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घर आते hi अंकल आंटी को साथ लिए मुझे अपने साथ बिठा कर चल दिए दिव्या मौसी क घर. मोहित दोपहर को मौसी से मिल आया था तो इस वक़्त उसने जाने से मन कर दिया क्यूंकि उसे मीनल से बात करनी थी फ़ोन पर . वैसे तो मैंने सोचा था क दिव्या मौसी क घर न जॉन पर अंकल आंटी को मन करता तो क्या कहता क मैं क्यों अपनी मौसी क घर नहीं जाना चाहता . इससे ये बात सबको पता चल सकती थी क मेरे और दिव्या मौसी क बीच सब ठीक नहीं है . खैर हम दिव्या मौसी क घर गए तो इस वक़्त वहां पर राधा दिव्या मौसी क इलावा रीता मौसी भी थी. अंकल आंटी को देख कर रीता मौसी बहुत खुश हुई . कितने सैलून बाद वो आज अंकल आंटी को अपने सामने देख रही थी. अंकल आंटी भी बहुत खुश थे उन्हें अपने सामने देख कर.
रीता मौसी : तुम दोनों को इतने सैलून बाद अपने सामने देख कर मुझे यकीन नहीं हो रहा क ये तुम दोनों hi हो. कितना प्यार था तुम दोनों का पवन और दामिनी क साथ .
बात करते करते रीता मौसी की आँखों में पानी आ गया . यही हल अंकल आंटी का भी था जो पुराणी बातों को यद् कर रहे थे रीता मौसी को देख कर
अंकल : आप को फिर से देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है. लगता है अमित क रूप में पवन फिर से लौट आया है और फिर से वही पुराण समय भी.
आंटी : आप आज भी वैसी hi हैं दीदी काश दामिनी भी हमारे साथ होती.
रीता मौसी : काश ऐसा होता तो कितना ाचा होता.
आंटी : वैसे दिव्या कहाँ है मैं उसे देखना चाहती हूँ . दिव्या को देखना मतलब दामिनी को देखना , दोनों एक जैसी hi तो थी एक दूसरे की जान. मुझे जल्दी से उससे मिलवा दो .
रीता मौसी दोनों को अपने साथ अंदर ले गयी और मैं वहीँ हॉल में बैठ गया . मैं दिव्या मौसी क सामने जाना नहीं चाहता था. राधा जल्दी से अंकल आंटी क लिए पानी ले कर उनके पीछे गयी. अंदर क्या हो रहा है मैं देखना तो चाहता था मगर अंदर भी तो जाना नहीं था. कुछ देर बाद राधा कमरे से बहार आयी तो उसकी आँखों में नमी थी . मैंने अंदाज़ा लगा लिया क अंदर क्या चल रहा होगा. दिव्या मौसी को देख कर ज़रूर आंटी मेरी माँ की बात करते हुए खुद भी रो रही होंगी और उन्हें भी रुला रही होंगी .
राधा सीधा किचन में गयी और अपने चेहरे पर मणि मर कर मेरे पास आ गयी .
राधा : तुम यहाँ बहार क्यों बैठे हो अकेले ?
अमित : इतने लोग पहले hi अंदर बैठे हैं इस लिए मैं बहार hi बैठ गया . वैसे भी इतने सैलून बाद अंकल आंटी मौसी से मिल रहे हैं तो ढेर साडी बातें करेंगे . मेरा वहां क्या काम
राधा : मगर तुम्हे तो ाचा लगता है न अपने मम्मी पापा का बारे में सुन्ना , फिर यहाँ क्यों बैठे हो?
अमित : बताया तो है , अभी बड़ों को अकेले में बातें करने दो
राधा : ाचा मेरे साथ आओ ज़रा मेरे कमरे में , मुझे एक काम है.
राधा उठ कर अपने कमरे में चली गयी और मैं भी उसके पीछे पीछे हो लिया . अंदर आते hi राधा ने दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरे गले लग कर रोने लगी.
राधा : रट हुए) ी ऍम सॉरी अमित ये सब मेरी वजह से हुआ
अमित: शॉकेड ) ये तुम क्या कह रही हो ? क्या हुआ है?
राधा : मुझे सब पता चल गया है माँ ने तुम्हारे साथ क्या किया. मैंने तुम्हारी और मौसी की बातें सुन ली थी. माँ को ऐसा नहीं करना चाहिए था. अपनी माँ की तरफ से मैं माफ़ी मांगती हूँ , मैं जानती हूँ तुम माँ से मिलना नहीं चाहते और इसी लिए अंदर नहीं जा रहे. मैं जानती हूँ तुम उनसे नाराज़ हो और इसी लिए अब यहाँ आना भी बंद कर डोज. पर इसमें मेरी क्या गलती है ? मुझे किस जुर्म की सजा मिलेगी?
राधा मेरे गले लगी ये सब कहती हुई तो रही थी और इसी वजह से मेरी भी ऑंखें छलक आयी थीं . राधा को दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ पर ऐसा तो मैंने सोचा भी नहीं था. मैं तो बस दिव्या मौसी क सामने नहीं आना चाहता था जब तक क वो खुद न मुझे बुलाएँ. मगर राधा को ये दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ.
अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? किसने कहा मैं यहाँ आना बंद कर दूंगा? वो तुम्हारी माँ होने क साथ मेरी भी तो मौसी हैं . और मौसी का मतलब होता है माँ जैसी. मैं भला उनसे नाराज़ कैसे रह सकता हूँ. हाँ मेरा चेहरा देख कर अगर उन्हें ाचा नहीं लगता तो मैं उनके सामने आ कर उन्हें दुखी नहीं करना चाहता . और तुम क्यों रो रही हो? मैंने तुम्हे तो कुछ नहीं कहा. अब रोना बंद करो क्यूंकि तुम रट हुए बंदरिया लगती हो.
राधा : मैं जानती हूँ तुम मेरा दिल रखने क लिए ये सब कह रहे हो. तुम चाहो तो मुझे सजा दो मगर मुझे खुद से अलग मत करना . तुम्हारे सिवा और कौन है मेरा जिसे मैं जब चाहे पुकारूँ और वो मेरी मदद क लिए चला ए? प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाना . माँ बुरी नहीं है वो भी तुम्हे चाहती है मगर वो गुस्सा क्यों करती है ये मुझे नहीं पता. पर अब मैं पता लगा क रहूंगी. वो क्या वजह है क वो तुम पर इतना गुस्सा करती हैं , मैं ज़रूर पता लगाउंगी.
अमित : रिलैक्स राधा , तुम किसी बात की चिंता मत करो. वक़्त क साथ सब ठीक हो जायेगा. मैं जनता हूँ एक दिन वो खुद मुझे इसकी वजह बताएंगी मगर मुझसे वडा करो तुम मौसी क साथ गुस्सा नहीं करोगी . वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं अगर तुमने भी उनसे गुस्सा किया तो उनको ाचा नहीं लगेगा. आखिर और है hi कौन तुम्हारे इलावा जिससे वो बात कर सकें.
राधा : मैं उनसे गुस्सा कर क कहाँ जाउंगी. वो मेरे लिए सब कुछ हैं , माँ भी पापा भी सहेली भी बहिन भी. मगर तुम पर उनका बेवजह गुस्सा करना मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लगता. तुम वडा करो कुछ भी हो तुम मेरा साथ नहीं छोड़ोगे.
अमित : मैं तो हमेशा से तुम्हारे साथ था राधा . जब तुम मुझसे बात किये बिना वहां से चली अति थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. जब तुम मुझे कई कई महीने साल तक नज़र नहीं आती थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस किया है. तुम मेरी सबसे अछि दोस्त हो. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस करता रहा हूँ. मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा चाहे जो भी हो.
राधा : मुझे भी सब यद् है और सच बताऊँ तो मैं भी तुमसे ढेरों बातें करना चाहती थी मगर माँ की वजह से तुमसे दूर रहती थी और हर बार गाओं से आने क बाद कई कई दिन तक मैं अपनी उस मज़बूरी क लिए रोटी रहती थी . मैंने हुई कभी कोई दोस्त नहीं बनाया . मेरे लिए हमेशा से तुम hi मेरे दोस्त थे और आज भी हो. मैं बस कभी तुम्हे खोना नहीं चाहती. माँ पापा क बाद अगर मेरी ज़िन्दगी में मुझे कोई सबसे प्यारा है तो वो तुम हो.
मैंने राधा को खुद से अलग किया और उसकी आँखों से आंसू साफ करते हुए कहा
अमित : मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा ये मेरा वडा है. तुम जब भी मुझे पुकारोगी मैं चाहे इस दुनिया में हूँ या उस दुनिया में , मैं तुम्हारे लिए ज़रूर आऊंगा.
मैं पता नहीं किस रो में बेहटा हुआ ये सब कहे जा रहा था मुझे भी नहीं पता. राधा की आँखों में आंसू देख कर मेरा खुद पर hi काबू नहीं थी. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों होता है जब भी बात राधा की हो. रिश्ते में वो मेरी बहिन लगती थी पर एक अनजान सी कशिश मैंने शुरू से hi महसूस की है राधा को लेकर मेरे मन में. मैंने ज़ज़्बात में इतना कुछ कह तो दिया मगर शायद राधा को ये पसंद नहीं आया और उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.
राधा : ख़बरदार फिर कभी ऐसी बात की तो. मुझे किसी और दुनिया का कुछ नहीं पता . मैं बस तुम्हे इसी दुनिया में इसी जनम में हमेशा अपने सामने देखना चाहती हूँ.
दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ से हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए . और बहार से आवाज़ आयी
रीता मौसी : राधा क्या तुम अंदर हो ? अमित कहाँ है दिखाई नहीं से रहा ?
राधा : आई मौसी अमित मेरे साथ hi है.
राधा ने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो रीता मौसी सामने hi कड़ी थी और मुझे देख कर उनके चेहरे पर जो चिंता क भाव थे वो दूर हो गए.
रीता मौसी : तुम यहाँ हो ? मुझे लगा क तुम कहीं बहार तो नहीं चले गए. चलो राधा डिनर तैयार करें सब क लिए . और तुम जाओ अंदर जा कर बैठो , यहाँ क्या कर रहे हो?
