Part-9
भारी मन से सव्वेदनशील जय शुभम को वही छोड़ क़र जाने लगा, अदनान को एयरपोर्ट पर भी drop करना था, ऊपर flat पर पोहोचा, अदनान तो तैयारी क़र के redy था...
अदनान : आ गए जनाब... क़र लि चुदाई... बोलो...
जय : भाई कुछ मत बोल....
अदनान : अरे हुवा क्या वो तो बता...
जय : तू तेरा इंटरव्यू दे क़र आजा... बाद में बता दूंगा...
जय कुछ बोलने की हालत में नहीं था, शुभम की तूटी हुईं अवस्था उसके नजरो के सामने बार बार खड़ी हो जाती, उस निर्देश नादान बच्चे की हवसी माँ को उसी के घर में चोद क़र मैंने जो गुनाह किया हैँ इस का पाप मुझे ढोना ही पड़ेगा, ये सोच सोच क़र जय परेशान हो रहा था, जय ने बुलेट(Royal Enfield)निकाल ली और एक ही किक में धद धद की आवाज करते हुए start क़र दी, और अदनान को एयरपोर्ट पर छोड़ क़र वापस आ गया, मॉर्निंग होने को अब भी 3 घंटे बाकि थे पर फिर भी जय सो न पाया, आगे क्या बखेड़ा खड़ा होने वाला हैँ इस बात का भुत उसके माथे पर सवार था. मॉर्निंग हो क़र 10 बज रहे थे तब भी जय बेड पर पड़ा पड़ा सोचते ही रह गया, 10 बजे हैँ जॉब पर जाऊंगा तो मन बहला रहेगा यह सोच क़र उसने तैयारी क़र ली और बुलेट सवार हो क़र निकल गया....

दुसरी तरफ उर्वशी थी, जो 7 बजे तक बड़ी गहरी नींद सो चुकी थी, दिन में आर्यन से और रात में जय से चूदा क़र बदन की hit को ठंडी क़र के नंगी टांगे फैला क़र बड़ी आराम से नींद पूरी क़र चुकी थी....

तीसरी तरफ शुभम था, उसकी माँ को नंगी किसी पराये मर्द के साथ देख क़र अंदर से तूट चूका शुभम बेड पर बिन पलके झपकाये अनेको विचारों के बवंड़र में ख़ो चूका था, बहोत सारे अनसुलझे सवालों को सुलझाने की कशमकश में बेचारा डूबा जा रहा था. कोई उसी के घर में उसी के माँ को चोदे जा रहा है ये बात उसे हजम नहीं हो रही थी,...... क्या चीख चीख क़र मोहल्ले के सामने इन दोनों की नंगी सच्चाई खोल ला दु...

.....क्या मम्मी और जय को मार दु......

.....क्या पापा को कॉल क़र के बता दु....

..... क्या घर छोड़ क़र कही भाग जाऊ....

.....क्या करू....

