Adultery Manhoos se mahan tak - Page 19 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 145



घर पहुँचते hi माँ मुझे देख कर खुश हो गयी. और मुझे गले लगा लिया . बाबा घर पर hi थे . मुझे देख कर दीपिका ममी भी खुश हो गयी. मैं सब से मिला और कामिनी ममी को भी उनके रूम में जा कर मिला. थोड़ी देर में hi अजय मम और कमलेश मां भी आ गए . कुछ देर मैंने अपने बेटे क साथ भी खेला और फिर सब ने मिल कर खाना खाया . मैंने फ़ोन पर दिव्या मौसी और राधा से भी बात की और अपनी कुशलता बताई. रीमा शालू शिवानी से भी मेरी बात हुई. कल्पना ने भी कुछ मेस्सगेस भेजे थे नार्मल शायरी क पर मैंने उसके जवाब में सिर्फ एक जोके hi सेंड किया. उसके बाद मैं बीएड पर लेट कर माँ क बारे में सोचने लगा . सब का सोने का टाइम हो चूका था अब किसी भी वक़्त माँ आ सकती थी. मैं उनके साथ कैसे शुरुआत करूँ इसी बात को लेकर मैं सोच रहा था. माँ खुद तो शुरुआत करने नहीं वाली इस लिए करना तो मुझे hi था. तभी एक बात दिमाग में आयी क जब माँ सब कुछ जानते हुए भी कर hi रही है और यही वो चाहती है तो मैं अपने अंदर से दर को छोड़ कर खुद hi पहल कर दूँ. वो क्या कहेंगी. बस मैंने यही सोच कर अपने कमरे की लाइट पूरी बंद को और कपडे उतर कर बीएड पर लेट कर माँ का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर में hi कुछ आहत हुई तो मैं समझ गया क माँ आ गयी है. जैसे hi वो दरवाज़ा खोलने लगी मैं उठ कर पहले hi दरवाज़े क पास पहुँच गया.

जैसे hi माँ दरवाज़ा खोल कर अंदर आयी तो अँधेरे में उसे मेरे करीब होने का पता न चला. पर उसके कुछ बोलने से पहले hi मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. माँ मेरे इस तरह अचानक उनको बाँहों में भर लेने से सकते में आ गयी और मुझे खुद से दूर हटाने की कोशिश करने लगी पर मैं नहीं रुका और उनके होंठ चूसने लगा. थोड़ी hi देर में माँ का विरोध काम हो गया और उनके हाथ खुद hi मेरे सर पर आ गए . अब माँ भी किसिंग में रिस्पांस करने लगी . माँ को साथ देते हुए देख कर मैंने अपना एक हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. माँ मचलने लगी और उनकी पकड़ मेरे सर पर और भी मजबूत हो गयी. वो मस्ती में मेरे बल खींचने लगी और मेरे होंठ अपने डेंटन में दबाने लगी. मैंने अपना दूसरा हाथ अब उनके मस्त बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिया और उन्हें भी मसलने लगा. माँ की गर्मी और बाद गयी और वो मेरे साथ चिपकने लगी. मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और किश करता हुआ उनकी गर्दन पर आ गया. माँ क होंठ आज़ाद होते hi अब वो सिसकियाँ लेने लगी.

गौरी ममी: उम्मम्मम कक्कक्कक्स उम्मम्मम उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स

माँ कुछ बोल नहीं रही थी पर आज मैंने सोच लिया था क उन्हें बुलवा क hi रहूँगा. मैंने उनकी सदी का पल्लू सीने से हतय और सदी खोलने लगा. माँ ने भी मेरा साथ दिया और सदी उनके बदन से उतर कर निचे गिर गयी. मैंने माँ क ब्लाउज को भी खोल दिया और अगले hi पल वो भी ज़मीन पर था. मैंने हाथ नीचे ले जा कर उनके पेटीकोट का नाडा खोल दिया और वो भी उनके पाऊँ में जा गिरा. अब माँ भी मेरी तरह नंगी थी. ब्रा और पेंटी वो पहले hi उतर कर आयी थी. मैं उन्हें नंगी कर क जैसे hi उनके साथ लगा तो उन्हें भी मेरे निर्वस्त्र होने का एहसास हुआ स्पेशलय जब मेरा लैंड उनके योनि भाग क पास टकराया. माँ क मुँह से फिर से सिसकी निकल गयी.

गौरी ममी : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स उम्मम्मम्म

मैंने माँ को अपने सीने से लगा लिया और उनको अपनी बाँहों की गिरफ्त में लेने क बाद उनकी पीठ पर अपने हाथ चलता हुआ उनकी गांड तक पहुँच गया. दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में ले कर मैं मसल मसल कर दबाने लगा. जब मैं उनके चूतड़ों को दबाता तो वो उनकी छूट मेरे लैंड क साथ और भी ज्यादा चिपक जाती. माँ सिर्फ सिसकियाँ ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी गांड में दाल दी तो वो उछाल पड़ी.

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मैंने फिर से उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और वो भी मुझे किश करने लगी. मैंने उनका भी एक हाथ अपने हाथ में पकड़ा और नीचे ले जा कर अपना लैंड उनके हाथ में थमा दिया. पहले तो उन्होंने हाथ पीछे खिंच लिया पर फिर से मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपना लैंड थमा दिया. और उन्हें हाथ खींचने नहीं दिया . धीरे धीरे माँ भी रंग में आ गयी अपनी मुठी बंद कर क उसने मेरा लैंड अपनी गिरफ्त में ले लिया. अब माँ धीरे धीरे मेरा लैंड मसलने लगी और किसिंग भी ज़ोरदार करने लगी . ये सब अँधेरे में हो रहा था इस लिए माँ साथ दे रही थी पर अब इस अटक से पर्दा उठाना था तो मैंने हाथ बड़ा कर रूम की लाइट ों कर दी. एक डैम कमरे में लाइट हो जाने से माँ को झटका लगा और उन्होंने तुरंत मुझे छोड़ दिया और अपने हाथों से अपने उरोज और छूट को ढकती हुई नीचे बैठ गयी . माँ को इस सब की उम्मीद नहीं थी. वो सर झुका कर बैठ गयी पर अब मुझे उनकी इस शर्म को ख़तम करना था.

अमित : रुक क्यों गयी माँ ? कब तक ऐसे अँधेरे में चुपचाप करती रहोगी ? जब सब करना hi है तो हक़ से करो. वैसे भी किसी और से ज्यादा आपका हक़ है मुझ पर. मुझे ाचा नहीं लगता ऐसे आप छुप कर किसी अपराधी की तरह मुझसे प्यार करने आती हैं. अगर आप सच में hi मुझसे ये प्यार चाहती हैं तो हल से करिये. मैं नहीं चाहता क आप अपनी इच्छाओं को दबाकर जियें. अब जो भी होगा वो खुली आँखों से रौशनी में होगा.

मेरी बात सुनने क बाद भी माँ कुछ बोली नहीं पर उन्होंने नज़र उठा कर मुझे देखा . वो अभी भी खुद को रोक रही थी . मैंने उनकी दुविधा को समझा और हाथ बड़ा कर उन्हें खड़ा कर दिया . वो अपने हाथों से अपना खज़ाना छुपा रही थी. पर मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा.

अमित : अगर आप मुझे खुद को सौंप hi चुकी हैं तो फिर इस शर्म की जंजीर को भी तोड़ दीजिये. मैं आपकी हर ीचा पूरी करने की कोशिश करूँगा.

इतना कह कर मैंने माँ क कंकपते होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा. माँ बट सी बानी रही . मैंने उनके दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उँगलियों में उंगलियां फसते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. माँ अभी मेरा साथ नहीं दे रही थी पर मैं उनके होंठ चूसने लगा. साथ hi मैंने अपने लैंड को उनके योनि भाग पर रगड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में hi माँ मेरे होंठ चूसने लगी. मैंने उन्हें मुँह में अपनी जीभ दाल दी और उनकी जीभ क साथ अपनी जीभ मिलाने लगा. माँ का एक पाऊँ उठ गया और वो उसे मेरी तंग से रगड़ने लगी. माँ फिर से गरम होने लगी थी पर उन्होंने ऑंखें बंद कर ली थी. मैंने माँ क हाथ छोड़ कर उनके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया. माँ अब मेरी गर्दन सर और पीठ पर मस्ती में अपने हाथ चलने लगी साथ hi वो अपनी कमर भी खुद हिलने लगी . मैंने माँ का हाथ पकड़ा और उसे अपने लैंड पर रख दिया पर माँ ने हाथ हटा लिया.

अमित : पकड़ो न माँ ये तुम्हारे लिए hi तो है. अब शर्माना छोड़ भी दो.

माँ ने ऑंखें बंद hi राखी और बोली कुछ नहीं. मैंने माँ का हाथ अपने लैंड पर दबाये रखा तो धीरे धीरे उनकी पकड़ हाथ पर मजबूत हो गयी . मुझे ख़ुशी हुई क वो अब साथ देने लगी हैं पर वो ऑंखें नहीं खोल रही थी और न अभी तक कुछ बोली थी. मैंने झुक कर उनके रसीले आम की तरह लटक रहे एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया. हालाँकि वो इतना बड़ा था क मुँह में तो आ नहीं सकता था पर जितना हो सका मैंने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया. दूसरे वाले को मैंने हाथ में ले क मसलना शुरू कर दिया. अपने एक हाथ को मैंने माँ की योनि पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. इससे माँ की गर्मी और बाद गयी हर उन्होंने भी मेरे लैंड को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी जिन्हे वो मुँह पर हाथ रख कर दबाने की कोशिश कर रही थी.

गौरी ममी : कक्कक्कक्स उनममममम ओह्ह्ह्ह उम्मम्मम आह्हः उनमममममम

एक आम को निचोड़ने क बाद मैंने दूसरे को चूसना शुरू कर दिया . माँ क हलके भूरे नीपल अब अकड़ चुके थे मैंने उनके निप्पल खींचने शुरू कर दिए. माँ की उत्तेजना और बढ़ती गयी. उनकी छूट पानी पानी हो रही थी और वो ज़ोर ज़ोर मेरा लैंड रगड़ रही थी. माँ सिसकियाँ लिए जा रही थी पर बोल नहीं रही थी . मैं दोनों स्तनों क साथ खेलने क बाद या के मांसल जिसम को चूमता हुआ नीचे जाने लगा. छूट क पास कुछ बाल थे मैंने उनके बालों को सहलाया और बालो क पीछे छिपी रास बहती छूट सामने आ गयी . आज पहली बार मैं रौशनी में उनकी छूट देख रहा था. बड़ी hi प्यारी थी , होंठ थोड़े से खुले और मोठे मोठे थे. मैंने छूट की फांकों को उँगलियों से खोलना चाहा तो माँ ने आगे हाथ रख दिया. मैंने उनके हाथ को चूमा और साइड हटा दिया. छूट की डंके खुलते hi अंदर का गुलाबी हिस्सा नज़र आने लगा.

अमित : आपकी छूट बहुत प्यारी है माँ पर ये बल मुझे यहाँ अचे नहीं लग रहे. इतना कह कर मैंने अपने होंठ छूट क होंठों से भिड़ा दिए तो माँ का जिसम लरज गया .

गौरी ममी : आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्कक्स उफ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम

मैंने माँ की एक तंग उठा कर अपने कंधे पर लटका ली. उन्होंने सहारा लेने क लिए अपने हाथ मेरे सर पे रख लिए . अब वो एक तंग पर कड़ी थी और दूसरी मेरे कंधे पर लटकाये वो मेरे सर का सहारा लिए अपनी छूट चूसै का मज़ा ले रही थी. मैंने अपनी एक उंगली उनकी छूट में घुसा कर अंदर बहार करनी शुरू कर दी और साथ hi अपनी जीभ को भी छूट में घुसा दिया.

गौरी ममी : आआआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्मम

माँ मज़े की वादियों में खोटी जा रही थी. उनकी पकड़ मेरे सर पर और मजबूत हो गयी और वो मेरे मुँह को अपनी छूट पर दबाने लगी .

गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म आह्हः कक्कक्स aaaaiaiiiiiiiiii

माँ और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झटके लेती पानी छोड़ने लगी. मैंने भी उनका पानी वास्ते नहीं होने दिया और सारा पि गया. पानी निकलते hi माँ ढीली पड़ने लगी उनसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था पर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और उनकी छूट को चाट ता हुआ फिर से गरम करने लगा. माँ अब मेरे कंधे से अपनी तंग नीचे उतरना छह रही थी पर मैं उन्हें ऐसा करने नहीं दे रहा था . मैं उनकी छूट को अछि तरह चूसने क बाद अब अपने कंधे पर राखी उनकी जांघ को चूमने लगा. कितना मुलायम बदन था माँ का. मगर माँ ने ज्यादा देर मुझे ऐसा करने न दिया और ज़बरदस्ती अपनी तंग मेरे कंधे से निचे कर दी. मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी ऑंखें खुली हुई थी और वो मुझे hi देख रही थी. जैसे hi हमारी नज़रें मिली तो उन्होंने चेहरा घुमा लिया. माँ ने फिर से लाइट बंद करने क लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया .

अमित : नहीं माँ आज नहीं , आज कोई पर्दा नहीं . मैं आपके इस खूबसूरत बदन को जी भर क देखना चाहता हूँ .

मेरी इस बात से माँ ने एक सिसकी भरी और ऑंखें बंद कर ली. मैंने उनको गॉड में उठा लिया और बीएड पर ले गया . बीएड पर लिटाने क बाद मैं पीछे हैट कर उनके पूरे बदन का अवलोकन करने लगा. सर से पाऊँ तक माँ का जिस्म नायब था . गोरा दूध सा रंग और मांसल शरीर कहीं से भी एक्स्ट्रा फैट नहीं थी. बड़े बड़े बूब्स हलके भूरे निप्पल्स क साथ. पेट थोड़ा सा मांसल था पर इतना नहीं कर बहार लटके मगर इतना ज़रूर था क उनकी नाभि गहरी नज़र आ रही थी. पेट क नीचे काले बाल जो उनके गोर बदन पर अचे भी लग रहे थे पर मुझे वो जगह चिकनी पसंद थी. उसके नीचे का हिस्सा माँ की जाँघों में छिप गया था क्यूंकि उन्होंने अपनी दोनों टंगे कास क आपस में मिलायी हुई थी. यहाँ से आगे उनकी गोरी चिकनी जांघें और नीचे बहार को झांक रहे उनके चूतड़ जांघों से पाऊँ तक गोरी टंगे जहाँ बालों का रेशा तक न था और पाऊँ क तखनो क पास उनकी वो पायल जो हमेशा चलते वक़्त मधुर झंकार बजती थी . और फिर वो सुन्दर पाऊँ लाल नेल पोलिश क साथ अपनी खूबसूरती को और भी बढ़ाते हुए. इन पाऊँ को मैं हमेशा छूटा रहा हूँ और अब इन्ही पाऊँ को उठाने वाली जगह पहुँच चूका था.

अमित : आप सच में बहुत खूबसूरत हैं माँ , आपका ये बदन वाकई में बेमिसाल है.

माँ ने जब महसूस किया क मैं उन्हें ताड़ रहा हूँ तो उनके हाथ फिर से उनके स्तनों पर आ गए और टंगे समेत कर पेट से लगा ली और करवट लेकर मेरी तरफ पीठ कर ली. ऐसा करने से उनकी गोरी सफ़ेद पीठ मेरे सामने आ गयी और नीचे उनके बड़े बड़े चूतड़ जो करवट क बल होने से और भी बड़े लग रहे थे. मुझसे और रुका नहीं गया और मैंने सीधा उनके चूतड़ों में मुँह फसा दिया. मैं उनके दोनों चूतड़ों को मसलता हुआ चुम रहा था. माँ एक हाथ से मेरे सर को दूर हटने की कोशिश कर रही थी पर मैंने कहा अब रुकने वाला था . मैंने माँ की गांड को चाटने क साथ काटना भी शुरू कर दिया और माँ सिसकने लगी. मैंने माँ को पलटा दिया और अब पेट क बल लेती थी. मैं उनके चूतड़ फैला फैला कर चूमने चाटने लगा. उनकी टांगों क ऊपर बैठ कर माँ उनके उनकी गांड क मज़े ले रहा था और वो बिस्टेर में मुँह दबाये सिसक रही थी. मैंने उनके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर फैलाया तो उनकी गांड का छेड़ मेरे सामने आ गया. हलके भूरे रंग का छोटा सा छेड़ बता रहा था क यहाँ आज तक किसी ने दस्तक नहीं दी है. मैंने तुरंत उस दरवाज़े पर झुकते हुए अपनी जीभ वह लगा कर दस्तक दे दी.

गौरी ममी : आआआहहहहहह cccccccccccc उम्मम्मम्मम

माँ ने फिर से हाथ पीछे लेकर मुझे हटाने की कोशिश की पर मैं नहीं रुका और जीभ को अंदर डालने की कोशिश करने लगा. माँ लगातार सिसक रही थी . फिर मैंने अपनी एक उंगली गीली कर क उनकी गांड में घुसा दी. गांड तो पहले से hi टाइट थी ऊपर से माँ ने उसे और टाइट कर लिया मुझे अपनी उंगली उनकी गांड में फस्ती हुई महसूस हुई.

गौरी ममी : कक्कक्क्स नाहीईईई उम्मम्मम

ये पहला शब्द था जो उनके मुँह से निकला. पर मैं कहाँ रुकने वाला था.

अमित : क्यों नहीं माँ ? आप क जिस्म का एक एक हिस्सा सिर्फ प्यार करने क लिए बना है. मैं आपके हर हिस्से पर अपने प्यार से मोहर लगाऊंगा.

इतना कह कर मैंने फिर से उनके चूतड़ चाट ता उनकी गांड में उंगली अंदर बहार करने लगा. उंगली पहले फास फास कर जा रही थी पर मैं अपना थूक इस्तेमाल कर क उनकी गांड चिकनी करता रहा और फिर मेरी उंगली आसानी से अंदर बहार होने लगी. उसके बाद मैं उनकी जाँघों को चूमता हुआ उनके पाऊँ की तरफ बढ़ने लगा. माँ लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी. माँ क पाऊँ क पास पहुँच कर मैंने पाऊँ चुम लिए तो फिर से माँ ने तेज़ सिसकी ली.

उनकी पायल को भी चूमा मैंने और उनके दोनों पाऊँ जोड़ कर घुटनो से उनकी टंगे मोड़ते हुए ऊपर किये. मैंने दोनों पाऊँ क तलवे कहते जिससे माँ सिसकती जा रही थी.

अमित : इन दोनों पाऊँ में मेरी जन्नत पहले भी थी और आज भी है. मैं आपका एहसान तो चूका नहीं सकता पर आपको इतना प्यार ज़रूर दूंगा क आपके मन क कोना कोना भर जाये. पर मैं चाहता हूँ क आप एक प्रेमिका की तरह मेरा साथ दें. उसके बिना ये मिलान अधूरा रहेगा.

मैंने उनके पाऊँ की उँगलियों को मुँह में ले कर चूसा और फिर उन्हें पलट कर सीधा कर दिया. अब पाऊँ से चूमता हुआ मैं ऊपर जाने लगा और उनकी योनि पर पहुँच गया जो अभी नज़र नहीं आ रही थी. मैंने उनकी दोनों टाँगें फैला दी इस बार उन्होंने ज़ोर नहीं लगाया और आराम से टंगे फैला दी. मैं फिर से उनकी छूट पर झुका और छूट को चाटने लगा. माँ फिर से गरम हो चुकी थी और उनकी छूट पनिया गयी थी. छूट चाट ते हुए मैंने छूट में उंगली घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. माँ सिसकियाँ लेती हुई फिर से मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. पर इस बार मैं उनका पानी नहीं निकलना चाहता था. इस लिए छूट को छोड़ कर ऊपर बाद गया और उनके बूब्स पर आ गया . दोनों बूब्स को चूमते मसलते हुए मैंने अपना लैंड छूट पर रगड़ना शुरू कर दिया. माँ भी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी और खुद hi अपनी टंगे उठा कर मेरी कमर पर लपेट ली और कमर उठा कर लैंड को अनादर लेने की कोशिश करने लगी . पर मैं ऐसा नहीं करना चाहता था . माँ ने हाथ नीचे ले जा कर मेरा लैंड हाथ में लिया और खुद hi छूट पर से किया पर मैंने धक्का नहीं मारा. वो मेरी कमर को पाऊँ से कैंची बंधे नीचे को दबाने लगी पर मैंने फिर भी लैंड छूट में घुसने नहीं दिया. माँ मेरा सर ज़ोर ज़ोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी और उनकी बेताबी बता रही थी क वो अब लैंड को अंदर लेना छह रही हैं . पर अभी तक वो मुझसे बोली नहीं थी . और मैं अब उन्हें बुलवा कर hi रहने वाला था.

गौरी ममी : अब बस भी करो , दाल दो न अंदर

अमित : क्या दाल दूँ

गौरी ममी : तुम्हे क्या है मैं जो कह रही हूँ.

अमित : आप जब तक नहीं बताएंगी मैं कुछ नहीं करूँगा .

गौरी ममी : मुझे शर्म आती है और मत तड़पाओ मुझे.

अमित : यही शर्म तो निकालनी है माँ, अब और पर्दा मुझे बर्दाश्त नहीं , या तो आप खुल कर मेरा साथ दें या फिर ये सब यहीं बंद कर दें.

माँ कुछ देर खामोश रही.

अमित : तो आप नहीं बोलेंगी ? ठीक है फिर आप अपने कपडे पहन लें.

इतना कह कर मैं उनके ऊपर से उठने लगा तो उन्होंने मुझे अपनी गिरफ्त से निकलने नहीं दिया.

गौरी ममी : तू जो चाहता है वो मैं नहीं कर सकती बीटा. ये सब गलत है .

अमित : प्यार करना कभी गलत नहीं होता माँ. आपको मेरी ज़रूरत है और मैं भी आपको वही प्यार देना चाहता हूँ मगर बिना किसी शर्मिंदगी क. मुझे पता है आप मेरे और ममी क बारे में भी जानती हैं. जब वो खुल कर मुझसे प्यार कर सकती हैं तो आप क्यों नहीं? आपका तो मुझ पर सबसे ज्यादा हक़ है.

गौरी ममी : मैंने हमेशा तुम्हे अपना बीटा मन है इस लिए ये सब

अमित : मैं हमेशा आपका बीटा hi रहूँगा माँ. और आपको हर ख़ुशी देना मेरा फ़र्ज़ है. मैं आपके साथ ये सब करना नहीं चाहता था पर पहले ये सब तकदीर से हुआ और बाद में आपकी मर्ज़ी से . मगर अब ये हम दोनों क अपनी प्रेम से होना चाहिए . मैं चाहता हूँ आप खुल क वो सब करें हो आप क दिल में है. मैं वडा करता हूँ आपकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा.

जब माँ फिर से चुप रही तो मैंने उनकी बाँहों को खोल दिया और उनके पाऊँ को भी अपनी कमर से हटा कर उठने लगा तो माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

गौरी ममी : ऐसे छोड़ कर जायेगा? प्यार नहीं करेगा मुझे ?

मैंने माँ की तरफ देखा तो वो मेरी hi आँखों में देख रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली मगर इस बार उनहोंने न नज़र झुकाई और न मुँह फेरा.

अमित : मैं कैसे जा सकता हूँ ? आपकी एक आवाज़ पर आपके पास hi हूँ मैं . पर अब आपको खुल कर वो सब करना होगा जो आप करना चाहती हैं.

गौरी ममी : तो तूने फैसला कर लिया है तुझे बेशरम बना क छोड़ेगा?

अमित : प्यार में शर्म क लिए कोई जगह नहीं है माँ.

गौरी ममी : माँ नहीं , मुझे मेरे नाम से बुलाओ, माँ बन कर मैं वो सब नहीं कर सकती जो तू कह रहा है.

अमित : अगर आप ऐसा hi चाहती हैं तो आपकी ख़ुशी क लिए मुझे ये भी मंज़ूर है पर सिर्फ इन्ही पलों में.

गौरी ममी : मैं भी यही चाहती हूँ .

अमित : तो शुरू करें गौरी , हमारी प्रेम मिलान की रत.

गौरी ममी : आआह्ह्ह्ह फिर से मुझे मेरे नाम से बुलाओ

अमित : गौरी

गौरी ममी : कब से तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुन्ना चाहती थी मैं. आज मुझे ऐसे प्यार करो क सब भूल जॉन मैं . जब से तुम्हे दीपिका क साथ देखा है मैं खुद को रोक नहीं प् रही थी . मैं भी वो सब महसूस करना चाहती हूँ जो दीपिका महसूस कर रही थी. वो शांति वो ख़ुशी जो उसके चेहरे पर मैंने देखि थी मुझे भी वो चाहिए.

माँ मेरे गले लग कर अपने दिल की बात बता रही थी और मैंने भी उन्हें सहलाते हुए कहा

अमित : उससे भी ज्यादा hi मिलेगा . बस आप मेरा साथ देना.

गौरी ममी : जैसा चाहोगे वैसा साथ दूंगी बस आज मेरी अधूरी ीचा पूरी कर दो.

अमित : अब कोई ीचा अधूरी नहीं रहेगी आपकी. और सिर्फ आज hi नहीं हमेशा क लिए.

इतना कह कर मैंने माँ को बीएड पर लिटा दिया और. उन्हें किश करने लगा . माँ भी मेरे गले में बहन डेल बराबर साथ दे रही थी . किश करते हुए अब माँ खुद hi मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी ज़ुबान को भी चूसने लगी. किश करने क बाद मैं उनकी गर्दन को चूमता हुआ उनके स्तनों तक आया तो एक बार नज़र भर क उनके मस्त उरोजों को देखा.

अमित : आप क ये दूध क कलश बहुत hi दिलकश हैं. जी करता है इन्हे खा जॉन

गौरी ममी : तो खा जाओ न रोका किसने है, ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. इन्हे प्यार करो.

मैंने उनका एक स्तन मुँह में लिया और दूसरे को मसलने लगा. माँ और भी ज्यादा सिसकियाँ लेती हुई मेरे सर को अपने स्तनों पर दबाने लगी.

गौरी ममी : हम्म्म उनममम ककक ऐसे hi प्यार करो उम्म्म मैं कब से इन पलों क लिए तड़प रही थी कक्कक्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ और ज़ोर से करो ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. खूब प्यार करो उम्म्म्म ककक इन्हे दूध से भर दो और फिर मेरा दूध पीना जो मैं कभी तुम्हे पीला नहीं पायी.

अमित : इनको दूध से भर कर मैं hi इनमे से दूध भी पियूँगा , आपकी हर ीचा पूरी करूँगा मैं.

मैंने कुछ देर दोनों स्तनों को मसल मसल क बरी बरी से पिया . दोनों चूचे मसलने से लाल हो चुके थे. उसके बाद मैंने उनकी कभी में अपनी जीभ घुसा कर उन्हें और उत्तेजित करने लगा. इससे माँ छटपटाने लगी.

गौरी ममी : उफ्फ्फ्फ़ ये क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म करते रहो ुकम्म्म कक्कक्स

नाभि को प्यार करने क बाद मैं उनकी छूट पर आ गया और फिर से छूट को चाटने लगा. माँ मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी.

गौरी ममी : आआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ये क्या कर रहे हो ऐसा भी कोई करता है

अमित : आपको ाचा नहीं लग रहा क्या ?

गौरी ममी : बहुत ाचा लग रहा है , अब पता चला दीपिका क्यों इतना पागल रहती है तुम्हारे लिए . उम्म्म्म कक्कक्क्स करते रहो.

अमित : क्या वो सब करना चाहती हैं आप जो दीपिका ममी करती है मेरे साथ

गौरी ममी : हम्म्म्म सब कुछ

माँ के इतना कहते hi मैं उनके ऊपर घूम गया और 69 पोजीशन में उनके ऊपर आ गया . अब मेरा मुँह माँ की छूट क ऊपर था और मेरा लैंड उनके मुँह क ऊपर . अपने सामने मेरा झूलता हुआ लैंड देख कर माँ की तो बोलती बंद हो गयी. पर मैंने उनके मुँह पर लैंड रगड़ना शुरू कर दिया . वो लैंड को मुँह में जाने से रोकने क लिए अपना मुँह इधर उधर कर रही थी.

अमित : क्या हुआ ? प्यार करो न इसे भी जैसे दीपिका ममी करती है , आपको भी मज़ा आएगा.

गौरी ममी : मैंने ऐसा कभी नहीं किया .

अमित : अब सब कुछ भूल जाइये. मेरे साथ खुल कर मज़ा लीजिये एक प्रेमिका की तरह . आप जो कभी किया नहीं है अब वो सब कीजिये और मज़ा लीजिये.

मैंने फिर से लैंड उनके मुँह पर रगड़ा तो माँ ने लैंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सुपडे पर अपने होंठ लगा कर एक किश कर दी. मुझे इतना मज़ा आया क मैंने उनकी छूट में जीभ घुसा दी और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. माँ को भी मेरे ऐसा करने से मज़ा आया और मज़े में उन्होंने सुपडे को मुँह में ले लिया. लैंड क मुँह में जाते hi मैंने लैंड को दबाते हुए उनके मुँह में और अंदर तक घुसा दिया . माँ ने जल्दी से मेरी जांघों को दबा कर उठाया और मुँह से लैंड बहार निकल दिया.

गौरी ममी : अखुनण अखुनण अखुनण ये क्या अखुनण अखुनण कर रहे थे अखुनण

अमित : सॉरी वो मुझे इतना मज़ा आया क बर्दाश्त नहीं हुआ .

मैं माँ क ऊपर से हैट गया और उन्हें साँस लेने दी. माँ ने मुझे अपने लिए चिंता करते देखा तो वो मुस्कुराती हुई मेरे ऊपर आ गयी और खुद hi मेरे लैंड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया .

अमित : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स आप कमल हैं

गौरी ममी : सररूपप्प्प श्रुणुपपप सृपपप उम्म्म्म कमल तो तुम हो . सच में इस सब में अलग hi मज़ा है जो आज तक मुझे पता hi नहीं था. सरररूउप सर्र्रउपपपप उम्म्म

माँ अपनी मर्ज़ी से जितना हो सकता था उतना लैंड मुँह में अंदर बहार कर रही थी. मैं हाथ बड़ा कर उनके बाल पकड़ कर उनका मुँह बीच बीच में लैंड पर दबाने लगा. माँ को ऐसे अपना लैंड चूसते हुए देख कर मुझे अपने अंदर उत्तेजना का ज्वालामुखी उठता महसूस हो रहा था. जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उनको बीएड पर लिटा दिया और खुद उनकी टांगों क बीच में आकर लैंड को छूट पर सेट कर क एक धक्का मर दिया. लैंड छूट में आधा चला गया

गौरी ममी : आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स तुम्हारा ये बहुत बड़ा है , हर बार दर्द देता है. पिछली बार तो तुमने मुझे चलने लायक नहीं छोड़ा था.

अमित : आपको पसंद नहीं है क्या?

गौरी ममी : पसंद न होता तो क्या खुद hi इसे अंदर लेने की कोशिश करती ?

अमित : जनता हूँ कैसे हॉस्पिटल में आप इसके ऊपर बैठ कर दर्द से छटपटा रही थी.

गौरी ममी : तुम जग रहे थे?

अमित : हम्म्म

गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तो उसी दिन क्यों नहीं कर दिया सब ? इतने दिन क्यों इंतज़ार करवाया ? आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह

अमित : इंतज़ार तो आप ने करवाया , मैं चाहता था आप खुद मुझसे बात करें. पिछली बार भी इसी लिए मैंने वो सब उस तरीके से किया था. पर फिर भी आप चुप रही.

गौरी ममी : ाःह ाःह उम्म्म्म कक्कक्स आअह्ह्ह क्या करती तुमसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी. आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ाःह ऐसे hi करो आअह्ह्ह आअह्ह्ह पिछली बार जैसे तुमने किया था वैसे कभी नहीं हुआ था मेरे साथ. तुमने तो सुहाग रत यद् करवा दी थी. इतना दर्द तो तब भी न हुआ था. ाःह आअह्ह्ह aahhhhhhhhhhhhhhhh

माँ की इस बात पर मुझे जोश आ गया और मैंने सुपडे तक खींच कर पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक घुसा दिया जो अब तक आधा hi अंदर बहार हो रहा था.

गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मार डाला सीसीसी आआआअह्ह्ह्हह आराम से नहीं कर सकते क्या आअह्ह्ह्हह उस दिन भी ऐसे hi कर रहे थे तुम ककक आआआईईई जान निकल डोज

अमित : कण्ट्रोल नहीं हो रहा आप की बातें मुझे और गरम कर रही हैं

गौरी ममी : कहीं जान hi न निकल देना आआह्ह्ह्ह एक तो इतना बड़ा मुसल लिए फिरते हो ऊपर से ऐसे करते हो ककक आआह्ह्ह्ह सच में बहुत बड़ा है अंदर पेट तक जा कर लगता है

माँ की बातें मुझे गरम कर रही थी और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी. माँ भी कुछ देर बाद खुद hi कमर हिला कर मज़े लेने लगी .

गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः उम्म्म्म ऐसे hi करते रहो मज़ा आ रहा है उम्म्म आआह्ह्ह्ह

अमित : अभी तो और भी मज़ा आएगा.

इतना कह कर मैंने माँ को करवट क बल किया और उनके पीछे लेट कर उनकी एक तंग उठा कर घुटने क नीचे से हाथ निकल कर उनका एक चुका पकड़ लिया और लैंड घुसा कर धक्के पेलने लगा.

गौरी ममी : आअह्ह्ह उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह ये सब कहाँ से सीखा तुमने आअह्ह्ह आअह्ह्ह कैसे कैसे तरीके से कर रहे हो

अमित : क्या कर रहा हूँ ?

गौरी ममी : यही हो कर रहे हो आअह्ह्ह आअह्ह्ह उम्म्म करते रहो

अमित : ज़रा खुल क बताओ न क्या कर रहा हूँ गौरी

गौरी ममी : आआह्ह्ह आह्हः फिर से कहो आआह्ह्ह अह्ह्ह्हह

अमित : बताओ तो क्या कर रहा हूँ गौरी

गौरी ममी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मुझे छोड़ रहे हो आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह एआईईईई मैं गईइइइइइइइ आअह्हह्ह्ह्ह

मेरे मुँह से अपना नाम सुन कर माँ इतनी गरम हो गयी क खुद hi अपनी छूट मसलते हुए झटके लेती झड़ने लगी . मुझे भी उनकी बातों ने गरम कर दिया था अब मैं भी अपना पानी निकलना चाहता था तो मैंने जल्दी से उन्हें घुटनो क बल किया और पीछे आ कर एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया.

गौरी ममी : आआअह्ह्ह्हह मर डाला आआआअह्ह्ह्हह कक्कक्स

मैं माँ की कमर थामे लगातार ज़ोरदार धक्के पेलने लगा और कुछ hi पलों में मेरे सबर का बांध भी टूट गया. लैंड को जड़ तक अंदर घुसा कर मैंने माँ क ऊपर hi गिर गया और उनकी छूट में पानी छोड़ने लगा.

अमित : आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स आप बहुत गरम हो माँ

गौरी ममी : माँ नहीं गौरी , तुम्हारी गौरी .

अमित : गौरी तुम बहुत hi गरम हो इतनी जल्दी मेरा कभी नहीं होता.

गौरी ममी : तुम्हारे लिए कैसी भी बन जाउंगी , अब तुम hi मेरे सब कुछ हो. मेरे बचे क बापू.

गौरी ममी ने इतना कहा तो मैं उन्हें किश करने लगा और वो भी गर्दन घुमा कर मेरा साथ देने लगी . कुछ देर बाद जब हम दोनों की साँसे संभाली तो माँ बीएड से उतर कर बाथरूम में चली गयी. जब वो वापिस आयी तो उनको देख कर फिर से मुझे कुछ होने लगा. वो आकर मेरे साथ बिस्टेर पर लेट गयी.

गौरी ममी : क्या देख रहे हो?

अमित : आप बहुत हॉट हो. फिर से आपको प्यार करने का दिल हो रहा है.

गौरी ममी : साडी रत क्या यही कुछ करना है?

अमित : साडी ज़िन्दगी कर सकता हूँ अगर आप साथ दे तो.

गौरी ममी : शरमाते हुए ) मैं तो तुम्हे मन कर hi नहीं सकती .

अमित : तो करे शुरू ?

इतना कह कर मैंने फिर से उन्हें बाँहों में ले लिया और किश करने लगा . माँ भी मेरा गरम जोशी से साथ देने लगी. बस फिर क्या था हो गया शुरू एक और राउंड. इस बार उन्होंने खुद hi मेरा लैंड मुँह में ले कर खड़ा किया और मेरे ऊपर बैठ कर घुड़सवारी भी की.

गौरी ममी : ाःह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है उम्म्म आठ आअह्ह्ह

अमित : खुल कर मज़े लो गौरी मैं तुम्हे हर मज़ा दूंगा.

माँ मेरे लैंड पर उछाल थी थी और मैं उनके उछाल कूद करते दूध दबा रहा था. माँ मस्ती में खुद hi अपने बल खोल रही थी . जब माँ उछाल उछाल कर थक गयी तो मैंने उन्हें बिस्टेर से निचे कड़ी कर क घोड़ी बना लिया . पीछे आ कर मैंने एक hi झटके में लैंड छूट में पेल दिया .

गौरी ममी : आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स एक hi बार में पेल देते हो आअह्ह्ह्ह दर्द होता है पर मज़ाआआ आअह्ह्ह मज़ा भी अत है ऐसे hi करो उम्म्म आअह्ह्ह्हह

माँ बीएड की पुष्ट की पकड़ कर झुकी हुई थी और मैं उनके लटक रहे आम पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मर रहा था . मैंने माँ को और झुकाते हुए उनकी एक तंग बीएड पर रखवा दी जिससे उनकी गांड और बहार निकल आयी . गांड देख कर मेरा मन फिर से मचलने लगा . क्या गांड थी मुझे अब माँ की गांड मारनी थी कैसे भी कर क. मैंने उनकी गांड में उंगली घुसा दी.

गौरी ममी: आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स ये कर रहे हो कक्कक्क्स वहां क्यों कर रहे हो?

