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अगले दिन कॉलेज में फर्स्ट लेक्चर फिर से चंद्रकांता की दन्त से hi शुरू हुआ मगर प्रोफ व् को बताने क बाद से अब मम मुझे क्लास से नहीं निकलती थी मगर खिसनी बिल्ली की तरह वो मेरी इंसल्ट करने चुकती नहीं थी. आज भी ऐसा hi हुआ. और मेरे साथ आज तो मोहित की भी वाट लग गयी. जैसे तैसे लेक्चर ख़तम हुआ तो चंद्रकांता क जाते hi साथ वाली रॉ मैं बैठी कल्पना ने मुझसे बात शुरू की.
कल्पना : hi , कैसे हो ? कल कहाँ रह गए थे ? कैंटीन में भी नहीं थे, ग्राउंड में भी नहीं ?
अमित : तो तुम कल मुझे ढून्ढ रही थी. वैसे कोई काम था क्या?
कल्पना : बस ऐसे hi. तुम नहीं थे और क्लास में भी बोर हो रही थी तो सोचा तुम कहीं बहार बैठे होंगे बस इसी लिए ढून्ढ रही थी. वैसे थे कहाँ तुम?
अमित : कल किसी काम से गया था मैं .
कल्पना : मुझे भी यही लगा इसी लिए फ़ोन नहीं किया तुम्हे. वैसे आज क्या कर रहे हो शाम को?
अमित : तुम्हे बताया तो था , पहले स्टेडियम फिर ट्यूशन.
कल्पना : तुम छुट्टी नहीं करते क्या? और ये ट्यूशन कोण पड़ता है भला?
अमित : क्या करूँ यार इंग्लिश में थोड़ी प्रॉब्लम थी और यहाँ सरे सब्जेक्ट इंग्लिश में होने की वजह से मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
कल्पना : ट्यूशन की क्या ज़रूरत है इसमें ? तुम मेरे साथ पद पिया करो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी.
अमित : थैंक्स पर वो क्या है न मेरी एक दीदी इंग्लिश टीचर हैं तो उन्होंने hi सख्ती से बोलै है क मैं उनके पास आकर पडूँ और छुट्टी करता हूँ तो वो नाराज़ हो जाती हैं.
कल्पना : ाचा !!! चलो ठीक है , वैसे अगर तुम थोड़ा टाइम निकल सको तो क्या तुम मुझसे मिलोगे ? तुमने कहा था न क हम दोस्त हैं . मेरा और कोई दोस्त नहीं है न hi मुझे यहाँ कोई ाचा लगता है. सब बनावटी हैं यहाँ. बस एक तुम hi हो जो सच्चे हो और मेरी तरह स्पोर्ट्स पर्सन हो.
अमित : मैं ज़रूर मिलूंगा किसी दिन टाइम निकल कर वैसे अगर कोई खास काम हो तो बिना झिझक कह देना तुम्हारे किये दीदी का गुस्सा भी झेल लूंगा.
कल्पना : सच ! वैसे चिंता न करो बिना वजह मैं तुम्हे कभी तंग नहीं करुँगी. वैसे मैं भी शाम को प्रैक्टिस तो करती हूँ पर उसके इलावा कुछ नहीं तो काफी टाइम होता है मेरे पास. सोचा तुम्हारे साथ कहीं बहार घूम आया करूँ.
‘ अमित बे अटेंटिव इन माय क्लास ‘
ये आवाज़ सुनते hi मुझे ध्यान आया मंजू म क्लास में आ चुके हैं और मेरी तरफ hi देख रहे हैं. वो कब आये मुझे पता hi नहीं लगा. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi सीधा हो के बैठ गया. मम ने और कुछ नहीं कहा पर उनके चेहरे पर हल्का गुस्सा ज़रूर था. मंजू म का लेक्चर ख़तम होते hi हम कैंटीन की तरफ चल दिए और कल्पना भी हमारे साथ थी. कल्पना तो अब हमारे ग्रुप में शामिल हो गयी थी . कॉलेज से घर वापिस आ कर जब लंच से फ्री हुए तो मोहित अपने रूम में चला गया और मैं आंटी क साथ बैठ गया .
अमित : तो अंकल से क्या बात हुई दीदी क बारे में ?
आंटी : राघव कह रहे थे क वो एक बार खुद बात करेंगे दामाद जी से क वो करिश्मा ( मोहित सिस्टर) कुछ दिनों क लिए भेज दें. अगर वो नहीं भेजेंगे तो अगले महीने जा कर हम दोनों उसे ले आएंगे.
अमित : ये भी ठीक है. ऐसे सीधा जा कर लाना से वो लोग बुरा भी मन सकते हैं. उन्हें एक मौका तो देना चाहिए क्या पता वो खुद hi भेज दें दीदी को.
आंटी : ऐसा होता तो वो राखी पर न आ जाती? मैं तो आज hi जाने का बोल रही थी पर ये मने नहीं.
अमित : कोई बात नहीं सब ठीक हो जायेगा. आप चिंता मत करो.
आंटी : उम्मीद hi कर सकते हैं.
अमित : वैसे आंटी एक बात पूछनी थी आपसे ?
आंटी : पूछो
अमित : अंकल उस दिन बता रहे थे क आपका एक और घर भी है ?
आंटी : तुम्हे मोहित ने बताया नहीं? वो हमारा पहला घर है . जहाँ पहले हम रहा करते थे पर वो दूसरे शहर में है. तुम क्यों पूछ रहे हो?
अमित : बस ऐसे hi दिमाग में आ गया . वो क्या है न यहाँ पर जो भी मिलता है वो यही कहता है हमारे पास इतने फ्लैट्स हैं , हमारे पास फार्म हाउस है , हमारे पास इतने घर हैं हमारे पास ये हमारे पास वो . तो मैंने सोचा आपके पास भी तो होंगे अंकल बता भी रहे थे पर मोहित क साथ जा कर देखने का टाइम hi नहीं मिला . आज बस मंद में आया तो पूछ लिया.
आंटी : पहली बात ये क ये आपका कहना बंद करो. ये सब तुम्हारा भी है. वैसे तो हम ने उसी शहर से शुरुआत की थी तुम्हारे पापा भी वहीँ क तो थे. मगर यहाँ भी हमारा बहुत कुछ है. फार्महाउस की तो कभी हमें ज़रूरत hi नहीं थी, हाँ फ्लैट और कुछ प्लाट वगैरह ले रखे हैं इन्वेस्टमेंट क तौर पर. और ऑफिस का तो तुम्हे बता hi दिया होगा.
अमित : फ्लैट भी हैं ? वो कहाँ ओर हैं? क्या वहां कोई रहता है?
आंटी : एक में तो इन्होने अपने किसी दोस्त को रखा हुआ है और एक खली पड़ा है. यहीं क्सक्सक्सक्स टावर्स में है. इसके इलावा एक और है वो करिश्मा क नाम से लिया था उसके पेपर्स उसी को दे दिए शादी क गिफ्ट में .
अमित : क्या मैं वो फ्लैट देख सकता हूँ?
आंटी : देख तो सकते हो पर आज अचानक ये सब कैसे दिमाग में आ गया ? बात क्या है सच सच बताओ.
अमित : वो आंटी असल में हमारे ग्रुप क सब लोग पार्टी करने को कह रहे थे पार्टी मुझे करनी है तो जगह समझ नहीं आ रही थी. वैसे तो दोस्तों क अपने फ्लैट और फार्म हाउस हैं ओर अगर मैं वहां जाता हूँ तो इससे कहीं मोहित की इंसल्ट न हो बस इसी लिए मैं सोच रहा था अगर अपने पास कोई ऐसी जगह है तो वहीँ कर लेंगे.
आंटी : तो तुम घर क्यों नहीं ले एते सब को?
अमित : समझा कीजिये वो लोग घर नहीं आएंगे. और मोहित को अभी माहि ओट किसी बात का. उसे सरप्राइज देना है आप भी मत बताइयेगा.
आंटी : ठीक है पर वहां साफ सफाई का देखन पड़ेगा वैसे तो वहां सब सामान मौजूद है बस सफाई करनी पड़ेगी बहुत दिनों से वहां गए hi नहीं.
अमित : वो मैं देख लूँगा आप चिंता मत करो. आप बस चाबियाँ दे दीजिये.
आंटी : रुको मैं अभी लती हूँ.
आंटी ने मुझे फ्लैट की चाबियाँ लेकर दे दी. अब मुझे बस फ्लैट को एक बार जा कर देखना था. नैना दीदी क लिए जगह का प्रबंध तो हो गया. अब बाकि क इंतज़ाम करने होंगे. आंटी से थोड़ी इधर उधर की बातें की और इतने में शिवानी का फ़ोन आ गया मैंने उसे आने को कह दिया और जल्दी से अपने कपडे बदल लिए. कुछ hi देर में शिवानी आ गयी. शिवानी मुझे कार में बिठा कर ग्राउंड की तरफ चलने लगी तो मैंने उसे उस फ्लैट का एड्रेस दिया और वहां चलने को कहा . शिवानी ने बिना किसी सवाल क गाड़ी उधर घुमा ली. ये भी एक बहुत बड़ी बिल्डिंग थी जहाँ बहुत सरे फ्लैट्स थे. मैंने सिक्योरिटी गार्ड क पास एंट्री करवाई और हम दोनों फ्लैट पर पहुँच गए. मैंने चाबी लगा कर दरवाज़ा खोला तो शिवानी पूछने लगी.
शिवानी : ये किसका फ्लैट है? और इसकी चाबी तुम्हारे पास कैसे?
अमित : ये मोहित का है . मुझे चाहिए था तो क बार चेक करने चला आया.
शिवानी : तुम्हे क्या ज़रूरत पद गयी इसकी?
मैंने अंदर जाते दरवाज़ा बंद किया और शिवानी की कमर में हाथ दाल कर उसे अपने साथ चिपका लिया.
अमित : गाड़ी में तुम्हे मज़ा नहीं अत न इसी लिए इसकी चाबी मांग कर लाया हूँ. तो बोलो क्या कहती हो.
शिवानी : ( शरमाते हुए ) क्या सच में इसी लिए यहाँ ए हो?
अमित : तुम क्या कहती हो ?
शिवानी : मैं तो तुम्हारे साथ कहीं भी चलने को तैयार हूँ.
अमित : सच में ? तो फिर हो जाये ?
शिवानी : हम्म्म्म
अमित : मगर पहले यहाँ की सफाई करनी पड़ेगी वर्ण ऐसे मज़ा नहीं आएगा. तुम ऐसा करो आज घर चली जाओ और मैं यहाँ की सफाई करता हूँ.