सोच सोच क़र शुभम बिलख बिलख क़र वही रोते रह गया, मॉर्निंग के 6 बज रहे थे, उसने जैसे वैसे खुद को संभाल लिया, स्कूल की तैयारी की और घर से निकलने लगा, शुभम आज time से पहले ही घर से निकलने लगा, उर्वशी अभी अभी उठी ही थी...
उर्वशी : अरे बेटा टिफिन.... टिफिन बना देती हूँ.... रुको....
शुभम : नहीं चाहिए....
शुभम स्कूल के लिए निकल गया था. वो रात ही मनहूस थी आज का दिन भी मनहूस हैँ, मम्मी भी मनहूस हैँ और जय मदरचोद सबसे बड़ा मनहूस है, अब मै क्या करू.....किस को बताऊ... फिर से जय मेरे घर ने घुस क़र mom की चुदाई करे तो मै क्या करूंगा, आज उसका मन स्कूल में था ही नहीं. कब स्कूल छूटी इसका आभास bhi उसे नहीं रहा... भारी मन से निराश शुभम धीरे धीरे सायकिल चलाते हुए घर आने लगा...
स्कूल से घर आते ही उसने पाया के आज मम्मी make up कर तय्यार भी हो चुकी है, sleeveless midi dress मे mom कोई कॉलेज टीचर लग रही थी, वह छत्रिनुमा midi dress उनके घुटनो से थोड़ा ही निचे तक आ रहा था, ड्रेस के निचे beby pink color का ankle Leggings सट क़र चिपका हुवा था जिस से उनके निचले बदन का सूड़ोंल आकार बखूबी निखर क़र एकदम sexy look दे रहा था. Ankle तक़ आने वाला laggings के निचे उनके चिकने गोरे गोरे पैर और उनपर सजी पायल काफ़ी खूबसूरत लग रहे थे. पुरे शरीर से वो चिपका हुवा ड्रेस उनके शरीर का सुदौल आकार चीख चीख कर जाहिर कर देता रहा. जिस से उनके आगे और पीछे के उभार स्पष्ट दिख रहा था. Mom बरामदे मे बाल बना रही थी. body lotion की खुशबु और शैम्पू की मंद मंद सुगंध बता रही थी के उर्वशी ने अभी अभी ही नहाई , उसके आँखो मे आज अजीब से चमक दिख रही थी जैसे की किसी कारण वो खुश हो कर तृप्त हो चुकी हो. हॉल मे tv on था उसपे Mtv चल रहा था और टोनी कक्कड का वो song " धीमे धीमे धीमे धीमे.... " बज रहा था. बिच बिच मे उर्वशी भी वो गाना गुणगुणा रही थी.... आज शनिवार था और कल रविवार और परसो सोमवार को good Friday आ रहा था इसलिए रविवार और सोमवार दो दिन छुट्टी थी..... दोपहर के 2.30 बज रहे थे, बिन कारण कर उर्वशी का इतने जल्दी तैयार होना कुछ अजीब सा लग रहा था....
उर्वशी : बेटा आ गए हो आप...गए हो तो जल्दी फ्रेश हो जाओ लंच क़र लो....आज मुझे तुम्हारे मौसी के घर होते हुए शॉपिंग जाना है....
शुभम : mom मुझे कुछ बात करनी है....
उर्वशी : हा कर लेना पहले जल्दी तैयार हो जाओ फिर करते है...

उर्वशी क्या खिचड़ी पका रही है, अब ये क्या नया dram क़र रही है, आखिर किस चीज की shopping करनी है इसे...भारी मन से सोचते हुए fresh होने चला गया. बाथरूम मे जाते ही कल रात का जय जय और उर्वशी की नंगी सोते हुए तस्वीरें उसके मनमें live प्रकट होने लगी. दोनों की कल रात वाली नंगी अवस्था, अर्ध नग्न शरीर शुभम के सामने ऐसे प्रकट हो गइ मानो वो अभी भी उसने वो सब देखा हो.....("जय का वो मूसलाकार काला चमकिला नसो से घिरा हुवा तोफ जैसा लन्ड मेरी mom के योनि के तरफ तना हुवा क्यों था

...., जय का लंड मेरी कलाई जितना बड़ा कैसे हो सकता है

...उसके लटकते हुए अंडकोष इतने सीकूड़े और सख्त ऐसे क्यों थे के मानो लन्ड और अंडकोष एक ही हो

... लन्ड के निचे सख़्ती से चिपके हुए उसके अंडकोष ऐसे क्यों लग रहे थे के किसी भारी भरकम पीपल के डाली पर मधुमक्खी का काला छत्ता चिपका हुवा हो

...उसका लंड क्या मेरी mom की फुदी की रोज रोज सवारी करता है

......अरे यह सब क्या हो रहा है मै यह सब क्यों सोच रहा हु, अब चाहे कुछ भी हो पापा को इसकी खबर करनी ही पड़ेगी.... यहि एक रास्ता है.....)