अमित : गौरी तुम्हारी ये गांड बहुत मस्त है मुझे अपनी गांड मरने डौगी .

गौरी ममी : वहां भी भला कोई करता है क्या? आह्हः अह्ह्ह वहां मैंने कभी नहीं किया और तुम्हारा इतना बड़ा जायेगा कैसे

अमित : चला जायेगा जैसे दीपिका ममी क गया था तुम्हारे अंदर भी चला जायेगा. बस मुझे अपनी गांड मरने दो वर्ण मुझे चैन नहीं मिलेगा.

गौरी ममी : वहां बहुत दर्द होगा मैं कैसे लुंगी

अमित : एक hi बार दर्द होगा जैसे पहली बार आगे होता है बस . प्लीज मुझे अपनी गांड मरने दो न .

गौरी ममी : इतना hi दिल है तो आआह्ह्ह्बा आअह्ह्ह मर लेना कक्कक्स मैं मन कैसे कर सकती हूँ और ज़ोर से करो .

मैंने माँ को बीएड क सिरे पर घुटनो क बल होने को कहा और वो हो गयी . माँ को और ज्यादा पीछे को बेंड करते हुए उनकी गांड को पूरी तरह मैंने बहार निकल लिया और उनकी छूट से लैंड निकल कर गांड क छेड़ पर लगा दिया . लैंड छूट रास से भीगा हुआ था . इस लिए मैंने तेल लगाना ज़रूरी नहीं समझा और सूपड़ा छेड़ पर लगा कर एक हाथ से लैंड को थामे ज़ोर से पुश कर दिया. माँ की गांड बहुत टाइट थी सूपड़ा घुसते hi मुझे भी परेशानी हुई पर माँ क मुँह से तो चीख hi निकल गयी .

गौरी ममी : आयआईईईई मर गयी कक्कक्स. ाझह्ह्ह

मैंने रुकने की बजाये लगातार लैंड पर दबाव बनाये रखा और धीरे धीरे सरकता हुआ 5 इंच तक लैंड गांड में घुस गया. पर इतने में माँ की बुरी हालत हो गयी.

गौरी ममी : मायआ एआइइइइ निकल लो बहुत दर्द हो रहा है. एआईईईई कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह

अमित : बस अब दर्द नहीं होगा , अब तो घुस गया है .

मैंने कुछ देर माँ क स्तनों को दबाया और एक हाथ से उनकी छूट को मसलता रहा. थोड़ी देर में hi उनका कराहना सिसकियों में बदल गया तो मैंने आहिस्ता से लैंड बहार निकलना शुरू किया . माँ की गांड लैंड को पूरी तरह से जकड़े हुए थी. मैंने सुपडे तक लैंड बहार किया और फिर से अंदर करने लगा. मैं ये सब बहुत धीरे धीरे कर रहा था जिससे माँ को ज्यादा दर्द न हो. साथ में मैं माँ की छूट सहलाता रहा. थोड़ी देर में जब माँ कुछ नार्मल हुई तो मैंने भी स्पीड तेज़ करदी.

गौरी ममी : आअह्ह्ह ाःह आअह्ह्ह आराम से करो दर्द है ाः आअह्ह्ह आअह्ह्ह

अमित : अब कभी दर्द नहीं होगा . ये सिर्फ पहली बार का hi दर्द है . आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तुम बहुत टाइट हो गौरी बड़ा मज़ा आ रहा है.

मैं धक्के मरता हुआ बीच बीच में लैंड थोड़ा थोड़ा कर क और अंदर घुसता जा रहा था और न को पता भी न चला. जब आखिर का 2 इंच रह गया तो मैं एक ज़ोरदार धक्का मर कर पूरा लैंड गांड में थोक दिया. माँ ने एक बार फिर ज़ोर से चीख मरी पर मैं उनके ऊपर झुक कर उनकी पीठ चूमने लगा और कुछ देर में वो फिर से नार्मल हो गयी. माँ की टाइट गांड मरने में मुझे इतना मज़ा आया क ज्यादा देर खुद को मैं रोक न पाया और उनकी गांड में अपना पानी निकल दिया . इस राउंड में भी माँ 3 बार झाड़ चुकी थी और गांड चुदाई में तो उनको दर्द भी काफी हुआ इस लिए मैंने उसके बाद उन्हें ज्यादा परेशां नहीं किया और उनको अपनी बाँहों में लिए ऐसे hi सो गया.

सुबह माँ की कराह से मेरी आँख खुली . मैंने देखा तो माँ बीएड से नीचे उतर कर चलने की कोशिश कर रही थी पर उन्हें दर्द हो रहा था. मैंने जल्दी से उठ कर उन्हें सहारा दिया और उनको बीएड पर बिठाया मगर वो फिर से कराह उठी.

गौरी ममी : आआआह्ह्ह्ह आईईईई मर गयी

माँ एक साइड को करवट क बल बीएड पर लेट गयी. मैं समझ गया क उनको गांड में दर्द हो रहा है. रत में तो हम ऐसे hi सो गए थे मगर अब उनकी गांड अकड़ गयी थी.

अमित : आप लेट जाओ माँ आपको दर्द हो रहा है

गौरी ममी : किसे लेट जॉन सबके उठने का टाइम हो रहा है और मुझे चाय नाश्ते का भी देखना है . तुमने तो सत्यांश मर दोउ मेरा. न बैठा जा रहा है न चला जा रहा है. क्या जवाब दूंगी सबको?

अमित : सॉरी माँ पर आप इस हालत में नहीं हैं क कोई काम करें. आप बस आराम करेंगी . बाथरूम में गिरने का बहाना कर दी . नाश्ते का कोई बात नहीं कोई और इंतज़ाम कर लेंगे आप पहले मेरे साथ आओ.

मैंने माँ को गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया और पानी गरम करने क लिए गीज़र चला दिया. थोड़ी देर में पानी कुछ गरम हुआ तो मैंने माँ की गांड की सिकाई गरम पानी से की जिससे कुछ अकड़न काम हुई. अब माँ ठीक से कड़ी हो प् रही थी पर दर्द अभी भी था .

अमित : अब कैसा लग रहा है माँ?

गौरी ममी : अब कुछ ठीक हूँ बीटा पर दर्द अभी भी है. चल अब मुझे ज़रा नहाने दे. तू बहार जा .

अमित : नहीं माँ आप से नहीं होगा आप यही कड़ी रही मैं नेहला देता हूँ.

गौरी ममी : नहीं तू रहने दे

अमित : चुप बस

मैंने माँ को शावर की नीचे खड़ा किया और फिर उन्हें नहलाने लगा. साबुन से अछि तरह रगड़ कर मैंने उन्हें नहलाया. जैसे बचपन में वो मुझे नहलाती थी. माँ मुझसे शर्मा रही थी पर माँ को रगड़ते हुए फिर से मेरा लैंड खड़ा हो गया.

गौरी ममी : अब बस कर चल मुझे कपडे दे मेरे .

अमित : थोड़ी देर और नहाते हैं न माँ

गौरी ममी : नहीं बस अब मुझे कपडे दे दे.



मैंने माँ को एक बार नहीं में भर कर गले लगाया और अपने खड़े लैंड को उनकी जांघों क बीच दे कर छूट क ऊपर रगड़ दिया . माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . पर उन्होंने मुझे अब बहार जाने क लिए धकेल दिया . सही भी था ये वक़्त सही नहीं था क्या पता कौन उठ कर आ जाये . मैंने माँ को तौलिये से साफ़ किया और उनको कपडे पहनने में भी मदद की उसके बाद वो धीरे धीरे चलती हुई नीचे चली गयी और थोड़ी देर बाद hi उनकी कराहने की आवाज़ आयी. मैं समझ गया वो ड्रामा कर रही हैं . मुझे अभी नींद आ रही थी इस लिए मैं फिर से कपडे पहन कर सो गया .
 
भाई आज की छुट्टी आज अपडेट लिख नहीं पाया पूरा . कल अपडेट दूंगा
 
अपडेट 146



मैं आराम से सो रहा था क राजू ने आ कर मुझे नींद से जगाया .

राजू : उठ यार कितना सोयेगा. देख 10 बज चुके हैं. एक तो दिन होता है तू यहाँ पर और ऐसे सोया पड़ा है.

अमित : राजू तू यहाँ पर? तू कब आया ?

राजू : मैं तो अभी आया हूँ , माँ काफी देर से आयी हुई है . चल माँ ने hi बुलाने भेजा है. निचे आ कर नाश्ता कर ले .

अमित : आंटी क्या कर रही हैं इतनी सुबह?

राजू : तू सो रहा है तुझे पता भी नहीं , गौरी आंटी को चोट लगी है इसी लिए उन्होंने माँ को बुलाया था . नाश्ता माँ ने hi बनाया है अब आ कर नाश्ता कर ले.

मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में जल्दी से पानी दाल कर फटा फैट तैयार हो कर राजू क साथ निचे आ गया. आंटी ने मुझे नाश्ता करने को कहा पर मैं पहले माँ से मिलने उनके कमरे में गया. वैसे तो मुझे पता hi था सब पर अब उनकी तबियत कैसी है वो भी पता करना था. मैं माँ क रूम में गया तो दीपिका ममी और कामिनी ममी भी उनके पास बैठी हुई थी. माँ बीएड पर लेती हुई थी. मैं सीधा उनके पास जा कर बैठ गया.

अमित : क्या हुआ माँ ? तुम्हे चोट कैसे लग गयी?

गौरी ममी : कुछ नहीं बीटा वो बस पाऊँ फैसला गया था नहाते समय.

अमित : ज्यादा चोट तो नहीं लगी?

गौरी ममी : मैं बिलकुल ठीक हूँ बीटा बस ज़रा सी मोच है. तू चिंता मत कर चल पहले नाश्ता कर ले. दीपिका देख ज़रा मेरे बेटे को नाश्ता करवा दे , इसे भूख लगी होगी.

दीपिका ममी : चलिए महाराज नाश्ता करवा दूँ आपको. दीदी आप तब तक मेरे बेटे का ध्यान रखना मैं आपके बेटे का रखती हूँ.

मैं दीपिका ममी क साथ बहार आ गया और उन्होंने आंटी से लेकर मुझे खाना लगा दिया. राजू भी मेरे साथ नाश्ता करने बैठ गया. नाश्ते क बाद मैं राजू क साथ गाओं में घूमने निकल गया. सबसे पहले हम डरा भैया से मिलने गए और 1 घंटा उनके साथ बिताया . वो मुझसे शहर का हल चल जानने लगे. मैंने भी उन्हें इशारों में बता दिया क साथ ठीक चल रहा है . डरा भैया क बाद हम दोनों नदी किनारे चले गए. राजू मुझे अपने काम और रेनू क बारे में बताता रहा. दोपहर को हम दोनों घूम फिर कर वापिस घर आ गए. दोपहर का खाना भी बन चूका था तो हमने साथ में खाना खाया. माँ अपने कमरे में hi आराम कर रही थी . खाने क बाद राजू आंटी क साथ घर चला गया और मैं अपने कमरे में आराम करने चला गया .

मैं अपने कमरे में आराम से लेता था क पूजा भाभी का फ़ोन आ गया. मैं तो भूल hi गया था क उनके पास भी जाना है . मैं उनसे बात करने बाद घर निकल गया . पूजा भाभी क घर पहुंचा तो आज अंकल घर पर hi थे. मगर उनकी तबियत मच ठीक नहीं थी. मैंने अंकल और आंटी से मिला पूजा भाभी मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी.

अमित : अंकल आपको क्या हुआ ? आप बिस्टेर पर हैं आज?

अंकल : अरे कुछ नहीं बीटा ज़रा सा बुखार आ गया था कल तो दवा खा कर आराम कर रहा हूँ.

पूजा सास : बुखार तो आएगा hi जब देसी पियोगे अपने दोस्तों क साथ . इस उम्र में तो ध्यान रख लो थोड़ा.

आंटी ने तंजिया लहजे में अंकल को झाड़ लगा दी.

अंकल : अब मैं क्या करूँ सब ने ज़ोर दिय तो 2 पेग लगा लिए. वो पता नहीं कैसे शराब थी सर hi पकड़ लिया . आगे से ध्यान रखूँगा.

पूजा भाभी : लो देवर जी दूध पिलो आप म्हणत जो करनी है.

पूजा भाभी ने बड़ी मादक ऐडा से देख कर मुझे दूध का गिलास देते हुए कहा और अपनी छाती को ऊपर उठा कर इशारा किया और चली गयी. वहीँ उनकी सास भी मादक नज़रों से देख कर मुस्कुरा रही थी. मैं तो सोच रहा था क अंकल क होते शायद कुछ नहीं होगा पर यहाँ तो दोनों सास बहु जैसे पक्का इरादा किये हुए थी.

पूजा सास : हाँ बीटा जल्दी से गरम दूध ले म्हणत तो तुझे बहुत करनी होती है.

अंकल : आज तो छुट्टी है इसकी काम से काम आज तो आराम करना चाहिए घर पर . क्यों बीटा ?

पूजा सास : इसे आराम की क्या ज़रूरत है? अभी जवान है हत्ता करता है . इसे तो खूब म्हणत करनी चाहिए तभी तो ऐसे गठीला बना रहेगा. आराम तो आप को चाहिए .

आंटी तो अंकल को बोलने hi नहीं दे रही थी जैसे . दूध का गिलास ख़तम कर क मैंने जाने की इजाज़त मांगी तो अंकल बैठने को कहने लगे पर आंटी ने मुझे जाने दिया. मैं कमरे से अभी बहार hi आया था क पूजा भाभी ने मेरी T-shirt पकड़ कर मुझे अपने कमरे में खिंच लिया.

पूजा भाभी : कहाँ जा रहे हो? इतने दोनों बाद आते हो ऐसे hi चले जाओगे ?

पूजा भाभी मुझसे चिपकने लगी और मेरी T-shirt उतरने लगी.

अमित : क्या कर रही हैं ? अंकल घर पर हैं.

पूजा भाभी : उनकी चिंता मत करो , माँ जी संभल लेंगी. तुम जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो टाइम काम है.

मैंने भी ज्यादा नहीं सोचा और पूजा भाभी क होंठ चूसते हुए उनके चुके दबाये और जल्दी से उन्हें बीएड ले गया. पूजा भाभी ने अपने ब्लाउज को आगे से खोल दिया. नीचे ब्रा नहीं था तो उनके बूब्स लटकते हुए सामने आ गए . सदी क ा पल्लू साइड िरा कर उन्होंने अपनी साडी पेटीकोट समेत कमर तक चढ़ा ली. नीचे पेंटी भी नहीं थी . मैं समझ गया ये पहले से hi तैयार हैं. मैंने भी लोअर को अंडरवियर समेत नीचे किया और लैंड जो अब खड़ा हो चूका था पूजा भाभी की छूट पर सेट करते हुए एक hi धक्के में पूरा घुसेड़ दिया. पूजा भाभी को जैसे पता hi था क क्या होने वाला है तो उन्होंने ने पहले hi अपना मुँह तकिये से दबा लिया था जिससे उनकी आवाज़ ज्यादा बहार नहीं आयी पर मैंने उनकी चीख सुन ली थी.

पूजा भाभी : आआआईइइइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह मर दलाआआआ.

मैंने पूजा भाभी क बूब्स पकडे और उन्हें दबाता हुआ कमर चलने लगा. थोड़ी देर में hi पूजा भाभी भी कमर उठाने लगी और अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट ली. इस पोजीशन में थोड़ी देर पेलने का बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया और वो तेज़ तेज़ उछलने लगी. जल्दी hi उनका पानी निकल गया और वो निढाल हो गयी. मैंने उन्हें अपने ऊपर से नीचे उतरा और बीएड से नीचे खड़ा हो कर उनको पाऊँ से पकड़ कर घसीट कर किनारे पे लाया. उनके दोनों पेअर पकडे टंगे उठा कर मैंने फिर से लैंड छूट में पेल दिया . कोई 10 मिनट्स में फिर से उनका पानी निकल गया . मैं उनकी पोजीशन बदल hi रहा था क दरवाज़ा खुल और आंटी अंदर आ गयी .

पूजा सास : तेरा हो गया बेटी ? चल तू जल्दी से तैयार हो कर बहार देख . अमित अब तू मेरी भी प्याज़ बुझा दे जल्दी से बीटा .

इतना कह कर फ़ौरन आंटी ने अपनी सदी कमर तक उठा ली और मेरे सामने झुक गयी. मैंने भी देर न की और लैंड उनकी छूट में फसा कर कमर को थामे ज़ोरदार धक्का दे दिया. आंटी ज़ोरदार धक्का बर्दाश्त न कर सकती और आगे गिरने लगी पर मैंने कमर को थमा हुआ था. मगर बेध्यानी में उनके मुँह से चीख निकल गयी.

पूजा सास : आयआईइइइइइइइ माआआआआ

‘ क्या हुआ भाग्यवान ? ‘

आंटी की चीख अंकल तक पहुँच गयी थी जिसे सुन कर वो चिंता से पूछने लगे.

पूजा सास : को कक कुछ नहीं जी वो ज़रा पाआओं पाऊँ फिसल गया था.

अंकल : ध्यान दो ज़रा , इस उम्र में चोट लगी तो तुम भी बिस्टेर पकड़ लोगी

पूजा सास : मेरी चिंता न करो जी मैं बिस्टेर hi पकड़ रही हूँ अब.

अंकल फिर कुछ बोले पर मैंने ध्यान नहीं दिया और आंटी को धक्के पेलने लगा.

पूजा सास : आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह आराम से बीटा अब मेरी उम्र नहीं है आअह्ह्ह्ह ककक इतना बड़ा तो जवानी में न लिया और इस उम्र में आयआईई धीरे कर उन्हें भी मसल ज़रा आआह्ह्ह्ह

आंटी फर्श पर हाथ रख कर घोड़ी बानी हुई थी और उनकी गांड अपना पूरा भूगोल दिखा रही थी. मैंने उनकी गांड मसलते हुए धक्के जारी रखे तब तक पूजा भाभी अपनी हालत ठीक कर क बहार निकल गयी. आंटी का जल्दी hi पानी निकल गया और उनकी टाँगे कम्पनी लगी. मेरा अभी नहीं हुआ था. मैंने उनकी छूट से लैंड निकला और गांड में घुसा दिया. आधा लैंड एक hi बार में घुस गया और एक बार फिर से आंटी चीखी पर उन्होंने अपना मुँह दबा लिया. मैंने उनकी टाइट गांड को खुला करते हुए तेज़ तेज़ धक्के मरे और पूरा लैंड जड़ तक घुसा कर अपना पानी निकल दिया. आंटी को छोड़ा तो वो वहीँ फर्श पर hi पसर गयी और ऑंखें बंद किये लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी. मैंने उनकी सदी से लैंड साफ़ किया और अपने कपडे ठीक कर क घर से चुपचाप निकल गया.

शाम को घर वापिस आया तो माँ अब भी अपने कमरे में hi थी. किचन में काम वाली आंटी लगी हुई थी. कुछ देर मैं दीपिका ममी और अपने बेटे क साथ रहा और फिर माँ क पास चला गया.

अमित : अब कैसी तबियत है आपकी ?

गौरी ममी : ठीक हूँ बीटा बस थोड़ा दर्द अभी भी है.

इस वक़्त हम दोनों कमरे में अकेले थे पर फिर से माँ औपचारिकता से बात कर रही थी.

अमित : सॉरी मेरी वजह से आप .....

गौरी ममी : तेरी वजह से क्या ? तूने क्या किया ? वो तो मैं गिर गयी थी .

माँ मुझसे ऐसे बात कर रही थी जैसे हम दोनों क बीच कुछ हुआ hi नहीं. मुझे भी लगा क वो शायद इस बारे में बात नहीं करना चाहती इस लिए मैंने भी ज्यादा बात नहीं की और फिर कुछ देर उनके साथ बिताने क बाद बहार आ गया. रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में माँ का इंतज़ार कर रहा था पर वो नहीं आयी . मैंने भी सोचा शायद दर्द ज्यादा hi होगा जो नहीं आयी. कैच देर मैंने रीमा से बात की और सो गया.

दूसरी तरफ सुबह से दिव्या कुछ बैचैन थी. आज उसने फिर से वही सपना देखा और फिर से वैसे hi उसकी आँख खुली. वो इस बात पर हैरान थी क आज तो वो अकेली है फिर कैसे उसे वो सपना आया. उस दिन तो उसने अमित को अपनी छाती से लगा देख कर ये समझ लिया था क शायद उसकी वजह से वो सपना आया होगा. इस बारे में सोच सोच कर वो परेशां हो रही थी और बस इसी में खोयी थी . ये कोई छोटी बात नहीं थी . क्यूंकि दिव्या तो जैसे अपनी साड़ी उमंगें अपने बहिन क साथ hi खो चुकी थी. पति भी बहार hi रहता था और 2-3 साल में आता भी तो दिव्या उसके साथ पति पत्नी वाला रिश्ता बना नहीं पति थी और न hi उसका पति इस में रूचि दिखता था. या यूँ कहिये क बहिन की मौत क साथ hi उसकी सेक्स लाइफ ख़तम हो चुकी थी. फिर इतने सैलून बाद अचानक ये सब उसके लिए बहुत बड़ी बात थी. क्यूंकि वो तो खुद कभी अपनी योनि को भी सहलाती नहीं थी. इतनी हसीं होते हुए भी जैसे उसके अंदर से ये गरम भावनाएं सार्ड हो चुकी थी. फिर ऐसा सपना ? ऊपर से उसे दामिनी की आवाज़ सुनाई देती थी हो उसे जीने क लिए कह रही थी. दामिनी की hi ऑंखें देख कर वो उस अनजान से साये की तरफ खींची चली जाती थी और वो साया उसे उस दुनिया में ले जा रहा था जिससे वो नाता तोड़ चुकी थी. उसके सोये हुए अरमान जैसे नींद से जागने की तयारी में थे जिसकी वजह दामिनी और वो साया था. बरसों से सार्ड पद चुकी भावनाएं जैसे अब पिघलने लगी थी. दिव्या को अभी सेक्स की गर्मी नहीं छू पायी थी पर एक बेचैनी ज़रूर शुरू हो गयी थी जो उसे इसी और ले जाने वाली थी. दिव्या सुबह से उठ कर बस इसी सोच में गम थी और उसे जैसे कोई सरोकार hi नहीं था क उसने घर का कुछ काम भी करना है .

वहीँ बिस्टेर पर लेती राधा कब से जग तो चुकी थी पर जैसे अभी भी वो नींद में रहना चाहती थी. उसका दिल अभी भी इस इंतज़ार में था क कहीं से अमित आ जाये और उसे फिर से प्यार से जगाये मगर आज वो यहाँ नहीं था. 2-4 दिन क hi उसके साथ होने से राधा इतनी खुश थी क वो ये साथ उम्र भर यूँही चाहने लगी थी. सूरज की धुप की गर्मी बता रही थी क वो सर पर आ चूका है पर राधा मायूस सी बस बिस्तर पर hi पड़ी रही. न hi वो खुद उठी और न दिव्या उसे जगाने आयी. दोपहर को कहीं जा कर दिव्या अपनी सोच को कुछ आराम देकर जैसे hi होश में आयी तो समय देख कर उसे खुद पर hi गुस्सा आ गया .

दिव्या ( मन में ) ये क्या दोपहर हो गयी और मैंने अभी तक खाना नहीं बनाया ? राधा भी नहीं है ? कहीं उसे ...

राधा का ख्याल आते hi वो भाग कर उसके कमरे में गयी तो देखा राधा भी भी बिस्टेर पर hi थी. राधा को देख कर उसे चैन पड़ा पर अभी तक वो बिस्टेर पर कैसे है ? जल्दी से दिव्या ने राधा क माथे पर हाथ रख कर चेक किया कहीं बुखार तो नहीं.

दिव्या : राधा , तू अभी तक बिस्टेर पर hi है? क्या बात है बेटी? आज उठना नहीं है क्या?

राधा : क्या करना है उठ कर माँ आज तो संडे है न कॉलेज जाना है न कोई काम है . आप तो ठीक हैं न आज आप भी तो नहीं आयी जगाने ?

दिव्या : वो हाँ वो बस ज़रा सा सर दर्द था.

राधा : आप झूठ कह रही हो न माँ ? मुझे पता है आप अमित को यद् कर रही हैं.

राधा ने तो अपने मन क भाव hi कहे थे क्यूंकि वो जानती थी क उसकी माँ कभी ऐसा नहीं करती है. तबियत भी देख कर पता चल रहा था क ठीक है तो ज़ाहिर सी बात है वो मिस कर रही है अमित को. क्यूंकि इतने दिनों में उसने देखा था क कैसे वो अमित को बेटे की तरह प्यार कर रही है और दोनों की बातें भी तो सुनी थी राधा ने बहार से.

राधा ने जो बात भोलेपन से कहो वो बात दिव्या को जैसे अंदर तक हिला गयी . वो खुद अमित को सोच कर भी उसे न सोचने का इरादा कर रही थी . क्यूंकि वो उस साये में अमित का चेहरा नहीं देखना चाहती थी. पर उसका दिल कहीं न कहीं उस साये में अमित को देखने लगा था . वजह थी उस साये की आँखें जो दामिनी जैसी थी. और अमित क ऑंखें तो थी उसकी माँ जैसी .

दिव्या : वो कहीं दूर थोड़ा है बीटा वो तो हमारे पास hi है. जब दिल करेगा आ जायेगा.

राधा : कितना ाचा होता न माँ अगर वो हमारे साथ hi रहता.

दिव्या : वो पास hi है बीटा तू अब उठ और तैयार हो देख टाइम क्या हो गया है.

इतना कह कर दिव्या अपने मन को संभालती कमरे से बहार चली गयी पर चाहती वो भी यही थे क अब अमित उसके पास रहे . वो उसे वो प्यार देना चाहती थी जो उसे दामिनी से मिलना चाहिए था पर उसे नहीं मिला और इसके लिए वो खुद को भी दोषी मानती थी क उसने अपनी बहिन की ज़िम्मेदारी को समझा नहीं.

राधा भी अपने मन को मर कर अमित को यद् करते हुए उठी और उसने अपनी अलमारी में रखे कल अमित द्वारा दिए गिफ्ट को चूमा और उसकी तस्वीर को गले से लगा कर दिल hi दिल उसे जल्दी आने का कह कर नहाने चली गयी.

अगली सुबह मैं जल्दी उठ गया क्यों की रत जो चैन से जल्दी सो गया था. जल्दी उठ तो गया पर माँ की तबियत का यद् कर क मैंने सोचा क नाश्ते क लिए उनको परेशां क्यों करना इस लिए जल्दी से तैयार हो कर सब से मिला और कॉलेज क लिए निकल गया. माँ बाबा ने बड़ा ज़ोर दिया नाश्ता कर क जाने का पर मैं नाश्ता मौसी क घर करने का कह कर निकल गया .हालाँकि माँ ने जाते जाते दूध का गिलास तो पीला hi दिया. मैं घर इतनी जल्दी निकल आया था क शहर में अभी लोग उठे भी नहीं होंगे . और जैसे मैंने गाओं जाने से पहले hi सोच रखा था मैं सीधा दिव्या मौसी क घर hi चला गया. राधा क मायूस चेहरे ने मुझे विचलित कर दिय था उस दिन इस लिए मैंने सोच लिया था क ये दो दिन भी मैं दिव्या मौसी क पास hi रुकूंगा क्यूंकि वेडनेसडे को तो कम्पटीशन क लिए हमें बहार जाना था. अब दो दिन कहीं और जाने से ाचा तो यही था क मैं यहीं रुक जॉन जिससे राधा को भी कुछ ख़ुशी मिले. दिव्या मौसी क घर जा कर मैंने बेल्ल बजायी तो तीसरी बेल्ल पर मौसी ने दरवाज़ा खोला शायद वो नाहा रही होंगी. जैसे hi दिव्या मौसी ने दरवाज़ा खोला तो मुझे सामने देख कर वो हैरान हो गयी और साथ hi उनके चेहरे पर ख़ुशी आ गयी. गीले बल बता रहे थे क वो बाथरूम से hi आ रही हैं . मैंने आगे बाद कर उन्हें गले लगा लिया.

दिव्या मौसी : अमित तुम यहाँ ? तुम तो आज दीदी क घर जाने वाले थे न? और इतनी सुबह कैसे?

अमित : जाना तो था पर सोचा 2 दिन और अपनी माँ क पास रह लूँ वैसे भी बुधवार को जो बहार जा रहा हूँ कम्पटीशन क लिए.

दिव्या मौसी को मेरे द्वारा माँ कहने से बहुत ख़ुशी मिली और उन्होंने मेरा माथा चूम कर फिर से मुझे गले लगा लिया.

दिव्या मौसी : चल अंदर बैठ मैं तेरे लिए नाश्ता बनती हूँ , घर से हो खा कर आया नहीं होगा.

अमित : कैसे खा कर अत ? मुझे तो आपके हाथ का नाश्ता जो करना था. राधा सो रही है अभी ?

दिव्या मौसी : हाँ सो रही है , मैं अभी जगती हूँ उसे.

अमित : आप रहने दो मैं hi जगा देता हूँ . उसे सरप्राइज जो देना है .

दिव्या मौसी : बहुत खुश होगी वो भी कल यद् कर रही थी तुम्हे.

इतना कह कर वो किचन में चली गयी और मैं राधा क कमरे में. पिंक वाइट नाईट ड्रेस में बीएड पर मासूम से चेहरे में वो सोई हुई भी मुस्कुरा रही थी. ज़रूर नींद में कोई ाचा ख्वाब देख रही होगी. उसके चेहरे की मासूमियत और ये मुस्कराहट देख कर मेरा दिल hi नहीं किया क उसे जगाऊँ. मैं उसके पास hi बैठ गया . तभी मेरी नज़र उसकी कलाई पर बंधी उस वाच पर गयी जो मैंने उसे दी थी जाने से पहले . वाच को देखते हुए जैसे hi मैंने उस पर हाथ रखा तो राधा ने नींद में hi मेरे हाथ पर अपना चेहरा रख दिया और उसके कोमल गाल मेरे हाथ पर टिक गया. मैं कुछ देर उसे देखता रहा पर फिर मौसी न कहीं आ जाएँ इस लिए राधा को जगाने क लिए मैंने दूसरे हाथ से उसका गाल सहलाया और उसे उठने को कहा.

अमित : राधा उठ जाओ सुबह हो गयी है.

राधा : उम्म्म्म मत जाओ न मेरा दिल नहीं लगेगा

राधा ने नींद में hi कोई सपना देख कर ये बुदबुदा रही थी.

अमित : राधा उठो सुबह हो गयी है

राधा : उम्म्म्म तुम ऐसे hi मेरे पास रहा करो .

राधा बच्चों की तरह कुनमुना रही थी जिसे देख कर मुझे ाचा भी लग रहा था पर उठाना तो था hi.

अमित : राधा उठो वर्ण पानी दाल दूंगा

मैंने राधा को इस बार थोड़ा हिलाया और पानी डालने की धमकी दी तो उसने फटाफट ऑंखें खोली मगर मुझे सामने देख कर वो शॉकेड हो गयी और फिर से ऑंखें बंद कर ली.

राधा : ये सपना है , अमित तो गाओं गया है हाँ ये सपना hi है

अमित : ो मैडम अब उठ जाओ या पानी लॉन?

राधा : मैंने फिर से ऐसा कहा तो राधा ने ऑंखें खोल कर फिर से मुझे देखा और फिर अपने कमरे में इधर उधर नज़रें दौड़ायीं जैसे पक्का करना चाहती हो क वो सपने में है या हकीकत में . मैंने फिर से उसे हिलाया तो वो ख़ुशी से चीख पड़ी और मेरे गले लग गयी

राधा : तुम सच में हो ओह माय गॉड .

अमित : हाँ सच में हूँ पर तुम क्या सपना देख रही थी जो उठ नहीं रही थी और बड़बड़ा रही थी?

राधा : तुम्हे hi देख रही थी इसी लिए तो यकीन नहीं हो रहा था क सपने में हूँ या हकीकत में .

अमित : मुझे देख रही थी ?

राधा : शरमाते हुए ) वो बस ऐसे hi सपना आ रहा था . तुम भी थे सपने में.

अमित : ाचा तो क्या था सपना ?

राधा : वो वो कुछ नहीं . पर तुम यहाँ इतनी सुबह ? तुम्हे तो मौसी क घर जाना था न.

अमित : अब तुम्हे उदास छोड़ कर कैसे जा सकता था? सोचा 2 दिन और तुम्हारी नींद ख़राब कर दूँ .

राधा : नींद कैसे ख़राब होगी भला ? मेरे तो दिन की शुरुआत इतनी अछि होती है क सब सही होता है. वैसे भी नींद में भी तो तुम ....

अमित : क्या कहा ?? ाचा अब जल्दी से उठ कर तैयार हो जाओ और हाँ सिर्फ 2 दिन hi रुकूंगा अब फिर से उदास मत होना .

राधा : हमेशा क लिए नहीं रुक सकते ?

अमित : क्या मतलब ?

राधा : मुस्कुराते हुए ) कुछ नहीं , थैंक यू वैरी मच.

इतना कह कर फिर से राधा मेरे गले लगी और मुस्कुराती हुई बाथरूम में जाने लगी तो मैंने एक सवाल पूछ hi लिया .

अमित : वैसे ये रत को घडी पेहेन कर सोने का क्या फायदा ?

राधा पलट कर मुस्कुरायी और मुझे देखने लगी .

राधा ( मन में ) तुम्हारा एहसास हर पल मेरे साथ रहे इसी लिए पहने थी और देखो सपने में भी तुम थे और आँख खुली तो सामने भी तुम्हे पाया.

राधा : मेरी मर्ज़ी जब भी पह्नु . तुम्हारा दिया गिफ्ट है क्या तुम्हे ाचा नहीं लगा?

अमित : ाचा लगा , तुम्हारे ऊपर और भी ाचा लग रहा है .

राधा मेरी आँखों में देखती मुस्कुराती बाथरूम में चली गयी और मैं बहार आ गया. दिव्या मौसी किचन में नाश्ता बना रहा थी . थोड़ी देर में मौसी ने नाश्ता लगा दिया और राधा जब तैयार हो कर सामने आयी तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया . मैंने सोचा भी नहीं था क राधा इस तरह मेरे सामने आएगी. वो तो जैसे बिजलियाँ गिरा रही थी इन कपड़ों में. मेरी हालत देख कर राधा भी श्रम गयी और वहीँ नज़रें झुकाये कड़ी हो गयी. वो अपनी उंगलियां मरोड़ने लगी और पाऊँ से ज़मीन कुरेदने लगी .

दिव्या मौसी : राधा ये सब क्या है? ये कपडे तुमने कहाँ से लिए ?

दिव्या मौसी की आवाज़ ने मुझे हकीकत में वापिस आने को मजबूर किया तो मैंने राधा को सर से पाऊँ तक देखा. राधा इस वक़्त पिंक टॉप और ब्लू जीन्स में थी . कपडे इतने ज्यादा फिटिंग क थे राधा की बॉडी की पूरी बनावट पता चल रही थी. मेरी नज़रें जैम सी गयी थी और मुँह में जैसे ज़ुबान hi न थी.

राधा : माँ वो उस दिन अमित ने ले कर दिए थे.

अमित : ( मन में ) ये साला मैंने कब लेकर दिए ?

दिव्या मौसी : बहुत hi अचे हैं और बहुत अछि लग रही हो तुम इनमे पर बीटा कॉलेज में ये सब पहन कर जाओगी तो परेशानी होगी.

राधा : इसके होते भला मुझे क्या परेशानी हो सकती है माँ.

दिव्या मौसी : मैंने कब कहा क तुम्हे परेशानी होगी? परेशानी तो इसे hi होगी , खामखाह फिर से किसी से भिड़ना पड़ेगा. तुम क्या चाहती हो क फिर से इसे परेशानी हो .

राधा : नहीं नहीं माँ मैं ऐसा नहीं चाहती.

दिव्या मौसी : तो जाओ बीटा कपडे पेहेन लो कहीं मेरी फूल से बेटी को किसी की नज़र न लग जाये.

राधा मायूस हो कर अपने कमरे में वापिस जाने लगी तो मुझे ाचा नहीं लगा .

अमित : रहने दीजिये मौसी , अब पेहेन hi लिए हैं तो रहने दीजिये न. मैं देख लूंगा कोई परेशानी नहीं होगी. वैसे भी कॉलेज में सब ऐसे hi कपडे पहनते हैं . आप ने तो देखा hi होगा कल्पना को?

दिव्या मौसी : पर .... ाचा ठीक है आज पहन लो पर आगे से ध्यान रखना.

दिव्या मौसी : खाने की प्लेट मेरे सामने रख कर किचन में चली गयी तो राधा का चेहरा जो अभी मुरझा गया था फिर से खिल गया और वो मेरे पास आ कर शर्माती हुई नज़रें झुकाये बैठ गयी.

अमित : ये मैंने कब लेकर दिया था तुम्हे ? तुमने मौसी से क्यों कहा ऐसा ?

राधा : तुमने hi तो लेकर दिया था उस दिन जब सबको शॉपिंग करवा रहे थे . तभी लिया था मैंने .

अमित : ये मैंने तो नहीं देखा था ?

राधा : वो तुम्हे ऐसे कपडे अचे लगते हैं न ? तो मैंने ले लिया .

अमित : मैंने कब कहा मुझे ऐसे कपडे अचे लगते हैं ?

राधा : वो तुम शिवानी दीदी को .....

अमित : तो तुमने मुझे उसके साथ देख कर ये अंदाज़ा लगा लिया ?

राधा क चेहरे की मुस्कराहट गायब हो गयी और जैसे उसे अब अफ़सोस हो रहा था

राधा : तो इस का मतलब तुम्हे ये पसंद नहीं है ?

राधा की बदलती शकल देख कर मैं समझ गया क वो क्या सोच रही है .

अमित : ऐसी बात नहीं है , असल में तुम जैसी हो मुझे वैसी hi पसंद हो . तुम सिंपल कपड़ों में ज्यादा अछि लगती हो मुझे . वैसे इस ड्रेस में भी तुम खूबसूरत लग रही हो . बिलकुल हॉट

मैंने राधा को खुश करने क लिए हॉट कह तो दिया पर मुझे लगा क मैंने गलत कह दिया. जबकि राधा का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया .

