Adultery Manhoos se mahan tak - Page 14 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 111



सुबह जल्दी उठने की आदत क कारन मैं जल्दी जाग गया . कमरे में वाल क्लॉक पर नज़र पड़ी तो 6 बज चुके थे . दिन का उजाला कमरे में फ़ैल रहा था. मेरी नज़र साथ में लेती हुई मंजू म पर पड़ी तो वो पेट क बल लेती हुई थी. एक तरफ को किया हुआ चेहरा जब मैंने देखा तो उनके उस मासूम और सुन्दर मुखड़े को देख कर मुझे उन पर प्यार आ गया और खुद बा खुद झुकते हुए मैंने उनके गालों पर किश कर दिया . वो वैसे hi सोई रही. मैंने उनके बल एक तरफ किये तो उनकी नंगी पीठ मेरे सामने आ गयी . दूध सा सफ़ेद रंग था मम का और कोमलता माखन जैसी. मैंने उनकी पीठ पर भी 4-5 किश जड़ दिए. वो थोड़ी सी कसमसाई और अपना एक घुटना मोड़ते हुए तंग को थोड़ा साइड को खोल दिया. इस तरह करने से उनकी गांड ऊपर को उभर आयी और एक साइड का पहाड़ कुछ ज्यादा hi बड़ा नज़र आने लगा. मैं खुद को रोक नहीं पाया और उनके दोनों खरबूजे अपने हाथों से थम कर दबाने लगा. बड़े hi नरम चूतड़ थे मम क . सचमुच वो पूरी की पूरी खूबसूरती का शाहकार थी जो अब मेरी थी. मुझे अपने आप पे रश्क होने लगा. चूतड़ों की खूबसूरती का इनाम देने क लिए मैंने उन्हें भी झुक कर चुम लिया और अपने हाथ से उनकी जांघों और कमर को सहलाने लगा.

‘ सुबह सुबह फिर शुरू हो गए , अभी रत को इतना दर्द दे कर चैन नहीं मिला ? लगता है ये तुम्हे कुछ ज्यादा hi पसंद हैं’

शायद मेरी छेड़ छड़ ने मम को उठने क लिए मजबूर कर दिया था. उन्होंने मुझे अपने चूतड़ों पर किश करते हुए देख कर ये कहा.

अमित: क्या करूँ आपका ये हुस्न मुझे मजबूर कर रहा है क मैं आपसे प्यार करूँ. और अब फिर से दर्द नहीं होगा मगर मैं अभी कुछ करने वाला नहीं. कॉलेज भी तो जाना है. और रही इनकी बात तो ये इतने खूबसूरत है क कोई भी मर्द इनकी तरफ खींचा चला आएगा. उन्हें देखते hi मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगती है.

मंजू म : मतलब तुम्हारी पहले से hi आँख थी इन पर? मैं नहीं करने दूंगी वहां कुछ यद् रखना. ये बहुत नाज़ुक हैं इतनी आसानी से नहीं मिलने वाले

अमित: सोच लो एक तरफ आप कहती हैं क आप पूरी की पूरी मेरी हैं और दूसरी तरफ मन भी कर रही हैं ?

मंजू म : मन कब किया ? मैंने तो इतना कहा क इतनी आसानी से नहीं दूँगी

अमित: मतलब आप देंगी तो चलो अभी शुरुआत कर देते हैं

मंजू म : अरे अरे कुछ तो तरस खाओ मुझ पर . अभी आगे का दर्द ख़तम नहीं हुआ और पीछे से भी भेदना चाहते हो ये खूंटा गाड़ कर.

मुझे उनकी इस बात पर हंसी आ गयी. मैं तो बस मज़ाक कर रहा था उनके साथ मगर वो दर hi गयी.

अमित : है है है . आप तो दर गयी. चिंता मत करो मैं आपकी सहमति क बिना कुछ नहीं करूँगा चाहे तो आप मन कर दें मैं फाॅर्स नहीं करूँगा

मंजू म : तुम कितने अचे हो , मेरी ीचा का सम्मान करते हो इसी लिए तो तुम पर इतना प्यार अत है मगर मुझे तुम्हारा खुद पर अधिकार जाताना ज्यादा ाचा लगता है. तुम ये सब अधिकार से कर सकते हो मैं मन नहीं करुँगी.

अमित: मगर मुझे सिर्फ आपकी ख़ुशी चाहिए

मंजू म : और मेरी ख़ुशी तुम्हारी ख़ुशी में है

इतना कह कर मंजू म ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर किश शुरू कर दी. 2-3 मिनट्स तक अच्छी तरह होंठ चूस कर वो मुझसे अलग हुई. मैं भी उनको सीधा करते हुए उनकी छूट पर नज़र डाली तो सूजन कुछ काम लग रही थी मगर अभी भी छूट क होंठ बड़े बड़े लग रहे थे .

अमित: अब दर्द कैसा है यहाँ पर?

मंजू म : अब ठीक है मगर हल्का हल्का महसूस हो रहा है अंदर भी.

अमित : बीएड से उठ कर ज़रा चल क देखिये

मंजू म जैसे hi चलने को हुई तो उनको थोड़ा दर्द हुआ मगर वो आहिस्ता आहिस्ता पाऊँ फैलाकर चल प् रही थी.

अमित: आज आप आराम कीजिये ऐसी हालत में बहार जाना सही नहीं . मुझे अभी जाना होगा सुबह की एक्सरसाइज पर भी जाना है और फिर घर .

मंजू म : क्या आज छुट्टी नहीं कर सकते तुम? मैं चाहती हूँ तुम मेरे पास रहो.

अमित : ऐसी बात है तो कैंसिल कर देता हूँ आज कॉलेज जाना . लो मैं बैठ गया यहीं आपके पास

मैंने फिर से बीएड पर बैठते हुए कहा.

मंजू म : चलो उठो कैसे तैयार रहते हो छुट्टी करने क लिए . मैं तो बस देख रही थी तुम क्या कहते हो. टेस्ट शुरू होने वाले हैं अब कोई छुट्टी नहीं. जाओ अब मगर कॉलेज क बाद सीधा मेरे पास आना . मेरा अकेले में दिल नहीं लगेगा.

मैंने मंजू म को बाँहों में भर कर उन्हें किश किया .

अमित : सीधा यहीं आऊंगा मगर आप भी अपना ख्याल रखना . खाना बहार से hi मंगवा लेना और कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है .

मैंने किश किया और कपडे पेहेन कर एक बार फिर मम को किश किया . गाउन पेहेन कर वो मुझे दरवाज़े तक छोड़ने आयी. जाने से पहने एक बार उन्होंने मुझे कास क ऐसे गले लगाया जैसे पत्नी पति क कहीं दूर जाने से पहले गले मिलती है . मुझे उनके दिल की हालत का पता चल रहा था क वो मुझे खुद से दूर नहीं करना चाहती . मगर मुझे भी तो जाना होगा वैसे भी मैं उन्हें थोड़ा स्ट्रांग बना hi दूंगा क वो इतना भी कमज़ोर न बने. मैं सीधा ग्राउंड में गया और एक्सरसाइज क बाद मोहित क घर. ज्यादा टाइम नहीं था तो जल्दी से तैयार हो कर नाश्ता किया. आंटी मुझसे बात करना चाहती थी मगर मोहित भी वहां था तो वो चुप रही . नाश्ता कर क हम दोनों दोस्त कॉलेज निकल गए.

चन्दर्कांता म का लेक्चर लगाने क बाद अगले 2 लेक्चर फ्री थे तो मैं मोहित और कल्पना को साथ ले कर कैंटीन में आ गया. तभी मुझे शिवानी की कॉल आने लगी . कॉलेज टाइम पर शिवानी कॉल क्यों कर रही है मुझे लगा कोई ज़रूरी बात होगी . मैंने साइड में जा कर कॉल अटेंड की

शिवानी : कहाँ गायब रहते हो कल से कितनी कॉल की उठाते नहीं हो . क्या बात है ?

अमित : सॉरी यार वो कल कहीं ज़रूरी काम में फसा हुआ था. तुम बताओ क्या बात है

शिवानी : देखो मैं ज्यादा बात तो नहीं कर सकती क्यूंकि मुझे जाना होगा इस वक़्त वाशरूम में आयी हूँ बात करने क लिए . मोंटी कुछ प्लान कर रहा है पर उसने अभी तक शीना से भी इस बारे में बात नहीं की है. इतना ज़रूर है क वो तुम्हारे साथ साथ तुम्हारी बहनो को भी नुकसान पहुँचाने वाला है.

शिवानी की बात सुनते hi मेरा दिमाग घूम गया. अपनी तो मुझे परवाह नहीं थी मगर नेहा दीदी और राधा को नुकसान पहुँचाने वाली बात पर मेरा खून खौल गया. एक पल में hi मेरा दिमाग गरम हो गया.

अमित: गुस्से में ) इस कुत्ते की मौत आयी है शायद . अगर उसने नेहा दीदी या राधा की तरफ गन्दी नज़र डाली तो ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा उसे .

शिवानी : खुद को काबू में रखो. वो क्या करने वाले हैं अभी तो हमें ये भी पता नहीं . तुम बस अलर्ट रहना बाकि मुझे जैसे hi पता चलता है मैं बता दूंगी .

अमित: थैंक्स शिवानी मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगा

शिवानी : मार कहानी है क्या ? मैं एहसान नहीं कर रही प्यार करती हूँ तुमसे और तुम्हारे लिए इतना तो कर hi सकती हूँ. वैसे मुझे तुम्हारी बहुत यद् आती है मगर मिल नहीं प् रही .

अमित: चिंता न करो किसी दिन साडी कसार निकल दूंगा और इस बार कार में नहीं बीएड पर मिलेंगे

शिवानी : चुप बेशरम कहीं क . ाचा अब मैं चलती हूँ . ी लव यू उम्म्माह bye bye

उसके बाद शिवानी ने कॉल कर दी मगर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था. मैंने तुरंत शालू को फ़ोन लगाया . उसने फ़ोन काट दिया और 1 मिनट बाद hi उसकी कॉल आ गयी

शालू : तो आ गयी मेरी यद्? मुझे लगा तुम भूल गए मुझे

अमित: तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ बस तुम्हारा काम पूरा होने तक मैं तुमसे दूर हूँ. वैसे मैंने कॉल इस लिए किया है क मुझे मदद की ज़रूरत है.

शालू : मदद ? क्या हुआ है ? मुझे बताओ मैं जो कर सकती हूँ करुँगी

अमित: मोंटी मेरी बहनो को नुकसान पहुँचाने की कोई चल चलने वाला है तुम मुझे पता कर क बताना अगर तुम कर सको तो.

शालू : क्या ? उस कुत्ते की नज़र अब तुम्हारी बहनो पर है. मैं आज से hi नज़र रखूंगी अगर कुछ भी पता चला तो बताउंगी . वैसे तुम खुद भी अलर्ट रहना और उन्हें भी कह देना.

शालू से बात कर क मैंने कॉल काट दी. शालू को मोंटी क कई कॉन्टेक्ट्स का पता था इस लिए शिवानी क मुकाबले मुझे शालू ज्यादा सही लगी ऐसे वक़्त में मदद क लिए मगर मोंटी भी शायद किसी क सामने कोई बात नहीं करेगा वर्ण उसने शीना को बता दिया होता. मुझे और भी कुछ सोचना होगा . फिर मैंने नीरज को कॉल लगा दी.

नीरज : हाँ भाई इस वक़्त कॉल कर रहे हो सब ठीक तो है न ?

अमित: भैय्या एक प्रॉब्लम हो गयी है. मुझे किसी दोस्त से पता चला है क मोंटी प्लान बना रहा है मेरी बहनो क साथ कुछ करने का.

नीरज : गुस्से में ) इसकी तो , तू चिंता मत कर छोटे भाई मेरे होते ऐसा नहीं हो सकता . अगर इसने कोई पन्गा लिया तो पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा . तू चिंता मत कर वो मेरी भी बहने हैं.

अमित: मुझे आपसे यही उम्मीद थी भैय्या . आप फिर भी अपने दोस्तों से भी बात कर लेना.

नीरज : तू चिंता मत कर मैं अभी बात करता हूँ .

इसके बाद हमने एक होने काट दिया. अब मैं सोचने लगा क मोंटी कैसे नुकसान पहुंचा सकता है राधा और नेहा दीदी को ? कॉलेज में तो नीरज भैया उनके दोस्त हैं मैं हूँ मोहित है ज़रूर वो बहार hi कुछ करेगा. मुझे दोनों क बारे में कुछ सोचना होगा. वो दोनों स्कूटी पे अति हैं ऐसे में कहीं बहार वो पहले की तरह किसी को भेज कर या खुद उन्हें परेशां न करे या फिर कुछ और करेगा? जब तक उसके प्लान का पता नहीं चल जाता मुझे खुद नज़र रखनी चाहिए. मैं अपनी सोच में डूबा था क कल्पना और मोहित भी मेरे पास आ गए . मुझे टेंशन में देख कर उन्हें पता चल गया क कोई गंभीर मसला है

मोहित : क्या बात है ? तू टेंशन में क्यों है?

कल्पना : बात क्या है ? इतनी देर से बहार हो किसका फ़ोन था ?

अमित : यार वो मोंटी राधा और नेहा दीदी को कोई नुकसान पहुँचाना चाहता है मुझसे बदला लेने क लिए . मुझे समझ नहीं आ रही क क्या किया जाये ?

मोहित : क्या ? उसकी माँ की , तू टेंशन मत ले. सेल को थोक देते हैं पहले hi . फिर कुछ करने की सोचेगा भी नहीं.

कल्पना : ऐसे कैसे थोक डोज? अगर कुछ किया तो कॉलेज से निकल दिए जाओगे. पहले पता तो चले वो करना क्या चाहता है. फिर उसे तरीके से हैंडल कर लेंगे. जो भी करना होगा कॉलेज क बहार . पर मैं यही कहूँगी क पहले पता करो वो करने क्या वाला है वर्ण वो पलट कर फिर वॉर करेगा इस लिए ाचा रहेगा रेंज हाथ पकड़ो और उसे ऐसी सजा मिले क दोबारा कुछ करने क लायक hi न रहे.

अमित: मुझे इस बात की परवाह नहीं है. मैं बस इस बात से दर रहा हूँ क कॉलेज में तो हम सब हैं . यहाँ वो हिम्मत नहीं करेगा मगर कॉलेज क बहार घर आते जाते कहीं वो उन दोनों को कहीं रस्ते में घेर कर कुछ करेगा तो हम को पता चलने से पहले कुछ हो गया तो ?

कल्पना : बस इतनी सी बात ? इसकी जिम्मेदारी मैं लेती हूँ. उन दोनों को कॉलेज से घर लेन ले जाने मैं खुद जाउंगी अपनी कार में बस तुम उनसे बात कर लो.

अमित: एक बात और , वो दोनों जल्दी घबरा जाती हैं इस लिए उनके सामने कोई इस बारे में बात नहीं करेगा.

कल्पना : तो फिर मानेंगी कैसे? तुम खुद hi समझाना उन्हें कैसे समझाना है.

अमित : वो मैं देखता हूँ बस तुम उनका ख्याल रखना प्लीज

कल्पना : प्लीज कहने की ज़रूरत नहीं है. हम दोस्त हैं और दोस्त hi दोस्तों क काम एते हैं. वैसे भी जो कुछ सीखा है उसका इस्तेमाल रियल लाइफ में करने का इससे ाचा मौका कहाँ मिलेगा . तुम फ़िक्र न करो आज से उनकी साडी टेंशन मैं लेती हूँ . तुम बस बेफिक्र रहो.

अमित : थैंक यू वैरी मच कल्पना मैं तुम्हारा एहसान.....

कल्पना : दूँ क्या एक रख क ? दोस्ती में एहसान नहीं होते . हाँ दोस्तों को फीस ज़रूर देनी पड़ती है दोस्ती की. चलो कुछ खिलाओ अब कब से वेट कर रहे थे तुम्हारा कैंटीन में.

मुझे कल्पना पर बड़ा गर्व महसूस हुआ क वो कितनी अच्छी है और मुझे अपना ाचा दोस्त मानते हुए मेरी टेंशन अपने सर ले रही है. अगर राधा और नेहा दीदी कल्पना क साथ रहेंगी तो निश्चय hi वो सुरक्षित रहेंगी . हम तीनो कैंटीन में आ गए. कुछ hi देर में बेल्ल बज गयी और राधा मीनल नेहा दीदी क साथ कैंटीन में आ गयी .

अमित : ाचा हुआ आप आ गयी. देखो न दीदी आपकी वजह से मुझे सबकी बातें सुन्नी पद रही हैं. अब आप hi कुछ करो.

नेहा दीदी : बात क्या है क्या हुआ है ? कौन बातें कर रहा है?

नेहा दीदी क साथ साथ राधा मीनल मोहित और कल्पना भी हैरान हो गए क मैं क्या बात करने इस वाला हूँ .

अमित : मैं मोहित क साथ कार में अत हूँ और आप दोनों स्कूटी पर बस इसी लिए सब ये कह रहे हैं क मैं कैसा भाई हूँ क खुद कार में घूमता हूँ और मेरी बहने स्कूटी पे आती हैं. मुझे ये ाचा नहीं लग रहा

नेहा दीदी : ये तो सरासर गलत बात है . कौन कह रहा है ये ? तुम कौन सा अपनी कार में एते हो वो तो तुम्हारे दोस्त की है. अगर तुम्हारे पास अपनी हो तो फिर हम भी कार में आएँगी . मगर ऐसा नहीं है तो तुम क्यों चिंता करते हो.

राधा : दीदी ठीक कह रही हैं. जब तुम कार लोगे तो हम भी कार में तुम्हारे साथ बैठ कर घूमेंगी और मैं आगे बैठूंगी तुम्हारे साथ देख लेना

राधा ने मेरी आँखों में देखते हुए बड़े हक़ से ये कहा.

अमित: मगर मुझे ाचा नहीं लग रहा क आप इस तरह अकेली स्कूटी पे आती हैं. कहीं कभी कोई प्रॉब्लम हो गयी तो? मुझे दर लगता है इस लिए मैंने फैसला किया है क आप दोनों कार से आया करेंगी अब.

नेहा दीदी : ये नहीं हो सकता. कार हमारे बस की नहीं है और तुम्हे भी इस बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है

मैं क्या बात कर रहा हूँ अब तक मोहित और कल्पना भी समझ चुके थे इस लिए अब वो भी बीच में कूद पड़े .

मोहित : अमित ठीक कह रहा है दीदी . मैं भी तो आपका भाई हूँ. जैसा अमित वैसा मैं कल से आप दोनों को मैं लेने आऊंगा .

नेहा दीदी : थैंक्स मोहित पर ये ठीक नहीं है. तुम हमारे भाई जैसे हो पर लोग गलत समझेंगे वैसे भी कार की ज़रूरत नहीं है हमें.

कल्पना : ी एग्री विथ नेहा दीदी. लड़का होने की वजह लोग गलत समझेंगे मगर लड़की हो तो फिर कोई गलत नहीं समझेगा.

नेहा दीदी : तुम कहना क्या चाहती हो?

कल्पना : यही क कल से मैं आप दोनों को लेने आउंगी और आप मन नहीं करेंगी क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे दोस्त की बहने ऐसे स्कूटी पर आएं. एक तो इससे आपकी और अमित की इंसल्ट करेंगे क घटिया लोग और दूसरा आप कार में आएँगी तो किसी तरह की कोई परेशानी का दर भी नहीं रहेगा.

नेहा दीदी : पर

अमित : पर वॉर कुछ नहीं दीदी . क्या आप चाहती हैं क आपके भाई को बातें सुन्नी पड़े?

नेहा दीदी : बिलकुल नहीं

अमित : तो कल से आप कल्पना क साथ hi आएंगी और राधा तुम्हे तो कोई ऐतराज़ नहीं?

राधा : मेरी वजह से कोई तुम्हे कुछ कहे मैं ऐसा होने नहीं दूँगी. पर माँ शायद राज़ी न हो

कल्पना : आंटी से मैं बात करुँगी . तो हो गया फाइनल . कल मैं सुबह आप दोनों को लेने आउंगी आप मुझे अपने घर का एड्रेस समझा दो .

इस तरह एक मुश्किल तो हल हो गयी मगर अब मोंटी का हल तो करना पड़ेगा मगर कल्पना की बता भी सही थी पहले मोंटी क प्लान क बारे में जानना ज़रूरी था. इसी तरह हम कैंटीन में बैठे बातें करते रहे जब तक क बेल्ल नहीं बज गयी .

दूसरी तरफ D.P. इंटरनेशनल का ऑफिस जो शहर की सबसे बड़ी कंपनी है जिसकी कई फैक्ट्रीज और ऑफिस हैं अलग अलग शहरों में और फॉरेन में भी इनके ऑफिस हैं. ये मोंटी क डैड बलजीत राइ की कंपनी है. मोंटी क डैड तो खुद इतना बिजी रहते हैं क उनका पता नहीं होता वो कहाँ हैं . कई बार तो कई कई हफ्ते वो फॉरेन में hi बिता कर आते हैं . ऐसे में उनका स्टाफ hi सब कुछ संभालता है और उनके ऊपर उनके भरोसेमंद मैनेजर्स हैं जो पूरी ईमानदारी से काम करते हैं क्योंकि वो जानते हैं क उनका मालिक कितना खतरनाक इंसान है जो गलती होने पर क्या हल कर सकता है. रजनी मौसी की बेटी निधि भी इसी ऑफिस में जॉब करती है.

निधि ऑफिस में कासुअल फुल स्लीव शर्ट और ग्रे पेंट्स पहनती थी. जैसा की आप जानते hi हैं क निधि मॉडल जैसी दिखती है तो इसकी वो ज़बरदस्त फिगर ऐसी कासुअल ड्रेस में और भी कातिल लगती है . गोरा सफ़ेद रंग और ऐसी टाइट फिटिंग्स ऊपर से जान लेवा फिगर 36-28-36 . हाइट भी अच्छी है. देखने वाले तो पागल होंगे hi मगर निधि इतनी रिज़र्व है क कभी उसने किसी क साथ कोई रिलेशन रखा hi नहीं और न hi वो किसी को घास डालती है. मगर लोगों की नज़रें तो वो रोक नहीं सकती. ऐसे लोग तो हर जगह भरे पड़े हैं जो खूबसूरत लड़कियों को हासिल करने क लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं .

निधि : मई ी के इन सर ?

मैनेजर : यस निधि प्लीज के इन. तुम्हे मेरे केबिन में आने क लिए पूछने की ज़रूरत नहीं. ये रुके दुआरों क लिए है

निधि : थैंक यू सर बूत आईटी इस मैनर्स . सर ये प्रोजेक्ट फाइल आपने मंगवाई थी.

मैनेजर : फाइल को एक तरफ रखते हुए ) प्लीज सीट डाउन निधि. क्या हम कुछ देर बात कर सकते हैं ?

निधि : सर मुझे एक इम्पोर्टेन्ट रिपोर्ट फाइनल कर क फॉरेन क ऑफिस में भेजनी है . बॉस की सेक्रेटरी का फ़ोन आया था .

मैनेजर : ok , वैसे शाम को फ्री हो तुम ?

निधि : no सर मुझे फॅमिली क साथ कहीं जाना है. सर मई ी जो नाउ ?

मैनेजर : ok यू मई जो

निधि पलट कर बहार जाने लगी तो मैनेजर की नज़र उसकी जानलेवा मटकती गांड पर hi टिक गयी. वो तब तक देखता रहा जब तक क वो नज़रों से दूर नहीं हो गयी. उसे ये भी ध्यान नहीं आया क दरवाज़ा बंद क्यों नहीं हुआ. जब की दरवाज़ा पर उसका एक जूनियर दरवाज़े को एक साइड से रोक कर खड़ा था क्यूंकि उसको पता था क मैनेजर की नज़र कहाँ पर है. मन hi मन वो भी खुश हो रहा था. जब मैनेजर की नज़रों से निधि ओझल हुई तो उसका ध्यान जूनियर पर गया. जूनियर दरवाज़ा बंद करता हुआ अंदर आ गया. दोनों काफी सैलून से साथ थे तो एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और अच्छी टोनिंग भी थी इनमे.

मैनेजर : यार ये लड़की क्या चीज़ है . इसे देखता हूँ तो खून उबले खाने लगता है. 3 महीने हो गए इस यहाँ लेकिन अभी तक साली हाथ भी नहीं लगाने देती .

जूनियर: सर बच कर जाएगी कहाँ , एक न एक दिन आप के नीचे आना hi पड़ेगा इसे भी. मगर जल्दी कीजिये सर कहीं बॉस आ गए तो वो ले उड़ेंगे इसे .

मैनेजर : तुम ठीक कहते हो. उस ठरकी की नज़र पद गयी तो फिर वो hi इसका सारा रास चूस लेगा. चाल देख कर तो लगता है क अभी कच्ची काली है . इससे पहले क बॉस की नज़र पड़े ये मेरे नीचे आणि चाहिए . बड़ा मज़ा आएगा इसे फूल बनाने में. जब जब इसे देखता हूँ खुद पर काबू नहीं रहता , साला अब तो सपने भी इसके एते हैं.

जूनियर : क्या सर आप भी कैसी बातें करते हैं. आप तो सब क सीनियर हैं आपके लिए भला क्या मुश्किल है. पकड़ लीजिये किसी दिन.

मैनेजर : समझा कर ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते बात बिगड़ गयी तो करियर ख़राब हो जायेगा. कई बार टच तो करने की कोशिश की है मगर साली करंट मरती है. बहुत शरीफ लगती है आसानी से काबू नहीं आएगी.

जूनियर : किसी दिन ले जाइये न सर अपने साथ बिज़नेस टूर पे मीटिंग का बहाना कर क . फिर होटल में कर देना काम इसका भी जैसे पिछली वाली का किया था.

मैनेजर : तरय कर चूका हूँ साली मानती नहीं बहार जाने को . ज्यादा फाॅर्स किया तो रिजाइन देने की बात करने लगी थी . कुछ और तरय करता हूँ. जो भी हो इसे मैं अपने नीचे तो ला कर रहूँगा.

जूनियर : आपकी किस्मत अछि है सर जो बॉस 4 महीने से यहाँ ए hi नहीं . ाचा मौका है उनके आने से पहले झंडा गाड़ दो.

मैनेजर : तुम ठीक कह रहे हो . बॉस क आने से पहल hi करना होगा. फ़िलहाल तो वो अभी फॉरेन चले गए हैं . एक डेढ़ महीना तो गोरी चमड़ी का मज़ा लेंगे वहां . तब तक मैं इसे शीशे में उतर hi लूंगा.

जूनियर : बेस्ट ऑफ़ लक सर मेरे लिए कोई काम हो तो मुझे भी बताना . और सर काम होने क बाद मुझे भी भूल मत जाइएगा

मैनेजर : तुझे कैसे भूल सकता हूँ . तू तो मेरा यार है . बस एक बार इसके मज़े ले लूँ फिर तुझे भी पूरा मौका दूंगा मज़े करने का.

दोनों आपस में बातें करते हुए हसने लगे .

कॉलेज से छुट्टी होने क बाद कल्पना नेहा दीदी और राधा क पीछे पीछे उनका घर देखने चली गयी और मैं मोहित मीनल क साथ घर को निकल गया . घर आते hi मैं बिना लंच किये बाइक उठा कर मंजू म क घर की तरफ निकल गया . मोहित ने रोकना भी चाहा मगर मैं बहाना बना कर निकल गया. मुझे उनकी भी चिंता थी क पता नहीं उन्होंने कुछ खाया भी होगा या नहीं. मैंने रास्ते में होटल से लंच पैक करवाया और उनके घर पहुँच गया . बेल्ल बजने से पहले hi दरवाज़ा खुल गया और सामने मंजू म गाउन में hi कड़ी थी. उनके चेहरे पर दिलकश स्माइल थी. मेरे कुछ कहने से पहले hi उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद कर क मेरे गले लग गयी .

मंजू म : इतनी देर कैसे हो गयी आने में ? कॉलेज से घंटा भर पहले छुट्टी गयी थी न फिर भी देर से आये . पता है मैं कब से तुम्हारी रह देख रही हूँ?

मंजू म का इस तरह मेरा बेकरारी से मेरा इंतज़ार करना और यूँ मुझे गले लगाना मुझे बड़ा ाचा लगा

अमित: तो मेरा इंतज़ार हो रहा था. वो क्या है न मोहित क साथ पहले घर गया और बाइक उठा कर सीधा इधर hi आ गया रस्ते में लंच पैक करवा कर ले आया . खाना तो खाया नहीं होगा अपने ?

मंजू म : तुम्हारे बिना कैसे खा लेती? ाचा किया जो ले आये मैंने भी बनाया नहीं था सोचा था बहार लंच करने जायेंगे चलो ये भी ाचा हुआ.

अमित : अब तबियत कैसी है ?

मंजू म : अब ठीक हूँ . सारा दिन आराम जो किया.

अमित : वो तो नज़र आ रहा है . अभी तक गाउन में hi हो.

मंजू म : तुम्हारा लाया हुआ है और तुमने खुद hi तो पहनाया था सुबह . इसमें मुझे तुम्हारा एहसास हो रहा था इस लिए नहाने क बाद फिर से पहन लिया.

अमित: मतलब क जो मैं पहनाउंगा आप वो hi पहनेंगी. और अगर मैं आपको कपड़ों क बिना hi रखना चहुँ तो ?

मंजू म : धत्त बदमाश बेशरम कुछ तो शर्म करो .

अमित: आपके साथ बेशरम बन कर प्यार करना चाहता हूँ क्या आप नहीं करने देंगी?

मंजू म : तुम्हे रोका है क्या किसी ने?

अमित : तो फिर अब उतर दीजिये इसे

मंजू म : मैं नहीं उतरूंगी खुद hi उतर लो

अमित: चलिए पहले खाना खा लेते हैं सुबह से कुछ खाया तो होगा नहीं आपने

मंजू म : नहीं बस जूस पिया था

अमित : पता था मुझे आप ऐसा hi करेंगी. अब जल्दी से खाना कहते हैं बाएं बाद में.

मैंने मम क होंठो पर किश किया और किचन में जाने लगा तो मम ने खुद मेरे हाथ से खाना पकड़ लिया और मुझे बैठने का कह कर किचन में चली गयी . मैं सोफे पर बैठ हुआ था क मम खाना एक प्लेट में दाल कर ले आयी

अमित : ये क्या एक hi प्लेट ? आपकी प्लेट कहाँ है?

मंजू म : मैं तुम्हारे साथ hi खाउंगी और तुम्हे अपने हाथों से खिलाऊंगी .

अमित : ये तो और भी ाचा है.

मम ने प्लेट टेबल पर राखी और मेरे साथ बैठ गयी . मम अपने हाथ से निवाला बना कर मुझे खिलने लगी तो मैंने हाथ रोक पकड़ लिया

मंजू म : क्या हुआ?

अमित : ऐसे नहीं, मेरी गॉड में बैठ कर खिलाओ मुझे .

मंजू म : नॉटी बॉय !!

मम उठ कर मेरी जांघ पर बैठ गयी और मुझे अपने हाथ से खाना खिलने लगी. मैंने उनके हाथ से निवाला खाया और फिर अपने हाथ से निवाला बना कर उन्हें खिलाया . मम प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगी और उनकी आँखों में पानी आ गया.

अमित : क्या हुआ ? आप की आँखों में आंसू ?

मंजू म : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. इतना प्यार मुझे कभी नहीं मिला . इससे पहले सिर्फ मेरे भैया hi मुझे हाथ से खाना खिलते थे कभी कभी प्यार से . मगर जैसे तुम खिला रहे हो ऐसे कभी नहीं खाया .

अमित : मतलब

मंजू म : मुझे जिस तरह गॉड में बिठा कर खिला रहे हो ऐसे सिर्फ पति का hi हक़ होता है . और मेरे हस्बैंड में कभी ऐसे मुझे प्यार किया hi नहीं था.

अमित: आज क बाद आप अपने हस्बैंड का ज़िकर भी नहीं करना. पता नहीं वो कैसा आदमी था जिसने इतनी खूबसूरत बीवी को प्यार नहीं किया. मैं होता तो इतना प्यार करता क प्यार करने की कोई जगह hi नहीं बचती

मंजू म : अब तो हो न तुम . मैं कभी ज़िकर नहीं करुँगी अपने एक्स हस्बैंड का अब से तुम hi मेरे सब कुछ हो.

मम ने एक बार फिर से मुझे किश किया . मैंने भी उनको पूरा रिस्पांस दिया .

अमित : ऐसे तो खाने का और भी मज़ा आ रहा है. एक बाईट पर एक किश , ाचा है.

ऐसे hi प्यार से हम एक दूसरे को खाना खिलते हुए किश करते रहे. मंजू म से जितना भी प्यार कर रहा था उतना hi ज्यादा प्यार करने को दिल करता था.

अमित: अब मैं चलूँ ?

मंजू म : अभी तो ए अब कहाँ जाओगे ? मैं कहीं नहीं जाने दूंगी तुम्हे.

अमित: जाना तो होगा न . आंटी को क्या जवाब दूंगा? कल रत भी घर से बहार था रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो बात घर तक पहुँच जाएगी.

मंजू म : ऐसा नहीं हो सकता क तुम मेरे साथ hi रहो? पता है इतनी अच्छी नींद मुझे कभी नहीं आयी जितनी कल रत तुम्हारी बाँहों में आयी मुझे.

अमित : वो तो आणि hi थी कल इतनी म्हणत जो की थी . कहो तो आज भी कल जैसे म्हणत करें?

