Adultery Kundali Bhagya - Page 21 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 141

सुबह से संयम अपने रूम में hi घुसी रही, न किसी से बात कर रही थी न अपना मुँह दिखा रही थी, नाज़िआ ने भी दो तीन बार बात करने की कोशिस की, पर वो अपना मुँह तकिये में छुपा के उलटी लेती हुई थी. खाने के वक़्त भी वो खाने नहीं उतरी. उसके अब्बू ने भी आवाज लगायी, पर वो नहीं उतरी. नाज़िआ ने मामला सँभालते हुए अपने अब्बू को संजय की वो उसको खिला देगी, उसके पेट में दर्द है तो शायद अभी खाने का मान नहीं होगा. सब निपटने के बाद वो उसके रूम में गयी, अच्छी बात ये थी की दरवाजा बंद नहीं था, पर जैसे hi वो अंदर गयी, फिर से संयम ने अपना मुँह तकिये में छुपा लिया.

नाज़िआ : संयम, क्या कर रही है तू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया) मुझसे बात तो कर (फिर भी वो कुछ नहीं बोली) इतनी सी बात पर ये क्या कर रही है तू, मेरी और देख तो (फिर भी न उसने बात की न तकिये से मुँह nikala)Kya तू रो रही है? (कोई प्रतिक्रिया nahi)Tuje मेरी कसम है, देख मेरी और. (उसकी बात का एस्सार हुआ, और संयम ने तकिये से एक तरफ का चेहरा बहार निकल के नाज़िआ की और देखा, जिसे देख कर वो काहुनक गयी, क्यों की साफ़ पता चल रहा था की वो रो रही थी, उसके बाल भी चेहरे से चिपक गए है), ये क्या हल बना रक्खा है, ऐसा क्या हो गया जो तू ऐसे रियेक्ट कर रही है.

संयम : (रोटी आवाज me)Use क्यों शिव के पीछे बैठना है, उसका क्या हक़ है, वो मेरा दोस्त है, उसका नहीं है.

नाज़िआ : पागल है क्या तू, साथमे पढ़ते हो, साथ में आते जाते हो, तो क्या दोस्ती नहीं होजायेगी उसकी, और उसके बैठने से तुजे क्यों इतना बुरा लग रहा है, एक तो बेचारी तुजे रोज़ लेने और छोड़ने आती है, तुजे कुछ तो ख्याल करना चाहिए.

संयम : पर उसे क्यों बैठना है?

नाज़िआ : तुजे क्यों बैठना है?

संयम : क्यों की वो मेरा दोस्त है.

नाज़िआ : तो तेरे पीछे बैठने से तेरी दोस्ती ख़तम हो जाएगी क्या. तू तो ऐसे हक़ जाता रही है जैसे तू उसकी गर्लफ्रेंड है. (संयम चुप हो गयी, वो कुछ नहीं बोली, उसने फिर से अपना चेहरा छुपा लिया. नाज़िआ बच्ची नहीं थी, वो सब समाज रही थी, पर वो इस बात को बताना नहीं चाहती थी) अब मुँह क्यों छुपा रही है, जवाब दे मुझे.

संयम : तो वो क्यों हक़ जाता रही है, क्या वो उसकी गर्लफ्रेंड है?

नाज़िआ : क्यों? नहीं हो शक्ति वो.

संयम : वो मेरा दोस्त है.

नाज़िआ : मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, दोस्त है वो तेरा, बॉयफ्रेंड नहीं है, और वो वैस्वी का बॉयफ्रेंड हो भी सकता है, वो उनका मटर है, तुजे क्या? में तेरे लिए कह रही हु, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, तू जानती है, हमारी कास्ट में सबको पढ़ाई का मौका नहीं मिलता, और जो पढ़ते है वो भी ज्यादा तर 10वि या 12वि तक hi पढ़ते है, उसके बाद उनकी शादी कर दी जाती है, अगर अब्बू को ऐसा वैसा कुछ भी पता चला तो वो तेरी पढ़ाई रुकवा कर शादी कर देंगे, और ये तू अच्छे से जानती है. क्यों अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहती है, ये पढ़ाई की उम्र है, पढ़ाई पर ध्यान दे. तू जानती hi है की शादी के बाद चीजे कितनी बदल जाती है.

संयम : मुझे शादी hi नहीं करनी.

नाज़िआ : उसके लिए भी तुजे अपने पेरो पर खड़ा होना पड़ेगा, और पढ़ाई hi है जो तेरे पेअर मजबूत बनाएगी. इस उम्र में ये सब होता है, हमे कोई अच्छा लगता है, उसके साथ रहने का मान करता है, उसमे कोई बुराई नहीं है, पर तुजे अपना रास्ता तय करना है, तुजे क्या करना है, वो भी यही है, कही भगा नहीं जा रहा, पढ़ाई छोड़ कर इन सबके पीछे पड़ना, न तेरे लिए अच्छा है, न शिव के लिए. तू समाज रही है न? (संयम ने फिर अपना चेहरा बहार निकला, और हां में शिर हिलाया, नाज़िआ ने पूरा तकिया हटा दिया और संयम को सामने बिठाया और उसकी आंखे पोछते हुए) इस उम्र में लड़को के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है, में ये नहीं कहती की तू दूर रह, पर उसके लिए अपनी पढ़ाई पर असर न पड़ने दे. आज तूने स्कूल से छूती कर ली, कल अगर ऐसा वैसा कुछ हो गया तो स्कूल छोड़ देगी, क्या ये ठीक है? नहीं न. तुजे वो अच्छा लगता hai,ye मुझे पता है, पर अभी से तू उस पर हक़ नहीं जमा शक्ति, उसका मान भी तुजे जान न होगा, हो शक्ति है की उसे वैस्वी पसंद हो या कोई और, और वैसे भी तू उसे अपना दोस्त कहती है, तो वो तुजे दोस्त hi समजेगा. अगर तेरे मान में कुछ है तो उस से बोल दे. हम किसी को प्यार कर शक्ति है, पर वो प्यार करे या न करे ये उसकी मर्जी है, हम उस पर दबाव नहीं बना शक्ति, समाज रही है न तू?

संयम : है आप.

नाज़िआ : (उसका चेहरा अच्छे से साफ़ करते hue)Meri प्यारी गुड़िया, में तेरी दोस्त हु, दुसमन नहीं हु, में हमेशा तेरा साथ दूंगी, पर अभी ये कच्ची उम्र का प्यार है, अगर है भी तो, उसे थोड़ा पकने दे, उसके बाद अगर तुजे लगे की तुजे उसके साथ hi रहना है तो फिर आगे बढ़ना. और ये भी हो सकता है की आगे चल कर तुजे और कोई मिले जो तुजे और ज्यादा अच्छा लगे.

संयम : (अपनी आप के गले लगते hue)Thank यू आप, आप बहोत अच्छी हो.

नाज़िआ : तू भी तो अच्छी है, मेरी प्यारी गुड़िया. (दोनों ऐसे hi थोड़ी देर गले लगी रही) चल खाना कहते है, मुझे तो बहोत भूख लगी है, तेरे चक्कर में मेने भी अभी तक खाना नहीं खाया.

संयम : मुझे इतना लेक्चर दे रही हो, आप को समाज नहीं आता? आप प्रेग्नेंट हो आप को तो अपना ख्याल रखना चाहिए न. चलिए, में अपने हाथो से खिलाती हु.

प्रकाशराओ ऑफिस में बैठा था, मला आज बहार गए हुए थे, वो फिलो को देख रहा था, उसके फ़ोन पर किसी अनजान नंबर से फ़ोन आया.

प्रकाशराओ : Hello?

अव्वज : प्रकाशराओ जी बोल रहे है?

प्रकाशराओ : हांजी, बोलिये?

आवाज : में चंद्रभान बोल रहा हु, स्वर्ण का चाचा.

प्रकाशराओ : (स्वर्ण के घर से फ़ोन आया ये सोच के उसे आश्चर्य हुआ) हांजी कहिये?

चंद्रभान : हम आपसे मिलना चाहते है.

प्रकाशराओ : (उसे और आश्चर्य होने लगा, क्यों की ये पहली बार था की स्वर्ण के घर से फ़ोन आया था, स्वर्ण और उसके बेटे ने लव मर्रिएगे की थी, अपने बेटे पर भी वो गुस्सा हुआ था, पर इकलौता बीटा था तो फिर एक्सेप्ट कर लिया था, स्वर्ण के घरवाले नहीं मने थे तो कभी उनकी बात नहीं हुई थी, उसने स्वर्ण के बारे में पता करवाया था, वो बड़े घर की और अच्छे खंडन की थी तो फिर उसने एतराज नहीं किआ था, सुरु में स्वर्ण से बात भी की थी उसने इस बारे में, पर जब स्वर्ण ने रट रट बताया की उसके पापा इस बात से नाराज़ है और कोई रिस्ता नहीं रखना चाहते तो उसने भी एक्सेप्ट कर लिया था, उसे बुरा भी नहीं लगा था क्यों की एक बेटी के बाप के तौर पर ये सही फैसला भी था, उसकी भी बेटी थी, अगर वो ऐसा कदम उठाये तो वो भी उस से रिस्ता तोड़ देगा, पर अभी अचानक वह से फ़ोन आना उसको अचंबित कर रहा था) जी आप कभी भी आ शक्ति है.

चंद्रभान : हम आपके सहर में hi है, अगर आप इजाजत दे तो हम थोड़ी देर में आपके वह आ शक्ति है, स्वर्ण की माताजी और उसकी भाभी भी आयी हुई है.

प्रकाशराओ : उसके पिताजी नहीं आये? (उसने थोड़े तीखे पैन से कहा)

चंद्रभान : वो भी आना चाहते थे, पर काम की वजह से वो नहीं आ पाए, वो बाद में आ जायेंगे. पर क्या आपकी इजाजत है?

प्रकाशराओ : में क्यों एतराज करने लगा, आपकी बेटी है, आप जरूर मिल शक्ति है, में अभी बहार हु, में आधे घंटे में घर पहुँचता हु.

चंद्रभान : बहोत बढ़िया, हम भी आधेघंटे बाद hi आते है. आपने सहमति जताई उसके लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद.

प्रकाशराओ : नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मिलते है.

चंद्रभान : जी जरूर.

प्रकाशराओ : (फ़ोन रखने के बाद वो सोच में पद गया, पर फिर उसने सोचा की मिलने आये होंगे, उसने अपनी पत्नी को फ़ोन lagaya)Hello, शिखा.

शिखादेवी : हांजी बोलिये, आपने िःस्वक़्त फ़ोन किआ?

प्रकाशराओ : है, वो स्वर्ण के चाचा और उसकी माँ और भाभी, हमारे घर आ रहे है.

शिखादेवी : ऐसे अचानक, क्यों?

प्रकाशराओ : मुझे क्या पता, में भी घर आ रहा हु, तुम स्वर्ण को बता देना.

शिखादेवी : ठीक है. (फ़ोन रख kar)Swarnaaaa.

स्वर्ण : जी माजी.

शिखादेवी : तेरे मायकेवाले आ रहे है.

स्वर्ण : (उसको यकीं नहीं हुआ की उसने क्या suna)Kon मजी?

शिखादेवी : तेरे मायकेवाले, तेरी मम्मी, भाभी, और चाचा.

स्वर्ण : (उसकी आँखमे आंसू आगये) सचमे....

शिखादेवी : (उसके शिर पर हाथ फेरते hue)Aisi हालत में रोना अच्छी बात नहीं है, अभी आधेघंटे में आ रहे है, तुजे पता चल जायेगा की सच या जूथ.

स्वर्ण : (उसके आंसू रुक नहीं रहे the)Mera वो मतलब नहीं था माजी.

शिखादेवी : (मुस्कुराते hue)Me मजाक कर रही थी, पगली, मुझे पता है की तू क्या महसूस कर रही है, अक्सर ऐसा होता है, बच्चे जवानी के जोश में कदम उथलेटे है, पर फिर घरवालों की एहमियत पता चलती है. चल अब रोना धोना छोड़ और उनके आने की तयारी कर. (फिर वो दोनों नौकरो को हिदायत देने लगे, स्वर्ण तो जैसे हवा में उड़ रही थी, वो खुसी खुसी सब तैतरीय कर रही थी, और हो भी क्यों न, शादी के बाद आज पहली बार उसकी मम्मी आ रही थी, अपनी मर्जी से शादी कर के वो अपने फॅमिली से जैसे अलग हो गयी थी, उसको ये हमेषा से अपने मान में दर्द देता था, पर इतने सालो बाद उसके घरवाले उस से मिलने आ रहे थे)

(वह में स्कूल से निकला, मेरे दिमाग में दो hi बाते चल रही थी, एक तो आज जो सुबह हुआ, संयम और वैस्वी की वो तकरार, बार बार मेरे जहँ में आ रही थी, संयम को मेने कभी ऐसी कोई भी हिंट नहीं दी थी की वो उसको प्यार वाली नजर से देखता है, वो उसे अपनी दोस्त की तरह hi देखता था. पर जिस तरह से संयम, वैस्वी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी, उस से तो यही लग रहा था की वो उसे प्यार वाली नजर से देखती है, अब मुझे ये भी पता चल रहा था की अगर वो दो इंसान से प्यार जतायेगा तो उनके बिच ऐसी परिस्थितिया जन्म लेगी hi. में अपने रिस्तो को एक बार दोबारा टटोलने लगा, एक और मेरे लिए लतादिदी थी, क्यों की अब हमारे बिच जिस तरह का रिस्ता था, वो कतई भाई बहन वाला तो नहीं था, तो आगे चल कर हमारा क्या रिस्ता रहेगा, क्यों की ये बात तो तय थी की किसी भी परिस्थिति में में लतादिदी को नहीं छोड़ सकता, तो वो किस रिश्ते से मेरे साथ अपना जीवन बिताएगी, जूही अपनी तरफ से ये कह रही थी की वो मुझसे क्या किसी से भी अभी शादी नहीं करना चाहती, पर वो रिस्ता तो छह रही है, आगे चल कर अगर उसने भी कहा की वो उसके साथ जुड़ना चाहती है तो? वैस्वी की और से भी मुझे उसी तरह के सिग्नल मिल रहे थे. मेरी कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था, मुझे जूही की बात सही लग रही थी, अभी से ये सब सोचने का कोई मतलब नहीं है.

अब मेरा दिमाग अनाथालय की समस्या की और जा रहा था, पहले भी ये परिस्थितिया आयी थी, लग रहा था की अनाथालय बिखर जायेगा, काव्य मैडम और भार्गवी मैडम का यही कहना था की कुछ नहीं होगा, पर मुझे कही न कही लग रहा था की कुछ तो गड़बड़ हो रही है. जो इतने सालो से चल रहा था अचानक गोवत, को इस अनाथालय की hi याद क्यों आयी, क्यों उन्होंने हमें hi नोटिस दिया. कुछ तो था, कोई तो था जो ये सब करवा रहा था, पर ऐसा कोण है, कोण ऐसा है जिसको हमारे जैसे अनाथ बच्चो के शिर से छत हटानी है. मेने काव्य मैडम को फ़ोन लगाया.

शिव : Hello, कैसी है आप?

काव्य : में तुम्हे hi फ़ोन करनेवाली थी.

शिव : (उनकी आवाज से मेरा दिल बैठने laga)K क्यों?

काव्य : देखो, तुम ज्यादा डरना नहीं, (वो एक पल ruki)Pata नहीं ये कैसे मुमकिन है, पर मेरी ट्रस्टी से बात हुई, वो भी इस बात को समाज नहीं प् रहे है, उन्होंने बताया की उनके पास दस्तावेज नहीं है.

शिव : क्या ? दस्तावेज नहीं है.

काव्य : इतना ज्यादा दुखी होने की जरुरत नहीं है शिव, (वैसे तो वो खुद भी दुखी थी, पर वो शिव को अस्वासन देना चाहती थी) वो धुंध रहे है, ऊपरी तौर पर ढूंढने पर उन्हें कागजात नहीं मिले, वो उसे धुंध रहे है, उन्होंने कहा है की वो फिर मुझे फ़ोन करेंगे.

शिव : पर ऐसा कैसे हो शक्ति है, ये उनकी मिल्कियत है, तो कागजात तो उनके पास hi होंगे न.

काव्य : मेने उनसे यही कहा था, उन्होंने बताया की ये सब उनके पिताजी यानि जानकीदास hi देखते थे तो उनको इस बारेमे कुछ पता नहीं है, मेने ये भी कहा की इतने सालो से तो अनाथालय है, ऐसा तो मुमकिन नहीं है की बिना किसी कागजात के इतना बड़ा अनाथालय कही रजिस्टर हो. तो उन्होंने कहा की उन दिनों ये सब मुमकिन हो भी सकता था, क्यों की इस वक़्त ये सब कम्प्युटेरिसेड हो चूका है तो गोवत. उसे सब कागजातों के साथ hi रजिस्टर करती है, पर उन दिनों ये सब jan-pehchan में भी हो जाता था. मुझे भी उनकी बात सही लग रही है, पर अगर जमीं खरीदी गयी है तो कागजात तो जरूर होने चाहिए, तो वो धुंध रहे है, हो सकता है की जानकीदासजी ने वो कही और रक्खे हो.

शिव : पर अगर नहीं मिले तो?

काव्य : इतना नेगेटिव सोचने की जरुरत नहीं है शिव, अभी हमारे पास समय है, हम धुंध लेंगे, और अगर ऐसा न भी हुआ तो में कोई और तरीका सोचती हु, तुम चिंता मात करो, अनाथालय को कुछ नहीं होगा. हम मिल कर शांति से बात करते है, अभी में कोर्ट में हु, और मेरा एक केस है, ठीक है.

शिव : जी, ठीक है. (फ़ोन रखने के बाद में सोच में पद गया, अब क्या होगा, में घर पहुंच गया, मेने चेहरे से किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया, में नहीं चाहता था की वो लोग परेशान हो)

बिना और उसके घरवाले एक बड़े एलिसन घर के पार्किंग में थे, वो गाड़ी से साथ में लाया हुआ सामान उतर रहे थे. बिना घर को भी देख रही थी, वो इन लोगो को नहीं जानती थी, तभी अंदर से एक औरत (स्वर्ण) भागते हुए बहार आयी.

स्वर्ण : Mummiiiiiiiiiii. (वो दौड़ते हुए आयी और कामनादेवी से लिपट गयी) मुम्मीी (बोलते बोलते उसकी आँखों से आंसू चालक आये)

कामनादेवी : (कई बरसो के बाद वो अपनी बेटी से मिल रही थी, तो सबकुछ भूल कर उसने अपनी बेटी को बहो में भर liya)Meri बच्ची... (थोड़ी देर दोनों का ये स्नेह मिलान चला)

चंद्रभान : हम भी यही है बेटी.

स्वर्ण : (वो अपने चाचा की और बढ़ी और उनके पेअर chhuye)Chachaji.

चंद्रभान : जीती रहो बेटी. (फिर वो अपनी चची से भी गले मिली)

स्वर्ण : चचईई.

नर्मदादेवी : जीती रह, खुस रह. (स्वर्ण बिना और पद्मा की और देखने लगी) ये तेरी भाभियाँ है, ये पृथ्वी की बीवी और ये जिग्नेश की बीवी.

स्वर्ण : भाभी (कह कर वो दोनों के गले लगी)

कामनादेवी : कहा से पहचाने गई इनको, पहले hi चली आयी थी अपना घर छोड़ कर, इतना गुस्सा आ रहा है की मान कर रहा है दो चपेट लगा दू.

स्वर्ण : (रट हुए फिर अपनी मम्मी के गले लग gayi)Maaf कर दो मुझे, में पागल थी, इतनी समाज नहीं थी न.

आकाश : (स्वर्ण का पति, वो भी बहार आ गया था, प्रकाशराओ और संध्यादेवी भी बहार चले आये थे) अच्छा तो अब लग रहा है की गलती कर दी, उस समय में समजा रहा था तब अकाल घास चरने गयी थी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था, वो भी आगे बढ़ा और अपनी सासु के पेअर छुए)

कामनादेवी : जीते रहो, तरक्की करो और हमेशा खुस रहो. (आकाश ने बड़ो के पेअर छुए और बिना और पद्मा को नमस्ते किआ) आपको देख कर hi मेरी बेटी का दिमाग काम करना बंद कर गया था शायद.

स्वर्ण : में दर गयी थी मम्मी, आप तो पापा को जानते है, मुझे पता था वो कभी नहीं मानेंगे, मेरी हिम्मत hi नहीं हुई उन्हें बताने की.

कामनादेवी : (उसके शिर पर चपेट मरते hue)Ek बात मुझसे तो बात कर लेती.

संध्यादेवी : अब छोड़िये भी पुराणी बातो को, आप लोग अंदर आईएम बहार hi खड़े रह गए आप sab.(Sab अंदर आ गए, और सोफे में बेथ गए, पहली बार बेटी के ससुराल आये थे तो सब आस पास घर को देख रहे थे, संध्यादेवी ने उन्हें देखने दिया, फिर boli)Kaisa लगा अपनी बेटी का ससुराल.

कामनादेवी : (झेपते hue)Nahi, में तो बस ऐसे hi देख रही थी.

संध्यादेवी : (मुस्कुराते hue)Nahi नहीं, ये हक़ है आपका, अपनी बेटी किस घर में रह रही है वो तो देखना hi चाहिए.

प्रकाशराओ : आप आये, हमे बहोत अच्छा लगा, बहु के चेहरे पर आज जो खुसी देख रहा हु वो देख कर दिल को बहोत अच्छा लगा. आपने अपनी बेटी के प्रति बड़ा दिल दिखाया ये बहोत अच्छी बात है.

चंद्रभान : अब बेटी है हमारी, वो गलती कर शक्ति है, पर हमे तो उसे स्वीकार करना hi था, हम आपके लिए थोड़े तोहफे भी लाये है.

प्रकाशराओ : उसकी क्या जरुरत थी?

चंद्रभान : बेटी के घर आये है तो, खली हाथ तो नहीं आ शक्ति थे. (फिर थोड़ी देर सब को तौफे देने का कार्यक्रम चला, ये सब देख कर स्वर्ण बहोत खुस थी, तौफा में सोने के जेवर भी थे, उनकी सासुमा को भी सोने का हार दिया गया था, जमाई के लिए सोने का ब्रासलेट था. ये सब भी उसने कई बार सुना था, कई बार इस चीज को लेकर उसे तने दिए गए थे की वो क्या ले कर आयी, दोनों भाभियाँ मिल कर सबको तौफे दे रही thi)Beta और कोई रह तो नहीं गया न (स्वर्ण से कहा)

स्वर्ण : मेरी नानन्द है, में अभी बुलाती हु. (वो गयी वैस्वी को बुलाने, समजने पर वो भी निचे आ गयी)

बिना : वैस्वीी.

वैस्वी : टीचररररर.

प्रकाशराओ : आप जानती है इससे?

बिना : है, ये मेरे क्लास में hi पढ़ती है.

प्रकाशराओ : कितनी अजीब बात है, एक hi सहर में रहते हुए भी हम एक दूसरे से अनजान थे.

(वैस्वी को भी एक सोने की चैन दी गयी, जो खुद बिना मैडम दे रही थी )

वैस्वी : पापा (उसने पापा की और देखा)

प्रकाशराओ : बेटी, ये तुम्हारी भाभी की भाभी hai.(Aise hi थोड़ी देर इधर उधर की बाते चलती रही, फिर स्वर्ण ने वह नास्ता लगवाया, सबने नास्ता किआ, नास्ता क्या जैसे खाना hi हो गया था, चंद्रभान ने मन भी किआ, की बेटी का घर है,) अब छोड़िये भी पुराने ज़माने की बाते (ये कह कर उन्होंने जबर दस्ती की तो फिर सबने खा लिया, उसके बाद सब वह बैठे थे)

चंद्रभान : समधी जी, बिटिया से मिलने का एक और कारन भी है.

प्रकाशराओ : हांजी बताइये.

चंद्रभान :सब फॅमिली की भलाई के लिए हम एक अनुष्ठान का आयोजन कर रहे है, तो उसी का नौटा भी देने आये है.

प्रकाशराओ : ये तो बहोत खुसी की बात है, हम जरूर आएंगे, कब रक्खा है?

चंद्रभान : अभी तारीख तय नहीं की गयी है, बाबाजी का निर्देश था की सभी कुटुम्बीजन का उपस्थित होना आवश्यक है, तो हम जितने भी कुटुम्बीजन है उनसे मिल रहे है, क्यों की ये भी पता नहीं है की सब इक्कट्ठा होंगे भी की नहीं, अगर उपरवाले की कृपा से सब इकठ्ठा हो गए तो जल्द hi तारीख निकल कर आप को ऑफिशियली नौटा देने आएंगे.

प्रकाशराओ : अजीब बात है, ऐसा क्यों लगता है की आपके सब कुटुम्बीजन इकठ्ठा नहीं होंगे?

चंद्रभान : बुरा मात मानिये, पर हमें तो ये भी नहीं पता था की स्वर्णबेटी आएगी या नहीं, क्यों की जिस तरह के हालत थे, शायद आप hi इजाजत न दे, या वो खुद न आना चाहे.

प्रकाशराओ : बात तो सही है आपकी, हर कोई अपनी तरह से सोचता है, हमारी तरफ से हां समजिये, हमें कोई दिक्कत नहीं है, है आप एक बार स्वर्ण से जरूर पूछ लीजियेगा, आप भी बुरा मात मानिये, पर एक बात जरूर कहूंगा, क्या ऐसा अनुष्ठान न होता तो आप स्वर्ण से मिलने आते? इसका तो यही मतलब होता है की आप को स्वर्ण का ख्याल नहीं है, आपको अपने अनुष्ठान का ख्याल है.

कामनादेवी : ऐसा कहसकते है आप भाईसाहब, पर क्या कभी कोई घर की औरतो को भी उसकी मर्जी पूछता है, उन्होंने (अपने पति) फैसला सुना दिया की बेटी से कोई सम्बन्ध नहीं रखना है, क्या हम उसमे कुछ कह शक्ति थे (बोलते बोलते उनकी आंख में आंसू आ गए)

प्रकाशराओ : बुरा मात मानिये बहनजी, आप सच hi कह रही है, इसीलिए तो मेने कहा की आप स्वर्ण से बात कर लीजिये, क्यों की जैसा मेरे मान में ख्याल आया, उसके दिल में भी ये बात आ शक्ति है. आपने ये अनुष्ठान रक्खा है, अपने सभी फॅमिली के लोगो की भलाई के लिए तो उसमे ये भी तो आ जाती है, चाहे हम सम्बन्ध न भी रक्खे, पर जो रिस्ता उपरवाले ने बना के भेजा है उसे तो हम जुटला नहीं सकते, पर ऐसी क्या बात हो गयी की आपको ऐसा अनुष्ठान रखना पड़ा, क्यों की येसामन्य बात तो दिख नहीं रही है, आप बहोत गंभीर है इस अनुष्ठान को लेकर, इतने बरसो के गुस्से को भुला कर भी आप स्वर्ण को लेने आये है तो बात तो जरूर गंभीर होगी.

चंद्रभान : (सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे, थोड़े स्वस्थ हो कर ) आप सही कह रहे है, अब कैसे कहु और क्या कहु समाज में नहीं आ रहा, पर अब आप भी हमारी फॅमिली का hi हिस्सा है तो आप से क्या छुपाना. हमारी पीढ़ी के बाद की जो पीढ़ी है, वो आगे नहीं बढ़ प् रही है, मेरे कहने का मतलब है की उनके वह कोई भी संतान नहीं है, तो इसके उपाय स्वरुप हमने एक ज्योतिष बाबा से संपर्क किआ तो हमें उन्होंने इस अनुष्ठान का सुझाव दिया.

प्रकाशराओ : (कुछ सोचते हुए) आपके कहने का मतलब है की आपके बेटो के वह कोई संतान नहीं है, है न?

चंद्रभान : सिर्फ बेटो के वह hi नहीं, बेटिओ के वह भी संतान नहीं है, मेरी बेटी की शादी को भी कई साल हो चुके है, पर अभी भी उनके वह भी कोई उम्मीद नहीं है.

प्रकाशराओ : (मुस्कुराते hue)Dekhiye बुरा मात मानिये, पर ये कोई ढोंगी बाबा है, आज कल कोण ऐसे अन्धविश्वास में मंटा है, ऐसा नहीं है की हमे अपने धर्म पर कोई संदेह है, पर यक़ीनन ये बाबा तो ढोंगी hi है.

चंद्रभान : आप कैसे ये कह सकते है?

प्रकाशराओ : जैसा की आपने कहा की आपके वह की लड़कीओ को भी कोई संतान नहीं हो रही, पर आपकी जानकारी के लिए बता दू की हमारी बहु, उम्मीद से है. वो प्रेग्नेंट है.

कामनादेवी : क्या सच में? (स्वर्ण शर्मा गयी, कामना देवी कड़ी हुई और अपनी बेटी के शिर पर हाथ रक्खा) जीती रहो बेटी, सदा खुस रहो, ढेर साडी खुसिया नसीब हो तुजे. ये तो सचमे बहोत बड़ी खुस खबरि है.

प्रकाशराओ : इसीलिए में कह रहा था की ये उस बाबा की मन घडन्त बाटे है, अगर सचमे ऐसा होता तो आपके घर की hi बेटी प्रेग्नेंट न होती.

बिना : (मान में) स्वर्ण भी प्रेग्नेंट है? कैसे? अगर घरवाले सही है, बाबाजी सही है तो फिर स्वर्ण कैसे गर्भवती हो शक्ति है? ये कैसे मुमकिन है? उसके ससुर ठीक कह रहे है, क्यों की अगर बाबाजी की बात सच होती हो स्वर्ण ऐसे hi प्रेग्नेंट नहीं हो शक्ति, तो क्या कही कोई गलती हो रही है, नहीं ऐसा नहीं हो सकता, क्यों की बाबाजी ने hi बताया था की मेरा और ममतादिदी के बच्चे का बाप एक hi है, ये बात तो हम दोनों को भी नहीं पता थी, तो फिर ये कैसे मुकीम हो सकता hai?Swarna और शिव? क्या ऐसा हो सकता है? नहीं ये मुमकिन नहीं है, पर वैस्वी और शिव आपसमे दोस्त है, हो सकता है वो यहाँ आता भी हो, पर स्वर्ण की लव मैरिज है, वो अपने पति से दूर भी नहीं है, तो फिर ये मुमकिन नहीं हो शक्ति. पर अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर वो प्रेग्नेंट कैसे है, तो बाबाजी गलत है.

चंद्रभान : आप सही है, मुझे बाबाजी से बात करनी होगी, पर वो जो कुछ भी हो, उसी बहाने से सही, पर हमें अपनी बेटी से मिलने का मौका मिला, और एक बार फिर से हमारा रिस्ता फिर मजबूत हुआ.

प्रकाशराओ : ये बात तो सही है.

बिना : (उस से रहा न गया) पापा, आपलोग बाटे कीजिये, हम अंदर चलते है, में तो अपनी नानन्द से पहली बार मिली हु, कुछ आपस में बात hi करलु. (प्रकाशराओ की और देख kar)Agar आपकी इज्जाजत हो तो.

प्रकाशराओ : इसमें इजाजत की क्या बात है, (स्वर्ण se)jao बेटी इनको अपने कमरे में ले जाओ.

स्वर्ण : आइये भाभी.

पद्मा : में भी चलती हु (बिना को पद्मा का आना अच्छा नहीं लगा, वो स्वर्ण से अकेले में बात करना चाहती थी, पर वो उसे मन भी नहीं कर शक्ति थी, वैस्वी भी उनके साथ कड़ी हुई, वो लोग सब स्वर्ण के कमरे में गए, और वैस्वी अपने कमरे में चली गयी)

बिना : (कमरे को देख kar)Bahot अच्छे से सजाया है ये रूम.

स्वर्ण : थैंक यू भाभी.

बिना : में तो भूल hi गयी (ये कह कर वो उसके गले lagi)Bahot बहोत बधाई हो.

स्वर्ण : थैंक यू भाभी, (पद्मा ने भी बधाई di)Thank यू भाभी. पर भाभी एक बात समाजमे नहीं आयी, ये अनुष्ठान का क्या चक्कर है. (वो तीनो बीएड पर बेथ गयी)

बिना : वो जो भी हो, आपको तो खुस होना चाहिए, इस बहाने से hi सही, पर जो रिस्ता टूट चूका था वो फिर से जुड़ गया.

स्वर्ण : पर जैसा पापा ने कहा, अब तो इस अनुष्ठान का कोई मतलब नहीं रह गया, क्यों की अगर ऐसा होता तो में माँ न बन ने वाली होती.

बिना : आप ठीक कह रही है, पर कुछ और भी बाटे है, इस अनुष्ठान के पीछे.

स्वर्ण : वो क्या है भाभी?

बिना : अभी फ़िलहाल तो में तुम्हे नहीं बता शक्ति (अचानक hi उसकी नजर पद्मा की और चली गयी. (पद्मा झेप गयी, वो इसका मतलब साफ़ समाज सकती थी)

पद्मा : मेरे सामने बात नहीं करनी तो में बहार चली जाती हु (उसका चेहरा उदास हो गया था)

बिना : (उसका हाथ पकड़ kar)Aisi बात नहीं है, तू बेथ.

पद्मा : आपको क्या लगता है, में कोई बच्ची हु, में समाज सकती हु की कोई तो बात है, वो बाबाजी ने भी मुझे छोड़ कर आप दोनों को hi बुलाया था, यहाँ भी मेरी उपस्थिति आपको खाल रही है, अगर मेरी उपस्थितिमे आपको बात करने में दिक्कत हो रही है तो में बहार चली जाती हु. (वो फिर उठने लगी, बिना ने फिर उसका हाथ पकड़ कर बीएड पर बिठा दिया)

बिना : जैसा तू समाज रही है, वैसा नहीं है, पर कुछ बाटे होती है, जो समय पर पता चले तो hi अच्छा होता है, वर्ण उसका मतलब और मायने बदल जाते है. ऐसा नहीं है की में तुजसे कुछ छुपा रही हु, पर अभी फ़िलहाल वो जान न तेरे लिए जरुरी नहीं है, पर जितना में समाज प् रही हु, अगर वैसा hi है तो फिर तुजे भी वो बात जान नई hi पड़ेगी, में खुद तुजे बताउंगी, तो मुँह मात लटका, सामजी.

पद्मा : (उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े) आप जानती hi हो, घर का माहौल कैसा है, में अकेली हो गयी हु वह, और आप सब भी मुझसे ऐसे पर्दा करोगी तो बुरा तो लगता है न.

बिना : (पद्मा को गले लगा kar)Pagala (प्यार से कहा) ऐसा वैसा कुछ नहीं है, तू दिल पर मात ले, मेने कहा न समय आने पर में खुद बात करुँगी, पर अभी मेरी तो समाज में आने दे, कई सवाल है मेरे मान में, मुझे hi उसके जवाब नहीं मिल रहे तो तुजे क्या बताउंगी.

स्वर्ण : ऐसी क्या बात है भाभी? (बिना को)

बिना : कुछ नहीं है, सब के घरो में एक hi टेंशन है, बच्चा.

स्वर्ण : हो जायेगा भाभी, अभी उम्र hi क्या है आपकी.

बिना : (अपने मान में, अब क्या बताऊ आपको, वो तो आलरेडी मेरे गर्भ में है, पर भी में वो नहीं बता शक्ति, मुझे ये जान न है की ये अनुष्ठान शिव के लिए क्यों जरुरी है, और आपका और शिव का कोई रिस्ता है की नहीं, क्यों की अगर नहीं है तो फिर ये साडी बाटे बेमानी हो जाएगी)

स्वर्ण : (बिना को सोच में डूबा dekh)Sach में भाभी, कोई तो बात है, बताओ न.

बिना : (उसके पास वैसे भी कोई चारा नहीं बचा था, तो हिम्मत कर के उसने अच्छे तरीके से पूछा) आप शिव को जानती है? (उसने बहोत शांत लहजे में पूछा था, पर अचानक शिव के नाम से स्वर्ण चौंक गयी, ऐसे अचानक भाभी शिव का क्यों पूछ रही है ये उसकी समाज में नै आया)

स्वर्ण : क क कोण शिव? (उसकी जबान तक ladkhadayi)(Uski लड़खड़ाहट बहोत कुछ बयां कर रही थी, बिना को पूरा शक हो गया)

पद्मा : (उसे भी कुछ समाज नहीं aaya)Kon शिव?

बिना : (बात को सँभालते hue)Mene तो बस ऐसे hi पूछा था, मेने सोचा की बात का टॉपिक बदला जाये, वैस्वी और शिव दोनों दोस्त है तो मेने सोचा की आप जानती हो.

स्वर्ण : (अपने आपको सँभालते hue)Wo शिव, है वो वैस्वी का दोस्त है और पापा की कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ भी जुड़ा हुआ है तो आता है कभी कभी. पर आपने अचानक उसका क्यों पूछा?

बिना : मेने कहा न, की बहोत सीरियस बात चल रही थी तो मेने सोचा की टॉपिक चेंज करते है, मुझे भी लगा था की शायद आप जानती होंगी, बहोत अच्छा लड़का है, मेरे क्लास का होशियार बच्चा.

स्वर्ण : है, वैस्वी भी उसकी बाते करती है, उसने वैस्वी की बहोत मदद भी की थी, आपको तो पता hi होगा, उस हादसे के बारे में. (पद्मा को कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो बस सुन रही थी, तभी एक नौकर ने आके कहा की आप को निचे बुला रहे है, सब निचे आ गए, सबने विदा mangi)Bhabhi, आप तो यही हो, तो अब आपसे मिलना होता रहेगा. आप मेरा नंबर ले लो, और मुझे आपका भी दे दो. (उन्होंने आपसे में नंबर दे दिए, फिर वो सब वह से निकल गए, बिना ने बहोत रोका पर वो सब वापस चले गए, बिना फिर से स्वर्ण और शिव के बारे में सोचने लगी)

बिना : जिस तरह से स्वर्ण हीचिकिचाई थी जरूर कुछ न कुछ तो है, और अगर मेरा शक सही है तो वो शिव का hi बच्चा हो शक्ति है, क्यों की परिस्थितिया हो उसी और इस्सर कर रही है. पर फिर भी ध्यान से जान न होगा, अगर मेरा अनुमान गलत हुआ तो बात बिगड़ भी सकती है. ऐसा करती हु पहले शिव से hi बात करती हु, वैसे भी मिलना है उस से, कहा कहा गुल खिला रहे है जनाब, में उसे कितना भोला समझती थी, और यहाँ देखो, जहा देखो वह उनके बच्चे मिल रहे है. (उसने शिव के मोबाइल पर मश्ग किआ) में सहर में आ गयी हु, टाइम हो तो मिलने आना.

शिव उस वक़्त स्टेडियम में था तो उसने मश्ग नहीं पढ़ा, आज भी वो साइट पर नहीं गया था, आज वो घर hi रहा, क्यों की घर में भी टेंशन का माहौल था.
 
अपडेट 142

साइट पर सब काम चल रहा था, जीन्स और थिरत पहने हुए जहान्वी इधर उधर टहल रही थी और सबको काम करते हुए देख रही थी, पर बार बार उसकी नजर घडी पर जा रही थी, शिव के आने के टाइम के ऊपर भी तक़रीबन एक घंटा गुजर चूका था, पर अभी तक शिव नहीं आया था. पता नहीं पर उसके अंदर गुस्सा बढ़ता जा रहा था, ये गुस्सा किस बात का था वो उसे भी नहीं पता था, शिव के काम पर न आने से वो गुस्सा थी या शिव के न आने से, पर वो बार बार घडी देख रही थी, उसका मान किआ की पिंकेशभाई से पूछे की कोई मश्ग या फ़ोन आया था, पर फिर उसने नहीं पूछा. उसका मान नहीं लग रहा था तो वो घर चली गयी.

स्टेडियम से निकलते वक़्त मेने मश्ग पढ़ा, मैडम वापस आ गयी है ये जान के खुसी हुई.

जूही : (मेरी और देखते hue)Kya हुआ? मुस्कुरा क्यों रहे हो? (वो दिखय में सामान रख रही थी)

शिव : नहीं कुछ नहीं, वो बिना मैडम का मश्ग आया है, वो वापस आ गयी है तो मिलने को बुला रही है.

जूही : ो हो, तो इस लिए जनाब का चेहरा खिल उठा है. (वो जिस तरह से बोली थी में झेप गया)

शिव : तुम जैसे बोल रही हो वैसा कुछ नहीं है, वो तो...

जूही : चल चल रहने दे, मुझे घुमा मत, में सब समझती हु, में बोलती हु तो जनाब बहाने बनाते है, और वह दौड़े दौड़े जायेंगे.

शिव : मिलने बुलाया है, और तुम जानती हो, अभी माहौल कैसा है, अनाथालय की वजह से वैसे भी टेंशन है, में बस मिलने जा रहा हु.

जूही : वह कक्तव नहीं लगा जो में देख सकती हु, मुझे क्या? जो करना है वो करो.

शिव : अगर इतनी hi तकलीफ हो रही है तो तुम भी साथ चलो.

जूही : न बाबा, मुझे नहीं बन न, कबाब में हड्डी. तुम hi जाओ.

शिव : मुझे उस और छोड़ देना.

जूही : (स्कूटर पर बेथ गयी, में पीछे बेथ गया, वो ऐसे बोली जैसे खुद से बड़बड़ा रही ho)Kaisi किस्मत है अपनी, जिसके साथ खुद रहना है उसको दूसरी के पास छोड़ने जाना पद रहा है. (उसने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, वैसे भी स्टेडियम सहर से बहार था तो रास्ता थोड़ा सुंसम था, तो मेने उसकी कमर के इर्द गिर्द हाथ लपेट ते हुए उसके गाल पर किश कर diya)Jyada मक्खन मात लगाओ (कहते हुए उसने अपना गाल पोछ दिया, तो मेने फिर से किश कर diya)Shiiiiiiiiv (जूते गुस्से के साथ वो बोली, फिर muskurayi)Waise तुम्हारे मज़े है, एक नाराज़ भी हो जाये तो तुम्हे क्या फर्क पड़नेवाला है, दूसरी इंतजार में बैठी hi है.

शिव : (मेने फिर गाल पर किश kia)Jalan हो रही है?

जूही : वो तो होगी hi, में यहाँ मिन्नतें कर रही हु और तुम हो की किसी और से मिलने जा रहे हो और किस्मत देखो की में hi तुम्हे उसको मिलने के लिए छोड़ने जा रही हु. (उसकी बात सुन कर मेरी हसी छूट gayi)Ha है हसो तुम, पर याद रखना, गईं गईं कर बदले लुंगी, बता दे रही हु.

शिव : तुम्हे जो करना है करना, में कुछ नहीं बोलूंगा, बस.

जूही : (Muskurayi)Karne कहा देते हो कुछ. हमारे किस्से में तो लगता है, में लड़का हु और तुम लड़की हो, (अज्जेब आवाज me)Jab भी पास जाओ तो “ प्लीज मुझे छोड़ दो, मेरे साथ ऐसा मात करो में बर्बाद हो जाउंगी, प्लीज मुझे भगवन के लिए चूड दो” (वो जिस तरह से बोल रही थी, मेरी हसी hi नहीं रुक रही थी, वो भी हसने लगी, हम दोनों मैडम के घर के नजदीक पहुंच गए थे, उसने स्कूटर रोक दिया)

शिव : यहाँ क्यों रोक दिया, चलो तुम भी (मेने नौटंकी करते हुए कहा था)

जूही : है है चलो तुम भी (उसने मेरी नक़ल उतारते हुए kaha)Muje नहीं आना, मैडम कहेगी, क्या बेवकूफ लड़का है, कबाब खाने को बुलाया और साथ में हड्डी ले आया, तुम hi जाओ और कबाब खाओ. (में मुस्कुराते हुए निचे उतर गया, उसने मेरी और प्यार से देखा और puchha)lene औ क्या?

शिव : (उसके गाल पर हाथ रखते hue)Me चला जाऊंगा.

जूही : (स्कूटर मोड़ते हुए boli)Ok bye, एन्जॉय. (मुस्कुराते हुए वो निकल गयी, में वही मुस्कुराते हुए उसे जाता देख रहा था, फिर में मैडम के घर की और चला गया, बेल्ल बजायी तो उन्होंने दरवाजा खोला, वो सामने hi कड़ी थी, साड़ी पहनी थी, माथे पर सिंदूर भी लगा था, और सजी हुई भी लग रही थी, में उन्हें देखने लगा, मुझे ऐसे देखते हुए देख वो शर्मायी)

बिना : यही खड़े रहने का िर्रादा है क्या? (में मुस्कुराया, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खिंच लिया और दरवाजा बंद कर दिया, फिर थोड़े नखरे se)Aise बहार खड़े खड़े कोई घूरता है क्या, कोई देखेगा तो क्या कहेगा. (में मुस्कुराया, अब हम दोनों इतना खुल चुके थे, और हमारा सम्बन्ध बहोत आगे बढ़ चूका था तो झिझक नहीं थी, वैसे भी इतने दिनों बाद मिले थे तो में नजदीक गया और झुक कर उन्हें किश करने लगा, उन्होंने भी अपनी बहो में भर लिया और मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए, और एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे)

शिव : कब आयी आप?

बिना : दो पहर को?

शिव : तो फिर मश्ग इतना लेट क्यों किआ, दो पहर को hi बोल देती.

बिना : कैसे कहती, मेरे सास ससुर भी आये थे (में अस्स पास देखते हुए उनसे अलग होने लगा, तो उन्होंने मुझे पकड़ liya)Wo चले गए है.

शिव : ओह!

बिना : तो में क्या पागल हु जो उनके रहते ऐसा कुछ करुँगी.

शिव : (उनको छेड़ते hue)Aur अगर कभी पता चल गया तो?

बिना : (बेफिकरी se)Tab की तब सोचेंगे, कैसे हो तुम?

शिव : में अच्छा हु.

बिना : मुझे याद किआ?

शिव : (उनकी बात सुन कर में muskuraya)Ha.

बिना : चल जूठा, तेरी सकल hi बता रही है.

शिव : आपको भूल थोड़ी गया था जो याद करूँगा. (मुझे खिंच कर सोफे पर बिठाया और वो भी साइड में बेथ गयी)

बिना : ऐसे फ़िल्मी डायलॉग मात मारो, अगर याद आती तो फ़ोन करते मुझे.

शिव : कैसे करता, में जनता था की आप अपने ससुराल गयी है, आपके पति भी साथ हो सकते है.

बिना : बहाना अच्छा है, अगर फ़ोन करते तो उन्हें थोड़ी न पता है की तुम असल में कोण हो मेरे, में कोई बहाना बना देती.

शिव : (मुस्कुराते hue)fir भी में थोड़ी न चाहूंगा की आप कोई मुसीबत में पदों, याद तो करता था, पर यहाँ और भी बहोत कुछ हो रहा था तो उसमे समय नहीं मिला.

बिना : ऐसा क्या हो गया?

शिव : अनाथालय पर नोटिस आया है (फिर मेने उन्हें सब बताया, वो भी गंभीर हो गयी)

बिना : ओह गॉड! इतना कुछ हो गया, अब क्या होगा?

शिव : देखते है, क्या होता है?

बिना : (उसके पहलु में घुसते hue)Tum टेंशन मात लेना, में हु तुम्हारे साथ, कुछ नहीं होगा.

शिव : (मेने भी उन्हें अपनी आगोस में ले liya)Me जनता हु, मुझे मेरी फ़िक्र नहीं है, दूसरे लोगो की है.

बिना : उसका भी कोई न कोई हल निकल जायेगा.

शिव : देखते है, वैसे आपके saas-sasur क्यों आये थे?

