Adultery Manhoos se mahan tak - Page 13 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 103



अगले दिन कॉलेज में फर्स्ट लेक्चर फिर से चंद्रकांता की दन्त से hi शुरू हुआ मगर प्रोफ व् को बताने क बाद से अब मम मुझे क्लास से नहीं निकलती थी मगर खिसनी बिल्ली की तरह वो मेरी इंसल्ट करने चुकती नहीं थी. आज भी ऐसा hi हुआ. और मेरे साथ आज तो मोहित की भी वाट लग गयी. जैसे तैसे लेक्चर ख़तम हुआ तो चंद्रकांता क जाते hi साथ वाली रॉ मैं बैठी कल्पना ने मुझसे बात शुरू की.

कल्पना : hi , कैसे हो ? कल कहाँ रह गए थे ? कैंटीन में भी नहीं थे, ग्राउंड में भी नहीं ?

अमित : तो तुम कल मुझे ढून्ढ रही थी. वैसे कोई काम था क्या?

कल्पना : बस ऐसे hi. तुम नहीं थे और क्लास में भी बोर हो रही थी तो सोचा तुम कहीं बहार बैठे होंगे बस इसी लिए ढून्ढ रही थी. वैसे थे कहाँ तुम?

अमित : कल किसी काम से गया था मैं .

कल्पना : मुझे भी यही लगा इसी लिए फ़ोन नहीं किया तुम्हे. वैसे आज क्या कर रहे हो शाम को?

अमित : तुम्हे बताया तो था , पहले स्टेडियम फिर ट्यूशन.

कल्पना : तुम छुट्टी नहीं करते क्या? और ये ट्यूशन कोण पड़ता है भला?

अमित : क्या करूँ यार इंग्लिश में थोड़ी प्रॉब्लम थी और यहाँ सरे सब्जेक्ट इंग्लिश में होने की वजह से मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी.

कल्पना : ट्यूशन की क्या ज़रूरत है इसमें ? तुम मेरे साथ पद पिया करो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी.

अमित : थैंक्स पर वो क्या है न मेरी एक दीदी इंग्लिश टीचर हैं तो उन्होंने hi सख्ती से बोलै है क मैं उनके पास आकर पडूँ और छुट्टी करता हूँ तो वो नाराज़ हो जाती हैं.

कल्पना : ाचा !!! चलो ठीक है , वैसे अगर तुम थोड़ा टाइम निकल सको तो क्या तुम मुझसे मिलोगे ? तुमने कहा था न क हम दोस्त हैं . मेरा और कोई दोस्त नहीं है न hi मुझे यहाँ कोई ाचा लगता है. सब बनावटी हैं यहाँ. बस एक तुम hi हो जो सच्चे हो और मेरी तरह स्पोर्ट्स पर्सन हो.

अमित : मैं ज़रूर मिलूंगा किसी दिन टाइम निकल कर वैसे अगर कोई खास काम हो तो बिना झिझक कह देना तुम्हारे किये दीदी का गुस्सा भी झेल लूंगा.

कल्पना : सच ! वैसे चिंता न करो बिना वजह मैं तुम्हे कभी तंग नहीं करुँगी. वैसे मैं भी शाम को प्रैक्टिस तो करती हूँ पर उसके इलावा कुछ नहीं तो काफी टाइम होता है मेरे पास. सोचा तुम्हारे साथ कहीं बहार घूम आया करूँ.

‘ अमित बे अटेंटिव इन माय क्लास ‘

ये आवाज़ सुनते hi मुझे ध्यान आया मंजू म क्लास में आ चुके हैं और मेरी तरफ hi देख रहे हैं. वो कब आये मुझे पता hi नहीं लगा. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi सीधा हो के बैठ गया. मम ने और कुछ नहीं कहा पर उनके चेहरे पर हल्का गुस्सा ज़रूर था. मंजू म का लेक्चर ख़तम होते hi हम कैंटीन की तरफ चल दिए और कल्पना भी हमारे साथ थी. कल्पना तो अब हमारे ग्रुप में शामिल हो गयी थी . कॉलेज से घर वापिस आ कर जब लंच से फ्री हुए तो मोहित अपने रूम में चला गया और मैं आंटी क साथ बैठ गया .

अमित : तो अंकल से क्या बात हुई दीदी क बारे में ?

आंटी : राघव कह रहे थे क वो एक बार खुद बात करेंगे दामाद जी से क वो करिश्मा ( मोहित सिस्टर) कुछ दिनों क लिए भेज दें. अगर वो नहीं भेजेंगे तो अगले महीने जा कर हम दोनों उसे ले आएंगे.

अमित : ये भी ठीक है. ऐसे सीधा जा कर लाना से वो लोग बुरा भी मन सकते हैं. उन्हें एक मौका तो देना चाहिए क्या पता वो खुद hi भेज दें दीदी को.

आंटी : ऐसा होता तो वो राखी पर न आ जाती? मैं तो आज hi जाने का बोल रही थी पर ये मने नहीं.

अमित : कोई बात नहीं सब ठीक हो जायेगा. आप चिंता मत करो.

आंटी : उम्मीद hi कर सकते हैं.

अमित : वैसे आंटी एक बात पूछनी थी आपसे ?

आंटी : पूछो

अमित : अंकल उस दिन बता रहे थे क आपका एक और घर भी है ?

आंटी : तुम्हे मोहित ने बताया नहीं? वो हमारा पहला घर है . जहाँ पहले हम रहा करते थे पर वो दूसरे शहर में है. तुम क्यों पूछ रहे हो?

अमित : बस ऐसे hi दिमाग में आ गया . वो क्या है न यहाँ पर जो भी मिलता है वो यही कहता है हमारे पास इतने फ्लैट्स हैं , हमारे पास फार्म हाउस है , हमारे पास इतने घर हैं हमारे पास ये हमारे पास वो . तो मैंने सोचा आपके पास भी तो होंगे अंकल बता भी रहे थे पर मोहित क साथ जा कर देखने का टाइम hi नहीं मिला . आज बस मंद में आया तो पूछ लिया.

आंटी : पहली बात ये क ये आपका कहना बंद करो. ये सब तुम्हारा भी है. वैसे तो हम ने उसी शहर से शुरुआत की थी तुम्हारे पापा भी वहीँ क तो थे. मगर यहाँ भी हमारा बहुत कुछ है. फार्महाउस की तो कभी हमें ज़रूरत hi नहीं थी, हाँ फ्लैट और कुछ प्लाट वगैरह ले रखे हैं इन्वेस्टमेंट क तौर पर. और ऑफिस का तो तुम्हे बता hi दिया होगा.

अमित : फ्लैट भी हैं ? वो कहाँ ओर हैं? क्या वहां कोई रहता है?

आंटी : एक में तो इन्होने अपने किसी दोस्त को रखा हुआ है और एक खली पड़ा है. यहीं क्सक्सक्सक्स टावर्स में है. इसके इलावा एक और है वो करिश्मा क नाम से लिया था उसके पेपर्स उसी को दे दिए शादी क गिफ्ट में .

अमित : क्या मैं वो फ्लैट देख सकता हूँ?

आंटी : देख तो सकते हो पर आज अचानक ये सब कैसे दिमाग में आ गया ? बात क्या है सच सच बताओ.

अमित : वो आंटी असल में हमारे ग्रुप क सब लोग पार्टी करने को कह रहे थे पार्टी मुझे करनी है तो जगह समझ नहीं आ रही थी. वैसे तो दोस्तों क अपने फ्लैट और फार्म हाउस हैं ओर अगर मैं वहां जाता हूँ तो इससे कहीं मोहित की इंसल्ट न हो बस इसी लिए मैं सोच रहा था अगर अपने पास कोई ऐसी जगह है तो वहीँ कर लेंगे.

आंटी : तो तुम घर क्यों नहीं ले एते सब को?

अमित : समझा कीजिये वो लोग घर नहीं आएंगे. और मोहित को अभी माहि ओट किसी बात का. उसे सरप्राइज देना है आप भी मत बताइयेगा.

आंटी : ठीक है पर वहां साफ सफाई का देखन पड़ेगा वैसे तो वहां सब सामान मौजूद है बस सफाई करनी पड़ेगी बहुत दिनों से वहां गए hi नहीं.

अमित : वो मैं देख लूँगा आप चिंता मत करो. आप बस चाबियाँ दे दीजिये.

आंटी : रुको मैं अभी लती हूँ.

आंटी ने मुझे फ्लैट की चाबियाँ लेकर दे दी. अब मुझे बस फ्लैट को एक बार जा कर देखना था. नैना दीदी क लिए जगह का प्रबंध तो हो गया. अब बाकि क इंतज़ाम करने होंगे. आंटी से थोड़ी इधर उधर की बातें की और इतने में शिवानी का फ़ोन आ गया मैंने उसे आने को कह दिया और जल्दी से अपने कपडे बदल लिए. कुछ hi देर में शिवानी आ गयी. शिवानी मुझे कार में बिठा कर ग्राउंड की तरफ चलने लगी तो मैंने उसे उस फ्लैट का एड्रेस दिया और वहां चलने को कहा . शिवानी ने बिना किसी सवाल क गाड़ी उधर घुमा ली. ये भी एक बहुत बड़ी बिल्डिंग थी जहाँ बहुत सरे फ्लैट्स थे. मैंने सिक्योरिटी गार्ड क पास एंट्री करवाई और हम दोनों फ्लैट पर पहुँच गए. मैंने चाबी लगा कर दरवाज़ा खोला तो शिवानी पूछने लगी.

शिवानी : ये किसका फ्लैट है? और इसकी चाबी तुम्हारे पास कैसे?

अमित : ये मोहित का है . मुझे चाहिए था तो क बार चेक करने चला आया.

शिवानी : तुम्हे क्या ज़रूरत पद गयी इसकी?

मैंने अंदर जाते दरवाज़ा बंद किया और शिवानी की कमर में हाथ दाल कर उसे अपने साथ चिपका लिया.

अमित : गाड़ी में तुम्हे मज़ा नहीं अत न इसी लिए इसकी चाबी मांग कर लाया हूँ. तो बोलो क्या कहती हो.

शिवानी : ( शरमाते हुए ) क्या सच में इसी लिए यहाँ ए हो?

अमित : तुम क्या कहती हो ?

शिवानी : मैं तो तुम्हारे साथ कहीं भी चलने को तैयार हूँ.

अमित : सच में ? तो फिर हो जाये ?

शिवानी : हम्म्म्म

अमित : मगर पहले यहाँ की सफाई करनी पड़ेगी वर्ण ऐसे मज़ा नहीं आएगा. तुम ऐसा करो आज घर चली जाओ और मैं यहाँ की सफाई करता हूँ.

शिवानी : ये क्या बात हुई? तुम अकेले कैसे करोगे ये सब वैसे भी ये लड़कियों का काम होता है लड़कों का नहीं. हटो पूछे मैं करती हूँ सफाई तुम आराम से बैठो.

अमित : नहीं तुमसे नहीं होगा. तुम तो राज कुमारियों की तरह पाली हो मैं जनता हूँ तुमने घर ओर भी कभी काम नहीं किया होगा. इस लिए तुम रहने दो मैं खुद hi कर लूंगा तुम तब तक बहार घूम आओ.

शिवानी : इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. इतना काम तो हर कोई करना जनता है. वैसे ये सब मेरे लिए hi तो करना है तो क्यों न मैं hi करूँ.

अमित : ाचा चलो दो ो मिल कर करते हैं जल्दी ख़तम hi जायेगा.

सारा कुछ सफ़ेद चादरों से ढाका हुआ था ता की धुल मिटटी से ख़राब न हो. वैसे भी बहार से कहीं से धुल मिटटी आने की कोई जगह तो थी नहीं इस किये तकरीबन साफ hi था बस हलकी फ़िल्मी सफाई को ज़रूरत थी तो हम दोनों जुट गए और सरे कपडे उतर कर एक साइड रख दिए. फ्लैट में hi झाड़ू पीछे का सामान पड़ा हुआ था तो हमने वही इस्तेमाल किया. पानी का प्रबंध तो ऊपर सबके लिए hi रहता है. उसके इलावा किचन में भी बर्तन वगैरह ज़रूरत की हर चीज़ थी. फ्लैट में हर चीज़ मौजूद थी पूरा फर्नीचर और घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़. सफाई करते करते 1:30 घंटा लग गया और हम दोनों थक गए .

अमित : हआ अब जा क कहीं साफ लग रहा है. तो क्या कहती हो फिर से गन्दा करें?

शिवानी : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मैं तो थक गयी . कभी भी इतना काम नहीं किया मेरी तो पूरी बॉडी ऐसे लग रही है जैसे बहुत भरी हो गयी हो. मुझसे तो अब कुछ नहीं होगा . आज तो रहने hi दो.

अमित : ठीक है आज रहने देते हैं पर अभी तुम्हारी थकन उतरने क लिए कुछ तो करना होगा न.

शिवानी : मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा प्लीज रहने दो कुछ भी.

अमित : तुम बस चुप रहो.

उसके बाद मैंने शिवानी क कपडे उतरने शुरू कर दिए वो मुझे रोकती रही पर मैं नहीं मन . शिकवणी को नंगा करने क बाद मैंने भी अपने कपडे उतर दिए और शिवानी को लेकर बाथरूम में आ गया. ठन्डे पानी क शावर क नीचे नहाने से हमारी थकन मिटने लगी. मैंने अपने हाथों से शिवानी क गोर बदन को मॉल मॉल कर उसे नहलाया. आज वाकई में थकन हो चुकी गहि इस लिए मैंने कोई छेड़ छड़ नहीं की क्यूंकि इसमें मज़ा नहीं अत दोनों को. नहाने क बाद शिवानी को भी काफी रहत मिली और फिर हम कपडे पहन कर फ्लैट को लॉक कर क वापिस आ गए. स्टेडियम से जब ट्यूशन पहुंचा तो मंजू म क चेहरे पर गुस्सा झलक रहा था .

मंजू म : क्या बातें हो रही थी क्लास में कल्पना क साथ ?

अमित : कुछ भी तो नहीं , बस ऐसे hi इधर उधर की. वो मुझसे पूछ रही थे क मैं कल क्यों नहीं आया ?

मंजू म : उसे बड़ा इंटरेस्ट है तुम में ? माजरा क्या है? इतने बिजी थे तुम उसके साथ क मेरा भी पता नहीं चला ?

अमित : कुछ नहीं कोई ऐसी वैसी बात नहीं है. वो बस मेरी दोस्त है. वैसे आप इतना गुस्सा क्यों कर रही हैं? आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हैं जैसे आप मेरी गफ हो और आप क सामने मैंने किसी और लड़की से कोई बात कर्ली हो. आप को जलन हो रही है उससे?

बेध्यानी में मैं वो बात कह गया जो नहीं केहनी चाहिए थी. पर अब तो तीर निकल चूका था.

मंजू म : क्या कहा ? मुझे जलन हो रही है ? हाँ हो रही है जलन , सच सच बता तेरा उसके साथ क्या सन चल रहा है.

मंजू म तो सच मच गुस्से में आ गयी और उन्होंने मेरी उस बात पर भी जैसे कोई गौर नहीं किया. पर मैंने जो गलती कर दी थी उसे संभालना भी तो था.

अमित : सॉरी दीदी मैं कुछ ज्यादा hi बोल गया. मैं सच कह रहा हूँ ऐसी कोई बात नहीं वो जस्ट मेरी फ्रंड है . वो जुडो की प्लेयर है तो उस दिन पहली बार प्रिंसिपल सर क ऑफिस में hi बात हुई थी. बेचारी क कोई फ्रेंड्स नहीं हैं . स्पोर्ट्स में होने क कारन हम दोस्त नान गए और कोई बात नहीं है. प्लीज आप गुस्सा मत कीजिये अगर आप को बुरा लगा हो तो मैं फिर उससे बात नहीं करूँगा . मैं आपको नाराज़ नहीं करना चाहता.

मेरे ऐसा कहता hi मंजू म क तेवर थोड़े नरम पद गए.

मंजू म : उसकी कोई ज़रूरत नहीं. मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है. कॉलेज में ज्यादातर बड़े घरों क बिछ्ड़े हुए बचे हैं और मैं नहीं चाहती क मेरा भाई किसी गलत सांगत में पड़े. वैसे वो लड़की सब से अलग है . मैंने देखा है वो किसी से बात नहीं करती.

अमित : अब गुस्सा ठंडा हो गया हो तो क्या एक कप कॉफ़ी मिलेगी?

मंजू म : गुस्सा ऐसे ठंडा नहीं होगा

अमित : तो कैसे होगा?

मंजू म : कितने दिन हो गए तुम मुझे बहार नहीं लेकर गए. राखी वाले दिन मैंने सोचा था क हम साथ में डिनर करेंगे पर तुम्हे उस दिन जाना था.

अमित : लो इसमें कौन सी बड़ी बात है हम आज hi चलते हैं चलिए कपडे बदलिए.

मंजू म : अभी पहले कॉफ़ी पि कर पड़े करो. टेस्ट आने वाले हैं . स्टडी करने क बाद चलेंगे अभी बहुत टाइम है.

उसके बाद मम क हाथ की कॉफ़ी और स्टडी करने क बाद हम डिनर करने क लिए निकल गए . होटल में हमने साथ में डिनर किया और फिर मैंने मम से आइस क्रीम का पूछ तो मम मन गयी . हम आइस क्रीम खाने क लिए एक आइस क्रीम पार्लर गए . वहां मम को एक चेयर पर बिठा कर मैं आइस क्रीम लेने गया तो काउंटर पर एक लड़की मिल गयी जिसे मैं पहले एक बार मिल चूका था पर अभी उसका चेहरा मेरी तरफ नहीं था मगर साइड से hi मैं उसको पहचान रहा था बाद कन्फर्म नहीं था . जैसे hi मैं काउंटर पर आर्डर देने लगा तो उसने मेरी तरफ देखा.

लड़की : ो hi व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज !! कैसे हो तुम? मुझे पहचाना ? मैं नैना की दोस्त ज्योति

अमित : ो hi आप कैसी हैं ? इतने दिनों क बाद देख रहा हूँ आप को , एक बार तो मुझे लगा कहीं मैं किसी और को hi न गलती सी बुला लूँ. वैसे आपको मैं किसे भूल सकता हूँ. आप तो सब से खास हैं. उस दिन आपकी वजह से hi तो...

ज्योति : ी ऍम सॉरी यार , उस दिन कुछ ज्यादा hi हो गया था. पर थैंक्स तुमने नैना को मन लिया वर्ण वो तो हमसे बात भी न करती दोबारा . तुम जितने हैंडसम हो उससे भी ज्यादा दिल क अचे भी हो. वर्ण कोई और होता तो पता नहीं क्या कहता.

अमित : अरे इसमें माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. दोस्तों में तो हंसी मज़ाक चलता hi है. ऐसे अगर दोस्तों से लड़ाई झगड़ा करने लगे तो हम अकेले hi रह जायेंगे फिर ज़िन्दगी ज़िन्दगी कहाँ रह जाएगी. आखिर दोस्त hi तो ज़िन्दगी होते हैं.

ज्योति : ट्रुइली यू अरे अमेजिंग . कितनी अछि सोच है तुम्हारी. नैना बहुत लकी है जिसे तुम जैसा बर्फ मिला है. सच में यार तुम एक कम्पलीट पैकेज हो. मतलब परफेक्ट मन. काश क तुम्हारे जैसा मुझे भी कोई मिल जाये

अमित : आप कुछ ज्यादा hi तारीफ कर रही हैं मेरी , मैं इतना भी ाचा नहीं.

ज्योति : तुम क्या हो मैं अछि तरह जानती हूँ. हीरो जैसी पर्सनालिटी इतने अछि सोच . ये मजबूत बॉडी जो लड़कियों को अछि तरह गार्ड कर सकती है. केयरिंग नेचर और .. ( तगड़ा मजबूत हथियार जो किसी की भी प्यास बुझा सकता है )

अमित : और .....

ज्योति : ( शरमाते हुए ) और कुछ नहीं . तुम्हारा कोई भाई वगैरह नहीं है क्या ? या कोई तुम्हारा दोस्त जो तुम्हारे जैसा हो?

अमित : क्या करोगी ? वैसे मैं अकेला ओने पीेछे हूँ. मेरी कोई कार्बन कॉपी नहीं है.

ज्योति : मायूस होते हुए) काश कोई होता तो..

अमित : तो ....

ज्योति : बिना देरी किये उसे अपना बर्फ बना लेती.

अमित : है है है ... आप भी कमल करती हैं. वैसे आप इतनी खूबसूरत हैं क आप को मुझसे भी अचे अचे मिल जायेंगे.

ज्योति : मुझे बस तुम चाहिए . मेरा मतलब है सिर्फ तुम जैसा चाहिए.

अमित : अब तो मुश्किल है हाँ अगर कोई मिल गया तो बताऊंगा. वैसे मुझे यकीन है आप जैसी खूबसूरत लड़की को कोई मुझसे भी ाचा hi मिलेगा.

ज्योति : ( शर्मा गयी) इतनी भी कोई खूबसूरत नहीं मैं. नैना मुझसे कहीं अछि है.

अमित : वो तो है hi पर आप अपनी जगह खूबसूरत हैं. पता है आप क ग्रुप में मुझसे सबक अछि आप hi लगी थी उस दिन.

ज्योति : तो तुम hi बन जाओ न मेरे बर्फ

अमित : क्या ?

ज्योति : आज कल तो हर कोई 2-3 गफ बना लेता है . तो क्या तुम नहीं बना सकते? वैसे मैं तुम्हे ज्यादा तंग भी नहीं करुँगी.

अमित : आप ये क्या कह रही हैं? अगर नैना को पता चला तो पता है क्या होगा.

ज्योति : नैना को मैं कुछ नहीं बताउंगी और तुम भी मत बताना. प्लीज हाँ कार्डो . देखो मेरा कोई बर्फ नहीं है. मैं तो बाद सब पर इम्प्रैशन ज़माने क लिए किसी को भी थोड़ी बहुत लाइन देकर अपना बर्फ बना कर सब क सामने ले जाती हूँ पर उससे ज्यादा कुछ नहीं. मैं कसम कहती हूँ मेरा सीरियसली कोई बर्फ नहीं है. प्लीज तुम मेरे बर्फ बन जाओ .

अमित : ये नहीं हो सकता , मैं नैना को धोखा नहीं दे सकता.

ज्योति : प्लीज देखो मैं उसे धोखा देने को नहीं कह रही. मैं सिर्फ इतना चाहती हूँ तुम थोड़ा सा अपना प्यार मुझे भी दे दो. मैं वडा करती हूँ नैना को कभी पता नहीं चलेगा.

अमित : देखिये आप पता नहीं मुझे क्या समझ रही हैं पर मैं ऐसा नहीं हूँ. आप बहुत अछि हैं और खूबसूरत भी. आपको ज़रूर आपका मन चाहा बर्फ मिलेगा आप थोड़ा सबर रखिये.

ज्योति : सबर hi तो रखा था पर जब से तुम्हे देखा है बस तुम hi मेरे ख्वाबों ख्यालों में हो. नैना से कई बार कहा है क वो तुमको एक बार बुला ले पर वो मेरी सुनती hi नहीं है. प्लीज मुझे थोड़ा सा प्यार देदो.

ज्योति क बार बार इस तरह रिक्वेस्ट करने से मेरा मन पिघलने लगा था. उसकी वो करुणा मई ऑंखें मुझे कमज़ोर कर रही थी. किसी औरत का सबसे बड़ा हथियार उसके आंसू होते हैं मैंने ये सुना था और अक्सर मैं इसे हथियार क आगे ढेर हो जाता हूँ.

अमित : प्लीज यार खुद को सम्भालो मैं एक आम सा साधारण लड़का हूँ और आप ऐसे . ठीक है मैं आपका दोस्त बन सकता हूँ पर सिर्फ तब तक जब तक आपको कोई और बर्फ नहीं मिल जाता. इससे ज्यादा की उम्मीद मत रखिये मुझसे.

मेरे इतना कहने से ज्योति क चेहरे पर जैसे ख़ुशी जगमगाने लगी. उसकी ऑंखें चेहरे से ज्यादा मुस्कुराने लगी.

ज्योति : ो थैंक यू , थैंक यू वैरी मच.

ज्योति ने वही ख़ुशी में उछलते हुए मुझे गले लगा लिया और मेरे गाल पर किश कर दिया. ज्यादा लीग तो नहीं थे वहां पर फिर भी कुछ ने तो ये देख hi लिया था . ज्योति को जब एहसास हुआ क अभी अभी उसने क्या किया है वो भी शर्मा गयी और उसका चेहरा झुक गया . देखने में सबकी उस्ताद यानि क लेडी डॉन लगती थी अपने ग्रुप में और आज ऐसे शर्मा रही थी. मुझे पहले तो उसके किश करने से शॉक लगा पर उसको शरमाते हुए देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

अमित : ये क्या था? सबके सामने ये सब

ज्योति : नज़रें चुराते हुए ) सॉरी वो मुझे पता hi नहीं लगा कब ये ... सॉरी मुझे अपनी ख़ुशी कण्ट्रोल करनी चाहिए थी.

अमित : कोई बात नहीं , हो जाता है. पर खुद पर काबू करना भी आना चाहिए

ज्योति : मैं आगे से ध्यान रखूंगी.

अमित : वैसे किसके साथ आयी हो यहाँ?

ज्योति : मैं अकेली आयी हूँ यहाँ पास में hi मेरा घर है. और तुम?

ज्योति क इस सवाल से मुझे मंजू म की यद् आयी . वो यहीं पर थी और उन्होंने सब देख लिया होगा.

अमित : ो सहित ! मैं यहाँ दीदी क साथ आया था . मर गए मुझे जाना होगा प्लीज तुम भी निकलो . पता नहीं अब क्या होगा वो यहीं बैठी हुई हैं.

मैंने मंजू म की तरफ देखा तो वो हमारी तरफ hi देख रही थी और उनके चेहरे से hi उनके गुस्से का पता चल रहा था. मैंने जल्दी से आइस क्रीम ली और मंजू म की तरफ चल दिया. ज्योति भी पालक झपकते गायब हो गयी.

मंजू म : कौन थी ये ? बड़ा चिपक रही थी और सबके सामने ये सब ? बड़ी बेशरम लड़की है. और तुम भी कैसे उसके साथ इतनी देर से लगे हुए थे. है कौन ये ?

अमित : वो कोई नहीं है आप वो सब छोड़िये. वो पागल है मुझे तो खुद गुस्सा आ गया था उसने ऐसे अचानक

मंजू म : पता है जो गुस्सा आ गया था. इतनी देर से है है क बातें कर रहे थे तब तो गुस्सा नहीं आया? कब से चल रहा है उसके साथ चक्कर ? और ये अपने कॉलेज की तो नहीं लगती . कौन हैं? कहाँ की है? कैसे जानती है तुम्हे?

अमित : आप ऐसे hi शक कर रही हैं. असल में वो मेरी दीदी क कॉलेज में पड़ती है . उनकी फ्रंड है . दीदी क साथ hi मिला था इससे. वो पिछली बार इसने मेरे साथ एक मैक कर दिया था जिससे मैं गुस्सा हो गया था. उसी की माफ़ी मांग रही थी क्यूंकि दीदी ने भी उस दिन से इसे बुलाया नहीं. तो इस लिए वो मुझसे माफ़ी मांग रही थी. मैंने माफ़ कर दिया और वो ख़ुशी क मरे मेरे गले लग गयी.

मंजू म : तुम झूठ बोल रहे हो. उसने एक बार भी कण नहीं पकडे थे. और अगर वाकई में उसने तुम्हारे साथ गलत किया था तो तुमने माफ़ क्यों कर दिया? तुझे उसकी क्यों परवाह होने लगी?

अमित : आपको मुझ पर भरोसा नहीं? क्या मैं झूठ बोलूंगा आपसे ? आप को हो क्या गया है ? इतना शक तो कोई बीवी भी अपने पति पर नहीं करती जितना आप मुझ पर कर रही हैं.

बात तो कोई इतनी बड़ी नहीं थी पर पता नहीं कैसे मुझे बात करते करते गुस्सा आ गया. मंजू म तो पहले hi गुस्से में थी उनको मानाने की जगह मैं भी गुस्सा कर बैठा और जब दोनों hi गुस्सा कर बैठें तो मनाये कौन? आइस क्रीम वहीँ पड़ी रह गयी और हम दोनों उठ कर बहार आ गए. मैंने बाइक स्टार्ट की और मम भी चुपचाप पीछे बैठ गयी. मैंने मम को घर छोड़ा और वापिस मोहित क घर लौट आया . क्या से क्या हो गया. मैं ज्योति को रोने नहीं देना चाहता था इस लिए उसकी बात मन ली और अब मंजू म को बिना वजह इतना कुछ सुना कर उन्हें गुस्सा दिला कर वापिस आ गया. देखा जाये तो मम को भी इस तरह ओवर रियेक्ट नहीं करना चाहिए था. पर फिर भी मेरे दिल में इस बात पर पछतावा भी हो रहा था. अगर मम को वाकई में ठेस लग गयी तो ? अगर फिर से वो पहले की तरह हो गयी तो ? मैंने उन्हें बहिन बनाया है तो मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. हो सकता है बड़ी बहिन क नाते वो मेरी चिंता कर रही हों. पर फिर भी एक hi दिन में 2-2 बार , क्या मैं अब किसी लड़की से बात भी नहीं कर सकता?

मैं काफी देर तक मम क बारे में सोचता रहा. आंटी जब दूध देने आयी तो मुझे सोच में खोया देख कर उन्होंने भी वजह पूछी तो मैं है कर ताल दिया . इस सब में मैं तो भूल hi गया था क नैना दीदी को भी फ़ोन करना था.

अमित : hi कैसी हो नैना ?

नैना दीदी : वह आज तो बड़े अचे तरीके से बात कर रहे हो.

अमित : क्यों पहले अचे से बात नहीं करता क्या?

नैना दीदी : पहले हमेशा दीदी कहते हो इस लिए मुझे नहीं लगता पर आज सीधा मेरा नाम लिया . ी लिखे आईटी that’s लिखे माय बर्फ

अमित : क्या करूँ शुरू से आदत जो है दीदी कहने की

नैना दीदी : फिर आज क्यों नहीं कहा?

अमित : क्यूंकि मैं अपनी दीदी को तो वो नहीं कह सकता न जो मैं अपनी गफ को कहने वाला हूँ.

नैना दीदी : ( धीमी आवाज़ में ) ऐसा क्या कहने वाले हो .

अमित : कल आपको काली से फूल बनाना है इस लिए कल सुबह कॉलेज नहीं जाना . कल सारा दिन आप मेरे साथ रहोगी.

मेरी बात सुनते hi नैना दीदी शर्मा गयी और कुछ देर तक चुप रही. शायद मेरी बात से लड़कियों वाली हाय उन पर हावी हो गयी थी . हमेशा मेरे साथ बोल्ड रहने वाली आज खुद शर्मा रही थी.

अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी?

नैना दीदी : ........

अमित : इरादा बदल गया हो तो रहने देते हैं

नैना दीदी : ( उतावले पाने से ) मैंने ऐसा कब कहा

मुझे उनके इस तरह बोलने से उन पर हसी आ गयी पर मैंने कण्ट्रोल किया

अमित : तो फिर आओ कुछ बोली क्यों नहीं?

नैना दीदी : मैं क्या कहूं? तुम्हे सब पता तो है

अमित : मुझे क्या पता होगा मैं तो आप से इसी लिए पूछ रहा हूँ

नैना दीदी : तुम्हे सब पता है अब मुझे तंग मत करो

अमित : तंग कहा होगी अब तो खुली होगी

नैना दीदी : क्या खुली होगी ? ............ गंदे बेशरम छी ... शर्म नहीं आती ?

अमित : मैंने क्या कहा

नैना दीदी : तुम ज्यादा स्मार्ट मत बनो . कैसी गन्दी गन्दी बातें कर रहे हो

अमित : मतलब गन्दा काम तो कर सकते हैं पर बातें नहीं.

नैना दीदी : क्यों तंग कर रहे हो मुझे शर्म आ रही है

अमित : वह ..... तो आप को भी शर्म आती है. उस दिन तो मुझे कह रही थी क मैं लड़कियों की तरह शरमाता हूँ.

नैना दीदी : तो क्या अब बदला ले रहे हो उस बात का?

अमित : बदला तो अचे से लूँगा कल आप मिलो तो सही

नैना दीदी : मैं नहीं आने वाली अगर तुमने ऐसे hi बातें करनी हैं तो.

अमित : सोच लीजिये , कल का दिन जगह का इंतज़ाम किया बाद में मौका मिले न मिले पता नहीं.

नैना दीदी : मैं नहीं आउंगी मुझे पता है तुम ऐसे hi तंग करोगे

अमित : फिर वही बात. मैंने कहा न मैं तंग नहीं खुली करूँगा.

नैना दीदी : ोुउउउउ ..... गंदे बेशरम गधे

अमित : गधे जैसा hi तो है वैसे

नैना दीदी : youuuuuuuuuu bye रखो अपना गधा अपने पास hi.

इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट दिया. कुछ ज्यादा हो शर्मा रही थी. जैसे भी हो उन्हें सताने में मज़ा बड़ा आ रहा था. मैंने फिर से फ़ोन कर दिया. 3-4 बेल्ल बजने क बाद उन्होंने फ़ोन उठा hi लिया.

नैना दीदी: ??????

अमित : बुरा मान गयी ?

नैना दीदी :???????

अमित : बात माहि करोगी ?

नैना दीदी : उनंहूँण

अमित : तो कल का कैंसिल फिर ? मैं अपने दोस्त को बोल देता हूँ क मुझे ज़रूरत नहीं उसके घर की चाबियों की.

नैना दीदी : जान ले लुंगी अगर कल का कैंसिल किया तो.

नैना दीदी भी न . वैसे तो बोल नहीं रही थी अब एक डैम से बोल पड़ी

अमित : तो कल तैयार हो क आना अछि तरह सफाई कर क. घर पर बहाना बना क आना कल देर से आओगी घर. और हाँ एक और बात

नैना दीदी : बोलो

अमित : कल तो अछि तरह खुली कर दूंगा फिर कभी तंग नहीं होगी है है है

नैना दीदी : ोुउउउउउउ ी किल यू गंदे बदमाश गधे

मैंने जल्दी से फ़ोन काट दिया. दीदी पता नहीं क्या क्या कहती रही होगी. मैं नैना दीदी क बारे में सोचता हुआ आराम से गया . आज आंटी भी शायद चुदाई क मूड में नहीं थी इसी लिए दूध देकर वापिस चली गयी थी. अगली सुबह मैं रूटीन से एक्ससरसीसे कर क वापिस आ गया और नगर कर क मोहित क साथ hi रेडी हो गया. मगर मैं कार क बजाये बाइक पर घर से निकला और मोहित को बता दिया क मैं किसी काम से जा रहा हूँ और फ्री हो कर आ जाऊंगा. मैंने नैना दीदी को फ़ोन किया तो उन्होंने पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया जैसे मेरे फ़ोन का hi वेट कर रही हों

नैना दीदी : कहाँ हो मैं कब से तुम्हारे फ़ोन का वेट कर रही हूँ?

अमित : बड़ी जल्दी में हो . ज्यादा तंग हो गयी थी क्या रत को ?

नैना दीदी : तुम बाज़ नहीं आओगे? मैं कॉलेज में तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ जल्दी आओ.

अमित : कॉलेज में क्या कर रही हो?

नैना दीदी : तो और क्या करती ? मैं करुणा क साथ कॉलेज आ गयी अब यहाँ से तुम्हारे साथ जाउंगी.

अमित : क्या करुणा दीदी को भी बता दिया?

नैना दीदी : पागल समझा है क्या? अभी उसे कुछ नहीं बताया . पर ज़रूरत पड़ी तो बताना भी पद सकता है. कोई बात हुई तो वो hi मेरी हेल्प करेगी न.

अमित : ाचा ठीक है मैं 15 मिनट्स में पहुँच रहा हूँ

नैना दीदी : जल्दी आओ

उसके बाद मैं नैना दीदी क कॉलेज की तरफ निकल गया. रस्ते में मुझे कुछ खाने पिने का सामान और कुछ टेबलेट्स भी चाहिए थी तो वो भी ले लिया.

दूसरी तरफ कॉलेज में आज शीना ने अपनी सब फ्रेंड्स को बुलाया था उनसे किसी बात पर चर्चा करने क लिए. उसके दिमाग में उस दिन से hi अमित को लेकर जो शक था आज वो अपना शक यकीन में बदलने क लिए सब क साथ मिलकर कोई प्लान बनाने वाली थी. वहीँ आज मोंटी कॉलेज नहीं आय और वो अपने उस फ्लैट छुम ऑफिस में चला गया . 2 दिन से वो गया नहीं था वहां और उसके पीछे क्या हो गया है वहां उसे खबर तक नहीं थी.

आज मेरे क्लास में न आने से मंजू म भी परेशां हो गए थे थोड़ा . कल रत जो भी हुआ उसकी वजह से वो भी ठीक से सो नहीं पायी थी. उन्हें भी समझ नहीं आ रही थी क आखिर वो इतनी ओवर रियेक्ट क्यों कर रही हैं. अमित जवान है उसकी अपनी लाइफ है . हैंडसम है तो लड़कियां तो आएँगी hi न बात करने उससे पर उन्हें क्यों जलन हो रही है ये बात उन्हें खुद समझ नहीं आ रही थी. जिस तरह कल अमित गुस्सा कर क गया था और आज क्लास में भी नहीं आया था . इसका मतलब था क अमित कुछ ज्यादा hi नाराज़ हो गया है. अगर कहीं गुस्से में आकर उनसे मिलना hi छोड़ दिया? अगर उसने उनसे अपना रिश्ता तोड़ लिया तो ? इतने दिनों बाद उनकी ज़िन्दगी में फिर से रंग आने लगे थे अमित की वजह से . वो एक स्टूडेंट एक दोस्त एक भाई एक घर क बड़े की तरह उनको ट्रीट करता था. इतने सरे रिश्ते वो अपनी एक गलती से कहीं खो न दे ये दर उन्हें सताने लगा था. ज़िन्दगी में पहली बार अपने सेज भाई क बाद दूसरा अमित hi था जिसकी छाप मंजू क दिल पर बस गयी थी. अब ये छाप भाई की है या कुछ और अभी इसका फैसला नहीं हुआ था. क्यूंकि कल जो कुछ भी मंजू ने किया वो एक बहिन तो कभी कर नहीं सकती. कहीं न कहीं मंजू क अंदर जलन सी हो गयी थी पहले कल्पना और फिर उस लड़की को आइस क्रीम पार्लर में अमित क साथ देख कर. जिस तरह उसने अमित को गले लगाया और सब क सामने चूमा ऐसे तो सिर्फ प्रेमिका hi कर सकती है . बस इसी वजह से मंजू को गुस्सा आ गया था और इस गुस्से में वो अमित को अनजाने में नाराज़ कर बैठी. कहीं अमित उनसे दूर हो कर किसी और क पास न चला जाये अब ये दर उन्हें सत्ता रहा था. बहिन होने क नाते मंजू को तो खुद अमित की मदद करनी चाहिए थी लड़की ढूंढ़ने में और यहाँ मंजू बजाये मदद करने क उन लड़कियों की वजह से झगड़ा कर रही थी. सच hi कहा था अमित ने क इतना शक तो बीवियां भी नहीं करती. तो क्या वो अमित क प्रति इतनी पोस्सेस्सिवे हो गयी है जैसे एक बीवी अपने पति क लिए? या फिर एक प्रेमिका अपने प्रेमी क किये ? सोच सोच कर मंजू का दिमाग ख़राब होता जा रहा था . दिमाग तो यही कह रहा था क अमित उसका छोटा भाई है पर दिल तो कुछ और hi कह रहा था. दिल को तो अमित क पास होने का एहसास hi बहुत था. जब कभी अमित उसे छूटा था तो उसको एक अलग hi फीलिंग आती थी जो वो समझ नहीं पति थी. और किस तरह से वो कभी का hi मंजू की तारीफ करता था चाहे शब्दों से या नज़रों से . मंजू को वो बहुत भाता था. जब कभी अमित की नज़रों को वो अपने रूप योजन पर महसूस करती तो वो अंदर तक हिल जाती थी. अमित क साथ बाइक पर पीछे बैठना उसके साथ वो नक्सली लड़ाई उसकी वो शर्तें उसका मंजू पर हक़ जाताना उसका उसे ज़बरदस्ती खुश रहने और ज़िन्दगी जीने का उपदेश देना मंजू को बहुत ाचा लगता था. एक समर्पण की भावना उसके मन में आ जाती थी जब भी अमित उस ओर हक़ जताता था और आज अमित गुस्सा कर क उसके सामने भी नहीं आया. पर ये भी तो हो सकता है क वो किसी काम से कहीं गया हो? शायद उसकी फॅमिली या रिश्तेदारों ने उसे बुला लिया हो या फिर वो किसी से मिलने गया हो. शायद वो रत वाली लड़की क साथ डेट पर गया हो ?

ये बात दिमाग में आते hi एक बार फिर मंजू को गुस्सा आ गया और वो फिर से अपने काम में लग गयी.

मंजू : ( जाता है तो जाये उसी से मिलने गया होगा . देखती हूँ इसे . जब आएगा अचे से क्लास लूंगी. खुद को समझता क्या है. एक तो खुद गलती करता है ऊपर से खुद hi गुस्सा दिखता है . मैं भी नहीं मनाने वाली इसे . बल्कि उसे मुझे मानना चाहिए . नाराज़ मैं हुई थी वो नहीं .)



मन में बस ऐसी hi बातें कर रही थी मंजू पर उसे क्या पता था क सच क्या है. आगे क्या होने वाला है उसकी ज़िन्दगी में. अब उनका आपस का ये गुस्सा ये नाराज़गी किस तरफ जाएगी ये मंजू को पता hi नहीं था मगर जल्द hi एक नया मोड़ आने वाला था.
 
अपडेट 104



जब मैं नैना दीदी क कॉलेज क बहार पहुंचा तो लड़कियां अंदर जा रही थी . कुछ तो मुझे बड़े गौर से देख रही थी. मुझे वहां खड़ा रहना ठीक नहीं लगा और मैं कुछ दूर पर जा कर एक गली क मोड़ पर खड़ा हो गया.

नैना दीदी : ( ों कॉल ) कहाँ हो अभी तक आये क्यों नहीं ?

अमित : मैं तो आ चूका हूँ आप कहाँ हैं ? मैं अभी गेट पर आया था तो आ थी नहीं वहां . मैं दायी तरह जो रोड जा रही है वहां पहली गली क मोड़ पर खड़ा हूँ आ जाओ. वहां मुझे देख कर पता नहीं क्या समझेंगे सब

नैना दीदी : कोई कुछ नहीं समझेगा तुम इधर आओ मैं बहार गेट पर hi हूँ.

इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट दिया और मैं उन्हें लेने चला गया. दीदी गेट क बहार hi कड़ी थी. उन्हें देख कर एक बार तो मेरा मुँह खुला का खुला hi रह गया. क्या लग रही थी आज वो. रेड टॉप जो स्किन फिट था और वैसी hi कासी हुई ब्लैक जीन्स खुले रेशमी काले सुबह बाल . चमकता हुआ गोरा मुखड़ा और काजल से आँखों को और काल कार्ड दिया था जैसे नज़रों से hi कतल करने का इरादा हो. एक नज़र मुझे देखने क बाद नैना दीदी ने जिस ऐडा से नज़रें शर्मा कर झुकाई वो भी मेरे दिल पर निकली गिराने क लिए काफी था. मैंने उनके पास बाइक को रोका तो वो बिना कोई बात किया आराम से पीछे बैठ गयी. मैं तो अभी भी जैसे उनके मायाजाल में hi कैद था.

नैना दीदी : अब चलो या किसी और का भी इंतज़ार है?

दीदी ने मुझे जैसे नींद से जगाया और मैंने बाइक को आगे बड़ा दिया. यहाँ से फ्लैट तक जाने में 15-20 मिनट्स का टाइम लग्न था . हम जैसे hi कॉलेज से थोड़ा आगे गए तो मैंने हम दोनों क बिच की चुप्पी को तोडा

अमित : आज आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं.

नैना दीदी : थैंक्स

नैना दीदी ने इतना hi कहा , मैं समझ गया क वो भी अंदर से शर्मा रही हैं या फिर नर्वस हैं. हो भी क्यों न आज उनकी ज़िन्दगी का खास दिन था. बिना शादी क वो सुहाग रत मेरा मतलब है सुहाग दिन मानाने वाली थी. आज क बाद वो कुंवारी लड़की नहीं रहेंगी. आज वो काली से फूल बन जाएँगी आज वो लड़की से औरत बन जाएँगी. और वो अपनी ये खास दहलत ये अनमोल खजाना मुझे सौंपना चाहती थी. उन्होंने ने मुझे चीन था अपनी ज़िन्दगी क इस अनमोल पल क लिए. हर बार शरारत और हंसी मज़ाक करने वाली नैना दीदी आज भीगी बिल्ली बानी चुपचाप बैठी थी. वो आज जीन्स में होने क बावजूद दोनों टाँगें एक तरफ कर क लड़कियों की तरह hi बैठी थी. जबकि पहले वो जब भी मेरे साथ बाइक पर बैठी थी तो हर बार लड़कों जी तरह दोनों तरफ टंगे कर क बैठती थी और मेरी पीठ से अपने बूब्स रगड़ती थी . दीदी कोई बात नहीं कर रही थी पर मैं उन्हें ज्यादा नर्वस नहीं होने देना चाहता था.

अमित : वैसे आज आप इस तरह क्यों बैठी हैं ? मुझे तो वही तरीका पसंद है जैसे आप हर बार बैठती हैं मेरे पीछे.

नैना दीदी : वो क्यों?

अमित : आप जब वैसे बैठती हैं तो मेरी पीठ को बहुत ाचा सपोर्ट रहता है और दिल को भी आराम मिलता है.

मेरी बात का मतलब समझते hi नैना दीदी और शर्मा गयी और मेरी पीठ पर एक थप्पड़ मर दिया.

नैना दीदी : गंदे इंसान ! बस यही चलता रहता है तुम्हारे दिमाग में ? मैंने सोचा था तू बहुत शरीफ है.

अमित : था तो शरीफ hi पर आप जैसी गफ हो तो कोई भी बिगड़ जायेगा.

दीदी फिर से शर्मा गयी. आज उनका ये क्या रूप देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. वो बार बार चुप कर जाती और मैं फिर से कोई हसी मज़ाक वाली बात कर देता. थोड़ी देर में hi हम अपने फ्लैट पर पहुँच गए. फ्लैट क अंदर आते hi दीदी अछि तरह उसे चेक करने लगी. और मैंने अपने साथ काया हुआ सामान बैग से निकल कर कुछ फ्रिज में रखा और कुछ बैग में hi रहने दिया.

नैना दीदी : ये किसका फ्लैट है? देखने में तो बड़ा ाचा है. लगता है काफी पैसे वाले लोग हैं ये.

अमित : इसे अपना hi समझिये. मोहित की फॅमिली का है . मैंने सोचा इससे अछि और कोई जगह कहाँ मिलेगी और इस फ्लैट क भी भाग खुल जायेंगे . कब से बंद पड़ा हुआ था . कल hi मैं सफाई कर क गया हूँ यहाँ की .

नैना दीदी : तुम्हे क्या ज़रूरत थी सफाई करने की हम साथ में कर लेते.

अमित : साथ में तो हम कुछ और करेंगे न. वैसे भी अगर आप मेरे साथ यहाँ सफाई करती तो फिर कुछ और करने की हिम्मत कहाँ रहती आप में .

दीदी फिर से एक बार शर्मा गयी.

अमित : क्या लेंगी आप ? मैं आपके लिए कुछ खाने पिने को लाया हूँ. जूस कोल्ड ड्रिंक चिप्स या कुछ और?

नैना दीदी : कॉलेज से 1 बजे छुट्टी हो जाती है. करुणा मेरे साथ hi जाती है.

नैना दीदी ने इतना कह कर बता दिया क ज्यादा टाइम नहीं है इस लिए टाइम वास्ते मत करो. मैं भी उनकी बात का मतलब समझ गया और दरवाज़े को अछि तरह लॉक कर क जैसे hi नैना दीदी की तरफ आगे बड़ा तो उनकी नज़रें झुक गयी और वो अपने हाथो की उंगलियां मरोड़ने लगी. मैंने धीमे कदमो से चलता हुआ उनके पास गया. नैना दीदी क दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो चुकी थी जिसका साबुत था उनका ऊपर नीचे होता सीना. नैना दीदी बहुत ज्यादा शर्मा रही थी जो एक अनएक्सपेक्टेड बेहेवियर था पर लड़कियों में शर्म तो नटुरालय होती hi है. मैंने उनकी थोड़ी पर उंगली से चुकार उनका चेहरा ऊपर किया मगर उन्होंने नज़रें झुकाये राखी. कितनी खूबसूरत थी नैना दीदी , एक तो इतना गोरा रंग जो मौसी से hi मिला था और मेरी सब मौसियां और कौसिन्स ऐसे hi गोरी चिट्टी थी. गोर रंग पर तीखे नैन नक्श. काजल क इस्तेमाल से पलकें कुछ ज्यादा hi लम्बी लग रही थी. शर्म से झुकी हुई नज़रें . गोर गुलाबी गाल जो अब शर्माने से और गुलाबी हो रहे थे. उनके वो कपकपाते यकृति होंठ जो गुलाब की पंखुड़ियों से कोमल थे और आज जैसे दीदी ने लाल लिपस्टिक लगा कर उन्हें और भी कातिलाना बना दिया था. लम्बी सुराहीदार गर्दन , बहार को उभरे हुए रेड टॉप में कैसे हुए उनके बूब्स जो सांस लेने क साथ फूल जाते और फिर सांस छोड़ते hi नीचे जाते . जीन्स तो जैसे जिस्म पर थी नहीं . इतनी कासी हुई स्किन फिट जीन्स उनकी कमर और टांगों का सही आकर बता रही थी. मैंने एक नज़र सर से पाऊँ तक नैना दीदी को देखा और फिर एक आखिरी बार उनसे फिर से सवाल किया.

अमित : आप पक्का ये करना चाहती हैं न ?

नैना दीदी ने एक पल को नज़रें उठा कर मेरी आँखों में देखा जैसे कह रही हो , क्यों बार बार ये सवाल कर रहे हो ? अब बस आगे बड़ो और मुझे प्यार करो . नैना दीदी ने फिर से नज़रें झुका ली और गर्दन हाँ में हिलायी. मैंने और देरी करना ठीक नहीं समझा क्यूंकि हमें ज्यादा वक़्त चाहिए था इस लिए मैंने अपना एक हाथ उनकी गर्दन पर रखते हुए उनके सुर्ख होंठो को अपने होंठो की पकड़ में ले लिया. दीदी क जिस्म में जैसे कम्पन सी हो रही थी उनके वो नमो मुलायम होंठ चूमते हुए मुझे उनके जिस्म में कम्पन महसूस हो रही थी. दीदी ने भी धीरे धीरे रिस्पांस देना शुरू कर दिया. मैंने दूसरे हाथ से उनकी कमर सहलाना शुरू कर दिया. दीदी भी मदहोश होने लगी और उनके हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे. मैंने किश करते हुए उन्हें अपनी आगोश में लेकर उठा लिया और बैडरूम की तरफ चल दिया. बैडरूम में एते hi मैं उन्हें अपने साथ लिए बीएड पर गिर गया. अब वो मेरे नीचे नरम गद्दे पर पड़ी हुई थी. मैंने अभी तक किश करना बंद नहीं किया था और नैना दीदी तो जैसे अपना आप मुझे सौंप चुकी थी. उन्होंने अपनी ऑंखें बंद कर राखी थी और वैसे hi मेरी पीठ सेहला रही थी. कोई 10 मिनट्स मैंने उनके माध भरे होंठो का रास चूसा और फिर उनसे थोड़ा अलग हुआ. वो अभी भी जैसे नशे में खोयी ऑंखें बंद किये हुए थी. मैंने एक बार उनका चेहरा नज़र भर देखा जो अब लाल गुलाबी हो रहा था. फिर मैंने उनके माथे पर किश किया फिर दो ो गलों पर फिर थोड़ी पर और फिर उनकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर किश किय. कान की लो को चूमते हुए मैंने उसे होंठों में पकड़ कर हल्का सा काट लिया . नैना अपनी सिसकियों को जैसे कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. फ्री मैंने उसकी गर्दन और कंधे क बीच एक बार और कटा और नैना तड़प उठी. इस बार उसने मेरी पीठ पर अपने दोनों हाथ कास लिए और मुझे अपने साथ लगा लिया.

मैंने उसे किश कर ा जारी रखा और उसके मस्त कच्चे आम जो थोड़े टाइट हो रहे थे दोनों हाथों में पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए. नैना एक बार फिर मचल गयी.