राधा : तो मैं इसे बदल लूँ ?

अमित : नहीं अब पेहेन hi लिया है तो पहने रखो . हाँ आज तुम्हे कल्पना क साथ hi आना जाना पड़ेगा .

राधा ने तुरंत नज़रें उठा कर मुझे देखा.

राधा : वो क्यों ?

अमित : सुना नहीं मौसी ने क्या कहा ? परेशानी हो सकती है. तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो क कोई न कोई तो आज पिट hi जायेगा मेरे हाथों से.

राधा का चेहरा फिर से गुलाबी हो गया और शर्म से उसने नज़रें झुका ली.

राधा : मैं तो तुम्हारे साथ hi जाउंगी , मुझे किसी की परवाह नहीं.

दिव्या मौसी ने राधा को भी नाहटा लगा दिया और फिर हलकी फुलकी बातों क साथ हमने नाश्ता कर लिया. कॉलेज जाने से पहले एक बार फिर दिव्या मौसी ने हिदायत दी और फिर राधा मेरे पीछे बैठ गयी. हम दोनों कॉलेज क लिए निकल गए. अभी हम थोड़ा सा hi घर से दूर आये थे क राधा ने. बाइक रोकने को कहा.

अमित : क्या हुआ ?

राधा बाइक से उतरी और फिर से बैठ गयी. पर इस बार वो दोनों तरफ पाऊँ कर क लड़कों की तरह बैठी थी.

राधा : अब चलो

अमित : ये सब क्या?

राधा : जीन्स पेहेन कर ऐसे hi तो बैठती हैं लड़कियां. अब चलो.

राधा तो आज मुझे झटके पे झटका दे रही थी. पहले ऐसे कपडे पेहेन लिए क मेरे धड़कने बड़ा दी और अब ऐसे मेरे पीछे बैठ गयी . अब मैं क्या कहता चुपचाप बाइक चलने लगा. राधा मेरे साथ सात कर बैठ गयी . उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे हुए थे पर जैसे hi एक जगह मुझे ब्रेक मारनी पड़ी तो वो मेरे ऊपर जैसे गिर hi गयी. और मुझे अपनी पीठ पर उसके कोमल यौवन का एहसास हुआ . ये पहली बार था जब राधा मेरे साथ ऐसे जुड़ रही थी. और ऐसे कभी मैंने उसे महसूस भी नहीं किया था . ज़रूर उसके इन टाइट फिटिंग वाले कपड़ों का हाथ था इस सब में. पर जो भी था एक पल तो मैं इस सुखद एहसास में खो सा गया पर फिर मुझे खुद पर hi गुस्सा आने लगा क मैं राधा क बारे में क्या सोच रहा हूँ . अब राधा क हाथ मेरे पेट पर आ चुके थे जिसे उसने दुबारा वहां से नहीं हटाया . उसका सर अब मेरे कंधे पर था.

राधा : जानते हो मैं कब से सोच रही थी म मैं भी ऐसे कपडे पह्नु और तुम्हारे साथ बाइक पर ऐसे hi बैठूं. जैसे कॉलेज में सब लड़कियां बैठती हैं.

अमित : ाचा ! तो पहले बता देती

राधा : तुम होते hi कहाँ हो मेरे साथ. पिछले हफ्ते hi तो आये हो. पहले सोचा क तुम कहीं बुरा न मन जाओ पर उस दिन तुम्हे जीन्स पसंद करते देखा तो हिम्मत हुई.

अमित : मैं तुम्हारी किसी बात का कभी बुरा मंटा हूँ क्या ?

राधा : तुम हो hi इतने अचे क बुरा मानते hi नहीं.

अमित : नहीं , तुम हो hi इतनी प्यारी क बुरा मन hi नहीं सकता. वैसे आज ज़रा संभल कर रहना कहीं किसी ने कोई शरारत कर दी तो फिर ...

राधा : जानती हूँ तुम क्या करोगे, वैसे मैंने ये कपडे तुम्हारे लिए पहने हैं किसी और को दिखने क लिए नहीं. और कल से फिर वही अपने सिंपल कपडे hi पहनूंगी जो तुम्हे पसंद हैं .

बातें करते हुए हम कॉलेज पहुँच गए . राधा कॉलेज पहुँचते hi असहज होने लगी. उसने आज पहली बार ऐसे कपडे पहने थे. मुझे दिखने क लिए पेहेन तो लिए पर अब जैसे वो खुद को छुपाने की कोशिश कर रही थी . अभी तो हम पार्किंग में hi थे क वो चाँद लोगों की नज़रों से hi खुद को छुपा रही थी पता नहीं कॉलेज क अंदर क्या करेगी? खुद को छुपाने क लिए उसने अपना बैग छाती पर लगा लिया . मुझे उसे ऐसा करता देख हंसी आ गयी जिससे राधा का मुँह बन गया .

राधा : हंस क्यों रहे हो?

अमित : पहले तो खुद hi ये कपडे पेहेन लिए और अब ऐसे शर्मा रही हो ?

राधा : पहली बार पहने हैं मैंने तो लग रहा है जैसे

अमित : जैसे क्या ?

राधा : कुछ नहीं . हहह

इतने में कल्पना की कार भी आ गयी और उसमे से नेहा दीदी बहार निकली . पर जैसे hi कल्पना कार से बहार निकली तो हैरानी से मेरा मुँह खुला रह गया . असल में कल्पना एक ब्लू कलर क सूट पहने हुए थी. कल्पना ऐसे कपडे भी पेहेन सकती है ये तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. हमेशा रफ़ एंड टफ रहने वाली आज सलीके से भारतीय परिधान में थी . ऊपर से उसने बाल भी सलीके से खुले छोड़ रखे थे. मुझे अपनी तरफ ऐसे देखता प् कर एक पल तो वो भी शर्मा गयी . मुझे तो आज सरप्राइज पे सरप्राइज मिल रहे थे. कहाँ दिन की शुरुआत मैंने राधा को सरप्राइज दे कर की और अब मैं 2-2 सरप्राइज देख रहा था. वो दोनों जब चलते हुए मेरे पास आयी तो कल्पना hi बोली

कल्पना : ऐसे क्यों देख रहे हो जैसे अजूबा देख लिया हो ?

अमित : तुम्हारी तबियत तो ठीक है न ?

कल्पना : क्यों क्या हुआ मेरी तबियत को?

अमित : आज तुमने ऐसे कपडे क्यों पहने हैं ?

कल्पना : क्यों मैं नहीं पेहेन सकती क्या? आखिर मैं भी इंडियन हूँ.

नेहा दीदी : देखा कहा था न मैंने ये सरप्राइज होगा , मैं भी तो हो गयी थी. और अब दूसरा झटका मेरी इस छोटी बेहेन दे दिया है मुझे. बहुत hi प्यारी लग रही हो राधा सच में.

कल्पना ने जब राधा पर गौर किया तो वो भी सरप्राइज हो गयी.

कल्पना : ोये तू राधा hi हैं न ? मुझे लगा कोई और कड़ी है इसके साथ. तुम तो बहुत ज़बरदस्त लग रही हो . आज तो लड़कों की खरी नहीं. ाचा लगा तुम्हे इन कपड़ों में देख कर. ऐसे कपडे भी पहना करो. अभी तो दिन हैं पहनने क. बाद में क्या पता शादी म बाद सूट पहनना है या सदी.

राधा तो शर्मा रही थी और अपनी तारीफ सुन कर उसके गाल कश्मीरी सेब की तरह लाल हो रहे थे .

राधा : थैंक्स , वैसे आज तुम भी बहुत अछि लग रही हो. बिलकुल अलग, आज तो तुम लग hi नहीं रही क हमारी पहले वाली कपङा हो.

कल्पना : अब तुम्हारी और दीदी की सांगत में रह कर सोचा मैं भी थोड़ी वोकल बन hi जॉन. सुना है कुछ लोग सूट ज्यादा पसंद करते हैं वेस्टर्न ड्रेस क मुकाबले .

कल्पना का इशारा मेरी तरफ था.

कल्पना: वैसे तुम ये शर्मा क्यों रही हो? किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है तुम्हे. लोग तो देखते hi हैं चाहे कैसे भी कपडे पेहेन लो . किसी की परवाह मत करो अगर कोई भी कुछ कहे तो कान क नीचे लगा देना .

कल्पना ने अपने स्टाइल में बात कह hi दी जिसे सुन कर राधा मुस्कुराने लगी.

राधा : उसकी ज़रूरत नहीं है मुझे , ये है न .

राधा ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और मैं भी मुस्कुरा दिया.

नेहा दीदी : चलो अब अंदर चलते हैं वर्ण क्लास शुरू हो जाएगी.



नेहा दीदी की बात पर हम सब अंदर चल दिए. राधा अब बस नेहा दीदी से hi बात करती हुई अपने ब्लॉक में चली गयी . और मैं मन में सोच रहा था क आज पता नहीं और कौन कौन से सरप्राइज मिलने वाले हैं .
 
अपडेट 147



कल्पना क साथ मैं क्लास में पहुँच तो मोहित पहले hi आ चूका था. मेरी तरह उसकी भी ऑंखें फटी रह गयी. और क्लास में और भी कइयों को मैंने ऐसे हैरानी से कल्पना को देखता हुआ पाया.

मोहित : ये क्या ????

कल्पना : मुँह बंद करना वर्ण माल्हि घुस जाएगी. पहली बार देख रहा है क्या? मैं भी सूट पहनती हूँ .

मोहित क जवाब देने से पहले क्लास में चन्दर्कांता आ गयी और दोनों चुपचाप अपनी जगह बैठ गए और कल्पना भी मेरी साइड वाली रॉ में अपनी जगह. कल्पना से जब भी मेरी नज़र मिलती वो शर्मा जाती . आज पहली बार मैं कल्पना का ये रूप देख रहा था. उसके जैसी लड़की ऐसे शर्माना भी जानती है ये तो कोई सोच भी नहीं सकता होगा. किसी तरह चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम हुआ और फिर से मोहित से थोड़ी बहुत बात की जिसका कल्पना ने अपने स्टाइल में hi जवाब दिया. उसके बाद मंजू म हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई आयी और लेक्चर लेने लगी. मेरी तरफ देख कर मुस्कुराना जैसे नई आदत बन गयी थी पर वो इस बात का भी ख्याल रखती थी क किसी का इस तरफ ध्यान न जाये.

मंजू म क जाते hi हम अपने अड्डे की तरफ चल दिए. कैंटीन में पहुँचते hi नेहा दीदी मीनल रीमा और राधा भी आ गयी. रीमा भी इस मेहरून रंग क सूट में बड़ी प्यारी लग रही थी. ऊपर से उसका गोरा रंग भूरे बाल और ग्रे ऑंखें उसकी खूबसूरती को और भी बड़ा रही थी . एक बार मेरी उससे नज़र मिली तो वो मुस्कुरा कर शर्मा दी. मीनल और रीमा भी अब कल्पना का ये रूप देख कर हैरान हो रही थी.

मीनल : कमल है यार आज तो सरप्राइज पे सरप्राइज मिल रहे हैं. पहले ये हमारी भोली बेगम ने झटका दे दिया ऐसे कपडे पेहेन कर और अब हमारी लेडी डॉन आज ऐसे कपडे पेहेन कर जैसे एक नया hi रूप दिख रही है.

मीनल की इस बात पर राधा तो शर्माने लगी जबकि कल्पना ने मीनल को भी थोक दिया.

कल्पना : क्यों ? ऐसे कपडे पहनने क लिए किसी का लाइसेंस चाहिए? तेरे मजनू को तू ऐसे कपड़ों में अछि लगती हो न इस लिए तुम तो पहनोगी नहीं. वर्ण सँभालने में परेशानी होगी बाद में.

कल्पना ने आखिरी बात जिस मकसद से कही थी वो समझ कर मीनल की हवा टाइट हो गयी और कल्पना हसने लगी. अब मीनल कहाँ चुप रहने वाली थी.

मीनल : तो तुमलो कौन सा ऐसा लवर मिल गया जिसके लिए तुम ने काया बदल ली? पता तो चले लेडी ब्रूस ली को कौन सा जैकी चेन मिला है.

कल्पना : कोई भी हो तेरे मजनू से ाचा hi होगा.

नेहा दीदी : तो सच में तुम्हे कोई पसंद आ गया ? हमें नहीं बताओगी?

कल्पना : क्या दीदी आप भी उसकी बातों में आ गयी . आप को तो पता है न मेरा.

‘ वह आज तो सूरज पछिम से निकला है शायद, आयरन लेडी आज फूल बानी हुई है और माँ की गुड़िया हॉटट ‘

ये आवाज़ शालू की थी. शालू की बात पर राधा फिर से शर्मा गयी जबकि कल्पना मुस्कुराने लगी. . अभी शालू हमारे पास बैठी hi थी क एक और सरप्राइज सामने से आ कर खड़ा हो गया जिसने सबको hi सरप्राइज कर दिया . सामने शीना शिवानी क साथ आ कर कड़ी हो गयी. और आज वो भी एक बहुत hi अचे डिज़ाइनर सूट में थी. शीना जैसी लड़की जो हमेशा से कॉलेज में अपने रोअब से रही थी और हमेशा वेस्टर्न और सबसे मॉडर्न ड्रेसेस में , आज वो एक घरेलु लड़की की तरह नज़ाकत क साथ कड़ी थी और उसके चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान भी थी. मेरी तरह मोहित मीनल कल्पना नेहा दीदी और राधा भी उसे hi देख रहे थे. शालू और रीमा तो पहले hi उसे देख चुके होंगे . मुझे जब अपनी तरफ हैरानी से देखते हुए पता तो शीना की नज़रें झुक गयी और उसकी स्माइल और गहरी हो गयी.

शिवानी : कैसा लगा सरप्राइज ?

शिवानी की आवाज़ सुन कर मेरा ध्यान उसकी तरफ गया. वो तो सूट और जीन्स दोनों hi तरह क कपडे पहनती थी जो आज भी जीन्स टॉप में hi थी. मेरी शकल देख कर वो भी है रही थी . उसकी इस बात पर मीनल hi बोली.

मीनल : शीना दीदी आप भी ? आज हो क्या रहा है हर कोई सरप्राइज hi दे रहा है. वैसे दीदी आप तो इसमें कमल लग रही हो. मतलब एक डैम गॉर्जियस.

शीना : थैंक्स मीनल

कल्पना : सही कहा इसने दीदी आप तो यार सच में आज ज़बरदस्त लग रही हो.

शीना : तुम भी आज बहुत अछि लग रही हो कल्पना . तुम्हे देख कर तो मैं भी सरप्राइज हूँ.

नेहा दीदी : मुझे तो पता hi नहीं था तुम ऐसे कपडे भी पहनती हो. जो भी हो इसमें तुम पहले से कहीं ज्यादा अछि लग रही हो.

शीना : थैंक्स नेहा. पर आज तो राधा सबसे प्यारी लग रही है . देखो तो ज़रा बिलकुल hi बदल गयी है .

राधा : शरमाते हुए ) थैंक्स दीदी पर आप ज्यादा अछि लग रही हैं इन कपड़ों में.

शीना : थैंक्स

शिवानी : तुम कुछ नहीं बोलोगे ?

शिवानी ने मुझसे पूछा , मैं तो अभी शीना को hi देख रहा था. आज सच में वो खूबसूरत लग रही थी. वो हमेशा से hi खूबसूरत थी पर उन कपड़ों में तो जैसे उसकी सुंदरता कहीं ज्यादा निखार आयी थी. और उसका यूँ शर्माना और भी क़यामत था.

अमित : सच में आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं. मैं सोच भी नहीं सकता था क आप इन कपड़ों में ऐसी दिखती होंगी. आपको ऐसे कपडे भी पहनने चाहिए.

कल्पना : ताकि सब उन्हें hi देखते रहें और बाकि लड़कियां जलती रहें है न ??

शीना मेरी बात से जहाँ शर्मा रही थी वहीँ अब कल्पना की बात ने सबको हसने पर मजबूर कर दिया था.

अमित : वैसे आज ये सब हो क्या रहा है ? राधा का तो मैं समझ गया क उसने उस दिन जो ड्रेस ली थी वो पेहेन कर दिखा दी पर कल्पना और अब शीना ?

कल्पना : तो मैंने भी तो वही पहनी है जो तुमने ले कर दी थी उस दिन.

शिवानी : मैंने भी वही पहनी है

मीनल : मैंने भी यही ली थी

रीमा : मेरी और दीदी की भी वही है.

नेहा दीदी : मतलब सब उस दिन की शॉपिंग दिखने आये हैं और मैं hi रह गयी.

एक बार फिर सब है दिए . और बातें करने लगे . मेरी नज़र कैंटीन में बैठे बाकि स्टूडेंट्स की तरफ गयी तो बहुत सरे स्टूडेंट्स शीना को hi देख रहे थे. उसका ये बदला रूप सबके लिए झटका hi था. बातें करते हुए लेक्चर कब ख़तम हुआ किसी को पता hi नहीं चला . और बेल्ल क साथ hi हूँ सब उठ खड़े हुए. कैंटीन से बहार निकल कर अपने अपने ब्लॉक की तरफ हो लिए. रस्ते में शीना चलते हुए मेरे करीब आ गयी.

शीना : थैंक्स तारीफ क लिए, तुम्हे ाचा तो लगा न?

अमित : थैंक्स की क्या ज़रूरत है मैंने तो सच hi कह था. और आप सच में इन कपड़ों में बहुत जाँच रही हैं .

शीना : तुम्हे पसंद आया न ? मुझे भी ाचा लग रहा है . सोच रही हूँ अब ऐसे hi कपडे पहना करूँ. और मुझे नाम से hi बुलाया करो जैसे पहले बुलाते थे.

इतना कह कर वो मुस्कुराती हुई आगे निकल गयी . उसके बाद हम अपनी क्लास अटेंड करने लगे. अभी हम क्लास में बैठे hi थे क मेरे फ़ोन पर मीनल का मैसेज आ गया.

मीनल : अगले लेक्चर में मुझे लाइब्रेरी में मिलो.

बस इतना hi लिखा था मैसेज में . मैंने सोचा उसे कोई काम होगा मुझसे वरन वो ऐसे तो बुलाती नहीं है . मैंने भी ok का मैसेज कर दिया . जैसे hi लेक्चर ख़तम हुआ मैं कल्पना और मोहित से बाथरूम जाने का कह कर लाइब्रेरी में चला गया. हमारे कॉलेज में लाइब्रेरी बहुत बड़ी है और हर स्ट्रीम क लिए अलग hi सेक्शन है. रीमा को देखता हुआ मैं साइंस सेक्शन में गया तो हमेशा की तरह शांति थी. ये लेक्चर तकरीबन हर क्लास का hi बिजी होता है तो इक्का दुक्का hi स्टूडेंट्स थे इस वक़्त वहां पर. बड़ी बड़ी लकड़ी की बुक शेल्फ्स क पीछे कार्नर में मुझे रीमा अकेली कड़ी नज़र आयी जो शायद मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. मैं उसके पास गया तो मेरी आँखों में ख़ामोशी से देख रही थी. रीमा खामोश थी पर उसकी ऑंखें कुछ कह रही थी . मैं तो ये सोचकर आया था क शायद उसे कुछ काम होगा पर उसकी आँखों में छिपी बात समझ कर मैंने बिना कोई सवाल किये उसे बाँहों में भर लिया और उसके हाथ भी मेरी पीठ पर कास गए .

रीमा : तुम्हे बिलकुल भी मेरी परवाह नहीं है न ?

अमित : ऐसा क्यों कह रही हो ?

रीमा : तो क्या कहूं ? मेरे लिए टाइम hi नहीं है तुम्हारे पास . कभी कभी लगता है कहीं मैं तुम्हे खो hi न दूँ.

अमित : ये कैसी बातें कर रही हो तुम? भला ऐसे हो सकता है क मैं तुमसे दूर हो जॉन? और रही टाइम की बात तो मैं टाइम निकल कर बात करता तो हूँ तुमसे .

रीमा : सिर्फ फ़ोन पर बात करने से क्या दिल को करार आ जाता है ? क्या तुम्हारा दिल नहीं होता तुम मेरे साथ कभी अकेले में बैठ कर बातें करो. कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो. पता है जब सबको तुम्हारी तरफ देखते हुए उनकी नज़रों को महसूस करती हूँ तो दर लगता है कहीं कोई तुम्हे मुझसे छीन न ले.

अमित : कोई देखता है तो देखे पर तुम तो जानती हो न क मैंने सिर्फ तुम्हारा हूँ . और रही बात अकेले में मिलने की तो मेरा भी दिल करता है पर साथ में दर भी लगता है

रीमा : कैसा दर?

अमित : दर इस बात का क कहीं मैं अकेले में तुम मेरे साथ हो और मैं बहक जॉन तो फिर ये सही नहीं होगा.

रीमा : मैं तुम्हे बहकाने नहीं दूँगी और अगर कभी ऐसा हुआ भी तो प्यार में सब जायज़ है.

अमित : फिर से कहना

रीमा : ुँहुँणन

रीमा ने शर्मा कर मेरी छाती में चेहरा छुपा लिया . मैंने उसके चेहरे को थोड़ी से पकड़ कर उठाया तो उसने ऑंखें बंद कर राखी थी .

अमित : ऑंखें खोलो रीमा , मैं तुम्हारी आँखों में खुद को देखना चाहता हूँ.

मेरे इतना कहते hi रीमा ने अपनी खूबसूरत ऑंखें खोल ली और कुछ देर मैं उसकी आँखों में देखता रहा. रीमा भी ख़ामोशी से बस मुझे देखे जा रही थी. रीमा की आँखों में सिर्फ प्यार hi प्यार था और मैं उन समंदर सी गहरी आँखों में देखता हुआ उसके ऊपर झुकता चला गया . रीमा ने भी अपनी ाड़ियाँ उठा कर अपने गुलाबी नरम होंठ मेरे होंठो से लगा दिए और हम दोनों एक असीम आनंद क सागर में डूबता चले गए . रीमा मेरे गले में बहन डाले मेरे बाल सहलाती बस अपने नाज़ुक कोमल होंठों से मेरे होंठों को चूम रही थी. और मैं उसके होंठों से शहद चुराता हुआ बस शुन्य में चला गया. कब हमारे होंठ खुले और जीभ एक दूसरे क मुँह में आने जाने लगी पता hi न चला. पता नहीं कब तक हम एक दूसरे क होंठों को प्यार से चूम रहे थे क किसी क आने की आहत से हम अलग हुए. रीमा जल्दी से पीछे की तरफ चली गयी और मैं भी एक बार देख कर उसके hi पीछे हो लिया. इस तरफ कोई आया तो नहीं था पर आवाज़ पास से hi आयी थी तो हम वहां से हैट गए. शेल्फ क बिलकुल पीछे थोड़ी सी जगह कार्नर में थी जहाँ पर किसी की नज़र नहीं जा सकती थी वहां रीमा कड़ी हो कर अपनी साँसे ठीक कर रही थी . मुझसे नज़र मिलते hi वो शर्मा गयी . मैंने फिर से उसे बाँहों में भर लिया और एक छोटा सा किश उसके होंठों पर दे दिया.

अमित : अब शर्मा क्यों रही हो ? क्या मेरा किश करना ाचा नहीं लगा ?

रीमा : ाचा तो लगा पर यहाँ कोई भी आ सकता है. क्या हम कहीं बहार नहीं मिल सकते ?

अमित : सोच लो , तुम जो कह रही हो उससे क्या हो सकता है .

रीमा : बस एक hi बात दिमाग में चलती है क्या तुम्हारे ? मेरा मतलब था कभी हम अकेले में कहीं घूमें , मूवी देखें या फिर ऐसे घंटो एक दूसरे की बाँहों में बैठे बातें करें . क्या तुम नहीं चाहते ये सब? पता है मूवीज में जब भी हीरो हेरोइन का प्यार देखती थी तो यही सोचती थी क कभी मुझे भी कोई ऐसा प्यार करने वाला मिले जो मेरे साथ रहे , मुझे प्यार करे.

अमित : प्यार करने की hi बात मैं कर रहा था और तुम कहती हो क बस एक hi बात चलती है मेरे दिमाग में. अब बताओ हीरो हेरोइन मूवीज में क्या ऐसे प्यार नहीं करते ? एक दूसरे क साथ चिपके हुए बीएड पर

रीमा : गंदे , घूम फिर कर वहीँ पहुँच जाते हो. जाओ मैं बात नहीं करती तुमसे.

अमित : ाचा ठीक है बात नहीं करता पर प्यार तो कर सकता हूँ न .

रीमा : तुम सुधरोगे नहीं ?

अमित : अब प्यार करने का hi तो कहा है और तुम इसमें भी बुरा मन रही हो, अछि गफ हो?

रीमा : जानती हूँ किस प्यार की बात कर रहे हो तुम .

इतना कह कर रीमा मुझे पीछे धकेलती हुई नखरे से जाने लगी तो मैंने उसे पीछे से hi बाँहों में भर लिया . और उसकी बालों से आती खुशबु क साथ उसके बदन की महक को अपनी साँसों में भरते हुए मैंने उसकी गर्दन पर किश की और कहा

अमित : एक बात कहूं ?

रीमा : धीमी आवाज़ में ) ह्म्म्मम्म

अमित : आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.

रीमा मेरी बात सुन कर फिर से पलट गयी और खुद hi मेरे सर को पकड़ कर मेरे होंठों अपने होंठों में जकड कर किश करने लगी . एक गहरा चुम्बन करने क बाद वो सांस लेने क लिए अलग हुई मेरी आँखों में मदहोशी से देखते हुए बोली.

रीमा : ी लव यू माय लव , मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ मेरी हर साँस तुम्हारी है. मैं कभी तुम्हे किसी बात से नहीं रोकूंगी क्यूंकि मैं खुद तुम में समां जाना चाहती हूँ, इतना क कोई कभी भी मुझे तुमसे अलग न कर पाए .

रीमा ने एक hi लाइन में अपने प्यार की गहराई मुझे बता दी और मैं भी उसके प्यार की डोर से बंधा फिर से उससे जुड़ गया और उसे चूमते हुए अपने सीने से लगा लिया.

अमित : तुम्हे कोई मुझसे अलग नहीं कर सकता रीमा . तुम मेरी हो हमेशा मेरी रहोगी. ी लव यू .

कुछ देर रीमा मेरे साइन से ऐसे hi चिपकी रही और हम इस खामोश जगह पर बस एक दूसरे की धड़कनो को सुन रहे थे. तभी लेक्चर की बेल्ल बज गयी और हम अलग हुए. उसके बाद फिर से मैंने रीमा को एक छोटी सी किश की और हम दोनों अपनी अपनी क्लास में वापिस चले गए . आखिरी लेक्चर अटेंड करने क बाद मैं कल्पना और मोहित क साथ साइंस ब्लॉक में आ गया . कल्पना मेरे पिछले लेक्चर में एब्सेंट होने का पूछ रही थी पर मैंने इधर उधर की बात कर दी. पीछे पीछे शीना शिवानी और शालू भी हमारे पास आ गयी . और हम सब बाकि सब का इंतज़ार करने लगे. आखिरी लेक्चर ख़तम होते hi रीमा राधा मीनल और रहा दीदी भी हमारे पास आ गयी. हलकी फुलकी बात करते हुए हम पार्किंग में आ गए .

नेहा दीदी : तो आज किस तरफ जा रहे हो ?

अमित : फ़िलहाल तो राधा क साथ

नेहा दीदी : मेरा मतलब था आज बरी मौसी क घर या हमारे ?

अमित : दीदी 2 hi तो दिन हैं . परसों तो मुझे जाना है कम्पटीशन क लिए जहाँ 3 दिन तो लग hi जायेंगे तो क्या फायदा 2 दिन क लिए आपके या निधि दीदी क घर जॉन. फिर ाचा नहीं लगेगा क सिर्फ 2 क लिए आया. इस लिए अगले हफ्ते hi जाऊंगा.

नेहा दीदी : ये भी ठीक है. ाचा तो फिर चलते हैं मैं माँ को बता दूंगी.

उसके बाद सबने विदा ली और रीमा भी शर्माती मुस्कुराती मुझे आँखों से इशारा करती चली गयी शीना क साथ. राधा अलग hi खुश थी इस बात से क मैं आज भी उसके साथ जा रहा हूँ. बाइक पर पीछे बैठते hi मेरी कमर में हाथ दाल कर मेरे साथ सात कर बैठ गयी और हम निकला लिए .

वहीँ आज राधा क इस तरह ड्रेस उप होने से उसे देखने वाले आज अपनी लार टपका रहे थे. इनमे से उसके सेक्शन क hi 2 सीनियर लड़के अपने hi जुगाड़ में थे.

लड़का 1 : यार ये मरवायेगी मुझे , पहले hi इतनी खूबसूरत है और अब इतने दिनों से ऐसे ऐसे ड्रेस पेहेन कर आ रही है क कण्ट्रोल नहीं हो रहा. आज तो आग hi लगा दी है इसने . क्या कैसा हुआ बदन है . पूरा फिगर नज़र आ रहा है जैसे कपडे नहीं खाल hi चढ़ा राखी है. बहनचोद क्या क़यामत चीज़ है ये भी. एक बार इसको सेट कर लूँ तो लाइफ बन जाये. आज तो कैसे भी कर क इसे एक hi लूँगा. देखता हूँ कैसे मन करती है.

लड़का 2 : ऐ बावली गांड , ज़रा खुद पर काबू कर ले. जनता है न उस सांड को ? पहले hi दिन मोंटी को पेल दिया था साले ने. तू तो नहीं था पर मैंने देखा था. बहनचोद अकेले ने उसकी और उसके चमचों की पूरे कॉलेज क सामने बजा दी. जनता है न मोंटी को तो सेल हमारी औकात hi क्या है? इसी की वजह से हुआ था सब. ये उसकी खास hi है कोई , शायद सेटिंग hi हो.

लड़का 1 : तू तो साला ठुल्लू hi रहेगा गांडू. कोई सेटिंग नहीं है इसकी उसके साथ. पता कर लिया है मैंने. हाँ दोस्त ज़रूर है इसका वो शायद कोई रिश्तेदार भी हो . पर अपने को क्या ? इस आग लगाती जवानी को भी तो कोई सँभालने वाला चाहिए न. मैंने सोच लिया है सब , वो साला तो चला जायेगा बहार कॉलेज टीम क साथ उसके पीछे मैं उसे पक्का साला बना दूंगा अपना. देखता हूँ कैसे हाथ नहीं आती ये. मोंटी तो साला पागल था जो गलत काम कर गया ये तो प्यार करने वाली चीज़ है .

लड़का 2 : साले अछि तरह सोचले अपने साथ कहीं मेरी भी गांड न मरवा दियो.

लड़का 1 : अबे तू फत्तू कब से हो गया? मैंने सब सोच रखा है कुछ नहीं होगा .

इन सब से परे निधि क ऑफिस में आज उसका मैनेजर अपने जूनियर क साथ ज़रूरी बात कर रहा था अकेले में.

मैनेजर : सुन इस वीकेंड पर एक बर्थडे पार्टी अर्रेंगे कर ऑफिस में.

जूनियर : सर बर्थडे पार्टी आपकी hi करनी है न?

मानेगा: साले दिमाग क्या गांड में घुसा रखा है ? अपना बर्थडे पहले hi उसके सामने मन चूका हूँ मैं. अब क्या हर महीने बर्थडे मनाऊंगा ? किसी का भी कह कर पार्टी रख ले वीकेंड की . और ऑफिस में hi रखना साली बहार तो जाएगी नहीं कहीं.

जूनियर: सर ऑफिस में कैसे होगा ? मेरा मतलब किसी को भी पता चल सकता है और फिर बात नौकरी पर भी आ सकती है .

मैनेजर : यहाँ सब का बाप मैं हूँ आयी बात समझ में . और यहाँ हम कुछ नहीं करेंगे . कंपनी की बदनामी हुई तो साला बॉस hi माँ छोड़ देगा. यहाँ पर सिर्फ उसको हेरोइन बनाएंगे और बाकि का काम अपने ठिकाने पर.

जूनियर : पर सर अगर वो बाद में न मणि तो ?

मैनेजर : कैसे नहीं मानेगी ? इज़्ज़त सबको प्यारी होती है . तू बस उतना कर जितना कहा है .

जूनियर: ठीक है सर मैं अभी अर्रेंगे करता हूँ. पर सर मेरा भी सोच लेना थोड़ा

मैनेजर : है है है तू साला पूरा कमीना है . तुझे तो साथ रखना hi पड़ेगा . निगरानी भी तो ज़रूरी है पर पहले मैं अपना दिल भरने तक करूँगा बाद में तू कर लेना.

जूनियर : थैंक यू सर , यू अरे थे बेस्ट . मैं पार्टी का अरेंजमेंट करता हूँ.

इतना कह कर वो बहार निकल गया और मैनेजर अपने लैपटॉप पर निधि की फोटो निकल कर अपना लैंड मसलने लगा.

मैनेजर : अब तो तुझे अपनी रंडी बना क hi रहूँगा आठ

कॉलेज से जैसे hi हम घर पहुंचे तो राधा जल्दी से अपने कमरे में चली गयी और फिर से अपने रूप में वापिस आ कर मौसी का हाथ बताने लगी . थोड़ी देर में hi खाना लग गया.

दिव्या मौसी : तो कैसा रहा आज का दिन ? सब ठीक तो रहा न ?

अमित : सब ठीक रहा , जानती हो मौसी हर कोई राधा को देख कर शॉकेड था . हर कोई आज इसकी तारीफ कर रहा था.

दिव्या मौसी : मेरी बेटी है hi इतनी प्यारी .

अमित : होगी क्यों नहीं आखिर आपकी बेटी है आप जैसी hi तो है.

दिव्या मौसी मेरी बात पर मुस्कुरा दी . और राधा तो पहले hi खुश थी अपनी तारीफ पर.

राधा : माँ जानती हो आज तो कल्पना ने भी सबको सरप्राइज कर दिया.

दिव्या मौसी : वो कैसे ?

राधा : आज वो सूट पेहेन कर जो आयी थी. किसी ने सोचा भी नहीं था क कल्पना भी ऐसे कपडे पेहेन सकती है.

दिव्या मौसी : वो दिल की बहुत अछि है. पर ाचा होता वो भी तुम्हारे साथ आती . मैं भी तो देखती क कैसी लग रही है वो. इतने दिन हुए उसे देखा नहीं.

अमित : तू बुला लेते हैं उसे यहाँ पर.

दिव्या मौसी : अरे नहीं कहाँ आएगी बेचारी.

अमित : राधा तुम उसे फ़ोन लगाओ वो आ जाएगी . अभी नेहा दीदी क साथ hi होगी मेरे ख्याल से.

राधा ने तुरंत फ़ोन लगा दिया और मेरा अंदाज़ा सही था कल्पना रीता मौसी क घर hi थी. राधा ने उसे बताया क माँ तुमसे मिलना चाहती है तो उसने आने का कह दिया . हम तीनो बातें करते हुए खाना खाने लगे. इधर हमारा खाना ख़तम हुआ और उधर से कल्पना तूफ़ान माइक की तरह आ गयी.

कल्पना : कहाँ मदर इंडिया देखो मैं आ गयी.

कल्पना की आवाज़ सुन कर दिव्या मौसी जी अभी किचन में गयी थी बर्तन रखने वापिस आ गयी. सामने कल्पना को ऐसे सूट में कड़ी देख कर दिव्या मौसी भी शॉकेड हो गयी.

दिव्या मौसी: अरे वहहह !! आज तो मेरी बेटी पहचानी hi नहीं जा रही. ये चमत्कार कैसे हो गया ?

कल्पना: ये सब आप का hi असर है मदर इंडिया आप दोनों इतनी अछि लगती हैं सिंपल कपड़ों में क मैंने भी सोच लिया अब आपके जैसी hi बन जॉन.

इतना कह कर कल्पना दिव्या मौसी क गले लग गयी और दिव्या मौसी भी उसे प्यार देने लगी.

दिव्या मौसी : जीती रहो मेरी बची , किसी की नज़र न लगे तुम्हे

और एक कला टिका आँख क काजल से मौसी ने कल्पना को लगा दिया. कल्पना की आँख भर आयी तो दिव्या मौसी भी तड़प उठी .

दिव्या मौसी : क्या मेरी बची तेरी आँखों में आंसू?

कल्पना : कुछ नहीं आंटी बस आपको देख कर माँ की यद् आ गयी . अगर वो ज़िंदा होती तो वो भी ऐसे hi मुझे प्यार करती न.

दिव्या मौसी : क्या मैं तुम्हारी माँ नहीं ? तू भी राधा की तरह मेरी बेटी hi है. आज से कभी ये नहीं सोचना क तुम्हारी माँ नहीं है.

कल्पना ने ज़ोर से मौसी को गले लगा लिया. और आंसू बहाने लगी. दिव्या मौसी उसे दुलार कर रही थी.

कल्पना : आप बहुत अछि हैं आंटी , मैं कितनी खुशनसीब हूँ क मुझे 2-2 माँ मिल गयी. रीता आंटी भी आपकी तरह hi मुझे प्यार करती हैं.

माहौल थोड़ा सीरियस होता देख मैंने इसे हल्का करने की गरज़ से एक बात कर hi दी जिससे सबके चेहरे पर हंसी आ गयी .

अमित : तो इसका मतलब पहले रीता मौसी को भी रुला कर आ रही हो और अब दिव्या मौसी का no. लगा दिया .

कल्पना : तुम्हे क्या तकलीफ है ? मेरी माँ हैं दोनों , तुम अपना मुँह बंद रखो.

कल्पना ने अपने hi मिज़ाज से जवाब दिया तो मुझे भी ाचा लगा क वो फिर से नार्मल है.

अमित : मुझे क्या तकलीफ होगी बस सोच रहन हूँ क कहीं तुम सब का रोना धोना hi न शुरू करवा दो.

कल्पना : देखा आंटी इसे लगता है मैं आपको रुलाउंगी.

दिव्या मौसी : बिलकुल नहीं , तू तो मेरी बहादुर बेटी है. चल आ बैठ मैं खाना लगाती हूँ.