आखिर उसने ठान लिया था के जल्दी ही पापा को इस सब की खबर क़र देगा... तभी बाथरूम का दरवाजा किसी ने खटखटाया....
उर्वशी : शुभम बेटा जल्दी करो बहोत काम पड़े है....
मै : "धीमे आवाज से" हा मम्मी कर रहा हु....
बाहर fresh हो क़र निकल क़र हॉल मे कर बैठा था तब मम्मी ने आवाज लगाई....
मम्मी : अछा सुनो lunch बना रखा है..! time से खा लेना आने मे मुझे देर हो सकती है... दोनों दरवाजा बंद कर लेना...! हा और जरुरत पड़े तो ऊपर जा के अदनान मामा की मदत ले लेना...!
उर्वशी ने कार निकाली और चली गई. उसने शुभम की मन की बात सुनी ही नही, शुभम उस से जो बात करना चाहता था, कल उसे नंगा देख क़र उसे पूछना चाहता था वो सब उसके मन में ही रह गई....
दोपहर के 3 बजने आ रहे थे ऊपर जय के flat मे अलग ही ड्रामा चल रहा था.... आज second Saturday था, जय को छुट्टी थी, बाथरूम मे शुभम की वो अवस्था, उसके रोने की आवाजे, कंधो पर गिरते हुए उसके आंसू और उस नादान की दिल दहला देने वाली चुप्पी याद करता हुवा सहमा सा bed पर एक कोने मे बैठा हुवा था, उसकी बिन पलकें झपकाये हुये उसकी आँखे एक टक खिड़की के बाहर टीकी हुईं थी, रात भर शुभम के बारे मे सोच सोच क़र परेशान हो चूका जय अभी तक़ bed पर ही पड़ा हुवा था, न उसने कुछ खाया, न पानी भी पिया था, बस खिड़की के बाहर देख क़र अदनान के आने की राह ताकता हुवा जय ऐसे लग रहा tha मानो उसने किसी भुत को देख लिया हो, तभी अदनान वहा आता हैँ...
अदनान : जय... जय... अरे क्या हुवा... जय... जय... होश मे तो हैँ ना...! (अदनान बार बार जय को हिला हिला के आवाज दे रहा था, पर सुन्न पड़ चूका जय का शरीर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा देख क़र अदनान घबरा गया, उसने बोतल मे भरा पानी निकाल क़र जय के चेहरे पर छींटे मारे, तब जा क़र जय ने धीरे धीरे होश संभाला)
अदनान : भाई जय तू ठीक तो हैँ ना... चल उठा दवाखाना चलते है... चल उठ चल...!
जय : अदनान भाई...रात मे कांड हो गया....!
अदनान : क्या हुवा... तूने कुछ गलत क़र दिया क्या...! किसी का accident, या किसी का खून क़र आया हैँ तू...!(डरते हुए अदनान बोला)
जय : हा बहोत बड़ा accident हो गया भाई... किसी नादान की जान ले ली है मैंने...!
अदनान : क्या बात क़र रहा है... पर तू तो उर्वशी के घर गया था भाई, उर्वशी ठीक तो हैँ ना..?
जय : उर्वशी ठीक हैँ... वो ठीक हैँ... पर शुभम...! शुभम...! शुभम को मैने घायल क़र दिया...!
अदनान : oh my god...! क्या किया तूने उस के साथ... साले...!(अदनान जय को हिला हिला क़र होश मे लाता हुवा पूछता रहा, पर जय खुद को गुनहगार साबित क़र चूका था, ना उसे कुछ सूझ रहा था, ना कुछ समझ आ रहा था, अदनान के सवालों का जवाब भी ठीक से नहीं दे पा रहा था)
अदनान : तू बता रहा हैँ के मै उर्वशी के घर जा के खुद देख लू...!
(जय ने रात मे हुईं सारी घटना अदनान के सामने बया करने लगा, सभी बातो को अदनान बड़ी गौर से सुन रहा था, समझ रहा था)
जय : मै गुनहगार हूँ... मैंने बहोत बड़ा गुनाह क़र दिया हैँ... अब मै क्या करू... शुभम उसके पापा को सब बता देगा.. उसका पापा मुझे मार देगा...!
अदनान : गुनाह तो तूने क़र दिया हैँ...! अब इस सब को तू ही ठीक क़र...! तेरे गुनाहो को कबूल क़र ले...!
जय : तू ही बता मै क्या करू...!
अदनान : उस के मम्मी के साथ सो क़र तूने शुभम का भरोसा तोड़ा है...! उसको रुला क़र तूने उसकी हाय ले ली है...! अब वही तुझे माफ क़र सकता है..! जा जा क़र उसके सामने confess क़र... माफ़ी मांग... और दोबारा ऐसा फिर कभी नहीं करेगा उसे यकीन दिला दे...!
जय : अब मुझमे इतनी हिम्मत नहीं बची है...! उसके मासूम नजरो का सामना मै पापी कैसे करूंगा...!
अदनान : आज नहीं करेगा तो कल पछतायेगा...! उसकी माँ के साथ जो तू सोया है ये देख क़र उसकी बद्दुआ तो तुझे लगेगी ही, पर ज़ब वो बड़ा होगा तेरे से बदला लेने जरूर आएगा...!
जय : हा वो मुझे मार दे यही अच्छा होगा...!
अदनान : पागल मत बन...! उस नादान के बारे मे भी तो सोच...! आज जो उसने देखा ये बुरी यादे बन क़र उसका जीवन बर्बाद क़र देगी...! हिम्मत से काम ले...! उसे बर्बाद होने से बचा ले भाई...!
जय : मै क्या करू अब...! कैसे करू अब...!
अदनान : मै जैसे बोलता हूँ वैसे ही क़र...शुभम से मिल... उस से बात क़र... प्यार से समझा उसे...! तुझपे वो trust करें ऐसा कुछ क़र...!
जय : hum....! कोशिश करता हूँ...!
(अदनान ने जय को सारा प्लान बता दिया, समझा दिया, धीरज बंधा क़र फिर से होश मे आने के लिए तैयार क़र दिया)
अदनान : उठ नहा ले...! तैयार हो जा..! Mai जायजा ले क़र आता हूँ...! शुभम condition मे है वो देख क़र आता हूँ...!
अदनान निचे उतरने लगा, पीछे का दरवाजा खटखटाने लगा....
शुभम : कौन है
अदनान : मै हु अदनान.... हा हा हा...

