Adultery Kundali Bhagya - Page 13 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 77

में और दिव्या दोनों वह से खाना जहा हो रहा था वह चले गए. हम दोनों को साथ आते देख रंजन, विणा और कुसुम का मुँह खुला का खुला hi रह गया. उनको ऐसे देखता देख कर दिव्या शर्माने लगी. हम चलते चलते वह आ गए.

रंजन : तू हमारी सहेली है की शिव की.

दिव्या : (एक बार शिव की और देख कर फिर अपनी नज़ारे रंजन की और करती है, और शरमानेवाले लहज़े me)Aisa क्यों बोल रही है?

रंजन : और नहीं तो क्या, हम लोग कब से तुम्हे मन रहे थे, पूछ रहे थे की क्या हुआ, क्या हुआ, तब तो तू मुँह फुला कर बैठी हुई थी, हमारी छोड़, तेरे पापा और मम्मी की बात भी तू नहीं मणि और अब शिव के कहने पर मान गयी.

दिव्या : ऐसा कुछ भी नहीं है, शिव ने मुझे संजय की मेरे एकलौते भाई की शादी है तो मुझे गीले शिकवे भूल कर शादी को एन्जॉय करना चाहिए वर्ण मेरे मम्मी पापा को बुरा लगेगा, मुझे उसकी बात सही लगी तो में मान गयी, और कुछ नहीं.

शिव : अभी ये सब बाते छोडो, और खाना सुरु करो, देखो सब ख़तम होने आया है, ऐसा न हो की हम भूखे hi रह जाये. फिर तुमलोगो को वरघोड़े के लिए भी तैयार होना है न.

फिर हम सब खाना खाने लगे. हलकी फुलकी बाटे चलती रही, में कुसुम को देख रहा था तो वो ज्यादा बोल नहीं रही थी पर उसके चेहरे पर उदासी छायी हुई थी. वो नीचे देख कर खाना खा रही थी, अगर कोई जबरदस्ती उस से कुछ पूछता तो वो सिर्फ है या न में जवाब दे रही थी. खैर हमने खाना ख़तम किआ और वो सब तैयार होने चली गयी. मुझे तो तैयार होना नहीं था तो में वह एक और बेथ गया. शादी में बहोत चहल पहल थी. थोड़ी देर बाद परम और उसके कुछ दोस्त कही जा रहे थे, मुझे देख कर परम मेरे पास आया.

परम : शिव, यहाँ अकेले अकेले क्यों बैठे हो.

शिव : वो सब तैयार होने गए है तो में यहाँ बैठा हु.

परम : ये मेरे दोस्त है, ये लोग पार्टी करने जा रहे है, तुजे जाना है?

शिव : पार्टी करने?

दोस्त 1 : अरे दारू पिने, चल मज़ा करेंगे, फिर नाचना भी तो है.

शिव : नहीं भैया, में वो सब नहीं करता.

दोस्त 1: परम, अभी ये बच्चा है, रहने दे.

परम : इसमें बच्चा वच्चा क्या, वो नहीं पिता तो नहीं पिता, तुम लोग एन्जॉय करो और है कोई हंगामा नहीं करना.

दोस्त 1 : अरे यार, हम पहली बार थोड़े hi पि रहे है, जा तू तैयार हो जा, हम लोग नाचने के लिए तैयार हो जाते hai.(Wo लोग आपसमे ताली बजाते हुए हसने लगे, और वहस इ चले गए)

परम : यहाँ अकेले अकेले बोर हो जायेगा, चल मेरे साथ. (वो मुझे अंदर ले गए, जहा वो तैयार हो रहे थे, उनके कुछ दोस्त थे जो उन्हें तैयार होने में मदद कर रहे थे, मेरे पास वह भी कुछ नहीं था तो में एक चेयर पर बेथ कर उन्हें देख रहा था, वो सर पर सेहरा, और शेरवानी पहन कर तैयार हो गए.)

थोड़ी देर वह बैठने के बाद मुझे भीड़ में गर्मी लग रही थी तो में बहार आ गया. थोड़ी देर में रंजन और विणा आयी, उन्होंने घाघरा चोली पहनी हुई थी और साथ में मेकउप भी किआ हुआ था, सच में वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी. मेने पहली बार इन दोनों को ऐसे देखा था, लिपस्टिक और आँखों पर कलर और न जाने क्या क्या किये हुई थी, पर सचमे वो दोनों बहोत खूबसूरत लग रही थी.

रंजन : कैसी लग रही हु?

शिव : बहोत खूबसूरत लग रही हो, पहचाना hi नहीं जा रहा है.

रंजन : दिव्या और कुसुम ने कपडे दिए, बोल रही थी की सब तैयार होंगी तो तुम दोनों सादे कपड़ो में कैसी लगोगी.

शिव : नहीं अच्छा किआ, सच में अब ऐसा लग रहा है की तुम किसी शादी में आयी ho.(Hum बाटे कर hi रहे थे की दिव्या और कुसुम भी आ गयी, दिव्या बहोत ज्यादा तैयार हुई थी, और क्यों न हो, उसके भाई की शादी जो थी. सच में लड़कीअ तैयार होने के बाद जिले अलग hi दिखने लगती है, वो दोनों भी बहोत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी)

दिव्या : में कैसी लग रही हु शिव?

शिव : बहोत hi अच्छी लग रही हो (कुसुम भी मेरी और देख रही थी, जैसे पूछ रही हो, और में?, मेने उस सी भी कहा) तुम भी बहोत अच्छी लग रही हो, उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी)

दिव्या : तुम तैयार नहीं हुए?

शिव : हम लड़को को तुम्हारी तरह तैयार नहीं होना पड़ता, में ऐसे hi ठीक हु.

दिव्या : इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति, तुम हो hi ऐसे, पुरे गांव में ऐसा कोई नहीं है जिसके कपडे तुम्हे आएंगे.

शिव : क्यों में ऐसे अच्छा नहीं लगरहा.

दिव्या : तुम खुद इतने अच्छे हो की तुम्हे और कुछ करने की जरुरत hi नहीं. (रंजन उसे घर कर देखने लगी) क्यों मेने कुछ गलत कहा, जो मुझे ऐसे घर रही हो? (सब है पड़े)

थोड़ी देर में परम को घोड़ी के बिठाया गया, और दज जोर जोर से चालू हो गया, सुरु में बच्चो ने नाचना सुरु किआ, फिर दिव्या, रंजन और कुसुम भी कुछ और लड़कीओ के साथ शामिल हो गयी, कुछ लड़के भी नाचने लगे, माहौल उमंग और ऊर्जा से भर गया था, हर किसी के पेअर, संगीत पर मचल रहे थे. लड़के एक तरफ और लड़कीअ दूसरी तरफ नाच रही थी. आहिस्ता आहिस्ता सब गांव की गालिओ में आगे बढ़ने लगे लगे. दिव्या ने मुझे भी नाचने के लिए िःस्सारा किआ, पर मुझे नाचना नहीं आता था, तो मेने न में गर्दन हिलायी. दिव्या अपनी माँ को भी नाचने के लिए ले आयी, फिर अपने पापा को भी ले आयी. वो मुझे भी खिंच कर अंदर ले जाने लगी, में उसे मन कर रहा था पर वो नहीं मणि और मुझे खिंच कर अंदर ले गयी, कुछ औरते और लड़कीअ वह नाच रही थी, उनके बिच मुझे अजीब लग रहा था. लड़के दूसरी और नाच रहे थे तो मुझे लड़कीओ के साथ थोड़ा अजीब लग रहा था. दिव्या के पापा ने भी मुझे नाचने का इस्सर किआ तो में अपने हाथ उठा कर नाचने का प्रयत्न करने लगा. कुछ लड़कीअ मुझे देखते हुए नाच रही थी, जो मुझे दिखा रही थी की देखो में कितना अच्छा नाचती हु, थोड़ी देर में मुझे लगा की जैसे कुछ लड़कीओ में कॉम्पिटिओं सुरु हो गया था मुझे रिझाने का.

वह नछरहे लड़को में से कुछ लड़के जो अभी थोड़े नशे में थे वो आपस में एक दूसरे को देखने लगे, उन्हें लग रहा था की वो बहार का लड़का, उनके गांव की लड़कीओ के मज़े ले रहा है और हम रह गए, दो तीन लड़के भी लड़कीओ के बिछ घुस आये और नाचने लगे. वो ऐसे नाच रहे थे की लड़कीओ को दिक्कत हो रही थी. एक लड़का कुसुम के सामने नाचने लगा, कुसुम झिझक रही थी, एक रंजन के साथ भी नाचने का प्रयास कर रहा था. रंजन ने मेरी और देखा, मेने कुसुम को देखा तो उसके चेहरे पर भी नाराजगी साफ़ देखि जा शक्ति थी. दिव्या के पिता ने भी ये देखा पर वो अपने प्रसंग को बिगड़ना नहीं चाहते थे तो वो वह से निकल गए. मेने भी नाचना बंद किआ और उनके बिच से साइड में हो गया, पर वो लड़के अभी भी अंदर hi नाच रहे थे. लड़कीओ को परेशानी हो रही थी तो कुछ लड़कीओ ने नाचना बंद कर के साइड में हो गयी. दिव्या ने ये देखा और वो उन लड़को को गुस्से से देखने लगी, पर वो लड़की कुछ ज्यादा hi धित थे. दिव्या ने अपने पापा की और देखा तो, उसके पापा समाज गए और वो अंदर आये और उन लड़को को दूसरी और जाने के लिए समजने लगे. पर वो लोग अंकल के हाथ उठा कर उन्हें नाचने के लिए उकसा रहे थे, मतलब था की वो वह से हटने को तैयार नहीं थे. रंग में भांग हो रहा था, दिव्या ने मेरी और देखा, जैसे कह रही हो प्लीज कुछ करो. मेने उसके सामने है में गर्दन हिलायी और में वापस अंदर घुस गया. झगड़ा तो करना नहीं था वर्ण माहौल ख़राब हो शक्ति था. में उन लड़को के सामने नाचने लगा तो वो लोग मेरी और देख कर नाचने लगे, धीरे धीरे में उन्हें दूसरी और धकेलने लगा, वो पीछे हटना नहीं चाहते थे पर मेरे सामने वो कुछ नहीं कर प् रहे थे, मेने तीनो को आहिस्ता आहिस्ता धकेलते हुए लड़कीओ से अलग कर दिया. जब मुझे लगा की वो लड़कीओ से दूर हो गए है तो मेने नाचना बंद कर के साइड में खड़े हो गया. जब उनलड़को को एहसास हुआ की वो लोग लड़कीओ के झुण्ड से बहार हो गए है तो वो एक दूसरे का मुँह देखने लगे, अब लड़कीअ अकेले नछरही थी तो वो लोग वापस नहीं घुस सकते थे, वो मुझे घर कर देखने लगे, में बस मुस्कुरा दिया. अब वो कुछ नहीं कर शक्ति थे तो वो लोग गुस्से में वह से चले गए. फिर से माहौल में रंग आ गया, सब नाचने लगे, लड़कीअ भी जोश में नाचने लगी. एक घंटे बाद दिव्या, रंजन और कुसुम बहार निकली और मेरे पास से गुजरते हुए मुझे उनके साथ आने को कहा. में उनके साथ चला गया. वह पास में hi एक घर में वो लोग घुसने लगी.

दिव्या : ये कुसुम का घर है, हमे प्यास लगी थी तो पानी पिने आये है. थैंक यू.

शिव : ठनक यू क्यों?

दिव्या : तुमने उन लड़को को वह से भगाया इस्सलिये. (कुसुम सब के लिए पानी ले आयी, घर में कोई नहीं था, उसके घरवाले भी वह शादी में थे, उसने मुझे पानी दिया, वो मुझे देख रही थी, मेने उसे देखा, वो बोली कुछ नहीं पर उसका चेहरा बहोत कुछ बोल रहा था, वो अपनी आँखों और चेहरे से मुझे थैंक यू कह रही थी, क्यों की वो भी परेशान हो गयी थी उन लड़को से. मेने मुस्कुराते हुए उसके हाथ से पानी लिया)

फिर और कोई दिक्कत नहीं हुई, रात देर तक सब चला और सबने खूब मज़ा किआ. अब बात आयी रात को सोने की तो दिव्या ने अपनी मम्मी से कहा की यहाँ बहोत लोग है तो वो कुसुम के घर सोने जा रही है. वो हमें ले कर कुसुम के घर आगयी. अंदर कुसुम के मम्मी पापा और उसका छोटा भाई था. दिव्या सब से मिली और उनको कहा की वो सब यहाँ सोयेंगे. उसके घर भी ऊपर दो रूम थे तो, एक में सब लड़कीअ और दूसरेमे में सोऊंगा ऐसा फैसला हुआ. सब थक गए थे तो सब अपने अपने रूम में सोने चले गए. में अकेला था तो सब कपडे निकल कर अंडरवियर में hi सोने के लिए लेट गया. दूसरी और सब लड़कीओ ने भी अपने कपडे बदले और सोने के लिए बिस्तर पर लेट गयी. थोड़ी देर सब ने बाते की पर सब थक गयी थी तो धीरे धीरे सब सोने लगी. दिव्या के मान में कुछ चल रहा था तो वो सबके सोने का इंतजार करने लगी. जब उसको लगा की सब सो गए है तो वो आहिस्ता से बिस्तर से उठी और बहार निकल गयी, उसने सब और देखा तो सन्नाटा छाया हुआ था. वो बिना आवाज किये अपने कदम बढ़ा कर शिव के कमरे के पास पहुंची, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किआ था, दो मिनट तक वो सिर्फ दरवाजे के पास कड़ी रही और अपनी सांसे संभल रही थी. एक बार तो उसे वापस लोट जाने का ख्याल आया पर शिव से मिलने के लालच ने उसे रोक दिया. उसने धड़कते दिल से दरवाजे पर हलकी दस्तक दी. (शिव अभी अभी सोया था, पर उसके तेज कानो में दस्तक सुनाई दी, उसने आंखे खोली और दरवाजे की और देखा, पर कोई हलचल सुनाई नहीं दी तो उसने सोचा की उसका वहम होगा, फिर उसने आंखे बंद कर ली) जब दरवाजा न खुला तो दिव्या को लगा की शिव सो गया होगा और जोर से दस्तक देने से उसका दिल घबरा रहा था. वो मायूस हो गयी, वो वापस लौटने के लिए कदम बढ़हि रही थी की फिर एक बार रुक गयी. उसने मान में hi शिव को पुकारा, और फिर हलके से दस्तक दी, उसने थोड़ी देर राह देखि पर दरवाजा नहीं खुला, वो मुड़ने वाली थी की दरवाजा खुलने की आहत हुई, एक तरफ तो उसे बहोत खुसी हुई और दूसरी तरफ उसका दिल जोरो से धड़कने लगा. दरवाजा खोल कर शिव खड़ा था, वो ऊपर से नंगा था पर निचे उसने पंत पहन रक्खी थी. (दूसरी बार दस्तक से शिव को लगा की ये उसका कोई वहम नहीं है, उसे समाज नहीं आ रहा था की इस वक़्त कोण होगा, तो उसने पंत पहनी और दरवाजा खोला, दिव्या को खड़े देख कर उसे आश्चर्य हुआ)

शिव : (धीमी आवाज me)Tum इस वक़्त, क्या हुआ? (दिव्या ने एक बार शिव को देखा फिर अपनी नज़ारे झुकाये निचे देखने लगी) क्या हुआ, तुम इस वक़्त यहाँ क्या कर रही हो?





दिव्या : (हिचकिचाते हुए) तुमसे मिलने आयी हु.

शिव : पागल हो गयी हो, कोई जाग गया तो?

दिव्या : सब सो गए है.

शिव : देखो, अभी तुम जाओ, हम कल milenge.(Wo मायूस नज़रो से शिव को देखने लगी, उसकी आंखोमे बिनती थी, अब में क्या करता तो मेने कहा) ठीक है, अन्दर आओ. (मेने उसे रास्ता दिया तो वो संकुचाते हुए अंदर आ गयी, वो नज़ारे चुरा रही थी, मुझे उसके िर्रादे ठीक नहीं लग रहे थे, )अब कहो क्या हुआ? (वो कुछ नहीं बोली, वो दो कदम मेरे नजदीक आ गयी) देखो दिव्या, हम कल मिलेंगेना, अभी तुम जाओ, किसीने देख लिया तो तुम्हारी बदनामी होगी.

दिव्या : (रुवासी हो kar)Me कब से तुमसे मिलने के लिए तड़प रही थी और तुम मुझे भगा रहे हो. मेने सुना था की लड़के अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए कही भी चले जाते है, यहाँ में सामने से तुम्हारे पास आयी हु और तुम मुझे भगा रहे हो (मुझे लगा अभी वो रो देगी)

शिव : (मेने उसके गाल पर हाथ रक्खा और kaha)Dekho, ऐसा कुछ नहीं है, में तुम्हे भगा नहीं रहा हु, मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए में तुमसे कह रहा था. (मेरे उसके गाल को छूने पर वो मेरे शाइन से लग रही और मेरी कमर में अपनी बहे दाल दी)

दिव्या : (फिर रोनी आवाज में) तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड नहीं मानते, बस मुझे बहलाने के लिए बोल दिया था. है न?

शिव : ऐसा नहीं है, (मुझे लगा की ये ऐसे नहीं जाएगी, मेने सोचा की इसे थोड़ा प्यार से समझाऊंगा तो समाज जाएगी, मेने भी उसके गले में बहे लपेटी और उसे अपने से चिपका लिया) तुम गलत समाज रही हो दिव्या, अगर तुम्हारे कमरे में कोई जाग गया तो वो क्या सोचेगा.

दिव्या : (मुझे और कास के पकड़ते हुए) मुझे नहीं जान न, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे ऐसे तुमसे मिलने का मौका फिर कभी मिलेगा की नहीं पता नहीं. एक लड़की सामने से तुम्हारे रूम में आयी है और तुम हो की उसे भगा रहे हो, क्या में इतनी बुरी हु?

शिव : किसने कहा की तुम बुरी हो, मुझे तुम्हारी फ़िक्र है इस लिए कह रहा था.

दिव्या : क्या फ़िक्र है मेरी, क्या तुम मुझे खा जाओगे?

शिव : (अब इससे क्या संजो, मेने मजाक में कहा) हो सकता है की में तुम्हे खा जाऊ.





दिव्या : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, और वो शिव से और लिपट ते हुए) तो खा जाओ न, मेने कहा रोका है. (उसके ऐसा कहने पर और मुझसे वो ऐसे लिपटी थी की मेरे लुंड में हरकत होने लगी, मुझे दर लगने लगा की अभी लुंड खड़ा हो जायेगा और उसको पता चल जायेगा, तो मेने सोचा की उसे अलग करता हु, मेने उसको हलके से मुझसे दूर करने की कोशिस ki)Achchha ठीक है, आओ बिस्तर पर बेथ के बात करते है.

दिव्या : नहीं, मुझे ऐसे hi अच्छा लग रहा है, (वो मुझसे और लिपटने लगी, उसके नरम हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे थे, और उसकी इस हरकत पर मेरे लुंड ने ठुमका मारा, और खड़ा होने laga)(Divya उस कड़क होते अंग को महसूस कर रही थी, उसे शर्म भी आ रही थी पर उसे अच्छा भी लग रहा था, उसे उस अंग का कड़ा होना और उसका उसके शरीर पर चुभना अच्छा लग रहा था, वो अपना गाल शिव की छाती पे रगड़ते हुए उसकी पीठ को सहलाने lagi)(Uski ऐसी हरकत से में गरम होने लगा था, बड़ी मुश्किल से में अपने आप को संभल रहा था)

शिव : (समजते hue)Hum वह बेथ कर बाते करते है न, (प्यार se)chalo छोडो मुझे.

दिव्या : तुम मुझसे इतना दर क्यों रहे हो शिव?

शिव : (अब में उसे क्या संजो) में तुम्हारे लिए दर रहा हु दिव्या, तुम ऐसा करोगी तो कुछ हो जायेगा.

दिव्या : (वो शिव की बात समाज रही थी, वो शर्माने लगी, उसने धीमी आवाज में कहा) तो हो जाने दो न.

शिव : (मेने थोड़ा ताकत से उसे जुड़ा किआ, वो मेरे सामने देखने लगी) तुम पागल तो नहीं हो गयी, तुम क्या कह रही हो पता है?

दिव्या : है पता है, क्यों, गर्लफ्रेंड और बॉय फ्रेंड यही तो करते है न?

शिव : ये सब इतना आसान नहीं होता, तुम समाज नहीं रही हो.

दिव्या : (अपनी नज़ारे झुका कर) मुझे सब पता है, में जानती हु की पहली बार दर्द भी होगा.

शिव : तुम सच में पागल हो, देखो अभी ये सब ठीक नहीं है, हम दोनों आज hi मिले है और तुम...

दिव्या : वो सब मुझे नहीं पता शिव, मुझे तुम बहोत अच्छे लगते हो, और तुम्ही बताओ ऐसे क्या हम कभी मिल शकेंगे, आज मौका मिला है तो फिर कर लो न.

शिव : (अगर में दिव्या को जनता नहीं होता तो में सच में ये समाज लेता की वो एक चालू लड़की है, पर में उसे जनता था, मुझे पता था की वो अभी कुवारी है, मुझे उसके भोलेपन पे सचमे प्यार आ रहा था) पागल ladki(Mene उसको गले लगा लिया, वो भी मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी) तुम्हे क्या जल्दी है ये सब करने की?

दिव्या : मेने बहोत लड़कीओ को देखा है, वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सब कुछ करती है, मुझे भी बहोत मान होता था, पर कभी कोई अच्छा hi नहीं लगा, तुम पसंद आये तो में अपने आप को रोक नहीं पायी. सच कहती हु शिव, तुम मुझे बहोत पसंद हो, और लड़के लड़कीओ में ऐसा hi होता है, अगर किसी को कोई पसंद आ जाता है तो वो उसे प्रोपोज़ कर देता है और फिर अगर दोनों की है हुई तो फिर वो बॉयफ्रेंड – गर्लफ्रेंड बन जाते है. पर लगता है की में तुम्हे इतनी पसंद नहीं आयी, है न?

शिव : (मुस्कुराते हुए) है, मुझे तुम इतनी पसंद नहीं थी पर अब तुम्हारी हरकते मुझे धीरे धीरे पसंद आने लगी है.

दिव्या : (मुझे मुस्कुराते हुए देखते हुए) सच?

शिव : (मुस्कुराते हुए) है, सच.

दिव्या : तो फिर मुझे भी वैसा प्यार करो न शिव.

शिव : अगर मेने तुमसे वैसा प्यार किआ न तो तुम कल शादी में नहीं जा पाओगी.

दिव्या : वो क्यों?

शिव : वो तुम अभी नहीं संजोगी.

दिव्या : क्यों नहीं संजुगी, तुम समजाओगे तो में समज जाउंगी, में क्या बेवकूफ हु?

शिव : जिस दिन में तुमसे वैसा वाला प्यार करूँगा न तब तुम्हे पता चल जायेगा.

दिव्या : तो करो न शिव.

शिव : पागल, तुमने उस दिन टंकी में मेरे वह पेअर लगाया था तब भी तुम्हे नहीं पता की क्या हो शक्ति है?

दिव्या : (शर्मा गयी) है, थोड़ा थोड़ा तो पता है, पर मेने सुना है, सब करते है, और मेने नहीं देखा की किसी को इतनी दिक्कत हुई होगी.

शिव : तुमने किसी का देखा है?

दिव्या : क्या?

शिव : वही जो लड़को के पास होता है?

दिव्या : नहीं.

शिव : इसीलिए तो, अगर तुम देखती तो तुम्हे पता होता की जो मेरे पास है वो बहोत बड़ा है.

दिव्या : (मेरी आंखोमे देख रही थी, उसके चेहरे पर कई भाव आ रहे थे और कई जा रहे थे) क्या तुम मुझे वो दिखाओगे?

शिव : पागल हो क्या?

दिव्या : (थोड़ा जिद करते hue)Please शिव, तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो न?

शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती?

दिव्या : आती है न, पर अगर में अपने बॉयफ्रेंड के साथ hi शर्माउंगी तो मुझे सब कैसे पता चलेगा?

शिव : (मुझे भी उसकी बातो से बड़ा मज़ा आ रहा था, )देख कर क्या करोगी?

दिव्या : (खुस होते हुए) कुछ नहीं, बस मुझे देखना है.

शिव : ठीक है, जाओ दरवाजा बंद कर दो. (वो खुस हो कर गयी और दरवाजा बंद कर के वापस आ गयी, और मुस्कुराते हुए मेरे सामने देखने लगी, उसके चेहरे से लग रहा था की जैसे उसे कोई मनपसंद चीज मिलने वाली हो, उसके ऐसे भोले पैन पर मुझे भी मज़ा आ रहा था, मेने अपना पंत खोला, वो उत्सुकता से मेरे पंत को hi देख रही थी, जब मेने अपना अंडरवियर नहीं उठता तो वो मेरे सामने देखने लगी, जैसे कह रही हो उतरो न, मेने उसे बीएड पर बिठा दिया, सच में में कैसा अजीब काम करने जा रहा था, मेने अपनी अंडरवियर आहिस्ता आहिस्ता नीचे उतरी, सच कहु तो अभी मुज पर कोई हवस जारी नहीं थी तो मेरा लुंड वापस नार्मल स्थिति में आ गया था, जब मेने अंडर वियर सरकाया तो मेरा लुंड निचे झुका हुआ था)





(दिव्या बड़ी अजीब नजरो से शिव के लुंड को देख रही थी, उसकी धड़कने तेज हो चुकी थी, दो पैरो के बिच उसे छूट देखने की आदत थी, वह आज वो एक लम्बा अंग देख रही थी, उसे अजीब लग रहा था, उसने छोटे बच्चो की नुन्नी देखि थी पर उनके सामने ये बहोत बड़ा था, उसके ऊपर के भाग पर बाल भी थे, उसने देखा की निचे दो बड़े अंडो को किसी थैली में भर के लटकाया हो वैसे लटक रहे थे, वो कभी उस लुंड को तो कभी शिव को देख रही थी, उसके चेहरे से हसी गायब थी, वो अपना शिर घुमा घुमा कर देख रही थी, उसका दिल तो इतनी तेज गति से चल रहा था की उसे साँस लेने भी दिक्कत हो रही थी) अगर देख लिया हो तो वापस अंदर कर दू?

दिव्या : (दिव्या ने शिव की और देखा, हिचकिचाते हुए kaha)Kya में isse...(Me उसे देख रहा था की वो क्या कहना चाहती है) क्या में इससे छू सकती हु?

शिव : दिव्यआ.

दिव्या : (मुझे बिनती करते hue)Please प्लीज प्लीज.

शिव : (उसको ऐसे गिड़गिड़ाते देख कर में मुस्कुराया) ठीक है.

वो खुस हो गयी, वो थोड़ी आगे खिसकी और डरते डरते हाथ आगे बढ़ाया, उसका हाथ लुंड के नजदीक पहुंच गया था, वो हिचकिचा रही थी उसने अपनी मुठी एक बार बंद की, उसने अपनी उंगलिओ को अंगूठे से माला, उसने मेरे सामने देखा, में उसे hi देख रहा था, उसने पहले एक ऊँगली से थोड़ा छुआ, फिर चारो ऊँगली से उसे सहलाया. अब लुंड तो लुंड है, लड़की की छुअन से वो बड़ा होने लगा, उसने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा, में मुस्कुराया.

शिव : क्या हुआ?

दिव्या : ये बड़ा हो रहा है.

शिव : क्यों की उसे तुम्हारा छूना पसंद आ रहा है.

दिव्या : क्या सच में (वो खुस हो रही थी की उसके छूने से ये सब हो रहा है, वो फिर उसे उंगलिओ से सहलाने लगी)

शिव : (मुझे भी अच्छा लगने लगा था, तो मेने उसे kaha)use पकड़ कर हिलाओगी तो और बड़ा hoga(Wo ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उसे विस्वास hi न हो, पर मेरे चेहरे से उसे लगा की में मजाक नहीं कर रहा हु, तो उसने कपट हाथो से अपना अंगूठा निचे ले जाते हुए लुंड को पकड़ा, (दिव्या का दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था, की पशीने की बुँदे उसके चेहरे पर उभर आयी थी, ये उसके जीवन का पहला अनुभव था, उसने बहोत कुछ सुना था पर आज वो महसूस कर रही थी, वो नरम चमड़े का गरम डंडा उसके अंदर हलचल मचाये हुए था, उसे अपनी छूट के अंदर अजीब सी अनुभूति हो रही थी, वो बस लुंड को थामे रुकी रही, उसे समाज नहीं आ रहा था की कैसे करे तो वो शिव के सामने देखने लगी, में उसके चेहरे से समाज रहा था, मेने उसके हाथ पर अपना हाथ रक्खा और उसे आगे पीछे कैसे हिलना है वो एक दो बार हिलके संजय, फिर मेने उसका हाथ छोड़ दिया, वो समाज गयी थी तो उसने अपनी स्थिति ठीक की और अच्छी तरह से लुंड के सामने बेथ गयी और आहिस्ता आहिस्ता लुंड को देखते हुए अपना हाथ आगे पीछे करने लगी, इतनी प्यारी और मासूम लड़की के नरम नरम हाथो के स्पर्श से लुंड अपनी औकात में आने लगा, दिव्या के थोड़ी देर हिलने से लुंड पूरा खड़ा हो गया और सामने की और तन गया, में भी उत्तेजित हो गया था तो लुंड ने एक दो ठुमके मर दिए. लुंड के ऐसे अपने आप हिलने से वो दर गयी और उसने लुंड छोड़ दिया और अपने मुँह को अपने हाथो से डाकलिया.

वो खुले मुँह से आंखे फाडे उछलते लुंड को देख रही थी, उसके गले से थूक भी नहीं उतर रहा था, उसने जब थूक अपने गले से निचे उतरा तो में हसने लगा)

शिव : अब सम्ज्मे आया?

दिव्या : ये तो बहोत बड़ा है. ये ऐसे उछाल क्यों रहा है.

शिव : (में उसे क्या समजता की कच्ची गरम जवानी की खुसबू से ये झटके मार रहा है, वैसे भी में गरम हो चूका था पर में अभी उसके साथ कुछ करना नहीं चाहता था, जैसे तैसे मेने अपने आप को संभाला) तो अब इससे वापस अंदर कर दू?

दिव्या : (वो गुस्से से मुझे देखने lagi)Tumhe किस बात की जल्दी है?

शिव : क्यों, अब देख लिया न?

दिव्या : (शरमाते हुए) मुझे अच्छा लग रहा है, इससे छूने पर मुझे कुछ कुछ हो रहा है शिव. (वो अपनी झंघे आपसमे सत्ता रही थी, मेने छेड़ते हुए पूछा) कहा हो रहा है? (वो शर्माने लगी) मुझे तो नंगा कर दिया है और अब खुद शर्मा रही हो?

दिव्या : (उसने शरमाते हुए मुझे देखा, फिर अपनी छूट की और इस्सर करते hue)Yaha.(Waise तो मुझे पता hi था तो में हसने लगा, वो और शर्मा गयी)

शिव : अब बहोत हो गया दिव्या, में इससे वापस अंदर कर रहा हु, और अब तुम भी जाओ अपने कमरे में.

दिव्या : (अपने चेहरे पर जूठा गुस्सा लेट हुए वो उठी और मुझे धक्का दे कर मुझे बीएड पर लेता दिया और मेरे ऊपर चढ़ gayi)kab से ये क्या लगा रक्खा है, जाओ जाओ जाओ, में नहीं जाने वाली.

शिव : (पलट ते हुए मेने उसे मेरे नीचे लेता दिया) कब से समजा रहा हु की तुम्हारी हालत ख़राब हो जाएगी, तुम्हे समाज नहीं आता.

दिव्या : (मेरे गले में बहे दाल कर मुझे अपनी और खिंच कर मेरे होठो को चुम कर) है नहीं आता, क्या कर लोगे.

शिव : अच्छा तो तुम्हे देखना है की में क्या कर लूंगा





(में उसके होठो को चूसने लगा और एक हाथ उसके स्तन पर रख दिया और उसे दबाने लगा, उसके होठो को जोर जोर से चूसा और उसके स्तन को भी थोड़ी सख्ती से दबाया, जब मेने उसे छोड़ा थो वो जोर जोर से हांफ रही थी) अब पता चला, में क्या कर लूंगा. (वो मुझे देख रही थी, उसकी आंखे नशीली हो चुकी थी, इस बार उसने मुझे खिंचा और मेरे होठो पे टूट पड़ी, वो भी जोर जोर से मेरे होठो को चूस रही थी, पांच मिनट तक मेरे होठो को जोर जोर से चूसने के बाद उसने मुझे छोड़ा और मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी) तो तुम ऐसे नहीं मानोगी.

दिव्या : (मुस्कुराते हुए न में गर्दन हिलने लगी) है नहीं मानूंगी, मुझे प्यार करो वर्ण में यहाँ से नहीं जाउंगी.

में भी काफी गरम हो गया था, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुझे ललचा रही थी, में फिर से झुकता चला गया. इस बार बड़े प्यार से उसके होठो से खेलने लगा, और हलके हलके उसके स्तन दबाने लगा.

दिव्या : उम्म्म्मह, उम्म्म्मह उम्मम्मम्ह (वो भी मेरे गले में बहे डेल मेरे बालो से खेलने लगी, में किश करते हुए एडजस्ट होने लगा, उसने भी अपने दोनों पेअर फैला दिए और मुझे अपने पैरो के बिच कर दिया, हलाकि उसने ढीला लेहंगा पहना हुआ था, पर ऐसा लग रहा था की हम दोनों चुदाई की परफेक्ट पोसिटिव में है. (शिव के खड़े लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर के वो अपनी कमर हिलने लगी, उसको अजीब सी अनुभूति हो रही थी, ये एहसास हुस बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपनी कमर हिलाते हुए उस कड़क अंग पर अपनी छूट को दबाने lagi)me भी हलके हलके धक्के लगाने लगा. वैसे भी मेरा लुंड नंगा था, कपड़ो के ऊपर से भी मुझे छूट का पूरा एहसास मिल रहा था. मुझे लग रहा था की ये लड़की अभी नहीं बचेगी.

शिव : दिव्या...

दिव्या : (मेरे होतो पर अपनी ऊँगली रखते हुए) शहहह, कुछ मात कहो शिव, अपने मान से सरे विचार निकल दो, आज की रात मुझे दे दो, जो होगा वो होने दो, ये रात मेरे भाग्य से मुझे मिली है, ऐसा मौका फिर कभी मिलेगा ये सोच कर में आये हुए मौके को खोना नहीं चाहती, जितना तुम समाज रहे हो उतनी भी नादाँ नहीं हु, है ये सब पहलीबार अनुभव कर रही हु पर में जानती हु सब, मेने बहोत कुछ सुना है, और में जानती हु तुम भी मेरा ख्याल रक्खो गए, प्लीज शिव, समां जाओ मुज में, जो होना है वो हो जाने दो, ाजलि रात भूल जाओ सब, भूल जाओ की तुम कोण हो, भूल जाओ की में कौन हु, आजकी रात बस मेरे बन कर मेरे साथ रहो.

में उसकी आँखों में देख रहा था, कितना प्यार उमड़ आया था उसके चेहरे पर, एक और तो मुझे लग रहा था की मुझे उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए, पर में उसे कोई धोखा नहीं दे रहा था, मेने उसे सब कुछ साफ़ साफ़ कह दिया था. मुझे नहीं पता की उसके और मेरे भाग्य में क्या लिखा है, पर उसकी इस बिनती को नकारना मेरे बॉस में नहीं था, में फिर से उसके होठो को अपनी गिरफ्त में लेते हुए, उसे चूमने लगा तो वो पूरी ताकत से मुज से चिपक गयी.
 
अपडेट 78

दिव्या मुज से चिपक कर मेरे गाल पर, मेरे गले पर किश किये जा रही थी, उसकी ऐसी हरकतों से में काफी गरम हो गया था. में थोड़ा ऊपर उठा और उसको देखने लगा, मुझे अपनी और ऐसे देखते देख वो रुक गयी और मेरी आँखों में देखने लगी. मेरे हाथ अभी भी उसके एक स्तन को हलके हलके दबा रहे थे, वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे पूछ रही हो क्या देख रहे हो, रुक क्यों गए? में अपने हाथ को उसके शर्ट के बटन पर ले गया और उसे खोलने लगा, वो एक तक मुझे देख रही थी, अपने शर्ट के बटन को खोलते देख, वो मेरे उस हाथ की ब्याह को सहलाने लगी, जैसे कह रही हो, आगे बढ़ो. हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और मेने बरी बरी सब बटन खोल दिए, जैसे hi में शर्ट की एक बाजु को हटाने लगा, वो शर्मा गयी और दूसरी तरफ देखने लगी, उसके चेहरे पर मुस्कान थी. में रुक गया, तो वो फिर से मेरी और देखने लगी. में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी, मुझे सके शरीर का काफी भाग दिख रहा था, स्तन की गोलाई भी हलकी दिख रही थी, में फिर से शर्ट को खिसकने लगा, इस बार उसने नजर नहीं घुमाई, वो मेरे चेहरे को hi देख रही थी, उसको देखते हुए मेने शर्ट की एक साइड को खिसका दिया. एक स्तन मेरे सामने पूर्ण नंग अवस्था में था, ये तो में पहले से hi जनता था की उसने ब्रा नहीं पहन रक्खी. उसका उभरा हुआ गोरा स्तन मेरे सामने था, उसके ऊपर कला घेरा था जो की काफिर गहरे रंग का था, उसके ऊपर निप्पल था पर आकर में छोटा था, मेने ऊँगली से उसके निप्पल को छुआ तो उसने आंखे बंद कर ली और उसका शिर ऊपर की और उठ गया, में हलके हलके उसके निप्पल से खेलने लगा, उसकी आंखे बंद थी तो मेने उसके स्तन को देखा, पूर्ण गोलाई लिए वो ऊपर की और उठा हुआ था, में हलके हलके उसे दबाते हुए अंगूठे और ऊँगली की मदद से उसके निप्पल से खेलने लगा. उस से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था तो वो छातिवाले भाग को कभी ऊपर उठा रही थी. उसने चद्दर को अपनी मुठी में कास लिया था. मेने दूसरे स्तन को भी बेपर्दा किआ और उसको भी दबाते हुए सहलाने लगा. में देख रहा था की दिव्या लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी, में निचे झुका और बाये स्तन के निप्पल को चूसने लगा, जैसे hi मेने उसे चूसा, वो अपनी छाती को ऊपर की और उठाते हुए बीएड से भी काफी ऊपर उठ गयी.

