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सुबह से संयम अपने रूम में hi घुसी रही, न किसी से बात कर रही थी न अपना मुँह दिखा रही थी, नाज़िआ ने भी दो तीन बार बात करने की कोशिस की, पर वो अपना मुँह तकिये में छुपा के उलटी लेती हुई थी. खाने के वक़्त भी वो खाने नहीं उतरी. उसके अब्बू ने भी आवाज लगायी, पर वो नहीं उतरी. नाज़िआ ने मामला सँभालते हुए अपने अब्बू को संजय की वो उसको खिला देगी, उसके पेट में दर्द है तो शायद अभी खाने का मान नहीं होगा. सब निपटने के बाद वो उसके रूम में गयी, अच्छी बात ये थी की दरवाजा बंद नहीं था, पर जैसे hi वो अंदर गयी, फिर से संयम ने अपना मुँह तकिये में छुपा लिया.
नाज़िआ : संयम, क्या कर रही है तू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया) मुझसे बात तो कर (फिर भी वो कुछ नहीं बोली) इतनी सी बात पर ये क्या कर रही है तू, मेरी और देख तो (फिर भी न उसने बात की न तकिये से मुँह nikala)Kya तू रो रही है? (कोई प्रतिक्रिया nahi)Tuje मेरी कसम है, देख मेरी और. (उसकी बात का एस्सार हुआ, और संयम ने तकिये से एक तरफ का चेहरा बहार निकल के नाज़िआ की और देखा, जिसे देख कर वो काहुनक गयी, क्यों की साफ़ पता चल रहा था की वो रो रही थी, उसके बाल भी चेहरे से चिपक गए है), ये क्या हल बना रक्खा है, ऐसा क्या हो गया जो तू ऐसे रियेक्ट कर रही है.
संयम : (रोटी आवाज me)Use क्यों शिव के पीछे बैठना है, उसका क्या हक़ है, वो मेरा दोस्त है, उसका नहीं है.
नाज़िआ : पागल है क्या तू, साथमे पढ़ते हो, साथ में आते जाते हो, तो क्या दोस्ती नहीं होजायेगी उसकी, और उसके बैठने से तुजे क्यों इतना बुरा लग रहा है, एक तो बेचारी तुजे रोज़ लेने और छोड़ने आती है, तुजे कुछ तो ख्याल करना चाहिए.
संयम : पर उसे क्यों बैठना है?
नाज़िआ : तुजे क्यों बैठना है?
संयम : क्यों की वो मेरा दोस्त है.
नाज़िआ : तो तेरे पीछे बैठने से तेरी दोस्ती ख़तम हो जाएगी क्या. तू तो ऐसे हक़ जाता रही है जैसे तू उसकी गर्लफ्रेंड है. (संयम चुप हो गयी, वो कुछ नहीं बोली, उसने फिर से अपना चेहरा छुपा लिया. नाज़िआ बच्ची नहीं थी, वो सब समाज रही थी, पर वो इस बात को बताना नहीं चाहती थी) अब मुँह क्यों छुपा रही है, जवाब दे मुझे.
संयम : तो वो क्यों हक़ जाता रही है, क्या वो उसकी गर्लफ्रेंड है?
नाज़िआ : क्यों? नहीं हो शक्ति वो.
संयम : वो मेरा दोस्त है.
नाज़िआ : मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, दोस्त है वो तेरा, बॉयफ्रेंड नहीं है, और वो वैस्वी का बॉयफ्रेंड हो भी सकता है, वो उनका मटर है, तुजे क्या? में तेरे लिए कह रही हु, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, तू जानती है, हमारी कास्ट में सबको पढ़ाई का मौका नहीं मिलता, और जो पढ़ते है वो भी ज्यादा तर 10वि या 12वि तक hi पढ़ते है, उसके बाद उनकी शादी कर दी जाती है, अगर अब्बू को ऐसा वैसा कुछ भी पता चला तो वो तेरी पढ़ाई रुकवा कर शादी कर देंगे, और ये तू अच्छे से जानती है. क्यों अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहती है, ये पढ़ाई की उम्र है, पढ़ाई पर ध्यान दे. तू जानती hi है की शादी के बाद चीजे कितनी बदल जाती है.
संयम : मुझे शादी hi नहीं करनी.
नाज़िआ : उसके लिए भी तुजे अपने पेरो पर खड़ा होना पड़ेगा, और पढ़ाई hi है जो तेरे पेअर मजबूत बनाएगी. इस उम्र में ये सब होता है, हमे कोई अच्छा लगता है, उसके साथ रहने का मान करता है, उसमे कोई बुराई नहीं है, पर तुजे अपना रास्ता तय करना है, तुजे क्या करना है, वो भी यही है, कही भगा नहीं जा रहा, पढ़ाई छोड़ कर इन सबके पीछे पड़ना, न तेरे लिए अच्छा है, न शिव के लिए. तू समाज रही है न? (संयम ने फिर अपना चेहरा बहार निकला, और हां में शिर हिलाया, नाज़िआ ने पूरा तकिया हटा दिया और संयम को सामने बिठाया और उसकी आंखे पोछते हुए) इस उम्र में लड़को के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है, में ये नहीं कहती की तू दूर रह, पर उसके लिए अपनी पढ़ाई पर असर न पड़ने दे. आज तूने स्कूल से छूती कर ली, कल अगर ऐसा वैसा कुछ हो गया तो स्कूल छोड़ देगी, क्या ये ठीक है? नहीं न. तुजे वो अच्छा लगता hai,ye मुझे पता है, पर अभी से तू उस पर हक़ नहीं जमा शक्ति, उसका मान भी तुजे जान न होगा, हो शक्ति है की उसे वैस्वी पसंद हो या कोई और, और वैसे भी तू उसे अपना दोस्त कहती है, तो वो तुजे दोस्त hi समजेगा. अगर तेरे मान में कुछ है तो उस से बोल दे. हम किसी को प्यार कर शक्ति है, पर वो प्यार करे या न करे ये उसकी मर्जी है, हम उस पर दबाव नहीं बना शक्ति, समाज रही है न तू?
संयम : है आप.
नाज़िआ : (उसका चेहरा अच्छे से साफ़ करते hue)Meri प्यारी गुड़िया, में तेरी दोस्त हु, दुसमन नहीं हु, में हमेशा तेरा साथ दूंगी, पर अभी ये कच्ची उम्र का प्यार है, अगर है भी तो, उसे थोड़ा पकने दे, उसके बाद अगर तुजे लगे की तुजे उसके साथ hi रहना है तो फिर आगे बढ़ना. और ये भी हो सकता है की आगे चल कर तुजे और कोई मिले जो तुजे और ज्यादा अच्छा लगे.
संयम : (अपनी आप के गले लगते hue)Thank यू आप, आप बहोत अच्छी हो.
नाज़िआ : तू भी तो अच्छी है, मेरी प्यारी गुड़िया. (दोनों ऐसे hi थोड़ी देर गले लगी रही) चल खाना कहते है, मुझे तो बहोत भूख लगी है, तेरे चक्कर में मेने भी अभी तक खाना नहीं खाया.
संयम : मुझे इतना लेक्चर दे रही हो, आप को समाज नहीं आता? आप प्रेग्नेंट हो आप को तो अपना ख्याल रखना चाहिए न. चलिए, में अपने हाथो से खिलाती हु.
प्रकाशराओ ऑफिस में बैठा था, मला आज बहार गए हुए थे, वो फिलो को देख रहा था, उसके फ़ोन पर किसी अनजान नंबर से फ़ोन आया.
प्रकाशराओ : Hello?
अव्वज : प्रकाशराओ जी बोल रहे है?
प्रकाशराओ : हांजी, बोलिये?
आवाज : में चंद्रभान बोल रहा हु, स्वर्ण का चाचा.
प्रकाशराओ : (स्वर्ण के घर से फ़ोन आया ये सोच के उसे आश्चर्य हुआ) हांजी कहिये?
चंद्रभान : हम आपसे मिलना चाहते है.
प्रकाशराओ : (उसे और आश्चर्य होने लगा, क्यों की ये पहली बार था की स्वर्ण के घर से फ़ोन आया था, स्वर्ण और उसके बेटे ने लव मर्रिएगे की थी, अपने बेटे पर भी वो गुस्सा हुआ था, पर इकलौता बीटा था तो फिर एक्सेप्ट कर लिया था, स्वर्ण के घरवाले नहीं मने थे तो कभी उनकी बात नहीं हुई थी, उसने स्वर्ण के बारे में पता करवाया था, वो बड़े घर की और अच्छे खंडन की थी तो फिर उसने एतराज नहीं किआ था, सुरु में स्वर्ण से बात भी की थी उसने इस बारे में, पर जब स्वर्ण ने रट रट बताया की उसके पापा इस बात से नाराज़ है और कोई रिस्ता नहीं रखना चाहते तो उसने भी एक्सेप्ट कर लिया था, उसे बुरा भी नहीं लगा था क्यों की एक बेटी के बाप के तौर पर ये सही फैसला भी था, उसकी भी बेटी थी, अगर वो ऐसा कदम उठाये तो वो भी उस से रिस्ता तोड़ देगा, पर अभी अचानक वह से फ़ोन आना उसको अचंबित कर रहा था) जी आप कभी भी आ शक्ति है.
चंद्रभान : हम आपके सहर में hi है, अगर आप इजाजत दे तो हम थोड़ी देर में आपके वह आ शक्ति है, स्वर्ण की माताजी और उसकी भाभी भी आयी हुई है.
प्रकाशराओ : उसके पिताजी नहीं आये? (उसने थोड़े तीखे पैन से कहा)
चंद्रभान : वो भी आना चाहते थे, पर काम की वजह से वो नहीं आ पाए, वो बाद में आ जायेंगे. पर क्या आपकी इजाजत है?
प्रकाशराओ : में क्यों एतराज करने लगा, आपकी बेटी है, आप जरूर मिल शक्ति है, में अभी बहार हु, में आधे घंटे में घर पहुँचता हु.