बिना : (वो सीधी बेथ गयी और मुझे ऐसे देखा जैसे कोई रहस्यमयी बात बताने, जा रही ho)Tumhe यकीं नहीं होगा शिव, यहाँ इस सहर में मेरी नानन्द रहती है, चाचा ससुर की लड़की है, पर नानन्द तो हुई न, और तुम यकीं नहीं कर पाओगे की वो कोण है.

शिव : अच्छा! ऐसा कोण है?

बिना : वैस्वी की भाभीईई. (ये सुन कर में चौंक गया)

शिव : स्वर्ण जी.

बिना : (मुझे गौर से देखते hue)Tum जानते हो उन्हें?

शिव : (नार्मल होने का प्रयास करते hue)Ha... जनता हु, वैस्वी के पापा और पवन सर साथ में काम करते है, तो गया हु वह.

बिना : (मुझे ध्यान से देखते hue)Bas, वैसे hi जानते हो?

शिव : (उनका टोन अलग tha)Ha, बस वैसे hi.

बिना : अब मुझसे भी बाते छुपाओगे?

शिव : कहना क्या चाहती है आप?

बिना : मुझसे बेहतर तुम जानते हो की में कहना क्या चाहती हु.

शिव : (शांत होते hue)Agar कोई मुझे, आपके बारे में पूछे तो मुझे क्या बताना चाहिए? (में उनको उल्जना चाहता था)

बिना : मतलब जैसे मेरे बारे में छुपाने को है वैसे hi उनके बारे में छुपाने को है, है न?

शिव : (ये औरते कितनी शातिर होती है, मुझे पूरी तरह फसा लिया था, मेने फिर भी बचाव किआ) मेने आपसे कुछ पूछा, क्या मुझे आपके बारे में किसी को बताना चाहिए, की हम दोनों के बिछ क्या सम्बन्ध है?

बिना : (गंभीरता se)Ye तुम पर निर्भर करता है, और सामनेवाले पर भी, मुझे इतना तो यकीं है की अगर बात मेरी इज्जत पर आएगी तो तुम ऐसा कुछ भी नहीं बताओगे, इतना तो विस्वास है मुझे (उन्होंने फिर मेरे शाइन पर अपना शिर रख दिया.

शिव : आपको दार नहीं लगता, की में किसी को बता न दू.

बिना : (अपनी आंखे बंद करते hue)Nahi शिव, मुझे तुम पर पूरा विस्वास है, अगर तुमने किसी को बताया तो भी वो ऐसा व्यक्ति होगा जिस पर तुम्हे पूरा भरोसा होगा, वर्ण तुम ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बताओगे.

शिव : (उनका प्यार में महसूस कर प् रहा था, उन्हें मुझपर कितना यकीं tha)Kya जान न है आपको?

बिना : (बहोत शांत स्वर se)Tumhare और स्वर्ण के बिच सम्बन्ध है?

शिव : (मेने उन्हें अपने शाइन से उठाया, और उनकी आँखों में dekha)Ek बात पुछु, आपने ऐसा अचानक क्यों पूछा, और आपको ऐसा क्यों लगा की मेरे और स्वर्णजी के बिछ सम्बन्ध हो सकता है?

बिना : ये एक बातो लम्बी बात है, कुछ बाटे मेरी समाज में आ रही है, कुछ नहीं, ये जो स्वर्ण है, वो मेरे बड़े चाचा ससुर की लड़की है, उन्होंने लव मैरिज की थी, मेरे ससुर ने उनसे नाता तोड़ दिया था, में तो उनसे कभी मिली भी नहीं थी, मेने एक बात तुम्हे बताया था, अगर तुम्हे याद हो, की हमारे वह किसी को संतान नहीं हो रही है.

शिव : (समझने का प्रयास करते hue)Ha याद है मुझे, पर मेने ये भी कहा था की ये सब अंधविस्वास है, और देखिये, मेने जो कहा वो सही भी साबित हुआ, आप प्रेग्नेंट हो. (मेने मुस्कुरा कर कहा, जैसे अपनी बात साबित होने पर अक्सर अपने आप पर फक्र होता है)

बिना : बात इतनी भी सरल नहीं है. तुम ममतादिदी को जानते हो?

शिव : (ममता भाभी का नाम सुन कर में फिर चौका, मेने अनजान बन ने की कोशिस ki)Kon ममतादिदी?

बिना : (मुस्कुराते हुए हल्केसे अपने दोनों हाथो से मेरे बल पकड़े और खिंच कर मेरा शिर हिलने लगी)

शिव : क्या कर रही हो आप?

बिना : (उन्होंने मेरे बाल छोड़े, और फिर से उसे अपनी उंगलिओ से सही करते hue)Ab ज्यादा भोले मात बनो, कितना भोला समझती थी तुम्हे, पता नहीं कैसे तुम्हारे चक्कर में फंस गयी (मुस्कुराते हुए वो मेरे बाल ठीक कर रही thi)Ek नंबर के लुच्चे हो तुम. (में समाज गया था की उन्हें ममता भाभी के बारे में पता है, कैसे वो मुझे नहीं पता था, पर इतना तो यकीं हो गया था की वो सबकुछ जानती है, में उन्हें देख कर समझने की कोशिस कर रहा था, मेरी सकल देख कर वो फिर muskurayi)Aisi भोली सकल से अब तुम मुझे नहीं बेहला शक्ति समजे, सब जानती हु में, वो भी मेरी नानन्द है, सगी नानन्द. (ये एक और बम था जो मुज पर फूटा था)

बिना : (वो मुस्कुरा रही thi)Pata नहीं कहा कैसे पहुंच जाते हो, किसी को तो छोड़ देते.

शिव : (झेपते hue)Muje थोड़ी न पता था की वो सब आपके रिस्तेदार hai.(Mene फिर भोला चेहरा बनाते हुए कहा)

बिना : (वो जूते गुस्से से फिर उठी और मेरी गॉड में बेथ गयी, पेअर फैलने से उनकी साड़ी घुटनो तक चढ़ गयी thi)Kha जाउंगी तुम्हे जो ऐसी भोली सूरत बनायीं तो, में समझती थी की कितना अच्छा लड़का है, कितना भोला है, भोले पैन से मोहित हो कर फिसल गयी, पर जनाब तो कितने गुल खिला रहे है, जहा देखो वह हर जगह बाप बन रहे है. (में शर्मा gaya)Marungi में तुम्हे जो फिर भोले बन ने का नाटक किआ तो. (जूते गुस्से से कहा उन्होंने)

शिव : जितना मरना है मार लेना. पर पहले वो बात समझाइये, क्यों की अभी भी मेरी समाजमे कुछ नहीं आ रहा.

बिना : (हलकी सी किश मेरे होठ पर देते hue)Ha, तो में ससुराल गयी थी तो मुझे ममतादिदी के बारेमे पता चला, डिटेल में सब बाद में बताउंगी, पहले मैं मुद्दा सुनो, वो भी प्रेग्नेंट थी, बातो बातो में तुम्हारे बारे में पता चला, क्यों की एक बाबा hai,jinhone हम दोनों को बताया की हम दोनों प्रेग्नेंट है और दोनों बच्चो का पिता एक hi है, हलाकि न मेने या ममतादिदी ने किसी को नहीं बताया था की वो प्रेग्नेंट है, पर उन बाबा को पता था. कैसे वो तो मेरी भी समाज में नहीं आ रहा, पर जब उन्होंने कहा की हमारे बचो का बाप एक hi है तो हम दोनों को बात करनी hi पड़ी, और तुम्हारा नाम सामने आया. फिर यहाँ आये, स्वर्ण से मिले, वह भी पता चला की वो प्रेग्नेंट है, आज तक कोई प्रेग्नेंट नहीं हुई और अचानक सब प्रेग्नेंट हो रही थी, मेरे मान में सनका जगी तो मेने स्वर्णादिदी को भी पूछ hi लिया की क्या वो तुम्हे जानती है, तुम्हारा नाम सुन कर उन्होंने कहा तो कुछ नहीं पर उनका चेहरा देख कर में सब समाज गयी थी. और तुमने कन्फर्म कर दिया.

शिव : मेने कहा कन्फर्म किआ, में तो बस पूछ रहा था.

बिना : अच्छा, बहोत भोले बनते हो न (कह कर मुझे किश करने लगी, में थोड़ी देर ऐसे hi बैठा रहा, पर उनके ऐसे किश करने से में उत्तेजित होने लगा, और में उनके कूल्हे मसलने लगा, तो उन्होंने किश तोड़ी और मेरे हाथ को झटक दिया (मुझे जूते गुस्से से घूरते hue)Khabar दर जो मुझे हाथ लगाया तो, पता नहीं कितनी भरी पड़ी है तुम्हारी जिंदगी में.

शिव : अगर इतना hi गुस्सा आ रहा है तो फिर किश क्यों कर रही हो?

बिना : मेरी मर्जी, मुझे जो करना है वो करुँगी, पर अगर तूने कुछ किआ न तो देखलेना.

शिव : में ऐसे कैसे बता देता, उनके साथ जो भी हुआ, वो सिचुएशन hi ऐसी थी, में क्या कर शक्ति था?

बिना : (मेरे गले में किश करते hue)Jyada भोले मात बनो, सबको प्रसाद बात रहे हो, शर्म नहीं आती तुम्हे (में फिर उत्तेजित होने लगा, तो मेने उनके स्तन को जोर से मसल diya)Ahhhhhh chhodo(Unhone फिर मेरा हाथ जातक diya)Kaat खाउंगी जो मुझे हाथ लगाया तो. में यहाँ आस लगा के बैठी थी की मेने इतना बड़ा कदम उठाया है, तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये है तो तू मेरे आगे पीछे घूमेगा, उस तरह से नहीं बोल रही हु, पर अगर किसी की जिंदगी में किसी को ऐसे किसी लड़की के साथ मौका मिलता है तो वो बार बार उसके पीछे जाता है, में सोच रही थी की कितना अच्छा लड़का है जो ऐसे मेरे पीछे पीछे नहीं आ रहा है, पर अब पता चल रहा है, क्यों तू मेरे पीछे नहीं आया. (वो अपनी कमर हिलाते हुए अपनी छूट वाला भाग रगड़ रही थी तो मेरा लुंड खड़ा हो गया tha)(Beena को वो खड़ा लुंड महसूस होने लगा, उसके अंदर भी गर्मी बढ़ती जा रही थी, एक बार के लिए तो वो पिघल गयी और उसके होठो को किश करने लगी, शिव के मजबूत हाथ उसके कूल्हों को मसलने लगे तो उसकी सिस्किअ भी निकलने लगी, पर अपने आपको सँभालते हुए, उसने फिर शिव का हाथ जातक diya)Waha मात छू, बोलना, आज कुछ नहीं मिलनेवाला तुजे, इतनी hi आग लगी थी तो आता मेरे पास, मेने मन किआ था.

शिव : (में समाज गया था की वो आज कुछ भी नहीं करने देगी, तो मेने अपना ध्यान हटाने के लिए टॉपिक चेंज kia)Thik है, जैसी आपकी इच्छा, पर एक बात समाजमे नहीं आयी, आपको कैसे यकीं था की स्वर्णजी और मेरे बिच hi कुछ हुआ होगा, वो अपने पति से भी प्रेग्नेंट हो सकती थी.

बिना : (वो भी थोड़ी शांत हुई) है, मुझे भी ये ख्याल आया था, पर जो में समाज प् रही थी ऐसा मुमकिन नहीं लग रहा था, और में यही जान न चाहती थी, इसीलिए मेने तुम्हे बुलाया था.

शिव : ओह! मुझे लगा था की आपको मुझसे मिलना था, पर आपने इस वजह से मुझे बुलाया था.

बिना : (मेरी आँखों में प्यार से देखते hue)Milna तो था hi, इतने दिन हो गए तुजे देखे तो मान तो करता hi है.

शिव : (शरारत se)To फिर अच्छे से मिल लो (मेने उन्हें अपनी और खिंचा, तो उन्होंने मेरे शाइन पर हाथ रख कर अपने आप को रोका).

बिना : इतना जल्दी नहीं, तू भी तड़प थोड़ा, मुझे इतना तड़पता है तो, तुजे भी पता चलना चाहिए, और है तुजे मेरी कसम है अगर तूने मुझे करने से पहले किसी और के साथ किआ तो.

शिव : ये क्या कह रही हो आप?

बिना : और नहीं तो क्या, मेने नहीं करने दिया तो साहब कही भी चले जायेंगे, लड़कीओ की कमी है क्या तुम्हे, माज़ा तो तब है जब सामने खाना होते हुए भी तुम खा न सको.

शिव : ठीक है, जैसा आपका हुकुम. अब अपनी बात पूरी कीजिये, आपको क्यों लगा की में hi होऊंगा?

बिना : इतने बरसो में कोई भी माँ नहीं बन प् रही थी, और अचानक तुम आते हो, तुमने मुझे प्रेग्नेंट बनाया, में ये समझने की कोशिस hi कर रही थी, और अपने आपको संजय था की घरवाले गलत दिशा में सोच रहे है, की पता चला की ममतादिदी भी प्रेग्नेंट है, और वजह तुम hi हो. मुझे ये भी पता चला था की मेरी जेठानी है, उन्होंने ऐसे hi किसी और के साथ सम्बन्ध बनाये थे, पर वो प्रेग्नेंट नहीं हुई. सबसे बड़ी बात की बाबाजी ने ये कहा, और अब स्वर्णादिदी. तो जाहिर सी बात है की शक तुम पर hi जाता, क्यों की तुम्हारी वजह से hi सब प्रेग्नेंट हो रही है.

शिव : चलो एक बार मान भी लेते है, पर में hi क्यों?

बिना : (गंभीर होते हुए) वो hi तो समाजमे नहीं आ रहा, (फिर चिंता se)Unhone ये भी कहा है की ये अनुष्ठान वो तुम्हारी सलामती के लिए कर रहे है, तुम्हे खतरा है, किसी चीज से. (उनके चेहरे पर मेरे लिए चिंता साफ़ छलक रही थी)

शिव : पर में hi क्यों, मेरा क्या लेना देना आपके परिवार से?

बिना : वो तो मेरी भी समाजमे नहीं आ रहा. पर अपने आपको संभालना, में नहीं चाहती की तुम पर कोई मुसीबत आये.

शिव : ऐसा जूठा प्यार न दिखाओ, अभी तो छूने से भी मन कर रही थी. (मेने जूथ मुठ hi कहा)

बिना : (बिलकुल रोनी सूरत हो gayi)Tumhe लगता है की मेरा पीरा जूठा है?

शिव : (मुझे समाज आया की में क्या बोल गया, वो हर्ट हो गयी thi)Are, में तो मजाक में बोल रहा था, में उनका चेहरा पकड़ने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने दोनों स्तन पर रख दिए.

बिना : लो, जो करना है करलो, में नहीं रोकूंगी. (वो अब रोने वाली hi थी, मेने उन्हें गले से लागलिया, और उनकी पीठ सहलाने लगा)

शिव : मज़ाक कर रहा था, इतना भी नहीं समझती आप.

बिना : पर में मज़ाक नहीं कर रही, में बस तुम्हे मेरी तड़प का एहसास करवाना चाहती थी, और कुछ नहीं, तुम्हे क्या पता मेरा कितना मान कर रहा है, इतने दिन बाद मिले हो, क्या मेरा मान नहीं कर रहा होगा तुमसे प्यार करने का. पर अब में नहीं रोकूंगी, कर लो जो करना है.

शिव : आप तो ऐसे कर रही हो जैसे मेरी बीवी ho(Mene फिर माहौल को हल्का करने के इरादे से कहा)

बिना : तो क्या बीवी से काम हु, अपना सब कुछ सूप चुकी हु, तुम्हारे अंश को अपने अंदर धारण किये हुए हु, क्या ये काम है?

शिव : फिर आप सीरियस हो रही हो, में माहौल को हल्का करने के लिए बोल रहा हु और आप हो की सीरियस होती जा रही हो.

बिना : एक लड़की या औरत ऐसे hi किसी के साथ नहीं सोती, हमारा तुम्हारे जैसा नहीं है, तुम देते हो, हम लेते है, वो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है, तो ऐसे hi हम किसी को हमारे साथ करने की इजाजत नहीं दे देते, समजे. में अपनी कसम वापस लेती हु, तुम्हारी जो मर्जी है वो करो.

शिव : अच्छा, जो मर्जी हो?

बिना : है. (में फिर से उनके कूल्हे मसलने लगा, उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, वो बस मेरे ऊपर लेती रही, मेने उनकी साडी में हाथ डाला और पंतय में कैद कूल्हों को पकड़ा, उनके गरम कूल्हों का एहसास होते hi मेरा लुंड खड़ा होने लगा, वो ऐसे hi लेती थी, मेने अपना हाथ पंतय के ऊपरी भाग से अंदर दाल दिया, और उनके नंगे कूल्हों को मसलने लगा, और साथ में गरम गरम दरार पर हाथ रगड़ने लगा, (उनकी सांसे तेज होने लगी थी, में ऐसे hi सहलाता रहा तो वो मुझसे और चिपकने लगी, उनकी सांसो से पता चल रहा था की वो गरम हो रही है, मेने अपना हाथ और नीचे किआ तो वो उनकी छूट तक पहुंच गया, मेने ऊँगली अंदर डाली तो वो गीली हो चुकी thi)(apani छूट में ऊँगली को महसूस करते hi)Shhhhhhhhh. (उनकी सिसकी सुन कर मेने एक दो बार ऊँगली अंदर बहार की, और फिर अपना हाथ बहार निकल लिया, और बिना लुछ किये बेथ gaya.)(Beena को समाज नहीं आया की वो क्यों रुक गया, उसने कुछ पल इंतजार किआ, पर वो ऐसे hi बैठा था, उसने धीमी आवाज में kaha)Kya हुआ, रुक क्यों गए? (उनकी आवाज में निमंत्रण था)

शिव : आपने कहा न की आज नहीं.

बिना : मेने अपनी कसम वापस ले ली न.

शिव : आपने कसम दे दी तो दे दी, न में आपके साथ आज करूँगा, न किसी और के साथ.

बिना : (मेरी आँखों में देखते hue)Mene तो ये भी कहा था की मेरे साथ किये बगैर किसी और के साथ नहीं कर शक्ति.

शिव : है याद है.

बिना : अब छोडो भी, मेने ऐसे hi कहा था.

शिव : पर में दिखाना चाहता हु की आप मेरे लिए कोई खिलौना नहीं हो, और में सिर्फ वो सब करने के लिए आपके पास नहीं आता हु.

बिना : मुझे दिखने की जरुरत नहीं है, में जानती हु शिव, में पागल नहीं हु जो ऐसे hi तुम्हारे साथ रिस्ता बनाया है. (वो मेरे गले को किश करने लगी, उनकी गर्म सांसे मुझे बहका रही thi)Sab भूल जाओ, और मुझे प्यार करो शीइइइइइइइव.

शिव : आज तो नहीं.

बिना : बड़े जिद्दी हो, (मुझे हलके गुस्से से देखा, में मुस्कुराया) ठीक है, कल में इंतजार करुँगी, रात का खाना साथ में खाएंगे.

शिव : ठीक है (फिर में वह आधा घंटा और रुका, हमारे बिछ और भी बात चित हुई, पर न वो समाज पायी न में समाज पाया की आखिर मेरा क्या लेना देना है इस बात से, में वह से घर चला गया)

रात को में पढ़ रहा था तो लतादिदी आयी, आज वो मेरे साथ सोनेवाली थी. मेने किताब बंद की और उनके साथ लेट गया. में खामोस था तो वो बोली

लतादिदी : क्या हुआ, क्या सोच रहा है?

शिव : वो कागजात नहीं मिले है दीदी.

लतादिदी : तू क्यों टेंशन ले रहा है, जो होगा वो देखलेंगे.

शिव : पर दीदी, अगर ये घर चला गया तो?

लतादिदी : तो क्या हुआ, और कोई रास्ता निकल आएगा, (वैसे तो लता भी चिंतित थी पर वो शिव को कमजोर नहीं करना चाहती थी, वो उसके हाथ पर शिर रख कर उसके पास खिसक गयी और उसके शाइन पर अपना कोमल हाथ घूमने लगी) अब न में कमजोर हु न तू, हम ऐसी सिचुएशन का पहले भी सामना कर चुके है, हो जायेगा सब.

शिव : पर कैसे दीदी?

लतादिदी : हो जायेगा, उपरवाले पर भरोसा रख, (उन्होंने मेरे गाल पर किश किआ, वो कुछ पल रुकी और वो मेरे होठो की और बढ़ने लगी, में उनकी भावनाये समाज रहा था, उनको भी जौरात थी शायद, पर मुझे बिना मैडम याद आ रही थी, उनकी कसम याद आ रही थी, में दीदी को रोकना चाहता था पर कैसे रोक शक्ति था, वो मेरे ऊपर चढ़ने लगी, मेरे ऊपर आकर मेरे होठो को चूमने लगी, उनकी तड़प मुझे दिख रही थी, वो मुझे किश करने लगी. में बिना कुछ कुए लेता रहा, वो अपनी कमर हिला कर अपनी छुटवाले भाग को मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, में काफी चिंतित था तो मेरा लुंड भी खड़ा नहीं हो रहा था, मुझे पशीने छूटने लगे, थोड़ी देर वो अपनी छूट रगड़ते हुए मुझे किश कर रही थी, मेरा मान कर रहा था की में उन्हें दे दू जो उन्हें चाहिए था, पर बार बार मेरे सामने बिना मैडम का चेहरा आ रहा था, जब दीदी को एहसास हुआ की मेरा लुंड अभी भी खड़ा नहीं हुआ है तो वो शांत हो गयी, अपना शिर मेरे शाइन पर रख कर वो boli)Kya हुआ शिव?

शिव : कुछ नहीं दीदी.

लतादिदी : कुछ तो हुआ है, मेरे ऐसे छूने पर भी तू शांत है (वो सीधे सब्दो में तो नहीं बोल रही थी, पर में उनकी बात समाज रहा था) (लता ने सोचा शायद अनाथालय के टेंशन की वजह से शिव चिंतित hai)Mene कहा न, सब ठीक हो जायेगा, तेरे टेंशन लेने से क्या हो जायेगा? (हम दोनों बहोत धीमी आवाज में बात कर रहे थे)

शिव : सॉरी दीदी, कल में जरूर आपको वो दूंगा जो आपको चाहिए.

लतादिदी : मुझे तेरा प्यार चाहिए, और कुछ नहीं, मेरे सोचा तू थोड़ा टेंशन फ्री हो जायेगा, यही सोच कर में ये सब कर रही थी.

शिव : (कुछ सोचते hue)Didi, एक बात कहु?

लतादिदी : बोल न. (बड़े प्यार से उन्होंने कहा)

शिव :एक बात है जो में आपको बताना चाहता हु, पर दर लग रहा है, कही आप बुरा न मान जाओ.

लतादिदी : (थोड़ी ऊपर हुई और मेरी आँखों में देखने lagi)Itna क्या सोच रहा है, तू जनता है, में कभी नाराज़ नहीं हो सकती, तुजे जो कहना है कह सकता है.

शिव : Didi....(Kuchh पल में रुका, मेरी आंखे झुक गयी thi)Apko में बताना चाहता हु की ....(में फिर रुक गया) की... मेरे सम्बन्ध.... और लोगो के साथ भी है.

लतादिदी : (वो muskurayi)Muje पता है.

शिव : आपको बुरा नहीं लग रहा?

लतादिदी : लगता है शिव, पता नहीं क्यों, पर में ऐसा hi चाहती हु की तू सिर्फ और सिर्फ मेरे हो के रहे, पर शायद ये मुमकिन नहीं, और वैसे भी तू मुझे दीदी बुलाता है, सब जानते है की में तेरी दीदी हु, तो में तुम्हे छह कर भी अपना नहीं बोल शक्ति.

शिव : पर आप जानती है की हमारा सम्बन्ध कही आगे बढ़ चूका है.

लतादिदी : है, पर जो रिस्ता बचपन से बन चूका है वो भी तो नहीं जुटला शक्ति.

शिव : (कुछ सोच kar)Me आज से आपको दीदी नहीं बुलाऊंगा.

लतादिदी : (मुस्कुराने lagi)Achchha, तो क्या कह कर बुलाएगा?

शिव : में आपको नाम से hi बुलाऊंगा.

लतादिदी : (वो और ज्यादा मुस्कुराने lagi)Achchha, में भी तो सुनु, तू कैसे बुलाएगा मुझे.

शिव : में आपको लता कह कर hi बुलाऊंगा.

लता : (उसे बहोत अच्छा लग रहा था, उसके चेहरे पर मुस्कराहट थम hi नहीं रही thi)Jara बोल कर तो बता.

शिव : (अचानक से दीदी को उनके नाम से बुलाना मुझे भी थोड़ा ावक्वार्ड लग रहा था, पर मेने हिम्मत इकठ्ठा की और bola)Lata, आप मुझे बहोत अच्छी लगती हो, में चाहता हु की में हमेशा आपके साथ राहु, और आपको ऐसे hi प्यार करू.

लता : (उसके चेहरे की मुस्कराहट तो जैसे बढ़ती hi जा रही थी, आज पहली बार वो उसके नाम से बात कर रहा था, उसने शिव को chheda)Par ये आप तो हैट नहीं रहा है.

शिव : क्यों में आपको आप तो कह hi शक्ति हु, भले hi में आपको नाम से बुलाऊ, पर आप तो कहूंगा hi.

लता : पर ये ‘आप’ मुझे याद दिलाता है की में तुमसे बड़ी हु, जिस रिश्ते की तू बात कर रहा है, उसमे मर्द hi हमेशा बड़ा मन जाता है.

शिव : मन जाता होगा, में अलग इतिहास बनाऊंगा.

लता : पर मुझे तू, ‘तू’ कह कर बुलाएगा तो मुझे अच्छा लगेगा.

शिव : वो भी सिख लूंगा.

लता : ठीक है (ये कह कर वो फिर से उसको किश करने लगी, इस बार शिव भी किश कर रहा था, पर थोड़ी देर बाद उसने रोक दिया, वो फिर उसे देखने lagi)Ab क्या प्रॉब्लम है? (उसने सवालिया नजरो से देखा)

शिव : किसी ने मुझे कसम दी है, बस आज की रात रुक जाओ.

लता : कसम? किसने दी?

शिव : (में कुछ पल उनकी आँखों में देख रहा था, बताऊ या न बताऊ वो सोच रहा था, पर फिर सोचा की बता hi देता hu)Beena मैडम ने.

लता : वो तेरी टीचर? (मेने है में इस्सर kia)Unhone किस बात की कसम दी है?

शिव : Di...(Adat के मुताबित दीदी निकलने वाला tha)Lata, वो सिर्फ मेरी टीचर नहीं है.... वो मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली है. (दीदी के चेहरे पर अचानक से आश्चर्य उभर आया) मेने कहा न की मेरे और के साथ भी सम्बन्ध है.

लता : है, पर मेने सोचा की तुम सरिता की बात कर रहे हो.

शिव : उनके अलावा भी बहोत लोग है. (दीदी के चेहरे पर आश्चर्य बढ़ता hi जा रहा था)

लता : और कोण कोण है? (मेने बरी बरी सबके नाम बता दिए, जैसे जैसे वो नाम सुन रही थी उनके चेहरे पर भाव बदल रहे थे, में सब नाम बता कर चुप हो gaya)Muje यकीं नहीं हो रहा शिव, ये सब तो कितने बड़े बड़े लोग है, सरिता हमेशा मुझे कहती थी, पर मुझे यकीं नहीं आया था.

शिव : सॉरी डी... लता.

लता : तेरे लिए जितना आश्चर्य हो रहा है उस से कही ज्यादा मुझे आश्चर्य हो रहा है की वो सब ऐसा कर शक्ति है.

शिव : में आपको बताना चाहता था, मेरी भी समाज में नहीं आ रहा पर पता नहीं सब होता चला गया. (लतादिदी कुछ सोच रही थी, जैसे यकीं करना चाहती ho)Muje माफ़ कार्डो.

लता : (मेरी छाती पर फिर से शिर रख diya)ab में क्या कहु शिव, पर में देख शक्ति हु की तू अपनी जिंदगी में कितना आगे बढ़ चूका है, में अपने पल्लू से बांध कर रक्खूंगी तो ये सब मुमकिन नहीं है, सहके सहारे से hi तू इतना ऊपर उठ पाया है. और मेने सबका व्यव्हार भी देखा है, सब की सब अच्छी है, खूबसूरत है, मेरी तो कपरिसों hi नहीं है उन सब के सामने.

शिव : आप सबसे खास हो, अगर आप कहोगी तो में सब से... (गले तक तो आ गया था की कह दू की रिस्ता तोड़ दूंगा, पर कही न कही में जनता था की ये मुमकिन नहीं hai)(Lata उसकी चुप्पी को भली भाटी समाज रही थी)

लता : नहीं शिव, में ऐसा कुछ भी नहीं कहूँगी, मुझे पता है तू समझदार है, कई बात नहीं, जो होता है अच्छे के लिए होता है, बस एक बात कहूँगी, किसी को भी अँधेरे में मान रखना.

शिव : एक बात कहु लता, (Hmmmm)jaise मेने सबके बारेमे आपको बताया, वैसे hi में आपके बारेमे सबको बताना चाहता हु, पर उसके लिए आपको पूछना जरुरी है.

लता : पर वो सब मेरे बारे में क्या सोचेगी? तू मुझे दीदी बोलता है.

शिव : उसकी चिंता आप मात करो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, आपका स्थान मेरे दिल में जो है वो है, पर मेरे लिए ये मायने रखता है की क्या आप चाहती हो की में आपके बारे में बताऊ?

लता : ठीक है, जैसे तुम्हे सही लगे (मेने उनका चेहरा उठा कर देखा तो उनके चेहरे पर दर साफ़ दिख रहा था)

शिव : में हु न, आप क्यों इतनी फ़िक्र कर रही हो, अब मुस्कुराइए और सो जाइये.

लता : (फिर से मेरे शाइन पर अपना शिर रख diya)Par तूने बताया नहीं की उन्होंने ये कसम तुजे क्यों दी है? (फिर मेने उन्हें सब बताया, थोड़ी देर वो मुझे सवाल करती रही और में उन्हें बताता रहा, थोड़ी देर बाद वो मेरी बहो में hi सो गयी)

सुबह उठ कर में तैयार हुआ, स्कूल जाना था, में नास्ते का वेट कर रहा था, लतादिदी, सरितादिदी, रंजन, विणा सब किसी न किसी काम में लगे हुए थे, लता एक थाली ले कर नास्ता नास्ता निकलने जा रही थी. मेने सबको सुनाने के लिए hi बोलै.

शिव : (जोर से) लाताआए, कितनी देर है, स्कूल के लिए लेट हो रहा है. (सबके सामने शिव को नाम से बुलाते देख उसके हाथ से थाली छूट गयी, सब एक दूसरे का मुँह देख रहे थे, लता ने घबराते हुए सबको देखा, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, उसने नज़ारे झुकाये थाली उठायी और बोली)

लता : (जोर se)Ji आईईईई. (सब आश्चर्य से अपना अपना मुँह तक रहे थे, लता इतना शर्मा रही थी की किसी से नज़ारे hi नहीं मिला रही थी, उसने फटा फैट नास्ता निकला, वो कैंप रही थी, उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी, उसने नास्ता निकला और शिव की और बढ़ गयी, सब एक दूसरे का मुँह तक रहे थे, जब थाली दे कर लता किचन में वापिस आयी तो वो किसी से नज़ारे नहीं मिला रही थी, सरिता ने उसे छेड़ा)

सरिता : लाताआ. (उसने जिस लहजे में बोलै था, लता शर्म से पानी पानी हो रही थी, उसकी हालत पर उसे तरस आया, और मुस्कुरा कर कहा) लता जी, काम पर ध्यान दीजिये, दुसरो को भी स्कूल जाना है. (सबकी सब मुस्कुरा रही थी, वैसे तो सबको पता था, पर शिव ने आज सबके सामने जैसे उनका रिस्ता काबुल किआ था, सब खुस भी थी, किसी को कोई एतराज नहीं था, पर लता की हालत ख़राब थी, वो सेहमी सेहमी सब काम कर रही थी, थोड़ी देर बाद फिर आवाज आयी)

शिव : लाताआ, में स्कूल जा रहा हु, बहार तो आओ जरा. (लता मान में सोच रही थी, की ये लड़का आज उसकी जान ले कर रहे गए, पर उसका दिल बहोत खुस था)

लता : ईई (कहते हुए सहसे नज़ारे चुरा कर वो बहार भागी, सके ठहाके की आवाज उसके कानो में पड़ी, जब वो शिव के पास पहुंची तो वो भी मुस्कुरा रहा था, लता और शर्मा गयी, वो एक पल शिव को देखती फिर नज़ारे झुकाती, फिर देखती फिर झुकाती)

शिव : इतना खु घबरा रही है.

लता : कुछ नहीं, तुम जाओ, bye.

शिव : (मुस्कुराते hue)Bye, (जाते जाते गाल पर किश कर के निकल gaya)(Lata अपने गाल पर हाथ रख के घबरा गयी, उसने पीछे मुद कर देखा तो सब की सब अंदर से झक रही थी, लता पानी पानी हो गयी, और अपने कमरे की और भाग गयी)

में दौड़ते दौड़ते जा रहा था तो मुझे संयम, वैस्वी और नाज़िआदिदी कड़ी दिखाई दी, वो तीनो मुझे hi देख रही थी, में उनके पास रुका, वैस्वी और संयम की नज़ारे झुकी हुई थी, कोई कुछ बोल नहीं रहा था, मेने भी बात को ज्यादा खींचना ठीक नहीं समजा. में स्कूटर पर बेथ गया, और उन दोनों के बैठने का इंतजार करने लगा, दोनों एक दूसरे का मुँह देख रही थी, पर कोई बेथ नहीं रहा था.

शिव : चलो बैठो.

संयम : तुम बेथ jao(Vaiswi की और देख कर)

वैस्वी : नहीं तुम बेथ जाओ.

शिव : कल में बेठुंगी, में बेठुंगी कर के लाड रही थी, आज तुम बैठो तुम बैठो कर के फिर सुरु मत हो जाना.

नाज़िआदिदी : तुम बेथ जाओ वैस्वी, आते टाइम संयम बेथ जाएगी. (दोनों कुछ नहीं बोली, वैस्वी बेथ गयी, उसके पीछे संयम भी बेथ गयी, मेने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, जगह की वजह से वैस्वी मुझसे चिपक कर बैठी थी, पर उसने हाथ मेरी कमर पर नहीं रक्खा था, कोई कुछ बोल भी नहीं रहा था, हम सब स्कूल पहुंच गए, वह भी वो दोनों कुछ नहीं बोली, दोनों चुप चाप क्लास की और निकल गयी, में भी अपने दोस्तों के साथ क्लास में चला गया)
 
अपडेट 143

बिना मैडम क्लास में आ गयी, वैसे भी वो बूइटीफुल तो थी hi, पर आज वो हलकी पिंक लाल साड़ी में आयी हुई थी, उन्हें देख कर hi मेरा मान किआ की जा कर उन्हें किश कर दू, पर ये मुमकिन नहीं था, तो में उन्हें आंखे फाडे देख रहा था, उनकी भी नजर मुज पर गयी और हलकी सी स्माइल उनके चेहरे पर उभर आयी पर तुरंत उन्होंने अपने आपको संभल लिया, क्यों की क्लास के सरे लड़के उन्हें hi ताड रहे थे, और लड़कीअ जलन से देख रही थी. उन्होंने अपना काम सुरु कर दिया. रेसस्स में भी वैस्वी और संयम ज्यादा तर चुप hi रही. में ये तो नहीं चाहता था, पर क्या करू समस्या hi ऐसी थी. मेने उनसे बात की तो वो सिर्फ हु, है, में hi जवाब दे रही थी. खैर स्कूल के बाद मेने काव्यजि को फ़ोन किआ, तो उन्होंने बताया की अभी तक कागजात का कुछ नहीं हुआ है, मेरी फ़िक्र बढ़ती जा रही थी. मेने सोचा की एक बार काव्यजि से मिल कर इसका हल सोचता हु. पर अभी वो कोर्ट में होंगी. वैस्वी और संयम भी आ गयी, तभी बिना मैडम भी बहार निकली और वह आयी, क्यों की उनका स्कूटर भी पास में hi पार्क था. सब ने उन्हें hello कहा.

शिव : Hello मैडम. (उन्होंने सबको स्माइल दी, कुछ सोच कर) मैडम, (वो मेरी और देखने लगी, सब मेरी और hi देख रहे the)Madam, मुझे आपसे काम है, क्या में आपके साथ चल सकता हु?

बिना : (आश्चर्य से शिव को देखती है, सब मुझे देखते है, उन्होंने सब पर नज़र डाली फिर bola)Ha, क्यों नहीं.

शिव : थैंक यू मैडम. (संयम और वैस्वी थोड़ी अपसेट हो गयी, वही मेरे दोस्त आश्चर्य से भरे हुए थे, उनके लियेतो ये अजूबे से काम नहीं था की में मैडम से इतना घुला हुआ हु, उन्होंने मेरी और चाभी बधाई तो मेने स्कूटर बहार निकला, वो एक साइड पेअर कर के दुरी बना कर बेथ गयी, सब ko)Kal मिलते है (ये कह कर में वह से निकल गया)

वैस्वी : (उदास स्वर me)Chale? (संयम से)

संयम : (उदास स्वर me)Hmmm.

में और मैडम वह से निकल गए.

शिव : में घर पर बोल देता हु, आपको कोई दिक्कत तो नहीं?

बिना : नहीं, चलो. (हम अनाथालय पहुंच गए, हम दोनों अंदर दाखिल हुए, हमे देख कर लतादिदी आयी)

लता : अरे आप?

बिना : ये ले आया, कैसी हो तुम?

लता : (वो अब जानती थी, शिव और उनके sambandh)Me अच्छी हु, आइये न?

शिव : नहीं, में सिर्फ ये बताने आया था की मुझे कुछ काम है तो में अभी इनके घर जा रहा हु.

लता : है, पर khana?(Mene मैडम की और देखा)

बिना : घर जा कर बनाना पड़ेगा.

लता : तो यही खा लीजिये, फिर चले जाना, अगर आपको दिक्कत न हो तो.

बिना : मुझे क्यों दिक्कत होगी.

शिव : ठीक है, तो फिर खा कर hi चलते है, में कपडे चेंज कर लेता hu.(Me अपने कमरे में चला गया)

लता : आप बैठिये, में खाना लगाती हु.

बिना : चलो में तुम्हारी मदद करती हु.

लता : आप बैठिये, में कर लुंगी.

बिना : मुझे ऐसे hi खाना अच्छा नहीं लगेगा, प्लीज मुझे कुछ करने दो.

लता : (मुस्कुराते हुए) ठीक है, (वो किट्चेन में गए, सरिता और गायत्री रोटीआं बना रही thi)aap वो बिछोना और थाली रखिये, में खाना बहार ले आती हु. (वो दोनों आश्चर्य से देखने लगी, क्यों की वो जानती थी की ये शिव की टीचर है और लता उन्हें काम दिखा रही थी, पर वो कुछ नहीं बोली, बिना, बहार बिछोना बिछा रही थी की शिव आया)

शिव : अरे मैडम! आप ये क्या कर रही है, लाताआ. (लता बर्तन में सब्जी ले कर बहार aayi)ye मैडम क्यों काम कर रही है?

लता : मेने मन किआ, पर वो करना चाहती है तो में क्या करू.

शिव : पर आपको रोकना चाहिए था न.

लता : उनको लगता है की ये उनका घर है और उन्हें यहाँ काम करना चाहिए तो में क्या कह शक्ति हु.

बिना : वो ठीक कह रही है, मेने hi कहा था. क्यों तुम्हे कोई दिक्कत है? (अब में क्या कहता, उतने में रंजन और विणा भी आ गयी, वो भी मैडम को काम करते देख आश्चर्यचकित हुई)

लता : आ गयी तुम दोनों, जाओ फ्रेश हो जाओ, खाना लगाती हु. (वो दोनों अंदर चली गयी)

सब खाना खाने बेथ गए, शिव, लता को ये दो, वो दो, ये सब उसके नाम से hi कह रहा था, ये बात बिना को अजीब लगी, क्यों की वो जानती थी की ये शिव की दीदी है और शिव दीदी कह कर hi बुलाता था, पर आज वो उसको नाम से बुला रहा था, पर वो कुछ नहीं बोली. लता भी बिना के साथ बड़े प्यार से पेश आ रही थी, वो उसकी थाली में ध्यान रख रही थी, उसे आग्रह कर के खाना खिला रही थी, तो बिना को भी वो अच्छी लग रही थी, खाना खा कर वो दोनों बिना के घर की और निकल गए.

बिना बहोत खुस थी, जब से वो ससुराल से आयी थी तब से शिव से मिलना छह रही थी, कल जब शिव आया था तब भी वो बहोत ज्यादा उत्तेजित थी, पर अगर सिर्फ सेक्स का सम्बन्ध होता तो वो कल hi शिव के साथ सेक्स कर लेती, पर उसे शिव पर गुस्सा भी था, जब वो अपने ससुराल थी तब स्वाभाविक तौर पर उसके और उसे पति के बिच शारीरिक सम्बन्ध हुए थे, पर वो संतुस्ट न हो पायी थी, उसको वैसा मज़ा hi नहीं आया था जैसा उसे शिव के साथ आता था. जब उसका पति अपना लुंड उसकी योनि में दाल कर उसके साथ सम्भोग कर रहा था तब भी वो शिव को मिस कर रही थी, उसे अपने आप पर बहोत गुस्सा आ रहा था, उसे महसूस हो रहा था की वो किस कदर शिव से जुड़ चुकी है. उसने अपने पति का लुंड भी देखा तो वो उसकी तुलना शिव के लुंड के साथ कर रही थी, जब उसने अपने पति का लुंड चूसा तब भी वो अपने मुँह में शिव के लुंड को महसूस कर रही थी, अपने पति से hi जब वो संतुस्ट न हुई तो उसे शिव पर गुस्सा आया था, वो हर पल शिव के बारे में hi सोच रही थी, यहाँ तक की ममतादिदी की बातो में भी शिव hi था, तो आ कर अपना सहारा गुस्सा उसने शिव पर hi निकल दिया, भले hi उसकी कोई भी गलती नहीं थी. यहाँ तक की उसने अपनी तड़प दिखने के लिए उसे कसम तक दे दी, पर फिर उसे पछतावा भी हुआ था तो उसने कसम वापस भी ले ली, पर जब शिव ने फिर भी उसकी कसम न तोड़ने का वडा किआ तो वो अंदर से फूली नहीं समायी थी, शिव की ये छोटी सी बात भी उसके दिल को छू गयी थी, उसे महसूस हुआ था की वो भी शिव के लिए सिर्फ सम्भोग का साधन नहीं है, ये सब याद करते हुए वो शिव के पीछे बैठे बैठे मुस्कुरा रही थी, वो शिव की पीठ को देख कर hi खुस हो रही थी, अगर रस्ते पर न होती तो वो शिव से चिपक गयी होती.

दोनों घर पहुंच गए, दरवाजा खोल कर दोनों अंदर गए, हलाकि बिना की हालत ख़राब थी पर उसने अपने आप पर सयम रक्खा और अंदर गयी और उसके और शिव के लिए पानी ले आयी, वो जानती थी की आगे क्या होने वाला है तो वो शर्मा भी रही थी, शिव की आँखों में देखने से भी कटरा रही थी.

शिव : (उनकी हालत देख kar)Kya हुआ? (उसने गर्दन हिला कर कुछ नहीं का इस्सर किआ) इतना क्यों शर्मा रही हो आप?

बिना : (मुस्कुराते हुए नज़ारे jhukaye)Kuchh नहीं?

शिव : अब बता भी दो.

बिना : (उसे बात करने में शर्म आ रही थी तो उसने टॉपिक बदला) एक बात पुछु? (वो कुछ पल रुकी) मुझे याद है तब तक तुम लता को दीदी कह कर बुलाते थे, सही कह रही हु न में?

शिव : Ha(Shiv ने सपाट सा उत्तर दिया)

बिना : आज मेने देखा की तुम उसे नाम से बुला रहे थे, क्यों?

शिव : क्यों की अब हमारे बिच वो रिस्ता नहीं रहा.

बिना : (गौर से देखते hue)Me सामजी नहीं.

शिव : जैसे हमारे बिच teacher-student का रिस्ता नहीं रहा वैसे hi.

बिना : मतलब तुम और Lata...(Usne बात अधूरी छोड़ दी)

शिव : है, वो बचपन से hi मुझसे प्यार करती है, बड़े होने के बाद वो मेरे साथ उस तरह से रहना चाहती थी, तो मेने उन्हें अपना लिया. क्यों आप को बुरा लगा?

बिना : (वो हिचकिचा रही thi)Nahi वैसी बात नहीं है पर...

शिव : में नहीं समझता की उसमे कुछ गलत है, में उन्हें दीदी बुलाता था क्यों की उस वक़्त में छोटा था, बड़े होने के बाद हमारे रिश्ते बदल गए, तो मेने नए रिश्ते को अपनालिया. आपको बुरा लगा?

बिना : (वो ध्यान से सुन रही thi)Nahi ऐसा में नहीं कह रही हु, हमारे समाज में बहन भाई के बिच इस तरह का रिस्ता अवैध मन जाता है, तो अजीब लगा, पर अजीब तो हमारा रिस्ता भी है, में एक टीचर हो कर तुमसे ये रिस्ता नहीं बना सकती, पर अब हमारा रिस्ता बन गया है और वो बहोत आगे भी निकल गया है, में तो बस पूछ रही थी. वैसे भी में ये तो नहीं कह सकती की तुम सिर्फ मुझसे जुड़ कर hi रहो, क्यों की में खुद ऐसा नहीं कर सकती, पर में भी तो इंसान hi हु, और इंसान जैसा सेल्फ़िके प्राणी इस दुनिया में कोई नहीं होगा, सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो.

शिव : सॉरी अगर आपको बुरा लगा हो तो, पर यही एक चीज है जो में नहीं कर सकता, मुझे लता को भी आपके बारे में बारे में बताना पड़ा.

बिना : (आश्चर्य से उसे देखते hue)Tumne बताया? क्यों बताया? क्या कहा उसने? ओह! गॉड, वो क्या सोच रही होगी मेरे बारे में?

शिव : आपने hi तो कहा था की में बता सकता हु, और आपकी कसम के चलते भी मुझे बताना पड़ा, वो कल मेरे साथ सोने आयी थी, अगर में उनके साथ कुछ करता तो आपकी कसम टूट जाती, तो मुझे बताना पड़ा.

बिना : सॉरी यार, पर मेने अपनी कसम वापस भी ले ली थी, कर लेते.

शिव : आपको अच्छा नहीं लगा की मेने उन्हें आपके बारे में बताया.

बिना : ऐसी बात नहीं है शिव, पर अजीब लगता है, हम सब अच्छे बने रहना चाहते है, और हमारा रिस्ता दुसरो की नजर में गलत है तो मान में ऐसा ख्याल आता है की अब वो मेरे बारे में कैसा सोचेंगे, तुम किसी को भी बताओ, मुझे ऐतराज़ नहीं है, पर सबको बताने की जरुरत भी नहीं है, हमारा ये रिस्ता, तुम्हारी जिंदगी में कोई दिक्कत नहीं पैदा करेगा, क्यों की में उस तरह से तो तुम्हारी जिंदगी में आ नहीं सकती, उसे दिक्कत तब होगी जब में तुम्हारी जिंदगी में आ सकती हु, ममतादिदी और स्वर्णादिदी का भी ऐसा hi है, तो तुम न बताओ वही बेहतर रहेगा, है जूही के बारेमे जोर बता देना, क्यों की हो सकता है की कल को वो तुम्हारी जिंदगी में आ शक्ति है, तो ऐसी सिचुएशन में लता को दिक्कत हो सकती है. वैसे भी कोई लड़की ये कह कर तुमसे रिस्ता बनती है की उसको तुम्हारी जिंदगी में नहीं आना है, वो बस तुम्हारे साथ ांगत रिस्ता बनाना चाहती है तो उस से किसी को क्या नुकसान होगा, और ये बता कर तुम उसे दुखी hi करोगे, तो बेहतर है की तुम न बताओ. ये देखा नहीं होगा. तुम्हे क्या लगता है की हमारे रिश्ते के बारेमे मुझे अपने पति को बताना चाहिए? नहीं, हरगिज़ नहीं, उनके जीवन में इस बात से मुश्किल hi पैदा होगी, है वो बात अलग है की में उन्हें छोड़ कर तुम्हारे साथ रेहनेका सोचती हु तो उन्हें दिक्कत हो सकती है तो मुझे उन्हें बताना चाहिए, कुछ बाटे ऐसी होती है जो राज़ रहे उसमे hi सबकी भलाई होती है.