शिवानी : ये क्या बात हुई? तुम अकेले कैसे करोगे ये सब वैसे भी ये लड़कियों का काम होता है लड़कों का नहीं. हटो पूछे मैं करती हूँ सफाई तुम आराम से बैठो.
अमित : नहीं तुमसे नहीं होगा. तुम तो राज कुमारियों की तरह पाली हो मैं जनता हूँ तुमने घर ओर भी कभी काम नहीं किया होगा. इस लिए तुम रहने दो मैं खुद hi कर लूंगा तुम तब तक बहार घूम आओ.
शिवानी : इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. इतना काम तो हर कोई करना जनता है. वैसे ये सब मेरे लिए hi तो करना है तो क्यों न मैं hi करूँ.
अमित : ाचा चलो दो ो मिल कर करते हैं जल्दी ख़तम hi जायेगा.
सारा कुछ सफ़ेद चादरों से ढाका हुआ था ता की धुल मिटटी से ख़राब न हो. वैसे भी बहार से कहीं से धुल मिटटी आने की कोई जगह तो थी नहीं इस किये तकरीबन साफ hi था बस हलकी फ़िल्मी सफाई को ज़रूरत थी तो हम दोनों जुट गए और सरे कपडे उतर कर एक साइड रख दिए. फ्लैट में hi झाड़ू पीछे का सामान पड़ा हुआ था तो हमने वही इस्तेमाल किया. पानी का प्रबंध तो ऊपर सबके लिए hi रहता है. उसके इलावा किचन में भी बर्तन वगैरह ज़रूरत की हर चीज़ थी. फ्लैट में हर चीज़ मौजूद थी पूरा फर्नीचर और घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़. सफाई करते करते 1:30 घंटा लग गया और हम दोनों थक गए .
अमित : हआ अब जा क कहीं साफ लग रहा है. तो क्या कहती हो फिर से गन्दा करें?
शिवानी : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मैं तो थक गयी . कभी भी इतना काम नहीं किया मेरी तो पूरी बॉडी ऐसे लग रही है जैसे बहुत भरी हो गयी हो. मुझसे तो अब कुछ नहीं होगा . आज तो रहने hi दो.
अमित : ठीक है आज रहने देते हैं पर अभी तुम्हारी थकन उतरने क लिए कुछ तो करना होगा न.
शिवानी : मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा प्लीज रहने दो कुछ भी.
अमित : तुम बस चुप रहो.
उसके बाद मैंने शिवानी क कपडे उतरने शुरू कर दिए वो मुझे रोकती रही पर मैं नहीं मन . शिकवणी को नंगा करने क बाद मैंने भी अपने कपडे उतर दिए और शिवानी को लेकर बाथरूम में आ गया. ठन्डे पानी क शावर क नीचे नहाने से हमारी थकन मिटने लगी. मैंने अपने हाथों से शिवानी क गोर बदन को मॉल मॉल कर उसे नहलाया. आज वाकई में थकन हो चुकी गहि इस लिए मैंने कोई छेड़ छड़ नहीं की क्यूंकि इसमें मज़ा नहीं अत दोनों को. नहाने क बाद शिवानी को भी काफी रहत मिली और फिर हम कपडे पहन कर फ्लैट को लॉक कर क वापिस आ गए. स्टेडियम से जब ट्यूशन पहुंचा तो मंजू म क चेहरे पर गुस्सा झलक रहा था .
मंजू म : क्या बातें हो रही थी क्लास में कल्पना क साथ ?
अमित : कुछ भी तो नहीं , बस ऐसे hi इधर उधर की. वो मुझसे पूछ रही थे क मैं कल क्यों नहीं आया ?
मंजू म : उसे बड़ा इंटरेस्ट है तुम में ? माजरा क्या है? इतने बिजी थे तुम उसके साथ क मेरा भी पता नहीं चला ?
अमित : कुछ नहीं कोई ऐसी वैसी बात नहीं है. वो बस मेरी दोस्त है. वैसे आप इतना गुस्सा क्यों कर रही हैं? आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हैं जैसे आप मेरी गफ हो और आप क सामने मैंने किसी और लड़की से कोई बात कर्ली हो. आप को जलन हो रही है उससे?
बेध्यानी में मैं वो बात कह गया जो नहीं केहनी चाहिए थी. पर अब तो तीर निकल चूका था.
मंजू म : क्या कहा ? मुझे जलन हो रही है ? हाँ हो रही है जलन , सच सच बता तेरा उसके साथ क्या सन चल रहा है.
मंजू म तो सच मच गुस्से में आ गयी और उन्होंने मेरी उस बात पर भी जैसे कोई गौर नहीं किया. पर मैंने जो गलती कर दी थी उसे संभालना भी तो था.
अमित : सॉरी दीदी मैं कुछ ज्यादा hi बोल गया. मैं सच कह रहा हूँ ऐसी कोई बात नहीं वो जस्ट मेरी फ्रंड है . वो जुडो की प्लेयर है तो उस दिन पहली बार प्रिंसिपल सर क ऑफिस में hi बात हुई थी. बेचारी क कोई फ्रेंड्स नहीं हैं . स्पोर्ट्स में होने क कारन हम दोस्त नान गए और कोई बात नहीं है. प्लीज आप गुस्सा मत कीजिये अगर आप को बुरा लगा हो तो मैं फिर उससे बात नहीं करूँगा . मैं आपको नाराज़ नहीं करना चाहता.
मेरे ऐसा कहता hi मंजू म क तेवर थोड़े नरम पद गए.
मंजू म : उसकी कोई ज़रूरत नहीं. मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है. कॉलेज में ज्यादातर बड़े घरों क बिछ्ड़े हुए बचे हैं और मैं नहीं चाहती क मेरा भाई किसी गलत सांगत में पड़े. वैसे वो लड़की सब से अलग है . मैंने देखा है वो किसी से बात नहीं करती.
अमित : अब गुस्सा ठंडा हो गया हो तो क्या एक कप कॉफ़ी मिलेगी?
मंजू म : गुस्सा ऐसे ठंडा नहीं होगा
अमित : तो कैसे होगा?
मंजू म : कितने दिन हो गए तुम मुझे बहार नहीं लेकर गए. राखी वाले दिन मैंने सोचा था क हम साथ में डिनर करेंगे पर तुम्हे उस दिन जाना था.
अमित : लो इसमें कौन सी बड़ी बात है हम आज hi चलते हैं चलिए कपडे बदलिए.
मंजू म : अभी पहले कॉफ़ी पि कर पड़े करो. टेस्ट आने वाले हैं . स्टडी करने क बाद चलेंगे अभी बहुत टाइम है.
उसके बाद मम क हाथ की कॉफ़ी और स्टडी करने क बाद हम डिनर करने क लिए निकल गए . होटल में हमने साथ में डिनर किया और फिर मैंने मम से आइस क्रीम का पूछ तो मम मन गयी . हम आइस क्रीम खाने क लिए एक आइस क्रीम पार्लर गए . वहां मम को एक चेयर पर बिठा कर मैं आइस क्रीम लेने गया तो काउंटर पर एक लड़की मिल गयी जिसे मैं पहले एक बार मिल चूका था पर अभी उसका चेहरा मेरी तरफ नहीं था मगर साइड से hi मैं उसको पहचान रहा था बाद कन्फर्म नहीं था . जैसे hi मैं काउंटर पर आर्डर देने लगा तो उसने मेरी तरफ देखा.
लड़की : ो hi व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज !! कैसे हो तुम? मुझे पहचाना ? मैं नैना की दोस्त ज्योति
अमित : ो hi आप कैसी हैं ? इतने दिनों क बाद देख रहा हूँ आप को , एक बार तो मुझे लगा कहीं मैं किसी और को hi न गलती सी बुला लूँ. वैसे आपको मैं किसे भूल सकता हूँ. आप तो सब से खास हैं. उस दिन आपकी वजह से hi तो...
ज्योति : ी ऍम सॉरी यार , उस दिन कुछ ज्यादा hi हो गया था. पर थैंक्स तुमने नैना को मन लिया वर्ण वो तो हमसे बात भी न करती दोबारा . तुम जितने हैंडसम हो उससे भी ज्यादा दिल क अचे भी हो. वर्ण कोई और होता तो पता नहीं क्या कहता.
अमित : अरे इसमें माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. दोस्तों में तो हंसी मज़ाक चलता hi है. ऐसे अगर दोस्तों से लड़ाई झगड़ा करने लगे तो हम अकेले hi रह जायेंगे फिर ज़िन्दगी ज़िन्दगी कहाँ रह जाएगी. आखिर दोस्त hi तो ज़िन्दगी होते हैं.
ज्योति : ट्रुइली यू अरे अमेजिंग . कितनी अछि सोच है तुम्हारी. नैना बहुत लकी है जिसे तुम जैसा बर्फ मिला है. सच में यार तुम एक कम्पलीट पैकेज हो. मतलब परफेक्ट मन. काश क तुम्हारे जैसा मुझे भी कोई मिल जाये
अमित : आप कुछ ज्यादा hi तारीफ कर रही हैं मेरी , मैं इतना भी ाचा नहीं.
ज्योति : तुम क्या हो मैं अछि तरह जानती हूँ. हीरो जैसी पर्सनालिटी इतने अछि सोच . ये मजबूत बॉडी जो लड़कियों को अछि तरह गार्ड कर सकती है. केयरिंग नेचर और .. ( तगड़ा मजबूत हथियार जो किसी की भी प्यास बुझा सकता है )
अमित : और .....
ज्योति : ( शरमाते हुए ) और कुछ नहीं . तुम्हारा कोई भाई वगैरह नहीं है क्या ? या कोई तुम्हारा दोस्त जो तुम्हारे जैसा हो?
अमित : क्या करोगी ? वैसे मैं अकेला ओने पीेछे हूँ. मेरी कोई कार्बन कॉपी नहीं है.
ज्योति : मायूस होते हुए) काश कोई होता तो..
अमित : तो ....
ज्योति : बिना देरी किये उसे अपना बर्फ बना लेती.
अमित : है है है ... आप भी कमल करती हैं. वैसे आप इतनी खूबसूरत हैं क आप को मुझसे भी अचे अचे मिल जायेंगे.
ज्योति : मुझे बस तुम चाहिए . मेरा मतलब है सिर्फ तुम जैसा चाहिए.
अमित : अब तो मुश्किल है हाँ अगर कोई मिल गया तो बताऊंगा. वैसे मुझे यकीन है आप जैसी खूबसूरत लड़की को कोई मुझसे भी ाचा hi मिलेगा.
ज्योति : ( शर्मा गयी) इतनी भी कोई खूबसूरत नहीं मैं. नैना मुझसे कहीं अछि है.