चंद्रभान : बहोत बढ़िया, हम भी आधेघंटे बाद hi आते है. आपने सहमति जताई उसके लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद.
प्रकाशराओ : नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मिलते है.
चंद्रभान : जी जरूर.
प्रकाशराओ : (फ़ोन रखने के बाद वो सोच में पद गया, पर फिर उसने सोचा की मिलने आये होंगे, उसने अपनी पत्नी को फ़ोन lagaya)Hello, शिखा.
शिखादेवी : हांजी बोलिये, आपने िःस्वक़्त फ़ोन किआ?
प्रकाशराओ : है, वो स्वर्ण के चाचा और उसकी माँ और भाभी, हमारे घर आ रहे है.
शिखादेवी : ऐसे अचानक, क्यों?
प्रकाशराओ : मुझे क्या पता, में भी घर आ रहा हु, तुम स्वर्ण को बता देना.
शिखादेवी : ठीक है. (फ़ोन रख kar)Swarnaaaa.
स्वर्ण : जी माजी.
शिखादेवी : तेरे मायकेवाले आ रहे है.
स्वर्ण : (उसको यकीं नहीं हुआ की उसने क्या suna)Kon मजी?
शिखादेवी : तेरे मायकेवाले, तेरी मम्मी, भाभी, और चाचा.
स्वर्ण : (उसकी आँखमे आंसू आगये) सचमे....
शिखादेवी : (उसके शिर पर हाथ फेरते hue)Aisi हालत में रोना अच्छी बात नहीं है, अभी आधेघंटे में आ रहे है, तुजे पता चल जायेगा की सच या जूथ.
स्वर्ण : (उसके आंसू रुक नहीं रहे the)Mera वो मतलब नहीं था माजी.
शिखादेवी : (मुस्कुराते hue)Me मजाक कर रही थी, पगली, मुझे पता है की तू क्या महसूस कर रही है, अक्सर ऐसा होता है, बच्चे जवानी के जोश में कदम उथलेटे है, पर फिर घरवालों की एहमियत पता चलती है. चल अब रोना धोना छोड़ और उनके आने की तयारी कर. (फिर वो दोनों नौकरो को हिदायत देने लगे, स्वर्ण तो जैसे हवा में उड़ रही थी, वो खुसी खुसी सब तैतरीय कर रही थी, और हो भी क्यों न, शादी के बाद आज पहली बार उसकी मम्मी आ रही थी, अपनी मर्जी से शादी कर के वो अपने फॅमिली से जैसे अलग हो गयी थी, उसको ये हमेषा से अपने मान में दर्द देता था, पर इतने सालो बाद उसके घरवाले उस से मिलने आ रहे थे)
(वह में स्कूल से निकला, मेरे दिमाग में दो hi बाते चल रही थी, एक तो आज जो सुबह हुआ, संयम और वैस्वी की वो तकरार, बार बार मेरे जहँ में आ रही थी, संयम को मेने कभी ऐसी कोई भी हिंट नहीं दी थी की वो उसको प्यार वाली नजर से देखता है, वो उसे अपनी दोस्त की तरह hi देखता था. पर जिस तरह से संयम, वैस्वी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी, उस से तो यही लग रहा था की वो उसे प्यार वाली नजर से देखती है, अब मुझे ये भी पता चल रहा था की अगर वो दो इंसान से प्यार जतायेगा तो उनके बिच ऐसी परिस्थितिया जन्म लेगी hi. में अपने रिस्तो को एक बार दोबारा टटोलने लगा, एक और मेरे लिए लतादिदी थी, क्यों की अब हमारे बिच जिस तरह का रिस्ता था, वो कतई भाई बहन वाला तो नहीं था, तो आगे चल कर हमारा क्या रिस्ता रहेगा, क्यों की ये बात तो तय थी की किसी भी परिस्थिति में में लतादिदी को नहीं छोड़ सकता, तो वो किस रिश्ते से मेरे साथ अपना जीवन बिताएगी, जूही अपनी तरफ से ये कह रही थी की वो मुझसे क्या किसी से भी अभी शादी नहीं करना चाहती, पर वो रिस्ता तो छह रही है, आगे चल कर अगर उसने भी कहा की वो उसके साथ जुड़ना चाहती है तो? वैस्वी की और से भी मुझे उसी तरह के सिग्नल मिल रहे थे. मेरी कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था, मुझे जूही की बात सही लग रही थी, अभी से ये सब सोचने का कोई मतलब नहीं है.
अब मेरा दिमाग अनाथालय की समस्या की और जा रहा था, पहले भी ये परिस्थितिया आयी थी, लग रहा था की अनाथालय बिखर जायेगा, काव्य मैडम और भार्गवी मैडम का यही कहना था की कुछ नहीं होगा, पर मुझे कही न कही लग रहा था की कुछ तो गड़बड़ हो रही है. जो इतने सालो से चल रहा था अचानक गोवत, को इस अनाथालय की hi याद क्यों आयी, क्यों उन्होंने हमें hi नोटिस दिया. कुछ तो था, कोई तो था जो ये सब करवा रहा था, पर ऐसा कोण है, कोण ऐसा है जिसको हमारे जैसे अनाथ बच्चो के शिर से छत हटानी है. मेने काव्य मैडम को फ़ोन लगाया.
शिव : Hello, कैसी है आप?
काव्य : में तुम्हे hi फ़ोन करनेवाली थी.
शिव : (उनकी आवाज से मेरा दिल बैठने laga)K क्यों?
काव्य : देखो, तुम ज्यादा डरना नहीं, (वो एक पल ruki)Pata नहीं ये कैसे मुमकिन है, पर मेरी ट्रस्टी से बात हुई, वो भी इस बात को समाज नहीं प् रहे है, उन्होंने बताया की उनके पास दस्तावेज नहीं है.
शिव : क्या ? दस्तावेज नहीं है.
काव्य : इतना ज्यादा दुखी होने की जरुरत नहीं है शिव, (वैसे तो वो खुद भी दुखी थी, पर वो शिव को अस्वासन देना चाहती थी) वो धुंध रहे है, ऊपरी तौर पर ढूंढने पर उन्हें कागजात नहीं मिले, वो उसे धुंध रहे है, उन्होंने कहा है की वो फिर मुझे फ़ोन करेंगे.
शिव : पर ऐसा कैसे हो शक्ति है, ये उनकी मिल्कियत है, तो कागजात तो उनके पास hi होंगे न.
काव्य : मेने उनसे यही कहा था, उन्होंने बताया की ये सब उनके पिताजी यानि जानकीदास hi देखते थे तो उनको इस बारेमे कुछ पता नहीं है, मेने ये भी कहा की इतने सालो से तो अनाथालय है, ऐसा तो मुमकिन नहीं है की बिना किसी कागजात के इतना बड़ा अनाथालय कही रजिस्टर हो. तो उन्होंने कहा की उन दिनों ये सब मुमकिन हो भी सकता था, क्यों की इस वक़्त ये सब कम्प्युटेरिसेड हो चूका है तो गोवत. उसे सब कागजातों के साथ hi रजिस्टर करती है, पर उन दिनों ये सब jan-pehchan में भी हो जाता था. मुझे भी उनकी बात सही लग रही है, पर अगर जमीं खरीदी गयी है तो कागजात तो जरूर होने चाहिए, तो वो धुंध रहे है, हो सकता है की जानकीदासजी ने वो कही और रक्खे हो.
शिव : पर अगर नहीं मिले तो?
काव्य : इतना नेगेटिव सोचने की जरुरत नहीं है शिव, अभी हमारे पास समय है, हम धुंध लेंगे, और अगर ऐसा न भी हुआ तो में कोई और तरीका सोचती हु, तुम चिंता मात करो, अनाथालय को कुछ नहीं होगा. हम मिल कर शांति से बात करते है, अभी में कोर्ट में हु, और मेरा एक केस है, ठीक है.
शिव : जी, ठीक है. (फ़ोन रखने के बाद में सोच में पद गया, अब क्या होगा, में घर पहुंच गया, मेने चेहरे से किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया, में नहीं चाहता था की वो लोग परेशान हो)
बिना और उसके घरवाले एक बड़े एलिसन घर के पार्किंग में थे, वो गाड़ी से साथ में लाया हुआ सामान उतर रहे थे. बिना घर को भी देख रही थी, वो इन लोगो को नहीं जानती थी, तभी अंदर से एक औरत (स्वर्ण) भागते हुए बहार आयी.
स्वर्ण : Mummiiiiiiiiiii. (वो दौड़ते हुए आयी और कामनादेवी से लिपट गयी) मुम्मीी (बोलते बोलते उसकी आँखों से आंसू चालक आये)
कामनादेवी : (कई बरसो के बाद वो अपनी बेटी से मिल रही थी, तो सबकुछ भूल कर उसने अपनी बेटी को बहो में भर liya)Meri बच्ची... (थोड़ी देर दोनों का ये स्नेह मिलान चला)
चंद्रभान : हम भी यही है बेटी.
स्वर्ण : (वो अपने चाचा की और बढ़ी और उनके पेअर chhuye)Chachaji.
चंद्रभान : जीती रहो बेटी. (फिर वो अपनी चची से भी गले मिली)
स्वर्ण : चचईई.
नर्मदादेवी : जीती रह, खुस रह. (स्वर्ण बिना और पद्मा की और देखने लगी) ये तेरी भाभियाँ है, ये पृथ्वी की बीवी और ये जिग्नेश की बीवी.
स्वर्ण : भाभी (कह कर वो दोनों के गले लगी)
कामनादेवी : कहा से पहचाने गई इनको, पहले hi चली आयी थी अपना घर छोड़ कर, इतना गुस्सा आ रहा है की मान कर रहा है दो चपेट लगा दू.
स्वर्ण : (रट हुए फिर अपनी मम्मी के गले लग gayi)Maaf कर दो मुझे, में पागल थी, इतनी समाज नहीं थी न.
