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में घर पंहुचा और अंदर गया, तो स्नेहमड़ाम और पवनसीर बैठे हुए थे और कुछ बच्चे मिठाई खा रहे थे, सब मस्ती कर रहे थे, जैसे hi में पंहुचा तो सबकी निगाहे मेरी और हुई.
लता : आए गया तू. (में मुस्कुराते हुए उनके पास पंहुचा)
शिव : नमस्ते सर, नमस्ते मैडम. (पवनसीर बस मुस्कुराये पर स्नेहा मैडम बोल पड़ी)
स्नेहा : नमस्ते के बच्चे, कहा घूम रहा है, तुम्हे मिलने घर आये और तुम hi गायब.
शिव : सॉरी, मुझे पता नहीं था न की आप आ रहे हो, कह देते तो में मौजूद रहता.
पवनसीर : क्यों खामखा दन्त रही हो, कामियाब हुआहै वो और तुम उसे दन्त रही हो.
स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Me दन्त नहीं रही हु, बस कह रही हु, कोंग्रटुलतिओन्स. तुमने तो मुँह मीठा नहीं करवाया पर में ले आयी, आओ में अपने हाथसे तुम्हारा मुँह मीठा करवाती हु. (कहते हुए उन्होंने एक पैदा लिया और मुझे खिलाया)
शिव : थैंक यू.
स्नेहा : सिर्फ थैंक यू से काम नहीं चलेगा, पार्टी देनी पड़ेगी.
शिव : जैसा आप कहे. (बड़े सब ने मिठाई नहीं खायी हुई थी)
स्नेहा : ये सब तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे, किसी ने तुम्हारे बगैर मिठाई नहीं खाई, तुम hi खिलाओ सबको. (मेने मिठाई का डिब्बा लिया और सबको बरी बरी मिठाई khilayi)Sabko खिलाई मुझे नहीं क्यों? (में मुस्कुराया और उन्हें भी खिलाई और पवनसीर को भी, फिर बच्चे अंदर चले गए और विणा, रंजन और गायत्री दीदी भी)
पवनसीर : क्यों भाई, बहोत शिकायते आ रही है तुम्हारी? (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : कैसी शिकायते सर?
पवनसीर : (मुस्कुराते hue)Site से और कहा से? (उन्होंने इसरो में hi जहान्वी की बात की)
शिव : (मुस्कुराते hue)Ab नहीं आएगी.
स्नेहा : वैसे शिकायत तो मुझे भी है. (में उन्हें देखने लगा) तुम घर पर भी नहीं आ रहे हो, ज्यादा बिजी हो गए हो क्यों.
शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है मैडम, आऊंगा में.
ऐसे hi हमारी बाटे होती रहे, करीब एक घंटे बाद वो दोनों गए. लता और सरिता सब ठीक करने लगी और में अपने रूम में चला गया, पुरे दिन की भागादौड़ी से मुझे नींद आ गयी और में सो गया. दोनों काम ख़तम कर के मेरे रूम में आयी तो मुझे सोते पाया.
सरिता : ये तो सो गया.
लता : थका होगा, चल हम बड़े रूम में सो जाते है. उसे आराम करने दे. (मान दोनों का नहीं था, पर मुझे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी तो वो दोनों चली गयी)
सुबह उठ कर मेने फिर दौड़ की प्रैक्टिस की और फिर में स्कूल के लिए निकल गया, आज बाइक थी तो विणा और रंजन को भी स्कूल छोड़ दिया, वो दोनों भी खुस हो गयी, उसके बाद में संयम के घर के मोड़ पर पंहुचा तो कोई नहीं था तो में स्कूल के लिए निकल गया. वह पंहुचा तो संयम, वैस्वी, हर्ष और महेश सब खड़े हुए थे, मुझे देख कर महेशबोला.
महेश : क्यों बे, किसी उठलाया?
शिव : में इसकी तरह उठा नहीं लता. (वैस्वी की और देख kar)Aaj तुम दोनों साथ में आये?
वैस्वी : है तुमने कहा था तो लेने चली गयी थी, पहले ये मन कर रही थी पर जब मेने तुम्हारा नाम लिया तब मणि, मेने तो कह दिया की जो जवाब देना है शिव को देना, तब जा के बैठी, लगता है तुमसे डर्टी है. (संयम को देख कर वो मुस्कुराने लगी)
संयम : में कोई डर्टी वर्ती नहीं सामजी, अब नहीं आउंगी.
शिव : क्या तुम भी, ये किसी से नहीं डर्टी, बस. चलो अब बेल्ल बज गयी है. आज बीनमदं नहीं आयी थी, मुझे आश्चर्य हुआ, मेने सोचा की फिर बात करता हु. दूसरे टीचर ने पीरियड लिया ऐसे hi पढ़ाई चलने लगी. जब स्कूल से छूटे तो वैस्वी अपने घर के लिए निकल गयी और संयम मेरे साथ बेथ गयी, वो दुरी बना कर hi बैठी थी और ज्यादा कुछ बोली भी नहीं, मेने भी कोई बात नहीं छेड़ी. जब हम पहुंचे तो नाज़िआ दीदी उसका इंतजार कर रही थी, मुझे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
नाज़िआ : आज तुम बाइक से?
शिव : है, वो काम था तो ले आया, आप कैसी हो?
नाज़िआ : अच्छी हु, चलो घर.
शिव : अभी नहीं, फिर आता हु.
नाज़िआ : ठीक है. (वो दोनों चली गयी, में भी घर के लिए निकल गया, रस्ते में मुझे रंजन और विणा की स्कूल की याद आयी तो में उनके स्कूल की और निकल गया, वो रस्ते में hi मिल गयी मुझे, उनको ले कर में घर की और निकल गया, रंजन मुझसे चिपक कर बैठी थी, उसके स्तन मुझे चुभ रहे थे, मेने साइड मिरर से उसे देखा तो वो मुस्कुरायी, वो जानती थी की क्या हो रहा है, वो और अपने स्तन गढ़ने लगी, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी)
रंजन : आज कल बहोत बिजी हो गया है न. टाइम hi नहीं हमारे लिए.
शिव : घर पे तो होता हु. और बाकि तो तू जानती hi है.
रंजन : जानती हु और खुस भी हु, पर कभी कभी तो समय निकल ले, तेरा मान नहीं होता क्या? (में क्या जवाब देता, में मुस्कुराया, उसने भी बात को नहीं खिंचा, हम घर आ गए, वो दोनों निचे उतरी, और मेरे लिए कड़ी रही, मेने बाइक स्टैंड की, वो दोनों मुझे देख कर मुस्कुरायी, फिर हम तीनो अंदर चले गए, फ्रेस हुए और खाना खाने बेथ गए. उसके बाद में साइट की और निकल गया. आज जल्दी पंहुचा था मेने देखा की जहान्वी अभी नहीं आयी थी, में पिंकेशभाई से मिला, फिर सबसे मिलने लगा, भोली ने तो तना hi दे दिया.

भोली : कल आये फिर भी मिले भी नहीं, उस मैडम के लिए टाइम है, मेरे लिए नहीं है.
शिव : पागल है क्या तू, अभी मिलने आया न.
भोली : बड़े आये मिलने, अब हम छोटे लोगो से क्या मतलब, अबतो बड़े लोगो में उठना बैठना हो गया है न.
शिव : मर खायेगी तू, में कोनसा बड़ा हो गया हु जो ऐसा कह रही है.
भोली : और क्या कहु, यहाँ भी नहीं आता तो मिलेगा क्या.
शिव : मेरा कॉम्पिटिओं था, राज्यालेवाल क्लियर किआ है मेने, उसके लिए hi गया था.
भोली : पिंकेशबाबू बता रहे थे, पर समाज में कुछ नहीं आया.
शिव : (उसके भोले पैन से में muskuraya)Ye समाज ले की हमारे पुरे राज्य में दौड़ में पहले नंबर पर आया हु.
भोली : अच्छा, ये तो बहोत अच्छी बात है, पर फायदा क्या होता है?
शिव : (मुस्कुराते hue)Bahot फायदा होता है, तुम्हारा नाम होता है, सर्कार की और से इनाम मिलता है, आगे बढ़ने पर और भी बहोत कुछ मिलता है.
भोली : देखा मेने कहा था नई की अब बड़ा आदमी हो गया है, मेने क्या जूथ कहा था फिर.
शिव : तू जिस तरह से कह रही थी न वैसा बड़ा नहीं हुआ में सामजी.
भोली : अच्छा ऐसा है तो फिर कमली की शादी में आओगे?
शिव : कमली की शादी (मेने उसकी और देखा तो उसने नज़ारे झुका ली) कब है?
भोली : अभी बिस दिन है, पर आओगे तुम?
शिव : है है, क्यों नहीं आऊंगा, कमली बुलाएगी तो जरूर आऊंगा, वैसे बधाई ho(Mene कमली को कहा, उसने एक बार मुझे देखा और मुस्कुरायी)
जहान्वी : तो तुम यहाँ हो. (मेने देखा की जहान्वी अंदर आ रही थी, उसे देख कर भोली का मुँह बिगड़ गया और ये जहान्वी ने भी देखा) आज जल्दी आ गए तुम.
शिव : है, वो टाइम था तो आ गया.
जहान्वी : ठीक है, में ऑफिस में हु, (कहते हुए वो बहार चली गयी)
भोली : (जैसेही वो नजरो से दूर hui)Jao बुला रही है तुमको, इसको भी तुम्हारे बगैर चैन नहीं है.
शिव : (जुमारी और कमली अपना मुँह छुपा कर मुस्कुरा रही thi)Tu भी न, उन्होंने ऐसा थोड़ी न कहा.
भोली : नाम भोली है, में भोली नहीं हु समजे, लड़की हु, उसका मतलब और उसका चेहरा दोनों समाज सकती हु.
शिव : (में भी समाज रहा था पर मेने जान बुज कर kaha)Aisa कुछ नहीं है.
भोली : तो रुको फिर यहाँ.
शिव : है तो में यही तो हु, तुम अब काम करो, में यही हु. (वो फिर अपने अपने काम में लग गए, में थोड़ी देर वह घूमते हुए सब देख रहा था, करीब बिस मिनट बाद वो सब खाने बैठे और में वह से निकला और ऑफिस में चला गया, जहान्वी ऑफिस में कुर्शी पर बैठी हुई थी और कुछ सोच रही thi)Hello.
जहान्वी : (मेरी और हलके गुस्से से देखते hue)Mil गया time.(Muskurate हुए में सामने चेयर पर betha)Ab इसमें मुस्कुराने की क्या बात hai(Usne चिढ़ते हुए कहा)
शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi कुछ नहीं. वो बस भोली की बात याद आ गयी (मेने जानबुज कर कहा था और वो सच में थोड़ी और चीड़ गयी)
जहान्वी : तो वही रहते, यहाँ क्यों आये.
शिव : अपने बुलाया था इस्सलिये आ गया.
जहान्वी : मेने कहा बुलाया था, तुम खुद hi आये हो, जाओ अगर मान नहीं है तो (उसने नखरे से कहा)
शिव : उनके साथ रहना hi तो मेरा काम है, वो नहीं करूँगा तो आप मुझे नौकरी से निकल degi(Mene मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : ज्यादा स्मार्ट मात बनो, हो नहीं तुम. (वो हलके गुस्से से बोली)
शिव : मेने कब कहा ऐसा. और यहाँ काम करने आया हु तो काम hi करूँगा न, इसमें क्या जूथ कहा मेने.
जहान्वी : तो जाओ न, काम करो, यहाँ क्यों बैठे हो?
शिव : वो सब खाना खाने बैठे तो में आ गया.
जहान्वी : (झुंझलाते hue)Oh! तो वो खाना खाने बैठे इस लिए आये, तुम्हे नहीं आना था.
शिव : मुझे बैठेरहने की पगार थोड़ी न मिलती है, और आपके साथ में कैसे बेथ सकता हु मालकिन. (मेने हसी छुपाते हुए कहा, वो मुझे गुस्से से घर रही थी)
जहान्वी : तो जाओ न फिर यहाँ क्यों बैठे हो?
शिव : अभी लंच टाइम है तो में अपनी दोस्त से मिलने आ गया. पर लगता है वो थोड़ी नाराज है. (में मुस्कुराया)
जहान्वी : (उसको भी हसी आ गयी पर वो अपनी हसी दबा gayi)Yaha कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी.
शिव : है यार, बड़ी प्यारी, खूबसूरत है थोड़ी णखचड़ी है बाकि अच्छी है.
जहान्वी : (वो अपनी मुस्कान छुपाने का भरपूर प्रयास कर रही thi)Me णखचड़ी हु?
शिव : मेने आपको थोड़ी न कहा, में तो अपनी दोस्त की बात कर रहा हु, वैसे है वो बहोत मस्त, उसके होठ भी बहोत मीठे है (मेने उनके होठो को देख कर कहा, मेरा ऐसे देखने से वो शर्मा गयी, जहान्वी को ऐसी बाते बहोत अच्छी लग रही थी)
जहान्वी : (शरमाते hue)Maar खाओगे तुम. (उसने धीमी आवाज में कहा).
