नहीं चाह रही थी.... उर्वशी के नर्म मुलायम दूध गोले के निप्पल को चूसते चूसते शुभम उसके मन के सारी चिंता, भय, और डर को अब त्याग चूका था, जिस से शुभम एक गहरी नींद मे सो गया.....





इस परिस्थिति का फायदा उठा कर अब उर्वशी ने उसकी दोनों टांगे खोल कर कमर ऊपर उठा दी जिस से के वह अज्ञात ताकतवर मर्द उसका हल उर्वशी के खेत मे जोथ सके. उस ताकतवर मर्द ने भी उर्वशी के अंदर ख़त्म न होने वाली आग को बुझाने के लिए कमर कस लि. अब वो उर्वशी कर घुटने उसके कंधो पर उठा कर उसने उसके पंजो से उर्वशी की कमर पकड़ कर उर्वशी की फुदी को मथना आरम्भ कर दिया.....





सुबह नींद ज़ब खुली तब शुभम का सर बहोत भारी सा लग रहा था, स्कूल भी जाना था पर उसकी mom उर्वशी अब तक सोइ हुईं ही थी.

शुभम : मम्मी...! मम्मी.... उठीये भी देखो 6.30 बज गए है मुझे स्कूल जाना है.

उर्वशी : हा हा, उठ रही हु तुम तब तक फ्रेश हो कर तैयारी कर लो, जाओ....!

शुभम को जोर से सुसु लगी थी तो वो उसके mom के ही बाथरूम मे चला गया, अभी भी आँख ठीक से खुली नहीं थी इसलिए आँखो पर पानी मार रहा था. और सुसु कर के बाहर निकलते समय उसने कुछ अजीब बात notice किया. देखा के कोई ऑरेंज रंग की बड़े इलास्टिक वाली चड्डी पड़ी है. यह उसके mom की तो बिलकुल नहीं लग रही थी. शुभम ने उसे चीमटी मे पकड़ कर उठाया तो देखा वह चड्डी आगे से पूर्ण गीली हुईं है. यह देख कर शुभम का माथा ठनकने लगा. यह गिलापन तो वैसा ही था जैसे के ज़ब शुभम का night fall होता है या ज़ब ज़ब चड्डी मे ही मुठ मार देता है तब कुछ ऐसे ही उसकी चड्डी गीली होती है......
 
Part 4

आज शुभम के दिमाग़ मे अलग विचारों का तूफान घूम रहा था, उर्वशी के बाथरूम मे मिली हुईं चिपचिपे चाशनि से सनी ऑरेंज रंग की under wear देख क़र शुभम अंदाजा बांधने लगा के रात मे उर्वशी के बाथरूम और बेडरूम मे उसने जिस अज्ञात मर्द का आभास किया ये underwear उसी की होगी.

जैसे तैसे तैयार हो क़र शुभम कॉलेज के लिए निकल पड़ा, पर आज कॉलेज मे भी उसका मन नहीं लग रहा था, शुभम के दो best friend एक आर्यन और दूसरा वासु इनके साथ भी आज शुभम असहज हो रहा था.

आर्यन : अरे सुनो अब मुझे लगता है हमें group study फिर से सुरु क़र देनी चाहिए.

वासु : हा मुझे भी लगता है, पर शुभम की मम्मी से पुछना पड़ेगा bro...

आर्यन : पूछना क्या है...! आंटी कभी ना नहीं कहती... क्यों शुभम?

शुभम : आ... हा हा... मम्मी से पूछ लेते है हा.

वासु : अच्छा आज पूछने आये क्या? या तुम ही पूछ लोगे?

आर्यन : अरे हम ही चलते है न.... बहोत दिन हुए आंटी जी से मिले नहीं...

शुभम : hum... अच्छा आजाना...

( शुभम, आर्यन और वासु तीनो क्लासमेट है. इनमे आर्यन के पापा सुरक्षा विभाग मे अधिकारी है, आर्यन साडे छे फिट ऊंचा, गोरा, दुबला पतला, BASKETBALL player है, आर्यन तीनो ने सबसे ज्यादा धूर्त, आंटीओ का दीवाना, और चलाक है. तो वासु के पिता किसान है, 5फिट 9 इंच की hight सावला वासु सभ्य और सुलझाहुवा लड़का है.)

कॉलेज छूटते ही शुभम घर के लिए निकल पड़ा. Ghar पोहोच क़र शुभम,

शुभम : मम्मी आर्यन और वासु group study के लिए घर आना चाहते है...

उर्वशी : अच्छा, तो आने दो, पिछले साल भी तो आये थे.

शुभम : हा मम्मी पर मैंने सोचा के पहले पूछ लू आप से.

उर्वशी : पढ़ाई के लिए मना किया है कभी.... आने दो मेरी permission है.

शुभम : पर मम्मी सुनिए....

उर्वशी : बोलो क्या हुवा..

शुभम : मम्मी आज सुबह आप की बाथरूम मे एक ऑरेंच कलर की चड्डी किसकी थी... 🤔

(शुभम के इस सवाल से उर्वशी सकूँचा गई.)

उर्वशी : अरे कल के तूफान से किसी की चड्डी उड क़र आई थी मैंने बाथरूम मे रख दी थी.

शुभम : ओह अच्छा....

उर्वशी : अच्छा बाते छोड़ो अब खाना खा लो...

शुभम : जी मम्मी.

(उर्वशी आर्यन की हरकतें बखूबी जानती थी, आर्यन की चोर नजर उर्वशी के बदन को घूर क़र उसके खूबसूरती का जायजा लेती थी ये सब उर्वशी भी मन ही मन पसंद करती थी. पर फिर भी आर्यन उर्वशी से और उर्वशी आर्यन से दुरी बना क़र ही चलते थे. उर्वशी जानती थी के उसके जवानी की आग बुझाना कोई बच्चो का खेल नहीं, पर पती के रगड़ से कई कई महीने रह क़र उर्वशी बोर हो जाती इसलिए बस मजे के लिए किसी की नजर की हवस को वो तूल देती तो नहीं थी पर जवान लड़को के सामने मटक मटक क़र मजे पुरे लेती थी. उर्वशी के इसी जाल का एक शिकार आर्यन भी था जो इतना समझता था के उर्वशी उसी के best friend की mom है इसलिए थोड़ी दुरी ही ठीक है उर्वशी के गदराये हुए बदन को बस निहार मुट्ठी मार क़र ही आर्यन खुश था.)





थोड़ी ही देर मे आर्यन और वासु शुभम के घर आ गए.

आर्यन : शुभम ! शुभम !

शुभम : ओह आ गए तुम दोनों ...

तभी उर्वशी को देख क़र आर्यन बोलने लगा.

आर्यन : नमस्ते आंटी, उर्वशी के स्तन को निहारते हुए आर्यन बोल पड़ा...

उर्वशी : कैसे हो आर्यन, कैसे हो वासु...

वासु : जी आंटी हम ठीक है.

आर्यन : आंटी जी आप को देख क़र मेरा मन ठीक हो जाता है.😊

उर्वशी : हा हा... तुम्हारा मन मै बहोत अच्छे से जानती हु बाबू... उर्वशी हसते हुए बोल पड़ी.

तभी शुभम ने दोनों को रूम मे study के लिए ले जाने लगा.

उर्वशी बोलि - सुनो कुछ कॉफी नास्ता चाहिए हो तो बता देना बना दूंगी ठीक है

आर्यन : जी ठीक है आंटी...

(दुनिया के धकोसलो और चालबाजी से अंजान शुभम अभी ईन सब बातो से काफ़ी दूर था, अच्छी सोच और एक सज्जन स्वभाव का पढ़ाकू शुभम उर्वशी पर बहोत विश्वास करता था, job के लिए हमेशा out of town रहने वाले पिता का हाथ उसके माथे पर नहीं था. इसलिए शुभम के पास बस उसकी mom उर्वशी ही एक आधार थी.)

शुभम के रूम मे जा क़र तीनो पढ़ाई और home work करने लगें, पढ़ाई से related doubts एक दूसरे से पूछने लगें. पर इस सब मे आर्यन की नजर रूम के बाहर उर्वशी को ही खोजती रहती थी. उर्वशी ज़ब भी वहा से आती जाती आर्यन उसे ताड़ना नहीं भूलता था. उर्वशी भी आर्यन की नजरो को समझ गई थी इस लिए आर्यन ज़ब भी आता उर्वशी के चाल ढाल का अंदाजा अधिक ही मादक बन जाता.

