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मंजरी को यद् करता मैं अपने कमरे में जाने कब तक अकेला बैठा रहा. मुझे हमारी वो आखिरी मुलाकात क मंजरी क शब्द बार बार यद् आ रहे थे ‘ पता नहीं क्यों मगर मेरा दिल नहीं मन रहा मुझे ऐसा लगता है क मैं आप से बहुत दूर चली जाउंगी ‘ मंजरी की ये बातें सच हो गयी और वो हमेशा क लिए मुझसे दूर हो गयी. मेरा किसी से भी बात करने का दिल नहीं था इस लिए फ़ोन भी बंद कर क साइड में रख दिया था. सरे घर में शाम क वक़्त लाइट जल चुकी थी बस मेरा hi कमरा अँधेरे में था. मैं बस लेता लेता मंजरी की यादों में खोया था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और करुणा दीदी अंदर आ गयी शायद वो मुझे जगाने आयी थी. कमरे में अँधेरा देख वो लाइट जलने लगी तो मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली और सोने की एक्टिंग करने लगा. करुणा दीदी ने मुझे 1-2 बार आवाज़ दी पर मैं नहीं हिला. मुझे सोया हुआ समझ कर वो मेरे ऊपर hi लेट गयी और मुझे किश करने लगी. मैं वैसे hi पड़ा रहा और कोई रिस्पांस नहीं दिया . करुणा दीदी अपने नरम होंठों से मेरे होंठ चूस रही थी . कभी वो ऊपर वाले होंठ को चुस्ती और कभी निचे वाले को. जब मेरी तरफ से किसी तरह का रिस्पांस न मिला तो वो मेरे ऊपर से हटी.
करुणा : अजीब लड़का है , कैसे घोड़े बेचकर सो रहा है . यहाँ मैं मर रही हूँ प्यार करने क लिए और इसे परवाह hi नहीं कोई . ो हीरो उठ जा देख कितना टाइम हो गया है. पापा भी आ गए हैं . माँ बुला रही है चल उठ अब . उठ न कितना सोता है.
मैंने उठने की एक्टिंग करते हुए कहा
अमित : क्या हुआ दीदी क्यों परेशां कर रही हो .
करुणा दीदी : ाचा !! मैं परेशां कर रही हूँ ? परेशां तो तू कर रहा है . 4 दिन हो गए तुझे यहाँ आये और अभी तक तूने मुझे एक बार भी टाइम नहीं दिया. अब भी कैसे आराम से सो रहा है . वैसे ाचा है आज रत तुझे मैं सोने नहीं दूंगी .
अमित : आपको बस एक hi काम सूझता है ? कल आपको शॉपिंग करवाई न मैंने ? फिर क्यों परेशां कर रही हैं ? अब हटिये मैं आ रहा हूँ नीचे .
करुणा दीदी : हुआ क्या है तुझे ? ये कैसे बात कर रहा है तू ? पहले तो कभी ऐसे बात नहीं करता तू ? दिल भर गया है क्या मुझसे ? नहीं करती तुझे परेशां
मुझे अपने गलती का एहसास हुआ मैं कुछ ज्यादा रौदे हो रहा था करुणा दीदी क साथ. वो तो मुझे प्यार करती थी और मैं उन्हें ऐसे जवाब दे रहा था. मैं कुछ कहता इससे पहले hi करुणा दीदी पेअर पटकते हुए कमरे से बहार चली गयी . अपने दुःख से दुखी हो कर अपने चाहने वालों को दुखी करना भी तो सही नहीं होता. करुणा दीदी का भला क्या दोष था इसमें . वो तो दिल से मुझे चाहती थी और मेरी परवाह भी करती थी . मैं जल्दी से उठा और फ्रेश हो कर नीचे चला गया. मौसा जी हॉल में बैठे थे और साथ में hi नेहा दीदी करुणा दीदी भी. मौसी किचन में थी . मुझे देखते hi करुणा दीदी में नाराज़गी से मुँह फेर लिया . मैं मौसा जी क साथ बैठ गया और उनसे बातें करने लगा. टाइम 8 से ऊपर हो चूका था इस लिए मौसी रत का खाना बना रही थी. नेहा दीदी वैसे तो किताब पढ़ रही थी पर उनकी नज़र मुझ पर भी थी. कई बार मेरी उनसे नज़र मिली तो हर बार उन्हें खुद को देखता हुआ पाया. खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला आया , करुणा दीदी भी अपने कमरे में चली गयी. मुझे करुणा दीदी को ऐसे नाराज़ करना ाचा नहीं लग रहा था. मैंने सोच लिया क उनके पास जा कर उन्हें मनाता हूँ. अभी मैं सोच hi रहा था क नेहा दीदी कमरे में आ गयी . नेहा दीदी को इस वक़्त अपने कमरे में देख कर मैं हैरान हो रहा था क्यूंकि वो इतने दिनों से ऐसे आयी hi नहीं थी मेरे पास. मेरे कुछ कहने से पहले वो दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आ कर बैठ गयी और मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली.
नेहा दीदी : क्या बात है ? किस बात को लेकर तू इतना टेंशन में है ?
अमित : कुछ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं .
नेहा दीदी : झूठ मत बोल , तेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रहा है क तू किसी बात पर टेंशन में है . अगर बहिन मंटा है अपनी तो बता मुझे सब . आज तक तू इतनी देर तक अपने कमरे में नहीं रहा और तेरी ऑंखें बता रही हैं क तू किसी बात पर दुखी है. तेरा दुःख मैं महसूस कर सकती हूँ . बता मुझे क्या बात है ?
नेहा दीदी जो हमेशा काम बोलती थी वो मुझे इतनी गौर से देख रही थी क उन्होंने वो जान लिया जो किसी और ने नहीं देखा.
अमित : किसी की यद् आ रही थी दीदी , एक दोस्त जो मेरे बहुत करीब था वो अचानक मुझसे बहुत दूर चला गया . आज मैं उसकी माँ से मिला था तो बस तब से उसी को यद् कर रहा था . काश क मैं उससे फिर से एक बार मिल सकता . आखिरी बार उससे बात भी नहीं हो पायी थी .
नेहा दीदी : दोस्त ? तेरी आँखों की नमी बता रही है क वो दोस्त लड़का नहीं कोई लड़की होगी . मैं सच कह रही हूँ न.
न चाहते हुए भी मेरी आँखों में रुका पानी छलक पड़ा और ये देख नेहा दीदी ने फ़ौरन मुझे अपने गले से लगा लिया .
नेहा दीदी : मत रो मेरे भाई मत रो. तू इतना कमज़ोर नहीं है. खुद को संभल . तीनो आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते. तू अपने सरे आंसू मुझे देदे . तेरे सरे दुःख तू मुझे देदे. मैं तुझे रोने नहीं दूंगी . तू तो मेरा प्यारा भाई है न.
अमित : मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है दीदी ? पहले माँ पापा चले गए और फिर वो भी चली गयी. मुझे जो भी प्यार करता है उसे मुझसे छीन लिया जाता है . ऐसा क्यों होता है दीदी. क्या ऐसे hi एक एक कर क सब मुझसे दूर हो जायेंगे ? कभी कभी तो दर लगता है क कहीं सब मुझे अकेला छोड़ कर चले जायेंगे .
नेहा दीदी: ऐसा क्यों कहता है ? ऐसा कभी नहीं होगा. देख सभी तुझे कितना प्यार करते हैं . फिर भी तू ऐसे सोचता है. मैं हूँ न तेरे पास . चाहे कुछ भी हो जाये मैं तेरा साथ कभी नहीं छोडूंगी . तू hi तो मेरा भाई है. मैं तुम्हे कभी अकेला नहीं रहने दूंगी मैं तुझे छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी .
नेहा दीदी भी मुझे गले से लगाए रोने लगी थी तो मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और नेहा दीदी क आंसू पोंछे .
अमित : आओ क्यों रो रही हैं दीदी ? मेरी तो किस्मत में आंसू लिखे हैं पर आप ऐसे रो कर खुद को दुखी मत कीजिये .
नेहा दीदी: मेरी आँखों से तेरे hi आंसू बह रहे हैं मेरे भाई. जब तक तू दुखी है इन आँखों में ख़ुशी कैसे आ सकती है.
अमित : दीदी !!!
मैंने ज़ोर से नेहा दीदी को गले से लगा लिया. नेहा दीदी क दिल में मेरे लिए कितना प्यार था ये मुझे पता चल रहा था. वो जताती नहीं थी पर शायद मुझसे ज्यादा वो किसी से प्यार नहीं करती थी .
नेहा दीदी : अब तू कुछ भी मत सोचना , जो होता है भगवन की मर्ज़ी से होता है. जितना तू सबको प्यार करता है न उससे ज्यादा hi मिलेगा तुझे देख लेना.
नेहा दीदी काफी देर तक मेरे पास बैठी रही और फिर रीता दीदी मेरे लिए दूध ले आयी तब कहीं जा कर नेहा दीदी मेरे कमरे से गयी.
रीता मौसी : आज रत सो मत जाना मैं तुम्हारे कमरे में आउंगी तेरे मौसा क सोने क बाद. कल से आग लगी हुई है. खुद से कुछ होता नहीं और मुझे भड़का देते हैं.
अमित : पर मौसी परसों hi तो किया था न हमने .
रीता मौसी : क्या बताऊँ तुझे, सब तेरे मौसा का कसूर है. मैं तो कल hi आ जाती तेरे पास अगर दिव्या न होती तो. कल से बुरा हल है मैं सब को सुला कर अति हूँ तेरे पास.
अमित : नहीं मौसी आज मेरा मन नहीं है .
रीता मौसी : क्या बात है ? शाम को भी तू इतनी देर तक सोता रहा . कोई बात है तो मुझे बता.
अमित : नहीं मौसी ऐसी कोई बात नहीं है बस आज मन नहीं है .
रीता मौसी : ( उदास होते हुए ) ाचा ठीक है. तू आराम कर जब तेरा मन हो तो बता देना.
इतना कह कर मायूस होती रीता मौसी नीचे चली गयी . मैं दूध पिने क बाद कुछ देर लेता रहा . फिर मुझे करुणा दीदी का ख्याल आया. मैं उठ कर उनके कमरे में चला गया .
करुणा दीदी करवट क बल लेती हुई थी . बीएड क किनारे दूध का गिलास ढाका हुआ पड़ा था जो उन्होंने नहीं पिया था. मैंने आहिस्ता से दरवाज़ा बंद किया और बीएड क दूसरी तरफ से घूम कर जब करुणा दीदी क पास गया तो देखा वो जग रही थी और उनकी आँखों में आंसू थे. मुझे देखते hi उन्होंने ऑंखें बंद कर ली. करुणा दीदी मेरी वजह से दुखी थी , मुझसे देखा न गया और मैंने उनके ऊपर झुकते हुए उनके चेहरे पर हर जगह किश कर क अपनी गलती की माफ़ी मांगी.