‘ आआह्ह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम आआअह्ह्ह आराम से ककक आआह्ह्ह्ह प्लीज आआअह्ह्ह्ह ‘

मैंने ज़रा दबाव बताया तो नैना जैसे मुझे यद् दिलाया क इन्हे ज़रा प्यार से दबाओ ये बहुत नाज़ुक हैं और तुम्हारे लिए hi हैं. मुझसे नैना क मस्त प्यारे बूब्स की ये परेशानी बर्दाश्त नहीं हो रही थी क वो अभी भी कपड़ों की कैद में थे. मैंने नैना दीदी क टॉप को निचे से दोनों साइड से पकड़ा और ऊपर करना चाहा तो नैना दीदी खुद hi थोड़ा उठ कर बैठ गयी और मैंने आराम से उनका टॉप उतर दिया. रेड टॉप क नीचे रेड ब्रा में hi कैद वो गुलाबी निप्पल वाले बूब्स कितने प्यारे लग रहे थे. मैंने जल्दी से ब्रा को भी खोल दिया और उनके वो प्यारे कच्चे आम उछालते हुए बहार आ गए. मैंने बिना वक़्त गवाए दोनों को अपने हाथों में थम लिया और नैना दीदी को फिर से बीएड पर गिरा दिया. मैं दीदी क ऊपर छ गया और दोनों बूब्स को मसलता हुआ एक साइड क निप्पल को होंठो में पकड़ कर खींचने लगा और साथ साथ अपनी जीभ से उसे कुरेदने लगा. एक बार दीदी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगी और मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी.

‘ आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्मम्मम्म ऐसे hi उम्म्म्म चुसो खा जाओ ककक उम्म्म्म इन्हे और प्यार करो आअह्ह्ह्ह ये कब से तरस रहे थे इन्हे ऐसे hi प्यार करो . इन पर अपना नाम लिख दो ‘

मैंने दीदी की बात मंटा हुआ उनके बूब्स को अपना बना रहा था और अपने होंठो से अपना नाम लिख रहा था. एक साइड से किश करने क बाद मैंने दूसरे को भी वाइज hi प्यार किया. उसके बाद उनकी नाभि को किश करता हुआ मैं निचे कमर तक आ गया. मैंने जीन्स क बटन को खोल कर ज़िप को खोला तो दीदी ने अपनी टंगे खुद hi ऊपर उठा ली. मैंने जीन्स को उतरना शुरू किया तो वो खुद मेरी मदद करने लगी. टाइट होने क कारन जीन्स ज़रा धीरे धीरे उतर रही थी. जीन्स क उतारते hi दीदी की गोरी चिकनी टंगे मेरे सामने थी. मैंने तो देखा hi नहीं क कब दीदी क पाऊँ से सेंडल उतर गए थे. खैर मैंने घुटनो पर बैठ कर उनका एक पाऊँ पकड़ कर चूमने लगा तो दूसरे को खुद hi उन्होंने मेरी छाती पर रख दिया. दोनों पाऊँ को मैंने अछि तरह चुम कर इस हुस्न की देवी की अपने प्यार द्वारा पूजा की . पाऊँ से लेकर घुटनो तक का भाग दोनों hi टांगों का मेरे थूक से गीला हो चूका था और मेरी स्टाम्प धीरे धीरे उनके पूरे बदन पर ऐसे hi लगने वाली थी. मैं नैना दीदी क ज़िन्दगी क इस अनमोल पल को इतने प्यार से भर देना छठा था जिसे वो कभी भी न भूल सके. घुटनो से उनकी टैंगो को बेंड करते हुए मैंने दो ो जांघों पर हाथ रख कर फैला दिया. दीदी मुझे ऐसा करने से रोक रही थी और ज़ोर लगा रही थी पर मैंने अपनी मर्ज़ी की. उनकी नरम मुलायम जाँघों पर मैंने किश करते हुए कटा भी और अछि तरह से मसला भी. जांघों को किश करता हुआ मैं उनकी योनि तक पहुँच गया जो अभी रेड पेंटी क अंदर थी. मैंने जल्दी से उनकी पेंटी भी उतर दी. नैना दीदी की गोरी गुलाबी छूट मेरे सामने आ गयी. बालों का एक भी रेशा तक कहीं नज़र नहीं आ रहा था. खूब चिकनी लग रही थी जैसे नैना दीदी ने स्पेशलय इसे खास तौर पर आज संवारा था. मैंने जैसे hi झुक कर उसे चूमना चाहा तो नैना दीदी ने मेरा सर पकड़ लिया.

नैना दीदी : नहीं आज नहीं वर्ण तुम फिर मुझे ऐसे hi कर क छोड़ डोज.

नैना दीदी ने समझा क आज फिर मैं उनका पानी निकल कर उन्हें ठंडा कर दूंगा और कहीं आज फिर से मैं आज उन्हें अधूरा न छोड़ दूँ तो वो थोड़ा घबरा रही थी .

अमित : आज आपकी हर इच्छा पूरी होगी आप चिंता मत करो मैं तो बस आपकी सहेली को प्यार कर रहा हूँ. आज इसके इस रूप को आखिरी बार प्यार कर रहा हूँ क्यूंकि इसके बाद तो ुए ऐसी नहीं रहेगी. अभी ये का hi काली है और फिर ये फूल बन जाएगी. आज इस का hi काली का सारा रास मेरा दोस्त निचोड़ लेगा. अभी इसके होंठ जो बंद पड़े हैं फिर ये हमेशा खुले रहेंगे

मेरी बातें सुन कर दीदी के चेहरे की लाली बाद गयी और शर्मा कर उन्होंने अपना चेहरा अपने हाथो से धक् लिया. मैं उनके उस प्यारे योन कुंड से अमृत निकलने क लिए म्हणत करने लगा. दीदी खुद को रोकने की कोशिश करती रही पर वासना की आग उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी और फिर उनके हाथ जो उनके चहरे पर थे वो अपने आप मेरे सर पर आ गए और वो मुझे अपनी छूट पर दबाने लगी.

‘ आअह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म्म ये क्या कर रहे हो कक्कक्स उम्म्म्म ये कहाँ से सीखा है तुमने कक्कक्स तुम जादूगर हो कक्कक्स आआह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है ककक उनममम आअह्ह्ह्ह ममअअअअ ककक आआह्ह्ह्ह आआआहहह आआअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आआह्ह्ह aaaaaaaaaaaaa ‘

मज़े में चीखती चिल्लाती नैना दीदी का जिस्म अकड़ गया. मेरे सर को उन्होंने अपनी छूट पर ज़ोर से दबा दिया और झटके लेते हुआ अपना पानी छोड़ने लगी. मैंने उनकी छूट को अछि तरह से साफ़ कर दिया. नैना दीदी रिलैक्स हो कर लेट गयी. मैं उनके ऊपर से उठा और अपने कपडे निकलने लगा. नैना दीदी मस्ती क वो पल एन्जॉय करती हुई ऑंखें बंद किये लेती हुई थी. मुझे अब उनसे फाइनल राउंड खेलना था और मैं जनता था मेरा लैंड जब अंदर जायेगा तो उनसे ये दर्द आसानी से बर्दाश्त नहीं होगा. मैंने इसका भी इंतज़ाम किया था. मैंने बैग से क्रीम निकली और उनकी टांगों क बीच आ कर बैठ गया. मैंने उंगली से क्रीम निकल कर उनकी छूट पर लगनी शुरू की तो छूट पर मेरे एहसास से उन्होंने ऑंखें खोल कर मेरी तरफ देखा. मुझे कपड़ों क बिना देख कर वो शर्मा गयी और फिर से ऑंखें बंद कर्ली. उन्हें पता चल गया था क अब आगे क्या होने वाला है.

छूट क अंदर जहाँ तक मेरी उंगली जा प् रही थी मैंने वहां तक क्रीम लगा दी और फिर अपने लैंड पर भी क्रीम लगा दी. मैंने दीदी क कमर को थोड़ा ऊपर उठा कर एक तकिया सुनी कमर क निचे रख जिससे क लैंड सही पोजीशन में सेट हो सके छूट पर . फिर मैंने दीदी की टांगों को बेंड कर क फैलते हुए खुद घुटने मोड़ कर उनकी कमर क साथ लग कर पोजीशन में आ गया और एक हाथ से लैंड को पकड़ कर उनकी छूट पर ऊपर निचे रगड़ने लगा. छूट इतनी छोटी थी क लैंड क सुपडे क नीचे गायब हो रही थी. दीदी आने वाले पल क बारे में सोचते हुए शर्मा कर ऑंखें बंद किये लेती थी.

‘ पहली बार है दर्द होगा बर्दाश्त कर लेना ‘ मैंने नैना दीदी को समझने की कोशिश की

‘ मुझे पता है तुम बस अपना काम करो और मेरी चिंता मत करो , कुछ भी आज बिना काम किये पूछे मत हटना’ दीदी ने साफ़ कर दिया क आज वो हर हल में ये सब करना चाहती हैं.

मैं दीदी क ऊपर झुक गया और एक हाथ उनकी नहीं तरफ बीएड पर रखते हुए दाएं हाथ से अपना लैंड पकडे उनकी छूट पर दबाव बढ़ाने लगा. दीदी की छूट का मुँह बहुत छोटा था इस लिए उन्हें दर्द होने लगा पर उन्होंने दर्द बर्दाश्त करते हुए अपने जबड़े भींच लिए. मैं झटका नहीं मरना चाहता था क्यूंकि एक तो दीदी को एक डैम से ज्यादा दर्द होता और दूसरा इससे लैंड फिसल भी तो जाता है. सालों से बंद दरवाज़ा पहली बार खुलने वाला था तो दर्द तो होना hi था. सूपड़ा अंदर नहीं जा रहा था और लगातार दीदी को दर्द हो रहा था. मैं एक पल क लिए रुका और दीदी की टाँगे पूरी तरह फैला दी जिससे छूट का मुँह थोड़ा खुला रहे. मैंने फिर से लैंड को पकड़ कर छूट पर सेट किया और दबाव बढ़ाने लगा. टाँगे पूरी तरह खुलने से छूट का मुँह हल्का सा खुल गया था और लैंड को निशान देने क लिए इतना बहुत था. कहते हैं न क पाऊँ रखने की जगह मिल जाये बाकि जगह आदमी खुद बना hi लेता है. बस ऐसे hi लैंड को थोड़ी सी जगह मिली सूपड़ा टिकाने क लिए और लैंड सेट हो गया निशाने पर. मैंने ज़ोर से लैंड को आगे पुश किया और सूपड़ा छूट क द्वार फैलते हुए अंदर घुस गया.

‘ आआआईइइइइइइइ माआआआ uiiiiiiiiiiii मर्डर गईइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह’

अभी सूपड़ा hi अंदर गया था क दीदी चीख पड़ी. चीखती भी क्यों न कहाँ उस छोटी सी छूट में एक उंगली तक न गयी थी कहाँ 4 इंच व्यास का ये मोटा तगड़ा मुसल वहां घुसने की कोशिश में था. मैंने बस सुपडे तक hi लैंड को रोक कर दीदी क बूब्स दबाने शुरू कर दिए . दीदी की बहुत दर्द हो रहा था उन्हें तो मिर्ची लग रही थी छूट पर.

‘ बस दीदी थोड़ा बर्दाश्त करलो ये दर्द तो होगा hi पहली बार ‘

‘ बहुत दर्द हो रहा है , ऐसा लग रहा है किसी ने छुरा घोंप दिया हो आआअह्ह्ह्हह माआ’

मैं तब तक उन्हें बूब्स मसलता रहा जब तक क वो थोड़ा शांत नहीं हुई. जब मैंने देखा क वो अब बर्दाश्त कर रही हैं तो मैंने झुक कर उनके होंठो पर किश करते हुए धक्का मारा. 2 इंच लैंड और अंदर घुस कर रुक गया. यहाँ पर शायद वो दिवार थी जो हर लड़की की जवानी क ख़ज़ाने का टाला होती है. मेरे इस धक्के से दीदी को दर्द तो हुआ था पर लिप लॉक होने से उनकी आवाज़ बहार नहीं आयी. मैंने थोड़ा सा लैंड बहार खींचते हुए माध्यम वेग से धक्का मारा और इसी क साथ मेरा शेर अपने रस्ते की रुकावट को भेदता हुआ आगे बाद गया. इसी क साथ नैना दीदी लड़की से औरत बन गयी. इसी क साथ आज वो काली से फूल बन गयी. मगर मेरे लैंड क इस प्रहार ने उन्हें जो दर्द दिया था वो बर्दाश्त नहीं कर पायी और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून चुभो दिए. वो मेरी पीठ नोचने लगी और मेरी कमर पर मुक्के मरने लगी. मैं जनता था कुछ ऐसा hi रिएक्शन होगा इसी लिए मैं उनके साथ पूरी तरह से चिपक गया था और उनके होंठ कास लिए थे . दीदी चीखना चिल्लाना चाहती थी मगर उनकी वो दर्द भरी चीखें उनके अंदर hi रह गयी . दर्द क मरे उन्होंने ने मेरे होंठ अपने दांतो से काट दिए और मैंने दर्द से कराहते हुए उनके होंठ आज़ाद कर दिए.

‘ आआआहहहहहहह माआरररर डाला माआआआ बहार निकालो इसे aaaaaaaaiiiiiiiiii माआआ मर गयी . प्लीज बहार निकालो इसे मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी बहार निकालो. ‘

नैना दीदी दर्द क मरे मुझे बहार निकलने को बोल रही थी पर उन्हें कहाँ पता था क असली मज़ा तो इस दर्द क बाद hi आने वाला है.

‘ बस दीदी हो गया जो होना था. अब और दर्द नहीं होगा. ये तो पहली बार में होता hi है. थोड़ा होंसला रखो घोड़ी देर में सारा दर्द गायब हो जायेगा’

मैं लगा तर उनके बूब्स मसल रहा था. एक निप्पल को होंठो में लेकर प्यार करता और कभी दूसरे निप्पल को. लैंड तो ऐसे घुसा पड़ा था जैसे हम दोनों की जिस्म उसी क सहारे जोड़ दिए गए हों. छूट में रेशे मात्र भी जगह न बची थी लैंड क साइज क ऊपर. बल्कि जगह तो थी hi नहीं वो तो मेरा लैंड hi खूंटे जैसा गड गया था छूट में. कोई 10 मिनट तक मैंने दीदी को रिलैक्स करने क लिए इतनी म्हणत की तब कहीं जाकर उनका दर्द से छटपटना बंद हुआ. दीदी क शांत होते hi मैंने धीरे से लैंड को बहार खींचने की कोशिश की तो उनकी छूट क अंदर का भाग भी जैसे लैंड क साथ चिपक कर बहार खिंचा आने लगा. मैंने सुपडे तक लैंड बहार निकला और लैंड क साथ अंदर से खून की धार भी बहार निकल आयी. छूट से खून निकल कर बीएड पर गिरने लगा. एक बार फिर से दीदी को दर्द होने लगा था लैंड क हिलने जुलने से. मैंने दीदी क बूब्स थमते हुए आराम से पुश करते हुए पहले जितना लैंड अंदर कर दिया. दीदी को दर्द हो रहा था पर वो चीख नहीं रही थी बल्कि वो जबड़े भींच कर दर्द बर्दाश्त कर रही थी. मैं आराम से लैंड को बिना धक्का मरे ऐसे अंदर बहार करने लगा . कुछ धक्कों क बाद hi लैंड आराम से अब छूट में आने जाने लगा था. लैंड जब छूट से बहार आता तो ऐसा लगता जैसे खून से नाहा कर बहार आया हो यानि क किसी क पेट में जैसे छुरा घुसा कर निकला हो . मेरा 5 इंच तक लैंड छूट में आ जा रहा था और इतने से hi मैं दीदी को मज़ा देने लगा. दीदी की छूट जब थोड़ी एडजस्ट हो गयी और गीली होने लगी तो मैंने बीच बीच में तेज़ धक्का मर कर लैंड थोड़ा थोड़ा और आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. दीदी को अब मज़ा आने लगा था और अब उन्हें दर्द से ज्यादा मज़ा मिल रहा था तो उनके मुँह से निकल रही दर्द भरी आहें अब मज़े की सिसकियों का रूप ले चुकी थी.

‘ आआह्ह्हम्म्म्म कक्कक्क्स उम्म्म्म आआह्ह्ह्हह कक्कक्स ऐसे hi प्यार करो मुझे उम्मम्मम कक्कक्स कास क मसलो इन्हे उम्म्म्म सीसीसी कितना मज़ा आ रहा है. कक्कक्स पहले क्यों नहीं किया तुमने ते सब उम्म्म्म कितना मज़ा आए रहा है. सच कहती हैं सब असली जन्नत यही है कक्कक्स उम्म्म ऐसे hi मुझे प्यार करते रहो , हमेशा ऐसे hi मुझे प्यार करना. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगी अब . इन्हे चूसो प्यार करो . आअह्ह्ह्ह उम्म्म इस मज़े क आगे तो वो दर्द कुछ भी नहीं है ककक उनममम .’

दीदी मज़े में मेरे बाल सहलाती मुझे प्यार करने को कहे जा रही थी. और मैं भी आज्ञा करि बालक की तरह उनकी बात मंटा हुआ उनके बूब्स मसलता चूमता धक्के मरे जा रहा था. दीदी क जिस्म में फिर एक बार उत्तेजना बाद गयी और वो खुद अपनी कमर उछलने लगी. मुझे अपने साथ कस्ते हुए वो अपने बीएड पर टिका कर अपनी कमर उछलने की कोशिश करने लगी.

‘ आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्ह और तेज़ करो और ज़ोर से और तेज़ धक्के मारो ऐसे hi और तेज़ शाबाश और तेज़ आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ममअअअ आआई aaahhhhhhhhhhhhhhhh’

दीदी का जिस्म अकड़ गया और उन्होंने अपनी छूट मेरे लैंड पर पूरे ज़ोर से दबा दी जिस वजह से थोड़ा और लैंड छूट में चला गया मगर इस वक़्त उन्हें इस बात का एहसास कहाँ था. वो तो मेरे लैंड पर गरम पानी की बरसात कर रही थी. पानी निकलने क बाद धीरे धीरे वो शांत होने लगी और उनकी कमर no बीएड ऊपर उठ गयी थी फिर से बीएड पर आ गिरी. मैंने थोड़ा सा लैंड बहार निकला तो खून और छूट का पानी अंदर से hi मिक्स हो कर बहार आने लगा . मैंने थोड़ी देर दीदी को रिलैक्स होने दिया . दीदी की साँसे नार्मल होते hi मैंने अपना काम शुरू कर दिया. दीदी तो बार झाड़ चुकी थी पर अब मेरी बरी थी. वैसे भी हमारे पस सारा दिन नहीं था और दीदी को हो बाद में दर्द होना था उसका भी तो इलाज करना रहा. मैंने पोजीशन सँभालते हुए फायरिंग शुरू कर दी और छूट पर लैंड क तेज़ धक्के शुरू कर दिए. लैंड अब 7 इंच तक जगह बना चूका था. छूट क पानी बहा देने से अब लैंड बिना किसी मुश्किल क आसानी से छूट में आ जा रहा था. मैं तेज़ी से कमर चलने लगा और दीदी की टंगे उठा कर अपने कन्धों पर रख ली. कितना सुन्दर नज़ारा था , दूध सी गोरी कुंदन काया अब तक उनतोच जवानी आज मेरे निचे थी. दीदी की गोरी गोरी टांगों को अपने मजबूत कन्धों पर रख कर मैं उनके ऊपर झुक गया. जब दीदी क नज़रें मेरी नज़रों से मिली तो वो अपने ऊपर मुझे इस तरह झुके हुए देख कर वो शर्मा गयी. मेरे धक्के अब पहले से कहीं तेज़ हो चुके थे और दीदी भी एक बार फिर से गरम होने लगी. मैं अब अपना पानी निकलना चाहता था मैंने घुटनो पर बैठ कर दीदी की जंगों को थम लिया और तेज़ी से अपनी कमर चलने लगा दीदी भी फिर से चरम पर पहुँच रही थी.

‘ आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्हह आआआहहहहह और तेज़ और तेज़ और ज़ोर से ऐसे hi शाबाश , तुम बहुत अचे हो बहुत प्यारे हो मुझे ऐसे ऐसे साडी ज़िन्दगी प्यार करते रहना आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह तुम हमेशा मुझे ऐसे hi प्यार करना मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती शाबाश और तेज़ मारो फाड़ दो और तेज़ करो आज से मैं तेरी हूँ मेरा सब कुछ तेरा है सीसीसी उम्मम्मम्मम मैं तेरी दासी हूँ आज से जो तुम कहोगे मैं करुँगी बस ऐसे hi प्यार करते रहना मुझे उम्मम्मम ककक आअह्ह्ह आआह्ह्ह आआह्ह्ह मुझे रोज़ ऐसा hi प्यार चाहिए तुम रोज़ मुझे प्यार करने आया करो चाहो तो रोज़ मुझे कॉलेज से यहीं ले आया करो चाहे मेरे घर आ कर कर लिया करो पर मुझे रोज़ प्यार करना आआआअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह अअअअअअअ मैं आए रही हूँ ी ऍम सुंम्मिंग आअह्हह्ह्ह्हह ‘

ऐसे hi दीदी बड़बड़ाती हुई फिर से झाड़ गयी और मैं भी अंतिम चरण में था

‘ आआह्ह्ह कक्कक्स मैं भी आने वाला हूँ दीदी मेरा होने वाला है ककक उम्म्म आप बहुत प्यारी हैं बहुत अछि हैं मैं हमेशा आपको प्यार करूँगा , आप जब कहेंगी प्यार करूँगा मैं आ रहा हूँ अअअअअ ‘

मैंने पूरा ज़ोर लगाते हुए लैंड छूट में जड़ तक घुसा कर पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मैं दीदी क ऊपर hi गिर गया और दीदी मेरे निचे डाब गयी. मैं हलके हलके झटके महसूस कर रहा था अपने जिस्म में और आखिरी बूँद तक लैंड खली करने क बाद मैं दीदी क ऊपर से साइड में हैट कर लेट गया. दीदी भी ऑंखें बंद कर क जैसे मज़ा के रही थी और मेरा पानी अपनी छूट क अंदर फील कर रही होगी. मुझे तो पता hi न चला था क कब मेरा पूरा लैंड नैना दीदी की छूट में चला गया और दीदी भी उत्तेजना में सब बर्दाश्त कर गयी थी. मैंने साँसे सँभालने क बाद दीदी की तरफ देखा तो वो आँखें बंद किये लेती हुई थी. मैंने उठ कर उनकी छूट को देखा तो उसका मुँह खुल चूका था. छूट क किनारे फाटे हुए लग रहे थे जहाँ पर खून और छूट रास क निशान थे. छूट एक बार में hi इतना खुल गयी थी क खुद दीदी भी उसे देख कर हैरान होगी. छूट का तो नक्शा बदल गया था अब ज़रा अपने उस सिपाही की तरफ भी देखा जाये जिसने दुश्मन की चूंकि तबाह की थी. जब मेरी नज़र लैंड पर गयी तो वो आराम से सो रहा था मगर उसकी जड़ पर जमा हुआ लाल रक्त ये बता रहा था क उसने मैदाने जुंग में लहू की नदियां बहाई हैं. मैं उठ कर बाथरूम गया और हीटर ों कर दिया. मैंने लैंड की सफाई करने क बाद बाथ टब में गरम पानी भर दिया क्यूंकि अब दीदी को सिकाई की ज़रूरत पड़ने वाली थी. बाथ टब भरने क बाद मैं रूम में वापिस आया तो दीदी वैसे hi बेसुध पड़ी थी मैंने दीदी की जगाया

अमित : उठो दीदी वाशरूम हो आओ फिर हमें वापिस भी जाना है.

मेरे हिलने से वो उठ गयी पर उठते hi उनके पेट में तेज़ दर्द होने लगा और वो पेट पकड़ कर दोहरी हो गयी. साथ hi उन्हें अपनी जांघों की जड़ों में भी तेज़ दर्द होने लगा. वो दर्द से कराह उठी.

नैना दीदी : आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआ ाआईईई मायआ बहुत दर्द हो रहा है

अमित: कहाँ दर्द हो रहा है दीदी

नैना दीदी : पेट में और वहां भी प्लीज कुछ करो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आआआ

अमित: थोड़ा हिम्मत से काम लीजिये दीदी अभी मैं सब ठीक कर दूंगा.

मैंने नैना दीदी को बच्चों की तरह अपनी गॉड में उठाया और वाशरूम में जाकर बाथटब में दाल दिया. कुछ देर दीदी दर्द से कटौती रही पर धीरे धीरे उनको एआरएम आने लगा. गरम पानी से उनकी सिकाई हो रही थी जिससे क छूट का दर्द तो काम हो hi जायेगा पर ये पेट दर्द का क्या करूँ. मैंने बैग से पैन किलर टेबलेट निकली और पानी क साथ दीदी को खिला दी. कुछ देर बाद दीदी पर टेबलेट का असर हुआ और वो कुछ हद तक नार्मल हो गयी. करीब आधे घंटे तक मैंने दीदी को बाथ टब में रखा और फिर उन्हें बहार निकल कर अछि तरह उन्हें शावर क नीचे खड़ा कर क नहलाया और साफ किया. दीदी बस चुपचाप मुझे देख रही थी शायद उन्हें मेरा ऐसा करना ाचा लग रहा था. मैंने उन्हें तौलिये से अछि तरह पोंछ कर वापिस गॉड में उठाये रूम में ले आया . दीदी को बीएड पर लिटा कर मैंने उनकी टंगे खोल कर छूट को चेक किया तो अब वो साफ सुथरी लग रही थी मगर होंठ उसके खुले हुए hi थे. मैंने बैग से क्रीम निकल कर छूट पर लगाई . दीदी बस देखे जा रही थी.

अमित : इस क्रीम से यहाँ पर जलन नहीं होगी और थोड़ी देर में दर्द भी ख़त्म हो जायेगा.

नैना दीदी : तू कितना प्यारा है कितनी फ़िक्र है तुझे मेरी. तेरा प्यार देख कर तो मेरा दर्द वैसे hi ख़तम हो गया है और ये जो तूने इतना कुछ मेरे लिए कर दिया है शायद hi किसी का बर्फ ऐसा हो. मैं बहुत खुश हूँ क मुझे तुम मिले . प्लीज मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार देना.

अमित : मैं तो हमेशा से आपको प्यार करता आया हूँ दीदी इस लिए तो आपका दिल नहीं तोडना चाहता था इंकार कर क. और देखिये आज ये सब भी मैंने कर दिया सर्फ आपके लिए. मैं हमेशा आपको खुश देखना चाहता हूँ क्यूंकि आप हस्ती मुस्कुराती हुई मुझे अछि लगती हैं. सॉरी आज मेरी वजह से आपको इतना दर्द हुआ

नैना दीदी : तूने मुझे कोई दर्द नहीं दिया . ये सब तो नेचुरल है हर किसी को इस दर्द से गुज़ारना hi पड़ता है. मगर तुमने जो दर्द में भी इतना प्यार दिया वो मेरे लिए अनमोल है.

अमित : अब आप थोड़ी देर आराम कर लीजिये और ज़रा टाँगे खोल कर रखिये ताकि इसे आराम मिले. मैंने फ्रिज से जूस निकला और दीदी को पिलाया और साथ hi प्रेगनेंसी की गोली भी उन्हें खिला दी. उसके बाद मैं कपडे पहने और मोबाइल देखा तो वो बंद हुआ पड़ा था. पता माहि कैसे हो गया शायद डाब गया हो अपने आप. मैंने फ़ोन ों कर क ओने देखा तो 1 बज रहा था. अभी मैं मोबाइल चेक कर रहा था क दीदी का मोबाइल भी बजने लगा. मैंने दीदी की जीन्स में से उनका मोबाइल निकल कर उनको दिया.

नैना दीदी : hello

कॉलर :.......

नैना दीदी : चुप बेशरम

कॉलर : ........

नैना दीदी : तुझे भी पता चल जायेगा मज़ा है या क्या है

कॉलर : ......

नैना दीदी : ाचा ठीक है तू वहां रुक हम थोड़ी देर में आते हैं

उसके बाद दीदी ने फ़ोन काट दिया .

अमित : किसकी कॉल थी?

नैना दीदी : करुणा की . पूछ रही थी कहाँ हूँ और कब तक आ रही हूँ ?

अमित : शॉकेड) क्या ??? आप ने उन्हें बताया था क आप कहना जा रही है?

नैना दीदी : मैंने सिर्फ इतना कहा था क मैं अमित क साथ मूवी देखने जाने वाली हूँ. अब जल्दी करो वो मेरा इंतज़ार कर रही है . छुट्टी का टाइम हो गया है.

उसके बाद दीदी बीएड से उठी और कपडे पहनने लगी. जीन्स पहन कर उन्हें अपनी छूट पर दर्द महसूस होने लगा . क्यूंकि अब छूट सूज चुकी थी और उसपर ये टाइट कपडे परेशां कर रहे थे. पैन किलर की वजह से अब उन्हें उतना दर्द नहीं हो रहा था. हम दोनों तैयार हो गए. एक बार फ्लैट में नज़र मर कर जब हम बहार निकलने लगे तो दीदी ने मुझे रोक लिया और एक किश मेरे होंठो पर खुद hi कर दिया.

अमित : अब ये क्या था

नैना दीदी : थैंक्स , मुझे इतना प्यार करने क लिए. अब चलो

फ्लैट को लॉक कर क हम कॉलेज की तरफ चले गए. करुणा दीदी बहार hi एक छोटे से रेस्टोरेंट में हमारा इंतज़ार कर रही थी. जब मैं उनसे मिला तो वो मुझे और दीदी को बड़े गौर से देख रही थी. दीदी की चल कुछ बदल गयी गहि जो उन्होंने अछि तरह नोट कर लिया था. और जिस तरह वो बार बार नैना दीदी की कमर और फिर मेरी तरफ देख रही थी मुझे शक हो गया क इन्हे सब पता है. खैर हम आलरेडी लेट थे तो वो दोनों जल्दी निकल गयी और मैं भी घर की तरफ चल दिया.

उधर कॉलेज में आज शीना ने अपनी सहेलियों को ऊपर क खली क्लासरूम में बुलाया था खास बातचीत क लिए

शीना : तुम लोगों को एक काम करना है मेरा.

नितिका : जल्दी बता क्या काम है . तेरे किये तो जान भी हाज़िर है.

शीना : तुम लोगों को पता है न टोनी और रॉकी क साथ क्या हुआ है. मुझे लगता है क अब ये सब मोंटी क साथ भी हो सकता है. और मुझे हर हल में अपने भाई को बचाना है. अगर उसे कुछ हो गया तो मैं कुछ भी कर जाउंगी.

वैशाली : तुझे पता है किसने किया है उन पर हमला ? और मोंटी पर भी हमला होगा ये तुझे कैसे पता ?

शीना : मैं जानती हूँ इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है. आज तक किसी ने मोंटी और उसके दोस्तों पर हाथ नहीं डाला . सब उसे अचे से जानते हैं और उससे डरते भी हैं. गिर ऐसा काम कौन कर सकता है ? वही जिसने मोंटी पर हाथ डाला था. वही देहाती ये उसी का काम है. मोंटी मन नहीं रहा मगर मुझे पूरा ताक़ीन है क ये उसी का काम है. तुम लोग उस पर नज़र रखो और उसकी वो दोनों बहनो पर भी. पता करो पिछले दिनों में क्या कुछ हुआ है इन सब में से किसी न किसी क साथ कोई ऐसी बात हुई होगी जो मोंटी टोनी और रॉकी से जुडी होगी. जैसे hi कुछ पता चले मुझे बताओ और ये सब जल्दी करना होगा.

शीना की बातें सुन कर शिवानी का दिल घबराने लगा था. उसे पता था शीना अमित को ज़रूर नुकसान पहुंचाएगी और पता नहीं वो गुस्से में क्या करेगी क्यूंकि मोंटी उसका भाई है और वो उससे बहुत प्यार करती है.

शिवानी : शीना बुरा मत मन्ना पर ज़रूरी नहीं क ये उसी का काम हो. मेरा मतलब है वो तो किसी से भी झगड़ा नहीं करता यार . वो एक ाचा लड़का है . देखा नहीं इतना कुछ मैंने उसके साथ किया और बदले में उसने किसी को कुछ भी नहीं कहा . वो चाहता तो मुझे कॉलेज से निकलवा देता. पता है माँ भी कह रही थी क वो एक बहुत ाचा लड़का है.

शीना : गुस्से में) ाचा माय फुट . वो साला 2 कोसी का देहाती मजदूर और तू उसकी इतनी तारीफ कर रही है. तू मेरी दोस्त है क उसकी? यद् नहीं कैसे उसने सबके सामने मोंटी पर हाथ उठाया था. आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई ऐसा करने की. तू जानती है न वो मेरा एक लौटा भाई है और उसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ. और ये जो तू कह रही है न क उसने तुझे कॉलेज से निकलवाया नहीं तो सुन वो ऐसा कर भी नहीं सकता था. मेरे डैड सब संभल लेते चाहे इसके लिए प्रिंसिपल को क्यों न हटाना पड़ता. मुझे लगता है वो अब एक एक कर क सब से बदला ले रहा है. अब गाला हमला वो मोंटी पर hi करेगा और उससे पहले मुझे इस बात का पता कर क उसे सजा देनी है.

वैशाली : तू सही कह रही है. मोंटी पर हाथ डालने की आज तक किसी ने हिम्मत नहीं की थी उस सेल ने सीधा पंच मर दिया. उसे तो सजा मिलनी चाहिए

नितिका : मैं तो कहती हूँ उसकी बहनो को इस कॉलेज की रंडी बना देते हैं सब का सफाया एक hi बार में हो जायेगा. प्रिंसिपल तक बात पहुंचेगी तो वो उसकी बहनो को निकल देगा और वो देहाती भी साला शर्म से मर जायेगा

शिवानी : शर्म करो नितिका तुम भी एक लड़की हो और दूसरी लड़की क बारे में ऐसी घटिया बातें कर रही हो. और शीना तुम्हे क्या हो गया है? क्यों तुम उससे इतनी नफरत करती हो? क्या किया है उसने? देखा जाये तो उसने वही किया जो कोई भी भाई अपनी बहिन क लिए करता है. उस वक़्त अगर उस सिचुएशन में तुम होती और उसकी जगह मोंटी होता तो क्या वो ऐसा नहीं करता ?

गलत वो नहीं था गलत हम थे. और तुम बेवजह उसे इस बात में घसीट रही हो

शीना : मुझे कुछ नहीं पता . मैं बस इतना जानती हूँ क उसने मेरे भाई पर हाथ डाला है उसकी इंसल्ट की है. और मोंटी को तुम जानती हो न उसके पीछे लड़कियों की लाइन लगी रहती है. सब खुद चल कर उसके पास आती हैं. उसने कभी किसी लड़की क साथ गलत नहीं किया . बात तो सिर्फ एक किश की थी न. वो इस बात को बातचीत से भी तो हल कर सकता था .

शिवानी : बात करने का वक़्त कहाँ था उस वक़्त. ये सब तो अचानक हुआ था

शीना : तू मेरी फ्रंड हो कर उसकी साइड ले रही है. कहाँ गयी तेरी वो दोस्ती?

शिवानी : देख शीना मैं तेरी डाइट थी हूँ और हमेशा रहूंगी पर यार मैं बस इतना कह रही हूँ क हे इस ा नीस गाए . बिना वजह उसे निशाना मत बनाओ

शीना : ठीक है , पहले हम सब चेक करेंगे अगर उसका हाथ नहीं है तो बात ख़त्म पर अगर उसका हाथ हुआ तो उसे कोई नहीं बचा सकता. और नितिका ये बात हमेशा यद् रखना क हमारी उससे दुश्मनी हो सकती है पर इसके लिए उसकी बहनो क साथ कोई कुछ गलत नहीं करेगा .

उधर मोंटी आज आपने फ्लैट पर गया तो दरवाज़ा हाथ कहते hi खुल गया. लॉक उखाड़ा हुआ था वो जल्दी से अंदर गया और एक नज़र फ्लैट पर अछि तरफ मर कर उसने दवर चेक किया तो वो अपनी जगह पर नहीं था. मोंटी का दिमाग घूम गया. फ्लैट पर चोरी होने वाली कोई चीज़ तो थी hi नहीं पर दवर को गायब क्यों किया गया ये बात उसके दिमाग में खटक रही थी. यानि क जहाँ जो भी आया था वो अपनी आइडेंटिटी छुपाना चाहता है उससे मतलब क वो मोंटी क नोन में है. उसे लगने लगा क ज़रूर इसमें उन लोगों का हाथ हो सकता है जिन्होंने टोनी और रॉकी ओर हमला किया. पुलिस को बुला कर वो बात को कानून की नज़र में नहीं लाना चाहता था इस लिए उसने बिल्डिंग क मैनेजर को अपने पास बुलाया और उसे साडी बात बताकर सिक्योरिटी क बारे में पूछा. अब इस बिल्डिंग का मालिक तो मोंटी का बाप hi था इस लिए मैनेजर ने भी तुरंत सिक्योरिटी गार्ड्स को हाज़िर करवा लिया. गार्ड बेचते क्या बताते उन्हें तो खुद कुछ नहीं पता था. फिर कक्तव चेक किये गए तो लिफ्ट वाला कैमरा काम नहीं कर रहा था. जो कैमरा मोंटी वाले फ्लोर पर था उसमे दो लोगो की बैक hi नज़र आ रही थी जिससे कुछ पता नहीं चल सका. मगर जो कपडे उन लोगो ने पहने हुए थे उससे एक गार्ड ने पहचान लिया था. कैमरा रिकॉर्डिंग से टाइम का पैट चल गया और इस टाइम क रजिस्टर एंट्री से मोहित का नाम निकल आया जिसे गार्ड ने वेरीफाई कर लिया. मोहित कौन है अब ये मोंटी क दिमाग में नहीं आ रहा था. उसे लग रहा था क इस नाम को वो कहीं सुन चूका है मगर कहाँ ये उसे समझ नहीं आ रहा था.



उधर घर पर पहुँचने पर लंच क बाद मोहित ने मुझे आकर बताया क उस दिन जो दवर हम उठा कर लाये थे उसमे से रिकॉर्डिंग निकल ली गयी हैं और शाम को हमें उस लड़के से मिलने जाना होगा जो अंकल क ऑफिस में जॉब करता है और कैमरा वगैरह सर्विलेंस का काम वही करता है.
 
अपडेट 105



मोहित से बात करने के बाद मैं कुछ देर आराम करने के लिए लेट गया . आज बोहोत मेहनत की थी इसलिए मुझे जल्दी नींद आ गयी. शिवानी ने मुझे फ़ोन भी किया था और मैं नींद में होने के कारण फ़ोन नहीं उठा पाया. मैं इतनी गहरी नींद में था क मोहित के जगाने से hi मैं उठा

मोहित : और कितना सोयेगा अब उठ भी जा

अमित : क्या हुआ

मोहित : टाइम देख कितना हो गया , याद नहीं हमें किसी से मिलने भी जाना है

अमित : तू चल में पांच मिनट में आया

मोहित नीचे चला गया और मैं जल्दी से उठकर फ्रेश होकर तैयार हो गया. मैंने मोबाइल देखा तो बोहोत साड़ी मिस कॉल्स आयी हुई थी .नैना दीदी करुणा दीदी कल्पना शिवानी ने मुझे कॉल्स की थी और कुछ मेस्सगेस भी थे जो मिस कॉल्स क थे शायद जब मैंने फ़ोन स्विच ऑफ किया था तब क होंगे. मैंने बाद में चेक करने का सोचा और जल्दी नीचे चला गया. आज टाइम काफी हो गया था अब स्टेडियम जाने का कोई फायदा नहीं था. नीचे आकर मैंने मोहित और आंटी क साथ बैठ कर कॉफ़ी पि और फिर हम चल दिए उस लड़के से मिलने. थोड़ी देर में hi हम उस लड़के क घर में थे जो कंप्यूटर वगैरह का कोई मास्टर hi लग रहा था. उसने हमारी आओ भगत की और फिर हमें वो दवर की रिकॉर्डिंग्स दिखने लगा. वीडियोस ज्यादातर खली hi थी क्यूंकि मोंटी कभी कभी जाट था तो कुछ खास था नहीं मगर एक वीडियो में मोंटी लैपटॉप पे कुछ करता नज़र आ रहा था और उसके बाद उसने वो लैपटॉप कप्बोर्ड में छुपा दिया. ऐसे hi 2-3 वीडियो hi थे जिसमे मोंटी जब भी नज़र अत तो वो अपने लैपटॉप को ज़रूर इस्तेमाल करता . और आखिरी वीडियो में अपना लैपटॉप अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया. जो हमारे वहां जाने से एक दिन पहले का hi था.

मोहित : हो न हो इस लैपटॉप में hi .....

मैंने मोहित का हाथ दबा दिया क वो उस लड़के क सामने कोई बात न करे. मोहित मेरा इशारा समझ गया. इस दौरान मंजू म का फ़ोन आया पर मैंने फ़ोन नहीं उठाया क्यूंकि अभी मैं उनसे बात नहीं कर सकता था. शायद वो ट्यूशन पर न आने क कारन फ़ोन कर रही होंगी. खैर वीडियो से सिर्फ इतना hi पता चला क मोंटी का सीक्रेट उसके लैपटॉप क अंदर है जो हासिल करना आसान नहीं होगा. और अब तो वो और चौकन्ना हो जायेगा जब उसे पैट चलेगा क कोई उसके फ्लैट पर आया था. एक बार फिर मोंटी की किस्मत ने उसका साथ दिया. हम दोनों उस लड़के का शुक्रिया ऐडा कर क वहां से निकले क मेरा फ़ोन फिर से बजने लगा. इस बार फ़ोन करुणा दीदी का था मैंने फ़ोन उठा लिया.

करुणा दीदी : लो माँ से बात करो

रीता मौसी : अमित कहाँ ओर हो तुम ?

अमित : पाऊँ लगे मौसी . आप कैसी हैं मैं मोहित क साथ हूँ.

रीता मौसी : जीते रहो. फ़ौरन घर आ जाओ और आज तुम यही रहने वाले हो. जल्दी आना

इतना कह कर मौसी ने फ़ोन काट दिया . मोहित ने पूछा तो मैंने बता दिया क मौसी का फ़ोन था और आज मुझे वहां जाना होगा. घर आने क बाद मैंने आंटी को बताया और बाइक लेकर मौसी क घर को निकल गया . थोड़ी देर में hi मैं मौसी क घर पर पहुँच गया. बेल्ल बजे तो दरवाज़ा करुणा दीदी ने hi खोला.

करुणा दीदी : मेरे कहने से तो तुमने आना नहीं था. शुक्र है माँ क कहने पर तो आ गए.

अमित : कैसी बातें कर रही हो दीदी. आप भी कह देती तो भी मैं चला अत.

करुणा दीदी : पता है मुझे कितनी सुनते हो तुम मेरी. अभी तक मुझे मेरा गिफ्ट तो दिया नहीं तुमने.

अमित : इसमें कौन सी बात है चलिए पहले आपको गिफ्ट hi ले देता हूँ अभी तो मार्किट बंद नहीं हुई होगी . बताइये क्या लेना है.

करुणा : वही जो दीदी ने किया है .

करुणा दीदी की बात सुनते hi मैं हैरान हो गया . मुझे इतना तो पता hi था क वो भी कुछ वैसे hi इरादे रखती हैं पर इस तरह अचानक वो ऐसा कह देंगी ये मैं उम्मीद नहीं कर रहा था .

अमित : आप क्या कह रही हैं?

करुणा दीदी : ज्यादा बनो मत . दीदी और तुम आज कहाँ थे और क्या कर रहे थे मुझे सब पता है. मैं बस इतना कह रही हूँ क मुझे भी वो गिफ्ट चाहिए जो तुमने दीदी को दिया है. वैसे ऐसा क्या कर दिया था जो दीदी की इतनी बुरी हालत हो गयी?

अमित : शॉकेड ) क्या हुआ दीदी को ?

करुणा : जैसे तुम्हे कुछ पता hi नहीं? उनसे तो ठीक से बैठा भी नहीं जा रहा था . घर जा कर सीधा कमरे में लेट गयी बुखार का बहाना कर क और सच में उन्हें बुखार लग रहा था. मौसी ने पूछा तो मैंने कह दिया दीदी की तबियत आज ख़राब हो गयी थी कॉलेज में. और तुमने एक बार भी उनसे बात नहीं की न दोपहर क बाद . काम से काम एक बार उनका हल तो जान लेते. बड़े बेदर्दी हो.

रीता मौसी : अब क्या दरवाज़े पर hi खड़े रखना है उसे ? अंदर ले आ अब.

पीछे से मौसी की आवाज़ आयी जैसे उन्हें पता था क दरवाज़े पर मैं hi हूँ. मौसी की आवाज़ क बाद करुणा दीदी पीछे हैट टी हुई बोली

करुणा दीदी : आ गया आपका लाडला , बड़े बिजी हो गए हैं जनाब आज कल . इनके पास तो वक़्त hi नहीं हम गरीबों क लिए.

रीता मौसी : अब बस भी कर पहले तो कह रही थी उसे फ़ोन कर क बुलाओ अब जब आ गया है तो ताने दे रही है. आजा मेरा राजा बीटा . तुझे यद् नहीं आती अपनी इस मौसी की?

मैंने आगे बाद कर मौसी क पाऊँ छुए और उन्होंने मुझे गले लगा कर मेरे गाल पर किश कर दिया.

अमित : ऐसा हो सकता है क मैं अपनी प्यारी मौसी को भूल जॉन ? बस टाइम hi नहीं मिल पता कॉलेज और प्रैक्टिस से.

‘ आज तो कॉलेज भी नहीं आया तू , कहाँ था आज सारा दिन ? ‘

ये आवाज़ नेहा दीदी की थी जो हमारी आवाज़ सुन कर हॉल में आ गयी. मैंने दीदी को देखा और उन्हें गले लगा लिया.

नेहा दीदी : कहाँ था आज सारा दिन? मोहित को भी नहीं पैट था तेरा. राधा बेचारी भी कितनी परेशां हो रही थी . तुझे फ़ोन भी किया कितनी बार पर तेरा फ़ोन hi स्विच ऑफ बता रहा था.

अमित : वो क्या है न दीदी फ़ोन को चार्जिंग ख़तम हो गयी थी तो इस लिए फ़ोन बंद हो गया था. और मैं आज कोच सर क साथ गया था कुछ काम था ज़रूरी .

रीता मौसी : चल अब आराम से बैठ मैं खाना बना क आती हूँ. अगर कुछ और चाहिए तो बता दे वैसे टाइम तो खाने का हो रहा है.

अमित : नहीं मौसी अब बस खाना hi खाऊंगा आपके हाथों का.

रीता मौसी खाना बनाने चली गयी और करुणा दीदी मुझे ले कर हॉल में hi सोफे और बैठ गयी. नेहा दीदी भी हमारे साथ hi बैठ गयी. मेरे आने से पहले शायद वो स्टडी कर रही होंगी क्यूंकि उन्होंने अपना चश्मा लगाया हुआ था जो वो स्टडी करते वक़्त पहनती थी. इस वक़्त नेहा दीदी और करुणा दीदी दोनों लोअर और T-shirt में थी जैसे की अक्सर घर में वो हुआ करती थी फ्रीली कंडीशन में और मैं भी लोअर T-shirt में hi था.

करुणा दीदी : तो कैसा चल रहा है कॉलेज तेरा? कोई गफ बनाई क नहीं?

नेहा दीदी : ये कैसी बातें कर रही है छोटी? अमित हमारा छोटा भाई है और ये ऐसा बिलकुल भी नहीं है.

करुणा दीदी : दीदी ये हमारा छोटा भाई है. अब इसका ख्याल हम नहीं रखेंगी तो कौन रखेगा ? उस उम्र में तो हर कोई गफ बनता है. और ये तो पूरा हीरो है. अगर इसने अभी तक गफ नहीं बनाई है तो मैं इसके लिए एक अछि सी गफ ढून्ढ डोंगी न. काम से काम कोई इसका मज़ाक तो नहीं उड़ाएगा गफ न होने की वजह से.

नेहा दीदी : इसमें मज़ाक उड़ने वाली बात कहाँ से आ गयी?

करुणा दीदी : दीदी आप भी कमल करती हो. इतने बड़े कॉलेज में पड़ती हो फिर भी नहीं समझती . जिसकी गफ नहीं होती न उसको सब फत्तू बोलते हैं.

नेहा दीदी : तुझे बड़ा पता है लड़के क्या बोलते हैं क्या नहीं? हमारे कॉलेज में ऐसा नहीं होता. और वैसे भी लड़कियां तो खुद इससे फ्रेंडशिप करना चाहती हैं ये खुद hi नहीं करता

करुणा दीदी : दीदी हर जगह ऐसा hi होता है. लड़के क्या लड़कियां भी ऐसा hi बोलती हैं. मगर आप को कैसे पैट होगा आप तो किताबों से बहार hi नहीं आती. ये फ्रेंडशिप नहीं करता इसी लिए तो इसकी मदद करनी पड़ेगी वर्ण ये अकेला hi रह जायेगा.

तभी मौसी ने नेहा दीदी को किचन में बुला लिया और वो उठ कर चली गयी . इधर करुणा दीदी और मैं अकेले रह गए तो करुणा दीदी शुरू हो गयी.

करुणा दीदी : देख मुझे भी मेरा गिफ्ट चाहिए और आज hi. मैं कुछ नहीं सुनने वाली. दीदी को आज तूने दे दिया न तो मुझे भी आज hi चाहिए.

अमित: दीदी प्लीज समझने की कोशिश करो. ये इतना भी आसान नहीं है. आप ने देखि न दीदी की हालत ? घर पर कुछ भी किया तो प्रॉब्लम हो जाएगी . प्लीज आप समझे बात को और हाँ अगर हो सके तो इस बात को दिमाग से hi निकल दें

करुणा दीदी : मैं कुछ नहीं सुनने वाली. मुझे भी तुम्हारे साथ hi अपना फर्स्ट एक्सपीरियंस लेना है.

अमित : उसके बाद ?

करुणा दीदी : अभी तो इंकार कर रहा था अभी आगे का भी पूछने लगा. एक no. का बदमाश है तू.

अमित : मेरा मतलब था क क्या उसके बाद भी आप मुझे तंग करेंगी या छोड़ देंगी?

करुणा दीदी : अब तो शादी तक मैं नहीं छोड़ती तुम्हे . हाँ शादी क बाद का कह नहीं सकती. अगर तेरे जैसा कोई मिल गया तो ठीक वर्ण तुझे बाद में भी मुझसे प्यार करते रहना होगा.

अमित : पर शादी क बाद ......

करुणा दीदी : वो सब बाद में पहले आज तो मुझे प्यार करो. दीदी को तो एक hi बार में बदल दिया अब मुझे कब प्यार करोगे?

अमित : घर पर कुछ नहीं हो सकता . किसी दिन आपको भी वहीँ ले जाऊंगा गाओं से आने क बाद.

करुणा दीदी : क्या????? गाओं से आने क बाद , इतने दिन मैं कैसे रहूंगी? जब से दीदी को देखा है मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा .

अमित : दीदी से यद् आया उनकी मॉस्कल्स आयी हुई थी मैंने उन्हें फ़ोन नहीं किया , रुको पहले उन्हें फ़ोन करलूं

मैंने नैना दीदी को फ़ोन किया तो करुणा दीदी कान लगा कर बैठ गयी बातें सुनने क लिए. दूसरी बेल्ल पर hi दीदी ने फ़ोन उठा लिया.

नैना दीदी : आ गयी याद ? बड़े हरजाई हो , मुझे लहू लोहान कर दिया और एक बार भी हल नहीं पूछा .ऐसा कोई करता है क्या ?

अमित : सॉरी दीदी वो क्या है न मैं भी घर आ क सो गया था . अब आपकी तबियत कैसी है?

नैना दीदी : हल्का बुखार है और वहां दर्द है कुछ सूजन भी और शर्म करो अब तो दीदी कहना छोड़ दो.

अमित : कैसे छोड़ दूँ? आप दीदी हैं तो दीदी hi कहूंगा न. वैसे दवाई ली या नहीं आपने ? किसी को शक तो नहीं हुआ न ?

नैना दीदी : दवाई ली है मैंने घर ओर पड़ी रहती है . और किसी को शक नहीं हुआ क्यूंकि मैं बीएड से उठी hi नहीं अभी तक. फ़िक्र न करो मुझे भी ध्यान है. वैसे अब कहाँ हो? करुणा बोल रही थी क आज तुम उनके यहाँ जाने वाले हो.

अमित : लगता है आओ सब कुछ एक दूसरे से शेयर करती रहती हैं. रीता मौसी क घर पर Hi हूँ और करुणा दीदी भी साथ hi बैठी हैं लो बात करो.

करुणा दीदी : अब कैसी हो दीदी? ये माँ क कहने पर आया है दीदी, मेरा तो फ़ोन hi नहीं उठाया था इसने. और देख क्या कह रहा है क गाओं से आने क बाद मेरा no. लगेगा . इसे समझें न क इतना वेट नहीं होगा मुझसे.

नैना दीदी : अरे इतनी उतावली मत बन. वो जैसा कहता है उसे करने दे. वो हर बात का ध्यान रखता है. आखिर हमारा भाई है वो हमारा इतना ख्याल रखता है . कोई बहार वाला थोड़ा hi ऐसा हमारा ध्यान रखेगा. वो तो यही कहेगा जहाँ मौका मिले मर दी चुका पर बाद में तो हमें hi भुगतना होगा न. उसे ज्यादा फाॅर्स मत करना. हाँ आज वो तुम्हारे घर है तो ऊपर ऊपर से hi कुछ कर लेना.