ठहाका लगाते हुए अदनान बोला ....
दरवाजा खोलते हुए शुभम : अरे मामू आप! बोलिए....
अदनान : अरे जानी मेरी पेन ख़त्म हो गई है एक्स्ट्रा की होगी तो दे दो...कल तुम्हे नइ दिला दूंगा पर अभी मुझे बड़ी जरुरत है....
शुभम रूम मे जा कर पेन ले आता है ....
शुभम : हा ये लीजिये पेन...! पर मामू आप तो कही बाहर गए थे.. आप का interview था न आज...

कैसा रहा....
अदनान : हा अभी अभी आया हूँ.... जानी interview तो अच्छा रहा... आगे मालिक की मर्जी...
शुभम : जी मामू मेरा मन कहता है आप जरूर जॉब पा लेंगे, वो जॉब आप को ही मिलेगी...
अदनान : tank you जानी...अच्छा सुनो आज हम मूवी देखने जाने वाले है. क्या तुम चलोगे...!
शुभम : पर मामू घर पर कोई नहीं है मुझे तो यही रुकना पड़ेगा....!
अदनान : उसकी टेंशन मत तो हम है ना... हा हा हा हा

..... बस तुम 4 बजे तैयार रहना....
शुभम : जी मै तैयारी कर के ऊपर जाता हु...
(शुभम को देख क़र अदनान समझ गया था के ये कुछ छुपा रहा है, पर उसने जितना हो सके माहौल सवारने की कोशिश क़र दी, शुभम के मन ka जायजा ले क़र अदनान निचे आ गया)
अदनान : देख जय, उसको मैने मूवी के लिए मना लिया है...! बस तू अब कुछ गड़बड़ी मत करना...!संभाल ले उसे...! उर्वशी भी घर मे नहीं है...! अच्छा मौका है...!
जय : मै पूरी कोशिश करूंगा...!
(शुभम तैयार हो क़र door लॉक क़र के ऊपर आगया)
जय : अरे शुभ आ गए हो, चलो निकलते है...
शुभम : पर अदनान भैय्या
जय : अरे उसका कोई प्रोजेक्ट वर्क पुर्न नहीं हुवा वो नहीं आएगा इसलिए तो तुमको बुलाया हु के मुझे भी साथी मिल जाये और टिकट के पैसे भी ना बर्बाद हो.
अदनान : ठहाके लगाते हुए.... हा हा हा...."बैंक वाले और कीमती माल का हिसाब".. ये जनाब बड़ी खूबी से रखते है. प्यार से वसूलना तो कोई इनसे सीखे. हा हा हा हा....
शुभम : "हसते हुए"ही ही ही.... (नकली हसीं से कल की बात छुपा देता है)

