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अमित मंजू की गॉड में सर रख और सो रहा था क मंजू का मोबाइल बजने लगा. ये शीना का फ़ोन था. मंजू ने जल्दी से फ़ोन उठाया ताकि अमित की नींद ख़राब न हो.
शीना : कैसी हो हुआ ?
मंजू : मैं ठीक हूँ शीना तुम कैसी हो ?
शीना : बस ठीक हूँ. दिन नहीं लग रहा था तो सोचा आपसे मिल लूँ. आप घर पर hi हैं न. मैं आ रही हूँ
मंजू : वो शीना मैं वो कहीं जा रही हूँ तुम आज रहने दो. मुझे देर हो जाएगी .
शीना : पर आप कहाँ जा रही हैं.
मंजू : वो मुझे एक ज़रूरी सामान लेना था और कुछ किताबें . तुम कल आ जाना.
शीना : ाचा ठीक है. पर अगर आप कहें तो मैं आपके साथ चल सकती हूँ
मंजू : नहीं कोई बात नहीं. मुझे टाइम लग जायेगा और मैं नहीं चाहती तुम मेरे साथ बोर होती रहो . ाचा अब कल मिलते हैं. Ok
शीना : ठीक है बुआ. Bye .
मंजू ने शीना को ताल दिया ताकि अमित को कोई परेशानी न हो और वैसे भी शीना पता नहीं क्या सोचती. उधर मोहित भी परेशां अमित को ढूंढ रहा था तो अचानक उसके ख्याल आया क क्यों न एक बार मंजू म क घर देख लिया जाये क्यूंकि अमित का उनके साथ भी जुड़ाव है. ये बात मन में आते hi मोहित पहुँच गया मंजू में क घर. और बहार अमित की बाइक देख कर उसके चेहरे पर रौनक आ गयी. मोहित लगभग दौड़ता हुआ दरवाज़े तक पहुंचा और बेल्ल बजा दी. मंजू म ने जैसे hi दरवाज़ा खोला तो मोहित को देख कर चौंक गयी.
मंजू : अरे मोहित तुम यहाँ ?
मोहित : वो मम असल में मैं अमित को ढूंढ रहा था. उसका फ़ोन बंद है और मैं दोपहर से उसे ढूंढ रहा हूँ. थैंक गॉड क वो आपके पास है . वर्ण पता नहीं कहाँ कहाँ ढूंढना पड़ता.
मंजू ( मन में ) हो न हो जो भी हुआ है वो मोहित क घर या इसकी बहिन क ससुराल में hi हुआ है. इसी लिए अमित बिना बताये निकल आया होगा.
मोहित : अरे मम आप कहाँ खो गयी? प्लीज आप अमित को बुला दीजिये.
मंजू : पर अमित तो यहाँ नहीं है.
मोहित : वो उसकी बाइक तो यहीं कड़ी है न मम. प्लीज मम उसे बुला दीजिये. हम लोग बहुत टेंशन में हैं.
मंजू : अरे मैं कह रही हूँ न वो यहाँ नहीं है. यकीन न हो तो अंदर आ कर खुद देख लो. आओ
मोहित : no मम it’s ok. पर उसकी बाइक तो यहीं है . आपके पास आया होगा न वो?
मंजू : हाँ वो आया तो था. उसकी बाइक शायद ख़राब हो गयी थी इस लिए यहीं कड़ी कर क चला गया.
मोहित : क्या ?? बाइक छोड़ कर चला गया. आपको पता है वो कहाँ गया?
मंजू : बता कर तो नहीं गया . हाँ कह रहा था क मोबाइल ख़राब है तो उसे ठीक करवा कर वो घर चला जायेगा. शायद बाइक लेने आये. अगर वो आया तो मैं उसे कह दूंगी क वो तुमसे बात कर ले.
मोहित : कुछ बता कर गया है क किस तरफ गया है.? चलिए कोई बात नहीं मैं खुद देख लेता हूँ. आप मेरा जो. रख लीजिये अगर वो आये तो मुझे फ़ोन ज़रूर कीजियेगा. प्लीज मम it’s अर्जेंट. हमें उसकी बहुत फ़िक्र हो रही है.
मंजू : वैसे तुम चिंता मत करो. वो बिलकुल नार्मल hi था और कह कर गया था क वो आएगा. वो जैसे hi अत है मैं तुम्हे फ़ोन कर दूंगी.
मोहित को कुछ तसल्ली हुई क चलो कुछ तो पता चला . फिर भी वो एक बार पास की मार्किट में उसे देखने चला गया. और उसने घर भी फ़ोन कर क इन्फॉर्म कर दिया. ये सुन कर रमा को कुछ तसल्ली हुई पर करिश्मा तो जैसे पछतावे की आग में जल रही थी. वो अमित से खुद माफ़ी मांगना चाहती थी. मंजू मन में सोचने लगी क उसने सही किया या गलत किया. मोहित अमित का बेस्ट फ्रेंड था मंजू ये अछि तरह जानती थी. पर फिर भी कुछ तो हुआ hi था चाहे फॅमिली में किसी और की वजह से hi हुआ हो. बस इसी लिए मंजू ने बात को छिपा लिया और अमित क पास बैठ गयी.
पता नहीं मैं कितनी देर सोता रहा . मेरी नींद मंजू म क जगाने से hi खुली. मैंने ऑंखें खोली तो वो प्यार से मेरा सर सेहला रही थी.
मंजू म : उठ जाओ देखो रत होने वाली है. रत को भी तो सोना है न. और फिर खाना भी खाना है. चलो उठ जाओ.
अमित : क्या टाइम हो गया है ?
मंजू म : क्यों ? कहीं जाना है क्या ?
अमित : वो बात नहीं मतलब मैं काफी देर से सो रहा हूँ.
मंजू म : ाचा वो सब छोडो पहले बताओ तुम्हारा फ़ोन कहाँ है?
अमित : वो यहीं होगा ये हाँ ये रहा. पर आप क्यों पूछ रही हैं?
मंजू म : इस लिए क सब परेशां हो रहे होंगे. कब से फ़ोन बंद है तुम्हारा? मोहित आया था तुम्हे ढूंढते हुए .
अमित : आपने क्या कहा उसे?
मंजू म : पहले तो मैं बताने वाली थी फिर सोचा क शायद वहीँ से तुम इतना परेशां हो कर आये तो फिर से तुम्हे वापिस नहीं जाना चाहिए तो मैंने कह दिया क तुम यहाँ बाइक कड़ी कर क अपना मोबाइल ठीक करने गए हो. अब उसे फ़ोन कर क कुछ कह दो वर्ण वो फिर से तुम्हे ढूंढने आ जायेगा. तुम बात करो तब तक मैं कॉफ़ी लती हूँ.
अमित : हम्म्म
मैंने अपना मोबाइल ों किया तो ढेरों मेस्सगेस आने लगे मॉस्कल्स क. मैंने पहले मोहित को hi फ़ोन किया.
मोहित : कहाँ है तू ? मैं दोपहर से तुझे ढूंढ ढूंढ क थक गया हूँ. यहाँ सब परेशां हो रहे हैं. है कहाँ तू.
अमित : अरे यार मैं वो हाँ वो मोबाइल ख़राब हो गया था तो उसे ठीक करवाने आया था तो यहाँ कुछ पुराने दोस्त मिल गए उन्ही क साथ चला आया.
मोहित : काम से काम एक फ़ोन तो कर सकता था. तुझे पता है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा. माँ और दीदी का रो रो कर बुरा हल है . आखिर हुआ क्या है तू ऐसे अचानक बिना बताये गया क्यों?
अमित : अरे कुछ नहीं यार वो फ़ोन की वजह से मैं जल्दी से निकल गया था और फिर टाइम hi नहीं मिला अभी फ़ोन ठीक हुआ है तो फ़ोन कर दिया. ाचा अब मैं जा रहा हूँ जब वापिस आऊंगा तो फिर मिलूंगा . मेरी चिंता मत करना. और आंटी से दीदी से कह देना क उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं.
मोहित : पर तू जा कहाँ ....
मैंने ज्यादा बात नहीं की और फ़ोन काट दिया . मोहित को क्या समझाता क हुआ क्या है बस इसी लिए मैंने फ़ोन काट दिया. फिर मैंने राधा को फ़ोन किया . राधा में पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया .
राधा : रट हुए ) कहाँ हो तुम ? अभी क अभी घर आओ . तुम्हे ज़रा भी परवाह है किसी की? कहाँ हो कल से ? तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था? क्या हुआ है तुम्हे? जल्दी से घर आओ.
अमित : अरे अरे आराम आराम से तुम पहले रोना बंद करो
‘ कहाँ हो तुम ? जल्दी से घर आओ तुमने सुना न , घर आओ जल्दी से . वर्ण मैं कभी तुमसे बात नहीं करुँगी. ‘ ये दिव्या मौसी की आवाज़ थी जो गुस्से से मुझे घर आने को कह रही थी. मैं उनकी आवाज़ से समझ गया था क वो भी चिंता में होंगी और इसी लिए ऐसे बात कर रही हैं.
अमित : पर मौसी मैं ...
दिव्या मौसी: तुमने सुना नहीं ? मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना. अभी क अभी यहाँ आओ .
अमित : पर मौसी मैं अभी कैसे आ सकता हूँ ?
दिव्या मौसी: क्यों? क्यों नहीं आ सकते ? हो कहाँ तुम ?