कौन दीदी : अब वो तो करना hi पड़ेगा वर्ण इसके यहाँ होते मुझे नींद कहा आएगी. ाचा दीदी आप रेस्ट करो मैं ज़रा इससे बात कर लूँ.

उसके बाद कॉल कट हो गयी. मैंने दोनों की बातें सुन ली थी और मुझे अंदाज़ा हो गया था क आज रत करुणा दीदी कुछ तो ज़रूर करेंगी ऐसे में उन्हें भी ऊपर ऊपर से hi शांत करना पड़ेगा. फ़ोन साइड में रख कर करुणा दीदी मेरी तरफ नशीली आँखों से देखने लगी. उनके देखने से hi मैं समझ गया वो आराम से नहीं बैठेंगी. करुणा दीदी ने मुझे बाँहों में कास लिया और मेरे होंठो पर किश करने लगी. मैंने एक मिनट क लिए उन्हें किश किया फिर खुद से दूर किया. मैं दर रहा था क कहीं मौसी या नेहा दीदी न देख लें मगर उन्हें तो जैसे कोई परवाह hi नहीं थी. वो मेरी इस हालत पर हसने लगी.

अमित : दीदी पागल हो गयी हो क्या? अगर मौसी या नेहा दीदी अभी आ जाती तो ?

कौन दीदी : हस्ते हुए ) तू बहुत डरता है. ऐसे डरोगे तो प्यार कैसे करोगे ? वैसे तुझे क्या लगता है क मुझे परवाह नहीं है? उनके आने का पता चल जाता है मुझे.

अमित : पर मैं रिस्क नहीं लेना चाहता.

करुणा दीदी : पर मैं तो लेना चाहती हूँ. इसमें बहुत मज़ा अत है. वाइज दीदी बहुत तारीफ कर रही थी तेरी . क्या मुझे भी तो वैसे hi प्यार करेगा ?

अमित : क्यों नहीं करूँगा? आप भी तो मेरी दीदी हैं. दोनों एक जैसी हो मेरे लिए.

करुणा दीदी : हाँ दोनों एक जैसी हैं और दोनों की एक जैसी है.

अमित : ??????

करुणा दीदी : सॉरी उनकी तो अब बदल गयी है अब मेरी भी बदल दो.

मैं उनकी बात का इशारा समझ गया क वो अपनी छूट की बात कर रही हैं . यानि दो ो पहले वर्जिन थी मगर अब नैना दीदी वर्जिन नहीं रही और करुणा दीदी भी अब विर्जिनिटी लूज़ करना चाहती थी.

हम ऐसे hi बातें करते रहे और थोड़ी देर में नेहा दीदी खाना ले ए. करुणा दीदी तो डबल मीनिंग बातें करती हुई जैसे मेरे मज़े ले रही थी खैर खाना आ जाने से मुझे कुछ रहत मिली उनकी उन बातों से. हम सब में मिल कर डिनर किया. खाना बहुत ाचा बना था. मेरी मौसियां का खाना बनाने में जवाब नहीं. मैंने जैम कर मौसी की तारीफ की और वो भी खुश हो रही थी. मैंने मौसा जी का पुछा तो उन्होंने बताया क वो कल hi टूर पर गए हैं और संडे को आएंगे. बातों बातों में खाना भी हो गया. उसके बाद नेहा दीदी और करुणा दीदी मेरे साथ बैठ कर बातें करती रही. इतने में मौसी ने बर्तन साफ कर लिए और दूध ले आयीं.

रीता मौसी : चलो अब सब दूध पिलो.

करुणा दीदी : माँ मुझे दूध नहीं पीना.

रीता मौसी : चुप चाप दूध पियो. बहार से जो मर्ज़ी खिला पीला दो दूध पिने में प्रॉब्लम है इसे.

करुणा दीदी : माँ मैं बाद में पि लुंगी न.

रीता मौसी : अभी मेरे सामने दूध का गिलास ख़त्म करो . बाद में तुम नहीं पियोगी मैं जानती हूँ.

नेहा दीदी ने मौसी को गुस्से में देख जल्दी दूध का गिलास ख़तम किया और करुणा दीदी ने भी मुँह टेड़ा करते हुए पि लिया. मेरी तो रोज़ की आदत थी मैंने एक मिनट में खली कर क रख दिया. दूध क गिलास भी मौसी समेत कर किचन में चली गयी. 5 मिनट बाद hi नेहा दीदी तो गुड नाईट कह कर अपने कमरे में चली गयी. करुणा दीदी तो रत में बहुत कुछ करने का सोच क बैठी थी मगर उनकी ऑंखें भी बोझिल होने लगी तो वो मुझे बाद में मेरे कमरे में आने का कह कर अपने कमरे में चली गयी. मैं अब अकेला रह गया था तो मैंने भी कमरे में जाने क सोचा. मैं अभी उठा hi था क मौसी आ गयी.

रीता मौसी : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : कमरे में जा रहा हूँ सोने क लिए.

रीता मौसी : कभी अपनी मणि क पास भी बैठ कर कुछ देर बातें कर लिया कर . या सिर्फ सारा प्यार अपनी ममी क लिए hi रखा हुआ है

अमित: ये आप कैसी बातें कर रही हैं मौसी जी. मेरे लिए तो सब एक सामान हैं . मैं सबको प्यार करता हूँ.

रीता मौसी : पता है कितना प्यार करता है तू. तू तो सिर्फ अपनी ममी से hi प्यार करता है. देखा है मैंने कामिनी को कैसे बदल दिया है तूने. पहले कितना उखड़ी उखड़ी रहती थी तुमसे और अब देखो कितना प्यार करती है . अब तो माँ भी बनने वाली हो गयी है. सब तेरा hi जादू है.

मौसी की इस बात से मैं हड़बड़ा गया.

अमित : ये तो भगवन की मर्ज़ी है मौसी भला इसमें मैंने क्या किया. कामिनी ममी तो शुरू से hi अछि हैं . हाँ अब वो मुझे प्यार करने लगी हैं शायद वो माँ बनने वाली हैं न इस लिए उनमे बदलाव आ गया है.

रीता मौसी : माँ बनने से बदलाव नहीं आ रहा. बदलाव आने से माँ बन रही है.

अमित : शॉकेड ) क्या मतलब

रोटा मौसी : अरे वक़्त बदल रहा है न. सितारों की चल जब बदल जाती है तो इंसान में बदलाव एते हैं . वैसे तू कामिनी से कुछ ज्यादा hi प्यार नहीं करता ? मुझे भी थोड़ा प्यार कर लिया कर जैसे कामिनी को करता है.

अमित : लो करलो बात , मौसी जी मैं तो सबको एक जैसा hi प्यार करता हूँ. आप को कोई शक है क्या?

रीता मौसी : ाचा अगर ऐसा है तो आज पता चल जायेगा . चल आजा मेरे कमरे में. आज तेरे मौसा तो हैं नहीं आज मेरे साथ hi सो जा दोनों बातें भी कर लेंगे और मैं भी तो देखूं तू कितना प्यार करता है मुझे.

रीता मौसी मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी. मुझे उनके आठ सोना थोड़ा अजीब लग रहा था क्यूंकि हमारे बीच जो कुछ पहले हो चूका था उसके बाद रत में ऐसे उनके साथ अकेले कमरे में वो भी मौसा जी की गैर हाज़री में ? पता नहीं मौसी क क्या इरादे हैं. मैं मौसी क साथ कमरे में आ गया तो मौसी अपनी सदी खोलने लगी. साडी खुलते hi मौसी क वो बड़े बड़े आम ब्लाउज में कैसे हुए मेरी नज़रों को अपने ऊपर बांधने लगे. नीले ब्लाउज में कैसे हुए उनके बड़े बड़े सफ़ेद रंग क बूब्स कमल क लग रहे थे. ब्लाउज में से झांकती उन बूब्स क बीच की घाटी नज़र आ रही थी और मैं उस घाटी में hi फिसलता चला गया. औरतों क शरीर क दो hi भाग ऐसे होते हैं जो कपड़ों क ऊपर से hi किसी भी मर्द को अपनी तरफ खींच लेते हैं. और रीता मौसी क ये दोनों भाग hi अपने आप में बेस्ट थे. वैसे तो रजनी मौसी भी ऐसी hi थी बल्कि 21 hi होगी पर उनके बारे में कभी ऐसा सोचा नहीं था. जबकि रीता मौसी का दो बार मैं पानी निकल चूका था उनके बड़े बड़े ख़रबूज़ों में अपना लैंड रगड़ कर. बस में तो मौसी क आम भी पकड़ hi लिए थे. ज़ाहिर है मौसी को भी सब पता था और शायद वो भी आगे बढ़ना चाहती थी मगर पहला कैसे की जाये ये समस्या थी. क्यूंकि हम दोनों क बीच जो रिश्ता था वो हमें रोक रहा था. मेरी माँ की सगी बहिन होने क नाते रीता मौसी से मेरा खून का रिश्ता था और शायद ये भी एक वजह थी जो मैं उनके साथ कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेमेंट फील करता था.

मैं मौसी क अभी ब्लाउज में से झांकते बूब्स को देखने में बिजी था क मौसी ने एक और वार कर दिया. मौसी मेरी तरफ पीठ कर क कड़ी हुई और फिर झुक गयी. उफ्फफ्फ्फ़ क्या नज़ारा था. पेटीकोट में से बहार आने की कोशिश कर रहे उनके वो बड़े बड़े ख़रबूज़े और उनके बीच की खली जगह जैसे मेरे लैंड को आवाज़ दे रही थी क फिर से वहां घुस जाओ. मौसी कुछ देर ऐसे hi झुकी रही और मैं उनको देखता रहा . मुझे पता hi नहीं चला कब मेरा हाथ मेरा लैंड पर चला गया और लैंड भी बड़ा बदमाश निकला जो पहले hi सर उठाये खड़ा था. मौसी ने ऐसे hi झुके हुए एक बार पलट कर मुझे देखा तो मैंने जल्दी से अपना हाथ लैंड से हटा लिया. मौसी क चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी. तभी मौसी झुके हुए hi क रहने लगी

रोटा मौसी : आयआईईई मायआ ोोूहः मर गयी मेरी कमर

अमित : घबरा कर ) क्या हुआ मौसी? आप को कहीं दर्द हो रहा है क्या?

रीता मौसी : मेरी कमर अकड़ गयी है जल्दी कुछ कर न.

मैं जल्दी से उठ कर उनके पस चला गया और उनको सहारा देने क लिए उनको कमर से पकड़ा तो वो सीधा होते हुए पीछे हुई जिससे उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरे लैंड पर रगड़ खा गए और मेरे जिस्म को एक झटका सा लगा. कुछ पल लैंड पर अपनी गांड रगड़ने क बाद मौसी ऐसे hi बीएड पर उलटी लेट गयी. उलटे लेटने की वजह से उनके चूतड़ पहाड़ों की तरह खड़े हो गए जिन्हे देख कर एक बार फिर मेरा मन डोलने लगा. ब्लाउज और पेटीकोट क बिच क हिस्से में मौसी की नंगी गोरी चिकनी कमर जहाँ उनका एक हाथ था मुझे आकर्षक लग रही थी.

रीता मौसी : अअअअअअअ मा मर गयी कुछ कर बीटा देख कितना दर्द हो रहा है.

मौसी की कराह सुन कर मैं नींद से जगा . वास्तव में उन्हें दर्द हो रहा था और मैं यहाँ उनको ताड़ने में लगा हुआ था. मैं चरण उनकी कमर क पास बैठ बी और अपने हाथो से उनकी कमर को मस्सगे करने लगा .

अमित : मौसी यहाँ दर्द है ?

रीता मौसी : हाँ बीटा थान से लेके निचे तक दर्द हो रहा है. माआआ मेरी तो जान निकल रही है.

मैं मौसी की कमर को दबाते हुए मस्सगे करने लगा . शायद झुकने से मोच आ गयी होगी . ऐसे में मस्सगे करना hi सही था लेकिन तेल या कोई तुबे भी तो होनी चाहिए.

अमित : मौसी जी लगता है मोच आ गयी है. आपके पास कोई तुबे या तेल है जिससे मैं मस्सगे कर सकूँ ?

रीता मौसी : बीटा तुबे तो नहीं है किचन में तेल की बोतल है वो ले आ

मैं जल्दी से किचन में गया और तेल को एक कटोरी में दाल कर ले आया . मैं जब वापिस आया तो सामने का नज़ारा देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया. मौसी का ब्लाउज पीठ से खुला हुआ था और उनकी ब्रा की स्ट्रैप्स नज़र आ रही थी. गर्दन से लेकर कमर तक उनका बदन नंगा था सिर्फ ब्रा की स्ट्रैप्स को छोड़ कर . ब्लाउज खुला हुआ दोनों साइड में लटक रहा था. नीचे पेटीकोट भी घुटनो तक ऊपर हुआ पड़ा था जिसके नीचे से गोरी चिकनी टंगे नज़र आ रही थी और उनके खूबसूरत पाऊँ क ऊपर पायल लटक रही थी. रीता मौसी एक आम घरेलु पत्नी की तरह हर सिंगार में रहती थी और जिस्म से भी बहुत मादक थी. उनका जिस्म न पतला था न hi भरा. हर अंग ज़रूरत क हिसाब से चर्बी से भरा हुआ था जो उनको काम देवी बना देता था. उनकी गोरी चिकनी पिंडलियों को देख कर मेरे अंदर उबाल आने लगा. उचित मात्रा में फैट होने क कारन वो मुझे और भी ज़्यादा आकर्षित लग रही थी.

रीता मौसी : जल्दी कर बीटा देख मुझे कितना दर्द हो रहा है. जल्दी से मेरी ये तड़प मिटा दे.

अब मौसी ने दर्द की जगह तड़प क्यों कहा . वो शायद देख चुकी थी क मैं कहाँ खोया हुआ हूँ इसी लिए उन्होंने ऐसा कहा होगा. मैं उनकी आवाज़ सुन कर जल्दी से उनके पास चला गया.

अमित : मौसी जी इसे खोलने की क्या ज़रूरत थी?

रीता मौसी : तेल से कपडे ख़राब न हो जाएँ इसी लिए खोला है. और तू क्यों शर्मा रहा है? तू तो मेरा अपना है न. जैसे कामिनी को प्यार करता है वैसे hi मुझे भी किया करो न. अब जल्दी कर

मौसी बार बार कामिनी ममी का नाम क्यों ले रही हैं ये मुझे समझ नहीं आ रहा था. खैर मैंने थोड़ा सा तेल उनकी कमर पर गिराया और मालिश करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर कमर पर मालिश करने से उन्हें कुछ सुकून मिला.

अमित : अब कैसा लग रहा है मौसी ?

रीता मौसी : अब ाचा लग रहा है बीटा. तेरे हाथों में तो जादू है. मगर यहाँ रुक क्यों गया मेरी पूरी पीठ में दर्द है और कमर क निचे तक. ज़रा अचे से मालिश कर क आज मेरी साडी तड़प ख़तम करदे.

मौसी क कहने से मैंने अपने हाथ अब ऊपर बढ़ाने शुरू कर दिए. मैं सावधानी से हाथ ऊपर ले जा रहा था क्यूंकि बिच में ब्रा क स्ट्रैप्स थे. मेरे ऐसा करने से मौसी ने पूछा

रीता मौसी : क्या हुआ ये बिच में हाथ क्यों उठा लेता है?

अमित : वो मौसी बिच में ये है न , कहीं ये तेल से ख़राब न हो जाएँ

मैंने उनकी ब्रा क स्ट्रैप्स पर हाथ रखते हुए कहा

रीता मौसी : मैं तो भूल hi गयी . ऐसा कर इन्हे खोल दे और अचे से मालिश करदे

मौसी की बात सुनते hi मैं शॉकेड हो गया.

अमित : क्याआ ? पर मैं कैसे ?

रीता मौसी : तो क्या हुआ ? तू मेरा बीटा hi तो है अब ज्यादा न शर्मा जल्दी से कर .

ब्रा को खोलने क नाम से hi मेरे अंदर अजीब सी हलचल होने लगी. मैं स्ट्रैप्स पर हाथ रखा तो मेरे हाथ कॉंम्पने लगे. बड़ी मुश्किल से मैंने ब्रा को खोला तो वो लास्टिक की तरह दो ो साइड को खुल गयी जैसे बड़ी ज़ोर से बांध रखा हो. मौसी की अब एक तरह से मेरे सामने टॉप लेस्स हो गयी थी. मैं एक बार नज़र भर क उनकी नंगी बैक को देखा और फिर कन्धों से लेकर कमर तक मालिश करने लगा. मालिश तो अब नाम की थी असल में तो अब मैं उनके गोर चिकने कोमल बदन को हाथ से छू कर टटोल रहा था. मौसी क मुँह से बिच बिच में सिसकी निकलने लगी जैसे वो भी इसका मज़ा ले रही हो. मज़ा तो वो पहले भी मेरे साथ ले चुकी थी इस लिए मेरा होंसला बढ़ता hi जा रहा था. एक अलग तरह की एक्ससिटेमेंट मेरे अंदर थी जो मुझ पर हावी होती जा रही थी. मौसी से मेरा खून का रिश्ता होने से मेरी रगों में दोस्त हुआ खून उबाल रहा था. मैंने पीठ पर मालिश करते हुए अपनी उंगलियां साइड को ब्लाउज क अंदर की तो ब्रा में घुसते हुए मेरी उंगलियां मौसी क नरम मुलायम बूब्स पर जा लगी.

‘ ससीईईई उम्मम्मम ‘ मौसी क मुँह से एक मादक सिसकी निकली. मेरे अंदर भी मज़े की एक लहर दौड़ गयी. उँगलियों वो नरम एहसास मुझे रोमांचित करने लगा. मैं बार बार मालिश करता हुआ अपनी उंगलियां वहां ले जाने लगा. मौसी बार बार सिसकी छोड़ रही थी. मैं क्या कर रहा हूँ मौसी अछि तरह समझ रही थी मगर उनका मुझे न रोकना इस बात का सबूत था क उन्हें भी इसमें मज़ा आ रहा है और वो मेरे साथ और मज़ा लेना चाहती हैं. मैं मौसी क एक साइड में बैठा था जिसकी वजह से मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी .

अमित : मौसी मुझे ऐसे बैठने में दिक्कत हो रही है अगर आप बुरा न मने तो मैं आपकी कमर क ऊपर आ जॉन ? इससे अछि तरह मालिश हो पायेगी.

रीता मौसी : पूछने की क्या ज़रूरत है अजा चढ़ जा अपनी मौसी पर.

मौसी पर नशा छ चूका था इस लिए उन्हें नहीं पता चल रहा था क वो क्या कह रही हैं. मैं भी बिना देर किये घुटने दोनों तरफ कर क उनकी गांड क पास बैठ गया और फिर से मालिश करने लगा. अब ये मालिश और भी मज़ेदार हो गयी थी. जब मैं अपने हाथ कन्धों की तरफ ले कर हटा तो आगे झुकने से मेरा लैंड जो खड़ा हुआ था मौसी क बड़े बड़े पहाड़ों क बीच घुसने लगता. मेरा लैंड सख्त हुआ पड़ा था जिससे उसकी चुभन मौसी को अछि तरह फील हो रही होगी. पर उन्होंने इस पर भी कुछ नहीं कहा . मौसी की तरफ से को विरोध न देख कर मैंने अब अपना लैंड अछि तरह से उनके नरम चूतड़ों में घुसना शुरू कर दिया. और साथ hi अपनी उंगलियां और ज़्यादा उनके बूब्स पर लगाने लगा. एक बार तो मैंने उंगलियां इतनी ज्यादा आगे बड़ा दी क उनके निप्पल मेरी उँगलियों से टच हो गए और मैंने भी उन्हें हल्का सा मसल दिया. ऐसा करते hi मौसी क मुँह से एक तेज़ सिसकी निकली .

‘ आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम कक्कक्क्स ‘ अब तो कुछ भी कहने या पूछने की ज़रूरत नहीं थी . मैं पूरी तरह से आज़ाद था कुछ भी करने क लिए. मैंने थोड़ा सा ऊपर उठ कर अपना लोअर नीचे कर क अपना लैंड अंडरवियर से बहार निकल लिया और मौसी क चूतड़ों में अछि तरह सेट कर क घुसा दिया. कपड़ों से बहार होने क कारन मेरे लैंड की चुभन मौसी को अछि तरह फील हुई और उन्होंने एक सिसकी लेते हुए गर्दन घुमा कर पीछे देखने की कोशिश की मगर मैं अब उनके ऊपर झुक चूका था इस लिए वो देख नहीं पायी. मैं सीधा अपने हाथ उनके बूब्स पर लगा दिए. बूब्स उनके नीचे दबे होने क कारन मेरे हाथों में तो नहीं आ सकते थे फिर भी जितना हो सका मैंने उन्हें पकड़ने की कोशिश की.

‘ उम्मम्मम कक्कक्कक्स आआअह्ह्ह्ह बहुत अछि मालिश करता है तू तो. साडी अकड़न ठीक हो रही है बस ऐसे hi करता जा. ‘

‘ आप चिंता मत करो मौसी मैं अचे से मालिश करूँगा , आप की साडी तकलीफ दूर कर दूंगा.’

‘ शाबाश बीटा मैं भी यही चाहती हूँ क तू मेरी साडी तकलीफ मिटा दे. तेरे मौसा जी तो ध्यान hi नहीं देते अब तू hi ये कर सकता है’

इंदिरेक्ट्ली मौसी ने साफ बता दिया था क मौसा जी उनके साथ कुछ नहीं करते और अब मुझे hi करना है. वैसे भी मैंने तो खुद आँखों से देख चूका था.

रीता मौसी : बीटा कमर नीचे भी थोड़ा मालिश करदे . वहां नीचे हड्डी क आखिरी जोड़ पर भी दर्द होता है.

मौसी क्या कह रही थी मैं समझ गया. मैं थोड़ा सा ऊपर उठा तो उनकी गांड में धंसा हुआ मेरा लैंड बहार आ गया . पेटीकोट लैंड क दबाव क कारन वहां से दोनों फैंको क अंदर घुसा हुआ था. मैंने कमर से मालिश करने क अंदाज़ में हाथ नीचे ले जाने शुरू किये तो मैं हैरान हो गया. पेटीकोट बिलकुल ढीला था . मौसी ने पेटीकोट का नाडा भी खोल रखा था. मेरे हाथ पेटीकोट क अंदर आसानी से घुस गए तो मेरी उंगलियां पेंटी से जा लगी. धीरे धीरे ये सब मुझे मज़े की वादियों में लेता जा रहा था. आज तक मैंने जितना भी सेक्स किया था इसका एहसास सब से अलग था. मैंने बड़े आराम से बिना ज़ाहिर किये पेटीकोट को चूतड़ों तक नीचे कर दिया इससे ज्यादा निचे नहीं जा प् रहा था मौसी क नीचे दबे होने क कारन. मगर इससे मौसी क बड़े विशाल चूतड़ आधे नंगे हो गए थे. वो बड़े बड़े चूतड़ जो हमेशा मुझे मजबूर कर देते थे बहकाने क लिए आज मेरी आँखों क सामने आधे नंगे थे मगर ऊपर जो पेंटी थी वो मेरे मज़े को ग्रेहेन लगा रही थी. फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हरी और मालिश क बहाने अपनी उंगलियां पेंटी क अंदर भी घुसा दी. चूतड़ों की शुरुआत जहाँ से होती हैं वहां बानी घाटी में कब मेरी उंगलियां लगी तो इस बार मज़े से मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी. अब मैं बार बार पेंटी क अंदर अपनी उंगलियां घुसाने लगा और उनके नरम चूतड़ों को महसूस करने लगा.

‘ आआह्ह्ह बीटा तेरे हाथो में तो जादू है कक्कक्स ऐसे hi करता जा , ऐसे hi शाबाश उम्म्म ‘

अब भला किसको कण्ट्रोल करना था मैं गयी अब जल्दी से मौसी को नंगा कर देना चाहता था . मैं माँ उसकी क ऊपर से उठा और उनके पाऊँ क पास बैठ गया. बिना मौसी को कुछ कहे या पूछे मैंने उनके पाऊँ से मालिश शुरू कर दी. पाऊँ से ऊपर को मैं शुरू हुआ और उनकी नंगी पिंडलियों को बार बार मसल कर उनका एहसास करने लगा. घुटनो तक तो पहले hi पेटीकोट ऊपर हुआ पड़ा था. इससे आगे जाने क लिए मैंने अपने हाथ पेटीकोट में घुसा दिए और मौसी की नंगी मांसल जाँघे मेरे हाथों में आ गयी. क्या जांघें थी मौसी की, एक डैम नरम और भरी . आज तक जितना क साथ भी सेक्स किया था उनमे से किसी की भी जाँघे ऐसी नहीं थी सिर्फ गौरी ममी को छोड़ कर . क्यूंकि उस वक़्त मैंने उनके जिस्म का अछि तरह एहसास नहीं किया था. मगर उनके जिस्म की बनावट भी कुछ कुछ रीता मसि जैसी थी. मैंने मौसी की दोनों जांघों को मसलना शुरू कर दिया . इससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरा उत्तेजना से बुरा हाल होने लगा.

‘ आह बीटा शाबाश ऐसे hi अचे से मालिश कर , बहुत आराम मिल रहा है. तू तो अचे से मालिश करना जनता है ज़रूर कामिनी ने सिखाई होगी तुझे ‘

एक बार रीता मौसी ने कामिनी ममी का नाम लिया मगर अब मैं कहाँ इन बातों पर ध्यान देने की कंडीशन में था. मैंने मौसी का पेटीकोट पीछे से उनकी गांड तक उठा दिया तो एक तरह से अब मौसी मेरे सामने पीछे से पूरी नंगी पड़ी हुई थी. पेटीकोट गांड क ऊपर इकठ्ठा हुआ पड़ा था जिसके निचे पेंटी थी और ऊपर साडी पीठ नंगी थी. मैंने मौसी की कमर क नीचे हाथ दाल कर उनको घुटनो पर करने की कोशिश की तो वो मेरा इशारा समझ कर तुरंत घुटनो पर हो गयी. मैंने उनका पेटीकोट समेत कर कमर से नीचे कर दिया जो घुटनो पर आ गया. अब मौसी मेरे सामने बीएड पर अपनी छाती लगाए हुए घुटनो पर अपनी गार्डन उठाये चुदाई की पोजीशन में आ गयी थी. मौसी सब जानती थी अब क्या होने वाला है मगर वो जैसे इस से अनजान बानी हुई इस नाटक को कंटिन्यू रखना चाहती थी. मैंने मौसी की पेंटी को देख तो वो छूट वाले भाग से गीली हुई पड़ी थी मतलब मौसी चुदाई हुई पड़ी हैं और वो अब छोड़ना चाहती हैं. मैंने देर न करते हुए अपने कपडे एक झटके में उतर कर नीचे फेंक दिए और मौसी की पेंटी को दोनों साइड से पकड़ कर नीचे खिंच दिया और पेंटी भी पेटीकोट क साथ घुटनो पर आ गयी.

रीता मौसी : क्या कर रहा है बीटा ? तूने मुझे नंगा क्यों कर दिया?

अमित : मौसी जी अछि तरह से मालिश करनी है न , तो कहीं तेल से ये कपडे ख़राब न hi जाएँ इस लिए नीचे किया है वैसे भी यहाँ हमारे सिवा और है hi कौन. अगर आपको ऐतराज़ है तो मैं ऊपर कर देता हूँ?

रीता मौसी : अब कर दिया है तो रहने दे . जैसे तेरा दिल करता है वैसे hi कर पर आज मेरी अचे से रगड़ कर मालिश करना.

मैं मौसी का इशारा समझ गया. मैंने बिना देर किये अपने लैंड पर थूक लगाया और छूट पर निशाना सेट किया. छूट तो पहले hi गीली हुई पड़ी थी ऐसे में उसपर और टाइम ख़राब करने की ज़रूरत नहीं थी. मौसी अपनी उम्र से कहीं ज्यादा जवान थी और अपनी बेटियों की बहिन hi लगती थी. मगर इतने साल से चुदाई हो रही थी तो छूट भी कुछ ढीले थी जिसे आज मैं और ढीला करूँगा. मैंने एक हाथ उनकी कमर पर रखा और घुटनो क बल उनके पीछे खड़े हो कर अपना लैंड दूसरे हाथ से पकड़ कर छूट से लगाया

‘ आआह्ह्ह्हह्ह कक्ककक्कक्स ये क्या लग रहा है नीचे बीटा ? ‘

‘ कुछ नहीं मौसी बस अचे से मालिश करनी है न तो ये एक औज़ार है मालिश करने क लिए. आपको बहुत मज़ा आएगा’

मैंने पुश करते हुए अपना लैंड मौसी की छूट में उतर दिया. मेरा आधा लैंड बिना किसी मुश्किल क अंदर चला गया. मगर छूट इतनी भी ढीली नहीं थी क लैंड गलियों में भाटिया हुआ जाता. छूट लैंड क मुकाबले ज्यादा खुली नहीं थी और मेरा लैंड छूट की दीवारों से रगड़ खता हुआ अंदर गया.

‘ आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम्मम आआअह्ह्ह्हह ये औज़ार तो बहुत ाचा है , इसे ऐसे hi अचे से रगड़ कर मेरी मालिश कर बीटा.’

मैंने मौसी की कमर दोनों हाथों से थम ली और लैंड जहाँ तक आसान ी से है रहा था वहां तक लैंड को अंदर बहार करना शुरू कर दिया.

‘ मौसी जी चिंता मत करो आज अचे से रगड़ कर मालिश करूँगा आपकी ‘

मैंने मौसी की कमर को थम कर धक्के लगाने शुरू कर दिए और मौसी मज़े में सिसकियाँ छोड़ने लगी. पर मुझे मज़ा नहीं आ रहा था क्यूंकि मेरा आधा लैंड अभी बहार hi था. यहाँ तक की सड़क अछि तरह से इस्तेमाल हुई थी इस लिए आसानी से लैंड आ जा रहा था. शायद मौसा जी का लैंड इतना hi होगा. अब इससे आगे का रास्ता मेरे लैंड क जिम्मे था तो मैंने कमर को थामे हुए उपदे तक लैंड बहार खींच कर एक ज़ोरदार धक्का मारा. मौसी ने एक डैम चीख कर मेरी पकड़ से बहार निकलने की कोशिश की.

‘ आआआआअह्हह्ह्ह्ह ाआईईईई माआआ मररररर गईइइइइइइ आआह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ कितना बड़ा है ये . जाएं लोगे क्या मेरी ? ‘

‘ कुछ नहीं होगा मौसी आपको इससे अछि तरह आराम मिलेगा ‘

‘ आराम का तो पता नहीं पर ये मेरी हालत पतली कर देगा. इस उम्र में अब ये सब नहीं झेल पाऊँगी मैं ‘

‘ कैसी बातें करती हैं मौसी आप भी , अभी आपको उम्र hi क्या है. आप तो नेहा दीदी की बड़ी बहिन लगती हैं’

‘ आआह्ह्ह रुक जा थोड़ी देर रुक जा मुझे दर्द हो रहा है ‘

मौसी ने मुझे रुकने का कहा तो मैंने उनके बड़े बड़े चूतड़ मसलने शुरू कर दिए. मौसी क चूतड़ मेरी कमज़ोरी थे. मैं उनके चूतड़ मसलता हुआ उनकी गांड क सुराख़ पर अपनी उंगली घिसने लगा. मौसी की गांड अभी तक कुंवारी लड़ रही थी. इतनी बड़ी और कुंवारी गांड सामने हो तो लैंड बेचारा क्या करे वो तो बेकाबू होगा hi. मैंने मौसी की परवाह न करते हुआ लैंड को सुपडे तक बहार खींचा और इसके साथ hi एक और दमदार धक्का मर कर जड़ तक लैंड को छूट में उतर दिया .

‘ ाआईईईई माआआ माअररररर दियाआआअ री आआआहहह मायआ मर गईइइइइइ तुझे रुकने को कहा था न माआ एआईईईई इतना बड़ा मुसल अंदर घुसा दिया , जान लेनी है क्या मेरी? ‘

मौसी दर्द से बिबिला उठी और अपना धड़ भी अपने हाथों पर उठा लिया. वास्तव में hi ये धक्का उनके लिए घातक था. इस झटके से पूरा लैंड जड़ तक समां गया था और छूट उस छोर तक खुल गयी थी जहाँ तक पहले कभी लैंड नहीं गया था. मेरा लैंड छूट में ऐसे फास गया था जैसे कुंवारी छूट में फसा हो. रीता मौसी को बहुत दर्द हो रहा था. मगर उन्होंने मुझे बहार निकलने को नहीं कहा. रोटा मौसी क बदन पर पसीना आ गया. वो जिस तरह से चिल्लाई वक बार तो मुझे लगा क कहीं दीदी न उठ कर आ जाये पर शुक्र है कोई नहीं आया. मैंने मौसी को कुछ देर ऐसे hi रहने दिया और अपने हाथ आगे बड़ा कर उनके लटक रहे बूब्स को थाम कर मसलने लगा. मेरे ऐसा करने से मौसी को कुछ रहत मिली और धीरे धीरे वो शांत हो गयी. अब वो कोई कुंवारी लड़की तो थी नहीं जो ज्यादा नाटक करती. मौसी जल्दी hi संभल गयी और अपनी कमर हिलायी. मैं मौसी का इशारा समझ गया और उनकी कमर थम कर लैंड को अंदर बहार करने लगा. छूट पहले तो कासी हुई थी मगर जल्दी hi उसमे पानी आने लगा और लैंड को आसानी हो गयी अंदर बहार होने में. धीरे धीरे मैंने धक्के तेज़ करने शुरू कर दिए. मेरे धक्कों क साथ मौसी क बड़े बड़े चूतड़ थिरक रहे थे. जब लैंड छूट में जड़ तक जाता तो मेरे अंडकोष छोर पर टकराते और मौसी क चूतड़ मेरी तइस से टकरा कर थिरकते ुए नज़ारा मुझे बहुत ाचा लग रहा था . मैंने मस्ती में मौसी क चूतड़ों पर थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए और इससे मौसी की कमर भी अब तेज़ी से आगे पीछे होने लगी शायद उन्हें भी इसमें मज़ा आ रहा था. मैं मज़े से धक्के मरने में लगा था क मौसी की सिसकियाँ तेज़ हो गयी और तेज़ी से कमर चकते हुए वो बुदबुदाने लगी

‘ आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म ऐसे hi और तेज़ धक्के लगा उम्म्म ककक कितना मज़ा आ रहा है , कब से तड़प रही थी इसके लिए मैं ककक उम्म्म आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह और तेज़ लगा धक्के दिखा मुझे कितना डैम है तुझ में और तेज़ मर फाड़ दे मेरी छूट को आज इसको ऐसा ठंडा कर फिर ये कभी न तड़पे आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह एआइइइइ मैं. गयीईइ मायआ ‘

इसके साथ hi मौसी का जिस्म झटके लेने लगा और वो बीएड पर गिर गयी मगर मैंने उनकी कमर को थामे रखा. मौसी की छूट से बहुत सारा पानी निकला जो उनकी छूट से बहार आकर उनकी झांगों से होता हुआ उनके घुटनो में फसे हुए पेटीकोट और पेंटी को भी भिगोने लगा . मेरा लैंड उनकी छूट क गरम पानी से नाहा कर चमकने लगा था. मौसी तो ठंडी हो गयी थी पर मेरा अभी नहीं हुआ था वैसे भी आज नैना दीदी क साथ भी किया था तो जल्दी होने वाला भी नहीं था. मगर मौसी क साथ करने में अलग hi मज़ा अलग hi नशा मुझ पर हावी था. मैं अपनी जगह से पीछे हटा और और मौसी क दोनों पाऊँ पकड़ कर खींच दिए जिससे वो पूरी बीएड पर लेट गयी. मैंने उनके पेटीकोट और पेंटी को खींच कर टांगों से बहार निकला दिया एक नज़र फिर से मौसी क मांसल बदन को देखने क बाद मैंने उन्हें सीधा कर दिया. मेरे सामने अब मौसी की नंगी छूट आ गयी जो पूरी गीली हो चुकी थी और उसमे से अभी रास टपक रहा था. छूट पर एक भी बाल नहीं था और जिस तरह वो साफचक थी पता चल रहा था क आज hi मौसी ने बाल साफ किये हैं. मौसी की ऑंखें बंद थी और उनकी छाती पर ब्लाउज अस्त व्यस्त हालत में पड़ा था जिसके नीचे से उनके बूब्स बहार आ रहे थे. मैंने मौसी की टंगे उठायी और अपनी पोजीशन ले कर छूट पर लैंड सेट किया. पानी निकलने क बाद मौसी पर जैसे फिर से शर्म का भूत आ गया था जिसे उतर कर वासना का भूत चढ़ाना था वर्ण मेरा क्या होगा. मैंने मौसी की मांसल टाँगे ऊपर उठा कर लैंड छूट पर सेट करते हुए टैंगो को चूमना शुरू किया. कितनी प्यारी लग रही थी वो टंगे और टंगे उठाने से उनकी पायल पिंडलियों पर आ गयी थी. अब मज़ा आएगा जब धक्कों से हिलती टांगों में पायल चमचम करेगी. मुझे ये बहुत पसंद था. पायल की आवाज़ शुरू से hi मुझे बहुत पसंद थी. और इस तरह से निकलती आवाज़ तो और भी ज़्यादा मज़ा देती थी. मैंने टैंगो को चूमते हुए मौसी को पाऊँ को भी चूमा मेरे ऐसा करने से मौसी को भी शायद गर्मी आने लगी और उनके मुँह से सिसकी निकली. मैं ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा वर्ण लैंड महाराज नाराज़ हो जाते जो कब से छूट क फाटक पे एंट्री क लिए खड़े थे.

मैंने कन्धों पर मौसी की टंगे बंदूकों की तरह राखी और मौसी पर झुकते हुए अपने दोनों हाथ उनकी दोनों साइड बीएड पर टिका कर अपना लैंड छूट में हलके धक्के से पुश कर दिया. लैंड आराम से अंदर चला गया और धक्के लगाने क लिए सही पोजीशन बन गयी. मैंने कमर को आगे धकेलते हुए ज़ोर से लैंड को छूट में घुसाया और फिर से एक बार मौसी सिसक उठी उनका पूरा बदन हिल गया था इस धक्के से. मगर अभी भी उन्होंने ऑंखें नहीं खोली. मुझे कैसे भी उनकी ऑंखें खुलवानी थी मुझे देखना था क वो कैसे मेरा सामना करती हैं. मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए और शुरू से hi स्पीड तेज़ राखी. मौसी भी जल्दी गरम होने लगी और अपने हाथ से hi अपने बूब्स दबाते हुए सिसकियाँ लेने लगी. मैंने उनके हाथ बूब्स से हटाए और उनके ब्लाउज और ब्रा को खींच कर निकल दिया जिसमे उन्होंने मेरी मदद की. अब मौसी पूरी तरह से मेरे सामने नंगी लेती हुई थी. आज रीता मौसी अपने बीएड पर अपने भांजे से अपनी आग शांत करवा रही थी . जिस बीएड पर वो अपने पति से चुदती थी आज उसी बीएड पर अपने भांजे से चुद रही थी. मौसी का बदन धक्कों से हिल रहा था और बीएड भी हिल कर उनका साथ दे रहा था. मैंने उनके दोनों बड़े बड़े पानी क गुब्बारे की तरह फैले हुए बूब्स हाथों में थामे हुए थे और उनको थाम कर मैं पूरा ज़ोर लगा रहा था. कन्धों पर लटकती उनकी टांगों में से पायल की चमचम मेरे खून का दौरा बड़ा रही थी.

‘ आआह्ह्ह माआ आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआह्ग्ग उफ्फ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह ऐसे hi ज़ोर से मर आआह्ह्ह्ह तू असली मर्द है कक्कक्स उम्म्म्म आआअह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्ह तुझे पता है कैसे खुश करना है किसी औरत को उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आयी ककक उम्म्म्म और तेज़ ऐसे hi ज़ोर से मर फाड़ दे मेरी छूट को . कब से तड़प रही थी तेरे इस मुसल क लिए. जब से देखा है हर वक़्त बस आँखों में घूमता रहता था. और तेज़ और तेज़ आअह्ह्ह आआह्ह्ह आआह्ह्ह आआह्ह्ह कितना दमदार है ये , मुझे तो लगा था मैं ले नहीं पाऊँगी और देख कैसे ये मेरे अंदर घुसा पड़ा है आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे hi शाबाश मेरे राजा और ज़ोर से मर आअज ऐसे ठुकाई कर क एक महीने तक छूट दोबारा लैंड न मांगे. ककक उम्म्म्म ऐसे hi और तेज़ तूने बहुत तड़पे है मुझे , दो बार मेरे पीछे इसे लगा कर मेरा पानी निकल दिया मैं कितना तदपि हूँ ये मुझे hi पता है. आअह्ह्ह ाजहठ ाजहठ’

‘ आज आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा मौसी बस एक बार मेरी आँखों में देखो ‘

मौसी ने मेरे कहने से भी आंखे नहीं खोली मुझे ाचा नहीं लगा . मौसी मेरा कहना न मन कर मुझे गुस्सा दिला रही थी और गुस्से में इंसान जानवर बन जाता है. मैं भी जानवर बन गया . मैंने मौसी की टांगों को दोनों हाथो से पकड़ा और और उनके सर की तरफ दबाते हुए ज़ोरदार झटके मरने लगा जिससे उन्हें दर्द होने लगा

‘ ाआईईई माआआ छोड़ दे क्या कर रहा है आआआआ जान लेगा क्या मेरी . मैं अब जवान नहीं हूँ मुझ पर तरस खा थोड़ा देख मेरी सांस अटक रही है छोड़ आआआ ाआईई ‘

मैंने अपना सारा वजन मौसी पर दाल दिया था और ज़ोरदार धक्के मर रहा था . मैं अपने पाऊँ पर हो गया था और अपने घुटने मोड़ कर मौसी पर hi चढ़ गया था मौसी का बदन पूरा फोल्ड हो गया था. बदन भरी होने क कारन उनको दिक्कत होने लगी थी. उनके घुटने उनके बूब्स पर डाब गए थे. पर मैं तो ताबड़तोड़ धक्के मरने में लगा हुआ था और मौसी मेरी छाती पर अपने हाथ लगाए मुझे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी. मौसी ने प्यार से तो ऑंखें नहीं खोली मगर दर्द में उनकी ऑंखें खुल hi गयी . उन्होंने जब मुझे देखा तो उनकी आँखों में दर्द देख कर मुझे ाचा नहीं लगा. वो मेरी सगी मौसी थी यानि माँ जैसी . मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और उनके ऊपर से निचे उतर आया . मुझे ाचा नहीं लगा उनको दुःख देना और मैं उनके ऊपर से हाथ गया . मैं उनकी छूट से लैंड निकल कर उनकी तरफ पीठ कर के बीएड से नीचे टंगे लटकाये बैठ गया.

‘ क्या हुआ रुक क्यों गए ? ‘

मैंने कोई जवाब नहीं दिया मगर अगले hi पल मौसी ने मुझे पीछे से पकड़ कर बीएड पर धकेलते हुए लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आती हुई घुटनो क बल होकर एक हाथ से लैंड पकड़ कर अपनी छूट ओर सेट किया और एक डैम से बैठ गयी जिससे मेरा लैंड एक बार में hi उनके अंदर जड़ तक समां गया

‘ आआअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्क्स मायआ कितना बड़ा है ये मुसल . लगता है कल मैं चलने क लायक नहीं रहूंगी पर फिर भी मैं इसे आज सोने नहीं दूँगी. तुझे इतना भी नहीं पता क बीएड पर औरत को जितना दर्द होता है उतना hi मज़ा अत है? मैंने कहा तुझे बहार निकलने क लिए ? ‘

मौसी मेरे लैंड पर बैठ कर अपनी कमर चलने लगी . उनकी स्पीड तो देखने लायक थी. लगता है मौसी इस पोजीशन में ज्यादा सेक्स करती होंगी.

‘ आपको दर्द हो रहा था मुझे लगा क मैंने कुछ ज्यादा hi कर दिया ‘

‘ तेरा वो जंगली पैन मुझे बहुत पसंद आया मेरे राजा . काश ऐसा जंगली पैन तेरे मौसा में होता तो कितना मज़ा अत. आगे से इस बात का ध्यान रखना मुझे ऐसी hi चुदाई पसंद है ाअहभ सीसीसी उम्म्म कितना बड़ा है ये बचे दानी तक ठोकर मर रहा है आअह्ह्ह्ह आआह्ह आह्ह्ह्ह ‘

मैंने मौसी क दोनों बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाते हुए अपनी कमर भी उछालने लगा. मौसी एक बार फिर चरम पर पहुँच गयी. और झटके लेती हुई मेरे लैंड पर गरम पानी की बरसात कर क मेरे ऊपर hi लुढ़क गयी. मैं अभी अपना पानी निकलना चाहता था इस लिए मैंने जल्दी से मौसी को अपने ऊपर से निचे गिराया और उन्हें कुटिया बनाते हुए बीएड क किनारे खिंच कर खुद नीचे खड़ा हो गया और उनकी कमर पकड़ क एक ज़ोरदार धक्के में जड़ तक लैंड छूट में उतर दिया.

‘ आआह्ह्ह्हह माआआआ जाएं लेगा क्या मेरी ? कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह ‘

‘ जान नहीं बस छूट hi लॉन्ग और ऐसे लूंगा क हमेशा यद् रखोगी अआप ‘

मैंने ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए मौसी को जंगली पैन पसंद था तो अब उन्हें जंगली पैन सीखना hi पड़ेगा . मैंने तेज़ रफ़्तार से चुदाई करते हुए उनके बल पकड़ कर खिंच दिए जिससे वो कराने लगी और आगे ऊपर को उठ गयी. इस पोजीशन में और भी मज़ा आने लगा और मैं ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. साथ hi मैं उनकी गांड पर थप्पड़ भी मर मर रहा था. मौसी भी चीखती चिल्लाती मज़ा ले रही थी. वो खुल कर चीख रही थी जैसे घर में कोई हो hi न . इस वक़्त मुझे भी किसी बात की परवाह नहीं थी और मैं भी चरम पर पहुँच गया. एक आखिरी धक्का मरते हुए जड़ तक लैंड मैंने छूट में घुसकर अपना पानी छूट में छोड़ना शुरू कर दिया. मेरा पानी निकलते hi मौसी एक बार फिर झाड़ गयी. मौसी और मैं दो ो hi पसीने में नाहा गए थे और थक भी गए थे. मौसी बीएड ओर लुढ़क गयी और मैं भी उनके ऊपर hi गिर गया. कमरे में हमारी तेज़ सांसों क इलावा और कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. कुछ देर बाद हम दोनों पूरी तरह शांत हो गए. अब मुझ पर शर्म हावी होने लगी चाहे अभी कुछ देर पहले हम दोनों में सब कुछ हो चूका था और सरे शर्म क परदे हैट चुके थे पर अब इस ख़ामोशी को तोड़ने की हिम्मत मुझ में नहीं हो रही थी. मौसी कुछ देर बाद मेरी तरफ पलटी और मुझे देख कर बोली

रीता मौसी : क्या सोच रहे हो ?

अमित : सोच रहा हूँ मैंने आपके साथ ......

रीता मौसी : तुमने कुछ नहीं किया . ये सब मैं खुद चाहती थी. वर्ण तुम कैसे कुछ कर सकते थे. तुमने आज मुझे वो सुख दिया है जिसके लिए मैं कितने सैलून से तड़प रही थी . तुम नहीं जानते अमित तेरे मौसा जी में अब डैम नहीं रहा . एक तो उनसे कुछ होता नहीं दूसरा उनका दिल भी नहीं होता. कभी बहुत ज्यादा उन पर ज़ोर डालूं तो कुछ कर लेते हैं मगर फिर भी मैं प्यासी hi रह जाती हूँ. मेरी तो किस्मत hi ख़राब निकली जो ऐसा पति मिला जो ज़रा भी रोमांटिक नहीं था. मैं शुरू से hi इस मामले में बहुत गरम थी . शादी क बाद क्या क्या सपने थे मगर पूरे नहीं हुए. एक तो इनकी टूरिंग की जॉब थी जिसकी चाहा से हफ्ते में 4 दिन तो ये बहार hi रहते थे. और जब आते तो मैं 2-3 बार एक दिन में सेक्स ज़रूर करती थी. मगर धीरे धीरे इनकी बस हो गयी. मुझे तो यद् भी नहीं आखिरी बार कब मैं तबियत से ठंडी हुई थी . किसी तरह खुद को दबा लिया था मैंने पर जब तुझे कामिनी क साथ देखा तो फिर से मेरी आग भड़क उठी हर वक़्त तेरे ये बड़ा मुसल आँखों क सामने घूमता रहता था और मैं गरम हो कर बस उंगली कर क खुद को शांत करने की कोशिश करती.

अमित : शॉकेड ) क्या कह रही हैं आप? म मम मैं कब ममी क साथ ?

रीता मौसी : ऐसे दर क्यों रहा है? अब हम में कौन सा पर्दा है? मैंने देखा था तुझे कामिनी की चुदाई करते हुए गाओं में नदी किनारे. जब हम सब बगीचे में गए थे. बस उसी दिन से तेरा ये हथियार मुझे रातों को सोने नहीं दे रहा था. पता नहीं कामिनी कैसे ले लेती है ये मेरी तो हालत पतली कर दी इसने. जो भी है, किसी की भी तसल्ली करवाने क लिए काफी है. लगता है कामिनी ने काफी कुछ सिखाया है तुझे. मैं तो कब से तुझे कामिनी का नाम ले ले कर इशारा कर रही थी मगर तू समझ hi नहीं रहा था. दो बार मेरे पीछे रगड़ कर पानी निकल दिया मेरा फिर भी इतनी देर लगी तुझे समझने में क मैं क्या चाहती हूँ?

अमित : मुझे दर था क कहीं आप बुरा न मन जाएँ

रीता मौसी : बुरा मन्ना होता तो तुझे पहले दिन hi न रोक देती जब उस दिन किचन में तू मेरे पीछे रगड़ रहा था. वैसे ये सब तू नहीं कर रहा था मैं hi तुझसे ये करवा रही थी

अमित : शॉकेड ) क्या मतलब

रीता : उस दिन रत को जब तू पिछली बार यहाँ रुका था तो तूने देखा था माँ मुझे इसी बीएड पर उंगली करते हुए? असल में मुझे तेरे आने का पता चल गया था और तुझे दिखने क लिए मैं ऐसा कर रही थी आवाज़ें निकलती हुई. वर्ण जवान बेटियों क होते मैं ऐसा कर सकती हूँ क्या ? फिर उसके बाद किचन में भी तुझे जानबूझ करापना पिछवाड़ा दिखा रही थी . और फिर बस में भी . वैसे तुझे ये कुछ ज्यादा hi पसंद है क्यों है न ?

अमित : ये दो चीज़ें तो हर मर्द को पसंद होती हैं एक बूब्स और दूसरे ये बड़े बड़े चूतड़ और आपके ये दोनों हथियार बड़े खतरनाक हैं .

रीता : तो तुझे भी ये पसंद हैं. समझ तो मैं पहले hi गयी थी इसी लिए तुझे दिखा रही थी.

अमित : वैसे आप चीखती बहुत हैं मुझे तो दर था क कहीं दीदी आवाज़ सुन कर उठ न जाएँ.

रीता मौसी : उनके पास तो ढोल भी बाजवा लो तो भी न वो उठें. मैंने दूध में नींद की गोली दाल दी थी उनके .

अमित : मतलब आप पहले से साडी तयारी कर क बैठी थी

रोटा मौसी : कैसे न करती आज इतना ाचा मौका था . तेरे मौसा भी बहार हैं और मज़े से हम कुछ भी कर सकते हैं.

अमित : वैसे अब आगे क्या इरादा है

रीता मौसी : मैं बस इतना चाहती हूँ क कभी कभी अपनी इस मौसी पर तरस खा कर मेरी प्यास बुझा दिया करना.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं मौसी आप तो मेरी जान हो . आप जैसा कहेंगी मैं करूँगा. आप बस हुकम कीजिये . वैसे अभी भी हम अकेले hi हैं.

रीता मौसी : तो हो जाओ शुरू आज मैं साडी आग बुझा लेना चाहती हूँ.

मैंने मौसी क बड़े बड़े चूतड़ मसलते हुए कहा

अमित : इस बार मैं यहाँ से करना चाहता हूँ . आपकी गांड बहुत ज़ालिम है . ये मुझे बहुत तड़पती है.

रीता मौसी : तेरा ये हथियार क्या काम ज़ालिम है. इसने तो मेरी छूट की हालत ख़राब कर दी है अगर पीछे ले लिया तो चलने फिरने क लायक नहीं रहूंगी.

अमित : प्लीज मौसी क्या मेरे लिए आप इतना भी नहीं कर सकती ?

रीता मौसी : मेरी बात समझो बीटा. तेरा ये मुसल बहुत बड़ा है. मैंने आज तक कभी तेरा मौसा का भी पीछे नहीं लिया है. प्लीज मन जा . आज तो मैं इसे आगे hi बड़ी मुश्किल ले प् रही हूँ. पूछे का तो सोच भी नहीं सकती .

