Adultery Kundali Bhagya - Page 15 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 95

ट्रैन अपनी रफ़्तार से चल रही थी, हमारे कम्पार्टमेंट में दो उम्रदराज कपल थे जो कही शादी में जा रहे थे. वैसे तो हमारी बिरथ निचे की थी पर उन्होंने हमें कहा की हम ऊपर नहीं चढ़ सकते तो क्या आप ऊपर सो जायेंगे, तो हमने मान लिया, वैसे भी हमे सोना तो था नहीं क्यों की देर रात तक हमारा स्टेशन आ जानेवाला था. में और जूही साथ साथ में बैठे हुए थे. जूही मुझे आगे का प्लान बता रही थी, उसने कहा की अगले महीने स्टेट लेवल एंट्री कॉम्पिटिओं होनेवाले है तो हम दोनों को उसमे हिस्सा लेना है. वैसे भी वो अनुभवी थी तो मुझे तो वो जो कहे वही करना था. उसकी बाते सुनते सुनते में कभी कभी सोचने लगता था की वो कितना महत्व रखती है मेरी जिंदगी में, वो खूबसूरत तो थी hi और वो मुझसे प्यार भी करती थी, जहा तक मुझे लगता था, पर फिर मुझे लतादिदी का ख्याल आ जाता था, वो भी मेरे जीवन में उतनी hi महत्व रखती थी, पता नहीं पर में कोई फैसला नहीं कर प् रहा था, और अभी से ये फैसला करना भी शायद जल्दबाजी होगा, ऊपर से रंजन भी मुझसे उम्मीदे लगाए बैठी थी. ये सब मेरी जिंदिगी का बहोत एहम हिस्सा है और में किसी को भी दुःख नहीं पंहुचा सकता था, पर क्या सबको खुस रख पाउँगा, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. एक डेढ़ घंटे तक बाते करने के बाद अब वो शांत बैठी थी, हम दोनों निचे हो रही बाते सुन रहे थे, वो लोग भी अपने घर और बच्चो की बाटे कर रहे थे, वो बैठे बैठे थक गयी थी जो उसका चेहरा बता रहा था और वो थोड़ी लेटने की कोशिस कर रही थी उस से भी मुझे पता चल रहा था.

शिव : तुम लेट जाओ, में सामनेवाली बिरथ पर चला जाता हु.

जूही : मुझे तुम्हारे साथ hi रहना है शिव. (उसने जिस प्यार से कहा था में कैसे मन करता, में पालथी मरकर बेथ गया और उसको मेरी गॉड में शिर रखने का इस्सर किआ तो उसका चेहरा खुसी से चालक उठा, वो मेरी गॉड में अपना शिर रख कर लेट गयी और मुझे देखने लगी)

शिव : क्या हुआ? (उसने ना में शिर हिलाया, में बस मुस्कुरा दिया, थोड़ी देर वो लेती रही, मेरा हाथ जो साइड में था उसे उसने पकड़ लिया और अपने पेट पर रख दिया, मेरे हाथ पर उसने अपना हाथ रख दिया, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, उसने अपनी आंखे बंद कर दी, में उसे देख रहा था, प्यारा सा चेहरा और पतले होठ उसको बहोत आकर्षक बना रहे थे, मेरे हाथ से थोड़ी hi दुरी पर उसके स्तन थे जो ऊपर की और उठे हुए थे, एक खूबसूरत लड़की अगर ऐसे किसी की गॉड में लेती हुई हो तो शरीर में हलचल होना स्वाभाविक था, मेरे लुंड में तनाव आने लगा, में घबराने लगा, मेने अपनी निगाहे दूसरी और घुमा ली ताकि मेरा ध्यान दूसरी और हो जाये, पर ये काम नहीं कर रहा tha)(Juhi शांति से लेती हुई थी, उसे ऐसे लेटना बहोत अच्छा लग रहा था, वैसे भी ट्रैन में कोण उनको जनता था जो वो डरे, इस लिए वो शिव की गॉड में लेटने का मज़ा ले रही थी, उसे अपने गाल पर शिव के उभर का एहसास हुआ, उसे पता चला की क्या हो रहा है, उसने आंखे खोली और शिव को देखा, जो इधर उधर देख रहा था, उसके चेहरे पर दर साफ़ नजर आ रहा था, वो शिव को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इस लिए उसने फिर से आंखे बंद कर ली, वैसे भी वो अंग उसके अंदर भी हलचल मचा रहा था, उसे भी वो अच्छा hi लग रहा था तो वो वैसे hi लेती रही. उसका मान कर रहा था की वो उस अंग से और सात जाये पर उसे शर्म आ रही थी. थोड़ी देर बाद फिर से वो अंग नार्मल होने लगा, उसने फिर से शिव को देखा जो आंखे बंद किये बैठा था, अब वो शांत था, उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी. आस पास लोग थे तो वो दोनों ऐसे hi लेते रहे, तक़रीबन 8 खानेवाला आर्डर लेने आया तो उन्होंने खाने का आर्डर दे दिया, जब खाना आया तो दोनों ने आमने सामने बेथ कर खाना खाया.

खाना खाने के बाद वो फिर से बाथ गए, आहिस्ता आहिस्ता सब लाइट बंद होने लगी, अभी तक़रीबन तीन घंटे का सफर बाकि था. निचे वालो को सोना था तो उन्होंने लीगत बंद कर दी, पुरे डिब्बे में अब एक दो लाइट hi जल रही थी. हल्का सा उजाला था, जूही ने मेरी और देखा, मेने भी उसकी आँखों में देखा. में मुस्कुराया तो उसने अपनी निगाहे जुका ली और मेरे कंधे पर शिर रख दिया, और उसने मेरा हाथ थम लिया. वो मुझसे इतना सात कर बैठी थी की उसके स्तन का हिस्सा मेरी बाह में डाब रहा था, उसे भी ये पता था फिर भी वो वैसे hi बैठी रही. तक़रीबन पंद्रह मिनट बाद वो सीधी हुई, फिर वो मेरी और देखने लगी, में उसकी आँखों को पढ़ने की कोशिस कर रहा था, वो बिना कुछ बोले मेरी गॉड में लेटने लगी तो में भी थोड़ा साइड में खिसक लिया और उसे लेटने के लिए जगह बना दी. मेने एक पेअर को घुटने से मोड़ कर निचे रक्खा और दूसरे को घुटने से मोड़ कर ऊपर रक्खा. वो मेरी एक झंघ को तकिया बना कर लेट गयी, मेने अपना एक हाथ निचे बिरथ पर टिकाया हुआ था और दूसरे को अपने खड़े पेअर के घुटने पे रक्खा हुआ था. थोड़ी देर बाद उसने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया. मेरी धड़कने तेज हो गयी थी और मेरे लुंड ने फिर से खड़ा होना सुरु कर दिया. उसने अपना शिर थोड़ा मेरे लुंड की और खिसका दिया, मुझे पता चल रहा था की उसे पता है फिर भी वो मेरे उभर के और करीब हो गयी थी, उसने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और उसे ऊपर की और खिसकने लगी, उसके इरादे जान कर मेरी धड़कन बढ़ने लगी. में उसके चेहरे को hi देख रहा था, उसने आंखे तो बंद की हुई थी पर उसके चेहरे पर उत्तेजना की लाली साफ़ देखि जा शक्ति थी. मेरा हाथ उसके दिल के ऊपर था तो उसकी बढ़ हुई धड़कने भी मुझे महसूस हो रही थी. ट्रैन में होने की वजह से मेने अपना हाथ ऊपर जाने से रोकने के लिए उस पर जोर लगाया तो वो और जोर से मेरे हाथ को ऊपर खींचने लगी, मेने भी अपना हाथ ढीला छोड़ दिया, में आस पास भी देख रहा था, पर सब सोये हुए थे. उसने मेरा हाथ अपने बाये उभर पर रख दिया, मेरे हाथ के निचे वो सख्त उभर अपनी गोलाई का एहसास करवा रहा था. उसकी ब्रा भी मुझे महसूस हो रही थी. हम दोनों ऐसे hi थोड़ी देर बैठे रहे, में कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था, तो में ऐसे hi बैठा रहा पर जूही को जैसे रुकना नहीं था, उसने मेरे हाथ पर दबाव बनाना सुरु किआ, वो अपने हाथ के दबाव से मुझे स्तन दबाने का इस्सर कर रही थी, मेने थोड़ी देर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं की पर फिर मेने हलके हलके उसे दबाना सुरु कर दिया, उसने अपना हाथ हटा लिया. में उसकी भावनाओ को समाज रहा था तो में हलके हलके उसे सहलाते हुए उसके एक स्तन को दबाने लगा. थोड़ी देर बाद उसने मेरे हाथ को अपने दूसरे स्तन पर रख दिया. हमारा ये खेल काफी देर तक चलता रहा. उसने अपना t-shirt उठाने की कोशिस की तो मेने उसे रोक दिया. उसने आंखे खोली और मुझे देखने लगीं हलके अँधेरे में चमकती उसकी आंखे मुझे आगे बढ़ने की बिनती कर रही थी. मेने ना में शिर हिलके उसे रोका, उसके चेहरे पर नाराजगी दिख रही थी तो में मुस्कुराया और उसके माथे पर किश किआ, तो वो भी मुस्कुरा दी. में उसका शिर सहलाने लगा तो उसने फिर से आंखे बंद कर दी. तक़रीबन डेढ़ बजे हमारी ट्रैन, हमारे सहर पहुंच गयी. पार्किंग में hi उसने अपना स्कूटर रक्खा था तो ुमने पैसे चुकाए और स्कूटर ले कर निकल गए. एक हाथ से अपना सामना पकड़ कर वो बैठी थी और दूसरे हाथ से मेरी कमर थामे मुज से चिपक गयी थी, मेरा सामान मेने आगे रक्खा हुआ था.

जूही :(मेरे पेट को सहलाते hue)Aaj मेरे घर hi रुक जाओ न.

शिव : मुझे सुबह स्कूल भी जाना है.

जूही : में जल्दी उठा दूंगी, मुझे भी गयम जाना है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Agar में तुम्हारे घर आया तो न तुम सो ो गई न मुझे सोने डौगी.

जूही : (शर्मगाई, और मुस्कुराने lagi)Me ऐसा वैसा कुछ नहीं करुँगी, सच्ची, चलो न सिर्फ साथ में सो जायेंगे.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ye मुमकिन नहीं, और अगर तुमने अपने आप को संभल भी लिया पर में अपने आप को संभल न पाया तो.

जूही : (मुझे कास के पकड़ते hue)To मात संभल न.

शिव : (उसकी बात का में मतलब समाज रहा था, और ये सही भी था, हम दोनों के बिच जो कुछ भी हो चूका था तो उसके मान में ऐसी बात आना स्वाभाविक था, पर में अभी भी उसे बचाना चाहता tha)Dekha, तुम तो अभी से फिसल रही हो.

जूही : में कहा फिसल रही हु, मेने तो बस ये कहा की अगर तुम आगे बढ़ोगे तो में तुम्हे नहीं रोकूंगी. (हम दोनों उसके घर पहुंच गयेथे, वो खुस हो गयी, वो जल्दी से उतर गयी और खुस हो कर मेरे सामने देखने लगी)

शिव : में बस तुम्हे छोड़ने आया हु, में यहाँ से खुद चला जाऊंगा. (उसने रूठने वाला चेहरा बना लिया, में मुस्कुराया) वैसा भी वक़्त आएगा, तुम्हे क्या जल्दी पड़ी hai.(Wo मुस्कुराने लगी, मेने स्कूटर स्टैंड किआ और उसे चाबी दी)

जूही : मुझे क्यों दे रहे हो, तुम ले जाओ इससे, सुबह ले आना.

शिव : मचला जाऊंगा.

जूही : अब इतनी तो बात मान hi शक्ति हो न.

शिव : (मुस्कुराते हुए) ठीक है. (में स्कूटर में चाबी डालने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसकी और देखा)

जूही : थोड़ी देर तो अंदर चलो (में उसकी और सवालिए नजरो से देखने लगा, उसने फिर अपना चेहरा रुठनेवाले बना liya)Yaha लड़की में हु, तुम लड़के हो, पर मुझे ऐसा लग रहा है की में लड़का हु और लड़की पर मौके का फायदा उठाने के लिए मन रहा हु.

शिव : अच्छा ऐसी बात है, चलो में तुम्हे दिखता हु (मेने उसका हाथ पकड़ा और उसे दरवाजे की और ले गया, उसने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला, जैसे hi हम अंदर गए मेने उसे दीवाल से चिपका दिया और उसके होठो की करीब अपने होठ ले gaya)Tumhe देखना है, की लड़का कोण है? (वो मुस्कुरायी और हां में इस्सर किआ, उसके चेहरे की ख़ुशी देखने लायक थी, मेने उसके चेहरे पर आये बालो की लत साइड में की और उसके होठो को जोर से चूसने लगा,





वो भी कहा पीछे रहनेवाली थी, उसने मेरे शिर को दोनों हाथो से पकड़ लिया और मेरे होठो को जोरो से चूसने लगी, हम दोनों जैसे जोर आजमाईस कर रहे थे, जल्दी hi दोनों की सांसे फूल गयी और हम अलग हुआ, मेने उसे देखा, उसने मुझे फिर दोनों हसने lage.)Ab पता चला, कोण लड़का है.

जूही : (मेरी छाती पर हाथ फिरते hue)Ruk जाओ न. (उसके बोलने का अंदाज ऐसा था की एक बार तो दिल में आया की रुक hi जाऊ. मेने हलके से उसके होठो को चूमा)

शिव : अभी नहीं, पर जल्द hi रुकूंगा.

जूही : Sach(Mene है में गर्दन हिलायी तो वो मेरे गले लग gayi)I लव यू शिव.

शिव : लव यू तू. (वो मुझसे कास के लिपट गयी, में थोड़ी देर वह रहा फिर घर लौट गया, मेने दरवाजा खत खतया तो सरितादिदी गेट पर आयी, मुझे देख कर वो खुस हो गयी और टाला खोल कर मुझसे लिपट गयी)

सरितादिदी : आ गया तू, कितने दिन लगा दिए (थोड़ी देर वो मेरे गले लगी रही, फिर दूर हो kar)Khana खाया?

शिव : है, दीदी. (आवाज सुन कर लतादिदी भी रूम से बहार आयी) दीदी (कहते हुए में उनकी और बढ़ा तो वो भी मेरी और बढ़ी, मेने उन्हें गले लगा liya)Kaisi हो दीदी.

लतादिदी : में ठीक हु, तू कैसा है?

शिव : में भी ठीक हु दीदी.

लतादिदी : खाना खायेगा?

सरितादिदी : मेने पूछ लिया है, वो खाना खा कर आया है. अब सो जाओ, सुबह बात करेंगे. (लतादिदी की और देख kar)Hamare साथ सोयेगी की इसके साथ? (लतादिदी शर्मा गयी) ठीक है, जा सो जा. (वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने दीदी को देखा तो वो शर्मा गयी. (पता नहीं दीदी का रूप पल में hi बदल जाता था, अभी जब वो मुझे खाने का पूछ रही थी तो लगता था की वो मेरी माँ, मेरी बड़ी बहन है, और अब लग रहा था जैसे वो मेरी प्रेमिका है, मेने उनका हाथ पकड़ा और हम दोनों अंदर रूम में आ गए, जैसे hi मेने दरवाजा बंद किआ वो फिर से मेरे गले लग गयी, में उनकी भावनाओ को समाज रहा था, इतनेदिन बाद जो मिला था. हम दोनों ऐसे गले लगे थे जैसे बरसो बाद मिल रहे हो, जब हम दोनों को सुकून हो गया तो वो बोली)

लतादिदी : कपडे बदल ले, बहोत रात हो गयी है, कल स्कूल जायेगा?

शिव : है दीदी जाना पड़ेगा, एग्जाम आनेवाली है.

लतादिदी : ठीक है फिर, जल्दी से कपडे बदल ले और सो जा, टाइम hi कितना बचा है. (मुझे कपडे बदलने तो थे नहीं, मेने कपडे निकल दिए और पूरा नंगा हो गया, और दीदी के पास चला गया, वो बिस्तर को सही कर रही थी, जब उन्होंने मुझे देखा तो उनकी आंखे चौड़ी हो गयी, पर जैसे hi उनकी नजर मेरी नजरो से मिली, वो शर्मा गयी, और नज़ारे चुरा कर boli)Mene कपडे बदलने को कहा था, तूने तो सरे निकल दिए.

शिव : हम ऐसे hi तो सोते है न दीदी, आप भी निकल दो.

लतादिदी : (उनकी सांसे तेज चल रही thi)Ha सोते है पर आज नहीं, तुजे सुबह जल्दी जाना है और तीन चार घंटे hi बचे है सुबह होने में. में नहीं चाहती की तेरी नींद पूरी न हो, आ चल सो जा.

शिव : (मुझे शर्म आने लगी की में बिना सोचे नंगा हो gaya)Thik है में अंडरवियर पहन लेता हु.

लतादिदी : कोई बात नहीं, रहने दे, चल aaja(Unhone लेट ते हुए मुझे कहा, में उनकी बगल में लेता तो उन्होंने मेरे शिर को अपनी छाती से लगा लिया, मेरे शिर पर हाथ फिरते hue)chal सो जा अब. (में उनके शाइन से लगा हुआ था, और उनके स्तन का एहसास मुझे अपने चेहरे पर हो रहा था, उनकी तेज धड़कने भी में महसूस कर रहा था, पर वो मेरे शिर को सेहला रही थी, मेने भी उनके ऊपर हाथ रखते हुए उन्हें अपनी और खिंचा और अपनी आंखे बंद कर दी, वैसे भी रात बहोत हो गई थी तो मुझे नींद आने lagi)(Lata थोड़ी देर तक शिव को सहलाती रही, जब उसे महसूस हुआ की वो सो गया है तो उसने भी सहलाना छोड़ अपनी आंखे बंद कर दी, शिव के नंगे बदन का एहसास उसकी नींद उदा रहा था, कितने दिनों बाद वो शिव के साथ इस अवस्था में थी, उसका दिल कर रहा था की वो उसके साथ वही प्यार करे पर वो शिव को खलेल नहीं पहुंचना चाहती थी पर उसका दिल भी उसे सोने नहीं दे रहा था, उसने अपना पेटीकोट थोड़ा ऊपर किआ जिस से उसके पेअर झांघो तक नंगे हो गए, अपने नंगे पेअर से उसने शिव के लुंड को छुआ, शिव सो चूका था, तो उसका लुंड भी सोया हुआ था, उस नरम लुंड से एहसास से hi उसका दिल मचलने लगा, उसका दिल कर रहा था की वो उसे पकड़े और सहलाये, पर ऐसा करने से शिव डिस्टर्ब हो शक्ति था, उसने जैसे तैसे अपने आप को शांत किआ और सोने की कोश्शि करने लगी, आखिर कर वो भी सो गयी.)

सुबह जब में उठा तो दीदी पूरी तरह से मुज से लिपटी हुई थी, और एक तंग मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, मेने उनके पेअर को छुआ तो वो नंगा था, मेरा भी दिल किआ उन्हें और छूने का तो में अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा, शुरुआत में उनके हलके बालो वाले पेअर का एहसास हुआ फिर मेरा हाथ उनकी झांघो पर पंहुचा तो बिनबालोवाले मखमली झांघो का एहसास होने लगा, मेने उन्हें दबाते हुए सहलाया, मेरे अंदर उत्तेजना का संचार हो रहा था. फिर हाथ को ऊपर ले गया तो मेरा हाथ उनके गोल कूल्हों को छूने लगा, में उन्हें सहलाते हुए हलके हलके दबाने लगा, मेरी उंगलिअ उनकी छूट के होठो को छूने लगी, उन्होंने पंतय नहीं पहनी थी, छूट के आसपास के बालो का एहसास पते hi मेरा लुंड अकड़ने लगा, दीदी के साथ बहोत दिन हो गए थे, तो मेने हलके से छूट के होठो को सहलाया, मेरी ऊँगली छूट की दरार को फैला कर छूट के छेड़ तक पहुंच गयी, थोड़ा सा सहलाने पर hi वह चिकनाहट महसूस होने लगी. उस मखमली छूट के एहसास को महसूस कर ते हुए, में आंखे बंद किये हुए उसे महसूस करने लगा. मेने ऊँगली थोड़ी अंदर डाली तो छेड़ की गर्माहट मुझे महसूस होने लगी, में हलके हलके छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा, मुझे दीदी के मुँह से सिसकी सुनाई दी तो मेने आंखे खोली, मेने देखा तो दीदी मुझे देख रही थी, उन्हें देख कर में थोड़ा चौक गया पर फिर संभल कर मुस्कुराया. वो भी मुस्कुरायी.

शिव : सॉरी दीदी, मेने आपको जगा दिया.

लतादिदी : में तो कब से जाग गयी थी, पर तुज से दूर जाने का मान नहीं कर रहा था इस लिए लिटी हुई थी. (मेने उनकी आँखों में देखा तो उनकी आँखों में भी मुझे आगे बढ़ने की सहमति दिखाई दी, मेने छूट के होठो को सहलाया तो उनकी आंखे बंद हो gayi)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv.(Unke होठो पर वो कशिश देख कर में आगे खिसका और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी चूसने लगी, मेने ऊँगली को छूट के छेड़ में फिर से उतरा तो वो मुझसे लिपटने लगी, टाइम था नहीं, पर मेरा लुंड भी कड़क हो चूका था, में दुविधा में था की क्या करू, तभी दीदी ने अपने हाथ को निचे किआ और मेरे लुंड को सेहला ने लगी)

शिव : (उनके छोटे हाथ ने मेरे बड़े लुंड को पकड़ लिए था, उनके होठो को छोड़ उनकी नाक से नाक रगड़ते hue)Didi टाइम नहीं है.

लतादिदी : (बिना मेरी और देखे, वो लुंड को सेहला रही थी, उनका चेहरा उत्तेजना में लाल हो रहा था, मेरी ऊँगली अभी भी छूट में अंदर बहार हो रही thi)shhhhhhhh, जल्दी जल्दी कर ले न.

शिव : फिर भी टाइम लगेगा दीदी.

लतादिदी : (लता बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी, वो कैसे भी छोड़ना चाहती थी, उसने शिव को अपने ऊपर खींचते hue)Nahi लगेगा, शहहह जल्दी जल्दी कर ले, शहहह दाल दे अंदर. (मेरा भी बहोत मान कर रहा था तो मेने दीदी को सीधा लेटाया और उनके पैरो को फैला कर छूट को देखा, छूट पूरी तरह से चिकनी हो चुकी थी, मेने लुंड को छूट पर लगाया और उस पर घिसने लगा, साथ में एक हाथ से मेने दीदी के स्तन को पकड़ा जो अभी ब्लॉउज में कैद था, दीदी ने ब्लॉउज के हुक खोल दिए, में झुका और उनके सुडौल स्तन के कड़क हो चुके निप्पल को अपने मुँह में भर liya)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह अंदर दाल de(Mene उन्हें देखा तो वो उत्तेजना में लाल हो रही थी, उनके गल्ल और कान लाल हो चुके थे, मेने भी लुंड को छेड़ पर लगाया तो दीदी मुझे अपनी बहो में भर के खींचने लगी, वो बहोत उतावली हो रही थी, मेने लुंड पर दबाव डाला तो लुंड छूट के छेड़ को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, वो मेरे कंधे को छत रही थी, जैसे hi लुंड अंदर उतरा उन्होंने मेरे कंधे पर अपने दन्त गदा diye)Ummmmmmmm. (मुझे कंडे पर दर्द हुआ)

शिव : दीदी...

लतादिदी : (लता को अपनी छूट में दर्द हुआ पर उसने शिव से kaha)Jyada सोच मात, दाल de,(Jaise लुंड और अंदर उतरा) आईईईई शीइइइइव uffffffffff. (मेने आधे से ज्यादा लुंड दाल दिया था, कुछ देर में रुक गया, थोड़ी ही देर में दीदी अपनी कमर हिला कर धक्के लगाने लगी, लुंड को अपनी छूट में महसूस कर के लगा बावली हो रही thi)Jaldi सीईव शह्ह्ह्ह जल्दी जल्दी कर ले





(वो भी बहोत गर्म हो चुकी थी और में भी, उनकी छूट मेरे लुंड को निचोड़ रही thi)(Lata को दर्द तो हो रहा था पर इतने दिनों की तड़प वो मिटा देना चाहती थी, तो वो खुद सामने से कमर उचक कर धक्के लगा रही थी, शिव ने भी उसे दबोचते हुए लुंड को अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो तेजी से धक्के लगा रहा था, उसकी छूट पानी की नदिया बहाने लगी, वो अपनी टंगे फैला कर शिव की कमर पर लपेटे हुए उसे खिंच रही थी, कमरा सिसकीओ से गूंजने laga,)(Mene दीदी के होठो को चूसते हुए धक्को की रफ़्तार तेज कर दी, दीदी के मुँह से





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उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म निकल रहा था, छूट की कसावट मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, आइए भी दीदी को छोड़ने का एहसास खास hi था)( 10 मिनट तक में उन्हें लगातार छोड़ता रहा, सुबह की ठंडक के बावजूद हम दोनों पशीने से भीग गए थे, दोनों के आमने सामने धक्के से ढको की रफ़्तार बहोत ज्यादा हो गयी थी,





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उनका शरीर अकड़ने लगा, छूट भी अंदर से ज्यादा संकरी होने लगी, वो झड़ने लगी, उनकी छूट ने मेरे लुंड को जोरो से झकड़ लिया, पर में नहीं रुका और धक्के लगता रहा, मेरा भी निकलनेवाला था, आखरी समय पर मेने लुंड बहार निकल दिया और वीर्य की बरसात कर दी, एक पिचकारी सीधे उनके चेहरे तक भी चली गयी थी, और कुछ उनके पेट और बूब्स पर, बाकि उनके झांटो के बाल पर जमा हो गयी, हम दोनों हांफ रहे थे, ये एक अजीब तरह का अनुभव था, दीदी आंखे बंद किये हुए हांफ रही थी, में भी बैठे बहते हांफ रहा था, दीदी टंगे फैलाये लेती हुई थी और उनके शरीर पर वीर्य की बरसात के निशान थे, थोड़ी देर बाद उन्होंने आंखे खोली, जैसे hi उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी वो शर्मा गयी, वो थोड़ी ऊपर खिसकी और उन्होंने अपनी छूट को अपने पेटीकोट से धक् दिया, में मुस्कुराया तो वो शरमाते हुए अपने स्तन को ब्लॉउज से ढकने का प्रयास करते हुए कड़ी होने लगी, उनको शर्माता देख, में मुस्कुराया तो वो भी नज़ारे चुराते हुए muskurayi.)Tu जा, तुजे देर हो रही है. (में उनके पास गया और उनके माथे को चूमा)

शिव : इतना क्यों शर्मा रही है आप?

लतादिदी : (मेरे शाइन पर अपना शिर टिका कर) शर्म तो आती है न.

शिव : वैसे आप शरमाते हुए बहोत hi ज्यादा खूबसूरत लगती हो दीदी, आप खुस हो न?

लतादिदी : है शिव, बहोत ज्यादा, जा तुजे देर हो रही है.

में खड़ा हुआ और टॉवल लपेट कर वह से निकल गया. जब में बाथरूम से निकला तो रंजन मिल गयी, मुझे देख ते hi वो दौड़ कर मुज से लिपट गयी.

रंजन : (चहकते hue)Kab आया तू?

शिव : रात को.

रंजन : मुझे जगा देता.

शिव : बहोत देर से आया था तो नहीं जगाया. कैसी है तू, और एग्जाम कब है?

रंजन : में अच्छी हु और एग्जाम तुम्हारे साथ में hi है (गायत्रीदिदी भी उसी और आती दिखाई di)Thik है स्कूल के बाद मिलते hai.(Wo चली गयी)

शिव : कैसी हो दीदी?

गायत्री : (गायत्री ने देखा था की कैसे रंजन, शिव से चिपक कर कड़ी थी, और वो भी तब जब शिव सिर्फ तौलिये में tha)Achchhi हु, तुम?

शिव : में भी, आप तैयार हो जाओ, आप को मेरे साथ hi चलना है, जूही का स्कूटर मेरे पास hi है.

गायत्री : ठीक है.

में तैयार हुआ, तब तक गायत्रीदिदी भी तैयार हो गयी थी, मेने उन्हें और स्कूटर को जूही के घर छोड़ा और स्कूल की और निकल गया. जब में संयम के घर के नाके पर पंहुचा तो मेने देखा की संयम और वैस्वी निकल रही थी, नाज़िआ दीदी उन्हें bye कर रही थी, जैसे hi संयम की नजर मुँह पर पड़ी तो उसने वैस्वी को स्कूटर रोकने को बोलै, वैस्वी को कुछ समाज नहीं आया, उसने जैसे hi बराक लगाया वो कूद कर उतरी और मेरी और भागी, उसे ऐसे भागता देख नाज़िआदिदी की भी नज़र मुज पर गयी, मुझे देख कर उनके भी चेहरे पर मुस्कान आ गयी. वो संयम को ऐसे शिव से मिलते देख उसको जलन हुई क्यों की वो भी इसीतरह शव से मिलना चाहती थी पर ऐसा वो कर नहीं शक्ति थी. शिव के पास पहुंच कर

संयम : तुम आ गए (वो हांफ रही thi)Kitne दिन हो गए, कैसे हो? मेरे मश्ग तो मिलते थे न तुम्हे, तुमने तयारी तो की है न?

शिव : (मुस्कुराते hue)Are रुक, रुक, कितने सवाल पूछेगी? है में आगया, रात को आया, और तुम्हारे मश्ग मिले थे, जिसकी वजह से मुझे पढ़ाई में आसानी हो गयी थी, थैंक यू.

वैस्वी : संयम, देर हो रही है.

संयम : चल, स्कूल में मिलते है, bye.

शिव : Bye, (वो दौड़ कर फिर से स्कूटर पर बेथ गयी, वैस्वी ने स्कूटर बढ़ा दिया, पर संयम जाते जाते भी पीछे मुद कर मुझे हाथ हिला रही थी, मेने भी मुस्कुरा कर हाथ हिलाया, जब वो दूर निकल गयी तो में नाज़िआ दीदी के पास पंहुचा, उनके चेहरे की खुसी मनो समां नहीं रही thi)(Nazia ने आस पास देखा तो लोग थे, उसका दिल कर रहा था की वो शिव से लिपट जाये, पर वो ऐसा कर नहीं shaki)Kaisi हो दीदी?

नाज़िआदिदी : बहोत अच्छी, तुम कैसे हो, कितने दिन हो गए तुम्हे देखे, कहा चले गए थे, मेरा मान कर रहा था तुम्हे फ़ोन करने को पर फिर नहीं किआ.

शिव : क्यों नहीं किआ, कर लेती.

नाज़िआदिदी : में तुम्हे देखते हुए ये कहना चाहती थी शिव.

शिव : क्या दीदी?

नाज़िआदिदी : (वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, चेहरे की ख़ुशी तो जैसे छुपे नहीं छुप रही थी, आँखों में आंसू तक छलक आये थे) तुम... तुम ...(वो हांफ रही thi)Tum, बाप बन नेवले ho.(Wo इतना मुस्कुरा रही थी, की क्या कहु)

शिव : (मुझे भी ये सुन कर बहोत खुसी हुए, मेने उनकी दोनों और से बाह पकड़ li)Sach?

