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अगले दिन हम जब कॉलेज गए तो नोटिस बोर्ड पर कल क कम्पटीशन जितने वालों क नाम लिखे हुए थे रिसल्ट क साथ. मैं और मोहित मेरा नाम देख कर खुश हो गए . हमारा कॉलेज ओवरआल पहले no. पर hi रहा था. कल जितने वाले सभी प्लेयर्स को प्रोफ व् से कांटेक्ट करने को कहा गया था इस लिए मैं सीधा उनके ऑफिस में चला गया.
अमित : मई ी के इन सर?
प्रोफ व् : अरे आओ आओ अमित बहार क्यों खड़े हो? मैं तुम्हारा hi वेट कर रहा था.
मैं ऑफिस में अंदर चला गया उनके पास एक दो लड़के खड़े थे जिनको उन्होंने बहार भेज दिया.
प्रोफ व् : कोंग्रटुलतिओन्स बीटा कल तुमने बहुत ाचा खेला.
अमित : थैंक यू सर सब कोच साहब की ट्रेनिंग और आपका आशीर्वाद है.
प्रोफ व् : बीटा ये सब तुम्हारी म्हणत है. वैसे एक बात बताओ क्या तुम उस लड़के को पहले से जानते थे उस बॉयज कॉलेज वाले लड़के को?
अमित : जी नहीं सर मैंने तो कल उसे पहली बार hi देखा था.
प्रोफ व् : क्या उससे तुम्हारी कोई बात हुई थी मैच से पहले ?
अमित : नहीं सर
प्रोफ व् : तो उसने ऐसा क्यों किया? उसे देख कर hi लग रहा था क वो खेल नहीं रहा वो तुम्हे चोट पहुँचाने की कोशिश कर रहा था . मैंने इसकी शिकायत की थी उनके कॉलेज क प्रोफेस्सोर्स थे और प्रिंसिपल सर को भी बताया था. वैसे अब तुम्हारा घुटना कैसा है?
अमित : ठीक हूँ सर इतना तो चलता hi है. हल्का सा दर्द है 2-3 दिन में चला जायेगा.
प्रोफ व् : अब तुम जाओ जैसे hi प्रिंसिपल सर बुलाते हैं तुम सब ऑफिस में जाना उनके पास वो सब से मिलना चाहते हैं.
मैं सर से मिलके अपनी क्लास में चला आया. चंद्रकांता म क्लास ले रही थी तो उन्होंने मुझे अंदर घुसने hi नहीं दिया. मैं चुपचाप बहार इंतज़ार करने लगा बेल्ल बजने का.
बेल्ल बजते hi चंद्रकांता म गयी और मंजू म आ गयी उनके साथ hi मैं भी क्लास में आ गया. मैं घुटने में दर्द की वजह से थोड़ा आहिस्ता चल रहा था तो मंजू म ने मुझे गौर से देखा और इसकी वजह पूछी . मैंने बता दिया क कल मैच में थोड़ी चोट लगी थी. मम मुझसे और भी बात करना चाहती थी मगर हम क्लास में थे तो इस लिए उन्होंने बात वहीँ छोड़ दी. वो ज़रूर पूछना चाहती होंगी क कल तो मैं आराम से चल रहा था दिर आज कैसे मैं ऐसे चल रहा हूँ. कल तो मैंने पैन किलर खाई थी पर आज नहीं खायी थी इस लिए आज दर्द महसूस हो रहा था. मम का लेक्चर अभी आधा hi हुआ था क पेओन मुझे बुलाने आ गया. मम ने भी मुझे जाने की इजाज़त दे दी पर उनकी नज़रों में चिंता और नाराज़गी मुझे नज़र आ रही थी.
प्रिंसिपल सर क ऑफिस क बहार हमारे कॉलेज क वो सब स्टूडेंट्स मौजूद थे जो कल कम्पीटीशन्स जीत कर आये थे . बॉयज क साथ गर्ल्स भी थी और उनमे एक लड़की मेरी क्लास की भी थी. मुझे देख कर उसने मुझे विश किया. इस लड़की को मैंने क्लास में देखा तो कई बार था मगर कभी बात नहीं की . वैसे भी मैं क्लास में किसी से बात नहीं करता था. वो लड़की देखने में अछि खासी लम्बी छोड़ी थी और चेहरे सपाट था किसी पेशेवर की तरह . मगर चेहरे पर स्माइल थी और देखने में भी खूबसूरत थी हालाँकि उसके फीचर आम लड़कियों की तरह नाज़ुक नहीं लग रहे थे.
लड़की : hi कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुमने गोल्ड मैडल जीता कल .
अमित : थैंक्स एंड सॉरी . क्या आप मुझे अपने बारे में बताएंगी? मुझे आपका नाम नहीं मालूम.
लड़की : मेरा नाम कल्पना है और मैं जुडो की प्लेयर हूँ कल मुझे भी गोल्ड मिला था. और तुम्हे सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है वे अरे क्लास मातेस . मुझे पता है तुम किसी से बात नहीं करते क्लास में.
अमित : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना सॉरी पर मैं किसी से बात इस लिए नहीं करता क यहाँ सब बड़े घरों क लोग हैं तो मैं थोड़ा उनसे दूर hi रहता हूँ क्या पता उन्हें मेरे साथ बैठने में कोई दिक्कत हो.
कल्पना : सब ऐसे नहीं होते. वो लोग जिन्हे पैसे का घमंड हो वो hi ऐसे होते हैं. वैसे अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो क्या हम अचे दोस्त बन सकते हैं ? खिलाडी होने क नाते हमारे बिच दोस्ती होने तो लाज़मी है.
अमित : आप ऐसे पूछ कर मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. हम आज से दोस्त hi हैं
हम दोनों ने हाथ मिलाया . हम बातें कर रहे थे क प्रिंसिपल सर बहार आ गए और सब को एक साथ खड़े कर क प्रिंसिपल सर प्रोफ व् और सब कोच आगे चेयर्स पर बैठ गए . सबकी ग्रुप फोटो ली गयी. प्रिंसिपल सर ने ओने बी ओने सब को आशीर्वाद दिया और कॉलेज का नाम ऐसे hi रोशन करने को कहा. उसके बाद मैं कल्पना से बात करता हुआ कैंटीन की तरफ hi जा रहा था क मुझे नेहा दीदी और राधा रस्ते में मिल गयी. दोनों क चेहरे पर टेंशन और गुस्सा था . मुझे देखते hi नेहा दीदी ने अपने चेहरे पर स्माइल लेन की ज़बरदस्ती कोशिश की
नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुम्हारा तो नाम आज नोटिस बोर्ड पर लगा हुआ है.
राधा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित
अमित : थैंक्स दीदी एंड थैंक्स राधा इससे मिलो ये है कल्पना मेरी क्लास मात है और जुडो प्लेयर . इसने भी कल गोल्ड जीता है. और कल्पना ये है मेरी नेहा दीदी और ये है राधा मेरी ....
राधा : hi कल्पना कोंग्रटुलतिओन्स
कल्पना : थैंक्स राधा .
नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना . तुम्हे आज तक कभी इसके साथ देखा तो नहीं ?
कल्पना : थैंक्स दीदी . देखेंगी कहाँ से आपका ये भाई क्लास में किसी से बात hi नहीं करता . इसे तो मेरा नाम भी नहीं पता था वो तो आज मैंने hi इसे बुला लिया. ये तो लड़कियों से भी ज्यादा शर्मीला है.
कल्पना की इस बात से राधा और नेहा दीदी हसने लगी. तभी किसी ने कल्पना को आवाज़ दे दी और वो फिर मिलने का कह कर चली गयी.
अमित : बात क्या है दीदी आज आपके चेहरे पर फिर से टेंशन है. आपने वडा किया था क आप आज बताएंगी.
मेरी बात पर नेहा दीदी अपने हाथ की उंगलियां मसलने लगी और सोचने लगी क अब क्या जवाब दें तो राधा बोल पड़ी
राधा : आप बताएंगी या मैं hi बता दूँ?
नेहा : मैं बताती हूँ तुम चुप रहो.
राधा क चेहरे पर मुझे गुस्सा नज़र आ रहा था जैसे वो नेहा दीदी क मन करने पर नाराज़ हो रही हो.
नेहा : पहले प्रॉमिस करो मैं जो कहूँगी वो मानोगे.
अमित : ऐसी क्या बात जिसके लिए आप पहले प्रॉमिस मांग रही हैं. आप बताती क्यों नहीं ऐसे आप मेरी टेंशन बड़ा रही हैं.
नेहा : पहले प्रॉमिस कर फिर बताउंगी
अमित : ाचा ठीक है प्रॉमिस
नेहा : वो क्या है न तुम तो जानते hi हो अब लड़कियों क पीछे तो लड़के आते hi हैं आशिकी करने बस कुछ दिनों से ऐसे hi 2 लड़के हम दोनों क पीछे एते हैं जब हम कॉलेज अति है और वापिस पर भी.
राधा : दीदी आप साफ साफ बताइये क वो लड़के आपको तंग कर रहे हैं. मैं बताती हूँ अमित
नेहा : तुम चुप रहो राधा मैं बात कर रही हूँ न
नेहा दीदी और राधा की बात सुनते मेरा खून खोलने लगा था और गुस्से से मेरी मुठियाँ खिंच गयी.
अमित : राधा तुम बताओ क्या बात है ? कौन हैं वो लड़के और क्या किया है उन्होंने?
राधा : वो...
नेहा : राधा
अमित : दीदी अब आप नहीं बोलेंगी मुझे सुनने दीजिये राधा तुम बोलो
राधा : कुछ दिनों से 2 लड़के हमें कॉलेज में फ्रेंडशिप करने को कह रहे थे. वो दोनों हमसे अलग अलग अकेले में मिलते थे पर अब वो कॉलेज क बहार भी हमारा रास्ता रोकने लगे हैं. अब तो वो दोनों साथ में होते हैं और गंदे गंदे कमैंट्स करते हैं. परसों एक ने तो दीदी का हाथ पकड़ लिया था और आज भी उसने रास्ता रोक कर गंदे कमेंट किये मुझे तो बोलने में भी शर्म आ रही है.
अमित : इतना कुछ हो गया और मुझे किसी ने बताया तक नहीं. क्या मुझे आप अपना नहीं मानती ?
राधा : दीदी ने मन किया था मैं तो कब से कह रही थी क तुम्हे बता दूँ.
अमित : दीदी आप मुझे अपना नहीं मानती या अपने भाई पर भरोसा नहीं था ?
नेहा : ऐसे मत कहो भाई तेरे सिवा मेरा और है hi कौन जिसे भाई कहूं. मैं नहीं चाहती क तुम पर कोई आंच आये पहले भी तुम्हारे साथ इतना कुछ हो चूका है.
अमित : आपके साथ इतना कुछ हो गया मेरे होते हुए ये जान कर क्या अब मुझे ाचा लग रहा है? क्या अपने नहीं सोचा एक बार भी मेरे बारे में क जब मुझे पता चलेगा तो मुझ पर क्या बीतेगी? मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी. राधा कौन हैं वो दोनों ? मुझे बताओ उनका नाम क्या है वो कौन सी क्लास में हैं.
