Adultery Manhoos se mahan tak - Page 22 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 169



सप ऋतू सिंह : मंजूउ !!!!

मंजू म : ऋतूउउउउ

ऋतू सिंह और मंजू दोनों एक दूसरे को देख कर ज़ोर चिल्लाईं और फिर एक दूसरे क गले लग गयी . मेरे साथ शीना रीमा और रीना भी हैरान थी मगर रुपाली शायद पहचान रही थी. दोनों एक दूसरे से ऐसे गले मिल रही थी जैसे बरसों बाद बिछड़े हुए दोस्त मिल रहे हों . ऋतू सिंह जैसी सख्त अफसर को इस तरह देख कर उसके साथ वाले पुलिस वाले भी हैरान थे . ऋतू सिंह को तो मनो कोई फरक hi नहीं पद रहा था किसी बात से . वो यूनिफार्म में होते हुए भी कितने प्यार और गरम जोशी से मंजू म को गले लग क मिल रही थी .

सप ऋतू सिंह : मुझे यकीन नहीं हो रहा तुम मेरे सामने हो . मैंने तुम्हे कितना ढूँढा पर तुम मिली hi नहीं. पता है मेरी पोस्टिंग तेरे शहर में भी हुई थी . मैं बहुत पता किया पर तेरा कुछ पता नहीं चला. तू कहाँ गायब हो गयी थी ? किसी को भी पता नहीं था तेरे बारे में . तूने किसी से भी कोई लिंक नहीं रखा कॉलेज क बाद .

मंजू म : मैं वो .. मेरी छोड़ तू कहाँ थी? तेरा भी तो किसी को अत पता नहीं था और ये पुलिस यूनिफार्म ???

सप ऋतू सिंह : न्यूज़ पेपर नहीं देखती क्या ? मैं सप हूँ यहाँ . अभी पिछले महीने hi यहाँ ट्रांसफर हुई है. तू कहाँ रहती है ?

मंजू म : सॉरी यार न्यूज़ पेपर तो वाकई नहीं देख पति बस किताबों में टाइम निकल जाता है. मैं भी यहीं रहती हूँ . ये तो ाचा हो गया अब तू भी यहीं आ गयी . तुम्हे इतने सैलून बाद अपने सामने देख कर मैं कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती . चल मेरे साथ तुझे घर ले कर चलती हूँ .

सप ऋतू सिंह: नहीं यार अभी तो नहीं आ सकती . अभी ज़रा काम है कुछ . तू मुझे अपना no. और एड्रेस दे मैं जल्दी hi तेरे घर आउंगी.

रुपाली : मुझसे नहीं मिलोगी क्या ऋतू ?

सप ऋतू सिंह : अरे भाभी आप ? आप भी यहीं हैं ?

रुपाली ने पास आकर ऋतू क कंधे पर हाथ रखा तो ऋतू ने उन्हें पहचानते हुए उनको भी गले लगा लिया .

सप ऋतू सिंह : कैसी हैं आप भाभी और वो दोनों एंगेल्स कहाँ हैं ?

रुपाली : मैं ठीक हूँ और ये रहीं तुम्हारी एंगेल्स और 2 नहीं 3 शीना भी यहीं है.

रुपाली ने शीना रीमा और रीना को ऋतू सिंह से मिलवाया. ऋतू सिंह ने उनको भी गले से लगाया .

सप ऋतू सिंह : वह ये तो बड़ी हो गयी . और शीना तुमने बताया नहीं तुम मंजू की भतीजी शीना हो ? क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं था ?

शीना : आप ??

मंजू म : ये भी तुम्हारी बुआ hi हैं . जब तुम छोटी थी तब ये अक्सर मेरे साथ घर आया करती थी और तुम तीनो इसके साथ खेलती थी. हम दोनों स्कूल से कॉलेज तक एक साथ रहे हैं.

ऋतू सिंह : तुम तीनो तो कितनी बड़ी हो गयी हो अब. रीना तुम्हारी पढ़ाई तो ख़तम हो गयी होगी न ?

रीना : जी बुआ मैं अब डॉ हूँ .

ऋतू सिंह : अरे वह ये तो बहुत अछि बात है . मुझे पता था तुम ज़रूर कुछ बनोगी. और ये रीमा भी तुम्हारे जैसी hi थी ये भी ज़रूर कुछ बनेगी . कमल आप सब लोग इस शहर से में थे और इतने दिनों तक किसी से मिलना नहीं हुआ. वैसे तुम करती क्या हो ? और तुम्हारे पति ?

मंजू म : मैं इनके कॉलेज में hi लेक्चरर हूँ और मेरे हस्बैंड अब उस दुनिया में नहीं हैं .

ऋतू सिंह : ी ऍम सॉरी मंजू मुझे पता नहीं था पर ये सब कैसे हुआ ?

मंजू म : जब घर आओगी तब बैठ कर आराम से बातें करेंगे . तुम अपनी सुनाओ .

ऋतू सिंह : मैं तो तेरे सामने hi हूँ . कॉलेज क बाद तूने तो शादी कर्ली और मैंने आईपीएस क्लियर कर्ली. बस तब से यही ज़िन्दगी है .

मंजू म : जतिन क्या करता है ?

ऋतू सिंह : हम बाद में बात करेंगे मंजू . वैसे अमित से तुम्हारा क्या रिलेशन है ?

मेरी तरफ देखते हुए ऋतू सिंह ने मंजू म से पूछा . अब तक तो मैं पीछे अकेला hi खड़ा था . मगर अब ऋतू सिंह ने मेरी तरफ ध्यान करवाया मंजू म का.

मंजू म : कहने को तो मेरा स्टूडेंट है पर आज मेरी ज़िन्दगी में जितनी भी खुशियां हैं सब इसी की वजह से हैं. और देखो इसी की वजह से आज मुझे मेरी दोस्त वापिस मिल गयी. इसके बारे में बताने लगूंगी तो यहीं सुबह हो जाएगी. तुम घर आना फुर्सत में बात करेंगे.

ऋतू सिंह : वैसे तुम भी मेरे घर आ सकती हो मगर पहले फ़ोन कर लेना . मेरी ड्यूटी का कुछ पता नहीं होता कब कहाँ हूँगी . मैं जल्द hi तुम्हारे पास आउंगी. ाचा फिर मिलेंगे .

ऋतू सिंह ने बरी बरी से सबको गले लगाया और लास्ट में मुझसे मिलने मेरी तरफ बरही तो मैंने दूर से hi हाथ जोड़ दिए. बिना कोई शब्द कहे. ऋतू सिंह भी समझ गयी क मैं उससे बात नहीं करना चाहता . वो कुछ कहना तो चाहती थी पर कहते कहते रुक गयी और एक बार मुझे देखने क बाद चली गयी.

मंजू म : शीना तुम कहाँ मिली थी ऋतू से ?

शीना : अरे बुआ वो कॉलेज आयी थी एक दिन तब मुलाकात हुई थी .

मंजू म : कब ? मैंने तो देखा नहीं .

शीना : आप तब घर पर थी न बुआ . जब आपके चोट लगी थी तब की बात है . अब घर चलें बुआ ?

मंजू म : हाँ चलो , पर ये जो भी कुछ हुआ आज ये सही नहीं है. तुम्हे उनसे उलझना नहीं चाहिए था . वो इतने लोग थे हम उनका कैसे मुकाबला करते ?

शीना : बुआ वो लोग कितनी गन्दी बकवास कर रहे थे , मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और फिर अमित था न हमारे साथ . इसके होते मुझे किसी से दर नहीं लगता .

मंजू म : पर वो अकेला था अगर उसे कुछ हो जाता तो ?

शीना : आपने देखा नहीं ये अकेला hi काफी है उन जैसों क लिए . और फिर ऋतू बुआ भी तो कह रही थी .

रुपाली : फिर भी शीना ऐसे उलझना नहीं चाहिए , ऐसे लोगों का क्या भरोसा कुछ कर दें तो .

रीना : मेरे ख्याल से अब हमें चलना चाहिए . 10 बज चुके हैं .

उसके बाद हम सब कार्स में बैठे इस बार दोनों कार्स मंजू म क घर की तरफ hi आ गयी. मैंने बहार से बाइक उठायी और सबसे विदा ली. शॉपिंग बैग ज्यादा थे तो मैंने वहीँ रहने दिए. जिसे घर पहुँचाने की ज़िम्मेदारी शीना ने ले ली. क्यूंकि उसे पता था रीता मौसी क घर का . मैं मम क घर से सीधा मौसी क घर पहुँच गया . रीता मौसी मेरा hi इंतज़ार कर रही थी . जब मैं घर आया तो वो अकेली hi जग रही थी . नेहा दीद और कल्पना दीदी नज़र नहीं आ रही थी .

रीता मौसी : इतनी देर कैसे हो गयी तुम्हे ?

अमित : वो शीना और मम क साथ शॉपिंग क लिए जाना पड़ा फिर उसके बाद वो लोग डिनर की ज़िद करने लगे .

रीता मौसी : वैसे ये शीना का क्या चक्कर है तेरे साथ ?

अमित : ऐसा कुछ नहीं है मौसी . नेहा दीदी को भी पता है हम बस अचे दोस्त हैं . और मैंने उसकी मदद की थी तो उसने कहा था क वो मुझे शॉपिंग करवाना चाहती है . इतने दिनों से टाइम नहीं मिल रहा था तो आज वो ज़बरदस्ती ले गयी मुझे. मैडम भी साथ hi थी . वैसे नेहा दीदी करुणा दीदी नज़र नहीं आ रही कहीं

रीता मौसी : वो दोनों सो रही हैं . तुम भी कपडे बदल कर आ जाओ मेरे कमरे में . मैं तब तक दूध गरम करती हूँ .

अमित : वो दोनों इतनी जल्दी सो गयी ?

रीता मौसी : हस्ते हुए ) सोई नहीं सुलाया है कल की तरह . आज तुम्हे तुम्हारा गिफ्ट जो देना था.

अमित : सच !! तो चलिए सीधा आपके कमरे में hi चलते हैं .

मैंने मौसी को बाँहों में भरते हुए उनकी गांड को मसलना शुरू कर दिया .

रीता मौसी : अरे रुको , साडी रत अपने पास hi है बेसब्री मत बनो. जाओ कपडे बदल लो और मुँह हाथ धो लो तब तक मैं दूध गरम करती हूँ .

अमित : ठीक है मैं अभी आया. उम्म्मा

मैंने रीता मौसी क होंठों पर एक किश की और ऊपर भाग गया अपने कपडे बदलने . जैसे hi मैं कपडे बदल कर फ्रेश हो कर नीचे आया तो सभी लाइट्स बंद थी सिवाए मौसी क रूम क. रीता मौसी क कमरे का दरवाज़ा खुला था . मैं अंदर गया तो बीएड की साइड पर दूध का गिलास ढाका हुआ पड़ा था . मौसी कमरे में नहीं थी . मैंने दूध का गिलास उठा कर पि लिया और बीएड पर बैठ कर मौसी की वेट करने लगा . बाथरूम से आती आवाज़ बता रही थी क मौसी बाथरूम में हैं . मैं दरवाज़ा बंद कर क वैसे hi बीएड पर बैठ गया . कुछ hi देर में बाथरूम का दरवाज़ा खुला और अंदर से रीता मौसी बहार निकली . मैं तो मौसी को देखता hi रह गया. मौसी नाहा कर आयी थी और उनके बालों क साथ साथ उनकी बॉडी पर भी पानी की बूंदे साफ नज़र आ रही थी . बूब्स से लेकर जाँघों तक बस एक सफ़ेद टॉवल में लिपटी वो इस वक़्त बिजलियाँ गिरा रही थी .

बाथरूम क दरवाज़े पर hi वो कड़ी हो कर मेरी हालत पर मुस्कुरा रही थी. मैंने तो ऑंखें फाड़े बस उन्हें सर से पाऊँ तक निहार रहा था . उनके बल गीले थे और बिखरे हुए थे जिनमे से पानी की कुछ बूंदे नीचे गिर रही थी . गोरा चिकना बदन नंगे कंधे . आधे चुके तोलिये से बहार hi थे और उनके बीच की घाटी नज़र आ रही थी . तलिये क अंदर कैसा हुआ गदराया बदन . तौलिये क नीचे गोरी मांसल जांघें जो आधी से ज्यादा बहार hi थी . गोरी चिकनी टाँगें और तखनो क पर पायल . मैं तो बस इस काम सुंदरी क यौवन को देखता गरम हो रहा था. जब कुछ देर तक मौसी अपनी जगह से नहीं हिली तो मेरी नज़र उनके चेहरे पर गयी जहाँ एक कामुक मुस्कान थी .

रीता मौसी : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : आप बहुत हॉट लग रही हैं .

रीता मौसी : बस , अभी तो तुम्हे बहुत कुछ दिखाना है .

इतना कह कर मौसी धीरे धीरे कैट वाक करती हुई मेरे पास आयी और अपना डायन पाऊँ उठा कर सीधा मेरे आधे खड़े लैंड पर रख दिया. लोअर में भी मेरे लैंड को मौसी क नंगे पाऊँ का एहसास हो गया और वो जागने लगा. मौसी कामुक ऐडा से मेरी आँखों में देखती हुई अपने पाऊँ से मेरा लैंड अपने पाऊँ से दबाने लगी . मौसी एक पैन मेरे लैंड पर रखे कड़ी थी और इस पोज़ में टॉवल क नीचे से मेरी नज़र उनकी छूट तक जा रही थी. मौसी का सारा बदन अभी भी गीला गीला लग रहा था. मेरे लैंड पर मौसी क पाऊँ का दबाव और उनकी सेक्सी ऐडा मुझे पागल कर रही थी मैंने झट से उनकी पिंडली को पकड़ लिया और झुक कर उनके घुटने और झांग पर किश करने लगा

रीता मौसी : आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम्म

मौसी क मुँह से सिसकी निकल गयी. मौसी का जिस्म अभी भी गीले पैन और ठंडक का एहसास करवा रहा था . मैंने जांघ पर किश करते हुए दांत भुई गाढ़ा दिए और एक हाथ उनकी छूट तक ले गया जिसे मौसी ने रोक दिया . न में इशारा करते हुए उन्होंने मुझे मन किया और मेरा दूसरा हाथ भी अपनी तंग से हटा दिया. अगले hi पल मौसी मेरे दोनों तरफ घुटने बीएड पर रखते हुए मेरी गॉड में बैठ गयी . मेरा लैंड जो खड़ा हो चूका था जैसे hi मौसी मेरे लैंड पर बैठी उन्हें एहसास हो गया उसकी सख्ती का . मौसी ने मेरा चेहरे दोनों हाथों में देखा और बड़े hi कामुक अंदाज़ में मेरी आँखों में देखने क बाद अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए . मैंने भी मौसी क सर क पीछे हाथ रखते हुए उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए . मौसी कभी मेरा नीचे वाला होंठ चुस्ती कभी ऊपर वाला . फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में दाल दी और मैं उनकी जीभ चूसने लगा. कुछ देर अपनी जीभ चूसने क बाद वो मेरी जीभ चूसने लगी. मेरे हाथ अब मौसी क कन्धों से होते हुए नीचे आने लगे. मौसी का टॉवल कब खुल गया हमें पता hi न चला. मौसी की नंगी पीठ को सहलाता हुआ मैं उनके नंगे कूल्हों पर पहुँच गया . कूल्हों को मसलते हुए मैंने अपनी उंगली उनकी छूट में घुसा दी जो पहले से hi पानी छोड़ रही थी .

रीता मौसी : ुम्माआआ कक्ककक्कक्स आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्म

मेरा एक हाथ अब मौसी की नंगी जांघों को सेहला रहा था . मौसी का पूरा बदन माखन की तरह मुलायम था और दूध की तरह सफ़ेद . मौसी भी पूरी गरम थी और मेरी गॉड में बैठी अपनी कमर हिला कर मेरे लैंड पर अपनी छूट रगड़ रही थी . मैंने मौसी क पाऊँ इसी पोज़ में उनकी गांड से लगा कर उन्हें अपनी गॉड में hi लिए उठ गया . मौसी मेरे गले में बहन दाल कर मेरे साथ चिपक गयी. मैंने पलट कर मौसी को बिस्टेर पर लिटा दिया और टॉवल को एक साइड फेंक दिया . अब मौसी का गदराया हुआ दूधिया गोरा बदन मेरे सामने था . मौसी की छूट क ऊपर एक भी बाल नहीं था जिसे देख कर मुझे ाचा लगा और मैंने मौसी की टंगे फैलते हुए उनकी छूट पर झुक कर उनकी चिकनी छूट को एक बार देखा और फिर सीधा अपना मुँह उनकी छूट से लगा दिया. मेरे ऐसे करते hi मौसी क बदन में करंट सा लगा और एक तेज़ सिसकी उनकी मुँह से निकल गयी.

रोटा मौसी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ खा जाओ बहुत आग लगी हुई है इतने दिनों से . आअह्ह्ह्हह उनमममम आज साडी आग बुझा दो इसकी. खा जाओ उम्मम्मम ऐसे hi चुसो आअह्ह्ह आआह्ह आह्ह्ह्हह

मैं मौसी की छूट चूसते हुए उनके दाने पर अपनी जीभ फिर रहा था और साथ hi एक उंगली अंदर बहार कर रहा था. मौसी अपनी जांघें मेरे सर पर कास रही थी और मेरा सर अपने हाथों से छूट पर दबा रही थी . मौसी कुछ ज्यादा hi उतावली हो रही थी और अपनी कमर उठा उठा कर मेरे मुँह पर अपनी छूट रगड़ने लगी .

रीता मौसी : आआह्ह्ह आह्हः आअह्ह्ह आह्हः ककक और ज़ोर से करो आअह्ह्ह हाँ आह्ह्ह्ह ऐसे hi मैं गयी आअह्ह्ह्ह ककक ज़ोर से करो ाःह आठ आह्हः. MaaaaaaaaaaAhhhhhh

मौसी अपनी कमर बार बार उठती हुई एक डैम से चिल्लाई और उनका बदन एक पल क लिए अकड़ गया . उनकी छूट से पानी का तेज़ परवाह बहने लगा जो मेरे मुँह पर लग रहा था . पानी निकलते hi मौसी का बदन ऐसे ढीला हो कर बीएड पर गिरा जैसे जान hi निकल गयी हो. मौसी बेजान से बिस्तर पर टंगे फैलाये पड़ी थी . मैंने उठ कर अपने कपडे उतरे और मौसी क साथ लेट कर उनके बड़े बड़े चुके थम लिए. एक निप्पल को होंठों में लेने क बाद मैंने दूसरे को उँगलियों से पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया . बरी बरी से मैंने मौसी क दोनों चुचों को चूसा और मसला जिससे वो लाला हो गए. मौसी क बदन में फिर से उत्तेजना आने लगी थी और वो मेरे सर को अपनी छाती पर दबाने लगी .

अमित : मौसी आप कह रही थी क कितनी दिनों से आप प्यासी हैं अभी कल रत hi तो मैंने हमने किया था न ? फिर भी आप इतनी प्यासी हैं

रीता मौसी : वो वो हाँ वो एक बार में कहाँ प्यास बुझती है इतने दिनों की .

अमित : वैसे ये आपने ाचा किया क वहां से सरे बल साफ़ कर लिए . कल तो पूरा जंगल hi बना हुआ था नीचे.

रीता मौसी : तू ऐसे hi अपना हल चलता रह अब तुझे कभी वहां बाल नहीं मिलेंगे

रीता ( मन में ) दीदी को कह दूंगी क अगर अमित क नीचे लेटना है तो अपनी छूट साफ़ रखा करे.

रीता : चल अब मेरे ऊपर से मुझे भी कुछ करने दे.

अमित : आओ क्या करोगी ?

रीता : हैट तो फिर बताती हूँ.

मैंने जैसे hi मौसी क ऊपर से हटा मौसी उठ कर बैठ गयी और मेरी कमर की तरफ झुकते हुए मेरे लैंड को एक हाथ से पकड़ कर अपने मुँह में लेने लगी . मुझे मौसी का ऐसा करना इतना ाचा लगा क मज़े क मारे मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी .

अमित : ाःह मौसी ये क्या कर रही हो आप ककक

मौसी क मुँह का गीला पैन लैंड को और गरम कर रहा था. मौसी ने अभी सुपडे से थोड़ा आगे तक लैंड को मुँह में लिया था क मैंने मज़े में कमर उठाते हुए उनका मुँह लैंड पर दबा दिया . जिससे लैंड आधे से ज्यादा उनके मुँह में चला गया . लैंड सिद्ध उनके गले में जा क लगा और एक डैम से वो खांसने लगी और लैंड मुँह से निकल दिया .

रीता मौसी : ाखुन ाखुन ाखुन ह्ह्हह्ह्ह्ह ाखुन ाखुन ाखुन हहहहह गाल फाड़ोगे क्या? ाखुन ाखुन

अमित : सॉरी मौसी मुझ से कण्ट्रोल नहीं हुआ. पर आप ने ये सब कहाँ से सीखा ?

रीता मौसी : जब दिल से कुछ करना चाहो तो किसी क सीखने की ज़रूरत नहीं पड़ती . तुम मुझे चूस कर इतना मज़ा देते हो तो मैं नहीं दे सकती क्या ?

इतना कह मौसी दी से लैंड चूसने लगी. कुछ देर और मौसी ने लैंड को चूसा और फिर मेरे ऊपर आ कर कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर रखते हुए एक हाथ से लैंड पकड़ क छूट पर सेट किया और धीरे धीरे नीचे बैठने लगी. मौसी की छूट लैंड पास कासी हुई नीचे हो रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था क जैसे लैंड किसी गरम गुफा में जा रहा हो. मौसी अपने होंठ डेंटन में दबाये नीचे होती रही और 7 इंच तक लैंड छूट में लेने क बार वो रुक गयी. फिर वो आगे को झुकी और मेरे पेट पर हाथ रख कर वो धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी. मैंने हाथ बढ़ा कर मौसी क दोनों लटकते आम पाकर लिए और उन्हें कास कर दबाते हुए अपनी तरफ झुका लिया .

रीता मौसी : आअह्ह्ह्ह ककक आराम से दबाओ न उखड डोज क्या ? कक्कक्स आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह आह्हः ये मुसल हर बार अंदर लेने में पसीने छूट जाते हैं आअह्ह्ह ककक एआईई आराम से करो न उफ्फफ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह

अमित : अब तो आपको दर्द नहीं होना चाहिए मौसी कल hi तो पूरा लिया था अपने उम्म्म्म

मैंने मौसी का एक निप्पल मुँह में भरते हुए चुआना शुरू कर दिया.

रीता मौसी : एक बार बता ाःह आठ उम्म्म तुझे दीदी कैसी लगती है ? उनकी लेना चाहता है क्या ?

मैं रीता मौसी की बात सुन कर एक डैम से रुक गया और उनके निप्पल को मुँह से निकल दिया .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता .

रीता मौसी : रुक क्यों गया ? करते रहो न . मेरे साथ कर सकते हो फिर दीदी क साथ क्यों नहीं ? हम दोनों क साथ तुम्हारा रिश्ता तो एक जैसा hi है न? आअह्ह्ह्ह कक्कक्स और फिर वो भी मेरी तरह कई सैलून से प्यासी हैं . क्या तुम उनकी प्यास नहीं बुझा सकते कक्कक्स उम्म्म्म उनकी छूट भी कब से प्यासी है . जीजा ने उन्हें हाथ भी नहीं लगते उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह उनके दूध मुझसे बड़े hi हैं कम नहीं ाःह आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ककक आह्ह्ह्ह उनकी गांड भी ककक आआह्ह्ह्ह आह्हः आह्हः ऐसे hi तेज़ और तेज़ करो आठ आह्हः आआह्ह मायआ

रीता मौसी ने जब रजनी मौसी की छूट का नाम लिया तो पता नहीं क्यों मुझे एक झटका डा लगा और मैंने अपनी कमर उछलते हुए धक्के मरने शुरू कर दिए .

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं वो सब से बड़ी हैं और मैं उनकी बहुत इज़्ज़त लेता हूँ . मैं उनके बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता

रीता मौसी : ाःह आह्हः तू मत सोच ये तेरा मुसल तो दीदी का नाम सुनते hi खुश हो गया है सीसीसी आह्ह्ह्ह वो सब से बड़ी हैं उनकी गांड भी सबसे बड़ी है तुझे बहुत मज़ाआ ाःह आराम से

मौसी की बातों से मेरी गर्मी बढ़ती जा रही थी और जब उन्होंने रजनी मौसी की बड़ी गांड का ज़िकर किया तो न चाहते हुए भी मेरे ज़ेहन में मौसी की वो बड़ी गांड आ गयी हो हमेशा साड़ी में ढकी रहती थी . मैंने रीता मौसी को अपने ऊपर से बीएड पर पटकते हुए उनकी टाँगे उठा दी और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा .

रीता मौसी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह तुझे पसंद है न दीदी की बड़ी गांड आआह्ह ाःह आठ और तेज़ करो आअह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे hi ाःह आह्हः देख तेरा मुसल कितना जोश में आ गया है ये भी आअह्ह्ह आह्हः दीदी की छूट में जाना चाहता है. आअह्ह्ह आह्हः

रीता मौसी की बातों से मेरा जोश बढ़ता जा रहा था और मैंने ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए . मौसी लगातार तेज़ तेज़ सिसकियाँ लेती मुझे और उकसा रही थी .

रीता मौसी : दीदी की छूट भी प्यासी है आअह्हह्ह तू कहे तो मैं दीदी को तेरे नीचे ला सकती हूँ अअअअअ आआअह्ह आअह्ह्ह्ह वो भी तेरा मुसल ले कर मेरी तरह तृप्त हो जाएँगी आअह्ह्ह आह्हः उनकी भी ककक आह्हः उनकी भी प्यास बुझा दे आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह माआआआ

मैंने जोश में रीता मौसी क पाऊँ उनके असर की तरफ दबाते हुए बीएड से लगा दिए जिससे उनके शरीर पूरी तरफ फोल्ड हो गया और खुद क पाऊँ उनकी गांड क पद करते हुए पाऊँ पर अपना वजन दाल कर उनकी छूट पर उछाल उछाल कर गहरे और ज़ोरदार धक्के छूट में मरने लगा . मौसी को दर्द हो रहा था पर उन्हें मज़ा भी आ रहा था. मौसी ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायी और उनका शरीर अकड़ गया . मुझे अपने लैंड पर गरम पानी का शावर चलता महसूस हुआ पर मैंने नहीं रुका . पता नहीं मौसी की बातों से क्या असर हो गया था क मैं अपना सारा जोश रीता मौसी की छूट पर निकलने लगा .

रीता मौसी : आह्हः ाआईई छोड़ दे बीटा दर्द हो रही है आआअह्ह्ह आअह्ह्ह माआआ छोड़ दे मेरी टांगें दुःख रही हैं छोड़ डीईई

मौसी पता नहीं क्या क्या कह रही थी मगर मुझे तो कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था . फिर मौसी ने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मर दिया . मौसी का रो रो कर बुरा हल हो रहा था. मौसी की आँखों में आंसू देख कर मैंने खुद को रोका और मौसी की टांगों को छोड़ कर अलग हुआ. छूट से लैंड बहार निकला तो पूरा भीगा हुआ था. मौसी लम्बी लम्बी सांस ले कर अपनी हालत ठीक कर रही थी . मौसी अपना पेट पकड़ कर उलटी हो गयी . मेरा जोश कुछ ठंडा हुआ तो मैंने मौसी की पीठ पर किस करते हुए पूछा

अमित : आप ठीक तो हो मौसी ?

रीता मौसी : ककक क्या हो गया था तुम्हे ?? मेरी कोई बात hi नहीं दूँ रहे थे तुम . कितना कहा तुम्हे क रुक जाओ . छूट क साथ टाँगें और पेट भी दुखने लगा है. मौसी हूँ तुम्हारी कोई बाज़ारू रंडी नहीं

अमित : सॉरी मौसी पता नहीं मुझे क्या हो गया था . प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये .

मौसी की हालत देख कर और उनकी बातें सुन कर मेरा सारा जोश ठंडा हो गया और लैंड सोने लगा. मुझे लगा अब मौसी मुझे हाथ भी नहीं लगाने देगी जैसी मैंने उनकी हालत कर दी थी . मैं मौसी से अलग हुआ और बीएड से नीचे उतर गया. अपने कपडे उठाने लगा तो मौसी की नज़र मुझ पर पड़ी . तो उन्होंने जल्दी से उठ कर मेरा हाथ पकड़ लिया .

रीता मौसी : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : सॉरी मौसी मैंने आपके साथ ठीक नहीं किया. आप आराम कीजिये मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ .

रीता मौसी : क्या ठीक नहीं किया तुमने ? तुमने तो मेरी साडी प्यास बुझा दी . हाँ आज कुछ ज्यादा hi जोश दिखा दिया इस लिए मेरी छूट की हालत पतली हो गयी है . वैसे एक बात तो बता तू तो कह रहा था क तू दीदी क साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता फिर दीदी क नाम पर इतना जोश कैसे आ गया तेरे अंदर ? मुझे तो लगा तू मुझे hi दीदी समझ कर थोक रहा है . दीदी की गांड बहुत पसंद है न तुझे , चिंता मत कर जल्दी hi तेरा ये लैंड दीदी की गांड में होगा . देख कैसे फिर से खड़ा हो गया है दीदी का नाम लेते hi .

मैंने अपने लैंड की तरफ देखा तो सच में लैंड फिर से खड़ा हो गया था . मौसी ने झुक कर मेरे लैंड को एक बार मुँह में ले क चूसा और मेरे सामने कड़ी हो गयी .