नाज़िआदिदी : (उन्होंने है में गर्दम हिलायी और मेरी और झुकी, वो मेरे गले लग्न चाहती थी, पर ऐसे बिच रस्ते वो कर न payi)Shiv में तुम्हारे गले लग्न चाहती हु, प्लीज आज स्कूल से घर आना, में इतनी खुस हु की में बता नहीं सकती, आओगे न.

शिव : ठीक है दीदी, में स्कूल से छूट कर आ जाऊंगा.

में उन्हें देखते हुए स्कूल की और बढ़ चला, उन्होंने हाथ हिला कर मुझे bye कहा, मेने भी bye कहते हुए, स्कूल की तरफ दौड़ लगा दी. (नाज़िआ शिव को जाते हुए देखती रही, उसने अपने पल्लू से अपने आंसू पोछे और हस्ती हुई अपने घर की और चल पड़ी) में भी खुस था, ये मेरा दूसरा बच्चा था, एक अजीब सा आनंद मुझे महसूस हो रहा था, में जब स्कूल पंहुचा तो क्लास सुरु हो चुकी थी. में दरवाजे पर खड़े रे कर बोलै

शिव : मई ी के इन मैडम?

बीनमदं : (जसी hi उसने दरवाजे की और देखा तो शिव खड़ा था, वो एकदम से खुस हो गयी, और शिव की और बढ़ने लगी, पर जैसे hi एक कदम बढ़ाया, उसे एहसास हुआ की वो क्लास में है, वो रुक गयी और अपने आप को सँभालते hue)H..ha, आ jao.(Me उनको देखते हुए अंदर आया, हमारी आँखों ने जैसे हज्जारो बाटे कर ली, मेने देखा की वो अपनी उंगलिया आपस में रगड़ रही थी, इतनेदिन बाद मिलने की उनकी बेचैनी मुझे साफ़ नज़र आ रही थी, में अपनी जगह की और बढ़ा, मेरे दोस्तों के चेहरे पर भी खुसी थी, पूरा क्लास मुझे देख रहा था, संयम, मुस्कुराते हुए और वैस्वी ऐसे hi.

में अपनी जगह बेथ गया और क्लास सुरु हो गयी. मैडम ने एग्जाम के बारे में बाते की और किस तरह के सवाल आ शक्ति है उसकी भी चर्चा की. सब ध्यान से सुन रहे थे.

नाज़िआ घर जा कर दोपहर की तैयारिओं में जुट गयी, वो शिव के लिए कुछ खास बनाना चाहती थी. उसने पहले नामकिनबनाया फिर मीठा बनाने लगी. जब उसकी अम्मी रसोई में आयी थो उसने भी देखा की उसकी बेटी खाने की तैयारियां कर रही है, उसकी कुछ समाज में नहीं आया क्यों की अभी खाना बनाने की देर थी और वो मिठाई बना रही थी.

अम्मी : क्या बात है बेटी मिठाई बना रही हो, दामादजी आनेवाले है क्या?
 
अपडेट 96

अम्मिणे जब पूछा की दामादजी आनेवाले है क्या तो, उनकी बात सुन कर नाजीअ अंदर तक खुस हो गयी, क्यों की सच में उसके लिए तो उसकी अम्मीका दामाद hi आनेवाला था, पर वो अम्मी को तो ऐसा नहीं कह शक्ति थी, वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका कर बोली.

नाज़िआ : अम्मी, शिव आनेवाला है.

अम्मी : शिव, वो क्यों? (अम्मी की समाज में कुछ नहीं आ रहा था, क्यों की काफी दिनों से उसने भी शिव को नहीं देखा था, और अपनी बेटी का साथ देने के लिए उसने शिव और नाज़िआ के रिश्ते को भी काबुल कर लिया था, पर अभी तक उसका कोई नतीजा नहीं मिला था, उसे भी लगने लगा था की खोट उसकी बेटी में hi है)

नाज़िआ : वो, अम्मी... (कुछ बोलने में जबान उसका साथ नहीं दे रही थी)

अम्मी : (गहरी साँस छोड़ते हुए) देख बेटी, मेने तेरी बात मान के तुजे ऐसे रस्ते पर जाने दिया जिसकी इजाजत समाज नहीं देता, मेने सोचा था की अगर इस से मेरी बेटी का भला होता है तो यही सही. पर अब नतीजा तेरे सामने है, अगर कुछ होना होता तो अब तक हो चूका होता, मेरे ख्याल से अब तुजे मान लेना चाहिए की संतान का सुख तेरे नसीब में नहीं है, और सोच अगर किसी को तेरे और शिव के सम्बन्ध के बारेमे पता चल गया तो क्या होगा, हम किसी को मुँह दिखने काबिल नहीं रहेंगे, और ऊपर से उनको तलाक का एक और बहाना मिल जायेगा.

नाज़िआ : (उसने गैस बंद की, और अपनी अम्मी के पास gayi)Ammiii (उनके दोनों हाथ पकड़ कर) अम्मी आप ने मेरा बहोत साथ दिया, मेरी मुस्किलो में आप मेरे साथ रही, मेरी ऐसी बेहूदा मांग को भी अपने स्वीकार किआ.

अम्मी : (उसकी आँखों में देखते hue)Wohi तो कह रही हु बेटी, अब छोड़ दे उस रस्ते को, तेरी किस्मत hi ख़राब है.

नाज़िआ : अम्मी सुनोतो, अम्मी (वो कुछ पल रुक गयी, क्यों की उसे शर्म भी आ रही thi)Ammi, इस महीने मेरी माहवारी नहीं आयी है.

अम्मी : (अपनी बेटी की बात सुन कर, उनके चेहरे पर खुसी चालक aayi)Kya सच? (नाज़िआ ने शरमाते हुए, हां में गर्दन hilayi)To पहले क्यों नहीं बताया, कितना टाइम हो गया?

नाज़िआ : एक हफ्ते से ऊपर हो गया अम्मी, में पहले कन्फर्म करना चाहती थी, मेने प्रेग्नेंसी टेस्ट की स्ट्रिप से भी पता किआ, उसमे भी यही आया की में प्रेग्नेंट हु.

अम्मी : (अपने हाथ इबादत के लिए उठाते hue)Ya क्स्ड, तेरा लाख लाख सुक्रिया, तूने मेरी बेटी को एक नयी जिंदगी दी है, उस पर हमेसा अपनी रेहमत बनाये रखना. (नाज़िआ se)Tune किसी को बताया?

नाज़िआ : (उसका चेहरा खुसी से फुला नहीं समां रहा था, अपनी अम्मी के सामने उसे शर्म भी आ रही थी, क्यों की वो उसकी राजदार भी thi)Ammi, सिर्फ शिव को बताया है. में सब से पहले उसे hi बताना चाहती थी. (वो इतना शर्मा रही थी की वो अपनी ामी से भी नज़ारे नहीं मिला प् रही थी)

अम्मी : (वो भी अपनी बेटी के जज्बात को समाज रही थी) कोई बात नहीं, तू तयारी कर, और अपने ससुरालवालों को अभी खबर मात करना, हफ्ता 10 दिन रुक जाना, डॉक्टर से भी मिल लेना, और उनकी रिपोर्ट के बाद hi उनको बताना, (थोड़ा गुस्से se)bade आये मेरी बेटी को बांज कहनेवाले, अपने बेटे की खोट तो दिखाई नहीं देती और मेरी फूल सी बेटी को बदनाम कर रहे थे. ऊपरवाला सब देखता है, (नाज़िआ को) तू कर तयारी बेटी, में उपरवाले का सुक्रिया कर के आती hu.(Unki आँखों से आंसू बह रहे थे, जिसे देख नाज़िआ की आंखे भी नाम हो गयी)

नाज़िआ : अम्मीय

अम्मी : (अपने आंसू पोछते hue)Are नहीं बेटी, ये तो खुसी के आंसू है, में बहोत खुस हु (वो बड़बड़ाते हुए जाने lagi)bade आये मेरी बेटी पर इल्जाम लगनेवाले, मेरी फूल सी बच्ची को रुलाया, उसे दुखी kia...(Pata नहीं क्या क्या बाद बढ़ाते हुए वो अपने कमरे में चली गयी, नाज़िआ ने भी अपने आंसू पोछे और फिर से काम में लग गयी)

स्कूल में जब हम तीनो दोस्त नास्ता कर रहे थे तो भी एग्जाम की hi बाते कर रहे थे. दोपहर को स्कूल ख़तम होने के बाद भी हम सब पार्किंग में खड़े खड़े वही बाते कर रहे थे. मेने देखा की वैस्वी और संयम स्कूटर ले कर चली गयी, मेने भी अपने दोस्तों से विदा ली और घर की और निकल गया. संयम के घर के मोड पर मुझे याद आया की नाज़िआदिदी ने बुलाया था तो में उसके थार की और मुद गया. जब मेने घर की घंटी बजायी तो संयम ने hi दरवाजा खोला, वो अभी घर पहुंची थी तो स्कूल यूनिफार्म में hi थी, मुझे देख कर वो आश्चर्यचकित हो गयी.

संयम : शीइइइइव, चूम.

शिव : क्यों में नहीं आ शक्ति?

संयम :ऐसी बात नहीं है, आओ अंदर आओ, (में अंदर दाखिल hua)me तो इस्सलिये कह रही थी की अगर तुम आनेवाले थे तो मुझे कह देते, साथ में आते.

शिव : तुम तो स्कूटर से आती हो, अगर में कहता तो तुम्हे मेरे साथ चल के आना पड़ता.

संयम : तो क्या हुआ, मुझे तो अच्छा hi लगता, बैठो, कैसे तुम मेरे घर का रास्ता भूल गए?

नाज़िआदिदी : उसे मेने hi बुलाया था. (संयम ने नाज़िआदिदी की और देखा, मेने भी देखा, वो सफ़ेद सलवार कमीज़ और हरे रंग की चुन्नी लिए हुए थी, उनके चेहरे की रंगत बहोत कुछ बयां कर रही थी,





वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, उन्हें ऐसे देखने पर मेरा तो मुँह hi खुला का खुला रह गया, मेरे ऐसे देखने पर वो शर्मा गयी) बहोत दिनों से वो आया नहीं था तो मेने उसे बुला लिया.

संयम : (अपनी आप को ऐसे तैयार हुई देखते hue)Aapa, आप कितनी खूबसूरत लग रही हो, क्या जीजाजी आनेवाले है?

नाज़िआदिदी : (मान में : वो तो आ भी गए है, पर फिर अपने आप को सँभालते hue)Nahi, कोई नहीं आनेवाला, ऐसा क्यों कह रही हो?

संयम : आप इतनी तैयार हुई है इस्सलिये ऐसा कह रही हु.

नाज़िआदिदी : में कोई तैयार नहीं हुई, बस अच्छे कपडे पहने है, वैसे भी शिव को बुलाया था तो क्या घर के कपड़ो में rehti.(Me अभी भी उन्हें देख रहा था तो वो बहोत शर्मा रही थी, संयम ko)Jao तुम भी कपडे बदल लो, खाना तैयार है, चलो शिव तुम्हारे हाथ दुलवाडेति हु. (मुझे तो जैसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, संयम ऊपर चली गयी, पर में वैसे hi बैठा था, वो मुझे ऐसे देखते हुए देख रही थी, और में उन्हें, कुछ पल ऐसे hi गुजर गए पर में न उठा तो उन्होंने शर्मा कर फिर kaha)Shiiiv (में वैसे hi बैठा था, वो मेरे नजदीक आई, मेरे गाल पर थपकी देते hue)Shiiiiv.

शिव : (में हड़बड़ा gaya)H...h..ha?

नाज़िआदिदी : (उसे बहोत शर्म आ रही thi)Chalo, हाथ धो लो.

शिव : H....h..ha? (में खड़ा हुआ, वो मुझे अंदर ले गयी, जैसे hi हम अंदर गए वो मेरे गले लग गयी)

नाज़िआदिदी : शिईयिव (मेने भी उन्हें अपनी बहो में भर liya)Me तुम्हे गले लगाने को तरस गयी थी Shiv.(Me उन्हें बहो में भर उनकी पीठ को सेहला रहा tha)Aise क्या देख रहे थे, पता है मुझे कितनी शर्म आ रही थी.

शिव : आप बहोत खूबसूरत लग रही थी.

नाज़िआदिदी : (ये सुन कर उसका रोम रोम खुस हो gaya)Tumhare लिए hi तो तैयार हुई थी, (उसको अपनी बहो में कस्ते hue)par ऐसे कोई देखता है, संयम को कैसा लगता अगर वो देख लेती तो.

शिव : सॉरी, पर में अपने आप को रोक नहीं पाया.

नाज़िआदिदी : (कोई बात नहीं, तभी हमे सीडीओ से आवाज आयी तो हम दोनों अलग हो gaye)Lo हाथ धो लो. (वो मेरे हाथ धुलवाने लगी, मुझे तौलिया दिया, मेने हाथ पोछ कर उन्हें वापस दे दिया, में बहार चला गया, वो भी बहार आ गयी, संयम मुझे ऊपर से निचे आती दिखाई दी, उसे देख कर भी में देखता रह गया,





वो भी अच्छे कपडे पहन कर आयी थी, मुझे अपनी और ऐसे देखते देख वो भी शर्मा गयी, मेने अपने आपको संभाला और आगे सोफे पर बेथ गया)

नाज़िआदिदी खाने की टेबल सजाने लगी, संयम ने भी मुझे शर्मा कर देखा और वो भी अपनी दीदी का हाथ बताने लगी.

नाज़िआदिदी : तू क्यों इतना तैयार हुई?

संयम : आप ऐसे तैयार हुई है तो क्या में नहीं हो शक्ति (असल में उसने शिव को अपनी दीदी को देखते हुए देख लिया था, वो अंदर से जलभुन गयी थी, पता नहीं पर उसे अच्छा नहीं लगा था की शिव किसी और को ऐसे देख रहा है, इस्सलिये वो भी तैयार हो कर आयी थी, और जब शिव ने उसे ऐसे देखा तो वो भी बहोत खुस हो गयी थी, दोनों ने खाना lagadiya)Chalo शिव, खाना कहते है.

शिव : अंकल और आंटी?

नाज़िआदिदी : अब्बू तो बहार गए है, में अम्मी को बुलाती हु, वो अपने कमरे में है. (वो उन्हें बुलाने चली गयी, आंटी भी आगयी उन्होंने अपने शिर को कपडे से ढाका हुआ था, मुझे देखते hi वो भी खुस हो गयी)

आंटी : अरे शिव, कैसे हो बीटा, बड़े दिनों बाद दिखे.

शिव : है आंटी wo...(Me अपना वाक़्या पूरा करता उस से पहले hi)

संयम : इससे अपने खेल से फुर्सत मिले तब न आये, दस दिनों से वो किसी कैंप में गया हुआ था, अम्मी आपको पता नहीं पर अब ये बहोत बड़ा खिलाडी बन गया है, अब इससे हमारे लिए फुर्सत कहा. (मेने आंटी के पेअर छुए, वो मेरे शिर पर हाथ फिरते हुए)

आंटी : मेरे बच्चे को नज़र न लगा, में उपरवाले से दुआ करुँगी की तुजे खूब तरक्की दे.

शिव : थैंक यू आंटी.

आंटी : आओ खाना कहते है.

संयम : (हम सब खाना खाने टेबल पर बेथ गए, खाने को देखते हुए) आज तो लगता है दावत है, इतना सारा खाना.

नाज़िआदिदी :(दन्त ते हुए) चुप चाप खाना खा, ये आनेवाला था तो बनाना hi था.

संयम : इतना खाना तो आप जीजू के आने पर भी नहीं बनती, (मेरी और देख kar)Tumhare तो मज़े है, मुझे नहीं पता था की मेरी फॅमिलिय में तुम्हारी इतनी इज्जत है, यार तुम रोज़ आया करो, इस बहाने मुझे भी तो अच्छा अच्छा खाना मिलेगा.

आंटी : कितना बोलती है, ऐसे चपड़ चपड़ करती रहेगी तो कोण शादी करेगा तुजसे. ये भी नहीं सोचती की कोण बैठा है.

संयम : शिव hi तो है, और रही बात शादी की, तो मुझे तो शादी करनी hi नहीं है.

आंटी : सब लड़कीअ यही कहती है, पर फिर उसे शादी करके जाना hi पड़ता है.

संयम : में जूथ मुठ का नहीं कह रही, और वैसे भी आप को देख कर मेरा िर्रादा और पक्का हो गया है, में शादी नहीं करनेवाली.

आंटी : कुछ नहीं हुआ तेरी आप को, वो भी जल्दी hi खुसी खुसी अपने ससुराल लोट जाएगी. तू चुप चाप खाना खा.

संयम : ऐसे कैसे लौट जाएगी, वो लोग तो...

आंटी : चुप कर बोलै न, (नाज़िआ se)Beti तू शिव को खाना परोस, इसका तो चलता hi रहे गए, उसे भूख लगी होगी.

नाज़िआदिदी : जी अम्मी. (वो मुझे खाना परोसने लगी, खाने की आइटम से पूरी थाली भर गयी थी, उन्होंने एक कटोरी मेरी और बढ़ा कर kaha)Lo, इस से शुरुआत करो. (मेने देखा की कटोरी में पतली पतली सेव जैसा कुछ है और साथ में दूध भी था, मेने कभी ऐसा कुछ नहीं खाया था तो में कटोरी को देख रहा tha)Aise क्या देख रहे हो, ये सिवैया hai(unhone खुद एक चम्मच उठायी और मेरे सामने ले आयी, मेने उनकी और देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, मेने अपना मुँह खोल दिया, उन्होंने चम्मच मेरे मुँह में दाल दिया, मेरा मुँह मीठेपन के एहसास से भर गया, सच में वो जो भी था वो बहोत स्वादिस्ट tha)Kaisi लगी?

शिव : (मेरे चेहरे पर कुछ अच्छा खाने के बाद जैसे भाव आते है वैसा tha)Bahot स्वादिस्ट. ऐसा मेने पहले कभी कुछ नहीं खाया.

नाज़िआदिदी : साथ में ये नमकीन भी खाओ, अच्छा lagega(Unhone एक और निवाला मेरे मुँह के सामने कर दिया, उसे खिलते वक़्त उनकी उंगलिअ भी मेरे मुँह में चली गयी, उस एहसास से नाज़िआने अपनी आंखे बंद कर ली, ये तो अच्छा था की किसी का ध्यान नहीं था)

शिव : आप भी खा लीजिये, में खा लूंगा.

नाज़िआदिदी : (वो मुस्कुरायी और मेरे बाजु की कुर्शी पर hi बेथ गयी और अपनी प्लेट में खाना निकलने lagi)(Nazia ने एक निवाला लिया, उसके हाथ पर अभी भी शिव के मुँह का एहसास था, उसने अपनी उंगलिअ भी निवाले समेत अपने मुँह में घुसा दी, एक बार फिर से उसकी आंखे बंद हो गयी)

संयम : आप, पता है खाना स्वादिस्ट है, पर क्या अपनी उंगलिया hi खा जाओगी क्या. (नाज़िआ हड़बड़ा गयी)

नाज़िआदिदी : तू चुप चाप खाना नहीं खा शक्ति.

हम खाना खाने लगे, नाज़िआदिदी मेरी प्लेट से खाना काम hi नहीं होने दे रही थी, जैसे hi कुछ ख़तम होता वो भर देती, मुझे उन्हें रोकना पड़ा.

शिव : बस दीदी, कितना खिलाओगी, मेरा पेट भर गया है.

नाज़िआदिदी : अभी तुमने खाया hi कितना है.

शिव : दीदी आपके पेट में जगह होगी क्यों की आप खा नहीं रही सिर्फ मुझे खिला रही है, सच में मेरा पेट भर गया है, आप भी खा लो. (संयम भी खा चुकी थी तो वो उठ गयी और अपने हाथ धोने चली गयी, आंटी भी उठ गयी थी) आपने अभी ये क्या था, है सेवइया, ये तो खायी hi नहीं.

नाज़िआदिदी : (उन्होंने संयम की और नज़र दौड़ाई, फिर धीरे से boli)Tum hi खिला दो, मुझे तुम्हारे हाथ से मुँह मीठा करना था. (में मुस्कुराया और एक चम्मच ले कर उनके मुँह में रक्खा, उनके चेहरे की खुसी देखने लायक thi)(Jaise hi नाज़िआने देखा संयम आ रही है, वो सीधी बेथ गयी और अपना शिर झुकाये खाने लगी, पर उसके चेहरे की वो रंगत काम होने का नाम नहीं ले रही थी)

सब का खाना ख़तम हो गया, खाने के बाद में कुछ देर रुका, (नाज़िआ ने बहोत कोशिस की, की उसे थोड़ा सा वक़्त मिल जाये पर संयम छोड़ hi नहीं रही थी)

शिव : थैंक यू दीदी, इतना अच्छा खाना खिलने के लिए, अब में चलता हु.

नाज़िआदिदी : थोड़ी देर रुक जाओ न.

शिव : नहीं दीदी, मुझे जाना होगा, पढाई भी करनी है.

नाज़िआदिदी : फिर कब आओगे?

शिव : जब भी आप बुलाओ.

संयम : बड़ा आया, जब भी आप बुलाओ, जब में कहती हु तो हजार बहाने तैयार होते है, आप ये बस यु hi कह रहा है, आप बुला कर देखना तब पता चलेगा, किसी न किसी बहाने से ताल देगा.

हम सब मुस्कुराये, ऐसे hi थोड़ी देर बाद मेने उनसे विदा ली और घर चला आया. लतादिदी मेरी रह देख रही थी. मेने दीदी को सॉरी कहा और जो हुआ था वो बता दिया. फिर मेने अपने हाथो से दीदी को खाना खिलाया, तब जा कर उनके चेहरे पर रंगत आयी. फिर में पढ़ाई करने लग गया. शाम को जूही के साथ स्टेडियम चला गया. प्रैक्टिस के बाद में घर चला गया, फिर पढ़ाई करने लगा. दूसरे दिन जब में स्कूल में रेसस्स में जा रहा था तो बिना मैडम सामने मिली, मुझे देख कर वो रुक गयी, मेने हर्ष और महेश को आगे जाने को बोलै और में मैडम के पास चला गया.

शिव : कैसी है आप?

बिना :(नाराजगी से मुझे देखते हुए, धीमी आवाज me)Itne दिनों बाद आये, पर तुम्हे ये इच्छा नहीं हुई की एक बार मिल लू. मुझे लगा था की कल तुम जरूर मुज से मिलने आओगे. में तुंहारी कितनी राह देख रही थी.

शिव : सॉरी, कल में व्यस्त था, सचमे मेरा भी मान था आपसे मिलने का पर एग्जाम की पढ़ाई की वजह से टाइम hi नहीं मिला, आज आता हु आपसे मिलने.

बिना : कोई जरुरत नहीं, पहले एग्जाम की तयारी करो, एग्जाम के बाद मिलते है.

वह आते जाते सब मैडम को गुड मॉर्निंग बोल रहे थे तो ज्यादा बात संभव नहीं थी, वो अंदर चली गयी, में भी चला गया. स्कूल से में घर चला गया, खाना खाया और दीदी को बोल कर अपनी किताबे ले कर बिना मैडम के घर चला गया.

बिना घर आ गयी और सोफे पर बेथ गयी. आज खाना बनाने का भी मान नहीं हो रहा था, पर भूख लगी थी तो उसने सैंडविच बनाया और खा लिया. वो पिच्छले कुछ दिनों से बेचैन थी, उसके साथ जो हो रहा था उसका उसे अभी भी यकीं नहीं आ रहा था. उसके पीरियड्स नहीं आये थे, पहले भी कभी कभार ऐसा होता था, उसके पीरियड एक दो दिन लेट हो जाते थे, पर इस बार पांच दिन हो गए थे, पर पीरियड अभी तक नहीं आये थे. वो बड़ी दुविधा में थी क्यों की ऐसा होना संभव नहीं था, ऐसा तो था नहीं की उसकी सास जूथ बोल रही हो, और इतने सालो से, कोई प्रोटेक्शन उसे न करने से भी उसका गर्भ नहीं ठहरा था, वैसे उसने सेक्स ढंग से किआ hi नहीं था, पर फिर भी जैसा उसकी सास ने बताया था की ये संभव नहीं है तो उसने भी मान लिया था की ये संभव नहीं है. पर आज उसे पीरियड का पांचवा दिन था, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ था. वो सोच रही थी की क्या वो प्रेग्नेंट है? पर उसका उसे जवाब नहीं मिल रहा था. वो वही सोफे पर लेते लेते ये सोच hi रही थी की दरवाजे की घंटी बजी. उसका बिलकुल मान नहीं था उठने का, पर दरवाजे पर कोई था तो उठना तो था hi, वो बे मान से उठी और दरवाजा खोला, सामने शिव खड़ा था. वो बास उसे देख रही थी.





शिव : क्या देख रही है मैडम, में शिव. (उसने शिव को अंदर खिंचा और दरवाजा बंद कर दिया और उसके शाइन से लिपट gayi)(Mene भी मैडम को बहो में भर लिया, हम दोनों एक दूसरे को बहो में लिए खड़े थे, थोड़ी देर baad)Kya हुआ? (वो कुछ नहीं बोली, बस मुज से चिपक कर कड़ी rahi)Kya हुआ, कोई परेशानी है?

बिना : ऐसा क्यों पूछ रहे हो? (उसके शाइन से चिपके अपनी आंखे बंद किये हुए hi उसने पूछा)

शिव : आप का चेहरा बता रहा है की आप परेशान हो, कुछ हुआ है क्या?

बिना : Mere...(Wo क्या बोले कुछ समाज नहीं आ रहा था, फिर कुछ देर ख़ामोशी छायी रही)

शिव : मेरे ...kya?(Use बहोत शर्म आ रही थी, वो शिव से कैसे कहे उसे समाज नहीं आ रहा था, वो बस उसके शाइन से लगी कड़ी rahi)(Muje कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Kya हुआ मैडम? कुछ बताइये तो समाज में आये.

बिना : (वो मुस्कुरायी, पर उसे बहोत शर्म आ रही thi)Muje बहोत शर्म आ रही है शिव.

शिव : शर्म क्यों आ रही है, मेने तो कुछ किआ भी नहीं.

बिना : क्या किआ नहीं, सब तो कर चुके हो.

शिव : तो उसके लिए अभी क्यों शर्मा रही है?

बिना : वो बात नहीं है.

शिव : वो बात नहीं है तो क्या बात hai(Mene उन्हें अपने से थोड़ा दूर किआ और उनकी आँखों में देखा, वो भी मुझे देख रही थी और मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी) क्या हुआ, कुछ बताइये तो.

बिना : (फिर शिव के शाइन में समां गयी, और उसकी छाती पर शर्ट को मसलते hue)Wo wo...mere....mere period...miss...

शिव : (उनकी बात सुन कर मुझे झटका लगा, क्यों की स्नेहा मैडम और नाज़िआदिदी तो चाहते थे की प्रेग्नेंट हो पर बिना मैडम का ऐसा कोई इरादा नहीं था, क्या वो खुस है या परेशान मेरे समाज में नहीं आ रहा tha)Matlab आप... (में भी सीधे सीधे पूछ नहीं प् रहा था)

बिना : (उसे तो इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से नज़र भी नहीं मिला प् रही thi)Shayad...

शिव : आप परेशां है की खुस है?

बिना : पता नहीं, पर ऐसा हो नहीं शक्ति शिव?

शिव : (मेरी कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Kyu नहीं हो शक्ति? मुझे लगा था की शायद आप यही चाहती थी, इसीलिए मुझे अंदर झड़ने से कभी आपने रोका नहीं. अगर आप ऐसा नहीं चाहती थी तो आपको मुझे रोकना चाहिए था, की में अंदर न निकलू.

बिना : (अपने अंदर शिव के वीर्य निकलनेवाला दृश्य याद आते hi वो और शर्माने lagi)Shiiiiv.

शिव : क्या आप ऐसा नहीं चाहती थी?

बिना : ऐसी बात नहीं है शिव, पर ये मुमकिन नहीं हहि.

शिव : क्या मुमकिन नहीं है? अगर मर्द और औरत ये सब करेंगे तो ये होना तो तय है.

बिना : तुम्हारी बात सही है पर मेरे साथ ये संभव नहीं है.

शिव : ऐसा क्यों लगता है आप को?

बिना : है ऐसा कुछ, पूरी बात तो में भी नहीं जानती पर इतना तो पता है की में माँ नहीं बन शक्ति.

शिव : (ऐसा hi कुछ तो ममता भाभी भी कह रही थी, ये क्या हो रहा है? मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा tha)Aap में कोई खराबी है जो आप माँ नहीं बन शक्ति.

बिना : नहीं, मेरे अंदर कोई खराबी नहीं है.

शिव : तो फिर? आप को इतना आश्चर्य क्यों है? और आप सूरे hi हो की आप माँ बन ने वाली हो?

बिना : (ऐसा सुन कर की वो माँ बन ने वाली है, उसका रोम रोम खुसी से झूम उठा.) पता नहीं शिव, मुझे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं है.

शिव : आइये बैठिये (मेने उन्हें सोफे पर बिठाया, मेने कुछ देर सोचा, फिर फ़ोन लगाने लगा)

बिना : किसे फ़ोन कर रहे हो? (मेने उन्हें चुप रहने का इस्सर किआ, वो चुप हो गयी पर मुझे देख रही थी)

शिव : Hello, में शिव बोल रहा हु.

सामने से : मुझे पता है, तुम भले hi अपना नंबर न दो पर मुझे पता है.

शिव : सॉरी, वो में जल्दी जल्दी में चला गया था तो में दे नहीं पाया, आप कैसी हो?

सामने से : बहोत दिनों बाद ये पूछ ने का ख्याल आया? में अच्छी हु, तुम कैसे हो? अब तो नौकरी भी छोड़ दी है तो मिलने का होता hi नहीं.

शिव : मेने नौकरी छोड़ी है, पर दूसरी कर भी ली है, अभी एग्जाम की वजह से नहीं आया पर जल्दी hi ज्वाइन कर लूंगा, सर ने बताया नहीं आप ko?(Samne स्नेहा मैडम थी)

स्नेहा : है बताया था, कहो कैसे फ़ोन किआ, फ़ोन कर रहे हो, मिलने नहीं आ शक्ति थे?

शिव : आऊंगा मिलने, पर अभी एक काम के लिए फ़ोन किआ था.

स्नेहा : है बोलो.

शिव : अगर कोई औरत प्रेग्नेंट है की नहीं ये कैसे पता चलेगा? (बिना मैडम मेरा फ़ोन खींचने की कोशिस करने लगी, तो मेने उन्हें मन किआ और चुप रहने का इस्सर किआ)

स्नेहा : तुम्हे ऐसी क्या जरुरत ाँ पड़ी?

शिव : बताओ न प्लीज.

स्नेहा : पहले मुझे बताओ.

शिव : वो में नहीं बता शक्ति, अगर आपको बताना है तो बताओ.

स्नेहा: तुम भले hi न बताओ पर में समाज गयी, मेरे जैसी hi कोई है, जिसकी तुम इज्जत उछालना नहीं चाहते, ठीक है में बताती हु, क्या जानना है तुम्हे?

शिव : उनके पीरियड मिस हो गए है, अब वो सूरे नहीं है की वो प्रेग्नेंट है की नहीं.