शिव : खाना तो और कुछ है, पर अभी मार hi सही.
जहान्वी : (उसकी सांसे चढ़ने लगी thi)Kya खाना है?
शिव : खाने के लिए नजदीक जाता हु तो वो भाग जाती है, पता नहीं क्यों?
जहान्वी : शायद तुम्हे जो खाना है वो उसके पास नहीं है.
शिव : ऐसा तो हो नहीं सकता, है उसके पास, मुझे पता है.
जहान्वी : पर जैसा तुम्हे चाहिए वैसा न हो.
शिव : (मुझे भी उनकी बात समाज नहीं आयी, आखिर वो कहना क्या चाहती थी, में उन्हें देख कर समझने की कोशिस करने laga)Me समजा नहीं. (वो कुछ नहीं बोली, बस नज़ारे झुका ली उन्होंने, में उठा और उनके पास गया, उनकी चेयर को मेरी और घुमाया, पर वो नज़ारे झुकाये हुएहि थी, मेने झुक कर उनके दोनों हाथ पकड़े, वो सिमटने लगी, मेने उन्हें चेयर से हल्का खींचा तो वो कड़ी भी हो गयी, पर मेरी और नहीं देख रही thi)(Jhanvi का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको शिव अच्छा भी लगता था पर वो वर्जिन नहीं है ये बात उसके दिल में बेथ गयी थी, पर फिर भी वो उसके सामने नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Kya बात है? (वो कुछ नहीं बोली) में पसंद नहीं (उसने न में शिर hilaya)Matlab में पसंद नहीं.
जहान्वी : ऐसी बात नहीं है. (उन्होंने फ़ौरन कहा)
शिव : तो फिर क्या बात है? (वो फिर कुछ नहीं बोली, में उनको दीवाल के सहारे खड़ा कर diya)Bolo वर्ण फिर में उस दिन की तरह जबरदस्त कर लूंगा, (वो फिर भी कुछ नहीं बोली बस नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Me सच कह रहा हु, में फिर वो बदतमीजी कर लूंगा. (वो बस नज़ारे झुकाये हुए कड़ी थी न कुछ बोल रही थी न मन कर रही थी, में उनके चेहरे को देखने लगा, सच में वो एक खूबसूरत लड़की थी, उनके होठ कैंप रहे थे, उनकी सांसे भी तेज चल रही थी, मतलब तो साफ़ था की उन्हें मेरे किश करने से कोई भी एतराज नहीं था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी तो उनके स्तन भी ऊपर निचे हो रहे थे, ये सब देख कर में भी सब भूल गया, में भी उत्तेजित होने लगा था, मेरी भी सांसे तेज हो रही थी, में थोड़ा और नजदीक गया, गाल को सत्ता कर उनके कान में धीरे से kaha)Me सच में जबरदस्ती किश कर लूंगा (उन्होंने मेरे शर्ट को कमर से मुठी में भर लिया, में थोड़ा दूर हुआ और उनके चेहरे को देखने लगा, वो बहोत उत्तेजित दिख रही थी, चेहरे पर गंभीरता थी, साँस भी ठीक से नहीं ले प् रही थी, मेने चेहरा और नजदीक किआ और मेरी नक् उनकी नक् से टकराई, में अपनी नाक को उनकी नक् पर रगड़ने laga)Me सचमे किश कर लूंगा (उन्होंने अपना चेहरा थोड़ा ऊपर उठा दिया, वो पूरी तरह से तैयार थी, वो चाहती थी की में किश करू, उनकी सांसे भी मुझे सुनाई दे रही थी, मेने दाहिना हाथ ऊपर किआ और उनके गले को और कंधे को ऐसे सहलाने लगा की मेरे हाथ को उनके स्तन का ऊपर भाग भी महसूस हो रहा tha)Meri और देखो जहान्वी (उसने एक पल नज़ारे उठायी पर फिर झुका di)Tum चाहती हो की में ऐसा करू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, में अपने होठ और नजदीक ले गया, अब मेरे होठ उनके होठो से छूने भी लगे the)Jhanvi (उसने मेरे शर्ट को और जोरो से मुठी में कास लिया, और अपने चहरे को आगे किया, मेरे होठो उनके होठो से सात गए, पर अभी किश नहीं कर रहे थे, मेरे होठ थोड़ा खुले और मेने उनके ऊपरी होठ को पकड़लिया, वो मुझसे सात गयी, मुझसे भी अब रहा नहीं गया तो मेने उनके होठो को अच्छे से चूसना सुरु कर दिया, वो भी मेरे होठो को चूसने लगी,

सांसे तेज चलने लगी थी, मेरा लुंड भी खड़ा हो चूका था, मेने एक हाथ को निचे किआ और उनकी कमर को पकड़ कर मेरी और खिंचा तो मेरा लुंड पूरी तरह से उनकी छूट से सात गया (उनकी सांसे और तेजी से चलने लगी, नक् से सांसे लेना भी मुश्किल हो गया था, मेने लुंड से एक दो धक्के भी मर दिए, और कमर से हाथ निचे ले जा कर उनके पोस्ट कूल्हे को मसल दिया) (जहान्वी से बर्दास्त नहीं हो रहा था, साँस भी नहीं ले प् रही थी, उसने अपना शिर दीवाल से लगा दिया और ऊपर देखते हुए जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उनके गले पर किश करने लगा, वो मेरी कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी)

जहान्वी : शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. नहीं शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.

शिव : क्यों भाग रही हो, मान नहीं है क्या?

जहान्वी : शहहहहह मात करो शिईयिव शह्ह्ह्ह तुम्हारी नजरो में गिर जाउंगी में शह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : पागल हो क्या, ऐसी क्या बात है?
जहान्वी : शह्ह्ह्ह नहीं बता सकती शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.
शिव : तुम नहीं चाहती की ऐसा करू में.
जहान्वी : शहहहहह चाहती हूउउउउ.
शिव : तो फिर.
जहान्वी : नहीं बता सकतीईई शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : आज तो बताना hi पड़ेगा तुम्हे (में दोनों हाथो से कूल्हे पकड़ कर अपने लुंड को छूट पर ठोकने लगा)
जहान्वी : शह्ह्ह्ह माआ शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.
अभी हमारा ये खेल चल hi रहा था की निचे का दरवाजा खुलने की आवाज आयी हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, तभी सीढ़ियों पर किसी के चाहड़ने की आवाज आयी तो हम दोनों अलग हुए, वो चेयर पर बेथ गयी और में सामने चेयर पर बेथ गया. (वो अपने बल ठीक करने लगी और अपना चेहरा सही करने लगी, मेने भी अपने होठ पोछे, की तभी पिंकेशभाई दरवाजे पर आये.
पिंकेश : आ जाऊ मैडम.
जहान्वी : (अपने आपको सँभालते hue)Ha आओ. (फिर वो सब काम के लिए बताने लगा, ये हो गया है अब ये करना है, और ये मंगवाना है, वगैरह वगैरह, पंद्रह मिनट तक वो सब बताता रहा और जहान्वी सुनती रही, उसका जरा भी मान नहीं था, वो कैसे भी पिंकेश को भेजना चाहती थी, वो शर्मा कर बार बार शिव को देख रही thi)Thik है, चालू करवाओ, में आर्डर कर देती हु.
पिंकेश : (पर पिंकेश के मन में काम hi चल रहा था, उन्होंने मेरी और देख कर kaha)Agar फ्री हो तो जरा तुम क्सक्स नंबर में देख लो में दूसरे घर की इंस्ट्रक्शन दे देता hu.(Us बेचारे को थोड़ी न पता था की अभी एक कोनसा काम चल रहा था और उसने आ कर उसमे भांग दाल दिया)
शिव : है है, क्यों नहीं, चलिए. (वो आगे बहरे निकले, मेने जहान्वी को देखा, वो मुझे बिनती भरे अंदाज में देख रही थी, उसकी आंखे कह रही थी की मात जाओ, पर मेरे पास रुकने का कोई बहाना नहीं था, मेने उसे आँखों hi आँखों में सॉरी कहा और वह से बहार निकल गया)
थोड़ी देर जहान्वी दरवाजे को hi देखती रही, फिर टेबल पर अपने हाथ रख कर उसने अपना शिर पकड़ा और अभी जो हुआ था उसके बारे में सोचने लगी, उसके चेहरे पर एक सुकून की मुस्कान आ गयी जीस्त तरह से शिव ने उसे पकड़ा था वो अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी, अगर अभी पिंकेश न आया होता तो शायद कुछ भी हो जाता, वो अकेले अकेले hi शर्माने लगी. वही दूसरी तरफ ध्रुव अपनी तैयारिओं में लगा हुआ था.
ध्रुव : तू वो टेबलेट ले आया?
दोस्त : है ले आया हु, पर ये टेबलेट क्यों मंगवाई, वो गरम करनेवाली मंगवाता तो और मज़ा आता न, साली छोड़ने के लिए तड़प उठती, ऐसी गरम लड़की को छोड़ने में मज़ा आता.
ध्रुव : मेने भी पहले यही सोचा था पर ये साली अलग है, गरम तो हो जाती पर पुरे होशमे रहती और कही अपने आपको संभल ले तो लेने के देने पद सकते है, में कोई रिस्क लेना नहीं चाहता, एक बार बेहोशी में hi कर लेंगे, बाद में तो वो छुडवायेगी hi, तब वो टेबलेट दे कर छोड़ेंगे.
दोस्त : हमें भी छोड़ने देगा न?
ध्रुव : अभी नहीं, पहले में उसको अच्छे से छोड़ लू बाद में तो तुम सबको छोड़ना hi है, अभी तो साली मेरी hi पर्सनल रंडी बनेगी, बहोत उड़ रही है न, उसको भी पता चले की ध्रुव क्या चीज़ है.
दोस्त : पर ये सब होगा कैसे?
ध्रुव : ये टेबलेट उसको बियर में मिला कर दे देंगे, जब उसको नींद आएगी तो हम उसको एक कॉटेज में ले जायेंगे, वह में उसकी वीडियो बनाते हुए छोड़ लूंगा, सिंपल है.
दोस्त : पर भाभी भी तो होंगी न, उनको पता चल गया तो?
ध्रुव : उसको hi कहा है की वो उसे नशेवाली ड्रिंक देगी, और वो hi उसे कॉटेज में ले आएगी, तू फ़िक्र मत कर, सब सेट है.
दोस्त : तुम्हारे तो मज़े है यार, अपने दोस्तों को भूल मत जाना.
ध्रुव : क्यों बे चूतिये, इतने तो मज़े करवाए है, विदेशी रंडिया भी लाया हु की नहीं.
दोस्त : है भाई, तुम्हारी वजह से तो विदेशी लड़कीअ छोड़ने का मौका मिला है वर्ण हमारी क्या औकात.
ध्रुव : बस तो फिर, उस दिन भी दो तीन रंडिया भी आएगी, तुम भी मज़े करना.
दोस्त : वह भाई, तुम अपने दोस्तों का कितना ख्याल रखते हो.
आज बिना अपने ससुराल आयी थी, उसने फ़ोन से अपने पति को समजा दिया था, उसने गुरूजी से मिलने का सारा अरैंजमेंट करवा दिया था. दोनों अभी उनके ठिकाने की और hi जा रहे थे.
जिग्नेश : ऐसी क्या जरुरत ाँ पड़ी जो तुम्हे गुरूजी से मिलना है, पापा सब देख रहे है न.
बिना : (अपने पति की और देखते hue)Hai कुछ काम, उनसे मिल कर hi सब पता चलेगा.
जिग्नेश : ऐसा क्या है जो उनसे मिलकर hi पता चलेगा, और ऐसा कुछ था तो मुझे बता देती में मिल आता, तुम इतनी दूर तक क्यों आयी?
बिना : क्यों मेरा आना अच्छा नहीं लगा? (उसने अपने पति को मीठे गुस्से से देखा)
जिग्नेश : पागल है क्या, मुझे क्यों अच्छा नहीं लगेगा, में तो बस तुम्हारे लिए फ़िक्र कर रहा था, इतनी दूर तक आयी हो. वैसे अब तो बता सकती हो न की क्या पूछना है तुम्हे?
बिना : अभी नहीं, पहले में उनसे बात कर लू फिर बताती हु.
जिग्नेश : (थोड़ा चिढ़ते hue)Kya बात है पता नहीं, अपने पति से भी छुपा रही हो. (उसने हलके गुस्से से कहा)
बिना : (वो मान में सोचने लगी की क्या बताऊ, क्या बताऊ, फिर उसे कुछ सुजा तो वो boli)Wo गुरूजी बता रहे थे न की सबका आना जरुरी है, पर मुझे नहीं लगता की सब आ पाएंगे, आप को तो चाचाजी और चाचीजी की हालत पता hi है, अब ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में अगर ये अनुष्ठान होगा तो क्या वो हमें लाभ दे पायेगा?