राधा : वो दोनों फाइनल क स्टूडेंट्स हैं रिस्की और टोनी , मोंटी क साथी.
नेहा : देख अमित तू उन्हें कुछ नहीं कहेगा तूने वडा किया था तू मेरी बात मानेगा. तुमने उनसे लड़ाई झगड़ा किया तो वो फिर तुम्हारे साथ कुछ न कुछ करेंगे. हम उनकी शिकायत करते हैं प्रिंसिपल सर से तुम कुछ मत करना तुम्हे मेरी कसम.
अमित : दीदी !!!!!! आप ने मुझे कसम दे कर ाचा नहीं किया. वो घटिया लोग हैं प्रिंसिपल सर को शिकायत करने से कुछ नहीं होने वाला. लातों क भूत बातों से नहीं मानते . उनका इलाज मैं अचे से कर सकता हूँ.
नेहा : देख मैंने तुझे कसम दी है तू कुछ नहीं करेगा . तुमने उनसे झगड़ा किया तो मुझसे बात मत करना कभी.
अमित: दीदी आप उनको बचने क लिए मुझे कसम दे कर रोक रही हैं?
नेहा : नहीं भाई मैं तुझे रोक रही हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे भाई पर कोई एक आंच भी आये.
नेहा दीदी की आँखों में आंसू आ गए . मेरे लिए उनका प्यार देख कर मेरा भी मन भर आया और मैंने दीदी का हाथ अपने दोनों हाथो में थम कर उन्हें चुप करवाने की कोशिश की .
अमित : आप क्यों रो रही हैं? मैं उनसे लड़ाई झगड़ा न करूँ यही चाहती हैं न आप ? ठीक है मैं किसी से झगड़ा नहीं करूँगा. पर आप चुप हो जाइये. चलिए कैंटीन में चल कर कुछ कहते हैं आज तो पार्टी बनती है , आपका भाई जीत कर आया है.
मैं दोनों को साथ लेकर कैंटीन की तरफ बाद चला तो मेरी चल में बदलाव देख कर राधा ने मुझे रोका .
राधा : तुम ऐसे क्यों चल रहे हो? क्या हुआ है तुम्हे? कहीं चोट लगी है क्या? दिखाओ मुझे?
राधा क चेहरे ओर एक डैम चिंता क भाव उभर आये उसे मेरी बदली हुई चल से पता चल गया था. नेहा दीदी का इस तरफ ध्यान नहीं था और राधा क ऐसे बोलने से वो भी मेरी तरफ चिंता से देखने लगी.
अमित : कुछ नहीं वो मैच में थोड़ी सी चोट लग गयी थी घुटने पर ज्यादा कुछ नहीं है.
राधा : दिखाओ मुझे कितनी चोट लगी है . तुमने पट्टी करवाई क नहीं? डॉ को दिखाया था? दवा ली क नहीं?
महा : तुमने बताया क्यों नहीं क तुम्हे चोट लगी है ? चल दिखा हमें
अमित : दीदी ऐसा कुछ नहीं ज़रा स चोट है घुटने पर होने की वजह से मैं ज़रा आराम से चल रहा हूँ.
राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे अपनी चोट दिखाओ
अमित : प्लीज राधा तरय तो अंडरस्टैंड यार मामूली स चोट है.
राधा : तो फिर तुमने बताया क्यों नहीं? मुझे तसल्ली नहीं होगी जब तक तुम नहीं दिखाओगे.
अमित : ाचा चलो पहले कैंटीन में चलते हैं . वहां बैठ कर बात करते हैं. वहीँ देख लेना चोट भी.
मैं दोनों क साथ कैंटीन की तरफ चल पड़ा तो इस बार राधा मेरी दायीं तरफ आ गयी क्यों की चोट दाएं घुटने में hi थी. राधा ने मेरी बाजु पकड़ ली मुझे सहारा देने क लिए. मैंने मन किया पर वो नहीं मणि. हम कैंटीन में पहुंचे तो मोहित और मीनल साथ बैठे हुए थे.
मोहित : अरे तुझे क्या हुआ जो इस बेचारी को की जान ले रहा है.
अमित : इसी से पूछ ले मैंने तो मन किया पर ये hi नहीं मन रही. अब तू hi बता क मेरे इतनी भी को चोट नहीं लगी. इसे मेरी तो समझ hi नहीं आ रही.
राधा : मोहित भैया तुम बताओ इसे ये चोट कैसे लगी और कितनी लगी है ये तो बता hi नहीं रहा.
मैंने मोहित को इशारा किया क कुछ ऐसा वैसा न बता दे जिससे मेरी दोनों बहने राइ का पहाड़ बना दें.
मोहित : डरने वाली कोई बात नहीं है वो कल मैच में उस लड़के ने जान बुझ कर इसके घुटने पर मर दिया था बस उसी का दर्द है
राधा : क्या ? जान बुझ कर मारा , पर उसने ऐसा क्यों किया?
अमित : कुछ नहीं ये तो ऐसे hi कह रहा है. गेम में ऐसा होता रहता है.
मैंने मोहित को टेबल की नीचे लात मरी. और आंखे दिखाई
मोहित : हाँ हाँ वो तो गेम में ऐसा हो जाता है तुम टेंशन मत लो
राधा : पर तुमने तो कहा उसने जान बुझ कर मारा
मोहित : वो उसने जितने क लिए ऐसा किया न. और कोई बात नहीं है.
राधा : मुझे अपनी चोट दिखाओ पहले मुझे अभी देखना है.
अमित : मैंने कहा न राधा क मामूली सी चोट है. वैसे भी मैं दिखा नहीं सकता
राधा : क्यों ?
अमित : क्यूंकि इस क लिए मुझे पेण्ट उतरनी पड़ेगी और तुम ये नहीं चाहोगी क सब मुझ पर हसन
मेरी बात से राधा शर्मा गयी. हम सब बातें कर रहे थे क रीमा भी कैंटीन में आ गयी. उसे देखते hi मैंने गुस्से से मुँह फेर लिया और जब वो हमारे पास आयी तो मैं फ़ोन का बहाना कर क बहार निकल गया. रीमा मुझे देखती रह गयी पर मैंने उसे नहीं देखा. मैं बहार फ़ोन को हाथ में पकडे खड़ा था तो रीमा वहां भी मेरे पीछे आ गयी.
रीमा : अमित क्या एक बार मुझसे बात भी नहीं करोगे ? काम से काम मुझे सच बताने का मौका तो दो.
अमित : अब और कौन सा सच बताना है ? और तुम सच बताओगी भी तो क्या? शुरू से तो झूठ बोल रही हो. मैं अछि तरह समझ गया हूँ क तुम भी अपने भाई क कहने पर hi मेरे साथ नाटक कर रही थी. ज़रूर उसी ने भेजा होगा फिर से कोई चल चलने क लिए. मगर उससे एक बात कह देना क लड़कियों को ढाल बना कर वॉर करना बंद कर दे . उसने जो पाप किये हैं उसकी सजा उसे मिल क रहेगी.
इतना कह कर मैं बिना उसकी बात सुने वहां से निकल गया. हालाँकि वो मुझे बार बार कहती रही क मैं एक बार उसकी बात तो सुनु . रीमा की आँखों में पानी और मायूसी थी उसके चेहरे की साडी रंगत उडी हुई थी जो मेरे दिल को झकझोर रही थी. पर राधा और नेहा दीदी ने जो आज मुझे बताया उसकी वजह से भी मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था. मैं गुस्से में ग्राउंड में अकेला खली जगह पर बैठ गया और सोचने लगा क इस मोंटी को कैसे सबक सिखों. मेरी बहनो को परेशां करना शुरू कर दिया है इन लोगों ने अब तो कुछ न कुछ करना hi पड़ेगा. मैंने शालू को फ़ोन लगाया.
शालू : क्या बात है तुम तो स्टार बन गए हो आज तो हर तरफ तुम्हारे hi चर्चे हैं. कोंग्रटुलतिओन्स फॉर योर विक्ट्री . कहो आज हम गरीबों की यद् कैसे आ गयी.
अमित : थैंक्स शालू . मुझे तुमसे एक ज़रूरी काम है क्या तुम 2 मिनट्स बात कर सकती हो?
शालू : ऐसा कोण सा ज़रूरी काम आ गया ? बोलो मैं क्या कर सकती हूँ?
अमित : ये रॉकी और टोनी क बारे में जो कुछ भी जानती हो मुझे बताओ?
शालू : पर बात क्या है ?
अमित : वो बाद में पर मुझे अभी इनकी इनफार्मेशन चाहिए .
शालू : वो दोनों मोंटी क साथी हैं और उसी की तरह घटिया हैं. ये हर काम मोंटी क साथ मिल कर करते हैं. दोनों रोच फैमिलीज़ से हैं. मोंटी क साथ मिल कर ये लड़कियों को गड़ाए हैं और फिर एक साथ उनके मज़े लेते हैं.
अमित : ये दोनों कहाँ मिलेंगे ?
शालू ने मुझे उनके एड्रेस और उनके ठिकाने बता दिए. मैंने सब अपने दिमाग में बिठा किया.
शालू : तुम करने क्या वाले हो? बात क्या है ?
अमित : अभी तुम कुछ मत पूछो बस शांत रहना और किसी से इस बात का ज़िकर मत करना.
मैंने शालू से ज़रूरी इनफार्मेशन ले ली. नेहा दीदी ने मुझे कसम दी थी क मैं उन लोगों से झगड़ा न करूँ. मैं उनकी कसम तो नहीं तोड़ सकता पर जो उन लोगों ने किया है उसकी सजा देना भी तो ज़रूरी है. मैं अपने दिमाग में प्लान बनाने लगा क क्या करना है और कैसे. सब कुछ प्लान करने क बाद मैंने किसी को कॉल की.
अमित : hello भैया कैसे हो?
आदमी : मैं ठीक हूँ आज मेरी यद् कैसे आ गयी ? सब ठीक तो है न?
अमित : कुछ ठीक नहीं है भैया . यहाँ कुछ बदमाश मेरी बहनो को तंग कर रहे हैं कॉलेज में . मेरी बहिन ने मुझे कसम दे कर बांध दिया है ऐसे में मैंने आपको यद् किया अब आपको उन लोगों को ठीक करना होगा.
आदमी : क्या ???? तेरी बहनो को तंग कर रहे हैं . सहमत आयी है उन लोगों की. वो तेरी नहीं मेरी भी बहने हैं. बता क्या करना है?
अमित : आप किसी को साथ ले कर मेरे पास आ जाओ फिर मैं बताता हूँ क क्या करना है.
आदमी : ठीक है मैं आ रहा हूँ.