अमित : ठीक है आज नहीं पर अगली बार मैं पीछे से करूँगा ज़रूर. और हाँ आप डरिये मत मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा. कामिनी ममी भी तो लेती हैं

रीता मौसी : क्या ??? कामिनी इसे पीछे भी लेती है? मैं नहीं मानती.

अमित : मैं झूठ क्यों बोलूंगा. और हाँ मुझे अपनी ये गांड बहुत पसंद है इस लिए मेरी ख़ुशी क लिए आप इसे मेरे लिए तैयार कर लेना . अब सोना है या कुछ करना है?

रीता मौसी : आज की रत ये मेरा है और मैं न खुद सोऊंगी न इसे सोने दूँगी.

इतना कह कर उन्होंने मेरा लैंड पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया . और मैं भी उनके बूब्स मसलने लगा . बस फिर शुरू हो गया अगला राउंड. रीता मौसी बहुत प्यासी थी इस लिए उन्होंने रत भर मुझे सोने नहीं दिया. और सुबह 4 बजे तक हम दोनों खत कबड्डी खेलते रहे. मौसी कभी मेरे ऊपर अति कभी मैं मौसी क ऊपर. कभी उन्हें घोड़ी बनता कभी कुटिया बनता. हर पोजीशन में मज़े के कर छुड़वा रही थी और खून ज़ोर से चिल्लाती थी. मैंने उनको गॉड में उठा कर भी छोड़ा और दीवार से लगा कर भी. मैं सुबह तक 3 बार उनकी छूट में अपना पानी निकला . मौसी तो जैसे रुकने का नाम नहीं ले रही थी पता नहीं उन्होंने कौन सी दवा खली थी या कोई भूत उन पर चढ़ गया था . आखिरी राउंड तक हम दोनों पास्ट हो गए थे. और दिन भी चढ़ने वाला था तो कपडे पहन कर मैं अपने रूम में वापिस आ गया.

उधर मंजू म साडी रत ठीक से सो नहीं पायी. आज अमित क न आने से वो बहुत ज्यादा परेशां hi गयी थी और दर भी गयी थी. उन्हें दर सटने लगा क कहीं वो फिर से अकेली न हो जाएँ. अपनी वीरान ज़िन्दगी को बड़ी मुश्किल से उन्होंने भूलना शुरू कर दिया था और अब फिर से जैसे उनकी खुशियों को नज़र लग गयी. मगर इस बार गलती कहीं न कहीं उनसे hi हुई थी. वो खुद को hi कोस रही थी क उन्हें ऐसे बेहवे नहीं करना चाहिए था अमित क साथ. अगर कहीं वो दोबारा लौट कर आया hi न तो ? न आज अमित कॉलेज में आया था न ट्यूशन पर और न hi उसने कोई फ़ोन उठाया था. मतलब साफ़ था क वो उनसे मिलना hi नहीं चाहता. पता नहीं क्या जादू था अमित में जो वो फिर से मुस्कुराने लगी थी जो वो फिर से खुश रहने लगी थी. कहने को वो उसे छोटा भाई मानती थी पर जिस तरह से उसने पहली बार उनकी जान बचाई थी और फिर जैसे हक़ से उसने मंजू को अपनी मर्ज़ी से सूट दिलवाये और पहनने पर मजबूर भी किया. ये भाई वाला काम और प्रेमी वाला ज्यादा प्यार था. मंजू का दिल जैसे ऐसे hi प्यार को साडी उम्र तरसता रहा था. उसकी शादी भी कुछ महीने क लिए hi थी मगर उस शादी में भी जो पति मीका था उसने वो प्यार नहीं दिया था जो उसके दिल को चाहिए था. मंजू अपने दिमाग की सुनती और अमित को बहिन की नज़र से देखने की कोशिश करती पर उसका दिल अलग hi राग अलाप रहा था. उसे तो बस प्यार नज़र आ रहा था जिसकी उसे तलाश थी. जिस तरह से अमित ने उसे सहारा दिया जिस तरह उससे हंसी मज़ाक करता उसकी केयर करता उसे बसता, ऐसी कंडीशन में कोई भी लड़की ऐसे लड़के क प्यार में पद hi जाएगी. मंजू क दिल में कभी भी अमित को लेकर भाई बहिन वाली फीलिंग आई hi नहीं थी सिवाए राखी वाले दिन क जब उसे अपना भाई अमित क रूप में नज़र आने लगा था. मगर सिर्फ शकल मिल जाने से वो भाई कैसे हो सकता है. उसका दिल जो कह रहा था मंजू वो मैंने को तैयार नहीं थी. पर होनी तो हो क रहती है और होनी आगे क्या रंग दिखाएगी इस बात का तो उसे भी अंदाज़ा नहीं था.

मंजू बस साडी रत तड़पती रही वो बार बार फ़ोन उठती क अमित को फ़ोन करे मगर खुद hi रुक जाती क्यूंकि उसका दिमाग उसके दिल पर हावी होने लगता जो अपना ऐटिटूड दिखा रहा था. उसे लग रहा था क अमित को ऐसा नहीं करना चाहिए था अगर वो नहीं आना चाहता तो न ए मुझे क्या. उसे लड़कियों क पीछे अपनी ज़िन्दगी ख़राब करनी है तो करे . मैं क्यों उसके आगे गिड़गिड़ाऊं ? मैं तो फ़ोन किया था उसी ने नहीं उठाया. अगर वो भाव खा रहा है तो खाने दो खुद hi अकाल आ जाएगी. मंजू दिमाग की सुन कर दिल की आवाज़ दबा रही थी जो रो रहा था और अमित को वापिस लेन क लिए कह रहा था. खैर उसकी रत करवटें बदलते निकल गयी.



सॉरी दोस्तों कल लिख नहीं पाया कुछ. मौसी क साथ सन कैसे बनाऊं ये समझ नहीं आ रहा था. अब जैसा भी सन बना है इसके बारे में गए ज़रूर देना
 
अपडेट 106



सुबह 4 बजे मैं सोया था और 6 बजे नेहा दीदी मेरे लिए चाय ले आई पर मैं कहाँ उठने वाला था. मुझे नींद की हालत में देख कर उन्होंने परेशां नहीं किया और वापिस चली गयी. उसके बाद 7:30 बजे फिर से मेरी नींद खुल गयी और इस बार मेरी नींद बड़े hi मीठे एहसास से टूटी. मुझे लगा कोई मेरे होंठों पर अपने लगाए किश कर रहा है. मैंने नींद में hi किश करते हुए उठ गया तो देखा सामने करुणा दीदी थी.

करुणा दीदी : गुड मॉर्निंग. सॉरी यार पता नहीं कैसे कल रत मुझे नींद आ गयी. मैंने कितना कुछ सोचा था रात को मस्ती करने क बारे में पर पता नहीं किसे नींद आ गयी.

अमित : कोई बात नहीं बेटर लक नेक्स्ट टाइम.

करुणा दीदी : वैसे तुम इतनी देर तक क्यों सो रहे हो ? तुम तो जल्दी उठ जाते हो न और तुम्हारी ऑंखें भी लाल हैं. बात क्या है?

अब मैं क्या बताता क तुम्हारी माँ ने hi तुम्हे सुला दिया था और मुझे साडी रत जगाये रखा इसी लिए मेरी ऑंखें लाल हैं.

अमित : मैं साडी रत जगता रहा हूँ इसी लिए ऑंखें लाल हैं

करुणा दीदी : मगर तुम क्यों जग रहे थे?

अमित : आप hi ने तो कहा था रत में मस्ती करेंगे. मैं साडी रत आपका इंतज़ार करता रहा.

करुणा दीदी : ो सो स्वीट इतना प्यार करते हो? ी म सॉरी अगली बार ऐसी गलती नहीं होगी. ऐसा करो आज मैं कॉलेज से छुट्टी कर लेती हूँ और हम दोनों वहीँ चलते हैं जहाँ तुम कल दीदी क साथ गए थे.

ये तो छोड़ने क लिए इतना उतावली हो रही हैं. हो भी क्यों न मौसी भी तो इतनी हराम है और करुणा दीदी उन्ही पर गयी हैं. मगर नेहा दीदी तो बिलकुल ऐसी नहीं हैं. उधर नैना दीदी इतनी गरम हैं मगर वो किस पर गयी हैं? रजनी मौसी तो ऐसी नहीं लगती. मौसा भी ऐसे नहीं हैं. फिर वो किस पर गयी हैं? रीता मौसी भी तो देखने में ऐसी नहीं लगती थी . हो सकता है रजनी मौसी में भी ये सब हो मगर उन्होंने खुद को संभल कर रखा हो. मौसा जी उनको ठंडा कर देते होंगे .

करुणा दीदी : क्या हुआ कहाँ खो गए ?

अमित : कुछ नहीं. आज रहने देते हैं दीदी. रत भर जागने से मेरा सर घूम रहा है. मैं वडा करता हूँ जल्द hi आपको वहां लेकर जाऊंगा प्लीज आज नहीं.

करुणा दीदी : ठीक है गलती मेरी थी इस लिए जाने देती हूँ. अब तुम आराम करो और मैं तैयार हो क कॉलेज जाती हूँ. लगता है आज अकेले hi जाना पड़ेगा दीदी तो जा नहीं पाएंगी. नाउ यू टेक रेस्ट . मुआअह माय शोना

करुणा दीदी मुझे किश करने क बाद चली गयी और मैं फिर से सो गया. उसके बाद मेरी नींद मौसी क जगाने से खुली .

रीता मौसी : अमित अब उठ जाओ देखो 12 बजने वाले हैं.

मैं एक झटके से उठ गया. मैं पहली बार इतनी देर तक सोया था. मैं खुद पर हैरान हो रहा था क इतना कैसे सो गया मैं. मैंने मौसी को देखा तो वो तैयार हो चुकी थी. मगर उनकी ऑंखें भी लाल थी. मौसी को देख कर रत की चुदाई यद् आ गयी. कितने खुले पैन से कल रत मौसी ने मुझे मज़े दिए थे.

रीता मौसी : ऐसे क्या देख रहे हो? अब उठ जाओ और नाहा धो कर तैयार हो जाओ.

मैंने मौसी को पकड़ पर अपने ऊपर खींच लिया और उनके होंठो पर किश करने लगा.

रीता मौसी : क्या कर रहे हो छोडो मुझे . रत को दिल नहीं भरा क्या? छोडो मुझे लंच तैयार करना है नेहा और करुणा कॉलेज से आ जाएँगी . सुबह भी तुम्हारी वजह से उठ नहीं पायी और वो दोनों बिना नाश्ते क गयी हैं.

अमित : क्या करूँ मौसी आपका ये हुसैन मुझे पागल बना रहा है. रत भर प्यार कर क भी फिर से दिल कर रहा है क मैं आपको प्यार करूँ.

रीता मौसी : अब तो मैं तेरी hi हूँ जब चाहे आ जाया करो पर अभी छोड़ दो प्लीज मुझे किचन में काम करना है.

मैंने भी मौसी को ज्यादा तंग नहीं किया और उनकी गांड को अछि तरह मसलने क बाद छोड़ दिया. मैं जल्दी से नाहा कर तैयार हो गया और मौसी मेरे लिए नाश्ता ले आयी. मैंने मोबाइल देखा तो मोहित कल्पना नैना दीदी आंटी और गौरी ममी की मॉस्कल्स आई हुई थी. मैंने पहले गौरी ममी को फ़ोन लगाया .

अमित :hello माँ कैसी हो?

गौरी ममी : मैं तो ठीक हूँ पर तुम कहा हो? कब से फ़ोन लगा रही हूँ कहाँ था तू?

अमित : मैं क्लास में था माँ . ( झूठ)

गौरी ममी : मैं तो भूल hi गयी थी. ाचा सुन आज जल्दी घर आ जाना. शाम होने से पहले आ जाना तू अँधेरे में अत है तो मेरा दिल घबराता रहता है.

अमित : ठीक है माँ मैं जल्दी आ जाऊंगा.

कुछ देर माँ से इधर उधर क बात की और घर में सब का हल चल जाना और कॉल कट कर दी. उसके बाद मैंने नैना दीदी को फ़ोन किया . दीदी आज कॉलेज नहीं गई थी. बुखार का बहाना कर क वो घर hi रेस्ट कर रही थी ताकि उनकी हालत पूरी तरह से ठीक हो जाये. कुछ देर उनसे बात करने क बाद मैंने मोहित को फ़ोन किया वो नाराज़ हो रहा था क आज मेरी वजह से फिर वो क्लास में अकेला रह गया . उसने बताया क कल्पना मेरे बारे में पूछ रही थी और चंद्रकांता मम भी गुस्से में है . मोहित से बात कर क मैं कल्पना को फ़ोन लगाने लगा क नेहा दीदी और राधा मेरे पास आ गयी. राधा को देख कर मैं सरप्राइज हो गया.

अमित : कैसी हो राधा ? व्हाट ा प्लेअसेन्ट सरप्राइज .

राधा : मुँह फूलते हुए) मैं नाराज़ हूँ तुमसे . मुझे तुमसे बात नहीं करनी. दीदी इससे कह दो क मैं इसे नहीं जानती . ये मुझसे बात न करे.

अमित : अरे क्यों क्यों आखिर हुआ क्या है ? क्यों तुम बात नहीं करोगी?

राधा : दीदी इससे कह दो क इसे कौन सा मेरी परवाह है जो मैं इससे बात करूँ. बिना बताये कॉलेज से गायब रहता है . न कभी घर अत है न फ़ोन करता है. आखिर लगती क्या हूँ मैं इसकी.

अमित : हम्म तो इस लिए नाराज़ हो तुम. ाचा सॉरी बाबा गलती हो गयी लो कान पकड़ता हूँ. आगे से तुम्हे बता कर कहीं जाया करूँगा. और जल्दी hi तुम्हारे घर भी आऊंगा ये तो कल रत मौसी ने फ़ोन कर क बुला लिया था . आज माँ ने जल्दी बुलाया है वर्ण मैं सीधा तुम्हारे साथ तुम्हारे घर hi चलता .

राधा : सच !

अमित : और नहीं तो क्या. वैसे भी रजनी मौसी और यहाँ पर तो मैंने चक्कर लगा लिया तो अब तुम्हारी बरी है.

मेरी बात सुन कर राधा खुश हो गयी. उसके मासूम से चेहरे पर मुस्कान आ गयी. जो नक्सली गुस्सा अभी वो दिखा रही थी मेरी 2 मीठी मीठी बातों से वो गायब हो गया.

अमित : वैसे मुझे घर बुला कर तुम करोगी क्या. मौसी तो मुझे ज्यादा देर रुकने hi नहीं देंगी.

राधा : माँ ऐसा कुछ नहीं करती . तुम एक बार आओ तो सही. मैं तुम्हारे साथ बहुत साडी बातें करुँगी. घर में अकेली बोर हो जाती हूँ किताबों क इलावा और है hi क्या ?

अमित : तुमने अभी तक कोई दोस्त नहीं बनाये?

राधा : मुझे किसी की ज़रूरत नहीं है. मेरे लिए तुम hi बहुत हो अगर तुम दोस्ती निभाओ तो. पर लगता है तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम नहीं है.

अमित : गलती हो गयी बाबा अब नहीं होगी. अब से मैं रोज़ तुम्हे फ़ोन किया करूँगा और हफ्ते में एक दिन तुमसे मिलने भुई आऊंगा.

राधा : प्रॉमिस

अमित : प्रॉमिस

राधा इतने से hi खुश हो गयी. और उसको खुश देख कर मेरा दिल भी खुश हो गया.

नेहा दीदी : तो आज सारा दिन सोते रहे तुम. कॉलेज भी नहीं ए. ऐसे रोज़ रोज़ छुट्टिआं करोगे तो कैसे चलेगा? तुम्हारी तबियत तो ठीक है न?

नेहा दीदी की बातों से राधा क चेहरे पर भी एक पल क किये शिकन आ गयी. जैसे मुझे सचमुच में कुछ हुआ हो.

अमित : क्या दीदी आप भुई कैसी बातें करती हैं ाचा भला तो हूँ आपके सामने. आज कॉलेज में कुछ खास था नहीं तो सोचा आज आराम करता हूँ. कहीं फिर किसी ने आपको तंग तो नहीं किया कॉलेज में?

नेहा दीदी : तेरे होते कोई ऐसा कर सकता है क्या? मुझे पता है मेरा भाई सबको ठीक कर देगा.

कुछ hi देर में करुणा दीदी भी आ गयी . दिव्या मौसी का फ़ोन आने से राधा जल्दी चली गयी मगर जाते जाते मुझे घर आने को कह कर गयी. मैंने तो नाश्ता अभी किया था फिर भी नेहा दीदी को कंपनी दी. उसके बाद मैं एक बार मोहित क घर गया . मोहित और आंटी से मिल कर मैं गाओं चला गया.

कॉलेज में भी आज शीना और मोंटी अलग अलग अपनी खोज में लगे थे.

मोंटी : साला किसी ने मेरे फ्लैट में घुसने की कोशिश की है और मुझे लगता है ये उन्ही लोगों का काम है जिन्होंने टोनी और रॉकी पर हमला किया था.

रघु: तुझे पक्का यकीन है ये वही लोग हैं ? उनकी कोई फुटेज है तेरे पास ?

मोंटी : सेल दवर उठा कर ले गए पर बिल्डिंग क कक्तव से गार्ड ने बताया क 2 लड़के थे . एक ने अपना नाम मोहित बताया है. अब ये साला मोहित कौन है ये समझ नहीं आ रहा.

रघु : मोहित नाम क किसी लड़के से अपना कोई लगदा तो हुआ नहीं फिर कौन है साला ?

मोंटी : जो भी है इसको ढूंढ़ना ज़रूरी है. मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने ये नाम पहले भी सुना है मगर यद् नहीं आ रहा ये कौन है.

रघु : ो तेरी ! कहीं ये वही मोहित तो नहीं उस लौड़े अमित का दोस्त ?

मोंटी : अरे हाँ उसका नाम भी मोहित है , तभी मैं कहूं साला ये नाम कहाँ सुना है.

रघु : चल इसकी माँ छोड़ते हैं. साला चींटी क पर निकल आये हैं.

मोंटी : अबे रुक , पहले कन्फर्म करले क ये वही है . मुझे नहीं लगता वो गांडू हमसे पन्गा लेगा. उसका बाप अछि तरह जनता है हमें. तू एक काम कर उसकी फोटो निकल फिर हम उस गार्ड से चेक करवाते हैं .

रघु : ok बॉस , अगर ये वही निकला तो फिर क्या करना है. फिर उसकी और उस गांडू दोनों की गांड मारेंगे. मगर प्लान क साथ. उसे पता भी नहीं चलेगा क कब वो हमारे पैन क नीचे आ गया. पर पहले देख तो ले.

वहीँ शीना भी अपनी फ्रेंड्स क साथ बैठी थी जानकारी लेने क लिए.

शीना : पता चला कुछ ?

नितिका : टोनी की गफ ने बताया क आजकल वो उसी लड़की क पीछे जा रहा था जिसकी वजह से उस देहाती ने मोंटी पर हमला किया था.

वैशाली : रॉकी भी टोनी क साथ उसकी दूसरी कजिन क पीछे था कुछ दिनों से.

शीना : मगर वो लोग ऐसा क्यों कर रहे थे?

नितिका : मस्त माल हैं दोनों कोई भी लड़का उन्हें सेट तो करना चाहेगा hi न. वैसे मुझे लगता है शायद उस देहाती को जवाब देने क लिए ऐसा कर रहे होंगे दोनों.

शिवानी : पर उससे बदला लेने क लिए उसकी कौसिन्स को क्यों तंग कर रहे थे वो लोग ?

नितिका : क्यों की झगड़ा भी तो उसी की वजह से हुआ था न. वैसे भी एवरीथिंग फारे इन लव एंड वॉर.

शिवानी : पर ये गलत है.

शीना : हमें उन लड़कियों से कुछ लेना देना नहीं है नितिका. वैसे भी वो हमारी क्लास ( स्टेटस ) की नहीं हैं. इस बात से मुझे लग रहा है ये उसी का काम होगा. देखने में तो शरीफ लगता है कॉलेज में कैसे भोला भला बना रहता है मगर असलियत कुछ और है उसकी.

शिवानी : शीना इन सब बातों से कहीं भी ये तो साबित नहीं होता क ये काम उसी ने किया है. ी मैं हो सकता है टोनी और रिस्की की किसी और से दुश्मनी हो.

शीना : ऐसा नहीं है. मोंटी ने बात की थी उनसे , वो भी नहीं जानते किसने ये किया. ऐसे में सिर्फ वही एक बचता है जो दुश्मनी रखता होगा दिल में. टोनी और रॉकी उसकी कौसिन्स क पीछे गए इसी लिए उसने ये कदम उठाया होगा जैसे उसने मोंटी क साथ किया था. फिर भी मैं एक बार आज कन्फर्म कर लूंगी.

शिवानी : कैसे ?

शीना : टोनी और रॉकी उस दिन 2 लड़कियों क साथ थे जिसके बारे में शायद मोंटी को नहीं पता अभी तक. मगर मुझे पता है . मैं उनसे मिलूंगी आज .

शिवानी : कौन हैं वो दोनों?

शीना : गर्ल्स कॉलेज की हैं. मुझे कल hi पता चला है अपनी एक दोस्त से. दोनों दरी हुई हैं और उस दिन से कॉलेज भी नहीं गयी. मेरी दोस्त उनको जानती है और उनकी भी दोस्त है. उन दोनों ने इसके बारे में उस से बात की थी और उसने मुझे बताया. आज मैं उसके साथ जाकर उन दोनों से मिलूंगी.

घर आते hi माँ ने मुझे कास क गले लगा लिया. जाने कब तक माँ मुझे छोटे बच्चों की तरह अपनी छाती से लगाए रही .

दीपिका ममी : बस भी करो दीदी हम भी यहीं हैं.

दीपिका ममी की बात सुन कर माँ ने मुझे छोड़ा और दीपिका ममी से नज़र चुराने लगी जैसे उनकी कोई चोरी पकड़ी गयी हो. मैंने देखा तो दीपिका ममी और कामिनी ममी एक साथ कड़ी थी. दीपिका ममी का पेट तो पूरा फूल चूका था अब कुछ hi दिनों में वो माँ बनने वाली थी. मैंने आगे बाद कर उन्हें गले लगाया तो वो धीरे से मेरे कण में बोली

दीपिका ममी : एक हफ्ता और है दीदी क पास बस इस लिए उन्हें ज्यादा समय दो. वर्ण 6 महीने कोई हाथ नहीं जाने वाली.

अमित : आप चिंता मत करो मैं इंतज़ार कर लूंगा. वैसे आप कब मुँह मीठा करवा रही हैं.

दीपिका ममी : 20 दिन का टाइम दिया है मगर उससे पहले भी हो सकता है. सब से मेरे बचे को उसके पापा की सूरत hi दिखनी चाहिए वर्ण मैं नाराज़ हो जाउंगी

अमित : ऐसा hi होगा. वैसे मुझसे लड़का चाहिए ताकि वो बड़ा होकर आपकी सेवा कर सके.

दीपिका ममी : मैं भी यही चाहती हूँ क मेरी कोख से तुम्हारे जैसा बीटा पैदा हो.

दीपिका ममी क बाद मैंने कामिनी ममी को गले लगाया और उनसे कान में कहा

अमित : आज रत आगे पीछे दोनों साइड से करेंगे. तैयार रहना.

मेरी इस बात पर कामिनी ममी शर्मा गयी. और जल्दी से दूर हटने लगी तो मैंने उनकी गांड एक बार मसल दी. माँ ने मेरे लिए दूध गरम किया और खाने को भी ड्राई फ्रूट्स ले आयी. मां लोगों क आते hi सब मिल कर इधर उधर घर परिवार और मेरे कॉलेज की बातें करने लगे. अंकल आंटी क बारे में भी बात हुई. हम बात कर रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा. देखा तो शिवानी का फ़ोन था. मैंने साइड में जा कर फ़ोन अटेंड किया.

शिवानी : कहाँ गायब हो ? 3 दिन हो गए मिले हुए . यहाँ मेरी जान पर बानी है और तुम हो क नज़र भी नहीं आ रहे.

अमित : बात क्या है ? तुम इतना टेंशन में क्यों हो?

शिवानी : शीना को तुम पर शक हो गया है. वो आज दो लड़कियों से मिलने वाली है जो उस दिन वहां थी जब टोनी और रॉकी पर हमला हुआ.

अमित : तुम चिंता मत करो कुछ नहीं होगा.

शिवानी : कैसे न चिंता करूँ? मेरा दिल घबरा रहा है. शीना बहुत गुस्से वाली है. क्या तुम ने किया था ये सब ?

अमित : बताया तो था तुम्हे.

शिवानी : तुमने नहीं बताया मुझे कुछ भी.

अमित : ठीक है मिल क बताऊंगा .

शिवानी : तुम खुद थे वहां पर ? अगर शिवानी को पता चल गया तो पता नहीं क्या होगा.

अमित : कुछ नहीं होगा . तुम हो न मुझे बचने क लिए. वैसे भी मैं वहां था hi नहीं तो दर किस बात का.

शिवानी : मुझे दर लगता है शीना बुरी तो नहीं है पर उसका गुस्सा बहुत बुरा है. उसे दर है क तुम मोंटी को नुकसान पहुँचाने वाले हो इस लिए वो तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा न कर बैठे. मैं आज से शीना से दोस्ती तोड़ लुंगी. जो तुम्हारा बुरा चाहती है मैं उससे दोस्ती नहीं रखना चाहती.

अमित : अरे ऐसा बिलकुल मत करना. वो तुम्हारी डिस्ट है. तुम्हे उसकी मदद करनी चाहिए उसे सही रास्ता दिखाओ. और इसके इलावा अगर तुम उसके साथ रहोगी तो तुम्हे पता चलता रहेगा वो क्या करने वाली है जिससे मुझे फायदा होगा.

शिवानी : पर मैं .....

अमित : शह्ह्ह्ह . मुझे पता है तुम मुझसे प्यार करती हो. तुम कभी मेरा नुकसान नहीं चाहती पर ये तुम्हे करना होगा. अब मुझे फ़ोन रखना होगा मैं गाओं आया हुआ हूँ. सब मेरा इंतज़ार कर रहे हैं . वापिस आ कर मिलूंगा ok bye.

शिवानी से बात कर क मैंने फ़ोन काट दिया. शीना जिन लड़कियों से सचाई जानना चाहती हैं वो खुद नहीं जानती तो मदद क्या करेंगी. मैं उनकी तरफ से निश्चिन्त था. और शीना क साथ शिवानी तो थी hi जो मुझे खबर देती रहेगी मगर मोंटी की खबर कौन देगा? शीना कहीं राधा या नेहा दीदी को परेशां तो नहीं करेगी? अगर उसने ऐसा किया तो उसे भी मैं सजा दूंगा , भूल जाऊंगा क वो एक लड़की है. माँ की आवाज़ सुन कर मैं अपने दिमाग क घोड़ों को रोक कर वापिस आ गया.

रत को खाने क बाद माँ कुछ देर मेरे साथ बातें करने क बाद अपने कमरे में चली गयी ये कह कर उन्हें नींद आ रही है और कुछ hi डॉ में कामिनी ममी चली आयी. कामिनी ममी का पेट भी काफी उभर आया था. आज और नेक्स्ट वीक में एक , बस ये दो hi रातें थी अब हमारे पास. मैंने आते hi उन्हें प्यार करना शुरू कर दिया , मैं जनता था वो भी कितना तरस रही हैं. कुछ hi देर में हम दो ो नंगे हो गए और अपना खेल शुरू कर दिया.

कमरे क बहार से गौरी सारा खेल शुरू से देख रही थी . गौरी ने खुद hi कामिनी को आज अमित क साथ रत बिताने को कहा था. अब सब कुछ तीनो में ओपन था. इस लिए कामिनी को भी दर नहीं था. कामिनी को भेज कर गौरी अपने रूम में चली गयी थी मगर ये सिर्फ दिखावा था. असल में वो कामिनी अमित क रूम में एते hi पीछे पीछे आ गयी थी. आज वो सारा खेल शुरू से देखना चाहती थी. सब को दूध देकर सुला दिया गया था और गौरी किसी क भी जागने क बारे में आश्वस्त थी. कमरे क अंदर अमित ने जब रोमांटिक तरीके से किश करते हुए और दूध मसलते हुए कामिनी क कपडे उतरे तो ुए सब देख कर hi गौरी गरम हो गयी थी. अमित क नंगे शरीर क वो पहलवानी कसाव भरे मसल वो छोडो छाती और मजबूत कंधे आज गौरी एक औरत की नज़र से देख रही थी. टैंगो क बीच हवा में झूलता वो सांप , नहीं नहीं वो तो अजगर था. पिछली बार भी उसने देखा था मगर आज फिर से घर से देख रही थी क्यूंकि अब इस अजगर क किस्से उसे पता चल चुके थे. इसी ने दीपिका और कामिनी दोनों को प्रसाद देकर माँ बनाया था और इसी क ज़हरीले फैन से वो खुद भी माँ बनने वाली थी. इतना बड़ा लैंड उसकी छूट में कैसे गया होगा ये सोचते hi उसका हाथ अपनी छूट पर चला गया. गुस्से में उसे अपनी हालत पर तब ध्यान hi नहीं गया था मगर उसे यद् आया क 3 दिन तक उसे अपनी योनि में दर्द महसूस होता रहा था और छूट सूजी रही थी. अंदर कामिनी अमित का लैंड चूसने लगी तो गौरी का मुँह खुला खुला रह गया. इतने बड़े लैंड को वो कैसे मुँह में ले सकती है इस बात पर गौरी हैरान हो रही थी. उसने अपनी साडी ज़िन्दगी में विजय क लैंड क इलावा कोई लैंड देखा नहीं था . मुँह में लेना तो दूर की बात है कभी उसने विजय का लैंड हाथ में भी नहीं पकड़ा था. कामिनी इतना कुछ कैसे कर सकती है ? भला ऐसा करने से क्या होता होगा ? गौरी यही सोचने लगी और उसका एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा हाथ उसकी छूट को सदी क ऊपर से hi लगातार सहलाता जा रहा था. कामिनी का ये रूप देख कर उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी . सेक्स में ये सब भी होता होगा इसका उसे बिलकुल ज्ञान नहीं था और जब अमित ने कामिनी की छूट को चेतना शुरू किया तो गौरी को तेज़ झटका लगा उसकी टंगे कम्पनी लगी. गौरी से खड़ा रह पाना मुश्किल हो गया. वो धक् से नीचे बैठ गयी. गौरी को जैसे चक्कर सा आ गया था कुछ पल क लिए उसकी साँसे उखड़ी रही और ऑंखें बंद . जब सब कुछ नार्मल हुआ तो उसे अपनी सदी छूट क भाग से गीली महसूस हुई. उसकी जांघें भी उसे चिपचिप लग रही थी. जब उसने अचे जांचा तो पैट चला उसकी छूट ने नदी बहा दी थी. अंदर का नज़ारा देख कर जहाँ गौरी उसे गन्दा काम समझ रही थी उसी नज़ारे को उसकी छूट ने पसंद करते हुए पानी बहा दिया था.

सँभालने क बाद गौरी ने फिर से अंदर देखा तो अमित कामिनी को झुका कर उसकी छूट की चुदाई कर रहा था. गौरी चुदाई देखते हुए फिर से गरम होने लगी. एक दिल उसका कहता क वापिस लौट जाये दूसरा दिल कहता क अंत तक सब देख जाये क्या पता क्या क्या नया पता चलेगा. गौरी नया जानने की लालसा में सब देखने लगी और फिर से उसके जिस्म में आग लगनी शुरू हो गयी. कामिनी को दो बार ठंडा करने क बाद जब अमित ने उसकी गांड में लैंड डाला और कामिनी ने भी आराम से ले लिया तो गौरी को गिर से झटका लगा और एक बार फिर झाड़ गयी. गौरी कब भी विजय क साथ सेक्स करती थी तो 1 बार करने क बाद hi वो आराम से सो जाते थे. मगर यहाँ कामिनी को दो बात ठंडा करने क बाद भी अमित लगा हुआ था. और पिछले सुराख़ का मॉल त्याग क इलावा भी कुछ काम है ये जान कर भी गौरी हैरान थी. वैसे तो उसे पता था क कुछ आदमी ऐसे होते हैं जो आदमी से hi ऐसा गन्दा काम कर केते हैं पर औरत भी ऐसा करती है और वो भी मज़े क साथ ये भी एक अनहोनी घटना थी गौरी क लिए. अमित का भी काम हो गया था और वो की ह देर कामिनी क साथ आराम करने क लिए लेट गया पर बहार गौरी की हालत खस्ता हो गयी थी. बेचारी दीवार का सहारा लेती हुई बड़ी मुश्किल से नीचे उतरी. उसकी सदी और पेटीकोट काफी भीग गए थे और उसका पानी उसकी जाँघों से बेहटा हुआ पाऊँ तक आकर अब पाऊँ की जुटी में आ गया था. जिससे उसके पाऊँ में चिपचिपा पैन हो रहा था और जुटी से बहार भी पानी निकल रहा था. वो खुद को संभालती हुई बाथरूम तक पहुंची और जल्दी से कपडे उतर कर नहाने लगी.

रत क इस पहर में जब सब गहरी नींद में होते हैं गौरी न सिर्फ जाग रही थी बल्कि नाहा कर अपने अंदर की आग को ठंडा कर रही थी. उसका दिमाग वो सब मैंने को तैयार नहीं था उसने अभी देखा था मगर उसका दिल वो सब खूब मज़े से एन्जॉय कर क आया था और अब वो खुद भी एक बार वो सब करना चाहता था. गौरी नाहा कर नंगी hi बाथरूम में कड़ी सोच में गम थी क किसी ने उसे हिलाया.

दीपिका : क्या हुआ दीदी ऐसे इस हालत में क्यों कड़ी हैं वो भी इस वक़्त . काम से काम दरवाज़ा तो बंद कर लेटिन आप .

गौरी दीपिका को अपने सामने देख कर हड़बड़ा गयी. जब उसे अपने लगे पैन का एहसास हुआ तो वो अपने हाथों से अपना नंगा जिस्म ढकने लगी. दीपिका ने फर्श पर गिरी हुई सदी उठा कर गौरी को दी और बहार निकलते हुए कुछ ऐसा कह दिया जिसने गौरी क वजूद को अंदर तक हिला दिया

दीपिका : ऐसे आग ठंडी नहीं होगी दीदी ये आग सिर्फ वही बुझा सकता है जिसकी वजह से ये लगी है.

दीपिका इतना कह कर चली गयी मगर गौरी को सोचने पर मजबूर कर दिया. दीपिका ने ऐसा क्यों कहा ? उसने तो पुछा भी नहीं क मैं नाहा क्यों रही हूँ या मेरी तबियत तो ख़राब नहीं? सीधा वो बात करदी जो क 100% सच थी. इसका मतलब दीपिका को पैट था क मैं क्या कर क आयी हूँ या फिर मेरे अंदर क्या चल रहा है. नहीं नहीं वो मेरा बीटा है मैंने उसे अपने बेटे को तरह पला है. मैं उसके साथ कैसे ? एक तरफ गौरी का दिमाग उसके आगे सवाल रख रहा था वहीँ उसका दिल भी उसे तर्क देने लगा.

‘ तो क्या हुआ जो बेटे की तरह पला है तो, बीटा तो नहीं है न? अगर तूने उसे दिल से बीटा मन होता तो फिर तू माँ बनने क किये क्यों तड़प रही थी ? और देख उसी ने तुझे माँ बनाया है, क्या उसे उसका इनाम नहीं मिलना चाहिए ? कामिनी कितने मज़े से उसको प्यार कर रही है . दीपिका भी उसे दिलो जान से प्यार करती है फिर तू hi क्यों नखरे कर रही है? मत भूल क तेरे पेट में उसी का बीज है और क्या तू अपने पेट में पल रहे बचे को उसके बाप का प्यार नहीं देगी? बचे की अछि सेहत और उसके मजबूत जिस्म क लिए उसे उसके बाप क बीज की ज़रूरत है. कहीं वो ऐसे कमज़ोर रह गया तो? अमित ने सिर्फ एक बार hi तेरे साथ वो सब किया था और उसी से तू माँ बन गयी . अब जो हो चूका है उसे बदला नहीं जा सकता इस लिए ाचा है क अपने बचे क बारे में सोच और उसकी अछि सेहत क लिए अमित का पानी फिर से अपने अंदर ले. दीपिका बिलकुल सही कह क गयी है ये आग सिर्फ अमित hi बुझा सकता है . देखा नहीं कैसे वो प्यार करता है? एक औरत को किस तरह प्यार किया जाता है ये सिर्फ उसी को पता है. आज तक तेरे पति ने कभी तेरे साथ ऐसा किया है क्या? कामिनी कितनी खुश लग रही थी. ये ख़ुशी तुम्हे भी मिलनी चाहिए मगर तू खुद hi इस ख़ुशी को अपना नहीं रही ‘

दिमाग : पर वो मेरा बीटा है वो मुझे माँ कहता है माँ की तरह मंटा है

दिल : वो तो कामिनी को भी ममी कहता है दीपिका को भी ममी कहता है पर देख फिर भी दोनों को माँ बना दिया न उसने. वो तो ाचा है क वो रिश्तों को नहीं भूलता जिससे कल को तुझे भी कोई मुश्किल नहीं होने वाली. माँ माँ कह क तुझे माँ बनता रहेगा और तू जितने चाहे उतने बचे पैदा कर लेना. सब की बोलती बंद कर देना जो तुझे बाँझ कहती थी. ये hi असली मर्द है जो किसी भी औरत को माँ बना सकता है. इस घर क कार्डो में अगर डैम होता तो अब तक 10-12 बचे इस घर की रौनक बन चुके होते. और इन लोगों प्यार करना hi कहाँ अत है. देख ज़रा अमित की तरफ हर चीज़ में अव्वल है. न उसके जैसे किसी की पर्सनालिटी है न उसके जैसा दिमाग न उसके जैसी ताकत और न उसके जैसा हथियार. इतना बड़ा कभी सुना भी है तूने किसी से?

दिमाग : अमित कभी ऐसा नहीं करेगा वो मुझे माँ मंटा है. अगर मैंने कोशिश की तो उसकी नज़रों से गिर जाउंगी

दिल : कुछ भी नहीं होगा. पहले भी तो सब कुछ उसी ने किया था न? मन क सिचुएशन अलग थी पर किया तो. अब एक बार जो गुनाह हो चूका है वो फिर दोबारा हो भी जाये तो क्या फरक पड़ता है. सुना नहीं था दीपिका ने क्या कहा था ? उसने दीपिका की जान बचाई और इस घर को बचने क लिए दीपिका को वो प्यार दिया जो उसे कमलेश से नहीं मिला. कामिनी को भी उसने प्यार दे कर बदल दिया . तू कहेगी तो वो तेरे लिए भी मन जायेगा उसे मन्ना hi होगा. तुम उसे अपने बचे का वास्ता देना . वैसे भी तू उसकी माँ थोड़े hi है . तू तो ममी है. अब उसे इस बात का एहसास करवा क तू सिर्फ माँ नहीं ममी भी है और एक औरत भी है जिसे प्यार चाहिए. तू उसके होने वाले बचे की माँ है और उसे उसके बचे को प्यार देना hi होगा.

इधर गौरी साडी रत अपने बिस्तर ओर करवटें बदलती रही और उधर अमित साडी रत कामिनी की तबियत से सेवा करता रहा. रत देर तक कुश्ती खेलने की वजह से अमित सुबह देर तक सोता रहा.

उधर शहर में शीना को उन लड़कियों से कुछ खास पता नहीं चला मगर एक बात लड़कियों से जो पता चली थी वो ये थी क तीनो लड़के देखने में पहलवान जैसे तगड़े थे. इस बात से शीना का शक अमित पर और भी मजबूत हो गया. मगर उसका साथ देने वाले 2 लोग कौन हो सकते हैं ये उसे समझ नहीं आ रहा था.

मोंटी ने भी गार्ड से मोहित की तस्वीर दिखा कर कन्फर्म करवा लिया था. उसके पास अमित की तस्वीर नहीं थी कोई मगर उसकी अब कन्फर्म हो चूका था क दूसरा लड़का अमित hi होगा क्यूंकि मोहित क साथ तो उसके दुश्मनी थी नहीं. मगर मोहित ने अमित का साथ देकर मोंटी क खिलाफ दुश्मनी का एलान कर दिया था. अब मोंटी आगे का प्लान करने लगा क क्या किया जाये. उसने सोच किया क अब अमित को वो ऐसी सजा देगा क वो न सिर्फ कॉलेज बल्कि इस शहर से hi गायब हो जाये और हमेशा क लिए या तो गाओं चला जाये या कहीं डूब मरे. अपने दिमाग में प्लान बना कर मोंटी हसने लगा . अब उसे इस प्लान क लिए बहार से लड़के ढूंढ़ने होंगे ताकि इलज़ाम उसपर न आये . और ऐसे कामों क लिए वो अक्सर बॉयज कॉलेज क लड़कों का इस्तेमाल करता था. मोंटी का प्लान अभी पूरा नहीं हो सकता था क्यूंकि अभी टेस्ट होने वाले थे इसके लिए उसे कुछ दिन रुकना होगा और इसमें शीना की ज़रूरत भी पड़ेगी. मोंटी अकेले में बैठा अपनी प्लानिंग पर खुश होता स्कॉच पि रहा था और अपनी एक रखैल को बुला कर उस पर चढ़ गया.

इधर रत भर म्हणत की वजह से मैं देर तक सोता रहा और मुझे किसी ने जगाया भी नहीं. करीब 10 बजे माँ ने आ कर मुझे नींद से जगाया.

गौरी ममी : उठ जाओ अमित अब और कितना सोयेगा देख 10 बज गए हैं.

माँ क जगाने से मैं हड़बड़ा कर उठ गया.

अमित : सॉरी माँ पता hi नहीं लगा . आज तो बहुत देर हो गयी

गौरी ममी : लगता है कल बहुत म्हणत की होगी इसी लिए इतनी देर तक सोते रहे. कोई बात नहीं मैंने भी तुझे इसी किये सोने दिया. वैसे आज तो सब देर से जग रहे हैं कामिनी भी आज देर से hi उठी थी. अब तैयार हो और खाना खा के आ कर.

माँ की बात सुन कर एक बार तो मैं घबरा गया क कहीं माँ को पता तो बही चल गया? पर जिस तरह वो बात कर रही थी कहीं भी गुस्सा या नाराज़गी नहीं थी मतलब उन्होंने ऐसे hi कहा होगा.

अमित : ठीक है माँ मैं अभी अत हूँ आप चलिए.

माँ क जाने क बाद मैं जल्दी से नहा धो कर तैयार हुआ और नीचे आ कर खाना खाया. कामिनी ममी मुझे देख कर शर्मा रही थी जबकि दीपिका ममी मेरे पास बैठी बातें कर रही थी और माँ मेरे लिए परांठे बना रही थी.

दीपिका ममी : लगता है साडी रत तूने बहुत म्हणत की है तभी तो दीदी की ऑंखें अभी तक लाल हैं.

अमित : आप पर भी तो इतनी म्हणत की है इसी लिए तो ये इतना फूल गया है.

दीपिका ममी : हए मैं तो कितना मिस करती हूँ उन दिनों को. अब इसके बहार आने क बाद कुछ महीने और रुकना होगा मगर उसके बाद मैं तेरे पास शहर hi आ जाउंगी फिर रत भर मेरे साथ कुश्ती करना.

अमित : वो सब बाद में पहले आप अपना ध्यान रखिये. और कभी कोई दिक्कत हो तो फ़ोन कर देना मैं फ़ौरन चला आऊंगा. मां को कार लेने को कहा था अब तक ली क्यों नहीं?

दीपिका ममी : उनकी छोड़ मुझे उनसे कोई लेना देना नहीं है. तू बस मेरे पास होना चाहिए उस वक़्त.

गौरी ममी : लो गरमा गरम परांठे खाओ. कामिनी तू वहां क्या कर रही है? इधर आ कर परांठे खिला न अमित को मैं रसोई में बना रही हूँ तू खिला.

कामिनी ममी का चेहरा लाल हो गया. और वो चुपचाप गौरी ममी क पीछे रसोई में चली गयी.

दीपिका ममी : वैसे बड़ी दीदी आज कल कुछ ज्यादा hi ध्यान रखने लगी है तुम्हारा. खुश हो न तुम? अब तो वो भी हमारी तरह तुम्हे प्यार करने लगी हैं.

अमित : मैं बहुत खुश हूँ क सब पहले जैसा हो गया है. माँ फिर से मुझे प्यार करने लगी है वर्ण पहले तो मेरा दिल नहीं करता था घर आने को , उनकी नाराज़गी की वजह से.

दीपिका ममी : (मन में) तू समझा नहीं , दीदी अब हमारी तरह तुझे प्यार करना चाहती हैं वो और ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाएंगी. वो मन नहीं रही पर उनका दिल अंदर से तड़पने लगा है तेरे लिए.

अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी आप ?

दीपिका ममी : कुछ नहीं , वैसे एक बात बताएगा मुझे ?

अमित : पूछिए

दीपिका ममी : तुझे अपने होने वाले बच्चों से कितना प्यार है?

अमित : पता नहीं मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता बस एक अजीब से फीलिंग है जैसे क मुझे कुछ बहुत बड़ा कुछ बहुत खास मिलने वाला हुआ जो मेरा है.

दीपिका ममी : तुझे क्या अपने सब बच्चों से एक सामान प्यार है या अलग अलग?

अमित : इसमें फरक कैसे किया जा सकता है. जो मेरे हैं वो मेरे लिए एक जैसे हैं

दीपिका ममी : पर बच्चों की माँ तो अलग अलग हैं न ? तो क्या तू अपने बच्चों की माओं से भी एक जैसा प्यार करता है?

अमित : क्यों आपको कोई शक है क्या ? मैंने आपको और कामिनी ममी दोनों को एक जैसा प्यार दिया है.

दीपिका ममी : मगर एक को नहीं दिया

अमित : शॉकेड ) आप किसकी बात कर रही हैं?

दीपिका ममी : बड़ी दीदी

अमित : गुस्से में ) ये आप क्या कह रही हैं?

दीपिका ममी : क्या गलत कहा मैंने ? वो भी तो तुम्हारे बचे की माँ बनने वाली हैं.

अमित : बस बहुत हुआ मुझे आपसे ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी. वो माँ हैं मेरी और आप ऐसी बातें कर रही हैं.

मुझे एक डैम से गुस्सा आ गया था और मैं गुस्से में खाना बीच में छोड़ कर घर से बहार निकल गया .

आज संडे था तो मोंटी ने अपने प्लान पर डिसकस करने क लिए अपने खास दोस्त रघु और बॉयज कॉलेज से उस लड़के को बुलाया जो सीनियर था और मोंटी की तरह अपने गैंग का लीडर भी. ये वही लड़का था जिसके साथ नीरज का पन्गा था. इसका नाम रंजीत है और b.a. फाइनल का स्टूडेंट साथ hi साथ रेसलिंग प्लेयर.

रघु : क्या बात है मोंटी आज यहाँ क्यों बुलाया?

मोंटी : थोड़ी देर रुक उसे भी आने दे

रघु : किसे ??

इतने में बहार से रंजीत भी अंदर आ गया. ये मोंटी का फार्महाउस था और यहाँ इन तीनो क इलावा कोई नहीं था.

रंजीत : कैसे हो मोंटी आज मुझे कैसे यद् किया?

मोंटी : आ यार रंजीत बैठ यहाँ पर. बोल क्या लेगा उसके बाद कोई बात करेंगे.

रंजीत : जो मर्ज़ी ले आ तुझे तो अपना सब पता hi है.

मोंटी : अचे से पता है तुझे क्या चाहिए. रघु तीन पेग बना ज़रा. तेरे लिए आइटम का भी इंतज़ाम किया है . एक घंटे में आ जाएगी.

रघु ने तीन पेग स्कॉच क बनाये और तीनो ने चियर्स करते हुए अपना अपना पेग उठा लिया. रंजीत ने तो एक बार में hi गिलास खली कर दिया. अब इतनी मेहेंगी शराब उस देसी पीने वाले को कहाँ मिलती थी रोज़ रोज़ . वो तो बोतल को देख कर पानी बहाने लगा था मुँह से.

मोंटी : आराम से आराम से यहाँ पर बहुत है किसी चीज़ की कमी नहीं है. पहले मेरी बात तो सुन के जिसके लिए बुलाया है.

रंजीत : इसके जैसी एक और मंगवा ले पहले. और बता क्या बात करनी है.

मोंटी: तुझे वो लड़का यद् है न ? जिसको उस दिन ठोकने का बोलै था मगर तेरे लड़के से वो काम नहीं हुआ.

रंजीत : है यद् है साला बच गया उस दिन. उसको तो कभी न कभी मैं ठोकूंगा ज़रूर . उसी ने नीरज को बचाया था और मेरे सर पर चोट उसी की वजह से लगी थी.

मोंटी : वो मेरा भी दुश्मन है इतना तो तू जनता hi होगा. अब असल बात सुन. पिछले दिनों उसने अपने साथी क साथ मेरे दोस्तों पर हमला कर क उन्हें बुरी तरह मारा है. 3 महीने तक वो बीएड से उठ नहीं पाएंगे और उसके बाद का पता नहीं. इससे पहले क वो मुझ पर भी हमला करे मुझे उसको सबक सीखना है.

रंजीत : चल आज hi थोक डालते हैं सेल को मैं अभी अपने साथियों को फ़ोन लगता हूँ.

मोंटी : नहीं बात सिर्फ उसे ठोकने तक की नहीं है. उसने जो किया है उसकी इतनी छोटी सजा नहीं दे सकता मैं उसे.

रंजीत : तो क्या करना चाहता है तू?

मोंटी : उसे ऐसी सजा दूंगा क साला खुद hi शर्म से डूब मरेगा.

रघु : वो कैसे?

मोंटी : तूने देखा है न उसकी वो कजिन कितनी ज़बरदस्त माल है , बिलकुल कच्ची काली. उसे कैसे छोड़ सकता हूँ मैं. उसी की वजह से तो सब कुछ हुआ है. टोनी पर हमला भी उसकी वजह से हुआ है. अब इसका बदला भी उसी से लूंगा और उसके बाद वो साला खुद hi शर्म क मरे कहीं डूब मरेगा वर्ण

रंजीत : वर्ण हम उसे थोक देंगे. मगर करना क्या है.

मोंटी : उस लड़की को उठाना है. पहले उसे काली से फूल बनाएंगे फिर उसको फिल्म की हेरोइन बनाएंगे और फिर कॉलेज क साथ साथ सरे शहर में हिट करवाएंगे. इतना सब होने क बाद साला खुद hi कहीं जा कर डूब मरेगा नहीं तो हमारे पाऊँ क निचे उसकी गर्दन होगी.

रघु : मगर ये करना कैसे है ? और कब?

रंजीत : कब क्या आज hi करते हैं मैं बुलाता हूँ लड़कों को

मोंटी : अभी नहीं थोड़े दिन रुक जाओ . मेरे दिमाग में एक प्लान है. जिससे काम भी हो जायेगा और हम पर इलज़ाम भी नहीं आएगा. जब मैं कहूं तब तुम अपने लड़कों को तैयार रखना उस लड़की को उठाने क लिए. प्लान मैंने बना लिया है अब बस इंतज़ार करो और तब तक ऐसे शांत रहो जैसे कोई बात है hi नहीं. उस हरामज़ादे को चैन से रहने दो ताकि उसे सँभालने का मौका hi न मिले .

संडे का दिन होने की वजह से आज मंजू को कोई काम नहीं था और कहते हैं खली दिमाग शैतान का घर. आज मंजू भी अमित क बारे में सोचत सोचते बेचैन हो रही थी. वो अपने दिल और दिमाग क बीच फांसी हुई थी. उसका दिल जो पहले hi इतना घायल और कमज़ोर था वो अपनी बात मनवा पाने में नाकाम साबित हो रहा था क्यूंकि उसके भैया क जाने क बाद से hi कभी उसने ख़ुशी महसूस की hi नहीं थी. शादी तो जैसे घरवालों का कहा मन कर ली थी असल में वो भी उसे घर से भेजना चाहते थे. वो भाई जिन्होंने कभी उसे भाई का प्यार दिया hi नहीं था. शादी क बाद पति से भी कभी दिल नहीं मिला बस रिश्ता निभाने की कोशिश करती रही. और वो भी ज्यादा देर नहीं चला. हालातों ने मंजू को ऐसा बना दिया था क वो दिल की आवाज़ को सुनती hi कहाँ थी ये तो अमित क आने से उसका दिल जैसे फिर से धड़कने लगा था. और जिसने उसके दिल को धड़कने बक्शी थी उसी से वो प्यार कर बैठा. मगर मंजू गुस्से में अपना ऐटिटूड हाई रखती हुई सिर्फ दिमाग की सुन रही थी और अपने दिल की अनदेखी करती हुई खुद को hi जाने अनजाने में सजा दे रही थी. रह रह कर उसके अंदर एक तीस उठ रही थी अमित क न होने से मगर उसका दिमाग उसे यही कह रहा था क अमित से पहले भी वो अछि तरह जी रही थी और उसके न होने से भी उसे फरक नहीं पड़ने वाला . गुस्से में hi उसने अपना फ़ोन आज बंद कर दिया क्यूंकि वो बार बार फ़ोन उठा कर देखने लगती क कहीं अमित का कोई फ़ोन तो नहीं आया या कोई मैसेज. जब वो देखती क अमित की तरफ से कुछ नहीं आया तो वो अमित को खुद फ़ोन करने का सोचने लगती.