मंजू म : बदमाश ! घूम फिर क उसी बात पर आ जाते हो. अभी बताती हूँ तुम्हे

मम एक पल क लिए कड़ी हुई और मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने सोफे पर रख कर मेरी गॉड में बैठ गयी और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. इसी क साथ हम एक दूसरे होंठो को चूमने चाटने और करने लगे. मेरा एक हाथ गाउन क अंदर घुस कर उनके बूब्स पर पहुँच गया जो अंदर से निर्वस्त्र थे दूसरा हाथ मैंने उनकी नंगी जांघ से अंदर को खिसकते हुए उनके बड़े और मुलायम बट पर रख दिया . बूब्स की तरह वो भी निर्वस्त्र था यानि क गाउन क निचे कुछ नहीं पहना था मम ने. मम मेरे गले में बहन डेल मुझे किश कर रही थी और मैंने उनके होंठो का रास पिता हुआ उनके बूब्स और बट क साथ खेल रहा था. मेरा लैंड इतने में hi खड़ा हो गया था जिसका एहसास मम को हो गया होगा. मम अपनी कमर को मेरे लैंड पर दबाते हुए हिलने लगी यानि की अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ने लगी. हम दोनों की सांस उखाड़ने लगी तो मम ने किश तोडा वो ज़ोर से हांफ रही थी. हम दोनों की नज़रें मिली तो उनकी आँखों में एक नशा सा दिखा मुझे.

मंजू म : अब बोलो , जाओगे मुझे छोड़ कर ?

अमित : ऐसे रोकेगी तो कैसे जा पाउँगा. वैसे नीचे का क्या हल है? वो इतनी जल्दी ठीक हो गयी ?

मंजू म : खुद hi देख लो.

मैंने ऐसे hi बैठ बैठे मम को साइड में सोफे पर लिटा दिया और नीचे बैठ कर उनकी टांगों को खोल कर छूट को देखने लगा.

अमित : सो ब्यूटीफुल!!!!

मम की छूट देखते hi मेरे मुँह से अपने आप तारीफ निकल आयी क्यूंकि मम की छूट एक डैम साफा चक थी. बालों का कहीं कोई नमो निशान नहीं था. छूट थोड़ी गोली हुई थी मगर छूट क होंठ फूले हुए भी प्यारे लग रहे थे. बिलकुल गुलाबी आभा बिखेर रही थी और बाकि का सारा हिस्सा दूध सा सफ़ेद था.

अमित : ये कब किया ?

मंजू म : तुमने hi तो कहा था तुम्हे वहां बल पसंद नहीं तो आज मैंने इसे अच्छी तरह साफ़ कर दिया ताकि तुम इसे फिर से प्यार कर सको .

अमित : ये कितनी प्यारी है इसे तो साडी उम्र प्यार करूँगा मैं.

इतना कह कर मैंने उनकी छूट पर एक किश कर दिया.

मंजू म : आअह्ह्ह्ह cccccccccc उनमममम ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi है . तुम जैसा चाहोगे वैसा पाओगे इसे. बस इसे यूँ hi प्यार करते रहना.

अमित : हमेशा करूँगा मगर अभी इसे रेस्ट की ज़रूरत है.

इतना कह कर मैं सीधा हो गया तो उनके पाऊँ में लटक रही पायल ने मुझे रोक लिया. मैंने हवा में झूल रहे उनके पाऊँ को हाथों में लिया और पायल क ऊपर से उनके तखनो पर किस किया.

अमित: इस पायल की खूबसूरती आपके पाऊँ में आकर बाद गयी है और आपके पाऊँ जैसे सम्पूर्ण हो गए हैं सुंदरता में बस इन पर थोड़ी लाल पोलिश लग जाये तो और भी अचे लगेंगे.

मंजू म : मैं अब से तुम्हारे लिए सजूंगी संवारूंगी . मैं एक खली तस्वीर हूँ जैसे चाहे रंग भर दो मुझ में.

अमित : मैं सिर्फ एक hi रंग जनता हूँ और वो है प्यार का रंग . बस उसी रंग से रंग दूंगा आपको

मैंने मंजू मम क दोनों पाऊँ एक साथ पकडे और उन पर किश किया.

मंजू म : तुम्हे पायल की आवाज़ बहुत पसंद है न ? मेरे भैया भी पायल की आवाज़ को बहुत पसंद करते थे. भाभी भैया क लिए स्पेशलय पायल पेहेन कर hi रहती थी हर वक़्त. मैं भी तुम्हारे लिए हमेशा उन्हें पेहेन कर रखूंगी.

अमित: पता नहीं क्यों पर ये सच है मुझे उसकी आवाज़ बहुत अच्छी लगती है . ये सीधा मेरे दिल में उतर जाती है . इसी लिए तो मैं ये लाया था आपके लिए . आपके सुने पाऊँ मुझे अचे नहीं लगते थे.

मंजू म : तुम्हारे दिल में जो जो भी बात हो वो मुझे बता दिया करो . मैं वो हर काम करुँगी जिससे तुम्हे ख़ुशी मिले. तुम्हे प्यार कर क मेरे दिल को क्या सुकून मिलता है मैं ये बयां नहीं कर सकती.

हम बात कर hi रहे थे क मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो नैना दीदी की कॉल आ रही थी. मैंने एक नज़र मम की तरफ देखा तो वो मेरे मोबाइल पकड़ लेने से नाराज़ हो रही थी. उनके साथ प्यार भरी बातें बीच में hi रुक गयी थी. मगर मैंने उन्हें सॉरी का इशारा किया और कॉल अटेंड की.

नैना दीदी : बेशरम बेहया ज़ालिम इंसान अपने आप तो तुम्हे मेरी यद् आती नहीं ? एक बार भी अपने आप फ़ोन नहीं करते . शर्म तो नहीं आती न ? उस दिन क बाद मैं क बार भी मिलने नहीं आये. बस इतना hi प्यार था मुझसे ?

मैंने जवाब देने से पहले मम की तरफ देखा वो अभी भी वैसे hi मुझे देख रही थी जैसे वो इंतज़ार कर रही हो फ़ोन बंद होने का. मैंने उन्हें इशारे से बताया क मेरी कजिन का फ़ोन है तब तक आप कॉफ़ी बना लो. मम मेरी बात समझ कर सोफे से उठी और किचन में चली गयी.

नैना दीदी : जवाब दो चुप क्यों हो गए ?

अमित: सॉरी दीदी आप तो जानती हैं मैं गाओं गया था. टाइम नहीं मिल प् रहा मगर ऐसा मत समझना क मैं आपसे प्यार नहीं करता. आपकी जो जगह मेरे दिल में है वो मैं बता नहीं सकता शब्दों से.

नैना दीदी : पता है मुझे कहाँ कहाँ रहते हो सब खबर रखती हूँ. मगर तुम्हारा दिल नहीं करता मुझसे प्यार करने को? पता है उस दिन क बाद मुझे तुम्हारी कितनी यद् आती रहती है और तुम हो क दोबारा मिले नहीं अभी तक. मेरा दिल फिर से प्यार करने को कितना मचल रहा है मैं बता नहीं सकती.

अमित: थोड़ा सबर रखिये जैसे hi वक़्त मिलेगा मैं खुद hi आपको फिर से वहां ले चलूँगा.

नैना दीदी : अब तो वहां जाने की ज़रूरत भी नहीं है. वो तो पहली बार की वजह से जाना पड़ा था . अब तो तुम किसी दिन रत रुक जाना हमारे यहाँ . घर पर hi कर लेंगे.

अमित: घर पर रिस्क लेना ठीक नहीं

नैना दीदी: वो सब मैं देख लुंगी तुम जल्दी से आ जाओ बस .

अमित : ठीक है मैं गाओं जाने से पहले एक बार आऊंगा मगर रिस्क मत लेना.

नैना दीदी : मैंने कहा न तुम चिंता मत करो मैंने सब सोच रखा है. तुम बस आ जाओ.

उसके बाद कुछ देर और हमने बातें की फिर कॉल कट कर दी. इतने में मंजू म कॉफ़ी ले आये. कॉफ़ी भी एक hi बड़े मग में ले क ए थे मम और मैं उनका मतलब समझ गया. हमने एक hi मग में कॉफ़ी पि और बीच बीच में किश कर क एक दूसरे क होंठों का स्वाद भी कॉफ़ी में मिलाया.

अमित: अब मुझे जाना होगा. शाम को एक बार फिर आऊंगा ट्यूशन पड़ने . आपके स्टूडेंट्स भी आने वाले होंगे आप भी तैयार हो जाइये.

मंजू म : क्या आज रत फिर से नहीं रुक सकते तुम?

अमित: नहीं , आप समझने की कोशिश करो. रोज़ रोज़ ऐसे बहार रहूँगा तो शायद मेरा आना hi बंद हो जाये क्या आप ऐसा चाहती हैं?

मंजू म : नहीं नहीं , ऐसा नहीं होने दूंगी मैं. ठीक है तुम जाओ मगर शाम को जल्दी आ जाना और डिनर साथ में करेंगे आज. इतना तो कर सकते हो न?

अमित: ठीक है , तैयार रहिएगा. अब चलता हूँ.



मन ने आगे बाद कर मुझे किश किया और कस क मुझसे गले लग गयी . मैंने भी उन्हें अपनी आगोश में ले क प्यार किया और बाइक ले कर घर वापिस आ गया.
 
लेट हो जायेगा अभी कम्पलीट नहीं हुआ है.
 
अपडेट 112



घर आते hi मैं अपने रूम में चला गया और फ्रेश हो कर कपडे बदले. अभी मेरे पास एक घंटा था तो सोचा रेस्ट कर लूँ . मैं जैसे hi बीएड पर लेता तो फिर से मोबाइल बजने लगा. इस बार फ़ोन करुणा दीदी का था. स्क्रीन पर उनका नाम देखते hi मैं समझ गया वो क्या कहेंगी . मैंने गाओं से आ कर उन्हें प्यार करने का वडा किया था और अब टाइम नहीं निकल प् रहा था. उन्हें कोई न कोई बहाना बनाना पड़ेगा मैंने जल्दी से सोचने लगा और आईडिया आते hi कॉल अटेंड की.

अमित : hello दीदी कैसी हैं आप?

करुणा दीदी : तुमने वडा किया था गाओं से आके मुझे ले कर चलोगे और अब तक तुमने एक फ़ोन तक नहीं किया.

अमित : अरे अरे न hi न hello सीधा लड़ाई झगड़ा

करुणा दीदी : मुझे कुछ नहीं सुन्ना . तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो? क्या सिर्फ नैना दीदी को hi प्यार करते हो तुम ? मैं तुम्हारी कुछ नहीं ?

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं. आप अच्छी तरह जानती हैं क ऐसा बिलकुल भी नहीं है. असल में मैं खुद आपको फ़ोन करता मगर वो क्या है न मेरे फ्रेंड क कोई रिश्तेदार आये हुए हैं तो अभी वो जगह अवेलेबल नहीं है इसी लिए मैंने फ़ोन नहीं किया. मगर भरोसा रखिये जैसे hi इंतज़ाम होगा मैं आपको फ़ोन करूँगा .

करुणा दीदी : मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना . हम किसी होटल में चलते हैं. या फिर तुम यहीं हमारे घर पर कर लो . मुझसे वेट नहीं होता.

अमित : प्लीज दीदी समझने की कोशिश करो . मैं आपके साथ जल्दबाजी में कुछ नहीं करना चाहता. आप इतनी प्यारी हो क आपके साथ मैं. आराम से करना चाहता हूँ ताकि वो साडी उम्र आपको और मुझे यद् रहे.

मैंने जान बुझ कर उनकी तारीफ करते हुए ऐसे बात की क वो मन जाएँ वैसे बात गलत भी नहीं थी . वो बहुत प्यारी थी और मैं उनको प्यार से वो एहसास दिलाना चाहता था जो वो चाहती थी.

करुणा दीदी : सच ! मगर मुझसे अब इंतज़ार नहीं होता.

अमित : प्लीज दीदी आप इंतज़ार कर लो मैं चाहता हूँ जब भी मैं आपको प्यार करूँ तो उसने न जल्दबाजी हो न किसी का दर. जैसे नैना दीदी क साथ किया बिलकुल वैसे hi आपके साथ भी करूँगा.

करुणा दीदी : ठीक है पर जल्दी करना और तब तक काम से काम एक बार मुझे आके मिल तो लो. मैं तुम्हे मिलने को तरस रही हूँ.

अमित : ठीक है मैं कल घर पर आऊंगा.

करुणा दीदी : पक्का आना वैसे माँ भी तुम्हे यद् कर रही हैं .

रीता मौसी का सुनते hi मेरी आँखों क सामने उस रत का मंज़र आ गया जब मैंने रीता मौसी क साथ रत भर चुदाई की थी. वो मंज़र यद् आते hi लैंड में तनाव आ गया.

अमित : मैं कल ज़रूर आऊंगा और मौसी से भी मिल लूंगा.

उसके बाद कुछ और बातें कर क मैंने कॉल कट कर दी. मैं कुछ देर ऑंखें बंद करके आराम करने लगा. 5 बजने से पहले मैं नीचे आ गया . आंटी हॉल में hi बैठे हुए थे.

आंटी : उठ गए ? कब आये थे वापिस ? आज कल बहार ज्यादा नहीं रहने लगे ?

अमित : वो किसी से मिलना था तो बहार चला गया था . मैं घंटा भर पहले वापिस आ गया था मगर आप शायद रूम में थी.

आंटी : तुम कुछ छुपा तो नहीं रहे ?

अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है मगर आपको ऐसा क्यों लगा ?

आंटी : आज कल तुम कुछ ज्यादा hi बिजी रहने लगे हो. बैठो मैं तुम्हारे लिए जूस लती हूँ.

आंटी मेरे लिए जूस लेन चली गयी. मैं पिछले कई दिनों से उन्हें टाइम नहीं दे प् रहा था शायद इसी लिए वो मुझसे नाराज़ लग रही थी. खैर आंटी जूस ले आयी और मैं उन्हें रत को लेट आने का कह कर निकल गया . आंटी कुछ कहना चाहती थी मगर मैं जल्दी से निकला गया. स्टेडियम में प्रैक्टिस करने क बाद नीरज ने मुझे रोक लिया.

नीरज : बात क्या है ज़रा खुल क बताएगा ?

अमित : भैया आपको तो पता hi है मोंटी क साथ क्या चल रहा है. अब मुझे एक दोस्त ने बताया है क वो साला कुछ प्लान कर रहा है मुझसे बदला लेने क लिए और इस बार वो मेरी बहनो क साथ कुछ करने वाला है.

नीरज : तू टेंशन न ले मैंने सबको बोल दिया है. वो सब आते जाते उस पर नज़र रखेंगे ऐसा कुछ भी नज़र आया तो फ़ौरन पता चल जायेगा. अपने एक लड़के को स्पेशल उस पर नज़र रखने को कहा है. कॉलेज में तो कुछ होने नहीं देंगे हम अगर कुछ किया उसने तो फिर उसकी खैर नहीं . तुम दोनों बहनो से कह दो क बेवजह घर से बहार न निकला करे और फ़ोन पर उनसे कांटेक्ट रखना. वैसे इतना बड़ा कोई गुंडा नहीं है वो क बहार कोई हरकत करे इस लिए तू टेंशन मत ले.

अमित : उम्मीद तो मुझे भी यही है क वो कॉलेज क बहार ऐसा कुछ नहीं करेगा. अगर उसने किया तो उसका अंजाम वो होगा जो उसने कभी सोचा भी नहीं होगा.

नीरज : कुछ भी हो मैं हमेशा साथ हूँ.

नीरज से बात करने क बाद मैं मंजू म क घर को निकल गया .

दूसरी तरफ मोंटी शीना क रूम में गया. जब शीना अपनी सहेलियों क पास से वापिस घर आयी. मोंटी ने hi शीना को वापिस बुलाया था ज़रूरी बात करने .

मोंटी : आ गयी तुम ?

शीना : हाँ भाई अभी आयी हूँ. क्या बात थी जो मुझे वापिस बुला लिया? हमने अभी शॉपिंग करनी थी.

मोंटी : मुझे कहीं जाना था तो उससे पहले मैंने सोच तुमसे मिल कर सब समझा दूँ पता नहीं कल टाइम मिले या न मिले.

शीना : कहाँ जा रहे हो तुम? और क्या बात समझनी है?

मोंटी : मेरी बात ध्यान से सुन और इसके बारे में किसी से भी बात मत करना. ी रिपीट किसी से भी बात मत करना. उस देहाती ने अपनी लिमिट क्रॉस कर दी है. मेरे साथ जो किया सो किया उसको मैं अपने तरीके से हैंडल कर लेता मगर उसने तुम्हारे साथ बदतमीज़ी कर क अपनी मौत को दावत दी है. अपनी इंसल्ट तो मैं शायद माफ़ कर भी देता मगर मेरी बहिन क साथ कोई गलत हरकत करे ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता. जब तक उसे इसकी सजा नहीं दे देता तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा. उसका वो हल करूँगा क ज़िन्दगी भर अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पायेगा.

शीना : उसे तो मैं अपने हाथों से सजा दूंगी भाई . उसने पहले तुम पर हाथ उठाया फिर मेरी भी इंसल्ट की उसे छोडूंगी नहीं मैं.

मोंटी : बिलकुल , अपने हाथो से सजा देना तुम और फिर बाद में मैं सजा दूंगा. तुम्हारे क़दमों में दाल दूंगा उसे फिर जो चाहे करना. मैंने एक प्लान बना लिया है बस तुम्हे वो hi करना है जो मैं कहूंगा. फिर देखना साला भीख मांगेगा तेरे पैरों में गिर कर.

शीना : क्या प्लान बनाया है तुमने?

मोंटी : साइंस वाली मैडम मधु को तो जानती हो न तुम ?

शीना : अछि तरह से , मगर उससे क्या काम है ?

मोंटी : टेस्ट्स क बाद फर्स्ट ईयर वालों को टूर पे ले क जाते हैं न , बस तुम उनसे बात करो क इस बार ये टूर क्सक्सक्सक्सक्स जगह पर जाना चाहिए और वो भी 2 दिन क लिए. और यद् रहे क उस देहाती की बहिन ज़रूर जाये इसमें.

शीना : तुम करने क्या वाले हो? हमें उस देहाती को सबक सीखना है इसमें उसकी बहिन को क्यों इन्वॉल्व कर रहे हो?

मोंटी : क्यूंकि वो hi उसकी कमज़ोरी है . उसे काबू कर क हमें उस देहाती को मजबूर कर देंगे झुकने क लिए. वैसे भी झगड़ा उसी लड़की की वजह से हुआ था. अगर वो उस दिन नखरा न करती तो लड़ाई भी न होती.

शीना : भाई ये गलत है. वो एक लड़की है . तुम करने क्या वाले हो उसको बहार भेज कर ?

मोंटी : ऐसा कुछ नहीं है मेरी बहिन. वो सिर्फ चारा है. उस जगह क पास एक फार्म हाउस है जिसे मैं आज बुक करने जा रहा हूँ. जंगल एरिया होने की वजह से वहां कुछ भी हो जाये किसी को पता नहीं चलेगा. मेरे साथी उसकी बहिन को उठा कर वहां ले आएंगे और फिर हम उस देहाती को वहां बुलाएँगे बस इतनी सी बात है. वो लड़की सिर्फ चारा है और कुछ नहीं है उसको कब्जे में कर क हूँ उस देहाती को काबू कर सकते हैं. तुमने कहानी तो सुनी होगी न क जिसमे जिन की जान एक तोते में थी. बस वही समझो. उस देहाती से सीधा लड़ पाना आसान नहीं साला बहुत ताकतवर है. इस लिए हम या लड़की को ढाल बनाएंगे. और फिर वो हमारे कदमो में होगा फिर जो चाहे करना उसके साथ.

शीना : नहीं भाई ये गलत है . तुम डरते हो उस देहाती से जो उसकी बहिन का सहारा ले रहे हो?

मोंटी : तुम अछि तरह जानती हो क डरता मैं किसी क बाप से भी नहीं. मगर तुम्हे नहीं पता वो रेसलर है इस लिए मुझसे कुछ ज्यादा hi ताकत है उसमे . और जब दुश्मन ताकतवर हो उसे दिमाग से हराना चाहिए. मैं उसकी बहिन का सिर्फ इस्तेमाल कर रहा हूँ उसे काबू करने क लिए. इसमें क्या गलत है? मैं कौन सा उसकी बहिन क साथ कुछ करूँगा. तुम तो जानती हो क मेरे पास गफ की कमी नहीं है. उसने मेरी बहिन पर हाथ डाला अब मैं उसकी बहिन का इस्तेमाल कारनुगा इसमें कुछ गलत नहीं है. एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर

शीना : पर ...

मोंटी : पर वॉर कुछ नहीं , भूल गयी उसने मुझे सब क सामने मारा था और तुम्हे कैंटीन में सबके सामने ज़लील किया. उसे तो सजा देनी hi पड़ेगी अब तुम मेरा साथ दो या न दो ये तो मैं कर क रहूँगा. अगर इस प्लान में तुमने साथ नहीं दिया तो मैं कुछ और करूँगा मगर उसे छोडूंगा नहीं.

शीना : पर भाई इसमें अगर कोई पन्गा हो गया तो?

मोंटी : कुछ नहीं होगा मैंने सब सोच लिया है. इसी लिए तो वहां टूर भेजने को कह रहा हूँ. एक तो वो हमारे शहर से इतनी दूर है दूसरा हम यहाँ कॉलेज में होंगे तो हम पर कोई इलज़ाम भी नहीं आएगा.

शीना : ठीक है मैं साथ दूँगी मगर उस लड़की क साथ कुछ नहीं होना चाहिए और मैं खुद साथ जाउंगी .

मोंटी : तुम्हे जाने की क्या ज़रूरत है तुम मेरे साथ चलना.

शीना : नहीं मैं खुद उस लड़की क साथ रहूंगी .

मोंटी : ाचा ठीक है जैसे तुम्हारी मर्ज़ी . मगर यद् रहे इसका ज़िकर किसी क साथ भी मत करना . ये बात बहार निकली तो हम फास भी सकते हैं.

शीना :ठीक है

मोंटी : ाचा अब तुम आराम करो . मैं परसों निकल जाऊंगा 1-2 दिन का काम है.

इधर मैं मंजू म क घर पहुंचा तो बेल्ल बजने से पहले hi दरवाज़ा खुल गया और मम मेरे सामने कड़ी मुस्कुरा रही थी.

अमित: आपको कैसे पता क मैं हूँ?

मंजू म : तुम्हारा hi इंतज़ार रहता है अब तो . इस दिल की धड़कने जब बढ़ने लगती हैं तो पता चल जाता hi क तुम आ गए.

मंजू म का इतना रोमांटिक्स अंदाज़ मुझे बहुत ाचा लगा और मैंने अंदर घुसते hi उन्हें गले लगा कर चुम लिया .

अमित: इतना प्यार करने लगी हो ? इतना प्यार करो मुझसे अगर कहीं किसी रोज़ मुझे कुछ हो गया तो तुम ........

मंजू म में मेरे मुँह पर हाथ रख दिया . एक पल में hi उनकी आँखों में पानी आ गया था .

मंजू म : एक पल भी ज़िंदा नहीं रह पाऊँगी मैं . तुमने मुझे फिर से जीना सिखाया है अगर इस बार मैं टूटी तो ज़िंदा नहीं रह पाऊँगी.

अमित : सॉरी दोबारा ऐसा नहीं कहूंगा. वैसे तुम्हे कैसे पता चल जाता है क मैं हूँ? ये कोई और भी तो हो सकता है.

मंजू म : यहाँ कोई और अत है क्या ? वैसे भी तुम्हारी बाइक की आवाज़ दूर से पता चल जाती है. अब जल्दी से नाहा लो पहले . पसीने से कपडे भीगे हुए हैं तुम्हारे . ये है न डिनर पर भी जाना है?

अमित : यद् है मम अछि तरह यद् है . मगर पहले ट्यूशन भी पड़नी है . टेस्ट शुरू होने वाले हैं. कहीं फ़ैल हो गया तो और कोई कुछ कहे न कहे चन्दर्कांता मम मुझे कॉलेज से निकलवा देगी.

मंजू म: ऐसे कैसे निकलवा देंगी? जितना अभी तक तुम क्लियर कर चुके हो काफी है पास होने क लिए. वैसे तुम्हारा क्या पन्गा है उनके साथ ? मैंने कई बार तुम्हे क्लास से बहार देखा है उनकी.

अमित : मुझे लगता है शायद वो मेरी एडमिशन इस कॉलेज में होने से नाराज़ हैं क्यूंकि उन्होंने तो मुझे रिजेक्ट कर दिया था और प्रिंसिपल सर ने अपनी तरफ से मुझे रख लिया. वो तो मुझे कॉलेज में देखना hi नहीं चाहती .

मंजू म : ये तो बहुत गलत बात है. ाचा वो सब छोडो जाओ पहले नाहा लो. मैं तुम्हारे कपडे निकल देती हूँ.

अमित: आप भी आइये न , साथ में नहाते हैं.

मंजू म : बलुशिंग ) तुम फिर शुरू हो गए. जाओ अब नाहा लो पहले .

मैं बाथरूम में घुस गया नहाने क लिए. नाहा कर बहार आया तो बीएड पर मेरे लिए जीन्स और T-shirt पड़ी हुई थी. बिलकुल ब्रांड नई थी पता नहीं क्या क्या ले कर रखा हुआ था मम ने मेरे लिए. मैंने कपडे पहन लिए बिलकुल मेरी फिटिंग क थे. मैंने कपडे पहन कर मम क पास आया तो वो मुझे अछि तरह चेक करने लगी जैसे कपड़ों की फिटिंग देख रही हो.

मंजू म : बिलकुल फिट हैं . मुझे लगा था कहीं फरक न हो मगर सही है. बहुत हैंडसम लग रहे हो.

मैंने उनकी कमर में हाथ दाल कर खुद से चिपका लिया .

अमित: तो क्या ख्याल है ? डिनर यहीं मंगलवा ले?

मंजू म : शर्माती हुई ) बाज़ नहीं आओगे? डिनर बहार करने जाना है पर उससे पहले थोड़ा स्टडी भी करलो . मैं नहीं चाहती किसी को कोई मौका मिले तुम्हारे खिलाफ कुछ करने का.

अमित: पहले तो कुछ और कह रही थी आप

मंजू म : मैं वेट कर सकती हूँ पर तुम पर कोई बात नहीं आने दूंगी. अब चलो छोडो किताबें खोलो मैं कॉफ़ी बना कर लायी.

मैंने एक किश कर क मम को छोड़ दिया और वो हस्ती मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी . मैं किताबें खोल कर बैठ गया. स्टडी में तो पहले hi ठीक था बस इंग्लिश की प्रॉब्लम थी और अब वो भी दूर हो गयी थी मम की वजह से. मैंने पड़ना शुरू कर दिया और मन कॉफ़ी ले आयी. कॉफ़ी पिटे पिटे मम ने मुझे पढ़ाया और आगे का काम देकर खुद कप उठा कर चली गयी. मैं आराम से पड़े कर रहा था कोई आधे घंटे बाद मुझे मम क आने की आहात हुई तो मैंने नज़रें उठा कर देखा. मम को देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया. नेवी ब्लू सूट में गोरा रंग ऊपर से बालों की एक लत चाँद से चेहरे क आगे लटकती हुई. क्या ज़बरदस्त नज़ारा था मेरे सामने . मंजू म तो बिजलियाँ गिरा रही थी ऊपर से उनका वो शर्मा कर नज़रें झुकना. उफ़ उनकी नेचुरल ब्यूटी और सादेपन में ये जलवा क़यामत था. आँखें काजल से जैसे और भी बड़ी लग रही थी और किसी का कतल करने क लिए काफी थी. सुर्ख गुलाबी होंठो पर लाल लिपस्टिक लगा कर उन्होंने ऐसे बना लिया था जैसे रक्त रंजीत हों. रक्त hi तो था मेरे दिल का उनके होंठो पर. मम ने नज़रें झुका कर बालों की लत को कण क पीछे किया तो जैसे मुझे होश आया.

अमित : आज कतल करने का इरादा है क्या? ऐसे बन संवर क निकलोगी तो देखने वाले बिन मौत मर जायेंगे.

मंजू म ने मेरी बात सुन कर एक नज़र उठा कर मुझे देखा और फिर से नज़र गिरा दी . उफ्फ्फ्फ़ दिल पर तीर चल गए. मुझसे और कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैं झटके में खड़ा हुआ और लगभग दौड़ता हुआ उनके पास गया और उन्हें बाँहों में भर लिया. मैंने उन्हें अपने अंदर समां लेना चाहता था. इतनी ज़ोर से मैंने उन्हें अपने सीने में भींच लिया मनो उनका डैम hi निकल जाये. मेरे चोदे सीने में उनके नाज़ुक उभर धंस गए . मैंने गर्दन झुका कर उनके सुर्ख लबों पर अपने होंठ रख दिए और उनका मधु रास पिने लगा. मम ने भी मेरे सर क पीछे अपने हाथ रखे और मेरा साथ देने लगी . मैंने दीवानावार उनके होंठ चूस रहा था और वो भी मेरा साथ दे रही थी. होंठ चूमते चूसते मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में दाल दी और वो भी वैसे hi करने लगी. कुछ hi पलों में मेरे अंदर गर्मी इतनी बाद गयी क मेरा दिल किया अभी कपडे उतर कर उनके ऊपर चढ़ जॉन. मैंने अपने हाथ उनकी पीठ से नीचे ले जाते हुए उनके नितम्बों पर रख लिए और उन्हें मसलने लगा. मम भी ऑंखें बंद किये बस मस्ती में खोयी थी . मैंने उनके बड़े बड़े ख़रबूज़ों को थमते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया और उनकी टंगे भी खुल कर मेरी कमर पर लिपट गयी. मैंने उन्हें ऐसे hi दिवार से लगा लिया और किश करना जारी रखा . अपना एक हाथ आगे लेकर मैंने उनकी छूट पर रखा तो उनके मुँह से हलकी सी कराह निकल गयी जिसे सुनके मैं होश में आ गया

मंजू म : आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ccccccccccccccc

मैंने तुरंत अपना हाथ वहां से हटा लिया . मुझे होश आया तो मैंने उन्हें नीचे उतर दिया. मम की छूट पर अभी भी सूजन थी ऐसे में उन्हें मैं फिर से दर्द नहीं देना चाहता था.

मंजू म : रुक क्यों गए ?

अमित: सॉरी मैं आपका ये हुस्न देख कर खुद को रोक नहीं पाया . मैं भूल गया था क अभी आपको थोड़ा रेस्ट की ज़रूरत है. चलिए अब चलते हैं

मंजू म : तुम मेरी परवाह मत करो. मुझे तो तुम्हारा ये प्यार करना hi ाचा लगता है. मैं ठीक हूँ और तुम्हारा साथ दे सकती हूँ.

अमित: मैं जनता हूँ आप मन नहीं करेंगी मगर आपकी सहेली अभी ठीक नहीं है और उसे रेस्ट की ज़रूरत है. इस लिए अब हमें चलना चाहिए .

मंजू म : ाचा ठीक है . ज़रा अपना मुँह इधर करो

अमित : क्या हुआ ?

मम ने अपने हैंड पर्स से रुमाल निकला और मेरे होंठो और आसपास रुमाल से अछि तरह साफ़ किया.

मंजू म: ऐसे बहार जाओगे तो सबको पता चल जायेगा. मुझे फिर से लिपस्टिक लगनी पड़ेगी.

अमित: वैसे आपको लिपस्टिक की ज़रूरत नहीं है वैसे hi आपके होंठ गुलाबी हैं . हाँ एक कला टिका ज़रूर लगा लीजिये कहीं मेरी hi नज़र न लग जाये

मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मम शर्मा गयी और नज़रें झुका ली

मंजू म : इतनी भी तारीफ मत करो मेरी . पता है मुझे कैसी हूँ मैं तुम कुछ ज्यादा hi तरीफ कर रहे हो.

इससे पहले मैं कुछ और कहता मम ने मेरा मुँह बंद कर दिया और वापिस कमरे में चली गयी. थोड़ी देर में हम दोनों मेरी बाइक पर बैठ कर डिनर करने निकल गए . होटल में खाना कहते हुए भी सबकी नज़रें मम पर hi थी वो खूबसूरत hi इतनी लग रही थी. मैं मम को इशारा करता जब कोई उनके घूर कर देख रहा होता तो वो शर्मा जाती और मुझे ऐसा करने से मन करती. खाना खा क हम वापिस निकले तो मम ने मुझे उस दिन वाले आइस क्रीम पार्लर चलने को कहा . मैंने उन्हें वहां ले गया तो वो वहां ऐसे इधर उधर देख रही थी जैसे किसी को ढून्ढ रही हों.

अमित : क्या ढून्ढ रही हैं?

मंजू म : कुछ नहीं बस देख रही थी शायद उस दिन वाली लड़की फिर मिल जाये?

अमित : शॉकेड ) उसे क्यों ढून्ढ रही हैं? मैंने कहा न क मेरा उसके साथ कोई चक्कर नहीं . आपको मुझ पर विश्वास नहीं ?

मंजू म : वो बात नहीं है , मुझे पता है तुम सच कह रहे हो. मैं बस उसे थैंक्स कहना चाहती हूँ. अगर उस दिन वो उस तरह तुम्हे नहीं मिलती तो मुझे पता hi नहीं चलता क मेरे अंदर तुम्हारे लिए कैसी फीलिंग्स हैं . मेरा एक काम करोगे ?

अमित : कहिये

मंजू म : उसे मेरी तरफ से गिफ्ट ज़रूर देना और थैंक्स कहना.

अमित : पर मैं तो उससे नहीं मिलने वाला , पता है आप उसकी वजह से मुझ पर कितना भड़क गयी थी.