रीता मौसी मुझे अंदर जाने का कह कर राधा को लेकर किचन में चली गयी . मैं भला कैसे अंदर जाता इस लिए मोबाइल पकड़ कर बैठ गया. मोबाइल चेक किया तो ज्योति क फ़ोन से कुछ मेस्सगेस आये हुए थे. मैंने उसे रिप्लाई किया. इसी बिच. मेरा फ़ोन बजने लगा. स्क्रीन पर नाम देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी.
अमित : hello , आ गयी यद् ?
मेघा : यद् तो तब करूँ अगर भूली हूँ तो. तुम्हारा एहसास तो हर वक़्त रहता है मुझे.
अमित: बड़ी रोमांटिक हो रही हो. वैसे मेरा एहसास कहाँ रहता है ? आगे या पीछे?
मेघा : मत पूछो कहाँ कहाँ रहता है. मेरा रोम रोम तुम्हे यद् कर क फड़कने लगता है. जिस्म क्या अब तो दिल में भी तुमने अपने नाम की मोहर लगा दी है.
अमित : लगता है बड़ी आग लगी हुई है तुम्हारे अंदर.
मेघा : आग क्यों न लगे? तुम्हारा ख्याल आते hi मैं गीली होने लगती हूँ . अब जल्दी से मिलो और मेरी आग बुझाओ.
अमित: ऐसे नहीं , पहले मेरा काम करो फिर मैं तुम्हारी आग ठंडी करूँगा.
मेघा : बड़े ज़ालिम हो , मैं खुद तुम्हारे आगे टंगे खोली बैठी हूँ और तुम हो क दूसरों की पीछे लगे हुए हो.
अमित: अब बातें hi बनाओगी या काम भी करोगी कोई .
मेघा : इसी लिए तो फ़ोन किया है.
अमित : क्या मतलब ?
मेघा : मतलब ये क मैंने रुपाली को मन लिया है और कल तुम्हे आना है मेरी आग बुझाने क लिए.
अमित : क्या ??? तुम सच कह रही हो ? क्या सच में रुपाली मन गयी ?मुझे यकीन नहीं हो रहा है.
मुझे सच में यकीन नहीं था क रुपाली मन जाएगी. पता नहीं मेघा ने ये कैसे किया पर ये एक मुश्किल काम था जो मेघा ने कर दिया . इससे ये साबित हो गया क मेघा मुझसे अपनी आग बुझाने क लिए कुछ भी कर सकती है.
मेघा : इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है? तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ. मैंने तुम्हारा काम कर दिया अब मुझे मेरा इनाम चाहिए.
अमित: तुमने मुझे बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई है. इसका इनाम तुम्हे ज़रूर मिलेगा. मगर तुमने ये किया कैसे ?
मेघा : उसे तो मन्ना hi था. साली मेरी पति की रखैल बानी फिरती है और ऐसे दिखती है जैसे बड़ी सटी सावित्री हो . बस इसी बात पर मन लिया उसे. मैंने तो कल hi बात कर दी थी मगर साली पहले मन नहीं रही थी इस लिए एक दिन वेट करनी पद गयी .
अमित : ग्रेट अब तो उसकी भी आग ठंडी कर दूंगा.
मेघा : अचे से करना ताकि उसके बाद उसकी छूट भोसड़ा बन जाये और फिर मेरा पति भी उससे दूर hi रहे. वैसे भी एक बार जिसके अंदर तुम्हारा लैंड चला जायेगा उस छूट में कोई और लैंड जगह बना hi नहीं पायेगा . क्यूंकि फिर छूट छूट नहीं रहती भोसड़ा बन जाती है. हे हे हे
अमित : तो फिर कहाँ मिलना है और कब
मेघा : मैं तुम्हे एड्रेस भेज देती हूँ अपने फ्लैट का . कल वहां आ जाना 11 बजे तक.
अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा.
मेघा : मगर मुझे इसका इनाम चाहिए ये बात यद् रखना .
अमित : वैसे तुम्हे क्या चाहिए . तुम्हारे पास तो सब कुछ है.
मेघा: वो मैं बाद में बताउंगी .
अमित : ाचा ठीक है बता देना . अब मुझे जाना है मैं और बात नहीं कर सकता .
मेघा : ठीक है तो कल 11 बजे .
अमित : ok
उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया. रुपाली इतनी जल्दी मन जाएगी ये मुझे अंदाज़ा भी नहीं था. बल्कि मुझे तो लगा था और वो मानेगी hi नहीं . चलो जो भी है मेरे प्लान क लिए रुपाली का आना बहुत ज़रूरी था जो मैं करने वाला था. थोड़ी देर में रीता मौसी और राधा ने डिनर रेडी कर दिया और मैं अंकल आंटी क साथ हॉल में बैठ कर खाना खाने लगा. दिव्या मौसी रूम से बहार नहीं आयी या तो वो इतनी वीक थी क आ नहीं सकती थी या फिर वो मेरे सामने नहीं आना चाहती थी और मैं भी उनके सामने नहीं जाना चाहता था. खाना खाने क बाद अंकल आंटी एक बार फिर दिव्या मौसी से मिलने रूम में गए मगर मैं वहीँ बैठा रहा इस बार रीता मौसी ने ये बात नोट कर ली.
रीता मौसी : अमित , क्या बात है ? मैं देख रही हूँ तुम दिव्या क पास नहीं जा रहे . मैंने कहा था न क उससे नाराज़ मत हो . वो तुमसे बहुत प्यार करती है बीटा ऐसा मत करो उसके साथ. उसने बहुत दुःख देखे हैं , दामिनी क जाने क बाद तो उसने कभी है क देखा भी नहीं शायद . क्या तुम उसे और दुःख देना चाहते हो ?
अमित: मैं ऐसा क्यों चाहूंगा मौसी ? मगर मुझे देख कर उन्हें गुस्सा अत है और दुःख भी होता होगा अतीत की किसी घटना को यद् कर क. ऐसे में मैं उनके सामने जा कर उन्हें और दुखी नहीं करना चाहता.
रीता मौसी : घाव का इलाज करने क लिए उसे जब कुरेदा जाता है तो दर्द तो होता hi है न . दिव्या क दिल क ज़ख़्म बहुत पुराने हो चले हैं मगर आज भी जैसे ताज़ा हैं. तुम्हारे सामने आने से उसके वो घाव कुरेदे जा रहे हैं मगर तुम्हे hi उन घावों पर प्यार से मलहम भी लगाना है . इस लिए उससे दूर रहने की बजाये उसका सामना करो तभी तो उसके अंदर का दर्द बहार निकलेगा जिसे वो अंदर अंदर hi छुपाये जी रही है.
रीता मौसी क चेहरे पर इस समय बड़ी गंभीरता थी और शायद आँखों में नमी भी आने hi वाली थी क वो खुद को सँभालते हुए चली गयी . मैं रीता मौसी की बातों को सोचता रहा और फिर मुझे बाबा की बातें भी यद् आने लगी की कैसे दिव्या मौसी का मेरी माँ क साथ जुड़ाव था और बचपन में मुझे वो कितना प्यार करती थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ. एक तरफ दिल कहता क मुझे दिव्या मौसी क दिल में छिपे मेरे प्रति प्यार को बहार निकलना चाहिए दूसरी तरफ दिल कहता क वो मेरे सामने आने से दुखी होती हैं और मेरे पापा को गलत कहती हैं जो मुझे ाचा नहीं लगता था. मैं सोफे पर बैठा यही सोच रहा था क अंकल आंटी बहार आ गए और मैं रीता मौसी और राधा को bye कहता हुआ अंकल आंटी क साथ घर वापिस लौट आया.
बीएड पर लेता मैं रत भर रीता मौसी और बाबा की बातों को यद् कर क दिव्या मौसी क बारे में सोचता रहा. दिव्या मौसी ने चाहे कभी मेरी होश में मुझे प्यार नहीं किया हो मगर फिर भी मेरे दिल में उनके लिए कभी नफरत भरे ख्याल नहीं ए थे . इतना कुछ होने क बाद भी मैं छह कर भी उनसे नफरत नहीं कर प् रहा था . बल्कि मुझे खुद पर hi गिलटी महसूस हो रहा था क मैं उनकी बातों का बुरा मन कर उन्हें अकेला छोड़ कर चला आया जबकि राधा मेरे साथ कितना अपना पैन दिखती है. वो बेचारी मुझे अपनी ज़िन्दगी का एक हम हिस्सा मानती है और मैं उसे कभी समझ नहीं पाया . दूसरों को सहारा देने क चक्कर में उसे इग्नोर करता रहा जिसके लिए मैं hi एक मात्रा दोस्त हूँ. जो भी हो अब राधा को मैं अकेला नहीं रहने दूंगा चाहे मैं खुद उसके पास मौजूद रहूं या न मुझे उसको सेफ जोन में रखना होगा जिससे उसे कभी मेरी कमी महसूस न हो. ऐसे hi सोचते सोचते कब आँख लगी पता hi नहीं चला.
दूसरी तरफ रीता मौसी ने अमित की तरह दिव्या को भी झकझोरा और उसे उसकी गलती का एहसास भी दिलवाया क कैसे वो अमित क साथ गलत कर रही है. दोनों बहने एक hi कमरे में सो रही थी तो बातों क लिए इस काली रत क सन्नाटे में बहुत एकांत था अपनी बातों को खुल कर करने और समझने क लिए
रीता मौसी : दिव्या क्या तुम्हे नहीं लगता क तुम ज्यादती कर रही हो अमित क साथ? तुमने मुझे तो अपनी कसम देकर चुप करवा लिया पर क्या दामिनी को चुप करवा पाओगी ? तुम्हे अमित में पवन नज़र अत है क्यूंकि वो उसका पिता था मगर क्या तुम्हे दामिनी नज़र नहीं अति जिसने उसे पैदा किया . 9 महीने पेट में रखने वाली माँ का अधिकार बचे पर बाप से कहीं ज्यादा होता है , फिर भी तुम उसे उसके बाप की वजह से इतना दुःख देती हो. तुमने कभी ये सोचा है क दामिनी पर क्या बिट रही होगी ये देख कर क उसकी जान से प्यारी बहिन hi उसकी आखिरी निशानी उसके बेटे पर ऐसे ज़ुलम करती है. क्या जवाब डौगी अपने आप को बताओ मुझे? तुम्हारा दिल तो आज भी दामिनी का नाम लेकर धड़कता है फिर भी तुम अमित क साथ ऐसा करती हो. मैं नहीं जानती पवन ऐसा क्या किया क तुम उससे इतनी नफरत करने लगी क मरने क बाद भी उसे तुमने माफ़ नहीं किया ऊपर से उसकी सजा अमित को दे रही हो . जहाँ तक मैं जानती हूँ अमित में तो ऐसी एक भी बुराई नहीं है क कोई उससे नफ़रत करे . वो तो इतना प्यारा है क सब क दिल में जगह बना लेता है , देखा न कामिनी भी अब उसे कितना प्यार करती है. पर तुमने तो अपना दिल पत्थर का बना लिया है. कभी ऑंखें खोल कर देख एक माँ की नज़र से देख वो कितना प्यारा है. गौरी भाभी उस पर यूँ hi जान नहीं छिड़कती और सच कहूं तो मुझे लगता सब hi उसे प्यार करते हैं चाहे वो बड़े हो या हमारे बचे. तुमने देखा नहीं राधा ने किसी और को फ़ोन करने की बजाये अमित को फ़ोन किया. क्यूंकि उसे उस पर भरोसा है और तुमने उसके बारे में ऐसा सोचा? अब भी वक़्त है दिव्या ऑंखें खोल कर देख वो कितना ाचा है . उसे सिर्फ तेरा प्यार चाहिए. आज तो वो सिर्फ तेरे रूम में नहीं आया , सोच अगर उसने तेरे घर आना भी बंद कर दिया और राधा से भी नाता तोड़ लिया तो वो अकेली हो जाएगी. अपने लिए न सही राधा क लिए hi सोच.
