- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
अपडेट 95
ट्रैन अपनी रफ़्तार से चल रही थी, हमारे कम्पार्टमेंट में दो उम्रदराज कपल थे जो कही शादी में जा रहे थे. वैसे तो हमारी बिरथ निचे की थी पर उन्होंने हमें कहा की हम ऊपर नहीं चढ़ सकते तो क्या आप ऊपर सो जायेंगे, तो हमने मान लिया, वैसे भी हमे सोना तो था नहीं क्यों की देर रात तक हमारा स्टेशन आ जानेवाला था. में और जूही साथ साथ में बैठे हुए थे. जूही मुझे आगे का प्लान बता रही थी, उसने कहा की अगले महीने स्टेट लेवल एंट्री कॉम्पिटिओं होनेवाले है तो हम दोनों को उसमे हिस्सा लेना है. वैसे भी वो अनुभवी थी तो मुझे तो वो जो कहे वही करना था. उसकी बाते सुनते सुनते में कभी कभी सोचने लगता था की वो कितना महत्व रखती है मेरी जिंदगी में, वो खूबसूरत तो थी hi और वो मुझसे प्यार भी करती थी, जहा तक मुझे लगता था, पर फिर मुझे लतादिदी का ख्याल आ जाता था, वो भी मेरे जीवन में उतनी hi महत्व रखती थी, पता नहीं पर में कोई फैसला नहीं कर प् रहा था, और अभी से ये फैसला करना भी शायद जल्दबाजी होगा, ऊपर से रंजन भी मुझसे उम्मीदे लगाए बैठी थी. ये सब मेरी जिंदिगी का बहोत एहम हिस्सा है और में किसी को भी दुःख नहीं पंहुचा सकता था, पर क्या सबको खुस रख पाउँगा, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. एक डेढ़ घंटे तक बाते करने के बाद अब वो शांत बैठी थी, हम दोनों निचे हो रही बाते सुन रहे थे, वो लोग भी अपने घर और बच्चो की बाटे कर रहे थे, वो बैठे बैठे थक गयी थी जो उसका चेहरा बता रहा था और वो थोड़ी लेटने की कोशिस कर रही थी उस से भी मुझे पता चल रहा था.
शिव : तुम लेट जाओ, में सामनेवाली बिरथ पर चला जाता हु.
जूही : मुझे तुम्हारे साथ hi रहना है शिव. (उसने जिस प्यार से कहा था में कैसे मन करता, में पालथी मरकर बेथ गया और उसको मेरी गॉड में शिर रखने का इस्सर किआ तो उसका चेहरा खुसी से चालक उठा, वो मेरी गॉड में अपना शिर रख कर लेट गयी और मुझे देखने लगी)
शिव : क्या हुआ? (उसने ना में शिर हिलाया, में बस मुस्कुरा दिया, थोड़ी देर वो लेती रही, मेरा हाथ जो साइड में था उसे उसने पकड़ लिया और अपने पेट पर रख दिया, मेरे हाथ पर उसने अपना हाथ रख दिया, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, उसने अपनी आंखे बंद कर दी, में उसे देख रहा था, प्यारा सा चेहरा और पतले होठ उसको बहोत आकर्षक बना रहे थे, मेरे हाथ से थोड़ी hi दुरी पर उसके स्तन थे जो ऊपर की और उठे हुए थे, एक खूबसूरत लड़की अगर ऐसे किसी की गॉड में लेती हुई हो तो शरीर में हलचल होना स्वाभाविक था, मेरे लुंड में तनाव आने लगा, में घबराने लगा, मेने अपनी निगाहे दूसरी और घुमा ली ताकि मेरा ध्यान दूसरी और हो जाये, पर ये काम नहीं कर रहा tha)(Juhi शांति से लेती हुई थी, उसे ऐसे लेटना बहोत अच्छा लग रहा था, वैसे भी ट्रैन में कोण उनको जनता था जो वो डरे, इस लिए वो शिव की गॉड में लेटने का मज़ा ले रही थी, उसे अपने गाल पर शिव के उभर का एहसास हुआ, उसे पता चला की क्या हो रहा है, उसने आंखे खोली और शिव को देखा, जो इधर उधर देख रहा था, उसके चेहरे पर दर साफ़ नजर आ रहा था, वो शिव को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इस लिए उसने फिर से आंखे बंद कर ली, वैसे भी वो अंग उसके अंदर भी हलचल मचा रहा था, उसे भी वो अच्छा hi लग रहा था तो वो वैसे hi लेती रही. उसका मान कर रहा था की वो उस अंग से और सात जाये पर उसे शर्म आ रही थी. थोड़ी देर बाद फिर से वो अंग नार्मल होने लगा, उसने फिर से शिव को देखा जो आंखे बंद किये बैठा था, अब वो शांत था, उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी. आस पास लोग थे तो वो दोनों ऐसे hi लेते रहे, तक़रीबन 8 खानेवाला आर्डर लेने आया तो उन्होंने खाने का आर्डर दे दिया, जब खाना आया तो दोनों ने आमने सामने बेथ कर खाना खाया.
खाना खाने के बाद वो फिर से बाथ गए, आहिस्ता आहिस्ता सब लाइट बंद होने लगी, अभी तक़रीबन तीन घंटे का सफर बाकि था. निचे वालो को सोना था तो उन्होंने लीगत बंद कर दी, पुरे डिब्बे में अब एक दो लाइट hi जल रही थी. हल्का सा उजाला था, जूही ने मेरी और देखा, मेने भी उसकी आँखों में देखा. में मुस्कुराया तो उसने अपनी निगाहे जुका ली और मेरे कंधे पर शिर रख दिया, और उसने मेरा हाथ थम लिया. वो मुझसे इतना सात कर बैठी थी की उसके स्तन का हिस्सा मेरी बाह में डाब रहा था, उसे भी ये पता था फिर भी वो वैसे hi बैठी रही. तक़रीबन पंद्रह मिनट बाद वो सीधी हुई, फिर वो मेरी और देखने लगी, में उसकी आँखों को पढ़ने की कोशिस कर रहा था, वो बिना कुछ बोले मेरी गॉड में लेटने लगी तो में भी थोड़ा साइड में खिसक लिया और उसे लेटने के लिए जगह बना दी. मेने एक पेअर को घुटने से मोड़ कर निचे रक्खा और दूसरे को घुटने से मोड़ कर ऊपर रक्खा. वो मेरी एक झंघ को तकिया बना कर लेट गयी, मेने अपना एक हाथ निचे बिरथ पर टिकाया हुआ था और दूसरे को अपने खड़े पेअर के घुटने पे रक्खा हुआ था. थोड़ी देर बाद उसने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया. मेरी धड़कने तेज हो गयी थी और मेरे लुंड ने फिर से खड़ा होना सुरु कर दिया. उसने अपना शिर थोड़ा मेरे लुंड की और खिसका दिया, मुझे पता चल रहा था की उसे पता है फिर भी वो मेरे उभर के और करीब हो गयी थी, उसने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और उसे ऊपर की और खिसकने लगी, उसके इरादे जान कर मेरी धड़कन बढ़ने लगी. में उसके चेहरे को hi देख रहा था, उसने आंखे तो बंद की हुई थी पर उसके चेहरे पर उत्तेजना की लाली साफ़ देखि जा शक्ति थी. मेरा हाथ उसके दिल के ऊपर था तो उसकी बढ़ हुई धड़कने भी मुझे महसूस हो रही थी. ट्रैन में होने की वजह से मेने अपना हाथ ऊपर जाने से रोकने के लिए उस पर जोर लगाया तो वो और जोर से मेरे हाथ को ऊपर खींचने लगी, मेने भी अपना हाथ ढीला छोड़ दिया, में आस पास भी देख रहा था, पर सब सोये हुए थे. उसने मेरा हाथ अपने बाये उभर पर रख दिया, मेरे हाथ के निचे वो सख्त उभर अपनी गोलाई का एहसास करवा रहा था. उसकी ब्रा भी मुझे महसूस हो रही थी. हम दोनों ऐसे hi थोड़ी देर बैठे रहे, में कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था, तो में ऐसे hi बैठा रहा पर जूही को जैसे रुकना नहीं था, उसने मेरे हाथ पर दबाव बनाना सुरु किआ, वो अपने हाथ के दबाव से मुझे स्तन दबाने का इस्सर कर रही थी, मेने थोड़ी देर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं की पर फिर मेने हलके हलके उसे दबाना सुरु कर दिया, उसने अपना हाथ हटा लिया. में उसकी भावनाओ को समाज रहा था तो में हलके हलके उसे सहलाते हुए उसके एक स्तन को दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उसने मेरे हाथ को अपने दूसरे स्तन पर रख दिया. हमारा ये खेल काफी देर तक चलता रहा. उसने अपना t-shirt उठाने की कोशिस की तो मेने उसे रोक दिया. उसने आंखे खोली और मुझे देखने लगीं हलके अँधेरे में चमकती उसकी आंखे मुझे आगे बढ़ने की बिनती कर रही थी. मेने ना में शिर हिलके उसे रोका, उसके चेहरे पर नाराजगी दिख रही थी तो में मुस्कुराया और उसके माथे पर किश किआ, तो वो भी मुस्कुरा दी. में उसका शिर सहलाने लगा तो उसने फिर से आंखे बंद कर दी. तक़रीबन डेढ़ बजे हमारी ट्रैन, हमारे सहर पहुंच गयी. पार्किंग में hi उसने अपना स्कूटर रक्खा था तो ुमने पैसे चुकाए और स्कूटर ले कर निकल गए. एक हाथ से अपना सामना पकड़ कर वो बैठी थी और दूसरे हाथ से मेरी कमर थामे मुज से चिपक गयी थी, मेरा सामान मेने आगे रक्खा हुआ था.