आकाश : (स्वर्ण का पति, वो भी बहार आ गया था, प्रकाशराओ और संध्यादेवी भी बहार चले आये थे) अच्छा तो अब लग रहा है की गलती कर दी, उस समय में समजा रहा था तब अकाल घास चरने गयी थी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था, वो भी आगे बढ़ा और अपनी सासु के पेअर छुए)
कामनादेवी : जीते रहो, तरक्की करो और हमेशा खुस रहो. (आकाश ने बड़ो के पेअर छुए और बिना और पद्मा को नमस्ते किआ) आपको देख कर hi मेरी बेटी का दिमाग काम करना बंद कर गया था शायद.
स्वर्ण : में दर गयी थी मम्मी, आप तो पापा को जानते है, मुझे पता था वो कभी नहीं मानेंगे, मेरी हिम्मत hi नहीं हुई उन्हें बताने की.
कामनादेवी : (उसके शिर पर चपेट मरते hue)Ek बात मुझसे तो बात कर लेती.
संध्यादेवी : अब छोड़िये भी पुराणी बातो को, आप लोग अंदर आईएम बहार hi खड़े रह गए आप sab.(Sab अंदर आ गए, और सोफे में बेथ गए, पहली बार बेटी के ससुराल आये थे तो सब आस पास घर को देख रहे थे, संध्यादेवी ने उन्हें देखने दिया, फिर boli)Kaisa लगा अपनी बेटी का ससुराल.
कामनादेवी : (झेपते hue)Nahi, में तो बस ऐसे hi देख रही थी.
संध्यादेवी : (मुस्कुराते hue)Nahi नहीं, ये हक़ है आपका, अपनी बेटी किस घर में रह रही है वो तो देखना hi चाहिए.
प्रकाशराओ : आप आये, हमे बहोत अच्छा लगा, बहु के चेहरे पर आज जो खुसी देख रहा हु वो देख कर दिल को बहोत अच्छा लगा. आपने अपनी बेटी के प्रति बड़ा दिल दिखाया ये बहोत अच्छी बात है.
चंद्रभान : अब बेटी है हमारी, वो गलती कर शक्ति है, पर हमे तो उसे स्वीकार करना hi था, हम आपके लिए थोड़े तोहफे भी लाये है.
प्रकाशराओ : उसकी क्या जरुरत थी?
चंद्रभान : बेटी के घर आये है तो, खली हाथ तो नहीं आ शक्ति थे. (फिर थोड़ी देर सब को तौफे देने का कार्यक्रम चला, ये सब देख कर स्वर्ण बहोत खुस थी, तौफा में सोने के जेवर भी थे, उनकी सासुमा को भी सोने का हार दिया गया था, जमाई के लिए सोने का ब्रासलेट था. ये सब भी उसने कई बार सुना था, कई बार इस चीज को लेकर उसे तने दिए गए थे की वो क्या ले कर आयी, दोनों भाभियाँ मिल कर सबको तौफे दे रही thi)Beta और कोई रह तो नहीं गया न (स्वर्ण से कहा)
स्वर्ण : मेरी नानन्द है, में अभी बुलाती हु. (वो गयी वैस्वी को बुलाने, समजने पर वो भी निचे आ गयी)
बिना : वैस्वीी.
वैस्वी : टीचररररर.
प्रकाशराओ : आप जानती है इससे?
बिना : है, ये मेरे क्लास में hi पढ़ती है.
प्रकाशराओ : कितनी अजीब बात है, एक hi सहर में रहते हुए भी हम एक दूसरे से अनजान थे.
(वैस्वी को भी एक सोने की चैन दी गयी, जो खुद बिना मैडम दे रही थी )
वैस्वी : पापा (उसने पापा की और देखा)
प्रकाशराओ : बेटी, ये तुम्हारी भाभी की भाभी hai.(Aise hi थोड़ी देर इधर उधर की बाते चलती रही, फिर स्वर्ण ने वह नास्ता लगवाया, सबने नास्ता किआ, नास्ता क्या जैसे खाना hi हो गया था, चंद्रभान ने मन भी किआ, की बेटी का घर है,) अब छोड़िये भी पुराने ज़माने की बाते (ये कह कर उन्होंने जबर दस्ती की तो फिर सबने खा लिया, उसके बाद सब वह बैठे थे)
चंद्रभान : समधी जी, बिटिया से मिलने का एक और कारन भी है.
प्रकाशराओ : हांजी बताइये.
चंद्रभान :सब फॅमिली की भलाई के लिए हम एक अनुष्ठान का आयोजन कर रहे है, तो उसी का नौटा भी देने आये है.
प्रकाशराओ : ये तो बहोत खुसी की बात है, हम जरूर आएंगे, कब रक्खा है?
चंद्रभान : अभी तारीख तय नहीं की गयी है, बाबाजी का निर्देश था की सभी कुटुम्बीजन का उपस्थित होना आवश्यक है, तो हम जितने भी कुटुम्बीजन है उनसे मिल रहे है, क्यों की ये भी पता नहीं है की सब इक्कट्ठा होंगे भी की नहीं, अगर उपरवाले की कृपा से सब इकठ्ठा हो गए तो जल्द hi तारीख निकल कर आप को ऑफिशियली नौटा देने आएंगे.
प्रकाशराओ : अजीब बात है, ऐसा क्यों लगता है की आपके सब कुटुम्बीजन इकठ्ठा नहीं होंगे?
चंद्रभान : बुरा मात मानिये, पर हमें तो ये भी नहीं पता था की स्वर्णबेटी आएगी या नहीं, क्यों की जिस तरह के हालत थे, शायद आप hi इजाजत न दे, या वो खुद न आना चाहे.
प्रकाशराओ : बात तो सही है आपकी, हर कोई अपनी तरह से सोचता है, हमारी तरफ से हां समजिये, हमें कोई दिक्कत नहीं है, है आप एक बार स्वर्ण से जरूर पूछ लीजियेगा, आप भी बुरा मात मानिये, पर एक बात जरूर कहूंगा, क्या ऐसा अनुष्ठान न होता तो आप स्वर्ण से मिलने आते? इसका तो यही मतलब होता है की आप को स्वर्ण का ख्याल नहीं है, आपको अपने अनुष्ठान का ख्याल है.
कामनादेवी : ऐसा कहसकते है आप भाईसाहब, पर क्या कभी कोई घर की औरतो को भी उसकी मर्जी पूछता है, उन्होंने (अपने पति) फैसला सुना दिया की बेटी से कोई सम्बन्ध नहीं रखना है, क्या हम उसमे कुछ कह शक्ति थे (बोलते बोलते उनकी आंख में आंसू आ गए)
प्रकाशराओ : बुरा मात मानिये बहनजी, आप सच hi कह रही है, इसीलिए तो मेने कहा की आप स्वर्ण से बात कर लीजिये, क्यों की जैसा मेरे मान में ख्याल आया, उसके दिल में भी ये बात आ शक्ति है. आपने ये अनुष्ठान रक्खा है, अपने सभी फॅमिली के लोगो की भलाई के लिए तो उसमे ये भी तो आ जाती है, चाहे हम सम्बन्ध न भी रक्खे, पर जो रिस्ता उपरवाले ने बना के भेजा है उसे तो हम जुटला नहीं सकते, पर ऐसी क्या बात हो गयी की आपको ऐसा अनुष्ठान रखना पड़ा, क्यों की येसामन्य बात तो दिख नहीं रही है, आप बहोत गंभीर है इस अनुष्ठान को लेकर, इतने बरसो के गुस्से को भुला कर भी आप स्वर्ण को लेने आये है तो बात तो जरूर गंभीर होगी.
चंद्रभान : (सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे, थोड़े स्वस्थ हो कर ) आप सही कह रहे है, अब कैसे कहु और क्या कहु समाज में नहीं आ रहा, पर अब आप भी हमारी फॅमिली का hi हिस्सा है तो आप से क्या छुपाना. हमारी पीढ़ी के बाद की जो पीढ़ी है, वो आगे नहीं बढ़ प् रही है, मेरे कहने का मतलब है की उनके वह कोई भी संतान नहीं है, तो इसके उपाय स्वरुप हमने एक ज्योतिष बाबा से संपर्क किआ तो हमें उन्होंने इस अनुष्ठान का सुझाव दिया.
प्रकाशराओ : (कुछ सोचते हुए) आपके कहने का मतलब है की आपके बेटो के वह कोई संतान नहीं है, है न?
चंद्रभान : सिर्फ बेटो के वह hi नहीं, बेटिओ के वह भी संतान नहीं है, मेरी बेटी की शादी को भी कई साल हो चुके है, पर अभी भी उनके वह भी कोई उम्मीद नहीं है.
प्रकाशराओ : (मुस्कुराते hue)Dekhiye बुरा मात मानिये, पर ये कोई ढोंगी बाबा है, आज कल कोण ऐसे अन्धविश्वास में मंटा है, ऐसा नहीं है की हमे अपने धर्म पर कोई संदेह है, पर यक़ीनन ये बाबा तो ढोंगी hi है.
चंद्रभान : आप कैसे ये कह सकते है?
प्रकाशराओ : जैसा की आपने कहा की आपके वह की लड़कीओ को भी कोई संतान नहीं हो रही, पर आपकी जानकारी के लिए बता दू की हमारी बहु, उम्मीद से है. वो प्रेग्नेंट है.
कामनादेवी : क्या सच में? (स्वर्ण शर्मा गयी, कामना देवी कड़ी हुई और अपनी बेटी के शिर पर हाथ रक्खा) जीती रहो बेटी, सदा खुस रहो, ढेर साडी खुसिया नसीब हो तुजे. ये तो सचमे बहोत बड़ी खुस खबरि है.
प्रकाशराओ : इसीलिए में कह रहा था की ये उस बाबा की मन घडन्त बाटे है, अगर सचमे ऐसा होता तो आपके घर की hi बेटी प्रेग्नेंट न होती.
