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में और दिव्या दोनों वह से खाना जहा हो रहा था वह चले गए. हम दोनों को साथ आते देख रंजन, विणा और कुसुम का मुँह खुला का खुला hi रह गया. उनको ऐसे देखता देख कर दिव्या शर्माने लगी. हम चलते चलते वह आ गए.
रंजन : तू हमारी सहेली है की शिव की.
दिव्या : (एक बार शिव की और देख कर फिर अपनी नज़ारे रंजन की और करती है, और शरमानेवाले लहज़े me)Aisa क्यों बोल रही है?
रंजन : और नहीं तो क्या, हम लोग कब से तुम्हे मन रहे थे, पूछ रहे थे की क्या हुआ, क्या हुआ, तब तो तू मुँह फुला कर बैठी हुई थी, हमारी छोड़, तेरे पापा और मम्मी की बात भी तू नहीं मणि और अब शिव के कहने पर मान गयी.
दिव्या : ऐसा कुछ भी नहीं है, शिव ने मुझे संजय की मेरे एकलौते भाई की शादी है तो मुझे गीले शिकवे भूल कर शादी को एन्जॉय करना चाहिए वर्ण मेरे मम्मी पापा को बुरा लगेगा, मुझे उसकी बात सही लगी तो में मान गयी, और कुछ नहीं.
शिव : अभी ये सब बाते छोडो, और खाना सुरु करो, देखो सब ख़तम होने आया है, ऐसा न हो की हम भूखे hi रह जाये. फिर तुमलोगो को वरघोड़े के लिए भी तैयार होना है न.
फिर हम सब खाना खाने लगे. हलकी फुलकी बाटे चलती रही, में कुसुम को देख रहा था तो वो ज्यादा बोल नहीं रही थी पर उसके चेहरे पर उदासी छायी हुई थी. वो नीचे देख कर खाना खा रही थी, अगर कोई जबरदस्ती उस से कुछ पूछता तो वो सिर्फ है या न में जवाब दे रही थी. खैर हमने खाना ख़तम किआ और वो सब तैयार होने चली गयी. मुझे तो तैयार होना नहीं था तो में वह एक और बेथ गया. शादी में बहोत चहल पहल थी. थोड़ी देर बाद परम और उसके कुछ दोस्त कही जा रहे थे, मुझे देख कर परम मेरे पास आया.
परम : शिव, यहाँ अकेले अकेले क्यों बैठे हो.
शिव : वो सब तैयार होने गए है तो में यहाँ बैठा हु.
परम : ये मेरे दोस्त है, ये लोग पार्टी करने जा रहे है, तुजे जाना है?
शिव : पार्टी करने?
दोस्त 1 : अरे दारू पिने, चल मज़ा करेंगे, फिर नाचना भी तो है.
शिव : नहीं भैया, में वो सब नहीं करता.
दोस्त 1: परम, अभी ये बच्चा है, रहने दे.
परम : इसमें बच्चा वच्चा क्या, वो नहीं पिता तो नहीं पिता, तुम लोग एन्जॉय करो और है कोई हंगामा नहीं करना.
दोस्त 1 : अरे यार, हम पहली बार थोड़े hi पि रहे है, जा तू तैयार हो जा, हम लोग नाचने के लिए तैयार हो जाते hai.(Wo लोग आपसमे ताली बजाते हुए हसने लगे, और वहस इ चले गए)
परम : यहाँ अकेले अकेले बोर हो जायेगा, चल मेरे साथ. (वो मुझे अंदर ले गए, जहा वो तैयार हो रहे थे, उनके कुछ दोस्त थे जो उन्हें तैयार होने में मदद कर रहे थे, मेरे पास वह भी कुछ नहीं था तो में एक चेयर पर बेथ कर उन्हें देख रहा था, वो सर पर सेहरा, और शेरवानी पहन कर तैयार हो गए.)
थोड़ी देर वह बैठने के बाद मुझे भीड़ में गर्मी लग रही थी तो में बहार आ गया. थोड़ी देर में रंजन और विणा आयी, उन्होंने घाघरा चोली पहनी हुई थी और साथ में मेकउप भी किआ हुआ था, सच में वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी. मेने पहली बार इन दोनों को ऐसे देखा था, लिपस्टिक और आँखों पर कलर और न जाने क्या क्या किये हुई थी, पर सचमे वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी.
रंजन : कैसी लग रही हु?
शिव : बहोत खूबसूरत लग रही हो, पहचाना hi नहीं जा रहा है.
रंजन : दिव्या और कुसुम ने कपडे दिए, बोल रही थी की सब तैयार होंगी तो तुम दोनों सादे कपड़ो में कैसी लगोगी.
शिव : नहीं अच्छा किआ, सच में अब ऐसा लग रहा है की तुम किसी शादी में आयी ho.(Hum बाटे कर hi रहे थे की दिव्या और कुसुम भी आ गयी, दिव्या बहोत ज्यादा तैयार हुई थी, और क्यों न हो, उसके भाई की शादी जो थी. सच में लड़कीअ तैयार होने के बाद जिले अलग hi दिखने लगती है, वो दोनों भी बहोत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी)
दिव्या : में कैसी लग रही हु शिव?
शिव : बहोत hi अच्छी लग रही हो (कुसुम भी मेरी और देख रही थी, जैसे पूछ रही हो, और में?, मेने उस सी भी कहा) तुम भी बहोत अच्छी लग रही हो, उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी)
दिव्या : तुम तैयार नहीं हुए?
शिव : हम लड़को को तुम्हारी तरह तैयार नहीं होना पड़ता, में ऐसे hi ठीक हु.
दिव्या : इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति, तुम हो hi ऐसे, पुरे गांव में ऐसा कोई नहीं है जिसके कपडे तुम्हे आएंगे.
शिव : क्यों में ऐसे अच्छा नहीं लगरहा.
दिव्या : तुम खुद इतने अच्छे हो की तुम्हे और कुछ करने की जरुरत hi नहीं. (रंजन उसे घर कर देखने लगी) क्यों मेने कुछ गलत कहा, जो मुझे ऐसे घर रही हो? (सब है पड़े)
थोड़ी देर में परम को घोड़ी के बिठाया गया, और दज जोर जोर से चालू हो गया, सुरु में बच्चो ने नाचना सुरु किआ, फिर दिव्या, रंजन और कुसुम भी कुछ और लड़कीओ के साथ शामिल हो गयी, कुछ लड़के भी नाचने लगे, माहौल उमंग और ऊर्जा से भर गया था, हर किसी के पेअर, संगीत पर मचल रहे थे. लड़के एक तरफ और लड़कीअ दूसरी तरफ नाच रही थी. आहिस्ता आहिस्ता सब गांव की गालिओ में आगे बढ़ने लगे लगे. दिव्या ने मुझे भी नाचने के लिए िःस्सारा किआ, पर मुझे नाचना नहीं आता था, तो मेने न में गर्दन हिलायी. दिव्या अपनी माँ को भी नाचने के लिए ले आयी, फिर अपने पापा को भी ले आयी. वो मुझे भी खिंच कर अंदर ले जाने लगी, में उसे मन कर रहा था पर वो नहीं मणि और मुझे खिंच कर अंदर ले गयी, कुछ औरते और लड़कीअ वह नाच रही थी, उनके बिच मुझे अजीब लग रहा था. लड़के दूसरी और नाच रहे थे तो मुझे लड़कीओ के साथ थोड़ा अजीब लग रहा था. दिव्या के पापा ने भी मुझे नाचने का इस्सर किआ तो में अपने हाथ उठा कर नाचने का प्रयत्न करने लगा. कुछ लड़कीअ मुझे देखते हुए नाच रही थी, जो मुझे दिखा रही थी की देखो में कितना अच्छा नाचती हु, थोड़ी देर में मुझे लगा की जैसे कुछ लड़कीओ में कॉम्पिटिओं सुरु हो गया था मुझे रिझाने का.
