Adultery Kundali Bhagya - Page 14 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 86

में बिना मैडम से मिलने उनके घर चला गया, दरवाजे की घंटी बजायी तो थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, मुझे वह देख कर वो खुस हो गयी.

बिना :(खुस हो कर): शिईयिव, आओ अंदर आ जाओ. मेने सोचा नहीं था की तुम आओगे.

शिव : क्यों, आप ने कहा था न?

बिना : है कहा तो था पर, तुम इतने बिजी होते हो तो मुझे लगा तुम आ नहीं पाओगे. इतना जल्दी आये हो, मतलब खाना भी नहीं खाया होगा, है न?

शिव : जी, मैडम, मुझे लगा की आप खिला देंगी.

बिना : मुझे लगा के बच्चे, ये नहीं कह शक्ति की मेरे साथ खायेगा, तुजे क्या लगता है की में खिलाऊंगी नहीं? (में बस मुस्कुरा रहा था) एक काम कर, तू बेथ, में क्यूकेर चढ़ा के नाहा लेती हु, मुझे पहले से बोलै होता तो में सब तैयार रखती. (वो किचन में गयी और सब निपटा कर टॉवल ले कर बाथरूम की और चली गयी. मेरे दिमाग में आईडिया आया, मेने अपने कपडे निकले और बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी, शावर की आवाज बंद hui)Kya हुआ शिव?

शिव : दरवाजा खोलिये. (बिना मैडम ने थोड़ा दरवाजा खोला और बहार झाकने लगी, मुझे नंगा देख कर उनका मुँह खुला का खुला रह गया, फिर वो मुस्कुरायी और शर्मा gayi)Ab दरवाजा खोलिये और मुझे अंदर आने दीजिये. वो दरवाजे से हैट गयी, में दरवाजा खोल कर अंदर चला गया, शर्म की वजह से उन्होंने मेरी और पीठ कर ली थी पर उनके मस्त उभरे हुए कूल्हे देख कर तो मेरा लुंड खड़ा हो गया, उन्होंने धीरे से मेरी और देखा, मुझे अपने कूल्हों के देखते प् कर वो शर्मा गयी, पर उनकी निगाह जब मेरे खड़े हो चके लुंड पर गयी तो और शर्मा गयी.





शिव : इतना क्यों शर्मा रही हो मैडम, हम पहलीबार तो नहीं कर रहे.

बिना : ये भले hi पहली बार न हो पर शर्म तो आती hi है.

शिव : मेरी और घूमिये न मैडम, में आप को देखना चाहता हु.

बिना : (शरमाते हुए) सब तो देखा है, अब क्या देखना है?

शिव : जैसे आप को हर बार शर्म आती है वैसे hi मुझे भी हर बार आप नयी hi लगती है, आप कितनी खूबसूरत हो मैडम, और आपका ये शरीर बहोत hi ज्यादा उत्तेजक है, इससे देख कर hi मेरी हालत ख़राब हो जाती है.

बिना : (मुस्कुराते hue)Wo मुझे नजर आ रहा hai.(Unka इस्सर मेरे खड़े लुंड की और था, में मुस्कुराया तो वो भी शर्मा कर मुस्कुराने लगी, उसे भी ये सब बहोत अच्छा लग रहा था, समाज में चाहे वो किसी भी मुकाम पर क्यों न हो, पर वो एक लड़की थी, एक औरत थी तो उसे अपने पसंदीदा मर्द के साथ खुल कर सेक्स करने का पूरा हक़ था, चाहे ये समाज उसे बुरा समजे या जैसा भी समजे, सो आहिस्ता से शिव की और घूम गयी, शिव उसे ऐसे घर कर देख रहा था जैसे उसे अभी खा जायेगा, वो भी तो यही चाहती थी, उसने देखा की शिव उसके बड़े बड़े चुचो को देख रहा है तो वो उसे अपने हाथ में ले कर दबाने लगी, वो ये जानती थी की वो कितनी बेशर्मी कर रही है पर उसे ऐसा करना कही न कही बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को रिज़ा रही थी, ऐसा वो पहली बार कर रही थी. वो अपने अंगो का जैसे प्रदर्शन कर रही थी, शिव को उसे ऐसे आंखे फाडे देखते देख उसे शर्म भी आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो मुस्कुराते हुए शिव को अपनी चूचिया दबा ते हुए ललचा रही थी, शिव खड़ा खड़ा अपने लुंड को सहलाने लगा, उसने भी अपने हलके बालो वाली छूट को सहलाया,





शिव को जैसे यकीं hi नहीं हो रहा था, ये देख वो और मुस्कुराने लगी. इतनी बेशर्मी से अपने गुप्त अंगो को ऐसे किसी और के सामने करते हुए उसे बड़ा अजीब लग रहा था पर साथ में बहोत hi ज्यादा उत्तेजक भी लग रहा था. शिव जैसे hi उसके नजदीक आया उसने शिव को पकड़ लिया और उसे किश करने लगी,





उसका लुंड उसके पेट पर चुभ रहा था जो उसे और उत्तेजना प्रदान कर रहा था, शिवने भी अपने लुंड को दो झांघो के बिच सेट किआ और कूल्हों को पकड़ते हुए उसे अंदर बहार करने लगा, अपनी छूट पर हो रहे घर्षण से वो शिव को जोर जोर से किश करने लगी, अब वो इस बड़े से अंग का महत्व जानती थी, उसे पता था की ये अंग उसे कितनी खुसी देता है, तो उसे उस लुंड को अपने हाथ में थम लिया और उसे हिलने लगी. (मेडम मेरे साथ इतना खुल कर प्यार जाता रही थी जो मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, में भी उनके अंगो से खेलने लगा, वैसे भी वो सच में बचत hi कमलकी थी, उनका हर अंग बेमिसाल था, इतनी खूबसूरत लड़की को छोड़ने के ख्याल से hi मेरा लुंड ठुमके मार रहा था, थोड़ी देर बाद वो अपने घुटनो पर बेथ गयी, वो मेरे लुंड को देख रही थी, वो मुझे भी देख रही थी, मुझे लगा वो थोड़ी झिक्जाक रही है, वैसे भी वो थी तो मेरी टीचर hi, मेने उनकी झिझक को समजा और मेरे खड़े लुंड को उनके मुँह में दाल दिया, उन्होंने भी बिना किसी एतराज के मेरे लुंड को मुँह में भर लिया.





for every math symbol

वो मेरे लुंड को अच्छे से चूसने लगी, जब हमारी नज़ारे मिलती तो वो शर्मा रही थी, पर लुंड को वो लगातार चूस रही थी. गरम गरम मुँह में अपने लुंड पर हो रही सरसराहट महसूस कर के में पागल हो रहा था. वो मेरे लुंड को काफी अंदर तक ले रही थी. मेने उन्हें खड़ा किआ. वो मुझे देखने लगी)

बिना मैडम : तुम्हे लग रहा होगा की में कितनी बेशर्म हु, पर पता नहीं क्यों, मुझे ये सब अच्छा लग रहा है.

शिव : इसमें बेशर्मी कैसी, ये सब तो खुलकर करने में hi मज़ा आता है, में आपके बारे में कुछ भी गलत नहीं सोच रहा. आप को जो अच्छा लगे वो कीजिये, ये हम दोनों के निजी पल है, न में किसी को बतानेवाला हु न आप, तो बिना कोई झिझक के जो मर्जी आये वो कीजिये.

बिना : सच कहती हु शिव, तुम्हारे साथ जुड़ने के बाद hi मुझे इन सब का सही से पता चला है, अगर में तुमसे न मिलती तो शायद कभी ये आनंद नहीं प् पति.

शिव : चलिए तो फिर अपने इस आनंद को आगे बढ़ाते है.

बिना : चलो, बैडरूम में चलते है, वह अच्छे से हो पायेगा.

शिव : आज तो जो कुछ भी होगा वो यही होगा, आप देखती जाइये. (मेने उनकी एक तंग उठायी और अपने लुंड को छूट पर एडजस्ट किआ और अंदर उतरने लगा)





how to do fractions on a keyboard

बिना : अह्हह्ह्ह्ह, आहिस्ता से शिव. (ऐसे खड़े खड़े अपनी छूट में उतर रहे लुंड को महसूस करते हुए उसने शिव के कंधे पर अपना शिर रख दिया, शिव ने आधे से ज्यादा लुंड उसकी छूट में दाल दिया, ये एहसास उसने कभी अपने पति के साथ महसूस नहीं किआ था, जब शिव उसके कूल्हे थम कर अपना लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो आनंद में डूबने लगी. शावर के निचे, इस तरह से करने का उसका पहला अनुभव था, वो शिव के मजबूत कंधो का सहारा लिए अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी) शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (वो उसको अपने से चिपका रही थी, उसके बालो को सहलाते हुए उसकी गर्दन पर अपने गर्म होठो का मज़ा दे रही थी, शिव लगातार धक्के लगा रहा था, जब शिव ने उसे पूरी ऊपर उठा लिया तो घबरा कर उस से पूरी तरह से चिपक गयी, वो मोटा लुंड उसकी छूट को पूरी तरह से भरते हुए उसकी बच्चेदानी के मुँह पर लग गया. उसकी आंखे बंद हो गयी, उसने शिव को कास के गले लगा लिया. शिव ने उसे ऐसे उठा रक्खा था जैसे वो कोई नन्ही बच्ची हो, बचपन के बाद वो शिव था जिसने उसे गॉड में उठाया था, वो अपने इस ताकतवर प्रेमी पर न्योछावर होती जा रही थी, वो ऐसे ऐसे अनुभवों से गुजर रही थी जो उसके लिए नए थे साथ में बहोत आनंद दायक थे., बाथरूम में लगातार उसकी सिस्किअ और आहे गूंज रही थी, साथ में थप थप की ध्वनि जैसे इस माहौल को और रंगीन बना रही थी. थोड़ी देर ऐसे छोड़ने से उसने पानी छोड़ दिया. अपने स्खलन को प् कर वो शिव से लिपट गयी और उसके होठो को चूसने लगी. थोड़ी देर बाद शिव ने उसे नीचे उतरा. वो शिव को ऐसे देख रही थी जैसे दुनिया का सबसे प्यारा इंसान हो, और प्रतीक्षा कर रही थी उसके अगले कदम का. शिव ने इससरए से पूछा भी क्या हुआ तो उसने न में गर्दन हिला दी. वो मुस्कुराया और उसे पलटने लगा, वो भी पलट गयी, जब शिव ने उसके कंधे को पकड़ कर हल्का धक्का देने लगा तो वो समाज गयी, सामने की दीवाल के सहारे वो थोड़ा झुक गयी, जब शिव ने उसके कूल्हों को सहलाया तो शर्म के साथ उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, जब शिव का लुंड उसके कूल्हों के बिच से उसकी छूट के छेड़ पर लगा तो वो थोड़ी और झुक गयी. फिर से लुंड उसकी छूट को भरता हुआ अंदर उतर गया. वो अपनी आंखे बंद किये, लुंड को अंदर बहार होता महसूस करने लगी.





geometry math symbols

फिर से थप थप और आह आह का संगीत बाथरूम में गूंजने लगा. शिव के धक्के इतने तेज लग रहे थे की वो लगातार आगे खिसक रही थी, आखिर कर वो दीवाल से साथ गयी, उसकी चूचिया दीवाल में धसने लगी, वो लगातार हो रहे धक्के को मज़े से सेह रही थी. यही तो वो आनंद था जिसे पाने के लिए वो हमेशा बेक़रार रहने लगी थी. अब शिव के धक्के काफी रफ़्तार से लग रहा थे, उसने शिव को रोका और निचे फर्श पर घोड़ी बन गयी, शिव फिर से उसकी कमर को थामे धक्के लगाने लगा. ऐसी धुआँधार चुदाई से एक बार फिर वो झाड़ गयी, पर शिव को उसने रोका नहीं, शिव की रफ़्तार बता रही थी की वो अब झाड़नेवाला है. अपने ससुराल में हुई बात उसको याद आ गयी. वो अंदर से मायूस हो गयी थी, उसे पता था की अब इन सब का कोई मतलब नहीं है, वो शायद अब कभी माँ नहीं बन पायेगी. जब उसे लगा की शिव अभी थोड़ी hi देर में छूट जायेगा तो उसने शिव को रोका और सीधी निचे लेट गयी. शिव उसके पैरो को फैलते हुए बेथ गया और फिर से अपना लुंड अंदर दाल दिया. थोड़ी देर रफ़्तार से धक्के लगाने के बाद वो झाड़ गया. बिना अपने बच्चेदानी पर हो रही गर्म वीर्य की बरसात को महसूस कर रही थी, उसने शिव को अपने शाइन से लगा दिया. थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद वो अचानक चौकी.

बिना : शीइइइइव, कुकर.... जल्दी हटो. (में ऊपर से उठा तो वो ऐसे नंगी hi किचन की और भागी. में बाथरूम के दरवाजे पर खड़ा था, थोड़ी देर बाद वो आयी तो अपने आप को ऐसे नंगा प् कर वो शर्माने लगी) मुझे ऐसे मात देखो, क्या हर वक़्त घूरते रहते हो. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुस्कुरा diya)(Hum दोनों फिर नहाने लगे, मेने साबुन लिया और उनके सरे बदन पर लगाने लगा तो वो शर्मा रही थी पर मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, मेने उनके स्तन पर साबुन लगाया फिर उनके कूल्हों पर फिर दरार में, शिव को ऐसे नहलाते देख वो मुस्कुरा रही थी, ये सब उसके जीवन के खास पल थे जो वो महसूस कर रही थी. दरार की गर्मी अपनी उंगलिओ पर महसूस कर के फिर से मेरा लुंड खड़ा हो गया, मेने उनकी छूट को भी साफ़ किआ तो उन्होंने मेरे कंधे को दबा दिया. जब उनकी नज़र मेरे लुंड पर पड़ी तो) शिव तुम कभी थकते नहीं? (मेने जब देखा की वो मेरे लुंड को देख कर ऐसा कह रही है तो में मुस्कुराया)

शिव : ये आप की वजह से खड़ा हो जाता है.

बिना : ऐसा क्यों होता है शिव, तुम्हारे साथ मुझे वक़्त काम hi लगता है.

शिव : वो भी वक़्त आएगा, जब आप को नहीं लगेगा की वक़्त काम पद गया. चलिए अब नहलेते है warna...(Beena मैडम मुस्कुरायी)

हम दोनों नाहा कर बहार आ गए. मैडम ने अपने बदन को पूछा और बिना ब्रा और पंतय के अपने ऊपर गाउन दाल दिया और खाना बनाने लगी. हम दोनों ने साथ में मिल कर खाया. फिर हम दोनों तैयार होने लगे. वो एक बॉक्स ले कर मेरे पास आयी. मेने देखा तो वो मोबाइल का बॉक्स था.

शिव : ये क्या है?

बिना : में तुम्हारे लिए लायी थी.

शिव : पर उसकी क्या जरुरत है?

बिना : मोबाइल की तो सब को जरुरत रहती है, और वैसे भी तुम दस दिन के लिए जा रहे हो, मेरा हमेसा मान करता है तुम से बात करने का, तो मेने सोचा की में तुम्हारे लिए मोबाइल ले लू.

शिव : में भी सोच रहा था, में भी लेने hi वाला था, आपने क्यों तकलीफ की.

बिना : (उदास चेहरे se)Abhi भी तुम मुझे अपना नहीं मानते na.(Unki आँखों में आंसू छलकने hi वाले थे)

शिव : अरे, मेने ऐसा नहीं कहा.

बिना : नहीं तुम्हारा यही मतलब है, अगर तुम मुझे अपना मानते तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं बोलते, पता है में कितना प्यार से खरीद कर लायी थी, में कितना खुस हो रही थी तुम्हारे लिए लेते वक़्त, और tum...tum मेरा तेरा कर रहे हो.

शिव : (मेने उन्हें गले lagaliya)Mera ऐसा कोई मतलब नहीं था, मेरे कहने का मतलब ये था की में सब को क्या कहूंगा, की मेरे पास मोबाइल कहा से आया? अगर मेने ये कहा की आप ने दिया है तो सब क्या सोचेंगे? मैडम ने शिव को मोबाइल क्यों दिया?

बिना : में कुछ नहीं जानती, जिसे जो सोचना है सोचे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. और तुम्हे कहने की जरुरत क्या है, तुम ये कह देना की तुमने लिया है.

शिव : थकी है बाबा, अब रोना बंद करो, कभी कभी तो शक होता है की आप मेरी टीचर हो?

बिना : नहीं हु, यहाँ में तुम्हारी टीचर नहीं हु.

शिव : तो फिर क्या ho?(Mene मुस्कुरा कर पूछा)

बिना : (उनके चेहरे पर भी मुस्कराहट आ gayi)Pehle रुलाते हो फिर हसते हो.

शिव : सॉरी, अब नहीं करूँगा, चलिए तैयार हो जाइये, स्कूल भी तो जाना है.

हम दोनों ऑटो कर के स्कूल आ गए. स्कूल में और तो कुछ खास नहीं हुआ. शाम को में घर चला गया. में गायत्री दीदी से मिला.

शिव : कैसा रहा दिन दीदी?

गायत्री : सब ठीक hi था.

शिव : अगर कोई दिक्कत हो तो जूही से या मुझे बता देना.

गायत्री : ठीक है.

दीदी को बोल कर में जूही के पास चला गया, मेने उनसे यही कहा की मेने मोबाइल लिया है, तो सिम लेनी है. हम दोनों ने सिम ले ली. रात को निकलना था तो फिर में घर चला गया और अपने कपडे और किताबे पैक करने लगा. थोड़ी देर बाद लतादिदी आयी. पहली बार था की में इतने दिनों के लिए जा रहा था तो वो रोने लगी. सरिता दीदी भी आयी, रंजन और विणा भी आयी. गायत्री दीदी भी आयी सरितादिदी, लतादिदी और रंजन तीनो मुज से लिपट कर रो रही थी. विणा और गायत्री दूर कड़ी देख रही थी. वो देख प् रही थी की ये सब एक दूसरे के कितने करीब है. में उनसे भी गले मिला, और विणा से भी गले मिला. मेने दीदी को अपना मोबाइल नंबर दिया. रात की तरीन थी तो जूही मुझे अनाथालय लेने आयी, हम दोनों स्टेशन चले गए, वह पार्किंग में स्कूटर रखदिया और हम अंदर चले गए. तक़रीबन आधे घंटे बाद ट्रैन आयी, टिकट तो बुक करवाली थी पर हमें रिजर्वेशन नहीं मिली थी. जूही ने तक से बात की तो उसने एक बर्थ का इंतजाम कर दिया. ट्रैन में भीड़ ज्यादा थी तो एक hi बिरथ से काम चलना था. हम दोनों अंदर आये और अपनी सीट ढूंढने लगे. रात का वक़्त था तो ज्यादातर लोग सोये हुए hi थे. हमे सबसे ऊपरवाली बर्थ मिली थी. हम दोनों ऊपर चढ़ गए. हमारे कम्पार्टमेंट में दो सुप्ले थे, एक कपल का सात आठ साल का बच्चा था जो हमारे सामनेवाली बिरथ पर सोया हुआ था. ज्यादातर लाइट बंद थी, थोड़ी सी रौशनी थी जिस से हम दोनों अपनी बिरथ पैर बेथ गए. अब किआ भी क्या जा शक्ति था. एक सिस में सामान रख कर हम दोनों बेथ गए. सफर काफी लम्बा था. थोड़ी देर में ट्रैन चल पड़ी. स्टेशन की वजह से जो लाइट जाली थी वो भी बंद होने लगी. एक दो लाइट को छोड़ कर सब लाइट बंद हो चुकी थी. हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi बिना बात किये बैठे रहे, वैसे भी सब सो रहे थे तो बाते करना ठीक नहीं था और रात का समय था तो अस्स पास देख कर टाइम पास करना भी संभव नहीं था. हम दोनों घुटने मोड़कर बैठे हुए थे, थोड़ी देर बाद मेने जूही को देखा तो वो अपनी आंखे बंद किये हुए बैठी थी. में उसके नजदीक खिसका और उसके शिर को अपने कंधे की और झुकाने लगा तो एक बार उसने मेरी और देखा फिर मुस्कुराते हुए उसने मेरे कंधे पर शिर रख दिया. मेने भी अपनी आंखे बंद कर ली. आधे घंटे बाद अब मुझे भी नींद आ रही थी पर ऐसे बैठे बैठे शिर लुढ़क जा रहा था और नींद टूट जाती थी. और आधा घंटा बीत गया. एक जगह किसी स्टेशन पर ट्रैन रुकी तो जूही भी जाग गयी.

शिव : ऐसे नींद नहीं आ रही न?

जूही : हम्म्म.

शिव : एक काम करो, तुम सो जाओ में निचे उतर जाता हु.

जूही : निचे जा कर तुम क्या करोगे, तुम थोड़ी न सो पाओगे. एक काम करो तुम एक साइड लेट जाओ, में तुम्हारे एक साइड सो जाती हु.

शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कह रही है पर उसके साथ ऐसे सोना, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था, ये पहला मौका था जब हम दोनों इस परिस्थिति में थे) वो कैसे होगा, इतनी सी जगह में हम दोनों नहीं सो पाएंगे, तुम hi सो जाओ.

जूही : मेने कहा न, एक बैग का तकिया बनाओ और लेट जाओ (मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था, में वैसे hi लेट गया, जगह बहोत काम थी तो वो भी लेटने का प्रयास करने लगी, पर हम दोनों पूरी तरह से सटे हुए थे, उसने मेरी बाह पर अपना शिर रक्खा और लेट गयी, में बहार की तरफ था और वो अंदर की तरफ थी, झिझक तो वो भी रही थी, इस लिए वो मेरी और पीठ कर के लेती, उसकी पीठ मेरी छाती से पूरी तरह चिपकी हुई थी, उसके साथ ऐसे लेटने सेमेरी धड़कने बढ़ चुकी थी. उसके बदन की गर्मी में महसूस कर पर रहा था. वो भी लम्बी थी तो उसके कूल्हे ठीक मेरे लुंड के पास थे. में ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहता था पर लुंड साला सुन hi नहीं रहा था, वो उठना सुरु हो गया. में जितनी कोशिस कर रहा था वो उतना hi उठ रहा था. मुझे बहोत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, ऐसा पहले भी एक बार हो चूका था बस में. में इसमें कुछ भी नहीं कर शक्ति था तो अपनी आंखे बांड कर के अपने आप को शांत रखने की कोशिस करने लगा. (जूही अपने कूल्हों पर उस चुभन को महसूस कर रही थी, वो आंखे बंद किये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी. शिव उसकी वजह से उत्तेजित हो गया है ये सोच कर वो शर्माने भी लगी, पर उसे ये सब बहोत अच्छा लग रहा था. किस्मत से आज वो शिव के साथ ऐसे सात कर सोई हुई थी. सीट न मिलने से जहा उसे पहले बुरा लगा था वही अब उसे वो अच्छा लग रहा था. अब वो सोच रही थी की अच्छा हुआ की दूसरी सीट नहीं मिली. वो भी इस मधुर स्पर्श का आनंद लेते हुए सोने की कोशिस करने लगी) थोड़ी देर में हम दोनों सो गए. रात को जूही के हिलने से में फिर जाग गया.

शिव : क्या हुआ?

जूही : एक करवट से लेटने पर दर्द हो रहा है. (उसने अपनी करवट बदली और अब वो मेरी और मुँह कर के लेट गयी, मेने अपने शिर को थोड़ा पीछे खिसका दिया, फिर से मेने अपनी आंखे बंद कर di.)(Juhi ने भी अपनी आंखे बंद कर दी पर थोड़ी देर बाद उसने आंखे खोली और शिव की और देखा जो अपनी आंखे बंद किये हुए था. आज वो उसे और ज्यादा अच्छा लग रहा था, कब से वो उसके साथ इस तरह से लेती हुई थी पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी, सिवाय उसके की उसका अंग खड़ा हो गया था, वो उत्तेजित भी हो गया था पर फिर भी उसने कोई आईसीआईसी हरकत नहीं की थी. अगर वो कुछ भी करता तो भी जूही उसे रोकती नहीं. पर शिव वैसा नहीं था. वो प्यार से उसे निहार रही थी, उसका दिल कर रहा था की वो शिव को किश करे, पर वो लड़की सहज लज्जा से वो कर नहीं प् रही थी. उसने अपनी बाह शिव के ऊपर रक्खी और उस से चिपक गयी, उसके शाइन में अपने शिर को रख कर उसे बहोत सुकून मिल रहा था. थोड़ी देर बाद शिव ने भी उसे अपनी बहो में ले लिया और उसके ऊपर अपना पेअर रख दिया, वो थोड़ी चौकी पर उसने कोई विरोध नहीं किआ. वो देखना चाहती थी की शिव क्या करता है, पर उसने कोई और हरकत नहीं की, शायद उसने नींद में hi उसे अपनी आगोश में ले लिया था, वो भी सुकून से उसकी बहो में समाये सो गयी. उसकी नींद तब खुली जॉब उसकी जीब में रक्के मोबाइल पर अलार्म baja.)(Me भी उस अलार्म से जाग गया, मेने देखा की मेने जूही को अपनी बहो में लिया हुआ है तो मेने फ़ौरन अपन हाथ हातलिया.) (जूही ने अपने ट्रैक की जेब से मोबाइल निकला और अलार्म ऑफ किआ. अलार्म का मतलब था की अब उनका स्टेशन आनेवाला था. उसने शिव की और देखा तो वो उसे hi देख रहा था, वैसे तो उसे शर्म आ रही थी पर ऐसा मौके को वो गवाना नहीं चाहती थी तो वो फिर से उसके शाइन से लग gayi)(Juhi ऐसे मेरे शाइन से लगी थी जैसे लतादिदी रोज मुज से चिपक कर सोती थी, में उसके प्यार को समाज रहा था, हम थोड़ी देर ऐसे hi लेते रहे, थोड़ी देर बाद डिब्बे में हरकत सुरु हो गयी तो उसने मुझे छोड़ा और कड़ी हो कर बेथ गयी, में भी बेथ गया. वो मेरी और hi देख रही थी, मेने भी उसे देखा, वो थोड़ी नजदीक खिसकी और मेरे कंधे पर अपना शिव शिर रख दिया, मेने भी अपनी बाह उसके कंधे पर रक्खी और उसे अपनी और खिंच लिया. थोड़ी देर बाद हम दोनों निचे आ गए. अपना सामान लिए हम दोनों दरवाजे के पास खड़े हो गए. थोड़ी देर बाद ट्रैन रुकी, और हम दोनों निचे उतर गए. स्टेऑन की लाइट अभी जल रही थी, पर आसमान में उजाला हो चूका था. सूरज अभी नहीं निकला था. हम दोनों स्टेशन से बहार आये, जूही आस पास देखने लगी, उसने अपना हाथ ऊपर उठा कर हिलाया. मेने उस और देखा तो एक आदमी अपनी खुली जीप लिए वह खड़ा था.

जूही : आओ शिव ( हम दोनों उनकी और चले गए) भैयाआ (कहते हुए जूही अपने भैया के गले लग गयी, मेने देखा की जूही अपने भाई से भी ऊँची थी, जब उनका मिलना ख़तम हुआ to)Bhaiya ये शिव है.

भैया : (वो इस युवक को ऊपर से निचे तक देखने लगे, कद काठी से वो अपनी बहन से भी कही ज्यादा था) Hello.

शिव : (अपने हाथ जोड़ kar)Namaste भैया.

भैया : मेरा नाम चंद्रपाल है.

जूही : सॉरी भैया, मेरे लिए आप को इतनी सुबह सुबह आना पड़ा.

चंद्रपाल : अरे पगली, इसमें क्या है, चल बेथ जा, घर पर सब तेरा इंतजार कर रहे है.

जूही : (हम दोनों ने अपना सामान पिच्छे रक्खा, जूही आगे की सीट पर बेथ गयी और में पीछे, जीप चल padi)Bhabhi कैसी है भैया, और माँ.

चंद्रपाल : तू खुद चल कर देख लेना.

जीप अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी, आस पास खेतो में लोग जाने लगे थे, रस्ते में कई लोग दिखे जो जूही के भैया को देख कर अपने हाथ जोड़ रहे थे, वो भी कभी कभी अपना हाथ उठा कर उसका जवाब देते थे. जूही के भैया को देख कर तो लग रहा था की वो लोग बड़े लोग है. वैसे तो वो गांव था पर जब हम एक घर के सामने रुके तो मेने देखा की ये बहोत बड़ा घर था, रस्ते में देखे हुए घरो में सब से बड़ा, घर के पास जगह भी बड़ी थी जिस को सीमेंट की दिवार से कवर किआ हुआ था. गाड़ी रुकी तो जूही कूद कर उस से उतर गयी और एक और दौड़ने लगी, मेने देखा की एक 45 साल या 50 साल के आस पास की औरत दरवाजे से निकल रही थी. जूही दौड़ कर उनके गले लग गयी.

जूही : माआआ.

माँ : आ गयी, इतना माँ माँ होता है तो जाती क्यों है?

जूही : अभी सुबह सुबह सुरु मात हो जाओ माँ (तभी एक और औरत दरवाजे से बहार आयी, 24-25 साल की थी, साड़ी पहनी थी और शिर पर पल्लू लिए हुए थी) भाभीयी (जूही उनके भी गले लग गयी, में अपनी और जूही की बैग लिए थोड़ी दुरी पर खड़ा हो गया) कैसी हो भाभी?

भाभी : में अच्छी हु, तुम कैसी हो? (उनकी नज़र मेरी और गयी)

जूही : (जूही ने देखा की उसकी भाभी और उसकी माँ दोनों शिव को देख रही है) माँ, ये शिव है. (में आगे बढ़ा और जूही की माँ के पेअर छू कर आशीर्वाद लिया)

माँ : जीते रहो बीटा, (मुझे ऊपर से निचे देखते हुए) मुझे तो लग रहा था की एक यही है दुनियामे इतनी लम्बी. (में मुस्कुराया, मेने भाभी को भी नमस्ते किआ, तो उन्होंने भी मेरे नमस्ते का जवाब नमस्ते से दिया) आओ बीटा अंदर आओ. बहु, इनके चाय नास्ते का इंतजाम कर तो.

भाभी : जी, मजी.

जूही : ये भी चाय नहीं पिता, ये भी मेरी तरह दूध hi पिता है.

माँ : ये तो अच्छी बात है, बहु, बदामवाला दूध hi बना. आओ तुम दोनों, पहले मुँह हाथ धो लो.

जूही : आओ शिव. (में उसके पीछे पीछे चला गया)

चंद्रपाल : माँ, इससे जूही क्यों लायी है?

माँ : उसका फ़ोन आया था, ये भी उसकी तरह खिलाडी है, यहाँ अपने जिले में कैंप है तो दस दिनों के लिए आया है.

चंद्रपाल : तो क्या ये यहाँ रहनेवाला है?

माँ : तुजे क्या दिक्कत है?

चंद्रपाल : एक अनजान लड़के को ऐसे रखना ठीक नहीं.

माँ : वो तेरे मेरे लिए अनजान है, जूही के लिए नहीं, वो उसे जानती है, अगर उसने कहा है तो सोच समझकर hi कहा होगा. जा तू अपना काम देख.

चंद्रपाल : ठीक है माँ, जैसे तुम कहो, में खेतो की और जा रहा हु.

(वो वह से चला गया, पर उसको शिव का यहाँ रहना ठीक नहीं लग रहा था, पर वो अपनी बहिन और माँ के सामने कुछ बोलै nahi.)(Hum दोनों रसोई में बैठे दूध और मसाले वाली रोटी खा रहे थे, मेने देखा की भाभी चुपके से मुझे hi देख रही थी, जैसे hi मेरी नजर उनकी और जाती वो दूसरी और देखने लगती, मेरी समाजमे नहीं आ रहा था, नास्ता करने के बाद हम सब बैठक वाले कमरे में बैठे थे)

माँ : तो बेटी अब कहो, तुम्हारी क्या योजना है.

जूही : माँ, शिव मेरी तरह एथलीट है, हमारे जिले में कैंप है तो में इससे यहाँ लायी हु ताकि उसे इन सब का अनुभव मिले, ताकि वो आगे बढ़ शेक.

माँ : ये रहेगा कहा?

जूही : जैसे आप कहो माँ, वैसे इसका रहने का इंतजाम वह स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में भी हो शकता है, पर में चाहती हु की ये यहाँ रहे, इसकी दो वजह है, एक तो में इससे वह रहने देना नहीं चाहती और दूसरी वजह है की वो घर में रहे तो घर को समजे, माँ शिव अनाथालय में पला बड़ा है, उसने कभी घर देखा hi नहीं, में चाहती हु की वो आप के साथ रहे तो समजे की माँ क्या होती है, और आप से अच्छी माँ तो हो hi नहीं शक्ति.

माँ : (मुस्कुराते hue)Jyada चापलूसी मात कर. चल ठीक है, पर यहाँ कहा रहेगा?

जूही : ऊपर दो कमरे है न, उसमे रहलेगा, वैसे भी इससे अपने एग्जाम की तयारी करनी है तो ऊपर रहेगा तो एकांत में पढ़ पायेगा.

माँ : अब अपनी बात, तू क्यों नहीं रुक रही?

जूही : अभी फ़िलहाल तो मेरा रुकना मुश्किल है, पर तुम्हारे लिए खुशखबरी है?

माँ : वो क्या?

जूही : माँ, में नौकरी छोड़ रही हु.

माँ : (खुस हो kar)Ye हुई न बात, में तुजे कब से कह रही हु, क्या रक्खा है ऐसी नौकरी में, जब हमारे पास सब कुछ तो है.