रीता की एक एक बात दिव्या क दिल पर तीर की तरह चुभ रही थी. उससे अपने आंसू कण्ट्रोल नहीं हो रहे थे दामिनी का ख्याल आते hi. सच hi तो कहा था रीता दीदी ने, बचे पर माँ का हक़ बाप से भी ज्यादा होता है. शकल बाप से मिलने का मतलब ये तो नहीं क वो बाप जैसा hi होगा. जिस माँ ने 9 महीने अपने पेट में रख कर अपने खून से सींचा है और अपना दूध पीला कर बड़ा किया है क्या उसका कोई मोल नहीं? दामिनी को जवाब देने की बात पर तो दिव्या की आँखों क साथ साथ दिल भी रोने लगा था. दोनों बहनो में कितना प्यार था , यहाँ तक क उसके मरने क बाद भी आज तक वो उसे खुद से जुड़ नहीं कर पायी . जब अमित पैदा हुआ था तो किस तरह दिव्या उसे अपनी गॉड में ले लिया करती थी. दिव्या अमित को अपना बीटा hi मानती थी और राधा क होने क बाद तो जैसे दोनों बहनो ने फैसला hi कर लिया था क वो एक दूसरे क बच्चों को ले लेंगी . दामिनी ने राधा को अपनी बेटी बना लिया था और इसके लिए दोनों बहनो में गुप्त सहमति भी हो गयी थी क राधा की शादी अमित क साथ होगी. उसी अमित को आज दिव्या नफ़रत भरी नज़रों से देखने लगी थी. आखिर उसका कसूर hi क्या था. क्यों उसे उस जुर्म की सजा मिल रही थी जो उसने किया hi नहीं था. जो कुछ भी किया वो पवन ने किया था इसमें किसी और का दोष कैसे हो सकता है?
दिव्या : रट हुए ) मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ? मैं खुद को रोक नहीं पति जब भी अमित को देखती हूँ मुझे पवन hi नज़र अत है.
रीता : तो तू उसके चेहरे को मत देख कर न, बल्कि मैं तो कहती हूँ क अगर देखना hi है तो उसकी आँखों में देख . तुझे वहां सिर्फ दामिनी hi नज़र आएगी मेरी बहिन. यद् नहीं उस दिन राधा क बर्थडे पर क्या हुआ था. सच सच बताना क्या तुम्हे उस दिन दामिनी का एहसास नहीं हुआ था. हम सब ने देखा था क तू कैसे रो रही थी और तेरे आंसू बता रहे थे क तू दामिनी क लिए रो रही है. फिर भी तुझे अमित में सिर्फ पवन नज़र अत है?
दिव्या : मैं खुद को बहुत समझती हूँ दीदी पर क्या करूँ. उसके बाप ने मेरे साथ जो किया है वो मैं भुला नहीं पाती .
रीता : तुमने तो मुझसे कसम देकर मेरा मुँह hi बंद कर दिया है. मगर इतना सुन ले क जब तक तू अपना दुःख किसी की बताएगी नहीं ये तुम्हे जीने नहीं देगा . और मेरी मान तो सब भुला कर अमित को गले से लगा ले तुझे सुकून मिलेगा वर्ण तू ऐसे hi आंसू बहती रहेगी.
दिव्या का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और रीता की बात भी सही थी क जब तक वो अमित को ऐसे दुःख देती रहेगी वो खुद भी दुखी रहेगी . कहीं न कहीं अमित दिव्या का भी बीटा था चाहे वो दत्तक पुत्र हो या फिर दामाद की शकल में.
अगले दिन सुबह मैं अपनी रूटीन से उठ कर ेष्वरसीसे करने क बाद मोहित क साथ कॉलेज जाने की बजाये अपनी बाइक पर गया .
मोहित : आज फिर बाइक पर ? आज कहाँ जाने का इरादा है ? मंडे से टेस्ट शुरू हैं थोड़ा उधर भी ध्यान दे ले भाई.
अमित: बस यार मुझे कहीं जाना पड़ेगा अगर फ़ोन आ गया तो इस लिए बाइक पर जा रहा हूँ.
मोहित : अबे मेरी कार भी तो है न तू कब तक ऐसे अकेला बाइक पर घूमता रहेगा . मेरी मन तो पापा ने उस दिन कार तेरे लिए सेलेक्ट की थी न वो hi लेले. तुझे अकेले hi जाना है तो कार से भी तो जा सकता है न.
अमित: अरे यार इतनी सी बात क लिए कार की क्या ज़रूरत है. तू चल मैं भी आ रहा हूँ.
हम अलग अलग अपनी अपनी सवारी पर कॉलेज क लिए निकल गए. चन्दर्कांता ने आज मुझे कुछ कहा तो नहीं पर उसका मेरी तरफ देखना ऐसा था क जैसे कह रही हो क बच्चू टेस्ट का रिजल्ट मेरा फैसला करने वाला है. मैं क्लास में रहूँगा या बहार जाऊंगा . उसे लगता होगा क मैं फ़ैल हो जाऊंगा क्यूंकि मैं क्लास में जो नहीं रहता. मगर उसे क्या पता क मंजू म ने मेरी स्टडी ुप्तो डेट राखी हुई है.
चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम होते hi साथ वाली रॉ में बैठी कल्पना बोल पड़ी.
कल्पना : कैसे हो?
अमित : मैं तो ाचा हूँ , तुम कैसी हो?
कल्पना : मैं भी ठीक हूँ वैसे मुझे तुमसे एक बात केहनी थी.
अमित : इसके लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है.
कल्पना : थैंक्स
अमित : हम्म्म्म ???
कल्पना : तुम्हारी वजह से मुझे इतनी अछि फॅमिली जो मिल गयी. रीता मणि रजनी मौसी दिव्या मौसी तीनो hi बहुत प्यारी हैं और तुम्हारी माँ भी बहुत प्यारी हैं. अब तो मैंने सोच लिया है क तुम्हारे हैं भी जाउंगी किसी दिन कामिनी ममी और दीपिका ममी से मिलने . नेहा दीदी और राधा ने बताया क वो भी बहुत प्यारी हैं और तुम्हारा घर भी बहुत ाचा है. ऊपर से गाओं का माहौल भी देखने को मिलेगा.
अमित: तो ये बात है , वेलकम तुम जब चाहो चल सकती हो . मुझे ख़ुशी होगी तुम्हे अपने गाओं ले जाकर मगर एक शरत है मेरी.
कल्पना : कैसी शरत ?
अमित : तुम किसी क हाथ पाऊँ नहीं तोड़ेगी और मुझे कुछ नहीं कहोगी.
कल्पना : मैं क्या ऐसी लगती हूँ तुम्हे जो बिना वजह किसी पर भी हाथ उठा दूँ. और वैसे तुम्हे मैंने कब कुछ कहा जो तुम ऐसे कह रहे हो?
अमित: तुम्हारा क्या भरोसा कब गुस्से में आ कर मेरा नक्शा hi बिगड़ दो. मैं तो सेफ्टी क लिए बोल रहा हूँ.
कल्पना : ाचा तो ऐसा है? कोई बात नहीं सोचेंगे इसके बारे में.
मंजू म ने क्लास लेनी शुरू की तो हम भी चुपचाप पड़ने लगे. अभी मंजू म का लेक्चर कहतक भी नहीं हुआ था क मेरे फ़ोन पर कॉल आने लगी . मैंने देखा तो मेघा का फ़ोन था मैंने कॉल काट दी. अगले hi पल उसका मैसेज आ गया . उसने लिखा था क वो फ्लैट पर पहुँच गयी है रुपाली क साथ अब वो मेरे बारे में पूछ रही थी. मैंने मैसेज कर दिया क मैं आधे घंटे में पहुँच जाऊंगा. मंजू का लेक्चर ख़तम होते hi मैं कल्पना और मोहित क साथ कैंटीन जाने की बजाये बहार चला गया. कल्पना ने पूछा तो मैंने उसे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया और जल्दी से बाइक लेकर निकल गया मेघा और रुपाली से मिलने . मैंने 20 मिनट्स में इस जगह पहुँच गया जो मेघा ने बताई थी. ये एक पॉश एरिया में बानी 4 मंज़िला ईमारत थी और हर एक मंज़िल का मालिक कोई अलग hi था जैसा क मैंने एंट्रेंस पर देखा था. गार्ड ने मुझे अंदर जाने से पहले रोक लिया तो मैंने मेघा से उसकी बात करवा दी. गार्ड ने मेघा से बात करते hi मुझे बिना एंट्री नोट किये अंदर जाने दिया .
मैं अभी बिल्डिंग में एंटर hi हो रहा था क राधा का फ़ोन आ गया.
ों कॉल
राधा : कहाँ पर हो?
अमित : कैसी हो राधा ? मैं ज़रा काम से बहार आया हूँ.
राधा : सच कह रहे हो ? या फिर माँ की नाराज़गी मुझ पर निकल रहे हो?