वह नछरहे लड़को में से कुछ लड़के जो अभी थोड़े नशे में थे वो आपस में एक दूसरे को देखने लगे, उन्हें लग रहा था की वो बहार का लड़का, उनके गांव की लड़कीओ के मज़े ले रहा है और हम रह गए, दो तीन लड़के भी लड़कीओ के बिछ घुस आये और नाचने लगे. वो ऐसे नाच रहे थे की लड़कीओ को दिक्कत हो रही थी. एक लड़का कुसुम के सामने नाचने लगा, कुसुम झिझक रही थी, एक रंजन के साथ भी नाचने का प्रयास कर रहा था. रंजन ने मेरी और देखा, मेने कुसुम को देखा तो उसके चेहरे पर भी नाराजगी साफ़ देखि जा शक्ति थी. दिव्या के पिता ने भी ये देखा पर वो अपने प्रसंग को बिगड़ना नहीं चाहते थे तो वो वह से निकल गए. मेने भी नाचना बंद किआ और उनके बिच से साइड में हो गया, पर वो लड़के अभी भी अंदर hi नाच रहे थे. लड़कीओ को परेशानी हो रही थी तो कुछ लड़कीओ ने नाचना बंद कर के साइड में हो गयी. दिव्या ने ये देखा और वो उन लड़को को गुस्से से देखने लगी, पर वो लड़की कुछ ज्यादा hi धित थे. दिव्या ने अपने पापा की और देखा तो, उसके पापा समाज गए और वो अंदर आये और उन लड़को को दूसरी और जाने के लिए समजने लगे. पर वो लोग अंकल के हाथ उठा कर उन्हें नाचने के लिए उकसा रहे थे, मतलब था की वो वह से हटने को तैयार नहीं थे. रंग में भांग हो रहा था, दिव्या ने मेरी और देखा, जैसे कह रही हो प्लीज कुछ करो. मेने उसके सामने है में गर्दन हिलायी और में वापस अंदर घुस गया. झगड़ा तो करना नहीं था वर्ण माहौल ख़राब हो शक्ति था. में उन लड़को के सामने नाचने लगा तो वो लोग मेरी और देख कर नाचने लगे, धीरे धीरे में उन्हें दूसरी और धकेलने लगा, वो पीछे हटना नहीं चाहते थे पर मेरे सामने वो कुछ नहीं कर प् रहे थे, मेने तीनो को आहिस्ता आहिस्ता धकेलते हुए लड़कीओ से अलग कर दिया. जब मुझे लगा की वो लड़कीओ से दूर हो गए है तो मेने नाचना बंद कर के साइड में खड़े हो गया. जब उनलड़को को एहसास हुआ की वो लोग लड़कीओ के झुण्ड से बहार हो गए है तो वो एक दूसरे का मुँह देखने लगे, अब लड़कीअ अकेले नछरही थी तो वो लोग वापस नहीं घुस सकते थे, वो मुझे घर कर देखने लगे, में बस मुस्कुरा दिया. अब वो कुछ नहीं कर शक्ति थे तो वो लोग गुस्से में वह से चले गए. फिर से माहौल में रंग आ गया, सब नाचने लगे, लड़कीअ भी जोश में नाचने लगी. एक घंटे बाद दिव्या, रंजन और कुसुम बहार निकली और मेरे पास से गुजरते हुए मुझे उनके साथ आने को कहा. में उनके साथ चला गया. वह पास में hi एक घर में वो लोग घुसने लगी.
दिव्या : ये कुसुम का घर है, हमे प्यास लगी थी तो पानी पिने आये है. थैंक यू.
शिव : ठनक यू क्यों?
दिव्या : तुमने उन लड़को को वह से भगाया इस्सलिये. (कुसुम सब के लिए पानी ले आयी, घर में कोई नहीं था, उसके घरवाले भी वह शादी में थे, उसने मुझे पानी दिया, वो मुझे देख रही थी, मेने उसे देखा, वो बोली कुछ नहीं पर उसका चेहरा बहोत कुछ बोल रहा था, वो अपनी आँखों और चेहरे से मुझे थैंक यू कह रही थी, क्यों की वो भी परेशान हो गयी थी उन लड़को से. मेने मुस्कुराते हुए उसके हाथ से पानी लिया)
फिर और कोई दिक्कत नहीं हुई, रात देर तक सब चला और सबने खूब मज़ा किआ. अब बात आयी रात को सोने की तो दिव्या ने अपनी मम्मी से कहा की यहाँ बहोत लोग है तो वो कुसुम के घर सोने जा रही है. वो हमें ले कर कुसुम के घर आगयी. अंदर कुसुम के मम्मी पापा और उसका छोटा भाई था. दिव्या सब से मिली और उनको कहा की वो सब यहाँ सोयेंगे. उसके घर भी ऊपर दो रूम थे तो, एक में सब लड़कीअ और दूसरेमे में सोऊंगा ऐसा फैसला हुआ. सब थक गए थे तो सब अपने अपने रूम में सोने चले गए. में अकेला था तो सब कपडे निकल कर अंडरवियर में hi सोने के लिए लेट गया. दूसरी और सब लड़कीओ ने भी अपने कपडे बदले और सोने के लिए बिस्तर पर लेट गयी. थोड़ी देर सब ने बाते की पर सब थक गयी थी तो धीरे धीरे सब सोने लगी. दिव्या के मान में कुछ चल रहा था तो वो सबके सोने का इंतजार करने लगी. जब उसको लगा की सब सो गए है तो वो आहिस्ता से बिस्तर से उठी और बहार निकल गयी, उसने सब और देखा तो सन्नाटा छाया हुआ था. वो बिना आवाज किये अपने कदम बढ़ा कर शिव के कमरे के पास पहुंची, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किआ था, दो मिनट तक वो सिर्फ दरवाजे के पास कड़ी रही और अपनी सांसे संभल रही थी. एक बार तो उसे वापस लोट जाने का ख्याल आया पर शिव से मिलने के लालच ने उसे रोक दिया. उसने धड़कते दिल से दरवाजे पर हलकी दस्तक दी. (शिव अभी अभी सोया था, पर उसके तेज कानो में दस्तक सुनाई दी, उसने आंखे खोली और दरवाजे की और देखा, पर कोई हलचल सुनाई नहीं दी तो उसने सोचा की उसका वहम होगा, फिर उसने आंखे बंद कर ली) जब दरवाजा न खुला तो दिव्या को लगा की शिव सो गया होगा और जोर से दस्तक देने से उसका दिल घबरा रहा था. वो मायूस हो गयी, वो वापस लौटने के लिए कदम बढ़हि रही थी की फिर एक बार रुक गयी. उसने मान में hi शिव को पुकारा, और फिर हलके से दस्तक दी, उसने थोड़ी देर राह देखि पर दरवाजा नहीं खुला, वो मुड़ने वाली थी की दरवाजा खुलने की आहत हुई, एक तरफ तो उसे बहोत खुसी हुई और दूसरी तरफ उसका दिल जोरो से धड़कने लगा. दरवाजा खोल कर शिव खड़ा था, वो ऊपर से नंगा था पर निचे उसने पंत पहन रक्खी थी. (दूसरी बार दस्तक से शिव को लगा की ये उसका कोई वहम नहीं है, उसे समाज नहीं आ रहा था की इस वक़्त कोण होगा, तो उसने पंत पहनी और दरवाजा खोला, दिव्या को खड़े देख कर उसे आश्चर्य हुआ)
शिव : (धीमी आवाज me)Tum इस वक़्त, क्या हुआ? (दिव्या ने एक बार शिव को देखा फिर अपनी नज़ारे झुकाये निचे देखने लगी) क्या हुआ, तुम इस वक़्त यहाँ क्या कर रही हो?

दिव्या : (हिचकिचाते हुए) तुमसे मिलने आयी हु.
शिव : पागल हो गयी हो, कोई जाग गया तो?
दिव्या : सब सो गए है.
शिव : देखो, अभी तुम जाओ, हम कल milenge.(Wo मायूस नज़रो से शिव को देखने लगी, उसकी आंखोमे बिनती थी, अब में क्या करता तो मेने कहा) ठीक है, अन्दर आओ. (मेने उसे रास्ता दिया तो वो संकुचाते हुए अंदर आ गयी, वो नज़ारे चुरा रही थी, मुझे उसके िर्रादे ठीक नहीं लग रहे थे, )अब कहो क्या हुआ? (वो कुछ नहीं बोली, वो दो कदम मेरे नजदीक आ गयी) देखो दिव्या, हम कल मिलेंगेना, अभी तुम जाओ, किसीने देख लिया तो तुम्हारी बदनामी होगी.
दिव्या : (रुवासी हो kar)Me कब से तुमसे मिलने के लिए तड़प रही थी और तुम मुझे भगा रहे हो. मेने सुना था की लड़के अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए कही भी चले जाते है, यहाँ में सामने से तुम्हारे पास आयी हु और तुम मुझे भगा रहे हो (मुझे लगा अभी वो रो देगी)
शिव : (मेने उसके गाल पर हाथ रक्खा और kaha)Dekho, ऐसा कुछ नहीं है, में तुम्हे भगा नहीं रहा हु, मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए में तुमसे कह रहा था. (मेरे उसके गाल को छूने पर वो मेरे शाइन से लग रही और मेरी कमर में अपनी बहे दाल दी)
दिव्या : (फिर रोनी आवाज में) तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड नहीं मानते, बस मुझे बहलाने के लिए बोल दिया था. है न?
शिव : ऐसा नहीं है, (मुझे लगा की ये ऐसे नहीं जाएगी, मेने सोचा की इसे थोड़ा प्यार से समझाऊंगा तो समाज जाएगी, मेने भी उसके गले में बहे लपेटी और उसे अपने से चिपका लिया) तुम गलत समाज रही हो दिव्या, अगर तुम्हारे कमरे में कोई जाग गया तो वो क्या सोचेगा.
दिव्या : (मुझे और कास के पकड़ते हुए) मुझे नहीं जान न, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे ऐसे तुमसे मिलने का मौका फिर कभी मिलेगा की नहीं पता नहीं. एक लड़की सामने से तुम्हारे रूम में आयी है और तुम हो की उसे भगा रहे हो, क्या में इतनी बुरी हु?
शिव : किसने कहा की तुम बुरी हो, मुझे तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए कह रहा था.