उसके बाद मैंने कॉल काट दी और अपने मन में फिर से प्लान क बारे में सोचने लगा. अब तो उन लोगों ने हद पर कर दी है . अगर अब भी इनको जवाब नहीं दिया तो क्या फायदा मेरे होने का. मोंटी अब तेरी लंका में आग लगने वाली है. जिन पेडों को तू इस्तेमाल करता है अब उनके पीटने का वक़्त आ गया. मन में अपनी प्लानिंग पर खुश होते हुए मैं वापिस आ गया . कॉलेज से वापिस आते हुए मीनल ने मुझसे रीमा क रिगार्डिंग बात की
मीनल : अमित ी थिंक तुम्हे एक बार रीमा से बात करनी चाहिए . मुझसे उसकी हालत देखि नहीं जा रही . बेचारी मुँह से मच नहीं कहती ओर उसकी आँखों में मायूसी कोई भी देख सकता है . ी थिंक शी इस इन लव विथ यू. मैं ये नहीं कहती क तुम सब कुछ भूल जाओ मोंटी और शीना ने जो भी किया पर हो सके तो एक बार उसकी बात ज़रूर सुन लो. जितना मैं उसके बारे में अभी तक जान पायी हूँ तो वो कहीं से भी उन लोगों जैसी नहीं है. इसके पीछे क्या राज़ है क उसने हमें अपने भाई बहनो क बारे में नहीं बताया ये तो उससे बात करने क बाद hi पता चलेगा न. मैंने तुम्हारे कहने क बाद उससे बात करना बंद कर दिया है. उसने मुझे कुछ नहीं बताया अपनी फॅमिली क बारे में पर ी थिंक वो तुम्हे सब कुछ बताना चाहती है प्लीज एक बार उससे बात करलो. हो सकता है वो सच में hi इनोसेंट हो और तुम उसके भाई की वजह से उस पर ज़ुल्म कर रहे हो.
अमित : तुम कैसे कह सकती हो क इसमें उन लोगों की कोई चल नहीं होगी. शिवानी भी तो इनोसेंट है लेकिन उसका भी तो उन लोगों ने इस्तेमाल किया न. तो मैं रीमा पर भरोसा कर क फिर एक बार किसी मुसीबत में फास जॉन. हो सकता है गली बार कोई मेरी मदद करने आगे न आये तो फिर मेरा क्या होगा? एंड फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मोंटी क दोस्त राधा और नेहा दीदी को कुछ दिनों से परेशां कर रहे हैं मुझे आज hi पता चला और तुम कहती हो क ऐसे घटिया लोगों क साथ मैं किसी तरह की जान पहचान रखूं.
मोहित : ये क्या कह रहा है तू. वो सेल अब नेहा दीदी और राधा को परेशां करने लगे हैं. इनकी माँ की ..... इनका कुछ करना पड़ेगा भाई . तूने प्रिंसिपल से बात की?
अमित : नहीं प्रिंसिपल सर को इन सब बातों में लेन से कोई फायदा नहीं. अब जो करना है हमें करना है.
मोहित : जो भी करना है मैं तेरे साथ हूँ बस बता दे क करना क्या है?
अमित : अभी तू घर चल बाद में देखते हैं. और मीनल प्लीज तुम रीमा को मुझसे दूर hi रखना कहीं उसके भाई का गुस्सा उस पर न निकल जाये.
घर आकर हमने खाना खाया और अपने अपने कमरे में रेस्ट करने लगे. पर मुझे आज शिवानी से मिलना था. मैंने कपडे बदल लिए और T-shirt लोअर पेहेन कर शिवानी को फ़ोन किया. शिवानी भी घर पर खाना खा कर रेस्ट कर रही थी , उसने 20 मिनट्स में आने का कहा. ठीक 20 मिनट्स बाद शिवानी गेट पर थी . आज वो शार्ट स्कर्ट और टॉप में रही . स्कर्ट उसके घुटनो से ऊपर थी जिसकी वजह से उसकी गोरी टंगे नज़र आ रही थी और ड्राइविंग सीट पर बैठे होने क कारन उसकी जांघो का भी कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था. शिवानी ने मुझे अपनी जांघों को घूरते देखा पर बिना कुछ कहे हल्का हल्का मुस्कुराती हुई गाड़ी चलने लगी. शिवानी उस दिन वाली जगह पर ले आयी और गाडी को एक जगह रोक दिया.
शिवानी : चलो अब तुम मेरी जगह पर आ जाओ और गाडी चलाओ
अमित : पर तुम तो जानती हो न मुझे अभी कण्ट्रोल करना नहीं अत.
शिवानी : उस दिन चलाई तो थी आज कोशिश करो चला लोगे तुम
अमित : मुझे पता है मुझसे नहीं होगा और मैं जनता हूँ तुम उस दिन की वजह से नाराज़ हो मुझसे इसी लिए ऐसा कह रही हो वर्ण मुझे अकेले चलने को नहीं कहती. ( मैंने जान बुझ कर ऐसा कहा क शिवानी उस दिन की तरह आज भी मेरी गॉड में बैठे )
रहने दो मई किसी और से सिख लूंगा अभी हम वापिस चलते हैं.
शिवानी : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? मैंने उस दिन भी कहा था क मैं नाराज़ नहीं हूँ. अगर नाराज़ होती तो आज यहाँ आती? ाचा ठीक है मैं तुम्हे सिखाती हूँ तुम मेरी जगह पर आ कर बैठो.
अमित: नहीं रहने दो मुझसे नहीं होगा तुम वापिस चलो
शिवानी : चुप चाप जो कह रही हूँ वो करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. मैं माँ को बता दूंगी क तुम अब भी मुझसे गुस्सा हो और बस उन्हें दिखने क लिए ऊपर ऊपर दोस्त कहते हो.
मेरी चल काम कर गयी शिवानी खुद मुझे फाॅर्स कर रही थी तो मैं भला कैसे न मंटा. मुझे तो जल्दी से शिवानी को अपना बनाना था जिसकी शुरुआत यहीं से होनी थी. मगर शिवानी क दिल में भी कुछ तो था जो आज लॉन्ग स्कर्ट की जगह शार्ट स्कर्ट पेहेन कर आयी थी . शायद वो भी मज़े लेना चाहती थी मुझसे . वर्ण वो इतनी जल्दी तैयार नहीं होती और शायद आती hi नहीं. एक बार उसने जो इंकार किया था वो भी सिर्फ दिखने क लिए hi किया होगा. शिवानी क मन में क्या है ये अभी पता चला जायेगा . आज मैं भी तयारी क साथ आया था इसी लिए लूसे कपडे पहने थे क वो अछि तरह मुझे फील कर सके.
मैं अपनी जगह से उठ कर शिवानी की जगह पर आ गया और फिर शिवानी भी मेरी गॉड में बैठ गयी. आज न उसने मेरी टांगों क बीच बैठने की कोशिश की न hi मेरे घुटने पर बैठी बल्कि सीधा मेरी गॉड में hi बैठ गयी जिस वजह से उसके नरम नरम चूतड़ मेरी जाँघों पर आ गए. उसकी गांड से मेरा लैंड ज़रा सा hi फॉर था जो उसके हल्का सा पीछे खिसकते hi या मेरे लैंड क खड़े होते hi उसकी गांड से जा मिलेगा. शिवानी ने सेल्फ मर कर कार स्टार्ट की और मुझे सिखाते हुए गाड़ी चाल्ने लगी. मगर मुझे तो कार ड्राइव नहीं करनी थी मुझे तो शिवानी को ड्राइव करना था. शिवानी मुझे बताते हुए ड्राइव कर रही थी और मैंने अपने हाथ सरकते हुए उसके हाथों पर रख दिए. मेरे ऐसा करते hi शिवानी की बॉडी में हलचल हुई और उसकी बातें एक डैम से रुक गयी मगर उसने कुछ नहीं कहा. मैंने आगे हो कर अपना मुँह उसकी गर्दन पर रख दिया और उसक बदन की महक लेते हुए उसकी दर्दन से उसके जिस्म का कोमल एहसास महसूस करने लगा. शिवानी की बॉडी में भी तरंगे उठ रही थी और वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. अभी तक शिवानी ने कुछ भी रिएक्शन नहीं दिया था. कहने को तो इसे 50-50 चांस भी कहा जा सकता है पर मेरा दिल कह रहा था क शिवानी अंदर से तैयार हो कर hi आयी है इस सब क लिए. उसको भी पता होगा क मैंने फिर से ये सब करूँगा या फिर ये भी हो सकता है क उसने सोचा हो उस दिन गलती से हो गया होगा पर मैं ऐसा नहीं करूँगा. पर मैं अपने दिल की hi सुन रहा था . शिवानी की कोमल मुलायम स्किन का एहसास बहुत hi मज़ेदार था जिसे मैंने अपने होंठो से फील करने क लिए अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए. शिवानी क मुँह से एक सिसकी निकली जो इस बात का सिग्नल थी क उसे भी मज़ा आ रहा है. मैंने उसकी गर्दन पर अपने होंठ इधर उधर चलते हुए अपनी जीभ बहार निकल कर उसकी स्किन पर चलने लगा. शिवानी की आँखें मदहोशी में बंद हो गयी और उसका जिस्म लरजने लगा. उसे पता hi नहीं लगा क वो कब पूरी तरह पीछे होती हुई मेरे लैंड क ऊपर बैठ गयी और मेरे कंधे पर अपना सर गिरते हुए मेरे साथ चिपक गयी . गाडी एक जगह कड़ी हो चुकी थी और मैंने स्टेरिंग से हाथ हटा कर उसके पेट और जांघो पर रख दी . शिवानी की स्कर्ट थोड़ी ऊपर खिसक चुकी थी जिस वजह से उसकी आधी जांघें नंगी नज़र आ रही थी और जब मैंने वहां हाथ रखा तो उसकी मखमली जांघों का एहसास मुझे बहुत ाचा लगा. मेरा लैंड कब का खड़ा हो चूका था जो अब शिवानी क चूतड़ों में चुभ रहा था. शिवानी को भी उसका एहसास तो हो रहा होगा मगर वो तो किसी और hi दुनिया में खो गयी थी. मैंने शिवानी क कण की लो को होंठो में ले लिया और उसकी जांघों पर अपना हाथ चलने लगा साथ hi उसके पेट पर जो हाथ था उसको नीचे ले क जाता छूट क पास तक और ऊपर लेकर आता सके बूब्स क बॉटम तक. जांघों को मसलते हुए मैं अपना हाथ कभी बहार से कभी इनर तइस पर चलता और इसके साथ hi उसकी स्कर्ट को और ऊपर करने की कोशिश करता. शिवानी क मुँह से लगातार मादक सिसकियाँ निकल रही थी जो बता रही थी क शिवानी इस वक़्त सिर्फ मज़ा ले रही है और उसकी आग बाद चुकी है. शिवानी एक हाथ पीछे लेकर मेरे सर को अपनी गर्दन पर दबा रही थी और दूसरा हाथ अपने पेट पर चल रहे मेरे हाथ क ऊपर रख कर उसे डिश बता रही थी. मैंने उसकी जांघों पर हाथ चलते हुए जब इनर साइड पर चला रहा था तो हाथ को थोड़ा अंदर ले जाते हुए जांघों की जड़ों तक ले गया यानि की छूट क पास तक जिससे शिवानी की आग कुछ ज्यादा hi भड़की क उसने मेरा दूसरा हाथ खुद hi पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया. शिवानी को तो एहसास भी न होगा क उसने क्या किया पर मैं शिवानी को काबू करने में कामयाब हो गया था. मैंने इसके एक दाएं स्तन को अपने हाथ में ले लिया. शिवानी का स्तन टाइट हो रहा था . शिवानी क बूब्स बड़े और आकर्षक थे उन्हें हलके हाथ से दबा कर मैं उनका अछि तरह से जायज़ा ले रहा था. शिवानी पहले भी सब कुछ करवा चुकी होगी ये तो मैं फोटो देखते hi समझ गया था इसी लिए ये सब करने में उसे कोई धक्का नहीं पहुंचेगा ये बात मैं अछि तरह समझ चूका था . इस लिए मैं अपना काम बिना किसी अफ़सोस क कर रहा था . जब शिवानी ने मेरे हाथ को अपने बूब्स दबाने से नहीं रोका तो मैंने अपना दूसरा हाथ भी उसके दूसरे स्तन पर रख दिया और उसके दोनों स्तनों को अपने हाथो से दबाने लगा. शिवानी अब और कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी और अब उसकी बंद ज़ुबान खुलने लगी.