अमित: ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? मैंने कहा न क मैं किसी से नाराज़ नहीं हूँ. और तुम से तो नाराज़ हो भी नहीं सकता मैं. मुझे अचानक काम पद गया इसी लिए आना पड़ा . मोहित ने बताया नहीं तुम्हे ?
राधा : मुझे लगा तुम जान बुझ कर गए हो.
अमित : ऐसा कभी सोचना भी मत . अगर फिर भी यकीन नहीं है तो मैं वापिस आ जाता हूँ. काम नहीं होता तो न सही मगर तुम्हे नाराज़ नहीं होने से सकता.
राधा : नहीं नहीं ऐसा मत करो. तुम अपना काम करो जो करने क लिए गए हो. वैसे मैंने सोचा आज तुम घर चले जाओगे तो एक बार तुमसे मिल लेती .
अमित : बस इतनी सी बात. मैं गाओं जाने से पहले तुम्हे मिलने आऊंगा , अब खुश?
राधा : खुश तब हूँगी जब तुम मिलने आओगे
अमित : फिर तो आना hi पड़ेगा चाहे दुनिआ इधर की उधर क्यों न हो जाये. वैसे तुम आज कॉलेज आयी तो घर पर कौन है मौसी क पास?
राधा : रीता मौसी हैं वैसे तो पर अब माँ पहले से कहीं अछि है. खुद देख लेना आ कर.
अमित : ठीक है राधा मैं ज़रा किसी से मिलने आया था तो उससे बात कर लूँ
राधा : ठीक है bye
अमित : bye
इसके बाद मैंने कॉल कट की और सामने लगी एक छोटी सी लिफ्ट में घुस कर टॉप फ्लोर पर चला गया. लिफ्ट क सामने hi एक छोटा सा कॉरिडोर और एक बड़ा सा दरवाज़ा था. बेल्ल बजाते hi दरवाज़ा अंदर से खुल गया और सामने मेघा कड़ी थी. मेघा ने इस वक़्त एक काले रंग का शार्ट ड्रेस पहना हुआ था जो देखने में भड़कीला था . यानि क टाइट फिटिंग जिसमे से उसके शरीर क अंगों की बनावट साफ नज़र आ रही थी. मेघा मोती तो नहीं थी मगर शरीर चर्बी से भरपूर था जैसे क पाकिस्तानी ड्रामा में अपने देखा होगा. बड़े बड़े चुके जो आधे बहार झलक रहे थे और खुले बल जो बड़े गले की इस ड्रेस में कन्धों को ढके हुए थे. शार्ट ड्रेस सिर्फ कूल्हों से कुछ नीचे तक hi था जिसने से उसकी गोरी मांसल जांघें अपना जलवा दिखा रही थी . चेहरे पर एक कामुक स्माइल लिए उसने मुझे अंदर आने का रास्ता दिया .
मेघा : देर करदी तुमने आने में ? आ जाओ अंदर.
मैं उसके पीछे पीछे अंदर आया तो अंदर से फ्लैट की साजो सजावट देख कर दिल खुश हो गया. किसी फ़िल्मी सन सा लग रहा था . हर चीज़ अपने आप में इस बात की गवाह थी क पैसों की यहाँ नदियां बहाई गयी हैं. मैं अभी छतो तरफ देख कर जायज़ा ले रहा था क मेघा ने दरवाज़ा बंद करते हुए मुझे पीछे से hi अपनी बाँहों में भर लिया .
मेघा : उम्म्म आ hi गए आखिर मैं कब से इंतज़ार में थी. आज तो वक़्त भी अपना है और जगह भी . आज मैं शाम तक तुम्हे नहीं छोड़ने वाली.
मेघा क बड़े बड़े रुई क गोले मेरी पीठ पर फ़ैल गए थे और उसके हाथ मेरे सीने पर चल रहे थे. मेरी गर्दन पर उसने अपने होंठ चिपका लिए और मुझे उत्तेजित करने की कोशिश करने लगी .
अमित : मगर वो कहा है जिसके लिए मुझे यहाँ बुलाया है?
मेघा : मैंने तो अपने लिए hi बुलाया है तुम्हे , तुम hi दूसरों को ढूंढते फिरते हो.
अमित : मज़ाक मत करो , क्या वो आयी नहीं ?
मेघा : अंदर है वो , मैंने कहा था न वो ऐसी नहीं है इस लिए शर्मा रही है. वो साथ नहीं देगी जो करना है तुम्हे खुद hi करना पड़ेगा.
अमित : ये तो वक़्त hi बताएगा क वो साथ देगी या नहीं. अब जल्दी से बुलाओ उसे .
मेघा : तुम्हे इतना यकीन है खुद पर? वैसे तो तुम्हारा हथियार देख कर कोई भी दीवानी हो जाएगी मगर ये कुछ अलग है . पता नहीं मेरे पति क साथ कैसे करती होगी . वो तो एक no. का ठरकी है.
अमित : वो सब तुम देख लेना अपनी आँखों से जब वो खुद मुझे करने को कहेगी
मेघा : तो हो जाये शरत ?
अमित : अगर ऐसा hi चाहती हो तो ठीक है . मगर शरत में क्या लगाओगी ? तुम्हारा तो सब मैं पहले hi बजा चूका हूँ.
मेघा : मेरी जान तुमने तो सिर्फ अभी रुपाली को hi देखा है. मेरी सब फ्रेंड्स एक से बढ़कर एक हैं. और अगर तुम कहो तो लड़कियों की भी लाइन लगा दूंगी . चली शरत ये है क अगर मैं जीती तो मेरे साथ चलना होगा जहाँ मैं कहूं और जितना टाइम भी हम वहां रहें तुम मेरी प्यास अचे से बुझाओगे. और अगर तुम जीते तो तुम्हे एक नै छूट मिलेगी . वो भी ऐसी क तुम यद् रखोगे.
अमित: वैसे दोनों hi सूरत में काम तो एक hi है और फायदा भी मेरा hi . चलो ठीक है मुझे शर्त मंज़ूर है . अब किसको लेन वाली हो ये तुम hi जानो. चलो अब उससे भी मिलवा दो.
मेघा : बड़ी जल्दी है उससे मिलने की ? बैठो मैं उसे लती हूँ बहार
मैं सोफे पर बैठ गया और मेघा अंदर चली गयी अपनी देवरानी यानि की रुपाली को बुलाने . मैं अभी सोफे पर बैठा सोच रहा था रुपाली क बारे में क मुझे उन दोनों की आहत महसूस हुई. मेरी पीठ उनकी तरफ थी .
मेघा : लो मिल लो मेरी प्यारी देवरानी से.
मैंने मेघा की आवाज़ सुन कर जब पलट कर देखा तो सामने रुपाली कड़ी थी मेघा क साथ. खुले घुंघराले बाल बड़ी बड़ी नीली ग्रे आँखें गोरा चमकदार चेहरा और गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ. उसने इस वक़्त बढ़िए सी सलवार कमीज पहनी हुई थी जो डिज़ाइन दर और मॉडर्न थी. मैं तो उसकी खूबसूरती को hi देख रहा था. मगर मुझे सामने देख कर उसकी तो बोलती hi जैसे बंद हो गयी थी . रुपाली का मुँह खुला का खुला रह गया. उसे उम्मीद नहीं थी शायद मेरे यहाँ होने की
रुपाली : ये यहाँ क्या कर रहा है दीदी ?
मेघा : यही तो है मेरा खास दोस्त जिससे तुम्हे मिलवाना था.
रुपाली : दीदी आपका दिमाग तो ठीक है? ये आपके बेटे की उम्र का है और ऊपर से ये रमा का नोन है.
मेघा : तो क्या हुआ. बेटे की उम्र का है बीटा तो नहीं . रमा का नोन है तो क्या हुआ. उसके हस्बैंड से इसकी पार्टनरशिप है . कोई ऐरागैरा नहीं है. तुम डरो मत ये किसी से कुछ नहीं कहने वाला और वैसे भी ऐसा मर्द तुमने कभी देखा या सुना भी नहीं होगा. मेरी मनो तो एक बार तरय करलो सब कुछ भूल जाओगी .
रुपाली : ये आप कैसी बातें कर रही हैं ? आप सेक्स की आग में ये भी भूल गयी क अगर किसी को पता चला तो क्या होगा? और तुम , तुम्हे शर्म नहीं अति ऐसे गलत काम करते हुए? अपनी माँ की उम्र की औरत क साथ ऐसा गन्दा काम करते हुए तुम्हारी आत्मा ने तुम्हे धिक्कारा नहीं? ज़रूर तुम्हारे अंदर भी किसी ऐसे hi आदमी का खून होगा जो ये सब कर रहे हो.
रुपाली की ये बात सुन कर मेरा दिमाग एक सेकंड में ख़राब हो गया . उसने मेरे माँ बाप पर hi उंगली उठा दी थी. मैं तो ये सब सिर्फ इस लिए कर रहा था क मुझे शालू की मदद करने का यही रास्ता नज़र आया था. मगर मुझे रुपाली ने घटिया लोगों की केटेगरी में खड़ा कर दिया था ऊपर से मेरे खून पर hi बात कर दी. मन क मैं पहले भी मेघा क साथ कर चूका था मगर वो एक एक्सीडेंट था और दूसरी बार सिर्फ शालू क लिए. मेरा गुस्सा कण्ट्रोल से बहार होने लगा .
अमित: मन में ) खुद तो अपने भतीजे और उसके बाप से चुदवाती है और मुझे उपदेश दे रही है . मेरे माँ बाप पर उंगली उठाई तूने , देख आज तेरा क्या हल करता हूँ.
मेघा : रुपाली , मंद योर लैंग्वेज. तुम भी कोई सटी सावित्री नहीं हो , मेरे पति क साथ करते तुझे शर्म नहीं आती जो यहाँ उपदेश दे रही हो. चलो माफ़ी मानगो इससे और इसे खुश करो.
रुपाली : गुस्से में ) माफ़ी माय फुट. आपका दिमाग ख़राब हो गया है. सेक्स की आग में अंधी हो कर आप ये गन्दा खेल खेल रही हैं . मैं आपका साथ नहीं देने वाली . आपको मुबारक आपका ये यार , मैं चली.