मंजू म : मुझे कुछ नहीं पता , मेरे लिए तो वो लकी है. तुम उसे मिलोगे और मेरी तरफ से थैंक्स भी कहोगे अगर हो सके तू मुझे hi मिलवा देना .

अमित : आप उससे मिल कर क्या करेंगी ? वैसे भी मैंने उसे बताया था क आप मेरी कजिन हैं.

मंजू म : तो क्या हुआ , कजिन कह कर hi मिलवा देना . वैसे भी हम सब क सामने तो नहीं बता सकते न क हमारा रिश्ता अब क्या है.

अमित: ठीक है मैं उससे मिल लूंगा और थैंक्स भी कह दूंगा अब खुश?

मंजू म : बहुत खुश. अब चलते हैं देखो आइसक्रीम भी ख़तम हो गयी.

अमित : चलिए , वैसे और कहानी है तो ले लूँ?

मंजू म : नहीं , एक hi दिन में साडी खा लेनी है क्या?

उसके बाद हम वहां से निकल पड़े . मगर अब रत क सन्नाटे में मम कुछ ज्यादा hi रोमांटिक होने लगी. रास्ता सुनसान था तो उन्होंने मुझे पीछे से कास क पकड़ लिया और मेरी छाती पर हाथ फिरते हुए मेरी गर्दन पे किश करने लगी. मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहरन हुई उनके ऐसा करने से

अमित: क्या कर रही हैं , हम गिर जायेंगे.

मंजू म : मुझे पता है तुम गिरने नहीं डोज. मैं सिर्फ प्यार कर रही हूँ और मुझे प्यार करने दो.

अमित: अगर मैंने किया तो आप को भरी पड़ेगा.

मंजू म : ाचा ऐसा है तो देख लेते हैं . प्यार में सब जायज़ है . मुझे बस प्यार करना है .

इतना कह कर मम फिर से किश करने लगी. वो मेरी गर्दन पर मेरे कानो पर और गलों पर किश करते हुए अपनी ज़ुबान भी फिरती और बाईट भी करती. वो इस तरह मेरे साथ चिपकी हुई थी क उनके नरम स्तन मुझे अपनी पीठ पर अछि तरह फील हो रहे थे. मेरे अंदर भी गर्मी बढ़ती जा रही थी . मैंने बाइक की स्पीड बड़ा दी और जल्दी से घर पहुँच गया .

बाइक से उतारते hi मम भाग कर दरवाज़ा खोलने चली गयी और मैं भी बाइक को स्टैंड पर लगा कर मम क पीछे हो लिया. मम ने अभी दरवाज़ा खोला hi था क मैंने उनको पकड़ लिया और अपनी गॉड में उठा लिया.

अमित : बड़ी मस्ती चढ़ रही थी न बाइक पर अभी निकलता हूँ साडी मस्ती .

मंजू म : छोडो क्या कर रहे हो कोई देख लेगा , नीचे उतरो मुझे .

मैं उन्हें उठाकर अंदर आ गया और दरवाज़ा लात मर कर बंद कर दिया .

अमित: अब तो नहीं छोडूंगा जब तक आपकी मस्ती न निकल दूँ. बड़ा प्यार करने को मन हो रहा था न अब मैं दिखता हूँ प्यार कैसे करते हैं.

मंजू म : ाचा ! तो दिखाओ कैसे प्यार करते हैं

मम एक ऐडा से बोलती हुई मुस्कुरा रही थी. मैं उन्हें ऐसे hi गॉड में लिए उनके बैडरूम में आ गया और बीएड पर पटक कर उनके ऊपर टूट पड़ा. मैं मम को किश करने लगा और साथ hi साथ मेरे हाथ उनके बूब्स और और चूतड़ों क साथ साथ जांघों को सहलाने लगे. मम भी मस्ती में आ गयी और मुझे किश करती हुई मेरे बल नोचने लगी और अपने एक पाऊँ से मेरी जांघ को सहलाने लगी. मैं कुछ ज्यादा hi आक्रामक हो रहा था शायद मम ने जो रस्ते में मेरे साथ हरकतें की थी उसकी वजह से. मैंने उनके होंठो का रास चूसने क बाद उनकी गर्दन पर किश करने लगा . अपनी जीभ को मैं उनकी गर्दन पर फिरता और बीच बीच में काट भी लेता. मम भी मस्ती में साथ दे रही थी

मंजू म : उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ कक्कक्स उम्म्म्म ुमाः कक्कक्स पूछह उम्म्म्म दिखाओ मुझे तुम कितना प्यार करते हो मुझे उम्म्म्म पूक्कछ्ह उम्म्म्म

मैंने मम क ऊपर से उठते हुए अपनी T-shirt निकल दी और मम की कमीज को भी निकलने लगा जिसमे मम ने मेरा साथ दिया और उठ कर अपने हाथ ऊपर उठा लिए. कमीज उतारते hi उनके वो खूबसूरत गोर दूध से चुके मेरे सामने आ गए जो ब्लैक ब्रा में कुछ ज्यादा hi आकर्षक लग रहे थे. दोस्तों आप तो जानते hi होंगे गोरा रंग डार्क कपड़ों में और भी गोरा नज़र अत है ऐसे hi इस वक़्त मंजू म का जिस्म लग रहा था. मैंने जल्दी से उनकी ब्रा भी खोल कर निकल दी और एक बार फिर से उन खूबसूरत स्तनों की शान गुलाबी निप्पल मेरे सामने थे. मैंने देर न करते हुए दोनों कबूतरों को थम लिया और मम को धकेल कर लिटाते हुए एक निप्पल को अपने होंठों में पकड़ लिया और अपनी जीभ से उसे कुरेदने लगा.

मंजू म : आह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम खा जाओ कक्कक्क्स उम्म्म. इन्हे प्यार करो ये सिर्फ तुम्हारे लिए hi हैं. कक्कक्क्स उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ ये क्या जादू कर दिया है तुमने मुझ पर हर वक़्त बस तुम्हारे हाथों का एहसास मुझे अपने जिस्म पर होता रहता है. कक्कक्क्स उम्म्म प्यार करो इन्हे और ज़ोर से दबाओ सीसीसी उनममम

मैं चुप चाप अपने काम में लगा हुआ था . इस वक़्त मुझे उनके दूध पिने से ज्यादा ज़रूरी और कुछ नहीं था. एक दूध को अछि तरह निचोड़ने क बाद मैंने दूसरे को पकड़ लिया हालाँकि दूध तो नहीं था उनमे पर मज़ा बड़ा आ रहा था. दोनों दूध चूसै और मसलने से लाल हो गए थे. निप्पल अकड़ कर खड़े हो गए थे और मम भी छुडासी हो गयी थी. मैंने मम की सलवार का नाला खोला और कमर से पकड़ कर उतरने लगा तो मम ने फटाफट कमर उठा कर टंगे ऊपर कर ली. मैंने सलवार को उनकी टांगों से अलग किया और फिर उनकी पेंटी भी निकल दी जो गीली हो रही थी. मैं मम की दोनों टांगों क बीच बैठ गया तो मम ने अपनी टंगे उठा कर मेरे कन्धों पर रख ली. ऐसा करने से उनके पाऊँ मेरे चेहरे क पास आ गए और मेरी नज़र उनकी पायलों पर पड़ी. मैंने पहले पतली पर hi किश किया और पाऊँ को चूमने क बाद मैंने धीरे धीरे आगे बढ़ता गया. मम ने अपने दोनों हाथों से अपनी छूट छुपा ली थी. मगर मैं तो अभी घुटनो तक hi पहुंचा था. घुटनो क बाद जांघों को अछि तरह मसल मसल कर किश करने क बाद मैं छूट तक पहुँच hi गया जहाँ मम ने अपने हाथ रखे हुए थे.

अमित: हाथ हटाइये यहाँ से और मुझे प्यार करने दीजिये .

मंजू म : ूंणहुंण

अमित: हटाइये न मुझे प्यार करना है आपकी सहेली को

मंजू म : मुझे शर्म अति है .

अमित : प्यार ने शर्म क लिए कोई जगह नहीं. अगर प्यार करती हैं तो मुझसे शर्माना छोड़ दीजिये

इतना कह कर मैंने उनके हाथ को हटाया तो उन्होंने बिना किसी विरोध क हाथ हटा लिए. हाथ हैट ते hi उनकी गोरी गुलाबी छूट मेरे सामने आ गयी जो इस वक़्त पानी की कुछ बुँदे बहा रही थी. छूट क होंठ कुछ फूले हुए थे और लाल लाल थे. मुझे पता था क अभी वो चुदाई क काबिल नहीं है. मगर अब जिस जगह हम पहुँच गए थे यहाँ से पीछे भी हटना आसान नहीं था. मैंने ज्यादा टाइम ख़राब नहीं किया और झुक कर उनकी छूट पर किश कर दिया

मंजू म : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ccccccccccc आआह्ह्ह्हह्ह उम्मम्मम

मंजू म को ज़रूर दर्द भी हुआ होगा साथ में पर वो उसे दबा रही थी कहीं मैं पीछे न हैट जॉन . पर मैं भी उन्हें ऐसे बिच में नहीं छोड़ना चाहता था तो मैंने हलके हलके किश करते हुए अपनी जीभ को अंदर घुसा कर कुरेदना शुरू कर दिया . साथ में अपनी उंगली को नीचे की तरफ से थोड़ा सा छूट में घुसा कर अंदर बहार करने लगा. मम बहुत एक्ससिटेड थी. वो मेरे बल सहलाती हुई मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. मम मेरे द्वारा छूट चूसै को ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायी और उनका जिस्म अकड़ गया .

मंजू म : आआह्ह्ह्हह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह ी ऍम सुंम्मिंग आआअह्ह्ह्ब मैं आए रही हूँ अमित ऐसे hi प्यार करो खा जाओ आआअह्ह्ह्ह हैं ऐसे hi करो. आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ककक ुड़फ्फ्फ ओह्ह्ह्हह मायआ आआआहहह आअह्ह्ह

इसके साथ hi मम का जिस्म झटके लेने लगा और उन्होंने मेरे सर अपनी जांघों में कस लिया. मेरा मुँह मम क छूट रास से भीग गया और झटके लेते हुए मम बीएड पर ठंडी पद गयी. मैं मन क ऊपर से उठा और अपना चेहरा साफ करता हुआ मम क साथ hi बीएड पर लेट गया. मम की ऑंखें बंद थी वो मस्ती क आलम में थी. कुछ देर बाद जब उनकी सांसे संभाली तो उन्होंने ऑंखें खोल कर मेरी तरफ देखा .

मंजू म : रुक क्यों गए ?

अमित: क्यूंकि आपकी सहेली अभी तैयार नहीं है. मैंने ये सब इस लिए किया क आप को अछि नींद आये वर्ण आप सो नहीं पति. बाकि का हम तब करेंगे जब ये पूरी तरह से तैयार होगी .

मैंने मम की छूट पर हाथ लगते हुए कहा.

मंजू म : मैं झेल लूंगी तुम करो तो सही.

अमित : मेरी जान मैं जनता हूँ मेरे लिए आप ये झेल लेंगी पर मैं आपको दर्द नहीं देना चाहता . मैं वेट कर सकता हूँ . आपके लिए इतना काफी है अब आप आराम से सो जाइये मैं चलता हूँ.

मंजू म : रुक जाओ न यहीं मेरे साथ

अमित: आप जानती हैं न मेरी मज़बूरी फिर क्यों कहती हैं बार बार? अभी जितना वक़्त दे सकता हूँ मैं दे रहा हूँ. इसके इलावा जब मौका होगा मैं बिना कहे hi आपके पास आ जाता करूँगा.

मंजू म : ठीक है . अब ध्यान से जाना और जा कर मुझे फ़ोन ज़रूर करना.

मैंने अपनी T-shirt पहनी और मम को उनका गाउन पहनाया . मम मुझे बहार तक छोड़ने आयी और मैंने उन्हें किश कर क गुड bye कहा और घर चल दिया.

घर पर आंटी मेरा हॉल में hi वेट कर रही थी बाकि लाइट्स बंद थी और अंकल की कार भी घर पर नहीं थी. मतलब अंकल घर नहीं थे और मोहित शायद सो गया होगा या रूम में मीनल क साथ फ़ोन पर लगा होगा.

आंटी : कहाँ थे अब तक? और किसके साथ वक़्त बिता रहे हो आज तक?

अमित: आप सोई नहीं अभी तक ?

आंटी : तुम्हारे अंकल घर पर नहीं हैं. और मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी. तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.

अमित : वो आज डिनर था बहार तो वहीँ से आ रहा हूँ.

आंटी : किसके साथ थे? और ये कपडे कैसे बदल गए तुम्हारे ? घर से तो दूसरे कपडे पहन कर गए थे.

अमित: ये आज hi लिए हैं देखिये ब्रांड नई हैं. और मैं अपनी ट्यूशन टीचर क साथ था . मैंने बताया था न आपको क उनका कोई नहीं है उन्होंने मुझे अपना भाई बनाया है.

मेरे इस जवाब से आंटी कुछ संतुष्ट हुई

आंटी : ाचा तो यह बात है मुझे लगा की

अमित : क्या लगा आपको ?

आंटी : मुझे लगा क शायद तुमने कोई गफ बना ली है.

मैंने आगे बाद कर आंटी की कमर में हाथ दाल कर उन्हें खुद से चिपका लिया और उनके चेहरे पर झुकते हुए धीरे से कहा .

अमित: मेरी गफ तो आप हो . एक गफ क होते हुए दूसरी की क्या ज़रूरत ?

आंटी मेरे ऐसा करने से शर्मा गयी मगर उनकी साँसे तेज़ हो गयी और सीना फूलने लगा.

आंटी : झूठे हो तुम. इतने दिन हो गए एक बार भी मेरे पास नहीं ए , कोई ऐसा करते hi क्या अपनी गफ क साथ?

मैं मंजू म क साथ पहले hi गरम हो कर आया था और लैंड को शांत नहीं किया था तो सोचा चलो आज आंटी को भी खुश कर देता हूँ.

अमित: लगता है आज आपको दिखाना hi पड़ेगा क आप मेरी गफ हो और मैं आपका बर्फ .

इतना कह कर मैंने उनके होंठ चूम लिए और एक हाथ से उनकी गांड को मसल दिया.

आंटी : उम्म्म अऔच की करते हो . यहाँ नहीं . जाओ कपडे बदल कर मेरे कमरे में आ जाओ.

मैंने आंटी को छोड़ा और जल्दी से अपने रूम में गया और कपडे बदल लिए. एक बार मोहित क कमरे में नज़र मरी तो वो सो रहा था. मैंने मंजू म को एक बार फ़ोन कर क अपने घर पहुँचने की खबर दे दी ताकि वो भी चैन से सो सकें. उसके बाद मैं सीधा आंटी क कमरे में चला गया. दरवाज़ा बंद कर क मैं आंटी की तरफ पलटा तो आंटी बीएड पर बेडशीट ोाद कर लेती हुई थी.



मैंने भी अपने कपडे निकल दिए क्यूंकि मुझे पता था वो बेडशीट में नंगी hi लेती होंगी. मैं बीएड पर चढ़ गया और बेडशीट को खींच कर अलग कर दिया. मेरी आँखों क सामने आंटी का खूबसूरत गोरा बदन नंगा हो गया. योग ने आंटी की उम्र को बांध कर रख दिया था वो किसी भी जवान लड़की से काम नहीं थी मगर यहाँ मैं एक बात कहना चाहूंगा क मंजू म और आंटी को कपड़े करें तो मंजू म आंटी क मुकाबले कहीं ज्यादा खूबसूरत थी और मेरी नज़रों में उनका जलवा hi ज्यादा था मगर आंटी भी काम नहीं थी और उस वक़्त मेरे सामने आ वही थी. मैं आंटी पर टूट पड़ा और उन्हें किश करते हुए उनके दूध मसलने लगा. आंटी भी कितने दिनों बाद मिलने से एग्रेसिव थी. कभी मैं ऊपर होता तो कभी आंटी मेरे ऊपर होती. हम दोनों ऐसे गुथमगुथा हो रहे थे जैसे कुश्ती लड़ रहे हो. और फिर हम 69 पोजीशन में हो कर एक दूसरे क योन अंगों को चूमने चाटने लगे. लैंड क पूरी तरह अकड़ जाने पर मैंने आंटी की टाँगें कंधो पर रख कर एक करारा धक्का लगते हुए एक hi बार में आधे से ज्यादा लैंड आंटी की छूट में घुसा दिया. आंटी क मुँह से हलकी चीख निकला गयी हो मज़े और दर्द से मिली जुली थी. अगले झटके में मेरा लैंड उनके गर्भाशय से जा टकराया और फिर शुरू हो गया धक्कों का सिलसिला. मैंने आंटी की खूब रेल बनाई और कभी आंटी मेरे ऊपर चढ़ कर कूदने लगती कभी मैं उन्हें घोड़ी बना कर सवारी करता. जब तक मेरा पानी निकल नहीं गया तब तक मैंने आंटी पर कोई रेहम नहीं किया. और पानी निकलने क बाद मैं उन्हें गुड नाईट किश देकर अपने कपडे पहन कर अपने कमरे में वापिस आ कर बीएड पर लेट गया .
 
भाई कुछ चीज़ें अभी से करनी है कहानी क हिसाब से जो बाद में नहीं हो पाएंगी इस लिए अभी रोमांस ज्यादा दिखा रहा हूँ. ी होप क आप समझ जायेंगे आने वाली इन्सिडेंट्स क बाद. अमित का करैक्टर ऐसा क वो जान बुझ कर कुछ गलत नहीं करना चाहेगा गर अनजाने में तो हो hi सकता है न. इस लिए ऐसा चल रहा है अभी. जब सचाई सामने आएगी जिसमे कई करैक्टर शामिल हैं आसपास क तो शायद उसके मन में गिलटी फील होगा मगर कहानी क फ्यूचर क लिए ये आधार है. मुझे जैसे सही लग रहा है मैं बना रहा हूँ. आप आगे समझ जायेंगे. कहानी कहीं रुकी नहीं है बस एक ख़ामोशी है तूफान से पहले की
 
अपडेट 113



सुबह रूटीन से एक्सरसाइज वगैरह क बाद ब्रेकफास्ट कर क मैं और मोहित कॉलेज चले गए. चन्दर्कांता मम ने क्लास में फिर से फाइनल वार्निंग देते हुए बता दिया क मंडे से रोज़ एक टेस्ट होगा और फ्राइडे तक हमारे सरे सब्जेक्ट्स क टेस्ट हो जायेंगे . ये टेस्ट वैसे तो सिर्फ प्रोग्रेस चेक करने क लिए होते हैं मगर फिर भी मम ने आँखों से मुझे देखते हुए जिस तरह क्लास को वार्निंग दी मैं समझ गया क अगर गलती से मैं इसमें क्लियर न हुआ तो मम मेरी ले क रहेंगी.

चन्दर्कांता म: मंडे से आप लोगों क टेस्ट शुरू हो रहे हैं. आप लोगों को सब अचे से पढ़ाया गया है और मैं ये मानती हूँ क आप सब को समझ भी आया होगा फिर भी किसी का किसी भी सब्जेक्ट में कोई डाउट हो तो सैटरडे तक अपने प्रोफ़ेसर से क्लियर कर ले. इस कॉलेज का अपना एक स्टैण्डर्ड है स्टेटस है. हमारा रिजल्ट सब से बेस्ट रहता है. आप लोगों का इस कॉलेज में पहला साल है . मैं जानती हूँ कुछ लोग इसे हलके में ले रहे हैं. ( मेरी तरफ देखते हुए) जो ये सोचते हैं क वो किसी और फील्ड में अचे हैं तो स्टडी क साथ किसी तरह कोम्प्रोमाईज़ हो जायेगा उन्हें मैं ये साफ बता देना चाहती हूँ क अगर स्टडी में लापरवाही की तो फाइनल एग्जाम में उन्हें मैं बैठने नहीं दूंगी , चाहे फिर कोई भी उनकी सिफारिश ले कर आये.

मोहित : धीरे से ) यार ये तुम्हे देख कर hi क्यों बोल रही है ? लगता है तुझे फ़ैल कर क hi छोड़ेगी .

अमित : टेंशन मत ले मैं कर लूंगा.

कल्पना ने भी ये नोटिस किया था मगर वो चुप hi रही शायद चन्दर्कांता म की नज़र हमारी तरफ थी तो इस लिए वो चुप रही होगी. लेक्चर की बेल्ल बजने क साथ hi मंजू म क्लास में आ गयी. आज उनके चेहरे पर अलग hi चमक थी. उनका चेहरा खिला खिला लग रहा था. आँखों में काजल रेड लिपस्टिक और वैसे hi नेल पोलिश . कदमो क साथ पायल की हलकी आवाज़ जो शायद कोई नोटिस नहीं कर रहा होगा मगर मेरे दिल पर उसकी धमक महसूस हो रही थी. हेयर स्टाइल भी आज अलग था और सदी भी कुछ कास क बंधे थी . अंदर आते hi मम ने एक नज़र मुझे देखा और किसी की नज़र में आये बिना हलकी मुस्कान क साथ आगे बाद गयी. मैं उनके इस नए रूप को देख कर मन hi मन खुश हो रहा था.

मोहित : क्या लग रही है यार ? आज तो मम कुछ अलग hi नज़र आ रही हैं. आज तक तो कभी ऐसा जलवा नहीं देखा था मम का? ये तो क्लास की लड़कियों को भी मात दे रही हैं.

मुझे मोहित की बात कुछ अछि नहीं लगी. मगर जब मैंने क्लास में बाकि लड़कों की तरफ देखा तो सब साले ठरकी चक्षु छोडन में लगे हुए थे. वो भी सेल क्या करें मम लग hi इतनी हॉट रही थी मगर मुझे सबका उन्हें घूरना ाचा नहीं लग रहा था. मगर मैं कर भी क्या सकता था. अब खूबसूरती को तो हर कोई देखेगा hi.

कल्पना : मम तो वाकई में बहुत हॉट हैं मगर आज तक तो कभी ऐसे नहीं देखा था इनको. हमेशा से hi सिंपल रहती हैं . लगता है आज कुछ ख़ास है.

अमित: हमें क्या होगा कुछ , ये उनकी पर्सनल लाइफ है.

कल्पना : हम्म सही कहा.

उसके बाद मम पड़ने लगे मगर बार बार वो मुझे नज़र बचा कर ज़रूर देखती और जब हमारी नज़र मिलती तो उनके होंठों पर हलकी सी स्माइल आ जाती और आँखों की चमक बाद जाती.

उधर शीना आज साइंस ब्लॉक में मधु म से मिलने चली गयी मोंटी का दिया हुआ काम करने. मधु म अभी लैब में थी तो शीना आराम से उनसे बात कर सकती थी.

मधु म : मधु की उम्र लगभग 25 साल है और वो इसी कॉलेज से m.sc करने क बाद उघ कर क लेक्चरर बानी थी. शीना मधु को पहले से जानती है क्यूंकि मधु का जिस लड़के से अफेयर था कॉलेज में वो शीना की स्कूल फ्रंड का भाई था . मधु को अपनी फ्रंड क भाई साथ उसके घर पर इंटिमेट होते हुए शीना ने एक बार देख लिया था जब वो गलती से अपनी फ्रंड से मिलने उसके घर चली गयी थी . मगर उस दिन कोई घर पर नहीं था और इसी वजह से शीना की फ्रंड का भाई मधु को घर ले गया था चुदाई करने क लिए. मधु की नज़र शीना पर पद गयी थी जब शीना खिड़की से दोनों की रास लीला देख रही थी. शीना मधु की राज़दार थी इसी लिए मधु शीना की बात को टालती नहीं थी.

शीना : hi , कैसी हैं आप ?

मधु : घबरा कर ) तट तू तुम यहाँ ? इस वक़्त ? तुम क्यों आयी हो यहाँ ?

शीना : रिलैक्स , ऐसे घबरा क्यों रही हैं आप? वे अरे फ्रेंड्स न ? मैंने कभी आपको परेशां किया है जो आप ऐसे घबरा रही हैं?

मधु : नहीं नहीं आ एआईसी तो कोई बात नहीं. मैं घबरा कहाँ रही हूँ? बताओ आज कैसे आना हुआ?

शीना : बस आपकी यद् आयी तो मिलने चली आयी.

मधु : ाचा , आओ बैठो . वैसे मेरा अगला लेक्चर बिजी है तो मैं ज्यादा देर बात नहीं कर पाऊँगी .

शीना : it’s ok मैं ज्यादा देर नहीं लगाउंगी. मुझे एक काम था आपसे.

मधु : काम ? क्या काम था ?

शीना : टेस्ट क बाद फर्स्ट ईयर का टूर जाने वाला है न? और आप फर्स्ट ईयर की hi क्लासेज ले रही हैं तो इस लिए आपसे एक छोटा सा काम है.

मधु : कहो क्या काम है? किसी स्टूडेंट की हेल्प करनी है क्या ? मैं बस उतना hi कर सकती हूँ जितना मेरे बस में होगा.

शीना : रिलैक्स मैं भी वही काम कहने आयी हूँ जो आपके बस में है. फर्स्ट ईयर क साथ टूर में जाने वाली फैकल्टी में आप hi होंगी तो मैं चाहती हूँ इस बार ये टूर क्सक्सक्सक्स जगह पर जाये और वो भी 2 दिन क लिए.

मधु : शॉकेड ) तुम ऐसा क्यों चाहती हो ? और वैसे भी ये फैसला सीनियर करेंगे मुझे तो अभी 2 साल hi हुए हैं यहाँ . मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती.

शीना : सोच लो मम, अगर आपने मेरा काम नहीं किया तो आपके स्टूडेंट्स को आपकी पर्सनल लाइफ की रियल मूवी दिखा दूंगी जो आज भी मेरे मोबाइल में है.

मधु : डरते हुए ) तुम ऐसा नहीं कर सकती. मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है जो तुम मेरे साथ ऐसा कर रही हो?

शीना : आपने मेरा कुछ नहीं बिगाड़ा इसी लिए तो मैंने कभी आज तक कभी आपको परेशां भी नहीं किया और न hi करुँगी. आप मेरी दोस्त हैं. बस एक छोटा सा काम तो बोलै है आपको , क्या आप इतना भी नहीं कर सकती मेरे लिए?

मधु : मगर उस जगह पर hi क्यों ? तुम करना क्या चाहती हो ?

शीना : वो मेरा पर्सनल मटर है. रही बात जगह की तो वहां पहले भी कॉलेज की तरफ से टूर जाते रहते हैं. वो एक हिल एरिया है और बहुत खूबसूरत भी है.

मधु : पता है मुझे वो कैसा एरिया है . मैं भी जा चुकी हूँ वहां और वहां क्या क्या होता है जंगल में सब अचे से जानती हूँ. तुम क्या करने वाली हो मुझे सच सच बताओ. कल को कुछ भी हुआ तो बात मुझ पर hi आएगी.

शीना : रिलैक्स मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली जिससे आप पर बात आये. बस किसी से हिसाब बराबर करना है और कुछ नहीं. आप बस बेफिक्र रहिये ऐसा कुछ नहीं होगा क आप पर कोई बात आये .

मधु : कौन है वो ? किसके साथ हिसाब बराबर करने वाली हो तुम?

शीना : आप इस में न hi पड़ें तो ाचा है. मैंने जितना कहा बस उतना करिये. और हाँ फर्स्ट ईयर क सभी स्टूडेंट्स लाज़मी जाने चाहिए चाहे कुछ भी हो . अगर कोई पैसों का बहाना करे तो मेरे से ले लेना और अगर कोई और बहाना बनाये तो खुद hi हैंडल कर लेना. मेरा काम हर हल में होना चाहिए.

मधु : मैं कोशिश करुँगी पर पक्का नहीं कह सकती क्यूंकि मैं सिर्फ सुग्गेस्टिव दे सकती हूँ फाइनल फैसला मेरे हाथ में नहीं है.

शीना : फाइनल भी आप करवा सकती हैं . खूबसूरत हो और दिमाग भी है तो ज़रा अपनी स्मार्टनेस दिखाओ . आदमी सेल सब ठरकी होते हैं , ज़रा सा पल्लू सरका नहीं क सब भूल जाते हैं .

मधु : गुस्से से ) शीना ! तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो?

शीना : कूल , कूल मम , ऊँची आवाज़ में बात मत करो कोई सुन लेगा फिर क्या पता और क्या क्या बहार निकल आये . मैं सिर्फ इतना कह रही हूँ क मुझे रिजल्ट चाहिए एक्सक्यूज़ नहीं वर्ण आप जानती हैं क मैंने क्या कर सकती हूँ. फैसला आपका है क्यूंकि कर्रिएर भी आपका है. चलती हूँ , फाइनल होते hi बता दीजियेगा.

इतना कह कर शीना लैब से बहार निकल गयी पीछे मधु को टेंशन में छोड़ कर. मधु जानती थी क उसकी कमज़ोरी शीना क पास है और अगर उसने उसका काम नहीं किया तो वो कॉलेज में उसे बदनाम कर देगी और फिर उसका कर्रिएर ख़तम. मधु क माथे पर पसीना आ गया था क अब वो ये काम कैसे करे और दूसरा ये भी दर था क शीना पता नहीं किसके साथ क्या कर दे. दोनों तरफ hi मधु क लिए खतरा hi था. मगर शीना की बात मैंने क इलावा और कोई रास्ता नहीं था.

शीना लैब से बहार निकली तो लेक्चर की बेल्ल बज गयी और सामने से उसे रीमा क्लास रूम से बहार अति हुई दिखाई दी जो शायद लाइब्रेरी जा रही थी.

शीना : रीमा , रीमा , अरे कहाँ जा रही हो ध्यान कहाँ है तुम्हारा ? कब से आवाज़ दे रही हूँ तुम सुन hi नहीं रही. बात क्या है ? घर पर भी किताबों म घुसी रहती हो बहार नहीं निकलती न शॉपिंग में जाती हो मेरे साथ. और कॉलेज में भी तुम कहीं नज़र नहीं आती, चल क्या रहा है? मन क तुम साइंस पद रही हो मगर ये सब कर क्या रही हो तुम? दीदी ने भी तो साइंस की है न वो तो ऐसी नहीं थी फिर तुम क्यों ऐसे बेहवे कर रही हो? मुझसे नाराज़ हो ? या मोंटी से नाराज़ हो ?

रीमा : उदास चेहरा ) नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. वो बस स्टडी में ज्यादा ध्यान दे रही हूँ. अगर बहार घूमूंगी तो मार्क्स काम हो जायेंगे .

शीना : किताबी कीड़ा मत बन मेरी बहिन ये टाइम फिर से वापिस नहीं आने वाला . कॉलेज लाइफ तो सब एन्जॉय करते हैं और एक तुम हो क सबको भूलती जा रही हो. चल आ मेरे साथ कैंटीन में चलते हैं

रीमा : नहीं दीदी प्लीज मुझे असाइनमेंट पूरा करना है प्लीज , हम फिर कभी चलेंगे.

शीना : फिर कहाँ मिलती हो तुम . वो तो आज मैं इधर आ गयी तो तुम नज़र आ गयी वर्ण तुम्हारा तो घर में भी पता नहीं होता क कहाँ हो. ाचा ठीक है तुम जाओ मगर थोड़ा बहार भी निकला करो कुछ एन्जॉय करो तुम्हे पता नहीं हो क्या गया है जब भी मैं घर अति हूँ तुम या तो दरवाज़ा बन कर क पड़ती रहती हो या सो रही होती हो. दीदी से शिकायत करूँ क्या ?

रीमा : नहीं इसकी ज़रूरत नहीं है दीदी मैं आगे से ध्यान रखूंगी अब मैंने चलती हूँ.

इतना कह कर रीमा लाइब्रेरी में चली गयी और शीना वापिस अपने ब्लॉक में आ गयी. शीना की नज़र राधा पर नहीं पड़ी थी जो रीमा क पीछे पीछे क्लास से निकली थी और अब वो नेहा दीदी को साथ लिए कैंटीन की तरफ hi जा रही थी अमित से मिलने.

अमित : तो आज कैसे आयी थी आप दोनों ?

कैंटीन में जब सब मिल कर बैठे तो अमित नेहा और राधा को देखते हुए पुछा

कल्पना : ऑब्वियस्ली मेरे साथ, मैं अपनी ड्यूटी अचे से निभाती हूँ.

अमित: मौसी ने कुछ कहा तो नहीं?

कल्पना : दीदी क माँ तो आराम से मन गए थे शायद दीदी ने पहले hi बात कर्ली थी मगर राधा क माँ मन कर रहे थे.

अमित: फिर कैसे मनाया उनको ?

कल्पना : राधा ने hi मनाया उन्हें

अमित: मगर मौसी मणि कैसे ?

राधा : मैंने कहा क कल्पना मेरी क्लास में है और नेहा दीदी भी हमारे साथ जाएँगी तो माँ मान गयी.

अमित: ये ाचा किया अगर ये कहती क ये मेरी क्लास में है तो वो नहीं मानती.

कल्पना : वो क्यों ?

राधा : जी नहीं ऐसा कुछ नहीं है . वो तब भी मन जाती. वो सब छोडो तुमने कहा था क तुम आओगे पर तुम अभी तक आये नहीं हमारे घर.

अमित: इस बार गाओं जाने से पहले पक्का आऊंगा .

राधा : सब क लिए टाइम है तुम्हारे पास बस हमारा hi घर तुम्हे नज़र नहीं अत.

राधा ने मुँह बनाते हुए कहा . वो जान बुझ कर रूठने का नाटक कर रही थी.

अमित : तुम जानती हो क ऐसा नहीं है. फिर भी ऐसी बात कर रही हो. मैंने कहा न इस बार गाओं जाने से पहले ज़रूर आऊंगा.

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ अपने सभी लेक्टर्स अटेंड करने क बाद जब छुट्टी हुई तो हम सब पार्किंग में मिले.