जूही : ऐसे नहीं माँ, में नेशनल के लिए तयारी करना चाहती हु, इस लिए.

माँ : तुजे कितनी बार संजो, छोड़ ये सब, अब शादी का सोच, पर तू है की समझती hi नहीं.

जूही : क्या शादी करना hi एक लड़की के लिए सब कुछ होता है, और में ये नहीं कह रही की नहीं करुँगी, पर अभी फ़िलहाल नहीं. और में इस बारेमे और कोई बहस नहीं करना चाहती.

माँ : मेने hi तुजे शिर पर चढ़ा रक्खा है.

जूही : (उठ कर उनके बाजु में बेथ कर उनके गाल को चुम कर) मेरी प्यारी माँ, इस्सलिये तो कह रही हु की दुनियामे सबसे अच्छी है मेरी माँ.

माँ : छोड़ मुझे, ज्यादा मस्का मात लगा. कब वापस जानेवाली है?

जूही : वैसे तो आज hi जानेवाली थी पर अब सोच रही हु एक दिन रुक jau(Ye कह कर उसने मेरी और देखा) में सोच रही थी की शिव को मेरा गांव दिखाऊ.

माँ : ठीक है, पर खाने के वक़्त तक आ जाना.

जूही : ठीक है माँ. चलो शिव.

हम दोनों बहार आये, जूही ने एक बीके निकली, में तो उसे देखता hi रहा, क्या लड़की है यार. बाइक चालू कर के मुझे बैठने को कहा तो में बेथ गया. उसने गांव की और बाइक दौड़ा दी.
 
अपडेट 87

हम दोनों गांव के छोटे रास्तो पर थोड़ी देर घूमते रहे, गांव इतना बड़ा भी नहीं था तो थोड़ी hi देर में हम ने सारा गांव घूम लिया.

शिव : तुम बाइक भी चला लेती हो ये जान कर आश्चर्य हुआ.

जूही : इसमें आश्चर्य की क्या बात है, क्यों लड़कीअ बाइक नहीं चला शक्ति.

शिव : चला शक्ति है पर मेने ज्यादा लड़कीओ को बाइक चलते देखा नहीं.

जूही : में तो भैया की जीप भी चला लेती हु.

शिव : क्या सच में, कस्मे भी सब चला पता.

जूही : इसमें कोनसी बड़ी बात है, तुम स्कूटर तो चला hi लेते हो, बाइक के गियर समाज लो तो फिर बाइक भी चला पाओगे, सीखना चाहते हो?

शिव : है है, क्यों नहीं.

जूही : थकी है, तो गांव के बहार के रस्ते पर चलते है, वह ज्यादा कोई नहीं होगा और रास्ता भी सीधा है. (हम दोनों गांव से बहार आ गए, उसने बाइक रोकी) ये देखो इसे क्लच कहते hai(Usne हाथ से लीवर दबा कर दिखाया) और इससे गियर कहते है (पेअर से दबा कर दिखाया), इस बाइक में 5 गियर है, किसीमे 4 भी होते है, सबसे ऊपर न्यूट्रल और उसके बाद में निचे करते जाओगे ऐसे ऐसे गियर बदलते जायेंगे, जब तक ये क्लच नहीं छोड़ोगे, बाइक आगे नहीं जाएगी. अब पीछे बेथ जाओ, में तुम्हे दिखती हु. (में बेथ गया, और उसने मुझे थोड़ी देर बाइक चला कर दिखाई, कैसे और कब गियर चेंज करते है वो मुझे संजय, दिखने में तो सब आसान लग रहा था) चलो अब तुम करके दिखाओ.

(में बाइक पर आगे बेथ गया, जूही मेरे पीछे बेथ गयी) चलो अब क्लच दबाओ( मेने दबा दिया,) अब गियर में डालो. (मेने दाल diya)Ab क्लच छोडो और बाइक को आगे बढ़ाओ. (मैंने जैसे hi क्लच छोड़ा तो एक झटका लगा और बाइक बंद हो गयी, जूही एक दम से मेरी पीठ से टकराई )क्या करते हो, ऐसे एकदम से नहीं, आहिस्ता से छोड़ना था.

शिव : सॉरी, यार, गलती हो गयी.

जूही : चलो कोई बात नहीं, फिर से तरय करो, देखो में दिखती हु( वो मुझसे पूरी तरह से चिपक गयी, उसके स्तन मेरी पीठ में चुभ रहे थे, पर उसका ध्यान सब सीखने में hi था, मेने भी सिखने में ध्यान दिया, थोड़ी देर की मसक्कत के बाद में बाइक चलने लगा) है ऐसे hi, देखा कितना आसान है, बस स्पीड के हिसाब से गियर बदलते जाओ, और जब रोकना हो तो क्लच दबा दो. (में भी खुस तह बाइक चलते हुए, हम दोनों ऐसे hi बाइक चलते rahe)Us और लेलो.

शिव : किस और?

जूही : उस aur(Apne हाथ से रास्ता दिखते hue)waha हमारे खेत है. (मेने उस और मोड़ दिया, वह एक कच्चा रास्ता था, खेत काफी बड़ा था, अंदर एक छोटा माकन भी बना हुआ था. जब नजदीक गया तो वो भी काफी बड़ा था, बहार से hi लग रहा था की काम से काम चार रूम का घर होगा. आस पास कुछ मजदुर काम कर रहे थे, एक खटिया पर जूही के भाई लेते हुए थे. मेने थोड़ी दुरी पर बाइक रोक दी, बाइक आवाज सुन कर वो खटिया पर से खड़े हुए.

चंद्रपाल : अरे जूही, तुम यहाँ, आओ आओ.

जूही : जी भैया, बस ऐसे hi घूमने निकले थे तो यहाँ आ गए.

चंद्रपाल : है, वैसे भी इस गांव में खेतो के अलावा है भी क्या., आओ बैठो. इ ीे लीला, माकिन के लिए पानी ले आओ. (मेने देखा की एक 50 साल के करीब की औरत थी, फिर भी ये उन्हें नाम से बुला रहे थे, वो भी जी मालिक कहती हुए, अंदर गयी और पानी के दो गिलास ले आयी. हम दोनों ने पानी पिया.)

जूही : सुक्रिया, मौसी.

लीला : आरी बिटिया, िमे सुक्रिया कैसा, इ तो हमर काम है. (जूही सच में सब को इज्जत देना जानती थी)

जूही : भैया, हम थोड़ा खेत घूम लेते है, में शिव को अपने खेत दिखा देती हु.

चंद्रपाल : है है, क्यों नहीं, इसने तो ये सब कभी देखा hi नहीं होगा, जाओ दिखाओ इससे. इससे भी तो पता चले की हमारी बहन की क्या हैसियत है. (वो जिस तरह से बात कर रहे थे उस से लग रहा था की वो मुझे मेरी औकात दिखा रहे है, पर वैसे भी मेरी तो कोई औकात थी hi नहीं, तो मुझे क्या फर्क पड़नेवाला था)

जूही : क्या भैया आप भी, (मुज से) चलो शिव. (हम दोनों खेत की और निकल गए, बहोत बड़ा खेत था, या यु कहे की बहोत सरे खेत थे, कुछ में फसल लगी हुई थी, कुछ में आम के पेड़ भी थे, कुछ दुरी पर पेड़ एक क़तर में दिख रहे थे, जूही मुझे सब बता रही थी, कोनसी फसल है, कोनसे पेड है, हम चलते चलते काफी दूर तक आ गए, हम जहा थे वह से तो अब वो माकन भी नहीं दिख रहा tha.)Wo पेड की क़तर दिख रही है शिव, उसके पीछे एक तालाब भी है, देखना चाहोगे.

शिव : जैसे तुम कहो. (वो मुस्कुरायी और हम उन पेड़ो के नीचे आ गए, सच में वह का नजारा बहोत hi ज्यादा खूबसूरत था, वह से एक रास्ता भी दिख रहा था) ये रास्ता?

जूही : ये रास्ता हमे स्टेडियम की और ले जायेगा, स्टेडियम हमारे गांव की तरफ, सहर से लगकर है.

शिव : अगर वो इतना दूर है तो में जाऊंगा कैसे, इस से तो अच्छा है की में वही रह जाऊ. वैसे भी मुझे नहीं लगता की तुम्हारे भाई को मेरे यहाँ रहने से कोई ख़ुशी हुई है.

जूही : ऐसा कुछ नहीं है, उनका स्वाभाव थोड़ा वैसा hi है. पापा तो अपनी नौकरी की वजह से बहार रहते है, हफ्ते में एक दिन आते है, तो सब भैया hi सँभालते है, सब पर हुकुम चलते चलते वो थोड़े वैसे हो गए है. पर वो मेरी कोई बात नहीं टालते, इस्सलिये तुम उनकी चिंता मात करो. तुम भाभी से मिले न, वो बहोत अच्छी है, वो भाभी नहीं, मेरी दोस्त है. है वो ज्यादा बोलती नहीं पर दिल की बहोत अच्छी है, वो तुम्हारा पूरा ख्याल रक्खेगी. और रही बात आने जाने की तो तुम बाइक का इस्तेमाल कर शक्ति हो.

शिव : देखते है, पर अगर कुछ और इंतजाम हो तो बेहतर है.

जूही : छोडो वो सब, अपने मोबाइल से मेरी कुछ तस्वीर तो लो, वैसे भी पूरा मोबाइल खली पड़ा है.

शिव : पर मुझे नहीं आता.

जूही : अरे इसमें कोनसी बड़ी बात है, लाओ तुम्हारा मोबाइल, में सिखाती हु. (फिर उसने मुझे तस्वीर लेना सिखाया, मेने उसकी काफी साडी तस्वीर ली, उसने मेरे साथ सेल्फी भी ली, उसने मुझे वीडियो बनाना भी सिखाया, काफी देर घूमने के बाद हम वापस उस माकन के पास आगये) भैया, हम घर चलते है, अब भूख भी लगी है, आप नहीं आनेवाले?

चंद्रपाल : तुम दोनों जाओ, में आता हु थोड़ी देर में.

हम दोनों वह से चले गए. एक मजदुर जो वही पास में खड़ा था.

मजदुर : ये लड़का कोण है, मालिक?

चंद्रपाल : है कोई अनाथ, मेरी बहन उस पर दया खा कर उसे यहाँ ले आयी है.

मजदुर : पर लड़का बहोत बढ़िया है मालिक, बिटियरानी से ऊँचा और तगड़ा है.

चंद्रपाल : जा अपना काम कर, तुजसे पूछा कुछ.

मजदुर : माफ़ कीजिये मालिक, में तो वैसे hi कह रहा था. (वो दर कर वह से भाग लिया, चंद्रपाल जाती बाइक को देख रहा था)

हम दोनों घर आ गए.

माँ : बहोत देर लगा दी?

जूही : है माँ, अपने खेत की और चले गए थे, शिव को सब दिखा रही थी. अब बहोत भूख लगी है.

माँ : है, खाना तैयार hi है, बहुउउउउ, खाना लगा दे.

भाभी : (अंदर से hi आवाज आयी) जी मजी, हाथ मुँह धो कर आ जाइये, सब तैयार hi है.

माँ : जाओ, दोनों मुँह हाथ धो लो और रसोई में hi आ जाओ.

हम दोनों ने खाना खाने बेथ गए, भाभी ने खाना परोस दिया. खाना सच में बहोत स्वादिस्ट था, भाभी परोसते वक़्त भी मुज से ज्यादा नज़ारे नहीं मिला रही थी. पर दूर बेथ कर मुझे देख लेती थी. जैसे hi उनसे नजर मिलती तो फिर अपनी नजर हटलेटी. मेरी समाज में नहीं आ रहा था. खैर हम दोनों ने खाना खाया.

जूही : हम शाम को मेरी सहेली के घर जायेंगे, तब तक अगर तुम्हे आराम करना है तो कर लो.

शिव : ठीक है, वैसे भी मुझे पढ़ाई करनी है. (में पढ़ाई करने ऊपर चला गया, जूही की माँ भी आराम करने चली गयी, भाभी और नानन्द रसोई में अकेली रह गयी)

जूही : भाभी आप नहीं खाओगी?

भाभी : तुम्हारे भैया आएंगे, उसके बाद खाउंगी.

जूही : क्या भाभी आप भी, उनका कोई ठिकाना रहता है, उन्होंने भी कितनी बार बोलै है की खा लिया करो.

भाभी : वो सब छोड़, शिव के साथ तेरा क्या स्कीन है? अब तो तू उसे घर तक ले आयी.

जूही : (वो शर्मा तो रही थी, पर उदास भी thi)Aisa कुछ नहीं है भाभी, वो तो कैंप की वजह से उसे में यहाँ लायी हु.

भाभी : मतलब तुम दोनों में कुछ भी नहीं है?

जूही : पता नहीं भाभी, कभी कभी तो लगता है कुछ है, पर कभी लगता है कुछ भी नहीं है, वो कभी मेरे करीब नहीं आता. में खुद उसके करीब जाती हु फिर भी वो दूर दूर रहता है.

भाभी : ऐसा क्यों?

जूही : पता नहीं भाभी, शायद वो मेरी बहोत इज्जत करता है, तो मुझे उस नज़र से देखने में उसे दिक्कत हो रही है, या फिर वो अनाथ है तो मुझसे दूर रहता है, पता नहीं भाभी.

भाभी : तो एक बार बात करके देख.

जूही : वो भी की थी, पर उसके बाद भी मुझे ऐसा hi लगता है की वो मुझे नाराज नहीं करना चाहता इस लिए मेरे करीब है, पर वो अपने दिल से मेरे करीब नहीं है.

भाभी : तेरी बातो से तो यही लगता है की वो एक अच्छा लड़का है, वर्ण तेरे जैसी लड़की अगर सामने से बोले तो कोण पागल होगा जो मन करेगा.

जूही : एक बात पुछु भाभी, आप उसे क्यों घर रही थी?

भाभी : में घर नहीं रही थी, मेने तुजे पहले भी बोलै था, पता नहीं क्यों पर वो मुझे जाना पहचाना सा लगता है, ऐसा लगता है जैसे मेने उसे पहले भी कही देखा है. तो में वही सोच रही थी की मेने उसे कहा देखा है?

जूही : जहा तक में जानती हु, आप कभी भी उस से नहीं मिली, न hi वो आप से मिला है.

भाभी : वो hi तो, मेरी भी समाज में नहीं आ रहा है. (तभी भाई की गाड़ी की आवाज आयी)

जूही : ठीक है भाभी, आप खाना खाओ, में चलती हु, अपने रूम में. (चंद्रपाल अंदर रसोई में आया)

चंद्रपाल : चल जल्दी खाना निकल. (वो फटाफट खाना निकलने लगी, दोनों खाना खाने lage)Us फटीचर पर नजर रखना.

भाभी : किसकी बात कर रहे है?

चंद्रपाल : अरे वो लौंडा है न, क्या नाम है, है शिव.

भाभी : ऐसा क्यों कह रहे है?

चंद्रपाल : जूही तो बेचारी भोली है, अभी उसे लोगो की समाज नहीं, वो फटीचर साला अनाथ, न जाने किसकी औलाद है, नादानी में वो उसे घर में ले आयी है, देखना कही कुछ चुरा न ले.

भाभी : मुझे तो वो वैसा नहीं लगा जी.

चंद्रपाल : तुजे जितना बोलै है उतना कर, वैसे भी तुमसे बुद्धि की अपेक्षा तो है नहीं. पता नहीं माँ ने भी क्या सोच कर है कह दी. तू बस घर का ध्यान रखना, ऐसे फ़ातिचारम कंगलो ने कभी कुछ देखा नहीं होता, सेल कब हाथ साफ़ कर दे पता नहीं.

भाभी : जी.

में ऊपर बैठा पढ़ाई कर रहा था. जब दरवाजे पर दस्तक हुई तो मेने पीछे मुद कर देखा, वैसे तो दरवाजा खुला hi था, वह भाभी कड़ी थी.

शिव : जी भाभी?

भाभी : निचे आ जाओ, जूही तुम्हारी रह देख रही है.

शिव : आप चलिए, में अभी आया. (वो चली गयी, में निचे आ गया, जूही अपनी माँ के साथ बैठी हुई थी, अभी उसने सलवार, कुरता पहना हुआ था, ऐसे कपड़ो में वो अलग hi दिखती थी, में वह गया और उसकी माँ के पेअर छुए, उन्होंने भी आशीर्वाद दिया)

जूही : माँ हम आते है, पारुल के घर जा रहे है. (हम दोनों जूही की सहेली के घर चले गए, बहार हमें उसके पिताजी मिले)

प के पापा : अरे बिटिया, तुम, बहोत दिनों बाद आयी, कैसी हो?

जूही : जी अच्छी हु, पारुल कहा है?

प के पापा : वो अंदर hi है, में जरा काम से जा रहा हु, तुम जाओ. (उन्होंने मेरी और देखा तो मेने स्माइल दी, उन्होंने भी सामने स्माइल दी, में दरवाजे के पास hi खड़ा था, जूही अंदर गयी, थोड़ी देर में वो दोनों हस्ती हुई बहार आयी)

पारुल : अरे बाप रे, ये कोण है?

जूही : (उसकी बाह पर मरते हुए) अभी तो बताया, ये शिव है.

पारुल : (हस्ते हुए) वो तो मुझे भी पता है, पर इससे देख कर लगा की किसी और गृह से आया है.

जूही : क्या बोल रही है, थोड़ी शर्म कर. सॉरी शिव, ये ऐसी hi है.

पारुल : है, ऐसी हु इसीलिए तो तेरी सहेली हु, वैसे मान न पड़ेगा, ये तेरी टक्कर का है.

जूही : (फिर से उसे मरते hue)Kya बोले जा रही है, मार खायेगी.

पारुल : मुझे जो लगा वो बोल दिया, बाकि मुझे तो चिंता थी की कोई तेरे जितना भी मिलेगा की नहीं, पर ये तो तेरे भी ऊपर है.

जूही : अब न तू पिटेगी मुज से (वो मारने को हुई, तो पारुल ढूढ़कर मेरे पीछे छुप गयी)

पारुल : बचाओ Shiv(Mene हस्ते हुए, जूही के हाथ पकड़लिये तो वो रुक गयी) देखा में न कहती थी, ये तेरे से भी ऊपर है, भाई अब तो हमे भी सपोर्ट मिल गया है, अब हम तुजसे डरनेवाले नहीं है. अगर तू शेरनी है तो अब हमारे पास भी शेर है.

(एक आवाज आयी): अरे जूही तुम?

जूही : अरे विष्णु भैया, कैसे है आप?

विष्णु : में ठीक हु, तुम काब आयी? ये कोण है?

जूही : आज सुबह hi आयी हु, ये शिव है भैया. (उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया) ये पससवले सहर के स्पोर्ट्स कैंप के लिए आया है.

विष्णु : अच्छा, कोनसी स्पोर्ट्स?

शिव : दौड़.

विष्णु : चलो, फिर तो बच गए.

जूही : (हस्ते हुए) ऐसा क्यों कह रहे हो भैया?

विष्णु : में भी तो हिस्सा ले रहा हु, पर में कुस्ती में हिस्सा ले रहा हु, अगर ये कुस्ती में होता तो हमारा पत्ता तो काट जाता न.

जूही : क्या सच में, आप कैसे जानेवाले हो?

विष्णु : मेरी बाइक से.

जूही : आप, शिव को अपने साथ ले जायेंगे?

विष्णु : है क्यों नहीं.

जूही : चलो अच्छा हुआ, हमारी प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी.

उसके बाद हम वह काफी देर रुके, दोनों भाई बहन काफी मिलनसार थे, विष्णुभाई भी अच्छे थे, मुझसे वो दोस्त की तरह hi बात कर रहे थे. अँधेरा होने पर हम घर लौट आये. रात का खाना खाया, और में अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर लेता फिर पढ़ाई करने लगा. में पढ़ाई में खोया हुआ था की मेरे कंधे पर किसीने हाथ रक्खा, मेने चौक कर देखा तो वो जूही थी. में ऊपर से नंगा था और निचे सिफत एक हाफ पंत पहना हुआ था.

शिव : तुम? तुमने तो मुझे चौका दिया. इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो?

जूही : कुछ नहीं, तुमसे मिलने का मान किआ तो आ गयी.

शिव : इतनी रात को किसीने देख लिया तो क्या सोचेगा?

जूही : क्या सोचेगा, क्यों में तुमसे मिलने भी नहीं आ शक्ति?

शिव : ऐसी बात नहीं है, पर तुम्हारे भैया ने या तुम्हारी माँ ने देखा तो अच्छा नहीं लगेगा.

जूही : तुम इतना डरते क्यों हो?

शिव : में डरता नहीं हु, मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है.

जूही : (उसने प्यार से मुझे देखा) में जानती हु, पर मेरा दिल किआ तो में आ गयी. अगर तुम्हे अच्छा नहीं लगा तो में चालिजाति हु. (वो जानेलगी, तो मेने उसका हाथ पकड़लिया)

शिव : चलो, बहार चलते है. (में ऊपर से नंगा था तो) एक मिनट, में कुछ पहेंलेता हु.

जूही : रहने दो, ऐसे hi अच्छे लगते हो.

अब में क्या कहता, हम दोनों बहार छत पर आ गए, चारो और सन्नाटा छाया हुआ था, कही से मेंढक और झींगुरो की hi आवाजे आ रही थी. मेने जीप देखि.

शिव : तुम्हारे भाई आ गए?

जूही : है, और सब सो रहे है. कैसा लगा तुम्हे मेरा घर?

शिव : बिलकुल तुम्हारे जैसा.

जूही : (मुस्कुरा kar)Mere जैसा? मतलब?

शिव : तुम्हारी तरह, प्यारा और खूबसूरत.

जूही : क्या में तुम्हे अच्छी लगती हु?

शिव : है लगती तो हो.

जूही : तो फिर मुज से दूर क्यों भागते हो?

शिव : अच्छी लगती हो, इसकामतलब ये तो नहीं की में तुम्हे पकड़ लू. मुझे मेरी हैसियत पता है.

जूही : भैया की दोपहर की बात का बुरा लगा?

शिव : उनकी बात का बुरा क्यों लगेगा,? क्या में अपने बारे में नहीं जनता.

जूही : इतना सब जानते हो तो मेरे बारेमे नहीं सोचते?

शिव : सोचता हु, इसीलिए तो दूर रहता हु. कही जाने अनजाने में तुम्हे दुःख न दे बेतहु.

जूही : चाहे दुःख हो या सुख, अगर वो मुझे वो चाहिए तो? और आगे चल कर शायद तुम मुझे दुखी कर डोज ऐसा ख्याल तुम्हे आ रहा है तो अभी तुम मुझे दुखी कर रहेहो उसका ख्याल नहीं आ रहा tumhe?(Me खामोश रहा, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो बड़ी छह से मुझे देख रही थी) क्यों इतना सोचते हो, आगे क्या होनेवाला है क्या पता, आगे का सोच कर क्यों में अपने आज को ख़राब करू, क्या तुम मुझे इतना भी नहीं दे shakte.(wo उदास चेहरे से मेरे शाइन से लग गयी, में उसको उदास नहीं देख शक्ति था तो मेने उसे अपनी बाहोंमे भर लिया, हम दोनों थोड़ी देर वैसे hi खड़े rahe)(Juhi का शिर शिव की छाती के ऊपरी भाग पर टिका हुआ था, उसके कण छाती से चिपके हुए थे, तो उसे शिव की धड़कन साफ़ सुनाई दे रही थी, उसके धड़कते दिल का एहसास पते hi उसने अपना एक हाथ उसकी छाती के दूसरे भाग पर रखदिया और उसे वो सहलाने lagi)(Ajib सी कस्मकस चलरही थी मेरे दिल में, उसके हाथ का स्पर्श मुझे पिघला रहा था)

शिव : अब जाओ, किसी ने देख लिया तो क्या होगा?

जूही : जिसे देखना है देखे, में कुछ नहीं जानती, मुझे बस ऐसे hi रहना है.

शिव : मेटो इस लिए कह रहा था की किसीने देख लिया तो तुम्हारी बदनामी होगी.

जूही : क्या इज्जत का ठेका हम लड़कीओने hi ले रक्खा है, हमारे मान का हमारे दिल का कुछ नहीं.

शिव : ठीक है बाबा, जितना मर्जी है उतना रहो, बस. (में महसूस कर रहा था, उसके प्यार को, मेरे भी मान में उथलपथल मची हुई थी, क्या करू, हम दोनों काफी देर तक ऐसे खड़े रहे)

जूही : (बिना शिव की और देखे) शिव...

शिव : ह्म्म्मम्म.

जूही : Shiv...muje ... मुझे ...किश करो न.

शिव : देखो जूही...

जूही : मुझे कुछ नहीं सुन न और न hi कुछ समझना है. क्या तुम मुझे इतना भी नहीं दे शक्ति?

शिव : ऐसी बात नहीं है पर...

जूही : (अपना शिर उठा कर मेरी और देखते हुए) किश में शिव. (मेरा दिल तेज रफ़्तार से धड़क रहा था, मेने महसूस किआ की उसका भी यही हल है, वो मेरी और देखेजा रही थी, उसका हाथ अब मेरे शाइन से ऊपर जाने लगा, जब उसका हाथ मेरी गर्दन पर पहुंच गया तो वो मेरे बालो में हाथ दाल कर उसे सहलाने लगी) किश में Shiv.(Uski सांसे तेज चल रही थी, चाँद की मध्धम रोशनी से उसका प्यारा चेहरा दमक रहा था, मेरी नजर उसके कांपते होठो पर गयी, मेने एक बार फिर उसकी आँखों में देखा तो उसने है में गर्दन हिलायी, मेने अपना हाथ ऊपर उठाया और उसकी गर्दन को पकड़ लिया, उसने अपनी आंखे बंद कर दी, जैसे वक़्त थम गया था, मुझे कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी, उसका एक हाथ मेरे बालो को सेहला रहा था तो दूसरा मेरी पीठ को सेहला रहा था, में उसकी और झुका तो वो अपने पंजो पर थोड़ी ऊपर उठ गयी, मेने उसके फड़कते होठो को देखा, धड़कन तो जैसे तेज रफ़्तार से चल रही थी, मेने उसकी आँखों को देखा तो वो बंद थी, वो आनेवाले पालो का बेशब्री से इंतजार कर रही थी. मैंने अपने होठ बढ़ाये और उसके ऊपर के बोथ को अपने होठो के बिच पकड़ लिया,





उसकी पकड़ मजबूत हो रही थी, में होल होल उसके होठ को चूसने लगा, वो भी मेरे होठो को चूसने का प्रयास करने लगी, कोई जल्द बजी नहीं थी, हमने एक दूसरे को मजबूती से पकड़ा था पर हमारे होठ एक नजाकत से एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे. मेने उसके निचे के होठ को चूमना सुरु किआ, फिर ऊपर के, ऐसे hi बरी बरी में उसके भीगे होठो को चुम रहा था चाट रहा था,

वो आंखे बंद किये हुए hi कड़ी थी, हम दोनों की सांसे तेज चल रही थी, ठंडी रात में भी पशीने की बुँदे माथे पर चमकने लगी थी. पता नहीं कितनी देर तक हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूमते रहे. आखिर कर मेने hi होठो को जुड़ा किआ, वो अभी भी मेरे होठो की और अपने होठ बढ़ा रही थी, मेने उसके चेहरे को सहलाया तो उसने अपनी आंखे खोली. नशे से भरी उन आँखों को देख मुझे भी नशा होने लगा, पर मेने अपने आप को संभाला.

शिव : जूही.

जूही : हम्म्म्म.

शिव : अब तो जाओ.

जूही : क्यों मेरे साथ ऐसा कर रहे हो शिव?

शिव : मेरी बात को संजो जूही. अभी हम कहा है, क्या हो शक्ति है? थोड़ा तो सोचो.

जूही : में सब समझती हु शिव, पर ये दिल नहीं समझता.

शिव : (मेने उसके शिव को सहलाया और उसके माथे पर किश kia)Abhi अपने दिल को सम्भालो. जल्दबाजी में सब ख़राब हो शक्ति है. हम दोनों तो साथ में hi है न.

जूही : (मेरे शाइन पर अपना शिर टिकते हुए, मेरी छाती को सहलाते hue)Hum दोनों साथ में है न, शिव?

शिव : है, है (उसके होठो को हलके से किश कर ke)Ab जाओ.

जूही : (मेरे होठो पर हलके से किश कर ke)Good नाईट!

शिव : (मुस्कुरा कर) गुड नाईट!

(हम दोनों की खबर के बहार दो आंखे हमे देख रही थी, वो भी अपने कमरे की और लौट गयी) (जूही भी वह से चली गयी, में उसे जाता हुआ देख रहा था, जब वो चली गयी तो में भी बिस्तर पर लेट गया, अभी जो कुछ भी हुआ था उसको सोचते हुए में भी सो गया)

सुबह जल्दी उठने की आदत के कारन में नींद से जाग गया. में फिर भी लेता रहा, तभी मुझे दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी. मुझे पता था की ये जूही hi होगी. में उठा और ऐसे hi ऊपर से नंगे hi मेने दरवाजा खोला. सामने भाभी कड़ी थी.

शिव : भाभी! आप.

भाभी : (मुझे उपरसे से नंगा देखकर उन्होंने अपनी नजर झुका ली) जूही ने कहा था तुम्हे उठाने को, वो नहाने गयी है, तुम भी निचे आ जाओ और ब्रश कर के नाहा लो, में नास्ता बना रही hu.(Wo जाने लगी)

शिव : सॉरी, भाभी, मुझे पता नहीं था की आप हो, मुझे लगा की जूही है.

भाभी : (वो भी जाते जाते रुक गयी, और मुस्कुराते hue)Iska मतलब मेरी नानन्द के सामने तुम्हे शर्म नहीं आती, इतना पास हो तुम दोनों?

शिव : ऐसी बात नहीं है भाभी, पर हम दोनों साथ में hi प्रैक्टिस करते है तो ये सब हमारे लिए सामान्य है.

भाभी : क्या वो भी तुम्हारे साथ ऐसे hi रहती hai?(Unki नटखट मुस्कान से में झेप गया)

शिव : नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था, में अक्सर ऐसा हो जाता हु, क्यों की कसरत कर के पशीने से भीगे हुए कपडे में निकल देता हु न इसीलिए.

भाभी : इतना घबरा क्यों रहे हो, में अपनी ननद को जानती हु, वो कैसी है? चलो तुम कपडे पहन कर निचे आ जाओ.

शिव : जी, भाभी.

में निचे गया, ब्रश कर रहा था की जूही बाथरूम से निकली. भीगे बालो में टॉवल लपेटे हुए उसने सलवार कुरता पहना हुआ था, सच में इतनी लम्बाई उसको और आकर्षक बना रही थी. कल रात की निकट ता के बाद उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान तैर रही थी. में उसके इस रूप को आंखे फाडे देख रहा था, जब वो तौलिये में लिपटी मेरे सामने होती थी उस से भी कही ज्यादा आकर्षक वो िःस्वक़्त लग रही थी. मेरे ऐसे देखने से वो शरमाते हुए मुस्कुराकर अंदर चली गयी. में पीछे मुड़कर उसे जाते देखने लगा. दरवाजे पर जा कर वो रुकी और मेरी और देखा, अभी भी मुझे अपनी और देखता प् कर वो मुस्कुरायी और अंदर चली गयी. मेने ब्रश किआ और नाहा कर तैयार हो गया. एक बैग में स्पोर्ट्स के कपडे लिए और में निचे आ गया. जूही की माँ उसी वक़्त आरती की थाली लिए बहार आयी, सबने आरती ली, मेने उनके पेअर छुए.

माँ : सदा खुस रहो, ये एक लड़का है जो हमेशा मेरा आशीर्वाद लेता है, कुछ सिख इस se.(Juhi को)

जूही : (नखरे se)Kya माँ, तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे में कभी तुम्हारे पेअर छूती hi nahi(Wo उठी और अपनी माँ के पेअर छू kar)Lo अब खुस?

माँ : सदा ऐसे hi हस्ती खेलती रहे मेरी बच्ची, और अपनी माँ की हर बात मने.

जूही : (रूठने का नाटक करते hue)Ashirwad में भी अपने बारे में hi सोच रही हो, और कोनसी बात नहीं मानती में तुम्हारी जो ऐसा कह रही हो?

माँ : सब मानती है, सिवाय एक के.

जूही : वो भी मानूंगी, जब वक़्त आएगा. अभी बैठो और चाय नास्ता करो.

माँ : अभी मुझे तुलसी की पूजा करनी है, में बाद में कहती हु, तुम दोनों खा लो.

भाभी हमें परोसती गयी और हम कहते गए, दूध और पराठे खा कर हम पारुल के घर पहुंच गए. विष्णु भाई को साथ ले कर हम स्टेडियम की और निकल गए. रस्ते में जूही ने बाइक मुझे चलने को दे दी. दार अब काम होता जा रहा था. में भी अच्छे से बाइक चलने लगा था. हम सब स्टेडियम पहुंच गए. अलग अलग स्पोर्ट्स के काफी लड़के लड़कीअ आये हुए थे. हम सब एक सख्स में पास पहुंचे. जूही ने उनके पेअर छुए.

जूही : कैसे है आप, सर? (उनका नाम अविनाशीर था)

अविनाशीर : अरे जूही, कैसी हो?

जूही : आप का आशीर्वाद है सर, मेने कहा था न, ये शिव है. (मेने भी उनके पेअर छुए, विष्णुभाई ने भी छुए)

अविनाशीर : कैसे हो विष्णु?

विष्णुभाई : ठीक हु सर.