तभी आर्यन बोल पड़ा.

शुभम : अरे सुनो कॉफी के लिए मम्मी को बोल दु क्या...

वासु : नहीं रहने दो bro...

आर्यन : अरे कॉफी से मूड फ्रेश हो जायेगा bro, कॉफी तो बनती है ..... (आर्यन ने वासु को चुपके से pinch करते हुए इशारा किया)

वासु : अच्छा bro मै भी पिऊंगा.... इशारा समझते हुए वासु ने इरादा बदल दिया.

शुभम : अच्छा मै mom को बोल आता हु.

आर्यन : अरे नहीं रुको मै जाता हु इसी बहाने आंटी जी से कुछ बाते क़र लूंगा और मै ही कॉफी ले आऊंगा bro.

यह कह क़र आर्यन वहा से जाने लगा, तब उर्वशी बेड रूम मे बाल सवार रही थी, आर्यन की गंदी आदत थी के उसे बड़ी उमर वाली महिलाओ को चुपके से निहार क़र रात मे ऊन की imagination क़र के मुठ मारता था. आर्यन चुप चाप उर्वशी के बदन का जायजा लेने लगा, लाल साड़ी मे आयने के सामने बैठि हुईं उर्वशी ने जान बुझ क़र पल्लू गिरा दिया था जिस के उर्वशी के गोल मटोल स्तन ब्लाउज के कैद मे बंद उभर क़र दिख रहे थे, उर्वशी की गोरी सकुची हुईं सुरीली कमर और उसकी गहरी नाभि आर्यन के नजरो मे भर रही थी, आर्यन उर्वशी के रूम मे चुपके से झाखने लगा है उर्वशी ने आर्यन की आहट पहले ही भाप ली थी उर्वशी बखूबी जानती थी के आर्यन ताकाझाकी करने जरुर आएगा इसलिए आज वो भी जान बुझ क़र नए नये अदाज मे position बना क़र बाल सवार रही थी, आर्यन उसे ताड़ रहा है ये उर्वशी को खबर भी थी.

तभी उर्वशी उठ क़र बाथरूम जाने लगी, उर्वशी ने जान बुझ क़र दरवाजा open ही रखा और पीछे से साड़ी उठा क़र मोरनि बनते हुए आर्यन को नजारा दिखाने की कोशिश करने लगी, धीरे से उर्वशी ने इसकी एकदम छोटी नाड़े वाली black panty जो मुश्किल से उसके दोनों पिंडलीओ के बिच छुपी हुईं फुदी को ढक पाती थी उसे उतरने लगी, उर्वशी ने panty घुटनो तक सरका दी और धीरे धीरे गांड पीछे की और क़र के बैठने लगी, गांड हिलाते हुए उर्वशी दोनों पिंडलीओ को ऊपर निचे घूमने लगी. इस कारण उर्वशी की फुदी की पंखुड़ीया खुल क़र खिली हुये कमल के समान दिख रही थी. उर्वशी के इस अंदाज के कारण आर्यन को उर्वशी के दोनों गुफाओ का खजाना साफ दिखने लगा. इस अंदाज मे उर्वशी सु सु क़र के फिर से उसी अंदाज मे panty pahn क़र साड़ी निचे क़रने लगी, अब ज़ब उर्वशी बाहर आने लगी तब आर्यन उर्वशी के रूम के बाहर छुप गया.









उर्वशी : अरे आर्यन तुम यहां...

आर्यन : जी आंटी वो आप हमें कॉफी बना देते तो अच्छा होता...

उर्वशी : हा हा अभी बना देती हु....

आर्यन : आंटी मै भी किचन मे आउ क्या... 🤔

उर्वशी : हा हा आजाओ....

अब उर्वशी आगे आगे और आर्यन पीछे पीछे चलने लगा, उर्वशी के बदन को हर angle से निहारता हुवा आर्यन उर्वशी के पीछे पीछे आर्यन तने हुए लंड को बार बार adjust क़र के मंडरा रहा था, आर्यन के मन मे उर्वशी का फुला हुवा गुलदस्ता घूम रहा था, इस कारण आर्यन का pant मे उसके मोटे बंबू ने तम्बू बना दिया था जो छुपाये नहीं छुप रहा था. उर्वशी भी आर्यन के तने हुए लंड का अंदाजा बांध चुकी थी.

उर्वशी : अच्छा बताओ आप तीनो की study कैसे चल रही है.

आर्यन : जी study तो अच्छी चल रही है आंटी जी... उर्वशी के बगल मे खड़ा हो क़र आर्यन उर्वशी को निहारते हुए बोल पड़ा.

उर्वशी : और exams कब से start होने वाले है.

आर्यन : जी वो next month ending को start हो जाएगी.

उर्वशी : अरे तब तो आप को study बढा देनी चाहिए.

आर्यन : जी आंटी इसी लिए group study and all करना चाहते है हम तीनो.

उर्वशी : हा बिलकुल करिये! मै हर प्रकार से आप तीनो को support करती रहूंगी.

आर्यन : जी हा आंटी..! आप के सपोर्ट की मुझे बहोत जरुरत है...! फिर से लंड adjust करते हुए आर्यन बोल पड़ा .

उर्वशी : हा बिलकुल बेटा, आप ज़ब भी adjust करना चाहो बोल देना मै आप का adjust क़र लुंगी, ठीक है.

आर्यन : जी आंटी मैने देखा है आप का engine .... And आप बड़ी तेजी से काम करती हो...बड़ी आसानी से adjust क़र लोगी कोई तकलीफ नहीं होंगी😊

उर्वशी : अच्छा.... बडा बारीकी से निरक्षन करते हो आर्यन आप🤨

आर्यन : जी जो चीज मेरे काम की हो उसका मै जायजा लेते रहता हु आंटी बाकि कुछ नहीं जी😊

उर्वशी : हा अच्छी बात है, लेकिन बड़े engine को चलाने के लिए experienced driver भी चाहिए पता है न आप को😏.... आर्यन के लंड पर नजर फेरते हुए उर्वशी बोलि.

आर्यन : पर आंटी जी कोई एक दिन मे तो experienced नहीं बनता, बार बार चांस मिले तो कोई भी बड़े से बड़ा engine चला सकता है 😊

उर्वशी : बड़े होसियार हो रहे हो आप.

शुभम : मम्मी कॉफी हुईं क्या 🤔 जल्दी बनाइये plz

उर्वशी : बस भेज रही हु बेटा.

तभी आर्यन कॉफी ले क़र जाता है., जाते ही ज़ब वासु आर्यन को देखता है तब आर्यन वासु को आँख मार क़र अजीब smile देता है😉

तीनो मिल क़र पिते है और फिर study करने लगते है.
 
Part 5

अब तो रोज रोज आर्यन, वासु group study के लिए शुभम के घर आने jane लगें. शुभम भी पुरानी बाते भूलने लगा था, college, friends and group study मे समय बिता जा रहा था, शुभम भी अब ईन सब मे व्यस्त रह क़र padhai पर focused हो रहा था. दूसरी तरफ उर्वशी भी अब खुद मे ही व्यस्त रहती थी, सजने सवरने, शुभम and friends को help करने और घर के काम सवारने मे उर्वशी का समय बीत जाता, पर उर्वशी कही न कही कुछ खिचड़ी पका रही थी, उसका बदला हुवा ढंग का कारण आर्यन नहीं था बलकी कोई और ही था जिसके खयालो मे उर्वशी बेसुद सी रहती थी, दूसरी तरफ आर्यन को लगने लगा के उर्वशी उसी को चांस देने के लिए redy है इसलिए बन सवर क़र रहती थी. उर्वशी आर्यन का ये भरम तोडना नहीं चाहती थी, अब उनकी exams भी पास आ रही थी इसलिए जो चल रहा है चलने देने मे ही भलाई थी. आर्यन की ये चाल बाजी से शुभम दूर था पर वासु बखूबी आर्यन के मन की बदमोसी जानता था. पर वासु यह सब जान क़र भी दोस्ती के लिए चुप था.