जिग्नेश : ये तो पापा को भी पता है, उन्होंने पूछा भी तो था, तुम ख़म खा टेंशन ले रही हो, इतनी सी बात के लिए यहाँ तक चली आयी, एक बार पूछ तो leti.(Usne हलके गुस्से में hi कहा)
बिना : (वो चुप रही, क्यों की वो सही कारन तो बता नहीं सकती थी, पर उसका गुरूजी से मिलना आवश्यक था, उसको ये जान न था की शिव कही शिवांश तो नहीं, उसको पूरा यकीं था की वो शिवांश hi है, अगर ऐसा हुआ तो वो क्या करेगी, उसको नींद नहीं आती थी, वो बेचैन hi रहती थी, और ऐसे समय में जब उसके गर्भ में बच्चा था उसका इन परिस्थितिओ में रहना भी ठीक नहीं था, उसके बच्चे पर भी इसका असर हो सकता था. इसीलिए वो आज यहाँ आ गयी थी, उसने ममतादिदी से भी बात की थी पर वो नहीं आ शक्ति थी, इसीलिए वो अकेले hi आ गयी थी. दोनों खामोश बैठे रहे, थोड़ी देर बाद दोनों एक आश्रम में पहुंच गए, थोड़ा जंगल जैसे इलाके में ये आश्रम था,

कुछ अनुयायी यहाँ वह अपने काम में लगे हुए थे, कुछ लोग भी दिख रहे थे वह, बहार कुछ कार भी पड़ी हुई थी. लोग बहोत मानते थे गुरूजी को, दूर दूर से उनसे मिलने आते थे लोग. बिना ने साड़ी पहनी थी, वो दोनों अंदर आये और एक अनुयायी से गुरूजी से मिलने की ख्वाहिस जताई और अपनी पहचान भी उसको बायती, उसने एक कुटीर में प्रतीक्षा करने को कहा, और वो वह से चला गया. जिग्नेश इधर उधर देख रहा था फिर वो अपनी बीवी को भी देख लेता था, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी और किसी सोच में hi डीठि, वो कुछ नहीं बोलै बस बैठा रहा. करीब पंद्रह मिनट बाद वो अनुयायी वापस आया और उनसे अपने साथ चलने को कहा, दोनों उसके साथ चल दिए बिना ने साड़ी का पल्लू अपने शिर पर ले लिया. गुरूजी एक पेड़ की छाव में बैठे हुए थे, उनके पास एक औरत और एक मर्द बैठे हुए थे, अनुयायी ने उन्हें वही रुकने को कहा, थोड़ी देर बाद वो दोनों गुरूजी के पॉ छू कर वह से निकल गए तो अनुयायी ने उन्हें जाने को कहा, दोनों उनके पास पहुंचे, दोनों ने उनके पेअर छुए.
गुरूजी : जीते रहो, आओ बैठो. (दोनों वही निचे बेथ gaye)Kaho कैसे आना हुआ? (जिग्नेश ने अपनी पत्नी की और देखा)
बिना : गुरूजी आपसे बात करनी थी.
गुरूजी : कहो पुत्री, जो पूछना है पूछो, हमारे बस में होगा तो हम जरूर उत्तर देंगे.
बिना : (अपने पति की उपस्थिति में थोड़ी हिचकिचारहि थी, और ये गुरूजी ने भी नोटिस kia)Babaji, आपको ज्ञात है न आपने हमारे घर पर हमसे क्या कहा था?
गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Yaad है बेटी.
बिना : (उसने अपने पति की और देखा, वो सीधे सीधे बात करने से कटरा रही thi)Apne अनुष्ठान में सब को आने को कहा है, क्या ये मुमकिन है बाबाजी?
गुरूजी : ये सब तो ऊपरवाला तय करता है बेटी, वो जो चाहेगा वो होगा. (बिना बेचैन हो रही थी, उसे जो पूछना था वो पूछ नहीं प् रही थी, वो अपनी साड़ी का पल्लू मसल रही थी, गुरूजी उसकेमान को समाज गए और जिग्नेश से कहा) बीटा मुझे इनसे कुछ बात करनी है अगर तुम्हे एतराज न हो तो.
जिग्नेश : नहीं बाबाजी, मुझे क्या एतराज होगा (कहते हुए वो खड़ा हुआ और जिस और से आया था उस और चला गया, थोड़ी दूर जा कर वो खड़ा हो गया, यहाँ से वो उन दोनों को देख सकता था पर उनकी बाटे नहीं सुन सकता था, उसको भी बेचैनी हो रही थी की आखिर ऐसी क्या बात है जो इनको करनी है)
गुरूजी : कहो बेटी, क्या बात है?
बिना : बाबाजी, आप तो सब जानते है, आपने जो कहा था वो अभी भी मेरे दिमाग में गूंज रहा है, उसका हमारे घर से क्या कोई नाता है?
गुरूजी : (उन्होंने मुस्कुराते हुए dekha)Tumhe क्यों जान न है बेटी?
बिना : (उल्जन भरे स्वर se)Babaji आप ने जो कहा है तब से में बेचैन हो उठी हु, मेरी समाज में नहीं आ रहा है की में क्या करू, मुझे शक है की वो वो....
गुरूजी : आज तुम्हे जिस बात का ख्याल आ रहा है, उस वक़्त नहीं आया था जब तुम ने ये कदम उठाया. (बिना की शर्म के मरे नजर झुक गयी, ये सच hi था की उसने शिव के साथ सम्बन्ध बनाये ये गलत hi था) एक बात बता ता हु बेटी, जो कुछ भी होता है वो हमारे बस में नहीं होता, जो उपरवाले की मर्जी हो वही होता है, तो जो हो चूका है उसके बारे में सोच कर परेशान क्यों हो रही हो, जो होना था वो हो चूका है.
बिना : पर वो hi क्यों बाबाजी, और सिर्फ में अकेली होती तो समाज में भी आता, पर हर जगह वो hi क्यों, क्यों बाबाजी?
गुरूजी : ऐसे बहोत सरे क्यों होते है बेटी, अगर सब हमारी समाज में आ जाता तो हम hi भगवन हो जाते, उसकी लीला है, वो hi जाने.
बिना : पर बाबाजी इतना तो बता दीजिये की वो ...वो हमारे कुल का hi है?
गुरूजी : भविष्य जान न एक अभिशाप है बेटी, अगर हमे सब पहले से hi पता हो की क्या होनेवाला है तो इंसान जीने का मज़ा hi खो देगा, ये जीवन कई पहेलिओ से भरा हुआ है, कई उतर चढाव है इसमें, अगर दुःख न हो तो सुख का मज़ा नहीं आता, अगर हर न हो तो जीत का मज़ा नहीं होता, और जैसा मेने कहा की इंसान को अगर सब पता चल जाये तो वो भगवन बन जाये, और में कोई भगवन नहीं हु, एक सामान्य सा इंसान hi हु, और में भी गलत हो सकता हु, तो कुछ भी कहना मेरे लिए भी संभव नहीं है.
बिना : आप hi मेरे मार्गदर्शक है, अगर ाफी ऐसा कहेंगे तो हम जैसे तुच्छ इंसान कहा जायेंगे, जहा तक मुझे पता चला है, आपने हमारे कुल के उस चिराग की भी कुंडली पढ़ी थी, क्या ये वो हो सकता है?
गुरूजी : होने को तो कुछ भी हो सकता है बेटी, उसकी लीला है, न जाने उसने क्या सोचा है.
बिना : आप मुझे उलझा रहे है गुरूजी, मुझे स्पस्ट उत्तर दीजिये, क्या ये वो hi है की नहीं, और अगर है तो इस अनुष्ठान में उसका होना आवश्यक है की नहीं?
गुरूजी : (मुस्कुराये) मेने कहा न बेटी, में भगवन नहीं हु, है में कुछ अनुमान लगा शक्ति हु, पर वो भी जरुरी नहीं की सही hi हो, तुम्हारा सोचना जायज है, पर अभी परिस्थिति स्पस्ट नहीं है, और अगर एक बार मान भी ले की ये वो hi है तो उसका वह उपस्थित होना आवश्यक है पर ये भी याद रखना की उसका वह होना उसके लिए घातक भी हो सकता है, भाग्य ने कुछ सोच कर hi उसको अपने स्थान से दूर किया होगा, और जब समय आएगा तो वो वापस भी आ जायेगा, अगर उस से पहले आया तो उसके लिए खतरा भी हो सकता है.
बिना : इसका मतलब ये वो hi है?
गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Ye तुम्हारे शब्द है बेटी, तुम मुझे अपने शब्दों में बांध रही हो, मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा.
बिना : बाबाजी, आप मुझे उलझा रहे हो, मुझे येबताइये की उसको अनुष्ठान में होना चाहिए की नहीं.
गुरूजी : वो तुम्हारे बच्चे का होनेवाला बाप है, और ये अनुष्ठान हम बच्चो के लिए hi कर रहे है, इस नाते उसका वह होना आवश्यक है, पर अगर ये वो hi है तो उसके लिए खतरा भी है, और ऐसी कई बाटे है जो अभी तुम्हे पता नहीं है, आगे जा कर उलझने और बढ़ सकती है.
बिना : (उसका दिमाग घूम रहा था, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Anusthan कब रख रहे हो आप?
गुरूजी : इस माह की पूर्णिमा को.
बिना : ठीक है गुरूजी, तो फिर में उसे ले आउंगी.
गुरूजी : ये तो भाग्यै तय करेगा. जो उसके भाग्य में होगा वो hi होगा.
बिना : अगर ये वो hi है तो मेरी उलझाने बढ़ जाएगी गुरूजी.
गुरूजी : तुमने अपनी ये परिस्थिति खुद hi निर्माण की है, अब तुम इसे बदल नहीं सकती, तो जो हुआ है उसका स्वीकार करो, जो भाग्य में है वो hi होगा.
बिना : में आपके पास जवाब की आशा से आयी थी, आपने तो मुझे और उलझा दिया.
गुरूजी : मेने कहा था बेटी, भविष्य जान न और ज्यादा खतरनाक है, उस से इंसान उलझ hi जाता है, तो जो हो रहा है उसे स्वीकार करो और इस जीवन का आनंद लो.
बिना : (प्रणाम करते hue)Jaisi आपकी आज्ञा गुरूजी. (उसने अपने पति की और देखा और उन्हें भी बुलाया, दोनों ने मिल कर गुरूजी के पेअर छुए)
गुरूजी : कल्याण हो. (जिग्नेश ko)Tumhari पत्नी जो कर रही है वो तुम्हारे कुल के उद्धारके लिए hi कर रही है, उसका साथ देना.
जिग्नेश : जी बाबाजी, आज्ञा दीजिये.
वो दोनों वह से निकल गए, वो जाना चाहते थे पर अनुयायिओं ने उन्हें भोजन करवा कर hi bheja.Raste में जिग्नेश बहोत कुछ पूछना चाहता था पर वो चुप रहा, वैसे भी वो अपनी पत्नी को जनता था, वो स्वाभाव की अच्छी थी, सबका ख्याल रखती थी, गुरूजी ने भी कहा की वो जो कुछ कर रही है उसके कुल के उद्धार के लिए hi कर रही है, तो उसने ज्यादा पूछताछ करना ठीक नहीं समजा, दोनों वह से घर आ गए.
उसके बाद काम की वजह से मुझे कोई मौका नहीं मिला, जहान्वी भी वह आ गयी जहा में काम कर रहा था, वो ऐसे hi बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो, कभी कभी हमारी नज़ारे आपस में टकरा जाती तो वो शर्मा जाती थी. में भी मुस्कुरा देता, ऐसे hi छूटने का समय हो गया, मुझे जाना था क्यों की जूही वेट कर रही होगी, जहान्वी की नज़ारे मुझे रुकने का निमंत्रण दे रही थी पर में रुक नहीं सकता था. में वह से निकलने गया. थोड़ी hi देर बाद उनका मश्ग भी आ गया.
जहान्वी : रात को में लेने आउंगी.
शिव : Ok.
मेने और कुछ नहीं कहा, में वह से घर आ गया और तैयार हो कर जूही के वह पहुंच गया, उसने दरवाजा खोला और शर्मा गयी, वो ट्रैक पहने रेडी थी.
शिव : (तुम ठीक हो, मेने अंदर आते हुए पूछा, वो बिना कोई जवाब दिए मुझसे लिपट गयी, मेने भी उसको बहो में भर लिया, वो मेरे गले लगे रही, थोड़ी देर बाद में थोड़ा अलग हुआ और उसकी आँखों में देखते हुए puchha)Bataya नहीं, ठीक हो? (उसने शरमाते हुए हां का इस्सर किआ, उसको बहोत शर्म आ रही थी, आज जैसे सब बदला बदला लग रहा था उसे, शिव से शर्म भी आ रही थी और उसको अपनी बाहोंमे भरने का भी मान कर रहा था, वो फिर से गले लग गयी, शिव की नजरो का सामना करना भी उसको शर्मा दे रहा tha)Agar ठीक नहीं हो तो आज मात आओ.
जूही : (धीमी आवाज me)Me ठीक हु, जितना होगा में कर लुंगी, और तुम तो कर hi सकते हो न, तुम जानते हो अब ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी, एक एक दिन कीमती है.