अमित : मैं शहर से बहुत दूर हूँ . अपने एक दोस्त क साथ . रत भी हो गयी है तो अकेले इतनी रत को इतनी दूर से कैसे आऊं. आप खुद hi तो मन करती हैं न रत को सफर करने से.
दिव्या मौसी: पर तुम हो कहाँ ?
अमित : वो मैं आपके एक दोस्त के साथ हूँ .
दिव्या मौसी: कौन सा दोस्त है जिसके साथ घूम रहे हो? और तुमने फ़ोन क्यों बंद कर रखा था.? बात क्या है ? तुम्हे पता भी है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा?
राधा : ( दिव्या से फ़ोन छींटे हुए ) मुझे कुछ नहीं पता तुम अभी क अभी यहाँ आओ. खुद को समझते क्या हो तुम ? एक फ़ोन नहीं कर सकते थे ? मुझे तुम्हे देखना है तुम जल्दी से आ जाओ.
दिव्या मौसी: राधा मैं बात कर रही हूँ न. इतनी रत को कैसे आएगा वो अकेला? तुम रुको. हाँ अमित ठीक है तुम रत वहीँ रुक जाओ पर सुबह तुम यहाँ होने चाहिए मेरे सामने. समझ गए?
अमित : जी मौसी कल सुबह मैं पहुँच जाऊंगा.
दिव्या मौसी: अपना ध्यान रखना और ऐसे से आ जाना. मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं और घर भी फ़ोन कर देना.
अमित : जी ाचा मौसी.
उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया पर दिव्या मौसी की बात से पता चल गया क वो गुस्से में हैं और कल मुझे उनके गुस्से का सामना करना पड़ेगा. साथ hi मुझे राधा को लेकर भी खुद पर अफ़सोस हो रहा था क वो मेरी कितनी परवाह करती है और मैंने उसे बताया तक नहीं. बताता भी क्या अगर उसे मेरी सचाई पता चले तो शायद वो कभी मुझे देखना भी पसंद न करे. खैर उसके बाद मैंने माँ से बात की . इस बीच आंटी का फ़ोन आने लगा पर मैंने फ़ोन नहीं उठाया. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आ गयी.
रीमा : टेंशन में ) कहाँ थे तुम ? कल से तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था ? तुम्हे किसी की परवाह है की नहीं ?
अमित : अरे रुको रुको मेरी बात तो सुनो.
रीमा : क्या सुनु सब सुन लिया है मैंने . मैं वहीँ थी राधा क पास. और अत भी है क्या हल बना रखा था राधा ने अपना. और मौसी भी कितना दुखी थी .
अमित : पर तुम वहां कैसे ?
रीमा : क्यों ? मैं वहां नहीं हो सकती क्या ? मेरी बेस्ट फ्रेंड है वो और मैं उसकी साइड hi लुंगी. जो हरकत तुमने की है न उसके लिए तुम्हे सजा मिलने चाहिए.
अमित : ाचा तो तुम मुझे सजा देना चाहती हो ? तो ठीक है देदो सजा पर जानना नहीं चाहोगी क मैं कहाँ था और फ़ोन क्यों बंद था ?
रीमा : तुम मिलो तो सही फिर बताती हूँ तुम्हे . तुम्हे तो कोई फरक पड़ता नहीं न चाहे कोई तड़प तड़प कर मर जाये.
अमित : सही कहा मुझे फरक नहीं पड़ता क्यूंकि मैं इंसान हूँ hi नहीं मैं तो जानवर हूँ बेशरम बेगैरत हूँ
रीमा : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? तू कहाँ हो ? हुआ क्या है ?
अमित : कुछ नहीं , कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . अभी तुम घर जाओ और आराम करो. मैं जहाँ भी हूँ बिलकुल ठीक हूँ.
रीमा : प्लीज मुझे बताओ मेरा दिल घबरा रहा है.
अमित : मैंने कहा न क मैं बिलकुल ठीक हूँ. तुम टेंशन न लो. कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . ाचा अब मैं रखता हूँ. Bye
रीमा : लव यू
अमित : 2
रीमा की कॉल मैंने जल्दी से कटी क्यूंकि निधि दीदी का फ़ोन आ रहा था .
अमित : hello दीदी
निधि दीदी: तुम वापिस आ गए और बताया तक नहीं.
अमित : वो दीदी मैं थक गया था तो सो रहा था अभी उठा हूँ और मेरा फ़ोन बी बंद था.
निधि दीदी : तुम हो कहाँ मुझे तुमसे मिलना है अभी.
अमित : पर अभी तो मैं यहाँ नहीं हूँ दीदी. मैं अपने एक दोस्त से मिलने आया था तो कल वापिस आऊंगा.
निधि दीदी : ाचा ठीक है कल जब आओ तो पहले मुझे फ़ोन करना एक सरप्राइज देना है तुम्हे .
अमित : ज़रूर दीदी मैं आपको फ़ोन ज़रूर करूँगा.
निधि दीदी : मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.
अमित : ाचा दीदी मैं रखता हूँ . Bye
निधि दीदी : bye
मैंने दीदी से बात करते hi फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया क्यूंकि आंटी और करिश्मा दीदी की कॉल्स आ रही थी और मैं उनसे बात नहीं करना चाहता था. मैंने जैसे hi फ़ोन बंद किया तो सामने मंजू म कड़ी मुझे hi देख रही थी.
अमित : ऐसे क्या देख रही हैं आप?
मंजू म : तुम्हे hi देख रही हूँ. पता चल गया न क अपने कैसे परेशां होते हैं जब बात न हो तो. और तुम वहां अकेले पार्क में बैठे थे फ़ोन बंद कर क. वैसे कब से बैठे वहां? वो तो ाचा हुआ कॉलेज से आते वक़्त मेरी नज़र तुम्हारी बाइक पर पद गयी . वर्ण तुम तो वहीँ बैठे रहते . कोई कुछ भी कहे या कुछ भी गलत करे इसका मतलब ये तो नहीं उसकी सजा हम अपनी को दें . मुझ नहीं पता क तुमने किस किस से अभी बात की पर इतना तो समझ सकती हूँ क वो सब परेशां हो रहे होंगे जो तुम इस तरह झूठ बोल कर उन्हें सफाई दे रहे थे. तुम इतने कमज़ोर तो नहीं थे क इतनी जल्दी टूट जाओ. फिर आज क्यों ऐसे थके हारे बैठे थे वहां?
अमित : कुछ नहीं मम बस कल किसी ने मुझे मेरा आइना दिखा दिया क मैं कितना गलत इंसान हूँ. मुझे रिश्तों की कदर नहीं मैं सिर्फ हवस का कीड़ा ......
मंजू म : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) शहहहहह.... एक लफ्ज़ भी और मत कहना. किसी एक कुछ कह देने से तुम्हारी सचाई नहीं बदल जाएगी. दूसरों की इज़्ज़त बचने वाला हवस का भूखा हो hi नहीं सकता और ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है. अब उठ कर हाथ मुँह धोलो तुम्हारे लिए मैंने कपडे निकल कर रख दिए हैं.
मनु म ने मेरे माथे को चूमा और मुझे फ्रेश होने को कह कर खुद किचन में चली गयी. मैं कुछ देर उनके बारे में hi सोचता रहा. वो कितना प्यार करती थी मुझसे और मैं उन्हें बदले में उतना प्यार नहीं दे प् रहा था. मम क बारे में सोचता हुआ मैं उठा और फ्रेश हो कर कपडे बदल लिए. कुछ देर में hi मन ने खाना लगा दिया . मम कब दोनों क लिए खाना परोस रही थी तब भी मैं उन्हें hi देख रहा था.
मंजू म : ऐसे क्या देख रहे हो ?
अमित : देख रहा हूँ क एक hi रूप में मुझे कितने सरे रिश्ते आप से मिले हैं.
मंजू म : मतलब ?
अमित : मतलब आप मेरी टीचर भी हैं मुझे दोस्त की तरह समझती समझती भी हैं. बहिन की तरह राखी बंधी. प्रेमिका की तरह प्यार किया बीवी की तरह मेरी सेवा की और माँ की तरह मुझे संभाला. आप ने मेरे लिए कितना कुछ किया , मुझे कितना प्यार दिया और बदले में मैं आपको कुछ भी नहीं देता.
मंजू म : कौन कहता है तुम मुझे कुछ नहीं देते? तुमने मुझे जीना सिखाया मेरी ज़िन्दगी को एक मकसद दिया ताकि मैं जी सकूँ. वर्ण पहले तो मुझे ऐसे लगता था क जैसे मैं उम्र कैद काट रही हूँ. तुमने मुझे वो हर ख़ुशी दी जो मुझसे दुनिया ने चीन ली थी. मुझे फिर से हसना सिखाया. तुम्हारी वजह से मुझे वो रिश्ते वापिस मिले जो वक़्त क साथ कहीं खो गए थे. तुम में मैंने वो भाई देखा जो मेरा सब कुछ था . तुमने मुझे प्यार दिया जो मुझे कभी मिला hi नहीं था. मेरी ज़िन्दगी तुम्ही से है . मैं तो मर कर भी तुम्हारा एहसान नहीं उतर सकती.
अमित : शहहह .... प्यार कोई एहसान नहीं होता. और आप ने मुझे कहीं ज्यादा प्यार दिया है. मुझे लगता है क मैं आपको बदले में उतना प्यार नहीं दे पता
मंजू म : बदले में?? बदला तो कारोबार में होता है, प्यार में तो सिर्फ देना hi होता है. और तुमने मुझे हो दिया है वो मेरे जीने क लिए काफी है. बस अब एक और चीज़ मुझे तुमसे चाहिए पर वो तब जब तुम्हे ठीक लगे.