अमित : मोहित मैं ज़रा नेहा दीदी क साथ उनके घर जा रहा हूँ आंटी को बोल देना लंच कर क आऊंगा.

मोहित : लेकिन जायेगा कैसे ?

अमित: कल्पना को कार में चला जाता हूँ

मोहित : और वापिस?

अमित : वापसी का देख लूंगा .

मोहित : मुझे फ़ोन कर देना मैं लेने आ जाऊंगा .

अमित: ाचा ठीक है .

मोहित मीनल क साथ कार में बैठ गया और वो निकल लिए. मैं अभी भी वहीँ खड़ा था तो नेहा दीदी और राधा मुझे वहीँ खड़ा देख कर हैरान हुई . कल्पना भी इतने में अपनी कार ले आयी.

नेहा दीदी : तुम मोहित क साथ नहीं गए?

अमित: नहीं

राधा : मगर क्यों ? अब तुम कैसे जाओगे ?

इतने में कल्पना कार ले आयी तो मुझे वहां खड़ा देख कर वो भी सरप्राइज हुई.

कल्पना : तुम यहीं हो ? मोहित क साथ नहीं गए ? अब घर कैसे जाओगे ?

अमित: मैं सोच रहा हूँ आज तुम्हारे साथ बैठ कर देख हूँ लूँ क तुम गाड़ी कैसी चलती हो , पता तो हो कैसे ड्राइवर क साथ जा रही हैं मेरी कौसिन्स

कल्पना : मतलब मेरा टेस्ट लेने वाले हो.

नेहा दीदी : मैं समझी नहीं , तुम हमारे साथ चल रहे हो ?

अमित: बिलकुल , आपको ऐतराज़ तो नहीं?

नेहा दीदी : मुझे क्यों ऐतराज़ होगा. चलो इसी बहाने माँ से भी मिल लेना बहुत यद् करती हैं तुम्हे .

हम सब कार में बैठ गए . नेहा दीदी और राधा पिछली सीट पर जबकि मैं अगली सीट पर था. कल्पना कार चलते हुए मेरे साथ बातें करती रही . हम पहले राधा क घर गए . राधा ने मुझे घर आने क लिए कहा मगर मैंने उसे फिर आने का कहा. उसके बाद हम नेहा दीदी क घर गए. नेहा दीदी मुझे अंदर चलने क लिए फाॅर्स करने लगी .

नेहा दीदी : चलो उतरो कार से और अंदर चलो माँ भी खुश होंगी तुम्हे देख कर और कल्पना तुम भी आओ

अमित : दीदी देर हो जाएगी घर में आंटी इंतज़ार कर रही होंगी.

नेहा दीदी : मुझे कुछ नहीं सुन्ना . चुपचाप अंदर चलो.

आया तो मैं इसी लिए था क्यूंकि कल वडा जो किया था करुणा दीदी से . फिर भी नेहा दीदी की बात को ज़बरदस्ती मैंने की एक्टिंग करने लगा ताकि उनको भी ख़ुशी हो.

कल्पना : तो तुम रुकने वाले हो मगर तुम जाओगे कैसे ?

अमित : कैसे मतलब ? तुम्हारे साथ hi जाऊंगा , चलो गाड़ी साइड पर लगा कर तुम भी अंदर चलो.

कल्पना : पर मुझे घर भी जाना है.

अमित : रुक जाओ न आज लंच साथ में करते हैं वैसे भी तो तुम अकेली बोर हो जाती हो आज फॅमिली के साथ टाइम स्पेंड करो.

मेरी बात सुन कर कल्पना एक पल क लिए सीरियस हो गयी और फिर सर हिल कर हाँ कह दिया. कल्पना ने गाड़ी साइड में लगा दी और हम नेहा दीदी क साथ अंदर चले गए . नेहा दीदी ने बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा रीता मौसी ने hi खोला . मुझे नेहा दीदी क साथ देख कर उनके चेहरे पर रौनक आ गयी .

रीता मौसी : तुम आ गए ? मैं कितने दिनों से तुम्हारा रास्ता देख रही थी . इतने दिनों क बाद आये हो. अपनी मौसी की यद् नहीं अति .

मैं मौसी क पाऊँ चुने के लिए झुकने लगा मगर उससे पहले hi उन्होंने मुझे अपने गले लगा लिया और मेरा सर अपने बूब्स पर प्रेस कर दिया. ये सब एक पल में हुआ किसी ने कुछ नोटिस नहीं किया होगा. देखने वाला तो इसे माँ बेटे वाला प्यार समझेगा मगर मैं जनता था क मौसी ने ऐसा कर क मुझे अपनी तड़प क बारे में बताया था. मेरा माथा चूमने क बाद मौसी ने मुझे छोड़ा तो अगले hi पल उस की नज़र मेरे पीछे कड़ी कल्पना पर भी पद गयी. मौसी ने उसे भी गले से लगा लिया.

रीता मौसी : कैसी हो बेटी ? तुम भी साथ आयी हो?

अमित: गलत ! मौसी ये हमारे साथ नहीं आयी , हम इनके साथ आये हैं. मतलब क इनकी कार में. और ये लंच हमारे साथ hi करेंगी. क्यों कल्पना मैंने ठीक कहा न

कल्पना : आंटी जी वैसे तो मैं जाने वाली थी पर दीदी ने इतने प्यार से कहा है तो मैं मन कैसे कर सकती हूँ वैसे भी इसी बहाने आप क साथ बैठने का टाइम मिलेगा.

रीता मौसी : क्यों नहीं बेटी , तुम भी तो मेरी बेटी जैसी हो आओ अंदर बैठो मैं तुम सब क लिए लंच रेडी करती हूँ.

अभी हूँ अंदर सोफे पर बैठे hi थे क करुणा दीदी उछलती हुई आ गयी. आते hi उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो दौड़ क मुझे गले लगा लिया.

करुणा दीदी : तुम आ गए मैं कितने दिनों से इंतज़ार कर रही थी. आज नहीं आते तो तुमसे बात भी नहीं करती

अमित: कैसे नहीं अत आपसे वडा जो किया था

मुझसे गले मिलने का बाद करुणा दीदी की नज़र बदल में बैठी कल्पना पर गयी तो वो उससे भी गले मिली

करुणा दीदी : तुम भी आयी हो ? नीस तो सी यू. राधा नहीं आयी साथ ?

कल्पना : उसे घर ड्राप कर क hi ए हैं हम

करुणा दीदी : मतलब ये भी साथ आया है तुम लोगों क?

कल्पना : हम सब एक साथ hi ए हैं.

करुणा दीदी : मतलब तुम बाइक क बगैर ए हो फिर तो मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी आज यहीं रहना पड़ेगा.

अमित: नहीं आप तो जानती हैं न मुझे शाम को प्रैक्टिस क लिए जाना होता है.

करुणा दीदी : एक तो तुम्हारी ये प्रैक्टिस hi गले में घंटी की तरह बजती रहती है. जब देखो प्रैक्टिस का बहाना .

कल्पना : सही कहा दीदी अपने , ये तो किसी से मिलता hi नहीं हर वक़्त ऐसे hi बहाने बनता रहता है.

कल्पना की बात पर करुणा दीदी की आँखों में चमक आ गयी और एक बार उन्होंने कल्पना को गौर से देखा.

करुणा दीदी : मतलब तुम्हे टाइम नहीं देता ये ? ये तो बहुत बुरी बात है. इतनी अछि लड़की को ऐसे इग्नोर करना अछि बात नहीं. इसके कान खींचने पड़ेंगे

करुणा दीदी की बात का इशारा समझते हुए कल्पना शर्मा गयी और मैं भी हैरान हो गया क दीदी क्या कह रही हैं.

रीता मौसी : किसके कान खींचने हैं भाई

करुणा दीदी : इसी क जिसके पास किसी क लिए टाइम नहीं है .

रीता मौसी : चुप कुछ भी बोलती है . लाखों में एक है हमारा अमित भगवन इसे हर भरी नज़र से बचाये. चलो अब जल्दी से हाथ मुँह धोलो मैं खाना लगाती हूँ.

बरी बरी से सब हाथ धोने क लिए वाशरूम में जाने लगे. पहले कल्पना फिर नेहा दीदी फिर करुणा दीदी ने मुझे भेज दिया और जब मैं वाशरूम में हाथ मुँह धो रहा था तो पीछे से करुणा दीदी अंदर घुस आयी और दरवाज़ा बंद कर क मुझे पीछे से गले लगा लिया.

अमित: क्या कर रही हो दीदी सब घर में हैं किसी ने देख लिया तो क्या होगा?

करुणा दीदी : कोई नहीं देखेगा , एक तो इतने दिन दूर रहते हो ऊपर से प्यार भी नहीं करने देते. जल्दी से मुझे किश करो.

मैं पलट गया तो करुणा दीदी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख लिए. मुझे दर था क कहीं कोई आ न जाये और दीदी थी जो बिना किसी दर क मेरे होंठ चूमने में लगी थी . मैंने उन्हें थोड़ी देर किश की और फिर उन्हें अलग किया.

अमित: दीदी प्लीज , अगर कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी . मैं बहार जाता हूँ आप भी हाथ मुँह धो कर आ जाइये .

करुणा दीदी : मैं कितना तड़पती हूँ तुम्हारे लिए तुम्हे उसका ख्याल नहीं है? दीदी को तो तुमने प्यार दे दिया अब मेरी बरी आयी है तो मुझे बहाने बना रहे हो.

अमित: मैंने आपसे कहा था न जैसे hi मौका मिलेगा आपको भी प्यार करूँगा कुछ दिन रुक जाइये . अब मुझे जाने दीजिये

इतना कह कर मैंने उनके होंठों पर किश किया और बहार चला आया . टेबल पर खाना लग गया था और रीता मौसी क साथ नेहा दीदी भी सर्वे कर रही थी. मैं भी चेयर पर बैठ गया मेरे एक तरफ कल्पना बैठी थी और दूसरी तरफ करुणा दीदी आ कर बैठ गयी. रीता मौसी ने बड़े प्यार से कल्पना को खाना खिलाया . कल्पना क चेहरे पर एक अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी मगर साथ hi उसकी आँखों में कुछ नमी भी मुझे दिखाई दी मगर मैंने इस बारे में कोई बात नहीं की.

रीता मौसी : और लो न बेटी , क्या मेरे हाथो का खाना ाचा नहीं लगा?

कल्पना : नाम ऑंखें ) बहुत ाचा है आंटी इन्फेक्ट इतना ाचा खाना सालों बाद खा रही हूँ . मेरी माँ बनती थी ऐसा खाना .

रीता मौसी : बनती थी ? क्यों अब कहाँ हैं तुम्हारी माँ ?

कल्पना : आँखों में आंसू) वो अब इस दुनिया में नहीं हैं. वो मुझे और पापा को अकेला छोड़ गयी.

रीता मौसी ने कल्पना की आँखों में आंसू देखे तो उठ कर उसे गले लगा लिया .

रीता मौसी : मत रो बेटी मत रो, मैं भी तो तुम्हारी माँ जैसी हूँ न? तुम मुझे अपनी माँ hi समझो. नेहा और करुणा की तरह तुम भी मेरी बेटी हो. इसे अपना hi घर समझो और जब चाहे चली आया करो . आज क बाद ये मत समझना क तुम्हारी माँ नहीं है. मैं हूँ न.

रीता मौसी क प्यार और स्नेह में कल्पना बहती चली गयी और उसकी आँखों से आंसू की धरा बहती चली गयी . मुझे कल्पना क ये रूप देख कर हैरानी हो रही थी. जो लड़की बहार से इतनी स्ट्रांग और खुश दिल नज़र आती थी उसके अंदर इतना दर्द भी होगा ये देख कर मैं हैरान हो रहा था. वैसे ऐसा hi कुछ मेरे साथ भी था मगर वक़्त क साथ अब मुझे इतना प्यार मिल रहा था क दर्द मनो मैं भूल सा गया था . नेहा और करुणा दीदी ने भी उठ कर कल्पना को गले लग लिया और अपनी छोटी बहिन की तरह ट्रीट करने लगी. माहौल कुछ गंभीर हो गया था . खैर उसके बाद रीता मौसी ने अपने हाथो से कल्पना को खाना खिलाया . खाना खाने क बाद हम सब ने कुछ देर बातें की और फिर नेहा दीदी ने सबके लिए गरमा गरम चाय बनाई. चाय क बाद अब मैंने वापिस चलने का कहा तो करुणा दीदी क साथ साथ नेहा दीदी और रीता मौसी भी इसका विरोध करने लगी.

करुणा दीदी : कहाँ जाना है? आज सब कैंसिल तुम कहीं नहीं जा रहे और न hi कल्पना कहीं जाएगी .

नेहा दीदी : बिलकुल , कल्पना को अभी हम नहीं जाने देंगे और रही बात तुम्हारी तुम भी नहीं जा पाओगे इस लिए चुप चाप बैठो

रीता मौसी : आज मुझे एक और बेटी मिली है , इसे तो मैं कहीं जाने नहीं दूंगी.

अमित: पर मौसी मेरा जाना ज़रूरी है.

रीता मौसी : एक दिन नहीं जायेगा तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा .

अब मैं क्या कहता मैं भी चुप हो गया . मैं तो हैरान था के कल्पना ने एक बार भी जाने की बात नहीं की. उसे भी तो प्रैक्टिस करनी होती है. खैर मेजोरिटी साडी एक तरफ थी तो मैंने भी हर मान ली और बैठ गया चुप चाप मगर तभी मेरे फ़ोन पर आंटी का फ़ोन आने लगा.

अमित : हांजी आंटी जी

आंटी : कहाँ हो

अमित: मैं रीता मौसी क घर हूँ आंटी जी

आंटी : तुम्हारे अंकल का फ़ोन आया है आज शाम तुम्हे हमारे साथ चलना है क्लब में फंक्शन है . 8 बजे से पहले घर आ जाना . तुम्हे स्पेशलय साथ जाना है आज सब से इंट्रोडस करवाना है आज .

अमित: मैं वहां क्या करूँगा

आंटी : कोई बहाना नहीं चलेगा . मैंने कहा न तुम्हारा जाना ज़रूरी है. अंकल से बात करलो .

अमित : इसकी ज़रूरत नहीं है मैं आ जाऊंगा

इसके बाद आंटी ने कॉल कट कर दी. मैं आंटी से क्या बात कर रहा था सबकी नज़र इसी पर थी. फ़ोन बंद होते hi सब सवालिया नज़रों से मुझे देखने लगे .

रीता मौसी : क्या बात है किसका फ़ोन था .

अमित: आंटी का फ़ोन था. अंकल ने कहा है क आज फंक्शन कोई क्लब में तो मेरा जाना ज़रूरी है वहां पर .

रीता मौसी : अगर इतना hi ज़रूरी है तो फिर तुम चले जाओ .

करुणा दीदी : लेकिन माँ

रीता मौसी : बेटी समझने की कोशिश करो . उसका जाना ज़रूरी है तो जाने दो न. हमारी वजह से उसके काम ख़राब तो नहीं होने चाहिए न ? वो फिर आ जायेगा , आओगे न ?

अमित: आप न भी कहेंगी तो भी आऊंगा .

रीता मौसी : ठीक है तो अब तुम्हे जाना है तो जा सकते हो.

कल्पना : ठीक है आंटी फिर मैं भी चलती हूँ . अमित मेरे साथ hi आया था तो इसे मैं hi घर छोड़ दूंगी.

रीता मौसी : तुम कहाँ चली बेटी ? तुम तो बैठो.

कल्पना : नहीं आंटी मुझे भी जाना चाहिए मेरी भी प्रैक्टिस होती है न शाम को तो मुझे भी चलना चाहिए .

करुणा दीदी : तुम भी प्रैक्टिस करती हो ? मगर किस चीज़ की?

नेहा दीदी : जुडो एक्सपर्ट है ये , तभी तो लड़के डरते हैं इससे

करुणा दीदी : क्याआ ?? जूड़ूऊओ..... फिर तो तुम वाकई में ज़बरदस्त हो यार . वैसे तुम दोनों की जोड़ी अछि है एक रेसलर दूसरा जुडो मास्टर .

करुणा दीदी की बात पर मुझे झटका लगा और कल्पना भी हैरानी से करुणा दीदी को देखने लगी.

नेहा दीदी : चुप कर कुछ भी बोलती रहती है. कल्पना हमारी अछि दोस्त है. कल्पना तुम इसकी बातों पर ध्यान मत देना ये ऐसे hi बोलती रहती है.

उसके बाद कल्पना एक बार सब से गले मिली और इधर करुणा दीदी और रीता मौसी भी मुझे गले मिली. करुणा दीदी ने गले मिलते हुए मेरी गर्दन पर हलके से किश कर दिया . मैं उस की इस हरकत से फिर घबरा गया मगर शुक्र था क किसी ने देखा नहीं. सब से मिलके हम घर से निकल गए . रस्ते में गाड़ी चलते हुए कल्पना ने मुझसे बात की.

कल्पना : थैंक यू अमित थैंक यू सो मच फॉर थी लवली मोमेंट्स. आज ऐसा लगा जैसे मुझे मेरी फॅमिली मिल गयी. कितनी प्यारी हैं न रीता आंटी और करुणा दीदी नेहा दीदी भी. आज मुझे माँ की यद् आ गयी. इतने सैलून में पहली बार किसी से इतना प्यार मिला है.

अमित : अभी तुमने देखा hi कहाँ है ? मेरी पूरी फॅमिली ऐसी hi है. रजनी मौसी दिव्या मौसी और फिर मेरी माँ मेरी दोनों ममियां सब ऐसे hi प्यार करने वाली हैं . तुम चलना कभी मेरे साथ तुम्हारा वापिस आने को दिल नहीं करेगा.

कल्पना : तुम सच में लकी हो क तुम्हारे पास इतना प्यार करने को वाली फॅमिली है. अब तो मेरा दिल भी कर रहा है क मैं तुम्हारी पूरी फॅमिली से मिलूं .

अमित : वैसे तुमने मुझे बताया नहीं आंटी के बारे में?

कल्पना : बताती तो तब जब तुम्हारे पास टाइम होता सुनने का. कितनी बार मिलने का सोचा मगर तुम इतना बिजी रहते हो क किसी क लिए तुम्हारे पास टाइम hi नहीं. वैसे तुम्हे सब कितना प्यार करती हैं, स्पेशलय करुणा दीदी .

अमित: हाँ वो सब मुझे प्यार करती हैं उनका कोई भाई नहीं है न.

मैं कल्पना को रास्ता दिखता गया और बातें बातें करते करते हम मोहित क घर पहुँच गए . मैं गाड़ी से उतरा तो कल्पना फिर से बोली .

कल्पना : थैंक्स अगेन अमित , तुम्हारी वजह से मुझे इतना प्यार मिला .

अमित: थैंक्स की ज़रूरत नहीं है. हम दोस्त हैं और दोस्ती में थैंक्स नहीं कहते . मेरा जो है वो तुम्हारा भी है.

हम दोनों ने एक दूसरे को गुड bye कहा और कल्पना अपने घर को चली गयी . उसके बाद मैंने रूम में जाकर कपडे बदले और आंटी को बता कर स्टेडियम चला गया. आज शाम को मुझे अंकल आंटी क साथ जाना था तो मैंने जायदा देर प्रैक्टिस नेगी की और मंजू म क घर को चला गया .

मंजू म: क्या बात है आज तो जनाब टाइम से पहले आ गए.

मंजू म ने दरवाज़ा खोलते hi मुस्कुराते हुए मेरा स्वागत किया . इस वक़्त वो येलो सूट में थी और हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी.

अमित : हाँ आज मुझे जल्दी जाना है इस लिए जल्दी चला आया. वर्ण आप फिर नाराज़ हो जाती अगर बिना मिले चला जाता.

मंजू म : क्या ?? कहाँ जा रहे हो तुम ?

अमित : आज वास् अंकल आंटी क साथ जाना है किसी फंक्शन में . अंकल से स्पेशलय कहा है क मेरे जाना ज़रूरी है.

मंजू म थोड़ी उदास हो गयी मेरी बात सुन कर.

मंजू म : इसका मतलब आज भी मुझे प्यार नहीं करोगे?

अमित: आप ऐसा क्यों सोचती हैं? हम रोज़ मिल लेते हैं क्या ये काम है? प्यार करने वाले तो उम्र भर इंतज़ार कर लेते हैं और आप इतनी जल्दी अधीर हो रही हैं?

मंजू म : मेरा इंतज़ार तुम्हे दिखाई नहीं दिया ? इतने सैलून से जिस प्यार की तलाश में थी वो अब जब मिला है तो कैसे खुद को रोकूं ? 10 साल से इंतज़ार hi तो कर रही थी और अब तुम मुझे फिर से इंतज़ार करने को कह रहे हो?

अमित : मैं तो बस इतना कहना चाहता हूँ क खुद पर थोड़ा काबू रखिये . मैं आपसे प्यार करता हूँ और करता रहूँगा. पर इसका मतलब ये तो नहीं क हम रोज़ रोज़ वो सब करें? वो प्यार का एक हिस्सा है मगर सिर्फ वो hi प्यार नहीं. मैं समझ सकता हूँ क आप कितना तड़पती हैं मगर मैं ये चाहता हूँ क आप सिर्फ एक चीज़ को सब कुछ न समझें. वो सब प्यार में ाचा लगता है मगर सिर्फ उसी क लिए तो हमने प्यार नहीं किया न? आप मेरी बात समझिये , मैं आपको हर ख़ुशी दूंगा मगर सब हम प्यार से करेंगे. बिना किसी दबाव या वासना क.

मंजू म : ये वासना नहीं है अमित ये वासना नहीं है. ये मेरे अंदर की वो खली जगह है जो तुम्हारे प्यार से मैं भर लेना चाहती हूँ. मेरे वजूद में एक कमी सी थी जो अब मैं पूरी करना चाहती हूँ. तुम्हे लगता है क ये वासना है तो मैं तुम्हे ऐसा कुछ करने क लिए नहीं कहूँगी मगर मैं इतना चाहती हूँ क तुम मेरे पास रहो और जब भी मैं ऑंखें बंद करूँ तो तुम्हारी आगोश में मेरा सर हो.

अमित: ऐसा hi होगा मगर जब भी मुझे सही मौका मिलेगा तब और आप को ये बात समझनी होगी . वैसे आज आप कुछ अलग दिख रही थी कॉलेज में. पता है क्लास क सब लड़के कैसे देख रहे थे आपको ? मुझे तो गुस्सा आ रहा था.

मंजू म : तुम्हे क्यों गुस्सा आ रहा था ?

अमित : वो जिस नज़र से देख रहे थे वो ठीक नहीं थी

मंजू म : तो तुम्हे जलन हो रही थी. वैसे मैंने ऐसा भी कुछ अलग तो नहीं किया था . वो तो बस तुम्हारी वजह से थोड़ा अब खुद पर ध्यान देने लगी हूँ . अगर तुम कहते हो तो मैं ऐसा नहीं करुँगी . आखिर ये सब मैं तुम्हारे लिए hi तो कर रही हूँ

अमित : मेरे लिए कर रही हैं ? फिर तो आपको इनाम मिलना चाहिए

इतना कह कर मैंने मम क होंठो पर एक प्यारा सा किश कर दिया. मम ने भी मेरा पूरा साथ दिया .

अमित : आप ऐसे बन संवर क रहा कीजिये. लोग तो देखेंगे hi. मगर इतना यद् रखना क आओ अब मेरी हैं

मंजू म : मेरी हर सांस तुम्हारी है . तुम कहो. तो मैं घर से भी बहार नहीं निकलूंगी मुझे दुनिया से कहीं दूर ले चलो.

अमित : मेरा बस चले तो आपको सब से छुपा कर रख लूँ. मगर ऐसा करना भी गलत होगा. आप मुझसे प्यार करती हैं मेरी गुलाम नहीं हैं

मंजू म : मैं भी तो यही चाहती हूँ क तुम और मैं दुनिया से दूर कहीं साथ रहें हमेशा क लिए. और ये कोई गुलामी नहीं है ये समर्पण है. तुम्हारे सिवा कोई दूसरा मुझे छू भी नहीं सकता.

अमित : मुझे पता है इसी लिए तो कह रहा हूँ आप ऐसे hi बन संवर क रहा कीजिये मुझे ाचा लगता है. चलिए अब कॉफ़ी पि कर थोड़ा पद लेता हूँ फिर मुझे जाना भी है.

मंजू म : तुम बैठो मैं अभी लायी

उसके बाद मम ने कॉफ़ी बनायीं और कॉफ़ी क बाद कुछ देर पड़े की. उसके बाद मैं मम को हुग कर क किश करने क बाद घर वापिस लौट आया. घर पर अंकल पहले hi आ चुके थे . आंटी और अंकल तैयार हो रहे थे. मैं भी जल्दी से अपने रूम में तैयार होने चला गया. मैं तैयार हो कर मोहित क कमरे में गया

मोहित : अरे ाचा हुआ तू आ गया . यार एक काम कर न , माँ को किसी तरह मन ले यार. पापा ने पहले बतया नहीं था और मैंने मीनल क साथ प्रोग्राम फिक्स कर लिया अब उसे मन किया तो वो नाराज़ हो जाएगी. प्लीज तू माँ को मन लेना

अमित: यार मीनल को बता दे न क तुझे जाना है वो गुस्सा नहीं करेगी

मोहित : यार उधर क्लब में मैं बोर हो जाता हूँ तू प्लीज मेरी हेल्प कर दे मेरा ाचा दोस्त है न तू

अमित : पर अंकल का क्या उनसे क्या कहोगे ?

मोहित : पापा कुछ नहीं कहेंगे उन्हें पता है मुझे ये सब पसंद नहीं. तुम बस माँ को समझा देना.

अमित : चल देखता हूँ मैं.

मोहित : थैंक यू यार थैंक यू.

उसके बाद मैं तैयार हो कर नीचे आया तो अंकल आंटी तैयार हो कर रूम से बहार आ चुके थे. मुझे देखते hi अंकल ने गले लगा लिया.

अंकल : कितना हैंडसम लग रहा है मेरा बीटा . आज तुझे सब से मिलाऊँगा मैं. शहर क सब बड़े बड़े लोग आएंगे क्लब में.

आंटी : ये तो है hi हैंडसम . देख लेना आज सबकी नज़र इसी पर होगी. अब चलिए वर्ण देर हो जाएगी. मोहित तुम वहां क्या कर रहे हो चलो गाडी निकालो.

मोहित : माँ वो मुझे अपने दोस्त की बर्थडे पार्टी में जाना है .

आंटी : ये क्या बात हुई बीटा . हम सब पार्टी में जा रहे हैं और तुम बर्थडे मानाने में लगे हो.

अमित: जाने दीजिये न आंटी. दोस्तों की अपनी खास जगह होती है . आप इसे जाने दीजिये

अंकल : ठीक कहा अमित ने , रमा जाने दो इसे , अगर ये दोस्तों की परवाह न करता तो हमें आज हमारा खोया हुआ बीटा नहीं मिलता.

अंकल और मेरे कहने पर आंटी मन गयी . मोहित ख़ुशी से उछलता हुआ मुझसे और अंकल आंटी से मिला और निकल गया मीनल से मिलने. मैं भी अंकल आंटी क साथ कार में बैठ कर क्लब की और निकल गया .

कभी कभी किस्मत से तुरप का पत्ता हाथ आ जाता है और बाज़ी एक बार में hi पलट जाती है .



कुछ ऐसा hi होने वाला था इस पार्टी में

दोस्तों इस फोरम पर हमारे रीडर भाई सिर्फ कहानी hi पड़ने नहीं आते उन्हें साथ में रोमांस का तड़का और सेक्स की भरपूर मात्रा भी चाहिए. मैं कहानी को सेक्स और रोमांस से भरपूर रखना चाहता हूँ अगर फिर भी किसी को ये लगता है क सेक्स कुछ ज्यादा hi रहा है तो कुछ दिन क लिए वो स्टोरी न पड़े क्यूंकि आने वाली कहानी में ये सब क्लियर हो जायेगा

थैंक्स फॉर आल सपोर्टिंग रीडर्स
 
भाइयो कल से बहार hi हूँ यार टाइम नहीं मिल प् रहा फिर भी मैंने बीच में टाइम निकल कर आधा लिख लिया था. होपफ़ुल्ली अगर आज टाइम पर वापिस पहुँच गया तो रत को अपडेट दूंगा
 
अपडेट 114



आंटी कुछ ज्यादा hi बन थान क आयी थी आज . उन्होंने वैसे तो सदी पहनी थी मगर सदी का ब्लाउज फ्रंट कुछ ज्यादा hi डीप था और पीछे से ऑलमोस्ट बैक लेस्स . शायद जहाँ हम जा रहे थे वहां सब ऐसे hi कपड़ों में होंगे. थोड़ी देर में हम एक जगह पहुंचे जिसके बहती दीवार काफी लम्बी छोड़ी थी और दूर तक मेहेंगी कार्स की लाइन लगी हुई थी. दीवारों पर लगी शाही ठाठ बात वाली लाइट्स देख कर लग रहा था क शानो शौकत का यहाँ खाद ख्याल रखा गया है . गाड़ी गेट पैर रुकते hi यूनिफार्म में कुछ लोग जल्दी से कार क पास आ गए और सलूट करते हुए दरवाज़ा खोला . रॉयल गार्ड की वेशभूषा में 4 अछि कद काठी क बड़ी बड़ी मूछों वाले गार्ड थे. कार से उतर कर हम अंकल आंटी अंदर चल दिए और मैं उनके पीछे . ड्राइवर कार को पार्क करने क लिए ले गया. अंदर खुला सा गार्डन था जिसके चरों और बड़े बड़े पेड़ और हरयाटली थी जिन पर खूबसूरत लाइटिंग की हुई थी. एक तरफ कार्नर में बार बानी हुई थी जहाँ शार्ट ड्रेस में वेट्रेस ड्रिंक्स बना रही थी. एक साइड से शुरू हो कर बहुत सरे स्टाल लगे हुए थे. एक तरफ एक स्टेज बानी हुई थी जहाँ पर सिंगिंग का कोई कार्यक्रम चल रहा था. पार्क क बीचों बिच गोलाकार चेयर टेबल लगे हुए थे. गार्डन से आगे जा कर क्लब की बिल्डिंग थी जहाँ पर आगे की तरफ कांच की hi दिवार जैसे बानी हुई थी .

हर तरफ तितलियाँ उड़ रही थी मेरा मतलब है हर औरत कुछ ज्यादा hi फैशनेबुल बन कर आयी हुई थी. अलग अलग तरह क ड्रेसेस , अलग अलग मेकअप हेयर स्टाइल. कुछ तो इतनी भड़कीली लग रही थी क जैसे बुला रही हो क आओ और आ कर हमें पेल दो. स्टाइल से hi पता चल रहा था क यहाँ कोई मिडिल क्लास का हो hi नहीं सकता सब बड़े लोग hi होंगे. हर कोई अपनी hi टोली में मस्त था.

अंकल : देख रहे हो बीटा , ये है इस शहर का सब से बड़ा क्लब . कहने को तो सोशल वर्क क लिए बना है मगर यहाँ हर कोई अपने पैसे का रॉब दिखने hi अत है. वैसे तो मैं यहाँ काम hi अत हूँ क्यूंकि मुझे ये सब पसंद नहीं मगर क्यूंकि आज खास दिन है तो हर कोई आया होगा. मोहित तो पहले आ चूका है हमारे साथ , तुम्हे आज इस लिए लाया हूँ क सब को पता चल जाये क तुम हमारी कंपनी क पार्टनर हो. यहाँ पर शहर का हर बड़ा आदमी मौजूद होगा आज और हमारे शहर क सरे बड़े सरकारी अफसर भी. आओ तुम्हे कुछ लोगों से मिलवाता हूँ.

अंकल मुझे अपने साथ ले गए और आंटी लेडीज टीम की तरफ हो ली. अंकल मुझे कुछ बड़े लोगों से इंट्रोडस करवा रहे थे मगर यहाँ उनका विवरण ज़रूरी नहीं. अंकल तो अपनी तरफ से सबको मेरे बारे में बता कर खुश हो रहे थे मगर मेरा दिल नहीं लग रहा था. सही कहता था मोहित यहाँ पर तो बोर hi हो सकता है आदमी . अंकल ने फाॅर्स करने पर ड्रिंक पकड़ ली तो मैं भी वहां से खिसक गया और आंटी को ढूढ़ने लगा . हर औरत चलती फिरती आग hi बानी हुई थी . एक बात मैंने नोट की क ज्यादा तर जिस किसी औरत की नज़र मुझ पर पड़ती तो वो मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखती. कुछ औरतें तो पेग भी लगा रही थी. मैं यूँही भटक रहा था क मेरी नज़र एंट्री गेट से अंदर आ रहे मोंटी पर पड़ी. मैं उसकी की तरफ देखने लगा. मैं एक साइड में था तो मेरी तरफ उसकी नज़र गयी hi नहीं. मैं उसे hi देख रहा था क उसके साथ जिसको देखा उसे देख कर मुझे झटका लगा.