दिव्या : ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Shiiiiiiiiiiiiv. (वो वापस बिस्तर पर धड़ाम से गिरी, में उसके नीपल्लो से बरी बरी खेलते हुए उसे चूसने लगा) शहहहहह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह शीइइइइइइइव shhhhhhhhhhh(Wo मेरे बालो में हाथ घूमने लगी) शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है शहहहहह ये कैसा आनंद है शिव शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह ऐसे hi करते रहो शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (में जीभ निकल कर उसके स्तन को, निप्पल को उसके स्तन के निचे के भाग को, हर जगह चाट रहा था.) शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह ऐसे hi शहहहहह अह्ह्ह्हह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह हैईईईई शहहहहह ओह्ह्ह्हह सीईव में पागल हो जाउंगी, शह्ह्ह्ह. (में काफी देर उसके स्तन से खेलता रहा, सिसकीओ से पूरा कमरा गूंज रहा था, में उसके शर्ट को निकलने की कोशिस करने लगा पर वो ऐसे निकल नहीं रहा था, वो मेरी उल्जन समाज गयी, वो बिस्तर पर बेथ गयी, और मेने उसके शर्ट को निकल दिया, वो ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी, जब मेने उसकी और देखा तो मुस्कुराते हुए शमरने लगी, वो अपनी गर्दन दूसरी और घुमा के मुस्कुराये जा रही थी, मेने गाल पर हाथ रख कर उसका चेहरा अपनी और किआ तो वो मुस्कुराये जा रही थी, वो अपना चेहरा मेरी और घुमा नहीं रही थी, मेने उसके स्तन को पकड़ा और हलके से दबाने लगा)





शहहहहह nahiiiiii(Wo फाटक से मेरे गले लग गयी, उसके नरम नरम स्तन मेरी छाती से चिपक गए) ओह्ह्ह्ह सीईव में पागल हो jaungi(Wo मेरे बालो में हाथ दाल कर मेरे शिर को सहलाने लगी और मेरे कंधे पर चुम्बनों की बरसात करने लगी, में भी उसकी नंगी मखमली पीठ को सहलाते हुए उसे हलके हलके दबाने लगा, लड़की के नंगे बदन का एहसास एक अलग ऊर्जा प्रदान करता है, उसकी मखमली पीठ को सहलाते हुए में अपने हाथ को निचे ले गया और उसके लहंगे के अंदर दाल कर उसके कूल्हों को छूने लगा, कूल्हे मुझे गरम गरम लग रहे थे, वो बैठी हुई थी तो कूल्हे के थोड़े से हिस्से को hi में छू प् रहा था, मेरे ऐसे छूने से वो मुझे जोर जोर से चूमने लगी, और मेरे बालो को सख्ती से सहलाने lagi)(Divya अपने शरीर पर घूम रहे शिव के हाथो को महसूस कर के मचल रही थी, ऐसा पहली बार हो रहा था की कोई लड़का उसके बदन को छू रहा था, सच में उसे शर्म भी बहोत आ रही थी, वो कभी ऐसे किसी के साथ इस अवस्था में नहीं आयी थी. अभी भी वो अपने आप से लड़ रही थी, एक तरफ उसकी शर्म थी जो एक लड़की सहज उसे हो रही थी, साथ में वो ये भी जानती थी की ऐसा मौका उसे फिर शायद न मिले. शिव के लिए शायद ये पहला दिन था जब वो उस से मिला था पर वो तो पिछले कई दिनों से शिव के साथ अपने आप को इस अवस्था में देख रही थी. रात को सपनो में भी शिव hi आ रहा था. वो उसके साथ ये सब कुछ पहले hi कर चुकी थी, जो आज हकीकत में हो रहा था उसे वो सपनो में कई बार दोहरा चुकी थी. शायद इसीलिए उसे आज इतनी शर्म नहीं आ रही थी. वो शिव के सुदृढ़ शरीर की मासपेशिओ को देख कर और पागल हो रही थी, उसका शरीर उसकी कल्पना से भी ज्यादा खूबसूरत था. सपनो में उसे जो एहसास हुआ था उस से कई गुना बेहतर वो इस समय महसूस कर रही थी. उसके नग्न कूल्हों को जब शिव ने छुआ तो उसके अंदर जैसे चिंटिअ रेंगने लगी थी, एक अजीब सी खुमारी उसके मन मस्तिक पर छाती जा रही थी, उसकी छूट तो न जाने कब से गीली हो चुकी थी. वो ऊपर से तो शिव से चिपकी हुई थी पर उसे ये अभी भी काम लग रहा था, वो थोड़ा उठी, और शिव के गले लगे हुए hi अपने आपको सही करते हुए उसकी गॉड में बेथ गयी, उसने अपने पेअर उसकी कमर के अगल बगल से निकल लिए. ऐसा करने से शिव का वो बड़ा सा अंग उसकी छूट से सात गया था, वो इतना लम्बा था की वो उसे अपनी नाभि को छूटा हुआ महसूस कर रही थी, वो शिव से और लिपट गयी और अपनी कमर को आगे की तरफ दबाते हुए उसे कड़े अंग को महसूस करने लगी, जैसे जैसे वो उस कड़े अंग को महसूस कर रही थी उसकी कमर अपने आप hi हिलना सुरु हो गयी थी, उसकी सांसे इतनी तेज चल रही थी की ऐसा लग रहा था की उसकी सांसे घुट रही है, तो वो जोर जोर से सांसे खिंच रही थी, एक अजीब सा माहौल बन गया tha.)(Divya के गॉड में बैठने से शिव का हाथ अब काफी निचे तक जा रहा था, तो वो उसके कूल्हों को अच्छे से छू प् रहा था. उस गरम गरम कूल्हों को वो अच्छी तरह से मसल रहा था, उसकी उंगलिया दरार में भी घुस रही थी जिस से वो दरार की गर्मी अपनी उंगलिओ पे महसूस कर के और उत्तेजित हो रहा था, ऊपर से दिव्या अपनी कमर हिलाते हुए उसके लुंड पर अपनी छूट रगड़ रही थी, जो उसको और गरम कर रहा था, वो उसके कूल्हों को पकड़ कर अपनी और खिंच लेता था जिस से उसकी छूट और ज्यादा लुंड से चिपक रही थी., दिव्या उस से थोड़ी भी दूर जाने को तैयार नहीं थी, उसने अपने शिर को जबरदस्ती थोड़ा निचे किआ और उसकी चुकी को अपने मुँह में भर लिया,) (दिव्या ने भी अपने आपको एडजस्ट किआ और वो थोड़ा ऊपर को उठ गयी, उसे भी शिव का इस तरह से उसकी चुचिओ को चूसना बहोत अच्छा लग रहा था. जब शिव उसके निप्पल को जोर से चूसते हुए खिंच रहा था तो उसको दर्द हो रहा था पर फिर भी वो उसे ज्यादा मज़ा दे रहा था तो उसने शिव को रोका नहीं. वो अपनी चुइची पकड़ कर शिव के मुँह में दे रही थी. उसने खुद सोचा नहीं था की वो इतनी बेशर्मी से शिव के साथ ये सब करेगी. पर न जाने कब से ये युवक उसके जहँ में बस चूका था, उसको वो इतना पसंद था की वो उसके साथ किसी भी हद से गुजर जाने को तैयार thi.)(Uski ऐसी हरकतों से मुझको लगने लगा था की शायद ये दिव्या का पहली बार नहीं है, वो पहले भी ये सब कर चुकी है, इस्सलिये में थोड़ा निश्चिंत हो गया, में उसके कूल्हों की दर्द में अपनी ऊँगली चलते हुए उसकी चुचिओ को पि रहा था, मेरी लम्बी उंगलिअ अब दिव्या की छूट को छूने लगी थी, वह से रिस्ता वो चिप छिपा रास मेरी उंगलिओ को भिगोने लगा था. में उस छेड़ को भी महसूस कर प् रहा था, उसके छूट के अंदरूनी होठो को सहलाते हुए में छूट के छेड़ को भी सेहला रहा था, जैसे जैसे में उसे सेहला रहा था, दिव्या की कमर झटके खा रही thi)(Divya के लिए ये एहसास पागल करदेनेवाला था, आज पहली बार कोई उसके खास निजी अंग को छू रहा था, उसे शर्म आणि चाहिए थी पर उसे तो बहोत मज़ा आ रहा था, आज तक उसने अपने इस निजी अंग को दुनिया से छुपा कर रक्खा था, नारी सहज वो अपने शरीर को हमेशा छुपके रखती थी, अगर खुलेमें पेशाब भी करने बेथ टी तो चार बार आगे पीछे देख कर ये सुनिश्चित करती की कोई देख तो नहीं रहा. जिसे उसने लोगो की नज़रो तक से बचके रक्खा था आज शिव उसे छू रहा था, उसके छूटे hi उसके शरीर के अंदर जैसे हर तर हिलने लगा था, एक अजीब से तरंगे उसके शरीर में पैदा हो रही थी., उसने शिव के शिर को पकड़ा और उसके होठो को जोर जोर से चूसने लगी, सुका शरीर पसीने से पूरी तरह से भीग गया था.)( में अपने हाथ को थोड़ा आगे की और ले गया, अपनी सनका के समाधान के लिए मेने ऊँगली को छेड़ पर सेट किआ, ऊँगली पूरी भीगी हुई थी तो मेने उसे छेड़ पर दबा दिया, पर मेरी मान्यता के विपरीत वो छेड़ काफी संकरा था, अभी ऊँगली आधा सेंटीमीटर भी अंदर नहीं गयी थी की दिव्या के मुँह से कराह निकली)

दिव्या : अह्हह्ह्ह्ह, ोुछहहह. (में वही रुक गया और दिव्या को देखने लगा, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की वो सचमे पूरी तरह से कुवारी है, में उसे आश्चर्य से देख रहा था, उसके चेहरे पर उभर आये उस दर्द को में देख रहा था, जब में रुक गया तो उसको थोड़ी रहत हुई पर ऊँगली अभी भी छूट के छेड़ में hi थी, वो मेरी और बस देखे जा रही थी, उसको लग रहा था की में अभी ऊँगली और अंदर डालूंगा तो वो जैसे अपने आपको तैयार कर रही थी, पर मेने कुछ न किआ, में भी बस उसे देख रहा था, जब में कुछ नहीं कर रहा था तो वो boli)Ruk क्यों गए?

शिव : तुम्हे दर्द हो रहा hai?(Me जान न चाहता था की क्या सच में उसको दर्द हो रहा है की वो नाटक कर रही है, वैसे नाटक करने का तो सवाल hi नहीं पैदा होता था, वो नाटक कर शक्ति है पर मेरी ऊँगली पर जो वो छेड़ कैसा हुआ था वो बिलकुल सच तह तो नाटक का तो सवाल hi नहीं पैदा हो रहा था)

दिव्या : है, थोड़ा थोड़ा. पर कोई बात नहीं, में सेह लुंगी.

शिव : (मुझे समाज नहीं आ रहा था की ये लड़कीअ किस मिटटी की बानी हुई होती है, जब इन्हे पता होता है की इन्हे दर्द होगा फिर भी ये खुसी खुसी सब करने को तैयार हो जाती है, मेने ऊँगली को बहार निकल दिया)

दिव्या : क्या हुआ शिव, कुछ नहीं होगा, में सेह लुंगी, में आवाज भी नहीं करुँगी.

शिव : (में मुस्कुराया) पागल है क्या तू?

दिव्या : (वो भी मुस्कुरायी) ऐसा क्यों कह रहे हो?

शिव : और नहीं तो क्या, पता है एक बार तो मुझे लगा था की तुम...

दिव्या : (सवालिया नज़रो से मुझे देख रही थी) क्या???

शिव : कुछ नहीं.

दिव्या : कहो न, क्या लगा था तुम्हे?

शिव : पागल, तू ऐसी हरकते कर रही थी की मुझे लगा की तू सच में कुवारी है की जूथ बोल रही है.

दिव्या : (मेरी और आश्चर्य से देखते hue)Kya? तुम्हे ऐसा लगा? में सच में कुवारी hi हु शिव.

शिव : वो मुझे पता चल गया, पर हरकते ऐसी करती हो तो लगता है की बहोत एक्सपीरियंस है.

दिव्या : (शरमाते हुए) ऐसा नहीं है, पर पता तो होता है न, अब इतनी बड़ी हो गयी हु तो क्या मुझे पता नहीं होगा. लड़कीअ आपस में बाते करती है, कई भाभा भी हमे बताती है, तो पता तो रहता है न. और तुम तो मेरे करीब आते hi नहीं अगर में तुम्हारे करीब न आती तो. तो फिर मुझे hi आगे आना पड़ा.

शिव : (मुस्कुराते हुए) ऐसा क्या देखलिया मुज में जो ऐसी पागल हुए जा रही हो?

दिव्या : वो मुझे नहीं पता, पर तुम अच्छे दीखते हो, और तुम सचमे अच्छे हो भी, क्यों की अगर तुम्हारी जगह और कोई लड़का होता तो मुझे इतनी मिन्नतें नहीं करनी पड़ती, अब तक तो वो मेरे साथ सब कुछ कर चूका होता. कई लड़के है, मेरे एक इस्सर करने की देर है, वो मेरे पीछे पीछे चले आएंगे, पर मुझे वैसे लड़के पसंद नहीं है. मेरी अक्सर राजनजान और विणा से तुम्हारे बारे में बाते होती रहती है, उनकी बातो से मुझे यकीं हो गया था की तुम वाक़ई एक अच्छे लड़के हो. वर्ण में क्या पागल हु की शर्म हाय छोड़ कर तुम्हारे कमरे में चली आयी.

शिव : तुम्हारी हरकतों से तो ऐसा hi लगता है की तुम में शर्म है hi नहीं. इस्सलिलिये तो मुझे लगा की शायद तुम...

दिव्या : वो तो तुम्हे अभी पता चलना hi है, थोड़ी देर में.

शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कह रही है, फिर भी उसे छेड़ते hue)Wo कैसे?

दिव्या : वो जब तुम मुझे ...(वो बोलते बोलते रुक गयी, वो मेरी और देखने लगी, मेरे चेहरे की मुस्कराहट से वो शर्मा गयी)

शिव : तुम सच में मेरी समाज से बहार हो, कभी कभी लगता है की तुम में शर्म है hi नहीं, और कभी लगता है की तुम कितनी शर्मीली हो.

दिव्या : (मेरा गाल चुम kar)Muje भी बहोत शर्म आती है शिव, पर अगर में शर्माती रहती तो तुम्हे कैसे पति, तुम्हारे करीब आने का मुझे और कोई रास्ता नहीं सूज रहा था, वैसे भी हम दोनों इतना मिलनेवाले थे नहीं की में आहिस्ता आहिस्ता तुम्हारे करीब आती, तो जो एक मौका मुझे मिला उसे मेने पकड़लिया. अभी भी तुम्हे अगर मुज पर शंका है तो अब मेरे बदन पर सिर्फ एक hi कपड़ा बाकि है, उसे उतर कर देख लो.

शिव : जब तुम्हे इतना सब पता है तो फिर तुम्हे ये दर नहीं लगता की मेरे साथ ये सब करने के बाद तुम किसी और के साथ शादी करो गई तो उसे पता नहीं चलेगा.

दिव्या : हो भी शक्ति है और नहीं भी, और दूसरी बात, अगर वो मुझे पसंद करता है तो में जैसी भी हु वो मेरे साथ खुस रहेगा. जैसे तुम मुझे पसंद हो, तो ये जान कर भी की तुम्हारी कोई और गर्लफ्रेंड है, में तुम्हारे साथ रहने के लिए तैयार हुई की नहीं. अगर में कुवारी न होती तो क्या तुम मुझे पसंद नहीं करते? क्या मेरा कुँवारापन मुज से भी ज्यादा महत्व रखता है, क्या सिफत यही एक प्रमाण है की में तुमसे प्यार करती हु. अगर में कुवारी न होती और तुमसे कहती की में तुमसे प्यार करती हु तो क्या तुम्हे मेरा यकीं नहीं होता हैना? ऐसा क्यों शिव?

शिव : मुझे दुसरो का नहीं पता, में सिर्फ अपनी बात करता हु, मेरा यकीं कर पाओ तो ठीक है, में ने तुम्हार कुँवारापन इस लिए नहीं चेक किया था की में तुम्हारे बारे में कुछ गलत सोच रहा था, मुझे तुम्हारी परवाह हो रही है, अगर तुम कुवारी न होती तो शायद ये सब जो हम कर रहे है वो थोड़ी आसानी से हो जाता, पर अब जब तुम कुवारी हो तो में सच में ये सब अभी नहीं कर शक्ति, अगर मेने ये सब किआ तो सच में कल तुम्हारी हालत ऐसी होगी की सब को पता चल जायेगा, और अगर तुम कोई बहाना भी बनलोगी तब भी तुम्हे तो परेशानी रहेगी है और ऐसे में तुम अपने भाई की शादी को एन्जॉय नहीं कर पाओगी.

दिव्या : शिव, हमे ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा.

शिव : क्यों नहीं मिलेगा, अगर नहीं मिलेगा तो हम मौका बना लेंगे.

दिव्या : तुम सच कह रहे हो?

शिव : है सच.

दिव्या : अगर तुम्हारा मन बदल गया तो, मेरा मतलब है की तुम्हारी तो गर्लफ्रेंड है, और अगर तुम्हे ऐसा लगे की तुम गलत कर रहे हो, तुम्हे मेरे साथ नहीं रहना चाहिए, तो?

शिव : वो तो मुझे अभी भी लग रहा है, की मुझे तुम्हारे साथ नहीं करना चाहिए.

दिव्या : देखा, में सही कह रही थी न, नहीं शिव तुम अभी मेरे साथ ये सब कर लो, पता नहीं मुझे फिर कभी तुम मिलो या नहीं.

शिव : पागल, मेने कहा न में जरूर मिलूंगा.

दिव्या : (मेरी आँखों में देखते hue)Me तुम्हे अच्छी तो लगती हु न?

शिव : पहले का तो पता नहीं पर है अब तुम मुझे अच्छी लग्न रही हो.

दिव्या : (खुस हो कर) अब मुझे यकीं है, तुम मुज से मिलोगे.

शिव : (छेड़ते हुए) और अगर में कह दू की मेने जूथ कहा है तो?

दिव्या : जुबान जूथ बोल शक्ति है, आंखे नहीं. में तुम्हे इतनी पागल लगती हु.

शिव : सच में तुम्हे समजना आसान नहीं है.

दिव्या : (मुस्कुराते हुए) लोग कहते है, औरत को समजना तो बनानेवाले के लिए भी नामुनकिन है. वो सब छोडो पर अभी क्या करेंगे?

शिव : क्या करेंगे से क्या मतलब है, मेने बोलै न बाद में सब.

दिव्या : (नखरे se)Kitna मज़ा आ रहा था, सब बिगड़ दिया तुमने. क्या जरुरत है इतना अच्छा बन ने की, एक लड़की, सामने से तुम्हारे कमरे में आयी, सब करने को तैयार है, तुम खुद पुरे नंगे हो, लड़की आधी नंगी है और अब कुछ नहीं होगा, और पागल मुझे बोलते हो. क्या तुम पागल हो?

शिव : (मुस्कुराते हुए) चल ठीक है, पर अभी भी कह रहा हु सब कुछ नहीं करूँगा.

वो कुछ न बोली बस मुस्कुरायी, और फिर से मेरे होठो को वो हलके हलके चूसने लगी, हमारी बातो से मेरा लुंड जो थोड़ा सिथिल हुआ था वो फिर से अपनी औकात में आने लगा. दिव्या का शरीर स्नेहा के मुकाबले तो काम hi था पर सच कहु तो लतादिदी और रंजन के मुकाबले काफी भरा हुआ था. शायद अच्छे घर के खान पैन से ये तफावत था, में उसके मखमली बदन को सहलाते हुए उसे फिर से चूमने लगा. उसके स्तनों को बरी बरी हलके हलके मसलते हुए उसका मज़ा लेने लगा. में उसे साथ में लिए hi थोड़ा ऊपर हुआ और फिर उसे बिस्तर पर निचे लेटते हुए में उसके ऊपर आ गया, उसके होठो को छोड़ कर में निचे के और जाने लगा, उसकी गर्दन को चेतना सुरु किया तो वो एक हाथ से मेरा शिर सहलाते दूसरे हाथ से मेरी बाजु को सेहला रही थी. में और निचे गया और उसके दोनों स्तन को बरी बरी चूमते हुए उसके निप्पल को चूसने लगा. कमरा फिर से एक बार उसकी सिसकीओ से गूंजने लगा. हलकी चर्बी की परत लिए उसके सपाट पेट पर अपनी जीभ से चाट ते हुए में उसकी नाभि को चूमने लगा. (दिव्या के लिए ये किसी सपने से काम नहीं था, उसने कई बार फिल्मो में ऐसा देखा था, ऐसा करने पर हेरोइन मचल जाती थी, आज वो उस सुखद अनुभव की अनुभूति कर रही थी. उसे गुदगुदी के साथ ऐसा लग रहा था की उसकी नाभि का कोई तर उसकी अनछुई छूट तक जा रहा है, उसकी छूट से रास का बहाव तेज होने लगा था. वो आंखे बंद किये हुए इस मज़े का भरपूर आनंद ले रही थी. जब शिव के होठ उसकी छूट की और बढ़ने लगे तो उसकी सांसे बहोत तेज चलने लगी, उसके अंदर कुछ अजीब सी हलचल हो रही थी, जैसे जैसे शिव निचे की और खिसक रहा था वो चद्दर को अपनी मुठी से कस्ती जा रही थी. उसकी छूट में एक अजीब सी हलचल हो रही थी जिसकी वजह से उसने अपनी झंघे आपसमे जोर से सत्ता दी. जब उसे एहसास हुआ की शिव उसकी छूट के फुले हुए हिस्से पर पहुंच कर जोर जोर से सांसे ले रहा है तो उसने थोड़ा ऊपर उठ कर देखा, शिव जोर से साँस अंदर खिंच कर उसकी छूट की महक को सूंघ रहा था. ये देख कर वो शर्मा गयी, एक अजीब सा एहसास उसके अंदर होने लगा, जब शिव ने उसकी लेंगी के शिरो को पकड़ा तो वो हिल गयी, शिव उसकी छूट को नंगी करने जा रहा था, उसकी शर्म उसे रोकने को बोल रही थी, उसका हाथ उसको रोकने के लिए उठना चाहते थे, पर उसका दिल ये नहीं चाहता था, उसने कास के चद्दर को अपनी मुठी में जकड लिया, और अपनी आंखे बंद करके अपने आपको नंगा होते महसूस करने लगी, शिव उसकी लेंगी को निचे सरकने लगा. उसको एहसास हुआ की उसके छूट के ऊपर के हलके बल अब शिव को दिख रहे होंगे, उसने अपनी आंखे जोर से बंद कर दी, ये एहसास उसे पागल किये जा रहा था. शिव थोड़ी देर रुका रहा पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो शिव की और देखे. थोड़ी देर बाद जब शिव उसकी लेंगी को निचे सरकने लगा तो लेंगी उसके कूल्हों के निचे डाब कर फंस रही थी, अनायास hi उसकी कमर ऊपर को उठ गयी और लेंगी अशनि से निचे शराक्ने लगी. उसे इतने शर्म आ रही थी की उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी की वो शिव को देखे. वो बस आंखे मूंदे उस एहसास को जी रही थी. जब शिव ने उसकी झांटो के बाल पर हाथ घुमाया तो वो पूरी कैंप गयी, उसकी मुट्ठी और कास गयी थी. शिव उसकी छूट की दरार को अपने अंगूठे से टटोल रहा था. आज पहली बार कोई उसकी अनछुई छूट को छू रहा था. एक न एक दिन हर लड़की के नशीब में ये दिन आता है, आज उसका दिन था. उसकी झंगे चिपकी हुई थी तो अंगूठा ज्यादा नीचे जा नहीं रहा था, शिव ने उसकी पूरी लेंगी निकल दी, जब वो उसकी टंगे फ़ैलाने लगा तो वो शर्म से घड़ी जा रही थी, पर उसको एक अजीब सी खुसी मिल रही थी. उसकी टंगे फैला कर शिव उसकी छूट को छू रहा था. उसके मुँह से हलकी हलकी सिस्किअ निकल रही थी जिसे वो बड़ी मुश्किल से रोकने का प्रयास कर रही थी. उसने अपने निचले होठ को अपने दन्त से दबा दिया. शिव ने जब अपने अंघूठे को दबा कर उसकी छूट के ऊपरी होठो को फैलाया तो उसके मुँह से थोड़ा जोर से सिसकी निकल गयी. शिव उसकी छूट के होठो को दोनों अंगूठे की मदद से फाइलरहा था, उसे यकीं था की वो उसके छेड़ को देख रहा होगा, उसने एक बार ऊपर उठ कर हलकी आंख खोल कर देखा तो शिव उसकी छूट को देखने में खोया हुआ था, उसके चेहरे पर शर्मीली हसी उभर आयी. शिव नीचे झुकने लगा तो उसकी सांसे थमने लगी, जब उसे अपनी छूट पर शिव के होठो का एहसास हुआ तो एक लम्भी आह्ह्हह्ह्ह्ह उसके मुँह से निकलने वाली थी की उसने अपने हाथ से अपने मुँह को दबा दिया. शिव हलके हलके उसकी छूट के होठो को चाट रहा था,

ये इतना सुखद एहसास था जिसकी उसने कभी कल्पना तक नहीं की थी. उसकी टंगे अपने आप और ज्यादा खुलने लगी, जब शिव की झिबह उसकी छूट के छेड़ को कुरेदने लगी तो वो पागल से होने लगी, उसके हाथ अपने आप शिव के शिर पर चले गए और वो उसे अपनी और खींचने लगी, वो चाहती थी की शिव की झिबह और अंदर तक जाए.





जब शिव की नुकीली झिबह और अंदर घुसी तो उसके मुँह से बड़ी सी सिसकी फुट पड़ी. शिव इतने से hi नहीं रुका वो उसकी छूट के छेड़ में अपनी जीभ अंदर बहार करने लगा, उसके अंदर कुछ कुछ होने लगा था, उसकी छूट की अंदर की दिवलो पर सरसराहट होने लगी थी, उसे कुछ अंदर चाहिए था, उसने शिव के बाल पकड़े और उसे ऊपर की और खींचने लगी. (मुझे अपने बालो में दर्द हुआ, मेने ऊपर देखा तो वो मुझे ऊपर आने के लिए खिंच रही थी, में ऊपर होता गया, जैसे hi में ऊपर हुआ वो मेरे होठो पर टूट पड़ी और अपनी छूट मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, वो बहोत उतावली हो रही थी, उसने अपने हाथ से मेरे लुंड को पकड़ लिया और अपनी छूट पर उसके सुपडे को रगड़ने लगी, वो बहोत गरम हो चुकी थी, और सच कहु हो में भी काफी गरम हो चूका था, उसने मेरे लुंड को अपने छेड़ पर सेट किआ और मेरे लुंड को खींचने लगी ताकि वो अंदर चला जाया.)

शिव : शहहह दिव्या, रुको, अह्ह्ह्ह क्या कर रही हो?

दिव्या : (उसका चेहरा सेक्स की खुमारी से लाल हो चूका था) शिव, डालो न.

शिव : दिव्या, पागल मात बनो.

दिव्या : (झुंझलाते हुए, मेरे लुंड को और जोर से खिंच कर अपनी छूट में डालने का प्रयास करते hue)Dalo न शिव, जल्दी डालो. (जब मेने कुछ न किआ तो वो मेरी बाह पर मरने lagi,)Dalo न शिव, कुछ नहीं होगा, में पागल हो जाउंगी, मुझे ये चाहिए, abhi.(Me उसकी हालत समाज रहा था, पर ये बहोत रिस्की था, मुझे यकीं था की उसकी हालत ख़राब हो hi जनि थी, मुझे कुछ तो करना hi तह तो हलके हलके धक्के लगाने laga)Shiv शहहह अह्ह्ह्ह थोड़ा jorse(Wo मुझे खींचने लगी) थोड़ा जोर से शिव, (दिव्या को अपनी छूट थोड़े खुलते महसूस हुए, उसे दर्द भी होने लगा था पर अभी उसको इस दर्द की कोई परवाह नहीं thi)(Muje सचमे दर लग रहा था, अब ये हो कर hi रहे गए, में हलके हलके धक्के मर रहा tha)(Divya झुंझलाते हुए, शिव की कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी, और साथ में अपनी छूट को लुंड पर दबाने लगी, सूपड़ा थोड़ा थोड़ा अंदर उतरने लगा था, दिव्या पागल हो रही थी, उसके अंदर ऐसा कुछ हो रहा था जिसे उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किआ था, वो बस उस एहसास को पूरा पाना चाहती थी, वो भी अपनी कमर हिला कर लुंड को और अंदर लेने का प्रयास कर रही थी पर शिव नहीं कर रहा था, उसने शिव को थोड़ी नाराजगी से देखा, उसने आखरी कोशिस ki)Please बाबू, मुझे कुछ नहीं होगा, मुझे ये चाहिए, प्लीज थोड़ा सा अंदर डालो न प्लीज. (मेने हल्का धक्का दिया) है मेरे बाबू, थोड़ा और शहहहहह अह्ह्ह्ह थोड़ा और (में हलके हलके धक्के लगा रहा था, वो मुझे लगातार खिंच रही थी, मेने सोचा की दाल hi देता हु की तभी) अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुम्मीईईईई मुझे कुछ हो रहा है, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhh(Wo जटके कहते हुए झड़ने lagi,usne मुझे अपने ऊपर खिंच लिया और मुझसे कास के लिपट गयी, मुझे महसूस हो रहा था की मेरा सूपड़ा काफी उसकी छूट के अंदर घुस गया है, सच में एक अजीब लड़की थी ये. जब वो थोड़ी शांत हुई तो वो मेरी आँखों में देख रही थी, मेरा लुंड अभी भी उसकी छूट में घुसा हुआ था और वो भी पूरी औकात में, अगर में एक झटका जोर से मरता तो मेरा लुंड अंदर चला जाना तय था, कैसे मैंने अपने आपको कण्ट्रोल किआ है, में hi जनता हु. झड़ने के कारन उसके शिर से नशा उतर गया था, वो एहसास उसे इतना अच्छा लगा था की वो सच में खुस थी, उसे हल्का दर्द भी हो रहा था, अपनी छूट में फसे उस लुंड को वो महसूस कर रही थी.

शिव : पागल हो गयी हो?

दिव्या : सच में शिव, पता नहीं मुझे कुछ हो गया था उस वक़्त.

शिव : अगर कुछ हो जाता तो? (मेरे न करने के पीछे का कारन वो समाज रही थी, और मेरी इस परवाह के कारन वो मुजसे काफी प्रभावित थी, वो जानती थी की अगर कोई और लड़का होता तो अब तक वो कुवारी न रही होती, शायद इसीलिए तो उसे शिव पसंद था.)

दिव्या : जितनी में पागल हु न उस से कही ज्यादा तुम पागल हो, क्यों की कोई पागल hi होगा जो ऐसे मौके को छोड़ता होगा.

शिव : अगर तुम्हे ऐसा लगता है तो अभी भी देर नहीं हुई है.

दिव्या : में जानती हु शिव, तुम ऐसा नहीं करोगे, क्यों की तुम्हे खुद से ज्यादा दुसरो की परवाह है, में तुम्हारे रंग रूप से hi तुम्हारी तरफ आकर्षित हुई थी, पर अब लगता है की मेरा भाग्य अच्छा है, जो तुम मेरे जीवन में आये. ी लव यू शिव. (में उसे आश्चर्य से देखने लगा, वो मुस्कुरायी) तुम्हे टेंशन लेने की जरुरत नहीं है, क्या में प्यार भी नहीं कर शक्ति, जरुरी नहीं की हम साथ hi रहे. और अभी तो उम्र की शुरुआत है, न मुझे अभी शादी करनी है न तुम्हे, तो क्यों अभी से सोच के इस पल को जाने दू. ये सब बाटे छोडो, अब मेरे ऊपर ऐसे hi रहोगे? अगर मान कर रहा है तो पूरा कर लो.

में मुस्कुराते हुए उसके ऊपर से उठा, मेरा लुंड बहार निकल आया, वो उठ बैठी और अपनी टंगे फैला कर अपनी छूट को देखने लगी, वो होठो को फैला कर छेड़ को देख रही थी, सुरु ात का छाला थोड़ा फैट गया था और खून की कुछ बुँदे निकल आयी थी, जब उसे एहसास हुआ की में सामने हु तो वो शर्मा गयी और अपनी टंगे आपस में सत्ता दी.

दिव्या : (मुस्कुराते हुए) गंदे कही के (मेरे लुंड की और इस्सर कर के) अब इसका क्या karoge?(Mene कुछ न कहा) में कर दू?

शिव : (मेने आश्चर्य से उसे देखा) तुम्हे आता है?

दिव्या : इसमें आनेवाली क्या बात है? जो सुना है वो hi करना है, अगर कोई गलती हो तो तुम सीखा देना.

शिव : सचमे दिव्या, तुम कमल हो.

दिव्या : अब जैसी भी हु, कुछ साल तो तुम्हे hi झेलना है. (मेरी आँखों में देखते हुए) झेलोगे na?(Mene मुस्कुराते हुए है में इस्सर किआ तो वो खुस हो गयी और मेरे होतो पे एक किश कर ली, फिर मेरे लुंड को देखा, और उसे हलके हाथो से पकड़ा,





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उसे करीब से देखते हुए वो उसे हिलने लगी, वो इतना दर के कर रही थी की जैसे मेरे लुंड को कुछ हो जायेगा, मुझे हसी आ gayi)Kya हुआ, में ठीक से नहीं कर रही क्या? (मेने उसे अपने लुंड को अच्छे से पकड़ कर हिलना सिखाया) ओह ऐसे, मुझे लगा तुम्हे लग न जाये (उसने भी अच्छे से मेरे लुंड को पकड़ा और ऊपर की चमड़ी को निचे सरकते हुए एक दो बार हिलाया)

शिव : उसके ऊपर अपना थूक डालो, वो सुख गया है.

दिव्या : (उसने लुंड की चमड़ी को हटाया और अपने मुँह में थूक इकठ्ठा कर के लुंड के टोपे को नेहला दिया, फिर उसे हिलने लगी, वो पूरी नंगी थी, उसके स्तन हवामे लटक रहे थे और वो मेरे लुंड को हिलाये जा रही थी, काफी देर हिलने के बाद भी जब कुछ न हुआ तो वो मेरी और देखने लगी)

शिव : रहने दो.

दिव्या : नहीं, मुझे पता है आखिर में इसमें से सफ़ेद सफ़ेद पानी निकलता है, मुझे वो देखना है. क्या मुँह से करुँगी तो होगा?

शिव : तुम्हे ये भी पता है?

दिव्या : कहा न, पता सब है पर कैसे करते हे वो नहीं पता.

शिव : अपना हाथ do(Usne मेरी और हाथ बढ़ाया, मेने उसकी ऊँगली ली और उसको अपने मुँह में डाला और उसे चूस कर आगे पीछे कैसे करना है वो सिखाया.) ऐसे.

वो मेरे दो पैरो के बिच बेथ गयी, एक बार मेरी और देखा, उसने मुँह खोला और लुंड को अंदर लेने की कोशिस करने लगी, जब लुंड अंदर गया तो उसके मुँह पर एक्सप्रेशन बदलने लगे, जैसे वो समझने की कोशिस कर रही थी की कैसा लग रहा है, फिर वो आहिस्ता आहिस्ता अपना मुँह चलने लगी, उसके गरम मुँह में मुझे बहोत अच्छा लगने लगा,





वो पहली बार कर रही थी तो ये मुमकिन hi नहीं था की वो मेरे स्खलन करवा शेक, वो काफी दे करती रही पर मेरा स्खलन न हो पाया. अब वो थक गयी थी, वो मेरी और देखने लगी. में मुस्कुराया, उसे अपनी और खिंच लिया, वो नंगी hi मेरे शाइन लग गयी.

दिव्या : ये हो क्यों नहीं रहा, में कुछ गलत कर रही हु?

शिव : जान न और करना ये दो अलग चीजे होती है, जितना आसान लगता है ये सब उतना भी आसान नहीं होता.

दिव्या : (मायूसी से) पर तुम्हारा तो हुआ hi नहीं.

शिव : कोई बात नहीं.

दिव्या : तुम मुज से नाराज तो नहीं हो न?

शिव : पागल, (में उसे हलके हलके सहलाने लगा)

दिव्या : एक बात पुछु, में तुम्हारे साथ ऐसे नंगी लेती हुई हु, तुम्हे मेरे साथ कुछ करने का मान नहीं होता?

शिव : बहोत हो रहा है.

दिव्या : सच, मुझे लगा की मुज में hi कोई कमी है जो तुम मेरे साथ ये सब नहीं कर रहे.

शिव : जिस दिन करूँगा न उस दिन तुम्हे पता चल जायेगा की क्यों में आज रुक गया हु.

दिव्या : (मेरी छाती पर हाथ फिरते हुए मेरे निप्पल को कुरेदते हुए) वो दिन कब आएगा?

शिव : जल्द.

(उनकी ये सब बाते कुसुम न जाने कब से बहार कड़ी सुन रही थी और देख भी रही थी. उसे भी यकीं नहीं हो रहा था की कोई लड़का कैसे ऐसा कर शक्ति है. दिव्या ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी, फिर भी शिव ने उसके साथ कुछ भी नहीं किआ था, वो भी काफी प्रभावित थी शिव से, पर उसे पता था की अब ये संभव नहीं है, क्यों की उसकी सहेली ने बाज़ी मर ली थी, भले hi वो दिव्या से भी ज्यादा खूबसूरत थी पर उसके जितनी हिम्मत वो नहीं कर पायी थी. और अब उसे ये भी पता था की शिव की कोई और भी गर्लफ्रेंड है तो शिव और उसके बिछ कुछ नहीं हो शक्ति था. वो चुप चाप वह से कमरे में चली गयी और सोने लगी, थोड़ी देर बाद दिव्या भी कमरे में आयी, कुसुम ने यही जताया की वो सो रही है तो दिव्या भी चुप चाप लेट गयी, उसे हल्का हल्का दर्द हो रहा था, वो अब शिव की बात को समाज रही थी, जो कुछ भी हुआ था उसे सोचते हुए मुस्कुरा रही थी, कब उसे नींद आ गयी उसे भी पता न चला.

सुबह हम सब थोड़ी देर से उठे, वैसे भी सुबह सुहाह और कुछ था भी नहीं, बारात दोपहर को निकलनेवाली थी. किसी के दरवाजा खत खतने पर में उठा, दरवाजा खोला तो सामने रंजन कड़ी थी, वो मेरे गले लग गयी.

शिव : ये क्या कर रही है, ये हमारा घर नहीं है.

रंजन : जानती हु, सब निचे है.

शिव : फिर भी, कोई भी देख शक्ति है, तू निचे जा में आता hu.(Ranjan अपना मुँह बनाते हुए चली गयी, में मुस्कुराया क्यों की मुझे पता है की वो ज्यादा देर नाराज नहीं रह पायेगी.)

में जल्दी से नहाया और नीचे आ गया. सब नास्ता करने बैठे थे. कुसुम की मम्मी ने मुझे बैठने को कहा तो में बेथ गया. कुसुम, मेरे लिए भी चाय नास्ता ले आयी. मेने उसकी और देखा तो वो मेरी और देख भी नहीं रही थी. मेने दिव्या को देखा तो वो मेरी और देख कर मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया. हमने चाय नास्ता किआ और दिव्या के घर आ गए. सब दोपहर की तयारी में लगे हुए थे. कल स्कूल भी जाना था तो आज तो हमें निकलना hi था. मेने दिव्या से कहा तो उसने अपने पापा को बताया. उसके पापा और सब ने बहोत कहा पर अगर हम जाते तो कल स्कूल और गयम में न जा पता. मेरे समजने पर वो लोग मान गए. दो पहर को एक और बारात निकली और दूसरी और हम वह से अपने घर की और निकल गए.

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बिना अपने घर यानि सरूरल आयी हुई थी. सैटरडे को छूती ली थी और संडे ऐसे दो दिन का टाइम निकल कर वो आयी थी. 6 घंटे का सफर उसे ट्रैन में लगा था. शनिवार वो दस बजे अपने घर पहुंची थी. उसने अपने पति को इन्फॉर्म कर दिया था तो वो उसे लेने स्टेशन आये हुए थे. आज पहली बार उसे अपने पति से मिलते हुए बेचैनी हो रही थी. शिव के साथ सम्बन्ध बन ने के बाद आज वो पहली बार उनसे रूबरू हो रही थी. जब ट्रैन प्लेटफार्म पर रुकी तो उसका पति जिग्नेश उसे लेने के लिए प्लेटफार्म पर hi मौजूद था. जैसे hi ट्रैन रुकी, जिग्नेश अपनी पत्नी को लेने के लिए डिब्बे के अंदर गया, क्यों की सामान भी लाना था. बिना ने जैसे hi अपने पति को देखा उसने शिर पर पल्लू लिया और अपने पति का चरण स्पर्श किया.

जिग्नेश : इसकी क्या जरुरत है, ये घर नहीं है ट्रैन है, तुम चलो में सामान लेकर आता हु. (वो सामान ले कर आया और उसे गाड़ी में रख दिया, बिना आगे की सीट पर बेथ गयी, उसके पति ने गाड़ी अपने घर की और बढ़ा दी)

बिना : कैसे हे आप?

जिग्नेश : अच्छा हु, तुम कैसी हो?

बिना : जी, में भी अच्छी हु, घर पे सब?

जिग्नेश : (सड़क पर नज़ारे रक्खे हुए) माँ- बाबूजी भी अच्छे है. ऐसे अचानक कैसे आ गयी?

बिना : क्यों नहीं आना चाहिए था?

जिग्नेश : मेरा मतलब वो नहीं था, में जनता हु, स्कूल में कितना टाइम चाहिए, चलो छोडो उस बात को अच्छा किआ आ गयी. ममता भी आयी है.

बिना : अच्छी बात है, अकेली आयी है, की जीजाजी भी आये है?

जिग्नेश : नहीं, अकेली आयी है.

दोनों बाते करते हुए घर पहुंच गए. जब वो घर पहुंचे तो उसके ससुर बहार hi निकल रहे थे किसी काम से. बिना ने जा कर उनके पेअर छुए.

चंद्रभान (ससुर) : जीती रहो बेटी, कैसी हो?

बिना : (शिर पर पल्लू ठीक करते हुए) अच्छी हु बाबूजी, आप की तबियत कैसी है?

चंद्रभान : अच्छी है बहु, तुम्हारे सामने हु, कितने दिनों के लिए आयी हो?