अकेले घर में दीवारें उसे काटने को दौड़ रही थी सुआब से दोपहर तक किसी तरह उसने वक़्त गुज़ारा मगर फिर और बर्दाश्त नहीं हुआ तो अपना पर्स उठाया और कार ले कर निकल गयी बहार टाइम पास करने.

कहते हैं न जब दिल बेचैन है तो चैन कहीं भी नहीं मिलता. मंजू का हल भी अब ऐसा hi हो गया था. उसे कुछ भी ाचा नहीं लग रहा था न घर में न बहार. रत होते होते उसका दिमाग कमज़ोर पड़ने लगा और दिल को अपनी आवाज़ उठाने का मौका मिला. दिल तो आखिर दिल है जहाँ सिर्फ प्यार और सिर्फ प्यार होता है. जब दिल को मौका मिला तो बस एक hi आवाज़ आयी ‘ मैं अमित क बिना नहीं रह सकती ‘

 
भाइयो अपडेट पर काम कर रहा हूँ. कम्पलीट हो गया तो आज hi कर दूंगा पोस्ट. वैसे अभी कुछ दिन सेक्स एनकाउंटर होने वाले हैं क्यूंकि कहानी ऐसे मोड़ पर है. कुछ भाई इस बात से नाराज़ भी हैं क स्टोरी आगे नहीं बाद रही या टेम्पो सही नहीं है. तो मैं उनके लिए इतना कह सकता हूँ भाई क मैं कोई राइटर तो हूँ नहीं ये मैंने पहले भी कहा था. मुझे जैसे सही लग रहा है मैं लिख रहा हूँ. अगर स्टोरी को फ़ास्ट मोड पर करने की कोशिश की तो जल्दी hi ये एन्ड पर पहुँच जाएगी फिर आप लोग hi कहेंगे ये क्या किया. मैंने स्टोरी को सिर्फ मसल लगे है बाकि स्टोरी का एक एन्ड फिक्स है जिसके आगे मैं स्टोरी नहीं चलाऊंगा इस लिए पेशेंस रखें. मुझे ये टेम्पो वगैरह की समझ नहीं है . जितना लिख सकता हूँ मैं अपनी तरफ से ाचा करने की कोशिश कर रहा हूँ. कई बार कमेंट पद कर मेरे दिमाग में स्टोरी को जल्दी जल्दी नए मोड़ देने की बात आने लगती है और फिर स्टोरी पटरी से नीचे उतर जाये इसका दर लगता है. प्लीज जैसे लिख रहा हूँ उसे स्वीकार करें.
 
अपडेट 107



घर से मैं गुस्से में निकल कर चलता चलता नदी किनारे जा पहुंचा. कुछ देर मैं अकेला वहां बैठा रहा और फिर मुझे राजू अत हुआ दिखा. वो अपने hi ख्यालों में डूबा हुआ खोया खोया सा उधर hi आ रहा था. राजू इतना उदास दिख रहा था जैसे उसके साथ कुछ बुरा हो गया हो. उसे मेरे वहां होने का भी पता नहीं लगा. उसकी ऐसी हालत देख कर मुझे अपना सब भूल गया. था तो वो मेरा जिगरी यार इस लिए मुझे उसकी फ़िक्र होने लगी. मैं उठ कर उसके पास गया पर उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं जैसे मैं वहां हूँ hi नहीं. मैंने उसको पकड़ कर हिलाया तो उसे होश आया

अमित : क्या हो गया है तुझे? कहाँ खोया हुआ है? ये चेहरे पर 12 क्यों बजे हैं?

राजू : तू गया मेरे यार

इतना कह कर राजू मेरे गले लग गया और रोने लगा. मैंने उसे चुप करवाने की कोशिश की और कुछ देर में वो चिप हो गया.

अमित : ये क्या लड़कियों को तरह रो रहा है. बात क्या है कुछ बताएगा भी?

राजू : मैं रेनू क बिना नहीं रह सकता , मैं उसके बिना नहीं रह सकता. प्लीज कुछ कर मेरे यार , तू मेरा सच्चा यार है न ? तू मेरी मदद करेगा न?

अमित : अबे हुआ क्या है ये तो बता ?

राजू : वो रेनू क घरवाले उसकी शादी कहीं और करने वाले हैं. अगर ऐसा हुआ तो मैं अपनी जान दे दूंगा. मैं उसके बिना नहीं रह सकता.

अमित: क्या ??? तुमने उसके घरवालों से बात की या नहीं? रेनू क्या कहती है? उसने अपने घर बताया या नहीं?

राजू : वो बेचारी क्या कर सकती है? उसका भी रो रो कर बुरा हल है. मैंने उसके घर रिश्ता भिजवाया था मगर उसके बापू ने इंकार कर दिया.

अमित : उन्होंने इंकार क्यों कर दिया ?

राजू : बोले एक तो गाओं में hi रिश्ता नहीं करेंगे दूसरा मैं करता भी क्या हूँ? न मेरे पास काम है न ज़मीन. न रेनू क बिना नहीं रह सकता अमित कुछ कर यार वर्ण मैं खुद को ख़त्म कर लूंगा.

अमित : अबे चुप करेगा या मरुँ एक कान क नीचे. मुझे सोचने दे कुछ.

मैं कुछ देर सोचता रहा क राजू की किस तरह मदद करूँ क रेनू का बापू मन जाये. ये तो प्यार में मजनू बन गया है कहीं सच में hi कुछ कर न बैठे. रेनू क बापू ने राजू में कोई कमी नहीं निकली मतलब राजू क लिए वो हाँ कर सकते हैं उनकी सिर्फ 2 hi कंडीशन हैं . 1 गाओं में शादी नहीं करेंगे . 2 राजू क पास न ज़मीन है न काम. ज़मीन तो थोड़ी सी है पर उससे गुज़ारा नहीं हो सकता. तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया .

अमित : रेनू क बापू यही चाहते हैं न शादी क बाद उनकी बेटी इस गाओं की बजाये कहीं और जाएँ?

राजू : ये तू क्या कह रहा है ? अब मैं गाओं छोड़ दूँ क्या?

अमित : अबे उसकी ज़रूरत नहीं है. तू काम करने क लिए शहर तो जा सकता है न? वहीँ पर रह लेना इससे दोनों कंडीशन पूरी हो जाएँगी. तुझे काम भी मिल जायेगा और रेनू भी शादी क बाद तेरे साथ यानि क गाओं से बहार रहेगी.

राजू : मगर ऐसा कैसे होगा? मुझे कैसी काम कहाँ अत है? कौन देगा मुझे काम?

अमित : तू वो सब छोड़ कल सुबह मेरे साथ चलने क लिए तैयार रहना और रेनू को बोल दे तुझे काम मिल गया है शहर में.

राजू : पर काम कौन देगा?

अमित : मेरे दोस्त क बापू की फैक्ट्री है शहर में. कोई न कोई काम तो तुझे मिल hi जायेगा और रहने क लिए जगह का भी इंतज़ाम करवा दूंगा. क्या कहता है ?

राजू : अगर ऐसा हो गया तो रेनू क बाप को हाँ करनी hi पड़ेगी बस तू जल्दी से ऐसा करदे मैं अभी तेरे साथ चलने को तैयार हूँ. चल चलें

अमित : ोये मजनू ठण्ड रख ठण्ड. कल जाना है सुबह अभी जा क रेनू को बता क आ.

राजू फटाफट रेनू को बताने क लिए भाग गया. अभी कुछ देर पहले मजनू बना बैठा था और अब जैसे उसे नै ऊर्जा मिल गयी थी. मुझे ख़ुशी हो रही थी इस बात पर क राजू को तो उसका प्यार मिल जायेगा इसके लिए मैं कुछ भी करूँगा काश क मंजरी इतनी जल्दी न करती जाने की तो मैं भी उसे खुद से अलग नहीं होने देता. मैं राजू की वजह से अपना गुस्सा भूल गया था और फिर टहलता हुआ गाओं की तरफ चल दिया. चलते चलते मैं पूजा भाभी क घर क पास पहुंचा तो मुझे उनकी यद् आ गयी. पिछली बार गुस्से में दिखी थी . आज उनकी नाराज़गी hi दूर कर देता हूँ. ये सोचते हुए मैंने उनके घर की बेल्ल बजा दी. दरवाज़ा पूजा भाभी ने hi खोला. मुझे सामने खड़ा देख कर वो हैरान हो गयी. मैं बिना पूछे पूजा भाभी को साइड करते हुए अंदर चला गया . पूजा भाभी ने दरवाजा लगा दिया

पूजा भाभी: अब क्यों आये हो ? माहि और बाबू जी घर पर नहीं हैं , तुम चले जाओ.

पूजा भाभी कुछ ज्यादा hi गुस्से में थी जो ऐसे मुझे जाने को कह रही थी .

अमित : ठीक है भाभी अगर आप यही चाहती हैं तो मैं चला जाता हूँ पर जाने से पहले इतना कहूंगा क हो सके तो मुझे माफ़ कर देना . मैं जनता हूँ मैंने आपका दिल दुखाया है. बस इतना hi कहूंगा क हालत कुछ ऐसे बने रहे क मैं अपनी ज़िन्दगी में hi उलझा रहा और अब भी हफ्ते में एक दिन क लिए hi घर अत हूँ. ाचा भाभी मैं चलता हूँ.

इतना कह कर मैं दरवाज़े की तरफ जाने लगा तो पूजा भाभी बोली

पूजा भाभी : काम से काम एक बार मुझे बता hi देते कुछ. मैं इंतज़ार कर लेती पर तुमने तो ऐसे मुँह मोड़ लिया जैसे मुझसे कोई रिश्ता था hi नहीं. कोई ऐसा करता है क्या? मैं तो तुम्हे अपना समझने लगी थी मगर तुमने मुझे अपना नहीं समझा वर्ण ऐसा नहीं करते. अपने पति का इंतज़ार भी तो मैं करती हूँ न साल भर . तुम एक बार कह देते तो मैं इंतज़ार कर लेती. पर तुमने ऐसा कर क दिल तोड़ दिया और अब भी मुझे बिना मनाये वापिस चल दिए. तुम्हे पता है न मैं तुमसे नाराज़ हूँ और तुम मानाने की बजाये वापिस जा रहे हो बस इतनी hi परवाह थी मेरी? अगर परवाह नहीं है तो यहाँ आये hi क्यों?

मैंने पलट कर पूजा भाभी की तरफ देखा तो वो मायूस स मेरी तरफ देख रही थी. मैंने आगे बाद कर उनको गले लगा लिया और वो इस तरह मेरे गले लगी जैसे बरसो बाद अपने प्रेमी से मिली हो. पूजा भाभी मुझ पर झपट पड़ी और मेरे पूरे चेहरे पर किश करने क बाद मेरे होंठो को पहलों की तरह किश कर ते लगी . मैं भी उनका साथ देने लगा. वो बहुत दिनों से प्यासी थी और तड़प रही थी . मैं उनकी तड़प को समझ कर उनका साथ देने लगा. हम दोनों आँगन में hi खड़े थे और यहाँ खड़े रहना ठीक नहीं था. मैंने पूजा भाभी से दूर हटने की कोशिश की तो वो मुझे छोड़ने को तैयार नहीं थी फिर मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भरते हुए उन्हें ऊपर उठाया और अंदर को चल दिया. भाभी लगातार किश करती जा रही थी मैं उन्हें लेके हॉल में आ गया और उन्हें नीचे उतरा .

पूजा भाभी: यहाँ क्यों ले आये चलो मेरे कमरे में

अमित : अंकल आंटी कभी भी आ सकते हैं

पूजा भाभी : मुझे कुछ नहीं पता. मैं कितना तदपि हूँ ये सिर्फ मुझे पता है प्लीज जल्दी से एक बार मेरी प्यास बुझा दो . उनके आने से पहले एक बार मेरी प्यास बुझा दो.

भाभी मेरी कोई बात सुनने को राज़ी नहीं थी और वो मुझे खींचती हुई अपने बीएड रूम में ले गयी. अंदर आते hi वो घुटनो पर बैठ गयी और मेरा लोअर नीचे कर क जल्दी से मेरा लैंड बहार निकल कर एक बार नज़र भर क देखा और मुँह में लेके चूसने लगी.

भाभी का उतावला पैन देख कर मैं हैरान हो रहा था. सच में वो बहुत प्यासी थी . जल्दी उनके मुँह की गर्मी से मेरा लैंड खड़ा हो गया और भाभी देर न करते हुए कड़ी हो गयी और पलट कर अपनी सदी पेटीकोट समेत उठाते हुए घोड़ी बन गयी. जल्दी से उन्होंने अपनी पेंटी नीचे की और उनकी गोरी चिकनी गांड मेरे सामने आ गयी.

पूजा भाभी : जल्दी से इसे अंदर करो और मेरी प्यास भुझे दो देवर जी. मैं बहुत तदपि हूँ इसके लिए जल्दी इसे अंदर कार्डो

मैंने भाभी की कमर को थामा और अपना लैंड छूट पर सेट करते हुए धक्का मारा. इतने दिनों से चुदाई न होने से छूट थोड़ी टाइट हो गयी थी इस लिए लैंड फास्ट हुए अंदर जा रहा था. अभी आधा hi कांड अंदर गया था क भाभी क मुँह से कराह निकल गयी

‘ आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स कितना बड़ा है ये हर बार डैम निकल देता है. सीसीसी उम्म्म्म पूरा घुसा दो देवर जी आज मैं इसे नहीं छोड़ने वाली कक्कक्स आअह्ह्ह्ह ‘

मैंने हल्का सा लैंड पीछे खींच कर एक और ज़बरदस्त धक्का पेल दिया जिससे पूरा लैंड जड़ तक छूट में समां गया मगर इस बार भाभी लड़खड़ा गयी.

‘ aaaaaaaaaaiiiiiiiii माआआआ आआअह्ह्ह्हह फाड़ दो मेरी छूट को बहुत तंग करती है मुझे आआअह्ह्ह्ह आज इसे फाड़ दो ताकि फिर ये कभी मुझे तंग न करे आआह्ह्ह आआह्ह्ह्हह ‘

भाभी इस धक्के से ज़ोर से चीख पड़ी थी और बीएड पर गिरने वाली थी क मैंने थम लिया. भाभी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था तो मैंने उनके घुटने मोड़ कर उन्हें बीएड पर चौपाया कर दिया. मैंने भाभी की कमर को थमा और शुरू हो गया. मेरे धक्कों क साथ भाभी पूरी हिल रही थी और उनके साथ उनका बीएड भी हिल रहा था. भाभी चीखती चिल्लाती मुझे और तेज़ धक्के मरने को कह रही थी और पता नहीं क्या क्या बड़बड़ा रही थी.

‘ आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह ऐसे hi शाबाश देवर जी ऐसे hi उम्म्म्म आआह्ह्ह मेरे राजा अपनी इस गुलाम को छोड़ कर कहाँ चले गए थे कक्कक्स उम्म्म्म तेरे बिना मैं तो मर hi गयी थी. देख मेरी छूट का क्या हाल हुआ पड़ा है ककक आअह्ह्ह आअह्ह्ह ये निगोड़ी तो तुम्हे यद् कर कर क रोटी रहती थी आअह्ह्ह आअह्ह्ह मायआ और ज़ोर से मारो और तेज़ फाड़ दो इसे आआह्ह्ह आआह्ह्ह्ह माआआ मैं गयी मैं गयी aaaaaaaaaaa ‘

एम् ऐसे hi बड़बड़ाती हुई एक ज़ोरदार चीख क साथ भाभी बीएड पर गिर गयी और उनका जिसका झटके लेने लगा उनकी छूट से पानी बेहटा हुआ बीएड को भिगोने लगा . मेरा लैंड अभी वैसे hi खड़ा था. मैं भाभी की तरफ बढ़ने लगा तो बहार बेल्ल बजने लगी. बेल्ल की आवाज़ से हम दोनों hi घबरा गए. मैंने जल्दी से अपना लोअर ऊपर किया और भाभी भी खुद को सँभालते हुए बीएड से उठी . जल्दी से उन्होंने अपनी सदी नीचे की और अपनी हालत ठीक करते हुए गेट खोलने चली गयी . मैं जल्दी से हॉल में बैठ गया .

पूजा सास : क्या हुआ बहु बड़ी देर लगा दी गेट खोलने में ? क्या कर रही थी ? ये पसीना क्यों आया हुआ है तुझे ?

पूजा भाभी : वो माँ जी चाय बना रही थी देवर जी ए हैं .

बातें करते हुए पूजा भाभी की सास जल्दी से अंदर की तरफ बड़ी जैसे उसे कोई शक हो. अंदर आते hi उसके नज़र मुझ पर पड़ी तो तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

पूजा सास : अरे वाह आज तो हमारे भाग खुल गए . आज यहाँ का रास्ता कैसे भूल गए ? मैंने तो सोचा था तुम अब कभी आओगे hi नहीं. कितनी बार तेरे अंकल को भेजा तुझे बुलाने पर तू घर होता hi नहीं.

गिला करती हुई आंटी ने मुझे गले लगा लिया.

अमित : बस आंटी जी कॉलेज की वजह से घर शनिवार शाम को अत हूँ और अगले दिन वापिस चला जाता हूँ इसी लिए टाइम hi नहीं मिलता वर्ण मैं यहाँ क्यों न अत ? ये मेरा अपना घर है.

आंटी ने एक नज़र पूजा भाभी को अचे से देखा और बोली

पूजा सास : पूजा से मिल लिया न ? बहुत यद् करती ये तुझे?

आंटी की ऐसी बात से मैं एक बार तो मैं घबरा गया क आंटी को कोई शक तो नहीं हो गया. मगर जब पूजा भाभी की तरफ देखा तो वो बिलकुल नार्मल थी.

पूजा भाभी : मैं अकेली यद् यद् करती थी क्या ? आप भी तो करती थी. मैंने तो देवर जी से मिल लिया अब आप भी मिल लो अचे से

इतना कह कर पूजा भाभी किचन में चली गयी

पूजा सास : टेंगा तो नहीं किया भाभी ने देवर को?

आंटी क चेहरे पर कुटिल मुस्कान मुझे सोचने पर मजबूर कर रही थी कहीं आंटी को हमारे बारे में कुछ पता तो नहीं है. मुझे आंटी क इस बेहेवियर से दर लगने लगा. मैं जल्दी से वापिस चले जाना चाहता था.

अमित : ाचा आंटी अब मैं चलता हूँ , वो घर पर बता क नहीं आया था न इस लिए मेरी फ़िक्र कर रहे होंगे सब.

पूजा सास : इतनी जल्दी भी क्या है बीटा , इतने दिनों बाद आये हो कुछ देर तो बैठो

अमित : मैं फिर आऊंगा आंटी अभी मुझे इजाज़त दीजिये . अंकल को भी मिलना है इस लिए जल्दी आऊंगा.

पूजा सास : ाचा एक मिनट बैठ तो सही मैं अभी आयी.

इतना कह कर आंटी उठ कर किचन में चली गयी और 5 मिनट्स बाद hi पूजा भाभी मेरे पास आ गयी.

पूजा भाभी : माँ जी ने आ के सारा मज़ा ख़राब कर दिया . प्लीज अभी मेरी प्यास नहीं बुझी है बल्कि अब और बाद गयी है. मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ एक बार अचे से मेरी प्यास बुझा दो. माँ जी को मैं 4 बजे नींद की दवा दे कर सुला दूंगी तुम 4:30 पर पीछे क रस्ते से आ जाना . प्लीज आ जाना तुम्हे मेरी कसम .

उतना कह कर बिना मेरी बात सुने भाभी जल्दी से वापिस चली गयी. भाभी क जाते आंटी आ गयी. उनके हाथ में एक बड़ा सा गिलास था.

पूजा सास : ये लो बीटा ये दूध पिलो इसे पीकर तुम्हारे अंदर ताकत आएगी.

मैं जल्दी से जाना चाहता था इस किये बिना कोई बात किये दूध का गिलास खली कर क रख दिया.

अमित : ाचा आंटी अब मैं चलता हूँ.

पूजा सास : बीटा आते रहा करो तुम्हे देख कर ाचा लगता है.

जाते जाते आंटी ने फिर से मुझे गले लगा लिया और इस बार मुझे उनके वो बड़े बड़े ख़रबूज़े अपनी छाती पर अचे से महसूस हुए मगर मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया और जल्दी से बहार निकल गया. घर जाते हुए भी मैं आंटी क बारे में सोचता रहा , उनका बेहेवियर कुछ अजीब सा लग रहा था. पूजा भाभी की चुदाई बीच में hi रह गयी थी इस लिए उन्होंने मुझे फिर आने को कह दिया. मैंने पिछली बात फैसला किया था क मैं उनके घर ऐसा वैसा कुछ माहि करूँगा पर आज भाभी ने मुझे सोचने का भी मीका नहीं दिया और मैं भी सब कुछ करता गया . अब शाम को जॉन या न जॉन मैं यही सोच रहा था. भाभी इतने देने से प्यासी है तो आसानी से उनकी प्यास तो बुझेगी नहीं . उन्हें तगड़ी चुदाई की ज़रूरत है. पर आंटी क घर में होते ये सब करना भी रिस्की था. जो भी हो पूजा भाभी को मैं फिर से नाराज़ नहीं करना चाहता था. उन्होंने मेरी बात मानते हुए दोबारा मां की तरफ देखा भी नहीं , बेचारी थी तो मजबूर . भरी जवानी में उसका पति शादी क बाद ऐसे उसे बिठा कर खुद बहार चला गया था. जो भी हो पूजा भाभी का सहारा मैं hi हूँ तो मुझे अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए . सोचते सोचते मैं घर आ गया और कुछ देर बातें करने क बाद सब क साथ लंच किया. दीपिका ममी लंच करने बहार नहीं आयी वो अपने कमरे में hi थी जब से मैं घर वापिस आया था वो कमरे से बहार hi नहीं निकली शायद मेरे उस तरह गुस्से से बात करने पर नाराज़ होंगी मुझसे. मैंने माँ से पूछा तो उन्होंने बताया क दीपिका ममी की तबियत ठीक नहीं इस लिए वो लिंच नहीं करेंगी. मुझे उनकी चिंता होने लगी क्यूंकि जल्द hi वो माँ बनने वाली थी ऐसे में अगर उन्होंने बात को दिल से लगा लिया तो उनकी तबियत बिगड़ सकती है. मैंने जल्दी से उनके लिए खाने की थाली लगवाई और उनके कमरे में चला गया. दीपिका ममी करवट क बल लेती हुई थी. उनका चेहरा दूसरी तरफ था. मैं चुप चाप गया और थाली को साइड में रख कर उनके कंधे पर हाथ रख कर उन्हें सीधा किया.

अमित : मेरा गुस्सा खाने पर क्यों निकल रही हैं आप? मुझ पर गुस्सा हैं तो मुझे सजा दीजिये न इस तरह भूखे रह कर खुद को और इस नन्ही सी जान को सजा क्यों दे रही हैं?

दीपिका ममी : अब क्यों आये हो जाओ जहाँ पहले गए थे ? मेरी तो परवाह है hi नहीं तुम्हे . ज़रा स बात पर कितना गुस्सा दिखाया मुझे. खुद खाना बिच में छोड़ कर चले गए और मुझे उपदेश देने आये हो खाने पर.

अमित : आप उसे ज़रा स बात कहती हैं? पता है आप ने क्या कहा था ? नहीं आपको शायद पता नहीं आपने क्या कहा था वर्ण आप ऐसा न कहती.

दीपिका ममी : सब पता है मुझे मैंने क्या कहा था और बिलकुल सही कहा था. तुम hi बात को समझना नहीं चाहते

अमित : आप कहना क्या चाहती हैं आखिर ? वो मेरी माँ हैं आप कैसे ऐसी बात कह सकती हैं?

दीपिका ममी : देखो अमित ये सब जानते हैं और तुम भी जानते हो क दीदी ने तुम्हे सिर्फ पला है. तुम्हारी असली माँ तो अब इस दुनिया में hi नहीं है. और तुम ये क्यों भूल गए हो क तुम्हारी वजह से hi वो माँ बन रही हैं आज. जैसे मैं और कामिनी दीदी तुम्हारी ममी हैं रिश्ते में वैसे hi गौरी दीदी भी तुम्हारी ममी हैं माँ नहीं. तुम मनो या न मनो पर अब तुम उनके बचे क बाप हो और वो कितना भी छुपा ले मैंने देखा है उनकी आँखों में क वो तुम्हे अब किस नज़र से देखती हैं. तुम चाहो तो मेरा गाला घोट दो मैं उफ़ तक नहीं करुँगी पर मैं तुम्हे वो दिखने की कोशिश कर रही हूँ जो तुम देखना नहीं चाहते. क्या तुम्हे महसूस नहीं होता वो जब तुम्हे गले लगाती हैं तो कैसे गले लगाती हैं? वो खुद को रोक नहीं प् रही हैं और ये उनके बस में भी नहीं है. हर औरत उस आदमी को न चाहते हुए भी प्यार करती है जिसका बीज उस औरत क पेट में पल रहा होता है. और अब जिस कंडीशन में दीदी हैं उन्हें तुम्हारे प्यार की सख्त ज़रूरत है. सोचो ज़रा क वो इतने सैलून बाद ज़िन्दगी में पहली बार माँ बन रही हैं. अगर तुम्हारे प्यार की कमी क कारन उनका बचा सही न बना तो ? या फिर उसमे कोई कमी रह गयी तो ? या मारा हुआ पैदा हुआ तो ? क्या बीतेगी उनपर ? क्या वो ये सदमा बर्दाश्त कर पाएंगी? नहीं अमित वो मर जाएँगी. और फिर तुम क्या करोगे ?

अमित : माहि ऐसा नहीं हो सकता. भगवन कभी ऐसा नहीं होने देंगे. उन्हें कुछ नहीं हो सकता मैं उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा.

दीपिका ममी : यही तो मैं कह रही थी क तुम्हे hi तो कुछ करना होगा. भगवन बे hi तुम्हे दीदी को माँ बनाने क लिए चुना था वर्ण वो सब नहीं होता. अब अगर तुमने दीदी का साथ न या तो मुझे दर है क कहीं दीदी का बचा .....

अमित : ऐसा कभी नहीं होगा. और भगवन की नहीं वो मेरी गलती थी. रही बात प्यार की तो मैं उन्हें और भी ज़्यादा प्यार करूँगा मगर वक बेटे की तरह . जो आप कह रही हैं वो कभी नहीं होगा. मैं उनका अचे से ाचा इलाज करवाऊंगा उन्हें अपने साथ शहर के जाऊंगा मैं उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा.

दीपिका ममी : पर जिस प्यार की औरत को ज़रूरत होती है वो बीटा बन कर तू उन्हें नहीं दे पायेगा . जैसे तुमने उन्हें माँ बनाया है वैसे hi उनको प्यार कर क उन्हें सहारा दे और ताकत भी. दीदी की भावनाओं को समझने की कोशिश कर. वो मेरी तरह अपने मुँह से कभी नहीं कहेंगी. उन्हें भी माँ बेटे क रिश्ते की डोर रोक रही है मगर वो अंदर से तेरे प्यार क लिए तड़प रही हैं.

अमित : बस बहुत हो गया . मैं यहाँ आपको मानाने आया था मगर लगता है आप उस बात को छोड़ना नहीं चाहती जो मुझे पसंद नहीं . अब मैं चलता हूँ और यद् से ये खाना ज़रूर खा लेना.

इतना कह कर मैं बहार निकलने लगा तो दीपिका ममी ने एक डैम से मेरा हाथ पकड़ लिया.

दीपिका ममी : बस इतना hi प्यार था तेरे दिल में मेरे लिए?

मैंने पलट कर देखा तो दीपिका ममी की आँखों में आंसू थे. उनकी ये हालत देख कर मेरा सारा गुस्सा हवा हो गया और मैंने उन्हें गले लगा लिया.

अमित : आप ऐसी बातें क्यों करती हो जिनसे मुझे गुस्सा अत है दुःख होता है? वो मेरा माँ हैं आप क्यों ुए नहीं समझती.

दीपिका ममी : मैंने तो वही कहा जो मैं इतने दिनों से देख रही हूँ. बस तू hi नहीं समझ रहा. खैर जिस बात पर तुम्हे गुस्सा आ रहा है अब मैं वो बात hi नहीं करुँगी. मगर तू ऐसे मुझसे नाराज़ मत हुआ कर तुझे पता है न तू मेरे लिए क्या है?

अमित : अब चुप करो और ये खाना खाओ. भूखी रह कर मेरे बचे को भूखा क्यों रख रही थी. अगर फिर से ऐसा किया तो देख लेना . बात भी नहीं करूँगा कभी.

इतना कह कर मैंने अपने हाथो से दीपिका ममी को खाना खिलाना शुरू किया. बातें करते हुए मैंने दीपिका ममी को खाना खिलाया और उन्हें आराम करने का कह कर अपने कमरे में चला गया . मैं बीएड पर लेता दीपिका ममी की बातों क बारे में सोचने लगा. कल घर आने पर माँ ने किस तरह मुझे गले लगाया और फिर दीपिका ममी का इस पर कमेंट अब मुझे समझ आ रहा था. माँ वाकई में कुछ दिनों से मेरी ज्यादा परवाह करने लगी थी और मैं इसे नार्मल hi समझ रहा था मगर आज दीपिका ममी क कहने क बाद मैं हर एक चीज़ को बारीकी से देखने लगा. मगर फिर खुद hi अपनी सोच को झटक देता ये कह कर क वो मेरी माँ है . ‘दीपिका ममी क कहने से hi मैं ऐसा सोचने लगा हूँ असल में ऐसा कुछ माहि है ‘ मैं खुद को बस यही समझने की कोशिश कर रहा था. मुझे लेते हुए टाइम का ख्याल hi नहीं रहा तभी मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने फ़ोन देखा तो पूजा भाभी की कॉल आ रही थी. पूजा भाभी का नाम देखते hi मुझे यद् आया क उन्होंने मुझे 4:30 बजे घर बुलाया था. मैंने टाइम देखा तो 4 hi बजे थे. फिर इतनी जल्दी फ़ोन क्यों कर रही हैं ? शायद इंकार करना होगा कोई आ गया होगा घर पर. मैंने फ़ोन उठा लिया.

अमित : जी कहिये भाभी

पूजा भाभी : मैंने माँ जी को नींद की गोली दे दी है तुम ठीक टाइम पर आ जाना पीछे क रस्ते से.

उतना कह कर भाभी ने फ़ोन काट दिया और मेरी कोई बात भी नहीं सुनी . अजीब मुसीबत है अब इनको भी टाइम देना पड़ेगा वर्ण कहीं ये नाराज़ न हो जाएँ. खैर मैं कौन सा हर बार उनसे मिल पाउँगा इस लिए कभी कभी क लिए तो उन्हें टाइम दिया hi जा सकता है . बस यही सोच कर मैं तैयार हो गए और राइट टाइम पर उनके घर क पीछे वाले दरवाज़े पर पहुँच गया. दरवाज़े को कुंडू नहीं लगी थी, मेरे हाथ लगते hi वो खुलता चला गया. जैसे hi मैं अंदर घुसा तो भाभी दरवाज़े क पीछे hi कड़ी थी . उन्होंने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर क कुण्डी लगा दी.

पूजा भाभी : चुपचाप मेरे पीछे आओ कोई आवाज़ मत करना.

अमित : पर हम तो यहाँ चारे वाले कमरे में करने वाले थे न ?

पूजा भाभी : नहीं वहां मज़ा नहीं आएगा. माँ जी को मैंने नींद की दवा इसी लिए तो दी है. अब चलो मेरे साथ.

मैं पूजा भाभी की गांड को देखता हुआ उनके पीछे पीछे चलता हुआ हल में आ गया .

पूजा भाभी : एक मिनट यहाँ रुको मैं अभी आयी.

मुझे हॉल में बिठा कर भाभी किचन में चली गयी और दूध का गिलास ले आयी.

पूजा भाभी : लो ये दूध पि लो फटा फैट.

अमित : इसकी क्या ज़रूरत है भाभी आप जल्दी करो कहीं कोई आ न जाये .

पूजा भाभी : कोई नहीं आने वाल और आ भी गया तो मैं काम ख़तम होने से पहले दरवाज़ा नहीं खोलूंगी बस तुम जल्दी से ये दूध पिलो ताकि तुम अचे से मेरी आग बुझा सको.

अमित : वो तो मैं वैसे भी बुझा सकता हूँ

पूजा भाभी : जानती हूँ पर फिर भी तुम ये दूध पियो.

पता नहीं भाभी क्यों इतना ज़ोर दे रही थी पर फिर भी मैंने उनकी बात मानते हुए दूध का गिलास एक सांस में ख़तम कर दिया. मेरे दूध पिटे hi पूजा भाभी ने मेरे हाथ से गिलास ले कर साइड में रखा और मेरे गले लग कर किश करने लगी. पूजा भाभी बड़े वाइल्ड तरीके से मेरे होंठ चूस रही थी उन्होंने खुद hi मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रखा . मैंने एक हाथ से उनके चुके दबाने लगा और दूसरा हाथ उनकी गांड पर ले जा कर उनकी गांड दबाने लगा. पूजा भाभी बड़ी गरम थी वो मेरे ऊपर चढ़ने को होने लगी . मगर मैं उनको कण्ट्रोल करने की कोशिश करने लगा. भाभी ने खुद किश तोड़ कर अपनी सदी खोल कर साइड में फेंक दी और अपना ब्लाउज भी उतर कर साइड में रख दिया. ब्लाउज क नीचे काली ब्रा में कैद वो गोर गोर बूब्स क्या क़यामत लग रहे थे. मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने आगे बाद कर उनके दोनों बूब्स थम लिए.

पूजा भाभी : आआअह्हह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स धीरे करो देवर जी सब तुम्हारा hi है . आज जी भर क इन्हे प्यार करो . ये कब से तुम्हारे लिए तड़प रहे थे.

मुझ पर तो जैसे एक खास किस्म का नशा हावी होता जा रहा था. मुझे इस वक़्त कुछ समझ नहीं आ रहा था. मुझे ऐसा लगने लगा क मुझे मेरा दिमाग नहीं मेरा लैंड चला रहा है. मेरी सोचने समझने की ताकत काम होती जा रही थी. मैंने भाभी की बात अनसुनी करते हुए ज़ोर ज़ोर से उनके दूध मसलने शुरू कर दिए और उनकी ब्रा खिंच कर फाड़ दी. मेरे खून का दौरा बढ़ता जा रहा था और मेरे अंदर आक्रामकता आती जा रही थी. मैंने पूजा भाभी क एक चूल्हे को मसलते हुए दूसरे को मुँह में लेके चूसना शुरू कर दिया. पूजा भाभी क मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी. बूब्स को अछि तरह चूसने क बाद मैं उनका पेटीकोट नाड़े से पदक कर ज़ोर से झटका तो नाडा टूट गया और पेटीकोट पाऊँ में गिर गया.

पूजा भाभी : आराम से करो कपडे क्यों फाड़ रहे हो देवर जी

अमित : चुप कर साली आज तो तेरी छूट भी फाड़ूंगा और गांड भी फाड़ूंगा बहुत खुजली है न तुझे?

पूजा भाभी : आआअह्ह्ह्ह माँ लगता है तुम्हारे इरादे ठीक नहीं है.

अमित : इरादे तो मेरा लैंड बताएगा , जल्दी मेरा लैंड चूसना शुरू कर . मेरी रखैल है न तू? चल काम पे लग जा.

पूजा भाभी जल्दी से घुटनो पर बैठ गयी और मेरा लोअर निचे कर क मेरा लैंड अंडरवियर से बहार निकल कर उसे मुँह में ले कर चूसने लगी. मैंने अपनी T-shirt उतर दी और लोअर को भी पाऊँ से बहार निकल दिया. अब हम दोनों हॉल में नंगे एक दूसरे को गरम करने में लगे थे . मैंने पूजा भाभी का सर दोनों हाथो से पका और उनके मुँह में धक्के मरना लगा .

अमित : आआह्ह्ह उम्म्म मेरी रंडी ऐसे hi दिल लगा कर मेरे लैंड क सेवा कर तभी तुझे पार्षद मिलेगा तभी तेरी छूट की प्यास बुझेगी शाबाश ऐसे hi

पूजा भाभी : ऑगगगगग हम्म्म्म आआह्ह्ह ये मेरा है सरररररूप सररर्रूप ओहःगगगगगग ाःह बड़ा तड़पाया इसने मुझे आज सारा बदला लूंगी इससे ोःगगगगगगठ्ठ

पूजा भाभी पूरी कोशिश कर रही थी मेरा लैंड ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की. कभी को सुपडे को मुँह में लेके चुस्ती कभी जीभ से पूरा लैंड चाट टी और कभी मुँह में अंदर लेती. पूजा भाभी का चेहरा लाल हो गया था और उनके मुँह से लार टपक कर उनके घुटनों पर गिर रही थी . मुझ पर वहशीपन सवार हो गया था और मैं भाभी का गाला फाड़ने की कोशिश कर रहा था. अचानक भाभी ने लैंड चूसना बंद किया और कड़ी हो गयी.

पूजा भाभी : चलो राजा अब बाकि का काम भी शुरू करते हैं. मगर आज नए अंदाज़ में . मैं कमरे में जा रही हूँ कमरे की लाइट बंद रहेगी. तुम्हे मुझे ऐसे hi ढूंढ़ना होगा और ढून्ढ लिया तो वहीँ पेल देना बिना कोई सवाल किये.

इतना कह कर भाभी दरवाज़ा खोल कर अंदर घुस गयी. मेरी हालत ऐसी हो गयी थी जैसे शेर क मुँह से किसी ने शिकार चीन लिया हो. मेरे लैंड गुस्से में फुंकार रहा था. ऐसे में पूजा भाभी की ये हरकत मेरे लैंड को नागवार गुज़री और मैं पूजा भाभी को उनकी इस हरकत की सजा देने क लिए उनके पीछे पीछे कमरे में घुस गया. कमरा अंदर से पूरी तरह अँधेरे में था , किसी तरह की कोई रौशनी नहीं थी. मुझे कुछ मज़ार नहीं आ रहा था मेरे घुटने बीएड से टकराये तो मैंने बीएड पर आठ मरते हुए पूजा भाभी को खोजने की कोशिश की.

अमित : कहाँ छुप गयी हो मेरी रंडी ? आज तेरी छूट फाड़ कर रख दूंगा बहुत परेशां कर रही है तू

बीएड पर हाथ मरते हुए मेरे हाथ पूजा भाभी क पाऊँ से लगे तो मैंने उनका पाऊँ पकड़ कर ज़ोर से अपनी तरफ खींचा.

अमित : ाः मेरी रंडी अब देख तेरा क्या हल करता हूँ.

मैंने पूजा भाभी क दोनों पाऊँ पकड़ कर फैलते हुए घुटनो क बल बैठ कर अपनी जगह बनायीं और एक हाथ से लैंड पकड़ कर छूट पर सूपड़ा रगड़ने लगा.

अमित : बोल रंडी क्या किया जाये ? मर दिया जाये क छोड़ दिया जाये?

पूजा भाभी : मर दिया जाये .

अमित : तो ये ले

इतना कह कर मैंने सूपड़ा छूट में फसते हुए पूरे ज़ोर से धक्का मारा . और इसी क साथ मेरा लैंड चूस की धज्जीआं उडाता हुआ अंदर तक घुस गया.

‘ हम्मम्मम्मम्म hmmmmmmmmmmmmmmm hmmmmmmmmmm ‘

पूजा भाभी ने अपने मुँह को दबा कर अपनी चीख किसी तरह रोक ली. पर उनका बदन जिस तरह ढीला पद गया मुझे पता चल गया क उन्हें बहुत दर्द हो था है पर इसमें तो मुझे मज़ा आने लगा. मेरा लैंड अभी भी एक इंच बहार hi था और छूट में लैंड गाला भाग बुरी तरह फसा हुआ था. वैसे तो पूजा भाभी मेरा लैंड पूरा अंदर ले लेती थी मगर इस बार लैंड पूरा अंदर नहीं गया. मैं इस वक़्त सोचने समझने की हालत में नहीं था. मैंने लैंड सुपडे तक बहार निकला और पूजा भाभी की जांघों को पकड़ कर पूरे ज़ोर से धक्का मारा और इस बार लैंड पूरा जड़ तक अंदर समां गया. एक बार फिर से भाभी को दर्द हुआ और उनके मुँह से दबी दबी आवाज़ निकली. मुझे पूजा भाभी की जाँघे कुछ भरी लग रही थी . मैं इस वक़्त दिमाग से नहीं बस लैंड से काम ले रहा था तो मैंने ध्यान नहीं दिया. और अपनी कमर चलनी शुरू कर दी. कुछ देर तक पूजा भाभी बिना किसी हरकत क पड़ी रही शायद दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी. पूजा भाभी का जिस्म मुझे कुछ भरी लग रहा था . मैंने भाभी पर झुकते हुए जब उनके बूब्स पकडे तो वो भी बड़े बड़े थे और ढीली भी. मैंने गुब्बारों जैसे वो बड़े बड़े बूब्स पकडे औरपलंग तोड़ चुदाई शुरू कर दी. कुछ देर में भाभी को मज़ा आने लगा , छूट में लैंड ने जगह बना ली थी और पूरी स्पीड से चुदाई जोरो शोरों से जारी थी.

अमित : आआह्ह्ह आआअह्ह उम्म्म मेरी रंडी अब पैट चला लैंड को नाराज़ करने का अंजाम. ये ले आज तेरी छूट का भोसड़ा बना कर hi रुकूंगा.

पूजा भाभी : शाबाश मेरे राजा मैं भी यही चाहती हूँ , बना दे इसे भोसड़ा ताकि फिर किसी और का लैंड लें क लायक न रहे.

मुझे पूजा भाभी की इस बात से और जोश आ गया. इतना दर्द सेह कर भी वो मुझे छूट फाड़ने को बोल रही थी. तो मैं क्यों पीछे हतुं . मैंने पूजा भाभी की टंगे फोल्ड कर क उनके घुटने उनकी छाती से लगा दिए और पाऊँ पर बैठ कर ज़ोर दर धक्के मरने शुरू कर दिए. पता नहीं क्यों पर आज कुछ ज्यादा hi जोश चढ़ा हुआ था मुझ पर और लैंड भी कुछ ज्यादा hi अकड़ हुआ लग रहा था. मैं इतनी ज़ोर से धक्के मर रहा था क सचमुच आज भाभी की छूट जैसे फाड़ hi दूंगा. भाभी का गद्दे दर बदन मैं फोल्ड कर क अपना वजन उनके ऊपर दाल दिया था. जिससे शायद उनको तकलीफ होने लगी थी और वो मेरी छाती पर हाथ रख कर मुझे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी.

अमित : अब क्या हुआ मेरी रंडी अब क्यों रोक रही है ? अब तो तेरी फाड़े बिना मैं नहीं रुकने वाला .

मैंने धक्के देने जारी रखे और कुछ hi ढकों में भाभी की छूट का बांध टूट गया और पानी बहार आने लगा. मेरे लैंड ने भाभी की छूट क गरम पानी में शावर कर लिया . पूजा भाभी ने इतना पानी छोड़ा क जितना पहले भी नहीं छोड़ा था . पूजा भाभी ढीली पद गयी तो मैंने पोजीशन चेंज करने क लिए उनकी टंगे पकड़ कर उन्हें पलटने की कोशिश की. भाभी मेरा मतलब समझ कर घुटनो पर मेरे आगे झुक गयी. मैंने उनकी कमर को पकड़ कर पोजीशन ली तो फिर से मुझे उनका जिस्म भरी लगा और चूतड़ भी कुछ बड़े बड़े लग रहे थे. मैंने छूट पर लैंड सेट किया और कमर थमते हुए एक ज़ोर दर धक्का मर कर एक hi बार में पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया.

पूजा भाभी : ाहहमममम ह्म्म्मम्म्म्म

अमित : क्या हुआ रंडी मुँह में ज़ुबान नहीं है ? मुझे तेरी आवाज़ सुन्नी है

पूजा भाभी : आआह मेरे राजा और ज़ोर से मार आआह्ह मज़ा आ रहा है ऐसे hi करो और ज़ोर से करो .

मुझे ऐसा लगा जैसे आवाज़ कहीं और से आ रही है पर मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया क्यूंकि दिमाग पर तो लैंड हावी था. मैंने कमर को दोनों हाथों से थामे ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी. पूरे कमरे में ‘ ठप्प ठप्प ठप्प ‘ की आवाज़ें आ रही थी. भाभी क बड़े बड़े चूतड़

ेरे धक्कों से उछालते और कम्पन पैदा करते. मुझे उनकी चुदाई करने में बड़ा मज़ा आ रहा था पर आज मैं रूटीन से कुछ ज्यादा hi बेचैन सा फील कर रहा था. मैंने हाथ बड़ा कर भाभी क बाल पकड़ लिए और बाल खींचता हुआ और भी तेज़ी से चुदाई करने लगा.

अमित : आआह्ह्ह मज़ा आए था है मेरी रंडी ? आज तो तुझे फाड़ कर रख दूंगा.

पूजा भाभी : आआआआह आआआआअह्ह्ह्ह

पूजा भाभी कराह रही थी मगर मुझे उनपर कोई तरस नहीं आ रहा था. कुछ hi देर में एक बार फिर से झटके लेती हुई पूजा भाभी ने मेरे लैंड पर गरम पानी की बौछार कर दी. पानी निकलते hi वो ढीली पद गयी मैंने उनके बाल छोड़े तो वो धड़ाम से बीएड पर गिर गयी. मैंने उनकी कमर को थामे रखा. अब पोजीशन ुए थी क उनका ऊपर का धड़ बीएड पर था और कमर घुटनो पर . पूजा भाभी तो ढीली पद गयी पर मुझ पर तो जूनून सवार था. मैंने उनके बड़े बड़े कूल्हों को पकड़ कर मसला. क्या बड़े बड़े कूल्हे थे कूल्हे मसलते हुए मुझे उनकी गांड मरने की इच्छा होने लगी. मैंने छूट से लैंड बहार निकला और गांड पर सेट करने लगा. गांड क सुराख़ पर लैंड का दबाव पड़ते hi पूजा भाभी होश में आयी और एक हाथ पीछे कर क मेरा लैंड वहां से हटाने की कोशिश करने लगी. मगर मैं कहाँ सुनने वाला था. मैंने उनकी बाजु मरोड़ कर पीठ पर लगा दी और लैंड को ज़ोर लगा कर पुश करने लगा. छूट रास से गिला होने क कारन लैंड चिकना था इस लिए अंदर घुसने में ज्यादा मुश्किल नहीं आयी मगर गांड बहुत ज्यादा टाइट थी. मैंने पूजा भाभी की गांड पहले भी मरना चाहता था मगर मौका नहीं मिला था तो आज मैंने मौके का फायदा उठा hi लिया. सूपड़ा अंदर घुसते hi पूजा भाभी चीख पड़ी

पूजा भाभी : आआआआईइइइइइइइ माआआआ वहां नहीं हैट जा पि.........

मुझे पूजा भाभी की आवाज़ कुछ बदली बदली लगी. पर बिच में hi जैसे आवाज़ को बंद कर दिया गया. मुझे क्या मुझे तो सिर्फ गांड में लैंड घुसना था. मैंने ज़ोर लगते हुए लैंड को और अंदर पूछ कर दिया इसके साथ 4 इंच लैंड गांड में उतर गया

पूजा भाभी : हम्मम्मम्मम्म हहनममममममममम hmmmmmmmmmmmmmm

पूजा भाभी का एक हाथ मैंने पीठ पर लगा रखा था और दूसरे हाथ से भी वो मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी और उनकी दबी दबी आवाज़ आ रही थी. मुझे इतना भी ध्यान नहीं आया क दोनों हाथ तो मेरे सामने हैं दिर उनका मुँह बंद कैसे हो रहा है. मैं तो अपने काम में लगा था और फिर से मैंने एक और धक्का देते हुए 2-3 इंच लैंड और अंदर घुसा दिया. गांड बहुत ज्यादा टाइट थी. हालाँकि छूट भी अंदर से टाइट थी पर बहार से बहुत ढीली थी और 6 इंच तक तो ढीली ढाली थी. मगर गांड ने तो मज़ा ला दिया. मैं अपनी मस्ती में गांड मरने में लगा था और भाभी परवाह किये बगैर लैंड को और अंदर घुसता जा रहा था. यहाँ तक क भाभी का जिस्म ठण्ड पड़ने लगा था पर मैंने कोई परवाह नहीं की. पूरा लैंड गांड में उतर गया तो मुझे ध्यान आया क भाभी की तरफ से न आवाज़ आ रही है न कोई हिलजुल. तभी बीएड पर कुछ हिलजुल हुई और पानी क कुछ छींटे मुझ पर भी पड़े. ऐसे लगा पूजा भाभी पर कोई पानी गिरा रहा है. मगर मैं फिर भी गांड फाड़ने में लगा था. अब लैंड पूरा अंदर बहार होने लगा तभी पूजा भाभी की फिर से आवाज़ आयी और उनका बदन हिला

पूजा भाभी : छोड़ दो मुझे मेरी गए......

एक बार फिर बिच में उनकी आवाज़ बंद हो गयी. मैं लैंड को अंदर बहार करने में लग गया. धीरे धीरे पूजा भाभी का विरोध ख़तम होता गया और गांड ने भी लैंड को स्वीकार कर लिया.

अमित : क्यों मेरी रंडी मज़ा आ रहा है न? अब तेरी छूट और गांड दोनों को फाड़ दिया है . मैंने अब ये तुझे तंग नहीं करेगी , इतना खुला कर दिया है मैंने. बोल कैसा लग रहा है ? मैं पता नहीं कितनी देर तक गांड मरता रहा. फिर पूजा भाभी ने दोनों हाथो से मुझे धक्का दिया और मैं पीछे को बीएड पर गिरा.

पूजा भाभी : बस अब हाल में चलते हैं यहाँ मज़ा नहीं आ रहा.

पीछे को गिरने से लैंड गांड से बहार निकल आया था. मुझे पूजा भाभी पर बहुत गुस्सा आया पर उनकी बात सुन कर मैं उठने लगा तो वो खुद मेरा हाथ पकड़ती हुई मुझे बहार ले गयी. मुझे सोफे पर बिठा कर पूजा भाभी मेरी गॉड में दोनों तरफ घुटने करते हुए लैंड को एक हाथ से पकड़ कर छूट पर सेट करते हुए बैठ गयी. लैंड एक बार फिर से पूजा भाभी की छूट में चला गया. मैं पूजा भाभी क बूब्स पकड़ कर मसलता हुआ चूसने लगा. पूजा भाभी को उजाले में ऐसे लैंड पर उछलती हुई देख कर बड़ा मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर पहले जो बूब्स बड़े बड़े लग रहे थे अब वो फिर से प्यारे प्यारे लगने लगे और मेरे हाथों में अछि तरह पकड़ में आ रहे थे.

पूजा भाभी : आआह्ह्ह्हह उम्म्म्म आआह्ह्ह खा जाओ इन्हे ये तुम्हारे हैं बहुत तंग करते हैं मुझे खा जाओ कक्कक्क्स उम्मम्मम

भाभी लैंड पर कूदती हुई मज़े से अपने बाल नोचती पता नहीं क्या क्या बोल रही थी पर मैं तो उनके बूब्स मसलने और चूसने में लगा हुआ था.

पूजा भाभी : आआह्ह्ह्ह उम्म्म शाबाश आआह्ह्ह्ह और hi उम्म्म और ज़ोर से उम्म्म्म मैं गयी मैं गयी aaaaaaaaaaaaaaiiiiiiii

भाभी मेरी गॉड में बैठी अपना पानी छोड़ने लगी और मेरे ऊपर निढाल हो गयी. मैं पिछले 30-40 मिनट्स से लगातार चुदाई कर रहा था मगर अभी तक मेरा पानी नहीं निकला था ये हैरान करने वाली बात थी. खैर पूजा भाभी क शांत होते hi मैंने उन्हें सोफे पर लिटा कर फिर से चुदाई शुरू कर दी. कुछ hi देर में एक बार और पूजा भाभी का पानी निकल गया अब मैं भी थक गया था और पानी निकलना चाहता था. मैंने पूजा भाभी को सोफे से लगा कर घोड़ी बनाया और एक hi झटके में पूरा लैंड छूट में घुसा दिया. पूजा भाभी कमरे से बहार आ कर खुल कर चीख चिल्ला रही थी और उनकी आवाज़ें सुन कर मुझे मज़ा आ रहा था .