शिव : सच कह रही हो आप, में आगे से ख्याल रखूँगा. वैसे आप अपने घर गयी थी तो आपके पति को अपनी प्रेगनेंसी के बारे में नहीं बताया?

बिना : बताना चाहती थी, पर एक के बाद एक घटना होती गयी तो बता नहीं पायी, और जिस तरह की परिस्थितिया है, में थोड़ा संभल कर रहना चाहती हु.

शिव : उनके साथ सेक्स किआ?

बिना : (ऐसे सीधे सवाल से वो शर्मा gayi)Ye क्या सवाल है?

शिव : सीधा सा सवाल है, आपने कहा था की पहले सही से हो नहीं पाया था, तो अब सब ठीक से हुआ की नहीं?

बिना : (शिव की छाती पर अपना शिर रख kar)Kitna अजीब है न शिव, हम दोनों कितने करीब है न, हम कैसी बात कर शक्ति है, तुम मेरे पति के बारेमे पूछ रहे हो, में तुम्हे लता के बारेमे पूछ रही हु, इतना करीब तो में किसी के साथ नहीं रही.

शिव : (उनके बाल में हाथ घूमते hue)To बताओ, कैसा रहा?

बिना : ऐसा मात पूछो शिव, मुझे शर्म आती है, पर में उस वक़्त भी तुम्हे याद कर रही थी, मुझे कितना गिलटी फील हो रहा था पता है. अपने पति के साथ होते हुए भी में किसी और के बारेमे सोच रही थी, कितने ख़राब हो तुम, ऐसा मान कर रहा था की तुम्हे बहोत मरू, इतना मरू ki...ki...

शिव : की????

बिना : कुछ नहीं, में तुम्हे मार भी तो नहीं सकती, पर तुम बहोत गंदे हो, मुझे कैसा बना दिया तुमने, मुझे बिलकुल मज़ा नहीं आया वह, मुझे कितना ख़राब लग रहा था, इसीलिए मेने तुम्हे कसम दे दी, गुस्से में.

शिव : अच्छा तो आपको लग रहा है की आपने गलती की, है न?

बिना : हम्म्म्म.

शिव : तो फिर उसकी सजा भी मिलेगी.

बिना : (मुस्कुराते हुए, बच्चे की tarha)Kya सजा देना चाहते हो?

शिव : वो में बाद में बताता हु, पर पहले कसम को तो पूरी कर लू, वर्ण मुझे फिर से लता को मन करना पड़ेगा. (बिना शर्मा गयी, वो भी तो यही चाहती थी, शिव उसकी बाह को सहलाने लगा, वो सिकुड़ने लगी, शिव का हाथ थोड़ी देर में उसककी कमर को सहलाते हुए उसके कूल्हे तक चला गया, उसने अपनी आंखे बंद कर दी और शिव की छाती पर हाथ घूमने lagi,Shiv ने उसे पीछे किआ और उसका चेहरे शिव के सामने आ गया, वो आंखे बंद किये हुए hi थी, शिव के होठ उसके होठो को चूसने लगे तो उसकी सांसे चढ़ने लगी, शिव एक हाथ से उन्नत स्तन को ब्लॉउस के ऊपर से hi सहलाने और दबाने लगा, थोड़ी देर बाद वो उसे उठा कर अंदर कमरे में ले गया, ये सोच कर hi की शिव उसके साथ क्या करनेवाला है उसकी सांसे बेकाबू होने लगी, बेडूम में जा कर उसने उसे जमीं पर खड़ा किआ, और अपने कपडे निकलने लगा, वो नज़ारे झुकाये कड़ी थी, शिव पूरा नंगा हो गया, उसे बहोत शर्म आ रही थी पर चेहरे पर मुस्कान थी,





उसके बलिष्ठ शरीर को देख कर वो पानी पानी हो रही थी, वो ऐसा पुरुष था जिसकी चाहत हर स्त्री को होती है, और वो अभी उसके साथ था, उसका लुंड खड़ा था जिसे देख कर उसकी हालत ख़राब होने लगी, ये वही अंग था जिसे वो इतने दिन से मिस कर रही थी, वो एक नजर उस खड़े लुंड को देखने लगी, शिव उसके नजदीक आने लगा तो उसने उसके चेहरे पर देखा तो वो मुस्कुरा रहा था, वो शर्मा गयी, और नखरे से उसे ना का इस्सर करने लगी, हलाकि वो उसे रोकना बिलकुल नहीं चाहती थी, और उसे पता भी था की वो रुकेगा भी नहीं, वो उसके नजदीक आया और उसको कमर से पकड़ कर अपने नजदीक खिंचा और फिर से उसको किश किआ,





किश काने के बाद वो उसके स्तन सेहला कर दबाने लगा, उसकी छूट से पानी रिसने लगा, उसकी सांसे तेज होने लगी, वो शिव की छाती को सहलाने लगी, जैसे कह रही हो की में तुम्हारी hi हु, जो मर्जी चाहे करो, स्तन दबाने से उसकी सिस्किअ रूम में गूंज रही थी )

बिना : शहहहहह शिईयिव शहहहहह शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मैडम की आवाज में इतनी मादकता भरी हुई थी की मेरा लुंड लोहे जैसा कड़क हो गया था, मेने उनके हाथ को पकड़ कर लुंड थमा दिया, उन्होंने भी बिना झिझक उसे थम लिया)





शह्ह्ह्ह शिईयिव शहहहहह ये बहोत मस्त है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (अपने पति के लुंड से वो तुलना कर चुकी थी, वो इस अंग की खूबी जानती थी, वो जानती थी की ये उसके लिए कितना महत्वपूर्ण था, वो उसे एक स्त्री बनता था, वो उसे हिला रही थी, अपने नाजुक हाथ से सहलाने से वो और कठोर होता जा रहा था, शिव ने उसकी साड़ी निकल दी और वही फर्श पर फेंक दी, बिना को पलट कर उनके कूल्हों की दरार में अपना लुंड चुभोया)





शीइइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसकी चुभन से में पागल होने लगी, ये चुंबन कितनी प्यारी थी, में आंखे बंद किये सिसक रही थी और उस कड़क अंग पर अपने कूल्हे दबा रही थी, वो मेरी कमर पकड़ कर वह धक्के लगा रहा था, मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी, मान कर रहा था की अपना घाघरा उठा लू और पंतय उतर कर सिदा उकसा लुंड अपने अंदर समां लू, पर अभी इतनी भी बेशर्म नहीं हुई थी, वो मेरे गले में किश कर रहा था और साथ में अपने लुंड से मेरे कूल्हों की दरार में धक्के लगा रहा था, इतनी उत्तेजना से में कैंप रही थी. में चाहती थी की वो मुझे जल्द से जल्द नागि करे, वो मेरी छूट की और बढ़ा और अपने हाथ से उसे कपडे की ऊपर से hi मसलने लगा,





मेरी हालत बहोत ख़राब हो रही thi)Shhhhh शिईयिव शहहहहह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेरे मुँह से बस गरम गरम सिस्किअ और उसका नाम hi निकल रहा था, थोड़ी देर मेरी छूट से खेलने के बाद उसने मेरा ब्लाउज निकल दिया,

और घाघरा भी निकल दिया, में सिर्फ ब्रा और पंतय में थी, वो फिर से मेरे शरीर के साथ खेले लगा, एक और पड़ाव पर हो चूका था, अब उसके लुंड और मेरी छूट के बिच सिर्फ मेरी पंतय थी, वो मेरे हर अंग को चुम रहा था, उसका ऐसे मेरे शरीर से प्यार जाताना मुझे बेहद भ रहा था, पर उस अंग की छह मुझे तड़पा रही थी. में जल्द से जल्द नंगी होना चाहती थी, आखिर उसने मेरी बात सुन ली और मेरी ब्रा को निकल दिया, में इतनी बेसबर हो गयी थी की मेने खुद उसकी मदद की, अब में सिर्फ पंतय में थी, पता नहीं उसे क्या सूजी की वो मुज से दूर चला गया, मेरी समाज में नै आया मेने पीछे मुद कर देखा तो वो मुझे ऊपर से निचे देख रहा था, में शर्म से गाढ़ी जा रही थी, ) ऐसे मात देखो शिव, शर्म आ रही है.

शिव : अपने कूल्हे हिलाओ.

बिना : (मेने सुना पर यकीं नहीं hua)Kya कह रहे हो?

शिव : मुझे उन्हें अच्छे से देखना है, हिलाओ न.

बिना : मुझे बहोत शर्म आ रही है शिव.

शिव : प्लीज.

बिना : (पता नहीं वो क्या करवा रहा था, पर मेरी भी उत्तेजना चरम पर थी, ऐसा कुछ तो मेने सपने में भी नहीं सोचा था, में उसकी और देखे लगी, उसके चेहरे पर बहोत चाहत थी मेरे कूल्हों को वैसे देखने की, हलाकि मुझे शर्म आ रही थी पर मेने उसकी बात मणि, में अपने कूल्हे हिलने लगी,





में उसकी और देख भी नहीं प् रही थी, पर उसकी खुसी के लिए में कुछ भी कर शक्ति थी)

शिव : अपनी पंतय निकल दो. (वैसे भी उसे निकालनी थी, पर यहाँ में खुद अपनी पंतय निकल रही थी,

मुझे कितनी शर्म आ रही थी, पर ऐसा करना अच्छा भी लग रहा था, वो मुज पर अपना हक़ जमा रहा था, और उसकी ये बात मुझे और ज्यादा अच्छी लग रही थी, मेने झिझकते हुए अपनी पंतय nikaldi)(Me उस बड़े और खूबसूरत कूल्हों को निहार रहा था, मेने देखा की उनकी छूट बहोत गीली हो रही थी, उस से पानी भी टपक रहा था, में उनकी हालत समाज रहा था, पर मुझे भी उन्हें ऐसे देखना अच्छा लग रहा tha)Meri और घूम जाइये. (वो शरमाते हुए घूम गयी पर अपने हाथ से स्तन और छूट को छुपाये रक्खा था) अपने हाथ हटाइये.





बिना : शीइइइइव.

शिव : प्लीीासे.

बिना : (वो जिस तरह से मुझे सब करवा रहा था, मुझे हसी भी आ रही थी, पर वो शर्म वाली हसी थी, मेने अपने हाथ हटा diye)Lo देख लो. खुस्सस्स्स्स. (में उनके नजदीक गया और उन्हें गले से लागलिया)

शिव : ी लव यू, मैडम.

बिना : मुझे भी नाम से बुलाओ शिव, जैसे लता को बुलाते हो.

शिव : ी लव यू बिना.

बिना : ी लव यू तू शिव, मुझे पता नहीं ये सही है या गलत, पर रियली ी लव यू. मेरी गलती की कितनी बड़ी सजा दी तुमने.

शिव : मेने कोई सजा नहीं दी, और सजा में दे भी नहीं सकता, (उनके नंगे शरीर

को सहलाते hue)Aap बहोत खूबसूरत हो, और सेक्सी भी.

बिना : (उसके नंगे गठीला बदन को सहलाना मुझे भी अच्छा लग रहा tha)Tum भी शिव, फिल्मो में सुना था की लड़कीअ लड़को को हॉट बोलती है, आज में महसूस कर प् रही हु, तुम्हे देख कर में अपने आपको रोक नहीं प् रही, में तुम्हे अच्छी लगती हु वो hi बहोत है मेरे लिए.

शिव : (कूल्हे को मसलते hue)Par अभी मुझे और देखना है आपको.

बिना : और क्या बाकि रहा? सब तो तुमने देख लिया है.

शिव : में चाहता हु की आप अपने वो खास अंग मुझे दिखाए, खुद.

बिना : (बिना वो सोच कर hi गीली होने lagi)Muje बहोत शर्म आ रही है शिव.

शिव : एक बार, प्लीज.

बिना : (वो अपने इस आशिक़ को जरा भी नाराज़ नहीं करना चाहती थी, और उसकी ये इच्छाएं उसे भी अच्छी लग रही थी, वैसे भी कुछ छुपाने को था भी nahi)Kaise देखना hai(Usne मादकता से पूछा).

शिव : वह बेथ जाइये, और अपनी टंगे फैला कर दिखाइए.

बिना : (उसे बहोत शर माँ रही थी, पर वो शरमाते हुए बीएड पर बैठी और अपनी टंगे फैला di)Aise? (पेअर खोलने से उसकी योनि पूरी तरह से शिव के सामने थी)

शिव : है, ऐसे hi. (बिना और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी जब शिव उसे देख कर अपने लुंड को मसल रहा था, एक लड़का उसे देख कर अपने लुंड को मसल रहा है ये देख कर उसे शर्म आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, आज वो हर हद को पर कर जाना चाहती थी) उसे सहलाइये. (उसे शर्म आ रही थी पर फिर भी उसने अपनी छूट को सहलाया, एक अजीब सा आनंद आ रहा था, )(शिव मुझे देख कर अपने लुंड को हिला रहा था और में उसे देख कर अपनी छूट को सेहला रही थी, मेरी उत्तेजना अपने चरम पर थी, छूट को सहलाने से में बेकाबू होने लगी)

बिना : शहहहहह, शिव, बहोत हो गया ये खेल, प्लीज अब मेरे अंदर समां जाओ शह्ह्ह्ह में अब नहीं रह पाऊँगी शहहहहह प्लीज. (मुझे भी उनकी बात सही लगी, में उनके नजदीक गया तो उन्होंने मुझे पकड़ा और खींचते हुए मेरे निचे लेट गयी, में उनके ऊपर था, वो मुझे बेतहासा किश कर रही थी, मेरे कान को चाट रही थी, और साथ में एक हाथ से मेरे लुंड को छूट पर टिकने लगी, अपनी कमर हिला कर लुंड को अंदर डालने की कोशिस करने लगी, मेने भी देर नहीं की और लुंड को अंदर उतरने लगा, थोड़ी hi देर में पुरे लुंड को उनके अंदर समावित कर diya)Ohhhhhh मायआ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितना तदपि हु शिईयिव शहहहहह ये आनंद मुझे हर सिमा तोड़ने पर मजबूर कर रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह (में हलके हलके धक्के लगाने laga)Shhhhhh हआ ऐसे hi शहहहहह मेरे शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi shhhhhhhhhh ऐसे hi करो शीइइइइव





(अब बातो से ज्यादा काम चल रहा था, में लगातार उनकी छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था, वो सिसक रही थी, पूरा कमरा उनकी सिसकीओ से गूंज रहा था,) शहहह ऐसे hi मेरी जान शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो मुझे शह्ह्ह्ह इस आनंद की तुलना किसी से नहीं हो सकती शहहहहह कितना बड़ा है तुम्हारा शहहहहह मुझे वो फील हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह करते रहो शह्ह्ह्हह्ह और जोर से शह्ह्हह्ह्ह्ह (में जल्दी जल्दी करने लगा, छूट इतनी गीली हो गयी की पूछ पूछ आवाज आने लगी, छूट से जैसे नदिया बह रही थी, )है शह्ह्ह्ह और अंदर शहहहहह और अंदर शहहह हीी में झाड़ रही हु शह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ( वो इतनी ज्यादा उत्तेजित थी की थोड़ी hi देर में वो झाड़ गयी, वो पूरी ताकत से मुज से लिपट gyi)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये सुख तुम hi मुझे दे शक्ति हो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे उनके साथ ये मज़ा नहीं आया था shhhhhhhhhhh में कितनी गन्दी हु, शह्ह्ह्ह में उनसे धोखा कर रही हु शह्ह्ह्ह पर मजबूर हु शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे माफ़ करदेना जिग्नेश शह्ह्हह्ह्ह्ह पर में शिव के बगैर नहीं रह पाऊँगी shhhhhhhhhh. मेरा शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मेरा शिव. (में थोड़ी देर हलके हलके धक्के देता रहा) (मेरे कान को चाट ते हुए मादक स्वर में वो boli)Shiv मुझे उसे चूसना है (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा gayi)Tumne मुझे अच्छी देखा न, तो अब मेरी बरी है. (मेने लुंड बहार निकला तो वो उठ कर बेथ गयी और मुझे बीएड पर लेता दिया, मेरी छाती और पेट पर हाथ घूमते हुए दूसरे हाथ से मेरे लुंड को पकड़ कर देखने लगी, फिर मुस्कुराते हुए मेरी और देखा, उनके चेहरे पर कामुकता छायी हुई थी, वो मेरे लुंड पर झुकने लगी, उन्होंने मेरे गीले लुंड को छठा जहा उनकी छूट का रास लगा हुआ था, चाट ते चाट ते उसे अपने मुँह में भर लिया,





upload image

मेरी भी आह निकलने लगी, उनके ग्राम मुँह में मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, में उनका शिर सहलाने लगा क्यों की उनका ऐसे चूसना मुझे अच्छा लग रहा tha)(Me अब काफी खुल चुकी थी, में भी इस खेल का मज़ा पूरी तरह से लेना चाहती थी, उसका लुंड मेरे मुँह में था, मुँह पुयरा भरा हुआ था, मुझे उसका लुंड चूसना बहोत अच्छा लग रहा था, मुझे पता था की उसे भी अच्छा लग रहा था तो में उसके लुंड को हिलाते हुए चुने लगी, थोड़ी देर तक में उसके लुंड को पूरी तरह से चाट टी और चुस्ती रही, मुझसे रहा न गया तो में अपनी छूट को भी सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद उसने मुझे पकड़ा और अपने ऊपर कर दिया, पेअर फैला कर में उसके ऊपर थी, उसका लुंड मेरी छूट के पास था तो मेने पकड़ कर उसे अपनी छूट का रास्ता दिखा दिया, एक बार फिर वो मेरे अंदर था, में खुद अपनी कमर हिला कर उसे अंदर बहार करने लगी, उसके घरसँ से में और उत्तेजित होने लगी, उस अंग में क्या जादू था, वो मुझे पूरी तरह से आनंदित कर रहा था, में उसके निप्पल चूसते हुए अपनी छूट लुंड पर मार रही थी, मेरे कूल्हे थम कर वो मुझे अपने लुंड पर ऊपर निचे कर रहा था और साथमे नीचे से धक्के लगाने लगा,) (में उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें छोड़ रहा था, वो फिर से गरम होने लगी, फिर से उनकी सिस्किअ बढ़ने लगी, उनके नरम नरम शरीर को मसलते हुए में उन्हें छोड़ रहा था, वो भी अपनी कमर हिलाते हुए सामने से धक्के मार रही थी, कूल्हों को मसलते हुए मेरा हाथ उनकी गांड के छेड़ पर चला गया, मेने अपनी ऊँगली को निचे छूट के रास से गिला किआ और ऊँगली को गांड के छेड़ में डालने laga.)Shhhhh, क्या कर रहे हो शह्ह्ह्ह (में कुछ नहीं बोलै जोर लगा कर मेने ऊँगली अंदर दाल di)ouuuch शह्ह्ह्ह वह क्यों ऊँगली दाल रहे हो शहहहहह वो गन्दी जगह है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने ऊँगली और अंदर की और अंदर बहार करते हुए उन्हें छोड़ रहा था, थोड़ी देर बाद वो मुझे चूमते हुए सिसकने लगी)





शिव : कैसा लग रहा है?

बिना : उम्म्म उम्म्म्म शह्ह्ह्हह्ह बहोत अच्छा उम्म्म्म उम्मम्मम. (वो मेरी गांड के छेड़ में ऊँगली दाल रहा था, पहले मुझे वह अजीब लग रहा था पर फिर छूट में लुंड और गांड में ऊँगली, दोनों तरफ से उसका ऐसा करना मुझे बहोत अच्छा लग रहा था)

शिव : में वह भी करूँगा.

बिना : उम्म्म्म शहहहहह वह मतलब शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : अभी जहा मेरी ऊँगली है वह में अपना लुंड डालूंगा.

बिना : वह क्यों शह्ह्हह्ह्ह्ह वो जगह उसके लिए नहीं होती शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : वह भी करते है, में वह भी करूँगा.

बिना : (में इतनी उत्तेजित थी की में उस से कोई बहस नहीं करना चाहती थी, उसके लुंड और ऊँगली ने मेरे अंदर कोहराम मचा रक्खा tha)Tumhe जो करना है वो करना शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे कुछ भी नहीं पता है शिव शह्ह्ह्ह तुम्हे जो अच्छा लगे वो मेरे साथ karna.(Me दोनों तरफ के वार से बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी) में फिर से झाड़नेवाली हु शीइइइइव ,मुझे अपने निचे ले लो. (मेने फिर से उन्हें अपने निचे कर लिया और धक्के लगाने लगा, वो ऊपर हो कर छूट में जाते लुंड को देखती फिर निचे लेट जाती, फिर देखती, वो अपनी दोनों टैंगो को पकड़ कर फैलते हुए मेरे धक्को को ले रही थी, में भी उनके स्तन मसलते हुए उनके अंदर तक लुंड को दाल रहा था, कुछ देर हमारा और chala,)Shhhhh शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह जोर से शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह अंदर तक शह्ह्ह्हह्ह में झाड़ रही हु शह्ह्ह्ह में गयी शिव्व्व shhhhh(Mene भी तेज तेज धक्के मरे और हम दोनों झाड़ गए, मेरा वीर्य उनकी छूट में भर गया. वो मुझसे पूरी तरह लिपटी रही, हम दोनों हांफ रहे थे, काफी समय हम वैसे hi लेते रहे, फिर मेने उन्हें किश किआ और उनकी साइड में लेट गया तो उन्होंने अपना शिर मेरी बाह पर रख दिया और एक हाथ और पैर मेरे ऊपर कर दिए, मेने फिर उन्हें बहो में भर लिया और उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें किश करने लगा. थोड़ी देर बाद वो मेरी आँखों में देखते hue)Maza आया बेशरम कही के? (वो मुस्कुराने लगी)

शिव : (में भी muskuraya)Ha बहोत मज़ा आया.

बिना : कितने बेशर्म हो तुम, क्या क्या करवाया मुज से. (प्यारा गुस्सा दिखते हुए)

शिव : गुस्सा आ रहा था तो फिर किआ क्यों?

बिना : तुम्हारे लिए, सब कुछ तुम्हारे लिए, तुम्हे अच्छा लगा?

शिव : हां, बहोत अच्छा लगा. (घडी की और देखते hue)Muje जाना होगा बिना.

बिना : (उन्होंने भी घडी देखि)4 बजने को आये, बाप री कितना टाइम हो गया. तुम्हारे साथ टाइम कैसे गुजरता है पता hi नहीं चलता. तुम कपडे पहनो में दूध बनती हु.

शिव : रहने दीजिये, जूही पीला देगी.

बिना : कोनसा वाला? (कहते हुए वो नटखट सा मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, फिर अचानक बैठते hue)Shiv मेने तुम्हे बताया था क्या? जूही भी मेरी रिस्तेदार है?

शिव : (में muskuraya)Ab इतना भी पागल नहीं हु में, आप और मंतभाभी रिस्तेदार हुए तो वो तो होंगी hi न.

बिना : (थोड़ा घभराते hue)Use हमारे बारेमे पता है?

शिव : है पता है, पर मेने कुछ नहीं बताया, हमारी हरकतों ने उसे बता दिया.

बिना : (अपने शिर पर हाथ रखते hue)Wo क्या सोचेगी मेरे बारेमे.

शिव : (में खड़ा हुआ और अपने कपडे पहन ने laga)Kuchh नहीं सोचेगी, टेंशन मात लीजिये.

बिना : क्या टेंशन मात लीजिये, कैसे में उसका सामना करुँगी.

शिव : वो आपको कुछ नहीं बोलेगी, आप चिंता मात करो, वो समझदार है. (मेने उन्हें किश kia)Aap आराम करो, में जाता हु.

बिना : जल्दी आना. (मेने मुस्कुरा कर है कहा और वह से निकल गया)

वह से निकल कर में जूही के घर गया, फिर हमदोनो स्टेडियम चले गए, उसके बाद मेने उसे मुझे काव्यजि के वह छोड़ने को बोलै.

जूही : कभी यहाँ तो कभी वह, में पागल हु जो तुम्हे सामने से सबके वह भेज रही हु (उसने हलके गुस्से से कहा)

शिव : वैसी बात नहीं है, वो अनाथालय के लिए बात करनी है, अगर तुम्हे आना है तो तुम भी चलो.

जूही : मुझे नहीं आना, तुम hi जाओ. (उसने मुझे काव्यजि के घर छोड़ा, मेने बेल बजायी तो आंटी ने दरवाजा खोला)

आंटी : अरे शिव, आओ बीटा.

शिव : आप कब आये?

आंटी : आज hi आये है बीटा, जाओ वो ऊपर hi है.

शिव : जी आंटी (में ऊपर गया तो वह दो लोग बैठे थे तो में बहार बने सोफे पर hi बेथ गया)

काव्य की नजर भी शिव पर पद चुकी थी, वो जल्द से जल्द सबको भेजना चाहती थी, वैसे भी उनके सम्भोग के बाद आज अकेले मिल रहे थे, उसने सब निपटाया) (थोड़ी देर बाद वो सब बहार निकल गए तो में अंदर गया) में आ शक्ति हु?

काव्यजि : (मुस्कुराते hue)Aa जाओ. (में जा कर सामने चेयर पर बेथ गया, उनके चेहरे पर प्यारीसी मुस्कान थी, सचमे वो बहोत प्यारी थी, मुस्कुराते हुए उन्होंने puchha)Kaise हो?

शिव : अच्छा हु, आप?

काव्यजि : (मुस्कुराते हुए) क्या पिओगे?

शिव : कुछ नहीं, (में सीधे मुद्दे पर aaya)kya हुआ फिर?

काव्यजि : (चेहरे पर थोड़ी उदासी आ gayi)Kuchh नहीं हुआ है, जैसे थे, unko(Trusty) अभी कागजात नहीं मिले है.

शिव : अगर कागजात न मिले तो क्या वो हमे निकल देंगे?

काव्यजि : है निकल शक्ति है, पर इतना आसान भी नहीं है, हम केस कर देंगे, तुम चिंता मात करो, में हु न.

शिव : आपका hi तो सहारा है.

काव्यजि : इसके अलावा भी कभी मिल लिया करो (उन्होंने हलके गुस्से से कहा, वो मेरी और नहीं देख रही थी, वो कागजात ठीक कर रही थी)

शिव : (में उनकी बात समाज रहा tha)Me आपकी बात समाज रहा हु पर मेरी भी दिक्कत समजिये.

काव्यजि : क्यों तुम्हे क्या दिक्कत हो गयी? (मेने बहार की और देखा, वो समाज gayi)Mummy ऊपर नहीं आएँगी)

शिव : सच कहु तो मुझे आपसे दर लगता है.

काव्यजि : क्यों? क्या में डरावनी हु? (अभी भी वो मुझे नहीं देख रही थी, वो कोई फाइल में कागज रख रही थी, मेने उनका हाथ पकड़ लिया, वो रुक गयी और मेरी और देखने लगी)

शिव : मेरी भी हालत समजिये, अगर आप मेरी स्कूल में पढ़ती होती तो में बे झिझक आपसे मिल लेता, पर...

काव्यजि : (नज़ारे jhukaye)Me बहोत बड़ी हु, है na?(Unhone मेरी बात को जैसे पूरा किआ)

शिव : उस तरह से नहीं, पर आपके साथ में ऐसी वैसी कोई हरकत नहीं कर शक्ति न, एक दर लगा रहता है, कही आप नाराज़ हो गयी तो?

काव्यजि : खा नहीं जाउंगी तुम्हे. (में उनकी बेरुखी समाज रहा था, में अपनी जगह से उठा और उनकी चेयर की और गया, वो मुझे देखने लगी, मेने उनकी और हाथ बढ़ाया तो उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ में दिया, मेने उन्हें खींचकर खड़ा किआ) (काव्य की धड़कने तेज हो गयी थी, वैसे भी वो पहली बार ऐसे किसी के साथ जुडी थी, वो बिलकुल चाहती थी की शिव उसके करीब आये पर आज उसके मातापिता घर पर थे, हलाकि उसे पता था की कोई ऊपर नहीं आएगा, पर फिर भी एक दर उसके पुरे शरीर को थार था गया, शिव जैसे hi उसकी कमर में हाथ डाला और अपनी और खिंचा वो कैंप गयी, उसकी सांसे तेज होने लगी थी, उसका सीना ऊपर निचे हो रहा tha)(Unke चेहरे पर दर देख कर में रुक गया)

शिव : क्या हुआ, अभी तो आप कह रही थी की कोई ऊपर नहीं आएगा.

काव्यजि : है, par...(Wo बोलते बोलते रुक गयी) एक मिनट ruko...(Mene उन्हें छोड़ दिया, वो बिना मेरी और देखे बहार चली gyi)(Kavya ने बहार जा कर निचे देखा, उसकी मम्मी टीवी देख रही थी, पापा कही दिख नहीं रहे थे, शायद वो अंदर होंगे, पर वो कभी ऊपर नहीं आते, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो जो चाहती थी वो हो रहा था पर फिर भी पता नहीं वो दर रही थी, ये उसके लिए एक नया अनुभव था, वो किसी लड़के के प्रति ऐसे आकर्षित कभी नहीं हुई थी, यहाँ तक की वो उसके साथ सम्भोग भी कर चुकी थी, पर फिर भी उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो फिर से अपने केबिन में दाखिल हुई, पर वो शिव को देखने की हिम्मत नहीं कर प् रही thi)(Wo अंदर आयी तो में फिर उनके पास गया)

शिव : सब ठीक है?

काव्यजि : (बिना मेरी और dekhe)Hmmmmm.

शिव :मेरी और देखिये. (उन्होंने अपना चेहरा उठाया और मेरी और देखा, वो थोड़ी दुरी पर थी तो मेने फिर हाथ आगे बढ़ाया तो उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ में दिया, मेने फिर अपनी और खींचा तो वो मुझसे टकराई, मेने उन्हें कमर से पकड़ लिया)

काव्यजि : अब आये हो तो प्यार जाता रहे हो, ये नहीं की एक बार मिल लू, काम आया तो आये हो (वो अपनी भड़ास निकल रही थी, में कोई जवाब दिए बिना झुका और उनके होठो को अपने होठो से पकड़ liya)(Kavya सब भूल गयी, वो शिव से लिपट गयी और उसको किश करने लगी, उसका गुस्सा जैसे एक मिनट में हवा हो गया, वो उसकी पीठ सहलाने lagi)(Me भी उनकी पीठ को सहलाते हुए उन्हें किश करने लगा,





में उन्हें अपनी और खिंच रहा था और वो मुझे, कुछ देर बाद मेने उन्हें छोड़ा, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, मुझे देख कर वो शर्मा गयी और मेरे गले लग gayi)Bahot गंदे हो तुम. (कहते हुए मुस्कुरा कर गले लगी रही, थोड़ी देर बाद मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सोफे पर बिठाया और खुद भी मेरे पास बेथ गयी, हम दोनों ने हाथ पकड़ रक्खा tha)Ab डरे न तो मार खाओगे. (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : (जूथ मुठ डरते hue)Dekho देखो, फिर डरा रही हो मुझे.

काव्यजि : (मेरी छाती पर मरते hue)Dara रही तू में, है, डरा रही हु? (हम दोनों muskuraye)Kitna मिस करती हु तुम्हे पता है. भार्गवी के वह जा शक्ति हो, मेरे वह नहीं, क्यों.

शिव : (में muskuraya)Ab आपसे भी मिलने आऊंगा, बस.

काव्यजि : है, एहसान करोगे न मुज पर (थोड़ी बे रूखी से बोली) एक बार ये झंझट ख़तम हो जाने दो (केस की बात) फिर तुम्हे ले कर उड़ जाउंगी कही.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kaha?

काव्यजि : जहा कोई न हो. (वो मुस्कुराने लगी, में भी मुस्कुराया) अच्छा सुनो, मेने पता करवाया तो मुझे कुछ गड़बड़ पता चली है.

शिव : ऐसा क्या पता चला है?

काव्यजि : मुझे लग रहा है की ये गोवत. की कोई सामान्य क्रिया के स्वरुप तुम्हे नोटिस नहीं मिला है.

शिव : मतलब.

काव्यजि : मुझे लग रहा है की इसमें किसी का हाथ है.

शिव : किसका?

काव्यजि : शायद, कमलनाथ का.

शिव : मला?

काव्यजि : है.

शिव : वो कैसे?

काव्यजि : मेने अपने एक पहचान से पता करवाया तो पता चला की जहान्वी, मला की बेटी, वो अफसर से मिलने आयी थी, उसने कुछ दिया भी था, शायद पैसे, उसके बाद hi उस अफसर ने अनाथालय की डिटेल मंगवाई थी.

शिव : जहान्वी?

काव्यजि : है, कमलनाथ की बेटी.

शिव : (कुछ सोचते hue)Agar जहान्वी आयी थी तो आपको क्यों लगता है की कमलनाथ इसके पीछे होगा?

काव्यजि : जाहिर सी बात है, जहान्वी का क्या लेने देना इन सब से? (मेरे चेहरे को ध्यान से देखते हुए) और कुछ बात है?

शिव : है, शायद. मेरे और जहान्वी के बिच अक्सर खींचतान रहती है, तो हो सकता है की... (में उन्हें ये तो नहीं बता शक्ति था की मेने उसे किश कर दिया था)

काव्यजि : किस बात पर?

शिव : काम को और टाइम को ले कर, में काम पर अपने हिसाब से जाता हु, मेने पवनसीर को भी बोलै हुआ है, पर पता नहीं वो क्यों मुझे सुनती रहती है, तो टी हो जाता है.

काव्यजि : (सोच में पद gayi)Ho सकता है? पर वो इतनी सी बात के लिए ऐसा तो नहीं कर शक्ति.

शिव : ाहेहम (ईगो), बहोत बड़ी चीज होती है, शायद वो मेरे ऊपर हुकुम न चला पायी तो ऐसा किआ.

काव्यजि : पता नहीं, मेरे पल्ले तो बात नहीं पद रही की इतनी सी बात के लिए वो इस हद तक जा शक्ति है. (तभी निचे से आंटी की आवाज आयी) है मां?????

आंटी : कुछ भिजवाओ क्या?

काव्यजि : नहीं मां. (Mujse)Raat के खाने के लिए रुकोगे? (उन्होंने प्यार से पूछा)

शिव : नहीं, आज नहीं, फिर कभी.

काव्यजि : चिंता मात करो, कोई न कोई हल निकल आएगा.

शिव : पर कागजात नहीं मिल रहे है ये समाज में नहीं आ रहा है, unhone(Trusty) वैसे कहा क्या?

काव्यजि : उन्हें भी समाज में नहीं आ रहा, अचानक उनके पापा का निधन हो गया था तो उन्हें भी नहीं पता. पर मेरा मान कहता है की कागजात तो होंगे hi, ऐसे hi कोई इतनी बड़ी संस्था चालू नहीं कर शक्ति. इतने सालो में टैक्स भी भरा गया होगा, कुछ तो हुआ होगा, ऐसे कैसे रिकॉर्ड गायब हो गए. ये पूरी सोची सामजी प्लानिंग है.

शिव : पैसे देने तो जहान्वी hi गयी थी न, तो वो hi जानती होगी, या करवाया होगा.

काव्यजि : पर इस बात का कोई साबुत नहीं है, तो ऐसे hi हम उस पर हाथ नहीं दाल शक्ति. में भार्गविजई से बात करती हु, वो उस मैनेजर से पूछताछ करे. पर उनके लिए भी वो मुश्किल होगा क्यों की अब वो मैनेजर उनकी कस्टडी में नहीं है, उसे बड़ी जेल में भेजदिया गया है. और अगर वो जनता होगा तो भी नहीं बताएगा, वो क्यों बताएगा. वो तो वैसे भी बदला लेना चाहता होगा. फिर भी एक बार कोशिस करनी चाहिए.

शिव : में भार्गविजई से बात करता हु.

काव्यजि : तुम्हे बड़ी जल्दी है, में बात करता हु (उन्होंने मुँह बना कर कहा)

शिव : ऐसा क्यों बोल रही हो आप? (मेरी समाज में नहीं आया)

काव्यजि : (सँभालते hue)Mene कहा न की में बात कर लुंगी. मुझे पता है की वो तुम्हारी बहोत करीबी है, पर में अपने हिसाब से बात कर लुंगी.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो आप? वो भी मेरी दोस्त है जैसे आप हो.

काव्यजि : अच्छा, जैसी में हु वैसी? (उनका मतलब में समज सकता था, वो ये कह रही थी की जैसे मेरे साथ सम्भोग किआ है वैसे hi)

शिव : देखा, देखा, मेने कहा था न की मुझे आपसे दर लगता है, अब डरा रही हो न मुझे.

काव्यजि : मरूंगी में तुम्हे, डरा रही तू में तुम्हे? में बता रही हु, मुझे क्या, जो भी हो तुम दोनों का (उन्होंने मुँह चढ़लिया)

शिव : अच्छा, मुझे क्या? तो फिर मुँह क्यों चढ़ा रही हो? जलन हो रही है?

काव्यजि : जले मेरी जुटी, मुझे क्या, तुम्हे जो करना है वो करो, बस में hi नहीं दिखती. (मुझे हसी आने लगी, ये लड़कीअ, लड़कीअ hi होती है, चाहे जिस पोसिटिव में भी पहुंच जाये, पर जहा रिस्तो की बात आती है, ये पसेसिव हो जाती है, वैसे ये गलत भी नहीं, कोई क्यों अपनी चीज बे वजह किसी के साथ बाते, पर मेरी हालत hi ऐसी है की में किसी को कुछ भी नहीं कह सकता, में सबको बता कर चलता हु पर फिर भी वो उलझ hi जाता है, वैसे भी लड़कीओ को एक साथ रखना किसी देश को सँभालने से काम नहीं होता)

शिव : ठीक है, आप hi बात कर लेना. अब में चलता हु.

काव्यजि : रुकना थोड़ी देर, वैसे भी काम मिलते हो. (में थोड़ी देर वह रुका, एक बार फिर से हमने किश भी की, वह से निकल कर घर जाते हुए मेरे मान में वही बात चल रही थी, जहान्वी ने ऐसा क्यों किआ, सिर्फ एक किश के चलते, अगर इतना hi गुस्सा था तो मेरे पर निकलती, अनाथालय पर क्यों निकला)
 
अपडेट 144

में पुरे रस्ते सोचते हुए जा रहा था, की आगे क्या होगा. में घर पंहुचा और अंदर गया, सब काम कर रहे थे, मेने एक नजर डाली कुछ ने मेरे सामने भी देखा, पर में अंदर अपने रूम में चला गया.

सरिता : (लता se)Ja देख तो क्या हुआ है उसे, उदास लग रहा है.

लता : हम्म्म्म (वो रूम में गयी तो शिव कुर्शी पर बैठा था और कुछ सोच रहा tha)Kya हुआ शिव?

शिव : (नार्मल होने का प्रयास करते hue)Nahi कुछ नहीं दीदी.

लता : जूथ क्यों बोल रहा है (कहते हुए उसके शिर को अपनी छाती से लगा लिया) क्यों उदास दिख रहा है?

शिव : (लता के ऐसे पकड़ ने से उसे जैसे एक सहारा मिला, उसने भी लता को पकड़ा, पर उसके हाथ उसके नितम्ब के इर्द गिर्द थे, पर सेक्स वाली कोई भावना नहीं thi)Kagjat नहीं मिल रहे है.

लता : कोई बात नहीं, मिल जायेंगे (उसके शिर को सहलाते हुए) ऊपरवाला सब देख रहा है, तू क्यों फ़िक्र करता है.

शिव : काव्यजि ने ट्रस्टी से बात की थी, वो भी धुंध रहे है, पर नहीं मिल रहे.

लता : अगर वह नहीं होंगे तो यहाँ होंगे, कही तो होंगे.

शिव : यहाँ भी तो हमने ढूंढा था न जब मनगरवाला कांड हुआ था, उस वक़्त तो कोई कागजात नहीं मिले थे.

लता : उस वक़्त हम उसे नहीं धुंध रहे थे, हो सकता है उसे अच्छे से रक्खा हो, हम एक बार फिर ढूंढने का प्रयास करेंगे, में और सरिता और सब मिलके ढूंढेंगे. और न भी मिले तो कोई और रास्ता निकल आएगा.

शिव : (उनसे कास के लिपट ते हुए) आप बहोत अच्छी हो.

लता : (मुस्कुराते हुए) तू भी तो अच्छा है, (बात बदलने के liye)Apani कसम निभा आया की नहीं.

शिव : (उनकी बात का मतलब समझते हुए, शर्मा gaya)Ha. (दोनों थोड़ी देर खामोश रहे) आपको बुरा नहीं लगा?

लता : (उसके बालो में हाथ घूमते hue)Lagta है, पर उस से कही ज्यादा तू जरुरी है, में तुजे परेशान नहीं देख शक्ति, में ये भी जानती हु की तेरी जिंदगी में मेरी एहमियत क्या है, तो फिर क्यों चिंता करू, चल कपडे बदल ले, खाना तैयार होनेवाला है.

शिव : एक किश दो न.

लता : (शरमाते hue)Abhi नहीं, जो करना है रात में कर लेना, अब तो कसम भी पूरी हो गयी है, तो तुज पर कोई बंधन भी नहीं है.

शिव : (उनके सुडौल कूल्हों को मसलते हुए) मुझे तो अभी किश चाहिए, अभी मतलब अभी.

लता : शहहहहह, क्यों जिद कर रहा है, दरवाजा भी खुला है, कोई भी आ जायेगा.

शिव : अभी मतलब अभी (मेने उनके स्तन पर शिर घिसते हुए कहा)

लता : शहहहहह, क्यों जिद कर रहा है, रात को सब दूंगी.

शिव : अभी मतलब अभी.

लता : ठीक है, उस और चल (दरवाजे की साइड की और इस्सर करते हुए उन्होंने कहा, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, में खड़ा हुआ और उन्हें दरवाजे के पीछे की दिवार से लगा कर खड़ा कर दिया, वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, मेने एक हाथ से उनके स्तन को पकड़ कर sehlaya)shhhhhh, वह नहीं शिव, सिर्फ किश और वो भी छोटी सी. (में मुस्कुराया, और झुक कर उन्हें किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद उन्होंने मुँह हटाया, हांफ ते hue)Bas शिव, और ज्यादा नहीं.

शिव : क्यों?

लता : (शरमाते हुए, नज़ारे नीची करके) में रुक नहीं पाऊँगी फिर. (उन्होंने हलकी सी नजर ऊपर की तो में मुस्कुराया तो वो फिर शर्मा गयी, मुझे धक्का देते hue)Ab छोड़ मुझे और जल्दी बहार आ. (वो मुस्कुराते हुए वह से भाग गयी, में मुस्कुरा रहा tha)(Lata फिर किचन में पहुंच गयी, पर उसका खिला चेहरा सब बयां कर रहा था)

सरिता : (लता को चहेते hue)Uski उदासी दूर करने गयी थी की अपनी, क्या कर के आयी?

लता : (शरमाते hue)Kuchh नहीं.

सरिता : रहने दे रहने दे, तेरा चेहरा hi सब बयां कर रहा है. क्या हुआ था उसे?

लता : वो कागजात के लिए परेशान है, त्रुस्तीजी ने बताया की कागजात मिल नहीं रहे है. एक बार हमे यहाँ भी ढूँढना चाहिए, क्या कहती है तू?

सरिता : सही कह रही है, कल सबके स्कूल जाने के बाद हम ढूंढते है.

थोड़ी देर बाद सब आ गए, खाने बेथ गए. वही दूसरी और स्वर्ण और वैस्वी एक कमरे में बैठे थे, खाना खा कर काम निपटा कर स्वर्ण उस से मिलने आयी थी. वैस्वी टेबल पर बुक खोले बैठी थी, पर किन्ही खयालो में खोयी हुई थी.

स्वर्ण : क्या सोच रही है?

वैस्वी : (अचानक हुई आवाज से वैस्वी चौंक गयी, घबरा कर उसने dekha)Are भाभी आप. (अपनी सांसो को काबू करते hue)Aapne तो डरा दिया.

स्वर्ण : (उसके बीएड पर बैठते hue)Aise खोयी रहेगी तो चौंक hi जाएगी न, क्या सोच रही थी?

वैस्वी : (झेपते hue)Nahi कुछ नहीं भाभी, बस ऐसे hi.

स्वर्ण : किसी लड़के का मामला है?

वैस्वी : नहीं भाभी, वैसी कोई बात नहीं है. (उसने नज़ारे झुका ली)

स्वर्ण : मेने कहा था न की अभी उस बारे में मात सोच, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे.

वैस्वी : (वो संभल चुकी thi)Nahi भाभी, वो तो बस संयम के बारे में सोच रही थी.

स्वर्ण : क्यों, लड़ाई हो गयी उस से?

वैस्वी : लड़ाई तो नहीं हुई, बस थोड़ी बहस हो गयी थी.

स्वर्ण : सहेलिओ में तो ये सब चलता रहता है, यही तो जिंदगी है, इसी समय दोस्त बनते है, गीले सिक्वे तो चलते रहते है. अगर तुजे लगता है की जिस बात पर बहस हुई है उस से ज्यादा वो तेरे लिए इम्पोर्टेन्ट है तो उस से माफ़ी मांग लेना, बात ख़तम.

वैस्वी : जी भाभी.

स्वर्ण : चल तू पढ़, में जा रही हु. और तो कोई बात नहीं है न?

वैस्वी : नहीं भाभी.

स्वर्ण : ठीक है, (उसके शिर पर हाथ रख कर वो अपने कमरे में चली गयी, जहा उसका पति कोई फाइल देख रहा था, नाराजगी से) अब घर में तो काम को छोडो.

आकाश : (मुस्कुराते hue)Bas थोड़ी der(Thodi देर फाइल देखने के बाद उसने रख दी) कहा गयी थी तुम?

स्वर्ण : वैस्वी के पास.

आकाश : क्यों?

स्वर्ण : क्यों क्या, आपको तो अपने काम से hi फुर्सत नहीं है, मुझे hi सब देखना पड़ता है. मुझे लगा की वो उदास है तो में उस से बात करने गयी थी.

आकाश : क्यों, क्या हुआ?

स्वर्ण : कह रही थी की उसकी सहेली से बहेश हो गयी है, पर मुझे पता है की वो क्यों उदास रहती है.

आकाश : क्यों?

स्वर्ण : मम्मी- पापा ने अभी से उसकी शादी की बात चला दी है तो परेशान तो होगी hi, और ऊपर से वो मोंटी कैसा लड़का है, पता नहीं उन्हें किस बात की जल्दी है.

आकाश : मुझे भी वो सही नहीं लगा था, पर क्या करू, उन्हें कह भी नहीं सकता.

स्वर्ण : कॉलेज के दिनों में तुम कैसे थे, और अब देखो, अपने पापा की गलत बात पर भी नहीं बोल सकते. मम्मी ने भी मुझे कितना सुनाया है, एक तो हमने लव मैरिज की थी और ऊपर से बच्चा नहीं हो रहा था, मेने कितना सहा है तुम्हे क्या पता.