(अदनान की इन बातो से कुछ अजीब अर्थ भी निकल रहा था. पर शुभम ने ध्यान नहीं दिया.)
जय : चुप कर अदनान.... " हल्के स्वर मे फुसफुसाते हुए "सबर रख एक दिन तुझे भी वसूली पर ले जाऊंगा....
(वैसे अदनान उर्वशी को दीदी और जय भाबी बोल कर पुकारते थे.)
जय : चलो शुभम.
शुभम का मन जय के साथ जाने को बिलकुल राजी नहीं था. रात वाला बाथरूम का प्रसंग के वजह से अब उसे जय से डर लगने लगा था, वो तो अदनान के लिए उसने मूवी जाने के लिए हामी भरी थी. पर अब उनके साथ जाना ही सही समझा क्यों के अदनान भी पढ़ रहा था वो शुभम को time देता नहीं, और शुभम बेचारा घर मे अकेला करता भी क्या....
शुभम ने दरवाजे लॉक किये. तब तक जय ने उसके बुलेट(Royal Enfield) को किक मारी, धड..धड..धड..धड.. करती हुईं उसकी बुलेट स्टार्ट हो गई. शुभम पीछे से ये देख रहा था के इतनी बड़ी बाइक कैसे जय के शरीर के भार से दब गई है, उसके शरीर के आगे बुलेट छोटी लग रही थी. बुलेट पर बैठे हुवा जय की जाँघे अब और फूली हुईं और सख्त लग रही थी जो उसके मजबूत शरीर का परिचय दे रही थी. शुभम उसके पीछे बैठ गया पर जय के घोड़े जैसे शरीर के कारण आगे वाला कोई यह समझ ही नहीं पाता के पीछे कोई बैठा भी है....
दोनों निकल पड़े movie थ्रीटर काफी दूर था. अचानक जय ने बिच रास्ते पर बुलेट रोक दि और उतर कर.
जय : मुझे माफ़ कर दो शुभम. माफ़ कर दो मुझे....
(और घोड़े जैसा शरीर और सांड जैसी ताकत वाला जय फुट फुट कर रोने लगा)
शुभम : क्या हुवा जय अंकल , क्यों रो रहे हो आप?
(शुभम ने कभी यह नही सोचा था के इतना सख्त सा दिखने वाला जय कभी रो भी सकता है.)
जय : मुझसे गलती हुईं है कल रात को तुमने जो देखा वह समझ भी लिया होगा. पर अब ये बात तुम्हारे पापा को पता लग गई तो वो मुझे और तुम्हारी मम्मी को मार डालेंगे... यह बोल कर फुट फुट कर उसके आंसू निकलने लगें....
अब शुभम के मन मे ख़यालो का मानो तूफ़ान उमड़ रहा था. उसे कुछ समझ नही आ रहा था के क्या बोलना चाहिए.
"जय को उस के किये की सजा मिलनी ही चाहिए, इसे ऐसे कैसे छोड़ दु, कल की रात मैने जो देखा था इस से मै जान गया जे उस तूफान वाली रात ज़ब lights off हो गई थी तब mom की बाथरूम से फच फच फच की आती हुईं आवाजे mom और जय के चुदाई की थी, कल की रात से इतना तो पक्का हो गया था. पर अब यह भी था के पापा को बताऊ तो मेरी तो दुनिया ही उजड़ जायेगी"....ये सोच क़र शुभम की मासूम आँख़ो मे भी आंसू आने लगें....
शुभम : मै क्या बोला कुछ सूझ नहीं रहा पर चलिए मूवी देख लेते है. बाद मे सोचते है....
जय : "भरी आँखो से बुलेट को किक मारते हुए" हा चलो शुभम...
दोनों ज़ब थ्रीटर पोहोच कर सीट पर बैठे तब मूवी सुरु हो कर 10 मिनिट बीत चुके थे. बिच बिच मे मै जय के चेहरे को देख रहा था तब उसकी आँखे अभी भी नम थी. शुभम का भी मन मूवी मे कहा था.....(
शुभम सोच मे पड़ गया के जय बोल तो सही ही रहा है, पापा को जब मम्मी के अफेयर के बारे में पता लगेगा तब पापा इन दोनों को मार ही देंगे, जय भाग बी जायेगा पर मम्मी कहा भागेगी, कैसी भी हो आखिर मेरी mom है, मुझे उसे पाला है, प्यार दिया है, मेरी हर जरूरत आखिर वो ही तो पूरी करती है, उसके बिना मै भी मर जाऊंगा. पापा तो जॉब में busy रहते है उनके पास मेरे लिए वक़्त ही कहा है, आखिर मुझे मम्मी ही तो संभाल रही है......
......रात मे मम्मी जय को room मे बुला लेती है यह बात पापा को
नहीं लगने दूंगा, इस के बदले जय से ही बात मनवा लेता हु के आगे जय ये सब ना करें. उसका फुट फुट कर रोना ये साबित कर रहा है के अब जय डरा हुवा है, उसे पापा का डर है.और पल्ला मेरा भारी है....)
मूवी के 2 घंटे कैसे बीते न जय समझ पाया ना ही शुभम...
मूवी के बाद जय ने एक आइस क्रीम पार्लर में बाइक पार्क क़र दी जहाँ दोनों रुके......
मूवी के बाद जय ने सीधे बुलेट एक आइसक्रीम पार्लर मे रोकि. दूर इलाके मे जहाँ काफी सन्नाटा था. आइसक्रीम पार्लर मे बस जय, शुभम और पार्लर का owner ही थे. पार्लर काफी बढ़िया था बैठने के लिये काफी space था.
जय : शुभम plz क्या तुम कल की बात भूल सकते हो. अब आगे मै कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा....Plz
जय ने शुभम के दोनों हाथ उसके हाथों मे प्यार से लेते हुए पश्चाताप जताया...
बात की सभी गहराई और दूर के परिणाम सोच के शुभम ने चुप्पी साधना उचित समझा और चेहरा लटका दिया.
जय : शुभम मै तुम्हरी हर बात मानने के लिए तैयार हु....बोलो... बस यह राज राज ही रखना...Plz