अविनाशीर : (मुझे ऊपर से निचे तक देखते hue)Ha तो शिव, हाइट तो अच्छी है तुम्हारी, वैसे तो ये ओपन कैंप है पर तुम्हारे जितने दूर से कोई नहीं आया है. जूही ने तुम्हारे बारेमे बताया है मुझे. अच्छे से म्हणत करना, जरूर तरक्की करोगे.

शिव : जी सर.

अविनाशीर : और जूही, अब तुम्हारे क्या प्लान है?

जूही : सर, मेने भी अब नेशनल का मान बना लिया है.

अविनाशीर : ये तो अच्छी बात है, पर तुम इतने टाइम इन सब से दूर रही तो अगर तुम्हे नेशनल खेलना है तो फिर से तुम्हे अपने आप को प्रोवे करना पड़ेगा.

जूही : मुझे पता है सर.

अविनाशीर : अगर पता है तो तुम्हे भी इस कैंप में पार्टिसिपेट करना चाहिए था.

जूही : सर, अचानक में नौकरी नहीं छोड़ शक्ति, मुझे थोड़ा टाइम लगेगा, वर्ण मेरे भी मान में था की में इस कैंप से अपनी शुरुआत करू.

अविनाशीर : तुम हमारी होनहार बच्ची हो, यही से तुम आगे बढ़ी हो, एक काम कर शक्ति है, लास्ट में जब यहाँ कॉम्पिटिओं होंगे तो तुम उसमे पार्टिसिपेट कर देना, में तुम्हारा नाम दाखिल करदेता हु. वैसे भी ट्रेनिंग तो तुम अपने आप कर लोगी. क्या कहती हो?

जूही : सर, ट्रेनिंग तो मेने पहलेसे hi सुरु कर दी है, में और शिव, साथ में hi ट्रेनिंग करते है.

अविनाशीर : थॉट्स बेटर, तो फिर देर किस बात की, अपना भी नामांकन दाखिल कर दो.

जूही : (खुस हो कर ) थैंक यू सर, थैंक यू वैरी मच.

हम सब ने अपना नामांकन दाखिल करवादिया, और फिर हमारी ट्रेनिंग सुरु हो गयी. दो पहर तक हमारी ट्रेनिंग चली. शाम को फिर आना था. चार घंटे का ब्रेक था तो हम घर चले गए. अब जूही का जाने का बिलकुल भी मान नहीं था पर जाना जरुरी था. 2 बजे की उसकी ट्रैन थी तो वो चली गयी. शाम को में और विष्णुभाई ट्रेनिंग के लिए चले गए.
 
अपडेट 88

स्टेडियम में बहोत सरे गेम्स की ट्रेनिंग चल रही थी. हमे कसरत कराई गयी. कुछ लड़कीअ भी हमारे साथ में थी. आस पास से कई इलाको से लड़के और लड़कीअ आयी हुई थी. पास के सहर की भी लड़कीअ थी, और जैसा हमारे सहर में था वैसे hi यहाँ भी लड़कीअ छोटे सोर्ट्स पहने हुई थी, पर अब ये सब जैसे सामान्य था. है कई बार किसी की और नज़र चली भी जाती थी, वैसे hi लड़कीअ भी देख लेती थी, पर अब मुझे ये सब सामान्य hi लग रहा था. कई लड़कीअ मुझे देखती रहती तो लड़को के चेहरे पर मेरे लिए नाराजगी के भाव दिख hi जाते थे. मेने अपने गेम पर hi ध्यान देना उचित समजा. मेने देखा की कई लड़के जो उंचाइमे मेरे से काम थे फिर भी उनकी स्पीड बेहतर थी, ये मेरे लिए चेतावनी भी थी. उनका परफॉरमेंस ये बता रहा था की मुझे अभी और म्हणत करनी है. मेने भी अपने आप को उस म्हणत के यग्न में झोक दिया और पुरे मान से म्हणत करने लगा. विष्णु भाई का गेम अलग था तो वो अलग जगह पर प्रैक्टिस कर रहे थे. जब हमारा ब्रेक हुआ तो में उनकी और चला गया. विष्णु भाई और एक लड़का प्रैक्टिस कर रहे थे. विष्णुभाई की गेम भी अच्छी थी, उन्होंने उस लड़के को थोड़ी hi देर में पटक दिया, सब के साथ मेने भी तालिया बजायी. मुझे देख कर वो मेरे पास आये.

शिव : भाई, कमल का खेलते हो, आप.

विष्णुभाई : थैंक यू, तू यहाँ?

शिव : है भाई, थोड़ी देर के लिए ब्रेक था तो में आ गया.

विष्णुभाई : Dav-pech सीखेगा?

शिव : क्या ये, नहीं भाई, मुझे अपनी हड्डिया नहीं तुड़वानी.

विष्णुभाई : अरे कुछ नहीं होगा, ये तो बस गेम है. ये dav-pech हमे कई बार अपनी जिंदगी में भी काम आ शक्ति है.

शिव : ऐसा है तो ठीक है, चलिए.

वो मुझे सीखने लगे, में उनकी सब टेक्निक समजने की कोशिस कर रहा था. मेरे जैसे लम्बे कद के लड़के को भी वो बड़ी आसानी से यहाँ वह पटक दे रहे थे. वो मुझे समजने लगे की कैसे क्या करना है.

विष्णुभाई : तो कैसा लगा?

शिव : बढ़िया है भाई, आप मेरे जैसे को भी कितनी आसानी से पटक रहे हो.

विष्णुभाई : मेने बताया न की ये ताकत से ज्यादा देव का खेल है, जिसका देव लग गया वो विनर. अगर और सीखनेका मान करे तो घर आ जाना.

शिव : क्या सच में? ठीक है भाई में आ जाऊंगा.

फिर हम दोनों वापस अपने अपने काम में लग गए. शाम को लौट ते वक़्त भी उन्होंने बहोत कुछ बताया. हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी थी. उन्होंने मुझे घर छोड़ा और वो चले गए. मेने हाथ मुँह धोया तो भाभी टॉवल ले कर कड़ी थी.

शिव : थैंक यू भाभी, आप ने क्यों तकलीफ की, में ऊपर जा कर साफ़ कर लेता.

भाभी : भीगे पेअर ऊपर जाते और कही फिसल जाते तो, मुझे आवाज दे दिया करो.

शिव : नहीं भाभी, में आपसे काम करवाऊंगा?

भाभी : तो क्या हुआ, इस घर में रहनेवाले सभी का ख्याल रखना मेरा फर्ज है. अच्छा खाना कब खाओगे?

शिव : जब भी आप सब कहते हो.

भाभी : मजी तो सादे सात बजे खा लेती है, में उनका इंतजार करती हु, अगर वो सादे आठ तक आ गए तो ठीक है वर्ण फिर में खा लेती हु, क्यों की उसके बाद तो वो खा कर hi आते है.

शिव : ठीक है, अगर आप भैया के साथ खाना खाओ तो उन्हें खिला कर बाद में मुझे दे देना, या फिर अगर भैया न आये हो तो मुझे आवाज दे देना, वैसे भी मुझे 9 बजे के आस पास खाना खाने की आदत है.

फिर में ऊपर चला गया, और पढ़ाई करने लगा. रात को भाभी आयी, भाई नहीं आये थे तो वो मुझे खाना खाने के लिए बुलाने आयी थी. हमदोनो खाना खाने बेथ गए. हम दोनों खाना खा रहे थे, भाभी बार बार मुझे देखती थी.

शिव : भाभी आप मुझे ऐसे क्यों देखती रहती हो?

भाभी : झेपते हुए, नहीं ऐसा कुछ नहीं है.

शिव : भाभी, में कल से देख रहा हु ये.

भाभी : तुम्हे अजीब लगेगा, पर मुझे ऐसा लगता है की मेने तुम्हे कही देखा है.

शिव : मुझे? कहा?

भाभी : वो hi तो याद नहीं आ रहा. पर ऐसा लगता है की में तुम्हे जानती हु.

शिव : ये कैसे हो शक्ति है भाभी, में तो पहली बार यहाँ आया हु, और जहा तक मुझे याद है में कल से पहले आप से कभी नहीं मिला.

भाभी : वही तो मेरी भी समाज में नहीं आ रहा. सॉरी, में अब से तुम्हे नहीं देखूंगी, मेरा मतलब है उस तरह नहीं देखूंगी.

शिव : इसमें सॉरी कहनेवाली कोई बात नहीं, वैसे भी में अनाथ हु, न में कभी इस और आया था न आप कभी उस और आयी है. हो सकता है की मेरे जैसी सकलवाले किसी और को आपने देखा हो, अक्सर कई चेहरे एक जैसे या मिलते झूलते लगते है पर उनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं होता.

भाभी : शायद तुम ठीक कह रहे हो. अगर तुम्हे बुरा न लगे तो तुम मुझे बता सकते हो की तुम अनाथालय कैसे पहुंचे?

शिव : इसमें बुरा मान ने वाली कोनसी बात है, तीन चार साल का था, तब मुझे पुलिस ने एक भिखारन के पास से बरामद किआ था, वो मेरे नाम पर सब से भीख मांग रही थी, हमारे अनाथालय के जो मालिक है उनकी नजर मुज पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस बुलाई, पूछताछ में कुछ भी पता नहीं चला, पुलिस ने आस पास के नेवसपपेर में भी दिया था और टीवी पर भी दिया था, पर कुछ पता नहीं चला.

भाभी : टीवी पर? क्या टीवी पर ऐसे भी न्यूज़ दिखते है?

शिव : वही तो, ये सब ऐसे टीवी चैनल पर दिखाया जाता है जिस आम तौर पर बहोत काम लोग hi देखते होते है. और ये कोई बड़ी न्यूज़ तो थी नहीं, वैसे भी रोज न जाने कितने बच्चे गम होते है, कोण खबर रखता है.

भाभी : पर तुम्हारे maa-baap तो तुम्हे ढूंढ रहे होंगे न, उन्हें कैसे नहीं पता चला?

शिव : में क्या जणू? क्या हुआ था, क्यों हुआ था, कैसे हुआ था, ये सब मुझे थोड़ी न पता है. अब तो में ये सब भूल चूका हु, यही मेरी जिंदगी है. और में खुस हु अपनी जिंदगी से.

भाभी : एक बात पुछु, जूही सेक्या सम्बन्ध है tumhara?(Shiv ऐसे सीधे सवाल से चौंक गया, वही बहार जूही की माँ जो पानी पिने के लिए आ रही थी वो भी इस सवाल से चंक गयी, वो बिना आवाज किये अंदर हो रही बाते सुन ने लगी, क्यों की वो भी जान न चाहती थी की आखिर उसकी बेटी इसको यहाँ क्यों लेकर आयी है)

शिव : क्या भाभी आप भी, मेने कहा न, की में अनाथ हु, न मेरे खंडन का कुछ अटपटा है, और न मेरा. में अभी एक अनाथालय में रह रहा हु, ऐसे में ये सब में सोच भी नहीं सकता, और रही बात जूही की तो वो मेरे जीवन में आयी भगवन की एक dut(angle) है, पता नहीं क्यों उसे मेरे जैसे लड़के में दिलचस्पी हुई और मेरी जिंदगी सवारने में लगी हुई है. फ़िलहाल तो में सिर्फ अनाथालय के बारेमे hi सोच रहा हु, वह रह रहे बच्चे और लड़कीओ को अच्छी जगह सेट करने के बारेमे hi सोच रहा हु, जूही को शायद भगवन ने मेरे जैसे अनाथ का जीवन सवारने के लिए भेजा है. (भाभी कुछ बोलते बोलते रुक गयी, क्यों की कल रात को उसने जो देखा था वो कुछ और hi था, उसने कुछ भी ना बोलने में hi समझदारी सामजी, क्यों की अक्सर जो हम देखते है उसके पीछे के कारन को न जाने तो उस बात का हम गलत मतलब भी निकल शक्ति hai)(Wahi बहार कड़ी जूही की माँ ने जब ये सुना की उसकी बेटी किसी अनाथ पर दया दिखा रही है तो उसे बहोत खुसी हुई, वो अंदर जाने लगी)

भाभी : (मजी को देख कर) अरे मजी आप, मुझे आवाज दे दी होती.

माँ : अभी में बुद्धि नहीं हो गयी, चलने फिरने से सेहत अच्छी रहती है, और मुझे पता था की तुम खा रही होगी, मुझे प्यास लगी थी तो में आ गयी. और शिव बीटा, खाना अच्छा है न?

शिव : जी आंटी, बहोत hi स्वादिस्ट है.

माँ: है, मेरी बहु बहोत अच्छा खाना बनती है, सर्व गन सम्पन है bus...(Wo बोलते बोलते रुक gayi)Tum खाना खाओ. (उन्होंने पानी पिया और चली गयी, हमने भी खाना खा hi लिया था, फिर से में ऊपर अपने कमरे में चला गया, जब में पढ़ रहा था तो मुझे पेशाब आयी तो में निचे चला गया, मेने देखा तो भैया की जीप कड़ी थी, मुझे याद आया की मेने आवाज तो सुनी थी पर पढ़ाई में व्यास होने की वजह से ज्यादा ध्यान नहीं दिया था)

में बाथरूम गया और वापस ऊपर जा रहा था की मुझे कुछ आवाजे सुनाई दी. मुझे जहा तक पता चला मुझे ऐसा लगा की किसी को चांटा पड़ा. घर में और कोई तो था नहीं, सिर्फ भाभी, भाई और आंटी थे. ऐसे में चांटा तो सिर्फ भाभी को hi लग शक्ति था. मेने सुन ने का प्रयास किआ पर आवाज समाज में नहीं आ रही थी, वो दोनों शायद बहोत धीरे से बात कर रहे थे या फिर वो मुज से दूर थे, मेरा मान किआ की में जा कर सुनु, पर मुझे ये ठीक नहीं लगा. पर मुझे दुःख अवस्य हुआ क्यों की जितना भी में भाभी को जान पाया था, उनके साथ ऐसे व्यव्हार की में अपेक्षा नहीं कर रहा था. में अपने कमरे में चला गया. न जाने क्यों पर भाभी का सोच कर मेरे दिल में दर्द हुआ. में पलंग पर लेट गया, दरवाजा खुला हुआ hi था, बहार से आते तजा ठन्डे पवन me,me कब सो गया मुझे पता hi नहीं चला.

सुबह अपने नित्य समय पर भाभी उठचुकि थी, ये उसके रोज का समय था, चाहे कुछ भी हो जाये वो सुबह उठ hi जाती थी. सुबह उठ कर उसने नहाया और अपने बालो में तौलिया लपेटे hi शिव को जगाने ऊपर चली गयी. जब शिव के रूम के पास पहुंची तो उसने देखा की उसका दरवाजा खुला हुआ hi है, उसे आश्चर्य हुआ पर डरने की बात नहीं थी, यहाँ दरवाहा खुला हो या बंद डरने की बात नहीं थी क्यों की ये ऊपर की तरफ था, और उस कमरेमे वैसे भी कुछ नहीं था. जब वो कमरे में पहुंची तो उसने पाया की शिव सिर्फ अंडरवियर में सोया हुआ है, ये देख कर तो उसकी धड़कन hi रुक गयी, क्यों की उसने ऐसा सोचा नहीं था. वो फ़ौरन पलट गयी, उसे अपने दिल की धड़कन भी सुनाई दे रही थी, दिल इतना जोरो से धड़क रहा था. उसने आहिस्ता से पलट कर शिव की और देखा तो वो आंखे बंद किये सोया हुआ था. वो आहिस्ता से पलट गयी और शिव को देखने लगी, उसका सुदृढ़ सरीर वाक़ई में आकर्षक था, उसका लम्बा कद उसे और आकर्षित बनता था. वो उसे निहार रही थी की उसकी नज़र उसके अंडरवियर में बने उभर पर चली गयी, उसका दिल इतना जोर से उथला की उसने अपने मुँह पर हाथ दबा दिया, वर्ण मुँह से आवाज निकलना तय था. वो औ पहली बार किसी गैर मर्द को ऐसे देख रही थी. उसके अंग को देख कर उसे अजीब सी अनुभूति हो रही थी. उसके दो कारन थे, एक तो वो शिव को इस अवस्था में देख रही थी, और दूसरा उसका वो अंग बहोत बड़ा दिख रहा था. उसने फ़ौरन नज़ारे घुमा ली, वो वापस जाने लगी पर शिव को उठाना था, तो वो रुक गयी. उसने कांपते हाथो से वह पड़ी चद्दर को शिव के उप्पर डाला और उसका नीचेका शरीर ढँक दिया. उसने एक दो बार शिव को पुकारा पर वो गहरी नींद में था. उसको जगाने के लिए उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, उसका हाथ कंधे की और जाते जाते उसकी छाती की और जाने लगा. अजीब सी स्थिति हो गयी थी, भाभीने जब हाथ शिव की छाती पर रक्खा तो उस सख्त मासपेशिओ को महसूस करके उसके मुँह से आह निकल गयी जिसे उसने बड़ी कुशलता से अपने होठो से दबा दिया. वो दो तीन पालो के लिए उसकी छाती पर हाथ रख कर कड़ी रही, उसे दिल की धड़कने सुनाई दे रही थी. फिर कुछ सोच कर वो शांत हो गयी, उसने सरे विचार त्याग दिए, उसने एक आह भरी और शिव के कंधे को हिलाया.

भाभी : उठो सिव, सुबह हो गयी है. शीइइइइव, उठो.

शिव : उम्मम्मम्म, थोड़ी देर दीदी.

भाभी : शिव के मुँह से दीदी सुन कर उसे अजीब लगा, वो शिव को देखने लगी तो उसने पाया की वो अभी नींद में है.

भाभी : सीईव, ुथूऊओ.

शिव : (हड़बड़ाता hue)ummm आमंमंत्र, भाभीई.

भाभी : चलो उठो, जाना नहीं है क्या?

शिव : आप अंदर?

भाभी : तुम दरवाजा खुला रख कर सो गए थे. चलो अब उठ जाओ और निचे आ जाओ.

शिव : भाभी... (वो जाते जाते रुक गयी, और शिव को देखने lagi)Bhabhi, कल रात क्या हुआ था?

भाभी : (अनजान बनते hue)Kya हुआ था? किस बारेमे बात कर रहे हो?

शिव : मुझे लगा, कल भैया ने आप को मारा...

भाभी : (दूसरी और पलट gayi)Aisa कुछ नहीं हुआ है, तुम्हारा वहम है, चलो अब निचे आ जाओ में दूध बनती हु.

शिव : मुझे पता है, आप जूथ बोल रही है, मुझे बस ये समाज नहीं आ रहा की आप जैसी पत्नी पर वो कैसे हाथ उठा सकते है?

भाभी : (उसकी आंखे भीग ने लगी थी, पर जैसे तैसे उसने अपने आप को संभाला और बिना देखे hi kaha)Ye हम पति पत्नी का मामला है, किसी को इसमें दखल नहीं देना चाहिए. तुम तैयार हो जाओ और नीचे आ जाओ.

शिव : जी भाभी.

में निचे गया तैयार हुआ, और नाहा धो कर नास्ता करने बैठा था. जब हम नास्ता कर रहे थी तो दोनों hi चुप थे.

भाभी : मेरा एक काम करोगे?

शिव : है बोलिये न भाभी.

भाभी : दोपहर में मुझे मंदिर ले जाओगे?

शिव : दोपहर में? लोग सुबह मंदिर जाते है, शाम को जाते है, दोपहर में तो मंदिर बंद रहता है न?

भाभी : मेने जितना कहा वो सुनते क्यों नहीं, मेने बस इतना पूछा, की मुझे ले कर जाओगे की नहीं?

शिव : है, मेने कब मन किआ. (मेने खाना खाया और बहार आया तो आंटी मंदिर में से आरती ले कर आ रही थी, मेने आरती ली और उनको प्रणाम किआ)

भाभी : माजी, में दोपहर को मंदिर जाऊ?

माँ : इसमें पूछनेवाली कोनसी बात है, बोल दे चंद्र को.

भाभी : वो नहीं आएंगे, में शिव के साथ चली जाउंगी.

माँ : (एक दो पल सोच कर) ठीक है बहु.

मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था. थोड़ी देर में विष्णुभाई आ गए और हम दोनों वह से स्टेडियम निकल गए. जब दो पहर में लौटे तो मेने खाना खाया और फिर भाभी को ले कर निकल गया. भाभी ने साड़ी के पल्लू से अपने मुँह को पूरी तरह से ढाका हुआ था. मंदिर गांव के थोड़ा बहार था, एक दो रहे पर मेने बाइक मोदी तो भाभी ने फ़ौरन मुझे रोक दिया.

भाभी : इस और नहीं, उस और चलो. (मेने बाइक उस और मोड दी) इस और कभी गलती से भी नहीं जाना.

शिव : क्यों भाभी?

भाभी : इस और इनके चहेरे भाई के खेत है, उनके और हमारे बिच अच्छे सम्बन्ध नहीं है, आये दिन झगड़े होते रहते है, तो गलती से भी उस और न जाना.

शिव : जी भाभी. (हम दोनों मंदिर पहुंच गए, वह कोई नहीं था, सिर्फ हम दोनों थे, मेने देखा तो मंदिर के आगे जाली भी बंद थी. मेने देखा की भाभी ने अपने शिर के पल्लू को सही किआ और हाथ जोड़ कर आंखे बंद कर दी, मेने भी भगवन को प्रणाम किआ, ये शिव मंदिर hi था, भगवन भोलेनाथ का मंदिर)

भाभी : (मान me)Hey, प्रभु, आप तो सर्व ज्ञाता हो, आप सब कुछ जानते हो, ये कैसी विपदा है, मेरा क्या गुनाह है जो मुझे ये सब सहना पद रहा है, अगर मुझे इस घर से निकला गया तो में आप की सौगंध खा कर कहती हु, में जिन्दा नहीं रहूंगी, क्या आप अपनी इस भक्त पर इतनी भी कृपा नहीं कर शक्ति. बचपन से आपकी पूजा करती आ रही हु, प्रभु, आप hi हो जो मुझे इस परिस्थि से निकल शक्ति हो, आप के लिए सब संभव है, में आपके आगे हाथ जोड़ती हु, आपके चरणों में अपना शिस नमति हु, प्रभु दया कीजिये, कृपा कीजिये भोलेनाथ, में आप की शरण में हु, मेरी सहायता करो Shiv(Usne अपना शिर निचे जमीं पर लगा दिया, तभी उसके कानो में घंटी की आवाज आयी, उसने आंखे खोल कर देखा तो शिव बाजु में खड़ा था, उसे उसके पेअर दिखाई दे रहे थे, उसने अपनी गर्दन साइड से उठा कर देखा तो उसकी नजर आहिस्ता आहिस्ता पुरे शिव पर गयी, वो हाथ जोड़े भगवन को प्रणाम कर रहा था, उसके मुँह से अनायास hi nikala)Shiiiiiv.

शिव : (मेरा नाम सुन ने पर मेने आंखे खोली और देखा तो भाभी मेरे पैरो के पास थी तो में फ़ौरन दूर हैट गया) सॉरी भाभी. (थोड़ी देर बाद हम दोनों बहार आ गए, मेने देखा की भाभी ने आसपास देखा फिर अपने शिर से पल्लू हटा दिया) भाभी आपने पल्लू से अपना मुँह क्यों धक् दिया था.

भाभी : बस ऐसे hi.

शिव : मुझे लगता है, आप मुझे अपना नहीं मानती, है न? आप को मुज पर विस्वास नहीं है.

भाभी : ऐसा क्यों कह रहे हो? अगर विस्वास न होता तो क्या तुम्हारे साथ यहाँ आती?

शिव : तो फिर बताओ न भाभी, आपने ऐसा क्यों किआ, क्यों की आपने जिस तरह से अपना चेहरा छुपाया था वो सामान्य तो नहीं था.

भाभी : में किसी को अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहती थी इस लिए.

शिव : वही तो में पूछ रहा हु, क्यों? (मेरे ऐसा पूछने पर उनकी आँखों में पानी चालक आया)

भाभी : लोग मुझे, मनहूस समझते है, इनका मन न है की अगर मेरा चेहरा ये देखेंगे तो इनका बुरा होगा.

शिव : ये क्या बकवास है. भला आप का चेहरा देखने से उनका कैसे बुरा होगा?

भाभी : में banj...(Bote बोलते उनका गाला भर aaya).(Apne आप को सँभालते hue)To लोग मेरा मुँह देखना पसंद नहीं करते.

शिव : ये क्या बेवकूफी है, में तो रोज आपका चेहरा देखता हु, मेरा तो कोई बुरा नहीं hua,balki मुझे तो लगता है मेरा अच्छा hi हो रहा है, मेरी तो सुबह भी आपके इस खूबसूरत चेहरे को देख कर ही होती है. (में क्या बोल गया उसका एहसास मुझे थोड़ी देर बाद hua)Sorry भाभी, मेरा ये मतलब नहीं था.

भाभी : (मुस्कुराने का प्रयास करते hue)Iska मतलब में खूबसूरत नहीं, है न?

शिव : नहीं, मेरा मतलब वो नहीं था, आप खूबसूरत हो, बहोत ज्यादा खूबसूरत हो पर मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए, इसीलिए मेने सॉरी कहा. पर भाभी आप डॉक्टर्स का भी सहारा ले शक्ति है न.

भाभी : वो भी में कर चुकी हु, यहाँ डॉक्टर भी कुछ नहीं कर शक्ति.

शिव : (स्नेहा मैडम, नाज़िआदिदी और अब भाभी, क्या इन सब की शामे प्रॉब्लम है, और ये सब मेरे सामने hi क्यों आता है, क्या ये समस्या इतनी बड़ी है की इतने सरे लोग इस समस्या का शिकार है, मेरे पास इस प्रॉब्लम का सलूशन तो था पर में कैसे कहता, फिर भी मेने डरते डरते कह hi दिया) क्या में इसमें कोई मदद कर शक्ति हु? (हलाकि ये बोलते हुए मेरी जबान लड़खड़ा रही थी, क्यों की में सच में किसी के साथ ये सब नहीं करना चाहता था, पर में उनका दर्द भी नहीं देख शक्ति था)

भाभी : (वो मेरी और देखने लगी, थोड़ी देर हम दोनों में ख़ामोशी छायी rahi)Tum कहना क्या चाहते हो? (हलाकि वो समाज रही थी, पर फिर भी उसने पूछा था)

शिव : (अब में क्या कहता, मेरे मुँह में सब्द नहीं आ रहे थे, में इधर उधर देखने लगा)

भाभी : जिस को बोलते हुए, तुम्हे सब्द नहीं मिल रहे वैसा काम में नहीं कर शक्ति, और उसका भी कोई फायदा नहीं.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो भाभी? क्या डॉक्टर ने ये कहा है?

भाभी : नहीं, डॉक्टर्स की रिपोर्ट में, में एकदम सही हु, पर...

शिव : पर क्या भाभी, अगर आप सही है तो फिर भैया में hi कमी हुई न?

भाभी : (अपना शिर झुकाते hue)Me तुम्हे ये कहना नहीं चाहती थी, पर कल रात इसीबात पर उन्होंने मुज पर हाथ उठाया था, वो बता रहे थे की वो बाप बाण ने वाले है.

शिव : ये क्या कह रही हो भाभी, वो बाप बन नेवले है? में समजा नहीं.

भाभी : किसी और औरत के साथ उनके सम्बन्ध है, और वो बाप बन ने वाले है.

शिव : मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा भाभी, आप में कोई प्रॉब्लम नहीं है, भैया भी कह रहे है की वो दूसरी औरत से बाप बन ने वाले है, तो फिर प्रॉब्लम क्या है?

भाभी : भाग्य... मेरे भाग्य में hi नहीं है तो वो मुझे कहा से मिलेगा?

शिव : क्या भाभी आप भी, ये कैसी बाटे कर रही है?

भाभी : तो तुम इससे क्या कहोगे?

शिव : मुझे नहीं पता, पर मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा, एक बात बताइये, क्या आप उस औरत को जानती है?

भाभी : है.

शिव : कोण है वो?

भाभी : तुम क्या करोगे ये जान कर?

शिव : आप बताइये तो.

भाभी : माया, एक विधवा है. (वो शिव को देख रही थी जो किसी सोचमे डूबा हुआ tha)Kya सोच रहे हो?

शिव : नहीं, कुछ नहीं, समझने की कोशिस कर रहा हु?

भाभी : सच कहु तो ये सब मेरी भी समाज में नहीं आ रहा है, पर ये hi सच है की में माँ नहीं बन शक्ति.

शिव : वो सब मुझे नहीं पता, पर आप बिना प्रयास किये कैसे हर मान शक्ति hai?(Bhabhi मेरी और गौर से देखने lagi)Aise क्या देख रही है?

भाभी : किसी और के मुँह से अगर में ये सुनती तो अभी तक उसका गाल लाल कर दिया होता, पर में जानती हु तुम उस तरह से नहीं हो.

शिव : (गाल पर चांटा खाने की बात से में उन्हें देखने लगा, मेरा हाथ अपने आप hi मेरे गाल पर चला गया जैसे उन्होंने मुझे सच में मार दिया हो) आप ऐसा क्यों कह रही है?

भाभी : मर्द अपना उल्लू सीधा करने के लिए कुछ भी कर शक्ति है, अगर में तुम्हारे बारेमे जानती न होती तो यही समझती की तुम वो सब करने के लिए मुझे वैसा कह रहे हो, क्यों की मेरा भला हो न हो तुम्हारा तो भला हो hi जाना है.

शिव : नहीं भाभी, मेरा वो मतलब नहीं था.

भाभी : में जानती हु, क्यों की अगर तुम्हे वही चाहिए होता तो तुम मेरी ननद को मन नहीं करते, जब की वो सामने से तुम्हे कह रही थी.

शिव : (झेपते hue)Ye क्या कह रही है आप?

भाभी : मेने सब देखा था, और सुना भी था, वो तुमसे जैसे मिन्नतें कर रही थी, अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो उस रात बहोत कुछ कर शक्ति था, पर तुमने वैसा नहीं किआ, इसका मतलब तुम हवस के चलते तो मुझे ये प्रस्ताव नहीं दे रहे हो. पर मेरा भाग्य hi ख़राब है, शायद मेरी कुंडली में वो गृह hi नहीं जिस से मुझे ये सुख प्राप्त हो. (मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, में सोच में डूबा था, मुझे ऐसा देख kar)Chalo अब, तुम्हे जाना नहीं है.

शिव : है चलिए. (हम दोनों वह से घर के लिए निकल गए)

भाभी : एक बात तो है शिव, तुम से बात कर के मान बहोत हल्का हो गया, थैंक यू.

शिव : इसमें थैंक यू कैसा भाभी, आप ने मुझे इस लायक समजा वही मेरे लिए खुषी की बात है.

हम घर पहुचनेवाले थे की बारिश सुरु हो गयी. एक घंटे तक तेज बारिश हुई, बहार पानी भर गया था. मुझे विष्णुभाई का फ़ोन आया.

विष्णुभाई : मेने सर, से बात की, उन्होंने बताया की बारिश के चलते आज शाम का सांक्ले है.

शिव : ऐसा, ये तो बुरा हुआ.

विष्णुभाई : अरे कोई नई, तू मेरे घर आजा, किस्मत से मौका मिला है तो आज मेरे घर खाना खा, गप्पे मरेंगे.

शिव : ठीक है भैया, में आता हु. (मेने भाभी को बता दिया, बारिश रुकने के बाद में विष्णु भाई के घर चला गया, रस्ते में जगह जगह पानी भरा हुआ था, तो में चल कर hi गया था, में गया तो कसरत hi कर रहे थे, तो हम दोनों ने मिल कर कसरत की और फिर उन्होंने एक कमरे में गद्दे बिछा कर मेरे साथ प्रैक्टिस की. गाँव के घरो में वैसे भी बड़े कमरे थे, उनके पापा घर पे नहीं थे, उनकी माँ और पारुल hi घर पे थे. जब हम बैठे हुए थे तो मेने उनसे पूछा)

शिव : भैया, के बात पुछु? आप जूही के भाई को जानते हे? मेरा मतलब है वो कैसे इंसान है?

विष्णुभाई : में उनको ज्यादा तो नहीं जनता, इस गांव के बड़े लोगो में उनका नाम आता है तो उस हिसाब से जनता हु, ऐसा कुछ खास नहीं जनता, जैसे बदला होते है वैसे hi है वो.

शिव : कोई माया कर के औरत है यहाँ इस गांव में?

विष्णुभाई : कही तुम मयाभाभी की तो बात नहीं कर रहे? वो बेचारी विधवा है, एक हादसे में उनके पति की मौत हो गयी थी, तुम क्यों पूछ रहे हो?

शिव : ऐसी कोई खास बात नहीं, बस ऐसे hi पूछ रहा था.

विष्णुभाई : देख भाई, में भला और अपना काम भला, वैसे भी मुझे कुस्ती से hi फुर्सत मिलती नहीं तो में लोगो के बारेमे ज्यादा नहीं जनता.

शिव : (कोई जानकारी न मिलने से शिव थोड़ा निराश था, मौसम की वजह से उसको पेशाब लगी तो उसने puchha)Bhai बाथरूम कहा है?

विष्णुभाई : पीछे की और चला जा, तुजे दिख जायेगा.

शिव : (में पीछे की और चला गया, जब में वापस लौट रहा था तो मुझे पारुल मिल गयी, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी, में जा hi रहा था की वो बोली)

पारुल : तुम मयाभाभी के बारेमे क्यों पूछ रहे थे?

शिव : (में समाज गया की उसने हमारी बाटे सुनी hai)Bas ऐसे hi पूछ रहा था.

पारुल : वो अच्छी औरत नहीं है, दूर hi रहना उस से.

शिव : (उसकी और ध्यान से देखते hue)Tum क्या जानती हो, और तुम्हे ये सब कैसे पता?