जूही
मेरे पेट को सहलाते hue)Aaj मेरे घर hi रुक जाओ न.
शिव : मुझे सुबह स्कूल भी जाना है.
जूही : में जल्दी उठा दूंगी, मुझे भी गयम जाना है.
शिव : (मुस्कुराते hue)Agar में तुम्हारे घर आया तो न तुम सो ो गई न मुझे सोने डौगी.
जूही : (शर्मगाई, और मुस्कुराने lagi)Me ऐसा वैसा कुछ नहीं करुँगी, सच्ची, चलो न सिर्फ साथ में सो जायेंगे.
शिव : (मुस्कुराते hue)Ye मुमकिन नहीं, और अगर तुमने अपने आप को संभल भी लिया पर में अपने आप को संभल न पाया तो.
जूही : (मुझे कास के पकड़ते hue)To मात संभल न.
शिव : (उसकी बात का में मतलब समाज रहा था, और ये सही भी था, हम दोनों के बिच जो कुछ भी हो चूका था तो उसके मान में ऐसी बात आना स्वाभाविक था, पर में अभी भी उसे बचाना चाहता tha)Dekha, तुम तो अभी से फिसल रही हो.
जूही : में कहा फिसल रही हु, मेने तो बस ये कहा की अगर तुम आगे बढ़ोगे तो में तुम्हे नहीं रोकूंगी. (हम दोनों उसके घर पहुंच गयेथे, वो खुस हो गयी, वो जल्दी से उतर गयी और खुस हो कर मेरे सामने देखने लगी)
शिव : में बस तुम्हे छोड़ने आया हु, में यहाँ से खुद चला जाऊंगा. (उसने रूठने वाला चेहरा बना लिया, में मुस्कुराया) वैसा भी वक़्त आएगा, तुम्हे क्या जल्दी पड़ी hai.(Wo मुस्कुराने लगी, मेने स्कूटर स्टैंड किआ और उसे चाबी दी)
जूही : मुझे क्यों दे रहे हो, तुम ले जाओ इससे, सुबह ले आना.
शिव : मचला जाऊंगा.
जूही : अब इतनी तो बात मान hi शक्ति हो न.
शिव : (मुस्कुराते हुए) ठीक है. (में स्कूटर में चाबी डालने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसकी और देखा)
जूही : थोड़ी देर तो अंदर चलो (में उसकी और सवालिए नजरो से देखने लगा, उसने फिर अपना चेहरा रुठनेवाले बना liya)Yaha लड़की में हु, तुम लड़के हो, पर मुझे ऐसा लग रहा है की में लड़का हु और लड़की पर मौके का फायदा उठाने के लिए मन रहा हु.
शिव : अच्छा ऐसी बात है, चलो में तुम्हे दिखता हु (मेने उसका हाथ पकड़ा और उसे दरवाजे की और ले गया, उसने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला, जैसे hi हम अंदर गए मेने उसे दीवाल से चिपका दिया और उसके होठो की करीब अपने होठ ले gaya)Tumhe देखना है, की लड़का कोण है? (वो मुस्कुरायी और हां में इस्सर किआ, उसके चेहरे की ख़ुशी देखने लायक थी, मेने उसके चेहरे पर आये बालो की लत साइड में की और उसके होठो को जोर से चूसने लगा,

वो भी कहा पीछे रहनेवाली थी, उसने मेरे शिर को दोनों हाथो से पकड़ लिया और मेरे होठो को जोरो से चूसने लगी, हम दोनों जैसे जोर आजमाईस कर रहे थे, जल्दी hi दोनों की सांसे फूल गयी और हम अलग हुआ, मेने उसे देखा, उसने मुझे फिर दोनों हसने lage.)Ab पता चला, कोण लड़का है.
जूही : (मेरी छाती पर हाथ फिरते hue)Ruk जाओ न. (उसके बोलने का अंदाज ऐसा था की एक बार तो दिल में आया की रुक hi जाऊ. मेने हलके से उसके होठो को चूमा)
शिव : अभी नहीं, पर जल्द hi रुकूंगा.
जूही : Sach(Mene है में गर्दन हिलायी तो वो मेरे गले लग gayi)I लव यू शिव.
शिव : लव यू तू. (वो मुझसे कास के लिपट गयी, में थोड़ी देर वह रहा फिर घर लौट गया, मेने दरवाजा खत खतया तो सरितादिदी गेट पर आयी, मुझे देख कर वो खुस हो गयी और टाला खोल कर मुझसे लिपट गयी)
सरितादिदी : आ गया तू, कितने दिन लगा दिए (थोड़ी देर वो मेरे गले लगी रही, फिर दूर हो kar)Khana खाया?
शिव : है, दीदी. (आवाज सुन कर लतादिदी भी रूम से बहार आयी) दीदी (कहते हुए में उनकी और बढ़ा तो वो भी मेरी और बढ़ी, मेने उन्हें गले लगा liya)Kaisi हो दीदी.
लतादिदी : में ठीक हु, तू कैसा है?
शिव : में भी ठीक हु दीदी.
लतादिदी : खाना खायेगा?
सरितादिदी : मेने पूछ लिया है, वो खाना खा कर आया है. अब सो जाओ, सुबह बात करेंगे. (लतादिदी की और देख kar)Hamare साथ सोयेगी की इसके साथ? (लतादिदी शर्मा गयी) ठीक है, जा सो जा. (वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने दीदी को देखा तो वो शर्मा गयी. (पता नहीं दीदी का रूप पल में hi बदल जाता था, अभी जब वो मुझे खाने का पूछ रही थी तो लगता था की वो मेरी माँ, मेरी बड़ी बहन है, और अब लग रहा था जैसे वो मेरी प्रेमिका है, मेने उनका हाथ पकड़ा और हम दोनों अंदर रूम में आ गए, जैसे hi मेने दरवाजा बंद किआ वो फिर से मेरे गले लग गयी, में उनकी भावनाओ को समाज रहा था, इतनेदिन बाद जो मिला था. हम दोनों ऐसे गले लगे थे जैसे बरसो बाद मिल रहे हो, जब हम दोनों को सुकून हो गया तो वो बोली)
लतादिदी : कपडे बदल ले, बहोत रात हो गयी है, कल स्कूल जायेगा?
शिव : है दीदी जाना पड़ेगा, एग्जाम आनेवाली है.
लतादिदी : ठीक है फिर, जल्दी से कपडे बदल ले और सो जा, टाइम hi कितना बचा है. (मुझे कपडे बदलने तो थे नहीं, मेने कपडे निकल दिए और पूरा नंगा हो गया, और दीदी के पास चला गया, वो बिस्तर को सही कर रही थी, जब उन्होंने मुझे देखा तो उनकी आंखे चौड़ी हो गयी, पर जैसे hi उनकी नजर मेरी नजरो से मिली, वो शर्मा गयी, और नज़ारे चुरा कर boli)Mene कपडे बदलने को कहा था, तूने तो सरे निकल दिए.
शिव : हम ऐसे hi तो सोते है न दीदी, आप भी निकल दो.
लतादिदी : (उनकी सांसे तेज चल रही thi)Ha सोते है पर आज नहीं, तुजे सुबह जल्दी जाना है और तीन चार घंटे hi बचे है सुबह होने में. में नहीं चाहती की तेरी नींद पूरी न हो, आ चल सो जा.
शिव : (मुझे शर्म आने लगी की में बिना सोचे नंगा हो gaya)Thik है में अंडरवियर पहन लेता हु.