अमित : आप हुकम कीजिये मैं आपकी हर बात पूरी करूंगा.
मंजू म ( शरमाते हुए ) मुझे ,,, मुझे तुम्हारी निशानी चाहिए
मंजू म ने शरमाते हुए ये बात कही और सर शर्म से झुका लिया. उनकी बात का मतलब समझ कर मैं हैरान भी हुआ पर मुझे उनकी इस बात पर प्यार भी आया.
अमित : क्या सच में ये चाहती हैं ??
मंजू म : नज़रें झुकाये हुए ) हम्म्म्म
अमित : पर आप सबको क्या जवाब देंगी? और अभी तो मैं खुद पड़े कर रहा हूँ . अभी मैं आपकी ज़िम्मेदारी ....
मंजू म : मैंने कहा न , जब तुम्हे ठीक लगे तब. और मैंने सब सोच रखा है. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा .
अमित : पर आप ये सब क्यों चाहती हैं? मेरा मतलब है क अगर किसी को पता चला तो आपके लाइफ परेशानी होगी.
मंजू म : औरत की ज़िन्दगी का ये सबसे ज़रूरी रूप है. माँ बन कर hi औरत पूरी होती है वर्ण तब तक अधूरी रहती है. और मैं तुम्हारे प्यार की निशानी को जनम देना चाहती हूँ. ताकि मैं भी वो सुख प् सकूँ जो हर औरत क लिए ज़रूरी होता है. और मुझे किसी की परवाह नहीं मैं सब देख लूंगी अगर कुछ समय क लिए कहीं जाना भी पड़ा तो चली जाउंगी.
अमित : तो ये आपका फाइनल फैसला है ?
मंजू म : सर हिलाते हुए ) हम्म्म
अमित : तो फिर आज hi बना दूँ आपको माँ ??
मैंने जान बुझ कर मंजू म को छेड़ते हुए कहा. तो वो हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी.
मंजू म : हाथ मरते हुए ) गंदे ,, मैंने ये कब कहा ? जब तुम एक बाप होने की ज़िम्मेदारी निभाने क काबिल हो जाओ तब बना देना अभी तो खुद को संभल नहीं पते. यद् है न क्या हालत बना राखी थी अपनी आज . तब ख्याल नहीं आया था किसी का?
अमित : सॉरी गलती हो गयी . आगे से ऐसा नहीं होगा.
मंजू म : होना भी नहीं चाहिए . मुझे हास्य खेलता अमित hi ाचा लगता है. ये तोंदू लड़का मुझे नहीं चाहिए.
अमित : ाचा तो अब मेरे मज़े ले रही हैं आप ? अगर मैंने कुछ किया न तो फिर आप hi रोटी फिरेंगी .
मंजू म : ाचा क्या कर लोगे ? बड़े आये मुझे रुलाने वाले. चलो चुपचाप खाना खाओ पहले
अमित : ठीक है पहले खाना खा लो आप फिर मैं आप को खता हूँ.
मेरी इस बात पर मंजू म ने ऑंखें बड़ी कर क मुझे देखा और फिर शर्मा गयी. मंजू म को मैंने अपने हाथों से खाना खिलाया और वो भी मुझे अपने हाथों से खाना खिलने लगी. खाना खाने क बाद मंजू म किचन में चली गयी. मैंने सोच लिया क आज मंजू म को वो प्यार दूंगा जो मैं कब से उन्हें दे नहीं प् रहा था. आज साडी रत अपनी थी. वैसे भी अब मेरा मन हल्का हो चूका था और मंजू म की वजह से hi ये हुआ था. मंजू म किचन में थी और बैडरूम में आ गया.
रमा अपने कमरे में बार बार अमित का फ़ोन तरय कर रही थी पर उसने फ़ोन नहीं उठाया और फिर उसका फ़ोन बंद आने लगा. रमा को ये तो तसल्ली थी क अमित की खबर मिल गयी और वो ठीक है पर उसका दिल अंदर से टूट भी गया था क अब अमित शायद उससे दूर हो गया है ऊपर से करिश्मा की नज़रों में भी अब वो गिर चुकी थी. अपने कमरे में बैठी वो रोये जा रही थी. उसने खाना भी नहीं खाया था और करिश्मा का भी यही हल था. एक तरफ तो पहले वो अमित से बेतहाशा गुस्सा थी और अपनी माँ पर भी पर सचाई जान लेने क बाद उसने अपनी माँ को समझा और अमित भी अब उसकी नज़र में गलत नहीं था. क्यूंकि उसने कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं किया था. पर उसे खुद पर अफ़सोस ज़रूर हो रहा था क उसने अमित को जो कुछ अपशब्द कहे हैं उसका कितना असर अमित पर हुआ है. रमा ने जिस तरह अमित क कुछ होने पर खुद को ख़तम करने की बात कही थी उससे भी उसे अंदाज़ा हो गया था क रमा क दिल में अमित की क्या जगह है और ये सिर्फ हवस नहीं है. राघव काम क सिलसिले में शहर से बहार था इस वजह से तीनो अपने अपने कमरे में अकेले बैठे थे. कोई भी खाना खाने नहीं आया. जहाँ दोनों माँ बेटी अमित को लेकर परेशां थी वहीँ मोहित भी चिंता में डूबा था. उसे किसी ने कुछ बताया नहीं था और इसी लिए वो अपनी सोच क घोड़े चरों तरफ दौड़ा रहा था. अमित का इस तरह चले जाना और दोनों माँ बेटी का इस तरह रोना धोना , करिश्मा का इस तरह अचानक से ससुराल जा कर वापिस लौट आना. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क आखिर हुआ क्या है. ऊपर से राजीव ने भी उसका फ़ोन नहीं उठाया था. मोहित ने अमित से सचाई जानने का सोच कर कुछ देर मीनल से बात की और सो गया. जब घर में सन्नाटा पसरा था तब करिश्मा अपने कमरे से निकल कर अपनी माँ क पास जाने लगी पर दरवाज़ा बंद था. उसने सोचा क उसे अपनी माँ से बात करनी चाहिए कहीं उसकी माँ डिप्रेशन में न चली जाये.
थक थक थक
करिश्मा ने 2-3 बार दरवाज़ा खटखटाया पर रमा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.
करिश्मा : माँ प्लीज दरवाज़ा खोलिये , मुझे आपसे बात करनी है. प्लीज माँ एक बार दरवाज़ा खोलिये. मैं जानती हूँ आप जग रही हैं. सिर्फ एक बार दरवाज़ा खोल दीजिये. मेरी बात सुन लीजिये माँ.
रमा : ?????
करिश्मा : प्लीज माँ सिर्फ एक बार मेरी बात सुन लीजिये. प्लीज सिर्फ एक बार ,, आपको अमित की कसम माँ प्लीज एक बार मेरी बात सुन लीजिये.
तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और करिश्मा अंदर आ गयी. रमा उसकी तरफ पीठ कर क कड़ी थी. करिश्मा ने पहले दरवाज़ा लॉक किया फिर अपनी माँ क सामने आयी . रमा का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ देख के करिश्मा उससे लिपट गयी.
करिश्मा : रट हुए ) ी ऍम सॉरी माँ, मुझे माफ़ कर दीजिये. मैंने बिना सचाई जाने क्या कर दिया. ये सब मेरी गलती है. प्लीज आप मुझे माफ़ कर दीजिये. मैं अमित से भी माफ़ी मांगूंगी. प्लीज माँ
रमा : रट हुए ) तुम क्यों माफ़ी मांग रही हो? गलत तुमने नहीं गलत तो मैंने किया है. साडी गलती मेरी है. मैंने hi अमित को मजबूर किया क वो मेरे साथ वो सब करे. मुझे खुद को कण्ट्रोल करना चाहिए था. अपने बेटे क दोस्त क साथ hi मैंने .... और फिर तेरे ससुराल में अमित को ज़बरदस्ती भेज कर वो सब करने क लिए कहा. सरु गलती मेरी hi है. मुझे माफ़ कर दे बेटी मैंने बहुत बड़ा पाप किया है. तेरा घर बसने की जगह मैंने जब बर्बाद कर दिया.
करिश्मा : नहीं माँ ऐसा मत कहो , आपने कोई पाप नहीं किया. मैं जानती हूँ शरीर की भूख इंसान से बहुत कुछ गलत करवा देती है. इसमें कसूर पापा का भी है अगर वो आपका ध्यान रखते तो ऐसा कभी नहीं होता . आप ने हमेशा पापा को hi सब कुछ मन है मैं जानती हूँ . इसी लिए तो मैंने अमित को गलत समझा था और ये सोचा hi नहीं क वजह कुछ और भी हो सकती है. आप गलत नहीं हैं आपने अमित को जिस लिए भेजा था वो उसने कर भी दिया था माँ. वो दोनों माँ बेटी मुझसे अचे से पेश आने लगी थी पर जो सचाई फिर मेरे सामने आयी वो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकीय. मैंने राजीव का हर जुल्म सहा पर फिर भी उसे पति क रूप में hi मानती रही पर अब .. अब मुझे नफरत हो रही है इस बात से क मैं उस जैसे घटिया इंसान को इतनी इज़्ज़त देती रही . वो तो किसी की नफरत क भी लायक नहीं. कुत्ता ज़लील इंसान मैं एक पल भी उस जान क साथ नहीं रह सकती.