रुपाली गुस्से से पेअर पटकती हुई चल दी
घर आते hi अंकल आंटी को साथ लिए मुझे अपने साथ बिठा कर चल दिए दिव्या मौसी क घर. मोहित दोपहर को मौसी से मिल आया था तो इस वक़्त उसने जाने से मन कर दिया क्यूंकि उसे मीनल से बात करनी थी फ़ोन पर . वैसे तो मैंने सोचा था क दिव्या मौसी क घर न जॉन पर अंकल आंटी को मन करता तो क्या कहता क मैं क्यों अपनी मौसी क घर नहीं जाना चाहता . इससे ये बात सबको पता चल सकती थी क मेरे और दिव्या मौसी क बीच सब ठीक नहीं है . खैर हम दिव्या मौसी क घर गए तो इस वक़्त वहां पर राधा दिव्या मौसी क इलावा रीता मौसी भी थी. अंकल आंटी को देख कर रीता मौसी बहुत खुश हुई . कितने सैलून बाद वो आज अंकल आंटी को अपने सामने देख रही थी. अंकल आंटी भी बहुत खुश थे उन्हें अपने सामने देख कर.
रीता मौसी : तुम दोनों को इतने सैलून बाद अपने सामने देख कर मुझे यकीन नहीं हो रहा क ये तुम दोनों hi हो. कितना प्यार था तुम दोनों का पवन और दामिनी क साथ .
बात करते करते रीता मौसी की आँखों में पानी आ गया . यही हल अंकल आंटी का भी था जो पुराणी बातों को यद् कर रहे थे रीता मौसी को देख कर
अंकल : आप को फिर से देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है. लगता है अमित क रूप में पवन फिर से लौट आया है और फिर से वही पुराण समय भी.
आंटी : आप आज भी वैसी hi हैं दीदी काश दामिनी भी हमारे साथ होती.
रीता मौसी : काश ऐसा होता तो कितना ाचा होता.
आंटी : वैसे दिव्या कहाँ है मैं उसे देखना चाहती हूँ . दिव्या को देखना मतलब दामिनी को देखना , दोनों एक जैसी hi तो थी एक दूसरे की जान. मुझे जल्दी से उससे मिलवा दो .
रीता मौसी दोनों को अपने साथ अंदर ले गयी और मैं वहीँ हॉल में बैठ गया . मैं दिव्या मौसी क सामने जाना नहीं चाहता था. राधा जल्दी से अंकल आंटी क लिए पानी ले कर उनके पीछे गयी. अंदर क्या हो रहा है मैं देखना तो चाहता था मगर अंदर भी तो जाना नहीं था. कुछ देर बाद राधा कमरे से बहार आयी तो उसकी आँखों में नमी थी . मैंने अंदाज़ा लगा लिया क अंदर क्या चल रहा होगा. दिव्या मौसी को देख कर ज़रूर आंटी मेरी माँ की बात करते हुए खुद भी रो रही होंगी और उन्हें भी रुला रही होंगी .
राधा सीधा किचन में गयी और अपने चेहरे पर मणि मर कर मेरे पास आ गयी .
राधा : तुम यहाँ बहार क्यों बैठे हो अकेले ?
अमित : इतने लोग पहले hi अंदर बैठे हैं इस लिए मैं बहार hi बैठ गया . वैसे भी इतने सैलून बाद अंकल आंटी मौसी से मिल रहे हैं तो ढेर साडी बातें करेंगे . मेरा वहां क्या काम
राधा : मगर तुम्हे तो ाचा लगता है न अपने मम्मी पापा का बारे में सुन्ना , फिर यहाँ क्यों बैठे हो?
अमित : बताया तो है , अभी बड़ों को अकेले में बातें करने दो
राधा : ाचा मेरे साथ आओ ज़रा मेरे कमरे में , मुझे एक काम है.
राधा उठ कर अपने कमरे में चली गयी और मैं भी उसके पीछे पीछे हो लिया . अंदर आते hi राधा ने दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरे गले लग कर रोने लगी.
राधा : रट हुए) ी ऍम सॉरी अमित ये सब मेरी वजह से हुआ
अमित: शॉकेड ) ये तुम क्या कह रही हो ? क्या हुआ है?
राधा : मुझे सब पता चल गया है माँ ने तुम्हारे साथ क्या किया. मैंने तुम्हारी और मौसी की बातें सुन ली थी. माँ को ऐसा नहीं करना चाहिए था. अपनी माँ की तरफ से मैं माफ़ी मांगती हूँ , मैं जानती हूँ तुम माँ से मिलना नहीं चाहते और इसी लिए अंदर नहीं जा रहे. मैं जानती हूँ तुम उनसे नाराज़ हो और इसी लिए अब यहाँ आना भी बंद कर डोज. पर इसमें मेरी क्या गलती है ? मुझे किस जुर्म की सजा मिलेगी?
राधा मेरे गले लगी ये सब कहती हुई तो रही थी और इसी वजह से मेरी भी ऑंखें छलक आयी थीं . राधा को दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ पर ऐसा तो मैंने सोचा भी नहीं था. मैं तो बस दिव्या मौसी क सामने नहीं आना चाहता था जब तक क वो खुद न मुझे बुलाएँ. मगर राधा को ये दर था क कहीं मैं उनके घर आना hi बंद न कर दूँ.
अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? किसने कहा मैं यहाँ आना बंद कर दूंगा? वो तुम्हारी माँ होने क साथ मेरी भी तो मौसी हैं . और मौसी का मतलब होता है माँ जैसी. मैं भला उनसे नाराज़ कैसे रह सकता हूँ. हाँ मेरा चेहरा देख कर अगर उन्हें ाचा नहीं लगता तो मैं उनके सामने आ कर उन्हें दुखी नहीं करना चाहता . और तुम क्यों रो रही हो? मैंने तुम्हे तो कुछ नहीं कहा. अब रोना बंद करो क्यूंकि तुम रट हुए बंदरिया लगती हो.
राधा : मैं जानती हूँ तुम मेरा दिल रखने क लिए ये सब कह रहे हो. तुम चाहो तो मुझे सजा दो मगर मुझे खुद से अलग मत करना . तुम्हारे सिवा और कौन है मेरा जिसे मैं जब चाहे पुकारूँ और वो मेरी मदद क लिए चला ए? प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाना . माँ बुरी नहीं है वो भी तुम्हे चाहती है मगर वो गुस्सा क्यों करती है ये मुझे नहीं पता. पर अब मैं पता लगा क रहूंगी. वो क्या वजह है क वो तुम पर इतना गुस्सा करती हैं , मैं ज़रूर पता लगाउंगी.
अमित : रिलैक्स राधा , तुम किसी बात की चिंता मत करो. वक़्त क साथ सब ठीक हो जायेगा. मैं जनता हूँ एक दिन वो खुद मुझे इसकी वजह बताएंगी मगर मुझसे वडा करो तुम मौसी क साथ गुस्सा नहीं करोगी . वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं अगर तुमने भी उनसे गुस्सा किया तो उनको ाचा नहीं लगेगा. आखिर और है hi कौन तुम्हारे इलावा जिससे वो बात कर सकें.
राधा : मैं उनसे गुस्सा कर क कहाँ जाउंगी. वो मेरे लिए सब कुछ हैं , माँ भी पापा भी सहेली भी बहिन भी. मगर तुम पर उनका बेवजह गुस्सा करना मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लगता. तुम वडा करो कुछ भी हो तुम मेरा साथ नहीं छोड़ोगे.
अमित : मैं तो हमेशा से तुम्हारे साथ था राधा . जब तुम मुझसे बात किये बिना वहां से चली अति थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. जब तुम मुझे कई कई महीने साल तक नज़र नहीं आती थी तब भी मैं तुम्हारे साथ था. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस किया है. तुम मेरी सबसे अछि दोस्त हो. मैंने हमेशा तुम्हे अपने पास महसूस करता रहा हूँ. मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा चाहे जो भी हो.
राधा : मुझे भी सब यद् है और सच बताऊँ तो मैं भी तुमसे ढेरों बातें करना चाहती थी मगर माँ की वजह से तुमसे दूर रहती थी और हर बार गाओं से आने क बाद कई कई दिन तक मैं अपनी उस मज़बूरी क लिए रोटी रहती थी . मैंने हुई कभी कोई दोस्त नहीं बनाया . मेरे लिए हमेशा से तुम hi मेरे दोस्त थे और आज भी हो. मैं बस कभी तुम्हे खोना नहीं चाहती. माँ पापा क बाद अगर मेरी ज़िन्दगी में मुझे कोई सबसे प्यारा है तो वो तुम हो.
मैंने राधा को खुद से अलग किया और उसकी आँखों से आंसू साफ करते हुए कहा
अमित : मैं कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा ये मेरा वडा है. तुम जब भी मुझे पुकारोगी मैं चाहे इस दुनिया में हूँ या उस दुनिया में , मैं तुम्हारे लिए ज़रूर आऊंगा.
मैं पता नहीं किस रो में बेहटा हुआ ये सब कहे जा रहा था मुझे भी नहीं पता. राधा की आँखों में आंसू देख कर मेरा खुद पर hi काबू नहीं थी. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों होता है जब भी बात राधा की हो. रिश्ते में वो मेरी बहिन लगती थी पर एक अनजान सी कशिश मैंने शुरू से hi महसूस की है राधा को लेकर मेरे मन में. मैंने ज़ज़्बात में इतना कुछ कह तो दिया मगर शायद राधा को ये पसंद नहीं आया और उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.
राधा : ख़बरदार फिर कभी ऐसी बात की तो. मुझे किसी और दुनिया का कुछ नहीं पता . मैं बस तुम्हे इसी दुनिया में इसी जनम में हमेशा अपने सामने देखना चाहती हूँ.
दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ से हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए . और बहार से आवाज़ आयी
रीता मौसी : राधा क्या तुम अंदर हो ? अमित कहाँ है दिखाई नहीं से रहा ?
राधा : आई मौसी अमित मेरे साथ hi है.
राधा ने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो रीता मौसी सामने hi कड़ी थी और मुझे देख कर उनके चेहरे पर जो चिंता क भाव थे वो दूर हो गए.
रीता मौसी : तुम यहाँ हो ? मुझे लगा क तुम कहीं बहार तो नहीं चले गए. चलो राधा डिनर तैयार करें सब क लिए . और तुम जाओ अंदर जा कर बैठो , यहाँ क्या कर रहे हो?