अमित : वो तो है hi पर आप अपनी जगह खूबसूरत हैं. पता है आप क ग्रुप में मुझसे सबक अछि आप hi लगी थी उस दिन.
ज्योति : तो तुम hi बन जाओ न मेरे बर्फ
अमित : क्या ?
ज्योति : आज कल तो हर कोई 2-3 गफ बना लेता है . तो क्या तुम नहीं बना सकते? वैसे मैं तुम्हे ज्यादा तंग भी नहीं करुँगी.
अमित : आप ये क्या कह रही हैं? अगर नैना को पता चला तो पता है क्या होगा.
ज्योति : नैना को मैं कुछ नहीं बताउंगी और तुम भी मत बताना. प्लीज हाँ कार्डो . देखो मेरा कोई बर्फ नहीं है. मैं तो बाद सब पर इम्प्रैशन ज़माने क लिए किसी को भी थोड़ी बहुत लाइन देकर अपना बर्फ बना कर सब क सामने ले जाती हूँ पर उससे ज्यादा कुछ नहीं. मैं कसम कहती हूँ मेरा सीरियसली कोई बर्फ नहीं है. प्लीज तुम मेरे बर्फ बन जाओ .
अमित : ये नहीं हो सकता , मैं नैना को धोखा नहीं दे सकता.
ज्योति : प्लीज देखो मैं उसे धोखा देने को नहीं कह रही. मैं सिर्फ इतना चाहती हूँ तुम थोड़ा सा अपना प्यार मुझे भी दे दो. मैं वडा करती हूँ नैना को कभी पता नहीं चलेगा.
अमित : देखिये आप पता नहीं मुझे क्या समझ रही हैं पर मैं ऐसा नहीं हूँ. आप बहुत अछि हैं और खूबसूरत भी. आपको ज़रूर आपका मन चाहा बर्फ मिलेगा आप थोड़ा सबर रखिये.
ज्योति : सबर hi तो रखा था पर जब से तुम्हे देखा है बस तुम hi मेरे ख्वाबों ख्यालों में हो. नैना से कई बार कहा है क वो तुमको एक बार बुला ले पर वो मेरी सुनती hi नहीं है. प्लीज मुझे थोड़ा सा प्यार देदो.
ज्योति क बार बार इस तरह रिक्वेस्ट करने से मेरा मन पिघलने लगा था. उसकी वो करुणा मई ऑंखें मुझे कमज़ोर कर रही थी. किसी औरत का सबसे बड़ा हथियार उसके आंसू होते हैं मैंने ये सुना था और अक्सर मैं इसे हथियार क आगे ढेर हो जाता हूँ.
अमित : प्लीज यार खुद को सम्भालो मैं एक आम सा साधारण लड़का हूँ और आप ऐसे . ठीक है मैं आपका दोस्त बन सकता हूँ पर सिर्फ तब तक जब तक आपको कोई और बर्फ नहीं मिल जाता. इससे ज्यादा की उम्मीद मत रखिये मुझसे.
मेरे इतना कहने से ज्योति क चेहरे पर जैसे ख़ुशी जगमगाने लगी. उसकी ऑंखें चेहरे से ज्यादा मुस्कुराने लगी.
ज्योति : ो थैंक यू , थैंक यू वैरी मच.
ज्योति ने वही ख़ुशी में उछलते हुए मुझे गले लगा लिया और मेरे गाल पर किश कर दिया. ज्यादा लीग तो नहीं थे वहां पर फिर भी कुछ ने तो ये देख hi लिया था . ज्योति को जब एहसास हुआ क अभी अभी उसने क्या किया है वो भी शर्मा गयी और उसका चेहरा झुक गया . देखने में सबकी उस्ताद यानि क लेडी डॉन लगती थी अपने ग्रुप में और आज ऐसे शर्मा रही थी. मुझे पहले तो उसके किश करने से शॉक लगा पर उसको शरमाते हुए देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
अमित : ये क्या था? सबके सामने ये सब
ज्योति : नज़रें चुराते हुए ) सॉरी वो मुझे पता hi नहीं लगा कब ये ... सॉरी मुझे अपनी ख़ुशी कण्ट्रोल करनी चाहिए थी.
अमित : कोई बात नहीं , हो जाता है. पर खुद पर काबू करना भी आना चाहिए
ज्योति : मैं आगे से ध्यान रखूंगी.
अमित : वैसे किसके साथ आयी हो यहाँ?
ज्योति : मैं अकेली आयी हूँ यहाँ पास में hi मेरा घर है. और तुम?
ज्योति क इस सवाल से मुझे मंजू म की यद् आयी . वो यहीं पर थी और उन्होंने सब देख लिया होगा.
अमित : ो सहित ! मैं यहाँ दीदी क साथ आया था . मर गए मुझे जाना होगा प्लीज तुम भी निकलो . पता नहीं अब क्या होगा वो यहीं बैठी हुई हैं.
मैंने मंजू म की तरफ देखा तो वो हमारी तरफ hi देख रही थी और उनके चेहरे से hi उनके गुस्से का पता चल रहा था. मैंने जल्दी से आइस क्रीम ली और मंजू म की तरफ चल दिया. ज्योति भी पालक झपकते गायब हो गयी.
मंजू म : कौन थी ये ? बड़ा चिपक रही थी और सबके सामने ये सब ? बड़ी बेशरम लड़की है. और तुम भी कैसे उसके साथ इतनी देर से लगे हुए थे. है कौन ये ?
अमित : वो कोई नहीं है आप वो सब छोड़िये. वो पागल है मुझे तो खुद गुस्सा आ गया था उसने ऐसे अचानक
मंजू म : पता है जो गुस्सा आ गया था. इतनी देर से है है क बातें कर रहे थे तब तो गुस्सा नहीं आया? कब से चल रहा है उसके साथ चक्कर ? और ये अपने कॉलेज की तो नहीं लगती . कौन हैं? कहाँ की है? कैसे जानती है तुम्हे?
अमित : आप ऐसे hi शक कर रही हैं. असल में वो मेरी दीदी क कॉलेज में पड़ती है . उनकी फ्रंड है . दीदी क साथ hi मिला था इससे. वो पिछली बार इसने मेरे साथ एक मैक कर दिया था जिससे मैं गुस्सा हो गया था. उसी की माफ़ी मांग रही थी क्यूंकि दीदी ने भी उस दिन से इसे बुलाया नहीं. तो इस लिए वो मुझसे माफ़ी मांग रही थी. मैंने माफ़ कर दिया और वो ख़ुशी क मरे मेरे गले लग गयी.
मंजू म : तुम झूठ बोल रहे हो. उसने एक बार भी कण नहीं पकडे थे. और अगर वाकई में उसने तुम्हारे साथ गलत किया था तो तुमने माफ़ क्यों कर दिया? तुझे उसकी क्यों परवाह होने लगी?
अमित : आपको मुझ पर भरोसा नहीं? क्या मैं झूठ बोलूंगा आपसे ? आप को हो क्या गया है ? इतना शक तो कोई बीवी भी अपने पति पर नहीं करती जितना आप मुझ पर कर रही हैं.
बात तो कोई इतनी बड़ी नहीं थी पर पता नहीं कैसे मुझे बात करते करते गुस्सा आ गया. मंजू म तो पहले hi गुस्से में थी उनको मानाने की जगह मैं भी गुस्सा कर बैठा और जब दोनों hi गुस्सा कर बैठें तो मनाये कौन? आइस क्रीम वहीँ पड़ी रह गयी और हम दोनों उठ कर बहार आ गए. मैंने बाइक स्टार्ट की और मम भी चुपचाप पीछे बैठ गयी. मैंने मम को घर छोड़ा और वापिस मोहित क घर लौट आया . क्या से क्या हो गया. मैं ज्योति को रोने नहीं देना चाहता था इस लिए उसकी बात मन ली और अब मंजू म को बिना वजह इतना कुछ सुना कर उन्हें गुस्सा दिला कर वापिस आ गया. देखा जाये तो मम को भी इस तरह ओवर रियेक्ट नहीं करना चाहिए था. पर फिर भी मेरे दिल में इस बात पर पछतावा भी हो रहा था. अगर मम को वाकई में ठेस लग गयी तो ? अगर फिर से वो पहले की तरह हो गयी तो ? मैंने उन्हें बहिन बनाया है तो मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. हो सकता है बड़ी बहिन क नाते वो मेरी चिंता कर रही हों. पर फिर भी एक hi दिन में 2-2 बार , क्या मैं अब किसी लड़की से बात भी नहीं कर सकता?
मैं काफी देर तक मम क बारे में सोचता रहा. आंटी जब दूध देने आयी तो मुझे सोच में खोया देख कर उन्होंने भी वजह पूछी तो मैं है कर ताल दिया . इस सब में मैं तो भूल hi गया था क नैना दीदी को भी फ़ोन करना था.
अमित : hi कैसी हो नैना ?
नैना दीदी : वह आज तो बड़े अचे तरीके से बात कर रहे हो.
अमित : क्यों पहले अचे से बात नहीं करता क्या?
नैना दीदी : पहले हमेशा दीदी कहते हो इस लिए मुझे नहीं लगता पर आज सीधा मेरा नाम लिया . ी लिखे आईटी that’s लिखे माय बर्फ
अमित : क्या करूँ शुरू से आदत जो है दीदी कहने की
नैना दीदी : फिर आज क्यों नहीं कहा?
अमित : क्यूंकि मैं अपनी दीदी को तो वो नहीं कह सकता न जो मैं अपनी गफ को कहने वाला हूँ.
नैना दीदी : ( धीमी आवाज़ में ) ऐसा क्या कहने वाले हो .
अमित : कल आपको काली से फूल बनाना है इस लिए कल सुबह कॉलेज नहीं जाना . कल सारा दिन आप मेरे साथ रहोगी.
मेरी बात सुनते hi नैना दीदी शर्मा गयी और कुछ देर तक चुप रही. शायद मेरी बात से लड़कियों वाली हाय उन पर हावी हो गयी थी . हमेशा मेरे साथ बोल्ड रहने वाली आज खुद शर्मा रही थी.
अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी?
नैना दीदी : ........
अमित : इरादा बदल गया हो तो रहने देते हैं
नैना दीदी : ( उतावले पाने से ) मैंने ऐसा कब कहा
मुझे उनके इस तरह बोलने से उन पर हसी आ गयी पर मैंने कण्ट्रोल किया
अमित : तो फिर आओ कुछ बोली क्यों नहीं?
नैना दीदी : मैं क्या कहूं? तुम्हे सब पता तो है
अमित : मुझे क्या पता होगा मैं तो आप से इसी लिए पूछ रहा हूँ
नैना दीदी : तुम्हे सब पता है अब मुझे तंग मत करो
अमित : तंग कहा होगी अब तो खुली होगी
नैना दीदी : क्या खुली होगी ? ............ गंदे बेशरम छी ... शर्म नहीं आती ?