शिवानी : ककक आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह उम्म्म ओह्ह्ह्हह्हह उम्म्म्म क्या कर रहे हो तुम कक्कक्स तुम तो ड्राइविंग सिखने आये थे ककक उम्म्म्म ये क्याआ. कररररर रहे होऊ... तुम मुझे पगललललल कर रहे होऊ. रुक जाओ उम्मम्मम कक्कक्स मत करूऊओ मैंनमम्म उम्मम्मम ये क्या हो रहा हीी. ......
मैंने अपना काम जारी रखा शिवानी मुझे रुकने को कह तो रही थी मगर उसका जिस्म कुछ और hi कह रहा था. मैं लगातार अपना काम कर रहा था . मैंने एक और तीर चलते हुए अपना हाथ उसकी स्कर्ट में घुसकर पेंटी क ऊपर से उसकी छूट पर रख दिया. शिवानी की पेंटी गीली हो रही थी . मैंने अपनी उंगली से उसकी छूट पर से दबाव बनाना शुरू कर दिया जिस से उसका जिस्म कम्पनी लगा . शिवानी का एक उभर मेरे हाथ में था और दूजा वो खुद hi दबाने लगी साथ hi अपनी नंगी टैंगो को मेरी टैंगो पर रगड़ने लगी. मैंने उसकी स्कर्ट को दोनों हाथो से पकड़ कर उलट कर कमर तक कर दिया जिससे उसकी पेंटी मेरे सामने आ गयी. शिवानी की गोरी टांगों क ऊपर कासी हुई काली पेंटी बहुत खूबसूरत नज़ारा दे रही थी. मैंने अपनी उंगलियां उसकी पेंटी में दाल कर उसकी छूट पर चलने लगा. शिवानी की छूट क्लीन शेव थी . उसकी छूट की स्किन का नरम एहसास बता रहा था क वो अपनी छूट का खास ख्याल रखती होगी. शिवानी की छूट गीली थी और उसकी कमर जिस तरह हिलने लगी थी वो बता रही थी क जल्दी hi छूट में कैद पानी का बाँध टूटने वाला है.
शिवानी : आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हब उम्मम्मम कक्कक्स क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म ऊऊह्ह्ह्ह क्या जादू है तुम में उम्मम्मम ऐसे hi ऐसे hi करो कक्कक्स उम्मम्मम कॉमन फास्टर फास्टर उम्म्म्म डीपर फास्टर
शिवानी अपनी छूट में चल रही मेरी उंगली को और अंदर और तेज़ चलने को कह रही थी . मैं भी शिवानी क बूब्स मसलता हुआ उसकी छूट में तेज़ तेज़ उंगली चलने लगा. शिवानी से और ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुआ और उसका जिस्म अकड़ने लगा. शिवानी की कमर ऊपर उठी मेरी उंगली को और अंडर तक लेने क लिए और उसका जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा.
शिवानी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह अघहहह आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हब ुंकन्ना आईई कक्कक्स मैं गयी ी म सुंम्मिंग ी ऍम सुंम्मिंग आआआअह्हह्ह्ह्हह
शिवानी की छूट से गरम पानी की बरसात होने लगी और वो मेरी गॉड में निढाल हो कर पद गयी. एक बार फिर से शिवानी की ऑंखें बंद थी और वो ऐसे लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी मनो बहुत दूर से भाग कर आयी हो. शिवानी पूरी तरह से रिलैक्स हो गयी थी और उसे ज़रा भी एहसास नहीं था क वो कहाँ है और किस हालत में है. अब मैंने आगे बढ़ने का सोचा . शिवानी क पानी से उसकी पेंटी उसकी जांघें और मेरे हाथ क इलावा मेरा लोअर भी भीग गया था शायद काफी दिनों से पानी स्टॉक कर रखा होगा. मैंने उसके टॉप को उतरने क लिए जैसे hi हाथ लगाया तो मेरा फ़ोन बज उठा.
‘ ये भी साला अभी बजाना था पता नहीं कौन है. ‘ मन में बड़बड़ाते हुए मैंने मोबाइल देखा तो मेरा इरादा बदल गया और मैंने फ़ोन उठा लिया
आदमी : हम पहुँच गए हैं तुम कहाँ हो?
अमित : आप इस वक़्त कहाँ हैं?
आदमी : हम इस वक़्त क्सक्सक्सक्सक्स पर हैं.
अमित : आप वहीँ रुको मैं अभी आया.
मेरी बातचीत क दौरान शिवानी को भी होश आ गया था और वो अपनी हालत ठीक कर रही थी. मैंने कॉल ख़त्म होते hi शिवानी को देखा तो वो सर झुकाये अपनी हालत ठीक कर रही थी.
अमित : शिवानी ी ऍम सॉरी मुझसे फिर गलती हो गयी. पर क्या करूँ जब भी तुम पास आती हो मैं खुद को रोक नहीं पता काश तुम मेरे साथ मेरी क्लास में होती तो ......
शिवानी : तो ?
अमित : तो मैं अब तक अकेला नहीं होता. अब तक मैंने तुम्हे अपनी गफ बना लिया होता
शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो . तुम तो कहते हो तुम्हे इंटरेस्ट नहीं इन सब बातों में
अमित : जब मेनका विश्वामित्र जैसे तपस्वी की तपस्या भांग कर सकती है तो मैं तो एक मामूली सा इंसान हूँ. तुम तो स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा हो मैंने खुद को रोकने की कितनी कोशिश की पर तुम्हारे इस कयामती हुस्न ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना hi दिया. तुम तो ऊपर वाले की बनायीं वो मूरत हो जो पत्थरों में भी जान दाल दे मैं तो इंसान हूँ.
अपनी तारीफ से भला कोण लड़की खुश नहीं होगी . शिवानी भी अंदर अंदर hi खुश हो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर मैंने देख ली मगर शिवानी ने उस मुस्कान को छुपाते हुए कहा
शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो अगर ऐसा होता तो तुम पहले भी मेरे साथ प्यार कर सकते थे मगर तब तो तुम पर कोई असर नहीं हुआ था जबकि मैं खुद तुम्हे लाइन दे रही थी.
अमित : ये तो मेरा दिल hi जनता है का मैं उस पर कितना जुल्म कर क उसे रोक रहा था . मगर अब जब मेरे दिल ने तुम्हारे दिल को पहचान लिया है तो ये मेरी भी नहीं मन रहा और तुम्हारे पास आते hi ये मेरे कण्ट्रोल से बहार जो जाता है.
शिवानी : मैं कैसे विश्वास करूँ क तुम सच बोल रहे हो?
अमित : ठीक है तो तुम अपने दिल से पूछो क वो क्या कहता है अगर वो कहे क मैं गलत हूँ या झूठा हूँ तो तुम मुझे बोल देना मैं कभी दोबारा तुम्हारे पास भी नहीं आऊंगा.
शिवानी : बड़े तेज़ हो तुम . तुम जानते हो मेरा दिल तो तुम्हारी hi साइड लेगा इस लिए ऐसी बातें कर रहे हो.
शिवानी की बात से मैं खुश हो गया मतलब वो भी मुझे पसंद करती है. पसंद करती है ये तो मुझे पहले hi पता था मगर इस नज़र से भी करती है ये अब पता चल गया .
अमित : क्या कहा ? इसका मतलब तुम भी मुझे चाहती हो ? मतलब तुम जैसी परियों की रानी मुझ जैसे मामूली आदमी को पसंद कर सकती है मुझे तो यकीन नहिभो रहा .
शिवानी : तुम कोई मामूली नहीं हो. तुम क्या हो ये मैं अछि तरह जानती हूँ . काश क तुम मुझे पहले मिले होते तो मैं तुम्हारे कदमो में जान तक लुटा देती. अगर तुम मुझे पहल मिल जाते तो मैं कभी किसी की तरफ देखती भी नहीं
अमित : अब तो मिल गया हूँ न तो अब क्या इरादा हज?
शिवानी : इरादा तो नेक है पर इस रिश्ते का अंजाम क्या होगा?
अमित : कल की चिंता क्यों करती हो ? हम आज साथ हैं क्या ये काम है ? मैं तुम्हे किसी भी चीज़ क लिए फाॅर्स नहीं करूँगा टेक योर टाइम . तुम्हे ठीक लगे तो हम आगे बढ़ेंगे वर्ण नहीं. और अंजाम की परवाह करने से क्या होगा किसी को अपने अंजाम पर इख़्तियार नहीं होता ये तो सब ऊपर वाले क हाथ में है. मैं चाहता हूँ तुम ठन्डे दिमाग से सोच कर मुझे अपना फैसला बताओ इस लिए आज क लिए इतना बहुत है अब हम चलते हैं तुम मुझे घर छोड़ दो.
शिवानी कुछ कहना चाहती थी मगर वो चुप रह गयी शायद उसे भी अपनी ये हालत सही नहीं लग रही होगी और एक डैम से आगे बढ़ना भी आसान नहीं होता. बेशक शिवानी मॉडर्न थी पर उसकी माँ से मिलने क बाद मुझे इतना तो पता चल गया था क वो बहार से कुछ और अंदर से कुछ और है. शिवानी कार से बहार निकली और अपने कपडे ठीक करने लगी मैं भी ड्राइवर सीट से उठ कर दूसरी सीट पर आ गया और शिवानी गाड़ी चलते हुए मुझे घर क बहार ड्राप कर क चली गयी. मैंने अपनी बाइक निकली और उस तरफ चल दिया जहाँ मुझे अपने साथियों से मिलना था. मैंने मंजू म को फ़ोन पर बता दिया क आज मैं नहीं आ पाउँगा . वो मुझसे नाराज़ हुई क्यूंकि वो मेरी चोट की वजह से पहले hi मुझ पर गुस्सा थी अब मेरे न आने से वो और नज़र hi रही थी . मैंने उनको बताने क बाद अपने साथियों क पास पहुँच गया.