शिव : ठीक है जाते है, पर कुछ देर तो रुक शक्ति है na(Mene नॉटी स्माइल के साथ कहा)
जूही : (मेरा मतलब समाज कर वो शर्मा gayi)Kyu? (उसने शर्म से मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : (उसके नाजुक होठो पर अंगूठा फिरते हुए kaha)Thodi एनर्जी तो ले लू. (वो शर्मा गयी, मेने देर न करते हुए उसके होठो को पीना सुरु कर दिया)
जूही : (वो भी तो यही चाहती थी, वो भी लिपट गयी और उसका पूरा साथ देने लगी, कुछ देर बाद उसने अपने आपको छुड़ाया और हांफ ने लगी)
शिव : क्या हुआ?
जूही : (शरमाते hue)Basss, वर्ण में अपने आपको रोक नहीं पाऊँगी, संजो न. (में उसकी बात से मुस्कुराया तो वो और शर्माने लगी, मेने उसको ज्यादा तंग करना सही नहीं समजा क्यों की में भी फिर नहीं रुक पता)
शिव : ठीक है चलो. (हम दोनों बहार निकले, उसने लॉक लगाया और मेरे पीछे आ कर बेथ गयी, उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझसे सात गयी, मेने बाइक आगे बढ़ा दी, हम दोनों स्टेडियम पहुंच गए, और प्रैक्टिस करने लगे, में देख रहा था की उसको थोड़ी तकलीफ है पर फिर भी वो जी जान से म्हणत कर रही थी, उसको देख कर मुझे उस पर और प्यार आने लगा, वो अपने गोआल के प्रति कितनी समर्पित थी, उसको देख कर मुझे भी हौसला मिल रहा था, में भी अपनी पूरी सकती के साथ प्रैक्टिस करने लगा, हमारी म्हणत को लोग देख रहे थे, अब उन्हें ये भी पता था की हम किस लेवल पर पहुंच गए है तो उनकी नजरो में हमारे लिए एक अलग hi भाव था, उनके लिए हम प्रेरणा थे, हमदोनो ने लगातार दो घंटे तक जी तोड़ म्हणत की, आखिर कर अँधेरा होने पर हम वह से निकल गए, जब मेने उसे घर छोड़ा तो उसने अंदर आने को कहा)
शिव : मुझे कही जाना है, घर जा कर नाहा कर तैयार होना पड़ेगा.
जूही : कहा जा रहे हो?
शिव : झांविमडम ने बुलाया है, वो मुझे अपने साथ पार्टी में ले जा रही है.
जूही : तुम जाओ उस से मुझे कोई एतराज नहीं है पर ऐसी पार्टयों में नशा करते है ऐसा मेने सुना है, तुम दूर रहना इनसब से. एक खिलाडी के तौर पर तो ये अच्छा नहीं hi है पर एक इंसान के तौर पर भी ये अच्छा नहीं होता, समाज रहे हो न. (उसने बड़े प्यार से कहा)
शिव : बहोत ख्याल रखती हो न मेरा.
जूही : (मुस्कुराते hue)Wo तो रखूंगी hi, और अब तो और ज्यादा रखूंगी.
शिव : वो क्यों?
जूही : क्यों की अब हम एक है, और में ख्याल नहीं रखूंगी तो कोण रखेगा.
शिव : तुम hi रखना, ok में चलता हु, bye, लव यू.
जूही : Bye, लव यू तू.
में वह से निकल गया, घर पहुंच कर नाहा लिया और कपडे पहन लिए, इतने ज्यादा अच्छे तो नहीं थे पर जो भी थे वो पहन लिए. लतादिदी को भी बता दिया की में कहा जा रहा हु. में इंतजार कर रहा था की जहान्वी का फ़ोन आया, वो बहार आ चुकी थी. में बहार गया, उसने गाड़ी का दरवाजा खोला तो में अंदर आ गया, मेने देखा की वो एक खूबसूरत ड्रेस पहने हुए थी

ब्लैक कलर का टॉप था जो कंधे से निचे था, कुछ दिख नहीं रहा था पर उनके गोर कंधो को उजागर किये हुए थे, मेकअप भी किआ हुआ था, गले में सफ़ेद मोतिओं की माला टी और बल खुले हुए थे, देख कर hi लग रहा था की वो किसी को भी अपनी और आकर्षित करने को सक्षम है, कुछ पल में उन्हें hi देखता रहा. (शिव को अपनी और ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी, और धीरे से बोली)
जहान्वी : ऐसे क्या देख रहे हो?
शिव : आप भोत खूबसूरत लग रही हो.
जहान्वी : तो क्या इस तरह देखोगे? (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)
शिव : इस तरह मतलब?
जहान्वी : कुछ नहीं, चले?
शिव : चलिए. (दो पहर की घटना के बाद हम पहली बार अकेले में मिले थे, क्या बोलू समाज में नहीं आ रहा था, शायद उनका भी यही हल था, वो गाड़ी चला रही थी, मेने उनकी और देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी, मुझे अपनी और देख कर उन्होंने भी मेरी और देखा, और आँखों के इससरए से पूछा, क्या????, मेने न में गर्दन हिलायी, वो समाज रही थी, वो भी मुस्कुराते हुए आगे देखने लगी और गाड़ी चलने लगी, थोड़ी देर बाद हम सिटी से बहार निकल aaye)Hum कहा जा रहे है?
जहान्वी : कोई फार्म हाउस है, में भी नहीं गयी कभी, एड्रेस है, धुंध लेंगे. कार चलाओगे?
शिव : में इस वक़्त?
जहान्वी : क्यों अपने आप पर भरोसा नहीं है?
शिव : है, पर में अभी इतना तेज नहीं चला सकता.
जहान्वी : हमे भी कोनसी जल्दी है, वो तो तुम आ रहे थे इसलिए में आयी वर्ण में आती hi नहीं, हमारे थोड़ी देर से पहुंचने से क्या फर्क पद जायेगा, तुम्हे चलनी है की नहीं.
शिव : ठीक है. (दर तो मुझे भी लग रहा था, पर अब इतना तो कॉन्फिडेंस था की गाड़ी चला लू, उन्होंने गाड़ी साइड में की और निचे उतर गयी, में भी उतर गया, जब वो घूम कर मेरे सामने आयी तो मेने उन्हें ऊपर से निचे तक देखा, निचे लम्बा स्कर्ट पहना था पर ऊपर कन्धा और पेट नंगे थे, और इस रौशनी में भी उनका गोरा रंग दमक रहा था, हम दोनों की नज़ारे टकराई, वो शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए दूसरी और चली गयी, में भी ड्राइविंग सीट पर बेथ गया, मेने एक बार गियर, क्लच और सब देखा, वो मुझे hi देख रही थी, मेने भी उनकी और देखा और मुस्कुराया, गाड़ी चालू hi थी, तो मेने गाड़ी गियर में डाली और चलने लगा, अँधेरा था और सामने से आती गाड़िओ की रौशनी में मुझे देखना मुश्किल हो रहा था, में धीरे धीरे hi गाड़ी चला रहा था)
जहान्वी : सामनेवाली गाड़िओ की रौशनी की परवाह मत करो, उनकी और मात देखो, अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और कुछ न भी दिखे तो अपने रस्ते पर गाड़ी सीधी चलते रहो, कुछ नहीं होगा.
शिव : (मुझे दर भी लग रहा था, पर में गाड़ी चलता raha)Aap कैसे चलती हो, मुझे तो कुछ दिख hi नहीं रहा है.
जहान्वी : रात को ऐसा होता है, मुझे भी नहीं दीखता जब सामने से गाड़ी आती है, पर अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और जो रस्ते पर सफ़ेद धारिया बानी हुई है उस पर अपनी नजर रखना, कार उसके बहार न जाये, बस यही ध्यान रखना. (थोड़ी hi देर में में अभ्यस्त हो गया, स्पीड तो ज्यादा नहीं थी पर में गाड़ी चला रहा tha)Achchha चला रहे हो.
शिव : अपने hi सिखाया है, वर्ण में कहा गाड़ी चला पता.
दूसरी और ध्रुव बेचैन था, वो जहान्वी का इंतजार कर रहा था, पर भी तक वो नहीं दिखी थी, 8 बजे का सबको बोलै था पर भी साढ़े अंत होने को आये थे पर अभी तक वो नहीं दिखी थी. वो करुणा के पास गया जो अपनी सहेलिओ के साथ थी और बाटे कर रही थी. उसने करुणा को एक साइड में बुलाया.
करुणा : क्या हुआ?
ध्रुव : जहान्वी नहीं आयी, तुमने बात तो की थी न?
करुणा : (थोड़ा चिढ़ते hue)Ha की थी, वो निकल रही थी घर से.
ध्रुव : तो अभी ता आयी क्यों नहीं फिर.
करुणा : जितना इंतजार उसका कर रहे हो कभी मेरा किआ है क्या? (उसने हलके गुस्से से कहा)
ध्रुव : (जो अभी परेशान tha)Tum अलग हो और वो अलग है.
करुणा : क्या मतलब है तुम्हारा? (उसने घूरते हुए कहा)
ध्रुव : (थोड़ा संभल kar)Are यार, तुम तुम हो, वो वो है, तुम तो मेरी जान हो, उस से तो बस बदला लेना है, तुम तो ख़म खा गुस्सा हो रही हो.
करुणा : अभी भी समय है ध्रुव, एक बार फिर सोच लो, वो जहान्वी है, जानते हो उसेतुम, उसका भाई और उसका बाप कोण है ये भी तुम्हे पता है, एक बार फिर सोच लो.
ध्रुव : तुम क्यों फ़िक्र करती हो, सब सेट है, बस एक बार आ जाये, फिर कभी वो अपना मुँह नहीं खोलेगी, ट्रस्ट में यार.
करुणा: पता नहीं क्यों पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा.
ध्रुव : तुम तो ऐसे hi परेशान हो रही हो, में सब संभल लूंगा.
(में गाड़ी चला रहा था, उन्होंने गूगल मैप ों किआ और मुझे रास्ता बताती गयी, हम एक अँधेरी सड़क पर थे, लग रहा था की आगे कुछ भी नहीं है, शायद रास्ता भटक गए the)Rasta तो सही है न, कुछ दिख नहीं रहा है, न कोई गाड़ी आ जा रही है.
जहान्वी : गूगल मैप तो यही रास्ता दिखा रहा है, फार्म हाउस है न तो ऐसी जगह पर hi होगा, एक दो किलोमीटर hi रह गया है, जो दिखा रहा है वह जा कर देख लेते है अगर न हुआ तो वापस चले जायेंगे. (में गाड़ी चलता रहा, आखिर कर हम वह पहुंच गए, वह बहार बोर्ड लगा हुआ था जिस पर एक लाइट थी, पर पीछे बड़े बड़े पेड़ थे तो अँधेरा hi था, हम गेट के पास पहुंचे तो एक गार्ड आया, और उसने दरवाजा खोल दिया, जैसे hi गाड़ी नजदीक पहुंची उसने सलाम किआ) ये ध्रुव का फार्म है?
गार्ड : है है, आप गाड़ी अंदर ले लीजिये, अंदर पार्किंग है.
शिव : (मेने गाड़ी अंदर ले ली, कुछ दिख नहीं रहा tha)Ajeeb जगह hai.(Wo कुछ नहीं बोली बस अस्स पास देख रही थी, थोड़ा अंदर जाने पर हमे रौशनी दिखाई दी, वह भी एक गार्ड खड़ा था, उसने हमे रास्ता दिखाया और गाड़ी कड़ी करने की जगह बताई, मेने गाड़ी वह कड़ी कर दी, हम दोनों बहार निकले, अंदर काफी रोशनी थी, पूरा माहौल सजाया हुआ था, म्यूजिक की आवाज भी आ रही thi)Bahar से पता hi नहीं चल रहा की अंदर इतना सब हो रहा है.
जहान्वी : है, वो पेड़ो की वजह से कुछ भी दिख नहीं रहा है, चले?
शिव : है चलिए. (हम दोनों चलते हुए अंदर की और जाने लगे, म्यूजिक की आवाज और तेज होती चली गयी, कुछ लड़के लड़कीअ नाच भी रहे थे, पूरी पार्टी सजी हुई थी, में पहली बार ऐसी पार्टी में आया था, जहान्वी सब देखते हुए अंदर जा रही थी, अंदर पहुंचे तो उसे ध्रुव सामने से आता दिखाई दिया, जैसे वो हमारा hi इंतजार कर रहा tha)(Dhruv ने देखा की जहान्वी के साथ कोई और लड़का भी है, उसे देखते hi ध्रुव पहचान गया, पर उसको समाज नहीं आ रहा था की वो जहान्वी के साथ कैसे, पर अभी उसका ध्यान जहान्वी पर था)
ध्रुव : आइये आइये, खुशनसीबी की आप हमारे गरीबखाने पर आये. (वो बहोत खुस था की आखिर कर चिड़िया आ hi गयी, उसे ऊपर से निचे तक देख रहा था, और मान में सोचने लगा, क्या हॉट पटाखा है साली, आज तो जी भर के इसको निचोड़ूंगा)
में घर पंहुचा और अंदर गया, तो स्नेहमड़ाम और पवनसीर बैठे हुए थे और कुछ बच्चे मिठाई खा रहे थे, सब मस्ती कर रहे थे, जैसे hi में पंहुचा तो सबकी निगाहे मेरी और हुई.