लतादिदी : कोई बात नहीं, रहने दे, चल aaja(Unhone लेट ते हुए मुझे कहा, में उनकी बगल में लेता तो उन्होंने मेरे शिर को अपनी छाती से लगा लिया, मेरे शिर पर हाथ फिरते hue)chal सो जा अब. (में उनके शाइन से लगा हुआ था, और उनके स्तन का एहसास मुझे अपने चेहरे पर हो रहा था, उनकी तेज धड़कने भी में महसूस कर रहा था, पर वो मेरे शिर को सेहला रही थी, मेने भी उनके ऊपर हाथ रखते हुए उन्हें अपनी और खिंचा और अपनी आंखे बंद कर दी, वैसे भी रात बहोत हो गई थी तो मुझे नींद आने lagi)(Lata थोड़ी देर तक शिव को सहलाती रही, जब उसे महसूस हुआ की वो सो गया है तो उसने भी सहलाना छोड़ अपनी आंखे बंद कर दी, शिव के नंगे बदन का एहसास उसकी नींद उदा रहा था, कितने दिनों बाद वो शिव के साथ इस अवस्था में थी, उसका दिल कर रहा था की वो उसके साथ वही प्यार करे पर वो शिव को खलेल नहीं पहुंचना चाहती थी पर उसका दिल भी उसे सोने नहीं दे रहा था, उसने अपना पेटीकोट थोड़ा ऊपर किआ जिस से उसके पेअर झांघो तक नंगे हो गए, अपने नंगे पेअर से उसने शिव के लुंड को छुआ, शिव सो चूका था, तो उसका लुंड भी सोया हुआ था, उस नरम लुंड से एहसास से hi उसका दिल मचलने लगा, उसका दिल कर रहा था की वो उसे पकड़े और सहलाये, पर ऐसा करने से शिव डिस्टर्ब हो शक्ति था, उसने जैसे तैसे अपने आप को शांत किआ और सोने की कोश्शि करने लगी, आखिर कर वो भी सो गयी.)
सुबह जब में उठा तो दीदी पूरी तरह से मुज से लिपटी हुई थी, और एक तंग मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, मेने उनके पेअर को छुआ तो वो नंगा था, मेरा भी दिल किआ उन्हें और छूने का तो में अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा, शुरुआत में उनके हलके बालो वाले पेअर का एहसास हुआ फिर मेरा हाथ उनकी झांघो पर पंहुचा तो बिनबालोवाले मखमली झांघो का एहसास होने लगा, मेने उन्हें दबाते हुए सहलाया, मेरे अंदर उत्तेजना का संचार हो रहा था. फिर हाथ को ऊपर ले गया तो मेरा हाथ उनके गोल कूल्हों को छूने लगा, में उन्हें सहलाते हुए हलके हलके दबाने लगा, मेरी उंगलिअ उनकी छूट के होठो को छूने लगी, उन्होंने पंतय नहीं पहनी थी, छूट के आसपास के बालो का एहसास पते hi मेरा लुंड अकड़ने लगा, दीदी के साथ बहोत दिन हो गए थे, तो मेने हलके से छूट के होठो को सहलाया, मेरी ऊँगली छूट की दरार को फैला कर छूट के छेड़ तक पहुंच गयी, थोड़ा सा सहलाने पर hi वह चिकनाहट महसूस होने लगी. उस मखमली छूट के एहसास को महसूस कर ते हुए, में आंखे बंद किये हुए उसे महसूस करने लगा. मेने ऊँगली थोड़ी अंदर डाली तो छेड़ की गर्माहट मुझे महसूस होने लगी, में हलके हलके छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा, मुझे दीदी के मुँह से सिसकी सुनाई दी तो मेने आंखे खोली, मेने देखा तो दीदी मुझे देख रही थी, उन्हें देख कर में थोड़ा चौक गया पर फिर संभल कर मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरायी.
शिव : सॉरी दीदी, मेने आपको जगा दिया.
लतादिदी : में तो कब से जाग गयी थी, पर तुज से दूर जाने का मान नहीं कर रहा था इस लिए लिटी हुई थी. (मेने उनकी आँखों में देखा तो उनकी आँखों में भी मुझे आगे बढ़ने की सहमति दिखाई दी, मेने छूट के होठो को सहलाया तो उनकी आंखे बंद हो gayi)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv.(Unke होठो पर वो कशिश देख कर में आगे खिसका और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी चूसने लगी, मेने ऊँगली को छूट के छेड़ में फिर से उतरा तो वो मुझसे लिपटने लगी, टाइम था नहीं, पर मेरा लुंड भी कड़क हो चूका था, में दुविधा में था की क्या करू, तभी दीदी ने अपने हाथ को निचे किआ और मेरे लुंड को सेहला ने लगी)
शिव : (उनके छोटे हाथ ने मेरे बड़े लुंड को पकड़ लिए था, उनके होठो को छोड़ उनकी नाक से नाक रगड़ते hue)Didi टाइम नहीं है.
लतादिदी : (बिना मेरी और देखे, वो लुंड को सेहला रही थी, उनका चेहरा उत्तेजना में लाल हो रहा था, मेरी ऊँगली अभी भी छूट में अंदर बहार हो रही thi)shhhhhhhh, जल्दी जल्दी कर ले न.
शिव : फिर भी टाइम लगेगा दीदी.
लतादिदी : (लता बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी, वो कैसे भी छोड़ना चाहती थी, उसने शिव को अपने ऊपर खींचते hue)Nahi लगेगा, शहहह जल्दी जल्दी कर ले, शहहह दाल दे अंदर. (मेरा भी बहोत मान कर रहा था तो मेने दीदी को सीधा लेटाया और उनके पैरो को फैला कर छूट को देखा, छूट पूरी तरह से चिकनी हो चुकी थी, मेने लुंड को छूट पर लगाया और उस पर घिसने लगा, साथ में एक हाथ से मेने दीदी के स्तन को पकड़ा जो अभी ब्लॉउज में कैद था, दीदी ने ब्लॉउज के हुक खोल दिए, में झुका और उनके सुडौल स्तन के कड़क हो चुके निप्पल को अपने मुँह में भर liya)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह अंदर दाल de(Mene उन्हें देखा तो वो उत्तेजना में लाल हो रही थी, उनके गल्ल और कान लाल हो चुके थे, मेने भी लुंड को छेड़ पर लगाया तो दीदी मुझे अपनी बहो में भर के खींचने लगी, वो बहोत उतावली हो रही थी, मेने लुंड पर दबाव डाला तो लुंड छूट के छेड़ को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, वो मेरे कंधे को छत रही थी, जैसे hi लुंड अंदर उतरा उन्होंने मेरे कंधे पर अपने दन्त गदा diye)Ummmmmmmm. (मुझे कंडे पर दर्द हुआ)
शिव : दीदी...
लतादिदी : (लता को अपनी छूट में दर्द हुआ पर उसने शिव से kaha)Jyada सोच मात, दाल de,(Jaise लुंड और अंदर उतरा) आईईईई शीइइइइव uffffffffff. (मेने आधे से ज्यादा लुंड दाल दिया था, कुछ देर में रुक गया, थोड़ी ही देर में दीदी अपनी कमर हिला कर धक्के लगाने लगी, लुंड को अपनी छूट में महसूस कर के लगा बावली हो रही thi)Jaldi सीईव शह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी कर ले

(वो भी बहोत गर्म हो चुकी थी और में भी, उनकी छूट मेरे लुंड को निचोड़ रही thi)(Lata को दर्द तो हो रहा था पर इतने दिनों की तड़प वो मिटा देना चाहती थी, तो वो खुद सामने से कमर उचक कर धक्के लगा रही थी, शिव ने भी उसे दबोचते हुए लुंड को अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो तेजी से धक्के लगा रहा था, उसकी छूट पानी की नदिया बहाने लगी, वो अपनी टंगे फैला कर शिव की कमर पर लपेटे हुए उसे खिंच रही थी, कमरा सिसकीओ से गूंजने laga,)(Mene दीदी के होठो को चूसते हुए धक्को की रफ़्तार तेज कर दी, दीदी के मुँह से

monolith 12
उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म निकल रहा था, छूट की कसावट मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, आइए भी दीदी को छोड़ने का एहसास खास hi था)( 10 मिनट तक में उन्हें लगातार छोड़ता रहा, सुबह की ठंडक के बावजूद हम दोनों पशीने से भीग गए थे, दोनों के आमने सामने धक्के से ढको की रफ़्तार बहोत ज्यादा हो गयी थी,

a1 make it good album download
उनका शरीर अकड़ने लगा, छूट भी अंदर से ज्यादा संकरी होने लगी, वो झड़ने लगी, उनकी छूट ने मेरे लुंड को जोरो से झकड़ लिया, पर में नहीं रुका और धक्के लगता रहा, मेरा भी निकलनेवाला था, आखरी समय पर मेने लुंड बहार निकल दिया और वीर्य की बरसात कर दी, एक पिचकारी सीधे उनके चेहरे तक भी चली गयी थी, और कुछ उनके पेट और बूब्स पर, बाकि उनके झांटो के बाल पर जमा हो गयी, हम दोनों हांफ रहे थे, ये एक अजीब तरह का अनुभव था, दीदी आंखे बंद किये हुए हांफ रही थी, में भी बैठे बहते हांफ रहा था, दीदी टंगे फैलाये लेती हुई थी और उनके शरीर पर वीर्य की बरसात के निशान थे, थोड़ी देर बाद उन्होंने आंखे खोली, जैसे hi उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी वो शर्मा गयी, वो थोड़ी ऊपर खिसकी और उन्होंने अपनी छूट को अपने पेटीकोट से धक् दिया, में मुस्कुराया तो वो शरमाते हुए अपने स्तन को ब्लॉउज से ढकने का प्रयास करते हुए कड़ी होने लगी, उनको शर्माता देख, में मुस्कुराया तो वो भी नज़ारे चुराते हुए muskurayi.)Tu जा, तुजे देर हो रही है. (में उनके पास गया और उनके माथे को चूमा)
शिव : इतना क्यों शर्मा रही है आप?