वासु : bro आर्यन एक बात बता आंटी और तेरा कुछ चल रहा है क्या 🤔

आर्यन : नहीं तो, कुछ ख़ास नहीं.

वासु : सच सच बता, तुझे कसम हैं.

आर्यन : भाई बस आंटी और मै थोड़ी बाते क़र लेते है सच यहि है और आंटी ही मुझे थोड़ा बहोत उनका गोदाम दिखा देती है bro... उसमे मेरा कोई हाथ नहीं....





वासु : क्या बात क़र रहा है bro... गजब😉

आर्यन : हा bro सही बता रहा हु.... आंटी ने मुझे उनका घोंसला दिखाया था.

वासु : ओह वाव यार.... आंटी इतनी खूबसूरत है साड़ी मे ही उनकी गांड इतनी कसी हुईं लगती है तो नंगी तो गजब कयामत लगती होंगी.😉

आर्यन : हा bro, आंटी की गांड, जांघ, balls बहोत कसे हुए है... मैंने सब देखा है.

एक बार ज़ब आंटी सुसु करने बाथरूम मे बैठ रही थी तभ भाई उनकी फूली हुईं बादाम जैसी गोरी त्रिकोण बनाये हुईं फुदी के दीदार मै क़र चूका हु🤤

वासु : क्या बात क़र रहा है भाई 😋 गजब... भाई बताना आंटी का घोंसला कैसे दीखता है.

आर्यन : भाई आंटी का घोंसला बहोत खूबसूरत है, चर्बीदार टांगे और गोलमटोल मटकेनुमा गांड के बिच छिपी हुईं सी लगती है भाई, और भाई सट के चिपकी हुईं इलास्टिक की नाड़े वाली panty भी उनके बुर को ठीक से ढक नहीं पाति, आंटी के बुर के छेद को गुलाबी पंखुड़ी जैसे दो गोरे गोरे मांसल ओठों से घेरे हुए थे, जब मै किचन मे जा रहा था तब अचानक देखा के आंटी उनके रूम की बाथरूम की और जा रही थी तब मै उनके दरवाजे के पीछे रुक क़र देख रहा था, ज़ब उन्होंने ड्रेस ऊपर क़र के टांगे फैला क़र बैठने लगी तभ आंटी की ऊपर की हुईं ड्रेस और निचे झुक के उनकी खुलती हुईं दो पिंडलीया के बिच मे छिपी खूबसूरत जन्नत को देख मै बहोत ख़ुश हुवा था भाई.





आर्यन : अरे हा भाई, पर मुझे एक doubt है.

वासु : क्या भाई.

आर्यन : भाई आंटी की फुदी बढ़िया है पर उनकी फुदी के दोनों बगल की ओठों के अंदर से दो पतली पंखुड़ीया साफ बाहर निकलि हुईं है भाई, हो सकता है के कोई आंटी की servicing क़र रहा है....

वासु : भाई आंटी है ही इतनी गजब की मादा कोई तड़गा नर आंटी को ठोकता होगा भाई.... छोड़... अपना क्या जाता है...

आर्यन : बस समझ जा भाई. पर शुभम को ना बता बस....

वासु : अबे यार तू ये सब करने आया है या group study करने....

आर्यन : अरे भाई तू समझता नहीं क्या, study ही क़र रहे है, बस आंटी ही सब मजे दे रही है भाई मैंने कुछ नहीं किया भाई.

वासु : चल ठीक है पर exams पर focused रहा क़र भाई...

आर्यन : वही पर हु भाई. बस तू मेरा एक काम क़र दे भाई plz.

वासु : हा बोल.

आर्यन : ज़ब मै कॉफी लेने आंटी के पास जाऊ, या किसी बहाने रूम से बाहर जाऊ तू शुभम को वहि managed क़र रखियो, बाहर ना आने दियो बस. बदले मे तुझे party दूंगा.

वासु : humm, अच्छा भाई, पर तू करना क्या चाहता है🤔

आर्यन : भाई मै बस एक बार आंटी के बड़े बड़े balls पकड़ क़र balling करना चाहता हु.... और उनके दोनों balls मे मेरी bat घूमाना चाहता हु 🤤

वासु : साले बड़ा हराम है तू....

"आर्यन ने अब वासु को college मे ही सब seting समझा दी थी अब आर्यन एक मौक़े की तलाश मे था के कब उर्वशी के balls उसके पंजे मे आये."

स्कूल छूटते ही तीनो शुभम के घर मे आने लगें, पहोच ते ही तीनो ने हाथ पैर धो क़र study सुरु क़र दिया वही दूसरी तरफ उर्वशी ने आज leggings and red t shirt लगा रखी थी जिस पर उर्वशी बहोत ही bold लग रही थी और किचन मे तीनो के लिए नास्ता तैयार करने लगी. नास्ता तैयार क़र उर्वशी शुभम के रूम मे आ गई.... आते ही उर्वशी की नजर और आर्यन की नजर एक होने लगी, आर्यन उर्वशी के गदराये बदन को देख क़र horny/होने लगा. उर्वशी के इस अलग रूप को देख क़र आर्यन समझ गया के आंटी आज फिर से उनका engine दिखाएगी.

उर्वशी : फटाफट नास्ता क़र लो ठीक है और हा आर्यन नास्ता की प्लेट्स किचन मे रख क़र जाना, अब मै आप को disturb करने नहीं आउंगी ठीक है.

आर्यन : don't worry आंटी मै रख दूंगा...

तीनो ने नास्ता finished क़र के plates रख ली अब आर्यन वासु को इशारा करता है और plates किचन मे रखने के लिए जाने लगा. वासु समझ गया के शुभम को यहि पढ़ाई मे busy रखना है.

आर्यन plates किचन मे rakh क़र देखता है के उर्वशी बेडरूम मे कपड़े बदल रही थी, कपडे उतार क़र उर्वशी बस panty bra पर आयने के सामने खुद की खूबसूरती पर नाज क़र रही थी, उर्वशी की नाड़े वाली panty उसकी गोलमटोल गांड ढक नहीं पा रही थी, panty के बाहर निकलते हुए मटके जैसे कसे हुए उर्वशी के नितंब पूनम के चाँद जैसे उज्वल दिख रहे थे. दोनों नितंबो के बिच फसी हुईं उर्वशी की गुलाबी panty उसके नितंबो को और ही कस क़र सटी हुईं थी. गोरी मांसल जाँघे, कमर मे लटकता हुवा चांदी की कमरचैन, पैरो मे घुंगरू वाली पायल ये सब देख क़र उर्वशी पुराने राजाओं की पटरानी जैसी मादक लग रही थी. उर्वशी के bra से बाहर आने के लिए मचलते हुए बड़े बड़े संतरे जैसे उर्वशी के घचाघच मलाई से भरे हुए दूध और उस पर पड़ने वाली light का reflection इस से दोनों balls कुंदन के जैसे चमक रहे थे, जवानी की आग से झूलस रही उर्वशी कभी अपने ही दूध पकड़ सहलाती तो कभी कमर झुका क़र गांड हिलाती, तो कभी panty उतार क़र अपनी फुदी पर थपथपाती, पति job के लिए कई महिने बाहर रहता पर फिर भी उर्वशी ने अपने जवानी को सब से छुपा क़र रखा था. पर अब उसी के बेटे का दोस्त आर्यन की नजररो से उर्वशी जवानी बचा नहीं पाई. उर्वशी का नग्न लम्बी चौडा गोरा सूड़ोंल शरीर निहार क़र आर्यन का लंड उफनता हुवा हीचकोले मार रहा था, उसे क्या करे क्या न करें सूझ नहीं रहा था. उर्वशी के बदन को देख क़र बावला हो चूका आर्यन ने हड़बड़ाहट मे बगल की एक कुंडी धक्का लगा दिया जो धड से गिर पड़ी.

उर्वशी : कौन है.... सावधान हो क़र ड्रेस लगाते हुए बोलि.

आर्यन : जी आंटी मै हु.... आर्यन.

उर्वशी : अच्छा नास्ता क़र लिए हो आप तीनो ने?