बिना : जी कल रात को वापसी की ट्रैन है.

चंद्रभान : में फिर कहता हु बहु, छोडो इस नौकरी को, क्या रक्खा है, जो मेरा है वो सब तुम सबकहि तो है, फिर ऐसी मामूली नौकरी क्यों करना.

जिग्नेश : अभी इस वक़्त फिर से वो सब सुरु मात कीजिये, उसकी मर्जी है तो करने दीजिये, वैसे भी मेने बात की है, थोड़े समय बाद इसकी बदली नजदीक हो जाएगी.

चंद्रभान : जैसे तुमलोगो को ठीक लगे, अच्छा बहु में चलता हु, शाम को मिलेंगे.

बिना : जी बाबूजी. (वो चले गए, जब दोनों अंदर गए तो सामने hi उसकी सास और नानन्द बैठी हुई दिखी, उसने जा के अपनी सास के पेअर छुए)

नर्मदादेवी : जीती रहो बहु, दूधो नहावो पुतो फलो.

ममता : (जो उसकी छोटी नानन्द थी, वो बिना के पेअर छूने लगी तो बिना ने उसे रोक कर गले लगा diya.)Kaisi है भाभी आप.

बिना : में अच्छी हु? आप कैसी हो?

ममता : में भी अच्छी हु, आइये न बैठिये.

बिना : में फ्रेश हो जाती हु फिर बात करते है. माजी, में अभी आयी.

नर्मदादेवी : है बेटी, जाओ फ्रेश हो जाओ, लम्बे सफर से आयी हो.

जिग्नेश : मुझे भी थोड़ा काम है, में भी आता हु.

नर्मदादेवी : (नारजगीसे) अभी अभी तो बहु आयी है और तू बहार जा रहा है.

जिग्नेश : में जल्दी hi आता हु माँ, थोड़ा काम है.

बिना : कोई बात नहीं मजी, आप जाइये, ममता है न मुझे भी उनके साथ थोड़ा टाइम मिलेगा.

ममता : है भाभी, कितने टाइम बाद मिले है. आप जाओ भाई. (जिग्नेश मुस्कुराता हुए वह से चला गया, बिना फ्रेश होने चली गयी, ममता उसे जाते हुए देख रही थी)

नर्मदादेवी : क्या देख रही है?

ममता : एक बात पुछु माँ?

नर्मदादेवी : (अपनी बेटी को देखते हुए) इसमें पूछनेवाली क्या बात है, पूछ न.

ममता : माँ, भाई और भाभी की शादी को इतने साल हो गए है, अभी तक वो माँ नहीं बानी, आप कुछ कहती नहीं?

नर्मदादेवी : (उनके चेहरे पर हलकी उदासी छ गयी) इसमें इसका कोई दोष नहीं बेटी, तो फिर में इससे क्या कहु.

ममता : ये आप कैसे कह शक्ति है माँ, क्या भैया में?

नर्मदादेवी : नहीं बीटा, उसका भी कोई कसूर नहीं, ये सब भाग्य का खेल है.

ममता : में सामजी नहीं माँ, तुम कहना क्या चाहती हो?

नर्मदादेवी : कुछ ऐसी बाते होती है जिन्हे याद न करना hi बेहतर होता है, बस इतना बता शक्ति हु की अपने कर्मो की साझा हमें यही इसी जनम में भुगतने पड़ते है. कुछ ऐसे कर्म है, जिनकी वजह से इस घर में ये खुशिया नहीं आ शक्ति.

ममता : तुम कहना क्या चाहती हो माँ, और आज कल के ज़माने में भी तुम ऐसे अंधविश्वास पर विस्वास करती हो, आश्चर्य है.

नर्मदादेवी : पहले नहीं करती थी, पर अब आहिस्ता आहिस्ता होने लगा है, जब सब करके देख लिया और फिर भी जब कोई परिणाम न मिले तो विश्वास करना पड़ता है. तेरी सदी को भी इतने साल हो गए, तू क्यों माँ न बन शक्ति?

ममता : (उसके चेहरे पर भी उदासी छ गयी) क्या आप कहना चाहती है की उन बातो के चलते hi में माँ नहीं बनपायी हु?

नर्मदादेवी : लगता तो ऐसा hi है, आखिर तुम हमारी hi बेटी हो, इसी खंडन की लड़की हो तो शायद तुम्हे भी इस्सके परिणाम भुगतना पद रहा है.

ममता : ऐसी क्या बात है माँ?

नर्मदादेवी : मेने कहा न में नहीं बता शक्ति.

ममता : पर माँ, उस बात से हम सब की जिंदगी पे असर पद रहा है, में तुम्हे कहना तो नहीं चाहती थी पर, शायद ऐसा न हो की मेरे भी शादी टूट जाये.

नर्मदादेवी : (चौकते हुए अपनी बेटी को देखती है) ये क्या कह रही हो बेटी.

ममता : है माँ, ये सच है, में माँ नहीं बाण प् रही हु तो लोग तरह तरह की बाते बना रहे है, में यहाँ इसीलिए आयी थी ताकि, डॉक्टर से मिल के चेकउप करवा शकु, मेने उनसे कहा तो वो मान नहीं रहे थे, कहते है, की यहाँ ये सब करने से उनकी इज्जत जा शक्ति है, लोग क्या कहेंगे? इसीलिए मेने सोचा की यहाँ जांच करवालु.

नर्मदादेवी : (चेहरे पर असीम पीड़ा उभर आयी) हम ने सब करवा कर देख लिया बेटी, तुम सोच भी नहीं शक्ति इतना कर चुके है, पर कोई फायदा नहीं.

ममता : में समाजी नहीं माँ. तुम क्या बात कर रही हो? क्या करवा कर देख लिया है?

नर्मदादेवी : एक बेटी के साथ ऐसी बाते करना सोभा नहीं देता, पर अब ये तुम्हारी भी जिंदगी के साथ जुड़ चूका है तो में तुम्हे बताती हु, तुम्हारे चाचा है न उदैसिंहजी, उनकी बहु पद्मा को तो तुम जानती hi ho(Mamta बड़े गौर से सुन रही थी) वो भी माँ नहीं बन पायी. ये बात कहते हुए तो शर्मिंदगी हो रही है पर उसका पति पृथ्वी मतलब तेरा चचेरा भाई, वो भी बाप बाण ने के काबिल नहीं है, पद्मा ने अपने मायके के किसी लड़के के साथ सम्बन्ध बना लिए, पर वो फिर भी माँ नहीं बन शक्ति.

ममता : ये आप क्या कह रही है माँ, पद्माभाभी, में नहीं मानती, वो तो कितनी सरल स्वाभाव की है.

नर्मदादेवी : कोई जान बुज कर ये सब नहीं करता, वो भी क्या करती, लोगो के तने सुन सुन कर उसने ये कदम उठा लिया. पर फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला.

ममता : (उदास चेहरे के साथ) भाभी ने इतना बड़ा कदम उठाया फिर भी? ये सब आप को कैसे पता माँ?

नर्मदादेवी : उस से क्या फर्क पड़ता है बेटी.

ममता : तुम ये कहना चाहती हो की हम कभी माँ नहीं बन शक्ति? किसी भी तरह से नहीं.

नर्मदादेवी : लगता तो यही है बेटी.

ममता : में नहीं मान टी ये सब, ऐसा कुछ नहीं होगा, में आज डॉक्टर के पास जाउंगी अपनी जांच करवाने, फिर देखते है आगे का.

नर्मदादेवी : ठीक है बेटी, जैसा तुजे ठीक लगे. में खाना देखती हु, जा तू भी अपनी भाभी से मिल ले.

बिना और ममता, बिना के कमरे में बैठी थी. ममता बार बार खयालो में खो जा रही थी.

बिना : क्या हुआ बहना, जीजाजी की याद आ रही है क्या?

ममता : ऐसी बात नहीं है भाभी.

बिना : तो बार बार किसके खयालो में गम हो रही हो?

ममता : किसी के खयालो में नहीं, एक बात पुछु भाभी, आप बुरा तो नहीं मानोगी?

बिना : इसमें क्या बुरा मान न, तू गैर थोड़ी न है, पूछ जो पूछ न है?

ममता : आप माँ क्यों नहीं बानी अभी तक?

बिना : (थोड़ा झुंझलाते hue)Ye क्या सवाल है?

ममता : में जान न चाहती हु भाभी, आप बुरा मात मान न, पर मुझे कुछ ऐसी बाते पता चली है की मेरे लिए ये जान न जरुरी है.

बिना : में आप के साथ ऐसी बाते नहीं कर शक्ति, आप मेरी नानन्द हो.

ममता : भाभी, ये हमारी जिंदगी का सवाल है, आप मुझे अपनी दोस्त संजो, प्लीज.

बिना : अब में तेरी बात का क्या जवाब दू, मुझे खुद नहीं पता है की में माँ क्यों नहीं बानी. (बिना नज़ारे चुरा रही थी)

ममता : भाभी आप का चेहरा hi बता रहा है, की सब ठीक नहीं है. ठीक है में आप को कुछ बताती हु जो मुझे माँ ने बताया है (ममता, बिना को सब बता देती है) क्या आप को लगता है, ऐसा हो शक्ति है?

बिना : (अपनी सोच में दुब गयी, वो तो क्या क्या सोच कर यहाँ आयी थी, उसे लग रहा था की शिव के साथ रहने से शायद वो माँ बन जाएगी, अगर घरवालों को पता चल गया की वो अपने पति से दूर रह रही है फिर भी माँ बन ने वाली है तो, उसका भन्दा फुट जायेगा, इस लिए वो अपने पति के साथ रात बिताने आयी थी ताकि, किसी को कोई शक न हो, पर ममता की बात सुन कर उसे बहोत बड़ा धक्का लगा, वो सोचने लगी क्या सचमे ऐसा हो शक्ति है, क्या वो कभी माँ नहीं बनेगी)

ममता : (सोच में दुभि अपनी भाभी को हिलाते हुए) क्या सोच रही हो भाभी, बतावा क्या ऐसा हो शक्ति है?

बिना : (उसके चेहरे पर भी हवइया उड़ रही थी) ममम में क्या कह शक्ति हु ममता.

ममता : माँ की बातो से तो लग रहा है की भाई की वजह से तो आप माँ नहीं बन पाओ गई, और आप इस खंडन की बहु हो तो किसी और से भी आप माँ नहीं बाण पाओगी, आप विस्वास करती हो ऐसी बिना शिर पेअर वाली बातो का.

बिना : (खुद दरी हुई थी वो क्या जवाब देती) में क्या बता शक्ति हु.

ममता : आप भी मेरे साथ डॉक्टर के पास चलिए, में कुछ दिन यहाँ रहनेवाली हु तो में अपनी जांच करवा रही हु.

बिना : में कल यहाँ से चली जाउंगी, में इतने दिन यहाँ नहीं रह शक्ति, में वही अपने सहर में hi अपनी जांच करवालुंगी.

ममता : (थोड़ी झीखक के साथ) भाभी एक और बात पुछु? आप बुरा तो नहीं मानोगी?

बिना : (अपनी ननद को गौर से देखते हुए) ऐसी क्या बात है, पूछ न.

ममता : भाही, अगर सोचो की हमारी रिपोर्ट सही आयी, मतलब अगर हम में कोई कमी न हुई to...(Thoda रुक कर) क्या पद्मा भाभी की तरह...

बिना : (वो उसकी बात भली भाटी समाज रही थी, अब वो उसे कैसे बताये की ये कदम तो वो पहले hi उठा चुकी है, पर ममता को कोई जवाब तो देना hi था) ये क्या कह रही है तू, हम ऐसा कैसे कर शक्ति है.

ममता : आप सच कह रही हो भाभी, हम ऐसा कैसे कर शक्ति है (थोड़ी देर दोनों चुप हो गयी) पर आप को क्या लगता है भाभी, ऐसी कोनसी बात हो शक्ति है की हम किसी से भी माँ नहीं बाण शक्ति, क्या आप मानती है ऐसा?

बिना : में क्या जणू, अगर मजी कह रही है तो सोच समाज कर hi कह रही होगी.

ममता : भाभी आप का तो पता नहीं पर मुझे तो बहोत दर लग रहा है, यहाँ आप के ससुराल में मतलब मेरे घर में तो सब समाज रहे है पर मेरे ससुराल में ऐसा नहीं है, मेरे क्या होगा भाभी.?

बिना : तू दर मात, अगर मुसबत है तो इसका कोई न कोई हल जरूर होगा. हम तो उपरवाले से बस प्रार्थना hi कर शक्ति है.

दोनों काफी देर तक बाते करते रहे. शाम को सबने खाना खाया, और रात को सब सोने चले गए. आज पहली बार बिना का दिल धड़क रहा था, अब उसे सेक्स के बारे में समाज थी, वो देखना चाहती थी की उसके पति के साथ क्या होता है. वो धड़कते दिल से अपने पति का इंतजार कर रही थी. जब उसका पति आया तो उसने थोड़ी देर उस से बात की, फिर कमरे की बत्ती बजा कर उसको बहो में भर लिया, वो धड़कते दिल से आनेवाले पालो का इंतजार कर रही थी. अँधेरे में वो महसूस कर रही थी की जिग्नेश ने अपना लेहंगा निचे किआ जो वो अक्सर सोते वक़्त पहनते थे. फिर वो उसके उन्नत स्तनों को हलके हलके दबाने लगा, अभी कुछ hi वक़्त हुआ था की वो उसका साया उठा कर उसकी पंतय उतरने लगा. उसने कोई विरोध नहीं किआ, उसके पेअर फैला कर वो अपनी स्थिति सही करने लगा, वो उसकी छूट की फैंको पर कुछ घिसने लगा, उसने धड़कते दिल से अपना हाथ बढ़ाया और उस चीज को छुआ, वो उसका निजी अंग था पर ढीला था और ऐसा लग रहा था की ऊँगली के बराबर hi है.

जिग्नेश : ये क्या कर रही हो, वह क्यों हाथ लगा रही हो?

बिना : में तो बस आपकी मदद कर रही थी, अँधेरे में आप को सही जगह दिखा रही थी.

जिग्नेश : (हलके गुस्से से) मुझे पता है, पहली बार थोड़ी न कर रहा hu.(Beena कुछ नहीं बोली, उसने अपना हाथ हटा लिया पर उसे सब समाज आ गया था, वो बस लेती रही, जिग्नेश ने अपना छोटा सा लुंड बिना की छूट पे घिसा, और अंदर डालने की कोशिस करने लगा, अब तो बिना की छूट खुल गयी थी तो लुंड थोड़ा सा अंदर भी गया, छूट की गर्मी का एहसास होते hi जिग्नेश ने कमर का धक्का मारा, बिना को तो कुछ महसूस भी नहीं हुआ, बस कमर का धक्का hi लगा, उसकी छूट में उसे अंदर कुछ भी महसूस नहीं हुआ, दो चार बार जिग्नेश ने धक्के लगाए और हफ्ते हुए रुक गया. थोड़ी hi देर में वो दूसरी और लुढ़क गया, बिना ने अपनी छूट पर हाथ लगाया तो उसे थोड़ा चिप छिपा महसूस हुआ, वो समाज गयी की यही होता आ रहा था. इस वक़्त उसे शिव याद आ गया, अगर अभी वो होता तो वो मज़े से चुद रही होती. पर वो जिस काम के लिए आयी थी वो हो गया था, अब अगर वो माँ बन भी गयी तो वो कह शक्ति थी. पर ममता की बातो ने उसे डरा दिया था, अपने मान में इसी उधेड़ बन में वो सो गयी, दूसरे दिन वो अपनी ननद के साथ डॉक्टर के पास भी गयी, उन्होंने उसे जांच कर खा की उन्हें दो तीन बार और आना पड़ेगा, उसके बाद hi वो अपना रिपोर्ट देंगे. शाम को उसकी ट्रैन थी जो रात को उसके सहर पहुंचने वाली थी. वो ट्रैन में बेथ गयी, उसका पति hi उसे छोड़ने आया था.

शाम को 5 बजे तक हम लोग अनाथालय पहुंच गए थे. एक दिन हम बहार रहे थे तो जैसे hi में रूम में पंहुचा तो लतादिदी आ कर मेरे गले लग गयी. मेने भी उन्हें बाहोंमे भर लिया और उन्हें किश करने लगा. (गायत्री ने शिव और लता को किश करते हुए देखा, वो नफ़रत से उन्हें देख रही थी. वो समाज नहीं प् रही थी की आखिर शिव अपनी hi दीदी के साथ ऐसा कैसे कर शक्ति है, वो वह से निकल गयी)

शिव : कैसी हो दीदी?

लतादिदी : अच्छी हु, कैसी रही शादी, मज़ा आया?

शिव : है दीदी, अच्छी थी.

लतादिदी : अच्छा हुआ की तू उनके साथ जा आया, और ये अच्छी बात है की अब उनकी सहेलिया भी बन ने लगी है. ऐसे hi, लोगो के बिच रहेगी तो दुनियादारी भी सीखेगी.

शिव : दीदी में थोड़ी देर में आता हु, शनिवार को छूती की थी न तो में मैडम से मिल आता हु.

लतादिदी : है जा आ.

में घर से निकल कर बिना मैडम के घर गया तो वह टाला लगा हुआ था. अब में क्या करू, तभी मुझे विचार आया की संयम के घर जाता हु, उस से पूछ लूंगा की शनिवार को स्कूल में क्या हुआ. वह से में संयम के घर चला गया. उसके घर का दरवाजा खटखटाया पर कोई जवाब न मिला. थोड़ी देर रह देखने पर भी दरवाजा न खुला तो मेने दोबारा दरवाजा खत खतया, अभी भी दरवाजा न खुला तो में वापस जाने के लिए मुदा hi था की दरवाजा खुला. सामने नजिआदिदी कड़ी थी, उनका चेहरा बुझा बुझा सा था और उनकी आँखों को देख कर hi पता चल रहा था की वो अभी रो रही थी जिस पोछ कर वो आयी है. मुझे देख कर उन्होंने अपने चेहरे पर मुस्कान लेन की कोशिस की पर मुस्कान भी फीकी थी.

शिव : दीदी, संयम है?

नाज़िआदिदी : अंदर आओ. (में अंदर चला गया) संयम तो नहीं है, बहार गयी है.

शिव : ओह ! कोई बात नहीं, में चलता हु, बाद में मिल लूंगा.

नाज़िआदिदी : क्यों, संयम नहीं है तो क्या हुआ, में नहीं हु क्या, मुझसे तो मिल शक्ति हो न. तुम बैठो में पानी लती हु. (में वही सोफे पर बेथ गया, वो पानी ले आयी जिसे मेने पि लिया) कल स्कूल नहीं गए थे क्या?

शिव : है दीदी, बहार जाना पड़ा था तो स्कूल नहीं गया था, इस्सलिये सोचा संयम को मिल लू ताकि कल क्या पढ़ाया वो जान शकु.

नाज़िआदिदी : वो, अम्मी अब्बू के साथ बहार गयी है, रात को आएगी.

शिव : कहा गयी है? (वो मेरी आंखोमे देख रही थी, उनकी आँखों से hi लग रहा था की वो अभी रो देगी) क्या हुआ दीदी? कुछ हुआ है क्या? (वो अपने आंसू छुपाना चाहती थी तो उन्होंने अपना मुँह दूसरी और कर लिया) आप रो रही है, मेरे आने से पहले भी आप रो रही थी na?(Muje लग रहा था की वो रो रही है) क्या हुआ दीदी?

नाज़िआदिदी : वो लोग मेरे ससुराल गए है, वो जल्द से जल्द तलाक लेना चाहते है, इसी सिलसिले में अब्बू बात करने गए है.

शिव : (वो अपना चेहरा साफ़ कर रही थी, वो मुझे अपने आंसू दिखाना नहीं चाहती थी, में उनका दर्द समाज रहा था) आप डॉक्टर के पास गयी थी न दीदी, फिर क्या हुआ?

नाज़िआदिदी : गयी थी, पर अब उसका कोई मतलब नहीं.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो दीदी?

नाज़िआदिदी : अब में तुम्हे कैसे संजो, तुम ये सब नहीं संजोगे.

शिव : आप बताकर तो देखिये, शायद में समाज सकू.

नाज़िआदिदी : डॉक्टर कहते है मुज में कोई कमी नहीं है, मेरे सरे रिपोर्ट नार्मल है, अब बताओ क्या समजे तुम? (में उनकी बात समाज रहा था फिर भी चुप रहा) मेने कहा था न, ये सब अभी तुम्हरी समाज में नहीं आएगा.

शिव : में सब समाज रहा हु दीदी, आप में कोई कमी नहीं है, शायद आप के पति में कमी है, आप उनको ये सब बतादिजिये, और उन्हें कहिये की इलाज करवाए.

नाज़िआदिदी : (मेरी और देखते हुए) अब इसका कोई मतलब नहीं, में ये कहूँगी फिर भी वो नहीं मानेगे. उन्होंने दूसरी लड़की भी देख ली है, वो अब जल्द से जल्द शादी करना चाहते है.

शिव : (मुझे पता था की इस परिस्थिति में क्या हो शक्ति है, अब में ये सब समाज चूका था, स्नेहा मैडम और स्वर्णजी इन सब के चलते मेरी मदद ले चुकी थी, पर ये संयम की बहन थी, और दूसरी बाद, स्नेहा मैडम और स्वर्णजी दोनों मेरे पास खुद चलकर आयी थी, नाज़िआदिदी ने ऐसा वैसा कुछ भी नहीं कहा था तो में सामने से वो सब नहीं कह शक्ति था, और ये भी पता नहीं की वो क्या कहेगी, वैसे भी वो संयम की बहन थी, अगर उनको मेरी बात बुरी लगी और उन्होंने संयम को बतादिया तो संयम नाराज हो जाएगी, वो मेरी दोस्त थी तो में ये नहीं चाहता था) कोई तो रास्ता होगा, जिस से आपकी शादी बचायी जा शेक?

नाज़िआदिदी : (उसे डॉक्टर की कही बात याद आ गयी, डॉक्टर ने कहा था की तेसत्तुबे का सहारा लो, पर जब उसने कोई और उपाय पूछा तो डॉक्टर ने झुंझलाकर कह दिया था की किसी और के साथ जा कर बच्चा पैदा करो, उस वक़्त तो उसे डॉक्टर का कहना बुरा लगा था पर अब उसके समाज में आ रहा था की यही एक रास्ता हो शक्ति है, पर कैसे ये उसे समाज नहीं आ रहा था) रास्ता तो है, पर वो सब तुम नहीं संजोगे शिव.

शिव : आप कहिये तो सही, में पूरी कोशिस करूँगा, आप की शादी बचने की.

नाज़िआदिदी : (वो शिव की और देख रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की इससे कैसे संजो, उसकी नज़र में शिव अभी छोटा hi था, उसके जहँ में दूर दूर तक शिव के साथ सम्बन्ध बनाने की बात तक नहीं थी) इसमें तुम कुछ नहीं कर शक्ति शिव, तुम्हारी समाज से ये बहार है अभी.

शिव : एक बार कहके तो देखिये, शायद में मदद कर pau(Shiv भी सामने से कुछ कहना नहीं चाहता था)

नाज़िआदिदी : (उसे अब थोड़ा गुस्सा आ रहा था, एक तो उसकी शादी टूटने का टेंशन था और ऊपर से शिव जिद किये जा रहा था) में कह रही हु न तुम्हारी समाज से बहार है, इस सूरत में एक hi रास्ता नजर आ रहा है और वो ये की में किसी और से माँ बनु, अब कहो क्या समाजमे आया तुम्हे?

शिव : (शांति से दीदी को देख रहा था, में थोड़ा झिझक रहा था पर अब मुझे कहना hi पड़ा) में इसमें आपकी मदद कर शक्ति हु.

नाज़िआदिदी : (थोड़े गुस्से से) तुम क्या मदद कर पाओगे, एक तो वैसे भी में परेशान हु, मुझे कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा, तुम क्या कर शक्ति हो इसमें.

शिव : (झिझकते हुए) में.... Me...apko ...माँ बना शक्ति हु.

नाज़िआदिदी : (पहले तो उसे समाज नहीं आया पर शिव की झुकी नज़रो से उसे पता चल गया की शिव क्या कहना चाहता है, एक बार के लिए तो उसे झटका लगा, उसे थोड़ा गुस्सा भी आया, पर फिर सोचने पर उसे लगा की इस से बेहतर कुछ हो नहीं शक्ति, पर शिव के साथ, ये सोच कर hi उसे शर्म आने लगी, उसने धीमी आवाज में कहा) ये क्या कह रहे हो तुम?

शिव : सॉरी दीदी, अगर आप को बुरा लगा हो तो, इन हालत में मुझे जो सही लगा वो मेने कह दिया.

नाज़िआदिदी : (वो झिझक रही थी) ये कैसे...

शिव : सॉरी दीदी, अगर मेने कुछ गलत कह दिया हो तो, में चलता हु दीदी. (वो खड़ा हो गया और मुद का जाने लगा)

नाज़िआदिदी : (उसकी धड़कने तेज हो गयी थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो क्या कहे, पर जैसे hi शिव जाने लगा) शिईयिव. (उसकी आवाज सुन कर शिव रुक गया, अब उसे भी लेन लगा था की ये hi सही रास्ता है, पर उसे बहोत hi ज्यादा शर्म आ रही थी और साथ में एक झिझक थी, की वो कैसे ये सब करेगी) रुको शिव, क्या सच में tum...(Wo पूरा बोल भी नहीं प् रही थी)

शिव : (मुद कर दीदी को देखा, उन्होंने अपनी नज़ारे झुका li)Agar आप चाहो तो दीदी. आखिर ये आपकी जिंदगी है, आपको hi फैसला लेना है. अगर आप को लगता है की इस से ये मसाला सुलझ जायेगा तो में मदद करने के लिए तैयार hu.(Nazia को इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से नज़ारे तक नहीं मिला प् रही thi)(Mene उनकी हालत देखि, मुझे लगा की उन्हें इस बारे में सोचने का वक़्त देना चाहिए) दीदी आप सोच समाज कर फैसला लेना, अभी में चलता हु.

नाज़िआदिदी : (एकदम से) नहीं शिव, रुको, में क्या कहु मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा, पर मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं है, और टाइम भी नहीं है, में कैसे भी कर के दो महीने का टाइम ले लुंगी, पर क्या ये हो पायेगा?

शिव : (चलते हुए उनके पास gaya)Aap चाहती है?

नाज़िआदिदी : (वो काँप रही थी) है, पर...

शिव : पर क्या दीदी?

नाज़िआदिदी : (हिचकिचाते हुए धीमी आवाज me)Muje बहोत शर्म आ रही है शिव, में तुम्हारे साथ...

शिव : एक बात पुछु दीदी, क्या आप अभी .... या फिर कभी.

नाज़िआदिदी : मेरे पास टाइम नहीं है शिव.

शिव : ठीक है दीदी, में अपनी आंखे बंद कर लूंगा, फिर तो आप को शर्म नहीं आएगी न.?

नाज़िआदिदी : (कपटी आवाज में) ऊपर मेरे कमरे में चलो.

अनथालयमे सब काम कर रहे थे, पर गायत्री बुझी बुझी सी थी. सरिता और गायत्री दोनों बर्तन साफ़ कर रही थी, गायत्री को ऐसे देख कर सरिता ने आखिर पूछ hi लिया.

सरिता : क्या हुआ, किन ख़यालोमे खोयी है.

गायत्री : (थोड़ी देर उसे देखने लगी, फिर आस पास देखा, सरिता को कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Ye शिव कैसा है?

सरिता : तू कहना क्या चाहती है? कुछ समाज आये वैसा बोल.

गायत्री : मुझे लगा था की यहाँ सब बदल गया है, पर कुछ नहीं बदला.

सरिता : (अभी भी उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था) तू साफ़ साफ़ बोल, कहना क्या चाहती है, ऐसे गोल गोल बात करेगी तो क्या समाज में आएगा.

गायत्री : मुझे लगा था की उस कमीने मैनेजर के जाने के बाद यहाँ सब बदल गया होगा, पर नहीं अभी भी वैसा hi है.

सरिता : (उसे गौर से देखते हुए) अभी भी मेरी कुछ समाजमे नहीं आया.

गायत्री : क्यों की तुम जानती नहीं हो इस्सलिये, पहले वो मैनेजर था अब शिव है.

सरिता : (उसे थोड़ा गुस्सा आ रहा tha)Tu जानती थी भी है की क्या कह रही है, क्या तू मैनेजर और शिव की तुलना कर रही है, तू ये कहना छह रही है की शिव, मैनेजर जैसा है?

गायत्री : है, में वही कह रही हु, पहले मैनेजर यहाँ की लड़कीओ पर बुरी नज़र रखता था आप शिव है.

सरिता : (गुस्से से, पर आवाज को काम रखते hue)Tuje पता भी है, तू क्या कह रही है?

गायत्री : जो मेने देखा, वही कह रही हु.

सरिता : ऐसा क्या देखा तूने?

गायत्री : तुजे पता है, लता और शिव के बिछ कैसे सम्बन्ध है?

सरिता : (वो तो पहले से जानती थी पर वो गायत्री के मुँह से सुन न चाहती थी) कैसे सम्बन्ध है से तेरा क्या मतलब है?

गायत्री : उन दोनों के बिच, वो वाले सम्बन्ध है, aurat-mard वाले.

सरिता : तुजे कैसे पता?

गायत्री : मेने खुद अपनी आँखों से देखा है, और इतना hi नहीं वो रंजन के साथ भी वैसा hi करता है, में तो समझती थी की वो एक अच्छा लड़का है, पर वो भी वैसा hi है.

सरिता : (उसकी ऐसी बात सुन कर उसे बहोत गुस्सा आ रहा था, पर उसने अपने आप को कण्ट्रोल kia)Ek बात पुछु, मैनेजर ने तेरे साथ क्या किआ था? (गायत्री को कुछ समाज नहीं आया तो वो उसे देखने लगी) बता, मैनेजर ने तेरे साथ जो किआ था क्या वो सब वैसा hi था, मतलब, शिव मैनेजर की तरह कर रहा था और लता और रंजन तेरी तरह उसका शिकार हो रही थी?

गायत्री : नहीं, वैसा तो नहीं था, वो दोनों तो अपनी मर्ज़ी से...

सरिता : तो तुजे कैसे शिव में वो मैनेजर नज़र आया, क्या उसने तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती की?

गायत्री : नहीं, पर ये गलत है न, वो लता को दीदी कहता है और उसके साथ hi ये सब कर रहा है.

सरिता : उनकी बात छोड़, वो तो तुजे भी दीदी कहता है न, उसने तुजे उस नर्क से आज़ाद करवाया जहा से निकलना न मुमकिन था, है na(Gayatri उसे देख रही थी) अगर शिव तुजे कहे की दीदी में तुम्हारे साथ ये सब करना चाहता हु तो क्या तू मन karegi?(Gayatri ने कोई जवाब नहीं दिया) तू मन कर hi नहीं शक्ति, जिसने तुजे उस झालील जिंदगी से छुटकारा दिलाया, वो अगर तुजसे प्यार से कहेगा तो तू मन कर भी नहीं पायेगी, पर उसने ऐसा वैसा कुछ भी नहीं कहा, अगर वो मैनेजर जैसा होता तो वो टेरेलिए वह आता hi नहीं, उसे ऐसा क्या मिलजाना था जो वो टेरेलिए वह आ कर अपनी जान जोखिम में डालता. (गायत्री चुप चाप उसकी बाते सुन रही थी) जो जैसा है, वैसा क्यों है ये जाने बगैर ऐसे किसी पर इलज़ाम लगाना ठीक नहीं. और वो दोनों क्या सेज भाई बहन है? वो दोनों एक दूसरे के साथ खुस है तो तुजे किस बात परेशानी है. और रही बात शिव की तो तू अगर नंगी हो कर भी उसके सामने जयेगीना तो भी वो तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं करेगा, और तू उसकी तुलना उस कमीने के साथ कर रही है. अगर यकीं न हो तो कर के देख लेना, तुजे खुद पता चल जायेगा.

गायत्री को कुछ समाज नहीं आ रहा था. सरिता की बात सौ प्रतिसत सही थी, अगर शिव उसे कहता तो वो कभी शिव को मन नहीं करती. वैसे भी अब उसके पास बचा क्या था जो वो मन करती. न जाने कितने लोगोने उसे नोचा था. वैसी जिंदगी से शिव ने hi उसे निकला था. उसे अपने आप पर hi गुस्सा आने लगा की उसने ऐसा वैसा सोचा क्यों. शिव ने क्या उसके साथ गलत कर दिया था. कही न कही वो खुद इस शरीर की गर्मी से जल रही थी और ऐसे में उसे वो सुख मिल नहीं रहा था, शिव और लता को देख कर शायद वो जल रही थी. गायत्री को ऐसे सोच में डूबा देख सरिता ने कहा

सरिता : देख, मेरा कोई इरादा नहीं था, तेरा दिल दुखने का, अगर तुजे ऐसा लगता है की ये जगह टेरेलिए ठीक नहीं तो तेरी मर्जी है, किसीमे जबरदस्ती तो जुजे बांधकर नहीं रक्खा है.

गायत्री : (उसकी आँखों से आंसू छलक आये) में कहा जाउंगी.

सरिता : तू जाना चाहती hai?(Gayatri ने न में गर्दन हिलायी) एक बात और, जैसे तुजे इनके बारे में पता चला है वैसे hi तुजे कल ये भी पता चलेगा, इस से पहले hi में तुजे बतादेति हु, शिव के मेरे साथ भी सम्बन्ध है, पर इसका मतलब ये नहीं की तुजे शिव से डरने की जरुरत है, तू सामने से भी शिव को कहेगी न तो भी शिव तुजे मन hi करेगा. वो वैसा नहीं है जैसा तू समाज रही है. तुजे यहाँ डरने की कोई जरुरत नहीं है, है अगर तू कहेगी की तुजे यहासे कही जाना है, अपने पैरो पर खड़ा होना है तो वो तेरी मदद करेगा, और उसके बदले में तुम से कुछ भी नहीं मागेगा. समाज में aaya.(Gayatri ने है में गर्दन हिलायी, फिर दोनों काम करने लगे)

यहाँ में और नाज़िआदिदी उनके कमरे में खड़े थे...
 
अपडेट 80

में और नाज़िआदिदी उनके कमरे में तो आ गए थे, पर दोनों में चुप्पी छायी हुई थी, वो मेरी और पीठ करके कड़ी थी. मेने कभी उन्हें उस नज़र से नहीं देखा था, पर आज बात अलग थी, मुझे उन्हें उस नजर से देखना hi था, वर्ण में कुछ नहीं कर पाउँगा. वो मेरी तरफ पीठ किये कड़ी थी तो मुझे उनके कूल्हों का उभर स्पस्ट दिख रहा था, भरे हुए नितम्ब और पतली कमर उनके व्यक्तित्व को आकर्षक बना रहे थे. मुझे पता था की थोड़ी देर में में इन्हे नग्न देखने वाला हु ये सोच कर hi मेरे लुंड में हलचल होने लगी. वो ऐसे hi बूत बानी कड़ी थी, शायद वो मेरी और से पहल का इंतजार कर रही थी. ये मेरे लिए भी आसान नहीं था. पता नहीं मेरे भाग्य में क्या लिखा हुआ था, लड़कीअ माँ नहीं बाण प् रही ऐसे किस्से मेरे सामने hi क्यों आ रहे थे. वैसे मेने एक अद्वेर्तिसेमेन्ट में सुना था की आज कल छे में से एक जोड़े को बच्चा न होने की प्रॉब्लम है. जिन्हे ऐसी प्रॉब्लम है वो तेसत्तुबे बेबी का सहारा ले रहे है. कई ऐसे है जो ये खर्चा नहीं उठा सकते या समाज के दर से वह नहीं जाते वो ऐसे बहार सम्बन्ध बनलेते है. ये शायद एक बहोत बड़ी वजह बन गयी है. खैर अभी तो मेरे सामने नाज़िआदिदी कड़ी थी. जब उन्होंने कुछ न कहा तो मेने hi कहा

शिव : दीदी एक हथरूमल है तो दीजिये.

नाज़िआदिदी : हुम्म्म. (उन्होंने वह ड्रावर में से निकला और मुझे दिया, जब हमारी नज़ारे मिली तो उन्होंने नज़ारे झुका ली, वो थोड़ी सेहमी हुई सी भी थी. में समाज शक्ति था की किसी भी अच्छी औरत के लिए ये आसान नहीं होता, वो नहीं चाहती की वो अपने पति के अलावा किसी और से सम्बन्ध बनाये, चाहे उन्हें खुसी मिले या न मिले, पर वो ऐसे अवैध सम्बन्ध से दूर hi रहती है, परिस्थितिया उन्हें मजबूर करती है. नाज़िआ ने देखा की शिव ने अपनी आंखे रुमाल से बंद करदी, वो कुछ पल शिव को देखती रही, वो ये देख रही थी की शिव ने उसकी खातिर अपनी आंखे बंद कर्ली ताकि उसे शर्म महसूस न हो, वैसे भी शिव पहली नज़र में hi अच्छा लगा था, अगर वो कुवारी होती तो शिव को अपना बॉयफ्रेंड बनाने की जरूर कोशिस करती. शिव की आवाज से उसकी विचारो की गाड़ी को ब्रेक लगी)

शिव : दीदी, आप तैयार हो?

नाज़िआ : (एक लम्बी साँस ली और अपने आप को मान से तैयार करने लगी) एक मिनट. (उसने अपने आप को संभाला और जा कर बिस्तर पर सीधी लेट गयी. ) आ jao.(Meri आँखों पर पट्टी बंधी थी, मुझे कुछ समाज नहीं आया, मेने हवामे हाथ इधर उधर घुमाया) में बिस्तर पर हु. (नाज़िआ को एक तरफ बहोत शर्म आ रही थी और दूसरी तरफ उसकी दिल की धड़कने बहोत तेज चल रही थी, उसके माथे पर पशीने की बुँदे भी नज़र आने लगी thi)(Jab मेने सुना की वो बिस्तर पर है तो मेने अपना पंत खोला, और अंडरवियर पहने हुए hi बिस्तर को धुंध कर उसके ऊपर चढ़ा, में हाथो से टटोल रहा था तो मेरा हाथ उनकी झंगवाले हिस्से को छू गया, मेरे छूने से वो कैंप गयी, मेने भी एक बार तो हाथ पीछे खिंच लिया. पर अब जो करना था वो करना hi था, मेने वापस अपना हाथ उनकी झंघ पर रक्खा, उनकी भरी हुई झंघ का एहसास होते hi मेरे अंदर हलचल होने लगी. मेने सिर्फ चेक करने के उद्देस्य से hi जंघको sehlaya)(Nazia ने फ़ौरन अपना मुँह अपने हाथ से बांध कर लिया वर्ण उसके मुँह से आवाज निकल जाती)

शिव : दीदी ये.

नाज़िआ: (नाज़िआ उसकी बात समाज गयी, शिव का इस्सर उसकी सलवार की और था, उसे उतरना तो था hi पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, उसने धीरे से कहा) तुम hi उतर दो.

शिव : ( में उतर तो देता पर नाडा ढूंढने के चक्कर में मेरे हाथ कही भी लग शक्ति थे) दीदी मेरी आंखे बंद है, मेरा हाथ इधर उधर लग गया तो?