स्नेहा : देखा, मेने सही गेस किआ था न, तुम उसके लिए मान से बात कर रहे हो, मतलब वो तुम से बड़ी है, कोई बात नहीं, में नाराज़ नहीं हु, वैसे भी में उसका दर्द समाज शक्ति हु. ठीक है सुनो, अगर उसे सूरे होना है तो वो डॉक्टर के पास जा शक्ति है, और अगर खुद से hi पता करना है तो मेडिकल स्टोर पर प्रेगनेंसी चेक की स्ट्रीप मिलती है, उस से भी तुम पता कर शक्ति हो, अगर मेरी हेल्प चाहिए तो में आ शक्ति हु, में किसी को नहीं बताउंगी, इतना तो भरोसा है न मुज पर.

शिव : पागलो जैसी बात मात कीजिये, अगर आप पर भरोसा न होता तो क्या में आप को फ़ोन करता, ठीक है आप मुझे उस का नाम भेज दीजिये, में ले आता हु.

स्नेहा : उसके नाम की कोई जरुरत नहीं, तुम मेडिकलवाले से कहना की अच्छी कंपनी की प्रेग्नेंसी चेक करने की स्ट्रिप दीजिये तो वो दे देगा, और अगर ज्यादा सूरे होना है तो दो ले लेना.

शिव : ठीक है, थैंक यू.

स्नेहा : थैंक यू के बच्चे, अपने बच्चे की इस माँ को कब मिलने आ रहे हो?

शिव : (मुस्कुराते hue)Jald hi आता हु, bye.(Unhone भी bye कहा, मेने फ़ोन रख दिया.)

बिना : (चिंतित हो kar)Kis से बात कर रहे थे, शिव किसी को पता चल गया तो... तुमज्जंते हो फिर भी.

शिव : (उनका हाथ पकड़ kar)Aap को भरोसा नहीं मुज पर?

बिना : ऐसी बात नहीं है शिव, पर दर लगता है.

शिव : वो छोडो, में मेडिकल से अभी प्रेगनेंसी टेस्ट की स्ट्रिप ले आता हु. (में गया और ले आया, हम दोनों उसे देख रहे थे, पीछे इंस्ट्रक्शन लिखी हुई थी, वो पढ़ कर मेने स्ट्रिप nikali)Yaha आप को अपने उऋण की बून्द डालनी है. (वो मेरी बात से शर्मा gayi)Ab जाइये और चेक kijiye(Wo मेरे हाथ से स्ट्रिप लेने लगी तो मेने अपना हाथ पीछे खिंच लिया, वो और शर्मा gayi)Agar पता न चले तो मुझे बुला lena(Wo बहोत शर्मा रही थी, और मुस्कुरा रही थी, मेने उन्हें स्ट्रिप दी और वो शरमाते हुए बाथरूम में जाने lagi)Aur सुनिए, इसके ऊपर नहीं करना है, टम्ब्लर में मूतना और फिर उसके ऊपर एक दो ड्राप डालना. (वो शर्मा कर अंदर भाग गयी, में वही उनका इंतजार करने लगा, थोड़ी देर बाद वो स्ट्रिप लिए बहार आयी, वो बहोत शर्मा रही थी, उन्होंने वो स्ट्रिप मुझे दी, मेने स्ट्रिप देखि, फिर से इंस्ट्रक्शन पढ़ी, उसमे लिखा था की अगर अंदर दो धारिया दिखे तो मतलब है प्रेग्नेंट है. मेने देखा तो अंदर दो धारिया hi थी, मतलब वो सच में गर्भवती थी, मेने उनकी और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, मेने है में इस्सर किआ तो वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका li)Aap प्रेग्नंट हो, मैडम. (पर फिर मेरे चेहरे पर गंभीरता आ गयी) क्या आप चाहती थी? (उन्होंने मेरी और देखा, वो मेरी बात का मतलब समाज रही thi)(Beena ने शिव के चेहरे को चिंतित देखा, शायद वो समाज रहा था की में ऐसा नहीं चाहती और ऑक्सिडन्टी प्रेग्नेंट हो गयी हु, में उठी और उसकी गॉड में बेथ गयी और उसके होठो को चूसने लगी, सच में में बहोत खुस थी, भले hi ये मेरे लिए अविश्वसनीय था पर ये सच हो चूका था, में सच में गर्भवती थी, ये एहसास कुछ अलग hi था, और शिव मेरे गर्भमे आये इस बच्चे का बाप था, मेरा पूरा नजरिया hi बदल गया था उसके लिए, में बड़े प्यार से उसके होठो को चूस कर उसका सुक्रिया कर रही थी, उसने भी मुझे अपनी बाहोंमे भर लिया था)

बिना : में परेशान नहीं हु, खुस हु पागल, बस मुझे यकीं नहीं हो रहा की में सच में तुम्हारे बच्चे ki....(Wo इतनी शर्मा गयी की वो मेरे साइन से लग गयी)

शिव : एक और भी स्ट्रिप है, फिर से चेक कर लीजिये, कन्फर्म हो जायेगा.

बिना : मेने तो वो फेंक दिया था.

शिव : तो फिर से कर लीजिये.

बिना : इतना जल्दी थोड़ी न फिर से होगा.

शिव : तब तक क्या करेंगे?

बिना : क्या करेंगे से क्या मतलब hai(Wo मेरे होठो को चूसने लगी, में भी चूसने लगा)

आज बिना को शिव एक अलग hi व्यक्ति लग रहा था, वो उसके साथ इतना जुड़ाव महसूस कर रही थी की ऐसा लगता था की वो उसका hi है. उसके होतो को चूसने से उसका लुंड खड़ा होने लगा जिसको वो अपने नीचे महसूस कर रही थी, वो उसकी गॉड से उठी और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने बैडरूम में ले गयी, उसने शिव के शर्ट के बटन खोल दिए और उसके पंत को भी खोल कर नीचे सरका दिया. उसने खुद अपनी साड़ी निकल दी, और शिव को बाकि सब खोलने का इस्सर कर दिया, वो शिव के लुंड को अंडरवियर के ऊपर से hi सहलाने लगी, तब तक शिव उसका ब्लॉउज खोल चूका था, सुने खुद उसे उतर दिया, और अपनी ब्रा भी निकल दी. उसने शिव के अंडरवियर में हाथ डाला और नंगे लुंड को अपने हाथ में थम लिया, शिव ने उसके घाघरे का नाडा खोल दिया तो वो निचे गिर गया. उसने शिव को बीएड पर धकेल दिया और उसकी अंडरवेअर को खींच कर निकल दिया. वो घुटनो के बल हो गयी और शिव के लुंड को चूमने लगी, ये वही लुंड था जिसने उसे माँ बन ने का सुख दिया था, वो उसे अपने मुँह में ले कर चूसने lagi)(Shiv मैडम का बदला हुआ रूप देख रहा था, वो उस से जरा भी शर्मा नहीं रही थी, उनका भरा हुआ शरीर सिर्फ पंतय में था और वो उसके लुंड को चूस रही थी, वो थोड़ा ऊपर हुआ और उनके लटक रहे स्तन को हाथ में ले कर सहलाने लगा, मैडम ने मुझे देखा और मुस्कुरायी, में उनकी पीठ पर हाथ फिरते हुए उनकी पंतय में कैद गांड को सहलाने लगा तो उन्होंने वो मेरी और कर दी ताकि मुझे आसानी हो, में उनकी भरी हुई गांड को सहलाते हुए उनके द्वारा लुंड चूसने का मज़ा ले रहा था. मेने उनकी पंतय को निकलना चाहा तो उन्होंने अपने एक हाथकी मदद से उसे निकल दिया. अब वो पूरी नंगी थी, मेने उनकी गांड को मसाला तो वो ऊपरी मेरी और हो गयी और अपनी गंगे मेरे अगल बगल रखते हुए 69 में आ गयी. उनकी रास टपकती छूट को अपने मुँह में भरते हुए में उनके कूल्हे मसलने लगा, उन्होंने मेरा लुंड बहार निकल दिया और जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उनकी छूट को छत रहा था और वो सिस्किअ ले रही थी, थोड़ी देर बाद वो फिर से मेरे लुंड को चाटने लगी. हमारा ये खेल काफी देर चला, फिर मेने उनको हटने का इस्सर किआ तो वो हैट गयी और मुझे देखते हुए अपनी टंगे फैला कर सीधी लेट गयी, में उनके ऊपर हुआ तो उन्होंने मेरा लुंड पकड़ कर सेहलाहा और अपनी छूट पर जिसने लगी, में उनके होठो को चूस रहा था, उन्होंने मेरे लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर टिका दिया तो मेने दबाव बना कर अंदर उतरने लगा, जब लुंड पूरा अंदर चला गया तो वो मुँह से लिपट गयी और जोर जोर से सांसे लेने लगी,)

बिना : एआईई शहहह.

शिव : क्या हुआ मैडम, दर्द हुआ?

बिना : वो है hi बड़ा तो सुरु में दर्द होता hi है.

शिव : सॉरी मैडम.

बिना : शिव, एक बात मानोगे?

शिव : क्या मैडम?

बिना : आज मुझे बिना कह के प्यार करो.

शिव : Par...(Mere मुँह पर हाथ रख कर)

बिना : प्लीज.

शिव : ठीक है बिना.

बिना : ओह शिव, मुझे यकीं नहीं हो रहा, में तुम्हारे बच्चे की माँ बन नेवाली हु. आज मुझे जी भर के प्यार करो.





















हम दोनों में ाक खुल कर प्यार किआ, एक घंटे बाद हम दोनों नंगे रूम में लेते थे, उनकी छूट से मेरा वीर्य बहार बह रहा था, अपने बिखरे बालो को सही करते हुए उन्होंने kaha)Muje बाथरूम जाना है. (मेने नंगे hi उन्हें उठा लिया और उनको बाथरूम ले gaya)Tum बहार जाओ.

शिव : मुझे देखना है.

बिना : ये क्या कह रहे हो?

शिव : (में उनके चेहरे की दुविधा समाज रहा tha)Thik है में बहार जाता हु.

बिना :(मेरा हाथ पकड़ kar)Muje शर्म आती है शिव. (में कुछ नहीं बोलै, बस उन्हें देख रहा tha)Thik है, वो टम्बलर लाओ. (में मुस्कुराया और टम्बलर ले आया, वो अभी भी थोड़ी असहज थी)

शिव : ठीक हे में बहार जाता हु.

बिना : ऐसा नहीं है शिव, पर मेने कभी ऐसा किसी और के सामने नहीं किआ तो शर्म आ रही है.

शिव : में समझता हु, कोई बात नहीं में नाराज नहीं हु, में बहार जा रहा हु.

बिना : (मेरा हाथ पकड़ kar)Nahi शिव, तुम टम्ब्लर पकड़ो में कर रही हु.

मेने टम्बलर उनकी छूट के सामने कर दिया, उन्होंने अपनी टंगे फैलाई, में उनकी छूट को hi देख रहा था, फिर मेने उनके चेहरे को देखा तो वो शर्मा गयी, उन्होंने अपनी छूट के होठ फैलाये और मूतने लगी, में देख पर रहा था की उनका मूत किश छेड़ से निकल रहा है, पता नहीं पर इन बेषर्मीओ में भी एक मज़ा आता था. उन्होंने अपना मूतना बंद किआ, मेने टम्बलर पास में रक्खा और में बहार से वो दूसरी स्ट्रिप ले आया. मेने अपनी ऊँगली उस पेशाब में डुबोई जो गरम था, और उसकी बुँदे मेने स्ट्रिप पर गिरायी, हम दोनों उत्सुकता से देखने लगे, पहले पहली धरी लाल हुई, हम दोनों बेशब्री से देख रहे थे, कुछ hi पालो में दूसरी भी लाल हो गयी, हम दोनों खुस हो गए, उन्होंने मुझे गले लगा लिया और मेरे होठो को चूसने लगी.
 
अपडेट 97

बिना मैडम बहोत खुस थी, को गर्भवती थी. में उनके साथ फिर से कुछ करना चाहता था पर उन्होंने मन कर दिया और कपडे पहन लिए तो मेने भी कपडे पहन लिए, मेरे चेहरे पर नाराजगी देख कर वो मुस्कुरायी और मेरे पास बेथ गयी.

बिना : में कही भागी नहीं जा रही, तुम्हारे एग्जाम आ रहे है, कैसी तयारी है तुम्हारी?

शिव : तो फिर से आप मैडम बन गयी.

बिना : मुस्कुराते हुए, क्यों सिर्फ मैडम hi ऐसे सवाल पूछती है क्या, तुम्हारे दोस्त या घर में कोई नहीं पूछता?

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं, वो भी पूछते है.

बिना : तो फिर, में न सिर्फ तुम्हारी मैडम हु बल्कि तुम्हारी सुभचिन्तक भी हु, में चाहती हु की तुम खूब तरक्की करो इसीलिए पूछ रही हु, तो क्या गलत किआ.

शिव : (में उनके प्यार को समाज रहा था तो में muskuraya)Mene तो बस ऐसे hi कहा था, मेने पूरी तयारी कर्ली है.

बिना : अगर मेरे सब्जेक्ट में कुछ डाउट हो तो पूछ सकते हो.

शिव : आप जितनी अच्छी प्रेमिका है उस से कही ज्यादा अच्छी टीचर है, तो डाउट होना संभव hi नहीं.

बिना : मुस्कुराते हुए, अच्छा, प्रेमिका?

शिव : नहीं हो क्या?

बिना : (मेरी आँखों में देख kar)Me अब सिर्फ प्रेमिका नहीं रही शिव, उस से कही आगे बढ़ चुकी हु, में तो इस लिए तुम्हे पूछ रही थी की पिछले कुछ दिनों से तुम बहार थे तो तुम मेरे साथ पढ़े नहीं हो तो अगर कुछ समाज न आया हो तो पूछ सकते हो.

शिव : वैसे तो संयम ने सरे नोट्स भेज दिए थे, पर फिर भी आप एक बार समजादे तो अच्छा hi है.

बिना : ठीक है, वैसे ये संयम तुम से काफी क्लोज है, है न?

शिव : है मैडम, वो मेरी बहोत अच्छी दोस्त है.

बिना : सिर्फ दोस्त है या ...

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi, सिर्फ अच्छी दोस्त hi है.

बिना : में तो ऐसे hi कह रही थी, अगर उस से आगे भी बढ़ना हो तो अच्छी लड़की है.

शिव : नहीं मैडम, में ठहरा एक अनाथ, मेरे खुद का कोई ठिकाना नहीं वह दुसरो को कैसे सम्भालूंगा.

बिना : वो तो अभी हो, पर मुझे पूरा यकीं है की आगे चल कर तुम एक बहोत बड़े आदमी बनोगे.

शिव : वो तो पता नहीं, तब की तब देखेंगे.

बिना : चलो कोई बात नहीं, में किताब ले आती हु.

फिर वो मुझे पद्धति रही. तक़रीबन तीन घंटे तक वो मुझे पद्धति रही, उसके बाद में स्टेडियम चला गया, जब में शाम को घर लौट रहा था तो पुलिस की जीप मेरे पास आकर रुकी, मेने देखा तो भार्गवी मैडम थी.

शिव : Hello मैडम, कैसी है आप?

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Achchhi हु, तुम कैसे हो? कहा गायब हो गए हो, दिखाई hi नहीं दिए फिर.

शिव : है मैडम, स्पोर्ट्स कैंप में गया था तो बहार था. और, सब ठीक है न मैडम?

भार्गवी : सब ठीक है, अगर टाइम हो तो चलो, थोड़ी देर बाटे करेंगे, वैसे भी बहोत दिन हो गए.

शिव : है है क्यों नहीं, चलिए. (में उनके साथ जीप में बेथ गया, और हम उनके घर पहुंच गए)

भार्गवी : तुम बैठो, में पांच मिनट में आयी. (वो अंदर चली गयी, में बेथ कर आस पास देख रहा था, थोड़ी देर बाद वो आयी, बिना बाह की टीशर्ट और जीन्स पहने वो अलग hi दिख रही थी, बिना वर्दी के वो अलग hi दिख रही थी, में उन्हें देखता hi रह गया, मुझे ऐसे देखते देख वो muskurayi)Aise क्या देख रहे हो?

शिव : नहीं, वो... आप जैसे कोई अलग hi दिख रही हो.

भार्गवी : ऐसा क्या अलग हो गया, में तो वही हु.

शिव : है, पर आप वर्दी में अलग दिखती हो, और ऐसे कपड़ो में एक आम लड़की की तरह लगती हो. (झपटे hue)Sss सॉरी मैडम, मेरा ये मतलब नहीं था.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)to क्या में लड़की नहीं हु? वो मेरा काम है, पर हु तो में लड़की hi न, तो लड़का तो लगने से rahi(Wo है पड़ी)

शिव : ममम मेरा वो मतलब नहीं था मैडम, में क्या कहु (ऐसा तो में कह नहीं शक्ति था की आप भोत खूब सूरत लगती हो या आवारा जुबान में लोग क्या क्या बोलते है, जैसे अगर हर्ष कहता तो कहता की क्या माल लग रही हो, ऐसा वैसा तो में कुछ कह नहीं शक्ति, वो पुलिसवाली थी, मार मार के मेरा पिछवाड़ा सुजा देगी, पर सच में वो कमल thi)Mera मतलब है ऐसे आप को देख कर कोई कह नहीं शक्ति की आप इतनी सख्त पुलिस अफसर है.

भार्गवी : (बैठते hue)Are भाई, हम पुलिस वालो को क्या सींग लगे होते है जो हम अलग लगेंगे, है तो हम आम इंसान hi न, चलो छोड़ वो सब, क्या पिओगे, चाय या कफ?

शिव : वैसे तो में ये नहीं पिता, पर कुछ भी चलेगा.

भार्गवी : मुझे तो चाय पीना अच्छा लगता है, वैसे भी पुरे दिन की भगा दौड़ी की बाद चाय पिने से फ्रेश फील होता है. तुम रोज क्या पिटे हो?

शिव : जी, दूध.

भार्गवी : चलो अच्छी बात है, तुम्हारे लिए दूध hi बनती हु, और मेरे लिए चाय.

शिव : ये अच्छा नहीं लगता मैडम, आप मेरे लिए कुछ बनाये, एक काम करता हु, में hi आपके लिए चाय बना देता हु.

भार्गवी : ऐसे कैसे, तुम मेरे घर आये हो, और तुम बनाओगे, तुम बैठो में बनती हु.

शिव : आप इतनी बड़ी पुलिस अफसर है, ये अच्छा नहीं लगता मैडम.

भार्गवी : में कितनी भी बड़ी अफसर क्यों न बन जाऊ, रहूंगी तो औरत hi न, और औरतो से यही आशा की जाती है की वो घर के काम संभाले, वैसे में ज्यादा कुछ नहीं करती, घर के कामो के लिए एक औरत आती है, अभी भी वो खाना बना कर गयी होगी, तो मुझे ज्यादा कुछ करना नहीं पड़ता, पर लोग तो यही उम्मीद रखते है की लड़की को रसोई सम्भालनि चाहिए.

शिव : वो मुझे नहीं पता, पर मुझे ये अच्छा नहीं लगता, चाय तो में hi बनाऊंगा, वैसे में भले न पिता हो पर मुझे आती है मैडम.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Thik है, तुम मेरे लिए चाय बनाओ, में तुम्हारे लिए दूध बनती hu.(Hum दोनों रसोई में आगये, उन्होंने मुझे सब सामान दे दिया, में उनके लिए चाय बनाने लगा, और वो मेरे लिए दूध) दूध में क्या पसंद करोगे?

शिव : जो आप को ठीक लगे मैडम. (उन्होंने मेरे लिए िलाईचीवाला दूध बनाया और मेने उनके लिए अदरक वाली चाय बनायीं, वो ले कर हम दोनों फिर आगे आ गए)

भार्गवी : (चाय की चुस्की ले kar)Ummmm, चाय तो अच्छी बनलेते हो तुम, सच में रेफ्रेसिंग है.

शिव : थैंक यू मैडम, एक बात पुछु मैडम, आप अकेली क्यों रहती है?

भार्गवी : क्यों, क्या में अकेले नहीं रह शक्ति?

शिव : मेरा वो मतलब नहीं है मैडम, पर लड़कीअ अक्सर शादी से पहले अपने घरवालों के साथ रहती है और शादी के बाद अपने ससुरालवालों के साथ. क्या नौकरी की वजह से आप को अकेले रहना पद रहा है? (भार्गवी मैडम कुछ सोच में पद गयी, मुझे लगा मेने कुछ गलत पूछ liya)Sorry मैडम, अगर मेने कुछ गलत पूछ लिया हो तो, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था, सॉरी.

भार्गवी : (वो muskurayi)Tum इतना दर क्यों रहे हो?

शिव :वो वो आप एक पुलिसवाली हो तो दर तो लगता hi है.

भार्गवी : ऐसा क्यों, क्यों दर लगता है? पुलिसवालो से दर उसी को लगता है जिसने कुछ गलत किआ हो, क्या तुमने कुछ गलत किआ है?

शिव : नहीं मैडम, पर ...

भार्गवी : पता नहीं, लोग पुलिसवालो से डरते क्यों है, और अगर वो मर्द है तो इससे अच्छा मन जाता है और अगर कोई औरत है तो बुरा, यहाँ तक की लोग शादी करने से भी कतराते है, उनको औरत चाहिए ताकि वो उसे दबा कर रख शेक, और अगर वो एक पुलिसवाली हो तो उन्हें पता है की वो ऐसा नहीं कर पाएंगे इस्सलिये वो उस से शादी करने से भी कतराते है.

शिव : क्या आप की शादी नहीं हुई (उन्होंने मेरी और देखा तो सच में में दर गया, मेरी हालत देख कर उन्होंने अपनी नज़ारे घुमा ली)

भार्गवी : हुई थी. (वो खामोस हो गयी, मेरी भी आगे पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी, पर मुझे समाज नहीं आ रहा था की उन्होंने ऐसा क्यों कहा की शादी हुई थी, क्या अब वो शादी नहीं रही, पर उनके चेहरे की गंभीरता को देख कर मुझे लगा की मुझे ज्यादा नहीं पूछना चाहिए, वैसे भी मुझे उस से क्या फर्क पड़नेवाला था, खामखा मेने उन्हें दुखी कर दिया)

शिव : सॉरी, मैडम मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था, मेने तो बस ऐसे hi पूछ लिया था. (उन्होंने फिर मेरी और देखा, पर मुझे दर नहीं लग रहा था, में भी उनकी आँखों में देख रहा था)

भार्गवी : मेने कहा न, मर्दो को सिर्फ ऐसी hi औरते चाहिए जो उनके हुकुम का पालन करे, उसे ऐसा लगा की वो ऐसा नहीं करपयेगा तो उसने शादी तोड़ दी. छोडो उन बातो को, तुम अपनी सुनाओ, कोनसे कैंप गए थे तुम. (फिर मेने उन्हें अपने बारे में सब bataya)Are वह, ये तो अच्छी बात है, वैसे स्पोर्ट्स कोटा में भी पुलिस में भर्ती होती है अगर तुम इंट्रेस्टेड हो तो, पर पहले उसके लिए तुम्हे एक लेवल तक मुकाम हांसिल करना होगा.

शिव : क्या सच में, पर अभी तो मुझे अपने खेल पर hi ध्यान देना होगा, भविस्य में सोचूंगा.

भार्गवी : अच्छी बात है, वैसे फिर तुम हमारी प्रैक्टिस में भी नहीं आये.

शिव : मेने बताया न मैडम में बहार गया था, और वैसे भी आप मुझे पटक पटक कर बहोत धोती है. (वैसे भी मेने ये बात माहौल को हल्का करने के उद्देश्य से कही थी और इसका असर भी हुआ, मैडम खिल खिला कर है पड़ी, कुछ टाइम तक वो हस्ती hi रही, फिर शांत हुई और मुस्कुराते हुए)

भार्गवी : क्या तुम्हे सच में ऐसा लगता है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Agar आप को मुझे धोना है तो बोल दीजिये में आ जाऊंगा.

भार्गवी : (फिर थोड़ा हंसी और निचे देखने लगी, फिर मेरी और देख kar)Muje पता है तुम मज़ाक कर रहे हो, क्यों की में तुम्हारी ताकत को जानती हु, तुम मेरे पटक ने से दर जाओ ये मुमकिन नहीं, अगर सच में तुम आना चाहते हो तो पहले एग्जाम ख़तम कर लो फिर आना.

शिव : ठीक है, और अगर बिच में पीटने का मान हुआ तो में आपको फ़ोन कर दूंगा. (मैडम फिर है padi)Mera मोबाइल नंबर तो आपके पास है न?

भार्गवी : है है, मेने लता से ले लिया था.

शिव : ठीक है, जब पीटने का मान करेगा तो में फ़ोन कर के आ जाऊंगा और अगर आपको लगे की आज मुझे शिव को पीटना है तो आप फ़ोन कर देना.

भार्गवी : (फिर है पड़ी) अब बस करो शिव, मुझे इतना हसने की आदत नहीं है.

शिव : अच्छा ठीक है मैडम, में चलता हु. (हम दोनों ने एक दूसरे को bye कहा, में बहार निकला, अपने शूज पहने, वो दरवाजे पर hi कड़ी थी, में जाते जाते रुक गया और उनकी और देख कर) मैडम, एक बात कहना चाहता हु, (वो मेरी और सवालिए नज़रो दे देख रही thi)iske बदले आप को जितना पीटना हो पिट लेना, जब में अगली बार aau,...(Unhe कुछ समाज नहीं आ रहा था तो अभी भी सवालिए नज़रो से मुझे देख रही थी) आप .... आप... हस्ते हुए बहोत खूबसूरत लगती ho...(Kehte कहते में वह से भाग निकला, थोड़ी दूर जा कर मेने मुद कर देखा तो वो मुझे मुस्कुराते हुए घर रही थी, मेने चिल्ला कर kaha)Me सच कह रहा हु मैडम. (और में वह से भाग gaya)(Bhargavi मुस्कुराते हुए शिव को भागते हुए जाता देख रही थी, जब वो चला गया फिर भी वो काफी देर वह कड़ी कड़ी मुस्कुरा रही थी)

भार्गवी : Pagal...(Wo अंदर चली गयी और सोफे पर जा कर अपनी आंखे बंद किये बेथ गयी, फिर से उसके सामने उसकी पुराणी शादी शुदा जिंदगी एक फिल्म की तरह घूम गयी)

भार्गवी मैडम से मिलने के बाद में सीधा घर पहुंच गया, जब में घर पंहुचा तो गायत्री दीदी भी घर पहुंच रही थी.

शिव : कैसी हो दीदी?

गायत्री : अच्छी हु. (वो मुझसे नज़ारे चुराते हुए अंदर चली गयी)

मेरी कुछ समाज नहीं आया, में भी अंदर चला गया, हम सब ने मिल कर खाना खाया और फिर हम पढ़ाई में लग गए. सब को एग्जाम की तयारी करनी थी तो और तो कुछ न हुआ, हम बस पढ़ते रहे. देर रात पढ़ाई करने के बाद में अपने रूम में गया तो वह बिस्तर बिछा हुआ था, मुझे पता था ये लतादिदी ने किआ होगा, पर वो नहीं थी, में उन्हें देखने बच्चोंवाले रूम में गया तो वो सो रही थी. में वापस आ कर सो गया. ऐसे hi एक दिन और निकल गया. आज एग्जाम का दिन था, मुझे, रंजन और विणा तीनो को लतादिदी ने दही सक्कर खिला कर भेजा. स्कूल में मुझे अपने दोस्त मिल गए. दोनों के चेहरों पर दर था.

शिव : क्या हुआ, दर क्यों रहे हो?

हर्ष : साला कुछ भी याद नहीं है, एग्जाम में क्या घंटा लिखूंगा.

शिव : तुमने पढ़ाई तो की है न?

महेश : घंटा पढ़ा है ये, साला किताब लेकर बेथ ता होगा और फिर पोर्न देख ने लग जाता होगा.

हर्ष : मुझे मात सुना, में भी देखूंगा की तेरे कैसे मार्क आते है.

महेश : तेरे से तो अच्छे hi आएंगे.

शिव : तुम दोनों लड़ो मात, जो भी पढ़ा है उस पर अपना ध्यान केंद्रित करो, और शांत मान से लिखने की कोशिस करना, सब याद आ जायेगा.

महेश : है है है, ध्यान केंद्रित करेगा ये, जब से आया है, हाथ में किताब है पर ध्यान केंद्रित लड़कीओ की और है.

शिव : तुम दोनों लड़ाई बंद करो और चलो क्लास में चलते है. (हम क्लास की तरफ जा रहे थे की हमें बहार वैस्वी और संयम mile)Hi संयम.

संयम : Hi शिव, hi हर्ष, hi महेश.

हर्ष एंड महेश : Hi.

संयम : बेस्ट ऑफ़ लक तुम सब को.

हर्ष : थैंक यू, वैसे भी लक की बहोत जरुरत है. (सब हसने लगे, पर वैस्वी किताब पढ़ रही थी)

शिव : तुम्हे भी आल थे बेस्ट, वैसे तयारी कैसी है?

संयम : अच्छी है, मुझे कोनसा किसी को हराना है जो में टेंशन लुंगी. (वैस्वी ने घर कर संयम को देखा, पर बोली कुछ नहीं, में मुस्कुरा दिया)

शिव : सही कहा तुमने, मुझे भी किसी को हराना नहीं है तो में भी रिलैक्स hi हु. ठीक है, अच्छे से पेपर लिखना, फिर से तुम्हे और तुम्हारी दोस्त दोनों को बेस्ट ऑफ़ लक. (वैस्वी ने मेरी और देखा, पर बोली कुछ नहीं)

हम अंदर चले गए और फिर टीचर भी आ गए, और पेपर सुरु हो गया. पेपर आसान था तो में लिखने में व्यस्त हो गया. हर्ष मेरे पीछे hi बैठा था तो वो मुझे बार बार डिस्टर्ब कर रहा था, में भी थोड़ा मुद कर बेथ गया और पेपर लिखने लगा. हर्ष को जो कुछ दिख रहा था उस हिसाब से वो लिख रहा था, एक बार टीचर ने उसे डांटा भी पर फिर वो नज़र बचा कर लिख hi देता था, ऐसे hi हमारा पेपर ख़तम हो गया. जब हम बहार निकले तो हर्ष बहोत खुस था.

महेश : अबे इतना खुस क्यों हो रहा है?

हर्ष : अरे सब शिव की मेहरबानी है, इतना तो लिख hi दिया है पास हो hi जाऊंगा. (में मुस्कुरा रहा था, संयम और वैस्वी भी बहार आये, वैस्वी थोड़ी दूर hi कड़ी रही)

संयम : कैसा गया पेपर?

हर्ष : (उसने सब को पूछा था पर सब से पहले हर्ष hi बोल pada)Bahot बढ़िया.

संयम : ये इतना क्यों खुस हो रहा है?

महेश : शिव ने इसकी हेल्प की तो भाई उड़ रहे है.

संयम : (आश्चर्य se)Kya, तुमने शिव में से लिखा, और शिव, तुमने भी इससे लिखने दिया, अगर चीटिंग में पकड़े जाओगे तो दोनों को सजा मिलेगी.

शिव : वो मेरे पीछे hi बैठा था और बार बार डिस्टर्ब कर रहा था, मुझे भी लिखने नहीं दे रहा था तो में थोड़ा टेढ़ा बेथ गया, और कुछ नहीं किआ, वैसे भी वो दूर था, पता नहीं उसे क्या दिखा और उसने क्या लिखा.