अमित : दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती हो गयी. मुझे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी. प्लीज मुझे माफ़ कर दो.
मैंने लगातार दीदी को चुनता जा रहा था. उनके चेहरे से आंसुओं की धार मैंने अपनी जीभ से साफ की.
करुणा दीदी : बात मत कर मुझसे. मैं तेरे पास आने क लिए मरती रहती हूँ और तुझे मेरी कोई परवाह hi नहीं है. कभी सोचा है मेरा क्या बल होता है? कभी मेरे लिए अपने आप टाइम निकला है तुमने ? क्या कसूर है मेरा जो ऐसे मुझसे सजा दे रहे हो तुम ?
अमित : ी ऍम सॉरी दीदी. मेरा मूड ठीक नहीं था इस लिए आपसे ऐसे बात कर बैठा. आप भी जानती हैं न क मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ.
करुणा : ाचा प्यार है तुम्हारा , मैं इतने दिनों से प्यार करने को कह रही हूँ और प्यार करने की बजाये मुझ पर गुस्सा दिखा रहे हो .
अमित : गलती हो गयी दीदी कहा न , अब अपनी गलती को ठीक करने hi तो आया हूँ .
करुणा दीदी : हटो पीछे मुझे कुछ नहीं करना है. तुम बैठे रहो अपना ख़राब मूड लेकर .
अमित : ऐसे कैसे बैठा रहूं , अब तो मैं आपको प्यार किये बिना कहीं नहीं जाने वाला .
इतना कह कर मैंने करुणा दीदी क होठों पर अपने होंठ रख दिए . करुणा दीदी मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी पर मैं नहीं हटा और फिर वो भी मेरा साथ दें लगी. जल्दी उनकी किश वाइल्ड होने लगी और मुझे बीएड पर गिरा कर वो खुद मेरे ऊपर आ गयी. करुणा दीदी मेरे होंठों काटने hi लगी थी. जंगली बिल्ली की तरह वो मेरे ऊपर हावी हो रही थी .
करुणा दीदी : आआह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म बहुत तंग किया है तूने मुझे बहुत तरसाया है आज सारा हिसाब लूंगी उम्म्म उम्म्म
करुणा दीदी मेरे होंठ चबाती मुझे किश कर रही थी और मेरी T-shirt खिंच रही थी. मैंने भी उनका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतर दी और उनकी T-shirt भी उतरने लगा जो उन्होंने एक झटके में खुद hi उतर दी. टीशर्ट क साथ ब्रा भुई उतारते हुए करुणा दीदी ने अपने कच्चे आम निर्वस्त्र कर दिए . मैंने झट से उनके चुचों को थम लिया और मसलने लगा .
करुणा दीदी : आअह्ह्ह कक्कक्क्स आह्हः आज आयी है तुम्हे इनकी यद् ? इतने दिनों से यद् नहीं था क इनको प्यार भी करना है ? कक्कक्स जितना मुझे तड़पाया है आज मैं तुम्हे भी तड़पाऊंगी .
करुणा दीदी ने अपने चुचों से मेरे हाथ हटाए और मेरे लोअर को पकड़ कर खींचते हुए मेरे पैन से निकल दिया. मेरा लैंड अंडरवियर में hi अकड़ने लगा था . करुणा दीदी ने मेरे ुंडाइवेअर को भी खिंच कर निकल दिया. मैं तो बस करुणा दीदी को देख रहा था क वो प्यार कर रही हैं या गुस्सा . निर्वस्त्र होते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलने लगा. करुणा दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड अपने हाथों में थम लिया. मैं दीदी की इस हरकत पर हैरान हो गया.
करुणा दीदी : बहुत तड़पते हो न तुम अब बताती हूँ तुम्हे. सारूउप साररूउप सरररूउप
दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड सुपडे तक अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो हैरान हो रहा था क दीदी आज किस मूड में हैं. वो सच में hi बदला लेने की कोशिश कर रही थी . धीरे धीरे आधा लैंड दीदी अपने मुँह में लेने लगी . वो बड़े hi जोश क साथ लैंड चूस रही थी. मैं भी दीदी की इस लैंड चूसै से पागल होने लगा . मेरे हाथ अपने आप दीदी क सर पर पहुँच गए . दीदी लैंड चूसने क साथ मेरे अंडकोष भी सेहला रही थी. मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी .
अमित : सीसीसी हहहा उम् रुक जाओ दीदी कक्कक्स रुक जाओ
करुणा दीदी : साररूपप सरररूपप उम्म्म क्यों अब पता चला अभी तो आगे आगे देखो .
दीदी रुक hi नहीं रही थी तो मैंने दीदी को ज़बरदस्ती अपने लैंड से हटाया और उनका लोअर पेंटी समेत उतर दिया. दीदी की बिना बालों की चिकनी छूट मेरे सामने थी. करुणा दीदी की मैंने अभी तक एक hi बार चुदाई की थी और उसमे भी लैंड पूरा नहीं डाला था. करुणा दीदी की छूट क होंठ थोड़े से खुले थे और अंदर से थोड़ा सा मांस चोंच की शकल में बहार था . मैंने झुक कर दीदी की छूट पर मुँह लगा दिया और अपनी जीभ अंदर घुसा दी . दीदी भी तड़प उठी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी .
करुणा दीदी : आआह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म खा जाओ ककक खा जाओ इसे बहुत रोटी है ये तुम्हे यद् कर क आज इसे अछि तरह रुला दो. कक्कक्स आअह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आठ ओह्ह्ह्ह
मैंने अभी 2-3 मिनट्स hi चूसा था क दीदी का जिस्म क ओने लगा और अकड़ कर उनका बदन ढीला पद गया . मैंने उनका पानी निकलने क बाद उनकी टंगे खोल कर बीच में आते हुए अपना लैंड छूट पर लगाया तो दीदी ने एक बार ऑंखें खोल कर मुझे देखा . और फिर से ऑंखें बंद कर ली. मैंने छूट पर लैंड सेट किया और हल्का धक्का मर कर लैंड का सूपड़ा अंदर घुसा दिया. दीदी को थोड़ा दर्द हुआ पर उन्होंने बर्दाश्त कर लिया. मैंने एक और धक्का मर कर आधा लैंड छूट में घुसा दिया.
करुणा दीदी : आह्ह्ह्ह रुको मत कक्कक्स आज मैं इसे पूरा लेना चाहती हूँ कक्कक्स मेरे अंदर समां जाओ . आअह्ह्ह्ह
करुणा दीदी दर्द सेहती हुई भी मुझे पूरा अंदर करने को कह रही थी. जबकि पिछली बार उनकी इतने में hi बुरी हालत हो गयी थी. मैंने भी उनकी बात मानते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.
करुणा दीदी : आआआ माआआआ मममममम
लैंड पूरा घुसते hi करुणा दीदी दर्द से तड़प उठी और उनके मुँह से चीख निकल गयी . मैंने जल्दी से उनके होंठ अपने होंठों से लॉक कर दिए. दीदी को दर्द तो हो रहा था पर छूट तो पहले hi खुल चुकी थी इस लिए उतना दर्द नहीं था पर लैंड आज पहली बार पूरा अंदर गया था तो वो बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी. मैंने कुछ देर उनके बूब्स मसलते हुए उन्हें किश करता रहा. जब वो कुछ नार्मल हुई तो मैंने लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. लैंड छूट में पूरा फास फास कर आ जा रहा था. जब मुझे लगा क करुणा दीदी अब आराम से लैंड को झेलने लगी है तो मैंने उनके होंठ आज़ाद कर दिए और सीधा बैठ कर अपनी कमर हिलने लगा.
करुणा दीदी : ाःह ककक उम् अब मज़ा आ रहा है ऐसे hi करते रहो . सीसीसी आह्हः आअह्ह्ह मुझे यकीन नहीं हो रहा क कक्कक्स क पूरा अंदर चला गया उम्म्म दीदी सच hi कह रही थी ाःह आह्हः जब पूरा जाता है तो और भी मज़ा अत है आअह्ह्ह आह्हः
अमित : तो ये सब नैना दीदी बताती है आपको . आपकी ये बहुत टाइट है नैना दीदी से भी ज्यादा.
करुणा दीदी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह तो कार्डो न ढीली . तुम्हे hi करना है जो करना है आअह्ह्ह आह्हः इसे अआपने हिसाब से ढीली करलो आअह्ह्ह आह्हः और तेज़ करो
मैंने दीदी की छूट में ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए . कुछ देर इस पोज़ में छोड़ने क बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया और वो लैंड पर बैठ कर उछलने लगी. दीदी क उछलने से उनके बूब्स और भी दिलकश लग रहे थे. मैं उनके बूब्स थामे नीचे कमर उछाल कर धक्के पेल रहा था. दीदी का एक बार फिर से पानी निकल गया. फिर मैंने उन्हें घोड़ी बाण दिया और पीछे से लैंड घुसा कर कमर थामे तेज़ धक्के मरने लगा पर करुणा दीदी अभी इतनी चुदाई क काबिल नहीं थी इस लिए वो जल्दी hi अपना पेट पकड़ कर बैठ गयी और मुझे रुकने को कहने लगी.
करुणा दीदी : रुका जा भी प्लीज आअह्ह्ह्ह रुक जा मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती प्लीज आह्हः माआ बहुत दर्द हो रहा है .
आज मेरा ध्यान भी चुदाई में काम था इस लिए मुझे ज्यादा देर लग रही थी. मैं रुकना तो नहीं चाहता था पर करुणा दीदी की हालत देख कर मैं रुक गया .
अमित : दीदी आप ठीक तो हैं ?
करुणा दीदी : बहुत दर्द हो रहा है अमित मैं और नहीं सेह सकती प्लीज
अमित : कोई बात नहीं दीदी it’s ok. आप रेस्ट कीजिये . कोई पैन किलर है क्या आपके पास ?
करुणा दीदी : हाँ शायद यदि हो ड्रावर में देखो .
मैंने देखो तो ड्रावर में पैन किलर पड़ी थी मैंने दीदी को पानी क साथ टेबलेट डी और उन्हें कपडे पहना दिए. दीदी को बीएड पर लेता कर मैं भी अपने कपडे पहने और कमरे का दरवाज़ा बंद कर क बहार निकल गया. मेरा पानी नहीं निकला था तो ऐसे में नींद अचे से नहीं आने वाली थी तभी मुझे मौसी का ख्याल आया. वो मेरे पास उम्मीद से आयी थी और मैंने उन्हें वापिस भेज दिया था. मैं अपने कमरे में जाने की बजाये नीचे मौसी क रूम में चला गया. दरवाज़ा खोला तो मौसा और मौसी दोनों बीएड पर सो रहे थे . कमरे में हलकी रौशनी का बल्ब चल रहा था. मैं चुपके से अंदर गया और दरवाज़ा बंद कर क मौसी की तरफ जा कर खड़ा हो गया. मौसी करवट क बल लेती निघ्त्य पहने सो रही थी. मैंने मौसी क बड़े बड़े चुके पकडे और ज़ोर से मसल दिए. मौसी क मुँह से एक चीख निकली जिसे मैंने मुँह पर हाथ रख कर दबा दिया. मौसी की ऑंखें खुल चुकी थी और मुझे सामने देख कर वो चुप हो गयी.