लता : आए गया तू. (में मुस्कुराते हुए उनके पास पंहुचा)
शिव : नमस्ते सर, नमस्ते मैडम. (पवनसीर बस मुस्कुराये पर स्नेहा मैडम बोल पड़ी)
स्नेहा : नमस्ते के बच्चे, कहा घूम रहा है, तुम्हे मिलने घर आये और तुम hi गायब.
शिव : सॉरी, मुझे पता नहीं था न की आप आ रहे हो, कह देते तो में मौजूद रहता.
पवनसीर : क्यों खामखा दन्त रही हो, कामियाब हुआहै वो और तुम उसे दन्त रही हो.
स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Me दन्त नहीं रही हु, बस कह रही हु, कोंग्रटुलतिओन्स. तुमने तो मुँह मीठा नहीं करवाया पर में ले आयी, आओ में अपने हाथसे तुम्हारा मुँह मीठा करवाती हु. (कहते हुए उन्होंने एक पैदा लिया और मुझे खिलाया)
शिव : थैंक यू.
स्नेहा : सिर्फ थैंक यू से काम नहीं चलेगा, पार्टी देनी पड़ेगी.
शिव : जैसा आप कहे. (बड़े सब ने मिठाई नहीं खायी हुई थी)
स्नेहा : ये सब तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे, किसी ने तुम्हारे बगैर मिठाई नहीं खाई, तुम hi खिलाओ सबको. (मेने मिठाई का डिब्बा लिया और सबको बरी बरी मिठाई khilayi)Sabko खिलाई मुझे नहीं क्यों? (में मुस्कुराया और उन्हें भी खिलाई और पवनसीर को भी, फिर बच्चे अंदर चले गए और विणा, रंजन और गायत्री दीदी भी)
पवनसीर : क्यों भाई, बहोत शिकायते आ रही है तुम्हारी? (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : कैसी शिकायते सर?
पवनसीर : (मुस्कुराते hue)Site से और कहा से? (उन्होंने इसरो में hi जहान्वी की बात की)
शिव : (मुस्कुराते hue)Ab नहीं आएगी.
स्नेहा : वैसे शिकायत तो मुझे भी है. (में उन्हें देखने लगा) तुम घर पर भी नहीं आ रहे हो, ज्यादा बिजी हो गए हो क्यों.
शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है मैडम, आऊंगा में.
ऐसे hi हमारी बाटे होती रहे, करीब एक घंटे बाद वो दोनों गए. लता और सरिता सब ठीक करने लगी और में अपने रूम में चला गया, पुरे दिन की भागादौड़ी से मुझे नींद आ गयी और में सो गया. दोनों काम ख़तम कर के मेरे रूम में आयी तो मुझे सोते पाया.
सरिता : ये तो सो गया.
लता : थका होगा, चल हम बड़े रूम में सो जाते है. उसे आराम करने दे. (मान दोनों का नहीं था, पर मुझे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी तो वो दोनों चली गयी)
सुबह उठ कर मेने फिर दौड़ की प्रैक्टिस की और फिर में स्कूल के लिए निकल गया, आज बाइक थी तो विणा और रंजन को भी स्कूल छोड़ दिया, वो दोनों भी खुस हो गयी, उसके बाद में संयम के घर के मोड़ पर पंहुचा तो कोई नहीं था तो में स्कूल के लिए निकल गया. वह पंहुचा तो संयम, वैस्वी, हर्ष और महेश सब खड़े हुए थे, मुझे देख कर महेशबोला.
महेश : क्यों बे, किसी उठलाया?
शिव : में इसकी तरह उठा नहीं लता. (वैस्वी की और देख kar)Aaj तुम दोनों साथ में आये?
वैस्वी : है तुमने कहा था तो लेने चली गयी थी, पहले ये मन कर रही थी पर जब मेने तुम्हारा नाम लिया तब मणि, मेने तो कह दिया की जो जवाब देना है शिव को देना, तब जा के बैठी, लगता है तुमसे डर्टी है. (संयम को देख कर वो मुस्कुराने लगी)
संयम : में कोई डर्टी वर्ती नहीं सामजी, अब नहीं आउंगी.
शिव : क्या तुम भी, ये किसी से नहीं डर्टी, बस. चलो अब बेल्ल बज गयी है. आज बीनमदं नहीं आयी थी, मुझे आश्चर्य हुआ, मेने सोचा की फिर बात करता हु. दूसरे टीचर ने पीरियड लिया ऐसे hi पढ़ाई चलने लगी. जब स्कूल से छूटे तो वैस्वी अपने घर के लिए निकल गयी और संयम मेरे साथ बेथ गयी, वो दुरी बना कर hi बैठी थी और ज्यादा कुछ बोली भी नहीं, मेने भी कोई बात नहीं छेड़ी. जब हम पहुंचे तो नाज़िआ दीदी उसका इंतजार कर रही थी, मुझे देख कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.
नाज़िआ : आज तुम बाइक से?
शिव : है, वो काम था तो ले आया, आप कैसी हो?
नाज़िआ : अच्छी हु, चलो घर.
शिव : अभी नहीं, फिर आता हु.
नाज़िआ : ठीक है. (वो दोनों चली गयी, में भी घर के लिए निकल गया, रस्ते में मुझे रंजन और विणा की स्कूल की याद आयी तो में उनके स्कूल की और निकल गया, वो रस्ते में hi मिल गयी मुझे, उनको ले कर में घर की और निकल गया, रंजन मुझसे चिपक कर बैठी थी, उसके स्तन मुझे चुभ रहे थे, मेने साइड मिरर से उसे देखा तो वो मुस्कुरायी, वो जानती थी की क्या हो रहा है, वो और अपने स्तन गढ़ने लगी, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी)
रंजन : आज कल बहोत बिजी हो गया है न. टाइम hi नहीं हमारे लिए.
शिव : घर पे तो होता हु. और बाकि तो तू जानती hi है.
रंजन : जानती हु और खुस भी हु, पर कभी कभी तो समय निकल ले, तेरा मान नहीं होता क्या? (में क्या जवाब देता, में मुस्कुराया, उसने भी बात को नहीं खिंचा, हम घर आ गए, वो दोनों निचे उतरी, और मेरे लिए कड़ी रही, मेने बाइक स्टैंड की, वो दोनों मुझे देख कर मुस्कुरायी, फिर हम तीनो अंदर चले गए, फ्रेस हुए और खाना खाने बेथ गए. उसके बाद में साइट की और निकल गया. आज जल्दी पंहुचा था मेने देखा की जहान्वी अभी नहीं आयी थी, में पिंकेशभाई से मिला, फिर सबसे मिलने लगा, भोली ने तो तना hi दे दिया.

भोली : कल आये फिर भी मिले भी नहीं, उस मैडम के लिए टाइम है, मेरे लिए नहीं है.
शिव : पागल है क्या तू, अभी मिलने आया न.
भोली : बड़े आये मिलने, अब हम छोटे लोगो से क्या मतलब, अबतो बड़े लोगो में उठना बैठना हो गया है न.
शिव : मर खायेगी तू, में कोनसा बड़ा हो गया हु जो ऐसा कह रही है.
भोली : और क्या कहु, यहाँ भी नहीं आता तो मिलेगा क्या.
शिव : मेरा कॉम्पिटिओं था, राज्यालेवाल क्लियर किआ है मेने, उसके लिए hi गया था.
भोली : पिंकेशबाबू बता रहे थे, पर समाज में कुछ नहीं आया.
शिव : (उसके भोले पैन से में muskuraya)Ye समाज ले की हमारे पुरे राज्य में दौड़ में पहले नंबर पर आया हु.
भोली : अच्छा, ये तो बहोत अच्छी बात है, पर फायदा क्या होता है?
शिव : (मुस्कुराते hue)Bahot फायदा होता है, तुम्हारा नाम होता है, सर्कार की और से इनाम मिलता है, आगे बढ़ने पर और भी बहोत कुछ मिलता है.
भोली : देखा मेने कहा था नई की अब बड़ा आदमी हो गया है, मेने क्या जूथ कहा था फिर.
शिव : तू जिस तरह से कह रही थी न वैसा बड़ा नहीं हुआ में सामजी.
भोली : अच्छा ऐसा है तो फिर कमली की शादी में आओगे?
शिव : कमली की शादी (मेने उसकी और देखा तो उसने नज़ारे झुका ली) कब है?
भोली : अभी बिस दिन है, पर आओगे तुम?
शिव : है है, क्यों नहीं आऊंगा, कमली बुलाएगी तो जरूर आऊंगा, वैसे बधाई ho(Mene कमली को कहा, उसने एक बार मुझे देखा और मुस्कुरायी)
जहान्वी : तो तुम यहाँ हो. (मेने देखा की जहान्वी अंदर आ रही थी, उसे देख कर भोली का मुँह बिगड़ गया और ये जहान्वी ने भी देखा) आज जल्दी आ गए तुम.
शिव : है, वो टाइम था तो आ गया.
जहान्वी : ठीक है, में ऑफिस में हु, (कहते हुए वो बहार चली गयी)
भोली : (जैसेही वो नजरो से दूर hui)Jao बुला रही है तुमको, इसको भी तुम्हारे बगैर चैन नहीं है.
शिव : (जुमारी और कमली अपना मुँह छुपा कर मुस्कुरा रही thi)Tu भी न, उन्होंने ऐसा थोड़ी न कहा.
भोली : नाम भोली है, में भोली नहीं हु समजे, लड़की हु, उसका मतलब और उसका चेहरा दोनों समाज सकती हु.
शिव : (में भी समाज रहा था पर मेने जान बुज कर kaha)Aisa कुछ नहीं है.
भोली : तो रुको फिर यहाँ.
शिव : है तो में यही तो हु, तुम अब काम करो, में यही हु. (वो फिर अपने अपने काम में लग गए, में थोड़ी देर वह घूमते हुए सब देख रहा था, करीब बिस मिनट बाद वो सब खाने बैठे और में वह से निकला और ऑफिस में चला गया, जहान्वी ऑफिस में कुर्शी पर बैठी हुई थी और कुछ सोच रही thi)Hello.
जहान्वी : (मेरी और हलके गुस्से से देखते hue)Mil गया time.(Muskurate हुए में सामने चेयर पर betha)Ab इसमें मुस्कुराने की क्या बात hai(Usne चिढ़ते हुए कहा)
शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi कुछ नहीं. वो बस भोली की बात याद आ गयी (मेने जानबुज कर कहा था और वो सच में थोड़ी और चीड़ गयी)
जहान्वी : तो वही रहते, यहाँ क्यों आये.
शिव : अपने बुलाया था इस्सलिये आ गया.
जहान्वी : मेने कहा बुलाया था, तुम खुद hi आये हो, जाओ अगर मान नहीं है तो (उसने नखरे से कहा)
शिव : उनके साथ रहना hi तो मेरा काम है, वो नहीं करूँगा तो आप मुझे नौकरी से निकल degi(Mene मुस्कुराते हुए कहा)
जहान्वी : ज्यादा स्मार्ट मात बनो, हो नहीं तुम. (वो हलके गुस्से से बोली)
शिव : मेने कब कहा ऐसा. और यहाँ काम करने आया हु तो काम hi करूँगा न, इसमें क्या जूथ कहा मेने.
जहान्वी : तो जाओ न, काम करो, यहाँ क्यों बैठे हो?
शिव : वो सब खाना खाने बैठे तो में आ गया.
जहान्वी : (झुंझलाते hue)Oh! तो वो खाना खाने बैठे इस लिए आये, तुम्हे नहीं आना था.
शिव : मुझे बैठेरहने की पगार थोड़ी न मिलती है, और आपके साथ में कैसे बेथ सकता हु मालकिन. (मेने हसी छुपाते हुए कहा, वो मुझे गुस्से से घर रही थी)
जहान्वी : तो जाओ न फिर यहाँ क्यों बैठे हो?
शिव : अभी लंच टाइम है तो में अपनी दोस्त से मिलने आ गया. पर लगता है वो थोड़ी नाराज है. (में मुस्कुराया)
जहान्वी : (उसको भी हसी आ गयी पर वो अपनी हसी दबा gayi)Yaha कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी.
शिव : है यार, बड़ी प्यारी, खूबसूरत है थोड़ी णखचड़ी है बाकि अच्छी है.
जहान्वी : (वो अपनी मुस्कान छुपाने का भरपूर प्रयास कर रही thi)Me णखचड़ी हु?
शिव : मेने आपको थोड़ी न कहा, में तो अपनी दोस्त की बात कर रहा हु, वैसे है वो बहोत मस्त, उसके होठ भी बहोत मीठे है (मेने उनके होठो को देख कर कहा, मेरा ऐसे देखने से वो शर्मा गयी, जहान्वी को ऐसी बाते बहोत अच्छी लग रही थी)
जहान्वी : (शरमाते hue)Maar खाओगे तुम. (उसने धीमी आवाज में कहा).
शिव : खाना तो और कुछ है, पर अभी मार hi सही.