रमा : चौंकते हुए ) ये क्या कह रही हो तुम ? क्या हो गया ऐसे अचानक ? मुझे साडी बात बता .
करिश्मा : रहने दो माँ उन घटिया लोगों क बारे में मैं कोई बात नहीं करना चाहती.
रमा : पर मुझे बता तो सही क हुआ क्या है?
करिश्मा : वो घटिया इंसान अपनी hi सगी बहिन क साथ ,,,,,,, उफ्फ्फ मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही है. कैसे घटिया लोग हैं. और वो कमीनी भी कैसे अपने पति को छोड़ कर अपने hi सेज भाई क साथ मुँह कला कर रही है.
रमा : शॉकेड ) क्याआ ? ये सब .....
करिश्मा : हाँ माँ मैंने अपनी आँखों से देखा था दोनों को और फिर मैं खुद को रोक नहीं पायी. मैंने दोनों को hi मरना शुरू कर दिया कैसे बेशर्मी क साथ दोनों नंगे .....
रमा : ये सब कब हुआ ? अमित कहाँ था तब ?
करिश्मा: रत को मुझे सोता देख कर जब राजीव कमरे से गया तो मुझे लगा कहीं अमित उस हेमा या उसकी माँ क साथ न हो तो मैं दर गयी की अगर राजीव ने देख लिया तो क्या होगा. मैं जब अमित क कमरे में गयी तो वहां कोई नहीं था. फिर मुझे दूसरे कमरे में किसी क होने का एहसास हुआ. मैंने दरवाज़े अंदर देखा तो दोनों बहिन भाई बीएड पर.... बस फिर मुझे होश नहीं रहा. अमित उस वक़्त पता नहीं कहाँ था पर जब राजीव ने मुझ पर हाथ उठाया तो अमित अचानक वहां आ गया और राजीव को पटक दिया.
रमा : इसका मतलब वो नज़र रख रहा था.
करिश्मा : क्याआ??
रमा : हाँ वो हर चीज़ का सबूत उकठा कर रहा था ताकि तुम्हारे ससुराल वाले अगर कभी तुझे तंग करें तो हम उनसे अपनी बात मनवा सकें.
करिश्मा : वो मेरे लिए सब कर रहा था और मैंने उसे hi
रमा : उसे hi क्या ?
करिश्मा : रट हुए ) वो जब मुझे चुप करवाने मेरे पास आया तो मैंने उस पर हाथ उठा दिया और उसे पता नहीं क्या क्या कह दिया.
रमा : रो मत बेटी गलती हम दोनों से हुई है. उस बेचारे ने तो जो भी किया मेरे कहने पर किया और तुम्हारी भलाई क लिए किया. तुम्हे अपनी बहिन मंटा है वो . वो तुम्हे ज़रूर माफ़ कर देगा . उसका दिल बहुत बड़ा है. पर मैं तो अब उससे माफ़ी भी नहीं मांग सकती. वो पहले hi मन कर रहा था पर मैंने hi उसे तुम्हारा वास्ता दे कर भेजा था. उसके दिल को बहुत ठेस लगी है . मेरा फ़ोन तक नहीं उठाया उसने.
करिश्मा: रो मत माँ मैं उसे मनाऊंगी. देखती हूँ कैसे नहीं मंटा. पर उससे पहले मोहित को क्या बताना है ये सोच लो. वो सुबह ज़रूर पूछेगा.
रमा : वो मैं देख लुंगी बीटा पर तू बता क अब तू क्या चाहती है?
करिश्मा : मैं उस घर में नहीं रहना चाहती. पर पापा ...
रमा : ऐसा hi होगा तेरे पापा से मैं बात कर लुंगी. और बीटा हो सके तो मुझे ....( हाथ जोड़ते हुए)
करिश्मा: नहीं माँ प्लीज ऐसा मत करिये. मुझे उस बात पर अब कोई गुस्सा नहीं है और आप चाहो तो अमित क साथ
रमा : नहीं बीटा अब तो वो शायद मुझसे कभी मिलेगा भी नहीं . चल ये सब छोड़ आज तू मेरे साथ यहीं रुक जा.
करिश्मा ( मन में ) नहीं माँ ,, मैं जानती हूँ आपको अमित की ज़रूरत है. मैं उससे माफ़ी मांगूंगी उसे आपके पास वापिस लाऊंगी.
दोनों माँ बेटी एक देर रत तक बातें करती हुई सो गयी.
उधर राधा ने कई बार अमित का फ़ोन तरय किया पर वो स्विच ऑफ आ रहा था. राधा अमित से ठीक से बात भी नहीं कर पायी थी अपनी माँ की वजह से . वो बिस्टेर प् करवटें बदल रही थी और अमित पर गुस्सा भी हो रही थी. फिर उसे रीमा की बातें यद् आने लगी.
राधा : प्यार तो तब से करती हूँ जब मुझे प्यार का मतलब भी नहीं पता था पर वो बूढी समझे तो न. आने दो कल इसे बहुत तंग करता है न . कल अचे से खबर लुंगी इसकी.
‘ आआआ मैडम जी प्लीज माफ़ कर दीजिये . मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा मैडम अअअअअ’ पुलिस लॉकअप में कल से hi इन 3 लोगों को ज़बरदस्त टार्चर किया जा रहा था. पर अभी तक इन्होने वो नहीं बताया था जो ऋतू सिंह जानना चाहती थी. ऋतू सिंह ने भी ठान लिया था क वो सच उगलवा क रहेगी.
ऋतू सिंह : तो तुम लोग नहीं बताना चाहते. चलो कोई बात नहीं. अगर तुम लोगों की यही मर्ज़ी है तो ठीक. पांडेय जी इनको और मत मारिये फ़िज़ूल में हम अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं. आप इनको गाडी में बिठाओ अब इनको आज़ाद रिहा कर देते हैं.
ऋतू सिंह क मुँह से ये बात सुनते hi उन तीनो क दिल में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी. तीनो को जल्दी से कपडे पहना कर पुलिस वन में बिठाया गया और रत क अँधेरे में 4 पुलिस वाले इन तीनो को लेकर शहर क बहार इंसान रस्ते पर लेकर चल दिए. एक जगह पर गाड़ी रुकी और तीनो को गाड़ी से उतर कर उनके हाथ खोल दिए गए. पीछे से दुरी गाडी में ऋतू सिंह भी आ गयी.
ऋतू सिंह : भाई मन्ना पड़ेगा, तुम लोग हो बड़े वफादार जो इतनी मर खा कर भी अपना मुँह नहीं खोला. तुम लोगों की वफादारी से खुश हो कर मैं तुम लोगों को आज़ाद करती हूँ. अब तुम्हे कभी कोई दर्द नहीं होगा. जाओ भाग जाओ.
‘ नहीं मैडम कहीं नहीं जायेंगे . आप हमें वापिस लेकर चलो’ पहले वाले ने ये कहा जो समझ गया था क ऋतू सिंह क्या कह रही है.
‘ हह हमें वापिस लॉकअप में दाल दीजिये . आप हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकती ‘ दूसरा वाला भी ऋतू को देखता हुआ बोलै.
ऋतू सिंह : अरे मैं तो तुम लोगों को आज़ाद कर रही हूँ. वैसे भी तुम लोग सुधरने वाले तो हो नहीं और न hi तुम लोग सच बोलोगे तो क्यों न हम ये झगड़ा hi ख़तम कर दें.
‘ आप ऐसा नहीं कर सकती ये ये गलत है. पुलिस ऐसे नहीं कर सकती किसी को’ तीसरे वाले ने जब देख क पुलिस वालों ने अपनी गन्स लोड कर की हैं तो वो डरने लग और उसकी टंगे कम्पनी लगी. ऋतू ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और सिर्फ मुस्कुरा दी.
ऋतू सिंह : पांडेय जो जल्दी करो मुझे वापिस भी जाना है.
पांडेय : जी मैडम , चलो बे भागो जल्दी.
तीनो में से कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला तो पुलिस वाले ज़बरदस्ती खींच कर दो लोगों को गाड़ी से थोड़ा दूर ले गए और दोनों को गोली मार्डी. गोली की आवाज़ क साथ उन दोनों की चीखें भी सुनाई दी. ये मंज़र देख कर तीसरे वाला थार थार कम्पनी लगा और उसका पेशाब निकल गया. वो जल्दी से ऋतू क पाऊँ पद गया
‘ मुझे छोड़ दो मैडम मैं आपकी हर बात मानूंगा मैडम मुझे छोड़ दो’
ऋतू सिंह : तो बताओ मुझे सब कुछ सच सच
‘ मैडम मैंने ऐसा किया तो मेरे साथ मेरे घरवालों को भी मर दिया जायेगा’ प्लीज मैडम मुझे छोड़ दो’
ऋतू सिंह : तो फिर तुम भी अपने साथियों क पास जाओ. वैसे अगर तुम मुझे सच बताओ तो मैं तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ नहीं होने दूंगी. इस बात की मैं गारंटी लेती हूँ. और तुम्हारा नाम भी नहीं आएगा.
‘ ठीक है मैडम मम मैं सब सच सच बता दूंगा. ‘
ऋतू सिंह : पांडेय जी इसके बयां नोट करो और उन दोनों को हॉस्पिटल पहुंचा दो. अगर बच गए तो उनकी किस्मत. वर्ण एनकाउंटर फाइल कर देना .