अमित : शहहह मौसा hi उठ जायेंगे .
रीता मौसी : नहीं उठेंगे सुबह से पहले मैंने उन्हें दूध पीला दिया था. पर तुम तो कह रहे थे क मूड नहीं है.
अमित : मैं सोचा आपको अचे से नींद नहीं आएगी तो चला आया.
रीता मौसी : ( मुस्कुराते हुए ) तो देर किस बात की है हो जाओ शुरू.
इतना सुनते hi मैंने मौसी को किश किया और उनके चुके निघ्त्य क ऊपर से hi मसलते हुए नीचे चलता हुआ उनके पाऊँ तक आ गया. मौसी का पाऊँ पर मैंने किश किया और उनकी तरफ देखा और उनसे परमिशन मांगी. मौसी मुझे ऐसा करते देख शर्मा गयी. मैंने मौसी क दोनों पाऊँ पकड़ कर उठा दिए और उनकी निघ्त्य उनकी कमर पर इकठी हो गयी. मौसी ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी मैंने भी अपना लोअर और अंडरवियर निचे किया और लैंड को छूट पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मरते हुए एक hi बार में पूरा लैंड छूट में जड़ तक घुसा दिया . मौसी ज़ोर से कराह उठी. मौसा जी तो नींद की दवा क असर से उतने वाले थे नहीं इस लिए मौसी भी खुल कर मज़ा ले रही थी. मैंने बिना रुके मौसी की छूट की धज्जीआं उड़ानी शुरू कर दी और दी अपना पानी रीता मौसी की छूट में निकल दिया. तब तक मौसी का भी काम हो गया था. मौसी हैरान हुई क आज मेरा इतनी जल्दी कैसे हो गया. अब मैं उन्हें क्या बताता क उनकी बेटी भी मुझे म्हणत करवा चुकी थी पहले hi. खैर थोड़ी देर में hi मौसी को मैंने अचे से रगड़ दिया था तो वो भी तसल्ली से सो गयी और मैं भी अपने कमरे में आ कर सो गया.
अगली सुबह नेहा दीदी ने मुझे जगाया . रत देर से सोया था तो आँख नहीं खुली थी . नेहा दीदी क जगाने क बाद मैं उठ कर तैयार हो कर करुणा दीदी क कमरे में गया तो वो भी तैयार हो रही थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर शर्म आ गयी जैसे सुहाग रत क अगले दिन नव विवाहिता शर्माती है अपने पति को देख कर.
अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , कैसी हैं आप ?
करुणा दीदी : शरमाते हुए) अकेले में तो दीदी मत कहा कर. और ठीक हूँ मैं बस थोड़ी सी सूजन है वहां.
अमित : तो आज आप छुट्टी कर लीजिये न कॉलेज से . ऐसे तो आप को तकलीफ होगी.
करुणा दीदी ने मेरे होंठों को हलके से चूमा और कहा.
करुणा दीदी : थैंक्स मेरी इतनी परवाह करने क लिए पर इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. खाने क बाद एक पैन किलर ले लुंगी . चल अब नीचे चलते हैं माँ ने नाश्ता बना लिया होगा .
करुणा दीदी थोड़ा पाऊँ फैला कर चल रही थी और मुझे दर लग रहा था क कहीं मौसी ने ये बात नोटिस कर ली तो क्या कहेंगी. पर खैर ऐसा नहीं हुआ. मौसी नाश्ता बना रही थी. मौसा जी क साथ बैठ कर मैं भी नाश्ता करने लगा. मौसी मुझे देख मुस्कुरा रही थी और उनकी आँखों में ख़ुशी बता रही थी क वो अब संतुष्ट हैं. खाना खाने क बाद सब अपने अपने रस्ते हो लिए. करुणा दीदी नैना दीदी क घर चली गयी और नेहा दीदी कल्पना क साथ.
दूसरे लेक्चर में मंजू म मुझे नाराज़गी से देख रही थी और लेक्चर ख़तम होने क बाद जब वो क्लास से जाने लगी तो मुझे अपने साथ आने को कहा . मैं उनके साथ क्लास से बहार आ कर गलियारे में खड़ा हो गया .
मंजू म : नाराज़ हो मुझसे ?
अमित : नहीं मम आप ऐसे क्यों कह रही हैं ?
मंजू म : तो आ क्यों नहीं रहे तुम घर ? कल तो तुमने फ़ोन भी नहीं उठाया मेरा . क्या बात है ? अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो बताओ मैं माफ़ी मांग लेती हूँ .
अमित : ये आप क्या कह रही हैं. ऐसी कोई बात नहीं है. कल मैं थोड़ा अपसेट था तो इस लिए किसी से भी बात नहीं की.
मंजू म : तुम अपसेट थे और मुझसे बात करना भी ठीक नहीं समझा? क्या इतनी भी जगह नहीं तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरी? खुद तो मेरे हर दुःख को तुमने अपना कर दूर कर दिए और अपनी बरी आयी तो अकेले सेह रहे हो सब कुछ .
अमित : वो कल कुछ ऐसा हो गया था क मैं अपसेट हो गया और बस फिर खुद को अकेला कर लिया. आप कुछ ऐसा वैसा मत सोचो मैं आपसे कुछ भी छू पता नहीं हूँ. और आपको सब बता भी दूंगा . प्लीज आप कुछ मत सोचो .
मंजू म : ठीक है , शाम को बात करते हैं . आज अगर न ए तो फिर मैं बात नहीं करुँगी तुमसे कह देती हूँ .
अमित : मैं ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण सब पता नहीं क्या क्या सोचेंगे.
मंजू म : मेरा बस चले तो सबके सामने तुम्हे गले से लगा लूँ, खैर शाम को मिलते हैं .
कैंटीन में रोज़ की तरह हंसी मज़ाक हो रहा था. शीना ने बताया क वो कल निधि दीदी को कार सीखने गयी थी तो इस बात नेहा दीदी और राधा क साथ कल्पना भी थोड़ी हैरान हुई. मगर इस बात पर सब खुश भी थी. मोहित ने बताया क आंटी और करिश्मा दीदी मुझे यद् कर रहे हैं . मैंने भी उसे शाम को आने का कह दिया . कॉलेज से छुट्टी क बाद मैं आज सीधा रीता मौसी क घर गया. और सबके साथ लंच भी किया. लंच क बाद मैं कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में चला गया.
2 घंटे आराम करने क बाद मैं मंजू क क घर क लिए निकल गया . जब मैं मंजू म क घर पहुंचा वो घर पर अकेली थी और बाइक की आवाज़ सुनते hi उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया .
मंजू म : अगर आज भी न आते तो मैं बात नहीं करती तुमसे .
अमित : ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा.
अंदर आते hi मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में भर लिया . वो जान बुझ कर रूठने का दिखावा कर रही थी
मंजू म : हटो पीछे , अब बड़ा प्यार आ रहा है . जो दो दिन से शकल तक नहीं दिखाई उसका क्या.
अमित : बताया तो था आपको क कल मूड अपसेट हो गया था.
मंजू म : ऐसा क्या हो गया था जो मूड अपसेट हो गया?
अमित : मैंने आपको मंजरी क बारे में बताया था न . कल उसकी माँ मिल गयी थी . बस उसके बाद फिर उसकी यादें उसके साथ बिताया हर लम्हा मेरी आँखों क सामने घूमता रहा .
मंजू म : गंभीर होते हुए) तुम अकेले बैठ कर खुद को दुखी करते रहे . क्या मुझे अपने दुःख में शरीक करना तुम्हें ठीक नहीं लगा ? मुझे ख़ुशी होती अगर तुम अपना हर वो लम्हा मुझे दे देते जिसमे तुम दुखी होते हो.
‘ तुम्हारे गम को अपना गम बना लूँ तो करार ए ,
तुम्हारा दर्द साइन में छुपा लूँ तो करार ए,
तड़प इस दिल की थोड़ी सी मुझे मेरे सनम देदो ,
अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने हूँ देदो..
किसी पुराने हिंदी गाने की ये लाइन्स मंजू म ने मेरी आँखों में देखते हुए इतनी गंभीरता से कही क मैं उनकी आँखों में hi खो गया और उन्हें अपने सीने से लगा कर कास लिया. मंजू म भी सच्ची प्रेमिका की तरह मेरी धड़कनो को महसूस करती मेरे दिल की तड़प को अपने दिल में उतर रही थी. कुछ देर वो ऐसे hi मेरे साथ चिपकी रही और फिर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया. इस चुम्बन में कहीं में भी काम वासना या उतावला पैन नहीं था. बड़े hi आराम से वो मेरे होंठों को अपने कोमल होंठों में पकडे जैसे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैंने उन्हें अपनी बाँहों के उठा लिया और सोफे पर बैठ गया . वो मुझे किश करती हुई ऐसे hi मेरी गोद में बैठ गयी. मंजू म कभी किश करती कभी मेरे गले लग जाती.
मंजू म : मुझे हर सुख दिया है तुमने जो मुझे नहीं मिला था. मेरे दुःख दूर कर क अपने दुःख मुझसे छुपा कर तुम ाचा नहीं कर रहे. मैं सब कुछ सेह सकती हूँ अमित पर तुम्हे दुखी नहीं देख सकती. तुम्हारी मुस्कराहट hi मेरी असली ख़ुशी है . अगर तुम्हे कभी भी मुझसे कोई भी शिकायत हो प्लीज एक बार कह देना . मैं तुम्हारे कुछ भी कर सकती हूँ . किसी को भी ( ऋतू को यद् करते हुए )छोड़ सकती हूँ. पर मुझे कभी खुद से अलग मत करना .
मंजू की आँखों में आयी नमी उनके एक एक अल्फ़ाज़ की सचाई की गवाह थी.
अमित : ये आप क्या कह रही हैं? इतने दुःख सहने क बाद आपको अपनों का प्यार मिला है. मैं भला क्यों चाहूंगा क आप किसी को छोड़ें?
मंजू म : मुझे हर ख़ुशी तुमसे hi मिली है वर्ण मैं तो अकेली हो गयी थी. तब कौन था मेरे पास? अगर तुम न होते तो ये सब मुझे कभी नसीब न होता. अगर कभी मुझे किसी एक को चुनना पड़ा तो मैं ख़ुशी से तुम्हे hi चुनूंगी.
अमित : मैं ऐसा वक़्त नहीं आने दूंगा. हर किसी की अपनी एहमियत होती है ज़िन्दगी में जैसे माँ बाप भाई बहिन और दोस्त रिश्तेदार. ज़िन्दगी में हर रंग होना ज़रूरी है. आपने इतने साल अकेलेपन में गुज़र दिए . मैं उन्हें वापिस तो नहीं का सकता पर इतना चाहता हूँ क आपकी आने वाली ज़िन्दगी में एक भी दुःख न हो.