लतादिदी : (मेरे शाइन पर अपना शिर टिका कर) शर्म तो आती है न.
शिव : वैसे आप शरमाते हुए बहोत hi ज्यादा खूबसूरत लगती हो दीदी, आप खुस हो न?
लतादिदी : है शिव, बहोत ज्यादा, जा तुजे देर हो रही है.
में खड़ा हुआ और टॉवल लपेट कर वह से निकल गया. जब में बाथरूम से निकला तो रंजन मिल गयी, मुझे देख ते hi वो दौड़ कर मुज से लिपट गयी.
रंजन : (चहकते hue)Kab आया तू?
शिव : रात को.
रंजन : मुझे जगा देता.
शिव : बहोत देर से आया था तो नहीं जगाया. कैसी है तू, और एग्जाम कब है?
रंजन : में अच्छी हु और एग्जाम तुम्हारे साथ में hi है (गायत्रीदिदी भी उसी और आती दिखाई di)Thik है स्कूल के बाद मिलते hai.(Wo चली गयी)
शिव : कैसी हो दीदी?
गायत्री : (गायत्री ने देखा था की कैसे रंजन, शिव से चिपक कर कड़ी थी, और वो भी तब जब शिव सिर्फ तौलिये में tha)Achchhi हु, तुम?
शिव : में भी, आप तैयार हो जाओ, आप को मेरे साथ hi चलना है, जूही का स्कूटर मेरे पास hi है.
गायत्री : ठीक है.
में तैयार हुआ, तब तक गायत्रीदिदी भी तैयार हो गयी थी, मेने उन्हें और स्कूटर को जूही के घर छोड़ा और स्कूल की और निकल गया. जब में संयम के घर के नाके पर पंहुचा तो मेने देखा की संयम और वैस्वी निकल रही थी, नाज़िआ दीदी उन्हें bye कर रही थी, जैसे hi संयम की नजर मुँह पर पड़ी तो उसने वैस्वी को स्कूटर रोकने को बोलै, वैस्वी को कुछ समाज नहीं आया, उसने जैसे hi बराक लगाया वो कूद कर उतरी और मेरी और भागी, उसे ऐसे भागता देख नाज़िआदिदी की भी नज़र मुज पर गयी, मुझे देख कर उनके भी चेहरे पर मुस्कान आ गयी. वो संयम को ऐसे शिव से मिलते देख उसको जलन हुई क्यों की वो भी इसीतरह शव से मिलना चाहती थी पर ऐसा वो कर नहीं शक्ति थी. शिव के पास पहुंच कर
संयम : तुम आ गए (वो हांफ रही thi)Kitne दिन हो गए, कैसे हो? मेरे मश्ग तो मिलते थे न तुम्हे, तुमने तयारी तो की है न?
शिव : (मुस्कुराते hue)Are रुक, रुक, कितने सवाल पूछेगी? है में आगया, रात को आया, और तुम्हारे मश्ग मिले थे, जिसकी वजह से मुझे पढ़ाई में आसानी हो गयी थी, थैंक यू.
वैस्वी : संयम, देर हो रही है.
संयम : चल, स्कूल में मिलते है, bye.
शिव : Bye, (वो दौड़ कर फिर से स्कूटर पर बेथ गयी, वैस्वी ने स्कूटर बढ़ा दिया, पर संयम जाते जाते भी पीछे मुद कर मुझे हाथ हिला रही थी, मेने भी मुस्कुरा कर हाथ हिलाया, जब वो दूर निकल गयी तो में नाज़िआ दीदी के पास पंहुचा, उनके चेहरे की खुसी मनो समां नहीं रही thi)(Nazia ने आस पास देखा तो लोग थे, उसका दिल कर रहा था की वो शिव से लिपट जाये, पर वो ऐसा कर नहीं shaki)Kaisi हो दीदी?
नाज़िआदिदी : बहोत अच्छी, तुम कैसे हो, कितने दिन हो गए तुम्हे देखे, कहा चले गए थे, मेरा मान कर रहा था तुम्हे फ़ोन करने को पर फिर नहीं किआ.
शिव : क्यों नहीं किआ, कर लेती.
नाज़िआदिदी : में तुम्हे देखते हुए ये कहना चाहती थी शिव.
शिव : क्या दीदी?
नाज़िआदिदी : (वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, चेहरे की ख़ुशी तो जैसे छुपे नहीं छुप रही थी, आँखों में आंसू तक छलक आये थे) तुम... तुम ...(वो हांफ रही thi)Tum, बाप बन नेवले ho.(Wo इतना मुस्कुरा रही थी, की क्या कहु)
शिव : (मुझे भी ये सुन कर बहोत खुसी हुए, मेने उनकी दोनों और से बाह पकड़ li)Sach?
नाज़िआदिदी : (उन्होंने है में गर्दम हिलायी और मेरी और झुकी, वो मेरे गले लग्न चाहती थी, पर ऐसे बिच रस्ते वो कर न payi)Shiv में तुम्हारे गले लग्न चाहती हु, प्लीज आज स्कूल से घर आना, में इतनी खुस हु की में बता नहीं सकती, आओगे न.
शिव : ठीक है दीदी, में स्कूल से छूट कर आ जाऊंगा.
में उन्हें देखते हुए स्कूल की और बढ़ चला, उन्होंने हाथ हिला कर मुझे bye कहा, मेने भी bye कहते हुए, स्कूल की तरफ दौड़ लगा दी. (नाज़िआ शिव को जाते हुए देखती रही, उसने अपने पल्लू से अपने आंसू पोछे और हस्ती हुई अपने घर की और चल पड़ी) में भी खुस था, ये मेरा दूसरा बच्चा था, एक अजीब सा आनंद मुझे महसूस हो रहा था, में जब स्कूल पंहुचा तो क्लास सुरु हो चुकी थी. में दरवाजे पर खड़े रे कर बोलै
शिव : मई ी के इन मैडम?
बीनमदं : (जसी hi उसने दरवाजे की और देखा तो शिव खड़ा था, वो एकदम से खुस हो गयी, और शिव की और बढ़ने लगी, पर जैसे hi एक कदम बढ़ाया, उसे एहसास हुआ की वो क्लास में है, वो रुक गयी और अपने आप को सँभालते hue)H..ha, आ jao.(Me उनको देखते हुए अंदर आया, हमारी आँखों ने जैसे हज्जारो बाटे कर ली, मेने देखा की वो अपनी उंगलिया आपस में रगड़ रही थी, इतनेदिन बाद मिलने की उनकी बेचैनी मुझे साफ़ नज़र आ रही थी, में अपनी जगह की और बढ़ा, मेरे दोस्तों के चेहरे पर भी खुसी थी, पूरा क्लास मुझे देख रहा था, संयम, मुस्कुराते हुए और वैस्वी ऐसे hi.
में अपनी जगह बेथ गया और क्लास सुरु हो गयी. मैडम ने एग्जाम के बारे में बाते की और किस तरह के सवाल आ शक्ति है उसकी भी चर्चा की. सब ध्यान से सुन रहे थे.
नाज़िआ घर जा कर दोपहर की तैयारिओं में जुट गयी, वो शिव के लिए कुछ खास बनाना चाहती थी. उसने पहले नामकिनबनाया फिर मीठा बनाने लगी. जब उसकी अम्मी रसोई में आयी थो उसने भी देखा की उसकी बेटी खाने की तैयारियां कर रही है, उसकी कुछ समाज में नहीं आया क्यों की अभी खाना बनाने की देर थी और वो मिठाई बना रही थी.
अम्मी : क्या बात है बेटी मिठाई बना रही हो, दामादजी आनेवाले है क्या?