अगले दिन हम जब कॉलेज गए तो नोटिस बोर्ड पर कल क कम्पटीशन जितने वालों क नाम लिखे हुए थे रिसल्ट क साथ. मैं और मोहित मेरा नाम देख कर खुश हो गए . हमारा कॉलेज ओवरआल पहले no. पर hi रहा था. कल जितने वाले सभी प्लेयर्स को प्रोफ व् से कांटेक्ट करने को कहा गया था इस लिए मैं सीधा उनके ऑफिस में चला गया.
अमित : मई ी के इन सर?
प्रोफ व् : अरे आओ आओ अमित बहार क्यों खड़े हो? मैं तुम्हारा hi वेट कर रहा था.
मैं ऑफिस में अंदर चला गया उनके पास एक दो लड़के खड़े थे जिनको उन्होंने बहार भेज दिया.
प्रोफ व् : कोंग्रटुलतिओन्स बीटा कल तुमने बहुत ाचा खेला.
अमित : थैंक यू सर सब कोच साहब की ट्रेनिंग और आपका आशीर्वाद है.
प्रोफ व् : बीटा ये सब तुम्हारी म्हणत है. वैसे एक बात बताओ क्या तुम उस लड़के को पहले से जानते थे उस बॉयज कॉलेज वाले लड़के को?
अमित : जी नहीं सर मैंने तो कल उसे पहली बार hi देखा था.
प्रोफ व् : क्या उससे तुम्हारी कोई बात हुई थी मैच से पहले ?
अमित : नहीं सर
प्रोफ व् : तो उसने ऐसा क्यों किया? उसे देख कर hi लग रहा था क वो खेल नहीं रहा वो तुम्हे चोट पहुँचाने की कोशिश कर रहा था . मैंने इसकी शिकायत की थी उनके कॉलेज क प्रोफेस्सोर्स थे और प्रिंसिपल सर को भी बताया था. वैसे अब तुम्हारा घुटना कैसा है?
अमित : ठीक हूँ सर इतना तो चलता hi है. हल्का सा दर्द है 2-3 दिन में चला जायेगा.
प्रोफ व् : अब तुम जाओ जैसे hi प्रिंसिपल सर बुलाते हैं तुम सब ऑफिस में जाना उनके पास वो सब से मिलना चाहते हैं.
मैं सर से मिलके अपनी क्लास में चला आया. चंद्रकांता म क्लास ले रही थी तो उन्होंने मुझे अंदर घुसने hi नहीं दिया. मैं चुपचाप बहार इंतज़ार करने लगा बेल्ल बजने का.
बेल्ल बजते hi चंद्रकांता म गयी और मंजू म आ गयी उनके साथ hi मैं भी क्लास में आ गया. मैं घुटने में दर्द की वजह से थोड़ा आहिस्ता चल रहा था तो मंजू म ने मुझे गौर से देखा और इसकी वजह पूछी . मैंने बता दिया क कल मैच में थोड़ी चोट लगी थी. मम मुझसे और भी बात करना चाहती थी मगर हम क्लास में थे तो इस लिए उन्होंने बात वहीँ छोड़ दी. वो ज़रूर पूछना चाहती होंगी क कल तो मैं आराम से चल रहा था दिर आज कैसे मैं ऐसे चल रहा हूँ. कल तो मैंने पैन किलर खाई थी पर आज नहीं खायी थी इस लिए आज दर्द महसूस हो रहा था. मम का लेक्चर अभी आधा hi हुआ था क पेओन मुझे बुलाने आ गया. मम ने भी मुझे जाने की इजाज़त दे दी पर उनकी नज़रों में चिंता और नाराज़गी मुझे नज़र आ रही थी.
प्रिंसिपल सर क ऑफिस क बहार हमारे कॉलेज क वो सब स्टूडेंट्स मौजूद थे जो कल कम्पीटीशन्स जीत कर आये थे . बॉयज क साथ गर्ल्स भी थी और उनमे एक लड़की मेरी क्लास की भी थी. मुझे देख कर उसने मुझे विश किया. इस लड़की को मैंने क्लास में देखा तो कई बार था मगर कभी बात नहीं की . वैसे भी मैं क्लास में किसी से बात नहीं करता था. वो लड़की देखने में अछि खासी लम्बी छोड़ी थी और चेहरे सपाट था किसी पेशेवर की तरह . मगर चेहरे पर स्माइल थी और देखने में भी खूबसूरत थी हालाँकि उसके फीचर आम लड़कियों की तरह नाज़ुक नहीं लग रहे थे.
लड़की : hi कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुमने गोल्ड मैडल जीता कल .
अमित : थैंक्स एंड सॉरी . क्या आप मुझे अपने बारे में बताएंगी? मुझे आपका नाम नहीं मालूम.
लड़की : मेरा नाम कल्पना है और मैं जुडो की प्लेयर हूँ कल मुझे भी गोल्ड मिला था. और तुम्हे सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है वे अरे क्लास मातेस . मुझे पता है तुम किसी से बात नहीं करते क्लास में.
अमित : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना सॉरी पर मैं किसी से बात इस लिए नहीं करता क यहाँ सब बड़े घरों क लोग हैं तो मैं थोड़ा उनसे दूर hi रहता हूँ क्या पता उन्हें मेरे साथ बैठने में कोई दिक्कत हो.
कल्पना : सब ऐसे नहीं होते. वो लोग जिन्हे पैसे का घमंड हो वो hi ऐसे होते हैं. वैसे अगर तुम्हे ऐतराज़ न हो तो क्या हम अचे दोस्त बन सकते हैं ? खिलाडी होने क नाते हमारे बिच दोस्ती होने तो लाज़मी है.
अमित : आप ऐसे पूछ कर मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. हम आज से दोस्त hi हैं
हम दोनों ने हाथ मिलाया . हम बातें कर रहे थे क प्रिंसिपल सर बहार आ गए और सब को एक साथ खड़े कर क प्रिंसिपल सर प्रोफ व् और सब कोच आगे चेयर्स पर बैठ गए . सबकी ग्रुप फोटो ली गयी. प्रिंसिपल सर ने ओने बी ओने सब को आशीर्वाद दिया और कॉलेज का नाम ऐसे hi रोशन करने को कहा. उसके बाद मैं कल्पना से बात करता हुआ कैंटीन की तरफ hi जा रहा था क मुझे नेहा दीदी और राधा रस्ते में मिल गयी. दोनों क चेहरे पर टेंशन और गुस्सा था . मुझे देखते hi नेहा दीदी ने अपने चेहरे पर स्माइल लेन की ज़बरदस्ती कोशिश की
नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित तुम्हारा तो नाम आज नोटिस बोर्ड पर लगा हुआ है.
राधा : कोंग्रटुलतिओन्स अमित
अमित : थैंक्स दीदी एंड थैंक्स राधा इससे मिलो ये है कल्पना मेरी क्लास मात है और जुडो प्लेयर . इसने भी कल गोल्ड जीता है. और कल्पना ये है मेरी नेहा दीदी और ये है राधा मेरी ....
राधा : hi कल्पना कोंग्रटुलतिओन्स
कल्पना : थैंक्स राधा .
नेहा : कोंग्रटुलतिओन्स कल्पना . तुम्हे आज तक कभी इसके साथ देखा तो नहीं ?
कल्पना : थैंक्स दीदी . देखेंगी कहाँ से आपका ये भाई क्लास में किसी से बात hi नहीं करता . इसे तो मेरा नाम भी नहीं पता था वो तो आज मैंने hi इसे बुला लिया. ये तो लड़कियों से भी ज्यादा शर्मीला है.
कल्पना की इस बात से राधा और नेहा दीदी हसने लगी. तभी किसी ने कल्पना को आवाज़ दे दी और वो फिर मिलने का कह कर चली गयी.
अमित : बात क्या है दीदी आज आपके चेहरे पर फिर से टेंशन है. आपने वडा किया था क आप आज बताएंगी.
मेरी बात पर नेहा दीदी अपने हाथ की उंगलियां मसलने लगी और सोचने लगी क अब क्या जवाब दें तो राधा बोल पड़ी
राधा : आप बताएंगी या मैं hi बता दूँ?
नेहा : मैं बताती हूँ तुम चुप रहो.
राधा क चेहरे पर मुझे गुस्सा नज़र आ रहा था जैसे वो नेहा दीदी क मन करने पर नाराज़ हो रही हो.
नेहा : पहले प्रॉमिस करो मैं जो कहूँगी वो मानोगे.
अमित : ऐसी क्या बात जिसके लिए आप पहले प्रॉमिस मांग रही हैं. आप बताती क्यों नहीं ऐसे आप मेरी टेंशन बड़ा रही हैं.
नेहा : पहले प्रॉमिस कर फिर बताउंगी
अमित : ाचा ठीक है प्रॉमिस
नेहा : वो क्या है न तुम तो जानते hi हो अब लड़कियों क पीछे तो लड़के आते hi हैं आशिकी करने बस कुछ दिनों से ऐसे hi 2 लड़के हम दोनों क पीछे एते हैं जब हम कॉलेज अति है और वापिस पर भी.
राधा : दीदी आप साफ साफ बताइये क वो लड़के आपको तंग कर रहे हैं. मैं बताती हूँ अमित
नेहा : तुम चुप रहो राधा मैं बात कर रही हूँ न
नेहा दीदी और राधा की बात सुनते मेरा खून खोलने लगा था और गुस्से से मेरी मुठियाँ खिंच गयी.
अमित : राधा तुम बताओ क्या बात है ? कौन हैं वो लड़के और क्या किया है उन्होंने?
राधा : वो...
नेहा : राधा
अमित : दीदी अब आप नहीं बोलेंगी मुझे सुनने दीजिये राधा तुम बोलो
राधा : कुछ दिनों से 2 लड़के हमें कॉलेज में फ्रेंडशिप करने को कह रहे थे. वो दोनों हमसे अलग अलग अकेले में मिलते थे पर अब वो कॉलेज क बहार भी हमारा रास्ता रोकने लगे हैं. अब तो वो दोनों साथ में होते हैं और गंदे गंदे कमैंट्स करते हैं. परसों एक ने तो दीदी का हाथ पकड़ लिया था और आज भी उसने रास्ता रोक कर गंदे कमेंट किये मुझे तो बोलने में भी शर्म आ रही है.
अमित : इतना कुछ हो गया और मुझे किसी ने बताया तक नहीं. क्या मुझे आप अपना नहीं मानती ?
राधा : दीदी ने मन किया था मैं तो कब से कह रही थी क तुम्हे बता दूँ.
अमित : दीदी आप मुझे अपना नहीं मानती या अपने भाई पर भरोसा नहीं था ?
नेहा : ऐसे मत कहो भाई तेरे सिवा मेरा और है hi कौन जिसे भाई कहूं. मैं नहीं चाहती क तुम पर कोई आंच आये पहले भी तुम्हारे साथ इतना कुछ हो चूका है.
अमित : आपके साथ इतना कुछ हो गया मेरे होते हुए ये जान कर क्या अब मुझे ाचा लग रहा है? क्या अपने नहीं सोचा एक बार भी मेरे बारे में क जब मुझे पता चलेगा तो मुझ पर क्या बीतेगी? मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी. राधा कौन हैं वो दोनों ? मुझे बताओ उनका नाम क्या है वो कौन सी क्लास में हैं.