मंजू म : एक बात पूछूं ? तुम्हे मेरे किसी रिश्तेदार या कासी से कोई ऐतराज़ तो नहीं है न?
अमित : नहीं , मुझे भला क्यों ऐतराज़ होगा? वैसे भी सभी को तो मैं जनता हूँ और वो भी मुझे जानते हैं. तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो ?
मंजू म : इस लिए क मैं नहीं चाहती क किसी की वजह से तुम मुझसे दूर हो जाओ.
अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा और न hi मुझे किसी से कोई ऐतराज़ है.
अभी हम बात कर hi रहे थे क बहार से दरवाज़े की बेल्ल बजने लगी
मंजू म : लगता है शीना आ गयी . मुआअह्ह्ह्ह जल्दी hi मुझे कहीं घूमने ले कर चलो. बड़े दिन हो गए मुझे टाइम नहीं दे रहे हो तुम.
जाते जाते मंजू म मेरे होंठो पर किश देकर अपनी शिकायत करती हुई दरवाज़ा खोलने चली गयी. दरवाज़े पर शीना hi थी. शीना क आने क बाद मैं किताब लेकर बैठ गया. शीना ने थोड़ी बहुत नार्मल बातें की और फिर मंजू म हम दोनों को hi पड़ने लगी . घडी पर अभी 6 बजने में ठोस वक़्त था क बहार से गाड़ियों की आवाज़ आयी और बेल्ल बजी. शीना ने जा कर दरवाज़ा खोला और उसके साथ hi सप ऋतू सिंह अपनी वर्दी में सामने आ कर कड़ी हो गयी. मुझे देख कर एक कल क लिए वो रुकी पर मैंने उससे नज़रें नहीं मिलायी.
मंजू म : अरे ऋतू तुम !! आओ आओ बैठो.
ऋतू सिंह : कैसी हो मंजू ? इधर से गुज़र रही थी सोचा तुमसे मिलती चलूँ. आज तो अमित भी आया हुआ है यहाँ . कैसे हो अमित?
अमित : मैं ठीक हूँ . ाचा मम अब मैं चलता हूँ. मुझे मोहित क घर भी जाना है
मंजू म : अरे रुको तो अभी तो 6 भी नहीं बजे . इतनी जल्दी क्या है?
अमित : मम वो करिश्मा दीदी और आंटी को कुछ काम है . मेरा जाना ज़रूरी है. ाचा आप अपनी सहेली से बातें करो मैं चलता हूँ.
इतना कह कर मैं जल्दी से वहां से निकल गया.
ऋतू सिंह अमित से बात करना छह रही थी मगर आज भी अमित उसको इग्नोर करता हुआ चला गया. वहीँ मंजू को भी दुःख हुआ क अमित ऋतू क आने से एक डैम जल्दी जल्दी में निकल गया. ऋतू क ऊपर वो कितना गुस्सा है ये वो महसूस कर प् रही थी. वो किसी भी कीमत पर अमित को खोना नहीं चाहती थी इस लिए उसने अमित से ऋतू का नाम लिए बिना पूछा भी मगर उसने तब ऐसी कोई बात नहीं की मगर अब ऋतू क आने पर इस तरह उसका चले जाना साफ साफ इशारा था क वो ऋतू को पसंद नहीं करता . मंजू मन hi मन सोचने लगी क वो ऋतू को मन कर दे ताकि अमित कहीं उसकी वजह से यहाँ आना न बंद कर दे. शीना भी अमित क जाते hi चली गयी.
मंजू म : ऋतू तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है अगर मैं तुम्हे कुछ कहूं तो तू गुस्सा तो नहीं करेगी ?
ऋतू सिंह : ये क्या बात कर रही है तू ? तेरी किसी बात का गुस्सा मैं कर सकती हूँ भला . बोल क्या कहना है तुझे .
मंजू म : तूने देखा न कैसे वो तेरे आते hi चला गया . मुझे लगता है वो तुझसे कुछ ज्यादा hi नाराज़ है. तू उसे कैसे भी कर क मन ले या ...
ऋतू सिंह : बोल मैं सुन रही हूँ .
मंजू म : या तू उस वक़्त न आया कर जब उसका टाइम होता है यहाँ आने का.
ऋतू को मंजू की ये बात सुनकर बड़ा दुःख हुआ. उसके लिए मंजू hi तो सब कुछ दिए. आरसे बाद उसे कोई अपना मिला था मंजू क रूप में और वो hi उसे यहाँ न आने को कह रही थी . पर इसके साथ hi वो मंजू की मज़बूरी भी समझ रही थी क वो अमित से कितना प्यार करती है. और वो अमित को नाराज़ करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहती . ऋतू तो खुद अमित से माफ़ मांग कर बात ख़तम करना छह रही थी पर वो था क ऋतू से बात करने को भी तैयार नहीं था.
ऋतू सिंह : मैं समझ सकती हूँ तू ऐसा क्यों कह रही है मंजू . मेरा यकीन कर मैं रोज़ यही सोच कर आती हूँ क मैं आज अमित से माफ़ी मांग कर बात को ख़तम करुँगी पर तेरे सामने hi देख वो मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं है.
मंजू म : तूने खुद hi मुझे मन किया था न क मैं अमित से बात न करूँ अब तू hi बता मैं क्या करूँ? कहीं ऐसा न हो क मैं फिर से अकेली रह जॉन . मैं उसे किसी कीमत पर खोना नहीं चाहती मेरी बहिन . मुझसे समझने की कोशिश कर. मैं तुझे भी छोड़ना नहीं चाहती और न उसे छोड़ सकती हूँ. अब तू hi बता मैं क्या करूँ.
ऋतू सिंह : तू चिंता मत कर मंजू अब मैं hi कुछ करती हूँ. मैं तुझे दुखी नहीं होने दूंगी. मैं तब तक तुझे अपनी शकल नहीं दिखाउंगी जब तक क अमित को मन न लूँ.
इतना कह कर ऋतू सिंह घर से बहार निकल गयी . मंजू ने उसे रोकने की कोशिश की पर वो नहीं रुकी. दोनों सहेलियों को इस बात से दुःख तो बहुत हुआ था. पर ऋतू सिंह अपने जज़्बात छुपा कर वही सपाट चेहरा लिए अपनी गाड़ी में बैठ कर चली गयी जबकि मंजू नाम आँखों से अपनी बेस्ट फ्रेंड को जाते हुए देखती रही.
मंजू म क घर से निकल के मैंने सीधा मोहित क घर गया . मैं जैसे hi अंदर गया तो आंटी बेहद hi खूबसूरत परिधान में पूरे मेकअप में तैयार हुई बिलकुल जवान लड़कियों सी सजी हुई, स्टाइलिश हेयर स्टाइल में आँखों में काजल की लम्बी धार लगाए गहनों से सजी बिलकुल किसी काम देवी जैसी प्रतीत हो रही थी . मैं उन्हें देखता hi रह गया.
आंटी : शुक्र है तुम आ गए, पर ये क्या तुम इन कपड़ो में ? जाओ अपने कमरे में जा कर अचे से कपडे पेहेन लो .
अमित : पर बात क्या है आंटी?
आंटी : मोहित ने बताया नहीं तुम्हे? करिश्मा की सहेली क यहाँ फंक्शन है. तेरे अंकल तो देर से आएंगे और मोहित भी कहीं जा रहा है तो तुम्हे हमारे साथ चलना है. अब जल्दी करो करिश्मा भी तैयार हो रही है. ज्यादा देर मत लगाना .
अमित : पर मुझे ...
आंटी : चिंता मत करो साडी रत नहीं रुकना है 10 बजे से पहले आ जायेंगे. अब जल्दी करो.
आंटी की बात मानते हुए मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया. मेरे कपडे यहाँ वैसे hi पड़े हुए थे जो आंटी ने मुझ दिलवाये थे. मैंने एक ाचा सा ब्लेजर पेहेन लिया और निचे आया तो आंटी क साथ करिश्मा दीदी भी तैयार बैठी थी. करिश्मा दीदी को देख कर मेरी नज़रें उन पर जैम गयी. वो जब गाओं आयी थी तब भी इतनी सुन्दर नहीं लगी थी. मगर आज तो जैसे वो भी बिजलियाँ गिरा रही थी. रंगत और सूरत तो पहले hi आंटी जैसी थी ऊपर से आज वो जिस तरह से सज धज कर तैयार हुई थी वो किसी को भी दीवाना बना देने क लिए काफी था. 34 -30- 36 की ज़बरदस्त फिगर और 5’6” की हाइट . बड़ी बड़ी ऑंखें जो काजल लगाने से और भी बड़ी लग रही थी. काले रेशमी बल हो खुले छोड़े हुए थे गले में सिर्फ मंगलसूत्र . फक्क गोरा रंग पिंक सूट में वो खुद भी पिंकिश hi लग रही थी. मैं उन्हें एक तक देखे जा रहा था क मेरे चेहरे क आगे हाथ कर क उन्होंने चुटकी बजायी और मुझे वापिस होश में लायी.
करिश्मा दीदी : ोये ऐसे क्या देख रहा है ? पहले कभी लड़की नहीं देखि क्या? लगता है तेरे लिए कोई लड़की देखनी पड़ेगी.
अमित : आए आप बहुत अछि लग रही हैं ..
करिश्मा दीदी : ाचा ठीक है ठीक है. जल्दी चल मुझे लेट नहीं होना. वैसे तू भी कुछ काम नहीं लग रहा.
आंटी : लाखों में एक है अमित , नज़र न लगे इसे किसी की.
इतना कह कर आंटी ने अपनी आँख से काजल ले कर मेरे कण पर लगा दिया .
अमित : वैसे आज काम तो आप भी नहीं लग रही. अगर अंकल यहाँ होते तो पक्का घायल हो जाते .
करिश्मा दीदी : हे हे हे बिलकुल सही कहा . माँ आज आप कमल की लग रही हो .
आंटी : शरमाते हुए ) धत्त तू भी शुरू हो गयी उसके साथ. चलो अब देर नहीं हो रही ?
आंटी क इतना कहते hi करिश्मा दीदी जल्दी से अपना छोटा सा पर्स हाथ में लटकाये आगे बाथ गयी और आंटी ने आँखों से hi मुझे इशारा किया और स्माइल करती हुई आगे चल पड़ी. मैं उनकी मटकती गांड देखता हुआ उनके पीछे पीछे चल पड़ा. बहार कार तैयार कड़ी थी और साथ hi ड्राइवर. मैं आगे वाली सीट पर बैठ गया और आंटी करिश्मा दीदी क साथ पीछे बैठ गयी.