‘ ये तो वही आंटी है ‘

मेरे मुँह से अपने आप hi ये शब्द निकले क्यूंकि मोंटी क साथ जो औरत थी वो वही थी जिसे मैंने नाईट क्लब में पेला था. मैंने अपने आँखों को एक बार अचे से साफ़ किया क कहीं गलती तो नहीं हो रही मगर ये वही थी. इसका मतलब था क जाने अनजाने मैंने मोंटी की माँ छोड़ दी थी. क्या लग रही थी आंटी बढ़िए सा हेयर स्टाइल और गले में चमकता हर , शायद हीरों का होगा. ब्लैक सदी में उसका गोरा रंग कुछ ज्यादा hi गोरा लग रहा था. ब्लाउज स्लीवलेस था और आगे इतना डीप क उसके क्लीवेज दूर से hi साफ़ दिखाई दे रहे थे. अभी मैं उसे देख hi रहा था क उसके पीछे एक और लेडीज उनके साथ थी. ये देखने में कोई भाभी टाइप लग रही थी मगर थी बहुत हसीं. कर्ली बाल गोरा रंग चमकता चेहरा आँखों का रंग कुछ ग्रे या नीला सा लग रहा था. चेहरे पर मुस्कान मगर फैशन क मामले में कहूं तो वो सिंपल hi लग रही थी मगर नेचुरल ब्यूटी hi इतनी थी क देखने वाले की नज़र न हेट. एक दिलकश स्माइल क साथ वो आगे बाद रही थी . उसने भी एक नेवयबलुए साडी पहनी हुई थी मगर दोनों में बहुत फरक था . जहाँ उस आंटी का परिधान देखने में भड़कीला था वहीँ इस भाभी का पहरावा शालीन था. हाफ बाजु का ब्लाउज और पल्लू भी सलीके से लिया हुआ. कलाई में दो कंगन थे शायद उनमे भी गेम्स लगे हुए थे. कानो में बालियान थी , गले में शायद कोई चैन वगैरह थी मगर साडी का पल्लू आगे होने से पता नहीं चल रहा था.

मैं आराम से एक स्टाल पर खड़ा मोंटी पर नज़र जमाये हुए था. एक तो पहले से hi मुझे उसपर गुस्सा था ऊपर से जब से शिवानी ने बताया था क ये राधा और नेहा दीदी को परेशां करना चाहता है तो मैं उसे गुस्से से देख रहा था. वो दोनों लेडीज तो लेडीज टीम से जा कर मिलने लगी और मोंटी सीधा बार की तरफ चल दिया और पेग उठा लिया. मैं मोंटी की नज़र में आये बिना उस पर hi नज़र जमाये था. मोंटी क साथ वो दोनों औरतें कौन हैं ये मुझे पता तो नहीं था मगर मेरा दिल कह रहा था क वो आंटी मोंटी की माँ hi हो अगर ऐसा हुआ तो उसको पटना होगा मोंटी को काबू करने क लिए .

मैं अभी मोंटी पर hi नज़र जमाये था क मेरे मोबाइल पर आंटी की कॉल आने लगी.

अमित: हांजी आंटी बोलिये

आंटी : कहाँ हो तुम ? कब से तुम्हे ढून्ढ रही हूँ , यहाँ आओ मेरे पास मैं लेडीज ग्रुप में बैठी हूँ . जल्दी आना तुम्हे अपनी फ्रेंड्स से मिलवाना है.

मैं आंटी की कॉल क बाद उनकी तरफ चल दिया. यहाँ पर तो अछि खासी रौनक लगी हुई थी. 3-4 तबके जोड़कर एक बड़ा दायरा बना लिया था और सब लेडीज ठहाके लगा रही थी. तकरीबन सब क आगे कांच क गिलास पड़े थे जिनमे शराब वोडका और वीने वगैरह थी.

आंटी : लेडीज मीट विथ अमित . हे इस माय son’s फ्रेंड एंड पार्टनर इन आवर कंपनी .

लेडी 1 : वो सो हैंडसम

लेडी 2 : हे इस लिखे ा मॉडल

लेडी 3 : सो बिग मस्कुलर बॉडी लिखे टार्ज़न

हर कोई अपनी तरफ से कोई न कोई कमेंट कर रही थी और खा जाने वाली नज़रों से देख रही थी . वहां पर वो क्लब वाली आंटी भी बैठी थी और उसके साथ वाली वो भाभी भी जो मोंटी क साथ आयी थी. वो आंटी मुझे पहचानने की कोशिश कर रही थी जबकि वो भाभी जस्ट सबको कंपनी देने क लिए hi जैसे बैठी थी.

आंटी मुझे घूरते हुए यद् करने की कोशिश कर रही थी. आंटी ने मुझे उस आंटी और उस भाभी को छोड़ कर करीब करीब सब से मिलवाया. शायद आंटी उनसे बात चित नहीं करती होगी. मैं उस आंटी से बात करना चाहता मगर सही मौका नहीं था. वो मुझे पहचानने की कोशिश तो कर रही थी मगर शायद इसे यद् नहीं आ रहा था आएगा भी कैसे उस दिन वो नशे में जो थी. जब उसकी नज़र मुझसे मिली तो मैंने उसे स्माइल दी. आंटी मेरे बारे में सबको बता रही थी और वो सब मुझसे सवाल करने लगी. मैं अभी वहां लेडीज क सवालों का जवाब hi दे रहा था क उस आंटी क साथ वाली भाभी क मोबाइल पर कोई कॉल आयी और वो बात करती हुई उठ कर चली गयी .

मैं इधर सब लेडीज क अजीब अजीब सवालों से परेशां हो रहा था तो मैं बहाना बना कर वहां से जल्दी खिसक गया. मैं फिर से बार की तरफ नज़र रखते हुए आगे बाद रहा था तो मुझे मोंटी कहीं नज़र नहीं आया . मैं मोंटी को इधर उधर देखने लगा तो गार्डन क दूसरी तरफ जो बिल्डिंग थी वहां से मुझे मोंटी अंदर घुसता हुआ नज़र आया और उसके साथ वो भाभी भी. मुझे दाल में कुछ कला लगा तो मैं भी तुरंत उसके पीछे हो लिया.

जब तक मैं वहां पहुंचा तो मोंटी और वो भाभी कहीं गायब हो गए थे. उस बिल्डिंग में एंटर होते hi बड़ी सी लॉबी थी और एक तरफ रिसेप्शन पर एक लड़की कड़ी थी. एक तरफ बड़े बड़े सोफे सेट और चेयर्स लगे थे और सामने एक रास्ता आगे को जा रहा था ऊपर बार का निशान था मतलब पीछे बार होगा और साथ hi लिफ्ट और स्टैर्स भी थे जो शायद ऊपर कोई हॉल या रूम्स की तरफ जा रही होंगी. मोंटी तो नज़र नहीं आ रहा था अब उसे कैसे ढूंढूं . मैं रिसेप्शन पर hi चल गया .

Receptionist:may ी हेल्प यू सर?

अमित : ी ऍम फ्रेंड ऑफ़ मोंटी विल यू प्लीज तेल्ल में वेयर हे इस?

रिसेप्शनिस्ट: फर्स्ट फ्लौर रूम no. 105

अमित: थैंक यू मिस

रिसेप्शनिस्ट: यू अरे वेलकम सर.

मैं जल्दी से लिफ्ट में गया और फर्स्ट फ्लोर पर 105 no. रूम क बहार पहुँच गया. दरवाज़ा तो लॉक hi होगा मगर मैं टैंक झांक नहीं कर सकता था क्यूंकि सब तरफ कामर्स लगे हुए थे. मोंटी बंद कमरे में इस भाभी को क्यों लेकर गया है? वो साथ में आयी है तो मतलब ये क वो फॅमिली में से hi होगी या कोई रिलेटिव फिर भी वो उसे कमरे में लेकर बंद है तो मतलब साफ है क वो मज़े ले रहा होगा. और वो भाभी भी अपनी मर्ज़ी से hi आयी है. जो भी हो वो भाभी थी बड़ी मस्त , साला मोंटी की तो किस्मत लकी है. मैं अपनी सोच को पुख्ता करने क लिए एक नज़र खुद देखना चाहता था तो अंदर देखने का रास्ता ढूंढने लगा . दरवाज़ों क इलावा कोई खिड़की नज़र नहीं आ रही थी तो मैंने सामने की तरफ जो रास्ता जा रहा था उस पर बाद चला. आगे जाकर फिर से एक लॉबी और सिटींग एरिया था जिसके एक तरफ आगे खुला हवादार व्यू था यानि क कोई दीवार नहीं थी . मैं उस तरफ आगे बड़ा तो रूम्स की बैक साइड की तरफ से थोड़ा सा रास्ता रखा हुआ था शायद मेंटेनेंस क लिए . इस तरफ रूम्स की खिड़कियां थी. मैंने इधर उधर देखा और जायज़ा लेने क बाद उस तरफ चल दिया . इस बार किस्मत ने साथ दिया . खिड़की तो बंद थी मगर कांच वाले हिस्से क पीछे से पर्दा थोड़ा हटा हुआ था. मैंने वहां से अंदर देखा तो देखते hi मेरा मुँह खुला का खुला रह गया.

अंदर मोंटी बिलकुल नंगा था और वो उस भाभी क कपडे उतरने की कोशिश कर रहा था जबकि भाभी शायद उसे कपडे न उतरने को कह रही थी. दोनों में क्या बात हो रही है ये तो बता पाना मुश्किल था मगर भाभी क खुले ब्लाउज में से झांकते उनके गोर गुलाबी स्तन देख कर मेरे लैंड में हलचल होने लगी. पता नहीं क्या कशिश थी उस भाभी में क मैं उन्हें पहली नज़र में hi पसंद कर बैठा था और जो नज़ारा अब मेरी आँखों क सामने था उसे देख कर तो मुझे मोंटी की किस्मत पर रश्क होने लगा. भाभी क स्तन बिलकुल गोल थे और ज्यादा ढीले नहीं थे. निप्पल गुलाबी थे और आकर भी सही था. मोंटी उसके बूब्स मसल और चूस रहा था. मोंटी का लैंड तो साला कुछ खास नहीं था मगर हरामखोर ठरकी अव्वल दर्जे का था. मोंटी ने भाभी क बाल पकड़ कर उसे अपने लैंड पर झुकाने की कोशिश की तो वो मन करने लगी मगर फिर भी उसने जबरदस्ती उसे लैंड पर झुका दिया और बाल खींचते हुए अपना लैंड उसके मुँह में घुसा दिया. मेरे दिमाग में उसी वक़्त एक आईडिया आया और मैंने मोबाइल निकल कर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. दोनों hi साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे बस साउंड की कमी थी.

मोंटी का लैंड भाभी ने ज्यादा देर नहीं चूसा और कड़ी हो गयी. मोंटी ने उसकी साडी खींचनी चाही तो वो फिर से मन करने लगी. मोंटी ने उसे बीएड पर धक्का दे कर गिरा दिया और उसकी सदी ऊपर उठा कर एक झटके में छूट में लैंड पेल दिया . भाभी की टाँगे भी मस्त चिकनी थी जो अब मोंटी ने हवा में उठा राखी थी. मस्त भाभी क हुसैन का जलवा देख कर मैं गरम हो गया था मगर यहाँ ज्यादा देर रुकना भी ठीक नहीं था इस लिए मैं इतना hi रिकॉर्ड कर क वहां से वापिस चला गया .

मैं वापिस गार्डन में आ गया तो देखा सब वैसा hi चल रहा है . आंटी तो लेडीज क्लब में hi बातों क रिकॉर्ड बना रही थी और अंकल पेग लगा रहे थे. मेरी नज़र मोंटी क साथ आयी आंटी पर पड़ी तो वो उठ कर कहीं जा रही थी . मैं उससे बात करना चाहता था तो उसे अकेली देख कर मुझे ये मौका सही लगा . वो आंटी वाशरूम की तरफ जा रही थी शायद शराब पीकर टंकी भर गयी होगी. मैं उसके पीछे पीछे चल दिया. वो वाशरूम में घुस गयी तो मैं उसी रस्ते में कुछ दूरी पर खड़ा हो गया. थोड़ी देर में वो वापिस लौटी तो मैंने उसका रास्ता रोक लिया .

अमित: कैसी हैं आप ? वैसे पहचान तो लिया होगा आपने मुझे ?

आंटी : ऐसा लगता तो है क कहीं देखा है मगर यद् नहीं आ रहा. तुम खुद hi बता दो तो शायद यद् आ जाये

अमित: कमल है मुझे तो लगा था क आप मुझे देखते hi पहचान लेंगी खैर शायद आप उस दिन वाकई होश में नहीं थी.

मेरा जवाब सुन कर आंटी क चेहरे पर परेशानी साफ़ नज़र आने लगी

आंटी : तुम कहना क्या चाहते हो ?

अमित: भूल गयी आप क हम पहले कहाँ मिले थे ? यद् कीजिये वो नाईट क्लब

मेरे इतना कहते hi जैसे आंटी को सब यद् आ गया और उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया.

आंटी : तो वो तुम थे , यू रास्कल तुमने उस दिन पर रपे किया था मैं तुम्हे छोडूंगी नहीं .

अमित: अरे अरे ये क्या कह रही हैं आप ? मैंने तो वही किया था जो आपने मुझे करने को कहा था. इसमें मेरी क्या गलती है ? आप खुद hi कह रही थी क मुझे वाइल्ड सेक्स पसंद है तो मैंने वही किया . अब मुझे इसका एक्सपीरियंस तो था नहीं और आप मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थी. मुझे तो लगा था क आपको बहुत मज़ा आया और आप मुझे इनाम देंगी मगर आप तो गुस्सा हो रही हैं

आंटी : मज़ा ??? तुमने मेरा रपे किया था . पता भी है क्या हालत की थी तुमने मेरी ? वो तो ाचा हुआ क वो क्लब मेरी फ्रेंड का था वर्ण मेरा क्या होता ?

अमित: ये तो मुझसे गलती हुई क मुझे आपको होश में लाना चाहिए था पर क्या करता मेरे दोस्त मुझे बुला रहे थे. वैसे सच सच कहिये क्या आपको मज़ा नहीं आया था क्यूंकि उस वक़्त तो आप बहुत कुछ कह रही थी.

आंटी ने पेग तो लगते हुए hi थे और अब उस मंज़र को यद् करते हुए शायद उन्हें भी गर्मी आने लगी थी.

आंटी : सच कहूं तो मैंने आज तक इतना सॉलिड मर्द कभी नहीं देखा. तुमने तो मुझे पूरी तरह हिला कर रख दिया था. पता है 3 दिन तक तो मुझसे बैठा तक नहीं जाता था. वो तो ाचा है क कोई मुझसे सवाल करने की हिम्मत नहीं करता वर्ण ऐसी हालत किसी से छुपती नहीं है. वैसे तुम रमा क साथ क्या कर रहे हो ? और उसने तो बताया क तुम उनकी कंपनी में पार्टनर हो तो फिर तुम वो सब क्यों करते हो ? या फिर रमा ने तुम्हे म्हणत का इनाम दिया है ?

एक पल क लिए तो मुझे उसकी बात पर गुस्सा आया पर घटिया इंसान घटिया बात hi तो सोचेगा , फ़िलहाल मुझे अपना उल्लू सीधा करना था .

अमित: म्हणत तो आप पर भी की थी मैंने पर लगता है आप खुश नहीं हुई , रही बात रमा आंटी की तो मैं उनके बेटे का दोस्त हूँ और कंपनी में पार्टनरशिप मेरे पापा की वजह से है और इससे ज्यादा और कोई सवाल नहीं . आप बताइये क्या आप मुझे मेरी म्हणत का इनाम नहीं देंगी ?

आंटी : तुमने जो मेरे साथ किया है उसके बाद तो तुम्हे मैं जान से मर दूँ मगर ये भी सच है क उसके बाद मुझे किसी और क साथ मज़ा भी नहीं आया . पता नहीं कितनी बार मैं तुम्हे ढूंढने उस क्लब में गयी हूँ मगर तुम मिले नहीं. मैंने तो ओनर को भी बोलै था क अगर तुम वहां दोबारा आओ तो वो मुझसे ज़रूर बताये पर तुम वहां शायद गए hi नहीं.

अमित: कैसे जाता ? आप ने मुझे जो समझा था मैं वो था hi नहीं. मैं तो बस दोस्त की बर्थडे पार्टी में गया था. वैसे अब आपका क्या इरादा है? अब तो आपके सामने हूँ.

आंटी : इरादा तो अब भी वही है. चलो मेरे साथ

अमित : कहाँ ?

आंटी : चुपचाप पीछे आओ और कोई सवाल नहीं.

आंटी अपनी बड़ी गांड मटकती हुई मेरे आगे आगे चल रही थी. मैं उनके बड़े बड़े तरबूज़ जैसे कूल्हों को हिलते हुए देख रहा था पिछली बार इनकी अछि तरह बंद बजे थी मैंने . आंटी चलती हुई उसी बिल्डिंग में मुझे ले आयी . मुझे दर था क कहीं मोंटी से सामना न हो जाये इस लिए मैं आंटी से थोड़ा दूर hi खड़ा था और अपना चेहरा झुका कर खड़ा था. खैर मोंटी नहीं आया और आंटी ने रिसेप्शन से एक रूम की चाबी ली और मुझे इशारा कर क लिफ्ट की तरफ चल दी. मैं भी आंटी क पीछे लिफ्ट में घुस गया . लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होते hi आंटी ने 2 ंद फ्लौर का बटन दबा दिया और मैंने भी आंटी क बड़े बड़े चूतड़ मसल दिए.

आंटी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स रुको थोड़ा रूम में चल क कर लेना जो करना है. और तुम इनके पीछे hi क्यों पड़े रहते हो?

अमित : आपके ये बड़े बड़े बट किसी भी मर्द को पागल बनाने क लिए काफी हैं . मेरा तो दिल कर रहा है क अभी इसी वक़्त आपको गांड में अपना लैंड घुसा दूँ. आप सर से पाऊँ तक मस्त छोड़ने लायक माल हैं . आप तो किसी मुर्दे को भी छू लें तो उसका लैंड खड़ा हो जाये .

आंटी अपनी तारीफ सुन कर खुश हो गयी . तारीफ तो हर औरत की कमज़ोरी होती है. मैं उसे शीशे में उतरना चाहता था मगर सीधा उसके बारे में अभी मैं सवाल नहीं करना चाहता था. इस लिए प्यार से hi काम ले रहा था. आंटी नशीली आँखों से मुझे देखा और अपना हाथ बड़ा कर मेरा लैंड पेण्ट क ऊपर से hi पकड़ लिया

आंटी : असली मर्द तो तुम हो और मुझे सिर्फ तुम्हारा hi लैंड हमेशा चाहिए. इसके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ. तुम नहीं जानते मैं इसे कितना मिस कर रही थी . आज क बाद तुम मेरी प्यास बुझाते रहना बदले में जो कहोगे मिलेगा .

अमित : सोच लो ! अगर मेरी बात नहीं मणि तो मैं फिर से गायब हो जाऊंगा.

आंटी : सोच लिया , मेरा पास बहुत है तुम्हे देने क लिए तुम बस मुँह खोलो.

अमित : मेरा भी उसूल है काम होने क बाद hi फीस लेता हूँ. पहले आपकी प्यास बुझाता हूँ फिर अपनी फीस बताता हूँ अगर आप ने वो दे दी तो आपको सर्विस मिलती रहेगी

आंटी : फिर तो तुम्हे हमेशा मेरी सर्विस करते रहना होगा.

इतने में लिफ्ट रुक गयी और आंटी ने आगे बाद कर एक रूम का दरवाज़ा खोल दिया. आंटी क साथ hi मैं रूम में एंटर किया और आंटी ने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया .

आंटी : अब जल्दी से शुरू हो जाओ और मुझे प्यार करो , मेरी आग बुझाओ

अमित : वैसे मेरा नाम तो आपको पता चल hi गया होगा अब ज़रा अपना भी बता दो.

आंटी : मेरा नाम मेघा है. और तुम चाहो तो किसी भी नाम से बुला सकते हो.

अमित : बहुत प्यारा नाम है वैसे पार्टी में किसके साथ आयी हो आप ?

मेघा : बातें बाद में करना अभी पहले मुझे अपना जलवा दिखाओ . जब से तुम्हारा लैंड लिया है किसी और का अब पसंद hi नहीं आता .

इतना कह कर आंटी ने एक हाथ से मेरा लैंड पेण्ट क ऊपर से पकड़ लिया और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. अब मैं भला कैसे पीछे हैट ता मैंने भी उसके होंठ चूसते हुए उसके बड़े बड़े बूब्स मसलने शुरू कर दिए . मैं कुछ ज्यादा hi जोर से उसके बूब्स मसलने लगा तो वो कराह उठी

मेघा : आआह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ जानवर हो क्या ? इतनी ज़ोर से क्यों मसल रहे हो ?

अमित : मेघा रानी मैं जनता हूँ तुम्हे ऐसा hi जंगली पैन पसंद है. अब ज्यादा नखरा मत करो हमारे पास टाइम काम है.

मेघा : तो रोका किसने है निकालो बहार अपने सांप को

अमित: खुद hi निकल लो , मैं भी तो देखूं तुम्हे कितना पसंद है मेरा सांप.

मेघा ने एक नज़र मुझे देखा और कामुक ऐडा दिखती वो एक झटके में घुटनो पर बैठ गयी और मेरी पेण्ट खोल कर निचे कर दी. अंडरवियर भी घुटनो तक करने क बाद उसने मेरा लैंड हाथ में पकड़ कर अछि तरह घूम घूम कर देखना शुरू कर दिया.

मेघा : क्या लैंड है ककक , मैं तो इसकी कायल हो गयी हूँ. पिछली बार इसने मेरी छूट और गांड का जो हाल किया था अभी तक यद् है मुझे. अब तो इसे मैं कहीं जाने नहीं दूंगी. अब से मेरी छूट में सिर्फ ये hi लैंड जायेगा.

इतना कह कर मेघा ने मेरे लैंड का सूपड़ा मुँह में ले लिया और उसे होंठों में जकड कर धीरे धीरे चूसते हुए बहार निकला. मुझे ऐसा लगा जैसे वैक्यूम में मेरा लैंड खिंचा जा रहा हो. मेघा धीरे धीरे लैंड को और अंदर तक ले जाने लगी और जब लैंड को बहार निकलती तो जीभ निकल कर उसे आइस क्रीम की तरह चाट टी . मेघा जैसे लैंड चूस रही थी उसके आगे तो प्रोफेशनल रंडियां भी पानी भरें . मुझे बहुत मज़ा आ रहा था , मज़े से मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयी और मेरे हाथ उसके सर पर चले गए .

अमित: आह शाबाश मेरी रंडी ऐसे hi प्यार सेवा कर मेरे लैंड की तभी तुझे प्रसाद मिलेगा . शाबाश ऐसे hi चूस इसे , तू तो रंडियों को भी मात करती है . बहुत आग है तेरे अंदर

मेघा : हाँ मैं रंडी हूँ सिर्फ तुम्हारी रंडी हूँ और मेरी आग तुम्हारा ये लैंड hi भुजा सकता है . मैं तो तुम्हारे इस लैंड की गुलाम हो गयी हूँ आअह्ह्ह सीसीसी उम्मम्मम्म उम्मम्मम्म सुररूऊऊप्प्प्प सुर्र्र्रूऊऊप्प्प्पप्प उम्म्म्म

मेघा अपना काम पूरे मन से कर रही थी मगर मैं जनता था क ज्यादा टाइम नहीं है क्या पता कब किसका फ़ोन आ जाये और काम बिच में hi छोड़ना पड़े . मैंने मेघा को बालों से पकड़ कर ऊपर उठाया.

अमित : चल रंडी तैयार हो जा मेरे लैंड की सवारी करने क लिए . आज तेरी साडी आग बुझा दूंगा. तेरी छूट को आज भोसड़ा बना दूंगा.

मेघा : मैं भी यही चाहती हूँ क आज मेरी छूट की ऐसी चुदाई करो क इसकी साडी आग ठंडी हो जाये. मैं तेरी गुलाम हूँ जैसे चाहे वैसे छोड़ मुझे.

मैंने मेघा को ढाका दे कर बीएड पर गिरा दिया और उसकी टंगे हवा में उठा कर उसकी गांड क नीचे तकिया रख कर उसकी छूट को थोड़ा ऊपर किया . मेघा की गोरी चिकनी मांसल टाँगे बिलकुल नंगी थी . मैंने उसकी पेंटी निकल दी घुटने बेंड करते हुए झुक कर अपना सूपड़ा छूट पर लगा दिया. उसकी टांगो को उसके पेट पर दबा कर मैंने कास क एक धक्का मारा

मेघा : एआईईईई माआआ उईईईईई उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्क्स कितना बड़ा है ये मुसल . जान hi निकल देता है. ज़रा आराम से करो

अमित: चुप कर रंडी अगर ज्यादा बोली तो छूट फाड़ कर रख दूंगा. तुझे तो ऐसी hi चुदाई पसंद है न. ले इसे भी....

इतना कह कर मैंने एक और ज़ोरदार धक्का पार्क दिया और जड़ तक पूरा लैंड मेघा की छूट में समां गया . एक बार फिर से मेघा क मुँह से कराह निकली मगर मैं नहीं रुका और दाना दान धक्के पेलने शुरू कर दिए . कुछ hi धक्कों क बाद मेघा को मज़ा आने लगा और वो मज़े में सिसकारियां लेती और तेज़ धक्के मरने को कहने लगी

मेघा : आअह्ह्ह आआह्ह्ह ऐसे hi ाःह आअह्ह्ह ऐसे hi करो शाबाश और ज़ोर से मारो और तेज़ उम्म्म्म ककक ाःह आह्ह्ह्हह तुम्हारा लैंड सच में अजूबा है कक्कक्स ऐसा लैंड ज़िन्दगी में कभी नहीं देखा था मैंने . कक्कक्स आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह अब से मैं तुम्हारी गुलाम हूँ बस ऐसे hi मेरी छूट की आग बुझाते रहना बदले में तुम जो कहोगे मैं करुँगी . जैसे चाहो वैसे छोड़ो मुझे जहाँ कहोगे वहां आ जाउंगी . तुम ऐसे hi मुझे खुश करना मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करुँगी आआह्ह्ह्ह माआ आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

अमित : आअह्ह्ह ठीक है मेरी रंडी जब तक तू मेरी बात मानेगी तब तक तुझे मेरा लैंड मिलता रहेगा अगर किसी बात पर कभी मन किया तो फिर भूल जाना मुझे

मेघा : उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह नहीं ऐसा मत कहो , मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी तुम एक बार कह तो देखो सीसीसी आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह मैं इस लैंड क बिना अब नहीं रह पाऊँगी. मैं उस दिन क बाद से तुम्हे ढूंढने क लिए शहर क हर क्लब में कितने चक्कर लगा चुकी हूँ मगर तुम मिले hi नहीं कोई तुम्हे जनता hi नहीं. अब मैं तुम्हे कहीं जाने नहीं दूंगी तुम बताओ तुम्हे क्या चाहिए मैं रमा से दुगना दूँगी मेरा सब ले लो बस ये लैंड मुझे रोज़ चाहिए कक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्ह और तेज़ ज़ोर से करो फाड़ दो मेरी . मैं गयी मैं गयी ओह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह

इसके साथ hi मेघा की छूट ने पानी का बाँध खोल दिया और बेडशीट भी उसके छूट रास से भीगने लगी. मेरा अभी बहुत दूर था इस लिए मैंने उसकी छूट से लैंड बहार निकला और उसे बिना कोई टाइम दिए घसीट कर आधा बीएड से नीचे लटकाते हुए उसे ज़मीन पर घुटनो पर कर दिया और उसका ऊपर का धड़ बीएड पर hi रहने दिया. मैंने उसके पीछे घुटनो पर पोजीशन लेते हुए छूट पर लैंड सेट किया और एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया. मेघा फिर से करहि मगर मैं बिना रुके उसकी चुदाई करने लगा. इस पोजीशन में इसके बड़े बड़े कूल्हे मेरे सामने थे मैंने ज़ोर से थप्पड़ मर कर उसके चूतड़ लाल करने शुरू कर दिए .

अमित : आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म क्या बड़ी बड़ी गांड है तेरी , इसे देखता हूँ तो गांड करने का मन होने लगता है , आज इसे भी फाड़ कर रख दूंगा

मेघा : नहीं आज नहीं प्लीज पिछली बार मैं 3 ठीक से चल नहीं पायी थी . अभी तुमने किया तो मेरे बेटे को पता चल जायेगा

अमित : कौन बीटा साली किसकी बात कर रही है ?

( अंदाज़ा तो मुझे था क ये मोंटी की hi माँ हो सकती है फिर भी कन्फर्म करना ज़रूरी था )

मेघा : आआह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्हह मेरे साथ आया है पार्टी में , तुमने देखा नहीं उसे ? मोंटी नाम है उसका . प्लीज आज मत करना पीछे से , तुम कल कर लेना . जहाँ कहोगे मैं आ जाउंगी या तुम मेरे पास आ जाना . आज रहने दो

अमित: ठीक है मगर इसके बदले में मुझे कुछ और भी चाहिए

मेघा : बताओ क्या चाहिए मैं सब दूंगी

अमित : तुम्हारे साथ जो भाभी आयी है साली मस्त माल है मुझे उसकी छूट भी चाहिए.

मेघा : कौन भाभी ?

अमित : वही जो तुम्हारे साथ आयी है

मेघा : तुम रुपाली की बात कर रहे हो ? नहीं नहीं ये नहीं हो सकता . वो मेरी देवरानी है वो ऐसी नहीं है . वो नहीं मानेगी . तुम किसी और को पसंद कर लो मैं उसे तैयार कर लुंगी . यहाँ बहुत सी ऐसी हैं जिन्हे तुम्हारे जैसे लैंड चाहिए . अगर कहो तो कोई लड़की पेश कर दूंगी . उसे भूल जाओ वो नहीं मानेगी.

अमित : ( मन में ) देवरानी !!!!!! मतलब वो मोंटी की चची है ? और साला अपनी hi चची को पेल रहा है. साला पूरी की पूरी फॅमिली hi चुड़क्कड़ है. घर है या रंडीखाना . अब तो साली को नीचे लाना hi पड़ेगा. अपने भतीजे से छुड़वा रही है तो साली में आग भी बहुत होगी.

अमित : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , अगर मेरा लैंड चाहिए तो मेरे लिए उसे ले कर आओ वर्ण मेरे लैंड को भूल जाओ और कौन कहता है क वो वैसी नहीं है ? मुझे तो लग रहा है साली वो भी बहुत गरम है . उसकी फिगर देख कर hi मैं समझ गया था क वो बहुत गरम है और तू कह रही है क वो ऐसी नहीं .

मेघा : तुम नहीं समझते , वो किसी और क साथ ये सब नहीं करती. हाँ उसमे आग तो बहुत है ये मैं जानती हूँ. तभी तो साली मेरे पति का लैंड लेती है

अमित : शॉकेड ) क्या ?

मेघा : हाँ वो मेरे पति का लैंड लेती है अपनी छूट में तभी तो साली इतना बन थान क रहती है . अपना पति तो उसका कब का मर चूका तब से मेरे hi पति को अपना पति बना कर बैठी है और वो भी ठरकी मुझे हाथ तक नहीं लगता और इसकी छूट में जा घुसता है

अमित : मगर तुम्हे कैसे पता ?

मेघा : देखा है मैंने कई बार अपनी आँखों से मगर इस बारे में उससे बात नहीं की. मेरे कहने से वो रुकने वाले तो थे नहीं इस लिए मैंने भी अपना इंतज़ाम कर लिया .

अमित : मन में ) फिर तो साली पक्की रंडी है मगर देखने में तो साली ऐसी नहीं लगती. इतनी सिंपल सी लग रही थी और अब क्या क्या पता चल रहा है . पहले मोंटी और अब उसका बाप भी. साली बाप बेटों दोनों से छुड़वा रही है . इसकी तो लेनी hi पड़ेगी .

अमित : इतना कुछ जानती हो फिर भी मन कर रही हो. अब तो मुझे हर हल में उसकी चाहिए अगर नहीं मिली तो मुझे भूल जाना.

मेघा : नहीं प्लीज ऐसा मत कहो , मैं तो इस लिए मन कर रही थी क कहीं तुम उसकी ले कर मुझे न भूल जाओ जैसे मेरा पति मुझे भूल गया है. अगर तुम उसकी लेना hi चाहते हो तो मैं उसे ले आउंगी मगर इसमें टाइम लग सकता है क्यूंकि मुझे उसे लाइन पर लेन क लिए कुछ सोचना पड़ेगा. मगर तुम्हे भी एक वडा करना होगा .

अमित : कैसा वडा?

मेघा : यही क उसकी लेने क बाद मुझे छोड़ोगे नहीं

अमित : आरी तुझे कैसे छोडूंगा मेरी रंडी तू तो मेरी जान है. वडा करता हूँ तुझे नहीं छोडूंगा. मगर अगली बार जब मुझसे मिलो तो मुझे तुम्हारी उस देवरानी की छूट चाहिए.

मेघा : ठीक है मगर अभी तो करो कब से बातों में समय गवा कर चुदाई रोक दी है तुमने.

अमित : ये ले मेरी रंडी

इतना कह कर मैं उसकी चुदाई करने लगा . अगले 10 मिनट तक मैंने उसकी छूट को अचे से रगड़ा और उसका एक बार फिर पानी निकल दिया मगर मेरा काम होने से पहले मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने फ़ोन देखा तो अंकल का फ़ोन आ रहा था वो मुझे बुला रहे थे. मैंने उन्हें जल्दी आने का कह कर फ़ोन काट दिया और मेघा की छूट से लैंड निकल कर अपने कपडे ठीक करने लगा

मेघा : क्या हुआ रुक क्यों गए अभी तो तुम्हारा हुआ hi नहीं.

अमित : अंकल बुला रहे हैं मुझे जाना होगा. अगली बार जब मिलेंगे तो अचे से फ्री टाइम में तुम्हारी साडी प्यास बुझा दूंगा.

मेघा : ठीक है मगर जल्दी मिलना अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा और जाने से पहले अपना no. देकर जाओ.

मैंने मेघा क फ़ोन पर मिसकॉल दे दी और उसका no. अपने फ़ोन में सेव कर लिया .

अमित: जल्दी या देर अब तुम्हारे हाथ में है. अगली बार तुम रुपाली को साथ hi लेकर आना वर्ण मैं नहीं आऊंगा.