नाज़िआ : (धीमी आवाज me)Kya फर्क पड़ेगा, वैसे भी जो हम करने जा रहे है उसके सामने ये क्या मैंने रखता है.( उनकी बात भी सही थी, मेने अपने हाथ को टटोलते हुए आगे बढ़ाया, मेरी आंखे बंद थी पर अपनी उंगलिओ के स्पर्श से में जैसे सब देख रहा था, जब मेरी उंगलिओ ने छूट के फुले हुए हिस्से को छुआ तो एक अजीब सी हलचल होने लगी, ये कोई पहली बार तो नहीं था पर नाज़िआ दीदी के साथ पहली बार था तो एक अजीब सी हलचल हो रही थी. में नदी को ढूंढते हुए अपने हाथ को और ऊपर ले गया, उनकी कमीज़ का निचला हिस्सा मेने महसूस किआ तो उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया (नाज़िआ अब मान से तैयार हो गयी थी, इस छुअन से उसके अंदर भी तरंगे उठने लगी थी, जैसे जैसे शिव का हाथ उसके श्री पर रेंग रहा था उसकी छूट गीली होने लगी थी, उसके मुँह से सिस्किअ निकलने को बेताब थी जिन्हे उसने बड़ी मुश्किल से हाथसे और होठो से दबा कर रक्खा tha)(Mere हाथ में नाडा आ गया, मेने उसका एक शिरा पकड़ा और उसे खिंच दिया, सलवार ढीली हो गयी थी, मेने पैरो की और से पकड़ते हुए उसे खिंचा तो वो निचे सरकने लगी, दीदी ने अपने आपको थोड़ा ऊपर उठा कर मेरी मदद की. उनकी क्या मनोस्थिति है ये में नहीं देख शक्ति था, तो मेने अपने काम पर ध्यान देना hi उचित समजा. वापस जब मेने अपने हाथ को रक्खा तो वो सीधे झंघ पर लगा, नंगी चमड़ी को छूटे hi मुझे जैसे करंट लगा, शरीर की गर्मी मेरी उंगलिओ पे महसूस हो रही थी, अब देखना था की उन्होंने पंतय पहनी है की नहीं, मेने धड़कते दिल से हाथ से टटोला तो मेरा हाथ छूट के फुले हुए हिस्से को छूने लगा. मेरा लुंड कड़क होने लगा था. छूट को छूने का लालच में रोक नहीं पाया और पूरी छूट को अपनी मुठी से दबाते हुए महसूस करने लगा. मुझे लगा की दीदी का श्री कैंप गया और ये भी लगा की वो आगे से थोड़ी हवा में उठ गयी पर उनके मुँह से कोई आवाज नहीं आ रही थी, जब मेने छूट को दबाया तो गीली पंतय से रास की एक दो बुँदे बिस्तर पर टपक गयी, पंतय की इस हालत को देखते हुए मुझे यकीं हो गया की दीदी गरम हो गयी है, हालत तो मेरी भी ख़राब थी, छूट की छुअन से मेरा लुंड झटके मर रहा था. मेने पैंटी को साइड से पकड़ा और उसे उतरने लगा, दीदी ने अपने भरी कूल्हे उठा कर फिर से मेरी मदद की. पंतय को पैरो से पूरी निकलडेने के बाद मेने अपनी अंडरवियर भी उतर दी. यहाँ ये सब सिर्फ बच्चे के लिए hi हो रहा था तो ज्यादा तो कुछ करना नहीं था. मेने दीदी के पैरो को फैलते हुए अपनी पोजीशन ली. छूट का जायजा लेना जरुरी था तो मेने अंगूठे से छूट को छुआ, जब मेने छूट को सहलाया तो छूट से बहते चिपचिपे रास से मेरा पूरा अंगूठा भीग गया. दीदी शायद बहोत ज्यादा गरम हो गयी thi.)(Shiv द्वारा उसकी नंगी छूट को सहलाने से नाज़िआ पागल होने लगी, आज कई महीनो के बाद कोई उसकी छूट को छू रहा था, चाहे वो कितनी भी शर्मा रही हो पर शरीर की ये जरुरत उभर आती hi है, उसका मान कर रहा था की वो जोर जोर से सिस्किअ ले पर उसे ऐसा करने में और ज्यादा शर्म आ रही थी, वो शिव को ये बताना नहीं चाहती थी की वो बहोत ज्यादा गर्म हो गयी है, अब जल्दी से वो कर जो करना है, पर वो ये सब कह नहीं शक्ति थी, जब शिव का अंगूठा उसकी छूट के छेड़ में घुसा तो उसके मुँह से उम्म्म उम्म्म की हलकी हलकी आवाजे निकलने लगी. उसकी शिव की और देखने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी, हलाकि शिव की आंखे बंद थी पर फिर भी उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो बस शिव के अंगूठे को अपनी छूट के छेड़ में आगे पीछे होते महसूस कर रही thi)(Me अंगूठे को थोड़ा अंदर तक दाल कर चेक कर रहा था की छूट कैसी है. मेरे अनुमान के मुताबिक hi वो खुली हुई थी, पर मेरे लुंड जितनी नहीं. पिछले अनुभवों से मुझे पता था की क्या होगा, पर करना तो था hi. मेने अंगूठा बहार निकला और अपने लुंड को पकड़ कर छूट के होठो पर घिसने लगा. छूट इतना रास छोड़ रही थी की कुछ hi पालो में लुंड का सूपड़ा और आगे का हिस्सा पूरा चिप छिपा हो गया. (अपनी छूट की फैंको के बिच इस गरम कड़क डंडे को महसूस कर के नाज़िआ की हालत ख़राब हो गयी थी, उसकी छूट इसको बहोत अच्छे से पहचानती थी, उसके स्पर्श से वो और ज्यादा पानी छोड़ने लगी, जैसे जैसे शिव अपने उस अंग को उसकी छूट पर घिस रहा था उसकी कमर में हलके हलके कम्पन सुरु हो गए थे, वो इस मेहमान को अपने अन्दर लेने के लिए मचल रही थी, पर शर्म की वजह से वो कह नहीं प् रही thi)Me समाज गया था की अब वो वक़्त आ गया है, पर फिर भी एक बार दीदी को पूछना जरुरी था.

शिव : दीदी, में आगे बधु?

नाज़िआदिदी : (एक बल न गवाते हुए उसने कह diya)Hmmmm. (शिव ने अपना वो अंग छूट के छेड़ पर टिका दिया, आनेवाले पालो को सोच कर hi उसकी मुट्ठी ने चद्दर को दबोच लिया, जैसे hi शिव ने अपना दबाव बढ़ाया वो बड़ा सा अंग उसकी मखमली सुरंग में अंदर उतरने लगा, उसे एहसास होने लगा की आनेवाला मेहमान बहोत बड़ा है, उसकी नाजुक सी सुरंग फैलने लगी, उसने अपने मुँह को जोर से दबा दिया. पर जैसे जैसे वो अंदर जा रहा था उसके लिए सहना कठिन होता जा रहा था, जब शिव ने एक धक्का लगाया तो अपने आप को रोक नहीं पायी, दूसरे हाथ से भी उसने चद्दर को मुट्ठी में भर लिया, उसका शरीर हवामे अपने आप hi उठ गया और मुँह से निकल hi पड़ा) ामीइइइइइइइ.

शिव : (उनकी आवाज से में रुक गया, दीदी की सांसे मुझे सुनाई दे रही थी, वो जोर जोर से सांसे लेते हुए हांफ रही थी) आप ठीक हो दीदी. (उनकी और से कोई जवाब नहीं aaya)Didi....

नाज़िआदिदी : (जोर से साँस छोड़ते hue)hmmmmmmm में हहहहहह ठीक हूउउउउ. (में उनकी हालत समाज रहा था पर में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति था, मेने अपने अप्प को थोड़ा एडजस्ट करते हुए उनके ऊपर हो गया, उनके दोनों तरफ हाथ रखते हुए, में लुंड को आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने laga)(Nazia ने शिव को देखा, उसके चेहरे पर दर्द की लकीरे थी, उसने शिव की कलाई को थम लिया, शिव का वो अंग उसकी छूट में अंदर बहार हो रहा था, वो लगातार शिव के चेहरे को hi देखे जा रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की शिव उसकी ऐसी हालत करेगा, उसने एक बार थोड़ा ऊपर उठ कर पहलीबार लुंड को देखा, उसकी नाजुक सु छूट को फैलते हुए वो अंदर बहार हो रहा था, उसने देखा की अभी तो सिर्फ आधा hi गया है, वो आश्चर्य से शिव को देखने लगी, शिव कोई जल्द बजी नहीं कर रहा था, वो आहिस्ता आहिस्ता अपने लुंड को उसकी छूट में आगे पीछे कर रहा था, थोड़ी hi देर में उसके अंदर मज़े की तरंगे उठने लगी, उसका मान कर रहा था की वो शिव के होठो को चुम ले पर शर्म के मरे वो ये नहीं कर शक्ति थी. शिव काफी देर तक उसको आहिस्ता आहिस्ता से कर रहा था. अब उसका मज़ा बढ़ने लगा था, वो बड़ा अंग उसकी अंदरूनी दिवलो को अच्छे से रगड़ रहा था, अपनी छूट के अंदर एक जगह उसे अजीब सा आनंद आ रहा था, और शिव का बड़ा सा सूपड़ा उसकी उस जगह को जबरदस्त तरीके से रगड़ रहा था. वो पशीने से भीग गयी थी, उसकी कमर अपने आप hi शिव का साथ देने लगी थी, वो देख तो शिव को रही थी पर अपनी आहे अपनी सिसकीओ को एक हाथ से अपने मुँह में दफ़न कर रही थी. पर ये ज्यादा देर न चला, उसको लगने लगा की वो चरम की और बढ़ रही है, वो अपनी कमर को जल्दी जल्दी आएगी पीछे करने लगी, शायद शिव भी ये समाज गया था, उसकी भी स्पीड बढ़ रही थी, उसकी कमर तेजी से चल रही थी साथ में शिव के धक्के भी तेजी से चल रहे थे, उसने अपने पैरो को शिव के कूल्हों पर लपेट दिया, उसे बहोत शर्म आ रही थी पर वो इसमें कुछ नहीं कर शक्ति थी. वो अपने पेअर से शिव को अपनी और खींचने लगी.) अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह जल्दी अह्ह्ह्हह जल्दी शह्ह्ह्ह (वो अपने शिर को गद्दे पर घिस रही थी, उसका मान कर रहा था की शिव उसके स्तन को दबाये पर वो कह नहीं प् रही थी) उसने खुद hi एक स्तन को थम लिया और उसे दबाने लगी. आखिर कर वो पल ाही गया और वो झटके कहते हुए झड़ने लगी, उसने शिव को कमर से पकड़ लिया और अपने हाथ और पेअर से उसे अपने ऊपर पूरी तरह खिंच लिया, ऐसा करने से शिव का लुंड जड़ तक उसके अंदर समां गया तू उसकी बच्चेदानी के मुहाने जा टकराया, ये पहलीबार हो रहा था, ये अजीबसा एहसास उसे पागल किये जा रहा था, शिव भी उसकी भावनाओ को समझते हुए निचे झुक गया तो नाज़िआ ने उसे अपनी बाहोंमे कास लिया. उसने शिव को इतनी शख्ती से जकड लिया था जैसे वो कही भागजानेवाला हो. थोड़ी देर वो ऐसे hi लेती रही, शिव भी शांत था, थोड़ी बार जब उसे एहसास हुआ की उसने क्या किआ है तो उसे शर्म आने लगी, उसकी पकड़ शिव के शरीर से ढीली होती गयी, जैसे hi उसने पकड़ ढीली की शिव ऊपर उठने लगा, वो जानती थी की शिव के चेहरे पर पट्टी बंधी है पर फिर भी उसे बहोत शर्म आने लगी, वो कनखियों से शिव को देखने लगी, शिव के चेहरे की मुस्कान देख उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया, शर्म तो आ रही थी पर फिर भी उसके चेहरे पर मुस्कान आ hi गयी. वो बहोत कुछ कहना चाहती थी पर अभी भी एक दिवार उसे रोक रही थी.)

फिर से शिव के धक्के हलके हलके चालू हो गए, अब शिव का वो बड़ा सा अंग उसकी छूट के आखरी छोर से टकरा रहा था, दर्द था पर ये आनंद वो पहलीबार महसूस कर रही थी, अपनी बच्चेदानी के मुख पर हो रही ठोकर उसके अंदर एक नयी ऊर्जा भर रही थी. अब उसे यकीं हो गया था की वो जरूर माँ बनेगी, उसके अंदर hi एक सकारात्मक ऊर्जा उठ रही थी. उसे शिव पर इतना प्यार आ रहा था की उसका दिल कर रहा था की वो उसको चुम कर कहना चाहती थी की उसे कितना मज़ा आ रहा है, वो बेबसी से उसके प्यारे से चेहरे को निहार रही थी, उसके धक्के से कभी कभी उसके चेहरे पर शिकन आ जाती थी पर वो दर्द भी उसे प्यारा लग रहा था, जब शिव की रफ़्तार तेज होने लगी तो उसे थोड़ा दर्द होने लगा पर वो कुछ नहीं बोली, एक बार फिर वो चरम पर पहुंचने वाली थी, शिव के तेज धक्को से वो पूरी हिल रही थी और साथ में पलंग भी आवाज करने लगा था. शिव के द्वारा हो रही अपनी ऐसी हालत उसे और ज्यादा पसंद आ रही थी, वो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी अपनी सिस्किअ रोकने का प्रयास कर रही थी, तेज दकको के साथ जब शिव उसके ऊपर झुका तो वो समाज गयी की शिव भी छूटने वाला है तो उसने उसे अपनी बाहोंमे भर लिया और अपने पैरो से उसके कूल्हों को दबा दिया, गरम गरम तरल उसकी बच्चे दानी के मुख पर अपनी बौछार करने लगा, सचमे ऐसा एहसास वो जीवन में पहली बार अनुभव कर रही थी. वो आंखे बंद किये शिव से पूरी तरह लिपट गयी, सिर्फ दोनों की सांसे कमरे में गूंज रही थी. शिव ने भी छूटने की कोशिस नहीं की, वो भी जनता था की अगर वो खड़ा हुआ तो लुंड बहार निकल जायेगा और वीर्य बहार बह जायेगा. तो वो भी वैसे hi रहा. थोड़ी देर बाद उन्हें दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी.

वो दोनों ऐसी खुमारी में थे की पहले तो लगा की ये वहम है, पर जब नाज़िआ के नाम की आवाज सुनाई दी तो दोनों चौंक गए. नाज़िआ पहचान गयी की ये उसकी ामी की आवाज है. वो लोग इतना जल्दी कैसे आ गए इस बात से वो हैरान थी साथ में उसे दर भी लगने लगा क्यों की उसके अब्बू भी होंगे और संयम भी होगी.

नाज़िआदिदी : (दर से) शिव, लगता है अम्मी, अब्बू और संयम आ गए है.

शिव : (मुझे भी दर लगने लगा, क्यों की इस से मेरे और संयम के सम्बन्ध तो बिगड़ेंगे साथ में नाज़िआदिदी की बदनामी होगी) अब क्या होगा?

नाज़िआदिदी : जल्दी से कपडे पहनो.

हम दोनों ने जल्दी से कपडे पहने, नाज़िआ ऊपर बानी खिड़की से निचे देखने लगी. उसने देखा की निचे उसकी अम्मी अकेली कड़ी है, अब्बू और संयम नहीं दिख रही है.

नाज़िआ : एक मिनट अम्मी, अभी आयी. (उसकी अम्मी ने ऊपर देखा, हम दोनों फटाफट निचे आये और नाज़िआदिदी ने दरवाजा खोला. आंटी अंदर आयी पर मुझे देख कर वो चौकी)

नाज़िआदिदी : (अपनी ामी के बदलते भाव देख कर वो बोल padi)Ammi, शिव, संयम से मिलने आया tha(Naziadidi की ज़बान लड़खड़ा रही थी) Wo..wo शनिवार को स्कूल गया नहीं था न तो वो पूछने आया था, संयम थी नहीं तो हम ऊपर संयम की बुक्स देख रहे थे. (मेने भी जैसे तैसे है में है मिलायी) संयम कहा है अम्मी?

आंटी : (थोड़े रूखे स्वर में) वो दोनों कुछ सामान लेने के लिए दुकान गए है, अभी आ जायेंगे.

शिव : अभी काफी देर हो गयी है, संयम से में कल स्कूल में मिल लूंगा.

नाज़िआदिदी : है ठीक है. (आंटी कुछ बोल नहीं रही थी, अक्सर वो बड़े प्यार से मिलती है मुज से)

शिव : ठीक है, में चलता हु दीदी, bye आंटी, bye दीदी. (में वह से निकल गया)

नाज़िआदिदी : (वो थोड़ी असहज महसूस कर रही थी) अम्मी में आपके लिए पानी लती हु.

अम्मी : क्या चल रहा है ये?

नाज़िआ : क्या कहना चाहती हो अम्मी?

अम्मी : तू क्या मुझे बेवकूफ समझती है? में अंधी नहीं हु, मेने तुज से कही ज्यादा दुनिया देखि है, क्या मुझे समाज नहीं आ रहा. तुजे शर्म नहीं आयी ये सब करते हुए, और उस कमीनो को इतनी इज्जत दी, मेने बीटा कहा उसे, वो भी बेगैरत निकला, आने दे तेरे आबू को, बेशरम कही की. (नाज़िआ की आँखों से आंसू निकलने लगे)

अँधेरा होने को आया था, में घर पहुंच गया. वैसे तो कुछ हुआ नहीं था, पर मुझे ऐसा लगा की शायद आंटी को शक हुआ था. पता नहीं मेरे जाने के बाद वह क्या हुआ होगा. बार बार मेरा दिमाग वही सोच रहा था. अभी खाने में टाइम था तो में लकडिया काटने चला गया.

मैंने लकडिया काट hi रहता की रंजन भी आ गयी. लकडिया काटने के बाद रंजन मेरे सामने देखने लगी, पर मेरा दिमाग अभी भी नाज़िआदिदी के वह hi अटका हुआ था, क्यों की मुझे लग रहा था की कुछ तो गड़बड़ है. रंजन को बुरा लग रहा था पर वो समाज रही थी की शिव कुछ उलझन में है तो उसने भी ज्यादा दबाव नहीं डाला. हमने खाना खाया और रूम में आ गए. रंजन और विणा दूसरे कमरे में सोती थी पर हम चारो अभी भी बच्छोवाले कमरे में hi सो रहे थे. अब मुझे भी लग रहा था की मुझे अपने रूम में सोना चाहिए क्यों की अब तो सब ठीक हो चूका था.

शिव : (मेने लतादिदी से कहा, क्या हम अपने रूम में सो जाये?

लतादिदी : (उन्होंने मेरी और देखा, फिर सरिता और गायत्री की और देखा) अगर तुम्हे वह सोना है तो तुम सो जाओ.

शिव : आप नहीं आएँगी?

लतादिदी : (उसे थोड़ी झझक थी, सरितासे नहीं पर गायत्री से, और वैसे भी ऐसे अचानक जाना भी उसे ठीक नहीं लग रहा tha)Nahi, जा तू सो जा.

शिव : ठीक है didi.(Me वह से अपने रूम में आ गया, गद्दा बिछा कर में लेट गया, एक घंटा बिता होगा की मुझे लगा मेरे साथ में कोई है तो मेरी आंख खुल गयी, मेने देखा तो लतादिदी थी, मेने मुस्कुराते हुए उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया) क्यों मन कर रही थी न.

लतादिदी : (शरमाते हुए) मुझे शर्म आ रही थी, अभी भी सोने नहीं आयी हु, बस थोड़ी देर के लिए आयी हु.

शिव : पहले भी तो हम साथमे hi रहते थे न, तो फिर कैसी शर्म.

लतादिदी : (शरमाते हुए) जब हमारे बिछ कुछ नहीं था तो कोई शर्म नहीं आती थी पर अब शर्म आती है.

शिव : तो फिर अब क्यों आ गयी?

लतादिदी : (मेरी आँखों में देखते hue)Tu आसपास हो और तेरे गले न लागु तो दिल बेचैन रहता है.

शिव : तो आपके बेचैन दिल को अब करार आ गया?

लतादिदी : वो तो तेरी बाहोंमे आते hi आ गया.

शिव : पर अब मेरा दिल बेक़रार हो रहा है.

लतादिदी : (वो जानती थी फिर भी उसने मुस्कुरा कर puchha)Wo क्यों?

शिव : Batau?(Latadidi ने मुस्कुराकर है में गर्दन हिलायी, मेने उनके नाजुक से प्यारे होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उस मीठे रास का रसपान करने लगा, थोड़ी hi देर में हम दोनों निर्वस्त्र थे. में सब भूल गया और दीदी के प्यार में दुब गया. दुसरो के मुकाबले दीदी का शरीर छोटा था पर वो मुझे और ज्यादा उत्तेजित करता था, में उनके स्तन को निचोड़ते हुए उन्हें पिने लगा. हमदोनो का ये प्यार करीब दो घंटे तक चला. फिर दीदी अपने रूम में लौट गयी. में शुकुन की नींद सो गया.

बिना रात को अपने घर पहुंच गयी थी, वो भी शिव को याद कर रही थी और बेचैनी में करवाते बदल रही थी. अब शायद उसे पता था की वो माँ नहीं बन पायेगी, इस वजह से भी वो ज्यादा बेचैन थी. जैसे तैसे वो नींद की वदीओ में खो गयी.

सुबह उठ कर गयम के लिए निकल गया. जूही मैडम के घर पंहुचा तो घर का दरवाजा खुला था. उन्होंने मेरे लिए hi खुला छोड़ दिया था. मुझे उस जलपरी की याद आ गयी जो अक्सर मुझे देखने को मिलती थी, पर भी वो शायद मेरे सामने वैसे आना नहीं चाहती थी. में सोफे पर बेथ गया, थोड़ी देर बाद वो तैयार हो कर आ गयी और मुझे दूध दिया. मेने उन्हें देखा तो वो निचे जमीं को देखते हुए दूध पि रही थी.

शिव : (डच ख़तम कर के) क्या सोच रही हो?

जूही : कुछ नहीं, वैसे तीन दिन बाद तुम्हारे इंटरस्कूल की कॉम्पिटिओं है. उसके बाद शायद तुम्हे कुछ दिनों के लिए बहार भी जाना पड़े.

शिव : कहा?

जूही : कहा उसका तो बाद में पता चलेगा, पर तुम्हारी ट्रेनिंग के लिए, वैसे भी हमे पता है की ये स्कूल लेवल तो तुम आराम से पूरा कर लोगे. उसके बाद डिस्ट लेवल और स्टेट लेवल के लिए तुम्हे तैयार होना पड़ेगा.

शिव : ठीक है मैडम

हम दोनों वह से गयम चले गए, काव्य मैडम से भी मिला, वो भी कसरत के दुआरण मेरे पास आ जाती थी, जहा में कसरत करता वो भी वही आ जाती. जूही दूर से इन दोनों को देख रही थी. गयम ख़तम कर के में घर चला गया. तैयार हो कर में स्कूल के लिए निकल गया. जब में संयम के घर वाले मोड़ पर पंहुचा तो मुझे नाज़िआदिदी अकेली कड़ी दिखी.





संयम, वैस्वी के साथ चली गयी थी. में उनके पास पहुंच गया.
 
अपडेट 81

जब ने स्कूल जा रहा था तो मेने देखा की नाज़िआदिदी कड़ी थी, में उनके पास जा कर रुक गया. वो मुझे देखने लगी और मुस्कुराने लगी, उनकी मुस्कराहट में भी एक शर्म थी. मुझे लगा था की उनकी अम्मी मुझे देख कर वह नाराज़ हुई थी, पर दीदी के चेहरे से लग रहा था की जैसे सब सामान्य है.

शिव : कैसी हो दीदी?

नाज़िआदिदी : अच्छी हु.

शिव : दीदी सब ठीक है न?

नाज़िआदिदी : है सब ठीक है.

शिव : मेरा मतलब है की कल आंटी मुझे नाराज़ दिख रही थी.

नाज़िआदिदी : है, पर अब सब ठीक है.

शिव : क्या उनको पता नहीं चला था?

नाज़िआदिदी : (कल हुए संसर्ग के बारे में बात निकलते hi वो और शर्माने लगी, उन्होंने नज़ारे ज़ुका कर कहा) बाद में बात करेंगे, अभी तुम्हे स्कूल के लिए लेट हो रहा होगा न? कल थोड़ा जल्दी आ शक्ति हो?

शिव : जल्दी मतलब?

नाज़िआदिदी : (बोलते बोलते hi उसे बहोत शर्म आ रही थी) एक घंटा पहले.

शिव : कहा दीदी?

नाज़िआदिदी : यही.

शिव : (मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा tha)Aa जाऊंगा, फिर?

नाज़िआदिदी : (उन्होंने एक बार नज़ारे उठायी पर शर्म से फिर झुका li)Fir घर चलेंगे.

शिव : (अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा tha)Aapke घर? उस वक़्त तो संयम भी होगी और आंटी भी?

नाज़िआदिदी : वो सब में देख लुंगी, तुम आओगे न?

शिव : ठीक है दीदी, में आ जाऊंगा. Bye, में चलता हु.

नाज़िआदिदी : Bye, में यही मिलूंगी.

शिव : ठीक hai(Mene दौड़ लगा दी, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, कल जो हुआ उसके बाद तो दीदी की उलझने बढ़ जनि चाहिए थी, मुझे यकीं था की आंटी को जरूर शक हुआ था, क्यों की उनका मेरे प्रति बर्ताव बता रहा था की वो मेरे यहाँ होने का मतलब समाज रही थी, फिर दीदी इतनी शांत कैसे थी, ऊपर से वो मुझे अपने घर वापस बुला रही थी, और वो भी उस वक़्त जब संयम भी घर पर हो शक्ति है क्यों की तो स्कूल के लिए तैयार होने का टाइम होता है, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था. में दौड़ते हुए स्कूल पहुंच गया)

जब में क्लास के दरवाजे पर पंहुचा तो बिना मैडम भी क्लास के दरवाजे तक hi पहुंची थी, में दौड़ते हुए आ रहा था तो वो मुझे देख कर रुक गयी. मेने मुस्कुराकर गुड मॉर्निंग मैडम कहा तो उन्होंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया. में सीधे अपनी जगह जा पंहुचा. फिर क्लास सुरु हो गयी, रेसस्स में जब में और मेरे दोस्त बाथरूम से हो कर वापस आ रहे थे तो हमे संयम और वैस्वी सामने मिले. आज मेने संयम को सामने से Hi कहा तो उसने मुस्कुराकर जवाब दिया. वैस्वी दूसरी और देखने लगी तो मेने उसे hi नहीं कहा. मेरे दोस्तों से भी संयम ने hi कहा, फिर हम गार्डन में चले गए, और वो लोग बाथरूम की और चली गयी. आज फिर मुद्दा था सेक्स.

महेश : क्यों बे सेल, फिर तेरा कुछ हुआ की नहीं उस दीदी के साथ?

हर्ष : यार वो बार बार मुझे बुलाती है, एक दो बार तो उन्होंने मेरा लुंड भी पकड़ लिया था, पर मुझे बहोत दर लगता है.

महेश : इसमें डरनेवाली कोनसी बात है, अगर वो सामने से सब कर रही है तो फिर तुजे क्या प्रॉब्लम है.

हर्ष : पता नहीं यार, दार तो लगता है न. तुजे सब आसान लगता है तो तू आजा.

महेश : क्या वो ऐसी है, किसी का भी ले लेगी?

हर्ष : नहीं यार, वो वैसी तो नहीं है, मेने कभी उनके बारे में गलत नहीं सुना, पर मुझे लगता है वो मान जाएगी, अभी कॉलेज में है, पर शायद उनको सेक्स करना है.

महेश : क्या कहता है शिव? चले क्या?

शिव : मुझे इसमें मात घसीटो, मुझे ऐसा कोई इंटरेस्ट नहीं है.

महेश : क्या घंटा इंटरेस्ट नहीं है, सीधे सीधे बोलना की तेरी फैट टी है.

शिव : तुजे जो समझना है समाज, पर मुझे इसमें मत घसीटो, तुम दोनों hi जाओ.

हर्ष : छोड़ न उसे, वो हमारा दोस्त hi नहीं है.

शिव : ये क्या बकवास कर रहा है, इसमें दोस्ती कहा से आ गयी?

हर्ष : दोस्त होता तो हमारा साथ देता, पर तू तो हमे अपना दोस्त मानता hi nahi(Harsh ने महेश को आंख मरी, महेश भी समाज गया, पर उनके ये इससरए मेरी नजर से न बच सके)

शिव : ये नौटंकी मात कर, मुझे सब समाज आ रहा है.

हर्ष : अगर सब समाज आ रहा है तो चल न.

शिव : मेने कहा न मुझे इन सब में कोई इंटरेस्ट नहीं है.

हर्ष : ठीक है, पर चल तो साही, तू कुछ मात करना.

शिव : में पक्का नहीं कह शक्ति पर देखता हु. काब जाना है?

हर्ष : संडे को, दोपहर में.

पता नहीं पर मेने है केहड़िया था, वैसे भी दोस्तों में ये सब तो चलता रहता है, मेने सोच लिया की संडे को में कोई भी बहाना बना दूंगा. शाम को में स्टेडियम गया और फिर वह से घर चला गया. दूसरे दिन गयम से लौट कर मेने दीदी को बताया की मुझे जल्दी जाना है. उन्होंने भी ज्यादा कुछ पूछा नहीं. में तैयार हुआ और बैग लेकर निकल गया. जब में संयम की गली के मोड पर पंहुचा तो वह कोई नहीं था. दीदी ने यही मिलने को कहा था तो वह से थोड़ी दुरी पर खड़ा हो गया. थोड़ी देर बाद मेने देखा की, संयम, नाज़िआदिदी और आंटी तीनो वह आये. मुझे समाज नहीं आया तो में थोड़ा साइड में हो गया ताकि वो मुझे देख न पाए, संयम ने यूनिफार्म पहन रक्खा था.. उन्होंने आसपास देखा और एक रिक्शा को बुलाया, संयम और आंटी उसमे बेथ गए और रिक्शा चली गयी, नाज़िआदिदी आसपास देखने लगी, जब रिक्शा दूर निकल गयी तो में नाज़िआदिदी के पास गया. मुझे देख कर वो मुस्कुरायी पर फिर शर्मा भी गयी.

नाज़िआदिदी : में घर जाती हु, तुम दो मिनट बाद आ जाना.

वो चली गयी, में दो मिनट बाद उनके घर की और निकल गया, दरवाजा खुला hi था तो में सीधा अंदर चला गया. वो दरवाजे के पास hi कड़ी थी तो उन्होंने दरवाजा बांध कर दिया. मेने उनको देखा तो वो थोड़ी घबराई थोड़ी शर्मायी हुई थी, वो नज़ारे मिलती और झुका लेती, दो तीन बार उन्होंने ऐसा किआ. मेरी भी हालत कुछ वैसी hi थी.

नाज़िआदिदी : (नज़ारे झुकाये, धीमी आवाज me)Betho, में पानी लती हु.

शिव : उसकी जरुरत नहीं, एक बात पुछु? (उन्होंने मेरी और देखा) संयम और आंटी कहा गयी?

नाज़िआदिदी : उन्हें बाजार में कुछ काम था तो वो दोनों गयी है. (नाज़िआ के सामने कल शिव के जाने के बाद जो हुआ था वो पूरा सामने आ गया)

शिव के जाने के बाद उसकी अम्मी उसे घर घर कर देख रही थी. नाज़िआ अपनी अम्मी से नज़ारे नहीं मिला प् रही थी, आखिर कर उसकी मम्मी ने गुस्से से कहा,

अम्मी : सच सच बता, शिव यहाँ क्यों आया था.

नाज़िआ : (हकलाते हुए) ममम मेने कहा न, वो स्कूल नहीं गया था तो संयम से मिलने आया था.

अम्मी : में बेवकूफ नहीं हु, तेरी और उसकी आँखों से मुझे पता चल रहा है की यहाँ क्या चल रहा था, तुजे शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए? (नाज़िआ अपने आप को संभल नहीं पायी और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे) छियई, में तुजे क्या समझती थी और तू क्या निकली, तेरे जिस्म की आग इतनी बढ़ गयी थी की तुजे ये सब करना पड़ा, और उस बेगैरत को तो आने दो में उसे ठीक करती हु, ये सब करने से पहले उसे इतना भी ख्याल नहीं आया की मेने उसे कितना प्यार और इज्जत दी थी.

नाज़िआ : (रट hue)Ammi, मुझे जो कहना है वो कह लो, उसे कुछ मात कहो, इसमें उसकी कोई गलती नहीं है, मेने hi उसे मजबूर किआ था.

अम्मी : अपनी हवस में तू इतनी अंधी हो गयी थी की इस घर में तू ये सब करने लगी, पता है तेरे अब्बू को पता चलेगा तो क्या होगा? एक तो वैसे भी तेरे तलाक को लेकर हम इतने परेशान है और ऊपर से तू ये सब... छियई, पैदा होते hi तू मर क्यों नहीं गयी, तुजे हमारी इज्जत का जरा भी ख्याल नहीं आया?

नाज़िआ : आप की इज्जत का ख्याल था तभी तो आज तक चुप थी, और मेने ये सब किआ ताकि अभी भी आपकी इज्जत बरक़रार रहे, मेने ये सब अपनी हवस मिटने या अपने जिस्म की आग बजाने के लिए नहीं किआ है, मेने ये सब किआ है ताकि में अपनी शादी को बचा शकु.

अम्मी : तू कहना क्या चाहती है, तुजे लगता है ये सब करके तू अपनी शादी बचा रही है, तुजे क्या लगता है की तू जो कुछ भी कहेगी में मान लुंगी, क्या तुजे में इतनी बेवकूफ दिखती हु.?

नाज़िआ : में जो कह रही हु सच कह रही हु, अगर इसमें जरा सा भी जूथ हो तो ऊपरवाला मुझे अभी के अभी मौत दे दे.

अम्मी : (वो गौर से अपनी बेटी को देखने लगी, वो अपनी बेटी को अच्छे से जानती थी, उसका चेहरा बता रहा था की वो जूथ नहीं बोल रही, पर अभी भी उसे समाज नहीं आ रहा था) तू कहना क्या चाहती है? जरा खुल कर बता.

नाज़िआ : अम्मी, में आप से जूथ नहीं कहूँगी, मेरी शादी टूट रही है क्यों की में माँ नहीं बन प् रही हु, मेने डॉक्टर से भी अपनी जाँच करवाई है, उन्होंने कहा की में बिलकुल ठीक हु, मुज में कोई कमी नहीं है, उन्होंने ये भी कहा की अपने पति को जाँच के लिए ले आओ. मेने उनसे बात करने की भी कोशिस की पर वो नहीं मने. आज आप लोग वह गए थे, आप को भी पता चल गया होगा की वो जल्द से जल्द ये शादी ख़तम करना चाहते है, में चाहती तो ये बात सबके सामने भी कह शक्ति थी की मुज में कोई खरभि नहीं है, खोट मेरे शौहर में है, पर उस से क्या होता, शादी तो फिर भी टूटनी hi थी. में कितने दिनों से परेशान थी और इसका हल धुंध रही थी, अचानक मुझे हल के रूप में शिव नजर आया, अगर में किसी तरह से माँ बन गयी तो साडी समस्या hi हल हो जाएगी.

अम्मी : तू पागल हो गयी है, तू इतने महीनो से यहाँ है और अगर तू ऐसे में माँ बानी तो क्या वो पागल है जो ये मानेगे. वो तो तुजे बदचलन कह के निकल देंगे.

नाज़िआ : मेने उसका भी हल धुँधलीया है, में उनसे कहूँगी की मेने मन्नत मणि है, और मुझे यकीं है की में माँ बन जाउंगी, में, मेरे सौहार को भी यहाँ आने के लिए मन लुंगी, उनसे कहूँगी की अगर इन दो महीनो में अगर में प्रेग्नेंट न हुई तो में खुद उन्हें तलाक दे दूंगी, में कैसे भी करके, हमारे इतने साल के रिश्ते का वास्ता दे कर भी उन्हें राज़ी कर लुंगी.

अम्मी : और अगर तू माँ नहीं बन पायी तो?

नाज़िआ : तो क्या फर्क पड़ना है अम्मी, वैसे भी तलाक हो रहा है, तब भी होगा.

अम्मी : पर मेरी बच्ची...

नाज़िआ : अगर आप के पास कोई उपाय है तो बताइये अम्मी.

अम्मी : पर अगर ये बात बहार आ गयी तो बहोत बदनामी होगी बेटी.

नाज़िआ : कुछ नहीं होगा अम्मी, मेने बहोत सोच समाज कर शिव को चुना है, आप भी उसे जानती हो, वो बहोत अच्छा है, वो कभी मेरी बदनामी नहीं करेगा, वो तो ये सब करने के लिए भी तैयार नहीं था, मेने बहोत मुश्किल से उसे मनाया है. और आप जानती है उसने मेरे साथ ये सब किआ तब भी उसने अपनी आँखों पर पट्टी बांधली थी. अम्मी प्लीज, मुज पर भरोसा करो, में किसी हवस में आ कर ये सब नहीं कर रही हु, में अपनी शादी और इस घर की इज्जत बचने के लिए ये सब कर रही हु.

अम्मी : ये सब कब से चल रहा है?

नाज़िआ : अम्मी आज पहली बार hi हुआ है, और ये सही समय भी है, डॉक्टर ने जो समय बताया था उसके मुताबित hi हुआ है, आज अचानक hi ये सब हो गया, इससे आप उपरवाले की मर्जी भी कह शक्ति है, क्यों की जैसे सब उसने hi सहूलियत करवा दी थी. अगर इस हफ्ते में शिव के साथ रहूंगी तो मुझे यकीं है अम्मी में जरूर माँ बन जोगी. प्लीज अम्मी मुझे मुआफ कर दो, मेने ये सब, सब की भलाई के लिए hi किआ है.

अम्मी : (अपनी दुखियारी बेटी के लिए उसने अपनी बहे फैला दी, नाज़िआ दौड़ते हुए अपनी अम्मी के गले लग गयी) मेरी बच्ची. (दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे)

शिव : Didi....kya सोच रही ho(Shiv की आवाज सुन करो वो वापस वर्तमान में आ गयी)

नाज़िआदिदी : शिव, तुम उनकी चिंता छोडो, वो अभी वापस नहीं आएगी, वो संयम को स्कूल छोड़ कर hi आएगी.

Shiv:(Ab में क्या पूछ ता, वैसे भी उसका कोई मतलब नहीं था, में जनता था की उन्होंने क्यों बुलाया है तो फिर मेने उसी बात पर अपना ध्यान केंद्रित किआ) ऊपर चले? (उन्होंने मेरी और देखा और शर्मा कर अपनी नज़ारे झुका ली, उन्होंने सिर्फ है में गर्दन हिलायी, में सीढ़ियों की तरफ मुद गया और ऊपर जाने लगा, वो भी मेरे पीछे पीछे ऊपर आ गयी, फिर से हम दोनों उसी कमरे में खड़े थे, )दीदी एक हाथ रुमाल देना. (मेने पिछली बार भी अपनी आंखे बंद कर दी थी तो मेने रुमाल माँगा, वो कुछ नहीं बोली पर रुमाल लेने भी नहीं gayi)Kya हुआ दीदी, रुमाल दो न.

नाज़िआदिदी : (हिचकिचाते हुए, धीमी आवाज में) उसकी जरुरत नहीं है. (में उन्हें आश्चर्य से देख रहा था, उन्होंने एक बार मेरी और देखा, फिर नज़ारे झुकाते हुए आगे बढ़ी और मेरे शाइन से लग गयी) ऐसे मात देखो मुझे शर्म आती है.

शिव : (वो मेरे गले लगी तो मेने भी उन्हें बहो में भर liya)Issiliye तो मेने रुमाल माँगा.

नाज़िआदिदी : (उसे शर्म भी आ रही थी और मुस्कुरा भी रही थी) उसकी जरुरत नहीं है.

शिव : अप्पको शर्म नहीं आएगी?

नाज़िआदिदी : (उसके शाइन की गर्मी को महसूस करते हुए) आएगी, पर ... (थोड़ा रुक कर) में चाहती हु, तुम मुझे dekho.(Mene उनका चेहरा ऊपर उठाया तो वो मेरी आँखों में देखने लगी, वो मेरी आँखों में ऐसे देख रही थी जैसे कुछ धुंध रही हो)

शिव : क्या देख रही है?

नाज़िआदिदी : मेरी मज़बूरी के चलते मेने तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर दी न.

शिव : (मुस्कुराते हुए) है, थोड़ी सी.

नाज़िआदिदी : (वो मुझसे दूर हुई और बिस्तर पर बेथ गयी, अपनी नज़ारे jhukaye)Muje माफ़ कर दो शिव, मेने अपनी मुसीबतो को दूर करने के लिए तुम्हारा इस्तेमाल किआ, में बहोत बुरी हु न.

शिव : (मुस्कुराते हुए) में मज़ाक कर रहा था.

नाज़िआदिदी : में जानती हु शिव, तुम अपनी हमउम्र, खूबसूरत लड़की से प्यार करने की सोच रहे होंगे, और मेने तुम्हे मेरे साथ ये सब काने के लिए मज़बूर किआ, प्लीज मुझे माफ़ कर देना.

शिव : (अब में इन्हे क्या बताता, की मेरे साथ क्या क्या हो रहा है) आप फ़िक्र मात करो, है मुझे हमउम्र नहीं मिली पर खूबसूरत तो मिली hi है.