पूजा भाभी : आआअह्ह्ह माआ आआअह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ अपनी रंडी को आआअह्ह्ह ऐसे hi छोड़ मैं तेरी रखैल हूँ फाड़ दे मेरी छूट को. आआह्ह्ह. आआह्ह्ह रोज़ मुझे छोड़ने आ जाया कर या मुझे अपने साथ शहर ले चल. मैं तेरी सेवा करुँगी तू रोज़ मुझे ऐसे hi छोड़ना आआह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म और ज़ोर से मारो

मैं खुद को और ज्यादा रोक नहीं पाया और आखिरी धक्का ज़ोर से मरकर पूरा लैंड छूट में जड़ तक ठुकाये पानी छोड़ने लगा. मेरे साथ hi वक बार फिर पूजा भाभी का भी काम हो गया. पूजा भाभी वैसे hi सोफे पर झुकी हुई निढाल पद गयी . लैंड क शांत होते hi मैंने लैंड को बहार निकला तो मेरी नज़र लैंड पर लगे खून पर गयी. पूजा भाभी की शायद गांड डाडते हुए निकला होगा. मैंने पूजा भाभी की गांड को देखा तो वो बिलकुल पहले जैसी थी यानि क वहां कुछ हुआ hi नहीं था. सुराख़ अभी भी छोटा hi था. मुझे ये देख कर झटका लगा. लैंड क शांत होते hi दिमाग चलने लगा.

अमित : ( मन में ) अगर पूजा भाभी की गांड सही सलामत है तो ये खून कहाँ से आया? मैंने किस की गांड फाड़ दी?



मुझे एक एक कर क साडी बातें यद् आने लगी. पूजा भाभी का अंधेरे कमरे में मुझे ले क जाना , उनके जिस्म क अंगों का बड़ा साइज और बीच बीच में उनकी आवाज़ एक डैम से बंद हो जाना. मुझे आशंका होने लगी क कुछ तो झोल है. मैं पूजा भाभी को ऐसे hi छोड़ कर तुरंत कमरे में भगा और स्विच को ढूंढ़ने हुए लाइट ों करदी. बीएड पर देख कर मेरी गांड hi फैट गयी . बीएड पर एक औरत उलटी लेती हुई थी और उसकी गांड लहू लोहान हुई पड़ी थी. पीछे से पूजा भाभी भी अंदर आ गयी और पानी का गिलास ले कर उस औरत को उन्होंने जब सीधा किया तो मेरी सचमुच में गांड फैट गयी
 
अपडेट 108

पूजा भाभी जिसे पानी पीला रही थी वो कोई और नहीं पूजा भाभी की सास hi थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था ये सब क्या है. मुझे लगा शायद मैं सपना देख रहा हूँ या मुझसे कोई गलती हो रही है. मैं अपनी बाजु पर खुद hi चिकोटी कटी. मगर ये तो साला सच था . मेरे सामने बीएड पर पूजा भाभी और उनकी सास hi थी और दोनों hi इस वक़्त बिलकुल नंगी थी . वैसे मैं भी नंगा hi था उस में जैसे hi. पूजा भाभी ने अपनी सास को सहारा देकर बिठाया और उन्हें पानी पिलाने लगी. आंटी क चेहरे से hi लग रहा था क उन्हें बहुत दर्द हो रहा है. मगर वो अपना दर्द दर्द बर्दाश्त करते हुए पूजा भाभी क हाथों पानी पिने लगी. मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ. मैं वहीँ खड़ा रहूं या अभी अपने कपडे लेकर भाग जॉन मैं यही सोच रहा था क्यूंकि पूजा भाभी की सास को मेरी वजह से इतनी तकलीफ हो रही थी पता नहीं वो मेरे साथ क्या सलूक करेंगी? हो सकता है मुझे गलियां दे या धक्के मर कर घर से बहार निकल दें. पर दिमाग में एक बात ये भी आ रही थी क मैंने कुछ भी ज़बरदस्ती तो नहीं किया है उनके साथ फिर वो मुझे क्यों कुछ कहेंगी? मुझे सोच में डूबा देख कर पूजा भाभी hi बोली.

पूजा भाभी : क्या सोच रहे हो? देखो क्या हल कर दिया है तुमने माँ जी का.

अमित : ये सब क्या है ? आप ने मेरे साथ ये सब क्यों किया?

पूजा भाभी: सॉरी तुम्हे पहले बताया नहीं पर मैं क्या करती माँ जी ये करना चाहती थी और मुझे लगा तुम राज़ी नहीं होंगे इस लिए ऐसा किया.

अमित : मगर आंटी कैसे ?

पूजा सास : कुछ भी सोचने से पहले एक बार मेरी भी बात सुन लो बीटा . इसके बहु की कोई गलती नहीं है. मैंने hi बहु से कहा था क वो तुमसे बात करे पर ये दर रही थी क तुम मानोगे नहीं इस लिए ये सब किया. क्या बताऊँ बीटा , मैं इतनी मजबूर हो गयी थी क मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था. तुम नहीं जानते बीटा तुम्हारे अंकल और मुझमे 15 साल का फरक है. मेरे घरवालों ने दस जमात होते hi मुझे तेरे अंकल क पल्ले बाँध दिया था. तब तेरे अंकल तो जवान थे खूब रास निचोड़ा उन्होंने मेरी कच्ची जवानी का मगर जब मैं पूरी जवान हुई तो उनकी जवानी ढल गयी. तुम नहीं जानते बीटा 30 क बाद hi औरत को ज्यादा प्यास लगने लगती है पहले तो बस नासमझी hi होती है. और जब मैं 40 की होने को आयी तो तेरे अंकल का हथियार जवाब से गया. पिछले 10 साल से मैं कैसे खुद को ठंडा कर रही हूँ ये मुझे hi पता है. मैं चाहती तो किसी और से भी अपनी प्यास बुझा लेती बीटा पर डर्टी थी क इस उम्र में किसी ने बदनाम कर दिया तो क्या होगा. मेरे साथ मेरे बहुत बेटे की ज़िन्दगी भी बर्बाद हो जाती. पिछली बार जब तुम्हे मैंने बहु क साथ देखा था तो पहले तो मुझे बड़ा गुस्सा आया था तुम पर . मैंने कभी सोचा भी नहीं था क तुम ऐसे निकलोगे. मुझे तो बहु पर भी गुस्सा आया था. मगर जब तुम्हारा हथियार देखा तो मैं सब भूल गयी और मेरी आग मेरे काबू से बहार हो गयी. मैं तो तुझसे और बहु से नाराज़ थी मगर मेरी आग ने मुझे मजबूर कर दिया क मैं तुम्हारे आगे लेट जॉन. सच बताऊँ तो इतना बड़ा हथियार मैंने कभी देखा भी नहीं था. तेरे अंकल का इतना मोटा तो था पर इतना लम्बा नहीं था. न चाहते हुए भी मैं तेरी गुलाम हो गयी.

अमित : आप ने कब देखा मुझे?

पूजा सास : पिछली बार जब तुम बहु क साथ चारे वाले कमरे में लगे हुए थे , मैं बहु को ढूंढती हुई पूछी की तरफ गयी तो मुझे बहु की सिसकियों की आवाज़ सुनाई दी . मैंने दबे पैन जाकर देखा तो तुम बहु को पेल रहे थे. जब मेरी नज़र तुम्हारे हथियार पर गयी तो मैं सब भूल गयी और सच बताऊँ तो तुम्हे देखते हुए वहीँ पानी निकल गया था मेरा. जब मैं वापिस जाने लगी तो बाल्टी से टकरा गयी और बाल्टी गिरने से तुम लोगों को भी आवाज़ आ गयी

अब याद आया मुझे , पिछली बार पूजा भाभी की चुदाई करते हुए बहार से कुछ गिरने की आवाज़ आयी थी और फिर आंटी ने आवाज़ दी थी पूजा भाभी को . इसका मतलब आंटी तब सब देख कर वापिस गयी थी.

अमित : तो वो आवाज़ आपकी थी.

पूजा सास : हाँ , मैं तो तभी तुम्हारे आगे टंगे उठाने को तैयार हो गयी थी मगर दर था क कहीं तुम मुझे गलत न समझो. बहु क बारे में भी मैंने सोचा क जब मैं इतनी उम्र में भी अपनी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर प् रही ये तो अभी जवान है. और तुम पर मुझे भरोसा भी था क तुम कभी कुछ गलत नहीं करोगे. मैंने उसी दिन बहु से बात कर ली थी क ये तुमसे बात करे मगर तुम उसके बाद आये hi नहीं. आज तुम्हे घर पर देखा तो मैं समझ गयी क तुम बहु से मिलने आये हो और मैंने बहु से तुम्हें यहाँ बुलाने को कहा.

अमित : मन में ) इसका मतलब तब आंटी किचन में भाभी से यही कहने गयी थी और उसी वक्त भाभी ने मुझे शाम को आने को कह दिया .

पूजा भाभी : अमित प्लीज गुस्सा मत करना माँ जी की तड़प देख कर मुझे इन पर तरस आ गया और मैंने इनके लिए ये सब प्लान किया था. प्लीज गुस्सा कर क हमसे नाराज़ मत हो जाना . तुम जैसे कहोगे हम वैसे hi करेंगे

पूजा सास : हाँ बीटा तुम नाराज़ न होना तुम जैसा कहोगे मैं वैसे करुँगी. तुम जब चाहे आ कर बहु की चुदाई कर लिया करो मैं कभी रोकूंगी नहीं . तुम कहो तो मैं इसे तुम्हारे पास शहर भी भेज दिया करुँगी एक दो दिन क लिए मायके जाने क बहाने. मगर थोड़ी सी दया मुझ पर भी कर देना. कभी कभार अपनी इस आंटी की प्यास भी बुझा दिया करना. तुम जैसे चाहो वैसे मेरे साथ कर सकते हो मैं सब करुँगी . देखो आज तक तुम्हारे अंकल ने भी पीछे से नहीं किया था मगर तुमने कर लिया अगर तुम्हे पीछे से करना पसंद है तो मैं वो भी करुँगी पर हमसे मन मत मोड़ना . मैं तुम्हारे पाऊँ पड़ती हूँ आआआईईई मायआ

आंटी बीएड से उठने लगी मेरे पैन पकड़ने क लिए मगर उनकी गांड में दर्द होने लगा. मैंने जल्दी से आगे बाद कर उनके हाथ पकड़ लिए.

अमित : आप ये कैसी बातें कर रही हैं आंटी ? मैं क्या इतना गिरा हुआ हूँ क आप से ये सब करवाऊं? आप तो मेरी माँ सामान हैं , आप को तो हुकम करना चाहिए. वैसे ये सब है तो गलत पर मैं आपकी मज़बूरी समझ सकता हूँ. आप तो जानती हैं मैं अब शहर में hi होता हूँ तो ज्यादा गाओं अत नहीं ऐसे में काम hi वक़्त दे पाउँगा आपको पर वडा करता हूँ जब भी वक़्त मिलेगा आपको ठंडा कर दिया करूँगा मगर...

पूजा सास : मुझे तेरी हर शरत मंज़ूर है बीटा तूने इतना कह कर मेरा कलेजा ठंडा कर दिया है. तू जैसा कहेगा वैसा hi होगा. तू कहेगा तो मैं खुद बहु को लेकर तेरे पास आ जाया करुँगी तू चाहेगा तो हम दोनों एक साथ तेरे आगे अपनी टांगें उठा लेंगी.

अमित : मेरी बात तो सुन लीजिये पहले. मैं चाहता हूँ क आप कभी भी किसी पर ये ज़ाहिर नहीं होने देंगी और कभी मुझे ज़बरदस्ती बुलाने की कोशिश नहीं करेंगी. मैं खुद सही समय और मौका देख कर आऊंगा. और हाँ ये क्या था भाभी ? आप ने दूध में कुछ मिलाया था ? मुझे खुद पर काबू क्यों नहीं हो प् रहा था?

पूजा भाभी : वो वो ....

पूजा सास : मैं बताती हूँ बीटा ये सब बहु का hi आईडिया था. ये कह रही थी क अगर तुमने अपना पानी मेरे अंदर निकल दिया तो ये कहीं प्यासी न रह जाये इस लिए इसने तुम्हे दूध में गोली दाल कर पीला दी. अपने मज़े क लिए देखो इसने मेरा क्या हाल करवा दिया . अभी भी कितना दर्द हो रहा है. इतना बड़ा तो आगे लेने में hi पसीने छूट गए थे और तुमने पीछे भी घुसा दिया. ऐसा भी कोई करता है क्या कक्कक्क्स देखो कैसे गति पड़ी है

आंटी ने अपनी गांड दिखते हुए कहा जवान अभी भी खून क दाग लगे हुए थे.

अमित : क्या करूँ आंटी मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. मैं तो पूजा भाभी का hi समझ कर सब कर रहा था और बेचारी आप बलि चढ़ गयी. वैसे आप ने जो मेरे साथ चालबाज़ी की है ये उसी की सजा समझिये.

पूजा भाभी : फिर तो मैं बच गयी वर्ण आज मेरा भी यही हल हो जाता

अमित : तो क्या आप मुझे वहां नहीं करने देंगी ?

पूजा भाभी : मुझे तो माफ़ hi करो तुम. माँ hi की हालत देख कर तो दर लगने लगा है.

अमित : सोच लीजिये ? अगर आप ने मुझे अपनी गांड नहीं दी तो फिर मैं आंटी क पास hi आऊंगा.

पूजा सास : हाँ बीटा तू मेरे पास hi आना मैं तुम्हे कभी नहीं रोकूंगी. तू जैसे चाहे जहाँ चाहे करना. वैसे भी अब रास्ता तो खुल hi गया है.

पूजा भाभी : ऐसे कैसे मुझे छोड़ डोज तुम ? तुमको मेरी गांड hi लेनी है न मैं तैयार हूँ चाहो तो अभी ले लो पर मैं तुम्हारे बिना अब नहीं रह पाऊँगी. अब इस छूट में तो मेरे पति का लैंड भी कुछ नहीं कर पायेगा इतनी खुली कर दी है तुम्हारे इस मुसल ने.

पूजा सास : सच कहा बहु तुमने . ये मुसल एक बार जिसके अंदर भी जायेगा फिर वो कभी किसी और का लैंड पसंद hi नहीं करेगी.

पूजा भाभी : चलो अब कर्ली अपनी मन मणि मैं तैयार हूँ.

इतना कह कर भाभी मेरे आगे चौपाया हो गयी. और अपनी गांड और ज्यादा बहार को निकलती हुई मुझे पीछे मुर कर देखने लगी. मैंने पूजा भाभी की गोरी चमकती गांड पर अच्छी तरह हाथ घुमाया. मेरा लैंड अभी भी खड़ा था शायद वियाग्रा टेबलेट का hi असर था. मगर टाइम भी तो कितना हो रहा था मुझे वापिस घर जाना था. मेरे सामने दोनों सास बहु नंगी लेती थी. एक तरफ जहाँ पूजा भाभी का जवान आकर्षक जिस्म था वहीँ आंटी का जिस्म भी कुछ काम नहीं था . आंटी इस उम्र में भी जवान hi थी . उनके अंग भाभी से बड़े थे और जिस्म ज्यादा मादक था. पेट कुछ बहार को निकला हुआ था बूब्स बड़े बड़े थे और चूतड़ भी उसी अनुपात में बड़े थे. जांघें कुछ ज्यादा hi मांसल थी. बालों में सफेदी बिलकुल भी नहीं थी हालाँकि मेहँदी लगाने क कारन कहीं कहीं बल कुछ लाल हो रखे थे. चेहरा भी तेज भरा था घर पर काम करने और गाओं की अच्छी खुराक की वजह से आंटी अभी भी पूरी जवान थी. मैंने पूजा भाभी क चूतड़ों पर थप्पड़ मरे और उन्हें सीधा लेता दिया आंटी क बगल में.

अमित : अब मुझे वापिस जाना है देर हो गयी है घर से निकले हुए वैसे भी आप दोनों की प्यास तो बुझ hi गयी है. मगर गली बार मैं आपकी गांड ज़रूर मरूंगा और दोनों की एक साथ मरूंगा .

मेरे इतना कहते आंटी क चेहरे पर रौनक आ गयी. मैंने दोनों को बरी बरी से किश किया और दोनों क बूब्स मसल कर अपने कपडे पहना लिए.

पूजा सास : बीटा जल्दी आना मुझे इंतज़ार रहेगा तुम्हारा .

अमित : जैसे hi मौका मिलेगा मैं आ जाऊंगा आप चिंता न करें . अब आप आराम कीजिये पहले hi मैंने आपको बहुत तकलीफे दी है.

पूजा सास : ऐसे तकलीफ तो मैं हर बार लेने को तैयार हूँ बीटा बस तुम एते रहना.

उसके बाद मैं अपने घर क लिए निकल गया. उधर घर में मेरे आने क बाद गौरी और दीपिका ममी की आपस में कुछ बातचीत हो रही थी आओ ज़रा देखें

गौरी : ये क्या है दीपिका ? तुझे पता है न वो मुझे माँ मंटा है फिर क्यों तुम उसके साथ ऐसी बातें कर रही थी ? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं क उसे कितना बुरा लग रहा होगा? क्या सोचेगा वो ? और अगर वो तुझसे hi नाराज़ हो गया तो ?

दीपिका : तो आप सब सुन रही थी बहार से? ाचा है आपको पता चल गया. वो मुझसे ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता दीदी वो किसी से भी नाराज़ नहीं रह सकता. उसका दिल बहुत बड़ा है वो जल्दी सबको माफ़ कर देता है सब भुला देता है. वैसे भी उसे कैसे मानना है मुझे अचे से पता है . पर मुझसे आपकी तड़प नहीं देखि जा रही दीदी. आप लाख मन कर लें लाख छुपा लें पर मैं अच्छी तरह ये जानती हूँ क आपको उसकी ज़रूरत है. आप चाहे कह भी लें क अमित आपका बीटा है पर इसे तो अपने बाप का प्यार चाहिए न ?

दीपिका ने गौरी क पेट पर हाथ लगते हुए कहा. एक पल क लिए गौरी क चेहरा शर्म से लाल हो गया

दीपिका : दीदी ( कामिनी ) ने और मैंने तो अपने हिस्से का प्यार उससे ले लिया अब आपकी बरी है. और मैं आपके साथ na-insaafi नहीं होने दूँगी. अमित को आपको प्यार करना hi होगा बस आपको मेरी बात माननी होगी

गौरी : ये तू क्या कह रही है दीपिका ? तू जानती है वो कभी नहीं मानेगा . मैं चाहे कुछ भी कर लूँ वो नहीं मानेगा और हो सकता है मैं उसकी नज़रों से गिर जॉन

गौरी क ऐसे जवाब से दीपिका को कन्फर्म हो गया क गौरी भी अमित से सब करने क लिए तैयार है बस शर्म आड़े आ रही है. गौरी ने अनजाने में hi जो जवाब दे दिया था वास्तव में ये ये उसकी सहमति थी.

दीपिका : आप कुछ मत सोचिये बस मैं जो कहूँगी वो करती जाना . जल्दी hi आपके बचे को उसके पापा से मिलवा दूंगी .

दीपिका की बात पर एक बार फिर गौरी शर्मा गयी.

गौरी : मैं कुछ नहीं करने वाली . अमित क्या सोचेगा मेरे बारे में?

दीपिका : आपको कुछ नहीं करना है सब वैसा hi रहेगा. आप जो कुछ पहले करती थी वो hi कीजिये मगर थोड़ा अलग अंदाज़ में

गौरी दीपिका की तरफ नासमझी भरी नज़रों से देखने लगी

दीपिका : उसे ज़रा अपने जलवे दिखाओ दीदी ताकि वो आपको उस नज़र से देखना शुरू कर दे. कभी अपना पल्लू उसके आगे गिरा दिया करो कभी ब्लाउज क उसपर क बटन खोल कर उसे अपनी छाती से लगा लिया करो. कभी उसके साथ वहां पर अपने ये टच करवा दिया करो अब इतना तो आप समझ hi सकती हैं न क औरत मर्द को कैसे आकर्षित करती है? बस अमित क साथ भी वही सब करना है आपने. और अब शर्म को संदूक में बंद कर क टाला लगा दो वर्ण यूँही उंगली करती रह जाएँगी देख देख कर.

दीपिका की बातों को गौर से सुनते हुए गौरी सोच रही थी पर जो बात आखिर में दीपिका ने कह दी थी उससे तो गौरी पानी पानी हो गयी. इसका मतलब था दीपिका ने सब देखा था क गौरी क्या करती है अमित क रूम क बहार .

गौरी : धत्त ! कितनी गन्दी बातें करती है तू . मैं नहीं कुछ करने वाली ये सब तू hi कर .

इतना कह कर गौरी जाने लगी तो पीछे से फिर दीपिका बोली

दीपिका : कुछ काम बातों से भी गंदे होते हैं दीदी मगर उनमे मज़ा बड़ा अत है .

दीपिका की बात जाते जाते गौरी ने सुनी और शर्माती मुस्कुराती बहार निकला गयी. गौरी ऊपर ऊपर से तो दीपिका को कुछ और कह रही थी मगर अंदर से उसका दिल दीपिका की बात में हामी भर रहा था. दीपिका क मुँह से निकलने वाले शब्द मनो उसके दिल की भावनाएं hi थी. गौरी क दिल ने ठान लिया था क वो वही सब करेगी जो दीपिका ने कहा मगर अभी भी गौरी पर शर्म और रिश्तों की लाज हावी थी. अपने कमरे में बीएड पर लेती गौरी दीपिका की बातों को hi सोचे जा रही थी . जब भी गौरी का दिमाग उसके दिल पर हावी होने लगता तो गौरी का दिल अमित और कामिनी की चुदाई यद् दिलवा कर और उसके मुसल जैसे लैंड की तस्वीर दिखा कर दिमाग को चारो खाने चित्त कर देता.

इधर मैं घर आ रहा था तो राजू मिल गया . राजू : मैं तेरी तरफ hi आ रहा था . मैं रेनू को बता कर आया हूँ . पहले तो वो शहर काम करने और वहां रहने की बात पर राज़ी नहीं थी मगर मैंने बता दिया क तू भी वही होता है तो वो मन गयी .

अमित : चलो ये अच्छा हुआ . अब उसके घर वालों को मानना है. उसकी भी तू चिंता मत करना मैं कुछ करता हूँ.

राजू और मैं हमारे घर तक बातें करते हुए आये और फिर वो वापिस चला गया. रत का खाना खाने क बाद मैं बाबा क पास चला गया . वो अपने कमरे में बीएड पर बैठे हुए थे.

विजय मां : आओ अमित बैठो आज मेरे पास मेरे कमरे में ? कोई खास बात है क्या ?

अमित : क्या मैं आपसे मिलने यहाँ नहीं आ सकता ?

विजय मां : ये कैसी बात कर रहा है तू ? सब तेरा hi तो है बीटा . मैंने तो इस लिए पुछा क अगर तुझे कोई बात करनी होती तो तू खाने पर hi कर सकता था मगर तू यहाँ आया है तो मतलब कुछ खास हो होगा.

अमित : हाँ बाबा कुछ ऐसा hi है. बाबा वो अपने वो चाचा नहीं हैं जो मुखिया जी क साथ होते हैं .

विजय मां : कौन वो बिरजू ?

अमित : जी बाबा वही , उनकी एक बेटी है रेनू .

विजय मां : तो तुझे उनकी बेटी पसंद आ गयी है ? मगर बीटा अभी तो तेरी पड़े भी पूरी नहीं हुई और ....

अमित : बाबा मेरी बात तो सुन लो पहले आप. वो राजू है न वो रेनू को पसंद करता है और रेनू भी उसे पसंद करती है. दोनों शादी करना चाहते हैं मगर रेनू क बापू ने कहा है क राजू कुछ करता नहीं है और वो रेनू की शादी गाओं में नहीं करना चाहते. इसलिए मैंने सोचा है राजू को अंकल की फैक्ट्री में काम दिलवा दूंगा और वहीँ उसका रहने का भी कर दूंगा. बस आप किसी तरह रेनू क बापू को मन लेना.

विजय मां : बात तो बिरजू की ठीक है और तूने भी ठीक हल निकला है मगर क्या राजू शादी क लायक हो गया है? मेरा मतलब अभी उसकी उम्र hi क्या है.

आमिर : बाबा वो दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं अगर उनकी शादी किसी और से हो गयी तो दोनों hi खुश नहीं रह पाएंगे. प्लीज आप रेनू क बापू को समझा लेना. राजू की सेटिंग मैं करवा दूंगा.

विजय मां : ठीक है मैं बिरजू से बात कर लूंगा और वो मेरी बात नहीं टलेगा .

अमित : थैंक यू बाबा आप बहुत अचे हैं.

विजय मां : अरे बस बस अब ये बता क तुझे भी कोई पसंद तो नहीं आ गयी शहर में ?

गौरी : आप न मेरे बेटे को बिगड़ डोज. अभी इसकी उम्र hi क्या है? जब शादी का टाइम आएगा तो देख लेना चाँद सी दुल्हन लाऊंगी मैं अपने बेटे क लिए.

माँ किचन का काम ख़तम कर क कमरे में दाखिल होती दोनों की बातें सुन कर बिच में कूद पड़ी. मैंने कुछ देर दोनों से बातें की और अपने कमरे में आ गया. कमरे में आ कर मैंने अंकल को फ़ोन किया .

अंकल : हाँ बीटा कहाँ हो ? मैं घर आया तो तुम यहाँ नहीं हो. रमा ने बताया क तुम गाओं हुए हुए हो , वापिस कब आ रहे हो?

अमित : अंकल मैं कल सुबह आ रहा हूँ. अंकल मुझे आप से एक काम था.

अंकल : हाँ हाँ बोलो बीटा

अमित : अंकल मेरा एक बचपन का दोस्त है राजू . उसे आपकी फैक्ट्री में नौकरी मिल ल सकती है क्या. मैंने उसे कहा है क मैंने उसे नौकरी दिलवा दूंगा अगर हो सके तो आप थोड़ी मदद कर दो.

अंकल : ये कैसी बातें कर रहे हो बीटा ? मैंने कहा था न क सब कुछ तुम्हारा और मोहित का आधा आधा है. तुम भी मालिक हो बराबर क. तुम जिसे चाहे नौकरी पर राखी जिसे चाहे निकल दी तुम्हे पूरा हक़ है . तुम अपने दोस्त को ले आना अपने साथ और उसे जो नौकरी देनी हो खुद hi दे देना.

अमित : नहीं अंकल मुझे इन बातों की कोई समझ नहीं है. प्लीज आप उसकी काबिलियत देख कर खुद hi उसे कोई नौकरी दे देना . मैं नहीं चाहता क वो मेरे नाम का फायदा उठाये. उसे खुद म्हणत कर क काबिल बनना होगा तभी वो कुछ बन पायेगा.

अंकल : बहुत अचे विचार हैं बीटा बिलकुल अपने बाप जैसे. तुम उसे साथ ले आना मैं उसे कोई न कोई काम दिलवा दूंगा.

अमित : ठीक है अंकल कल मिलता हूँ.

अंकल : ठीक है बीटा

उसके बाद मैंने कॉल कट करदी और राजू की मुश्किल लगभग मैंने हल कर दी. उसके बाद कामिनी ममी रत में मेरे पास आ गयी और फिर 2 राउंड चुदाई क उनके साथ खेले.

बहार से गौरी आज फिर अमित और कामिनी का खेल देख कर उंगली करती रही. आज उसने सोचा था क वो नहीं देखेगी क्यूंकि दीपिका उसे ऐसा करते देख चुकी थी मगर गौरी खुद को रोक नहीं पायी और पहुँच गयी लाइव सेक्स देखने. कामिनी की छूट में बजते हुआ अमित क मुसल जैसे लैंड क धक्के उसे अपनी छूट पर महसूस हो रहे थे. गौरी का दिल उसके दिमाग पर हावी होता गया . गौरी अपनी सदी गीली कर क फिर से नहाने चली गयी मगर अब ये आग बहुत ज्यादा भड़कने लगी थी जिसका हल ठन्डे पानी से नहीं बल्कि अमित क गरम पानी से hi हो सकता था.

रत में कामिनी ममी की दो बार चुदाई करने क बाद मैं बहुत थक गया था क्यूंकि दिन में पूजा भाभी और उनकी सास क साथ भी तो किया था वो भी लम्बा ताबड़तोड़ सेक्स . कामिनी ममी को दूसरी बार करना तो नहीं चाहता था पर फिर सोचा क 5 दिन वो कैसे रहेंगी तो एक राउंड और लगा hi दिया मगर इससे मैंने बहुत ज्यादा थक गया था और ऐसे बिस्टेर पर गिरा क जैसे जान hi निकल गयी हो जिस्म से. सुबह मुझे अपने ऊपर गीला पैन महसूस हुआ और साथ hi एक भीनी भीनी खुशबु . मैंने नींद में hi हाथ बढ़ाये तो महसूस हुआ क कामिनी ममी नाहा कर आयी हैं शायद उनके गीले बल मेरे चेहरे पर लग रहे थे. रात की थकावट की वजह से आँखें खोलने को मन नहीं हो रहा था पता नहीं ममी कैसे इतनी जल्दी उठ गयी.

अमित : उम्म्म सोने दो न ममी रत भर जगा क रखती हो और सोने भी नहीं देती .

कामिनी ममी का चेहरा मुझे अपने चेहरे क पास महसूस हुआ तो मैंने अपनी एक बाजु उनके गले में दाल कर अपने साथ बिस्टेर पर लिटा दिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर सुबह की ताज़गी लेने लगा. कामिनी ममी का जिस्म नहाने की वजह से सुघन्ड फैला रहा था जो मेरी सांसों में उतर रही थी. मैंने करवट लेकर उनके ऊपर होते हुए उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए. मैं इस वक़्त सिर्फ लोअर में था और ऊपर से नंगा था. जबकि कामिनी ममी ने सदी पहन ली थी. मैं ऐसे hi ऑंखें बंद किये उनके होंठ चूसने लगा मगर ममी मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. वो कुछ कहना चाहती थी मगर मैंने उनकी बोलती बंद कर राखी थी. जब मैं उनके ऊपर आया तो वो मुझे पीछे हटाने की कोशिश करने लगी पर मैंने उन्हें अपने नीचे दबा लिया और अपने एक हाथ से उनका एक हाथ पकड़ कर दूसरे हाथ से उनके बूब्स मसलने लगा. ममी मुझे पीछे हटानी की कोशिश करती रही मगर जल्दी hi वो मेरा साथ देने लगी. ममी क साथ देते hi मैं दोनों हाथों से उनके बूब्स मसलने लगा. ममी क हाथ मेरी पीठ पर कास गए. होंठों का रास पीने क बाद मैंने ममी की गर्दन पर किश करने लगा. साथ hi साथ अपना एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी छूट को सदी क ऊपर से hi मसलने लगा.

‘ उम्मम्मम्म कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम ‘

ममी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी. धीरे धीरे ममी पूरी गरम हो गयी और मुझे अपने साथ कसबे लगी.

अमित : क्या जादू है आप में , मैं खुद को रोक नहीं प् रहा हूँ. सुबह सुबह एक और अराउंड खेलने को मन होने लगा है. बोलो तैयार हो न आप

मैंने कामिनी ममी का एक हाथ पकड़ कर अपने लैंड पर रख दिया जिसे उन्होंने फ़ौरन हटा लिया. मगर मैंने फिर से उनका हाथ पकड़ कर लैंड पर रख दिया. वो बार बार हाथ छुड़ा रही थी तो मैंने झुंझला कर उनका हाथ पकड़ कर अपने लोअर में घुसा दिया और अपना नंगा लैंड उनके हाथ में पकड़ा दिया और उनके हाथ की मुट्ठी अपने नंगे लैंड पर कास दी.

‘ कक्ककक्कवक्कव उम्मम्मम्मम्म आआआआहहहहहहह’

मेरे लैंड को पकड़ते hi ममी को पता नहीं क्या हुआ उनका बदन झटके लेने लगा. इतनी जल्दी ममी का पानी कैसे निकल गया? मैं नींद में ये सब सोचने की कोशिश भी नहीं कर रहा था. मैंने फिर से ममी से छेड़छाड़ शुरू कर दी. पर वो मुझे बीएड पर धक्का दे कर जल्दी से कमरे से बहार भाग गयी. उनके इस तरह जाने से मैं भी उठ गया. मैं ममी को जाते हुए नहीं देख सका.

मुझे भी शहर जाना था तो मैं न चाहते हुए भी उठा और नाहा कर तैयार हो गया और नीचे आ गया. नीचे आया तो कामिनी ममी बाथरूम से नाहा कर निकल रही थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर स्माइल आ गयी. मैं उनको देखता हुआ माँ क कमरे की तरफ बड़ा तो वो भी हाथ में कपडे लिए बाथरूम में जा रही थी.

अमित : माँ आप कहाँ जा रही हैं ?

गौरी ममी : शरमाते हुए ) नहाने जा रही हूँ .

अमित : पर आप तो नहीं हुई लग रही हैं .

गौरी ममी : वो कपडे ख़राब हो गए हैं इस लिए फिर से नहाना पड़ेगा .

विजय मां : अरे जाने दे बीटा औरतों को कभी टोकना नहीं चाहिए . भूखे रहना है तो hi सवाल करना.

बाबा की ऐसी बात पर मुझे हंसी आ गयी जबकि माँ बाबा को घूर क देखने लगी.

गौरी ममी: आज तक कभी भूखा रखा है आपको ? और ये तो मेरा बीटा है . तू बैठ बीटा मैं अभी आई फिर तुझे नाश्ता करवाती हूँ

उसके बाद माँ नहाने चली गयी और फिर आ कर मेरे लिए नाश्ता बनाया . नाश्ता करते hi राजू भी आ गया और फिर मैं उसे साथ लेकर शहर क लिए निकल गया .

मैं सीधा मोहित क घर hi गया और राजू को सब से मिलवाया. आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हुई . अंकल भी मुझे गले मिले और राजू क बारे में भी उनसे बातें हुई. थोड़ी देर में मोहित भी तैयार हो कर आ गया . राजू तो बंगले क साजो सामान को देख कर hi हैरान हो रहा था. राजू से अंकल कुछ ज़रूरी बातें की और फिर बोले

अंकल : अमित तुम्हारे दोस्त को तुम्हारे कहने पर मैं नौकरी से रहा हूँ. पर इससे कह देना क पूरी ईमानदारी से काम करे. थोड़ी बहुत जो इसने पड़े की है उस हिसाब से फैक्ट्री में फोरमैन या फिर सुपरवाइजर की जॉब पर रख लेंगे इसे बाकि सैलरी और दूसरी बातें इसे मैनेजर समझा देगा

राजू : मैं पूरी ईमानदारी से काम करूँगा सर जी , आपको कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा.

अमित : देख राजू मेरा नाम ख़राब मत होने देना.

राजू : तेरे लिए तो जान भी देदूंगा मेरे यार तू चिंता मत कर.

अंकल : अमित अब तुम मोहित क साथ कॉलेज जाओ और राजू को मैं अपने साथ ले जाऊंगा , मुझे यहाँ से सीधा फैक्ट्री hi जाना है.

मैं एक बार राजू से मिला और फिर मोहित क साथ कॉलेज क लिए निकल गया . पहले लेक्चर में आज फिर चन्दर्कांता म ने मेरी दबा क ली वैसे आज तो वो जाएज़ भी थी . मैं लगातार 3 दिन से गायब था और टेस्ट सर पे थे. खैर उनका लेक्चर जैसे तैसे निकला. चन्दर्कांता क जाने तक मैंने तो सर उठा कर देखा भी नहीं क आसपास कौन है और क्या हो रहा है.

लेक्चर की बेल्ल बजते hi साथ वाली रॉ में बैठी कल्पना ने मुझे बुलाया .

कल्पना : कहाँ गायब रहते हो यार ? फ़ोन भी नहीं उठाते . अचे दोस्त हो , क्या ऐसे होते हैं दोस्त ? देख ली तुम्हारी दोस्ती मैंने.

कल्पना बिलकुल सही कह रही थी मैंने एक बार भी उसका फ़ोन अटेंड नहीं किया और न hi बैक कॉल की . उसका नाराज़ होना लाज़मी था. मगर दोस्तों को नाराज़ नहीं होने देना चाहिए . मैंने भी फ़ौरन माफ़ी मांग ली

अमित : ी ऍम सॉरी कल्पना पर किसी न किसी वजह से मैं हर बार बिजी था और फ़ोन अटेंड नहीं कर पाया. इस बार माफ़ कार्डो फिर से गलती नहीं होगी. वैसे तुम्हे कोई काम तो नहीं था?

कल्पना : काम क्या होगा यार , मैंने तुमसे कहा था न क मैं बोर हो जाती हूँ कभी कभी तो इसी लिए फ़ोन कर रही थी और तुमने कहा था क मैं जब चहुँ फ़ोन कर सकती हूँ पर लगता है फ़ोन करने का कोई फायदा hi नहीं क्यूंकि फ़ोन तो तुम उठाते hi नहीं हो. लगता है तुम्हारे ठिकाने hi पता करने पड़ेंगे ताकि सीधा जा क मिल सकूँ.

अमित : अब ऐसी भी कोई बात नहीं है यार. वैसे सॉरी मैं भूल गया था . मैं तुम्हे फ़ोन करने भी वाला पर पता नहीं कैसे स्किप कर गया . वैसे अपनी गलती सुधरने क लिए आज हम साथ में कॉफ़ी पिटे हैं , क्या कहती हो ?

कल्पना क चेहरे पर स्माइल आ गयी .

कल्पना : नेकी और पूछ पूछ . चलो इसी बहाने कुछ वक़्त तो तुम्हारे साथ बैठने का मौका मिलेगा.

हम दोनों अपनी बातों में hi खोये थे क हमें ध्यान hi नहीं रहा क क्लास में एक डैम शांति हो चुकी थी और मंजू म क्लास में आ चुकी थी. मंजू म हम दोनों को hi देख रही थी मगर हमे खबर hi नहीं थी. मोहित ने मुझे हिलाया तो मैंने सामने देखा मंजू म गुस्से से मुझे देख रही थी . मुझे यद् आ गया क मम ने कितनी बार फ़ोन किया था और मैंने फ़ोन नहीं उठाया और तो और कॉल बैक भी नहीं किया . ऊपर से कॉलेज से भी एब्सेंट और ट्यूशन भी नहीं गया. आखिरी बार की हमारी नाराज़गी भरी मुलाकात क बाद मैंने अनजाने में जो कर दिया था उससे अब मम बहुत नाराज़ थी. मुझे उनसे माफ़ी मांगनी थी मगर शायद वो कुछ ज्यादा hi गुस्से में आ चुकी थी.

मंजू म : हो गयी बातें या अभी बाकि हैं ? वैसे क्लास में तो आना नहीं होता तुमने तो अब जा कर जी भर क बातें कर लो अपनी दोस्त क साथ. यू बोथ मई लीव माय क्लास.

अमित : ी ऍम सॉरी.......

मंजू म : ी साइड लीव माय क्लास .

मंजू म का चेहरा गंभीर था और ऑंखें गुस्से से भरी हुई. मैंने बात को बदन ठीक नहीं समझा और क्लास से बहार निकल गया और मेरे साथ hi कल्पना को भी क्लास से बहार जाना पड़ा. मैंने जाते जाते मम को देखा पर उन्होंने चेहरा घुमा लिया.

कल्पना : चलो ये भी ाचा किया मम ने अब आराम से बातें कर लेंगे

अमित : ी ऍम सॉरी यार , मेरी वजह से तुम्हे क्लास से बहार निकलना पड़ा

कल्पना : तुम सॉरी क्यों बोल रहे हो? इस में तो हम दोनों hi शामिल थे न. वैसे भी ये ाचा हुआ , वहां हम आराम से बात नहीं कर पते

कल्पना ने मुस्कुराते हुए ये बात कही तो मुझे भी उसकी ये बात अच्छी लगी. मैं कल्पना को साथ लिए कैंटीन में आ गया और दोनों क लिए कॉफ़ी ले आया.

आमिर : तो अब बताओ तुम मुझे किस लिए फ़ोन कर रही थी?

कल्पना : कितनी बार कहूं क बोर हो रही थी तो कॉल किया था . सोचा था तुमसे मिल क ाचा टाइम पास हो जायेगा. वैसे तुम थे कहाँ ? 3 दिन तुम गायब रहे हो क्लास से. और 2 दिन तो कॉलेज में hi नहीं थे

अमित : कुछ नहीं यार एक दिन तो दोस्त क साथ काम था और दो दिन बस कौसिन्स क साथ निकल गए.

कल्पना : पर वो तो दोनों यहीं थी फिर कौन सी कौसिन्स?

आमिर : तुम नहीं जानती उन्हें वो गर्ल्स कॉलेज में हैं .

कल्पना : वैसे तुम किस दिन फ्री होते हो या फिर अपॉइंटमेंट लेनी पड़ेगी तुमसे मिलने क लिए.

आमिर : है है है नीस जोक . अपॉइंटमेंट hi लेनी पड़ेगी. वैसे तुम्हारी कोई सहेली नहीं है जिससे तुम बात कर सको टाइम स्पेंट कर सको.

कल्पना : क्या बताऊँ यार मैं इसी साल तो इस शहर में आयी हूँ. पहले मैं दूसरी शहर में रहती थी पापा क साथ. अब यहाँ फ्रेंड्स नहीं हैं तो क्या करूँ. वैसे भी मुझे लड़कियों वाली आदतें नहीं हैं न तो इस लिए बनती नहीं.

आमिर : तो कौन सी आदतें हैं तुम्हे ? वैसे दिखती तो लड़की जैसी hi हो , तुम लड़की नहीं हो क्या ?

कल्पना : वैरी फनी ! तुम्हे नज़र नहीं पता क मैं लड़की hi हूँ

एक नज़र मैंने कल्पना को सर से पाऊँ तक देखा . और मुआयने करने वाली नज़रों से जब मैंने उसकी ब्रैस्ट को देखा तो वो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखने लगी

कल्पना : हे ऐसे क्या घूर रहे हो?

आमिर : देख रहा हूँ क वाकई में तुम लड़की hi हो न . वैसे दिखती तो लड़की जैसी hi हो मगर थोड़ी अलग हो.

मेरी नज़र फिर से कल्पना की ब्रैस्ट पर गयी तो उसके गाल लाल हो गए.

कल्पना : तुम्हारी नज़र कहाँ जा रही है सब देख रही हूँ मैं बच्चू , भूल गए मैं जुडो प्लेयर हूँ. सोच लो क हशर क्या हो सकता है.

आमिर : वैसे तुम भी मत भूलो क मैं कुश्ती का प्लेयर हूँ और मेरे साथ कुश्ती खेलना तुम्हारे बस का नहीं .

‘ देखो तो देहातियों क लिए कॉलेज में शमले रख ली गयी हैं. जोड़ी अच्छी रहेगी’

हम अपनी बातों में लगे हुए थे क ये आवाज़ सुन कर हम दोनों की नज़र आवाज़ वाली की तरफ गयी ये शीना थी और उसके साथ उसकी सहेलियां . वो हमारा मज़ाक उदा रही थी. मैं अपने दांत पीस कर रह गया .

‘ इस देहाती को और कोई मिलेगी भी कैसे ? इसके लिए तो ऐसी hi शमले hi सही रहेंगी. ऊपर से तो कंगाल है शायद नीचे कुछ काम का हो ‘

ये नितिका थी जिसने कल्पना की इंदिरेक्ट वर्ड्स में बेइज़्ज़ती करने की कोशिश की थी. नितिका ने कल्पना क छोटे बूब्स को देख कर ऐसा कहा था और उसका सपाट चेहरा होने की वजह से उसके फीचर्स लड़कियों जैसे नहीं लगते थे शायद इसी लिए वो सब उसे शमले कह रही थी. मैं गुस्से से उनकी तरफ देख hi रहा था क बिजली की रफ़्तार से कल्पना अपनी सीट से उठ कर उनके पास पहुँच गयी और नितिका की कलाई मरोड़ कर उसकी पीठ पर लगते हुए उसे वहीँ अपने पैरों पर झुका दिया.

‘ ाआईई माआ साली छोड़ छोड़ मेरा हाथ आआआआ ‘ नितिका कराहने लगी

कल्पना : गुस्से में ) बड़ा प्राउड है न तुझे अपने ऊपर वाले और नीचे वाले हिस्से पर चल दिखा सबको . सबको पता तो चले क्या खास है तेरे पास जो तू इतना अकड़ रही है

नितिका की ऐसी हालत देख कर शीना ने कल्पना पर हाथ उठाना चाहा तो कल्पना ने फिरती से उसका हाथ हवा में अपने एक करते क साथ वापिस लौटा दिया

‘ आयआईईई माआआ ‘ शीना क मुँह से बस यही एक कराह निकली और वो अपना हाथ मल्टी हुई पीछे हैट गयी.

कल्पना : अगर आज क बाद कभी मेरे बारे में या मेरे दोस्त क बारे में एक भी गलत बात मुँह से निकली तो वो हाल करुँगी क कभी कोई तुम लोगों की तरफ देखेगा क्या थूकेगा भी नहीं . कल्पना सिंह राठौर नाम यद् रखना

फिर कल्पना ने नितिका को धक्का दे कर दूर गिरा दिया. कैंटीन में बैठे सब स्टूडेंट्स ये ड्रामा देख रहे थे. शीना और उसकी फ्रेंड्स अपनी इंसल्ट से भाग कर कैंटीन से बहार निकल गयी . इधर मैं अभी भी हैरानी से कल्पना को देख रहा था. अभी मेरे साथ थोड़ी देर पहले है है क बात करने वाली ये लड़की एक पल में hi कितनी खतरनाक बन गयी थी. मैं तो उसे देख कर हैरान था. मुझे इस तरह सोच में डूबा देख कर कल्पना बोली

कल्पना : ऐसे क्या देख रहे हो? कहा था न जुडो प्लेयर हूँ. देख लिया न ट्रेलर

आमिर : वाकई में यार तुम कमल हो. अब तो मुझे भी तुमसे दर क hi रहना पड़ेगा

कल्पना : तुम क्यों डरोगे ? तुम तो मेरे दोस्त हो . डरे तो वो जो मेरे साथ पन्गा लेने की कोशिश करे

आमिर : उन लोगों को समझ आ गयी होगी. अब कभी तुम्हारे सामने वो ऐसी कोई बात मुँह से नहीं निकलेगी

कल्पना : इसका मतलब वो पहले भी तुम्हारे साथ ऐसे बदतमीज़ी कर चुकी हैं? और तुम उन्हें कुछ कहते भी नहीं ? ये तो बहुत गलत है . मेरे पापा कहते हैं क अन्याय को सहना भी अन्याय है. इस लिए फ़ौरन जवाब देना चाहिए . आगे से तुम हमेशा मुझे साथ hi रखना . मैं देखती हूँ इन सब को

अमित : छोडो यार खामखाह अपना मूड ख़राब क्यों करना ? वैसे भी ये बड़े घरों को भरी हुई लड़कियां हैं. इसके मुँह लग्न मुझे ाचा नहीं लगता. वैसे एक बात तो अच्छी हुई इसी बहाने मुझे इसने बचने क लिए बॉडीगार्ड मिल गयी. है है है


लेक्चर कब का ख़तम हो चूका था और मेरी बात पूरी होते hi मोहित मीनल नेहा दीदी और राधा भी कैंटीन में आ गए .
 
अपडेट 109



नेहा दीदी : तो आ गए जनाब गाओं से ? घर सब कैसे हैं ?

आमिर : सब ठीक हैं दीदी आप सब को यद् करते हैं.

राधा : आज क्लास में नहीं थे ?

मोहित : क्लास में तो था मगर मम ने दोनों को अछि तरह से बातें करने क लिए यहाँ भेज दिया

राधा : ( मेरी और कल्पना की तरफ गौर से देखते हुए ) मतलब

कल्पना : ऐसा कुछ नहीं है यार. आमिर 2-3 दिन क्लास में नहीं आया था तो मैं वही पूछ रही थी इतने में मम की नज़र हम पर पद गयी और हमें क्लास से निकल दिया. शायद मम का मूड ाचा नहीं होगा वर्ण पहले तो कभी ऐसा नहीं किया कभी .

राधा : तो तुम लोग यहाँ आ गए और तब से यहीं बैठे हो अकेले ?

अमित : अकेले कहाँ थे अभी आयी थी न शीना एंड कंपनी भी और कल्पना से अच्छी तरह hi hello कर क गयी हैं सब

मेरी बात पर सब मुझे घूर कर देखने लगे मगर कल्पना हसने लगी

मीनल : क्या वो कल्पना की दोस्त हैं ?

कल्पना : अरे नहीं यार ऐसे hi बकवास कर रही थी तो ज़रा अकाल सीखा दी उनको

कल्पना की बात पर सब हैरान हो गए और टेंशन होने लगी उनको

नेहा दीदी : क्या हुआ है यहाँ ? कोई झगड़ा तो नहीं किया उन्होंने तुम्हारे साथ ?

राधा : फिर से तुम्हारे खिलाफ कुछ कर तो नहीं रही वो ? प्लीज मुझे बताओ क्या हुआ है

राधा तो कुछ ज्यादा hi टेंशन में आ गयी थी.. नेहा दीदी को भी टेंशन होने लगी इससे पहले क मैं कुछ बोलता कल्पना ने hi जवाब दिया

कल्पना : कुछ नहीं हुआ आप लोग टेंशन मत लो. अमित और मुझे कमैंट्स के रही थी तो मैंने 2 हाथ दिखा दिए. आखिर जुडो किस लिए सीखें हैं अगर अपना एटीएम सम्मान hi नहीं बचा सकती तो और क्या करुँगी इसका. वैसे मुझे तुमसे बड़ी शिकायत है अमित तुम कैसे सुन लेते हो उनकी बकवास?

अमित : अब लड़कियों क मुँह कौन लगे? वैसे भी मैं नहीं चाहता क झगड़ों में पद कर मैं स्टडी को भूल जॉन. कुत्तों क भोंकने से हठी को कोई फरक नहीं पड़ता

नेहा दीदी : राइट , कल्पना तुम भी इग्नोर किया करो . उन लोगों का तो काम है.

कल्पना : बिलकुल नहीं , अब से ऐसा नहीं होगा. मैं देखती हूँ कैसे वो कुछ बोलती हैं या करती हैं. आज से मैं अमित क साथ hi कैंटीन में आया करुँगी

कल्पना की बातों से राधा के चेहरे पर चिंता और ख़ुशी क मिले जुले भाव थे. मगर उसका ध्यान मुझ पर hi था . शायद पहले जो कुछ हो चूका है उस वजह से उसे मेरी फ़िक्र हो रही होगी.

मोहित : तो हो गया फाइनल आज से कल्पना होगी अमित की बॉडीगार्ड

मीनल : ये क्या बात हुई

अमित : बिलकुल , कल्पना किसी की बॉडीगार्ड नहीं बल्कि सबकी शील्ड होगी. और कल्पना प्लीज मैं कॉलेज में रहूं या न रहूं राधा और नेहा दीदी का ख्याल रखना

राधा : क्या मतलब है तुम्हारा ‘ कॉलेज में रहूं या न रहूं ‘ कहाँ जाने वाले हो तुम ? तुम कहीं नहीं जा सकते आयी बात समझ में .

राधा का चेहरा ऐसे हो गया था जैसे मैंने दुनिया से जाने की बात कह दी हो .

नेहा दीदी : हाँ तुम कहीं नहीं जा सकते . हमारा ख्याल कौन रखेगा ? तुम्हारे बिना तो वो लोग हमें और परेशां करेंगे

अमित : अरे मैं कहीं नहीं जा रहा मैं तो बस ये कह रहा था क अगर मैं कॉलेज में न भी आऊं कभी तो कल्पना आप दोनों का ख्याल रख लेगी

कल्पना : इसमें कोई कहने की बात है? ये मेरी भी तो बहने हैं

मोहित : और मेरी भी , मुझे भूल गया क्या?

अमित : अब तुम्हारे अंदर कल्पना की तरह जैकी चेन की आत्मा नहीं है न वर्ण तुझे hi कहता है है है

मेरी इस बात पर सब हसने लगे . जबकि कल्पना बनावटी गुस्सा दिखने लगी

कल्पना : लगता है तुम्हे भी दिखाना पड़ेगा जैकी चेन का भूत

बातों बातों में बेल्ल बज गयी और हम क्लास में वापिस चले गए . उसके बाद छुट्टी क वक़्त राधा ने मुझे फिर से घर आने को कहा और हम सब अपने अपने घर चले गए. लंच क बाद मैं अपने रूम में सुस्ताने चला गया.