रीता मौसी मुझे अंदर जाने का कह कर राधा को लेकर किचन में चली गयी . मैं भला कैसे अंदर जाता इस लिए मोबाइल पकड़ कर बैठ गया. मोबाइल चेक किया तो ज्योति क फ़ोन से कुछ मेस्सगेस आये हुए थे. मैंने उसे रिप्लाई किया. इसी बिच. मेरा फ़ोन बजने लगा. स्क्रीन पर नाम देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी.
अमित : hello , आ गयी यद् ?
मेघा : यद् तो तब करूँ अगर भूली हूँ तो. तुम्हारा एहसास तो हर वक़्त रहता है मुझे.
अमित: बड़ी रोमांटिक हो रही हो. वैसे मेरा एहसास कहाँ रहता है ? आगे या पीछे?
मेघा : मत पूछो कहाँ कहाँ रहता है. मेरा रोम रोम तुम्हे यद् कर क फड़कने लगता है. जिस्म क्या अब तो दिल में भी तुमने अपने नाम की मोहर लगा दी है.
अमित : लगता है बड़ी आग लगी हुई है तुम्हारे अंदर.
मेघा : आग क्यों न लगे? तुम्हारा ख्याल आते hi मैं गीली होने लगती हूँ . अब जल्दी से मिलो और मेरी आग बुझाओ.
अमित: ऐसे नहीं , पहले मेरा काम करो फिर मैं तुम्हारी आग ठंडी करूँगा.
मेघा : बड़े ज़ालिम हो , मैं खुद तुम्हारे आगे टंगे खोली बैठी हूँ और तुम हो क दूसरों की पीछे लगे हुए हो.
अमित: अब बातें hi बनाओगी या काम भी करोगी कोई .
मेघा : इसी लिए तो फ़ोन किया है.
अमित : क्या मतलब ?
मेघा : मतलब ये क मैंने रुपाली को मन लिया है और कल तुम्हे आना है मेरी आग बुझाने क लिए.
अमित : क्या ??? तुम सच कह रही हो ? क्या सच में रुपाली मन गयी ?मुझे यकीन नहीं हो रहा है.
मुझे सच में यकीन नहीं था क रुपाली मन जाएगी. पता नहीं मेघा ने ये कैसे किया पर ये एक मुश्किल काम था जो मेघा ने कर दिया . इससे ये साबित हो गया क मेघा मुझसे अपनी आग बुझाने क लिए कुछ भी कर सकती है.
मेघा : इसमें इतना हैरान होने वाली कौन सी बात है? तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ. मैंने तुम्हारा काम कर दिया अब मुझे मेरा इनाम चाहिए.
अमित: तुमने मुझे बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई है. इसका इनाम तुम्हे ज़रूर मिलेगा. मगर तुमने ये किया कैसे ?
मेघा : उसे तो मन्ना hi था. साली मेरी पति की रखैल बानी फिरती है और ऐसे दिखती है जैसे बड़ी सटी सावित्री हो . बस इसी बात पर मन लिया उसे. मैंने तो कल hi बात कर दी थी मगर साली पहले मन नहीं रही थी इस लिए एक दिन वेट करनी पद गयी .
अमित : ग्रेट अब तो उसकी भी आग ठंडी कर दूंगा.
मेघा : अचे से करना ताकि उसके बाद उसकी छूट भोसड़ा बन जाये और फिर मेरा पति भी उससे दूर hi रहे. वैसे भी एक बार जिसके अंदर तुम्हारा लैंड चला जायेगा उस छूट में कोई और लैंड जगह बना hi नहीं पायेगा . क्यूंकि फिर छूट छूट नहीं रहती भोसड़ा बन जाती है. हे हे हे
अमित : तो फिर कहाँ मिलना है और कब
मेघा : मैं तुम्हे एड्रेस भेज देती हूँ अपने फ्लैट का . कल वहां आ जाना 11 बजे तक.
अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा.
मेघा : मगर मुझे इसका इनाम चाहिए ये बात यद् रखना .
अमित : वैसे तुम्हे क्या चाहिए . तुम्हारे पास तो सब कुछ है.
मेघा: वो मैं बाद में बताउंगी .
अमित : ाचा ठीक है बता देना . अब मुझे जाना है मैं और बात नहीं कर सकता .
मेघा : ठीक है तो कल 11 बजे .
अमित : ok
उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया. रुपाली इतनी जल्दी मन जाएगी ये मुझे अंदाज़ा भी नहीं था. बल्कि मुझे तो लगा था और वो मानेगी hi नहीं . चलो जो भी है मेरे प्लान क लिए रुपाली का आना बहुत ज़रूरी था जो मैं करने वाला था. थोड़ी देर में रीता मौसी और राधा ने डिनर रेडी कर दिया और मैं अंकल आंटी क साथ हॉल में बैठ कर खाना खाने लगा. दिव्या मौसी रूम से बहार नहीं आयी या तो वो इतनी वीक थी क आ नहीं सकती थी या फिर वो मेरे सामने नहीं आना चाहती थी और मैं भी उनके सामने नहीं जाना चाहता था. खाना खाने क बाद अंकल आंटी एक बार फिर दिव्या मौसी से मिलने रूम में गए मगर मैं वहीँ बैठा रहा इस बार रीता मौसी ने ये बात नोट कर ली.
रीता मौसी : अमित , क्या बात है ? मैं देख रही हूँ तुम दिव्या क पास नहीं जा रहे . मैंने कहा था न क उससे नाराज़ मत हो . वो तुमसे बहुत प्यार करती है बीटा ऐसा मत करो उसके साथ. उसने बहुत दुःख देखे हैं , दामिनी क जाने क बाद तो उसने कभी है क देखा भी नहीं शायद . क्या तुम उसे और दुःख देना चाहते हो ?
अमित: मैं ऐसा क्यों चाहूंगा मौसी ? मगर मुझे देख कर उन्हें गुस्सा अत है और दुःख भी होता होगा अतीत की किसी घटना को यद् कर क. ऐसे में मैं उनके सामने जा कर उन्हें और दुखी नहीं करना चाहता.
रीता मौसी : घाव का इलाज करने क लिए उसे जब कुरेदा जाता है तो दर्द तो होता hi है न . दिव्या क दिल क ज़ख़्म बहुत पुराने हो चले हैं मगर आज भी जैसे ताज़ा हैं. तुम्हारे सामने आने से उसके वो घाव कुरेदे जा रहे हैं मगर तुम्हे hi उन घावों पर प्यार से मलहम भी लगाना है . इस लिए उससे दूर रहने की बजाये उसका सामना करो तभी तो उसके अंदर का दर्द बहार निकलेगा जिसे वो अंदर अंदर hi छुपाये जी रही है.
रीता मौसी क चेहरे पर इस समय बड़ी गंभीरता थी और शायद आँखों में नमी भी आने hi वाली थी क वो खुद को सँभालते हुए चली गयी . मैं रीता मौसी की बातों को सोचता रहा और फिर मुझे बाबा की बातें भी यद् आने लगी की कैसे दिव्या मौसी का मेरी माँ क साथ जुड़ाव था और बचपन में मुझे वो कितना प्यार करती थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ. एक तरफ दिल कहता क मुझे दिव्या मौसी क दिल में छिपे मेरे प्रति प्यार को बहार निकलना चाहिए दूसरी तरफ दिल कहता क वो मेरे सामने आने से दुखी होती हैं और मेरे पापा को गलत कहती हैं जो मुझे ाचा नहीं लगता था. मैं सोफे पर बैठा यही सोच रहा था क अंकल आंटी बहार आ गए और मैं रीता मौसी और राधा को bye कहता हुआ अंकल आंटी क साथ घर वापिस लौट आया.
बीएड पर लेता मैं रत भर रीता मौसी और बाबा की बातों को यद् कर क दिव्या मौसी क बारे में सोचता रहा. दिव्या मौसी ने चाहे कभी मेरी होश में मुझे प्यार नहीं किया हो मगर फिर भी मेरे दिल में उनके लिए कभी नफरत भरे ख्याल नहीं ए थे . इतना कुछ होने क बाद भी मैं छह कर भी उनसे नफरत नहीं कर प् रहा था . बल्कि मुझे खुद पर hi गिलटी महसूस हो रहा था क मैं उनकी बातों का बुरा मन कर उन्हें अकेला छोड़ कर चला आया जबकि राधा मेरे साथ कितना अपना पैन दिखती है. वो बेचारी मुझे अपनी ज़िन्दगी का एक हम हिस्सा मानती है और मैं उसे कभी समझ नहीं पाया . दूसरों को सहारा देने क चक्कर में उसे इग्नोर करता रहा जिसके लिए मैं hi एक मात्रा दोस्त हूँ. जो भी हो अब राधा को मैं अकेला नहीं रहने दूंगा चाहे मैं खुद उसके पास मौजूद रहूं या न मुझे उसको सेफ जोन में रखना होगा जिससे उसे कभी मेरी कमी महसूस न हो. ऐसे hi सोचते सोचते कब आँख लगी पता hi नहीं चला.
दूसरी तरफ रीता मौसी ने अमित की तरह दिव्या को भी झकझोरा और उसे उसकी गलती का एहसास भी दिलवाया क कैसे वो अमित क साथ गलत कर रही है. दोनों बहने एक hi कमरे में सो रही थी तो बातों क लिए इस काली रत क सन्नाटे में बहुत एकांत था अपनी बातों को खुल कर करने और समझने क लिए
रीता मौसी : दिव्या क्या तुम्हे नहीं लगता क तुम ज्यादती कर रही हो अमित क साथ? तुमने मुझे तो अपनी कसम देकर चुप करवा लिया पर क्या दामिनी को चुप करवा पाओगी ? तुम्हे अमित में पवन नज़र अत है क्यूंकि वो उसका पिता था मगर क्या तुम्हे दामिनी नज़र नहीं अति जिसने उसे पैदा किया . 9 महीने पेट में रखने वाली माँ का अधिकार बचे पर बाप से कहीं ज्यादा होता है , फिर भी तुम उसे उसके बाप की वजह से इतना दुःख देती हो. तुमने कभी ये सोचा है क दामिनी पर क्या बिट रही होगी ये देख कर क उसकी जान से प्यारी बहिन hi उसकी आखिरी निशानी उसके बेटे पर ऐसे ज़ुलम करती है. क्या जवाब डौगी अपने आप को बताओ मुझे? तुम्हारा दिल तो आज भी दामिनी का नाम लेकर धड़कता है फिर भी तुम अमित क साथ ऐसा करती हो. मैं नहीं जानती पवन ऐसा क्या किया क तुम उससे इतनी नफरत करने लगी क मरने क बाद भी उसे तुमने माफ़ नहीं किया ऊपर से उसकी सजा अमित को दे रही हो . जहाँ तक मैं जानती हूँ अमित में तो ऐसी एक भी बुराई नहीं है क कोई उससे नफ़रत करे . वो तो इतना प्यारा है क सब क दिल में जगह बना लेता है , देखा न कामिनी भी अब उसे कितना प्यार करती है. पर तुमने तो अपना दिल पत्थर का बना लिया है. कभी ऑंखें खोल कर देख एक माँ की नज़र से देख वो कितना प्यारा है. गौरी भाभी उस पर यूँ hi जान नहीं छिड़कती और सच कहूं तो मुझे लगता सब hi उसे प्यार करते हैं चाहे वो बड़े हो या हमारे बचे. तुमने देखा नहीं राधा ने किसी और को फ़ोन करने की बजाये अमित को फ़ोन किया. क्यूंकि उसे उस पर भरोसा है और तुमने उसके बारे में ऐसा सोचा? अब भी वक़्त है दिव्या ऑंखें खोल कर देख वो कितना ाचा है . उसे सिर्फ तेरा प्यार चाहिए. आज तो वो सिर्फ तेरे रूम में नहीं आया , सोच अगर उसने तेरे घर आना भी बंद कर दिया और राधा से भी नाता तोड़ लिया तो वो अकेली हो जाएगी. अपने लिए न सही राधा क लिए hi सोच.