नाज़िआदिदी : (शिव की बातो से उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गयी, उसने शिव की और देखा) Sach....(Mene है में गर्दन हिलाये तो उन्होंने मेरे होठो को चुम लिया)

होठो को थोड़ी देर चूमने के बाद उनकी सांसे तेज हो गयी, मेरे होठो को अच्छे से चूमने के बाद उन्होंने किश तोड़ी और मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, मेने फिर से उनके होठो को चूमते हुए उन्हें बिस्तर पर लेता दिया, वो भी मेरे होठो को चूमते हुए मुझसे चिपकने लगी. कल के मुकाबले आज वो कुछ और hi थी, कल वो मुझे अपने आप को देखने भी नहीं दे रही थी और आज वो सामने से मुझे चूमे जा रही थी, मेने भी उन्हें चूमते हुए एक हाथ उनके बड़े स्तन पर रख दिया. मेरे स्तन दबाने से वो और तीव्रता से मुझे चूमने लगी, जैसे hi मेने अपनी जीभ उनके मुँह में घुसाई तो वो उसे चूसने लगी. उनके गरम गरम मुँह का स्वाद गजब का था. थोड़ी देर किश के बाद में थोड़ा ऊपर हुआ और हलके हलके उनके स्तन को दबाते हुए सहलाने लगा, वो मेरी आँखों में hi देख रही थी. में थोड़ा ऊपर हुआ और उन्हें पलट दिया, वो अब पेट के बल थी, मेने उनके पीठ पर सहलाया तो वो मचलने लगी, में अपने हाथ को निचे उनके कूल्हों पर ले गया, भरे हुए कूल्हों मो में मसलने लगा तो उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी. में कूल्हों को सहलाते हुए उनकी गोलाईयों से खेलने लगा.

शिव : दीदी, आपके ये बहोत ला जवाब है, (मेरे ऐसा कहने से वो मुस्कुराते हुए शर्माने लगी, मेने उनकी कुटरी की ज़िप को सरकाया और निचला शिरा पकड़ते हुए उसे ऊपर की और से निकलने की कोसिस करने लगा पर वो लेती थी तो ज्यादा ऊपर न हुआ. जब उन्हें लगा की वो ऐसे नहीं निकलेगा तो वो बिस्तर पर बेथ गयी, मेने कुर्ती को ऊपर की और से निकलने लगा तो उन्होंने अपने हाथ उठा कर मुझे सहायता की, कुर्ती को निकल कर मेने साइड में रक्खा और अपने दोनों हाथो से उनके उन्नत भरे हुए स्तनों को थम लिया, ब्रा में कैद आधे से ज्यादा नंगे चुके मेरे हाथो में समां नहीं रहे थे, में उन्हें मसलने लगा तो उन्होंने मेरे साइन पर अपना शिर टिका दिया)

नाज़िआदिदी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (में पीछे से उनके गले को चूमते हुए उनके स्तन को दबा रहा था, वो मेरी झंघ पर अपना हाथ रख कर उसे सेहला रही थी, में एक हाथ को निचे ले गया और उनकी छूट को सलवार के ऊपर से hi सहलाने लगा, उन्होंने अपने पेअर फैला diye)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव shhhhhh(Meri उंगलिओ पर में उनकी छूट के होठो को महसूस कर रहा था, जैसे जैसे छूट को सहलाते हुए में दबा रहा था तो वो जोर जोर से सिस्किअ ले रही thi.)(Nazia बहोत गर्म हो गयी थी, ऊपर से शिव को जाना भी था, उसने खुद अपनी सलवार का नाडा खोद दिया और अपनी सलवार को उतरने lagi)(Unka उतावलापन देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, जब उन्होंने मुझे देखा तो मेरी मुस्कान देख कर वो शर्मा गयी. वो अब ब्रा और पंतय में थी, मेने भी अपने कपडे उतरदिये और सिर्फ अंडरवियर में आ गया, वो घुटने मोड़ कर बैठी थी, वो दूसरी और मुँह करके बैठी थी, उनकी पूरी पीठ नंगी थी सिवाय ब्रा की पत्तिओ के, वो काफी गोरी थी तो ये नज़ारा बहोत आकर्षक लग रहा था. मेने उनकी पीठ पर हाथ फेरा तो वो और सिमटने लगी, मेने उनकी पीठ को चूमा तो वो सिस्किअ लेने लगी, मेने उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को निकलने लगा, वो थोड़ी सीधी हुई तो मेने ब्रा को कंधो से सरका दिया, अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी, मेने हाथ को आगे ले जाते हुए उनके उभारो को थम लिया और गर्दन और पीठ को चाटने लगा, वो गर्म जिस्म और पिघलने लगा, मेने उन्हें बिस्तर पर लेटाया तो वो दूसरी और मुँह कर के लेट गयी, मेरे सामने ऊपर की और उठे हुए उनके स्तन थे, नरम पेट और पंतय में लेती वो बहोत कामुक लग रही थी. जैसे hi मेने उनके नंगे स्तन को सहलाया तो उन्होंने चद्दर को मुठी में पकड़ liya.)Shhhhhhhh उम्मम्मम्म shhhhhh(Me उनके निप्पल से खेलते हुए एक हाथ को पंतय पर ले गया और उनकी छूट के उभरे हुए होठो को दबोचने लगा, पहले तो उन्होंने अपनी झंघे आपसमे सताने की कोशिस की पर जैसे जैसे में छूट को दबोच रहा था उनकी झंघे खुलने लगी, मेने उनका एक हाथ पकड़ कर अपने कड़क लैंड पर ले गया, उन्होंने एक बार मेरी और देखा फिर वापस अपना चेहरा दूसरी और कर लिया. वो मेरे लुंड को दबाते हुए अंडरवियर के ऊपर से hi सहलाने लगी.)

शिव : दीदी, मेरी और देखो. (उन्होंने मेरी और देखा, वो मेरी आँखों में देखने lagi)Apko अच्छा लग रहा है? (वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे jhukali)Kahona दीदी, मेरा ऐसे छूना आपको अच्छा लग रहा है?

नाज़िआदिदी : (मेरी और देखे बिना) Haaa,(Mene पंतय के अंदर हाथ दाल कर उनकी छूट को dabocha)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : दीदी ये बहोत रास बहा रही hai(Wo शर्मा के मुस्कुराने लगी) में आपकी पंतय उतर दू? (उन्होंने बिना मेरी और देखे है में इस्सर किआ. अपने पेअर के अंगूठे को उनकी पंतय में फसाया और उसे निचे की और खिसकने लगा, उन्होंने अपनी कमर उठाकर उसे उतरने में मदद की, वो अब पूरी नंगी थी. उनके फुले हुए होठो पर मुझे झट के बाल दिख रहे थे, मेने हाथ बढ़ा कर उनके जातक बालो को शलया, उनकी झंघ पर हाथ लेजाते हुए उसे फ़ैलाने लगा तो उन्होंने खुद उसे फैला दिया, झंघ को सहलाते हुए में हाथ को छूट तक ले गया और छूट के होठो को फैलते हुए दरार को सहलाया तो छूट रास पूरी छूट पर फैलने लगा) दीदी, मेरी और देखो.

नाज़िआदिदी : (आवाज पूरी मादकता से लिप्त thi)Muuuje शर्म आआ रही है शीइइइइव, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : मेरी और देखो दीदी. (उन्होंने आहिस्ता से अपना शिर मेरी और घुमाया और मुझे देखने लगी) आपको शर्म आ रही है तो में फिर से अपनी आंखे बंद कर दू?

नाज़िआदिदी : नहीं शिव, में चाहती हु की तुम मुझे देखो.

शिव : वो क्यों दीदी, आपको तो शर्म आ रही है न?

नाज़िआदिदी : शर्म तो आ रही है, पर मुझे अच्छा लग रहा है की तुम मुझे ऐसे देख रहे हो. मुझे ऐसे देखना तुम्हे कैसा लग रहा है?

शिव : आप सच में कमल हो दीदी, आप ऐसे बहोत ज्यादा कामुक लग रही हो, सॉरी मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए पर आपका शरीर बहोत खूबसूरत है.

नाज़िआदिदी : जब मेने तुम्हे, अपने शरीर को देखने का उस से खेलने का हक़ दिया है तो फिर तुम्हारी जो मर्ज़ी आये वो कर शक्ति हो.

शिव : अगर में (छूट की और इस्सर कर ke)aapki उस जगाय को, चूमना चहु तो?

नाज़िआदिदी : वो जगह गन्दी होती है शिव, वैसे मैंने सुना तो है की लोग ऐसा करते है पर उनको ये सब पसंद नहीं है तो उन्होंने कभी नहीं किआ.

शिव : पर मुझे तो आपमें कुछ भी गन्दा नहीं लगता. क्या में करू? (नाज़िआ की भी बहोत इच्छा थी तो उन्होंने है में शिर हिला दिया)

नाज़िआदिदी : (वो शिव को देख रही थी, वो उसके पेअर फैलते हुए उसकी छूट के सामने झुक गया, आज पहली बार कोई उसकी छूट को इतनी नज़दीक से देख रहा था, एक और उसे शर्म आ रही थी पर दूसरी और इस अनुभव से उसे बहोत कुछ हो रहा था, शिव ने जब उसकी छूट के होठो को फैला कर देखा तो उसे अजीब सी खुसी महसूस हुई, उसे शर्म तो बहोत आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को छू कर फैला कर देख रहा था उसकी छूट से निकलते रास को वो महसूस कर प् रही थी, वो शिव के चेहरे को hi देख रही थी, जैसे hi शिव ने अपना मुँह वह लगाया और उसकी छूट के होठो को चूसने लगा उसके अंदर एक आनंद की लहर फ़ैल गयी, उसकी आंखे बंद हो गयी)





Shhhhhhhhhh shiiiiiiiiiiiv shhhhhhhh(Jaise जैसे वो उसके होठो को चाट रहा था ऐसा लग रहा था की वो शिव को अपनी छूट के अंदर दबा दे, अपने आप hi उसके हाथ शिव के शिर पर पहुंच गए और वो उसे अपनी छूट पर दबाने लगी, इस एहसास से वो अब तक अनजान थी, एक लड़के के सामने वो अपनी छूट को परोस कर बैठी थी और वो लड़का उसकी छूट को स्वादिस्ट व्यंजन की तरह खा रहा था, इस एहसास से उसके अंदर इतना कुछ हो रहा था की वो बयां नहीं कर प् रही थी.





उसे लग रहा था की वो हमेशा ऐसे ही अपनी टंगे फैला कर बैठी रहे और शिव उसकी छूट को ऐसे hi चाट ता रहे. पर उसे पता था टाइम काम है) शहहह अह्ह्ह्ह शिईयिव बहोत अच्छा लग रहा है, अगर पुरे दिन का समय होता तो में तुम्हे नहीं रोकती पर तुम्हे जाना भी hai)(Unki बातो को में समाज रहा था, मेने सीधा हुआ और अपनी अंडरवियर उतरने laga)Ruko.(Unke रोकने से में रुक गया, और उनकी और देखने लगा, वो उठकर बेथ गयी) में उतरती हु. (में उन्हें आश्चर्य से देखने लगा, क्यों की जो पहले इतना शर्मा रही थी वो अब खुल कर सब करनेलगी थी, मुझे अपनी और ऐसे देखते प् कर वो शर्माने लगी) ऐसे क्या देख रहे हो, है ये सच है की मुझे शर्म आ रही है पर साथमे में ये भी जानती हु की तुम्हे किस्मे मज़ा आएगा, जब तुम मेरे लिए इतना कर रहे हो तो क्या ये मेरा भी फर्ज नहीं है की में भी तुम्हे हर खुसी दू. खड़े हो जाओ( में मुस्कुराते हुए खड़ा हो gaya)(Nazia का दिल भी धड़क रहा था, जो उसने परसो अपनी छूट में महसूस किआ था और आज जिसे उसने अंडरवियर के उपरसे hi छुआ था, उस बड़े लुंड को देखने के लिए वो कब से मरी जा रही थी, जिस अंग ने उसे इतनी खुसी दी थी वो उसे देखना चाहती थी, चाहे जितनी भी शर्म आ रही हो पर वो जानती थी की शर्म करने से कुछ नहीं होगा, शिव एक बार तो उसके साथ सम्भोग कर चूका है, तो अब कैसा सर्मना. उसने धड़कते दिल से उस तम्बू बने लुंड को देखा और अंडरवियर को पकड़ कर निचे खींचा. लुंड उछाल कर बहार निकल आया. महसूस करना अलग था और देखना अलग था, ऐसा अंग वो पहली बार देख रही थी, जो आज तक उसने देखा था उसके सामने ये बहोत बड़ा था, वो कभी उसे तो कभी शिव की आँखों में देख ने लगी. लुंड पर नज़ारे जमाये हुए hi उसने अंडरवियर पूरा निकल दिया. शिव बहोत लम्बा था तो उसने शिव को घुटनो पर बैठने को कहा, अब लुंड उसकी आँखों के सामने था, उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, उसने एक बार शिव की और देखा, और थोड़ा सा झुक कर वो अपने मुँह को लुंड के पास ले gayi)(Me उन्हें hi देख रहा था, वो क्या करने जा रही थी मुझे पता था, उन्होंने एक बार मुझे देखा, फिर अपने मुँह को खोलते हुए लुंड के सुपडे को अपने मुँह की गरम गुफा में प्रवेश करवा दिया.





उस गर्म गुफा के एहसास से hi मेरी आंखे बंद हो गयी. वो लुंड को कुल्फी की तरह चूसने लगी. लुंड को चूसते हुए वो घोड़ी बानी हुई थी, जिसकी वजह से उनके कूल्हे उबार आये थे, पतली कमर से उठते हुए उसे बड़े गोलों का आकर, बहोत आकर्षक लग रहा था, मेरा हाथ अपने आप hi वह चला गया. में उन्हें सहलाने लगा, दीदी ने मेरी और देखा, और खिसक कर अपनी गांड को मेरे नजदीक कर दिया, कूल्हों को सहलाते हुए मेने एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी. में ऊँगली को अंदर बहार करने लगा और वो मेरे लुंड को हिलाते हुए अपने मुँह में अंदर बहार करने लगी. दो तीन मिनट करने के बाद मेने दीदी के कंधो को पकड़ा तो उन्होंने मेरी और देखा. वो मेरा इस्सर समाज गयी और बिस्तर पर अपनी टंगे खोलते हुए लेटने लगी. जब वो लेट गयी तो मेने एक बार छूट को देखा, गोर रंग की चमड़ी पर हलके बालो से सजी वो छूट बहोत आकर्षक लग रही थी. में बैठते हुए आगे खिसका और लुंड को छूट के पास ले गया, लुंड को छूट पर घिसा जिस से लुंड पर चकनाहट हो गयी, दीदी के थूक से सना हुआ लैंड और ज्यादा चिकना हो गया, एक बार मेने दीदी की और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. अपने आप को एडजस्ट करते हुए मेने लुंड को छेड़ पर लगाया और अंदर धकेलने लगा, लुंड उस गरम मखमली और रास से सराबोर सुरंग में अंदर सरकने लगा. उसका मखमली एहसास अपने लुंड पर महसूस करते हुए में लुंड को अंदर धकेलने लगा.





(नाज़िआ अपनी नाजुक छूट के अंदर उतारते हुए उसे सख्त लुंड को महसूस कर मचलने लगी, दर्द का एहसास हो रहा था पर वो इस मज़े के सामने कुछ भी नहीं था, लुंड का सूपड़ा इतना बड़ा था की उसकी छूट पूरी तरह से फ़ैल गयी थी, एक हाथ से उसने अपना मुँह दबा दिया और दूसरे हाथ से शिव का हाथ पकड़ लिया) दीदी ने मेरे हाथ को कास के पकड़ लिया जिस से मेने उनके पेअर को पकड़ा हुआ था. मेने उनकी और देखा तो उन्होंने मुझे अपने ऊपर आने का इस्सर किआ, में उनके ऊपर झुकता चला गया और लुंड छूट की गेहराइओ में उतरने लगा.

नाज़िआदिदी : अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, shhhhhhhhhhh. (में जनता था उन्हें थोड़ा दर्द हो रहा है, पर में लुंड को अंदर उतरता रहा, जब आधे से ज्यादा लुंड अंदर चला गया तो में रुक गया, मेने दीदी को देखा और लुंड को हलके हलके धक्को के साथ अंदर बहार करना चालू kia)(Is अद्भुत आनंद से नाज़िआ पागल सी होने लगी, छूट के हर सवेंदनशील हिस्से को रगड़ते हुए लुंड अंदर बहार हो रहा tha)Ahhhh, अह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्हह.

शिव : दर्द हो रहा है दीदी?

नाज़िआदिदी : थोड़ा थोड़ा, तू उसकी चिंता मात कर, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह. तेरा बहोत बड़ा है शिव.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya बड़ा है दीदी?

नाज़िआदिदी: (मुस्कुराते हुए मुझे देखते hue)Badmash. शहहह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (लुंड की उस रगड़ को महसूस कर के उसके शरीर का हर तर झनझना रहा था)





ऐसे hi शिव शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह. बहोत अच्छा लग रहा है शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह. (मुझे अपनी बहो में कस्ते हुए वो मेरे होठो को चूसने lagi)Ummm उम्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम. (में थोड़ा ऊपर हुआ और उनके स्तन को हाथो से दबाते हुए धक्के लगाने laga)(Apne स्तन पर हो रहे उस शख्त दबाव से उसकी छूट से और पानी रिसने laga)Abao उसे शहहह अह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्हह है ऐसे hi दबाओ शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.( आज नज़ारा काफी उत्तेजक था, बिस्तर पर नाज़िआदिदी पूरी नंगी लेती हुए थी और ऐसे उन्हें छोड़ने में और मज़ा आ रहा था, मेने देखा तो लुंड पूरा भीग गया था, उनकी छूट से बहोत रास बह रहा था, छूट पूरी तरह से लुंड पर सरक रही थी, मेने दीदी को देखा तो वो आंखे बंद किये हुए जैसे किसी और hi दुनिया में थी, मेने धक्के तेज कर दिए) अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ahhh(Didi की आवाज भी बढ़ गयी थी, घर में कोई भी नहीं था तो कोई दिक्कत नहीं थी) अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शहहह अह्ह्ह्ह शिव तुम बहोत अच्छे हो शठ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शहहह अह्ह्ह्ह है ऐसे hi शहहह अह्ह्ह्हह मेरा होनेवाला है शहहह अह्ह्ह्ह ामीईईई (वो झटके कहते हुए झड़ने लगी, कुछ पल में रुका, फिर मेने लुंड बहार निकला, वो बोझिल आँखों से मुझे देखने लगी. मेने उनकी कमर पकड़ कर उल्टा कर दिया, उनका शिर निचे लगा था और गांड बिस्तर पर उठी हुई थी, मेने लुंड लगाया और अंदर डाला, वो बिस्तर पर अपने हाथ टिकते हुए ऊपर हो गयी. उनकी भरी हुई गांड को देखते हुए में लुंड अंदर बहार करने लगा,





उनकी कूल्हों को पकड़ कर मेने फैलाया तो गांड का भूरा छेड़ भी मेरे सामने था, कूल्हों को दबाते हुए में लुंड अंदर बहार करने laga)Ahhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह. (लगातार धक्को से उनके कूल्हे थिरक रहे थे) अह्ह्ह्ह शिव बहोत मज़ा आ रहा है शहहह अह्ह्ह्हह, तू जादूगर है शहहह अह्ह्ह्हह. तेरा बहोत मस्त है शहहह आह्ह्ह्ह बहोत अंदर तक जाता है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह. ऐसा मेने कभी महसूस नहीं किआ शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह और अंदर शिईयिव शह्ह्ह्ह ahhhh.(Mene उनकी कमर पकड़ी और अपनी और खींचते हुए लुंड को अंदर तक उतरदिया)





आईईईई अम्मीईई shhhhhh(Lund को अपनी बच्चेदानी पर महसूस करके नाज़िआ और ज्यादा गर्म होने लगी) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसे hi शहहहहह ऐसे hi शहहहहह (काफी देर में उन्हें वैसे hi छोड़ता रहा, वो आगे होने लगी और मुझे रोकने लगी, में रुक गया तो उन्होंने लुंड को बहार निकल दिया, वो बिस्तर पर धड़ाम से गिरी, जैसे तैसे सीधी हुई और फिर से अपनी टंगे फैलते हुए मुझे ऊपर ांडे का इस्सर करने lagi)Aise करो शिव, में तुम्हे अपनी बहोत में भरना चाहती hu(Me फिर से लुंड को अंदर डालते हुए उनके ऊपर हो गया, उन्होंने अपनी बहे मेरे गलेमे दलदी और मेरे होतो को चूमने लगी.





मेने भी धक्के लगाने सुरु कर दिए. वो अपना मुँह बंद नहीं कर प् रही थी, तो अपना मुँह खोल कर) अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शीइइइइव में पागल हो जाउंगी. शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह बहोत अच्छा लग रहा है सीईव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, तुम पहले क्यों नहीं मिले शहहह अह्ह्ह्हह तुम कितने अच्छे हो शहहह अह्ह्ह्ह मुझे बजट मज़ा आ रहा है शिव शहहह अह्ह्ह ऐसे hi करो अह्ह्ह्ह है ऐसे hi शिव बहोत अंदर तक महसूस हो रहा है. शाहहहह अह्ह्ह्हह जल्दी जल्दी शिव शहहह अह्ह्ह मेरा फिर होनेवाला है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (छूट की सिकुड़न बहोत बढ़ रही थी, मेने भी अपने आप को तैयार किआ की में भी छूट जाऊ, अगर में चाहता तो और खिंच सकता था., मेरा लुंड और ज्यादा फूल गया था) ओह सीईव शहहह ये बहोत बड़ा है शहहह पर बहोत अच्छा लग रहा है शहहह अह्ह्ह में गयी शिईयिव अह्ह्ह्ह में गईइइइइइइ.

शिव : में भी दीदी, में भी आया.

नाज़िआदिदी : (अपने गर्भाशय के मुख पर हो रही उस गरम रास की बौछार को महसूस कर शिव से पूरी तरह से लिपट गयी.) ओह शिईयिव, ये अध्भुत एहसास है शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह. ये कितना आनंद दायक है शह्ह्ह्ह. (हम दोनों ने एक दूसरे को कास के पकड़ लिया. थोड़ी देर में वैसे hi उनके ऊपर लेता रहा, फिर में उठने लगा तो नाज़िआदिदी ने अपने पेअर मेरी कमर पर लपेट दिए)

शिव : (मेने उनकी और dekha)Kya हुआ दीदी?

नाज़िआदिदी : (शरमाते हुए) ऐसे hi रहो न, बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : मुझे स्कूल भी जाना है.

नाज़िआदिदी : कस ये समय इतना जल्दी न बिट जाता. कितना अच्छा लग रहा है. क्या तुम्हे अच्छा नहीं लगा?

शिव : (उनकी नाक से नाक रगड़ते hue)Muje भी बहोत अच्छा लगा, पर जाना भी है, और आप की अम्मी भी आती होगी.

नाज़िआदिदी : अम्मी की कोई फ़िक्र नहीं है.

शिव : आंटी ये सब जान गयी है, है न?

नाज़िआदिदी : (मेरी आँखों में देखते हुए) है.

शिव : उन्होंने कुछ नहीं कहा?

नाज़िआदिदी : बहोत सुनाया, गालिया भी दी, अब्बू से भी कहनेवाली थी.

शिव : फिर?

नाज़िआदिदी : मेने उन्हें संजय, वो माँ है तो क्या हुआ, वो भी एक औरत है, और जब मेने उन्हें सब संजय तो वो मान गयी. अब सब इस बात पर निर्भर है की में माँ बनूँगी की नहीं.

शिव : आप को क्या लगता है?

नाज़िआदिदी : मुझे यकीं है की में माँ बन जाउंगी.

शिव : वो कैसे?

नाज़िआदिदी : वो मुझे पता नहीं पर मेरे अंडर से मुझे महसूस हो रहा है की में इस बार जरूर माँ बन जाउंगी. (मुझे प्यार से अपने गले लगते hue)Aur तुम मेरे बच्चे के abbu.(Usne अपनी आंखे बंद कर दी और शिव के जिस्म को महसूस करने लगी) शिव, इन दो hi दिनों में तुम मेरे कितने करीब आ गए हो. ये सब जिस वजहसे भी हुआ पर आज में तुम्हारे साथ इस अवस्था में हु, मेने तुम्हे अपने शरीर को भोगने का हक़ दिया है, तुम मेरे लिए बहोत खास हो चुके हो शिव. (मेने देखा तो उनकी आँखों से आंसू बहने लगे थे)

शिव : अब ये आंसू क्यों?

नाज़िआदिदी : पता नहीं शिव, शायद तुम मेरे हो कर भी मेरे नहीं हो, ये मेरा दिल जनता है इस लिए ये आंसू छलक आये.

शिव : (उनके माथे पर किश karke)Me आप का hi हु, जब भी जरुरत हो याद कीजियेगा, मुझे अपने साथ खड़ा पाओगी.

नाज़िएदि : ओह शीइइइइव.

उनसे थोड़ी देर बात करने के बाद में स्कूल चला गया. स्कूल में एक एनौन्स्मेंट हुआ की पहली तारीख से स्कूल सुबह की हो जाएगी. अब ये मेरे लिए एक समस्या थी, क्यों की सुबह मुझे गयम भी जाना होता था. मेने शाम को जूही को बताया तो उसने कहा की सर से बात करेंगे.
 
अपडेट 82

शाम को में और जूही दोनों पवन सर की केबिन में खड़े थे.

पवनसीर : ये तो समस्या हो गयी, अब क्या करेंगे?

शिव : सर, में शाम को तो आ hi शक्ति हु.

पवनसीर : वो तो ठीक है पर ये बिचका रास्ता है, हमे कोई ठोस निर्णय तो लेना hi पड़ेगा, और जैसे जूही बता रही है की अब तुम्हे ट्रेनिंग के लिए भी कही बहार जाना हो शक्ति है और साथमे जब थी तुम्हारी प्रतियोगिता होगी, तब भी तुम्हे बहार जाना hi पड़ेगा, तो हमे किसी और को लेना hi पड़ेगा.

शिव : आप सही कह रहे है, जैसा आप को ठीक लगे वैसे कीजिये.

पवनसीर : ठीक है, में तो ढूंढता हु, तुमलोग भी देखो, कोई हो तो. फिर तुम क्या करो गए?

शिव : में ऐसे hi कोई दिन की part टाइम जॉब धुन्ध्लूँगा.

पवनसीर : एक काम कर शक्ति है, जब तक कोई जॉब न मिले तुम मेरी कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरविसोर का काम कर शक्ति हो, वैसे सुपरवाइजर है पर मुझे कोई भरोसे का अपना आदमी भी चाहिए. तो तुम दिन में दो तीन घंटे के लिए जा कर सब देख शक्ति हो.

शिव : पर मुझे इस काम का कोई तजुर्बा नहीं है सर.

पवनसीर : ऐसा कोई मुश्किल काम नहीं है, तुम्हे बस ये ध्यान रखना है की सब काम ठीक तरह से तो हो रहा है न. सब लोग ठीक से अपना काम कर रहे है की नहीं, बस वही देखना है.

शिव : ठीक है सर, और थैंक यू.

हम दोनों वह से बहार चले आये.

जूही : ये मात समझना की तुम्हे यहाँ से छूती मिल गयी है, तुम्हे यहाँ भी आना पड़ेगा, अपनी कसरत के लिए. में सर से बात कर लुंगी, और जो भी दूसरा यहाँ आएगा उसे भी तो टाइम लगेगा.

शिव : ठीक है. और थैंक यू.

जूही : थैंक यू किस लिए.

शिव : चाहे कोई भी परिस्थिति हो, तुम हमेशा मेरे साथ होती हो. में जनता हु तुम मुझसे नाराज हो पर फिर भी तुम हमेशा मेरा सपोर्ट करती हो.

जूही : में कोई नाराज नहीं हु. अभी वो सब बाटे छोडो और अपने इंटेस्चुल कॉम्पिटिओं पर ध्यान दो.

दो दिन कैसे गुजर गए पता hi नहीं चला, एक बार में बिना मैडम के घर भी हो आया.

आज कॉम्पिटिओं का दिन था, में सुबह उठा और बाथरूम चलागया. जब बहार आया तो रंजन कड़ी थी, मुझे देख मुस्कुरा रही थी.

शिव : उठ गयी? आज तो छुट्टी है न?

रंजन : है, सब का कॉम्पिटिओं है तो सब स्टेडियम में इक्कट्ठा होनेवाले है, हमारा स्कूल भी आएगा. वह तो हम मिलेंगे नहीं तो सोचा अभी तुम्हे बेस्ट ऑफ़ लक कह दू.

शिव : तो कह do.(Wo नजदीक आयी और मेरे गले में अपनी बहे डेल कूदगई और मेरी कमर में अपने पेअर फ़ासलिये, मेने हस्ते हुए उसे अपनी गोड़ में उठालिया, और उसके कूल्हों को थम लिया) ये क्या तरीका है बेस्ट ऑफ़ लक कहने का?

रंजन : (मुस्कुराते hue)Mera तो यही रारिका है, (मेरे होठो को चुम kar)Best ऑफ़ लक,

शिव : थैंक यू, अब उतरो कोई देखलेगा तो?

रंजन : देखने दो.

शिव : तुजे दर नहीं लगता?

रंजन : में क्यों दारू, और किस से दारू?

शिव : (पीछे देखते hue)Lata दीदी, गुड morning.(Ranjan ने जैसे hi लतादिदी का नाम सुना, फ़ौरन कूद कर नीचे उतर गयी और घबरा कर पीछे देखने लगी पर वह कोई नहीं था, उसने शिव की और घर कर dekha)(Me मुस्कुरा रहा था)

रंजन : Shiiiiiiiiiiv

शिव : क्यों? दर नहीं लग रहा था न.

रंजन : वो तो लतादिदी है, वो बड़ी है तो थोड़ा दर लगता है, वैसे वो बहोत अच्छी है वो मुझे कभी कुछ नहीं कहती. वो छोड़, कॉम्पिटिओं में अच्छे से दौड़ना, मेरी नाक मात कटवाना.

शिव : (उसकी नाक खींचते hue)Badi आयी नाक wali(Humdono हसने लगे, फिर वो बाथरूम में चली गयी और में रूम की और, सामने विणा मिली, में उसके सामने मुस्कुराया वो भी मुस्कुरायी, और में आगे बढ़ने लगा)

विणा : Shiv(Uski आवाज से में रुक गया, में उसके पास गया)

शिव : है बोलो विणा.

विणा : आज तुम्हारा कॉम्पिटिओं है न, तो बेस्ट ऑफ़ लक.

शिव : थैंक यू. (फिर में जाने लगा)

विणा : Shiv.(Me फिर रुक गया)

शिव : है बोलो.

विणा : वो ...वो (में उसे सवालिया नजरो से देख रहा था) नीचे झुको.

शिव : क्या?

विणा : निचे jhuko(Muje समाज नहीं आया पर में झुक गया, उसने मेरे गाल पर पप्पी di)Best ऑफ़ luck(Keh के वो भाग गयी, में अपने गाल पर हाथ रखे उसे जाते देख रहा था, आगे जा कर वो रुकी और मुद कर मेरी और देखा, फिर शर्माती हुई दूसरे बाथरूम में घुस गयी, में मुस्कुराता हुआ रूम में आया और कपडे बदलने लगा, लतादिदी और सरितादिदी भी उठ गयी, उन्होंने भी मुजेगले लगा कर बेस्ट ऑफ़ लक कहा और दही सक्कर खिला कर भेजा)

में स्टेडियम पंहुचा तो काफी चहल पहल थी. इतनी सुबह सुबह भी बहोत से लोग आ चुके थे और बहोत सरे लोग आ रहे थे. बहार hi दो गेट बने हुए थे, वह मेने अपना नाम लिखवाया और खिलाड़ी हु ऐसा कहा तो उन्होंने एक गेट की और इस्सर किआ, में अंदर दाखिल हो गया. बहा बहोत सरे लड़के और लड़कीअ थे में सब को देखता हुआ अंदर जा रहा था, कहा जाना है वो मुझे पता नहीं था तो में ऐसे hi देखते हुए जा रहा था. ऐसे में किसीने मुझे पुकारा, वो जूही थी, वो एक I-card अपने गलेमे लटकाये हुए ट्रैक और जैकेट में मेरी और चली आ रही थी.

जूही : आ गए?

शिव : तुम इतनी जल्दी आ गयी थी?

जूही : है, यहाँ ारंगमेंट भी करना था और मेरे जैसे बहोत से लोग है जो यहाँ साडी गेम खिलवायेंगे. में तुम्हारे कपडे ले आयी हु, वह लड़को का लाकर रूम है, ये लो चाभी, 115 नंबर का लाकर तुम्हारे लिए है, उसमे मैंने तुम्हारे कपडे रख दिए है, और शूज भी है.

में चाबी लेकर लाकर रूम पंहुचा, वह बहोत सरे लड़के थे जो चेंज कर रहे थे, में सबको देखता हुआ अपने लाकर के पास पहुंच गया. मेने लाकर खोला तो उसमे मेरे लिए कपडे और शूज थे, कपड़ो ने एक बिना बहवली T-shirt थी जिसे बनियान भी कह शक्ति है, और एक शार्ट थी, मेने आस पास देखा तो कई लोग ऐसे शार्ट hi पहने हुए थे, और कुछ टॉवल की मदद से पहन रहे थे. शार्ट एकदम टाइट थी और शरीर से चिपकी हुई थी, देखने पर लड़को का आगे का भाग स्पस्ट दिख रहा था, पर किसी को कोई फर्क नहीं पद रहा था. मेने भी अपने कपडे पहने और लाकर बंद कर के बहार आ गया. मेने जूही को ढूंढा तो वो एक काउंटर के पास कड़ी नजर आयी. वो कुछ लड़कीओ के साथ थी और रजिस्टर में कुछ लिख रही थी. में उनके पास पहुंच गया. एक दो लड़कीओ की नजर मुज पर पड़ी, में उनकी आँखों को देखा तो उनकी निगाहे मेरे लुंड वाले भाग पर चिपक गयी थी, वो एक दूसरे को कोहनी मर कर मेरी और चुप के से इस्सर कर रही थी, सच कहु तो मुझे बहोत शर्म आने लगी थी. उनकी खुसुर फुसुर पे जूही का ध्यान गया और उसने देख लिया की वो क्या देख रही है, उसने भी मेरी और देखा, उसने भी एक बार मेरे लुंड को देखा, में शर्मा गया, वो मुस्कुराने लगी, थोड़ी देर में सब का नाम लिख कर उन लड़कीओ को भेज दिया. वो लड़कीअ जाते जाते भी मुद मुद के देख रही थी.

जूही : (मुस्कुराते hue)Kyu शर्म आ रही है?

शिव : है.

जूही : चिंता मात करो, जो अभी तुम्हे घर रही थी न वो भी तुम्हे ऐसे hi दिखेगी, ये खेल जगत है, यहाँ इन बातो पर ध्यान नहीं देना होता है, अपने लक्ष पर ध्यान दो. जिसे जो देखना है देखने दो. अगर तुम्हे शर्म आ रही है तो इसके ऊपर ट्रैक पहन लो और दौड़ते वक़्त उतर देना. मेने ट्रैक और जैकेट भी रक्खा था वह.

शिव : (मुझे उसकी बात सही लगी, सब तो ऐसा पहन रहे है फिर क्या शर्माना) नहीं, कोई बात नहीं, अब क्या करना है.

जूही : तुम्हारे स्कूल के तेअचे आये हुए hai(Wo आस पास नजर दौड़ने lagi)Wo रहे, अभी तुम उनके पास जाओ, वो तुम्हे सब समझायेंगे, वो जो कहे वो करना. छोटी दौड़ की साडी इवेंट में तुम्हारा नाम लिखने को बोलै है. में यही हु तो मिलती रहूंगी.

में अपने स्कूल टीचर के पास पहुंच गया. उनका नाम वरुणसीर था. वह मेरी स्कूल के और भी लड़के और लड़कीअ थे, कुछ को में जनता था, कुछ को देखा था पर जनता नहीं था. वरुणसीर ने बताया की जब जब तुम्हारी इवन होगी तो तुम्हे वह पहुंचना है, अनाउंसमेंट होती रहेगी, खली टाइम में तुम गयम में अभ्यास कर शक्ति हो या दूसरे इवेंट का मज़ा ले शक्ति हो. अभी सुबह थी तो मैदान पर होनेवाले सरे इवेंट अभी होने थे. मेरी पहली दौड़ 400 मत की थी. में गयम में गया और हलकी फुलकी कसरत करने लगा, वह बहोत से लड़के और लड़कीअ भी थी, लड़कीओ ने ज्यादा तर ट्रैक पहना हुआ था और ऊपर जैकेट. पर लड़के मेरी तरह hi थे. वह सबसे लम्बा में hi था तो सब मुझे hi देख रहे थे. कुछ को मेने स्माइल भी दी, फिर अपने काम में लग गया. थोड़ी देर बाद वरुणसीर वह आये और जिसको 400मत में भाग लेना है वो ट्रैक पर पहुंचे. हम वह पहुंचे तो सबको एक नंबर दिया गया जो आगे और पीछे दोनों जगह चिपकना था. मेरा नंबर 10 था.

वरुणसीर : शिव, तुम से बहोत साडी उम्मीदे है, आज तक हमारा स्कूल कभी फर्स्ट नहीं आया. तो अपनी पूरी ताकत लगदेना. अभी 8-8 लड़को को दौड़ाएंगे, फिर बाद में पहले और दूसरे नंबर पर आये लड़को का फाइनल होगा. हर रेस में ऐसा hi होगा.

शिव : जी, सर, में पूरी कोशिस करूँगा. (तभी जूही आयी)

जूही : (मुझे साइड में लेजाकर.) सुरु से तेज मात दौड़ने लग्न, बस उतना तेज दौड़ना की सब के साथ रहो, पहले 300 मत में अपनी नार्मल स्पीड से दौड़ना और आखरी 100 मत में अपनी पूरी ताकत लगदेना.

शिव : जी madam.(Mere मैडम कहने से वो मुस्कुरायी)

हम जितने भी लड़के थे वो सब क़तर में ट्रैक पर पहुंचे. स्टेडियम में बहोत शोर था, सब अपने अपने यूनिफार्म में आये थे, कई बड़े भी आये हुए थे. लोग अपने अपने स्कूल के झंडे लिए चिल्ला रहे थे. हम सब के बरी बरी नाम घोषित किये गए. मुझे मेरी स्कूल का ग्रुप दिखाई दे रहा था पर वो थोड़ी दुरी पर था तो में किसी को पहचान नहीं प् रहा था. इतने शोर में भी मेने अपने आप को शांत किआ, मेरे सामने लतादिदी का चेहरा आ गया. मुझे अपना अनाथालय दिखने लगा. मेने ट्रैक पर नज़र दौड़ाई, अब मुझे कोई शोर नहीं सुनाई दे रहा था, मेने अपने आस पास देखा तो दूसरे लड़के अपनी पोजीशन लेते नजर आये, मेने भी अपनी पोजीशन ली, अनाउंस मेन्ट हुआ और सब को शांत रहने को बोलै गया. अब स्टेडियम में भी आवाजे काम हो गयी, मेने एक बार अपनी आंखे बंद की, जूही मेरी आँखों के सामने थी, मेने साइड में नजर दौड़ाई तो वो वही कड़ी थी, उसने अपनी गर्दन है में हिलायी, मेने अपनी निगाहे ट्रैक पर लगायी, सब जैसे स्लो मोशन में चल रहा था, पुरे स्टेडियम में शोर था पर जैसे मुझे कुछ भी नहीं सुनाई दे रहा था. गेट, set...(Fire) जैसे बन्दुक से गोली निकली हो वैसे मेने दौड़ लगा दी, सरे स्टेडियम में शोर होने लगा, सब चिल्ला रहे थे, आखरी 100 मत में मैंने तेज दौड़ लगा दी और जब फिनिश लाइन को क्रॉस किआ तब मेने आस पास देखा, में अकेला था, दूसरे स्कूल के बच्चे शांत हो गए थे, सिर्फ मेरी स्कूल के बच्चे चिल्ला रहे थे, नाच रहे थे. (हर्ष और महेश कुर्शी पर चढ़ कर कूद रहे थे, संयम भी ख़ुशी से सब को देख रही थी और तालिया बजा रही थी, वैस्वी भी तालिया बजा रही थी, वो दूर से शिव को hi देख रही थी, शिव उसे सबकी और हाथ हिलता हुआ अंदर जाता नज़र आया.)

जूही : बहोत अच्छे शिव (जैसे hi में अंदर दाखिल हुआ जूही सामने मिली, 47.15 सेकंड.

वरुणसीर : बहोत बढ़िया शिव.

जूही : पहली hi दौड़ में तुम नेशनल रिकॉर्ड के करीब पहुंच गए शिव, ये तुम्हारा ऑफिसियल डाटा है.

शिव : नेशनल रिकॉर्ड कितना है मैडम.