अमित : मैंने क्या कहा
नैना दीदी : तुम ज्यादा स्मार्ट मत बनो . कैसी गन्दी गन्दी बातें कर रहे हो
अमित : मतलब गन्दा काम तो कर सकते हैं पर बातें नहीं.
नैना दीदी : क्यों तंग कर रहे हो मुझे शर्म आ रही है
अमित : वह ..... तो आप को भी शर्म आती है. उस दिन तो मुझे कह रही थी क मैं लड़कियों की तरह शरमाता हूँ.
नैना दीदी : तो क्या अब बदला ले रहे हो उस बात का?
अमित : बदला तो अचे से लूँगा कल आप मिलो तो सही
नैना दीदी : मैं नहीं आने वाली अगर तुमने ऐसे hi बातें करनी हैं तो.
अमित : सोच लीजिये , कल का दिन जगह का इंतज़ाम किया बाद में मौका मिले न मिले पता नहीं.
नैना दीदी : मैं नहीं आउंगी मुझे पता है तुम ऐसे hi तंग करोगे
अमित : फिर वही बात. मैंने कहा न मैं तंग नहीं खुली करूँगा.
नैना दीदी : ोुउउउउ ..... गंदे बेशरम गधे
अमित : गधे जैसा hi तो है वैसे
नैना दीदी : youuuuuuuuuu bye रखो अपना गधा अपने पास hi.
इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट दिया. कुछ ज्यादा हो शर्मा रही थी. जैसे भी हो उन्हें सताने में मज़ा बड़ा आ रहा था. मैंने फिर से फ़ोन कर दिया. 3-4 बेल्ल बजने क बाद उन्होंने फ़ोन उठा hi लिया.
नैना दीदी: ??????
अमित : बुरा मान गयी ?
नैना दीदी :???????
अमित : बात माहि करोगी ?
नैना दीदी : उनंहूँण
अमित : तो कल का कैंसिल फिर ? मैं अपने दोस्त को बोल देता हूँ क मुझे ज़रूरत नहीं उसके घर की चाबियों की.
नैना दीदी : जान ले लुंगी अगर कल का कैंसिल किया तो.
नैना दीदी भी न . वैसे तो बोल नहीं रही थी अब एक डैम से बोल पड़ी
अमित : तो कल तैयार हो क आना अछि तरह सफाई कर क. घर पर बहाना बना क आना कल देर से आओगी घर. और हाँ एक और बात
नैना दीदी : बोलो
अमित : कल तो अछि तरह खुली कर दूंगा फिर कभी तंग नहीं होगी है है है
नैना दीदी : ोुउउउउउउ ी किल यू गंदे बदमाश गधे
मैंने जल्दी से फ़ोन काट दिया. दीदी पता नहीं क्या क्या कहती रही होगी. मैं नैना दीदी क बारे में सोचता हुआ आराम से गया . आज आंटी भी शायद चुदाई क मूड में नहीं थी इसी लिए दूध देकर वापिस चली गयी थी. अगली सुबह मैं रूटीन से एक्ससरसीसे कर क वापिस आ गया और नगर कर क मोहित क साथ hi रेडी हो गया. मगर मैं कार क बजाये बाइक पर घर से निकला और मोहित को बता दिया क मैं किसी काम से जा रहा हूँ और फ्री हो कर आ जाऊंगा. मैंने नैना दीदी को फ़ोन किया तो उन्होंने पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया जैसे मेरे फ़ोन का hi वेट कर रही हों
नैना दीदी : कहाँ हो मैं कब से तुम्हारे फ़ोन का वेट कर रही हूँ?
अमित : बड़ी जल्दी में हो . ज्यादा तंग हो गयी थी क्या रत को ?
नैना दीदी : तुम बाज़ नहीं आओगे? मैं कॉलेज में तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ जल्दी आओ.
अमित : कॉलेज में क्या कर रही हो?
नैना दीदी : तो और क्या करती ? मैं करुणा क साथ कॉलेज आ गयी अब यहाँ से तुम्हारे साथ जाउंगी.
अमित : क्या करुणा दीदी को भी बता दिया?
नैना दीदी : पागल समझा है क्या? अभी उसे कुछ नहीं बताया . पर ज़रूरत पड़ी तो बताना भी पद सकता है. कोई बात हुई तो वो hi मेरी हेल्प करेगी न.
अमित : ाचा ठीक है मैं 15 मिनट्स में पहुँच रहा हूँ
नैना दीदी : जल्दी आओ
उसके बाद मैं नैना दीदी क कॉलेज की तरफ निकल गया. रस्ते में मुझे कुछ खाने पिने का सामान और कुछ टेबलेट्स भी चाहिए थी तो वो भी ले लिया.
दूसरी तरफ कॉलेज में आज शीना ने अपनी सब फ्रेंड्स को बुलाया था उनसे किसी बात पर चर्चा करने क लिए. उसके दिमाग में उस दिन से hi अमित को लेकर जो शक था आज वो अपना शक यकीन में बदलने क लिए सब क साथ मिलकर कोई प्लान बनाने वाली थी. वहीँ आज मोंटी कॉलेज नहीं आय और वो अपने उस फ्लैट छुम ऑफिस में चला गया . 2 दिन से वो गया नहीं था वहां और उसके पीछे क्या हो गया है वहां उसे खबर तक नहीं थी.
आज मेरे क्लास में न आने से मंजू म भी परेशां हो गए थे थोड़ा . कल रत जो भी हुआ उसकी वजह से वो भी ठीक से सो नहीं पायी थी. उन्हें भी समझ नहीं आ रही थी क आखिर वो इतनी ओवर रियेक्ट क्यों कर रही हैं. अमित जवान है उसकी अपनी लाइफ है . हैंडसम है तो लड़कियां तो आएँगी hi न बात करने उससे पर उन्हें क्यों जलन हो रही है ये बात उन्हें खुद समझ नहीं आ रही थी. जिस तरह कल अमित गुस्सा कर क गया था और आज क्लास में भी नहीं आया था . इसका मतलब था क अमित कुछ ज्यादा hi नाराज़ हो गया है. अगर कहीं गुस्से में आकर उनसे मिलना hi छोड़ दिया? अगर उसने उनसे अपना रिश्ता तोड़ लिया तो ? इतने दिनों बाद उनकी ज़िन्दगी में फिर से रंग आने लगे थे अमित की वजह से . वो एक स्टूडेंट एक दोस्त एक भाई एक घर क बड़े की तरह उनको ट्रीट करता था. इतने सरे रिश्ते वो अपनी एक गलती से कहीं खो न दे ये दर उन्हें सताने लगा था. ज़िन्दगी में पहली बार अपने सेज भाई क बाद दूसरा अमित hi था जिसकी छाप मंजू क दिल पर बस गयी थी. अब ये छाप भाई की है या कुछ और अभी इसका फैसला नहीं हुआ था. क्यूंकि कल जो कुछ भी मंजू ने किया वो एक बहिन तो कभी कर नहीं सकती. कहीं न कहीं मंजू क अंदर जलन सी हो गयी थी पहले कल्पना और फिर उस लड़की को आइस क्रीम पार्लर में अमित क साथ देख कर. जिस तरह उसने अमित को गले लगाया और सब क सामने चूमा ऐसे तो सिर्फ प्रेमिका hi कर सकती है . बस इसी वजह से मंजू को गुस्सा आ गया था और इस गुस्से में वो अमित को अनजाने में नाराज़ कर बैठी. कहीं अमित उनसे दूर हो कर किसी और क पास न चला जाये अब ये दर उन्हें सत्ता रहा था. बहिन होने क नाते मंजू को तो खुद अमित की मदद करनी चाहिए थी लड़की ढूंढ़ने में और यहाँ मंजू बजाये मदद करने क उन लड़कियों की वजह से झगड़ा कर रही थी. सच hi कहा था अमित ने क इतना शक तो बीवियां भी नहीं करती. तो क्या वो अमित क प्रति इतनी पोस्सेस्सिवे हो गयी है जैसे एक बीवी अपने पति क लिए? या फिर एक प्रेमिका अपने प्रेमी क किये ? सोच सोच कर मंजू का दिमाग ख़राब होता जा रहा था . दिमाग तो यही कह रहा था क अमित उसका छोटा भाई है पर दिल तो कुछ और hi कह रहा था. दिल को तो अमित क पास होने का एहसास hi बहुत था. जब कभी अमित उसे छूटा था तो उसको एक अलग hi फीलिंग आती थी जो वो समझ नहीं पति थी. और किस तरह से वो कभी का hi मंजू की तारीफ करता था चाहे शब्दों से या नज़रों से . मंजू को वो बहुत भाता था. जब कभी अमित की नज़रों को वो अपने रूप योजन पर महसूस करती तो वो अंदर तक हिल जाती थी. अमित क साथ बाइक पर पीछे बैठना उसके साथ वो नक्सली लड़ाई उसकी वो शर्तें उसका मंजू पर हक़ जाताना उसका उसे ज़बरदस्ती खुश रहने और ज़िन्दगी जीने का उपदेश देना मंजू को बहुत ाचा लगता था. एक समर्पण की भावना उसके मन में आ जाती थी जब भी अमित उस ओर हक़ जताता था और आज अमित गुस्सा कर क उसके सामने भी नहीं आया. पर ये भी तो हो सकता है क वो किसी काम से कहीं गया हो? शायद उसकी फॅमिली या रिश्तेदारों ने उसे बुला लिया हो या फिर वो किसी से मिलने गया हो. शायद वो रत वाली लड़की क साथ डेट पर गया हो ?
ये बात दिमाग में आते hi एक बार फिर मंजू को गुस्सा आ गया और वो फिर से अपने काम में लग गयी.
मंजू : ( जाता है तो जाये उसी से मिलने गया होगा . देखती हूँ इसे . जब आएगा अचे से क्लास लूंगी. खुद को समझता क्या है. एक तो खुद गलती करता है ऊपर से खुद hi गुस्सा दिखता है . मैं भी नहीं मनाने वाली इसे . बल्कि उसे मुझे मानना चाहिए . नाराज़ मैं हुई थी वो नहीं .)
मन में बस ऐसी hi बातें कर रही थी मंजू पर उसे क्या पता था क सच क्या है. आगे क्या होने वाला है उसकी ज़िन्दगी में. अब उनका आपस का ये गुस्सा ये नाराज़गी किस तरफ जाएगी ये मंजू को पता hi नहीं था मगर जल्द hi एक नया मोड़ आने वाला था.