जहान्वी : (उसकी सांसे चढ़ने लगी thi)Kya खाना है?
शिव : खाने के लिए नजदीक जाता हु तो वो भाग जाती है, पता नहीं क्यों?
जहान्वी : शायद तुम्हे जो खाना है वो उसके पास नहीं है.
शिव : ऐसा तो हो नहीं सकता, है उसके पास, मुझे पता है.
जहान्वी : पर जैसा तुम्हे चाहिए वैसा न हो.
शिव : (मुझे भी उनकी बात समाज नहीं आयी, आखिर वो कहना क्या चाहती थी, में उन्हें देख कर समझने की कोशिस करने laga)Me समजा नहीं. (वो कुछ नहीं बोली, बस नज़ारे झुका ली उन्होंने, में उठा और उनके पास गया, उनकी चेयर को मेरी और घुमाया, पर वो नज़ारे झुकाये हुएहि थी, मेने झुक कर उनके दोनों हाथ पकड़े, वो सिमटने लगी, मेने उन्हें चेयर से हल्का खींचा तो वो कड़ी भी हो गयी, पर मेरी और नहीं देख रही thi)(Jhanvi का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको शिव अच्छा भी लगता था पर वो वर्जिन नहीं है ये बात उसके दिल में बेथ गयी थी, पर फिर भी वो उसके सामने नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Kya बात है? (वो कुछ नहीं बोली) में पसंद नहीं (उसने न में शिर hilaya)Matlab में पसंद नहीं.
जहान्वी : ऐसी बात नहीं है. (उन्होंने फ़ौरन कहा)
शिव : तो फिर क्या बात है? (वो फिर कुछ नहीं बोली, में उनको दीवाल के सहारे खड़ा कर diya)Bolo वर्ण फिर में उस दिन की तरह जबरदस्त कर लूंगा, (वो फिर भी कुछ नहीं बोली बस नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Me सच कह रहा हु, में फिर वो बदतमीजी कर लूंगा. (वो बस नज़ारे झुकाये हुए कड़ी थी न कुछ बोल रही थी न मन कर रही थी, में उनके चेहरे को देखने लगा, सच में वो एक खूबसूरत लड़की थी, उनके होठ कैंप रहे थे, उनकी सांसे भी तेज चल रही थी, मतलब तो साफ़ था की उन्हें मेरे किश करने से कोई भी एतराज नहीं था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी तो उनके स्तन भी ऊपर निचे हो रहे थे, ये सब देख कर में भी सब भूल गया, में भी उत्तेजित होने लगा था, मेरी भी सांसे तेज हो रही थी, में थोड़ा और नजदीक गया, गाल को सत्ता कर उनके कान में धीरे से kaha)Me सच में जबरदस्ती किश कर लूंगा (उन्होंने मेरे शर्ट को कमर से मुठी में भर लिया, में थोड़ा दूर हुआ और उनके चेहरे को देखने लगा, वो बहोत उत्तेजित दिख रही थी, चेहरे पर गंभीरता थी, साँस भी ठीक से नहीं ले प् रही थी, मेने चेहरा और नजदीक किआ और मेरी नक् उनकी नक् से टकराई, में अपनी नाक को उनकी नक् पर रगड़ने laga)Me सचमे किश कर लूंगा (उन्होंने अपना चेहरा थोड़ा ऊपर उठा दिया, वो पूरी तरह से तैयार थी, वो चाहती थी की में किश करू, उनकी सांसे भी मुझे सुनाई दे रही थी, मेने दाहिना हाथ ऊपर किआ और उनके गले को और कंधे को ऐसे सहलाने लगा की मेरे हाथ को उनके स्तन का ऊपर भाग भी महसूस हो रहा tha)Meri और देखो जहान्वी (उसने एक पल नज़ारे उठायी पर फिर झुका di)Tum चाहती हो की में ऐसा करू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, में अपने होठ और नजदीक ले गया, अब मेरे होठ उनके होठो से छूने भी लगे the)Jhanvi (उसने मेरे शर्ट को और जोरो से मुठी में कास लिया, और अपने चहरे को आगे किया, मेरे होठो उनके होठो से सात गए, पर अभी किश नहीं कर रहे थे, मेरे होठ थोड़ा खुले और मेने उनके ऊपरी होठ को पकड़लिया, वो मुझसे सात गयी, मुझसे भी अब रहा नहीं गया तो मेने उनके होठो को अच्छे से चूसना सुरु कर दिया, वो भी मेरे होठो को चूसने लगी,

सांसे तेज चलने लगी थी, मेरा लुंड भी खड़ा हो चूका था, मेने एक हाथ को निचे किआ और उनकी कमर को पकड़ कर मेरी और खिंचा तो मेरा लुंड पूरी तरह से उनकी छूट से सात गया (उनकी सांसे और तेजी से चलने लगी, नक् से सांसे लेना भी मुश्किल हो गया था, मेने लुंड से एक दो धक्के भी मर दिए, और कमर से हाथ निचे ले जा कर उनके पोस्ट कूल्हे को मसल दिया) (जहान्वी से बर्दास्त नहीं हो रहा था, साँस भी नहीं ले प् रही थी, उसने अपना शिर दीवाल से लगा दिया और ऊपर देखते हुए जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उनके गले पर किश करने लगा, वो मेरी कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी)

जहान्वी : शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. नहीं शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.

शिव : क्यों भाग रही हो, मान नहीं है क्या?

जहान्वी : शहहहहह मात करो शिईयिव शह्ह्ह्ह तुम्हारी नजरो में गिर जाउंगी में शह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : पागल हो क्या, ऐसी क्या बात है?
जहान्वी : शह्ह्ह्ह नहीं बता सकती शह्ह्हह्ह्ह्ह, मात करो शहहहहह.
शिव : तुम नहीं चाहती की ऐसा करू में.
जहान्वी : शहहहहह चाहती हूउउउउ.
शिव : तो फिर.
जहान्वी : नहीं बता सकतीईई शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : आज तो बताना hi पड़ेगा तुम्हे (में दोनों हाथो से कूल्हे पकड़ कर अपने लुंड को छूट पर ठोकने लगा)
जहान्वी : शह्ह्ह्ह माआ शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.
अभी हमारा ये खेल चल hi रहा था की निचे का दरवाजा खुलने की आवाज आयी हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, तभी सीढ़ियों पर किसी के चाहड़ने की आवाज आयी तो हम दोनों अलग हुए, वो चेयर पर बेथ गयी और में सामने चेयर पर बेथ गया. (वो अपने बल ठीक करने लगी और अपना चेहरा सही करने लगी, मेने भी अपने होठ पोछे, की तभी पिंकेशभाई दरवाजे पर आये.
पिंकेश : आ जाऊ मैडम.
जहान्वी : (अपने आपको सँभालते hue)Ha आओ. (फिर वो सब काम के लिए बताने लगा, ये हो गया है अब ये करना है, और ये मंगवाना है, वगैरह वगैरह, पंद्रह मिनट तक वो सब बताता रहा और जहान्वी सुनती रही, उसका जरा भी मान नहीं था, वो कैसे भी पिंकेश को भेजना चाहती थी, वो शर्मा कर बार बार शिव को देख रही thi)Thik है, चालू करवाओ, में आर्डर कर देती हु.
पिंकेश : (पर पिंकेश के मन में काम hi चल रहा था, उन्होंने मेरी और देख कर kaha)Agar फ्री हो तो जरा तुम क्सक्स नंबर में देख लो में दूसरे घर की इंस्ट्रक्शन दे देता hu.(Us बेचारे को थोड़ी न पता था की अभी एक कोनसा काम चल रहा था और उसने आ कर उसमे भांग दाल दिया)
शिव : है है, क्यों नहीं, चलिए. (वो आगे बहरे निकले, मेने जहान्वी को देखा, वो मुझे बिनती भरे अंदाज में देख रही थी, उसकी आंखे कह रही थी की मात जाओ, पर मेरे पास रुकने का कोई बहाना नहीं था, मेने उसे आँखों hi आँखों में सॉरी कहा और वह से बहार निकल गया)
थोड़ी देर जहान्वी दरवाजे को hi देखती रही, फिर टेबल पर अपने हाथ रख कर उसने अपना शिर पकड़ा और अभी जो हुआ था उसके बारे में सोचने लगी, उसके चेहरे पर एक सुकून की मुस्कान आ गयी जीस्त तरह से शिव ने उसे पकड़ा था वो अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी, अगर अभी पिंकेश न आया होता तो शायद कुछ भी हो जाता, वो अकेले अकेले hi शर्माने लगी. वही दूसरी तरफ ध्रुव अपनी तैयारिओं में लगा हुआ था.
ध्रुव : तू वो टेबलेट ले आया?
दोस्त : है ले आया हु, पर ये टेबलेट क्यों मंगवाई, वो गरम करनेवाली मंगवाता तो और मज़ा आता न, साली छोड़ने के लिए तड़प उठती, ऐसी गरम लड़की को छोड़ने में मज़ा आता.
ध्रुव : मेने भी पहले यही सोचा था पर ये साली अलग है, गरम तो हो जाती पर पुरे होशमे रहती और कही अपने आपको संभल ले तो लेने के देने पद सकते है, में कोई रिस्क लेना नहीं चाहता, एक बार बेहोशी में hi कर लेंगे, बाद में तो वो छुडवायेगी hi, तब वो टेबलेट दे कर छोड़ेंगे.
दोस्त : हमें भी छोड़ने देगा न?
ध्रुव : अभी नहीं, पहले में उसको अच्छे से छोड़ लू बाद में तो तुम सबको छोड़ना hi है, अभी तो साली मेरी hi पर्सनल रंडी बनेगी, बहोत उड़ रही है न, उसको भी पता चले की ध्रुव क्या चीज़ है.
दोस्त : पर ये सब होगा कैसे?
ध्रुव : ये टेबलेट उसको बियर में मिला कर दे देंगे, जब उसको नींद आएगी तो हम उसको एक कॉटेज में ले जायेंगे, वह में उसकी वीडियो बनाते हुए छोड़ लूंगा, सिंपल है.
दोस्त : पर भाभी भी तो होंगी न, उनको पता चल गया तो?
ध्रुव : उसको hi कहा है की वो उसे नशेवाली ड्रिंक देगी, और वो hi उसे कॉटेज में ले आएगी, तू फ़िक्र मत कर, सब सेट है.
दोस्त : तुम्हारे तो मज़े है यार, अपने दोस्तों को भूल मत जाना.
ध्रुव : क्यों बे चूतिये, इतने तो मज़े करवाए है, विदेशी रंडिया भी लाया हु की नहीं.
दोस्त : है भाई, तुम्हारी वजह से तो विदेशी लड़कीअ छोड़ने का मौका मिला है वर्ण हमारी क्या औकात.
ध्रुव : बस तो फिर, उस दिन भी दो तीन रंडिया भी आएगी, तुम भी मज़े करना.
दोस्त : वह भाई, तुम अपने दोस्तों का कितना ख्याल रखते हो.
आज बिना अपने ससुराल आयी थी, उसने फ़ोन से अपने पति को समजा दिया था, उसने गुरूजी से मिलने का सारा अरैंजमेंट करवा दिया था. दोनों अभी उनके ठिकाने की और hi जा रहे थे.
जिग्नेश : ऐसी क्या जरुरत ाँ पड़ी जो तुम्हे गुरूजी से मिलना है, पापा सब देख रहे है न.
बिना : (अपने पति की और देखते hue)Hai कुछ काम, उनसे मिल कर hi सब पता चलेगा.
जिग्नेश : ऐसा क्या है जो उनसे मिलकर hi पता चलेगा, और ऐसा कुछ था तो मुझे बता देती में मिल आता, तुम इतनी दूर तक क्यों आयी?
बिना : क्यों मेरा आना अच्छा नहीं लगा? (उसने अपने पति को मीठे गुस्से से देखा)
जिग्नेश : पागल है क्या, मुझे क्यों अच्छा नहीं लगेगा, में तो बस तुम्हारे लिए फ़िक्र कर रहा था, इतनी दूर तक आयी हो. वैसे अब तो बता सकती हो न की क्या पूछना है तुम्हे?
बिना : अभी नहीं, पहले में उनसे बात कर लू फिर बताती हु.
जिग्नेश : (थोड़ा चिढ़ते hue)Kya बात है पता नहीं, अपने पति से भी छुपा रही हो. (उसने हलके गुस्से से कहा)
बिना : (वो मान में सोचने लगी की क्या बताऊ, क्या बताऊ, फिर उसे कुछ सुजा तो वो boli)Wo गुरूजी बता रहे थे न की सबका आना जरुरी है, पर मुझे नहीं लगता की सब आ पाएंगे, आप को तो चाचाजी और चाचीजी की हालत पता hi है, अब ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में अगर ये अनुष्ठान होगा तो क्या वो हमें लाभ दे पायेगा?