रीता मौसी : चल अब अपनी मनपसंद जगह पर अपना नाम लिख ले

मौसी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी गांड पर रखा और मेरे होंठो पर किश कर दी . उसके बाद वो बीएड पर चढ़ कर घोड़ी बन गयी और अपनी गांड बहार को उभरते हुए पीछे मुद कर कामुक ऐडा से मेरी तरफ देख कर बोली .

रीता मौसी : अब सोच क्या रहा है. आज अपनी मर्जी कर ले . मैंने तेरे लिए तैयार किया है इसे. ये ले क्रीम अचे से लगा लेना ताकि दिक्कत न हो .

मौसी ने बीएड क साइड में पड़ी क्रीम मुझे देते हुआ कहा . मैं तो मौसी की बात सुन कर hi खुश हो गया था क वो मुझे आज अपनी गांड देने वाली हैं. मैंने मौसी क हाथ से क्रीम ली और उनकी गांड पर लगाने लगा. मैंने जब गांड में अपनी उंगली घुसाई तो मुझे कुछ नरम लगी .

अमित : मौसी ये पहले से कुछ नरम लग रही है . क्या अपने मौसा जी क साथ यहाँ ......

रीता मौसी : नहीं यहाँ पर तो सिर्फ तेरा hi जायेगा तेरे मौसा से तो आगे कुछ नहीं होता पीछे क्या ख़ाक करेंगे . तेरे ये मुसल आसानी से तो जाने वाला नहीं बस इसी लिए कितने दिनों से इसे खुला करने क लिए कुछ न कुछ तरय कर रही थी क ज्यादा दर्द न हो जब ये खूंटा मेरे अंदर जाये . कक्ककक्कक्स ध्यान से करना बीटा तेरी मौसी हूँ फाड़ मत देना .

अमित : चिंता माता करो मौसी मैं ध्यान से hi करुंग . आप बस हौंसला रखना .

मैंने थोड़ी सी क्रीम अपने लैंड पर भी लगाई. मौसी बीएड पर घुटनो क बल कुटिया बानी हुई थी पर मुझे लगा ऐसे मौसी की गांड में अचे से लैंड जायेगा नहीं तो मैंने उनको बीएड क किनारे तक खिंच लिया और उनको अपने पाऊँ चूतड़ क साथ लगा कर घुटने पेट से लगाए पूरा बेंड होने को कहा . इससे उनकी गांड पूरी बहार को उभर आयी . मैंने ज़मीन पर खड़े हो कर घुटने बेंड किये और लैंड को गांड क पर से कर क मौसी की पीठ को दबाते हुए अपना लैंड गांड में घुसना शुरू कर दिया . क्रीम लगी होने से लैंड बिना रुकावट गांड में घुसने लगा. मौसी ने अपनी गांड पर काफी म्हणत की थी फिर भी मेरे लैंड क आगे उनकी गांड का सुराख़ काम hi था. इस लिए उनके मुँह से दर्द भरी सिसकी निकल hi गयी

रीता मौसी : आअह्हह्ह्ह्हह धीरे आराम से आआह्ह ककक दर्द हो रहा है रुक जा कक्कक्स आअह्ह्ह्ह

अभी सुपडे से 1 इंच और आगे तक hi लैंड गांड में घुसा था क रीता मौसी कराहने लगी और मुझे रुकने को कहने लगी . मगर मैं रुकने क मूड में नहीं था इस लिए मौसी को पूरी तरह दबाये हुए लगातार गांड में लैंड घुसते जा रहा था . मौसी मेरी पकड़ से छूटना चाहती थी मगर मैंने मजबूती से उन्हें दबाया हुआ था .

ऋतू मौसी : आआआअह्ह्ह्ह रुक जा आआआहहह माआ दर्द हो रहा है रुक जा मेरी फैट जाएगी रुका जाआआआहहहहह

अमित : बस हो गया मौसी अब दर्द माहि होगा अब तो पूरा चला भी गया बस हो गया शांत हो जाओ .

रीता मौसी : बहुत दर्द हो रही है आअह्ह्ह्हह माआ रुक जा न थोड़ी देर आआह्ह्ह्ह

मैंने मौसी को कह तो दिया था क सारा अंदर चला गया पर अभी भी दो ढाई इंच बहार hi था. मौसी क कहने पर मैं कुछ देर रुक गया और उनकी पीठ चूमने लगा. कुछ देर बाद मौसी ने अपनी गांड को थोड़ा ढीला छोड़ा तो मैंने लैंड को थोड़ा सा बहार खिंच कर फिर से अंदर लिया. लैंड गांड में ऐसे फसा हुआ था जैसे शिकंजे में फसा दिया हो. अंदर बहार करने में भी मुशक्कय करनी पद रही थी . थोड़ी देर मैं ऐसे hi थोड़ा थोड़ा कर क लैंड अंदर बहार करता रहा जिससे लैंड ने छूट को कुछ हद तक ढीला कर दिया था . जब लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा तो मैंने सुपडे तक लैंड बहार खिंच कर अंदर करना शुरू कर दिया . मौसी भी अब नार्मल हो रही थी .

रीता मौसी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म आह्हः ऐसे hi आराम से कर अब कुछ ठीक लग रहा है .

अमित : मौसी अब बस मज़ा लो और दर्द नहीं होगा अब . हहहहहह

मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी. मौसी की गांड और पाऊँ बीएड से थोड़े बहार hi थे और उनकी लटकती हुई पायलें मेरे थक्कों क साथ आवाज़ कर रही थी . मुझे मौसी क बड़े बड़े गोर चूतड़ देख कर धक्के मरते हुए बड़ा मज़ा आ रहा था . मैंने मौसी क चूतड़ों पर ज़ोर से थप्पड़ मारा तो उनके चूतड़ पर मेरे हाथ की उंगलियां छाप गयी . चटाक

रीता मौसी : आआह्ह्ह्ह मार क्यों रह है ? एक तो पहले hi जान निकल रही है ऊपर से ऐसे कर रहा है

अमित : क्या करूँ मौसी आपके ये बड़े बड़े चूतड़ देख कर कण्ट्रोल नहीं हो रहा . आपके ये चूतड़ कितने बड़े और गोर गोर हैं .

रीता ‘मौसी : कैसे नाम ले रहा है कक्कक्क्स अगर मेरे तुझे ये इतने पसंद आ रहे है तो जब दीदी क ऊपर चढ़ेगा तो तुझे कितना मज़ा आएगा आअह्ह्ह्हह माआआ में gyiiiiiiiiii

रीता मौसी ने जब रजनी दीदी क बड़े चूतड़ फिर से मुझे याद करवाए तो मैंने ज़ोरदार धक्का मरते हुए पूरा लैंड जड़ तक गांड में घुसा दिया . मौसी ज़ोर से कराह उठी और मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश की पर वो निकल नहीं पायी. मैं भी रुका नहीं और लगातार धक्के मरने शुरू कर दिए. पता नहीं क्यों रजनी मौसी का नाम सुनते hi मेरे अंदर करंट सा लग जाता था. मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था क ये क्या हो रहा है . मैंने रीता मौसी क कन्धों पर दोनों हाथ रखते हुए ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए .

रीता मौसी : आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह रुक जा आआह्ह आह्हः रुक जाआआ आआह्ह्ह मेरी फट जाएगी रुक जाआआ

मौसी मुझे रुकने को कह रही थी पर एक तो मैं पहले hi उनकी गांड मरने से मस्त हुआ पड़ा था दूसरा उन्होंने रजनी मौसी का ज़िकर कर क जैसे जलती में तेल दाल दिया था . मैं मौसी क कंधे पकडे बुलेट ट्रैन की रफ़्तार से धक्के पेलने लगा मौसी ने बीएड पर हाथ रखे खुद को ऊपर उठाने की कोशिस की पर मैं उनके कंधे थामे अपना काम करता गया . मौसी करहटी रही पर मुझे कोई परवाह नहीं थी . मौसी क्या कह रही थी मैं कुछ नहीं सुन रहा था . मैं तब तक धक्के पेलता रहा जब तक क मेरा काम नहीं हो गया . J.B मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने मौसी क कंधे ज़ोर से पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींचते हुए पूरा लैंड मौसी की गांड में घुसा कर अपना पानी निकलना शुरू कर दिया . जब तक मेरा पानी निकलता रहा मैंने मौसी क कंधे पकडे उन्हें ऐसे hi ऊपर उठाये रखा और फिर एक डैम से ढीला hi कर उनके होर बीएड पर आगे को गिर गया. मौसी बीएड पर उलटी पड़ी थी और मैं ु के ऊपर . मौसी कराह रही थी पर मैं तो बेहोश सा उनके ऊपर पड़ा था. इतना मज़ा तो कभी नहीं मिला था मौसी क साथ जितना आज आया था . पता नहीं कितनी देर मैं मौसी क ऊपर ऐसे hi पड़ा रहा. फिर जब थोड़ा होश आया तो मुझे मौसी का ख्याल आया . मेरा लैंड अभी भी मौसी की गांड में hi था जो ढीला हो रहा था. मैं मौसी क ऊपर से उठा और जैसे hi मौसी की गांड को देखा तो उसका मुद खुल चूका था. पहले जहाँ बंद सुराख़ था अब वहां 2 रूपए क सिक्के क जितना बड़ा सुराख़ हो चूका था . जहाँ पर मेरे सफ़ेद वीर्य की कुछ बूंदे लगी हुई थी. मौसी क चूतड़ मेरे थप्पड़ों से लाल हो चुके थे और गांड क सुराख़ का आसपास भी लालजी बता रही थी क यहाँ अब सूजन आने वाली है . मौसी आंख बंद किये पड़ी हुई थी . मैंने मौसी को हिलाया

अमित : मौसी आप ठीक तो हैं ?

रीता मौसी ने मेरी बात सुन कर मेरी तरफ मुँह किया और मुँह बनाते हुए बोली

रीता मौसी : ऐसा करता है भला कोई? मैंने कहा भी ता आराम से करना. देखो क्या हालत करदी है मेरी .

अमित : सॉरी मौसी पता नहीं मुझे क्या हो रहा था .

रीता मौसी : मुझे पता है तुझे क्या हो रहा था. दीदी का नाम सुन कर तेरा ये घोडा बेलगाम हो रहा था. ये अब दीदी क ऊपर भी चढ़ना चाहता है. चिंता मत कर जल्द hi इसकी ये ीचा पूरी हो जाएगी . दीदी का भी ख्याल तो तुझे hi रखना पड़ेगा न. जब तू दीपिका कामिनी और मुझे प्यार कर सकता है तो दीदी को भी तो कर सकता है न. बेचारी बड़ी तरसी हुई हैं वो भी मेरी तरह . उनका भी कल्याण तुझे hi करना है.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं मौसी?

रीता मौसी : वो hi कह रही हूँ जो सच है . दीदी क नाम सुनते hi कैसे ये घोडा बेलगाम हो गया था. दीदी क नाम पर सारा ज़ोर मेरे ऊपर दिखा दिया. वैसे सच कहूं तो दीदी को तुम्हारी ज़रूरत है. जीजा जी से कुछ होता नहीं और वो किसी से कह नहीं सकती. मुझसे वो अपनी बात करती रहती है इस लिए मैंने तुमसे कहा. बाकि जैसी तुम्हारी मर्ज़ी . अगर तुम अपनी बड़ी मौसी को ख़ुशी नहीं देना चाहते तो मैं क्या कर सकती हूँ .

मैंने रीता मौसी की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया. जवाब देता भी तो क्या ? अगर कुछ पूछता तो वो यही सोचती क मैं रजनी मौसी क साथ वो सब करना चाहता हूँ. इस लिए मैंने इस बात पर कुछ नहीं कहा.

रीता मौसी : ाचा वो सब छोड़ मुझसे ज़रा ड्रावर में से पैन किलर निकल कर दे दे. पता नहीं सुबह उठा भी जायेगा या नहीं . दीदी का नाम लेकर तो गलती कर दी मैंने .

मैंने मौसी को पानी क साथ पैन किलर दी और उनको निघ्त्य पहना कर खुद अपने कपडे पहन कर मौसी को किश करने क बाद अपने कमरे में आ गया . डेढ़ बज चूका था और मैं बिस्टेर पर लेट ते hi सो गया .

उधर रीमा शीना और रीना एक साथ एक hi कमरे में लेती हुई थी अपनी बुआ क घर. जबकि रुपाली अपनी ननद क साथ उसके कमरे में थी .

रीना : शीना तू ऋतू बुआ से कहाँ मिली थी ?

शीना : दीदी बताया तो था क कॉलेज में मिली थी .

रीना : तू कुछ छुपा रही है. सच सच बता कहीं ये वो hi तो नहीं जिसने अमित को टार्चर किया था. अमित ने जिस तरह से रियेक्ट किया था उससे मुझे पूरा यकीन है क ये वो hi होगी. और मंजू बुआ की वजह से उसने कुछ नहीं कहा.

शीना ने रीना की बात का कोई जवाब नहीं दिया. तो रीमा भी उठ कर बैठ गयी .

रीमा : दीदी आप बता क्यों नहीं रही? वैसे मुझे भी यही लगता है. वर्ण वो किसी से ऐसे बेहवे नहीं करता. अगर ये बात मंजू बुआ को पता लगी तो वो कैसे रियेक्ट करेंगी ?

शीना : बुआ भी अमित को बहुत मानती है . और ऋतू बुआ तो उनकी पुराणी बेस्ट फ्रेंड है. ऐसे में मैं उनके सामने ये बात करती तो उनको दुःख होता. बुआ को ये बात पता नहीं चलनी चाहिए. अमित तो खुद बताएगा नहीं. पर अगर मंजू बुआ को पता चला तो वो ज़रूर नाराज़ होंगी ऋतू बुआ से. सच कहूं तो मुझे लगता है ऋतू बुआ भी शर्मिंदा हैं अपनी उस हरकत क लिए. और वो अमित से माफ़ी भी मांगना चाहती हैं पर अमित शायद अभी माफ़ नहीं करेगा.

रीना : करना भी नहीं चाहिए , ये क्या बात हुई बिना सच जाने किसी को भी ऐसे बुरी तरह मारा जाना चाहिए क्या? देखा नहीं था क्या हालत हो गयी थी अमित की. ये तो अमित था जो झेल गया उसकी जगह कोई और होता तो हॉस्पिटल में दाखिल करना पड़ता . मुझे तो गुस्सा आ रहा है ऋतू बुआ पर उन्हें कुछ कह भी नहीं सकती. अभी तक अमित की पीठ से वो निशान गए नहीं. सब क साथ वो ाचा hi करता है फिर भी पता नहीं क्यों उसके साथ बुरा हो जाता है .

शीना : शायद भगवन ने उसे दूसरों क दुःख दर्द अपने सर लेने क लिए hi बनाया है . मैं तो भगवन क आगे हाथ जोड़ती हूँ क कभी मैं उसके किसी काम आ सकूँ या उसके लिए कुछ कर सकूँ .

रीना : सच कह रही हो शीना . वो सब से अलग है .

शीना और रीना दोनों hi अपने अपने मन में अमित को लेकर अपनी यादें ताज़ा कर रही थी और दिल में सपने सजा रही थी जबकि रीमा तो अमित क साथ बिताये प्यार भरे पलों को यद् कर रही थी.

सुबह मेरी आंख अपने होंठों पर गीले एहसास क साथ खुली . बंद आँखों से भी मैं अपनी छाती पर नरम मॉस क गोलों क एहसास से समझ गया क ये करुणा दीदी hi होंगी. और नींद में hi उनके होंठ चूमते हुए मैंने उनकी गांड पर हाथ रख कर उनके चूतड़ मसलने शुरू कर दिए . कुछ देर किश करने क बाद करुणा दीदी ने किश तोडा तो मैंने ऑंखें खोली .

करुणा दीदी : गुस्स दिखते हुए ) बहुत ख़राब हो तुम. कल कहाँ रह गए थे ? क्या क्या नहीं सोचा था मैंने और तुमने कल की रत भी ख़राब कर दी.

अमित : अब इसमें मेरा क्या कसूर है . मैं जब आया आप hi सोई पड़ी थी .

करुणा दीदी : पता नहीं ये आजकल नींद कैसे आ जाती है अपने आप . अगर मैं सो गयी थी तो तुम नहीं जगा सकते थे ? मेरा कितना मन था.

अमित : तो अभी कर लेते हैं. अभी तो कॉलेज जाने में टाइम है न .

करुणा दीदी : उठो जल्दी से , बड़े आये अभी कर लेते हैं. माँ ने कहा है क राजकुमार जिनको उठा कर लाओ कॉलेज भी जाना है . वैसे सच कहूं तो मेरा दिल तो यही कर रहा है क आज कॉलेज जाने की बजाये हम दोनों कहीं बहार चलें और वहां डॉन दिन का हिसाब बराबर कर लें.

मैंने करुणा दीदी को बहिन में भर लिया और उनके होंठ अपने होंठो में जकड लिए . एक ज़ोरदार किश करने क बाद मैंने दीदी को छोड़ा .

अमित : आज रत पक्का , चाहे कुछ भी हो जाये. आज आप रत को तैयार रहना. आज आपकी साडी गर्मी निकल दूंगा. बस आप ज्यादा चिल्लाना मत .

इतना कह कर मैंने दीदी क चुके पकड़ कर मसल दिए .

करुणा दीदी : नहीं चिल्लाती , पर आज मुझे पूरा लेना है पहले hi कह देती हूँ .

इतना कह कर दीदी ने भी मुझे किश लिया और जल्दी से कमरे से बहार भाग गयी. मैं भी उठा और बाथरूम में जा कर नाहा कर तैयार हो गया. जब नीचे आया तो नेहा दीदी किचन में नाश्ता बना रहा थी .

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , आप किचन में ? मौसी कहाँ हैं ?

नेहा दीदी : गुड मॉर्निंग, माँ की तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी तो मैंने hi उन्हें रेस्ट करने को कहा है . तू बैठ मैं अभी नाश्ता देती हूँ तुझे

अमित : मैं पहले मौसी से मिल कर अत हूँ .

मुझे मौसी की चिंता हो रही थी कहीं रत की ठुकाई से ज्यादा hi तो तकलीफ नहीं हो गयी उन्हें. मैं यानि सोचता हुआ उनके कमरे में आया तो वो अभी भी निघ्त्य में बीएड पर करवट क बल लेती हुई थी. मैं दरवाज़ा बंद कर क उनके पास आ कर बैठ गया .

अमित : मौसी ??

रीता मौसी : हम्म्म उठ गया तू ? नेहा नाश्ता बना रही है जा नाश्ता कर ले.

अमित : मौसी आप की ये हालत मेरी वजह से हुई है न . मुझे माफ़ कर दीजिये .

रीता मौसी : हस्ते हुए ) तू भी पूरा बुद्धू राम है . कुछ नहीं हुआ है मुझे . पहली बार में तो आगे लेने पर भी बुखार आ जाता है और मैंने तो पीछे लिया है वो भी इतना बड़ा मुसल. असर तो होना hi था. रेस्ट करुँगी तो सब ठीक हो जायेगा. हाँ आज रत मैं कुछ नहीं करने दूंगी हाँ .

रीता मौसी ने खुद hi मुझे अपने ऊपर झुकाते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . मैंने भी उनके चुके थम लिए और उन्हें मसलते हुए किश करने लगा .

रीता मौसी : उम्मम्माह चल अब नाश्ता करले जा के फिर तुझे कॉलेज भी जाना है .

अमित : पहले मुझे देखना है क आपकी हालत कैसी है .

इतना कह कर मैंने मौसी को बीएड पर पेट क बल

कर दिया और उनकी निघ्त्य उनकी कमर तक ऊपर उठा दी. मौसी ने नीचे पेंटी नहीं पहनी थी जिससे उनके गोर चूतड़ नंगे मेरे सामने आ गए . मैंने दोनों चूतड़ों को फैला कर देखा तो गांड क सुराख़ क आसपास सूजन आ चुकी थी. मेरे इस तरह से चूतड़ फ़ैलाने से मौसी को दर्द होने लगा .

रीता मौसी : कक्कक्स. क्या करता है कोई आ जायेगा कमरे में .

अमित : दरवाज़ा बंद है आप चिंता मत करो. आप क पास कोई क्रीम है यहाँ लगाने क लिए ?

मैंने मौसी से पूछ कर क्रीम उनकी गांड में लगा दी और उनके गोर चूतड़ों को एक बार किश करने क बार उनकी निघ्त्य नीचे कर दी . फिर मैं उन्हें किश करने क बाद बहार आ गया और नेहा दीदी क हाथों क परांठे खाये. करुणा दीदी भी आ गयी थी और मेरे साथ hi नाश्ता करने लगी. उधर से कल्पना भी दीदी को लेने आ गयी .

कल्पना : अरे वह दीदी आज आप नाश्ता बना रही हैं . फिर तो एक और बना hi लीजिये मैं अमित तो अमित क हिस्सा क ले रही हूँ .

इतना कह कर कल्पना ने मेरे साथ बैठते hi मेरी प्लेट से परांठे उठा कर खाना शुरू कर दिया.

कल्पना : और कैसी हो दीदी आप ? समझाओ अपने इस भाई को रोज़ गायब रहता है कॉलेज से. किसी दिन इसकी गुमशुदगी क पोस्टर लग जायेंगे बता देती हूँ.

करुणा दीदी क्यों क्या हुआ ?

कल्पना : क्या हुआ ? ये क्लास में अत hi कहाँ है . ऊपर से हमारा भी दिल नहीं लगता . ये नहीं होता तो कैंटीन में भी बोरिंग hi लगता हुआ सब. आज तो आ रहे हो न कॉलेज

‘ मुझे तो लगता है तेरा hi दिल नहीं लगता इसके बगैर. वर्ण हम सब भी तो होते hi हैं ‘ नेहा दीदी ने मेरी प्लेट में एक और परांठा रखते हुए कहा

करुणा दीदी : मुझे भी यही लगता है दीदी. इसी लिए हर वक़्त ये अमित को लेकर hi कोई न कोई बात करती रहती है.

कल्पना : क्या दीदी आप भी मज़े लेने लगी .

करुणा दीदी : मेरी जान तुम क्या अकेले hi मज़े लेना चाहती हो इसके हाँ?

कल्पना तो करुणा दीदी की बात में hi फास गयी थी . वो कुछ और कहती उससे पहले hi बहार से रीमा और शीना हाथ में शोप्पेर्स पकडे हुए अंदर आ गयी.

शीना : गुड मॉर्निंग एवरीवन , तो नाश्ता हो रहा है. अरे दीदी आप नाश्ता बना रही हैं ? आंटी कहाँ हैं ?

नेहा दीदी : माँ की तबियत आज ठीक नहीं थी तो नाश्ता मैं बना रही हूँ.

रीमा : चिंता से ) क्या हुआ मौसी को?

नेहा दीदी : कुछ नहीं बस कमर में थोड़ा दर्द है तो आराम कर रही हैं.

कल्पना: वैसे कोई ये बताएगा क ये इतनी शॉपिंग किस ख़ुशी में की गयी है?

शीना : ये सब अमित का है .

कल्पना : अमित का ? मतलब ?

शीना : वो कल शाम बुआ और चची क साथ मैं रीमा और रीना दीदी गयी थी इसे साथ लेकर . सब ने अपनी अपनी पसंद क कपडे ले कर दिए इसे . कितने दिनों से कह रही थी पर ये तो बनाने पर बहाने बना रहा था कल आज्ञा काबू और हो गयी शॉपिंग.

कल्पना : मुझे बता देती तो मैं भी आ जाती. मेरी तो आज तक इसने कोई बात नहीं मणि.

करुणा दीदी : अरे यार तुम नाराज़ क्यों होती हो. मुझ ले चलो शॉपिंग पर मैं फ्री हूँ.

कल्पना : आप तो जब कहोगी ले जाउंगी मैं तो इसकी बात कर रही हूँ मर. विप . हर बार बहाना तैयार होता है इसका.

अमित : ाचा इस हफ्ते में पक्का चलेंगे प्रॉमिस. अब तो खुश ?

कल्पना: देखलो दीदी सबके सामने इसने प्रॉमिस किया है . अब अगर इसने प्रॉमिस तोडा तो

करुणा दीदी : तो मिलकर इसकी पिटाई करेंगे.

नेहा दीदी : ख़बरदार किसी ने मेरे भाई को हाथ भी लगाया तो.

कल्पना : तो कह दीजिये अपने भाई से क प्रॉमिस नहीं टूटना चाहिए वर्ण इसकी टाँगें टूटेंगी .

नेहा दीदी : तुम सब बातों में लगी हो टाइम देखो हम लोग लेट हो रहे हैं चलो जल्दी से.

करुणा दीदी : दीदी पहले देख तो ले क्या क्या शॉपिंग की है कल इसने.

नेहा दीदी : ये सब कहीं भगा नहीं जा रहा है . आ कर देख लेना.



नेहा दीदी ने सरे शोप्पेर्स उठा कर अपने कमरे में रख दिए . करुणा दीदी स्कूटी पर नैना दीदी की तरफ चली गयी. नेहा दीदी को कल्पना अपने साथ ले गयी . मुझे भी वो कह रही थी साथ चलने को पर मैंने कह दिया क मुझे जाना है कहीं. खैर शीना और रीमा एक कार में कल्पना और नेहा दीदी एक कार में चली गयी. मैंने चरों को कॉलेज जाने को कह दिया और खुद राधा को लेने उसके घर की तरफ चल दिया .
 
भाई लोगी लिख रहा हूँ कोशिश है 10:30 से पहले अपडेट दे दूँ
 
अपडेट 170



जैसे hi मैं दिव्या मौसी क घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुनते hi दरवाज़ा खुल गया और सामने राधा क साथ दिव्या मौसी भी कड़ी थी. दोनों क चेहरे पर स्माइल थी मगर राधा क चेहरे पर आयी ख़ुशी देखने वाली थी . राधा दौड़ कर मेरे पीछे बैठ गयी और दिव्या मौसी भी पास आ गयी. मौसी ने आते मेरे माथे को चूम लिया .

दिव्या मौसी : शुक्र है तुझे टाइम मिला इधर भी आने का वर्ण मुझे तो लगा था तू भूल गया अपनी इस मौसी को .

अमित : कैसी बातें करती हो आप मौसी , मैं भला आपको भूल सकता हूँ? मैं खुद को भूल सकता हूँ आपको नहीं. आप कहती हैं तो मैं आज रीता मौसी क घर से यहाँ आ जाता हूँ रहने.

दिव्या मौसी : दिल तो मेरा भी यही चाहता है क तू बस मेरे पास रहे पर दीदी भी तो तुझे इतना प्यार करती हैं . मैं नहीं चाहती उनका दिल दुखे. पर थोड़ा सा टाइम निकल कर अपनी शकल hi दिखा जाया कर दिल को तसल्ली मिलती है तुझे देख कर.

अमित : मौसी आप भी तो आ सकती हैं न मुझे अपना ये प्यारा सा चेहरा दिखने जिसमे मैं खुद को देखता हूँ .

मेरी बात पर दिव्या मौसी क चेहरे पर ख़ुशी और शर्म दोनों hi आ गयी .

राधा : वैसे हमें कॉलेज भी जाना है मर.

अमित : हाँ सॉरी सॉरी , ाचा मौसी हम चलते हैं .

इतना कह कर मैंने बाइक चला दी. दिव्या मौसी हमें जाते हुए हाथ हिलती रही . मैं बाइक थोड़ा तेज़ चला रहा था क्यूंकि हम लेट हो रहे थे .

राधा : इतनी तेज़ क्यों चला रहे हो आराम से चलो न.

अमित : हम लेट हो रहे हैं राधा

राधा : कोई बात नहीं तुम आराम से चलाओ. मुझे लये होने मंज़ूर है . वैसे थैंक्स . मैं बहुत खुश हूँ क तुम मुझे लेने आये .

अमित : इसमें थैंक्स की क्या ज़रूरत है ? हम घर से hi लेट हो गए थे तो मैंने कल्पना से कह दिया क मैं राधा को लेता आऊंगा . कार में टाइम ज्यादा लग जाता ट्रैफिक की वजह से.

राधा : तुम रोज़ ऐसे hi मुझे लेने आ जाया करो . मुझे ाचा लगता है.

अमित : अजीब हो तुम भी , लोग कार में बैठना पसंद करते है और तुम हो क बाइक में धुल मिटटी छनकती फिरती हो.

राधा : मैं ऐसी hi हूँ. जहाँ तुम वहां मैं. तुम अगर मुझे कार में देखना चाहते हो तो कार ले आओ .

अमित : क्या ?

राधा : सामने देखो किसी पर चढ़ा मत देना .

इतना कह कर राधा मेरे साथ चिपक कर बैठ गयी मेरी कमर में हाथ डाले.

थोड़ी देर में हम कॉलेज पहुँच गए. बाकि सब भी अभी पहुंचे hi थे तो राधा जल्दी से रीमा और नेहा दीदी क साथ अपनी क्लास क लिए निकल गयी. शीना भी हमारे साथ चल पड़ी अपने ब्लॉक की तरफ . मैं और कल्पना जब अपनी क्लास में पहुंचे तो चंद्रकांता म क्लास में आ चुकी थी और अटेंडेंस लगा रही थी . मुझे और क कल्पना को देख कर वो गुस्से से देखने लगी पर उसने कहा कुछ नहीं . चंद्रकांता क बाद मंजू म लेक्चर क लिए आ गयी . मुझे देख कर उनके चेहरे पर स्माइल थी. तीसरा लेक्चर हमारे पक्के अड्डे पर था यानि क कैंटीन में . कैंटीन में रोज़ की तरह एक दूसरे क साथ हंसी मज़ाक में टाइम निकल गया . कैंटीन का टाइम ख़तम होते होते नीरज भैया भी कैंटीन में आ गए .