आर्यन : जी आंटी क़र लिया है... उर्वशी के आँखो ने देखता हुवा आर्यन बोल पड़ा....

(उर्वशी समझ गई थी के आर्यन ने सारा नजारा निहार लिया है, आर्यन के आँखो का गरमाया हुवा अंदाज और उसके pant मे लंड तन जाने से बना हुवा तम्बू आर्यन का हाल बया क़र रहे थे. उर्वशी भी कही न कही मजे लूटना चाहती थी पर आर्यन अभी कच्चा खिलाडी है यह भी वो समझ गई थी. इसलिए चैंपियनशिप खेल के आर्यन को उर्वशी अभी उसकी पिच खुली नहीं करना चाहती थी. पर उर्वशी आर्यन के साथ एक test match खेलने के लिए तैयार थी.)

उर्वशी : अच्छा आर्यन क्या मेरी एक help क़र दोगे.?... बेड रूम मे ले जाते हुए उर्वशी बोलि.

आर्यन : जी आंटी

उर्वशी : बड़े दिनों से कंधे बड़े दर्द क़र रहे है जरा दबा देते तो अच्छा होता. आर्यन के आँखो मे आँखे डाल क़र उर्वशी ने आर्यन को अब गुलाम बना लिया.

आर्यन : जी आंटी आप बैठिये मै दबा दूंगा आप के...

उर्वशी आयने के सामने बैठ गई और आर्यन उसके पीछे खड़ा हो क़र उसके कंधे दबाने लगा. आर्यन का तना हुवा मोटा सख्त लंड उर्वशी के पीठ मे मानो सुराख़ करने की नाकाम कोशिश क़र रहा था, उर्वशी भी आर्यन का ये हाल जान गई थी.

उर्वशी : उउम..थोड़ा और निचे दबाओ बेटा... 😊

आर्यन : जी आंटी....





अब आर्यन की हिम्मत बढ़ी हुईं थी, आर्यन अब उसके दोनों हाथ कंधो से और निचे ले जाता.

उर्वशी : very good बेटा... थोड़ा और निचे जाते तो अच्छा होता...

आर्यन अब उर्वशी के कंधो से निप्पल तक पंजो की पोहोच बना रहा था जिसे उर्वशी काफ़ी enjoy क़र रही थी. उर्वशी दोनों brest के ऊपर से bra के cup धीरे से बगल क़र के उसने अंदर ही अंदर दोनों दूध बाहर खींच लिए. धीरे धीरे आर्यन ने कंधे दबाना छोड़ क़र उर्वशी के संतरे ही दबाना सुरु क़र दिया था. उर्वशी के निप्पल बड़े प्यार से पिरोने की कोशिश करता हुवा आर्यन के दोनों बड़े पंजो मे उर्वशी के दोनों दूध आज मुक्त होने वाले थे. उर्वशी ने भी आर्यन को सहयोग देते हुए ti shirt ऊपर उठा ली अब आर्यन उसके पंजो से उर्वशी के दोनों दूध दोह रहा था. आर्यन हर अलग अंदाज मे उर्वशी के दोनों गोल मटोल बड़े बड़े दूध सहलाता तो कभी मसलता, कभी दोनों दूध पकड़ क़र एक दूसरे से रगड़ता, तो कभी उर्वशी के निप्पल अलग अंदाज मे पिरोता. आज आर्यन के हाथो दुधारु गाय लग गई थी जिस का दूध हर प्रकार की कला से आर्यन दोहना चाहता था...





. उर्वशी भी अब रंगत मे आने लगी थी उर्वशी अपने ही दांतो से अपने ही ओठ काटने लगी और आयने से आर्यन के eye to eye contact बनाने लगी. आर्यन भी अब समझ गया के उर्वशी के गुलाब जैसे ओठों का रस पान करने का समय आ गया है. आर्यन अब हिम्मत जुटा क़र आगे आने लगा, उर्वशी ने उसे आगे आते देख आँखे बंद क़र दी.

सामने खड़े हो क़र आर्यन ने उर्वशी के बगल मे हाथ डाल की कड़ा क़र दिया, wolly ball खेलने वाला 6 फिट ऊंचा college student आर्यन उर्वशी के balls से काफ़ी बढ़िया पारी खेल गया था. अब अगली पारी की तैयारी क़रता हुवा आर्यन के सामने 5 फिट 8 इंच की गदराई हुईं उर्वशी अर्ध नग्न खड़ी थी. आर्यन ने देर न करते हुए उर्वशी के फूल जैसे कोमल मुलायम होंठ को अपने ओठों मे दबोच लिया था, कभी उर्वशी आर्यन के ओठ चूसती to कभी आर्यन उर्वशी के, लिप लॉक मे फसा क़र उर्वशी ने जबान आर्यन के मुह मे डाल दी जिसे आर्यन बड़ी सुलभता से चूसने लगा आर्यन के मुह के अंदर घुस क़र उर्वशी की जबान जंगी लड़ाई लड़ रही थी. अब आर्यन ने उर्वशी की leggings घुटनो तक निचे सरका दी और उर्वशी की panty को उर्वशी के एक नितंब मे फसा क़र फुदी से बाहर सरका लिया, उर्वशी ने भी आर्यन को सहयोग देते हुए एक टांग आयने के table पर उठा क़र टिका दिया. अब उर्वशी की काम रस से सनी हुईं बादाम जैसी फूली गोरी त्रिकोण आकार की फुदी मुक्त हो चुकी थी जिस पर आर्यन की उंगलियां ऐसे मंडरा रही थी मानो किसी कमल पर भवरा मंडरा रहा हो. उर्वशी के बुर का जायजा लेते हुए आर्यन की उंगलियां उर्वशी के कमल मे अंदर बाहर हो रही थी जिस से अब उर्वशी के अंदर का शहद तार जैसी पतली धार ले क़र टपक रहा था....

अब उर्वशी ने भी आर्यन के लंड का जायजा लेने ke लिए आर्यन का बेल्ट ढीला क़र दिया, आर्यन उर्वशी की भावना का सम्मान करते हुए कमर का हूक खोलने लगा उर्वशी ने उसके pant को बड़े नजाकत से कमर तक निचे खींच लिया, अब उर्वशी ने उसकी underwear निचे धीरे से सरका दिया जिस ke अंदर से अब केले जैसा अकड़ा हुवा गोरा मोटा पत्थर जैसा सख्त लम्बा लंड नस नाड़ीओ से और ही भीषण दिखने लगा इसका अंदाजा उर्वशी को न होने ke कारण उर्वशी उसके उग्र लंड को देख दंग रह गई.





(अब तक चुप्पी साध क़र test match खेलते हुईं उर्वशी और पहली बार अपने best friend की mom के साथ साथ इतना आगे पोहोच बना क़र डरा हुवा आर्यन दोनों बिन बोले खेल का लुप्त उठा रहे थे, पर दोनों ने एक दूसरे के बदन और सामान का अच्छे से जायजा लिया. आर्यन ने अब उर्वशी के engine का पूर्ण जायजा ले लिया था, और उर्वशी के सामने आर्यन का नौजवान ड्राइवर तन क़र redy था. अब तक आर्यन को नौसीखिया या कच्चा खिलाडी समझने वाली उर्वशी का इरादा आर्यन के भीषण लंड को देख क़र बदल गया था, उर्वशी अब समझ गई के उसके engine के लिए एक और driver उसे मिल चूका है.)

उर्वशी : आर्यन तुम तो बहोत अच्छे खिलाडी निकले हो बेटा.

आर्यन : आंटी आप को मैंने कहा था ना के मै भी आप के engine को अच्छे से चला सकता हु... याद है आप को.

उर्वशी : हा बेटा याद है. उर्वशी ने आर्यन का land पकड़ते हुए कहा.

अब तक आर्यन का लंड किसी ने पकड़ा नहीं था, ये पहली बार था के कोई इसका लंड छू रही थी. उर्वशी के उंगलिओ का नर्म अहसास पा क़र आर्यन का लंड और भी गर्म हो गया. उर्वशी भी अब आर्यन को तड़पना नहीं चाहती थी. उर्वशी ने बाथरूम के तरफ इशारा किया और मोटी गांड मटकाते हुए बाथरूम की और चलने लगी, उसके पीछे पीछे आर्यन लंड झूलाते हुई चलने लगा. बाथरूम मे पोहोचते ही उर्वशी ने बाथरूम लगा लिया.