मंजरी को यद् करता मैं अपने कमरे में जाने कब तक अकेला बैठा रहा. मुझे हमारी वो आखिरी मुलाकात क मंजरी क शब्द बार बार यद् आ रहे थे ‘ पता नहीं क्यों मगर मेरा दिल नहीं मन रहा मुझे ऐसा लगता है क मैं आप से बहुत दूर चली जाउंगी ‘ मंजरी की ये बातें सच हो गयी और वो हमेशा क लिए मुझसे दूर हो गयी. मेरा किसी से भी बात करने का दिल नहीं था इस लिए फ़ोन भी बंद कर क साइड में रख दिया था. सरे घर में शाम क वक़्त लाइट जल चुकी थी बस मेरा hi कमरा अँधेरे में था. मैं बस लेता लेता मंजरी की यादों में खोया था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और करुणा दीदी अंदर आ गयी शायद वो मुझे जगाने आयी थी. कमरे में अँधेरा देख वो लाइट जलने लगी तो मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली और सोने की एक्टिंग करने लगा. करुणा दीदी ने मुझे 1-2 बार आवाज़ दी पर मैं नहीं हिला. मुझे सोया हुआ समझ कर वो मेरे ऊपर hi लेट गयी और मुझे किश करने लगी. मैं वैसे hi पड़ा रहा और कोई रिस्पांस नहीं दिया . करुणा दीदी अपने नरम होंठों से मेरे होंठ चूस रही थी . कभी वो ऊपर वाले होंठ को चुस्ती और कभी निचे वाले को. जब मेरी तरफ से किसी तरह का रिस्पांस न मिला तो वो मेरे ऊपर से हटी.
करुणा : अजीब लड़का है , कैसे घोड़े बेचकर सो रहा है . यहाँ मैं मर रही हूँ प्यार करने क लिए और इसे परवाह hi नहीं कोई . ो हीरो उठ जा देख कितना टाइम हो गया है. पापा भी आ गए हैं . माँ बुला रही है चल उठ अब . उठ न कितना सोता है.
मैंने उठने की एक्टिंग करते हुए कहा
अमित : क्या हुआ दीदी क्यों परेशां कर रही हो .
करुणा दीदी : ाचा !! मैं परेशां कर रही हूँ ? परेशां तो तू कर रहा है . 4 दिन हो गए तुझे यहाँ आये और अभी तक तूने मुझे एक बार भी टाइम नहीं दिया. अब भी कैसे आराम से सो रहा है . वैसे ाचा है आज रत तुझे मैं सोने नहीं दूंगी .
अमित : आपको बस एक hi काम सूझता है ? कल आपको शॉपिंग करवाई न मैंने ? फिर क्यों परेशां कर रही हैं ? अब हटिये मैं आ रहा हूँ नीचे .
करुणा दीदी : हुआ क्या है तुझे ? ये कैसे बात कर रहा है तू ? पहले तो कभी ऐसे बात नहीं करता तू ? दिल भर गया है क्या मुझसे ? नहीं करती तुझे परेशां
मुझे अपने गलती का एहसास हुआ मैं कुछ ज्यादा रौदे हो रहा था करुणा दीदी क साथ. वो तो मुझे प्यार करती थी और मैं उन्हें ऐसे जवाब दे रहा था. मैं कुछ कहता इससे पहले hi करुणा दीदी पेअर पटकते हुए कमरे से बहार चली गयी . अपने दुःख से दुखी हो कर अपने चाहने वालों को दुखी करना भी तो सही नहीं होता. करुणा दीदी का भला क्या दोष था इसमें . वो तो दिल से मुझे चाहती थी और मेरी परवाह भी करती थी . मैं जल्दी से उठा और फ्रेश हो कर नीचे चला गया. मौसा जी हॉल में बैठे थे और साथ में hi नेहा दीदी करुणा दीदी भी. मौसी किचन में थी . मुझे देखते hi करुणा दीदी में नाराज़गी से मुँह फेर लिया . मैं मौसा जी क साथ बैठ गया और उनसे बातें करने लगा. टाइम 8 से ऊपर हो चूका था इस लिए मौसी रत का खाना बना रही थी. नेहा दीदी वैसे तो किताब पढ़ रही थी पर उनकी नज़र मुझ पर भी थी. कई बार मेरी उनसे नज़र मिली तो हर बार उन्हें खुद को देखता हुआ पाया. खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला आया , करुणा दीदी भी अपने कमरे में चली गयी. मुझे करुणा दीदी को ऐसे नाराज़ करना ाचा नहीं लग रहा था. मैंने सोच लिया क उनके पास जा कर उन्हें मनाता हूँ. अभी मैं सोच hi रहा था क नेहा दीदी कमरे में आ गयी . नेहा दीदी को इस वक़्त अपने कमरे में देख कर मैं हैरान हो रहा था क्यूंकि वो इतने दिनों से ऐसे आयी hi नहीं थी मेरे पास. मेरे कुछ कहने से पहले वो दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आ कर बैठ गयी और मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोली.
नेहा दीदी : क्या बात है ? किस बात को लेकर तू इतना टेंशन में है ?
अमित : कुछ नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं .
नेहा दीदी : झूठ मत बोल , तेरे चेहरे पर साफ नज़र आ रहा है क तू किसी बात पर टेंशन में है . अगर बहिन मंटा है अपनी तो बता मुझे सब . आज तक तू इतनी देर तक अपने कमरे में नहीं रहा और तेरी ऑंखें बता रही हैं क तू किसी बात पर दुखी है. तेरा दुःख मैं महसूस कर सकती हूँ . बता मुझे क्या बात है ?
नेहा दीदी जो हमेशा काम बोलती थी वो मुझे इतनी गौर से देख रही थी क उन्होंने वो जान लिया जो किसी और ने नहीं देखा.
अमित : किसी की यद् आ रही थी दीदी , एक दोस्त जो मेरे बहुत करीब था वो अचानक मुझसे बहुत दूर चला गया . आज मैं उसकी माँ से मिला था तो बस तब से उसी को यद् कर रहा था . काश क मैं उससे फिर से एक बार मिल सकता . आखिरी बार उससे बात भी नहीं हो पायी थी .
नेहा दीदी : दोस्त ? तेरी आँखों की नमी बता रही है क वो दोस्त लड़का नहीं कोई लड़की होगी . मैं सच कह रही हूँ न.
न चाहते हुए भी मेरी आँखों में रुका पानी छलक पड़ा और ये देख नेहा दीदी ने फ़ौरन मुझे अपने गले से लगा लिया .
नेहा दीदी : मत रो मेरे भाई मत रो. तू इतना कमज़ोर नहीं है. खुद को संभल . तीनो आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते. तू अपने सरे आंसू मुझे देदे . तेरे सरे दुःख तू मुझे देदे. मैं तुझे रोने नहीं दूंगी . तू तो मेरा प्यारा भाई है न.
अमित : मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है दीदी ? पहले माँ पापा चले गए और फिर वो भी चली गयी. मुझे जो भी प्यार करता है उसे मुझसे छीन लिया जाता है . ऐसा क्यों होता है दीदी. क्या ऐसे hi एक एक कर क सब मुझसे दूर हो जायेंगे ? कभी कभी तो दर लगता है क कहीं सब मुझे अकेला छोड़ कर चले जायेंगे .
नेहा दीदी: ऐसा क्यों कहता है ? ऐसा कभी नहीं होगा. देख सभी तुझे कितना प्यार करते हैं . फिर भी तू ऐसे सोचता है. मैं हूँ न तेरे पास . चाहे कुछ भी हो जाये मैं तेरा साथ कभी नहीं छोडूंगी . तू hi तो मेरा भाई है. मैं तुम्हे कभी अकेला नहीं रहने दूंगी मैं तुझे छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी .
नेहा दीदी भी मुझे गले से लगाए रोने लगी थी तो मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और नेहा दीदी क आंसू पोंछे .
अमित : आओ क्यों रो रही हैं दीदी ? मेरी तो किस्मत में आंसू लिखे हैं पर आप ऐसे रो कर खुद को दुखी मत कीजिये .
नेहा दीदी: मेरी आँखों से तेरे hi आंसू बह रहे हैं मेरे भाई. जब तक तू दुखी है इन आँखों में ख़ुशी कैसे आ सकती है.
अमित : दीदी !!!
मैंने ज़ोर से नेहा दीदी को गले से लगा लिया. नेहा दीदी क दिल में मेरे लिए कितना प्यार था ये मुझे पता चल रहा था. वो जताती नहीं थी पर शायद मुझसे ज्यादा वो किसी से प्यार नहीं करती थी .
नेहा दीदी : अब तू कुछ भी मत सोचना , जो होता है भगवन की मर्ज़ी से होता है. जितना तू सबको प्यार करता है न उससे ज्यादा hi मिलेगा तुझे देख लेना.
नेहा दीदी काफी देर तक मेरे पास बैठी रही और फिर रीता दीदी मेरे लिए दूध ले आयी तब कहीं जा कर नेहा दीदी मेरे कमरे से गयी.
रीता मौसी : आज रत सो मत जाना मैं तुम्हारे कमरे में आउंगी तेरे मौसा क सोने क बाद. कल से आग लगी हुई है. खुद से कुछ होता नहीं और मुझे भड़का देते हैं.
अमित : पर मौसी परसों hi तो किया था न हमने .
रीता मौसी : क्या बताऊँ तुझे, सब तेरे मौसा का कसूर है. मैं तो कल hi आ जाती तेरे पास अगर दिव्या न होती तो. कल से बुरा हल है मैं सब को सुला कर अति हूँ तेरे पास.
अमित : नहीं मौसी आज मेरा मन नहीं है .
रीता मौसी : क्या बात है ? शाम को भी तू इतनी देर तक सोता रहा . कोई बात है तो मुझे बता.
अमित : नहीं मौसी ऐसी कोई बात नहीं है बस आज मन नहीं है .
रीता मौसी : ( उदास होते हुए ) ाचा ठीक है. तू आराम कर जब तेरा मन हो तो बता देना.
इतना कह कर मायूस होती रीता मौसी नीचे चली गयी . मैं दूध पिने क बाद कुछ देर लेता रहा . फिर मुझे करुणा दीदी का ख्याल आया. मैं उठ कर उनके कमरे में चला गया .
करुणा दीदी करवट क बल लेती हुई थी . बीएड क किनारे दूध का गिलास ढाका हुआ पड़ा था जो उन्होंने नहीं पिया था. मैंने आहिस्ता से दरवाज़ा बंद किया और बीएड क दूसरी तरफ से घूम कर जब करुणा दीदी क पास गया तो देखा वो जग रही थी और उनकी आँखों में आंसू थे. मुझे देखते hi उन्होंने ऑंखें बंद कर ली. करुणा दीदी मेरी वजह से दुखी थी , मुझसे देखा न गया और मैंने उनके ऊपर झुकते हुए उनके चेहरे पर हर जगह किश कर क अपनी गलती की माफ़ी मांगी.
अमित : दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे गलती हो गयी. मुझे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी. प्लीज मुझे माफ़ कर दो.