दिव्या : क्या फ़िक्र है मेरी, क्या तुम मुझे खा जाओगे?
शिव : (अब इससे क्या संजो, मेने मजाक में कहा) हो सकता है की में तुम्हे खा जाऊ.

दिव्या : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, और वो शिव से और लिपट ते हुए) तो खा जाओ न, मेने कहा रोका है. (उसके ऐसा कहने पर और मुझसे वो ऐसे लिपटी थी की मेरे लुंड में हरकत होने लगी, मुझे दर लगने लगा की अभी लुंड खड़ा हो जायेगा और उसको पता चल जायेगा, तो मेने सोचा की उसे अलग करता हु, मेने उसको हलके से मुझसे दूर करने की कोशिस ki)Achchha ठीक है, आओ बिस्तर पर बेथ के बात करते है.
दिव्या : नहीं, मुझे ऐसे hi अच्छा लग रहा है, (वो मुझसे और लिपटने लगी, उसके नरम हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे थे, और उसकी इस हरकत पर मेरे लुंड ने ठुमका मारा, और खड़ा होने laga)(Divya उस कड़क होते अंग को महसूस कर रही थी, उसे शर्म भी आ रही थी पर उसे अच्छा भी लग रहा था, उसे उस अंग का कड़ा होना और उसका उसके शरीर पर चुभना अच्छा लग रहा था, वो अपना गाल शिव की छाती पे रगड़ते हुए उसकी पीठ को सहलाने lagi)(Uski ऐसी हरकत से में गरम होने लगा था, बड़ी मुश्किल से में अपने आप को संभल रहा था)
शिव : (समजते hue)Hum वह बेथ कर बाते करते है न, (प्यार se)chalo छोडो मुझे.
दिव्या : तुम मुझसे इतना दर क्यों रहे हो शिव?
शिव : (अब में उसे क्या संजो) में तुम्हारे लिए दर रहा हु दिव्या, तुम ऐसा करोगी तो कुछ हो जायेगा.
दिव्या : (वो शिव की बात समाज रही थी, वो शर्माने लगी, उसने धीमी आवाज में कहा) तो हो जाने दो न.
शिव : (मेने थोड़ा ताकत से उसे जुड़ा किआ, वो मेरे सामने देखने लगी) तुम पागल तो नहीं हो गयी, तुम क्या कह रही हो पता है?
दिव्या : है पता है, क्यों, गर्लफ्रेंड और बॉय फ्रेंड यही तो करते है न?
शिव : ये सब इतना आसान नहीं होता, तुम समाज नहीं रही हो.
दिव्या : (अपनी नज़ारे झुका कर) मुझे सब पता है, में जानती हु की पहली बार दर्द भी होगा.
शिव : तुम सच में पागल हो, देखो अभी ये सब ठीक नहीं है, हम दोनों आज hi मिले है और तुम...
दिव्या : वो सब मुझे नहीं पता शिव, मुझे तुम बहोत अच्छे लगते हो, और तुम्ही बताओ ऐसे क्या हम कभी मिल शकेंगे, आज मौका मिला है तो फिर कर लो न.
शिव : (अगर में दिव्या को जनता नहीं होता तो में सच में ये समाज लेता की वो एक चालू लड़की है, पर में उसे जनता था, मुझे पता था की वो अभी कुवारी है, मुझे उसके भोलेपन पे सचमे प्यार आ रहा था) पागल ladki(Mene उसको गले लगा लिया, वो भी मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी) तुम्हे क्या जल्दी है ये सब करने की?
दिव्या : मेने बहोत लड़कीओ को देखा है, वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कुछ करती है, मुझे भी बहोत मान होता था, पर कभी कोई अच्छा hi नहीं लगा, तुम पसंद आये तो में अपने आप को रोक नहीं पायी. सच कहती हु शिव, तुम मुझे बहोत पसंद हो, और लड़के लड़कीओ में ऐसा hi होता है, अगर किसी को कोई पसंद आ जाता है तो वो उसे प्रोपोज़ कर देता है और फिर अगर दोनों की है हुई तो फिर वो बॉयफ्रेंड – गर्लफ्रेंड बन जाते है. पर लगता है की में तुम्हे इतनी पसंद नहीं आयी, है न?
शिव : (मुस्कुराते हुए) है, मुझे तुम इतनी पसंद नहीं थी पर अब तुम्हारी हरकते मुझे धीरे धीरे पसंद आने लगी है.
दिव्या : (मुझे मुस्कुराते हुए देखते हुए) सच?
शिव : (मुस्कुराते हुए) है, सच.
दिव्या : तो फिर मुझे भी वैसा प्यार करो न शिव.
शिव : अगर मेने तुमसे वैसा प्यार किआ न तो तुम कल शादी में नहीं जा पाओगी.
दिव्या : वो क्यों?
शिव : वो तुम अभी नहीं संजोगी.
दिव्या : क्यों नहीं संजुगी, तुम समजाओगे तो में समज जाउंगी, में क्या बेवकूफ हु?
शिव : जिस दिन में तुमसे वैसा वाला प्यार करूँगा न तब तुम्हे पता चल जायेगा.
दिव्या : तो करो न शिव.
शिव : पागल, तुमने उस दिन टंकी में मेरे वह पेअर लगाया था तब भी तुम्हे नहीं पता की क्या हो शक्ति है?
दिव्या : (शर्मा गयी) है, थोड़ा थोड़ा तो पता है, पर मेने सुना है, सब करते है, और मेने नहीं देखा की किसी को इतनी दिक्कत हुई होगी.
शिव : तुमने किसी का देखा है?
दिव्या : क्या?
शिव : वही जो लड़को के पास होता है?
दिव्या : नहीं.
शिव : इसीलिए तो, अगर तुम देखती तो तुम्हे पता होता की जो मेरे पास है वो बहोत बड़ा है.
दिव्या : (मेरी आंखोमे देख रही थी, उसके चेहरे पर कई भाव आ रहे थे और कई जा रहे थे) क्या तुम मुझे वो दिखाओगे?
शिव : पागल हो क्या?
दिव्या : (थोड़ा जिद करते hue)Please शिव, तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो न?
शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती?
दिव्या : आती है न, पर अगर में अपने बॉयफ्रेंड के साथ hi शर्माउंगी तो मुझे सब कैसे पता चलेगा?
शिव : (मुझे भी उसकी बातो से बड़ा मज़ा आ रहा था, )देख कर क्या करोगी?
दिव्या : (खुस होते हुए) कुछ नहीं, बस मुझे देखना है.
शिव : ठीक है, जाओ दरवाजा बंद कर दो. (वो खुस हो कर गयी और दरवाजा बंद कर के वापस आ गयी, और मुस्कुराते हुए मेरे सामने देखने लगी, उसके चेहरे से लग रहा था की जैसे उसे कोई मनपसंद चीज मिलने वाली हो, उसके ऐसे भोले पैन पर मुझे भी मज़ा आ रहा था, मेने अपना पंत खोला, वो उत्सुकता से मेरे पंत को hi देख रही थी, जब मेने अपना अंडरवियर नहीं उठता तो वो मेरे सामने देखने लगी, जैसे कह रही हो उतरो न, मेने उसे बीएड पर बिठा दिया, सच में में कैसा अजीब काम करने जा रहा था, मेने अपनी अंडरवियर आहिस्ता आहिस्ता नीचे उतरी, सच कहु तो अभी मुज पर कोई हवस जारी नहीं थी तो मेरा लुंड वापस नार्मल स्थिति में आ गया था, जब मेने अंडर वियर सरकाया तो मेरा लुंड निचे झुका हुआ था)

(दिव्या बड़ी अजीब नजरो से शिव के लुंड को देख रही थी, उसकी धड़कने तेज हो चुकी थी, दो पैरो के बिच उसे छूट देखने की आदत थी, वह आज वो एक लम्बा अंग देख रही थी, उसे अजीब लग रहा था, उसने छोटे बच्चो की नुन्नी देखि थी पर उनके सामने ये बहोत बड़ा था, उसके ऊपर के भाग पर बाल भी थे, उसने देखा की निचे दो बड़े अंडो को किसी थैली में भर के लटकाया हो वैसे लटक रहे थे, वो कभी उस लुंड को तो कभी शिव को देख रही थी, उसके चेहरे से हसी गायब थी, वो अपना शिर घुमा घुमा कर देख रही थी, उसका दिल तो इतनी तेज गति से चल रहा था की उसे साँस लेने भी दिक्कत हो रही थी) अगर देख लिया हो तो वापस अंदर कर दू?
दिव्या : (दिव्या ने शिव की और देखा, हिचकिचाते हुए kaha)Kya में isse...(Me उसे देख रहा था की वो क्या कहना चाहती है) क्या में इससे छू सकती हु?
शिव : दिव्यआ.
दिव्या : (मुझे बिनती करते hue)Please प्लीज प्लीज.
शिव : (उसको ऐसे गिड़गिड़ाते देख कर में मुस्कुराया) ठीक है.