आर्यन : आंटी क्या मै आप के मुंह मे मेरा लंड दे दु. 😉सहमाते हुए आर्यन बोला....

उर्वशी : हा पर पहले आप आप के कपडे उतार लो.

आर्यन और उर्वशी पूर्ण नंगे हो गए. आर्यन ने उर्वशी को बाहो मे भर क़र खूब सहलाया. एक दुसरो को किस करते हुए आर्यन अब उर्वशी की एक टांग उठा क़र घुटनो के बल बैठ गया, उर्वशी की फुदी को सुंग क़र चूमने लगा. चाटने लगा. आर्यन ने उर्वशी की बुर चाट चाट क़र गोरी से लाल क़र दी😋

उर्वशी : आर्यन आप बहोत अच्छा चाटते हो... Aah.. Aahhh...

अब आप खड़े हो जाओ मै आप का लंड चूसती हु.

आर्यन : ok आंटी... मै भी यहि चाहता हु 🤤

अब उर्वशी ने आर्यन का लंड मु मे लेना सुरु किया, उसके मोटे लंड की गोलाई इतनी बड़ी थी के ओठ पूर्ण फैला क़र भी उसका सूपड़ा मुश्किल से अंदर जा पा रहा था.... गोप्प... गोप्प.... गोप्प... की आवाज करती हुई उर्वशी के ओठों से ठुक की पलटी तार लटक रही थी. आर्यन ने उर्वशी के बालो को पकड़ क़र जुडा बना लिया और उसके सर को लोडे पर ऊपर निचे करने लगा, उर्वशी के गले तक ले जाने की कोशिस करता हुवा आर्यन उर्वशी के बाल पकड़ क़र लंड अंदर डालने की पूरी कोशिश करने लगा. उर्वशी के ठुक आर्यन के लंड से होते हुए उसके अंडकोष से ऐसे टपकने लगा जैसे मधुमखी के छत्ते से शहद तपकता हो, गुड़प गप्प....गुड्डप गप्प.... गुड्डप गप्प.... करती हुईं उर्वशी अपने ही बेटे के best friend के साथ नंगी हो क़र मजे ले रही थी, उसके ही बेटे के उमर का आर्यन का लंड पकड़ क़र उर्वशी लाज हया भूल चुकी थी.





उर्वशी ने जल्दी ही उसे छोड़ दिया और और फर्श पर लेट क़र दोनों टांगे फैलाने लगी. उर्वशी का बदन से पसीने की नमकीन बूंदे ऊपर से निचे धारा बन क़र उतरने लगी, से नर्म गद्दे के समान उर्वशी की मोटी टांगे पकड़ क़र आयन ने पीछे मोड़ डाली और उसकी फूली हुईं बादाम को सुंगने लगा, उर्वशी के बुर के ओठ खोल क़र अंदर जीभ डाल क़र अंदर का जायजा लेने लगा, उर्वशी के टांगो से होती हुईं बुर तक जाने वाली आर्यन की खुर्दरी जीभ उर्वशी को अलग ही अहसास करा रही थी, ऊँगलीओ से उर्वशी की योनि खोल क़र आर्यन उर्वशी के काम रस से सनी हुईं बुर का नमकीन स्वाद चख रहा था, उर्वशी के योनि को किस क़र रहा था, उर्वशी के योनि के ओठ अपने ओठों मे ले क़र मसल रहा था, योनि रस से गीली हो चुकी उर्वशी के बुर मे आर्यन का थूक भर क़र योनि से गांड के ब्राउन छेद पर रिसता हुवा रास्ता बना क़र गिर रहा था.....





उर्वशी की मांसल टांगे पकड़ क़र आर्यन ने आगे पीछे ऊपर निचे घुमा क़र उर्वशी के बिच छुपे हुये थूक और योनि रस से भरे हुए मदमस्त खदान को उसकी गांड उठा क़र ऊपर क़र दिया... ता के अच्छे से अंदर तक खोद क़र उसमे अपना बेशकीमती बीज बो सके, उर्वशी की योनि उसके लिंग के फवारे से सिंच सके.... आर्यन ने उर्वशी की दोनों टांगे अच्छे से मोड़कर अपने कंधो पर ले लि अब उतावला हो गया था इसने उर्वशी की कमर जोर से निचे दबा डाली जिस से के उर्वशी की फुदी आर्यन के लोडे के लिए थोड़ी और ऊपर आये. उचित position बना क़र आर्यन उसका लंड उर्वशी के फुदी पर रगड़ता हुवा खेल रहा था. उर्वशी भी आर्यन के बचकानी हरकतो के मजे ले रही थी. अब आर्यन ने उर्वशी की कमर कस क़र पकड़ ली और एक ही बार मे top to bottom लंड अंदर तक गाड़ दिया. कलाई जितना मोटा लंड एक ही बार मे अंदर गड़ जाने से उर्वशी दर्द से कर्राह उठी..... Aahhh...humm... Aaahh...

पर अब आर्यन उर्वशी को बढ़िया से चोदने लगा, कमर पकड़ पकड़ क़र खींचने लगा, आर्यन के झटको से उर्वशी आगे हो जाती पर आर्यन फिर से उर्वशी की कमर पकड़ जोर से खींच क़र ताकतवर shot लगा देता.उर्वशी भी उसके लिंग के प्रहार को कमर उठा उठा क़र पलट जवाब दे रही थी.इस सब से बाथरूम मे फच..फचा.. फच.... फच..फचा..फच... फच..फचा.. फच....

पहली बार सहवास के सुख से बावला हो चूका आर्यन उसकी बचकानी हरकते से बाज नहीं आ रहा था, कभी वो उर्वशी को जोर जोर से ठोकता तो कभी उर्वशी के सामने जा क़र उस से लंड चुसवाता, to कभी उर्वशी की फुदी सूंघता और चाट जाता....

उर्वशी : बेटा कोई एक ही काम करो, ये आप क्या क़र रहे हो....

आर्यन : sorry आंटी 🤤

अब आर्यन ने बस उर्वशी के चुदाई पर ध्यान देना सुरु किया, उर्वशी की गहरी रसभरी चुत मे आर्यन का कलाई जैसा मोटा लम्बा सख्त लंड perfect fit बैठ रहा था, और आर्यन के जोरदार वार से बनी गर्मी के कारण उर्वशी के अंदर का घी पिघला क़र बाहर टपक रहा था. अब उर्वशी उर्वशी की गर्मी पूरा जोश पकड़ने वाली थी, और आर्यन भी पूरी ताकद से रपारप batting क़र रहा था, आर्यन के धुवधार batting से उर्वशी की पिच के छक्के छूटने लगें, उर्वशी की पिच के जकड़न मे फसी हुईं आर्यन की bat भी अब भयंकर गति से बल्लेबाजी करने लगी. उर्वशी पुरानी खिलाडी हो क़र भी आर्यन के शानदार बल्लेबाजी से थरथरने लगी. आर्यन नया खिलाडी हो क़र भी मैदान छोड़ने का नाम नहीं के रहा था..... आर्यन थकते नहीं थक रहा था. अब तक उसके हाथो कभी ऐसा मौका नहीं लगा था, यह उसके जीवन का पहला अवसर था. आर्यन पहली बार आंटी की घंटी बजा रहा था, कॉलोनी मे सब लड़को की पहली पसंद उर्वशी आर्यन के हाथो बड़ी आसानी से लग गई थी, दुबला पतला आर्यन भी अपनी ताकत का अहसास उर्वशी को देना चाहता था. वही उर्वशी को उसके मादक बदन का बड़ा घमंड था, किसी ऐसे वैसे को तो उर्वशी देखती तक नहीं थी. उर्वशी के भयंकर गर्मी की ज्वालामुखी शांत कोई स्कूल का 18+ साल का लड़का क़र सकता है ऐसा उसने कभी सोचा नहीं था. आर्यन के धुवाधार हमले से उर्वशी पसीना पसीना हो गई थी.