राधा : वो दोनों फाइनल क स्टूडेंट्स हैं रिस्की और टोनी , मोंटी क साथी.
नेहा : देख अमित तू उन्हें कुछ नहीं कहेगा तूने वडा किया था तू मेरी बात मानेगा. तुमने उनसे लड़ाई झगड़ा किया तो वो फिर तुम्हारे साथ कुछ न कुछ करेंगे. हम उनकी शिकायत करते हैं प्रिंसिपल सर से तुम कुछ मत करना तुम्हे मेरी कसम.
अमित : दीदी !!!!!! आप ने मुझे कसम दे कर ाचा नहीं किया. वो घटिया लोग हैं प्रिंसिपल सर को शिकायत करने से कुछ नहीं होने वाला. लातों क भूत बातों से नहीं मानते . उनका इलाज मैं अचे से कर सकता हूँ.
नेहा : देख मैंने तुझे कसम दी है तू कुछ नहीं करेगा . तुमने उनसे झगड़ा किया तो मुझसे बात मत करना कभी.
अमित: दीदी आप उनको बचने क लिए मुझे कसम दे कर रोक रही हैं?
नेहा : नहीं भाई मैं तुझे रोक रही हूँ क्यूंकि मैं नहीं चाहती क मेरे भाई पर कोई एक आंच भी आये.
नेहा दीदी की आँखों में आंसू आ गए . मेरे लिए उनका प्यार देख कर मेरा भी मन भर आया और मैंने दीदी का हाथ अपने दोनों हाथो में थम कर उन्हें चुप करवाने की कोशिश की .
अमित : आप क्यों रो रही हैं? मैं उनसे लड़ाई झगड़ा न करूँ यही चाहती हैं न आप ? ठीक है मैं किसी से झगड़ा नहीं करूँगा. पर आप चुप हो जाइये. चलिए कैंटीन में चल कर कुछ कहते हैं आज तो पार्टी बनती है , आपका भाई जीत कर आया है.
मैं दोनों को साथ लेकर कैंटीन की तरफ बाद चला तो मेरी चल में बदलाव देख कर राधा ने मुझे रोका .
राधा : तुम ऐसे क्यों चल रहे हो? क्या हुआ है तुम्हे? कहीं चोट लगी है क्या? दिखाओ मुझे?
राधा क चेहरे ओर एक डैम चिंता क भाव उभर आये उसे मेरी बदली हुई चल से पता चल गया था. नेहा दीदी का इस तरफ ध्यान नहीं था और राधा क ऐसे बोलने से वो भी मेरी तरफ चिंता से देखने लगी.
अमित : कुछ नहीं वो मैच में थोड़ी सी चोट लग गयी थी घुटने पर ज्यादा कुछ नहीं है.
राधा : दिखाओ मुझे कितनी चोट लगी है . तुमने पट्टी करवाई क नहीं? डॉ को दिखाया था? दवा ली क नहीं?
महा : तुमने बताया क्यों नहीं क तुम्हे चोट लगी है ? चल दिखा हमें
अमित : दीदी ऐसा कुछ नहीं ज़रा स चोट है घुटने पर होने की वजह से मैं ज़रा आराम से चल रहा हूँ.
राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे अपनी चोट दिखाओ
अमित : प्लीज राधा तरय तो अंडरस्टैंड यार मामूली स चोट है.
राधा : तो फिर तुमने बताया क्यों नहीं? मुझे तसल्ली नहीं होगी जब तक तुम नहीं दिखाओगे.
अमित : ाचा चलो पहले कैंटीन में चलते हैं . वहां बैठ कर बात करते हैं. वहीँ देख लेना चोट भी.
मैं दोनों क साथ कैंटीन की तरफ चल पड़ा तो इस बार राधा मेरी दायीं तरफ आ गयी क्यों की चोट दाएं घुटने में hi थी. राधा ने मेरी बाजु पकड़ ली मुझे सहारा देने क लिए. मैंने मन किया पर वो नहीं मणि. हम कैंटीन में पहुंचे तो मोहित और मीनल साथ बैठे हुए थे.
मोहित : अरे तुझे क्या हुआ जो इस बेचारी को की जान ले रहा है.
अमित : इसी से पूछ ले मैंने तो मन किया पर ये hi नहीं मन रही. अब तू hi बता क मेरे इतनी भी को चोट नहीं लगी. इसे मेरी तो समझ hi नहीं आ रही.
राधा : मोहित भैया तुम बताओ इसे ये चोट कैसे लगी और कितनी लगी है ये तो बता hi नहीं रहा.
मैंने मोहित को इशारा किया क कुछ ऐसा वैसा न बता दे जिससे मेरी दोनों बहने राइ का पहाड़ बना दें.
मोहित : डरने वाली कोई बात नहीं है वो कल मैच में उस लड़के ने जान बुझ कर इसके घुटने पर मर दिया था बस उसी का दर्द है
राधा : क्या ? जान बुझ कर मारा , पर उसने ऐसा क्यों किया?
अमित : कुछ नहीं ये तो ऐसे hi कह रहा है. गेम में ऐसा होता रहता है.
मैंने मोहित को टेबल की नीचे लात मरी. और आंखे दिखाई
मोहित : हाँ हाँ वो तो गेम में ऐसा हो जाता है तुम टेंशन मत लो
राधा : पर तुमने तो कहा उसने जान बुझ कर मारा
मोहित : वो उसने जितने क लिए ऐसा किया न. और कोई बात नहीं है.
राधा : मुझे अपनी चोट दिखाओ पहले मुझे अभी देखना है.
अमित : मैंने कहा न राधा क मामूली सी चोट है. वैसे भी मैं दिखा नहीं सकता
राधा : क्यों ?
अमित : क्यूंकि इस क लिए मुझे पेण्ट उतरनी पड़ेगी और तुम ये नहीं चाहोगी क सब मुझ पर हसन
मेरी बात से राधा शर्मा गयी. हम सब बातें कर रहे थे क रीमा भी कैंटीन में आ गयी. उसे देखते hi मैंने गुस्से से मुँह फेर लिया और जब वो हमारे पास आयी तो मैं फ़ोन का बहाना कर क बहार निकल गया. रीमा मुझे देखती रह गयी पर मैंने उसे नहीं देखा. मैं बहार फ़ोन को हाथ में पकडे खड़ा था तो रीमा वहां भी मेरे पीछे आ गयी.
रीमा : अमित क्या एक बार मुझसे बात भी नहीं करोगे ? काम से काम मुझे सच बताने का मौका तो दो.
अमित : अब और कौन सा सच बताना है ? और तुम सच बताओगी भी तो क्या? शुरू से तो झूठ बोल रही हो. मैं अछि तरह समझ गया हूँ क तुम भी अपने भाई क कहने पर hi मेरे साथ नाटक कर रही थी. ज़रूर उसी ने भेजा होगा फिर से कोई चल चलने क लिए. मगर उससे एक बात कह देना क लड़कियों को ढाल बना कर वॉर करना बंद कर दे . उसने जो पाप किये हैं उसकी सजा उसे मिल क रहेगी.
इतना कह कर मैं बिना उसकी बात सुने वहां से निकल गया. हालाँकि वो मुझे बार बार कहती रही क मैं एक बार उसकी बात तो सुनु . रीमा की आँखों में पानी और मायूसी थी उसके चेहरे की साडी रंगत उडी हुई थी जो मेरे दिल को झकझोर रही थी. पर राधा और नेहा दीदी ने जो आज मुझे बताया उसकी वजह से भी मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था. मैं गुस्से में ग्राउंड में अकेला खली जगह पर बैठ गया और सोचने लगा क इस मोंटी को कैसे सबक सिखों. मेरी बहनो को परेशां करना शुरू कर दिया है इन लोगों ने अब तो कुछ न कुछ करना hi पड़ेगा. मैंने शालू को फ़ोन लगाया.
शालू : क्या बात है तुम तो स्टार बन गए हो आज तो हर तरफ तुम्हारे hi चर्चे हैं. कोंग्रटुलतिओन्स फॉर योर विक्ट्री . कहो आज हम गरीबों की यद् कैसे आ गयी.
अमित : थैंक्स शालू . मुझे तुमसे एक ज़रूरी काम है क्या तुम 2 मिनट्स बात कर सकती हो?
शालू : ऐसा कोण सा ज़रूरी काम आ गया ? बोलो मैं क्या कर सकती हूँ?
अमित : ये रॉकी और टोनी क बारे में जो कुछ भी जानती हो मुझे बताओ?
शालू : पर बात क्या है ?
अमित : वो बाद में पर मुझे अभी इनकी इनफार्मेशन चाहिए .
शालू : वो दोनों मोंटी क साथी हैं और उसी की तरह घटिया हैं. ये हर काम मोंटी क साथ मिल कर करते हैं. दोनों रोच फैमिलीज़ से हैं. मोंटी क साथ मिल कर ये लड़कियों को गड़ाए हैं और फिर एक साथ उनके मज़े लेते हैं.
अमित : ये दोनों कहाँ मिलेंगे ?
शालू ने मुझे उनके एड्रेस और उनके ठिकाने बता दिए. मैंने सब अपने दिमाग में बिठा किया.
शालू : तुम करने क्या वाले हो? बात क्या है ?
अमित : अभी तुम कुछ मत पूछो बस शांत रहना और किसी से इस बात का ज़िकर मत करना.
मैंने शालू से ज़रूरी इनफार्मेशन ले ली. नेहा दीदी ने मुझे कसम दी थी क मैं उन लोगों से झगड़ा न करूँ. मैं उनकी कसम तो नहीं तोड़ सकता पर जो उन लोगों ने किया है उसकी सजा देना भी तो ज़रूरी है. मैं अपने दिमाग में प्लान बनाने लगा क क्या करना है और कैसे. सब कुछ प्लान करने क बाद मैंने किसी को कॉल की.
अमित : hello भैया कैसे हो?
आदमी : मैं ठीक हूँ आज मेरी यद् कैसे आ गयी ? सब ठीक तो है न?
अमित : कुछ ठीक नहीं है भैया . यहाँ कुछ बदमाश मेरी बहनो को तंग कर रहे हैं कॉलेज में . मेरी बहिन ने मुझे कसम दे कर बांध दिया है ऐसे में मैंने आपको यद् किया अब आपको उन लोगों को ठीक करना होगा.
आदमी : क्या ???? तेरी बहनो को तंग कर रहे हैं . सहमत आयी है उन लोगों की. वो तेरी नहीं मेरी भी बहने हैं. बता क्या करना है?
अमित : आप किसी को साथ ले कर मेरे पास आ जाओ फिर मैं बताता हूँ क क्या करना है.
आदमी : ठीक है मैं आ रहा हूँ.