ट्रैन अपनी रफ़्तार से चल रही थी, हमारे कम्पार्टमेंट में दो उम्रदराज कपल थे जो कही शादी में जा रहे थे. वैसे तो हमारी बिरथ निचे की थी पर उन्होंने हमें कहा की हम ऊपर नहीं चढ़ सकते तो क्या आप ऊपर सो जायेंगे, तो हमने मान लिया, वैसे भी हमे सोना तो था नहीं क्यों की देर रात तक हमारा स्टेशन आ जानेवाला था. में और जूही साथ साथ में बैठे हुए थे. जूही मुझे आगे का प्लान बता रही थी, उसने कहा की अगले महीने स्टेट लेवल एंट्री कॉम्पिटिओं होनेवाले है तो हम दोनों को उसमे हिस्सा लेना है. वैसे भी वो अनुभवी थी तो मुझे तो वो जो कहे वही करना था. उसकी बाते सुनते सुनते में कभी कभी सोचने लगता था की वो कितना महत्व रखती है मेरी जिंदगी में, वो खूबसूरत तो थी hi और वो मुझसे प्यार भी करती थी, जहा तक मुझे लगता था, पर फिर मुझे लतादिदी का ख्याल आ जाता था, वो भी मेरे जीवन में उतनी hi महत्व रखती थी, पता नहीं पर में कोई फैसला नहीं कर प् रहा था, और अभी से ये फैसला करना भी शायद जल्दबाजी होगा, ऊपर से रंजन भी मुझसे उम्मीदे लगाए बैठी थी. ये सब मेरी जिंदिगी का बहोत एहम हिस्सा है और में किसी को भी दुःख नहीं पंहुचा सकता था, पर क्या सबको खुस रख पाउँगा, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. एक डेढ़ घंटे तक बाते करने के बाद अब वो शांत बैठी थी, हम दोनों निचे हो रही बाते सुन रहे थे, वो लोग भी अपने घर और बच्चो की बाटे कर रहे थे, वो बैठे बैठे थक गयी थी जो उसका चेहरा बता रहा था और वो थोड़ी लेटने की कोशिस कर रही थी उस से भी मुझे पता चल रहा था.
शिव : तुम लेट जाओ, में सामनेवाली बिरथ पर चला जाता हु.
जूही : मुझे तुम्हारे साथ hi रहना है शिव. (उसने जिस प्यार से कहा था में कैसे मन करता, में पालथी मरकर बेथ गया और उसको मेरी गॉड में शिर रखने का इस्सर किआ तो उसका चेहरा खुसी से चालक उठा, वो मेरी गॉड में अपना शिर रख कर लेट गयी और मुझे देखने लगी)
शिव : क्या हुआ? (उसने ना में शिर हिलाया, में बस मुस्कुरा दिया, थोड़ी देर वो लेती रही, मेरा हाथ जो साइड में था उसे उसने पकड़ लिया और अपने पेट पर रख दिया, मेरे हाथ पर उसने अपना हाथ रख दिया, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, उसने अपनी आंखे बंद कर दी, में उसे देख रहा था, प्यारा सा चेहरा और पतले होठ उसको बहोत आकर्षक बना रहे थे, मेरे हाथ से थोड़ी hi दुरी पर उसके स्तन थे जो ऊपर की और उठे हुए थे, एक खूबसूरत लड़की अगर ऐसे किसी की गॉड में लेती हुई हो तो शरीर में हलचल होना स्वाभाविक था, मेरे लुंड में तनाव आने लगा, में घबराने लगा, मेने अपनी निगाहे दूसरी और घुमा ली ताकि मेरा ध्यान दूसरी और हो जाये, पर ये काम नहीं कर रहा tha)(Juhi शांति से लेती हुई थी, उसे ऐसे लेटना बहोत अच्छा लग रहा था, वैसे भी ट्रैन में कोण उनको जनता था जो वो डरे, इस लिए वो शिव की गॉड में लेटने का मज़ा ले रही थी, उसे अपने गाल पर शिव के उभर का एहसास हुआ, उसे पता चला की क्या हो रहा है, उसने आंखे खोली और शिव को देखा, जो इधर उधर देख रहा था, उसके चेहरे पर दर साफ़ नजर आ रहा था, वो शिव को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इस लिए उसने फिर से आंखे बंद कर ली, वैसे भी वो अंग उसके अंदर भी हलचल मचा रहा था, उसे भी वो अच्छा hi लग रहा था तो वो वैसे hi लेती रही. उसका मान कर रहा था की वो उस अंग से और सात जाये पर उसे शर्म आ रही थी. थोड़ी देर बाद फिर से वो अंग नार्मल होने लगा, उसने फिर से शिव को देखा जो आंखे बंद किये बैठा था, अब वो शांत था, उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी. आस पास लोग थे तो वो दोनों ऐसे hi लेते रहे, तक़रीबन 8 खानेवाला आर्डर लेने आया तो उन्होंने खाने का आर्डर दे दिया, जब खाना आया तो दोनों ने आमने सामने बेथ कर खाना खाया.
खाना खाने के बाद वो फिर से बाथ गए, आहिस्ता आहिस्ता सब लाइट बंद होने लगी, अभी तक़रीबन तीन घंटे का सफर बाकि था. निचे वालो को सोना था तो उन्होंने लीगत बंद कर दी, पुरे डिब्बे में अब एक दो लाइट hi जल रही थी. हल्का सा उजाला था, जूही ने मेरी और देखा, मेने भी उसकी आँखों में देखा. में मुस्कुराया तो उसने अपनी निगाहे जुका ली और मेरे कंधे पर शिर रख दिया, और उसने मेरा हाथ थम लिया. वो मुझसे इतना सात कर बैठी थी की उसके स्तन का हिस्सा मेरी बाह में डाब रहा था, उसे भी ये पता था फिर भी वो वैसे hi बैठी रही. तक़रीबन पंद्रह मिनट बाद वो सीधी हुई, फिर वो मेरी और देखने लगी, में उसकी आँखों को पढ़ने की कोशिस कर रहा था, वो बिना कुछ बोले मेरी गॉड में लेटने लगी तो में भी थोड़ा साइड में खिसक लिया और उसे लेटने के लिए जगह बना दी. मेने एक पेअर को घुटने से मोड़ कर निचे रक्खा और दूसरे को घुटने से मोड़ कर ऊपर रक्खा. वो मेरी एक झंघ को तकिया बना कर लेट गयी, मेने अपना एक हाथ निचे बिरथ पर टिकाया हुआ था और दूसरे को अपने खड़े पेअर के घुटने पे रक्खा हुआ था. थोड़ी देर बाद उसने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया. मेरी धड़कने तेज हो गयी थी और मेरे लुंड ने फिर से खड़ा होना सुरु कर दिया. उसने अपना शिर थोड़ा मेरे लुंड की और खिसका दिया, मुझे पता चल रहा था की उसे पता है फिर भी वो मेरे उभर के और करीब हो गयी थी, उसने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और उसे ऊपर की और खिसकने लगी, उसके इरादे जान कर मेरी धड़कन बढ़ने लगी. में उसके चेहरे को hi देख रहा था, उसने आंखे तो बंद की हुई थी पर उसके चेहरे पर उत्तेजना की लाली साफ़ देखि जा शक्ति थी. मेरा हाथ उसके दिल के ऊपर था तो उसकी बढ़ हुई धड़कने भी मुझे महसूस हो रही थी. ट्रैन में होने की वजह से मेने अपना हाथ ऊपर जाने से रोकने के लिए उस पर जोर लगाया तो वो और जोर से मेरे हाथ को ऊपर खींचने लगी, मेने भी अपना हाथ ढीला छोड़ दिया, में आस पास भी देख रहा था, पर सब सोये हुए थे. उसने मेरा हाथ अपने बाये उभर पर रख दिया, मेरे हाथ के निचे वो सख्त उभर अपनी गोलाई का एहसास करवा रहा था. उसकी ब्रा भी मुझे महसूस हो रही थी. हम दोनों ऐसे hi थोड़ी देर बैठे रहे, में कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था, तो में ऐसे hi बैठा रहा पर जूही को जैसे रुकना नहीं था, उसने मेरे हाथ पर दबाव बनाना सुरु किआ, वो अपने हाथ के दबाव से मुझे स्तन दबाने का इस्सर कर रही थी, मेने थोड़ी देर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं की पर फिर मेने हलके हलके उसे दबाना सुरु कर दिया, उसने अपना हाथ हटा लिया. में उसकी भावनाओ को समाज रहा था तो में हलके हलके उसे सहलाते हुए उसके एक स्तन को दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उसने मेरे हाथ को अपने दूसरे स्तन पर रख दिया. हमारा ये खेल काफी देर तक चलता रहा. उसने अपना t-shirt उठाने की कोशिस की तो मेने उसे रोक दिया. उसने आंखे खोली और मुझे देखने लगीं हलके अँधेरे में चमकती उसकी आंखे मुझे आगे बढ़ने की बिनती कर रही थी. मेने ना में शिर हिलके उसे रोका, उसके चेहरे पर नाराजगी दिख रही थी तो में मुस्कुराया और उसके माथे पर किश किआ, तो वो भी मुस्कुरा दी. में उसका शिर सहलाने लगा तो उसने फिर से आंखे बंद कर दी. तक़रीबन डेढ़ बजे हमारी ट्रैन, हमारे सहर पहुंच गयी. पार्किंग में hi उसने अपना स्कूटर रक्खा था तो ुमने पैसे चुकाए और स्कूटर ले कर निकल गए. एक हाथ से अपना सामना पकड़ कर वो बैठी थी और दूसरे हाथ से मेरी कमर थामे मुज से चिपक गयी थी, मेरा सामान मेने आगे रक्खा हुआ था.