संयम : हर्ष, तुम्हे पढ़ाई करनी चाहिए न की चीटिंग.

हर्ष : में पढता तो हु पर याद नहीं रहता तो में क्या करू. (सब हसने लगे)

वैस्वी : चलो संयम, देर हो रही है.

संयम : अच्छा, में चलती हु.

शिव : तुमने तो कहा hi नहीं तुम्हारा कैसा पेपर गया?

संयम : अच्छा था.

शिव : और उस मैडम का?

संयम : (मुस्कुराते हुए उसने वैस्वी की और dekha)Uska भी अच्छ hi गया. Ok bye.

जैसे hi संयम, वैस्वी के पास पहुंची वो दोनों खुसुर फुसुर करते हुए जाने लगी, जाते जाते एक बार मुद कर वैस्वी ने मेरी और देखा, में मुस्कुराया तो उसने मुँह फेर लिया. हम लोग भी अपने अपने घर चले गए. तीन दिन ऐसे hi गुजर गए, कल हमारे पेपर की छूती थी पर उसके बाद में थोड़ा हार्ड पेपर था, तो में पढ़ाई में लग गया. शाम को में स्टेडियम चला गया. जूही के घर से जब में निकला तो मुझे भार्गवी मैडम का ख्याल आया, मेने उन्हें फ़ोन किआ.

भार्गवी : Hello.

शिव : में शिव बोल रहा हु.

भार्गवी : है मुझे पता है, बोलो?

शिव : कुछ नहीं, मेने तो ऐसे hi फ़ोन किआ था, आपने बोलै था न की फ्री हो तो फ़ोन कर न.

भार्गवी : ओह, ऐसा, पर सॉरी शिव, में एक केस में बिजी हु, आज कल बाइक और स्कूटर की चोरिया बढ़गयी है तो उसी सिलसिले में थोड़ी बिजी हु.

शिव : कोई बात नहीं मैडम, बाद में मिलते है.

भार्गवी : Ok.

मेने फ़ोन काट दिया, पर उनकी बात मेरे दिमाग में घूमने लगी. कुछ समय पहले हम लोग जाहिर गेराज में गए थे, वह चोरी का सामान मिल रहा था, पता नहीं ये बात उनको पता है की नहीं, एक बार मुझे उनसे बात करनी चाहिए, वैसे वो पुलिस में थी तो शायद उन्हें पता hi होगी, पर फिर भी मुझे एक बार उनसे बात करनी hi चाहिए. में घर चला गया और पढ़ने बेथ गया. रात को हम खाना खा रहे थे और तभी गायत्रीदिदी भी आ गयी. उनका चेहरा बुझा बजा सा था. वो भी हाथ मुँह धो कर खाने बेथ गयी. हम सबने खाना खाया और फिर से में पढ़ने बेथ गया. में पढ़ रहा था की लतादिदी आयी, वो मेरेलिए बिस्तर लगाने लगी. बिस्तर लगा कर वो जाने लगी तो मेने उन्हें पूछा.

शिव : कहा जा रही हो दीदी?

लतादिदी : सोने, और कहा?

शिव : यही सो जावा.

लतादिदी : नहीं तू पढ़ाई कर.

शिव : कल छुट्टी hi है दीदी.

लतादिदी : तो क्या हुआ, तू पढ़ाई कर में जा रही हु. (में उठा और उन्हें पकड़ liya)Ye क्या कर रहा है Shiv(Unhone बड़े प्यार से कहा था)

शिव :रुक जाओ न दीदी. (वो मेरी और घूम गयी और मेरी आँखों में देखने लगी)

लतादिदी : देखा, अगर में यहाँ रही तो तू पढ़ने से रहा.

शिव : तो क्या हुआ दीदी, वैसे भी कल छूती है.

लतादिदी : इन सब के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है शिव, पढ़ाई सबसे पहले.

शिव : ठीक है, एक किश तो देती जाओ.

लतादिदी :(मेरे होठो पर एक किश दे kar)bas...

शिव : ये क्या था दीदी, इससे किश कहते है, में दिखता हु की किश किसे कहते hai(Mene दीदी को पकड़ा और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मुज से लिपट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी, काफी देर तक हम एक दूसरे को चूमते रहे, मेरा लुंड भी खड़ा हो गया और वो दीदी की छूट को ठोकर मरने लगा, वो मुझे धकेलने लगी, जैसे hi हम अलग हुआ)

लतादिदी : देखा, इसीलिए में मन कर रही थी.

शिव : किस लिए दीदी.

लतादिदी : ज्यादा भोले मात बनो, ये जो तुम्हारा है न वो मुझे चुभ रहा है.

शिव : तो क्या हुआ, वो तो आपको देख कर hi खड़ा हो जाता है.

लतादिदी : (वो muskurayi)Chal छोड़ मुझे, और पढ़ाई कर.

शिव : थोड़ी देर दीदी.

लतादिदी : थोड़ी देर, थोड़ी देर करते करते फिर थोड़ा और थोड़ा और करने लगेगा और फिर वही हो गए जो में नहीं चाहती.

शिव : आपका मान नहीं है दीदी.

लतादिदी : तेरा जितना मान कर रहा है न, उस से कही ज्यादा मेरा मान कर रहा है, पर अभी नहीं, अभी पढ़ाई पर ध्यान दे. चल छोड़ मुझे. (मेने जूथ मुठ का नाटक करते हुए उन्हें छोड़ दिया, वो मुस्कुरायी और मेरे होठो पर हल्का किश कर के चली गयी, में भी फिर से पढ़ने बेथ गया)

सुबह उठा और ब्रश किआ, मेने देखा तो रंजन नाहा कर निकल रही थी, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी और इस्सर करके वापस बाथरूम में घुस गयी, मेने आस पास देखा तो कोई नहीं था, में भी बाथरूम में घुस गया. वो मुझसे लिपट गयी और मुझे किश करने लगी, में भी उसके बूब्स दबाते हुए उसे किश करने लगा. थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए.

शिव : स्कूल नहीं जाना क्या?

रंजन : जाना है, तुम्हारी क्यों छूती है?

शिव : कल हार्ड पेपर है तो स्कूल ने एक गैप रक्खा है. कैसी तयारी है तुम्हारी.

रंजन : अच्छी है. (वो मेरे लुंड को पकड़ कर सहलाने लगी)

शिव : ये क्या कर रही है?

रंजन : कुछ नहीं, बस थोड़ा मान कर रहा है.

शिव : (मुस्कुराते हुए) जा, वर्ण देर हो जाएगी.

रंजन : एक बार दिखा दे न (मेरे जवाब की प्रतीक्षा किये बगैर उसने मेरा हाफ पंत नीचे खिसका दिया और मेरे लुंड को थम लिया, और उसे सहलाने लगी) शहहह मान कर रहा है अभी इससे अपने अंदर ले lu(Wo झुकी और मेरे लुंड को मुँह में भर लिया, उसके गर्म मुँह का एहसास होते hi, मेरी आंखे बंद हो गयी, दो चार बार चूसने के बाद वो कड़ी हुई और अपना फ्रॉक ऊपर उठा diya,mene देखा की वो अभी नहायी थी तो उसने नीचे कुछ नहीं पहना था, उसकी छूट के ऊपर के हलके बल मुझे दिख रहे थे, मेने जब नज़र ऊपर की तो मुझे उसका लाल हो चूका चेहरा दिखा, मेने फिर निचे देखा तो छूट से निकलते रास से मेरा सूपड़ा गिला होने लगा था, छूट की गर्माहट और छूट की चिकनाहट को महसूस कर के मेरा लुंड कड़क हो चूका था, मेने उसके एक चुके को पकड़ लिया और उसे मसल दिया, उसके चेहरे पर दर्द उभर आया पर वो भी पागल हो रही थी, उसने दो चार बार मेरे लुंड को अपनी छूट के होठो पर घिसा फिर उसने अपनी एक तंग उठायी.

रंजन : मेरा पेअर पकड़. (मेने उसके पेअर को पकड़ लिया, उसने मेरे लुंड को अपने छेड़ पर टिका दिया, में उसको देख रहा था, उसने अपनी छूट मेरे लुंड पर दबायी तो लुंड का सूपड़ा छूट को फैलते हुए अंदर घुस gaya)Shhhhhhhhh(tabhi दरवाजे पर थक थक थक की आवाज आयी, हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे)

विणा : कितनी देर लगा रही है, स्कूल जाना नहीं है क्या

रंजन : (अपने आप को सँभालते hue)Tu जा में आती हु.

विणा : नहीं, अभी निकल, बहोत देर हो गयी hai.(Ranjan ने बुरा सा मुँह बना कर मुझे देखा, में मुस्कुराया, उसने जूथ मुठ के रोने वाला चेहरा बनाया, और लुंड को बहार निकला, अपने आप को ठीक कर के दरवाजा खोल कर बहार निकल gayi)Kitni देर लगाती है, एग्जाम देने नहीं जाना है क्या. (रंजन थोड़ा सा दरवाजा खोल कर निकल गयी थी तो विणा की नज़र मुज पर न पड़ी.)

रंजन : (थोड़ा नाराजगी se)Chal अब. (वो उसका हाथ पकड़ कर उसे ले गयी)

में अभी भी खड़े लुंड के साथ खड़ा था की दरवाजा खुला और सामने गायत्री दीदी कड़ी थी. मेरे खड़े लुंड को देख कर उनकी आंखे फ़ैल गयी, एक दो पल में hi ये हुआ, अपने मुँह पर हाथ रख कर वो एकदम से पीछे घूम गयी, में भी दूसरी और घूम गया, (एक दो पल गायत्री सुन्न कड़ी रही, फिर उसे एहसास हुआ की क्या हुआ है तो वो दूसरे बाथरूम की और जाने लगी, पर जाते जाते एक बार उसकी नजर शिव पर गयी जो दूसरी और घूम गया था, वो अपनी सांसे संभालती हुई बाथरूम में घुस गयी)

दूसरे बाथरूम में घुस कर वो सोचने लगी की क्या हुआ, उसे भी गयम जाना था तो वो तैयार होने बाथरूम जा रही थी, उसने रंजन को बाथरूम में से निकल कर विणा के साथ जाते देखा था, उस बाथरूम का दरवाजा खुला था तो वो उसी और मुद गयी और ये सब हो गया. वो ये सोचने लगी की रंजन उस बाथरूम से निकली और शिव इस अवस्था में था, तो क्या रंजन और शिव के bich....par ये कैसे हो शक्ति है, उसका तो लता के साथ चल रहा है. वो गुस्सा होने लगी, वो सोचने लगी की वो सही सोच रही थी, शिव भी उस मैनेजर की तरह hi है, सब एक जैसे hi होते है. वैसे भी वो पिछले कुछ दिनों से परेशान थी, वो रंडी खाने पहुंच गयी थी, उसका ये भूतकाल उसका पीछा hi नहीं छोड़ रहा था. फिर से उसकी आँखों में आंसू आ गए.
 
अपडेट 98

में पढ़ाई करने बेथ गया, दोपहर तक पढ़ाई करता रहा, सरितादिदी मुझे खाने को बुलाने आयी.

सरितादिदी : कबतक पढ़ाई करता रहेगा, चल खाना खा ले.

शिव : थोड़ी देर दीदी.

सरितादिदी : (मेरी किताबे बंद करते hue)Kya थोड़ी देर, इतनी देर से तो पढ़ रहा है, चल अब.

शिव : (में खड़ा hua)Thik है दीदी चलिए. (उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे सामने देखा, तो में भी मुस्कुराया, वो जानेलगी तो मेने उनका हाथ पकड़लिया, वो मेरी और सवालिया नज़रो से देखने लगी, में उन्हें दरवाजे के पीछे ले गया और दीवाल से सत्ता दिया, वो मेरी और देखने लगी, में झुका और उनके होठो को अपनी गिरफ्त में लेते हुए चूमने लगा, उन्होंने भी अपने हाथ मेरे शिर पर रख दिए और मेरे बालो को सहलाते हुए मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर किश करने के बाद में अलग हुआ, वो मेरी आँखों में देख रही थी)

सरितादिदी : क्या हुआ, मान कर रहा है?

शिव : नहीं दीदी.

सरितादिदी : (आश्चर्य se)To फिर मुझे क्यों पकड़ा? मुझे लगा तेरा मान कर रहा होगा इस लिए तू मेरे पास आया.

शिव : ऐसी बात नहीं है दीदी, में तो सिर्फ आप से प्यार जाता रहा था, कितने दिनों से हम ऐसे मिले नहीं थेना इस लिए. (उनकी आँखों में पानी छलक आया, में थोड़ा चिंतित हो gaya)Kya हुआ दीदी, कोई परेशानी है?

सरितादिदी : (अपनी आंखे पोछते hue)Muje क्या परेशानी होगी, तू जो है.

शिव : तो आपकी आँखों में आंसू?

सरितादिदी : तूने मेरे लिए इतना सोचा इस लिए, में तेरे लिए सिर्फ uska(Chudayi का) जरिया नहीं हु, ये जान कर मुझे इतनी खुसी हुई की आंख भर आयी.

शिव : क्या दीदी आप भी, क्या आप सिर्फ इस्सलिये तो नहीं हो, है वो भी एक तरीका है प्यार करने का पर में सिर्फ उसके लिए आपके करीब औ ऐसा तो नहीं है.

सरितादिदी : तेरे दिल में मेरे लिए ऐसा भी प्यार है ये जान कर तो मेरी आंख भर आयी. (मेने उन्हें गले लगा लिया, वो भी बिना कोई हरकत किये मेरे शाइन से लगी रही)

लतादिदी : (उन्होंने रसोई से आवाज di)Sarita... ो Sharita...kaha रह गयी?

सरितादिदी : (मुस्कुराते hue)Chal अब.

हम दोनों रसोई में आ गए, रंजन और विणा भी आ गयी थी. गायत्री दीदी और लतादिदी सबको खाना देने लगी. हम सब ने मिल कर खाना खाया. वैसे भी मेने काफी पढ़लिया था तो मेने भार्गविमडम को फ़ोन लगाया.

भार्गवी : है, बोलो शिव.

शिव : आप कहा हो?

भार्गवी : पुलिस स्टेशन में, क्यों?

शिव : आप से मिलना था.

भार्गवी : तो आ जाओ. (में उनसे मिलने चला गया, वो केबिन में बैठी थी तो एक हवलदार ने मेरे आने की खबर दी तो उन्होंने मुझे अंदर बुला liya)Aao शिव, बैठो. (में बेथ gaya)Kaho क्या बात है?

शिव : मैडम आप से एक बात करनी थी, आप कल मुझे कह रही थी न की सहर में दो पहिया वहां की चोरी बढ़ गयी है.

भार्गवी : (उन्होंने मेरी और गौर से dekha)Ha, तो? क्या तुम कुछ जानते हो उस बारे में?

शिव : आपने जाहिर गेराज का नाम सुना है?

भार्गवी : है, सुना है.

शिव : मैडम, मुझे ऐसा पता चला है की वह चोरी का सामान मिलता है.

भार्गवी : मेने भी सुना है शिव, पर उसका कोई साबुत नहीं है.

शिव : हमने वह से सामान भी ख़रीदा है मैडम, वो भी काफी सस्ते दामों पर.

भार्गवी : तुमने ख़रीदा था, तुम्हे क्या जरुरत पड़ी उसकी?

शिव : मेरा मतलब है की मेरे एक दोस्त को खरीदना था तो उस वक़्त में उसके साथ था.

भार्गवी : है, पर इस से हम ये नहीं कह शक्ति या साबित कर शक्ति की वह चोरी का hi सामान मिलता है, मेने खुद उस से पूछताछ की थी, उसने कहा की वो सेकंड हैंड गाड़िया खरीदता और बेचता है, वैसे hi कोई कबाड़ में गाड़ी आती है तो वो उसका सामान बेच देता है, और उसकी बात सही भी थी. तो सिर्फ लोगो के कहने से हम उसको गिरफ्तार नहीं कर शक्ति, वैसे भी वो बहोत नामचीन है, तो हम ऐसे hi हाथ नहीं दाल शक्ति.

शिव : (उनकी बात सुन कर मुझे लगा की वो सही है, सिर्फ सामान बेचने से hi वो चोर है ऐसा नहीं कह shakte)Aap की बात भी सही है मैडम.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Tumne ये सोचा, वो hi बहोत है, तुम फ़िक्र मात करो हम पता कर लेंगे. और सुनाओ एग्जाम कैसी चल रही है, अरे है मेने तुम्हे पूछा hi नहीं, पर क्या पुछु तुम तो चाय पिटे नहीं और दूध यहाँ मिलेगा नहीं.

शिव : (मुकसकुरते hue)Uski जरुरत नहीं मैडम, और मेरे एग्जाम अच्छे जा रहे है, आज छुट्टी थी तो घर पर पढ़ाई कर रहा था.

भार्गवी : अच्छा, आज छुट्टी है, तो आओ शाम को मिलते है.

शिव : ठीक है मैडम. शाम को मिलते है.

में वह से निकल गया. घर पहुंच कर फिर से पढ़ाई में लग गया. शाम को जूही के घर चला गया. मेरे अंदर जाते hi वो मुझे किश करने लगी, ये वैसे अब रोज़ का हो गया था, किश करने के बाद वो मुझे मुस्कुरा ते हुए देख रही थी, वो बहोत खुस थी.

शिव : चलो अब जाना नहीं है क्या?

जूही : तो चलो न, मेने कहा तुम्हे रोका है. (उसके चेहरे की रंगत उसकी खुसी बयां कर रही थी)

हम दोनों ने जाम कर प्रैक्टिस की, जब अँधेरा होने लगा तो हम वह से निकल गए. मेने उसे घर छोड़ा और फिर में वह से निकल गया, अभी सात के करीब बज रहे थे तो मेने भार्गवी मैडम को फ़ोन किआ, वो घर पर hi थी तो में घर चला गया. वो टाइट लेंगी और टीशर्ट में थी, और थोड़ी पसीने से भीगी हुई थी. मुझे देख कर वो मुस्कुरायी.

भार्गवी : आओ, अंदर आओ.

शिव : (में अंदर चला gaya)Aap कसरत कर रही थी?

भार्गवी : है, ये लगभग मेरा रोज़ का रूटीन है. तुम भी लगता है स्टेडियम से hi आ रहे ho?(Me muskuraya)Chalo अच्छा है, अब क्या िर्रादा है?

शिव : जैसा आप कहे, आपका डमी तैयार है.

भार्गवी : क्या में तुम्हे डमी मानती हु, तुम्हे ऐसा लगता है?

शिव : अरे नहीं मैडम, में तो मज़ाक कर रहा था, चलिए प्रैक्टिस करते है.

हम दोनों एक रूम में गए और वह कुछ गद्दे बिछा दिए ताकि किसी को चोट न लगे. फिर सुरु हो गया हमारा खेल. वो मुझे पकड़ने लगी तो में उनकी पकड़ में भी नहीं आ रहा था, में कैसे भी छूट जाता था. पकड़ा पकड़ी में कभी वो मेरी कमर और पेट पकड़ लेती तो कभी में, सच में हम दोनों को इस से कोई परहेज नहीं था और नहीं कोई और ख्याल. जब में उनके हाथ न आया तो वो मुस्कुरायी.

भार्गवी : लगता है प्रैक्टिस का असर हुआ है, घर पर प्रैक्टिस करते थे क्या?

शिव : (मुस्कुराते hue)Training पर एक दोस्त मिल गया था, जो कुस्ती करता है, खली समय में उन्होंने hi सब सिखाया है.

भार्गवी : चलो ये तो अच्छी बात है, मतलब अब तुमसे सामान्य तरीके से नहीं कुछ अलग तरीको से खेलना होगा.

में मुस्कुराया, फिर से हमने पोशण ली, वो मेरा शिव पकड़ने को लपकी तो मेने उनके हाथ छटक दिए पर अचानक उन्होंने मेरे पेअर पकड़लिये और खिंचलीये, मेरा बैलेंस बिगाड़ा और में पीठके बल निचे गिरा, वो पलटी मरते हुए मेरी छाती पर बेथ गयी और मेरे पेअर उन्होंने कास के पकड़ लिए. में हैरान था की ये उन्होंने कैसे किआ.

भार्गवी : क्यों बच्चू मज़ा आया? (वो मेरी छाती पर ऐसे बैठी थी की उनके कूल्हे मेरे चेहरे के पास थे, उनकी गंध तक मुझे महसूस हो रही थी, मेरी आंखे बंद हो गयी उसे सूंघ kar)Kya हुआ, कुछ बोलते क्यों नहीं? (उनकी आवाज़ सुन कर में होश में आया)

शिव : आपने ये कैसे किआ?

भार्गवी : तुम्हारा ध्यान भटका कर.

शिव : मतलब?

भार्गवी : तुम्हे लगा की में तुम्हारा शिर पकड़नेवाली हु पर मेरा टारगेट तुम्हारे पेअर hi थे, मेने तुम्हे ऐसा बताया का में तुम्हारा शिर पकड़नेवाली हु तो तुम उसकी को बचने गए और मेने तुम्हारे पेअर पकड़ कर तुम्हे गिरा दिया.

शिव : ओह! ऐसा, तो फिर ये देखिये (मेने उनकी कमर पकड़ी और जोर लगा कर उन्हें पलट दिया और में उनके ऊपर आ गया, मेने उन्हें मेरे निचे दबा दिया, वो उलटी लेती थी मेरे निचे और ठीक उनके ऊपर था, मेने उनके दोनों हाथ को भी पकड़ लिया था, वो अपने पेअर तो हिला रही थी पर कुछ कर नहीं प् रही thi)To अब कहिये, ये कैसे रही (वो छूटने का प्रयास कर रही थी पर मेने उनके ऊपर अपना पूरा वजन डेल हुए था, अचानक मुझे एहसास हुआ की उनके गद्देदार कूल्हे ठीक मेरे लुंड के नीचे है, उस मखमली एहसास को मेरे लुंड ने पहचान लिया, वो खड़ा होने लगा, मेने भी तरौसे hi पहना था तो लुंड आगे की और हो गया और उनके कूल्हों की दरार में चला गया, वो जितना छूटने का प्रयास कर रही थी मेरा लुंड उतना hi कड़क हो रहा tha)(Bhargavi छूटने का प्रयास कर रही थी की तभी उसे अपने कूल्हों पर कुछ चुभता महसूस हुआ, पहले तो उसका ध्यान नहीं गया पर फिर जिस स्थिति में शिव उसके ऊपर था उसे एहसास हो गया की ये क्या है, उसे गुस्सा आया और वो ज्यादा ताकत से छूटने का प्रयास करने लगी, पर शिव ने उसे पूरी तरह से अपनी निचे दबोच रक्खा था, वो कह तो नहीं शक्ति थी पर उसका गुस्सा बढ़ रहा था, वो और ताकत से अपने आप को छुड़ाने की कोशिस करने लगी पर वो कुछ न कर पायी, वो पूरा पसीना पसीना हो गयी थी, उसके बाल भी पशीने की वजह से उसके गाल पर चिपक गए थे, वो जितना छूटने का प्रयास कर रही थी वो चुभन बढ़ती जा रही थी, वो उसकी दरार से उसकी छूट पर दबाव बनाने लगी थी, वो जितना छूटने का प्रयास कर रही थी, वो अंग उसकी छूट पर उतना hi घरसँ कर रहा था, पता नहीं पर उसका गुस्सा काम होने लगा, वो दिखावे के लिए hi छूटने का प्रयास कर रही थी पर उसका पूरा ध्यान उस चुभते अंग पर था, इतने सालो बाद वो उसको महसूस कर रही थी, थोड़ी देर वो उसको महसूस करती रही पर फिर एहसास हुआ की क्या हो रहा है तो फिर से उसका गुस्सा बढ़ने laga)(Thodi देर तो मेने उन्हें छूटने नहीं दिया पर मेरा लुंड मेरी बात नहीं मान रहा था, मुझे यकीं हो गया था की मैडम को पता चल गया होगा, मुझे दर लगने लगा, दर के मरे मेरा लुंड भी सिकुड़ने लगा, वो पुलिसवाली थी, मेरी गांड फटने लगी, मेने उन्हें छोड़ दिया और खड़ा हो गया)

शिव : मैडम में जाता हु, मुझे देर हो रही है. (में बिना पीछे मुड़े वह से निकल गया)

सच में में ऐसी कोई हरकत नहीं करना चाहता था पर साला ये लुंड कहा मंटा है. मुझे सच में बहोत दर लग गया था, मैडम जिस तरह से छूटने का प्रयास कर रही थी वो गुस्से में था जो अब मेरी समाज में आ रहा था, उस वक़्त में थोड़ा बाहेक गया था तो मुझे ध्यान hi नहीं रहा. में फटाफट घर पहुंच गया और हाथमुँह धो कर पढ़ने बेथ गया. पर बार बार मुझे वही याद आ रहा था, मैडम क्या करेगी मेरे साथ ये सोच सोच कर hi मेरी हालत ख़राब हो रही थी. लतादिदी खाने बुलाने आयी तो में खाने चला गया. रात को फिर से पढ़ने बेथ गया.

सुबह एग्जाम थी तो में सो गया और सुबह एग्जाम देने चला गया. आज फिर से एग्जाम तो अच्छी hi रही. दूसरे दो दिन ऐसे hi एग्जाम में चले गए, कल संडे था तो फिर एक छुट्टी मिल गयी थी. हर्ष ने कहा की उसे इस सब्जेक्ट में कुछ समाज नहीं आता, मुझे कह रहा था की में उसके घर जाऊ पढ़ने के लिए, महेश ने भी कहा की वो भी आएगा तो फिर हमने तय किआ की संडे को मिलते है.

संडे को करीब 10 बजे में हर्ष के घर की और निकल गया. उसने एड्रेस दिया हुआ था तो मुझे उसका घर ढूंढने में कोई परेशानी नहीं हुई. मेने बेल्ल बजायी तो एक औरत ने दरवाजा खोला. दिखने में एक घरेलु महिला की तरह दिख रही थी, साड़ी पहने थी और खूबसूरत भी थी, देखने से hi वो कुछ कुछ हर्ष जैसी hi दिख रही थी.

औरत : (अपने सामने इतने ऊँचे कद के लड़के को देख एक बार वो उसे ध्यान से देखने लगी, वो उसे पहचानती तो नहीं thi)Kon हो tum?Kis से मिलना है?

शिव : जी में शिव हु, ये हर्ष का घर है?

औरत : है, तुम कोण हो?

शिव : में उसका दोस्त हु, उसके साथ स्कूल में पढता हु.

औरत : अच्छा, आओ बीटा, अंदर आओ, सॉरी में तुम्हे जानती नहीं na.(Jor se)Harsh, ो हर्ष, तुम्हारा दोस्त आया है.

हर्ष : (ऊपर से आवाज aayi)Kon है मम्मी?

हर्ष की मम्मी : क्या नाम बताया तुमने बीटा?

शिव : शिव.

हर्ष की मम्मी : (जोर se)Shiv है.

हर्ष : (भागते हुए नीचे आया, वो ऊपर के कमरेमे tha)Are वह, शिव, मुझे यकीं नहीं हो रहा की तू आ गया, मुझे लगा तुजे टाइम नहीं मिलेगा. मम्मी ये शिव है, हमारे क्लास का सबसे होशियार लड़का. और शिव ये मेरी प्यारी मम्मी है.

शिव : (हाथ जोड़ kar)Namaste आंटी.

ह की म : नमस्ते बीटा, आओ बीटा बैठो. (वह सोफे पर एक और लड़का बैठा हुआ था जो टीवी देख रहा था, उम्र में थोड़ा बड़ा था)

हर्ष : ये मेरा बड़ा भाई है धर्मेश भाई.

शिव : (उन्होंने मेरी और देखा) नमस्ते भैया.

धर्मेश : (मेरी और ध्यान से देखते hue)Tum शिव हो.

हर्ष : आप जानते है भैया.

धर्मेश : इसकी फोटो देखि थी अख़बार में.

शिव : मेरी फोटो?

धर्मेश : है, तुम्हारी स्कूल में कोई कॉम्पिटिओं हुआ था तब, तुमने कफीसरे गोल्डमेडल जीते है न?

हर्ष : है भैया, इसने बहोत सरे गोल्ड मैडल जीते है.

धर्मेश : बहोत खूब शिव.

हर्ष : तो फिर, दोस्त किसका है.

ह की मम्मी : (हर्ष के माथे पर मरते hue)Bada आया दोस्त वाला, तूने क्या किआ है? (शिव ko)Bahot अच्छे बीटा.

शिव : थैंक यू आंटी, थैंक यू भैया. मुझे तो पता hi नहीं था की आप भी मुझे जानते होंगे.

धर्मेश : हर्ष की स्कूल का समाचार था और उसमे तुम्हारे बारेमे भी लिखा था जो मुझे इंटरेस्टिंग लगा तो मुझे याद रह गया, तुम किसी गयम में काम भी करते हो, पढ़ते भी हो और स्पोर्ट्स में भी ावल हो, वह भाई कमल हो तुम. बहोत प्रभावित किआ तुमने.

आंटी : सच है, बीटा, और एक ये hai(Harsh को) सिर्फ मोबाइल पे गेम खेलने में अव्वल. तुम्हारे maa-baap बहोत खुशनशीब है जीने तुम्हारे जैसा बीटा mila.(Unki बात से में उदाश हो गया पर मेने चेहरे पर दिखने नहीं दिया)

हर्ष : (दुखी स्वर me)Mummy... ये अनाथ है, अनाथालय में रहता है.

आंटी : (थोड़े आघात se)Kya? सच में? मुझे माफ़ करना बीटा, मुझे पता नहीं था, हे भगवन ये कैसी लीला है तुम्हारी, टीना सुन्दर, इतना अच्छा लड़का और उसकी ये दशा. बीटा दिल छोटा न करना, इससे अपना hi घर समाज न.

शिव : नहीं आंटी, में खुस हु अपनी जिंदगी से. अनाथालय में और बहार बहोत से ऐसे लोग है जिनकी वजह से मुझे कोई शिकायत नहीं अपनी जिंदगी से.

आंटी : (शिव को ममता से देखते hue)Jite रहो बीटा, सदा खुस रहो. (फिर माहौल को हल्का करने के लिए, फिर हर्ष के माथे पर मरते hue)Isse भी कुछ बुद्धि दे, हमेशा आवारा की तरह घूमता रहता है. कुछ सिख अपने दोस्त से.

हर्ष : क्या मम्मी आप bhi.(Utne में दूर बेल्ल बजी)

आंटी : जा दरवाजा खोल. (हर्ष ने दरवाजा खोला, वो एक लड़की thi)Aa गयी तू, कितना खर्चा कर आयी बेठी पारलर में.

लड़की : क्या मम्मी आप bhiiiiii(Meri और नज़र पड़ते hi)Kisi के भी सामने कुछ भी बोलती हो.

आंटी : ये शिव है, हर्ष का दोस्त, ये मेरी बेटी है पायल, हर्ष की बड़ी बहिन.

शिव : (खड़े होते hue)Namaste दीदी.

पायल :(आश्चर्य से, इतने लम्बे लड़के को देख रही थी फिर थोड़े नखरे se)Me इतनी भी बड़ी नहीं हु, पायल कह सकते हो. हर्ष भी मुझे पायल hi कहता hai.(Me देख रहा था की वो एक खूबसूरत लड़की है, दिखने में आंटी जैसी hi दिखती है, जीन्स और टीशर्ट पहनी हुई थी, वो एक भरे बदन की लड़की थी, t-shirt की वजह से उनके बड़े स्तन अपनी हजारी, सामनेवाले को करहि देते थे, मेरे मान में कोई गलत भावना नहीं थी पर देखने में नज़र तो चली hi जाती है)

शिव : जी दीदी.