बिना : (मान में) स्वर्ण भी प्रेग्नेंट है? कैसे? अगर घरवाले सही है, बाबाजी सही है तो फिर स्वर्ण कैसे गर्भवती हो शक्ति है? ये कैसे मुमकिन है? उसके ससुर ठीक कह रहे है, क्यों की अगर बाबाजी की बात सच होती हो स्वर्ण ऐसे hi प्रेग्नेंट नहीं हो शक्ति, तो क्या कही कोई गलती हो रही है, नहीं ऐसा नहीं हो सकता, क्यों की बाबाजी ने hi बताया था की मेरा और ममतादिदी के बच्चे का बाप एक hi है, ये बात तो हम दोनों को भी नहीं पता थी, तो फिर ये कैसे मुकीम हो सकता hai?Swarna और शिव? क्या ऐसा हो सकता है? नहीं ये मुमकिन नहीं है, पर वैस्वी और शिव आपसमे दोस्त है, हो सकता है वो यहाँ आता भी हो, पर स्वर्ण की लव मैरिज है, वो अपने पति से दूर भी नहीं है, तो फिर ये मुमकिन नहीं हो शक्ति. पर अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर वो प्रेग्नेंट कैसे है, तो बाबाजी गलत है.
चंद्रभान : आप सही है, मुझे बाबाजी से बात करनी होगी, पर वो जो कुछ भी हो, उसी बहाने से सही, पर हमें अपनी बेटी से मिलने का मौका मिला, और एक बार फिर से हमारा रिस्ता फिर मजबूत हुआ.
प्रकाशराओ : ये बात तो सही है.
बिना : (उस से रहा न गया) पापा, आपलोग बाटे कीजिये, हम अंदर चलते है, में तो अपनी नानन्द से पहली बार मिली हु, कुछ आपस में बात hi करलु. (प्रकाशराओ की और देख kar)Agar आपकी इज्जाजत हो तो.
प्रकाशराओ : इसमें इजाजत की क्या बात है, (स्वर्ण se)jao बेटी इनको अपने कमरे में ले जाओ.
स्वर्ण : आइये भाभी.
पद्मा : में भी चलती हु (बिना को पद्मा का आना अच्छा नहीं लगा, वो स्वर्ण से अकेले में बात करना चाहती थी, पर वो उसे मन भी नहीं कर शक्ति थी, वैस्वी भी उनके साथ कड़ी हुई, वो लोग सब स्वर्ण के कमरे में गए, और वैस्वी अपने कमरे में चली गयी)
बिना : (कमरे को देख kar)Bahot अच्छे से सजाया है ये रूम.
स्वर्ण : थैंक यू भाभी.
बिना : में तो भूल hi गयी (ये कह कर वो उसके गले lagi)Bahot बहोत बधाई हो.
स्वर्ण : थैंक यू भाभी, (पद्मा ने भी बधाई di)Thank यू भाभी. पर भाभी एक बात समाजमे नहीं आयी, ये अनुष्ठान का क्या चक्कर है. (वो तीनो बीएड पर बेथ गयी)
बिना : वो जो भी हो, आपको तो खुस होना चाहिए, इस बहाने से hi सही, पर जो रिस्ता टूट चूका था वो फिर से जुड़ गया.
स्वर्ण : पर जैसा पापा ने कहा, अब तो इस अनुष्ठान का कोई मतलब नहीं रह गया, क्यों की अगर ऐसा होता तो में माँ न बन ने वाली होती.
बिना : आप ठीक कह रही है, पर कुछ और भी बाटे है, इस अनुष्ठान के पीछे.
स्वर्ण : वो क्या है भाभी?
बिना : अभी फ़िलहाल तो में तुम्हे नहीं बता शक्ति (अचानक hi उसकी नजर पद्मा की और चली गयी. (पद्मा झेप गयी, वो इसका मतलब साफ़ समाज सकती थी)
पद्मा : मेरे सामने बात नहीं करनी तो में बहार चली जाती हु (उसका चेहरा उदास हो गया था)
बिना : (उसका हाथ पकड़ kar)Aisi बात नहीं है, तू बेथ.
पद्मा : आपको क्या लगता है, में कोई बच्ची हु, में समाज सकती हु की कोई तो बात है, वो बाबाजी ने भी मुझे छोड़ कर आप दोनों को hi बुलाया था, यहाँ भी मेरी उपस्थिति आपको खाल रही है, अगर मेरी उपस्थितिमे आपको बात करने में दिक्कत हो रही है तो में बहार चली जाती हु. (वो फिर उठने लगी, बिना ने फिर उसका हाथ पकड़ कर बीएड पर बिठा दिया)
बिना : जैसा तू समाज रही है, वैसा नहीं है, पर कुछ बाटे होती है, जो समय पर पता चले तो hi अच्छा होता है, वर्ण उसका मतलब और मायने बदल जाते है. ऐसा नहीं है की में तुजसे कुछ छुपा रही हु, पर अभी फ़िलहाल वो जान न तेरे लिए जरुरी नहीं है, पर जितना में समाज प् रही हु, अगर वैसा hi है तो फिर तुजे भी वो बात जान नई hi पड़ेगी, में खुद तुजे बताउंगी, तो मुँह मात लटका, सामजी.
पद्मा : (उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े) आप जानती hi हो, घर का माहौल कैसा है, में अकेली हो गयी हु वह, और आप सब भी मुझसे ऐसे पर्दा करोगी तो बुरा तो लगता है न.
बिना : (पद्मा को गले लगा kar)Pagala (प्यार से कहा) ऐसा वैसा कुछ नहीं है, तू दिल पर मात ले, मेने कहा न समय आने पर में खुद बात करुँगी, पर अभी मेरी तो समाज में आने दे, कई सवाल है मेरे मान में, मुझे hi उसके जवाब नहीं मिल रहे तो तुजे क्या बताउंगी.
स्वर्ण : ऐसी क्या बात है भाभी? (बिना को)
बिना : कुछ नहीं है, सब के घरो में एक hi टेंशन है, बच्चा.
स्वर्ण : हो जायेगा भाभी, अभी उम्र hi क्या है आपकी.
बिना : (अपने मान में, अब क्या बताऊ आपको, वो तो आलरेडी मेरे गर्भ में है, पर भी में वो नहीं बता शक्ति, मुझे ये जान न है की ये अनुष्ठान शिव के लिए क्यों जरुरी है, और आपका और शिव का कोई रिस्ता है की नहीं, क्यों की अगर नहीं है तो फिर ये साडी बाटे बेमानी हो जाएगी)
स्वर्ण : (बिना को सोच में डूबा dekh)Sach में भाभी, कोई तो बात है, बताओ न.
बिना : (उसके पास वैसे भी कोई चारा नहीं बचा था, तो हिम्मत कर के उसने अच्छे तरीके से पूछा) आप शिव को जानती है? (उसने बहोत शांत लहजे में पूछा था, पर अचानक शिव के नाम से स्वर्ण चौंक गयी, ऐसे अचानक भाभी शिव का क्यों पूछ रही है ये उसकी समाज में नै आया)
स्वर्ण : क क कोण शिव? (उसकी जबान तक ladkhadayi)(Uski लड़खड़ाहट बहोत कुछ बयां कर रही थी, बिना को पूरा शक हो गया)
पद्मा : (उसे भी कुछ समाज नहीं aaya)Kon शिव?
बिना : (बात को सँभालते hue)Mene तो बस ऐसे hi पूछा था, मेने सोचा की बात का टॉपिक बदला जाये, वैस्वी और शिव दोनों दोस्त है तो मेने सोचा की आप जानती हो.
स्वर्ण : (अपने आपको सँभालते hue)Wo शिव, है वो वैस्वी का दोस्त है और पापा की कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ भी जुड़ा हुआ है तो आता है कभी कभी. पर आपने अचानक उसका क्यों पूछा?
बिना : मेने कहा न, की बहोत सीरियस बात चल रही थी तो मेने सोचा की टॉपिक चेंज करते है, मुझे भी लगा था की शायद आप जानती होंगी, बहोत अच्छा लड़का है, मेरे क्लास का होशियार बच्चा.
स्वर्ण : है, वैस्वी भी उसकी बाते करती है, उसने वैस्वी की बहोत मदद भी की थी, आपको तो पता hi होगा, उस हादसे के बारे में. (पद्मा को कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो बस सुन रही थी, तभी एक नौकर ने आके कहा की आप को निचे बुला रहे है, सब निचे आ गए, सबने विदा mangi)Bhabhi, आप तो यही हो, तो अब आपसे मिलना होता रहेगा. आप मेरा नंबर ले लो, और मुझे आपका भी दे दो. (उन्होंने आपसे में नंबर दे दिए, फिर वो सब वह से निकल गए, बिना ने बहोत रोका पर वो सब वापस चले गए, बिना फिर से स्वर्ण और शिव के बारे में सोचने लगी)
बिना : जिस तरह से स्वर्ण हीचिकिचाई थी जरूर कुछ न कुछ तो है, और अगर मेरा शक सही है तो वो शिव का hi बच्चा हो शक्ति है, क्यों की परिस्थितिया हो उसी और इस्सर कर रही है. पर फिर भी ध्यान से जान न होगा, अगर मेरा अनुमान गलत हुआ तो बात बिगड़ भी सकती है. ऐसा करती हु पहले शिव से hi बात करती हु, वैसे भी मिलना है उस से, कहा कहा गुल खिला रहे है जनाब, में उसे कितना भोला समझती थी, और यहाँ देखो, जहा देखो वह उनके बच्चे मिल रहे है. (उसने शिव के मोबाइल पर मश्ग किआ) में सहर में आ गयी हु, टाइम हो तो मिलने आना.
शिव उस वक़्त स्टेडियम में था तो उसने मश्ग नहीं पढ़ा, आज भी वो साइट पर नहीं गया था, आज वो घर hi रहा, क्यों की घर में भी टेंशन का माहौल था.