मैंने लगातार दीदी को चुनता जा रहा था. उनके चेहरे से आंसुओं की धार मैंने अपनी जीभ से साफ की.
करुणा दीदी : बात मत कर मुझसे. मैं तेरे पास आने क लिए मरती रहती हूँ और तुझे मेरी कोई परवाह hi नहीं है. कभी सोचा है मेरा क्या बल होता है? कभी मेरे लिए अपने आप टाइम निकला है तुमने ? क्या कसूर है मेरा जो ऐसे मुझसे सजा दे रहे हो तुम ?
अमित : ी ऍम सॉरी दीदी. मेरा मूड ठीक नहीं था इस लिए आपसे ऐसे बात कर बैठा. आप भी जानती हैं न क मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ.
करुणा : ाचा प्यार है तुम्हारा , मैं इतने दिनों से प्यार करने को कह रही हूँ और प्यार करने की बजाये मुझ पर गुस्सा दिखा रहे हो .
अमित : गलती हो गयी दीदी कहा न , अब अपनी गलती को ठीक करने hi तो आया हूँ .
करुणा दीदी : हटो पीछे मुझे कुछ नहीं करना है. तुम बैठे रहो अपना ख़राब मूड लेकर .
अमित : ऐसे कैसे बैठा रहूं , अब तो मैं आपको प्यार किये बिना कहीं नहीं जाने वाला .
इतना कह कर मैंने करुणा दीदी क होठों पर अपने होंठ रख दिए . करुणा दीदी मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी पर मैं नहीं हटा और फिर वो भी मेरा साथ दें लगी. जल्दी उनकी किश वाइल्ड होने लगी और मुझे बीएड पर गिरा कर वो खुद मेरे ऊपर आ गयी. करुणा दीदी मेरे होंठों काटने hi लगी थी. जंगली बिल्ली की तरह वो मेरे ऊपर हावी हो रही थी .
करुणा दीदी : आआह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म बहुत तंग किया है तूने मुझे बहुत तरसाया है आज सारा हिसाब लूंगी उम्म्म उम्म्म
करुणा दीदी मेरे होंठ चबाती मुझे किश कर रही थी और मेरी T-shirt खिंच रही थी. मैंने भी उनका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतर दी और उनकी T-shirt भी उतरने लगा जो उन्होंने एक झटके में खुद hi उतर दी. टीशर्ट क साथ ब्रा भुई उतारते हुए करुणा दीदी ने अपने कच्चे आम निर्वस्त्र कर दिए . मैंने झट से उनके चुचों को थम लिया और मसलने लगा .
करुणा दीदी : आअह्ह्ह कक्कक्क्स आह्हः आज आयी है तुम्हे इनकी यद् ? इतने दिनों से यद् नहीं था क इनको प्यार भी करना है ? कक्कक्स जितना मुझे तड़पाया है आज मैं तुम्हे भी तड़पाऊंगी .
करुणा दीदी ने अपने चुचों से मेरे हाथ हटाए और मेरे लोअर को पकड़ कर खींचते हुए मेरे पैन से निकल दिया. मेरा लैंड अंडरवियर में hi अकड़ने लगा था . करुणा दीदी ने मेरे ुंडाइवेअर को भी खिंच कर निकल दिया. मैं तो बस करुणा दीदी को देख रहा था क वो प्यार कर रही हैं या गुस्सा . निर्वस्त्र होते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलने लगा. करुणा दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड अपने हाथों में थम लिया. मैं दीदी की इस हरकत पर हैरान हो गया.
करुणा दीदी : बहुत तड़पते हो न तुम अब बताती हूँ तुम्हे. सारूउप साररूउप सरररूउप
दीदी ने बिना देर किये मेरा लैंड सुपडे तक अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो हैरान हो रहा था क दीदी आज किस मूड में हैं. वो सच में hi बदला लेने की कोशिश कर रही थी . धीरे धीरे आधा लैंड दीदी अपने मुँह में लेने लगी . वो बड़े hi जोश क साथ लैंड चूस रही थी. मैं भी दीदी की इस लैंड चूसै से पागल होने लगा . मेरे हाथ अपने आप दीदी क सर पर पहुँच गए . दीदी लैंड चूसने क साथ मेरे अंडकोष भी सेहला रही थी. मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर दीदी तो रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी .
अमित : सीसीसी हहहा उम् रुक जाओ दीदी कक्कक्स रुक जाओ
करुणा दीदी : साररूपप सरररूपप उम्म्म क्यों अब पता चला अभी तो आगे आगे देखो .
दीदी रुक hi नहीं रही थी तो मैंने दीदी को ज़बरदस्ती अपने लैंड से हटाया और उनका लोअर पेंटी समेत उतर दिया. दीदी की बिना बालों की चिकनी छूट मेरे सामने थी. करुणा दीदी की मैंने अभी तक एक hi बार चुदाई की थी और उसमे भी लैंड पूरा नहीं डाला था. करुणा दीदी की छूट क होंठ थोड़े से खुले थे और अंदर से थोड़ा सा मांस चोंच की शकल में बहार था . मैंने झुक कर दीदी की छूट पर मुँह लगा दिया और अपनी जीभ अंदर घुसा दी . दीदी भी तड़प उठी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी .
करुणा दीदी : आआह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म खा जाओ ककक खा जाओ इसे बहुत रोटी है ये तुम्हे यद् कर क आज इसे अछि तरह रुला दो. कक्कक्स आअह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आठ ओह्ह्ह्ह
मैंने अभी 2-3 मिनट्स hi चूसा था क दीदी का जिस्म क ओने लगा और अकड़ कर उनका बदन ढीला पद गया . मैंने उनका पानी निकलने क बाद उनकी टंगे खोल कर बीच में आते हुए अपना लैंड छूट पर लगाया तो दीदी ने एक बार ऑंखें खोल कर मुझे देखा . और फिर से ऑंखें बंद कर ली. मैंने छूट पर लैंड सेट किया और हल्का धक्का मर कर लैंड का सूपड़ा अंदर घुसा दिया. दीदी को थोड़ा दर्द हुआ पर उन्होंने बर्दाश्त कर लिया. मैंने एक और धक्का मर कर आधा लैंड छूट में घुसा दिया.
करुणा दीदी : आह्ह्ह्ह रुको मत कक्कक्स आज मैं इसे पूरा लेना चाहती हूँ कक्कक्स मेरे अंदर समां जाओ . आअह्ह्ह्ह
करुणा दीदी दर्द सेहती हुई भी मुझे पूरा अंदर करने को कह रही थी. जबकि पिछली बार उनकी इतने में hi बुरी हालत हो गयी थी. मैंने भी उनकी बात मानते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.
करुणा दीदी : आआआ माआआआ मममममम
लैंड पूरा घुसते hi करुणा दीदी दर्द से तड़प उठी और उनके मुँह से चीख निकल गयी . मैंने जल्दी से उनके होंठ अपने होंठों से लॉक कर दिए. दीदी को दर्द तो हो रहा था पर छूट तो पहले hi खुल चुकी थी इस लिए उतना दर्द नहीं था पर लैंड आज पहली बार पूरा अंदर गया था तो वो बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी. मैंने कुछ देर उनके बूब्स मसलते हुए उन्हें किश करता रहा. जब वो कुछ नार्मल हुई तो मैंने लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. लैंड छूट में पूरा फास फास कर आ जा रहा था. जब मुझे लगा क करुणा दीदी अब आराम से लैंड को झेलने लगी है तो मैंने उनके होंठ आज़ाद कर दिए और सीधा बैठ कर अपनी कमर हिलने लगा.
करुणा दीदी : ाःह ककक उम् अब मज़ा आ रहा है ऐसे hi करते रहो . सीसीसी आह्हः आअह्ह्ह मुझे यकीन नहीं हो रहा क कक्कक्स क पूरा अंदर चला गया उम्म्म दीदी सच hi कह रही थी ाःह आह्हः जब पूरा जाता है तो और भी मज़ा अत है आअह्ह्ह आह्हः
अमित : तो ये सब नैना दीदी बताती है आपको . आपकी ये बहुत टाइट है नैना दीदी से भी ज्यादा.
करुणा दीदी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह तो कार्डो न ढीली . तुम्हे hi करना है जो करना है आअह्ह्ह आह्हः इसे अआपने हिसाब से ढीली करलो आअह्ह्ह आह्हः और तेज़ करो
मैंने दीदी की छूट में ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए . कुछ देर इस पोज़ में छोड़ने क बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया और वो लैंड पर बैठ कर उछलने लगी. दीदी क उछलने से उनके बूब्स और भी दिलकश लग रहे थे. मैं उनके बूब्स थामे नीचे कमर उछाल कर धक्के पेल रहा था. दीदी का एक बार फिर से पानी निकल गया. फिर मैंने उन्हें घोड़ी बाण दिया और पीछे से लैंड घुसा कर कमर थामे तेज़ धक्के मरने लगा पर करुणा दीदी अभी इतनी चुदाई क काबिल नहीं थी इस लिए वो जल्दी hi अपना पेट पकड़ कर बैठ गयी और मुझे रुकने को कहने लगी.
करुणा दीदी : रुका जा भी प्लीज आअह्ह्ह्ह रुक जा मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती प्लीज आह्हः माआ बहुत दर्द हो रहा है .
आज मेरा ध्यान भी चुदाई में काम था इस लिए मुझे ज्यादा देर लग रही थी. मैं रुकना तो नहीं चाहता था पर करुणा दीदी की हालत देख कर मैं रुक गया .
अमित : दीदी आप ठीक तो हैं ?
करुणा दीदी : बहुत दर्द हो रहा है अमित मैं और नहीं सेह सकती प्लीज
अमित : कोई बात नहीं दीदी it’s ok. आप रेस्ट कीजिये . कोई पैन किलर है क्या आपके पास ?
करुणा दीदी : हाँ शायद यदि हो ड्रावर में देखो .
मैंने देखो तो ड्रावर में पैन किलर पड़ी थी मैंने दीदी को पानी क साथ टेबलेट डी और उन्हें कपडे पहना दिए. दीदी को बीएड पर लेता कर मैं भी अपने कपडे पहने और कमरे का दरवाज़ा बंद कर क बहार निकल गया. मेरा पानी नहीं निकला था तो ऐसे में नींद अचे से नहीं आने वाली थी तभी मुझे मौसी का ख्याल आया. वो मेरे पास उम्मीद से आयी थी और मैंने उन्हें वापिस भेज दिया था. मैं अपने कमरे में जाने की बजाये नीचे मौसी क रूम में चला गया. दरवाज़ा खोला तो मौसा और मौसी दोनों बीएड पर सो रहे थे . कमरे में हलकी रौशनी का बल्ब चल रहा था. मैं चुपके से अंदर गया और दरवाज़ा बंद कर क मौसी की तरफ जा कर खड़ा हो गया. मौसी करवट क बल लेती निघ्त्य पहने सो रही थी. मैंने मौसी क बड़े बड़े चुके पकडे और ज़ोर से मसल दिए. मौसी क मुँह से एक चीख निकली जिसे मैंने मुँह पर हाथ रख कर दबा दिया. मौसी की ऑंखें खुल चुकी थी और मुझे सामने देख कर वो चुप हो गयी.