कल्पना : नहीं ौंटी मैं अभी खा कर hi आ रही हूँ. रीता आंटी ने ज़बरदस्ती खाना खिला कर भेजा था आज .

दिव्या मौसी : तो चाय बना देती हूँ . वो तो पि लो गई न?

कल्पना : ठीक है आप चाय बनाइये तब तक मैं इसकी खबर लेती हूँ.

दिव्या मौसी किचन में चली गयी और कल्पना मेरे करीब आ गयी. दिव्या बस चुप चाप उसे देख रही थी क वो क्या करने वाली है.

कल्पना : थैंक्स !! तुम्हारी वजह से मुझे इतनी अछि फॅमिली मिली है क अब दिल यही चाहता है क इनके करीब रहूं. मैंने हमेशा जो कमी महसूस की थी परिवार की वो लगता है जैसे अब पूरी हो गयी है.

अमित : ये कैसी बातें कर रही हो कल्पना? कितनी बार ये सब कहोगी ? हम दोस्त हैं कोई अजनबी नहीं हो एहसान समझ रही हो. जो कुछ मेरा है उसे अपना hi समझो.

राधा : सही कहा , और तुम जब चाहो यहाँ आ सकती हो. संडे को तो बोर होती हो न घर पर तो यहीं आ जाया करो .

कल्पना : अब से यही करुँगी .

थोड़ी देर में दिव्या मौसी चाय ले आयी और हमने मिल कर चाय पि. उसके बाद कालापन फिर आने का कह कर चली गयी और मैं भी कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में जा कर लेट गया और मेरी आँख लग गयी . मैं आराम से सो रहा था क मौसी ने hi मुझे जगाया और मैं उठ कर फ्रेश हो गया. एक बार फिर से चाय का कप

पिया और चल दिया स्टेडियम . आज कोच साहब ने सबको इकठ्ठा कर क लिस्ट बता दी क कौन कौन जायेगा कम्पटीशन में. बुधवार को कॉलेज से hi बसेस में सवार हो कर जाना था सब के साथ. अलग से जाने पर सीधे साफ शब्दों में उन्होंने मन कर दिया. सचेडूले कुछ ऐसा था क बुधवार को जाना और नेक्स्ट 2 दया कम्पटीशन और सैटरडे को प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन क बाद वापिस . वहां हमारे रहने क लिए हॉस्टल का इंतज़ाम था. कोच साहब में सबको मन लगा कर खेल पर ध्यान देने को कहा और स्ट्रेस से दूर रहने को कहा. और साथ hi ये भी एलान कर दिया क कल को प्रैक्टिस से छुट्टी रहेगी आराम करने क लिए. कोच साहब क बाद नीरज भैया मेरे पास आ गए.

नीरज : तो फिर तैयार हो छोटे भाई?

अमित : आपके सामने hi हूँ . मुझे नहीं लगता इस बार ाचा खेल पाउँगा .

नीरज : क्यों तुझे ऐसा क्यों लगता है?

अमित : आप को तो पता hi है चोट की वजह से इतने दिन मिस हो गए और अब उतना अचे से कर नहीं पाउँगा.

नीरज : देख मेरे भाई वो सब भूल जा. तेरे अंदर हम सब से ज्यादा डैम है. यहाँ की प्रैक्टिस अपनी जगह पर तू जिस मिटटी से तैयार हुआ है न उसके आगे ये सब फ़ैल है . और यकीन मान वहां शायद hi कोई होगा जो तेरी टक्कर का हो और अगर कोई हुआ भी तो मैं जनता हूँ तू देसी पता है आराम से पटक देगा.

अमित : आपको कुछ ज्यादा hi भरोसा है मुझ पर .

नीरज : इस लिए क्यूंकि मैं 3 साल से खेल रहा हूँ कॉलेज की तरफ से और जनता हूँ कैसे खिलाडी आने वाले हैं हमारे सामने . ाचा अब चल

उसके बाद हम लोग स्टेडियम से निकल गए . आज कोच साहब की एक्स्ट्रा क्लास से टाइम कुछ ज्यादा hi हो गया था. फिर भी मैं मंजू म क घर क लिए निकल गया . मंजू म क घर पहुँचते hi बुलेट की आवाज़ से दरवाज़ा खुल गया और दरवाज़े पर शीना कड़ी मुस्कुरा रही थी.

शीना : आज इतनी देर कैसे हो गयी ? मुझे लगा तुम आओगे hi नहीं.

अमित : वो आज कोच साहब कुछ समझा रहे थे तो वहीँ टाइम लग गया.

मंजू म : तो आ गए महाराज ? आइये बैठिये. वैसे तुमने कुछ नोट नहीं किया ?

अमित : क्या ?

मंजू म : शीना !! देखा नहीं आज कितनी प्यारी लग रही है इन कपड़ो में . मैं तो हैरान hi हो गयी थी इसे देख कर.

अमित : आपने सही कहा शी इस लुकिंग ब्यूटीफुल. पर क्या है न , हम तो कॉलेज में hi मिल लिए थे. पर सरप्राइज तो मैं भी हुआ था और मेरे साथ साथ सब hi हुए थे. किसी ने सोचा hi नहीं था क शीना ऐसे कपडे भी पहनती होगी.

शीना : स्माइल ) पहनती होगी नहीं पहने हैं . मैंने कभी ऐसे कपडे पहने hi नहीं थे वो तो अब तुम लोगों की कंपनी का असर है .

मंजू म : सही कहा , जैसी सांगत वैसी रंगत . मैं खुश हूँ क तुमने अचे दोस्त बना लिए हैं. तुम लोग बैठो मैं कॉफ़ी बना कर लायी.

इतना कह कर मंजू म कॉफ़ी बनाने चली गयी.

शीना : देखा बुआ भी खुश हैं और घर पर चची जी भी ऐसे hi खुश हुई थी मुझे इन कपड़ों में देख कर . ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है .

अमित : मेरी वजह से ? मैं समझा नहीं .

शीना : वो तुम लोगों की सांगत में आ कर hi तो मेरा भी मन हुआ ऐसे कपडे पहनने को वर्ण मैं तो पहनती नहीं थी.

अमित : तुम इन कपड़ों में वाकई में अछि लगती हो. खूबसूरत तो तुम पहले से hi हो और अब तो और भी ज्यादा लग रही हो.

शीना मेरी बात से शर्माने लगी

शीना : एक बात कहूं ?

अमित : कहो , इसमें पूछने की क्या ज़रूरत है?

शीना : वो मैं सोच रही थी अगर कल तुम थोड़ा टाइम निकल सको तो ..

अमित : कुछ काम है क्या ?

शीना : भूल गए , तुम्हारी शॉपिंग.

अमित : है है है क्या तुम भी , छोडो उस बात को.

शीना : तुमने वडा किया था.

अमित : ाचा ठीक है, पर अभी तो पॉसिबल नहीं . परसों मुझे कम्पटीशन पर जाना है . उसके बाद hi देखूंगा.

शीना : ाचा ठीक है पर यद् रखना. और एक बात ...

अमित : कहो

शीना : मेरा बर्थडे आ रहा है अगले महीने . मैं चाहती हूँ इस बार मैं बर्थडे तुम्हारे साथ ... मेरा मतलब है तुम सब क साथ मानों.

अमित : that’s ग्रेट , फिर तो सब मिल कर सेलिब्रेट करेंगे न. मगर पार्टी देनी पड़ेगी .

शीना : वो सब हो जायेगा .

मंजू म : किस बात की प्लानिंग हो रही है भाई मुझे भी तो बताओ.

शीना : कुछ नहीं बुआ , मैं कह रही थी इस बार मैं अपना बर्थडे अपने नए दोस्तों क साथ मनाऊंगी.

मंजू म : अरे हाँ तुम्हारा तो बर्थडे आने वाला है. अछि बात है अचे से मानना पर अपनी बुआ को मत भूल जाना.

शीना : ऐसा कभी हो सकता है बुआ ? अब मैं आपको नहीं छोड़ने वाली .

तभी दरवाज़े की घंटी बजी और जा कर मम ने hi दरवाज़ा खोला तो सामने डॉ रीना कड़ी थी. दोनों गले मिली और अंदर आ गयी . शीना को देख कर वो भी शॉक हो गयी.

डॉ रीना : शीनाआ !!!! व्हाट ा सरप्राइज. तुम तो पहचानी hi नहीं जा रही

शीना : कैसी हो दीदी.

डॉ रीना : मैं तो ठीक हूँ पर ये सब कब हुआ?

शीना : आप तो निकल जाती हैं जल्दी और देर से आती हैं . आपके पास समाया hi कहाँ होता है? मैं सुबह से hi इन कपड़ों में हूँ. चची जी या रीमा ने बताया नहीं क्या ?

डॉ रीना : अरे टाइम hi कहाँ मिलता है बात करने का. वैसे अछि लग रही हो तुम . और आप भी यहीं पर हैं जनाब. ईद का चाँद हो गए हो. सोचा खुद hi जा कर मिल लूँ यहाँ तो मिल hi जाओगे.

अमित : अरे ऐसी कोई बात नहीं है . ाचा हुआ आप यहीं आ गयी वर्ण टाइम hi नहीं मिलता . अब देखिये न वेडनेसडे को फिर से जा रहा हूँ बहार 3 दिन क लिए . कम्पटीशन है तो अगले हफ्ते hi मिलूंगा उसके बाद पहले hi बता देता हूँ .

डॉ रीना : मैं सोचती थी क मैं hi बिजी रहती हूँ शायद पर तुम तो मुझसे भी ज्यादा बिजी लग रहे हो.

मंजू म : तो तुम जा रहे हो फिर , जाने से पहले मिल कर जाना मैं तो वहीँ हूँगी कॉलेज में hi.

अमित : जी ज़रूर.

डॉ रीना : वैसे कौन से शहर में है कम्पटीशन?

अमित : क्सक्सक्सक्स शहर में .

डॉ रीना : हम्म्म वैसे जीत कर आओगे तो पार्टी देनी पड़ेगी पहली hi कह देती हूँ.

शीना : बिलकुल दीदी मैंने भी प्लान बना रखा है . ये और कल्पना दोनों जा रहे हैं और मुझे पूरा भरोसा है क दोनों hi जीत कर आएंगे.

डॉ रीना : that’s ग्रेट तो मुझे भी इन्विते करोगी न ?

शीना : क्या दीदी आप को भला कहने की ज़रूरत है ? बस आप hi कोई ऑपरेशन ले कर न बैठ जाना हॉस्पिटल में.

डॉ रीना : नहीं नहीं , मुझे पहले hi बता देना मैं छुट्टी ले लुंगी.

कुछ देर यूँही हम सब बातें करते रहे और फिर मैं वापिस घर आ गया. रत का खाना खाने क बाद कुछ देर राधा ने मेरे साथ बात की और चली गयी वो अपने कमरे में. दिव्या मौसी आज मेरे पास नहीं आयी तो मैं hi उठ कर उनके कमरे में चला गया . देखा तो बीएड पर लेती हुई थी. मैं चुप चाप उनके पास गया और उनके पाऊँ दबाने लगा. अचानक मौसी उठ कर बैठ गयी.

दिव्या मौसी : ये क्या कर रहे हो अमित ? तुम जा कर सो जाओ उठो चलो.

अमित : नहीं मौसी जी आप थक जाती हैं सारा दिन काम कर क आज मुझे अपनी सेवा करने दीजिये.

दिव्या मौसी : अरे उठ न , मुझे कुछ नहीं हुआ मैं ठीक हूँ. मेरी तो रोज़ की आदत है .

अमित : मैं जनता हूँ आप थकी हुई हैं . इसी लिए तो आप मेरे हाथ अस नहीं आयी. तो मैंने सोचा मैं खुद hi अपनी माँ क पास. चला जॉन .

दिव्या मौसी ने मेरे चेहरे को दोनों हाथों में थम लिया और प्यार से मुझे देखते हुए बोली.

दिव्या मौसी: इतनी भी परवाह मत कर क जब तू दूर जाये तो मैं रह न पौन.

अमित : मैं कहीं दूर जाऊंगा hi नहीं आपसे. बस आप मुझे खुद से अलग मत करना .

दिव्या मौसी: ऐसा कभी नहीं होगा कभी नहीं



इतना कह कर मौसी ने मुझे गले लगा लिया. उसके बाद मौसी क लाख मन करने क बाद भी मैं उनके पाऊँ दबाता रहा और जब उनकी आँख भरी हो गयी तो मैं उठ कर अपने कमरे में आ गया. टाइम काफी हो चूका था तो मेरी भी आंख लग गयी .
 
अपडेट 148



अगली सुबह मैं जल्दी उठा और ऊपर जा कर एक्सरसाइज करने लगा और कुछ देर बाद दिव्या मौसी मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी . दूध पि कर मैं नीचे आ गया और राधा को जगाया. सब कुछ रोज़ की तरह hi था और फिर हम नाश्ते क बाद कॉलेज चले गए . मंजू म का लेक्चर अभी चल hi रहा था क पेओन ने मुझे और कल्पना को प्रोफ़ेसर वरिंदर से उनके ऑफिस में मिलने को कहा. मम ने हम दोनों को जाने को कहा. हम जैसे hi उनके ऑफिस में पहुंचे तो वहां और भी कुछ स्टूडेंट्स खड़े थे हो शायद हमारी तरह hi किसी न किसी गेम क प्लेयर्स थे.

अमित : मई ी के इन सर

कल्पना : मई ी के इन सर

प्रोफ व् : यस के इन, आओ आओ बैठो. बीटा नोटिस तो तुम लोगों ने देख hi लिया होगा और कोच से भी पता चल गया होगा. फिर भी मैं बता दूँ क कल यहाँ से सब एक साथ जायेंगे जहाँ कम्पटीशन होने हैं. बॉयज और गर्ल्स क लिए अलग से रहने क लिए हॉस्टल का इंतज़ाम है . कल सुबह प्रिंसिपल सर खुद रवाना करेंगे सब को और मुझे यकीन है तुम लोग ज़रूर जीतोगे. कोई भी प्रॉब्लम हो तो साथ में कोच और स्टाफ से भी कुछ लोग साथ जायेंगे और मैं खुद भी जा रहा हूँ. बाकि प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन पर प्रिंसिपल सर भी आ जायेंगे. पिछले साल हम विजेता रहे थे और इस बार भी हमारी जगह वही होने चाहिए.

कल्पना : ज़रूर सर वे विल विन.

अमित : सर हम पूरी कोशिश करेंगे.

प्रोफ व् : बहुत अचे बीटा कोशिश करने वालों की कभी हर नहीं होती. मैं खुद साथ जा रहा हूँ और तुम मेरे टच में रहना . किसी तरह की भी कोई गड़बड़ हो जैसे क पहले हुआ था मुझे सबसे पहले पता होनी चाहिए .

अमित : जी सर.

प्रोफ व् : अब तुम लोग जा सकते हो . और हाँ अपने रिलेटेड प्रोफ़ेसर को अपने जाने का बता देना कहीं फिर से कोई शिकायत न कर दे तुम्हारी.

अमित : hi सर .

इतना कह कर हम सर से इजाज़त लेकर बहार आ गए .

कल्पना: ये क्या कह रहे थे सर? पिछली बार कौन सा पन्गा हुआ था?

अमित : वो कुछ नहीं , बॉयज कॉलेज क जिस लड़के से मेरा फाइनल था उसको मोंटी ने मुझे चोट पहुँचाने को कहा था और उसने कोशिश भी की थी पर ज्यादा कुछ कर नहीं पाया.

कल्पना : ऐसी भी घटिया प्लेयर्स होते हैं इस गेम में?

अमित : प्लेयर्स कभी गलत नहीं होते कल्पना. और जो गलत होते हैं वो प्लेयर्स होते hi नहीं. ऐसे लोग कभी आगे नहीं बाद पाते वहीँ रह जाते हैं. और ऐसा हर गेम में hi होता है . कोई न कोई ऐसा घटिया काम करने वाला मिल hi जाता है. चाहे दुश्मनी से करे या जेएलओसी से . लेक्चर तो ख़तम होने हो वाला है चलो कैंटीन में hi चलते हैं .

उसके बाद हम कैंटीन में आ गए. कुछ देर बाद लेक्चर की बेल्ल बजी और बाकि सब भी आ गए. शीना आज भी सूट में hi थी और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. और जैसे की सबको पता था क कल हम जा रहे हैं कम्पटीशन क लिए तो आज चर्चा का विषय यही था.

मोहित : तो किस लिए बुलाया था तुम दोनों को?

अमित : और किस लिए ? वही कल क बारे में बता रहे थे सर.

नेहा दीदी : क्या बताया ?

कल्पना : यही क कल सब साथ में यहीं से निकलेंगे 2 दिन कम्पटीशन और अगले दिन प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन क बाद वापिस .

नेहा दीदी : तो मतलब अब मंडे को hi वापिस कॉलेज आओगे ?

अमित : कल भी तो आ रहे हैं न. उसके बाद मंडे को.

शिवानी : तो इतने दिन रहने का क्या बताया ? होटल में या

कल्पना : होटल ?? कॉलेज स्टूडेंट्स को होटल में कौन ठहरता है? हॉस्टल में रखेंगे.

अमित : मोहित मैं ॉच रहा था क कल्पना भी जा रही है तो क्या तू दीदी और राधा को घर से कॉलेज लेन ले जाने का काम कर लेगा न?

मोहित : क्यों नहीं , इसमें कौन सी दिक्कत वाली बात है.

शीना : अगर ऐतराज़ न हो तो ये काम मैं कर सकती हूँ. वैसे भी रीमा को घर का तो पता hi है तो हम ले आएंगे और छोड़ भी देंगे.

अमित : तुम्हे खामखाह दिक्कत होगी , मोहित कर लेगा

शीना : तो क्या मैं दोस्त नहीं हूँ या मुझ पर भरोसा नहीं है ?

अमित : अरे ऐसा क्यों सोच रही हो तुम ? ाचा ठीक है दीदी से बात कर लो

नेहा दीदी : इसमें पूछने वाली क्या बात है ? वैसे किसी को परेशां होने की ज़रूरत नहीं है हम दोनों पहले की तरह खुद स्कूटी पर आ जायेंगे .

शीना : बिलकुल नहीं , आप दोनों मेरे साथ hi आओगी और जाओगी भी मेरे साथ .

रीमा : हाँ दीदी , वैसे भी दोबारा कभी जाने का मौका hi नहीं मिला राधा क घर और आपके घर भी मिल लेंगे आंटी से.

ऐसे hi हमारी सभा चलती रही और लेक्चर की बेल्ल बजने क साथ hi सब अपनी अपनी क्लास में चले गए . छुट्टी क बाद घर जाते समय राधा मुझसे बात करने लगी जो सुबह से काम hi बात कर रही थी .

राधा : तो कल तुम चले जाओगे ?

अमित : जाना तो है hi अब कम्पटीशन थोड़ा hi मिस कर सकता हूँ.

राधा : मेरा मतलब था क तुम ... ाचा तो वापिस आ कर क्या सीधा गाओं चले जाओगे ?

अमित : अब शनिवार को तो वैसे भी गाओं जाना hi होता है तो जाऊंगा hi.

राधा : तो फिर इसका मतलब आज आखिरी दिन है?

अमित : किस बात का ?

राधा : कुछ नहीं , वो कल तुमने जाना है न . तो फिर आज तो आखिरी hi दिन है न यहाँ पर.

अमित : हम्म्म

इतने में हम घर पहुँच गए और राधा बाइक से उतर कर अंदर चली गयी .

इधर घर में दिव्या फिर से अपनी सोच में hi डूबी बैठी थी. आज फिर उसने वही सपना देखा था . उसे समझ नहीं आ रहा था क आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. उसके शरीर में उत्तेजना बाद जाती थी जब भी उसे वो सपना अत . वो हर बार फूलों क बाघ में उस अनजान साये की बहिन में खुद को पति और जैसे hi दोनों एक दूसरे क करीब होते तो उत्तेजना से hi उसकी आ कह खुल जाती. उसे सपने में देखे साये की बाँहों की मजबूती अपने जिस्म पर उठने क बाद भी महसूस होती . पहले दिन तो उसने सोचा था क अमित की वजह से ऐसा बुआ है पर अब तो अकेले में भी उसे वो hi सपना आने लगा था. हर बार वो दामिनी की आवाज़ से उठती और उसी की आँखों में देखती हुई वो खुद को उस अनजान साये की बाँहों क घेरे में पति. वो अनजान साया कौन है और उसका दिव्या क सपने में ऐसे बार बार आना किस बात की और इशारा कर रहे थे ये उसे समझ नहीं आ रहा था. मगर ये भी सच था क जब वो सुबह उस सपने क साथ उठती तो अपने शरीर क नाज़ुक हिस्सों पर एक अकड़न उसे महसूस होती. दिव्या जितना इस सपने को भूलने की कोशिश करती उतना hi वो दिमाग में खलबली मचा देता. वो अपने मन की व्यथा किस्से कहे उसे समझ नहीं आ रहा था पर वो खुद को उस अनजान साये की गिरफ्त में घिरती महसूस कर रही थी.

खाना खाने क बाद मैं थोड़ी देर क लिए सो गया. शाम को मौसी ने जगाया और चाय दी . आज स्टेडियम तो जाना नहीं था इस लिए मैं सीधा मंजू म क पास hi चला गया . सोचा कुछ देर अकेले में मम क साथ थोड़ा वक़्त बिता लूँगा पर ऐसा हुआ नहीं क्यूंकि शीना भी उसी वक़्त वहां आ गयी थी.

मंजू म : तो कल जा रहे हो तुम

अमित : जी और वापिस सैटरडे को आऊंगा

मंजू म : मतलब अब अगले हफ्ते hi वापिस आओगे ?

अमित : जी

मंजू म : कम्पटीशन जीत कर आना , मुझे hi नहीं प्रिंसिपल सर को भी तुमसे बहुत उम्मीद है

शीना : बुआ शर्त लगा लो ये पक्का जीत कर आएगा और मैंने पहले hi कह रखा है क फिर हम सब मिलकर पार्टी करेंगे

मंजू म : तो एक और पार्टी तैयार है तुम लोगों की. अछि बात है.

अमित : आप दोनों तो ऐसे कह रही हो जैसे वहां पर वो लोग मेरा hi इंतज़ार कर रहे हैं जीत का मैडल देने क लिए . वहां भी तो मुकाबले क लिए मुझसे भी अचे खिलाडी आये होंगे.

शीना : पर तुम्हारे जैसा एक भी नहीं होगा मैं गारंटी से कह देती हूँ.

अमित : मुझ में ऐसा क्या खास है जो ऐसे कह रही हो?

शीना : जो दूसरों क लिए अपनी जान की बाज़ी लगाना जनता है उसके आगे सब फीके hi होते हैं. ताकत तो बहुत से लोग इकठी कर लेते हैं पर उस ताकत का इस्तेमाल सही तरीके से सब नहीं कर पते.

मंजू म : बिलकुल सही कहा, तुम्हारे साथ सिर्फ तुम्हारी म्हणत hi नहीं वो हज़ारों दुआएं भी हैं जो तुमने कमाई हैं. इस लिए तुम hi जीतोगे.

खैर थोड़ी देर मैं वहां बैठ कर पड़ा और फिर घर वापिस आ गया. हालाँकि मम ने मुझे रोकने की कोशिश की पर मैं कल क लिए तयारी करने का बहाना बना कर निकल आया. आज मैं समय से जल्दी वापिस आ गया था . बाइक की आवाज़ से hi राधा ने दरवाज़ा खोला. मुझे इतनी जल्दी देख कर वो बहुत खुश थी अब वो इतना खुश क्यों है ये मुझे नहीं पता था पर कोई बात तो थी.

अमित : आज क्या बात है इतना खुश हो रही हो ?

राधा : कुछ भी तो नहीं , क्यों मैं खुश नहीं हो सकती ?

अमित : अरे मैंने कब कहा ? तुम तो ऐसे hi हस्ती खेलती अछि लगती हो.

बातें करते हुए हम अंदर आ गए तो मैंने ध्यान दिया मौसी की कहीं कोई आवाज़ नहीं आ रही न hi वो दिखाई दी अभी तक .

अमित : मौसी नज़र नहीं आ रही ?

राधा : माँ मार्किट गयी हैं सबकी लेने .

अमित : तो तू घर पर अकेली हो ?

राधा : और कोई है क्या यहाँ पर हम दोनों क सिवा ?

राधा ने बड़ी नरमी से ये शब्द कहे . और नज़रें झुका ली.

अमित : मौसी को क्या ज़रूरत थी जाने की ? मुझे बता देती . अब खुद उठा कर लाएंगी सब्जी.

राधा : तुम चिंता मत करो हमेशा माँ hi तो लती है. और ज्यादा दूर नहीं है , यहीं पास में है मंडी .

अमित : जो भी हो मेरे होते उन्हें नहीं जाना चाहिए . बताओ मुझे कहाँ है मंडी मैं उन्हें अभी लेकर अत हूँ.

राधा : अरे तुम चिंता मत करो माँ आ जाएगी . तुम बैठो तो सही

अमित : बाद में बैठूंगा पहले बताओ मुझे किधर लगती है ये मंडी?

राधा : यहीं जो आगे परक है न उसके आगे वाली खुली सड़क क किनारे पर hi लगती है .

अमित : तुम दरवाज़ा बंद कर लो मैं मौसी को ले कर अत हूँ.

राधा : ठीक है .

मैंने बाइक को किक मरी और 2 मिनट्स में hi वहां पहुँच गया जहाँ मंडी लगी हुई थी. अब मंडी में क्या हल होता है आप जानते hi हैं . ज्यादातर औरतें अपने अपने हस्बैंड या घरवालों क साथ सभी की खरीद दरी कर रही थी. और हर मंडी की तरह यहाँ पर भी कुछ ठरकी किसम क लोग लगे हुए थे औरतों क पिछवाड़े पर हाथ लगाने या लैंड घिसने. मैं बाइक को साइड में लगा कर मौसी को ढूंढने लगा. तभी मेरी नज़र मौसी पर पड़ी वो एक जगह सब्जी ले रही थी . अपनी पसंद की सब्जी लेने क लिए वो झुक कर देख रही थी क इतने में एक आदमी उनके पास आकर खड़ा हो गया. मेरी नज़र मौसी पर hi थी. मौसी क शरीर को झटका लगा और तुरंत पलट गयी और उस आदमी की तरफ गुस्से से देखने लगी . मैं समझ गया क ज़रूर उसने कोई हरकत करि है मौसी क साथ. वो आदमी भी साला कोई पक्का ढीठ था मौसी को देख कर मुस्कुराने लगा . मौसी सब्जी वहीँ छोड़ कर दूसरी जगह चली गयी तो वो आदमी फिर से उनके पीछे जा कर खड़ा हो गया. इससे पहले क वो फिर से कोई हरकत करता मैं फिरती से उसके पीछे पहुँच गया और उसका एक बाजु मरोड़ कर पीठ पर लगा कर दूसरे हाथ से उसकी गर्दन झुकाते हुए उसे वहीँ ज़मीन पर लिया दिया.

अमित : क्यों बे सेल औरतों की इज़्ज़त करना नहीं सिखाया माँ ने? वो hi तो औरत hi होगी न जिसने तुझे जनम दिया , क्या तुझे बाकि सब में वो नज़र नहीं आती .

आदमी : आआह्ह्ह्ह छोड़ मुझे भेनचोद कौन है तू. छोड़

अमित : अभी बताता हूँ मैं कौन हूँ.

मैंने उस आदमी का सर ज़ोर से पटक कर ज़मीन पर मारा और उसे उठा कर 8-10 थप्पड़ उसके मुँह पर मारे. साथ hi पास में पड़ा किसी आवारा सांड का गोबर उठा कर उसके मुँह और कपड़ों मर मॉल दिया.

अमित : आज क बाद किसी औरत क साथ छेड़ कहानी की न तो यद् रखना हाथ पाऊँ से नाकारा कर दूंगा . जिसके साथ तू बदतमीज़ी कर रहा था न वो माँ है मेरी . आज माफ़ कर रहा हूँ अगली बार नहीं करूँगा.

तब तक वहां आस पास लोग इकठ्ठा हो चुके थे और मेरी बातें सुन कर उन्हें पता चल गया क उस आदमी ने क्या किया है . अब ऐसे लोगों से तो हर कोई परेशां रहता है कुछ औरतें जो पास में hi कड़ी थी उन्हें भी गुस्सा आ गया और शुरू हो गयी उस आदमी की छित्तर परेड.

औरत : जीना हराम कर रखा इन जैसे मुश्टण्डों ने, अकेले में तो यहाँ आ hi नहीं सकती हम .

औरत 2 : कवि औरतों को तो ऐसे हाथ कहते हैं जैसे हम इंसान नहीं इनके इस्तेमाल की चीज़ हैं . इन जैसे लोगों को सजा मिलनी hi चाहिए.

बस फिर क्या था बहती गंगा में कइयों ने हाथ साफ कर लिए और आदमी का मर मर कर भुर्ता बना दिया. जा मेरी नज़र पास में कड़ी दिव्या मौसी पर पड़ी तो उनकी ऑंखें नाम थी पर चेहरे पर ख़ुशी भी थी.

अमित : चिंता से ) मौसी आपकी आँखों में आंसू ?

दिव्या मौसी : ख़ुशी क हैं , कौन माँ खुश नहीं होगी ऐसे बेटे पर जो अपनी माँ क सम्मान क लिए किसी से भी भीड़ जाये . मैं आज बहुत खुश हूँ बेटे .

इतना कह कर मौसी ने मुझे गले लगा लिया.

दिव्या मौसी : तू सच में मेरा बीटा है. मैं कितनी खुशनसीब हूँ क तुम जैसा बीटा मिला है .

अमित : बस माँ और नहीं , ये आंसू आपकी आँखों में अचे नहीं लगते . आपको मेरी कसम आप नहीं रोयेंगी.

दिव्या मौसी : रो कहाँ रही हूँ मैं ? चल अब घर चल.

मैंने मौसी क हाथ से सब्जी का खोला लिया और उन्हें साथ ले के बाइक क पास आ गया . वो खुद मेरे हाथ से खोला लेकर पीछे बैठ गयी और हम चल पड़े घर की तरफ .

दिव्या मौसी : तू आज इतनी जल्दी कैसे आ गया? और तुझे कैसे पता मैं यहाँ हूँ?

अमित : आज प्रैक्टिस से छुट्टी थी तो बस ट्यूशन से सीधा घर आ गया. राधा ने. बताया क आप यहाँ हैं तो मैं पीछे आ गया. पर यहाँ जो देखा वो बर्दाश्त नहीं हुआ . क्या हमेशा यही होता है यहाँ पर ?

दिव्या मौसी : नहीं हमेशा तो नहीं होता पर दुनिया में ऐसे क्यों घटिया लोग हैं बीटा जो मोके क फायदा उठाते हैं. औरतें बेचारी अपनी इज़्ज़त को बचने की खातिर चुप रह जाती है और इन जैसे लोगों का हौंसला बाद जाता है

अमित : पर ये तो गलत है न मौसी , ऐसे चुप रहने से ये लोग रुकते नहीं . इनका विरोध तो करना hi चाहिए न ताकि दुबारा ऐसी घटना न हो . आप दुबारा ऐसे अकेले नहीं आये hi यहाँ.

दिव्या मौसी : अरे बीटा तू ऐसे hi चिंता कर रहा है. तूने जो आज किया है न उसके बाद तो किसी की हिम्मत भी नहीं होगी मेरे आसपास भी आने की. देखा नहीं क्या हल कर दिया सब ने मिल कर . तूने भी ाचा सबक सिखाया . सब क सामने मुँह कला कर दिया उसका. ाचा अब राधा क सामने इसका ज़िकर मत करना वर्ण बेचारी टेंशन ले लेगी.

हम घर पहुँच गए थे और मौसी ने बाइक से उतरने से पहले hi मुझे ये कह दिया. राधा ने दरवाज़ा खोल दिया था और मौसी सीधा अंदर चली गयी . मौसी क पीछे पीछे मैं भी अंदर आ गया और राधा हमारे लिए पानी ले आयी. उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और कल क लिए अपने कपडे एक बैग में डालने लगा . थोड़ी देर बाद राधा मेरे लिए चाय ले कर मेरे पास आ गयी.

राधा : मैं कुछ मदद करूँ ?

अमित : नहीं बस हो गया.

राधा : लो चाय पियो मैंने बनाई है.

अमित : फिर तो पिणि hi पड़ेगी , तो अब रसोई का काम करने लगी हो तुम.

राधा : ये तू मैं पहले भी करती थी चावल और रोटी भी बना लेती हूँ बस दाल सब्जी माँ अभी बनाने नहीं देती पर अब मैं वो भी सिख जाउंगी.

अमित : अरे तुम तो लगता है सीरियस hi ले गयी मैंने तो बस मज़ाक में कहा था.

राधा : चाहे मज़ाक में कहा था पर बात तो सही की थी न. कल को तुम्हारी बीवी अगर तुम्हे खाना बना कर न खिला पाए तो तुम्हे क्या ाचा लगेगा?

अमित : अरे तुम किन बातों में पद गयी , वैसे चाय अछि बानी है.

राधा : थैंक्स , तुम 4 दूसरे शहर में रहोगे तो तुम्हे कैसा लगेगा? जहाँ तक मुझे पता है तुम कभी अकेले कहीं बहार रहे नहीं ऐसे.

अमित : अकेला कहाँ हूँ ? और भी तो साथी होंगे वहां पर . और नीरज भैया तो हैं hi.

राधा : फिर भी घर की यद् तो आएगी न ?

अमित : वो तो अति hi है , अब घर तो घर होता है उसकी अपनी जगह है चाहे आप कहीं भी रहो.

राधा : मुझे भी यद् करोगे न ?

अमित : नहीं

मेरे इतना कहते hi राधा थोड़ी मायूस सी हो गयी. मैंने उसका मज़ा लेने क लिए hi ये कहा था.

अमित : क्यूंकि यद् उन्हें किया जाता है जिसे भुला दिया हो और तुम्हे मैं कैसे भुला सकता हूँ?

मेरी बात सुनते hi राधा क चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी .

राधा : मैं रोज़ शाम क तुम्हे फ़ोन करुँगी तुम बात करोगे न ?

अमित : क्यों नहीं करूँगा ? वहां कौन सा शाम को क्लास लगनी है.

‘ तो बैग अभी से तैयार कर लिया तुमने ‘

दिव्या मौसी हाथ में चाय का कप लिए हमारे पास आ गयी .

अमित : जी मौसी , सोचा अभी से पैक कर देता हूँ बाद कुछ hi भूल hi न जॉन.

दिव्या मौसी : मैं पैक कर देती तुम्हे इसकी ज़रूरत नहीं थी. वैसे जाना कहाँ है कम्पटीशन क लिए?

अमित : जी क्सक्सक्सक्स शहर में कम्पटीशन है. वहीँ रहना है सैटरडे को वापिस.

मेरी बात सुन कर दिव्या मौसी एक डैम चुप

हो गयी और किसी सोच में दुब गयी . उनके चेहरे पर आयी गंभीरता देख कर मुझे लगा क कोई बात ज़रूर है.

अमित : क्या हुआ मौसी ? आप परेशां क्यों हो गयी ?

दिव्या मौसी : नं नहीं ऐसी बात नहीं . तुमने घर पर बताया था क तुम कहाँ जा रहे हो?

अमित : मैं तो बता कर hi आया था क मैं कम्पटीशन पर जा रहा हूँ बुधवार को. आज भी माँ बाबा से बात हुई थी फ़ोन पर.

दिव्या मौसी : किस जगह जा रहे हो ये नहीं बताया ?

अमित : इस बारे में तो बात हुई hi नहीं. बाबा ने पूछा भी था आज पर बातों बातों में भूल गया.

दिव्या मौसी : वहां कहाँ रहोगे ?

अमित : हॉस्टल में इंतज़ाम किया गया है हमारे रहने का और स्टाफ भी साथ hi होगा .

दिव्या मौसी : अछि बात है, वहां कम्पटीशन क लिए जा रहे हो तो इधर उधर मत निकलना कहीं पर भी . अपना ध्यान रखना और रोज़ मुझसे फ़ोन पर बात ज़रूर करना.

अमित : जैसा आप कहें मौसी .

दिव्या मौसी : ाचा तुम दोनों बातें करो मैं ज़रा खाना तैयार करती हूँ.

राधा : सुना न माँ ने क्या कहा ? रोज़ फ़ोन करोगे तुम. ाचा मैं भी ज़रा माँ क साथ थोड़ा काम करवा लूँ तब तक तुम भी आराम कर लो.

उसके बाद रत का खाना हमने साथ में खाया और कुछ देर राधा मेरे कमरे में फिर से आ गयी और मेरे साथ बात करने लगी. दिव्या मौसी जब काम ख़तम कर क मेरे कमरे में आयी तो उन्होंने राधा को सोने भेज दिया और खुद मेरे पास बैठ गयी .

दिव्या मौसी : सो जा बीटा अब आराम कर ले कल तुझे जाना भी है.

अमित : आप पहल मेरे पास बैठिये. अब बताइये आप किस बात से परेशां हो गयी थी उस शहर का नाम सुन कर?

दिव्या मौसी : नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं . तू . तू जनता है उस शहर से क्या रिश्ता है हमारा?

अमित : बाबा ने और अंकल ने बताया था क पापा उसी शहर क थे. हमारा घर वहीँ था पहले .

दिव्या मौसी : तू तुझे सब पता है ? मेरी एक बात मानेगा?

अमित : हुकुम कीजिये

दिव्या मौसी : मैं नहीं चाहती क तू वहां अपने घर या उससे जुड़े लोगों को तलाशने की कोशिश करे.

अमित : ये बात बहुत पहले बाबा ने भी कही थी . उन्होंने मुझे कसम दी थी क मैं किसी को खोजने की कोशिश न करूँ . मैं उनकी कसम तोड़ नहीं सकता मौसी . पर क्या ये सही है ? मतलब जिन लोगों ने मेरे माता पिता क साथ बुरा किया क्या मैं उनको कुछ न कहूं?

दिव्या मौसी : जो कुछ सब भूल चुके हैं उसे तू क्यों यद् करवाना चाहता है? तू बस वही करेगा जो तुझे कहा है.

ये सब कहते हुए दिव्या मौसी की आवाज़ भरी हो गयी थी और आँखों में भी नमी आ गयी थी.