सुबह से संयम अपने रूम में hi घुसी रही, न किसी से बात कर रही थी न अपना मुँह दिखा रही थी, नाज़िआ ने भी दो तीन बार बात करने की कोशिस की, पर वो अपना मुँह तकिये में छुपा के उलटी लेती हुई थी. खाने के वक़्त भी वो खाने नहीं उतरी. उसके अब्बू ने भी आवाज लगायी, पर वो नहीं उतरी. नाज़िआ ने मामला सँभालते हुए अपने अब्बू को संजय की वो उसको खिला देगी, उसके पेट में दर्द है तो शायद अभी खाने का मान नहीं होगा. सब निपटने के बाद वो उसके रूम में गयी, अच्छी बात ये थी की दरवाजा बंद नहीं था, पर जैसे hi वो अंदर गयी, फिर से संयम ने अपना मुँह तकिये में छुपा लिया.
नाज़िआ : संयम, क्या कर रही है तू? (उसने कोई जवाब नहीं दिया) मुझसे बात तो कर (फिर भी वो कुछ नहीं बोली) इतनी सी बात पर ये क्या कर रही है तू, मेरी और देख तो (फिर भी न उसने बात की न तकिये से मुँह nikala)Kya तू रो रही है? (कोई प्रतिक्रिया nahi)Tuje मेरी कसम है, देख मेरी और. (उसकी बात का एस्सार हुआ, और संयम ने तकिये से एक तरफ का चेहरा बहार निकल के नाज़िआ की और देखा, जिसे देख कर वो काहुनक गयी, क्यों की साफ़ पता चल रहा था की वो रो रही थी, उसके बाल भी चेहरे से चिपक गए है), ये क्या हल बना रक्खा है, ऐसा क्या हो गया जो तू ऐसे रियेक्ट कर रही है.
संयम : (रोटी आवाज me)Use क्यों शिव के पीछे बैठना है, उसका क्या हक़ है, वो मेरा दोस्त है, उसका नहीं है.
नाज़िआ : पागल है क्या तू, साथमे पढ़ते हो, साथ में आते जाते हो, तो क्या दोस्ती नहीं होजायेगी उसकी, और उसके बैठने से तुजे क्यों इतना बुरा लग रहा है, एक तो बेचारी तुजे रोज़ लेने और छोड़ने आती है, तुजे कुछ तो ख्याल करना चाहिए.
संयम : पर उसे क्यों बैठना है?
नाज़िआ : तुजे क्यों बैठना है?
संयम : क्यों की वो मेरा दोस्त है.
नाज़िआ : तो तेरे पीछे बैठने से तेरी दोस्ती ख़तम हो जाएगी क्या. तू तो ऐसे हक़ जाता रही है जैसे तू उसकी गर्लफ्रेंड है. (संयम चुप हो गयी, वो कुछ नहीं बोली, उसने फिर से अपना चेहरा छुपा लिया. नाज़िआ बच्ची नहीं थी, वो सब समाज रही थी, पर वो इस बात को बताना नहीं चाहती थी) अब मुँह क्यों छुपा रही है, जवाब दे मुझे.
संयम : तो वो क्यों हक़ जाता रही है, क्या वो उसकी गर्लफ्रेंड है?
नाज़िआ : क्यों? नहीं हो शक्ति वो.
संयम : वो मेरा दोस्त है.
नाज़िआ : मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, मेरा दोस्त है, दोस्त है वो तेरा, बॉयफ्रेंड नहीं है, और वो वैस्वी का बॉयफ्रेंड हो भी सकता है, वो उनका मटर है, तुजे क्या? में तेरे लिए कह रही हु, अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, तू जानती है, हमारी कास्ट में सबको पढ़ाई का मौका नहीं मिलता, और जो पढ़ते है वो भी ज्यादा तर 10वि या 12वि तक hi पढ़ते है, उसके बाद उनकी शादी कर दी जाती है, अगर अब्बू को ऐसा वैसा कुछ भी पता चला तो वो तेरी पढ़ाई रुकवा कर शादी कर देंगे, और ये तू अच्छे से जानती है. क्यों अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहती है, ये पढ़ाई की उम्र है, पढ़ाई पर ध्यान दे. तू जानती hi है की शादी के बाद चीजे कितनी बदल जाती है.
संयम : मुझे शादी hi नहीं करनी.
नाज़िआ : उसके लिए भी तुजे अपने पेरो पर खड़ा होना पड़ेगा, और पढ़ाई hi है जो तेरे पेअर मजबूत बनाएगी. इस उम्र में ये सब होता है, हमे कोई अच्छा लगता है, उसके साथ रहने का मान करता है, उसमे कोई बुराई नहीं है, पर तुजे अपना रास्ता तय करना है, तुजे क्या करना है, वो भी यही है, कही भगा नहीं जा रहा, पढ़ाई छोड़ कर इन सबके पीछे पड़ना, न तेरे लिए अच्छा है, न शिव के लिए. तू समाज रही है न? (संयम ने फिर अपना चेहरा बहार निकला, और हां में शिर हिलाया, नाज़िआ ने पूरा तकिया हटा दिया और संयम को सामने बिठाया और उसकी आंखे पोछते हुए) इस उम्र में लड़को के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है, में ये नहीं कहती की तू दूर रह, पर उसके लिए अपनी पढ़ाई पर असर न पड़ने दे. आज तूने स्कूल से छूती कर ली, कल अगर ऐसा वैसा कुछ हो गया तो स्कूल छोड़ देगी, क्या ये ठीक है? नहीं न. तुजे वो अच्छा लगता hai,ye मुझे पता है, पर अभी से तू उस पर हक़ नहीं जमा शक्ति, उसका मान भी तुजे जान न होगा, हो शक्ति है की उसे वैस्वी पसंद हो या कोई और, और वैसे भी तू उसे अपना दोस्त कहती है, तो वो तुजे दोस्त hi समजेगा. अगर तेरे मान में कुछ है तो उस से बोल दे. हम किसी को प्यार कर शक्ति है, पर वो प्यार करे या न करे ये उसकी मर्जी है, हम उस पर दबाव नहीं बना शक्ति, समाज रही है न तू?
संयम : है आप.
नाज़िआ : (उसका चेहरा अच्छे से साफ़ करते hue)Meri प्यारी गुड़िया, में तेरी दोस्त हु, दुसमन नहीं हु, में हमेशा तेरा साथ दूंगी, पर अभी ये कच्ची उम्र का प्यार है, अगर है भी तो, उसे थोड़ा पकने दे, उसके बाद अगर तुजे लगे की तुजे उसके साथ hi रहना है तो फिर आगे बढ़ना. और ये भी हो सकता है की आगे चल कर तुजे और कोई मिले जो तुजे और ज्यादा अच्छा लगे.
संयम : (अपनी आप के गले लगते hue)Thank यू आप, आप बहोत अच्छी हो.
नाज़िआ : तू भी तो अच्छी है, मेरी प्यारी गुड़िया. (दोनों ऐसे hi थोड़ी देर गले लगी रही) चल खाना कहते है, मुझे तो बहोत भूख लगी है, तेरे चक्कर में मेने भी अभी तक खाना नहीं खाया.
संयम : मुझे इतना लेक्चर दे रही हो, आप को समाज नहीं आता? आप प्रेग्नेंट हो आप को तो अपना ख्याल रखना चाहिए न. चलिए, में अपने हाथो से खिलाती हु.
प्रकाशराओ ऑफिस में बैठा था, मला आज बहार गए हुए थे, वो फिलो को देख रहा था, उसके फ़ोन पर किसी अनजान नंबर से फ़ोन आया.
प्रकाशराओ : Hello?
अव्वज : प्रकाशराओ जी बोल रहे है?
प्रकाशराओ : हांजी, बोलिये?
आवाज : में चंद्रभान बोल रहा हु, स्वर्ण का चाचा.
प्रकाशराओ : (स्वर्ण के घर से फ़ोन आया ये सोच के उसे आश्चर्य हुआ) हांजी कहिये?
चंद्रभान : हम आपसे मिलना चाहते है.
प्रकाशराओ : (उसे और आश्चर्य होने लगा, क्यों की ये पहली बार था की स्वर्ण के घर से फ़ोन आया था, स्वर्ण और उसके बेटे ने लव मर्रिएगे की थी, अपने बेटे पर भी वो गुस्सा हुआ था, पर इकलौता बीटा था तो फिर एक्सेप्ट कर लिया था, स्वर्ण के घरवाले नहीं मने थे तो कभी उनकी बात नहीं हुई थी, उसने स्वर्ण के बारे में पता करवाया था, वो बड़े घर की और अच्छे खंडन की थी तो फिर उसने एतराज नहीं किआ था, सुरु में स्वर्ण से बात भी की थी उसने इस बारे में, पर जब स्वर्ण ने रट रट बताया की उसके पापा इस बात से नाराज़ है और कोई रिस्ता नहीं रखना चाहते तो उसने भी एक्सेप्ट कर लिया था, उसे बुरा भी नहीं लगा था क्यों की एक बेटी के बाप के तौर पर ये सही फैसला भी था, उसकी भी बेटी थी, अगर वो ऐसा कदम उठाये तो वो भी उस से रिस्ता तोड़ देगा, पर अभी अचानक वह से फ़ोन आना उसको अचंबित कर रहा था) जी आप कभी भी आ शक्ति है.
चंद्रभान : हम आपके सहर में hi है, अगर आप इजाजत दे तो हम थोड़ी देर में आपके वह आ शक्ति है, स्वर्ण की माताजी और उसकी भाभी भी आयी हुई है.
प्रकाशराओ : उसके पिताजी नहीं आये? (उसने थोड़े तीखे पैन से कहा)
चंद्रभान : वो भी आना चाहते थे, पर काम की वजह से वो नहीं आ पाए, वो बाद में आ जायेंगे. पर क्या आपकी इजाजत है?
प्रकाशराओ : में क्यों एतराज करने लगा, आपकी बेटी है, आप जरूर मिल शक्ति है, में अभी बहार हु, में आधे घंटे में घर पहुँचता हु.