जिग्नेश : ये तो पापा को भी पता है, उन्होंने पूछा भी तो था, तुम ख़म खा टेंशन ले रही हो, इतनी सी बात के लिए यहाँ तक चली आयी, एक बार पूछ तो leti.(Usne हलके गुस्से में hi कहा)
बिना : (वो चुप रही, क्यों की वो सही कारन तो बता नहीं सकती थी, पर उसका गुरूजी से मिलना आवश्यक था, उसको ये जान न था की शिव कही शिवांश तो नहीं, उसको पूरा यकीं था की वो शिवांश hi है, अगर ऐसा हुआ तो वो क्या करेगी, उसको नींद नहीं आती थी, वो बेचैन hi रहती थी, और ऐसे समय में जब उसके गर्भ में बच्चा था उसका इन परिस्थितिओ में रहना भी ठीक नहीं था, उसके बच्चे पर भी इसका असर हो सकता था. इसीलिए वो आज यहाँ आ गयी थी, उसने ममतादिदी से भी बात की थी पर वो नहीं आ शक्ति थी, इसीलिए वो अकेले hi आ गयी थी. दोनों खामोश बैठे रहे, थोड़ी देर बाद दोनों एक आश्रम में पहुंच गए, थोड़ा जंगल जैसे इलाके में ये आश्रम था,

कुछ अनुयायी यहाँ वह अपने काम में लगे हुए थे, कुछ लोग भी दिख रहे थे वह, बहार कुछ कार भी पड़ी हुई थी. लोग बहोत मानते थे गुरूजी को, दूर दूर से उनसे मिलने आते थे लोग. बिना ने साड़ी पहनी थी, वो दोनों अंदर आये और एक अनुयायी से गुरूजी से मिलने की ख्वाहिस जताई और अपनी पहचान भी उसको बायती, उसने एक कुटीर में प्रतीक्षा करने को कहा, और वो वह से चला गया. जिग्नेश इधर उधर देख रहा था फिर वो अपनी बीवी को भी देख लेता था, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी और किसी सोच में hi डीठि, वो कुछ नहीं बोलै बस बैठा रहा. करीब पंद्रह मिनट बाद वो अनुयायी वापस आया और उनसे अपने साथ चलने को कहा, दोनों उसके साथ चल दिए बिना ने साड़ी का पल्लू अपने शिर पर ले लिया. गुरूजी एक पेड़ की छाव में बैठे हुए थे, उनके पास एक औरत और एक मर्द बैठे हुए थे, अनुयायी ने उन्हें वही रुकने को कहा, थोड़ी देर बाद वो दोनों गुरूजी के पॉ छू कर वह से निकल गए तो अनुयायी ने उन्हें जाने को कहा, दोनों उनके पास पहुंचे, दोनों ने उनके पेअर छुए.
गुरूजी : जीते रहो, आओ बैठो. (दोनों वही निचे बेथ gaye)Kaho कैसे आना हुआ? (जिग्नेश ने अपनी पत्नी की और देखा)
बिना : गुरूजी आपसे बात करनी थी.
गुरूजी : कहो पुत्री, जो पूछना है पूछो, हमारे बस में होगा तो हम जरूर उत्तर देंगे.
बिना : (अपने पति की उपस्थिति में थोड़ी हिचकिचारहि थी, और ये गुरूजी ने भी नोटिस kia)Babaji, आपको ज्ञात है न आपने हमारे घर पर हमसे क्या कहा था?
गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Yaad है बेटी.
बिना : (उसने अपने पति की और देखा, वो सीधे सीधे बात करने से कटरा रही thi)Apne अनुष्ठान में सब को आने को कहा है, क्या ये मुमकिन है बाबाजी?
गुरूजी : ये सब तो ऊपरवाला तय करता है बेटी, वो जो चाहेगा वो होगा. (बिना बेचैन हो रही थी, उसे जो पूछना था वो पूछ नहीं प् रही थी, वो अपनी साड़ी का पल्लू मसल रही थी, गुरूजी उसकेमान को समाज गए और जिग्नेश से कहा) बीटा मुझे इनसे कुछ बात करनी है अगर तुम्हे एतराज न हो तो.
जिग्नेश : नहीं बाबाजी, मुझे क्या एतराज होगा (कहते हुए वो खड़ा हुआ और जिस और से आया था उस और चला गया, थोड़ी दूर जा कर वो खड़ा हो गया, यहाँ से वो उन दोनों को देख सकता था पर उनकी बाटे नहीं सुन सकता था, उसको भी बेचैनी हो रही थी की आखिर ऐसी क्या बात है जो इनको करनी है)
गुरूजी : कहो बेटी, क्या बात है?
बिना : बाबाजी, आप तो सब जानते है, आपने जो कहा था वो अभी भी मेरे दिमाग में गूंज रहा है, उसका हमारे घर से क्या कोई नाता है?
गुरूजी : (उन्होंने मुस्कुराते हुए dekha)Tumhe क्यों जान न है बेटी?
बिना : (उल्जन भरे स्वर se)Babaji आप ने जो कहा है तब से में बेचैन हो उठी हु, मेरी समाज में नहीं आ रहा है की में क्या करू, मुझे शक है की वो वो....
गुरूजी : आज तुम्हे जिस बात का ख्याल आ रहा है, उस वक़्त नहीं आया था जब तुम ने ये कदम उठाया. (बिना की शर्म के मरे नजर झुक गयी, ये सच hi था की उसने शिव के साथ सम्बन्ध बनाये ये गलत hi था) एक बात बता ता हु बेटी, जो कुछ भी होता है वो हमारे बस में नहीं होता, जो उपरवाले की मर्जी हो वही होता है, तो जो हो चूका है उसके बारे में सोच कर परेशान क्यों हो रही हो, जो होना था वो हो चूका है.
बिना : पर वो hi क्यों बाबाजी, और सिर्फ में अकेली होती तो समाज में भी आता, पर हर जगह वो hi क्यों, क्यों बाबाजी?
गुरूजी : ऐसे बहोत सरे क्यों होते है बेटी, अगर सब हमारी समाज में आ जाता तो हम hi भगवन हो जाते, उसकी लीला है, वो hi जाने.
बिना : पर बाबाजी इतना तो बता दीजिये की वो ...वो हमारे कुल का hi है?
गुरूजी : भविष्य जान न एक अभिशाप है बेटी, अगर हमे सब पहले से hi पता हो की क्या होनेवाला है तो इंसान जीने का मज़ा hi खो देगा, ये जीवन कई पहेलिओ से भरा हुआ है, कई उतर चढाव है इसमें, अगर दुःख न हो तो सुख का मज़ा नहीं आता, अगर हर न हो तो जीत का मज़ा नहीं होता, और जैसा मेने कहा की इंसान को अगर सब पता चल जाये तो वो भगवन बन जाये, और में कोई भगवन नहीं हु, एक सामान्य सा इंसान hi हु, और में भी गलत हो सकता हु, तो कुछ भी कहना मेरे लिए भी संभव नहीं है.
बिना : आप hi मेरे मार्गदर्शक है, अगर ाफी ऐसा कहेंगे तो हम जैसे तुच्छ इंसान कहा जायेंगे, जहा तक मुझे पता चला है, आपने हमारे कुल के उस चिराग की भी कुंडली पढ़ी थी, क्या ये वो हो सकता है?
गुरूजी : होने को तो कुछ भी हो सकता है बेटी, उसकी लीला है, न जाने उसने क्या सोचा है.
बिना : आप मुझे उलझा रहे है गुरूजी, मुझे स्पस्ट उत्तर दीजिये, क्या ये वो hi है की नहीं, और अगर है तो इस अनुष्ठान में उसका होना आवश्यक है की नहीं?
गुरूजी : (मुस्कुराये) मेने कहा न बेटी, में भगवन नहीं हु, है में कुछ अनुमान लगा शक्ति हु, पर वो भी जरुरी नहीं की सही hi हो, तुम्हारा सोचना जायज है, पर अभी परिस्थिति स्पस्ट नहीं है, और अगर एक बार मान भी ले की ये वो hi है तो उसका वह उपस्थित होना आवश्यक है पर ये भी याद रखना की उसका वह होना उसके लिए घातक भी हो सकता है, भाग्य ने कुछ सोच कर hi उसको अपने स्थान से दूर किया होगा, और जब समय आएगा तो वो वापस भी आ जायेगा, अगर उस से पहले आया तो उसके लिए खतरा भी हो सकता है.
बिना : इसका मतलब ये वो hi है?
गुरूजी : (मुस्कुराते hue)Ye तुम्हारे शब्द है बेटी, तुम मुझे अपने शब्दों में बांध रही हो, मेने ऐसा कुछ भी नहीं कहा.
बिना : बाबाजी, आप मुझे उलझा रहे हो, मुझे येबताइये की उसको अनुष्ठान में होना चाहिए की नहीं.
गुरूजी : वो तुम्हारे बच्चे का होनेवाला बाप है, और ये अनुष्ठान हम बच्चो के लिए hi कर रहे है, इस नाते उसका वह होना आवश्यक है, पर अगर ये वो hi है तो उसके लिए खतरा भी है, और ऐसी कई बाटे है जो अभी तुम्हे पता नहीं है, आगे जा कर उलझने और बढ़ सकती है.
बिना : (उसका दिमाग घूम रहा था, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Anusthan कब रख रहे हो आप?
गुरूजी : इस माह की पूर्णिमा को.
बिना : ठीक है गुरूजी, तो फिर में उसे ले आउंगी.
गुरूजी : ये तो भाग्यै तय करेगा. जो उसके भाग्य में होगा वो hi होगा.
बिना : अगर ये वो hi है तो मेरी उलझाने बढ़ जाएगी गुरूजी.
गुरूजी : तुमने अपनी ये परिस्थिति खुद hi निर्माण की है, अब तुम इसे बदल नहीं सकती, तो जो हुआ है उसका स्वीकार करो, जो भाग्य में है वो hi होगा.
बिना : में आपके पास जवाब की आशा से आयी थी, आपने तो मुझे और उलझा दिया.
गुरूजी : मेने कहा था बेटी, भविष्य जान न और ज्यादा खतरनाक है, उस से इंसान उलझ hi जाता है, तो जो हो रहा है उसे स्वीकार करो और इस जीवन का आनंद लो.
बिना : (प्रणाम करते hue)Jaisi आपकी आज्ञा गुरूजी. (उसने अपने पति की और देखा और उन्हें भी बुलाया, दोनों ने मिल कर गुरूजी के पेअर छुए)
गुरूजी : कल्याण हो. (जिग्नेश ko)Tumhari पत्नी जो कर रही है वो तुम्हारे कुल के उद्धारके लिए hi कर रही है, उसका साथ देना.
जिग्नेश : जी बाबाजी, आज्ञा दीजिये.
वो दोनों वह से निकल गए, वो जाना चाहते थे पर अनुयायिओं ने उन्हें भोजन करवा कर hi bheja.Raste में जिग्नेश बहोत कुछ पूछना चाहता था पर वो चुप रहा, वैसे भी वो अपनी पत्नी को जनता था, वो स्वाभाव की अच्छी थी, सबका ख्याल रखती थी, गुरूजी ने भी कहा की वो जो कुछ कर रही है उसके कुल के उद्धार के लिए hi कर रही है, तो उसने ज्यादा पूछताछ करना ठीक नहीं समजा, दोनों वह से घर आ गए.
उसके बाद काम की वजह से मुझे कोई मौका नहीं मिला, जहान्वी भी वह आ गयी जहा में काम कर रहा था, वो ऐसे hi बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो, कभी कभी हमारी नज़ारे आपस में टकरा जाती तो वो शर्मा जाती थी. में भी मुस्कुरा देता, ऐसे hi छूटने का समय हो गया, मुझे जाना था क्यों की जूही वेट कर रही होगी, जहान्वी की नज़ारे मुझे रुकने का निमंत्रण दे रही थी पर में रुक नहीं सकता था. में वह से निकलने गया. थोड़ी hi देर बाद उनका मश्ग भी आ गया.
जहान्वी : रात को में लेने आउंगी.
शिव : Ok.
मेने और कुछ नहीं कहा, में वह से घर आ गया और तैयार हो कर जूही के वह पहुंच गया, उसने दरवाजा खोला और शर्मा गयी, वो ट्रैक पहने रेडी थी.
शिव : (तुम ठीक हो, मेने अंदर आते हुए पूछा, वो बिना कोई जवाब दिए मुझसे लिपट गयी, मेने भी उसको बहो में भर लिया, वो मेरे गले लगे रही, थोड़ी देर बाद में थोड़ा अलग हुआ और उसकी आँखों में देखते हुए puchha)Bataya नहीं, ठीक हो? (उसने शरमाते हुए हां का इस्सर किआ, उसको बहोत शर्म आ रही थी, आज जैसे सब बदला बदला लग रहा था उसे, शिव से शर्म भी आ रही थी और उसको अपनी बाहोंमे भरने का भी मान कर रहा था, वो फिर से गले लग गयी, शिव की नजरो का सामना करना भी उसको शर्मा दे रहा tha)Agar ठीक नहीं हो तो आज मात आओ.
जूही : (धीमी आवाज me)Me ठीक हु, जितना होगा में कर लुंगी, और तुम तो कर hi सकते हो न, तुम जानते हो अब ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी, एक एक दिन कीमती है.