उर्वशी : बेटा आर्यन अब जरा position बदलने दो कमर दर्द क़र रही है.... आह... आह..😮‍💨

आर्यन : ठीक है आंटी. आप जरा rest क़र लो, अभी और खेल बाकि है😊

उर्वशी के योनि से आर्यन ने उसका लिंग निकाल क़र उर्वशी के योनि का चुम्बन लेने लगा आर्यन जान गया के उर्वशी के engine मे फिट बैठा हुवा आर्यन के औजार जो जो तबाही मचाई थी उस से उर्वशी की योनि जवाब देने लगी. के उर्वशी के योनि की चाशनी से सना हुवा आर्यन का गोरा मूसलाकार लंड चांदी जैसा चमक रहा था. उर्वशी की गोरी योनि आर्यन के जोरदार प्रहार झेल क़र लाल पिली दिखने लगी. योनि की जलन होते हुए भी यौवन के अहंकार मे भरी हुईं उर्वशी आर्यन को इस का आभास नहीं देना चाहती थी.... उर्वशी 18+ साल के लडके के लंड से घबरा क़र चुदाई का मैदान चाह क़र भी नहीं छोड़ना चाहती थी. उर्वशी समझ गई थी के आर्यन को थकाना आसान नहीं है, अब उर्वशी ने अलग idea लगाई.... थोड़े देर बाद उर्वशी फिर से तैयार हो गई..





उर्वशी : आर्यन आप निचे लेट जाओ...

आर्यन उर्वशी की बात नजरअंदाज क़र के आगे का खेल नहीं बिगाड़ना चाहता था. उर्वशी की बात मार क़र आर्यन चुपचाप निचे लेट गया. उर्वशी ने अब आर्यन के ऊपर आ क़र position बना ली, उर्वशी अब आर्यन के लंड पर बैठ के सवारी करने लगी. उर्वशी के योनि के अंदर आर्यन का 9 इंच लंबा और कलाई जितना मोटा, योनि रस से सन क़र चमकता हुवा लंड मानो ऐसे गायब हो गया जैसे बादलो मे चाँद गायब हो जाता हो. अब उर्वशी ने दोनों टांगो को खोल क़र योनि की गुफा टाइट क़र ली योनि का दरवाजा आर्यन के मूसलाकार लिंग के लिए खुला क़र दिया. उर्वशी की योनि अब बाहरी द्वार से खुली पर अंदर से टाइट हो गई उर्वशी यहि चाहती थी के उर्वशी के योनि की गर्मी और टाइट पकड़न से आर्यन के सख्त लंड पर घर्शन feel हो ता के आर्यन जल्दी झड़ जाये. अब उर्वशी आर्यन के लंड को पूर्ण अंदर ले क़र ऊपर निचे कमर हिलाने लगी. उर्वशी के भारी भरकम शरीर के भार और पकड़ लंड पर पकड़ बना चुकी योनि के घर्शन से आर्यन का लिंग जरा भी टस से मस ना हुवा बल्कि और भी सख्त हो क़र उर्वशी की खदान खोदने लगा, उर्वशी सोचने लगी आखिर कार कद्दू पर चाकू गिरे या चाकू पर कद्दू ... कटेगा तो कद्दू ही, आर्यन ने उर्वशी के दोनों दूध पकड़ क़र मसलना सुर क़र दिया, आर्यन के लिंग पर उछलखुद मचाती हुईं उर्वशी और उसको feel करता हुवा आर्यन दोनों मदहोश हो चुके थे.... उर्वशी की योनि से घिसता हुवा आर्यन का लंड मानो ऐसे दिख रहा था के मानो कोई औजार पर धार लग रही हो.... पसीने से लतपत आर्यन का पसीना उर्वशी पर गिर क़र उर्वशी के पसीने से मिलन क़र रहा था...

आर्यन : आंटी.... आह.... आह...निकल रहा है 🤤

उर्वशी : आर्यन.... आर्यन....

दोनों अब चरम सीमा तक पोहोचने लगें थे.. उर्वशी का शरीर अब अजीब एकडन महसूस क़र रहा था और आर्यन के अंदर भी अजीब बिजली दौड़ रही थी, आर्यन के झटको के साथ दोनों झड़ क़र वही एक दूसरे पर गिर पड़े.

उर्वशी : आर्यन..! बेटा उठो... पढने जाना नहीं क्या..! शुभम और वासु wait क़र रहे होंगे.

आर्यन : जी आंटी जाता हु पर कॉफ़ी बना दीजिये ना plz.

उर्वशी : ठीक है...अभी बना लाती हु अब आप कपडे पहनो और जाओ.

आर्यन : जी आंटी, आर्यन जाते जाते उर्वशी के बुर को सुंगने लगा और कपड़े पहन क़र चला गया. उर्वशी भी ड्रेस पहन क़र किचन me कॉफ़ी बनाने चली गई.

वासु : अरे आर्यन, तुमने काफ़ी study miss क़र दी.

शुभम : अरे इतना देर कहा थे bro.

वासु : इसका क्या है गया होगा कही बाहर मन बहलाने.

आर्यन : सही कहा वासु...! बस समझो के गया था बॉलिंग करने पर batting क़र ke आ गया😉

वासु : क्या बात क़र रहा है.

आर्यन : हा भाई.... इतने चौके छक्के लगाये के पिच भी थर्राने लगी😉

शुभम : हा अब हो गया, जरा पढ़ाई भी क़र लो.

वासु : भाई हम पढ़ाई करते बैठे और ये खेल क़र आ गया भाई 😌

शुभम : हा तो तुम भी खेल क़र आओ मत करो पढ़ाई.

वासु : अरे भाई मै भी खेलने लग जाऊ तो तुंहारा क्या होगा भाई😁

आर्यन : अच्छा भाई अब थोड़ा पढ़ लेता हु नहीं तो मै पीछे रह जाऊंगा.

तभी उर्वशी वहा कॉफी का ले क़र आती है,

उर्वशी : आर्यन..! बेटा लो कॉफ़ी ले जाओ.

आर्यन : जी आंटी.... कॉफी का ट्रे पकड़ता हुवा आर्यन उर्वशी के दोनों हाथो को छूता है, और उर्वशी के आँखो मे देखते हुए उर्वशी को अहसास दिलाता है के आर्यन भले भी छोटा है पर उर्वशी को सभाल लेगा ऐसी मर्दाना ताकत उसने है. उर्वशी भी आर्यन का ये इशारा समझ जाती है.
 
Ji

आगे आप को सब समझ आएगा
 
part 6

शाम होते होते आर्यन और वासु घर चले जाने लगते है.

वासु : अच्छा आंटी अब हम चलते है.

उर्वशी : अच्छा.. हो गई study.

वासु : जी आंटी हो गई.

आर्यन : आंटी कल sunday है कल जल्दी आऊंगा.... आप तैयार रहियेगा... आर्यन अजीब अकड़ भरी नजाकत मे बोल रहा था..., जाते जाते उर्वशी को ऊपर से निचे तक घूरता हुवा आर्यन अजीब गुरुर मे था, उर्वशी के साथ बाथरूम मे धुवाधार समागम क़र के आर्यन ने खुद का पावर दिखा दिया था. उर्वशी को बाथरूम मे पसीना पसीना क़र आर्यन के अंदर अजीब आत्मविश्वास जाग गया था. उर्वशी अब आर्यन की अकड़ समझ गई थी. गदराई हुये खूबसूरत बदन और जवानी के अहंकार मे डूबी उर्वशी को आर्यन जैसा कोई कभी ठंडा क़र पायेगा ये उसने कभी सोचा नहीं था. आर्यन का दम उर्वशी मान गई थी. आर्यन के घूरने के बावजूद भी उर्वशी ने आर्यन से नजर नहीं मिलाई.....

अब घर मे उर्वशी और शुभम दोनों माँ बेटे ही बचे थे. शुभम हॉल मे सोफे पर बैठ क़र pogo tv चैनल पर कार्टून देखने लगा. Naruto and shinchan उसका पसंदीदा प्रोग्राम था, अब शुभम वहा से हटने वाला नहीं था...