अगले दिन कॉलेज में फर्स्ट लेक्चर फिर से चंद्रकांता की दन्त से hi शुरू हुआ मगर प्रोफ व् को बताने क बाद से अब मम मुझे क्लास से नहीं निकलती थी मगर खिसनी बिल्ली की तरह वो मेरी इंसल्ट करने चुकती नहीं थी. आज भी ऐसा hi हुआ. और मेरे साथ आज तो मोहित की भी वाट लग गयी. जैसे तैसे लेक्चर ख़तम हुआ तो चंद्रकांता क जाते hi साथ वाली रॉ मैं बैठी कल्पना ने मुझसे बात शुरू की.
कल्पना : hi , कैसे हो ? कल कहाँ रह गए थे ? कैंटीन में भी नहीं थे, ग्राउंड में भी नहीं ?
अमित : तो तुम कल मुझे ढून्ढ रही थी. वैसे कोई काम था क्या?
कल्पना : बस ऐसे hi. तुम नहीं थे और क्लास में भी बोर हो रही थी तो सोचा तुम कहीं बहार बैठे होंगे बस इसी लिए ढून्ढ रही थी. वैसे थे कहाँ तुम?
अमित : कल किसी काम से गया था मैं .
कल्पना : मुझे भी यही लगा इसी लिए फ़ोन नहीं किया तुम्हे. वैसे आज क्या कर रहे हो शाम को?
अमित : तुम्हे बताया तो था , पहले स्टेडियम फिर ट्यूशन.
कल्पना : तुम छुट्टी नहीं करते क्या? और ये ट्यूशन कोण पड़ता है भला?
अमित : क्या करूँ यार इंग्लिश में थोड़ी प्रॉब्लम थी और यहाँ सरे सब्जेक्ट इंग्लिश में होने की वजह से मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
कल्पना : ट्यूशन की क्या ज़रूरत है इसमें ? तुम मेरे साथ पद पिया करो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी.
अमित : थैंक्स पर वो क्या है न मेरी एक दीदी इंग्लिश टीचर हैं तो उन्होंने hi सख्ती से बोलै है क मैं उनके पास आकर पडूँ और छुट्टी करता हूँ तो वो नाराज़ हो जाती हैं.
कल्पना : ाचा !!! चलो ठीक है , वैसे अगर तुम थोड़ा टाइम निकल सको तो क्या तुम मुझसे मिलोगे ? तुमने कहा था न क हम दोस्त हैं . मेरा और कोई दोस्त नहीं है न hi मुझे यहाँ कोई ाचा लगता है. सब बनावटी हैं यहाँ. बस एक तुम hi हो जो सच्चे हो और मेरी तरह स्पोर्ट्स पर्सन हो.
अमित : मैं ज़रूर मिलूंगा किसी दिन टाइम निकल कर वैसे अगर कोई खास काम हो तो बिना झिझक कह देना तुम्हारे किये दीदी का गुस्सा भी झेल लूंगा.
कल्पना : सच ! वैसे चिंता न करो बिना वजह मैं तुम्हे कभी तंग नहीं करुँगी. वैसे मैं भी शाम को प्रैक्टिस तो करती हूँ पर उसके इलावा कुछ नहीं तो काफी टाइम होता है मेरे पास. सोचा तुम्हारे साथ कहीं बहार घूम आया करूँ.
‘ अमित बे अटेंटिव इन माय क्लास ‘
ये आवाज़ सुनते hi मुझे ध्यान आया मंजू म क्लास में आ चुके हैं और मेरी तरफ hi देख रहे हैं. वो कब आये मुझे पता hi नहीं लगा. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi सीधा हो के बैठ गया. मम ने और कुछ नहीं कहा पर उनके चेहरे पर हल्का गुस्सा ज़रूर था. मंजू म का लेक्चर ख़तम होते hi हम कैंटीन की तरफ चल दिए और कल्पना भी हमारे साथ थी. कल्पना तो अब हमारे ग्रुप में शामिल हो गयी थी . कॉलेज से घर वापिस आ कर जब लंच से फ्री हुए तो मोहित अपने रूम में चला गया और मैं आंटी क साथ बैठ गया .
अमित : तो अंकल से क्या बात हुई दीदी क बारे में ?
आंटी : राघव कह रहे थे क वो एक बार खुद बात करेंगे दामाद जी से क वो करिश्मा ( मोहित सिस्टर) कुछ दिनों क लिए भेज दें. अगर वो नहीं भेजेंगे तो अगले महीने जा कर हम दोनों उसे ले आएंगे.
अमित : ये भी ठीक है. ऐसे सीधा जा कर लाना से वो लोग बुरा भी मन सकते हैं. उन्हें एक मौका तो देना चाहिए क्या पता वो खुद hi भेज दें दीदी को.
आंटी : ऐसा होता तो वो राखी पर न आ जाती? मैं तो आज hi जाने का बोल रही थी पर ये मने नहीं.
अमित : कोई बात नहीं सब ठीक हो जायेगा. आप चिंता मत करो.
आंटी : उम्मीद hi कर सकते हैं.
अमित : वैसे आंटी एक बात पूछनी थी आपसे ?
आंटी : पूछो
अमित : अंकल उस दिन बता रहे थे क आपका एक और घर भी है ?
आंटी : तुम्हे मोहित ने बताया नहीं? वो हमारा पहला घर है . जहाँ पहले हम रहा करते थे पर वो दूसरे शहर में है. तुम क्यों पूछ रहे हो?
अमित : बस ऐसे hi दिमाग में आ गया . वो क्या है न यहाँ पर जो भी मिलता है वो यही कहता है हमारे पास इतने फ्लैट्स हैं , हमारे पास फार्म हाउस है , हमारे पास इतने घर हैं हमारे पास ये हमारे पास वो . तो मैंने सोचा आपके पास भी तो होंगे अंकल बता भी रहे थे पर मोहित क साथ जा कर देखने का टाइम hi नहीं मिला . आज बस मंद में आया तो पूछ लिया.
आंटी : पहली बात ये क ये आपका कहना बंद करो. ये सब तुम्हारा भी है. वैसे तो हम ने उसी शहर से शुरुआत की थी तुम्हारे पापा भी वहीँ क तो थे. मगर यहाँ भी हमारा बहुत कुछ है. फार्महाउस की तो कभी हमें ज़रूरत hi नहीं थी, हाँ फ्लैट और कुछ प्लाट वगैरह ले रखे हैं इन्वेस्टमेंट क तौर पर. और ऑफिस का तो तुम्हे बता hi दिया होगा.
अमित : फ्लैट भी हैं ? वो कहाँ ओर हैं? क्या वहां कोई रहता है?
आंटी : एक में तो इन्होने अपने किसी दोस्त को रखा हुआ है और एक खली पड़ा है. यहीं क्सक्सक्सक्स टावर्स में है. इसके इलावा एक और है वो करिश्मा क नाम से लिया था उसके पेपर्स उसी को दे दिए शादी क गिफ्ट में .
अमित : क्या मैं वो फ्लैट देख सकता हूँ?
आंटी : देख तो सकते हो पर आज अचानक ये सब कैसे दिमाग में आ गया ? बात क्या है सच सच बताओ.
अमित : वो आंटी असल में हमारे ग्रुप क सब लोग पार्टी करने को कह रहे थे पार्टी मुझे करनी है तो जगह समझ नहीं आ रही थी. वैसे तो दोस्तों क अपने फ्लैट और फार्म हाउस हैं ओर अगर मैं वहां जाता हूँ तो इससे कहीं मोहित की इंसल्ट न हो बस इसी लिए मैं सोच रहा था अगर अपने पास कोई ऐसी जगह है तो वहीँ कर लेंगे.
आंटी : तो तुम घर क्यों नहीं ले एते सब को?
अमित : समझा कीजिये वो लोग घर नहीं आएंगे. और मोहित को अभी माहि ओट किसी बात का. उसे सरप्राइज देना है आप भी मत बताइयेगा.
आंटी : ठीक है पर वहां साफ सफाई का देखन पड़ेगा वैसे तो वहां सब सामान मौजूद है बस सफाई करनी पड़ेगी बहुत दिनों से वहां गए hi नहीं.
अमित : वो मैं देख लूँगा आप चिंता मत करो. आप बस चाबियाँ दे दीजिये.
आंटी : रुको मैं अभी लती हूँ.
आंटी ने मुझे फ्लैट की चाबियाँ लेकर दे दी. अब मुझे बस फ्लैट को एक बार जा कर देखना था. नैना दीदी क लिए जगह का प्रबंध तो हो गया. अब बाकि क इंतज़ाम करने होंगे. आंटी से थोड़ी इधर उधर की बातें की और इतने में शिवानी का फ़ोन आ गया मैंने उसे आने को कह दिया और जल्दी से अपने कपडे बदल लिए. कुछ hi देर में शिवानी आ गयी. शिवानी मुझे कार में बिठा कर ग्राउंड की तरफ चलने लगी तो मैंने उसे उस फ्लैट का एड्रेस दिया और वहां चलने को कहा . शिवानी ने बिना किसी सवाल क गाड़ी उधर घुमा ली. ये भी एक बहुत बड़ी बिल्डिंग थी जहाँ बहुत सरे फ्लैट्स थे. मैंने सिक्योरिटी गार्ड क पास एंट्री करवाई और हम दोनों फ्लैट पर पहुँच गए. मैंने चाबी लगा कर दरवाज़ा खोला तो शिवानी पूछने लगी.
शिवानी : ये किसका फ्लैट है? और इसकी चाबी तुम्हारे पास कैसे?
अमित : ये मोहित का है . मुझे चाहिए था तो क बार चेक करने चला आया.
शिवानी : तुम्हे क्या ज़रूरत पद गयी इसकी?
मैंने अंदर जाते दरवाज़ा बंद किया और शिवानी की कमर में हाथ दाल कर उसे अपने साथ चिपका लिया.
अमित : गाड़ी में तुम्हे मज़ा नहीं अत न इसी लिए इसकी चाबी मांग कर लाया हूँ. तो बोलो क्या कहती हो.
शिवानी : ( शरमाते हुए ) क्या सच में इसी लिए यहाँ ए हो?
अमित : तुम क्या कहती हो ?
शिवानी : मैं तो तुम्हारे साथ कहीं भी चलने को तैयार हूँ.
अमित : सच में ? तो फिर हो जाये ?
शिवानी : हम्म्म्म
अमित : मगर पहले यहाँ की सफाई करनी पड़ेगी वर्ण ऐसे मज़ा नहीं आएगा. तुम ऐसा करो आज घर चली जाओ और मैं यहाँ की सफाई करता हूँ.