जूही
शिव : मुझे सुबह स्कूल भी जाना है.
जूही : में जल्दी उठा दूंगी, मुझे भी गयम जाना है.
शिव : (मुस्कुराते hue)Agar में तुम्हारे घर आया तो न तुम सो ो गई न मुझे सोने डौगी.
जूही : (शर्मगाई, और मुस्कुराने lagi)Me ऐसा वैसा कुछ नहीं करुँगी, सच्ची, चलो न सिर्फ साथ में सो जायेंगे.
शिव : (मुस्कुराते hue)Ye मुमकिन नहीं, और अगर तुमने अपने आप को संभल भी लिया पर में अपने आप को संभल न पाया तो.
जूही : (मुझे कास के पकड़ते hue)To मात संभल न.
शिव : (उसकी बात का में मतलब समाज रहा था, और ये सही भी था, हम दोनों के बिच जो कुछ भी हो चूका था तो उसके मान में ऐसी बात आना स्वाभाविक था, पर में अभी भी उसे बचाना चाहता tha)Dekha, तुम तो अभी से फिसल रही हो.
जूही : में कहा फिसल रही हु, मेने तो बस ये कहा की अगर तुम आगे बढ़ोगे तो में तुम्हे नहीं रोकूंगी. (हम दोनों उसके घर पहुंच गयेथे, वो खुस हो गयी, वो जल्दी से उतर गयी और खुस हो कर मेरे सामने देखने लगी)
शिव : में बस तुम्हे छोड़ने आया हु, में यहाँ से खुद चला जाऊंगा. (उसने रूठने वाला चेहरा बना लिया, में मुस्कुराया) वैसा भी वक़्त आएगा, तुम्हे क्या जल्दी पड़ी hai.(Wo मुस्कुराने लगी, मेने स्कूटर स्टैंड किआ और उसे चाबी दी)
जूही : मुझे क्यों दे रहे हो, तुम ले जाओ इससे, सुबह ले आना.
शिव : मचला जाऊंगा.
जूही : अब इतनी तो बात मान hi शक्ति हो न.
शिव : (मुस्कुराते हुए) ठीक है. (में स्कूटर में चाबी डालने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसकी और देखा)
जूही : थोड़ी देर तो अंदर चलो (में उसकी और सवालिए नजरो से देखने लगा, उसने फिर अपना चेहरा रुठनेवाले बना liya)Yaha लड़की में हु, तुम लड़के हो, पर मुझे ऐसा लग रहा है की में लड़का हु और लड़की पर मौके का फायदा उठाने के लिए मन रहा हु.
शिव : अच्छा ऐसी बात है, चलो में तुम्हे दिखता हु (मेने उसका हाथ पकड़ा और उसे दरवाजे की और ले गया, उसने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला, जैसे hi हम अंदर गए मेने उसे दीवाल से चिपका दिया और उसके होठो की करीब अपने होठ ले gaya)Tumhe देखना है, की लड़का कोण है? (वो मुस्कुरायी और हां में इस्सर किआ, उसके चेहरे की ख़ुशी देखने लायक थी, मेने उसके चेहरे पर आये बालो की लत साइड में की और उसके होठो को जोर से चूसने लगा,

वो भी कहा पीछे रहनेवाली थी, उसने मेरे शिर को दोनों हाथो से पकड़ लिया और मेरे होठो को जोरो से चूसने लगी, हम दोनों जैसे जोर आजमाईस कर रहे थे, जल्दी hi दोनों की सांसे फूल गयी और हम अलग हुआ, मेने उसे देखा, उसने मुझे फिर दोनों हसने lage.)Ab पता चला, कोण लड़का है.
जूही : (मेरी छाती पर हाथ फिरते hue)Ruk जाओ न. (उसके बोलने का अंदाज ऐसा था की एक बार तो दिल में आया की रुक hi जाऊ. मेने हलके से उसके होठो को चूमा)
शिव : अभी नहीं, पर जल्द hi रुकूंगा.
जूही : Sach(Mene है में गर्दन हिलायी तो वो मेरे गले लग gayi)I लव यू शिव.
शिव : लव यू तू. (वो मुझसे कास के लिपट गयी, में थोड़ी देर वह रहा फिर घर लौट गया, मेने दरवाजा खत खतया तो सरितादिदी गेट पर आयी, मुझे देख कर वो खुस हो गयी और टाला खोल कर मुझसे लिपट गयी)
सरितादिदी : आ गया तू, कितने दिन लगा दिए (थोड़ी देर वो मेरे गले लगी रही, फिर दूर हो kar)Khana खाया?
शिव : है, दीदी. (आवाज सुन कर लतादिदी भी रूम से बहार आयी) दीदी (कहते हुए में उनकी और बढ़ा तो वो भी मेरी और बढ़ी, मेने उन्हें गले लगा liya)Kaisi हो दीदी.
लतादिदी : में ठीक हु, तू कैसा है?
शिव : में भी ठीक हु दीदी.
लतादिदी : खाना खायेगा?
सरितादिदी : मेने पूछ लिया है, वो खाना खा कर आया है. अब सो जाओ, सुबह बात करेंगे. (लतादिदी की और देख kar)Hamare साथ सोयेगी की इसके साथ? (लतादिदी शर्मा गयी) ठीक है, जा सो जा. (वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने दीदी को देखा तो वो शर्मा गयी. (पता नहीं दीदी का रूप पल में hi बदल जाता था, अभी जब वो मुझे खाने का पूछ रही थी तो लगता था की वो मेरी माँ, मेरी बड़ी बहन है, और अब लग रहा था जैसे वो मेरी प्रेमिका है, मेने उनका हाथ पकड़ा और हम दोनों अंदर रूम में आ गए, जैसे hi मेने दरवाजा बंद किआ वो फिर से मेरे गले लग गयी, में उनकी भावनाओ को समाज रहा था, इतनेदिन बाद जो मिला था. हम दोनों ऐसे गले लगे थे जैसे बरसो बाद मिल रहे हो, जब हम दोनों को सुकून हो गया तो वो बोली)
लतादिदी : कपडे बदल ले, बहोत रात हो गयी है, कल स्कूल जायेगा?
शिव : है दीदी जाना पड़ेगा, एग्जाम आनेवाली है.
लतादिदी : ठीक है फिर, जल्दी से कपडे बदल ले और सो जा, टाइम hi कितना बचा है. (मुझे कपडे बदलने तो थे नहीं, मेने कपडे निकल दिए और पूरा नंगा हो गया, और दीदी के पास चला गया, वो बिस्तर को सही कर रही थी, जब उन्होंने मुझे देखा तो उनकी आंखे चौड़ी हो गयी, पर जैसे hi उनकी नजर मेरी नजरो से मिली, वो शर्मा गयी, और नज़ारे चुरा कर boli)Mene कपडे बदलने को कहा था, तूने तो सरे निकल दिए.
शिव : हम ऐसे hi तो सोते है न दीदी, आप भी निकल दो.
लतादिदी : (उनकी सांसे तेज चल रही thi)Ha सोते है पर आज नहीं, तुजे सुबह जल्दी जाना है और तीन चार घंटे hi बचे है सुबह होने में. में नहीं चाहती की तेरी नींद पूरी न हो, आ चल सो जा.
शिव : (मुझे शर्म आने लगी की में बिना सोचे नंगा हो gaya)Thik है में अंडरवियर पहन लेता हु.