अमित : मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ भैया .

नीरज भैया : अरे माफ़ करदे भाई मुझे पता है तू इस लिए नाराज़ है क मैं गाओं नहीं आया उस दिन. पर यार उस दिन पापा की तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी तो इस लिए नहीं आ सका

अमित : क्या हुआ अंकल को ?

नीरज भैया : डॉ कह रहा था क हार्ट कमज़ोर हो गया है और बैठे बैठे सारा दिन एसिडिटी बनती रहती है जिसकी वजह से छाती में दर्द रहने लगी है . अब तो मुझे भी दुकान पर जाना पड़ता है बीच बीच में. तू बता तू प्रैक्टिस पर क्यों नहीं आ रहा ? कोच साहब पूछ रहे थे.

अमित : भैया आप अंकल का ख्याल रखो . और मैं इस लिए नहीं आ रहा हूँ क थोड़ी सी चोट लग गयी थी . अभी वो पूरी ठीक नहीं हुई

नीरज : ाचा तू पहले अपना ध्यान रख फिर आ जाना प्रैक्टिस पर . मैं कोच सर से बात कर लूंगा.

कुछ देर और हमने बात की और फिर बेल्ल बजते hi अपनी क्लास में चले गए. कॉलेज में और कुछ खास न हुआ सिवाए शॉपिंग की बातों क जिन पर राधा ने भी खूब मज़े लिए . कॉलेज से छुट्टी होते hi मैं अपने फ्लैट की तरफ चल दिया . आज रुपाली आंटी से मिलने का वडा हो कर दिया था पिछली रत. उनकी क्या प्रॉब्लम है ये उनसे मिल कर जानना था मुझे .

दूसरी तरफ सप ऋतू सिंह अपने ऑफिस में बैठी थी . रत को जिन लड़कों ने बदतमीज़ी की थी थी सुन सब की अचे से ठुकाई करवाई थी ऋतू सिंह ने . एक तो उसे नफरत थी ऐसे लोगों से दूसरा जिनके साथ बदतमीज़ी की गयी थी वो ऋतू सिंह क अपने hi निकले तो डबल दोसे बनता hi था. मगर इसके इलावा अमित की बेरुखी से भी वो गुस्सा थी और उन आवारा मुश्टण्डों को थर्ड डिग्री hi मिल गयी. रत भर ऋतू अपनी पिछली ज़िन्दगी क बारे में सोचती रही और सोने क लिए वाइन का सहारा लेना पड़ा. अब भी वो अंदर से यही सोच रही थी क उसे अपनी सहेली मंजू से मिलना चाहिए. ऋतू सिंह की ज़िन्दगी इतनी वीरान हो चुकी थी क उसे अपना कोई नज़र hi नहीं अत था. ऐसे में मंजू उसे एक उम्मीद की किरण नज़र आयी जिसके साथ वो अपने दिल की बातें कर सकती थी . वर्ण इस नौकरी क इलावा और तो कुछ था hi नहीं. परिवार में भाई भाभी तो थे पर उनसे भी बोलचाल काम hi थी. ऋतू सिंह अकेली hi रहती थी और ज़िन्दगी में ऐसा कोई भी न था जिसे वो अपना कहे. मंजू उसकी सबसे अछि दोस्त थी. इस लिए जब मंजू से मिलना हुआ तो उसका अकेला दिल उसे मंजू क पास जाने को कहने लगा. ऋतू सिंह का अकेलापन hi उसका सबसे बड़ा दुश्मन था . इतने सैलून से अकेलेपन ने ऋतू सिंह को इमोशनलेस कर दिया था. अपनी ज़िन्दगी क बुरे एक्सपीरियंस से उसके स्वाभाव में कड़वाहट आ गयी थी . मर्दों से तो नफरत हो hi चुकी थी अब किसी और से भी कोई रिश्ता नहीं था उसका. खुद को कहीं खो hi चुकी थी ऋतू सिंह . वो ज़िंदा तो थी पर ज़िन्दगी का एहसास नहीं था . बस नौकरी और वर्दी hi उसकी ज़िन्दगी बन चुकी थी . मगर इस वर्दी क पीछे जो उसकी पर्सनल लाइफ थी वो तो जैसे कहीं थी hi नहीं . पर मंजू क रूप में ऋतू सिंह को जैसे अपनी खोयी हुई ज़िन्दगी मिल गयी . इस लिए वो मंजू क साथ जी भर कर बातें करना चाहती थी . अपना सारा दर्द उसके साथ बाँटना चाहती थी. ऊपर से मंजू की ज़िन्दगी में बहुत कुछ गलत हो चूका था जो वो जानना चाहती थी. मंजू कितनी नाज़ुक और इमोशनल थी ये ऋतू अछि तरह जानती थी . इस लिए उसे मंजू की हंसी क पीछे छुपा उसका दर्द भी महसूस हो गया था जब उसने उसके सवाल को ताल दिया था. ऋतू सिंह ने सोच लिया क आज वो हर हल में मंजू से ज़रूर मिलेगी . दूसरा उसके दिल में कहीं न कहीं अमित की नज़रों का वो रूखापन और उसका बेहेवियर उसे परेशां कर रहा था. अमित की मंजू से नज़दीकी उसके काम आ सकती थी . ऋतू ने जैसे तैसे अपने ज़रूरी काम दोपहर तक देखे और फिर लंच करने क लिए वो अपनी सहेली क घर क लिए निकल गयी.

घर पर मंजू कॉलेज से आ कर अपने कमरे में सुस्ता रही थी और अभी तक न उसने लंच किया था न hi कपडे बदले थे. बेल्ल बजने पर वो उठी और जा कर दरवाज़ा खोला . सामने अपनी बेस्ट फ्रेंड ऋतू को खड़ा देख कर वो ख़ुशी से उछाल पड़ी और ऋतू गले लगा लिया .

मंजू : ऋतूउउउ !!!!!

ऋतू singh:are बस बस अब अंदर तो आने दे यहाँ सब देख रहे हैं .

मंजू ने ध्यान दिया तो बहार ऋतू सिंह क साथ आये पुलिस वाले उन्हें hi देख रहे थे. ऋतू सिंह की लाल बत्ती वाली बड़ी गाड़ी क साथ एक पुलिस जीप और थी. ऋतू ने सबको बहार hi रुकने को कहा था . मंजू ने बात समझते हुए ऋतू को छोड़ा और उसे अंदर आने दिया. ऋतू सिंह अपनी यूनिफार्म में थी. अंदर आते hi उसने अपनी कैप और स्टिक एक तरफ राखी और जैसे hi मंजू दरवाज़ा बंद कर क पलटी उसने ने मंजू को बाँहों में भर लिया . मंजू एक पल को हैरान हुई और फिर उसने भी ऋतू को बाँहों में कास लिया.

ऋतू सिंह : अब बोल मेरी बन्नो बहार बड़ा जोश दिखा रही थी .

ऋतू सिंह ने मंजू को अपनी बहिन में पूरा कास लिया था जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को कास लेता है. ऋतू सिंह ने खुद को काफी मजबूत बना रखा था और मंजू तो नाज़ुक सी थी इस लिए ऋतू की मजबूत पकड़ में बिलबिला उठी.

मंजू : आआ अरे बस कर हड्डियां तोड़ेगी क्या ? ये तूने खुद को क्या बना लिया है ? बिलकुल पत्थर जैसी हो गयी है .

ऋतू सिंह : मगर तू वैसी की वैसी hi है . आज भी फूलों जैसी नाज़ुक. इतने सैलून में भी बदली नहीं तू .

मंजू : चल आ अंदर बैठते हैं , क्या यहीं कड़ी रहेगी ?

ऋतू सिंह : हाँ चल , तूने लंच तो नहीं किया न अभी ? मैं तेरे साथ लंच करने आयी हूँ .

मंजू : नहीं किया , मैं भी सोच hi रही थी क लंच करूँ या नहीं . आज भाभी नहीं हैं तो दिल hi नहीं कर रहा था. पिछले कुछ दिनों से वो hi रोज़ लंच बना रही थी तो आलस हो गया है.

ऋतू सिंह : मतलब ? वैसे वो सब हैं कहाँ ? कोई दिखाई नहीं दे रहा .

मंजू : दिखाई कैसे देगा , अकेली जो रहती हूँ

ऋतू सिंह : तू अकेली रहती है ? वो क्यों ?

मंजू : तू बैठ मैं खाना तैयार करती हूँ फिर बात करते हैं.

ऋतू सिंह : चल मैं भी तेरे साथ किचन में hi चलती हूँ. बड़े दिन हो गए किचन का मुँह देखे.

मंजू : रहने दे तेरी यूनिफार्म ख़राब हो जाएगी.

ऋतू सिंह : तेरे कपडे होंगे न घर पहनने वाले , वही पेहेन लेती हूँ .

मंजू : अरे तू बैठ न मैं कर लुंगी .

ऋतू सिंह : तू शुरू कर मैं आयी .

मंजू : तू बैठ न मैं कर लुंगी .

मंजू और बात करते करते अंदर आ गए थे. मंजू ने भी अभी कपडे बदलने थे तो वो जल्दी से बाथरूम में घुस गयी . बाथरूम में hi उसके ढीले कपडे टंगे रहते थे पहनने क लिए . मंजू अंदर बाथरूम में कपडे बदल रही थी तो ऋतू ने भी सोचा क वो भी कपडे बदल लेती है. वो खुद hi अलमारी से कपडे ढूंढने लगी तो उसकी नज़र कपड़ों क पीछे संभल कर रखे हुए लोअर T-shirt पर पड़ी . लोअर तो ऋतू ने झट से पेहेन लिया पर जब T-shirt का साइज देखा तो वो समझ गयी क ये गेट्स है. कपडे पुराने नहीं थे मतलब कोई पहनता है इन्हे अब भी. ऋतू क मन में एक बार ये सवाल आया क ये किसके हो सकते हैं क्यूंकि मंजू ने बताया था क उसके हस्बैंड तो रहे नहीं . फिर किसके हैं और मंजू रहती भी अकेली है . न चाहते हुए भी ऋतू का पॉलिसीस दिमाग इस बात पर सोचने लगा था. T-shirt को वापिस रखते हुए उसने अपने साइज की T-shirt उठा ली जो शायद मंजू की hi थी और पेहेन ली . मंजू जब बहार आयी तो ऋतू सामने T-shirt और लोअर में कई मुस्कुरा रही थी .

मंजू : तो तू नहीं मानेगी , चल फिर चलते हैं . कितने सैलून बाद आज दोनों एक साथ हैं. यद् है कैसे तू आमलेट बनाया करती थी संडे को मेरे साथ और मैं तेरे लिए कॉफ़ी बनती थी हर रोज़.

ऋतू सिंह : हाँ यार वो भी क्या दिन थे . काश वो टाइम वापिस मिल सके तो मैं सब कुछ देने को तैयार हूँ.

मंजू : हाँ कितना ाचा टाइम था वो पर तू ऐसा क्यों कह रही है? क्या तू खुश नहीं है अपनी ज़िन्दगी से ?

ऋतू सिंह : ये भी कोई ज़िन्दगी है ? ऐसा लगता है जैसे बस नींद क लिए hi टाइम है ड्यूटी क इलावा और कुछ है hi नहीं इसके सिवा.

दोनों सहेलियां बात करते हुए किचन में आ गयी और मंजू ने फ्रिज में से रत की सभी निकल कर गरम करने लगी और अत निकल कर रोटी बनाने की तयारी करने लगी. ऋतू ने भी फ्रिज में रखे अंडे देखे तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

ऋतू सिंह: चल आज मैं फिर से आमलेट बनती हूँ. पता नहीं आखिरी बार कब बनाया था. घर पर तो कुछ करने की ज़रूरत hi नहीं पड़ती , सब कुछ बना बनाया आ जाता है बस मुँह से कहने की ज़रूरत होती है. पर सच कहूं तो अब वो भी ाचा नहीं लगता.

मंजू : पर तू ऐसे एक डैम से अकेली कैसे हो गयी ? अंकल आंटी भैया कहाँ हैं सब?

ऋतू सिंह : एक पल रुक कर यद् करते हुए ) माँ पापा तो एक साथ hi चल बेस एक्सीडेंट में . अभी मुझे ज्वाइन किये साल भी नहीं हुआ था. भैया और भाभी क्सक्सक्सक्स शहर में रहते हैं. साल दो साल में कभी मिलना हो जाता है फॉर्मेलिटी क नाम पर.

मंजू : और जतिन

ये नाम सुनते hi ऋतू क चेहरे पर गुस्से और दर्द क भाव उभर आये जिसे मंजू ने गौर से देख लिया था .

ऋतू सिंह : इस नाम को मैं सुन्ना भी नहीं चाहती मंजू . उस घिनौने इंसान से प्यार करना मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी जिसके लिए मैं अब तक पछताती हूँ.

ऋतू सिंह का चेहरे गुस्से से भर गया था पर आँखों में दर्द से नमी भी आ गयी थी .

मंजू : पर तुम दोनों तो एक दूसरे से प्यार करते थे न ? फिर अचानक ऐसा क्या हो गया जो तू इतनी नफरत करने लगी है उससे.

ऋतू सिंह : जानती है मंजू तू सही थी , तूने मुझे समझने की कोशिश की मगर मैं तुम्हे पुराने विचारों वाली कह कर अपनी सोच पर hi अदि रही . और देख मुझे क्या मिला.

ऋतू सिंह के चेहरे पर आयी हंसी भी जैसे उसके दर्द को छुपा नहीं प् रही थी. मंजू अपनी सहेली का दर्द समझ गयी और उसे अपनी तरफ करते हुए उसे गले से लगा लिया. न चाहते हुए भी ऋतू की आँखों में छुपा बरसों पुराण दर्द धरा बन कर बहने लगा. सबके सामने सख्त और निर्दयी दिखने वाली ऋतू फफक फफक कर रोने लगी. उसने मंजू क कंधे पर सर रख और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी जैसे वो कब से रोना छह रही थी मगर उसके पास एक भी ऐसा कन्धा नहीं था जिस पर सर रख कर वो रो सके. आज उसे अपनी सबसे अछि सहेली वापिस मिली तो वो खुद को रोक न पायी. मंजू उसकी ज़िन्दगी का सबसे खास हिस्सा थी. जिसके साथ वो अपनी हर बात शेयर करती थी. आज मंजू क कंधे ने ऋतू क दिल की तिमोरि में बंद उसके दर्द को जैसे खोल कर बहार निकल लिया था. ऋतू हिचकियाँ ले ले कर रो रही थी और मंजू उसकी पीठ सेहला रही थी. उसे भी एहसास हो गया था क ऋतू अंदर से कितनी भरी हुई है. मंजू ने कुछ देर ऋतू को रोने दिया. और जब वो कुछ शांत हुई तो मंजू ने उसका चेहरा हाथों में थमा . सारा चेहरा आंसुओं से भीग चूका था. ऋतू क आंसू पोंछती हुई मंजू ने उसे पानी पिलाया .

मंजू : लगता है तूने बहुत गहरा ज़ख़्म खाया है . मुझे नहीं पता क तेरे साथ क्या हुआ है पर इतना तो मैं समझ hi सकती हूँ क इसकी वजह जतिन hi है. मुझे वो पहले से hi सही नहीं लगता था इसी लिए तुझे रोकती थी मैं.

ऋतू सिंह : तू सही थी मंजू मैं hi उसे पहचान न पायी. तू जानती है उसने क्या किया मेरे साथ ? मैं सोच भी नहीं सकती थी क वो इतना घटिया निकलेगा . तुझे तो पता है न मैंने कॉलेज ने hi उसके साथ सब कर लिया था. मैं उसे अपना जीवन साथी मन चुकी थी अपना सब कुछ उसे सौंप चुकी थी . पर उसने मुझे धोखा दिया. कॉलेज क बाद तू शादी कर क चली गयी और मैं आईपीएस क्लियर कर क ट्रेनिंग पर. साल बाद जब मैं वापिस आयी तो उसकी हरकतें बदली बदली सी लगी मुझे . मुझे ड्यूटी पर दूसरी जगह जाना पड़ा जहाँ पर जतिन से सिर्फ फ़ोन पर बात होती थी यान वो कभी मिलने आ जाता . पर उसका रवैया बदल चूका था. वो कुछ ज्यादा hi बिजी रहने लगा था. एक डिम मैं छुट्टी ले कर अचानक उसे सरप्राइज देने उसके घर पहुँच गयी तो वहां जो देखा उसे देख कर मेरे पाऊँ नीचे से ज़मीन खिसक गयी . जतिन क घर पर कोई और hi लड़की थी जो शादीशुदा लग रही थी और उसकी गॉड में एक बचा भी था. पहले मुझे लगा क शायद कोई रिश्तेदार होगी पर जब मैंने उसकी जतिन क साथ तस्वीर देखि तो मुझे यकीन नहीं हुआ. मेरी दुनिया hi लूट गयी. जिसे मैं अपना सब कुछ मानती थी उसी ने मुझे धोखा दिया. मैं गुस्से से वहां से लौट आयी. पर वो घटिया इंसान यहीं नहीं रुका. वो फिर मुझे मिलने पहुँच गया और मुझे सफाई देने लगा. जब मैं नहीं मणि तो उसने मुझे मेरी कुछ तस्वीरें और वीडियोस दिखायीं. जो उसने मेरी नॉलेज क बिना खींचे थे. वो मुझे अपनी रखैल बना कर रखना चाहता था. मेरे ओहदे का फायदा उठाना चाहता था. उसके लिए तो मैं सोने क अंडे देने वाली मुर्गी बन गयी थी. मैंने तब तो उसे कुछ नहीं कहा पर फिर मैंने उसकी पूरी इन्क्वायरी करवाई तो पता चला क मैं hi नहीं और भी कई लड़कियों को उसने अपने जाल में फसाया था . जिस लड़की से उसने शादी की थी वो भी एक बड़े बाप की औलाद थी. फॉर मुझे एक और बात पता चली क वो कुछ लड़कियों को कोठे पर बेच भी चूका है बस फिर मैंने उसके साथ वो hi किया जो ऐसे इंसान क साथ होना चाहिए.

मंजू जो अभी तक ऋतू की बातें सुन कर उसके दर्द को महसूस करती आंसू बहा रही थी ऋतू क चुप होते hi उसने उसे ज़ोर से गले लगा लिया और खुद रोने लगी जबकि अब ऋतू शांत थी .

मंजू : रट हुए ) इतना बड़ा धोखा दिया उसने तुझे ? मेरा दिल कहता था क वो गलत इंसान है पर उस वक़्त न तुम कुछ समझ पायी न मैं . उसने मुझसे भी मज़ाक मज़ाक में छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी पर मुझे लगा वो जीजा साली क रिश्ते से ऐसा कर रहा है. पर अब समझ आ रहा है क उसके इरादे गंदे थे. ऐसे लोगों को तो कड़ी कड़ी से सजा मिलनी चाहिए.

ऋतू सिंह : तू क्यों रो रही है ? चुप हो जा तू. उसे सजा मिल चुकी है.

मंजू : मतलब ?

ऋतू सिंह : ऐसे जानवर को खुला छोड़ कर मैं किसी और की ज़िन्दगी बर्बाद करने का उसे मौका नहीं देना चाहती हुई . इस लिए मैंने खुद hi इंसाफ कर दिया. उसकी लाश तक नसीब नहीं हुई किसी को.

मंजू : तुमने अपने हाथों से ????

ऋतू सिंह : हाँ , मैंने साँचा शायद उसके खून से अपनी आत्मा परे लगे दाग मिटा सकूँ पर ऐसा हो नहीं सका. वो आज भी एक ज़ख़्म की तरह मेरी आत्मा पर लगा हुआ है.

मंजू : मैं समझ सकती हूँ तेरा दर्द.

ऋतू सिंह : तेरे सिवा और कोई समझ भी नहीं सकता . इसी लिए तो आज तक मैंने ये बात कभी अपने आप से भी नहीं की . मैं बहुत अकेली हो गयी थी मंजू बहुत अकेली. कभी कभी लगता था क खुद को hi ख़तम कर लूँ पर फिर सोचा क समाज में पता नहीं और कितने ऐसे hi जतिन होंगे जो कितनी मासूम ज़िंदगियाँ बर्बाद कर देंगे बस फिर ड्यूटी को हो अपना करम अपना धरम समझ लिया और तब से यही करती आ रही हूँ .

मंजू : क्या तुझे कभी कोई ऐसा नहीं मिला जो तुझे कभी अपने काबिल लगा हो ? मेरा मतलब है तुमने शादी क्यों नहीं की ?

ऋतू सिंह : शादी !!! शादी मेरे नसीब में hi नहीं है. जब तक माँ पापा थे वो लड़के देखते थे और मैं मन कर देती थी क्यूंकि तब मेरे लिए जतिन hi सब कुछ था. पर उनके जाने क बाद तो जैसे कुछ रहा hi नहीं. एक दो बार भैया ने अपने एक दो दोस्तों और भाभी क भाई क साथ मेरा रिश्ता करने की कोशिश की मगर मैं समझ गयी थी क वो सब मेरा फायदा उठाने क लिए कर रहे थे . इसी लिए भाभी और भाई से भी रिश्ते बिगड़ गए. हाँ फिर एक पसंद आया था मेरी तरह hi वो भी पुलिस अफसर था और मुझे पर्पस भी किया था उसने पर फिर जल्द hi उसका चेहरा भी सामने आ गया . उसके बाद तो जैसे सब मर्द मुझे एक जैसे hi लगने लगे. जहाँ भी जाती सबकी गिद्धों जैसी नज़र अपने ऊपर महसूस करती . चाहे सीनियर हो या जूनियर सब की नज़र बस औरत क अंगों पर hi होती है. मुझे परेशां कर क कई सीनियर्स ने भी मुझे अपने नीचे लेन की कोशिश की पर ऋतू सिंह हमेशा अपना रेसिग्नेशन जेब में रखती है . और इन जैसे बहसें को जुटे की नोके पे.

ऋतू सिंह ने आखरी लाइन हस्ते हुए कही तो मंजू क चेहरे पर भी हंसी आ गयी.

मंजू : तू आज भी वो hi ऋतू है, लड़कों का गाल सेक देने वाली. ऐसे hi रहा कर. पर मुझे बहुत बुरा लग रहा है . तुझे जब मेरी ज़रूरत थी तब मैं तेरे साथ नहीं थी. तूने कितना कुछ सहा है.

मंजू ने ऋतू को फिर से गले लगा लिया तो ऋतू ने भी उसे प्यार से गले लगाया और उसे प्यार से चूमती हुई बोली

ऋतू सिंह : मैं तो पहले से hi स्ट्रांग थी इस लिए सब सेह गयी. पर तेरे साथ क्या हुआ वो नहीं बताएगी मुझे? तू तो शुरू से hi कितनी कोमल थी फिर तुमने कैसे ये सब .....

मंजू : छोड़ मेरी बात , मैं वो सब भूल चुकी हूँ और उसे यद् करना भी नहीं चाहती .

ऋतू सिंह : पर मुझे जानना है.

मंजू : देख पहले अब रोटी बना ले वर्ण दोनों भूखी रह जाएँगी. फिर कहेगी क मंजू ने भूखे पेट वापिस भेज दिया.

दोनों फिर जल्दी से अपना काम ख़तम करने लगीं. ऋतू ने अपनी स्पेशल आइटम आमलेट बना लिया और मंजू ने जल्दी से गरम गरम रोटीआं उतर कर रत की पड़ी सभी गरम कर क प्लेट में दाल ली और दोनों सहेलियां खाने का सारा सामान ले कर हॉल में आ गयी. कितने सैलून बाद आज दोनों एक साथ थी और पुराने दिनों को यद् करती हुई वो बिलकुल कॉलेज की लड़कियों की तरह बेहवे कर रही थी.

ऋतू सिंह : अब तो खाना भी हो गया चल अब तू बता .

मंजू : शादी तो तेरे सामने hi हुई थी, बड़े भैया ने अपने गले से उतर कर दूसरे क गले में बाँध दिया जैसे क मैं कोई बोझ थी उनकी ज़िन्दगी में. और शायद यही सच भी था क्यूंकि मुझे कभी अपना तो समझा hi नहीं था उन्होंने. भाई तो बस पवन भैया hi थे. शादी क बाद सोचा था क शायद कुछ ाचा होगा मेरी ज़िन्दगी में. जैसा हर लड़की सोचती है सपने देखती है मैं भी सपने सजा क अपने ससुराल गयी थी. पर मेरी बदकिस्मती ने वहां भी मेरा साथ नहीं छोड़ा. मेरे पति को प्यार तो करना hi नहीं अत था. मैं सिर्फ उनके लिए कोई खरीदी हुई गुलाम hi थी जैसे. जब चाहा अपनी मर्ज़ी कर्ली जैसे चाहा सकते मॉल कर लिया . खुद तो अपना काम कर क सो जाते और मैं समझती थी शायद एहि होता है शादी का मतलब . मैंने कभी उनसे न कोई सवाल किया न विरोध. वो जैसे भी थे मेरी ज़िन्दगी उन्ही से थी. मगर शादी क कुछ महीनो बाद hi वो बीमार रहने लगे. बाद में पता चला उन्हें पहले से hi कोई बीमारी थी . बिना कुछ जाने मुझे उनके साथ बिआह दिया गया. अभी शादी का छुड़ा भी न उतर था क सुहाग की चूड़ियां टूट गयी. बड़े भैया ने एक बार भी मुझे मायके आने को न कहा . ससुराल में सास और देवर hi थे. मायके से तो किसी ने हल भी न पूछा मज़बूरी में ससुराल में hi रहना था . मगर वो भी नरक लगने लगा जब देवर की गन्दी नज़र अपने जिस्म पर महसूस होने लगी. बहाने बहाने से वो मुझे छूने लगा था और सास तो जैसे कुछ भी देखती hi नहीं थी. वो मुझे hi मनहूस कहती रहती थी. बड़े भैया मैंने शिकायत की भी पर उन्होंने मेरी कोई मदद नहीं की. एक रत मेरे देवर ने मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की . ये भगवन की hi कृपा थी क उसका पैन फिसल गया और उसको चोट लग गयी जिससे मैं बच गयी वर्ण उस रत वो मेरे साथ अपनी मर्ज़ी कर लेता. सुबह सास उल्टा मेरे hi पीछे पद गयी क मैंने देवर पर हमला किया है. बस उस दिन मैंने हिम्मत कर क घर छोड़ दिया. मायका तो मेरा रहा नहीं था इस लिए नारी आश्रम में रहने लगी और फिर अपनी स्टडी क डैम पर टीचिंग की जॉब मिली . बस तब से टीचिंग hi कर रही हूँ. इसी साल इस शहर में आयी हूँ. मेरी ज़िन्दगी तो ख़तम हो चुकी थी. सोचा जब तक साँसे हैं अपने गुज़ारे क लिए टीचिंग कर लेती हूँ और उसके साथ hi कुछ सोशल सर्विस जो थोड़ी बहुत कर सकूँ. ज़िन्दगी में कुछ भी ाचा हुआ hi नहीं पवन भैया क जाने क बाद और ये सब होने क बाद तो मैं जीना hi नहीं चाहती थी. कई बार दिल किया क मर hi जॉन. पर शायद ऊपर वाले को मुझ पर रेहम आ गया और अमित मेरी ज़िन्दगी में आ गया. जानती हो हमारी पहली मुलाकात कैसे हुई? वो अपने दोस्तों क साथ शहर घूमने आया था गाओं से और उस दिन मैं कॉलेज में अपने डाक्यूमेंट्स जमा करवाने जा रही थी क रस्ते में कुछ बदमाशों ने मुझे लूटने की कोशिश की. सिर्फ गहने और पैसे लूटना hi उनकी नियत नहीं थी वो मेरे साथ और भी कुछ करना चाहते थे पर ऐन मोके पर अमित फ़रिश्ते की तरह वहां आ गया और अकेले hi मेरी इज़्ज़त बचाई. मुझे बचते हुए खुद घायल हो गया था वो. और जब मैंने उसका चेहरा देखा तो लगा जैसे मेरे पन्नी भैया hi सामने आ कर खड़े हो गए हों. मैंने उससे अभी अचे से बात भी नहीं की थी वो मुझे अलविदा कह कर चला गया. मैं खुद को कोसती रही क मैंने उसे जाने क्यों दिया . खैर भगवन ने फिर मुझे उससे मिलवा दिया. जब मेरी hi क्लास में वो स्टूडेंट क रूप में मेरे सामने बैठा था. मैंने उसे घर आने को कहा तो वो मेरे घर आया. हैं से होने की वजह से इंग्लिश में थोड़ा वीक था इस लिए मैंने उसे पड़ने की बात की तो वो भी मन गया. और फिर हम रोज़ मिलने लगे. मैंने उसमे अपने भाई को देखने लगी थी और उसने भी मेरी भावना का सम्मान करते हुए मुझे अपनी बहिन मान लिया . मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी ज़िन्दगी से अकेलेपन का अँधेरा हटने लगा हो. पता hi नहीं चाल कब अमित मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा बना और फिर हिस्से से वो ज़िन्दगी hi बन गया. जानती हो आज रीमा शीना रीना रुपाली भाभी सब मेरे पास है और इसकी वजह भी अमित hi है. उसने शीना की इज़्ज़त लूटने से बचाई रीना का भी रपे होने से बचाया और मुझे लगता है रुपाली भाभी की भी कोई मदद की है उसने हो वो बताती तो नहीं पर उनकी आँखों में मैंने अमित क लिए बहुत सम्मान देखा है. कई बार मैं सोचती हूँ क जैसे मेरी साडी ज़िन्दगी की तपस्या का फल मुझे अमित क रूप में मिला है या यूँ कहो क मेरे पन्नी भैया अमित क रूप में वापिस आ गए हैं पर कहीं ज्यादा नए रंग और रिश्ते लेकर

ऋतू मंजू का चेहरा पड़ने को कोशिश कर रही थी . पहले जहाँ पर दर्द था वहां अमित का ज़िकर करते hi ख़ुशी आ गयी थी. और जिस तरह वो अपनी बातों में खोयी अमित का ज़िकर कर रही थी उसे समझते देर न लगी क अमित की जगह कहीं ज्यादा है मंजू की ज़िन्दगी में जितना वो बता रही है.