तुम्हारे पापा को मत बता देना. नहीं तो तुम्हारी mom और मै दोनों मारे जायेंगे...plz
मै : जय अंकल मै अभी कुछ नहीं बोलूंगा. मै खुद परेशान हु
जय : तुम बोलो वह मै करूंगा बस इस बार तुम माफ़ कर दो...
शुभम के ही घर का नंगा राज उसे ही छूपा कर रखने के लिए जय उसके आगे गिड़गिड़ा रहा था. इसके बदले वो शुभम को चाहे वो दे सकता था, जैसे के कोई god उसके follower पर खुश हो कर हर blessings देने के लिए तैयार हो....
शुभम : ठीक है अंकल , पर मेरी इच्छा आप को पूरी करनी पड़ेगी
जय : क्या बताओ जल्दी बताओ...
शुभम : मेरी हर बात आप मानोगे बस यही है. जो मै कहु आप वह करोगे
जय : हा बिलकुल मै करूंगा पर प्रॉमिस करो के अब तुम कल का दिन भूल जाओगे.
शुभम : देखो अंकल कल का दिन मै कभी भूल नहीं पाउँगा पर प्रॉमिस करता हु के बात पापा तक नहीं जाएगी...!
जय : तो मै भी प्रॉमिस करता हु के मै तुम्हारी हर बात मानूंगा. पर कल तुमने क्या क्या देखा वह सब बताओ....
शुभम : देखा भी और कुछ आवाजे सुनी थी. अंकल कल मैंने आप दोनों को बेडरूम मे nude देखा, ज़ब आप ने pant पहना था तब मै वही था... देख रहा था
आप ज़ब आप के लन्ड को साफ कर रहे थे तब आप के लन्ड से कुछ चाशनीनुमा चिकना तरल टपक रहा था वह सब देखा था...
जय : अरे पागल वो चाशनी नुमा तरल क्या था तुम्हे पता भी है
मै : नहीं मुझे नहीं पता. आप बताओ...
जय : अरे बुद्धू! वह तरल तो तुम्हारी mom के फु.. दि का कामरस था जो मेरे लन्ड से सन कर कर चिपक गया