मेघा : ऐसा hi होगा

उसके बाद मेघा ने मुझे किश किया और मेरे लैंड को कपडा क ऊपर से रगड़ दिया . मैं रूम से बहार निकला कर लिफ्ट में घुसा और निचे जाने लगा तो निचे वाले फ्लोर पर लिफ्ट रुका गयी. दरवाज़ा खुला और लिफ्ट में वही भाभी घुस आयी सॉरी भाभी मतलब रुपाली मोंटी की चची. वो मेरे आगे मेरी तरफ पीठ कर क कड़ी हो गयी. रुपाली की बॉडी से खास तरह की सुगंध आ रही थी जो मुझे फिर से पागल करने लगी और मेरा खून गरम होने लगा. मैंने उसकी गोरी गर्दन और कमर को hi देख रहा था क लिफ्ट रुक गयी और वो बहार निकल गयी . उसके पीछे मैं भी बहार निकल गया. मैं रुपाली की हिलती कमर को तब तक देखता रहा जब तक वो नज़रों से दूर नहीं हो गयी.

अमित : मन में ) अब तो जल्दी hi इसकी गांड को बड़ा करना पड़ेगा . साली चैनल बाप बेटों दोनों से चुद रही है अब तो इसका वो हाल करूँगा क साली लैंड लेने क लायक hi नहीं रहेगी .

फिर मैं अंकल क पास चला गया. अंकल आंटी दोनों साथ में hi थे और डिनर क लिए मेरा वेट कर रहे थे . हमने साथ में डिनर किया और फिर घर को वापिस चल दिए .

घर आने क बाद अंकल तो ड्रिंक करने की वजह से जल्दी सो गए मगर आंटी शायद आज कुछ गरम ज्यादा hi गरम हो गयी थी . इस लिए रत में आंटी मेरे रूम में चली आयी. मेरा भी पानी नहीं निकला था और ऐसे में रत को लैंड चैन से सोने नहीं देता तो मैंने आंटी की छूट की प्यास अपने पानी से बुझा hi दी और फिर आंटी पुरसुकून हो कर अपने कमरे में वापिस चली गयी और मुझे भी चैन की नींद आ गयी. वर्ण मैं रत भर मोंटी और उसकी चुड़क्कड़ फॅमिली क बारे में hi सोचता रहता .

आज 3 चीज़ें अछि हुई थी पार्टी में मेरे लिए.

1 मोंटी की रिकॉर्डिंग बना ली थी मैंने

2 मोंटी की माँ को अपनी रंडी बना लिया था मैंने

3 मोंटी की चची का भी इंतज़ाम ऑलमोस्ट कर लिया था मैंने.



जो भी था मोंटी की चची किसी भी एंगल से उसकी चची लगती नहीं थी. साली उसकी भाभी लग रही थी अगर मेघा न बताती तो मुझे पर hi नहीं चलता. देखने में बहुत hi खूबसूरत थी और ऑंखें तो और भी प्यारी . पहली नज़र में तो मैं उसके हुसैन में hi खो गया था मगर उसका असली चेहरा सामने आते hi मुझे उससे नफरत सी होने लगी थी और उसी नफरत की वजह से मैंने सोच लिया क उसकी गांड का भुर्ता बना क रहूँगा. खैर अब इंतज़ार था तो बाद मेघा क फ़ोन का क कब वो रुपाली को राज़ी करती है . देखने में जितनी सिंपल और गंभीर वो लग रही थी उस हिसाब से तो वो ऐसा कभी मैंने वाली लग तो नहीं रही थी मगर जो उसकी सच्चाई सामने आयी तो यकीन हो गया क उसकी छूट और गांड में अब मेरा बाबू भाई अपना झंडा गाड़ क रहेगा.
 
अपडेट 115



अगले दिन सुबह मैं जब कॉलेज जाने क लिए रेडी हो रहा था तो नैना दीदी का फ़ोन आ गया

नैना दीदी : गुड मॉर्निंग क्या कर रहे हो?

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , कैसी हैं आप ? मैं तो बस कॉलेज क लिए रेडी हो रहा हूँ

नैना दीदी : मैं ठीक हूँ पर ये क्या तू फिर मुझे दीदी कह रहा है , कितनी बार कहा है मुझे अकेले में दीदी मत कहा कर

अमित : क्या करूँ दीदी अब आदत नहीं बदल सकती न . कहिये कैसे यद् किया इतनी सुबह?

नैना दीदी : मैंने तुझे इस लिए फ़ोन किया है क आज मुझे तुमसे मिलना है. तू 10 बजे क बाद हमारे कॉलेज क पास वाले रेस्टोरेंट में आ जाना .

अमित : मगर दीदी ....

नैना दीदी : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , तू आ रहा है तो मतलब आ रहा है.

अमित: ठीक है मैं आ जाऊंगा मगर काम क्या है?

नैना दीदी : काम कुछ नहीं बस तुझे आना है

अमित : ठीक है दीदी

नैना दीदी : सुन

अमित : हम्म्म

नैना दीदी : ी लव यू

अमित : ी लव यू तू

नैना दीदी : टाइम से आ जाना मुआहाह bye

अमित : bye

इसके बाद कॉल कट हो गयी . अब दीदी ने अचानक मुझे क्यों बुला लिया मैं ये सोचने लगा . खैर अब बुलाया है तो जाना तो पड़ेगा hi. उनका दिल भी तो नहीं तोड़ सकता वैसे भी उस दिन क बाद मैं उनसे मिलने नहीं जा सका . मैंने मोहित क साथ नाश्ता किया और जब कॉलेज जाने क लिए उसने कार में बैठने को कहा तो मैंने कह दिया मुझे आज थोड़ा काम से मौसी क घर जाना पड़ेगा इस लिए मैं बाइक पर hi कॉलेज गया . कॉलेज में चन्दर्कांता और मंजू म का लेक्चर अटेंड कर क मैं नैना दीदी से मिलने चला गया . दीदी क बताये हुए रेस्टोरेंट पर पहुंचा तो देखा नैना दीदी क साथ उनकी फ्रेंड ज्योति भी बैठी हुई थी. मुझे देखते hi नैना दीदी और ज्योति दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी. मगर मैं सोचने लगा क ज्योति क्या कर रही hi नैना दीदी क साथ ? मैं जैसे hi उनके पास गया तो नैना दीदी उठ कर मुझे गले मिली

नैना दीदी : आ गए तुम ? मैं कब से इंतज़ार कर रही थी . एक तो तुम्हारे पास टाइम नहीं होता मुझसे मिलने का और मैं तड़पती रहती हूँ.

ज्योति : ये तो बहुत गलत बात है अमित तुम मेरी फ्रेंड को इतना क्यों सताते हो ? देखो बेचारी कितना मिस करती है तुम्हे.

ज्योति की बात सुनके मैंने उसे देखा और नैना दीदी का हाथ पकड़ते हुए कहा

अमित : तो आज फिर से कोई टेस्ट लेने आयी हैं आप ? मगर अब मैं कोई टेस्ट नहीं देने वाला

ज्योति : ी ऍम सॉरी उस दिन जो भी हुआ वो मेरी गलती थी . एक्चुअली वो हम सब नैना क इतने हैंडसम बर्फ होने पर यकीन नहीं कर प् रहे थे तो वो गलती कर बैठे. मैं सच में शर्मिंदा हूँ तुम प्लीज मुझे माफ़ कर दो . मैं नैना से भी कई बार माफ़ी मांग चुकी हूँ.

ज्योति जिस तरह से बात कर रही थी मैं समझ गया क उसने उस दिन आइस क्रीम पार्लर वाली बात नैना दीदी से नहीं की होगी. ज्योति की आँखों में भी एक तड़प सी थी जो मुझे कुछ कह रही थी. उस दिन क बाद से मेरी न तो ज्योति से मुलाकात हुई थी और न hi उससे फ़ोन पर कोई कांटेक्ट था.

अमित : it’s ok फ्रेंड्स में ऐसा होता रहता है. अगर नैना ने तुम्हे माफ़ कर दिया है तो मैं भला क्यों नाराज़ होऊंगा . वैसे भी इतनी अछि दोस्त को थोड़ा बहुत तंग करने का हक़ तो होता hi है.

मेरे ऐसा कहने से ज्योति क चेहरे पर स्माइल आ गयी.

नैना दीदी : बिलकुल सही ज्योति मेरी बहुत अछि दोस्त है और उस दिन क बाद मैं इससे नाराज़ हो गयी थी मगर इसने भी मुझे नहीं छोड़ा और मन hi लिया. मैंने सोचा आज मैं तुम्हे भी इससे मिलवा hi दूँ बेचारी कब से तुमसे माफ़ी मांगने का कह रही थी.

अमित: माफ़ी की कोई ज़रूरत नहीं है जैसे ये तुम्हारी दोस्त है तो मेरी भी दोस्त हुई न.

ज्योति : दोस्त नहीं साली कहिये जीजा जी . अब नैना आपको अपना सब कुछ मानती है तो उस रिश्ते से मैं आपकी साली हुई न.

ज्योति क इस तरह मुझे जीजा जी कहने से मेरे अंदर अजीब सी फीलिंग आयी और नैना दीदी का चेहरा भी शर्म से लाल हो गया .

अमित: नहीं नहीं ये सब नहीं चलेगा , वे अरे फ्रेंड्स इसे बस फ्रेंड्स तक hi रहने दो . दोस्ती से ाचा कोई रिश्ता नहीं वैसे भी अभी हमारे पड़े क दिन हैं .

ज्योति : वैसे मैं तो एक तरह से तुम्हारी साली हूँ न , तो मेरा कुछ तो हक़ बनता है तुम पर

अमित: वो तो है

ज्योति : तो फिर अपनी साली को भी थोड़ा सा टाइम दे दिया करो न

नैना दीदी : तुम फिर शुरू हो गयी

ज्योति : तो अब मैं मज़ाक भी नहीं कर सकती ? वैसे भी ये जीजा साली क बीच की बात है तुम चुप hi रहो .

ज्योति की इस बात से एक बार फिर नैना दीदी क गाल लाल हो गए.

नैना दीदी : तुम कुछ खाओगे ?

ज्योति : पूछ क्या रही हो आर्डर करो.

नैना दीदी मेनू देखने लगी और इधर ज्योति ने टेबल क नीचे से मेरे पाऊँ पर अपना पाऊँ रख लिया . मैंने ऑंखें बड़ी कर क उसकी तरफ देखा तो उसने मुझे स्माइल दी और अपने पाऊँ से मेरे पाऊँ को छेड़ने लगी . नैना दीदी क होते ज्योति मेरे साथ ऐसी हरकत कर रही थी और मेरा दिल घबरा रहा था की अगर दीदी ने देख लिया तो उनके दिल पे क्या बीतेगी. मगर ज्योति को भी कुछ कह नहीं सकता था उस दिन खुद hi तो उसे हाँ कह बैठा था मैं . खैर दीदी ने वेटर को आर्डर लिखा दिया और फिर वो हमसे बातें करने लगी. दीदी अपनी जगह से उठ कर मेरे साथ वाली चेयर पर बैठ गयी और मेरी एक बाजु जो सीने से लगा कर चिपक गयी.

ज्योति : नैना मन अमित तेरा बर्फ है पर अब ऐसे तो न कर न.

नैना दीदी : क्यों क्या किया मैंने?

ज्योति : यार ऐसे तू चिपक क बैठेगी तो दूसरों क दिल पे क्या बीतेगी ज़रा ये भी तो सोच

नैना दीदी : मुझे किसी की परवाह नहीं , वैसे भी यहाँ कौन देख रहा है ? हाँ तुझे जलन हो रही है तो तू जल बैठ क

नैना दीदी ने ज्योति को मुँह बना कर जवाब दिया और मेरी बाजु को और भी साइन से लगा लिया . मुझे उनके नरम नरम रुई क गोले अपनी बाजु पर महसूस हो रहे थे. ज्योति भी कहाँ काम थी उसने भी अपना पाऊँ मेरे पाऊँ से ऊपर बढ़ाना शुरू कर दिया . उसके पाऊँ की नरम स्किन जब मुझे अपनी तंग पर जीन्स क अंदर से महसूस हुई तो मुझे पता लगा क उसने अपनी जुटी उतर दी है. ज्योति धीरे धीरे अपना पाऊँ मेरी जीन्स क अंदर घुसती हुई मेरी जीन्स को ऊपर उठा रही थी और मेरी तंग पर अपने पाऊँ का नरम एहसास दे रही थी. मैंने उसे आँखों से ऐसा न करने का इशारा कर रहा था मगर वो कहाँ मैंने वाली थी. इतनी देर में वेटर हमारा आर्डर ले आया. वेटर क एते hi हम अपनी अपनी जगह सीधे हो गए.

चाऊमीन कोल्ड ड्रिंक और पिज़्ज़ा खाने क बाद नैना दीदी वाशरूम क लिए गयी तो ज्योति फ़ौरन उठ कर मेरे साथ आकर बैठ गयी

ज्योति : कहाँ गायब हो गए थे ? उस दिन क बाद से मैं कितनी बेचैन थी तुमसे मिलने क लिए और एक तुम हो क एक बार भी मिलने नहीं ए . मेरी तो छोडो तुम्हे नैना का भी ख्याल नहीं ? वैसे काम से काम अपना फ़ोन no. तो दे देते , उस दिन भी जल्दी जल्दी में रह गया और नैना से मैं मांग नहीं सकती .

अमित : देखो तुम अपनी जगह बैठो अगर नैना दी ... अगर नैना ने देख लिया तो वो गलत समझेगी . मैंने पहले भी तुम्हे खा था न . और मेरे पास टाइम नहीं होता नैना अछि तरह जानती है .

मेरे मुँह से फिर नैना दीदी निकलते निकट रह गया . मगर शुक्र है ज्योति ने भी ध्यान नहीं दिया और मैंने भी बात बदल दी.

ज्योति : तो तुम मुझे थोड़ा सा भी टाइम नहीं दे सकते ? प्लीज मैं ज्यादा कुछ नहीं मांग रही तुमसे

अमित : देखो मैं ये नहीं कह रहा क मैं बिलकुल भी नहीं मिलुंग पर तुम्हे भी समझना होगा क मैं टाइम नहीं निकल पता. जब भी टाइम मिलेगा मैं ज़रूर मिलूंगा. अभी तुम अपनी जगह पर बैठ जाओ

ज्योति : ठीक है मैं वेट करुँगी मगर अभी मुझे कुछ चाहिए

अमित : क्या ?

ज्योति : एक किश

अमित : तुम पागल हो गयी हो यहाँ पर कैसे ?

ज्योति : ऐसे

इतना कह कर जल्दी से ज्योति ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर एक किश कर दी. ये सब इतनी जल्दी हुआ क मुझे सोचने का भी टाइम नहीं मिला. ये कुछ सेकण्ड्स का hi था इतने में कोई देख भी नहीं पता. मगर मेरी धड़कने बाद गयी थी . मैं हैरानी से ज्योति का चेहरा देखने लगा.

ज्योति : ऐसे क्या देख रहे हो? कुछ ज्यादा नहीं माँगा मैंने. अब जल्दी से अपना फ़ोन no. दो मुझे

मेरे कुछ कहने से पहले ज्योति ने मेरा मोबाइल ले लिया और अपना no. डायल कर क मिसकॉल भी मर ली. उधर से नैना दीदी क आने की आहत हुई और ज्योति फिर से अपनी जगह पर पहुँच गयी.

नैना दीदी : चलो अब कहीं घूमने चलते हैं .

अमित : आज नहीं फिर कभी. मंडे से टेस्ट शुरू हैं इस लिए थोड़ा उस तरफ भी ध्यान देना है.

नैना दीदी क चेहरे पर मायूसी च गयी.

अमित : ाचा ऐसा करते हैं टेस्ट ख़तम होने क बाद हम मूवी देखने चलेंगे .

नैना दीदी : प्रॉमिस ?

अमित : प्रॉमिस

ज्योति : क्या मुझे जगह मिल सकती है अगर तुम दोनों को ऐतराज़ न हो तो

अमित : अगर नैना चाहे तो

मैंने जवाब देकर नैना दीदी की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर जैसे मेरे जवाब से नाखुशी थी जैसे क वो ज्योति को मन करना चाहती हो

नैना दीदी : मगर हम दोनों क साथ तुम बोर हो जाओगी .

ज्योति : हे हे हे , जस्ट जोकिंग , पता है मुझे तुम्हे अकेले में मस्ती करनी है अमित क साथ वैसे मैं भी जीजा जी क साथ अकेले मूवी देखने जाउंगी .

नैना दीदी : तुम फिर शुरू हो गयी .

ज्योति : अब इतना तो चलता है न यार क्या तू मुझे अपना नहीं मानती ?

ज्योति ने मासूम सा चेहरा बना कर इमोशन ब्लैकमेल का दो खेला.

नैना दीदी : पूछ लो अपने जीजा जी से अगर ये जाना चाहे तो.

नैना दीदी ने जान बुझ कर जीजा जी शब्द को दबाकर जवाब दिया. मुझे उनके इस रिएक्शन से हंसी आ गयी.

अमित: चलो वो सब बाद में देखेंगे . अभी चलते हैं.

मैं बिल देने काउंटर पर गया तो ज्योति पहले hi पैसे निकल कर बिल देने लगी

अमित : ये तुम क्या कर रही हो?

ज्योति : आज की ट्रीट मेरी तरफ से थी , नैना सा पूछ लो

अमित : पर मुझे ये ाचा नहीं लगता , मैं लड़का हूँ बिल मुझे hi देना चाहिए

ज्योति : धीरे से ) तो लड़कों वाली चीज़ दो न

ज्योति की बात का मतलब समझ कर मैंने नैना दीदी की तरफ देखा , शुक्र है उन्होंने सुना नहीं. बिल पाय कर क हम बहार निकले तो दीदी को कुछ यद् आया

नैना दीदी : मेरा ी कार्ड ? लगता है अंदर hi रह गया , ज्योति तुम यहीं ठहरो , अमित मेरे साथ आओ

मैं दीदी क साथ अंदर गया तो दीदी अंदर जिस टेबल पर हम बैठे थे उसकी बजाये मुझे वाशरूम की तरफ ले गयी .

अमित : टेबल तो उस तरफ है आप यहाँ किधर ले जा रही हैं?

दीदी मुझे वाशरूम क पास ले जाकर रुक गयी और बिना कुछ कहे मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. दीदी मेरे होंठ चूमने लगी और मैं भी बिना विरोध किये उनके शहद से रसीले होंठों को रास पीने लगा. हम जहाँ खड़े थे वहां कोई भी आ सकता था इस लिए मैंने किश जल्दी ख़तम कर दिया .

अमित : दीदी क्या था ये ? यहाँ कोई भी आ सकता है

नैना दीदी : क्या करूँ इतने दिनों बाद मिले हो तो कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. ज्योति न होती तो बताती तुम्हे .

अमित : मगर ये भी तो सोचिये अगर कोई देख लेता तो?

नैना दीदी : मुझे कुछ नहीं पता . मैं कितना तड़प रही हूँ तुम्हे नहीं पता अब टेस्ट ख़तम होने तक मैं किसे कण्ट्रोल करुँगी मुझे नहीं पता . हो सके तो बीच में चक्कर लगा लेना . तुम तो घर भी नहीं एते.

अमित : मैं जल्द hi आऊंगा अब चलें ?

नैना दीदी : चलो

एक बार फिर से नैना दीदी ने छोटा सा किश मेरे होंठों पर दिया और हम बहार आ गए.

ज्योति : मुस्कुराते हुए ) तो ी कार्ड मिल गया ? वैसे कुछ देर और भी मैं वेट कर hi सकती थी तुम दोनों क लिए .

ज्योति इशारों में बता रही थी क उसे सब पता है हम अंदर क्या कर क ए हैं. नैना दीदी क गाल फिर लाल हो गए .

नैना दीदी : ज्योति की बची तू ऐसे नहीं मानेगी.

नैना दीदी आगे बाद कर उसे मारने का ड्रामा करने लगी तो वो भी आगे से खिलखिला कर हसने लगी.

ज्योति : सरे मज़े तुम को और मैं बातों से भी मज़ा न लूँ ?

खैर दोनों की चुहल बाज़ी चलती रही मगर मैं दोनों से हाथ मिला कर वापिस चला आया. कॉलेज ख़तम होने वाला था तो मैं सीधा घर hi चला गया . उसके बाद शाम तक कुछ खास नहीं हुआ सब रूटीन से hi था प्रैक्टिस और फिर ट्यूशन. आज मंजू मम कुछ क़ुएस्तिओन्स सेट कर रहे थे कॉलेज में टेस्ट लेने क लिए अलग अलग क्लासेज क लिए .

अमित: लगता है आज आप कुछ बिजी हैं?

मंजू म : हाँ वो टेस्ट क लिए क़ुएस्तिओन्स से कर रही हूँ. अब तुम आ गए हो तो ये बाद में कर लुंगी . वैसे भी अब टेस्ट ख़तम होने तक तो बिजी रहने वाली हूँ.

अमित: नहीं बाद में आप फिर रत भर जगती रहेंगी . आप अपना काम कीजिये मैं स्टडी करता हूँ , जहाँ ज़रूरत होगी पूछ लूँगा.

मंजू म : अरे ऐसी भी कोई बात नहीं है. मेरे लिए तुम ज्यादा इम्पोर्टेन्ट हो . ये काम तो होता रहेगा .

अमित : नहीं , मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आप किसी भी मामले में डिस्टर्ब हों. आप बस अपना काम कीजिये .

मंजू म : ाचा ठीक है मगर कॉफ़ी तो बना सकती हूँ न ? या वो भी नहीं क्यूंकि मुझे उसकी इस समय बहुत ज़रूरत है .

अमित : नहीं आप बस अपना काम कीजिये कॉफ़ी आज मैं बनाऊंगा .

मंजू म : रियली ! तुम्हे कॉफ़ी बनानी आती है ?

अमित: हाँ बस चाय बनाने जैसा hi तो है और चाय बनाई मुझे अछि तरह अति है.

मंजू म : तो आज फिर मुझे चाय hi पिलाओ , मैं भी तो देखूं कैसी चाय बनाते हो .

अमित : अभी लीजिये

उसके बाद मैं किचन में गया और जल्दी से चाय बनाने लगा . चाय बना कर में 2 कप में दाल कर मम क पास ले गया . मम ने चाय की एक दो चुस्कियां ली मगर कोई रिएक्शन नहीं दिया

अमित: क्या हुआ चाय अछि नहीं लगी?

मंजू म : बहुत hi अछि है , अब तो तुम्हारे हाथों की चाय भी पिया करुँगी वर्ण तो कॉफ़ी hi पीती हूँ. पहले पता होता तुम इतनी अछि चाय बनाते हो तो अभी तक इसे मिस नहीं करती

अमित: कोई बात नहीं अब से रोज़ मैं hi चाय बना कर पिलाया करूँगा आपको.

चाय पिने क बाद मैंने कुछ देर स्टडी की . अभी मैंने किताबें बंद hi की थी क मेरा फ़ोन बजने लगा . मोबाइल पर देखा तो राधा का फ़ोन था

अमित: hello राधा इस वक़्त कैसे यद् किया ?

राधा : रट हुए )अमित जल्दी आओ माँ को कुछ हो गया है

ये सुन कर मेरे पाऊँ क नीचे से ज़मीन hi खिसक गयी

अमित : क्या हुआ मौसी को ?

राधा : रट हुए ) पता नहीं न बेहोश हो गयी है और यहाँ पास में कोई डॉ भी नहीं है. मुझे बहुत दर लग रहा है माँ को कुछ हो तो नहीं जायेगा ? प्लीज कुछ करो जल्दी आओ.

अमित: मौसी को कुछ नहीं होगा , हौंसला राखो मैं आ रहा हूँ.

इतना कह कर मैंने फ़ोन कट किया और जल्दी से बहार निकलने लगा. राधा की लगी हुई बात सुनके मैं हिल गया था और उसका रोना मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. दिव्या मौसी चाहे मेरे साथ कैसी भी हो मगर वो मेरी माँ की जुड़वाँ थी यानि उनकी कॉपी और राधा की माँ. मुझे एक पल भी गवाना मंज़ूर नहीं था और मैं उड़ कर राधा क पास पहुँच जाना चाहता था.

मंजू म : क्या हुआ है अमित तुम्हारी आँखों में आंसू क्यों बह रहे हैं?

मुझे पता hi नहीं चला क कब मेरी ऑंखें बहने लगी थी .

अमित : मुझे जाना होगा मेरी मौसी की तबियत ठीक नहीं है

मंजू म : रुको मैं भी साथ चलती हूँ

अमित : नहीं मैं नहीं रुक सकता मुझे जाने दो

इतना कह कर मैं फ़ौरन भाग कर बहार आया और बाइक उठा कर निकल गया . मेरे दिमाग में बहुत साडी बातें चल रही थी. वहां राधा बेचारी अकेली थी और पता नहीं मौसी की कैसी हालत होगी . राधा ने कहा था क मौसी बेहोश हैं और वहां कोई डॉ नहीं . डॉ डॉ डॉ

. डॉ शब्द दिमाग में गूंजने लगा तो मैंने बाइक हॉस्पिटल की तरफ मोड़ ली . ये वही हॉस्पिटल था जो रस्ते में पड़ता था , जहाँ डॉ रीना जॉब करती थी. मैंने बाइक कड़ी की और भागता हुआ अंदर गया. किस्मत से डॉ रीना मुझे कॉरिडोर में hi मिल गयी.

अमित : डॉ प्लीज जल्दी चलिए मेरी मौसी की तबियत बहुत ख़राब है वो बेहोश हो गयी हैं.

डॉ रीना : कहाँ हैं वो ? क्या हुआ है उन्हें ?

अमित : वो अपने घर पर हैं और मुझे नहीं पता उन्हें क्या हुआ है आप प्लीज जल्दी चलिए.

डॉ रीना : एक मिनट मुझे अपना बैग तो लेने दो .

मैंने उनका हाथ पकड़ कर बहार ले जाना चाहा तो उन्होंने अपना बैग साथ ले जाने को कहा क्यूंकि उसमे उनका मेडिकल का सामान होगा. मैं तुरंत उनके ऑफिस से भाग कर बैग उठा लाया .

अमित: चलिए जल्दी कीजिये .

डॉ रीना बिना कोई सवाल किये मेरे साथ बहार आ गयी और आते आते नर्स को बात दिया क वो इमरजेंसी में जा रही हैं डॉ को बता देना.

मैंने बहार आ कर बाइक निकलने लगा

डॉ रीना : इस्पे जाना है ? अगर उन्हें हॉस्पिटल लेन की ज़रूरत पड़ी तो ?

अमित : मेरे पास बस यही है

डॉ रीना : मेरी कार से चलते हैं.

डॉ रीना ने अपने पर्स से कार की चाबी निकली और मुझे साथ बिठा कर चल पड़ी . मेरी बेकरारी देख कर उन्होंने भी कोई और बात नहीं की और बस मुझसे रास्ता hi पूछती रही. डॉ ने कार तेज़ चलाई और हम 15 मिनट में hi दिव्या मौसी क घर क बहार थे . मैंने जल्दी से भाग कर बेल्ल बजे तो एक मिनट से भी पहले राधा ने दरवाज़ा खोल दिया जैसे उसे पता था क मैं hi हूँगा गेट पर. राधा का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था मुझे देखते hi वो रट हुए मेरे गले से लग गयी.

राधा : देखो न अमित को क्या हो गया है , अगर माँ को कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा ? मैं माँ क बिना कैसे रहूंगी? प्लीज माँ को बचा लो वो आँखें नहीं खोल रही , वो मेरी किसी बात का जवाब नहीं दे रही .

अमित : मैं आ गया हूँ राधा मौसी को कुछ नहीं होगा मैं हूँ न तुम्हारे साथ

राधा को इस तरह रोटा देख कर मेरी भी आँखों से आंसू छलकने लगे . एक दर्द सा मुझे अपने सीने में महसूस हुआ . मुझे समझ नहीं आ रही थी क मैं राधा से क्या कहूं उसे कैसे चुप करवाऊं. मैंने उसे अपनी बाँहों में कास लिया जैसे उसका सारा दर्द मैं अपने अंदर समां लेना चाहता हूँ. शुरू से hi राधा को मैंने खामोश hi देखा था वो बहुत hi प्यारी और इनोसेंट थी. पता नहीं क्यों पर बचपन से hi मुझे सब बहनो सबसे प्यारी राधा hi लगती थी हालाँकि मौसी क मुझे नापसंद करने से राधा से मुलाकात तो हो नहीं पति थी पर कभी कभी जब सब एक साथ होते थे तो मैं राधा को देख कर मन hi मन खुश होता था. जब कभी राधा को मुस्कुराती देख लेता तो एक अलग सा सुकून दिल को महसूस होता था मगर आज वही राधा मेरे सीने से लगी रो रही थी और मैं उसे कुछ कह नहीं प् रहा था. मुझे कोई शब्द hi नहीं सूझ रहा था. मैंने बस उसे सीने से लगाए आंसू बहा रहा था . मैंने राधा क सर पर एक हाथ रखा और दूसरे से उसकी पीठ को सहलाने लगा. दिव्या मौसी किस हल में है उन्हें क्या हुआ है मैंने ये भी देखने की कोशिश नहीं की मुझे उस वक़्त बस राधा क hi आंसुओं ने जैसे बांध सा दिया था . शुक्र है क उस वक़्त में डॉ को साथ लेकर आया था और इस वक़्त उन्होंने hi सिचुएशन को संभाला

डॉ रीना : पेशेंट कहाँ है?

डॉ रीना क इस सवाल से मैंने राधा को हौसला देते हुए साइड पर किया.

अमित: आइये डॉ मौसी अंदर है

राधा का भी ध्यान डॉ रीना पर गया और उसके चेहरे पर उम्मीद की किरण नज़र आयी .

राधा : आइये मेरे साथ

राधा आगे चलते हुए डॉ रीना को मौसी क कमरे में ले गयी . मौसी बीएड पर बेहोश पड़ी थी डॉ रीना में मौसी का एग्जामिनेशन शुरू कर दिया .

डॉ रीना : उन्हें हुआ क्या है ? कब से ये ऐसी हैं ? क्या इन्हे कोई बीमारी है?

राधा : जी कल से माँ को बुखार था और आज जब मैं अपनी स्टडी करने क बाद माँ क पास आयी तो ये ऐसे hi बेहोश पड़ी थी . मैंने बहुत हिलाया माँ को पानी भी डाला मगर ये नहीं जगी. माँ को वैसे कोई भी बीमारी नहीं है .

डॉ रीना : ठीक है , मैंने चेक कर लिया है. उन्हें बहुत तेज़ बुखार है. शायद उसी की वजह से बेहोश हैं. एनीवे मैं अभी इंजेक्शन दे देती हूँ और कुछ मेडिसिन लिख देती हूँ . इन्हे आराम की ज़रूरत है. घबराने वाली कोई बात नहीं है. फिर भी एक बार कल इन्हे चेक करवा लीजियेगा.

डॉ रीना ने मौसी को एक इंजेक्शन लगा दिया और कुछ मेडिसिन्स लिख कर दी.

डॉ रीना : ये मेडिसिन इन्हे दे देना . ाचा अब मैं वापिस चलती हूँ. मुझे घर भी जाना है.

राधा : ऐसे कैसे , आप कुछ चाय ठंडा तो लो.

डॉ रीना : नहीं अभी मुझे देर हो रही है मुझे घर भी तो जाना है. अमित तुम चलो मेरे साथ और अपनी बाइक भी ले लेना.

मैं डॉ रीना क साथ बहार जाने लगा तो राधा आस भरी नज़रों से मुझे देखने लगी जैसे वो मुझे रुकने को कह रही हो. मैं राधा क पास गया और उसका हाथ थम लिया

अमित: फ़िक्र न करो मैं अभी वापिस आ जाऊंगा.

मेरे इतना कहने से hi राधा को तसल्ली हो गयी . राधा को छोड़ कर मैं डॉ रीना क साथ चल दिया . जब हम आये थे तो हमारे बिच कोई बात नहीं हुई थी क्यूंकि उस वक़्त मैं टेंशन में था मगर अब मैं रिलैक्स था . इस बार बात डॉ रीना ने हो शुरू की.

डॉ रीना : तो ये तुम्हारी मौसी हैं ?

अमित : जी , वो अब ठीक तो हैं न ?

डॉ रीना : अरे चिंता मत करो ये बस फीवर की वजह से हुआ है. वैसे तो मैंने जो इंजेक्शन दिया है उससे जल्दी hi उन्हें फरक पद जायेगा फिर भी अगर वो होश में न आएं तो चिंता मत करना क्यूंकि बॉडी में वीकनेस आ गयी होगी और अगर टेम्परेचर काम न हो तो ठन्डे पानी से पत्तियां कर देना फ़ोरेहेअद पर. मेडिसिन मैं अभी तुम्हे ले देती हूँ हॉस्पिटल से hi. एक बार कल चेक करवा लेना. वैसे मुझे तुमसे शिकायत है .

अमित: शिकायत ? कैसी शिकायत ?

डॉ रीना : भूल गए ? तुमने वडा किया था मेरे साथ कॉफ़ी पिने का ?

अमित: ओह ाचा आप उसकी बात कर रही हैं . वैसे मैं तो अगले दिन आया भी था मगर आप नहीं थी. आपको किसी ने बताया नहीं ?

डॉ रीना : हाँ पता चला था मुझे मगर उसके बाद तो आ सकते थे . मेरे पास तो तुम्हारा फ़ोन no. भी नहीं था वर्ण फ़ोन hi कर लेती .

अमित : मेरी गलती है , असल में मैं कुछ ज्यादा hi बिजी हो गया था. आप बताओ आप कब चलना चाहेंगी मैं टाइम निकल लूंगा.