उर्वशी की चाल आज बदली हुईं थी, आर्यन के जोरदार झटको से रगड़ी हुईं उर्वशी की योनि मे एक जलन सी हो रहि थी. आर्यन के साथ बाथरूम मे समागम करने से दो बदन की जो टक्कर हुईं थी उस से एकदूसरे का पसीना एक हो गया था, अब भी उर्वशी के बदन से आर्यन के पसीने मे मिले हुए उर्वशी के पसीने की भीनी भीनी बू आ रही थी, और आर्यन की के लिंग का लिंग चूसने से उसके वीर्य का नमकीन स्वाद उर्वशी के जीभ पर अब भी था. इस सब से fresh होने के उर्वशी नहाने चली जाती है.

बाथरूम के आयने मे देख क़र उर्वशी धीरे धीरे कपड़े उतरने लगी, अपने ही बदन को निहारती हुईं उर्वशी को गुरुर अब भी बरकरार था, कॉलेज के नवजवान लड़को को भी दीवाना क़र देने की अद्भुत लीला उसके बदन मे भरी पड़ी है ये उसने आज आजमा लिया था. उर्वशी ने ड्रेस उतार क़र bra और panty भी निकाल फेकि. अब उर्वशी आयने मे अपना बदन निहार रही थी. उर्वशी के गोलमटोल दूध पर आर्यन के पंजो से बना लाल छाप के निशान साफ दिखाइ दे रहे थे. आर्यन के लिंग के घर्शन से उर्वशी के योनि मे जो जलन हो रही थी उसका जायजा लेने के लिए उर्वशी आयने के सामने लेट क़र टांगे उठा क़र योनि को निहार रही थी,





उर्वशी ने योनि की पंखुड़ीया खोल क़र देखा तो अंदर अभी भी आर्यन का सफ़ेद चिपचिपा semen बहोत अंदर तक चिपका हुवा था, योनि के बाहरी झिल्ली पर लाल लाल निशान हो गए थे. आर्यन के मोटे लंड के घर्शन से अंदर की त्वचा छिल गई थी इसी की जलन उर्वशी को बेचैन क़र रही थी. उर्वशी ने उठ क़र shower on क़र दिया और योनि मे ऊँगली दाल डाल क़र धोने लगी, पानी के साथ मिल क़र आर्यन का semen बूंद बूंद उर्वशी के योनि से टपक रहा था. सारे बदन को अच्छे से धो क़र उर्वशी ने पोछ लिया. अब बेड पर आ क़र फिर से दोनों टांगे ऊपर की और खोल क़र लेट गई moisturizer की बोतल से कुछ बुँदे ऊँगली पर ले क़र योनि के अंदर लेपन करने लगी, ऊपर से आती हुईं पंखे की हवा से उर्वशी के योनि को थोड़ी शांति मिल रही थी....

उर्वशी ने अब कपड़े बदल क़र night gown ड्रेस लगा क़र रात के dinner की तैयारी करने लगी, क्या बनाऊ सोचने लगी....

उर्वशी : शुभम बेटा dinner मे क्या बनाऊ...

शुभम : आप कढी और पुलाव बना दो मम्मी...

आज उर्वशी का ध्यान कही और ही था, उर्वशी आर्यन के प्रदर्शन से ठंडी तो हो चुकी थी, पर आर्यन का वो प्रदर्शन उर्वशी के मन मे अब भी घूम रहा था. जैसे तैसे उर्वशी ने dinner redy क़र लिया. तभ रात के 8.30 बज रहे थे.

उर्वशी : शुभम..! चलो बेटा dinner तैयार है, आजाओ लगा देती हु...!

शुभम : ठीक है मम्मी...! आया...!

उर्वशी और आर्यन अब dining table के खुर्सी पर बैठ क़र dinner करते हुए कुछ बाते करने लगें.

शुभम : मम्मी...! पापा कब आने वाले है.

उर्वशी : बेटा पिछले महीने तो गए है ना...! दिन चार महीने तो लग ही जायेंगे.

शुभम : मम्मी अब exams भी हो जाएगी. हर बार की छुट्टीया बस घर मे ही बीत जाती है, मेरे सारे friends छुट्टीओ मे फॅमिली के साथ घूमने जाते है मम्मी... मुझे पूछते भी है के तू नहीं गया क्या... और ना कहु तो चिढ़ाते भी है... मायूसी से भर क़र शुभम बोला😌

उर्वशी : अब बेटा तुम्हारे पापा का job ही ऐसा है तो क्या करें... उनके पापा के पास time होगा. पर तुम्हारे पापा का job तो तुम जानते ही हो ना.

शुभम : पर मम्मी आप भी तो चल सकती हो ना. पापा तो आने से ही रहे, पर आप भी नही ले जाती कही. 😌

उर्वशी : पर बेटा मै बाहर का व्यवहार नहीं जानती हु ना.

शुभम : देखा...! मै जानता था आप भी बहाना करोगे. सब के मम्मी पापा उनके बच्चो के साथ वक्त बिताते है, पर मैंने तो कभी अपने पापा के साथ वक़्त बिताया ही नहीं मम्मी 😥

उर्वशी : अच्छा बेटा इस बार देखते है. पापा ना भी आये तो हम चले जायेंगे... ठीक है. पर अब आप पढ़ाई पर ध्यान दो.

शुभम : ठीक है मम्मी... Promise करिये.

उर्वशी : हा हा promise!

शुभम : मम्मी अब मेरा dinner हो गया मै थोड़ा पढ क़र सो जाऊंगा.

उर्वशी : ठीक है जल्दी सो जाना.

उर्वशी सोच मे पड़ गई, शुभम की demand जायज थी, घर और कॉलेज बस इतना ही उसका जीवन रह गया था. बचपन से अब तक उसे पिता का प्यार मिला ही नहीं था. उर्वशी भी घर मे रह क़र बोर हो जाती थी, कही न कही उर्वशी भी प्यार की भूखी थी...

उर्वशी ने सब काम निपटा क़र दरवाजे बंद क़र लिए, बैडरूम मे आ क़र लेट क़र उर्वशी अब सोचने लगी. उर्वशी अब अजीब कशमकश मे फसी हुईं थी. एक तरफ शुभम का पिता के प्यार के लिए तड़पना, दूसरी तरफ उर्वशी का पति जो साल मे बस दो तीन बार ही घर आता था. तीसरी तरफ उर्वशी की जवानी और उसकी चाहत. चौथी तरफ आर्यन जो अभी अभी उर्वशी के जीवन मे दाखिला लेने की कोशिश मे था. तो पांचवी तरफ वो अज्ञात नौजवान मर्द जिसके साथ उर्वशी पहले update मे बाथरूम मे रंगरलीया मना रहि थी, ऐसी कशमकश मे झुलसती हुईं उर्वशी अजीब विचारों मे डूबने लगी. अब उसको सूझ नहीं रहा था के इस सब से कैसे रास्ता निकले जो उसके बेटे शुभम और उसके लिए फायदेमंद हो. इस विचारों से बाहर निकलने ke लिए उर्वशी ने जय को कॉल किया.

उर्वशी : hello जय....! अभी आ सकते हो क्या...?

जय : भाभी क्या बात है...!

उर्वशी : कुछ खास नहीं... बस आ सकते हो तो आजाओ...!

जय : ठीक है भाभी... एक मिनिट मे पोहोच रहा हु.

उर्वशी : पिछले दरवाजे से आजाना ठीक है, शुभम भी सोया हुवा है.

जय : हा भाभी हर बार उसी दरवाजे से आता हु, आप बस खोल क़र रखिए मै आया.





(जय एक 28 साल का नवजवान मर्द है, 5फिट 10इंच की hight रंग सावला हो क़र भी muscular body के साथ बहोत handsome दीखता है. कोल्हापुर के एक गावं से आने वाला जय National lavel Boxing championship मे गोल्ड मेडल प्राप्त क़र चूका है. इसी वर्ष स्पोर्ट्स कोटा से जय को बैंक मे अच्छी job लगी है. जय स्वभाव से ही शांत है, उसे gym and exercise का बड़ा शौक है. चौड़ी छाती, कसे हुए कंधे, बड़ी पर कसी हुईं दोनों जांघे, six pack abs के साथ घूंगराले बाल जय के व्यक्तित्व को चार चाँद लगा देते है. जय अदनान के साथ उर्वशी के ही घर के ऊपर वाले 1bhk मे रहता है. चार महीने पहले ही उर्वशी के पती ने ऊपर के मंजिल वाले 1bhk मे जय और अदनान को किरायेदार रखा हुवा था.)