आकाश : (उसको अपनी बाहोंमे लेते hue)Sorry यार, पर वो मेरे माता पिता है, में कैसे उनके सामने बोल सकता हु.

स्वर्ण : में उनसे लड़ने के लिए नहीं कह रही, पर अगर कुछ गलत हो रहा है तो एटलीस्ट अपनी बात तो कहो, वैसे भी तुम्हारी चुप्पी ने इतना सब कर दिया है, में नहीं चाहती के वैस्वी के साथ कुछ गलत हो.

आकाश : क्या इतना सब हो गया है, अब तो सब ठीक है न, अब तो तुम माँ भी बन ने वाली हो, अब क्या परेशानी है.

स्वर्ण : (मान में: अब क्या कहु में तुम्हे, तुमसे प्यार करते हुए भी मुझे तुम्हे धोखा देना पड़ा, कैसे कहु की इस बच्चे के लिए मुझे क्या करना पड़ा, तुम्हे तो घर की कोई खबर hi नहीं है, बुसिनेस्स बिज़नेस बुसिनेस्स)

आकाश : ऐसे क्या देख रही हो? बोलो?

स्वर्ण : (खयालो से बहार आते hue)Nahi कुछ नहीं, में बस इतना चाहती हु की आप वैस्वी के मामले में चुप मत रहिये, वो आपकी बहन है, वो आपसे सपोर्ट की आशा नहीं रक्खेगी तो किस से रक्खेगी.

आकाश : इसमें में क्या कर शक्ति हु?

स्वर्ण : (उस से दूर होते hue)Tum कुछ मात करो, सो जाओ. (वो दूसरी और मुँह कर के लेट गयी)

आकाश : ये क्या बात हुई (उसको अपनी और घूमने का प्रयास करते hue)Suno to.(Wo उस और नहीं घूमी) ठीक है, सो जाओ. (वो भी सो गया)

ज़ोया (संयम की माँ) अपना काम ख़तम कर के अपने कमरे में गयी, तो उसका पति आंखे बंद किये बिस्तर पर लेता हुआ था.

ज़ोया : सो गए क्या?

हसन : नहीं, बस ऐसे hi लेता हुआ हु, क्या हुआ?

ज़ोया : नहीं, कुछ नहीं, में तो ऐसे hi पूछ रही थी. (अपना दुप्पट्टा साइड में रख कर वो लेट गयी, लाइट ऑफ की और नाईट बल्ब जला दिया, उनकी और घूमते हुए, उनकी छाती पर हाथ रक्खा, और सहलाने lagi)Neend आ रही है क्या? (उसने प्यार से पूछा)

हसन : (वो अपनी बीवी के इरादे समाज रहा था) थका हुआ हु ज़ोया.

ज़ोया : (निराश हो gayi)Mene कहा कुछ कहा.

हसन : में समझता नहीं क्या, की तुम क्या कर रही हो.

ज़ोया : अगर समाज रहे है तो फिर ऐसा क्यों कर रहे हो.

हसन : अब हमारी वो उम्र नहीं रही ज़ोया, दो जवान बेश्या है घर में, ये सब अच्छा लगता है क्या?

ज़ोया : में कहा रोज़ रोज़ मांगती हु, कभी कभी तो हो सकता है न, अभी इतने भी बुढ्ढे नहीं हो गए हम.

हसन : देखो ज़ोया, में कोई बहेश करना नहीं चाहता, सो जाओ अभी, फिर देखेंगे.

ज़ोया : (सीधे हो कर लेट गयी, उसे अपने पति पर गुस्सा आ रहा था, पर वो कोई बखेड़ा नहीं चाहती थी तो वो चुप हो गयी, उसके सामने शिव का चेहरा उभर आया, कैसे उसने उसे छोड़ा था, थोड़ी hi देर में उसका हाथ अपनी छूट पर चला गया, और मान में सोचने लगी, में नहीं चाहती की वो दोबारा हो, वो समय ऐसा था की में बह गयी, पर क्या करू में, क्या में बुद्धि हो गयी हु, अगर है तो फिर मेरे शरीर में ये सब क्यों हो रहा है, उसने अपना हाथ छूट से हातलिया और अपने मान को शांत करने का प्रयास किआ और सोने लगी)

रात को खाना खाने के बाद सरिता और लता सब काम निपटा रही थी, लता ने सोच लिया था की आज वो शिव के साथ hi सोयेगी, तो वो जल्दी जल्दी काम निपटा रही थी. काम निपटने के बाद दोनों बच्चो के कमरे में आयी, गायत्री भी किचन का काम निपटा कर लेती हुई थी. सब बच्चो को अच्छे से सुलाने के बाद लता कड़ी hi थी, तो सरिता ने पूछा,

सरिता : (लता se)Tu क्यों कड़ी है, चल सो जाते है.

लता : (हिचकिचाते hue)Wo शिव अनाथालय की बात को लेकर परेशान है तो में उसके साथ जाती हु.

सरिता : है तू सही कहती है, चल में भी चलती हु, वो अकेले अकेले परेशान हो रहा होगा. (लता उसको मन करना चाहती थी पर कुछ बोल नहीं पायी) (गायत्री से) तू संभल लेगी न?

गायत्री : है, कोई बात नहीं.

सरिता और लता दोनों शिव वाले कमरे की और निकल गए. जब वो दोनों पहुंची तो शिव किताब ले कर बैठा था.

सरिता : पढ़ाई चल रही है?

शिव : है दीदी.

सरिता : लता को लता बुलाएगा, और मुझे दीदी (उसने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : (मेने लता की और देखा, तो उसने नज़ारे झुका ली, जैसे कह रही हो, में कुछ नहीं कह सकती, तू जाने और Sarita)Thik है, अगर सबको hi नाम से बुलाऊ ऐसा चाहती है तो में सबको नाम से hi बुलाऊंगा, ठीक है सरिता जीईई. (वो मुस्कुरायी)

सरिता : वैसे लता बता रही थी मुझे, तू चिंता मात कर, हम दोनों कल ओफ्फिसेवाले पुरे कमरे को अच्छे से देखलेंगे. वैसे कब तक पढ़ेगा तू?

शिव : बस थोड़ी देर.

सरिता : ठीक है, चल लता बिस्तर लगा देते है.

लता : हम्म्म्म. (उन्होंने दो बिस्तर लगाए, और दोनों वह लेट गयी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की दोनों साथ में क्यों लेती है, शायद थोड़ी देर बाद सरितादिदी चली जाएगी, ये सोच कर में थोड़ी देर पढता रहा, पर वो दोनों धीमी आवाज में कुछ बाटे कर रही थी, मेने भी अपनी किताब बंद की, और कपडे निकले, निचे चड्डी रख कर ऊपर सब निकल दिया, और उन दोनों को देखा, जैसे कह रहा हु की अब में सोऊंगा, ताकि सरिता दीदी जाये)

सरिता : ऐसे क्यों खड़ा है, आजा, सोना नहीं है?

शिव : (मेने लता को देखा तो उसने नज़ारे झुका li)Kaha सोउ? (वो दोनों दोनों बिस्तर पर लेती थी)

सरिता : आजा (कहते हुए वो थोड़ा साइड को हो गयी, और दोनों के बिच में मेरे लिए जगह कर दी, मेने फिर लता को देखा तो वो मेरी और देख नहीं रही थी, तो में उन दोनों के बिछ लेट gaya)Aaj हम दोनों तेरे साथ hi सोनेवाली है, लता कह रही थी की तू परेशान है, अरे कहे की परेशानी, जो होगा वो देख लेंगे, वैसे भी ये कोनसा हमारा घर है, ऊपर वाले ने हमे बेघर hi पैदा किआ है तो फिर कहे की चिंता.

शिव : (वह लेट ते hue)Muje हमारी चिंता नहीं है, मुझे चिंता है उन छोटे बच्चो की.

सरिता : जब तू छोटा था, या में छोटी थी, लता, रंजन, विणा, गायत्री या कोई भी, सब बच्चे hi थे जब यहाँ आये थे, हमे किसका सहारा था, फिर भी हम बड़े हो hi गए न, ऊपरवाला सब देखता है, जैसी जिसकी किस्मत, तू चिंता मात कर सब ठीक hi होगा.

शिव : (उनकी बात बिलकुल सही थी, वैसे भी उन्होंने जिंदगी के बहोत से गंदे पहलु भी झेले है तो वो अब थोड़ी स्ट्रांग हो चुकी है, उनकी बातो से मुझे भी हौसला मिल रहा tha)Sachme दीदी, आप बहोत बहादुर हो.

सरिता : मरूंगी एक तुजे, अगर फिर दीदी बोलै तो, अगर लता के साथ रिस्ता बदल रहा है तो में पीछे नहीं रहनेवाली समजे. तुजे तो कोई प्रॉब्लम नहीं हे न लता. (वो कुछ नहीं बोली)

सरिता : बोल न, है कोई प्रॉब्लम, (मेने उनकी और देखा तो उन्होंने एक नजर मेरी और डाली फिर सरिता की और देख कर)

लता : नहीं.

सरिता : ले मिल गयी परमिशन, ठीक है. (में मुस्कुराया, उन्होंने बात आगे badhayi)Me कोई बहादुर नहीं हु शिव, (गंभीरता से) हादसे हमे बहादुर बनाते है, जिंदगी ने इतना सब छिना है की अब लगता है की है क्या मेरे पास जो कोई छीन लेगा, जब कुछ है hi नहीं तो खोने का दर कैसा. उल्टा जो भी मिलता है उसकी खुसी hi होती है, तो हमारी जिंदगी में खुसी ज्यादा है गाम काम है.

शिव : सही कहा आपने, हम जैसो से कोई क्या hi छीन लेगा जब कुछ है hi नहीं. सच में आपके आने से दिल को सुकून मिला.

सरिता : है न, इसीलिए में आयी थी, मुझे पता था की लता थोड़ी ढीली है, वो तेरे साथ मिलके रो सकती है, तेरा सहारा नहीं बनेगी.

लता : अब ज्यादा उड़ मात, में कोई कमजोर नहीं हु, और पूछ इस से, क्या में उसको मिल कर रो रही थी, मेने भी वही कहा जो तूने कहा, बड़ी आयी.

सरिता : अरे वह, मेरी लड़ो तो अब सायानी हो गयी. क्या कहते हो शिव. (में क्या कहता, बस मुस्कुराया)

लता : में सायानी hi हु, जा अब लाइट बंद कर, सुबह जल्दी भी उठाना है. (सरितादिदी उठी और मुस्कुराते हुए लाइट बंद कर के छोटा बल्ब जला दिया, और आ कर बिस्तर में बैठी, पर बिलकुल मेरे नजदीक)

सरिता : अपना हाथ सीधा कर (उन्होंने मुझे जैसे आदेश दिया, हलके उजाले में मेने उन्हें dekha)Dekh क्या रहा है (कहते हुए उन्होंने खुद मेरे हाथ को सीधा किआ और मेरे हाथ पर शिर रख कर मेरी बगल में लेट गयी, मुझे आश्चर्य हो रहा था, लतादिदी के होते हुए भी वो मुझसे चिपक कर सो रही थी, मेने लतादिदी की और देखा तो वो भी मुझे hi देख रही थी, सरितादिदी ने थोड़ा ऊपर होक लता की और dekha)Use क्या देख रही है, में तो ऐसे hi सोऊंगी, तुजे शर्म आ रही है तो तू दूर सो. (उन्होंने लतादिदी को उकसाया, मेने है का इस्सर किआ और दूसरी और के हाथ को भी फैला दिया तो लता दीदी भी खिसक कर नजदीक आ गयी और मेरी बाह पर शिर रख दिया, सरितादिदी मुझसे चिपक कर सोई थी पर लता दीदी सीधी लेती थी, में समाज रहा था की वो शर्मा रही है तो मेने खुद उन्हें मेरी और खिंच लिया तो वो भी मेरी और घूम गयी और अपना हाथ मेरी छाती पर रख दिया, सरितादिदी ने फिर चुटकी li)Kitna अच्छा दृश्य है, हमर राजकुमार do-do को एक साथ बहो में लिए सो रहा है. (उनकी बात से में और लतादिदी, दोनों मुस्कुराये)

लता : अब चपड़ चपड़ करती रहेगी की सोयेगी भी.

सरिता : सोऊंगी न, आज तो बहोत गहरी नींद आने वाली है, कह ते हुए उन्होंने मेरे गाल पर किश कर दी. (लता उसके बेबाकी पैन से बहोत हैरान थी, पर उसे शर्म आ रही थी तो वो बस ऐसे hi लेती रही, थोड़ी देर हुई होगी की लता दीदी थोड़ा ऊपर हुई और मेरे गाल पर किश किआ, मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)(Ye देख कर सरिता भी मुस्कुरायी, फिर सब सोने लगे, भले hi हर कोई सब कुछ जनता था, पर ये पहला मौका था तो किसी की भी आगे बढ़ने की हिम्मत न हुई तो सब सो गए)

सुबह जब मेरी आंख खुली तो में अकेला सोया हुआ था, में बहार आया तो देखा वो सब किचन में थे, में बाथरूम गया, नहाया और तैयार हो कर नास्ता किआ. फिर स्कूल के लिए निकल गया. जब में संयम के वह पंहुचा तो तीनो कड़ी थी. मेने सबको hello किआ, पर सिर्फ नाज़िआदिदी ने hi जवाब दिया, वो दोनों बिना मेरी और देखे कड़ी थी, में स्कूटर पर बेथ गया तो वो दोनों फिर अपना नूह देखने लगी, जैसे एक दूसरे को कह रही हो की तू बेथ जा.

संयम : तुम बेथ जाओ.

वैस्वी : नहीं तुम बेथ जाओ, कल में बैठी थी.

संयम : कोई बात नहीं, तुम बैठो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

शिव : अब बैठती हो की में जाऊ.

नाज़िआ : संयम तू बेथ जा, वैस्वी कल बैठी थी न. (वैसे भी शिव के बोलने से संयम दर रही थी तो वो चुप चाप बेथ गयी, उसके पीछे वैस्वी, मेने नाज़िआदिदी को bye कहा और स्कूटर आगे बढ़ा दिया. आज संयम भी बिना मेरी कमर पकड़े hi बैठी थी, पर उसके स्तन मेरी पीठ में चुभ रहे थे, हम तीनो चुप hi रहे और स्कूल पहुंच गए. क्लास में पढ़ना चालू हो गया, दोनों ज्यादा बात नहीं कर रही थी. रेसस्स में जब दोनों बाथरूम की और जा रहे थे तो संयम बोली.

संयम : तू रोज़ उसके पीछे बैठे तो भी मुझे कोई एतराज़ नहीं है, तू बेथ सकती है.

वैस्वी : मुझे भी कोई एतराज नहीं है अगर तू रोज़ उसके पीछे बैठे, अब में कोई जगहदा नहीं करुँगी.

संयम : क्यों? पहले जगहद रही थी, अब क्या हो गया.

वैस्वी : तुजे क्या हो गया, तू भी तो जगहद रही थी.

संयम : में समाज गयी हु, वैसे भी वो पहले दिन से hi तुम्हे पसंद कर रहा था, में तो ख़म खा बीचमे घुस गयी, में अब अपनी हद में hi रहूंगी, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है की तुम्हारे और उसके बिच में जो भी चल रहा हो.

वैस्वी : अच्छा सेक्रिफिके.

संयम : में कोई सेक्रिफिके नहीं कर रही हु, और किस चीज का सेक्टिफिके, हमारे बिच वैसे भी कुछ नहीं है.

वैस्वी : में पागल नहीं हु, पहले दिन से hi तू उसको पसंद करती थी, मुझे पता है.

संयम : है, पर वो थोड़ी न पसंद करता है. तुम दोनों का कुछ भी हो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, में तुम दोनों के बिच नहीं आउंगी.

वैस्वी : तुजे कोई दिक्कत नहीं है, इसीलिए तू दो दिन से मुझसे ठीक से बात नहीं कर रही है. (संयम खामोस रही) हम दोनों शिव के मिलने से पहले से दोस्त है, उसके लिए में तुजे दुखी नहीं कर सकती, तू मेरी पक्की सहेली है, शिव के लिए में तुजे नहीं छोड़ सकती.

संयम : मतलब तू मेरे लिए शिव को छोड़ सकती है?

वैस्वी : वो मुझे नहीं पता, मुझे बस इतना पता है की में तुजे नहीं छोड़ सकती, बस. (उसने संयम का हाथ पकड़ कर बड़े इमोशन के साथ कहा, संयम को भी उसकी बात छू गयी, दोनों एक दूसरे के गले लग गयी, आते जाते लड़के और लड़कीअ उन दोनों को देख रहे थे, दोनों मुस्कुराते हुए अलग हुई और एक दूसरे का हाथ पकड़ कर क्लास की और निकल गयी)

बड़ी रेसस्स में जब हम सब साथ में नास्ता करने बैठे तब मेने देखा की वो दोनों आपस में अच्छे से बात कर रही थी, ये देख कर मुझे बहोत अच्छा लगा, हलाकि वो दोनों मुझसे ज्यादा बात नहीं कर रही थी न hi पहले जैसे एक दूसरे से कॉम्पिटिओं कर रही थी, भले उन्होंने मुझे दर किनार कर दिया पर मुझे फिर भी अच्छा लगा. स्कूल के बाद हम सब खड़े थे तो बिना मैडम भी एक टीचर के साथ चलते चलते आयी, उन्होंने मुझे देखा, तो मेने गुड आफ्टरनून कहा, सब ने उन्हें और दूसरी टीचर को विश किआ. (बिना का मान था की फिर से वो शिव से कहे की मेरे घर चलो, पर वो ऐसा नहीं कह सकती थी, तो वो अपना स्कूटर ले कर निकल gayi)(Mene भी स्कूटर निकला तो मेने सोचा की सुबह संयम बैठी थी तो अभी वैस्वी बैठेगी, वैस्वी आगे बैग रख रही थी तो संयम उसके लिए कड़ी थी)

वैस्वी : (बैग रख कर उसने संयम को dekha)Khadi क्यों है, बेथ जा.

संयम : सुबह में बैठी थी तो अब तेरी बरी है.

वैस्वी : क्या बरी बरी लगा रक्खा है, ये क्या कोई हीरो है जो हम उसके साथ बैठने के लिए लाडे, तू कड़ी थी तो तू बेथ जा, मुझे बैठना होगा तो में बेथ जाउंगी (संयम को सीट की और धकेल kar)Tu hi बेथ. (संयम बेथ गयी, और वैस्वी पीछे बेथ गयी)

शिव : (मेने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, आगे जा कर मेने kaha)Lagta है की फिर से दोस्ती हो गयी.

वैस्वी : (फिर से तना मारते hue)Hamari दोस्ती टूटी hi काब थी, वैसे भी मेने कहा न की तुम कोई हीरो नहीं हो जो तुम्हारे पीछे बैठने के लिए हम लाडे, क्या कहती हो संयम. (उसने संयम को पीछे से झप्पी डाली)

संयम : सही कहा तुमने, पता नहीं क्या समझता है अपने आपको.

शिव : ये क्या बात हुई, लड़ी तुम दोनों, सुलह तुम्हारे बिच hi हुई, और बुराई मेरी कर रही हो.

संयम : करेंगे hi, बहोत चर्बी चढ़ी थी न तुन्हे, (वैस्वी ko)Kya बोल रहा था ये, बैठो वर्ण चला जाऊंगा. अरे जा, जहा जाना है, बड़ा आया धमकी denewala.(Usne मेरी कमर में चिकोटी कटी) (दोनों खिल खिला कर हसने लगी)

शिव : ोुछः! क्या कर रही है, गिर जायेंगे सब. और दोनों इकट्ठी हो गयी हो तो ये मात समझना की में अकेला हो गया हु, में तुम दोनों पर भरी पद सकता हु.

संयम : है, है बड़ा आया, भरी पड़नेवाला, हमें क्या कमजोर समजा है, नानी याद दिला देंगे तुजे, क्यों वैस्वी.

वैस्वी : है बिलकुल. (ऐसे hi मस्ती करते हुए हम संयम की गली के पास पहुंच गए, वैस्वी उतरी फिर संयम, उसने अपना बैग लिया, में बैठा रहा, वैस्वी मेरे सामने देख रही thi)Yahi बैठे रहने का इरादा है क्या?

शिव : (आश्चर्य से उसको देखते hue)Kyu मुझे छोड़ने नहीं आओगी?

वैस्वी : क्यों औ, मेने तुम्हारा ठेका लिया है क्या? (दोनों फिर हसने लगी, आज दोनों फुल मस्ती में थी)

संयम : अरे छोड़ आ गरीब को, उसे भी तो पता चले की किन रईसों से पला पड़ा है.

वैस्वी : अब तू कहती है तो छोड़ आती हु (वो फिर पीछे बेथ gayi)(Samim को) Bye(Samim ने भी bye कहा, मेरी और देख kar)Chalo ड्राइवर, अब क्यों खड़े हो.

संयम : है है है (कर के फिर हसने लगी, मेने स्कूटर आगे बढ़ा दिया, थोड़ी दूर जा कर)

शिव : अब में ड्राइवर, है.

वैस्वी : (वो मुस्कुरायी पर कोई जवाब नहीं दिया)

शिव : मुझे तुम दोनों जो भी कहो, पर मुझे बहोत अच्छा लगा की तुम दोनों का मटर सुलझ गया. वैसे ऐसा क्या हो गया जो दोनों इतना बदल गयी.

वैस्वी : वो हम दोनों की बात है, तुम्हे क्यों बताये. (हलके ऐटिटूड से बोली)

शिव : अच्छा बाबा, मात बताओ. (मेरा भी घर आ गया, बहार रस्ते पर मेने स्कूटर रोक दिया और वो निचे उतरी, में भी उतर गया, मुझे लगा था की वो फिर मेरे साथ वो सब करेगी, जो पहले किआ था पर वो स्कूटर पर बैठने lagi)Lagta है मुझे दरकिनार करने का फैसला कर लिया है.

वैस्वी : (मेरी और देख kar)Samim मेरी दोस्त है, तुम्हारी वजह से हमारी दोस्ती में दरार आ रही है, और वैसे भी तुम्हे मुजमे कोई इंट्रेस्ट नहीं है, तुम हमेसा मुझे कह ते हो की तुम मेरे साथ सम्बन्ध नहीं बना सकते, तुम्हारी जिम्मेदारिअ है वगेरा वगेरा, मुझे लग रहा है की में hi तुम्हारे पीछे पड़ी हु, तो मुझे नहीं लग रहा की मुझे वैसा करना चाहिए.

शिव : (उसका कहना सच hi था, मेने हमेसा उसे रोका था, पर जब वो खुद अलग हो रही थी तो मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, जो लड़की कल ताम मुझे सामने से सब करने का नौटा दे रही थी आज वो किनारा कर रही थी तो मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, वैसे भी जो आपको आसानी से मिल जाता है उसकी कोई कदर नहीं होती, पर जब ऐसा लगे की वो नहीं मिलनेवाली तो उसकी और आपका झुकाव और ज्यादा बढ़ जाता है, मेने परिस्थिति सँभालने की कोशिस ki)Mene ये कब कहा की तुम मुझे पसंद नहीं हो.

वैस्वी : ये तुमने कहा नहीं पर तुम्हारे बर्ताव से वो साफ़ झलकता है, अगर तुम्हे सचमे लगता है की में तुम्हे पसंद हु तो फिर मुझे पाने का प्रयास करो, देखते है की तुम सफल होते हो की नहीं.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

वैस्वी : में तुम्हारी झोली में पके फल की तरह आ गिरी तो तुम्हे मेरी कदर न हुई, आप जब मुझे इम्प्रेस करके पाने का प्रयत्न करोगे तब तुम्हे पता चलेगा की अगर कोई तुम्हारी और आता है तो हमें भी आगे बढ़ कर उसका स्वागत करना चाहिए, तो अब प्रयास करो, देखते है की तुम मुझे इम्प्रेस कर पते हो की नहीं.

शिव : चलो आज फिर उसी जगह चलते है, वह पैदा के बिच.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Sorry, पर आज आना संभव नहीं है, वैसे प्रयास अच्छा था, चलो में निकलती हु, कल तो छूती है, परसो मिलते है. Bye.

शिव : (निसृष हो ke)Bye. (मेरी ऐसी हालत देख कर वो मुस्कुरायी और वह से चली गयी, में वही खड़ा देख रहा था, थोड़ी दूर जा कर उसने मुद कर देखा तो मेने फ्लाइंग किश दी, वो मुस्कुरायी और चली गयी. सचमे, ये फितरत अजीब होती है, उसने सही कहा, जब वो हमसे दूर जाता है तभी हमे उसकी कदर होती है, में वैसे तो उसके साथ सम्बन्ध बना कर अपनी उलझाने बढ़ाना नहीं चाहता था पर उसका जाना भी अच्छा नहीं लगा मुझे, में अपने घर में चला गया, आज साइट पर भी जाना था तो मेने खाना खाया और साइट की और निकल गया)

में वह पंहुचा तो देखा की जहान्वी और पिंकेशभाई बात कर रहे थे, मेरी और पिंकेशभाई की नजर मिली तो उन्होंने मेरी और स्माइल की तो मेने भी स्माइल की, पिंकेशभाई को कही देखते हुए प् कर जहान्वी ने भी मेरी और देखा, उसने भी मुझे स्माइल दी, पर मेने कोई रिएक्शन नहीं दिया (दरवाल जहान्वी ने इतने दिनों बाद देखा था तो अनायास hi उसके चेहरे पर शिव को देख कर स्माइल आ गयी थी)





मेरे मान में उसके प्रति गुस्सा था, उसकी स्माइल में भी मुझे दिख रहा था की वो मुझे चिढ़ा रही है, जैसे कह रही हो, “देखा बच्चू मेरा पावर” मुझे उस पर इतना गुस्सा आ रहा था की में उनकी और न जा कर सीधा hi चला गया, और एक माकन में जहा काम चल रहा था वह घुस गया.

जहान्वी : (गुस्से में मुँह बिगड़ते hue)Attitude तो देखो साहब के, जैसे वो मालिक है. (पिंकेश कुछ नहीं बोलै, बोलता भी क्या)

पंखेष्भाई : जाने दीजिये न मैडम, अभी छोटा है.

जहान्वी : पता नहीं अपने आपको क्या समझता है, तुम यहाँ खड़े है तो एक बार बात करने की तमीज़ नहीं है, कमसे काम नमस्ते भी नहीं कर रहा, वैसे कितने दिन बाद जनाब के दर्शन हुए है?

पिंकेश : दो तीन दिन हुए होंगे मैडम, में समजता हु उसे.

जहान्वी : में ऊपर जा रही हु, भेजो उसे, में भी तो देखु किस बात की अकड़ है. (पिंकेश क्या बोलता, वो चुप चाप शिव की और चला गया, और जहान्वी ऊपर बने ऑफिस की और)

पिंकेश : (अंदर दाखिल होते hue)Shiiiv.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ha पिंकेश भाई.

पिंकेशभाई : यार, क्यों ऐसा करते हो?

शिव : (मुस्कुराते हुए hi)Kya हुआ भाई?

पिंकेश : मैडम वह कड़ी थी तुमने देखा था न, फिर काम से काम विश hi कर देते, नमस्ते तो बनता है न, वो नाराज है, बुला रही है तुम्हे.

शिव : मेरी तरह वो भी यहाँ काम सिखने आयी है, बॉस नहीं है वो मेरी, में क्यों कहु उसको नमस्ते. (पता नहीं शिव को क्यों गुस्सा आ रहा था, कही न कही वो अपनी मुसीबत के लिए जहान्वी को hi जिम्मेदार मान रहा था, उसे लग रहा था की वो उसकी किश का बदला ले रही थी)

पिंकेश : वो बॉस न सही पर बॉस की बेटी तो है, उनसे क्या पन्गा करना, जाओ जरा मिल लो उन से, ऑफिस में बुलाया है.

शिव : ठीक है, जाता हु.
 
मकरसंक्रांति की छुट्टिओ की वजह से लेट हुआ है, में लिख रहा हु.
 
अपडेट 145

में आगे वाली ऑफिस की और चला गया, मेने देखा की वो बालकनी में hi कड़ी थी और मुझे देख रही थी, मेरे अंदर गुस्सा भरा हुआ था, तो में उसे देखना भी नहीं चाहता था, मेने नज़ारे फेर ली और माकन के अंदर दाखिल हो गया. ऊपर गया तो वो अभी भी बालकनी में hi कड़ी थी, उसने मुद कर मेरी और देखा, वो जिस तरह से कड़ी थी उसके कूल्हे मेरी और थे, सुडौल भरे हुए कूल्हे देखने लायक थे, मेरी नजर उसके कूल्हों पर तिकी थी, उसने भी ये देखा की में उसके कूल्हों को देख रहा हु तो वोपालती, और मुझे देखने लगी, वो जिस तरह से देख रही थी जैसे उसे अपने आप पर बड़ा घमंड हो, जैसे में उसके हुस्न के जाल में फंस गया हु, उसके नखरे देख मुझे और गुस्सा आ रहा था, मान में हजार गालिया दे रहा था, मेने रूडली कहा

शिव : क्या है?

जहान्वी : (वो रूम में आयी और शिव को देखने लगी, वो जिस तरह से बात कर रहा था उसे अजीब लगा, उसको ऐसे बात करते देख उसको भी ऐटिटूड आ गया, वो कोई ऐरी गैरी लड़की नहीं थी, उसने भी उसी तरह जवाब दिया) ये क्या बदतमीज़ी है, इस तरह से बात करता है कोई.

शिव : में यहाँ तमीज़ सिखने नहीं आया हु, क्यों बुलाया है ये बताओ? (मेने वैसे hi उखड़े स्वर में जवाब दिया)

जहान्वी : तेवर तो देखो, तुम समझते क्या हो अपने आपको, में यहाँ के मालिक की बेटी हु, तुम्हारी तरह फर्तीचर नहीं हु जो इस तरह से बात कर रहे हो, खा थे इतने दिन? (उसने भी रूडली hi पूछा, वैसे इतने दिनों से वो शिव को मिस कर रही थी, उसने सोचा था की वो शिव से दोस्ती करेगी, वो हमेशा उसके बारे में सोचती रहती थी, पर शिव का ऐसा बेहेवियर देख कर उसको भी गुस्सा आ रहा था)

शिव : तुमसे मतलब, मेने कितनी बार कहा है की मेरे मामले में अपनी तंग मात घुसाओ, तुम्हे जो भी कहना है पवनसीर से कहना, न में तुम्हारा नौकर हु न तुम्हारे बाप का.

जहान्वी : किस बात का घमंड है तुम्हे, भगवन ने अच्छी सकल क्या दे दी, खुद को तिस मर खा समाज रहे हो, में चहु तो तुम्हे रस्ते का भिखारी बना सकती हु, समजे (उसने भी गुस्से में बोल दिया)

शिव : वो तो तुम कर hi रही हो, एक किश क्या कर दी, तुम तो बर्बाद करने पर उतर आयी, अगर मेरे साथ कुछ करती तो मुझे कोई अफ़सोस न होता, पर मेरी वजह से तुमने दुसरो को परेशानी में दाल दिया है.

जहान्वी : (वैसे तो शिव ने क्या बोलै उसे कुछ समाज hi नहीं आया, पर वो गुस्से में थी तो उसने उस बात पर ध्यान hi नहीं diya)Sirf किश, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की, तुम्हारी औकात क्या है जो तुम मुझे किश करो, मेने सोचा की अनाथ है तो बक्श देती हु, पर तुम उस लायक नहीं हो, ऐसे hi अनाथो को दुनिया हरामी नहीं बोलती. (वो भी गुस्से में थी तो जाने क्या क्या बोल रही थी)

शिव : (उसका भी गुस्सा बढ़ता जा रहा था) अब तुम्हे जो करना था वो तो तुम कर hi चुकी हो, वैसे भी अब कुछ रहा नहीं बिगड़ने को, तुम्हे गुस्सा है न की मेने तुम्हे किश की, जा की थी किश, अभी भी करूँगा, जा जो उखाड़ना है उखड ले. (कहते हुए वो जहान्वी की और बढ़ा)

जहान्वी : दो कदम पीछे हैट ते हुए, देखो, अपनी हद में रहो, उस वक़्त मेने तुम्हे हलके में छोड़ दिया था, अब अगर कुछ किया न तो देख लेना.

शिव : तुम्हारे लिए वो मामूली बात होगी (वो अपने अनाथालय की बात कर रहा था) हमारे लिए वो हमारी जिंदगी है, हमारा सहारा है, तुम आमिर लोग, क्या जानो हमारी तकलीफो को, तुम्हे सबकुछ बैठे बिठाये मिल गया है तो घमंड है तुम्हे, आज तेरी साड़ी अकड़ निकलता हु, फिर देखता हु तू क्या करती है.

जहान्वी : (उसको अपनी और बढ़ता dekh)Me तुम्हे चेतावनी दे रही हु शिव, अच्छा नहीं होगा, में कह देती हु.

शिव : (पता नहीं क्यों पर मेरे दिमाग ने जैसे काम करना hi बंद कर दिया था, मुझे बस उस पर गुस्सा आ रहा था, में उसकी और बढ़ा, वो पीछे खिसकी पर पीछे दीवाल आ गयी)

जहान्वी : वही रुक जाओ, में चिल्लाऊंगी.

शिव : (उसके ऊपर तो जैसे बहुत सवार tha)Chillayegi है, देखता हु में कैसे चिल्लायेगी (में उसके नजदीक गया और उसके होठो को जोरोसे चूसने लगा, वो मुझे धक्का दे रही थी, मुझे मर रही थी, पर में नहीं रुका और उसको किश करता रहा, धीरे धीरे उसका जोर कमजोर होने लगा, वो धक्का तो दे रही थी पर हलके से, मार भी रही थी पर हलके से, थोड़ी देर जोर जोर से होठो को चूसने के बाद में रुका और उसको देखने लगा, उसने गुस्से से मुझे देखा और मुझे धक्का देने लगी, पर मेने उसे इतनी मजबूती से पकड़ा था की वो दूर नहीं हुई. उसने मेरी और से नज़ारे घुमा ली)

जहान्वी : छोडो मुझे, जानवर कही के. (भले उसने गुस्से से बोलै था पर आवाज धीमी थी, में फिर उसकी और झुका तो उसने अपना मुँह दूसरी और फेर लिया, और जोर लगा के मुझसे छूटने का प्रयास करने lagi)Chhoooooodo (वो गर्दन इधर उधर घुमा रही थी और मुझे किश नहीं करने दे रही thi)Uuuuhh, ऊऊह्ह्ह्ह. क्या कर रहे हो, उउउउउउउह पछताओगे तुम चूऊऊऊदो. (वो चिल्ला नहीं रही थी, वो धीमी अवाजमे hi बोल रही थी)

शिव : वैसे तुम्हारे हॉट बहोत स्वादिस्ट है (उसने मुझे घर कर देखा, पर मेने उसका फायदा उठालिया और फिर से उसके होठो को चूसने लगा)

जहान्वी : उम्मम्मम्म उम्मम्मम्म, (जब मेने उसे फिर छोड़ा तो वो हांफ रही थी, मेने उसके भरे हुए स्तन को देखा और उसके स्तन को दबा diya)Shiiiiiiv, क्या बदतमीज़ी है, छोड़ूऊऊओ. (पता नहीं पर वो चिल्ला नहीं रही थी बस धीमी आवाज में मुझे चेतावनी दे रही थी)

शिव : (एक हाथ से उसके कूल्हे को मसलने लगा और दूसरे हाथ से उसके स्तन को, वो अभी भी छूटने का प्रयास कर रही थी पर मुझे लग रहा था जैसे वो इतना ज्यादा प्रयास नहीं कर रही है, उसके स्तन और भरे हुए कूल्हों को में दबा रहा था तो मेरा लुंड खड़ा हो गया, और में उसे उसकी छूट वाले भाग पर दबा के धक्के देने लगा, वो अपनी नजर चुराते हुए मुझे घर रही थी)

जहान्वी : (शिव के ऐसा करने से वो गरम हो रही थी, वैसे तो वो भी यही चाहती थी पर ऐसे नहीं जैसे शिव कर रहा था, शिव उसके साथ जबरदस्ती कर रहा था जो उसे बिलकुल गवारा नहीं था, फिर भी उसके द्वारा स्तन और कूल्हे दबाने से वो गरम हो रही थी और साथ में अपनी छूट पर हो रहे लुंड के प्रहार से वो और पिघल रही थी, पर फिर भी कभी कभी वो उस से छूटने का प्रयास कर रही थी, हलाकि उसमे कोई दम नहीं था, वो अपने चेहरे से नाराजगी दिखा रही थी, उसे खुद आश्चर्य हो रहा था की वो चिल्ला क्यों नहीं रही है, अगर शिव सचमे उसके साथ जबरदस्ती कर रहा है तो उसे चिल्लाना चाहिए, पर उसकी आवाज तो धीमी हो गयी थी, जैसे कोई सुन न le)Chhodo मुझे शिव, शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : तुमने जो किआ है उसका बदला तो तुम्हे मिलना hi चाहिए (कहते हुए मेने दोनों हाथो से उसके दोनों स्तन को मसल दिया)

जहान्वी : अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है Shiiiiiiiiiiiv. (उसके चेरे पर नाराजगी थी, गुस्सा नहीं था)

शिव : तुम्हे दर्द हो रहा है, और जो तुमने किआ, उस से हमें कितनी तकलीफ हो रही है पता भी है?

जहान्वी : अह्हह्ह्ह्ह (वो दर्द से tadpi)Mene क्या किहा हाइइइइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह?

शिव : हमारे अनाथालय को बर्बाद करना चाहती हो और पूछ रही हो क्या किआ है.

जहान्वी : (उसके सख्त हाथो से स्तन जिस तरह से मसाले जा रहे थे उसे दर्द हो रहा था, उसको शिव के सब्द सुनाई भी नहीं दे रहे the)Aaahhhhhh, नहीं अह्ह्ह्हह्हह (उसकी आंख में आंसू आ गए) अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : (मेरी नजर उसके चेहरे की और गयी तो देखा उसकी आँखों से आंसू निकल रहे है, मेने फ़ौरन उसे छोड़ दिया, वो वही दीवाल के सहारे बेथ gayi)Ab आंसू निकल रहे है, इतने सरे बच्चो को बेघर करने से पहले नहीं सोचा.

जहान्वी : (दर्द की वजह से और अपने साथ हुई इस जबर दस्ती की वजह से उसे कुछ समाज में नहीं आ रहा था, वो बस रो रही थी, जिंदगी में पहली बार उसके साथ ऐसी बदसलूकी हुई थी, वो बस रो रही थी)

शिव : मेरे एक किश करने से तुम्हे अगर इतना बुरा लगा था तो मुझे मार लेती, या मुझे पुलिस के हवाले कर देती, जो करना था मेरे साथ करती, पर तुमने अनाथालय के सरे बच्चो को सजा दी, आज मेने जो किआ वो भले hi गुस्से में किआ, पर मुझे कोई गिला नहीं है, तुम्हे अगर कम्प्लेन करनी है तो कर दो, जो करना है मेरे साथ करो, चाहे मुझे फांसी पर चढ़ा दो, पर अनाथालय के बच्चो को छोड़ दो. (कहते हुए वो वह से निकल गया)

जहान्वी अभी भी वह बैठी रो रही थी, वो कुछ भी समझने की हालत में नहीं थी, वह बैठे बैठे वो काफी देर आंसू बहती रही, उसे शिव के द्वारा कही गयी बाते याद आने लगी, पर उसे समाज में नहीं आरहा था की उसने ऐसा किआ क्या है. क्यों की जैसा शिव कह रहा है वैसा तो उसने कुछ भी नहीं किआ था, यहाँ तक की उसने शिव की किश का जीकर भी किसी से नहीं किआ था. वो उठी और अपनी हालत ठीक की और गाड़ी ले कर घर की और निकल गयी. जब वो घर पहुंची तो उसने काफी हद तक अपने आपको संभल लिया था, पर फिर भी उसकी माने उसे डेक कर पूछा.

शिखादेवी : क्या हुआ बेटी?

जहान्वी : (सँभालते hue)K कुछ नहीं मम्मी, बस थक गयी हु, में अपने कमरे में जा रही हु. (वो नज़ारे चुराते हुए अपने कमरे की और बढ़ गयी, दरवाजा बंद कर के फिर से रोने लगी, उसके साथ जो हुआ था उसका उसे दुःख था पर उस से ज्यादा ये शिव ने किआ था, ये सोच सोच कर hi उसे रोना आ रहा था, कहा वो शिव से दोस्ती करने का सोच रही थी और कहा शिव ने उसके साथ ऐसा सलूक किआ था, वो काफी देर तक पड़ी पड़ी रोटी रही)

ऑफिस से निकलने के बाद में पिंकेशभाई और दूसरे लोग जो काम कर रहे थे वह चला गया, झुमरी और भोली ने भी उस से बात करने की कोशिस की पर उसने कोई ज्यादा जवाब नहीं दिया तो वो भी समाज गयी की अभी बात करना ठीक नहीं है तो वो अपने काम में लग गयी, शाम को में आधे घंटे पहले hi निकल गया, मेने देखा की जहान्वी की कार भी नहीं है, सच में अब मुझे बुरा लग रहा था, मुझे अपने गुस्से पर काबू करना चाहिए था, पर जिस तरह की मुसीबत अनाथालय पर आयी थी में अपना आप खो बैठा था. मुझे ये भी नहीं पता था की अब वो क्या करेगी, क्यों की अगर ऐसा वैसा कुछ हुआ तो में तो मुसीबत में फसूंगा hi पर साथ में अनाथालय भी ज्यादा मुसीबत में बस जायेगा, पर जो होना था वो हो चूका था.

घर गया तो भी मेने किसी से बात नहीं की, स्टेडियम में भी मेरा ध्यान नहीं लग रहा था, जूही ने भी पूछ की क्या हुआ पर क्या बताता तो में तबियत का बहाना बना दिया, वह से भी हम जल्दी आ गए. रात को फिर से दोनों दीदी मेरे साथ सोई पर मेरा कुछ भी मान नहीं था, तो में शांति से सो गया, उन्होंने भी शायद मेरी हालत भाप ली थी तो वो भी सो गयी.

आज संडे था तो स्कूल जाना नहीं था, में सुबह सुबह घर के आस पास दौड़ लगता रहा.

सरिता : इससे क्या हुआ है? (लता को)

लता : पता नहीं, शायद पेपर को ले कर परेशान हो, हमने भी सारा कमरा धुंध लिया पर कुछ नहीं मिला, पता नहीं क्या होगा?

सरिता : में बात करती हु उस से.

लता : रहने दे, अभी वो परेशान है, रात को बात करते है.

दोपहर को में साइट चला गया, आज एक माकन की छत भरनी थी. मुझे दर लग रहा था पर अभी तक और कुछ भी हुआ नहीं था, मेने ऐसे hi भार्गविजई को भी फ़ोन किआ था पर सब नार्मल hi था, मतलब जहान्वी ने कोई कम्प्लेन तो नहीं की थी. में सोचने लगा की इस बार भी वो कुछ बड़ा करेगी क्या? पर जो भी हो, जो मेने उसके साथ किआ था वो किसी भी तरह से सही नहीं था, न उसको पहली बार किश करना न दूसरी बार इस तरह का बर्ताव करना, मेने सोच लिए था की मुझे उस से बात करनी चाहिए और माफ़ी मांगनी चाहिए. मेने देखा की जहान्वी नहीं आयी थी, काम चल रहा था तो मला और प्रकसराओ दोनों वह देखने चले आये थे, थोड़ी देर बाद पवनसीर भी आये थे. मेने सब को hello किआ तो पवनसीर ने मुस्कुरा कर जवाब दिया पर उन दोनों ने जैसे मुझे सुना hi नहीं.

कमलनाथ : और पवन, क्या चल रहा है?

पवनसीर : सब शांति है है फील हल तो.

कमलनाथ : सुना है सूर्यदेव का कॉन्ट्रैक्ट इस बार डायरेक्ट दिया जानेवाला है, न कोई टेंडर न और कुछ. (वो अपनी पेनी निगाह से पवन को देख रहा था, पवन भी अपने पाती नहीं खोलना छह रहा था)

पवनसीर : मुझसे ज्यादा तो आपको hi पता होगा, इन मामलो में आप ज्यादा जानकारी रखते है.

कमलनाथ : (वो समाज रहा था की वो इस बारे में बताना नहीं चाहता) मेने तो ये भी सुना है की उनकी जमीं छुड़वाने में तुमने मदद की थी तो वो तुम्हे hi कॉन्ट्रैक्ट देने वाले है. (कमलनाथ ने सीधा hi कह दिया, जिस की बात सुन कर पवन हिल गया, फिर भी उसने अपना बचाव किआ)

पवनसीर : पता नहीं आप क्या कह रहे है, क्यों की मेने तो उनकी जमीं नहीं छुड़ाई, वो इत्तफाकन पुलिस की वजह से hi सब कुछ हुआ था.

प्रकसराओ : क्यों जूथ बोलते हो यार, हमसे क्या छुपाना, पार्टनर है हम, अखबारों में भी आया था की तुम्हारा ये टट्टू उसमे शामिल था. (उन्होंने मेरी और इस्सर किआ, मुझे टट्टू बुला रहा था तो मुझे गुस्सा आया पर में कुछ नहीं बोलै)

पवनसीर : मुझे लगता है मीडिया ने कुछ बढ़ा चढ़ा कर hi बात कर दी थी, मेरी शिव से बात हुई थी, वो तो बेचारा सिर्फ साथ में था, जो कुछ भी किआ था वो इंस्पेक्टर भार्गवी ने hi किआ था, आपतो जानते है की मीडिया वाले क्या क्या छाप देते है.

कमलनाथ : (मेरी और देख kar)Waise भी इसे देख कर लगता नहीं की ये कुछ कर सकता है, अभी बच्चा है, और अगर किया है तो भी इससे पता नहीं है की उसने किनलोगों से दुश्मनी मोल ली है.

शिव : (शांति se)Muje सच में नहीं पता सर, मेने तो कुछ भी नहीं किआ था, और वैसे भी वो लोग तो जेल में है, तो अब कैसा खतरा.

कमलनाथ : बच्चे, अभी तुम्हारे दूध के दन्त भी नहीं टूटे है, तुम्हे क्या लगता है की वो अकेले होंगे, उनके साथी भी होंगे, तुम्हे लगता है की वो चुप रहेंगे?

शिव : मुझे नहीं लगता की उनके साथी होंगे, क्यों की उनकी औकात इतनी नहीं हो सकती, है उनका मालिक जरूर हो सकता है, जिनके इससरए पर वो सब कर रहा था. (कमलनाथ ने घर कर देखा, में मुस्कुराया)

कमलनाथ : (उसने भी अपने आपको संभाला, और muskuraya)Ho सकता है, संभल कर रहना, मेने सुना है की तुम बेघर होनेवाले हो?

पवनसीर : किस बारेमे बोल रहे है आप?

कमलनाथ : तुम्हे नहीं पता? वो अनाथालय की जमीं अवैध तरीके से इस्तेमाल हुई है, उसका कोई दस्तावेज नहीं है, न उसका कोई रिकॉर्ड है, तो सर्कार की तरफ से नोटिस गया है इन्हे, क्यों तुम्हे नहीं पता? ये तो तुम्हारा खास है न.

पवनसीर : ये सही है शिव? तुमने बताया नहीं मुझे.