शिवानी : ये क्या बात हुई? तुम अकेले कैसे करोगे ये सब वैसे भी ये लड़कियों का काम होता है लड़कों का नहीं. हटो पूछे मैं करती हूँ सफाई तुम आराम से बैठो.
अमित : नहीं तुमसे नहीं होगा. तुम तो राज कुमारियों की तरह पाली हो मैं जनता हूँ तुमने घर ओर भी कभी काम नहीं किया होगा. इस लिए तुम रहने दो मैं खुद hi कर लूंगा तुम तब तक बहार घूम आओ.
शिवानी : इतनी भी नाज़ुक नहीं हूँ मैं. इतना काम तो हर कोई करना जनता है. वैसे ये सब मेरे लिए hi तो करना है तो क्यों न मैं hi करूँ.
अमित : ाचा चलो दो ो मिल कर करते हैं जल्दी ख़तम hi जायेगा.
सारा कुछ सफ़ेद चादरों से ढाका हुआ था ता की धुल मिटटी से ख़राब न हो. वैसे भी बहार से कहीं से धुल मिटटी आने की कोई जगह तो थी नहीं इस किये तकरीबन साफ hi था बस हलकी फ़िल्मी सफाई को ज़रूरत थी तो हम दोनों जुट गए और सरे कपडे उतर कर एक साइड रख दिए. फ्लैट में hi झाड़ू पीछे का सामान पड़ा हुआ था तो हमने वही इस्तेमाल किया. पानी का प्रबंध तो ऊपर सबके लिए hi रहता है. उसके इलावा किचन में भी बर्तन वगैरह ज़रूरत की हर चीज़ थी. फ्लैट में हर चीज़ मौजूद थी पूरा फर्नीचर और घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज़. सफाई करते करते 1:30 घंटा लग गया और हम दोनों थक गए .
अमित : हआ अब जा क कहीं साफ लग रहा है. तो क्या कहती हो फिर से गन्दा करें?
शिवानी : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मैं तो थक गयी . कभी भी इतना काम नहीं किया मेरी तो पूरी बॉडी ऐसे लग रही है जैसे बहुत भरी हो गयी हो. मुझसे तो अब कुछ नहीं होगा . आज तो रहने hi दो.
अमित : ठीक है आज रहने देते हैं पर अभी तुम्हारी थकन उतरने क लिए कुछ तो करना होगा न.
शिवानी : मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा प्लीज रहने दो कुछ भी.
अमित : तुम बस चुप रहो.
उसके बाद मैंने शिवानी क कपडे उतरने शुरू कर दिए वो मुझे रोकती रही पर मैं नहीं मन . शिकवणी को नंगा करने क बाद मैंने भी अपने कपडे उतर दिए और शिवानी को लेकर बाथरूम में आ गया. ठन्डे पानी क शावर क नीचे नहाने से हमारी थकन मिटने लगी. मैंने अपने हाथों से शिवानी क गोर बदन को मॉल मॉल कर उसे नहलाया. आज वाकई में थकन हो चुकी गहि इस लिए मैंने कोई छेड़ छड़ नहीं की क्यूंकि इसमें मज़ा नहीं अत दोनों को. नहाने क बाद शिवानी को भी काफी रहत मिली और फिर हम कपडे पहन कर फ्लैट को लॉक कर क वापिस आ गए. स्टेडियम से जब ट्यूशन पहुंचा तो मंजू म क चेहरे पर गुस्सा झलक रहा था .
मंजू म : क्या बातें हो रही थी क्लास में कल्पना क साथ ?
अमित : कुछ भी तो नहीं , बस ऐसे hi इधर उधर की. वो मुझसे पूछ रही थे क मैं कल क्यों नहीं आया ?
मंजू म : उसे बड़ा इंटरेस्ट है तुम में ? माजरा क्या है? इतने बिजी थे तुम उसके साथ क मेरा भी पता नहीं चला ?
अमित : कुछ नहीं कोई ऐसी वैसी बात नहीं है. वो बस मेरी दोस्त है. वैसे आप इतना गुस्सा क्यों कर रही हैं? आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हैं जैसे आप मेरी गफ हो और आप क सामने मैंने किसी और लड़की से कोई बात कर्ली हो. आप को जलन हो रही है उससे?
बेध्यानी में मैं वो बात कह गया जो नहीं केहनी चाहिए थी. पर अब तो तीर निकल चूका था.
मंजू म : क्या कहा ? मुझे जलन हो रही है ? हाँ हो रही है जलन , सच सच बता तेरा उसके साथ क्या सन चल रहा है.
मंजू म तो सच मच गुस्से में आ गयी और उन्होंने मेरी उस बात पर भी जैसे कोई गौर नहीं किया. पर मैंने जो गलती कर दी थी उसे संभालना भी तो था.
अमित : सॉरी दीदी मैं कुछ ज्यादा hi बोल गया. मैं सच कह रहा हूँ ऐसी कोई बात नहीं वो जस्ट मेरी फ्रंड है . वो जुडो की प्लेयर है तो उस दिन पहली बार प्रिंसिपल सर क ऑफिस में hi बात हुई थी. बेचारी क कोई फ्रेंड्स नहीं हैं . स्पोर्ट्स में होने क कारन हम दोस्त नान गए और कोई बात नहीं है. प्लीज आप गुस्सा मत कीजिये अगर आप को बुरा लगा हो तो मैं फिर उससे बात नहीं करूँगा . मैं आपको नाराज़ नहीं करना चाहता.
मेरे ऐसा कहता hi मंजू म क तेवर थोड़े नरम पद गए.
मंजू म : उसकी कोई ज़रूरत नहीं. मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है. कॉलेज में ज्यादातर बड़े घरों क बिछ्ड़े हुए बचे हैं और मैं नहीं चाहती क मेरा भाई किसी गलत सांगत में पड़े. वैसे वो लड़की सब से अलग है . मैंने देखा है वो किसी से बात नहीं करती.
अमित : अब गुस्सा ठंडा हो गया हो तो क्या एक कप कॉफ़ी मिलेगी?
मंजू म : गुस्सा ऐसे ठंडा नहीं होगा
अमित : तो कैसे होगा?
मंजू म : कितने दिन हो गए तुम मुझे बहार नहीं लेकर गए. राखी वाले दिन मैंने सोचा था क हम साथ में डिनर करेंगे पर तुम्हे उस दिन जाना था.
अमित : लो इसमें कौन सी बड़ी बात है हम आज hi चलते हैं चलिए कपडे बदलिए.
मंजू म : अभी पहले कॉफ़ी पि कर पड़े करो. टेस्ट आने वाले हैं . स्टडी करने क बाद चलेंगे अभी बहुत टाइम है.
उसके बाद मम क हाथ की कॉफ़ी और स्टडी करने क बाद हम डिनर करने क लिए निकल गए . होटल में हमने साथ में डिनर किया और फिर मैंने मम से आइस क्रीम का पूछ तो मम मन गयी . हम आइस क्रीम खाने क लिए एक आइस क्रीम पार्लर गए . वहां मम को एक चेयर पर बिठा कर मैं आइस क्रीम लेने गया तो काउंटर पर एक लड़की मिल गयी जिसे मैं पहले एक बार मिल चूका था पर अभी उसका चेहरा मेरी तरफ नहीं था मगर साइड से hi मैं उसको पहचान रहा था बाद कन्फर्म नहीं था . जैसे hi मैं काउंटर पर आर्डर देने लगा तो उसने मेरी तरफ देखा.
लड़की : ो hi व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज !! कैसे हो तुम? मुझे पहचाना ? मैं नैना की दोस्त ज्योति
अमित : ो hi आप कैसी हैं ? इतने दिनों क बाद देख रहा हूँ आप को , एक बार तो मुझे लगा कहीं मैं किसी और को hi न गलती सी बुला लूँ. वैसे आपको मैं किसे भूल सकता हूँ. आप तो सब से खास हैं. उस दिन आपकी वजह से hi तो...
ज्योति : ी ऍम सॉरी यार , उस दिन कुछ ज्यादा hi हो गया था. पर थैंक्स तुमने नैना को मन लिया वर्ण वो तो हमसे बात भी न करती दोबारा . तुम जितने हैंडसम हो उससे भी ज्यादा दिल क अचे भी हो. वर्ण कोई और होता तो पता नहीं क्या कहता.
अमित : अरे इसमें माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है. दोस्तों में तो हंसी मज़ाक चलता hi है. ऐसे अगर दोस्तों से लड़ाई झगड़ा करने लगे तो हम अकेले hi रह जायेंगे फिर ज़िन्दगी ज़िन्दगी कहाँ रह जाएगी. आखिर दोस्त hi तो ज़िन्दगी होते हैं.
ज्योति : ट्रुइली यू अरे अमेजिंग . कितनी अछि सोच है तुम्हारी. नैना बहुत लकी है जिसे तुम जैसा बर्फ मिला है. सच में यार तुम एक कम्पलीट पैकेज हो. मतलब परफेक्ट मन. काश क तुम्हारे जैसा मुझे भी कोई मिल जाये
अमित : आप कुछ ज्यादा hi तारीफ कर रही हैं मेरी , मैं इतना भी ाचा नहीं.
ज्योति : तुम क्या हो मैं अछि तरह जानती हूँ. हीरो जैसी पर्सनालिटी इतने अछि सोच . ये मजबूत बॉडी जो लड़कियों को अछि तरह गार्ड कर सकती है. केयरिंग नेचर और .. ( तगड़ा मजबूत हथियार जो किसी की भी प्यास बुझा सकता है )
अमित : और .....
ज्योति : ( शरमाते हुए ) और कुछ नहीं . तुम्हारा कोई भाई वगैरह नहीं है क्या ? या कोई तुम्हारा दोस्त जो तुम्हारे जैसा हो?
अमित : क्या करोगी ? वैसे मैं अकेला ओने पीेछे हूँ. मेरी कोई कार्बन कॉपी नहीं है.
ज्योति : मायूस होते हुए) काश कोई होता तो..
अमित : तो ....
ज्योति : बिना देरी किये उसे अपना बर्फ बना लेती.
अमित : है है है ... आप भी कमल करती हैं. वैसे आप इतनी खूबसूरत हैं क आप को मुझसे भी अचे अचे मिल जायेंगे.
ज्योति : मुझे बस तुम चाहिए . मेरा मतलब है सिर्फ तुम जैसा चाहिए.
अमित : अब तो मुश्किल है हाँ अगर कोई मिल गया तो बताऊंगा. वैसे मुझे यकीन है आप जैसी खूबसूरत लड़की को कोई मुझसे भी ाचा hi मिलेगा.
ज्योति : ( शर्मा गयी) इतनी भी कोई खूबसूरत नहीं मैं. नैना मुझसे कहीं अछि है.