अमित : मैं ऐसा नहीं करूँगा मौसी पर मेरे दिल में कभी कभी इस बात से दुःख ज़रूर होता है क मैंने अपने माँ बाप क लिए कुछ नहीं किया.

दिव्या मौसी : कैसे नहीं किया ? सबको इतना प्यार करता है क्या ये काम है ? किसी को सजा देने से ाचा है किसी को प्यार देना. तूने वो किया जो तुम्हारी माँ करती थी. सबको खुश रखना.

अमित : पर मौसी

दिव्या मौसी : बस अब और कोई बात नहीं .

फिर देर हम दोनों hi खामोश रहे और मौसी मेरे पास hi बीएड पर बैठ गयी और मेरा सर अपनी गॉड में ले कर सहलाते हुए बोली.

दिव्या मौसी : एक बात तो बता ? तू वहां इतने गुस्से में क्यों आ गया था?

अमित : गुस्सा नहीं आना चाहिए था क्या ? मेरे सामने कोई मेरी माँ को छेड़ेगा तो उसको क्या ऐसे hi जाने दूंगा ? शुक्र करो क अपने पाऊँ पर चल क गया है .

दिव्या का दिल अमित की ये बात सुन कर प्यार से भर गया और उसका सीना गर्व से फूल गया.

दिव्या मौसी : अगर तुझे कोई चोट लग जाती तो?

अमित : तो क्या हुआ मौसी ? माँ क सम्मान क लिए तो बेटे क खून की एक एक बूँद भी बह जाये तो काम है.

दिव्या मौसी ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

दिव्या मौसी : मरूंगी अगर फिर से ऐसी बात की तो. तुझे तो मेरी उम्र भी लग जाये बीटा. तुम हो तो मैं हूँ तुम्हे कुछ हो गया तो मैं भी कहाँ रह पाऊँगी. दामिनी तो चली गयी क्या तू भी मुझे ऐसे छोड़ कर जाने की बातें करेगा अब?

दिव्या मौसी की आंख से आंसू की दो बूंदे मेरे ऊपर गिरी तो मैं उठ कर बैठ गया और मौसी को गले लगा लिया .

अमित : ये क्या मौसी आपकी आँखों में आंसू , मत रोइये मौसी , मैंने कहा था न अब आप नहीं रोयेंगी. बहुत रो लिया अपने.

दिव्या मौसी : खुद hi रुलाता है और खुद hi बात करता है . क्यों करता है ऐसी बातें ?

अमित : सॉरी मौसी गलती से निकल गयी थी. अब आप चुप करिये और यहीं मेरे साथ लेट जाइये . आज मैं अपनी माँ क साथ सोना चाहता हूँ .

दिव्या मौसी : आजा मेरे बचे तुझे मैं सुलाती हूँ.

दिव्या मौसी ने फिर से मेरा सर अपनी गॉड में रखा और सहलाने लगी. उनकी ममता की छांव में कब मेरी आँख लगी मुझे भी पता न चला.

‘ दूर हटो मुझसे , नहीं नहीं दूर हटो . बचाओ बचो कोई बचाओ मुझे ‘

दिव्या किसी सुनसान जगह पर अकेली मदद क लिए चिल्ला रही थी जहाँ एक काली परछाई भयंकर हंसी हस्ती हुई उसकी और बाद रही थी. दिव्या अकेली असहाये बेबस रोटी हुई मदद की गुहार लगा रही थी और उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था. वो भागने की कोशिश कर रही थी पर उसके पाऊँ जैसे किसी चीज़ से जकड़े हुए थे और वो परछाई लगातार उसकी तरफ बाद रही थी. दिव्या को अपनी इज़्ज़त अपनी दुनिया लूट टी हुई नज़र आ रही थी. तभी अँधेरे में से रौशनी की किरण उसकी तरफ बढ़ने लगी और उसका आकर बढ़ने लगा.

‘ मैं आ गयी मेरी बहिन मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगी. मेरे होते कोई तुम्हे छू भी नहीं सकता ‘

ये आवाज़ दामिनी की थी जिसे सुनते hi दिव्या में जैसे जान आने लगी और वो रौशनी बढ़ती हुई एक साये का रूप ले कर सामने आ कड़ी हुई जिसकी ऑंखें दामिनी की थी. वो काली परछाई जैसे hi दिव्या क दमन को पकड़ने लगी तो इस रौशनी क साये ने फ़ौरन उसे काली परछाई को बीच में से काट दिया और वो भयंकर चीखों से बिलबिलाता हुआ वहीँ तड़प तड़प कर मर गया . दिव्या जो पहले रो रो क फरियाद कर रही थी अब उसकी आँखों में या रक्षक क लिए सम्मान था. या रक्षक ने दिव्या क बंधन काट कर उसे आज़ाद कर दिया और दिव्या दामिनी की ऑंखें देखती हुई दौड़ कर उसके सीने से जा लगी. देखते hi देखते आसपास का अँधेरा गायब हो गया और स्वर्णिम उजाला हर तरफ फ़ैल गया .

‘ दिव्या , मेरे होते तुम्हे कुछ नहीं हो सकता. अब से तुम्हारी हर मुश्किल हर दुःख मेरा है . तुम अब अकेली नहीं हो मैं हर वक़्त तुम्हारे पास hi रहूँगा. जब भी पुकारोगी मुझे अपने पास पाओगी .’

उस रोशन साये ने जिसकी ऑंखें दामिनी की थी दिव्या की आँखों में देखते हुए ये सब कहा. दिव्या क दिल में अचानक उसके लिए प्यार उमड़ आया और उसने उस साये को कास क गले लगा लिया. अगले hi पल उस रक्षक साये की मजबूत बहन उसे अपने गिर्द लिपट टी महसूस हुयी और वो उस मजबूर पौरुष में खुद को मेहफ़ूज़ पाकर बिखर सी गयी. एक मधुर संगीत सा फ़िज़ाओं में बजने लगा और हर तरफ महकते हुए फूल साँसों में सुगंध घोलने लगे. दिव्या ने उन आँखों में देखा और खुद बा खुद वो दिल क आगे हारती हुई उस रक्षक को चूमने क लिए उसकी होंठों की तरफ अपने होंठ बढ़ाने लगी. अभी तक जहाँ पर सिर्फ एक रोशनी थी एक एक उस जगह दो होंठ उभर आये और दिव्या ने उन होंठों को अपने होंठों में ले कर चूमना शुरू कर दिया. दिव्या की ऑंखें इस मधुर एहसास में अपने आप बंद हो गयी और अम्बरबैल की तरह उससे लिपट टी हुई उसके होंठ चूमने लगी. धीरे धीरे ये चुम्बन और भी गहरा होता गया और दिव्या ने उस अपनी बाँहों में और भी कास लिया. किसी प्रेमिका की तरह वो बस अपने प्रेमी को चूमती जा रही थी. उसने अपनी एक तंग उठा कर उसकी मजबूत टांगों से लपेट कर उसकी पिछली साइड से रगड़नी शुरू कर दी . दिव्या को अपनी टांगों क जोड़ में अपने नाज़ुक हिस्से पर एक उभर सा महसूस हुआ और वो बेकरार सी और भी ज्यादा सख्ती से उस साये से लिपट कर उस उभर को अपने योन अंग पर दबाने लगी. दिव्या को अपने कूल्हों और अपनी छाती पर जब अपने उस रक्षक प्रेमी क हाथों का दबाव महसूस हुआ तो उसे लगा जैसे उसके जिस्म पर कोई कपडा है hi नहीं. उसके हाथों का स्पर्श से दिव्या को लग रहा था क जैसे उसके जिस्म से वस्त्र गायब हो गए हैं. दिव्या अपने जिस्म में उत्तेजना बढ़ती हुई साफ़ महसूस कर रही थी और उसने अपनी उत्तेजना शांत करने क लिए अपने इस अदृश्य प्रेमी को खुद hi नीचे लिया कर अपने दोनों घुटने उसकी कमर क गिर्द करते हुए अपना संवेदनशील अंग उसके उभरे हुए अंग पर रखा और उसे अपने अंदर सामने क लिए खुद अपना ज़ोर लगाना शुरू कर दिया. पर पता नहीं किस वजह से उसका वो उभरा अंग दिव्या क अंदर समां नहीं रहा था . दिव्या को अब ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती हुई उसे अपने अंदर सामने की कोशिश कर रही थी. दिव्या ने खुद hi अपने उस रक्षक प्रेमी का मुँह अपनी छाती पर दबाना शुरू कर दिया. तभी उसे अपने प्रेमी की जगह अमित का चेहरा नज़र आया और वो उसकी आँखों में खोयी उसे देखने लगी. दोनों का ये आपसी प्रेम आलिंगन जैसे ईश्वर को भी ाचा लगा और यकायक बारिश की बूंदे दोनों को भिगोने लगी. एक झुरझुरी सी दिव्या क बदन में हुई और उसका शरीर जैसे सूखे पत्ते की तरह कम्पनी लगा और उसकी ऑंखें खुल गयी

आँख खुलते hi दिव्या ज़ोर ज़ोर से सांसे लेती हुई अपनी धड़कन कण्ट्रोल करने लगी. और जैसे hi वो संभाली उसने अपनी हालत देखि तो उसकी आँखें बहार आ गयी. वो खुद अमित क ऊपर आधी छड़ी हुई थी. साडी का पल्लू छाती से हैट चूका था और एक तंग अमित क ऊपर थी जहाँ पर से साडी जांघ तक छड़ी हुई थी. अगले hi पल उसे अपनी योनि चिचिपि सी महसूस हुई. उसे खुद पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी. जल्दी से वो अमित क ऊपर से हटी तो उसकी नज़र अमित की पेण्ट में बने तम्बू पर गयी. न चाहते हुए भी दिव्या की नज़र उसी जगह जैम गयी. उस जगह का उभर ये बताने क लिए काफी था क ये कोई साधारण अंग नहीं है. दिव्या क मन में खुद hi विचार आने लगे और वो उसके बारे में अंदाज़ा लगाने लगी . अगले hi पल उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वो तेज़ी से बीएड से निचे उतर कर बहार निकल गयी. दिव्या खुद को कोसती हुई सीधा बाथरूम में गयी और जल्दी से अपनी सपने की वजह से गीली हुई पेंटी की वजह से कपडे उतर कर नहाने लगी. इतनी रत में वो अपनी आग को शांत कर रही थी मगर आँखें बंद करने से hi उसे अमित क लोअर में बना वो उभर फिर से नज़र आने लगा. वो जल्दी से खुद की हालत ठीक कर क अपने कमरे में जा कर बीएड पर लेट गयी . मगर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी ऑंखें बंद करने की , क्यूंकि ऑंखें बंद करती तो अमित का वो उभरा भाग नज़र आने लगता और ऑंखें खोलती तो उसे अपने सपने में आज अमित को देखना याद आने लगता

दिव्या : ये मुझे क्या हो रहा है ? ये पाप है , मैं क्यों उसी क बारे में सोचती जा रही हूँ? मेरे सपने में आने वाला वो साया अमित कैसे हो सकता है? क्या दामिनी जो कुछ मुझसे कह रही थी वो अमित क शब्द थे ? या दामिनी मुझे कुछ कह रही है ? नहीं ये मैं क्या सोचने लगी , ऐसा नहीं हो सकता वो मेरे बेटे जैसा है . नहीं ये गलत है



खुद को समझती वो सोने की कोशिश करती पर आँखों क आगे वही मंज़र आने लगता तो उसने फैसला कर लिया क वो अब सोयेगी hi नहीं. इधर कमरे से जाते hi अमित ने आँखें खोल कर दिव्या को जाते हुए देख लिया था. असल में दिव्या जब सपने अमित से लिपट रही थी और उसके ऊपर चढ़ती हुई अपनी कमर उसके लैंड पर घुसा रही थी तो दबाव से अमित की नींद खुल गयी थी मगर वो जान बुझ कर सोने की एक्टिंग करता रहा . वो देखना चाहता था क ये सब क्या हो रहा है. उसे पता था क उसके पास उसकी दिव्या मौसी है पर वो ये सब क्यों कर रही है ये उसे देखना था. और जैसे hi दिव्या अपने सपने से बहार आयी तो अमित को भी एहसास हो गया क ये सब वो सपने में कर रही थी और उसने कनखियों से दिव्या को अपने लैंड वाली जगह को घूरते हुए भी देख लिया था. दिव्या तो चली गयी पर अमित एक बात समझ गया क उसकी मौसी शायद बहुत ज्यादा तड़प रही है अंदर से. पति क होते भी वो अकेली रहती है . एक औरत में जो अरमान होते हैं वो सब दिव्या मौसी में थे पर वो खुद को जैसे अपने अंदर hi दबाये हुए थी. आज अमित को दिव्या की तड़प महसूस हो रही थी पर वो इस मामले में कुछ और नहीं कर सकता था. दिव्या क लिए उसके मन में एक खास जगह थी जो वो कभी बदलना नहीं चाहता था. पर दिव्या की ये तड़प अब उसकी परेशानी बनने वाली थी.
 
भाई आज की छुट्टी , कल कोशिश रहेगी अपडेट देने की
 
अपडेट 149



अगली सुबह मैं अपने टाइम पर उठा और एक्सरसाइज करने छत पर चला गया. आज हैरानी की बात ये थी क दिव्या मौसी मुझे न दूध देने आयी न hi वो अभी तक नज़र आयी थी. मुझे रात का मंज़र याद आया तो मन में ये ख्याल आया क कहीं मौसी रत की वजह से परेशां तो नहीं ? वो तो नींद में hi वो सब कर रही थी शायद कोई सपना देख रही होंगी ऐसा पर उठने क बाद जो देखा उन्होंने कहीं उनको मेरी हरकत तो नहीं मन रही ? मैं इस विचार क आते hi मौसी क रिएक्शन को लेकर चिंतित हो गया. कहीं वो फिर से पहले की तरह मुझसे नफरत न करने लगें. मैं आहिस्ता से उनके कमरे क पास गया तो दरवाज़ा अभी बंद था . हल्का सा धक्का दिया तो दरवाज़ा खुलता चला गया . दिव्या मौसी अपने बीएड पर तक लगाए कुछ सोच रही थी और अभी तक जैसे कमरे से बहार hi नहीं आयी थी. रत वाले आरामदायक कपडे पहने इस वक़्त तक वो कभी नहीं रहती थी. उनको सोचते हुए देख कर मैं समझ गया क वो ज़रूर रत वाली को hi सोच रही होंगी. मैंने डरते डरते उन्हें आवाज़ दी

अमित : मौसी

मेरी आवाज़ को तो मौसी ने जैसे सुना hi नहीं . वो भी भी वैसे hi बैठी थी. मैंने फिर से आवाज़ दी पर अभी भी वो वैसे hi थी. फिर मैं चल कर उनके पास आया तो देखा उनकी ऑंखें लाल थी और आँखें नींद से भी बोझिल सी थी. मैंने मौसी क कंधे पर हाथ रख उन्हें हिलाया.

अमित : मौसी आप ठीक तो हैं ?

दिव्या मौसी : हड़बड़ाते हुए) ह है हाँ. म मम मैं ठीक हूँ मैं ठीक हूँ . तुम उठ गए ?

अमित : मौसी जी अब तो 7 बज गए. आप मुझे ठीक नहीं लग रहीं . आपकी ऑंखें इतनी लाल क्यों हैं ?

दिव्या मौसी : 7 बज गए ? तुम जा कर तयारी करो मैं नाहा कर नाश्ता बनती हूँ . और कुछ नहीं हुआ है मुझे वो बस आज नींद कैच ज्यादा hi आ गयी थी.

इतने कह कर मौसी जल्दी से उठ कर कमरे से निकल गयी.

दिव्या ( मन में ) ये मुझे क्या हो रहा है? मैं क्यों बार बार एक hi बात सोच रही हूँ? इसमें उसकी तो कोई गलती नहीं है. मैं खुद hi .... नहीं मैं खुद कैसे ये सब कर सकती हूँ? ये उस सपने की वजह से है. आखिर क्यों बार बार मुझे ऐसे सपने आ रहे हैं ? ये मुझे क्या हो रहा है? आज तो वो साया एक पल को अमित क रूप में कैसे बदल गया ? क्या वो अमित hi है? दामिनी मेरी बहिन ये क्या हो रहा है मेरे साथ ? क्यों तुम मुझे खींच कर उस दलदल में ले जा रही हो जो मेरी जान ले लेगी ? वो हमारा बीटा है . मैं कैसे उसे उस रूप में देख सकती हूँ ? मुझे बचा लो मेरी बहिन ये सब मेरा साथ क्यों हो रहा है मुझे बचा ले मेरी बहिन बचा ले.

असल में दिव्या रत से एक पल भी सोई hi नहीं थी और लगातार तक ताकि लगाए बस अपने अंदर मचे हुए कोतुहल से जूझ रही थी. ऑंखें बंद करने से दर रही थी क कहीं फिर से वो ख्वाब न दिखे और ऑंखें खुली रखने से उसका दिमाग उसे चैन से बैठने नहीं दे रहा था . शांत से नज़र आ रहे चेहरे क पीछे जैसे विचारों की जंग सी लगी हुई थी. दिव्या को समझ नहीं आ रहा था आखिर कैसे इतने सालों बाद उसकी सोई हुई भावनाएं अचानक से जागने लगी हैं? आखिर कैसे वो इतना उत्तेजित हो गयी क नींद में hi वो इतना गीली हो गयी? इतने सालों से उसने तो खुद भी कभी अपने उस नाज़ुक हिस्से की छुआ तक न था और आज वो खास अंग ऐसे फड़क रहा था जैसे उसके अंदर की साडी छिपी हुई गर्मी लावा बन कर उस योनि रुपी ज्वालामुखी क मुँह से बहार निकल आएगी. खुद को किसी तरीके संभालती हुई वो जल्दी से बाथरूम में घुस कर नहाने लगी क्यूंकि उसे नाश्ता बनाना था. आज पहली बार वो इतनी देर से तैयार होने लगी थी.

मौसी ने मुझ पर न गुस्सा किया न कोई और बात की जिससे मुझे कुछ रहत तो मिली पर मैं इस बात को भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था क वो अंदर से व्यथित ज़रूर हैं. खैर अपने विचारों को विराम लगता हुआ मैं राधा को जगाने चला गया . राधा अपने बिस्टेर पर नहीं थी, शायद आज वो वक़्त से पहले hi उठ गयी थी. अभी मैं उसके कमरे में खड़ा hi था क बाथरूम का दरवाज़ा खुला और अंदर से राधा बहार निकली. राधा को देखते hi मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी दिल की धड़कन मेरे कानो में बजने लगी. मैं तो वहीँ पर जड़ हो गया. असल में राधा अपने कमरे में आत्ताच बाथरूम से नाहा कर बहार निकली थी और इस वक़्त उसके ताज़े नहाये बदन पर सिर्फ एक टॉवल था जो छाती से लेकर जांघों तक था और कुछ पानी की बूंदे कहीं कहीं ऐसे लग रही थी जैसे गुलाब पर ौस की बूंदे पड़ी हो. गीले बल कन्धों पर बिखरे हुए भी कुछ बूंदे गिरा रहे थे. गोरा गुलाबी बदन जैसे दूध में जैसे थोड़ा सा लाल रंग मिला दिया गया हो. छरहरा बदन जैसे खास सांचे ढला हुआ . हाथ पाऊँ तो जैसे लाल hi लग रहे थे और उसकी एक नज़र देखते हुए जब मेरी नज़र उसके चेहरे पर पड़ी तो शर्म से वो भी लाल हो चूका था. नज़रें झुकाने भी ऐडा ऐसी थी क मनो अदाओं से hi किसी को भी घायल कर दे. मैं तो जैसे किसी तिलिस्म में कैद सा हो हो गया था. और मुझे इस तिलिस्म की कैद से राधा ने hi आज़ाद किया.

राधा : प्लीज ऐसे मत देखो मुझे शर्म आ रही है. मुझे नहीं पता था तुम मेरे कमरे में हो .

अमित : वो वो हाँ मैं वो , सॉरी गलती हो गयी.

मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या कहूं ? अनजाने में मुझसे गलती हो गयी थी और अपनी गलती को ठीक करने की बजाये राधा को इस तरह घूर कर मैंने एक और गलती कर दी. मैं खुद पर hi जैसे काबू नहीं कर प् रहा था और तेज़ी से बहार निकल गया राधा क कमरे से. अपने कमरे में आ कर भी अभी तक मेरी धड़कने रेल गाडी की तरह hi दौड़ रही थी. मैंने अपनी उखड़ी हुई सांसों को दुरुस्त करने की कोशिश की. और तब तक दिव्या मौसी मुझे दूध का गिलास दे कर किचन में चली गयी . मैं यही सोच रहा था क राधा अब मेरे बारे में क्या सोचेगी ? एक तो मैंने उसे इस हालत में देख लिया ऊपर से नज़रें हटाने की बजाये मैं उसे ऐसे घूर रहा था , सच में बड़ी गलती हो गयी .

उधर अमित क जाते hi राधा शर्माने क साथ साथ मुस्कुरा भी रही थी. उसे इस बात पर शर्म भी आ रही थी क वो इस हालत में अमित क सामने थी पर साथ hi वो अमित को इस तरह बदहवास खुद को देखते देख कर खुश भी थी. राधा क तो मन मंदिर में अमित hi जैसे देवता बन कर विराजमान था . वो खुद को बस उसकी की अमानत समझती थी और चाहती थी क अमित क इलावा उसे कोई न देखे. आज जिस तरह अमित ने उसे देखा एक पल का शर्माना तो हुआ पर इस बात से वो खुश भी हुई क उसके देवता को वो पसंद आयी. वो मुँह से बोल तो नहीं पति थी क्यूंकि शुरू से hi उसका स्वभाव hi ऐसा था जो उसे अपनी माँ से hi मिला था पर राधा अपनी भावनाये ज़ाहिर करने की कोशिश ज़रूर करती थी अमित क पास रहते हुए जिसे वो जान कर भी अनजान बना फिर रहा था .

राधा ( शरमाते हुए ) पागल , कैसे देख रहा था मुझे ? शर्म नहीं आती ऐसे देखते हुए ? कोई ऐसे देखता है भला ? काम से काम एक बार तारीफ hi कर देते अगर ाचा लगा था तो . सच में बुद्धू हो बुद्धू पर जैसे भी हो बस मेरे हो .

अपने सर पर खुद hi चपत लगाती वो तैयार होने लगी . और कुछ देर में hi एक बढ़िया सी बेबी पिंक और वाइट कॉम्बिनेशन क इस सूट में वो पिंक रोज सी बन कर तैयार हो चुकी थी .

इधर मैंने खुद को संभाला और जल्दी जल्दी स तैयार हो गया. दिव्या मौसी ने भी नाश्ता बना दिया था. जैसे hi नाश्ते क टेबल पर बैठे हुए मैंने राधा को अपनी तरफ आते देखा तो एक बार फिर से मेरी नज़र उस पर जैम गयी . पिंक कमीज और वाइट सलवार का ये सूट उसके गुलाबी रंग से मैच कर रहा था. जैसे hi हम दोनों की नज़र आपस में मिली तो एक पल क लिए राधा भी वहीँ थम गयी और मैं भी बस उसे hi देखता रहा. राधा की आँखों में अपने लिए किसी गुस्से या शिकायत की जगह मुझे कुछ और hi नज़र आ रहा था. हम दोनों बस एक दूसरे में hi खोये थे की दिव्या मौसी खाने की प्लेट ले आयी.

दिव्या मौसी : कड़ी क्यों हो बैठो ? चलो नाश्ता करो जल्दी से .

दिव्या मौसी की बात से हम दोनों hi होश में आये. राधा जल्दी से अपनी चेयर पर बैठ गयी और मैं भी बस नाश्ता करने लगा. नाश्ता करते हुए भी मैं जब नज़र राधा की तरफ करता तो हम दोनों की नज़र मिल hi जाती. नज़र मिलते hi हम दोनों शर्मा जाते . जैसे तैसे खाना खा कर हम दोनों कॉलेज जाने क लिए उठ गए. मुझे तो आज जाना था कम्पटीशन क लिए सो किताबों की जगह कपड़ों वाला बैग लिया. मैं कमरे से बैग ले कर बहार आया और मौसी क पाऊँ छू कर आशीर्वाद लिया .

अमित : आशीर्वाद दो माँ मैं ाचा करूँ .

दिव्या मौसी ने मुझे गले लगा कर मेरा माथा चुम लिया.

दिव्या मौसी : जीते रहो बीटा , भगवन करे तू जीत कर आये. ले जाने से पहले दही शक्कर खा ले . देखना तू ज़रूर जीत कर आएगा.

दिव्या मौसी ने अपने हाथों से कटोरी से दही मुझे खिलते हुए कहा. मैंने भी उनके हाथों से दही खाया और एक बार फिर से उनके गले लग कर मिला जाने से पहले. राधा मेरे हाथ से बैग पकड़ कर पीछे बैठ गयी और हम निकल पड़े कॉलेज की तरफ. कुछ देर हम दोनों hi खामोश रहे फिर मैंने hi बात शुरू की

अमित : राधा तुम नाराज़ तो नहीं हो मुझसे वो गलती से मैं उस वक़्त तुम्हारे कमरे में आ गया था और फिर ....

राधा : इसमें तुम्हारी क्या गलती है ? तुम तो मुझे जगाने hi आये होंगे. मैं hi दरवाज़ा बंद करना भूल गयी थी.

अमित : मगर मैं वहां से हटने की बजाये तुम्हे देखता रहा मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. पर पता नहीं मुझे क्या हो गया था, मैं किसी अदृश्य ताकत क वाश में जकड़ा वहीँ खड़ा तुम्हे देखता रहा

राधा ( शरमाते हुए ) हाँ देखा था मैंने कैसे मुँह खोले देख रहे थे जैसे अजूबा देख लिया हो.

अमित : तुम हो hi इतनी खूबसूरत क मेरी नज़रें तुम्हारे चेहरे से हैट hi नहीं रही थी. बिलकुल किसी अप्सरा सी लग रही थी तुम. मनो सीधा इंद्रलोक से धरती पर उतर आयी हो.

अनजाने में मेरे मुँह से ये शब्द निकल तो गए पर फिर मुझे एहसास हुआ एक और गलती हो गयी मुझसे .

अमित : सॉरी मुझे ऐसे नहीं कहना चाहिए

राधा : तारीफ करने क लिए भी कोई सॉरी कहता है क्या ? वैसे इतनी भी खास नहीं हूँ मैं

अमित : तुम क्या हो तुम खुद भी नहीं जानती. बिलकुल गुलाब सी लग रही हो आज तुम.

राधा : शरमाते हुए ) अब तारीफ hi करते रहोगे

कुछ देर क लिए हम दोनों फिर से खामोश हो गए. फिर राधा बोली

राधा : पता है मैंने सोचा था क आज मैं तुम्हे जगाउंगी पर तुम तो बहुत पहले hi उठ जाते हो . जब मैं तुम्हारे कमरे में आयी तो तुम छत पर थे. फिर मैंने तुम्हे डिस्टर्ब नहीं किया और वापिस अपने कमरे में आ गयी .

अमित : हाँ वो जल्दी उठने की आदत है न मुझे. रोज़ जल्दी उठ कर सुबह एक्सरसाइज करता हूँ.

राधा : अगली बार मैं पहले उठ कर तुम्हे जगाउंगी जब तुम आओगे.

अमित : फिर तो तुम्हे अपनी नींद ख़राब करनी पड़ेगी . क्यूंकि मैं 5 बजे उठ जाता हूँ.

बातें करते हुए हम कब कॉलेज पहुँच गए पता hi न चला. अभी हम पार्किंग में hi थे क कल्पना की कार भी आ गयी. और जब दरवाज़ा खुला तो मैं और राधा दोनों hi हैरान हो गए. कल्पना नेहा दीदी क साथ आज करुणा और नैना दीदी भी थी. दोनों को देख कर मैं शॉकेड हो गया क वो आज कैसे हमारे कॉलेज आ गयी. दोनों चलती हुई मेरे पास आयी नाराज़गी दिखते हुए नैना दीदी बोली .

नैना दीदी : शर्म तो आती नहीं न तुम्हे ? इतने दिनों से न कोई फ़ोन न खुद मिलने आये न हल चल hi पूछा .

दोनों hi गुस्से और नाराज़गी से मुझे देख रही थी , बात भी सही थी क इतने दिनों से मैंने उनसे बात तक नहीं की थी.

अमित : दीदी वो मैं वो

करुणा दीदी : क्या वो वो लगा रखा है ? बंद दुनिया में है भी या नहीं काम से काम इतना तो पूछ hi सकता है न? मिलने से तो रहे तुम हम गरीबों से.

अमित : दीदी आप ये कैसी बातें कर रही हैं.

नैना दीदी : तो और क्या कहें? एक बार भी फ़ोन किया क्या खुद से? वो तो हम एक्साम्स में बिजी थी दोनों वर्ण मौसी क घर hi आ कर तुम्हारी खबर लेती . और आज कम्पटीशन पर जा रहे हो वो भी नहीं बताया . ये तो ाचा हुआ नेहा से पता चल गया वर्ण तुमने तो ये भी नहीं बताना था.

अमित : सॉरी दीदी गलती हो गयी . मुझे माफ़ कर दो

नैना दीदी : ठीक है ठीक है , तुम कम्पटीशन पे जा रहे हो तो मैं कुछ नहीं कहती वर्ण आज तेरी अचे से खबर लेती .

अमित : आप दोनों ऐसे अचानक?

करुणा दीदी : क्यों हम नहीं आ सकते क्या यहाँ ? हम तुमसे मिलने आयी हैं और साथ में आज तुम्हारा कॉलेज भी देख लेंगे बड़ा नाम सुना है इसका. वह मेरी गुड़िया आज तो बड़ा निखार रही हो . लगता है तुम्हे भी कॉलेज की हवा लग hi गयी.

करुणा दीदी अब राधा की तरफ हो गयी. राधा तो उनकी बात सुनते hi शर्मा गयी .

नैना दीदी : सच में गुड़िया आज तो तू बहुत सुन्दर लग रही है. आज तो लड़कों की खैर नहीं .

राधा : शरमाते हुए ) क्या दीदी आप भी , सुन्दर तो आप दोनों लग रही हैं. ाचा किया आप यहाँ आ गयी . इसी बहाने आप से मिलना तो हो गया वर्ण आप तो शहर में रहते हुए भी मिलने नहीं आती.

नैना दीदी : अभी बताया न एक्साम्स चल रहे थे. अब तो मैं फ्री हो गयी हूँ अब तो आती रहूंगी. वैसे तू भी तो आ सकती थी न. इतने दिनों से ड्राइवर पास था तो एक बार मर hi लेती चक्कर.

नैना दीदी का इशारा मेरी तरफ hi था.

कल्पना : सच में दीदी आप दोनों बड़ी मज़ेदार हो . आप क साथ मेरी बहुत जमने वाली है. काश आप भी इसी कॉलेज में होती. वैसे आज आप आ hi गयी हैं तो जब तक हम इधर हैं चलो आपको अपने कॉलेज को दिएर करवाते हैं.

हम सब मिल कर अंदर चल दिए. कल्पना की कार आज ड्राइवर ले कर आया था तो वहीँ से वापिस चला गया. हम अंदर चलते हुए क्लास जाने की बजाये नैना दीदी और करुणा दीदी को कॉलेज दिखाने लगे. नेहा दीदी और राधा भी क्लास नहीं गयी और हमारे साथ hi घूमने लगी. नैना दीदी और करुणा दीदी तो कॉलेज को देख देख कर खुश हो रही थी. उनके लिए तो ये उनका ड्रीम कॉलेज था . वो खुद hi तारीफ करती और मायूस भी होती क वो इस कॉलेज में नहीं हैं.

करुणा दीदी : सच में यार कितना ाचा कॉलेज में बिल्कु फिल्मों की तरह. काश हम भी यहाँ होते

नैना दीदी : सच में यार कितना ाचा है. कितनी फ्रीली घूम रहे हैं सब यहाँ. एक हमारा कॉलेज है सिर्फ गर्ल्स hi गर्ल्स ऊपर से टीचर्स की रेस्ट्रिक्शन्स.

नेहा दीदी : करुणा से ) तो पड़े में ध्यान देना था न. मैंने तो पहले hi कहा था ध्यान दो पड़े पर . अगर मेरी तरह अचे no. लिए होते तो तुम भी यहाँ होती.

करुणा दीदी : क्या दीदी आप तो बोरिंग हो , सारा दिन बस किताबों में घुसी रहती हैं. मुझसे नहीं होता.

कल्पना : वैसे दीदी आप कॉलेज मिलने तो आ hi सकती हैं. जब दिल करे आ जाया करिये. साथ में मज़े करेंगे .

नैना दीदी : मज़े तो वाकई में करते अगर यहाँ होते.

ये बात नैना दीदी ने मुझे देखते हुए कही तो मैंने उनकी बात सुन कर नज़रें घुमा ली. घूमते हुए हम कैंटीन में पहुँच गए तो कैंटीन में पूरी पल्टन मौजूद थी. हमें देखते hi सब खड़े हो गए और फिर बरी बरी से मैंने सबको नैना दीदी और करुणा दीदी से मिलाया और उन्हें भी अपने ग्रुप से इंट्रोडस करवाया.

नैना दीदी : यार सच में तुम लोगों का ग्रुप तो बड़ा ाचा है . मतलब सब एक से एक स्मार्ट गर्ल्स हैं यहाँ पर.

करुणा दीदी : सही कहा दीदी. सब कितनी प्यारी हैं रीमा से तो पहले मिल चुकी हूँ आज इन सब से मिल लिया. वैसे शीना यार तुम भी बड़ी कमल हो सच में रीमा से काम नहीं हो तुम भी .

शीना : ( शरमाते हुए ) आप दोनों भी बहुत प्यारी हैं बिलकुल नेहा दीदी और राधा की तरह. और बातों से तो लग रहा है आप इन दोनों से अलग हैं

नैना दीदी : वो तो है , ये दोनों तो किताबों में घुसी रहती हैं और हम कैंटीन में.

नैना दीदी की बात पर सब हसने लगे. तभी मुझे नीरज भैया का फ़ोन आया वो मुझे प्रिंसिपल सर क ऑफिस की तरफ आने को कह रहे थे. मैं बाकि सबको वहीँ वेट करने का कह कर कल्पना को साथ लिए प्रिंसिपल सर क ऑफिस की तरफ आ गया . जहाँ सब प्लेयर्स मौजूद थे. थोड़ी देर में प्रिंसिपल सर ने आकर सबको बेस्ट विशेष दी और कॉलेज का नाम रोशन करने को कहा. बुस्सेस कॉलेज में आ चुकी थी . सबकी लिस्ट बन चुकी थी लड़के और लड़कियों को अलग अलग बस में बैठना था. साथ में जाने वाला स्टाफ भी मौजूद था. सर ने सबको ब्रीफ कर दिया क 1 घंटे क बाद बुस्सेस चलेंगी तब तक किसी को कोई काम हो तो कर ले. हम दोनों वापिस कैंटीन में आ गए जहाँ सबका दिल नैना दीदी और करुणा दीदी ने लगाया हुआ था.

मोहित : कहाँ चले गए थे?

अमित : कुछ नहीं वो प्रिंसिपल सर ने सबको बुलाया था वहीँ गए थे . 1 घंटे बाद बुस्सेस चलेंगी.

करुणा दीदी : मतलब बस 1 घंटा hi हमारे पास ? हम तो सोच कर आये थे क काम से काम 12-1 बजे तक तो साथ रहेंगे hi .

कल्पना : वो सर बता रहे थे क जितना जल्दी जायेंगे उतना ज्यादा रेस्ट करने को मिलेगा कल ज मैचेस से पहले. काम से काम 3 घंटे तो लग hi जायेंगे सफर में .

रीमा : मैं ज़रा अभी आयी

शीना : तुम कहाँ जा रही हो ?

रीमा : दीदी वो ज़रा लाइब्रेरी में एक काम था अभी आयी मैं .

रीमा जाते जाते मुझे पीछे आने का इशारा कर गयी तो मैं भी 2 मिनट्स बाद बाथरूम जाने का कह कर लाइब्रेरी में चला गया. रीमा वहीँ सबसे शांत और खली जगह पर कड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी. मैं उसके पास गया तो उसने खुद hi मेरे गले में बहन दाल कर अपने गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और हम दोनों एक दूसरे को किश करने लगे. रीमा पूरी तरह मेरे साथ चिपक कर कड़ी थी और उसके नरम उभर मेरी सख्त छाती से लग कर दबे पड़े थे. मेरा एक हाथ रीमा क सर क पीछे और दूसरा हाथ उसकी पतली कमर पर था. रीमा कभी मेरे ऊपर वाले होंठ को मुँह लेती और कभी नीचे वाले होंठ को. उसके किश करने से hi मैं उसके दिल की तड़प को महसूस कर रहा था. जब सांस फूली तो उसने होंठ अलग किये और मेरी आँखों में देखने लगी.

अमित : क्या हुआ ?

रीमा : इतने दिन तुम्हे बिना देखे कैसे रहूंगी मैं. अब तो मुझे तुम्हारी आदत हो गयी है जब तक तुम्हे न देख लूँ चैन hi नहीं अत और सपनो में भी बस तुम hi होते हो. तुम दूर जा रहे हो तो दिल बैठा जा रहा है.

अमित : ऐसा क्यों सोचती हो पगली ? मैं कहीं दूर थोड़ा hi जा रहा हूँ. मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ हूँ . जब भी ऑंखें बंद करोगी तो नज़र आ hi जाऊंगा .

रीमा : ज्यादा बातें मत बनाओ, पता भी है क्या बीत रही है मुझ पर ?

अमित : तुम जानती हो न जाना तो पड़ेगा hi. अपने प्यार पर भरोसा नहीं है क्या ?

रीमा : भरोसा है , इसी लिए मैं परवाह नहीं करती जब सब तुम्हे घूर घूर कर देखती हैं.

अमित : कौन देखती है घूर क मुझे ? मुझे तो पता नहीं .

रीमा : सब देखती हैं , मुझे जल्दी से अपनी बना लो न . मेरा ये दर तभी ख़तम होगा.

अमित : तुम जानती हो न क पड़े ख़तम होने से पहले ये हम शादी नहीं कर सकते .