शिव : (कमलनाथ की और देख कर फिर मेने पवनसीर की और dekha)Mene अनाथालय के ट्रस्टी को बता दिया है, वो कागजात ले कर आनेवाले है. (कुछ सोच कर मेने जूथ बोलै, और मेने देखा की मेरे जूथ का फ़ौरन असर हुआ, कमलनाथ और प्रकाशराओ, दोनों के चेहरे पर सिकन आयी, उन्होंने एक दूसरे को देखा, ये मेने जान बुज कर बोलै था, क्यों की मुझे अब लगने लगा था की जहान्वी का इन सब में हाथ नहीं होसकता, तो जैसा की काव्यजि ने बताया था ये इन दोनों का hi काम हो सकता है और उनके चेहरे देख कर मेरा अनुमान सही साबित हुआ, मुझे फिर से जहान्वी की याद आ गयी, मेने ख़म खा उसके साथ बदतमीजी कर दी, क्यों की उसने अपने बाप को भी नहीं बताया था कुछ, क्यों की अगर बताया होता तो अभी वो मेरे साथ इस तरह से बात न कर रहा होता, मुझे सच में जहान्वी के लिए दुःख हुआ)

कमलनाथ : ये तो अच्छी बात है, चलो प्रकाशराओ चलते है, (पवनसीर ko)Ye सब काम निपट जाये तो हमे मश्ग कर देना.

पवनसीर : ठीक है. (वो दोनों चले गए) तुमने बताया नहीं शिव?

शिव : क्या बताता सर, मेने काव्यजि से बात की है, उन्होंने ट्रस्टी को बात की पर कागजात नहीं मिले, पता नहीं क्या होगा?

पवनसीर : पर तुमने अभी तो कहा की कागजात मिल गए है.

शिव : वो मेने जूथ बोलै था, काव्यजि को लगता है की इन सबके पीछे इन दोनों का हाथ है, तो में वही देखना छह रहा था, और मेरा शक यकीं में बदल गया, ये इन्ही का काम है.

पवनसीर : मुझे बताना चाहिए था न, मेरी भी पहचान है उस ऑफिस में.

शिव : काव्यजि ने बात की थी, वही से पता चला है की इनकी बेटी वह पैसे दे गयी है. अगर कागजात मिलजाए तो मामला सुलझ सकता है, इनके कहे अनुसार सरे रिकॉर्ड गायब है, ये इन्होने hi करवाया है.

पवनसीर : है, ये इन्ही का काम होगा, वो सूर्यदेव जी वाले कॉन्ट्रैक्ट का बदला लेना छह रहे है तुमसे.

शिव : अगर बदला लेना था तो मुझसे लेते, दूसरे अनाथबच्चों को क्यों बेघर कर रहे है.

पवनसीर : तुम चिंता मात करो, कोई हल निकलते है. एक बार मनीषजी से भी बात कर के देख लो, वैसे भी उनके साथ तुम्हारी अच्छी पहचान है.

शिव : मनीषा जी, वो क्या मदद कर शक्ति है?

पवनसीर : अरे वो पॉलिटिकली और एकनॉमिकल्ल्य बहोत साउंड है, उनकी भी अच्छी पहुंच है, वैसे तुमने काव्यजि से बात की है वो भी अच्छा hi किआ, पर मेरा सुझाव है की एक बार मनीषजी से भी बात कर लो, और चिंता करने की जरुरत नहीं है, हल निकल आएगा.

शिव : ठीक है, बात करता हु.

पवनसीर : में भी चलता हु, काम खतरम हो जाये तो बता देना.

वो भी चले गए, में फिर से जहान्वी को याद करने लगा, मुझे उसके लिए बहोत बुरा लग रहा था, मेने पिंकेशजी के पास गया और उनसे जहान्वी का नंबर लिया, और उन्हें मश्ग कर दिया.

शिव : “में बहोत दिलगीर हु, मेने जो भी किआ वो मुझे नहीं करना चाहिए था, एक ग़लतफहमी के चलते में ये गलती कर बैठा, में आपको माफ़ करने के लिए नहीं कह रहा, आपको जो सजा देनी है वो मुझे मजूर है, में फिर से कोई बदतमीजी नहीं करूँगा, ी म रियली सॉरी”

मेने मश्ग भेज दिया, में अब थोड़ा बेहतर फील कर रहा था. वह जहान्वी सो रही थी तो उसने मश्ग नहीं पढ़ा, रात को ठीक से नींद नहीं आयी थी तो वो अभी सो रही थी. जब वो उठी तो बिस्टेर में hi लेती रही, एक बार फिर से उसके सामने शिव का वो बर्ताव आ गया, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो क्या बोल रहा था, उस ने याद करने की कोशिस की की शिव क्या बोल रहा था, वो उसे किसी बात के लिए जिम्मेदार बता रहा था, क्या था वो? वो सोचने लगी.

जहान्वी : (मान में) वो बोल रहा था की मेने उसके किश करने की वजह से कुछ किआ था, पर मेने तो कुछ भी नहीं किआ था, वो क्या बोल रहा था, है, मेने उसको सजा न दे कर अनाथालय के बाकि लोगो को सजा दी थी, पर कैसे, मेने तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किआ था, तो वो क्यों मुज पर गुस्सा था, वो जो कुछ भी हो पर उसने मेरे साथ कैसा दुर्व्यवहार किआ, उसने कितनी सख्ती से मेरे स्तन दबाये, शहहह अभी भी दुःख रहे है (उसने हलके से अपने स्तन को छुआ, जहा अभी भी दर्द था, वो कड़ी हुई और आईने के सामने कड़ी हो गयी, उसने अपनी t-shirt निकली, वो ब्रा के ऊपर से अपने स्तन देखने लगी, वह शिव के उंगलिओ के निशान बने थे, वह त्वचा लाल हो गयी थी, उसने हलके से फिर उसे दबाया तो उसे दर्द hua)Kaisa जानवरो जैसा सुलूक किआ है उसने, सरे लड़के एक जैसे hi होते है, बस लड़कीओ पर इस तरह अपना दम दिखते है, क्या हम इंसान नहीं है, ऐसा कर के क्या मिलगया उसे? अगर अभी में ये नीसाण पुलिस को दिखा दू तो वो एक मिनट में अंदर हो जायेगा. (तो कर न, उसके मान ने कहा) क्या मुझे कम्प्लेन कर देनी चाहिए? (वो वही कड़ी किसी गहरी सोच में दुब gayi)Complain कर देनी hi चाहिए (उसने अपनी ब्रा निकली तो उसको अपने स्तन पर शिव के दोनों पंजी नजर आये, वो याद करने लगी की कैसे उसने उसके स्तन पकड़े थे, एक बार के लिए तो वो शर्मा gayi)Ganda कही का, ऐसे कोई लड़की के साथ पेश आता है, देखो तो, कैसे नीसाण बन गए है, वह भी तो निशान नहीं बन गए (उसने अपना लेहंगा निकला और पंतय भी, वो अब पूरी नंगी हो चुकी थी, घूम कर उसने अपने नितम्ब देखे, पर वह नीसाण नहीं थे, शायद जीन्स की वजह से, जब वो अपने नितम्ब देख रही थी तो उसकी निगाह अपनी गांड के छेड़ पर पड़ी, उसके अंदर एक अजीब सी हलचल उठ गयी, उसने अपने कूल्हे फैलाये तो गांड के छेड़ के साथ उसे अपनी छूट भी नजर आयी, जहा रास बहार तक आ गया था, उसे यकीं नहीं हुआ तो उसने ऊँगली से छूट के छेड़ को छुआ तो सच में वह चिकना रास निकल रहा था, उसे अपने आप पर गुस्सा आया, वो खुद को hi दन्त ने lagi)Usne तुम्हारे साथ ऐसा व्यव्हार किआ है और तुजे मज़ा आ रहा है? (उसने ऊँगली थोड़ी अंदर डाली तो उसकी आंखे बंद हो गयी, और साथ में उसे याद आया की कैसे शिव का वो कड़क अंग उसकी योनि पर ठोकर मार रहा था, उसने ऊँगली और अंदर सरकायी,) शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव. (उसने फिर अपने आप को danta)Sharam आणि चाइये तुजे, वो तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर रहा है और उसे उसको याद कर के रास बहा रही है. दिल: नहीं यार, वो कितना हैंडसम है, शहहहहह अगर वो प्यार से कहता तो में मन भी न करती. मान : पागल हो गयी है तू, अभी पुलिस को फ़ोन कर. दिल : क्या कहूँगी, ख़म खा बदनामी होगी, वैसे भी उसने कुछ किआ भी नहीं. मान : कितनी बेशर्म हो गयी है तू, क्या तू चाहती है की वो तेरे साथ कुछ करे (वो नंगी hi बीएड में लेट गयी थी, और ऊँगली अभी भी अंदर बहार कर रही थी) दिल : शह्ह्ह्ह हाआआ शह्ह्ह्ह में चाहती हु की वो करे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. मान : पागल मत बन, फ़ोन उठा और कम्प्लेन कर. (उसने चिढ़ते हुए फ़ोन उठाया, जैसे hi लॉक खोला तो सामने मश्ग दिखा जो शिव का था, उसने फ़ौरन मश्ग ओपन किआ, और मश्ग पढ़ने lagi)Dil : देखो वो सॉरी कह रहा है, कोई गलतफैमी की वजह से हुआ है ये. मान : जो भी गलतफैमी हो उसने जो किआ बुरा किआ, तू कम्प्लेन कर. दिल : नहीं यार, एक बार बात करने दो, उसके बाद देखती हु. मान : तू तो गयी, तू कुछ नहीं करनेवाली, जा लेट जा उसके निचे तेरा कुछ नहीं होनेवाला.

दिल : है, लेट जाउंगी, तू दफा हो यहाँ से. (जहान्वी ने टाइम देखा तो काफी टाइम हो गया था, तो आज तो जाना संभव नहीं था, उसने कल बात करने का निश्चय किया)

जहान्वी : सजा तो तुम्हे जरूर मिलेगी मिस्टर, शर्म नहीं आयी ऐसी हरकत करते हुए. (वो मुस्कुरायी और बाथरूम में चली गयी)

शाम को स्टेडियम से निकलते हुए मेने जूही से कहा की वो मुझे मनिषामदाम के वह छोड़ दे, उसने मुझे गुस्से से देखा, में मुस्कुराया

शिव : अनाथालय के लिए बात करनी है, क्यों गुस्सा हो रही हो?

जूही : सब दिखती है, शिवाय मेरे.

शिव : तुम तो सबसे पहले दिखती हो, पर अभी कण्ट्रोल में हु, जिस दिन कंटोल खो दिया तो चिल्लाओगी. (मेने मुस्कुराते हुए कहा, मेरी बात का मतलब समाज कर वो शर्मा गयी, उसने स्कूटर स्टार्ट किआ और बेथ गयी, में भी पीछे बेथ गया, जैसे hi बहार निकले मेने उसकी कमर को पकड़ा और हाथ ऊपर ले जाने लगा तो वो घबरा गयी)

जूही : क्या कर रहे हो, गिर जायेंगे.

शिव : तुम भी तो यही चाहती हो की गिर जाये.

जूही : में कुछ नहीं चाहती, सीधे बैठो, (रास्ता शूम सं था तो मेने उसके स्तन को दोनों हाथो में भर कर हलके से dabaya)Shhh क्या कर रहे हो, शर्म करो, शह्ह्ह्ह शीइइइइव रस्ते पर है. (मुझे हसी आयी और मेने अपने हाथ हटा लिए (जूही: उसके हाथ हटाने से मुझे अच्छा नहीं लगा, सचमे शर्म आ रही थी पर अच्छा भी लगा था, मेने हलके गुस्से से kaha)ghar में तो दूर भागते हो और यहाँ रस्ते पर सब कर रहे हो, घर में होते तो बताती.

शिव : उसका भी मौका दूंगा, अभी ये अनाथालय का मामला सुलझ जाने दो, उसके बाद में तुम्हारी साडी शिकायत दूर कर दूंगा.

जूही : (नखरे se)Bade आये शिकायत दूर करनेवाले, तयारी करो, स्टेट लेवल जाना है, वैसे भी हमारे लिए मुश्किल होगी, हम किसी भी अकादेमी से नहीं जुड़े हुए है, डायरेक्ट एंट्री मिलने में दिक्कत होगी, तो तयारी पर ध्यान दो, अगर कुछ कर पाए तो hi किसी का सहारा बन पाओगे समजे.

शिव : सच कहु जूही, मुझे न ऐसा लग रहा है की मेरी कुंडली बहोत बलवान है, में चाहे किसी भी रह चालू, किसी भी परेशानी का सामना करू, तुम सब मेरी ढल बन कर कड़ी हो जाती हो, सच में में जो कर रहा हु गलत कर रहा हु, पर मुझे लगता है शायद मेरी कुंडली है ऐसी है, तुम सब कुंडली के गृह बन कर मेरा भाग्य सवारने आ गयी हो.

जूही : ज्यादा जस्टिफाई मत करो खुद को, वो तो में अच्छी हु की ये सब एक्सेप्ट कर रही हु, पता नहीं कितने गृह इकठ्ठा कर के रक्खे है, गृह इकठ्ठा करते करते ये न हो की कोई ग्रह निकल जाये.

शिव : पर निकला तो नहीं न.

जूही : ज्यादा ऊधो मात, तुम पर तरस आता है, इसीलिए कुछ नहीं कहा.

शिव : वो hi तो में कह रहा हु, मेरा भाग्य hi ऐसा है, चाहे वजह कोई भी हो पर सब गृह मेरी कुंडली में सही स्थान पर बैठते जा रहे है. (हम दोनों मनीषजी के घर पर पहुंच गए, में निचे उतरा)

जूही : ये भी तुम्हारा गृह है? (मेने मुस्कुरा कर है में इस्सर kia)Sudhar जाओ, (उसने मुस्कुराते हुए स्कूटर moda)Kal मिलते hai(Mene हाथ हिला कर bye कहा, तो वो मुस्कुराते हुए चली गयी)

मेने चौकी दर से कहा की मुझे मनीषजी से मिलना है तो उसने फ़ोन पर बात की और में अंदर चला गया, मेने बेल बजायी तो किसी ने दरवाजा खोला, ये उनकी नौकरानी थी, उसने मुझे अंदर आने को कहा और सोफे पर बैठने को कहा. थोड़ी देर में मुझे सामने से मनीषजी आती दिखाई दी. में खड़ा हो गया.

शिव : नमस्ते मैडम, कैसी है आप?

मनीषा : (मुस्कुराते hue)To आखिर हमारी याद आ hi गयी. कहा गायब हो तुम?

शिव : सॉरी, वो थोड़ा बिजी हो गया था.

मनीषा : तुम्हे पता है न, अभी कई गांव घूमने है?

शिव : पता है मैडम, पर आप जानती है की में हर वक़्त ये नहीं कर सकता.

मनीषा : (वो दूसरे सोफे पर बेथ गयी) सरबत पिओगे की दूध? (उनके सवाल से में झेप गया, उन्होंने भी अपनी आवाज काम कर के bola)Besharam, वैसे नहीं पूछ रही हु, वो घर पर है (सूर्यदेव), और वैसे भी तुम्हे कहा इंट्रेस्ट है मुज में.

शिव : सरबत चलेगा. (उन्होंने आवाज दे कर शरबत मंगवाया) मेने ऐसा कब कहा मैडम, पर आप समाज सकती है, मुझे थोड़ा अजीब लगता है, आप सब इतने बड़े लोग हो, और में आपके साथ.

मनीषा : बहोत दिनों बाद दिखे हो, सूर्य भी पूछ रहे थे, क्यों? (उन्होंने दूसरी और देख कर जोर से खा तो मेने भी उस और देखा तो सूर्यदेव सर आ रहे थे, में खड़ा हो गया)

शिव : नमस्ते सर, कैसे है आप?

सूर्यदेव : नमस्ते, (सोफे में अपनी पत्नी के साथ बैठते hue)Kaha गायब हो भाई, मेने मनीषा से भी पूछा था, मेने कहा था न की इसकी मदद करते रहना (मेने मनीषजी की और देखा तो वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी)

मनीषा : लगता है इससे यहाँ आना पसंद नहीं.

शिव : (झेपते hue)Nahi सर, ऐसी बात नहीं है, पर... (में बोलते बोलते रुक गया, दोनों हसने लगे, में उन दोनों को hi देख रहा था)

सूर्यदेव : में तो मज़ाक कर रहा था यार, में जनता हु, तुम्हारी भी अपनी लाइफ है, कैसी चल रही है तुम्हारी दौड़?

शिव : जूही बता रही थी की स्टेट लेवल में तरय करना है, कुछ दिनों बाद सायद जाना है.

सूर्यदेव : देखा मनीषा, मेने कहा था न, और वैसे भी तुम्हे पॉलिटिक्स में अगर आगे बढ़ना है तो खुद hi बढ़ना होगा. इसकी अपनी मंज़िल है.

शिव : नहीं सर, ऐसी बात नहीं है, में जाता हु इनके साथ भी, बस कुछ दिनों से नहीं जा पाया.

सूर्यदेव : में तुम्हे कुछ नहीं कह रहा शिव, में भी तो अपने बुसिनेस में बिजी हु, पर वो क्या है न की वो तुम पर ज्यादा भरोसा करती है, और मुझे वो सही भी लगता है, तुम साथ में हो तो मुझे भी कोई टेंशन नहीं रहती, बस इस्सलिये कह रहा था.

शिव : में जरूर कोशिस करूँगा सर, और मुझे खुसी है की आपलोग मुज पर इतना भरोसा करते हो. (शर्बत आ गया तो हमारी बात रुकी, सबने अपना गिलास उठालिया)

मनीषा : और सुनाओ, आज हमारी याद कैसे आ गयी?

शिव : नहीं मैडम, वो तो me...(Me रुक गया)

सूर्यदेव : क्यों उसे उलझा रही हो, इसने मुझे बताया की अनाथालय में कोई दिक्कत आयी है. (मेने आश्चर्य से मनीषजी को देखा, क्यों की मेने तो उन्हें कुछ भी नहीं बताया था, मेरे चेहरे पर सवालिया भाव देख कर) अरे इसमें इतना चौकने की बात नहीं है, आज वो किसी काम से ट्रेस्सेरी ऑफिस गयी थी तो उसने वह सुना तो उसने बात निकलवाई और उसे पता चला. पर मेरी एक बात समाज में नहीं आयी, अभी तक तुमने डॉक्यूमेंट की कॉपी क्यों जमा नहीं करवाई?

शिव : वो मिल नहीं रही है.

सूर्यदेव : अजीब बात है, आज की डेट में उस जमीं की कीमत hi करोडो में जाएगी, इतनी कीमती जमीं के डॉक्यूमेंट नहीं मिल रहे. (उन्होंने आश्चर्य से मेरी और देखा)

शिव : हमने ट्रस्टी से भी बात की, जानकीदासजी तो अब रहे नहीं, और उनके बेटे को इस बारेमे पता नहीं है, पहले वो मैनेजर संभालता था तो हमे भी कुछ पता नहीं है.

सूर्यदेव : मुझे लग रहा है की मला और उस मैनेजर में कोई संत गांठ है, भले hi ये अभी हुआ है पर शायद ये पहले से प्लनेड है.

शिव : जिस तरह से वो मेरे साथ बात कर रहे है उस से तो लगता है की मेने आपकी जमीं छुड़वाने में मदद की उसीका बदला ले रहे है.

सूर्यदेव : (सोच्तेर hue)Hmmm, हो सकता है, पर मुझे अभी भी ये लगता है की ये सिर्फ बहाना है, ये सब पहले से प्लनेड है, तुम्हारे वह अत्ताक्ट भी हुआ था, और जहा तक मुझे याद है उनके पीछे भी कोई डॉक्यूमेंट का hi इशू था.

शिव : जी सर, वो लोग डॉक्यूमेंट मिटा देना चाहते थे, तो ऑफिस जलने आये थे.

सूर्यदेव : उस टाइम तो तुमने मेरी मदद नहीं की थी, समजीये. मैनेजर ने ये खेल बहोत पहले से खेला हुआ है, वर्ण ऐसा कैसे हो सकता है की कोई भी डॉक्यूमेंट न हो, वो टैक्स भरता होता, या इसके रिलेटेड कोई भी कार्यवाही करता होगा तो डॉक्यूमेंट तो होने चाइये न. मुझे लगता है की वो सरे पैसे खा गया, और कोई टैक्स नहीं भरा, और ऊपर उसने कहा की भर दिए है, ट्रस्टी ने भी शायद विश्वास कर लिया था, क्यों की जानकीदास जितना तो उन्हें इंट्रेस्ट नहीं होगा, इस अनाथालय को ले कर. खैर वो जो भी हो, तुम चिंता मात करो, देखते है, किसी अच्छे वकील की सलाह लेंगे, वैसे काव्य जी को तो तुम जानते hi हो.

शिव : जी, वो hi सब मदद कर रही है.

सूर्यदेव : बस तो फिर, टेंशन मात लो, में भी उनसे बात करता हु, पहले डॉक्यूमेंट पर फोकस करते है अगर वो न मिले तो दूसरे रास्तो पर देखेंगे. और वैसे भी अब तुम बड़े हो गए हो, अपना रास्ता खुद तय कर सकते हो.

शिव : मुझे मेरी टेंशन नहीं है सर, मुझे वह के दूसरे लोगो की फ़िक्र है, वो बिछड़ न जाये इस्सलिये में कोशिस कर रहा हु.

सूर्यदेव : (मुस्कुराते हुए) हम ऐसे hi भरोसा नहीं करते तुम पर, हमे पता है की तुम एक अच्छे लड़के हो, चिंता मात करो, देखलेंगे, और है आते रहना यहाँ, अब शिकायत का मौका न देना.

शिव : जी, आता रहूँगा. (थोड़ी देर हमारी और बात हुए, उनके पॉलिटिक्स को ले कर भी, उन्होंने खाने को बोलै पर मेने मन किआ, और फिर कभी कह कर वह से घर चला गया)

कहते वक़्त भी मेने सब को ये बात बताई तो सब के शिर से थोड़ी फ़िक्र काम हुई. खाने के बाद सब अपने काम में लग गए, में हॉल में लगी जानकीदास की बड़ी सी तस्वीर के आमने खड़ा उन्हें देख रहा था. मुझे आज भी याद है, वो मुझे भिखारी के पास से यहाँ ले आये थे.

शिव : बाबा, आप तो रहे नहीं, पर आज आपका ये अनाथालय खतरे में है, कुछ तो होगा, कही तो होगा, प्लीज हमारी मादा कर दो. (मुझे वह खड़ा देख कर लतादिदी वह आ गयी)

लता : ऐसे क्या देख रहा है?

शिव : कुछ नहीं, बस ऐसे hi खड़ा हु.

लता : सब ठीक हो जायेगा, ऊपरवाला है न. ज्यादा सोचो मात, और आराम करो.

में पढ़ने बेथ गया, सब टेंशन में थे तो और कुछ तो हुआ नहीं. सुबह स्कूल गया, आज संयम और वैस्वी आपस में hi बात कर रही थी.

शिव : यार तुम दोनों ने तो मुझे साइड hi कर दिया. (वैस्वी मेरे पीछे बैठी थी)

वैस्वी : कोई साइड वाइड नहीं किआ है, तुम स्कूटर चलने में ध्यान दो.

शिव : अजीब हो तुम दोनों, न मेने कुछ कहा, न मेने कुछ किआ, फिर भी मुझे hi साइड कर दिया.

संयम : जनाब ज्यादा उड़ रहे थे तो जमीं पर ले आये, और कुछ नहीं. (दोनों हसने लगी)

शिव : में कहा उड़ रहा था, तुम दोनों hi लड़ रही थी.

संयम : उस दिन हमें छोड़ कर क्यों चले गए थे.

वैस्वी : अच्छा hi हुआ था, ये चला गया, हमे भी अपने आप को देखने का मौका मिला.

शिव : में जो करता हु सही hi करता हु.

वैस्वी : (मेरी कमर में चिकोटी काट ते hue)Bola न ज्यादा ऊधो मात.

शिव : (स्कूटर इधर उदाहर हो gaya)Shhh क्या कर रही हो, गिर जायेंगे. कोई बात नहीं, जो करना है करो, में भी गईं गईं के बदले लूंगा.

वैस्वी : बड़ा आया बदला लेनेवाला, सीधे सीधे स्कूटर चला, ड्राइवर.

(दोनों फिर मेरे मजाक उड़ाते हुए हसने लगी, हम सब स्कूल पहुंच गए, दो पहर को भी ऐसे hi मस्ती चली, दो पहर को साइट की और चला गया, वैसे भी मुझे जहान्वी से मिलना था, मिल कर सॉरी कहना था)
 
अपडेट 146

स्कूल से आने के बाद बिना खुद के लिए खाना बना रही थी, उसके मान में आया की वो घर पूछ ले की क्या हुआ, पर फिर सीधे पूछने से पहले उसने ममता को फ़ोन लगा दिया.

बिना : Hello, कैसी हो दीदी?

ममता : अच्छी हु भाभी, आप कैसी हो?

बिना : में भी अच्छी हु.

ममता : आप तो अच्छी hi होंगी न, पास जो हो.

बिना : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Pass हु, किसके? में तो अकेले रहती हु.

ममता : भले hi आप अकेले रहती हो पर आपके सहर में hi वो रहता है तो कभी भी मिल सकती हो.

बिना : ओह! शीइइइइइव, है कह शक्ति है, वैसे तो वो रोज़ स्कूल में मिल hi जाता है, पर जिस तरह आप कह रही हो वैसे मिलना काम hi होता है, वैसे भी आपकी नानन्द उसे छोड़ती नहीं, हर वक़्त उसके पीछे पड़ी रहती है.

ममता : है पर रोज़ उसे देख तो सकती hi हो न, मेरे नसीब में तो वो भी नहीं है, और जूही उसका करार बनाने के लिए पीछे पड़ी हुई है, अभी तक उन दोनों के बिच वैसा कुछ नहीं है.

बिना : वो आपको बता कर थोड़ी न करेगी, रोज़ अपने रूम में मिलती है, क्या आपको लगता है की वो अभी तक दूर रही होगी?

ममता : दूर hi है, और वजह है शिव, वो अभी दुरी बनाये हुए है, हमारी बात हुई थी तो मेने उसे पूछ लिया था.

बिना : आप दोनों के बिछ ऐसी भी बात होती है?

ममता : है, वो अपने दिल की बात मुझे बताती है.

बिना : आपके और शिव के बारे में वो जानती है? (बिना को आश्चर्य हुआ तो पूछ लिया)

ममता : नहीं, वैसे तो कभी हमारे बिछ ऐसी बात नहीं हुई, और में उसे बता भी नहीं सकती, वो क्या सोचेगी मेरे बारे में, और उसका और शिव का भी सम्बन्ध है तो में वैसे भी बता नहीं सकती. मुझे तो लगा था की ये राज़ मेरे और शिव के बिच hi रहेगा, पर क्या पता था की ये इस तरह आपके सामने आ जायेगा.

बिना : तो क्या हुआ, मेरा भी राज़ आपके सामने आया न, ये सब तो चलता रहेगा, मेने ये पूछने के लिए फ़ोन किआ था की उस अनुष्ठान का क्या हुआ, कोई तारीख तय हुई?

ममता : मेरी माँ से बात हुई थी, अभी तक तो कुछ तय नहीं हुआ, उन्होंने बताया की योगेन्द्राचाचा की फॅमिली की दिक्कत है, वो कह रही थी की शाहजी कोमा में है और चची की ऐसी हालत नहीं की उन्हें यहाँ लाया जा सके, और भी एक दिक्कत है, उसके बारेमे उन्होंने कुछ खुल कर नहीं बताया, वो बोल रही थी की पापा फिर से बाबाजी से मिलने जानेवाले है, क्यों की पूरी फॅमिली तो इकठ्ठा तभी हो सकती है जब योगेन्द्राचाचा की फॅमिली भी आये.

बिना : ये चाचाजी कहा है, कभी पहले उनके बारे में सुना नहीं, न कोई तस्वीर है घर में, ये अजीब बात है पर इतने सालो में मुझे भी पता नहीं था की एक और चाचा है.

ममता : आपकी बात करती हो भाभी, में भी भूल गयी थी, क्युकी बचपन में मिली थी, उसके बाद में तो वो गायब hi हो गए, और न घर में कोई जीकर न तस्वीर, तो मेरे दिमाग में से भी उनकी तस्वीर गायब है, में खुद नहीं जानती, तो फिर आप कैसे जानोगी.

बिना : ठीक है, अगर कुछ पता चले तो बताना.

ममता : ठीक है भाभी, और है अगर वो मिले तो मेरी याद दिलाना, कमसे काम बात तो करे.

बिना : आपके पास उसका नंबर नहीं है?

ममता : है न, पर वो फ़ोन करे तो मुझे अच्छा लगेगा. (बोलते बोलते वो शर्मा गयी)

बिना : (वो भी muskurayi)Thik है में बोलती हु उसे, अच्छ रखती हु, ख्याल रखना अपना.

ममता : आप भी, रखती हु.

फ़ोन रखने के बाद बिना कुछ देर तक सोचती रही, फिर उसने स्वर्ण को फ़ोन किआ.

स्वर्ण : Hello.

बिना : Hello स्वर्णादिदी, में बिना बोल रही हु.

स्वर्ण : अरे भाभी आप, सॉरी वो मेने अभी आपका नंबर सेव नहीं किआ था, कैसी है आप?

बिना : में ठीक हु, आप कैसी है, और घर में सब?

स्वर्ण : सब ठीक है भाभी, कहिये कैसे यद् किआ?

बिना : कुछ नहीं, बस ऐसे hi फ़ोन किआ था, आइये न कभी मेरे घर, वैसे भी में अकेले रहती हु, इस बहाने से मुलाकात भी हो जाएगी.

स्वर्ण : ठीक है में माजी से पूछ के बताती हु. उस अनुष्ठान का कुछ तय हुआ?

बिना : नहीं दीदी, अभी तो नहीं, अच्छा आप योगेन्द्राचाचाजी को जानती है?

स्वर्ण : कोण छोटे चाचा, जानती तो नहीं पर सुना है उनके बारे में, क्यों पूछ रही है आप?

बिना : नहीं, ऐसे hi पूछ रही थी, अभी ममता दीदी से बात हुई तो वो बता रही थी की अनुष्ठान के लिए उन्हें बुलाना है पर शायद किसी कारन से वो मुमकिन नहीं हो प् रहा है.

स्वर्ण : है, उनके बारे में घर में भी कोई बात नहीं करता, पर एक दो बार घर में क्सिसि बात पर बहस हुई थी तो मुझे पता चला था, पर माँ ने ज्यादा कुछ बताया नहीं था. वो कोमा में है बस इतना जानती हु, कहा है वो भी नहीं पता.

बिना : कोई बात नहीं, में तो बस ऐसे hi पूछ रही थी. आप घर आओ, इत्मीनान से बात करेंगे, मेरी स्कूल सुबह की होती है, दोपहर के बाद तो में फ्री hi होती हु, कभी भी आ शक्ति है आप.

स्वर्ण : ठीक है भाभी, मिलते है फिर.

बिना : ठीक है, मिलते है.

फ़ोन रख कर वो सो गयी. यहाँ में साइट पर पंहुचा तो मेने दूर से hi जहान्वी की गाड़ी कड़ी देखि, में जा रहा था की वो ऑफिस की बालकनी में बहार आयी, बंद गले की ग्रीन t-shirt और जीन्स पहने हुई थी, हमारी नज़ारे मिली और उसने नज़ारे दूसरी और कर ली, मेने गौर किआ तो उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं था, मेने हिम्मत इकट्ठी की और में उस और मुद गया, और माकन के अंदर चला गया.

(जहान्वी ने भी देखा की शिव ऊपर hi आ रहा है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो अंदर गयी, तब तक शिव भी ऊपर आ गया था, दरवाजा खुला hi था तो वो दरवाजे पर खड़ा हो गया, जहान्वी ने उसे देखा पर नज़ारे नहीं मिला पायी तो वो निचे देखने लगी) (मेरे दिमागमे भी उल्जन थी, कुछ पल में वही खड़ा रहा, न वो कुछ बोली न में, फिर मुझे लगा की मुझे hi बात करनी पड़ेगी तो में अंदर चला गया, और उसके सामने थोड़ी दुरी पर खड़ा हो गया)

शिव : (बड़ी मुश्किल से मेरे मुँह से सब्द nikale)Sorry, (वो अभी भी निचे hi देख रही थी) में मेरे बर्ताव के लिए माफ़ी चाहता हु, में वैसा नहीं हु, मेने कभी किसी के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं किआ, मुझे समझना चाहिए था, वैसे भी आप यहाँ के मालिक की बेटी हो तो आपका हक़ बनता है की आप काम के लिए किसी को भी कुछ भी कहे (जहान्वी ने एक बार अपनी नज़ारे उठायी और शिव को देखा, उसके चेहरे पर पछतावा था, पर वो कुछ न बोल पायी) अगर आप मेरे खिलाफ कम्प्लेन करना चाहे तो कर सकती हो, मुझे अपनी फ़िक्र नहीं है, पर मेरे जाने से हमारे अनाथालय में बहोत दिक्कते हो जाएगी.

जहान्वी : (धीमी आवाज me)Ye पहले सोचना चाहिए था.

शिव : सही कहा आपने, में वादा करता हु की में कभी कोई गुस्ताखी नहीं करूँगा, बस आप एक बात बता दीजिये. (जहान्वी उसे गौर से देखने लगी) क्या आपने मेरे बर्ताव की वजह से अनाथालय में वो नोटिस भिजवाया है?

जहान्वी : (जहान्वी को कुछ समाज नहीं आया की शिव किस बारे में पूछ रहा hai)Konsi नोटिस?

शिव : मुझे लगा hi था की आपने वो सब नहीं किआ है, तो फिर आप त्रिसूर्य की ऑफिस क्यों गयी थी?

जहान्वी : कोनसी ऑफिस?

शिव : आप ऑफिस गयी थी, उस अफसर को पैसे देने.

जहान्वी : (सोचते hue)Wo तो पापा ने और प्रकाश अंकल ने कहा था, क्यों?

शिव : मुझे पता चला है की आपने वो पैसे दिए और उस अफसर ने हमारे अनाथालय को नोटिस भेजा.

जहान्वी : (उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था) में सामजी नहीं शिव, तुम बैठो (उसने सोफे की और इस्सर किआ, और वो खुद भी बेथ गयी) अनाथालय को नोटिस भेजा, किस लिए?

शिव : हमारे अनाथालय को बंद करवाने के लिए.

जहान्वी : मतलब, तुम्हे लगा की मेने वो किआ है, इस्सलिये तुमने मेरे साथ वो सब किआ.

शिव : मेने कहा न सॉरी, मुझे गुस्सा आ गया था, मुझे लगा की मेने आपको वो उस दिन k...kiss की (उसकी आवाज धीमी हो gayi)to आपने मुझसे बदला लेने के लिए वो सब किआ. (दोनों कुछ देर खामोश हो गए, दोनों के दिमाग में कुछ सोच चल रही थी)

जहान्वी : एक बात बताओ, तुम्हे क्यों लगता है की वो पैसे तुम्हारे अनाथालय को बंद करने के लिए hi दिए गए थे, किसी और काम के लिए भी दिए गए हो सकते है न.

शिव : उस ऑफिस में काम करेंवाले दूसरे लोगो से ये कन्फर्म किआ है की वो पैसे देने के बाद hi हमारे अनाथालय को ले कर सब कार्यवाही की गयी थी, तो जाहिर सी बात है की वो उसी के लिए होंगे.

जहान्वी : जहा तक मुझे पता है, पापा और अंकल किसी जमीं के लिए बात कर रहे थे, उसमे अनाथालय की तो कोई बात hi नहीं थी.

शिव : मुझे पता चला है की जिस जमीं पर अनाथालय है और उसके आस पास की जगह, उन सब का आजकी तारीख में करोड़ो में कीमत है. और वैसे भी वो लोग मुझसे बदला लेने चाहते है तो दोनों काम हो जायेंगे.

जहान्वी : (कुछ याद करते hue)Ha, किसी जमीं के मामले में तुम्हारी वजह से उनके हाथ से कोई कॉन्ट्रैक्ट निकल गया था, (अपने दिमाग पे जोर लगते हुए) पर पापा को अगर दिक्कत है तो वो तुमपे अपना गुस्सा निकलते, अनाथालय पर क्यों कर रहे हे वो?

शिव : देखा, तुम्हे भी बुरा लग रहा है न, जबकि तुम उन बच्चो को जानती भी नहीं हो, तो सोचो मुझे कितना गुस्सा आया होगा जब मुझे पता चला की उन बच्चो को बेघर करने के लिए ये सब हुआ है, जमीं तो कही भी मिल जाएगी, पर उन बच्चो के शिर से सहारा छीन न कितना गलत है, और उसी गुस्से के चलते मेने आपके साथ बदतमीज़ी कर दी.

जहान्वी : (शिव को गौर से देखते hue)Aur तुम्हे लगता है की ऐसा करने से तुम्हारा प्रॉब्लम सोल्वे हो जायेगा? (शिव चुप रह, क्यों की वो जनता था की उस से कोई फर्क नहीं पड़नेवाला था) बेवकूफ हो तुम, अगर मेने तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन कर दी होती तो अब तक तुम जेल में होते, तुम्हे क्या लगता है की उस से उन बच्चो की समस्या हल हो जाती?

शिव : (शिर झुका kar)Sorryyyy.

जहान्वी : बेवकूफ, ये तो अच्छा हुआ की मेने तुम्हारा मश्ग पढ़लिया, वर्ण मान कर रहा था की कम्प्लेन कर hi दू, पता नहीं क्यों नहीं की. (वो नाराजगी से मेरी और देखने लगी)

शिव : प्लीज, तुम्हे मेरे साथ जो करना है कर लो, पर मुझे जेल मात भेजना.

जहान्वी : वैसा करना होता तो अब तक कर चुकी होती, बेवकूफ कही के, इतना गुस्सा आ रहा है न ki...(Wo बोलते बोलते रुक गयी, फिर अपने आप को शांत किआ, वो लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी, थोड़ी देर बाद अपने आपको सँभालते हुए) अब ये बताओ की एक्साक्ट्ली क्या प्रॉब्लम हुई है? मेरा मतलब है की उस नोटिस में क्या है?

शिव : उसमे लिखा है की हमे कागजात सबमिट करने है, उनके पास हमारा कोई भी रिकॉर्ड नहीं है जो ये दिखता हो की ये जमीं अनाथालय की या जानकीदास की है जो की इस अनाथालय के ट्रस्टी थे.

जहान्वी : तो प्रॉब्लम क्या है, दिखा दो.

शिव : पर कागजात मिल नहीं रहे है.

जहान्वी : ये कैसे हो सकता है, (वो थोड़ी देर सोच में पद गयी) मुझे लगता है की शायद पापा को और अंकल को ये पता है की कागजात नहीं है.

शिव : वो कैसे?

जहान्वी : मेने तुम्हे बेवकूफ कहा वो सही hi है, कुछ सोचते hi नहीं हो, जाहिर सी बात है, की ऐसी नोटिस दी जाएगी तो कोई भी होगा जो डॉक्यूमेंट सबमिट करवा देगा, और कई लोगोने किये भी है, तो उसके लिए पैसे देने की क्या जरुरत है, ये तो उस ऑफिस का काम hi है, तो कोई पागल hi होगा जो सिर्फ नोटिस के लिए पैसे देगा, पर शायद वो ये जानते थे की कागजात नहीं है, तो उन्होंने पिछले रिकॉर्ड भी हटवाड़िये.

शिव : पर वो कैसे जानते होंगे की कागजात नहीं है?

जहान्वी : मुझे क्या पता (झुंझलाते हुए कहा) में कोई भगवन थोड़े न हु, में तो बस अनुमान कर रही हु, हो सकता है की तुम्हारे वह की सब खबर इनको हो, और इस से ये बात तो पता चलती है की ये सिर्फ इस लिए नहीं हुआ की तुमने उनका कॉन्ट्रैक्ट छिना, ये पहले से hi तय था, बस उन्होंने किआ अभी है.

शिव : आप बहोत इंटेलिजेंट हो.

जहान्वी : (उसने हलके गुस्से से देखा) दिमाग चलता है मेरा, तभी इतना पढ़ी हु वो भी विदेश जा कर, तम्हारी तरह नहीं जो... (उसने बात अधूरी छोड़ दी).

शिव : मेने तो आपकी तारीफ hi की थी, फिर भी आप गुस्सा हो रही हो.

जहान्वी : गुस्सा तो इतना आ रहा है न तुम पर की... की... खैर छोडो, अब ये सोचो की कैसे उन्हें पता होगा?

शिव : हमारे वह पहले जो मैनेजर था वो अच्छा आदमी नहीं था, तो शायद...

जहान्वी : अरे है, ये वही है न जिसको तुमने मारा था? मुझे पता चला था उस बारे में. मतलब हर जगह तुम गुस्सा hi दिखते हो है न?

शिव : वो अलग बात थी (मेने भी थोड़ी नाराजगी से kaha)mene उन्हें क्यों मारा था वो पता है आपको?

जहान्वी : (शांत होते hue)Ha पता है, सरे सहर को पता है, छोडो उसे, है तो उसने hi ये सब इंफोर्मशन पापा को दी होगी, शायद वो पापा को जनता हो. पर पापा को ऐसा नहीं करना चाहिए, बुसिनेस्स अपनी जगह है, यहाँ अनाथ बच्चो का सवाल है, उन्हें सचमुच ऐसा नहीं करना चाहिए.

शिव : आप कितनी अच्छी हो, मेने गलत समजा आपको सॉरी.

जहान्वी : (गुस्से से तो नहीं पर हलकी नाराजगी से kaha)Apana सॉरी अपने पास रक्खो (हलके से अपने आप hi badbadayi)Ek तो पकड़ कर किश कर दिया, बेवकूफ, सीधे सीधे कहता तो भी में तैयार हो जाती, सब बिगड़ दिया.

शिव : (मुझे कुछ सुनाई नहीं diya)Kya कहा आपने?

जहान्वी : कुछ नहीं (हलके गुस्से se)Me देखती हु, क्या कर सकते है.

शिव : क्या करेंगी आप?

जहान्वी : (हलकी नाराजगी se)Muje नहीं पता (क्यों की अभी उसके दिमाग में कोई रास्ता नहीं था, फिर कुछ सोचते hue)me उस अफसर से मिलती हु, शायद कुछ पता चल जाये.

शिव : एक बात पुछु? (जहान्वी ने घर कर देखा, जैसे कह रही हो पूछो) आप क्यों हेल्प कर रही हो, जबकि आप जानती हो की ऐसा कर के आप अपने पापा के खिलाफ जाओगी.

जहान्वी : (मान में, ये तो मेरी समाज में भी नहीं आ raha)(Fir कुछ सोच kar)Shayad मुझे बुरा लग रहा है, में नहीं चाहती की अनाथालय के बच्चे बेघर हो जाये. वर्ण तुम्हारे ऊपर तो इतना गुस्सा है की कुछ भी हेल्प न करू.

शिव : प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये, में कभी ऐसी गुस्ताखी नहीं करूँगा.

जहान्वी : (ये सुन कर उसे और गुस्सा आया, वो सोचने लगी, वो कुछ नहीं करेगा ये सुन कर क्यों गुस्सा आ रहा है, ये तो अच्छी बात है न, पर क्या में चाहती हु की वो कुछ करे, सोचते हुए हलके गुस्से से उसने शिव को देखा)

शिव : (मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो क्यों हर बात पर गुस्सा हो रही है, शायद मेने गलती hi ऐसी कर दी thi)Thik है, में अब आपसे सॉरी नहीं कहूंगा, पर थैंक यू जरूर कहूंगा, आप ने इतना सोचा, ये मेरे और मेरे जैसे अनाथ बच्चो पर बहोत बड़ा एहसान होगा. (तभी पिंकेशभाई अंदर आये)

पिंकेशभाई : अरे शिव, तुम आ गए हो.

शिव : जी पिंकेश भाई.

पिंकेशभाई : वो 14 नुम्बेर के माकन में काम चल रहा है जरा देखोगे, मुझे कुछ हिसाब दिखने है मैडम को.

शिव : (खड़े होते hue)Ha है क्यों नहीं, (जहान्वी की और देख kar)Me चलता हु मैडम.

जहान्वी : (पिंकेश का आना उसे अच्छा नहीं लगा था, पर वो क्या कहती तो उसने kaha)Thik है. (शिव वह से चला गया, लम्बी साँस छोड़ kar)Hmmmmm बोलो क्या दिखाना था? (पिंकेश को मैडम की नाराजगी समाज नहीं आयी, पर उसको क्या लेने देना था तो वो सब दिखने लगा)

में जहा काम चल रहा था वह आ गया, वह प्लास्टर का काम चल रहा था और सब बिजी थे, भोली मेरी और देख कर मुस्कुरायी तो मेने भी मुस्कुराके जवाब दिया, झुमरी भी मुस्कुरायी, कमली ने सिर्फ मुझे देखा, पता नहीं उसको क्या हुआ है, उस दिन के बाद वो कभी मुझसे मजाक नहीं करती थी. खरी में सब देखने लगा. थोड़ी देर बाद जहान्वी और पिंकेशभाई भी वह आये, थोड़ी देर सब देखने के बाद जहान्वी ने मुझसे कहा

जहान्वी : भर आना शिव. (कहते हुए वो माकन के बहार निकल गयी, में भी पीछे पीछे गया, माकन से थोड़ी दुरी पर रुक कर) में सोच रही हु की अभी चली जाऊ, अभी टाइम भी है.

शिव : में चालू क्या?

जहान्वी : पागल हो क्या, मुझे तुम्हारे साथ देखेंगे तो थोड़ी न वो बताएगा, में वह जा कर ऐसे पूछूँगी जैसे मेरे पापा ने कहा हो पूछने को, तब तो वो बताएगा.

शिव : सॉरी.

जहान्वी : ये हर बात पर सॉरी मात बोलै करो (जहान्वी को अब शिव उसका नौकर नहीं लगता था तो उसे उसके मुँह से बार बार सॉरी कहना पसंद नहीं आ रहा था, वो चाहती थी की शिव उस से नार्मल तरीके से बात करे, और शायद इसी लिए उसे गुस्सा भी आता था की शिव उस से नार्मल तरीके से बात क्यों नहीं कर रहा, क्यों की उसे वही शिव पसंद था जो उसकी एक भी बात नहीं मंटा था, उसको जबरदस्ती पकड़ कर किश कर चूका tha)(Ye सिर्फ जहान्वी की नहीं कई लड़कीओ की ख्वाहिस होती है, वो लड़के को अपने पर हावी देखना hi पसंद करती है)

शिव : सॉरी, (फिर मेने सॉरी कहा, जिस से उनके चेहरे पर नाराजगी आयी, मेने हड़बड़ाके kaha)Ye वो वाला सॉरी नहीं था, ये सॉरी कहने के लिए सॉरी था, में अब सॉरी नहीं कहूंगा, सॉरी.

जहान्वी : क्या बोल रहे हो? (झुंझलाते हुए वो बोली)

शिव : (में क्या बेवकूफी कर रहा था, मेने अपने आपको संभाला, मेने माकन की और देखा तो सब अपने काम में बिजी the)Mere साथ आइये.

जहान्वी : (सवालिया नजरो se)Kaha? (मेने उनका हाथ पकड़ा और ऑफिस वाले माकन की और badha)Kya कर रहे हो शिव (वो उसके साथ खींची चली जा रही थी, वो उसे खिंच कर माकन के अंदर ले गया, अंदर ले जाकर उसने दरवाजा बंद किआ, वो फिर सवालिया नजरो से देख रही thi)Kya कर रहे हो शिव?