पारुल : औरतो में उसकी बाते होती रहती है तो पता है, पर तुम्हे क्यों जान न है उनके बारे में?

शिव : है कुछ, अगर तुम उनके बारेमे बता शैको तो बहोत मेहरबानी होगी.

पारुल : अगर ऐसावैसा कुछ किआ तो में जूही को बता दूंगी.

शिव : जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है, मुझे बस जान न है की उनके और जूही के भाई के बिच कोई सम्बन्ध है क्या?

पारुल : उनके कई लोगो के साथ सम्बन्ध है.

शिव : क्या तुम मुझे उनका घर बता शक्ति हो?

पारुल : में जूही को बता दूंगी, में कह देती हु.

शिव : ऐसा कुछ नहीं है, उनकी वजह से घर में झगड़े हो रहे है, इस्सलिये में जान न चाहता था.

पारुल : सच कह रहे हो न तुम?

शिव : है एकदम सच.

पारुल : ठीक है, जब घर जाओ तब मुझे बताना, में तुम्हे बता दूंगी.

हमने खाना खाया, जब में निकलनेवाला हुआ तो मेने पारुल को देखा, उसने है में इस्सर किआ. वो अपनी मम्मी को कुछ कह रही थी, उसनी मम्मी ने है में इस्सर किआ. विष्णुभाई मुझे घर छोड़ने आना चाहते थे पर मेने मन कर दिया. उनके घर से निकलने के बाद में थोड़ी दुरी पर रुक गया. मेने देखा की पारुल घर से निकली, और एक और जाने लगी, और मुझे पीछे आनेका इस्सर किआ. में थोड़ी दुरी बना कर उसके पीछे चल पड़ा. रात हो गयी थी, कई जगह पर लैंप लगे थे तो लाइट थी, कई जगह अँधेरा था, वो एक अंधियारी गली में मुद गयी, में भी उसके पीछे पीछे चला गया. एक जगह हम दोनों मिल गए.

पारुल : वो देखो, मयाभाभी का घर. (उसने जिस दिशा में इस्सर किआ था में उस और देखने लगा, घर के बरामदे में एक छोटी सी लाइट जल रही थी. हम दोनों अभी बात कर hi रहे थे की एक औरत मुझे दिखी, दिखने में अच्छी thi)Wo है मयाभाभी. (हम दोनों देख रहे थे की मयाभाभी आस पास देखने लगी, तो एक आदमी अँधेरे से निकल कर बहार आया, और उनकी और चलने लगा, जब वो रौशनी में आया तो मेने देखा की वो जूही का भाई तो नहीं था, में देखना चाहता था की आखिर हो क्या रहा है)

शिव : ठीक है तुम जाओ अब.

पारुल : तुम भी जाओ अब, देखलिया न सब. (उसने थोड़े गुस्से से कहा)

शिव : (उसको समजते hue)Mene कहा न की ऐसा वैसा कुछ भी नहीं है, में देखना चाहता हु की यहाँ चल क्या रहा है.

पारुल : इतने बेवकूफ तो हो नहीं तुम जो इतना भी न समाज सको की यहाँ अब क्या होनेवाला है.

शिव : इसीलिए में तुम्हे कह रहा हु की तुम जाओ, मुझे थोड़ा काम है.

पारुल : में अभी घर जा कर जूही को फ़ोन कर देती हु.

शिव : तुम बार बार जूही की धमकी क्यों दे रही हो?

पारुल : उसको भी तो पता चले की उसका बॉयफ्रेंड कैसा है.

शिव : तुम्हे किसने कहा की में उसका बॉयफ्रेंड हु? जूही ने कहा?

पारुल : नहीं, पर क्या में पागल दिखती हु जो इतना भी न समाज सकू.

शिव : वो मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है, हम दोनों बस फ्रेंड है.

पारुल : फिर भी में बता दूंगी.

शिव : (झुंझलाते हुए) ठीक है तुम रुको, बस आवाज मात करना.

मेने देखा की वो दोनों अंदर चले गए, उन्होंने बहार की बत्ती भी बजा दी. वैसे ये हमारे लिए अच्छा hi था, मेने पारुल का हाथ पकड़ा और मयाभाभी के घर की और चलने laga(Shiv के हाथ पकड़ने से पारुल शिव को देखने लगी पर शिव का पूरा ध्यान घर की और था) हम दोनों घर के नजदीक पहुंच गए, मेने आस पास देखा तो दूसरे घर कुछ दुरी पर थे तो कोई दिक्कत नहीं थी. में अंदर देखने के लिए जगह ढूंढने लगा, थोड़ी दुरी पर बानी खिड़की से रौशनी आ रही थी तो में उस और चला गया. यहाँ भी मुझे अपनी हिघ्त का फायदा मिल रहा था, खिड़की पर शीसा लगा हुआ था और अंदर से पर्दा भी लगा हुआ था पर थोड़ी सी जगह से मुझे अंदर का नजारा दिखने लगा.
 
अपडेट 89

अँधेरे में में और पारुल खड़े थे, खिड़की थोड़ी ऊपर थी तो पारुल को कुछ नहीं दिख रहा था, पर में अंदर देख प् रहा था, मेने देखा की दोनों कुछ बाते कर रहे है, उनके चेहरे से लग रहा था की मयाभाभी थोड़ी नाराज़ दिख रही थी, वो आदमी बार बार माया को अपनी और खिंच रहा था और वो मन कर रही थी, उनके बिछ क्या बात हो रही है वो मुझे सुनाई नहीं दे रही थी. मेने खिड़की को खोलना चाहा तो मेरे नसीब से वो खुल गयी, शायद नसीब मेरा साथ दे रहा था. मेने खिड़की थोड़ा खोल दिया, पर्दा लगा हुआ था तो उनलोगो को इसका पता नहीं चला.

माया : छोडो मुझे, जाओ यहाँ से.

आदमी : क्यों इतने नखरे कर रही हो.

माया : तुम समझते क्यों नहीं, अगर चंद्रपाल को पता चल गया तो सब बना बनाया खेल बिगड़ जायेगा, कुछ दिन तो सबर कर लो, फिर तो में तुम्हारी hi हु.

उनकी बातो से मुझे कुछ अंदेसा होने लगा, अचानक मुझे ख्याल आया की ये सब बहोत काम का है, मेने अपना मोबाइल निकला और वीडियो रिकॉर्ड करने लगा.

आदमी : में तो सबर कर लू पर ये साला लुंड कहा मानता है, थोड़ी देर कर लेने दो.

माया : नहीं, छोडो मुझे, आज वो आनेवाला है.

आदमी : (उसको पलंग पर झुका देता है और उसकी साड़ी पीछे से उठाते हुए) आरी थोड़ी देर में में चला जाऊंगा, पार आज तो तुजे चोदे बगैर नहीं जाऊंगा. कितने दिनों से तड़पा रही हो.

माया : (अपनी छूट में लुंड जाते hi) अह्ह्ह्हह धीरे, तुम समझते क्यों नहीं, तुमसे छुड़वा कर तो मेरे पेट में बच्चा है, फिर भी तुम्हे सबर नहीं है. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

आदमी : तुम कैसे कह शक्ति हो की ये मेरा hi बच्चा है?

माया : तुम सेल मर्द एक जैसे hi होते हो, छोड़ने के लिए कैसी भी रंडी चलेगी, पर वही अगर कहे के में तुम्हारे बच्चे की माँ बन ने वाली हु तो उसी पर शक करते हो. अह्ह्ह अह्ह्ह, पिछले छे महीने से उस से छुड़वा रही हु पर पेट से नहीं हुई, उसके अलावा तू hi है जो मुझे छोड़ रहा है, अगर उस से बच्चा होना होता तो पहले hi न हो जाता, तेरे साथ दो महीने से छुड़वा रही हु तो में पेट से हो गयी. इसका क्या मतलब हुआ. उसने मुझे कहा है की अगर में उसको बच्चा दूंगी तो वो मुझे अपने घरमे बिठायेगा. इतने टाइम से बच्चा नहीं हुआ इसीलिए मेने तुजे घास डाली, ताकि में पेट से हो जाऊ. मेने उसे बताया है की ये बच्चा उसी का है, वो कह रहा था की अब वो अपनी बीबी को निकल देगा और मुझे अपने घर रख लेगा. एक बार में उसके घर में बेथ गयी फिर तो तेरी चंडी hi है न.

आदमी : ारे वह, मतलब उस के घर में बेथ जाएगी तो तू रानी बन जाएगी और उसकी दौलत पर आइस करेगी.

माया : है तो तुजे भी तो करवाउंगी, इसीलिए तुजे मन कर रही हु की थोड़े दिन सबर कर ले, पर तू समझता hi नहीं, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह.

आदमी : मेरी रानी, में क्या करू, तेरी ये जवानी मुझे चैन कहा लेने देती है.

माया : अगर कुछ गड़बड़ हो गयी न तो याद रखना में तेरे घर आ जाउंगी, फिर संभालना अपनी बीबी को.

आदमी : कुछ नहीं होगा रानी, उस चुतियो को कुछ पता नहीं चलेगा, में और तू पूरी जिंदगी उसको लूट ते रहेंगे और मेरा बच्चा उसकी दौलत का वारिस बनेगा.

माया : वही तो तुजे समझा रही हु, कुछ दिन सबर कर ले, पर तू है की समझता hi नहीं.

आदमी : अब से ध्यान रक्खूँगा, अब उसको छोड़ और मेरे साथ चुदाई का मज़ा ले.

(काफी टाइम हो गया था, और अंदर से आती आवाजों से पारुल को पता चल गया था की अंदर क्या हो रहा है.) पारुल ने मेरा शर्ट खिंचा तो मेरा हाथ खिड़की से टकरा गया, जिस से आवाज हुई. अंदर उन्दोनो का भी ध्यान गया. मेने फटाफट मोबाइल को जेब में रक्खा और पारुल का हाथ पकड़ कर वह से निकल गया, थोड़ी दुरी पर जहा हम पहले छुपे थे वह पहुंच गया और अपने आप को छुपा लिया, ऐसा करते वक़्त मेने पारुल को भी अपने पीछे छुपालिया और उस घर की और देखने लगा, वो दोनों बहार आये, उन्होंने लाइट जला दी, और आस पास देखने लगे.

माया : कौन hai?....kaun है?

आदमी : कोई नहीं है, क्यों गाला फाड़ रही है, आस पास से कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी.

माया : कोई तो था वह.

आदमी : कोई नहीं था, पवन से खिड़की खुलगायी होगी, तू चल अंदर.

माया : मेरा दिमाग ख़राब मात कर, तू जा अभी यहाँ से, और याद रखना अगर कुछ गड़बड़ हुई न तो तेरी खैर नहीं.

आदमी : जाता हु, ज्यादा धमकी मात de.(Wo आदमी वह से निकल गया और अँधेरे में कही गम हो गया, माया ने आस पास फिर से देखा फिर वो भी अंदर चली gayi)(Parul शिव के साथ चिपक कर कड़ी थी, उसका ध्यान किसी और नहीं था, बस वो शिव को देखेजा रही थी, जैसे वो शिव के साथ चिपक कर कड़ी थी उसे बहोत अच्छा लग रहा था)

शिव : ये क्या बेवकूफी है, अगर उनको पता चल जाता तो?

पारुल : सॉरी, पर कितना टाइम हो गया था, और अंदर वो सब हो रहा था और तू उनकी वीडियो बनाये जा रहा था, तुजे क्या जरुरत पद गयी ऐसा करने की.

शिव : तूने सुना नहीं वो क्या प्लानिंग बना रहे थे, ये तो नसीब अच्छा है की हमे पक्का साबुत मिल गया.

पारुल : ये मात भूल की ये सब मेरी वजह से हुआ है समजा. में तुजे यहाँ लेकर आयी थी तभी तुजे ये सब मिल shaka(Chudayi की आवाजों से वो थोड़ी गरम हो गयी thi)Mene इतना सब किआ तेरे लिए तो मुझे क्या इनाम देगा.

शिव : क्या मतलब है तेरा?

पारुल : तूने कहा न की तू जूही का बॉयफ्रेंड नहीं है, तो fir...(Wo मेरा शर्ट खिंच कर मुझे अपनी और खींचने लगी)

शिव : पागल हो गयी है क्या?

पारुल: (मेरी कमर में हाथ डालते hue)Ha, थोड़ी थोड़ी.

शिव : चल यहाँ से यहाँ रुकना अब खतरे से खली नहीं, और तुजे शर्म नहीं आती ऐसा कहते हुए, विष्णुभाई मेरे अच्छे दोस्त बन गए है, और जूही भी तेरी सहेली है. मेरे साथ ये सब करते हुए तुजे शर्म आणि चाहिए.

पारुल : (अपना हाथ chhudakar)Muje सब पता है, तो क्या हुआ, अगर तू मेरे साथ कुछ कर लेगा तो?

शिव : अभी इन सब बातो का समय नहीं है, बहोत टाइम हो गया है, तू क्या कह कर आई थी अपनी मम्मी को.

पारुल : यही की में अपनी सहेली के घर जा कर आती हु.

शिव :इतना टाइम हो गया है, और तेरी माँ ने अगर विष्णुभाई को तुजे ढूंढने भेजा और तू वह न मिली तो क्या जवाब देगी, अभी तू जा, हम बाद में बात करेंगे.

पारुल : (वो भी समाजराही thi)Thik है, पर फिर आना मुज से मिलने.

शिव : तू अभी घर जा, बहोत देर हो गयी है.

उस से पीछा छुड़ा कर में घर की और निकल गया, वैसे भी में कुछ दिनों में तो यहाँ से चला hi जाऊंगा, तो मेने सोच लिया की में अब विष्णुभाई के घर की और जाऊंगा hi नहीं. आज किस्मत ने बहोत साथ दिया था, मेने सोचा नहीं था की इतना सब मिल जायेगा. किसी तरह ये सब अगर जूही के भाई तक पंहुचा दू तो वो इसके चंगुल से छूट जायेगा और भाभी को भी शांति हो जाएगी. में वह से जब घर पंहुचा तो भाभी मुझे बहार hi मिल गयी.

भाभी : आ गए तुम? खाना अच्छे से खाया की नहीं? अगर अभी भी भूख हो तो खाना तैयार hi है.

शिव : नहीं भाभी, मेने खा लिया, आपने खा लिया की नहीं?

भाभी : है, अभी अभी खाया है, वो अभी तक आये नहीं मतलब देर से आएंगे.

शिव : ठीक है भाभी, में ऊपर जाता हु. (में ऊपर चला गया, कपडे बदले, हाफ पंत पहना, बनयान निकलनेवाला था पर फिर रहने दी. में पलंग पर बेथ के सोचने लगा की अब क्या किआ जाये, क्या भाभी को बताना चाहिए? ऐसी गन्दी बात में भाभी को कैसे बता शक्ति था, पर अगर उनको नहीं बताया वो दुखी hi रहेगी, में ये सब सोच रहा था की दरवाजे पर दस्तक हुई, मेने देखा तो भाभी हाथ में पानी का जग लिए कड़ी थी)

शिव : भाभी आप! आपने क्यों तकलीफ की, में लेने आ hi रहा था.

भाभी : इसमें तकलीफ कैसी (पानी टेबल पर रखते हुए) वैसे भी कोई काम नहीं था, और जब तक वो आएंगे नहीं मुझे नींद नहीं आएगी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu, भैया लोरी गए कर सुलाते है क्या?

भाभी : (वो मुस्कुरायी पर कोई जवाब नहीं diya)Thik है तू पढ़ाई कर में जाती हु.

शिव : भाभी...

भाभी : (जाते जाते वो रुक गयी, और मेरी और देखने lagi)Kuchh कहना है क्या?

शिव :(में कुछ देर खामोश रहा फिर एक लम्बी साँस ले kar)Bhabhi, आप को पता है, भैया आप को इस घर से बहार निकलना चाहते है?

भाभी : (उसने सोचा नहीं था की शिव को ये पता है, उनका चेहरा उदास हो gaya)Ha पता है. (उन्होंने बड़े सपाट लहजे में जवाब दिया)

शिव : क्या? आप को पता है? फिर भी आप इतनी शांत कैसे है?

भाभी : इसमें में क्या कर शक्ति हु, जब मेरे भाग्य में hi ये लिखा है तो में कैसे बदल शक्ति हु. (उनकी आँखों में आंसू चालक आये, और गाला भी भर gaya)par में जीते जी तो इस घर से नहीं जाउंगी.

शिव : (उनकी बात को सुन कर में अंदर तक हिल gaya)Aap क्या करने की सोच रही है? देखिये भाभी आप समझने की कोशिस कीजिये, ये इस बात का हल नहीं है.

भाभी : (आंसू उनके गाल से टपकने लगे, उनके चेहरे पर जहाँ भर का दुःख उमड़ aaya)Me ऐसे hi यहाँ से नहीं जा शक्ति, एक बार शादी हो जाये तो फिर उसकी अर्थी hi उसके ससुराल से निकलती है.

शिव : (पता नहीं पर उनका दर्द देख कर मेरा भी गाला भर aaya)Bhabhi... में आप को बताना तो नहीं चाहता था पर मेरे पास ऐसा कुछ है जिस से वो माया नाम का कांटा आपके जीवन से निकल जायेगा.

भाभी : ऐसा क्या है तेरे पास?

शिव : भाभी, वो मात पूछिए, में वो आपको दिखा नहीं शक्ति.

भाभी : ऐसा क्या है जो तू मुझे दिखा नहीं शक्ति?

शिव : वो मात पूछिए पर में आप को इतना यकीं दिलाता हु की में आपके जीवन से इस माया को दूर कर दूंगा.

भाभी : पहेलियाँ मात बजा, तुजे मेरी कसम है, बता मुझे, अगर तेरे दिल में मेरे लिए थोड़ा सा भी महत्व है तो मुझे बता, वर्ण तोड़ दे मेरी कसम.

शिव : ये क्या कह रही है भाभी. आप अपनी कसम वापस ले लीजिये.

भाभी : नहीं, अब तेरे ऊपर है, की तेरे दिल में मेरा कोई महत्व है की नहीं.

शिव : (कुछ सोच कर) ठीक है भाभी, पर ये कुछ ऐसा है जिसे देखना शायद आप पसंद न करे.

भाभी : जो भी है, में देखना चाहती हु.

शिव : ठीक है भाभी, अब आप इतना कह रही है तो में दिखता hu.(Mene अपना मोबाइल लिया और उनके पास खड़ा हो गया, वो कभी मेरे मोबाइल को तो कभी मुझे देख रही थी, मेने एक लम्बी साँस ली और वो वीडियो चालू कर दिया, सुरु में उनकी बाते सुन कर उनके चेहरे के भाव बदलने लगे, पर जब उनकी चुदाई सुरु हुई तो उनकी सांसे भरी होने लगी, थोड़ा देख कर hi उन्होंने अपना चेहरा घुमा लिया, मेने भी वीडियो बंद कर दी.)

भाभी : (अपने आप को संभल kar)Tu वह क्यों गया था? क्या जरुरत थी तुजे वह जाने की?

शिव : भाभी, मुझसे आप का वो बजा हुआ चेहरा देखा नहीं गया, में आप की परेशानी को दूर करना चाहता था इस लिए वह गया था.

भाभी : तुजे क्या जरुरत थी ये सब करने की, अगर तुजे कुछ हो जाता तो?

शिव : मेरा जो होता वो होता, पर में आप को ऐसे दुखी नहीं देख सकता भाभी, पता नहीं क्यों पर, आपके आंसू मेरे दिल को चिर देते है. (वो मेरी और बड़े प्यार से देख रही थी, उनके गाल से फिर आंसू टपकने लगे, पर ये आंसू दुःख के नहीं the)Aab तो आप को पता चल गया न की भाई में hi प्रॉब्लम है, अगर ऐसा नहीं होता तो वो तो पेट से जरूर होती.

भाभी : (अपने आंसू पोछ kar)Ho शक्ति है की उन में प्रॉब्लम हो पर इस से मेरी प्रॉब्लम ख़तम नहीं हो जाती, में कभी माँ नहीं बन शक्ति.

शिव : आप इतना यकीं से कैसे कह शक्ति है?

भाभी : (लम्बी साँस ले kar)Hai ऐसी कुछ बाटे जिसकी वजह से में माँ नहीं बन शक्ति.

शिव : ऐसी क्या वजह है?

भाभी : ठीक से तो मुझे भी नहीं पता पर में माँ नहीं बाण शक्ति ये तय hai.(Meri कुछ समाजमे नहीं आ रहा था, पर मुझे यही सही लग रहा था की अगर में उनसे सम्बन्ध बनाऊंगा तो वो माँ बन जाएगी, पर वो इस बात को मान नहीं रही थी, कुछ सोच कर मेने उन्हें पीछे से अपनी बहो में भर लिया) ये क्या कर रहा है?

शिव : सॉरी भाभी, में अपने किये की माफ़ी मांगता हु, पर मुझे यही लग रहा है की एहि सही है. (वो मुज से छूटने की कोशिस करने लगी, पर मेरी पकड़ से वो छूट नहीं पायी)

भाभी : छोडो मुझे शिव, इन सब से कुछ नहीं hoga.(Wo अपने आप को छुड़ाने की कोशिस कर रही थी)

शिव : मुझे यकीं है भाभी, इस से hi होगा. में अपनी इस हरकत के लिए बहोत शर्मिंदा हु पर मुझे यही सही लग रहा है.

भाभी : (हम दोनों कमरे में खड़े थे, में उन्हें छोड़ नहीं रहा था, थोड़ी देर छूटने का प्रयास करने के बाद उन्होंने छूटने की कोशिस बंद कर di)Shiv...aisa मात करो.

शिव :(मेरा भी दिल धड़क रहा था, में भाभी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं करना चाहता था, पर में उनकी परेशानी उनका दर्द भी नहीं देख शक्ति था, जैसा की भाभी कह रही थी की इस से भी कुछ नहीं होगा, पर फिर भी कोशिस तो करनी hi थी, आगे जैसी उपरवाले की मर्जी, मेने अपने हाथ उनके स्तन पर रख दिए, और उन्हें हलके से मसलने लगा)

भाभी : शीइइइइइइव.

शिव : में माफ़ी चाहता हु भाभी, सचमे मुझे बहोत शर्मिंदावगी महसूस हो रही है पर मुझे ये करना hi होगा. (उनके सुडौल स्तन को दबाने से मेरे अंदर उत्तेजना बढ़ने लगी, और मेरा लुंड खड़ा होने लगा)

भाभी : (शिव का ऐसा वर्तन उसे अच्छा लगने लगा था, पर वो जानती थी की इन सब का कोई मतलब नहीं है, तो वो बिना किसी बात पे अपनी इज्जत पर दाग नहीं लगने देना चाहती thi)Nahi शिईयिव, ऐसा मात karo...(Apne कूल्हों पर चुभ रहे उस कड़क अंग को महसूस कर रही थी, उसकी आंखे बंद होने लगी, उसकी आवाज भी नरम पड़ने lagi)Nahi शिईयिव, शह्ह्ह्ह Shiiiiiiiv(Ek हाथ से उनकी चुचिओ को सहलाते हुए दूसरे हाथ से में उनका नंगा पेट सहलाने लगा, पेट की नरम मुलायम त्वचा मेरे अंदर अपना असर दिखने लगी )उफ्फफ्फ्फ़ शह्ह्ह्ह नाहीई शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव शहहहहह.

शिव : (उनके सुराहीदार गले पर पशीने की बुँदे चालक आयी थी जिन्हे चाट ते हुए) सॉरी भाभी, मुझे माफ़ कर देना, ये सब में आपके लिए hi कर रहा hu(Me गले को चूमने लगा, मेरा लुंड चुत्तड़ो की दरार में चला गया था)

भाभी : (वो कड़क लुंड, साड़ी समेत अपने कूल्हों में चुभता महसूस करते हुए, उसकी आंखे नशे में डूबने लगी, उसका हाथ, अपने आप hi शिव के शिर पर चला गया जो उसके गले को छत रहा था, आवाज अब मादकता से भरने लगी thi)Nahi सीईव शहहहहह ऐसा मात करो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhhhh.(Uski छूट में नजाने कितना पानी बह रहा था, शिव ने उसे अपनी बहो में उठा लिया और पलंग की और ले जाने लगा, वो उसके चेहरे को बहोत प्यार से देख रही थी, वो उसे रोक पाने में असमर्थ थी, पता नहीं क्या आकर्षण था उसमे जो वो छह कर भी उसे रोक नहीं प् रही थी, शिव ने उसे पलंग पर लेता दिया और उसके बाजु में लेट ते हुए थोड़ा सा उसके ऊपर हो गया, दोनों एक दूसरे को hi देख रहे थे, शिव झुकता चला गया, उसके होठो की और तो उसने अपना चेहरा दूसरी और कर लिया, शिव उसके गले को चाटने लगा) शहहहहह नाहीईई शीइइइइव शहहहहह ऐसा मात karo(Hala की अब वो शिव को बिलकुल भी नहीं रोक रही थी, उसकी छूट गीली हो चुकी थी, शिव के स्पर्श ने उसे बहोत ज्यादा उत्तेजित कर दिया था, पर अभी भी वो प्रयास कर रही थी की ये सब रुक जाये, हलाकि उसका दिल इससे रोकना नहीं चाहता था, शिव के शिर को सहलाते hue)Shhhhh मत करो सीईव शहहहहह में बाहेक रही हु शह्ह्ह्ह रुक जाओ सीईव शह्ह्ह्ह ahhhhh.(Shiv का वो कड़क अंग उसकी झंघ के साइड में चुभ रहा था, जिसका एहसास उसे पागल कर रहा था, शिव उसके गाल को उसके कान को चूमते हुए उसके स्तन की और बढ़ने लगा तो उसने मजबूती से उसके बाल पकड़ लिए, वो उसे रोकना छह रही थी, उसने इतना कास के शिव के बालो को खींचा की शिव आगे नहीं बढ़ shaka(Shiv को भी अपने शिर में दर्द महसूस हुआ), पर उसका हाथ उसके पेट से फिसल कर उसकी झांघो के बिच पहुंच गया था और कपड़ो के उपरसे hi उसकी बेसकीमती छूट को मसल रहा था, उसके हाथ की पकड़ ढीली पद गयी और शिव का मुँह उसकी चुकी पर चला गया) Shhhhhhhhhhh नाहीईई शह्ह्ह्हह्ह शहहहहह( शिव अपना चेहरा उसकी चुचिओ प् रगड़ रहा था और उसका हाथ उसकी छूट को दबोच रहा था, वो उत्तेजना से भरने लगी थी, उसके पेअर भी अपने आप खुलने लगे जिस से शिव का हाथ उसकी छूट को अच्छे से मसल रहा tha)Ohhhhhh शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइव शहहहहह मात करो शहहहहह में रुक नहीं पाऊँगी शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह shiiiiiiiv.(Sach में वो कमल थी, वो खूबसूरती की मिसाल थी, उनका हर अंग नपा तुला था, में इतना उत्तेजित हो गया था की क्या बताऊ, मेने उनकी साडी निचे से उठा दी और अपना हाथ उनकी पंतय पर ृक्क दिया, में वह देख तो नहीं रहा था पर उसकी गर्मी को अपने हाथ पर महसूस कर रहा था, जब मेरी उंगलिओ पर गीली पंतय का एहसास हुआ तो में उसी जगह पर अपनी ऊँगली दबाने लगा) शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह नाहीईई शहहहहह रुक जाओ शहहहहह शीइइइइइव shhhhhhh(Wo बोल तो रही थी रुक जाओ पर मुझे रोक नहीं रही थी, छूट के होठो का एहसास मुझे अपनी उंगलिओ पर हो रहा था, मेने अपना हाथ पंतय में दाल diya)Ahhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह) छूट के ऊपर उगे बालो का एहसास मेरे हाथो पर होने लगा) शह्ह्ह्ह नाहीईईई अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वह नहीं शहहह माँ करो ऐसा shhhhhhh(Mene ऊँगली से छूट के होठ फैलाये और दरार में ऊँगली फिरने laga)Shhhhh अह्ह्ह्हह शहहहहह शह्ह्ह्ह शहहहहह शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है शहहहहह मात करो ऐसा shhhhhhhh(Unki कमर झटके खा रही thi)Shiiiiiiiv शह्ह्ह्हह्ह रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह (मेने ऊँगली से छूट के छेड़ को सहलाया और अंदर डालने लगा, उन्होंने मेरी कलाई पकड़ li)ahhhhhh नहीं शिईयिव शहहह अह्हह्ह्ह्ह नाहीईईई shhhhhhhh(Me हलके हलके ऊँगली अंदर बहार करने लगा, छूट की गर्माहट और उसका चिकना पैन महसूस कर के में और उत्तेजित होने लगा, उन्होंने अपनी पकड़ मेरी कलाई पर ढीली कर दी, ऊँगली पर लगे छूट रास से ऊँगली छूट में आसानी से अंदर बहार होने lagi)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह शह्ह्ह्ह shiiiiiiv(Me थोड़ी देर उनकी छूट में उंगली करता रहा, वो आंखे बंद किये हुए सिस्किअ ले रही थी, मेने हाथ बहार निकला और अपनी चड्डी, अंडरवियर समेत नीचे खिसका दी, मेने उनके हाथ को मेरे लुंड के पास रक्खा, न उन्होंने लुंड को पकड़ा न अपना हाथ हटाया, मेने फिर से अपना हाथ पंतय में दाल दिया और छूट में ऊँगली करने लगा, उनके हाथ में हरकत होने लगी, वो अपने उलटे हाथ से hi लुंड को छूने लगी, उनके हाथ ने लुंड का जायजा लिया, अभी उसे पकड़ा नहीं था.)

अचानक हमदोनो जीप के हॉर्न से चौंक गए, ये भैया की जीप का हॉर्न था, वो झटके से उठी और दरवाजे की और भागी, में उन्हें देखता hi रह गया और वो अँधेरे में ोजल हो गयी. में वैसे hi लेता सोचने लगा, की क्या मेने सही किआ. पता नहीं भाभी क्या सोच रही होगी. मेने अपने आप को ठीक किआ और भाभी का लाया हुआ पानी पिया. थोड़ी देर बैठे रहने के बाद मेने किताबे खोली और पढ़ने लगा.

ममता (भाभी) भाग कर नीचे पहुंच गयी थी, जब तक जीप अंदर आती वो बाथरूम में घुस चुकी थी. जब वो कमरे में पहुंची तो देखा की उसके पति ने शराब पि हुई है, और वो बीएड पर लेता है. उसने उसको सही से लेटाया और उसके ऊपर चद्दर दाल दी और वो भी लेट गयी. वो सोचने लगी की ये क्या हो गया, क्या उसे शिव को रोकना नहीं चाइये था. पर वो कितना ताकतवर था वो कैसे उसे रोक पति. अगर उसे रोकना hi था तो वो चिल्ला भी सकती थी, तो क्यों नहीं चिल्लाई. क्यों उसे सब करने दिया. क्या उसे चांस लेना चाहिए, क्या वो माँ बाण शक्ति है? उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था. वो ऐसे hi लेती रही और काफी देर बाद उसे नींद आ गयी.

सुबह किसी के उठाने से वो जगा, उसने देखा की ये विष्णुभाई थे, भाभी उसे जगाने नहीं आयी थी.

विष्णुभाई : अबे, अभी तक सो रहा है, चल जाना नहीं है क्या?

शिव : (हड़बड़ाते hue)Sorry भाई, बस पांच मिनट. (में उठा और निचे गया, मेने देखा की भाभी गाय को चारा खिला रही थी,





में सीधा बाथरूम में घुस गया और फटाफट तैयार हुआ, दूध और नास्ता करने का टाइम नहीं था तो में निकल गया, ममता, शिव का इंतजार कर रही थी पर शिव चला गया था, वो वैसे hi काफी देर बैठी रही, उसको ऐसे बैठा देख)

माँ : क्या हुआ बहु, ऐसे क्यों बैठी है, और ये दूध?

भाभी : वो शिव को देर हो गयी थी तो बिना पिए hi चला गया.

माँ : कोई बात नहीं, इसे अंदर रख दे. और ऐसे बैठे क्या सोच रही है, अगर अच्छा नहीं लग रहा तो जा थोड़ी देर आराम कर ले.

भाभी : नहीं माजी, ऐसी कोई बात नहीं. (फिर वो अपने काम में लग गयी)

कल रात को बारिश हुई थी और उसकी वजह से खेतो में पानी भर गया था, पिछले कुछ दिनों की बारिश की वजह से खेतो में पानी जमा हो रहा था. जब चंद्रपाल खेत में पंहुचा तो उसके मजदूरोने बताया की बाजूवाले खेत से पानी अपने खेतो की और मोड़ दिया है जिस की वजह से सरे खेत पानी से भर गए है, अगर ऐसा hi चला तो फसल को नुकशान हो शक्ति है. वैसे तो बाजूवाले खेत उसके चचेरे भाई के hi थे, पर इन्ही जमीनों के बटवारे को ले कर इनकी अब बनती नहीं थी. ऊपर से दोनों के खेत भी आपस में सटे हुए थे तो आये दिन कहा सुनी होती रहती थी. खेत में हो रहे नुकसान का सुन कर उसका पर चढ़ गया और वो बाजूवाले खेत में घुस गया और वह के मजदूरों को डांटने लगा, एक मजदुर ने जबान लड़ने की कोशिस की तो उसने उसको मारा भी, और चेतावनी दी की फ़ौरन उनके खेतो की और आ रहे पानी को रोको वर्ण अच्छा नहीं होगा. उसके चचेरे भाई का नाम था बृजमोहन, जब उसको मजदूरों ने खबर दी की चंद्रपाल ने उसके खेत में जा कर धमकी दी है और उसके एक आदमी को मारा है तो वो आग बबूला होता हुआ खेत पंहुचा. दोनों में कहा सुनी सुरु हो गयी, बात इतनी बढ़ गयी की हाथ पायी तक पहुंच गयी, वैसे भी बृजमोहन तयारी के साथ hi आया था, तो वो चंद्रपाल को बुरी तरह पीटने लगा.