पायल : (नखरा करते hue)Fir दीदी.

आंटी : ये क्या बेवकूफी है पायल, वो आज पहलीबार तुमसे मिल रहा है, तुम हर्ष की बड़ी बहन हो तो वो तुम्हे दीदी hi कहेगाना. बीटा ये थोड़ी पागल है, तुम उसका बुरा मात मन न, शादी होनेवाली है फिर भी बचपना नहीं गया इसका. धर्मेश की भी कही बात पक्की हो जाये तो दोनों की साथ में शादी करा देनी hai.(Hum बात कर रहे थे की फिर दुर्बल बजी, बिना कहे हर्ष ने जा कर दरवाजा खोला, इस बार महेश था, आंटी उसे जानती thi)Aao बीटा, कैसे हो तुम?

महेश : में ठीक हु आंटी, आप कैसी है? और आप भैया? और पायल तुम कैसी हो? ब्यूटी पारलर से आ रही हो kya?(Sab हसने लगे, वो गुस्सा हो कर अंदर चली गयी, सब हसने लगे) अरे वह शिव भी आ गया है.

आंटी : आज तुम तीनो इक्कट्ठा हुए हो, कोई बात है क्या?

हर्ष : नहीं मम्मी, कल जो परीक्षा है न, उसकी तयारी हम तीनो मिलकर करनेवाले है, इस लिए इकठ्ठा हुए है.

आंटी : चलो अच्छा है, तुम लोग पढ़ो, में खाना बना रही हु, तुम सब यही खाना, ठीक है शिव?

शिव : (अब में और क्या kehta)Ji आंटी.

फिर हम तीनो हर्ष के कमरेमे चले गए. वह ये दोनों बाते करने लगे तो मेने उन्हें रोका और पढ़ाई करने को कहा, फिर सब पढ़ने लगे, हर्ष बार बार मुझे पूछ रहा था, उसकी बातो से तो लग रहा था की उसे कुछ भी नहीं आता. दो घंटे पढ़ाई करने के बाद हमने साथमे खाना खाया. खाना खाने के बाद वो दोनों थोड़ी देर वीडियो गेम खेलनेवाले थे और मुझे पढ़ना था और फिर स्टेडियम भी जाना था तो में वह से निकल गया. शाम को स्टेडियम से लौटने के बाद जब में जूही के घर से निकल कर अनाथालय जा रहा था तो मुझे सामने पुलिस की जीप दिखाई दी, मेने जीप को देखा, जब वो मेरे पास से गुजारी तो मेने देखा की उसमे भार्गवी मैडम थी, जीप थोड़ी दूर जा कर रुकी, फिर उलटी चलके मेरे पास रुकी. मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था, पता नहीं मैडम क्या कहेगी.

भार्गवी : कहा जा रहे हो? (उनका बोलने का तरीका थोड़ा रूढ़ था)

शिव : Ji..ji घर जा रहा हु. (वो मुझे ऐसे देख रही थी की में नज़ारे hi नहीं मिला प् रहा था)

भार्गवी : (वो भी उसे डांटना छह रही थी, जैसी हरकत उसने की थी, किसी की हिम्मत नहीं हुई थी उसके साथ ऐसा करने की, पर उसको डरा हुआ देख उसने कुछ न kaha)Betho, में तुम्हे छोड़ देती हु.

शिव : नहीं मैडम, में चला जाऊंगा.

भार्गवी : (थोड़ी कड़क आवाज me)Betho बोलै न. (उनकी आवाज में एक हुकम था तो में बेथ गया, उन्होंने गाड़ी घुमा ली, में समाज नहीं प् रहा था की वो दूसरी और जा रही थी, फिर मुझे छोड़ने दूसरी और क्यों आ रही है, मेने उनकी और देखा तो वो आगे देख कर गाड़ी चला रही थी, थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रही, में भी अपनी गलती के लिए माफ़ी मांगना चाहता था पर कैसे कहु समाज नहीं आ रहा था, अचानक एक बात मुझे याद आयी जो कल मेरे दिमाग में आयी थी)

शिव : मैडम, एक बात कहु?

भार्गवी : (उन्होंने बे मन से मुझे dekha)Kaho.

शिव : मैडम, अगर में चोरी का कोई व्हीकल बेचने जाहिर गेराज में जाऊ तो?

भार्गवी : (उन्होंने गाड़ी फ़ौरन साइड में लगायी, और घर कर मुझे dekha)Chori की गाड़ी, तुम्हारे पास?

शिव : मेरे कहने का मतलब है की में जूथ मुठ का चोर बन कर उसके वह बेचने जाऊ तो?

भार्गवी : (कुछ सोच kar)Matlab, उसके लिए जाल बिछाने का सोच रहे हो?

शिव : जी, मैडम.

भार्गवी : आईडिया तो अच्छा है, कई बार पुलिस ऐसा करती है, किसी को नकली ग्राहक बना कर हम उसके वह छापेमारी करते है, पर इसमें खतरा रहता है, में देख लुंगी. एक बात बताओ, तुम क्यों इसमें इतना दिमाग चला रहे हो?

शिव : वो उस दिन आपको परेशान देखा था तो मुझे अच्छा नहीं लगा, मेने सोचा कैसे आपकी परेशानी दूर करू इसीलिए में ये सोच रहा था.

भार्गवी : (उसने शिव को देखा, उसका चेहरा बता रहा था की वो सच में उसके लिए सोच रहा है, अपने लिए उसको ऐसे फ़िक्र करते देख उसका गुस्सा थोड़ा काम हुआ, उसकी आवाज में भी नर्माहट आ gayi)Ye मेरा काम है, रोज़ कोई न कोई मसाला चलता रहता है, तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, में देख लुंगी sab.(Unhone फिर जीप चला दी और मुझे अनाथालय छोड़ा)

शिव : (जीप से उतर kar)Thank यू मैडम.

भार्गवी : (बना मेरी और dekhe)Hmmmm...

शिव : (मेने हिम्मत बटोरी और bola)Aur सॉरी.

भार्गवी : (उन्होंने घर कर मेरी और dekha)Sorry?

शिव : (उनके ऐसे देखने से मेरी गांड फैट padi)Wo, वो आपको यहाँ आना पड़ा इस liye(Muje कुछ न सुजा तो में ने ये कहा और पीछे कदम बढ़ाते हुए में जल्दी से चलते हुए अनाथालय की और निकल गया)

भार्गवी : (वो शिव को ऐसे घबराये हुए जाता देखती रही, वो जानती थी की शिव, उसे सॉरी किस वजह से कह रहा था, उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ gayi)Pagal. (वो वह से निकल गयी)

में अंदर गया और पढ़ाई करने बेथ गया. फिर खाना खाया और फिर पढ़ाई करने बेथ गया. रात को पढ़ाई कर के में थक गया था. सोचा थोड़ी देर फ्रेश हो लू. में बहार आया और बाथ रूम गया, घर में सन्नाटा छाया हुआ था. मेने सोचा थोड़ी देर बहार टहल लू, में ऊपर छत पर चला गया. चारो और शांति थी, ठंडी हवा बह रही थी. मेने एक गहरी साँस ली. चाट की पाली पर में तक लगाए बहार देख रहा था की मुझे हलकी हलकी आवाज सुनाई दी, मेने ध्यान लगाया ता तो ये किसी की सिस्किअ थी, में दबे पॉ उस और बढ़ा, अँधेरा था तो ज्यादा कुछ दिख नहीं रहा था, वह पड़े थोड़े से कबाड़ के पीछे से आवाज आ रही थी. मुझे याद आया की मेरी जेब में मोबाइल रक्खा है, में वह गया तो मुझे सिस्किअ अब स्पस्ट सुनाई दे रही थी, मेने मोबाइल निकला और टॉर्च चालू कर दी, मेने देखा की गायत्री दीदी अपनी सलवार निचे किये हुए अपनी छूट में उंगली कर रही थी, लाइट से वो चौंक गयी, में भी घूम गया, मेने जल्दी से टोर्च बंद की और थोड़ी दूर जा कर खड़ा हो गया. थोड़ी देर बाद दीदी निकली, मेने मुद कर देखा तो उनका साया hi दिख रहा था.

शिव : सॉरी दीदी, मुझे मालूम नहीं था, में जा रहा हु. (में जल्दी से वह से निकल गया, मुझे अभी भी यकीं नहीं हो रहा था, मेने क्लेअर्ल्य देखा था की दीदी अपनी टंगे फैलाये अपनी छूट में ऊँगली दाल रही थी. में निचे आयकर बेथ गया और सोचने लगा. मुझे थोड़ी सी आहत हुई तो मेने मुद कर देखा तो गायत्रीदिदी कड़ी थी. में क्या कहु समाज नहीं आ रहा था और मुझे ये भी समाज नहीं आ रहा था की वो यहाँ क्यों आयी है.
 
अपडेट 99

गायत्री सबसे नज़र बचा कर छत पर जा कर अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी, उसे अपनी इस हालत पर गुस्सा भी आ रहा था. पर वो मज़बूर थी, क्यों की वो पिछले कुछ सालो से रोज़ चुदती आ रही थी, भले hi उसकी मर्ज़ी के बगै hi सही पर उसे छोड़ने की आदत पद गयी थी. आज भी वो ऊपर आगयी थी, उसने देखा था की शिव के रूम की लाइट जाली हुई है पर उसे ये भी पता था की वो पढ़ रहा है और फिर वो सो जायेगा. वो जब अपनी क्रिया में मगन थी तभी वह उजाला हो गया, वो चौंक गयी, उसने अपने आप को ढकने की कोशिस की पर वो समाज रही थी की सामनेवाला जो भी था उसे सब दिखा होगा. वो कुछ समझती उस से पहले वो सख्स घूम गया, वह हुए उजाले से उसे इतना तो पता चल गया की वो शिव है, वो जैसे तैसे कड़ी हुई और अपने कपडे ठीक किये, उसने देखा की शिव अभी वह खड़ा है, उसने जितना देखा था उस से उसे इतना तो यकीं था की अब शिव उसे छोड़ेगा, और सच कहे तो उसे भी एतराज नहीं था पर वो इतनीजल्दी मान ने वाली नहीं थी. उसने सोचा की अगर शिव ने कोई जबरदस्ती की तो वो चिल्लायेगी और सब को इक्कट्ठा कर शिव के चेहरे से नकाब हटा देगी, जो वो अच्छा बन ने का ढोंग कर रहा है उसे सब के सामने नंगा कर देगी. वो ये सब सोच कर बहार आयी पर शिव उसे सॉरी बोल कर चला गया. वो ठगी से वह कड़ी रह गयी, वो सोच रही थी की शिव ने उसके साथ कुछ भी क्यों नहीं किआ, क्यों की जितना वो जानती थी, अगर किसी लड़के को कोई लड़की ऐसी स्थिति में मिले तो वो उसके साथ सेक्स करने की जरूर कोशिस करेगा. उसे सरिता की कही बात याद आ गयी. “अगर तू उसके सामने नंगी भी हो जाएगी, तब भी शिव तुम्हे कुछ नहीं करेगा”. वो सोचने लगी, कही उसे शिव को समझने में भूल तो नहीं हो रही, उसने hi तो उसे उस नर्क से बचाया था जहा आने की कोई हिम्मत नहीं कर शक्ति था, उसके कहने से hi न सिर्फ वो वह आया बल्कि उसे उस नर्क से आज़ाद भी करवाया.

वो अपने आप पर hi गुस्सा होने लगी. शिव ने उसे बचाया था अगर वो कहता तो वो उसके सामने नंगी होकर लेट जाती, क्यों की फिर भी वो उसके एहसान का बदला नहीं चूका सकती थी. पर शिव ने न उसके सामने ऐसी कोई इच्छा रक्खी न hi उसके साथ कोई जबरदस्ती की, आज वो अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी तब वो कामातुर थी अगर शिव उसे वह छोड़ देता तो शायद वो मन भी न करती भले hi वो उस समय गुस्सा थी, वो सोच रही थी की वो गुस्सा क्यों थी शिव पर, इस लिए की शिव लता के साथ सब कर रहा था या रंजन के साथ भी कर रहा था पर उसके साथ उसने कुछ नहीं किआ था. उसे लगने लगा की सायद वो शिव को पहचान ने में धोखा खा रही है, वो अपनी सोच से बहार आयी और कुछ सोच कर शिव के कमरे में चली गयी, उसके मान में क्या चल रहा था वो खुद समाज नहीं प् रही थी.

वो धड़कते दिल से शिव के दरवाजे पर जा कर कड़ी थी, शिव वह बैठा था पर उसकी कुछ भी बोलने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, जब शिव ने मुद कर देखा तो उसकी नज़ारे अपने आप hi झुक गयी, वो अपना शिर झुकाये वही कड़ी रही.

शिव : दीदी आप? (मेरी कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो यहाँ क्यों आयी hai)Sorry दीदी, वो जो कुछ हुआ. (दीदी अभी भी कुछ बोल नहीं रही थी, मुझे लगा की वो शर्मिंदा है तो मेने उनकी शर्म मिटने के उद्देश्य से kaha)Aap चिंता मात कीजिये, में किसी से कुछ भी नहीं कहूंगा, आप शर्मिंदा मत होइए.

गायत्री : (उसने हिम्मत बटोरी और अंदर रूम में चली गयी, शिव के पास जाकर उसने kaha)Akhir तू चाहता क्या है?

शिव : में कुछ समजा नहीं दीदी.

गायत्री : इतना नादाँ नहीं है तू जो समाज न शेक, मुझे पता है तुम्हारे और लता के बिच क्या सम्बन्ध है, ये भी पता है की रंजन के साथ भी तुम्हारे वैसे hi सम्बन्ध है, और जिस तरह से सरिता तुम्हारी वकालत करती है, वो भी में समाज सकती हु, तो इतना अच्छा बन ने का नाटक क्यों कर रहा है. (शिव को खामोस देख kar)Me जानती हु मर्दो को क्या चाहिए, तुम भी तो सब एक जैसे hi हो. (मुझे ये जान कर आघात लगा की वो लतादिदी के बारेमे जानती है, मेरे लिए मुझे कोई चिंता नहीं थी पर में नहीं चाहता था की लतादिदी पर कोई ऊँगली उठाये, पर में जान न चाहता था की आखिर उनके मान में चल क्या रहा है) वह गयम में bhi...(Wo बोलते बोलते रुक गयी. मुझे चिंता हुई, गयम में उनके साथ किसी ने कुछ किआ क्या, किसने?)

शिव : गयम में? किसी ने कुछ कहा क्या?

गायत्रीदिदी : (मेरी और देख कर) तुम सब एक जैसे hi हो, वो भी पहले पहले मुज से अच्छी अच्छी बाते कर रहा था, जब मेने घास न डाली तो सीधे सीधे पूछने लगा की मेरे साथ कफ पिने चलोगी, मेने वो भी मन कर दिया तो...

शिव : किसकी बात कर रही हो दीदी?

गायत्री : वो है न, मदनसीर.

शिव : मदनसीर... क्या किआ उन्होंने?

गायत्री : क्या कहेगा, जब मेने मन कर दिया तो उसने मुज से कहा की वो मुझे पैसे भी दे सकता है अगर में उसके साथ जाऊ तो.

शिव : क्या? आप ने पवनसीर को नहीं बताया? अगर उनसे कहने में झिझक रही थी तो मुझे तो बता शक्ति थी.

गायत्री : क्यों बताती, सब मर्द एक जैसे hi होते है, जब में नहीं मणि तो उसने मुझसे कहा की वो जतनता है की में एक वैस्य रह चुकी हु, तो वो मुझे पैसे से खरीदना चाहता था.

शिव : इतना सब हो गया फिर भी अपने मुझे बताया नहीं दीदी, मुझे लगता है, अपने मुझे अपना मन hi नहीं, में कल hi पवनसीर से बात करता हु.

गायत्री : उसकी कोई जरुरत नहीं, मुझे आता है ऐसे लोगो को कैसे संभाला जाता है, इतने सालो से बेइज्जती के घुट पि कर अब मुझे इज्जत का कोई दर नहीं, है में थी वैस्य पर अब नहीं हु, और न कभी बनूँगी. (उनकी आँखों से आंसू बह निकले, में उनका दर्द समाज रहा था, में उनके पास गया और उन्हें गले लगा लिया, पर पता नहीं क्यों उन्होंने मुझे धकेलते हुए kaha)Chhod मुझे, तू भी तो वही चाहता है( मेने उन्हें नहीं छोड़ा और उन्हें कास के पकड़े rakkha)Chhod मुझे, में चिल्लाऊंगी.

शिव : चिल्लाओ, जितना मर्जी हो चिल्लाओ, पर में आपको नहीं छोडूंगा, आप मनो या न मनो पर आप मेरे परिवार की hi हो, और में अपने परिवार के किसी भी सदस्य को रोटा नहीं देख शक्ति.

गायत्री : ज्यादा अच्छा बन ने का नाटक मात कर, तू भी तो वही चाहता है जैसा वो चाहता है.

शिव : आपको ऐसा क्यों लग रहा है, क्या मेने कभी आपके साथ कोई जबरदस्ती की या आप को कभी उस नजर से देखा, क्या मेने कभी आपको छुआ? (गायत्री जानती थी की ये सच है की शिव ने कभी ऐसा कुछ नहीं किआ)

गायत्री : क्यों नहीं किआ?

शिव :क्या? (मेरी समाज में नहीं आया, दीदी ने क्या कहा, मेने उनकी और देखा, वो भी मुझे देख रही थी)

गायत्री : क्यों नहीं किआ?

शिव : (उन्हें छोड़ते hue)Meri समाजमे नहीं आ रहा दीदी, अभी तो आप मुझे दूसरे मर्दो की साथ तौल रही थी और अभी मुझसे hi कह रही है की मेने ऐसा कुछ क्यों नहीं किआ.

गायत्री : तू लता के साथ कर रहा है, बाकि के साथ भी कर रहा है तो मेरे साथ क्यों कुछ नहीं किआ?

शिव : आप बार बार लतादिदी को बीचमे मात लाईये, और आप कैसे कह शक्ति है की मेरे और लतादिदी के बिच...

गायत्री : मेने सब अपनी आँखों से देखा है, और उस दिन रंजन बाथरूम से निकली तब भी तू कैसे खड़ा था, तुजे क्या में बेवकूफ लगती हु.

शिव : ठीक है, है मेरे और दीदी के बिच सब, पर जैसा आप समाज रही है वैसा नहीं है, जैसा सब आपके साथ हुआ है, इसकी तुलना आप हमारे सम्बन्ध के साथ मात कीजिये. हम सब जो भी करते है वो आपसी सहमति से करते है, मेने कभी किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की.

गायत्री : अगर उनके साथ कर शक्ति है तो मेरे साथ क्यों नहीं?

शिव : ये क्या कह रही है दीदी?

गायत्री : क्यों तुजे दिखाई नहीं देता की मेरी क्या हालत है, इतने सालो से में वो सब करती आ रही हु तो न चाहते हुए भी ये शरीर वो चाहता है, में अपने आप पर काबुराख्ने की कोशिस करती हु पर कभी कभी वो सब काबू से बहार हो जाता है.

शिव : अगर करना hi चाहती थी तो फिर मदनसीर के साथ कर लेती.

गायत्रीदिदी : (मेरे सामने घर कर देखते hue)Me वैस्य नहीं hu(Unhone थोड़े सख्त लहजे में कहा था, थोड़ी देर वो खामोस रही फिर थोड़ी नरमी se)Agar वो मुझे मानते तो में शायद मान जाती, पर वो मुझे खरीदने चले थे, में बिकाऊ नहीं हु, अगर मुझे पैसे hi कमाने होते तो में नौकरी न करती, जो वह करती थी अगर वो hi करती तो भी महीने के इतने पैसे कमेटी की जो अभी मिलरहे है उसके सामने कई गुना ज्यादा मिलते. पर मुझे वो नहीं करना hai.(Unki आँखों से फिर से आंसू बहने लगे, मेने फिर से उन्हें गले लगा लिया, इस बार उन्होंने छूटने का कोई प्रयास नहीं किआ) मुझसे कभी कभी ये बर्दास्त नहीं होता शिव, आज भी वैसा hi हुआ, इसीलिए में ऊपर चली गयी थी.

शिव : तो ख़तम हुआ फिर आपका? या मेने आपको बिच में hi डिस्टर्ब कर दिया

गायत्री : (चौक कर उसने शिव को देखा, वो मुस्कुराया तो वो शर्मा gayi)Nahi, तू जो आ गया था.

शिव : अब में नहीं आऊंगा, जाइये आप को जो करना है कर लीजिये.

गायत्री : (उसे अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की शिव ये क्या बोल रहा hai)Tu ऐसा क्यों है, तुजे पता है की मुझे क्या चाहिए फिर भी तू...

शिव : में किसी की मज़बूरी का फायदा नहीं उठता दीदी. मेने आपको पहले भी कहा था की ये आपका भी घर है, आप अपनी मर्ज़ी से रहिये, पता नहीं आपको में वैसा क्यों लगता हु पर में आपके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा, यकीं रखिये, और रही बात दुसरो के साथ सम्बन्ध की तो हम सब आपसी सहमति से करते है और हम खुस है.

गायत्री : तो मुझे भी उसमे शामिल कर लो. (मेने उन्हें दूर किआ और उनके चेहरे को देखा, वो शर्मा gayi)Aise मात देखो, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : फिर आप ये तो नहीं कहेगी की मेने आपके साथ कोई जबरदस्ती की, या आपकी मज़बूरी का फायदा उठाया है.

गायत्री : (फिर से मेरे गले लगते hue)Nahi शिव, में खुद चाहती हु की तुम मेरे साथ वो सब करो. में खुद तड़प रही हु शिव, मेरे तड़प मिटा दो.

शिव : (वो मेरी बाहोंमे थी, मेने उनकी पीठ को सहलाया और दबाया तो वो भी मुहसे लिपटने लगी और मुझे अपनी और खींचने लगी, में उनकी हालत समाज रहा tha)Thik है, जाइये दरवाजा बंद कर दीजिये. (उन्होंने मेरी और देखा, तो में मुस्कुराया, उन्होंने फिर अपनी नज़ारे झुका ली और धीमे कदमो से वो दरवाजे के पास गयी और दरवाजा बंद कर के चिटकनी लगा दी, कुछ पल वो वह कड़ी रही फिर पलटी और अपनी नज़ारे झुकाये दरवाजे के पास hi कड़ी rahi)Ab आ भी जाओ दीदी. (उन्होंने नज़र उठा के मुझे देखा फिर शमा के नज़ारे झुका ली, और धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आकर कड़ी हो गयी, पर निचे hi देख रही thi)Aap तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे ये सब पहली बार करने वाली ho.(Meri और देख कर फिर से उनकी आँखों में आंसू आ गए, मेरी समाज में नहीं आया की अब वो क्यों रो रही है) सॉरी दीदी, कुछ गलत कहा क्या मेने?

गायत्री : तुमने सही कहा शिव, में ये सब न जाने कितनी बार कर चुकी हु, पर आज पहली बार में अपनी मर्ज़ी से किसी के साथ हु, तुजे भी शायद मेरी बात समाज नहीं आएगी.

शिव : (में उनकी बात का मतलब समाज रहा tha)Me समाज सकता हु, सॉरी दीदी, मेरा वो मतलब नहीं था, वो तो बस ऐसे hi मेरे मुँह से निकल गया. (मेने उनका चेहरा ऊपर उठाया, और उनके आंसू पोछे, फिर मुस्कुराते हुए) वैसे दीदी आप बहोत मस्त है, अगर कुछ ज्यादा गुस्ताखी हो जायेतो माफ़ कर dena(Unke चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी)

गायत्री : मुझे मात बना, अगर इतनी hi अच्छी होती तो कभी मेरे ऊपर तरय क्यों नहीं किआ.

शिव : (में muskuraya)Tab बात अलग थी, मेने आप को उस नजर से नहीं देखा था, पर आज वैसे देखा तो पता चला, आप सच में बहोत कमल लगती हो दीदी, बिना कपड़ो के भी आप कमल लगोगी. (मेरी बात से वो शर्मा गयी) क्या में आपको बिना कपड़ो के देख शक्ति हु? (वो मुस्कुरायी और अपनी नज़ारे झुका कर हां में गर्दन हिलायी, में भी मुस्कुराया और उनके गोल घूम कर उन्हें हर तरफ से देखा, वो इतना शर्मा रही थी की वो अपने आप को शमटने की कोशिस कर रही थी, पर उनके चेहरे की मुस्कराहट बता रही थी की उन्हें ये अच्छा लग रहा था, अब जब मुझे ाप्त था की में उन्हें छोडूंगा तो मेरा लुंड खड़ा होने लगा, उन्होंने सलवार कमीज़ पहना था, मेने उनकी चुन्नी को उतर दिया और उसे साइड में रख दिया, में उनके पूछे गया और उन्हें अपनी बहो में भर लिया, मेरे लुंड उनके चूतड़ों से टकराने लगा, मेने उनकी ब्याह को सहलाते हुए उनके स्तन को सहलाया)

गायत्री : शह्ह्हह्ह्ह्ह (उनकी गर्म सिसकी सुन कर मेरा लुंड और अकड़ने लगा, उनके भरे हुए स्तन को में कपड़ो के ऊपर से hi दबाने लगा, और मेरे लुंड को उनकी गांड की दरार में दबाने laga)Shhhhhh, ओह्ह्ह्हह शिईयिव shhhhhh(Mene उनकी गर्दन पर किश किआ तो उन्होंने पीछे हाथ बढ़ा कर मेरी गर्दन को अपनी और khincha)Shhhhhhh शीइइइइइइव (उनके भरे हुए नरम स्तन को में दबाते हुए उनकी गांड की दरार में अपना लुंड चुभा रहा tha)Shhhhhh शहीीिव शहहहहह में कब से तड़प रही थी सीईव शह्ह्ह्ह.

शिव : (उनके कान को चाट ते hue)Me आपके कपडे उतर दू?

गायत्री : शह्ह्ह्ह हाआआआआ. (उनकी अनुमति प् कर मेने उनकी कमीज़ की चैन जो पीछे थी उसे खोला और कमीज़ को पकड़ कर ऊपर की तरफ से उतर दी, वो अब ऊपर से ब्रा में थी, मेने कमीज़ साइड में रक्खी और उनकी और देखा तो वो अपने स्तन को हाथ से छुपाने की कोशिस करते हुए शर्मा रही थी, में फिर उनके पीछे खड़ा हो गया और उनकी नंगी पीठ को देखने लगा, वह सिर्फ काली ब्रा की पट्टी hi थी, मेने उनकी नंगी पीठ को चूमते हुए ब्रा को थोड़ा निचे खिसकाया और उनके स्तन को बहार निकल दिया, बे उनके नंगे स्तन को दबाने लगा, वो नरम गुब्बारे मेरे अंदर जोश भरने लगे, मेरा लुंड उनकी गांड की दरार में धसने लगा, उन्होंने अपना हाथ पीछे किआ और मेरे लुंड को सहलाने लगी, वो उसे दबाते हुए देख रही thi.)Isse बहार निकल न.

शिव : आप खुद hi निकल लो. (उन्होंने मेरी चड्डी निचे खिसका दी और मेरे लुंड को थम लिया, और उसे हिलने लगी) कैसा है दीदी?

गायत्री : बहोत बड़ा है, उस दिन देखा था तो यकीं नहीं हुआ था.

शिव : अब अच्छे से देख लो. (मेने ब्रा के हुक हॉल दिए, ब्रा ढीली हो गयी थी पर उसे उन्होंने अपने हाथो से थम लिया, उनके कंधो पर से ब्रा को हटते हुए में उन्हें सेहला ते हुए अपने हाथ को आगे ले गया, हलके से उनके हाथ को हटाने पर उन्होंने खुद अपने हाथ हटा दिए, मेने उनके नंगे भरे हुए चुचो को सहलाया)





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ओह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (चुचो को मसलते hue)Didi आप के बॉल मस्त है. (में उन नरम गोलों को अच्छे से दबाते हुए मसल रहा था, और उसके निप्पल को भी मसल रहा था)

गायत्री : (शिव के बड़े बड़े पंजो में फसे अपने चुचो की हालत देख उसकी सिस्किअ फुट रही थी, शिव के द्वारा मसली जा रही अपनी चुचिओ से उसके अंदर चिंगारिया फुट रही थी,





उसके सख्त हाथ और उसके कड़क लुंड को अपनी गांड की दरार में महसूस करके उसकी छूट से नादिया बह रही थी, चुचिअ मसलने से उसे हल्का हल्का दर्द हो रहा था पर फिर भी उसे चैन नहीं tha)Shhhhhh जोर से मसलो उसे शह्ह्ह्हह्ह दबा दो उसे बहोत तंग करती है ये शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जोर से मसलो उसे शिव shhhhhhhhh(Mene थोड़ा ज़ोरो से मसाला तो वो सिसक utthi)Ahhhhhh इतना जोर से नहीं शह्ह्ह्हह्ह (वो अपनी गांड मेरे लुंड पर रगड़ रही थी, उनकी गांड के घरसँ से मेरा लुंड लोहे सा कड़क हो गया tha)Shhhhh अह्ह्ह्ह तुम्हार कितना बड़ा है न शिव शह्ह्ह्ह उस दिन देखा था शहहहहह तब से दिमाग से हैट hi नहीं रहा था शह्ह्हह्ह्ह्ह आज भी में उसे hi याद कर के अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी shhhhhhhhhh, मेने इतना बड़ा कभी नहीं देखा शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह उसे अपने अंदर लेने के लिए तड़प रही हु में शह्ह्ह्हह्ह, मेरी सलवार भी उतर दो शह्ह्ह्ह मुझे पूरी नंगी कर दो शह्ह्हह्ह्ह्ह मुज से रहा नहीं जाता अब शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में अपना हाथ निचे ले गया और उनकी छूट को सलवार के ऊपर से hi दबोच लिया, मेरे हाथ में चिकनाहट साफ़ महसूस हो रही थी, जैसे hi मेने उसे दबाया तो कुछ बुँदे नीचे जमीं पर भी टपक गयी, वो बहोत hi ज्यादा कमरुत हो चुकी थी.)

शिव : आप की छूट तो बहोत ज्यादा गीली हो गयी है दीदी. (में छूट को मसल रहा था, उन्होंने अपनी टंगे फैला दी)

गायत्री : शह्ह्ह्हह्ह वो बहोत दिनों से तड़प रही है शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, उसे तेरे लुंड का एहसास हो चूका है, वो जानती है की उसे क्या मिलनेवाला है तो वो पागल हुए जा रही है शह्ह्हह्ह्ह्ह, जल्दी कर शिव, उसे आज़ाद कर दे (दीदी अब जरा भी नहीं शर्मा रही थी, उसकी गर्म सिस्किअ और उनका अंदाज़ देख मेरा लौड़ा झटके मर रहा था, मेने सलवार की डोरी खोली और वो निचे सरक गया, मेने दीदी को उल्टा लेता दिया और उन्हें देखने लगा, सिर्फ पंतय में वो नंगी लेती थी, उनके उभरे कूल्हे ला जवाब थे,

गेहुए रंग का उनका बदन कामुकता से भरा हुआ था. मेने भी अपने कपडे उतरदिये और ननगा हो गया, वह उनके पैरो के पास बेथ कर में उनके कूल्हों को मसलने laga)Shhhhhhh shhhhhhhhh(Me उन्हें मसल रहा था और वो सिस्किअ ले रही थी)

शिव : आप के कूल्हे मस्त है दीदी.