शिव : (में उन्हें देखने लगा, सच कहु तो मुझे उन पर बहोत प्यार आ रहा था, वो अपने बाप के खिलाफ जा रही थी, मेरे लिए या अनाथ बच्चो के लिए पता नहीं, पर जब मेने जबरदस्ती किश किआ था तो उन्होंने कुछ नहीं किआ था तो अब तो मुझे यकीं था की वो कुछ नहीं karegi)Sorry, मेरे सॉरी कहने के लिए, पर अब इसके लिए में सॉरी नहीं कहूंगा (में उनके होठ की और बढ़ने लगा)

जहान्वी: (उसे पता चल गया की वो क्या करनेवाला है, उसकी सांसे तेज होने लगी, उसने कमजोर आवाज में kaha)Kya कर रहे हो? (शिव रुका नहीं, वो आगे बढ़ता रहा, जहान्वी की सांसे फूलने लगी ये सोच कर hi की वो अब नहीं रुकेगा, वो फिर उसे किश karega)Nahi Shiiiiv(Usne बहोत धीमे से कहा, पर वो उसे रोकना नहीं चाहती थी, पर अभी वो सरेंडर भी नहीं करना चाहती थी)

शिव : (में एक दम नजदीक पहुंच चूका था, मेने उन्हें दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया था, अब मुश्किल से एक कम का फैसला था, अपने होठो पर में उनकी सांसे भी महसूस कर प् रहा tha)Mene कहा न की में इसके लिए सॉरी नहीं कहूंगा.

जहान्वी : (शिव की सांसे उसके होठो से टकरा रही थी, उसने शिव की छाती पर शर्ट के कपडे को पकड़ लिया, अब वो खिंच रही थी की धक्का दे रही थी वो उसे hi नहीं पता था, उसने आखरी कोशिस ki)Nahi शिव, मात करो. (वो अंदर से तो पूरी तरह से तैयार थी)

शिव : मेने कहा न की में सॉरी नहीं कहूंगा, मेने जो पहले गलती की थी ये उसका हर्जाना है (कहते हुए मेने जहान्वी के कांपते रसीले होठो को आपने होठो की गिरफ्त में ले लिया और उसे हलके हलके चूसने लगा, उनके हाथ के नाखुनो से उन्होंने मेरा शर्ट निचोड़ दिया, और वो हांफ ने लगी, में कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा था, वो कुछ नहीं कर रही थी, बस कड़ी थी, में उनके होठ को हलके हलके बरी बरी चूस रहा था, मेरा लुंड कड़क हो कर खड़ा हो गया, मेने कमर को आगे किआ तो लुंड उनकी छूट वाले भाग को छूने लगा, उसकी सांसे और तेज हो गयी, कुछ देर मेने उनके होठ चूसे और छोड़ दिया, मेने उनकी और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए हांफ रही थी, थोड़ी देर बाद उन्होंने पलके उठानी चाही पर जैसे वो उठ hi नहीं रही थी, कनपटी पलकों से उन्होंने हलकी सी दरार से मुझे देखा. )आपको जो सजा देनी हो दे देना, और क्या बात होती है वो मुझे फ़ोन कर के बता न. (में वह से निकल gaya)(Jhanvi वह मूरत की तरह कड़ी थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की अभी क्या हुआ था, वैसे भी वो जानती थी की शिव बहोत हिम्मतवाला है पर वो उसके साथ इस हद तक चला जायेगा उसे यकीं नहीं हो रहा था, आज उसने कोई जबरदस्ती नहीं की थी बल्कि बड़े प्यार से उसके होठ चूसे था, उसके सरीर में अभी भी कम्पन हो रहा था, उसे महसूस हुआ की वो निचे से गीली हो चुकी है, वो शरमाते हुए बाथरूम की और भागी, अपनी जीन्स उतर कर वो कमोड पर बैठी तो उसने देखा की उसकी छूट के गुलाबी होठो के बिच से मूत के साथ साथ चिकनाहट भी निकल रही है, वो शर्मा गयी, उसने अपनी छूट साफ़ की और बहार निकली, उसने काम चल रहे माकन की और देखा तो शिव वही बहार खड़ा था, वो पिंकेशभाई से बात कर रहा था, अचानक उसने इस और देखा, तो जहान्वी शर्मा गयी और नज़ारे झुकाये गाड़ी में बेथ गयी और वह से निकल गयी)

मेने जहान्वी को जाते हुए देखा पर पिंकेशभाई थे तो चेहरे पर कोई भाव नहीं दिखाए. थोड़ी देर बाद में काम में लग गया. शाम को काम ख़तम हुआ तो सब हाथ पेअर धोने लगे, में रूम में सब देख रहा था की भोली आ गयी. उसकी प्याल की खनक से मेने मुद कर उसे देखा.

शिव : भोली तुम, क्या हुआ? (मेने नॉर्मली पूछा)

भोली : में तुम्हे अच्छी नहीं लगी बाबू?

शिव : (में muskuraya)Aisa क्यों कह रही हो? मेने तो वैसा कुछ भी नहीं कहा.

भोली : कहा नहीं पर किआ भी तो नहीं.

शिव : (उसको देखते हुए में muskuraya)Tumhe क्यों इतनी जल्दी है भोली?

भोली : (मेरे नजदीक आते hue)Ye तुम नहीं संजोगे बाबू, तुम्हे क्या पता में कितनी तड़प रही हु, अगर में अच्छी नहीं लगती तो बोल दो, में फिर कभी तुम्हारे पीछे नहीं आउंगी. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : (मेने देखा तो वो नज़ारे झुकाये कड़ी थी और अपने अंगूठे से जमीं कुतर रही thi)Mere साथ कर के तुम्हे क्या मिलेगा भोली, अपने पति को देना, वो खुस हो जायेगा.

भोली : (हलके गुस्से से मुझे देखते hue)Muje सलाह मात दो, मुझे बस इतना बताओ की तुम मेरे साथ वो करोगे की नहीं.

शिव : (मेने उसको कमर से पकड़ा और अपनी और khincha)Abhi कर दू?

भोली : (उसने मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Pehle बोलते तो आ जाती न, अभी सबके जाने का टाइम हो गया है.

शिव : पागल है क्या तू, तूने देखा था न मेरा, तुजे लगता है की तू घर जा पायेगी. (वो छोड़ने को तैयार है ये सोच कर hi मेरा लुंड खड़ा होने लगा)

भोली : (अपने पेट पर कड़क लुंड को महसूस करते hue)Mera जो होना है वो हो, पर मुझे ये चाहिए बाबू, सपने भी तुम hi दिखाई देते हो, सपने में तो न जाने कितनी बार तुम्हारे निचे लेट चुकी हु, हकीकत में भी लेताओ न.

शिव :(वो कितनी बिंदास थी, उसको जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ता था, कुछ सोच kar)Thik है भोली, में करूँगा, पर कोई जल्दबाजी मात करो, जब सही टाइम होगा तब, और हो सके तो तुम्हारे गांव में या तुम्हारे घर में, या तो फिर इतना टाइम हो की तुम कुछ घंटे आराम कर सको.

भोली : इतनी कमजोर मात संजो बाबू, हमारे वह की औरते बच्चा देने के बाद भी कड़ी हो जाती है, में सहर की लड़कीओ की तरह कमजोर नहीं हु.

शिव : पर मुझे तो चिंता होती है न.

भोली : यही बात है की में तुम्हारे पीछे पड़ी हु बाबू, अगर किसी और लड़के को में ऐसा कहती तो बिना कुछ सोचे मुझे कही भी पेल देता, पर मुझे पता है की तुम वैसे भेड़िए नहीं हो, इसीलिए तो तुम्हारे पर दिल आ गया, जानती हु की तुम्हे प् नहीं सकती पर इतना तो प् hi सकती हु. (बहार से कमली की आवाज आयी)

कमली : भोलीइइइइइ, ो भोलीईई, कहा हैईईईई?

भोली : ाआटीईई हूउउउउउ.

कमली : चल सब रह देख रहे है.

भोली : दो मिनट रुक में आईईईई. (मेरी और देख kar)Babu, एक चुम्मी दो न जल्दी से, और है कास के. (में मुस्कुराया और उसको कूल्हों से पकड़ कर खिंचा और उसके होठो को चूसने लगा, वो बहोत उतावली थी, वो मेरे गले से लिपट गयी और मुझे जोर जोर से चूसने लगी, मेने भी उसके सख्त कूल्हों को अच्छे से दबाया, उसने अपने होठ दूर kiye)Babu चड्डी में हाथ डालो न (वो फिर मुझे किश करने लगी, मेने उसका घाघरा उठाया और उसकी चड्डी में हाथ दाल कर उसके कूल्हों को मसाला) (कमली आहिस्ता से बिना आवाज किये अंदर आ गयी थी और झांक रही थी, ऐसा गरम स्कीन देख कर उसने अपने स्तन दबा diye)(Bholi ने फिर होंठ छोड़े और हफ्ते hue)Babu, आगे भी हाथ डालो न. (वो फिर मेरे होठो को चूसने लगी, मेने हाथ आगे बढ़ाया और उसकी चड्डी में हाथ दाल कर उसकी छूट को दबोच लिया, उसके झांट के बाल मुझे महसूस हो रहे थे, जब दरार में ऊँगली फिराई तो वो पूरी तरह से गीली थी, मेने ऊँगली से दरार को सहलाया तो छूट का छेड़ महसूस हुआ, मेने थोड़ी ऊँगली अंदर सरकायी तो वो बिलकुल बंद था, मेरी ऊँगली भी अंदर नहीं जा रही थी, भोली मुझसे और लिपट गयी और जोर जोर से मेरे होठ चूसने लगी, वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी तो मेने ऊँगली हलके हलके अंदर की, उस से बर्दास्त न हुआ और होठो को छोड़ कर वो मुझसे लिपट गयी और कमर हिलाते हुए झड़ने लगी )ओह्ह्ह्ह बाबूउ शह्ह्ह्हह्ह बाबूउऊउउउ.

झुमरी : बहुओली, कामाआली, कहा हो तुम दोनों? (मेने महसूस किआ की कोई दीवाल के पीछे से भगा, भोली भी मुझसे दूर हुई, वो खुस थी और हांफ रही thi)Bhoooliiiiiiii. तेरे बाबा बुला रहे है.

भोली : Aayiiiiiiiiii. (Mujse)Babu, जल्दी करना, मुझसे इंतजार नहीं होगा, में जाती हु. (कह के वो बहार चली गयी, मेने खिड़की से देखा तो जुमारी और कमली कड़ी थी, जैसे hi भोली बहार निकली वो कुछ बात करने लगी, और हस्ती हुई तीनो वह से निकल गयी, मुझे भी जाना था तो में भी निकला. उन सबके जाने के बाद में भी घर की और निकल गया)

वह से घर गया, घर से स्टेडियम चला गया, रात को खाने के बाद में पढ़ रहा था तो देखा की जहान्वी का मश्ग आया. लिखा था की ‘बात हो सकती है’, तो मेने किताब बंद की और फ़ोन ले कर छत पर चला गया और जहान्वी को फ़ोन लगाया.
 
अपडेट 147

जहान्वी आज बहोत खुस भी थी और दुखी भी थी, खुस इसलिए थी की आज उसकी शिव के साथ दोस्ती हो गयी थी, जिस तरह से शिव ने आज उसे किश किआ था वो मंजर बार बार उसकी आँखों के सामने आ जाता था, वो अपनी आंखे बंद किये उस मंजर को याद करती रहती थी, उसको मुस्कुराते हुए देख के उसकी माँ ने भी पूछा था पर वो ताल गयी थी, और अपने रूम में घुस गयी थी, जाया वो तकिये से लिपट कर शिव को महसूस कर रही थी, हलाकि उसके सम्बंद पहले भी एक लड़के से रहे थे जब वो विदेश में पढ़ रही थी पर ये सब उसको कुछ अलग hi महसूस हो रहा था. वो पहले किश भी कर चुकी थी और सेक्स भी, पर जिस तरह का अनुभव उसको शिव के साथ हुआ था उसकी तुलना नहीं की जा सकती थी. वो नहीं चाहती थी की अपने पास्ट को याद करे पर फिर भी कही न कही वो शिव को अपने पास्ट के साथ कपड़े कर hi लेती थी. भले hi शिव ने उसके साथ गुस्से में या किसी रंजिस के चलते उसके साथ वो व्यव्हार किआ था पर फिर भी उसे वो कारन भी अच्छा hi लगा था, क्यों की अगर वैसा न हुआ होता तो शायद शिव ने उसके साथ वो सब किआ भी न होता, तो उसे कोई गिला सिकवा नहीं था.

खुसी के साथ वो दुखी भी थी, क्यों की उसे अब शिव की फ़िक्र थी, आज उसने अपने पापा के विरुद्ध जा कर शिव के लिए कुछ किआ था, वो उस अफसर से मिली थी और उस से सब पूछा था, अब उसको पता था की ये सब उसके पापा ने hi करवाया था, तो वो दुखी थी, एक तो वो अनाथ बच्चे थे और साथमे शिव था, उसे अब शिव की की हरकत भी कही न कही सही लग रही थी, वो गुस्सा था, तो उसने ये सब हरकत कर दी थी, और साथमे वो भगवन का शुक्रियादा भी कर रही थी की उसने कोई कम्प्लेन नहीं की, वर्ण शिव और मुसीबत में फास जाता. वो बार बार शिव को इस मुसीबत से निकलने का रास्ता धुंध रही थी, उसने अफसर से जो बात की थी उस हिसाब से तो वो अनाथालय पर कब्ज़ा करने का पूरा प्लान बना चूका था. आज कल की मॉडर्न और खूबसूरत लड़की होने के नाते नाते इंस्टाग्राम पर उसके बहोत सरे फोल्लोवेर्स भी थे, उसके दिमाग में एक खिचड़ी पाक रही थी, पर वो करे की न करे उसकी दुविधा थी. जब वो खाने के लिए निचे गयी तब वो बार बार अपने पापा को देख रही थी, रोज़ की तरह उसका भाई तो आया नहीं था, वो बार बार सोच रही थी की उसके पापा ऐसा कैसे कर सकते है.

कमलनाथ : क्या बात है बेटी, क्या सोच रही हो?

जहान्वी : (हड़बड़ाते hue)Nahi तो, कुछ भी नहीं.

कमलनाथ : खाने पर ध्यान दो.

जहान्वी : जी पापा. (वो फिर खाने लगी, ज्यादा तो खाया नहीं गया तो वो जल्दी hi उठ गयी, और अपने रूम में चली गयी)

कमलनाथ : (अपनी पत्नी se)Kya हुआ है इससे?

शिखादेवी : मुझे क्या पता, आपको पता होगा, वो पूरा दिन तो साइट पर रहती है, तो आपको hi पता होगा न, में कुछ कहती हु तब आप उसकी hi साइड लेते हो, अब वो बड़ी हो गयी है, शादी वाड़ी का कुछ सोचा की नहीं, वो नालायक छोटा है फिर भी उसके लिए लड़की पसंद कर दी और बड़ी बेटी के बारेमे नहीं सोचा.

कमलनाथ : तेरे नालायक बेटे को कोण पसंद करेगा, ये तो प्रकाशराओ हमारे एहसानो के निचे दबा हुआ है तो मान गया, बाकि मेरी बेटी तो हिरा है, विदेश में पढ़ी लिखी है, उसके लिए लड़को की क्या कमी.

सिखादेवी : अरे, पर अब बियाह के लायक हो गयी है, तो ढूँढना पड़ेगा न, अगर किसी को अपने आप धुंध लिया तो क्या इज्जत रहेगी हमारी, अगर लड़का ठीक हुआ तो भी चलेगा, पर किसी ऐसे वैसे के साथ लग गयी तो किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे.

कमलनाथ : तुम खामखा उसके पीछे पड़ी हो, वो समाज दर है, वो ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी.

सिखादेवी : मेरी तो आप कभी सुनते hi नहीं, अगर कुछ ऊंच नीच हो गयी तो फिर मुझे मात कहना.

कमलनाथ : अब शांति से खाना खाओ और मुझे भी खाने दो.

नाईट सूट पहन कर अभी जहान्वी लेती hi थी की शिव का फ़ोन आ गया, जैसे hi उसकी नजर शिव के नाम पर पड़ी वो शर्मा गयी, और मुस्कुराने लगी, फिर उसने फ़ोन उठाया, और मुस्कुराते हुए कहा

जहान्वी : Hello.

शिव : (जहान्वी ने इतना प्यार से hello कहा की में सुनता hi रहा)

जहान्वी :(थोड़ा जोर se)Helloooo.

शिव : (हड़बड़ा ke)Haa hello.

जहान्वी : क्या हुआ, आवाज नहीं आ रही थी क्या?

शिव : नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं. खाना खा लिया?

जहान्वी : (बिस्तर पर सीधा लेते hue)Ha खा लिया, तुमने?

शिव : मेने भी. (दोनों खामोस हो gaye)Ek बात पुछु?

जहान्वी : हम्म्म्म.

शिव : आपको बुरा तो नहीं लगा?

जहान्वी : (शर्मा गयी और मुस्कुरायी, पर संभल कर kaha)Ek तो गलत व्यव्हार करते हो और फिर पूछते हो बुरा तो नहीं लगा.

शिव : (मेरे मुँह से सॉरी निकलने वाला था, पर में रुक gaya)Mene कहा था की में सॉरी नहीं कहूंगा, क्यों की मुझे जो सही लगा वो मेने किआ, अगर आपको बुरा लगा हो तो आग्गे से ध्यान रखूँगा.

जहान्वी : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Buddhu.

शिव : अब क्यों बुद्धू कहा?

जहान्वी : (मान में: बुद्धू न कहु तो क्या कहु, अगर बुरा लगा होता तो ऐसे बात कर रही hoti)Khair छोडो वो सब, में उस अफसर से मिली थी, मेने ऐसे hi सब पूछा जैसे उसको लगे की पापा ने पूछ ने को बोलै हो. (शिव ध्यान से सुन ने laga)Yaar वो सब प्लान कर के बैठा है, अगर कागजात जमा नहीं हुए तो वो सच में वह कब्ज़ा कर लेगा. (जहान्वी ने दुखी स्वर में कहा, जिसे सुन कर शिव भी नीरस हो गया) पर एक बात पता चली है, जिस तरह से वो बता रहा था, उस से ये लगा मुझे की दस्तावेज की कॉपी तो जल गयी थी पर टैक्स की रशीदें बच गयी है, पर वो उसने पापा को दे दी है.

शिव : ओह!

जहान्वी : मुझे लगता है की वो ऑफिस में होनी चाहिए, में कल जा कर देखती हु, वह.

शिव : पर अब ज्यादा टाइम नहीं बचा है.

जहान्वी : मुझे पता है, उसके लिए मेने एक प्लान सोचा है.

शिव : क्या?

जहान्वी : हम ये खबर फैलाएंगे की अनाथ बच्चो की जमीं हड़पने और उन्हें बेघर करने की सर्कार की साजिस. इस तरह का एक छोटा सा वीडियो बना कर उसे सोशल मीडिया और न्यूज़ पर फैलाएंगे.

शिव : उस से क्या होगा?

जहान्वी : उस से हमें लोगो का सपोर्ट मिलेगा, वैसे भी कोई नहीं चाहेगा की अनाथ बच्चे बेघर हो जाये. में अपने िसंस्ता पर पोस्ट करुँगी और जितने भी लोग है उन्हें आगे फॉरवर्ड करने को बोलूंगी.

शिव : पर इस से तो आपके पापा आप पर गुस्सा हो जायेंगे.

जहान्वी : पहले मेने भी ये सोचा था, पर अगर पापा ने कुछ कहा तो में कह दूंगी की मुझे थोड़ी न पता था की आप ये सब कर रहे हो. मुझे लगा था की सरकारी तंत्र ये सब कर रहा है इस लिए मेने ये किआ.

शिव : आप बड़ी चालक हो.

जहान्वी : बन न पड़ता है, जब घी सीधी ऊँगली से न निकले तो ऊँगली टेढ़ी करनी hi पड़ती है.

शिव : वीडियो कैसा बनाएंगे?

जहान्वी : हमे कुछ लोगो को इकठ्ठा करना चाहिए जैसे वो लोग तुम्हे सपोर्ट कर रहे हो और अनाथालय के बंद होने के खिलाफ हो, वो कुछ नारे वेयर लगाएंगे और हम उसका वीडियो बना देंगे और फिर उसे फैला देंगे.

शिव : पर लोग कहा से आएंगे?

जहान्वी : (कुछ सोचते hue)School में तुम्हारे दोस्त तो होंगे, तो एक काम करो कल स्कूल में जितने भी दोस्त हो उन्हें बुला लेना.

शिव : पर मेरे दोस्त ज्यादा नहीं है.

जहान्वी : अरे जितने भी हो चलेगा.

शिव : कब बुलाऊ?

जहान्वी : स्कूल के है तो स्कूल के बाद hi आएंगे, कितने बजे स्कूल छूट ता है तुम्हारा.

शिव : साढ़े बारह बजे.

जहान्वी : ठीक है में तुम्हारे अनाथालय 12 बजे पहुंच जाउंगी, और दूसरे जिनको भी जानते हो उनको भी बोल देना.

शिव : ठीक है, कल मिलते है.

जहान्वी : थकी है, bye (वो और भी कुछ रोमांस की बाते करना चाहती थी, पर अभी ये मौका सही नहीं था, वो कल के लिए प्लान बनाने लगी, उसको अपने कुछ दोस्तों की याद आयी, उसने फ़ोन लगाया)

जहान्वी : Hi, करुणा.

करुणा : Hi जहान्वी, कैसी है? इस वक़्त फ़ोन किआ?

जहान्वी : एक काम था, सुन (उसने उसे सब संजय)

करुणा : तुजे क्या जरुरत पद गयी, अनाथालय केलिए ये सब करने की, कही सोशल एक्टिविस्ट तो नहीं बन ने वाली.

जहान्वी : नहीं ऐसा कुछ नहीं है, वो हमारे यहाँ काम करता है, उसको मदद की जरुरत है, बोल तू आएगी की नहीं?

करुणा : जरूर आउंगी. वैसे भी किसी अनाथ की मदद तो करनी hi चाहिए, उस बेचारे के पास होगा भी क्या, कोण उसका सपोर्ट करेगा, कोई नहीं में आ जाउंगी.

जहान्वी : में दुसरो को भी बोल देती हु, वो अपने दोस्तों को लाएगा, हम सब जायेगे, 10-15 लोग हो जायेंगे तो भी चलेगा.

करुणा : ठीक है तो फिर कहा मिलेंगे?

जहान्वी : क्सक्सक्स कॉफी शॉप पर 11:30 को मिलते है, में दुसरो को भी बोल देती हु. (फिर उसने दूसरे दोस्तों को भी फ़ोन किआ, सबको फ़ोन करने के बाद उसे चैन मिला और वो सो गयी)

सुबह जब वो कॉफी शॉप पर पहुंची तो कोई नहीं आया था, उसे टिंटिओं होने लगी. थोड़ी देर बाद उसे करुणा दिखी, वो उसके बॉयफ्रेंड को ले कर आयी थी. ऐसे hi कई लड़कीअ और कुछ लड़के भी हो गए. वो लोग मिलकर hi 10 तो हो गए थे.

जहान्वी : थैंक यू सबका, आप सब एक बहोत नेक काम करने जा रहे हो.

करुणा : अब फोमालित्य छोड़, हमे यही लेट हो गया है 12:30 तो यही हो गए, चलो अब चलते है.

जहान्वी : है चलो (करुणा और एक लड़की उसके साथ hi गाड़ी में बेथ गयी, बाकि सब गाड़ी और बाइक से आ रहे थे, जब वो अनाथालय के पास पहुंचे तो काफी लोग इकठ्ठा दिख रहे थे)

करुणा : तू तो कह रही थी की हम hi होंगे (जहान्वी भी हैरान थी, वह काम से काम 100 से ज्यादा लोग थे, सहा गेट पर hi पुलिस कड़ी थी.

पुलिस : आप गाड़ी बहार लगा दीजिये. (जहान्वी हैरान परेशान थी, उसने गाड़ी साइड में लगायी, जिस लेडी अफसर ने उसे कहा था वो फिर उसके पास आयी)

जहान्वी : मैडम, यहाँ क्या हो रहा है?

भार्गवी : तुम जहान्वी हो न?

जहान्वी : जी मैडम, आप कैसे जानती हो मुझे?

भार्गवी :शिव ने बताया था, वैसे तुम्हारा आईडिया अच्छा है, तुम अंदर जाओ.

करुणा : (हैरानी से देखते hue)Jhanvi, यहाँ तो सब बैनर लिए आये है.

जहान्वी : (जहान्वी भी हैरान थी, वो इधर उधर सब देख रही थी, कई आदमी और औरते आयी हुई थी, किसी किसी के हाथ में स्लोगन लिखे हुए बैनर भी थे, वह उसे कुछ पत्रकार भी दिखे, एक औरत जिसने बहोत महंगी साड़ी पहन रक्खी थी वो अनाथालय के बच्चो को एक जगह पर बिठा रही थी, और कुछ लड़कीअ उन बच्चो को संभल रही थी, उतने में उसे शिव आता हुआ दिखा, वो हिरणी से शिव को देख रही थी, उसके साथ तीन लड़कीअ थी और वो पुलिस अफसर भी, उसमे से एक को वो पहचानती थी, शिव स्कूल बैग लिए हुए था, और दूसरी दो लड़कीअ भी, एक बिना बैग के थी, शिव भी उसे हैरान दिख रहा था, जैसे उसे भी यकीं न हो रहा हो, वो आस पास देखते हुए आगे बढ़ा तो जहान्वी उसकी और गयी.

जहान्वी : शिईयिव.

शिव : मैडम, ये सब? (शिव जैसे उसी को पूछ रहा था)

जहान्वी : में तुमसे पूछ रही हु, ये सब क्या है?

भार्गवी : ये सब उनके साथ आये है (भार्गवी ने जिस और इस्सर किआ था उस और शिव ने देखा, वह उसे मनीषा मैडम दिखी, जो सब को समजा रही थी) वैसे भी में आनेवाली थी पर उन्होंने फाॅर्स भी मंगवाई थी तो में सबके साथ आयी. (शिव मनीषा की और बढ़ने लगा तो सब उसके साथ चल दिए)

जहान्वी : तुम यहाँ कैसे?

वैस्वी : शिव, मेरे साथ hi पढता है, पर आप यहाँ कैसे दीदी?

जहान्वी : शिव हमारे साथ hi काम करता है.

शिव : (सब मनीषा के पास पहुंच गए the)Madam.

मनीषा : अरे शिव, आ गए तुम.

शिव : मैडम, इतने सरे लोग?

मनीषा : अब सामाजिक कार्यकर्ता हु तो लोग तो साथ होंगे hi, तुमने कल रात को hi बोलै तो काम लोग आये है, एक दो दिन का टाइम देते तो पूरा मैदान भर देती, चलेंगे न इतने लोग?

शिव : (खुस होते hue)Bahot है madam.(Jhanvi को) क्यों मैडम चलेंगे न इतने लोग, वैसे अभी दूसरे आ रहे है.

मनीषा : कोण? (उतने में बहार रस्ते पर बहोत सारा शोर सुनाई देने लगा, स्कूल यूनिफार्म पहने लगभग 200-300 बच्चे साइकिल से आते दिखे और उनके साथ कुछ टीचर भी.) तुम्हारी स्कूल के बच्चे.

शिव : है मैडम, मेने अपने दोस्तों को कहा, तो वैस्वी ने कहा की सबको बोल दो जिसको आना होगा वो आएगा, तो मेने प्रिंसिपल सर को कहा तो उन्होंने अनाउंस करवादिया की जिसको भी शिव की मदद के लिए जाना हो वो उसके अनाथालय को जाये, सर ने एक घंटे पहले hi स्कूल भी छोड़ दी थी. (बिना मैडम और कुछ टीचर भी आये थे, में उनके पास gaya)Thank यू फॉर कमिंग सर एंड मैडम.

वरुणसीर : अरे भाई इसमें थैंक यू की क्या बात है, तुम हमारी स्कूल और सहर के नमी खिलाडी हो, इतना तो कर hi सकते है.

बिना : (मैडम ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और kaha)Me लता की मदद करती हु. (कहते हुए वो लतादिदी जो बच्चो और सबको संभल रही थी उस और चली गयी)

करुणा : (धीमी आवाज में, जहान्वी se)Tu तो कह रही थी की काम लोग होने, लगता है की इसको तो सारा सहर जनता है, तूने सीरत एक रात का समय दिया फिर भी इसने तो पूरा मेला लगा दिया. (जहान्वी क्या बोलती, वो खुद हैरान थी)

भार्गवी बहार की और निकल गयी और सब को क़तर से खड़ा करने लगी, उतने में एक स्पीकर से भरी हुई गाड़ी आयी.

शिव : अब ये क्या है?

मनीषा : अब इतने सरे लोग है तो सबके कानो में आवाज पहुचनी चाहिए न, तो दज वाले को बुला लिया. माइक की मदद से सहूलियत होगी.

(उतने में वह पानी के जग से भरा हुआ एक टेम्पो अंदर आया)

शिव : अब ये क्या है?

मनीषा : ये मेने नहीं किआ. (अभी हम सोच hi रहे थे की पवनसीर और स्नेहा मैडम आते दिखाई दिए, और पवनसीर उस पानी वाले को एक और इस्सर करते हुए उसे कुछ कहने लगे, स्नेहा मैडम हमारी और आयी)

शिव : आइये मैडम, ये पानी?

स्नेहा : पवन बता रहे थे की इतने लोग इकठ्ठा हो रहे है तो पानी तो चाहिए होगा, और यहाँ आ कर देखा तो बहोत सरे बच्चे भी दिखाई दे रहे है तो उन्होंने स्नैक्स का भी आर्डर कर दिया है. (जहान्वी तो आंखे फाडे सब देख रही थी)

मनीषा : आप का बहोत बहोत सुक्रिया, वैसे मुझे पता नहीं था की बच्चे भी आनेवाले है वर्ण में पहले से इंतजाम करवा देती.

स्नेहा : शिव के लिए आपने किआ या मेने किआ एक hi बात है. आप लोग बाते कीजिये में लता के पास जाती हु.

जूही : में भी आती हु मैडम, तुम्हारा बैग मुझे दे दो शिव, में तुम्हारे रूम में रख देती हु. (जहान्वी और उसके फ्रेंड तो शिव को मिल रही इतनी एहमियत देख कर हैरान हो रहे थे, कहा वो सोच कर आये थे की किसी अनाथ की मदद करने जा रहे है और कहा इतने सरे लोग उसकी मदद को पहुंच रहे थे)

मनीषा : अब ध्यान से सुनो शिव, वह माइक के पास जा के सब का सुक्रिया करना और फिर अपनी समस्या बताना (जहान्वी se)Jhanvi अगर में तुम्हे आगे करू तो तुम्हे कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी न.

जहान्वी : कैसी प्रॉब्लम.

मनीषा : भले hi हम सर्कार के निर्णय के खिलाफ ये कर रहे है पर तुम भी जानती हो की ये हम तुम्हारे पापा के खिलाफ कर रहे है, तो फिर तुम्हे देख कर तुम्हारे पापा भड़क न जाये. वैसे भी उनका और हमारा 36 का आंकड़ा है.

शिव : ये बात वैस्वी पर भी लगी होती है.

वैस्वी : मुझपर क्यों?

शिव : क्यों की तुम्हारे पापा भी शामिल है. तो अगर आप दोनों दूर रहना चाहो तो हमे कोई आपत्ति नहीं है.

जहान्वी : मेने तो कल hi कहा था की पापा ने मुझे नहीं बताया है तो वो तो मुझसे पूछने से रहे, क्यों की अगर वो मुझे पूछेंगे तो में खुद पूछूँगी की आप क्यों विरोध कर रहे है, और मुझे लगता है की वो मुझे तो नहीं कहेंगे की इन सबके पीछे वो है.

मनीषा : स्मार्ट गर्ल.

वैस्वी : मुझे भी थोड़ी न पता है तो मेरे साथ भी शामे सिचुएशन है.

मनीषा : (शिव की और मुस्कुरा कर देखते hue)Tumhare ये दो हथियार देख कर hi तुम्हारा दुसमन हथियार दाल देगा. जित तुम्हारी hi होगी, चलो उस और वह जहान्वी और वैस्वी को शिव के अगल बगल खड़ा रखना और है शिव इन सब में तुम कमलनाथजी का या प्रकाशरोजी का जीकर भी मात करना, तुम्हे सिर्फ ये कहना है की सरकारी कचेरी से ऐसा नोटिस आया है और हम इनका विरोध कर रहे है और हम मन नहीं कर रहे है पर हमे कुछ वक़्त दिया जाये, इतनी सॉर्ट नोटिस पर ये संभव नहीं है, और वैसे भी इस अनाथालय के ट्रस्टी नहीं रहे तो हमे कागजात ढूंढने में टाइम लग रहा है, हम इन सब का एक वीडियो बनाएंगे, मीडिया तो हाजिर है hi.

मनीषा मैडम के कहे अनुसार में बिच में खड़ा हो गया, माइक मेने अपने हाथ में ले लिया, मेरी एक और जहान्वी कड़ी थी तो दूसरी और वैस्वी कड़ी थी, मनीषा मैडम भी कड़ी थी, तभी काव्य जी भी आती दिखाई दी, वो वकील के कपड़ो में hi थी, शायद कोर्ट से सीधा hi आयी थी, मेने उन्हें भी बुला लिया, मेने भार्गवी मैडम को भी माइक के पास आने को बोल दिया. सामने सब बहार के लोग खड़े थे, मतलब स्कूल के बच्चे और बाकि सब, मेरी दाहिनी और अनाथालय के सब लोग थे, लतादिदी, सरितादिदी, गायत्रीदिदी, रंजन विणा, दूसरे बच्चे और जूही, स्नेहमड़ाम, बीनमदं. भार्गवी मैडम भी आ गयी और हमारे साथ कड़ी हो गयी.

शिव: दोस्तों और यहाँ आये सभी महानुभावो का में दिल से आभार व्यक्त करता हु, आज मेरा शीना चौड़ा हो गया है, मुझे खुद नहीं पता था की मेरे साथ इतने लोग जुड़े हुए है, मेरे प्रति आपका स्नेह देख कर मेरा दिल भर आया है. सबसे पहले में जहान्वी जी का सुक्रिया करना चाहूंगा, क्यों की ये सारा कार्यक्रम इनका hi आईडिया है, उन्हें हम अनाथो पर और हमारे अनाथालय पर इतनी दया आयी की वो हमें बचने हमारे साथ आ gayi(Jhanvi ने सबकी और देख कर हाथ जोड़े, और मेरी और देख कर मुस्कुरायी). ये वैस्वी है जिसने सरे स्कूल को इस कार्यक्रम के साथ जोड़ दिया hai(Itne सरे लोगो के सामने अपना नाम सुन कर वैस्वी शर्मा गयी, और शिव की और देखने लगी). साथ में में हमारे सहेरे की सुरक्षा में कड़ी भार्गवी मैडम का भी आभारी हु (भार्गवी ने भी सबको नमस्ते किआ), और काव्य मैडम जो क़ानूनी तौर पर हमारे साथ जुडी हुई hai(Kavya ने सबको नमस्ते किआ). और साथ में में सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा मैडम और उनके साथियो का भी आभारी हु जो हमारा हौसला बढ़ने हमारे साथ उपस्थित hai(Manisha ने हाथ जोड़ कर सब का अभिवादन किआ). एक बार इन सबके लिए तालिया बजा कर इनका स्वागत कीजिये. (पूरा मैदान तालिओं से गूंज उठा). में ये नहीं कह रहा की हम इस जगह कर बिन आधिकारिक तौर पर अपना हक़ जमाना चाहते है, में खुद करीब तीन साल का था जब में यहाँ जानकीदास जी के साथ आया था, तब भी ये अनाथालय था, तो ऐसा तो मुमकिन hi नहीं की बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ये अनाथालय खड़ा हो, आज जानकीनाथजी हमारे बिच नहीं है आउट उन्होंने एक सज्जन की तरह इस अनाथालय को बनाया है और आज तक चलाया है, वो ऐसे इंसान थे की नेकी कर और दरिया में दाल. मुझे यकीं है की उन्होंने ये सब ऐसे hi तो खड़ा नहीं किआ होगा, पर अभी हमें उस बारे में नहीं पता है, तो हमारी सर्कार से दरख्वास्त है की वो हम अनाथ बच्चो को बेघर न होने दे, हमें समय दिया जाये ताकि हम इस से जुड़े दस्तावेज धुंध सके. इतने काम वक्त में हमे इस घर से बे दखल न करे. में ज्यादा कुछ तो नहीं जनता पर हमारे साथ कड़ी काव्य मैडम इस बारे में अच्छे से समजा सकती है. (मेने माइक काव्य मैडम की और बढ़ा दिया)

काव्य : सबको नमस्कार, जैसा की शिव ने बताया की ये हो नहीं सकता की ये अनाथालय बिना किसी दस्तावेज के खड़ा हुआ हो, आप सबको पता है की यहाँ के भ्रस्ट मैनेजर ने अपने निजी लालच के चलते कुछ गड़बड़ की है, क़ानूनी तौर पर नहीं पर हमें भावनात्मक तौर पर इस मसाले को देखना होगा, मेरी सर्कार से गुजारिश है की वो इस मामले को देखे और बच्चो को बेघर होने से बचाये. (उन्होंने शिव को माइक वापस दिया)

शिव : हमारे साथ जुडी सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा मैडम से में गुजारिश करूँगा की वो कुछ कहे. (शिव ने मनीषा मैडम की और माइक बढ़ा दिया)

मनीषा : नमस्कार दोस्तों, जैसा की शिव ने कहा की में एक सामाजिक कार्यकर्ता हु तो मेरा ये फर्ज बनता है की समाज में हो रहे इस अन्याय का में विरोध करू, यहाँ रह रहे छोटे छोटे बच्चो के लिए एक महँ आत्मा ने ये अनाथालय बनवाया और उनके पालन पोषण के लिए हर महीने पैसे दिए ताकि समाज में उपेक्षित ये बच्चे अपनी रह चुन सके, किसी न किसी कारन से इन बच्चो को समाज से बहार किआ गया, इनके शिर से माँ बाप का साया छीन गया, क्या सर्कार इतनी बे दर्द हो गयी है की वो इन बच्चो को रस्ते पर ले आना चाहती है, में गुजारिश करुँगी उन नेताओ को जो समाज की आवाज़ है, में गुजारिश करुँगी उन समाज के ठेकेदारों को जो इस समाज को एक नयी राह देना चाहते है, कोण लोग है जिनको इन बच्चो को बेघर करने में अपना फायदा दिख रहा है, में सर्कार से गुजारिश करती हु की ऐसे धन के लालची लोगो को बे नकाब करे जिन्हे ये छोटे बच्चे भी नहीं दिख रहे, दिख रहा है तो बस कुछ पैसे, उन्हें भी एक दिन ऊपर जाना है और भगवन को जवाब देना है, क्या मुँह दिखाएंगे वो उपरवाले को, में सराहना करती हु इन जहान्वी और वैस्वी जैसी लड़कीओ की जो इस अन्याय के खिलाफ कड़ी है, इन्हे देख कर लगता है की भारत का भविस्य सुरक्षित है, में चाहूंगी के आप सब एक बार इनके लिए तालिया बजाये. और इनका हौसला बढ़ाये (सब तालिया बजने लगे, वैस्वी पहली बार इतने लोगो का सामना कर रही थी तो उसे संकोच हो रहा था पर जहान्वी को देख कर उसने भी सबके सामने हाथ जोड़े) जहान्वी हमारे मला कमलनाथ साहब की बेटी है, और वैस्वी भी एक सहर के जानेमाने बिल्डर प्रकाशराओ जी की बेटी है, में उनके mata-pita को भी धन्यवाद करती हु ऐसी निडर बेटी समाज को देने के लिए. (सबने फिर से तालिया बजायी) साथमे में चेतावनी भी देती हु सर्कार के उन अधिकारिओ को जो किसी के हाथ की कठपुतली बन कर ऐसा घिनौना काम कर रहे है, अगर उन्होंने इस अनाथालय को हाथ भी लगाया तो हम यहाँ धरना देंगे, और जरुरत पड़ी तो अमरणांत उपवास भी करेंगे. (सबने फिर तालिया बजायी)

थोड़ी देर ऐसे hi कार्यक्रम चला फिर सब को नास्ता खिला कर विदा किया गया. शिव ने सब का सुक्रिया किआ, सरे स्कूल के बच्चे घर लौट गए, कार्यकर्ता भी चले गए तो भार्गवी मैडम भी शिव से मिल कर चली गयी.

काव्य : (शिव ko)Aisa हल तो मेने भी नहीं सोचा था, पर जो हुआ अच्छा हुआ (जहान्वी को) तुम्हारा सुझाव अच्छा था, में देख रही हु की इस से बहोत कुछ होगा, लोगो का सर्कार पर दबाव आएगा, पर तुम्हारे पापा खफा होंगे, पर जैसा तुमने कहा की वो खुल कर तुम्हे कुछ नहीं कह पाएंगे. (शिव se)Chalo में चलती हु, देखते है आगे क्या होगा. (सब से विदा ले कर वो चली गयी)

वैस्वी : (झिझक ते hue)Hum भी चलते है (वो और संयम साथ में थी)

शिव : एक बार फिर से तुम्हारा सुक्रिया, तुमने hi आईडिया दिए था तो इतने बच्चे आ गए.

वैस्वी : (शरमाते hue)Mene कुछ नहीं किआ, मेने तो बस सुझाव दिया था.

जहान्वी : सुझाव देना भी बहोत बड़ी बात होती है वैस्वी, कभी कभी तनाव की वजह से मुसीबत में घिरा इंसान कुछ नहीं सोच पता, एक सुझाव से उसको रास्ता मिल जाता है ताकि वो अपनी मुसीबत से बहार आ सके, तुम बहोत समझदार हो.

वैस्वी : आप सब ऐसे hi मेरी बड़ाई कर रहे हो, सारा आईडिया तो आपका hi था, आपने hi हिम्मत दिखाई, अपने पापा के खिलाफ जाना कोई आसान काम नहीं होता.

लता : शिव के साथ एक से बढ़कर एक दोस्त है, पता नहीं क्यों पर आप सबका साथ उसे हर मुसीबत से निकल hi लेता है.

शिव : सच कहा आपने, इसीलिए तो में कहता हु की कोई कमी नहीं है मेरी जिंदगी में, क्या हुआ की में अनाथ हु, जब इतने लोग मेरे साथ है तो में अनाथ कैसे हुआ. थैंक यू वैस्वी, संयम, हर्ष, महेश, तुम सब का सुक्रिया.

महेश : एक तो दोस्त बोलता है और सुक्रिया भी करता है, अपना सुक्रिया अपने पास रख, हमे नहीं चाहिए. (सब हसने लगे, फिर वो सब भी चले गए)

मेने स्नेहा मैडम, पवन सर, मनीषा मैडम और बाकि सब को बरी बरी विदा किआ, बच्चो को पहले hi अंदर भेज दिया था, सबको विदा देने के बाद पुरे मैदान में फैला कचरा साफ़ किआ रंजन और विणा ने भी मदद की शाम होने को आयी थी तो में और वो दोनों अंदर गए.

सरिता : नजर उतर अपने हीरो की लता, इसको तो आज मेरी hi नजर लग जाएगी.

रंजन : इसको किसी की नजर नहीं लगनेवाली, हर एक नजर को काटनेवाली इतनी साडी काली काली आँखों वाली खूबसूरत लड़कीअ इसका पहरा भर रही है, देखा नहीं आपने.

लता : बहोत बोलने लगी है तू, देखा नहीं तूने, वो सह हमारे लिए hi आयी थी, ताकि हमारे शिर से ये सहारा न छीन जाये.

रंजन : आपको लगता है की अगर ये न होता तो ये सब आती, रहने दो दीदी मुझे मात बेहलाओ.

लता : मरूंगी में तुजे जो ऐसा कहा तो और क्या बुराई है अगर वो सब इसकी वजह से आयी तो, सरिता सही कह रही है इसकी नजर उतरनी पड़ेगी, न जाने इसके जैसी कितनी उसको नजर लगा रही होगी.

रंजन : में कोई नजर नहीं लगा रही, और मेरी नजर लगेगी भी नहीं, में तो बस ऐसे hi कह रही थी, उसका इतना रुतबा देख कर मुझे खुसी नहीं हो रही क्या, में खुस हु और बहोत बहोत ज्यादा खुस ह.

लता : ठीक है मान ली तेरी baat,ab उसको छोडो और उसे आराम करने दो.

शिव : आराम कहा दीदी, में स्टेडियम जाता हु, वह एक और बॉस है जो मेरी रह देख रही होंगी.

मुस्कुराते हुए में अपने रूम में गया और कपडे बदल कर वह से निकल गया, जब में जूही के घर पंहुचा और बेल बजायी. जूही ने दरवाजा खोला मुझे देख कर मुस्कुरायी और जैसे hi में अंदर गया मुझे पकड़ कर दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया और जोरो से मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर हम दोनों किश करते रहे, किश करने के बाद में अलग हुआ, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.

शिव : क्या हुआ, आते hi पकड़ लिया.

जूही : बात hi मात कर, अभी मेरे अंदर क्या हो रहा है न में बता नहीं सकती, ऐसा लग रहा है की तुम्हे पूरा का पूरा खा जाऊ.

शिव : ारे बापरे, तुम्हारे अंदर चुड़ैल तो नहीं घुस गयी. (वो भी मुस्कुरायी)

जूही : तुम बैठो में दूध लती हु. (वो मुस्कुराती हुए अंदर चली गयी)

वह जब वैस्वी घर पहुंची तो वो बहोत खुस थी, जैसे hi वो घर में गयी तो उसकी माँ ने पूछा.

संध्याजी : कहा रह गयी थी, तुजे फ़ोन किआ फिर भी उठा नहीं रही थी.

वैस्वी : पूछो मात मम्मी, आज का दिन ऐसा था की में कभी भूल नहीं सकती.

संध्याजी : कहा गयी थी वो बता नहीं रही है और पहेलियाँ बजा रही है, कहा गयी थी?

वैस्वी : अनाथालय गयी थी मम्मी, वो शिव है न उसको और अनाथालय को बचने के लिए अपना सपोर्ट देने के लिए.

संध्याजी : क्यों क्या हुआ? (फिर वैस्वी ने सब बताया, स्वर्ण भी सब सुन रही थी, सब सुन कर उसे शिव की चिंता हुई)

एक नौकर : मालकिन, बिटिया टीवी पर आ रही है.

संध्याजी : टीवी पर, कोण आ रही है?

नौकर : वैस्वी बिटिया, मेने मोबाइल में देखा.

संध्याजी : टीवी चालू कर तो. (नौकर ने टीवी चालू किआ तो न्यूज़ में वो दिखा रहे थे, उसमे शिव बोल रहा था, थोड़ी देर वो सब देखते rahe)To यहाँ थी तू.

वैस्वी : है मम्मी, कोई अनाथालय को बंद करवाना छह रहा था (उसने अपने पापा का नाम नहीं लिया क्यों की उसे अभी भी यकीं नहीं था की उसके पापा ने ऐसा किआ tha)school के बहुतसारे बच्चे और टीचर भी आये थे वह.

संध्याजी : तुजे क्या जरुरत थी वह जाने की.

वैस्वी : में मुसीबत में थी तो शिव ने मेरी मदद की थी न, तो में क्यों पीछे रहती.

संध्याजी : ठीक है, पर बता के जाया कर, कइँती चिंता को रही थी मुझे.

शाम तक तो सरे सहर में वीडियो वायरल हो चूका था. कमलनाथ के कानो तक भी ये बात पहुंच चुकी थी. घबरा कर उस अफसर ने भी कमलनाथ को फ़ोन किआ.

अफसर : कमलनाथ जी, में ये क्या देख रहा हु, आपकी बेटी hi उनको बचने में साथ दे रही है, अगर मेरी बाटे सामने आ गयी तो मेरी नौकरी चली जाएगी, कुछ कीजिये.