मंजू : सच कहूं तो अब मुझे ऐसा लगता है क ज़िन्दगी अब मिली है मुझे पहले तो मैं सजा hi काट रही थी . कभी कभी दर भी लगता है क अगर कहीं किस्मत ने उसे भी मुझसे छीन लिया तो ..... तो ये मेरी ज़िन्दगी का आखिरी ज़ख़्म होगा.

मंजू ने आखिरी बात को जिस तरह रुक कर कहा था उससे साफ ज़ाहिर था क वो क्या कहना चाहती है . और ऋतू अचे से समझ गयी थी.

ऋतू सिंह : तेरे साथ इतना कुछ हो गया ??? तू तो फूलों से भी नाज़ुक थी और तूने इतना सहा ?? पवन भैया से तो मेरा ज्यादा मिलना न हुआ था पर इतना जानती हूँ क वो तुम्हे बहुत प्यार करते थे. मगर तेरे बड़े भैया का तेरे साथ ऐसा रिश्ता है ये सुन क मुझे उनसे नफरत होने लगी है. भला ऐसा भी कोई करता है अपनी बहिन क साथ . ाचा किया तूने जो अपना ससुराल छोड़ दिया. वैसे एक बात तो बता तू यहाँ अकेली रहती हैं या कोई और भी रहता है तेरे साथ ?

मंजू : और है hi कौन ? रुपाली भाभी और बचे अभी कुछ हफ़्तों से मिलने आने लगे हैं. मगर वो यहाँ रहते नहीं . हाँ पुछले कुछ दिन मैं ठीक नहीं थी तो भाभी यहाँ रह रही थी मेरा ध्यान रखने क लिए .

ऋतू सिंह : तो फिर तेरी अलमारी वो मरदाना कपडे ...

मंजू : अमित क हैं . वो स्टेडियम से सीधा यहीं आ जाता था पसीने में लथपथ . तो मैंने hi कुछ आरामदायक कपडे ला कर रख दिए थे उसके लिए . पर आज कल शायद उसे कोई चोट लगी है जिसकी वजह से वो स्टेडियम नहीं जा रहा.

ऋतू सिंह : तू मेरी सहेली है मंजू , जो भी बात है मुझे खुल कर बता सकती है तू बिना किसी दर क. मैं समझ रही हूँ क अमित तेरे लिए कितना खास है . पर तेरा उसके साथ रिश्ता क्या उसी हद तक है जहाँ तक मैं सोच रही हूँ ??

ऋतू की बात पर मंजू ज़रा सी भी घबराई नहीं . क्यूंकि वो उसकी पक्की सहेली थी जिसके साथ वो अपनी हर बात कर सकती थी . ऋतू की बात पर मंजू क चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों hi आ गयी जिसे ऋतू ने भी देख लिया.

मंजू : मैं जानती हूँ तू किसी से नहीं कहेगी. और सच कहूं तो मैं खुद भी ये बात किसी से करना चाहती थी जो मुझे समझे . और तुझसे ज्यादा तो और कोई हो hi नहीं सकता मुझे समझने वाला. मैंने कहा न वो मेरी ज़िन्दगी बन चूका है. वो मेरे लिए सब कुछ है. प्यार क्या होता है इसका एहसास उसी ने मुझे करवाया है . पति क साथ तो मैंने कभी खुद को महसूस किया hi नहीं था . मगर अमित ने जैसे मुझे प्यार का हर रंग दिखा दिया . मेरी सूनी ज़िन्दगी में उसने इतने रंग भर दिए क अब ज़िन्दगी जीने लगी हूँ मैं. मैं जानती हूँ वो मुझे बहुत छोटा है और हमारा कोई फ्यूचर नहीं है न hi समाज में इस रिश्ते की कोई जगह. पर उसी ने समझाया क ये समाज कुछ भी नहीं है. क्यूंकि इस समाज ने कभी मेरा दर्द देखा hi नहीं. मुझे नरक से निकल कर स्वर्ग का राटा दिखाया है अमित ने. अब तो यही तमन्ना है क आखिरी सांस जब भी निकले तो अमित की बाँहों में निकले. मुझे उससे और कुछ नहीं चाहिए बस वो मुझे अपने साथ रख ले चाहे अपनी दासी बना कर hi. मैं उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ. और जानती हो वो भी मेरी पूरी इज़्ज़त करता है मेरी परवाह करता है. उसने कभी कोई ऐसी हरकत नहीं की क जिससे कोई मेरे ऊपर उंगली उठाये. सबकी नज़र में वो मेरा स्टूडेंट hi है . पर अकेले में वो मेरा मालिक मेरा सरताज मेरा सबकुछ है. वो मुझे कभी कुछ नहीं मांगता न कोई हुकम देता है पर मैं चाहती हूँ क वो मुझ पर हक़ जमाये मुझे हुकम दे. मेरी ज़िन्दगी क सरे अचे करम या यूँ कहो मेरे भैया की दुआओं का फल है अमित . भगवन से अब यही दुआ मांगती हूँ क जितनी भी ज़िन्दगी है मेरी वो अमित क साथ hi हो. और अगर कहीं उससे दूर जाना पड़े तो ये दिन बस वहीँ धड़कना छोड़ दे

ऋतू सिंह मंजू का चेहरा देखते हुए उसके शब्दों को ऐसे सुन रही थी जैसे उसके सामने कोई दीवानी अपने दीवाने पैन की हद बयां कर रही हो. मंजू का एक एक शब्द उसके दिल से निकल रह था . उसकी आँखों में सचाई की चमक उसके इश्क क जज़्बे को बयां कर रही थी .

ऋतू सिंह : तुझे तो मुहब्बत हो गयी है मंजू . मुझे यकीन नहीं हो रहा क तू इतना टूट कर चाहने लगी है उसे . तू तो कभी किसी की तरफ देखती भी नहीं थी और अब ऐसे लग रहा है जैसे इश्क की कोई नै दास्ताँ लिखने जा रही है तू. तेरी बातों से इतना तो पता चल गया क अमित क लिए तेरा प्यार किस हद तक है. तेरे अमित को मैं अचे से जान चुकी हूँ इस लिए ये भी नहीं कहूँगी क उसे परख ले. क्यूंकि वो सच में अजूबा hi है. सच कहूं तो पहली बार मैंने ऐसा इंसान देखा है जिसने मेरी सोच को गलत साबित कर दिया. बहुत तारीफ सुनी है मैंने अमित की और खुद भी देखा है. तुझे अगर उससे मुहब्बत हो गयी है तो इसमें तेरा कसूर नहीं है उससे तो किसी को भी मुहब्बत हो hi जाएगी . वो बिना किसी मतलब क बिना सो हे समझे किसी की भी मदद कर देता है . पता नहीं तुझे मालूम है क नहीं पर मैंने कॉलेज में hi अमित की तारीफ में जो किस्से सुने हैं उसके बाद तो मेरी नज़रों में भी अमित एक हीरो hi बन गया है . तू जानती है जो कुछ मेरे साथ जतिन ने किया है उससे भी कहीं ज्यादा बुरा तेरे कॉलेज की hi एक लड़की क साथ हो रहा था और उसे भी अमित ने hi बचाया है. उसकी कहानी सुन कर तो मुझे इतना गुस्सा आया क मैं उस लड़के को खुद अपने हाथों जान से कर देती पर उस लड़की ने बताया क अमित उस दरिंदे को सजा दे चूका है. पुलिस में न हो कर भी ये लड़का जैसे सबको इंसाफ दिला रहा है अपने तरीके से. और मैं उसे कितना गलत समझ बैठी थी.

मंजू : गलत समझ बैठी थी ?? क्या हुआ था बताओ मुझे .

ऋतू सिंह : कुछ नहीं यार वो मैं पहली बार अमित से स्टेडियम में मिली थी . मैं नई नई आयी थी यहाँ और सुबह एक्सरसाइज क लिए गयी थी क वहां पाऊँ फिसल गया. ये भी वहीँ एक्सरसाइज कर रहा था . इसने मुझे अपनी गॉड में उठा लिया और मुझे एक डैम से गुस्सा गया बस रख दिया मैंने एक मुँह पर . वो तो शुक्र है वहां कुछ लोग आ गए इसे बचने वर्ण इसकी खातिरदारी अचे से हो जाती. और उसके बाद ...

मंजू : क्या ???? तुमने अमित पर हाथ उठाया ??? तू ऐसे hi किसी पर भी हाथ उठा देती है ??? एक तो उसने तेरी मदद की ऊपर से तुमने उसके साथ ऐसा किया ???? तुझे उससे माफ़ी मांगनी चाहिए . पर उसने तो मुझे इस बारे में बताया भी नहीं कुछ .

ऋतू सिंह मंजू क बदलते भाव देख कर समझ गयी क अगर उसने अगली बात बताई तो मंजू शायद ये बर्दाश्त नहीं कर पायेगी . इस लिए वो चुप कर गयी .

ऋतू सिंह : मैंने कहा न तब मुझे पता नहीं था ऊपर से नई नई आयी थी और पहली मुलाकात में इसने ऐसी हरकत कर दी तो क्या करती मैं? न जान न पहचान सीधा hi गॉड में उठा लिया . भला ऐसा भी कोई करता है ? और ऊपर से मुझे पता चला क उसने कॉलेज में किसी लड़की क साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी फिर मुझे और गुस्सा आया. पर थैंक गॉड कुछ अचे लोग मिल गए और उसकी सचाई मेरे सामने आ गयी . उसके बाद मैंने जो कुछ उसके बारे में जाना फिर मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैंने उससे माफ़ी मांगने की कोशिश भी की पर वो मेरी बात hi नहीं सुन रहा था. और आज तेरे साथ उसके रिश्ते का पता लगा है तो सोच रही हूँ अब किसी भी तरह उसे मन लूँ कहीं ये न हो क अपनी इस साली की गलती की सजा जीजा जी तुझे दे दें .

ऋतू ने ये बात जान बुझ कर मंजू को छेड़ते हुए कही तो मंजू सच में किसी नयी नवेली दुलहन की तरह शर्मा गयी . अमित को ऋतू द्वारा ऐसे जीजा जी कहना मंजू को पानी पानी कर गया . मंजू ने शरमात्व हुए ऋतू को हलके हाथ से थप्पड़ मारा कंधे पर

मंजू : मार खायेगी तू मुझसे

ऋतू सिंह : आये हाय देखो कैसे शर्मा रही है . सड़के जॉन मेरी बन्नो , अब तो जीजा जी को मानना hi पड़ेगा क्या पता थोड़ा सा प्रसाद अपनी इस साली को भी दे दें .

मंजू : बड़ा दिल कर रहा है तेरा प्रसाद लेने का तो ले लेना मेरी तरफ से पूरी छूट है . तुम्हे भी तो पता चले वो क्या बाला है . तेरी चल न बदल दी तो कहना . वैसे भी तुझे सजा भी तो मिलनी चाहिए न जो तूने गलती की है .

ऋतू सिंह : ऐसी क्या खास चीज़ है जिसे तू बाला कह रही है .

मंजू : जैसा वो खुद नज़र अत है उससे भी ज्यादा ताकतवर है वो . देख लेना दिन में तारे दिखा देगा.

ऋतू सिंह : सच कह रही है तू ? वो तो अभी ...

मंजू : बचा नहीं है , बच्चों वाली कर देगा तुझे . अब तो मैं भी देखूंगी कैसे मानती है तू अपने जी जा. जी को .

मंजू ने जान बुझ कर जी जा जी शब्द को दबाकर कहा और आंख मर दी. दोनों सहेलियां जैसे अपने कॉलेज टाइम में hi वापिस पहुँच गयी थीं. एक लेक्चरर थी तो दूसरी आईपीएस अफसर पर इस वक़्त जैसे वो अल्हड लड़कियां बन गयी थी और एक दूसरे को वैसे hi छेड़ रही थी जैसे वो कभी छेड़ती थी.

ऋतू सिंह : ाचा बहुत हो गया मज़ाक . तू अमित से बात मत करना जो भी मैंने हमारे बारे में बताया. और न hi कुछ पूछना उससे. मैं खुद hi उससे बात करुँगी . मैं नहीं चाहती वो मेरी किसी गलती से तुम पर नाराज़ हो .

मंजू : वो ऐसा नहीं है और जानती वो मुझसे बहुत प्यार करता है. मैं जानती हूँ उसकी ज़िन्दगी में एक न एक दिन कोई लड़की ज़रूर आएगी पर इतना भी मुझे पता है क वो मुझे कभी खुद से दूर नहीं करेगा उसने वडा किया है मुझसे. तू फ़िक्र न कर वो तुझे भी माफ़ कर देगा . वो सब को माफ़ कर hi देता है गलती चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो. अब शीना और शिवानी को hi देख लो उन्दोनो ने भी तो उसके खिलाफ इतना कुछ किया था पर फिर भी उसने दोनों को माफ़ कर दिया . तुमने तो अभी कुछ किया hi नहीं . तुम चाहती हो क मैं बीच में न पडूँ तो ठीक है . मैं ऐसे hi ज़ाहिर करुँगी क जैसे मुझे कुछ पता hi नहीं.

ऋतू ( मन में ) अब तुझे कैसे बताऊँ क मैं कितनी बड़ी गलती कर चुकी हूँ . पर मैं उसे मन कर hi रहूंगी . जिसने तुम्हारी ज़िन्दगी में इतनी खुशियां भर दी हैं मैं उसे नाराज़ होने का कोई मौक़ा नहीं दे सकती .

ऋतू सूंघ : हाँ तू ऐसे hi करना . वर्ण वो समझेगा क मैंने अपनी गलती की माफ़ी मांगने क लिए तुझसे सिफारिश की है.



दोनों सहेलियां ऐसे hi बातें करती रही और जैसा की ऐसे में होता है . दोनों सहेलियों को वक़्त का कोई अंदाज़ा hi नहीं था क वो कब से बातों में लगी थी .
 
भाई लोगो आज की छुट्टी रहेगी. लम्बे सफर की चलते लिखने का बिलकुल टाइम नहीं मिला . कल मिलते हैं
 
भाई इंतज़ार करो अभी थोड़ा काम बाकि है
 
अपडेट 171



मैं जैसे hi फ्लैट पर पहुंचा तो रुपाली वहीँ बहार कड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी . सफ़ेद रंग क इस फिटिंग वाले सूट में वो जवान लड़कियों को भी पानी भरने को मजबूर कर दे इतनी खूबसूरत लग रही थी. हलके भूरे कर्ली बल दूध सा गोरा रंग कुदरती चमक क साथ इस उजाले परिधान को जैसे आत्मसात किये था. कानो में सिंपल सी बलि ऑंखें हलके काजल से बड़ी बड़ी लग रही थी और आँखों का वो ग्रे रंग जो रीमा और रीना इन्ही से मिला था . होंठों पर हलकी गुलाबी लिपस्टिक जो उनको और भी खूबसूरत बना रही थी . गले में एक पतली सी सोने की चैन और फिर सलीके से लिया दुपट्टा . गोरी बाँहों में 2-2 सोने क कंगन . 36-30-38 की ज़बरदस्त फिगर. गदराया हुआ उनका ये मदमस्त यौवन रीमा और रीना से 21 hi था . मैंने सर से पाऊँ तक रुपाली आंटी को गौर से देखा. मेरा ध्यान उनके खांसने की आवाज़ से टूटा जो शायद उन्होंने मेरी हालत को देख कर जान बुझ कर hi किया था .

अमित : आए आआप कब आयी यहाँ पर ?

रुपाली : बस अभी अभी आयी हूँ . अब क्या यहीं खड़े रहोगे या अंदर चलें ?

अमित : हाँ हाँ चलिए .

मैंने आगे बाद कर दरवाज़े को चाबी लगायी और दरवाज़ा खोला. मुझे खुद पर hi शर्म आ रही थी क मैं कैसे उन्हें देख रहा हूँ . वो क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में. पहले चाहे मैं उन्हें भोग चूका था पर अब बात और थी. पहले मुझे पता नहीं था क वो रीमा की माँ हैं पर अब सब जानते हुए उन्हें ऐसे देखना मुझे खुद hi गलत लग रहा था . मैं दरवाज़ा खोल कर उन्हें अंदर ले आया और दरवाज़ा बंद करने क बाद उन्हें सोफे पर बिठाया .

अमित : आप क्या लेंगी ? सॉरी यहाँ कोई रहता नहीं है तो बस ये ऐसे hi है .

रुपाली : कोई बात नहीं मैं समझ सकती हूँ . तुम्हे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है मैं घर से hi आ रही हूँ. हाँ तुम कुछ लेना चाहो ले लो फिर हम बात करते हैं .

अमित : नहीं मैं भी सीधा कॉलेज से hi आ रहा हूँ . आप आराम से बैठिये और बताइये क्या बात करनी थी आपको .

रुपाली आंटी कुछ देर आराम से खामोश बैठी अपनी उंगलियां मसलती रही जैसे वो हिम्मत जूता रही हो बात करने की पर कह नहीं प् रही थी .

अमित : क्या बात है आप इतना परेशां क्यों हो रही हैं ? जो भी बात है खुल कर कहिये. मैं अगर आप क किसी काम आ सकता हूँ तो यकीन कीजिये मुझे ख़ुशी होगी .

रुपाली : मैं कैसे कहूं मुझे समझ नहीं आ रही है . पता नहीं तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में .

अमित : मैं आपको अछि तरह से जनता हूँ . आप कुछ भी गलत नहीं कहेंगी . इस लिए जो भी बात है बिना संकोच क कहिये .

रुपाली : अगर बात कोई ऐसी हो जो तुम्हे अछि न लगे तो ?

अमित : तो क्या हुआ , no भी बात है आप बेजिझक कहिये. मैं वडा करता हूँ मैं आपकी किसी बात पर गुस्सा नहीं करूँगा . और अगर मैं आपकी मदद कर सकता हूँ तो ज़रूर करूँगा .

रुपाली : बस तुम hi मेरी मदद कर सकते हो इसी लिए मैं तुम्हारे पास आयी हूँ पर डर्टी हूँ तुम बुरा न मन जाओ

अमित : मैंने कहा न मैं बुरा नहीं मानूंगा . आप बिना डरे अपनी बात कहिये. अगर आप मुझे अपना मानती हैं तो कह दीजिये जो भी कहना है .

रुपाली : अपना मानती हूँ तभी तो तुम्हारे पास आयी हूँ . मेरी ज़िन्दगी में क्या कुछ हो रहा था वो तुम्हे पता hi है . अगर तुम मुझे न बचते तो मैं अभी भी उसी नरक में जल रही होती. आज तुम्हारी वजह से मैं और मेरी बेटियां सुरक्षित और खुश हैं . तुम्हारा ये एहसान तो मैं उतर hi नहीं सकती . पर आज मैं कुछ मांगने आयी हूँ तुमसे .

अमित : आपको मांगने की ज़रूरत नहीं है कुछ भी . आप बस हुकम कीजिये . मैं आपको किसी बात पर इंकार नहीं करूँगा .

रुपाली : तुम तो जानते hi हो मोंटी और उसका बाप मेरे साथ क्या कर रहे थे. कितने सैलून से वो जानवरों की तरह मेरा शरीर नोच रहे थे. मेरी आत्मा तक छलनी हो गयी थी उनकी वजह से . पर तुमने मेरी आत्मा पर लगे उन ज़ख्मों पर मलहम लगा दिया है. चाहे शुरुआत में मुझे तुम भी शुरू ऐसे hi लगे थे पर फिर तुम्हारा एहसास भी प्यार से काम न था. भगवन जनता है मैंने रीमा क पापा क इलावा किसी से कोई रिश्ता नहीं रखा अपनी ीचा से. मोंटी और उसके बाप ने मेरे साथ जो किया वो रपे था. जिसे मैं सेहती रही एक लाश की तरह . पर जब तुमने दूसरी बार मेरे साथ वो सब किया तो न चाहते हुए भी मेरा तन मन इस एहसास को अपनाने लगा था. मैं जानती हूँ ये गलत है . पर इतने सैलून बाद पहली बार तुम्हारी वजह से मुझे उस प्यार का एहसास हुआ जो मैं भूल चुकी थी . और उस दिन क बाद से मैं अंदर hi अंदर वो सब बार बार महसूस करती रहती हूँ. मेरा खुद पर hi काबू ख़तम होता जा रहा है. मैं जानती हूँ ये गलत है. मेरी बेटियां अब शादी क लायक हो गयी हैं और इस उम्र में मुझे ये सब नहीं सोचना चाहिए पर मैं खुद को रोक नहीं प् रही हूँ . मैं सोते जागते बस तुम्हे hi महसूस करती रहती हूँ. तुम्हे अपने सामने देख कर तो मेरी हालत और भी ख़राब होने लगी है कुछ दिनों से. अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा इस लिए यहाँ तुम्हारे पास आ गयी हूँ . मैं जानती हूँ तुम यही सोच रहे होंगे क कितनी बदचलन औरत है जो अपनी बेटी क दोस्त क साथ hi ये सब .... पर मैं सच कहती हूँ मैं ऐसी नहीं हूँ मगर मुझसे अब खुद पर कण्ट्रोल नहीं हो रहा है

इतना कह कर रुपाली आंटी सच में रोने लगी और उनकी आँखों से आंसू बहने लगे . शर्म से उनका सर खुद hi झुक गया था. जबकि मैं उनकी बातों से मुँह खोले ऑंखें फाड़े बस उनकी बातों का मतलब समझ कर हैरान था . पहले हमारे बिच जो कुछ भी हुआ था मैंने उसे अपनी गलती और हादसा समझ कर भुला दिया था पर अब फिर से वो सब करना मेरे लिए पॉसिबल नहीं था . क्यूंकि मैं रीमा से मुहब्बत करता था . और आने वाले वक़्त में रुपाली आंटी क साथ बनाये गए सम्भन्ध रीमा और मेरे रिश्ते में बाधक बन सकते थे . मैं इसी बात की वजह से टेंशन में आ गया था. रुपाली ौंटी को ऐसे रट हुए देखना भी मुझे ाचा नहीं लग रहा था और उनकी बात मन्ना भी सही नहीं था . मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ . कुछ देर चुप रहने क बाद मैंने हिम्मत कर क अपना मुँह खोला .

अमित : आप जानती हैं आप क्या कह रही हैं ? रीमा या रीना को कभी इस बारे में पता चला तो इसका रिजल्ट क्या होगा ? वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में ? मैं पहले hi अनजाने में ये पाप कर चूका हूँ जिसके लिए मैंने आपसे माफ़ी भी मांगी थी पर फिर से वो सब ... क्या आप मुझे माफ़ कर पाएंगी अगर कभी किसी मोड़ पर आपको मेरे बारे में कोई फैसला लेना पड़ा तो ?

मैं सीधा सीधा रीमा का नाम नहीं ले सकता था इस लिए बात को घुमा कर कह रहा था . रुपाली आंटी ने मेरी बात सुन कर अपनी नज़रें ऊपर की और मेरी तरफ देखते हुए बोली

रुपाली : तुमने कोई पाप नहीं किया था और न hi अब के रहे हो . शुरुआत में जो भी हुआ वो एक गलतफहमी थी जो तुम्हे मुझे मोंटी क साथ देख कर हुई थी. कोई भी होता तो वही सोचता जो तुमने सोचा . पर उसके बाद हो तुमने मेरे और मेरी बेटियों क लिए किया उसके आगे वो सब कुछ भी नहीं . तुम चाहते तो बाद में भी मेरे साथ जो चाहे कर सकते थे मगर तुमने नहीं किया और न hi मेरी बेटियों पर गलत नज़र डाली . मैं जानती हूँ तुम बहुत अचे हो . तुम कभी मेरी और मेरी बेटियों की इज़्ज़त पर दाग नहीं लगने डोज . इसी लिए मैंने तुम्हारे सामने अपने दिल की बात राखी है . मुझे सिर्फ तुम hi से आस है और मैं ये सब किसी और क साथ करना भी नहीं चाहती अगर तुम्हे ये सब सही नहीं लग रहा है तो कोई बात नहीं मैं खुद को जैसे तैसे समझा लुंगी . वैसे भी एक विधवा की ज़िन्दगी में ये सब सुख होते hi कहाँ हैं . प्लीज मुझे माफ़ कर देना मैं चलती हूँ

इतना कह कर रुपाली आंटी उठ कर जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया .

अमित : आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया . अगर कहीं किसी मोड़ पर आपको मेरे बारे में कोई फैसला लेना पड़ा तो तन आप इस वजह से मेरे खिलाफ तो नहीं होंगी ?

रुपाली : तुम्हारे खिलाफ तो मैं सपने में भी नहीं हो सकती . हम माँ बेटियों की ज़िन्दगी में सिर्फ एक hi सहारा है जो हमें हर मुसीबत से बचा सकता है और वो हो तुम. और यहाँ मैं खुद आयी हूँ तुमने तो मुझे नहीं बुलाया न . फिर मैं कैसे तुम्हारे खिलाफ हो सकती हूँ ? मेरा यकीन करो मैं तुम्हे कभी अपने लिए परेशां नहीं करुँगी. तुम मेरी किसी बात से परेशान न होना. मैं अपनी बेटियों को भी कभी तुम्हारे खिलाफ कुछ नहीं कहूँगी .

अमित : पर क्या आप इस बात से मुझ पर कभी नाराज़ तो नहीं होंगी ? रीमा शीना और रीना मेरी दोस्त हैं और आपकी बेटियां .

रुपाली : तुम ठीक कह रहे हो , मैं hi बेहाल गयी थी . मुझे माफ़ कार्डो मैं चलती हूँ .

रुपाली आंटी फिर से अपनी आँखों की नमी को साफ़ करती हुई भरी मन से बहार जाने लगी तो

मैंने उन्हें पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लिया . रुपाली झटके से मेरी छाती से आ लगी . उसने नज़रें उठा कर मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा

अमित : कब तक खुद को सजा देंगी आप ? आपको भी तो ज़िन्दगी जीने का हक़ है. आपने बहुत कुछ सहा है . मैं जनता हूँ ये गलत है पर आपके ज़ख्मों पर प्यार का मलहम लगाने से बड़ा और कोई पुण्य हो hi नहीं सकता. फिर भी अगर ये पाप है तो मैं इस पाप को मंज़ूर करता हूँ .

इतना कह कर मैंने रुपाली क होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें किश करने लगा . रुपाली रिस्पांस नहीं दे रही थी शायद वो अभी सकते में थी. मैंने किश तोड़ कर उनकी आँखों में देखा जहाँ अभी भी शुन्य भाव थे. कुछ पल उन्होंने मेरी आँखों में देखा जैसे वो यकीन करना चाहती हों. मैंने सर हाँ में हिलाया तो झटके से उन्होंने मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मेरे गले में बहन डेल वो मेरे होंठ चुम रही थी. मैंने उनकी पीठ और कमर पर अपने हाथ चलने शुरू कर दिए . कुछ देर ज़बरदस्त तरीके से रुपाली आंटी ने किश की और फिर मेरी आँखों में देखते हुए पूछा

रुपाली: तुम सच में दिल से करना चाहते हो न ? कहीं तुम ....

अमित : मैं दिल से ये सब कर रहा हूँ. मैं जनता हूँ अपने बहुत कुछ सहा है और आपका दिल बहुत दर्द समेटे है अपने अंदर जहाँ मैं प्यार भर देना चाहता हूँ. आपको भी ख़ुशी मिलनी चाहिए.

रुपाली : तो मुझे आज अपनी प्रेमिका की तरह प्यार करो ताकि मैं उस प्यार को महसूस कर सकूँ .

अमित : आज आपको इतना प्यार दूंगा क आप को फिर कोई शिकायत न रहे .

इतना कह कर मैंने फिर से रुपाली आंटी क होंठों पर अपने होंठ रख दिए और आंटी ने भी गर्मजोशी से मेरे होंठों को जकड लिया . आंटी वाइल्ड तरीके से किश करने लगी बिलकुल किसी जवान लड़की की तरह . मैंने भी उनका वैसे hi साथ देते हुए उनकी कमर से हाथ उनकी नरम गांड पर रख दिए . गांड सहलाते हुए मैंने दोनों चूतड़ों क नीचे से अब दाल कर उन्हें ऊपर उठा लिया तो आंटी ने उछाल कर अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट ली. मैं उन्हें ऐसे hi गॉड में उठाये कमरे की तरफ चल पड़ा . रुपाली ने नरम चूतड़ मसलते हुए मेरा मन में उनकी गांड मरने की पुराणी इस है फिर से जाग पड़ी मेरा लैंड झटके मरता हुआ खड़ा हो गया .

रुपाली आंटी ऑंखें बंद किये बस मेरे होंठ चुस्ती जा रही थी वो कभी नीचे वाला होंठ चुस्ती तो कभी ऊपर वाला . मैंने उन्हें जा कर बीएड पर लिटा दिया और किश तोड़ कर उनकी गर्दन पर किश की तो उन्होंने मेरी T-shirt को मुठियों में कास लिया और एक सिसकी ली .