लतादिदी : कोई बात नहीं, रहने दे, चल aaja(Unhone लेट ते हुए मुझे कहा, में उनकी बगल में लेता तो उन्होंने मेरे शिर को अपनी छाती से लगा लिया, मेरे शिर पर हाथ फिरते hue)chal सो जा अब. (में उनके शाइन से लगा हुआ था, और उनके स्तन का एहसास मुझे अपने चेहरे पर हो रहा था, उनकी तेज धड़कने भी में महसूस कर रहा था, पर वो मेरे शिर को सेहला रही थी, मेने भी उनके ऊपर हाथ रखते हुए उन्हें अपनी और खिंचा और अपनी आंखे बंद कर दी, वैसे भी रात बहोत हो गई थी तो मुझे नींद आने lagi)(Lata थोड़ी देर तक शिव को सहलाती रही, जब उसे महसूस हुआ की वो सो गया है तो उसने भी सहलाना छोड़ अपनी आंखे बंद कर दी, शिव के नंगे बदन का एहसास उसकी नींद उदा रहा था, कितने दिनों बाद वो शिव के साथ इस अवस्था में थी, उसका दिल कर रहा था की वो उसके साथ वही प्यार करे पर वो शिव को खलेल नहीं पहुंचना चाहती थी पर उसका दिल भी उसे सोने नहीं दे रहा था, उसने अपना पेटीकोट थोड़ा ऊपर किआ जिस से उसके पेअर झांघो तक नंगे हो गए, अपने नंगे पेअर से उसने शिव के लुंड को छुआ, शिव सो चूका था, तो उसका लुंड भी सोया हुआ था, उस नरम लुंड से एहसास से hi उसका दिल मचलने लगा, उसका दिल कर रहा था की वो उसे पकड़े और सहलाये, पर ऐसा करने से शिव डिस्टर्ब हो शक्ति था, उसने जैसे तैसे अपने आप को शांत किआ और सोने की कोश्शि करने लगी, आखिर कर वो भी सो गयी.)
सुबह जब में उठा तो दीदी पूरी तरह से मुज से लिपटी हुई थी, और एक तंग मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, मेने उनके पेअर को छुआ तो वो नंगा था, मेरा भी दिल किआ उन्हें और छूने का तो में अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा, शुरुआत में उनके हलके बालो वाले पेअर का एहसास हुआ फिर मेरा हाथ उनकी झांघो पर पंहुचा तो बिनबालोवाले मखमली झांघो का एहसास होने लगा, मेने उन्हें दबाते हुए सहलाया, मेरे अंदर उत्तेजना का संचार हो रहा था. फिर हाथ को ऊपर ले गया तो मेरा हाथ उनके गोल कूल्हों को छूने लगा, में उन्हें सहलाते हुए हलके हलके दबाने लगा, मेरी उंगलिअ उनकी छूट के होठो को छूने लगी, उन्होंने पंतय नहीं पहनी थी, छूट के आसपास के बालो का एहसास पते hi मेरा लुंड अकड़ने लगा, दीदी के साथ बहोत दिन हो गए थे, तो मेने हलके से छूट के होठो को सहलाया, मेरी ऊँगली छूट की दरार को फैला कर छूट के छेड़ तक पहुंच गयी, थोड़ा सा सहलाने पर hi वह चिकनाहट महसूस होने लगी. उस मखमली छूट के एहसास को महसूस कर ते हुए, में आंखे बंद किये हुए उसे महसूस करने लगा. मेने ऊँगली थोड़ी अंदर डाली तो छेड़ की गर्माहट मुझे महसूस होने लगी, में हलके हलके छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा, मुझे दीदी के मुँह से सिसकी सुनाई दी तो मेने आंखे खोली, मेने देखा तो दीदी मुझे देख रही थी, उन्हें देख कर में थोड़ा चौक गया पर फिर संभल कर मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरायी.
शिव : सॉरी दीदी, मेने आपको जगा दिया.
लतादिदी : में तो कब से जाग गयी थी, पर तुज से दूर जाने का मान नहीं कर रहा था इस लिए लिटी हुई थी. (मेने उनकी आँखों में देखा तो उनकी आँखों में भी मुझे आगे बढ़ने की सहमति दिखाई दी, मेने छूट के होठो को सहलाया तो उनकी आंखे बंद हो gayi)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv.(Unke होठो पर वो कशिश देख कर में आगे खिसका और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी चूसने लगी, मेने ऊँगली को छूट के छेड़ में फिर से उतरा तो वो मुझसे लिपटने लगी, टाइम था नहीं, पर मेरा लुंड भी कड़क हो चूका था, में दुविधा में था की क्या करू, तभी दीदी ने अपने हाथ को निचे किआ और मेरे लुंड को सेहला ने लगी)
शिव : (उनके छोटे हाथ ने मेरे बड़े लुंड को पकड़ लिए था, उनके होठो को छोड़ उनकी नाक से नाक रगड़ते hue)Didi टाइम नहीं है.
लतादिदी : (बिना मेरी और देखे, वो लुंड को सेहला रही थी, उनका चेहरा उत्तेजना में लाल हो रहा था, मेरी ऊँगली अभी भी छूट में अंदर बहार हो रही thi)shhhhhhhh, जल्दी जल्दी कर ले न.
शिव : फिर भी टाइम लगेगा दीदी.
लतादिदी : (लता बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी, वो कैसे भी छोड़ना चाहती थी, उसने शिव को अपने ऊपर खींचते hue)Nahi लगेगा, शहहह जल्दी जल्दी कर ले, शहहह दाल दे अंदर. (मेरा भी बहोत मान कर रहा था तो मेने दीदी को सीधा लेटाया और उनके पैरो को फैला कर छूट को देखा, छूट पूरी तरह से चिकनी हो चुकी थी, मेने लुंड को छूट पर लगाया और उस पर घिसने लगा, साथ में एक हाथ से मेने दीदी के स्तन को पकड़ा जो अभी ब्लॉउज में कैद था, दीदी ने ब्लॉउज के हुक खोल दिए, में झुका और उनके सुडौल स्तन के कड़क हो चुके निप्पल को अपने मुँह में भर liya)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह अंदर दाल de(Mene उन्हें देखा तो वो उत्तेजना में लाल हो रही थी, उनके गल्ल और कान लाल हो चुके थे, मेने भी लुंड को छेड़ पर लगाया तो दीदी मुझे अपनी बहो में भर के खींचने लगी, वो बहोत उतावली हो रही थी, मेने लुंड पर दबाव डाला तो लुंड छूट के छेड़ को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, वो मेरे कंधे को छत रही थी, जैसे hi लुंड अंदर उतरा उन्होंने मेरे कंधे पर अपने दन्त गदा diye)Ummmmmmmm. (मुझे कंडे पर दर्द हुआ)
शिव : दीदी...
लतादिदी : (लता को अपनी छूट में दर्द हुआ पर उसने शिव से kaha)Jyada सोच मात, दाल de,(Jaise लुंड और अंदर उतरा) आईईईई शीइइइइव uffffffffff. (मेने आधे से ज्यादा लुंड दाल दिया था, कुछ देर में रुक गया, थोड़ी ही देर में दीदी अपनी कमर हिला कर धक्के लगाने लगी, लुंड को अपनी छूट में महसूस कर के लगा बावली हो रही thi)Jaldi सीईव शह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी कर ले

(वो भी बहोत गर्म हो चुकी थी और में भी, उनकी छूट मेरे लुंड को निचोड़ रही thi)(Lata को दर्द तो हो रहा था पर इतने दिनों की तड़प वो मिटा देना चाहती थी, तो वो खुद सामने से कमर उचक कर धक्के लगा रही थी, शिव ने भी उसे दबोचते हुए लुंड को अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो तेजी से धक्के लगा रहा था, उसकी छूट पानी की नदिया बहाने लगी, वो अपनी टंगे फैला कर शिव की कमर पर लपेटे हुए उसे खिंच रही थी, कमरा सिसकीओ से गूंजने laga,)(Mene दीदी के होठो को चूसते हुए धक्को की रफ़्तार तेज कर दी, दीदी के मुँह से

monolith 12
उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म निकल रहा था, छूट की कसावट मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, आइए भी दीदी को छोड़ने का एहसास खास hi था)( 10 मिनट तक में उन्हें लगातार छोड़ता रहा, सुबह की ठंडक के बावजूद हम दोनों पशीने से भीग गए थे, दोनों के आमने सामने धक्के से ढको की रफ़्तार बहोत ज्यादा हो गयी थी,

a1 make it good album download
उनका शरीर अकड़ने लगा, छूट भी अंदर से ज्यादा संकरी होने लगी, वो झड़ने लगी, उनकी छूट ने मेरे लुंड को जोरो से झकड़ लिया, पर में नहीं रुका और धक्के लगता रहा, मेरा भी निकलनेवाला था, आखरी समय पर मेने लुंड बहार निकल दिया और वीर्य की बरसात कर दी, एक पिचकारी सीधे उनके चेहरे तक भी चली गयी थी, और कुछ उनके पेट और बूब्स पर, बाकि उनके झांटो के बाल पर जमा हो गयी, हम दोनों हांफ रहे थे, ये एक अजीब तरह का अनुभव था, दीदी आंखे बंद किये हुए हांफ रही थी, में भी बैठे बहते हांफ रहा था, दीदी टंगे फैलाये लेती हुई थी और उनके शरीर पर वीर्य की बरसात के निशान थे, थोड़ी देर बाद उन्होंने आंखे खोली, जैसे hi उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी वो शर्मा गयी, वो थोड़ी ऊपर खिसकी और उन्होंने अपनी छूट को अपने पेटीकोट से धक् दिया, में मुस्कुराया तो वो शरमाते हुए अपने स्तन को ब्लॉउज से ढकने का प्रयास करते हुए कड़ी होने लगी, उनको शर्माता देख, में मुस्कुराया तो वो भी नज़ारे चुराते हुए muskurayi.)Tu जा, तुजे देर हो रही है. (में उनके पास गया और उनके माथे को चूमा)
शिव : इतना क्यों शर्मा रही है आप?