रीमा : वो तो मुझे भी पता है , मुझे भी तो डॉक्टरी करनी है . मैं शादी का नहीं कह रही मैं तो .....

अमित : तो क्या ? ाचा समझ गया तो मतलब तुम चाहती हो क हम दोनों ......

रीमा : शर्मा कर ) चुप करो ऐसे मत देखो मुझे. मुझे बस तुमसे प्यार करना है ताकि तुम कभी मुझे खुद से अलग कर hi न सको.

अमित : वो तो मैं वैसे भी नहीं करने वाला. धड़कन भी कभी दिल से जुड़ा हुई है क्या?

रीमा मेरी बस सुन कर फिर से मेरे गले लग गयी और हमारे होंठ फिर से जुड़ गए.

रीमा : ाचा अब चलो सब इंतज़ार कर रहे होंगे . और हाँ जित कर आना .

अमित : इनाम में क्या मिलेगा मुझे?

रीमा : जो तुम चाहते हो .

इतना कह कर शरमाते हुए रीमा भाग गयी. मैं भी उसकी इस ऐडा पर मुस्कुराता हुआ बहार निकल गया . रीमा अभी कैंटीन में जा रही थी मैंने सोचा तब तक क्यों न मंजू म से मिल लिया जाये जाने से पहले. मैं उनसे मिलने अपने ब्लॉक की तरफ चल दिया तभी बेल्ल बज गयी और मंजू म क्लास से बहार आयी हुई दिखी. मुझे देख कर वो स्टाफ रूम जाते जाते रुक गयी. मैं भी उनके पास पहुँच गया.

मंजू म : तो जा रहे हो आज? ाचा किया जो

इधर आ गए. मैं भी जाने से पहले एक बार तुम्हे देखना चाहती थी . इतने दिनों से ठीक से टाइम hi नहीं दे प् रही मैं तुम्हे और आज तुम 4 दिनों क लिए जा रहे हो. अब तो अगले हफ्ते hi तुम्हारा देखने को मिलेगा.

मंजू म की बातों से मुझे अंदाज़ा हो गया क वो अंदर से उदासी फील कर रही हैं . अब कॉलेज में तो उनसे खुल कर मैं मिल भी नहीं सकता था . वर्ण अब तक उन्हें सीने से लगा लेता.

अमित : ऐसा मत सोचिये, मैं जनता आप टाइम क्यों नहीं निकल प् रही. और किसने कहा क अब अगले हफ्ते hi मिलूंगा. सैटरडे को वापिस आ रहा हूँ और गाओं जाने से पहले आप से मिल कर hi जाऊंगा.

मंजू म : थैंक्स , मेरा कितना दिल था तुम्हारे साथ अकेले में मिलने का . चलो कोई बात नहीं. अपना ख्याल रखना , और जीत कर आना.

अमित : ज़रूर और आप से आकर इनाम भी लूंगा.

मंजू म : मुझे भी इंतज़ार रहेगा.

उसके बाद मैं मम से विदा ले कर फिर से कैंटीन में आ गया . अपनी बाइक की चाबी मैंने मोहित को दे दी और उसे बाइक घर ले जाने को कहा.

मोहित : यार एक बार माँ और पापा से बात कर लेना. माँ तो नाराज़ हो रही है तुमसे तुम उनसे मिलने नहीं आये और पापा ने कहा था क वो भी उधर hi होंगे तो उनसे मिल लेना और उधर वाले ऑफिस और फैक्ट्री भी देख लेना.

अमित : अंकल से मैं बात कर लूंगा पर यार आंटी तो वाकई नाराज़ होंगी . उनसे बात भी नहीं हो पायी . मैं उनसे बस में बैठा बात कर लूंगा .

कल्पना : तो चलें अब तो 20 मिनट्स hi रह गए हैं. देर से गए तो कहीं हमारी क्लास hi न लगा दें सर.

अमित : चलो चलते हैं.

मैं और कल्पना जाने लगे तो सब हमारे साथ hi चल पड़े बस तक छोड़ने क लिए. बस कैंपस क अंदर hi कड़ी थी जहाँ सब इकठ्ठा हो रहे थे जाने क लिए . अब बस क पास पहुँच गए तो बरी बरी से सब से मिलने लगे हम.

मोहित : अपना ख्याल रखना दोस्त और फ़ोन करते रहना.

अमित : ज़रूर तू भी ध्यान रखना नेहा दीदी और राधा का ध्यान रखना.

मीनल : बेस्ट ऑफ़ लक जीत कर आना

अमित : थैंक्स

शिवानी : जीत कर आना और अपना ख्याल भी रखना .

अमित : थैंक्स

शालू : बेस्ट ऑफ़ लक. देखना तुम hi जीतोगे. मैं तुम्हारे लिए दुआ करुँगी.

अमित : थैंक्स , तुम्हारी बात तो उसे भी माननी पड़ेगी.

शीना : बेस्ट ऑफ़ लक, जीत कर आना. तुम्हारे आने पर सब मिल कर पार्टी करेंगे . और नेहा दीदी राधा की चिंता मत करना . अब से इनकी ज़िम्मेदारी मैं लेती हूँ.

अमित : थैंक्स शीना तुम सच में बहुत अछि हो .

शीना : तुमसे ाचा कोई भी नहीं है .

नेहा दीदी : अपना ध्यान रखना भाई, हर जीत से ज़रूरी तुम्हारी सलामती है मेरे लिए .

अमित : आप का प्यार मुझे कुछ होने hi नहीं देगा दीदी .

करुणा दीदी : जीत कर वापिस आना फिर तुमसे पार्टी लेनी है हमने यद् रखना .

नैना दीदी : और पार्टी हम दोनों को अलग से चाहिए .

ये बात नैना दीदी ने ज़रा आंख दबाकर धीरे से कही. मैं उनका इशारा समझ गया क वो क्या कह रही हैं .

अमित : मैं आपको निराश नहीं करूँगा.

रीमा : बेस्ट ऑफ़ लक , अपना ध्यान रखना.

अमित : तुम भी अपना ध्यान रखना.

रीमा का हाथ थम कर कुछ देर हमने आँखों में hi बात की और फिर लास्ट में राधा खड़ी थी सब से शांत .

अमित : राधा चुप क्यों हो ? कुछ कहोगी नहीं?

राधा : क्या कहूं ? तुम जा रहे हो तो कुछ समझ नहीं आ रहा. बस इतना hi कहूँगी क जल्दी आना और अपना ख्याल रखना.

अमित : मैं जल्दी वापिस आऊंगा और अपना ख्याल भी रखूँगा . पर तुम उदास मत होना और मौसी का भी ख्याल रखना. कॉलेज में कोई भी मुश्किल हो तो सब यहीं हैं तुम्हारे साथ

राधा : सब हैं पर तुम तो नहीं होंगे न. तुम्हारे बिना दिल .....

राधा अपनी बात कहते कहते रुक गयी . फिर उसने अपने दोनों हाथों से मेरा हाथ थम कर बेस्ट ऑफ़ लक कहा और मेरी आँखों में देखने लगी . इधर कल्पना भी सब से बरी बरी मिल रही थी .

कल्पना : सच में दीदी आप दोनों क साथ आज बड़ा मज़ा आया अब आप दोनों को एते रहना होगा. वर्ण मैं लेने आ जाउंगी

करुणा दीदी : अब तो आना hi पड़ेगा , वैसे थोड़ा बहुत हमको भी सूखा देना क्या पता कब किसके गाल सेकने को मिल जाएँ.

कल्पना : ज़रूर ाचा दीदी मैं चलती हूँ. ाचा राधा रीमा शीना दीदी नेहा दीदी शिवानी शालू दीदी मीनल और मीनल क मजनू . सब खुश रहना आ कर पार्टी करते हैं.

उसके बाद हम दोनों अपनी अपनी बसेस में बैठ गए. प्रोफ व् और बाकि स्टाफ मेंबर्स क एते hi बुस्सेस चल पड़ी. मेरे साथ नीरज भैया आ कर बैठ गए . सब खड़े हाथ हिलाकर मुझे bye करते रहे और इस तरह हमारा सफर शुरू हो गया .

नीरज : तो कैसा लग रहा है ? पहले कभी गए हो क्या कहीं बहार ऐसे?

अमित : नहीं पहली बार hi जा रहा हूँ, थोड़ा अजीब तो लग रहा है पर सब साथ हैं तो दिल लग hi जायेगा.

नीरज : बिलकुल , मैं पहले भी जा चूका हूँ इस शहर में . चिंता मत करो सब बढ़िया रहेगा. और अभी बस लंच क लिए एक बार रुकेंगे फिर सीधा हॉस्टल में जा कर.

नीरज और मैं बातें करते रहे वक़्त का पता hi नहीं चला. और करीब 2 घंटे क सफर क बाद हाईवे पर एक बढ़िया से होटल पर बसेस रुक गयी. ये एक बढ़िया होटल था जहाँ पार्किंग क लिए बड़ी जगह छोड़ राखी थी पहले से hi. आगे सुन्दर सा गार्डन और उसके पीछे बड़ी सी 3 मंज़िला ईमारत थी जिसको देख कर hi लग रहा था क यहाँ रहने का भी प्रबंध होगा. बड़े बड़े अक्षरों में महाराजा होटल एंड रेस्टोरेंट लिखा हुआ था. बुस्सेस से उतर कर हम अंदर की तरफ बड़े तो एंट्रेंस पर hi स्वागत क लिए बड़ी बड़ी मूछों वाला दरबान वर्दी पहने स्वागत क लिए खड़ा था .

अंदर हॉल में लकड़ी का डिज़ाइनर फर्नीचर लगा हुआ था लाइटिंग भी ऐसी थी क देख कर hi मन खुश हो रहा था . एक तरफ दीवार पर 2 लोगों की बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी जिसमे एक तो देखने में hi नेता लग रहा था और दूसरा कोट पेण्ट पहने कोई व्यापारी.

नीरज : क्या देख रहे हो ?

अमित : हाईवे पर इतने अचे होटल भी होते हैं ?

नीरज : यहाँ से पास में hi एक और शहर पड़ता है इस लिए यहाँ पर ये होटल काफी चलता है. जानते वो तस्वीर किसकी है?

अमित : नहीं तो

नीरज : वो कोट पेण्ट वाला आदमी मोंटी का बाप है और उसके साथ वाला उसका दोस्त मला निरंजना दस . ये होटल मोंटी क बाप का hi है और शायद ये मला हिस्सेदार होगा.

अमित : काफी पैसे वाले लोग हैं ये.

नीरज : अपने शहर का सबसे अमीर आदमी है मोंटी का बाप और जहाँ जा रहे हैं वहां पर भी उसी का नाम चलता है.

‘ क्या मैं आप लोगों क साथ बैठ सकती हूँ ?’

हम अपनी बातें कर रहे थे क कल्पना भी हमारे पास आ कर कड़ी हो गयी .

अमित : आओ आओ बैठो , पर तुम अकेली ?

कल्पना : अपनी क्लास की तो कोई लड़की है नहीं. और किसी को अभी मैं जानती नहीं तो सोचा तुम्हारे पास hi बैठ कर लंच कर लेती हूँ .

नीरज : वैसे तुम्हारी बड़ी तारीफ सुनी है सर से , कह रहे थे तुम ज़रूर मैडल ले कर आओगी.

कल्पना : शुक्रिया भैया वैसे आप दोनों क बारे में भी मैंने यही सुना है.

नीरज : तो लंच में क्या खाओगे तुम दोनों ?

अमित : ये तो कल्पना को hi डीडे करने दो भैया , लेडीज फर्स्ट.

मेरी बात पर कल्पना मुस्कुरा दी और मेनू देख कर आर्डर कर दिया. हम बातें करते हुए लंच किया . बिल नीरज ने hi ज़बरदस्ती पाय कर दिया. फिर से वापिस अपनी अपनी जगह पर आ कर बैठ गए और चल पड़े अपने अगले सफर क लिए. करीब एक घंटे क सफर क बाद हम इस शहर में पहुँच गए जहाँ हमारा कम्पटीशन था. शहर की हद में आते hi बड़ी बड़ी इमारतें और मॉल नज़र आने लगे. हमारे वाले शहर से ये शहर शुरुआत से आधुनिक और बड़ा लग रहा था. हर तरफ छोड़ी सड़कें और बड़ी बड़ी इमारतों क साथ मेहेंगी कार्स. मैं तो बस उन इमारतों को देख रहा था और नीरज साथ साथ शहर की खासियत बता रहा था . कोई 20 मिनट्स शहर क अंदर hi बस दौड़ती रही फिर एक 3 मंज़िला ईमारत क सामने आ कर रुक गयी जो काफी लम्बी छोड़ी थी. बहार hi हॉस्टल का नाम लिखा हुआ था . गेट पर एंट्री क बाद बस को अंदर जाने दिया गया और फिर एक जगह बस रोकने क बाद सब को बहार आने को कहा. प्रोफ़ेसर और स्टाफ ने ऑफिस में जा कर डिटेल दी और रूम्स की डिटेल ले कर हमें बता दिया गया क कौन कौन किस रूम में ठहरेगा. हर रूम में 2 -2 स्टूडेंट्स रुक सकते थे . नीरज में सर से कह कर हम दोनों क लिए एक hi रूम सेट करवा लिया. और हम अपना सामान लेकर अपने रूम में चले गए . रूम में दो सिंगल बीएड लगे हुए थे और एक एक छोटी अलमारी दी गयी थी साथ में hi. अपना सामान सेट करने क बाद हम नहाने चले गए.

उधर कॉलेज में अमित क जाने क बाद सब लड़कियां कैंटीन में hi बैठी रही. एक तो करुणा और नैना आयी हुई थी दूसरा राधा रीमा का तो मन hi नहीं हो रहा था क्लास में जाने का. सब का आपस में ाचा कनेक्शन बन गया था. कॉलेज से छुट्टी करने क बाद शीना रीमा क साथ राधा करुणा नैना और नेहा को ड्राप करने गयी. शीना ने दोनों से फिर से आने का वडा लिया और उनको एडवांस में अपनी पार्टी में आने का कह दिया.
 
अपडेट 150



अभी मैं अपने बीएड पर लेता आराम कर रहा था क मेरे मोबाइल पर अंकल की कॉल आ गयी.

अंकल : कैसे हो बीटा ? पहुँच गए हॉस्टल ?

अमित : जी अंकल , मैं ठीक हूँ आप सुनाइए कैसे हैं?

अंकल : मैं भी ठीक हूँ बीटा और इसी शहर में hi हूँ. तुम चाहो तो मेरे साथ रह सकते हो. हमारा एक और घर भी है यहाँ.

अमित : नहीं अंकल अभी तो यहाँ सबके साथ hi रहना होगा जब तक कम्पटीशन है. पर मैं आपसे मिलूंगा यहाँ से फ्री हो कर.

अंकल : ठीक है बीटा. किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता देना. खुद कहीं मत जाना , तुम्हारी हर ज़रूरत वहीँ पूरी कर दी जाएगी. तुम बस अपने खेल पर ध्यान दो और हाँ तुमसे मैं खुद hi मिलने आ जाऊंगा .

अमित : जी ठीक है अंकल

अंकल : और हाँ अपनी आंटी से ज़रूर बात कर लेना अभी तक बात नहीं की न तुमने ? वो नाराज़ है तुमसे.

अमित : मैं अभी बात करता हूँ अंकल.

अंकल : ाचा ठीक है अब रखता हूँ.

उसके बाद मैंने आंटी को फ़ोन लगा दिया तो पहली रिंग पर hi उन्होंने फ़ोन उठा लिया और नाराज़गी दिखने लगी.

आंटी: आ गयी यद्? मुझे तो लगा था भूल गए होंगे. कह कर तो गए थे मिलते रहोगे और देखो कितने दिन हो गए मिले हुए.

अमित : सॉरी सॉरी सॉरी गलती हो गयी . वो क्या है न मौसी क घर से और कहीं जाने का टाइम hi नहीं मिला. आपसे मिलना तो चाहता आने से पहले पर फिर रह गया. आपको शिकायत जल्दी hi आकर दूर कर दूंगा.

आंटी : वापिस आओगे तो देखेंगे अभी बताओ क्या कर रहे हो?

अमित : आप से बात कर रहा हूँ और अपने हॉस्टल में हूँ.

आंटी : तेरे अंकल से बात हो गयी तेरी या नहीं ? कुछ भी काम हो तो उनको बता देना . नई जगह है खुद कहीं मत निकलना . वो शहर यहाँ से बड़ा है और वहां क्राइम भी ज्यादा है तो बहार कहीं मत जाना.

अमित : जैसा आप कहें , अंकल से अभी मेरी बात हुई थी वो भी एहि कह रहे थे. वैसे मुझे तो यहाँ कुछ पता भी नहीं तो कहाँ जाऊंगा. 2 दिन तो वैसे hi मैच हैं तो टाइम कहाँ मिलेगा.

आंटी : अछि बात है , तुम अपना ध्यान रखना बस.

उसके बाद थोड़ी बहुत और बातें हुई और फ़ोन रख दिया . आंटी क बाद मैंने राधा और उन्हें िमा से भी बात की और फिर से आराम करने लेट गया. नीरज जो शायद नीचे किसी काम से गया था वापिस कमरे में आया और मुझे अपने साथ चलने का कहा.

नीरज : अरे छोटे भाई यहाँ लेता लेता क्या कर रहा है? चल ज़रा बहार घूम कर एते हैं अभी तो 6 hi बजे हैं खाना तो 9 बजे से पहले नहीं मिलने वाला.

अमित : पर जाना कहाँ है ? बहार जाने की परमिशन है क्या?

नीरज : अरे वो सब छोड़ , चल तुझे ज़रा शहर दिखा कर लता हूँ. कहीं दूर नहीं जाना है बस यहीं ज़रा पास में पैदल hi दिएर कर आते हैं .

मैं नीरज क साथ हॉस्टल से निकल गया पैदल hi . हॉस्टल क आसपास भी ाचा इलाका था . 2 से 3 मंज़िला घर और चौड़ी सड़क क साथ hi किनारों पर लगे हुए पेड़. किसी किसी घर पर पग का बोर्ड भी लगा हुआ था. हॉस्टल से कोई 400 मीटर की दूरी पर hi एक मार्किट थी जहाँ काफी रौनक थी . नीरज मुझे अपने साथ एक जूस कार्नर पर ले गया दोनों क लिए जूस आर्डर कर दिया .

अमित : आपको तो यहाँ सब पता होगा न ?

नीरज : इतना भी नहीं , मगर हाँ 2 बार आ चूका हूँ तो काफी कुछ देखा है. पहले साल में तो मेरे सीनियर ने hi मुझे दिखाई थी ये जगह . दूसरे साल में खुद से अपने दोस्तों क साथ निकल कर थोड़ा बहुत घूम लिया था. अब नए लड़कों को तो हॉस्टल से बहार निकलने में भी दर लगता है पर ऐसा होता कुछ नहीं है. और जनता है ये जो कार्नर से रोड लेफ्ट साइड को जा रही है न वहीँ आगे करीब 1.5 कम पर गर्ल्स हॉस्टल है जहाँ सब लड़कियों को ठहराया गया है. पास में hi वहां पर भी ऐसी hi मार्किट है.

अमित : हम्म्म तो इसका मतलब कल्पना भी उधर hi होगी.

अभी कल्पना को यद् hi किया था क उसी का फ़ोन आ गया. स्क्रीन पर नाम देख कर hi मुझे हंसी आ गयी

अमित : लो नाम लिया और डॉन हाज़िर हो गयी.

अमित : hello कैसी हो ? अभी तुम्हारी hi बात कर रहा था मैं

कल्पना : सच में ? फिर तो मेरी उम्र बढ़ गयी . वैसे जान सकती हूँ जनाब क्या बात कर रहे थे और किस्से बात कर रहे थे?

अमित : अरे ऐसा भी कुछ खास नहीं. वो मैं नीरज भैया क साथ हॉस्टल से बहार आया था तो वो बता रहे थे क गर्ल्स हॉस्टल किस तरफ है. तो मैंने तुम्हारा ज़िकर किया.

कल्पना : शुक्र है नाचीज़ को यद् तो किया. वैसे मैं भी हॉस्टल से बहार निकली थी अभी मार्किट में हूँ तो क्या तुम आ सकते हो इस तरफ या मैं आऊं?

अमित : कुछ ज़रूरी काम है क्या ?

कल्पना : बिना काम क नहीं आ सकते क्या? मैं बोर हो रही थी तो सोच तुमसे मिल लूँ . अब तुम नहीं मिलना चाहते तो ठीक है.

अमित : अरे ऐसी कोई बात नहीं , ाचा हम आते हैं 10-15 मिनट्स तो लग hi जायेंगे पैदल आते हुए.

कल्पना : ठीक है आ जाओ मैं वेट कर रही हूँ .

कल्पना से बात करते हुए हमने जूस भी पि लिया था और नीरज ने पहले hi पैसे से दिए तो मैंने उसे बताया क कल्पना मिलना चाहती है तो वो भी चलने को सहमत हो गए वैसे भी बहुत समय था. हम दोनों 10 मिनट्स में hi गर्ल्स हॉस्टल क पास वाली मार्किट में पहुंच गए . यहाँ नज़र कुछ अलग hi था. हर तरफ लड़कियां hi लड़कियां थी और उन्हें ताड़ने क लिए लड़के बन थान कर अपने मेहेंगी स्पोर्ट्स बाइक्स और कार्स में चक्कर काट रहे थे. मार्किट क पास hi पुलिस की एक जीप भी कड़ी थी शायद लड़कियों की सुरक्षा क लिए. हम दोनों मार्किट पहुंचे तो कल्पना स्पोर्ट्स ड्रेस में अकेली कड़ी नज़र आ गयी जो हमारा hi इंतज़ार कर रही थी. हम पर नज़र पड़ते hi उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी और वो तेज़ कदमो से हमारी तरफ आ गयी.

कल्पना : शुक्र है आ गए आप दोनों. कैसे हो भैया ?

नीरज : बिलकुल ठीक तुम सुनाओ

कल्पना : मैं भी ठीक हूँ.

अमित : तुम अकेली क्यों कड़ी हो ? कोई दोस्त नहीं बनाई क्या ?

कल्पना : तुम्हे तो पता है मुझसे लड़कियों वाली गॉसिप नहीं होती. बोर हो रही थी इसी लिए तुम्हे बुला लिया. कल क मैच का सचेडूले पता चला क नहीं ?

नीरज : कल 8 मैच होंगे इसके और मेरे भी . परसों 5 तो पक्के हैं उसके बाद अगर आगे बड़े तो क्वार्टरफईनल सेमीफइनल और फाइनल . यानि क 6 पर फाइनल शायद लास्ट डे hi हो अगर टाइम ज्यादा हो गया तो. 50 कॉलेजेस आएं हैं पार्टिसिपेट करने इस बार. बाकि सब में तो बहुत खिलाडी होंगे पर ये हैवीवेट में है तो शायद काम hi होंगे. तुम बताओ तुम्हारा क्या सचेडूले है?

कल्पना : मेरे वाली गेम में तो काम hi प्लेयर्स हैं फिर भी 4 मैच कल खेलने हैं और परसों भी शायद इतने hi . कहीं बैठ कर बात करें यहाँ ाचा नहीं लग रहा ऐसे खड़े रह कर बात करना.

अमित : हाँ चलते हैं और छंटते हुए भी बात कर सकते हैं अगर बैठने की जगह न हो.

कल्पना : चलते चलते थक जायेंगे और कल मैच भी है. यहीं पार्क है गली में मैंने पता किया है चलो वहीँ चलते हैं.

हम तीनो चलते हुए उस गली में बने पार्क में आ गए. बहुत बड़ा तो नहीं पर ये 200 मत्र लम्बाई में और 100 चौड़ाई में फैला बढ़िया पार्क था. हर तरह क पेड़ पौधे लगे हुए थे और अछि तरफ कटाई कर क अछि शेप दे राखी थी. बीच में 2 फाउंटेन भी बनाये गए थे और कुछ लाइट्स भी थी. बीच 4 फ़ीट का घुमावदार कंक्रीट का पक्का रास्ता था. साइड में बैठने क लिए बेंचेस और बच्चों क लिए झूले भी लगे थे. हम भी साइड में जा कर बेंच पर बैठ गए. कुछ लोग जो शायद आसपास क hi होंगे वहां सैर कर रहे थे. अँधेरा हो रहा था तो लाइट्स भी जल गयी थी. कहीं कहीं रत की रानी की खुशबु हवा क साथ सांसों में समां रही थी.

कल्पना : ये तो बहुत अछि जगह निकली , उस मार्किट क शोर से तो ये जगह बहुत अछि है.

अमित : सही कहा यार हर चीज़ अचे से संभाली गयी है यहाँ. और ये खुशबु तो दिल को सुकून सा दे रही है .

कल्पना : हाँ सही कहा , हमारे घर में भी एक छोटा सा बगीचा है वहां पर ये रत की रानी का एक पौधा लगा रखा है माली ने. गुलाब क पौधों क बीच ये अपनी अलग hi जगह रखता है .

अमित : तो तुम्हारे घर में भी बगीचा है?

कल्पना : क्यों ? नहीं होना चाहिए क्या ? तुम कभी आये हो तो पता चले ? कितनी बार कहा है आने को पर तुम्हे तो परवाह hi नहीं. और देखा आज कॉलेज क बहार मिल भी रहें हैं तो घर से इतनी दूर दूसरे शहर में.

अमित : चलो तुम्हारी बात तो पूरी हो गयी न.

कल्पना : ख़ाक पूरी हो गयी? घर होते तो कोई सेवा भी करती यहाँ तो पता hi नहीं चल रहा कुछ. बाजार का तो कुछ अभी खाने से रहे 2 दिन मैच हैं तो रिस्क नहीं ले सकते. अब तो ऐसे hi काम चलना पड़ेगा.

कल्पना और मैं काफी देर तक बात करते रहे जबकि नीरज भैया ने ज्यादा बात नहीं की और वो अपने hi फ़ोन में लगे रहे . 8 बजे क बाद हम वापिस आ गए अपने हॉस्टल और रत का खाना खाने क बाद अपने बीएड पर पद गए. सुबह जल्दी उठना था तो मैंने किसी से बात नहीं की बाद राधा और रीमा को बता कर सबको गुड नाईट मैसेज कर दिया.

सुबह नीरज और मैं जल्दी उठ कर रेडी हो गए और 7 बजे जा कर कोच साहब को रिपोर्ट किया. हल्का नाश्ता करने क बाद हम सब इकठ्ठा हुए. 8 बजे पहले मैच था हमारा. प्रोफ व् भी वहीँ पर थे उन्होंने फिर से एक बार हमे गुड लक कहा और हम सब को साथ ले कर हॉस्टल क पीछे hi बानी ग्राउंड और इंडोर स्टेडियम में ले आये. अलग अलग गेम्स क लिए अलग अलग जगह प्रबंध किया गया था. हमारी गेम तो इंडोर hi थी तो हमें एक तरफ बानी बिल्डिंग में ले गए जहाँ पर इंडोर गेम्स क लिए जगह थी. कोच साहब ने हमें मैच की लिस्ट बता दी. 8 मैच थे मेरे आज और हर मैच क बाद एक गहनता रेस्ट राखी गयी थी. एक hi टाइम पर सभी वेट काटेगोरिएस का एक साथ hi मैच होना था जिसके लिए अलग अलग मैट्स लगे हुए थे. 8 बजे क साथ hi मुकाबले शुरू करने की घंटी बजा दी गयी और रेफरी ने आकर मुझे मेरे सामने वाले प्रतिद्वंदी से मिलवा कर मैच शुरू करने क लिए सिटी बजा दी. हर तरफ भीड़ जमा थी . बहार से तो लोग नाम मात्रा hi थे पर इतने कॉलेजेस आये थे तो सबके स्टाफ और खिलाडी hi इतने हो गए थे क अछि खासी भीड़ हो गयी. खैर पहले मैच में hi मुझे भरी भरकम प्रतिद्वंदी मिला पर शायद वो इस खेल में कच्चा था बस शरीर से hi भरी था तो मुझे ज्यादा मुश्किल न हुई मैच जितने में. दूसरे मैच में खिलाडी तो ाचा था पर फुर्ती काम थी शरीर में तो ये भी आसानी से मैं जीत गया . लंच तक 4 मैच हो गए थे और सभी मैंने जीते . लंच करने क बाद आधा घंटा ब्रेक रही और फिर से मैच शुरू हो गए . शाम 7 बजे क बाद कहीं जा कर हम सब फ्री हुए पर इतना होने तक शरीर टूट चूका था. ज़ोर आज़माइश वाली गेम थी तो शरीर तो टूटना hi था. जैसे तैसे हम लोग वापिस आये और आज तो बीएड से उठने की भी हिम्मत न थी. इस लिए खाना खा कर रेस्ट करना hi ठीक लगा. कल्पना का फ़ोन आया था पर मैंने बता दिया क हालत कैसी है तो उसने भी ज्यादा नहीं कहा. नीरज कोई खास तरह का तेल ले आया था साथ जिससे उसने मेरी मालिश की और मैंने उसकी . मालिश क बाद शरीर को थोड़ी रहत मिली और हम चैन की नींद सो गए . राधा और रीमा को मैंने मैसेज कर क बता दिया था क थक गया हूँ तो बात नहीं कर सकता .

दूसरी तरफ कॉलेज में आज मौका देख कर राधा क दोनों सीनियर उससे बात करना चाहते थे. इनमे से एक का नाम मुनीश और दूसरे का नाम हरिंदर था. दोनों hi राधा से एक साल सीनियर थे. हरिंदर वो लड़का था जो राधा को पाना चाहता था और मुनीश उसका साथी जो हरिंदर को मन तो कर रहा था पर फिर भी उसके साथ था. दूसरा लेक्चर ख़तम होने क बाद राधा रीमा और मीनल क साथ उदास मन से कैंटीन जा रही थी क पीछे से मुनीश ने उसे आवाज़ दी.

मुनीश : एक्सक्यूज़ में , तुम्हारा नाम राधा है न?

राधा : जी , कहिये .

मुनीश : वो ऐसा है क केमिस्ट्री वाले मम तुम्हे बुला रहे हैं रूम no. 19 में . सेकंड फ्लोर पर .

मीनल : पर उनको इस वक़्त क्या काम है और वो क्लास में भी तो बात कर सकती हैं?

मुनीश : देखो मुझे कुछ नहीं पता . मुझे उन्होंने कह दिया तो मैंने मैसेज दे दिया . तुम्हारा सीनियर हूँ फिर भी खुद बताने आया हूँ और तुम रेस्पेक्ट करने की बजाये सवाल पूछ रही हो .

राधा : it’s ok मैं चली जाती हूँ.

रीमा : मैं आऊं तुम्हारे साथ ?

राधा : नहीं तुम लोग यहीं रुको मैं अभी मम से पूछ कर आती हूँ.

राधा रीमा और मीनल को वहीँ छोड़ कर सेकंड फ्लोर पर चली गयी. ये फ्री लेक्चर था तो फ्लोर पूरा खली था और टीचर भी सब स्टाफ रूम में hi थे. चलते चलते राधा रूम no. 19 में पहुंची जो सबसे लास्ट में था. दरवाज़ा खुला था तो राधा ने रुक कर देखा पर अंदर चेयर खली थी. उसने सोचा क कहीं पीछे न हो मम तो जैसे hi वो देखने क लिए अंदर घुसी किसी ने उसे अंदर खिंच कर दरवाज़ा बंद कर दिया . राधा एक डैम से घबरा गयी. उसे समझ hi नहीं आया क उसके साथ क्या हो गया है. उसने चिल्लाने क लिए मुँह खोला तो उस शख्स ने ज़ोर से अपना हाथ उसके मुँह पर दबा दिया .

हरिंदर : शहहहहह , आवाज़ नहीं . मुझे तो पहचानती होगी न तुम? तुम्हारा सीनियर हूँ. हरिंदर नाम है मेरा और प्यार से हेर्री कहते हैं. कब से तुमसे बात करनी चाहता था पर तुम हो क देखती hi नहीं हो. इस लिए इस तरह तुम्हे यहाँ बुलाना पड़ा. जब से तुम्हे देखा है बस तुम hi दिखती हो हर जगह मुझे. पागल कर दिया है तुमने मुझे . दिन रत बस तुम्हारा ये हुस्न मेरे दिल पर बिजलियाँ गिरता रहता है. मैं और ये सब बर्दाश्त नहीं कर सकता . तुम मेरी बन जाओ मैं तुम्हे रानी बना कर रखूँगा.

राधा बेचारी तो इतना दर गयी थी क उसकी धड़कने बहार तक सुनाई दे रही थी. वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी पर उसका मुँह हरिंदर ने ज़ोर से बंद कर रखा था. एक हाथ से राधा क दोनों हाथ कमर पर दबाये हुए दूसरे हाथ से मुँह दबाये वो हवसी नज़रों से राधा पर झुका हुआ था. राधा की आँखों में फिर से वही मंज़र आ गया जब उसका रपे करने की कोशिश की गयी थी . उसका दिल ज़ोर ज़ोर से अमित को पुकारने लगा. राधा खुद को उसकी पकड़ से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर वो सफल नहीं हो प् रही थी.

हरिंदर : देखो मेरे बाप क पास बहुत पैसा है तुम्हे किसी चीज़ की कमी नहीं होने दूंगा . गाड़ी बांग्ला सब है मेरे पास और तुम्हे पूरी ऐश करवाऊंगा . बस एक बार मेरी बन जाओ . मैं तुम्हारे मुँह से हाथ हटाने जा रहा हूँ चिल्लाना मत. अगर तुम चिल्लाई तो यहीं क यहीं तुम्हारी इज़्ज़त उतर दूंगा. प्यार से खुद hi मेरी बन जाओ वर्ण उंगली टेढ़ी करनी करनी आती है मुझे.

इतना कह कर हरिंदर उर्फ़ हेर्री ने राधा क मुँह पर झुकते हुए उसके होंठों क करीब पहुँच कर जैसे hi उसके होंठों से हाथ हटाया तो वो ज़ोर से चिल्ला उठी.

राधा : बचाऊऊऊऊओ बचाआंओओओओ

हेर्री ने फिर से उसका मुँह बंद कर दिया .

हेर्री : तो तू उसे ऐसे नहीं मानेगी? अभी दिखता हूँ तुझे .

इतना कह कर हेर्री ने राधा की सलवार क नाड़े पर हाथ रखा hi था क ‘ धादायक ‘ की आवाज़ से दरवाज़ा खुला और शीना बिजली की रफ़्तार से हेर्री पर टूट पड़ी. हेर्री क सर क बाल ज़ोर से नोचते हुए उसने झटके से उसे ज़मीन पर गिर दिया और ज़ोर से अपनी हील वाली सेंडल हेर्री क मुँह पर दे मरी.

शीना : हरामज़ादे तेरी हिम्मत कैसे हुई राधा पर हाथ डालने की. भूल गया वो दिन जब सरे कॉलेज क सामने तेरी पेण्ट उतरवाई थी मोंटी ने? आज तुझे पूरा नंगा करती हूँ कॉलेज क सामने .

हेर्री शीना क अचानक वॉर से एक बार तो गिर गया था पर वो फिर से उठ खड़ा हुआ और शीना को ज़ोर से थप्पड़ दे मारा जिससे शीना पीछे गिरते हुए बेंच से टकरा गयी और उसके माथे से खून निकलने लगा. राधा जो अब तक संभाली hi थी शीना का बेहटा खून देख कर उसकी तरफ लपकी.

हेर्री : खुद को समझती क्या है साली ? मोंटी क सर पर अकड़ती है न बुला अब उसे . ाचा हुआ तू भी आ गयी आज तेरे साथ भी हिसाब बराबर कर hi लेता हूँ. तुम दोनों भाई बहिन ने मेरी पेण्ट उतरवाई थी न मैं अब तुझे नंगी करता हूँ.

इतना कह कर हेर्री शीना को पकड़ने लगा तभी मोहित कमरे में घुसा और ज़ोर से किक दे मरी हेर्री की बगल में जिससे वो ज़ोर से बेंच से टकरा कर नीचे गिर गया.

मोहित : गन्दी नाली क कीड़े तेरी इतनी हिम्मत . लड़कियों को क्या ज़ोर दिखता है मुझसे बात कर .

इतने में पीछे से रीमा मीनल नेहा दीदी शी अपनी और शालू भी आ गयी. शीना जल्दी से उठी और फिर से घायल शेरनी की तरह टूट पड़ी हेर्री पर . शिवानी और शालू भी उसके साथ पिल गयी हेर्री पर और चाँद मिंटो में hi हेर्री की हालत भिखारी जैसी हो गयी. शोर सुन कर टीचर भी दौड़े आये और स्टूडेंट्स भी जमा हो गए . मुनीश तो पहले hi निकल लिया था बहार से hi पर हेर्री की माँ चुद गयी सब क आ जाने से. कपडे फैट चुके थे और चेहरे पर क्यों जगह छोटे छोटे कट लग गए थे जो शीना क नाख़ून से और संदल की हील से हुआ था. मोहित ने भी अछि तरह धुलाई कर दी थी. शीना को भी चोट लगी थी पर उसे अपनी चोट की परवाह नहीं थी उसे तो बस राधा की परवाह थी. टीचर को सारा मामला पता चला तो उन्होंने प्रिंसिपल सर क पास hi ले जाना ठीक समझा. शीना क माथे पर लगी चोट से निकलता खून देख कर राधा ने जल्दी से अपना रुमाल निकला और उसके माथे पर लगा दिया .

राधा : दीदी आज आप ने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है .

शीना : एहसान कैसा मेरी बहिन? एहसान तो अमित का है मुझ पर जो मैं कभी उतर नहीं सकती . तुम्हारा ध्यान रखने को कह कर गया था मुझे अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो क्या मुँह दिखती मैं उसे?

राधा : पर आपको इतनी चोट लगी है

शीना : ये तो कुछ भी नहीं है. मेरे खून की एक एक बूँद अमित की कर्ज़दार है. चल अब ज़रा प्रिंसिपल और क पास . इसे तो कॉलेज से निकलवा कर hi डैम लूंगी मैं.