रुपाली : cccccccccc उम्म्म्म

मैंने अपने हाथ उनके चुचों पर रख लिए और उन्हें दबाने लगा. मेरे ऐसा करते hi सिसकियों की आवाज़ और तेज़ हो गयी. वो अपने पाऊँ को मेरी कमर से जांघों तक रगड़ रही थी . मैंने उनके गले से दुपट्टा अलग करते हुए उनकी नंगी छाती पर किश किया तो उन्होंने मेरा सर अपनी छाती पर hi दबा दिया . मैंने उनकी पकड़ को ढीला किया और उनके ऊपर से उठते हुए उनका हाथ पकड़ कर उन्हें उठाया तो मेरी बात का मतलब समझ कर थोड़ा सा ऊपर हुई और मैंने उनकी कमीज को जल्दी से उनके धड़ से अलग कर क फेंक दिया. कमीज क नीचे ब्रा भी वाइट था और उसमे कैसे गोर चुके कमल क लग रहे थे . अपनी ब्रा क हुक उन्होंने खुद hi हाथ पीछे कर क खोल दिए और ब्रा भी अपनी बाँहों से निकल दी. इस बार जब उन्होंने मेरी आँखों में देखा तो मुझे उनकी आँखों में गुलाबी डोरे नज़र आये . ब्रा क हैट ते hi दूध क कलश आज़ाद हो कर मेरी आँखों क सामने आ गए थे. गोर रंग क ऊपर गुलाब hi घेरे में वो आधा इंच क गुलाबी निप्पल बड़े hi आकर्षक लग रहे थे . मैंने देर न करते हुए दोनों को हाथों में पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो रुपाली ने भी मेरे गले में बहन दाल कर मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए. मैंने किश करते हुए फिर से उन्हें बीएड पर लिया दिया और अचे से होंठ चूसने क बाद मैं सीधा उन रसीले आमों पर आ गया. एक निप्पल को होंठों में भरते हुए दूसरे निप्पल को उंगली और अंगूठे में पकड़ कर मसल दिया तो एक तेज़ सिसकी रुपाली क मुँह से निकल गयी .

रुपाली : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स

मैंने कुछ देर एक निप्पल को मसलते हुए दूसरे को प्यार किया और फिर ऐसा hi दूसरे क साथ किया . रुपाली खुद hi कभी अपने बाल खींचती तो कभी मेरा सर अपने चुचों पर दबती . मेरे नीचे लेती वो गरम होती तड़प रही थी . दोनों चुचों को अचे से प्यार करने क बाद मैं उनके मांसल पेट पर अपने होंठों से मोहर लगता नाभि तक पहुंचा जो थोड़ी गहरी थी. रुपाली आंटी क पेट मांसल ज़रूर था पर चर्बी केवल उन्हें और कामुक बनाने जितनी hi चढ़ी थी . जब मैंने नाभि पर अपनी जीभ लगाई तो उनके पेट में कम्पन होने लगी. फिर मैंने उनकी सलवार का नाला खोल दिया और उनकी सलवार को दोनों तरफ से खींचने लगा तो उन्होंने खुद hi कमर उठा दी. सलवार को उनके पाऊँ से निकल कर मैंने एक साइड में रख दिया. रुपाली आंटी अब मेरे सामने पूरी नंगी पड़ी थी. उनके इस दूध से सफ़ेद क़यामत बदन पर सिर्फ एक वाइट पेंटी थी जो उनकी योनि को ढके हुए थी. मुझे अपनी तरफ इस तरह घूरता देखा रुपाली को शायद शर्म आ गयी और अपने घुटने मोड़ते हुए उन्होंने करवट ले ली. उन्होंने तो खुद को मेरी नज़रों से बचने क लिए ऐसा किया था पर ये मेरे लिए और भी जानलेवा नज़ारा बन गया था. उनके चूतड़ बहार को निकल कर और भी बड़े लगने लगे . मैं उनकी गांड को देखने में इतना खो गया क पता hi नहीं चला कब मेरे हाथ उनके चूतड़ों को मसलने लगे.

रुपाली : आआअह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स

रुपाली क मुँह से एक और सिसकी निकली मैंने ऐसे hi करवट को लेती रुपाली की पेंटी खींच कर चूतड़ नंगे कर दिए और झुक कर उन बड़े चूतड़ों को फैलते हुए नज़दीक से गांड का छेड़ देखने लगा. गोर चूतड़ों की गहरी घाटी में गुलाबी रंगत का वो छोटा सा छेड़ बता रहा था क वहां अभी तक कोई नहीं गया है. हालाँकि मैंने एक बार वहां करने की कोशिश ज़रूर की थी पर रुपाली ने करने नहीं दिया था. मैंने अपनी जीभ निकल कर उस गुलाबी छेड़ पर लगा दी तो रुपाली क जिस्म को एक झटका सा लगा और मज़े की सिसकी उसके मुँह से निकल गयी

रुपाली : आअह्ह्ह ककक ये क्याआआअह्ह्ह कर रहे हो वो गन्दी जागाआआआहहह है

मैंने अपनी जीब उस छेद पर चलते हुए अपनी ुनगी का एक पूरा उसके करने की कोशिश की जिससे रुपाली क मुँह से और भी तेज़ ऐसी की निकली.

अमित : आपकी कोई भी जगह गन्दी नहीं है . आप सर से पाऊँ तक प्यार क लिए हो और मैं आपके रोम रोम में प्यार भर दूंगा .

रुपाली : आआह्ह्ह्हह्ह ककक मैं भी यही चाहती हूँ ककक हर जगह तुम अपना प्यार भर दो. आज मैं तुम्हे किसी बात क लिए नहीं रोकूंगी आआह्ह्ह्हह्ह

रुपाली आंटी ने इतना कहा तो मैं समझ गया उनका इशारा उनकी गांड की तरफ है बस इतना hi सुन्ना था क लैंड बेकाबू होने लगा. मैंने जोश में अपनी उंगली उनकी कोरी गांड में घुसा दी. आधी ुनगी अन्दर जाते hi वो सिसकती हुई आगे को खिसकी पर मैंने उन्हें दबोचे रखा . मैंने दोनों चूतड़ों को चूमते हुए उन पर दांत भी गाढ़ा दिए . रुपाली कसमसाती हुई सिसकियाँ ले रही थी. मैंने गांड क छेड़ क साथ अभ उससे 2 इंच की दूरी पर छूट क होंठों में भी उंगली घुमा दी जिससे रुपाली की सिसकी और ऊँची हो गयी . मैंने अपनी जीभ अब गांड क छेड़ से छूट क छेड़ पर लगा दी. रुपाली की छूट गीली हो चुकी थी मतलब वो पहले से hi गरम थी . जैसे hi मैंने वहां जीब लगाई तो वो तड़प उठी. और टाँगें फैलते हुए सीधी हो गयी. जहाँ पहले वो शर्म से खुद को छुपा रही थी अब खुद hi मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. पेंटी खुद hi उन्होंने पैन से बहार निकल दी थी. गोरी चिकनी छूट पर एक भी बल नहीं था . शायद आज hi वो सब साफ कर क आयी थी. रुपाली का शरीर इतना कोमल और गोरा था क जहाँ जहाँ से मैं उसे छूटा वहां से वो लाल गुलाबी हो जाता. छूट की फांके भी उत्तेजना से गुलाबी लग रही थी. दोनों फैंको में जीभ घुसते हुए मैंने छूट क डेन को छोड़ना श्रुत कर दिया तो रुपाली ने अपनी जांघों में मेरा सर कास लिया और बल पकड़ कर सर को छूट पर दबती हुई चीखने लगी

रुपाली : खा जाओ इसे आआह्ह्ह कक्कक्स खा जाओ बहुत तंग करने लगी है ये आअह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ये कैसा नशा छ रहा है मुझ पर कक्कक्क्स उम्म्म्म क्या कर दिया है तुमने मुझे आअह्ह्ह आह्हः खा जाओ मुझे मुझे कुछ हो रहा है और ज़ोर से करो और ज़ोररररररररर सीईए आआआह्ह्ह्ह

एक लम्बी ाः क साथ रुपाली का जिस्म अकड़ गया और अपनी कमर हवा में उठती वो मेरे सर को छूट पर दबाये अपना पानी निकलने लगी . छूट से इतना पानी निकला क मेरे चेहरे क साथ बीएड भी गीला हो गया. लगता है मेरे साथ hi आखिरी बार उनका पानी निकला होगा. रुपाली ने सुद्बुध गवा कर ऑंखें बंद किये पड़ी थी और लम्बी सांसें ले कर खुद को शांत कर रही थी. मैंने उनकी गदराया हुई नरम जांघों को चूमते हुए उनकी गोरी चिकनी टांगों को प्यार करना शुरू किया और उनके पाऊँ तक आ गया.

मैंने उठ कर अपने कपडे उतर कर एक साइड रख दिए. अंडरवियर से आज़ाद होते hi लैंड स्प्रिंग की तरह उछलता हुआ फुंकारने लगा. मैंने रुपाली की तरफ देखा तो उनकी नज़र लैंड पर hi थी. रुपाली की टाँगें फैलते हुए मैंने अपनी पोजीशन बनाई और लैंड को छूट पर रगड़ने लगा. छूट पर लगे पानी से लैंड पर भी कुछ चिकनाई आ गयी. लैंड का सूपड़ा थोड़ा सा छूट में फसकर ऊपर निचे करते हुए मैं छूट को गरम कर रहा था .

रुपाली : कक्कक्क्स उम्म्म्म और कितना तड़पाओगे मैं पहले से hi इतना तड़प चुकी हूँ

अमित : आप hi क लिए कर रहा था क आपके ज्यादा दर्द न हो

रुपाली : नहीं होता दर्द तुम बस अंदर करो मैं कौन सा पहली बार इसे अंदर ले रही आआआआअह्हह्ह्ह्हह

रुपाली की बात पूरी होने से पहले hi मैंने धक्का पेल दिया और आधे से थोड़ा ज्यादा लैंड छूट में घुसा दिया. पहले धक्के से hi रुपाली क मुँह से कराह निकल गयी. छूट लैंड पास कास गयी थी. 2 बार लैंड लेने क बाद भी अभी वो मेरे लैंड क काबिल नहीं हुई थी . मैंने रुपाली की टाँगें कंधे पर रख कर उसकी तरफ झुकते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चुके थामे हुए एक और धक्का पेल दिया. इस धक्के क साथ hi पूरा लैंड जड़ तक छूट में समां गया. रुपाली ने मेरी छाती पर हाथ रखे मुझे पीछे धकेलने की कोशिश की पर मैंने मजबूती से उसे अपने नीचे जकड़े रखा. मैंने बिना रुके धक्के मरने शुरू कर दिए और कुछ hi देर में रुपाली क हाथ मेरी छाती से मेरी पीठ पर आ गए और वो मज़े लेने लगी. रुपाली को नार्मल देख कर मैंने किश करना बंद किया और सीधा हो गया. दोनों पाऊँ को पकड़ कर सर की तरफ दबाये मैं घुटनो पर हो गया. इस पोजीशन में रुपाली की कमर बीएड से ऊपर उठ गयी थी और मैं घुटनो पर होकर तेज़ धक्के मरने लगा. रुपाली क चूतड़ों पर टकराती मेरी जांघें कमरे में फट फट फट की आवाज़ करने लगी और साथ hi रुपाली मज़े में सिसकारती मुझे उकसाने लगी.

रुपाली : उम्म्म्म आअह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः ऐसे hi करो और तेज़ करो मुझे ऐसे hi प्यार करो कक्कक्स आह्ह्ह्ह मैं एक आरसे बाद ये महसूस कर रही हूँ और ज़ोर से करो आआह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हह तुम सच में असली मर्द हो जिसे औरत को सही में प्यार करना अत है उम्म्म और तेज़ करो ककक इतना अंदर तक सिर्फ तुम hi पहुंचे हो कितना बड़ा है ये आआह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह उम् मायआ

मैंने कुछ देर इसी पोज़ में धक्के मरे और फिर रुपाली की टंगे छोड़ कर उसको बाज़ुओं से पकड़ कर उठाते हुए खुद पीछे को लेट गया. अब रुपाली मेरे ऊपर थी और लैंड अभी भी छूट में था. मेरी कमर क दोनों तरफ बीएड पर घुटने रखे रुपाली ने मेरी छाती पर हाथ रखे और ऊपर निचे हो कर खुद hi लैंड पर धक्के मरने लगी. रुपाली मस्ती में तेज़ तेज़ अपनी कमर चला रही थी . मैंने उसके लटकते आम पकड़ कर अपने ऊपर झुकाया और एक चुके को मुँह में भर कर दूसरे को मसलना शुरू कर दिया.

रुपाली : ऐसे hi करो खूब चुसो इन्हे आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह इन पर अब सिर्फ तुम्हारा हक़ रहेगा जब चाहो इन्हे प्यार कर लेना ककक उम्म्म्म खाओ जाओ इन्हे

मैंने बरी बरी चुचों को मसलते हुए अपना एक हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया उंगली से उसकी गांड का छेड़ सहलाना शुरू कर दिया . रुपाली इससे और मज़े में आ गयी और तेज़ी से कमर हिलाते हुए चीखने लगी

रुपाली : ये क्या कर रहे हूऊऊऊह्ह्ह ज़ोर से करो आअह्ह्ह्ह मैं हो रही हूँ ाःह aaaahhhhhhhhhh माआआआ

मैंने उंगली को गांड में घुसाया तो एक बार और रुपाली का जिसम अकड़ा और वो पानी छोड़ती हुई मेरे ऊपर hi गिर गयी . मैंने कुछ देर उसे सांस लेने दी. जब वो शांत हुई तो मैंने अपनी कमर नीचे से उछाल कर धक्के मरने शुरू कर दिए पर वो रिस्पांस नहीं दे रही थी . मैंने उसे अपने ऊपर से नीचे उतारते हुए साइड में गिरा दिया और उसने घुटनो पर कर क खुद उसके पीछे आ गया .

अमित : अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाइये

रुपाली : हहहहह रुको थोड़ा ....... अब इसे पीछे से करो .

रुपाली ने मेरे लैंड को खुद hi हाथ से पकड़ कर अपनी गांड पर लगा दिया तो मैं हैरान हो गया क वो सच में मुझे अपनी गांड देना चाहती हैं . मेरा लैंड इतने में hi झटके मरने लगा .

अमित : क्या आप सच में ये करना चाहती हैं?

रुपाली : मुझे पता है तुम्हे मेरी ये कितनी पसंद है . मैंने कहा था न क अगर हम फिर मिले तो मैं तुम्हे तुम्हारा इनाम ज़रूर दूंगी. अब करो मगर ध्यान से करना तुम्हारा ये बहुत बड़ा है . आगे लेने में hi बस हो गयी , पीछे तो मैंने कभी उंगली तक नहीं करि.

अमित : आपको दर्द होगा , मैं चाहे कितना भी आराम से करूँ दर्द तो होगा hi

रुपाली : तुम्हारे लिए मैं हर दर्द सेह लूंगी तुम करो . और मेरी परवाह मत करना जब तक पूरा न चला जाये .

मैंने रुपाली की बात मानते हुए उसे बीएड क किनारे तक खिंचा सिर्फ घुटने hi बीएड पर रहने दिए. दोनों घुटनो को जोड़ कर मैंने उसे पूरा बेंड कर दिया. अब पोजीशन ये थी क रुपाली का पेट घुटनो से लग चूका था और पाऊँ क ऊपर चूतड़ बीएड से बहार को हवा में झूल रहे थे. क्रीम तो कोई थी नहीं इस लिए मैंने छूट में उंगली दाल कर छूट क पानी से गीली कर कर क गांड में चिकनी करने लगा. पहले एक उंगली से मैंने गांड को चिकना किया फिर दूसरी उंगली भी अंदर कर दी.

रुपाली : आह्ह्ह्ह कक्कक्स

अब मैंने दोनों उंगलियां एक साथ गांड में डालने लगा. थोड़ी मुश्किल क बाद जब गांड का सुराख़ थोड़ा खुल गया तो मैंने लैंड को एक बार छूट में घुसा दिया लैंड को चिकना करने क लिए. उसके बाद मैंने जैसे hi सूपड़ा गांड क छेद पर रखा तो रुपाली का शरीर कम्पनी लगा. उसने अपनी गांड टाइट कर ली थी. उसको अब दर लगने लगा था जो जायज़ भी था.

रुपाली : आराम से करना

अमित : आप चिंता मत करो और इसे थोड़ा ढेला छोड़ दो वर्ण आपको दर्द होगा. इसे मुँह में दबा लीजिये

मैंने बीएड पर पड़ी अपनी T-shirt रुपाली को देते हुए कहा . उसे भी पता था क उसके मुँह से चीखें तो निकलेंगी hi. इस लिए उसने अपने मुँह में T-shirt दबाते हुए गांड को थोड़ा ढीला छोड़ा. मैंने लैंड को गांड में दबाते हुए दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया . गांड का छेड़ दबाव न सहते हुए फैलने लगा और सूपड़ा गांड क छल्ले में फास गया.

रुपाली : ह्म्मम्म्म्म घूंणन्न घूंणन्न

रुपाली की चीखें मुँह में कपडा होने से डाब गयी पर वो तड़प कर उठाने लगी तो मैंने उसे उठने नहीं दिया . गांड में लैंड का सूपड़ा जा चूका था अब रुक कर बार बार दर्द देने से ाचा मैंने सोचा एक hi बार में सारा दर्द दे देता हूँ . इस लिए मैंने रुपाली की पीठ पर दबाव बनाते हुए लगातार 3-4 धक्के मर कर पूरा लैंड गांड में घुसा दिया. दर्द से बेहाल होती वो तड़पती रही मुँह में कपडा होने से आवाज़ बहार तो नहीं आई पर उसकी दबी हुई चीखें भी काफी थी उसका दर्द बयां करने क लिए. मेरे अंडकोष छूट से चिपके पड़े थे . मैंने दर्द से कांपते रुपाली क जिस्म पर झुकते हुए उसे चूमने लगा. पूरी पीठ पसीने से भर चुकी थी. मैंने अपने हाथ रुपाली क चुचों पर रख कर उन्हें सहलाना शुरू कर दिया. मगर रुपाली की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं था . लैंड भी ऐसे महसूस हो रहा था क जैसे मुठी में कास क किसी ने पकड़ा हो.

अमित : बस हो गया अब और दर्द नहीं होगा . आप ठीक तो हैं

मैंने रुपाली को हिलाया तो वो कराह रही थी , मैंने उसके मुँह से कपडा निकला और चेहरा एक तरफ किया तो उसकी हालत देख कर मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ. सारा चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था आँख का काजल चेहरे पर बिखर गया था. आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे . मैंने उसका चेहरा साफ़ किया और अपना लैंड गांड से बहार निकलने की कोशिश की तो रुपाली कराह उठी

रुपाली : आआआह्ह्ह्ह maaaaaaaaaa कुछ मत करो कुछ मत आआअह्ह्ह्हह

मेरे थोड़ा सा हिलने से उन्हें दर्द होने लगा था. इस लिए मैं वहीँ रुक गया . रुपाली कुछ देर तक कराहती रही और मैं उनका दर्द काम करने क लिए उनके चुके मसलता रहा साथ hi मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर छूट को सहलाना शुरू कर दिया. जिसका असर कुछ देर बाद नज़र आने लगा. रुपाली की दर्द भरी सिसकियाँ अब मज़े वाली सिसकियाँ क साथ बदल गयी थी . मैंने फिर अपनी दो उँगलियों को उसकी छूट में अंदर बहार करना शुरू कर दिया . जब रुपाली की छूट गीली होनी शुरू हुई तो मैंने अपना लैंड थोड़ा थोड़ा हिलना शुरू कर दिया. . पहले पहले बड़ी मुश्किल से लैंड थोड़ा सा हिल प् रहा था . मैंने थूक का इस्तेमाल करते हुए लैंड की चिकनाई बड़ाई और लैंड अब आधा अंदर बहार होने लगा

रुपाली : ाःह आअह्ह्ह धीरे धीरे करो अभी भी दर्द है. बड़े ज़ालिम हो आराम से नहीं कर सकते थे आअह्ह्ह्ह

अमित : माफ़ कर दीजिये मुझे लगा थोड़ा थोड़ा करने से ज्यादा दर्द होगा तो एक hi बार में कर दिया .

रुपाली : आअह्ह्ह सीसीसी ाचा किया आअह्ह्ह्ह वर्ण मैं इसे ले नहीं पति आअह्ह्ह्ह अब करो अचे से.

इतना सुनते hi मैंने स्पीड बढ़ा दी और लैंड भी और ज्यादा बहार निकल कर अंदर करने लगा. सुपडे तक लैंड खींच कर अब मैं गांड में ठोकने लगा था साथ hi छूट में उंगली करना भी तेज़ कर दिया था. रुपाली इसी पोजीशन में कितनी देर से थी इस लिए वो थकने लगी थी तो मैंने उसे खिंच कर फर्श पर खड़ा कर लिया और कमर को थम कर तेज़ तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए .

रुपाली : ाःह आअह्ह्ह ऐसे hi करते रहो आआह्ह्ह मैं फिर से होने वाली हूँ आआह्ह्ह ाःह और ज़ोर से करो

मैं भी जोश में आ गया और जांघों क जोड़ में हाथ दाल कर रुपाली को ऊपर उठा लिया जिससे उसके पाऊँ ज़मीन से उठ गए . गिरने से बचने क लिए उसने अपने हाथ बीएड पर रख लिए. रुपाली की हाइट मुझसे थोड़ी काम थी इसी लिए मैंने जोश में उसे थोड़ा ऊपर उठा लिया था और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. गांड की टाइट पकड़ से मेरा भी पानी निकलन को हुआ . तो मैंने ऐसे hi उसे ज़ोर से पकड़े लैंड को गांड में आखिरी छोर तक घुसा दिया और पानी उसकी गांड में भरण शुरू कर दिया. रुपाली का पानी भी निकल गया था . वो भी खुद को संभल नहीं पायी और मैं उसे लिए ऐसे hi बीएड पर गिर पड़ा. मेरा लैंड अभी भी रुपाली की गांड में था और वो मेरे नीचे दबी हुई थी. कुछ दे तक हम दोनों को hi होश न था क हम कहाँ पड़े हैं. फिर रुपाली ने hi मुझे अपने ऊपर से हटने को कहा

रुपाली : प्लीज उठो मुझे वाशरूम जाना है.

मैं बड़ी मुश्किल से रुपाली क ऊपर से उठा और जब मेरी नज़र उसकी गांड पर पड़ी तो गांड का छेड़ जो पहले पूरा बंद था अब वो ऐसे खुला पड़ा था क आराम से 2 उंगली अंदर चली जाये. कुछ बूंदे मेरे वीर्य की अंदर से बहार आ रही थी. रुपाली ने जैसे hi करवट ली तो गांड बीएड पर लगते hi वो उछाल पड़ी

रुपाली : आआअह्ह्ह्ह माआआ

अमित : आइये मैं आपको ले चलता हूँ .

मैंने रुपाली को गॉड में उठाया और वाशरूम में ले गया . फिर उन्हें कमोड पर बिठाया तो इससे भी उन्हें दर्द होने लगा . मैं उन्हें वहीँ छोड़ कर अंदर हॉल में गया जहाँ मैंने लास्ट टाइम पैन किलर टेबलेट रखीं थीं. मैंने एक टेबलेट ली और पानी का गिलास ले कर रुपाली क पास वाशरूम में hi आ गया. रुपाली वैसे hi बैठी थी . मैंने उसे टेबलेट देते हुए पानी का गिलास दे पकड़ा दिया.

अमित : इसे खा लीजिये दर्द कम हो जायेगा .

रुपाली ने बिना कुछ पूछे टेबलेट खा ली. फिर मैंने उनको साफ़ किया और उठा कर बीएड पर लिटा दिया. वो उलटी हो पेट क बल लेती थी.

अमित : सॉरी मैंने आज आपको बहुत दर्द दिया.

रुपाली : माफ़ी मत मानगो. पहली बार तो दर्द होता hi है. अगर ये दर्द न होता तो मैं कैसे यद् रखती इसे. ये दर्द भी ज़रूरी था. अब ये मुझे हमेशा यद् रहेगा. तुम कुछ भी मत सोचो. तुमने कुछ गलत नहीं किया. अब तो मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो गयी हूँ न ? अब तो मुझे प्यार करने में तुम्हे संकोच नहीं होगा न ?

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? अगर आप ये सब न भी करवाती तो भी मैं आपको मन नहीं करता . बस एक गिलटी की फीलिंग है क मैंने रीमा और रीना क साथ गलत .....

रुपाली : मैंने कहा न तुमने कुछ भी गलत नहीं किया . ये सब मैं चाहती थी. अगर तुम मुझ से ये करवाते मेरी मर्ज़ी क बिना तो ये गलत होता . पर इसमें साडी ज़िम्मेदारी मेरी है. अब ज़रा मेरी मदद करो कपडे पहनने में .

मैंने रुपाली को उसके कपडे पहनाये . पैन किलर टेबलेट का असर हो गया था इस लिए अब उसे दर्द काम था.

रुपाली : ाचा अब मैं चलती हूँ . रीमा चिंता कर रही होगी. टाइम का पता hi नहीं चला देखो तो पांच बज गए हैं .

अमित : पांच बज गए ?? चलिए जल्दी आज तो मेरी वाट पक्की है.

मैंने दरवाज़ा लॉक किया और रुपाली को कार तक छोड़ा . वो कार में बैठ कर निकल गयी हालाँकि उसे बैठने में परेशानी हो रही थी . फिर मैंने अपनी बाइक उठायी और निकल पड़ा . 5 तो बज hi गए थे मैंने सोच क मंजू म क घर से हो कर hi घर जाता हूँ. जैसे hi मैं मम क घर पहुँच वहां पुलिस की गाड़ियां देख कर मैं समझ गया क सप ऋतू सिंह यहीं है. मैं उसके सामने नहीं जाना चाहता था तो बहार से hi वापिस मुद गया. और सीधा रीता मौसी क घर वापिस चला गया .

शीना जब अपनी मंजू बुआ क घर पहुंची तो बहार पुलिस की गाड़ियां देख कर उसे समझते देर न लगी क उसकी बुआ की सहेली ऋतू यहीं है. और जब वो अंदर आयी तो दोनों सहेलियों को आरामदायक परिधानों में सोफे पर बैठे बातें करते हुए पाया.

शीना : ऋतू बुआ आप यहाँ ?? और इन कपड़ों में ??

ऋतू सिंह : अरे शीना तुम ? आओ आओ , वैसे क्या बुराई इन कपड़ों में ? मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड से मिलने आयी हूँ तो थोड़ा फ्री हो क hi बैठूंगी न. ये मेरा ऑफिस थोड़ा है.

मंजू : शीना तुम आज जल्दी आ गयी ?

शीना : जल्दी ?? टाइम देखा आपने?

मंजू : ओह्ह 5 :30 बज गए ? टाइम का पता hi नहीं चला. अमित अत hi होगा.

ऋतू सिंह : मैं भी चेंज कर लेती हूँ

शीना : एक मिनट , अमित यहाँ नहीं आया?

मंजू : क्या मतलब यहाँ नहीं आया ?

शीना : मैंने तो उसे रस्ते में इधर से जाते हुए देखा है . इधर नहीं आया तो फिर वो किधर से आ रहा था ?

मंजू : मैं अभी पूछती हूँ

इतना कह कर मंजू अमित को फ़ोन करने लगी पर वो फ़ोन नहीं उठा रहा था. ऋतू समझ गयी थी क माजरा क्या है. ज़रूर अमित बहार कड़ी पुलिस की गाड़ियां देख कर वापिस चला गया है और फ़ोन भी इसी लिए नहीं उठा रहा. ऋतू ने कुछ न कहा और चुप चाप अंदर जा कर अपनी यूनिफार्म पेहेन ली और मंजू से इजाज़त ले कर फिर आने का कह कर चली गयी. आज बरसों बाद ऋतू को अपना मन हल्का महसूस हो रहा था अपनी सहेली क साथ अपना दर्द बाँट कर पर जाते जाते अमित की बेरुखी ने फिर से उसे चोट पहुंचा दी थी.