वो खुस हो गयी, वो थोड़ी आगे खिसकी और डरते डरते हाथ आगे बढ़ाया, उसका हाथ लुंड के नजदीक पहुंच गया था, वो हिचकिचा रही थी उसने अपनी मुठी एक बार बंद की, उसने अपनी उंगलिओ को अंगूठे से माला, उसने मेरे सामने देखा, में उसे hi देख रहा था, उसने पहले एक ऊँगली से थोड़ा छुआ, फिर चारो ऊँगली से उसे सहलाया. अब लुंड तो लुंड है, लड़की की छुअन से वो बड़ा होने लगा, उसने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा, में मुस्कुराया.
शिव : क्या हुआ?
दिव्या : ये बड़ा हो रहा है.
शिव : क्यों की उसे तुम्हारा छूना पसंद आ रहा है.
दिव्या : क्या सच में (वो खुस हो रही थी की उसके छूने से ये सब हो रहा है, वो फिर उसे उंगलिओ से सहलाने लगी)
शिव : (मुझे भी अच्छा लगने लगा था, तो मेने उसे kaha)use पकड़ कर हिलाओगी तो और बड़ा hoga(Wo ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उसे विस्वास hi न हो, पर मेरे चेहरे से उसे लगा की में मजाक नहीं कर रहा हु, तो उसने कपट हाथो से अपना अंगूठा निचे ले जाते हुए लुंड को पकड़ा, (दिव्या का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था, की पशीने की बुँदे उसके चेहरे पर उभर आयी थी, ये उसके जीवन का पहला अनुभव था, उसने बहोत कुछ सुना था पर आज वो महसूस कर रही थी, वो नरम चमड़े का गरम डंडा उसके अंदर हलचल मचाये हुए था, उसे अपनी छूट के अंदर अजीब सी अनुभूति हो रही थी, वो बस लुंड को थामे रुकी रही, उसे समाज नहीं आ रहा था की कैसे करे तो वो शिव के सामने देखने लगी, में उसके चेहरे से समाज रहा था, मेने उसके हाथ पर अपना हाथ रक्खा और उसे आगे पीछे कैसे हिलना है वो एक दो बार हिलके संजय, फिर मेने उसका हाथ छोड़ दिया, वो समाज गयी थी तो उसने अपनी स्थिति ठीक की और अच्छी तरह से लुंड के सामने बेथ गयी और आहिस्ता आहिस्ता लुंड को देखते हुए अपना हाथ आगे पीछे करने लगी, इतनी प्यारी और मासूम लड़की के नरम नरम हाथो के स्पर्श से लुंड अपनी औकात में आने लगा, दिव्या के थोड़ी देर हिलने से लुंड पूरा खड़ा हो गया और सामने की और तन गया, में भी उत्तेजित हो गया था तो लुंड ने एक दो ठुमके मर दिए. लुंड के ऐसे अपने आप हिलने से वो दर गयी और उसने लुंड छोड़ दिया और अपने मुँह को अपने हाथो से डाकलिया.
वो खुले मुँह से आंखे फाडे उछलते लुंड को देख रही थी, उसके गले से थूक भी नहीं उतर रहा था, उसने जब थूक अपने गले से निचे उतरा तो में हसने लगा)
शिव : अब सम्ज्मे आया?
दिव्या : ये तो बहोत बड़ा है. ये ऐसे उछाल क्यों रहा है.
शिव : (में उसे क्या समजता की कच्ची गरम जवानी की खुसबू से ये झटके मार रहा है, वैसे भी में गरम हो चूका था पर में अभी उसके साथ कुछ करना नहीं चाहता था, जैसे तैसे मेने अपने आप को संभाला) तो अब इससे वापस अंदर कर दू?
दिव्या : (वो गुस्से से मुझे देखने lagi)Tumhe किस बात की जल्दी है?
शिव : क्यों, अब देख लिया न?
दिव्या : (शरमाते हुए) मुझे अच्छा लग रहा है, इससे छूने पर मुझे कुछ कुछ हो रहा है शिव. (वो अपनी झंघे आपसमे सत्ता रही थी, मेने छेड़ते हुए पूछा) कहा हो रहा है? (वो शर्माने लगी) मुझे तो नंगा कर दिया है और अब खुद शर्मा रही हो?
दिव्या : (उसने शरमाते हुए मुझे देखा, फिर अपनी छूट की और इस्सर करते hue)Yaha.(Waise तो मुझे पता hi था तो में हसने लगा, वो और शर्मा गयी)
शिव : अब बहोत हो गया दिव्या, में इससे वापस अंदर कर रहा हु, और अब तुम भी जाओ अपने कमरे में.
दिव्या : (अपने चेहरे पर जूठा गुस्सा लेट हुए वो उठी और मुझे धक्का दे कर मुझे बीएड पर लेता दिया और मेरे ऊपर चढ़ gayi)kab से ये क्या लगा रक्खा है, जाओ जाओ जाओ, में नहीं जाने वाली.
शिव : (पलट ते हुए मेने उसे मेरे नीचे लेता दिया) कब से समजा रहा हु की तुम्हारी हालत ख़राब हो जाएगी, तुम्हे समाज नहीं आता.
दिव्या : (मेरे गले में बहे दाल कर मुझे अपनी और खिंच कर मेरे होठो को चुम कर) है नहीं आता, क्या कर लोगे.
शिव : अच्छा तो तुम्हे देखना है की में क्या कर लूंगा

(में उसके होठो को चूसने लगा और एक हाथ उसके स्तन पर रख दिया और उसे दबाने लगा, उसके होठो को जोर जोर से चूसा और उसके स्तन को भी थोड़ी सख्ती से दबाया, जब मेने उसे छोड़ा थो वो जोर जोर से हांफ रही थी) अब पता चला, में क्या कर लूंगा. (वो मुझे देख रही थी, उसकी आंखे नशीली हो चुकी थी, इस बार उसने मुझे खिंचा और मेरे होठो पे टूट पड़ी, वो भी जोर जोर से मेरे होठो को चूस रही थी, पांच मिनट तक मेरे होठो को जोर जोर से चूसने के बाद उसने मुझे छोड़ा और मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी) तो तुम ऐसे नहीं मानोगी.
दिव्या : (मुस्कुराते हुए न में गर्दन हिलने लगी) है नहीं मानूंगी, मुझे प्यार करो वर्ण में यहाँ से नहीं जाउंगी.
में भी काफी गरम हो गया था, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुझे ललचा रही थी, में फिर से झुकता चला गया. इस बार बड़े प्यार से उसके होठो से खेलने लगा, और हलके हलके उसके स्तन दबाने लगा.
दिव्या : उम्म्म्मह, उम्म्म्मह उम्मम्मम्ह (वो भी मेरे गले में बहे डेल मेरे बालो से खेलने लगी, में किश करते हुए एडजस्ट होने लगा, उसने भी अपने दोनों पेअर फैला दिए और मुझे अपने पैरो के बिच कर दिया, हलाकि उसने ढीला लेहंगा पहना हुआ था, पर ऐसा लग रहा था की हम दोनों चुदाई की परफेक्ट पोसिटिव में है. (शिव के खड़े लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर के वो अपनी कमर हिलने लगी, उसको अजीब सी अनुभूति हो रही थी, ये एहसास हुस बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपनी कमर हिलाते हुए उस कड़क अंग पर अपनी छूट को दबाने lagi)me भी हलके हलके धक्के लगाने लगा. वैसे भी मेरा लुंड नंगा था, कपड़ो के ऊपर से भी मुझे छूट का पूरा एहसास मिल रहा था. मुझे लग रहा था की ये लड़की अभी नहीं बचेगी.
शिव : दिव्या...
दिव्या : (मेरे होतो पर अपनी ऊँगली रखते हुए) शहहह, कुछ मात कहो शिव, अपने मान से सरे विचार निकल दो, आज की रात मुझे दे दो, जो होगा वो होने दो, ये रात मेरे भाग्य से मुझे मिली है, ऐसा मौका फिर कभी मिलेगा ये सोच कर में आये हुए मौके को खोना नहीं चाहती, जितना तुम समाज रहे हो उतनी भी नादाँ नहीं हु, है ये सब पहलीबार अनुभव कर रही हु पर में जानती हु सब, मेने बहोत कुछ सुना है, और में जानती हु तुम भी मेरा ख्याल रक्खो गए, प्लीज शिव, समां जाओ मुज में, जो होना है वो हो जाने दो, ाजलि रात भूल जाओ सब, भूल जाओ की तुम कोण हो, भूल जाओ की में कौन हु, आजकी रात बस मेरे बन कर मेरे साथ रहो.
में उसकी आँखों में देख रहा था, कितना प्यार उमड़ आया था उसके चेहरे पर, एक और तो मुझे लग रहा था की मुझे उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए, पर में उसे कोई धोखा नहीं दे रहा था, मेने उसे सब कुछ साफ़ साफ़ कह दिया था. मुझे नहीं पता की उसके और मेरे भाग्य में क्या लिखा है, पर उसकी इस बिनती को नकारना मेरे बॉस में नहीं था, में फिर से उसके होठो को अपनी गिरफ्त में लेते हुए, उसे चूमने लगा तो वो पूरी ताकत से मुज से चिपक गयी.