अमित : वो तो है hi पर आप अपनी जगह खूबसूरत हैं. पता है आप क ग्रुप में मुझसे सबक अछि आप hi लगी थी उस दिन.
ज्योति : तो तुम hi बन जाओ न मेरे बर्फ
अमित : क्या ?
ज्योति : आज कल तो हर कोई 2-3 गफ बना लेता है . तो क्या तुम नहीं बना सकते? वैसे मैं तुम्हे ज्यादा तंग भी नहीं करुँगी.
अमित : आप ये क्या कह रही हैं? अगर नैना को पता चला तो पता है क्या होगा.
ज्योति : नैना को मैं कुछ नहीं बताउंगी और तुम भी मत बताना. प्लीज हाँ कार्डो . देखो मेरा कोई बर्फ नहीं है. मैं तो बाद सब पर इम्प्रैशन ज़माने क लिए किसी को भी थोड़ी बहुत लाइन देकर अपना बर्फ बना कर सब क सामने ले जाती हूँ पर उससे ज्यादा कुछ नहीं. मैं कसम कहती हूँ मेरा सीरियसली कोई बर्फ नहीं है. प्लीज तुम मेरे बर्फ बन जाओ .
अमित : ये नहीं हो सकता , मैं नैना को धोखा नहीं दे सकता.
ज्योति : प्लीज देखो मैं उसे धोखा देने को नहीं कह रही. मैं सिर्फ इतना चाहती हूँ तुम थोड़ा सा अपना प्यार मुझे भी दे दो. मैं वडा करती हूँ नैना को कभी पता नहीं चलेगा.
अमित : देखिये आप पता नहीं मुझे क्या समझ रही हैं पर मैं ऐसा नहीं हूँ. आप बहुत अछि हैं और खूबसूरत भी. आपको ज़रूर आपका मन चाहा बर्फ मिलेगा आप थोड़ा सबर रखिये.
ज्योति : सबर hi तो रखा था पर जब से तुम्हे देखा है बस तुम hi मेरे ख्वाबों ख्यालों में हो. नैना से कई बार कहा है क वो तुमको एक बार बुला ले पर वो मेरी सुनती hi नहीं है. प्लीज मुझे थोड़ा सा प्यार देदो.
ज्योति क बार बार इस तरह रिक्वेस्ट करने से मेरा मन पिघलने लगा था. उसकी वो करुणा मई ऑंखें मुझे कमज़ोर कर रही थी. किसी औरत का सबसे बड़ा हथियार उसके आंसू होते हैं मैंने ये सुना था और अक्सर मैं इसे हथियार क आगे ढेर हो जाता हूँ.
अमित : प्लीज यार खुद को सम्भालो मैं एक आम सा साधारण लड़का हूँ और आप ऐसे . ठीक है मैं आपका दोस्त बन सकता हूँ पर सिर्फ तब तक जब तक आपको कोई और बर्फ नहीं मिल जाता. इससे ज्यादा की उम्मीद मत रखिये मुझसे.
मेरे इतना कहने से ज्योति क चेहरे पर जैसे ख़ुशी जगमगाने लगी. उसकी ऑंखें चेहरे से ज्यादा मुस्कुराने लगी.
ज्योति : ो थैंक यू , थैंक यू वैरी मच.
ज्योति ने वही ख़ुशी में उछलते हुए मुझे गले लगा लिया और मेरे गाल पर किश कर दिया. ज्यादा लीग तो नहीं थे वहां पर फिर भी कुछ ने तो ये देख hi लिया था . ज्योति को जब एहसास हुआ क अभी अभी उसने क्या किया है वो भी शर्मा गयी और उसका चेहरा झुक गया . देखने में सबकी उस्ताद यानि क लेडी डॉन लगती थी अपने ग्रुप में और आज ऐसे शर्मा रही थी. मुझे पहले तो उसके किश करने से शॉक लगा पर उसको शरमाते हुए देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
अमित : ये क्या था? सबके सामने ये सब
ज्योति : नज़रें चुराते हुए ) सॉरी वो मुझे पता hi नहीं लगा कब ये ... सॉरी मुझे अपनी ख़ुशी कण्ट्रोल करनी चाहिए थी.
अमित : कोई बात नहीं , हो जाता है. पर खुद पर काबू करना भी आना चाहिए
ज्योति : मैं आगे से ध्यान रखूंगी.
अमित : वैसे किसके साथ आयी हो यहाँ?
ज्योति : मैं अकेली आयी हूँ यहाँ पास में hi मेरा घर है. और तुम?
ज्योति क इस सवाल से मुझे मंजू म की यद् आयी . वो यहीं पर थी और उन्होंने सब देख लिया होगा.
अमित : ो सहित ! मैं यहाँ दीदी क साथ आया था . मर गए मुझे जाना होगा प्लीज तुम भी निकलो . पता नहीं अब क्या होगा वो यहीं बैठी हुई हैं.
मैंने मंजू म की तरफ देखा तो वो हमारी तरफ hi देख रही थी और उनके चेहरे से hi उनके गुस्से का पता चल रहा था. मैंने जल्दी से आइस क्रीम ली और मंजू म की तरफ चल दिया. ज्योति भी पालक झपकते गायब हो गयी.
मंजू म : कौन थी ये ? बड़ा चिपक रही थी और सबके सामने ये सब ? बड़ी बेशरम लड़की है. और तुम भी कैसे उसके साथ इतनी देर से लगे हुए थे. है कौन ये ?
अमित : वो कोई नहीं है आप वो सब छोड़िये. वो पागल है मुझे तो खुद गुस्सा आ गया था उसने ऐसे अचानक
मंजू म : पता है जो गुस्सा आ गया था. इतनी देर से है है क बातें कर रहे थे तब तो गुस्सा नहीं आया? कब से चल रहा है उसके साथ चक्कर ? और ये अपने कॉलेज की तो नहीं लगती . कौन हैं? कहाँ की है? कैसे जानती है तुम्हे?
अमित : आप ऐसे hi शक कर रही हैं. असल में वो मेरी दीदी क कॉलेज में पड़ती है . उनकी फ्रंड है . दीदी क साथ hi मिला था इससे. वो पिछली बार इसने मेरे साथ एक मैक कर दिया था जिससे मैं गुस्सा हो गया था. उसी की माफ़ी मांग रही थी क्यूंकि दीदी ने भी उस दिन से इसे बुलाया नहीं. तो इस लिए वो मुझसे माफ़ी मांग रही थी. मैंने माफ़ कर दिया और वो ख़ुशी क मरे मेरे गले लग गयी.
मंजू म : तुम झूठ बोल रहे हो. उसने एक बार भी कण नहीं पकडे थे. और अगर वाकई में उसने तुम्हारे साथ गलत किया था तो तुमने माफ़ क्यों कर दिया? तुझे उसकी क्यों परवाह होने लगी?
अमित : आपको मुझ पर भरोसा नहीं? क्या मैं झूठ बोलूंगा आपसे ? आप को हो क्या गया है ? इतना शक तो कोई बीवी भी अपने पति पर नहीं करती जितना आप मुझ पर कर रही हैं.
बात तो कोई इतनी बड़ी नहीं थी पर पता नहीं कैसे मुझे बात करते करते गुस्सा आ गया. मंजू म तो पहले hi गुस्से में थी उनको मानाने की जगह मैं भी गुस्सा कर बैठा और जब दोनों hi गुस्सा कर बैठें तो मनाये कौन? आइस क्रीम वहीँ पड़ी रह गयी और हम दोनों उठ कर बहार आ गए. मैंने बाइक स्टार्ट की और मम भी चुपचाप पीछे बैठ गयी. मैंने मम को घर छोड़ा और वापिस मोहित क घर लौट आया . क्या से क्या हो गया. मैं ज्योति को रोने नहीं देना चाहता था इस लिए उसकी बात मन ली और अब मंजू म को बिना वजह इतना कुछ सुना कर उन्हें गुस्सा दिला कर वापिस आ गया. देखा जाये तो मम को भी इस तरह ओवर रियेक्ट नहीं करना चाहिए था. पर फिर भी मेरे दिल में इस बात पर पछतावा भी हो रहा था. अगर मम को वाकई में ठेस लग गयी तो ? अगर फिर से वो पहले की तरह हो गयी तो ? मैंने उन्हें बहिन बनाया है तो मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. हो सकता है बड़ी बहिन क नाते वो मेरी चिंता कर रही हों. पर फिर भी एक hi दिन में 2-2 बार , क्या मैं अब किसी लड़की से बात भी नहीं कर सकता?
मैं काफी देर तक मम क बारे में सोचता रहा. आंटी जब दूध देने आयी तो मुझे सोच में खोया देख कर उन्होंने भी वजह पूछी तो मैं है कर ताल दिया . इस सब में मैं तो भूल hi गया था क नैना दीदी को भी फ़ोन करना था.
अमित : hi कैसी हो नैना ?
नैना दीदी : वह आज तो बड़े अचे तरीके से बात कर रहे हो.
अमित : क्यों पहले अचे से बात नहीं करता क्या?
नैना दीदी : पहले हमेशा दीदी कहते हो इस लिए मुझे नहीं लगता पर आज सीधा मेरा नाम लिया . ी लिखे आईटी that’s लिखे माय बर्फ
अमित : क्या करूँ शुरू से आदत जो है दीदी कहने की
नैना दीदी : फिर आज क्यों नहीं कहा?
अमित : क्यूंकि मैं अपनी दीदी को तो वो नहीं कह सकता न जो मैं अपनी गफ को कहने वाला हूँ.
नैना दीदी : ( धीमी आवाज़ में ) ऐसा क्या कहने वाले हो .
अमित : कल आपको काली से फूल बनाना है इस लिए कल सुबह कॉलेज नहीं जाना . कल सारा दिन आप मेरे साथ रहोगी.
मेरी बात सुनते hi नैना दीदी शर्मा गयी और कुछ देर तक चुप रही. शायद मेरी बात से लड़कियों वाली हाय उन पर हावी हो गयी थी . हमेशा मेरे साथ बोल्ड रहने वाली आज खुद शर्मा रही थी.
अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी?
नैना दीदी : ........
अमित : इरादा बदल गया हो तो रहने देते हैं
नैना दीदी : ( उतावले पाने से ) मैंने ऐसा कब कहा
मुझे उनके इस तरह बोलने से उन पर हसी आ गयी पर मैंने कण्ट्रोल किया
अमित : तो फिर आओ कुछ बोली क्यों नहीं?
नैना दीदी : मैं क्या कहूं? तुम्हे सब पता तो है
अमित : मुझे क्या पता होगा मैं तो आप से इसी लिए पूछ रहा हूँ
नैना दीदी : तुम्हे सब पता है अब मुझे तंग मत करो
अमित : तंग कहा होगी अब तो खुली होगी
नैना दीदी : क्या खुली होगी ? ............ गंदे बेशरम छी ... शर्म नहीं आती ?