वहीँ दूसरी और क्सक्सक्सक्स शहर में मला नारायण दस् का घर :-

महल नुमा इस घर क आगे बहुत बड़ा गार्डन था जहाँ हमेशा मिलने वालों का ताँता लगा रहता था. कोई डेढ़ दर्जन पुलिस वाले और इससे दोगुने प्राइवेट अंगरक्षक . 6 चमचमाती बड़ी गाड़ियां और उससे ज्यादा समर्थकों की हमेशा साथ में रहती थी. मला नारायण दस् बहुत पहुँच रखता था राजनीती में . अचे कामों की वजह से नहीं बल्कि गलत कामों की वजह से . पिछली ज़िन्दगी क बारे में जो लोग जानते थे वो दर से मुँह भी नहीं खोलते थे इसके खिलाफ और दुनिया की नज़र में सफ़ेद पॉश दबंग नेता असल में जुर्म की दुनिया का बेताज बादशाह था. पर अब सर्कार में मंत्री पद पाने की खातिर उसने सीधे तौर पर किसी भी बुरे काम में इन्वॉल्व होना छोड़ा दिया था. क्यूंकि यही एक कमज़ोर कड़ी थी जो उसके मंत्री बनने की रह में रोड़ा अटका सकती थी . आज उसका खास दोस्त मिलने आने वाला था इस लिए आज पब्लिक मीटिंग रद्द कर दी थी नरायन दस् ने. शाम कोई 6 बजे 5 बड़ी लक्ज़री गाड़ियां एक hi मॉडल और एक hi रंग की एक साथ इस बंगले में एंटर हुई और एक साथ मुख्या दरवाज़े पर आ कर रुकी . वेलकम करने खुद नारायण दस् दरवाज़े पर खड़ा था. गाड़ियों में से पहले काळा सूट बूट में प्राइवेट अंगरक्षक निकले और मुख्या गाड़ी क आपस खड़े हो गए. तभी एक ने दरवाज़ा खोला और अंदर से मेहेंगे सूट पहने बड़ी ठाठ बात क साथ एक रोबीला इंसान बहार निकला. चेहरे पर गुरुर और घमंड साफ़ नज़र आ रहा था साथ पैसे की शानो शौकत . इसे देखते hi नारायण दस आगे बढ़ा और दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया . नारायण दास क खास hi 2-3 लोग मौजूद थे इस वक़्त यहाँ पर और वो सब इस आदमी को अचे से जानते थे

N.D. : आओ भाई आओ , तुमने तो इस बार तरसा दिया मुझे. यहाँ मैं मंत्री बनने का जुगाड़ लगा रहा हूँ और तू बहार घूम रहा है . ऐसे मौके में अगर मेरा दोस्त मेरा भाई मेरे साथ नहीं होगा तो कौन होगा. दुनिया की लिए होगा तू राइ साहब बलजीत राइ पर मेरे लिए तो तू मेरा बल्ली hi है .

ये आदमी और कोई नहीं डप इंटरनेशनल ग्रुप का मालिक बलजीत राइ था . शीना और मोंटी का बाप . जो आज hi कितने महीनो बाद वापिस लौटा था विदेश से .

बलजीत राइ : लोगों क लिए जो मर्ज़ी हूँ पर तेरे लिए तेरा पुराण दोस्त और हमेशा रहूँगा. तेरी परवाह न होती तो एयरपोर्ट से सीधा तेरे पास न अत. देख इंडिया लैंड होते hi पहले तेरे पास आया हूँ. और तू है क ताने मर रहा है .

न. डी. : पता है पता है चल अब अंदर चल

बाकि बातें अंदर बैठ कर hi करते हैं .

दोनों दोस्त अंदर आ गए और पीछे पीछे उनके आदमी भी . नारायण दास ने सबको एक तरफ बैठने का इशारा किया और बलजीत राइ को लेकर अपने सीक्रेट ऑफिस में चला गया .

बलजीत राइ : अब बता क्या बात है ? किस लिए इतना तंग कर रहा था?

न. डी. : मुश्किल में तुझे नहीं कहूं तो किसे कहूं ? उधर मिनिस्टर बनने क लिए ज़ोर लगा रहे हैं और इधर कोई हमारी hi मैया छोडन में लगा है . पहले हमारे ड्रग्स क कारोबार पर छपा पड़ा और हमारे आदमी उठा लिए गए उसके बाद लड़कियों को विदेशों में बेचने और रंडी खाने में बेचने वाले लोग धार लिए गए. अब मैं इसमें सीधा कुछ कर नहीं सकता ऐसा किया तो साडी म्हणत मिटटी हो जाएगी जो इस मंत्री पद क लिए की है . ऊपर से सकीय कोई ईमानदार सप लगी है पीछे साली न रिश्वत ले रही है न hi दर रही है. अगर इस मिनिस्ट्री लेने की बात न होती तो अब तक साली को उसकी औकात बता देता मगर अफ़सोस क ऐसा कर नहीं सकता. अब तू hi कुछ कर. ऊपर से मेरी शिकायत भी कर दी है किसी ने क उन सेल मामलों में मेरा हाथ है. अगर मुझे ये मिनिस्ट्री न मिली तो सच कहता हूँ एक एक को ज़िंदा जला दूंगा फिर चाहे साला वो कोई भी हो .

बलजीत राइ : अरे शांत हो जा भाई शांत , कितनी को जलाएगा और कब तक जलाता रहेगा ? तू एक बार मिनिस्टर बन जा फिर आराम से देख लेंगे सबको. अभी कुछ देर क लिए सब भूल जा. साडी ज़िन्दगी कमाया hi है न, और इसी से तो यहाँ तक पहुंचा है . थोड़ा नुकसान होता है तो होने दे. तू बस किसी बात पर कुछ भी न करना . मैं तो कहता हूँ खुद hi अपना थोड़ा बहुत पकड़वा दे ताकि लोग कहें तो कितना ईमानदार है . मैंने दिल्ली में पार्टी हाई कमान में बात की है. 100 कर पार्टी फण्ड में मैं अपनी कंपनी की तरफ से दे दूंगा और उतने hi गवर्निंग पीनल क हेड को जो रिपोर्ट तैयार कर रहा है कैबिनेट की. तुझे तो मिनिस्ट्री दिला क hi रहूँगा. तू चिंता मत कर.

न. डी. : तू hi मेरा सच्चा यार है . मुझे पता था तू मेरे लिए ज़रूर कुछ न कुछ करेगा . मुझे मिनिस्ट्री मिली तो वडा करता हूँ तेरा कारोबार 10 गुना तेज़ी से आगे बढ़ेगा. सरे सरकारी टेंडर तुझे hi मिलेंगे और दूसरे धंधे भी तू hi देखना .

बलजीत राइ : अरे बस बस अब सिर्फ बातों से hi खुश करेगा क कोई इंतज़ाम भी है. 4 महीने गोरी चमड़ी का टास्ते कर कर क मन भर गया है आज कुछ ....

न. डी . : है है है , पता था मुझे तू आते hi यही पूछेगा . वैसे तो सारा धंधा चौपट कर दिया है उस पुलिस वाली ने पर अपने यार क लिए इतना तो कर hi सकता हूँ. तेरे लिए कल hi गाँव की कच्ची काली मंगवाई है . पहले ज़रा मेरे साथ गाला टर्र करले फिर खेल लेना खून की होली. साली को देख कर तो मेरा मन हुआ था क मैं hi कर दूँ इसका काम पर तेरे लिए मन को समझा लिया.

बलजीत राइ : तुझे हमेशा पता रहता है क मुझे क्या चाहिए . मज़ा आएगा आज तो . पहले मैं करता हूँ फिर एक बार साथ में करेंगे फिर बिठा देना साली को कोठे पे . जो भी कह यार इतना मज़ा गोरी चमड़ी में भी नहीं जितना यहाँ की गाओं की लौंडिया देती हैं. पिछली बार एक माल तो मिला था पर साली हाथ आते आते रह गयी और उसी क चक्कर में इस बार ज्यादा दिन बहार रुकना पड़ा. जल अब जल्दी जाम बना मुझसे इंतज़ार नहीं होगा .

N.D.: तू साला नहीं बदला करोड़ों छोड़ अरबों में खेलने लगा है पर स्वाद अभी भी गाओं देहात का है तुझे. ले पकड़



बलजीत राइ : है है है क्या करूँ शुरू से hi ये मेरी कमज़ोरी रही है. चियर्स .....
 
भाई अपडेट देर से आएगा . अभी काम बाकि है .
 
अपडेट 172



मैं जब घर आया तो रीता मौसी क साथ दिव्या मौसी बैठी बातें कर रही थी और राधा क साथ करुणा दीदी और नेहा दीदी बैठी हुई थी . मुझे देखते hi दिव्या मौसी खुश हो गयी और उठ क मुझे गले लगा लिया.

अमित : कैसी हैं मौसी आप ?

दिव्या मौसी: मैं अछि हूँ और तुझे देख कर और भी अछि हो गयी हूँ. तू कैसा है ?

अमित : मैं भी ठीक हूँ मौसी. आप यहाँ अचानक?

दिव्या मौसी: राधा ने बताया क दीदी की तबियत ठीक नहीं है तो मिलने चली आयी.

रीता मौसी: तू कहाँ था अब तक ? देख ले दिव्या ये रोज़ hi ऐसे देर से अत है . पता नहीं कहाँ कहाँ भटकता रहता है.

दिव्या मौसी: गया होगा किसी काम से दीदी , मेरा बीटा कोई गलत काम नहीं करता न hi स्वरा घूमता है. है न

अमित : हाँ मौसी वो किसी से मिलना था .

नेहा दीदी : आज ट्यूशन नहीं गया तू ?

अमित : नहीं आज मम क यहाँ गेस्ट आये हुए हैं तो मैं घर आ गया.

करुणा दीदी : that’s ग्रेट फिर आज तो शॉपिंग पे चल सकते हैं न ?

रीता मौसी : उसे बैठने तो दे अभी तो घर आया है और तुझे शॉपिंग की पड़ी है.

अमित : दीदी ठीक तो वह रही है मौसी . रोज़ देर से अत हूँ तो टाइम नहीं मिलता आज टाइम है तो चलते हैं . आप भी रेडी हो जाओ हम सब चलते हैं .

रीता मौसी: मैं क्या करुँगी बीटा तुम लोग चले जाओ .

अमित : नहीं हम सब चलेंगे . दिव्या मौसी आप को भी चलना पड़ेगा .

दिव्या मौसी: मैं ?? नहीं नहीं मैं तो बस दीदी से मिलने आयी थी . तुम लोग जाओ . मैं और राधा अब घर जायेंगे .

अमित : बिलकुल नहीं , आप को भी चलना पड़ेगा वर्ण मैं आपसे नाराज़ हो जाऊंगा

दिव्या मौसी: ऐसा मत कहो , और तू अपने सरे पैसे हम सब पर hi उदय रहता है ? भैया तुझे पैसे देते हैं तुम्हारे खर्च क लिए और तू ....

अमित : पैसे अपने लिए hi तो खरा हो कर रहा हूँ न मौसी. आप सब मेरे अपने हो और अपनी पर किया खरच अपने पर किया खरच होता है .

मेरी इस बात पर दिव्या मौसी ने मेरा माथा चुम लिया .

दिव्या मौसी : नाम ऑंखें ) सच में तू बिलकुल दामिनी जैसा hi है . वो भी ऐसा hi करती थी हमेशा . अपनी साडी बचत मुझ पर खरच देती थी .

करुणा दीदी : हम लोग जायेंगे कैसे ?

अमित : कल्पना की कार से . उसे प्रॉमिस किया था न .

करुणा दीदी : वोरडेर्फुल चलो दीदी जल्दी से चेंज करलो .

नेहा दीदी : मैं नहीं जाउंगी , मुझे तो पहले hi अमित शॉपिंग करवा चूका है .

अमित : तो क्या हुआ ? आपको चलना पड़ेगा . अगर नहीं गयी तो मैं उठा क ले क जाऊंगा.

राधा : चलिए न दीदी . देखो माँ भी तो तैयार हो गयी न.

नेहा दीदी : पर ,, ाचा ठीक है .

करुणा दीदी और नेहा दीदी अपने कमरे में तैयार होने चली गयी . मैंने कल्पना को फ़ोन कर क आने को कह दिया . वो भी खुश हो गयी और जल्दी आने का कह कर फ़ोन काट दिया . रीता मौसी भी तैयार होने चली गयी . दिव्या मौसी ने मुझे अपने पास बिठा लिया और बातें करने लगी. राधा साथ में बैठी बस मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी . आधे घंटे में कल्पना भी कार ले कर आ गयी . तब तक सब रेडी हो चुके थे . कल्पना आते hi रीता मौसी और दिव्या मौसी से मिली.

कल्पना: कैसी हैं मौसी आप ?

रीता मौसी : मैं ठीक हूँ मेरी बची तू कैसी है ?

कल्पना : मैं तो एक डैम बढ़िए हूँ. आप कैसी हैं मौसी

दिव्या मौसी : तेरे सामने hi हूँ एक डैम बढ़िया.

करुणा दीदी : इतनी देर कैसे लगा दी तूने? कब से तेरा वेट कर रहे हैं हम?

कल्पना : अब क्या ट्रैक सूट में hi आ जाती ? प्रैक्टिस कर रही थी मैं जब इसका फ़ोन आया. सब बीच में hi छोड़ कर कपडे बदल कर आ गयी हूँ . और आने में इतना टाइम तो लगता है न दीदी . इसने एक बार भी पहले बताया नहीं . और कोई होता तो मन कर देती पर मुझे पता है इसे तो दोबारा पता नहीं टाइम मिले या न मिले बस छोड़ कर आ गयी.

नेहा दीदी : कोई बात नहीं तू करुणा की बात पर ध्यान मत दे. इसे कुछ ज्यादा hi जल्दी है.

कल्पना : तो चलें ? वैसे सब लोग कार में आएंगे नहीं तो बाइक भी लेकर चलना पड़ेगा .

अमित : हाँ मैं साथ में बाइक पर आ रहा हूँ. आप सब कार में बैठो.

घर को लॉक करने क बाद सब कार में बैठने लगे . रीता मौसी को तो अभी बाइक पर बैठने में प्रॉब्लम हो सकती थी तो वो कार में hi बैठ गयी. करुणा दीदी और राधा मेरे पास कड़ी थी. दोनों hi कार में नहीं बैठ रही थी.

दिव्या मौसी : चलो तुम दोनों भी कार में बैठो नेहा क साथ . अमित क साथ मैं बाइक पर आती हूँ.

करुणा दीदी : मौसी आप कहाँ बाइक में बैठेंगी . आप कार में बैठिये मैं अमित क साथ बाइक पर अति हूँ.

दिव्या मौसी : क्यों मुझे क्या होगा बाइक पर ? क्या मैं बाइक पर नहीं बैठ सकती ? कई बार बैठ चुकी हूँ इसकी बाइक पर. वैसे भी तुम सब लड़कियां एक साथ बैठो कार में .

करुणा दीदी दिव्या मौसी की बात पर मन मार कर कार में बैठ गयी और उनके साथ राधा भी. राधा मेरी तरफ hi देख रही थी जैसे कह रही हो क मैंने उसे अपने साथ ले कर चलूँ. पर मैंने दिव्या मौसी की बात को नहीं कटा . वो खुद मेरे साथ बैठना चाहती थी तो मैं भला क्यों मन करता . वैसे भी मुझे ाचा लगता था उनका अपने पास रहना. उनके रूप में मैं अपनी माँ को जो देखता था. कल्पना ने सबके बैठते hi कार चला दी और मैंने भी दिव्या मौसी को पीछे बिठाया और चल पड़ा कार क पीछे पीछे . दिव्या मौसी मेरे कंधे पर हाथ रख क बैठी थी और मेरे करीब हो कर बात करने लगी.

दिव्या मौसी: तू यहाँ खुश तो है न ?

अमित : हाँ , पर आप ऐसे क्यों पूछ रही हैं?

दिव्या मौसी: रजनी दीदी क घर क्या कुछ हुआ मुझे सब पता है. और फॉर गाओं में वो सब ... तुझे यहाँ तो कोई परेशानी नहीं हो रही है न ?

अमित : नहीं मौसी ऐसा कुछ नहीं है. और रजनी मौसी क घर में भी मुझे कोई दिक्कत नहीं थी . आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं.

दिव्या मौसी : ाचा !!! ऐसे hi चिंता कर रही हूँ मैं ? कारन ने क्या क्या कहा था तुझे और क्या क्या हुआ सब पता है मुझे. तू ऐसे चुप न रहा कर. कोई भी बात हो मुझसे कहा कर. दामिनी नहीं है तो क्या मैं तेरी माँ नहीं? तुम्हे दुखी देखती हूँ तो मुझ पर क्या बिट टी है अंदाज़ा भी है तुझे ?

अमित : मौसी आप रो रही हैं ?

मुझे लगा क दिव्या मौसी रो रही है तो मैंने बाइक को साइड में रौला तो देखा मौसी की आँखों में सच में नमी थी.

दिव्या मौसी : मुझे कितना दुःख होता है तुझे जब कोई कुछ कहता है ये मैं hi जानती हूँ. कारन ने तेरे साथ क्या किया ये मुझे सब पता है. और तू कभी उसके पास भी नहीं जायेगा ये सुन ले तू. कमलेश भैया से भी तुझे डरने की ज़रूरत नहीं है. बिना सच जाने ऐसे hi तुझ पर हाथ उठा दिया उन्होंने . तू उनसे भी बात मत करना .

अमित : मौसी मेरी प्यारी मौसी , मैं जनता हूँ आप मुझसे कितना प्यार करती हैं. पर ऐसे ज़रा ज़रा सी बात पर मैं सब से रिश्ते तोड़ता रहूँगा तो अकेला रह जाऊंगा न. हो जाती गलती किसी से भी हो सकती है. इसका मतलब ये तो नहीं क उस गलती की वजह से सब कुछ भुला दिया जाये , रिश्ते hi तोड़ दिए जाएँ . छोटे मां को किसी ने मेरे बारे में गलत कहा होगा. इसी लिए उन्होंने मुझ पर हाथ उठाया . पर बचपन से मुझे उन्होंने प्यार भी तो दिया है. और उनसे मेरा रिश्ता माँ की वजह से है , क्या मैं इतनी सी बात पर सब कुछ भुला कर रिश्ता तोड़ दूँ? कारन भैया शायद किसी बात से मुझ से नाराज़ हैं पर हैं तो मेरे भाई hi न. अगर उनकी वजह से मैं मौसी क घर नहीं जाऊंगा तो ज़रा सोचिये क मौसी क्या सोचेंगी ? क्या उन्हें ाचा लगेगा? और फिर निधि दीदी कितना प्यार करती हैं मुझे नैना दीदी भी मुझे कितना प्यार करती हैं . क्या उनके साथ ये अन्याय नहीं होगा ?

दिव्या मौसी : मुझे मत समझा तू . वो सब तुझे प्यार करते हैं पर इसका मतलब ये तो नहीं क कारन कुछ करे तू चुपचाप सेहत रहेगा .

अमित : कारन भैया ने माफ़ी मांग तो लो थी मौसी . और आपको क्या ज़रूरत थी मेरे मोबाइल से ममी की फोटो खींचने की ? कोई भी देखेगा तो गलत hi समझेगा न ?

दिव्या मौसी : वो फोटो मैंने .... तू बस कारन से दूर रहेगा.

अमित : आप वो सब छोड़िये , देखिये हम पीछे रह गए हैं . अब ज़रा मुस्कुराइए थोड़ा सा , आप की आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते . चलिए वो लोग पहुँच गए होंगे.

मैंने दिव्या मौसी क आंसू पोंछे और फिर उन्हें पीछे बिठा के चल पड़ा. इस बार दिव्या मौसी मेरे कंधे पर सर रख कर बैठी थी और उनका एक हाथ मेरी छाती पर था. कुछ hi देर में हम कल्पना क बताये हुए मॉल पहुँच गए जहाँ सब बहार कब्ज़े अजंता hi इंतज़ार कर रहे थे .

कल्पना : कहाँ रह गए थे? इतनी धीमी कब से चलने लगे तुम बाइक ?

दिव्या मौसी : फ़ोन आ गया था घर से इस लिए रुक गए थे हूँ. अब चलो अंदर चलें

हम सब मॉल में गए तो कल्पना मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे लड़कों क कपड़ों वाले सेगमेंट में ले गयी. वो अपनी पसंद की टीशर्ट मेरे ऊपर लगा लगा कर देख रही थी . इस काम में करुणा दीदी भी उसका साथ दे रही थी. कल्पना और करुणा दीदी ने एक T-shirt और जीन मेरे लिए सेलेक्ट की . कल्पना तो और भी कपडे देख रही थी पर मैंने मन कर दिया. उसके बाद मैंने करुणा दीदी को अपने लिए शॉपिंग करने को कहा था ो तो झट से तैयार हो गयी. कल्पना को भी मैंने ज़िद कर क शॉपिंग का कहा तो करुणा दीदी ने उसे मन hi लिया . नेहा दीदी और राधा क लिए मैंने खुद hi क सूट सूट सेलेक्ट किया. नेहा दीदी मन कर रही थी पर मेरे फाॅर्स करने पर मन गयी. राधा तो मेरे एक बार hi कहने पर मन गयी उसे पता था क मुझे इंकार कर क क्या होगा. फिर करुणा दीदी अपने लिए कुछ और भी शॉपिंग करने क लिए कल्पना को साथ ले गयी और नेहा दीदी राधा भी उनके साथ हो ली .

दिव्या मौसी और रीता मौसी बातें करती हुई इधर उधर कपडे देखती हुई घूम रही थी. मैंने देखा क रीता मौसी की नज़र एक बट पर तंगी निघ्त्य पर है . पर उनके साथ दिव्या मौसी थी और शायद उनके सामने रीता मौसी वो परिधान देखना नहीं चाहती थी जो कुछ आधुनिक लग रहा था . मैं दिव्या मौसी क पास गया और उन्हें अपने साथ चलने को कहा . दिव्या मौसी जैसे hi आगे बरही मैंने रीता मौसी क कान में कहा .

अमित : मुझे भी वो पसंद है जहाँ आपकी नज़र है , जाइये तरय कर लीजिये मैं मौसी को साथ ले कर जा रहा हूँ .

इतना कह कर मैं दिव्या मौसी की तरफ चल दिया जबकि रीता मौसी मेरी बात पर शर्मा गयी थी . मैं दिव्या मौसी को लेकर आगे चला गया जहाँ कुछ लेटेस्ट डिज़ाइन क सुइट्स थे.

दिव्या मौसी : बोलो क्या करना है .

अमित : करना कुछ नहीं बस कुछ सुइट्स लेने हैं जिसमे आप मेरी मदद करेंगी .

दिव्या मौसी : किसके लिए लेने है ज़रा बता फिर उस हिसाब से देखते हैं .

अमित : मेरी सबसे प्यारी मौसी क लिए लेने हैं. जो शायद सूट पहना भूल चुकी हैं . उन्हें फिर से सूट में देखना चाहता हूँ .

दिव्या मौसी : हैरानी से ) किसकी बात कर रहा है तू ?

अमित : आप से प्यारी मौसी और कौन है ?

दिव्या मौसी: मुस्कुराते हुए ) ज्यादा बाएं मत बना . मैं सूट नहीं पहनती पता है न .

अमित : झूठ , मैंने एल्बम में देखा था तब तो आप साड़ी नहीं पहनती थी .

दिव्या मौसी : वो सब शादी क पहले की तस्वीरें थी .

अमित : तो अब कौन सा आप बूढ़ी हो गयी हैं . कोई भी देख ले तो आपको राधा की बड़ी बहिन hi समझेगा.

दिव्या मौसी : मैं hi मिली हूँ तुझे मज़ाक करने क लिए ?

अमित : नहीं मैं मज़ाक नहीं कर रहा. और भूल गयी उस दिन भी आप नहीं मन रही थी फिर क्या हुआ था उसके बाद होटल में .

दिव्या मौसी : उसका दिमाग ख़राब था . मैं सूट नहीं पेहेन सकती अब.

अमित : क्या मेरा दिल रखने क लिए भी नहीं पहनेंगी ? मैं आपको सूट में देखना चाहता हूँ .

दिव्या मौसी ने एक नज़र मेरी आँखों में देखा और फिर मेरे साथ सूट देखने लगी.

दिव्या मौसी : चल बता कौन सा सूट लूँ मैं. तेरी पसंद का hi लुंगी .

अमित : मौसी आप पर तो सभी रंग जांचेंगे. आप इतनी खूबसूरत हैं क जो भी रंग पहनेंगी वो आप पर ाचा hi लगेगा .

दिव्या मौसी : बस भी कर अब , मौसी हूँ तेरी और तू मेरे साथ ये मज़ाक कर रहा है

दिव्या मौसी ऊपर से तो मन कर रही थी पर हमले चेहरे पर एक पल क लिए मुस्कान काम नहीं हुई थी . मैंने जल्दी से अलग अलग रंग और डिज़ाइन क 3-4 सूट सेलेक्ट कर लिए. मौसी तो पहले प्राइस टैग देखना छह रही थी पर मैंने उन्हें बोलने का मौका hi नहीं दिया और सूट पैक करवा लिए. बिल देने की बरी आयी तो कल्पना बिल पाय करने की ज़िद करने लगी पर मैंने उसे ऐसा न करने दिया. फिर भी उसका दिल रखने क लिए मैंने अपने लिए दिलाये कपड़ों का बिल उसे देने दिया. शॉपिंग क बाद करुणा और कल्पना क कहने पर बहार डिनर करने का प्रोग्राम बना पर ऐन मौके पर रीता मौसी को मौसा जी का फ़ोन आ गया क वो घर पहुँचने वाले हैं तो डिनर का प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ा . कल्पना और करुणा दीदी का मुँह लता क गया पर किया भी क्या जा सकता था. मॉल से वापिस आते वक़्त इस बार हमारे साथ बहुत सरे शॉपिंग बैग भी हो गए थे. इस बार भी वापसी पर दिव्या मौसी hi मेरे साथ बैठी थी .

दिव्या मौसी : तूने मेरे लिए इतने सरे सूट क्यों लिए ? एक hi काफी था न .

अमित : मौसी आप सूट में बहुत अछि दिखती हो इसी लिए मैंने आपके लिए सूट लिए हैं . ताकि आप अब साडी क साथ सूट भी पहना करें.

दिव्या मौसी : तब की बात और थी , शादी क पहले हम सभी बहने सूट hi पहनती थी. पर शादी क बाद सिर्फ साड़ी. अब तू सूट पहनने की ज़िद कर रहा है कोई देखेगा तो क्या कहेगा.

अमित : कोई क्या कहेगा इसी परवाह है आपको , और जो मैं कह रहा हूँ उसकी परवाह नहीं है ? आप खुद hi hi देख लीजिये आपके लिए ज़रूरी कौन है .

दिव्या मौसी : इसमें देखना क्या है ? मेरे लिए तुम hi सबसे पहले हो और तुम्हारी ख़ुशी क लिए मैं कुछ भी करूंगी . कह ले जिसे जो खान है.

यूँही बातें करते हुए हम घर पहुँच गए जहाँ मौसा जी हमारा इंतज़ार कर रहे थे. मौसा जी नेचर से अचे इंसान थे इस लिए सब से बड़े प्यार से मिले. कल्पना सब को घर छोड़ कर मुझे थैंक्स कहती मुस्कुराती हुई चली गयी और हम सब बातें करने लगे . मौसा जी ने मुझे अपने पास बिठा लिया और मेरे कॉलेज और स्टडी क बारे में पूछने लगे.

दिव्या मौसी : ाचा दीदी अब हम चलते हैं . बहुत देर हो गयी है .

रीता मौसी : इस वक़्त अब कहाँ जाएगी ? सुबह चली जाना . चल आ दोनों मिल कर खाना बनाते हैं.

दिव्या मौसी : दीदी राधा को सुबह कॉलेज ...

रीता मौसी : यहीं से चली जाएगी. नेहा भी तो साथ hi जाती है न वैसे भी .

मौसा जी : साली साहिबा हमसे नाराज़गी है क्या ? इतने दिनों बाद मैं घर आया हूँ और तुम हो की अपने जीजा क साथ दो प्यार भरी बातें करने की बजाये वापिस भागना चाहती हो .

दिव्या मौसी : आप तो बात hi मत करो . अपनी नौकरी क इलावा तो कुछ दिखाई नहीं देता आपको. जब बीवी नहीं दिखती तो साली कहाँ से दिखेगी ? अगर इतनी hi परवाह थी तो चले आते गाओं फंक्शन पर तब तो आपकी बड़ी साली भी वहीँ थी और बाकि सब भी .

मौसा जी : क्या करूँ कोशिश तो बहुत की पर आ नहीं पाया. पर खैर कोई बात नहीं आज रत तो यहाँ रुक hi सकती हो न अपने जीजा क पास आखिर मेरा भी तो कुछ हक़ बनता hi है . आधी घरवाली तो हो hi मेरी .

दिव्या मौसी : ओहो हो हो बड़े आये आधी घरवाली वाले , जो पूरी है उसे तो टाइम देते नहीं है और जो आधी है उसके पीछे पड़े हैं . आपको तो दीदी hi ठीक करेगी अब , बताती हूँ मैं दीदी को.

मौसा जी : अरे उसे क्यों बीच में लती हो ये तो हम दोनों क बीच की बात है न

रीता मौसी ( किचन से बहार आते हुए ) सुन रही हूँ मैं सब , बड़ा प्यार आ रहा है साली पर . तू चिंता मत कर दिव्या तेरे जीजा से अब कुछ नहीं होता ये बस बातें hi कर सकते हैं और कुछ नहीं .

मौसा जी : ाचा !! कोई बात नहीं आज पहले तुम्हारी नाराज़गी दूर करता हूँ फिर कुछ और करूँगा.

दिव्या मौसी : जीजा जी तो आज फुल फॉर्म में लग रहे हैं दीदी

रीता मौसी : अछि तरह जानती हूँ मैं इन्हे और इनकी फॉर्म को भी तू चल मेरे साथ

मौसा जी कहाँ दिव्या मौसी क साथ दिल्लगी कर रहे थे और कहाँ रीता मौसी ने आ कर उनकी hi क्लास लगा दी थी. करुणा दीदी नेहा दीदी राधा को लेकर पहले hi कमरे में जा चुकी थी. मौसी क किचन में जाट hi मौसा ने मेरी तरफ देखा और खिसियानी हंसी हँसते हुए अपने कमरे में चले गए. आज मैंने पहली बार जीजा साली क बीच की चुहुलबाजी देखि थी . वैसे तो दोनों में कोई गलत रिश्ता या गलत बात नहीं थी दोनों अपने रिश्ते क हिसाब से hi मज़ाक कर रहे थे पर दिव्या मौसी ऐसी बातें भी करती हैं ये पहली बार देखा था मैंने .