चंद्रभान : बहोत बढ़िया, हम भी आधेघंटे बाद hi आते है. आपने सहमति जताई उसके लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद.
प्रकाशराओ : नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, मिलते है.
चंद्रभान : जी जरूर.
प्रकाशराओ : (फ़ोन रखने के बाद वो सोच में पद गया, पर फिर उसने सोचा की मिलने आये होंगे, उसने अपनी पत्नी को फ़ोन lagaya)Hello, शिखा.
शिखादेवी : हांजी बोलिये, आपने िःस्वक़्त फ़ोन किआ?
प्रकाशराओ : है, वो स्वर्ण के चाचा और उसकी माँ और भाभी, हमारे घर आ रहे है.
शिखादेवी : ऐसे अचानक, क्यों?
प्रकाशराओ : मुझे क्या पता, में भी घर आ रहा हु, तुम स्वर्ण को बता देना.
शिखादेवी : ठीक है. (फ़ोन रख kar)Swarnaaaa.
स्वर्ण : जी माजी.
शिखादेवी : तेरे मायकेवाले आ रहे है.
स्वर्ण : (उसको यकीं नहीं हुआ की उसने क्या suna)Kon मजी?
शिखादेवी : तेरे मायकेवाले, तेरी मम्मी, भाभी, और चाचा.
स्वर्ण : (उसकी आँखमे आंसू आगये) सचमे....
शिखादेवी : (उसके शिर पर हाथ फेरते hue)Aisi हालत में रोना अच्छी बात नहीं है, अभी आधेघंटे में आ रहे है, तुजे पता चल जायेगा की सच या जूथ.
स्वर्ण : (उसके आंसू रुक नहीं रहे the)Mera वो मतलब नहीं था माजी.
शिखादेवी : (मुस्कुराते hue)Me मजाक कर रही थी, पगली, मुझे पता है की तू क्या महसूस कर रही है, अक्सर ऐसा होता है, बच्चे जवानी के जोश में कदम उथलेटे है, पर फिर घरवालों की एहमियत पता चलती है. चल अब रोना धोना छोड़ और उनके आने की तयारी कर. (फिर वो दोनों नौकरो को हिदायत देने लगे, स्वर्ण तो जैसे हवा में उड़ रही थी, वो खुसी खुसी सब तैतरीय कर रही थी, और हो भी क्यों न, शादी के बाद आज पहली बार उसकी मम्मी आ रही थी, अपनी मर्जी से शादी कर के वो अपने फॅमिली से जैसे अलग हो गयी थी, उसको ये हमेषा से अपने मान में दर्द देता था, पर इतने सालो बाद उसके घरवाले उस से मिलने आ रहे थे)
(वह में स्कूल से निकला, मेरे दिमाग में दो hi बाते चल रही थी, एक तो आज जो सुबह हुआ, संयम और वैस्वी की वो तकरार, बार बार मेरे जहँ में आ रही थी, संयम को मेने कभी ऐसी कोई भी हिंट नहीं दी थी की वो उसको प्यार वाली नजर से देखता है, वो उसे अपनी दोस्त की तरह hi देखता था. पर जिस तरह से संयम, वैस्वी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थी, उस से तो यही लग रहा था की वो उसे प्यार वाली नजर से देखती है, अब मुझे ये भी पता चल रहा था की अगर वो दो इंसान से प्यार जतायेगा तो उनके बिच ऐसी परिस्थितिया जन्म लेगी hi. में अपने रिस्तो को एक बार दोबारा टटोलने लगा, एक और मेरे लिए लतादिदी थी, क्यों की अब हमारे बिच जिस तरह का रिस्ता था, वो कतई भाई बहन वाला तो नहीं था, तो आगे चल कर हमारा क्या रिस्ता रहेगा, क्यों की ये बात तो तय थी की किसी भी परिस्थिति में में लतादिदी को नहीं छोड़ सकता, तो वो किस रिश्ते से मेरे साथ अपना जीवन बिताएगी, जूही अपनी तरफ से ये कह रही थी की वो मुझसे क्या किसी से भी अभी शादी नहीं करना चाहती, पर वो रिस्ता तो छह रही है, आगे चल कर अगर उसने भी कहा की वो उसके साथ जुड़ना चाहती है तो? वैस्वी की और से भी मुझे उसी तरह के सिग्नल मिल रहे थे. मेरी कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था, मुझे जूही की बात सही लग रही थी, अभी से ये सब सोचने का कोई मतलब नहीं है.
अब मेरा दिमाग अनाथालय की समस्या की और जा रहा था, पहले भी ये परिस्थितिया आयी थी, लग रहा था की अनाथालय बिखर जायेगा, काव्य मैडम और भार्गवी मैडम का यही कहना था की कुछ नहीं होगा, पर मुझे कही न कही लग रहा था की कुछ तो गड़बड़ हो रही है. जो इतने सालो से चल रहा था अचानक गोवत, को इस अनाथालय की hi याद क्यों आयी, क्यों उन्होंने हमें hi नोटिस दिया. कुछ तो था, कोई तो था जो ये सब करवा रहा था, पर ऐसा कोण है, कोण ऐसा है जिसको हमारे जैसे अनाथ बच्चो के शिर से छत हटानी है. मेने काव्य मैडम को फ़ोन लगाया.
शिव : Hello, कैसी है आप?
काव्य : में तुम्हे hi फ़ोन करनेवाली थी.
शिव : (उनकी आवाज से मेरा दिल बैठने laga)K क्यों?
काव्य : देखो, तुम ज्यादा डरना नहीं, (वो एक पल ruki)Pata नहीं ये कैसे मुमकिन है, पर मेरी ट्रस्टी से बात हुई, वो भी इस बात को समाज नहीं प् रहे है, उन्होंने बताया की उनके पास दस्तावेज नहीं है.
शिव : क्या ? दस्तावेज नहीं है.
काव्य : इतना ज्यादा दुखी होने की जरुरत नहीं है शिव, (वैसे तो वो खुद भी दुखी थी, पर वो शिव को अस्वासन देना चाहती थी) वो धुंध रहे है, ऊपरी तौर पर ढूंढने पर उन्हें कागजात नहीं मिले, वो उसे धुंध रहे है, उन्होंने कहा है की वो फिर मुझे फ़ोन करेंगे.
शिव : पर ऐसा कैसे हो शक्ति है, ये उनकी मिल्कियत है, तो कागजात तो उनके पास hi होंगे न.
काव्य : मेने उनसे यही कहा था, उन्होंने बताया की ये सब उनके पिताजी यानि जानकीदास hi देखते थे तो उनको इस बारेमे कुछ पता नहीं है, मेने ये भी कहा की इतने सालो से तो अनाथालय है, ऐसा तो मुमकिन नहीं है की बिना किसी कागजात के इतना बड़ा अनाथालय कही रजिस्टर हो. तो उन्होंने कहा की उन दिनों ये सब मुमकिन हो भी सकता था, क्यों की इस वक़्त ये सब कम्प्युटेरिसेड हो चूका है तो गोवत. उसे सब कागजातों के साथ hi रजिस्टर करती है, पर उन दिनों ये सब jan-pehchan में भी हो जाता था. मुझे भी उनकी बात सही लग रही है, पर अगर जमीं खरीदी गयी है तो कागजात तो जरूर होने चाहिए, तो वो धुंध रहे है, हो सकता है की जानकीदासजी ने वो कही और रक्खे हो.
शिव : पर अगर नहीं मिले तो?
काव्य : इतना नेगेटिव सोचने की जरुरत नहीं है शिव, अभी हमारे पास समय है, हम धुंध लेंगे, और अगर ऐसा न भी हुआ तो में कोई और तरीका सोचती हु, तुम चिंता मात करो, अनाथालय को कुछ नहीं होगा. हम मिल कर शांति से बात करते है, अभी में कोर्ट में हु, और मेरा एक केस है, ठीक है.
शिव : जी, ठीक है. (फ़ोन रखने के बाद में सोच में पद गया, अब क्या होगा, में घर पहुंच गया, मेने चेहरे से किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया, में नहीं चाहता था की वो लोग परेशान हो)
बिना और उसके घरवाले एक बड़े एलिसन घर के पार्किंग में थे, वो गाड़ी से साथ में लाया हुआ सामान उतर रहे थे. बिना घर को भी देख रही थी, वो इन लोगो को नहीं जानती थी, तभी अंदर से एक औरत (स्वर्ण) भागते हुए बहार आयी.
स्वर्ण : Mummiiiiiiiiiii. (वो दौड़ते हुए आयी और कामनादेवी से लिपट गयी) मुम्मीी (बोलते बोलते उसकी आँखों से आंसू चालक आये)
कामनादेवी : (कई बरसो के बाद वो अपनी बेटी से मिल रही थी, तो सबकुछ भूल कर उसने अपनी बेटी को बहो में भर liya)Meri बच्ची... (थोड़ी देर दोनों का ये स्नेह मिलान चला)
चंद्रभान : हम भी यही है बेटी.
स्वर्ण : (वो अपने चाचा की और बढ़ी और उनके पेअर chhuye)Chachaji.
चंद्रभान : जीती रहो बेटी. (फिर वो अपनी चची से भी गले मिली)
स्वर्ण : चचईई.
नर्मदादेवी : जीती रह, खुस रह. (स्वर्ण बिना और पद्मा की और देखने लगी) ये तेरी भाभियाँ है, ये पृथ्वी की बीवी और ये जिग्नेश की बीवी.
स्वर्ण : भाभी (कह कर वो दोनों के गले लगी)
कामनादेवी : कहा से पहचाने गई इनको, पहले hi चली आयी थी अपना घर छोड़ कर, इतना गुस्सा आ रहा है की मान कर रहा है दो चपेट लगा दू.
स्वर्ण : (रट हुए फिर अपनी मम्मी के गले लग gayi)Maaf कर दो मुझे, में पागल थी, इतनी समाज नहीं थी न.