अमित मंजू की गॉड में सर रख और सो रहा था क मंजू का मोबाइल बजने लगा. ये शीना का फ़ोन था. मंजू ने जल्दी से फ़ोन उठाया ताकि अमित की नींद ख़राब न हो.
शीना : कैसी हो हुआ ?
मंजू : मैं ठीक हूँ शीना तुम कैसी हो ?
शीना : बस ठीक हूँ. दिन नहीं लग रहा था तो सोचा आपसे मिल लूँ. आप घर पर hi हैं न. मैं आ रही हूँ
मंजू : वो शीना मैं वो कहीं जा रही हूँ तुम आज रहने दो. मुझे देर हो जाएगी .
शीना : पर आप कहाँ जा रही हैं.
मंजू : वो मुझे एक ज़रूरी सामान लेना था और कुछ किताबें . तुम कल आ जाना.
शीना : ाचा ठीक है. पर अगर आप कहें तो मैं आपके साथ चल सकती हूँ
मंजू : नहीं कोई बात नहीं. मुझे टाइम लग जायेगा और मैं नहीं चाहती तुम मेरे साथ बोर होती रहो . ाचा अब कल मिलते हैं. Ok
शीना : ठीक है बुआ. Bye .
मंजू ने शीना को ताल दिया ताकि अमित को कोई परेशानी न हो और वैसे भी शीना पता नहीं क्या सोचती. उधर मोहित भी परेशां अमित को ढूंढ रहा था तो अचानक उसके ख्याल आया क क्यों न एक बार मंजू म क घर देख लिया जाये क्यूंकि अमित का उनके साथ भी जुड़ाव है. ये बात मन में आते hi मोहित पहुँच गया मंजू में क घर. और बहार अमित की बाइक देख कर उसके चेहरे पर रौनक आ गयी. मोहित लगभग दौड़ता हुआ दरवाज़े तक पहुंचा और बेल्ल बजा दी. मंजू म ने जैसे hi दरवाज़ा खोला तो मोहित को देख कर चौंक गयी.
मंजू : अरे मोहित तुम यहाँ ?
मोहित : वो मम असल में मैं अमित को ढूंढ रहा था. उसका फ़ोन बंद है और मैं दोपहर से उसे ढूंढ रहा हूँ. थैंक गॉड क वो आपके पास है . वर्ण पता नहीं कहाँ कहाँ ढूंढना पड़ता.
मंजू ( मन में ) हो न हो जो भी हुआ है वो मोहित क घर या इसकी बहिन क ससुराल में hi हुआ है. इसी लिए अमित बिना बताये निकल आया होगा.
मोहित : अरे मम आप कहाँ खो गयी? प्लीज आप अमित को बुला दीजिये.
मंजू : पर अमित तो यहाँ नहीं है.
मोहित : वो उसकी बाइक तो यहीं कड़ी है न मम. प्लीज मम उसे बुला दीजिये. हम लोग बहुत टेंशन में हैं.
मंजू : अरे मैं कह रही हूँ न वो यहाँ नहीं है. यकीन न हो तो अंदर आ कर खुद देख लो. आओ
मोहित : no मम it’s ok. पर उसकी बाइक तो यहीं है . आपके पास आया होगा न वो?
मंजू : हाँ वो आया तो था. उसकी बाइक शायद ख़राब हो गयी थी इस लिए यहीं कड़ी कर क चला गया.
मोहित : क्या ?? बाइक छोड़ कर चला गया. आपको पता है वो कहाँ गया?
मंजू : बता कर तो नहीं गया . हाँ कह रहा था क मोबाइल ख़राब है तो उसे ठीक करवा कर वो घर चला जायेगा. शायद बाइक लेने आये. अगर वो आया तो मैं उसे कह दूंगी क वो तुमसे बात कर ले.
मोहित : कुछ बता कर गया है क किस तरफ गया है.? चलिए कोई बात नहीं मैं खुद देख लेता हूँ. आप मेरा जो. रख लीजिये अगर वो आये तो मुझे फ़ोन ज़रूर कीजियेगा. प्लीज मम it’s अर्जेंट. हमें उसकी बहुत फ़िक्र हो रही है.
मंजू : वैसे तुम चिंता मत करो. वो बिलकुल नार्मल hi था और कह कर गया था क वो आएगा. वो जैसे hi अत है मैं तुम्हे फ़ोन कर दूंगी.
मोहित को कुछ तसल्ली हुई क चलो कुछ तो पता चला . फिर भी वो एक बार पास की मार्किट में उसे देखने चला गया. और उसने घर भी फ़ोन कर क इन्फॉर्म कर दिया. ये सुन कर रमा को कुछ तसल्ली हुई पर करिश्मा तो जैसे पछतावे की आग में जल रही थी. वो अमित से खुद माफ़ी मांगना चाहती थी. मंजू मन में सोचने लगी क उसने सही किया या गलत किया. मोहित अमित का बेस्ट फ्रेंड था मंजू ये अछि तरह जानती थी. पर फिर भी कुछ तो हुआ hi था चाहे फॅमिली में किसी और की वजह से hi हुआ हो. बस इसी लिए मंजू ने बात को छिपा लिया और अमित क पास बैठ गयी.
पता नहीं मैं कितनी देर सोता रहा . मेरी नींद मंजू म क जगाने से hi खुली. मैंने ऑंखें खोली तो वो प्यार से मेरा सर सेहला रही थी.
मंजू म : उठ जाओ देखो रत होने वाली है. रत को भी तो सोना है न. और फिर खाना भी खाना है. चलो उठ जाओ.
अमित : क्या टाइम हो गया है ?
मंजू म : क्यों ? कहीं जाना है क्या ?
अमित : वो बात नहीं मतलब मैं काफी देर से सो रहा हूँ.
मंजू म : ाचा वो सब छोडो पहले बताओ तुम्हारा फ़ोन कहाँ है?
अमित : वो यहीं होगा ये हाँ ये रहा. पर आप क्यों पूछ रही हैं?
मंजू म : इस लिए क सब परेशां हो रहे होंगे. कब से फ़ोन बंद है तुम्हारा? मोहित आया था तुम्हे ढूंढते हुए .
अमित : आपने क्या कहा उसे?
मंजू म : पहले तो मैं बताने वाली थी फिर सोचा क शायद वहीँ से तुम इतना परेशां हो कर आये तो फिर से तुम्हे वापिस नहीं जाना चाहिए तो मैंने कह दिया क तुम यहाँ बाइक कड़ी कर क अपना मोबाइल ठीक करने गए हो. अब उसे फ़ोन कर क कुछ कह दो वर्ण वो फिर से तुम्हे ढूंढने आ जायेगा. तुम बात करो तब तक मैं कॉफ़ी लती हूँ.
अमित : हम्म्म
मैंने अपना मोबाइल ों किया तो ढेरों मेस्सगेस आने लगे मॉस्कल्स क. मैंने पहले मोहित को hi फ़ोन किया.
मोहित : कहाँ है तू ? मैं दोपहर से तुझे ढूंढ ढूंढ क थक गया हूँ. यहाँ सब परेशां हो रहे हैं. है कहाँ तू.
अमित : अरे यार मैं वो हाँ वो मोबाइल ख़राब हो गया था तो उसे ठीक करवाने आया था तो यहाँ कुछ पुराने दोस्त मिल गए उन्ही क साथ चला आया.
मोहित : काम से काम एक फ़ोन तो कर सकता था. तुझे पता है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा. माँ और दीदी का रो रो कर बुरा हल है . आखिर हुआ क्या है तू ऐसे अचानक बिना बताये गया क्यों?
अमित : अरे कुछ नहीं यार वो फ़ोन की वजह से मैं जल्दी से निकल गया था और फिर टाइम hi नहीं मिला अभी फ़ोन ठीक हुआ है तो फ़ोन कर दिया. ाचा अब मैं जा रहा हूँ जब वापिस आऊंगा तो फिर मिलूंगा . मेरी चिंता मत करना. और आंटी से दीदी से कह देना क उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं.
मोहित : पर तू जा कहाँ ....
मैंने ज्यादा बात नहीं की और फ़ोन काट दिया . मोहित को क्या समझाता क हुआ क्या है बस इसी लिए मैंने फ़ोन काट दिया. फिर मैंने राधा को फ़ोन किया . राधा में पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया .
राधा : रट हुए ) कहाँ हो तुम ? अभी क अभी घर आओ . तुम्हे ज़रा भी परवाह है किसी की? कहाँ हो कल से ? तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था? क्या हुआ है तुम्हे? जल्दी से घर आओ.
अमित : अरे अरे आराम आराम से तुम पहले रोना बंद करो
‘ कहाँ हो तुम ? जल्दी से घर आओ तुमने सुना न , घर आओ जल्दी से . वर्ण मैं कभी तुमसे बात नहीं करुँगी. ‘ ये दिव्या मौसी की आवाज़ थी जो गुस्से से मुझे घर आने को कह रही थी. मैं उनकी आवाज़ से समझ गया था क वो भी चिंता में होंगी और इसी लिए ऐसे बात कर रही हैं.
अमित : पर मौसी मैं ...
दिव्या मौसी: तुमने सुना नहीं ? मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना. अभी क अभी यहाँ आओ .
अमित : पर मौसी मैं अभी कैसे आ सकता हूँ ?
दिव्या मौसी: क्यों? क्यों नहीं आ सकते ? हो कहाँ तुम ?
अमित : मैं शहर से बहुत दूर हूँ . अपने एक दोस्त क साथ . रत भी हो गयी है तो अकेले इतनी रत को इतनी दूर से कैसे आऊं. आप खुद hi तो मन करती हैं न रत को सफर करने से.