रीता की एक एक बात दिव्या क दिल पर तीर की तरह चुभ रही थी. उससे अपने आंसू कण्ट्रोल नहीं हो रहे थे दामिनी का ख्याल आते hi. सच hi तो कहा था रीता दीदी ने, बचे पर माँ का हक़ बाप से भी ज्यादा होता है. शकल बाप से मिलने का मतलब ये तो नहीं क वो बाप जैसा hi होगा. जिस माँ ने 9 महीने अपने पेट में रख कर अपने खून से सींचा है और अपना दूध पीला कर बड़ा किया है क्या उसका कोई मोल नहीं? दामिनी को जवाब देने की बात पर तो दिव्या की आँखों क साथ साथ दिल भी रोने लगा था. दोनों बहनो में कितना प्यार था , यहाँ तक क उसके मरने क बाद भी आज तक वो उसे खुद से जुड़ नहीं कर पायी . जब अमित पैदा हुआ था तो किस तरह दिव्या उसे अपनी गॉड में ले लिया करती थी. दिव्या अमित को अपना बीटा hi मानती थी और राधा क होने क बाद तो जैसे दोनों बहनो ने फैसला hi कर लिया था क वो एक दूसरे क बच्चों को ले लेंगी . दामिनी ने राधा को अपनी बेटी बना लिया था और इसके लिए दोनों बहनो में गुप्त सहमति भी हो गयी थी क राधा की शादी अमित क साथ होगी. उसी अमित को आज दिव्या नफ़रत भरी नज़रों से देखने लगी थी. आखिर उसका कसूर hi क्या था. क्यों उसे उस जुर्म की सजा मिल रही थी जो उसने किया hi नहीं था. जो कुछ भी किया वो पवन ने किया था इसमें किसी और का दोष कैसे हो सकता है?
दिव्या : रट हुए ) मैं क्या करूँ दीदी मैं क्या करूँ? मैं खुद को रोक नहीं पति जब भी अमित को देखती हूँ मुझे पवन hi नज़र अत है.
रीता : तो तू उसके चेहरे को मत देख कर न, बल्कि मैं तो कहती हूँ क अगर देखना hi है तो उसकी आँखों में देख . तुझे वहां सिर्फ दामिनी hi नज़र आएगी मेरी बहिन. यद् नहीं उस दिन राधा क बर्थडे पर क्या हुआ था. सच सच बताना क्या तुम्हे उस दिन दामिनी का एहसास नहीं हुआ था. हम सब ने देखा था क तू कैसे रो रही थी और तेरे आंसू बता रहे थे क तू दामिनी क लिए रो रही है. फिर भी तुझे अमित में सिर्फ पवन नज़र अत है?
दिव्या : मैं खुद को बहुत समझती हूँ दीदी पर क्या करूँ. उसके बाप ने मेरे साथ जो किया है वो मैं भुला नहीं पाती .
रीता : तुमने तो मुझसे कसम देकर मेरा मुँह hi बंद कर दिया है. मगर इतना सुन ले क जब तक तू अपना दुःख किसी की बताएगी नहीं ये तुम्हे जीने नहीं देगा . और मेरी मान तो सब भुला कर अमित को गले से लगा ले तुझे सुकून मिलेगा वर्ण तू ऐसे hi आंसू बहती रहेगी.
दिव्या का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और रीता की बात भी सही थी क जब तक वो अमित को ऐसे दुःख देती रहेगी वो खुद भी दुखी रहेगी . कहीं न कहीं अमित दिव्या का भी बीटा था चाहे वो दत्तक पुत्र हो या फिर दामाद की शकल में.
अगले दिन सुबह मैं अपनी रूटीन से उठ कर ेष्वरसीसे करने क बाद मोहित क साथ कॉलेज जाने की बजाये अपनी बाइक पर गया .
मोहित : आज फिर बाइक पर ? आज कहाँ जाने का इरादा है ? मंडे से टेस्ट शुरू हैं थोड़ा उधर भी ध्यान दे ले भाई.
अमित: बस यार मुझे कहीं जाना पड़ेगा अगर फ़ोन आ गया तो इस लिए बाइक पर जा रहा हूँ.
मोहित : अबे मेरी कार भी तो है न तू कब तक ऐसे अकेला बाइक पर घूमता रहेगा . मेरी मन तो पापा ने उस दिन कार तेरे लिए सेलेक्ट की थी न वो hi लेले. तुझे अकेले hi जाना है तो कार से भी तो जा सकता है न.
अमित: अरे यार इतनी सी बात क लिए कार की क्या ज़रूरत है. तू चल मैं भी आ रहा हूँ.
हम अलग अलग अपनी अपनी सवारी पर कॉलेज क लिए निकल गए. चन्दर्कांता ने आज मुझे कुछ कहा तो नहीं पर उसका मेरी तरफ देखना ऐसा था क जैसे कह रही हो क बच्चू टेस्ट का रिजल्ट मेरा फैसला करने वाला है. मैं क्लास में रहूँगा या बहार जाऊंगा . उसे लगता होगा क मैं फ़ैल हो जाऊंगा क्यूंकि मैं क्लास में जो नहीं रहता. मगर उसे क्या पता क मंजू म ने मेरी स्टडी ुप्तो डेट राखी हुई है.
चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम होते hi साथ वाली रॉ में बैठी कल्पना बोल पड़ी.
कल्पना : कैसे हो?
अमित : मैं तो ाचा हूँ , तुम कैसी हो?
कल्पना : मैं भी ठीक हूँ वैसे मुझे तुमसे एक बात केहनी थी.
अमित : इसके लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है.
कल्पना : थैंक्स
अमित : हम्म्म्म ???
कल्पना : तुम्हारी वजह से मुझे इतनी अछि फॅमिली जो मिल गयी. रीता मणि रजनी मौसी दिव्या मौसी तीनो hi बहुत प्यारी हैं और तुम्हारी माँ भी बहुत प्यारी हैं. अब तो मैंने सोच लिया है क तुम्हारे हैं भी जाउंगी किसी दिन कामिनी ममी और दीपिका ममी से मिलने . नेहा दीदी और राधा ने बताया क वो भी बहुत प्यारी हैं और तुम्हारा घर भी बहुत ाचा है. ऊपर से गाओं का माहौल भी देखने को मिलेगा.
अमित: तो ये बात है , वेलकम तुम जब चाहो चल सकती हो . मुझे ख़ुशी होगी तुम्हे अपने गाओं ले जाकर मगर एक शरत है मेरी.
कल्पना : कैसी शरत ?
अमित : तुम किसी क हाथ पाऊँ नहीं तोड़ेगी और मुझे कुछ नहीं कहोगी.
कल्पना : मैं क्या ऐसी लगती हूँ तुम्हे जो बिना वजह किसी पर भी हाथ उठा दूँ. और वैसे तुम्हे मैंने कब कुछ कहा जो तुम ऐसे कह रहे हो?
अमित: तुम्हारा क्या भरोसा कब गुस्से में आ कर मेरा नक्शा hi बिगड़ दो. मैं तो सेफ्टी क लिए बोल रहा हूँ.
कल्पना : ाचा तो ऐसा है? कोई बात नहीं सोचेंगे इसके बारे में.
मंजू म ने क्लास लेनी शुरू की तो हम भी चुपचाप पड़ने लगे. अभी मंजू म का लेक्चर कहतक भी नहीं हुआ था क मेरे फ़ोन पर कॉल आने लगी . मैंने देखा तो मेघा का फ़ोन था मैंने कॉल काट दी. अगले hi पल उसका मैसेज आ गया . उसने लिखा था क वो फ्लैट पर पहुँच गयी है रुपाली क साथ अब वो मेरे बारे में पूछ रही थी. मैंने मैसेज कर दिया क मैं आधे घंटे में पहुँच जाऊंगा. मंजू का लेक्चर ख़तम होते hi मैं कल्पना और मोहित क साथ कैंटीन जाने की बजाये बहार चला गया. कल्पना ने पूछा तो मैंने उसे ज़रूरी काम का बहाना बना दिया और जल्दी से बाइक लेकर निकल गया मेघा और रुपाली से मिलने . मैंने 20 मिनट्स में इस जगह पहुँच गया जो मेघा ने बताई थी. ये एक पॉश एरिया में बानी 4 मंज़िला ईमारत थी और हर एक मंज़िल का मालिक कोई अलग hi था जैसा क मैंने एंट्रेंस पर देखा था. गार्ड ने मुझे अंदर जाने से पहले रोक लिया तो मैंने मेघा से उसकी बात करवा दी. गार्ड ने मेघा से बात करते hi मुझे बिना एंट्री नोट किये अंदर जाने दिया .
मैं अभी बिल्डिंग में एंटर hi हो रहा था क राधा का फ़ोन आ गया.
ों कॉल
राधा : कहाँ पर हो?
अमित : कैसी हो राधा ? मैं ज़रा काम से बहार आया हूँ.