जूही : बॉयज अंडर 20 के लिए 46.59 सेकंड है. वो भी बरसो की ट्रेनिंग के बाद शिव, तुमने सिर्फ एक महीने में ये कर दिखाया है. अब दूसरे लड़को की रेस देखो. सब के टाइम पर ध्यान रखना.

खिलाड़िओ के लिए बैठने के लिए अलग जगह थी, तो में वह बेथ गया. दूसरी तीन रेस में कोई भी मेरे करीब नहीं पहुंच पाया था. मेरे जहँ में एक hi नंबर घूम रहा था 46.59. एक घंटे बाद में फिर से ट्रैक पर खड़ा था, सब के रिजल्ट में कोई भी मेरे जितना तेज नहीं दौड़ा था तो हरने का तो सवाल hi नहीं था. अब मेरी रेस खुद से थी. फिर से Get...set... जो हुआ तो मेने दौड़ लगा दी, जब फिनिश लाइन क्रॉस हुई तो में hi पहले नंबर पर था पर मेरी नज़र स्क्रीन की और थी. टाइम फ़्लैश हुआ 46.36. मेने अस्स पास देखा तो मुझे जूही नजर आयी, वो अपनी मुट्ठी बंद किये हुए हिला रही थी, उसके चेहरे पर ख़ुशी साफ जलक रही थी, में उसकी और दौड़ा, मुझे अपनी और आता देख उसने भी अपनी बहे खोल दी, जैसे hi में उसके पास पंहुचा मेने उसे गले लगा लिया, वो भी बहोत खुस थी, उसने भी मुझे कास के गले लगा लिया. हम दोनों भूल गए थे की सब हमें देख रहे है, बस थोड़ी देर के लिए जैसे दुनिया गायब हो गयी थी, पर हो रहे शोर ने हमे वास्तविकता में ला दिया, हम दोनों ने एक दूसरे को छोड़ा, वो मेरी पीठ थप थापा ने लगी, (ये दृश्य संयम ने और वैस्वी ने भी देखा, दोनों के दिल में एक तीस उठी) मेने वरुणसीर की और गया तो उन्होंने भी मुझे गले लगा कर शाबाशी दी. 200म मेने 21.06 सेकंड में कम्प्लीट किआ. और 100म 10.55 सेकंड में कम्प्लीट किआ. तीनो रेस में मुझे गोल्ड मैडल मिला था. में वरुणसीर, जूही सब साथ में खड़े थे.

वरुणसीर : बहोत बढ़िया शिव, आज पहलीबार हमारे स्कूल ने गोल्ड जीता है वो भी तीन इवेंट में. मेरी भूख बढ़ती जा रही है शिव, क्या तुम लॉन्ग जम्प लगा शक्ति हो.

जूही : ये क्या कह रहे है सर, ये दौड़ का खिलाडी है.

वरुणसीर : में जनता हु, पर यहाँ कोनसा इंटरनेशनल चल रहा है. अगर ये इतना तेज दौड़ शक्ति है तो सिर्फ कूदना hi तो है. तरय तो करने दो.

थोड़ी न नुकुर के बाद जूही भी मान गयी., वरुणसीर ने मेरा नाम लॉन्ग जम्प में भी दाल दिया. दिन के आखिर में, में 100म, 200म, 400म, 110म हर्डल, 400म हर्डल, 4x100m बॉय रिले, 4क्ष100 मिक्स रिले, लोगन जम्प और ट्रिपल जम्प, कुल मिलकर मेने 9 गोल्ड जीते थे. मेरे ऐसी परफॉरमेंस से हमारी स्कूल के दूसरे लड़के और लड़कीओ को भी जोश आ गया था और हम सबने मिल कर कुल 13 गोल्ड, 6 सिल्वर और 12 ब्रोंज मॉडल जीते थे. हमारी स्कूल के बच्चे, टीचर, प्रिंसिपल सब पागल हो चुके थे, पहलीबार ये करिश्मा हुआ था.

स्टेडियम में हमारी स्कूल के लड़को और लड़कीओ ने धमाल मचा रक्खी थी, सब ख़ुशी से चिल्ला रहे थे, नांच रहे थे. मैडल देने की बरी आयी तब मुख्या मेहमान को आमंत्रित किआ गया. ये हमारे मला कमलनाथ थे. और उनके साथ कई और हस्तिया भी आमंत्रित थी उनमे एक मनीषा मैडम भी थी. पहलीबार मुझे मैडल दिया गया तो मला साहब ने मुझे कोंग्रटुलतिओं कहा. उसके बाद अलग अलग इवेंट के लिए मेडल्स दिए जाने लगे. अलग अलग गेस्ट द्वारा ये मेडल्स दिए जा रहे थे, पर तीन से चार बार मला साहब ने hi मुझे मैडल पहनाया. वो मुझे बड़े गौर से देख रहे थे. एक मैडल मुझे मनीषा मैडम ने पहनाया, वो भी बहोत खुस थी, हाथ मिलते वक़्त उन्होंने मेरा हाथ थोड़ा दबाते हुए मुझे देख रही थी. उनकी आंखे बहोत कुछ कह रही थी. खैर मैडल सेरेमनी पूरी हुई. में गोल्ड मैडल पहन कर अपने स्कूल के ग्रुप में गया तो प्रिंसिपल सर और दूसरे टीचर्स ने मुझे बधाईया दी. बिना मैडम भी आयी हुई थी, उन्होंने भी मुझे सयमित तरीके से बधाई दी पर उनकी आँखों में चमक साफ़ दिख रही थी. उसके चेहरे की मुस्कान सब बयां कर रही थी. अगर उनका बस चलता तो वो मुज से लिपट कर मेरे होठो पर चुम्बनों की बरसात कर देती.

वह रंजन और विणा अपनी सहेलियों के साथ बैठी हुई थी.

सहेली 1 : हमारा स्कूल हर गया है भीड़ भी तू इतनी खुस क्यों हो रही है?

रंजन : हमारा स्कूल भले hi हर गया पर उसे हराया किसने है, मेरे शेर ने.

सहेली 2 : ये क्या कह रही है, किसकी बात कर रही है.

विणा : शिव की और किसकी. वो हमारे अनाथालय का है.

सहेली 1 : क्या, वो तुम्हारे अनाथालय का लड़का है? चल न मिलवाना उस से.

दिव्या : (उसने ये बात suni)Kyu मिलना है तुजे, रंजन किसी को मत मिलवाना.

रंजन : (मुस्कुराते hue)Me क्यों मिलवाने लगी उसे, और तुजे क्या ऐतराज है अगर वो मिले तो.

दिव्या : क्या वो मेरा दोस्त नहीं है?

रंजन : वो कब से तेरा दोस्त हो गया?

दिव्या : वो मेरे घर आया था तो दोस्ती हो गयी. चल अब उस से मिलते है.

सहेली 2 : ऐसा क्या करती है रंजन, मुझे भी मिलवाना उस से. में तो उसे दौड़ते हुए देख कर hi फ़िदा हो गयी थी. कितना लम्बा और हैंडसम दिख रहा था. मिलवाना मुझे, उसे नजदीक से देखना है.

रंजन : (दूसरी भी सहेलिया रिक्वेस्ट करने लगी to)Thik है चलो जाते है.

दिव्या :(अपना मुँह फूलते hue)Us से दूर से hi बात करना.

सहेली1 : वो रंजन के अनाथालय का लड़का है, तुजे क्यों इतनी मिर्ची लग रही है. (दिव्या कुछ नहीं बोली, वो लोग शिव की और निकल गए, वही दूसरी और)

संयम : चल शिव से मिलते है.

वैस्वी : नहीं, मुझे नहीं मिलना.

संयम : चल न, उसे बधाई देते hai(Wo वैस्वी को खींचकर ले जाती है, हर्ष और महेश भी मुझसे मिलने निकल लिए)

में टीचर्स और प्रिंसिपल सर के साथ में था, दूसरी स्कूल के टीचर भी मुझे बधाईया दे रहे थे. वो एक अलग एरिया बना हुआ था. मुझे मेरे नाम की आवाज सुनाई दी, मेने देखा तो रंजन चिल्ला रही थी, वह लकड़ा दाल कर पार्टीशन जैसा बनाया हुआ था, और वह गार्ड खड़ा था. जो उनलोगो को आने नहीं दे रहा था. मेने सर से इजाजत ली और उनकी और चला गया. मुझे देख रंजन और विणा मुस्कुरा रही थी. वो hi तो मेरी अपनी थी और ऐसे खुसी का पल उनके साथ न बटु तो ये ख़ुशी किस काम की. मेने देखा की दिव्या, कुसुम और दूसरी लड़कीअ भी वह उनके साथ थी. में वो पार्टीशन कूद कर दूसरी और कूद गया. रंजन तो उछाल कर मेरे गले hi लग गयी, मेने भी उसे उठालिया.

रंजन : वह मेरे हीरो, तुमने तो कमल कर दिया., (सब देख रहे थे, रंजन की सहेलिया तो जल भून गयी थी, मेने उसे निचे उतरा,)

विणा : (हिचकिचाते hue)Congratulation Shiv.(Mene थैंक यू कहते हुए उसे भी गले लगा लिया, वो भी मुझसे लिपट गयी, विणा की तो खुसी समां नहीं रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की शिव ने उसे सबके सामने गले लगाया है. दिव्या भी अपने आप को पीछे नहीं रखना चाहती थी, वो भी आगे आयी और मेरे गले लग कर मेरे गाल पर किश करते हुए मुझे बधाई देने लगी. रंजन का भी मुँह खुला का खुला रह gaya)(Saheli 1 ने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे बधाई दी, तो मेने भी हाथ मिलाया)

सहेली 1 : ये क्या, उसने तुम्हे बधाई दी तो तुमने उसे गले लागलिया, हमने भी बधाई दी है. (रंजन ने उसको चुटी kati)Ouuuuch, क्या करती है कामिनी. मेने कुछ गलत कहा शिव.

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi कुछ गलत नहीं कहा, आओ तुम्हारे भी गले लग जाता हु. (वो भी पूरी बेशर्मी दिखती हुई मेरे गले लग गयी, वो ऐसे चिपकी की उसके उभर मेरी छाती में अपना आभास देने लगे. दो पल के लिए hi उसके गले लगा था, उसने मेरे गाल पर किश कर दी. एक दो और लड़कीअ भी गले लगी, बाकि सब ने सिर्फ हाथ मिलाया. संयम और वैस्वी ये नजारा देख रही थी)

वैस्वी : (वैस्वी अंदर से पूरी तरह जल भून गयी thi)Chal न यहाँ से, देख नहीं रही वो कैसे लड़कीओ से घिरा हुआ है.

संयम : तो क्या हुआ, तू ruk(Usne मुझे आवाज di)Shiiiiiiv.(Mene आवाज सुनी और उन्दोनो को देखा)

शिव : (रंजन se)Ghar पे मिलते hai.(Mene सब को bye कहा तो वो और उसकी सहेलिया वह से निकल गयी, में संयम के पास पंहुचा)

संयम : (उसका भी दिल कर रहा था शिव को गले लगा ले पर वो ऐसा नहीं कर शक्ति, उसने हाथ badhaya)Congratulation शिव.

शिव : थैंक यू Samim(Kehte हुए मेने उसे गले लगा लिया, संयम भी बहोत खुस हो गयी और शिव के गले लग गयी).

संयम : तुमने तो कमल कर दिया, मुझे नहीं पता था तुम इतने बड़े खिलाडी हो, लोग एक मैडल के लिए तरसते है और तुम इतनेसारे लटकाये हुए ho.(Mene देखा की वैस्वी घर रही थी कुछ बोल नहीं रही थी, तभी मुझे हर्ष की आवाज सुनाई दी, वो भी मुझे पुकार रहा था)

शिव : (मेने देखा की वैस्वी कुछ बोल नहीं रही तो मेने वह से जाना hi उचित समजा )ठीक है संयम, कल स्कूल में मिलते है., (में जा hi रहा था की)

वैस्वी : शिव, (उस धीमी आवाज को भी मेने पहचान लिया, मेने वैस्वी की और dekha)Congratulations.(Usne हाथ आगे बढ़ाया)

शिव : (मुस्कुराकर हाथ badhaya)Thank यू. (उतने में मुझे हर्ष और महेश की आवाज सुनाई दी तो मेने संयम को kaha)Kal मिलते है. (वो दोनों भी जाने लगी)

में अपने दोस्तों के पास गया, लड़के तो कैसे मिलते है पता hi है, दोनों ने मुझे उठालिया, तो दूसरे लड़के भी शामिल हो गए और सबने मिलके मुझे उठालिया और चिल्लाने लगे, संयम और वैस्वी भी रुक गए और हमारी तरफ देखने लगे, रंजन और दूसरी लड़कीओ ने भी ये देखा, सब हमारी तरफ hi देख रहे थे. सब खुस थे, सब मुझे उठा कर चिल्ला रहे थे. मेने आसपास देखा, सब के चेहरे पर ख़ुशी थी. थोड़ी देर ये सब चला, उसके बाद में जूही को ढूंढने लगा, वो मुझे कही दिखाई नहीं दी तो में उसे ढूंढने लगा. धीरे धीरे सब जा चुके थे, तभी मुझे जूही काम में बिजी दिखाई दी. वह पे दूसरे टीचर भी काम में लगे हुए थे. में वह गया.

शिव : जुहीय. (उसने पलट कर मेरी और देखा, मुझे देख कर वो मुस्कुराती हुई मेरी और बढ़ी, उसने अपना हाथ बढाकर )

जूही : कोंग्रटुलतिओं शिव, (मेने अपना हाथ नहीं बढ़ाया, मेने अपने गले से सरे मैडल उतरे और उसके गले में दाल दिए)

शिव : कंगातुलेशन मैडम. (उन्हें गले लगते हुए) Aur,Thank you(Asspass के लोग खड़े हो गए और तालिया बजने lage)(Me उनसे दूर हुआ तो देखा की उनकी आंखे छलक आयी थी, जो तालिया बजा रहे थे मेने उनका सुक्रीडा kia)Thank यू, थैंक यू.

जूही : (अपने आंसू पोछ kar)Abhi सूरत है शिव, मंजिल अभी दूर है.

शिव : यस मैडम, में हाजिर hu.(Us ने मेरे गाल पर एक चपत लगायी, और सरे मैडल मुझे वापस पहनादिये)

जूही : थोड़ी देर रुको, फिर साथ में निकलते है.

शिव : ठीक है.

शाम के सादे 6 बज गए जब तक हम वह से निकले. में स्कूटर चला रहा था और जूही पीछे बेथ गयी.

जूही : अह्ह्ह्ह! आज तो थक गए. पर आज तुम्हारा परफॉरमेंस देख कर साडी थकन जैसे कुछ नहीं है.

शिव : ये तुम्हारी म्हणत का hi परिणाम है.

जूही : चलो आज सेलिब्रेट करते है. कही खाना कहते है.

शिव : पहले अनाथालय चलते है, वह दीदी को मिलकर चलते है.

जूही : है, ये भी सही है, चलो पहले वही चलते है.

हम दोनों अनाथालय आ गए, रंजन पहले hi सबको बता चुकी थी, स्कूटर की आवाज सुन कर रंजन दौड़ती हुई आयी.

रंजन : (चिल्लाते hue)Didiiii, वो आ gaya.(Mene रंजन को देखा, स्कूटर पार्क किआ और अंदर जाने लगा तो उसने मुझे रोक diya)Yahi रुको, दीदी आती है.

शिव : क्या कर रही हो? दीदी कहा है.

लतादिदी : में यहाँ हु (मेने देखा की वो हाथ में आरती लिए आ रही थी, उनके चेहरे पर खुसी साफ छलक रही थी)

जूही : एक मिनट रुको (उसने अपना फ़ोन nikala)Me फोटोज लेती हु. अब तुम चालू करो.

दीदी ने मेरी आरती उतरी, मेरे माथे पर टिका किआ, मेरी बलए ली. मेरे शिर पे पानी का लोटा घुमाया और बहार फेंक दिया.

लतादिदी : अब आ जा.

शिव : ये सब क्या है दीदी?

लतादिदी : तेरा स्वागत है, और कही किसी की नज़र न लगी हो इस लिए नज़र भी उतरी.

रंजन : है दीदी, आज तो सब की नज़ारे इस पर hi थी. सब लड़कीअ इससे घर घर के देख रही थी.

जूही : (हस्ते hue)Ye तो इसने सही कहा, आज स्टेडियम में सब की नजरो का केंद्र शिव hi था.

शिव : क्या तुमलोग भी, ऐसा कुछ नहीं था.

रंजन : दीदी अगर आप होती तो पता चलता, पुरे स्टेडियम में एक hi नाम सुनाई दे रहा tha’Shiiiv’ ‘शिव’, क्यों में सच केहरहि हु didi.(Juhi को)

जूही : है, बिलकुल सच, आज सबकी निगहोमे और सबके होठो पर एक hi व्यक्ति था ‘शिव’

सरिता दीदी : लता दो चार और लोटे घुमा इसके शिर पर, एक लोटे से कुछ नहीं होनेवाला.

सब हसने लगे, रंजन और जूही दोनों सब को पुरे दिन की कहानी बता रहे थे. माहौल पूरा खुशनुमा हो गया था.

जूही : अगर आप सब की इजाजत हो तो में थोड़ी देर के लिए शिव को ले जा शक्ति हु, खाना खा कर वो वापस आ जायेगा. तुम्हे कोई एतराज नहीं है न लता.

रंजन : (लता बोलती उस से पहले hi)Muje एतराज है, तुम दोनों अकेले अकेले सेलिब्रेट करोगे? हम भी करना चाहते है, आखिर शिव हमारा भी है.

लतादिदी : ये क्या है रंजन? तुम जाओ जूही, ये आएगा उसके बाद हम सेलिब्रेशन करेंगे.

जूही : नहीं, ये सही कह रही है, अब तो सब मिलकर पार्टी करेंगे, पर उसके लिए भी हमे बाजार जाना होगा, सब लेकर हम यही वापस आते है.

(एक औरत की आवाज): इसकी कोई जरुरत नहीं. (हमने मुद कर देखा तो स्नेहा मैडम, पवनसीर और बिना मैडम खड़े थे)

शिव : आप लोग?

स्नेहा मैडम : है हम लोग भी आये है.

शिव : (बिना मैडम ko)Madam आप?

बिना मैडम : है, में भी ऋषव से अभी आयी, यही हम साथ हो गए.

स्नेहा : हम सब मिल कर पार्टी करेंगे, पवन...

पवनसीर : है है, चलो शिव, हम दोनों सब ले आते है.

हम वह से निकल गए और बहोत सारा नास्ता और कोल्डड्रिंक्स लिया, आज अनाथालय में जैसे जश्न का माहौल था, हम सब ने खूब मज़ा किआ. बच्चे भी बहोत खुस हो कर नाच रहे थे.

जूही : सच में बहोत मज़ा आया, अगर हम अकेले गए होते तो इतना मज़ा नहीं आता.

स्नेहा : सही कहा तुमने, सब के साथ पार्टी कर के मज़ा आ gaya.Chalo अब हमे चलने चाहिए.

बिना मैडम : है मुझे भी चलना चाहिए.

जूही : आप मेरे साथ चलिए, में आप को घर छोड़ देती हु.

वो सब वह से निकल गयी, दीदी और सब साफ सफाई में लग गए. में पुरे दिन की भागादौड़ी से थक गया था तो में जल्दी सो गया.
 
अपडेट 83

रात को रंजन और विणा दोनों अपने कमरे में लेती हुई थी, दोनों hi शिव के बारे में बाते कर रही थी. आज जिस तरह लड़कीअ शिव से हाथ मिलाने के लिए, उसे किश करने के लिए उतावली हो रही थी उसी की बाते कर रही थी.

विणा : तुजे नहीं लगता की दिव्या, शिव से कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी.

रंजन : है यार, मुझे भी लग रहा था, मुझे तो लग रहा है उसने शिव के लिए hi हमे शादी में बुलाया था.

विणा : ऐसा नहीं हो शक्ति, वो तो हमारी सहेली है.

रंजन : तूने देखा नहीं, स्कूल में भी वो हमेशा शिव के बारे में hi पूछती रहती थी.

विणा : है, ये तो सही है, वो अक्सर शिव की hi बाते किआ करती है, पर वो ऐसा क्यों कर रही है?

रंजन : आरी पागल, उसे भी शिव पसंद आ गया है तो डोरे दाल रही है.

विणा : ऐसा क्या हो जाता है जो वो इस तरह से पीछे पद जाती है?

रंजन : अब तुजे क्या संजो, ये जवानी के लक्षण है, जब जवानी चढ़ती है तो लड़कीओ को लड़के अच्छे लगने लगते है.

विणा : वोही तो पूछ रही हु की ऐसा क्या हो जाता है?

रंजन : जब लड़कीअ जवान होती है तो उनके शरीर में जो बदलाव होते है, उसकी वजह से उन्हें लड़के अच्छे लगने लगते है, लय तुजे अच्छे नहीं लगते? तू सब से तो छुपा शक्ति है पर अपने आप से तो नहीं छुपा शक्ति, तुजे खुद पता होगा की तुजे लड़को को देखना अच्छा लगता है की nahi.(Vina ने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस रंजन को देख रही थी) तू चाहे मुझे जवाब न भी दे पर तू खुद महसूस कर रही होगी. कितना मज़ा आता है जब शिव मुझे वैसे छूटा है तो, में तुजे बता नहीं शक्ति, उसका लुंड चूसने में भी कितना मज़ा आता है.

विणा : कितना गन्दा बोलती है तू, एक तो वैसे गंदे काम करती है और ऊपर से इतनी गन्दी बाद बड़े मज़े से बोल भी रही है, बेशरम कही की.

रंजन : जब तुजे ये चस्का लगेगा तब तुजे पता चले गए, जब कोई तेरे इन स्तनों को दबाएगा, तेरी मुजिया को सहलायेगा तब तुजे इस बात का एहसास होगा.

विणा : हैट गन्दी, ऐसा क्या हो जाता है तुम्हे जो इतना मज़ा ले रही है?

रंजन : तुजे जान न है? (विणा का दिल भी कर रहा था की वो जाने पर शर्म के कारन वो कुछ बोल नहीं प् रही थी, रंजन को क्या सूजी की उसने करवट ले कर उसको देखते हुए उसके ऊपर हाथ रख दिया और उसके एक स्तन को पकड़ लिया)

विणा : (चौकते hue)Ye क्या कर रही है बेशरम, छोड़ मुझे.

रंजन : शहहहहह, चुप हो जा और अपनी आंखे बंद करले, और सोच की कोई लड़का ऐसा कर रहा है. (वो अपनी आंखे फाडे रंजन को देख रही thi)Bola न अपनी आंखे बंद कर.

विणा : (अच्छा तो उसे भी लग रहा था तो उसने अपनी आंखे बंद की, वो किसी और को तो जानती नहीं थी तो उसके जहँ में शिव hi आया, आज पहली बार कोई उसके स्तन को दबा रहा था, जैसे hi उसे लगा की शिव उसके स्तन दबा रहा है, उसकी सांसे चढ़ने लगी, उसके शरीर में अजीब सी हलचल होने लगी)

रंजन भी आज पहलीबार ऐसा कुछ कर रही थी, वो लड़की थी और किसी लड़की के स्तन को वो दबा रही थी, ये एहसास उसे भी अच्छा लगने लगा, वो विणा के स्तन को सहलाते हुए दबाने लगी, उसे महसूस हो रहा था की विणा का निप्पल कड़क हो गया है. उसने निप्पल को मरोड़ा तो विणा के मुँह से सिसकी निकल गयी.

रंजन : (मुस्कुराते हुए) क्यों, कैसा लग रहा है? (उसकी आवाज से विणा की तन्द्रा टूटी और उसने आंखे खोली, उसके सामने शिव नहीं रंजन थी, अभी भी वो उसके स्तन को दबा रही thi)Batana कैसा लग रहा hai?(Vina अभी भी कुछ नहीं बोल रही थी) चल रहने दे, तेरा चेहरा hi बता रहा है की तुजे कितना मज़ा आ रहा hai(Wo थोड़ी देर विणा के स्तन से खेली, उसका शरीर भी गर्म हो गया tha)Vina... सुन न.

विणा : हम्म्म्म...

रंजन : तू भी मेरे स्तन को दबा न यार, मुझे कुछ कुछ हो रहा है( विणा को शर्म आ रही थी तो उसने कुछ नहीं किआ, वो बस रंजन को देख रही थी) देख अगर तू नहीं करेगी तो में भी नहीं करुँगी. (रंजन की धमकी का असर हुआ, विणा नहीं चाहती थी की रंजन रुक जाये, उसने शरमाते हुए रंजन के स्तन को छुआ, उसने अपने स्तन को तो नहाते वक़्त कई बार छुआ था पर दूसरी लड़की को छूने का एहसास अलग hi था.) थोड़ा दबा न. (विणा, रंजन के स्तन को दबाने लगी, दोनों एक दूसरे के स्तन को दबा रही थी, दोनों की सांसे तेज तेज चल रही थी, रंजन अपना हाथ नीचे ले गयी और विणा के फ्रॉक के अंदर दाल कर उसकी छूट को सहलाने लगी, विणा को तेज झटका लगा, उसने फ़ौरन रंजन का हाथ पकड़ लिया)

विणा : ये क्या कर रही है?

रंजन : कुछ नहीं होगा, तुजे मज़ा आएगा.

विणा : मुझे शर्म आ रही है.

रंजन : कब तक शर्म करती रहेगी, अब तू बड़ी हो गयी है, एक न एक दिन तो तुजे ये सब करना hi पड़ेगा, तेरी कच्छी भी गीली हो गयी है, इसका मतलब तुजे मज़ा आ रहा है, है न? (विणा ने शरमाते हुए है kaha)Yaar मेरी छूट को भी छू न, मेरा भी बहोत मन कर रहा है.)

विणा : अगर इतना मान कर रहा है तो शिव के पास चली जा.

रंजन : है यार, ये अच्छा आईडिया है, ठीक है, में जाती हु. (विणा ने ये कह तो दिया, पर अब उसे पछतावा हो रहा था, उसे भी मज़ा आ रहा था और रंजन ने हाथ हातलिये थे, विणा के चेहरे को देख कर उसे इस बात का एहसास hua)Chal तू भी चल.

विणा : पागल हो गयी है क्या, में नहीं आती.

रंजन : आरी चल न, तू देखना, में दरवाजा थोड़ा खुला रक्खूंगी.

विणा : न यार, मुझे दर लग रहा है.

रंजन : कुछ नहीं होगा, chal(Usne विणा को खिंच कर खड़ा किआ और दोनों शिव के रूम की और जाने लगे, चारो और सन्नाटा छाया हुआ था, रंजन एक बार बच्चोंवाले कमरे में देख आयी, सब सो रहे थे, वो शिव के कमरे में आ गयी, शिव ने दरवाजा खुला hi रक्खा था. सिफत अंडरवियर पहने वो बिस्तर पर सो रहा था) तू यही कड़ी रह, में जाती हु.

विणा : में जाती हु, तू कर जो करना है.

रंजन : मेने कहा न, यही कड़ी रह. (थोड़ा दांत कर कहा था रंजन ने)

रंजन अंदर चली गयी, उसने शिव को देखा तो वो गहरी नींद में खोया हुआ था. उसने शिव की छाती पर हाथ रक्खा और उसे सहलाने लगी, थोड़ी देर सहलाने पर भी शिव नहीं उठा, (पुरे दिन की भगा दौड़ी के कारन वो थका हुआ था तो गहरी नींद सो रहा था) उसने शिव के लुंड को, अंडरवियर के ऊपर से hi छुआ





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और उसे सहलाने लगी, थोड़ी देर सहलाने से लुंड खड़ा होने लगा, उसने शिव के चेहरे को देखा तो वो सो hi रहा था. उसने अंडरवियर को पकड़ा और थोड़ा नीचे खिसका दिया, उसका कड़क बड़ा लुंड बहार आ गया था, उसने लुंड पकड़ा और हिलने लगी, उसने अपने मुँह से थूक निकल कर लुंड के सुपडे पर लगाया और हिलने लगी. वो थोड़ी देर सहलाती रही पर शिव अभी भी सो रहा था. वो झुकी और लुंड को अपने मुँह में भर लिया,





वो शिव को hi देख रही थी की शिव जाग जाये, पर थोड़ी देर लुंड को चूसने पर भी शिव नहीं जगा. उसने विणा की और देखा तो वो दरवाजे से झांक रही थी. उसने इस्सर किआ उसे अंदर आने का, पर विणा ने न में शिर हिला दिया. वो कड़ी हुई और उसके पास गयी.

रंजन : (धीमी आवाज me)Chal न, लुंड को नज़दीक से देखने का ये सुनेहरा मौका है, वो बहोत गहरी नींद में सो रहा है.

विणा : नहीं मुझे नहीं देखना, मुझे दर लग रहा है.

रंजन : कुछ नहीं होगा, चल, गर वो जाग गया तो में उसके होठो को चूमने लग जाउंगी, तू भाग jana.(Usko खींचते hue)Chal न. (विणा कटी पतंग की तरह रंजन के साथ अंदर आ गयी, सुने देखा तो शिव लेता हुआ था और उसका बड़ा लुंड उसके सामने था, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, रंजन नीचे बेथ गयी और खिंच कर विणा को भी बिठाने लगी, विणा दर रही थी पर रंजन के खींचने पर वो बेथ गयी) कैसा लग रहा है?

विणा : (थूक निगलते hue)Kitna बड़ा है.

रंजन : छू कर देख. (विणा न में गर्दन हिलने लगी) आरी कुछ नहीं hoga(Ranjan ने लुंड को पकड़ा और उसे हिलने लगी, विणा कभी लुंड को तो कभी शिव के चेहरे को देख रही थी, उसके माथे पर पशीने की बुँदे छलक आयी थी. रंजन ने विणा का हाथ पकड़ा और उसे लुंड की और ले जाने लगी, विणा अपना हाथ पीछे खिंच रही thi)Kuchh नहीं hoga(Jab विणा का हाथ लुंड के करीब पंहुचा तो उसकी उंगलिया लुंड को पकड़नेवाली मुद्रा में आ गयी) दर मात, पकड़ le(Usne रंजन को देखा फिर उस बड़े लुंड को देखा, उसने शिव के चेहरे को भी देखा, आज पहली बार वो किसी लड़के के लुंड को इतना करीब से देख रही थी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, जब रंजन ने उसके हाथ पर जोर दिया तो उसका हाथ लुंड को छू गया, उसको जैसे करंट सा लगा, वो गरम गरम लग रहा tha)Pakada, कुछ नहीं hoga(Jor जोर से सांसे लेते हुए वो अपनी उंगलिअ मोड़ने लगी, उसके हाथ में वो गरम लुंड था, ऊपर से खाल तो नरम लग रही थी पर अंदर से वो कड़क था, उसकी हालत ख़राब हो रही thi)(Ranjan ने देखा की विणा ने लुंड को पकड़ा है तो उसकी कलाई को पकड़ कर वो ऊपर नीचे करने लगी, विणा का हाथ लुंड पर ऊपर नीचे हो रहा tha)(Vina को अजीब लग रहा था, अभी उसे मज़ा नहीं आ रहा था बस दर लग रहा tha)(Thodi देर बाद रंजन ने हाथ छोड़ दिया फिर भी विणा लुंड को हिलाये जा रही थी, रंजन के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, विणा लुंड को देखते हुए उसे हलके हलके हिला रही थी, एक अजीब सा एहसास हो रहा था, दर काम होने लगा था और उसे लुंड को छूना अच्छा लग रहा था) मुँह में लेना chahogi?(Ranjna की आवाज सुन कर विणा को होश आया, उसने देखा की रंजन ने उसकी कलाई नहीं पकड़ी हुई है और फिर भी वो लुंड को हिला रही है, वो रुक गयी) मुँह में ले कर महसूस करना चाहेगी?

विणा : (कम्पटी आवाज me)Kaisa लगे गए?

रंजन : (मुस्कुराते हुए) वो तो तुजे तभी पता चलेगा जब वो तुम्हारे मुँह में जायेगा, ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा, अनुभव कर ले, शर्मा मात.

विणा : (उसे ये सब अजीब लग रहा था पर उसका दिल कर रहा था की वो ये सब करे, वो धड़कते दिल से झुकने लगी, जब वो लुंड के नजदीक पहुंची तो उसको एक अजीब सी गंध महसूस हुई, वैसे तो वो गंध hi थी पर पता नहीं क्यों उसे वो अच्छी लग रही थी, वो थोड़ी देर उसे सूंघती रही, उसको अपने शरीर में अजीब सी तरंगे महसूस होने लगी थी, उसने डरते डरते अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में प्रवेश करवा दिया,





सूपड़ा बहोत बड़ा था तो उसको अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा, एक अजीब सा नमकीन स्वाद उसको महसूस हुआ, पर बुरा नहीं लग रहा था, उसने किसी लड़के के लुंड को अपने मुहमे लिया है ये महसूस होते hi उसको अजीब सा लगने लगा, उसकी आंखे बंद हो गयी और वो उसे पूरी तरह से महसूस करने लगी. जब उसे अपने शिर पर रंजन का हाथ महसूस हुआ तो उसने आंखे खोली, रंजन उसके शिर के बल पकड़ कर उसे धक्का दे रही थी, लुंड उसके मुँह में थोड़ा और अंदर उतर गया, तो रंजन उसके बालो को ऊपर खींचने लगी, तो वो ऊपर उठती गयी, फिर रंजन ने दबाया, एक दो बार करने से वो समाज गयी की क्या करना है, अब रंजन ने उसके बाल छोड़ दिए थे पर फिर भी वो अपना शिर ऊपर नीचे कर रही थी, ये अजीब था पर उसे बहोत अच्छा लग रहा था. जब वो ऐसा कर रही थी तो शिव थोड़ा हिला तो वो दर गयी और वो पीछे हैट गयी, उसका दिल तो जैसे मुँह में आ गया tha.)(Ranjan ने देखा तो शिव अभी भी सो रहा था)

रंजन : वो सो रहा है, कुछ नहीं हुआ. अभी और करना hai?(Vina इतना दर गयी थी तो उसने न में गर्दन हिलायी) ठीक है, तू जा में आती hu.(Vina कड़ी हुई और दरवाजे की और बढ़ी, उसने मुद कर देखा तो रंजन अपने कपडे निकल रही थी, वो बहार निकली और अपने रूम की और जाने लगी, पर उसका दिल नहीं मान रहा था, वो वापस पलटी और दरवाजे की आड़ से अंदर देखने लगी. उसने देखा की रंजन अपने पुरे कपडे निकल कर नंगी हो गयी. उसने शिव की अंडरवियर भी पूरी निकल दी. फिर से वो शिव के लुंड के पास बेथ गयी और शिव के लुंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी. उसको लुंड चूसते देख विणा के भी मुँह में पानी आने लगा, वो समाज नहीं प् रही थी की उसको ऐसा क्यों लग रहा है, क्यों उसे वो लुंड इतना अच्छा लगने लगा है, वो अपने मुँह में उंगलिया दाल कर उंगलिओ को hi चूसने लगी.

थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद रंजन शिव के ऊपर होने लगी, वो पूरी नंगी थी, आकर में उसके कूल्हे छोटे थे पर अपने शरीर के हिसाब से वो काफी आकर्षक लग रहे थे, पतली कमर का कटाव उसे और चौड़ा दिखा रहा था. उसने लुंड को पकड़ा और उसे अपनी छूट के छेड़ पर घिसने लगी. विणा को पीछे से उसके फैले हुए कूल्हों के बिच छूट के फैलते हॉट स्पस्ट दिख रहे थे, उसे समाज नहीं आ रहा था की रंजन करने क्या जा रही है, क्यों की उसे भी पता था की छूट का छेड़ बहोत छोटा है और शिव का वो लुंड काफी विकराल है, उसकी नज़ारे छूट को फैलाये, छेड़ पर ठीके लुंड पर hi थी. रंजन छूट के छेड़ पर लुंड को टिकाये थोड़ी देर रुकी और शिव को देखने लगी, अपने आप को सही स्थिति में ला कर वो लुंड पर दबाव बढ़ने लगी, वो अपने आपको नीचे धकेल रही थी पर लुंड अंदर जा hi नहीं रहा था, अचानक से लुंड फिसल कर पीछे उसके कूल्हों की दरार की और चला गया. शिव थोड़ा हिला पर नींद इतनी थी की वो फिर से शांत हो गया.

रंजन जैसे हर मन ने को तैयार hi नहीं थी, उसने फिर से लुंड पर थूक लगाया और फिर से लुंड को अपनी नन्ही सी छूट के छेड़ पर सेट किआ. इस बार उसने लुंड को छोड़ा नहीं, उसका चेहरा भी लाल हो गया था, उसने हिम्मत बटोरी और लुंड पर थोड़ा जोर लगा कर बेथ गयी. छूट के छल्ले को फाड् कर लुंड उसकी छूट में प्रवेश कर गया पर उसे तेज दर्द महसूस हुआ, वो संभल नहीं पायी और उसके पेअर कैंप गए जिस से उसका शरीर और निचे हुआ और लुंड उसका कौमार्य भांग करते हुए छूट के अंदर चला गया. उसके मुँह से चीख निकलनेवाली थी पर उसने अपना मुँह अपने दन्त की मदद से जोर से बंद कर दिया, पर वो शिव के ऊपर धड़ाम से गिरी.

में नींद से अचानक जाग गया, मेरे ऊपर कुछ गिरा था और साथ में मुझे लुंड पर भी थोड़ा दर्द महसूस हुआ था. मेने आंखे खोली और समझने की कोशिस करने लगा, मेने महसूस किआ की कोई मेरे ऊपर है और मेरा लुंड किसी संकरी जगह पर धसहुआ है. लुंड पर हो रही गर्म खून की बरसात को में महसूस कर प् रहा था. मुझे परिस्थिति का बहन हुआ, मेने उस लड़की का चेहरा देखा तो पशीने से लतपथ मुझे रंजन का चेहरा नज़र आया. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे. मेने उसको हटाने की कोशिस की तो वो दर्द से कराहने लगी तो मेने उसे वैसे hi रहने दिया.

शिव : पागल हो गयी हो? ये क्या कर दिया?

रंजन : (दर्दभरे चेहरे पर भी मुस्कान लेट hue)Wahi जो तू कर नहीं रहा था.

शिव : मेने कहा था न की सही वक़्त आएगा तब करूँगा.

रंजन : मुझे पता है, वो सही वक़्त कभी आनेवाला नहीं था.

शिव : ऐसा क्यों कह रही है तू?

रंजन : वो इस लिए की तू जनता था की अगर तू करेगा तो मेरी क्या हालत होगी, इस्सलिये तू कभी मेरे साथ नहीं करता, है न?

शिव : ऐसा नहीं है, और में कहा भगा जा रहा हु जो तुजे इतनी जल्दी थी?

रंजन : सब लड़कीअ, कैसे तेरे पीछे पड़ी थी, अगर कोई तुजे उदा ले जाती तो?

शिव : बेवकूफ लड़की, ऐसा कुछ नहीं है.

रंजन : में जानती हु, वो सब तो अभी दूर है, में ये भी जानती हु की तू अभी मुज से भी वैसवाला प्यार नहीं करता जो शादी तक जाये. (में उसकी आँखों में देखने लगा) तू क्यों इतनी चिंता करता है? वो सब अभी बहोत दूर की बाते है, में जानती हु, जिस तरह का भी हो, पर प्यार तो तू मुझसे करता hi है, में ये भी जानती हु की तू भविस्य का सोच कर तू मुज से दूर रह रहा है, वर्ण में तेरे निचे नंगी लेती थी, तेरी जगह अगर कोई और होता तो वो कब का मुझे छोड़ चूका होता. पर तू मेरी परवाह करता है, तू ये नहीं चाहता की में कभी इस वजह से दुखी हो, इस लिए मुझे तू उल्लू बना देता था. और ऐसा किसने कहा है की अगर तू मेरे साथ ये सब करेगा तो तुजे मेरे साथ शादी करनी hi पड़ेगी, में अपनी मर्जी से तेरे साथ ये सब करना चाहती हु, चाहे तू मेरे साथ शादी करे या न करे, पर मुझे हमेशा ये ख़ुशी तो रहेगी की में कभी तेरी बन के रही हु. और ऐसा भी नहीं है की तू मुज से शादी नहीं hi करेगा, क्या में इतनी बुरी hu?(Usne इतना प्यारा मुँह बनाया की मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी)

शिव : मुझे ये तो पता है की तू पागल है पर ये नहीं पता था की तू इतनी पागल है?