अमित : मैंने क्या कहा
नैना दीदी : तुम ज्यादा स्मार्ट मत बनो . कैसी गन्दी गन्दी बातें कर रहे हो
अमित : मतलब गन्दा काम तो कर सकते हैं पर बातें नहीं.
नैना दीदी : क्यों तंग कर रहे हो मुझे शर्म आ रही है
अमित : वह ..... तो आप को भी शर्म आती है. उस दिन तो मुझे कह रही थी क मैं लड़कियों की तरह शरमाता हूँ.
नैना दीदी : तो क्या अब बदला ले रहे हो उस बात का?
अमित : बदला तो अचे से लूँगा कल आप मिलो तो सही
नैना दीदी : मैं नहीं आने वाली अगर तुमने ऐसे hi बातें करनी हैं तो.
अमित : सोच लीजिये , कल का दिन जगह का इंतज़ाम किया बाद में मौका मिले न मिले पता नहीं.
नैना दीदी : मैं नहीं आउंगी मुझे पता है तुम ऐसे hi तंग करोगे
अमित : फिर वही बात. मैंने कहा न मैं तंग नहीं खुली करूँगा.
नैना दीदी : ोुउउउउ ..... गंदे बेशरम गधे
अमित : गधे जैसा hi तो है वैसे
नैना दीदी : youuuuuuuuuu bye रखो अपना गधा अपने पास hi.
इतना कह कर दीदी ने फ़ोन काट दिया. कुछ ज्यादा हो शर्मा रही थी. जैसे भी हो उन्हें सताने में मज़ा बड़ा आ रहा था. मैंने फिर से फ़ोन कर दिया. 3-4 बेल्ल बजने क बाद उन्होंने फ़ोन उठा hi लिया.
नैना दीदी: ??????
अमित : बुरा मान गयी ?
नैना दीदी :???????
अमित : बात माहि करोगी ?
नैना दीदी : उनंहूँण
अमित : तो कल का कैंसिल फिर ? मैं अपने दोस्त को बोल देता हूँ क मुझे ज़रूरत नहीं उसके घर की चाबियों की.
नैना दीदी : जान ले लुंगी अगर कल का कैंसिल किया तो.
नैना दीदी भी न . वैसे तो बोल नहीं रही थी अब एक डैम से बोल पड़ी
अमित : तो कल तैयार हो क आना अछि तरह सफाई कर क. घर पर बहाना बना क आना कल देर से आओगी घर. और हाँ एक और बात
नैना दीदी : बोलो
अमित : कल तो अछि तरह खुली कर दूंगा फिर कभी तंग नहीं होगी है है है
नैना दीदी : ोुउउउउउउ ी किल यू गंदे बदमाश गधे
मैंने जल्दी से फ़ोन काट दिया. दीदी पता नहीं क्या क्या कहती रही होगी. मैं नैना दीदी क बारे में सोचता हुआ आराम से गया . आज आंटी भी शायद चुदाई क मूड में नहीं थी इसी लिए दूध देकर वापिस चली गयी थी. अगली सुबह मैं रूटीन से एक्ससरसीसे कर क वापिस आ गया और नगर कर क मोहित क साथ hi रेडी हो गया. मगर मैं कार क बजाये बाइक पर घर से निकला और मोहित को बता दिया क मैं किसी काम से जा रहा हूँ और फ्री हो कर आ जाऊंगा. मैंने नैना दीदी को फ़ोन किया तो उन्होंने पहली बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया जैसे मेरे फ़ोन का hi वेट कर रही हों
नैना दीदी : कहाँ हो मैं कब से तुम्हारे फ़ोन का वेट कर रही हूँ?
अमित : बड़ी जल्दी में हो . ज्यादा तंग हो गयी थी क्या रत को ?
नैना दीदी : तुम बाज़ नहीं आओगे? मैं कॉलेज में तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ जल्दी आओ.
अमित : कॉलेज में क्या कर रही हो?
नैना दीदी : तो और क्या करती ? मैं करुणा क साथ कॉलेज आ गयी अब यहाँ से तुम्हारे साथ जाउंगी.
अमित : क्या करुणा दीदी को भी बता दिया?
नैना दीदी : पागल समझा है क्या? अभी उसे कुछ नहीं बताया . पर ज़रूरत पड़ी तो बताना भी पद सकता है. कोई बात हुई तो वो hi मेरी हेल्प करेगी न.
अमित : ाचा ठीक है मैं 15 मिनट्स में पहुँच रहा हूँ
नैना दीदी : जल्दी आओ
उसके बाद मैं नैना दीदी क कॉलेज की तरफ निकल गया. रस्ते में मुझे कुछ खाने पिने का सामान और कुछ टेबलेट्स भी चाहिए थी तो वो भी ले लिया.
दूसरी तरफ कॉलेज में आज शीना ने अपनी सब फ्रेंड्स को बुलाया था उनसे किसी बात पर चर्चा करने क लिए. उसके दिमाग में उस दिन से hi अमित को लेकर जो शक था आज वो अपना शक यकीन में बदलने क लिए सब क साथ मिलकर कोई प्लान बनाने वाली थी. वहीँ आज मोंटी कॉलेज नहीं आय और वो अपने उस फ्लैट छुम ऑफिस में चला गया . 2 दिन से वो गया नहीं था वहां और उसके पीछे क्या हो गया है वहां उसे खबर तक नहीं थी.
आज मेरे क्लास में न आने से मंजू म भी परेशां हो गए थे थोड़ा . कल रत जो भी हुआ उसकी वजह से वो भी ठीक से सो नहीं पायी थी. उन्हें भी समझ नहीं आ रही थी क आखिर वो इतनी ओवर रियेक्ट क्यों कर रही हैं. अमित जवान है उसकी अपनी लाइफ है . हैंडसम है तो लड़कियां तो आएँगी hi न बात करने उससे पर उन्हें क्यों जलन हो रही है ये बात उन्हें खुद समझ नहीं आ रही थी. जिस तरह कल अमित गुस्सा कर क गया था और आज क्लास में भी नहीं आया था . इसका मतलब था क अमित कुछ ज्यादा hi नाराज़ हो गया है. अगर कहीं गुस्से में आकर उनसे मिलना hi छोड़ दिया? अगर उसने उनसे अपना रिश्ता तोड़ लिया तो ? इतने दिनों बाद उनकी ज़िन्दगी में फिर से रंग आने लगे थे अमित की वजह से . वो एक स्टूडेंट एक दोस्त एक भाई एक घर क बड़े की तरह उनको ट्रीट करता था. इतने सरे रिश्ते वो अपनी एक गलती से कहीं खो न दे ये दर उन्हें सताने लगा था. ज़िन्दगी में पहली बार अपने सेज भाई क बाद दूसरा अमित hi था जिसकी छाप मंजू क दिल पर बस गयी थी. अब ये छाप भाई की है या कुछ और अभी इसका फैसला नहीं हुआ था. क्यूंकि कल जो कुछ भी मंजू ने किया वो एक बहिन तो कभी कर नहीं सकती. कहीं न कहीं मंजू क अंदर जलन सी हो गयी थी पहले कल्पना और फिर उस लड़की को आइस क्रीम पार्लर में अमित क साथ देख कर. जिस तरह उसने अमित को गले लगाया और सब क सामने चूमा ऐसे तो सिर्फ प्रेमिका hi कर सकती है . बस इसी वजह से मंजू को गुस्सा आ गया था और इस गुस्से में वो अमित को अनजाने में नाराज़ कर बैठी. कहीं अमित उनसे दूर हो कर किसी और क पास न चला जाये अब ये दर उन्हें सत्ता रहा था. बहिन होने क नाते मंजू को तो खुद अमित की मदद करनी चाहिए थी लड़की ढूंढ़ने में और यहाँ मंजू बजाये मदद करने क उन लड़कियों की वजह से झगड़ा कर रही थी. सच hi कहा था अमित ने क इतना शक तो बीवियां भी नहीं करती. तो क्या वो अमित क प्रति इतनी पोस्सेस्सिवे हो गयी है जैसे एक बीवी अपने पति क लिए? या फिर एक प्रेमिका अपने प्रेमी क किये ? सोच सोच कर मंजू का दिमाग ख़राब होता जा रहा था . दिमाग तो यही कह रहा था क अमित उसका छोटा भाई है पर दिल तो कुछ और hi कह रहा था. दिल को तो अमित क पास होने का एहसास hi बहुत था. जब कभी अमित उसे छूटा था तो उसको एक अलग hi फीलिंग आती थी जो वो समझ नहीं पति थी. और किस तरह से वो कभी का hi मंजू की तारीफ करता था चाहे शब्दों से या नज़रों से . मंजू को वो बहुत भाता था. जब कभी अमित की नज़रों को वो अपने रूप योजन पर महसूस करती तो वो अंदर तक हिल जाती थी. अमित क साथ बाइक पर पीछे बैठना उसके साथ वो नक्सली लड़ाई उसकी वो शर्तें उसका मंजू पर हक़ जाताना उसका उसे ज़बरदस्ती खुश रहने और ज़िन्दगी जीने का उपदेश देना मंजू को बहुत ाचा लगता था. एक समर्पण की भावना उसके मन में आ जाती थी जब भी अमित उस ओर हक़ जताता था और आज अमित गुस्सा कर क उसके सामने भी नहीं आया. पर ये भी तो हो सकता है क वो किसी काम से कहीं गया हो? शायद उसकी फॅमिली या रिश्तेदारों ने उसे बुला लिया हो या फिर वो किसी से मिलने गया हो. शायद वो रत वाली लड़की क साथ डेट पर गया हो ?
ये बात दिमाग में आते hi एक बार फिर मंजू को गुस्सा आ गया और वो फिर से अपने काम में लग गयी.
मंजू : ( जाता है तो जाये उसी से मिलने गया होगा . देखती हूँ इसे . जब आएगा अचे से क्लास लूंगी. खुद को समझता क्या है. एक तो खुद गलती करता है ऊपर से खुद hi गुस्सा दिखता है . मैं भी नहीं मनाने वाली इसे . बल्कि उसे मुझे मानना चाहिए . नाराज़ मैं हुई थी वो नहीं .)
मन में बस ऐसी hi बातें कर रही थी मंजू पर उसे क्या पता था क सच क्या है. आगे क्या होने वाला है उसकी ज़िन्दगी में. अब उनका आपस का ये गुस्सा ये नाराज़गी किस तरफ जाएगी ये मंजू को पता hi नहीं था मगर जल्द hi एक नया मोड़ आने वाला था.