शिव : ठीक है जाते है, पर कुछ देर तो रुक शक्ति है na(Mene नॉटी स्माइल के साथ कहा)
जूही : (मेरा मतलब समाज कर वो शर्मा gayi)Kyu? (उसने शर्म से मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : (उसके नाजुक होठो पर अंगूठा फिरते हुए kaha)Thodi एनर्जी तो ले लू. (वो शर्मा गयी, मेने देर न करते हुए उसके होठो को पीना सुरु कर दिया)
जूही : (वो भी तो यही चाहती थी, वो भी लिपट गयी और उसका पूरा साथ देने लगी, कुछ देर बाद उसने अपने आपको छुड़ाया और हांफ ने लगी)
शिव : क्या हुआ?
जूही : (शरमाते hue)Basss, वर्ण में अपने आपको रोक नहीं पाऊँगी, संजो न. (में उसकी बात से मुस्कुराया तो वो और शर्माने लगी, मेने उसको ज्यादा तंग करना सही नहीं समजा क्यों की में भी फिर नहीं रुक पता)
शिव : ठीक है चलो. (हम दोनों बहार निकले, उसने लॉक लगाया और मेरे पीछे आ कर बेथ गयी, उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझसे सात गयी, मेने बाइक आगे बढ़ा दी, हम दोनों स्टेडियम पहुंच गए, और प्रैक्टिस करने लगे, में देख रहा था की उसको थोड़ी तकलीफ है पर फिर भी वो जी जान से म्हणत कर रही थी, उसको देख कर मुझे उस पर और प्यार आने लगा, वो अपने गोआल के प्रति कितनी समर्पित थी, उसको देख कर मुझे भी हौसला मिल रहा था, में भी अपनी पूरी सकती के साथ प्रैक्टिस करने लगा, हमारी म्हणत को लोग देख रहे थे, अब उन्हें ये भी पता था की हम किस लेवल पर पहुंच गए है तो उनकी नजरो में हमारे लिए एक अलग hi भाव था, उनके लिए हम प्रेरणा थे, हमदोनो ने लगातार दो घंटे तक जी तोड़ म्हणत की, आखिर कर अँधेरा होने पर हम वह से निकल गए, जब मेने उसे घर छोड़ा तो उसने अंदर आने को कहा)
शिव : मुझे कही जाना है, घर जा कर नाहा कर तैयार होना पड़ेगा.
जूही : कहा जा रहे हो?
शिव : झांविमडम ने बुलाया है, वो मुझे अपने साथ पार्टी में ले जा रही है.
जूही : तुम जाओ उस से मुझे कोई एतराज नहीं है पर ऐसी पार्टयों में नशा करते है ऐसा मेने सुना है, तुम दूर रहना इनसब से. एक खिलाडी के तौर पर तो ये अच्छा नहीं hi है पर एक इंसान के तौर पर भी ये अच्छा नहीं होता, समाज रहे हो न. (उसने बड़े प्यार से कहा)
शिव : बहोत ख्याल रखती हो न मेरा.
जूही : (मुस्कुराते hue)Wo तो रखूंगी hi, और अब तो और ज्यादा रखूंगी.
शिव : वो क्यों?
जूही : क्यों की अब हम एक है, और में ख्याल नहीं रखूंगी तो कोण रखेगा.
शिव : तुम hi रखना, ok में चलता हु, bye, लव यू.
जूही : Bye, लव यू तू.
में वह से निकल गया, घर पहुंच कर नाहा लिया और कपडे पहन लिए, इतने ज्यादा अच्छे तो नहीं थे पर जो भी थे वो पहन लिए. लतादिदी को भी बता दिया की में कहा जा रहा हु. में इंतजार कर रहा था की जहान्वी का फ़ोन आया, वो बहार आ चुकी थी. में बहार गया, उसने गाड़ी का दरवाजा खोला तो में अंदर आ गया, मेने देखा की वो एक खूबसूरत ड्रेस पहने हुए थी

ब्लैक कलर का टॉप था जो कंधे से निचे था, कुछ दिख नहीं रहा था पर उनके गोर कंधो को उजागर किये हुए थे, मेकअप भी किआ हुआ था, गले में सफ़ेद मोतिओं की माला टी और बल खुले हुए थे, देख कर hi लग रहा था की वो किसी को भी अपनी और आकर्षित करने को सक्षम है, कुछ पल में उन्हें hi देखता रहा. (शिव को अपनी और ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी, और धीरे से बोली)
जहान्वी : ऐसे क्या देख रहे हो?
शिव : आप भोत खूबसूरत लग रही हो.
जहान्वी : तो क्या इस तरह देखोगे? (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)
शिव : इस तरह मतलब?
जहान्वी : कुछ नहीं, चले?
शिव : चलिए. (दो पहर की घटना के बाद हम पहली बार अकेले में मिले थे, क्या बोलू समाज में नहीं आ रहा था, शायद उनका भी यही हल था, वो गाड़ी चला रही थी, मेने उनकी और देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी, मुझे अपनी और देख कर उन्होंने भी मेरी और देखा, और आँखों के इससरए से पूछा, क्या????, मेने न में गर्दन हिलायी, वो समाज रही थी, वो भी मुस्कुराते हुए आगे देखने लगी और गाड़ी चलने लगी, थोड़ी देर बाद हम सिटी से बहार निकल aaye)Hum कहा जा रहे है?
जहान्वी : कोई फार्म हाउस है, में भी नहीं गयी कभी, एड्रेस है, धुंध लेंगे. कार चलाओगे?
शिव : में इस वक़्त?
जहान्वी : क्यों अपने आप पर भरोसा नहीं है?
शिव : है, पर में अभी इतना तेज नहीं चला सकता.
जहान्वी : हमे भी कोनसी जल्दी है, वो तो तुम आ रहे थे इसलिए में आयी वर्ण में आती hi नहीं, हमारे थोड़ी देर से पहुंचने से क्या फर्क पद जायेगा, तुम्हे चलनी है की नहीं.
शिव : ठीक है. (दर तो मुझे भी लग रहा था, पर अब इतना तो कॉन्फिडेंस था की गाड़ी चला लू, उन्होंने गाड़ी साइड में की और निचे उतर गयी, में भी उतर गया, जब वो घूम कर मेरे सामने आयी तो मेने उन्हें ऊपर से निचे तक देखा, निचे लम्बा स्कर्ट पहना था पर ऊपर कन्धा और पेट नंगे थे, और इस रौशनी में भी उनका गोरा रंग दमक रहा था, हम दोनों की नज़ारे टकराई, वो शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए दूसरी और चली गयी, में भी ड्राइविंग सीट पर बेथ गया, मेने एक बार गियर, क्लच और सब देखा, वो मुझे hi देख रही थी, मेने भी उनकी और देखा और मुस्कुराया, गाड़ी चालू hi थी, तो मेने गाड़ी गियर में डाली और चलने लगा, अँधेरा था और सामने से आती गाड़िओ की रौशनी में मुझे देखना मुश्किल हो रहा था, में धीरे धीरे hi गाड़ी चला रहा था)
जहान्वी : सामनेवाली गाड़िओ की रौशनी की परवाह मत करो, उनकी और मात देखो, अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और कुछ न भी दिखे तो अपने रस्ते पर गाड़ी सीधी चलते रहो, कुछ नहीं होगा.
शिव : (मुझे दर भी लग रहा था, पर में गाड़ी चलता raha)Aap कैसे चलती हो, मुझे तो कुछ दिख hi नहीं रहा है.
जहान्वी : रात को ऐसा होता है, मुझे भी नहीं दीखता जब सामने से गाड़ी आती है, पर अपने रस्ते पर नजर गड़ाए रक्खो और जो रस्ते पर सफ़ेद धारिया बानी हुई है उस पर अपनी नजर रखना, कार उसके बहार न जाये, बस यही ध्यान रखना. (थोड़ी hi देर में में अभ्यस्त हो गया, स्पीड तो ज्यादा नहीं थी पर में गाड़ी चला रहा tha)Achchha चला रहे हो.
शिव : अपने hi सिखाया है, वर्ण में कहा गाड़ी चला पता.
दूसरी और ध्रुव बेचैन था, वो जहान्वी का इंतजार कर रहा था, पर भी तक वो नहीं दिखी थी, 8 बजे का सबको बोलै था पर भी साढ़े अंत होने को आये थे पर अभी तक वो नहीं दिखी थी. वो करुणा के पास गया जो अपनी सहेलिओ के साथ थी और बाटे कर रही थी. उसने करुणा को एक साइड में बुलाया.
करुणा : क्या हुआ?
ध्रुव : जहान्वी नहीं आयी, तुमने बात तो की थी न?
करुणा : (थोड़ा चिढ़ते hue)Ha की थी, वो निकल रही थी घर से.
ध्रुव : तो अभी ता आयी क्यों नहीं फिर.
करुणा : जितना इंतजार उसका कर रहे हो कभी मेरा किआ है क्या? (उसने हलके गुस्से से कहा)
ध्रुव : (जो अभी परेशान tha)Tum अलग हो और वो अलग है.
करुणा : क्या मतलब है तुम्हारा? (उसने घूरते हुए कहा)
ध्रुव : (थोड़ा संभल kar)Are यार, तुम तुम हो, वो वो है, तुम तो मेरी जान हो, उस से तो बस बदला लेना है, तुम तो ख़म खा गुस्सा हो रही हो.
करुणा : अभी भी समय है ध्रुव, एक बार फिर सोच लो, वो जहान्वी है, जानते हो उसेतुम, उसका भाई और उसका बाप कोण है ये भी तुम्हे पता है, एक बार फिर सोच लो.
ध्रुव : तुम क्यों फ़िक्र करती हो, सब सेट है, बस एक बार आ जाये, फिर कभी वो अपना मुँह नहीं खोलेगी, ट्रस्ट में यार.
करुणा: पता नहीं क्यों पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा.
ध्रुव : तुम तो ऐसे hi परेशान हो रही हो, में सब संभल लूंगा.
(में गाड़ी चला रहा था, उन्होंने गूगल मैप ों किआ और मुझे रास्ता बताती गयी, हम एक अँधेरी सड़क पर थे, लग रहा था की आगे कुछ भी नहीं है, शायद रास्ता भटक गए the)Rasta तो सही है न, कुछ दिख नहीं रहा है, न कोई गाड़ी आ जा रही है.
जहान्वी : गूगल मैप तो यही रास्ता दिखा रहा है, फार्म हाउस है न तो ऐसी जगह पर hi होगा, एक दो किलोमीटर hi रह गया है, जो दिखा रहा है वह जा कर देख लेते है अगर न हुआ तो वापस चले जायेंगे. (में गाड़ी चलता रहा, आखिर कर हम वह पहुंच गए, वह बहार बोर्ड लगा हुआ था जिस पर एक लाइट थी, पर पीछे बड़े बड़े पेड़ थे तो अँधेरा hi था, हम गेट के पास पहुंचे तो एक गार्ड आया, और उसने दरवाजा खोल दिया, जैसे hi गाड़ी नजदीक पहुंची उसने सलाम किआ) ये ध्रुव का फार्म है?
गार्ड : है है, आप गाड़ी अंदर ले लीजिये, अंदर पार्किंग है.
शिव : (मेने गाड़ी अंदर ले ली, कुछ दिख नहीं रहा tha)Ajeeb जगह hai.(Wo कुछ नहीं बोली बस अस्स पास देख रही थी, थोड़ा अंदर जाने पर हमे रौशनी दिखाई दी, वह भी एक गार्ड खड़ा था, उसने हमे रास्ता दिखाया और गाड़ी कड़ी करने की जगह बताई, मेने गाड़ी वह कड़ी कर दी, हम दोनों बहार निकले, अंदर काफी रोशनी थी, पूरा माहौल सजाया हुआ था, म्यूजिक की आवाज भी आ रही thi)Bahar से पता hi नहीं चल रहा की अंदर इतना सब हो रहा है.
जहान्वी : है, वो पेड़ो की वजह से कुछ भी दिख नहीं रहा है, चले?
शिव : है चलिए. (हम दोनों चलते हुए अंदर की और जाने लगे, म्यूजिक की आवाज और तेज होती चली गयी, कुछ लड़के लड़कीअ नाच भी रहे थे, पूरी पार्टी सजी हुई थी, में पहली बार ऐसी पार्टी में आया था, जहान्वी सब देखते हुए अंदर जा रही थी, अंदर पहुंचे तो उसे ध्रुव सामने से आता दिखाई दिया, जैसे वो हमारा hi इंतजार कर रहा tha)(Dhruv ने देखा की जहान्वी के साथ कोई और लड़का भी है, उसे देखते hi ध्रुव पहचान गया, पर उसको समाज नहीं आ रहा था की वो जहान्वी के साथ कैसे, पर अभी उसका ध्यान जहान्वी पर था)
ध्रुव : आइये आइये, खुशनसीबी की आप हमारे गरीबखाने पर आये. (वो बहोत खुस था की आखिर कर चिड़िया आ hi गयी, उसे ऊपर से निचे तक देख रहा था, और मान में सोचने लगा, क्या हॉट पटाखा है साली, आज तो जी भर के इसको निचोड़ूंगा)
