अमित : शहहह मौसा hi उठ जायेंगे .
रीता मौसी : नहीं उठेंगे सुबह से पहले मैंने उन्हें दूध पीला दिया था. पर तुम तो कह रहे थे क मूड नहीं है.
अमित : मैं सोचा आपको अचे से नींद नहीं आएगी तो चला आया.
रीता मौसी : ( मुस्कुराते हुए ) तो देर किस बात की है हो जाओ शुरू.
इतना सुनते hi मैंने मौसी को किश किया और उनके चुके निघ्त्य क ऊपर से hi मसलते हुए नीचे चलता हुआ उनके पाऊँ तक आ गया. मौसी का पाऊँ पर मैंने किश किया और उनकी तरफ देखा और उनसे परमिशन मांगी. मौसी मुझे ऐसा करते देख शर्मा गयी. मैंने मौसी क दोनों पाऊँ पकड़ कर उठा दिए और उनकी निघ्त्य उनकी कमर पर इकठी हो गयी. मौसी ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी मैंने भी अपना लोअर और अंडरवियर निचे किया और लैंड को छूट पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मरते हुए एक hi बार में पूरा लैंड छूट में जड़ तक घुसा दिया . मौसी ज़ोर से कराह उठी. मौसा जी तो नींद की दवा क असर से उतने वाले थे नहीं इस लिए मौसी भी खुल कर मज़ा ले रही थी. मैंने बिना रुके मौसी की छूट की धज्जीआं उड़ानी शुरू कर दी और दी अपना पानी रीता मौसी की छूट में निकल दिया. तब तक मौसी का भी काम हो गया था. मौसी हैरान हुई क आज मेरा इतनी जल्दी कैसे हो गया. अब मैं उन्हें क्या बताता क उनकी बेटी भी मुझे म्हणत करवा चुकी थी पहले hi. खैर थोड़ी देर में hi मौसी को मैंने अचे से रगड़ दिया था तो वो भी तसल्ली से सो गयी और मैं भी अपने कमरे में आ कर सो गया.
अगली सुबह नेहा दीदी ने मुझे जगाया . रत देर से सोया था तो आँख नहीं खुली थी . नेहा दीदी क जगाने क बाद मैं उठ कर तैयार हो कर करुणा दीदी क कमरे में गया तो वो भी तैयार हो रही थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर शर्म आ गयी जैसे सुहाग रत क अगले दिन नव विवाहिता शर्माती है अपने पति को देख कर.
अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , कैसी हैं आप ?
करुणा दीदी : शरमाते हुए) अकेले में तो दीदी मत कहा कर. और ठीक हूँ मैं बस थोड़ी सी सूजन है वहां.
अमित : तो आज आप छुट्टी कर लीजिये न कॉलेज से . ऐसे तो आप को तकलीफ होगी.
करुणा दीदी ने मेरे होंठों को हलके से चूमा और कहा.
करुणा दीदी : थैंक्स मेरी इतनी परवाह करने क लिए पर इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. खाने क बाद एक पैन किलर ले लुंगी . चल अब नीचे चलते हैं माँ ने नाश्ता बना लिया होगा .
करुणा दीदी थोड़ा पाऊँ फैला कर चल रही थी और मुझे दर लग रहा था क कहीं मौसी ने ये बात नोटिस कर ली तो क्या कहेंगी. पर खैर ऐसा नहीं हुआ. मौसी नाश्ता बना रही थी. मौसा जी क साथ बैठ कर मैं भी नाश्ता करने लगा. मौसी मुझे देख मुस्कुरा रही थी और उनकी आँखों में ख़ुशी बता रही थी क वो अब संतुष्ट हैं. खाना खाने क बाद सब अपने अपने रस्ते हो लिए. करुणा दीदी नैना दीदी क घर चली गयी और नेहा दीदी कल्पना क साथ.
दूसरे लेक्चर में मंजू म मुझे नाराज़गी से देख रही थी और लेक्चर ख़तम होने क बाद जब वो क्लास से जाने लगी तो मुझे अपने साथ आने को कहा . मैं उनके साथ क्लास से बहार आ कर गलियारे में खड़ा हो गया .
मंजू म : नाराज़ हो मुझसे ?
अमित : नहीं मम आप ऐसे क्यों कह रही हैं ?
मंजू म : तो आ क्यों नहीं रहे तुम घर ? कल तो तुमने फ़ोन भी नहीं उठाया मेरा . क्या बात है ? अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो बताओ मैं माफ़ी मांग लेती हूँ .
अमित : ये आप क्या कह रही हैं. ऐसी कोई बात नहीं है. कल मैं थोड़ा अपसेट था तो इस लिए किसी से भी बात नहीं की.
मंजू म : तुम अपसेट थे और मुझसे बात करना भी ठीक नहीं समझा? क्या इतनी भी जगह नहीं तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरी? खुद तो मेरे हर दुःख को तुमने अपना कर दूर कर दिए और अपनी बरी आयी तो अकेले सेह रहे हो सब कुछ .
अमित : वो कल कुछ ऐसा हो गया था क मैं अपसेट हो गया और बस फिर खुद को अकेला कर लिया. आप कुछ ऐसा वैसा मत सोचो मैं आपसे कुछ भी छू पता नहीं हूँ. और आपको सब बता भी दूंगा . प्लीज आप कुछ मत सोचो .
मंजू म : ठीक है , शाम को बात करते हैं . आज अगर न ए तो फिर मैं बात नहीं करुँगी तुमसे कह देती हूँ .
अमित : मैं ज़रूर आऊंगा . अब आप जाइये वर्ण सब पता नहीं क्या क्या सोचेंगे.
मंजू म : मेरा बस चले तो सबके सामने तुम्हे गले से लगा लूँ, खैर शाम को मिलते हैं .
कैंटीन में रोज़ की तरह हंसी मज़ाक हो रहा था. शीना ने बताया क वो कल निधि दीदी को कार सीखने गयी थी तो इस बात नेहा दीदी और राधा क साथ कल्पना भी थोड़ी हैरान हुई. मगर इस बात पर सब खुश भी थी. मोहित ने बताया क आंटी और करिश्मा दीदी मुझे यद् कर रहे हैं . मैंने भी उसे शाम को आने का कह दिया . कॉलेज से छुट्टी क बाद मैं आज सीधा रीता मौसी क घर गया. और सबके साथ लंच भी किया. लंच क बाद मैं कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में चला गया.
2 घंटे आराम करने क बाद मैं मंजू क क घर क लिए निकल गया . जब मैं मंजू म क घर पहुंचा वो घर पर अकेली थी और बाइक की आवाज़ सुनते hi उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया .
मंजू म : अगर आज भी न आते तो मैं बात नहीं करती तुमसे .
अमित : ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा.
अंदर आते hi मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में भर लिया . वो जान बुझ कर रूठने का दिखावा कर रही थी
मंजू म : हटो पीछे , अब बड़ा प्यार आ रहा है . जो दो दिन से शकल तक नहीं दिखाई उसका क्या.
अमित : बताया तो था आपको क कल मूड अपसेट हो गया था.
मंजू म : ऐसा क्या हो गया था जो मूड अपसेट हो गया?
अमित : मैंने आपको मंजरी क बारे में बताया था न . कल उसकी माँ मिल गयी थी . बस उसके बाद फिर उसकी यादें उसके साथ बिताया हर लम्हा मेरी आँखों क सामने घूमता रहा .
मंजू म : गंभीर होते हुए) तुम अकेले बैठ कर खुद को दुखी करते रहे . क्या मुझे अपने दुःख में शरीक करना तुम्हें ठीक नहीं लगा ? मुझे ख़ुशी होती अगर तुम अपना हर वो लम्हा मुझे दे देते जिसमे तुम दुखी होते हो.
‘ तुम्हारे गम को अपना गम बना लूँ तो करार ए ,
तुम्हारा दर्द साइन में छुपा लूँ तो करार ए,
तड़प इस दिल की थोड़ी सी मुझे मेरे सनम देदो ,
अगर मुझसे मुहब्बत है मुझे सब अपने हूँ देदो..
किसी पुराने हिंदी गाने की ये लाइन्स मंजू म ने मेरी आँखों में देखते हुए इतनी गंभीरता से कही क मैं उनकी आँखों में hi खो गया और उन्हें अपने सीने से लगा कर कास लिया. मंजू म भी सच्ची प्रेमिका की तरह मेरी धड़कनो को महसूस करती मेरे दिल की तड़प को अपने दिल में उतर रही थी. कुछ देर वो ऐसे hi मेरे साथ चिपकी रही और फिर मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया. इस चुम्बन में कहीं में भी काम वासना या उतावला पैन नहीं था. बड़े hi आराम से वो मेरे होंठों को अपने कोमल होंठों में पकडे जैसे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैंने उन्हें अपनी बाँहों के उठा लिया और सोफे पर बैठ गया . वो मुझे किश करती हुई ऐसे hi मेरी गोद में बैठ गयी. मंजू म कभी किश करती कभी मेरे गले लग जाती.
मंजू म : मुझे हर सुख दिया है तुमने जो मुझे नहीं मिला था. मेरे दुःख दूर कर क अपने दुःख मुझसे छुपा कर तुम ाचा नहीं कर रहे. मैं सब कुछ सेह सकती हूँ अमित पर तुम्हे दुखी नहीं देख सकती. तुम्हारी मुस्कराहट hi मेरी असली ख़ुशी है . अगर तुम्हे कभी भी मुझसे कोई भी शिकायत हो प्लीज एक बार कह देना . मैं तुम्हारे कुछ भी कर सकती हूँ . किसी को भी ( ऋतू को यद् करते हुए )छोड़ सकती हूँ. पर मुझे कभी खुद से अलग मत करना .
मंजू की आँखों में आयी नमी उनके एक एक अल्फ़ाज़ की सचाई की गवाह थी.
अमित : ये आप क्या कह रही हैं? इतने दुःख सहने क बाद आपको अपनों का प्यार मिला है. मैं भला क्यों चाहूंगा क आप किसी को छोड़ें?
मंजू म : मुझे हर ख़ुशी तुमसे hi मिली है वर्ण मैं तो अकेली हो गयी थी. तब कौन था मेरे पास? अगर तुम न होते तो ये सब मुझे कभी नसीब न होता. अगर कभी मुझे किसी एक को चुनना पड़ा तो मैं ख़ुशी से तुम्हे hi चुनूंगी.