उसके बाद सब मिल कर प्रिंसिपल सर क पास गए . प्रिंसिपल सर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए फ़ौरन हेर्री को कॉलेज से निकल दिया. और साथ hi पुलिस को भी शिकायत कर दी . कुछ hi देर में कॉलेज में पुलिस की गाडी आ गयी और हेर्री को साथ ले गयी . मंजू म को जब मामले का पता चला तो वो भी अपना लेक्चर छोड़ कर राधा क पास चली आयी . शीना ने जो किया उसे देख कर मंजू म को अपनी भतीजी पर गर्व हो रहा था. वो भी जानती थी क उसके प्यार अमित क लिए राधा कितनी खास है.

मंजू म : शाबाश मेरी बची. आज मुझे तुम पर गर्व है . तुमने राधा की मदद कर क मेरा सर ऊँचा कर दिया.

शीना : बुआ ये तो कुछ भी नहीं . अमित क इतने एहसान हैं क उसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ.

मोहित : मेरे ख्याल से अमित को एक बार फ़ोन कर क बता देना चाहिए. अगर उसे बहार से पता चला तो वो हमसे गुस्सा हो जायेगा.

राधा : नहीं बिलकुल नहीं , उसके कम्पटीशन हैं. अगर उसे पता चला क मेरे साथ क्या हुआ है तो वो सब छोड़ कर वापिस चला आएगा. मैं नहीं चाहती ऐसा हो.

नेहा दीदी : राधा ठीक कह रही है . वो पता चलते hi वापिस आ जायेगा.

राधा : इस लिए कोई उसे कुछ नहीं बताएगा . वैसे भी सब ठीक तो है . चोट तो शीना दीदी को लगी है मुझे क्या हुआ.

रीमा : दीदी आप बहुत अछि हैं. ी प्राउड ऑफ़ यू दीदी. अपने राधा को बचाकर मुझ पर भी एहसान किया है.

शीना : इसमें तुझ पर कैसा एहसान छोटी?

रीमा : वो वो राधा मेरी दोस्त है न अगर इसे कुछ हो जाता तो मुझे ाचा नहीं लगता

( मन में ) राधा को कुछ हो जाता तो अमित को क्या जवाब देती मैं. मैं hi तो राधा क साथ थी राधा मेरी ज़िम्मेदारी थी.

राधा : वैसे आपको कैसे पता चला ? आप तो थी नहीं वहां पर?

शिवानी : मैं बताती हूँ. हम तीनो तुम लोगों की तरफ hi आ रहे थे सोचा साथ में कैंटीन चलते हैं. रीमा ने बताया क तुम टीचर से मिलने गयी हो तो हम इंतज़ार करने लगे. इतने में जिस मम को तुम मिलने गयी थी वो स्टाफ रूम से निकलती दिखाई दी. शीना को शक हुआ तो फ़ौरन तुम्हे ढूंढने क लिए दौड़ पड़ी. हम सब तो पीछे आ रहे थे पर ये तो हमसे पहले hi पहुँच गयी . इतनी तेज़ तो कभी न दौड़ी होगी कभी पहले.

शीना : कैसे न दौड़ती. राधा को कुछ होने कैसे देती मैं. ऊपर आते hi मुझे राधा क चिल्लाने की आवाज़ आयी तो मैं यहाँ पहुँच गयी अगर आवाज़ न आती तो देर लग जाती.

मीनल : कुछ भी कहो दीदी एक बात तो माननी पड़ेगी सबको.

नेहा / शिवानी / शीना : क्या

मीनल : आज तो मेरे हीरो ने भी कमल कर दिया .

इतना कह कर मीनल ने मोहित की बाजु पकड़ ली तो वो भी लड़कियों की तरह शर्माने लगा.

उसके बाद भी सब आपस में बात करते रहे और फाइनल ये हुआ क जब तक अमित कॉलेज वापिस नहीं आ जाता उसे कोई कुछ नहीं बताएगा. छुट्टी क बाद शीना रीमा क साथ नेहा दीदी और राधा को घर छोड़ कर आयी. राधा दिल से अमित को यद् कर रही थी . राधा ने कॉलेज में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में दिव्या को कुछ नहीं बताया.

अगले दिन का खेल भी पिछले जैसा hi रहा. सुबह से शाम तक बिजी. पर आज कल क जितनी थकावट नहीं हुई . जिसकी वजह थी डोप टेस्ट. डोप टेस्ट करने वालों क आ जाने से आज कई खिलाडियों ने तो नाम hi हटवा लिया था जिस वजह से अमित को बिना खेले hi फाइनल में जगह मिल गयी क्यूंकि सेमि फाइनल वाला लड़का मैच से पहले hi हैट गया था. फाइनल में अब अमित का मुकाबला जिस लड़के से था वो भी इस खेल का ाचा खिलाडी था और उससे सीनियर भी था. एक बार तो अमित को भी लगा था क मुकाबला जीत नहीं पायेगा पर जब उसने अपने देसी खेल का मुज़ाहरा करते हुए सामने वाले की दायीं बाजु को पकड़ कर तेज़ी से घूम कर अपनी पीठ पर लड़ी बोरी की तरह पलट कर नीचे दे का तो उस लड़के क कंधे का जोड़ hi हिल गया जिसकी वजह से अमित मैच पूरा होने से पहले hi विनर घोषित कर दिया गया . यहाँ भी अमित ने स्पोर्ट्समैनशिप का उदहारण देते हुए उस लड़के क कंधे को देसी तरीके से मालिश कर क झटका देकर वापिस से ठीक कर दिया जैसे उसे अखाड़े में उस्ताद ने सिखाया था. ये देख कर उसके कोच भी हैरान थे और बाकि सब देखने वाले भी . प्रोफ व् जो फाइनल मैच होने की वजह से यहाँ आ गए थे देखने क लिए वो भी अमित की ऐसी स्पोर्ट्समैनशिप से बहुत खुश हुए . न सिर्फ अपने बल्कि दूसरे भी हर कोई जिसने ये देखा वो अमित की तारीफ hi कर रहा था. यहाँ तक क मैच हरने वाला भी उसे इज़्ज़त देने लगा.

उधर नीरज ने भी अपना फाइनल जीत लिया मगर उसके मैच देर शाम तक ख़तम हुए. दोनों दोस्त खुश थे और जब वापिस आये तो नीरज आते hi बीएड पर गिर गया. अमित आज कल क मुकाबले काम थका था इस लिए वो नाहा कर फ्रेश हो गया और नीरज की भी मालिश कर दी ताकि वो अचे से आराम कर सके. उधर से कल्पना का 8 बजे फ़ोन आ गया .

कल्पना : कोंग्रटुलतिओन्स आखिर झंडा गाड़ hi दिया मेरे शेर.

अमित : थैंक्स तुम्हे कैसे पता चला?

कल्पना : बस पता कर लिया, इतना भी मुश्किल नहीं है तुम्हारी खबर रखना.

अमित : अपना तो बताओ , तुम्हारा क्या बना?

कल्पना : बस तुम्हारी दुआओं से हम भी जीत गए.

अमित : कोंग्रटुलतिओन्स

कल्पना : क्या क्या सूखा सूखा विश कर रहे हो. चलो आ जाओ मिल कर छोटी सी पार्टी hi कर लेते हैं.

अमित : इस टाइम ?

कल्पना : लो करलो बात, लड़के हो कर लड़कियों वाली बात कर रहे हो. अरे यार मैच तो ख़तम हो गए न हमारे. तो आज अगर लेट भी हो गए तो क्या होगा? क्या आ नहीं सकते तुम ?

अमित : नीरज भैया बहुत थक गए हैं यार वो आ नहीं सकेंगे .

कल्पना : मैंने तुम्हे कहा है न आने को तुम तो आ सकते हो क नहीं ?

अमित : ाचा ठीक है आता हूँ.

कल्पना : जल्दी आना और हाँ, अभी मैंने किसी को बताया नहीं है तुम सबको खुद hi बता दो अपना कहीं मुझे फ़ोन आ गया किसी का तो मैं बता दूंगी फिर मत कहना क क्लास लगा दी किसी ने .

अमित : ाचा ठीक है , मैं अभी फ़ोन कर देता हूँ सबको .

कल्पना से बात करने क बाद मैंने सबसे पहले बाबा को फ़ोन लगाया

विजय म : तो मिल गया टाइम बात करने का? बधाई हो बीटा . ऐसे hi हमारा नाम रोशन करते रहो.

अमित : अभी तो मैंने कुछ कहा hi नहीं आप को कैसे पता चला.

विजय म : क्यूंकि मैं जनता था क तुम hi जीतोगे . सही कहा न ?

अमित : जी बाबा पर ये सब आपका और माँ का आशीर्वाद है .

तभी बीच में hi माँ की आवाज़ आने लगी और बना ने फ़ोन माँ को पकड़ा दिया.

विजय म : ले पहले अपनी माँ से बात करले

गौरी म : जग जग जियो मेरे लाल. सदा खुश रहो . तू ठीक तो है न तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी ?

अमित : नहीं माँ मैं बिलकुल ठीक हूँ. आप किसी हैं ?

गौरी म : मैं ठीक हूँ बीटा. तू कल आ रहा है न ?

अमित : हाँ माँ कल यहाँ से वापिस तो जाना है पर टाइम का नहीं पता कुछ.

गौरी म : बीटा कल शनिवार है और तुझे घर आना होता है न. मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ. जल्दी आना .

अमित : हाँ माँ मैं भी तो आपसे मिलना चाहता हूँ. जैसे hi वापिस आऊंगा तो गाओं चला आऊंगा.

गौरी म : ाचा अब रखती हूँ सबका मुँह मीठा करवाना है मुझे तू भी खाना खा क आराम कर.

माँ से बात करने क बाद मैंने राधा को फ़ोन किया तो वो भी बहुत खुश हुई. उसके बाद रीमा , शालू , शिवानी , शीना , डॉ रीना , मंजू म , मोहित , अंकल और आंटी से भी बात की . और इतने में चलते चलते मैं कल्पना क हॉस्टल

क पास वाली मार्किट में पहुँच गया था . जहाँ वो पहले से hi मेरा इंतज़ार कर रही थी .

कल्पना : तो आ गए मेरे डरा सिंह. मज़ा आ गया यार आज तो . तुम भी जीत गए नीरज भैया भी और मेरा भी no. लग hi गया.

अमित : तुम्हे तो जीतना hi था , और कोई थोड़ा होगी यहाँ तुम्हारे जैसी लेडी ब्रूस ली.

कल्पना : तुम फिर शुरू हो गए. ाचा चलो आज डिनर बहार hi करते हैं. हॉस्टल का खाना खा खा कर बोर हो गयी हूँ मैं .

अमित : ाचा ठीक है पर खाना कहाँ है?

कल्पना : वो देखो सामने hi तो है. यहीं कह लेते हैं.

कल्पना ने मार्किट में बने रेस्टोरेंट की तरफ इशारा किया और हम दोनों चल दिए उस तरफ. अंदर जा कर कल्पना ने खुद hi आर्डर किया और बातें करते हुए हमने खाना खाया. खाना खाने क बाद बिल कल्पना देने लगी तो मैंने उसे मन कर दिया और ज़बरदस्ती बिल खुद भरा. वो मुझे ऐसा करते देख मुस्कुरा रही थी पर उसकी वजह मुझे समझ नहीं आयी.

खाना खाने क बाद हम बहार आ गए

अमित : बस क्यों रही थी तुम?

कल्पना : बस ऐसे hi , बिलकुल किसी बर्फ की तरह ट्रीट कर रहे थे तुम मुझे . मतलब यार हम दोस्त हैं तो बिल कोई भी पाय कर सकता है न पर नहीं , ‘बिल तो मैं hi दूंगा ‘.

कल्पना ने मेरी नक़ल करते हुए कहा जिसे देख कर मुझे भी हंसी आ गयी .

अमित : तुम्हे ाचा नहीं लगा ?

कल्पना : ाचा क्यों नहीं लगेगा ? एक तो मेरे पैसे बच गए दूसरा....

अमित : दूसरा ?

कल्पना : दूसरा मुझे बर्फ मिल गया हे हे हे

अमित : तुम और तुम्हारे जोक्स.

कल्पना ( मन में ) काश तुम मेरी इन बातों का मतलब कभी समझ पाओ तो तुम्हे पता चले क मैं हस्ते हुए सचाई बयां करती हूँ अपनी.

‘ हस्ते हस्ते हाल दिल कह दिया उनसे ,

और वो वह वह कर क मुस्कुरा कर चल दिए.’

अमित : ाचा तो अब चलता हूँ मैं 9:30 हो रहे हैं.

कल्पना : कोई लेक्चर छूट रहा है क्या? कॉलेज में होते हो तो मिलते नहीं , कॉलेज क बहार तुम्हारे पास टाइम नहीं और यहाँ भी बहाना मर रहे हो. जाओ जहाँ जाना है.

कल्पना ने रूठते हुए कहा तो मैंने थोड़ी देर और रुकने का सोच लिया.

अमित : ाचा चलो ठीक है. पर अगर किसी ने मुझे कुछ कहा तो तुम्हारा नाम लगा दूंगा मैं.

कल्पना : हस्ते हुए ) लगा देना और कह देना क तुम मेरे साथ थे मेरे रूम पर हे हे हे

अमित : तुम बाज़ नहीं आओगी न ? ाचा बताओ अब क्या करना है ?

कल्पना : करना क्या है , खाना खा लिया है अब सैर करते हैं .

मैं भी कल्पना क साथ बातें करता हुआ चल पड़ा . हम दोनों बातों में इतना खोये थे क पता hi नहीं चला कितनी दूर निकल गए . अब हम जहाँ पहुंचे ये एक सुनसान सड़क थी और आवाजाही बिलकुल भी नहीं थी. हम अभी बातें hi कर रहे थे क एक लम्बी सी काली कार हमारे पास से तेज़ी से निकली जिसके पीछे hi दो बड़ी गाड़ियां थी. थोड़ी दूरी पर hi उन गाड़ियों ने उस कार को आगे पीछे से ब्लॉक कर लिया. उन बड़ी गाड़ियों से कुछ आदमी निकले जिनके हाथों में बेस बात हॉकी और लोहे की रोड तलवार जैसे हथियार थे . कल्पना ने मेरी बाज़ू पकड़ ली और मैं भी अपने हैं देख रहा था. उन हथियार बंद गुंडों ने कार का दरवाज़ा खोला और अंदर से एक लड़की को घसीट कर बहार निकला. लड़की काळा कोट पेण्ट वाइट शर्ट में थी. दूर से हमें आवाज़ तो नहीं सुनाई दे रही थी पर उन गुंडों ने उस लड़की को उठा कर अपनी गाड़ी में डाला और फिर से दोनों गाड़ियां हमारी तरफ मुद गयी . मेरे सामने ये घटना घाटी और मैं कुछ न करूँ मेरा ज़मीर मुझे इसकी इजाज़त नहीं देता था. मैंने आसपास देखा तो मेरी नज़र पास में गिरे पड़े पेड़ क तेहने पर पड़ी . मैंने जल्दी से उस तेहने को उठाया और घुमा कर ज़ोर से मर दिया आगे वाली गाड़ी क शीशे पर. गाड़ी का शीशा टूट गया और गाडी एक तरफ को मुद कर दीवार से जा लगी. पिछली गाड़ी भी वहीँ रुका गयी और दोनों गाड़ियों से गुंडे बहार निकल आये .

गुंडा 1 : मारो साले को भेनचोद हमारा रास्ता रोकता है .

उसके इतना कहते hi उसके साथ वाले 10 हथियार बंद गुंडे मेरी तरफ आगे बड़े तो कल्पना भी चौकन्नी हो गयी. हम दोनों ने hi पास में पड़े कुछ ईंट पत्थर क टुकड़े उठा कर मरे पर इससे कुछ ज्यादा नहीं हुआ . जैसे hi एक गुंडा मेरे करीब पहुंचा तो मैंने उसका वॉर हवा में रोकते हुए उसके बेस बात को मजबूती से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंचा और मुँह पर ज़ोरदार पंच मर कर उसे गिरा दिया. उसका बसेबत मेरे हाथ में hi रह गया और जैसे hi दूसरे मेरी तरफ बड़ा मैंने बसेबत से उसके वॉर रोकते हुए ज़ोरदार लात उसकी टांगों क बीच दे मरी और वो वहीँ गिर गया. इधर कल्पना भी हवा में उछाल कर ज़ोर दर किक मर कर एक को लिया चुकी थी और दूसरे को ज़ोरदार किक पसलियों में दे मरी थी. इसी तरह एक और गुंडा मेरी तरफ बड़ा तो मैंने बसेबत हाथ से छोड़ कर सीधा उसके सर पर दे मारा और उसके साथ वाले को वॉर करने से पहले hi कलाई से पकड़ कर ज़ोर से घुमा कर उछाल दिया गाडी की तरफ और वो गाड़ी से जा लगा. 10 में से 8 को बिछा दिया तो जो पहले वाला था जो शायद इनका लीडर था उसने गन निकल कर हवा में फिर कर दिया जिसकी आवाज़ से मैं रुक गया . उसके निशाने पर अब कल्पना थी.

गुंडा 1 : तू है कौन बे भेनचोद ? वसूली भाई क आदमियों पर हाथ डाला तूने . हम तो सिर्फ इस कोरट वाली को ठोकने आये थे पर लगता है साला तुम्हे भी ठोकना पड़ेगा . पर एक काम तो सही हो गया . आज रत क लिए 2-2 माल मिल गए . पहले तो सिर्फ इसी मैडम क साथ मज़ा कर क इसे ठोकने वाले थे पर अब इस तीखी मिर्ची का भी मज़ा लेंगे साथ में. बहुत फुदकती है साली. उठो बे सालो क्या हिजड़ों की तरह मरे पड़े हो . उठाओ इस छमिया को और डालो गाड़ी में.

गुंडे ने अपने साथियों को कल्पना को उठाने को कहा जो नीचे पड़े कराह रहे थे. इतने में मैंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसने मुझ पर गोली चला दी. मैंने बचने की कोशिश की पर फिर भी गोली मेरे कंधे को छू कर निकल गयी और मैं नीचे गिर पड़ा .

कल्पना : ामित्त्त्त्तत्त ,, nahiiiiiiiiiiii

गुंडा : अगर अपनी जगह से हिली भी तो अगली गोली उसके भेजे में दाल दूंगा. चल चुपचाप गाडी में बैठ कोई हुआहियारी नहीं .

कल्पना मेरी जान बचने क लिए लाचारी से आँखों से आंसू बहती उस गुंडे की तरफ बड़ी . मुझसे ये सब देखा नहीं गया मैं फिर से उठ कर उस गुंडे की तरफ लपका क एक बार फिर से गोली चली पर इस बार गोली थोड़ा दूर से चली थी . और उसके साथ hi 4 गाड़ियां हमारे पास घेरा बना कर रुक गयी . चरों गाड़ियों से एक साथ कुछ लोग बहार निकले और सबके हाथ में गन्स थी. आते hi उन लोगों ने उन गुंडों पर अपनी बंदूकें तान दी. तभी एक ज़ोरदार आवाज़ गूंजी

‘ मैंने कहा था न क शेरा वापिस आ गया है , या तो शहर छोड़ दो या दुनिया. पर लगता है तेरे उस हरामी बाप वसूली को समझ नहीं आया ‘



मैंने आवाज़ की तरफ देखा तो सामने वाले इंसान को देख कर हैरानी से मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और ऑंखें बहार आ गयी.
 
अपडेट 151



‘ अब अचे बच्चों की तरह ये खिलौना नीचे फेंक कर हाथ ऊपर कर क सब लाइन में खड़े हो जाओ वर्ण तुम जानते हो हो क शेरा दूसरी बार बात नहीं दोहराता ‘

मैं अभी तक उसी हालत में खड़ा हैरानी से बस उस आदमी को देखता जा रहा था. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था क मैं जिसकी जान बचा रहा हूँ वो एक गैंगस्टर निकलेगा. ये वही आदमी था जो मुझे सड़क किनारे झाड़ियों में घायल अवस्था में मिला था . हॉस्पिटल से ये आदमी गायब हो गया था और इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं था . आज मेरे सामने वो दोनों हाथों में पिस्तौल ताने खड़ा था और उसके साथी भी सब पिस्तौल लिए खड़े थे .

शेरा की एक hi वार्निंग से उस गुंडे ने अपनी पिस्तौल ज़मीन पर राखी और हाथ ऊपर कर क अपने साथियों क साथ लाइन में खड़ा हो गया. अब शेरा ने नज़र घुमा कर मुझे देखा तो एक डैम उसके इम्प्रेशन बदल गए और चेहरे पर ख़ुशी आ गयी.

शेरा : तुम ????? तुम यहाँ पर ?? मुझे यकीन नहीं हो रहा क तुम मेरे सामने खड़े हो .

इतना कह कर शेरा मेरी तरफ दौड़ा और मुझे अपने सीने से लगा लिया.

हे परवरदिगार तेरा लाख लाख शुक्रिया क तूने मुझे मेरे नाखुदा से मिला दिया. आवर सलीम ोये जश्न मनाओ यार . देख ये अपना भाई है इसी ने मुझे उस दिन बचाया था जब उस हरामी वसूली ने धोखे से मुझे मर कर फेंक दिया था. मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ तुझे अपने सामने देख कर. हॉस्पिटल से मुझे भागना पड़ा क्यूंकि पुलिस को मुझ पे शक था वर्ण मैं तुझे मिला बिना कभी नहीं अत . ये ज़िन्दगी तेरी hi दी हुई है मेरे यार बोल क्या खिदमत करूँ मैं तेरी ? तेरा एहसान तो मैं जान दे कर भी नहीं चूका सकता.

तभी शेरा की नज़र मेरे ज़ख़्म पर पड़ी तो खून देखते hi उसे गुस्सा आ गया . और उसने पलट कर फिर से पिस्तौल तान दी उस गुंडे पर.

शेरा : मेरे भाई पर गोली चलाई तूने

इतना कह कर शेरा गोली चलने लगा तो मैंने उसे रोक दिया.

अमित : नहीं शेरा भाई , उसकी जान मत लो.

शेरा : इसने तुम्हारी जान लेने की कोशिश की और तुम कह रहे हो इसे कुछ न कहूं .

अमित : मैंने कब कहा क कुछ न कहो? इसने एक लड़की को किडनैप किया और मेरी दोस्त को भी ले जाना चाहता था . इसे औरत की इज़्ज़त की कदर नहीं है. इस लिए इसे सजा तो मिलनी चाहिए पर मौत ज़रूरी तो नहीं .

शेरा : समझ गया , कालू !! इन सबको अपने अड्डे पर ले कर चलो और ज़रा इनकी मर्दानगी ठीक करो ताकि फिर कभी किसी औरत की तरफ गन्दी नज़र न डालें ये लोग .

कालू : जी भाई , चलो बे गाड़ी में बैठो . आज तुम्हारी किस्मत अछि है क भाई को भाई मिल गया और तुम लोगों को भाई ने ज़िंदा छोड़ दिया .

कालू नाम का वो 6 फ़ीट का हत्ता कट्टा सांवले रंग का वो आदमी जो तकरीबन 35 साल क आसपास होगा सबको रोअब से धक्के मरता हुआ गाडी में बिठाने लगा और उन लोगों क साथ अपने कुछ आदमी बिठा कर 3 गाड़ियों में ले गए . एक गाडी गुंडों वाली यहाँ रह गयी थी जो टूटी पड़ी थी और 2 शेरा क साथ आयी गाड़ियां अभी भी थी कुछ आदमियों क साथ. तभी मेरी नज़र उस कोट पेण्ट वाली लड़की पर पड़ी जो सदमे में कड़ी थी और चेहरे कर दर साफ नज़र आ रहा था. कल्पना से मेरी नज़र मिली तो वो भाग कर मेरे गले लग गयी.

कल्पना : इतना खून निकल रहा है चलो पहले हॉस्पिटल चलते हैं .

शेरा : मैं तो भूल hi गया था चलो बे सब पहले छोटे भाई को हॉस्पिटल ले कर चलो. और आप भी हमारे साथ चलिए

लड़की : नं नहीं मैं तुम लोगों क साथ नहीं जाउंगी.

शेरा : डरिये मत , शेरा औरतों की इज़्ज़त पर कभी दाग लगने नहीं देता. मैं गैर कानूनी काम ज़रूर करता हूँ पर किसी क साथ गलत नहीं करता . आप मुझ पर भरोसा रखिये मैं आपको सही सलामत घर पहुंचा दूंगा.

शेरा की इस बात पर वो लड़की संकोच करती हमारे साथ hi गाड़ी में बैठ गयी और गाड़ियां चल पड़ी . कल्पना मेरे साथ चिपक कर बैठी थी और मेरे ज़ख़्म को दबाये हुए थी खून को रोकने क लिए. उसके चेहरे पर मेरे लिए चिंता साफ़ झलक रही थी. कुछ hi मिंटो में हम एक हॉस्पिटल में पहुँच गए . शेरा मुझे अपने साथ लिए सीधा डॉ क केबिन में hi घुस गया . डॉ अभी किसी पेशेंट को देख रहा था पर अचानक दरवाज़ा खोल कर ऐसे हमारे अंदर आ जाने से वो चौंक गया और सामने शेरा और उसके आदमियों को देख कर उसकी ज़ुबान hi बंद हो गयी.

शेरा : डॉ ये मेरा भाई है जल्दी से इसका इलाज करो .

डॉ बिना एक भी शब्द बोले फटाफट मेरे पास आया और मेरी T-shirt उतरवा कर ज़ख़्म देखने लगा. इधर डॉ मेरा ज़ख़्म देख रहा था उधर कल्पना और वो कोट पेण्ट वाली लड़की मेरी चौड़ी छाती और मजबूत कंधे देख रही थी. मेरे इस पहलवानी शरीर को शेरा भी तारीफी निगाहों से देख रहा था.

डॉ : बुरा न मनो भाई क्या मैं जान सकता हूँ चोट कैसे लगी है?

शेरा : गोली लगी है.

डॉ शेरा की इस बात पर और भी दर गया और जल्दी से ज़ख़्म को साफ़ करने क बाद ड्रेसिंग करदी.

डॉ : गोली बस छू कर निकल गयी है डरने की कोई बात नहीं. ये कुछ दवाइयां मैं लिख देता हूँ ये ले लेना .

शेरा : डॉ तुम्हारी फीस?

डॉ : क्या बात करते hi भाई , आपसे भला मैं फीस लूंगा. आप बस कृपा बनाये रखना और कुछ नहीं चाहिए.

इसके बाद मैंने फिर से T-shirt पहनी और हम सब बहार निकल आये . कल्पना अभी भी मेरी बाजु पकडे थी.

शेरा : तुम तो अचे खासे पहलवान हो यार . करते क्या हो?

अमित : भाई अभी तो कॉलेज में पड़ता हूँ और साथ में रेसलिंग का प्लेयर हूँ. पर आप ये सब ......

शेरा : बताता हूँ पहले मेरे साथ चलो.

लड़की : अब मैं जा सकती हूँ?

शेरा : ऐसे नहीं मेरे आदमी आपको छोड़ आएंगे. आप शायद मुझे नहीं जानती होंगी पर मुझे पता है आप कौन हैं. अख़बार में देखा था मैंने वसूली क खिलाफ केस आपने hi लड़ा था न?

लड़की : जी , और मैं भी आपको जानती हूँ. शहर में शायद hi कोई होगा जो आपके नाम को नहीं जनता बस देखा आज है. वैसे जैसे सुना था आप वैसे नहीं लगते.

शेरा : है है है , शेरा को समझना इतना आसान कहाँ है मैडम जी . शेरा कानून की नज़र में मुजरिम हो सकता है पर मैंने आज तक ऐसा कोई काम नहीं किया क खुदा क घर शर्मिंदा हो जॉन. मैं कभी किसी मज़लूम क को परेशां नहीं करता और न hi ड्रग्स का धंधा करता हूँ . मेरे काम क अपने उसूल हैं. वैसे आपने अपना नाम नहीं बताया .

लड़की : सुमन बजाज क्रिमिनल लॉयर . बजाज सॉलिसिटर्स क सूरज बजाज की बेटी. मेरा पिता जी का नाम तो सुना hi होगा आपने?

शेरा : बिलकुल सुना है . शहर क रईस लोग उन्ही क पास जाते हैं अपना पैसा बचने .

सुमन : सही कहा , और क्या मैं आपके बारे में जान सकती हूँ?

कल्पना : इसके बारे में तो आपको पता चल hi गया होगा मेरा नाम है कल्पना और मैं भी उसके साथ hi पड़ती हूँ. जुडो की प्लेयर हूँ और हम दोनों यहाँ कॉलेज की तरय से कम्पटीशन खेलने क लिए आये हैं.

सुमन : वैरी गुड, आप दोनों hi बहुत अचे हैं. अगर आज आप दोनों मेरी मदद न करते तो कुछ भी हो सकता था. थैंक यू फॉर सेविंग माय लाइफ. मैं आपका एहसान कैसे उतरूंगी?

अमित : इसमें एहसान कैसा ? इंसान hi इंसान की मदद करता है .

सुमन : तुम वाकई में बहुत अचे हो. क्या तुम दोनों बर्फ गफ हो ?

सुमन क इस सवाल पर कल्पना शर्मा गयी.

अमित : नहीं हम बस साथ में पड़ते हैं और अचे दोस्त हैं. वो तो हम वहां डिनर क बाद सैर करने निकले थे क ये सब हो गया .

सुमन : था क यू वैरी मच अमित यू अरे रियली ा ब्रेव मन . तुमने कितनी बहादुरी से उनका मुकाबला किया . मुझे ख़ुशी होगी अगर तुम मेरे घर आ सको तो.

अमित : कल तो हम वापिस जा रहे हैं . फिर कभी आये तो ज़रूर मिलूंगा.

सुमन : वैसे कौन से शहर से आये हैं आप दोनों ?

कल्पना : क्सक्सक्सक्स शहर से

सुमन : ग्रेट फिर तो जल्द hi मिलेंगे. मैं तुम्हारे शहर में आती रहती हूँ केस क सिलसिले में. वन्स अगेन थैंक्स बोथ ऑफ़ यू. आज तुम लोग मेरी मदद न करते तो मेरे साथ क्या क्या हो सकता था ये सोच कर hi दर लग रहा है .

कल्पना : अगर आप जैसे सच्चे वकील hi डरने लगे तो कानून की मदद कौन करेगा ?

सुमन : थैंक्स मेरी सोच भी कुछ ऐसी hi है पर अभी जो कुछ हुआ उससे थोड़ा दर गयी थी. ाचा अब मैं चलती हूँ. एंड थैंक्स शेरा भाई आप सच में अचे इंसान है चाहे कानून आपको गलत कहे पर मुझ पर भी आपने एहसान कर दिया है कभी मौका मिला तो ज़रूर आपका यह एहसान चुकाऊँगी.

उसके बाद सुमन ने मुझसे और कल्पना से हमारे no. लिए और शेरा क आदमी उसे घर छोड़ने चले गए .

शेरा : चलो अब हमें मेहमान नवाज़ी का मौका दो और हमारे साथ चलो .

अमित : शुक्रिया भाई पर हमें वापिस हॉस्टल जाना होगा . वर्ण हमारे लिए मुश्किल हो जाएगी.

शेरा : ऐसे कैसे मुश्किल हो जाएगी ? मेरे होते तुम्हे किसी तरह की दिक्कत नहीं हो सकती छोटे भाई

अमित : नहीं भाई ऐसी बात नहीं है असल में हम अपने टीचर्स क साथ आये हैं तो मैं नहीं चाहता क वो हमसे किसी बात पर नाराज़ हो. और अगर आप इसमें शामिल हुए तो वो गलत सोच लेंगे.

शेरा : ाचा ठीक है भाई जैसा तुम कहो पर मुझे ाचा नहीं लग रहा क तुम यहाँ आये भी और ऐसे hi चले जाओगे.

अमित : मैं वडा करता हूँ क अगली बार जब आया तो आपसे ज़रूर मिलूंगा.

शेरा : चलो फिर मैं तुम्हे छोड़ कर अत हूँ जहाँ तुम्हे जाना है.

उसके बाद शेरा मुझे और कल्पना को हॉस्टल तक छोड़ने आया . और जाते जाते भी कास क मुझे गले लग कर मिला और मुझसे मेरा no . लेकर और अपना no. मुझे देकर वापिस चला गया . हॉस्टल तो अब तक बंद हो चूका था पर शेरा क आदमियों ने मेरे लिए सिक्योरिटी गार्ड से गेट खुलवा hi लिया. नीरज आराम से सोया पड़ा था तो मैं भी आराम से जाकर अपनी जगह सो गया . कंधे में कुछ दर्द तो था पर डॉ ने पैन किलर इंजेक्शन लगाया था और दवा भी थी तो अब कुछ आराम था.

उधर सुमन बजाज जब अपने घर पहुंची तो उसके पिता सूरज बजाज जो पेशे से इनकम टैक्स लॉयर और शहर क नामचीन आदमी थे अपनी इकलौती बेटी क लिए घर में चिंतित बैठे थे. शहर क सब से पॉश एरिया में बना ये दो मंज़िला महल अंदर रहने वालों की शानोशौकत का खुद hi एक उदहारण था. बहार खड़े आधा दर्जन सिक्योरिटी गार्ड इस बात का सबूत थे क इस घर का मालिक कितना खास आदमी है.

सूरज : तुम आ गयी बेटी , कहाँ रह गयी थी मैं कब से तेरा फ़ोन तरय कर रहा था. वसूली ने धमकी थी क वो तुम्हे .....

सूरज अपनी बेटी को देखते hi दौड़ता हुआ उसे गले लग कर मिला . सुमन उसके कलेजे का टुकड़ा थी चाहे वो अपने पिता से खफा रहती थी उनके रईस दोस्तों छुम क्लाइंट्स की वजह से . इसी लिए उसने अपने पापा की लाइन छोड़ क्रिमिनल लॉयर बनना चुना.

सुमन : मैं ठीक हूँ डैड उस वसूली ने आज मुझ पर हमला तो करवाया था पर ऐन मौके पर किसी ने मुझे बचा लिया.

सूरज : क्या ??? तुम पर हमला हुआ था?? मैं उसे ज़िंदा नहीं छोडूंगा.

सुमन : रिलैक्स डैड आप उसका कुछ नहीं बिगड़ सकते आखिर उसके पीछे भी तो हाथ आपके उन्ही दोस्तों का है.

सूरज : बेटी तू ये क्रिमिनल केसेस क्यों लड़ती है आखिर क्या किस चीज़ की कमी है हमारे पास ? तू मेरे साथ मेरा ऑफिस क्यों नहीं ज्वाइन कर लेती?

सुमन : डैड फिर वही बात. मैंने पहले भी कहा है न क मैं इन सफ़ेद पॉश अपराधियों का साथ नहीं देने वाली. आप को पैसा प्यारा है आप उनके काम करिये पर मैं अपनी माँ क उसूलों पर hi चलूंगी . वो हमारे बीच नहीं है पर उनकी कही हर बात मैं हमेशा यद् रखती हूँ. आप ने सिर्फ पैसे को तरजीह दी है पर मैं सिर्फ न्याय क लिए लड़ती हूँ और लड़ती रहूंगी.

सूरज : बेटी ये समाज सिर्फ ताकतवर लोगों क लिए hi है और कमज़ोर लोगों को यहाँ कुचल दिया जाता है. और मैं कौनसा कोई क्राइम कर रहा हूँ. मैं तो बस इनकम सेटलमेंट और लीगल एक्शन्स में अपनी राय hi तो देता हूँ.

सुमन : डैड गलत तरीके से पैसे कमाने वाले लोगों की मदद करना भी गलत hi होता है. ी ऍम सॉरी पर मैं ये सब नहीं कर सकती. मुझे हो सही लगता है मैं वही कर रही हूँ.

सूरज : बेटी तू समझती क्यों नहीं ? मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा और है hi क्या? ये सब मैंने तुम्हारे लिए hi तो कमाया है.

सुमन : गलत डैड आपने कभी मेरी और माँ की परवाह hi कहाँ की. माँ ने आपको कितनी बार समझाया था पर आप नहीं मने और आपकी गलत कमाई का भुगतान माँ को जान देकर करना पड़ा. किसी दिन आप मुझे भी खो देंगे.

इतना कह कर सुमन रोटी हुई अपने कमरे में भाग गयी . और सूरज वहीँ खड़ा अपनी बेटी की बातों को सोचता अपनी बीवी को यद् करने लगा. वो कितनी खुद्दार औरत थी जो हमेशा सूरज को गलत काम करने से मन करती थी. पर पैसा कमाने क चक्कर में उसने कभी अपनी बीवी की बात की परवाह नहीं की और अंत में वो बेचारी बीमारी से तड़प तड़प कर मर गयी. कहीं कहीं सूरज खुद को दोषी ज़रूर मंटा था पर फिर से खुद hi अपने आप को सही बता कर सब भूल जाता . आज सुमन पर हमला होने से वो अंदर से दर गया था और अब उसे दर लगने लगा क कहीं बीवी की तरह बेटी को भी कुछ हो गया तो उसका क्या होगा ? सूरज अकेला बैठा अपनी ज़िन्दगी में जाने अनजाने में किये गए गलत कामों क बारे में सोचता रहा और शराब पिता रहा . सुमन अपने बीएड पर लेती कुछ देर रोटी रही पर जब उसे अपने साथ हुई घटना यद् आयी तो वो अमित को यद् करने लगी. कैसे उसने बहादुरी से सबका सामना किया था और जैसे शेरा ने बताया क उसने शेरा की भी जान बचाई थी तो इसका मतलब वो मुसीबत में फाडे लोगों की मदद करता रहता है. उसे अमित बिलकुल वैसा लगने लगा जैसा उसकी माँ हमेशा कहती थी क इंसान को ऐसा होना चाहिए. अपनी अभी तक की 28 साल की उम्र में सुमन कभी किसी को अपने पास नहीं आने दिया था क्यूंकि माँ क बाद वो बिलकुल hi बदल गयी थी और दिल में एक लक्ष्य बना लिया था क वो समाज में फैले पाप क खिलाफ लड़ेगी. इस लिए तो वसूली ने उस पर आज हमला करवाया था क्यूंकि सुमन ने उसके खिलाफ केस लड़ा था जिसकी वजह से वसूली क खिलाफ आज hi कोर्ट ने आर्डर दिया था उसे अरेस्ट करने और 10 साल जेल में डालने का . किडनेपिंग , फिरौती और हत्या की कोशिश क जुर्म में.