में और दिव्या दोनों वह से खाना जहा हो रहा था वह चले गए. हम दोनों को साथ आते देख रंजन, विणा और कुसुम का मुँह खुला का खुला hi रह गया. उनको ऐसे देखता देख कर दिव्या शर्माने लगी. हम चलते चलते वह आ गए.
रंजन : तू हमारी सहेली है की शिव की.
दिव्या : (एक बार शिव की और देख कर फिर अपनी नज़ारे रंजन की और करती है, और शरमानेवाले लहज़े me)Aisa क्यों बोल रही है?
रंजन : और नहीं तो क्या, हम लोग कब से तुम्हे मन रहे थे, पूछ रहे थे की क्या हुआ, क्या हुआ, तब तो तू मुँह फुला कर बैठी हुई थी, हमारी छोड़, तेरे पापा और मम्मी की बात भी तू नहीं मणि और अब शिव के कहने पर मान गयी.
दिव्या : ऐसा कुछ भी नहीं है, शिव ने मुझे संजय की मेरे एकलौते भाई की शादी है तो मुझे गीले शिकवे भूल कर शादी को एन्जॉय करना चाहिए वर्ण मेरे मम्मी पापा को बुरा लगेगा, मुझे उसकी बात सही लगी तो में मान गयी, और कुछ नहीं.
शिव : अभी ये सब बाते छोडो, और खाना सुरु करो, देखो सब ख़तम होने आया है, ऐसा न हो की हम भूखे hi रह जाये. फिर तुमलोगो को वरघोड़े के लिए भी तैयार होना है न.
फिर हम सब खाना खाने लगे. हलकी फुलकी बाटे चलती रही, में कुसुम को देख रहा था तो वो ज्यादा बोल नहीं रही थी पर उसके चेहरे पर उदासी छायी हुई थी. वो नीचे देख कर खाना खा रही थी, अगर कोई जबरदस्ती उस से कुछ पूछता तो वो सिर्फ है या न में जवाब दे रही थी. खैर हमने खाना ख़तम किआ और वो सब तैयार होने चली गयी. मुझे तो तैयार होना नहीं था तो में वह एक और बेथ गया. शादी में बहोत चहल पहल थी. थोड़ी देर बाद परम और उसके कुछ दोस्त कही जा रहे थे, मुझे देख कर परम मेरे पास आया.
परम : शिव, यहाँ अकेले अकेले क्यों बैठे हो.
शिव : वो सब तैयार होने गए है तो में यहाँ बैठा हु.
परम : ये मेरे दोस्त है, ये लोग पार्टी करने जा रहे है, तुजे जाना है?
शिव : पार्टी करने?
दोस्त 1 : अरे दारू पिने, चल मज़ा करेंगे, फिर नाचना भी तो है.
शिव : नहीं भैया, में वो सब नहीं करता.
दोस्त 1: परम, अभी ये बच्चा है, रहने दे.
परम : इसमें बच्चा वच्चा क्या, वो नहीं पिता तो नहीं पिता, तुम लोग एन्जॉय करो और है कोई हंगामा नहीं करना.
दोस्त 1 : अरे यार, हम पहली बार थोड़े hi पि रहे है, जा तू तैयार हो जा, हम लोग नाचने के लिए तैयार हो जाते hai.(Wo लोग आपसमे ताली बजाते हुए हसने लगे, और वहस इ चले गए)
परम : यहाँ अकेले अकेले बोर हो जायेगा, चल मेरे साथ. (वो मुझे अंदर ले गए, जहा वो तैयार हो रहे थे, उनके कुछ दोस्त थे जो उन्हें तैयार होने में मदद कर रहे थे, मेरे पास वह भी कुछ नहीं था तो में एक चेयर पर बेथ कर उन्हें देख रहा था, वो सर पर सेहरा, और शेरवानी पहन कर तैयार हो गए.)
थोड़ी देर वह बैठने के बाद मुझे भीड़ में गर्मी लग रही थी तो में बहार आ गया. थोड़ी देर में रंजन और विणा आयी, उन्होंने घाघरा चोली पहनी हुई थी और साथ में मेकउप भी किआ हुआ था, सच में वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी. मेने पहली बार इन दोनों को ऐसे देखा था, लिपस्टिक और आँखों पर कलर और न जाने क्या क्या किये हुई थी, पर सचमे वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी.
रंजन : कैसी लग रही हु?
शिव : बहोत खूबसूरत लग रही हो, पहचाना hi नहीं जा रहा है.
रंजन : दिव्या और कुसुम ने कपडे दिए, बोल रही थी की सब तैयार होंगी तो तुम दोनों सादे कपड़ो में कैसी लगोगी.
शिव : नहीं अच्छा किआ, सच में अब ऐसा लग रहा है की तुम किसी शादी में आयी ho.(Hum बाटे कर hi रहे थे की दिव्या और कुसुम भी आ गयी, दिव्या बहोत ज्यादा तैयार हुई थी, और क्यों न हो, उसके भाई की शादी जो थी. सच में लड़कीअ तैयार होने के बाद जिले अलग hi दिखने लगती है, वो दोनों भी बहोत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी)
दिव्या : में कैसी लग रही हु शिव?
शिव : बहोत hi अच्छी लग रही हो (कुसुम भी मेरी और देख रही थी, जैसे पूछ रही हो, और में?, मेने उस सी भी कहा) तुम भी बहोत अच्छी लग रही हो, उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी)
दिव्या : तुम तैयार नहीं हुए?
शिव : हम लड़को को तुम्हारी तरह तैयार नहीं होना पड़ता, में ऐसे hi ठीक हु.
दिव्या : इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति, तुम हो hi ऐसे, पुरे गांव में ऐसा कोई नहीं है जिसके कपडे तुम्हे आएंगे.
शिव : क्यों में ऐसे अच्छा नहीं लगरहा.
दिव्या : तुम खुद इतने अच्छे हो की तुम्हे और कुछ करने की जरुरत hi नहीं. (रंजन उसे घर कर देखने लगी) क्यों मेने कुछ गलत कहा, जो मुझे ऐसे घर रही हो? (सब है पड़े)
थोड़ी देर में परम को घोड़ी के बिठाया गया, और दज जोर जोर से चालू हो गया, सुरु में बच्चो ने नाचना सुरु किआ, फिर दिव्या, रंजन और कुसुम भी कुछ और लड़कीओ के साथ शामिल हो गयी, कुछ लड़के भी नाचने लगे, माहौल उमंग और ऊर्जा से भर गया था, हर किसी के पेअर, संगीत पर मचल रहे थे. लड़के एक तरफ और लड़कीअ दूसरी तरफ नाच रही थी. आहिस्ता आहिस्ता सब गांव की गालिओ में आगे बढ़ने लगे लगे. दिव्या ने मुझे भी नाचने के लिए िःस्सारा किआ, पर मुझे नाचना नहीं आता था, तो मेने न में गर्दन हिलायी. दिव्या अपनी माँ को भी नाचने के लिए ले आयी, फिर अपने पापा को भी ले आयी. वो मुझे भी खिंच कर अंदर ले जाने लगी, में उसे मन कर रहा था पर वो नहीं मणि और मुझे खिंच कर अंदर ले गयी, कुछ औरते और लड़कीअ वह नाच रही थी, उनके बिच मुझे अजीब लग रहा था. लड़के दूसरी और नाच रहे थे तो मुझे लड़कीओ के साथ थोड़ा अजीब लग रहा था. दिव्या के पापा ने भी मुझे नाचने का इस्सर किआ तो में अपने हाथ उठा कर नाचने का प्रयत्न करने लगा. कुछ लड़कीअ मुझे देखते हुए नाच रही थी, जो मुझे दिखा रही थी की देखो में कितना अच्छा नाचती हु, थोड़ी देर में मुझे लगा की जैसे कुछ लड़कीओ में कॉम्पिटिओं सुरु हो गया था मुझे रिझाने का.