.... ही ही ही
मै : भैय्या चुप करो आप. शर्म करो वर्ना
जय : अच्छा sorry

आज से तू मेरा सगा भतीजा...! मै तेरा खयाल रखूँगा बिलकुल सगे अंकल से भी बढ़चढ कर...! पक्का प्रोमिस....! अब तू मुझे तेरी हर इच्छा बताना मै उसे पूरी करूंगा....!
अच्छा एक बात बताओ शुभम तुमने जो देखा मै समझ गया पर तुमने क्या सुना था वो बताओ....
शुभम : अंकल उस तूफान वाली रात ज़ब lights of हो गई थी... वो रात याद है आप को....?
जय : हा... हा... याद है...!
शुभम : तब मै डर क़र मम्मी के रूम मे सोने आया था...ये भी याद होगा...!
जय : हा... हा... तब मै बाथरूम मे छुपा हुवा था...! ये भी याद है...!
शुभम : अंकल उस रात मे मम्मी और आप बाथरूम थे... मै सो चूका था, पर ज़ब मुझे बाथरूम से मम्मी की पायल के घुंगरू बजने की और चुडिया खनखना की आवाज आई थी तब मै नींद से जाग चूका था ....!
जय : हा ये भी याद है....!
शुभम : ज़ब मैं मम्मी के बाथरूम के पास दरवाजे से कान सटा कर खड़ा रहा अजीब आवाजे आने लगी....!
जय : कैसी आवाजे...!
शुभम : मम्मी की पायल के बजने की, चुडिया खनकने की और फच.... फचा ....फच... फच... फचा... फच...ऐसी आवाज आने लगी थी जैसे मानो के कोई दही भरे मटके मे मुसल घुसा के रगड़ रगड़ कर घी मक्ख़न निकाल रहा हो
जय : हूँ... तुमने सही समझा...! हा शुभम मक्ख़न और घी तो निकाल ही दिया था..., पर मटके से नहीं...!
तुम जिसे दही का मटका और मुसल मान रहे थे वह कुछ और ही था.... ही ही ही

(जय की बातो को शुभम समझ रहा था पर उसका मन कहता था के जय से और बाते निकाली जाए ता के उसी के बातो मे उसी को फसा कर शुभम जय से खुद की बाते मनवा सके... आखिर कार उसने जो शुभम के घर मे कांड किया है उसके आगे शुभम की चोटी मोटी बात मनवाना काफ़ी छोटी चीज थी)
शुभम : अच्छा, क्या था वो
जय : "फुसफुसाते हुए" मुसल मेरा लन्ड था और मटका तुम्हारे mom की चु#t .... ही ही ही
उसी पर चढ कर मैने घी मक्ख़न बनाया था शुभम ! जिसे तुमने बाथरूम मे मेरे underwear पर चीपके हुए चाशनीनुमा तरल को टपकते हुए देखा था ... ही ही ही...
शुभम : चुप करो अंकल... मुझे ये सुन क़र बहोत अजीब लग रहा है...!
जय : अच्छा.. Sorry

पर शुभम उस रात तुम भी तो तुम्हारे मम्मी का दूध पी रहे थे, मैंने तुम्हे उर्वशी के दूध पिते देखा था...!
शुभम : हा... वो डर के मारे मेरे से सब हो गया...