वहीँ दूसरी और गौरी दोपहर क खाने से फ्री हो कर जब अपने बिस्तर पर लेती हुई थी तो सुबह की घटनाओं को यद् करने लगी. कैसे आज सुबह वो नहाने क बाद जब अमित को जगाने गयी तो उसके नंगे चोदे मरदाना साइन की बनावट देख कर वो कुछ देर उसे एक औरत की नज़र से देखती रही और उसका वो सोते हुए मासूम सा चेहरा उसे अपनी तरफ आकर्षित करने लगा. न चाहते हुए भी गौरी सब कुछ भूल कर अमित क ऊपर झुकती चली गयी. आयी तो वो अमित को जगाने थी मगर नज़ारा ऐसा था क वो अपना असल काम भूल कर अपने दिल क आगे झुकती चली गयी. अमित जो कल से इतनी चुदाई कर क थका हुआ पड़ा था उसे अंदाज़ा भी नहीं था क उसके ऊपर कौन झुक रहा है. रत भर कामिनी क साथ चुदाई करने की वजह से उसके दिमाग में कामिनी hi घूम रही थी. जब गौरी क गीले बल उसके चेहरे और गर्दन पर लगे तो वो नींद से जगा मगर ऑंखें नहीं खोली और रत क सुरूर में hi उसने कामिनी समझ कर गौरी को अपनी आगोश में ले लिया. गौरी तो जैसे किसी मायाजाल में फांसी हुई थी. अगले hi पल आमिर ने गौरी क होंठों को चूमना शुरू कर दिया. गौरी को जब अपने होंठों पर अमित क होंठो का एहसास हुआ तो उसने पीछे हटने की कोशिश की मगर तब तक देर हो चुकी थी और अमित उसके होंठों को अपनी गिरफ्त में ले चूका था. गौरी अमित को पीछे हटाने की कोशिश कर तो रही थी पर उसका शरीर उसका जैसे साथ hi नहीं दे रहा था. अमित लगातार गौरी क होंठ चूमता गया और गौरी न चाहते हुए भी उसके आगे समर्पण करती चली गयी. उसे पता भी नहीं चला कब अमित क हाथ उसकी छाती पर पहुँच गए . अमित क हाथ लगते hi उसकी छाती फ़ूलनि शुरू हो गयी और निप्पल कड़क हो गए. अभी गौरी इतने से hi संभाली नहीं थी क अमित का एक हाथ उसकी छूट पर चला गया और गौरी का जिस्म कुछ hi पलों में इतनी गर्मी महसूस करने लगा क शायद पहले इतनी जल्दी वो कभी भी इतना गरम न हुई हो . गौरी तो मज़े क आसमान में उड़ने लगी और उसके हाथ अमित की पीठ पर चलने लगे. गौरी अमित क होंठो को बराबर रिस्पांस दे रही थी. आज तक उसने कभी विजय को भी ऐसे किश नहीं किया था. ये एक नया एहसास था जो ज़िन्दगी में पहली दफा उसे मिल रहा था. कामिनी क साथ अमित को करते देख उसे मज़ा तो अत था पर इसमें इतना मज़ा अत है ये उसे अब पता चल रहा था . गौरी अमित का अनुसरण करते हुए वैसे hi उसके होंठ चूस रही थी जैसे वो कर रहा था. गौरी की छूट छुडासी होने लगी और उसकी कमर अपने आप उठने लगी. तभी अमित ने उसका हाथ पकड़ कर अपने लैंड पर रखा. एक पल में hi गौरी की रिड की हड्डी तक उसे कम्पन महसूस हुई. गौरी ने अपना हाथ पीछे हटा लिया 1-2 बार और जब उसने लैंड को नहीं पकड़ा तो अमित ने उसका हाथ अपने लोअर में दाल कर अपना लैंड ज़बरदस्ती उसके हाथ में थमा दिया. ‘ uffffffffffffg कक्ककक्कव आआआह ‘ बस ऐसी hi सिसकी उसके होंठो से अचानक निकल गयी . अमित का लैंड किसी मोठे डंडे को तरह सख्त अकड़ा हुआ उसके हाथ में था. ये वही लैंड था जिसने दीपिका और कामिनी को छोड़ कर माँ बनाया था. पता नहीं कैसे कामिनी इतना बड़ा लैंड अंदर लेती थी . मगर ये लैंड खुद गौरी की छूट में भी जा चूका था और इसी क आशीर्वाद से उसकी कोख हरी हुई थी. गौरी उस मुसल से लैंड को पकड़ कर उसका अचे से जायज़ा लेने लगी मगर छूट तो जैसे उस लैंड का एहसास hi बर्दाश्त न कर पायी और पानी की नदियां बहाने लगी. गौरी का जिस्म झटके खा कर जब ठंडा हुआ तो उसे अपनी हालत का एहसास होते hi वो जल्दी से अमित को धक्का दे कर भाग गयी. अमित की ऑंखें खुलने से पहले hi वो जा चुकी थी. एक बार नहाने क बाद भी उसे फिर दोबारा नहाना पड़ा पर आज उसको जो कुछ एहसास हुआ था वो अद्भुत अद्वितीय था. अभी भी बीएड पर लेती वो उसी एहसास में डूबी थी और फिर से एक बार उसकी छूट छुडासी होने लगी थी .

गौरी : ( मन में ) हाय कितना सख्त और कितना मोटा तगड़ा है. कैसे गया था वो मेरे अंदर ? अगर मैं होश में होती तो पक्का बेहोश हो जाती . काश मैं सुबह उठ कर न आयी होती तो वो नींद में hi अंदर घुसा देता . मुझे रुकना चाहिए था .

गौरी का दिमाग : ाचा हुआ क वो नींद में था वर्ण क्या सोचता वो तेरे बारे में? वो तो कामिनी समझ कर वो सब कर रहा था मगर तू तो होश में थी? क्या इज़्ज़त रह जाती तेरी उसकी नज़रों में ? ाचा हुआ उसे शहर जाना था वर्ण कामिनी से बात करता तो तेरी पोल खुल जाती.

गौरी का दिल : ऐसा कुछ नहीं होता . वो पहले भी तो कर चूका है फिर भी मेरी इज़्ज़त करता है. अगर फिर से कर लेता तब क्या हो जाता. बल्कि फिर तो आगे क लिए रास्ता खुल जाता. मुझसे तो अब बर्दाश्त नहीं हो रहा. आज पता चला क चुदाई का असल मज़ा क्या होता है. बिना अंदर डाले hi उसने इतनी जल्दी मेरा पानी निकल दिया अगर अंदर कर देता तो मज़े से मैं मर hi जाती. जो भी हो मैं उसका दंड अंदर ले क hi रहूंगी चाहे मेरी जान hi क्यों न चली जाये

गौरी का दिमाग: अरे कुछ तो शर्म कर वो तेरा बीटा है

गौरी का दिल : बीटा वो दामिनी का है मैंने तो बस उसका ख्याल रखा है और देख उसी का फल उसने मुझे माँ बना कर दिया है. उसके इस एहसान को तो मैं साडी उम्र नहीं उतर सकती. मेरे लेट में उसका बचा है इस नाते वो मेरा पति होने का अधिकार रखता है और फिर पति जब चाहे अपनी पत्नी को चोदे इसमें गलत क्या है. तू अब अपनी जुबान बंद रख और मुझे उसकी सेवा करने दे वैसे भी कामिनी अब उसके साथ सब बंद करने वाली है तो मुझे hi अमित का ध्यान रखना होगा और उसकी सेवा करनी होगी.

गौरी कितनी hi देर तक अपने बूब्स और छूट को कपड़ों क ऊपर से hi सहलाती अमित क बारे में सोचती रही. मन hi मन अब वो दीपिका की कही बातों पर अमल करने का सोचने लगी क्यूंकि अब उसके अंदर जो आग जल कर बेकाबू होने लगी थी उसका एक hi हल था और वो था अमित

उधर शिवानी जब शीना से मिली तो उसने देखा शीना आज बहुत गुस्से में है और नितिका उसके गुस्से को और भड़का रही थी.

शिवानी : आखिर बात क्या है शीना इतना गुस्से में क्यों हो तुम? क्या हुआ है?

नितिका : मैं बताती हूँ , उस देहाती ने आज शीना और मुझे कैंटीन में सब क सामने पिटवाया . अब तो उस साले को छोड़ना नहीं है और उस साली शमले को भी नहीं छोड़ना . सरे कॉलेज क सामने उसने हमारी इंसल्ट की है.

शिवानी : शॉकेड ) लेकिन हुआ कैसे ये सब ? बात तो बताओ

नितिका : हम लोग कैंटीन में गए थे वहीँ वो देहाती उस लड़की क साथ था . हम बातें कर रहे थे क उस शमले ने हम पर हमला कर दिया. सब क सामने उसने हमें मारा . अब तो कुछ भी हो जाये उन दोनों को छोड़ना नहीं है. उस साली शमले का तो गैंगरेप होना चाहिए. साली लड़की क नाम पर शमले है कॉलेज में. कितना सख्त हाथ था साली का. लड़कियों वाली कोई बात तो लगती hi नहीं कोई.

शिवानी : ये क्या बातें बनाये जा रही हो ? वो भी हमारी तरह लड़की है कुछ तो शर्म करो. और ज़रूर तुमने कुछ कहा होगा तभी झगड़ा हुआ होगा.

शीना : गुस्से में )नितिका सही कह रही है. झगड़ा उसने hi शुरू किया था. हम लोग तो आपस में बात कर रहे थे. आने दो मोंटी को आज उसका गेम कर क रहूंगी मैं.

शिवानी शीना क गुस्से से दर रही थी इतने में मोंटी भी आ गया . मोंटी को बात का पहले hi पता चल चूका था . उसने शीना को गुस्से में देखा तो सीधा उसके पास आया

मोंटी : शीना बात क्या है? इतना गुस्से में क्यों हो ? मुझे कैंटीन वाली बात का पता चल गया है . तुम शांत रहो मैं उस सेल को छोडूंगा नहीं.

शीना : मुझे कुछ नहीं पता. आज hi साले का कुछ करो उसने सबके सामने हमारी इंसल्ट की है. मैंने तुम्हे ड्रग्स लेन को कहा था वो लाये तुम?

शीना की बात पर शिवानी हैरान हो गयी. क्यूंकि शीना तो ड्रग्स लेती नहीं थी फिर वो ड्रग्स क्यों मांग रही है.

मोंटी : कूल डाउन शीना . ड्रग्स का क्या करना है तुमने ?

शीना : ड्रग्स उस देहाती क बैग में दाल कर उसे कॉलेज से निकलवा दूंगी आज hi.

शिवानी शीना की बात सुनते hi घबरा गयी. शीना इस हद तक जा सकती है गुस्से में ये देख कर वो डरने लगी. शीना का गुस्सा कैसा है ये तो वो पहले hi जानती थी मगर अब बात अमित पर आ रही थी तो बेचारी का दिल घबराने लगा.

मोंटी : कूल कूल शीना अपना दिमाग ठंडा रखो . उस देहाती क साथ क्या करना है मैंने सोच लिया है. एक hi वॉर से सब को ठिकाने लगा दूंगा बस कुछ दिन शांत रहो. जब तक मैं नहीं कहता तुम लोग कुछ नहीं करोगी और न hi उसके आसपास जाओगी. मुझ पर भरोसा रखो इस बार वो साला देहाती 2 कोड़ी का मज़दूर और उसकी वो कौसिन्स सब कॉलेज से बहार होंगे और हमारे पाऊँ पर नक् रगड़ क माफ़ी मांगेंगे . अब सिर्फ मेरी बात को मन्ना बिना सवाल किये. मुझे इसमें तुम्हारी ज़रूरत पड़ेगी और तुम्हे एक काम करना होगा

शीना : मुझे नहीं सुन्ना कुछ भी तुम आज क आज उसे सबक सिखाओ बस

मोंटी : मुझ पर भरोसा नहीं है क्या? उस साले पर हाथ डालने से हम लोग प्रिंसिपल की नज़र में आ जायेंगे. कुछ दिन पहले रुक जाओ फिर देखना तेरे कदमो में पड़ा वो भीख मांग रहा होगा.

शिवानी : करने क्या वाले हो तुम? क्या मैं कुछ मदद करूँ?

मोंटी : नहीं अभी कुछ नहीं बताने वाला मैं. जब ज़रूरत होगी तो बता दूंगा.

मोंटी की बात पर शीना चुप हो गयी मगर शिवानी का दिल घबरा रहा था. ज़रूर मोंटी कुछ बड़ा करने वाला है मगर वो बता नहीं रहा क क्या करेगा. शिवानी को दर लगने लगा क मोंटी क्या करेगा उसने अमित की कौसिन्स का ज़िकर भी किया है मतलब उनके साथ भी कुछ बुरा होगा . कैसे भी कर क मोंटी क प्लान क बारे में जानना होगा . इस के लिए ज्यादा से ज्यादा शीना क साथ hi रहना होगा. ज़ाहिर है अभी शीना भी नहीं जानती मगर मोंटी उसे बताएगा ज़रूर. कॉलेज से छुट्टी क बाद आज शिवानी भी शीना क साथ उसके घर चली गयी.

इधर मैं लेते लेते कब सो गया मुझे पता hi नहीं चला और मेरी जग आंटी क जगाने से खुली .

आंटी : आज स्टेडियम नहीं जाओगे क्या? टाइम देखो क्या हो रहा है.

मैंने उठते hi टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे . मैंने जल्दी से फ्रेश हो कर कपडे बदले और जूस पि कर स्टेडियम रवाना हो गया . आज स्टेडियम में भी कोच साहब ने अच्छी क्लास ली. नीरज भी पूछ रहा था क मैं छुट्टियां क्यों करने लगा हूँ तो मैंने बता दिया क घर पर कुछ काम था तो आ नहीं पाया. प्रैक्टिस क बाद मैंने मंजू म क घर जाने का सोचा. वो बहुत गुस्से में थी इसी लिए आज उन्होंने मुझे क्लास से ऐसे बहार किया . पहली बार उनके इस तरह क बिहेवियर से मैं समझ गया था क वो बहुत ज्यादा गुस्से में हैं और नाराज़ भी हैं . हों भी क्यों न मैंने एक तो उनसे उस दिन झगड़ा कर लिया ऊपर से उनका फ़ोन न उठा कर उन्हें गुस्सा दिला दिया. ट्यूशन पर भी नहीं गया और न hi कॉलेज में तो वो पता नहीं क्या क्या सोच बैठी होंगी. आज मुझे कैसे भी कर के उन्हें मानना होगा . यही सोच कर मैं उनके घर की तरफ निकल पड़ा .

रस्ते में मुझे यद् आया क मैं खली हाथ जा रहा हूँ मुझे कोई गिफ्ट ले लेना चाहिए ताकि मैं उन्हें गिफ्ट देकर मन सकूँ. वैसे भी कोई कितना भी नाराज़ हो गिफ्ट देने से नाराज़गी ख़तम हो hi जाती है. मगर उन्हें गिफ्ट क्या दूँ ये भी समझ नहीं आ रहा था. आखिर उनकी पर्सनालिटी क हिसाब से देना पड़ेगा जिसे वो कबूल भी करें. मैं सोचने लगा क उन्हें ऐसा क्या दिया जा सकता है जिसकी उन्हें ज़रूरत भी हो और उन पर ाचा भी लगे. मगर ऐसा क्या दूँ? क्या नहीं है उनके पास ?

मैं सब कुछ यद् करने की कोशिश करने लगा क क्या नहीं है उनके पास. सब कुछ तो है उनके पास फिर क्या दूँ? अचानक मुझे रस्ते में जेवेलरी शॉप दिखाई दी और मैं सीधा वहीँ चला गया. अंदर का कर मैं देखने लगा क क्या दिया जाये उन्हें तो मेरी नज़र शीशे क बॉक्स में पड़ी खूबसूरत पायलों पर पड़ी . पायल को आवाज़ तो शुरू से hi मुझे बहुत पसंद थी. मंजू म पायल नहीं पहनती थी मगर मैं इमेजिन करने लगा क उनके पाऊँ में पायल कैसी लगेगी और उनके चलने से छम छम की आवाज़ कितनी अच्छी लगेगी. मगर मंजू म विडो थी तो वो पायल शायद न पहने शायद इसी लिए वो पहनती नहीं होंगी. मगर मैंने सोच लिया क उन्हें मैं पॉल पहना क रहूँगा . उनके पाऊँ में पायल बहुत प्यारी लगेगी वैसे भी उन्हें अपने पुराणी ज़िन्दगी को भूलना होगा. और इसके लिए ये सब ज़रूरी है . मैंने दुकानदार को पायलें दिखने को कहा. दुकानदार ने मुझे बहुत साडी पायलें दिखाई. मगर मैंने वो सेलेक्ट की जो बिलकुल नए डिज़ाइन की थी और जिसमे घुंघरू भी काम थे यानि क आवाज़ बहुत काम आएगी जिससे मम मन नहीं करेंगी . ऐसी पायलें आज कल लड़कियां पहनती हैं. एक डोरी की तरह पायल बानी हुई थी और बस जोड़ पर hi 3-4 घुँघुरु लगे हु थे. मुझे ये बहुत पसंद आयी सिंपल भी और खूबसूरत भी. मैंने दुकानदार को वो पैक करने क लिए कह दिया . 3000रस की कार्ड से पेमेंट कर क मैं वो पैक करवा कर मम क घर को चल दिया.

आज मैं थोड़ा लेट पहुंचा था मम क घर और घर में बिलकुल सन्नाटा था . मम इस वक़्त वैसे भी अकेली hi होती थी. मगर मुझे अब दर लगने लगा क मैं मम का सामना कैसे करूँगा? उनके गुस्से को शांत कैसे करूँगा वो पता नहीं क्या क्या कहेंगी? पता नहीं वो घर में घुसने भी देंगी या नहीं? मैंने डरते डरते बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा नहीं खुला. मैंने फिर से बेल्ल बजायी तो इस बार अंदर से क़दमों की आहात सुनाई दी. तभी दरवाज़ा खुल गया और सामने मंजू म कड़ी थी. इस वक्त वो मेरे दिए हुए गाउन में थी. चेहरे पर मायूसी दिखाई दे रही थी मगर मुझे देखते hi उन्हें गुस्सा आ गया .

मंजू म : अब क्या लेने ए हो यहाँ ? जाओ चले जाओ यहाँ से .

अमित : क्या अंदर भी नहीं आने देंगी मुझे ? मैं जनता हूँ आप गुस्सा हैं और होना भी चाहिए मगर मेरी बात तो सुन लीजिये एक बार . काम से काम एक मौका तो मिलना चाहिए सफाई देने का.

मेरी इस बात पर मंजू म पलट कर अंदर चली गयी और मैं भी उनके पीछे अंदर आ गया.

मंजू म : बोलो क्या कहना चाहते हो

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी मुझसे गलती हो गयी . उस दिन पता नहीं क्यों मुझसे गुस्सा आ गया था. मेरा उस लड़की से ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जैसा आप समझ रही थी .

मंजू को तो जैसे अमित का दीदी कहना भी अब पसंद नहीं आ रहा था. उसने फिर से गुस्से से अमित को देखा

मंजू म : गुस्से में ) तो मैं गलत थी ? और आज तुम्हे टाइम मिला है सफाई देने का और माफ़ी मांगने का ? आज भी क्यों आये , रहने देते वैसे भी अब मुझे कोई बात नहीं करनी है तुमसे

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी ? मैं तो आपका छोटा भाई हूँ न ? हो जाती है गलती सब से , इसे मेरी पहली और आखिरी गलती समझ कर माफ़ कर दीजिये

मंजू म : कोई भाई वाई नहीं तुम मेरे और न मैं तुम्हारी दीदी. सब नकली है सब झूठ है. तुमने सिर्फ अपना मतलब निकलने क लिए मुझे बहिन बनाया और अब फिर से मुझे बेवक़ूफ़ बनाने आ गए हो. तुम्हे मेरी कोई परवाह न पहले थी न अब है. अगर होती तो कभी ऐसा नहीं करते . इतने फ़ोन किये थे मैंने , न तुमने फ़ोन उठाया और न hi वापिस कोई जवाब दिया. तुमने साबित कर दिया क रिश्ते नाते सिर्फ मतलब क होते हैं. मतलब हो तो रिश्ता है न हो तो नहीं.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं? आप मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं? मुझे आपसे क्या मतलब था ? और अब क्या मतलब है मुझे ? मैं आपका फ़ोन नहीं उठा पाया क्यूंकि हर बार मैं किसी न किसी चक्कर में फसा हुआ था और रिप्लाई करने क यद् hi नहीं रहा मगर आप गलत समझ रही हैं. मैं अपनी उलझनों में फसा हुआ था और आप पता नहीं क्या क्या सोच रही हैं . मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी .

मंजू म : हाँ हाँ अब तो सब गलती मेरी hi निकलेगी. अच्छी भली थी मैं . अकेली अपनी ज़िन्दगी गुज़र रही थी मगर तुम पता नहीं कहाँ से आ गए मेरी ज़िन्दगी में . मैंने समझाता कर लिया था अपनी इस मनहूस ज़िन्दगी क साथ और अपने आंसू खुद hi पांच लिए थे. मगर नहीं ऊपर वाले को ये भी बर्दाश्त नहीं हुआ और तुम्हे भेज दिया फिर से मेरे ज़ख्मों को कुरेदने क लिए. क्यों आये तुम मेरी ज़िन्दगी में ? ( रट हुए ) जैसे भी थी खुश थी मैं अकेले रह कर. तुमने आ कर मेरी तन्हाइयों को भी मुझ से छीन लिया. क्यों तुमने मुझे बदलने को कहा ? क्यों मुझे हसने खुश रहने को कहा ? ताकि फिर से रुला सको. देखो मैं रो रही हूँ , अब तो खुश हो न तुम?

मंजू म को रट हुए देख कर मुझे अपने दिल में दर्द सा महसूस होने लगा और उनकी ये बातें खंजर की तरह मेरे दिल को छलनी करने लगी . न चाहते हुए भी मेरी ऑंखें भर आयी.

मंजू म : पहले मुझे बहिन बनाया फिर मुझे अपनी मर्ज़ी से बदलने लगे . मुझे क्या पहना चाहिए क्या नहीं , मुझे कैसे रहना चाहिए ये सब तुम डीडे करने लगे जैसे भाई नहीं मेरे पति हो तुम. कभी मेरे साथ हंसी मज़ाक करते कभी लड़ाई झगड़ा , मुझे अपनी असर दाल दी थी तुमने . मैं तुम में अपनी दुनिया देखने लगी थी. मुझे अपने लिए हर रिश्ता तुम्हारे रूप में मिलने लगा. कभी बड़े भाई की तरह तुम मुझे शिक्षा देते कभी दन्त देते , कभी दोस्त की तरह मेरे साथ बातें करते वक़्त बिताते कभी बर्फ की तरह अपनी मर्ज़ी क कपडे दिलाते और अपनी बातें मनवाते . जो कुछ मुझे मेरी ज़िन्दगी में नहीं मिला था वो सब तुम में देखने लगी थी मैं . मगर तुमने मुझे इस तरह से इग्नोर कर दिया जैसे मैं कभी तुम्हारे लिए कुछ थी hi नहीं. तुमने मेरे सरे जखम फिर से हरे कर दिए . इससे ाचा था मुझे मर hi देते क्यों किया मेरे साथ ये सब क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा? काश मैं उसी दिन मर गयी होती जब तुमने मुझे बचाया था. न तुम मेरी मदद करते न मैं तुम्हे मिलती . चले जाओ मेरी ज़िन्दगी से मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती , चले जाओ अकेला छोड़ दो मुझे .

मंजू म की बातों से मुझे उनके मनो भाव और उनके दर्द का एहसास होने लगा. वो मेरे सामने बैठी तो रही थी और मेरी भी आँखों से पानी बहे जा रहा था. मैं उनकी बातों को hi सोचने लगा क वो मुझसे क्या क्या एक्सपेक्ट करने लगी थी . वो मुझमे एक बहु एक दोस्त और एक मर्द भी देखने लगी थी जो हर औरत की ज़िन्दगी में सबसे खास होता है. शायद इसी लिए उन्हें उस दिन मुझे ज्योति क साथ देख कर इतना गुस्सा आया था और आज भी मुझे कल्पना क साथ देख कर वो इतना गुस्से में आ गयी थी मगर मैंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था. मुझसे मंजू मम क रोना बर्दाश्त नहीं हो रहा था. पता नहीं क्यों पर मेरी धड़कन जैसे रुकने लगी थी . पर नहीं क्यों मंजू म से मेरा इतना जुड़ाव था क बर्दाश्त नहीं हो रहा था उन्हें रोटा देख कर. मैंने आगे बाद कर मंजू म क कंधे पर हाथ रख तो

मंजू म : रट हुए गुस्से में ) don’t टच में . चले जाओ यहाँ से. जाओ अपनी उन्हें सहेलियों क पास . मेरे साथ कोई रिश्ता नहीं है तुम्हारा. समझ लो मंजू मर गयी तुम्हारे लिए. मैं जी लुंगी अकेली जैसे पहले थी. मुझे किसी क सहारे की ज़रूरत नहीं है. चले जाओ यहाँ से .

अमित: मैं आपका भाई हूँ

मंजू म : मर चूका है मेरा भाई और नहीं चाहिए मुझे भाई . क्यों तुमने मुझे सपने दिखाए थे ? क्यों मुझे हसना खुश होना सिखाया था . क्यों मेरे इतने करीब ए क मुझे अपनी आदत दाल दी? मैं कैसे कपडे पहनूं कैसे रहूं क्यों बताते थे तुम? मैं जो प्यार कभी महसूस नहीं किया था वो एहसास मुझे तुमने दिलाया , क्यों ? भाई बन कर आये और मेरे दिल में प्यार का दिया जला दिया क्यों ? अगर तुम्हारी ज़िन्दगी में पहले hi और कोई थी तो मेरे पास क्यों ए थे ? क्यों मेरे इतना करीब ए थे ? क्यों मेरे सोये अरमान जगाये ? क्या सिर्फ इसी लिए क फिर से उन्हें कुचल सको ?

मंजू म की बातों से साफ ज़ाहिर हो गया क वो मेरे बारे में क्या सोचती हैं . मुझे दुःख भी हो रहा था और हैरानी भी क वो जब ये सब सोचने लगी ? मैंने तो बस उन्हें खुश रखने की कोशिश की थी मगर कब वो इसे प्यार समझ बैठी ये मुझे पता hi नहीं चला. शायद मेरी hi गलती थी , मुझे उनके इतना करीब नहीं होना चाहिए था. वो पहले hi इतनी दुखी थी अपनी ज़िन्दगी से. उन्हें कभी वो प्यार मिला hi नहीं था जो वो चाहती थी ऐसे में कोई भी इंसान ज़रा सी प्यार की गर्माहट से पिघल hi जायेगा. मंजू क साथ भी ऐसा hi हुआ था. अब मुझे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था . मेरे सामने मम रोये जा रही थी और मैं कुछ कर नहीं प् रहा था . मेरे हाथ में अभी भी वो गिफ्ट था जो मैं इतने चौ से लाया था मगर बात करने का भी मौका न दिया मम ने तो .

अमित : ी ऍम सॉरी मम , सब गलती मेरी hi है . मुझे आपकी ज़िन्दगी में दखलंदाज़ी करनी hi नहीं चाहिए थी. मगर ये भी सच है क मैं सिर्फ आपको खुश देखना चाहता था. और देखिये मैंने क्या कर दिया , आपको फिर से रुला दिया. जब भी आपको देखता था तो ऐसा लगता था क आपसे मेरा कोई रिश्ता है मगर शायद मैं गलत था और मैंने अपनी गलती से आपको रोने पर मजबूर कर दिया . मैं जनता हूँ क आप मुझसे माफ़ नहीं करेंगी पर फिर भी मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ . मैं आज भी आपको खुश देखना चाहता हूँ. आप रोटी हुई बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती. मैं आज क बाद कभी आपको परेशां नहीं करूँगा पर प्लीज आप भगवन क लिए कभी मत रोना. मैं चलता हूँ मम और फिर कभी नहीं आऊंगा . ये मैं आपके लिए लाया था सोचा था आप इसे देख कर सारा गुस्सा भूल जाएँगी पर लगता है अब कोई जगह बची hi नहीं है रिश्तों क लिए . इसे रख लीजिये , अगर कभी मुझे माफ़ कर पायी तो इन्हे पहन लीजियेगा वर्ण फेंक दीजियेगा. मैं चलता हूँ मम. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना और खुश रहना .

इतना कह कर मैंने वो पायलों वाला गिफ्ट बॉक्स उनके पास रख कर पलट कर बहार को चल दिया. मंजू म घुटनों में मुँह दबाये रो रही थी और मैं दरवाज़े से बहार निकल गया. मैं बहार तो आ गया था मगर मेरा दिल भरी होता जा रहा था. मेरे दिल से बार बार एक hi आवाज़ आ रही थी क मुझे इस वक़्त मंजू म को सहारा देना चाहिए और मैं उन्हें रोटा हुआ छोड़ कर जा रहा हूँ. मेरे कदम आगे बाद hi नहीं रहे थे और धड़कन थी क धीमी होती जा रही थी.

अंदर सोफे पर बैठी मंजू रोये जा रही थी उसने अपने दिल का सारा गुबार निकल दिया था. उसने गुस्से में अमित को अपनी ज़िन्दगी से चले जाने को कह तो दिया था मगर अमित क जाते hi जैसे उसकी धड़कन रुकने लगी . उसे ऐसा लगने लगा क जैसे उसकी ज़िन्दगी उससे दूर जा रही है. उसे फिर से वही दर्द महसूस होने लगा जब उसका भाई दुनिया से हमेशा क लिए चला गया था और उसके जाने क बाद मंजू की ज़िन्दगी हमेशा क लिए लूट गयी . अमित क जाने का एहसास बिलकुल वैसा hi था आज. ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा दुःख मंजू को अपने भाई की मौत पर hi हुआ था और आज उसे वही दुःख फिर से महसूस होने लगा. बेचारी का नाज़ुक कोमल दिल ये दर्द कहाँ बर्दाश्त कर सकता था. मंजू ने अपने दिमाग की सुनते हुए गुस्से से अमित को निकल तो दिया पर अब उसका दिल अमित क जाने से जैसे धड़कना hi बंद करने वाला था. अचानक मंजू ने चेहरा उठा के देखा तो सामने अमित नहीं था और दरवाज़ा बंद . उसे अमित क आखिरी शब्द यद् आने लगे क वो अब कभी नहीं आएगा. मनो वो कह कर गया हो क वो भी दुनिया छोड़ कर जा रहा है और भाई की तरह अब वो भी कभी मंजू को नज़र नहीं आएगा. मंजू का दिल बैठने लगा उसकी नज़र पास में पड़े गिफ्ट पर पड़ी जो अमित रख कर गया था . अमित ने कहा था क अगर वो उसे माफ़ कर पायी तो उसे पहन लेना . ऐसा क्या है इस गिफ्ट में जल्दी से मंजू ने गिफ्ट को उठाया जो पैक था. उसने एक झटके में व्रैप किया हुआ लाल चमकीला कागज़ उतर दिया और एक लम्बा सा लाल बॉक्स निकला जो कपडे से कवर था . देखने को तो ऐसा लग रहा था जैसे इसमें पेन हो मगर बॉक्स की बनावट कुछ और hi बयां कर रही थी . मंजू ने जल्दी से बॉक्स खोला तो सामने पायलों का जोड़ा था. एक पल क लिए मंजू का दिल तेज़ी से धड़का. क्यूंकि ऐसा गिफ्ट तो कोई प्रेमी या पति hi दे सकता है. कितनी खूबसूरत लग रही थी वो पायलें . एक डोरी की तरह दिखने वाली पायल और जोड़ पर घुँघुरु . इतना सिंपल और खूबसूरत तोहफा जिसे पहनने में भी किसी को कोई दिक्कत नहीं हो सकती . अमित ने इतना प्यारा तोहफा मंजू क लिए लिया था और उसने एक बार भी उसे मौका नहीं दिया . इस तोहफे का मतलब तो यही था क अमित भी उसे कहीं न कहीं दिल में प्यार करता है. मगर मंजू ने उसे जाने क लिए कह दिया. अब मंजू को अपनी गलती पर पछतावा होने लगा. उसे एक बार मौका देना चाहिए था अमित को. क्या पता वाकई में वो कहीं बिजी रहा हो. उसे एक बार उसकी बात सुन्नी चाहिए थी. अगर अमित कभी वापिस न लौटा तो ? ये बात जैसे मंजू की धड़कन रोकने क लिए काफी थी . मंजू एक झटके में उठी और दरवाज़े की तरफ दौड़ी. मंजू का एक मिनट में hi हल ऐसा हो गया था जैसे क वो अभी पागल हो जाएगी और अगर अमित वाकई में उसे छोड़ कर चला गया तो कहीं वो इस सदमे से मर hi न जाये . मंजू की आँखों से जार जार आंसू बह रहे थे. उसने जैसे hi दरवाज़ा खोला तो उसकी नज़र अमित पर पड़ी जो अपनी बाइक क पास खड़ा जैसे शुन्य में कहीं खोया हुआ था. उसकी पीठ मंजू की तरफ थी इसलिए उसे पता hi नहीं था क मंजू दरवाज़े पर कड़ी उसे देख रही है . मंजू की रूकती हुई धड़कन को मनो फिर से उम्मीद की किरण नज़र आ गयी और वो फिर से धड़कने लगी . एक पल क लिए मंजू अमित को देखती रही और फिर पागलों की तरह दौड़ती हुई अमित क पीठ पर hi चिपक गयी.

मंजू म : क्या सचमुच मुझे छोड़ कर चले जाओगे ? सब की तरह तुम भी मुझे अकेला छोड़ जाओगे ? तुमने तो वडा किया था तुम मुझे कभी नहीं छोड़ोगे , फिर आज कैसे जा रहे हो ? क्या बस इतनी hi परवाह थी मेरी? क्या तुम भी अपनी मंजू को अकेला रोने क लिए छोड़े जा रहे हो? इससे ाचा है मेरी जान hi साथ लेते जाओ . मैं और अकेली रहना नहीं चाहती . मुझे प्यार चाहिए मुझे तुम चाहिए . मुझे यूँ अकेला छोड़ कर मत जाओ , मर जाउंगी मैं .

मैं जो कब से खड़ा वापिस जाने की सोच रहा था मगर मेरे कदम आगे नहीं बाद रहे थे अचानक पीछे से मंजू म ने मुझे ऐसे गले लगा लिया और रट हुए जब ये बातें कहीं तो मैं खुद को रोक नहीं पाया और पलट कर मंजू म को कास क गले लगा लिया. हम दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे.

अमित : ख़बरदार मरने की बात की तो. पहले खुद hi जाने को कहती हो फिर खुद hi ऐसी बातें करती हो आप . मैंने एक बार भी कहा था क मैं आपको छोड़ दूंगा ? आप hi मुझे जाने को कह रही थी. मैं तो माफ़ी मांगने आया था आपसे. मुझे पता था आप नाराज़ हैं मगर मैंने ऐसा जान बुझ कर नहीं किया था. मैं तो सको हमेशा हस्ते हुए देखना चाहता हूँ और आप कह रही थी क मैं आपको रुलाने आया हूँ? पता है जब आप रोटी हैं तो यहाँ मेरे दिल में दर्द होता है. आप खुद भी रोटी हैं और मुझे भी रुला रही हैं . आप बहुत बुरी हैं. मैं तो आपको खुश देखना चाहता हूँ और आप मुझ पर शक करती हैं

मंजू म : मैं बहुत बुरी हूँ न इसी लिए . मैं क्या करूँ ? मुझसे अब नहीं रहा जाता तुमसे दूर. तुम्हे किसी और क साथ देखती हूँ तो बर्दाश्त नहीं होता. मैं जानती हूँ ये गलत है . तुम्हारी अपनी ज़िन्दगी है पर मैं इस दिल को कैसे समझों जो अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. तुमने पता नहीं क्या जादू कर दिया है अब तुम्हारे सिवा मुझे और कुछ नहीं चाहिए . तुम चाहो तो मैं सब कुछ छोड़ दूंगी जैसे तुम कहो वैसे रहूंगी मगर कभी मुझे खुद से जुड़ा मत करना. मैंने बहुत रोका खुद को मगर रोक नहीं पायी अब मैं तुमसे दूर रह कर जी नहीं पाऊँगी . या तो मुझे अपना लो या मुझे मर्दो

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं मैं आपको कुछ होने नहीं दूंगा और मैं कहीं नहीं जा रहा. मैं हमेशा आपके साथ हूँ . अब आप रोना बंद कीजिये वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा

मंजू : आंसू पोछते हुए ) तुम मेरे साथ हो तो मैं कभी नहीं रोउंगी बस तुम मेरा साथ मत छोड़ना मैं नहीं रह सकती तुम्हारे बिना . इतने दिन तुम्हारे बगैर मैंने कैसे करें हैं ये सिर्फ मैं जानती हूँ. मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी अब से तुम मेरे साथ hi रहोगे .

अमित : चलिए अब अंदर चलिए वर्ण लोग हमें ऐसे देखेंगे तो क्या कहेंगे

मंजू म : मुझे किसी की परवाह नहीं है . मुझे बस तुम्हारा साथ चाहिए. इस दुनिया ने आज तक मुझे दिया hi क्या है. कभी किसी ने आ कर मेरे आंसू तक नहीं पोंछे .

अमित : अब अंदर तो चलिए क यहीं खड़ा रखेंगी मुझे ?

फिर हम दोनों अंदर आ गए . मगर अंदर आते hi फिर से मंजू म ने मुझे गले लगा लिया . मैंने भी उनकी पीठ पर बाज़ू कास लिए और फिर उनकी पीठ सहलाते हुए उन्हें सँभालने लगा .

अमित : वैसे अब तो आप नाराज़ नहीं हैं न?

मंजू म : ुँहुँणन

अमित : आपने गिफ्ट खोल कर देख लिया ? कैसा लगा ?

मंजू म : बहुत ाचा है . मैंने कितने सैलून से पाऊँ में पायल नहीं पहनी. तुम चाहते हो मैं पहनूं तो खुद अपने हाथो से पहननी पड़ेगी.

अमित : जैसा आप कहें

मंजू म : अमित एक बात पूछूं ?

अमित : पूछिए ?

मंजू म : तुम समझ रहे हो न मैं तुमसे क्या चाहती हूँ ?

मैं मम की बात तो समझ गया था मगर उन्हें क्या जवाब दूँ ये समझ नहीं आ रही थी. अभी जो कुछ हम दोनों क बीच हुआ था उसको देख कर उन्हें इंकार करने का तो मैं सोच भी नहीं सकता था मगर को वो छह रही थी मैंने वैसा भी कभी नहीं सोचा था . मैं उनके सवाल पर चुप रहा तो वो मुझसे अलग हुई और मेरी आँखों में देखती हुई फिर से पूछने लगी .

मंजू म : तुम मुझे वो प्यार डोज न ? मैं ज़िन्दगी भर जिस एहसास क लिए तरसी हूँ वो मुझे सिर्फ तुमसे मिला है . प्लीज मुझे खुद से दूर मत करना .

इतना कहते हुए मंजू म की आँखों में फिर से पानी आ गया . वो ऐसे बात कर रही थी जैसे कोई मरता हुआ आदमी ज़िन्दगी मांग रहा हो और मैं भला कैसे उन्हें रट हुए देख सकता था. मैंने फिर से उन्हें गले लगा लिया .

अमित : मैं कहीं नहीं जाऊंगा . मैं कभी आपको नहीं छोडूंगा पर आप जानती हैं आप मुझ से क्या मांग रही हैं ? दुनिया को क्या जवाब देंगी आप ? क्या ये सही होगा ? आप ने मुझे राखी बंधी थी ?

मंजू म : मुझे कुछ नहीं पता . तब मुझे नहीं पता था मेरे दिल में क्या है मगर तुमसे इतने दिन दूर रह कर मुझे समझ आयी क मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ. तुम दुनिया की परवाह मत करो . मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी. तुम बस मुझे प्यार दो , तुम जैसा चाहोगे मैं वैसे रहूंगी. मुझे किसी की परवाह नहीं है.

अमित : तो फिर मेरा लाया हुआ गिफ्ट पहन कर दिखाइए

मंजू म : मैंने कहा न खुद hi पहनाओ. मैं इसे तुम्हारे हाथों से पहनना चाहती हूँ और फिर कभी इसे मैं उतरूंगी भी नहीं .
 
भाई देर हो जाएगी कुछ तफ्सील से लिख रहा हूँ
 
अपडेट 110



मैं वहीँ मम क कदमो क पास ज़मीन पर बैठ गया और उनका एक पाऊँ पकड़ कर अपनी जांघ पर रखा . उनका गाउन जो इस वक़्त उनकी पिंडली तक ऊपर उठा हुआ था उसने से बहार उनकी गोरी तंग बहुत hi आकर्षक लग रही थी और उससे भी ज्यादा उनका वो गोरा पाऊँ जिसके तलवे लाल गुलाबी थे जो ये बता रहे थे वो कितनी गोरी हैं और उनकी स्किन कितनी सॉफ्ट है हर जगह से. मंजू म किसी तरह का मेकअप वगैरह नहीं करती थी और इस वक़्त भी उनके पाऊँ की उँगलियों क नाखुनो पर कोई नेल पोलिश नहीं थी. उनके स्किन की सॉफ्टनेस मैं अचे से फील कर रहा था . मेरी नज़र उनके पाऊँ पर hi जमी हुई थी जबकि वो मुझे देख रही थी . मैंने पायल को उनके पाऊँ पर लपेट कर लॉक किया तो उस पॉल को उनके खूबसूरत पाऊँ पर देख कर एक बार को मेरा दिल हुआ क उनके वो हसीं पाऊँ को एक बार चूम लूँ मगर मैंने खुद को बड़ी मुश्किल से रोका. मंजू म गौर से मेरा चेहरा देख रही थी जैसे मेरे मनो भाव समझने की कोशिश कर रही हो. मैंने उनके पाऊँ को अच्छी तरह अपने हाथ से छुआ और उनके तलवे को भी हाथ से ऐसे छुआ जैसे उसे साफ़ कर रहा हूँ और फिर से अपनी जांघ पर रख लिया . हम दोनों अभी खामोश थे मगर दिल जैसे बेचैन होते जा रहे थे. मुझे मेरे दिल की धड़कन तेज़ होती महसूस हो रही थी. मंजू म का वो पाऊँ पायल क साथ इतना खूबसूरत लग रहा था जैसे किसी अल्हड जवान लड़की का पाऊँ हो या किसी राजकुमारी का.

मैंने दूसरी पायल को भी हाथ में लिया और मम क दूसरे पाऊँ को पकड़ कर उठाया तो उनका गाउन साइड में थोड़ा खिसक गया और मम क घुटने तक की उनकी टांग नंगी हो गयी. गाउन इससे भी ज्यादा खिसकता मगर मम ने उसे रोक लिया मगर फिर से अपनी टांग को ढकने की कोशिश नहीं की. मेरी धड़कन और तेज़ होती जा रही थी. मैंने दूसरे पाऊँ में भी पायल को बांध दिया और पता नहीं कैसे पर मेरे हाथ जैसे मेरे कण्ट्रोल से बहार हो कर ऊपर को उठते हुए उनकी पिंडली पर पहुँच गए और उनकी स्किन की सॉफ्टनेस को और अचे से फील करने लगे . मैंने हलके हाथों से उनकी पिंडली को दबाता हुआ उनकी सॉफ्टनेस फील कर रहा था . मेरा एक हाथ उनके घुटने तक पहुँच गया और मुझे मेरे कानो में धड़कन का शोर महसूस होने लगा. मम अभी तक कुछ नहीं बोली थी और न hi मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी. मैं उनकी तंग को देखता हुआ जब उनके पाऊँ को देखने लगा तो अनायास hi मैं उनके पाऊँ की खूबसूरती को देखता हुआ उसपर झुकने लगा. मैं उन्हें गोर गुलाबी पाऊँ को चूमना चाहता था मगर बीच में hi जैसे मैं नींद से जगा और तुरंत अपने हाथ उनकी तंग से हटा लिए . मम ने मुझे ऐसे पीछे हैट ते हुए देखा तो खुद hi अपना पाऊँ उठा कर ेरे कंधे पर मेरी गर्दन क पास रख लिया. उनका पाऊँ मेरे चेहरे क इतना करीब था क मैं अपना चेहरा घुमाऊं तो आराम से चुम लूँ . मगर मैंने एक नज़र मम को देखा तो वो मेरी नज़रो में hi देख रही थी . मम खामोश थी मगर उनकी नज़रें बहुत कुछ कह रही थी . उनके होंठ कांप रहे थे. और आँखें जैसे नशे में थी. मुझे लगा जैसे वो भी चाहती हैं क मैं अपना अरमान पूरा कर लूँ तो मैंने भी गर्दन को घुमाया और उनके पाऊँ पर किश कर दिया . मेरे ऐसा करते hi मम क मुँह से हलकी से सिसकी निकल गयी . पाऊँ इतना ऊपर उठाने से अब उनकी टांग जांघ तक गाउन से बहार नुमाया थी. मगर मेरी नज़र वहां नहीं बल्कि दुनिआ क सब से हसीं और कोमल पाऊँ पर थी. मैंने दोनों हाथों से उनका पाऊँ पकड़ा और उसको चूमना शुरू कर दिया . ऊपर क हिस्से को अच्छी तरह चूमने क बाद मैंने उनके तलवे चूमने शुरू कर दिए और अपने आप hi मेरी जीभ उन सॉफ्ट सॉफ्ट पाऊँ पर चलने लगी जैसे क वो उनका टास्ते करना चाहती हो. मैंने उनके पाऊँ क तलवे को अपने चेहरे पर लगा कर उसे अचे से फील किया. मैं पता नहीं किस जादू या नशे में खोता जा रहा था पर जो भी था मुझे मज़ा hi इतना आ रहा था क मैं बहार नहीं आना चाहता था इससे. मैं अभी यही सब कर रहा था क मेरा मोबाइल बजने लगा और मोबाइल की आवाज़ से मुझे होश आया. मैंने जल्दी से मम क पाऊँ को छोड़ा और हड़बड़ा गया. एक hi झटके में सारा नशा उतर गया था. मैं मम से नज़र मिलाने से बच रहा था और जल्दी से से जेब से मोबाइल निकल कर कॉल पिक करने hi लगा था क मम ने मेरे हाथ से फ़ोन छीन लिया और उसे बंद कर दिया. मैं अवाक सा मम की इस हरकत को देख रहा था क अगले hi पल मम अपनी जगह से खिसक कर सीधा मेरी गॉड में दोनों तरफ अपनी टंगे करती हुई बैठ गयी और मेरे गले में बहल दाल कर बोली.

मंजू म : नशीली आवाज़ में ) आज कोई नहीं आएगा हमारे बीच . आज मुझे इतना प्यार दो क मैं खुद को भी भूल जॉन. बहुत तरसी हूँ मैं इस पल क लिए . मेरी सूनी ज़िन्दगी में प्यार का ये रंग भी भर दो प्लीज लव में किश में टच में प्लीज अमित

मम मेरे ऊपर झुकती गयी और हमारे होंठ आपस में मिल गए. मैं मंजू म की तड़प को अच्छी तरह समझ रहा था पर मेरे मन में झिझक थी इस रिश्ते को लेकर जो मुझे रोक रही थी मगर अब उस झिझक को मम ने खुद hi दूर कर दिया. मैंने मम को अपनी आगोश में ले लिया और उनके गुलाब की पंखुड़ियों से नाज़ुक कोमल होंठों को अपने होंठों में पकड़ कर उनका रास चूसने लगा. मेरे द्वारा होंठों को चूमने से hi मम क जिस्म में जैसे एनर्जी आ गयी और वो तेज़ी से मेरे होंठों को चूमने लगी. वो कभी ऊपर वाले होंठ को चूमती और कभी नीचे वाले को. मैं तो बस नशे में डूबा हुआ उनके होंठो का शहद चूसने में मगन था. मम क हाथ मेरे सर क पीछे थे और मेरे उनकी पीठ पर घूम रहे थे. हम दोनों किसी अलग hi दुनिया में पहुँच गए थे. मेरे दिल को इस क अंजनी सी ख़ुशी मिल रही थी जो मुझे रीता मौसी क साथ महसूस हुई थी मगर ये उससे भी ज्यादा थी. इसकी वजह तो मैं नहीं जनता था पर मेरा रोम रोम नाचने लगा था. मैं कितनी देर तक ऑंखें बंद किये मम क होंठ चूमता रहा मुझे भी पता नहीं . मगर जब सांस उखाड़ने लगी तो हमे किश तोडना पड़ा. हम दोनों हांफने लगे और जैसे hi हमारी नज़र आपस में एक हुई तो बिना कुछ कहे फिर से हमारे होंठ आपस में जुड़ गए. इस बार मैं मम क जिस्म को छू कर देखने लगा और मेरा हाथ जब उनकी जांघों पर गया तो मुझे उनकी कोमलता का एहसास हुआ . गाउन पीछे हैट चूका था और उनकी जांघें पूरी तरह नग्न थी. कोमल और मांसल जांघों को मैं दबा दबा कर मसलता हुआ आनंद सागर में डूबने लगा. मेरा डायन हाथ उनकी बायीं जांघ पर था और बाएं हाथ से मैंने उनकी कमर को थम रखा था. अब मुझे अपने नीचे भी हरकत महसूस होने लगी थी. मम दोनों तरफ टाँगें कर क मेरी गॉड में बैठी थी जिससे उनकी छूट वाला भाग मेरे लैंड क साथ लगा हुआ था और छूट की खुशबु से लैंड जाग उठा था. मेरे लैंड ने अपना आकर बड़ा लिया था जो निश्चय hi मम को भी पता चल गया होगा. मगर वो तो बस किश करने में hi डूबी थी. मुझे जब अपने लैंड पर उनकी छूट का दबाव महसूस हुआ तो मेरा ध्यान अपनी छाती पर गड रहे उनके नुकीले निप्पलों पर गया. मम क उरोज सख्त हो चुके थे और निप्पल अकड़ कर मेरी छाती में गड़े जा रहे थे. दोनों क जिस्म धीरे धीरे उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँचने लगे थे. मगर यहाँ ये सब करने में मज़ा नहीं अत अब जब मन बना hi लिया था क हमें आगे बढ़ा है तो ज़रा अचे से hi करना चाहिए. मैंने किश तोड़ कर मम की आँखों में देखा जहाँ गुलाबी डोरे नज़र आ रहे थे. मम इस तरह देख रही थी जैसे पूछ रही हो क मैंने किश क्यों तोड़ दी.

अमित : बीएड पर चलें या यहीं पर ?

मेरी इस बात पर मम ने शर्मा कर सर झुका लिया और वो मेरी गॉड से उठने लगी तो मैंने उन्हें उठने नहीं दिया . उन्होंने फिर से मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा .

अमित: इन कोमल पाऊँ को ज़मीन पर ऐसे मत रखिये , इनके नीचे तो मैं खुद बिछने को तैयार हूँ.

मेरी बात पर एक बार फिर मम का चेहरा लाल गुलाबी होता हुआ शर्म से झुक गया. मैंने उन्हें वैसे hi अपने साथ चिपकाए हुए झटके से उठ गया. ये सब इतनी जल्दी हुआ क मम को भी समझ नहीं आयी और गिरने से बचने क लिए वो कास क मेरे साइन से लग गयी .

आमिर : घबराइए मत , आप तो फूलों से भी हलकी हैं और आपको मैं अचे से संभल सकता हूँ.

मम ने अपनी दोनों टंगे मेरी कमर पर कैंची की शेप में कास ली और खुद मेरे साथ बैल की तरह चिपक गयी. मैंने उनकी गर्दन पर किश किया और फिर से उनके मुँह से सिसकी निकली. मैं उनकी कमर सहलाता हुआ उनके कमरे की तरफ चल पड़ा और वो छोटी बची की तरह मेरी गॉड में मेरी छाती से चिपकी हुई थी.

मैं उन्हें अपनी गॉड में ऐसे hi लिए हुए बीएड पर बैठ गया और बड़े आराम से उन्हें बीएड पर लिटाते हुए उनके ऊपर लेट गया. मेरे इस तरह उनके ऊपर लेटने से उनके स्तन मेरी छाती क नीचे सब गए. अभी भी मम ने मेरी गर्दन पर अपनी बहन कास राखी थी . मैंने उनकी बाँहों का घेरा खोला और सर उठा कर उनको देखा. मम की ऑंखें अभी भी बंद थी. उनका वो मासूम सा चेहरा इस वक़्त और भी प्यारा लग रहा था. गोरा मुखड़ा शर्म और उत्तेजना से लाल हो रखा था. मैंने उनकी आँखों पर किश किया.

अमित: ऑंखें खोलिये

मम ने न में गर्दन हिला दी

अमित: प्लीज एक बार ऑंखें खोलिये, मैं इनमे खुद को देखना चाहता हूँ.

मेरे इतना कहते hi मम ने धीरे धीरे ऐडा से अपनी पलकें उठायी और उनकी वो हसीं तरीन ऑंखें मेरे सामने थी जिनमे सिर्फ मैं hi मैं था. इस बार मम ने ऑंखें बंद नहीं की और मेरी नज़रों से नज़र मिला क राखी.

मंजू म : इन आँखों में hi नहीं मेरी हर सांस में मेरी हर धड़कन में सिर्फ तुम हो . तुम hi मेरी ज़िन्दगी हो और कभी मुझे खुद से जुड़ा न करना वर्ण मैं एक पल ज़िंदा नहीं रह पाऊँगी .

मम क इन ज़ज़्बात भरे चाँद अल्फ़ाज़ों में hi उनके दिल का हाल बयां हो गया था. उनकी आँखों से उनके एक एक शब्द की सचाई ज़ाहिर थी. मैं भी ज़ज़्बात की लौ में बेहटा गया वास्तव में मंजू म क प्यार की तड़प ने मुझे मजबूर कर दिया था उनके आगे झुकने को. एक अंजना सा खिचाव तो पहले hi महसूस करता था मैं उनके साथ और अब उनके इन अल्फ़ाज़ों ने जैसे मुझे उनका गुलाम hi बना दिया और मैं तन मन से उनकी बात मैंने को तैयार हो गया.