कमलनाथ : कुछ नहीं होगा, तुम बस अपना मुँह बंद रक्खो. (उसने गुस्से से फ़ोन रख दिया, प्रकसराओ भी वही बैठा था) इस जहान्वी को इन सब में पड़ने की क्या जरुरत थी, वो समाज नहीं रही है की वो मनीषा उसका इस्तेमाल कर रही है, उसने मेरे hi सामने मेरी बेटी को खड़ा कर दिया है, अब में अपनी बेटी को कुछ कहूंगा तो उसे बताना पड़ेगा की इन सबके पीछे मेरा hi हाथ था. (उसने झुंझला कर टेबल पर हाथ मारा) साथमे तुम्हारी बेटी को भी लपेटे में ले लिया. (प्रकाशराओ को देख कर कहा)

प्रकाशराओ : वो उसके स्कूल में hi पढता है और उसने मेरी बेटी को बचाया था तो वो तो उसी का साथ देगी न, पर मुझे नहीं लगा था की ये लोग इतना बड़ा गेम खेल जायेंगे. अब क्या करेंगे.

कमलनाथ : क्या करेंगे से क्या मतलब है, अगर सबको पता चल गया की इन सबके पीछे हम है तो हर जगह हमारी ठु ठु होंगी, आगे इलेक्शन में मला तो क्या चपरासी भी नहीं बनाएंगे, एक जमीं के चक्कर में हमारा घर भी बिक जायेगा, भूल जाओ उस जमीं को और उस शिव को भी, साला क्या चीज है पता hi नहीं चलता, एक दो नहीं पूरी लाइन लगाडी है उसने. अभी उसके ऊपर हाथ डालने जायेंगे तो आग हमारे घर तक पहुंच जाएगी, तेरी बेटी और मेरी भी बेटी उसके सपोर्ट में कड़ी है, अभी फ़िलहाल उस जमीं को भूल जाओ, उस अफसर को कह दो की उसे जो करना है वो अपने हिसाब से करे, वाइज भी उसके डॉक्युमनेट है नहीं तो वो अपने हिसाब से कार्यवाही करे, हमारा कोई लेना देना नहीं है. में जाता हु घर (कहते हुए वो खड़ा हो gaya)Sala दिमाग ख़राब हो गया (कहते हुए वो बहार निकल गया).
 
अपडेट 148

कमलनाथ घर पहुंच गया था, पर वो अभी भी बेचैन था, उसने जहान्वी की गाड़ी पार्किंग में कड़ी हुई देखि थी, वो घर के अंदर दाखिल हुआ पर जहान्वी दिख नहीं रही थी, अपने पति को देख कर शिखादेवी उनके पास गयी. चेहरे से hi लग रहा था की उसका पति परेशान है.

शिखादेवी : क्या हुआ जी, कोई परेशानी है? (उसे अपने पति की चिंता जान ने का प्रयास किआ)

कमलनाथ: (नार्मल दिखने का प्रयास करते हुए) कुछ नहीं, जहान्वी आ गयी?

शिखादेवी : है, वो आज जल्दी आ गयी थी, अपने कमरे में होगी, काम है?

कमलनाथ : (वो जनता था की उसकी बीवी को कुछ भी पता नहीं है, क्यों की वो टीवी पर समाचार तो देखती नहीं, बस अपनी सीरियल देखती रहती hai)Nahi, कुछ नहीं, में कुछ देर आराम करना चाहता हु. (कहते हुए वो अपने कमरे में चला गया, रात के खाने के वक़्त सब टेबल पर इकठ्ठा हुआ, जहान्वी जानती थी की उसने क्या किआ है तो वो बस नार्मल होने का दिखावा कर रही थी, अपने पापा के चेहरे पर वो परेशानी देख प् रही थी, कोई कुछ बोल नहीं रहा था)

शिखादेवी : कोई समस्या है जी, आज कोई कुछ बोल नहीं रहा है, जहान्वी भी आज चुप है, कुछ हुआ है क्या? (कमलनाथ ने जहान्वी को देखा, फिर नज़ारे निचे कर के खाने लगी)

कमलनाथ : आपके साहबजादे कहा है, वो दिखाई नहीं देते.

शिखादेवी : होगा अपने दोस्तों के साथ, वो कब हमारे साथ खाने पर होता है.

कमलनाथ : (अपने नौकर ko)TV चालू करो और समाचार लगाओ जरा. (जहान्वी ने एक बार अपने पापा को देखा, वो जानती थी की उसके पापा समाचार लगाने क्यों बोल रहे है, पर वो चुप चाप अपना खाना कहती रही, जैसा की अनुमान था कुछ समाचार के बाद फिर से अनाथालय की समाचार आने लगी, जहान्वी का नाम सुन कर शिखादेवी भी ध्यान से समाचार देखने लगी, समाचार देखने के बाद)

शिखादेवी : ये क्या कर रही है बेटी तू, तुजे क्या जरुरत थी इन सब में पड़ने की.

जहान्वी : (उसने एक बार अपने पापा को देखा, फिर मुस्कुराते हुए जवाब diya)Papa की बेटी हु तो कुछ तो असर आएगा hi न मुम्मा, पापा इतने बड़े पॉलिटिशियन है तो मुजमे भी कुछ गन आएंगे. मुझे याद है की पापा ने भी ऐसे hi अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी, क्यों पापा?

कमलनाथ : (वो क्या bolta)Hmmmm (सिर्फ उतना hi आंसर दिया)

जहान्वी : कल जा कर अगर मुझे पापा की तरह पॉलिटिशियन बन न है तो फिर ऐसे लोगो के बिच जाना पड़ता है, लोगो की समस्या की आवाज बन न पड़ता है, और ये तो अन्याय hi था, एक अनाथालय से किसी का क्या बिगड़ जायेगा जो उसे बंद करवाने पर तुले हुए है, क्या कहते हो पापा, मेने सही किआ न.

कमलनाथ : (वो ऊपर देख hi नहीं रहा tha)Hmmmmm.

जहान्वी : (उसकी निगाहे अपने पापा पर hi थी, वो नज़ारे चुरा रहे थे जिस से जहान्वी का कॉन्फिडेंस बढ़ रहा tha)Waise पापा, मुझे पता चला है की इसके पीछे उसी अफसर का हाथ है जिसे आपने पैसे भिजवाए थे.

कमलनाथ : (अनादर तक हिल गया, पर जल्द hi अपने आपको संभल भी लिया, पॉलिटिशियन जो tha)Tum कहना क्या चाहती हो?

जहान्वी : आपने उसे पैसे भिजवाए थे, मतलब आप उसे जानते है, आप hi उसको बोलिये न की क्यों उन बच्चो के पीछे पड़ा है, एक अनाथालय से क्या बिगड़ जायेगा?

कमलनाथ : (वो अपनी बेटी की चालाकी अच्छी तरह से समाज रहा था, पर क्या bolta)Hmmm, बात करूँगा. (उसने संक्षिप्त में जवाब दिया, फिर ख़ामोशी छ गयी, थोड़ी देर baad)Ye सब आपके साहब जेड को आना चाहिए था, पर नहीं, उसे तो अपनी आवारागीरी से फुर्सत hi नहीं. (शिखादेवी की और देख कर उसने कहा)

जहान्वी : तो क्या हुआ पापा जो मेने कर दिया, क्या में आपकी बेटी नहीं हु?

कमलनाथ : (अपनी बेटी की चालाकी से उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, सच hi तो कह रही थी, ये गन किसी को सिखाये नहीं जाते, वो अपने आप hi आते hai)Tu ये मात समाज की मुझे समाज नहीं आ रहा, में सब समाज रहा हु (मुस्कुराते हुए kaha)Tu राजनीती सिख रही है, अच्छी बात है, पर ये राजनीती अपने बाप पर मत चला, सामजी.

जहान्वी : (मासूम सी सकल बना kar)Mene क्या किआ पापा, और में क्यों आपके साथ राजनीती करने लगी?

कमलनाथ : (उसकी ऐसी नौटंकीदेख कर वो मुस्कुरा utha)Jyada नाटक मात कर, खाना खा चुप चाप.

शिखादेवी : ये क्या बात कर रहे हो आप दोनों, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा. (उसने सवालिया नजरो से दोनों की और देखा, तो दोनों है पड़े)

जहान्वी : कुछ बाटे न कही जाये वो hi बेहतर होता है मुम्मा, कभी कभी खुल कर कहने से कोई लाभ नहीं होगा, समझदार इंसान वही होता है जो इसरो में hi समाज जाये, और मुझे पता है की मेरे पापा बहोत समझदार है, क्यों पापा.

कमलनाथ : ये मात भूल की राजनीती मुझसे मिली है तुजे, में अगर चहु तो सामने जवाब भी दे सकता हु, पर अपनी बेटी को सामने देख कर में रुक गया, पर एक बात समाज में नहीं आयी, तू क्यों वह पहुंच गयी?

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Kuchh बाटे सीखी नहीं जाती पता, वो अपनी सूज बुज से अर्जित की जाती है, में वह क्यों आयी कैसे आयी वो मेरा लुक आउट है.

कमलनाथ : पर ध्यान रखना, वो मनीषा तेरा इस्तेमाल कर रही है.

जहान्वी : राजनीति का असल है पापा, जब तक आप किसी काबिल न बन जाओ, तब तक लोगो का हथियार बनो, और जिस दिन किसी मुकाम पर पहुंच जाओ तो किसी को हथियार बनाओ, आज उनकी है, कल मेरी होगी.

कमलनाथ : (मुस्कुराते hue)Ye एक दिन बहोत बड़ी खिलाडी बन ने वाली है, लिख लो तुम शिखा.

शिखादेवी : उसे जो बन न है बने, पर अपने घर जा कर, इसके हाथ पिले करो और भेज जो उसके घर, फिर उसे जो करना है करे.

जहान्वी : क्या मम्मी, घूम फिर के आपकी सुई एक hi जगह अटक जाती है, अब ऐसी बेटी पैदा की है तो पहले उसके लायक कोई ढूंढो तो सही, फिर निकल देना घर से, मेने कहा रोका है. (बाप बेटी दोनों हसने लगे)

शिखादेवी : मेरी तो सुनता hi नहीं है कोई, जो करना है करो. (उसने गुस्से से कहा, फिर दोनों हसने लगे)

गायत्री अकेले बच्चो के कमरे में सोती थी तो आज सरिता और लता दोनों वह उसके साथ सो गयी थी. शिव, रंजन और विणा तीनो पढ़ाई करने बैठे थे. विणा ने लेहंगा और t-shirt पहना था जबकि रंजन घुटनो तक का फ्रॉक पहन कर बैठी थी, भर हलकी हलकी बारिश हो रही थी, पढ़ाई करते करते जब मेने नजर उठायी तो देखा की रंजन मेरी और देख रही थी, वो मेरे सामने hi बैठी थी, हमारी नज़ारे मिली तो में मुस्कुराया, वो भी मुस्कुरायी, फिर उसने विणा की और देखा, उसके चेहरे से लगा की वो कोई शैतानी करने जा रही है, में उसको गौर से देख रहा था, उसने मेरी और देखा और अपने फ्रॉक को ऊपर उठाया, में हैरान था की वो बिना पंतय के बैठी थी, हलके बालो से सजी उसकी छूट नानाजी मेरे सामने थी, मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयी, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो नटखट सा मुस्कुरा रही थी. (रंजन भी बहोत दिनों से चूड़ी नहीं थी, और महीने में कुछ दिन ऐसे होते है जब लड़की को छोड़ने की बहोत इच्छा होती है, आज उसका भी वैसा hi हल था, जैसे hi विणा हिली तो उसने फ़ौरन अपनी छूट को वापस धक् दिया,) (उसकी छूट देख कर मेरे लुंड में हरकत होनी सुरु हो गयी थी, मेने नज़ारे हटाई और किताब में देखने लगा, पर अभी भी मेरा ध्यान बार बार उसकी छूट की और hi जा रहा था जो अभी छुपी हुई thi.)(Shiv को अपनी छूट की और देखते हुए देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो शिव को रिज़ा रही थी, उसने किताब के साथ साथ अपना फ्रॉक पकड़ा और वापस ऊपर किआ, जिस से शिव उसकी छूट देख sake)(Uski हलचल देख कर मेने वापस उसकी और देखा तो उसकी छूट मुझे दिख रही thi,mene विणा की और देखा तो वो किताब में देख रही थी, मेने रंजन की और देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी पर वो किताब में देखने का ढोंग कर रही थी, मेरा लुंड खड़ा हो गया तो मुझे दिक्कत होने लगी, मुझे लुंड को एडजस्ट करना पड़ा, एक हाथ से किताब और फ्रॉक को पकड़े उसने अपना दूसरा हाथ अपनी छूट की और बढ़ाया और एक साइड को पकड़ कर वो अपनी छूट का छेड़ दिखने लगी, छूट का गुलाबी छेड़ देख कर मेरी हालत ख़राब होने लगी, मेरा लुंड कूदने लगा, वो हलके हलके अपनी छूट के छेड़ को सहलाने लगी, जिस से रास बहना सुरु हो गया, में देख रहा था की उसकी छूट का छेड़ रास से भीगने लगा था, उसका चेहरा पूरा कामुक हो गया था, वो मेरी और देख रही थी, उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था की वो क्या चाहती है, मेने विणा की और देखा, में भी गरम हो चूका था तो मेने उसे मेरे कमरे की और इस्सर किआ, उसने भी अपनी पलके झपकाई और है का इस्सर किआ.

(रंजन ने अपना फ्रॉक निचे कर दिया, उसका काम हो गया था, उसने उबासी ली और दिखने लगी जैसे उसे नींद आ रही है)

रंजन : (किताब रख kar)Muje अब नहीं पढ़ना, में थक गयी हु.

शिव : ठीक है, में भी अपने रूम में जा रहा हु. (कहते हुए मेने किताबो से अपना खड़ा लुंड छुपाया और अपने रूम की और निकल गया. (शिव की ऐसी हालत देख कर रंजन मुस्कुरा रही थी)

विणा : तुजे शर्म नहीं आती ऐसा करते हुए?

रंजन : (अनजान बनते hue)Mene क्या किआ?

विणा : मुझे सब पता है तू क्या कर रही थी, कितनी बेशरम है तू, कितनी आसानी से तू उसे सब दिखा रही थी.

रंजन : (उसे पता चल गया की विणा ने सब देखा है, तो वो muskurayi)Usme गलत क्या है, मेरा मान कर रहा था तो मेने किआ, तूने देखा नहीं शिव की हालत क्या हो रही थी, तू सीधी बानी रह, में तो जा रही हु उसके कमरे में, आज मेरी छूट में कुछ ज्यादा hi खुजली हो रही है, उसके बड़े लुंड से hi ये खुजली मिटेगी.

विणा : तुजे बिलकुल भी शर्म नहीं है, है न?

रंजन : तुजे भी उसका लुंड चाहिए, पर तू शर्माती रहेगी, मुझे क्या, तुजे जो करना है कर, में तो चली अपने यार से छुड़वाने, तू सो जा. (कहते हुए वो उठी और कूदती हुई शिव के रूम की और निकल गयी, विणा आँखे फाडे उसको जाता हुआ देख रही थी, उसका भी बहोत मान था, पर कभी शिव के साथ उसकी उस तरह से बात hi नहीं हुई, न शिव ने कभी उसके साथ ये सब करने का प्रयास किआ, उसका भी बहोत मान था की वो ये सब करे, और जब से उसने शिव के लुंड को चूसा था, वो उसे याद कर के कई बार अपनी छूट को सहलाती भी थी, पर कभी हिम्मत नहीं हुई उसकी, वैसे भी शिव को तो पता hi नहीं की विणा ने उसका लुंड चूसा है, उसने किताबे तक्खी और लेट गयी, पर उसका मान बेचैन था. बार बार उसका मान शिव के कमरे की और hi जा रहा था, वो यही सोच रही थी की अभी वो दोनों क्या कर रहे होंगे, उसका मान किआ की एक बार जा कर वो देख ले, पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी. वैसे भी वो जानती थी की शिव उसके साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगा, उसने देखा था की कितनी खूबसूरत लड़कीअ उसके साथ थी, उसके सामने तो वो कुछ भी नहीं थी. आंखे बंद किये हुए उसने सोने का प्रयास किआ, पर नीं कहा आनेवाली थी. पंद्रह मिनट तक वो करवाते बदलती रही, आखिर कर वो उठी, और बिना आवाज किये वो शिव के कमरे की और चल पड़ी)

बहार शांति थी, उसने एक बार बच्चो के कमरे की और नजर दौड़ाई तो वह सब शांत था और सब सो रहे थे, आहिस्ता से कदम बढ़ाते हुए वो शिव के कमरे के नजदीक पहुंची तो बहार से hi उसे रंजन की गरम गरम सिस्किअ सुनाई दे रही थी, सँभालते हुए वो आगे बढ़ी, दरवाजा बांध था तो कान लगा कर अंदर की आवाजे सुन ने लगी.

रंजन : शहहहहह किनते दिनों से तडप रही थी में शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आहिस्ता शहहहहह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आहिस्ता ष्ठीीिव शहहह वह दर्द हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : अगर दर्द हो रहा है तो आयी क्यों थी?

रंजन :शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह में नहीं रह सकीय शह्ह्ह्हह्ह मुझे छोड़ना था सीईव शहहह तुम्हारा लुंड चाहिए था मुझे शह्ह्ह्हह्ह. (सुन ने के चक्कर में विणा ने दरवाजे पर कान और दबा दिया तो दरवाजा हल्का सा खुल गया, दो दर गयी और पीछे हैट गयी, पर अंदर से आवाजे अभी भी चालू hi thi)Shhhh आहिस्ता करो न शिईयिव शह्ह्ह्ह बहोत मोटा है तुम्हारा शह्ह्ह्हह्ह. (जब अंदर से आवाजे न रुकी तो विणा ने दरवाजे की दरार से झांक कर अंदर देखा, रंजन निचे लेती हुई थी और शिव उसके ऊपर था, यहासे उसको शिव का लुंड रंजन की छूट में अंदर बहार होता दिख रहा था,





रंजन अपने पेअर शिव की कमर पर लपेटे हुए थी, उसकी छोटी सी छूट पूरी फ़ैल गयी थी और वह पानी रिस रहा था, शिव जोर जोर से कमर हिला रहा था, रंजन सिसकते हुए उसकी पीठ सेहला रही थी. विणा देख सकती थी की शिव के लुंड से चुड़ते हुए वो कराह रही थी पर उसको बहोत मज़ा आ रहा था, थोड़ी देर बाद शिव ने लुंड बहार निकला तो विणा को रंजन को छूट का फैला हुआ छेड़ दिख गया. पर जल्द hi वो वापस सिकुड़ गया, शिव ने रंजन को पलट दिया और घड़ी बना दिया, वो भी बिना किसी झिझक के घोड़ी बन गयी और अपने कूल्हे उठा कर उसकी और देखने लगी, शिव ने वापस अपना लुंड उसकी छूट में दाल दिया तो रंजन के चेहरे पर दर्द उभर आया, शिव उसकी पतली कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था और रंजन सिसकने लगी.





रंजन : शह्ह्ह्ह शहहहहह आहिस्ता शह्ह्ह्ह शहहहहह (अंदर थप थप की आवाजे आ रही थी, विणा का हाथ अपनी छूट पर चला गया, उसको अपनी छूट में अजीब सा महसूस होने लगा, वो जोर जोर से अपनी छूट मसल रही थी, और अंदर चुद रही अपनी सहेली की सिस्किअ सुन रही थी. काफी देर तक वो उन दोनों की चुदाई देखती रही, रंजन की गरम गरम सिस्किअ उसे पागल बना रही थी, वो अपने स्तन को भी मसल रही थी)

शिव : हम्म हम्म हम्म्म कहा छोड़ू.

रंजन : अंदर मात छोड़ना शहहहहह अह्ह्ह्हह मेरे स्तन पर छोड़ दो शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (थोड़ी hi देर में रंजन कंपनी लगी और झाड़ गयी, शिव उसे लगातार छोड़ रहा था, आखिर उसने रंजन को सीधे लेता दिया और जोर जोर से छोड़ ने लगा, रंजन उस से लिपट कर चुद रही थी और गरम सिसकीओ से पूरा कमरा गूंज रहा था, आखिर कर शिव ने अपना लुंड निकला और रंजन के ऊपर गरम सफ़ेद पानी की बरसात कर दी. (विणा से रहा न गया और वो वह से भाग ते हुए बाथरूम की और चली गयी, उसके जाने से आवाज हुई)

शिव : (चौंकते हुए वो दरवाजे की और देखने लगा)

रंजन : (चुदाई के नशे में थी, वो शिव को किश करना चाहती थी पर शिव दरवाजे की और देख रहा था जो थोड़ा सा खुला हुआ tha)Kya हुआ?

शिव : तुमने दरवाजा बंद नहीं किआ था?

रंजन : पता नहीं मुझे याद नहीं, क्यों?

शिव : कोई था वह पर.

रंजन : विणा होगी.

शिव : क्या कह रही हो तुम (रंजन को शांत देख कर उसे अजीब लगा)

रंजन : वो भी बड़ी हो गयी है, उसका भी मान करता है न, पर वो दर रही है तुमसे तो क्या करेगी, देख कर अपने आपको शांत कर लेती है.

शिव : तुम जानती हो?

रंजन : Ha,kayi बार हमारी बात हुई है, एक बार तो उसने तुम्हारा लुंड भी चूसा है, अब में तो तुजे कह नहीं सकती की जा कर ले उसके साथ भी, ये तेरा और उसका मटर है, ये तुम दोनों को डीडे करना है.

शिव : पागल है क्या तू, में कैसे उसके साथ कर सकता हु? और उसने कब मेरा चूसा था?

रंजन : एक रात तू सोया हुआ था तो हम दोनों ने तेरा चूसा था, यहाँ सबके साथ कर चूका है तू, सिर्फ वो hi बाकि रह गयी है, ये सब देख कर उसका भी मान करता होगा न.

शिव : क्या वो सब के बारे में जानती है?

रंजन : है, हमदोनो ने साथ में सब देखा है, वो डर्टी है और शर्माती भी है तो कह नहीं पति, अगर तुजे मान है उसके साथ करने का तो वो मन नहीं करेगी.

शिव : (टॉवल लपेट ते hue)Tu पागल है, तुजे पता भी है की तू क्या बोल रही है. (शिव बहार जाने लगा)

रंजन : तो बुराई भी क्या है, तू थोड़ी न जबरदस्ती कर रहा है, अब उसका मान है तो कर ले, तेरा क्या घिस जायेगा.

शिव को पेशाब लगी थी तो वो वह से निकल गया जैसे hi उसने बाथरूम का दरवाजा खोला तो सामने का नजारा देख कर वो चौक गया, विणा कड़ी थी, निचे से नंगी थी और अपनी छूट को कुरेद रही थी,





दरवाजा खुलने से उसकी नजर शिव पर पड़ी और घबरा कर वो उलटी घूम गयी, उसके भरे हुए कूल्हे शिव के सामने थे, एक बार तो शिव को लगा की वो लौट जाये, पर फिर उसे रंजन की बात याद आयी, वो बाथरूम में घुस गया.

विणा ऐसे अचानक शिव को देख कर घबरा गयी थी, सेक्स की खुमारी में उसे ये भी पता नहीं रहा की उसने दरवाजा ठीक से बंद नहीं किआ है, वो अपनी लेंगी नीचे उतर कर शिव और रंजन का सेक्स याद करते हुए अपनी छूट को रगड़ रही थी, उसने महसूस किआ की शिव बाथरूम में आ गया है, वो उलटी घूम गयी थी पर जैसे hi उसे आभास हुआ की वो निचे से नंगी है तो वो अपनी t-shirt खिंच कर उसे छुपाने की कोशिस करने लगी, उसे समाज नहीं आया की शिव अंदर क्यों आ गया, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो पीछे देख भी नहीं रही थी, उसे एहसास हुआ की शिव उसके बिलकुल पीछे खड़ा है, वो तेज तेज सांसे ले रही थी.

में अभी अभी सेक्स कर के आया था पर फिर भी मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा, सामने एक जवान लड़की जो निचे से नंगी थी और वो जनता था की अगर वो कुछ करेगा तो वो मन नहीं करेगी. उसने उसके दोनों कंधो पर हाथ रक्खा तो वो कैंप गयी, वो जनता था की विणा अभी सील पैक है तो ये सोच कर hi उसका लुंड कूदने लगा, टॉवल के अंदर से भी उसका लुंड खड़ा हो कर तमबुबानाये हुए था, वो कुछ पल ऐसे hi खड़ा रहा.

उधर विणा की हालत ख़राब थी, वो क्या करे कुछ समाज में नहीं आ रहा था, उसकी हिम्मत भी नहीं थी की वो पीछे देखे, तो वो कांपते हुए कड़ी थी, शिव उसके कंधे को हलके हलके दबा रहा था, विणा की सांसे तेज तेज चल रही थी, शिव उस के पीछे सात गया तो उसके लुल्हो पर वो कड़क डंडा चुभने लगा,.

विणा : Shhhhhhhhhhhhh (न चाहते हुए भी उसकी सिसकी निकल गयी, तो उसने अपने हाथ से अपना मुँह दबा दिया)

शिव : तुम देख रही थी? (विणा को कुछ समाज नहीं आया की वो क्या जवाब दे, वो कुछ नहीं बोली) तुम hi थी न जो हमें देख रही थी? (शिव को अपने कान के करीब आकर बोलते हुए महसूस कर के वो कंपनी लगी, ये पहली बार था की वो शिव के साथ इस अवस्था में थी, हलाकि वो कई बार सपने में शिव के साथ सबकुछ कर चुकी थी पर हकीकत, हकीकत होती hai.)(Me समाज गया की वो hi थी, उसकी ख़ामोशी सब बयां कर रही थी, तो मेने बात आगे badhayi)Kyu देख रही थी? (वो फिर भी कुछ नहीं बोली, वो दार से कैंप रही थी, उसकी ऐसी हालत मुझे अच्छी नहीं लगी, में उसको रिलैक्स करना चाहता था) तुम चाहती हो की में वो सब तुम्हारे साथ करू? (उसके कान में फुसफुसाते हुए मेने कहा, पर उसने कोई जवाब नहीं दिया, वो दूसरी और देखने lagi)Tum इतना दार क्यों रही हो विणा, क्या तुम मुझे जानती नहीं, में तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा, तुम जानती हो न? (विणा ने एक लम्बी साँस ली और हां में शिर hilaya)To फिर, दर क्यों रही हो, में बस तुम्हारे दिल की बात जान न चाहता हु, रंजन मुझे बता रही थी की तुम भी ये सब करना चाहती हो, क्या सच है ये? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, वो दर रही थी, में उसके मान की बात जान न चाहता tha)Wo बता रही थी की तुमने मेरा वो चूसा भी है, क्या सच है ये? (विणा इतनी घबरा गयी की वो दार के मारे कैंप रही थी) दार क्यों रही हो, में कोई गुस्सा नहीं हु, बस जान न चाहता हु.

विणा : (वो पहली बार ऐसी सिचुएशन में पड़ी थी, पर उसे लगा की अगर उसे कुछ पाना है तो हिम्मत तो दिखानी पड़ेगी, उसने धीमी आवाज में पूछा, पूछा क्या शिकायत ki)Tttt...tumhe....me अच्छी ...नहीं लगती न?

शिव : (उसके सवाल से मेरे चेहरे पर हसी आ गयी, पर में हँसा nahi)Aisa क्यों कह रही हो?

विणा : तुम कभी मुझसे बात नहीं करते.

शिव : करता तो हु, पर तुम ज्यादा शर्माती हो तो उतनी बात नहीं होती.

विणा : अगर में अच्छी लगती तो तुम मुझसे बात करने की कोशिस करते न, मुझे पता है में उतनी खूबसूरत नहीं हु.

शिव : एक बात कहु, बुरा तो नहीं मानोगी? (अब विणा थोड़ी शांत तो गयी थी तो उसने ना में शिर hilaya)Baat अजीब है, तुम्हे गन्दा भी लग सकता है, पर जब तुम मुझे उस हालत में देख चुकी हो, तुमने मेरा वो चूसा भी है, (विणा शर्मा गयी और निचे देखने lagi)Ek बात बताओ, तुम्हे पीछे कुछ महसूस हो रहा है? (ऐसे सीधे सवाल से विणा हिल गयी, उसने सोचा नहीं था की शिव उसके साथ ऐसी बात करेगा, वो क्या जवाब देती तो वो चुप rahi)Tumhe जवाब तो देना hi पड़ेगा, फिर तुम कहती हो की में तुमसे बात नहीं करता, पर तुम ऐसे शर्माती हो की बात नहीं हो पति, में फिर से पूछ रहा हु, क्या तुम्हे अपने पीछे कुछ महसूस हो रहा है (विणा ने कभी ऐसी बाते नहीं की थी तो वो मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी, उसकी सांसे तो बेकाबू हो रही थी, पर जवाब तो देना hi था तो उसने सिर्फ गर्दन हिला कर हां कहा) (में उसकी हालत समाज रहा था तो मेने उसे बोलने को मजबूर नहीं किआ, मेने अपनी बात आगे badhayi)Tum जानती हो, वो कब खड़ा होता है? (विणा की हालत ख़राब थी, वो कैंप रही थी, वो शिव के लुंड को अपने कूल्हों की दरार में महसूस कर रही थी, और शिव उसके साथ इस तरह की बात कर रहा हे, उसने शिव के सवाल के जवाब में ना में शिर hilaya)(Shiv ने मुस्कुराते हुए kaha)Jab उसको कोई पसंद आ जाती है तो वो खड़ा हो जाता है, अब तुम्हारे अलावा तो यहाँ कोई भी नहीं है तो फिर ये किस को देख कर खड़ा हुआ है (विणा बुरी तरह से शर्मा गयी, शिव ये कह रहा था की उसका वो उसको देख कर ऐसे खड़ा हो गया है, शिव ने बात आगे badhayi)To तुम्हे समाज आ गया होगा की तुम पसंद नहीं हो वैसा नहीं है, पर तुमने मुझे सबके साथ देखा है, तो तुम्हे क्या लगता है की तुम्हे मेरे जैसे लड़के के साथ ये सब करना chahiye)(Vina सोच में पद गयी) तुम मुझे पसंद हो उसका ये मतलब नहीं की में तुम्हारे साथ वो सब करू, अभी तुम छोटी हो, में छोटा हु, आगे चलकर तुम किसी के साथ घर बसना चाहोगी, तो मुझे लगता है की अभी तुम्हे अपने आपको और वक़्त देना चाहिए, में समझता हु की इस उम्र में ये सब फीलिंग आती है, इनमे में भी बह चूका हु, और सच कहु तो अच्छा भी लगता है, और में सच कह रहा हु की अगर मुझे तुम्हारे साथ वो करने का मौका मिला तो मुझे सचमे बहोत अच्छा लगेगा, पर तुम मेरी बात समाज रही हो न में क्या कहना छह रहा हु, तुमने सबकुछ देखा है की मेरे किनके साथ सम्बन्ध है. (विणा सचमे सोचमे पद गयी, उसके मान में ढेर सरे सवाल थे)

विणा : तुम क्या रंजन को छोड़ डोज?

शिव : मुझे नहीं पता है विणा, मेरा भविस्य क्या होगा मुझे नहीं पता है, उसके साथ में नादानी में कर चूका हु, पर में अब समझता हु, में किसी को भी दुखी नहीं कर सकता, मुझे खुद भी पता नहीं है की में सबको एक साथ कैसे खुस रख पाउँगा, तो में चाहूंगा की तुम अपने भविस्य का सोच समाज कर फैसला लो. है में तुम्हारी थोड़ी मदद जरूर कर शक्ति हु, मेरे आने से तुम्हे बीचमे रुकना पड़ा, उस के लिए में तुम्हारी मदद कर शक्ति हु अगर तुम छतो हो. (विणा शर्मा गयी क्यों की शिव उसकी ऊँगली करने की बात कर रहा था, शिव की बातो से अब वो काफी बेहतर महसूस कर रही थी, उसकी बात सुन कर उसको शर्म के साथ साथ उत्तेजना भी महसूस होने lagi)To बताओ, क्या तुम चाहती हो की में तुम्हारी मदद करू (विणा को इतनी शर्म आ रही थी की वो बोल नहीं पायी, पर उसने है में शिर हिलाया, भले hi आगे भविस्य में कुछ भी हो, पर वो इस पल को मिस करना नहीं चाहती थी, वो कितने दिनों से इन सबके लिए तड़प रही थी, उसने है में शिर हिला कर शिव को इजाजत दे दी, वैसे उसको पता था की शिव क्या करेगा, रंजन कई बार उसके साथ ये सब कर चुकी थी, पर ये शिव था, जिसके बारे में वो अक्सर सोचती thi)(Uski अनुमति प् कर मेने अपने हाथ को उसके कंधे से सरका कर उसके स्तन की और बढ़ाये, रंजन के मुकाबले उसके स्तन बड़े थे, और कमर पतली थी तो वो बहोत बड़े लगते थे, मेरी भी नजर कभी कभी चली जाया करती थी, पर मेने अपने आपको संभाला था, पार आज उसने खुद मुझे इजाजत दे दी थी तो मुझसे सबर न हुआ और मेने अपने दोनों पंजो से उसके स्तन को मसल दिया. (इतने मजबूत हाथ को महसूस कर के विणा को हल्का दर्द भी हुआ और मस्ती भी चढ़ने लगी, उसके दांत कास गए और मुँह से सिसकी निकल गयी. शिव उसके स्तन को जैसे मसल रहा था, हल्का दर्द हो रहा था पर शिव उसका ख्याल कर के आराम से मसल रहा था, रंजन ने भी उसके स्तन दबाये थे पर शिव के हाथ उसको अलग महसूस हो रहे थे, वो जैसे जैसे उसके स्तन मसल रहा था उसकी हालत ख़राब हो रही थी और साथ में शिव का वो कड़क डंडा उसके कूल्हों की दरार में चुभ रहा था, उसका मान किआ की वो उसे पकड़ ले पर वो अभी शर्मा रही थी) (उसके कठोर स्तन को दबाते हुए में अपने लुंड को उसके सुडौल कूल्हों पर रगड़ रहा था जिस से टॉवल खुल गया, मेने कोई परवाह नहीं की और नंगे लुंड को नंगे कूल्हों के बिच दबा दिया. लुंड सीधा उसके गांड के छेड़ पर hi लगा, उस गरम जगह को महसूस करते हुए मेरे मुँह से भी सिसकी निकल गयी, मेरी कमर हलके हलके आगे हिलने लगी) (विणा की हालत पतली हो रही थी, ये उसके लिए नया अनुभव था, वो महसूस कर रही थी की उसकी गांड के छेड़ पर शिव का लुंड चुभ रहा है, वो तो इन सब बातो से अनजान hi थी की इन सब का क्या परिणाम होगा, उसे तो सब अच्छा लग रहा था, शिव उसकी T-shirt उतरने लगा तो उसको बहोत शर्म आने लगी, पर उसने रोका नहीं, शिव ने उसकी T-shirt निकल दी, वो उलटी थी तो उसको इतनी शर्म नहीं आयी, रात को वो वैसे भी ब्रा नहीं पहनती थी तो अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी, इतने टाइम से वो सब देख रही थी तो उसने अपने आपको संजय की ये तो होना hi था, अब उसके नंगे चुके शिव के हाथ में थे, उसकी पूरी गोलाइओ का नाप लेते हुए वो उसे मसल रहा था, उसके निप्पल भी कड़क हो चुके थे, वो आंखे बंद किये हुए सिसक रही थी, शिव उसके दोनों निप्पलों को अंगूठे और ऊँगली की मदद से मसलने लगा, एक अजीब सी सनसनाहट उसके पुरे शरीर में दौड़ गयी.

विणा : शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह शह्ह्ह्हह्ह. (उसको जो अनुभव हो रहा था उसको वो समाज hi नहीं प् रही थी, अचानक शिव एक हाथ को निचे सरकने लगा, तो उसकी धड़कने बढ़ गयी, वो अपने दोनों हाथ बाथरूम की दीवाल पर टिकाये कड़ी थी, उसने शिव को रोका नहीं, वो हो जाने देना चाहती थी जो शिव चाहे, इस वक़्त उसके दिमाग में और कुछ भी नहीं था, वो अपने गुदा द्वार पर शिव के लुंड को महसूस कर रही थी, शिव हलके हलके धक्के मार रहा था, उसे महसूस हो रहा था की वह चिकनाहट हो रही है, क्यों की शिव का लुंड फिसल रहा था, उसे लग रहा था की उसका लुंड हल्का हल्का अंदर भी जा रहा है, वो ये सब महसूस कर के पागल हो गयी थी, शिव का हाथ उसकी छूट तक पहुंच गया था, और वो उसे मसल रहा tha)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइइइव (बो बस सिसक रही थी, वो हलकी आगे झुकी और अपनी गांड को और उभर दिया, पता नहीं क्यों पर उसे अपने गांड के छेड़ पर वो लुंड बहोत अच्छा लग रहा था, वो उसे जगह देना चाहती थी, वो भोली नादाँ कुछ भी नहीं जानती थी, बस अपनी भावनाओ में बहती जा रही थी.) (शिव अंजाम से भली भाटी परिचित था, तो वो सयम से धक्के लगा रहा था, पर उसको भी कही न कही ये अच्छा लग रहा था तो कभी कभी हल्का धक्का ज्यादा लग जाता था, वो गरम गरम छेड़ मुझे आकर्षित कर रहा था, मेरे मान में ये भी विचार आ रहा था की यहाँ करने से उसको कोई नुकसान नहीं है, तो मान भी बहक रहा था, पर फिर भी मेने अपने आपको संभाला था, उसकी छूट पर मेरा हाथ था, उसके रास से मेरा पूरा हाथ भीग चूका था, उसके होठो को महसूस करते हुए में उसे मसल रहा था, मेने हलकी सी ऊँगली उसके छेड़ में डालनी चाही तो वो छेड़ बहोत छोटा tha)Shhhhh शीइइइइव शहहहहह, अह्ह्ह्हह.

शिव : दर्द हो रहा है, डिअर?

विणा : (नशे में डूबी आँखों से मुझे देखा, उसके चेहरे पर अज्जेब से भाव the)Haaaa शहहहहह.

शिव: ज्यादा अंदर नहीं डालूंगा, थोड़ा बर्दास्त कर लो, तुम्हे अच्छा लगेगा. (उसने है में गर्दन हिलायी, मेने ऊँगली को हलके हलके अंदर बहार किआ, पर ध्यान रक्खा की वो ज्यादा अंदर न चली जाये)

विणा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : अच्छा लग रहा है?

विणा : शहहह हा, शह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है. (विणा के ऊपर तीनो और से हमले हो रहे थे, गांड के ऊपर लुंड लगा हुआ था, छूट में ऊँगली घुसी हुई थी और एक हाथ से स्तन मसाले जा रहे थे, ऐसे अनुभव की तो उसने कल्पना भी नहीं की थी. उसने रोनेवाली आवाज में kaha)Shiiiiv शहहह मुझे कुछ हो रहा है शहहहहह मुझे वो करना है शह्ह्ह्हह्ह मुझे वो करना है सीईव शह्ह्ह्हह्ह. (में उसकी हालत समाज रहा था, वो बहोत ज्या उत्तेजित थी, में भी बहोत ज्यादा उत्तेजित था, में महसूस कर रहा था की उसकी गांड का छेड़ फ़ैल रहा है, और मेरा सूपड़ा अब हल्का हल्का अंदर जा रहा है, अपने आप पर कण्ट्रोल करना मुश्किल होता जा रहा था, वो ज्यादा हिल रही थी, वो अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी)

शिव : ज्यादा हिलो मात विणा, शहहह कुछ हो जायेगा.

विणा : (रोनी आवाज में बिनती करते hue)Shiv शहहह कार्डो न शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है.

शिव : कर तो रहा हु, तुम बस ज्यादा हिलो मात, वर्ण वो अंदर चला जायेगा.

विणा : शहहहहह शीइइइइइइव (शिव को समजते हुए, रोनी आवाज me)Aage से डालो न शिव शह्ह्ह्ह कुछ नहीं होगा, शीइइइइइइव (शिव सुन नहीं रहा था, वो उसकी छूट में हाली हाली ऊँगली अंदर बहार कर रहा था, विणा की हालत ख़राब थी उसके अंदर तूफान मचा हुआ था, उसने फिर बिनती ki)Shiiiiv सुनो न शह्ह्ह्ह, आगे डालो न शह्ह्ह्ह मुझे वो चाहिए shhhhhhhhhh.

शिव : (मेरी भी हालत ख़राब थी, एक बार तो मान हुआ की दाल hi दू, पर फिर मेने अपने आपको sambhala)Mene कहा न आज नहीं.

विणा : (हलके गुस्से se)Please न शिव, आगे दाल दो न शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे रंजन के जैसे hi करना है, शहहहहह, प्लीज शिव.

शिव : (एक गरम लड़की जब तुम्हे इतने सेक्सी तरीके से खुद को छोड़ने के लिए बोलती है तो रुकना बहोत मुश्किल होता है, पर में जनता था की ये कुछ पल का खुमार है, पर कब तक आपने आपको संभालता, मेने उसे kaha)Jyada हिलो मात विणा, वो पीछे से तुम्हारे अंदर चला जायेगा.

विणा : (उसको गुस्सा आ रहा था, उसको लुंड अपनी छूट में चाहिए था, हलाकि वो ऊँगली भी बर्दास्त नहीं कर प् रही थी पर उसको वो बड़ा लुंड hi चाहिए थे, शिव के मन करने पर उसे गुस्सा आ रहा था, गुस्से में उसने एक गलती कर दी, उसने जोर से अपनी गांड लुंड पर दबा di)Ander जाता है तो दाल दो, (कहते हुए उसने अपनी गांड दबा दी पर अगले hi पल उसे अपनी गलती का एहसास हो गया, उसने फ़ौरन अपना मुँह खुद दबा दिया, लुंड का सूपड़ा उसके गांड के छेड़ को फैला कर अंदर चला गया था, उसे तेज दर्द हुआ, उसे लगा की उसकी चमड़ी वह फैट जाएगी. उसके मुँह से आवाजे निकलने lagi)Ummm उम्म्म्म, उम्म्म्म.

शिव : (वैसे तो लुंड के अंदर जाने से मुझे अच्छा लगा पर मुझे विणा की हालत पता thi)Shant हो जाओ विणा, कुछ नहीं होगा. (वो मुझे एक हाथ से पीछे धकेलने लगी जैसे कह रही हो की बहार nikalo)Wo अंदर चला गया है, अब बहार निकल कर क्या करना, थोड़ी देर में सब ठीक हो जायेगा. शांत रहो तुम. (उसने मेरी बात मणि और अपने आपको सँभालने की कोश्शि करने लगी, में फिर से सुरु हो गया, उसके स्तन मसलने और छूट को सहलाने laga)(Vina को गांड में फसे लुंड से दर्द हो रहा था पर फिर उसे एहसा हुआ की शिव ने उसको छोड़ दिया है भले hi गलत जगह पर, ये सोच कर वो गरम होने लगी, उसके चेहरे पर दर्द था पर उसको अच्छा भी लग रहा tha)(Mera भी मान अब लालची हो गया था, वैसे भी लुंड अंदर चला गया था, मेने लुंड पर थूक लगाया और अच्छे से गिला कर दिया, और विणा से puchaa)Dard हो रहा है?

विणा : है, थोड़ा थोड़ा.

शिव : में इसीलिए तुम्हे रोक रहा था, अब वो अंदर चला गया है, क्या में वह कर लू? (विणा ने अजीब नजरो से मुझे देखा, और ऋणी सूरत के साथ hi हां में गर्दन हिलायी, में खुस हो गया और हलके हलके लुंड अंदर बहार किआ, वो दन्त आपस में दबा कर सेहन कर रही थी, पर वो मुझे रोक नहीं रही थी, तो मेने लुंड थोड़ा थोडा अंदर बहार करना सुरु कर दिया, फिर थोड़ा थूक लगाया, और लुंड थोड़ा अंदर डाला, उसने दर्द से मेरी और देखा पर रोका नहीं, उसके कूल्हों के बिच लुंड फसा हुआ था, में उतने लुंड से अंदर बहार करने लगा, और साथ में थूक लगता रहा, थोड़ी देर में छेड़ फ़ैल गया और लुंड अंदर बहार हो रहा था, में काफी उत्तेजित फील कर रहा था, मेने विणा से kaha)Sorry यार, ये हो गया, पर मुझे अच्छा लग रहा है, में वह अच्छे से करू? (उसने अजीब नजरो से मुझे देखा, और है में शिर hilaya)Tum बहोत सेक्सी हो विणा, (में हलके हलके धक्को से लुंड अंदर बहार कर रहा था )तुम्हारी गांड बहोत गरम है, और बहोत टाइट भी. (उसने रोनी सरत से फिर मुझे dekha)Tumhe दर्द तो नहीं हो रहा है न (उसने ना में शिर हिलाया, मेरा लुंड लोहे जैसा कड़क हो चूका था, में उस मासूम काली को ज्यादा दर्द नहीं देना चाहता था तो में हलके हलके धक्के hi लगा रहा था और साथ में ज्यादा अंदर भी नहीं दाल रहा था)

(भले hi दर्द था पर विणा को एक अजीब सी खुसी मिल रही थी, वो पहली बार किसी लड़के के साथ ये सब कर रही थी, अपनी गांड के छेड़ में उस बड़े से लुंड को महसूस कर रही थी, साथ में उसकी छूट से पानी की धराये छूट रही थी, उसके मुँह से सिस्किअ निकालनी सुरु हो गयी थी, शिव उसे छोड़ रहा था ये उसके लिए सुकून की बात थी,

वो अब अपने आपको सबके जैसा hi महसूस कर रही थी, वो शिव को अपनी गांड मरने दे रही थी, भले hi शिव ने उसकी छूट में लुंड नहीं डाला था पर वह भी उसे अब अच्छा लग रहा था और साथमे शिव की ऊँगली उसकी छूट के छेड़ में तो थी hi, वो आंखे बंद किये हुए अपनी पहली चुदाई का मज़ा लेने लगी, शिव उसके गले में किश कर रहा था, और उसके स्तन दबा कर उसका प्यार जाता रहा था जो उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को गले लगाना चाहती थी पर वो उलटी थी तो कर नाही सकती थी, वो ऊपर उठी और शिव के शिर को पीछे से सहलाने लगी, वो उसे बता रही थी की उसका ऐसा करना उसे अच्छा लग रहा है, भले उसे दर्द था पर उस से कही ज्यादा मज़ा था, वो सिसकते हुए अपने गांड के छेड़ में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी,





थोड़ी देर बाद उसको महसूस होने लगा की वो अब छूटने वाली है, तो सिस्किअ लेते हुए शिव के शिर को सहलाने लगी, उसकी गरम सिस्किअ वो ज्यादा आवाज से नहीं निकल रही थी, शिव थोड़ी जल्दी जल्दी धक्के लगा रहा था जिस से उसे दर्द हो रहा था पर उसने रोका नहीं, एक अजीब से सनसनाहट उसके शरीर में महसूस हो रही थी, अचानक वो झड़ने लगी और साथमे उसने महसूस किआ की शिव ने उसके लुंड को और दबा दिया है जो उसकी गांड को फैलता हुआ और अंदर घुस गया जिस से उसे दर्द हुआ पर साथ में उसकी गांड के अंदर गरम गरम कुछ गिरने लगा जिस से उसको रहत भी मेहुस हुई, थोड़ी देर वो दोनों हांफ ते हुए वैसे hi खड़े रहे, शिव के लुंड का तनाव काम हो रहा था जिस से उसे और रहत महसूस हुई. आखिर कर शिव का लुंड उसकी गांड से बाहर निकल गया, उसने महसूस किआ की उसकी गांड से कुछ निकल रहा है तो उसने नीचे झुक कर देखा तो वह सफ़ेद रास उसकी गांड से टपक रहा था, उसके शिर से सेक्स का खुमार उतर चूका था तो उसे शर्म महसूस हुआ और फिर वो अपने आप को छुपाने की कोश्शि करने लगी, पर कैसे छुपाती, तो उसने अपने शरीर पर अपने हाथ ढकने का प्रयास किआ, उसकी गांड का छेड़ सिकुड़ा तो उसे दर्द महसूस हुआ.