आकाश : (स्वर्ण का पति, वो भी बहार आ गया था, प्रकाशराओ और संध्यादेवी भी बहार चले आये थे) अच्छा तो अब लग रहा है की गलती कर दी, उस समय में समजा रहा था तब अकाल घास चरने गयी थी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था, वो भी आगे बढ़ा और अपनी सासु के पेअर छुए)
कामनादेवी : जीते रहो, तरक्की करो और हमेशा खुस रहो. (आकाश ने बड़ो के पेअर छुए और बिना और पद्मा को नमस्ते किआ) आपको देख कर hi मेरी बेटी का दिमाग काम करना बंद कर गया था शायद.
स्वर्ण : में दर गयी थी मम्मी, आप तो पापा को जानते है, मुझे पता था वो कभी नहीं मानेंगे, मेरी हिम्मत hi नहीं हुई उन्हें बताने की.
कामनादेवी : (उसके शिर पर चपेट मरते hue)Ek बात मुझसे तो बात कर लेती.
संध्यादेवी : अब छोड़िये भी पुराणी बातो को, आप लोग अंदर आईएम बहार hi खड़े रह गए आप sab.(Sab अंदर आ गए, और सोफे में बेथ गए, पहली बार बेटी के ससुराल आये थे तो सब आस पास घर को देख रहे थे, संध्यादेवी ने उन्हें देखने दिया, फिर boli)Kaisa लगा अपनी बेटी का ससुराल.
कामनादेवी : (झेपते hue)Nahi, में तो बस ऐसे hi देख रही थी.
संध्यादेवी : (मुस्कुराते hue)Nahi नहीं, ये हक़ है आपका, अपनी बेटी किस घर में रह रही है वो तो देखना hi चाहिए.
प्रकाशराओ : आप आये, हमे बहोत अच्छा लगा, बहु के चेहरे पर आज जो खुसी देख रहा हु वो देख कर दिल को बहोत अच्छा लगा. आपने अपनी बेटी के प्रति बड़ा दिल दिखाया ये बहोत अच्छी बात है.
चंद्रभान : अब बेटी है हमारी, वो गलती कर शक्ति है, पर हमे तो उसे स्वीकार करना hi था, हम आपके लिए थोड़े तोहफे भी लाये है.
प्रकाशराओ : उसकी क्या जरुरत थी?
चंद्रभान : बेटी के घर आये है तो, खली हाथ तो नहीं आ शक्ति थे. (फिर थोड़ी देर सब को तौफे देने का कार्यक्रम चला, ये सब देख कर स्वर्ण बहोत खुस थी, तौफा में सोने के जेवर भी थे, उनकी सासुमा को भी सोने का हार दिया गया था, जमाई के लिए सोने का ब्रासलेट था. ये सब भी उसने कई बार सुना था, कई बार इस चीज को लेकर उसे तने दिए गए थे की वो क्या ले कर आयी, दोनों भाभियाँ मिल कर सबको तौफे दे रही thi)Beta और कोई रह तो नहीं गया न (स्वर्ण से कहा)
स्वर्ण : मेरी नानन्द है, में अभी बुलाती हु. (वो गयी वैस्वी को बुलाने, समजने पर वो भी निचे आ गयी)
बिना : वैस्वीी.
वैस्वी : टीचररररर.
प्रकाशराओ : आप जानती है इससे?
बिना : है, ये मेरे क्लास में hi पढ़ती है.
प्रकाशराओ : कितनी अजीब बात है, एक hi सहर में रहते हुए भी हम एक दूसरे से अनजान थे.
(वैस्वी को भी एक सोने की चैन दी गयी, जो खुद बिना मैडम दे रही थी )
वैस्वी : पापा (उसने पापा की और देखा)
प्रकाशराओ : बेटी, ये तुम्हारी भाभी की भाभी hai.(Aise hi थोड़ी देर इधर उधर की बाते चलती रही, फिर स्वर्ण ने वह नास्ता लगवाया, सबने नास्ता किआ, नास्ता क्या जैसे खाना hi हो गया था, चंद्रभान ने मन भी किआ, की बेटी का घर है,) अब छोड़िये भी पुराने ज़माने की बाते (ये कह कर उन्होंने जबर दस्ती की तो फिर सबने खा लिया, उसके बाद सब वह बैठे थे)
चंद्रभान : समधी जी, बिटिया से मिलने का एक और कारन भी है.
प्रकाशराओ : हांजी बताइये.
चंद्रभान :सब फॅमिली की भलाई के लिए हम एक अनुष्ठान का आयोजन कर रहे है, तो उसी का नौटा भी देने आये है.
प्रकाशराओ : ये तो बहोत खुसी की बात है, हम जरूर आएंगे, कब रक्खा है?
चंद्रभान : अभी तारीख तय नहीं की गयी है, बाबाजी का निर्देश था की सभी कुटुम्बीजन का उपस्थित होना आवश्यक है, तो हम जितने भी कुटुम्बीजन है उनसे मिल रहे है, क्यों की ये भी पता नहीं है की सब इक्कट्ठा होंगे भी की नहीं, अगर उपरवाले की कृपा से सब इकठ्ठा हो गए तो जल्द hi तारीख निकल कर आप को ऑफिशियली नौटा देने आएंगे.
प्रकाशराओ : अजीब बात है, ऐसा क्यों लगता है की आपके सब कुटुम्बीजन इकठ्ठा नहीं होंगे?
चंद्रभान : बुरा मात मानिये, पर हमें तो ये भी नहीं पता था की स्वर्णबेटी आएगी या नहीं, क्यों की जिस तरह के हालत थे, शायद आप hi इजाजत न दे, या वो खुद न आना चाहे.
प्रकाशराओ : बात तो सही है आपकी, हर कोई अपनी तरह से सोचता है, हमारी तरफ से हां समजिये, हमें कोई दिक्कत नहीं है, है आप एक बार स्वर्ण से जरूर पूछ लीजियेगा, आप भी बुरा मात मानिये, पर एक बात जरूर कहूंगा, क्या ऐसा अनुष्ठान न होता तो आप स्वर्ण से मिलने आते? इसका तो यही मतलब होता है की आप को स्वर्ण का ख्याल नहीं है, आपको अपने अनुष्ठान का ख्याल है.
कामनादेवी : ऐसा कहसकते है आप भाईसाहब, पर क्या कभी कोई घर की औरतो को भी उसकी मर्जी पूछता है, उन्होंने (अपने पति) फैसला सुना दिया की बेटी से कोई सम्बन्ध नहीं रखना है, क्या हम उसमे कुछ कह शक्ति थे (बोलते बोलते उनकी आंख में आंसू आ गए)
प्रकाशराओ : बुरा मात मानिये बहनजी, आप सच hi कह रही है, इसीलिए तो मेने कहा की आप स्वर्ण से बात कर लीजिये, क्यों की जैसा मेरे मान में ख्याल आया, उसके दिल में भी ये बात आ शक्ति है. आपने ये अनुष्ठान रक्खा है, अपने सभी फॅमिली के लोगो की भलाई के लिए तो उसमे ये भी तो आ जाती है, चाहे हम सम्बन्ध न भी रक्खे, पर जो रिस्ता उपरवाले ने बना के भेजा है उसे तो हम जुटला नहीं सकते, पर ऐसी क्या बात हो गयी की आपको ऐसा अनुष्ठान रखना पड़ा, क्यों की येसामन्य बात तो दिख नहीं रही है, आप बहोत गंभीर है इस अनुष्ठान को लेकर, इतने बरसो के गुस्से को भुला कर भी आप स्वर्ण को लेने आये है तो बात तो जरूर गंभीर होगी.
चंद्रभान : (सब एक दूसरे का मुँह देखने लगे, थोड़े स्वस्थ हो कर ) आप सही कह रहे है, अब कैसे कहु और क्या कहु समाज में नहीं आ रहा, पर अब आप भी हमारी फॅमिली का hi हिस्सा है तो आप से क्या छुपाना. हमारी पीढ़ी के बाद की जो पीढ़ी है, वो आगे नहीं बढ़ प् रही है, मेरे कहने का मतलब है की उनके वह कोई भी संतान नहीं है, तो इसके उपाय स्वरुप हमने एक ज्योतिष बाबा से संपर्क किआ तो हमें उन्होंने इस अनुष्ठान का सुझाव दिया.
प्रकाशराओ : (कुछ सोचते हुए) आपके कहने का मतलब है की आपके बेटो के वह कोई संतान नहीं है, है न?
चंद्रभान : सिर्फ बेटो के वह hi नहीं, बेटिओ के वह भी संतान नहीं है, मेरी बेटी की शादी को भी कई साल हो चुके है, पर अभी भी उनके वह भी कोई उम्मीद नहीं है.
प्रकाशराओ : (मुस्कुराते hue)Dekhiye बुरा मात मानिये, पर ये कोई ढोंगी बाबा है, आज कल कोण ऐसे अन्धविश्वास में मंटा है, ऐसा नहीं है की हमे अपने धर्म पर कोई संदेह है, पर यक़ीनन ये बाबा तो ढोंगी hi है.
चंद्रभान : आप कैसे ये कह सकते है?
प्रकाशराओ : जैसा की आपने कहा की आपके वह की लड़कीओ को भी कोई संतान नहीं हो रही, पर आपकी जानकारी के लिए बता दू की हमारी बहु, उम्मीद से है. वो प्रेग्नेंट है.
कामनादेवी : क्या सच में? (स्वर्ण शर्मा गयी, कामना देवी कड़ी हुई और अपनी बेटी के शिर पर हाथ रक्खा) जीती रहो बेटी, सदा खुस रहो, ढेर साडी खुसिया नसीब हो तुजे. ये तो सचमे बहोत बड़ी खुस खबरि है.
प्रकाशराओ : इसीलिए में कह रहा था की ये उस बाबा की मन घडन्त बाटे है, अगर सचमे ऐसा होता तो आपके घर की hi बेटी प्रेग्नेंट न होती.