गायत्री : तो चड्डी उतर कर देख न, शह्ह्हह्ह्ह्ह तुजे जो अच्छा लगे वो कर मेरे साथ शह्ह्ह्हह्ह में किसी भी चीज के लिए मन नहीं करुँगी शह्ह्ह्हह्ह. (उनकी बात मान कर मेने उनकी पंतय निकल दी, अब वो पूरी तरह से नंगी थी, में उनके भरे हुए कूल्हों को मसलते हुए उन्हें फैलाया तो गहरे रंग का गांड का छेड़ नज़र आ रहा था, और उसके निचे छूट भी थोड़ी देख रही थी, मेने उनके पेअर फैलाये तो उनकी भीगी हुई छूट भी मुझे नज़र आने लगी. में उनके कूल्हों को मसलने लगा और उन्हें चैहटन laga.)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहहहह ahhhhhhhh.(Thodi देर उनके कूल्हों के साथ खेल कर में उनके ऊपर हुआ, मेरा लुंड कूल्हों की दरार में था, वो गरम गरम दरार मेरे लुंड को और भड़का रहा hi thi)(Apni नंगी गांड पर लुंड की गर्माहट को महसूस कर वो सिसकने lagi)Shhhhhh कितना अच्छा लग रहा है शहहहहह, (मेरे लुंड से निकल रहे चिकने रास से दरार भी चिकनी हो गयी थी, मेरा लुंड बार बार गांड के छेड़ को ठोकर मर रहा tha)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह मेने वह कभी नहीं किआ शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुजे वह करना है? (वैसे तो मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं tha)Shhhhhh अह्ह्ह्हह तुजे जहा डालना है दाल दे शह्ह्ह्हह्ह में किसी भी चीज के लिए मन नहीं करुँगी.

शिव : (उन्हें पलट ते हुए) क्या आप इतना गरम हो गयी हो की आप कुछ भी करा शक्ति हो?

गायत्री : हआ शिव शहहह में बहोत उत्तेजित हो गयी हु शिव शहहह पर तुम्हारी वजह से, अगर कोई और मेरे साथ ये सब करना चाहता तो में न करने देती, और पैसो के लिए तो बिलकुल भी नहीं, पर तेरी बात अलग है, तू तो वो है जो मुझे उस जिल्लतभरी जिंदगी से छुड़ा कर लाया है, शायद में तेरे से इस लिए गुस्स्सा थी क्यों की तू मुझे कुछ कर नहीं रहा था, जितने भी लोग मेरे पास आते थे वो सब मेरी खूबसूरती की तारीफ करते थे, वह आनेवाले ज्यादा तर मेरी hi डिमांड करते थे, इस्सलिये में इतना तो जानती थी की में अच्छी दिखती हु, और तू है की कभी मेरी और बढ़ा hi नहीं, तो शायद मुझे तुज पर गुस्सा आ रहा था. पर में अब समाज गयी हु की तू उनके जैसा नहीं है, तू लड़कीओ को हवस की नज़र से नहीं देखता.

शिव : पर अभी तो में देख रहा हु दीदी.

गायत्री : अब तो में भी राज़ी हु तो फिर तू मुझे वैसे देख शक्ति है, क्यों की तभी तो तू उत्तेजित होगा और मुझे मज़ा देगा. अब मुझे वैसे देखने में या मेरे अंगो से खेलने में कोई खराबी नहीं है.

शिव : तो क्या में आपकी छूट को देखु?

गायत्री : तूने तो अच्छी अच्छी छूट देखि हुई है, लोगो की हवस का शिकार हो कर मेरी तो गन्दी हो चुकी है, है पर मेने कभी किसी को बिना कंडोम के करने नहीं दिया, पर फिर भी इतने लोगो ने मेरे साथ वो सब किआ तो है.

शिव : भूल जाओ दीदी वो सब, शरीर hi सब कुछ नहीं होता, मान भी कोई मैंने रखता है, अगर ऐसा होता तो लोग शादी के एक शाल में hi अपनी बीवी से दूर हो जाते, अगर छूट का इतना hi महत्व होता तो लोग अपनी बीवी को छोड़ देते, पर वो ऐसा नहीं करते, क्यों की सिर्फ छूट नहीं पर लड़की का शरीर उसका मान सब कुछ मायने रखता है, आप आज भी पवित्र hi है, सिर्फ शरीर से सेक्स करने से hi तो कोई अपवित्र नहीं हो जाता, ये तो एक कुदरती क्रिया है, पवित्रता या अपवित्रता वो मान का भाव है, आप गर किसी का बुरा नहीं चाहते तो आपसे पवित्र इस दुनिया में कोई नहीं, चाहे वो कोई वैस्य hi क्यों न हो. आप मान से और तन से आज भी पूरी तरह पवित्र hi है दीदी, तो अपने दिल से ये बोझ निकल दीजिये.

गायत्री : सच में तू बहोत अच्छा है शिव, दुनिया के मिले धोखो ने hi मुझे ऐसा बना दिया की में तुज पर भी शक कर गयी, मुझे माफ़ कर दे.

शिव : मेने कभी आप को गलत समजा hi नहीं तो माफ़ी किस बात की. चलिए अब तो मुझे देखने दीजिये.

गायत्री : (शरमाते hue)Shiv, सच में मुझे शर्म आ रही है, तेरे साथ आके पता चला की अभी भी में वही गायत्री हु जो कई साल पहले इस अनाथालय में रहती थी. आज तेरे छूने से मुझे एहसास हो रहा है की में भी एक लड़की हु, आज भी मेरे अंदर वो सब भावनाये है जो एक लड़की में होती है. तुजे जो करना है कर शिव, पर मुझे एक बार किश कर, मेने कभी किसी को किश नहीं किआ या करने दिया, पर ,में चाहती हु की तू मुझे किश करे (में उनके ऊपर हुआ और उनको अपने निचे दबाते हुए उनके होठो को चूसने लगा, पहले पहले वो कुछ कर नहीं रही थी सिर्फ मुझे चूसने दे रही थी पर फिर वो भी सुरु हो गयी, उनके किश करने के तरीके से hi में समाज गया की वो सच बोल रही है, में उन्हें अपने इस पहले अनुभव को यादगार बनाना चाहता था तो मेने उन्हें अच्छे से किश किआ, उनके मुँह में जीभ दाल कर उनकी जीभ से खेला, फिर उनकी जीभ को चूसा, वो मुझे बेतहासा किश कर रही थी, में उनके नंगे चुके दबाते हुए उन्हें किश कर रहा था, थोड़ी देर बाद में उनसे अलग हुआ और उन्हें देखा तो वो नशे में डूबी वो मुस्कुरा रही थी, मेने उनके बूब्स को दबाया और उन्हें चूसा फिर निचे जाते हुए मेने उनके पेअर फैलाये और छूट को देखा, वह छोटा सा छेड़ नज़र आ रहा था, छूट के होठ थोड़े काळा हो गए थे, पर बेचारी दीदी की कोई गलती नहीं थी, मुझे सच में उनके लिए दुःख था और में उन्हें वो खुसी देना चाहता था जो उनका हक़ था., मेने अपने होठ उनकी छूट पर लगा दिए और उन्हें चाटने laga)Shhhhhhh ये क्या कर रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह तूने तो शह्ह्ह्ह देखने को कहा था, शह्ह्ह्हह्ह वह अपना मुँह मात लगा शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh (जैसे जैसे शिव उसकी छूट चाट रहा था वो मज़े से पागल हो रही थी, ऐसा अनुभव तो उसने कभी पाया hi नहीं tha)Ahhhhhh सीईव ये कैसा मज़ा है शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह (अपनी छूट के अंदर वो लपलपाती जीभ को महसूस kar)Shhhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव ये क्या शहहहहह कर रहा है शह्ह्ह्हह्ह, ऐसा मज़ा तो मुझे कभी नहीं मिला शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह (और सच भी था, लोग रंडी के पास जाते है, तो सिर्फ अपना पानी निकलने के लिए, वो उसे लुंड तो चुसवाते है पर उसकी छूट नहीं चाट te)Shhhhhh शिईयिव शहहहहह मेरा पानी निकलनेवाला है शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव अपना मुँह हटा शहहहहह मीटीए शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो झटके कहते हुए झड़ने lagi)Oahhhhhhh शहहहहह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह. (वो हांफ रही थी में सीधे बेथ कर उन्हें देख रहा था, थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे देखा और वो उठ बैठी और मेरी गॉड में बैठते हुए मेरे होठो पर टूट padi,)Ummmh ुम्मम्ह स्लुर्प स्लुर्प उम्मम्मम ummmm(Wo काफी देर तक मेरे होठ चूस रही थी, मेरा लुंड हम दोनों के बिच खड़ा था, वो अपने छूट के होठो को मेरे लुंड पर रगड़ रही थी, वो अपनी कमर के झटके दे रही थी) शिव शह्ह्ह्ह मुझे पता है तुजे भी अपना लुंड चुसवाना है शह्ह्ह्ह पर में वो थोड़ी देर बाद उसे चूसूंगी, शह्ह्ह्ह मुझे अभी ये अपने अंदर चाहिए शहहहहह तुम्हे एहतज तो नहीं na(Mene मुस्कुरा कर न कहा, वो फिर से मेरे होठो को चूसने लगी) तुम्हे पता है शिव, आज में पहली बार सब अपने मान से कर रही हु, मुझे तू बहोत अच्छा लगता है, शायद मुझे तुज से प्यार हो गया है, और में ये भी जानती हु की में तेरे ऊपर कोई हक़ नहीं जमा शक्ति, पर प्यार तो कर hi शक्ति हु न, आज में खुद तेरा ये बड़ा, अपने अंदर लुंगी.

शिव : क्या दीदी?

गायत्री : (मुस्कुराते hue)Pata नहीं तुम लड़को को क्या मज़ा आता है ये सब सुन कर, (मेरा लुंड पकड़ kar)Ye, टेराआ लुंड, अब khus(Me मुस्कुराया, वो भी मुस्कुरायी, उन्होंने मेरे लुंड को अपनी छूट पर रक्खा और अपनी छूट पर घिसा, फिर अपनी छूट के छेड़ पर टिका कर उस पर बैठने लगी, लुंड छूट में उतरता गया, वो तब तक बेथ टी रही जब तक उनकी छूट में लुंड आगे नहीं गया, वो रुक gayi)Maaaaa, कितना बड़ा है ये शहहहहह पूरा भर गया मेरे अंदर. (में मुस्कुराया, वो मेरे गले में अपनी बहे डेल, मुझे किश करने लगी और ऊपर निचे होते हुए लुंड पर कूदने लगी)





शहहहहह अह्ह्ह्ह शहहह उम्म्म्म स्लुर्प स्लुर्प उम्मम्मम उम्मम्मम शहहहहह शिव शह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह तुजे अच्छा लग रहा है? (में मुस्कुराया और उनके कूल्हे पकड़ कर उन्हें अपने लुंड पर ऊपर नीचे करने laga)Shhhhhhh अह्ह्ह्ह सीईव शहहह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसा मज़ा तो आज मुझे पहली बार hi मिल रहा है शहहह अह्ह्ह्हह, अपने दिल से अपनी खुसी से ये करना कितना अलग है शिव शह्ह्ह्ह में सच में बयां नहीं कर शक्ति, शहहहहह अह्ह्ह्ह (वो अपनी गांड को गोल गोल घूमते हुए मेरे लुंड को अंदर ले रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्हह तेरे पुरे लैंड ने मेरी छूट को भर दिया है शिव शठ अह्ह्ह्ह.

शिव : (में muskuraya)Abhi बाकि है दीदी.

गायत्री : क्या बाकि है? (मेने निचे इस्सर किआ, वो थोड़ी दूर हुई और अपनी छूट में धसे उस मोठे से लुंड को देखने लगी, लुंड अभी भी बहोत बहार tha)He भगवन, ये तो अभी भी काफी बहार है, पर मेरे अंदर तो जगह नहीं बची शिव, अब वो और अंदर नहीं जा रहा.

शिव : वो आप से अंदर नहीं जायेगा.

गायत्री : तो फिर कैसे जायेगा.

शिव : आप चाहती है की वो पूरा अंदर चला जाये?

गायत्री : है शिव, तभी तो तुम्हे मज़ा आएगा, और में चाहती हु तुजे पूरा मज़ा दू.

शिव : पर आप को दर्द होगा.

गायत्री : पागल है क्या, अब कहे का दर्द, कुछ नहीं होगा तू दाल दे. (मेने उन्हें नीचे लेटाया, उनकी आँखों में देखा, वो भी देख रही थी, में झुका और उनके होठो को चूसने लगा, और साथ में लुंड को अंदर बहार करने लगा, वो होठो को चूसने में खोई हुई थी की मेने एक जोर से धक्का मर दिया, उनकी आंखे दर्द से बंद हो गयी और मेरा पूरा लुंड छूट में समां गया, वो चिल्लानेवाली थी पर मेने उनका मुँह अपने होठो से दबा दिया, थोड़ी देर में वैसे hi रहा, उनके पेअर जो हवामे थे वो बिस्तर पर पसर गए थे, में थोड़ी देर रुका रहा, थोड़ी देर बाद उन्होंने आंखे खोली और मुझे आश्चर्य से देखा, में मुस्कुराया)

शिव : सॉरी दीदी, ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ na(Wo अभी भी मुझे आश्चर्य से देख रही thi)Isme आश्चर्य की क्या बात है दीदी, शायद आपको ऐसा कोई मिला hi नहीं जो आपकी छूट को पूरा खोल शेक. (मेने लुंड थोड़ा बहार निकला, और फिर अंदर किआ, अभी भी वो मुझे आश्चर्य से देख रही thi)Aise क्या देख रही है दीदी.

गायत्री : मुझे यकीं नहीं हो रहा शिव, एक बात पुछु, तुजे मेरी छूट में मज़ा आ रहा है?

शिव : पूछना क्या चाहती है आप?

गायत्री : यही की, क्या वो तुजे मज़ा दे रही है?

शिव : (में muskuraya)Degi क्यों नहीं, मेरे लुंड से वो पूरी चिपक गयी है, आप को तो दर्द नहीं हो रहा न.

गायत्री : नहीं शिव, पर मेरी छूट बहोत फ़ैल गयी है, वह जगह hi नहीं बची, पर मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, अब छोड़ ले muje(Unhone अपनी टंगे मेरी कमर में dali)Achchhe से छोड़ ले में तुजे खुस देखना चाहती हु, में चाहती हु की तुजे भी मेरे साथ मज़ा aaye(Me ने धक्के चालू कर diye)shhhh अह्ह्ह्ह शहहहहह हम्म्म हम्म्म अह्ह्ह्हह शहहहहह शिव शठ तेरा लुंड अब अंदर किसी दीवाल से टकरा रहा है शहहह में उसे महसूस कर शक्ति हु शह्ह्ह्ह वो किसी जगह ठोकर मार रहा hai(Mene स्पीड बढ़ा di)Shhh अहह अहह अहह अहह अहह अहह शठ शठ शिव छोड़ ले मुझे शहहह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शहहह (मेने एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा, उन्होंने मेरे शिर को अपनी चुकी पर दबा diya)Shhh अह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे hi शहहह बहोत अच्छा लग रहा है शठ ऐसे hi शिव शठ अह्ह्ह्ह ऐसे hi शह्ह्ह्ह जोर से शिव शहहह मुझे छोड़ ऐसे hi छोड़ शठ मेने ऐसा लुंड कभी महसूस नहीं किआ शहहह तेरा लुंड मुझे बहोत मज़ा दे रहा है shhhh(Lagatar दस मिनट तक में उन्हें छोड़ता रहा तो वो ज़द gayi)Ahhhhh शह्ह्ह्ह में गयी शह्ह्ह्ह अह्ह्ह में फिर झाड़ गयी शह्ह्ह्ह ये कैसा जादू है शिव shhhhhh(Me रुक गया और लुंड बहार निकला, वो उठी और मुझेधकेलते हुए मेरे लुंड को अपने मुँह में भर liya)Ummm उम्म्ह , कितना बड़ा है ये शिव शहहह स्लुर्प स्लुर्प शहहह (वो उसे पागलो की तरह चाट रही thi)Slurp सलरत, शहहह ummmm(Unhone लुंड को अपने मुँह में बार लिया और चूसने lagi)Ummm ूमममम उम्म्म्म उम्म्म्म, बहोत बड़ा है ये शिव उम्म्म उम्म्म उम्म्म्म मेरा पूरा मुँह भर जाता है उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म बेचारी लता की क्या हालत हुई होगी उम्म्म्म उम्मम्मम तूने रंजन को भी छोड़ दिया है की सिर्फ लुंड चुसवाया है उम्म्म उम्म्म्म बोल न उम्म्म उम्म्म्म (में मुस्कुराया) ध्यान से करना, कही मर न जाये वो, स्लुर्प स्लुर्प, वैसे तो वो मुझसे भी लम्बी है तो ले लेगी पर आराम से करना use(Ab में उन्हें क्या बताऊ, वो पहले hi मेरा लुंड ले चुकी hai)(Thodi देर लुंड चूसने के बाद वो मेरे ऊपर आ गयी और लुंड को अपनी छूट पर सेट करते हुए बेथ गयी, लुंड फिर से एक बार उनकी छूट को फैलता हुआ अंदर चला gaya)Oooo मा शह्ह्ह्ह शिव तुम्हारा लुंड मस्त है shhhhh(Wo अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लुंड पर अपनी गांड पटकने लगी, छूट से इतना पानी बह रहा था की वो मेरे लुंड को भिगोते हुए मेरे गांड के छेड़ पर भी महसूस हो रहा tha)Wo मेरी छाती के निप्पल को चूसते hue)Shhh अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्ह आज मुझे पता चला शहहह अपने मान से ये सब कितना अच्छा लगता है शहहह शहहहहह, वो लगातार अपनी गांड पटक रही थी) शहहह उफ्फ्फ्फ़ शह्ह्ह्ह मेरी छूट फिर पानी छोड़ने को तैयार है शिव शह्ह्ह्ह आज तक कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ शहहहहह तुम क्या हो शिव शहहह तुम्हार पानी निकलता है की नहीं शहहहहह कितना कड़क है ये लुंड शह्ह्ह्हह्ह मेरी छूट फाड् दी तुमने शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह, मेरी गांड में जायेगा तो पता नहीं क्या होगा शहहह अह्हह्ह्ह्ह, मेने वह कभी नहीं करवाया शिव शहहहहह (वो फिर झड़ने लगी, वो हाफ ते हुए मेरे साइन पर लुढ़क गयी, थोड़ी देर बाद वो मेरी आँखों में देख रही थी,) तुम वह दाल दो.

शिव : कहा दीदी?

गायत्री : मेरी गांड में.

शिव : क्यों दीदी?

गायत्री : वह किसी ने नहीं डाला शिव, तुम दाल दो.

शिव : आप को दर्द होगा.

गायत्री : मर जाने दो मुझे, कोई अफ़सोस नहीं शिव, पर आज दाल दो.

शिव : उसकी कोई जरुरत नहीं दीदी.

गायत्री : मेने कहा न, वह दाल दो, मेरे लिए.

शिव : आप मारेंगी नहीं पर दर्द होगा.

गायत्री : होने दो शिव, प्लीज मेरे लिए, में चाहती हु में तुम्हे वो भी मज़ा दू. (अब में क्या कहता, मेने वह पड़ी वैसेलिन की डिब्बी उठायी और उनको घोड़ी बन ने को kaha)(Gayatri को शर्म तो आ रही थी पर वो घोड़ी बन गयी, अपनी गांड को शिव के सामने परोस दिया,

जब शिव ने उसके कूल्हों को मसाला तो उसके चेहरे पर





शर्मीली मुस्कान आ गयी. शिव उसके गांड के छे को अपनी अंगूठे से सहलाने लगा तो उसकी आंखे बंद हो गयी, जब शिव ने उसके कूल्हों को चूमा तो वो शर्माने लगी, पर उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो चौंक गयी जब शिव ने अपनी जीभ से उसके गांड के छेड़ को छुआ, उसे अच्छा तो बहोत लगा )शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो शहहह वो गन्दी जगह है. (शिव फिर भी नहीं रुका और वो उसकी गांड के छेड़ को चाट ता गया, उसने रोकने की कोशिस की अपर जब शिव नहीं मन तो वो अपनी आंखे बंद किये हुए उस का मज़ा लेने लगी, वो बहोत खुस थी की शिव दिल से उसके साथ प्यार कर रहा था, ऐसा प्यार तो उसने आज तक कभी महसूस नहीं किआ था, लोग अक्सर उसके सरीर के साथ खेलते थे, पर उसे कभी इस तरह का एहसास नहीं हुआ., उसकी सोच ता टूटी जब शिव ने एक ऊँगली से उसकी गांड के छेड़ पर वैसेलिन लगाया, वो अपनी आंखे बंद किये हुए उस अजीब से एहसास को महसूस कर रही थी. जब शिव ने अपनी ऊँगली छेड़ पर दबायी तो उसने अपने छेड़ को ढीला छोड़ दिया, ऊँगली उसकी गांड में चली गयी, आज पहली बार उसकी गांड को उसके अलावा कोई छू रहा था, गांड के अंदर ऊँगली जाने के बाद शिव ने फिर से ऊँगली निकल ली, उसने आहिस्ता से पीछे देखा तो वो वैसेलिन की डिब्बी से और वैसेलिन ले रहा था. जब शिव ने उसकी और देखा तो वो शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए अपना चेहरा दूसरी और कर लिया, फिर से ऊँगली उसकी गांड में चली गयी, वो ऊँगली को अंदर घुमा रहा था, और वैसेलिन हर जगह लगा रहा था, अजीब था पर अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर अच्छे से वैसेलिन लगाने के बाद शिव ने ऊँगली निकल ली, उसने देखा की शिव अपने लुंड पर वैसेलिन लगा रहा है, वो आनेवाले पालो को सोच कर थोड़ी दर रही थी पर उसने शिव को रोका नहीं. जब उसे महसूस हुआ की शिव ने अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ पर लगाया है तो उसने आंखे बंद कर ली, शिव अपने लुंड को उसकी छूट के छेड़ और गांड के छेड़ पर रगड़ रहा था, वो आंखे ाँद किये शिव के आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी.)

शिव : डीडीए.

गायत्री : ह्म्मम्म्म्म.

शिव : दाल दू?

गायत्री : ह्म्मम्म्म्म. (शिव का लुंड उसकी गांड के छेड़ पर लग गया, जब उसने दबाव बढ़ाया तो उसने जितना हो सके गान के छेड़ को ढीला छोड़ दिया, उसे भी इसका अनुभव नहीं था, पर उसने सुना हुआ था, शिव ने उसकी कमर पकड़ कर धक्का दिया तो लुंड उसकी गांड के छल्ले को फैलते हुए उसके अंदर घुसा महसूस हुआ, उसकी गांड का छल्ला खींच गया था, उसे दर्द हो रहा था, क्यों की पहली बार उसकी गांड इतना फैली thi)Ahhhhhhhhh, माआआआ.





(शिव थोड़ी देर रुका रहा, उसे भी रहत हुई, शिव उसका पूरा ख्याल रख रहा था, वो उसे अच्छा लगा, थोड़ी देर बाद उसने लुंड को अंदर दबाया तो लुंड अंदर उतरने लगा, उसकी गांड का छेड़ और फ़ैल गया, उसे लगा की अभी फैट जायेगा, उसने अपने मुँह को दबा लिया ताकि उसकी चीख न निकल जाये, उसने महसूस किआ की शिव की ऊँगली उसकी छूट को सेहला रही है और उसकी छूट में अपनी ऊँगली अंदर बहार कर रहा है, उसे अच्छा लगने लगा, उसकी गांड में लुंड घुस हुआ था और उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार हो रही थी, उसे अच्छा लगने लगा, लुंड और अंदर उतर गया पर अब उसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ, छूट में अंदर दर्द हुआ था पर गांड में ऐसा नहीं था, अंदर उसे कोई दर्द नहीं थी, जो था वो सिर्फ गांड के छल्ले पर hi था. वैसे भी गांड तो अंदर से खुली हुई hi होती है वर्ण घु कहा जमा होता, भले hi ये अजीब था पर वो इस पहले अनुभव को शिव के साथ महसूस करना चाहती थी.)

शिव : (मेरा लुंड आधे से ज्यादा अंदर घुस चूका था, उनकी गानन्द का छेड़ पूरी तरह से फैला हुआ था,





मेने लुंड वापस निकला, सुपडे को अंदर hi रहने दिया और फिर से लुंड पर वैसलीन लगा दिया, फिर लुंड वापस अंदर दाल दिया में धक्के लगाने लगा, गांड मरने का मेरा ये दूसरा अनुभव था, छूट के मुकाबले गांड में घरसँ ज्यादा मिल रहा था, शायद वो इस लिए की छूट की तरह अंदर से कोई रास निकल नहीं रहा था, गांड ने लुंड को जकड रक्खा था, जैसे जैसे में लुंड अंदर बहार कर रहा था, दीदी की सिस्किअ बढ़ रही thi)Didi अच्छा लग रहा है?

गायत्री : हआ शहहहहह अजीब है पर अच्छा लग रहा है, तुजे मेरी गांड मरने में मज़ा आ रहा है?

शिव : (में है pada)Aisa क्यों बोल रही हो दीदी, किसी का जब बुरा करते हे तब लोग बोलते है की मेरी गांड मर ली.

गायत्री : (मुस्कुराते hue)Ab तू मेरी गांड मार रहा है तो और क्या कहु, कैसा लग रहा है तुजे, क्या गांड मरने में तुजे मज़ा आ रहा है.





शिव : है दीदी, बहोत मज़ा आ रहा है.

गायत्री : अच्छे से गांड मर ले मेरी, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मुझे भी बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह तेरा मोटा लुंड बहोत अंदर तक जा रहा है शह्ह्ह्हह्ह, मेरी गांड का छेड़ आज तक इतना नहीं फैला था, shhhhhh(Me उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहा था, और ऊगली से छूट कुरेद रहा था, वो झड़ने lagi)Shhhhhhh कितनी बार झाड़ूंगी पता नहीं शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह (वो उलटी hi पूरी बिस्तर पर पसर गयी, में उनके ऊपर हो गया और उन्हें छोड़ने लगा, वो मेरे वजन से डाब रही थी) अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेरा बोज तो नहीं लग रहा दीदी?





गायत्री : शहहह अह्ह्ह ऐसा बोज तो लड़की हस्ते हस्ते उठाने को तैयार रहती है शह्ह्ह्ह मर ले शहहह अह्ह्ह्हह मेरे अंदर hi झाड़ न शह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह वैसे कब झाड़ेगा तू, इतनी देर तो कभी किसी ने मुझे नहीं छोड़ा शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह तू इंसान hi है न शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मम्मीय शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (मेरा भी होनेवाला hi tha)Bas थोड़ी देर दीदी, आप कहे तो लुंड छूट में दाल दू?

गायत्री : नहीं शिव, गांड में भी मज़ा आ रहा है शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह (दीदी के नरम गद्दे दर कूल्हे मेरे धक्को से डाब रहे थे, में लगा तर उनकी गांड मर रहा था, आखिर मेरा भी होने लगा और में उनके अंदर पिचकारियां छोड़ने laga)Shhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह तेरा वीर्य तो मुझे अंदर महसूस हो रहा है शह्ह्ह्ह ये कैसा जादू है शहहहहह. कंडोम की वजह से कभी महसूस नहीं कर पायी शायद, कितना सुकून देता है ये, अंदर जैसे गर्म गर्म लावा भर रहा है.

वो इतना थक गयी थी की वही सो गयी, मुझे टेंशन हो गया की अब क्या होगा, क्यों की अगर वो यहाँ सोई रही तो सुबह लतादिदी और सबको पता चल जायेगा, पर में गायत्री दीदी की हालत भी समाज रहा था तो मेने उन्हें सोने दिया.
 
अपडेट 100

में सोया हुआ था, और मुझे लगा की कोई दरवाजा खटखटा रहा है, मेरी नींद खुल गयी, मेने देखा की गायत्री दीदी नंगी hi मुझसे लिपट कर सो रही थी, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा, क्यों की पता नहीं दरवाजे पर कोण था. दरवाजे पर जो भी था वो बहोत धीरे धीरे दरवाजा खत खता रहा था, मतलब वो नहीं चाहता था की कोई और उठे, इसका मतलब तो यही था की वो जो कोई भी था वो मुज से प्यार करना छह रहा था. मेने टाइम देखा तो अभी 5 बज रहे थे. वैसे भी में कुछ कर नहीं शक्ति था तो में उठा और गायत्री दीदी को एक चद्दर से धक् दिया. जब दरवाजा खोला तो सरितादिदी थी, उन्हें देख मुझे थोड़ी रहत हुई. में दरवाजा खोल कर बहार निकल गया ताकि वो अंदर न जा शेक.

शिव : क्या हुआ दीदी? आप दरवाजा क्यों खटखटा रही थी?

सरितादिदी : (उन्होंने मेरी और dekha)Ander चल के बात करते है.

शिव : (हड़बड़ाते hue)Nnn नहीं दीदी, यही कहलो, क्या बात है?

सरितादिदी : ऐसा क्यों कह रहा है, मेने कहा न की अंदर रूम में चल के बात करते है.

शिव : (में घबरा रहा था, मेने आखरी प्रयास kia)Yahi बात कर लो न दीदी.

सरितादिदी : और अंदर जो बखेड़ा कर के बैठा है, उसे कोण संभालेगा? (में आश्चर्य से दीदी को देखने लगा, वो मुस्कुरा रही थी)

शिव : आप को पता था दीदी?

सरितादिदी : मुझे सब खबर रहती है, चल अब उसे उठा और भेज, लता भी जागनेवाली होगी.

शिव : (दीदी को गले लगा kar)Thank यू दीदी.

सरितादिदी : थैंक यू से काम नहीं चलेगा, तुजे पता है में तेरे रूम में आ रही थी पर, पर जब उठी तो देखा की गायत्री नहीं है, मेने आस पास ढूंढा, बाथरूम में ढूंढा पर वो नहीं मिली तो में तुजे जगाने आ रही थी की अंदर से आवाजे सुनी, तो में समाज गयी की आज उसका नंबर लग गया है.

शिव : नहीं दीदी, ऐसी बात नहीं थी वो तो darasal(Muje बीचमे टोकते हुए)

सरितादिदी : वो सब छोड़ अभी, पहले उसे अपनी जगह भेज, फिर बाद में बात करेंगे.

शिव : पर दीदी उनकी हालत...

सरितादिदी : अब उसे क्या होना hai(Wo जानती थी की वो किस परिस्थिति से आयी थी).

शिव : वो didi...unhone ....पीछे...

सरितादिदी : तो क्या हुआ?

शिव : उन्होंने वह कभी करवाया नहीं था.