डॉ रीना : अभी तो तुम अपनी मौसी का ख्याल रखो . होपफ़ुल्ली कल तक वो बेटर फील करेंगी अगर न हो तो मुझे फिर से दिखा देना या मैं साथ hi चल पड़ूँगी. वैसे तुम्हारी मौसी क घर तुम्हारी कजिन क इलावा कोई और क्यों नहीं था?

अमित : मौसा जी विदेश में हैं और राधा का कोई भाई बहिन नहीं है .

डॉ रीना : राधा बहुत क्यूट है और इनोसेंट भी . वैसे तुम्हारी कजिन तुमसे बहुत प्यार करती है. मैंने देखा था कैसे वो रट हुए तुमसे गले मिली हुई थी. भाई बहिन में बहुत प्यार है.

अमित : जी वो है hi ऐसी .

बातों बातों में हम हॉस्पिटल पहुँच गए और कार से उतर कर डॉ रीना क केबिन की तरफ गए. डॉ ने नर्स को भेज कर मेडिसिन मंगवा ली.

अमित : डॉ आपकी फी?

डॉ रीना : एक कप कॉफ़ी . बोलो कब डोज?

अमित : वो तो जब आप कहें मगर फीस तो आपको लेनी hi होगी.

डॉ रीना : यही फीस है मेरी. और बिल तुम दे देना मैं समझूंगी मुझे फीस मिल गयी.

अमित : आप ऐसे नहीं मानेंगी. चलिए कोई बात नहीं मैं अपनी तरफ से फीस दे क hi रहूँगा.

डॉ रीना : वो भी देख लेंगे. पहले मुझे अपना no. दो वर्ण फिर भूल जाओगे. काम से काम यद् तो दिला दूंगी न अगर भूल गए तो. और मेरा no. भी ले लो अगर किसी भी टाइम मेरी ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना मैं खुद पहुँच जाउंगी .

अमित : थैंक्स डॉ आप बहुत अछि हैं . खूबसूरत होने क साथ साथ भगवन ने आपको बहुत बड़ा दिल भी दिया है.

मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर डॉ रीना क चेहरे पर स्माइल आ गयी . उनका सुन्दर गोरा चेरा गुलाबी होने लगा. अपने बालों की एक लार को कण क पीछे करते हुए उन्होंने एक नज़र मुझे देखा मगर जैसे कुछ कहते कहते वो रुक गयी और फिर बोली.

डॉ रीना : मुझसे बड़ा दिल तो तुम्हारा है जो सबकी इतनी केयर करते हो. इसी लिए तो तुम मुझे अचे लगते हो.

अमित : जो खुद अचे होते हैं वो दूसरों को ाचा hi कहते हैं . एनीवे मम राधा परेशां हो रही होगी मुझे अब चलना चाहिए . मैं जल्द hi आपको आपकी फीस देने क लिए आऊंगा.

डॉ रीना : मुझे भी इंतज़ार रहेगा . और ज़रा संभल कर जाना .

हम दोनों ने एक दूसरे क no. लिए और मैं मेडिसिन ले कर अपनी बाइक से राधा की तरफ चल दिया . राधा ने खाना तो खाया नहीं होगा और दिव्या मौसी भी ठीक नहीं हैं तो कुछ बना नहीं होगा यही सोच कर मैंने रस्ते से खाना पैक करवा लिया . इसी बीच मंजू म का फ़ोन आया उन्होंने दिव्या मौसी क बारे में पूछा और मैंने उन्हें सब बता दिया. मोहित को भी मैंने फ़ोन कर क बता दिया क आज मैं घर नहीं आ पाउँगा , मौसी की तबियत क बारे में भी मैंने बता दिया . वो तो घर आना चाहता था मगर मैंने मन कर दिया . खाना ले कर मैं घर पहुंचा तो बेल्ल बजने से पहले hi राधा ने दरवाज़ा खोल दिया.

राधा : इतनी देर करदी आने में? मेरा दिल घबरा रहा था. माँ अभी तक वैसे hi बेहोश है.

अमित: चिंता मत करो डॉ ने कहा है क वो वीकनेस की वजह से बेहोश हैं. सुबह तक होश में आ जाएँगी. खाना तो खाया नहीं होगा तुमने ? ये लो मैं हम दोनों क लिए खाना ले आया हूँ. इसे जल्दी से बर्तन में दाल लो और डिनर करते हैं. मौसी की चिंता मत करो अब वो ठीक हो जाएँगी.

राधा मेरी बात सुन कर रिलैक्स हो गयी और मेरे हाथ से खाने का पैकेट ले लिया.

राधा : वैसे वो डॉ तो काफी यंग लग रही थी. तुम्हे कैसे जानती हैं वो ? तुम्हारा नाम ले रही थी .

अमित : वो किसी का एक्सीडेंट हो गया था तो मैं उसे उठा कर हॉस्पिटल ले गया था. और जिसकी गाडी को ज़बरदस्ती रुकवा कर मैं हॉस्पिटल पहुंचा था वो डॉ रीना hi थी बस तब उनसे जान पहचान हो गयी थी.

राधा : हम्म्म . तुम दूसरों क चक्कर में मत पड़ा करो अगर कहीं कभी तुम्हे कुछ हो गया तो?

राधा ने गंभीर हो क ये शब्द कहे तो मुझे पता चला क वो मेरी कितनी परवाह करती है. वैसे उसका मेरी केयर करना मुझे पहले भी फील होता था मगर शब्दों का असर अपना होता है

अमित: मुझे कुछ नहीं होगा मेरे साथ इतने लोगों की दुआएं जो हैं . अब जल्दी से खाना लगाओ और हम खाना कहते हैं. वैसे तुमने किसी और को फ़ोन किया या नहीं ?

राधा : नहीं , मैं बहुत दर गयी थी मुझे बस तुम्हारा hi ख्याल आया .

अमित : चलो ाचा किया वर्ण खामखाह सब टेंशन में पद जाते. सुबह तक मौसी ठीक हो जाएँगी.

राधा खाना ले कर किचन में चली गयी और एक प्लेट में दाल कर ले आयी . तब तक मैं दिव्या मौसी क पास जा कर बैठ गया था.

राधा : लो खाना खा लो

अमित : ये क्या एक hi प्लेट ? तुम्हारी कहाँ है?

राधा : मुझे भूख नहीं है.

अमित : ऐसे कैसे भूख नहीं है? चलो मुँह खोलो मैं अपने हाथों से तुम्हे खिलता हूँ.

राधा : नहीं मुझे भूख नहीं है

मैंने एक निवाला बनाया और राधा क मुँह क पास कर दिया.

अमित: मेरे हाथों से भी नहीं खाओगी ?

मेरे इतना कहते hi राधा जैसे कठपुतली सी मेरी तरफ देखती मुँह खोल कर खाना खाने लगी. राधा चुप चाप मेरी आँखों में देख रही थी और मेरा राधा को इस तरह देखना अलग लग रहा था. उसकी खामोश नज़रें बहुत कुछ कह रही थी मगर मैं उसकी नज़रों की भाषा से बचने की कोशिश कर रहा था. एक निवाला मैं राधा को खिलता और एक खुद खता. राधा बिना कुछ बोले बस मेरे हाथ से खाना कहती रही जब तक क प्लेट खली नहीं हो गयी.

अमित: रोटी तो ख़तम हो गयी , मैं लेकर ात हूँ

राधा : नहीं तुम बैठो मैं लायी

राधा किचन से और रोटी ले आयी और वो भी हमने साथ में खायी. उसके बाद राधा जूते बर्तन ले कर किचन में चली गयी . मैंने दिव्या मौसी का टेम्परेचर चेक किया तो वो अभी भी ज्यादा था . मैंने राधा से ठंडा पानी मंगाया और एक साफ़ कपडे की पट्टी बना कर मौसी क माथे पर पत्तियां करने लगा. राधा भी पास में hi बैठ गयी. राधा मौसी का एक हाथ अपने हाथ में पकड़ कर बैठी बैठी वहीँ बीएड पर लुढ़क गयी और मैं पता नहीं कब तक पत्तियां करता रहा मगर आखिर मुझे भी नींद आ hi गयी .

सुबह मोबाइल पर अलार्म टोन बजी तो मेरी आँख खुली मैंने जल्दी से अलार्म बंद किया . बीएड पर नज़र पड़ी तो राधा वैसे hi मौसी का एक हाथ पकडे मासूम बची सी लग रही थी सोते हुए. उसका चेहरा एक तरफ से बालो से धक् गया था मैंने वो बाल हाथ से कण क पीछे किये तो उसके मासूम चेहरे पर मेरी नज़रे कुछ देर क लिए जैम गयी. मैंने राधा को कुछ देर यूँ hi निहारता रहा . तभी राधा क चेहरे पर एक सुन्दर सी स्माइल आ गयी जैसे वो कोई ाचा सा ख्वाब देख रही हो. मैंने मौसी का टेम्परेचर देखा तो वो अब नार्मल लग रहा था . पट्टी अभी भी उनके माथे पर पड़ी थी. मैंने वो पट्टी हटाई और उठ कर वाशरूम में चला गया फ्रेश होने.

रत भर बीएड से तक लगा कर बैठा बैठा मैं सो गया था मगर अब बॉडी में रेस्टलेस फीलिंग हो रही थी. मैं फ्रेश हो कर वापिस आया तो राधा भी उठ चुकी थी . उसने मुझे देख कर एक प्यारी सी स्माइल दी.

राधा : गुड मॉर्निंग, तुम बैठो मैं अभी चाय बना कर लायी .

मेरे कोई जवाब देने से पहले hi वो स्माइल देती हुई मेरे पास से निकल गयी . मैं फिर से मौसी क पास बैठ गया . इतने में राधा चाय ले आयी और हम दोनों ने साथ में hi चाय पि.

राधा : तुम्हारी ऑंखें अभी भी लाल हैं. लगता है तुम रत भर सोये नहीं . अभी तुम कुछ देर सो जाओ वर्ण तबियत ख़राब हो जाएगी.

अमित : नहीं कॉलेज भी तो जाना है .

राधा : कुछ नहीं होगा एक दिन छुट्टी कर लेने से. वैसे भी तो कॉलेज से गायब रहते hi हो. मैं भी नहीं जा रही आज . अब तुम आराम करो मैं का को देखती हूँ . उन्हें भी उठा देती हूँ.



नींद तो मुझे भी आ रही थी . बॉडी को रेस्ट की ज़रूरत तो रहती hi है न . मुझे राधा ने अपने रूम में अपने बीएड पर सुला दिया और खुद मौसी क पास चली गयी . मुझे नहीं पता मैं कब तक सोता रहा . मगर मेरी नींद खुली एक धमाके क साथ.
 
अपडेट 116



मैं आराम से सो रहा था क किसी ने मुझे खिंच कर बीएड से निचे गिराया और मेरी नींद खुल गयी

अमित : आआह्ह ..

नीचे गिरने से मेरी कमर में चोट लग गयी थी जिससे एक कराह मेरे मुँह से निकल गयी . सामने देखा तो दिव्या मौसी गुस्से में आग बबूला कड़ी थी.

दिव्या मौसी : तेरी हिम्मत कैसे हुई राधा क साथ ऐसा करने की. जैसा बाप वैसा बीटा , निकल जा कमीने इसी वक़्त मेरे घर से. मैं जानती थी तू ऐसा hi कुछ करेगा. मेरी बीमारी का फायदा उठा कर गन्दी नज़र डालने आ गया मेरी बेटी पर. निकल जा इससे पहले मैं तुझे धक्के मर कर घर से निकल दूँ

अमित: मौसी जी हुआ क्या है आप क्यों इतना गुस्से में हैं ? आप बैठिये आपकी तबियत पहले hi ठीक नहीं है.

मौसी मेरे सामने गुस्से में कड़ी थी मगर चेहरे से पता चल रहा था क वो अभी भी कमज़ोर हैं.

दिव्या मौसी : ये ड्रामा बंद कर और निकल मेरे घर से. मेरी बेटी पर गन्दी नज़र रखता है ? मैं तेरा खून पि जाउंगी .

मौसी ने साइड में टेबल पर पड़ा फूल दान उठा कर मुझे मरना चाहा मगर उससे पहले hi शोर सुन कर रीता मौसी आ गयी और दिव्या मौसी का हाथ पकड़ लिया . रीता मौसी पता नहीं कब यहाँ आयी थी शायद राधा ने बुलाया होगा.

रीता मौसी : ये क्या कर रही है दिव्या तू ? तेरा दिमाग तो ठीक है? क्यों इसे मर रही है? क्या हुआ है?

दिव्या मौसी : क्या हुआ है ?? आपको नज़र नहीं आ रहा ? ये कमीना राधा क बीएड पर क्या कर रहा है और ये राधा क कपडे इसके पास क्यों पड़े हैं?

मैंने मौसी की बात सुनकर देखा तो बीएड पर राधा क कपडे पड़े हुए थे जो उसने रत में पहने हुए थे. शायद वो बाथरूम में नहाने गयी होगी मगर कपडे मेरे पास बीएड पर पड़े होने से मौसी ने गलत समझ लिया.

अमित : मौसी आप गलत समझ रही हैं , मैं तो बस यहाँ सो रहा था

दिव्या मौसी : बची नहीं हूँ मैं , बहार निकल अभी क अभी मेरे घर से वर्ण तेरा खून पि जाउंगी मैं

रीता मौसी : ये क्या बेहूदगी है दिव्या ? वो कह रहा है न क वो सो रहा था यहाँ . तू उसकी बात क्यों नहीं समझ रही ? तुझे दिख नहीं रहा वो अभी नींद से जगा है ? और मैं भी तो यहीं हूँ .

दिव्या मौसी : मुझे कुछ नहीं सुन्ना दीदी ये बहुत चालबाज़ है . मेरी बीमारी का फायदा उठा कर आ गया मेरी बेटी पर गन्दी नज़र डालने. जैसा बाप वैसा बीटा . इसे कह दी अभी क अभी निकल जाये मेरे घर से.

अमित : आप बार बार मेरे पापा का नाम ऐसे क्यों ले रही हैं ? क्या किया है उन्होंने ?

दिव्या मौसी : जा कर अपने बाप से hi पूछ लेना

रीता मौसी : दिव्या चुप कर , अमित तुम प्लीज दूसरे कमरे में चले जाओ

दिव्या मौसी : नहीं इसे मेरे घर से बहार निकालो

दिव्या मौसी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी और उनकी हालत भी अछि नहीं थी तो मैंने भी निकल जाना ठीक समझा . मगर जो कुछ दिव्या मौसी ने कहा वो मेरे दिल को चीयर गया. वो मेरे पिता जी पर इलज़ाम लगा रही थी जो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था वो जिस तरह मेरे पापा को गलत कह रही थी. मैं जल्दी से उठा और अपने शूज पेहेन कर तुरंत अपनी बाइक लेकर घर से निकल गया .

मेरे जाने क बाद रीता मौसी दिव्या मौसी से बात करने लगी .

रीता मौसी : तुझे हुआ क्या है ? किस लिए उस पर ऐसे गुस्सा करती रहती हो? और तू पवन क बारे में ऐसे गलत क्यों कहती हो ? क्या किया है उसने आज तुझे बताना होगा .

रीता मौसी : मैं कुछ नहीं बताने वाली .

इतने में राधा नाहा कर रूम में आ गयी शायद उसने भी शोर सुन लिया था.

राधा : क्या हुआ माँ आप चिल्ला क्यों रही थी?

रीता मौसी : कुछ नहीं बीटा तुम्हारी की तबियत ठीक नहीं है न तो थोड़ी चिड़चिड़ी हो गयी है. तुम्हारे कपडे यहाँ पर क्यों पड़े हैं ?

राधा : वो मैं नहाने गयी थी तो कपडे यहीं रख दिए थे

रीता मौसी : तुम्हे पता है न अमित यहीं पर था फिर तूने कपडे यहाँ क्यों रखे?

राधा : मौसी अमित तो सो रहा था तो मैंने यहीं पर कपडे रख दिए सोचा आ कर उठा लुंगी मगर बात क्या है ? अमित कहाँ है ?

रीता मौसी ने दिव्या मौसी की तरफ देखा जैसे पूछ रही अब क्या जवाब डौगी. दिव्या मौसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो रीता मौसी hi बोली

रीता मौसी : बीटा वो दूसरे कमरे में है.

राधा जब अमित को देखने क लिए दूसरे कमरे में गयी तो अमित वहां नहीं था फिर उसने किचन हॉल और सब तरफ देखा मगर अमित नहीं था. जब बहार निकल कर देखा तो बाइक भी नहीं थी. राधा को अमित का ऐसे अचानक चले जाना ठीक नहीं लगा. अभी थोड़ी देर पहले तो वो सो रहा था फिर ऐसे अचानक क्यों चला गया. राधा फिर से अपने कमरे अपनी माँ और मौसी क पास आयी

राधा : अमित तो कहीं नहीं है और उसकी बाइक भी बहार नहीं है.

रीता मौसी : शॉकेड ) मन में ) लगता है वो नाराज़ हो कर चला गया है . हो भी क्यों न दिव्या ने उसे इतना ज़लील जो कर दिया मगर दिव्या ऐसा कर क्यों रही है बेवजह उस पर गुस्सा करती रहती है. वो तो बेचारा यहाँ दिव्या का ख्याल रखने क लिए hi आया था .

रीता मौसी : शायद वो घर चला गया होगा तैयार होने क लिए .

राधा : ऐसे कैसे चला गया ? उसने तो नाश्ता भी नहीं किया. साडी रत माँ को पत्तियां करता रहा ठीक से सोया भी नहीं और ऐसे चला गया?

रीता मौसी : कोई बात नहीं बीटा वो फिर आ जायेगा तुम चिंता मत करो. जाओ तुम चाय बना लाओ

राधा : माँ आप चाय पियेंगी ?

रीता मौसी : हाँ पीयेगी क्यों नहीं ? तुम बनाकर लाओ.

राधा चाय बनाने चली गयी.

रीता मौसी : देखा ! क्या जवाब देगी अपनी बेटी को? उस बेचारे का इसमें क्या कसूर था? वो तो सो रहा था. सुन लिया न अपनी बेटी क मुँह से वो किस तरह साडी रत जगता रहा तुम्हारा ध्यान रखने क लिए और तू उसे ये सिला दे रही है? अब बता मुझे ऐसी कौन सी बात है जो तू उस पर बेवजह इतना गुस्सा करती रहती है? क्या किया था पवन ने जो तू उसका गुस्सा अमित पे निकलती है?

दिव्या मौसी : मुझे इस बारे में बात नहीं करनी दीदी और आपको मेरी कसम आप इस बारे में मुझसे सवाल मत पूछिए.

रीता मौसी : मुझे तो तू चुप करवा लेगी मगर राधा को क्या जवाब देगी जो तूने अमित क साथ किया ? राधा ने hi उसे बुलाया था कल रत जब तुम बेहोश हो गयी थी . वो बेचारा डॉ को साथ लेकर आया और खुद तेरी देखभाल की और तूने क्या किया उसके साथ? भूल मत क वो दामिनी का बीटा है . हमारी दामिनी का तेरी जान से प्यारी दामिनी का और तू उसके साथ ये सब कर रही है ? क्या जवाब देगी दामिनी को तू ? उसके इकलौते बेटे क साथ तू ऐसा सलूक करती है.

दिव्या मौसी : मैं क्या करूँ जब भी उसे देखती हूँ तो उसके बाप की शकल hi नज़र अति है मुझे काश उसकी शकल उसके बाप से न मिलती होती तो ऐसा नहीं होता.

रीता मौसी : देख दिव्या मुझे नहीं पटक तुम क्यों इतनी नफरत करती हो पवन से मगर जहाँ तक मैं जानती हूँ वो तो बहुत ाचा था. और अमित तो सब से ाचा है . वो सबका ख्याल रखता है सब से प्यार करता है फिर भी तू उसके साथ ऐसा करती है. मेरी बात मन सब भूल कर उसे अपना प्यार दे. वो बहुत प्यारा है एक बार उसे गले लगा कर तो देख तुझे दामिनी का एहसास न हो तो कहना.

इतने में राधा चाय ले आयी और रीता मौसी ने बात बंद कर दी. दिव्या मौसी भी मन में कहीं न कहीं गिलटी फील कर रही थी जो कुछ उससे हुआ. राधा क मुँह से सचाई सुन कर उसे अफ़सोस हो रहा था क उसने गलती करदी मगर उसका खुद पर काबू नहीं थी क्यूंकि उसे अमित में पवन hi तो नज़र अत था हालाँकि वो उसकी जान से प्यारी बहिन उसकी जुड़वाँ दामिनी का भी बीटा था. उसके अंदर पवन क लिए इतना गुस्सा क्यों है ये बात उसने कभी किसी को नहीं बताई और शायद कभी बता भी नहीं पायेगी. मगर राधा ने अगर कभी अमित का पक्ष लिया तो वो क्या करेगी ? राधा क सिवा उसकी ज़िन्दगी में और था hi क्या? पति तो उसे ठीक से मिलता भी नहीं था कभी कभी तो 2-2 साल तक उसकी शकल भी देखने को नहीं मिलती थी और दोनों में इतना प्यार भी नहीं था. दिव्या मन hi मन इसी उधेड़बुन में फांसी हुई थी क वो क्या करे.

इधर मैं दिव्या मौसी क घर से गुस्से में निकला , मुझे समझ नहीं आ रही थी क दिव्या मौसी ऐसा कैसे कर सकती हैं मेरे साथ . और ऊपर से वो पापा क बारे में गलत बोल रही थी . सब यही कहते हैं क मेरे पापा एक अचे इंसान थे तो फिर मौसी की उनसे नफरत की वजह क्या है? मेरा दिमाग सोच सोच कर ख़राब हो रहा था . इस बारे में न तो बाबा जानते हैं न hi कोई और फिर कैसे पता चल सकता है. राधा भी नहीं जानती वर्ण वो hi बता देती. मैं अपनी सोच में गम गुस्से से बाइक चलाता पता नहीं किधर का किधर निकल गया था. तभी मेरे फ़ोन पर लगातार कॉल आने लगी. मैंने देखा तो बाबा का फ़ोन था. मैंने खुद को शांत करते हुए फ़ोन उठा लिया .

विजय मां : कहाँ हो बीटा ? दिव्या क बारे में सुन कर हम उसका पता लेने यहाँ ए हैं तो पता चला तुम अभी अभी निकले हो. जल्दी से वापिस आ जाओ तुम्हारी माँ भी साथ आयी है.

अमित : बाबा मैं रत भर से वहीँ था , अभी मैं ज़रा काम से कहीं जा रहा हूँ . मैं नहीं आ पाउँगा

दूसरी तरफ से बाबा से माँ ने फ़ोन ले लिया.

गौरी ममी : जहाँ भी हो जल्दी वापिस आओ , इतने दिनों बाद तुमसे मिल रही हूँ और तू बहाने बना रहा है.

अमित : माँ मैं ज़रूरी काम से जा रहा हूँ

गौरी ममी : हमसे भी ज़रूरी है कुछ तेरे लिए ?

अमित : ठीक है माँ मैं अत हूँ.

मैं जाना तो नहीं चाहता था मगर अब माँ बाबा को कैसे मन करता . माँ की ज़िद क आगे मुझे झुकना hi पड़ा . मैं वापिस दिव्या मौसी क घर चल दिया. घर पहुंचा तो दरवाज़ा राधा ने hi खोला . माँ और बाबा दिव्या मौसी क पास उनके रूम में hi बैठे हुए थे .

राधा : ऐसे बिना बताये कहाँ चले गए थे? मैं तो नहाने गयी थी और तुम इतने में hi गायब हो गए. पता है मैंने अभी तक कुछ नहीं खाया . सोचा था तुम्हारे साथ hi खाउंगी मगर तुम्हे तो किसी की परवाह है hi नहीं .

अब मैं राधा से क्या कहता क मौसी ने मेरे साथ क्या किया है. बेचारी को तो पता भी नहीं क उसके पीछे क्या कुछ हो गया . मैंने भी राधा से इस बारे में कुछ कहना ठीक नहीं समझा .

अमित: मैंने सोचा घर जा कर तैयार हो क अत हूँ इसी लिए चला गया था .

राधा : ाचा हुआ मां ममी आ गए वर्ण तुम वापिस कहाँ एते और मुझे भूखा रहना पड़ता.

अमित : तुम भला क्यों भूखी रहती ?

राधा : इस लिए क मैंने तुम्हारे साथ hi नाश्ता करना था . साडी रत तुमने जग कर माँ की इतनी सेवा की है तुम्हे उसका इनाम तो मिलना चाहिए न.

अमित : इनाम तो मुझे पहले hi मिल गया है

राधा : कैसा इनाम ?

अमित : वो छोडो चलो अब पहले कुछ खा लो वर्ण भूखी रह जाओगी.

राधा : तुम बैठो मैं अभी खाना लेकर आयी.

शायद माँ को मेरे आने का पता चल गया था तो वो भी बहार आ गयी और एते hi मुझे अपने सीने से लगा लिया. माँ ने किसी छोटे बचे की तरह मुझे अपनी छाती से चिपका लिया .

गौरी ममी : तू आ गया बीटा . तुझे देखने क लिए तो ऑंखें तरस जाती हैं . अब जा क कलेजे में थान्कदक पड़ी है.

गौरी : मन में ) कितना सुकून मिलता है तुझे सीने से लगा कर ये क्या हो जाता है मुझे जब तुम मेरे पास होते हो. मेरे अंदर ये कैसी आग भड़कने लगती है . तुम कब मेरी इस आग को बुझाओगे ? मैं कितना तड़प रही हूँ कैसे बताऊँ ?

अमित: क्या माँ मैं अत तो हूँ हर हफ्ते फिर भी आप ऐसे कह रही हैं? मैं भला कब आपसे दूर हूँ.

गौरी ममी : तू नहीं समझेगा क मैं कितना तड़पती हूँ तेरे लिए. तू तो सिर्फ कामिनी और दीपिका से मिलने hi अत है घर . मेरा तो तुझे ख्याल hi नहीं.

अमित: आप ऐसा क्यों कह रही हैं ? मैं तो सबसे ज्यादा आप hi से प्यार करता हूँ.

इतने में मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने देखा तो मंजू म का फ़ोन था. वो मेरे कॉलेज न आने से थोड़ा परेशां हो गयी थी क कहीं मौसी क हालत ज्यादा ख़राब तो नहीं मगर मैंने उन्हें बता दिया क अब सब ठीक है . उनके साथ hi डॉ रीना का भी फ़ोन आ गया.

डॉ रीना : गुड मॉर्निंग. उठ गए या अभी भी सो रहे हो?

अमित: गुड मॉर्निंग ? अब तो 11 बज रहे हैं.

डॉ रीना : तुम्हे पहले भी फ़ोन किया था मगर तुमने उठाया नहीं इस लिए मुझे लगा तुम सो रहे होंगे . एनीवे अब तुम्हारी मौसी की तबियत कैसी है?

अमित : अब वो ठीक है बस कमज़ोरी है.

डॉ रीना : अगर तुम कहो तो मैं चेक करने आ जॉन? वैसे जो मेडिसिन मैंने दी थी वो दे देना जल्दी फरक पड़ेगा.

अमित : ठीक है . वैसे आपको आने की ज़रूरत नहीं है. वो अब ठीक हैं. वैसे अगर आप आना चाहें तो आ सकती हैं .

डॉ रीना : अगर हॉस्पिटल में ज़रूरी काम न होता ज़रूर चली अति . खैर तुम्हे अपना वडा तो यद् है न? फीस अभी बाकि है मेरी.

अमित: जी अछि तरह यद् है , मैं आज hi आपको अपनी फीस दे दूंगा .

डॉ रीना : रियली ? फिर तो मुझे भी तयारी करनी पड़ेगी. वैसे कब तक आओगे तुम?

अमित : तयारी किस बात की करनी है आपने ? कॉफ़ी पिने hi तो जाना है. आप तो वैसे hi इतनी खूबसूरत हैं आपको भला क्या ज़रूरत किसी चीज़ की.

राधा : इतनी भी नहीं हूँ जितना तुम कहते रहते हो. मुझे आने से पहल एक बार बात ज़रूर देना.

अमित : चिंता मत कीजिये वैसे मैं लंच क बाद hi आऊंगा.

डॉ रीना : ठीक है. मैं वेट करुँगी.

उसके बाद कॉल कट हो गयी. गौरी ममी मुझे ले कर सोफे पर बैठ गयी और अंदर से बाबा भी आ गए. मैं उठ कर उनसे गले मिला . राधा मेरे लिए खाना ले आयी . वो फिर से एक hi प्लेट में खाना लायी थी शायद रत की तरह वो मेरे साथ खाना चाहती थी मगर माँ बाबा को देख कर वो मायूस हो गयी और मुझे खाने की प्लेट देकर अपने लिए दूसरी प्लेट लेने चली गयी. मैं खाना खा रहा था तो इतने में रजनी मौसी भी आ गयी.

रजनी मौसी : क्या हुआ है दिव्या को? मुझे तो रीता ने फ़ोन कर क बताया (राधा से ) तुमने मुझे फ़ोन क्यों नहीं किया ? रत में hi मुझे फ़ोन कर देती मैंने आ जाना था. तुम लोग अकेले नहीं हो यहाँ , कुछ भी हो मुझे उसी वक़्त फ़ोन किया करो.

रजनी मौसी ने एते hi राधा को गले से लगा लिया और थोड़ा उससे नाराज़गी भी दिखने लगी. ऐसी hi तो थी रजनी मौसी सबसे बड़ी और सबका ख्याल रखने वाली. निधि दीदी भी उनके जैसी hi थी इसी लिए मेरी फेवरेट थी वो क्यूंकि वो मुझे सबसे ज्यादा प्यार जो करती थी.

राधा : मौसी मुझे कुछ समझ hi नहीं आ रहा था. माँ एक डैम से बेहोश हो गयी थी और यहाँ पास में जो डॉ है वो भी 6 बजे चला जाट है. मुझे और कुछ नहीं सुझा तो मैंने अमित को hi फ़ोन कर दिया. यही डॉ को लेकर आया था और साडी रत माँ को पत्तियां भी करता रहा बुखार काम करने क लिए.

रजनी मौसी ने राधा की पूरी बात सुन कर मुझे गले से लगा लिए और स्नेह से मेरे सर पर हाथ फिरते हुए बोली

रजनी मौसी : ये तो है hi सबसे प्यारा. कितना समझदार है मेरा बीटा . बिलकुल मेरी दामिनी जैसा है . वो भी ऐसे hi सबका ख्याल रखती थी और सबसे ज्यादा तो दिव्या से hi प्यार करती थी वो. ये तुम्हे बहुत ाचा किया बीटा जो दिव्या का ध्यान रखा . तुम्हारे होते मुझे अब इन दोनों माँ बेटी की चिंता नहीं.

राधा और रजनी मौसी से मेरे बारे में सुन कर माँ और बाबा को भी मुझ पर प्राउड फील हो रहा था.

अमित : मौसी जी मैंने वही किया जो मुझे करना चाहिए था. ये सब मैंने आप hi से तो सीखा है

रजनी मौसी : कितनी प्यारी बातें करता है . ये सब गौरी की परवरिश है , इसके लिए जितनी भी तारीफ करो काम है. दिव्या कहाँ है ज़रा उसका भी हल देख लूँ.

उसके बाद रजनी मौसी माँ और बाबा से मिल कर अंदर दिव्या मौसी का हल पूछने चली गयी. खाने क बाद हम सब बातें करने लगे . माँ मेरे साथ hi बैठी रही जबकि बाबा कभी अंदर कभी बहार आते जाते रहे. कुछ देर बाबा ने भी मेरे कॉलेज क बारे में बात की. दोपहर होते होते जब कॉलेज की छुट्टी का टाइम हो गया तो दिव्या मौसी क घर पर hi साडी पलटन इकठी हो गयी. हुआ ऐसा की सुबह कल्पना जब राधा को लेने आयी तो उसे दिव्या मौसी क बारे में पता चला और मुझे भी सोता हुआ वो देख कर गयी थी. इस लिए छुट्टी क बाद सब एक साथ आ गए .

कल्पना मोहित मीनल नेहा दीदी सब आ गए और उधर से नैना दीदी और करुणा दीदी भी सीधा इधर hi आ गयी. इतने लोग सब एक साथ आ जाने से ऐसा लग रहा था जैसे कोई पार्टी हो. सब लोग आ कर माँ बाबा रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी से मिले . लड़कियां तो अंदर दिव्या मौसी क पास hi बैठ गयी साडी राधा को साथ लेकर . मोहित मेरे पास आ गया.

मोहित : तू अभी तक ऐसे hi बैठा है ? तैयार भी नहीं हुआ? वैसे अब मौसी तो ठीक लग रही हैं.

अमित : हाँ अब वो ठीक हैं मैं भी देरी से उठा था इस लिए ऐसे hi हूँ अब तक.

मोहित : तू रत में hi बता देता तो हॉस्पिटल ले चलते

अमित : ज़रूरत hi नहीं पड़ी . डॉ को ले आया था मैं उसने ठीक कर दिया .

इतने में मीनल और कल्पना भी हमारे पास आ गयी.

कल्पना : तो उठ गए मिस्टर ? सुबह मैं आयी थी तो आराम से सो रहे थे. वैसे राधा ने बताया क तुम साडी रत जागते रहे. सच में यार तुम बहुत अचे हो .

‘ ये है hi ऐसा , सबका ख्याल रखता है . इसी लिए तो ये सबका फेवरेट है’

ये आवाज़ नैना दीदी की थी और उनके साथ hi करुणा दीदी भी थी.

करुणा दीदी : तो साडी रत पहरा देते रहे हो मौसी क पास. इसी लिए तो तुम्हे हम सब इतना प्यार करते हैं.