बिना : (मान में) स्वर्ण भी प्रेग्नेंट है? कैसे? अगर घरवाले सही है, बाबाजी सही है तो फिर स्वर्ण कैसे गर्भवती हो शक्ति है? ये कैसे मुमकिन है? उसके ससुर ठीक कह रहे है, क्यों की अगर बाबाजी की बात सच होती हो स्वर्ण ऐसे hi प्रेग्नेंट नहीं हो शक्ति, तो क्या कही कोई गलती हो रही है, नहीं ऐसा नहीं हो सकता, क्यों की बाबाजी ने hi बताया था की मेरा और ममतादिदी के बच्चे का बाप एक hi है, ये बात तो हम दोनों को भी नहीं पता थी, तो फिर ये कैसे मुकीम हो सकता hai?Swarna और शिव? क्या ऐसा हो सकता है? नहीं ये मुमकिन नहीं है, पर वैस्वी और शिव आपसमे दोस्त है, हो सकता है वो यहाँ आता भी हो, पर स्वर्ण की लव मैरिज है, वो अपने पति से दूर भी नहीं है, तो फिर ये मुमकिन नहीं हो शक्ति. पर अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर वो प्रेग्नेंट कैसे है, तो बाबाजी गलत है.
चंद्रभान : आप सही है, मुझे बाबाजी से बात करनी होगी, पर वो जो कुछ भी हो, उसी बहाने से सही, पर हमें अपनी बेटी से मिलने का मौका मिला, और एक बार फिर से हमारा रिस्ता फिर मजबूत हुआ.
प्रकाशराओ : ये बात तो सही है.
बिना : (उस से रहा न गया) पापा, आपलोग बाटे कीजिये, हम अंदर चलते है, में तो अपनी नानन्द से पहली बार मिली हु, कुछ आपस में बात hi करलु. (प्रकाशराओ की और देख kar)Agar आपकी इज्जाजत हो तो.
प्रकाशराओ : इसमें इजाजत की क्या बात है, (स्वर्ण se)jao बेटी इनको अपने कमरे में ले जाओ.
स्वर्ण : आइये भाभी.
पद्मा : में भी चलती हु (बिना को पद्मा का आना अच्छा नहीं लगा, वो स्वर्ण से अकेले में बात करना चाहती थी, पर वो उसे मन भी नहीं कर शक्ति थी, वैस्वी भी उनके साथ कड़ी हुई, वो लोग सब स्वर्ण के कमरे में गए, और वैस्वी अपने कमरे में चली गयी)
बिना : (कमरे को देख kar)Bahot अच्छे से सजाया है ये रूम.
स्वर्ण : थैंक यू भाभी.
बिना : में तो भूल hi गयी (ये कह कर वो उसके गले lagi)Bahot बहोत बधाई हो.
स्वर्ण : थैंक यू भाभी, (पद्मा ने भी बधाई di)Thank यू भाभी. पर भाभी एक बात समाजमे नहीं आयी, ये अनुष्ठान का क्या चक्कर है. (वो तीनो बीएड पर बेथ गयी)
बिना : वो जो भी हो, आपको तो खुस होना चाहिए, इस बहाने से hi सही, पर जो रिस्ता टूट चूका था वो फिर से जुड़ गया.
स्वर्ण : पर जैसा पापा ने कहा, अब तो इस अनुष्ठान का कोई मतलब नहीं रह गया, क्यों की अगर ऐसा होता तो में माँ न बन ने वाली होती.
बिना : आप ठीक कह रही है, पर कुछ और भी बाटे है, इस अनुष्ठान के पीछे.
स्वर्ण : वो क्या है भाभी?
बिना : अभी फ़िलहाल तो में तुम्हे नहीं बता शक्ति (अचानक hi उसकी नजर पद्मा की और चली गयी. (पद्मा झेप गयी, वो इसका मतलब साफ़ समाज सकती थी)
पद्मा : मेरे सामने बात नहीं करनी तो में बहार चली जाती हु (उसका चेहरा उदास हो गया था)
बिना : (उसका हाथ पकड़ kar)Aisi बात नहीं है, तू बेथ.
पद्मा : आपको क्या लगता है, में कोई बच्ची हु, में समाज सकती हु की कोई तो बात है, वो बाबाजी ने भी मुझे छोड़ कर आप दोनों को hi बुलाया था, यहाँ भी मेरी उपस्थिति आपको खाल रही है, अगर मेरी उपस्थितिमे आपको बात करने में दिक्कत हो रही है तो में बहार चली जाती हु. (वो फिर उठने लगी, बिना ने फिर उसका हाथ पकड़ कर बीएड पर बिठा दिया)
बिना : जैसा तू समाज रही है, वैसा नहीं है, पर कुछ बाटे होती है, जो समय पर पता चले तो hi अच्छा होता है, वर्ण उसका मतलब और मायने बदल जाते है. ऐसा नहीं है की में तुजसे कुछ छुपा रही हु, पर अभी फ़िलहाल वो जान न तेरे लिए जरुरी नहीं है, पर जितना में समाज प् रही हु, अगर वैसा hi है तो फिर तुजे भी वो बात जान नई hi पड़ेगी, में खुद तुजे बताउंगी, तो मुँह मात लटका, सामजी.
पद्मा : (उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े) आप जानती hi हो, घर का माहौल कैसा है, में अकेली हो गयी हु वह, और आप सब भी मुझसे ऐसे पर्दा करोगी तो बुरा तो लगता है न.
बिना : (पद्मा को गले लगा kar)Pagala (प्यार से कहा) ऐसा वैसा कुछ नहीं है, तू दिल पर मात ले, मेने कहा न समय आने पर में खुद बात करुँगी, पर अभी मेरी तो समाज में आने दे, कई सवाल है मेरे मान में, मुझे hi उसके जवाब नहीं मिल रहे तो तुजे क्या बताउंगी.
स्वर्ण : ऐसी क्या बात है भाभी? (बिना को)
बिना : कुछ नहीं है, सब के घरो में एक hi टेंशन है, बच्चा.
स्वर्ण : हो जायेगा भाभी, अभी उम्र hi क्या है आपकी.
बिना : (अपने मान में, अब क्या बताऊ आपको, वो तो आलरेडी मेरे गर्भ में है, पर भी में वो नहीं बता शक्ति, मुझे ये जान न है की ये अनुष्ठान शिव के लिए क्यों जरुरी है, और आपका और शिव का कोई रिस्ता है की नहीं, क्यों की अगर नहीं है तो फिर ये साडी बाटे बेमानी हो जाएगी)
स्वर्ण : (बिना को सोच में डूबा dekh)Sach में भाभी, कोई तो बात है, बताओ न.
बिना : (उसके पास वैसे भी कोई चारा नहीं बचा था, तो हिम्मत कर के उसने अच्छे तरीके से पूछा) आप शिव को जानती है? (उसने बहोत शांत लहजे में पूछा था, पर अचानक शिव के नाम से स्वर्ण चौंक गयी, ऐसे अचानक भाभी शिव का क्यों पूछ रही है ये उसकी समाज में नै आया)
स्वर्ण : क क कोण शिव? (उसकी जबान तक ladkhadayi)(Uski लड़खड़ाहट बहोत कुछ बयां कर रही थी, बिना को पूरा शक हो गया)
पद्मा : (उसे भी कुछ समाज नहीं aaya)Kon शिव?
बिना : (बात को सँभालते hue)Mene तो बस ऐसे hi पूछा था, मेने सोचा की बात का टॉपिक बदला जाये, वैस्वी और शिव दोनों दोस्त है तो मेने सोचा की आप जानती हो.
स्वर्ण : (अपने आपको सँभालते hue)Wo शिव, है वो वैस्वी का दोस्त है और पापा की कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ भी जुड़ा हुआ है तो आता है कभी कभी. पर आपने अचानक उसका क्यों पूछा?
बिना : मेने कहा न, की बहोत सीरियस बात चल रही थी तो मेने सोचा की टॉपिक चेंज करते है, मुझे भी लगा था की शायद आप जानती होंगी, बहोत अच्छा लड़का है, मेरे क्लास का होशियार बच्चा.
स्वर्ण : है, वैस्वी भी उसकी बाते करती है, उसने वैस्वी की बहोत मदद भी की थी, आपको तो पता hi होगा, उस हादसे के बारे में. (पद्मा को कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो बस सुन रही थी, तभी एक नौकर ने आके कहा की आप को निचे बुला रहे है, सब निचे आ गए, सबने विदा mangi)Bhabhi, आप तो यही हो, तो अब आपसे मिलना होता रहेगा. आप मेरा नंबर ले लो, और मुझे आपका भी दे दो. (उन्होंने आपसे में नंबर दे दिए, फिर वो सब वह से निकल गए, बिना ने बहोत रोका पर वो सब वापस चले गए, बिना फिर से स्वर्ण और शिव के बारे में सोचने लगी)
बिना : जिस तरह से स्वर्ण हीचिकिचाई थी जरूर कुछ न कुछ तो है, और अगर मेरा शक सही है तो वो शिव का hi बच्चा हो शक्ति है, क्यों की परिस्थितिया हो उसी और इस्सर कर रही है. पर फिर भी ध्यान से जान न होगा, अगर मेरा अनुमान गलत हुआ तो बात बिगड़ भी सकती है. ऐसा करती हु पहले शिव से hi बात करती हु, वैसे भी मिलना है उस से, कहा कहा गुल खिला रहे है जनाब, में उसे कितना भोला समझती थी, और यहाँ देखो, जहा देखो वह उनके बच्चे मिल रहे है. (उसने शिव के मोबाइल पर मश्ग किआ) में सहर में आ गयी हु, टाइम हो तो मिलने आना.
शिव उस वक़्त स्टेडियम में था तो उसने मश्ग नहीं पढ़ा, आज भी वो साइट पर नहीं गया था, आज वो घर hi रहा, क्यों की घर में भी टेंशन का माहौल था.






