उसके बाद मैंने कॉल काट दी और अपने मन में फिर से प्लान क बारे में सोचने लगा. अब तो उन लोगों ने हद पर कर दी है . अगर अब भी इनको जवाब नहीं दिया तो क्या फायदा मेरे होने का. मोंटी अब तेरी लंका में आग लगने वाली है. जिन पेडों को तू इस्तेमाल करता है अब उनके पीटने का वक़्त आ गया. मन में अपनी प्लानिंग पर खुश होते हुए मैं वापिस आ गया . कॉलेज से वापिस आते हुए मीनल ने मुझसे रीमा क रिगार्डिंग बात की
मीनल : अमित ी थिंक तुम्हे एक बार रीमा से बात करनी चाहिए . मुझसे उसकी हालत देखि नहीं जा रही . बेचारी मुँह से मच नहीं कहती ओर उसकी आँखों में मायूसी कोई भी देख सकता है . ी थिंक शी इस इन लव विथ यू. मैं ये नहीं कहती क तुम सब कुछ भूल जाओ मोंटी और शीना ने जो भी किया पर हो सके तो एक बार उसकी बात ज़रूर सुन लो. जितना मैं उसके बारे में अभी तक जान पायी हूँ तो वो कहीं से भी उन लोगों जैसी नहीं है. इसके पीछे क्या राज़ है क उसने हमें अपने भाई बहनो क बारे में नहीं बताया ये तो उससे बात करने क बाद hi पता चलेगा न. मैंने तुम्हारे कहने क बाद उससे बात करना बंद कर दिया है. उसने मुझे कुछ नहीं बताया अपनी फॅमिली क बारे में पर ी थिंक वो तुम्हे सब कुछ बताना चाहती है प्लीज एक बार उससे बात करलो. हो सकता है वो सच में hi इनोसेंट हो और तुम उसके भाई की वजह से उस पर ज़ुल्म कर रहे हो.
अमित : तुम कैसे कह सकती हो क इसमें उन लोगों की कोई चल नहीं होगी. शिवानी भी तो इनोसेंट है लेकिन उसका भी तो उन लोगों ने इस्तेमाल किया न. तो मैं रीमा पर भरोसा कर क फिर एक बार किसी मुसीबत में फास जॉन. हो सकता है गली बार कोई मेरी मदद करने आगे न आये तो फिर मेरा क्या होगा? एंड फॉर योर काइंड इनफार्मेशन मोंटी क दोस्त राधा और नेहा दीदी को कुछ दिनों से परेशां कर रहे हैं मुझे आज hi पता चला और तुम कहती हो क ऐसे घटिया लोगों क साथ मैं किसी तरह की जान पहचान रखूं.
मोहित : ये क्या कह रहा है तू. वो सेल अब नेहा दीदी और राधा को परेशां करने लगे हैं. इनकी माँ की ..... इनका कुछ करना पड़ेगा भाई . तूने प्रिंसिपल से बात की?
अमित : नहीं प्रिंसिपल सर को इन सब बातों में लेन से कोई फायदा नहीं. अब जो करना है हमें करना है.
मोहित : जो भी करना है मैं तेरे साथ हूँ बस बता दे क करना क्या है?
अमित : अभी तू घर चल बाद में देखते हैं. और मीनल प्लीज तुम रीमा को मुझसे दूर hi रखना कहीं उसके भाई का गुस्सा उस पर न निकल जाये.
घर आकर हमने खाना खाया और अपने अपने कमरे में रेस्ट करने लगे. पर मुझे आज शिवानी से मिलना था. मैंने कपडे बदल लिए और T-shirt लोअर पेहेन कर शिवानी को फ़ोन किया. शिवानी भी घर पर खाना खा कर रेस्ट कर रही थी , उसने 20 मिनट्स में आने का कहा. ठीक 20 मिनट्स बाद शिवानी गेट पर थी . आज वो शार्ट स्कर्ट और टॉप में रही . स्कर्ट उसके घुटनो से ऊपर थी जिसकी वजह से उसकी गोरी टंगे नज़र आ रही थी और ड्राइविंग सीट पर बैठे होने क कारन उसकी जांघो का भी कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था. शिवानी ने मुझे अपनी जांघों को घूरते देखा पर बिना कुछ कहे हल्का हल्का मुस्कुराती हुई गाड़ी चलने लगी. शिवानी उस दिन वाली जगह पर ले आयी और गाडी को एक जगह रोक दिया.
शिवानी : चलो अब तुम मेरी जगह पर आ जाओ और गाडी चलाओ
अमित : पर तुम तो जानती हो न मुझे अभी कण्ट्रोल करना नहीं अत.
शिवानी : उस दिन चलाई तो थी आज कोशिश करो चला लोगे तुम
अमित : मुझे पता है मुझसे नहीं होगा और मैं जनता हूँ तुम उस दिन की वजह से नाराज़ हो मुझसे इसी लिए ऐसा कह रही हो वर्ण मुझे अकेले चलने को नहीं कहती. ( मैंने जान बुझ कर ऐसा कहा क शिवानी उस दिन की तरह आज भी मेरी गॉड में बैठे )
रहने दो मई किसी और से सिख लूंगा अभी हम वापिस चलते हैं.
शिवानी : ये तुम कैसी बातें कर रहे हो ? मैंने उस दिन भी कहा था क मैं नाराज़ नहीं हूँ. अगर नाराज़ होती तो आज यहाँ आती? ाचा ठीक है मैं तुम्हे सिखाती हूँ तुम मेरी जगह पर आ कर बैठो.
अमित: नहीं रहने दो मुझसे नहीं होगा तुम वापिस चलो
शिवानी : चुप चाप जो कह रही हूँ वो करो वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. मैं माँ को बता दूंगी क तुम अब भी मुझसे गुस्सा हो और बस उन्हें दिखने क लिए ऊपर ऊपर दोस्त कहते हो.
मेरी चल काम कर गयी शिवानी खुद मुझे फाॅर्स कर रही थी तो मैं भला कैसे न मंटा. मुझे तो जल्दी से शिवानी को अपना बनाना था जिसकी शुरुआत यहीं से होनी थी. मगर शिवानी क दिल में भी कुछ तो था जो आज लॉन्ग स्कर्ट की जगह शार्ट स्कर्ट पेहेन कर आयी थी . शायद वो भी मज़े लेना चाहती थी मुझसे . वर्ण वो इतनी जल्दी तैयार नहीं होती और शायद आती hi नहीं. एक बार उसने जो इंकार किया था वो भी सिर्फ दिखने क लिए hi किया होगा. शिवानी क मन में क्या है ये अभी पता चला जायेगा . आज मैं भी तयारी क साथ आया था इसी लिए लूसे कपडे पहने थे क वो अछि तरह मुझे फील कर सके.
मैं अपनी जगह से उठ कर शिवानी की जगह पर आ गया और फिर शिवानी भी मेरी गॉड में बैठ गयी. आज न उसने मेरी टांगों क बीच बैठने की कोशिश की न hi मेरे घुटने पर बैठी बल्कि सीधा मेरी गॉड में hi बैठ गयी जिस वजह से उसके नरम नरम चूतड़ मेरी जाँघों पर आ गए. उसकी गांड से मेरा लैंड ज़रा सा hi फॉर था जो उसके हल्का सा पीछे खिसकते hi या मेरे लैंड क खड़े होते hi उसकी गांड से जा मिलेगा. शिवानी ने सेल्फ मर कर कार स्टार्ट की और मुझे सिखाते हुए गाड़ी चाल्ने लगी. मगर मुझे तो कार ड्राइव नहीं करनी थी मुझे तो शिवानी को ड्राइव करना था. शिवानी मुझे बताते हुए ड्राइव कर रही थी और मैंने अपने हाथ सरकते हुए उसके हाथों पर रख दिए. मेरे ऐसा करते hi शिवानी की बॉडी में हलचल हुई और उसकी बातें एक डैम से रुक गयी मगर उसने कुछ नहीं कहा. मैंने आगे हो कर अपना मुँह उसकी गर्दन पर रख दिया और उसक बदन की महक लेते हुए उसकी दर्दन से उसके जिस्म का कोमल एहसास महसूस करने लगा. शिवानी की बॉडी में भी तरंगे उठ रही थी और वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. अभी तक शिवानी ने कुछ भी रिएक्शन नहीं दिया था. कहने को तो इसे 50-50 चांस भी कहा जा सकता है पर मेरा दिल कह रहा था क शिवानी अंदर से तैयार हो कर hi आयी है इस सब क लिए. उसको भी पता होगा क मैंने फिर से ये सब करूँगा या फिर ये भी हो सकता है क उसने सोचा हो उस दिन गलती से हो गया होगा पर मैं ऐसा नहीं करूँगा. पर मैं अपने दिल की hi सुन रहा था . शिवानी की कोमल मुलायम स्किन का एहसास बहुत hi मज़ेदार था जिसे मैंने अपने होंठो से फील करने क लिए अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए. शिवानी क मुँह से एक सिसकी निकली जो इस बात का सिग्नल थी क उसे भी मज़ा आ रहा है. मैंने उसकी गर्दन पर अपने होंठ इधर उधर चलते हुए अपनी जीभ बहार निकल कर उसकी स्किन पर चलने लगा. शिवानी की आँखें मदहोशी में बंद हो गयी और उसका जिस्म लरजने लगा. उसे पता hi नहीं लगा क वो कब पूरी तरह पीछे होती हुई मेरे लैंड क ऊपर बैठ गयी और मेरे कंधे पर अपना सर गिरते हुए मेरे साथ चिपक गयी . गाडी एक जगह कड़ी हो चुकी थी और मैंने स्टेरिंग से हाथ हटा कर उसके पेट और जांघो पर रख दी . शिवानी की स्कर्ट थोड़ी ऊपर खिसक चुकी थी जिस वजह से उसकी आधी जांघें नंगी नज़र आ रही थी और जब मैंने वहां हाथ रखा तो उसकी मखमली जांघों का एहसास मुझे बहुत ाचा लगा. मेरा लैंड कब का खड़ा हो चूका था जो अब शिवानी क चूतड़ों में चुभ रहा था. शिवानी को भी उसका एहसास तो हो रहा होगा मगर वो तो किसी और hi दुनिया में खो गयी थी. मैंने शिवानी क कण की लो को होंठो में ले लिया और उसकी जांघों पर अपना हाथ चलने लगा साथ hi उसके पेट पर जो हाथ था उसको नीचे ले क जाता छूट क पास तक और ऊपर लेकर आता सके बूब्स क बॉटम तक. जांघों को मसलते हुए मैं अपना हाथ कभी बहार से कभी इनर तइस पर चलता और इसके साथ hi उसकी स्कर्ट को और ऊपर करने की कोशिश करता. शिवानी क मुँह से लगातार मादक सिसकियाँ निकल रही थी जो बता रही थी क शिवानी इस वक़्त सिर्फ मज़ा ले रही है और उसकी आग बाद चुकी है. शिवानी एक हाथ पीछे लेकर मेरे सर को अपनी गर्दन पर दबा रही थी और दूसरा हाथ अपने पेट पर चल रहे मेरे हाथ क ऊपर रख कर उसे डिश बता रही थी. मैंने उसकी जांघों पर हाथ चलते हुए जब इनर साइड पर चला रहा था तो हाथ को थोड़ा अंदर ले जाते हुए जांघों की जड़ों तक ले गया यानि की छूट क पास तक जिससे शिवानी की आग कुछ ज्यादा hi भड़की क उसने मेरा दूसरा हाथ खुद hi पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया. शिवानी को तो एहसास भी न होगा क उसने क्या किया पर मैं शिवानी को काबू करने में कामयाब हो गया था. मैंने इसके एक दाएं स्तन को अपने हाथ में ले लिया. शिवानी का स्तन टाइट हो रहा था . शिवानी क बूब्स बड़े और आकर्षक थे उन्हें हलके हाथ से दबा कर मैं उनका अछि तरह से जायज़ा ले रहा था. शिवानी पहले भी सब कुछ करवा चुकी होगी ये तो मैं फोटो देखते hi समझ गया था इसी लिए ये सब करने में उसे कोई धक्का नहीं पहुंचेगा ये बात मैं अछि तरह समझ चूका था . इस लिए मैं अपना काम बिना किसी अफ़सोस क कर रहा था . जब शिवानी ने मेरे हाथ को अपने बूब्स दबाने से नहीं रोका तो मैंने अपना दूसरा हाथ भी उसके दूसरे स्तन पर रख दिया और उसके दोनों स्तनों को अपने हाथो से दबाने लगा. शिवानी अब और कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी और अब उसकी बंद ज़ुबान खुलने लगी.