मौसा जी क जाने क बार मैं भी अपने कमरे में चला गया . कुछ देर मैंने रीमा से बात की और फिर खाने की आवाज़ लग गयी. दिव्या मौसी को रत यहीं रुकने क लिए मन गयी . वैसे भी सुबह जाना तो एक साथ hi था नेहा दीदी और राधा ने कॉलेज. रीता मौसी तो कल की ठुकाई से आज रत आराम करने वाली थी पर मौसा जी क इरादे ठीक नहीं लग रहे थे. खाने क बाद कुछ देर राधा और करुणा दीदी मेरे पास मेरे कमरे में बैठी बातें करती रही . करुणा दीदी तो रत को मेरे साथ मज़ा करना चाहती थी पर अब दिव्या मौसी और राधा क होने से उनका भी प्रोग्राम फ़ैल नज़र आ रहा था . हम बातें कर रहे थे क दिव्या मौसी कमरे में आ गयी और करुणा दीदी और राधा को अपने कमरे में सोने को कहा. सबको सुलाने क बाद दिव्या मौसी मेरे कमरे में आ गयी. दिव्या मौसी को रीता मौसी ने अपनी एक निघ्त्य दे दी थी रत को सोते वक़्त पहनने क लिए. रीता मौसी क मुकाबले दिव्या मौसी छरहरे बदन वाली थी इस लिए ये निघ्त्य उन पर खुली खुली लग रही थी.

दिव्या मौसी : अगर आज रत मैं तेरे साथ सो जॉन तुझे ऐतराज़ तो नहीं न?

अमित : कैसी बातें कर रही हैं मौसी , मैं तो चाहता हूँ आप मेरे पास सोएं . आप पास होती हो तो ऐसा लगता है मैं माँ क पास हूँ .

दिव्या मौसी : मुझे भी ाचा लगता है जब तू मेरे साथ होता है. इतने साल तुझे खुद से दूर रखा है पर अब और नहीं रख सकती . काश मैं अपनी गलती ठीक कर सकती

अमित : छोड़िये न मौसी जो बीत गया सो बीत गया. अगर वक़्त में पीछे जा कर कुछ बदला जा सकता तो मैं माँ और पापा को बचा लेता या खुद hi उनके साथ ....

मेरी बात पूरी होने से पहले hi दिव्या मौसी ने मुझे कास क अपने साथ लगा लिया . मैं बीएड पर बैठ हुआ था और दिव्या मौसी कड़ी हुई थी. दिव्या मौसी ने मेरा सर अपनी बाँहों में लपेट कर अपनी छाती पर कास लिया. मेरी आवाज़ उन साथ लगते hi बंद हो गयी .

दिव्या मौसी : ख़बरदार ऐसी बात मुँह से निकली भी तो. तुझे अपनी जान देकर बचाया है दामिनी ने. और तू जान देने की बात कर रहा है . ऐसी बातें क्यों करता है ? क्या तू मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा ? क्या मुझ मेरी गलती सुधरने का मौका नहीं देगा?

दिव्या मौसी भावुक हो गयी थी और मुझे अपनी छाती से लगाए ये सब कह रही थी. मैं तो चुप हो hi चूका था पर मौसी क चुप होने क बाद मेरा ध्यान अपने गाल पर लगे नरम मॉस पर गया . कपडे क अंदर से ये नरम एहसास किस चीज़ का है ये मैं अचे से समझ गया था. मौसी ने निघ्त्य क नीचे कुछ नहीं पहना हुआ था और उनके नरम चुके मुझे अपना एहसास करवा रहे थे. रत को आराम से सोने क लिए शायद मौसी ने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी. मैं दिव्या मौसी क बारे में ऐसा कुछ भी सोचना नहीं चाहता था मगर मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था और एक लैंड था दिमाग का अँधा जिसे तो कोई फरक पता hi नहीं था . ज़रा सा एहसास मिलते hi वो सर उठाने लगा था.

दिव्या मौसी : मैं hi तेरी माँ दामिनी हूँ . क्या तुझे मुझ में दामिनी नज़र नहीं आती? जब तू ऐसी बातें करता है तो मुझे खुद से नफरत होने लगती है ये सोच कर क मैंने तेरे साथ कितना गलत किया है.

अमित : नहीं मौसी आप ऐसा मत कहो. मुझे माफ़ कर दो आप तो सब से ज्यादा मुझे प्यार करती हो .

मैंने अपना सर मौसी की कोमल छाती से अलग कर लिया ताकि खुद को संभल सकूँ .

दिव्या मौसी : तू क्यों माफ़ी मांगता है ? गलती तो मैं की है माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए.

अमित : बस मौसी इस बात को यहीं ख़तम कर दीजिये. जो बदला नहीं जा सकता हम उसके बारे में बात नहीं करेंगे. चलिए अब आप आराम से लेट जाइये.

दिव्या मौसी : नहीं तू आराम से लेट अपनी इस माँ की गॉड में सर रख कर सो आज तू .

मौसी बीएड से तक लगा कर बैठ गयी और मेरा सर अपनी गॉड में रख लिया. मौसी मेरा सर सहलाने लगी और मुझे पता hi नहीं लगा कब मेरी आँख लग गयी.

उधर रीता क कमरे में उसके पति ने आज जोश जोश में रीता की टंगे तो उठा दिन पर उसे ठंडा नहीं कर पाया. वैसे भी अमित क साथ सेक्स करने क बाद रीता को अब अपने पति का लैंड ढीला लगने लगा था. दूसरा अमित रीता का 2-3 बार पानी निकलवा देता था जिससे उसकी टाइमिंग भी बाथ गयी थी. रीता आज कुछ करना तो नहीं चाहती थी क्यूंकि पिछली रत उसकी आगे पीछे दोनों तरफ से अछि सर्विस हो चुकी थी पर पति को मन भी नहीं कर सकती थी. सिद्धार्थ तो अपना पानी निकल कर पीठ दिखा कर सो गया पर रीता की आग भड़क गयी थी . रीता सिद्धार्थ को कॉस्टि हुई उठी और वाशरूम से होने क बाद एक नज़र करवट लिए सो चुके अपने पति को देखने क बाद अमित क कमरे की तरफ चल पड़ी. पता तो उसे भी था क आज अमित क साथ कोई चांस नहीं बन सकता पर बदन में जो आग जल उठी थी वो उसे सोने नहीं दे रही थी. रीता जब दबे पाऊँ अमित क कमरे में गयी तो दरवाज़ा खोलते hi उसे अमित क बिस्तर पर दिव्या नज़र आयी. अमित तो दिव्या की गोद में सर रख कर सो रहा था पर दिव्या एक तक उसे देखे जा रही थी. रीता कमरे में आयी पर दिव्या को पता भी न चला.

रीता : दिव्या ! ऐसे क्या देख रही है इसे ?

दिव्या : दद दीदी आ आप ?

रीता : क्या हुआ ? ऐसे घबरा क्यों रही है ?

दिव्या : मैं कहाँ घबरा रही हूँ , पर आप इस वक़्त यहाँ ? जीजा जी सो गए क्या ?

रीता : मुँह बनाते हुए ) हाँ सो गए तेरे जीजा जी . होता कुछ है नहीं बातें करवा लो जितनी मर्ज़ी. तू क्यों जग रही है अभी तक? और यहाँ क्या कर रही है ? तुझे तो मैंने नेहा क साथ सोने को कहा था न?

दिव्या : वो दीदी मेरा दिल किया क आज अपने बेटे क पास सो जॉन. देखिये कैसे छोटे बचे की तरह सो रहा है मेरी गॉड में.

रीता : ये अब छोटा बचा नहीं रहा , बचे पैदा करने जितना हो चूका है. अगर सोने का इतना hi मन है इसके साथ तो दरवाज़ा अचे स बंद कर ले . ये न हो सुबह कोई उठ कर यहाँ आ हुए और फिर तुझे किसी हालत में अमित क साथ ...

दिव्या : क्या दीदी चिन्नन आप ये कैसी बातें कर रही हैं .

रीता : ाचा !!! अब मेरी बात बुरी लग रही है तुझे? ज़रा देख खुद को, अपने ये कबूतर खुले छोड़ कर इसके साथ ऐसे सोयेगी तो कहीं नींद में इसके हाथ यहाँ पहुँच गए तो ? चल उठ कर दरवाज़ा बंद कर ले मैं जा रही हूँ. तेरे भले क लिए hi कहा है.

दिव्या : कहीं नहीं जाते इसके हाथ. पहले भी कई बार सो चूका है मेरे साथ .

रीता : देखा था मैंने गाओं में कैसे मियां बीवी की तरह चिपक कर सो रहे थे दोनों. बंद कर ले दरवाज़ा वर्ण मेरा क्या है तुझे hi परेशानी होगी.

इतना कहते हुए रीता हस्ते हुए दरवाज़े की तरफ गयी और दिव्या भी अमित का सर आराम से तकिये पर रख कर उसके पीछे hi दरवाज़ा बंद करने आ गयी.

रीता : पलट कर ) अब क्या हुआ ? अब दरवाज़ा क्यों बंद करने आ गयी? कहीं तेरा कोई इरादा तो नहीं कुछ करने का इसके साथ ?

रीता ने जान बुझ कर दिव्या को छेड़ते हुए कहा

दिव्या : दीदी आप को हो क्या गया है ? बीटा है वो हमारा

रीता : बीटा तो है पर वो अब मर्द बन चूका है . बच क रहना

इतना कहते हुए रीता हस्ती हुई नीचे चली गयी. दिव्या को रीता की बात अछि नहीं लगी थी पर उसका मन अंदर से मचल भी गया था इस बात पर. उसे वो साडी बातें यद् आने लगी . क वो कैसे नींद में अमित क साथ अपना चरम प् चुकी थी, कैसे सपने में उसे अमित की बाँहों में प्रेमी का सुख मिलने लगा था. एक बार को दरवाज़ा बंद करते हुए दिव्या क मन में उन बातों को यद् करते हुए दर भी आया पर फिर भी वो अपना सर झटकती हुई दरवाज़ा लॉक कर क अमित क साथ आ कर लेट गयी. अमित आराम से सोया पड़ा था दिव्या को उस पर प्यार आया और उसने आगे बाद कर अमित क गाल पर किश करदी. किश तो गाल पर किया था पर न जाने क्यों दिव्या को ऐसा लगा जैसे उसने अमित क होंठ चूम लिए हों. खुद पर hi शर्माती हुई वो अमित को देखती हुई उसकी तरफ करवट लिए सो गयी.

एक बार फिर रत को दिव्या को वही सपना आया जिसमे वो अमित क साथ एक प्रेमी क रूप में प्यार कर रही थी और नींद में hi वो अमित क साथ चिपकती हुई उसकी बाँहों में समां गयी. आज फिर दिव्या ने चरम सुख नींद में hi प् लिया J.B उसे अपनी छूट पर अमित क बलिष्ठ लैंड का एहसास हुआ. दिव्या तो नींद में सोई रही हालाँकि पानी निकलते वक़्त उसकी आँख खुली भी मगर वो फिर से वैसे hi सो गयी अमित को सोया हुआ देख कर. उसे नींद में इस बात का एहसास hi न था क उसकी निघ्त्य जांघों तक ऊपर हो चुकी थी और खुला गाला होने की वजह से बिना ब्रा क चुके काफी हद तक नज़र आ रहे थे.

सुबह मेरी जब आँख खुली तो मुझे अपने ऊपर किसी का एहसास हो रहा था. मैंने ऑंखें खोली तो अपने पास hi दिव्या मौसी को मासूम सा चेहरा देखा जो नींद में बहुत hi प्यारा लग रहा था. मैंने कुछ देर उनको देखता रहा . मैंने अपने ऊपर से उनकी बाजु को हटाया . उनकी तंग मेरी कमर पर चढ़ी हुई थी. जैसे hi मैंने उनकी तंग हटाने क लिए उनकी जांघ पर हाथ रखा तो मुझे करंट लगा . दिव्या मसूई की जांघ बिलकुल नंगी थी. मेरे हाथ उनकी नंगी जांघ क एहसास से hi कम्पनी लगे . न चाहते हुए भी मेरा लैंड झटके लेने लगा . मैंने दिल मजबूत करते हुए मौसी की जांघ अपने ऊपर से हटाई . और पीछे को खिसक गया. मैं उठ कर बैठ गया एक पल में hi साडी नींद हवा हो गयी थी. मैंने दिव्या मौसी पर नज़र मरी तो देख कर मुझे पसीना आने लगा . दिव्या मौसी करवट क बल लेती हुई थी एक तंग बिस्तर पर सीधी थी और ऊपर वाली तंग घुटने से मुड़ी हुई थी. निघ्त्य सरक कर जांघों क जोड़ तक पहुँच चुकी थी. दिव्या मौसी की दूधिया सफ़ेद टाँगें मेरे सामने दिन क उजाले में इस तरह नंगी थी. लम्बी गोरी कोमल टाँगें पाऊँ क पास चंडी की चमकदार पायलें. मेरा लैंड तो अकड़ कर फटने वाला हो रहा था. पता नहीं किस जादू में बंधा मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था अपने आप hi मेरा हाथ दिव्या मौसी की टांगों पर चला गया. इतनी कोमलता शायद किसी और में नहीं थी जितनी कोमल दिव्या मौसी की टाँगें थी. मेरा हाथ स्वतः hi उनकी मुलायम पिंडलियों से होता हुआ मांसल जांघों तक आ गया. जांघों पर हाथ से स्पर्श करते हुए मेरी नज़र दिव्या मौसी की छाती पर चली गयी. वहां का नज़ारा तो और भी खतरनाक था. मौसी की निघ्त्य क गले में से एक स्तन बहार आने को हो रहा था. यहाँ तक क निप्पल क पास क घेरे का गुलाबी हिस्सा इस वक़्त नज़र पद रहा था. ये देखते hi मुझे एक और झटका लगा और मेरे या हाथ की मुठी अपने आप कास गयी जो मौसी की नरम जांघ पर था . इधर मेरे हाथ की मजबूत पकड़ से मौसी हड़बड़ा गयी और उधर कोई दरवाज़ा पीटने लगा. मेरी तो गांड hi फैट गयी जब दिव्या मौसी ने उठते hi मेरी तरफ देखा. मेरा हाथ मौसी की जांच से हैट चूका था पर मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था . शर्म से मेरी नज़रें झुक गयी थी उधर दरवाज़ा अभी भी बज रहा था.

दिव्या मौसी : अरे तुम उठ गए ? देखो ज़रा दरवाज़े पर कौन है.

मैं एक झटके से बीएड से निचे उतरा और दरवाज़े की तरफ लपका. तब तक दिव्या मौसी ने भी अपनी हालत ठीक कर ली. मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने रीता मौसी थी.

रीता मौसी : अरे उठ गए तुम दोनों? मुझे लगा अभी सो hi रहे होंगे. ाचा हुआ उठ गए. चल दिव्या आ जा नीचे मैं चाय बनाए लगी थी. तू आराम कर अभी तो 6 hi बजे हैं.

अमित : नहीं मौसी मैं छत पर जा रहा हूँ थोड़ी देर एक्सरसाइज कर लेता हूँ.

इतना कह कर मैं कमरे से निकला और छत पर चला गया. मुझमे हिम्मत नहीं हो रही थी दिव्या मौसी से नज़रें मिलाने की इस लिए ऊपर चला गया.

अमित का इस तरह जल्दबाज़ी में ऊपर जाना रीता क मन में शक पैदा कर रहा था . ऊपर से दिव्या भी अपनी हालत ठीक कर रही थी . पर दिव्या की हालत से रीता को एक बात समझ आ गयी थी क दोनों क बीच सेक्स नहीं हुआ होगा वर्ण दिव्या से हिला भी न जाता . इतना तो उसे अमित क साथ चुदाई कर क पता चल hi चूका था. रीता दिव्या क पास आयी और उसे गौर से देखने लगी. दिव्या भी ऐसे नज़रें चुरा रही थी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

रीता : क्या हुआ है तुम दोनों क बीच ? ये अमित बिना देखे ऊपर क्यों भाग गया ?

दिव्या : कक कुछ भी तो नहीं , आ ऐसा कुछ नहीं है . वो कह कर तो गया है क एक्सरसाइज करने जा रहा है.

रीता : अगर कुछ नहीं हुआ है तो तू ऐसे क्यों हड़बड़ा रही है ? मैंने कहा था न क वो अब बचा नहीं है. कहीं उसने कोई हरकत तो नहीं कर दी ?

दिव्या : नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है . वो ऐसा कुछ नहीं कर सकता. आप गलत सोच रही हैं .

रीता : जानती हूँ वो ऐसा कुछ नहीं कर सकता पर मुझे ऐसा लग रहा है क कुछ न कुछ तो ज़रूर हुआ है जो वो इस तरह भाग गया . लगता है नींद में hi ....

दिव्या : नं नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ .

दिव्या हड़बड़ा गयी और जल्दी से उठा कर कड़ी हो गयी . इससे पहले क रीता कोई और बात करती दिव्या बाथरूम में घुस गयी. रीता मुस्कुराती हुई नीचे चली गयी . दिव्या की हड़बड़ाहट रीता क लिए काफी थी. वो समझ चुकी थी क नींद में hi कुछ न कुछ तो गया है.

दिव्या रीता से बचने क लिए बाथरूम म घुस कर कमोड पर बैठ तो गयी पर अब उसे अपना सपना यद् आने लगा. किस तरह वो सपने में अमित की बाँहों में निर्वस्त्र थी और वो उसे प्यार से मिलान का सुख दे रहा था. वो सपना इतना असली था क दिव्या का सच में पानी निकल गया था जिसकी एक वजह अमित क सख्त लैंड का दबाव था जो दिव्या क अमित की कमर पर अपनी जांघ चढ़ा देने से छूट पर पद रहा था. दिव्या को वैसे तो होश आ गयी थी पानी निकलते hi पर जिस तरह अमित उसकी बाँहों में था उसका मन hi नहीं हुआ अमित से अलग होने का. ये प्यार था या उस आलम की मदहोशी पर ये हो गया था. और फिर उसे यद् आया जब वो उठी थी तो उसे अपनी जांघ पर अमित क हाथ का स्पर्श महसूस हुआ था. दिव्या सोचने लगी क अमित ने उसकी नंगी जाँघों पर हाथ क्यों रखा ?

दिव्या :(मन में ) कहीं अमित कुछ करना तो नहीं चाहता था? पर इसमें उसकी क्या गलती है ? मैं खुद hi तो .... उसने मेरी नंगी जांघों को छुआ ? उसके मन में क्या आया होगा ? कहीं वो मुझे गलत तो नहीं समझेगा? मैं खुद को क्यों रोक नहीं प् रही हूँ? वो ऐसे उठ कर क्यों चला गया? कहीं वो खुद को दोष तो नहीं दे रहा ? हाँ एहि बात है तभी दीदी को ऐसा लगा वर्ण उन्होंने तो देखा hi कुछ नहीं था . मुझे उससे बात करनी चाहिए . कहीं वो अपने आप को गलत समझ कर खुद को कोई सजा न देदे.

दिव्या जल्दी से अपना मुँह धो कर छत पर चली गयी जहाँ अमित साइड में खड़ा कुछ सोच रहा था. दिव्या समझ गयी क ज़रूर वो उसी बारे में सोच रहा है.

दिव्या : ऐसे खड़े क्या सोच रहे हो ? चलो अगर एक्सरसाइज नहीं करनी तो नीचे चलो . और कुछ भी मत सोचो. मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो. तुम तो मुझे उठा hi रहे थे . मैं अचे से जानती हूँ क तुम कुछ गलत नहीं कर सकते . अब चलो नीचे आजाओ मैं चाय बनती हूँ .



इतना कह कर दिव्या ने अमित को एक बार फिर गले से लगाया और उसका माथा चूमती हुई नीचे चली गयी.
 
भाई लोग अपडेट लिख रहा हूँ आज hi आएगा
 
अपडेट 173



मैं छत पर खड़ा अपनी उस हरकत क बारे में सोच रहा था क मैं खुद को कण्ट्रोल क्यों नहीं कर पाया ? आखिर मैंने कैसे वो हरकत करदी ? दिव्या मौसी क्या सोच रही होगी? वो मुझे कितना घटिया समझेंगी ? मैं मन hi मन न जाने क्या क्या सोच रहा था और मुझे ये भी दर लगने लगा था क कहीं वो गुस्से में आ गयी तो शायद मैं राधा से भी बात न कर पौन . पता नहीं कैसी कैसी बातें मेरे दिमाग थोड़ी देर में आ गयी थी जो मुझे डराए जा रही थी . पर थोड़ी देर में hi दिव्या मौसी ने मुझे गले लगा कर जो कहा उसके बाद तो मेरा मन एक डैम से शांत हो गया . दिव्या मौसी की बात से मुझे पता चल गया क उन्होंने मुझे गलत नहीं समझा . वो यही सोच रही थी क मैं उन्हें जगा रहा था. मौसी क इतना कहने से hi मेरा दर तो ख़तम हो गया पर अब मुझे शर्मिंदगी हो रही थी क मैंने ये कर दिया. दिव्या मौसी मेरी माँ जैसी hi तो थी और मैं उनके hi साथ ये सब .... मैंने माँ को तो नहीं देखा था पर मेरी माँ और दिव्या मौसी एक जैसी hi थी तो दिव्या मौसी में hi मैं माँ को देखता था. वैसे भी दिव्या मौसी ने खुद बताया था क उन्होंने मुझे दूध पिलाया है. इस नाते भी वो मेरी माँ hi थी. मैं खुद को कोस्टा रहा. दिव्या मौसी मुझे नीचे आने का कह गयी थी पर मैं उनका सामना करने से कटरा रहा था इस लिए एक्सरसाइज करने लगा . एक्सरसाइज का बाद जब मैं नीचे आने लगा तो देखा करू एंड दीदी क कमरे का दरवाज़ा अभी भी बंद है . मैंने सोचा क उन्हें जगा देता हूँ. दरवाज़ा खोल कर जब मैं अंदर गया तो बीएड पर करुणा दीदी क साथ राधा भी सो रही थी. राधा का मासूम चेहरा देखते hi मैं सब भूल गया . पता नहीं क्या कशिश थी राधा में क मैं हमेशा उसी में खो जाता था. राधा क चेहरे पर कुछ बाल बिखरे हुए ऐसे लग रहे थे जैसे चाँद पर घटायें छ गयी हो. मैंने हाथ बढ़ा कर उसके चेहरे से बाल हटाए. एक तरफ को चेहरा किये वो आराम से सो रही थी. मैंने उसके गाल पर हाथ रख कर उसे प्यार से सहलाया. राधा क गाल पर हाथ ऐसे लग रहा था जैसे मैंने माखन पर हाथ रखा हो. मैं अपने आप राधा पर झुकता गया उसका माथा चूमने क लिए पर माथे की बजाये मेरे होंठ राधा क गालों पर जा लगे. ये एहसास बहुत hi खास था. मेरी धड़कन एक डैम से जैसे रुक hi गयी हो. कुछ पल तक मेरे होंठ राधा क गलों से चिपके रहे और मैं अपने होंठ अलग hi नहीं कर प् रहा था जैसे . तभी करुणा दीदी ने करवट ली और मैं जल्दी से पीछे हैट गया . मुझे ऐसा लगा क मेरी चोरी पकड़ी गयी हो और मैं सीधा कमरे से बहार निकल गया अपने धड़कते दिल क साथ .

राधा जो आराम से लेती हुई थी थोड़ी देर पहले hi उसकी नींद खुली थी . मगर अभी उसका उठने का मन नहीं था. करुणा दीदी भी साथ में पड़ी सो रही थी. रत देर से सोई थी दोनों बातें करती हुई. करुणा दीदी तो अपनी शॉपिंग और ामित्वक बारे में बातें करती रही थी. राधा वैसे तो बातों में नहीं पड़ती थी पर बात अमित की थी तो वो भी सुनती रही. सुबह आँख खुल तो गयी थी पर रत की खुमारी अभी उतरी नहीं थी. राधा मन में सोच hi रही थी क वो अमित क कमरे में जाये या अमित उसे जगाने आ जाये तभिनसे सीढ़ियों से किसी क नीचे आने की आवाज़ आयी. राधा का दिल जैसे पहचान गया था क ये अमित hi है. उसे उम्मीद जगी क शायद अमित उसे जगाने आ जाये और दरवाज़े पर हलकी सी दस्तक ने उसकी उम्मीद पर मोहर लगा दी. एक पल में hi राधा ने आँखें बंद कर क अपने चेहरे पर बाल आगे कर लिए ताकि अमित को एहसास न हो क वो जाग रही है. राधा इंतज़ार कर रही थी क कब अमित उसे जगाये. हालाँकि उसने देखा भी नहीं था क कमरे में कौन है पर इन क़दमों की आहत जैसे उसे पता थी. राधा सोच hi रही थी क अमित उसे जगा क्यों नहीं रहा क अमित ने उसके चेहरे से बालों को हटाया . एक अंजनी ख़ुशी और रोमांच से राधा अंदर तक हिल गयी थी पर उसने खुद को काबू में रखा और ज़रा सा भी एहसास न होने दिया अमित को . फिर जैसे अमित क होंठ राधा क होंठों से मिले राधा की धड़कन इतनी तेज़ हो गयी क उसका दिल किया वो अमित को बाँहों में भर ले मगर वो ऐसा कर क इस एहसास को खोना नहीं चाहती थी. पर जैसे hi करुणा दीदी ने करवट ली और अमित चोरों की तरह दर कर भाग गया. राधा का तो सारा मज़ा hi ख़राब हो गया था . दरवाज़े की आवाज़ से उसने अपनी आँखें खोली और अपने गाल पर हाथ रख कर मुस्कुराने लगी.

राधा : बुद्धू !! कुछ पल और नहीं रुक सकते थे ?? हर बार खुद hi कर क भाग जाते हो. न कभी पूछते हो न बताते हो . देख लेना जब मेरी बरी आएगी तो कैसे सताती हूँ तुम्हे.

राधा अपने ख्यालों में खोयी ये बड़बड़ा रही थी जो शायद करुणा क कानो में पद गया पर नींद में होने से उसे समझ नहीं आया.

करुणा : क्या हुआए किसे सताने की बात कर रही हो ...

राधा : कुछ नहीं आप सो जाओ आराम से , आराम से सोना भी नहीं अत आपको.

राधा अपना गाल सहलाते हुए उठी और बाथरूम में घुस गयी . दिन की शुरुआत तो अछि हो hi गयी थी अब कॉलेज क लिए तैयार भी होना था. करुणा भी राधा की बात सुन कर उठ गयी थी. उसे कुछ समझ में नहीं आया था इस लिए उसने दुबारा पूछा भी पर राधा ने कोई जवाब नहीं दिया .

मैं करुणा दीदी क रूम से निकल कर सीधा अपने कमर में आया और नहाने क लिए बाथरूम में घुस गया. तैयार होने क बाद मैं नीचे आया तो तब तक नाह दीदी भी तैयार हो चुकी थी और मौसा जी भी तैयार हो कर हॉल में बैठे थे . दिव्य मौसी और रीता मौसी किचन में लगी हुई थी. मैं तो बस ख़ामोशी से नज़रें नीची किये बैठा था. दिव्या मौसी ने मौसा जी को नाश्ता दिया और मुझसे भी पूछा पर मैंने नज़रें नीची किये hi जवाब दिया. नाश्ता करते करते करुणा दीदी और राधा भी आ गयी. नाश्ता करने क दौरान एक बार भी मैंने दिव्या मौसी की तरफ नहीं देखा. नाश्ता ख़तम करते hi मौसा जी तो निकल लिए. करुणा दीदी भी चली गयी. कल्पना जब नेहा दीदी और राधा को लेने आयी तो राधा ने मन कर दिया.

राधा : दीदी आप दोनों जाओ मेरे पेट में गड़बड़ हो रही है . मैं ज़रा वाशरूम जा रही हूँ. मुझे देर हो सकती है . अमित मुझे ले आएगा आप जाओ.

नेहा दीदी: कोई बात नहीं हम वेट कर लेते हैं.

राधा : नहीं नहीं दीदी , मेरी वजह से आप दोनों का लेक्चर मिस हो जायेगा . आप दोनों जाओ. अमित है न मुझे ले जाने क लिए .

कल्पना : अरे कुछ नहीं होता यार . हम इंतज़ार करते हैं तू आराम से आ.

राधा : पर मैं नहीं चाहती क मेरी वजह से आप दोनों का लेक्चर मिस हो . प्लीज आप दोनों जाओ.

रीता मौसी : बीटा हुआ क्या है तुझे अभी तो अछि भली थी ? कोई दवा दूँ अगर चाहिए तो ?

राधा : मौसी अगर ज़रूरत पड़ी तो बता दूंगी . दीदी आप जाओ

नेहा दीदी : चल कल्पना हम चलते हैं. राधा ठीक कह रही है. अमित तुम ले आना इसे.

नेहा दीदी कल्पना क साथ चली गयी और राधा अनादर वाशरूम में चली गयी. दिव्या मौसी मुझे hi देख रही थी पर मैंने उनसे नज़रें नहीं मिला प् रहा था. कल्पना क जाते hi 2 मिनट्स में राधा वापिस आ गयी.

राधा : चलें ?

दिव्या मौसी : अभी तो तू कह रही थी ठीक नहीं लग रहा और अभी तैयार भी हो गयी ? अगर ठीक नहीं हो तो आज छुट्टी कर लो कॉलेज से

राधा : मैं ठीक हूँ मौसी . वो बस पेट में प्रेशर सा था अब ठीक हूँ. ाचा माँ ाचा मौसी मैं चलती हूँ .