पिछले दरवाजे के पास ख़डी हो क़र उर्वशी इंतजार क़र ही रही थी के जय आ भी गया, दरवाजा बंद करती हुईं 🤫ओठो पर ऊँगली रख क़र उर्वशी जय को दबे पाव चलने का इशारा क़र रही थी. जय ने भी गर्दन हिला क़र उर्वशी के इशारे पर प्रतिक्रिया दे दी. जय उर्वशी के बेड रूम मे आ क़र AC ऑन क़र के सीधा बाथरूम मे घुस गया, बाथरूम की हूक पर जय ने उसकी t shirt और pant लटका दी, उर्वशी ने ड्रेस उतार क़र बस bra और panty पर हो गई. बेड रूम की सारी lights off क़र के एक छोटा zero wat का बल्ब on क़र दिया जिसका का हल्का हल्का अधमरा सा उजाला कमरे मे फैलने की नाकाम कोशिश क़र रहा था....black under wear पहना जय हाथ मे सिगरेट packet और lighter ले क़र बाहर आने लगा....

जय : क्या हुवा भाभी! अचानक कैसे याद किया, पहले बताया होता तो कुछ बड़ा इंतजाम क़र लेता.

उर्वशी : नहीं उसकी जरुरत नहीं है जय, बस आज बहोत अकेला feel क़र रही थी....🫠(उर्वशी ये ये कहते हुए उसके बेडरूम की खिड़की खोल दी ता के धुवा घर मे ना पसरे)

जय : अच्छा पर भाभी हुवा क्या, कुछ खास reason 🤔, (पॉकेट से सिगरेट उर्वशी के ओठों पर रख क़र लाइटर से उसे सुलगाते लगाते हुए जय बोला.)





उर्वशी : शुभम की बातो से मन उदास है, और भी कुछ है जय बताउंगी.(सिगरेट का कश खींच क़र धुवा निकालते हुए उर्वशी बोलि😮‍💨)

जय : अच्छा पर भाभी शुभम तो काफ़ी शांत लड़का है, पढ़ाकू भी है. क्या हुवा उसे मुझे बताओ मै ठीक क़र दूंगा.

उर्वशी : काश तुम ठीक क़र पाते जय.😮‍💨

जय : पर भाभी बताइयेगा तो क़र पाउँगा... पहले बताइये तो.

उर्वशी : ऐसा है, शुभम इसके पापा को बहोत miss करता है, बचपन से उसके पापा का साया उसे नसीब नहीं हुवा, न कभी उनके साथ बाहर भी गया. अब कहता है के सब के पापा उनके बच्चो के साथ time spend करते है, छुट्टीयों मे बाहर घूमने भी जाते है, और छुट्टीयों के बाद ज़ब उसके दोस्त शुभम को छुट्टीओ मे कहा घूमने गया यह पूछते है और शुभम कही नहीं बोलता है तब उसे चिढ़ाते है, ये हर साल से हो रहा है, इस साल भी छुट्टिओ मे शुभम के साथ यहि होगा इसलिए परेशान हो रहा है.

जय : भाभी ये तो बात परेशान करने वाली ही है, बेचारा शुभम फालतू मे कॉलेज के लड़को का टार्गेट बना जा रहा है, इसमें उसका कोई दोष भी नहीं.

उर्वशी : दोष उसका नहीं है पर मै उसके लिए क़र भी क्या सकती हु... 😮‍💨

जय : आप नहीं क़र सकते पर आप चाहे तो मै कुछ क़र सकता हु... (उर्वशी के ओठों से सिगरेट निकालते हुए जय ने खुद के ओठों पर रख क़र फुकने लगा 😮‍💨)

उर्वशी : कैसे भला...

जय : आप कहो तो इस vacation उसे ले क़र कही बाहर चलिए मै आप दोनों को घूमा लाऊंगा... 😮‍💨

उर्वशी : पर क्या ये ठीक होगा, किसी को पता लग गया के मै तुंम्हारे साथ घूमने बाहर गई हु तो समाज मे मु नहीं दिखाने देंगे लोग.

जय : भाभी किसी को पता चलेगा तब ना, और आप मेरा साथ दो तो मै ऐसी planning करूँगा के शुभम भी ख़ुशी ख़ुशी मान जायेगा और किसी को कानो कान खबर नहीं होंगी.... सिगरेट का धुवा उर्वशी के दूध पर छोड़ता हुवा जय बोल पड़ा.

उर्वशी : अच्छा...! पर तुम ठीक से managed क़र लोगे..?

जय : हा भाभी....! आप के दोनों दूध की कसम... आखिर मैंने भी आप का दूध पिया है... 😋

उर्वशी : तो अब क्या दूध का कर्ज उतरना चाहते हो जय...पर चुत का कर्ज कैसे उतरो गे.... हसते हुए उर्वशी बोल पड़ी 😉

जय : उतरूंगा भाभी चुत का कर्ज भी उतरूंगा, और आप ने चाहा तो आप के गुलाबी गांड का भी..उर्वशी के दूध सहलाते हुए जय बोल पड़ा.🤤

उर्वशी : हा हा उतार लेना जो उतरना है उतार लो... पर आज से periods चल रहे है, कभी और उतार लेना.(आर्यन के फौलादी हल ने उर्वशी का खेत पहले ही जोथ क़र उसमे बीज बो रखा था, सपासप हल के जुथाई से उर्वशी की जमीन मे अब जो खुरदरी निशान बन गए थे औरउससेजो जलन हो रही थी उसे वो जय के नजरो से बचाना चाहती थी, वही उर्वशी मदमस्त बदन को देख क़र जय का कोबरा फन उठा क़र underwear मे फनफ़ना रहा था, मानो पेटारे मे कैद काला नाग उर्वशी के गद्देदार गोरी गुफा मे घुसने के लिए उतावला हो रहा था, black bra मे झूलते हुए उर्वशी के संतरे भी मानो बाहर आने को तरस रहे थे, खचाखच मलाई से भरे मोटे चिकने उर्वशी के दोनों फल एक दूसरे से सट बिच मे gap बना ने डोल रहे थे, ऊसे gap मे जय ऊँगली करता हुवा दोनों फलो को bra के कैद से मुक्त करने के इरादे मे वही खड़ा था.)

जय : कोई बात नहीं भाबी आज आप भी थोड़ा कर्ज उतार लो. जय ने under wear निचे सरका क़र उसका काला कोबरा बाहर निकाल दिया

उर्वशी की मदमस्त जवानी को देख क़र कोई भी लौड़ा हरकत किये बिन रह नहीं पाता था, जय तो उर्वशी के संग एक रूम मे ही था उसका लंड सख्त होये बिना किसे रह जाता. जय ने उसकी underwear से लंड बाहर निकाल क़र आझाद क़र दिया, जय का लगभग 8 इंच लंबा और ककड़ी जैसे मोटाई लिए हुवा लंड बिच मे से one side टेढ़ा था, जो अब उर्वशी के योनि को छूना चाहता था,

उर्वशी : पर जय आज ये सब मै नहीं चाहती,..और periods भी है.. Plz...मेरा मन बहोत बातो से भर चूका है... इन बातो को मै share करना चाहती हु.

जय : भाबी मैंने मना नहीं किया है, बस आप एक बार गन्ना चूस लेती तो मेरे लिए आप की बात समझने मे आसानी होती.... उर्वशी के आँखो को चूमता हुवा जय बोल पड़ा.

जय बखूबी उर्वशी को समझने लगा था, उर्वशी की elastic की panty मे ऊँगली डाल क़र खींचता और छोड़ता जिस से चट चट की आवाजे आने लगी थी. उर्वशी को बाहो मे भर क़र जय उर्वशी के मदमस्त बदन की गर्मी सोकने लगा, उर्वशी को चुम क़र किस क़र क़र उर्वशी को उत्तेजित करने की कोशिश मे जय लगा हुवा था. जय की सख्त लंड ठंडा होये बिन नहीं मानेगा ये उर्वशी भी जान गई थी, इसलिये जय के टेड़े लंड को पकड़ क़र सहला रही थी...



 
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