वह नछरहे लड़को में से कुछ लड़के जो अभी थोड़े नशे में थे वो आपस में एक दूसरे को देखने लगे, उन्हें लग रहा था की वो बहार का लड़का, उनके गांव की लड़कीओ के मज़े ले रहा है और हम रह गए, दो तीन लड़के भी लड़कीओ के बिछ घुस आये और नाचने लगे. वो ऐसे नाच रहे थे की लड़कीओ को दिक्कत हो रही थी. एक लड़का कुसुम के सामने नाचने लगा, कुसुम झिझक रही थी, एक रंजन के साथ भी नाचने का प्रयास कर रहा था. रंजन ने मेरी और देखा, मेने कुसुम को देखा तो उसके चेहरे पर भी नाराजगी साफ़ देखि जा शक्ति थी. दिव्या के पिता ने भी ये देखा पर वो अपने प्रसंग को बिगड़ना नहीं चाहते थे तो वो वह से निकल गए. मेने भी नाचना बंद किआ और उनके बिच से साइड में हो गया, पर वो लड़के अभी भी अंदर hi नाच रहे थे. लड़कीओ को परेशानी हो रही थी तो कुछ लड़कीओ ने नाचना बंद कर के साइड में हो गयी. दिव्या ने ये देखा और वो उन लड़को को गुस्से से देखने लगी, पर वो लड़की कुछ ज्यादा hi धित थे. दिव्या ने अपने पापा की और देखा तो, उसके पापा समाज गए और वो अंदर आये और उन लड़को को दूसरी और जाने के लिए समजने लगे. पर वो लोग अंकल के हाथ उठा कर उन्हें नाचने के लिए उकसा रहे थे, मतलब था की वो वह से हटने को तैयार नहीं थे. रंग में भांग हो रहा था, दिव्या ने मेरी और देखा, जैसे कह रही हो प्लीज कुछ करो. मेने उसके सामने है में गर्दन हिलायी और में वापस अंदर घुस गया. झगड़ा तो करना नहीं था वर्ण माहौल ख़राब हो शक्ति था. में उन लड़को के सामने नाचने लगा तो वो लोग मेरी और देख कर नाचने लगे, धीरे धीरे में उन्हें दूसरी और धकेलने लगा, वो पीछे हटना नहीं चाहते थे पर मेरे सामने वो कुछ नहीं कर प् रहे थे, मेने तीनो को आहिस्ता आहिस्ता धकेलते हुए लड़कीओ से अलग कर दिया. जब मुझे लगा की वो लड़कीओ से दूर हो गए है तो मेने नाचना बंद कर के साइड में खड़े हो गया. जब उनलड़को को एहसास हुआ की वो लोग लड़कीओ के झुण्ड से बहार हो गए है तो वो एक दूसरे का मुँह देखने लगे, अब लड़कीअ अकेले नछरही थी तो वो लोग वापस नहीं घुस सकते थे, वो मुझे घर कर देखने लगे, में बस मुस्कुरा दिया. अब वो कुछ नहीं कर शक्ति थे तो वो लोग गुस्से में वह से चले गए. फिर से माहौल में रंग आ गया, सब नाचने लगे, लड़कीअ भी जोश में नाचने लगी. एक घंटे बाद दिव्या, रंजन और कुसुम बहार निकली और मेरे पास से गुजरते हुए मुझे उनके साथ आने को कहा. में उनके साथ चला गया. वह पास में hi एक घर में वो लोग घुसने लगी.
दिव्या : ये कुसुम का घर है, हमे प्यास लगी थी तो पानी पिने आये है. थैंक यू.
शिव : ठनक यू क्यों?
दिव्या : तुमने उन लड़को को वह से भगाया इस्सलिये. (कुसुम सब के लिए पानी ले आयी, घर में कोई नहीं था, उसके घरवाले भी वह शादी में थे, उसने मुझे पानी दिया, वो मुझे देख रही थी, मेने उसे देखा, वो बोली कुछ नहीं पर उसका चेहरा बहोत कुछ बोल रहा था, वो अपनी आँखों और चेहरे से मुझे थैंक यू कह रही थी, क्यों की वो भी परेशान हो गयी थी उन लड़को से. मेने मुस्कुराते हुए उसके हाथ से पानी लिया)
फिर और कोई दिक्कत नहीं हुई, रात देर तक सब चला और सबने खूब मज़ा किआ. अब बात आयी रात को सोने की तो दिव्या ने अपनी मम्मी से कहा की यहाँ बहोत लोग है तो वो कुसुम के घर सोने जा रही है. वो हमें ले कर कुसुम के घर आगयी. अंदर कुसुम के मम्मी पापा और उसका छोटा भाई था. दिव्या सब से मिली और उनको कहा की वो सब यहाँ सोयेंगे. उसके घर भी ऊपर दो रूम थे तो, एक में सब लड़कीअ और दूसरेमे में सोऊंगा ऐसा फैसला हुआ. सब थक गए थे तो सब अपने अपने रूम में सोने चले गए. में अकेला था तो सब कपडे निकल कर अंडरवियर में hi सोने के लिए लेट गया. दूसरी और सब लड़कीओ ने भी अपने कपडे बदले और सोने के लिए बिस्तर पर लेट गयी. थोड़ी देर सब ने बाते की पर सब थक गयी थी तो धीरे धीरे सब सोने लगी. दिव्या के मान में कुछ चल रहा था तो वो सबके सोने का इंतजार करने लगी. जब उसको लगा की सब सो गए है तो वो आहिस्ता से बिस्तर से उठी और बहार निकल गयी, उसने सब और देखा तो सन्नाटा छाया हुआ था. वो बिना आवाज किये अपने कदम बढ़ा कर शिव के कमरे के पास पहुंची, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किआ था, दो मिनट तक वो सिर्फ दरवाजे के पास कड़ी रही और अपनी सांसे संभल रही थी. एक बार तो उसे वापस लोट जाने का ख्याल आया पर शिव से मिलने के लालच ने उसे रोक दिया. उसने धड़कते दिल से दरवाजे पर हलकी दस्तक दी. (शिव अभी अभी सोया था, पर उसके तेज कानो में दस्तक सुनाई दी, उसने आंखे खोली और दरवाजे की और देखा, पर कोई हलचल सुनाई नहीं दी तो उसने सोचा की उसका वहम होगा, फिर उसने आंखे बंद कर ली) जब दरवाजा न खुला तो दिव्या को लगा की शिव सो गया होगा और जोर से दस्तक देने से उसका दिल घबरा रहा था. वो मायूस हो गयी, वो वापस लौटने के लिए कदम बढ़हि रही थी की फिर एक बार रुक गयी. उसने मान में hi शिव को पुकारा, और फिर हलके से दस्तक दी, उसने थोड़ी देर राह देखि पर दरवाजा नहीं खुला, वो मुड़ने वाली थी की दरवाजा खुलने की आहत हुई, एक तरफ तो उसे बहोत खुसी हुई और दूसरी तरफ उसका दिल जोरो से धड़कने लगा. दरवाजा खोल कर शिव खड़ा था, वो ऊपर से नंगा था पर निचे उसने पंत पहन रक्खी थी. (दूसरी बार दस्तक से शिव को लगा की ये उसका कोई वहम नहीं है, उसे समाज नहीं आ रहा था की इस वक़्त कोण होगा, तो उसने पंत पहनी और दरवाजा खोला, दिव्या को खड़े देख कर उसे आश्चर्य हुआ)
शिव : (धीमी आवाज me)Tum इस वक़्त, क्या हुआ? (दिव्या ने एक बार शिव को देखा फिर अपनी नज़ारे झुकाये निचे देखने लगी) क्या हुआ, तुम इस वक़्त यहाँ क्या कर रही हो?

दिव्या : (हिचकिचाते हुए) तुमसे मिलने आयी हु.
शिव : पागल हो गयी हो, कोई जाग गया तो?
दिव्या : सब सो गए है.
शिव : देखो, अभी तुम जाओ, हम कल milenge.(Wo मायूस नज़रो से शिव को देखने लगी, उसकी आंखोमे बिनती थी, अब में क्या करता तो मेने कहा) ठीक है, अन्दर आओ. (मेने उसे रास्ता दिया तो वो संकुचाते हुए अंदर आ गयी, वो नज़ारे चुरा रही थी, मुझे उसके िर्रादे ठीक नहीं लग रहे थे, )अब कहो क्या हुआ? (वो कुछ नहीं बोली, वो दो कदम मेरे नजदीक आ गयी) देखो दिव्या, हम कल मिलेंगेना, अभी तुम जाओ, किसीने देख लिया तो तुम्हारी बदनामी होगी.
दिव्या : (रुवासी हो kar)Me कब से तुमसे मिलने के लिए तड़प रही थी और तुम मुझे भगा रहे हो. मेने सुना था की लड़के अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए कही भी चले जाते है, यहाँ में सामने से तुम्हारे पास आयी हु और तुम मुझे भगा रहे हो (मुझे लगा अभी वो रो देगी)
शिव : (मेने उसके गाल पर हाथ रक्खा और kaha)Dekho, ऐसा कुछ नहीं है, में तुम्हे भगा नहीं रहा हु, मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए में तुमसे कह रहा था. (मेरे उसके गाल को छूने पर वो मेरे शाइन से लग रही और मेरी कमर में अपनी बहे दाल दी)
दिव्या : (फिर रोनी आवाज में) तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड नहीं मानते, बस मुझे बहलाने के लिए बोल दिया था. है न?
शिव : ऐसा नहीं है, (मुझे लगा की ये ऐसे नहीं जाएगी, मेने सोचा की इसे थोड़ा प्यार से समझाऊंगा तो समाज जाएगी, मेने भी उसके गले में बहे लपेटी और उसे अपने से चिपका लिया) तुम गलत समाज रही हो दिव्या, अगर तुम्हारे कमरे में कोई जाग गया तो वो क्या सोचेगा.
दिव्या : (मुझे और कास के पकड़ते हुए) मुझे नहीं जान न, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे ऐसे तुमसे मिलने का मौका फिर कभी मिलेगा की नहीं पता नहीं. एक लड़की सामने से तुम्हारे रूम में आयी है और तुम हो की उसे भगा रहे हो, क्या में इतनी बुरी हु?
शिव : किसने कहा की तुम बुरी हो, मुझे तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए कह रहा था.