शिवानी : ककक आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह उम्म्म ओह्ह्ह्हह्हह उम्म्म्म क्या कर रहे हो तुम कक्कक्स तुम तो ड्राइविंग सिखने आये थे ककक उम्म्म्म ये क्याआ. कररररर रहे होऊ... तुम मुझे पगललललल कर रहे होऊ. रुक जाओ उम्मम्मम कक्कक्स मत करूऊओ मैंनमम्म उम्मम्मम ये क्या हो रहा हीी. ......
मैंने अपना काम जारी रखा शिवानी मुझे रुकने को कह तो रही थी मगर उसका जिस्म कुछ और hi कह रहा था. मैं लगातार अपना काम कर रहा था . मैंने एक और तीर चलते हुए अपना हाथ उसकी स्कर्ट में घुसकर पेंटी क ऊपर से उसकी छूट पर रख दिया. शिवानी की पेंटी गीली हो रही थी . मैंने अपनी उंगली से उसकी छूट पर से दबाव बनाना शुरू कर दिया जिस से उसका जिस्म कम्पनी लगा . शिवानी का एक उभर मेरे हाथ में था और दूजा वो खुद hi दबाने लगी साथ hi अपनी नंगी टैंगो को मेरी टैंगो पर रगड़ने लगी. मैंने उसकी स्कर्ट को दोनों हाथो से पकड़ कर उलट कर कमर तक कर दिया जिससे उसकी पेंटी मेरे सामने आ गयी. शिवानी की गोरी टांगों क ऊपर कासी हुई काली पेंटी बहुत खूबसूरत नज़ारा दे रही थी. मैंने अपनी उंगलियां उसकी पेंटी में दाल कर उसकी छूट पर चलने लगा. शिवानी की छूट क्लीन शेव थी . उसकी छूट की स्किन का नरम एहसास बता रहा था क वो अपनी छूट का खास ख्याल रखती होगी. शिवानी की छूट गीली थी और उसकी कमर जिस तरह हिलने लगी थी वो बता रही थी क जल्दी hi छूट में कैद पानी का बाँध टूटने वाला है.
शिवानी : आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हब उम्मम्मम कक्कक्स क्या कर रहे हो कक्कक्क्स उम्म्म्म ऊऊह्ह्ह्ह क्या जादू है तुम में उम्मम्मम ऐसे hi ऐसे hi करो कक्कक्स उम्मम्मम कॉमन फास्टर फास्टर उम्म्म्म डीपर फास्टर
शिवानी अपनी छूट में चल रही मेरी उंगली को और अंदर और तेज़ चलने को कह रही थी . मैं भी शिवानी क बूब्स मसलता हुआ उसकी छूट में तेज़ तेज़ उंगली चलने लगा. शिवानी से और ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं हुआ और उसका जिस्म अकड़ने लगा. शिवानी की कमर ऊपर उठी मेरी उंगली को और अंडर तक लेने क लिए और उसका जिस्म अकड़ कर झटके खाने लगा.
शिवानी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह अघहहह आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हब ुंकन्ना आईई कक्कक्स मैं गयी ी म सुंम्मिंग ी ऍम सुंम्मिंग आआआअह्हह्ह्ह्हह
शिवानी की छूट से गरम पानी की बरसात होने लगी और वो मेरी गॉड में निढाल हो कर पद गयी. एक बार फिर से शिवानी की ऑंखें बंद थी और वो ऐसे लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी मनो बहुत दूर से भाग कर आयी हो. शिवानी पूरी तरह से रिलैक्स हो गयी थी और उसे ज़रा भी एहसास नहीं था क वो कहाँ है और किस हालत में है. अब मैंने आगे बढ़ने का सोचा . शिवानी क पानी से उसकी पेंटी उसकी जांघें और मेरे हाथ क इलावा मेरा लोअर भी भीग गया था शायद काफी दिनों से पानी स्टॉक कर रखा होगा. मैंने उसके टॉप को उतरने क लिए जैसे hi हाथ लगाया तो मेरा फ़ोन बज उठा.
‘ ये भी साला अभी बजाना था पता नहीं कौन है. ‘ मन में बड़बड़ाते हुए मैंने मोबाइल देखा तो मेरा इरादा बदल गया और मैंने फ़ोन उठा लिया
आदमी : हम पहुँच गए हैं तुम कहाँ हो?
अमित : आप इस वक़्त कहाँ हैं?
आदमी : हम इस वक़्त क्सक्सक्सक्सक्स पर हैं.
अमित : आप वहीँ रुको मैं अभी आया.
मेरी बातचीत क दौरान शिवानी को भी होश आ गया था और वो अपनी हालत ठीक कर रही थी. मैंने कॉल ख़त्म होते hi शिवानी को देखा तो वो सर झुकाये अपनी हालत ठीक कर रही थी.
अमित : शिवानी ी ऍम सॉरी मुझसे फिर गलती हो गयी. पर क्या करूँ जब भी तुम पास आती हो मैं खुद को रोक नहीं पता काश तुम मेरे साथ मेरी क्लास में होती तो ......
शिवानी : तो ?
अमित : तो मैं अब तक अकेला नहीं होता. अब तक मैंने तुम्हे अपनी गफ बना लिया होता
शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो . तुम तो कहते हो तुम्हे इंटरेस्ट नहीं इन सब बातों में
अमित : जब मेनका विश्वामित्र जैसे तपस्वी की तपस्या भांग कर सकती है तो मैं तो एक मामूली सा इंसान हूँ. तुम तो स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा हो मैंने खुद को रोकने की कितनी कोशिश की पर तुम्हारे इस कयामती हुस्न ने मुझे तुम्हारा दीवाना बना hi दिया. तुम तो ऊपर वाले की बनायीं वो मूरत हो जो पत्थरों में भी जान दाल दे मैं तो इंसान हूँ.
अपनी तारीफ से भला कोण लड़की खुश नहीं होगी . शिवानी भी अंदर अंदर hi खुश हो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर मैंने देख ली मगर शिवानी ने उस मुस्कान को छुपाते हुए कहा
शिवानी : तुम झूठ बोल रहे हो अगर ऐसा होता तो तुम पहले भी मेरे साथ प्यार कर सकते थे मगर तब तो तुम पर कोई असर नहीं हुआ था जबकि मैं खुद तुम्हे लाइन दे रही थी.
अमित : ये तो मेरा दिल hi जनता है का मैं उस पर कितना जुल्म कर क उसे रोक रहा था . मगर अब जब मेरे दिल ने तुम्हारे दिल को पहचान लिया है तो ये मेरी भी नहीं मन रहा और तुम्हारे पास आते hi ये मेरे कण्ट्रोल से बहार जो जाता है.
शिवानी : मैं कैसे विश्वास करूँ क तुम सच बोल रहे हो?
अमित : ठीक है तो तुम अपने दिल से पूछो क वो क्या कहता है अगर वो कहे क मैं गलत हूँ या झूठा हूँ तो तुम मुझे बोल देना मैं कभी दोबारा तुम्हारे पास भी नहीं आऊंगा.
शिवानी : बड़े तेज़ हो तुम . तुम जानते हो मेरा दिल तो तुम्हारी hi साइड लेगा इस लिए ऐसी बातें कर रहे हो.
शिवानी की बात से मैं खुश हो गया मतलब वो भी मुझे पसंद करती है. पसंद करती है ये तो मुझे पहले hi पता था मगर इस नज़र से भी करती है ये अब पता चल गया .
अमित : क्या कहा ? इसका मतलब तुम भी मुझे चाहती हो ? मतलब तुम जैसी परियों की रानी मुझ जैसे मामूली आदमी को पसंद कर सकती है मुझे तो यकीन नहिभो रहा .
शिवानी : तुम कोई मामूली नहीं हो. तुम क्या हो ये मैं अछि तरह जानती हूँ . काश क तुम मुझे पहले मिले होते तो मैं तुम्हारे कदमो में जान तक लुटा देती. अगर तुम मुझे पहल मिल जाते तो मैं कभी किसी की तरफ देखती भी नहीं
अमित : अब तो मिल गया हूँ न तो अब क्या इरादा हज?
शिवानी : इरादा तो नेक है पर इस रिश्ते का अंजाम क्या होगा?
अमित : कल की चिंता क्यों करती हो ? हम आज साथ हैं क्या ये काम है ? मैं तुम्हे किसी भी चीज़ क लिए फाॅर्स नहीं करूँगा टेक योर टाइम . तुम्हे ठीक लगे तो हम आगे बढ़ेंगे वर्ण नहीं. और अंजाम की परवाह करने से क्या होगा किसी को अपने अंजाम पर इख़्तियार नहीं होता ये तो सब ऊपर वाले क हाथ में है. मैं चाहता हूँ तुम ठन्डे दिमाग से सोच कर मुझे अपना फैसला बताओ इस लिए आज क लिए इतना बहुत है अब हम चलते हैं तुम मुझे घर छोड़ दो.
शिवानी कुछ कहना चाहती थी मगर वो चुप रह गयी शायद उसे भी अपनी ये हालत सही नहीं लग रही होगी और एक डैम से आगे बढ़ना भी आसान नहीं होता. बेशक शिवानी मॉडर्न थी पर उसकी माँ से मिलने क बाद मुझे इतना तो पता चल गया था क वो बहार से कुछ और अंदर से कुछ और है. शिवानी कार से बहार निकली और अपने कपडे ठीक करने लगी मैं भी ड्राइवर सीट से उठ कर दूसरी सीट पर आ गया और शिवानी गाड़ी चलते हुए मुझे घर क बहार ड्राप कर क चली गयी. मैंने अपनी बाइक निकली और उस तरफ चल दिया जहाँ मुझे अपने साथियों से मिलना था. मैंने मंजू म को फ़ोन पर बता दिया क आज मैं नहीं आ पाउँगा . वो मुझसे नाराज़ हुई क्यूंकि वो मेरी चोट की वजह से पहले hi मुझ पर गुस्सा थी अब मेरे न आने से वो और नज़र hi रही थी . मैंने उनको बताने क बाद अपने साथियों क पास पहुँच गया.