राधा : सच कह रहे हो ? या फिर माँ की नाराज़गी मुझ पर निकल रहे हो?
अमित: ये तुम कैसी बातें कर रही हो ? मैंने कहा न क मैं किसी से नाराज़ नहीं हूँ. और तुम से तो नाराज़ हो भी नहीं सकता मैं. मुझे अचानक काम पद गया इसी लिए आना पड़ा . मोहित ने बताया नहीं तुम्हे ?
राधा : मुझे लगा तुम जान बुझ कर गए हो.
अमित : ऐसा कभी सोचना भी मत . अगर फिर भी यकीन नहीं है तो मैं वापिस आ जाता हूँ. काम नहीं होता तो न सही मगर तुम्हे नाराज़ नहीं होने से सकता.
राधा : नहीं नहीं ऐसा मत करो. तुम अपना काम करो जो करने क लिए गए हो. वैसे मैंने सोचा आज तुम घर चले जाओगे तो एक बार तुमसे मिल लेती .
अमित : बस इतनी सी बात. मैं गाओं जाने से पहले तुम्हे मिलने आऊंगा , अब खुश?
राधा : खुश तब हूँगी जब तुम मिलने आओगे
अमित : फिर तो आना hi पड़ेगा चाहे दुनिआ इधर की उधर क्यों न हो जाये. वैसे तुम आज कॉलेज आयी तो घर पर कौन है मौसी क पास?
राधा : रीता मौसी हैं वैसे तो पर अब माँ पहले से कहीं अछि है. खुद देख लेना आ कर.
अमित : ठीक है राधा मैं ज़रा किसी से मिलने आया था तो उससे बात कर लूँ
राधा : ठीक है bye
अमित : bye
इसके बाद मैंने कॉल कट की और सामने लगी एक छोटी सी लिफ्ट में घुस कर टॉप फ्लोर पर चला गया. लिफ्ट क सामने hi एक छोटा सा कॉरिडोर और एक बड़ा सा दरवाज़ा था. बेल्ल बजाते hi दरवाज़ा अंदर से खुल गया और सामने मेघा कड़ी थी. मेघा ने इस वक़्त एक काले रंग का शार्ट ड्रेस पहना हुआ था जो देखने में भड़कीला था . यानि क टाइट फिटिंग जिसमे से उसके शरीर क अंगों की बनावट साफ नज़र आ रही थी. मेघा मोती तो नहीं थी मगर शरीर चर्बी से भरपूर था जैसे क पाकिस्तानी ड्रामा में अपने देखा होगा. बड़े बड़े चुके जो आधे बहार झलक रहे थे और खुले बल जो बड़े गले की इस ड्रेस में कन्धों को ढके हुए थे. शार्ट ड्रेस सिर्फ कूल्हों से कुछ नीचे तक hi था जिसने से उसकी गोरी मांसल जांघें अपना जलवा दिखा रही थी . चेहरे पर एक कामुक स्माइल लिए उसने मुझे अंदर आने का रास्ता दिया .
मेघा : देर करदी तुमने आने में ? आ जाओ अंदर.
मैं उसके पीछे पीछे अंदर आया तो अंदर से फ्लैट की साजो सजावट देख कर दिल खुश हो गया. किसी फ़िल्मी सन सा लग रहा था . हर चीज़ अपने आप में इस बात की गवाह थी क पैसों की यहाँ नदियां बहाई गयी हैं. मैं अभी छतो तरफ देख कर जायज़ा ले रहा था क मेघा ने दरवाज़ा बंद करते हुए मुझे पीछे से hi अपनी बाँहों में भर लिया .
मेघा : उम्म्म आ hi गए आखिर मैं कब से इंतज़ार में थी. आज तो वक़्त भी अपना है और जगह भी . आज मैं शाम तक तुम्हे नहीं छोड़ने वाली.
मेघा क बड़े बड़े रुई क गोले मेरी पीठ पर फ़ैल गए थे और उसके हाथ मेरे सीने पर चल रहे थे. मेरी गर्दन पर उसने अपने होंठ चिपका लिए और मुझे उत्तेजित करने की कोशिश करने लगी .
अमित : मगर वो कहा है जिसके लिए मुझे यहाँ बुलाया है?
मेघा : मैंने तो अपने लिए hi बुलाया है तुम्हे , तुम hi दूसरों को ढूंढते फिरते हो.
अमित : मज़ाक मत करो , क्या वो आयी नहीं ?
मेघा : अंदर है वो , मैंने कहा था न वो ऐसी नहीं है इस लिए शर्मा रही है. वो साथ नहीं देगी जो करना है तुम्हे खुद hi करना पड़ेगा.
अमित : ये तो वक़्त hi बताएगा क वो साथ देगी या नहीं. अब जल्दी से बुलाओ उसे .
मेघा : तुम्हे इतना यकीन है खुद पर? वैसे तो तुम्हारा हथियार देख कर कोई भी दीवानी हो जाएगी मगर ये कुछ अलग है . पता नहीं मेरे पति क साथ कैसे करती होगी . वो तो एक no. का ठरकी है.
अमित : वो सब तुम देख लेना अपनी आँखों से जब वो खुद मुझे करने को कहेगी
मेघा : तो हो जाये शरत ?
अमित : अगर ऐसा hi चाहती हो तो ठीक है . मगर शरत में क्या लगाओगी ? तुम्हारा तो सब मैं पहले hi बजा चूका हूँ.
मेघा : मेरी जान तुमने तो सिर्फ अभी रुपाली को hi देखा है. मेरी सब फ्रेंड्स एक से बढ़कर एक हैं. और अगर तुम कहो तो लड़कियों की भी लाइन लगा दूंगी . चली शरत ये है क अगर मैं जीती तो मेरे साथ चलना होगा जहाँ मैं कहूं और जितना टाइम भी हम वहां रहें तुम मेरी प्यास अचे से बुझाओगे. और अगर तुम जीते तो तुम्हे एक नै छूट मिलेगी . वो भी ऐसी क तुम यद् रखोगे.
अमित: वैसे दोनों hi सूरत में काम तो एक hi है और फायदा भी मेरा hi . चलो ठीक है मुझे शर्त मंज़ूर है . अब किसको लेन वाली हो ये तुम hi जानो. चलो अब उससे भी मिलवा दो.
मेघा : बड़ी जल्दी है उससे मिलने की ? बैठो मैं उसे लती हूँ बहार
मैं सोफे पर बैठ गया और मेघा अंदर चली गयी अपनी देवरानी यानि की रुपाली को बुलाने . मैं अभी सोफे पर बैठा सोच रहा था रुपाली क बारे में क मुझे उन दोनों की आहत महसूस हुई. मेरी पीठ उनकी तरफ थी .
मेघा : लो मिल लो मेरी प्यारी देवरानी से.
मैंने मेघा की आवाज़ सुन कर जब पलट कर देखा तो सामने रुपाली कड़ी थी मेघा क साथ. खुले घुंघराले बाल बड़ी बड़ी नीली ग्रे आँखें गोरा चमकदार चेहरा और गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ. उसने इस वक़्त बढ़िए सी सलवार कमीज पहनी हुई थी जो डिज़ाइन दर और मॉडर्न थी. मैं तो उसकी खूबसूरती को hi देख रहा था. मगर मुझे सामने देख कर उसकी तो बोलती hi जैसे बंद हो गयी थी . रुपाली का मुँह खुला का खुला रह गया. उसे उम्मीद नहीं थी शायद मेरे यहाँ होने की
रुपाली : ये यहाँ क्या कर रहा है दीदी ?
मेघा : यही तो है मेरा खास दोस्त जिससे तुम्हे मिलवाना था.
रुपाली : दीदी आपका दिमाग तो ठीक है? ये आपके बेटे की उम्र का है और ऊपर से ये रमा का नोन है.
मेघा : तो क्या हुआ. बेटे की उम्र का है बीटा तो नहीं . रमा का नोन है तो क्या हुआ. उसके हस्बैंड से इसकी पार्टनरशिप है . कोई ऐरागैरा नहीं है. तुम डरो मत ये किसी से कुछ नहीं कहने वाला और वैसे भी ऐसा मर्द तुमने कभी देखा या सुना भी नहीं होगा. मेरी मनो तो एक बार तरय करलो सब कुछ भूल जाओगी .
रुपाली : ये आप कैसी बातें कर रही हैं ? आप सेक्स की आग में ये भी भूल गयी क अगर किसी को पता चला तो क्या होगा? और तुम , तुम्हे शर्म नहीं अति ऐसे गलत काम करते हुए? अपनी माँ की उम्र की औरत क साथ ऐसा गन्दा काम करते हुए तुम्हारी आत्मा ने तुम्हे धिक्कारा नहीं? ज़रूर तुम्हारे अंदर भी किसी ऐसे hi आदमी का खून होगा जो ये सब कर रहे हो.
रुपाली की ये बात सुन कर मेरा दिमाग एक सेकंड में ख़राब हो गया . उसने मेरे माँ बाप पर hi उंगली उठा दी थी. मैं तो ये सब सिर्फ इस लिए कर रहा था क मुझे शालू की मदद करने का यही रास्ता नज़र आया था. मगर मुझे रुपाली ने घटिया लोगों की केटेगरी में खड़ा कर दिया था ऊपर से मेरे खून पर hi बात कर दी. मन क मैं पहले भी मेघा क साथ कर चूका था मगर वो एक एक्सीडेंट था और दूसरी बार सिर्फ शालू क लिए. मेरा गुस्सा कण्ट्रोल से बहार होने लगा .
अमित: मन में ) खुद तो अपने भतीजे और उसके बाप से चुदवाती है और मुझे उपदेश दे रही है . मेरे माँ बाप पर उंगली उठाई तूने , देख आज तेरा क्या हल करता हूँ.
मेघा : रुपाली , मंद योर लैंग्वेज. तुम भी कोई सटी सावित्री नहीं हो , मेरे पति क साथ करते तुझे शर्म नहीं आती जो यहाँ उपदेश दे रही हो. चलो माफ़ी मानगो इससे और इसे खुश करो.
रुपाली : गुस्से में ) माफ़ी माय फुट. आपका दिमाग ख़राब हो गया है. सेक्स की आग में अंधी हो कर आप ये गन्दा खेल खेल रही हैं . मैं आपका साथ नहीं देने वाली . आपको मुबारक आपका ये यार , मैं चली.
रुपाली गुस्से से पेअर पटकती हुई चल दी