सरितादिदी : में यहाँ बोल रही हु की मेरे पिछवाड़े का उद्घाटन कब करेगा और तूने उसके पिछवाड़े का उद्घाटन कर दिया. चल देखते है, क्या हालत है? (हम दोनों अंदर गए, वो उलटी hi लेती हुई thi)Lagta है सीधा लेता नहीं जा रहा उस से. (दीदी, गायत्रीदिदी के कूल्हों को फैला कर उनके गांड के छेड़ को देखने लगी, उनके छूने से गायत्री दीदी जाग गयी, उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो सरितादिदी को देख वो चौंक गयी और चद्दर से अपने आपको ढकते हुए बेथ गयी, वो कभी मुझे तो कभी सरितादिदी को देख रही थी और दर रही थी) दर क्यों रही है (वो कुछ बोली नहीं बस सरितादिदी को देख रही thi)Kya शिव ने जबरदस्ती की?

शिव : नहीं दीदी, ये क्या कह रही है?

सरितादिदी : तू चुप kar(Muje दन्त ते हुए उन्होंने कहा तो में चुप हो गया, फिर गायत्रीदिदी ko)Kya शिव ने जबरदस्ती की? (गायत्रीदिदी ने मेरी और देखा, फिर सरितादिदी की और, फिर ना में गर्दन hilayi)To दर क्यों रही है?

गायत्री : (अपनी नज़ारे झुका kar)Wo तुम आ गयी न...

सरितादिदी : (मुस्कुराते hue)Oh तो मुज से दर लग रहा है, मुझसे डरने की जरुरत नहीं है, यहाँ हर कोई एक दूसरे के बारे में जनता है, है बस सब आपस में बात नहीं करते, सब अपनी सहमति से दूसरे को रास्ता दे देते है, जैसे कल मेरी बरी थी जो तू ले गयी, कोई बात नहीं, मेरी बरी फिर कभी, पर तू तो शिव पे भड़क रही थी फिर उसके निचे कैसे आ गयी?

शिव : दीदी, लतादिदी...

सरितादिदी : तुजे लता से इतनदार क्यों लगता है, (कड़ी होते hue)Thik है, (गायत्री se)Baad में बात करेंगे, तेरी हालत कैसी है, क्या चल पायेगी? (गायत्रीदिदी ने शरमाते हुए हां में गर्दन हिलायी, सरितादिदी ने मुज से kha)Tu जा, तैयार हो, में इससे देखती हु. (में वह से चला गया)

गायत्री को बहोत शर्म आ रही थी, उसे ऐसा लग रहा था की कल उसकी सुहागरात हुई है और आज सुबह सुबह उसकी नानन्द उसका हल चल पूछने आयी हो, वो इतना शर्मा रही थी की पूछो मात. ऐसा समय उसके जीवन में पहले भी आ चूका था, जब उस से चला भी नहीं जा रहा था पर उस समय वो दुलखि थी पर आज वो खुस थी.

सरिता : अब शर्माती रहेगी की कपडे भी पहनेगी.

गायत्री : (धीमी आवाज me)Tu जा में पहलूँगी.

सरिता : अब मुझसे सर्मना छोड़, और कपडे पहले, अगर दिक्कत हो तो बता दे, शर्माने की जरुरत नहीं है, में तेरे साथ हु.

गायत्री : (अपने कपडे पहन ने lagi)Tune शिव के साथ करवाया है?

सरिता : (उसने गायत्री की और देखा, वो कपडे पहनते हुए उसे देख रही thi)Ha.

गायत्री : तुजे पता है की वो लता के साथ करता है फिर भी?

सरिता : है.

गायत्री : उसके सम्बन्ध रंजन के साथ भी है.

सरिता : मुझे पता है.

गायत्री : तो फिर उसके साथ क्यों कर रही है?

सरिता : तुजे तो सब पता था, फिर क्यों किआ?

गायत्री : मेरी बात अलग है, में तो वैसे भी कही की नहीं रही, पर तेरे साथ तो सब सही था, शिव ने hi तेरी सील खोली थी न?

सरिता : (दर्द से muskurayi)Jis कमीने ने तेरे साथ वो किआ था उसीने मेरे साथ भी वही किआ था, है उसने मुझे बेचा नहीं, शायद अभी टाइम नहीं आया था.

गायत्री : (अपने कपडे पहन चुकी thi)Kya? उसने तेरे sath(Usne सरिता को गले लागलिया) तूने कभी बताया नहीं.

सरिता : क्या बताती, मेने सोचा था की केस चल रहा है तो तुजे पता hi होगा, वैसे भी में भूल चुकी हु सब, अब तो सिर्फ शिव hi है.

गायत्री : मुझे ये पता था की उसने तुम दोनों पर रपे करने की कोसिस की थी, और शिव ने उसे मारा था, पर ये नहीं पता था की उसने रपे कर दिया था.

सरिता : अरे नहीं, तू गलत समाज रही है, उसने उस वक़्त रपे नहीं किआ था, वो तो बहोत पहले से मेरे साथ वो सब करता आ रहा था, चल अभी छोड़ वो सब, अपनी जगह जा कर सो जा.

गायत्री : अरे नहीं, अब नहीं सोना, वैसे भी इतना दर्द नहीं है, मुझे गयम भी जाना है.

सरिता : आज छुट्टी ले ले.

गायत्री : नहीं, उसकी जरुरत nahi.(Dono ब्रश करते हुए बाते कर रही थी)

सरिता : क्या सच में इतना दर्द नहीं है?

गायत्री : है, अभी तो इतना दर्द नहीं हो रहा. (सरिता सोच में पद gayi)Kya सोच रही है?

सरिता : नहीं कुछ नहीं.

गायत्री : अब बता भी, तेरे चेहरे की मुस्कुराहट तो कुछ और hi कह रही है.

सरिता : (शरमाते hue)Me दर रही थी, इसके लिए.

गायत्री : (उसे समाज नहीं aaya)Dar रही थी, matlab(Sarita की शर्म ने उसे सब समजा diya)Oh, तो ये बात है, अभी तूने वह का उद्घाटन नहीं करवाया. (फिर मुस्कुराते hue)Karwale, करवले, डरने की जरुरत नहीं है. (दोनों ऐसे hi बाते करती रही)

मेने जूही को फ़ोन कर दिया था की वो गायत्रीदिदी को अनाथालय से ले कर गयम जाये. उसके बाद में स्कूल चला गया. आज का पेपर भी अच्छा गया. अब सिर्फ कल का पेपर बचा था. हम तीनो पार्किंग में खड़े थे, हर्ष कल परीक्षा के बाद मूवी देखने की बात कर रहा था, महेश भी रेडी था.

हर्ष : अबे चल न, मज़ा आएगा.

महेश : दो पहर की hi है, तेरे स्टेडियम जाने की भी दिक्कत नहीं होगी. (हम बात कर hi रहे थे की वैस्वी और संयम आयी, वैस्वी का स्कूटर पास में hi पार्क था)

संयम : क्या बाते हो रही है?

महेश : कल एग्जाम के बाद मूवी देखने का प्रोग्राम बना रहे है.

संयम : अरे वह, ये तो अच्छी बात है, में भी चालू क्या?

महेश : है है क्यों नहीं, क्या कहते हो शिव?

शिव : (अब सब कह रहे थे to)Thik है.

वैस्वी : चल संयम.

संयम : अरे रुक न, तू भी ायेगीना?

वैस्वी : नहीं.

संयम : आएगी, आएगी, हम दोनों आएंगे.

वैस्वी : में नहीं आउंगी.

संयम : चलो, फिर कल एग्जाम के बाद का प्रोग्रमम तय रहा.

वैस्वी : में नहीं आउंगी.

संयम : चल न, तुजसे किसीने पूछा क्या. (वो दोनों निकल गए, हम सब है रहे थे)

वैस्वी : (रस्ते me)Me नहीं आउंगी संयम, तुजे जाना है तो जा.

संयम : में अकेले कैसे जाउंगी, वैसे शिव है तो मेरे घर से कोई मन नहीं करेगा, पर में चाहती हु तू भी चल.

वैस्वी : मुझे घर से आने की इजाजत नहीं मिलेगी, तू नहीं जानती मेरे घर का माहौल.

संयम : तू बोल देना की मेरे घर आ रही रही है, सिर्फ तीन घंटे की तो मूवी होती है. मेरे लिए इतना भी नहीं कर शक्ति?

वैस्वी : ठीक है, देखती हु, पक्का नहीं कह शक्ति.

संयम : तू कर शक्ति है, तरय तो कर.

में घर चला गया, गायत्रीदिदी एक कमरे में आराम कर रही थी, मेने सरितादिदी से पूछा तो उन्होंने कहा की सब ठीक है. में पढ़ाई में लग गया. दूसरे दिन एग्जाम ख़तम कर के सब मूवी देखने चले गए. हम लोग मतलब में, हर्ष और महेश, वैसे hi स्कूल यूनिफार्म में पहुंच गए थे, वो दोनों संयम के घर जा कर आनेवाली थी. हमने टिकट ली और उन दोनों का वेट करने लगे. जब वो दोनों आयी तो में देखता hi रह गया, वहॉ हालत महेश और हर्ष की थी. वैस्वी और संयम दोनों संयम के घर जा जाकर स्कूल के कपडे बदल कर आयी थी. हलके मेकअप में दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी. हम तीनो उनको hi देख रहे थे पर वो दोनों मुझे देख रही थी. मुझे ऐसे देखते देख संयम के चेहरे पर मुस्कान आ गयी पर वैस्वी ने दूसरी और देखना सुरु कर दिया, वो दूसरी और देखते हुए भी मुझे देख लेती थी.

हर्ष : (उनको दो टिकट देते hue)Tum दोनों अंदर जाओ, हम पॉपकॉर्न ले कर आते है, कहते कहते मूवी देखने में मज़ा आएगा.

संयम : (टिकट लेते hue)Thik है.

हम तीनो पॉपकॉर्न लेने चले गए. जब वापस आये तो देखा की वो दोनों दरवाजे के पास कड़ी थी और चार लड़के उनके पास hi खड़े थे और कुछ बोल रहे थे, ये दोनों वह उनकंफर्टबले लग रही थी. हम उनके पास गए.

शिव : क्या हुआ?

संयम : वो लोग...

शिव : (जैसे hi संयम ने इस्सर किआ उन लड़को की तरफ तो में सीधा उन लड़को के पास चला gaya)Kya प्रॉब्लम है? (उन चारो में शिव को देखा, ऐसे लम्बे चौड़े लड़के को देख वो पहले hi दर गए थे, और ऊपर से इतनी भरी भरकम आवाज सुनकर तो उनकी पंत hi गीली होने लगी)

एक लड़का : कक्क कुछ नहीं भाई, हमने कुछ नहीं kia(Apne दोस्तों ko)chal बे, निकल यहाँ से, पॉपकॉर्न नहीं लेने kya?(Wo चारो ऐसे भागे जैसे गधे के शिर से सींग)

में वापस अपने दोस्तों के पास पंहुचा तो संयम है रही थी, पर वैस्वी ऐसे hi कड़ी मुझे देख रही थी.

संयम : (हस्ते hue)Fattu सेल, तुम्हे देखते hi भाग गए. कैसी सिटी पित्ती गम हो गयी थी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Chalo अब, मूवी सुरु हो जाएगी.

हम अंदर चले गए, अपनी जगह धुंध कर हम बेथ गए. पहले महेश बैठा, उसके बाजु में हर्ष, उसके बाजुमें में और मेरे बाजु में संयम और उसके बाजु में वैस्वी बेथ गयी. थोड़ी देर में मूवी चालू हो गयी. रोमांटिक मूवी थी और साथ में हलकी कॉमेडी भी थी. हम मज़े से मूवी देख रहे थे. पॉपकॉर्न का एक पैकेट उन्दोनो ने ले लिया था, जो वैस्वी ने पकड़ा था. एक पैकेट हर्ष में पकड़ रक्खा था, मुझे उसे खाने में कोई इंटरेस्ट नहीं था, तो वो दोनों खा रहे थे. सब मूवी देख ने खोये हुए थे, मेरी नजर हमसे थोड़ी दुरी पर बैठे एक कपल पर पड़ी, वो दोनों किश कर रहे थे. में चौंक गया, ऐसे पब्लिक प्लेस पर वो लोग ऐसी हरकत कर रहे थे. मेने संयम की और देखा तो वो मूवी देख रही थी, वैस्वी भी मूवी देख रही थी, मेने देखा की हर्ष और महेश दोनों उस कपल को hi देख रहे थे. (दरअसल, ये नज़ारा संयम ने भी देखा था और वैस्वी ने भी पर शर्म की वजह से उन्होंने अपनी निगाहे स्क्रीन पर hi जमा ली थी, कभी कभी तिरछी नज़र से वो देख लेती थी) मेने भी मूवी देखना hi सही समाज. मेने जहा हाथ रक्खा हुआ था मुझे संयम का हाथ छूने लगा. मेने अपना हाथ थोड खिसका लिया, हम दोनों के बिछ एक hi पट्टी थी हाथ रखने के लिए, है वो थोड़ी चौड़ी जरूर थी, पर मुझे लगा की संयम को शायद जगह काम पद रही थी. थोड़ी देर बाद उसका हाथ फिर से मुझे चुने लगा. मेने हमारे हाथ की तरफ देखा तो संयम का हाथ मेरी और hi था, उसकी और की जगह काफी खली थी. मेने उसकी और देखा तो उसने भी मेरी और देखा, फिर अपनी नज़ारे झुका ली, एक दो पल बाद फिर उसने मेरी और देखा, उसके चेहरे पर तनाव साफ़ दिख रहा था, उसने फिर से अपनी निगाहे मूवी की और कर ली. पहले सिर्फ कोहनी तक का हाथ मेरे हाथ को छू रहा था, धीरे धीरे उसका कंधे तक का हाथ मेरे हाथ से चिपक गया, मेने उसकी और देखा पर वो मूवी की और hi देख रही थी, उसके चेहरे का तनाव बता रहा था की वो ये जान बुज कर कर रही थी. मेने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इंटरवल के दौरान उसने हाथ हटा लिया और वो वैस्वी से बाते करने लगी. फिर जब दोबारा मूवी सुरु हुई और जैसे hi अँधेरा हुआ वो फिर से वैसे hi बेथ गयी. वो मेरे कंधे से सात कर बैठी हुई थी. उसके शरीर का स्पर्श मेरे अंदर हलचल मचा रहा था, पर में शांति से बैठा रहा. थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा की वो अपने पंजी को हिला रही है और अपने हाथ के पिछले भाग से मेरे हाथ के पिछले भाग को सेहला रही है. मेने उसकी और देखा तो उसके हाथ की क्रिया रुक गयी. में फिर से मूवी देखने लगा, थोड़ी देर बाद फिर से वो मेरे हाथ पर अपना हाथ हलके हलके घिसने लगी, अगर कोई देखता फिर भी उसे पता नहीं चलता, पर उसका स्पर्श मुझे पता चल रहा था. मेने कुछ न करने में hi अपनी भलाई समाजी. में बैठा रहा, वो भी थोड़ी थोड़ी देर में मेरे हाथ को सेहला रही थी और कभी कभी मेरी और देख भी रही थी. पर मैंने ऐसे hi जताया जैसे मुझे कुछ पता नहीं है.

मूवी ख़तम हो गयी. हम सब बहार आ गए. संयम मुझसे नज़ारे मिलाने से थोड़ी झिझक रही थी, हम से बीड़ा ले कर वो दोनों चली गयी, हम सब भी चले गए. दूसरे दिन से वापस हमारी वही लाइफ सुरु हो गयी. एग्जाम ख़तम हो गयी थी तो में पवनसीर के घर चला गया. पवनसीर को फ़ोन कर के गया था तो वो घरपर hi मिल गए. स्नेहमड़ाम भी मुझे देख कर बहोत खुस हुई. उन्होंने मुझे दूध और नास्ता खिलाया. पवनसीर तैयार होने गए तो उन्होंने मुझे किश भी कर लिया. में और पवनसीर वह से उनकी साइट पर चले गए जहा कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. वह के एक सुपरवाइजर से मेरी मुलाकात करवाई और मुझे सब काम समजने को बोलै. मुझे देख कर उस सुपरविसोर को ज्यादा खुसी नहीं हुई थी. पवनसीर मुझे छोड़ कर वापस चले गए. वह बहोत सरे मजदूर काम कर रहे थे. सुपरवाइजर ने मुझे एक जगह बैठने को कहा और वो अपने काम में लग गया. थोड़ी देर बाद में खुद उठा और वह सब देखने लगा. ज्यादा तो मुझे कुछ समाज नहीं आया, बस में लोगो को काम करते हुए देख रहा था, वो लोग भी मुझे देखलेते थे और अपना काम कर रहे थे, वह कुछ लड़के, लड़कीअ, आदमी और औरते काम कर रही थी. वह में तीन घंटे रुका और फिर वापस चला गया. पवनसीर का फ़ोन आया तो मेने उन्हें बतादिया की वह क्या क्या हुआ. तो उन्होंने कहा की कोई बात नहीं, अभी तुम वह जाओ और वह नज़र रक्खो, अगर कुछ लगे तो मुझे बताना. वह काम करते हुए मुझे एक हफ्ता हो गया था. अभी तक मुझे वह कुछ संदिग्ध नहीं लगा था. वो भी मेने पवनसीर को बता दिया, तो उन्होंने कहा की वैसे तो कोई बात नहीं है, बस मुझे वह ध्यान रखना है, और सब अपना काम सही से कर रहे है की नहीं उसका ध्यान रखना है. इस बिच में स्नेहमड़ाम और बिना मैडम से भी मिल आया था. जूही ने मुझसे कहा की दो दिन बाद हमें एक जगह रेस है तो जाना है.

वह ममता को समाज नहीं आ रहा था की वो किस बात पर यकीं करे. उसकी माहवारी के समय का आज चुथदीन भी गुजर गया था पर उसकी माहवारी सुरु नहीं हुई थी, वो अंदर hi अंदर बहोत खुस थी, उसका पति भी अब ठीक था तो वो अपने काम पर चला गया था. ये तीन चार दिन उसने कैसे बिताये थे ये वही जानती थी. जब उस से रहा न गया तो उसने अपनी माँ को फ़ोन लगा दिया.

निर्मलादेवी : कैसी हो बेटी, बहोत दिनों बाद फ़ोन किआ.

ममता : में अच्छी हु माँ, आप कैसी ho(Ghar में सब की खबर पूछने के बाद उसने असल बात सुरु की) माँ, जब में पिछली बार आयी थी तब आपने मुझे कुछ कहा था, मेरे और भाभी के माँ न बन ने के बारे में. आपने ऐसा क्यों कहा था.

निर्मलादेवी : छोड़ न बेटी उस बात को, तुम उसको न जानो उसी में तुम्हारी भलाई है.

ममता : पर माँ, अगर वो बात हम सबकी जिंदगी पर भी प्रभाव दाल रही है तो वो जान न हमारे लिए आवश्यक है.

निर्मलादेवी : कुछ बात हो गयी है beti?(Use अपनी बेटी की चिंता होने लगी) क्या घर में कुछ हुआ है?

ममता : नहीं माँ, ऐसी कोई बात नहीं है. परिस्थितिओ को देख कर मुझे जान ने का मान किआ, इसीलिए पूछ रही हु.

निर्मलादेवी : ये बहोत लम्बी कहानी है बीटा, फ़ोन पर नहीं हो पायेगी. बस में इतना कह सकती हु की एक माँ की बद्दुआ का असर है, उसके दिल से निकली है है जो इस खंडन को तबाह कर रही है.

ममता : माँ की है, किस की बात कर रही हो माँ आप.

निर्मलादेवी : तेरे छोटे चाचा, योगंदर्भाई साहब की पत्नी चन्द्रिका की बात कर रही हु.

ममता : हमारे छोटे चाचा, ये क्या कह रही हो माँ, पापा और बड़े ताऊजी, वो तो सिर्फ दो hi तो भाई है.

निर्मलादेवी : ये तेरे बड़े ताऊजी का hi किआ धरा है बेटी, उनके कर्मो की सजा पूरा खंडन भुगत रहा है, उन्होंने अपने छोटे भाई का नामोनिशान उस हवेली से मिटा दिया है, तुम सब तो छोटे थे तो तुम लोगो को तो याद भी नहीं रहे वो. न उनकी कोई तस्वीर रक्खी न उनका वजूद.

ममता : क्या कह रही हो माँ, क्या उनको मार दिया?

निरमलालदेवी : नहीं बीटा, वो मरे नहीं है, पर जिन्दा भी नहीं कह शक्ति. अपने बेटे की मौत के गाम में माँ अपना होश खो बैठी है और बाप इतने सालो से कोमा में है. ये सब पैसो और जायदाद की लालच की वजह से हुआ.

ममता : पोसो की वजह से?

निर्मलादेवी :है बेटी, आज जो तुम अपने ताऊजी के पास इतनी दौलत देख रही हो न, वो सब योगंदर्भाई साहब का है. पैसो के पीछे वो इतने अंधे हो गए थे की अपने फूल जैसे भतीजे शिवांश को मरते हुए उनके हाथ तक न कांपे.

ममता : शिवांश????

निर्मलादेवी : है बेटी, वो तक़रीबन तीन साल का था उस वक़्त.

ममता : अगर उन्होंने उसको मर दिया था तो फिर उनको सजा क्यों नहीं हुई.

नर्मदादेवी : ये सब एक लम्बी कहानी है बेटी, पर शिवांश को मरते हुए चंद्रिकाने देख लिया था, वो पहले से hi उनके इरादे जान गयी थी, पर अपने पति की अच्छाई के चलते वो कुछ न कर पायी, उसने अपनी छाती पिट ते पिट ते ये कहा था की जिन पैसो की वजह से आज तुमने मेरा बच्चा छिना है वो पैसे इस्तेमाल करने के लिए कोई इस खंडन में जनम नहीं लेगा.

ममता : जो हुआ वो गलत हुआ माँ, पर क्या उनके कह देने से ऐसा हो सकता है?

नर्मदादेवी : हम भी यकीं नहीं करते थे बेटी, पर जो हो रहा है वो हमारी आँखों के सामने है, उदयसिंह भाई सब की दो बेतिया है और एक बीटा, एक ने प्रेमविवाह किआ था और एक ने अपने पिताजी की मर्जी से, पर न उनके बेटे के वह कोई औलाद है और न उनकी बेटिओ के वह. मेरे भी दो बच्चे है, तू और तेरा भाई, पर क्या तुम्हे भी बच्चो का सुख नसीब हुआ. अब इसे हम क्या समजे. विस्वास न करना हो तो भी करना पड़ता है.

ममता : (उसका दिमाग घूमने लगा था, वो समाज नहीं प् रही थी की क्या ऐसा हो सकता है, उसके पीरियड्स भी नहीं आये थे, तो क्या ये सिर्फ इत्तेफाक है, किसी और वजह से उसके पीरियड्स नहीं आये है, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसका दिल घबराने लगा था, आज के ज़माने में कोण इसका यकीं करता है)

निर्मलादेवी : (अपनी बेटी को खामोस देख उन्हें चिंता hui)Hello, बेटीईई?

ममता : है मा.

निर्मलादेवी : क्या हुआ बेटी?

ममता : कुछ नहीं माँ, अच्छा माँ ये शिवांश को कैसे मारा था?

निर्मलादेवी : मेने कहा न बेटी, ये बहोत लम्बी कहानी है, जब तू आएगी तब हम बात करेंगे.

ममता : पर माँ...

निर्मलादेवी : चल में रखती हु, तेरे पिताजी कब से आवाज दे रहे है.

ममता : ठीक है माँ.

वो फ़ोन को हाथ में लिए शिव वाली कमरे में बैठी रही, वो बात करने के लिए ऊपर आयी थी, वो अक्सर यहाँ आ जाती थी और शिव के साथ बिताये पालो को याद करती रहती थी. उसकी साडी उम्मीदे ख़तम होती नज़र आ रही थी, वो निराशा से आंखे बंद किये हुए वही लेट गयी. उसके पास इंतजार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था.

वह नर्मदादेवी को भी अपनी बेटी की चिंता हो रही थी, वो अपने पति दुर्गाप्रसाद के पास गयी.

नर्मदादेवी : क्यों बुला रहे हो, बेटी से दो पल चैन से बात भी नहीं करने देते.

दुर्गाप्रसाद : ितनिदर से तो बात कर रही थी, मुझे मेरा चस्मा नहीं मिल रहा है.

नर्मदादेवी : (चस्मा धुंध कर देती hai)Ye रहे, कही भी रख देते हो और फिर मुझे ढूँढना पड़ता है.

दुर्गाप्रसाद : (चस्मा लेते hue)Kya कह रही थी ममता?

नर्मदादेवी : वही, किसकी वजह से कुटुंब में सब परेशान है, वो माँ नहीं बन प् रही तो शायद अब उसको भी परेशानी हो रही है. में क्या कह रही हु, क्या इसका कोई हल नहीं, क्या सच में ऐसा हो शक्ति है की चन्द्रिका की कही बात सच गयी है.

दुर्गाप्रसाद : (चिंतित स्वर me)Lagta तो ऐसा hi है.

नर्मदादेवी : पर इसका कोई तो हल होगा.

दुर्गाप्रसाद : (कुछ सोचते hue)Tumhe याद है वो गुरुदेव, जिन्होंने शिवांश की कुंडली बनायीं थी, उस समय भी उन्होंने कहा था की इस बालक पर खतरा है, उनकी कही बात सच हो गयी, मुझे लगता है हमे उनसे एक बार मिल लेना चाहिए.

नर्मदादेवी : है, ये आप ने सही कहा, शायद वो hi कोई उपाय बता सके. आप पता करवाइये वो कहा मिलेंगे.

दुर्गाप्रसाद : में पता करवाता हु, पर जहा तक मुझे पता है वो कई सालो से इस तरफ आये नहीं, पता नहीं वो कहा है, में कोशिस करता हु, उनके बारे में पता करने की.

में और जूही ट्रैन में साथ में बैठे हुए थे. दो घंटे का सफर था, वो खिड़की के पास बैठी थी और में उसके पास. हमारा स्टेशन अब आने hi वाला था. जब स्टेशन आ गया तो हम स्टेशन से बहार निकले और ऑटो से उस सहर के स्टेडियम पहुंच गए. वह हमने हमारा नाम दाखिल करवा दिया. रेस कल थी.

शिव : रेस तो कल है, तो आज हम क्यों आये?

जूही : हमें आज hi यहाँ रिपोर्टिंग करनी थी, जो लोग आज आएंगे उन्ही लोगो का कल शेडूल में नाम होगा.

शिव : तो फिर आज हम क्या करेंगे?

जूही : अभी फ़िलहाल एक होटल में कमरा ले लेते है, शाम को यहाँ प्रैक्टिस करेंगे, और कल रेस. चलो कोई नजदीक में होटल ढूंढते है.

शिव : है चलो.

हमारे नसीब से हमे नजदीक में hi एक होटल मिल गया. जूही ने एक hi कमरा लिया, हम दोनों कमरे में पहुंच गए. वो बाथरूम में फ्रेश होने चली गयी, में सोच रहा था की जूही के साथ एक hi कमरे में रहना कैसा होगा, पर में और कुछ कर भी नहीं सकता था. वो चेंज कर के आयी तो उसने एक शार्ट पहन रक्खा था और ऊपर टॉप.





उसकी पतली कमर नंगी थी. सच में वो बहोत खूबसूरत और फिट थी. मुझे ऐसे देखते देख वो मुस्कुरायी. में भी मुस्कुराया और सीधा बाथरूम में घुस गया. फ्रेश हुआ और एक शार्ट और ऊपर बनियान पहन कर बहार आया. वो बिस्तर पर उलटी लेती हुई थी, उसको ऐसे देख कर में देखता hi रह गया, पुरे शेप में शरीर और कसरती बदन, उभरे हुए कूल्हे और चौड़ी झंघे, मेरी तो हालत ख़राब होने लगी, मेने एक गहरी साँस ली और सहा रक्खी एक चेयर पर बेथ गया. मुझे वह बैठता देख वो बोली.

जूही : वह क्यों बैठे, थोड़ी देर लेट जाओ.

शिव : नहीं में ठीक हु.

जूही : मेरे साथ एक hi कमरेमे तुम कम्फर्टेबले नहीं हो क्या?

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है.

जूही : अगर तुम चाहो तो में दूसरा कमरा ले लेती हु, मेने सोचा तुम्हे मेरे साथ रहने में कोई परेशानी नहीं है, इस्सलिये मेने एक hi कमरा ले लिया, मुझे लगता है मुझे दूसरा कमरा ले लेना चाहिए. में अभी जाती हु.

शिव : नहीं, उसकी कोई जरुरत नहीं, पर क्या तुम्हारा मेरे साथ यु अकेले रहना ठीक है, अगर किसीको पता चला तो वो तुम्हारे बारेमे क्या सोचेगा?

जूही : वो सब सोचना मेने कब का बांध कर दिया है, ये मेरी जिंदगी है, मुझे क्या करना है वो में देखूंगी, कोई और नहीं. और रही बात तुम्हारे साथ अकेले रहने की तो में अपने घर पर भी अकेली hi रहती हु और वह भी तुम आते हो, तो जिन्हे कहना है वो उसके लिए भी कह शक्ति है. अब ये सब सोचना बंद करो और थोड़ी देर आराम कर लो, शाम को स्टेडियम भी जाना है. मेने खाना मँगवादिया है वो भी थोड़ी देर में आ जायेगा.

अब में क्या कहता. थोड़ी देर बाद खाना भी आ गया और हमने खाना खाया और आराम किआ. शाम को हम स्टेडियम गए, जूही ने मुझे सिर्फ वॉर्मउप hi करने को कहा, ज्यादा कसरत करने से मन किआ. वह कई लोग थे, सब अपने हिसाब से कसरत कर रहे थे. मेने कुछ लड़को को भी देखा जो दौड़ की प्रैक्टिस कर रहे थे. में और जूही ये सब देख रहे थे और उनके बारे में बाते भी कर रहे थे, क्यों की ये वही सब थे जो कल हमारे साथ मुकाबला करेंगे. कुछ ऐसे थे जो बहोत अच्छे थे. उन्हें देख मुझे थोड़ी घबराहट हो रही थी, मेरा चेहरा देख जूही ये समाज गयी.

जूही : Har-jeet तो चलती रहती है, तुम्हे सिर्फ अपनी दौड़ पर ध्यान देना है और अपनी ताकत पर भरोसा करना है. यहाँ ऐसे कई लोग है जो आगे चलकर तुम्हारे और मेरे साथ स्टेट लेवल में भी होंगे. ये भी यहाँ जीतने hi आये है, और उसके लिए बरसो से म्हणत कर रहे है, तो जिसकी मेहनत रंग लाएगी वो hi जीतेगा. तो गभरने की जरुरत नहीं है, अगर हरे तो भी तुम्हे पता चलेगा की आगे क्या करना है. तो ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है, सिर्फ अपने खेल पर ध्यान दो.

जूही की बात सही थी, फिर हम काफी देर वह रुके और अपने होटल आ गए. जूही ने बहार चल कर खाने को कहा तो हम चले गए. अब ये आम बात हो गयी थी की लोग हमे घूरते थे, पर आज नजारा वैसे भी अलग था, उसने येलो कलर का ड्रेस पहना था





और में टीशर्ट और जीन्स में था,





हम दोनों को देख लगभग सबकी निगाहे हमे घर रही थी. हम दोनों एक टेबल पर बेथ गए. जूही मुस्कुरा रही थी.

शिव : क्या हुआ, मुस्कुरा क्यों रही हो?

जूही : कुछ नहीं.

शिव : बताओ भी.

जूही : सब लड़कीअ, तुम्हे घर रही है.

शिव : और लड़के तुम्हे.