में और विष्णुभाई जब घर लौटे तो भाभी दौड़ी दौड़ी बहार आ रही थी और साथ में आंटी भी थी. दोनों रोये जा रहे थे, मेरा दिल बैठा जा रहा था की आखिर हुआ क्या.

शिव :क्या हुआ भाभी, आप ऐसे दौड़ क्यों रही है?

भाभी : वो... वो उनका jagada...(Wo ठीक से बता नहीं प् रही थी, तभी एक आदमी जो ये खबर घर पर देने आया था वो बोलै)

आदमी : बाबूजी, वह खेत में मालिक की लड़ाई हो गयी है, वो सब मिलकर उन्हें मार रहे है.

भाभी : उन्हें बचालो, कही उन्हें कुछ हो न जाये.

शिव : अपने आप को सम्भालो भाभी, उन्हें कुछ नहीं hoga(Visnubhai se)Visnubhai, खेत चलो.

भाभी : में भी आती हु.

शिव : भाभी, आप यही रुको, में देखता हु.

भाभी : नहीं, में भी आती हु.

शिव : विष्णुभाई, आप वो बाइक ले कर आओ, में ये चला लेता hu.(Mene घर पर रक्खी बाइक की और इस्सर करते हुए कहा)

मेने भाभी को पीछे बिठाया और खेतो की और निकल गया. जब हम वह पहुंचे तो वह का नज़ारा बहोत खतरनाक था, भैया वह जमीं पर पड़े हुए थे और साथ में दूसरे भी कुछ लोग वह पड़े थे. मेने देखा की 8-10 लोग वह से जा hi रहे थे जो हमें देख कर रुक गए.

बृजमोहन : देख चंद्रपाल, तेरी बीबी भी आ गयी, अब तो उठ जा. (भाभी दौड़ते हुए वह पड़े भैया के पास पहुंच गयी और उनको उठाने लगी, पता नहीं चल रहा था की वो जिन्दा है की मार गए, भाभी ने जैसे hi उन्हें हिलाया तो उन्होंने अपने पेअर को हिलाया, मेरी जान में जान aayi)Apne मरद को समजा दे, मेरे साथ पंगे न लिया करे, अपनी हद में रहे, वर्ण इसको काट के ऐसे गायब कर दूंगा की किसी को पता भी नहीं chalega.(Bhabhi ने भैया का शिर अपनी गॉड में रक्खा तो उन्होंने आंखे खोली और बृजमोहन को देखने lage)Aise क्या देख रहा है, नामर्द कही के, सेल अपनी बीबी को एक बच्चा तो दे नहीं सकता और चला है बृजमोहन से टकराने. अगर तेरे से कुछ नहीं होता तो मुझे बोल देता, में तेरी बीबी को पेट से कर देता.

भाभी : बृजमोहाआआ.

बृजमोहन : Brijmohaaan,(Bhabhi के बाल पकड़ते हुए) साली रंडी, तेरा जेठ हु में, मुझे तू नाम से बुलाएगी...

एक साथ दो अह्हह्ह्ह्ह सुनाई दी. एक तो भाभी के मुँह से जो बालो के खींचे जाने पर निकली थी और दूसरी बृजमोहन के मुँह से जो किसी चीज से टकरा कर हवामे उछाल कर जमीं पर गिरा. बृजमोहन जैसे hi जमीं पर गिरा उसके आगे अँधेरा छ गया, जब उसे थोड़ी चेतना आयी तो उसने देखा की एक लड़का चंद्रपाल के पास खड़ा हुआ है, उसे याद आया की वही लड़का उस से टकराया था.

बृजमोहन : (वो खड़ा होने लगा to)Ahhhhhh, कमीनो देख क्या रहे हो, सेल की हड्डी, पसली तोड़ दो. फिर चालू हो गया घमासान, में सब को धोता चला गया, मेने देखा की विष्णुभाई भी आ गए है और वो भी किसीने किसी को मार रहे है, पर मेने थोड़ी hi देर में सब को अच्छी तरह से धोया, अब सबके सब चंद्रपाल भाई की तरह निचे जमीं पर पड़े हुए थे.

बृजमोहन : (उसे खड़े होने में तकलीफ हो रही थी, कराहते हुए वो bola)Kon है बे तू, हमारे झगड़े में क्यों अपनी तंग ऐडा रहा है?

शिव : अगर तुम लोगो में कोई मसाला है तो बेथ कर उसका समाधान ढूंढो, और दूसरी किसी भी औरत के बारेमे कोई अप्सब्द नहीं बोलने चाहिए. किसी को मरने के लिए मुझे तुम्हारी तरह आदमी नहीं रखने पड़ते, में अकेला hi काफी हु. अगर यहासे सही सलामत जाना चाहते हो तो भाभी से माफ़ी मानगो.

भाभी : रहने दो शिव, बात को आगे मात बढ़ाओ.

शिव : नहीं भाभी, इसने आपके बारेमे इतने गंदे सब्द निकले कैसे, में कह रहा हु माफ़ी maang(Brijmohan की रूह तक हिल गयी इस दहाड़ को सुन कर, निचे पड़े हुए उसके आदमी दूर हैट गए, बृजमोहन ने देखा की उसके सरे आदमी, चूहों की तरह दुबक रहे है तो उसकी भी हिम्मत जवाब दे गयी)

बृजमोहन : (डरते hue)Me माफ़ी चाहता हु बहु, मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था, मुझे माफ़ कर do.(Bhabhi ने कोई जवाब नहीं दिया, वो शिव को देखने लगी, चंद्रपाल भी शिव को देख रहा था, उसकी बीबी की इज्जत के लिए वो लड़ रहा था, उसको देख कर चंद्रपाल भी अंदर से कैंप गया)

शिव : लगता है भाभी तुम्हे माफ़ करने को तैयार नहीं है.

बृजमोहन : (उसने उस लड़के के चेहरे पर अपने लिए मौत नजर आने लगी, हो शक्ति है की आगे चलकर वो दूसरे आदमी इक्कट्ठा कर के फिर से लड़ाई करे पर अभी इस वक़्त तो उसे अपनी मौत hi नज़र आ रही थी, जैसे hi उसने देखा की वो लड़का उसकी और बढ़नेवाला है, वो फ़ौरन उठा और भाभी के पेअर पकड़ते hue)Bahu, मुझे माफ़ कर दो, मुझे माफ़ कार्डो बहु, मुझे बचालो बहु.

भाभी : (अपने पेअर पीछे खींचते hue)Shiv, छोड़ दो उन्हें.

शिव : जाओ निकालो यहाँ से, और ये मात सोचना की फिर से ये सब कर पाओगे, याद रखना, शिव नाम है मेरा, अगर मुझे कभी भी पता चला की तुमने इस घर पर कोई भी नुकशान पहुंचने की कोशिस की है तो चाहे तुम्हारे पास कितने भी आदमी हो, में तुम्हारे घर में घुस कर मरूंगा, अगर हिम्मत हो तो आजमा लेना. और घर के मसलो को आपस में बेथ कर सुलझाया करो.

बृजमोहन : (शिव की गुर्राहट, उसकी मरदाना आवाज से बृजमोहन की रूह भी कैंप रही थी, उसके मान में पल रहे विचार भी हवा हो गए) नहीं, में ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा, मुझे माफ़ कर दो चंद्रपाल, में अब कोई झगड़ा नहीं करूँगा.

विष्णु भाई को जीप आती थी, हमने भैया को जीप में डाला और सहर के अस्पताल ले गए. उन्हें वह भर्ती करवा दिया. कुछ देर बाद मजी भी आ गयी. चंद्रपाल को काफी चोट लगी थी, पेअर और हाथ में भी हड्डी टूट गयी थी. कुछ दिन उन्हें यही रहना था. में और विष्णुभाई जब अस्पताल के बहार खड़े थे तो एक एम्बुलेंस में बृजमोहन को भी उसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. उनको अंदर ले जाने में भी हमने मदद की. इन सब भगा दौड़ी में शाम को हम स्टेडियम नहीं जा पाए. एक दो घंटे बाद माजी और भाभी बहार आये.

माजी : तू बहु चिंता मात कर, में सब संभल लुंगी यहाँ, तू घर जा, तू घर संभल, और आते समय मेरे कपडे भी ले aana.(Me और विष्णुभाई सब सुन रहे the)(Meri और देख kar)Beta, तेरा बहोत बहोत सुक्रिया, तूने मेरे बेटे को बचालिया.

शिव : ये क्या बोल रही है आंटी, मेने कुछ नहीं किआ.

माजी : जीते रहो बीटा, (मेरे शिर पर हाथ फिर कर, मुझे प्यार से देखा, फिर भाभी ko)Abb तुम जाओ बीटा, यहाँ की चिंता मात करना, वैसे भी जो करना है वो सब डॉक्टर को hi करना है, जैसे डॉक्टर ने बताया, खतरे की कोई बात नहीं है, हड्डी टूटी है तो जुड़नेमे थोड़ा समय लगेगा.

भाभी : जी, माजी. जूही को खबर करनी है?

माजी : रहने दे बहु, वैसे भी वो अगले हफ्ते आनेवाली है, और ऐसी को खतरे की बात भी नहीं है, शिव है तो कोई दिक्कत नहीं होगी.

में, भाभी और विष्णुभाई घर की और निकल गए. विष्णुभाई हमे छोड़ कर घर चले गए. ये तय हुआ की सुबह भी हम जीप से hi जायेंगे. हम घर में आ गए और भाभी खाना बनाने लगी.
 
अपडेट 90

में ने हाथ मुँह धोये, क्यों की लड़ाई की वजह से कपडे भी ख़राब हो गए थे. में कपडे बदल कर पढ़ने बेथ गया. करीबन एक डेढ़ घंटे बाद मुझे भाभी की आवाज सुनाई दी वो निचे से मुझे पुकार रही थी, में बहार निकला और निचे देखा तो वो मुझे पुकार रही थी, मुझे देखते hi उन्होंने कहा.

भाभी : निचे आओ.

शिव : अभी आया. (में वह से निचे चला गया, मेने देखा की भाभी किचन में थी, तो में किचन के दरवाजे से hi puchha)Kya हुआ भाभी?

भाभी : (एक नजर मेरी और देखा, फिर वापस अपना काम करते hue)Ander आ जाओ, रोटी बाण रही है, खाना खा लो.

शिव : इतना जल्दी?

भाभी : सुबह भी बिना नास्ता किये चले गए थे, दोपहर को भी तुम्हे खाने को नहीं मिला, भूख नहीं लगी क्या?

शिव : (उनकी बात सही थी, मेने सुबह से खुछ नहीं खाया था, पर मुझे इस बात से बहोत अच्छा लगा की इस बात का एहसास भाभी को है, वो कितना ख्याल रखती है sabka)Koi बात नहीं भाभी, खाने के टाइम पर साथ में hi खाएंगे.

भाभी : अभी अस्पताल खाना पहुंचने भी जाना है, हो शक्ति है आते आते देर हो जाये, तब तक भूखे रहोगे क्या? थोड़ा खा लो.

शिव : चलेगा भाभी, बाद में खा lunga(waise खाना सामने देख कर तो भूख का एहसास हो रहा था)

भाभी : चुप चाप बैठो और एक दो रोटी खा लो, दूसरा आ कर खाना.

शिव : ठीक है भाभी, पर आप को भी खाना होगा.

भाभी : (मेरी और देख kar)Agar में खाउंगी तो रोटी कोण बनाएगा?

शिव : उसकी आप चिंता मात कीजिये, वो में संभल लूंगा. (भाभी मुझे सवालिया नजरो से देख रही थी, में मुस्कुराया और रोटी के अंदर सब्जी दाल कर रोल कर दिया, और उनके मुँह के सामने कर दिया)

भाभी : (मुस्कुराते hue)Pehle तुम खाओ.

शिव : में दूसरा बनता हु, पहले आप तो सुरु करो.

भाभी : (अपना ध्यान रोटी पकने में रखते hue)Dusara क्यों, इसीसे खाओ.

शिव : वो फिर मेरा जूठा हो जायेगा न भाभी.

भाभी : ऐसा कहो की मेरा जूठा नहीं खाना चाहते ho(Unhone मेरी और एक नजर डाली और मुस्कुराने लगी, उसे ये सब बहोत अच्छा लग रहा था, एक लड़की के तौर पर ऐसे पालो की इच्छा हमेसा से उसको थी पर ऐसा कभी हो नहीं पाया था, उसके पति ने कभी ऐसे पल उसके साथ नहीं बिताये थे)

शिव : (उनके मुँह से ये सुन कर मेरा दिल धड़कने लगा, क्यों की उन्हें मेरा जूठा खाने से भी परहेज नहीं tha)Thik है भाभी आप सुरु करो, में इसीमे से khaunga(Unhone एक निवाला कटा और मुस्कुराते हुए चबाने लगी, मेने रोटी अपने सामने की, जहा से उन्होंने कटा था वह उनके दन्त के नीसाण मुझे साफ़ दिख रहे थे, मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे में उनके होठो को छूने जा रहा हु,)( शायद ममता को भी ऐसा hi कुछ लग रहा था क्यों की वो तिरछी नजरो से शिव को hi देख रही थी, जिस तरह से वो उस कटे हुए भाग को देख रहा था उसे ऐसा hi लगा जैसे वो उसके होठो को देख रहा hai,uski भी धड़कन तेज हो चुकी थी. जैसे hi शिव ने रोटी को अपने मुँह में रक्खा, ममता को सारा स्कीन स्लो मोशन में दिखा, और जैसे hi रोटी को अपने मुँह में रक्खा उसे ऐसा लगा जैसे शिव ने उसके होठो को चुम लिया हो, उसकी आंखे बंद हो गयी, जब शिव ने रोटी को उसकी और बढ़ा कर पुकारा तो उसने आंखे खोली, शिव उसकी और सवालिया नजरो से देख रहा था, वो शर्मा गयी)

शिव :खाइये न भाभी. (मेने देखा की भाभी ने अपने अपने प्यारे गुलाबी होठो को खोला और मेरी झूठी रोटी को अपने मुँह में भर लिया, उन्होंने मुझे मुस्कुराते हुए ऐसे देखा जैसे वो भी यही सोच रही थी की उन्होंने मेरे होठो को चुम लिया हो)

हम दोनों ने दो रोटी खायी, फिर हम खाना और कपडे ले कर बाइक से अस्पताल चले गए. बाइक किसीने खेत से ला कर घर पर रख दी थी. बाइक पे बैठे हुए भाभी ने मेरे कंधे पर हाथ रक्खा हुआ था. कल रात के वाकिये से में थोड़ा विचलित था, क्यों की जब मेने ठन्डे दिमाग से सोचा था तो मुझे यही याद आ रहा था की उस वक़्त भाभी मुझे मन hi कर रही थी, वो मुझे रोक रही थी और में बेशर्मी की श्री हाडे पार करते हुए उनके साथ जैसे जबरजस्ती hi कर रहा था. मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी भाभी से ज्यादा बात करने की. हम दोनों hi पुरे रस्ते खामोश रहे. जब हम अस्पताल पहुंचे तो चन्द्रपालभाई को पैर में और हाथ में प्लास्टर लगा दिया गया था. वो जाग रहे थे. भाभी जा कर उनके पास बेथ गयी और उनका हल चल पूछने लगी, पर वो मेरी और देख कर बोले.

चंद्रपाल : तुम्हारा बहोत बहोत सुक्रिया शिव, तुमने न सिर्फ मुझे बचाया बल्कि मेरे घर की इज्जत भी बचायी. ऐसे मार खाने से शायद में ये जिल्लतभरी जिंदगी जी न पता.

माँ : एक मरूंगी, अगर ऐसावैसा कुछ बोलै तो.

चंद्रपाल : नहीं माँ, तुम नहीं जानती वह क्या हुआ था, वो कैसे कैसे अप्सब्द बोल रहा था, अगर में अपने घर की इज्जत न बचपाउ तो मेरे रहने का क्या मतलब होता.

माँ : वो जो कुछ हुआ सब भूल जा, मेरी बृजमोहन और उसकी माँ से भी बात हुई है, वो लोग भी अब ऐसा कोई बखेड़ा नहीं चाहते, उन्होंने भी मान है की अगर घर में कोई मान मोटव है तो उसका हल बातचीत से hi हो सकता है. ऐसे जगहदो से परिवार का hi नुकसान होगा. बृजमोहन की भी हड्डिया टूट गयी है, वो भी तुमसे माफ़ी मांग रहा था, कह रहा था की आखिर वो मेरा छोटा भाई है, में कैसे अपनी मर्यादा भूल गया, वो बहोत शर्मिंदा है. तेरी चची भी तुजसे मिल कर माफ़ी मांगने आनेवाली है. तो उलटे सीधे विचार मान से त्याग दे. सब ठीक है.

चंद्रपाल : ये सब जो भी हुआ है वो (शिव की और इस्सर कर ke)isski वजह से हुआ है.

माँ : सही कहता है तू, पता नहीं कैसे पर जूही ने ये एक बहोत hi अच्छा काम कर दिया की वो इससे यहाँ ले आयी, वर्ण अनर्थ हो जाता. (सब की बाते सुन कर भाभी भी मेरी और देख रही थी, उनकी आँखों में मेरे लिए ढेर साडी इज्जत नजर आ रही थी)

शिव : ऐसा कुछ नहीं है, मेने जो कुछ किआ अपना समाज कर किआ है, और ये तो कुछ भी नहीं, जितना जूही ने मुझपर एहसान किआ है उसके सामने तो ये सब कुछ भी नहीं है.

माँ : ये सब तुम्हारा बद्तपान है बीटा जो तुम ऐसा कह रहे हो. (भाभी se)Bahu, अब तुम लोग जाओ, बहोत देर हो गयी है, अँधेरा ज्यादा होने से पहले घर चले जाओ, और घर को अच्छे से बंद कर देना.

भाभी : जी, माजी, में सुबह चाय नास्ता ले कर आ जाउंगी.

हम दोनों वह से घर के लिए निकल gaye.(Mamta, खामोस बैठी थी पर उसके मान में बहोत साडी उथल पुथल मची हुई थी, आज वो और शिव दोनों घर पर अकेले थे, जैसे कल शिव ने उसके साथ किआ था शायद वो आज भी ऐसा कुछ करे. पर उसे अब कोई दर नहीं था, वो मान से तैयार थी, जिस तरहसे शिव ने आज उसका मान रक्खा था वो बहोत ज्यादा खुस थी, उसके खिलाफ अपशब्द कहनेवाले को उसने उसके पैरो में गिरा दिया था. शिव को देख कर वो जिस तरह से दर गया था ये सोच कर hi उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो शिव को देख रही थी, भले hi उसकी पीठ उसकी और थी पर उसे शिव को देख न अच्छा लग रहा था, उसका दिल छह रहा था की वो शिव से लिपट जाये पर उसे ऐसा करने में शर्म आ रही थी, उसने सोच लिया था की आज अगर शिव आगे बढ़ेगा तो वो उसे रोकेगी नहीं, हो शक्ति है की शिव से सम्बन्ध बनाने से उसकी समस्या का हल न निकले, वो माँ न भी बने, पर वो शिव के साथ हमबिस्तर हो कर उसे खुस करना चाहती थी, उसे प्यार देना चाहती थी.) हम दोनों घर लोट आये थे. मेने बाइक रक्खी, भाभी घर में चली गयी. में भी पीछे पीछे घर में चला गया. मेरे दिल में बार बार ये आ रहा था की में अपने कल के बर्ताव के लिए भाभी से माफ़ी मांगू, क्यों की ये उनकी जिंदगी थी, अगर वो मेरे साथ सम्बन्ध बना कर माँ नहीं बन न चाहती थी तो वो उनकी चॉइस थी, में कैसे उनके साथ जबरदस्ती कर शक्ति था. हम दोनों खाना खाने बेथ पर न में कुछ बोल रहा था न वो कुछ बोल रही थी. है कभी कभी हम दोनों की नज़ारे टकरा जाती तो हम दोनों hi औपचारिक तौर पर मुस्कुरा देते थे, पर उनके चेहरे पर भी उधेड़बुन के लक्षण साफ़ दिख रहे थे. मुझे लग रहा था की वो भी कल के मेरे व्यव्हार से विचलित है, वो मेरे साथ इतना खुल कर बात भी नहीं कर रही थी, मुझे अपने किये पर प्रस्ताव हो रहा था. मेने खाना खाया और हाथ धो कर उठ गया, भाभी बर्तन वगैरह ठीक करने लगी, में बहार आया और ऊपर अपने कमरे में चला गया. मेरा पढ़ने में भी मान नहीं लग रहा था. तभी मेरे फ़ोन पर जूही का फ़ोन आया.

शिव : (फ़ोन उठा kar)Hello.

सामने से : कैसे हो शिव?

शिव : दीदी aap?(Samne लतादिदी थी)

लतादिदी : है, जूही, हमसे मिलने आयी थी, हम सब तेरी hi बाते कर रहे थे तो तुजे फ़ोन लगा दिया. कैसा है तू?

शिव : अच्छा हु दीदी, जूही के घर पर hi हु तो क्या परेशानी हो शक्ति है, सब मेरा च्छे से ख्याल रखते है. आप सब कैसे है, वह सब ठीक है न?

लतादिदी : है सब ठीक है, वो तेरी स्कूल की मैडम भी आयी थी, और वो गयम की मालकिन है न वो भी आयी थी, और तो और वो इंस्पेक्टर और वकील भी आयी थी, हर कोई हमारा हल चल पूछने आ hi जाता है. भले hi तू यहाँ नहीं है पर तेरी वजह से सब हमारा ख्याल रकने आ hi जाते है, आज जूही भी आ गयी.

सब तेरी वजह से हुआ है, इतने काम वक़्त में कितने लोग है जो हमारे अपने हो गए है. ले में रंजन को दे रही हु, कब से फुदक रही है तुज से बात करने के लिए.

रंजन : कैसे हो?

शिव : में अच्छा हु, तू कैसी है?

रंजन : में ठीक हु, अभी दो तीन दिन hi हुए है और लगता है तू कितने दिनों से हम से दूर है, जल्दी आ जाना, तेरे बगैर कुछ भी अच्छा नहीं लगता.

शिव : है है आ जाऊंगा, तेरा दर्द तो ठीक है na?(Samne थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रही)

रंजन : (थोड़ी धीमी आवाज me)Ha सब ठीक है, प्लीज तू जल्दी आ जा न, तेरी बहोत याद आ रही है.

शिव : (उसके बोलने का अंदाज अलग hi था, में सोचने लगा की सब के सामने वो ऐसा कैसे बोल रही है) पागल, सब के सामने ऐसे बोलते है?

रंजन : में पागल नहीं हु, में थोड़ा दूर आ गयी हु. जल्दी आ जाना तू.

शिव : क्यों?

रंजन : क्यों की, वह तो दर्द ख़तम हो गया है, पर पुरे बदन में दर्द सुरु हो गया है, पुरे बदन का दर्द तुजे निकलना होगा, समजा. सरितादिदी मेरी और आ रही है, में उन्हें फ़ोन देती hu.(Me मुस्कुराने laga,tabhi सामने से मुझे सरितादिदी की आवाज आयी)

सरितादिदी : ये क्या गुसुरपुसूर कर रहे थे तुम दोनों?

शिव :कुछ नहीं दीदी, आप कैसी हो?

सरितादिदी : में ठीक हु, तू कैसा है? काब आ रहा है?

शिव : क्या दीदी, आप को पता तो है में काब आ रहा हु, फिर क्यों पूछ रही है?

सरितादिदी : पता तो है पर दिला कहा मान रहा है, ठीक है तू अपना ध्यान रखना और यहाँ की चिंता मात करना, ले में जूही को दे रही हु, न जाने कब से आस लगाए फ़ोन को देख रही hai.(Thodi देर सामने ख़ामोशी छायी रही)

जूही : (धीरे se)Hello.

शिव : Hello, कैसी हो?

जूही : अच्छी हु, तुम कैसे हो?

शिव : में अच्छा हु.

जूही : घर में सब ठीक है न, मेरा मतलब है तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं है न?

शिव : नहीं, सब ठीक है, भाभी मेरा अच्छे से ख्याल रखती hai.(Thodi देर इधर उधर की बात कर के फिर उसने फ़ोन रख दिया, मुझे लगा की कोई पीछे खड़ा है तो मेने मुद कर देखा तो भाभी कड़ी thi)Are भाभी आप, वह क्यों कड़ी है, अंदर आइये न.

भाभी : तो सब से फ़ोन पर बाते हो रही थी?

शिव : है भाभी, वो जूही, अनाथालय गयी थी तो सब से बात करवाई.

भाभी : तुमने यहाँ का क्यों बताया नहीं?

शिव : वो परेशान होती और सब ठीक hi तो है, अगर आप लोग चाहते हो तो आप को hi बताना चाहिए न.

भाभी : (मुस्कुरायी, फिर रठते hue)Tum ऊपर क्यों आगये, तुम्हे पता है न में अकेली hu.(Muje समाज नहीं आया की वो कहना क्या चाहती है) मेरा मतलब है, क्या तुम मुझे निचे अकेला छोड़ कर ऊपर तो सोनेवाले नहीं हो न?

शिव : ऐसा कुछ सोचा नहीं मेने.

भाभी : में अकेले अकेले नहीं रहनेवाली, मुझे अकेले दर लगता है, तुम नीचे आ जाओ.

शिव : ठीक है भाभी, में किताबे ले लेता हु.

हम दोनों निचे आ गए. में आगे के बेठकरूम में सोफे पर बेथ गया और अपनी किताबे खोल ली और पढ़ने लगा. भाभी अंदर कमरे में चली गयी. (ममता अंदर तो आ गयी थी पर उसका मान बहार hi था, पता नहीं शिव ऐसे क्यों व्यव्हार कर रहा था, कल तो उसने मुझे जबरदस्ती पकड़ लिया था और कितनी बेशर्मी से मुझे छू रहा था, वो दृश्य याद आते hi उसकी आंखे बंद हो गयी, उसे अपने सरीर पर हुए उस स्पर्श का एहसास होने लगा, कैसे शिव ने उसके स्तन को दबाया था, उसके निचे भी उसने हाथ दाल दिया था और छेड़ में ऊँगली भी गुसा दी थी. वो याद आते hi एक बार फिर उसके शरीर में तरंगे उठने लगी, उसे ऐसा लग रहा था जैसे शिव अभी भी उसके साथ वही सब कर रहा है, वो उत्तेजित होने लगी, उसका हाथ अपने आप hi अपनी चुकी पर चला गया और उसे वो दबाने लगी, वो मचल रही थी, जैसे जैसे वो अपनी चुचिओ को दबा रही थी उसकी हलकी हलकी सिस्किअ निकलने लगी थी, जीवन में वो ऐसा पहली बार कर रही थी, आज वो खुद अपने आप से खेल रही थी, उसके शरीर में बढ़रही उत्तेजना से उसकी सांसे भी तेज हो गयी थी, उसकी छूट से पानी रिसना सुरु हो गया था, वो अपना एक हाथ निचे ले गयी और अपनी छूट को दबाने लगी, उसके शरीर में बहोत कुछ हो रहा था, उसका रोम रोम शिव को पुकार रहा था, वो बेध्यानी में अपने शरीर से खेल रही थी उसे ऐसा hi लग रहा था जैसे शिव उसके साथ खेल रहा है, अचानक उसकी नज़र दरवाजे पर पड़ी, वो खुला हुआ था, वो हड़बड़ा कर बेथ गयी. दरवाजे को खुला hi छोड़ वो न जाने क्या क्या हरकते कर रही थी. वो उठी और दरवाजे के पास जा कर बहार देखा तो शिव पढ़ रहा था. वो शिव को बड़ी आस भरी नजरो से देखने लगी, उसका दिल कर रहा था की वो जाये और शिव से लिपट जाये, पर वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी. वो एक सीधी सदी घरेलु लड़की थी, जिसने कभी ऐसा सोचा तक नहीं था, पर पिछले कुछ दिनों में उसके मान मस्तिक में घमासान मचा हुआ था. उसके माँ न बन ने से उसके वैवाहिक जीवन में भी भूचाल मचा हुआ था. उसके पति ने भी किसी और के साथ सम्बन्ध बना लिए थे. अगर अभी भी वो ऐसे hi दरसक बानी रही तो उसका जीवन उजाड़ना तय था. उसको शिव के रूप में एक उम्मीद नज़र आ रही थी, पर उसका मन डगमगा रहा था क्यों की उसकी माँ ने कहा था की उसकी एक भाभी ने ऐसा प्रयत्न किआ था पर उसका नतीजा कुछ न निकला, ऊपर से इस वजह से उनकी जो बदनामी हुई वो अलग. दूसरी और शिव उसे बहोत hi ज्यादा अपना लग रहा था, और जिस तरह से वो उसके लिए लड़ गया, ये देख कर तो उसे शिव पर इतना प्यार आया था की वो बयां नहीं कर शक्ति थी, पर उसकी भी मर्यादाये थी, वर्ण वो उसी वक़्त शिव के गले लग जाती. शिव को पढ़ाई में व्यस्त देख कर वो वापस बीएड पर बेथ गयी. वो सोचने लगी की ऐसा क्या हो गया था जो वो ऐसी हरकत कर बैठी. उसे डॉक्टर से हुई बात याद आयी, डॉक्टर ने उसे कहा था की जब औरत गर्भाधान के उचित समय से गुजरती है तब उसके शरीर का तापमान बढ़ जाता है, उन दिनों उसके शरीर में उत्तेजना बढ़ने लगती है. उसे याद आने लगा की हर महीने कुछ दिन ऐसे होते थे जब उसे सेक्स की तीव्र इच्छा होती थी, और भी भी उसका वैसा hi हाल था. अपने आखरी रक्तस्त्राव के समय को वो याद कर के दिन गईं ने लगी, जैसा की डॉक्टर ने बताया था, ये वही समय चल रहा था. उसके दिल में जैसे जलचल सी मची हुई थी. एक बार वो फिर उठी और दरवाजे से शिव को देखने लगी. वक़्त भी काफी हो गया था तो उसने शिव के पास जाने का फैसला लिया. उसका दिल तेजी से धड़क रहा था. वो छोटे छोटे कदमो से चलते हुए शिव के पास पहुंची. उसका आभास होते hi शिव ने ऊपर देखा.

शिव : अरे भाभी आप, नींद नहीं आ रही क्या?

भाभी : है, वो... नहीं... बस ऐसे hi(Use खुद समाज नहीं आ रहा था की वो क्या बोल रही है)

शिव : क्या हुआ भाभी?

भाभी : तुम्हे सोना नहीं है क्या? सुबह फिर जल्दी भी तो उठना है.

शिव : (अपनी किताबे बंद करते hue)Thik है भाभी. मुझे एक तकिया दे दीजिये.

भाभी : तुम यही सो जाओगे?

शिव : है, में सोफे पर सो जाऊंगा.

भाभी :(उसका दिल कर रहा था की वो शिव को कहे की मेरे साथ कमरे में सो जाओ पर मर्यादा उसको ऐसा कहने नहीं दे रही थी, वो एक दो पल खामोश कड़ी रही और शिव को देखती rahi)Thik है, अभी लती hu.(Usne शिव को तकिया और चद्दर ला कर दे दी, उसके चेहरे पर उदासी आ गयी थी पर वो अपने आप को बेबस महसूस कर रही थी, वो छह कर भी शिव को अपने दिल का हल बता नहीं शक्ति थी, मायूसी से वो अपने कमरे की और चल पड़ी)

मुझे उनके चेरे पर छायी मायूसी समाज नहीं आ रही थी, शायद उनके पति हॉस्पिटल में है उस वजह से वो मायूस होगी. आज हम दोनों अकेले थे, मेने जो कल हरकत कर दी थी, अगर वो सहमत होती तो वो जरूर मुझे कुछ कहती, पर उन्होंने कुछ नहीं कहा था, इसका साफ़ मतलब था की वो ऐसा कुछ नहीं चाहती, अगर वो खुद नहीं चाहती तो में जबरदस्ती क्यों उनकी जिंदगी बदलने की कोशिस करू. मेने तकिया रक्खा और सोफे पर लेट गया, मेरी हाइट के सामने सोफे छोटा पद रहा था, जैसे तैसे में सोने की कोशिस करने लगा. (ममता भी मायूसी से बिस्तर पर लेट गयी. वो आंखे खोले छत को घर रही थी. वो सोचने लगी की शायद उसके भाग्य में hi ये सुख नहीं है क्यों की अगर काल उसका पति थोड़ी देर से आता तो शायद सब कुछ हो चूका होता. वो अपने आप को निसहाय महसूस कर रही थी, उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी की वो कदम आगे बढ़ाये. अगर शिव ने पहल की होती वो बिलकुल भी मन नहीं करती.

भाभी : (मान में शिव को पुकार रही thi)Shiv, मेरी मजबूरिओ को संजो, में एक औरत हु, में छह कर भी पहल नहीं कर शक्ति, आ जाओ तुम, में मन नहीं करुँगी, प्लीज शिव, आ जाओ.

मुझे लगा की भाभी मुझे बुला रही है, तो में बेथ गया, पर पुरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था. में भाभी के कमरे के दरवाजे पर भी गया और कान लगा कर सुन ने की कोशिस करने लगा, पर कोई आवाज़ नहीं थी. मुझे यकीं हो गया की ये मेरा वहम था. सोफे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में जमीं पर hi लेट गया. पता नहीं काब मेरी आंख लग गयी.