सुमन जब अमित क बारे में सोचने लगी तो उसकी आँखों में अमित का वो मजबूत जिस्म भी आ गया . चाहे वो सुमन से कितना छोटा था पर सुमन खुद को रोक नहीं प् रही थी उसके बारे में सोचने से. पहली बार उसे कोई इतना पसंद आया था क सीधा उसके दिल में hi उतर गया था . अमित क बारे में हरेक चीज़ को यद् करते हुए उसे कुछ यद् आया और चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गयी .

सुमन : अब तो तुमसे मिलना hi पड़ेगा मिस्टर अमित जल्दी hi मिलते हैं.

इतना कह कर मुस्कुराती हुई उठ कर कपडे उतर कर बाथरूम में घुस गयी सोने से पहले नहाने क लिए.

वहीँ कल्पना भी अपने बीएड पर लेती अमित क बारे में hi सोच रही थी. कैसे आज अमित अपनी जान की परवाह किये बगैर कल्पना को बचने क लिए आगे बड़ा था. सामने पिस्तौल ताने वो गुंडा खड़ा था फिर भी उसने परवाह नहीं की और गोली खाने क बाद फिर उठ खड़ा हुआ था कल्पना की हिफाज़त क लिए. कल्पना क दिल में रह रह कर अमित क लिए प्यार भरी उमंगें उठ रही थी. चाहे वो खुद भी अछि फाइटर थी और अमित क बराबर hi उसने भी सामना किया था उन गुंडों का पर पिस्तौल क आगे जहाँ वो स्टेचू बन गयी थी वहीँ अमित ने दिलेरी दिखाई थी . ऐसा तो कोई हद से ज्यादा चाहने वाला hi कर सकता है.

कल्पना : बिलकुल बुद्धू है , अपनी परवाह तो है hi नहीं इस लड़के को. खुद hi जा घुसता है दूसरों क मामलों में. जो भी है मेरा तो हीरो है.

खुद से बातें करती वो खुद hi शर्माने लगी और मीठे ख्वाब देखती हुई सो गयी

सुबह मुझे नीरज ने hi जगाया शायद पैन किलर खाने से या चोट की वजह से मैं आज देर तक सोता रहा.

नीरज : क्या हुआ भाई आज इतनी देर तक सो रहा है ? रोज़ तो जल्दी उठ जाता है.

अमित : कुछ नहीं भाई बस पता hi नहीं चला

नीरज : वैसे रत कब वापिस आया था तू ? मैंने 11 बजे देखा तो तू यहाँ नहीं था.

अमित : वो टाइम का पता hi नहीं चला भाई . सैर करने कुछ ज्यादा hi दूर निकल गए थे डिनर क बाद तो आते आते देर हो गयी.

नीरज : कल्पना क साथ तेरा कोई चक्कर है क्या ?

अमित : अरे नहीं भाई ये कैसी बात कर रहे हो आप ? वो मेरी अछि दोस्त है बस.

नीरज : हम्म्म चल अब तैयार होजा. 7 बज रहे हैं. मैच नहीं तो क्या हुआ रिपोर्ट तो करना पड़ेगा न.

नीरज मुझे उठा कर नहाने चला गया. मैं भी उठा और नहाने की जगह बस हाथ मुँह धोकर फ्रेश हो गया. चोट की वजह से मैंने नहाना कैंसिल कर दिया था. नाश्ते क बाद हम सब स्टाफ क साथ ऑडिटोरियम में आ गए जहाँ पर प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन होना था. यहाँ पर वही लोग मौजूद थे जो जीते थे या उनकी टीम से कोई जीता था जब की हरने वाले बहार से hi निकल लिए. हॉल में पहुँचते hi कल्पना मुझे ढूंढते हुए मेरे पास आ गयी .

कल्पना : अब कैसी तबियत है तुम्हारी?

अमित : मैं ठीक हूँ मुझे क्या होना है ?

कल्पना : मैं तुम्हारी चोट क बारे में पूछ रही हूँ.

नीरज : चोट ? कैसी चोट ?

कल्पना : आपको बताया नहीं इसने ?

नीरज : नहीं , बात क्या है ? क्या हुआ है ?

अमित : अरे कुछ नहीं भैया ये बस ऐसे hi कह रही है

कल्पना : ऐसे hi कह रही हूँ ? ये देखिये

कल्पना ने मेरी T-shirt को गले से खींचते हुए कंधे का भाग उजागर किया जिसके नीचे पट्टी बंधी हुई थी.

कल्पना : गोली छू कर निकली है इसी कंधे से और ये कह रहा है कुछ नहीं.

नीरज : गोली ??? ये सब क्या पन्गा है अब ? कल कहाँ था तू ? क्या कर दिया तुमने अब ?

कल्पना : मैं hi बताती हूँ भैया इसके कारनामे .

उसके बाद कल्पना ने सारा किस्सा नीरज को सुना दिया कल रत जो कुछ भी हुआ था. नीरज भी हैरान परेशां था सब सुनते हुए .

नीरज : यार तुझे कोई अपनी परवाह है की नहीं ? हर जगह तू खुद hi घुस जाता है पन्गा करने.

अमित : भाई अब मेरे सामने किसी क साथ गलत हो रहा हो तो मैं कैसे खुद को रोकूं ? मुझसे नहीं रुका जाता .

कल्पना : पता है तुम्हारी यही बात तुम्हे सब से अलग करती है. हर कोई पहले अपने बारे में सोचता है पर तुम हमेशा दूसरों क बारे में सोचते हो.

नीरज : ये तो सही कहा तुमने पर कहीं किसी दिन कुछ गलत हो गया तो ? कभी सोचा है अपनी फॅमिली क बारे में ?

अमित : क्या होगा भैया ? ज्यादा से ज्यादा मर hi जाऊंगा न , काम से काम ये तो तसल्ली होगी क मच ाचा करते हुए मारा और फिर मर क शायद अपने माता पिता से मिल सकूँ.

मैं अपनी hi धुन में ये सब कह गया पर जब मेरी नज़र कल्पना पर पड़ी तो उसकी आँखों में आंसू आ गए थे.

कल्पना : अपनी परवाह नहीं तो क्या दूसरों की भी परवाह नहीं कर सकते तुम ? जो तुम्हे अपना मानते हैं तुम्हे चाहते हैं क्या उनके लिए जी नहीं सकते तुम ? हर वक़्त मरने की बातें करते रहते हो . तुम्हारे बाद उन लोगों का क्या होगा जो तुम्हे चाहते हैं ?

कल्पना की आँखों से आंसू छलक आये तो मैंने जल्दी से उसके आंसू पोंछे.

अमित : सॉरी यार वो मुँह से निकल गया . सच कहा तुमने . अगर मुझे कुछ हो गया तो सब दुखी होंगे . माँ और बाबा ने बचपन से इतने प्यार से पला है क कभी मुझे लगा hi नहीं था क मैं उनका सागा बीटा नहीं हूँ. और मौसियां भी मुझे कितना प्यार करती हैं . थैंक्स कल्पना मुझे मेरी गलती का एहसास दिलाने क लिए और अब तुम ज़रा है कर दिखाओ तुम रोटी हुई बंदरिया लगती हो.

कल्पना : क्या कहा बंदरिया ???? अभी बताती हूँ तुझे बन्दर कहीं क .

इतना कह कर कल्पना मुझे जान बुझ कर पंच मरने लगी और उधर स्टेज पर फंक्शन शुरू हो गया कुछ टीचर्स ने सब को वेलकम किया बेस्ट विशेष दी और रिजल्ट अन्नोउंस किया गया. प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन क लिए अभी किसी खास विप की वेट की जा रही थी . और जैसे कुछ सूट बूट पहने लोग एक साथ साइड वाले दरवाज़े से अंदर आ कर स्टेज की तरफ बड़े तो मैं सबसे आगे चल रहे शख्स को देख कर सोच में पद गया. मुझे इतनी दूर से सभी से पता तो नहीं चल रहा था पर मुझे लग रहा था क शायद ये अंकल हैं. खैर वो विप स्टेज पर प्रिंसिपल क साथ बैठ गए और उनके साथी स्टेज क नीचे फ्रंट रौ में एडजस्ट हो गए.

उसके बाद रिजल्ट बताते हुए फर्स्ट सेकंड और थर्ड आने वाले प्लेयर्स को बुलाया जाने लगा . जब मेरी बरी आयी और मैं स्टेज पर गया तो अंकल को अपने सामने देख कर मैं हैरान हो गया. ये सच में hi अंकल थे मोहित क पापा . मैंने सब से पहले उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

प्रिंसिपल: राघव जी आप इसे जानते हैं ?

अंकल : और ये मेरा बीटा है , मेरे जिगरी यार का बीटा. अमित

अमित : अंकल आप यहाँ कैसे ?

अंकल : बीटा ये सारा प्रोग्राम हमारी कंपनी द्वारा hi स्पोंसर किया जाता है हर बार. वैसे तो मैं खुद यहाँ नहीं अत पर सोचा तुम्हे तुम्हे सरप्राइज दे दूँ. कैसा लगा मेरा सरप्राइज ?

अमित : बहुत hi ाचा अंकल . मुझे बहुत ाचा लग रहा है आपके हाथों से प्राइज लेना.

‘ तो ये आपका भतीजा है अंकल ? ‘

ये आवाज़ किसी लड़की की थी . जैसे hi मैंने आवाज़ की तरफ देखा तो ये अधिवक्ता सुमन थी जिसे कल रत hi मिला था मैं . उसे सामने देख कर मैं हैरान हो गया .

अंकल : तुम जानती हो बीटा इसे ?

सुमन : जी कल hi मिली हूँ इससे , वाकई आपका भतीजा बहुत hi ताकतवर और दिलेर है और ाचा इंसान भी .

अंकल : पर तुमने कहाँ देख लिया ये सब ?

सुमन कुछ जवाब देती उससे पहले मैंने उसे न में इशारा किया तो वो बात को बदल गयी .

सुमन : वो सब हम बाद में बात कर लेंगे अंकल पहले आप सबको प्राइज दे दीजिये सब इंतज़ार कर रहे हैं .

अंकल फिर मेरे गले में मैडल डाला और एक ट्रॉफी भी दी. मैं उसे लेकर अपनी जगह पर वापिस आ गया . और ये प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन चलता रहा कोई 2 घंटे तक. कल्पना और नीरज को भी उनका प्राइज मिल गया. लास्ट में ओवरआल विनर ट्रॉफी हमारे कॉलेज को hi मिली. प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन क बाद हमारे स्टाफ और पूरी टीम ने साथ में ग्रुप फोटो भी खिंचवाए . अंकल फिर से हमारे पास आ गए .

अंकल : प्रोफ़ेसर साहब क्या मैं अपने बेटे को अपने साथ ले जा सकता हूँ?

प्रोफ व् : आइये आइये राघव जी बहुत ख़ुशी हुई आपसे मिल कर . कॉलेज तो आप आते hi नहीं कभी चलो काम से काम यहाँ मुलाकात हो गयी. पर आपका बीटा यहाँ कहाँ है ?

अंकल और प्रोफ व् बड़ी गरम जोशी से मिले दोनों पहले से hi एक दूसरे को जानते थे.

अंकल : अमित , ये मेरा बीटा hi है. मेरे खास दोस्त का बीटा है ये.

प्रोफ व् : अरे वह ये तो बहुत अछि बात है . बहुत hi ाचा लड़का है ये और सच कहूं तो कॉलेज में सब से ाचा है ये. प्रिंसिपल सर और मैं तो इसके मुरीद hi हैं. वैसे आप कहाँ ले जा रहे हैं इसे ? हमको तो आज वापिस जाना है अभी डेढ़ घंटे में.

अंकल : जी बस अब ये यहाँ है तो सोचा इसे अपना ऑफिस और फैक्ट्री भी दिखा दूँ यहाँ की. घर तो इसे मैं अपने साथ hi ले जाऊंगा अगर आप इजाज़त दें तो?

प्रोफ व् : अरे इसमें इजाज़त की बात कैसी. आपका बीटा है तो ले जाइये . वैसे भी यहाँ का काम तो ख़तम हो hi गया है.

अंकल : तो ठीक है , चलो अमित अपना सामान ले लो तुम अब मेरे साथ चलोगे .

अमित : ठीक है अंकल मैं अभी अपना सामान हॉस्टल से ले आता हूँ .

नीरज : अरे यार उसकी टेंशन मत ले. मैं ले आऊंगा . तू जा अंकल क साथ .

अंकल : ये भी ठीक है , चलो बीटा तुम्हे अपना ऑफिस दिखता हूँ.

मैं नीरज से गले लग कर मिला और उसे थैंक यू कहा. कल्पना भी पास में hi थी मैंने उसे सब बताया तो उसने भी मुझे जाने का कह दिया पर उसके चेहरे की ख़ुशी काम हो गयी थी इस बात से मगर उसने कुछ नहीं कहा. मैं प्रोफ व् से और कोच साहब से इजाज़त ले कर अंकल क साथ चल दिया .

‘ एक्सक्यूज़ में , क्या मैं भी आपके साथ चल सकती हूँ अंकल अगर आपको ऐतराज़ न हो तो ? ‘

ये आवाज़ पीछे से आती सुमन की थी . हम दोनों उसकी आवाज़ सुन कर रुक गए .

अंकल : अरे बीटा तुम ? तुम हमारे साथ आना चाहती हो ?

सुमन : जी अंकल , सोचा कुछ देर मैं भी आपके बेटे से बात कर लूँ . कल इसमें मेरी बड़ी मदद की थी और अभी तक इसको थैंक यू कहने का मौका तक नहीं मिला .

अंकल : ऐसी कौन सी मदद कर दी इसने तुमने बताया नहीं ?

सुमन : वो अंकल कल रत मेरी गाडी ख़राब हो गयी थी और जगह सुनसान थी तो मैं दर गयी थी तो इसने मेरी मदद की थी वहां पर वर्ण पता नहीं क्या होता मेरे साथ .

अंकल : सच में ? ये तो है hi ऐसा बिलकुल अपने बाप पर गया है . वैसे तुम बहार क्या कर रहे इतनी रत को ?

अंकल मुझसे सवाल पूछ लिया तो मुझे समझ नहीं आया जवाब क्या दूँ पर कुछ तो कहना hi था.

अमित : वो अंकल बस खाना खाने क बाद सैर करने निकल गया था वहीँ इनसे मुलाकात हो गयी .

अंकल : मैंने मन किया था न बहार जाने से . चलो ये भी ाचा hi हुआ इसी बहाने सुमन बेटी की मदद भी हो गयी . वैसे बजाज साहब कैसे हैं ? वो नहीं आये यहाँ ? उन्हें भी तो बुलाया गया था.

सुमन : पापा अचे हैं वो बस किसी क साथ उनकी खास मीटिंग थी तो मैं उनकी जगह आ गयी .

बातें करते हुए हम पार्किंग तक आ गए. जहाँ अंकल की कार कड़ी थी और पीछे पीछे उनके स्टाफ क लोग भी थे जो अलग अलग गाड़ियों में ए थे. कुल 5 गाड़ियां थी जो अंकल की कार क आगे पीछे चल रही थी. सुमन भी हमारे साथ hi हमारी कार में hi बैठ गयी .

अंकल : अमित , सुमन क पिता इस शहर क बहुत बड़े वकील हैं. और बड़े बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट और रईस लोग उनसे अपने मटर सोल्वे करवाते हैं . बहुत पुराणी जान पहचान है हमारी. पहले हमारे केस भी वही देखते थे पर अब नहीं .

सुमन : अंकल आप ने मेरे बारे में तो बता दिया पर अभी तक अपने अमित क बारे में कुछ नहीं बताया .

अंकल : बीटा ये मेरे खास दोस्त का बीटा है. इसके पापा का नाम विजय है और दूसरे शहर क पास hi गाओं में रहते हैं. अछि ज़मीन जायदाद है और खेती में hi रूचि हैं उनकी . हमारी तरह चुस्त चालाकी से पैसा कामना उन्हें ाचा नहीं लगता है है है

अंकल पापा की जगह बाबा का नाम लिया तो मैं समझ गया क वो मेरी पहचान नहीं बताना चाहते ज़रूर कोई वजह होगी. मैंने जब उनकी तरफ देखा तो वो भी समझ गए और इशारे से मुझे चुप रहने को कहा.

सुमन : फिर तो वो बहुत अचे होंगे और इसी लिए ये भी इतना ाचा है. ज़िन्दगी में पहली बार इतना ाचा इंसान मिला है जो बिना किसी मतलब क किसी की भी मदद करता है . वर्ण यहाँ तो बस पैसा और मतलब hi रिश्ते बनता है.

कुछ देर हम ऐसे hi बातें करते रहे और आधे घंटे में हम एक बड़ी सी बिल्डिंग में पहुँच गए. ऊपर बड़े बड़े अक्षरों में प. र . इंडस्ट्रीज लिखा हुआ था. गेट पर सिक्योरिटी गार्ड्स खड़े थे जिन्होंने गाड़ियां देखते hi गेट खोला और सलूट करते खड़े हो गए. गाड़ियां रुकते hi जल्दी से एक आदमी ने दरवाज़ा खोला और हम कार से बहार निकले .

अंकल : ये हमारा ऑफिस बीटा , और ये पर का मतलब है पवन राघव.

अंकल ने पापा का नाम ले कर बता दिया क दोनों दोस्तों क नाम से बनाई गयी कंपनी है . मेरे कंधे पर हाथ रख कर वो मुझे अपने साथ लगाए अंदर चल पड़े और साथ hi अंकल स्टाफ क वो लोग जो दूसरी गाड़ियों में थे. हर कोई अंकल को देखते hi अपनी जगह पर खड़े हो कर विश कर रहा था. चलते चलते हम एक बहुत hi बड़े और आधुनिक ऑफिस क पास पहुंचे जिसकी दीवारें कांच की hi थी और अंदर परदे लगे हुए थे. अंदर जाते hi बहुत बड़ी टेबल जिसके ऊपर भी जाँच लगा था और पीछे एक बड़ी आरामदायक चेयर थी . टेबल पर लैपटॉप और कुछ फाइल्स पड़ी थी सामने 4 चेयर्स और साइड में सोफे सेट लगा था. साथ में hi एक दरवाज़ा था शायद उस तरफ से भी कुछ आत्ताच था . अंकल ने मुझे टेबल क पीछे ले जाकर उस चेयर पर बिठाने को कहा

अंकल : बैठो बीटा , इस कुर्सी पर तुम्हारा हक़ है .

अमित : मैं कैसे बैठ सकता हूँ अंकल ये आपकी चेयर है.

अंकल : मेरी है तभी कह रहा हूँ . तुम्हे पता है न इस कंपनी में तुम्हारी क्या हैसियत है ? यहाँ की हर चीज़ तुम्हारी है. एक बार इस चेयर पर बैठ जाओ तो मुझे तसल्ली होगी.

अंकल क इतना कहने पर मैं उस चेयर पर बैठ गया . और जैसे hi मेरी नज़र सामने दीवार पर लगी तस्वीर पर पड़ी तो मेरी आँखों में आंसू आ गए . सामने मेरे पापा की बड़ी सी तस्वीर लगी हुई थी जिस पर हर टेंगा हुआ था .. मैंने अंकल की तरफ देखा तो उनकी आँख में भी 2 बूँद आंसू आ गए थे जिसे वो खुद hi साफ करते हुए मुस्कुराने लगे .

अंकल : तू नहीं जनता क आज मेरे दिल को कितनी ख़ुशी मिल रही है. ऐसा लग रहा है जैसे आज ये सुना ऑफिस फिर से खिल गया है. मेरा दोस्त आज बहुत खुश होगा तुझे यहाँ देख कर .

मैं उठ कर अंकल क गले लग गया और वो भी मुझे अपने सीने से लगाए फफक पड़े . हम दोनों ने hi एक दूसरे क आंसू पोंछे . सुमन ख़ामोशी से ये सब देख रही थी .

सुमन : अंकल आप दोनों ऐसे ? बात क्या है ?

अंकल : मुस्कुराते हुए ) अरे कुछ नहीं बीटा. आज पहली बार मेरा बीटा इस ऑफिस में आया है तो ख़ुशी से आंसू आ गए . चलो अब लंच करते हैं बहुत देर हो गयी आज तो.

अंकल मुझे और सुमन को साथ लिए ऑफिस में hi लगे उस दरवाज़े से दूसरी तरफ ले गए जहाँ बहुत आरामदायक कमरा बना हुआ था . सहूलियत की हर चीज़ थी यहां और आराम करने क लिए बीएड भी. एक तरफ शायद वाशरूम था. अंकल हमें बैठने का कह कर वाशरूम में फ्रेश होने चले गए .

सुमन : बुरा न मनो तो क्या मैं जान सकती हूँ अंकल और तुम्हारी आँखों में आंसू क्यों आ गए ? बात सिर्फ उतनी नहीं है जो अंकल ने बताई . अगर ठीक लगे तो बता दो वर्ण कोई बात नहीं .

अमित : बात वो hi है जो उन्होंने बताई. हाँ उसके साथ एक और बात ये है क मैं इस फर्म में हिस्सेदार भी हूँ पापा की तरफ से तो इस लिए वो थोड़ा भावुक हो गए थे क्यूंकि पापा तो यहाँ आते नहीं .

सुमन : पर .....

सुमन बीच में hi चुप हो गयी क्यूंकि वाशरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आ गयी थी. अंकल क आते मैं भी हाथ मुँह धोने चला गया . तब तक अंकल ने खाना लगाने को कह दिया . मेरे बाद सुमन भी वाशरूम चली गयी.

अंकल : बीटा तुम समझ hi गए होंगे क मैंने जान बुझ कर तुम्हारे पापा का नाम नहीं बताया . इसकी खास वजह है. यहाँ लोग जानते हैं तुम्हारे पापा को और मैं नहीं चाहता किसी को पता चले तू उनके बेटे हो. फ़िलहाल तो नहीं जैसा क सब चाहते हैं तुम्हारे घर पर भी. मगर एक दिन मैं सबको ये ज़रूर बताऊंगा.

इतने में खाना आ गया हो शायद अंकल यहाँ आने से पहले hi बता चुके होंगे क लंच हमने यहीं करना है. उधर से सुमन भी वापिस आ गयी और हमने खाना साथ में खाया . फिर अंकल ने स्टाफ क बड़े लोगों को बुला कर मुझे उनका मालिक कह कर इंट्रोडस करवाया.

अंकल : मल्होत्रा जी , ये है मेरा बीटा अमित मेरे दोस्त का बीटा है और अब से इस फर्म में बराबर का हिस्सेदार. इसे मेरी जगह hi समझें सब लोग और वही इज़्ज़त दें जो मुझे देते हैं. इसके लिए जल्द hi यहाँ एक बढ़िया सा ऑफिस तैयार कीजिये . इसकी जब मर्ज़ी हो ये यहाँ आ सकता है. और अमित ये हैं मल्होत्रा जी हमारे बहुत पुराने वफादार साथी. मेरे बाद यही सब कुछ देखते हैं. कोई भी बात पूछनी हो तो इनसे पूछ सकते हो या कुछ भी काम हो तो इनसे कह सकते हो .

अमित : नमस्ते अंकल .

मल्होत्रा : नमस्ते बीटा , तुम्हे देख कर तो ऐसा लग रहा है जैसे पवन

अंकल : मल्होत्रा जी अमित को बाकि स्टाफ से भी मिलवा दीजिये.

अंकल मल्होत्रा जी की बात को बीच में हो टोकते हुए उन्हें इशारा किया जिसे वो समझ गए और मुझे अपने साथ बहार ले आये बाकि स्टाफ से मिलवाने . कुछ देर इंट्रोडक्शन क बाद अंकल मुझे फैक्ट्री चलने को कहने लगे.

सुमन : ाचा अंकल अब इजाज़त दें मैं अब चलती हूँ. आपको तो समय लगेगा और मुझे एक केस क सिलसिले में किसी से मिलना भी है ज़रूरी. ाचा अमित मैं चली हूँ पर फिर तुमसे ज़रूर मिलूंगी . Bye bye

सुमन क जाने क बाद अंकल मुझे अपने साथ कार में बैठा कर चल दिए फैक्ट्री की तरफ जो शायद यहाँ से दूर थी. पहले की तरह hi आगे पीछे गाड़ियों का काफिला वैसा hi था .

अंकल : बीटा सुमन पेशे से वकील है और वो तुमसे शायद कभी न कभी ज़रूर पूछेगी क हमारा रिश्ता क्या है और कैसे है. पर मेरी बात यद् रखना उसे कभी मत बताना क सचाई क्या है . क्यूंकि उसके पिता तुम्हारे पापा को अछि तरह जानते हैं . पवन ने hi बजाज को अपनी फर्म का कानो सौंपा था जब वो ें अनजान सा वकील था लोगों क लिए. मगर उसने इमां की जगह पैसे को चुना

अमित : मतलब ?

अंकल : ये सब छोडो बस इन बातों से तुम दूर hi रहना . चलो अब फैक्ट्री भी देख लो जिसकी शुरुआत तुम्हारे पापा ने hi करवाई थी .

थोड़ी देर में हम इंडस्ट्रियल एरिया में आ गए जहाँ बड़ी बड़ी फैक्ट्रीज थी. एक दीवार क साथ लगभग आधा किलोमीटर चलने क बाद एक गेट पर गाडी रुकी और सिक्योरिटी गार्ड्स सलूट करते हुए गेट खोल कर खड़े हो गए . ये बहुत बड़ी फैक्ट्री थी जिसका एक सिरा तो मैं देख लिया था और दूसरा सिरा शायद उतना hi आगे तक था और चौड़ाई का अंदाज़ा लगा पाना आसान न था. बड़ी बड़ी मचिनेस चलने की आवाज़ और धमक बहार तक आ रही थी. एक साइड में ट्रक्स बड़े बड़े कंटेनर ले कर बहार निकलने क लिए तैयार खड़े थे और कुछ ट्रक्स अंदर की तरफ जाते हुए नज़र आ रहे थे. कार अभी भी अंदर चलती हुई 5 मिनट्स क बाद रुकी . यहाँ पर भी एक ऑफिस बना हुआ था . पहले की तरफ यहाँ भी दरवाज़ा बहार से hi खोला गया और अंकल क साथ मैं उतर कर अंदर गया .

अंकल : बीटा ये फैक्ट्री सब से पहले लगायी गयी थी . पहले ये इतनी बड़ी न थी पर अब देखलो चार गुना हो चुकी है. ज्यादातर सामान विदेशों में hi भेजा जाता है यहाँ से और इस जैसी 2 और हैं इसी शहर में . उसके इलावा 4 और हैं 2 तो अपने उसी शहर में hi हैं. पर मुझे यहीं आना ज्यादा पसंद है क्यूंकि इसकी शुरुआत हम दोनों दोस्तों ने मिल कर की थी .

चलते चलते अंकल मुझे फैक्ट्री और काम क बारे में बताते गए और बीच बीच में जो भी मिलता वो पूरी इज़्ज़त देता अंकल को और साथ hi मुझे भी. तभी अंकल ने पेओन को किसी का नाम लेकर उसे बुलाने को कहा और हम अब वर्क एरिया की तरफ चल पड़े. तभी एक तरफ से एक 45 साल क करीब आदमी जो एक खास यूनिफार्म में था भागता हुआ हमारी तरफ आया और झुक कर अंकल को नमस्ते किया .

अंकल : और रामदीन कैसे हो ?

रामदीन: ठीक हूँ मालिक आपकी बड़ी किरपा है.

अंकल : इससे मिलो , ये है अमित . मेरे बाद मोहित और ये hi यहाँ क मालिक होंगे .

रामदीन: राम राम छोटे मालिक .

अमित : राम राम अंकल .

अंकल : और घर पर सब ठीक है न?

रामदीन : जी मालिक सब आपकी किरपा है .

अंकल : ये तो भगवन की किरपा है मैं कौन होता हूँ कुछ करने वाला.

रामदीन: मेरे लिए तो आप hi मेरे भगवन मेरे अन्नदाता हैं

अंकल : तुम्हारे भाई का कुछ पता चला फिर कभी ?

रामदीन : नहीं सर्कार बहुत ढूँढा पर वो कभी मिला hi नहीं. इतने साल हो गए पता नहीं वो है भी या ...

अंकल : दिल छोटा मत करो . वैसे वो भी तुम्हारी तरह बड़ा वफादार था. पता नहीं ऐसे अचानक गायब क्यों हो गया था. अगर वो मिल जाता तो बहुत कुछ पता चल सकता था. ाचा अब तुम जाओ .

अंकल क चेहरे क भाव कुछ देर क लिए बदल गए थे रामदीन से उसके भाई क बारे में पूछते हुए पर खुद को सँभालते हुए वो उसे जाने का कह कर आगे बाद गए मुझे फैक्ट्री दिखते हुए.

अमित : अंकल आप किस बारे में बात कर रहे थे?

अंकल : कुछ नहीं बीटा , है एक पुराण किस्सा जो कभी सुलझ नहीं पाया . जिसके बारे में वो hi बता सकता था पर पता नहीं कहाँ गायब हो गया वो .

उसके बाद अंकल मुझे फैक्ट्री दिखते रहे . अंकल ने बताया क ये फैक्ट्री 24 घंटे चलती है अलग अलग शिफ्ट में वर्कर्स से काम लेकर. अंकल ने बताया क पापा वर्कर्स को नौकर नहीं बल्कि बराबर का हिस्सेदार मानते थे और साल में जितना भी मुनाफा होता था वो आधा वर्कर्स में बाँट दिया जाता था जो आज भी अंकल कर रहे थे. इसके इलावा बहुत सरे बेनिफिट्स दिए जाते थे जैसे हेल्थ का बच्चों की एजुकेशन का और घर लेने क लिए ब्याज रहित लोन. अंकल ने पापा क उसूल अभी तक चलाये रखे थे और इसी लिए उनके पास काम करने वाला कोई भी एम्प्लाइज न बेईमानी करता था न कहीं छोड़ कर जाता था. इसके इलावा पापा ने अनाथ आश्रम और वृद्ध आश्रम भी बनवाये थे जो उनके द्वारा बनाया गया ट्रस्ट चला रहा था. वो ट्रस्ट अभी भी काम कर रहा था जिसकी देख रेख अंकल hi कर रहे थे क्यूंकि पापा क इलावा वो hi थे इस ट्रस्ट क करता धर्ता. मुझे पापा क ये अचे काम जान कर उन पर गर्व हो रहा था. करीब 8 बजे अंकल मुझे साथ लेकर वापिस अपने शहर की तरफ चल दिए.

उधर आज निधि क ऑफिस में बर्थडे पार्टी ओर्गनइजे की गयी थी आज. बाकि स्टाफ तो आज अचे अचे ड्रेस पहन कर आया था पर निधि आज भी ऑफिस ड्रेस में hi थी. लंच से कुछ टाइम पहले hi पार्टी शुरू कर दी गयी. निधि इस पार्टी में शामिल होना नहीं चाहती थी इस लिए अपने केबिन में hi वो काम कर रही थी.

‘ क्या यार निधि आज सब मेरा बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं और तुम हो क आज भी यूनिफार्म पेहेन कर काम कर रही हो. चलो उठो और चलो मेरे साथ . वर्ण मैं केक नहीं काटने वाली.’

ये निधि क साथ hi जॉब करने वाली टीना नाम की एक आधुनिक लड़की थी जो इस समय एक मॉडर्न शार्ट ड्रेस में थी. जल्दी तरक्की करने क लिए अपने जिस्म का इस्तेमाल करना इस लड़की को गलत नहीं लगता था इस लिए ये मैनेजर की भी खास थी और आज अपने बर्थडे की पार्टी एन्जॉय करने क नाम पर निधि को फसा रही थी . बर्थडे तो था नहीं पर एक षड़यंत्र ज़रूर था. जो मैनेजर द्वारा बनाया गया था.

निधि : यार मेरा बहुत सा काम पेंडिंग है प्लीज तुम एन्जॉय करो . वैसे भी मुझे ये सब ाचा नहीं लगता .

टीना : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , बस थोड़ी देर क लिए hi अजा. क्या हो जायेगा इतने में ? यहीं ऑफिस में hi हैं सब .

निधि बेचारी अब कैसे मन करती बात तो ठीक hi थी . उसे मैनेजर से परहेज़ था पर सब ऑफिस में hi थे तो डरने वाली कोई बात नहीं थी. इस लिए उसने भी ज्यादा मन नहीं किया और रीना क साथ उठ कर हॉल में आ गयी जहाँ सब जमा थे. मैनेजर अभी अपने केबिन में hi था जिससे निधि को कुछ रहत मिली . टीना ने निधि को अपने साथ खड़ा किया और केक करने लगी . सब तालियां बजाते हुए उसे विश करने लगे . बरी बरी से सबने टीना का मुँह मीठा करवाया और साथ hi सबके लिए सॉफ्ट ड्रिंक्स और स्नैक्स सर्वे किये गए केक क साथ . निधि को खुद अपने हाथों से टीना ने कोल्ड ड्रिंक बोतल मुँह को लगा दी. निधि ने भी कोल्ड ड्रिंक पिणि शुरू कर दी और केक खा कर अपनी जगह वापिस चली गयी जबकि सब लोग अब म्यूजिक की धुन पर डांस करने लगे. 5 मिनट्स क अंदर hi निधि का सर घूमने लगा और अपनी चेयर पर बैठे बैठे वो बेहोश सी होने लगी. अपनी तबियत अचानक ख़राब होती देख कर उसने जल्दी से अपनी माँ को फ़ोन लगा दिया और अपनी तबियत का बता कर कारन को भेज कर उसे ले जाने को कहा. बात करने क बाद निधि वहीँ फाइल्स पर सर रख कर बेहोश हो गयी. वहीँ मैनेजर का साथी दूर से निधि पर नज़र रखे हुए था . निधि क बेहोश होते hi ज़हरीली मुस्कान उसके चेहरे पर आ गयी और उसने मैनेजर को फ़ोन पर बता दिया .

निधि से बात होने क बाद रजनी को टेंशन हो गयी क उसकी बेटी क साथ क्या हुआ है. उसने अभी कॉलेज से घर लौटे कारन को निधि क फ़ोन क बारे में बताया

रजनी : कारन बीटा जल्दी जा निधि की तबियत ख़राब हो गयी है अभी उसका फ़ोन आया था . तू जा कर जल्दी उसे ले कर आ.

कारन : झुंझलाते हुए ) क्या माँ , देख नहीं रही अभी थका हरा कॉलेज से आया हूँ और आते hi तुम पीछे पद गयी . दीदी कोई बची नहीं हैं . उनसे कह दो क टेक्सी ले कर घर आ जाएँ. मैं नहीं कहीं जाने वाला इस धुप में.

रजनी : बेशरम तेरी बड़ी बहिन है वो जा उसे लेकर आ. पता नहीं किस हल में होगी मेरी बची .

कारन : मैं नहीं जाने वाला माँ अभी मुझे रेस्ट करनी है . थोड़ी देर बाद जाऊंगा .

रजनी : कैसा भाई है निर्लज्ज , तेरी बहिन की कोई परवाह नहीं तुझे ? उससे पैसे मांगते वक़्त तो तू एक पल इंतज़ार नहीं करता और आज जब उसे ज़रूरत है तो ये जवाब दे रहा है . जा जल्दी ले कर आ उसे.

कारन : बात बात पर ताने मरती रहती हो अगर इतना hi बुरा लगता हूँ तो घर से चला जाता हूँ मैं . खुद hi ले आना जा कर उसे

इतना कह कर कारन पेअर पटकता हुआ घर से बहार निकल गया. रजनी बेचारी चिंता में मरी जा रही थी क पता नहीं निधि किस हालत में है. रजनी ने निधि को फ़ोन लगाया पर वो फ़ोन नहीं उठा रही थी. रजनी को बहुत ज्यादा टेंशन होने लगी . इस वक़्त को किसे मदद क बुलाये. अमित भी तो शहर में नहीं था. और निधि क पापा शाम को वापिस आते थे. नैना भी अभी तक नहीं लौटी थी . रजनी ने खुद hi जाने का फैसला किया . और घर को टाला लगा कर ऑटो पकड़ कर निकल गयी निधि क ऑफिस की तरफ.

उधर निधि क बेहोश होते hi मैनेजर अपने पार्टनर अपने जूनियर को लेकर सबकी नज़र से बचते हुए निधि क पास पहुँच गया और दोनों निधि को उठा कर अपने केबिन में ले गए . दोनों क चहरे की चमक बता रही थी क आज वो अपन प्लान में कामयाब हो गए हैं.



उधर रजनी बेचारी ऑटो में पल पल बेचैन बार बार निधि को फ़ोन लगा रही थी मगर कोई जवाब नहीं . रजनी ने अपने पति और नैना को भी निधि क बारे में बता दिया . नैना जो आज करुणा क साथ फिर से अमित क कॉलेज गयी हुई थी और सबके साथ एन्जॉय कर रही थी. अपनी माँ से निधि दीदी क बारे में सुन कर हैरान हो गयी. जल्दी से वो करुणा को साथ लिए निधि क ऑफिस की तरफ निकल गयी.
 
अरे यार कोई न्य रीडर था सीमा नाम से. मैंने उसे सुग्गेस्ट किया था क प्यार 100 बार बेस्ट स्टोरी है साइट पर . उसने कहा क उसने शुरुआत से पड़ी है पर उसने सिर्फ सेक्स है कहानी नहीं. मैंने उसे समझाया क आगे पदों तुम्हे पता चल जायेगा . एक यही तो कहानी है बेस्ट ऑफ़ थे बेस्ट. उसने भी ये hi कहा क वो आगे पड़ेगा . अब मेरे से ये गलती हो गयी क मैंने उसका कमेंट लिखे कर दिया . इसी बात पर एनिग्मा भाई नाराज़ हो गए. मोंटी भाई ने मज़ाक में hi एक ऐसे hi हल्का सा कमेंट कर दिया था तो मैंने वहां स्माइल चिपका दी क्यूंकि मुझे पता था वो बस उंगली कर रहे हैं. अब बताओ क्या किया जाये. किसी अनजान को जिसे कुछ नहीं पता उसे तो समझाना hi बेहतर था न बजाये कुछ गलत कहने क.
 
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