विणा : अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (मेने विणा को अपनी तरफ पलटा, में समाज रहा था की उसे दर्द है जो में अपने प्यार से काम कर शक्ति था, मेने उसे दीवाल के सहारे खड़ा किआ वो मेरी और देख नहीं रही थी तो मेने उसको गाल से पकड़ कर मेरी और देखने को कहा तो वो मुझे देखने lagi)Meri और देखो विणा. (उसने मेरी और dekha)Tum बहोत खूबसूरत हो (कहते हुए में उसकी और झुका और उसे किश करने लगा)

विणा : (इस एहसास से सब कुछ भूल गयी और शिव को अपनी गोश में लेने लगी और उसको किश करने लगी, ये उसके जीवन का पहला किश था जो इतना दर्द सहने के बाद उसे मिल रहा था, उसने श्री शर्म त्याग कर शिर को अपनी बहो में भर लिया, उसे अपने नंगे होने का कोई फर्क नहीं पद रहा था, शिव भी उसके शरीर को सेहला रहा था और उसके होठो को चूस रहा था जो उसे बहोत अच्छा लग रहा था.)



 
अपडेट 149

रंजन चुदाई के बाद थक कर थोड़ी देर लेती रही, शिव अभी भी नहीं आया था, उसने कपडे पहने और अपने कमरे में गयी, वह विणा नहीं दिखी, पर चुदाई से वो इतनी थक गयी थी की वो बिस्तर में लेट गयी, थोड़ी देर में उसे नींद भी आ गयी.

वह बाथरूम में विणा और शिव ननगे थे, दोनों एक दूसरे से नंगे गले लगे हुए थे, अब विणा को शर्म आने लगी थी की वो शिव के साथ ऐसे बिना कपड़ो के है, उसको अपने गुदा द्वार में दर्द महसूस हो रहा था और वह से बह रहा वीर्य उसके पेअर पर टपक रहा था, जब वो शिव से अलग हुई तो शिव उसे देख रहा था पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी शिव की और देखने की. शिव भी ये समाज रहा था तो उसने उसको T-shirt पहनाया, पानी भर कर उसने उसके पेअर और गुदा द्वार को धोया, विणा को बहोत शर्म आ रही थी, वो बस शिव जो कर रहा था उसे सिर्फ महसूस कर रही थी, टॉवल से उसने विणा के पैरो को पोछा फिर उसे पंतय और लेंगी भी पहना दी. और खुद ने टॉवल लपेट लिया. विणा जैसे hi बहार जाने लगी तो उसके मुँह से आह्हः निकल गयी, क्यों की उसे वह दर्द हो रहा था. शिव ने उसे उठा लिया और कमरे की और बढ़ चला. रंजन सोई हुई थी, विणा को दूसरे बिस्तर पर लेटाया और वह से अपने कमरे में गया, वह से पेनकिलर की गोली ली और पानी ले कर वापस कमरे में आया. उसने विणा को गोली खिलाई, विणा शिव को देखने लगी, कैसे वो उसकी देखभाल कर रहा था.

शिव : (विणा को वापस सुलाया तो वो फिर करहि, शिव ने उसके शिर पर हाथ से sehlaya)Abhi थोड़ी देर में आराम हो जायेगा, रंजन को उठा दू? (विणा ने नज़ारे झुकाये hi ना में इस्सर किआ, शिव वह से बहार चला गया, विणा को अपने गुदा द्वार में दर्द हो रहा था तो उसका ध्यान बार बार वही जा रहा था, वो बेचैन हो रही थी, ऐसे तो नींद आने से रही, तभी उसने देखा की शिव तकिया और कम्बल ले कर उसके कमरे में आया, वो उसे hi देख रही थी, उसने उसके बाजु में hi तकिया लगाया और उसके साथ सोने लगा, उसके शिर के निचे हाथ रखते हुए अपने शाइन से चिपका लिया, विणा एक अनाथ लड़की थी, तो उसे इस तरह का प्यार कभी मिला नहीं था, पर शिव जिस तरह से उसके साथ व्यव्हार कर रहा था वो भावुक हो रही थी, जिस तरह से शिव उसे संभल रहा था उसके दिल को छू रहा था, आज उसको लग रहा था की वो अनाथ नहीं है, उसके ऊपर भी, उसका ख्याल करनेवाला कोई है, वो शिव से लिपट गयी.

शिव : (उसका शिर सहलाते hue)Kya हुआ, दर्द हो रहा है? (विणा ने न में गर्दन हिलायी) क्यों जूथ बोल रही हो, में जनता हु की दर्द हो रहा है, मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था, सॉरी.

विणा : सॉरी मात कहो शिव, में खुस हु, ये दर्द तो अभी चला जायेगा तुम परेशान मात हो, मुझे हमेसा लगता था की में अकेली हु, जब मेने देखा की तुम सबके साथ प्यार जाता रहे हो, मुझसे नहीं तो मुझे बहोत दुःख होता था, मुझे लगता था की मुज में hi कोई कमी है, आज तुमने मुझे अपना कर मुझे इस घर में शामिल कर लिया है, में खुस हु, बहोत खुस हु.

शिव : (उसका शिर सहलाते हुए) ठीक है, गर तुम खुस हो तो में भी खुस हु, और कभी अपने आप को अकेला मत समाज न, में हु न. कोई भी परेशानी हो कुछ भी चाहिए हो, तुम मुझे बता सकती हो, और ये इस वजह से नहीं है की हम दोनों में ऐसा हुआ, तुम पहले भी कहती या बताती तो में वो करता, मेने कभी तुम्हे अलग नहीं समजा.

विणा : एक बात कहु शिव (उसने बड़े प्यार से कहा)

शिव : है, कहो.

विणा : तुम्हारे रहते, यहाँ कोई भी अपने आपको अनाथ नहीं समझता, अनाथ वो होता है जिनका कोई नाथ नहीं होता मतलब जिसके शिर पर किसी का हाथ नहीं होता, हमारे शिर पर तुम्हारा हाथ है शिव, फिर हम अनाथ कैसे हुए. तुम्हारे रहते हम अपने आपको सुरक्षित महसूस करते है.

शिव : (उसके शिर को सहलाते hue)Par मेने तो तुम्हे hi लूट लिया आज.

विणा : ऐसा कभी मात सोचना, तुमने मुझे लुटा नहीं है, में खुद चाहती थी ये, लूटना किसे कहते है वो मेने देखा है शिव, तब मुझे लगता था की भगवन ने मुझे ऐसे नर्क में क्यों डाला, क्यों ऐसी जिंदगी दी, पर आज लगता है की जो हुआ सही हुआ, अगर में यहाँ न होती तो तुमसे कैसे मिलती. (उसकी बाते सुन कर मेरा दिल बैठने लगा, में ये हरगिज नहीं चाहता था, पर अब जो होना था वो हो चूका tha)(Vina ने शिव की बढ़ती धड़कन महसूस की तो वो समाज gayi)Tu चिंता मात कर, में ये नहीं कह रही की तू मुझे अपना ले, में जानती हु की तुम्हारी जिंदगी में दूसरे है, पर कभी भी मान करे मेरे साथ रहने का तो झिझकना नहीं, में कभी तुम्हे दोष नहीं दूंगी, ये मेरी जिंदगी है, और मुझे तुम्हारे साथ खुसी मिलेगी, आगे का रास्ता में खुद तय कर लुंगी तो मेरी फ़िक्र मात करना.

शिव : विणा, तुम बहोत समाज दर हो, पर तुम्हारा ऐसा प्यार hi मेरी मुसीबत बन जाता है, सिर्फ तुम नहीं बाकिओ के साथ भी यही हाल है, पता नहीं क्यों पर न चाहते हुए भी मुझसे ये गलती हो hi जाती है. कही न कही में गलत उम्मीद दे बैठता हु.

विणा : तू कुछ गलत नहीं कर रहा है, वैसे भी लड़कीअ एक बेल (Lata)ki तरह होती है, जहा उसे सहारा मिल जाता है वह वो ऊपर चढ़ने लगती है, जब तू किसी का सहारा बन के उसके साथ खड़ा रहेगा तो ये तो होना hi है, वो बेल है, तुजसे तो लिपटेंगी hi.

शिव : पर यही तो मेरी मजबूरी बन जाती है, मुझे दार लगता है की में उन्हें दुखी न करदु.

विणा : क्यों इतना ज्यादा सोचता है, कोई किसी के बगैर मार नहीं जाता, चाहे वो कितना भी महत्वपूर्ण क्यों नहो, सबके लिए maa-baap बहोत ज्यादा महत्व पूर्ण होते है, उनके बगैर बच्चो का क्या हाल हो सकता है, क्या वो जी भी पाएंगे? ये सवाल होता है, हमे hi देख ले, बिना maa-baap के भी हम इतने बड़े हो गए, उनके चले जाने से क्या हम मार गए, नहीं न, तो तेरे बगैर भी कोई नहीं मरनेवाली, पर शायद कल अलग हो जायेंगे ये सोच कर आज hi अलग हो जाना, उस से बड़ी बेवकूफी क्या होगी. जो आज मिल रहा है उसे कल की चिंता कर के क्यों ठुकराना. कल किसने देखा है, तो कल की चिंता कर के आज क्यों ख़राब करना. में तेरे बारे में सब कुछ जानती हु, तुम्हारे किनके साथ सम्बन्ध है में ये भी जानती हु, फिर भी अगर में तेरा साथ चाहती हु तो तुजे क्या परेशानी है, तो ज्यादा सोच मात, समजा.

शिव : जितना काम बोलती है न तू, उतनी hi ज्यादा समझदार है तू, बोलै कर, सब अपने अंदर छुपा कर क्या करेगी (मेने हलके से उसके शिर पर मारा)

विणा : तू भी तो कितना करीब लग रहा है आज, अगर सिर्फ ये सब करने से इतनी करीबी महसूस होती है तो मुझे कोई परहेज नहीं है शिव, तूने कहा था न की सोच समाज कर फैसला लेना, तो मेने सोच समाज कर hi तुजे वो सब करने दिया था, बिना सोचे में कुछ नहीं करती.

शिव : मुझे पहले से पता होता तो फिर अच्छे से सब करता न. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

विणा : (शरमाते hue)Ye तेरी प्रॉब्लम है, तू hi मुझे नहीं जान पाया. मेने तो सब सोच समाज कर hi किआ है, तो सोचना तुजे है, की तू आगे बढ़ना चाहता है की नहीं.

शिव : सच कहा तूने, सोचना मुझे hi चाहिए, चल सो जा, कल जल्दी उठना है.

विणा : (शरमाते hue)Me तो नहीं उठ पाऊँगी कल, और न रंजन उठ पायेगी, तो कल छुट्टी.

शिव : (उसके शिर पर किश करते hue)Good नाईट.

विणा : (लिपट ते hue)Good नाईट शिव. (मान में, ी लव यू) (मुस्कुराते हुए वो सोने लगी, दवाई का असर हो चूका था तो वो और शिव दोनों सो गए)

सुबह पेशाब लगने से रंजन जल्दी उठ गयी, उसने देखा की विणा शिव की बहो में सो रही है, उसे तो कुछ भी याद नहीं था, वो बाथरूम गयी और वापस आयी, लाइट चालू कर के उसने दोनों को देखा, लाइट चालू होने से शिव की नींद उड़ गयी, उसने रंजन को देखा जो आश्चर्य से उन्हें देख रही थी, वो हिला तो विणा की भी नींद टूट गयी. विणा शर्माने लगी. शिव बेथ गया और विणा को कम्बल ओढ़ा दिया.

रंजन : तू यहाँ? (शिव को, विणा का चेहरा देख कर उसे साख hua)Tum दोनों का हो गया?

शिव : अब ज्यादा सवाल मात कर, अभी समय है, सो जा, में अपने कमरे में जा रहा हु. (शिव उठ कर तकिया और कम्बल ले कर चला गया, रंजन ने विणा को देखा तो उसने अपना चेहरा कम्बल में धक् लिया)

रंजन : (उसका कम्बल खींचते hue)Ab बड़ी शर्म आ रही है, क्या हुआ, कब हुआ बता मुझे.

विणा : छोड़ना कम्बल, मुझे नींद आ रही है.

रंजन : नींद की बच्ची, बता मुझे.

में कमरे में जा कर सो गया, नींद तो आयी नहीं तो फिर उठ गया, थोड़ी देर दौड़ लगायी फिर जब अंदर आया तो रंजन , लतादिदी, सरितादिदी और गायत्रीदिदी काम कर रहे थे, में तैयार होने लगा, फिर में विणा का हाल पूछ ने चला गया. वो सो नहीं रही थी बस लेती हुई थी, मुझे देख कर वो शर्मा गयी, बिना मेरी और देखे वो मुस्कुरा रही थी.

शिव : (उसका चेहरे सेहला kar)Thik हो?

विणा : (बिना dekhe)Hmmmmm.

शिव : दवाई खाई? (उसने न में शिर हिलाया, तो में अपने कमरे में गया और दवाई ले कर पानी लेने चला गया, पानी ले जाते देख सरितादिदी ने पूछा)

सरितादिदी : किसके लिए पानी ले न रहा है?

शिव : विणा को दवाई देने के लिए (उन्होंने मुझे सवालिया नजरो से देखा, तो में नज़ारे चुरा कर वह से निकल गया) (सरिता समझदार थी, वो बस muskurayi)(Mene विणा को दवाई di)Tum आराम करो, कुछ हो तो सरितादिदी को बोल देना.

विणा : हम्म्म्म.

शिव : मेरी और देखो. (उसने आहिस्ता से मेरी और देखा) तुम खुस तो हो न? (उसने बस है में शिर hilaya)Khayal रखना अपना. (मेने हलके से उसके होठो पर किश किआ, तो वो नज़ारे चुराने लगी, में जैसे hi पलटा तो रंजन कड़ी थी, उसे देख कर में झिझक गया, पर वो मुस्कुराती हुई आयी और आ कर मेरे गले में बहे दाल कर मुझे किश करने लगी, अब उसे विणा का कोई दर नहीं था, वो बिना किसी झिझक के मुझे किश कर रही थी, में अभी भी झिझक रहा था., किश करने के बाद वो बोली)

रंजन : में हु न, संभल लुंगी उसे, तुम वापस आओगे तब तक तो रेडी मिलेगी तुम्हे.

शिव : रेडी?

रंजन : है, जो अधूरा छोड़ा है उसके लिए (कहते हुए वो मुस्कुराने लगी, मेने विणा की और देखा तो वो शर्मा रही थी, में समाज गया की इन दोनों में बात हो चुकी है)

शिव : उसे कोई रेडी नहीं करना है, बस ठीक कर दो, पूरी जिंदगी पड़ी है इन सबके लिए, पढ़ाई पर ध्यान दो, सामजी.

रंजन : समाज गयी बॉस. (उसने नौटंकी करते हुए कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Nautanki कही की. चलो में चलता हु, ध्यान रखना अपना और इसका. (कहते हुए उसके होठो पर भी हलकी किश की और निकल गया)

रंजन : (उसने विणा को देखा तो वो शर्मा गयी) तो कैसा लगा शिव?

विणा : (शर्मा कर) बहोत काररिंग है वो.

रंजन : अब आगे का क्या प्लान है? (विणा झेप गयी, रंजन मुस्कुरायी और उसकी छूट को मसल kar)Iss आगे की बात नहीं कर रही, आगे शिव के लिए क्या सोचा है?

विणा : कुछ नहीं, मुझे आगे की कोई फ़िक्र नहीं है, अभी बहोत टाइम है.

रंजन : देखा, मेने कहा था न, तेरा सही फैसला है, आगे का क्या सोचना, अभी इतने मज़े मिल रहे है उसी में खुस रहो, क्या कहती हो? (विणा बस मुस्कुरायी)

में जब संयम के वह पंहुचा तो तीनो मुझे मिल गयी.

नाज़िआ : में तुमसे नाराज़ हु शिव. (उन्होंने जूते गुस्से से कहा)

शिव : क्यों, क्या हुआ दीदी?

नाज़िआ : कल इतना सब हो गया मुझे बताया भी नहीं, में भी आ जाती वह.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aap क्यों चिंता करती हो, ये राजकुमारिया थी न वह, इन्होने सारा मोर्चा संभल लिया था. (संयम और वैस्वी बस मुस्कुरादि)

नाज़िआ : फिर भी बोलै तो होता.

शिव : आप फ़िक्र मात करो, अपनी तबियत सम्भालो, ये सब में देख लूंगा.

नाज़िआ : ठीक है, टाइम हो तो घर आना.

शिव : ठीक है दीदी, देखता हु. (फिर में स्कूटर पर बेथ गया, और उन दोनों को कहा) चलो. (दोनों एक साथ आगे बढ़ी, बैठने को पर फिर दोनों रुक गयी, दोनों का मान था बैठने का, पर दोनों एक दूसरे का मुँह देखने लगी)

संयम : तू बेथ जा. (उसने वैस्वी को हलकी उदासी से कहा)

वैस्वी : नहीं तू बेथ जा.

शिव : तुम लोगो का कुछ नहीं हो सकता, चलो जल्दी बैठो. (वैस्वी ने संयम को पकड़ कर आगे कर दिया, हलाकि उसका भी बहोत मान था, संयम बेथ गयी और पीछे वैस्वी) (संयम कल से बहोत परेशान थी, वैसे तो उसने शिव से दुरी बनाने का फैसला कर लिया था पर फिर भी वो कर नहीं प् रही थी, कल जब वैस्वी को ज्यादा इम्पोर्टेन्ट मिलते देखा तो उसको अंदर hi अंदर जलन हुई, वो शिव के साथ कड़ी थी और वो दूर थी, उसको अच्छा नहीं लग रहा था, इस्सलिये आज वो शिव के साथ बैठना चाहती थी, पर फिर खुद को संभल लिया tha)(Vaiswi की वजह अलग थी, कल शिव ने सबके सामने उसकी तारीफ की थी तो उसे बहोत अच्छा लगा था, पर जब घर गयी तो उसके पापा ने उसे डांटा था की क्यों वह गयी थी, और ऊपर से उस मिक्की का भी फ़ोन आया था, वो बोल रहा था की उस लड़के से दूर रह, उसका साथ क्यों दे रही थी, ऐसे hi उसकी बहस हुई थी, उसने भी गुस्से में सुना दिया था की उसकी जो मर्ज़ी होगी वो करेगी)

बैठे हुए संयम ने शिव की कमर में हाथ दाल कर उसके पेट पर हाथ रख दिया था. (शिव चौंक गया था क्यों की पिछले कुछ दिनों से वो हाथ नहीं रखती थी, पर आज उसने हाथ रखा था और वो ज्यादा सात कर बैठी थी, उसके स्तन और शरीर की गर्मी उसे महसूस हो रही थी, उसे ऐसा भी भ्रम हुआ की उसकी उंगलीः हरकत कर रही है, पर ज्यादा हरकत नहीं थी तो उसने स्कूटर चलने में hi ध्यान रक्खा, वो स्कूल पहुंच गए, उसी टाइम बिना मैडम भी अपना स्कूटर पार्क कर रही थी)

शिव : गुड मॉर्निंग मैडम, (साथमे संयम और वैस्वी ने भी कहा)

बिना : (दिखय से सामान निकलते हुए पीछे dekha)Good मॉर्निंग. (संयम और वैस्वी आगे बढ़ी पर शिव रुका रहा तो उन दोनों ने शिव को देखा तो शिव को उन्हें जाने का इस्सर किआ तो वो दोनों चली गयी, सामान हाथ में ले कर बिना ने शिव को देखा तो वो उसके साथ चलने laga)Kya हुआ आगे फिर?

शिव : अभी तो कुछ नहीं हुआ है, देखते है.

बिना : मेरी मदद की जरुरत हो तो बताना, और चिंता मात करना, सब ठीक हो जायेगा.

शिव : जनता हु, आप सब मेरे साथ हो तो मुझे चिंता करने की जरुरत नहीं है.

बिना : (कल का स्कीन याद karte)Waise तुमने बहोत नाम कमा लिया है, तुम्हारे लिए कितने लोग इकठ्ठा हो गए थे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene कुछ नहीं किआ, आप सबका प्यार है.

बिना : कुछ ज्यादा hi प्यार नहीं कमा लिया तुमने? (मीठी दन्त के साथ उन्होंने कहा)

शिव : (मुस्कुराते हुए) आप भी तो प्यार करती है, में रोक थोड़ी न सकता हु.

बिना : (वो मुस्कुरायी, फिर कुछ सोच kar)Manishadidi याद कर रही थी तुम्हे, फ़ोन करने को बोलै है. शिकायत कर रही थी की मुझे याद नहीं करता. मेने संजय भी की उसे मुझे याद करने का या मिलने का समय नहीं है हलाकि हम दोनों एक hi सहर में रहते है तो आपको कैसे याद करेगा.

शिव : तना मात मारिये, मिलता तो हु आपसे. (वैसे भी क्लास स्कूल बिल्डिंग नजदीक आ गयी थी)

बिना : तना नहीं मार रही, बस मिलने को बोल रही हु, और है उनसे भी बात कर लेना. Bye. (कहते हुए वो स्टाफ रूम की और चली गयी, में भी क्लास की और चला गया)

थोड़ी देर में वो वापस आ गयी और पढ़ाई सुरु हो गयी. रेसस्स में मेने देखा की मनीषा मैडम का मश्ग था, लिखा था की टाइम मिले तो मुझे फ़ोन करना, इम्पोर्टेन्ट है. में सोचमे पद गया, क्या काम होगा, फिर मेने सोचा की एक बार के बाद कभी में उनसे उस तरह से मिला नहीं तो शायद बुला रही होगी, पर फिर लगा की कोई इम्पोर्टेन काम भी हो सकता है तो मेने फ़ोन लगाया.

शिव : Hello मैडम.

मनीषा : Hello शिव, कहा हो?

शिव : इस वक़्त तो स्कूल में hi होऊंगा न, कहिये क्या बात है?

मनीषा: फ़ोन पर मज़ा नहीं आएगा, मिलकर बताउंगी, कब आओगे?

शिव : (कुछ सोच kar)Do पहर में आता हु, 2 बजे के आस पास.

मनीषा : ठीक है, में इंतजार करुँगी.

फ़ोन रखने के बाद में सोचने लगा की क्या काम हो सकता है, जो मिलकर hi बताया जा सकता है, अब मुझे लगने लगा की हो नहो वो उसी काम के लिए बुला रही है, वैसे भी वो अच्छी थी, मेरी बहोत मदद भी करती है तो अगर उसके बदले वो मुझसे ऐसा चाहती है तो क्या गलत है, वैसे भी वो अकेली ऐसी है जिनके स्तन में दूध भरा हुआ है, उस समय भले hi उन्होंने मेरी मर्जी के बगैर वो सब किआ था पर कभी कभी में उन्हें याद भी करता था, उनके दूध से भरे स्तन चूसने का मान करता था, पर फिर भी में नहीं गया था, अब सोचा की जा hi औ. फिर क्लास सुरु हो गयी, बड़ी रेसस्स में भी आज संयम और वैस्वी ज्यादा बात नहीं कर रही थी, वो अपने अपने खयालो में hi थी, मेने भी ज्यादा पूछना सही नहीं समजा, में तो यही चाहता था की वो मुझसे दूर hi रहे, पर फिर वो दोस्त भी थी तो मान हो आता था की उनके साथ वक़्त बितौ. पर फील हल मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. स्कूल के बाद में घर चला गया, सब से मिला, खाने बैठे तो विणा भी थी, सब खाना खा रहे थे की सरिता दीदी बोली,

सरिता : अब दर्द कैसा है? (विणा की और देख कर, विणा हिल गयी, गले में खाना अटकने से उसको हिचकी भी आ गयी)

लता : उसकी तबियत ख़राब है, दर्द थोड़ी न है, क्यों विणा? (लता ने फ़िक्र से पूछा)

सरिता : (शिव के मज़े लेने के इरादे से पूछा था पर विणा की हालत देख कर उसे लगा की गलत बोल दिया) अरे मेरा मतलब वही था, तबियत ख़राब होने की वजह से उसका बदन टूट रहा था तो में उस दर्द की बात कर रही थी. कोई बात नहीं खाने के बाद फिर गोली खा लेना.

विणा : जी. (वो अपना शिर झुकाये खाने लगी)

मेने सरितादिदी को देखा तो वो मुझे देख कर मुस्कुरायी, मेने हलके गुस्से से उन्हें देखा जैसे उन्हें डांटा हो तो उन्होंने अपने चेहरे के भाव से मुझे सॉरी कहा. में भी मुस्कुराया और खाना खाने लगा. ऐसे hi खाना खाने के बाद में लता को बोल कर निकल गया, वैसे भी मुझे साइट पर जाना होता है तो किसी ने ज्यादा सवाल नहीं किआ.

में मनीषजी के घर पहुंच गया, बहार खड़े दरबान ने मुझे अंदर जाने दिया, मेने बेल्ल बजायी तो नुकरणी ने दरवाजा खोला, और मुझे अंदर आने को कहा. फिर वो अंदर चली गयी, में वही सोफे पर बेथ गया. नौकरानी ने अंदर जेक मनीषजी को मेरे बारे में बताया, उस वक़्त वो अपने बेटे को नहलाने के बाद कपडे पहना रही थी.

मनीषजी : उसे यही भेजदो. (नौकरानी ने आ कर मुझे अपने साथ आने को कहा तो में उसके पीछे चला गया, वो मुझे एक रूम में ले गयी जहा, मैडम अपने बेटे को तैयार कर रही thi)Aao शिव. (में अंदर गया तो वो नौकरानी चली गयी, मुझे अब यकीं हो गया था की मैडम ने मुझे क्यों बुलाया है, और में उसके लिए तैयार भी tha)aao बैठो. (में वह रक्खे छोटे से सोफे की और बढ़ा तो वो फिर boli)Yaha बैठो. (बिस्टेर की और इस्सर करके, मेने उनकी और देखा तो उन्होंने मुस्कुरा कर आने को कहा तो में उनके पास चला गया, अपने बेटे को उठाते हुए मेरी और badhaya)Betho और इससे पकड़ो (मेने उनके बेटे को उठा लिया, वो उसे एक छोटा ट्रैक पंथ पहना ने लगी) ठीक से पकड़ो. (मेने बच्चे को अच्छे से पकड़ा, और वो उसे कपडे पहना ने लगी, सरे कपडे पहना ने के बाद उन्होंने उसे कला टिका किआ, और उसे अपनी गॉड में सुलाया और उसे अपनी साड़ी में धक् कर दूध पिलाने लगी, में झिझक रहा था, उन्होंने मेरी और देखा और मुस्कुरायी) क्या हुआ, इतना क्यों झिझक रहे हो.

शिव : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, क्यों बुलाया था आपने?

मनीषा: (मुस्कुराते hue)Kyu जल्दी में हो? कही जाना है?

शिव : ऐसी बात नहीं है, साइट पर जाना है पर जल्दी नहीं है, में तो ऐसे hi पूछ रहा था. (में झिझक रहा था, पता नहीं क्यों, वैसे भी में उनके साथ एक बार सेक्स कर चूका था, पर उस टाइम माहौल अलग था, उस से पहले में उन्हें जनता तक नहीं था, पर अब में उन्हें जनता था, तो कुछ अलग महसूस हो रहा था)

मनीषा : तुम्हारे लिए एक खुस खबरि है (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : खुशखबरी?... क्या?

मनीषा : बताती हु, पर मुझे क्या मिलेगा, उस खुशखबरी के बदले? (उन्होंने मुस्कुरा कर मेरी और देख कर कहा)

शिव : में क्या दे शक्ति हु (हलाकि में जनता था, उन्हें क्या चाहिए)

मनीषा :(वो कुछ पल मेरे सामने देखती रही, फिर फीकी मुस्कराहट के साथ kaha)Chhodo, मुझे कुछ नहीं चाहिए, जो दिल से न मिले ऐसे चीजों का कोई मोल नहीं. तो खुस खबरि ये है की...

शिव : (रोकते hue)Aapko क्या चाहिए बदले में?

मनीषा : मेने कहा न कुछ नहीं, में तो बस ऐसे hi कह रही थी.

शिव : नहीं, आपके मान में कुछ तो था, और जहा तक मेरा अनुमान सही है तो में जनता हु की क्या था.

मनीषा : हो सकता है की तुमने सही अनुमान लगाया हो, पर मेने कहा न की जो चीज दिल से न दी जाये उसको लेने में मजा नहीं है, एक बार में गलती कर चुकी हु, दोबारा नहीं करुँगी. और वैसे भी बच्चा होने के बाद औरतो का अट्रैक्शन काम हो जाता है, में समाज सकती हु.

शिव : आप गलत सोच रही हो.

मनीषा : में कुछ गलत नहीं सोच रही, क्यों की अगर ऐसा न होता तो कभी तो तुमने मेरी और कदम बढ़ाया होता. (उनके चेहरे पर हलकी उदासी थी)

शिव : (उनके हाथ पर हाथ रख kar)Sach कहता हु, जूथ नहीं कहूंगा, कई बार मान किआ की...

मनीषा : (वो समाज गयी की में क्या बोलना छह रहा हु, मेरी आँखों में देख kar)To फिर आगे क्यों नहीं बढे, मेने तो कभी टोका नहीं तुम्हे.

शिव : आपके और सर के कई एहसान है मुज पर, आप एक ऊँचे स्थान पर बैठी हो, मेरी पहुंच नहीं है वह तक.

मनीषा : कोई भी सख्स किसी भी स्थान पर क्यों न हो, हर किसी की अपनी जरुरत होती है, तुम्हे क्या लगता है, मेरे पति बहार घूमते है तो क्या वो अपनी जरूरते पूरी नहीं करते होंगे? औरतो से hi क्यों ऐसा एक्सपेक्टेशन किआ जाता है की वो ऐसी बानी रहे, क्या उनकी इच्छाएं नहीं होती. (उन्होंने अपने बेटे को उठाया जो सो चूका था और उसे एक पलने में रख दिया, बिना मेरी और घूमे उन्होंने अपने स्तन को वापस ब्लाउज में डाला, अपनी साड़ी सही की फिर मेरी और ghumi)Khair छोडो ये सब बाटे, क्यों की में लोगो की सोच नहीं बदल सकती, और है अगर तुम सोच रहे हो की मेने तुम्हे उस वजह से यहाँ बुलाया है तो तुम गलत सोच रहे हो, मेने सिर्फ तुम्हारे काम के लिए hi तुम्हे बुलाया है. (मेरी और देख कर बिना किसी भाव के उन्होंने kaha)Tumhare साथ वो सब करना मेरी मर्जी थी, (बोलते बोलते वो एक अलमारी की और बढ़ी, और अंदर से कुछ निकलने लगी) और मुझसे दूर रहना तुम्हारी मर्जी है, मेने जो किआ अपनी मर्जी से किआ, शादी के वक़्त भी में वर्जिन नहीं थी, न मेरे पति ने कभी पूछ न मेने कभी कोई सफाई दी, (वो एक लिफाफा ले कर मेरी और बढ़ी) मुझे गर्व है की मुझे ऐसे पति मिले है, और में खुस भी हु, वो मुझे पूरी तरह से संतुस्ट भी करते है, तुम्हे देख कर में बाहेक गयी थी बस, और कुछ नहीं. (उन्होंने बिना किसी भाव से मेरी और देखा, और लिफाफा मेरी और badhaya)Ye लो, तुम्हारे टेंशन की दवा. (मेने लिफाफा उनके हाथ से लिया और उसे बीएड पर फेंक दिया, और उनकी और बढ़ कर उनकी कमर में हाथ डाला, दरवाजा खुला था तो में कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था, कमर से मेने उन्हें उठा लिया और दरवाजे के पीछे खड़ा कर दिया, दीवाल से सत्ता कर, वो हांफ ने लगी और मेरी और देख रही थी, में बिना कुछ बोले झुकने लगा तो उन्होंने अपना मुँह दूसरी और घुमा लिया, में उनके गाल को होठो से छूने लगा, और गर्दन को भी, तो वो मुझे धक्का देने लगी )दूर हटो, (धीमी आवाज में कहा tha)Muje कोई एहसान का बदला नहीं चाहिए. (मेने अपना चेहरा हटाया और उनकी और देखने लगा तो वो भी मेरी आँखों में देखने लगी)

शिव : (धीमी आवाज me)Me कोई एहसान का बदला नहीं चूका रहा हु, सच में मेरा भी मान कर रहा है (मेरी आवाज कामुक हो चुकी थी, और मेरी बात सुन कर उनकी सांसे भी चढ़ने लगी, मेरा लुंड खड़ा होने लगा था जिसे मेने उनकी छूट वाले भाग पर रगड़ा, उनकी आंखे भी बंद हो गयी, पर उन्होंने फिर मेरी और देखा)

मनीषा : (भरी आवाज me)Aaj अचानक कैसे मान हो गया? (चेहरे पर नाराजगी के साथ कटाक्ष भी था)

शिव : (में फिर झुका और उनकी अपनी नाक से उनकी नाक और चेहरे को रगड़ते हुए) पहले कुछ दिन गुस्सा था पर फिर बहोत बार मान किआ की आप को कहु, पर हिम्मत नहीं हुई.

मनीषा : (उसकी सांसे भी चढ़ने लगी थी, अपनी छूट पर लग रहे लुंड को महसूस कर रही थी, घर में सब नौकर थे, वैसे कोई आनेवाला नहीं था पर फिर भी उनके घर में रहते उसे अपनी इज्जत का दर था, क्या सोचेंगे वो उसके बारे में, पर अपनी छूट पर चुभता वो लुंड उसे पागल कर रहा था, लुंड उसकी छूट पर ठोकर मर रहा था जिस से उसकी सिसकी निकलने lagi)Shhhhhh, जूते हो तुम शह्ह्ह्ह मुझे पता है शह्ह्ह्ह में अब उतनी आकर्षक नहीं रही शहहह थोड़ी मोती भी हो गयी हु, (धीमी आवाज में सिसकते हुए उसने कहा)

शिव : ऐसा कुछ भी नहीं है, अभी आप अपने सौंदर्य के चरम पर है, आपके स्तन पूर्ण विक्सित है तू दूध से भरे हुए है, (शिव नीचे झुक कर गले से होते हुए स्तन तक पहुंच गया था और स्तन पर अपना चेहरा रगड़ रहा tha.)Iski खुस्भु पागल बना रही है.

मनीषा : (मादक ता से भर्ती जा रही थी, वो आंखे बंद किये हुए उसके स्पर्श का आनंद ले रही थी, लड़खड़ाती आवाज में उसने kaha)Jhuth.. बोल.. रहे.. हो.. तुम. (शिव ने ब्लाउज के ऊपर से hi उस गीले हिस्से को छठा जहा दूध निकला हुआ था, बच्चे ने अभी दूध पिया था तो स्तन से दूध रिस रहा था, मनीषा कैंप रही थी, उसका हाथ शिर के शिर पर चला गया, वो उसे सहलाने lagi)Shhhhhh कोई आ जायेगा शिव (उसने धीमी आवाज में कहा, दरवाजा खुला था और नौकर बहार थे)

शिव : (निप्पल को ब्लाउज के ऊपर से चूसने का प्रयास करते hue)Muje दूध पीना है.

मनीषा : (उत्तेजना से कैंप रही thi)Shhhh कोई आ जायेगा, शह्ह्ह्ह रात को आए जाना. (वो भी चाहती थी पर अभी मजबूरी थी)

शिव : (ब्लाउज के हुक को पकड़ kar)Muje अभी पीना है.

मनीषा : (उसके हाथ पकड़ kar)Shhhhh शीइइइइव, अभी नहीं. (उन्होंने नशीली आँखों से देखते हुए कहा, पर शिव ने एक हुक खोल दिया, वो तड़प उठी, शिव दूसरा हुक खोलने लगा तो उसने आंखे बंद कर di)Nahiiiii शह्ह्ह्हह्ह (तीसरा हुक भी खुल गया, दूध पिलाने के लिए उसने ब्रा तो पहनी hi नहीं thi)Shhhhh पूरा मात खोलो शहहहहह. (शिव ने बात मानते हुए एक स्तन को पकड़ कर बहार निकल लिया, (नशीली आँखों से वो बस शिव को देख रही थी, उसने दूसरा स्तन भी बहार निकल लिया, दूध इतना भरा हुआ था की वो अपने ाफी निप्पल से टपकने लगा, बिना देरी किये शिव निप्पल को मुँह में ले कर चूसने लगा, मीठा मीठा दूध उसके गले से निचे उतरने लगा, मनीषा आंखे बंद किये हुए उसका शिर सहलाने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, आहिस्ता चुसो शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह. (सचमे, ये एहसास अलग hi था, मनीषा मैडम के स्तन से ढूढ़ पीना बहोत अच्छा लग रहा था, में बरी बरी से दोनों स्तन को चूस रहा था, कभी निप्प्के को होठो से पकड़ कर खिंच leta)Ouchhhh शह्ह्ह्ह ऐसा मात करो शह्ह्ह्हह्ह, मुझे कुछ हो रहा है शिव.

शिव : (उनकी छूट को साड़ी के ऊपर से मसलते hue)Yahaaa?

मनीषा : शहहहहह हाआआआआ. (बहोत गरम सिसकी निकली, जो वो रोकने का प्रयास कर रही थी, थोड़ी देर तक में उनका दूध पिटे हुए उनकी छूट को मसलता रहा, वो अपनी आवाज रोकने का प्रयास करते हुए सिसक रही थी, मेरा लुंड पुरे तनाव पर था)

शिव : (मैडम की और देख kar)Darwaja बंद कर दू? (मेने उन्हें पूछा)

मनीषा : (मजबूरी से मेरी और देखते hue)Nahi कर शक्ति शिव शह्ह्ह्ह, किसी को पता चल गया तो सब क्या सोच्नेगे?

शिव : पर मुझे अभी करना है. (उनकी छूट को दबाते हुए कहा)

मनीषा : शह्ह्ह्ह मुझे भी करना है सीईव शह्ह्हह्ह्ह्ह पर...

शिव : तो दरवाजा बंद कर दू?

मनीषा : नहीं कर शक्ति, किसी ने देखा तो क्या सोचे गए की दरवाजा क्यों बंद किआ, शह्ह्ह्ह ऐसे hi कर लो. (मुझे भी उनकी बात सही लगी, मेने उनकी साडी ऊपर उठायी और उनकी पंतय पकड़ कर नीचे कर दी, उन्होंने भी अपने पैरो से निकल दिया, मेने अपनी चैन खोली और लुंड को बहार निकला, साड़ी नीचे गिर गयी थी जिसे वापस मेने उठाया)

शिव : इससे पकड़िए (मेने उनकी और देख कर कहा तो वो शर्मा गयी और अपना चेहरा घुमा लिया पर उन्होंने साड़ी पकड़ ली, गरम तो वो भी थी, में निचे बेथ गया और छूट को देखने लगा, छूट पूरी तरह से भीग चुकी थी और रास भी टपक रहा था, में उनकी हालत समाज रहा था, मेने छूट की फेक फैला कर अंडर का हाल देखा, रास की नदी का स्त्रोत दिख रही थी, मेने वह मुँह लगा दिया और उस रास धरा को अपने मुँह में प्रवाहित करने लगा, होठो को चूस कर और रास निकलने लगा, (मनीषा की हालत ख़राब थी वो सिसकना चाहती थी पर अपना मुँह दबाये उम् उम् कर रही थी, उसे लगा की वो ज्यादा बर्दास्त नहीं कर पायेगी तो उसने शिव को दूर kia.)(Mene उनकी और देखा, उसने ना में शिर हुआलया, जैसे कह रही हो की और नहीं, में भी खड़ा हो गया, उन्होंने मेरा लुंड पकड़ लिया और उसे हिलने लगी, हम दोनों किश भी कर रहे थे, मेने पेअर मोड और लुंड को छूट पर सेट किआ और छूट के रास से लुंड के सुपडे को गिला करने लगा)

मनीषा : (छूट पर लुंड महसूस कर के सिसकने lagi)Shhhh शिईयिव शहहहहह (में लुंड को छूट पर रगड़ रहा tha)(Manisha बहोत गरम हो चुकी थी, उसने शिव को dekha)Shiiiiiiiv (मेने उनकी और देखा, जैसे पूछ रहा हु kya?)Muje शठ वो चूसना है.

शिव : बाद में चूसलेना, अभी में नहीं रूक सकता, (मेने उनका एक पेअर पकड़ा और लुंड को छेड़ पर सेट किआ, उन्होंने मेरे कंधे को थम लिया, लुंड गिला हो चूका था और छूट बहोत पानी छोड़ रही थी, गरम छेड़ का एहसास होते hi मेने लुंड को दबाया तो वो छूट को फैलते हुए अंदर उतरने लगा)

मनीषा : (छूट को फैलते हुए लुंड को महसूस कर के आंखे बंद कर दी) शह्ह्ह्हह्ह. (थोड़ी देर में रुक gaya)Tumhara बहोत बड़ा है शिव, उसे पूरी फैला देता है.

शिव : किसे?

मनीषा : (हलकी आंख खोल कर देखा, आंखे नशे में डूबी हुई thi)Meri छूट को (कामुकता से उन्होंने कहा)

शिव : आपकी छूट मस्त है.

मनीषा : तुजे अच्छी लगती है?

शिव : है शहहहहह भोत गरम है (धक्के लगते हुए मेने कहा)

मनीषा : ठंडी कर दे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ोूमा शहहह बहोत बड़ा है तेरा लुंड शहहहहह (तभी बहार से पायल की आवाज नजदीक आने लगी, जैसे कोई आ रहा हो, उन्होंने मुझे रोका, हम दोनों दर गए)

नौकरानी : (बहार se)Madam.

मनीषा : (सँभालते hue)Haaa...

नौकरानी : मैडम सब चले गए है, में भी जा रही हु, कुछ चाहिए?

मनीषा : नहीं, तुम भी जाओ. (उसके जाने की आवाज आयी, हम दोनों थोड़ी देर रुके रहे. फिर से मेने लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, गरम गुफा में लुंड अंदर तक जा रहा tha)Shhhhhh ऐसे खड़े खड़े मुझे कुछ ज्यादा hi हो रहा है shhhhhhhhhh पुरे शरीर में तरंगे दौड़ रही है, शहहहहह ऐसे hi करो शह्ह्हह्ह्ह्ह (कूल्हे पकड़ कर में दे दाना दान अंदर तक लुंड दाल रहा था,





वो सिसक रही थी उनकी गरम आवाजे मुझे और उकसा रही थी, थोड़ी hi देर में वो झाड़ gayi)Shhhhh अह्ह्ह्हह तुको शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह मेरा हो गया शह्ह्ह्हह्ह थोड़ी देर शहहहहह ahhhhh.(Me रुक गया, और लुंड बहार निकल लिया, वो वही जमीं पर बेथ गयी, मेने लुंड उनके मुँह के पास किआ तो अपनी hi छूट रास से भीगे हुए लुंड को उन्होंने अपने मुँह में भर लिया, और चूसने लगी,





लुंड चूसते हुए थोड़ी hi देर में वो वापस गरम हो गयी, मेने फिर उन्हें पलट दिया और दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया और पीछे से लुंड अंदर दाल दिया, उनके भरे हुए कूल्हों के बिच से लुंड अंदर चला गया, वो देवल के सहारे कड़ी हो कर सिसक रही थी और में पीछे से लुंड ठोके जा रहा था,





थप थप की आवाजे कमरे में गूंज रही thi,)Shhhh मा अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (इतना कड़क लुंड जिस रफ़्तार से उसकी छूट में अंदर बहार हो रहा था उसको दर्द महसूस होने लगा पर ये दर्द उसे और गरम कर रहा था, उसने शिव की और देखा जैसे कह रही हो की दया करो मुज पर, पर वो खुद उसे रोकना नहीं चाहती थी, लगातार गहराई तक जाते लुंड ने उसे एक बार और झड़ने के लिए मजबूर कर दिया. उसने शिव को फिर रोक दिया. और जोर जोर से सांसे लेने लगी, थोड़ी देर बाद उसने लुंड बहार निकला और लड़खड़ाते कदम से कमरे से बहार निकाल कर घर में चारो और नजर दौड़ाई, वह कोई नहीं था, उसने कमरे का दरवजा बंद कर दिया और अपने पुरे कपडे निकल दिए,





शिव को बिस्तर पर लेता कर उसके ऊपर चढ़ गयी और अपनी भरी भरखम गांड को फैलते हुए उसके मोठे लुंड को फिर से अपनी छूट में प्रवेश करा दिया, वो शिव के पैरो की और थी तो शिव को उसके कूल्हे दिख रहे थे,





वो ऊपर निचे होते हुए लुंड को अंदर बहार कर रही थी और सिस्किअ अपने चरम पर thi)(Muje उनके बड़े कूल्हे हिलते दिख रहे थे और लुंड अंदर बहार होता साफ़ साफ़ दिख रहा था

, ये दृस्य काफी उत्तेजक था, में उनके कूल्हे फैला कर लुंड को अंदर बहार होते देख रहा था, और निचे से भी धक्के मर रहा था, इतने उत्तेजक दृश्य से मेरा भी निकलने वाला था, मेने उठने लगा तो वो रुक गयी, मेने वैसे hi उन्हें बिस्तर पर उल्टा लेता दिया और लुंड अंदर दाल दिया,





बड़े कूल्हे डाब रहे थे और में लुंड अंदर बहार कर रहा था, मैडम सिसक रही थी, लगातार धक्को से उनकी हालत ख़राब थी, पर में रुक नहीं सकता था, पुरे जोर से में उन्हें छोड़ रहा था, आखिर मेरा निकलने वाला था तो मेने उनके बड़े बड़े कूल्हों पर अपना माल गिरा दिया, और लुढ़क कर उनके बाजु में लेट गया. थोड़ी देर के लिए मनीषा आंखे बंद किये हुए लेती रही, इतनी कुटाई के बाद वो थक गयी थी, जब उसे अच्छा लगा तब उसने बाजु में लेते शिव को देखा जो भी आंखे बंद किये हुए था, उसने अपना पेअर उस पर चढ़ा दिया और उसके आधे सोये लुंड को सहलाने लगी.

शिव : (मुस्कुरा कर देखते hue)Abhi दिल नहीं भरा?

मनीषा : पूरा भर गया है, पर फिर भी ये मुझे अपनी और आकर्षित कर रहा है, तुम्हे मज़ा आया?

शिव : बहोत.

मनीषा : तो फिर आते क्यों नहीं हो?

शिव : अब आऊंगा, आपका दूध पिने.

मनीषा : (थोड़ा ऊपर हो कर अपने स्तन को उसके मुँह में देते hue)Jab चाहो आ जाओ, बहोत दूध होता है, ये (अपने बच्चे की और इस्सर कर ke)bhi उतना नहीं पि पता. (शिव उसके दूध को चूस रहा था तो मनीषा आंखे बंद किये हुए उसका शिर सेहला रही थी.

शिव : कितने बजे?

मनीषा : तीन बजने आये है.

शिव : (खड़े होते हुए) बहोत टाइम हो गया, मुझे साइट पर भी जाना है, (फिर उसकी नजर लिफाफे पर पड़ी) ये क्या है?

मनीषा : खुद देख लो.

शिव : (लिफाफा खोला तो उसके अंदर से दस्तावेज की कॉपी nikali)Ye क्या है?

मनीषा : तुम्हारे अनाथालय के दस्तावेज की कॉपी.

शिव : क्या? सच में. आपके पास कैसे आयी?
 
Back
Top