हमने आर्डर दिया, और खाने लगे. सच में बहोत अच्छा लगा, खाने का बिल जब में देने लगा तो उसने मुझे रोका.

शिव : मेरे पास है, मुझे देने दो.

जूही : क्यों लड़की बिल देगी तो सबके सामने इज्जत चली जाएगी.

शिव : मेने ऐसा कुछ नहीं सोचा, ठीक है तुम hi दो, और ऐसे देना की सब को पता चले की तुमने बिल दिया है, बस.

जूही : (वो मुस्कुरायी और अपना पर्स वापस रख दिया, मेने उसे देखा तो वो boli)Tum hi do.(Mene बिल चुकाया, जब हम निकल रहे थे तो उसने मेरे हाथमे अपना हाथ डालदिया और मेरे साथ चलने लगी, मेने देखा की लड़कीअ जलन से उसे देख रही थी, जब मेने उसे देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. हम वह से बहार निकले)

शिव : तुम्हे बहोत मज़ा आता है न ऐसा करके.

जूही : बिलकुल आता है, जब लड़कीअ जलती है की इतना हैंडसम लड़का मेरे साथ है तो ये देख कर मज़ा आता है.

शिव : और लड़के?

जूही : ज्यादातर तो मेरी हाइट देख कर hi फ़स हो जाते है, उन्हें पता है की उनका और मेरा कोई मुकाबला नहीं, पर लड़कीओ को इस से प्रॉब्लम नहीं होती, वो जानती है की अगर वो छोटी है फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बल्कि ज्यादा मज़ा aayega.(Aur वो हसने लगी)

शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए?

जूही : इसमें शर्माने की क्या बात है, जो है सो है. (ऐसे hi मस्ती मज़ाक करते हुए हम होटल पहुंच गए)
 
सब दोस्तों का सुक्रिया, सच कहु तो जब मेने कहानी लिखना सुरु किआ था तो मुझे लगा था की कोई पढ़ेगा नहीं, और कुछ समय बाद मुझे बंद कर देनी पड़ेगी. ये कहानी मेने सिर्फ अपने लिए लिखी थी, मुझे कुछ अच्छा पढ़ना था, फिर सोचा देखु की सब को कैसी लगाती है, इस लिए पोस्ट कर दी थी.

आप सब के प्यार का सुक्रिया दोस्तों. और यकीं रखिये कहानी जरूर पूरी होगी.
 
अपडेट 101

भार्गवी जाहिर गेराज से थोड़ी दुरी पर अपने कुछ लोगो के साथ कड़ी थी, वो इंतजार कर रही थी की कब उसे इस्सर मिले. उसने अपने एक आदमी को चोरी की बाइक बेचने के बहाने जाहिर गेराज में भेजा था. गेराज के अंदर वो आदमी बाइक के साथ मौजूद था.

एक आदमी : क्या काम है?

भार्गवी का आदमी : मुझे ये बाइक बेचनी है.

आदमी : इसके पेपर्स?

बी का आदमी : (धीमी आवाज me)Ye चोरी की है. (उस आदमी ने गौर से बाइक लाये आदमी को देखा फिर बाइक को देखा)

आदमी : कोण हो तुम, पहले तो कभी नहीं देखा तुम्हे?

बी का आदमी :में क्सक्सक्स सहर से आया हु, वह से मेने ये बाइक चुराई थी, मुझे पता चला है की यहाँ ऐसी गाड़िया खरीदी जाती है तो में बेचने आ गया.

आदमी : कितना चाहिए?

बी का आदमी : जो भी मिल जाये.

आदमी : ठीक है, तुम ठहरो में बात करके आता हु. (वो अंदर चला गया जहा एक कांच की कैबिने में एक सख्स बैठा हुआ था, वो उसके साथ बात करने लगा, वह बैठे उस सख्स ने बहार खड़े उस आदमी को देखा फिर अपने आदमी से कुछ कहा, वो बहार चला आया) यहाँ ऐसी चीजे नहीं खरीदी जाती.

बी का आदमी : क्या बात करते हो भाई, जो भी डोज चलेगा, अब में वापस इस बाइक को नहीं ले जा शक्ति.

आदमी : मेने बोलै न यहाँ ऐसी चीज़े नहीं खरीदी जाती, जाओ यहाँ से.

बी का आदमी : (वो थोड़ी मिन्नतें करने laga)Please भाई, ले लो न, में कहा वापस ले जाऊंगा, आप सेठ से बात कर लो, वो जितना देंगे मुझे चलेगा प्लीज.

वो आदमी फिर से केबिन में गया और उस सख्स से बात करने लगा, वो सख्स गुस्से में उस आदमी से कुछ कहने लगा और फिर उसके साथ hi वो बहार aaya(Ye जाहिर hi था, इस गेराज का मालिक)

जाहिर : (गुस्से me)Tuje समाज नहीं आता, यहाँ ऐसी कोई चीज खरीदी नहीं जाती.

बी का आदमी : ऐसा क्या करते हो सेठ, तुम जो भी डोज वो चलेगा, ले लो न, में इससे वापस नहीं ले जा शक्ति.

जाहिर : अगर तुम इससे ले कर अभी के अभी यहाँ से नहीं निकले तो में पुलिस को फ़ोन करता हु, वो तुम्हे पकड़ कर ले जाएगी. क्या चाहते हो तुम, जाते हो की फ़ोन करू.

बी का आदमी : नहीं नहीं सेठ, पुलिस को फ़ोन मात करना, में जाता हु. (आखरी कोशिस करते hue)Seth ले लो न, सिर्फ पांच हजार दे देना.

जाहिर : जाओ बोलै न.

बी का आदमी : दो हजार दे दो.

जाहिर : लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा, (उसने फ़ोन निकला और डायल करने लगा)

बी का आदमी : में जाता हु, फ़ोन मात करना. (वो बाइक ले कर चला गया)

ज का आदमी : क्या हुआ सेठ, उसकी बाइक क्यों नहीं खरीदी, कितना सस्ते में दे रहा था.

जाहिर : बेवकूफ, वो पुलिस का आदमी था, मुझे पहले से मस्सगे आ गया था, (थोड़ा जोर से सब ko)Tum सबको कहता हु, बिना पहचान के किसी भी सख्स से कुछ भी मात खरीदना, या अभी हो सके तो किसी से भी कुछ मात खरीदना, थोड़े दिन रुक जाओ, जब तक मामला ठंडा न पड़े तब तक किसी से भी कुछ मात खरीदना, समजे.

भार्गवी कड़ी थी और वो आदमी बाइक ले कर वापस आ गया, उसने सब बता दिया, तो भार्गवी और उसकी टीम वापस चली गयी.

में और जूही होटल में आ गए थे. होटल में आते hi में अंदर गया और जूही ने दरवाजा बंद किआ और मेरे सामने देखने लगी. उसकी आँखों में देखते hi मुझे पता चल गया की उसके दिमाग में क्या चल रहा है, वो मेरी और बढ़ने लगी, में उसे hi देख रहा था, मेरे नज़दीक आते hi उसने मुझे बीएड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी, में कुछ करता उस से पहले hi वो मुझे किश करने लगी,

में उसको रोकने की कोशिस कर रहा था पर वो और ज्यादा जोर से किश कर रही थी, वो मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मुझे किश किये जा रही थी, मेने भी विरोध करना छोड़ शांत हो गया, वो मुझे किश कर रही थी तो में अपने हाथ निचे ले गया और उसके कूल्हों को मसलने लगा,





तो वो किश करते करते रुक गयी और मुझे देखने लगी. हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे.

शिव : क्या हुआ (वो शर्माने लगी और अपनी निगाहे झुका ली, में उसके कूल्हों को हलके हलके मसलने लगा, वो और शर्मा रही thi)Itni hi शर्म आती है तो फिर शुरू क्यों किआ था?

जूही : (शरमाते हुए मुस्कुरा रही thi)Tum hi लड़कीओ की तरह शरमाते रहते हो, कभी तुमने सुरु किआ है, जब देखो तब में hi सामने से आती हु, कभी तुम्हारा मान नहीं होता मेरे पास आने का?

शिव : बहोत मान होता है जूही, जब तुम जलपरी बाण के सुबह सुबह मेरे सामने आती हो तो ऐसा मान करता है की तुम्हे अपनी बहो में भर लू.

जूही : तो फिर क्यों नहीं भर लेते.

शिव : में तुम्हे कितनी hi बार कह चूका हु की में तुम्हारे लायक नहीं हु जूही, मेरे जीवन में और भी लोग है, मेरे ऊपर उनकी जिम्मेदारियां है, में उनसे भाग नहीं शक्ति, में तुम्हे कुछ नहीं दे पाउँगा.

जूही : मुझे कुछ चाहिए भी नहीं शिव, मुझे सिर्फ प्यार चाहिए, वो तो तुम दे hi शक्ति हो न.

शिव : दिक्कत वो hi है, जिस प्यार की तुम बात कर रही हो, उसके भी हक़दार कई है, में किसी को भी दुखी नहीं कर शक्ति, मेरी समाजमे भी नहीं आ रहा की में कैसे सबको प्यार दे शक्ति hu.Issiliye में जितना हो शेक दूर रहने की कोशिस करता हु.

जूही : मुझे कुछ नहीं मालूम, और में समझना भी नहीं चाहती शिव, आगे भविष्य की गर्भ में क्या छुपा है न तुम जानते हो न में, तो भविस्य को सोच कर हम अपने वर्तमान से क्यों भागे, मुझे तुम अच्छे लगे हो और में अपना जीवन तुम्हारे साथ बिताना चाहती हु, हलाकि शादी अभी दूर की बात है पर प्यार तो में प् hi शक्ति हु, है ये अलग बात है की में तुम्हे पसंद न हो.

शिव : पागल हो क्या, तुम बहोत खूबसूरत हो, तुम्हे न पसंद करे वो बेवकूफ hi होगा.

जूही : तो फिर सब भूल जाओ, और मुझे प्यार करो शिव, आगे जो होगा वो हम दोनों मिलकर देख लेंगे. (में मुस्कुराया और फिर से उसके कूल्हे मसलने लगा, वो muskurayi)Aise प्यार की में बात नहीं कर रही, ऐसे प्यार के लिए में रुक शक्ति हु.

शिव : तुम रुक शक्ति हो, पर तुम्हे देख कर मुझसे रुका नहीं jata(Mene उसे पलट दिया और में उसके ऊपर aagaya)Kya तुम मुझे रोकना चाहती ho(Usne मेरे आंखोमे देखते हुए ना में गर्दन हिलायी, तो मेने उसके रसीले होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन मध् से भीगे होठो को चूसने लगा, वो भी मेरे होठो को प्यार से चूसते हुए मेरी पीठ पर अपने नाखुनो का दबाव बढ़ने लगी, किश करते हुए hi में साइड में हो गया और उसके कूल्हे और झंघे सहलाने लगा तो उसने अपना एक पेअर मेरे ऊपर कर दिया. थोड़ी देर उस सख्त मगर स्मूथ सरीर को सहलाने के बाद में रुक गया, उसकी आंखे तड़प रही थी, वो मुझे ऐसे देख रही थी की प्लीज रुको मत. मेने अपने हाथ को उसके स्तन पर रखदिया तो वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, में हलके हलके उसके स्तन को सेहला रहा था, उसकी आंखे बंद होती चली गयी और सांसे तेज, हलकी हलकी सिस्किअ भी मुँह से फूटने लगी, में भी इस बेहद आकर्षक शरीर को देखने को लालायित था, तो मेने खड़े होते हुए उसे खिंच कर खड़ा किआ, वो मुझे देख रही थी, मेने उसके ड्रेस को पकड़ा और ऊपर करने लगा तो उसने शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली और अपने हाथ ऊपर कर के मुझे अपना ड्रेस उतरने में सहायता की, में उसे देखने लगा, शर्म की लाली उसके चेहरे पर उभर आयी थी, उसने एक पल के लिए नज़ारे उठायी और फिर झुका ली, में ब्रा में कैद उसन प्यारे से गोलों को देहने लगा, उसके शरीर के मुकाबले वो अच्छे खासे बड़े थे, मेने उन्हें हाथ से छुआ तो वो कैंप गयी,

मेने हाथ हातलिया, उसने फिर एक बार मुझे देखा और फिर अपनी नज़ारे झुकाली, मेने फिर से उसके स्तन को छुआ, फिर उसके पीछे चला गया और पीछे से अपने हाथ आगे करते हुए उन गोलों को सहलाने लगा, उसकी नंगी गोरी पीठ पर में चूमने लगा, उसके सख्त पेट को सहलाने से वो पीछे की और झुक गयी और अपने शरीर को मुज से चिपका दिया)

जूही : शह्ह्हह्ह्ह्ह, शहीीीव.

मेरे हाथ हाथ निचे और निचे जा रहे थे, जब मेरे हाथ पर सलवार का स्पर्श हुआ तो में कुछ पल रुक गया, पर जूही अपने गाल को मेरे गाल पर रगड़ रही थी, मेरा लुंड भी कड़क हो चूका था और मुझे पता था की उसे इस बात की खबर है, क्यों की वो अपने कूल्हों से मेरे लुंड पर दबाव बढ़ा रही थी, में अपना हाथ और निचे ले गया और उसकी छूट को हलके से दबा दिया.

जूही : ओह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह. (वो मुझे रोक नहीं रही थी बल्कि अपने कूल्हों को मेरे लुंड पर घिस रही थी, उसकी तड़प को देखते हुए मेने सलवार के नदी को खिंच दिया, और वो कुछ hi पालो में उसके पैरो में गिर गया. उसके हाथ अचानक से अपने आप को छुपाने की कोशिस करने लगे, मेने उसे छोड़ दिया और उसके सामने खड़ा हो गया, वो बेहतरीन शरीर जो सिर्फ ब्रा और पंतय में था, वो मेरी आँखों के सामने था, उसका कांड उसे लम्बा और चौड़ा बना रहा था पर वो एक नाजुक सी लड़की hi थी, शर्मा ते हुए वो अपने जिस्म को छुपाने की कोशिस करने लगी, मुझे लगा की में पुरे कपड़ो में हु और वो इस हालत में तो शर्मा रही है,





मेने मुस्कुराते हुए अपनी टीशर्ट उतर दी, में ऊपर से नानग हो गया था, वो मुझे देख रही थी, मेने अपना पंत भी उतर दिया तो उसकी निगाहे मेरे उभरे हुए लुंड पर चली गयी, जब उसे याद आया की में उसे hi देख रहा हु तो वो फिर से शर्मा गयी और मुस्कुराते लगी, में उसके करीब गया और उसे अपनी बहो में भर लिया, इस अवस्था में हमारे नंगे भाग एक दूसरे के संपर्क में आ गए थे, जिस से एक अलग सा एहसास हो रहा था, मेने उसको बहो में भरा तो उसने भी मुझे अपनी बहो में बार लिया.

शिव : शर्म आ रही है? (मेरे ऐसे सवाल से उसने सिर्फ है में शिर हिलाया) जूही.

जूही : (शिव के नंगे जिस्म को अपने हाथो से सेहला रही थी और अपनी छूट पर चूब रहे उसे अंग को महसूस कर उत्तेजित हो रही थी) ह्म्म्मम्म...

शिव : आज के लिए यही रुक जाते है.

जूही : (धीमी आवाज me)Aisa क्यों कह रहे हो. आज पहली बार तो तुम मेरे इतना करीब आये हो.

शिव : में तुम्हारे करीब hi हु जूही, पर अब इस से आगे बढ़ नहीं शक्ति.

जूही : क्यों?

शिव : क्यों की कल हमारा कॉम्पिटिओं है, अगर हमने कुछ किआ तो कल तुम कॉम्पिटिओं में भाग नहीं ले पाओगी. (जूही को स्नेहा की बात याद आ गयी, स्नेहा ने उसे कहा था की जिस दिन वो शिव के अंग को अपने अंदर लेगी वो चल भी नहीं पायेगी, वो शिव की बात समाज रही थी और शिव अभी भी उसके बारेमे सोच रहा है ये सोच कर hi उसे और ज्यादा प्यार आने लगा, क्यों की अगर कोई और होता तो वो इस वक़्त सिर्फ सेक्स के बारे में hi सोच रहा होता, पर उसका दिल मचल रहा था, उसे आज अपने लड़की होने का एहसास करना था, उसे एहसास करना था की जब वो किसी लड़के के साथ रहे गई तो उसे कैसा लगेगा, अब तक जिस तरह से उसके शरीर में संवेदनाये जाग रही थी वो उसे बहोत अच्छा लगा था, उसे और ये सुख लेना था)

जूही : थोड़ी देर और शिव, मुझे ये सब बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : (वो जनता था, की अगर थोड़ा थोड़ा करके भी आगे बढे तो कभी भी सिमा पर हो शक्ति है, उसने प्यार से kaha)Samajne की कोशिस करो जूही, हम फिर कभी ये सब करेंगे. और हमने तय किआ था न की ये सब हम तुम्हारे नेशनल में पहोचने के बाद करेंगे.

जूही : मुझे कुछ याद नहीं शिव, में बस इस पल को जीना चाहती हु, आज में पहली बार किसी लड़के के साथ इस अवस्था में हु, मेरे अंदर बहोत कुछ हो रहा है शिव, प्लीज थोड़ी देर मुझे प्यार करो. और muje(Wo कहते कहते रुक गयी, उसे शर्म आ रही थी, पर फिर भी वो boli)Muje वो... वो देखना है शिव.

शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कहना चाहती है, पर मेने फिर भी kaha)Kya देखना है?

जूही : (बहोत शर्मा गयी और उसने शिव को कास के गले लगा लिया, थोड़ी देर बाद उसने धीमी आवाज में kaha)Wo hi जो लड़को के पास होता है.

शिव : (उसकी बातो से मुझे बहोत मज़ा आ रहा tha)Kyu देखना है?

जूही : (वो शर्मा गयी, थोड़ी देर बाद वो boli)Mene कभी देखा नहीं उसे.

शिव : वैसे तो मुझे भी देखनी है, मेने भी कभी नहीं देखि.

जूही : चल जूठा, कितनो की तो देखि है.

शिव : पर तुम्हारी तो नहीं देखि न. (हम दोनों एक दूसरे को सेहला रहे थे) अगर तुम मेरा देखोगी तो अपनी भी दिखानी पड़ेगी. बोलो मंजूर hai(Wo मंद मंद मुस्कुरा रही थी, वो बोली तो नहीं पर सिर्फ है में शिर हिलाया, तो मेने मुस्कुराते हुए कहा) ठीक है देख लो. (में वह पड़े टेबल से सात कर खड़ा रहा और वो निचे बेथ गयी, वो इतना शर्मा रही थी की मुझसे नज़ारे चुरा रही थी, वो थोड़ी देर तक तो सिर्फ मेरे लुंड के उभर को देखती रही, फिर डरते हुए उसने हाथ लगाया,

हलके से उसका जायजा लेते हुए उसने मेरी और देखा तो में मुस्कुराता, वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, में उसके चेहरे के बदलते हाव भाव को देख रहा था, वो आश्चर्य से लुंड को देख रही थी, उसने हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ा और सहलाने लगी, उसके रोमांच को देखते हुए मेरी भी उत्तेजना बढ़ने लगी, मेरा मान कर रहा था की लुंड बहार निकल कर उसके मुँह में भर दू, पर अपने आप को काबू में किये में खड़ा रहा, थोड़ी देर सहलाने के बाद उसने लुंड को बहार निकला, जैसे hi लुंड बहार निकला वो चुअंक गयी और थोड़ी पीछे हाथ गयी, में उसके चेहरे के भाव देख रहा था, उसे यकीं नहीं हो रहा था, जो वो देख रही है., वो बस उसे hi देख रही थी, जब वो थोड़ी देर देखती hi रही तो मेने puchha)Kya देख रही हो?





जूही : (घबराते hue)Ye कितना बड़ा होता है शिव. (में मुस्कुराया)

शिव : अब देख लिया हो तो फिर वापस अंदर कर दो.

जूही : ऐसा क्यों कह रहे हो, मुझे देखने दो न.

शिव : अब कहो गई की मुझे छूना है (उसने आश्चर्य से मुझे देखा, क्यों की मुझे पता था की उसके दिल में क्या चल रहा hai)Hai न? (उसने शरमाते हुए है कहा) तो फिर छू lo(Uska भोला पैन मुझे और उत्तेजित कर रहा था, में उसकी भावनाओ को समाज रहा था, जब मेने पहली बार छूट देखि थी तब मेरा क्या हल था मुझे पता है, उसने डरते डरते मेरे लुंड को पकड़ा और हलके हलके दबाते हुए उसे महसूस करने लगी)

जूही : ये कितना गरम है शिव, और कड़क भी कितना hai(Me मुस्कुराते हुए उसे देख रहा tha)Iske अंदर हड्डी होती है क्या? (उसकी बात से मुझे हंसी आ gayi)Has क्यों रहे हो, ये अंदर से बहोत कड़क है, जैसे हड्डी होती है.

शिव : नहीं, कोई हड्डी नहीं होती, वो तुम्हारे छूने से ऐसा कड़क हो गया है.

जूही : ऐसा क्यों?

शिव : उसे लगता है की तुम उसके साथ प्यार करोगी, इस्सलिये वो बहोत खुस है.

जूही : प्यार करुँगी, कैसे?

शिव : जिस तरह से तुम मेरे साथ आगे बढ़ रही थी तो मुझे लगा था की तुम सब जानती होगी.

जूही : है थोड़ा बहोत सुना है, पर ज्यादा नहीं पता, और में आगे न बढ़ती तो क्या तुम आगे बढ़ते? (में मुस्कुराया) इस से कैसे प्यार करते है शिव?

शिव : फिर कभी बताऊंगा.

जूही : नहीं, अभी बताओ, मुझे जान न है.

शिव : जूही, संजो मेरी बात को, ये खेल ऐसा है की अपनी मंजिल पर पहुंचे बगैर रुकता नहीं है.

जूही : मुझेकुछ नहीं पता, अब बताओ कैसे करना है.

शिव : (अब में क्या kehta)Isko अपने जेठ से आगे पीछे हिला कर, इसको चाट कर अपने थूक से गिला कर के सहलाते हुए या इससे अपने मुँह में ले कर चूस कर.

जूही : क्या सच में, (वो आश्चर्य से मुझे देख रही thi)Kya इसे मुँह में भी लेते है?

शिव : है.

जूही : क्या स्नेहा भी ऐसा करती है?

शिव : क्या कहा तुमने?

जूही : क्यों, मेने कुछ गलत कहा क्या, तुम और स्नेहा, ये सब कर चुके हो, तो क्या वो भी ये सब करती है?

शिव : है करती है.

जूही : क्यों करती है? उसे गन्दा नहीं लगता?

शिव : मुझे अच्छा लगता है इस्सलिये वो करती है.

जूही : ऐसा करने से क्या सचमे तुम्हे अच्छा लगता है?

शिव : है, जब में तुम्हारे साथ करूँगा तो तुम्हे भी अच्छा लगेगा.

जूही : मेरे साथ? मतलब?

शिव : जब में तुम्हारी वो अपने मुहमे भर कर चूसूंगा और चाटूँगा तब तुम्हे भी अच्छा लगेगा.

जूही : (वो सहरमा gayi)Kya सच में? पर वह से तो me...(wo बोलते बोलते रुक गयी, फिर कुछ सोच kar)Wo तो गन्दी होती है न, वह से तो हम वो पेषाब करते है न.

शिव : तो क्या हुआ, वह चाटने से उत्तेजना बहोत बढ़ जाती है.

जूही : क्या में इससे अपने मुँह में लू?

शिव : तुम्हे अच्छा लगे तो लो.

जूही : तुम्हे तो अच्छा लगेगा न? (मेने है में शिर हिलाया, उसने मेरे लुंड को देखा, फिर अपना मुँह फैलाया, फिर वापस बंद कर दिया, फिर फैलाया, मेरी और देखा, में उस रोमांचक पल का इंतजार कर रहा था, भले hi कितनो ने hi मेरे लुंड को चूसा हो पर जब पहली बार ऐसा करता है तो उसके मनोस्थिति सोच कर hi लुंड कड़क हो जाता है, उसके चेहरे पर अजीब से भाव थे, उसकी निगाहे लुंड पर hi थी, उसने आहिस्ता से लुंड को अपने मुँह में प्रवेश करवाहा, थोड़ा सा hi लुंड अंदर गया था, उसके गरम मुँह के एहसास से hi मेरी आंखे बंद होने लगी, पर में उसे देखना चाहता था, उसका चेहता बता रहा था की वो महसूस कर रही है की उसे कैसा लग रहा है, मुझे उत्तेजना हो रही थी, मेने उसके शिर को पकड़ा और अपने लुंड पर हल्का दबा दिया, लुंड उसके मुँह में और घुस गया,





उसने फ़ौरन अपना शिर पीछे खिंचा और लुंड को अपने मुँह से बहार निकल दिया, वो मेरी और देखने लगी)

शिव : सॉरी, मुझसे रहा नहीं गया.

जूही : क्यों, क्या हुआ.

शिव : उसे अपने मुँह में अंदर बहार किआ जाता है.

जूही : कैसे?

शिव : (मेने उसकी ऊँगली पकड़ी और उसे अपने मुँह में दाल दिया, मेरे मुँह की गर्माहट से उसकी आंखे बंद हो गयी, में उसे अपने मुँह में अंदर हहर करने लगा तो उसने आंखे kholi)Aise, samaji?(Usne है में गर्दन हिलायी, फिर वापस लुंड को अपने मुँह में ले लिया, और उसे अंदर लिया, और फिर बहार निकला, एक बार करने के बाद वो रुक गयी और मेरी और देखा, मेने है में गर्दन हिलायी तो वो फिर से उसे अंदर ले गयी और बहार निकला, मेने फिर से है कहा तो वो फिर से करने लगी, थोड़ी देर करने के बाद वो अपने आप करने लगी, अपने लुंड पर हो रही सरसराहट से मेरी कमर भी हिल रही थी, में उसके शिर को सहलहाने लगा तो वो मेरी और देखते हुए मेरे लुंड को चूसने लगी, थोड़ी देर बाद उसने लुंड बहार निकला और मेरी और देख कर पूछा)

जूही : में ठीक कर रही हु शिव? (मेरी हालत ख़राब थी, अगर मेने उसे और करने दिया तो फिर में रुक नहीं पाउँगा)

शिव : जा जूही, बहोत अच्छा कर रही हो, मेने उसे खिंच कर खड़ा किआ और बिस्तर पर लेता दिया, और उसकी पंतय को निकल दिया, उसने अपनी छूट को ढकने की कोशिस की तो मेने उसके हाथ को पकड़ कर हटा दिया और उसकी टंगे फैला कर उसके छूट को चूस लिया, वो धनुस की तरह उठ गयी)





जूही : Shhhhhhhhhhhhhhhhhh (वो धड़ाम से वापस गिरी, में उसकी छूट को चाटने laga)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव (में उसकी छूट को अच्छे से चाट ते हुए उसके छेड़ में अपनी जीभ घुसाने की कोश्शि करने लगा, उसने चद्दर को मुठ्ठी में पकड़ liya)Shhhhh शह्ह्ह्ह आह्हः शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मुम्मीईई शह्ह्ह्ह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह shhhhhhhh(Me लगातार उसकी छूट को चाट रहा था, छूट कछेद बंद था तो मेरी जीभ अंदर नहीं जा रही थी पर भीड़ भी में उसे कुरेदते हुए छत रहा tha)Shhhh उम्मम्मम्म अह्ह्ह्हह शहीीीिव मुझे शहहह आह्ह्ह्हह्ह शहीीिव मुझे कुछ शह्ह्ह्ह हूऊऊ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह सीईव मुझे शहहह अह्ह्ह्ह शीइइइइव मुझे शहहहहह ahhhhhh(Me लगातार उसकी छूट को चूस रहा था, मुझे भी शांत होना था, में उसके ऊपर गया और लुंड को उसकी छूट से सत्ता दिया, और लुंड को छूट पर घिसने लगा,

में अपनी कमर हिला कर धक्के लगाने लगा था, अपनी छूट पर लुंड के एहसास से उसने टंगे फैला दी और मुझे अपनी बाहोंमे कसने lagi.)ufffff शहहह आअह्ह्ह्हह शिईयिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह , में उसकी छूट की फैंको पर अपना लुंड घिसे जा रहा था, में इतना उत्तेजित हो गया था की मेरा छूटने वाला tha)shhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह shiiiiii(Wo झटके खाने लगी और साथ में मेरे लुंड ने भी पिचकारी छोड़ना चालू कर दिया, में सीधा बेथ गया तू लुंड से निकलती पिचकारियां उसके पेट पर गिराने लगा, अपने शरीर पर हो रही गर्म बरसात को महसूस कर वो देखने लगी तो मेरे लुंड से निकल रही सफ़ेद पिचकारियां उसे दिख रही थी, वो आश्चर्य से निकलते उसे लावा को देख रही थी, एक पिचकारी उसके चहेरे पर भी पड़ी, हम दोनों हांफ रहे थे, और जोर जोर से सांसे ले रहे थे, थोड़ी देर बाद वो मुझे देखने लगी, में मुस्कुरया तो वो भी मुस्कुराया)

शिव : सॉरी, मेने तुम्हे गन्दा करदिया.

जूही : मुझे अच्छा लगा शिव, मुझे कुछ भी गन्दा नहीं लग रहा. सॉरी, मेने तुम्हे उकसा दिया.

शिव : (मुस्कुराते हुए) वो तो तुम रोज़ करती हो.

जूही : क्या सच में.

शिव : और नहीं तो क्या, जब देखो तब मेरे सामने तौलिये में चली आती हो, वैसे भी तुम्हे देख कर हालत ख़राब हो जाती है और ऊपर से तुम तौलिये में आ जाती हो, शर्म नहीं आती तुम्हे.

जूही : बहोत आती थी शिव, पर में तुम्हे पाना चाहती थी, तुम पहले लड़के हो जो मुझे इतने अच्छे लगे. और मेरा चयन गलत नहीं है शिव, इतना सब होने के बाद भी तुमने मेरे साथ कुछ न किआ, तुम्हे बस मेरा ख्याल था, मेरे कॉम्पिटिओं का ख्याल था, अगर तुम चाहते तो अंदर दाल शक्ति थे, और में रोकती भी नहीं, पर तुमने ऐसा नहीं किआ, मेरा फैसला गलत नहीं है शिव, अगर तुम मेरी जिंदगी में आये तो ये मेरी खुसनशिभी होगी.

शिव : पकड़ कर ले तो आयी हो मुझे, और में भी अपने आप को रोक नहीं पाया, पता नहीं मेरा क्या होगा. चलो अब, नाहा लो. (वो उठी, अपने हाथ से अपने स्तन ढके और अपनी छूट को भी ढाका और कड़ी हो गयी, मुझे मुस्कुराता देख वो शर्मा गयी और बाथरूम की और जाने लगी, उसकी थिरकते नंगे कूल्हों को देख मेरे अंदर फिर से उत्तेजना भरने लगी, मेने एक गहरी साँस ली और आंखे बंद कर दी.

रात को वो टीशर्ट और शार्ट पहन कर सोई और में सिर्फ शार्ट में. वो मेरी बाहोंमे सोई. सुबह हम दोनों स्टेडियम पहुंच गए.
 
ी क्नोव यू अरे वेटिंग बूत संडे ऑलमोस्ट में बहार रहता हु तो दे नहीं पता और न कुछ लिख पता हाउ.
 
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