अमित : मैं वडा करता हूँ मैं कभी आपको खुद से जुड़ा नहीं होने दूंगा चाहे मुझे साडी दुनिया से hi क्यों न लड़ना पड़े. आज क बाद आपको कभी कमी महसूस नहीं होगी इतना प्यार दूंगा मैं आपको. आपकी सुनी ज़िन्दगी को रंगीन बना दूंगा प्यार क रंगों से. मेरा रोम रोम आपको प्यार देगा . आप मेरी हो बस मेरी और मैं आपका . ी लव यू मंजू मम

मंजू म : सिर्फ मंजू सिर्फ तुम्हारी मंजू

इतना कहते hi हम दोनों क होंठ फिर से मिल गए और इस बार दोनों तरफ से इतना जोश था जैसे क दो नए नए जवान हुए प्रेमी प्यार की गर्मी ज़ाहिर कर रहे हों . इतने जोश में किश करने से हमारी सांसे जल्दी hi उखाड़ने लगी और हमें किश तोडना पड़ा. एक बार फिर हमारी नज़रें मिली और आँखों आँखों में हमारे दिलों ने पता नहीं क्या बात की जो सिर्फ दिल hi समझ सकता है. इस बार मंजू म ने बड़े प्यार से बहुत सोफ़्त्ल्य छोटे छोटे किश किये मेरे होंठो पर. मुझे अपने होंठों पर उनके होंठों का ये कोमल एहसास बहुत hi प्यारा लग रहा था. मैंने दोनों हाथों से उनका चेहरा थमा और एकफलिंस चेहरे को नज़र भर क देखने लगा. मुझे इस तरह अपनी तरफ देखता देख मंजू म शर्म से दोहरी हो रही थी और अपना चेहरा छुपाने की कोशिश कर रही थी.

अमित : आप बहुत खूबसूरत हैं . इस चाँद से चेहरे पर उदासी मुझे बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती. आज क बाद मैं कभी इस चेहरे पर मुस्कराहट क सिवा कुछ न देखूं .

इतना कह कर मैंने उनके माथे पर प्यार से एक किश की फिर उनकी आँखों पर किश की फिर उनके गोर गुलाबी गालों को चूमा जो इस वक़्त टमाटर जैसे लाल हो रहे थे. फिर उनके रसीले होंठो पर एक किश की फिर उनकी चीन पर और फिर उनकी गर्दन पर किश करता हुआ मैं कहीं कहीं अपनी जीभ से चाटने लगा. मंजू म की स्किन इतनी सॉफ्ट थी क मन कर रहा था उनका एक एक इंच चाट जॉन. उनकी सॉफ्ट सॉफ्ट स्किन ने मुझे इतना आतुर कर दिया क मैंने उनकी गर्दन पर अपने दांत गदा दिए .

मंजू म : आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कस्वकस्वक उम्मम्मम्मम्मम

मंजू म को दर्द हुआ तो उनके मुँह से हलकी चीख निकल gyi.Mujhe अपनी गलती का एहसास हुआ तो मैंने जहाँ बाईट किया था वहां अपनी जीभ से चाटकर मलहम लगाने लगा.

अमित : आपको दर्द तो नहीं हुआ ?

मंजू म : दर्द क बाद इतना अचे तरीके से मलहम लगे तो ऐसा दर्द बार बार लेने को मन करता है. मुझे तुम प्यार क वो रंग दिखा रहे हो जो मैंने कभी नहीं देखे. ये मेरी ज़िन्दगी का पहला एहसास है . दर्द में भी मज़ा आ रहा है.

अमित: मैं आपको इतना प्यार दूंगा क आप सब भूल जाएँगी

मंजू म : मैं भी तो यही चाहती हूँ क मैं सब भूल जॉन. मैं इस दुनिया को अपनी ज़िन्दगी को यद् नहीं रखना चाहती.

अमित: ऐसा hi होगा.

मैं मंजू म की गर्दन दोनों तरफ से किश करता गया और लव बाईट देता गया. मैं उनके रोम रोम पर अपना नाम लिख देना चाहता था. ऐसा hi वो मुझसे चाहती थी इसी लिए मैं ये सब खुद बा खुद करता जा रहा था. शायद मेरा दिल उनके दिल क अरमान समझ रहा था और उनको पूरा भी कर रहा था. गर्दन पर अपना नाम लिखने क बाद मैं गाउन में से झांक रहे उनके सीने पर किश करने लगा और जीभ से शहद की तरह चाटने लगा. उससे नीचे आते हुए मैंने उनके गाउन की डोरी को खोल कर दोनों पल्लू साइड में कर दिए . गाउन क अंदर मन ने एक बिकनी सी पहनी हुई थी जो उनकी जांघों तक hi थी .

मंजू म की आँखें तो शर्म क मरे या मज़े से बंद हो गयी थी. मगर मैं उनकी खूबसूरती को आँखों से नाप टोल रहा था . मंजू म कहीं से भी हमारे कॉलेज में पड़ने वाली लड़कियों से काम नहीं थी बल्कि उनसे 21 hi होंगी. मैंने मम को कन्धों से पकड़ कर बैठाया और उनके गाउन को उनकी बाज़ुओं से बहार निकल और फिर उनकी बिकनी को पकड़ कर उनके जिस्म से जुड़ा कर दिया . अब मंजू म क बदन पर उस पिंक ब्रा पेंटी क इलावा और कोई कपडा शेष नहीं था. मैंने मंजू म को बीएड पर फिर से लिटा दिया और उनके बदन को सर से पाऊँ तक देखने लगा.

Uffffffffffff क्या बताऊँ दोस्तों क्या दिलकश तिलिस्मी खूबसूरत बदन था उनका. कहीं पर भी कोई एक्स्ट्रा चर्बी नहीं थी और हर एक अंग परफेक्शन की एक्साम्प्ले था. स्किन तो थी hi इतनी गोरी और कोमल ऊपर से वासना की गर्मी से अब लाल आभा बिखेर रही थी. पेट बिलकुल स्पॉट था और नाभि बीच में धंसी हुई थी जैसे क कोई अमृत कुंड हो. पिंक परदे क पीछे छिपे हुए वो उन्नत उभर बहार से hi ऐसे नज़र आ रहे थे क जैसे बिना परदे क देखने क लिए कोई भी अपनी जान दे दे. एक डैम से खड़े पहाड़ों की चोटियों से नज़र आ रहे थे जो सांस लेने और तेज़ी से ऊपर नीचे जो रहे थे. कमर ऐसे पतली थी जैसे कोई वो कोई मॉडल हों. साडी बांधने क बावजूद वो कभी अपनी कमर को खुला नहीं रहने देती थी बल्कि इस तरह पल्लू लपेट थी क बस हलकी स झलक hi दिखाई देती थी . पतली कमर क नीचे पिंक पेंटी में कैद था उनका वो अनमोल खजाना जो बरसों से किसी लुटेरे की तलाश में था और आज उसे लूटने क लिए मैं आ गया था. कमर क नीचे उनकी वो खूबसूरत नमो मुलायम मांसल जांघें जो अपने आप में खूबसूरती की मिसाल थी. केले के पेड़ क तने क जैसी लम्बी गोरी मांसल जांघें बहुत hi आकर्षक थी और उनके नीचे वो खूबसूरत पिंडलियाँ जिनके बाद उनके वो मखमली कोमल पाऊँ थे जिनके ऊपर मौजूद पायलों का जोड़ा मेरे दिल को इतना भ रहा था क वहीँ पर झुक जाने को दिल कर रहा था. और मैं खुद को रोक पाने में विफल होता हुआ फिर से उनके पाऊँ पर झुक कर किश करने लगा.

मैं घुटनो पर बैठ गया और उनके पाऊँ को उठाकर चूमने लगा. मंजू म ने धीरे से आँख खोल कर मुझे देखा और हलकी सी मुस्कान उनके चेहरे पर नज़र आने लगी. मैंने बरी बरी से दोनों पाऊँ को चुम और धीरे धीरे किश करता हुआ ऊपर को बढ़ने लगा. पाऊँ से शुरू होकर पहले पिंडलियों को चूमा फिर जाँघों को मसलते मसलते जीभ से कभी चाट ता कभी दांत गदा देता. मेरे दन्त गाड़ते hi मम एक सिसकी छोड़ देती. वास्तव में मैं तो अपनी मोहर hi लगा रहा था क जब भी मम को खुद को बिना कपड़ो क आईने में देखें तो उन्हें मेरा hi नाम नज़र आये .

किश करते हुआ जब मैं जांघों की जड़ों तक आ गया तो मम दोहरी हो गयी और अपनी टैंगो को फोल्ड कर क अपने पेट से लगा लिया. वो शायद इस बात से शर्मा गयी थी क अब मैं उनकी पेंटी क नीचे छुपे उनके खजाने पर हमला करने वाला हूँ और अब उनकी शर्म उन पर हावी होने लगी थी.

मैंने उनकी टांगों को सीधा करने की कोशिश की तो वो पूरा ज़ोर लगा के मुझे ऐसा करने से रोक रही थी. मम करवट क बल हो गयी थी तो मैंने उनके दोनों पाऊँ पकड़ कर फिर से खींचे मगर वो मन नहीं रही थी .

अमित: टाँगें सीढ़ी कीजिये न

मंजू म : ुँहुँणन मुझे शर्म आ रही है .

मुझे उनकी इस ऐडा पर भी प्यार आया . कितनी सिंपल और लाज शर्म वाली थी वो. ऐसी लड़की भला किसे पसंद नहीं होगी. काम से काम हर भारतीय लड़का तो ऐसी hi लड़की चाहता है. मुझे भी ऐसी hi लड़कियों क प्रति खास लगाव था. मगर इस वक़्त इस मुकाम पर लाज शर्म क लिए कोई जगह नहीं थी.

अमित: आप नहीं चाहती क मैं आपको प्यार करू. तो ठीक है , मैं कुछ नहीं करता .

इतना कह कर मैंने उनके पाऊँ छोड़ दिए और उनकी बगल में उनकी तरफ पीठ कर क लेट गया . मेरे ऐसा करने से मम को लगा क कहीं मैं गुस्सा तो नहीं कर गया ? वो तो बस लाज शर्म से ऐसा कर रही थी मगर मेरे ऐसा करने से वो समझी क मैं बुरा मन गया हूँ और अब उनको वो प्यार नहीं करूँगा जो मैं करने जा रहा था . मंजू म तो कब से उस प्यार क लिए तरस रही थी मगर अपनी शर्म की वजह से उन्होंने ने मुझे नाराज़ कर दिया और जल्दी से वो मुझे मानाने क लिए मेरी तरफ पलटी. उनकी तरफ मेरी पीठ थी तो वो मेरे ऊपर hi चढ़ आयी और मुझे सीधा करने क लिए ज़ोर लगाने लगी जबकि मैं भी उनकी तंग करने की नियत से ज़ोर लगा रहा था और सीधा नहीं हो रहा था .

मंजू म : बुरा मन गए ? देखो मुझे माफ़ कर दो . प्लीज एक बार माफ़ कर दो . मैं दोबारा से गलती नहीं करुँगी. तुम जो चाहे करो मैं तुम्हारा साथ दूँगी प्लीज ऐसे मुझसे नाराज़ हो क मुँह न मोड़ो.

मंजू म बस इतने में hi माफ़ी मांगने लगी थी जिसका मतलब था क वो अंदर से मुझे शायद अपना भगवन hi मन बैठी हैं जैसे की एक लड़की को सिखाया जाता है क पति hi भगवन है और उसे कभी नाराज़ नहीं करना. ऐसा hi कुछ मुझे उनके इस तरह मानाने से लग रहा था. मैंने भी उनको ज्यादा नहीं तड़पाया और सीधा हो गया. मंजू म मेरे ऊपर चढ़ आयी और मेरे होंठो को चूसने लगी.

मंजू म : प्लीज मुझसे नाराज़ मत हुआ करो . मुझसे सच में बहुत शर्म आ रही थी मैं क्या करूँ. मुझे कुछ भी नहीं अत तुम जैसा कहोगे मैं करुँगी . मैंने जितनी बार भी ये सब अपने पति क साथ किया था मुझे कभी उसका एहसास hi नहीं हुआ था . वो सब कुछ hi देर क लिए होता था . उसमे भी सिर्फ वो hi करते थे जो करते थे जबकि मैंने तो ये सब भी पहले कभी नहीं किया जो तुम्हारे साथ अभी किया है.

वो हमारे बीच हुए फोरप्ले की बात कर रही थी. मुझे अब एहसास हुआ क उन्होंने ज़िन्दगी में कभी चुदाई का मज़ा लिया hi नहीं है. बस एक अनपढ़ घरेलु औरतों की तरह टाँगें उठाओ अंदर घुसाओ कमर हिलाओ और पानी गिराओ. बस यही कुछ उन्होंने किया होगा. खैर ये कोई वक़्त नहीं था क मैं उनसे इस बारे में कोई बात करूँ मगर मैंने उनको आज चुदाई का हर वो चेप्टर सीखने का मन बना लिया जो मुझे पता था. मैंने मंजू म को बाँहों में फिर से थम लिया और पलट कर उनके ऊपर आ गया .

अमित: आज मैं आपको वो प्यार दूंगा जो अपने कभी नहीं महसूस किया होगा. बस मेरा साथ देती जाइये और जो मैं करूँ मुझे करने देना आप

मंजू म ने हाँ में गर्दन हिलायी . मैंने एक बार फिर से उनके होंठो को अपने होंठों में जकड लिया और थोड़ी देर किश करने क बाद मैंने अपनी जीभ को उनके मुँह में घुसाने की कोशिश की पहले उन्होंने अपना मुँह नहीं खोला मगर मेरा मतलब समझ कर उन्होंने मेरी जीभ को रास्ता दिया तो मैंने अपनी जीभ से उनकी जीभ को छेड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में उन्होंने भी मेरा साथ देते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ गुसा दी और मैं उनकी जीभ चूसने लगा. अब उन्हें पता चल गया था क क्या करना है और इस बार जब मैंने उनके मुँह में जीभ घुसाई तो वो भी मेरी जीभ चूसने लगी. बीच बीच में हम दोनों की जीभ आपस में टकराती और कभी एक दूसरे क मुँह में घुस जाती. इस नै तरह क चुम्बन से उनका बदन थरथराने लगा था. वो और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी . हम दोनों क मुँह से थूक निकल कर चीन तक बह चला था.

किश करने क बाद मैं नीचे बड़ा और उनके उन्नत ठोस कबूतरों को अपने हाथों मर पकड़ लिया. उनके बूब्स मेरे हाथों की पकड़ से बड़े थे मगर थे बहुत कोमल. मेरे द्वारा बूब्स दबाये जाने से hi उनके मुँह से सिसकी निकल गयी .

‘आआआआह्ह्ह्हह्ह कक्ककक्कव उम्मम्मम्मम्म ‘

मैंने ब्रा को बूब्स से नीचे खिसकते हुए एक एक कर क उनके बूब्स ब्रा की कप से बहार निकल लिए.

Uffffffffffff दोस्तों क्या बूब्स थे यार. गोर गुलाबी बूब्स जो मसले जाने से लाल हो गए थे और उनके ऊपर वो 2.5 इंच का गोल घेरा जो स्किन क मुकाबले कुछ ज्यादा hi गुलाबी था और उसके बीच में पिन पॉइंट की तरह सर उठाये खड़े वो निप्पल जो गुलाब से गुलाबी थे और आधा इंच साइज क थे. मैंने उनके एक चुके को हाथ में थमा और मसलने लगा और दूसरे को नीचे से पकड़ कर एक घेरा बना कर दबाते हुए उनके निप्पल को और उभर लिया जिसके कारन वो निप्पल और भी नोकीला हो गया और अगले hi पल मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया.

‘ आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कवक ये क्या जादू कर रहे हो तुम कक्ककक्कव उम्मम्मम्म खा जाओ इन्हे बहुत गुदगुदी हो रही है इनमे आअह्ह्ह्ह कक्कक्स ‘

मंजू म क मुँह से मज़े क मरे ये सिसकियाँ निकल रही थी. मैंने कभी उनके निप्पल को चुस्त कभी अपनी जीभ से उसे कुरेदता और कभी दांतो में दबा देता. मेरी हर हरकत पर मंजू म क मुँह से एक सिसकी निकल जाती थी. मैंने 20 मिनट्स तक उनके दोनों बूब्स को बरी बरी से ऐसे hi चूसा और कटा. दोनों hi बूब्स इस वक़्त पूरी तरह लाल हो गए थे जैसे उनमे hi सारा खून उतर आया हो. फिर मैं उनके पेट पर किस करता हुआ नीचे बढ़ने लगा और मेरी जीभ अब उनकी नाभि पर आ कर रुकी. कोई आधा इंच गहरी उनकी नाभि पर मेरी जीभ पड़ते hi उनका पेट लरजने लगा. मैंने उनकी नाभि में अच्छी तरह से जीभ घुमा घुमा कर उसका अमृत निकलने की कोशिश की.

नाभि से नीचे बढ़ते हुए उनकी पिंक पेंटी ु के खजाने क पहरेदार की तरह मेरे सामने आ गयी. पेंटी बीच में से ऐसी भीगी हुई थी जैसे बीच में hi पेशाब निकल गया हॉक्स मैंने उनकी दोनों टांगों क बीच में लेट कर उनके घुटने मोड़ कर टांगों को बेंड किया और जांघों को थम कर पेंटी क ऊपर से hi छूट पर किश कर दिया.

‘ आआअह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कवक वहां मत करो वो गन्दी जगह है ‘

मैंने पेंटी को दोनों तरफ से पकड़ कर खींचना शुरू किया तो मम ने अपने कूल्हे थोड़ा ऊपर को किये जिससे की पेंटी आराम से नीचे खिसक गयी. मैंने आराम से पेंटी उनकी टांगों से बहार निकल कर अपने हाथों में पकड़ ली और उस पर बने गीले निशान को गौर से देखने लगा . फिर मैंने पेंटी में से आ रही मादक खुशबु को सुंघा और अपनी सांसों में उस महक को भरने लगा .

‘ की गंदे ये क्या कर रहे हो ? ‘

अमित: आपकी महक अपनी सांसों में भर रहा हूँ.

मंजू म : ऐसी बातें मत करो मुझे अजीब लग रहा है.

अमित : आज आपको मैं बताऊंगा क असली मज़ा क्या होता है.

इतना कह कर मैंने उनकी टांगों को घुटनो से पकड़ कर फिर से खोला और उनकी छूट पर झुक गया. मेरी आँखों क सामने सुंदरबन का घने जंगल आ गया. ऐसा लग रहा था क छूट कहीं गायब हो गयी है और वहां पर बालों का hi झुण्ड है. बाल भी इतने इतने बड़े थे क मनो सैलून से कटा hi न गया हो उनको. घने काले बल मनो छूट को छुपा रहे हों लुटेरों से ताकि मंजू म का अनमोल खजाना बचा रहे. मैंने हाथ बड़ा कर बालों को साइड कर क छूट को खोज निकला. छूट उनकी स्किन क अनुरूप hi गोरी थी और ऐसा लग रहा रहा था क जैसे उसके होंठ गुलाबी हैं मगर अचे से जायज़ा नहीं हो प् रहा था.

अमित: ये क्या है? आपने तो घाना जंगल बना रखा है यहाँ पर , बाल साफ़ नहीं करती क्या ?

मंजू म : किस क लिए करती ? कौन था जिसे मैं दिखती इसे ? और खुद इसे मैं हाथ भी नहीं लगाती .

अमित: मतलब इतने सैलून से ये बस एक hi काम कर रही है. खैर आज इसकी अचे से सर्विस कर दूंगा वैसे मुझे यहाँ बल अचे नहीं लगते.

मंजू म : फिर कभी यहाँ तुम्हे बल नज़र नहीं आएंगे .

इतना कह कर मम शर्मा गयी और अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया. मैं पूरी तरह झुक कर उनकी छूट क करीब आ गया जिससे उनकी छूट से आने वाली महक मेरी साँसों में घुलने लगी. छूट क आसपास क बल बुरी तरह भीगे हुए थे और छूट का भी ऐसा hi हल था. मैंने उंगली से छूट को बालों से बहार निकला तो छूट की खूबसूरती मेरे सामने आ गयी.

मंजू म की छूट किसी कुंवारी लड़की की तरह hi लग रही थी जिसकी बार सील तोड़ कर छोड़ दिया गया हो. यानि क छूट क होंठ बस थोड़े से खुले हुए थे. और इतने सैलून से यहाँ कोई लैंड गया भी तो नहीं था. मम ने भी बता दिया था क उन्हें यहाँ कुछ करना पसंद नहीं तो मतलब उनकी छूट फिर से टाइट हो चुकी होगी या फिर अंदर का रास्ता ब्लॉक हो गया हो . मगर आज यहाँ तूफ़ान आने वाला था. मंजू म को अंदाज़ा भी नहीं होगा क मेरे पास कैसा हथियार है . उन्होंने ने तो अपने पति क इलावा किसी का देखा भी नहीं होगा और छूट की हालत बता रही थी क यहाँ जो पहले लैंड आया था वो साधारण hi रहा होगा. मैंने छूट को उंगलिओं से खोल कर अंदर का नज़ारा देखने की कोशिश की तो अंदर की स्किन और भी गुलाबी और रेड्डिश थी . मैंने झुक कर अपने होंठ छूट की फांकों से लगा दिए और अपनी जीब छूट में घुसा दी.

‘ आआआह्ह्ह्हह्ह कक्ककक्कक्स गंदे ये क्या कर रहे हो वो गन्दी जगह है कक्कक्कक्स मत करो वहां ककक वो गन्दी है . ‘

मम मुझे बालों से पकड़ कर हटाने की कोशिश करने लगी मगर मैंने उनके हाथ अपने सर से हटा दिए

अमित: कौन कहता है ये गन्दी जगह है? ये तो हर लड़की का खज़ाना होता है जिसे सिर्फ उसका प्रेमी hi प् सकता है. और जिस जगह से जीवन की उत्पत्ति होती हो वो भला गन्दी कैसे हो सकती है? अगर आप इसे सिर्फ इस लिए गन्दा कह रही हैं क आप यहाँ से पेशाब करती हैं तो मैं बता दूँ क ये भी बाकि अंगों की तरह महत्वपूर्ण अंग है बल्कि सबसे ज्यादा यही काम का है क्यूंकि ये जीवन देता है. आप को किसी ने इसकी इम्पोर्टेंस नहीं बताई होगी मगर मैं आज आपको बताऊंगा क इसे भी प्यार किया जाता है और किसे किया जाता है ये आप बस फील कीजिये.

इतना कह कर मैंने फिर से अपने होंठ उनकी छूट से भिड़ा दिए और अपनी जीभ को अंदर घुसा दिया. मैंने होंठों से छूट की फैंको और छूट क डेन को पकड़ लिया और जीभ को तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. कभी मैं जीभ को अंदर बहार करता और कभी उसको कुरेदता साथ hi मैंने अपनी एक उंगली को थोड़ा सा छूट में घुसा कर अंदर बहार करना शुरू कर दिया . मंजू म तो जैसे तड़प hi उठी. ऐसा एहसास उन्हें ज़िन्दगी में कभी नहीं मिला था. उनकी छूट पर किसी ने ऐसे प्यार किया hi नहीं था. मंजू म तड़पने लगी . उनके हाथ मेरे सर पर कास गए और मेरा सर उन्होंने जांघों में दबा लिया.

‘ आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्मम्मम माआआआ ये क्या कर रहे हो कक्ककक्कव ये कैसा जादू है ीीी आआआअह्ह्ह्ह उम्मम्मम मुझे क्या हो रहा है? मैं हवा में उड़ रही हूँ , मुझे कुछ हो रहा है मुझे पकड़ो मुझे कुछ हो रहा है . मैं गयी मुझे पकड़ो प्लीज ये क्या हो रहा है ये क्या कर रहे हो तुम आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ऐसा कभी नहीं हुआ मेरे साथ आए हहहह मा बचाओ मुझे मैं गयी मैं gyuiiiiiiiiii’

मंजू म का जिस्म अकड़ गया और उन्होंने पूरे ज़ोर से मेरा सर जांघों में दबाते हुए साथ hi अपने हाथों से कास के मुझे छूट पर ऐसे दबाया जैसे अंदर hi घुसा लेंगी. तभी मंजू म की छूट से पानी की बाद आ गयी और इतना पानी निकला क मेरा मुँह भर गया और साथ hi पूरा चेहर भीग गया . फिर भी पानी बंद नहीं हुआ और बीएड को गीला करने लगा. मम झटके लेती हुई शांत हो गयी. और धीरे धीरे उनकी पकड़ कमज़ोर हुई तो मैंने अपना सर छूट से हटाया . छूट की फांके अभी भी कांप रही थी. मम अब ढीली पद गयी थी जैसे उनके जिस्म से जान निकल गयी हो. उनकी ऑंखें बंद थी और चेहरा एक तरफ को लुढ़क गया था.

मैंने अपने चेहरे से पानी को साफ़ किया और उनके ऊपर आ गया. वो अभी भी बेसुध पड़ी थी . मैंने जल्दी से अपने कपडे उतरे और उनकी टांगों क बीच में जगह बना कर उनके ऊपर लेट गया. मैंने उनका चेहरा सीधा किया और उनके होंठो पर किश किया

अमित: अब बोलो कैसा लगा ? मज़ा आया या नहीं ?

मंजू म: हम्म्म्म

आमिर : ऐसे नहीं मेरी तरफ देख कर अपने मुँह से बोलो

मम ने धीरे से अपनी ऑंखें खोली और मेरी आँखों में देखा . मुझे उनकी आँखों में सटिस्फैक्शन क भाव नज़र आ रहे थे. उनके चेहरे पर एक अलग hi नूर था.

मंजू म : मुझे पूरी ज़िन्दगी में ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ . ऐसा लगा जैसे मैं बादलों में उड़ रही हूँ . उस जगह पर ये सब भी किया जाता है ये तो मुझे पता hi नहीं था. तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया है जो शायद मैं कभी महसूस hi न कर पति. थैंक्स

अमित: थैंक्स कहने की ज़रूरत नहीं है. अब से हम दो नहीं एक हैं और ये मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ इससे जितनी ख़ुशी आपको होगी उससे ज्यादा मुझे होगी . अभी तो शुरुआत है अभी आगे आगे देखिये .

इतना कह कर मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जा कर अपना लैंड पकड़ा और छूट पर रगड़ना शुरू कर दिया . साथ hi मैंने उनके बूब्स को चुआना दबाना शुरू कर दिया . एक बार फिर से मंजू म गरम होने लगी. मैंने जान बुझ कर मम को अपना लैंड देखने नहीं दिया क कहीं वो दर hi न जाएँ इससे उन्हें मेंटली दर नहीं लगेगा और वो इसे नार्मल लैंड समझ कर अंदर लेने की कोशिश करेंगी .

‘ आअह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म आआह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह ऐसे hi मुझे प्यार करो. मैं अब से सिर्फ तुम्हारी हूँ मेरा रोम रोम सिर्फ तुम्हारा है . मुझे पूरी तरह से अपनी बना लो ‘

इतना कहते हुए मम अपनी छूट ऊपर उठाने लगी और खुद hi मेरे लैंड पर छूट रगड़ने लगी. उनका इशारा मैं समझ गया था . वो सीधा तो लैंड का नाम नहीं लेने वाली शर्म क मरे बस छूट को लैंड पर रगड़ कर इशारा दे रही थी और ज़ुबान से पूरी तरह अपना बनाने को कह रही थी . कुहनी उनके हिसाब से बस ये hi आखिरी काम रह गया था जबकि चुदाई में और भी बहुत कुछ होता है खैर उसके लिए अभी समय नहीं था. फ़िलहाल मैंने मंजू म की तड़प को मिटने का फैसला किया और लैंड को मजबूती से थम कर छूट की फांकों में सुपडे को फसा कर अंदर घुसाने क लिए दबाव डालना शुरू कर दिया . धीरे सूपड़ा छूट की तंग गली को खोलने लगा और अंदर घुसने लगा. मुझे ज़ोर लगाना पद रहा था तो ज़ाहिर है मम का भी बुरा हल होगा. मैंने मम क चेहरे को देखा तो उनके जबड़े कास गए थे. यानि क वो दर्द को बर्दाश्त करने की पूरी कोशिश कर रही थी.

मुझे लगा ऐसे धीरे धीरे करने से मम को दर्द ज्यादा होगा इस लिए मैंने लैंड को हल्का सा बहार को किया जिससे मम ने रहत की सांस ली. अगले hi पल मैंने ज़ोरदार धक्का मर दिया और मेरा लैंड पागल सांड की तरह उनकी छूट की धज्जियां उडाता हुआ 5 इंच तक छूट में घुस गया. पर्दा तो पहले hi छूट का हैट चूका था इस लिए रुकावट की कोई गुंजाईश नहीं थी. मगर सालों से बंद पड़ी छूट में उसके साइज से दुगने आकर का लैंड इतनी तेज़ी से घुसा क वो बर्दाश्त नहीं कर पायी और एक ज़ोरदार चीख उनके मुँह से भी निकल गयी.

‘ aaaaaaaiiiiiiiiiiiiii माआआआआ aaaaaaaaaaaa निकालो बाहर इसे आआआआआ मैं मर गयी आआआआअह्ह्ह्हह एआइइइइइइइइइ ओह्ह्ह्हह्हह ममअअअअअ मर गयी . मार डाला एआईईईई ccccccccccv ममअअअअअ बहार निकालो इसे मैं मर जाउंगी . ऐसा लग रहा है कोई खंजर घुसा दिया है तुमने . बहुत दर्द हो है कक्ककक्कक्स ाआईईईई प्लीज बहार निकल लो मैं मर जाउंगी .’

मंजू म से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था मगर मैं जनता था क ये दर्द तो होना hi था. पर उनकी बात मन कर अगर मैंने लैंड बहार निकल लिया तो वो कभी मेरे लैंड को अंदर नहीं ले पाएंगी. मुझे भी अपना लैंड उनकी छूट में पूरी तरह कैसा हुआ महसूस हो रहा था और मुझे इस बात का एहसास भी हो रहा था क जैसे छूट से खून बह रहा है मगर मैं अभी मम क ऊपर से उठना नहीं चाहता था. मुझे उनका दर्द जल्दी से काम करना था. मैंने मम की होंठो को चूमना शुरू कर दिया और उनके दोनों बूब्स मसलने शुरू कर दिए . काफी देर तक मम तड़पती रही मगर मैं उनका दर्द काम करने की लगातार कोशिश कर रहा था. मैंने उनके दोनों स्तन थोड़ा ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए जिससे क उनका ध्यान छूट क दर्द से कुछ देर क लिए हैट जाये .

‘ आअह्हह्ह्ह्ह धीरे दबाओ न दर्द हो रहा है ककक आअह्हह्ह्ह्ह ‘

मैं अपना काम करता रहा और कुछ देर में मम बस सिसकियाँ hi लेने लगी अब वो दर्द बर्दाश्त करने क लायक हो गयी थी. मैंने उतने hi लैंड से चुदाई करना बेहतर समझा और धीरे धीरे अपना लैंड बहार को खींचा मगर छूट में लैंड ऐसे फसा हुआ था क उसके हिलने से भी मम को दर्द होने लगा. मैंने थोड़ा सा लैंड बहार निकला और फिर अंदर कर दिया . मैं थोड़ा थोड़ा कर क लैंड बहार खींचता और फिर से अंदर कर देता . मैं ये सब इतना धीरे कर रहा था क मम को दर्द न हो और मेरी म्हणत रंग लायी. मम की छूट में अब लैंड इन आउट होने लगा. मैंने उतना hi लैंड अंदर बहार करना जारी रखा जितना क मैंने झटके से घुसाया था . मैं चाहता था क मम कुछ नार्मल हो जाएँ फिर बाकि का भी घुसा दूंगा . धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार करते मैं उनके बूब्स मसलता गया और उन्हें किश करता गया . एक बार फिर मम मस्ती में आने लगी और लैंड भी बिना किसी मुश्किल क अंदर बहार होने लगा. छूट में पानी आ गया था जिससे अब छूट और लैंड दोनों चिकने हो गए थे.

‘ आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उनममम ऐसे hi करो ऐसे hi मुझे प्यार करो अमित मुझे इतना प्यार दो मैं सब भूल जॉन आअह्ह्ह्हह कितना ाचा लग रहा है आआह्ह्ह्ह ककक उम्मम्मम ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था मुझे और तेज़ करो मुझे और प्यार करो ‘

मंजू म मज़ा लेने लगी थी और उनके हाथ खुद hi उनके बूब्स पर जाने लगे थे उनकी टंगे जो बेंड हुई मेरे बाजुओं पर थी मैंने उन्हें अपने कन्धों पर रख लिया और सीधा बैठ कर कमर चलते हुए उनकी पिंडलियों को चूमने चाटने लगा. आधे लैंड से चुदाई करने में मज़ा नहीं आ रहा था मगर मैं सही मोके का इंतज़ार कर रहा था. धीरे धीरे मम की सिसकियाँ बढ़ती चली गयी और मैंने भी स्पीड बदनी शुरू कर दी

‘ हाँ हैं ऐसे hi करो और तेज़ करो मुझे ऐसे प्यार करो और तेज़ करो और ज़ोर से करो हम्म्म्म उम्म्म्म आआ कक्कक्स और तेज़ करो मुझे फिर से कुछ हो रहा है मुझे पकड़ो मैं हवा में उड़ने वाली हूँ मुझे पकड़ो आअह्ह्ह्ह ककक आअह्ह्ह्हह और ज़ोररररररर लगाओ आआह्ह्ह्हह उम्म्म ी ऍम क्युम्मिंग दो फास्टर फ़ास्टरररररर मैं gyiiiiiiiiiii ‘

ज़ोर ज़ोर से चिल्लाती हुई मम का जिस्म अकड़ गया और झटके लेने लगा . मुझे अपने लैंड पर उनका गरम पानी महसूस हुआ तो मैंने इसे सही मौका समझा क्यूंकि छूट पानी से भर गयी थी और भरपूर चिकनाई में लैंड को आगे बढ़ाया जा सकता था. मैंने लैंड को सुपडे तक बहार खींचा और पूरे ज़ोर से धक्का मर कर अंदर पेल दिया. ‘ कहैछःह ‘ की आवाज़ से लैंड छूट की धज्जियाँ उडाता गहराई तक घुस गया. मंजू म जो अभी मज़े की वादियों में उड़ रही थी एक डैम तेज़ दर्द से चीख पड़ी और सारा मज़ा दर्द में बदल गया.

‘ आआआईइइइइइइइ माआआआ माअररर्र दिया aaaaaaaaaaaaaa , बहुत दर्द हो रहा है निकल लो इसे ‘

अमित: बस बस हो गया अब दर्द नहीं होगा . ये लास्ट था बस अब इसके बाद दर्द नहीं होने दूंगा .

मैंने मम क वो दूध क बड़े बड़े कलश फिर से मसलने शुरू कर दिए और उन्हें पिने लगा. मम दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी . मैं काफी देर तक उन्हें मसलता रहा ताकि उनका दर्द जल्दी ख़तम हो.

मंजू म : बहुत दर्द देते हो तुम . इतना तो मुझे पहली बार में भी नहीं हुआ था .

अमित : दर्द तो होगा hi इतने सैलून से बंद जो पड़ा था रास्ता . वैसे भी मुझे लगता है आपके हस्बैंड का बहुत छोटा होगा इस लिए रास्ता इतना टाइट था और अब खुल रहा है . जितना दर्द होना था हो गया अब कभी आपको ये दर्द दोबारा बर्दाश्त नहीं करना पड़ेगा . अब सिर्फ मज़ा hi मिलेगा.

मैंने उनकी आँखों से आंसू निकले थे उन्हें अपनी जीभ से चाट लिया. मेरा ऐसा करना उन्हें ाचा लगा. मम दर्द को बर्दाश्त करती हुई मेरी पीठ पर हाथ चलने लगी और मुझे किश करने लगी

मंजू म : मैंने कभी इतनी देर तक नहीं किया था बल्कि कभी ऐसा हुआ hi नहीं था . तुमने तो दो बार मेरा पानी निकल दिया और अभी तक लगे हुए हो. अब मैं बर्दाश्त कर सकती हूँ तुम अपना काम करो.

मैंने मम की सहमति मिलते hi कमर हिलनी शुरू कर दी और फिर से उनकी टंगे अपने कन्धों पर चढ़ा ली. पहले पहले तो मम को दर्द हुआ मगर फिर उन्हें भी मज़ा आने लगा और वो फिर से गरम होने लगी. मैंने लैंड की तरफ देखा तो अभी भी 1 इंच बहार hi था मगर इतना तो आराम से चला hi जायेगा इसके लिए कोई खास कुछ करने की ज़रूरत नहीं थी. मैंने धक्कों की गति बड़ा दी और इसके साथ hi मम क बड़े बड़े दिलकस कूल्हे मेरी जांघों से टकराने लगे. ‘ ठप्प थापपपप थापपप ‘ की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी थी और बीएड भी हिलने लगा था .

मंजू म : आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह और तेज़ करो और ज़ोर से मारो आआह्ह्ह्ह. उम्म्म्म तुम असली मर्द हो जिसे पता है क प्यार कैसे किया जाता है , मैं तो आज तक इस मज़े से अनजान थी, मुझे ऐसे hi हर रोज़ प्यार करना मैं अब से सिर्फ तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी. तुम जैसे चाहो जहाँ चाहो रखो पर हमेशा मुझे अपने साथ रखना कभी खुद से अलग मत करना . मैं अब रह नहीं पाऊँगी तुम्हारे बगैर. तुम यहीं मेरे साथ मेरे घर में रहना रोज़ मुझे प्यार करना . उम्म्म्म कक्कक्क्स और ज़ोर से करो डीपर डीपर फास्टर ऊऊह्ह्ह्ह ी म क्युम्मिंग अगेन ये मुझे क्या हो रहा है मैं फिर से आ रही हूँ और ज़ोर से करो पूरा ज़ोर लगाओ फ़ायद दो मार दो आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ‘

एक बार फिर से मम झड़ने लगी और अब मेरा भी कण्ट्रोल ख़तम हो गया . लैंड पर गरम पानी की बौछार पड़ते hi मेरा भी पानी निकलने को हुआ तो मैंने ज़ोरदार धक्का मरते हुए लैंड को छूट में आखिरी सीमा तक घुसा दिया और झटके लेते हुए मम की छूट को अपने पानी से भरने लगा. हम दोनों ऐसे जुड़ गयी थे क लैंड का तो नमो निशान भी नज़र नहीं आ रहा था. मम की टंगे मेरे और उनके धड़ क बीच में फांसी हुई थी और उनके घुटने बूब्स पर दबे हुए थे. हम दोनों का जिस्म पसीने में नाहा चूका था. मेरा सारा वजन मम क ऊपर था और उनका शरीर भी दोहरा हुआ पड़ा था तो उनको भी दर्द महसूस होने लगा.

मंजू म : मुझे दर्द हो रहा है प्लीज मेरी टाँगे सीधी कर दो.

मुझे उनकी हालत का अंदाज़ा हुआ तो मैंने उनके ऊपर से उठने की कोशिश की मगर उन्होंने मुझे पकड़ लिया .

मंजू म : नहीं , तुम ऐसे hi मेरे ऊपर लेते रहो . मैं तुम्हे अपने अंदर फील करना चाहती हूँ.

मैं समझ गया क मम चाहती हैं क मैं अभी लैंड बहार न निकलूं . लैंड अभी खड़ा hi था जो अब धीरे धीरे ढीला होने लगा था. मैंने उनकी टांगों को साइड से निकल दिया तो उन्होंने खुद hi अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट ली जैसे मैं उनके ऊपर से अलग न हो जॉन . मैं तब तक उनके ऊपर लेता रहा जब तक क लैंड पूरी तरह ढीला नहीं हो गया. फिर मैंने मम को किश किया . वो मज़े से ऑंखें बंद किये पड़ी थी मेरे किश करते hi ऑंखें खोल ली.

अमित: क्या हुआ ? क्या सोच रही थी आप ?

मंजू म : क्या बताऊँ , इतना मज़ा है इसमें ये तो मुझे पता hi नहीं था. मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गयी थी. तुम्हारा प्यार hi मेरी ज़िन्दगी है अमित . मैं ये प्यार उम्र भर चाहती हूँ. मुझे कितनी ख़ुशी मिली है कितना आनंद मिला है ये मैं एक्सप्लेन नहीं कर सकती . मैं बस ऑंखें बंद किये इसे फील कर रही थी.

अमित: पर आपको दर्द भी तो दिया मैंने

मंजू म: इस दर्द को तो मैं बार बार लेने क लिए तैयार हूँ. क्यूंकि दर्द क बाद जो मज़ा मिला वो अभी तक मुझे महसूस हो रहा है. एक नशा सा मुझे महसूस हो रहा है.

अमित : वो तो ठीक है मगर ज़रा नीचे की हालत भी देख ली जाये

इतना कह कर मैं मम क ऊपर से उठा तो उनकी छूट देख कर मैं हैरान हो गया . छूट का मुँह काफी खुल चूका था. किनारों से छूट चिर गयी थी और छूट से सफ़ेद पानी और लाल खून का मिश्रण बहार निकल रहा था. मम क कूल्हों क आसपास बेडशीट भी काफी गीली हो चुकी थी जो बता रही थी क मम ने बहुत पानी निकला है. साथ में खून क निशान भी ऐसे थे मनो आज hi उनकी सील टूटी हो. मैंने अपने लैंड को देखा तो उसकी जड़ क पास भी खून क निशान थे .

मंजू म : ो माय गॉड ये क्या हल बना दिया तुमने इसका ? ये इतनी खुल गयी एक बार में hi ? ोोू दर्द हो रही है , लगता है सूजन आ रही है .

अमित : डरिये मत कुछ नहीं होगा. इतनी सैलून से जो बंद थी आज खुली है दर्द तो होगा hi. चलिए इसकी थोड़ी गरम पानी से सिकाई कर लीजिये फिर आराम करना आप .

मम बीएड से उठने लगी तो उन्हें दर्द होने लगा और वो वैसे बीएड पर फिर लेट गयी

मंजू म : मुझसे नहीं उठा जा रहा बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने एक हाथ मम की जांघों क नीचे डाला और दूसरा हाथ उनकी पीठ पर दाल कर उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया . मम बड़ी प्यार भरी नज़रों से मुझे देख रही थी . मैं उन्हें ले कर बाथरूम की तरफ चल दिया.

अमित: ऐसे क्या देख रही हैं आप ?

मंजू म : देख रही हूँ क तुम कितने केयरिंग हो. तुम सच में बहुत अचे हो . ी लव यू सो मच

अमित : आप हो hi इतनी प्यारी क खुद hi दिल करता है आपको प्यार करने को केयर करने को.

मंजू म : प्लीज मुझे आप मत कहा करो . मुझे मेरे नाम से बुलाओ , मैं चाहती हूँ तुम मुझ पर अपना हक़ जटाओ. मैं तुम्हे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ इस लिए अब उसी हक़ से मुझे प्यार करो .

अमित : ठीक है जैसा तुम कहो . मगर सब क सामने तो तुम मेरी टीचर hi रहोगी न . टीचर को स्टूडेंट्स होने क नाते से hi बुलाऊंगा न

मंजू म : कॉलेज में तो टीचर hi हूँ मगर उसके बाद नहीं. वैसे भी टीचर का सब कुछ तो तुम ने ले लिया है

अमित : अभी कहाँ सब ले लिया

मंजू म : और क्या रह गया है ?

अमित : अभी ये तो बाकि है

मैंने उन्हें बाथरूम क फर्श पर खड़ा करते हुए उनकी गांड पर हाथ फिराया . मंजू म थोड़ा झुक कर कड़ी थी जिस वजह से उनकी गांड कुछ ज्यादा hi बहार को निकल आयी थी. मेरी बात का मतलब समझते hi वो चौंक गयी

मंजू म : क्या ? वहां भी कोई करता है क्या?

अमित : माय डिअर मंजू अभी तुम्हे बहुत कुछ सीखना है . इस सब्जेक्ट में मैं तुम्हारा गुरु हूँ . इसमें भी बहुत मज़ा अत है .

मंजू म : तुम्हे बहुत नॉलेज है इन बातों की . कहाँ से सीखा ये सब ? किस किस क साथ कर चुके हो ?

अमित : वो सब बाद में अभी पहले यहाँ बैठो और मुझे मेरा काम करने दो.

मैंने मंजू म क सवाल फ़िलहाल ताल दिए मगर वो पूछेंगी ज़रूर. मैंने उन्हें सीट पर बिठाया और गीज़र चला कर पानी गरम किया ताकि उनकी छूट की सिकाई कर सकूँ. छूट की सिकाई और सफाई क बाद एक बार मैंने उन्हें शावर क नीचे खड़ा कर क नहलाया . नहाते हुए भी वो मुझसे चिपक कर कड़ी थी. पानी में भी आग लगने लगी थी. उनका वो नाज़ुक सा बदन मेरे अंदर फिर से गर्मी भरने लगा और इस बात का एहसास उन्हें भी मेरे लैंड की चुभन से हो गया.

मंजू म : मन नहीं भरा अभी तुम्हारा?

अमित: आप जैसी अप्सरा इस हालत में सामने हो तो किस्से कण्ट्रोल होगा.

मैंने उनके जिस्म पर अपने हाथ चलते हुए कहा तो वो भी अपनी इस हालत पर शर्मा गयी .

मंजू म : हटो अब मुझे कपडे पहना दो. नहीं तो फिर शुरू हो जाओगे और अभी मेरी हालत ऐसी नहीं क तुम्हे फिर से झेल सकूँ.

मैंने उनकी बात समझते हुए उन्हें खुद से अलग किया तो उनकी नज़र मेरे खड़े हुए लैंड पर पड़ी

मंजू म : हे भगवन ये क्या है ?

मम का मुँह खुला का खुला रह गया मेरे लैंड पर नज़र पड़ते hi. वो तो ऐसे दर रही थी जैसे कोई सांप देख लिया हो.

अमित : आपको नहीं पता ये क्या है ?

मंजू म : लेकिन ये इतना बड़ा कैसे ? मेरे हस्बैंड का तो इससे आधा hi था हर मामले में .

मम लैंड की लम्बाई चौड़ाई की बात कर रही थी.

अमित: इसी लिए तो ये इतना मज़ा देता है . आपको भी तो मज़ा आया न

मंजू म : वो तो ठीक है मगर ये अंदर गया कैसे था ? क्या पूरा चला गया था ये इसमें?

मम मेरे लैंड को देखते हुए अपनी छूट को देखने लगी.

अमित : चला गया था वो भी पूरा. क्या आपको एहसास नहीं हुआ था? यकीन न हो तो फिर से करूँ ?

मंजू म : न बाबा न अब मुझसे नहीं हो पायेगा. तभी मैं कहूं इतना दर्द क्यों हो रहा था मुझे . ऐसा तो सुहाग रत पर भी नहीं हुआ था . मैंने कैसे बर्दाश्त किया है ये मैं hi जानती हूँ.

अमित: कोई बात नहीं , अब तो सब हो गया न. एक बार तो दर्द होता hi है मगर अब दोबारा नहीं होगा. अब इसकी जगह बन गयी है.

मंजू म : जगह तो बन गयी मगर ये देखा मेरा क्या हल हुआ है. सूजन आ गयी है. और तुम इसे वहां घुसाने की बात कर रहे हो?

मैंने एक नज़र उनकी छूट पर डाली तो देखा वाकई में छूट फूल गयी थी. छूट की फांकें बहार को उभर आयी थी.

अमित: चिंता मत कीजिये , आप पैन किलर खा लीजिये और रेस्ट कीजिये . कल तक ये ठीक हो जाएगी और कल की छुट्टी ले लेना . वैसे ये पीछे भी घुस जायेगा आराम से बस एक बार दर्द झेलना पड़ेगा उसके बाद मज़े.

मंजू म : तौबा आगे लेने में hi जान निकल गयी है , पीछे से किया तो कहीं सचमुच hi न मर जॉन. अब मुझे अंदर ले चलो.

मैंने तौलिये से उनका और अपना बदन ड्राई किया और उन्हें गॉड में उठा कर अंदर ले आया. मैंने उन्हें उनका गाउन पहना दिया और बीएड पर लिटा दिया.

अमित: खाने को कुछ है या बहार से आर्डर करूँ ? पैन किलर पड़ी है घर में ?

मंजू म : खाने क किचन और फ्रिज से देख लो बहार से लेन की ज़रूरत नहीं है. पैन किलर यहीं ड्रावर में होगी.

मैंने ड्रावर से निकल कर उन्हें पैन किलर की टेबलेट दी और फिर खाने का सामान ढूंढने लगा . कुछ सबकी वगैरह पड़ी थी और साथ में चावल . बस उसी को गरम कर क हम दोनों ने खा लिया. मैंने खाने क बाद कपडे पहनने लगा वापिस जाने क लिए

मंजू म : कपडे क्यों पेहेन रहे हो? कहाँ जा रहे हो ?

अमित: टाइम बहुत हो गया है आंटी अंकल मेरी रह देख रहे होंगे.

मंजू म : कहीं मत जाओ मुझे ऐसे छोड़ कर. मैं तुम्हारी बाँहों में सुकून से सोना चाहती हूँ. आज मुझे अपनी आगोश में ले कर सुलाओ. मेरा सपना था क मैं अपने प्यार की बाँहों में सब भूल कर सो जॉन और फिर सपनो की दुनिया से कभी बहार न आऊं.

मैं अपने कपडे वहीँ फेंक दिए और बीएड पर चढ़ गया

अमित: एक hi शरत पर अपनी बाँहों में सोने दूंगा

मंजू म : वो शरत क्या है?

अमित : तुम्हे मेरी तरह hi सोना होगा

मैं नंगा था मगर मम ने गाउन पहना हुआ था तो मैंने उनके गाउन की तरफ इशारा करते हुए कहा.

मंजू म : आज hi साड़ी शर्म उतर डोज मेरी ? खुद hi करलो जो करना है , मुझे शर्म आती है

अमित: ठीक है मगर प्यार में थोड़ी बेशर्मी भी होनी चाहिए . खुल कर प्यार करने में hi मज़ा अत है.

मैंने मम का गाउन खोल कर उतर दिया और उन्होंने भी मेरी मदद की. उसके बाद मैंने मम को अपनी आगोश में ले लिया और हम दोनों चिपक कर लेट गए . मम क सर मेरे कंधे क पास था और उनका डायन हाथ मेरी छाती पर और दायीं तंग भी उन्होंने मेरी टांगों पर रख ली. मैंने अपना एक हाथ उनकी पीठ पर चला रहा था और दूसरे हाथ से उनके हाथ को थम लिया जो उन्होंने मेरे सीने पर रखा हुआ था .

मंजू म : मैं चाहती हूँ इस रत की कभी सुबह न हो और मैं ऐसे hi तुम्हारी बाँहों में लेती रहूं.

अमित: और रत में फिर जो कुछ होगा वो ?

मंजू म : धत्त्त गंदे इंसान , शर्म नहीं आती . सिर्फ वो सब hi प्यार नहीं होता. मैं तुम्हारे एहसास से hi कितना ाचा फील करती हूँ ये तुम समझ भी नहीं सकते. मुझे बस तुम्हारा साथ हर पल चाहिए. मेरा बस चले तो एक पल भी तुमको खुद से दूर न करूँ.

अमित: आप जानती हैं क आप कितनी प्यारी हैं? आप को प्यार करने को अपने आप hi दिल करता है. ऊपर से भगवन ने आपको इतना खूबसूरत बनाया है क कोई खुद को रोक hi नहीं सकता

मंजू म : मैं पूरी की पूरी तुम्हारी hi हूँ . मुझे बस प्यार करना चाहे जैसे भी करना .

अमित : तो हो जाये एक बार और ?

मंजू म : तुम करना चाहते हो तो करलो मुझे ऐतराज़ नहीं

मैं जनता था क उन्होंने अभी अभी कितना दर्द झेला है और छूट की जो हालत हो गयी थी ऐसे में फिर से उनके साथ वो सब मैं नहीं करना चाहता था.

अमित: मैं तो मज़ाक कर रहा था , अभी रेस्ट करो जब ये ठीक हो जाएगी तो फिर से करेंगे.



मैं मंजू म क साथ प्यार करते हुए भूल hi गया था क मैंने मोहित को या आंटी को इन्फॉर्म तो किया hi नहीं ऊपर से टाइम भी 11 से ऊपर हो रहा था. मैंने तुरंत अपना फ़ोन ढूँढा और देखा तो फ़ोन बंद था . फ़ोन ों कर क पहले मैंने मोहित और आंटी को बता दिया क मैं आज मौसी क घर रुकने वाला हूँ . यही एक बहाना सही लगा मुझे जिससे वो भी ज्यादा बात नहीं करेंगे और हुआ भी ऐसा hi वर्ण आंटी गुस्सा कर लेती. दोनों से बात करने क बाद मैंने देखा तो मिस कॉल्स क मेस्सगेस आये हुए थे. जिनमे शिवानी नैना दीदी करुणा दीदी और राजू की नाम थे. साथ में कुछ मेस्सगेस भी थे जो कल्पना और राधा क no. से ए हुए थे मैंने उन्हें एक नज़र देखा और फिर मंजू म को आगोश में ले कर सो गया.
 
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