दिव्या मौसी: पर तुम हो कहाँ ?
अमित : वो मैं आपके एक दोस्त के साथ हूँ .
दिव्या मौसी: कौन सा दोस्त है जिसके साथ घूम रहे हो? और तुमने फ़ोन क्यों बंद कर रखा था.? बात क्या है ? तुम्हे पता भी है यहाँ क्या हल हो रहा था हमारा?
राधा : ( दिव्या से फ़ोन छींटे हुए ) मुझे कुछ नहीं पता तुम अभी क अभी यहाँ आओ. खुद को समझते क्या हो तुम ? एक फ़ोन नहीं कर सकते थे ? मुझे तुम्हे देखना है तुम जल्दी से आ जाओ.
दिव्या मौसी: राधा मैं बात कर रही हूँ न. इतनी रत को कैसे आएगा वो अकेला? तुम रुको. हाँ अमित ठीक है तुम रत वहीँ रुक जाओ पर सुबह तुम यहाँ होने चाहिए मेरे सामने. समझ गए?
अमित : जी मौसी कल सुबह मैं पहुँच जाऊंगा.
दिव्या मौसी: अपना ध्यान रखना और ऐसे से आ जाना. मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी हैं और घर भी फ़ोन कर देना.
अमित : जी ाचा मौसी.
उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया पर दिव्या मौसी की बात से पता चल गया क वो गुस्से में हैं और कल मुझे उनके गुस्से का सामना करना पड़ेगा. साथ hi मुझे राधा को लेकर भी खुद पर अफ़सोस हो रहा था क वो मेरी कितनी परवाह करती है और मैंने उसे बताया तक नहीं. बताता भी क्या अगर उसे मेरी सचाई पता चले तो शायद वो कभी मुझे देखना भी पसंद न करे. खैर उसके बाद मैंने माँ से बात की . इस बीच आंटी का फ़ोन आने लगा पर मैंने फ़ोन नहीं उठाया. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आ गयी.
रीमा : टेंशन में ) कहाँ थे तुम ? कल से तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था ? तुम्हे किसी की परवाह है की नहीं ?
अमित : अरे रुको रुको मेरी बात तो सुनो.
रीमा : क्या सुनु सब सुन लिया है मैंने . मैं वहीँ थी राधा क पास. और अत भी है क्या हल बना रखा था राधा ने अपना. और मौसी भी कितना दुखी थी .
अमित : पर तुम वहां कैसे ?
रीमा : क्यों ? मैं वहां नहीं हो सकती क्या ? मेरी बेस्ट फ्रेंड है वो और मैं उसकी साइड hi लुंगी. जो हरकत तुमने की है न उसके लिए तुम्हे सजा मिलने चाहिए.
अमित : ाचा तो तुम मुझे सजा देना चाहती हो ? तो ठीक है देदो सजा पर जानना नहीं चाहोगी क मैं कहाँ था और फ़ोन क्यों बंद था ?
रीमा : तुम मिलो तो सही फिर बताती हूँ तुम्हे . तुम्हे तो कोई फरक पड़ता नहीं न चाहे कोई तड़प तड़प कर मर जाये.
अमित : सही कहा मुझे फरक नहीं पड़ता क्यूंकि मैं इंसान हूँ hi नहीं मैं तो जानवर हूँ बेशरम बेगैरत हूँ
रीमा : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? तू कहाँ हो ? हुआ क्या है ?
अमित : कुछ नहीं , कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . अभी तुम घर जाओ और आराम करो. मैं जहाँ भी हूँ बिलकुल ठीक हूँ.
रीमा : प्लीज मुझे बताओ मेरा दिल घबरा रहा है.
अमित : मैंने कहा न क मैं बिलकुल ठीक हूँ. तुम टेंशन न लो. कल मिलूंगा तो सब बताऊंगा . ाचा अब मैं रखता हूँ. Bye
रीमा : लव यू
अमित : 2
रीमा की कॉल मैंने जल्दी से कटी क्यूंकि निधि दीदी का फ़ोन आ रहा था .
अमित : hello दीदी
निधि दीदी: तुम वापिस आ गए और बताया तक नहीं.
अमित : वो दीदी मैं थक गया था तो सो रहा था अभी उठा हूँ और मेरा फ़ोन बी बंद था.
निधि दीदी : तुम हो कहाँ मुझे तुमसे मिलना है अभी.
अमित : पर अभी तो मैं यहाँ नहीं हूँ दीदी. मैं अपने एक दोस्त से मिलने आया था तो कल वापिस आऊंगा.
निधि दीदी : ाचा ठीक है कल जब आओ तो पहले मुझे फ़ोन करना एक सरप्राइज देना है तुम्हे .
अमित : ज़रूर दीदी मैं आपको फ़ोन ज़रूर करूँगा.
निधि दीदी : मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.
अमित : ाचा दीदी मैं रखता हूँ . Bye
निधि दीदी : bye
मैंने दीदी से बात करते hi फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया क्यूंकि आंटी और करिश्मा दीदी की कॉल्स आ रही थी और मैं उनसे बात नहीं करना चाहता था. मैंने जैसे hi फ़ोन बंद किया तो सामने मंजू म कड़ी मुझे hi देख रही थी.
अमित : ऐसे क्या देख रही हैं आप?
मंजू म : तुम्हे hi देख रही हूँ. पता चल गया न क अपने कैसे परेशां होते हैं जब बात न हो तो. और तुम वहां अकेले पार्क में बैठे थे फ़ोन बंद कर क. वैसे कब से बैठे वहां? वो तो ाचा हुआ कॉलेज से आते वक़्त मेरी नज़र तुम्हारी बाइक पर पद गयी . वर्ण तुम तो वहीँ बैठे रहते . कोई कुछ भी कहे या कुछ भी गलत करे इसका मतलब ये तो नहीं उसकी सजा हम अपनी को दें . मुझ नहीं पता क तुमने किस किस से अभी बात की पर इतना तो समझ सकती हूँ क वो सब परेशां हो रहे होंगे जो तुम इस तरह झूठ बोल कर उन्हें सफाई दे रहे थे. तुम इतने कमज़ोर तो नहीं थे क इतनी जल्दी टूट जाओ. फिर आज क्यों ऐसे थके हारे बैठे थे वहां?
अमित : कुछ नहीं मम बस कल किसी ने मुझे मेरा आइना दिखा दिया क मैं कितना गलत इंसान हूँ. मुझे रिश्तों की कदर नहीं मैं सिर्फ हवस का कीड़ा ......
मंजू म : मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) शहहहहह.... एक लफ्ज़ भी और मत कहना. किसी एक कुछ कह देने से तुम्हारी सचाई नहीं बदल जाएगी. दूसरों की इज़्ज़त बचने वाला हवस का भूखा हो hi नहीं सकता और ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है. अब उठ कर हाथ मुँह धोलो तुम्हारे लिए मैंने कपडे निकल कर रख दिए हैं.
मनु म ने मेरे माथे को चूमा और मुझे फ्रेश होने को कह कर खुद किचन में चली गयी. मैं कुछ देर उनके बारे में hi सोचता रहा. वो कितना प्यार करती थी मुझसे और मैं उन्हें बदले में उतना प्यार नहीं दे प् रहा था. मम क बारे में सोचता हुआ मैं उठा और फ्रेश हो कर कपडे बदल लिए. कुछ देर में hi मन ने खाना लगा दिया . मम कब दोनों क लिए खाना परोस रही थी तब भी मैं उन्हें hi देख रहा था.
मंजू म : ऐसे क्या देख रहे हो ?
अमित : देख रहा हूँ क एक hi रूप में मुझे कितने सरे रिश्ते आप से मिले हैं.
मंजू म : मतलब ?
अमित : मतलब आप मेरी टीचर भी हैं मुझे दोस्त की तरह समझती समझती भी हैं. बहिन की तरह राखी बंधी. प्रेमिका की तरह प्यार किया बीवी की तरह मेरी सेवा की और माँ की तरह मुझे संभाला. आप ने मेरे लिए कितना कुछ किया , मुझे कितना प्यार दिया और बदले में मैं आपको कुछ भी नहीं देता.
मंजू म : कौन कहता है तुम मुझे कुछ नहीं देते? तुमने मुझे जीना सिखाया मेरी ज़िन्दगी को एक मकसद दिया ताकि मैं जी सकूँ. वर्ण पहले तो मुझे ऐसे लगता था क जैसे मैं उम्र कैद काट रही हूँ. तुमने मुझे वो हर ख़ुशी दी जो मुझसे दुनिया ने चीन ली थी. मुझे फिर से हसना सिखाया. तुम्हारी वजह से मुझे वो रिश्ते वापिस मिले जो वक़्त क साथ कहीं खो गए थे. तुम में मैंने वो भाई देखा जो मेरा सब कुछ था . तुमने मुझे प्यार दिया जो मुझे कभी मिला hi नहीं था. मेरी ज़िन्दगी तुम्ही से है . मैं तो मर कर भी तुम्हारा एहसान नहीं उतर सकती.
अमित : शहहह .... प्यार कोई एहसान नहीं होता. और आप ने मुझे कहीं ज्यादा प्यार दिया है. मुझे लगता है क मैं आपको बदले में उतना प्यार नहीं दे पता
मंजू म : बदले में?? बदला तो कारोबार में होता है, प्यार में तो सिर्फ देना hi होता है. और तुमने मुझे हो दिया है वो मेरे जीने क लिए काफी है. बस अब एक और चीज़ मुझे तुमसे चाहिए पर वो तब जब तुम्हे ठीक लगे.