दिव्या : क्या फ़िक्र है मेरी, क्या तुम मुझे खा जाओगे?
शिव : (अब इससे क्या संजो, मेने मजाक में कहा) हो सकता है की में तुम्हे खा जाऊ.

दिव्या : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, और वो शिव से और लिपट ते हुए) तो खा जाओ न, मेने कहा रोका है. (उसके ऐसा कहने पर और मुझसे वो ऐसे लिपटी थी की मेरे लुंड में हरकत होने लगी, मुझे दर लगने लगा की अभी लुंड खड़ा हो जायेगा और उसको पता चल जायेगा, तो मेने सोचा की उसे अलग करता हु, मेने उसको हलके से मुझसे दूर करने की कोशिस ki)Achchha ठीक है, आओ बिस्तर पर बेथ के बात करते है.
दिव्या : नहीं, मुझे ऐसे hi अच्छा लग रहा है, (वो मुझसे और लिपटने लगी, उसके नरम हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे थे, और उसकी इस हरकत पर मेरे लुंड ने ठुमका मारा, और खड़ा होने laga)(Divya उस कड़क होते अंग को महसूस कर रही थी, उसे शर्म भी आ रही थी पर उसे अच्छा भी लग रहा था, उसे उस अंग का कड़ा होना और उसका उसके शरीर पर चुभना अच्छा लग रहा था, वो अपना गाल शिव की छाती पे रगड़ते हुए उसकी पीठ को सहलाने lagi)(Uski ऐसी हरकत से में गरम होने लगा था, बड़ी मुश्किल से में अपने आप को संभल रहा था)
शिव : (समजते hue)Hum वह बेथ कर बाते करते है न, (प्यार se)chalo छोडो मुझे.
दिव्या : तुम मुझसे इतना दर क्यों रहे हो शिव?
शिव : (अब में उसे क्या संजो) में तुम्हारे लिए दर रहा हु दिव्या, तुम ऐसा करोगी तो कुछ हो जायेगा.
दिव्या : (वो शिव की बात समाज रही थी, वो शर्माने लगी, उसने धीमी आवाज में कहा) तो हो जाने दो न.
शिव : (मेने थोड़ा ताकत से उसे जुड़ा किआ, वो मेरे सामने देखने लगी) तुम पागल तो नहीं हो गयी, तुम क्या कह रही हो पता है?
दिव्या : है पता है, क्यों, गर्लफ्रेंड और बॉय फ्रेंड यही तो करते है न?
शिव : ये सब इतना आसान नहीं होता, तुम समाज नहीं रही हो.
दिव्या : (अपनी नज़ारे झुका कर) मुझे सब पता है, में जानती हु की पहली बार दर्द भी होगा.
शिव : तुम सच में पागल हो, देखो अभी ये सब ठीक नहीं है, हम दोनों आज hi मिले है और तुम...
दिव्या : वो सब मुझे नहीं पता शिव, मुझे तुम बहोत अच्छे लगते हो, और तुम्ही बताओ ऐसे क्या हम कभी मिल शकेंगे, आज मौका मिला है तो फिर कर लो न.
शिव : (अगर में दिव्या को जनता नहीं होता तो में सच में ये समाज लेता की वो एक चालू लड़की है, पर में उसे जनता था, मुझे पता था की वो अभी कुवारी है, मुझे उसके भोलेपन पे सचमे प्यार आ रहा था) पागल ladki(Mene उसको गले लगा लिया, वो भी मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी) तुम्हे क्या जल्दी है ये सब करने की?
दिव्या : मेने बहोत लड़कीओ को देखा है, वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कुछ करती है, मुझे भी बहोत मान होता था, पर कभी कोई अच्छा hi नहीं लगा, तुम पसंद आये तो में अपने आप को रोक नहीं पायी. सच कहती हु शिव, तुम मुझे बहोत पसंद हो, और लड़के लड़कीओ में ऐसा hi होता है, अगर किसी को कोई पसंद आ जाता है तो वो उसे प्रोपोज़ कर देता है और फिर अगर दोनों की है हुई तो फिर वो बॉयफ्रेंड – गर्लफ्रेंड बन जाते है. पर लगता है की में तुम्हे इतनी पसंद नहीं आयी, है न?
शिव : (मुस्कुराते हुए) है, मुझे तुम इतनी पसंद नहीं थी पर अब तुम्हारी हरकते मुझे धीरे धीरे पसंद आने लगी है.
दिव्या : (मुझे मुस्कुराते हुए देखते हुए) सच?
शिव : (मुस्कुराते हुए) है, सच.
दिव्या : तो फिर मुझे भी वैसा प्यार करो न शिव.
शिव : अगर मेने तुमसे वैसा प्यार किआ न तो तुम कल शादी में नहीं जा पाओगी.
दिव्या : वो क्यों?
शिव : वो तुम अभी नहीं संजोगी.
दिव्या : क्यों नहीं संजुगी, तुम समजाओगे तो में समज जाउंगी, में क्या बेवकूफ हु?
शिव : जिस दिन में तुमसे वैसा वाला प्यार करूँगा न तब तुम्हे पता चल जायेगा.
दिव्या : तो करो न शिव.
शिव : पागल, तुमने उस दिन टंकी में मेरे वह पेअर लगाया था तब भी तुम्हे नहीं पता की क्या हो शक्ति है?
दिव्या : (शर्मा गयी) है, थोड़ा थोड़ा तो पता है, पर मेने सुना है, सब करते है, और मेने नहीं देखा की किसी को इतनी दिक्कत हुई होगी.
शिव : तुमने किसी का देखा है?
दिव्या : क्या?
शिव : वही जो लड़को के पास होता है?
दिव्या : नहीं.
शिव : इसीलिए तो, अगर तुम देखती तो तुम्हे पता होता की जो मेरे पास है वो बहोत बड़ा है.
दिव्या : (मेरी आंखोमे देख रही थी, उसके चेहरे पर कई भाव आ रहे थे और कई जा रहे थे) क्या तुम मुझे वो दिखाओगे?
शिव : पागल हो क्या?
दिव्या : (थोड़ा जिद करते hue)Please शिव, तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो न?
शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती?
दिव्या : आती है न, पर अगर में अपने बॉयफ्रेंड के साथ hi शर्माउंगी तो मुझे सब कैसे पता चलेगा?
शिव : (मुझे भी उसकी बातो से बड़ा मज़ा आ रहा था, )देख कर क्या करोगी?
दिव्या : (खुस होते हुए) कुछ नहीं, बस मुझे देखना है.
शिव : ठीक है, जाओ दरवाजा बंद कर दो. (वो खुस हो कर गयी और दरवाजा बंद कर के वापस आ गयी, और मुस्कुराते हुए मेरे सामने देखने लगी, उसके चेहरे से लग रहा था की जैसे उसे कोई मनपसंद चीज मिलने वाली हो, उसके ऐसे भोले पैन पर मुझे भी मज़ा आ रहा था, मेने अपना पंत खोला, वो उत्सुकता से मेरे पंत को hi देख रही थी, जब मेने अपना अंडरवियर नहीं उठता तो वो मेरे सामने देखने लगी, जैसे कह रही हो उतरो न, मेने उसे बीएड पर बिठा दिया, सच में में कैसा अजीब काम करने जा रहा था, मेने अपनी अंडरवियर आहिस्ता आहिस्ता नीचे उतरी, सच कहु तो अभी मुज पर कोई हवस जारी नहीं थी तो मेरा लुंड वापस नार्मल स्थिति में आ गया था, जब मेने अंडर वियर सरकाया तो मेरा लुंड निचे झुका हुआ था)

(दिव्या बड़ी अजीब नजरो से शिव के लुंड को देख रही थी, उसकी धड़कने तेज हो चुकी थी, दो पैरो के बिच उसे छूट देखने की आदत थी, वह आज वो एक लम्बा अंग देख रही थी, उसे अजीब लग रहा था, उसने छोटे बच्चो की नुन्नी देखि थी पर उनके सामने ये बहोत बड़ा था, उसके ऊपर के भाग पर बाल भी थे, उसने देखा की निचे दो बड़े अंडो को किसी थैली में भर के लटकाया हो वैसे लटक रहे थे, वो कभी उस लुंड को तो कभी शिव को देख रही थी, उसके चेहरे से हसी गायब थी, वो अपना शिर घुमा घुमा कर देख रही थी, उसका दिल तो इतनी तेज गति से चल रहा था की उसे साँस लेने भी दिक्कत हो रही थी) अगर देख लिया हो तो वापस अंदर कर दू?
दिव्या : (दिव्या ने शिव की और देखा, हिचकिचाते हुए kaha)Kya में isse...(Me उसे देख रहा था की वो क्या कहना चाहती है) क्या में इससे छू सकती हु?
शिव : दिव्यआ.
दिव्या : (मुझे बिनती करते hue)Please प्लीज प्लीज.
शिव : (उसको ऐसे गिड़गिड़ाते देख कर में मुस्कुराया) ठीक है.