मैं तो चुपचाप बहार आ गया और बाइक स्टार्ट की तो राधा पीछे बैठ गयी. जैसे hi हम घर से कुछ दूर निकले तो राधा मेरे साथ सात कर बैठ गयी .

राधा : चुप क्यों हो ? कब से देख रही हूँ तुम न ठीक से बात कर रहे हो न देख रहे हो .

अमित : नहीं नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं

राधा : तो फिर कैसी बात है ? कहीं तुम सुबह की बात पर तो ....

अमित : कक कैसी बात ?

राधा : पता नहीं तुम क्या सोच रहे हो पर मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगा. बल्कि मुझे ाचा लगा. मैं तो चाहती हूँ तुम रोज़ मुझे ऐसे hi जगाया करो.

अमित : सॉरी वो मैं , एक मिनट ,,,, इसका मतलब तुम जाग रही थी ??

राधा : हम्म्म्म

अमित : सॉरी मुझसे गलती हो गयी .

राधा : मैंने कहा न , मैं तो चाहती हूँ तुम रोज़ ऐसे hi मुझे जगाया करो . अब ज्यादा मत सोचो . रोज़ होते hi कहाँ हो तुम हमारे साथ.

मुझे समझ में hi नहीं आ रहा था मैं क्या बात करूँ . पहले दिव्या मौसी क साथ जो हुआ उससे परेशां था और फिर राधा ने भी पकड़ लिया. पर राधा की बात पर मुझे बुरा लगने की बजाये ाचा hi लग रहा था. कुछ देर में hi हम कॉलेज पहुँच गए और फिर अपनी अपनी क्लास में चले गए. कैंटीन में रीमा ने बताया क उसकी माँ की तबियत ठीक नहीं है . अब इसकी असलियत तो मुझे पता hi थी. मैं रीमा की तरफ से शर्मिंदा भी था . खैर उसके इलावा कॉलेज में कुछ खास नहीं हुआ. अंकल और निधि दीदी का फ़ोन ज़रूर आया था मुझे . निधि दीदी मुझसे मिलना छह रही थी . कॉलेज से छुट्टी क बाद मैंने राधा को कल्पना क साथ भेज दिया और खुद निकल गया निधि दीदी क ऑफिस यानि क अपने ऑफिस. टॉप फ्लोर पर बने डायरेक्टर क ऑफिस यानि क मेरे ऑफिस क बगल में hi निधि दीदी का केबिन था. मैंने जैसे hi दरवाज़ा खोला निधि दीदी लैपटॉप पर कोई काम कर रही थी. आवाज़ सुनते hi उन्होंने दरवाज़े की तरफ देखा और उनके चेहरे पर ख़ुशी आ गयी . वो फ़ौरन अपनी जगह से उठी और दौड़ती हुई मेरे गले से आ लगी . निधि दीदी इस वक़्त ऑफिस की फॉर्मल ड्रेस में थी. एक शर्ट और पेण्ट में भी वो किसी मोडल से काम नहीं लग रही थी . बालों को बस रबर बंद से बंधा हुआ था.

निधि दीदी : ो अमित ! तुम आ गए मैं कब से इंतज़ार कर रही थी. अचे मालिक हो ऑफिस में आते hi नहीं. बाँदा काम से काम ये तो देखता है क एम्प्लोयी काम ठीक से कर रहे हैं क नहीं.

अमित : वो सब देखना आपका काम है न दीदी. ये आपका ऑफिस है . और ये कंपनी भी आपकी है. मेरी पूरी ज़िम्मेदारी आपके कन्धों पर है. जानती हैं न आप .

निधि दीदी : वो सब तो मैं देख लूंगी पर एक बार तो मिलने आ जाते. अपनी पर्सनल सेक्रेटरी का काम भी नहीं देखोगे?

अमित : देखने की ज़रूरत hi नहीं है. आप जो भी करेंगी सही करेंगी. बाकि यहाँ पर अंकल तो हैं hi .

निधि दीदी : अंकल भी कहाँ होते हैं यहाँ . फ़िलहाल तो मैं काम hi समझ रही हूँ दो दिन से. अभी कुछ अचे से पता भी नहीं चला और देखो अंकल क्या कह रहे हैं.

अमित : क्या कह रहे हैं ? ठीक hi तो कह रहे हैं. इतनी बड़ी कंपनी में इतनी बड़ी पोस्ट पर हो आप तो इतना तो बनता hi है न. कंपनी का अपना स्टेटस भी तो कोई चीज़ है क नहीं ?

निधि दीदी : ाचा !!! कंपनी का डायरेक्टर खुद बाइक पे घूमे वो ठीक है और सेक्रेटरी कार में आणि चाहिए . मुझे ये मंज़ूर नहीं .

अमित : दीदी क्यों मरवाना चाहती हो मुझे , मैं ऐसे hi खुश हूँ. और फिर मैं कौन सा ऑफिस अत हूँ. अगर कार में आने जाने लगा तो लोग पीछे पद जायेंगे. मुझे वही रहने दीजिये जो मैं हूँ.

निधि दीदी : तो मुझे भी ऐसे hi रहने दो न. घर पर क्या कहूँगी ? और वैसे भी मुझे कार चलनी कहाँ आती है.

अमित : वो कौन सी बड़ी बात है. आप कार चलना सीख लो. मैं किसी को कह देता हूँ. कल्पना शीना कोई भी आपको सीखा देगी.

निधि दीदी : पर मुझे ाचा नहीं लग रहा . एक तो अंकल ने पहले hi इतनी ज्यादा सैलरी देदी है ऊपर से ये कार. इतनी सैलरी तो पापा की भी नहीं है . अब कार भी ले लुंगी तो लोग बातें करेंगे.

अमित : लोग तो कुछ न कुछ कहते hi रहते हैं दीदी . फैसला आपको करना है क आप लोगों की सुनेंगी या मेरी.

निधि दीदी : तुम्हारे आगे तो मैं कभी खुद को भी नहीं सुनूंगी . तुम मेरे क्या हो ये मैं जानती हूँ या मेरा भगवन. ाचा तुमने ो सॉरी मैं कब से तुम कहे जा रही हूँ. यहाँ तो आप कह सकती हूँ न मैं .

अमित : no , मुझे ऐसे hi ाचा लग रहा है. आप बड़ी हैं और हक़ से मुझे ऐसे बुलाती है तो मुझे ाचा लगता है . आप कहने पर ऐसे लगता है जैसे हम कोई फार्मलिटी कर रहे हैं

निधि दीदी : पर ...

अमित : अभी आपने कहा न मेरे आगे आप अपनी भी नहीं सुनेंगी. तो मेरी ये बात आपको माननी पड़ेगी बाकि आपकी मर्ज़ी.

निधि दीदी : ाचा ठीक है , चलो पहले लंच करते हैं. मैंने भी आज लंच नहीं किया. तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी .

निधि दीदी ने इण्टरकॉम पर फ़ोन कर क हम दोनों क लिए लंच आर्डर कर दिया और तब तक वो मुझे अपने काम क बारे में बताती रही. लंच हमने मेरे वाले ऑफिस में hi किया जैसे क दीदी चाहती थी और खाना उन्होंने खुद hi सर्वे किया. यहाँ तक की मुझे अपने हाथों से खिलने लगी.

अमित : दीदी मैं खा लूंगा न आप बैठो आराम से .

निधि दीदी : no , ये मेरी जॉब है. पर्सनल सेक्रेटरी हूँ न तुम्हारी .

अमित : तो ठीक है मैं भी आपको अपने हाथों से खिलाऊंगा .

हम दोनों ने एक दूसरे को खाना खिलाया . दीदी का ऑफिस टाइमिंग 5 बजे तक था. और अभी 3 hi बजे थे. मैं दीदी को एक बार जाने से पहले गले लग कर मिला और निकल गया. मैं दीदी क साथ जब तक रहा एक पल भी उनके चेहरे से स्माइल काम न हुई. जाते जाते मैंने अंकल को फ़ोन कर क बता दिया क दीदी मन गयी है. दीदी क मन करने पर hi अंकल ने मुझे फ़ोन किया था क वो कार लेने से मन कर रही हैं. कंपनी क प्रेस्टीज क लिए अंकल उन्हें कार में आने क कह रहे थे. ताकि बाकि एम्प्लाइज को भी उनके स्टेटस का पता रहे और लोगों में भी कंपनी की जो पहचान है वो वैसे hi रहे. मैंने अंकल को बता दिया क दीदी को पहले कार सीखनी है. अंकल तो कह रहे थे क वो ड्राइवर भी दे देंगे पर मैं चाहता था दीदी खुद कार चलनी सिख लें. मैंने शीना को निधि दीदी को कार चलने को कह दिया और वो भी ख़ुशी ख़ुशी मन गयी .

मैं अपनी बाइक से घर जा रहा था क बस स्टॉप पर मेरी नज़र एक औरत पर पड़ी जो मुझे जनि पहचानी लगी. थोड़ा नज़दीक जाकर देखा तो मैंने फ़ौरन ब्रेक मर दी. ये औरत कोई और नहीं मंजरी की माँ थी. गाओं छोड़ने क बाद मैंने पहली बार उन्हें देखा था. मैं फ़ौरन उनकी तरफ चल दिया . आज इतने आरसे बाद फिर से मंजरी की यादें ताज़ा हो गयी थी. मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था. मेरी आँखों में अपने आप पानी आ गया. जैसे hi मैं उनके पास पहुंचा मैंने उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने भी मुझे पहचान लिया .

अमित : कैसी हो काकी? आप कहाँ चली गयी थी? कितने महीनो बाद देख रहा हूँ आपको.

काकी : अरे अमित तुम , कैसे हो बीटा ? बीटा अब वहां रह कर भी क्या करती. तेरे काका और मंजरी की यादें थी उस घर में जो मुझे जीने hi नहीं देती. यहाँ मंजरी क चाचा चची ने मुझे अपने पास hi बुला लिया था. अब उन लोगों क साथ hi रहती हूँ.

अमित : आप इसी शहर में हैं और फिर भी इतने दिनों से मैंने आपको देखा नहीं. मैं भी तो यहीं होता हूँ अब. इसी शहर में पढ़ता हूँ न .

काकी : ये तो बहुत अछि बात है बीटा. पढ़ लिख कर बड़े आदमी बनो. मंजरी बताती रहती थिंक तुम पढ़ाई में कितने अचे हो. वो तुम्हारे बारे में बहुत साडी बातें करती थी. तुम दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे न ? मैं जानती हूँ , उसने कभी कहा नहीं पर मैं जानती थी उसे अछि तरह. मुझे भी तुम पसंद थे मंजरी क लिए और तेरे काका को भी पर भगवन को शायद ये मंज़ूर नहीं था .

इतने कहते कहते आंटी की आँखों से आंसू बहने लगे . हाल तो मेरा भी कुछ ऐसा hi था .

अमित : मत रोइये आंटी , मंजरी बहुत अछि लड़की थी , सच कहूं तो मुझे यकीन hi नहीं हुआ था जब मुझे उसकी मौत का पता चला पता नहीं कितने दिन तक मुझे यही लगता रहा क वो शहर गयी है और वापिस आ जाएगी. पर वो वापिस नहीं आयी. भगवन को ज़रा भी दया नहीं आयी उस मासूम पर .

काकी : होनी को कौन ताल सकता है बीटा. तू सुना घर में सब कैसे हैं? मैंने सुना था छोटी बहु पेट से थी.

अमित : सब ठीक हैं काकी, और छोटी ममी को बीटा हुआ है पिछले महीने. आप बैठिये मोटरसाइकिल पर मैं आपको छोड़ अत हूँ.

काकी : अरे नहीं नहीं बीटा मैं चली जाऊंगा , तू क्यों चिंता करता है .

मैं उनकी एक न सुनी और उन्हें बाइक पर बिठा कर चल पड़ा मंजरी की चाचा क घर . काकी रस्ते में भी गाओं घर की बातें करती रही. और जब हम मंजरी क चाचा क घर पहुंचे तो मैं देख कर हैरान हो गया. घर बहुत hi ाचा था और बिलकुल नया था.

काकी : आप बता अंदर आओ बहार क्यों रुक गए .? ऐसे क्या देख रहे हो ? मंजरी क चाचा का hi घर है ये अभी लिया है 2 महीने पहले. इस लिए मुझे भी यहीं ले आये ये लोग. मालिक बहुत अचे हैं श्याम (manjari’s अंकल )क . पजूनियर है छोटे से घर में रहते थे और देखो अब कितना बड़ा घर ले दिया है. सबके पास अपना कमरा है. कहाँ पहले 2 कमरों में सब एक साथ रहते थे.

अमित : पर मंजरी ने तो बताया था क चाचा फैक्ट्री में काम करते हैं.

काकी : हाँ तो वहीँ करते हैं. कितने सैलून से वहीँ तो है. इसी लिए मालिक ने ये मैं ले कर दिया है. आओ आओ अंदर आओ.

अमित : फिर तो बहुत बड़ा दिल है मालिक का जो इतना बड़ा माकन ले दिया .

काकी मुझे अंदर ले आयी और गेस्ट रूम में बिठा कर अंदर चली गयी. मैं तो घर बार देख कर सोच रमे पद गया क इतना दयालु कौन है. या तो मंजरी को पता नहीं होगा और चाचा बड़े ओहदे और होंगे या फिर मालिक का कुछ खास hi लगाव होगा चाचा से. मैं कमरे में पड़े सजावट क सामान को hi देख रहा था क काकी क साथ एक महिला भी चली आयी.

काकी : लो बीटा पानी पियो, ये है मंजरी की चची पारो.

अमित : पाऊँ लगे चची जी.

पारो : जीते रहो बीटा , दीदी ये कौन है पहली बार देख रही हूँ इसे.

काकी : अरे अपने hi गाओं क है. अमित नाम है उसका और गाओं क सबसे भले आदमी का बीटा है. विजय भैया का. पूरे गाओं में सबसे ज्यादा ज़मीन इन्ही क पास है. मगर एक पैसे की भी अकड़ या अभिमान नहीं . देख लो खुद मुझे यहाँ तक छोड़ने आया है.

पारो : फिर तो धन हो गए हम क ये हमारे घर पधारे. वैसे आपने जो नाम बताया ये मैंने भी कई बार सुना है इनसे. बैठो बीटा मैं चाय बना कर लती हूँ.

मंजरी की चची चाय बनाने चली गयी और काकी मेरे साथ बैठ गयी बाएं करने. कुछ देर में hi पारो चाय बना लायी. और हम चाय पिने लगे . आखिर कर मैंने अपने मन की बात पूछ hi ली जो कब से मुझे परेशान कर रही थी.

अमित : चची जी , चाचा जी कौन सी फैक्ट्री में काम करते हैं ? काकी बता रही थी क ये घर उनको मालिक ने दिया है. फिर तो वो बहुत नेक इंसान हुए . ऐसे आदमी क बारे में मैं जानना चाहता हूँ

पारो : उनके बारे में ज्यादा तो न पता है मुझे पर इतना पता है क डप नाम है फैक्ट्री का जहाँ इतनी सैलून से काम कर रहे हैं तेरे चाचा. पहले तो हम किराये क माकन में hi रहते थे पर पता नहीं कैसे भगवन को दया आ गयी हम गरीबों पर और मालिक ने ये घर ले दिया. बड़े hi भले इंसान हैं वो. एक पैसा नहीं लिया इसके बदले में.

अमित : ये तो बहुत बड़ी बात है. कौन करता है ऐसा आज कल. वैसे चाचा करते क्या हैं फैक्ट्री में ?

पारो : पहले तो मजदूर hi थे पर अब वो क्या कहते हैं हाँ फरमान हैं .

अमित : ाचा ाचा , तनख्वाह तो अछि होगी चाचा की

पारो : पहले तो घर का गुज़ारा न होता था अब दुगनी हो गयी है तो घर अचे से चल रहा है और दोनों बेटों को भी वहीँ नौकरी मिल गयी है.

अमित : बहुत अछि बात है , ाचा काकी कुछ पता चला क कैसे हुआ था एक्सीडेंट मंजरी और काका का? पुलिस ने कुछ बताया ?

काकी : अब पता कर क क्या करना बीटा, जाने वाले तो चले गए . मैंने शाम से कहा था तो कहने लगा क पुलिस को कुछ पता नहीं चला है. और पुलिस गरीबों क लिए अपना टाइम ख़राब नहीं करती. अब जो गया सो हो गया तुम भी भूल जाओ. वो अब वापिस तो आने वाले हैं नहीं.

अमित : पर उन्हें सजा तो मिलनी चाहिए न काकी. आप चिंता मत करो मैं कुछ लोगों को जनता हूँ वो पुलिस में अछि जान पहचान रखते हैं. देख लेना पुलिस उन लोगों को ज़रूर पकड़ लेगी. चची आप ज़रा बाँटोगी क चाचा ने शिकायत किस ठाणे में दी थी ?

पारो : मम मुझे नहीं पता मम मैं थोड़ा कहीं गयी थी . और तुम किन बातों में पद गए बीटा . इन्होने बहुत दौड लगाई थी मगर कुछ पता नहीं चला इनके मालिक में भी पुलिस को कहा था. बहुत बड़े लोग हैं वो पर फिर भी पुलिस ढूंढ नहीं पायी. तुम किसी बात की चिंता मत करो . दीदी का ख्याल हम रख रहे हैं न. भूल जाओ जो हो गया .

मेरी बात सुन कर मंजरी की चची हड़बड़ा गयी थी और जिस तरह से वो बात करने लगी थी मुझे उसकी बात पर यकीन नहीं हो रहा था. मगर मैं शांत रहा वैसे भी उन्हें ज्यादा कुछ कहाँ पता होगा. पर दाल में कुछ कला ज़रूर है ये बात मुझे समझ आ गयी थी. ज़रूर कुछ छुपा रही थी चची.

अमित : चलो आपको नहीं पता तो कोई बात नहीं मैं चाचा से पूछ लूँगा. पर उन लोगों को सजा तो मिलनी hi चाहिए. चाचा कब आएंगे ?

पारो : वो वो फैक्ट्री क काम से बहार गए हैं . आज नहीं आएंगे .

अमित : चलो कोई बात नहीं , ाचा चची मैं फिर आऊंगा. और अगली बार चाचा से ज़रूर मिलूंगा .

इतना कह कर मैं दोनों से विदा ले कर घर की तरफ चल पड़ा .

घर पहुंचा तो रीता मौसी ने hi दरवाज़ा खोला . मैंने उनके पूछने से पहले hi बता दिया क मैं निधि दीदी क पास गया था. करुणा दीदी और नेहा दीदी भी मौसी क पास hi थी . मैंने कुछ देर उनसे बात की और फिर आराम करने अपने कमरे में चला गया . मैं कुछ देर अकेला रहना चाहता था. क्यूंकि मंजरी की माँ से मिलकर मुझे उसकी यद् आने लगी थी जो मैं अपनी दौड़ भरी ज़िन्दगी में भूल सा गया था.

सप ऋतू सिंह आज फिर से अपनी सहेली मंजू क घर गयी. उसे पता चल गया था क अमित किस वक़्त अत है इस लिए वो उसी वक़्त पर आज मंजू क घर गयी मगर आज भी अमित नहीं आया. अमित क न आने से मंजू अंदर hi अंदर परेशां थी पर अपनी सहेली को वो ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी. ऋतू ने मंजू क चेहरे ओर फींकी हंसी पहचान ली थी . उसे पता था क असल वजह क्या है ओर उसने भी ज्यादा इस मसले पर बात नहीं की . वहीँ शीना भी आज थोड़ी देर hi बैठी और जब उसने देखा क अमित आज भी नहीं आया है तो वो निधि क घर की तरफ चल पड़ी. अमित ने उस एक काम दिया था जिसे वो हुकम समझ कर पूरा करने वाली थी निधि को ड्राइविंग सीखना.

शीना जब निधि क घर पहुंची तब घर पर सभी मौजूद थे सिवाए निधि क पापा क. निधि भी 6 से कुछ देर पहले hi घर पहुंची थी और घर पहनने वाले आरामदायक कपड़ों में थी. उसे तो पता भी नहीं था क शीना आज आ रही है. शीना ने जब बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा नैना ने खोला. अपने सामने शीना को देख कर नैना हैरान भी हुई और खुश भी .

नैना : शीना तुम !!! व्हाट ा प्लेअसेन्ट सरप्राइज. तुम यहाँ कैसे ?

शीना : अंदर आने देंगी या यहीं से वापिस चली जॉन ?

नैना : अरे आओ आओ ऐसे कैसे चली जाओगी .

नैना ने शीना को गले लगाया और अंदर ले आयी . निधि अभी किचन से कॉफ़ी बना का बहा hi निकली थी क शीना को देख कर वो भी सरप्राइज हो गयी. रजनी भी हॉल में hi थी .

निधि : अरे शीना तुम !! तुम यहाँ अचानक ?

निधि शीना से गले मिली तो शीना ने भी निधि को गाल लगते हुए जवाब दिया

शीना : कमल है अभी नैना दीदी भी यही पूछ रही थी . मैंने सोचा शायद उन्हें पता नहीं होगा पर यहाँ तो लगता है आपको भी जैसे कुछ नहीं पता . अमित ने बताया नहीं आपको ? उसी ने तो भेजा है मुझे क मैं आपको कार चलना सिखों.

नैना : क्या कहा कार ?? पर दीदी क्या करेंगी कार सिख कर ? और वो खुद क्यों नहीं आया ?

निधि : तुम्हे अमित ने कहा है, एक बार मुझे बता देता तो मैं भी तैयार हो जाती. ाचा तुम 2 मिनट्स बैठो मैं अभी आयी कपडे चेंज कर क. और ये लो कॉफ़ी पियो अभी बनायीं है मैंने .

निधि शीना क हाथ में कॉफ़ी का कप थमा कर खुद अपने कमरे में चली गयी . शीना सोफे पर बैठने से पहले रजनी से मिली . रजनी अभी तक इन तीनो की बातें सुन चुकी थी पर उसे असल बात अभी तक पता नहीं थी. निधि ने घर पर किसी को कुछ बताया नहीं था .

रजनी : कैसी हो बेटी ? अमित ने तुम्हे खामखाह hi टेंशन दी. निधि को भला कार सिखने की क्या ज़रूरत है. हमारे पास कौन सा कार है.

शीना : अरे आंटी जी इसमें टेंशन कैसी. अमित मेरा दोस्त है और उसके लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ. वैसे भी निधि दीदी और नैना दीदी मेरे लिए भी तो बड़ी बहने हैं. अपनी बड़ी बहिन को कार सीखने मुझे तो ख़ुशी hi होगी न. रही बात कार की तो वो कौन सा बड़ी बात है . आप एक बार मुँह से कहो जैसी कार कहेंगी वैसी मिल जाएगी.

नैना : हाँ माँ शीना क पापा बहुत बड़े आदमी हैं और इनका फार्म हाउस तो बहुत hi नाडा है . हमारे जैसे तो 10 माकन आराम से बन जाएँ उतनी जगह में जितनी इनके फार्म हाउस क आगे सिर्फ लॉन बनाने में छोड़ी हुई है.

रजनी : इतने बड़े घर की बेटी हम गरीबों क घर .

शीना : प्लीज आंटी ऐसा मत कहिये. सिर्फ पैसे से hi कोई अमीर नहीं होता. मेरी नज़र में आप सब मुझसे ज्यादा अमीर हैं . क्यूंकि आप सब में कितना प्यार है आपस में . ऐसा प्यार ऐसे संस्कार आज कल कहाँ मिलते हैं. पैसे वाले सिर्फ मतलब क रिश्ते बनाते हैं जिसमे नफा नुकसान hi देखा जाता है . जबकि अमित से मैंने जाना है क पैसे से बड़ी दौलत आपसी प्यार रिश्तों और इंसानियत में है. उससे अमीर इंसान इस मामले में और कोई नहीं हो सकता .

रजनी : सच में मुझे फख्र है क अमित हमारा बीटा है जिसे सब इतना प्यार करते हैं.

नैना : हाँ माँ लगता है कुछ ज्यादा hi प्यार मिल रहा है उसे . क्यों शीना सही कहा न ?

नैना ने जानबूझ कर शीना को छेड़ते हुए ऐसा कहा था . जिससे वो शर्मा गयी. सुधर कारन भी साइड में खड़ा सबकी बातें सुन रहा था . शीना जैसी खूबसूरत लड़की क पास आने क लिए तो वो गाओं में भी कोशिश करता रहा था पर वहां मौजा नहीं मिला था. और अब तो उसे अपने लिए गोल्डन चांस नज़र आने लगा था. ऊपर से शीना कितने अमीर है ये जानकर तो उसकी लार और भी ज्यादा टपकने लगी थी . 2 दिन पहले हुई अपनी ठुकाई उसे भूल गयी. और वो शीना पर डोरे डालने क लिए स्कीम बनाने लगा.

कारन : अरे शीना तुम यहाँ ? वेलकम तो आवर होम. मुझे यकीन नहीं हो रहा इतनी जल्दी हम फिर से मिल रहे हैं. उस दिन तो ठीक से बात करने क मौका hi नहीं मिला था .

कारन शीना से हाथ मिलाया हुआ वहीँ आ कर सोफे पर बैठ गया.

शीना : hi , हाउ अरे यू ? बस वो अमित ने कहा था क था क निधि दीदी ने कार सीखनी है तो मैं खुद आ गयी. इसी बहाने आप सब से मिलने का मौका भी मिल जायेगा. निधि दीदी और नैना दीदी से तो पहले भी मिलना हो चूका है अब आंटी और आप से भी मिलना हो जायेगा.

शीना ने तो ये बात नार्मल लहजे में hi कमी थी पर कारन क मन में लड्डू फूटने लगे.

कारन : ये तो सही कहा तुमने. इसी बहाने हमें भी मौका मिलेगा तुम्हारी मेहमान नवाज़ी का.

इतने में निधि कपडे बदल कर आ गयी और कारन को शीना क साथ ऐसे बातें करते देख उसे ाचा नहीं लगा. नेहा से वो कल्पना क साथ हुई घटना क बारे में सुन चुकी थी और अमित क साथ कारन क रवैये से वो पहले hi गुस्से में थी.

निधि : चलें शीना ?

शीना : हाँ दीदी चलो

कारन : मैं भी चलता हूँ आपके साथ . इस टाइम आप दोनों का अकेले जाना ठीक नहीं .

निधि : तुम घर पर रुको यहाँ भी माँ और नैना अकेली हैं इनका ध्यान रखो . हम अपनी परवाह कर लेंगे.

कारन : माँ आप hi कहो दीदी से क अँधेरा हो रहा है , शीना तो हमारी मेहमान है . अभी तो हमने इसकी कोई सेवा भी नहीं की .

शीना : it’s ok मैं कोई मेहमान नहीं हूँ . मैं तो अपनी बड़ी बहिन क पास hi आयी हूँ .

निधि : सुन लिया या और भी कुछ कहना है तुम्हे ?

रजनी : वैसे बीटा इस वक़्त तुम लोग अकेले...

निधि : माँ आप चिंता मत करो, हम ध्यान रखेंगे.

शीना : it’s ok आंटी मैं समझ सकती हूँ. हम कल से सुबह चले जाता करेंगे. अगर आप कहती हैं तो हम आज रहने देते हैं. वैसे मैं आपको तसल्ली क लिए कह देती हूँ क हम कहीं बहार नहीं जायेंगे. सिटी क आउटर में जो रियल एस्टेट है वो पापा का hi है तो हम वहां सेफ रहेंगे.

कारन : क्या !! मतलब आपका रियल एस्टेट का काम है ? क्या आप मुझे दिखा सकती हैं?

निधि : शीना हम लोग चलें ? आज पहला दिन है अगर नहीं गए तो वो नाराज़ होगा.

शीना : हाँ हाँ चलो दीदी , मैं भी उसे शिकायत का मौका नहीं देना चाहती.

निधि शीना का हाथ पकड़ कर उसे बहार ले चली और कारन भी आखिरी उम्मीद लिए पीछे पीछे कार तक आ गया. चमचमाती बंव कार देख कर तो उसकी ऑंखें बहार निकल कर गिरने को हो गयी. शीना क साथ hi निधि अगली सीट पर बैठ गयी, कारन खुद को रोक नहीं प् रहा था वो कैसे भी कर क साथ जाना चाहता था और आज पहली बार वो इतनी मेहेंगी कार को इतने पास से देख रहा था .

कारन : दीदी प्लीज मन जाओ न . मैं आप लोगों को बिलकुल परेशां नहीं करूँगा .

निधि : मैंने कहा न तू घर पर माँ और नैना का ध्यान रख. हम अपना ध्यान रख सकती हैं. चलो शीना.

शीना ने निधि क कहते हो कार आगे बढ़ा दी और कारन अपना सर पीट ता रह गया. कहाँ वो इतनी मेहेंगी लक्ज़री गाडी में बैठने क लिए मारा जा रहा था और निधि की वजह से उसके अरमानों पर पानी फिर गया . उसे अपनी बहिन पर गुस्सा आ रहा था. पर कर भी क्या सकता था. अब तो अपनी माँ से भी कह नहीं सकता था कुछ.. पर मन hi मन उसने इस बात का इरादा कर लिया था क वो शीना को अपने प्यार क जल में ज़रूर फसायेगा. इतनी पैसे वाली लड़की को अगर वो फसा ले तो साडी ज़िन्दगी ऐश करेगा और ऊपर से शीना थी भी तो कितनी खूबसूरत.



कारन को अपने इस काम में मदद की एक hi किरण नज़र आ रही थी और वो थी नैना . अपने मन में खुद hi प्लान बनता वो नैना की खुशामद करने अंदर चल दिया.
 
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