अमित : आप हुकम कीजिये मैं आपकी हर बात पूरी करूंगा.
मंजू म ( शरमाते हुए ) मुझे ,,, मुझे तुम्हारी निशानी चाहिए
मंजू म ने शरमाते हुए ये बात कही और सर शर्म से झुका लिया. उनकी बात का मतलब समझ कर मैं हैरान भी हुआ पर मुझे उनकी इस बात पर प्यार भी आया.
अमित : क्या सच में ये चाहती हैं ??
मंजू म : नज़रें झुकाये हुए ) हम्म्म्म
अमित : पर आप सबको क्या जवाब देंगी? और अभी तो मैं खुद पड़े कर रहा हूँ . अभी मैं आपकी ज़िम्मेदारी ....
मंजू म : मैंने कहा न , जब तुम्हे ठीक लगे तब. और मैंने सब सोच रखा है. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा .
अमित : पर आप ये सब क्यों चाहती हैं? मेरा मतलब है क अगर किसी को पता चला तो आपके लाइफ परेशानी होगी.
मंजू म : औरत की ज़िन्दगी का ये सबसे ज़रूरी रूप है. माँ बन कर hi औरत पूरी होती है वर्ण तब तक अधूरी रहती है. और मैं तुम्हारे प्यार की निशानी को जनम देना चाहती हूँ. ताकि मैं भी वो सुख प् सकूँ जो हर औरत क लिए ज़रूरी होता है. और मुझे किसी की परवाह नहीं मैं सब देख लूंगी अगर कुछ समय क लिए कहीं जाना भी पड़ा तो चली जाउंगी.
अमित : तो ये आपका फाइनल फैसला है ?
मंजू म : सर हिलाते हुए ) हम्म्म
अमित : तो फिर आज hi बना दूँ आपको माँ ??
मैंने जान बुझ कर मंजू म को छेड़ते हुए कहा. तो वो हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी.
मंजू म : हाथ मरते हुए ) गंदे ,, मैंने ये कब कहा ? जब तुम एक बाप होने की ज़िम्मेदारी निभाने क काबिल हो जाओ तब बना देना अभी तो खुद को संभल नहीं पते. यद् है न क्या हालत बना राखी थी अपनी आज . तब ख्याल नहीं आया था किसी का?
अमित : सॉरी गलती हो गयी . आगे से ऐसा नहीं होगा.
मंजू म : होना भी नहीं चाहिए . मुझे हास्य खेलता अमित hi ाचा लगता है. ये तोंदू लड़का मुझे नहीं चाहिए.
अमित : ाचा तो अब मेरे मज़े ले रही हैं आप ? अगर मैंने कुछ किया न तो फिर आप hi रोटी फिरेंगी .
मंजू म : ाचा क्या कर लोगे ? बड़े आये मुझे रुलाने वाले. चलो चुपचाप खाना खाओ पहले
अमित : ठीक है पहले खाना खा लो आप फिर मैं आप को खता हूँ.
मेरी इस बात पर मंजू म ने ऑंखें बड़ी कर क मुझे देखा और फिर शर्मा गयी. मंजू म को मैंने अपने हाथों से खाना खिलाया और वो भी मुझे अपने हाथों से खाना खिलने लगी. खाना खाने क बाद मंजू म किचन में चली गयी. मैंने सोच लिया क आज मंजू म को वो प्यार दूंगा जो मैं कब से उन्हें दे नहीं प् रहा था. आज साडी रत अपनी थी. वैसे भी अब मेरा मन हल्का हो चूका था और मंजू म की वजह से hi ये हुआ था. मंजू म किचन में थी और बैडरूम में आ गया.
रमा अपने कमरे में बार बार अमित का फ़ोन तरय कर रही थी पर उसने फ़ोन नहीं उठाया और फिर उसका फ़ोन बंद आने लगा. रमा को ये तो तसल्ली थी क अमित की खबर मिल गयी और वो ठीक है पर उसका दिल अंदर से टूट भी गया था क अब अमित शायद उससे दूर हो गया है ऊपर से करिश्मा की नज़रों में भी अब वो गिर चुकी थी. अपने कमरे में बैठी वो रोये जा रही थी. उसने खाना भी नहीं खाया था और करिश्मा का भी यही हल था. एक तरफ तो पहले वो अमित से बेतहाशा गुस्सा थी और अपनी माँ पर भी पर सचाई जान लेने क बाद उसने अपनी माँ को समझा और अमित भी अब उसकी नज़र में गलत नहीं था. क्यूंकि उसने कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं किया था. पर उसे खुद पर अफ़सोस ज़रूर हो रहा था क उसने अमित को जो कुछ अपशब्द कहे हैं उसका कितना असर अमित पर हुआ है. रमा ने जिस तरह अमित क कुछ होने पर खुद को ख़तम करने की बात कही थी उससे भी उसे अंदाज़ा हो गया था क रमा क दिल में अमित की क्या जगह है और ये सिर्फ हवस नहीं है. राघव काम क सिलसिले में शहर से बहार था इस वजह से तीनो अपने अपने कमरे में अकेले बैठे थे. कोई भी खाना खाने नहीं आया. जहाँ दोनों माँ बेटी अमित को लेकर परेशां थी वहीँ मोहित भी चिंता में डूबा था. उसे किसी ने कुछ बताया नहीं था और इसी लिए वो अपनी सोच क घोड़े चरों तरफ दौड़ा रहा था. अमित का इस तरह चले जाना और दोनों माँ बेटी का इस तरह रोना धोना , करिश्मा का इस तरह अचानक से ससुराल जा कर वापिस लौट आना. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क आखिर हुआ क्या है. ऊपर से राजीव ने भी उसका फ़ोन नहीं उठाया था. मोहित ने अमित से सचाई जानने का सोच कर कुछ देर मीनल से बात की और सो गया. जब घर में सन्नाटा पसरा था तब करिश्मा अपने कमरे से निकल कर अपनी माँ क पास जाने लगी पर दरवाज़ा बंद था. उसने सोचा क उसे अपनी माँ से बात करनी चाहिए कहीं उसकी माँ डिप्रेशन में न चली जाये.
थक थक थक
करिश्मा ने 2-3 बार दरवाज़ा खटखटाया पर रमा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.
करिश्मा : माँ प्लीज दरवाज़ा खोलिये , मुझे आपसे बात करनी है. प्लीज माँ एक बार दरवाज़ा खोलिये. मैं जानती हूँ आप जग रही हैं. सिर्फ एक बार दरवाज़ा खोल दीजिये. मेरी बात सुन लीजिये माँ.
रमा : ?????
करिश्मा : प्लीज माँ सिर्फ एक बार मेरी बात सुन लीजिये. प्लीज सिर्फ एक बार ,, आपको अमित की कसम माँ प्लीज एक बार मेरी बात सुन लीजिये.
तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और करिश्मा अंदर आ गयी. रमा उसकी तरफ पीठ कर क कड़ी थी. करिश्मा ने पहले दरवाज़ा लॉक किया फिर अपनी माँ क सामने आयी . रमा का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ देख के करिश्मा उससे लिपट गयी.
करिश्मा : रट हुए ) ी ऍम सॉरी माँ, मुझे माफ़ कर दीजिये. मैंने बिना सचाई जाने क्या कर दिया. ये सब मेरी गलती है. प्लीज आप मुझे माफ़ कर दीजिये. मैं अमित से भी माफ़ी मांगूंगी. प्लीज माँ
रमा : रट हुए ) तुम क्यों माफ़ी मांग रही हो? गलत तुमने नहीं गलत तो मैंने किया है. साडी गलती मेरी है. मैंने hi अमित को मजबूर किया क वो मेरे साथ वो सब करे. मुझे खुद को कण्ट्रोल करना चाहिए था. अपने बेटे क दोस्त क साथ hi मैंने .... और फिर तेरे ससुराल में अमित को ज़बरदस्ती भेज कर वो सब करने क लिए कहा. सरु गलती मेरी hi है. मुझे माफ़ कर दे बेटी मैंने बहुत बड़ा पाप किया है. तेरा घर बसने की जगह मैंने जब बर्बाद कर दिया.
करिश्मा : नहीं माँ ऐसा मत कहो , आपने कोई पाप नहीं किया. मैं जानती हूँ शरीर की भूख इंसान से बहुत कुछ गलत करवा देती है. इसमें कसूर पापा का भी है अगर वो आपका ध्यान रखते तो ऐसा कभी नहीं होता . आप ने हमेशा पापा को hi सब कुछ मन है मैं जानती हूँ . इसी लिए तो मैंने अमित को गलत समझा था और ये सोचा hi नहीं क वजह कुछ और भी हो सकती है. आप गलत नहीं हैं आपने अमित को जिस लिए भेजा था वो उसने कर भी दिया था माँ. वो दोनों माँ बेटी मुझसे अचे से पेश आने लगी थी पर जो सचाई फिर मेरे सामने आयी वो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकीय. मैंने राजीव का हर जुल्म सहा पर फिर भी उसे पति क रूप में hi मानती रही पर अब .. अब मुझे नफरत हो रही है इस बात से क मैं उस जैसे घटिया इंसान को इतनी इज़्ज़त देती रही . वो तो किसी की नफरत क भी लायक नहीं. कुत्ता ज़लील इंसान मैं एक पल भी उस जान क साथ नहीं रह सकती.