रंजन : तूने मेरा पागल पैन देखा कहा है? (थोड़ा सीरियस हो कर) भविस्य का सोच कर में अभी इन खुसियो को खोना नहीं चाहती शिव, अगर भविस्य में तुजे लगे की तू मुझे तेरी दूसरी बीवी भी बनाना चाहता है तो भी में तैयार हु, दूसरी क्या तीसरी, चौथी, पांचवी, तेरी जैसी मर्ज़ी होगी में वैसा रहूंगी तेरे साथ. और क्या में इतनी बुरी दिखती हु की कोई दूसरा मेरे साथ शादी नहीं करेगा?

शिव : (उसका गाल सहलाते हुए उसके आगे आ रहे बालो को पीछे करते hue)Tu सच में पागल है.

रंजन : है हु, और ये सब भविस्य की बाते है, अभी तो में तेरे hi गले पड़ी हु, तुजे hi संभालना है मुझको. (मेरी आँखों में देखते hue)Sambhalega na?(Use अपनी और खींचते हुए, उसके होठो को चूमना चाहा) आईईईई, shhhhhhhh.(Apni छूट में दर्द महसूस करते hue)Sach में तेरा बहोत बड़ा है, पता नहीं दीदी ने कैसे लिया था.

शिव : (उसकी बात से चौकते हुए) क्या कहा तूने?

रंजन : (अपने आप को सँभालते हुए) कक्क कुछ नहीं.

शिव : मेने सुना तूने क्या कहा.

रंजन : छोड़ न उन बातो को, अभी इस से पीछा छुड़ा.

शिव : बहार निकल लू?

रंजन : मेने तेरे मुसल से पीछा छुड़ाने को नहीं कहा, इस दर्द से पीछा छुड़ाने को कहा है.

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Puri पागल है, पर सच कहता हु रंजन, तू बहोत प्यारी hai(Uske संतरे जैसे स्तन को हलके हलके दबाते hue)Be शर्म, पूरी नंगी हो कर चली आयी, तुजे जरा भी शर्म नहीं आती, है न?

रंजन : शर्माती रहूंगी तो अपने शिव को कैसे पाऊँगी. मेने तुजे एक दिन कहा था न की कभी मौका मिला तो तू मेरी हिम्मत देखेगा, आज वो दिन आ गया, तू तो कभी हिम्मत करनेवाला नहीं था, तो मेने hi कर दी.

शिव : अब बंद कर अपनी बक bak(Mene प्यार से उसे कहा).

मेने उसके होतो को अपने होठो से बंद कर दिया, हम दोनों किश करने लगे, में उसके स्तन को दबा रहा था, लतादिद और रंजन, दोनों का शरीर काफी एक जैसा था, में एक हाथ से उसकी नंगी पीठ को सहलाते हुए उसे किश कर रहा था, थोड़ी देर बाद मेने उसके छोटे छोटे कूल्हों को थम लिया और उसे मसलने लगा, थोड़ी hi देर में वो गर्म होने लगी और मेरे होठो को जोर जोर से किश करने लगी, किश करते हुए hi मेने उसकी कमर को कूल्हों समेत पकड़ा और उसे अपने लुंड पर ऊपर नीचे करने लगा, एक दो बार उसके मुँह से उम्म्म उम्म्म जैसी आवाजे निकली पर फिर वो शांत हो गयी, छूट की चिकनाहट भी मुझे अपने लुंड पर महसूस होने लगी, में आहिस्ता आहिस्ता उसे पकड़ कर अपने लुंड पर ऊपर नीचे कर रहा था. विणा बहार से ये नज़ारा देख रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वो बड़ा लुंड, रंजन की छूट में अंदर बहार हो रहा है.





अब रंजन भी कराह नहीं रही hi बल्कि सिस्किअ ले रही थी. ये देख कर उसका हाथ भी अपनी छूट पर चला गया, अपना फ्रॉक उठा कर उसने अपनी कच्छी में हाथ दाल दिया और अपनी छूट को मसलने लगी. उसके मान में अभी ऐसा कोई विचार नहीं था की उसे शिव से छोड़ना है की नहीं छोड़ना है, अभी तो बस उसे इस नज़ारे को देख कर hi आनंद आ रहा था, उसकी सबसे करीबी सहेली ने आज अपना कौमार्य खो दिया था और अभी वो मज़े से उस बड़े लुंड को अपने अंदर समाये हुई थी.

रंजन : शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह कितना अच्छा लग रहा है शिव, ये तो मेरी सोच से भी कही ज्यादा मज़ेदार है शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह तेरा वो अंदर बहार हो रहा है तो कितना अच्छा लग रहा है.

शिव : तुजे अब दर्द तो नहीं हो रहा?

रंजन : हो रहा है शिव पर अच्छा भी लग रहा है, तुजे मेरी छूट कैसी लग रही है? तुजे मज़ा आ रहा है मेरे साथ?

शिव : है, रंजन, मुझे भी मज़ा आ रहा है?

रंजन : कैसा लग रहा है तुजे?

शिव : मेने कहा न मज़ा आ रहा है.

रंजन : ऐसे नहीं, मेरी छूट के अंदर तुजे कैसा अनुभव हो रहा है, मुझे बता न, मेने सुना था की लड़की को पहलीबार छोड़ते हुए लड़को को बहोत मज़ा आता है, क्या तुजे मेरी छूट में मज़ा आ रहा है?

शिव : (में इस पगली लड़की को देखने लगा, सच में वो थोड़ी पागल तो थी पर प्यारी भी उतनी hi thi)Ha, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, में तेरी छूट की संकरी गली की सब मासपेशिओ को महसूस कर रहा हाउ, वो अंदर से बहोत ज्यादा कासी हुई है, मेरा लुंड अंदर फास कर अंदर बहार हो रहा है तो मुझे बहोत मज़ा आ रहा है.

रंजन : तेरा लुंड भी अंदर पूरी तरह से में महसूस कर रही हु शिव, जब तेरा लुंड अंदर बहार हो रहा है तो मुझे एक अजीब तरह का मज़ा दे रहा है, मुझे तेरा ऐसा करना बहोत अच्छा लग रहा है. तू मुझे ऐसे hi रोज़ छोड़ना.

शिव : और पढ़ाई कोण करेगा? रोज़ रोज़ ऐसा कुछ भी नहीं करना है सामजी.

रंजन : (अपना मुँह बनाते hue)Ganda शिव, तुम बहोत बुरे हो, (वो ऐसे कह रही थी की मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Agar तू नहीं करेगा न तो में ऐसे hi तेरे ऊपर चढ़ जाउंगी, कह देती हु.

शिव : Pagal.(Wo नटखट मुस्कुराने लगी)

रंजन : शिव, सुन न, मुझे अपने निचे लेता कर छोड़ न.

शिव : क्यों?

रंजन : तेरे निचे लेट कर छोड़ना है मुझे, मेने कई बार सपनो में देखा है, वैसा. में तेरे निचे लेती हु और तू मुझे छोड़ रहा है, मुझे वो बहोत अच्छा लग रहा था, में वैसा hi महसूस करना चाहती हु.

शिव : तुजे पलटने में अगर तुजे दुख तो?

रंजन : कुछ नहीं होगा, अगर थोड़ा दुख, तो भी में सेह लुंगी.

शिव : ठीक है. (मेने उसे उपक किआ और अपना लुंड बहार निकला, आहिस्ता से उसे निचे लेटाया, एक बार तो उसकी कराह निकल गयी, पर अब जो होना था वो तो हो hi गया था, मेने उसे सीधे लेटाया, वो घुटने मोड़ कर अपनी टंगे फैलाये लेती थी, मेने देखा तो उसकी छूट के आस पास खून लगा हुआ था, और छूट का रास भी लाल हो कर बहार टपक रहा था, मेने उसे देखा तो वो मुस्कुरा रही थी)

रंजन : क्या देख रहा है?

शिव : तेरा निकला हुआ खून, तुजे दर्द नहीं हो रहा?

रंजन : तू क्यों चिंता कर रहा है, अब भगवन ने एहि तरीका बनाया है तो में क्या कर शक्ति हु, अपने चाहनेवाले से प्यार करने के लिए, लड़की को ये दर्द सहना hi पड़ता है तो में इसमें क्या कर शक्ति हु. अब ज्यादा सोच मात, तेरा वो बहार है तो मुझे जरा भी अच्छा नहीं लग रहा, फिर से उसे मेरे अंदर दाल न.

शिव : पागल. (मेरे ऐसा कहने पर वो नटखट फिर मुस्कुरायी, में उसके ऊपर हुआ और उसके होठो को चुम लिया, उसकी गर्दन को चाट ते हुए उसकी चुचिओ को मसाला और उसके निप्पल को चूसने लगा.

रंजन : शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह कितना अच्छा लगता है ये सब शह्ह्ह्हह्ह मेरे शिव शहहहहह मुझे ऐसे hi प्यार कर शह्ह्ह्हह्ह ahhhhh(Wo मेरे बालो में हाथ घूमने लगी) मुझे पागल बोलता है पर तू खुद पागल है, शहहह कितने दिनों से में तुजे कह रही थी की मुझे ऐसा प्यार कर पर समाज hi नहीं रहा था, तू क्यों इतना सोचता है, में खुद लड़की हो कर तुजे कह रही हु फिर क्या सोचना, तुजे क्या लगता है की में क्या पागल हु, सब समझती नहीं, में सब समझती हु पर क्या मेरा कौमार्य hi सब है, क्या मेरी कोई वैल्यू नहीं? मेरे जज्बातो की कोई वैल्यू नहीं? क्या कोई लड़का या तू सिर्फ इसीलिए किसी से शादी कर शक्ति हो की वो कुवारी है चाहे देखने में वो बिलकुल बदसूरत हो, नहीं न तो फिर क्यों इतना सोचता है, अपनी चनेवाली को ऐसे तरसना ठीक नहीं शिव, मुझे भविस्य का पता नहीं तो उसे सोच कर में अपने आज को क्यों ख़राब करू, और ये मेरी जिंदगी है, मेरी कोई मर्जी नहीं kya?(Me उसे देखने laga)Kya देख रहा है?

शिव : यही की तू बहोत समझदार है, में तो यही सोचता था की तू ये सब नादानी में कर रही है.

रंजन : अब तो समाज आ गया, में कोई नादाँ नहीं हु, जिंदगी की ठोकरों ने हमें वक़्त से पहले परिपक्व कर दिया है, में अपना अच्छा बुरा सब समझती हु, और मुझे अभी अपने शिव से प्यार पाना है समजा. (मेरे लुंड को पकड़ते hue)Ab इससे वापस अपनी सही जगह पर dal(Kehte हुए उसने अपनी छूट पर लुंड लगा दिया, मेने भी दबाव बनाया तो लुंड वापस छूट में उतर गया) शह्ह्हह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है. (मेने भी अब ज्यादा बात किये बिना लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो मुझे चुम रही थी, मेरी पीठ को सेहला रही थी, मेने अभी ज्यादा लुंड अंदर नहीं डाला था, में बस आधे से भी काम लुंड को hi अंदर बहार कर रहा था, वैसे भी मुझे रंजन को माँ नहीं बनाना था बस उसे इस चुदाई का आनंद देना था, और छूट के अगले हिस्से में hi सरे सवेंदनशील भाग होते है तो उसे भी बहोत मज़ा आ रहा था) शह्ह्ह्ह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ मुझे शह्ह्ह्हह्ह तेरे लुंड बहोत अच्छा लग रहा है सीईव शह्ह्ह्ह है ऐसे hi शह्ह्ह्ह ऐसे hi शिव शहहहहह (वो मेरे गाल को चाट रही थी, मेरे कान की बूत को चूस रही थी) है मेरे शिईयिव शह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ मुझे शहहहहह कितना मज़ा आता है इन सब में शह्ह्हह्ह्ह्ह, (थोड़ी देर बाद)





थोड़ा जल्दी जल्दी कर शिव शहहहहह अह्ह्ह्हह मेरा निकलनेवाला है shhhhhh(Mene स्पीड बढ़ा di)Haaaa ऐसे hi shhhhhh(Wo मेरे बाल नोचते हुए मुज से लिपटने लगी) मेरे शिव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह में तेरी हु शिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अपनी रंजन को छोड़ शहहहहह अह्ह्ह्हह मेरे प्यारे शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मेरा होनेवाला है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव मुझे कुछ हो रहा है शहहहहह कितना अच्छा लग रहा है, शहहहहह में गयी शीइइइइइव अह्ह्ह्हह ऊऊऊ मायआ में गयी बस्सस अह्ह्ह्ह रुक जा शहहहहह (वो मुझे बेतहासा चूमने lagi)Oh शिव शहहह सीईव उम्मठ उम्मंहहह शिव ुम्मम्ह ुम्मम्ह. आज में पूरी हुई शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह तूने मुझे बहोत मज़ा दिया शह्ह्ह्ह अह्ह्ह. (थोड़ी देर में रुका रहा, वो शांत हो गयी, में उसे देख रहा था, वो भी मुझे देख रही थी, उसने थोड़ा ऊपर उठ के नीचे देखा, लुंड उसकी छूट में था पर बहोत सारा बहार भी tha)Shiiiiv, तुजे अभी पूरा अंदर नहीं डाला? मुझे तो लग रहा था की पूरा अंदर चला गया है.

शिव : सब एक hi दिन में तुजे कर लेना है?

रंजन : पर मुझे तो लग रहा था की मेरी छूट पूरी भर गयी है, कितना बड़ा है तेरा, अब क्या करेंगे?

शिव : क्या करेंगे से क्या मतलब है तेरा?

रंजन : यही, की, इससे कैसे अंदर डालेंगे.

शिव : आज के आज सब नहीं करना है, वो सब फिर कभी.

रंजन : पर एक बात तो आज करनी है?

शिव : वो क्या?

रंजन : आज तुजे पूरा होना है, और वो भी मेरे अंदर.

शिव : पागल हो गयी है?

रंजन : (नटखट सा हस्ती हुई) पागल नहीं हु में, मुझे पता है में क्या कह रही हु, में माँ नहीं बनूँगी, और क्या में अभी से माँ बनूँगी, अभी बहोत देर है उसके लिए.

शिव : तो???

रंजन : पागल, अब समाज आया, तू इतना भी समझदार नहीं है जो सब जनता हो. (में उसे सवालिया नज़रो से देखने लगा, वो फिर muskurayi)Are बुद्धू, इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है, ऐसी दवाई आती है, जिसे खाने से अभी बच्चा नहीं होगा, समजा. तो अभी तू चिंता छोड़ और मेरे अंदर hi अपना वीर्य निकल, में भी इस एहसास को महसूस करना चाहती हु.

शिव : तू सही कह रही है न?

रंजन : मुज पर भरोसा नहीं है क्या?

शिव : है, वो तो है.

रंजन : और में ऐसा कोई काम नहीं करना चाहती की मेरी वजह से एक और अनाथ इस दुनिया में आये. शायद ऐसे hi मेरी माँ ने मुझे फेक दिया होगा, में अपने बच्चे को ऐसे नहीं फेंकूँगी, जब मुझे लगे गए की में खुद उसकी परवरिस करनेलायक हु तभी hi उसे जन्म दूंगी.

शिव : (रंजन ने बहोत बड़ी बात बोल दी थी, में उसके दर्द को समाज शक्ति था, में झुका और उसके होठो को chuma)O दादी अम्मा, तू तो बहोत ज्यादा समझदार निकली.

रंजन : (मुस्कुराते hue)Aur नहीं तो क्या, मुझे बेवकूफ समजा है क्या, मुझे तेरे बारे में भी सब पता है, जो तू ये बहार और अंदर गुल खिला रहा है न, मुझे सब पता hai.(Me उसे देखने लगा, उसने मेरे गाल पर हाथ rakkha)Chinta मात कर, तुजे जो करना है कर, और मुझे ये भी पता है की तू को मन hi करता होगा पर कोई तुजे hi छोड़ने को तैयार नहीं होती होगी, जैसे में तेरे ऊपर चढ़ गयी. तो सब चिंता छोड़, और वैसे भी हमारे पास है क्या जो कोई हम से छीन लेगा, न जमीं जायदाद न खंडन का नाम, तो हमे क्या, जिसे जो करना है kare,hume किस बात का dar.(Mere मान में मनीषा मैडम का नाम उभरा, रंजन सच hi कह रही थी, मुझे किस बात का दर, मेने रंजन को देखा, वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी) क्या हुआ?

शिव : कुछ नहीं, थैंक यू.

रंजन : ठनक यू क्यों? मेने कुवारी छूट दी इस लिए?

शिव : पागल, तू कुवारी हो या न हो, तू मेरे लिए हमेशा खास hi रहे गई.

रंजन : है न? में भी तो वही कह रही थी, मेरी छूट मेरा प्रमाण नहीं है की में अच्छी हु, में खुद हु.

शिव : तू सच में बहोत प्यारी है.

रंजन : वो तो में hu(Fir खिल खिला कर हसने लगी, थोड़ी देर हसने के बाद, मेरा चेहरा सहलाते हुए) अगर में इतनी hi प्यारी हु तो फिर अब तो मुझे अच्छे से प्यार कर.

शिव : अच्छी बात है, चल अब थोड़ी देर घोड़ी बन जा, में ट्रे पीछे से बजता हु.

रंजन : तू जैसा कहे, में तेरे साथ सब करुँगी. (में मुस्कुराया और लुंड बहार निकला, वो घोड़ी बन गयी, उसकी छूट के आस पास खून सूखने लगा था, मेने उसकी कच्छी ली और उसकी छूट को अच्छी से पोछ दिया, उसकी छूट का छे अब साफ़ नज़र आ रहा था, पहले जहा छेड़ बहोत छोटा था वही अब वो थोड़ा खुल गया था और साथ में थोड़ी सूजन भी थी, पर ये तो होना hi था, पता नहीं ये लड़कीअ कैसे ये सब खुसी खुस सेह लेती है, में उसकी छूट को चाटने लगा और उसके कूल्हों को मसलते हुए उन्हें भी सहलाने laga)Shhhhhhh कितना अच्छा लगता है शिव, शह्ह्ह्ह कितना अजीब खेल है न ये, शहहहहह, मेरी छूट का स्वाद कैसा है शिव, शहहहहह (मेने कोई जवाब नहीं दिया बस चाट ता raha)Achchha hi होगा, तभी तो तू इतना चाट रहा है, शहहहहह तू जब से जीभ से छू रहा है तो एक अजीब सा आनंद आता है शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह (में उसकी गांड का छे चाटने लगा) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह पागल ये क्या कर रहा है शह्ह्ह्हह्ह वो गन्दी जगह है शह्ह्हह्ह्ह्ह सुन न शहहहहह वो गन्दा होगा shhhhhhhhh(Me उसकी बात को अनसुना कर के उसकी छूट को गांड के छेड़ को और कूल्हों को अच्छे से चाटने लगा, थोड़ी देर बाद) शह्ह्ह्हह्ह अब बस कर शिव शहहह मुज से रहा नहीं जा रहा शहहहहह अब मुझे छोड़ न शहहहहह (मेने भी उसकी बात मणि और उसके पीछे घुटनो के बल होते हुए अपने लुंड को छूट पर सेट किआ, स्नेहा मैडम और नाज़िआदिदी या टीचर, इन सब के मुकाबले ये कूल्हे बहोत छोटे थे, पर बहोत hi आकर्षक थे, मेने छेड़ में लुंड दबाया तो सूपड़ा अंदर चला गया) अह्हह्ह्ह्ह, (उसने चद्दर को मुठी में कास लिया, मेने आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर किआ, जब मुझे लगा की वो अब आगे नहीं जायेगा तो में ज्यादा अंदर डेल बगैर, अंदर बहार करने लगा, थोड़ी hi देर में वो रंग में आ गयी)





शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह शहहह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ahhhhh(Mene लटकते हुए उसके स्तन को पकड़ा और दबाते हुए धक्के लगाने लगा) शहहह अह्ह्ह्ह सचमे शिव शहहह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह तेरा लुंड मेरी छूट में कितना मज़ा दे रहा है,

शहहह ऐसे hi छोड़ मुझे( उसकी छूट रास टपकती छूट को में थोड़ी देर घोड़ी बनाये छोड़ता रहा, उसके बाद मेने उसको स्तन से पकड़ कर ऊपर कर दिया, अब वो घुटनो के बल कड़ी थी और में भी, में एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर और दूसरे हाथ से उसकी चुकी पकड़े हुए उसे छोड़ रहा था, वो भी बड़े मज़े से छुड़वा रही थी)





joking

शहहहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi ससससस अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव शहहहहह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह तेरा लुंड में महसूस कर रही हु शहहह वो अंदर कही छू रहा है तो मुझे बहोत अच्छा लग रहा hai(Usne शिर को साइड में मोड़ते हुए मेरे होठो को चुम लिया ) उम्म्म उम्म्म उम्म्म्म अह्ह्ह्हह शीइइइइव कितना मस्त है तेरा शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह और जोरसे कर शहहह थोड़ा जल्दी जल्दी कर में जानेवाली हु शहहह अह्ह्ह्ह है ऐसे hi मुझे छोड़ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह कितना मज़ा आ रहा है शहहह मेरा निकलनेवाला है सीईव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह में गयी अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ahhhhh(Usne फिर से अपने हाथ बिस्तर पर टिका दिए, थोड़ी देर ऐसे hi छोड़ने के बाद मेरे धक्को से वो आगे झुकती चली गयी, और उलटी हो कर पूरी बिस्तर पर लेट गयी, उसके पेअर फैले हुए थे, में उसको ऐसे hi पीछे से छोड़ने लगा)





अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शहहह ऐसे hi छोड़ मुझे अह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है शहहह, शिव मेरा फिर से होनेवाला है शहहह अह्ह्ह्हह, मुझे सीधा होने दे अह्ह्ह shhhhhhh(Mene उसे एक hi सेकंड में पलट दिया, अब वो सीधी हो गयी थी, मेने फिर से लुंड छूट में दाल दिया) अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह (फिर से में अंदर बहार करने लगा, छूट की कसावट मुझे भी मेरे चरम की और ले जाने लगी, मेरा लुंड फूलने laga)ahhhh सीईव वो बड़ा हो रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह अभी कितना बड़ा होगा वो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : अब और बड़ा नहीं होगा, में सच में तेरे अंदर निकलू?

रंजन : (मेरे गले में बहे डेल hue)Ha शिव, मेरे अंदर hi निकल न, में सब महसूस करना चाहती हु, (मेरे होठो को चुम kar)me तुजे अच्छी लगी न?

शिव : ऐसा क्यों कह रही है, तू अच्छी hi है.

रंजन : तू भी बहोत अच्छा है, अब तो मुझे छोड़ेगा न?

शिव : तुजे शर्म नहीं आती?

रंजन : नहीं आती, और तेरे साथ तो बिलकुल नहीं, बोल न, मुझे फिर से छोड़ेगा न?

शिव : है, पर कभी कभी.

रंजन :उम्मम्मम्म (मुझे चुम कर) मेरा फिर से होनेवाला है शिव.

शिव : मेरा भीईई.

रंजन : अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह कितना मज़ेदार है ये सब शहहह अह्हह्ह्ह्ह में सच में पागल हो रही हु शह्ह्ह्ह शिव्व्व ऐसे hi हआ जल्दी शहहहहह मेरा निकलनेवला है shhhhhhh(Mera भी निकलनेवाला tha)Ahhhh सीईव में गयी शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : ahhhhhhhhhhhhhh (में भी अपना लावा अंदर छोड़ने लगा)

रंजन : शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लग रहा है, कुछ गरम गरम मेरे अंदर गिर रहा है शहहहहह शीइइइइव मेरे शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह ी लव यू शीइइइइइइव शहहहहह ahhhhh.(Dono झटके खा रहे थे और मेरा वीर्य उसके अंदर गिर रहा था)

थोड़ी देर में सब शांत हो गया. बहार से विणा तो न जाने कब की चली गयी थी. अपनी छूट से खेलते hi वो झाड़ गयी थी और कमरे में चली गयी थी.

रंजन : ी लव यू शिव. (में उसकी आँखों में देख रहा था) तू भी बोल न. (में उसे देख रहा tha)I लव यू बोलने से में तेरे गले नहीं पद जाउंगी, बोल न.

शिव : (अब जैसा भी हो ये प्यार तो था hi)I लव यू.

रंजन : (मुझसे लिपट ते हुए) ी लव यू तू मेरे Shiv.(Thodi देर और हम ऐसे hi लेते रहे.) Shiv...muje बाथरूम जाना है. (मेने लुंड बहार निकला तो सफ़ेद और लाल रंग का गधा वीर्य बहार निकलने लगा, में उसे देख रहा था, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी) क्या देख रहा है.

शिव : कुछ नहीं, तू जा.

रंजन : (वो कड़ी होने लगी) अह्ह्ह्हह maaaaa.(Wo फिर से लेट गयी) सीईव, दर्द हो रहा है.

शिव : मेने तो पहले hi बोलै था, चल अब में तुजे उठा के ले जाता हु. (मेने उसे नंगी hi अपनी बाहोंमे उठा लिया, में बहार आया तो सब सन्नाटा था, में उसे बाथरूम ले गया, मेने नीचे utara)Tu कर ले में बहार खड़ा हु.

रंजन : नहीं शिव, में गिर जाउंगी, तू मुझे पकड़े रह (वो आहिस्ता से नीचे बैठी और मूतने लगी) अह्ह्ह्हह. (उसने नीछेझुक कर देखा तो उसकी छूट से मूत और निचे के छेड़ से घड़ा वीर्य टपक रहा था, उसने शिव की और देखा और मुस्कुरायी)

शिव : क्या हुआ?

रंजन : कुछ नहीं. (में उसको मूत ते हुए देख रहा था, जब उसका मूतना ख़तम हुआ तो मेने फिर से उसे उठा लिया) मेरे कमरे में ले चल. (में उसे वह ले गया) वह अलमारी में एक बॉक्स है उसमे गोलिया है वो मुझे दे. (मेने बॉक्स दिया, उसने गोलिया निकली, एक तो पैन किलर थी और एक बॉक्स था जिस पर

i-pill लिखा हुआ था, मुझे दिखते hue)Ye है वो गोली जिस से में अभी माँ नहीं बानगी.

शिव : तूने साडी तैयारियां कर रक्खी थी, है न?

रंजन : और नहीं तो क्या, मुझे पता था की ये कभी न कभी तो होगा hi. (मेने उसे पानी दिया उसने गोलिया खा ली, मेने उसे लेता दिया और उस पर चद्दर दाल दी) थैंक यू शिव.

शिव : अब ये थैंक यू किस लिए?

रंजन : मुझे ये खुसी देने के लिए और मेरी देखभाल के लिए. ी लव यू.

शिव : चल अब सो जा, अगर कुछ हो तो मुझे बुला लेना.

रंजन : ठीक है.

में नंगा hi अपने कमरे में आ गया, रंजन के कपडे पड़े हुए थे तो मेने उन्हें साइड में छुपा दिया और अंडरवियर पहन कर लेट गया. वैसे भी में थका हुआ था तो नींद आ गयी. सुबह उठा और में बाथरूम गया. जब वापस आया तो मुझे विणा मिली. वो मुझे अजीब नज़रो से देख रही थी. में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी. में वह से गयम के लिए निकल गया और जूही के घर पहुंच गया. आज वो तौलिया पहने hi मिली. में अंदर गया, उसने दरवाजा बंद किआ और वही कड़ी रही.

शिव : क्या हुआ, तैयार हो जाओ. (वो मेरी और आयी और मेरे सामने कड़ी हो गयी, में समझने की कोशिस कर रहा tha)Kya हुआ?
 
अपडेट 84

में वह से गयम के लिए निकल गया और जूही के घर पहुंच गया. आज वो तौलिया पहने hi मिली. में अंदर गया, उसने दरवाजा बंद किआ और वही कड़ी रही.

शिव : क्या हुआ, तैयार हो जाओ. (वो मेरी और आयी और मेरे सामने कड़ी हो गयी, में समझने की कोशिस कर रहा tha)Kya hua?(Ye कहते हुए में एक कदम पीछे हो गया तो वो एक कदम और मेरे पास आ गयी, में अभी भी उसकी आँखों में देखते हुए समझने की कोशिस कर रहा था)

जूही : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो?

शिव : में समजा नहीं, कहना क्या चाहती हो?

जूही : तुम मुज से भाग क्यों रहे हो?

शिव : ममम में .. में कहा भाग रहा हु. (वो कुछ देर मेरी आँखों में देखती रही, में भी उसे देख रहा था, उसकी आँखों में थोड़ी उदासी आयी और वो मुद कर कमरे में चली गयी, मेने रहत की साँस ली) बल बल बच गया. (में फुसफुसाया)

ऐसा नहीं था की में उस से डरता हु या भाग रहा हु, पर पहले hi मेरे जीवन में इतना बखेड़ा हो रक्खा है, ऊपर से कल रंजन भी मेरे साथ जुड़ गयी, में किसी को मायूस नहीं करना चाहता था पर मेरी भी मज़बूरी थी, में हर एक के साथ तो नहीं रह शक्ति था, वैसे भी जूही मेरे जीवन में खास महत्व रखती है, ऐसे में में नहीं चाहता की मेरी वजह से उसे कभी दुःख हो, पर मेरे ऐसा करने से भी वो दुखी hi हो रही थी, मुझे समाज नहीं आ रहा था की में क्या करू. वो कपडे पहन कर आयी और किचन की और चली गयी, मेने देखा की उसने मेरी और देखा तक नहीं. में वही से बैठे बैठे देख रहा था की वो किचन में दूध बना रही है, पर उसके चेहरे पर उदासी साफ़ देख प् रहा था. मेरी तो समाज में नहीं आ रहा था की ये मेरे साथ हो क्या रहा है, में सब को तो खुस नहीं कर शक्ति. अगर में उसके करीब भी जाऊंगा तो भी शायद उसे दुःख hi दूंगा, वैसे तो वो पहले भी कह चुकी है की मेरे किसी और के साथ सम्बन्ध से उसे कोई परेशानी नहीं है पर वो शायद स्नेहा के बारे में कह रही थी, उसे यही लगता था की स्नेहा के साथ सम्बन्ध से उसे क्या फर्क पड़ेगा, न वो लतादिदी की बारे में जानती है न रंजन के बारेमे. में उस से ये सब कह भी नहीं शक्ति. क्या करू कुछ समाज hi नहीं आ रहा था.

कुछ सोच कर में उठा और किचन में गया, दूध तो उबाल रहा था पर वो किसी सोच में डूबी थी, में वह हु, इसका भी उसे एहसास नहीं था. मेने गैस बंद किआ तब उसको मेरी उपस्थिति का एहसास हुआ, उसने एक बार मेरी और देखा फिर वापस अपनी नज़ारे दूध के बर्तन पर जमा दी. दूध के बर्तन में देखने लायक कुछ भी नहीं था पर फिर भी वो उसे घूरे जा रही थी. में उसकी भी मनोस्थिति समाज रहा था. मेने उसकी बाह पकड़ी तो वो हलकी सी कैंप गयी. मेने उसे मेरी और किआ तो मेरे सामने तो कड़ी थी पर निचे देख रही थी. मेने उसकी थोड़ी पकड़ी और उसका चेहरा ऊपर उठाया, उसने चेहरा तो ऊपर किआ पर अपनी नज़ारे नहीं उठायी, मेने देखा तो उसकी पलकों पर आसुओ की बून्द जमा हो गयी थी. मेरा भी दिल बेथ रहा था, मेने भी सोचा की अब जो होगा सो होगा देखा जायेगा. मेने उसे अपनी और खिंचा और उसे गले लगा लिया, वो हक्की बक्की से मेरे गले लगी रही, कुछ पल के लिए वो ऐसे hi बूत बानी कड़ी रही. जब उसे एहसास हुआ की मेने उसे गले लगाया है तो उसका चेहरा खुसी से खिलने लगा, आशु की एक दो बुँदे मेरे कंधे पर टपक गयी, उसके हाथ भी मुझे कस्ते चले गए. हम दोनों वही किचन में खड़े खड़े एक दूसरे को बहो में लिए वैसे hi कुछ देर तक खड़े रहे. थोड़ी देर बाद जब में उस से अलग होने लगा तो उसने भी अपनी पकड़ ढीली की. में उसके चेहरे को, उसकी आँखों को देख रहा था, अब वह नमी नहीं थी, उसकी आँखों में खुसी झलक रही थी, वो मेरी और देख रही थी, और में उसे. मेरा मान किआ की में उसे किश कर लू, मेरी नज़र उसके होठो की और भी गयी, शायद वो भी मेरा इरादा समाज गयी थी, उसके भी होठ कंपनी लगे, पर में बही जल्द बजी नहीं करना चाहता था.

शिव : जाना नै यही क्या? (उसने मुझे देखा, वो शर्माने लगी, उसने सिर्फ इससरए से है कहा, मेने उसे छोड़ा और बहार आ गया, मेने देखा तो अब उसके चेहरे पर मुस्कान थी, वो फटाफट दूध में सब मिला रही थी और उसे ले कर बहार आ गयी, उसने मुझे दूध दिया और अपना ले कर मेरे सामने बेथ गयी, वो मुझे hi देखे जा रही थी, में भी उसे देख कर मुस्कुराया.)

हम दोनों ने दूध ख़तम किआ, जब हम बहार आये तो उसने मेरे सामने चाबी कर दी, मेने भी मुस्कुरा कर चाबी ले ली और स्कूटर चालू किआ. मेरे कंधे पर हाथ रख कर वो बैठी, बैठने के बाद उसने अपना हाथ निचे किआ और मेरी कमर को कास के पकड़ते हुए मेरी पीठ से सात गयी, उसकी स्तन भी मेरी पीठ पर अपना एहसास देने लगे, पर जैसे उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पद रहा था. मेने भी कोई एतराज न किआ और स्कूटर को आगे बढ़ा दिया.

अनाथालय में जब विणा नाहा कर निकली तो सरिता ने उसे पूछ लिया.

सरिता : रंजन कहा है? उसे स्कूल नहीं जाना क्या?

विणा : (वो थोड़ी घबरा गयी, वो क्या कहती, थोड़े घबराये hue)Wo..uski उसकी तबियत ख़राब है.

सरिता : क्या हुआ उसे? (वो रंजन के रूम की और गयी तो विणा भी उसके पीछे पीछे चली गयी, रंजन के शिर पर हाथ रख kar)Kya हुआ तुजे, ये बुखार कैसे आ गया?

रंजन : (अब रंजन क्या कहती) पता नहीं दीदी?

सरिता : दवाई खाई?

रंजन : है दीदी, अभी थोड़ी देर पहले hi खायी है.

सरिता : ठीक है, तू आराम कर, (विणा से) तू भी स्कूल नहीं जानेवाली न?

विणा : नहीं दीदी, में अकेली नहीं जाउंगी.

सरिता : ठीक है, जा तू लता की मदद कर में साफ़ सफाई कर के आती हु.

सरिता साफ़ सफाई करने लगी. जब वो शिव के कमरे की सफाई कर रही थी तो उसकी नज़र, कोने में रक्खे कपड़ो पर गयी. उसने कपडे देखे तो रंजन के थे, कपड़ो में ब्रा और पंतय भी थी. वो सोचमे पद गयी की तभी उसके दिमाग में विचार कौंधा, उसने अपने मुँह पर हाथ रखलिया. उसने बिस्तर को छैक किआ तो वो साइड में मोड के रक्खा था, उसने खोला तो उसमे चद्दर नहीं थी, उसने ध्यान से देखा तो बिस्तर अभी थी थोड़ा गिला था, उसने आस पास नज़र दौड़ाई तो उसे अलमारी के निचे रक्खी चद्दर दिखाई दी. उसने निकल कर देखा तो उसका शक यकीं में बदल गया. चद्दर पर खून साफ़ देखा जा शक्ति था. अब वो सब समाज गयी थी. उसने वो सरे कपडे लिए और बाथरूम में धोने के लिए भिगो दिए. वो फिर से रंजन के कमरे में गयी.

सरिता : (प्यार से उसके शिर पर हाथ रखते hue)Kon कोण सी दवाई खायी तूने?

रंजन : (बड़ी मासूमियत से kaha)Wo बुखारवाली दवाई खायी है दीदी.

सरिता : दर्दनिवारक गोली खायी की नहीं?

रंजन : (थोड़ा घबराते हुए) नहीं, उसकी क्या जरुरत?

सरिता : (प्यार से उसके माथे पर हाथ फिरते hue)Muje सब पता है, दर्द तो नहीं हो रहा?

रंजन : (घबरा रही thi)Nahi दीदी, कोई दर्द नहीं है.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Achchha, तो ये बता, रात तूने जो कपडे पहने है वो कहा है?

रंजन : (अब वो बहोत घबरा रही thi)Kapade, मेने तो यही कपडे पहने थे. (वो सरिता से नज़ारे नहीं मिला रहा थी)

सरिता : अच्छा तो फिर तेरे कपडे मुझे शिव के कमरे से कैसे मिले और वो भी तेरी ब्रा और पंतय के sath.(Ranjan बहोत घबरा गयी थी, सरिता ने मुस्कुराते हुए kaha)Dar मात, मेने वो धोने के लिए रख दिए है. अब बता, दर्द तो नहीं है न?

रंजन : (वो समाज गयी थी की दीदी को सब पता चल गया है, तो वो शर्माने lagi)Nahi दीदी.

सरिता : मुझे क्या पागल समजा है, मुझे पता है, अब बता, कब गोली खायी थी?

रंजन : एक रात में और एक सुबह me(Wo सरिता से नज़ारे चुरा रही थी)

सरिता : ठीक है, तू आराम कर. अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे बुला लेना.

रंजन : (सरिता का हाथ पकड़ते हुए) थैंक यू दीदी.

सरिता : कोई बात नहीं मेरी लाड़ली, (कुछ सोच कर) वैसे तो मुझे पता है, पर ये सब तेरी मर्जी से हुआ न? उसने कोई...

रंजन : (शरमाते hue)Nahi दीदी, वो क्या कोई जबरदस्ती करेगा, बल्कि मेने hi उसके साथ...

सरिता :(अपने मुँह पर हाथ रखते hue)Hay राम, तूने की जबरदस्ती?

रंजन : तो और क्या करती, मुझे दर्द होगा, दर्द होगा कर के वो हमेसा ताल देता था, तो कल वो सोया हुआ था तो...

सरिता : पगली कही की, कुछ गड़बड़ हो जाती तो?

रंजन : कुछ नहीं हुआ दीदी, उसने सब प्यार से संभल लिया.

सरिता : तू खुस है न?

रंजन : है दीदी.

सरिता : अब उसमे hi मात लग जाना, अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान देना, सामजी.

रंजन : में समझती हु दीदी.

सरिता : चल कोई नई, तू आराम कर, अगर कुछ हो तो बुला लेना.

रंजन : ठीक है didi.(Sarita उसके शिर पर हाथ फेर कर चली गयी, रंजन ने फिर से आंखे बंद कर ली, उसके सामने फिर से रातवाली घटना आने लगी, वो मुस्कुराती हु फिर से सो गयी)

गयम में.

काव्य : शिव, तुम कोई वीडियो बनानेवाले थे, फिर क्या हुआ?

शिव : वो सब रेडी hi है, उसमे बैंक अकाउंट की डिटेल देनी थी उसिलिये रुके हुए थे. अब अकाउंट दीदी ऑपरेट कर शक्ति है तो अब कोई दिक्कत नहीं है. में आज hi बिना मैडम से पूछता हु.

काव्य : मुझे भी फॉरवर्ड करने के लिए बोलना.

शिव : जी, मैडम. (वो चली गयी, और जूही मेरे सामने आयी)

जूही : क्या कह रही थी, काव्य जी.

शिव : कुछ नहीं, वो वीडियो के बारेमे पूछ रही थी, जो हमने डोनेशन के लिए बनाया था.

जूही : अरे है, वो कल hi मैडम ने मुझे भेजा था, मेने कई लोगो को भेज दिया है, में काव्यजि को भी भेज देती हु. अच्छा एक और बात. मेरे जिले में भी एक स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स है, वह 10 दिनों का स्पोर्ट्स कैंप लगनेवाला है, क्या तुम जाओगे? वैसे तो मुझे पूछना नहीं चाहिए क्यों की तुम्हे जाना hi चाहिए, कैंप के बाद वह भी कॉम्पिटिओं होगा. ऐसे कुछ कपिशंस के बाद तुम स्टेट चैंपियनशिप में भाग ले पाओगे.

शिव : !0 दिन, पर स्कूल?

जूही : अस ा स्पोर्ट्स पर्सन, तुम्हे पढ़ाई के साथ तो समझौता करना hi होगा. वैसे स्कूल से तुम्हारी छूती मंजूर हो जाएगी और तुम्हारी हजारी भी लगेगी, तो उस लिहाज से तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होगी. तो क्या कहते हो?

शिव: जब तुमने सब सोच hi लिया है तो अब में क्या कह शक्ति हु. कब निकलना है? और कहा रहना है?