सुबह, ममता की आंख जल्दी खुल गयी, वो उठी और बहार आयी. उसने देखा की शिव निचे जमीं पर लेता हुआ है. वो कुछ देर उसे देखती रही, वो ऊपर से नंगा था, उसे उस दिन का दृश्य याद आ गया जब उसने शिव को अंडरवियर में देखा था, उसकी नजर एक बार उसके पेअर के जोड़ पर चली गयी, जो चद्दर से ढाका हुआ था पर उभर दिख रहा था. उसने एक मायूसी से आह भरी और बहार चली गयी. आज उसे शिव के साथ hi अस्पताल जाना था तो फटाफट काम करने लगी. आवाजों से मेरी भी नींद खुल गयी, रसोई से आवाजे आ रही थी तो में बाथरूम में चला गया. तैयार हो कर में रसोइमे गया, मुझे देख कर.

भाभी : तैयार हो गए, आओ बैठो, में दूध और नास्ता देती हु. (उन्होंने मुझे वो दे दिया) निचे जमीं पर क्यों सो गए थे?

शिव : सोफे छोटा पद रहा था.

भाभी : तो मुझे जगा देते.

शिव : में आप की नींद नहीं बिगड़ना चाहता था. वैसे जमीं पर भी अच्छी नींद आ गयी थी.

बहार विष्णुभाई की बाइक की आवाज सुनाई दी. थोड़ी देर में हम तीनो सहर चले गए. दोपहर को फिर हम तीनो लौट आये. हम दोनों ने खाना खाया और में ऊपर चला गया, और पढ़ाई करने लगा. ममता ने सारा काम निपटाया. वैसे वो काम निपटने के बाद वो दोपहर को अपने कमरे में थोड़ी देर सो जाती थी, पर आज उसने वैसा नहीं किआ. उसने नीचे का दरवाजा बंद किआ और ऊपर शिव के कमरे की और चल पड़ी.

में पढ़ाई कर रहा था और मुझे आहत सुनाई दी, मेने पीछे मुड़कर देखा तो बहभी कड़ी थी. इस वक़्त उन्हें देख कर मुझे आश्चर्य हुआ.

शिव : भाभी आप, क्या हुआ? (वो दरवाजे पर कड़ी थी, वो मुझे देख रही थी, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, या यु कहे के हलकी हलकी उदासी छायी हुई थी. वो कुछ बोल नहीं रही थी, उन्हें ऐसे चुप देख कर में खड़ा हो गया और उनके नजदीक gaya)Kya हुआ भाभी? (वो टकटकी लगाए मेरी और देख रही थी, उनका ऐसा व्यव्हार मुझे समाज नहीं आ रहा tha)Kya हुआ भाभी, कोई परेशानी है?

भाभी : तुम ऐसा क्यों कर रहे ho?(Unhone हिचकिचाते हुए मुज से सवाल किआ)

शिव : में कुछ समजा नहीं भाभी, मेने क्या किआ?

भाभी : कल परसो रात तुमने मेरे sath...(Wo आगे बोल नहीं पायी और वाक्य अधूरा छोड़ दिया)

शिव : (मेरी समाज में आ गया, वो मेरी उस रात की हरकत के बारेमे बात कर रही hai)Sorry भाभी, में आप से बात करना चाहता था, में माफ़ी चाहता हु मेरे उस बर्ताव को ले कर, मुझे आप के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था. बिना आपकी मर्जी जाने मेने आपके साथ जबरदस्ती कर दी, में सचमे बहोत सर्मिन्दा hu.(Meri और देख रही थी, पर उन्होंने बोलै कुछ nahi)Please भाभी मुझे माफ़ कर दीजिये, में ऐसी गलती दोबारा नहीं करूँगा.

भाभी : (अपनी नज़ारे झुका kar)Mene ऐसा तो नहीं कहा.

शिव : (में कुछ समजा नहीं) आप क्या कहना छह रही है?

भाभी : मेने तुम्हे ऐसा तो नहीं कहा की तुमने कुछ गलत किआ है, या में तुम से नाराज़ हु.

शिव : (भाभी मुज से नाराज़ नहीं थी, मतलब मेने जो हरकत की थी उस से उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं थी, मतलब वो चाहती है की में उनके साथ वो सब करू, ये ख्याल आते hi मेरी धड़कने तेज चलने लगी, फिर भी मेने एक बार पूछ hi liya)Aap नाराज़ नहीं ho?(Unhone ना में गर्दन हिलायी, में उन्हें देख रहा था, और समझने की कोशिस कर रहा tha)Aap सच में नाराज नहीं हो bhabhi?(Unhone फिर से ना में गर्दन हिलायी, मेरी धड़कने बहोत तेज चल रही थी. मेने सीधे सीधे पूछ न hi सही samja)Kya आप चाहती है की में आप के sath...(Meri जबान साथ नहीं दे रही थी, पर उन्होंने अपनी खूबसूरत पलके उठायी, एक पल के लिए मुझे देखा और फिर से अपनी नज़ारे झुका li)Kya आप चाहती है भाभी? (वो कुछ देर ऐसे hi कड़ी रही, पर फिर उन्होंने हां में शिर हिलाया, मुझे उनकी अनुमति मिल गयी थी, में थोड़ा और उनकी और बढ़ा और उनकी थोड़ी को पकड़ कर ऊपर uthaya)Meri और देखिये bhabhi(wo देख नहीं रही thi)Meri और देखिये भाभी. (उन्होंने आहिस्ता से अपनी पलके उठायी और मेरी आंखोमे देखा, में मुस्कुराया तो शर्मा गयी और मेरी छाती से लग गयी)

भाभी : ऐसे मात देखो, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : (उनको बाहोंमे भरते hue)Agar शर्म आ रही है तो फिर आयी क्यों?

भाभी : (मुझे कस्ते hue)Tum बहोत गंदे हो, तुम्हे शर्म नहीं आयी मेरे साथ ऐसा करते हुए.

शिव :(उनकी पीठ सहलाते hue)Sachme भाभी, मुझे आपके साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी, पर अब तो में आपकी मर्जी से कर शक्ति हु na?(Mamta के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो शिव की मजबूत छाती को महसूस कर के उसके साथ चिपकी रही, शिव का हाथ उसकी पिक्थ पर ब्लॉउज के बहार की नंगी त्वचा पर घूमते महसूस कर रही थी, पता नहीं पर उसे ये सब अच्छा लग रहा था, शिव उसके लिए जैसे कोई अंजना नहीं tha)Kahona भाभी, क्या में आप की मर्जी से आपके साथ सब कर शक्ति हु? (ममता को बहोत ज्यादा शर्म आ रही थी, उसने हां में गर्दन hilayi)(Mere चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Abhi या रात को?
 
ी ट्राइड बूत अपडेट है नॉट कम्प्लेटेड येत,
 
अपडेट 91

भाभी मेरी बहो में लिपटी कड़ी थी, मेने जब पूछा की अभी या रात को? तो वो बहोत hi ज्यादा शर्मा गयी. सच में वो बहोत hi ज्यादा शर्मा रही थी, मेने उनका जो रूप अब तक देखा था वो एक बहोत hi अच्छी औरत का रूप था, वो घर को सँभालने वाली और अपनी मर्यादाओ में रहनेवाली एक बहोत प्यारी भाभी के रूप में था. पर अब हमारे बिच जो हो रहा था उस से हमारे सम्बन्ध बदलनेवाले थे. वो लगभग चंद्रपाल भाई के जितनी hi ऊँची थी, इतनी ऊंचाई के साथ उनकी देह किसी लड़की जैसी कमनीय थी, नाजुक और कोमल सी दिखनेवाली एक खूबसूरत लड़की जैसी. शादी सुदा होने से उनके दो अंग थोड़े ज्यादा उभर आये थे, उनकी छाती और उनके नितम्ब. जो उन्हें और ज्यादा आकर्षक बनाते थे. मेने उन्हें इस तरह से कभी नहीं देखा था पर अब सब बदल रहा था, तो मेरे मनमस्तिक में ये सब आना स्वाभाविक था. मेरे सवाल के जवाब में उन्होंने धीरे से कहा.

भाभी : जैसा तुम्हे ठीक लगे.

शिव : (में उनसे थोड़ा सा दूर हुआ, ऊंट्ना hi जितना की में उनका चेहरा देख सकू, मेने उनका चेहरा ऊपर उठाया, तो उन्होंने चेहरा तो ऊपर उठा लिया पर अपनी नज़ारे नहीं uthayi)Bhabhi...(Unhone कोई जवाब नहीं diya)Bhabhi, मेरी और देखो. (उन्होंने फिर भी नहीं देखा, उनकी सांसे तेज चल रही थी, उनका सीना ऊपर निचे हो रहा था, पहलीबार में उनके साइन को देख रहा था, साड़ी थोड़ी सी खिसकी हुई थी तो एक और का उनका स्तन हल्का सा दिख रहा tha)Bhabhi, मेरी और देखो na(Unhone आहिस्ता से अपनी पलके उठायी और मेरी आंखोमे देखा, उनकी आकर्षक आंखे जैसे बहोत कुछ कह रही थी, बहोत कुछ पूछ रही थी, उन अधखुली आँखों में जैसे बहोत कुछ था.) भाभी, में आप की बहोत इज्जत करता हु, अगर ऐसी परिस्थिति निर्माण न होती तो में कभी आपको उस नज़र से देखता भी नहीं, आप एक खूबसूरत और आकर्षक महिला के साथ में एक अच्छी इंसान भी है, और उस से भी बढ़कर आप एक बहोत hi अच्छी भाभी भी हो, आप के बारेमे ऐसा वैसा सोचना भी पाप लगता है, अप्प समाज रही है न में क्या कह रहा hu(Wo मेरी आँखों को पढ़ने की कोशिस कर रही थी) मगर अब ऐसी परिस्थिति का निर्माण हो चूका है की मुझे आप को एक लड़के की तरह देखना होगा, आप समाज रही है na?(Wo फिर कुछ न बोली सिर्फ मेरी आँखों में देखती रही) में आप के साथ वो सब करूँगा जो एक लड़का, लड़की के साथ करता है, आप समाज रही है na(Unhone पहलीबार हलके से हां में शिर hilaya)Hamara रिस्ता भी बदल जायेगा, इसके बाद भले hi दुनिया के सामने आप मेरी भाभी रहो पर आप का और मेरा रिस्ता बदल चूका होगा. हो सकता है आगे चल कर हमारा रिस्ता और कुछ बन जाये, पर जो हमारे बिच रिस्ता बनेगा उसका प्रभाव हमेसा रहेगा.

भाभी : (पहलीबार उनके मुँह से सब्द nikale)Tu जूही की बात कर रहे हो?

शिव : पता नहीं भाभी, शायद है, इस्सलिये में चाहता हु की आप एक बार फिर सोच लीजिये, हम जो करेंगे आज रात को hi करेंगे, तब तक आप अच्छे से सोचविचार कर लीजिये.

भाभी : तुम्हे क्या लगता है शिव, रात टाक क्या कुछ बदल जायेगा, और तुम्हे क्या लगता है, शारीरिक सम्बन्ध hi सब बदल देगा, अभी में तुम्हारे साथ जिस हल में कड़ी हु क्या उसने रिस्ता नहीं बदल दिया, क्या ये सरीर hi सबकुछ है, मान की कोई कीमत नहीं. जिस पल तुमने और मेने ये सोचा उसीपल हमर सम्बन्ध हो चूका है, अब तुम और में कुछ भी नहीं बदल शक्ति. फिर भी तुम्हारे ख़यालात की में कदर करती हु, तुम सच में बहोत अच्छे हो, तुम सामनेवाले की भावनाओ की कदर करते हो, जितना मेने दुनिया देखि है जनि है, अगर कोई औरत या लड़की ऐसे रिश्ते बनाना चाहे तो कोईभी मर्द या लड़का बिना कुछ सोचे उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बना लेता है. पर तुम ऐसे नहीं हो, तुमने जूही जैसी लड़की को भी कुछ नहीं किआ, जब की वो सब कुछ करने को तैयार है, और हो शक्ति है की और कई लड़कीअ भी हो जो तुम्हारे साथ ये सब करना चाहती हो या शायद कर चुकी हो, पर तुम्हे सबकी इज्जत और उसके मान का ख्याल है, यही तुम्हे खास बनता है. ठीक है, हम रात में hi एक होंगे, तब तक तुम अच्छे से सोच लो, क्या तुम आगे बढ़ना चाहते हो, या सिर्फ मुज पर दया दिखाकर मुझे बच्चा देने के लिए hi ये सब करना चाहते हो. क्यों की अगर ऐसा हो गया तो तुम हमेसा के लिए मुज से जुड़ जाओगे.

शिव : पतानहीं भाभी पर मुझे ऐसा लगता है की में आप से जुड़ चूका hu(Me निचे झुका और उनके होठो को चूमने लगा, उन्होंने भी अपने हाथ से मेरा शिर पकड़ा और मुझे चूमने लगी, कितनी hi देर तक हमदोनो एक दूसरे को चूमते रहे, मेरा लुंड भी खड़ा हो गया था और शायद ये उन्हें भी पता था, उनकी सांसे अनियंत्रित थी जो उनकी उत्तेजना को दर्शा रही थी., काफी देर बाद हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को देख रहे थे)

भाभी : अब बताओ शिव, क्या कुछ बाकि रहा है, हम दोनों के बिच?

शिव : आप सच कह रही है, सिर्फ शारीरिक सम्बन्ध hi सब कुछ नहीं होता, फिर भी हम सब रात को hi करेंगे, क्यों की अभी हमें अस्पताल भी जाना है, और अगर अभी ये सब हो गया तो आप अस्पताल नहीं आ पाओगी.

भाभी : में जानती हु.

शिव : आप जानती है, में समजा नहीं.

भाभी : मेने उसे देखा भी है और छुआ भी है तो मुझे इतना तो अंदाजा hai.(Unke चेहरे पर उभर आयी शर्म बहोत प्यारी लग रही थी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Aapne छुआ है वो तो मुझे पता है पर आपने देखा कब?

भाभी : ऐसी हालत में सो जाओगे तो कोई भी देख लेगा और ऊपर से दरवाजा भी बंद नहीं karte.(Wo ऐसे मुस्कुराते हुए कह रही थी की मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी)

शिव : आप को कैसा लगा?

भाभी : (मेरी छाती पर मुक्का मरते hue)Besharam!(Wo मेरी छाती से लिपट गयी, मेने भी उन्हें अपनी बहो में भर लिया, थोड़ी देर baad)Ab तुम पढ़ाई करो, में निचे जाती हु.

शिव : मेरा मान नहीं कर रहा, आपको छोड़ने का.

भाभी : मेरा भी, पर पढ़ाई भी जरुरी है. अब छोडो मुझे.

शिव : एक बार और मुँह मीठा करा दो.

उनके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गयी, फिर से हमारे होठ आपस में मिल गए. थोड़ी देर बाद वो निचे चली गयी और में पढ़ाई करने लगा. विष्णुभाई लेने आये तब में पढ़ाई से उठा, फटाफट तैयार हुआ और नीचे गया. विष्णुभाई बाइक लेके तैयार hi थे. विष्णुभाई को एक मिनट रुकने का बोल कर में अंदर गया, भाभी रसोई से निकल hi रही थी, मेने उनके गाल प् किश किआ तो वो अपने गाल पर हाथ रख कर मुस्कुरादि, में उन्हें bye बोल कर निकल गया. सच में हमारा रिस्ता बदल गया था. स्टेडियम में मेने खूब म्हणत की. फिर हम घर आ गए. विष्णुभाई मुझे छोड़ कर चले गए. भाभी ने खाना तैयार कर लिया था तो हम दोनों उसे ले कर अस्पताल के लिए निकल गए. जैसे hi गांव गुजरा भाभी ने अपना घूँघट निकल दिया और मेरे कंधे से हाथ निकल कर कमर में दाल दिया. मेने आईने से उन्हें देखा तो सो मुस्कुराने लगी. चन्द्रपालभाई की हालत अब अच्छी थी. उन्हें खाना खिला कर जब हम निकलनेवाले थे भाभी ने अपनी सास के पेअर छुए.

भाभी : (मान me)Muje माफ़ कर देना माजी, पर में अपने घर की इज्जत और उसके वारिस के लिए hi ये कदम बढ़ने जा रही हु.

माँ: सदा सुहागन रहो बेटी, दूधो नहावो, पुतो फलो.

हम दोनों वह से निकल गए. हम दोनों घर आ गए. पता नहीं पर अब मुझसे सबर नहीं हो रहा था, हम दोनों जैसे hi घरमे घुसे मेने उन्हें बाहोंमे भरना चाहा.

भाभी : रुको तो, पहले खाना खा lo(Mene रूठने का नाटक करते हुए उन्हें देखा तो वो मुस्कुरा रही thi)Pehle खाना. (हम दोनों एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देख रहे थे और खाना ख़तम kia.)Ab जाओ, नाहा लो और ऊपर मेरा इंतजार करना.

शिव : ऊपर क्यों?

भाभी : नए रिश्ते की शुरुआत में तुम्हारे कमरे से hi करना चाहती हु, अब ज्यादा सवाल मात करो और नाहा कर ऊपर चले जाना, और है थोड़ी पढ़ाई भी कर लेना. में सब काम निपटाकर आती हु.

में नहाने चला गया और फिर ऊपर चला गया. पढ़ाई में भी मान नहीं लग रहा था, बार बार मेरी नजर दरवाजे की और hi जा रही थी. पर फिर मेने पढ़ाई में ध्यान देना hi उचित समजा. में काफी देर तक पढता रहा. जब मुझे बहार आहत सुनाई दी तो में पलट कर देखने लगा, भाभी अपने हाथ में दूध का गिलास ले कर अंदर आते हुए दिखी. उन्होंने अपना सर पल्लू से ढाका हुआ था, उनका आधा चेहरा hi दिख रहा था, उनके चेहरे पर मुस्कान थी और उनके होठो पर लिपस्टिक भी लगी हुई थी. भाभी तैयार हो कर आयी थी. घूँघट होने के बावजूद उनकी चमकती आँखों का आभास मुझे हो रहा था. वो अंदर आयी और उन्होंने दरवाजे को बंद किआ और कड़ी लगा दी. में उनके इस रूप को आश्चर्य से देख रहा था, उन्होंने दूध का गिलास टेबल पर रखा और मेरे सामने कड़ी हो गयी.

शिव : (मुज से रहा न गया तो मेने पूछ hi liya)Bhabhi, ये सब क्या है?

भाभी : ये तुम्हारे और मेरे नए रिश्ते की शुरुआत है, तो फिर ढंग से hi होनी चाहिए.

शिव : पर ये सब?

भाभी : बुद्धू! तुम इन सब का मतलब भी नहीं जानते?

शिव : नहीं भाभी.

भाभी :(उनके दमकते होठो पर चहई मुस्कुराहट को में देख रहा tha)Ye सब, एक लड़की के लिए खास पल होते है, जिसे उसकी सुहागरात कहा जाता है, भले hi में तुम्हारी सुहागन नहीं हु पर आज तुम मेरे लिए उसी जगह पर हो. अब बैठे क्यों हो, मेरा घूँघट उठाओ. (में उठा और उनका घूँघट उठाने के लिए जैसे hi अपना हाथ आगे badhaya)Ruko. (में रुक गया) दुसल्हन का घूँघट उठाने से पहले उसे उपहार देते है.

शिव : मेरे पास तो कोई उपहार नहीं है, अगर आप पहले कहती तो में ले आता.

भाभी : मेने तुम्हे जान बुज कर नहीं कहा था, ताकि में अपना मान चाहा उपहार मांग शकु.

शिव : (मेरी समाज में नहीं आ रहा tha)Kya चाहिए भाभी आप ko(Mere स्वर में थोड़ा दार छलक रहा था)

भाभी : दार क्यों रहे हो, में ऐसा वैसा कुछ नहीं मांगूंगी. और सच कह रही हु, में जो मांगने जा रही हु वो इस दुनिया का सबसे बड़ा उपहार होता है, लड़कीअ अपनी सुहागरात पर इससे छोड़ कर सब मांग लेती है, और मेने भी वही गलती की थी. पर अब मुझे समाज है और में वही तुमसे मांगने जा रही हु. (मेरी तो कुछ भी समाजमे नहीं आ रहा था) मुझे एक वचन चाहिए.

शिव : कैसा वचन.

भाभी : यही की तुम हमेसा मेरा मान रक्खो गए और मुझसे इज्जत से hi पेश आओगे, कभी मेरा अपमान नहीं करो गए.

शिव : ऐसा क्यों भाभी? आप को ऐसे वचन की क्यों आवस्यकता पद गयी?

भाभी : वो इस्सलिये, की एक लड़की जॉब शादी करती है तो अग्नि के फेरे लेते वक़्त hi उसे ये वचन दिया जाता है की उसका पति उसकी इज्जत की रक्षा करेगा, उकसे मान की रक्षा करेगा, पर वो खुद hi उसका मान या इज्जत नहीं करता. वो सोचता है की उसे अपनी पत्नी की रक्षा दुसरो से करनी है उसके मान की रक्षा दूसरोंसे करनी है पर वो खुद अपनी पत्नी को कभी मान नहीं देता. में ये नहीं कह रही की हर कोई एक जैसा होता है पर फिर भी अगर आपने ऐसा वचन लिया है तो उसे ये याद रहता है. ज्यादातर लड़कीअ इस्सके बदले अपनी सुहागरात पर किसी जेवर की अपेक्षा रखती है. आरी पागल, जिस घर की तू हो चुकी है उस घर के जेवर, उस घर का पैसा सब तो तेरा है फिर उसे क्या मांगना. अगर कुछ मांगना है तो अपना मान मानगो.

शिव : में वचन देता हु, में हमेसा आपका मान रक्खूँगा, कभी भी मेरी वजह से आपके मान को हानि पहुंचे ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Sach कहु तो मुझे तुमसे ये मांगने की जरुरत hi नहीं है शिव, पर फिर भी मेने माँगा क्यों की तुम्हे ये याद रहेगा की मेने तुमसे क्या माँगा था, तो कभी ऐसे हालत हो तो तुम्हे याद रहे की, जितनी इज्जत में तुम्हे देती हु तुम्हे भी मुझे उतनी hi इज्जत देनी चाइये. अब तुम मेरा घूँघट उठा सकते हो.

शिव : (मेने उनका घूँघट आहिस्ता से उठा दिया, क्या बाला की खूबसूरत लग रही थी वो, मेने उन्हें हमेसा सीधी सदी hi देखा था, आज उन्होंने ज्यादा तो नहीं पर हल्का हल्का मेकउप किआ हुआ था, आँखों में काजल लगा हुआ था, पलकों पर भी उन्होंने कलर लगाया हुआ था, होठो पे लगी लिपस्टिक उनकी मुस्कान को और ज्यादा आकर्षक बना रही थी. में तो जैसे एक नहीं भाभी को देख रहा था)

भाभी : (ममता शिव की आँखों में hi देख रही थी, उसकी आँखों की चमक दिखा रही थी की उसकी म्हणत अपना रंग दिखा रही है, वो उसके चेहरे को देखने में ऐसे खोया था जैसे आज उसे पहलीबार देख रहा हो, उसे शर्म भी आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, उसे लग रहा था की सच में आज ही उसकी सुहागरात है और शिव hi उसका दूल्हा hai)Aise क्या देख रहे हो?

शिव: आप बहोत खूबसूरत हो.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Sach में?

शिव : है भाभी, सच में, अगर कोई गुस्ताखी हो जाये तो माफ़ कर देना.

भाभी : (मुस्कराहट और बढ़ gayi)Sab माफ़.

मेरे भी चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी, मेने झुक कर उनकी होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन्हें चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट ते हुए मेरे चुम्बन का जवाब देने लगी, उनके मुँह की मिठास में अपने अंदर महसूस करने लगा, जैसे जैसे में होठो को चूस रहा था, मेरा लालच बढ़ता जा रहा था, मेने अपनी जीभ उनके मुँह में प्रवेश करा दी, वो भी अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ने लगी. उनके होठो को चूसते हुए hi मेने अपने हाथ उनके स्तन पर रख दिए, एक पल के लिए उनकी हरकत बंद हो गयी, मेने उनके उन्नत स्तन को हलके से दबा दिया, तो उनकी सांसे तेज होने लगी, हलके हलके सहलाते हुए मेने उनके होठो को चूसना जारी रक्खा, थोड़ी hi देर में वो भी मेरा साथ देने लगी. मेने उन्हें पलंग पर लेता दिया और साइड से आधा उनके ऊपर हो गया,





उनके होठो को चूसते हुए में उनके स्तन दबा रहा था, उनसे साँस लेना दूभर हो गया तो उन्होंने अपना मुँह साइड में करलिया और जोर जोर से सांसे लेने लगी, उनकी छाती ऊपर निचे हो रही थी. होठो की लिपस्टिक आस पास फ़ैल गयी थी, मेने उनके भरे हुए स्तनों को दबाते हुए उनके गले को चूमना सुरु कर दिया.

भाभी : शठ शीइइइइव शहहह शह्ह्ह्ह शीइइइइव. (मेने उनकी साड़ी के पल्लू को साइड में कर दिया और उनके मखमली पेट पर अपने होठ रख diye.)Ohhhhhh शीइइइइव (वो मेरे बालो को नोचने लगी, उनके पेट पर हलके हलके चुम्बन से वो बलखाने लगी, मेने उनकी नाभि में अपनी जिव्हा घुसाई तो वो आगे से धनुस की तरह ऊपर उठ गयी, नाभि को चूमते हुए में अपनी जीभ अंदर घुसा रहा था और एक हाथ से उनके स्तन को दबा रहा tha)Shhhh शीइइइइव अह्ह्ह्हह shiiiiiiiiiv.(Me फिर से ऊपर चला गया और उनके ब्लॉउज के हुक खोलने लगा, उन्होंने एक पल मेरी और देखा और शर्मा कर अपनी नज़ारे घुमा ली. में जैसे जैसे उनके ब्लॉउज के हुक खोल रहा था उनकी शर्म बढ़ती जा रही थी, पर उनके चेहरे पर मुस्कान थी, उसके प्यारे चेरे की मुस्कान, मुझे बहोत अच्छी लग रही थी. मेने सरे हुक खोल दिए और ब्लॉउज के दोनों शिरो को साइड में खिसका दिया. ब्रा में कैद उनके उन्नत स्तन मेरे सामने थे. आज वो पहलीबार मेरे सामने इस अवस्था में थी, वो रूप की देवी आज किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी, मेने ब्रा के बहार के भाग को अपनी ऊँगली से सहलाया तो उन्होंने चद्दर को अपनी मुठी में भर लिया. ब्रा के साथ में उनके स्तन को दबाने laga)Shhhhhh ahhhhhhh(Bra समेत उनके स्तन को दबाने से मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, ब्रा के कोने से एक स्तन का निप्पल का कला घेरा नजर आने लगा था, मेने ब्रा को थोड़ा खिसकाया तो निप्पल बहार आ गया, गोरी त्वचा पर वो कला गहरा घेरा बहोत hi ज्यादा आकर्षक लग रहा था, मेने भाभी के चेहरे को देखा तो वो आंखे बंद किये हुए सब महसूस कर रही थी. मेने झुक कर उस निप्पल को मुँह में भर liya)Shiiiiiiiiiiv (में इतना ज्यादा उत्तेजित हो रहा था की मेने निप्पल को जोरसे चूसना सुरु कर diya)Shhhhhhhh धीरे शिईयिव शहहहहह दर्द हो रहा है shhhhhhh(Mene अपने आप को काबू किआ और हलके हलके निप्पल को चूसने लगा)

शहहह shiiiiiiiv(ab उनकी आवाज में मादकता भरी हुई थी, वो मेरे शिर को सेहला रही thi)Ha ऐसे hi शह्ह्ह्ह (मेने दूसरे निप्पल को भी बहार निकला और उसे भी चूसने laga)Ohhhh शिईयिव shhhhhh(Me बरी बरी दोनों निप्पलों को चूस रहा था, थोड़ी देर बाद मेने उन्हें पलंग पर बिठा दिया तो वो मेरे गले लग गयी, ऐसी अवस्था में उन्हें शर्म आ रही थी, मेने उनके ब्लॉउज को निकला तो उन्होंने सहायता की पर अपना चेहरा नहीं उठाया, मेने ब्रा के हुक भी खोल दिए, और ब्रा को भी निकल दिया, वो मुझसे दूर नहीं हो रही थी, वो बहोत ज्यादा शर्मा रही थी, उनकी यही शर्म मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी, में उनकी नंगी पीठ को सहलाने लगा, गर्म जिस्म का एहसास मुझे अपनी हथेली पर होने लगा, उनके बदन की गर्मी मुझे और ज्यादा उत्तेजित करने लगी, वो भी मेरी पीठ को सेहला रही थी, शायद उन्हें मेरी बनियान अच्छी नहीं लगी इस लिए उन्होंने उसे निकलने की कोशिस की तो मेने भी अपने हाथ उठा कर उनकी सहायता की. जब बनियान उतरी तो एक पल के लिए हमारी नज़ारे टकराई तो वो फिर से शर्मा कर मेरे गले लग गयी, ऊपर से दो नंगे जिस्म आपस में सात गए, उनके स्तन की गोलाई, मुझे अपने शाइन पर महसूस होने लगी, में उनकी नंगी पीठ को शेहला ते हुए उन्हें अपनी और खींचने लगा, वो भी मेरे ऊपर से नंगे जिस्म को सेहला रही थी)

शाइन से लगाए हुए hi मेने उन्हें पलंग पर लेता दिया और में उनसे अलग होने लगा ताकि में उनके नग्न शरीर को देख शकु पर वो मुझे छोड़ नहीं रही थी.

शिव: (प्यार se)Kya हुआ?

भाभी : (शरमाते hue)Muje शर्म आ रही है शिव.

शिव : क्यों?

भाभी : पता नहीं, पर मुझे तुम्हारे सामने ऐसे, शर्म आ रही hai(Me समाज शक्ति था, पर अगर आगे बढ़ना है तो मुझे उनकी शर्म छुडवानी hi पड़ेगी, मेने उनके हाथो को पकड़ा और उन्हें थोड़ा जोर दे कर खुद से दूर करने लगा, जब उन्हें लगा की अब वो कुछ नहीं कर पायेगी तो उन्होंने अपने हाथ से अपने स्तनों को ढकने की नाकाम कोशिस की. ऐसी अवस्था में वो और ज्यादा कामुक लग रही थी, मेने उनके हाथो को पकड़ा और उन्हें पकड़ कर उनके शिर के ऊपर कर दिया, वो अपने हाथ खिंच रही थी पर मेरे सामने उनकी एक न चली, तो उन्होंने अपना शिर एक और कर लिया. मेरे सामने वो ऊपर से पूर्ण निर्वस्त्र लेती हुई थी, उनके आकर्षक स्तन मेरे सामने थे, पूर्ण गोलाई लिए वो स्तन ऊपर उठे हुए थे और उनके ऊपर का कला घेरा उन्हें और आकर्षक बना रहा था, वो अपनी आंखे थोड़ी सी खोल कर मुझे देख लेती थी. में स्तनों पर झुकता चला गया और फिर से उन्हें बरी बरी चूसने लगा, एक हाथ से उनकी झंघे सहलाते हुए मेने उनके पेटीकोट को ऊपर खिसका दिया, वो आपस में अपने पेअर रगड़ रही थी.

भाभी : (वैसे तो में सब कुछ करना चाहती थी पर नारी सहज शर्म आना लाजमी था, शिव जिस तरह से मेरे नंगे स्तन से खेल रहा था मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, पर साथ में मुझे शर्म भी आ रही थी, में उसके सामने आधी नंगी लेती हुई थी, वो मेरे हर अंग से खेल रहा था, मेरी सुडोल झांघो पर उसके हाथ मेरे अंदर की कामाग्नि को भड़का रहे थे. मेरे हाथो को उसने ऊपर पकड़ा हुआ था और मेरी झांघो पर रेंगते उसके हाथ मेरी पंतय में छुपी छूट पर पहुंच गए थे. वैसे तो इस पल का में सुबह से इंतजार कर रही थी पर जब ये पल नजदीक आ रहा था मुझे मेरी शर्म रोक रही थी, हलाकि में महसूस कर रही थी की मेरी छूट चिकने रास से भीग चुकी है, शिव भी ये जान गया होगा की मेरी छूट से रास बह रहा है जो मेरे आनंद को दर्शाता था, पर फिर भी मुझे शर्म आ रही थी. शिव ने जब मेरी छूट को मुट्ठी में भरा तो मेरे अंदर हज्जारो चींटिया दौड़ने लगी, मेरे मुँह से लगातार सिस्किअ निकल रही थी, जिन्हे में रोकने की नाकाम कोशिस कर रही थी. शिव ने मेरे हाथ छोड़ दिए, मेने फ़ौरन अपने स्तन को वापस अपने एक हाथ से छुपा लिया और दूसरे हाथ से अपनी पंतय को पेटीकोट से छुपा दिया. जब मेरी नजर शिव पर पड़ी तो वो अपनी अंडरवियर निकल रहा था. मेरी नजर उसके अंग को देखने के लिए लालायित होने लगी, मेरी नज़ारे उसी जगह अटकी हुई थी. मेने देखा की शिव उसे उतर नहीं रहा है, थोड़ा सा निचे खिसकाए खड़ा है, मुज से साबरा नहीं हुआ तो मेने उसके चेहरे को देखा तो वो मुस्कुरा रहा था. में एकदम से शर्मा गयी, और अपनी नज़ारे झुका ली, पर मुझे वो देखना था तो में चुपके से उस और देखने लगी. शिव ने जैसे hi अपना अंडरवियर उतरा तो उसका वो अंग सामने की और खड़ा था, मेरे मान में सब से पहले यही आया की कितना बड़ा है, क्यों की आज तक मेने जिसे देखा था उसके मुकाबले ये लम्बा और मोटा भी था. मेने जिसे देखा था वो रंग में भी सवाल था पर ये गोरा था, आगे के भाग में बहार झांकता वो गुलाबी रंग के सूपड़ा बेहद आकर्षक लग रहा था,





picture sharing

में उसे देखने में इतना खो गयी थी की मुझे याद hi नहीं रहा की शिव मुझे देख रहा है. जब मुझे एहसास हुआ तो मेने उसकी और देखा, वो अभी भी मुस्कुरा रहा था, मुझे इतनी शर्म आयी की मेने अपनी गर्दन दूसरी और कर दी, पर मेरे चेहरे पर मुस्कान ख़त्म hi नहीं हो रही थी, उसके नजदीक आने का जब एहसास हुआ तो मेरी धड़कन तेज होने लगी, उसने मेरे पेटीकोट का नाडा खोलना चाहा तो मेने हाथ से उसे रोकने की नाकाम कोशिस की, पर उसने मेरे हाथ को हलके से हटाया तो मेने भी कोई विरोध नहीं किआ. उसने मेरे पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसे खिसकने लगा. इतनी शर्म के बावजूद मेने अपने कूल्हे उठा कर उसकी सहायता hi की. उसने पूरा पेटीकोट निकल दिया, फिर से कमरेमे कोई हलचल नहीं थी, में जानती थी वो मुझे देख रहा है, मुझे उसको देखना था पर शर्म बहोत आ रही थी, जैसे तैसे मेने हिम्मत करके कनखीओं से उसे देखा तो वो मेरे हर अंग को आश्चर्य से देख रहा था. अपने शरीर को ऐसे देखता प् कर मुझे अपने आप पर गुमान होने लगा.)