नेहा दीदी : हमारा भाई है hi सबसे प्यारा. भगवन करे हर जनम में तू हमारा भाई बने.

नेहा दीदी की इस बात पर मुझे बहुत प्यार आया . मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी ऑंखें छलक जाएँगी . मैंने आगे बड़के नेहा दीदी को गले लगा लिया.

रीता मौसी : नेहा बीटा मेरे साथ आओ हम जल्दी से लंच तैयार कर देते हैं सबके लिए .

कल्पना : नहीं आंटी जी अब हम घर जायेंगे . हम तो बस आंटी का पता लेने ए थे.

रजनी मौसी : ऐसे कैसे जाओगे? कोई कहीं नहीं जायेगा बिना खाना खाये .

रजनी मौसी का फरमान सबको मन्ना पड़ा. हम सब मिल बैठ कर यूँ hi बातें करते रहे . कल्पना मेरी माँ और बाबा से मिल कर बहुत खुश हुई और उनसे भी बातें करती थी रही. राधा भी खुश थी क हमारा पूरा ग्रुप मौसी का हल चल पूछने आया था. राधा नेहा दीदी ने रीता मौसी और रजनी मौसी क साथ मिल कर सब को खाना खिलाया . खाना खाने क बाद कल्पना मोहित और मीनल घर को निकल गए और रीता मौसी ने मुझे अकेले में बात करने क लिए बुलाया.

रीता मौसी : अमित देखो दिव्या ने राधा क कपडे तुम्हारे पास पड़े देख कर तुम्हे गलत समझ लिया था , तुम प्लीज उस बात को भूल जाओ. वो गुस्से में क्या कर बैठती है उसे खुद पता नहीं चलता.

अमित : इसमें मेरी क्या गलती थी मौसी जी? और वो बार बार पापा को भी गलत बोल रही थी आखिर क्या वजह है जो पापा को ऐसे गलत बोलती हैं?

रीता मौसी : एहि तो मुझे भी समझ नहीं अति क वो किस बात पर इतना गुस्सा है? मैं भी कितनी बार पूछ चुकी हूँ. बीटा वो सबसे ज्यादा दामिनी से hi प्यार करती थी और आज भी करती है. दामिनी क लिए भी दिव्या hi सबसे पहले थी. तुम प्लीज उस पर गुस्सा मत करो , वो गुस्से से खुद को चोट पहुंचा रही है . तुम्हे गुस्से में बोल तो देती है मगर मैं जानती हूँ वो अंदर अंदर रोटी भी रहती है क्यूंकि तुम hi तो आखिरी निशानी हो उसकी जान से प्यारी दामिनी की. काश क मुझे वजह पता होती उसके इस गुस्से की तो मैं कुछ करती भी. तुम प्लीज उसे माफ़ कार्डो और एक बार उससे बात करलो वर्ण वो अंदर hi अंदर रोटी रहेगी और तुम तो जानते हो उसकी हालत कैसी है . कहीं फिर से बीमार न पद जाये

अमित : मुझे भी बताइये क मैं क्या करूँ ? मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जब वो मेरे पापा क बारे में ऐसे बोलती हैं. देखा था न आपने कैसे मुझे बिस्टेर निचे फेंक दिया और क्या क्या नहीं कहा मुझे. मैं क्या आपको ऐसा लगता हूँ जो राधा पर गन्दी नज़र रखूँगा?

रीता मौसी : बीटा अब गुस्सा थूक भी दो , उसने जो कुछ किया वो गुस्से में किया . अगर तुम भी गुस्सा करोगे तो कैसे चलेगा. तुम्हे दिव्या में दामिनी नज़र नहीं आती? हम तो हमेशा परेशां हो जाते थे दोनों में से दामिनी और दिव्या के तलाशने में. वो तुमसे बहुत प्यार करती है बीटा बस उसने नफरत और गुस्से क निचे अपना प्यार दबा रखा है . देखा था न राधा क बर्थडे पर .

हम दोनों अभी बात hi कर रहे थे क राधा भी वहां चली आयी.

राधा : तुम यहाँ हो और मैं तुम्हे सरे घर में ढून्ढ रही हूँ. छत पर क्या कर रहे हो ? और मौसी आप भी यहाँ?

रीता मौसी : है वो बस हम थोड़ा ताज़ी हवा लेने आये थे.

राधा : ाचा अब निचे चलिए चाय बन गयी है .

रीता मौसी : हाँ चलो

हम सब ने मिलकर चाय पि और फिर मैं सबको बता दिया क मुझे काम है इस लिए जाना होगा तो रीता मौसी ने मुझे दिव्या मौसी से मिलने को कहा और खुद hi मेरा हाथ पकड़ कर उनके पास ले गयी

रीता मौसी : लो अब बात करलो वर्ण बाद में रोटी रहोगी. और अब अचे से बात करना मैं दरवाज़े पर hi हूँ

दिव्या मौसी : मुझे कोई बात नहीं करनी किसी से

रीता मौसी : मैंने कहा न बात करो अमित से और माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है . ये हमारा बीटा hi है बस प्यार से बात करलो इसे भी ाचा लगेगा.

इतना कह कर रीता मौसी बहार चली गयी और हम दोनों अकेले रह गए रूम में. हम दोनों hi खामोश थे , जहाँ मुझे दिव्या मौसी की कही गयी बातों पर गुस्सा था वहीँ शायद मौसी को भी अफ़सोस होगा क उन्होंने गलतफहमी में मुझ पर इतना गुस्सा किया . हम दोनों क दरमियान ये ख़ामोशी किसी मातम की तरह लग रही थी मुझे इस लिए मैंने वहां से जाने का hi फैसला किया और बहार को निकलने लगा तो मुझे जाता देख कर मौसी hi बोली

दिव्या मौसी : मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कार्डो. तुम राधा क बीएड पर पड़े थे और उसके कपडे देख कर मैं गलत समझ बैठी

अमित : आप ने ये सोचा भी कैसे मैं राधा क बारे में गलत सोचूंगा? राधा ने खुद hi मुझे वहां सोने को कहा था वर्ण मैं वहां नहीं सोता. आप मेरी माँ सामान हैं , आप चाहे मेरे साथ जो भी करें मैं गुस्सा नहीं कर सकता क्यूंकि आप में मैं अपनी माँ को देखता हूँ . वो कैसी थी ये तो मुझे यद् भी नहीं मगर आपको देखता हूँ तो सोचता हूँ वो आप जैसी hi होगी. मुझसे माफ़ी मांगने की आपको ज़रूरत नहीं है पर आप ने जो कुछ मेरे पापा क बारे में कहा वो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा. अगर उन्होंने आपके साथ कुछ गलत किया था तो मुझे बताइये और भगवन क लिए उन्हें माफ़ कर दीजिये क्यूंकि मत चुके लोगों क माफ़ कर देना चाहिए नहीं तो उनकी आत्मा भटकती रहती है , हाँ इतना ज़रूर कहूंगा क मुझे नहीं लगता क मेरे पापा गलत हो सकते हैं वर्ण मुझ पर भी उनका असर ज़रूर होता फिर भी अगर आप उन्हें माफ़ नहीं कर सकतीं और मुझे देख कर आपको उनकी बुराई यद् आ जाती है तो मैं कभी आपके सामने नहीं आऊंगा.

इतना कह कर मैं उनके रूम से बहार निकल गया और सबसे मिलने क बाद मैं बाइक उठा कर मोहित क घर चला गया क्यूंकि अब डॉ रीना से भी मिलने जाना था. घर आया तो आंटी ने मौसी की तबियत क बारे में पुछा . मैंने कपडे चेंज किये और डॉ रीना को फ़ोन करने क बाद उनसे मिलने क लिए चला गया. मैं सीधा हॉस्पिटल में hi गया क्यूंकि वो वहीँ पर थी और उन्होंने यहीं से साथ चलने को कहा था. मैं उनके ऑफिस में गया तो उनको देख कर हैरान हो गया. आसमानी रंग क सूट में वो क्या कमल लग रही थी . खुले हुए करलो बल जो पूरे स्याह काळा नहीं थे , बड़ी बड़ी ग्रे ऑंखें जो कहीं कहीं नीली सी लगती थी गोरा रंगा आकर्षक नैन नक्श मोतियों से दन्त और गुलाब से पंखुड़ियों से पतले होंठ जो कुदरती गुलाबी रंगत लिए थे. मैं तो उनकी खूबसूरती का hi कायल हो गया था और किसी से मिलने क मैनर्स भूल कर बस कहीं और hi खोया हुआ उन्हें देख रहा था. मेरा वही हल था जो किसी अप्सरा को देख कर किसी आम आदमी का हो सकता है.

डॉ रीना : ो hello कहाँ खो गए ? क्या हुआ ? ऐसे क्या देख रहे हो? पहली बार देख रहे हो क्या?

डॉ रीना क ऐसा कहने से मैं होश में आया और मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.

अमित : जी ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार hi देख रहा हूँ. आप सच में बहुत खूबसूरत हैं . इतनी खूबसूरत तो शायद इंद्र लोक की अप्सरा भी नहीं होगी.

मेरे ऐसा कहने से रीना का चेरा गुलाबी हो गया और एक मुस्कराहट उनके होंठों पर आ गयी, साथ hi नज़रें थोड़ी शर्म से झुक सी गयी .

डॉ रीना : झूठी तारीफ मत करो , मैं जानती हूँ मैं क्या हूँ. मैं तो बस सिंपल सी रहने वाली आम लड़की हूँ.

अमित: यही खूबी तो आपको और भी खूबसूरत और दूसरों से अलग बनती है. दिखावे की चीज़ें तो कुछ पल की मेहमान होती हैं मगर जो नेचुरल हो वो हमेशा रहता है.

डॉ रीना : मन में ) लगता है तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए वो फीलिंग है जो मेरे अंदर है . तुम वो क्यों नहीं कह देते जो मैं सुन्ना चाहती हूँ ? मेरा तो दिल कर रहा है खुद hi कह दूँ मगर दर लगता है क तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में.

डॉ रीना ने मन hi मन सोच रही थी और नज़रें झुकाये शर्मा रही थी . उन्हें इस तरह चुप देख कर मुझे लगा क शायद उन्हें बुरा लगा मेरा ऐसे खुल्लम खुला उनकी तारीफ करना.

अमित: आपको बुरा तो नहीं लगा मेरा इस तरह कहना? अगर आपको बुरा लगा तो मुझे माफ़ कर दीजियेगा

डॉ रीना ने इतना सुनते hi अचानक से नज़रें ऊपर कर क मेरी आँखों में देखा

डॉ रीना : इसमें बुरा लगने वाली क्या बात है? तुमने तो तारीफ hi की है और तारीफ भला किसे अछि नहीं लगती? मेरे ख्याल से हमें चलना चाहिए वर्ण कोई काम आ जायेगा फिर हमारा प्लान कैंसिल हो जायेगा और फिर एक बार मैं वेट करती रह जाउंगी ?

अमित : अछि बात है , चलिए चलते हैं.

मैं डॉ रीना क साथ हॉस्पिटल से बहार आ गया. मैं तो बाइक पर आया था इस लिए मैं डॉ रीना क साथ hi उनकी कार की तरफ चलने लगा तो वो रुक गयी .

अमित : क्या हुआ ? कुछ यद् आ गया ?

डॉ रीना : नहीं , मैं कभी बाइक पर नहीं बैठी क्या तुम मुझे अपने पीछे बिठा सकते हो?

अमित: आप बाइक पर जाना चाहती हैं ? अगर किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा?

डॉ रीना : कोई क्या सोचेगा ये हम क्यों सोचें? चलो आज मुझे अपने पीछे बिठा कर बाइक का एक्सपीरियंस दे hi दो.

अमित: अगर आप यही चाहती हैं तो ठीक है . पर लोग कहीं ये न समझ ले क मैं आपका ....

डॉ रीना : क तुम मेरे बर्फ हो , यही न ? कोई सोचता है तो सोचने दो. वैसे भी तुम जैसा हैंडसम लड़का अगर किसी लड़की क साथ होगा तो लोग यही सोचेंगे चाहे वो कोई भी हो. अब लोग क्या सोचेंगे ये छोडो और चलो.

मैंने बाइक को किक मरी और डॉ रीना मेरे पीछे बैठ गयी. वो पहली बार बाइक पर बैठ रही थी इस लिए थोड़ा असहज थी और दोनों हाथों से मुझे बाज़ुओं से कास क पकड़ कर बैठ गयी. मैंने बाइक को काम स्पीड में चलन शुरू किया मगर उनके हाथ मेरे बाज़ुओं पर थे तो मुझे थोड़ा दिक्कत हो रही थी इस लिए मैंने उनके हाथ को पकड़ कर अपने कंधे पर रखा . उनके हाथ का टच इतना कोमल था क मन में एक अलग सी फीलिंग महसूस हुई.

अमित : घबराइए मत मैं आपको गिराऊंगा नहीं , आप थोड़ा रिलैक्स हो कर बैठिये. देखिये दूसरों की तरफ कैसे आराम से बैठी हैं बाइक क पीछे.

मैंने रोड पर जा रही दूसरी बाइक की तरफ इशारा करते हुए उन्हें कहा. कूचे लड़के लड़कियां बाइक पर जा रहे थे . पीछे बैठी कुछ लड़कियां तो लड़कों की तरह बैठी थी अपने बर्फ क साथ और कुछ एक तरफ को दोनों टाँगें किये लड़कियों की तरह hi बैठी थी.

डॉ रीना : मैंने जीन्स पहनी होती तो वैसे hi बैठ जाती.

डॉ रीना ने उस लड़की की तरफ इशारा किया जो लड़कों की तरह बैठी थी .

अमित: अरे उसकी बात नहीं कर रहा , वहां देखिये जैसे वो लड़की बैठी है . उसने भी सूट hi पहना है और देखो कितने आराम से बैठी है.

मैंने दूसरी लड़की की तरफ इशारा किया जो सूट में थी और लड़कियों की तरह बैठी थी . उसका एक हाथ उसकी गॉड में रखे पर्स पर था और दूसरा लड़के की कमर पर. डॉ रीना ने उस लड़की को देखा जो शायद अपने बर्फ क साथ थी .

डॉ रीना : तुम चाहते हो मैं भी वैसे hi बैठूं ?

मेरे कोई जवाब देने से पहले डॉ रीना ने मेरे कंधे से हाथ हटा कर मेरी कमर से लपेट ते हुए मेरे पेट पर रख दिया.

डॉ रीना : अब ठीक है?

डॉ रीना क इस तरह बैठने से वो मेरे साथ चिपक गयी थी और मुझे अपनी पीठ पर उनकी वो नरम गोलियां महसूस हो रही थी .

अमित: वैसे इतना भी कास क पकड़ने की ज़रूरत नहीं आप आराम से बैठ सकती हैं.

डॉ रीना : नहीं ऐसे hi ठीक है , मुझे दर भी नहीं लगेगा.

खैर हम चलते हुए थोड़ी देर में hi साफ कॉफ़ी डे पर पहुँच गए . हम दोनों एक साथ एंटर हुए तो अंदर का नज़ारा भी ऐसा था जैसे ये लवर्स पॉइंट हो. हर तरफ लड़के लड़कियां hi नज़र आ रहे थे. मतलब क बर्फ गफ , सब आपस में क्लोज हो कर बैठे थे. कपड़ों से hi लग रहा था क सब कॉलेज स्टूडेंट्स होंगे. हम दोनों साथ चलते एक कार्नर वाली तवो चेयर टेबल सेट पर बैठ गए.

बाकि सब की तरह हम भी कपल hi लग रहे थे. डॉ रीना क गाल तो जैसे टमाटर जैसे लाल हुए जा रहे थे अपने आसपास का माहौल देख कर. वो शर्मा कर नज़रें झुकाये बस मुस्कुरा रही थी.

अमित: तो कहिये मैडम आपकी क्या सेवा करूँ ?

डॉ रीना : जो तुम्हारा दिल करे , वैसे कॉफ़ी क साथ सैंडविच ठीक रहेगा

मैं उठ कर काउंटर पर चला गया क्यूंकि यहाँ सेल्फ सर्विस थी तो खुद hi लाना था. 5 मिनट्स में hi मैं कॉफ़ी और सैंडविच ले कर रीना क पास आ गया. डॉ रीना तो पास में बैठे कपल्स को hi देखे जा रही थी.

अमित : ये लीजिये मम आपकी कॉफ़ी और सैंडविच

डॉ रीना : ये क्या मम मम लगा रखा है? मैं तुम्हे अपना दोस्त मानती हूँ पर लगता है तुम मुझे अपना दोस्त नहीं मानते ?

रीना ने मुँह दिलाते हुए कहा

अमित : आप इतने रेस्पेक्टेड प्रोफेशन से हैं क खुद hi मुँह से ये शब्द निकल एते हैं. लोग तो डॉ को भगवन मानते हैं तो ये स्वाभाविक hi है. अगर आप चाहती हैं क मैं दोस्तों की तरह आपको ट्रीट करूँ तो जैसी आपकी मर्ज़ी.

डॉ रीना : मैं डॉ लोगों क लिए हूँ तुम्हारे लिए नहीं. मैं चाहती हूँ तुम मुझे मेरे नाम से बुलाया करो.

अमित : ठीक है आज से मैं आपको आपके नाम से hi बुलाऊंगा. मतलब तुम्हारे नाम से .

रीना : आज तुम्हारे साथ यहाँ आ कर मुझे बहुत ाचा लग रहा है. वैसे तो ऐसे कभी कभी अति रहती हूँ मगर आज कुछ अलग है .

अमित : आज क्या अलग है?

रीना : मैं कभी किसी खास क साथ ऐसे नहीं आयी इन फैक्ट ये पहली बार hi है.

रीना क चेहरे पर अलग hi भाव नज़र आ रहे थे. उसके होंठों पर स्माइल , गालों पर हटा की लाली और आँखों में कुछ अनकहे ख्याल थे.

अमित: मैं समझा नहीं, तुम तो इतना पड़ी लिखी हो और अब डॉ भी हो तो लड़कों क साथ तो तुम पहले भी आ चुकी होगी न?

रीना : दोस्तों क साथ कॉलेज में कभी कभी आ जाती थी मगर स्टाफ क साथ ऐसे नहीं जाती मैं कहीं . हाँ कोई पार्टी वगैरह पर जाना पड़े तो वो अलग बात है.

अमित : तो फिर मेरे साथ अलग कैसे है?

रीना : तुम समझे नहीं ?

रीना ने मेरी आँखों से ऑंखें मिलते हुए कहा.

रीना : तुम मेरे लिए बहुत खास हो . तुम बहुत अचे हो. अब तक मैं जितने भी लड़कों से मिली हूँ उनमे तुम सबसे अचे , सबसे प्यारे हो.

रीना :(मन में) मैं कह क्यों नहीं प् रही जो कहना चाहती हूँ ? प्लीज तुम खुद hi समझ जाओ न क मैं क्या कहना चाहती हूँ. मेरी ज़िन्दगी में तुम वो पहले लड़के हो जिसे देख कर मेरा दिल मेरे बस में नहीं रहा और अब तुम्हारा हो चूका है.

अमित : आप खुद hi इतनी अछि हैं क आपको हर तरफ अच्छी hi नज़र अति है . मैं तो एक ऍम लड़का हूँ मुझमे कुछ खास नहीं है .

रीना : हीरे को खुद नहीं पता होता क वो क्या है. तुम क्या हो मैं अछि तरह जानती हूँ. एक बात कहूं अगर तुम बुरा न मनो तो?

अमित : इसमें पूछने वाली क्या बात है? आप जो कहना चाहती हैं कहिये मैं बुरा नहीं मानूंगा वैसे भी हूँ अब दोस्त हैं तो बेजिझक कहिये.

रीना : मैंने कभी किसी लड़के को अपने इतना करीब महसूस नहीं किया जितना की तुम्हे. अगर तुम दे सको तो कभी कभी जब भी तुम्हे ठीक लगे तुम मुझे अपना थोड़ा टाइम दे सकते हो ? मैंने कभी किताबों क बहार निकल कर देखा hi नहीं था मगर अब मैं वो सब मिस करती हूँ. मैं चाहती हूँ क मैं तुम्हारे साथ ज़िन्दगी को थोड़ा जी सकूँ. घर और हॉस्पिटल क बिच जैसे अब कुछ मुझे नज़र hi नहीं अत. कभी कभी बोर हो जाती हूँ लाइफ से.

अमित : लो बस इतनी सी बात. आज से हम दोस्त हैं तो आपको बोर नहीं होने दूंगा. कॉलेज और दूसरे कामों में बिजी रहने क कारन टाइम तो ज्यादा नहीं मिल पता मगर इतना कर सकता हूँ क जब भी टाइम मिलेगा मैं ज़रूर मिलूंगा आपसे बशर्ते आपके पास टाइम हो .

रीना : तुम बस एक बार पहले बता दिया करना मैं एडजस्ट कर लुंगी.

रीना क चेहरे पर ख़ुशी देख कर मुझे बहुत ाचा लग रहा था. अगर हमारे थोड़े से वक़्त से किसी को ख़ुशी मिले तो इसमें हरा hi क्या है. किसी को ख़ुशी क 2 पल देना भी किसी पुण्य से काम नहीं होता . कहने को तो दुनिया की भीड़ हर तरह नज़र अति है मगर फिर भी लोग अकेले मायूस ज़िन्दगी से थके हरे जैसे वक़्त hi काट रहे हैं. ऐसे में किसी को थोड़ी सी ख़ुशी देना रेगिस्तान में प्यासे को पानी पिलाने जैसा है.

हम दोनों ने बातें करते करते कॉफ़ी और सैंडविच ख़तम किया और फिर से हॉस्पिटल की तरफ वापिस चल दिए . इस बार रीना रिलैक्स होकर बैठी थी . उसने मुझे कास क तो नहीं पकड़ा था मगर उसका हाथ मेरे पेट पर था और उसने अपना चेहरा मेरे कंधे पर रख लिया था मुझसे बात करते हुए. वो मेरे इतना करीब बैठी थी क उसकी खुशबु मुझे अपनी सांसों में घुलती महसूस हो रही थी. मेरी पीठ पर दबी हुई उन रुई क गोलों जैसी गोलियां की जैसे रीना को परवाह hi नहीं थी. हॉस्पिटल पहुँच कर जब मैंने बाइक रोकी तो वो वैसे hi बैठी रही.

अमित : हॉस्पिटल आ गया रीना जी

रीना : हम्म्म

अमित : मैंने कहा हॉस्पिटल आ गया है .

रीना : ओह ाचा , हम इतनी जल्दी कैसे पहुँच गए?

अमित : जल्दी तो नहीं ए , लगता है आप कहीं और hi गम थी.

रीना उतर कर मेरे सामने आयी तो जैसे उसके चेहरे पर अब थोड़ी मायूसी चाहने लगी थी.

अमित : क्या हुआ ?

रीना : कुछ नहीं. फिर कब आओगे ?

अमित : जैसे hi टाइम मिला तो आ जाऊंगा. वैसे आपको मिलना हो तो फ़ोन कर देना. मैं शाम को 8 बजे क बाद यहीं से निकल कर जाता हूँ

रीना : ठीक है , थैंक्स फॉर थे कॉफ़ी

अमित : इसमें थैंक्स कैसा. ये तो मैंने अपना वडा पूरा किया जो पहले किया था. अभी तो आपकी फीस भी रहती है वो अगली बार दूंगा.

रीना : फीस ? उसकी कोई ज़रूरत नहीं . एहि मेरी फीस थी.

अमित : आप जो चाहे कहिये मगर मैं तो दूंगा और आपको लेनी होगी. ाचा अब मैं चलता हूँ. एक बात और

रीना : हम्म्म

अमित : आप हस्ती हुई ज्यादा अछि लगती हैं इस लिए हस्ती रहा कीजिये.

मेरे इतना कहने से hi रीना क चेहरे पर स्माइल आ गयी और मैं बाइक घुमा कर निकल गया

रीना : ( मन में ) तुम्हारी यही सादगी और प्यारी बातें तो मुझे तुम्हारे करीब लती जा रही हैं. जाने तुम कब समझोगे. जल्द hi फिर तुम्हे आना पड़ेगा मुझसे मिलने . देखती हूँ कब तक नहीं समझोगे?

मैंने वापिस आ कर कपडे बदले और सैडियम चला गया प्रैक्टिस करने . आज कोच साहब ने सबको समझाया क टेस्ट की वजह से प्रैक्टिस बीच में मिस न की जाये क्यूंकि अगले महीने में कम्पटीशन भी आ रहा था अन्तर कॉलेज का जो दूसरे शहर में होना था. स्टेडियम से मैं सीधा मंजू म क पास गया. मेरे आते hi वो मुझसे दिव्या मौसी क बारे में पूछने लगी.

मंजू म : अब कैसी तबियत है तुम्हारी मौसी की? वो ठीक तो हैं न?

अमित : हाँ वो ठीक हैं बस एक डैम से बुखार ज्यादा हो गया था तो बेहोश हो गयी थी और राधा बेचारी घबरा गयी. अब वो ठीक हैं.

मंजू म : तुम आज कॉलेज नहीं ए तो मुझे फ़िक्र हो रही थी इसी लिए फ़ोन किया था. वैसे तुम कहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकती हूँ अगर तुम उधर जाने वाले हो तो.

अमित : नहीं अब मौसी ठीक है वैसे भी अब मेरी दूसरी मौसी आ गयी हैं उनके पास.

आज रीता मौसी दिव्या मौसी क पास रुकने वाली थी ये मुझे वहीँ पर पता चल गया था.

मंजू म : वैसे तुम्हारी मौसी की फॅमिली ने कौन कौन है?

अमित : मौसी और राधा hi हैं बस , मौसा जी तो विदेश में हैं.

मंजू म : फिर तो तुम्हारी उन्हें ज़रूरत पड़ती होगी . बेचारी माँ बेटी दोनों अकेली हैं यहाँ.

अमित : अब तो मेरी बड़ी मौसियां भी आ गयी हैं इस शहर में तो अब कोई दिक्कत नहीं है.

मंजू म : तुम्हारी कितनी मौसियां हैं ? तुमने बतया तो था मगर यद् नहीं

अमित : तीन मौसियां हैं मेरी. और तीनो इसी शहर में हैं.

मंजू म : ये तो अछि बात है. वैसे कभी मुझे अपनी फॅमिली से नहीं मिलवाओगे ?

अमित : बिलकुल मिलवाऊंगा . आप चाहें तो मेरे साथ मेरे गाओं चलिए.

मंजू म : ाचा ! वैसे क्या कह क मिलवाओगे मुझे उनसे ?

अमित : यही क आप मेरी टीचर हैं.

मंजू म : अब तो टीचर क साथ कुछ और भी हूँ न मैं , वो नहीं बताओगे ?

अमित: वो कैसे बता सकता हूँ मैं . आप खुद hi सोचिये वो क्या कहेंगे अगर उन्हें पता चला हमारे इस नए रिश्ते का .

मंजू म : मैंने इस बारे में बहुत सोचा है . मैं जानती हूँ क हमारी उम्र में जो अंतर है वो किसी रिश्ते क हिसाब से समझ अल्लोव नहीं करेगा. इस लिए तुम मुझे सबसे टीचर कह क hi मिलवा सकते हो. और इसके इलावा मुझे तुम वैसे hi अपने साथ रखना जैसा तुम चाहो.

अमित : चिंता मत कीजिये मैं आपको सब से मिलवाऊंगा और आपको अपनी फॅमिली का हिस्सा भी बनाऊंगा.

मंजू म की आँखों में पानी आ गया मेरी बात सुन कर .

मंजू म : मेरी किस्मत में परिवार का सुख नहीं है अमित . इसी लिए तो पहले मेरे भैया भाभी मुझे अकेला छोड़ गए और पति का सुख भी नसीब नहीं हुआ .

अमित : आप दुखी मत होइए . हमेशा वक़्त एक सा नहीं रहता. आपने जितने दुःख देखने थे देख लिए अब मैं आपको और दुखी नहीं होने दूंगा . वैसे आपने मुझसे सब कुछ पूछ मगर कभी अपनी फॅमिली क बारे में नहीं बताया. अगर आप को ऐतराज़ न हो तो मुझे अपनी फॅमिली क बारे में बताइये . जिस भाई को आप इतना यद् करती हैं आखिर उसके बारे में भी तो बताइये.

मंजू म: अब तो तुम hi मेरे लिए सब कुछ हो भला तुमसे मैं क्या छुपाउंगी . पहले मैं डर्टी थी अपने उन ज़ख्मो को दिखने से जिनका दर्द आज भी ताज़ा है मगर अब मेरे हर ज़ख़्म पर मलहम लगाने क लिए तुम्हारा प्यार है तो अब मैं तुम्हे सब बताउंगी . आओ मैं तुम्हे अपनी फॅमिली एल्बम दिखती हूँ और साथ साथ तुम्हे सबके बारे में बताती हूँ.

मंजू म मुझे अपने रूम में ले गए और ालमिरह से एक एल्बम निकल लिया. मेरे साथ बीएड पर बैठ कर वो मुझे अपनी तस्वीरें दिखने लगी. ये तस्वीरें उनके बचपन से शुरू हो रही थी. तस्वीरों में उनका बचपन था जिसके बारे में बताते बताते उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी थी .

मंजू म : ये मैं हूँ , ये मेरे पापा ये मेरी माँ. ये देखो ये हैं मेरे पन्नू भैया .

अमित : अरे ये तो बहुत पुराणी फोटो है और आप को तो गॉड में उठाया हुआ है आपके भाई ने.

मंजू म : हस्ते हुए ) हाँ भैया मुझे गॉड में hi खिलते थे. उनके लिए मैं hi उनका खिलौना थी और मेरे लिए वो घोडा बन जाये जाता करते थे. पता है मुझे कुछ भी चाहिए होता था न तो मैं जान बुझ कर रोने लगती और भैया मेरी हर बात पूरी करते.

अमित: फिर तो आपने अपने भाई का पूरा फायदा उठाया होगा

मंजू म : और नहीं तो क्या. पन्नू भैया मुझसे बहुत प्यार करते थे . ये देखो यहाँ . ये उनकी स्कूल की फोटो है . अगर तुम साधारण लड़कों की तरह होते तो ज़रूर पन्नू भैया जैसे hi दीखते.

अमित : ये कौन है इस तस्वीर में?

मंजू म : ये बड़े भैया हैं. तुम इन्हे नहीं जानते मगर इनके बच्चों को जानते हो.

अमित : क्या ये मोंटी क पापा हैं ?

मंजू म : शॉकेड )तुम्हे पता है ?

अमित : हाँ मैं जनता हूँ क आप उनकी बुआ हैं. मुझे बहुत पहले पता चल गया था. मैंने शीना को आपसे बात करते देख लिया था और उसकी बातों से पता चल गया क आप उसकी हुआ हैं.

मंजू म : फिर भी तुम मुझसे मिलते रहे?

अमित : पहले तो मैंने सोचा था क आपसे न मिलूं पर फिर मैंने गौर किया क उनसब क होते हुए भी अगर आप उनसे दूर हैं और उनसे बात भी नहीं करती तो इसका मतलब है आपका उनसे कोई रिश्ता है नहीं. और जो था वो पास्ट है. वैसे आपने जब सौतेले भाइयों की बात की थी तो मुझे कन्फर्म हो गया क आप उनके जैसी नहीं हैं और न hi उनसे रिश्ता रखती हैं.

मंजू म : तुमने ठीक कहा. वो इंसान रिश्तों की कीमत नहीं जनता . उसके लिए सिर्फ पैसा hi सब कुछ है. हालाँकि दूसरे भैया भी ऐसे hi थे मगर वो उतने भी बुरे नहीं थे . उनको बड़े भैया ने hi भड़काया था पन्नू भैया क खिलाफ. खैर वो भी अब नहीं हैं तो उनकी बात भी क्या करनी. वैसे तुम्हे सच में बुरा नहीं लगा था मेरे और शीना क रिश्ते क बारे में जान कर?

अमित : बताया न , बस थोड़ी देर क लिए बुरा लगा था . अब वो सब छोड़िये आप अपने भाई क बारे में बताइये .

मंजू म : तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है . वर्ण तुम्हारी जगह कोई और होता तो मोंटी और शीना की हरकत क बाद शायद मुझसे hi बदला लेता.

अमित : आप इतनी प्यारी हैं क कोई आप पर गुस्सा कर hi नहीं सकता. मेरा बस चले तो हर ख़ुशी आपके कदमो में दाल दूँ.

हम बात कर hi रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा. अंकल की कॉल आ रही थी , मैंने तुरंत फ़ोन उठाया.

अंकल : कहाँ हो बीटा ? कब तक आ रहे हो?

अमित: अंकल मैं ट्यूशन पर हूँ कहिये.

अंकल : बीटा मैं घर आ गया हूँ. रमा ने बताया क तुम्हारी मौसी की तबियत ठीक नहीं है तो हम उनका पता लेने जाना चाहते हैं. इस लिए जल्दी आ जाओ हम साथ में चलते हैं.

अमित : ठीक है अंकल मैं अभी आया.

इतना कह कर मैंने फ़ोन काट दिया .

मंजू म: कहाँ जा रहे हो?

अमित : वो मोहित क पापा का फ़ोन था अंकल आंटी मौसी क घर जाना चाहते हैं इस लिए मुझे बुला रहे हैं.

मंजू म: ठीक है .

अमित : अभी तो मैं जा रहा हूँ अगली बार यहीं से कंटिन्यू करेंगे .

मंजू म : ठीक है. ध्यान से जाना .



मैंने आगे बाद कर मंजू म को गले लगाया और एक किश उनके होंठों पर देने क बाद मैं वापिस चला आया मोहित क घर .
 
आज अपडेट आएगा भाई बस थोड़ा सा काम उसपे बाकि है
 
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