वो खुस हो गयी, वो थोड़ी आगे खिसकी और डरते डरते हाथ आगे बढ़ाया, उसका हाथ लुंड के नजदीक पहुंच गया था, वो हिचकिचा रही थी उसने अपनी मुठी एक बार बंद की, उसने अपनी उंगलिओ को अंगूठे से माला, उसने मेरे सामने देखा, में उसे hi देख रहा था, उसने पहले एक ऊँगली से थोड़ा छुआ, फिर चारो ऊँगली से उसे सहलाया. अब लुंड तो लुंड है, लड़की की छुअन से वो बड़ा होने लगा, उसने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा, में मुस्कुराया.
शिव : क्या हुआ?
दिव्या : ये बड़ा हो रहा है.
शिव : क्यों की उसे तुम्हारा छूना पसंद आ रहा है.
दिव्या : क्या सच में (वो खुस हो रही थी की उसके छूने से ये सब हो रहा है, वो फिर उसे उंगलिओ से सहलाने लगी)
शिव : (मुझे भी अच्छा लगने लगा था, तो मेने उसे kaha)use पकड़ कर हिलाओगी तो और बड़ा hoga(Wo ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उसे विस्वास hi न हो, पर मेरे चेहरे से उसे लगा की में मजाक नहीं कर रहा हु, तो उसने कपट हाथो से अपना अंगूठा निचे ले जाते हुए लुंड को पकड़ा, (दिव्या का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था, की पशीने की बुँदे उसके चेहरे पर उभर आयी थी, ये उसके जीवन का पहला अनुभव था, उसने बहोत कुछ सुना था पर आज वो महसूस कर रही थी, वो नरम चमड़े का गरम डंडा उसके अंदर हलचल मचाये हुए था, उसे अपनी छूट के अंदर अजीब सी अनुभूति हो रही थी, वो बस लुंड को थामे रुकी रही, उसे समाज नहीं आ रहा था की कैसे करे तो वो शिव के सामने देखने लगी, में उसके चेहरे से समाज रहा था, मेने उसके हाथ पर अपना हाथ रक्खा और उसे आगे पीछे कैसे हिलना है वो एक दो बार हिलके संजय, फिर मेने उसका हाथ छोड़ दिया, वो समाज गयी थी तो उसने अपनी स्थिति ठीक की और अच्छी तरह से लुंड के सामने बेथ गयी और आहिस्ता आहिस्ता लुंड को देखते हुए अपना हाथ आगे पीछे करने लगी, इतनी प्यारी और मासूम लड़की के नरम नरम हाथो के स्पर्श से लुंड अपनी औकात में आने लगा, दिव्या के थोड़ी देर हिलने से लुंड पूरा खड़ा हो गया और सामने की और तन गया, में भी उत्तेजित हो गया था तो लुंड ने एक दो ठुमके मर दिए. लुंड के ऐसे अपने आप हिलने से वो दर गयी और उसने लुंड छोड़ दिया और अपने मुँह को अपने हाथो से डाकलिया.
वो खुले मुँह से आंखे फाडे उछलते लुंड को देख रही थी, उसके गले से थूक भी नहीं उतर रहा था, उसने जब थूक अपने गले से निचे उतरा तो में हसने लगा)
शिव : अब सम्ज्मे आया?
दिव्या : ये तो बहोत बड़ा है. ये ऐसे उछाल क्यों रहा है.
शिव : (में उसे क्या समजता की कच्ची गरम जवानी की खुसबू से ये झटके मार रहा है, वैसे भी में गरम हो चूका था पर में अभी उसके साथ कुछ करना नहीं चाहता था, जैसे तैसे मेने अपने आप को संभाला) तो अब इससे वापस अंदर कर दू?
दिव्या : (वो गुस्से से मुझे देखने lagi)Tumhe किस बात की जल्दी है?
शिव : क्यों, अब देख लिया न?
दिव्या : (शरमाते हुए) मुझे अच्छा लग रहा है, इससे छूने पर मुझे कुछ कुछ हो रहा है शिव. (वो अपनी झंघे आपसमे सत्ता रही थी, मेने छेड़ते हुए पूछा) कहा हो रहा है? (वो शर्माने लगी) मुझे तो नंगा कर दिया है और अब खुद शर्मा रही हो?
दिव्या : (उसने शरमाते हुए मुझे देखा, फिर अपनी छूट की और इस्सर करते hue)Yaha.(Waise तो मुझे पता hi था तो में हसने लगा, वो और शर्मा गयी)
शिव : अब बहोत हो गया दिव्या, में इससे वापस अंदर कर रहा हु, और अब तुम भी जाओ अपने कमरे में.
दिव्या : (अपने चेहरे पर जूठा गुस्सा लेट हुए वो उठी और मुझे धक्का दे कर मुझे बीएड पर लेता दिया और मेरे ऊपर चढ़ gayi)kab से ये क्या लगा रक्खा है, जाओ जाओ जाओ, में नहीं जाने वाली.
शिव : (पलट ते हुए मेने उसे मेरे नीचे लेता दिया) कब से समजा रहा हु की तुम्हारी हालत ख़राब हो जाएगी, तुम्हे समाज नहीं आता.
दिव्या : (मेरे गले में बहे दाल कर मुझे अपनी और खिंच कर मेरे होठो को चुम कर) है नहीं आता, क्या कर लोगे.
शिव : अच्छा तो तुम्हे देखना है की में क्या कर लूंगा

(में उसके होठो को चूसने लगा और एक हाथ उसके स्तन पर रख दिया और उसे दबाने लगा, उसके होठो को जोर जोर से चूसा और उसके स्तन को भी थोड़ी सख्ती से दबाया, जब मेने उसे छोड़ा थो वो जोर जोर से हांफ रही थी) अब पता चला, में क्या कर लूंगा. (वो मुझे देख रही थी, उसकी आंखे नशीली हो चुकी थी, इस बार उसने मुझे खिंचा और मेरे होठो पे टूट पड़ी, वो भी जोर जोर से मेरे होठो को चूस रही थी, पांच मिनट तक मेरे होठो को जोर जोर से चूसने के बाद उसने मुझे छोड़ा और मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी) तो तुम ऐसे नहीं मानोगी.
दिव्या : (मुस्कुराते हुए न में गर्दन हिलने लगी) है नहीं मानूंगी, मुझे प्यार करो वर्ण में यहाँ से नहीं जाउंगी.
में भी काफी गरम हो गया था, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुझे ललचा रही थी, में फिर से झुकता चला गया. इस बार बड़े प्यार से उसके होठो से खेलने लगा, और हलके हलके उसके स्तन दबाने लगा.
दिव्या : उम्म्म्मह, उम्म्म्मह उम्मम्मम्ह (वो भी मेरे गले में बहे डेल मेरे बालो से खेलने लगी, में किश करते हुए एडजस्ट होने लगा, उसने भी अपने दोनों पेअर फैला दिए और मुझे अपने पैरो के बिच कर दिया, हलाकि उसने ढीला लेहंगा पहना हुआ था, पर ऐसा लग रहा था की हम दोनों चुदाई की परफेक्ट पोसिटिव में है. (शिव के खड़े लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर के वो अपनी कमर हिलने लगी, उसको अजीब सी अनुभूति हो रही थी, ये एहसास हुस बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपनी कमर हिलाते हुए उस कड़क अंग पर अपनी छूट को दबाने lagi)me भी हलके हलके धक्के लगाने लगा. वैसे भी मेरा लुंड नंगा था, कपड़ो के ऊपर से भी मुझे छूट का पूरा एहसास मिल रहा था. मुझे लग रहा था की ये लड़की अभी नहीं बचेगी.
शिव : दिव्या...
दिव्या : (मेरे होतो पर अपनी ऊँगली रखते हुए) शहहह, कुछ मात कहो शिव, अपने मान से सरे विचार निकल दो, आज की रात मुझे दे दो, जो होगा वो होने दो, ये रात मेरे भाग्य से मुझे मिली है, ऐसा मौका फिर कभी मिलेगा ये सोच कर में आये हुए मौके को खोना नहीं चाहती, जितना तुम समाज रहे हो उतनी भी नादाँ नहीं हु, है ये सब पहलीबार अनुभव कर रही हु पर में जानती हु सब, मेने बहोत कुछ सुना है, और में जानती हु तुम भी मेरा ख्याल रक्खो गए, प्लीज शिव, समां जाओ मुज में, जो होना है वो हो जाने दो, ाजलि रात भूल जाओ सब, भूल जाओ की तुम कोण हो, भूल जाओ की में कौन हु, आजकी रात बस मेरे बन कर मेरे साथ रहो.
में उसकी आँखों में देख रहा था, कितना प्यार उमड़ आया था उसके चेहरे पर, एक और तो मुझे लग रहा था की मुझे उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए, पर में उसे कोई धोखा नहीं दे रहा था, मेने उसे सब कुछ साफ़ साफ़ कह दिया था. मुझे नहीं पता की उसके और मेरे भाग्य में क्या लिखा है, पर उसकी इस बिनती को नकारना मेरे बॉस में नहीं था, में फिर से उसके होठो को अपनी गिरफ्त में लेते हुए, उसे चूमने लगा तो वो पूरी ताकत से मुज से चिपक गयी.




