अब मुझे अजीब लग रहा है..
जय : अरे... अरे...! अब इतना मत सोचो जो हो गया सो हो गया...! पर मजा तो तुम्हे भी आया होगा...! अच्छा छोड़ो...!
(शुभम समझ गया था के जय ने उसके mom के फुदि मे लन्ड गाड़ कर जो उछल कूद की थी उसी का वो आवाज था जो फच.... फच.... फच.... फच करते हुए बाहर तक आ रहा था)
शुभम : hmm....! ये चक्कर चल कब से रहा है....!
जय : covid pandemic से सुरु हुवा था...!
शुभम : पर ये सब कैसे सुरु हुवा... मुझे details मे बताओ आप...!
जय : अच्छा सुनो...! ये तब कि बात hai ज़ब covid lock down सुरु हुवा था....! बहोत बड़ी कहानी है शुभम... बाद मे बताऊंगा कभी...!
शुभम : अच्छा... पर मुझे बताना जरूर...! पर आज से आप को यह सब बंद करना पड़ेगा
जय : ठीक है ,

और हा तुम मुझे अंकल बुलाया करो क्यों के तुम्हारी mom को मै देवर मानती है समझें.
शुभम : ठीक है...!
(ऐसे ही बातो बातो मे जय ने शुभम की मनपसंद कुछ आइसक्रीम बुलवाई जिसे खा कर दोनों घर चले आये. 7 बज रहे थे घर अभी तक locked ही था...उर्वशी अभी तक नहीं आई थी, शुभम ने door unlock किया, तभी उर्वशी ने car horn बजाया, शुभम ने बाहर देखा
उर्वशी car मे ढेर सारा सामान ले आई थी)
उर्वशी : बेटा सामान उतरने मे help करो plz...
शुभम : आया मम्मी...
उर्वशी : बेटा किचन का सामान लाना था न, राशन भी खत्म हो चूका था, मार्गेट मॉल मे भीड़ भी इसी लिए देरी हो गई...
शुभम : कोई बात नहीं मम्मी....
उर्वशी : घर मे कोई आया था क्या...
शुभम : नहीं मम्मी (सब ठीक होते देख जय और शुभम के बिच हुईं बात वो उर्वशी से छुपाना चाहता था)
उर्वशी : अच्छा.... खाने के लिए भी food ले आई हूँ. वही dinner क़र लेंगे..
शुभम : जी... ठीक है...
उर्वशी : अच्छा बेटा हाथ धो लो dinner लगा देती हूँ.
शुभम : जी अभी आया...
शुभम और उर्वशी ने dinner क़र लिया, उर्वशी अब किचन मे सामान लगाने लगी, घर और किचन का बिखरा सामान सवारने लगी, सब निपटा क़र उसने door locked क़र दिए, lights deem क़र के कुछ देर tv देख क़र सोने चली गई...
(उधर उसके रूम मे study क़र रहा शुभम सोचने लगा जो भी हो अब जय सुधर जायेगा, उसने प्रॉमिस भी तो किया है, पर फिर भी मम्मी पर नजर रखनी पड़ेगी, मम्मी बहोत दिनों से जय के साथ चक्कर चला रही है, जय ने खुद ही सब confessed क़र दिया पर mom का कोई भरोसा नहीं है, उसे मै बोलू भी क्या के वो क्यों ऐसा क़र रही है. इस से अच्छा है के जय को ही control मे रख लू.)

पर उर्वशी कि चालाकियाँ बड़े बडो के समझ से बाहर कि थी उसके सामने शुभम तो अभी अभी अंडे से बाहर आने वाला चूजा था, एक तरफ जय के काम लीला पर प्रतिबन्ध लगा चूका शुभम उस नए कांड से अंजान था, शुभम और उर्वशी के बिच उस दिन जो घमासान mach हो चूका था ये तो बस एक शुरुवात थी, अभी आर्यन उर्वशी के पिच(pitch) पर लम्बी पारी(innings) खेलने वाला था.)