रमा : चौंकते हुए ) ये क्या कह रही हो तुम ? क्या हो गया ऐसे अचानक ? मुझे साडी बात बता .
करिश्मा : रहने दो माँ उन घटिया लोगों क बारे में मैं कोई बात नहीं करना चाहती.
रमा : पर मुझे बता तो सही क हुआ क्या है?
करिश्मा : वो घटिया इंसान अपनी hi सगी बहिन क साथ ,,,,,,, उफ्फ्फ मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही है. कैसे घटिया लोग हैं. और वो कमीनी भी कैसे अपने पति को छोड़ कर अपने hi सेज भाई क साथ मुँह कला कर रही है.
रमा : शॉकेड ) क्याआ ? ये सब .....
करिश्मा : हाँ माँ मैंने अपनी आँखों से देखा था दोनों को और फिर मैं खुद को रोक नहीं पायी. मैंने दोनों को hi मरना शुरू कर दिया कैसे बेशर्मी क साथ दोनों नंगे .....
रमा : ये सब कब हुआ ? अमित कहाँ था तब ?
करिश्मा: रत को मुझे सोता देख कर जब राजीव कमरे से गया तो मुझे लगा कहीं अमित उस हेमा या उसकी माँ क साथ न हो तो मैं दर गयी की अगर राजीव ने देख लिया तो क्या होगा. मैं जब अमित क कमरे में गयी तो वहां कोई नहीं था. फिर मुझे दूसरे कमरे में किसी क होने का एहसास हुआ. मैंने दरवाज़े अंदर देखा तो दोनों बहिन भाई बीएड पर.... बस फिर मुझे होश नहीं रहा. अमित उस वक़्त पता नहीं कहाँ था पर जब राजीव ने मुझ पर हाथ उठाया तो अमित अचानक वहां आ गया और राजीव को पटक दिया.
रमा : इसका मतलब वो नज़र रख रहा था.
करिश्मा : क्याआ??
रमा : हाँ वो हर चीज़ का सबूत उकठा कर रहा था ताकि तुम्हारे ससुराल वाले अगर कभी तुझे तंग करें तो हम उनसे अपनी बात मनवा सकें.
करिश्मा : वो मेरे लिए सब कर रहा था और मैंने उसे hi
रमा : उसे hi क्या ?
करिश्मा : रट हुए ) वो जब मुझे चुप करवाने मेरे पास आया तो मैंने उस पर हाथ उठा दिया और उसे पता नहीं क्या क्या कह दिया.
रमा : रो मत बेटी गलती हम दोनों से हुई है. उस बेचारे ने तो जो भी किया मेरे कहने पर किया और तुम्हारी भलाई क लिए किया. तुम्हे अपनी बहिन मंटा है वो . वो तुम्हे ज़रूर माफ़ कर देगा . उसका दिल बहुत बड़ा है. पर मैं तो अब उससे माफ़ी भी नहीं मांग सकती. वो पहले hi मन कर रहा था पर मैंने hi उसे तुम्हारा वास्ता दे कर भेजा था. उसके दिल को बहुत ठेस लगी है . मेरा फ़ोन तक नहीं उठाया उसने.
करिश्मा: रो मत माँ मैं उसे मनाऊंगी. देखती हूँ कैसे नहीं मंटा. पर उससे पहले मोहित को क्या बताना है ये सोच लो. वो सुबह ज़रूर पूछेगा.
रमा : वो मैं देख लुंगी बीटा पर तू बता क अब तू क्या चाहती है?
करिश्मा : मैं उस घर में नहीं रहना चाहती. पर पापा ...
रमा : ऐसा hi होगा तेरे पापा से मैं बात कर लुंगी. और बीटा हो सके तो मुझे ....( हाथ जोड़ते हुए)
करिश्मा: नहीं माँ प्लीज ऐसा मत करिये. मुझे उस बात पर अब कोई गुस्सा नहीं है और आप चाहो तो अमित क साथ
रमा : नहीं बीटा अब तो वो शायद मुझसे कभी मिलेगा भी नहीं . चल ये सब छोड़ आज तू मेरे साथ यहीं रुक जा.
करिश्मा ( मन में ) नहीं माँ ,, मैं जानती हूँ आपको अमित की ज़रूरत है. मैं उससे माफ़ी मांगूंगी उसे आपके पास वापिस लाऊंगी.
दोनों माँ बेटी एक देर रत तक बातें करती हुई सो गयी.
उधर राधा ने कई बार अमित का फ़ोन तरय किया पर वो स्विच ऑफ आ रहा था. राधा अमित से ठीक से बात भी नहीं कर पायी थी अपनी माँ की वजह से . वो बिस्टेर प् करवटें बदल रही थी और अमित पर गुस्सा भी हो रही थी. फिर उसे रीमा की बातें यद् आने लगी.
राधा : प्यार तो तब से करती हूँ जब मुझे प्यार का मतलब भी नहीं पता था पर वो बूढी समझे तो न. आने दो कल इसे बहुत तंग करता है न . कल अचे से खबर लुंगी इसकी.
‘ आआआ मैडम जी प्लीज माफ़ कर दीजिये . मैं और बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा मैडम अअअअअ’ पुलिस लॉकअप में कल से hi इन 3 लोगों को ज़बरदस्त टार्चर किया जा रहा था. पर अभी तक इन्होने वो नहीं बताया था जो ऋतू सिंह जानना चाहती थी. ऋतू सिंह ने भी ठान लिया था क वो सच उगलवा क रहेगी.
ऋतू सिंह : तो तुम लोग नहीं बताना चाहते. चलो कोई बात नहीं. अगर तुम लोगों की यही मर्ज़ी है तो ठीक. पांडेय जी इनको और मत मारिये फ़िज़ूल में हम अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं. आप इनको गाडी में बिठाओ अब इनको आज़ाद रिहा कर देते हैं.
ऋतू सिंह क मुँह से ये बात सुनते hi उन तीनो क दिल में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी. तीनो को जल्दी से कपडे पहना कर पुलिस वन में बिठाया गया और रत क अँधेरे में 4 पुलिस वाले इन तीनो को लेकर शहर क बहार इंसान रस्ते पर लेकर चल दिए. एक जगह पर गाड़ी रुकी और तीनो को गाड़ी से उतर कर उनके हाथ खोल दिए गए. पीछे से दुरी गाडी में ऋतू सिंह भी आ गयी.
ऋतू सिंह : भाई मन्ना पड़ेगा, तुम लोग हो बड़े वफादार जो इतनी मर खा कर भी अपना मुँह नहीं खोला. तुम लोगों की वफादारी से खुश हो कर मैं तुम लोगों को आज़ाद करती हूँ. अब तुम्हे कभी कोई दर्द नहीं होगा. जाओ भाग जाओ.
‘ नहीं मैडम कहीं नहीं जायेंगे . आप हमें वापिस लेकर चलो’ पहले वाले ने ये कहा जो समझ गया था क ऋतू सिंह क्या कह रही है.
‘ हह हमें वापिस लॉकअप में दाल दीजिये . आप हमारे साथ ऐसा नहीं कर सकती ‘ दूसरा वाला भी ऋतू को देखता हुआ बोलै.
ऋतू सिंह : अरे मैं तो तुम लोगों को आज़ाद कर रही हूँ. वैसे भी तुम लोग सुधरने वाले तो हो नहीं और न hi तुम लोग सच बोलोगे तो क्यों न हम ये झगड़ा hi ख़तम कर दें.
‘ आप ऐसा नहीं कर सकती ये ये गलत है. पुलिस ऐसे नहीं कर सकती किसी को’ तीसरे वाले ने जब देख क पुलिस वालों ने अपनी गन्स लोड कर की हैं तो वो डरने लग और उसकी टंगे कम्पनी लगी. ऋतू ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और सिर्फ मुस्कुरा दी.
ऋतू सिंह : पांडेय जो जल्दी करो मुझे वापिस भी जाना है.
पांडेय : जी मैडम , चलो बे भागो जल्दी.
तीनो में से कोई भी अपनी जगह से नहीं हिला तो पुलिस वाले ज़बरदस्ती खींच कर दो लोगों को गाड़ी से थोड़ा दूर ले गए और दोनों को गोली मार्डी. गोली की आवाज़ क साथ उन दोनों की चीखें भी सुनाई दी. ये मंज़र देख कर तीसरे वाला थार थार कम्पनी लगा और उसका पेशाब निकल गया. वो जल्दी से ऋतू क पाऊँ पद गया
‘ मुझे छोड़ दो मैडम मैं आपकी हर बात मानूंगा मैडम मुझे छोड़ दो’
ऋतू सिंह : तो बताओ मुझे सब कुछ सच सच
‘ मैडम मैंने ऐसा किया तो मेरे साथ मेरे घरवालों को भी मर दिया जायेगा’ प्लीज मैडम मुझे छोड़ दो’
ऋतू सिंह : तो फिर तुम भी अपने साथियों क पास जाओ. वैसे अगर तुम मुझे सच बताओ तो मैं तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कुछ नहीं होने दूंगी. इस बात की मैं गारंटी लेती हूँ. और तुम्हारा नाम भी नहीं आएगा.
‘ ठीक है मैडम मम मैं सब सच सच बता दूंगा. ‘
ऋतू सिंह : पांडेय जी इसके बयां नोट करो और उन दोनों को हॉस्पिटल पहुंचा दो. अगर बच गए तो उनकी किस्मत. वर्ण एनकाउंटर फाइल कर देना .