(इस बेमिसाल हुस्न को देख में आश्चर्य चकित था, रंग इतना गोरा था की शरीर पर कई जगह हरे रंग की लकीरे तक साफ देखि जा शक्ति थी, उसके ऊपर कुछ जगह पर काळा टिल, उस हुस्न को चार चाँद लगा रहे थे, सफ़ेद पंतय तो जैसे थी hi नहीं, सपाट पेट और ऊपर उठे स्तन एक बेहद आकर्षक और कामुक नजारा पेश कर रहे थे. थोड़ी देर उन्हें देखने के बाद मेरी नजर पंतय पर अटक गयी, वह छूट का उभरा हुआ भाग स्पस्ट दिख रहा था, मुझे उसे देखना था, में झुका और झंघ पर चूमने लगा, उनके मुँह से निकल रही कामुक सिस्किअ मुझे और भड़का रही थी, छूट से आती वो खुसबू मेरे अंदर उत्तेजना का तूफान ला रही थी, में उस खुसबू को सूंघते हुए हलके से अपनी जीभ निकल कर उसको चाटने laga.)(Bhabhi-Meri हालत बहोत ख़राब हो रही थी, वो मेरे उस अंग से इतना प्यार जाता रहा था की जैसे उसे कोई बेशकीमती खजाना मिल गया हो, एक तरफ तो शर्म आ रही थी पर उसका स्पर्श मेरे अंदर उत्तेजना का समुंदर भर रहा था, में आंखे बंद किये हुए उसका आनंद लेने लगी, जब उसने मेरी पंतय को ऊपर से पकड़ा तो मेरी शर्म ने उसे रोकना चाहा पर मेने अपने हाथ को रोक लिया और चद्दर को पकड़ लिया, में उसे सब कुछ करने देना चाहती थी, क्यों की उसकी हरकते मुझे आनंद दे रही thi)(Shiv- मेने जब पंतय को थोड़ा खिसकाया तो मुझे हलके हलके बाल नजर आये, देखने से लग रहा था जैसे उसे आज hi कटे गए थे. मेने भाभी के चेहरे को देखा तो उनका चेहरा लाल हो गया था, उनके चेहरे पर कामुकता साफ़ झलक रही थी, उस बेहद आकर्षक अंग को में अब पूरी तरह से देखना चाहता था. मेने पंतय को थोड़ा और खिसकाया तो छूट का चीरा नजर आने लगा,





गोर रंग पर काळा बाल के कटे हुए हिस्से नजर आ रहे थे जो कुछ मिली मीटर hi थे. मेने हलके से उस उभरे हुए हिस्से को सहलाया तो भाभी बलखाने लगी. मेने जैसे hi पंतय को थोड़ा और खिसकाया तो अब वो छूट से अलग होने लगी, मेने देखा की अंदर से पंतय पूरी तरह से चिपचिपे रास से भीगी हुई है और जब वो दूर हुई तो छूट से चिप छिपे तर से जुडी हुई थी. वो छूट को छोड़ना hi नहीं चाहती थी, पर मेने जबरदस्ती उसे छूट से अलग किआ और पैरो से निकल दिया.





imageupload

भाभी पूरी तरह से निर्वस्त्र पलंग पर लेती हुई थी. उन्हें ऐसे देख मेरा सबर ख़तम हो रहा था, छूट को किश करते हुए मेने उनके दोनों पेअर फैला दिए और उल्टा लेट गया. अब उनकी प्यारी सी छूट मेरे सामने थी, गोर रंग के होठो से विपरीत हलकी गुलाबी रंगत लिए अंदर का भाग हलके गहरे रंग का था.





छेद के आस पास चिकनाहट देख रही थी. मुज से रहा नहीं गया और मेने अपने होठ वह लगा दिए., नमकीन पर मीठा स्वाद मेरे मुँह में चासनी की तरह घुलने लगा, में अपनी जीभ निकल कर उस अमृत कुंड से चासनी को बहार निकलने लगा)

भाभी : (अपनी छूट पर गर्म जीभ का स्पर्श बेहद उत्तेजनात्मक था, मेरे पति ने मुझे ये सुख शादी के शुरुआती दिनों में दिया था पर अब तो जैसे में भूल hi चुकी थी, और जिस तरह से शिव मेरे उस अंग से प्यार जाता रहा था वो अविश्वसनीय था, सो जिस तरह से मेरी छूट को चाट रहा था ऐसा मेने कभी अनुभव नहीं किआ था. जब वो चूस रहा था तो चूसने की आवाजे तक आ रही थी, इतनी तीव्रता से वो मेरी छूट को चूस रहा था की मेने उसके शिर को hi पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पर दबाने लगी, इतना खुल कर तो में कभी अपने पति के साथ भी आनंद नहीं ले पायी थी, पता नहीं पर शिव के साथ जैसे सब अलग लग रहा था, श्री शर्म छोड़ कर में अपनी एक कोहनी को मोड़ कर उसे देखने लगी, एक हाथ से में उसके शिर को सेहला रही थी, में देख रही थी की कैसे वो मेरी छूट के होठो को चूस रहा है चाट रहा है, ये सब देख कर मेरे अंदर की कामाग्नि जैसे उफान पर थी.





वो इस तरह से चाट रहा था की वो मेरे अंदर के पानी को ख़तम कर देना चाहता हु पर वो जितना चाट रहा था पानी उतना hi तेजी से निकल रहा था, मुझे अपने शरीर में कुछ अजीब सा होने लगा, ये किश तरह की अनुभूति थी मुझे समाज नहीं आ रही थी, पर ऐसा लग रहा था जैसे मेरे अंदर से कुछ निकलने वाला हो, मेरी कमर झटके खाने लगी, जैसे मेरे पति मुझसे वो सब करते हुए धक्के लगते थे में शिव के मुँह पर धक्के लगाने लगी, ये किस तरह का आनंद था मुझे समाज नहीं आ रहा था, में इतनी बेशर्म हो गयी की मेने दोनों हाथो से शिव के शिर को पकड़ लिया और अपनी छूट को उसके मुँह पर दबाने लगी, उसकी जीभ मेरी छूट के छेड़ में अंदर हिल रही थी, मेरा मान करने लगा की वो और अंदर जाए, में शिव के शिर को अपनी छूट पर दबाने लगी, आखिर कर वो पल आ गया जब मेरे अंदर से कुछ निकलनेवाला था, मुझे लगा शिव का मुँह है तो उसके चेहरे पर सब गिर जायेगा, तो में उसके शिर को हटाने लगी पर वो पागल मुझे छोड़ hi नहीं रहा था, वो मेरी छूट को कहते जा रहा tha)Shiv, शीइइइइव शहहहहह अह्ह्ह्हह छोडो सीईव शह्ह्ह्ह मेरे अंदर से कुछ निकलनेवाला है, सीईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव हटो शह्ह्ह्ह तुम्हारे चेहरे पर गिरेगा, शह्ह्ह्ह शिईयिव hato(Me उसके बालो को पकड़ कर उसे हटा रही थी पर वो हैट hi नहीं रहा tha)Shiiiiiiv जल्दी हटो शह्ह्ह्हह्ह मेरा शायद shhhhhh(Muje लगा मेरा पेहसाब निकल जायेगा, शिव के चेहरे पर पेहसाब निकलेगा तो कितना गन्दा लगेगा, वो क्या सोचेगा, )शिईयिव छोड़ो मुझे शहहहहह आआह शह्ह्ह्ह में अब नहीं रुक शक्ति शह्ह्ह्ह सीईव तुम्हारे चेहरे पर hi निकल जायेगा शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव हटो mumiiiiiiiiiii शहहहहह पागल हटो वह से आईईईई में रुक नहीं शक्ति शीइइइइव शहहह तुम्हारे चेहरे पर निकल जायेगा shhhhhh(Wo हैट hi नहीं रहा था पर अब मेरे लिए रुकना नामुनकिन हो गया था, ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ था, मुझे बहोत शर्म आ रही थी पर अब में रुक नहीं शक्ति थी, )अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह shiiiiiiiiiiiiv mummmmiiiiiiiii(Mene अपने आप को रिलैक्स कर दिया और निकलने दिया जो निकलना था, मेरी कमर झटके खा रही थी और साथ में मेरे अंदर से कुछ निकलने लगा, वो कितना अजीब था पर इतना सुखदायक जिसकी मेने कभी कल्पना भी नहीं की थी, में जोर जोर से सांसे लेते हुए बिस्तर पर लेट गयी, मुझे पता था की सब शिव के चेहरे पर गिर रहा होगा, पर में कुछ नहीं कर शक्ति थी, वो मुझे छोड़ hi नहीं रहा था तो में क्या करती, कितना शर्मनाक था, में शिव के चेहरे पर hi मूत दी थी, ऐसा मेने कैसे कर दिया tha)(Shiv- जब वो छूती तो उसने छूट से ढेर सारा रास निकल रहा था, में उसे चार रहा था पर तभी मेने देखा की ढेर सारा पानी भी निकल रहा है, ये मेरे लिए एक नया अनुभव था, एक तेज धार मेरे चेहरे से टकराई, मेरे नाक पर लगने लगी तो मेरा मुँह खुल गया, उनकी छूट से तेज पानी की धार मेरे मुँह में गिर रही थी, थोड़ा सा मेरे गले में भी उतर गया, वो नमकीन पानी मेरे अंदर चला गया. मुझे भी लगा की उनका पेहसाब निकल गया है, एक अजीब सी अनुभूति हो रही थी, किसी लकड़ी की छूट से निकल रही पेहसाब को में इतना नजदीक से देख रहा था, वैसे बुरा लग्न चाहिए था पर मुझे उतना बुरा लगा नहीं, वो गर्म पानी की धार मेरे मुँह में गिर रही थी और फिर बिस्तर पर, थोड़ी देर ये सिलसिला चला, मेने छूट के होठो को फैला कर भी देखा की पानी कहासे निकल रहा है, छूट के गुलाबी छेड़ के ऊपर एक छोटा सा छेद था जहा से ये पानी निकल रहा था. आखरी बार में दो तीन बार जैसे रुक रुक कर पानी निकला. ये नजारा अद्भुत था. जब उनका पेशाब और स्खलन दोनों पुरे हो गए तो में उठा और भाभी को देखने लगा. जब उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ी तो वो फ़ौरन बेथ गयी और पास में पड़े अपने पेटीकोट से मेरा चेहरा साफ़ करने लगी, में मुस्कुरा रहा था.

भाभी : क्या मुस्कुरा रहे हो, मेने कहा था न हैट जाओ. (वो मेरा चेहरा अच्छे से साफ़ कर रही थी)

शिव : अगर हैट जाता तो ऐसा नज़ारा कहा देखने को मिलता.

भाभी : (शरमाते hue)Tumhe गन्दा नहीं लगा, मेने तुम्हारे चेहरे पर...

शिव : नहीं भाभी, मुझे कुछ भी गन्दा नहीं लगा, आप को कैसा laga?(Wo मेरा मुँह पोछते हुए शर्मा रही थी और मुज से नज़ारे चुराने की कोशिस कर रही थी) कहो न भाभी कैसा लगा आपको?

भाभी : (मुस्कुराते hue)Bahot अच्छा लगा, पर मेने कितनी गन्दी हरकत कर दी.

शिव : मेने कहा न मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा.

भाभी : ऐसा क्या अच्छा लग रहा था की मेरा इतना केहनेपर भी तुम हैट नहीं रहे थे.

शिव : में कैसे हैट ता आप का होनेवाला था तो आप को पूरा सुख दिए बगैर कैसे हैट ता.

भाभी : ये क्या था शिव, मुझे पहले कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था.

शिव : क्या! सच में! पर भाभी अगर हम अपने चरम पर पहुंचते है तो अक्सर ये होता है, क्या आप कभी अपने चरम तक नहीं पहुंची.

भाभी : पता नहीं शिव, पर ऐसा तो मेने कभी महसूस नहीं किआ, है वो सब अच्छा लगता था पर ऐसा भी होता है ये मुझे पता नहीं था.

शिव : कोई बात नहीं भभ में हु न, आप को हर सुख की अनुभूति करेंगे.

भाभी : तुजे तो बहोत कुछ पता है, लगता है बहोत जानकार है इन sabki.(Me उनका मतलब समाज रहा था, मेने फीकी सी मुस्कान di)Mera वो मतलब नहीं था शिव.

शिव : (मुस्कुराते hue)Jankari होना तो अच्छी बात है न भाभी, जानकर था तो आज आपके काम आ पाया.

भाभी : में तो बस ऐसे hi कह रही थी, पर एक बात बता अगर तू इतना hi जानकर है तो तुजे जूही का खुला निमंत्रण जरूर समाज आया होगा, तो तू उस से क्यों दूर भागता है?

शिव : जैसे की अब आप को पता है की में इन सब का जानकर हु तो इसका यही मतलब है न की में ये सब कर चूका हु.

भाभी : इसका मतलब तू किसी और को चाहता है, इस लिए जूही से भाग रहा है, ऊपर से जूही तेरे लिए इतना सब कर रही है तो तू उसे इंकार भी नहीं कर प् रहा है, है न.

शिव : ऐसा भी नहीं है भाभी, आप जिसे प्यार कह रही है वो hi तो मेरी समाज में नहीं आ रहा है, मेरे जीवन में और भी है और एक नहीं ज्यादा है, मेरे लिए वो सब उतनी hi महत्व रखती है जितनी की जूही. अभी आप भी उनमे शामिल हो, क्या आप को लगता है की आपके साथ ये सम्बन्ध सिर्फ सेक्स तक सिमित है.

भाभी : (वो भी सोच में पद गयी, ये बिलकुल सही था की, वो सदी सुदा होते हुए भी अभी ऐसी अवस्था में शिव के साथ है, और ये बिलकुल भी गलत नहीं है की वो सिर्फ बच्चा पाने के लिए या सिर्फ सेक्स करने के लिए शिव के साथ है, कही न कही शिव के प्रति उसे भी प्यार है) में तुम्हारी बात समाज रही हु शिव.

शिव : आप तो शादीशुदा है, आपका एक अलग संसार है, तो हो शक्ति है की आप को ज्यादा फर्क न पड़े पर अगर उन्हें मुझसे और भी अपेक्षा ये हुई तो पता नहीं में उन्हें पूरा कर पाव या nahi.(Bhabhi मुस्कुराने lagi)Ab आप क्यों मुस्कुरा रही हो?

भाभी : अब मुझे समाज आ रहा है की जूही क्यों तुम्हारे पीछे पागल हुई जा रही है, वो तुम्हे जानती है, उसे पता है की तुम उसका कभी बुरा नहीं सोच सकते, और जब किसी लड़की को ऐसा साक्ष मिलजाता है तो वो तो उसके ऊपर अपना सबकुछ लुटाने को तैयार हो hi जाती है. उसे भी पता है की लड़के अक्सर इस तक में रहते है की कही उसे एक लड़की या औरत ये सब करने को मिल जाये, और तुम उस से भाग रहे हो. पहले तो मुझे भी लगा था की शायद तुम इन सब में अनादि हो तो कुछ कर नहीं रहे होंगे, पर जब में जानती हु की तुम जान बुज कर अपने आप को रोक रहे हो तो वो भी ये जानती होगी. मतलब उसे भी पता है की तुम जान बुज कर उसे अवॉयड कर रहे हो इस्सलिलिये वो और ज्यादा तुम्हारे करीब आ रही है.

शिव : क्या आप को लगता है की उसे ये पता है?

भाभी : यक़ीनन, उसे पता है की तुम्हारे ऐसे सम्बन्ध किसी और के साथ भी है और फिर भी तुम उसके साथ कुछ भी नहीं कर रहे हो, यही बात उसको तुम्हारी और आकर्षित कर रही है. तुम चाहो या न चाहो, वो तुम्हे छोड़नेवाली नहीं hai.(Wo हुस्ने लगी)

शिव : (दुविधा में उन्हें देखते hue)Aap को नहीं लगता की आपको उसकी फ़िक्र करनी चाहिए.

भाभी : इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति, में भी एक लड़की हु, में उसके जज्बात समाज रही हु, देखो शिव, कुछ बाते हमारे बस में नहीं होती उसे भाग्य पर छोड़ देना चाहिए.

शिव : कितनी अजीब बात है न भाभी, कुछ दिन पहले तक में आप को जनता भी नहीं था और आज आपके साथ इस अवस्था में बेथ कर बाते कर रहा हु (भाभी को भी इस बात का बहन हुआ तो वो अपने आपको छुपाने lagi)Ab छुपाने से क्या फायदा, में सब कुछ तो देख चूका हु, सिवाय एक चीज के.

भाभी : (मेरी और देखते hue)Kya?

शिव : आप का पीछे का नज़ारा.

भाभी : (मुझे मरते hue)Gande कही के, पता नहीं तुम लड़को को वह ऐसा क्या नज़र आता है जो उसे घूरते रहते हो?

शिव : उसके लिए तो आप को लड़का बन न पड़ेगा. वैसे आप भी तो उसे घर रही थी.

भाभी : किसे?

शिव : (अपने घुटनो पर खड़ा हो kar)Isse.

भाभी : (शर्मा kar)Tum बहोत बदमाश हो, में तो तुम्हारी भोली सूरत par...(wo बोलते बोलते रुक गयी)

शिव : मेरी सूरत पर... फ़िदा हो गयी थी, यही कहना छह रही हो न.

भाभी : बड़ा आया, में कोई फ़िदा विदा नहीं हुई थी.

शिव : आपका चेहरा hi बता रहा है.

भाभी : वो तो तेरा भी चेहरा बता रहा है, कैसे लट्टू हुआ जा रहा हे मेरे पीछे.

शिव : में तो मानता हु, आप हो hi इतनी खूबसूरत, की कोई भी आपके पीछे लट्टू हो कर आपके आगे पीछे gumega.(Wo मुस्कुराने lagi)Ab अगर आप को इससे नहीं देखना तो में अपना काम आगे बढ़ाऊ.

भाभी : मुझे शर्म आ रही है शिव, हम दोनों कैसी कैसी हरकते कर रहे है न.

शिव : भाभी, इसी का तो मज़ा है (थोड़ा और नज़दीक खिसक कर मेने उनका हाथ पकड़ा और अपने लुंड को उनको पकड़ाया, वो शादी सुदा थी तो ये उनके लिए नयी बात तो नहीं थी, पर फिर भी वो कभी मुझे देखती तो कभी मेरे उस अंग को, वो उसे हलके हलके सहलाने लगी, मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर से कड़क होने लगा, अब वो सिर्फ मेरे लुंड को hi देख रही थी, जैसे जैसे वो बड़ा हो रहा था वो असचया से उसे देख रही thi)Itna क्या गौर से देख रही हो भाभी?

भाभी : ये बहोत बड़ा है.

शिव : दर लग रहा है?

भाभी : दर तो नहीं लग रहा पर अजीब लग रहा है, मेने इतना बड़ा कभी देखा नहीं तो अजीब लग रहा है.

शिव : आपने कभी इसे अपने मुँह में लिया है? (सच कहु तो मेरे अंदर अब कामाग्नि की लहरें बढ़ने लगी थी, में ये सोच कर hi बहोत उत्तेजित हो रहा था की भोली भली भाभी मेरा लुंड चूस रही है,





उनका आकर्षक चेरा देख में ये यकीं नहीं कर प् रहा था पर अपने अनुभवों से अब में जान गया था की खूबसूरत लड़कीअ भी ये सब करती hai)(Wo मेरी आँखों में देख रही थी, उनके चेरे पर मुस्कराहट नहीं थी पर एक शर्म एक दुविधा थी, करू की न करू की duvidha)Koi जबरदस्ती नहीं है भाभी, अगर आप का मान करे तो hi(Unhone एक बार मुझे देखा और वो थोड़ा नजदीक खिसकी, मेरी धड़कने बढ़ रही थी, वो मेरे लुंड को hi देख रही थी, जब उन्होंने अपना मुँह खोला तो मेरे दिल की धड़कन रुक सी गयी, उन्होंने अपना पूरा मुँह खोला और मेरे लुंड के सुपडे को अपने मुँह में भर लिया, उनके मुँह की गर्माहट महसूस करते hi मेरी आंखे बंद हो गयी. ये मेरे यकीं से परे था, क्यों की में जिस भाभी को जनता था वो इस से बिलकुल विपरीत थी, मेरी आँखों के सामने गे को चारा खिलाती एक पवित्र भाभी की चाबी उभर आयी,, मुझे यकीं न हुआ तो एक बार मेने निचे देखा, वो सच में मेरे लुंड को चूस रही थी, मुझे यकीं hi नहीं हो रहा था, पर वो बड़े प्यार से मेरे लुंड को चूस रही थी, उनकी ये हरकत मुझे पागल कर रही थी क्यों की में ये विस्वास hi नहीं कर पर रहा था की भाभी ऐसा भी कर शक्ति है. वो ज्यादा एक्सपर्ट तो नहीं थी पर फिर भी वो कर रही थी, उन्होंने मेरी और देखा तो मेने उनके शिर को सहलाया, उन्होंने फिर से अपनी नज़ारे लुंड पर डाली और उसे चूसने लगी. मेरे लिए अब रुकना जैसे मुश्किल हो गया था. मेने अपने लुंड को बहार निकला, वो मुझे देखने लगी, मेरी आँखों से उन्हें समाज आ गया की अब क्या करना है, वो सीधी लेट गयी, पर उन्होंने अपने पेअर आपस में सताए हुए थे, ये एक नारी सहज शर्म थी, मैंने उनके पेअर पकड़ कर फैलाये और अपनी पोशण लेते हुए में पैरो के बैठ बेथ गया. मेने भाभी के चेहरे को देखा तो उनके चेहरे पर थोड़ा दर दिख रहा था, में उनके ऊपर झुका और उनके ऊपर अपनी कोहनिओ के बल हो गायम हम दोनों का चेहरा आमने सामने था.

शिव : क्या हुआ भाभी, दर क्यों रही हो?

भाभी : नहीं, में कहा दर रही हु?

शिव : (प्यार से उनके होठ पर हलकी पप्पी कर ke)Apka चेहरा बता रहा है, क्या हुआ, अभी नहीं करना?

भाभी : (मेरी आँखों में देखते hue)Aisi बात नहीं है शिव, वो बहोत बड़ा है.

शिव :(में muskuraya)Kuchh नहीं होगा, में प्यार से करूँगा, ठीक है? (उन्होंने है में गर्दन हिलायी, पर उनके चेहरे पर दर साफ़ दिख रहा था. मेने उनके होठो पर किश करना चालू किआ और साथ में अपने लुंड को छूट के होठो पर रगड़ना चालू कर दिया,

होठो को चूसने के बाद निप्पल को चूसने लगा, पर लुंड को लगातार छूट के होठो के बिच रगड़ रहा था, थोड़ी hi देर में भाभी के मुँह से सिस्किअ निकलने लगी, उनके हाथ मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे अपनी और खींचने लगे. में समाज गया की अब उनके दर पर उत्तेजना हावी हो चुकी है, में उनके चेहरे को देखा और लुंड को छेड़ पर लगा दिया, उनके चेहरे से पता चल रहा था की अब उनका पूरा ध्यान अपनी छूट पर था,

मेने हलके से लुंड को दबाया तो लुंड छूट के होठो को फैलते हुए अंदर उतर गया, उनके चेहरे पर हलकी सी सिकन आयी पर लुंड का सूपड़ा अंदर चला गया,





में उनके चेहरे को hi देख रहा था, अब उनके चेहरे पर रहत के भाव थे, मेने लुंड को आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करना सुरु किआ, अब उनके मुँह से सिस्किअ निकलना सुरु हो गयी, उनके चेहरे पर आये इस कामुकता के भाव को देख कर मेरा लुंड और कड़क होने लगा, में एक ताल में लुंड को अंदर बहार कर रहा था, वो मेरे कूल्हों को सहलाने लगी थी, में उनको hi देख रहा था, जब उन्हें एहसास हुआ की में उन्हें देख रहा हु तो वो भी मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी )अच्छा लग रहा है? (उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उन्होंने है में गर्दन हिलायी) अब दर तो नहीं लग raha(Sharmate हुए उन्होंने ना में गर्दन हिलायी, और मुज से लिपट गयी, में भी मुस्कुराते हुए लुंड को लगातार अंदर बहार कर रहा था, मुझे गले लगाने से उनका मुँह मेरे कान के पास था, उनकी मादक सिस्किअ मुझे और भड़का रही थी पर मेने अपने आप को काबू में hi रक्खा था और आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार कर रहा था)

भाभी : शह्ह्ह्हह्ह आआआहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhh(Unki सिस्किअ उनके आनंद को दर्शा रही थी, (आहिस्ता आहिस्ता मेने लुंड को अंदर करना सुरु किआ, थोड़ा और थोड़ा और अंदर करता गया, आधे से ज्यादा लुंड अंदर चला गया था, भाभी मेरे गाल को मेरे कानो को चुम रही थी, वो अपनी चुदाई के आनंद में खोयी हुई थी, ने थोड़ा ऊपर हुआ तो वो मुझे देखने लगी, हम दोनों की आंखे मिली तो वो शर्माने लगी, उनकी शर्म मुझे और भड़का रही थी, मेने एक स्तन को पकड़ते हुए धक्के लगाने laga)Shhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह shhhh(Wo मुझे देखने से शर्मा रही थी पर उनकी नशे में बोझिल आंखे उनका हल बया कर रही थी., कभी कभी लुंड के धक्के से उनके चेहरे पर सिकन उभर आती थी पर फिर वो आहे भरने lagti)Shhhh ाः अह्ह्ह्ह अह्ह्ह ाः shhhhhh.(Kafi देर करने के बाद में रुक गया, मुझे रुका देख वो मुझे देखने लगी, वो समझने की कोशिस कर रही थी कहहि में झाड़ तो नहीं गया, जो रुक गया, पर शर्म के चलते वो कुछ न बोली, मेने लुंड बहार निकला, अभी भी उनके चेहरे पर सवाल था, में मुस्कुराता और उनकी कमर पकड़ कर उन्हें घोड़ी बनाने लगा तो वो शर्मा गयी, शरमाते शरमाते भी वो घुटनो के बल हो गयी, उनके सुडौल नितम्ब मेरे सामने थे, मेने उन्हें सहलाया और उसकी दरार में मुँह डाला, चुदाई की वजह से छूट से बेहटा पानी पूरी दरार को भिगो चूका था, में चाट कर उसे साफ़ करने लगा तो उन्होंने चद्दर को अपनी मुट्ठी में कास लिया) शहहह स्स्स्सह्ह्ह्ह (मेने उनके गांड के छेड़ को देखा तो वो हलके गहरे रंग का था, जब मेने उसे जीभ से छठा तो उन्होंने मेरी कलाई पकड़ li)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो शठ वो गन्दी जगह है शह्ह्ह्ह. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, फिर से मेने अपनी जीभ गांड के छेड़ पर रगड़ते हुए छूट को भी चाटने लगा, उन्होंने कास के मेरी कलाई को पकड़ लिया tha)Shhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhh(Mene फिर से लुंड को छूट के छेड़ पर लगाया, तो उन्होंने अपने आप को एडजस्ट किआ, उनकी पतली कमर को थमते हुए अपनी और खिंचा तो लुंड छूट में उतर गया, मेने देखा की उनकी पूरी छूट फ़ैल गयी थी, उनके छे का कोई भी हिस्सा खली नहीं था, मेने फिर से लुंड को अंदर बहार करना सुरु किआ तो उन्होंने मेरी कलाई छोड़ दी और फिर से चद्दर को अपनी मुट्ठी में जकड लिया, में लगातार धक्के लगा रहा था, मेरा पूरा लुंड अंदर नहीं जा रहा था, पर उनकी छूट का खुला हुआ भाग ख़तम हो चूका था, मेरे धक्के से वो आगे हो रही थी जिसे में उनकी कमर को पकड़ कर वापस खिंच रहा था, लगातार धक्को से वो फिर से झड़ने के कगार पर पहुंच गयी थी, मेने अपनी स्पीड बढ़ा di)Shhhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीरे शहहह अह्ह्ह्ह shhhhh(Bhabhi- अब में फिर से उसी स्थिति में आ गयी थी फिर से मेरे अंदर से कुछ निकलने वाला था, मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मेरे मुँह से आवाजे बांध hi नहीं हो रही थी, आज पहली बार था की में इतनी देर से ये सब करवा रही थी, मेरी छूट पूरी तरह से भरी हुई थी, अंदर कोई भी जगह खली नहीं लग रही थी, अंदर कुछ अजीब सा लग रहा था, पुरे शरीर में आनंद की चिंगारिया फुट रही थी, में आंखे बंद किये हुए इस पल का मज़ा ले रही थी, जब मेरा फिर से निकलने वाला था तो मेरी आवाजे भी तेज हो गयी थी, घर में कोई था नहीं तो मुझे फ़िक्र नहीं थी, लगातार छूट की दिवलो के घर्षण से में आखिर कर छूटने लगी,





मेरे अंदर से कुछ निकलने लगा में बेहद आनंद में थी की अचानक मुझे तेज दर्द हुआ, वो अंग मेरी छूट को चीरता हुआ और अंदर घुस गया था, मेरी चीख निकलने वाली थी पर मेने अपना मुँह बिस्तर पर दबा दिया, में सेह न पायी और बिस्तर पर उलटी लेट गयी, शिव मेरे ऊपर था और उसका वो लोहे जैसा कड़क डंडा बहोत अंदर तक घुस गया था, मुझे महसूस हो रहा था की अब आगे दीवाल है जो उसे आगे जाने से रोक रही थी, ये अलग तरह का अनुभव था, एक तरफ आनंद था तो दूसरी तरफ तेज दर्द था, में पसीना पसीना हो चुकी थी, शिव के धक्के रुक गए थे जिस से मुझे रहत थी, ये उस तरह का दर्द था जो मैंने अपनी सुहागरात पर महसूस किआ था. में जोर से सांसे लेते हुए अपने आप को सँभालने की कोशिस कर रही थी, शिव मेरी पीठ को चुम रहा था, उसका ये स्पर्श मुझे रहत दे रहा था, जब उसकी आवाज आयी तो मेने आंखे खोल कर उसे देखा, वो पूछ रहा था)

शिव : आप ठीक हो भाभी?

भाभी : (मेरे अंदर दर्द हो रहा था, पर में उसे रोकना नहीं चाहती थी, जैसे तैसे मेने अपने आप को संभाला और उसे हां का इस्सर किआ)

शिव : सॉरी भाभी, पर ये जरुरी tha(Mene गर्दन मोड़ कर उसे देखने की कोशिस की, उसके चेहरे पर मेरे लिए प्यार और केयर थे)

भाभी : (दर्द भरे स्वर me)Me ठीक हु शिव. (मेरी गर्दन को चुम कर वो अपनी केयर दर्शा रहा था, थोड़ी देर ऐसा करने से मेरा दर्द काम हो चूका tha)Ho गया शिव? (उसका वो डंडा अभी भी कड़क था, पर वो रुका हुआ था तो मेने पूछ लिया)

शिव : नहीं भाभी.

भाभी : तुम्हे क्यों इतना टाइम लग रहा है?

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही हो भाभी, क्या आप को अच्छा नहीं लग रहा?

भाभी : ऐसी बात नहीं है, पर कभी उन्होंने इतनी देर तक किआ नहीं, तो मुझे समाज नहीं आ raha.(Mene लुंड बहार nikala)Ahhhhhh.(Mene देखा तो लुंड हल्का लाल है, मेने उन्हें सीधा लेटाया और उनकी टंगे फैला कर छूट को देखा, छूट भी लाल हो गयी थी, मुझे उनपर दया आ रही थी पर इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति था, में फिर से झुका और उनके होठो को चूसने लगा, फिर उनकी आँखों में देख कर)

शिव : सॉरी भाभी, मेने आप को दर्द दिया.