लतादिदी : (मेरे शाइन पर अपना शिर टिका कर) शर्म तो आती है न.
शिव : वैसे आप शरमाते हुए बहोत hi ज्यादा खूबसूरत लगती हो दीदी, आप खुस हो न?
लतादिदी : है शिव, बहोत ज्यादा, जा तुजे देर हो रही है.
में खड़ा हुआ और टॉवल लपेट कर वह से निकल गया. जब में बाथरूम से निकला तो रंजन मिल गयी, मुझे देख ते hi वो दौड़ कर मुज से लिपट गयी.
रंजन : (चहकते hue)Kab आया तू?
शिव : रात को.
रंजन : मुझे जगा देता.
शिव : बहोत देर से आया था तो नहीं जगाया. कैसी है तू, और एग्जाम कब है?
रंजन : में अच्छी हु और एग्जाम तुम्हारे साथ में hi है (गायत्रीदिदी भी उसी और आती दिखाई di)Thik है स्कूल के बाद मिलते hai.(Wo चली गयी)
शिव : कैसी हो दीदी?
गायत्री : (गायत्री ने देखा था की कैसे रंजन, शिव से चिपक कर कड़ी थी, और वो भी तब जब शिव सिर्फ तौलिये में tha)Achchhi हु, तुम?
शिव : में भी, आप तैयार हो जाओ, आप को मेरे साथ hi चलना है, जूही का स्कूटर मेरे पास hi है.
गायत्री : ठीक है.
में तैयार हुआ, तब तक गायत्रीदिदी भी तैयार हो गयी थी, मेने उन्हें और स्कूटर को जूही के घर छोड़ा और स्कूल की और निकल गया. जब में संयम के घर के नाके पर पंहुचा तो मेने देखा की संयम और वैस्वी निकल रही थी, नाज़िआ दीदी उन्हें bye कर रही थी, जैसे hi संयम की नजर मुँह पर पड़ी तो उसने वैस्वी को स्कूटर रोकने को बोलै, वैस्वी को कुछ समाज नहीं आया, उसने जैसे hi बराक लगाया वो कूद कर उतरी और मेरी और भागी, उसे ऐसे भागता देख नाज़िआदिदी की भी नज़र मुज पर गयी, मुझे देख कर उनके भी चेहरे पर मुस्कान आ गयी. वो संयम को ऐसे शिव से मिलते देख उसको जलन हुई क्यों की वो भी इसीतरह शव से मिलना चाहती थी पर ऐसा वो कर नहीं शक्ति थी. शिव के पास पहुंच कर
संयम : तुम आ गए (वो हांफ रही thi)Kitne दिन हो गए, कैसे हो? मेरे मश्ग तो मिलते थे न तुम्हे, तुमने तयारी तो की है न?
शिव : (मुस्कुराते hue)Are रुक, रुक, कितने सवाल पूछेगी? है में आगया, रात को आया, और तुम्हारे मश्ग मिले थे, जिसकी वजह से मुझे पढ़ाई में आसानी हो गयी थी, थैंक यू.
वैस्वी : संयम, देर हो रही है.
संयम : चल, स्कूल में मिलते है, bye.
शिव : Bye, (वो दौड़ कर फिर से स्कूटर पर बेथ गयी, वैस्वी ने स्कूटर बढ़ा दिया, पर संयम जाते जाते भी पीछे मुद कर मुझे हाथ हिला रही थी, मेने भी मुस्कुरा कर हाथ हिलाया, जब वो दूर निकल गयी तो में नाज़िआ दीदी के पास पंहुचा, उनके चेहरे की खुसी मनो समां नहीं रही thi)(Nazia ने आस पास देखा तो लोग थे, उसका दिल कर रहा था की वो शिव से लिपट जाये, पर वो ऐसा कर नहीं shaki)Kaisi हो दीदी?
नाज़िआदिदी : बहोत अच्छी, तुम कैसे हो, कितने दिन हो गए तुम्हे देखे, कहा चले गए थे, मेरा मान कर रहा था तुम्हे फ़ोन करने को पर फिर नहीं किआ.
शिव : क्यों नहीं किआ, कर लेती.
नाज़िआदिदी : में तुम्हे देखते हुए ये कहना चाहती थी शिव.
शिव : क्या दीदी?
नाज़िआदिदी : (वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, चेहरे की ख़ुशी तो जैसे छुपे नहीं छुप रही थी, आँखों में आंसू तक छलक आये थे) तुम... तुम ...(वो हांफ रही thi)Tum, बाप बन नेवले ho.(Wo इतना मुस्कुरा रही थी, की क्या कहु)
शिव : (मुझे भी ये सुन कर बहोत खुसी हुए, मेने उनकी दोनों और से बाह पकड़ li)Sach?
नाज़िआदिदी : (उन्होंने है में गर्दम हिलायी और मेरी और झुकी, वो मेरे गले लग्न चाहती थी, पर ऐसे बिच रस्ते वो कर न payi)Shiv में तुम्हारे गले लग्न चाहती हु, प्लीज आज स्कूल से घर आना, में इतनी खुस हु की में बता नहीं सकती, आओगे न.
शिव : ठीक है दीदी, में स्कूल से छूट कर आ जाऊंगा.
में उन्हें देखते हुए स्कूल की और बढ़ चला, उन्होंने हाथ हिला कर मुझे bye कहा, मेने भी bye कहते हुए, स्कूल की तरफ दौड़ लगा दी. (नाज़िआ शिव को जाते हुए देखती रही, उसने अपने पल्लू से अपने आंसू पोछे और हस्ती हुई अपने घर की और चल पड़ी) में भी खुस था, ये मेरा दूसरा बच्चा था, एक अजीब सा आनंद मुझे महसूस हो रहा था, में जब स्कूल पंहुचा तो क्लास सुरु हो चुकी थी. में दरवाजे पर खड़े रे कर बोलै
शिव : मई ी के इन मैडम?
बीनमदं : (जसी hi उसने दरवाजे की और देखा तो शिव खड़ा था, वो एकदम से खुस हो गयी, और शिव की और बढ़ने लगी, पर जैसे hi एक कदम बढ़ाया, उसे एहसास हुआ की वो क्लास में है, वो रुक गयी और अपने आप को सँभालते hue)H..ha, आ jao.(Me उनको देखते हुए अंदर आया, हमारी आँखों ने जैसे हज्जारो बाटे कर ली, मेने देखा की वो अपनी उंगलिया आपस में रगड़ रही थी, इतनेदिन बाद मिलने की उनकी बेचैनी मुझे साफ़ नज़र आ रही थी, में अपनी जगह की और बढ़ा, मेरे दोस्तों के चेहरे पर भी खुसी थी, पूरा क्लास मुझे देख रहा था, संयम, मुस्कुराते हुए और वैस्वी ऐसे hi.
में अपनी जगह बेथ गया और क्लास सुरु हो गयी. मैडम ने एग्जाम के बारे में बाते की और किस तरह के सवाल आ शक्ति है उसकी भी चर्चा की. सब ध्यान से सुन रहे थे.
नाज़िआ घर जा कर दोपहर की तैयारिओं में जुट गयी, वो शिव के लिए कुछ खास बनाना चाहती थी. उसने पहले नामकिनबनाया फिर मीठा बनाने लगी. जब उसकी अम्मी रसोई में आयी थो उसने भी देखा की उसकी बेटी खाने की तैयारियां कर रही है, उसकी कुछ समाज में नहीं आया क्यों की अभी खाना बनाने की देर थी और वो मिठाई बना रही थी.
अम्मी : क्या बात है बेटी मिठाई बना रही हो, दामादजी आनेवाले है क्या?
