जूही : वैसे तो वह रहने का बंदोबस्त है, पर मेरा गांव नजदीक में hi है, तुम मेरे घर रह शक्ति हो, अगर तुम्हे एतराज न हो तो.

शिव : तुम्हारे घर? जब तुम हो तो मुझे क्या एतराज होगा.

जूही : में नहीं होउंगी, मुझे 10 दिन की छुट्टी नहीं मिलेगी.

शिव : तो फिर? तुम्हारे बगैर, तुम्हारे घरमे?

जूही : तो क्या हुआ, मेरा भाई है, भाभी है, माँ भी है. तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होगी. फिर भी में एक बार घर बात कर लेती हु, फिर फाइनल करेंगे.

शिव : ठीक है, जैसा तुम कहो.

वो सब ख़तम कर के में घर आ गया. जब मेने सुना की रंजन बीमार है तो में उसका हलचल पूछने चला गया. वो शर्मा रही थी.

शिव : कैसी हो?

रंजन : अच्छी हु?

शिव : ज्यादा दर्द तो नहीं है? डॉक्टर के पास जाना है? (उसने न में गर्दन हिलायी) किसी को बता भी नहीं शक्ति, क्या तुमने चेक किआ?

रंजन: क्या?

शिव : यही की वह सब ठीक है की नहीं? (वो बहोत शर्मा रही थी, शरमाते हुए उसने न में गर्दन हिलायी) में देखु? (वो मेरी और देख रही थी, पर जवाब नहीं दिया) ठीक है अगर कुछ हो तो बोल देना, अगर तुम चाहो तो में स्कूल से छूती ले लेता हु.

रंजन : नहीं, उसकी जरुरत नहीं है.

शिव : ठीक है तुम आराम करो, में चलता हु. (में जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसे देखा तो उसने नज़ारे दूसरी और कर ली, पर मेरा हाथ नहीं chhoda)Kya हुआ?

रंजन : Tuuuum...dekh लो.

शिव : तुम्हे शर्म आ रही है तो रहने दो, वैसे भी तुम कह रही हो सब ठीक है.

रंजन : तुम देख लो.

वैसे भी देखलेना hi सही था, क्यों की अगर कुछ गड़बड़ हो तो पता चल जाये. में दरवाजे पर गया तो सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, फिर भी मेने दरवाजा थोड़ा बांध कर दिया. पता नहीं पर मेरे दिल की धड़कन बढ़ रही थी. में उसके पास गया और उसे देखा तो उसने फिर से नज़ारे दूसरी और कर ली. मेने चद्दर हटाई, उसने फ्रॉक पहना हुआ था, मेने उसे ऊपर उठाया, पतानहीं पर मेरा लुंड खड़ा होने लगा. मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा, क्यों की ऐसा नहीं होना चाहिए, पर में कुछ नहीं कर शक्ति था. मेने फ्रॉक ऊपर उठा दिया, मेरे सामने उसकी छूट थी, हलके बालो के निचे उसकी त्वचा भी दिख रही थी, मेरे हाथ भी कैंप रहे थे. मेने उसके पेअर थोड़े फैलाये और उसकी छूट को देखने लगा, अंदर का छेड़ बहोत छोटा हो गया था, अंदरूनी होठो पर सूजन थी, में छूट को थोड़ा फिला कर देखने लगा,

रंजन : शह्ह्हह्ह्ह्ह. (उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसे देखा, शायद उसे दर्द हुआ था, पर उसका चेहरा कुछ और hi बता रहा था. मेने देखा की उसकी छूट में चिकनाहट आना शुरू हो गयी थी. मेने हलके से होठो को sehlaya)Shhhhhhh(Mera लुंड एकदम खड़ा हो गया, मेने फ़ौरन छूट को धक् दिया, और उसे चद्दर से धक् दिया, मेने रंजन को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, वो ऐसे देख रही थी की धक् क्यों दिया)

शिव : सब ठीक है, तू आराम कर. (में फटाफट वह से निकल गया, बहार आया तो सरितादिदी ने मुझे आवाज दी.

सरितादिदी : शिव.

शिव : है दीदी.

सरितादिदी : ये रंजन कैसे बीमार हुई?

शिव : कैसे बीमार हुई से क्या मतलब है, मुझे कैसे पता होगा?

सरितादिदी : (मेरी फिरकी लेते hue)Lekin वो तो कह रही थी की तेरी वजह से बीमार पड़ी है वो.

शिव : (मुझे समाज नहीं आ रहा था की रंजन ने ऐसा kaha)Wo..wo...

सरितादिदी : (धीरे se)Jyada डरने की जरुरत नहीं है, पर ये सब करतेवक़्त ध्यान रक्खा कर, लोगो की निगाहे रहती है तुज पर.

शिव : में समजा नहीं, क्या कहना चाहती है आप.

सरितादिदी : गायत्री...

शिव : गायत्रीदिदी, क्यों उनको क्या हुआ?

सरितादिदी : हुआ कुछ नहीं, उसने कुछ देख लिया था, तो मुझे बता रही थी, वो तो तुजे मैनेजर जैसा समाज रही थी.

शिव : में, मैनेजर जैसा, वो कैसे?

सरितादिदी : अरे कुछ नहीं, वो न समाज है, पर तू थोड़ा ध्यान रक्खा कर.

शिव : क्या वो यहाँ खुस है, या वो यहाँ से जाना चाहती है?

सरितादिदी : वो सब मुझे नहीं पता, वैसे भी वो ज्यादा बोलती नहीं. वो तो तुजे और लता को उसने देख लिया था तो गुस्से में मेरे सामने निकल गया.

शिव :मुझे और लतादिदी को?

सरितादिदी : है, और मेरे सामने नाटक करने की जरुरत नहीं है, में सब जानती हु. पर ध्यान रक्खा कर, सिर्फ इतना कह रही हु.

शिव : ठीक है, में रात को उनसे बात करता हु.

सरितादिदी : क्या बात करेगा? ये सब.

शिव : अरे नहीं दीदी, वो सब नहीं, में उनसे पूछूंगा की वो अपनी आगे की जिंदगी के बारे में क्या सोचती है, वही.

सरितादिदी : ओह, वैसा, ठीक है, बात कर लेना.

में तैयार हुआ और स्कूल चला गया. रस्ते में नाज़िआदिदी से भी मुलाकात हुई. स्कूल में एक और झटका मिला. 15 दिन बाद स्कूल में फर्स्ट एग्जाम थी. अब समाज नहीं आ रहा था की, एग्जाम का देखु की स्पोर्ट्स का. रेसस्स में वैस्वी और संयम भी बाते कर रही थी.

वैस्वी : इस एग्जाम में बता टी हु उसे.

संयम : किसकी बात कर रही है? शिव की?

वैस्वी : तुम देखना इस बार में hi फर्स्ट आउंगी.

संयम : तो क्या है, तू आ जाना, क्या इतनी सी बात को लेकर बैठी है.

वैस्वी : नहीं, इस बार उसे में दिखा कर hi रहूंगी, पता नहीं अपने आप को क्या समझता है.

संयम : मुझे तो ये लग रहा है की पता नहीं तू अपने आप को क्या समझती है?

वैस्वी : तू मेरी दोस्त है की उसकी?

संयम : में दोनों की दोस्त हु. चाहे तू फर्स्ट आये या वो, मुझे तो खुसी hi होनी है.

वैस्वी : तुजे उसकी अकड़ नहीं दिखती, मेरे सामने कितना अकड़ता है वो.

संयम : ये तेरी आँखों का धोका है, मुझे तो कुछ और hi लगता है.

वैस्वी : क्या लगता है?

संयम : यही की अकड़ता वो नहीं, तू है. वो तो बेचारा टेरेबारेमे कुछ भी गलत नहीं बोलता.

वैस्वी : तेरा मतलब है की में उसके बारे में गलत बोलती हु?

संयम : छोड़ इन सब बातो को, क्यों अपना मूड ख़राब कर रही है, चल नास्ता कर.

शाम को में जूही के साथ स्टेडियम और फिर गयम चला गया. उसके साथ ये तय हुआ की वो मेरे साथ आएगी, मुझे छोड़ कर वो वापस आ जाएगी. मेने उसे मन किआ पर वो नहीं मणि. मेने भी ज्यादा बहेश नहीं की. रात को खाना खा कर में पढ़ाई के लिए गया, रंजन ठीक थी, वो घूम फिर रही थी पर आहिस्ता आहिस्ता. लतादिदी को भी सरितादिदी ने कोई पट्टी पढ़ा दी थी, रंजन की हालत के बारे में. मेरी भोली लतादिदी सब कुछ मान लेती थी. एग्जाम का नाम सुन कर मेने देर रात तक पढ़ाई की. रात के एक बजे में सोने लगा पर थोड़ा फ्रेश होने के लिए में छत पर चला गया. चारो तरफ ठंडक फैली हुई थी, आधा चाँद था तो रौशनी भी हलकी हलकी थी. अस्सपस्स देखते हुए में ठंडी हवका लुफ्त उठा रहा था. मुझे हाली हलकी सिस्किअ सुनाई देने लगी. मेने सोचा की ये मेरा वहम है, पर थोड़ी थोड़ी देर पर आवाज आ रही थी. अब मुझे यकीं हो गया था की कोई तो है. में बिना आवाज किये उस दिशा में बढ़ने लगा. वह पानी की टंकी के पीछे से ये आवाजे आ रही थी. ये आवाज तो लड़की की थी और ऐसी आवाजे थी जैसे लड़की चुड़ते वक़्त करती है. में सोचमे पद गया की ऐसा कैसे हो शक्ति है.

शिव : कोण है? (आवाजे आना रुक गयी) कोण है वह? (कोई आवाज नहीं आ रही थी) कोण है वह, बोलो वर्ण में वह आ रहा हु.

गायत्रीदिदी : में हु, यहाँ मात आना.

शिव : (में गायत्रीदिदी की आवाज पहचान गया) आप यहाँ क्या कर रही hai?(Unhone कोई जवाब नहीं दिया) जवाब दो दीदी. आपके साथ कोई है?

गायत्रीदिदी : नहीं में अकेली हु, तुम जाओ शिव.

शिव : नहीं दीदी, में यही खड़ा हु.

गायत्रीदिदी : (वो अपने जिस्म की बढ़ती गर्मी को शांत करने आयी थी, उसकी किस्मत ख़राब थी की शिव आगया, उसने अपनी पजामी ऊपर चढ़ाई और बहार आ गयी, वो बिना शिव की और देखे जाने लगी)

शिव : आप क्या कर रही थी? (मुझे थोड़ी न पता था की लड़कीअ अपने आप भी सब करती है)

गायत्री : (मान में, मुझे पता है तू मेरा फायदा उठाने की सोच रहा है पर में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करने दूंगी) मुझे कोई जवाब नहीं देना, में जा रही हु.

शिव : एक मिनट दीदी, वैसे भी में आप से बात करना चाहता था, अच्छा हुआ आप मिल गयी.

गायत्री : (बे रूखी se)Kya बात करनी है? (अगर ऐसी वैसी बात की तो तेरा मुँह तोड़ दूंगी)

शिव: दीदी, आप यहाँ रहना चाहती है की फिर जाना चाहती है?

गायत्री : (आ गया न अपनी औकात पे, ऐसे hi वो मैनेजर सब को दरकार अपनी हवस पूरी करता था) तेरे कहने का क्या मतलब है?

शिव : यही की आप को यही रहना है की कोई नौकरी कर के या किसी और तरीके से अपना जीवन व्यतीत करना है?

गायत्री : (उसे समाज नहीं आया) तू कहना क्या चाहता है?

शिव : में कह नहीं रहा, पूछ रहा हु, क्या आप नौकरी करना चाहती है?

गायत्री : कैसी नौकरी?

शिव : वो सब बाद की बात है, में आप से ये पूछना चाहता हु की क्या आप नौकरी कर के अपना गुजरा खुद करना चाहती है की फिर आप यही रहना चाहती है, अगर आप यही रेन्हा चाहो तो भी कोई बात नहीं पर अगर आप नौकरी करना चाहो तो में इसमें आप की मदद कर शक्ति हु, इसीलिए में आप से पूछ रहा हु.

गायत्री : (मुझे लाइन पर ला रहा है, कमीना कही का) और ये सब तू मेरे लिए क्यों करेगा?

शिव : क्यों करूँगा से क्या मतलब है, आप मेरी दीदी हो, आप मेरे इस अनाथालय के परिवार की एक सदस्य हो, क्या सिर्फ यही कारन काफी नहीं आपकी मदद के लिए? और में ये भी नहीं कह रहा की आप अनाथालय छोड़ कर चली जाओ, आप नौकरी भी कर शक्ति हो और यहाँ रह भी शक्ति हो. में तो ये इस लिए कह रहा था की आप अपनी जिंदगी को आगे के लिए कैसे बेहतर बनाना चाहती हो ये में जान शकु?

गायत्री : (उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था) तू कहना क्या चाहता है, कुछ खुल कर बता.

शिव : इतना तो खुल कर बता रहा हु, क्या आप अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती है? अगर है तो उसके लिए आप को काम करना पड़ेगा. अभी में जहा काम कर रहा हु वह मेरी जगह किसी को काम पर रखना है, अगर आप कहो तो में आपकी बात कर शक्ति हु.

गायत्री : क्यों? तू नौकरी छोड़ रहा है?

शिव : है दीदी, मेरी स्कूल सुबह की हो रही है तो में वह नहीं जा पाउँगा, तो वो किसी और को लेनेवाले है, अगर आप चाहती हो तो में आपकी बात कर शक्ति हु, आप को काम का थोड़ा अनुभव हो जायेगा फिर आप कही और भी नौकरी करना चाहे तो कर शक्ति हो, और आप को यहाँ से भी जाने की जरुरत नहीं है, है अगर आपको लगे की आप को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जिनि है तो बेशक आप जा शक्ति है.

गायत्री : (वो अभी भी यकीं नहीं कर प् रही थी) और उसके बदले में तुजे क्या चाहिए?

शिव : क्या कब से आप, उसके बदले में तुजे क्या चाहिए, तुजे क्या चाहिए पूछे जा रही है, अगर में आप का सागा भाई होता तो क्या आप मुज से ये सब पूछती? मेने जो कहना था वो कह दिया, अगर आप को सही लगता है तो मुझे बता देना, में सोने जा रहा हु. गुड नाईट.

शिव चला गया पर, गायत्री अभी भी वही कड़ी उसी और देख रही थी जहा से शिव गया था. शिव की बातो से उसे कुछ भी ऐसा नहीं लगा था की शिव उसे हवस की नज़रो से देख रहा है या उसका इस्तेमाल करना चाहता है. उसे अभी भी समाज में नहीं आ रहा था की वो लता के साथ वो सब कर रहा था तो क्यों कर रहा था. वो भी तो उसकी बहन है, भले hi सगी न सही पर बचपन से वो उसे अपनी बड़ी बहन कह कर hi बुलाता आ रहा है. जब वो उसके साथ वो सब कर शक्ति है तो वो मेरे साथ भी वैसा सब कर शक्ति है. उसके दिल और दिमाग में जुंग छिड़ गयी थी, वो शिव को समाज hi नहीं प् रही थी. वो कुछ देर वह कड़ी रही फिर अपने बिस्तर पर जा कर लेट गयी, काफी देर तक उसे नींद नहीं आयी पर फिर आखिर कर थक कर वो सो hi गयी.

सुबह जब में तैयार हो रहा था तब वो आयी. इतनी सुबह उन्हें देख कर मुझे आश्चर्य हुआ.

शिव : क्या हुआ दीदी, आप यहाँ?

गायत्री : क्यों में नहीं आ शक्ति?

शिव : में तो ऐसे hi के रहा था, आप कही भी आ शक्ति है, कहिये कैसे आना हुआ?

गायत्री : वो तू नौकरी के लिए कह रहा था उसके लिए में तैयार हु, पर में यही रहूंगी.

शिव : है दीदी, ये आपका भी घर है, ठीक है में आज सर से बात करता हु, फिर आप को बताता हु. मुझे देर हो रही है दीदी, में चलता हु, bye.

गायत्री : Bye (उसे शिव के वर्तन में बोलने में कही से भी ऐसा नहीं लग रहा था की शिव किसी भी तरह से उस से कोई अपेक्षा रख रहा हो, उसने एक आह भरी और अपने काम में लग गयी)
 
अपडेट 85

में वह से जूही के घर पहुंच गया, वो जल पारी दरवाजा खोल कर मुस्कुरा रही थी. में भी मुस्कुराते हुए अंदर गया. उसने दरवाजा बंद किआ और मेरी और देखा, में उसकी भावनाओ को समाज रहा था तो मेने अपने हाथ खोल दिए तो वो मेरी बहो में आ गयी. उसकी खुसबू मुझे बहकाने लगी, एक बार के लिए मेने उसे थोड़ा जोर से अपनी बाहोंमे कास लिया. वो भी बिना किसी संकोच के मेरे साथ सात कर मुझे बहो में भरे कड़ी रही. मुझे पता था की अगर में थोड़ा सा भी आगे बढ़ा तो क्या होगा.

शिव : चलो तैयार हो जाओ, लेट हो जायेंगे.

जूही : हम्म्म्म.

मेने उसे छोड़ा तो वो अपने रूम में चली गयी, वो कपडे बदल कर वापस आयी और दूध बनाकर मेरे सामने बेथ गयी.

शिव : में कल बताना भूल गया, मेरे एग्जाम की डेट भी तय हो गयी है.

जूही : कब है?

शिव : पंद्रह दिन बाद.

जूही : ओह! ये तो समस्या हो गयी, अब क्या करेंगे?

शिव : ये तो में तुमसे पूछ रहा हु, अब क्या करेंगे?

जूही : एग्जाम भी इम्पोर्टेन्ट है और कैंप भी.

शिव :वैसे मुझे एग्जाम की ज्यादा टेंशन नहीं है, है शायद मार्क थोड़े काम हो शक्ति है.

जूही : सच कहु तो अगर तुम में इतना पोटेंशियल न होता तो में कहती की एग्जाम पे ध्यान दो, पर तुम में इतना पोटेंशियल है की तुम स्पोर्ट्स के जरिये अपना मुकाम हासिल कर पाओगे. कितने hi खिलाड़ी है जो स्पोर्ट्स की वजह से अच्छी पोस्ट पर है. मुझे लगता है की पढ़ाई अगर काम भी होगी तो तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

शिव : मेने तो अपने आप को तुम्हे सौप दिया है, जैसा तुम कहोगी वैसा hi करुगा.

जूही : (मान में) अभी कहा सौपा है, में तो कब से तरस रही हु.

शिव : कहा खो गयी?

जूही : ंन्न नहीं तो, कही नहीं.

शिव : चलो चलते है, मुझे पवनसीर से नौकरी के लिए अपने hi अनाथालय की एक लड़की के बारेमे बात करनी है.

जूही : (गिलास उठाते hue)Kiske बारे में?

शिव : गायत्रीदिदी.

जूही : ओह है, ठीक है चलो.

हम दोनों गयम आ गए, मेने पवनसीर से गायत्रीदिदी के बारेमे बात की तो उन्होंने मुझे गायत्रीदिदी को मिलवाने को कहा. मेने कहा की शाम को साथ लेकर आऊंगा. मुझे काव्य मैडम भी मिली.

काव्य : परसो संडे है, तुम्हे याद है न?

शिव : (वैसे तो मुझे याद था, उन्होंने कही बहार जाने का प्रोग्राम बनाया था) है याद तो है मैडम, पर मुझे कैंप जाना है.

काव्य : कैसा कैंप? (मेने उन्हें सब बता दिया) ओह!, चलो कोई बात नहीं, फिर कभी चलेंगे.

शिव : सॉरी मैडम.

काव्य : अरे नहीं, इसमें सॉरी की क्या बात है, हम कहा भागे जा रहे है, पहले अपने कर्रिएर के बारेमे सोचो. हम तो फिर कभी भी जा शक्ति है, पर जब भी मौका मिले उसे पकड़ लेना चाहिए, तुम्हारे लिए ये बहोत जरुरी है, वैसे मेने तुम्हारा वीडियो देखा और डोनेट भी किआ है, अपने ग्रुप में भी फॉरवर्ड कर दिया है.

शिव : वैसे तो थैंक यू मैडम पर मुझे आप को पैसे देने है, आप ने क्यों मुझे दिए?

काव्य : (मुस्कुराते हुए) मेने तुम्हे नहीं दिए, वह को अनाथ बच्चो को दिए है, तुम्हारा और मेरा हिसाब तो अलग से है, क्यों है न?

शिव : जी, मैडम. थैंक यू, मेरे अनाथालय की और से. (वो मुस्कुरायी, फिर चली गयी, थोड़ी देर बाद)

जूही : क्या कह रही थी, काव्य जी?

शिव : तुम, मुज पर नजर रखती हो?

जूही : नजर नहीं रखती पर देखती हो हु, तो मेने देख लिया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, उन्होंने वो वीडियो देखा और डोनेशन दिया है वही बता रही थी.

जूही : है, मेने भी बहोत से लोगो को फॉरवर्ड कर दिया है. मुझे लगता है अब तुम्हारी पैसो को प्रॉब्लम सोल्वे हो जाएगी.

शिव : वो तो हो गयी है, ये तो एक्स्ट्रा है, लतादिदी ने दूसरे छोटे बच्चो को भी स्कूल में डालने को कहा है.

जूही : चलो, अच्छा है, आखिर कर सब कुछ, अच्छे हाथो में है.

शिव : ये सब आप लोगो की वजह से hi हुआ है.

जूही : ऐसा कुछ नहीं है, जो भाग्यमे है वही होता है, हम तो सब जरिया है, और कुछ नहीं.

शिव : अरे है, पवनसीर ने गायत्रीदिदी को शाम को मिलने बुलाया है.

जूही : ठीक है, आज स्टेडियम नहीं जाते है, में उन्हें ले आउंगी. वैसे शनिवार रात को ट्रैन से जाना है हमे.

शिव : शनिवार, मतलब कल रात को?

जूही : है, कल रात को. और एक बात, आज में तुम्हारे स्कूल के प्रिंसिपल से भी मिलने आ जाउंगी, और तुम्हारी छूटीओ की बात भी कर लेंगे.

शिव : ठीक है.

मेने गायत्रीदिदी को बता दिया की शाम को उन्हें जूही मैडम लेने आएँगी. फिर में, स्कूल चला गया. जब बिना मैडम पढ़ा रही थी तो पेओन आया और मुझे प्रिंसिपल के ऑफिस में आने को कहा. मेने मैडम से इजाजत ली, वो मुझे सवालिया नजरो से देख रही थी, पर सब के सामने तो पूछ नहीं शक्ति थी, में उनकी बात समाज रहा था, तो मेने सोचा की रेसस्स में उनसे बात कर लूंगा. में वह से प्रिन्सिपल्सीर के ऑफिस में चला गया, वह जूही और वरुणसीर बैठे हुए थे.

शिव : मई ी के इन सर?

प्रिंसिपल : है आओ, शिव. जूही तुम्हारी छुट्टिओ की अर्जी ले कर आयी है.

शिव : जी सर.

प्रिंसिपल : वैसे तो मेने इन दोनों से बात कर ली है, तुम आगे बढ़ोगे तो हमारे स्कूल का hi नाम बढ़ेगा, पर एग्जाम भी है, क्या तुम सब कर पाओगे?

शिव : जी सर.

प्रिंसिपल : अगर और कोई होता तो मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं होती, पर मुझे पता है की तुम पढ़ने भी होशियार हो, इस्सलिये मुझे थोड़ी चिंता हो रही है, क्यों की इन सब की वजह से तुम्हारी पढ़ाई पर भी असर होगा.

शिव : में कर लूंगा सर.

प्रिंसिपल : वेल, ठीक है फिर. में तुम्हारी छुट्टी मंजूर करता हु, और तुम्हारी हजारी भरने के लिए भी बिना मैडम से बात कर लूंगा.

जूही : थैंक यू सर.

प्रिंसिपल : इसमें थैंक यू कैसा, मुझे तो तुम्हे थैंक यू कहना चाहिए जो तुमने शिव को स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित किआ. तुम्हारी वजह से hi हमें एक होनहार खिलाडी मिला है. सो थैंक यू. (जूही मुस्कुरायी और मेरी और देखने लगी, में भी मुस्कुराया, थोड़ी देर बात करने के बाद में वह से निकल गया, क्लास में आया तो बिना मैडम के चेहरे पर वही सवाल था. रेसस्स टाइम में में उनसे मिलने चला गया. हम दोनों बहार लॉबी में खड़े थे)

बिना मैडम : तो दस दिन की छूती पे जा रहे हो?

शिव : जी, आप को पता चल गया?

बिना मैडम : है, सर ने बताया. कब निकलनेवाले हो?

शिव : जी, कल रात को. (उनके चेहरे पर जैसे हलकी सी उदासी थी) आप को खुसी नहीं हुई?

बिना मैडम : नहीं ऐसी बात नहीं है, तुम्हारी तरक्की से में क्यों खुस नहीं houngi,(Thoda धीरे से) तुम्हे देखे बगैर...

शिव : (उन्होंने बहोत धीरे से बोलै था पर मेने सुनलिया) बस थोड़े दिनों की तो बात है. (उन्होंने मुझे देखा और हां में शिर हिलाया, वैसे भी बूम ज्यादा बात तो नहीं कर शक्ति थे)

बिना मैडम : जाने से पहले मिलोगे?

शिव : काब?

बिना मैडम : जैसा तुम्हे ठीक लगे, स्कूल के टाइम के बाद तो में घर पर hi होती हु.

शिव : ठीक है मैडम.

में वह से निकल कर गार्डन में गया तो मुझे संयम और वैस्वी मिले.

संयम : Hi, शिव.

शिव : (संयम ने मुझसे बात की तो में रुक gaya,Vaiswi ने मेरी और एक नजर की, फिर दूसरी और देखने लगी) Hi, संयम.

संयम : प्रिन्सिपल्सीर ने क्यों बुलाया था तुम्हे? (शायद विस्वी भी जान न चाहती थी तो उसने भी मेरी और देखा तो में मुस्कुराया, वो फ़ौरन दूसरी और देखने लगी)

शिव : में, दस दिन की छुट्टी पे जा रहा हु, तो उनसे परमिशन मांगी थी, इस्सलिये उन्होंने बुलाया था.

संयम : (चौकते हुए) दस दिन! कब से?

शिव : वैसे तो मंडे से, पर कल रात hi जा रहा हु.

संयम : तुम पागल हो गए हो क्या, स्कूल में एग्जाम है.

शिव : मुझे पता है, पर जाना जरुरी है.

संयम : ऐसा क्या है जो इतना जरुरी है (मेने उसे सब बता दिया) ओह! फिर तो तुम्हे जाना hi चाहिए. पर में बड़ी निराश हुई.

शिव : वो क्यों?

संयम : अरे यार, कोई तुम्हे पढ़ाई में हारने को सोच रहा था, उसे मौका मिल जायेगा. (वैस्वी ने घर कर संयम को देखा) दस दिन में अगर तुम ये सब करोगे तो पढ़ाई का नुकशान होगा न.

शिव : (में उसकी बात समाज रहा था) तुम चिंता मात करो, जो मुझे हराना चाहता है उसे कह देना की वो मुझे इन परिस्थितिओ में हलके में न ले, में दोनों जगहों पर जित शक्ति हु, वैसे भी कॉम्पिटिओं में तो नमूना देख hi लिया होगा उसने. (वैस्वी कुछ बोल नहीं रही थी पर दूसरी और देख कर hi अपना मुँह बनाते हुए जोर जोर से सांसे ले रही थी, में समाज रहा था की उसे गुस्सा आ रहा है)

संयम : नाज़िआदिदी का नंबर तो है hi तुम्हारे पास, अगर वह किसी के पास मोबाइल हो तो मुझे बता देना, में तुम्हे यहाँ के नोट्स भेजदूँगी.

शिव : यार, सच में तुम्ही मेरी सबसे खास दोस्त हो, वर्ण लोग खामखा कॉम्पिटिओं करने लगते है, मेने तो नहीं कहा, मुज से कॉम्पिटिओं करो, अब में बेस्ट हु तो हु, इसमें में क्या कर शक्ति हु? (में और संयम मुस्कुराने लगे तो वैस्वी के नथुने फूलने लगे, उसे देख कर हम दोनों हसने लगे)

वैस्वी : में जा रही hu.(Wo वह से जाने लगी)

संयम : अरे सुन तो, में भी आती हु, bye शिव, मुझे याद से नंबर भेजना.

वो दोनों चली गयी, पर मुझे संयम की बात सही लगी, मुझे मोबाइल का तो इंतजाम करना hi चाहिए, ज्यादा महंगा नहीं पर ससतावाला भी ले लेना चाहिए. में ये सोचते हुए अपने दोस्तों के पास चला गया. उन्हें भी ये सब बता दिया. वो लोग भी संडे का प्लान बना का बैठे थे तो वो भी नीरस हो गए. स्कूल के बाद में सीधे घर चला गया, आज स्टेडियम जाना नहीं था. सादे छे बजे जूही आयी, हमे लेने के लिए. मेने गायत्रीदिदी को बता दिया था तो वो तैयार हो गयी थी. अब हम तीन लोग थे तो एक स्कूटर पर कैसे जाते.

जूही : एक काम करो शिव, तुम स्कूटर चला लो, हम दोनों पीछे बेथ जाते है, तुम्हे चलेगा न गायत्री. (उन्होंने है कहा, में आगे बेथ गया, मेरे पीछे जूही hi बैठी, और उसके बाद गायत्रीदिदी. जगह काम थी तो जूही मुझसे पूरी तरह सटी हुई थी, (गायत्री ने देखा की इस खूबसूरत लड़की ने शिव को कमर से पकड़ा हुआ है, वो आश्चर्य चकित थी, क्यों की जूही बहोत hi खूबसूरत थी और लम्बी तो इतनी थी की इन दोनों के सामने वो बहोत बोंय लगती थी. इतनी खूबसूरत लड़की को शिव के साथ इतना सहज देख कर उसको भी शिव के लिए मान होने लगा, क्यों की कुछ भी हो, शिव था तो एक हंसों लड़का.) में और जूही बात कर रहे थे, (गायत्री चुप चाप बैठी थी). थोड़ी देर में हम गयम पहुंच गए. मेने स्कूटर पार्क किआ, मेने गायत्रीदिदी को देखा तो वो गयम के बोर्ड को देख रही थी, उनके चेहरे पर दर दिख रहा था. होता है, अक्सर इंटरव्यू से पहले हर कोई नर्वस हो जाता है. में उनके पास गया, मेने उन्हें कंधे से पकड़ा.

शिव : डरने की कोई बात नहीं है दीदी, सब ठीक हो जायेगा. (दीदी ने मुझे देखा, उन्होंने है में इस्सर किआ)

हम अंदर चले गए, पवनसीर अभी तक आये नहीं थे. में जो जो काम कर रहा था वो सब में दीदी को समजता गया, वो बड़े गौर से देख रही थी. सबकी एंट्री करवाने के बाद मेने उन्हें सब पैकेजेस के बारे में भी बताया.

शिव : देखा दीदी, सब कितना आसान है, क्या कर पाओगी आप. (उन्होंने है में शिर हिला या, उतने में पवनसीर भी आगये, मेरे साथ दीदी को भी उन्होंने देखा पर कहा कुछ नहीं, वो अपने केबिन में चले गए). दीदी आप बैठो में सर से बात करके आता hu.(Me अंदर गया और पवनसीर को दीदी के बारेमे बता दिया, उन्होंने फिर से एक बार दीदी को देखा)

पवनसीर : ठीक है, बुलाओ उसे. (में भर गया और दीदी को ले कर अंदर आया)

गायत्रीदिदी : गुड इवनिंग सर.

पवनसीर : गुड इवनिंग, बैठो. (दीदी मेरे सामने देखने लगी, मेने है में इस्सर किआ तो वो बेथ गयी) क्या नाम है तुम्हारा?

गायत्रीदिदी : गायत्री.

पवनसीर : है तो गायत्री, मेने देखा की शिव तुम्हे सब समजा रहा था, तुम्हे क्या लगता है? क्या तुम कर पाओगी?

गायत्री : जी, सर.

पवनसीर : ठीक है, वैसे शिव ने रेकमंड किआ है तो मुझे कुछ कहने की जरुरत नहीं. में शिव को ढाई हजार दे रहा था, में उसकी सैलरी बढ़ानेवाला hi था पर अब वो जा रहा है और वैसे भी मुझे लग रहा है की मुझे थोड़ी सैलरी बढ़ानी भी चाहिए ताकि कोई यहाँ टिक कर काम कर शेक, तो में अभी फ़िलहाल चार हजार दूंगा, अगर तुमने अच्छे से काम किआ तो बाद में बढ़ा भी दूंगा, ठीक है?

गायत्रीदिदी : जी सर, थैंक यू सर.

पवनसीर : इतस ऑलराइट, अच्छी काम करना. शिव, ये तुम्हारी जिम्मेदारी है की तुम इससे सब कुछ अच्छे से समजा दो.

शिव : जी सर. (हम दोनों बहार आ गए, दीदी के चेहरे पर मुस्कान thi.)Congratulation दीदी.

गायत्रीदिदी : थैंक यू शिव.

शिव : ऐसे सिर्फ थैंक यू से काम नहीं चलेगा, पार्टी देनी होगी.

गायत्रीदिदी : कैसी पार्टी? (थोड़ा मायूसी se)Abhi तो मेरे पास पैसे नहीं है.

शिव : मेरी पार्टी के लिए आप को पैसे नहीं खर्चने पड़ेंगे.

गायत्री : (उसका दिल धड़कने लगा, उसे लगने लगा की शिव जरूर वही बात करेगा) तो? क्या चाहिए तुम्हे?

शिव : आप को कोई अच्छी चीज अपने हाथो से बना कर खिलानी पड़ेगी.

गायत्री : (वो एक बार फिर गलत साबित हुई) ठीक hai(Wo मुस्कुराते हुए शिव को देखने लगी)

शिव : आप उस कुर्शी पर बैठो, अब से आप की वही जगह है, में थोड़ी कसरत कर लेता हु.

गायत्री शिव को जाता हुआ देख रही थी, अंदर बहोत से लोग कसरत कर रहे थे, पर उसकी नजर शिव के ऊपर hi थी, शिव अपना शर्ट ुअत्तर कर कसरत करने लगा, उसकी बॉडी और उसे ऐसे कसरत करते देख, वो उसे किसी फिल्म के हीरो जैसा लग रहा था. जब गयम का समय समाप्त हुआ तो शिव ने मदन सर को गायत्रीदिदी से मिलवाया. मदनसीर ने भी उन्हें बधाई दी. सबके जाने के बाद मेने सब चीजे अपनी

जगह रखने लगा और दीदी को सब समजने लगा. थोड़ी देर बाद मेने देखा की स्नेहा मैडम बहार कड़ी है. दीदी को देख कर वो वही कड़ी थी.

शिव : दीदी, आओ में आप को पवनसीर की वाइफ से मिलवाता हु. (गायत्री ने भी बहार कड़ी एक खूबसूरत महिला को देखा, वो उसे जानती थी, उसने देखा था जब वो शिव की पार्टी में आयी थी, हम दोनों बहार आये) गुड इवनिंग मैडम.

स्नेहा : गुड इवनिंग, तुम बहार जा रहे हो? (बिना गायत्री की परवाह किये उन्होंने सीधा सवाल किआ)

शिव : है मैडम, सिफत दस दिनों के लिए. ये गायत्रीदिदी है, अब से यही यहाँ काम करेगी.

स्नेहा : Hi, गायत्री कैसी हो?

गायत्रीदिदी : अच्छी हु मैडम, आप कैसी है?

स्नेहा : में भी अच्छी हु (मेरी और देख kar)Tum आओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

हम दोनों केबिन में चले गए, गायत्री वही कड़ी उन दोनों को देख रही थी, थोड़ी देर तक उसे लगा की मैडम शिव को दन्त रही है, वो उसे नाराज दिख रही थी, फिर थोड़ी देर बाद वो शांत हो गयी, शिव के कुछ कहने पर वो फिर से मुस्कुराने लगी. गायत्री को कुछ समाज नहीं आ रहा था, पर इतना पता चल रहा था की शिव के अच्छे सम्बन्ध है मैडम के साथ. थोड़ी देर बाद वो दोनों बहार आ गए.

स्नेहा : तुम्हारा सब काम हो गया है न शिव?

शिव : जी, मैडम.

स्नेहा : चलो, फिर में तुम दोनों को घर छोड़ देती हु.

शिव : ठीक है मैडम. (गायत्री को अजीब लग रहा था. सब गाड़ी में बेथ गए, गायत्री इस आलीशान गाड़ी में बेथ कर थोड़ी असहज हो रही थी, वो दूसरीबार ऐसी गाड़ी में बैठी थी, पहली बार भी वो शिव के साथ hi बैठी थी जब शिव और काव्य मैडम उसे ले कर आये थे. काव्य मैडम भी शिव से काफी अच्छे से बात कर रही थी, आज स्नेहा मैडम भी बहोत अच्छे से बात कर रही थी, अब उसे लगने लगा था की जब शिव के इन सब के साथ इतने अच्छे सम्बन्ध है तो जरूर शिव में कोई बात होगी, वो ख़म खा hi शिव पर शक कर रही थी, वो शिव से िस्तरः से है कर बात कर रही थी जैसे शिव उनका कोई दोस्त हो)

हम अनाथालय आ गए. हम ने स्नेहा को bye कहा और वो वापस लौट गयी. हम अंदर आ गए, मेने hi सब को ये खुस खबरि भी दी की गायत्रीदिदी अब नौकरी करेंगी. सब खुस थे. दूसरे दिन शनिवार था, आज रात को हमें निकलना था. सुबह में और दीदी चलके जूही के घर गए. जूही को गायत्रीदिदी के बारे में पता नहीं था तो उसने वैसे hi जलपरी बन कर दरवाजा खोला. गायत्रीदिदी को मेरे साथ देख कर वो फटाफट अंदर चली गयी. (गायत्री मान में सोचने लगी की जब शिव के सामने इतनी परिओ का मेला लगा हुआ है तो फिर शिव तो उसके बारेमे ऐसा वैसा सोच hi नहीं शक्ति. क्यों की इन सब के सामने तो वो कुछ भी नहीं है.) जूही कपडे पहन कर आ गयी.

जूही : गायत्री, तुम कफ पिओगी न, क्यों की हम दोनों तो प्रोटीन शेक पिटे है.

गायत्री : जी, उसकी कोई जरुरत नहीं.

जूही : ऐसे कैसे. (वो अंदर गयी और हम दोनों के लिए वो खास दूध और दीदी के लिए कफ ले आयी) तो अब से सुबह तुम आओगी है न. तुम ऐसा करना की मेरे घर hi आ जाना, हम साथ में चले जायेंगे.

गायत्री : नहीं, आप क्यों तकलीफ करती है, में चली जाउंगी.

जूही : अरे, इसमें तकलीफ कैसी, मुझे भी जाना होता है, है वापसी की कोई गारंटी नहीं, वो तुम्हे मैनेज करना पड़ेगा. (थोड़ी देर बाद सब बहार आ गए, गायत्री को लगा की उस दिन की तरह टी तीनो साथ में जायेंगे, पर वैसा नहीं हुआ, जूही स्कूटर पर बेथ गयी, तो गायत्री शिव को देखने लगी) अरे उसे क्या देख रही हो, उसे में नहीं बिठानेवाली, तुम बेथ जाओ. (गायत्रीदिदी को कुछ समाज नहीं आया, वो मुझे देखने लगी )

शिव : आप बेथ जाओ दीदी, ये मुझे दौड़ा के ले जाएगी, आप नहीं जानती पर ये मेरी ट्रेनर भी है.

गायत्री हिचकिचाते हुए बेथ गयी, वो दोनों आगे आगे जा रही थी और शिव उनके पीछे दौड़ रहा था, शिव को इतना तेज भागते देख उसे आश्चर्य हो रहा था, वो बार बार शिव को देख रही थी, क्यों की वो पुरे रस्ते लगातार भाग रहा था. उसकी इतनी ताकत देख कर तो वो अचंबित थी. घर में इतना सरल सा दिखनेवाला ये लड़का क्या था उसे समाज hi नहीं आ रहा था. खैर एक घंटे के बाद में और जूही निकल गए, मुझे घर छोड़ कर वो गयी. मेने गायत्री दीदी को कुछ पैसे दे दिए थे ताकि वो रिक्शा में घर आ शेक. आज टाइम था तो मेने सोचा की बिना मैडम से मिल लेता हु, क्यों की उन्होंने जाने से पहले मिलने को कहा था. में स्कूल यूनिफार्म पहन कर बैग लेकर उनके घर चला गया.
 
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