अमित : मैं ऐसा वक़्त नहीं आने दूंगा. हर किसी की अपनी एहमियत होती है ज़िन्दगी में जैसे माँ बाप भाई बहिन और दोस्त रिश्तेदार. ज़िन्दगी में हर रंग होना ज़रूरी है. आपने इतने साल अकेलेपन में गुज़र दिए . मैं उन्हें वापिस तो नहीं का सकता पर इतना चाहता हूँ क आपकी आने वाली ज़िन्दगी में एक भी दुःख न हो.
मंजू म : एक बात पूछूं ? तुम्हे मेरे किसी रिश्तेदार या कासी से कोई ऐतराज़ तो नहीं है न?
अमित : नहीं , मुझे भला क्यों ऐतराज़ होगा? वैसे भी सभी को तो मैं जनता हूँ और वो भी मुझे जानते हैं. तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो ?
मंजू म : इस लिए क मैं नहीं चाहती क किसी की वजह से तुम मुझसे दूर हो जाओ.
अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा और न hi मुझे किसी से कोई ऐतराज़ है.
अभी हम बात कर hi रहे थे क बहार से दरवाज़े की बेल्ल बजने लगी
मंजू म : लगता है शीना आ गयी . मुआअह्ह्ह्ह जल्दी hi मुझे कहीं घूमने ले कर चलो. बड़े दिन हो गए मुझे टाइम नहीं दे रहे हो तुम.
जाते जाते मंजू म मेरे होंठो पर किश देकर अपनी शिकायत करती हुई दरवाज़ा खोलने चली गयी. दरवाज़े पर शीना hi थी. शीना क आने क बाद मैं किताब लेकर बैठ गया. शीना ने थोड़ी बहुत नार्मल बातें की और फिर मंजू म हम दोनों को hi पड़ने लगी . घडी पर अभी 6 बजने में ठोस वक़्त था क बहार से गाड़ियों की आवाज़ आयी और बेल्ल बजी. शीना ने जा कर दरवाज़ा खोला और उसके साथ hi सप ऋतू सिंह अपनी वर्दी में सामने आ कर कड़ी हो गयी. मुझे देख कर एक कल क लिए वो रुकी पर मैंने उससे नज़रें नहीं मिलायी.
मंजू म : अरे ऋतू तुम !! आओ आओ बैठो.
ऋतू सिंह : कैसी हो मंजू ? इधर से गुज़र रही थी सोचा तुमसे मिलती चलूँ. आज तो अमित भी आया हुआ है यहाँ . कैसे हो अमित?
अमित : मैं ठीक हूँ . ाचा मम अब मैं चलता हूँ. मुझे मोहित क घर भी जाना है
मंजू म : अरे रुको तो अभी तो 6 भी नहीं बजे . इतनी जल्दी क्या है?
अमित : मम वो करिश्मा दीदी और आंटी को कुछ काम है . मेरा जाना ज़रूरी है. ाचा आप अपनी सहेली से बातें करो मैं चलता हूँ.
इतना कह कर मैं जल्दी से वहां से निकल गया.
ऋतू सिंह अमित से बात करना छह रही थी मगर आज भी अमित उसको इग्नोर करता हुआ चला गया. वहीँ मंजू को भी दुःख हुआ क अमित ऋतू क आने से एक डैम जल्दी जल्दी में निकल गया. ऋतू क ऊपर वो कितना गुस्सा है ये वो महसूस कर प् रही थी. वो किसी भी कीमत पर अमित को खोना नहीं चाहती थी इस लिए उसने अमित से ऋतू का नाम लिए बिना पूछा भी मगर उसने तब ऐसी कोई बात नहीं की मगर अब ऋतू क आने पर इस तरह उसका चले जाना साफ साफ इशारा था क वो ऋतू को पसंद नहीं करता . मंजू मन hi मन सोचने लगी क वो ऋतू को मन कर दे ताकि अमित कहीं उसकी वजह से यहाँ आना न बंद कर दे. शीना भी अमित क जाते hi चली गयी.
मंजू म : ऋतू तू मेरी बेस्ट फ्रेंड है अगर मैं तुम्हे कुछ कहूं तो तू गुस्सा तो नहीं करेगी ?
ऋतू सिंह : ये क्या बात कर रही है तू ? तेरी किसी बात का गुस्सा मैं कर सकती हूँ भला . बोल क्या कहना है तुझे .
मंजू म : तूने देखा न कैसे वो तेरे आते hi चला गया . मुझे लगता है वो तुझसे कुछ ज्यादा hi नाराज़ है. तू उसे कैसे भी कर क मन ले या ...
ऋतू सिंह : बोल मैं सुन रही हूँ .
मंजू म : या तू उस वक़्त न आया कर जब उसका टाइम होता है यहाँ आने का.
ऋतू को मंजू की ये बात सुनकर बड़ा दुःख हुआ. उसके लिए मंजू hi तो सब कुछ दिए. आरसे बाद उसे कोई अपना मिला था मंजू क रूप में और वो hi उसे यहाँ न आने को कह रही थी . पर इसके साथ hi वो मंजू की मज़बूरी भी समझ रही थी क वो अमित से कितना प्यार करती है. और वो अमित को नाराज़ करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहती . ऋतू तो खुद अमित से माफ़ मांग कर बात ख़तम करना छह रही थी पर वो था क ऋतू से बात करने को भी तैयार नहीं था.
ऋतू सिंह : मैं समझ सकती हूँ तू ऐसा क्यों कह रही है मंजू . मेरा यकीन कर मैं रोज़ यही सोच कर आती हूँ क मैं आज अमित से माफ़ी मांग कर बात को ख़तम करुँगी पर तेरे सामने hi देख वो मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं है.
मंजू म : तूने खुद hi मुझे मन किया था न क मैं अमित से बात न करूँ अब तू hi बता मैं क्या करूँ? कहीं ऐसा न हो क मैं फिर से अकेली रह जॉन . मैं उसे किसी कीमत पर खोना नहीं चाहती मेरी बहिन . मुझसे समझने की कोशिश कर. मैं तुझे भी छोड़ना नहीं चाहती और न उसे छोड़ सकती हूँ. अब तू hi बता मैं क्या करूँ.
ऋतू सिंह : तू चिंता मत कर मंजू अब मैं hi कुछ करती हूँ. मैं तुझे दुखी नहीं होने दूंगी. मैं तब तक तुझे अपनी शकल नहीं दिखाउंगी जब तक क अमित को मन न लूँ.
इतना कह कर ऋतू सिंह घर से बहार निकल गयी . मंजू ने उसे रोकने की कोशिश की पर वो नहीं रुकी. दोनों सहेलियों को इस बात से दुःख तो बहुत हुआ था. पर ऋतू सिंह अपने जज़्बात छुपा कर वही सपाट चेहरा लिए अपनी गाड़ी में बैठ कर चली गयी जबकि मंजू नाम आँखों से अपनी बेस्ट फ्रेंड को जाते हुए देखती रही.
मंजू म क घर से निकल के मैंने सीधा मोहित क घर गया . मैं जैसे hi अंदर गया तो आंटी बेहद hi खूबसूरत परिधान में पूरे मेकअप में तैयार हुई बिलकुल जवान लड़कियों सी सजी हुई, स्टाइलिश हेयर स्टाइल में आँखों में काजल की लम्बी धार लगाए गहनों से सजी बिलकुल किसी काम देवी जैसी प्रतीत हो रही थी . मैं उन्हें देखता hi रह गया.
आंटी : शुक्र है तुम आ गए, पर ये क्या तुम इन कपड़ो में ? जाओ अपने कमरे में जा कर अचे से कपडे पेहेन लो .
अमित : पर बात क्या है आंटी?
आंटी : मोहित ने बताया नहीं तुम्हे? करिश्मा की सहेली क यहाँ फंक्शन है. तेरे अंकल तो देर से आएंगे और मोहित भी कहीं जा रहा है तो तुम्हे हमारे साथ चलना है. अब जल्दी करो करिश्मा भी तैयार हो रही है. ज्यादा देर मत लगाना .
अमित : पर मुझे ...
आंटी : चिंता मत करो साडी रत नहीं रुकना है 10 बजे से पहले आ जायेंगे. अब जल्दी करो.
आंटी की बात मानते हुए मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया. मेरे कपडे यहाँ वैसे hi पड़े हुए थे जो आंटी ने मुझ दिलवाये थे. मैंने एक ाचा सा ब्लेजर पेहेन लिया और निचे आया तो आंटी क साथ करिश्मा दीदी भी तैयार बैठी थी. करिश्मा दीदी को देख कर मेरी नज़रें उन पर जैम गयी. वो जब गाओं आयी थी तब भी इतनी सुन्दर नहीं लगी थी. मगर आज तो जैसे वो भी बिजलियाँ गिरा रही थी. रंगत और सूरत तो पहले hi आंटी जैसी थी ऊपर से आज वो जिस तरह से सज धज कर तैयार हुई थी वो किसी को भी दीवाना बना देने क लिए काफी था. 34 -30- 36 की ज़बरदस्त फिगर और 5’6” की हाइट . बड़ी बड़ी ऑंखें जो काजल लगाने से और भी बड़ी लग रही थी. काले रेशमी बल हो खुले छोड़े हुए थे गले में सिर्फ मंगलसूत्र . फक्क गोरा रंग पिंक सूट में वो खुद भी पिंकिश hi लग रही थी. मैं उन्हें एक तक देखे जा रहा था क मेरे चेहरे क आगे हाथ कर क उन्होंने चुटकी बजायी और मुझे वापिस होश में लायी.
करिश्मा दीदी : ोये ऐसे क्या देख रहा है ? पहले कभी लड़की नहीं देखि क्या? लगता है तेरे लिए कोई लड़की देखनी पड़ेगी.
अमित : आए आप बहुत अछि लग रही हैं ..
करिश्मा दीदी : ाचा ठीक है ठीक है. जल्दी चल मुझे लेट नहीं होना. वैसे तू भी कुछ काम नहीं लग रहा.
आंटी : लाखों में एक है अमित , नज़र न लगे इसे किसी की.
इतना कह कर आंटी ने अपनी आँख से काजल ले कर मेरे कण पर लगा दिया .
अमित : वैसे आज काम तो आप भी नहीं लग रही. अगर अंकल यहाँ होते तो पक्का घायल हो जाते .
करिश्मा दीदी : हे हे हे बिलकुल सही कहा . माँ आज आप कमल की लग रही हो .
आंटी : शरमाते हुए ) धत्त तू भी शुरू हो गयी उसके साथ. चलो अब देर नहीं हो रही ?
आंटी क इतना कहते hi करिश्मा दीदी जल्दी से अपना छोटा सा पर्स हाथ में लटकाये आगे बाथ गयी और आंटी ने आँखों से hi मुझे इशारा किया और स्माइल करती हुई आगे चल पड़ी. मैं उनकी मटकती गांड देखता हुआ उनके पीछे पीछे चल पड़ा. बहार कार तैयार कड़ी थी और साथ hi ड्राइवर. मैं आगे वाली सीट पर बैठ गया और आंटी करिश्मा दीदी क साथ पीछे बैठ गयी.