भाभी : (मेरे चेहरे को देखते हुए उन्होंने मेरे बाल ठीक किए) कोई बात नहीं, ये कुदरती है, इससे सहने की ताकत उपरवाले ने हम औरतो को दी हुई है, तू चिंता मात कर. (उन्होंने अपने हाथ से टटोल कर मेरे लुंड को पकड़ा और उसे सहलाने lagi)Isse देख कर मुझे अंदाजा तो था hi(apni छूट के होठो पर लुंड का सूपड़ा रगड़ते hue)Ye मज़ा भी तो देता है, सच कह रही हु, इतना मज़ा मेने कभी अनुभव नहीं किआ tha(Apne छेड़ पर लुंड को सेट कर के वो मुझे अपनी और खींचने लगी, मेरा लुंड फिर से अंदर उतरने लगा, उन्होंने अपने दांत भींच लिए पर मुझे खींचती गयी, लुंड पूरा अंदर चला gaya)Shhhhhhhhhh, (वो जोर जोर से सांसे लेने lagi)Sach में बहोत बड़ा है ये, उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

(अपनी कमर हिलाते हुए वो लुंड को जैसे निचोड़ रही थी, छूट की मासपेशिया मेरे लुंड को खिंच रही thi)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह बहोत अच्छ लग रहा है, shhhhhh(Mene उनके होठो को चूसने लगा तो वो भी मेरे होतो को चूसने लगी, और अपनी कमर से धक्के लगाने लगी, मेने भी धक्के चालू कर दिया, अपने निचे दबोचे में धक्के लगाने laga)Shhhh अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह हआ शहहह हआ ऐसे hi शहहह है शिव शह्ह्ह्ह ऐसे hi सशह्ह्ह, बहोत अच्छा लग रहा है शठ ऐसे hi(Wo मेरे गले को मेरे गाल को चाट रही थी, और अपनी टंगे मेरी कमर में लपेट रही थी, मेने भी धक्के तेज कर diye)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ahhhh(Palang के हलने की आवाजे आने लगी thi)Ohhhhh सीईव शह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह वो पूरा अंदर चला गया है शह्ह्ह्ह वो कही छू रहा है तो बहोत अच्छा लग रहा है, शह्ह्ह्ह ahhhhh(Mene धक्के की स्पीड बढ़ा दी थी, मुझे गर्भाशय की दीवाल सुपडे पर महसूस हो रही थी, वो चिकनाहट और मासपेशिओ का खिंचाव मुझे और उत्तेजित कर रहा था, मेने उन्हें अपनी बहोत में भर लिया, वो अब बिस्तर से थोड़ी ऊपर मेरी बाहोंमे थी, उन्होंने भी मुझे जकड लिया था, सिर्फ निचे का हिस्सा हिल रहा था, वो एक बार फिर झाड़ गयी, में रुका नहीं और लगातार धक्के चालू rakkhe)Shhhh अह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह ऐसा तो मैंने कभी अनुभव नहीं किआ था शहहह शिईयिव ऐसे hi शहहह हआ ऐसे hi शहहहहह समजाओ मेरे अंदर शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहह उफ्फ्फ उफ्फ्फ हआ सीईव shhhhh(Dhakke दे दाना दान चल रहे थे , पूरा पालन चिल्ला रहा था, में थोड़ा ऊपर हुआ और उनके हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी और खींचते हुए धक्के लगाने लगा, सो अपना शिर िद्धार उधर रगड़ रही thi)Ahhhh शहहह शहहह अह्ह्ह्ह ahhhh(Mera भी झड़ने का समय आ गया था, मेरा लुंड फूलने लगा tha)Ahhhh शहहह अभी ये कितना मोटा होगा शहहह अह्ह्ह्हह सीईव शह्ह्ह्ह में छूटनेवाली हु शह्ह्ह्ह.

शिव : भाभी अह्ह्ह्ह अह्ह्ह में भी शह्ह्ह्ह.

भाभी : भर दो शहहह अंदर सब भर दो शहहह अह्ह्ह्ह शहहहहह, में झाड़नेवाली हु शीइइइइइइव अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में गईइइइइइइइ शहहहहह मुम्मीईई अह्ह्ह्हह में गईइइइइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

शिव : में भी भाभी, (जोर से धक्के लगते हुए में वीर्य निकलने लगा)

भाभी : (अपनी छूट में हो रही इस गर्म बारिस को वो महसूस कर पर रही थी, ये पहली बार हो रहा था की वो छूट में लुंड से निकल रहे उस तरल को महसूस कर पर रही थी, कितना सुकून दे रहा था, आखिरी धक्को में उसके मुँह से कराह भी निकल गयी थी, उसे लगा जैसे लुंड उसकी बच्चेदानी कोफाड़ कर अंदर छाला जायेगा. अपनी बच्चेदानी पर हो रही उस गरम बौछार से वो तृप्त हो चुकी थी. उसने शिव को ऐसे जकड लिया था की वो उसे पूरा अपने अंदर समलेना चाहती हो, उसकी कमर झटके खा रही थी और शिव भी झटके कहते हुए झाड़ रहा था, दोनों आंखे बंद किये इस का आनंद ले रहे थे, इस अशीम आनंद का एहसास करने के बाद दोनों की पकड़ ढीली हुई. शिव थोड़ा ऊपर हुआ और भाभी को देखने लगा, पशीने से भीगे चेहरे पर जुल्फों की कई लेट चिपक गयी थी, आंखे खोलने तक की ताकत शरीर में नहीं बची हो उस तरह से आँखों की दरार से वो शिव को देख रही थी, चेहरे पर जैसे कोई भाव hi नहीं थम बस वो शिव को निहार रही थी)

शिव : (चेहरे की लेट सवारते hue)Kaisa लगा भाभी? (कोई उत्तर न देते हुए उसने शिव को फिर से अपनी बहो में जकड लिया, उस मरदाना शरीर के निचे डाब कर उसे सुकून मिल रहा था, उस मजबूत शरीर को अपनी हथेली से सेहला ते हुए जैसे वो उसे अपने किये की सब्बासि दे रही थी, वो पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी, काफी देर वो दोनों ऐसे hi rahe)Ab पूरी रात ऐसे hi रहने का िर्रादा है kya?(Muskurate हुए भाभी मुझे देखने लगी, उनकी आंखे कह रही थी की है मुझे ऐसे hi रहना है, मेने बिस्तर की और dekha)Yaha सोयेंगे कैसे, पूरा गिला हो गया hai(Wo शर्मा गयी, उन्होंने भी नजर दौड़ाई तो बिस्तर पर गीलापन साफ़ दिख रहा था)

भाभी : (शरमाते हुए) निचे चलते है. (में खड़ा हुआ और लुंड बहार निकला तो छूट से ढेर सारा वीर्य बहार निकल आया,) (अपनी छूट से बहते उस तरल को महसूस करते हुए फिर से उसकी आंखे बंद हो गयी )(में उन्हें देख रहा था, छूट के होठो के बिच से बेहटा वीर्य एक कामुक दृश्य प्रदान कर रहा था, उनका गोरा जिस्म मेरे अंदर फिर से उत्तेजना भरने लगा, मेरा लुंड फिर से खड़ा होने laga)(Thodi देर बाद ममता ने अपनी आंखे खोली, उसने शिव को अपने नंगे जिस्म को देखते पाया, उसकी नजर उसके खड़े लुंड पर गयी, उसने शरमाते हुए पास पड़े पेटीकोट से अपने आप को ढकने की कोशिस की)

भाभी : बेशरम, ऐसा क्या देख रहे हो.

शिव : आप को भाभी, सच में आप कमल की हो.

भाभी : (मेरे लुंड की और इस्सर कर ke)Ha मुझे दिख रहा है, मुझे देख कर वो फिर se....Ab नहीं शिव, रात बातो हो गयी है और तुम्हे सुबह जाना भी है.

शिव : कोई बात नहीं, में सब देख लूंगा.

भाभी : क्या देख लूंगा, मुज में अब हिम्मत नहीं है, कोई ितनिदर तक करता है भला. मुझे तो लगा की पुरे महीने का सब एक hi दिन में कर लिया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, चलिए नीचे चलते hai.(Wo बैठने लगी तो उन्हें दर्द महसूस हुआ)

भाभी : अह्ह्ह्ह, दर्द हो रहा hai.(roni सी सूरत से उन्होंने मुझे कहा)

शिव : में ले चलता हु आप को.

भाभी : पागल हो गए हो, मुझे उठा कर सीढिया utaroge.(Unhe देखते हुए में उनके पास गया और उन्हें गॉड में उठा liya)Shiiiv, में गिर जाउंगी.

शिव : मुज पर भरोसा रक्खो, में आप को गिरने नहीं दुनगा.

भाभी : (मेरे गले में बहे डालते hue)Itna तो यकीं है मुझे. पर में कोई छोटी बच्ची नहीं हु.

शिव : आप एक फूल से भी काम हो. चलिए.

भाभी : (शर्मा kar)Aise hi?

शिव : है ऐसे hi(Me उन्हें ले कर बहार निकला और सीढिया उतरने लगा, उन्हें दर लग रहा था वो मुज से लिपट गयी, जब में पूरी सीढिया उतर गया तब जा कर उन्होंने चैन की साँस ली, बहार सन्नाटा छाया हुआ था, उन्हें उठाये हुए hi मेने दरवाजा खोला और उन्हें अंदर ले गया.

भाभी : रुको शिव. (में उन्हें देखने laga)Muje यही उतर दो. (में उन्हें सवालिया नजरो से देखने लगा, मेरी नजरो से वो शर्मा गयी, अपनी नज़ारे jukaye)Muje बाथरूम जाना है.

शिव : (मुस्कुराते hue)To कहिये न, में ले चलता हु.

भाभी : में तुम्हे बाथरूम ले जाउंगी, में इतनी भी बेशर्म नहीं हुई हु.

शिव : मेरे मुँह में किआ वो क्या था.

भाभी : Shiiiiiiv(Wo मेरी छाती से लिपट gayi)Wo सब तुम्हारी गलती थी. (में उन्हें बाथरूम में ले आया, और उन्हें नीचे utara)Ahhhhhh. पेअर भी नहीं रक्खा जा रहा Shiv.(Mene फिर से उन्हें थम लिया, दूसरे हाथ से उन्होंने दीवाल का सहारा liya)Ab तुम जाओ.

शिव : कर लो न भाभी.

भाभी : तुम बहार जाओ शीइइइइव. (वो शर्मा के मुझे कह रही थी, में मुस्कुराते हुए बहार निकल गया, दरवाजा खुला था तो मुझे उनके मूतने की आवाज आ रही thi)(Mamta ने पीछे मुद कर देखा तो शिव दरवाजे पर अपनी पीठ किये दिखा, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने अपनी छूट को देखा तो अंदर से अभी भी सफ़ेद और लाल वीर्य टपक रहा था, ये नजारा उसके लिए नया था, उसने देखा था की ऊपर बिस्तर पर भी सब निकला था और भी भी निकल रहा hai,usne फिर एक बार शिव की और देखा, उसके मान में सवाल उठा, क्या वो माँ बन जाएगी? वो समाज नहीं पर रही थी की, किस बात पर यकीं करे, जो अभी वो देख रही है वो या फिर जो उसकी माँ ने कहा था वो. उसने सब अपने भाग्य पर छोड़ दिया, उस से खड़ा न हुआ गया, उसने शिव की और देखा वो अभी भी दूसरी और देख रहा था, उसने आहिस्ता से pukara)Shiiiiiv. (मेने देखा की वो निचे बैठी हुई है और उनके कूल्हे साफ़ नजर आ रहे है, मुझे अपने कूल्हों की और देखता प् कर वो शर्माने lagi)Muje खड़ा करो. क्या हालत कर दी है मेरी, मुज से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा. (में गया और उन्हें खड़ा किआ, और उन्हें उठा कर बिस्तर पर लेता दिया, और एक चद्दर दाल दी. में वह से जाने laga)Kaha जा रहे हो?

शिव : बाथरूम. फिर आगे सो जाऊंगा.

भाभी : मरूंगी अगर आगे सोये तो, यही आना. (में मुस्कुराते हुए आगया और फिर वही उनकी बगल में लेट गया, उन्होंने अपनी चद्दर में मुझे ले लिया और मुज से लिपट gayi)Thank यू शिव.

शिव : वो किस लिए?

भाभी : मुझे सच में बहोत मज़ा आया.

शिव : तो आप का भी थैंक यू, मुझे भी बहोत मज़ा आया.

भाभी : शिव तुम बहोत अच्छे हो, मुझे नहीं लगा की सिर्फ हमारे बिच सेक्स हुआ है, ये कुछ अलग hi था.

शिव : (उनका शिर सहलाते hue)Ab सो जाओ, सुबह जल्दी उठाना है.

वो मुस्कुरायी, हम दोनों थोड़ी देर एक दूसरे को सहलाते रहे फिर सो गए.
 
अपडेट 92

ममता, शिव से लिपट कर ऐसे सोई थी जैसे वो उसका पति हो, पूरी तरह निर्वस्त्र हो कर बिना किसी संकोच के गहरी नींद में वो सोई हुई थी. रात को देर से सोने के बावजूद सुबह अपने समय पर उसकी नींद खुल गयी. जब उसे अपनी स्थिति का बहन हुआ तो वो शर्माने लगी. उसका पेअर शिव के ऊपर था और शिव का हाथ उसके कूल्हे पर था. अपने पेअर को छू रहे उस लुंड का आभास भी उसे हो रहा था. वो शर्मा रही थी पर इस एहसास से उस का रोम रोम आनंदित था, कल की पूरी घटना उसके सामने जैसे एक पल में गुजर गयी, कैसे उसने शिव के साथ संसर्ग किआ था ये सोच कर hi उसे शर्म आने लगी, उसने शिव के चेहरे को देखा तो वो गहरी नींद में सोया हुआ था. उसने उसकी छाती को सहलाया और उस पर एक पप्पी भी की, उसके ऐसे छूने से hi उसका लुंड हिलने लगा, ये देख कर वो शर्मा गयी. उसने आहिस्ता से अपने पेअर को निचे किआ और उस लुंड को देखने lagi,muskurate हुए उसने लुंड को थम लिया. ऐसी हरकत तो कभी उसने अपने पति के साथ भी नहीं की थी. वो लुंड को हलके हलके दबाते हुए सहलाने लगी, ऐसा करने से उसकी छूट में भी पानी आने लगा, अपनी ऐसी स्थिति पर उसे शर्म आ रही थी, कैसे वो बहकती जा रही थी. सुबह हो गयी थी और वह काम करनेवाली का भी आने का समय था, जो वह सुबह आती थी, और बहार की देखभाल करती थी. वो उठने लगी, उसे अपनी छूट की गहराइयो में हल्का सा दर्द महसूस हुआ, पर अब काफी काम था. वो उठी और कपडे पहन कर बहार चली गयी. उसने देखा की अभी कोई नहीं आया था तो वो बाथरूम में घुस गयी और नहायी. जब वो अपने अंग साफ कर रही थी तब भी उसे बार बार शिव का स्पर्श याद आ रहा था. मुस्कुराते और गुनगुनाते हुए वो नहायी. सुबह का नित्य कर्म ख़तम कर के वो शिव को जगाने गयी. वो नंगा hi लेता हुआ था, उसे देख कर वो शर्माने लगी, कुछ पल वो उसे देखते हुए मन hi मान मुस्काती रही. उसने शिव के ऊपर एक चद्दर डाली और फिर शिव को जगाया.

भाभी : (बड़े प्यार se)Utho शिव, सुबह हो गयी है. (शिव ने हलकी आंखे खोली तो पाया की भाभी अपने शिर पर तौलिया लपेटे हुए सदी पहने थी, ये प्यारा दृश्य देखते hi उसने भाभी को अपने करीब खिंच लिया और अपने शाइन से लगा liya)(Mamta को भी शिव का ऐसा करना बहोत अच्छा लगा, उसके शाइन पर अपना गाल चिपकाये वो उसके निप्पल से खेलने lagi)Utho न, विष्णु आता होगा. (ये इतना प्यारा दृस्य था जैसे कोई बीबी अपने पति को प्यार से जगा रही ho)(Visnubhai का नाम सुन कर मेने आंखे खोल di,aur बैठने लगा, भाभी भी बेथ गयी, मुझे कल की उनकी हालत याद आ गयी)

शिव : आप ठीक ho?(Mene उनके गाल को छू कर ये पूछा था, उन्होंने मेरी आँखों में देखा और है में शिर हिलाया, मेरा मान कर रहा था की उनके होठो को चुम लू पर अभी न मेने ब्रश किआ था न मेने मुँह धोया था तो मेने उनके माथे पर किश kia)Aap आज अस्पताल मात आना, में सब पंहुचा दूंगा.

भाभी : में ठीक हु.

शिव : (उनका गाल सहलाते hue)Muje पता है की आप कितनी ठीक हो, मेने जो कहा है वो कीजिये, में तैयार हो जाता हु.

भाभी : (ममता को शिव का ऐसे हक़ जाताना अच्छा लग रहा था, वो muskurayi)Thik है.

में तैयार होने चला गया. भाभी भी अपने काम में लग गयी. मेने दूध ख़तम किआ hi था की विष्णुभाई की बाइक की आवाज आयी. भाभी भी सब सामान तैयार कर के आ गयी. मेने उन्हें देखा तो वो भी मुझे hi देख रही थी. उनके चेहरे पर शर्म की लाली छ गयी, मेने भी मुस्कुराते हुए हलके से उनके होठो को चूमा. उनके हाथ से सब सामान लिया और बहार जाने लगा.

भाभी : जल्दी आ जाना. (मेने उनकी और देखा तो वो शर्मा गयी, में मुस्कुराते हुए बहार चला गया)

विष्णुभाई : भाभी नहीं आ रही?

शिव : नहीं, उन्हें घर का काम है, चलो. (हम निकलने लगे, मेने पीछे मुद कर देखा तो भाभी मुस्कुराते हुए दरवाजे से मुझे देख रही थी, में भी मुस्कुराया, और हम दोनों चले गए)

ममता मुस्कुराते हुए अंडे सोफे पर बेथ गयी, सब सोच सोच कर hi उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती थी. में अस्पताल गया और सब सामान दे दिया. आंटी ने भाभी के बारे में पूछा तो मेने बता दिया की वो थोड़ी थकी हुई थी और काम भी था तो वो नहीं आयी. उन्होंने भी कोई ज्यादा पूछताछ नहीं की. चंद्रपाल भाई से भी बात कर के उनका हल चल पूछ कर हम स्टेडियम पहुंच गए. दो पहर को में वापस घर पहुंच गया. विष्णुभाई मुझे बहार छोड़ कर hi निकल गए. जब में अंदर गया तो कोई नहीं देखा, मेने आवाज लगायी.

शिव : भाभीईई. (मेरी आवाज सुनते hi वो रसोई से बहार निकली, मुझे देख कर उनके चेरे की खुसी समां नहीं रही थी, थोड़ी हिचकिचाहट से वो मुझे देख रही थी, मेने एक कदम उनकी और बढ़ाया तो उन्होंने भी एक कदम आहिस्ता से मेरी और रक्खा, हमदोनो एक दूसरे को देख रहे थे, मेरे हाथ के सामान को मेने निचे रक्खा और उनकी और बढ़ा तो वो तेजी से दौड़ते हुए मेरे गले लग गयी)

भाभी : ओह्ह्ह Shiiiiiiv.(Mene भी उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया, जैसे कितने दिनों बाद मिल रहे हो ऐसे वो मेरे गले लगी हुई थी, थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi खड़े रहे, ऊपर से थोड़ा दूर हो कर मेने उन्हें देखा तो वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी)

शिव : क्या हुआ?

भाभी : पता नहीं, में कब से तुम्हारी रह देख रही थी, कितनी बार दरवाजे पर आ कर तुम्हे देख कर गयी हु.

शिव : अब तो में आ गया न. (हम दोनों अलग हुए)

भाभी : माजी ने कुछ पूछा?

शिव : नहीं, मेने उन्हें कह दिया की आप की तबियत थोड़ी नरम है, तो आप नहीं आयी. उन्होंने भी कहा की टेंशन की वजह से हो गया होगा. उन्होंने आप को आराम करने को कहा है.

भाभी : तुम हाथ मुँह धो लो, खाना तैयार है.

हम दोनों ने खाना खाया, थोड़ी देर बाद वो आयी जब में सोफे पर बैठा था. जैसे hi मेने उन्हें देखा में खड़ा हो गया और उन्हें अपनी बहो में भरते हुए उन्हें किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, में उतावला हो रहा था, तो मेने उनके कूल्हे थम लिए, उन्होंने मुझे धकेलना सुरु किआ. मेरी समाज में नहीं आया तो में किश तोड़ कर उन्हें देखने लगा.

भाभी : (शरमाते hue)Abhi नहीं रात में.

शिव : आप को ज्यादा दर्द है? (मेने चिंता में पूछा)

भाभी : नहीं, में ठीक हु.

शिव : तो फिर?

भाभी : तुम्हारी एग्जाम है, पढ़ाई पर भी ध्यान दो, में यही हु.

शिव : थोड़ी देर भाभी, थोड़ी देर में क्या हो जायेगा?

भाभी : मुझे पता है तुम्हारी थोड़ी देर कितनी होती है, में नहीं चाहती की मेरी वजह से तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान हो. चलो अपनी किताबे ले आओ.

शिव : क्या भाभी आप भी, मेरा बहोत मान कर रहा है, पता है में पुरे रस्ते आपके बारे में hi सोच रहा था.

भाभी : में भी तुम्हारे बारेमे hi सोच रही थी, मान मेरा भी है, पर इसका ये मतलब नहीं की सब भुला कर सिर्फ इसी में लग जाओ. अभी सिर्फ पढ़ाई, बाकि सब रात में, और वो भी पढ़ाई के baad.(Mene बुरा सा मुँह बनाया तो वो मुस्कुरायी)

मेने किताबे ली और पढ़ने बेथ गया, वो भी वही बेथ गयी और मेरी किताबे देखने लगी. मेने फ़ोन चेक किआ तो संयम के मस्सगे आये हुए थे, वो रोज मुझे पढ़ाई के मश्ग भेज देती थी. में पढ़ने लगा, भाभी भी मेरी किताबे पढ़ रही थी, पता नहीं क्या पढ़ रही थी, पर मेरी किताबे अंग्रेजी में थी फिर भी वो पढ़ रही थी मतलब वो भी पढ़ीलिखी थी. पूरी दो पहर मेने पढ़ाई की. शाम को स्टेडियम से आने के बाद हम दोनों बाइक पे अस्पताल चले गए. दो दिन बाद उन्हें भी छुट्टी मिलने वाली थी. हम दोनों घर वापस आ गए. हम ने खाना खाया. वो काम करने लगी, में सोफे पर बैठा था तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. मेने दरवाजा खोला तो सामने मयाभाभी कड़ी थी, में उन्हें देख कर हैरान था. मेने भाभी को आवाज दी. माया को देख कर वो भी हैरान थी.

भाभी : तुम, यहाँ?

माया :(भोलेपन se)Ha, में पूछने आयी थी की अब उनकी तबियत कैसी है?

भाभी : (भाभी जानती थी फिर भी puchha)Kiski बात कर रही हो?

माया : जी, चंद्रजी की.

भाभी : उस से तुम्हे क्या?

माया : जी, वो तो आप उनसे hi पूछ लीजियेगा.

भाभी : अगर इतनी hi फ़िक्र थी तो अस्पताल चली जाती, यहाँ आने की क्या जरुरत थी?

माया : में वह कोई बखेड़ा नहीं खड़ा करना चाहती थी, घर की बात घर में रहे तो अच्छा है.

भाभी : तुम चाहती क्या हो?

माया : में कुछ नहीं चाहती, जो चाहते है वो चंद्रजी है. उन्होंने बताया नहीं आप को?

भाभी : में तुम्हारे मुँह से सुन न चाहती हु.

माया : (अच्छे से सोफे में बैठते hue)Me उन्हें वो दे रही हु जो तुम नहीं दे पायी, तो वो मुझे इस घर की मालकिन बनाना चाहते है.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Achchha.

माया :(उसको समाज नहींआया की ऐसी बात सुन कर ये मुस्कुरा क्यों रही है, वो तो ये सोच कर आयी थी की माजी घर पर नहीं है, और वो इससे सच बता देगी तो ये खुद hi यहाँ से चली जाएगी और उसका रास्ता साफ़ हो जायेगा, पर उसकी मुस्कराहट उसे समाज नहीं aayi)Mene कोई चुटकुला तो नहीं सुनाया जो तुम है रही हो. है अगर तुम इस घर में रहना चाहती हो तो नौकरानी बन कर रह शक्ति हो.

शिव : क्या बोली तू?

भाभी : सीईव, में बात कर रही हु न.

माया : ये कोण है, तुम्हारा भाई है क्या?

भाभी : तुम्हे उस से क्या?

माया : दिखने में कुछ कुछ तुम्हारे जैसा दिख रहा है इस लिए मेने कहा, और वैसे भी तुम अकेली हो और ये यहाँ तुम्हारे साथ है तो भाई hi हो शक्ति है.

भाभी : (हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, संभल कर भाभी ने kaha)Sab को क्या अपने जैसा समजा है? अभी के अभी इस घर से और मेरे पति की जिंदगी से निकल जाओ, वर्ण...

माया : वार्ना क्या? मेरे पेट में तुम्हारे पति का बच्चा है, अब तो तुम तयारी करो इस घर से और उनकी जिंदगी से जाने की.

भाभी : पुरे गांव को पता है की तुम कैसी हो, तुम्हारे पास क्या साबुत है की तुम कह सको की ये तुम्हारा बच्चा, मेरे पति की वजह से है.

माया : वो तो तुम अपने पति से hi पूछ लेना, वो सब के सामने ये काबुल करेंगे की ये बच्चा उनका hi है.

भाभी : क्यों की वो तुम्हारा असली चेहरा नहीं जानते, मुझे पता है की ये बच्चा उनका नहीं है.

माया : (व्यंग se)Achchha, और तुम्हे ये कैसे पता है? (भाभी मुस्कुरायी, उन्होंने ने मेरी और देखा, में भी मुस्कुराया, वो हम दोनों को आश्चर्य से देख रही थी, मेने मोबाइल में वो वीडियो चला दी, उसे देख कर तो माया के चेहरे का रंग hi बदल गया) ये ye...(Us रात की घटना उसे याद आ गयी, उसे समझते देर नहीं लगी की उस रात क्या हुआ था)

भाभी : (दन्त पिस्टे hue)Ab अगर अपनी खेर चाहती हो तो चुप चाप मेरे पति की जिंदगी से दफा हो जाओ, वैसे भी ये देख कर वो तुम्हे मार मार के इस गांव से निकल देंगे, भरी पंचायत में तुम्हारा चरित्र उछलेगा वो अलग. और इस का तुम पूछ रही थी न, शायद तुमने इस्सके बारे में सुना होगा, िस्सने बृजमोहनभाई और उनके सरे आदमीओ को अकेले hi धूल छतड़ी थी, तो अपने जहँ में कोई खिचड़ी पकने से बेहतर है की तुम खुद hi उनसे रेस्टा तोड़ दो और उन्हें बता दो की तुम्हारा बच्चा गिर गया. अब जाओ यहाँ से. (जो कब से फ़ैल कर बैठी थी वो अब भीगी बिल्ली बन गयी थी, वो दर के मरे शिव को देख रही थी, क्यों की उसने गांव की औरतो से सुना था की किसी लड़के ने बृजमोहन और उसके सरे आदमीओ को अकेले मारा था और इतना मारा था की सब के सब अस्पताल में है, उसे वह से निकलना hi बेहतर लगा, वो अपना शिर झुककर वह से निकल गयी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya भाभी, आपने तो उसे डरा hi दिया, मुझे देख कर तो वो ऐसे दर रही थी की जैसे में नहीं कोई बहुत बैठा हो उसके सामने.

भाभी : उसे डरना जरुरी था, अभी तुम पढ़ाई करो, बाकी बाते रात में करेंगे.

में पढ़ाई करने लगा और भाभी, अपने काम में लग गयी. दो घंटे बाद भाभी आयी और मेरे पास में बेथ गयी. मेने उनकी और देखा तो वो मुस्कुरायी. मेने किताबे बंद कर दी.

भाभी : किताबे क्यों बंद कर दी, तुम पढ़ो, में फ्री हो गयी थी तो यहाँ बेथ गयी, अगर तुम डिस्टर्ब हो रहा है तो में अंदर चली जाती हु.

शिव : नहीं, में भी थक गया हु, बाकि कल कर लूंगा. कहा सोना है, निचे की ऊपर.

भाभी : (उन्होंने शरमाते हुए kaha)Soyenge निचे hi, पर अभी ऊपर चलते hai.(Me भी मुस्कुराया और खड़ा हो गया, उन्होंने आज फिर पानी और दूध ले लिया, हम दोनों ऊपर आ gaye.)Kal दूध वैसा का वैसा hi रह गया था, आज पहले hi पि लो, वर्ण फिर रह jayega.(Unhone दूध मेरी और बढ़ाया, मेने थोड़ा पिया)

शिव : भाभी आप जादूगर हो क्या?

भाभी : (मुस्कुराते hue)Aisa क्यों कह रहे हो?

शिव : आपके हाथ की बही हर चीज स्वादिस्ट लगती है, ये दूध भी कितना स्वादिस्ट है, लीजिये आप भी पि कर देखिये.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Ye गांव का तजा दूध है तो तुम्हे अच्छा लगता है, सहरमे तो पैक दूध मिलता है तो तुम्हे ये ज्यादा अच्छा लग रहा है. और ये तुम्हारे लिए hi है, तुम पि लो.

शिव : अगर आप नहीं पिएगी तो में भी नहीं पिता. (वो मुस्कुरायी, मेने हाथ पकड़ कर उन्हें मेरे पास खिंचा और दूध का गिलास उनके होठो से लगा दिया, वो मुस्कुरायी और फिर दूध पिने लगी, थोड़ा पि कर वो अपने होठ हटाने लगी तो मेने हटाने नहीं दिया, और उन्हें पिलाता गया, थोड़ा दूध उनके होठो से चालक कर बहार गिरा, जब थोड़ा दूध बचा तो उन्होंने मेरे हाथ को धकेला)

भाभी : अब बाकि का तुम पि जाओ. (मेने दूध ख़तम कर दिया, मेने देखा की उनके होठो पर दूध लगा हुआ hai)Kya देख रहे हो.

शिव : आप के होठो पर दूध लगा हुआ hai.(Wo पोछने के लिए उन्होंने साड़ी का पल्लू उठाया तो मेने उनका हाथ पकड़ लिया) ये में साफ़ कर ता hu(Me झुका और उनके होठो को चाटने लगा, उनकी मुस्कराहट और बढ़ गयी, मेने सारा दूध चाट लिया और अब उनके होठो को चूसने लगा, होठो को चूसते हुए दोनों की सांसे तेज हो गयी, थोड़ी देर उनके होठो को चूसने के बाद) पता नहीं चल रहा भाभी की दूध मीठा था या आप ज्यादा मीठी हो.

भाभी : बदमाश, में सब समझती हु. (हम दोनों मुस्कुराये) अगर अभी पता नहीं चला हो तो फिर चेक कर lo(Ye कहकर वो मेरे होठो को चूसने लगी, अपनी जीभ मेरे मुँह में डालते हुए मुझे किश करने लगी, मेने भी उनके स्तन और कूल्हों को मसलते हुए उन्हें चूमने लगा, वो भी मेरे कूल्हों को मसल रही थी, उनके नाख़ून मेरे कूल्हों में धस रहे थे, किश करते करते hi मेने उनकी साडी निकल दी उन्होंने मेरी टीशर्ट को ऊपर से निकल दिया, मेने उनके पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसे निचे गिरा दिया, उन्होंने भी मेरे हाफ पंत को निचे सरका कर उतर दिया, मेने उनके ब्लाऊज को उतर दिया, वो मेरे लुंड को अंडरवियर के ऊपर से hi सहलाने लगी, माहौल काफी उत्तेजक हो गया था, जब वो ब्रा अपने आप hi उतरने लगी तो मेने उनका हाथ पकड़ लिया, मेरी और देखते hue)Kya हुआ?

शिव : में आप को ऐसे देखना चाहता हु.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Kyu?

शिव : पता नहीं पर आप को ऐसे देखने की इच्छा हो रही है, अगर आप को सही लगे तो.

भाभी : (मुस्कुराते हुए) इसमें गलत लगनेवाली क्या बात है, वैसे भी ऐसे एक दूसरे को अपनी इच्छाएं बता कर हम एक दूसरे के नजदीक hi आएंगे, में तुम्हारा ख्याल रक्खूंगी और तुम मेरा एहि तो इस सम्बन्ध को मजबूत बनता है, न तुम और न में, हम दोनों अपनी हवस मिटने के लिए ये सब नहीं कर रहे, तो अगर तुम कुछ भी चाहो मुझे बतादिया करो. (भाभी थोड़ी दूर जा कर कड़ी हो गयी, सच में वो क़यामत लग रही थी, मुझे ऐसे देखते देख वो थोड़ी शर्मा रही थी पर उन्होंने अपने किसी अंग को ढकने का प्रयास नहीं किआ. जो उनका समर्पण दर्शाता था, उनको ऐसे देख कर मेरे अंडरवियर में लुंड पूरी तरह तन गया tha)Kaisi लगी?





शिव : आप दिल और चेहरे से जितनी खूबसूरत हो उतनी hi अपने शरीर से भी खूबसूरत हो, आपको देख कर मेरा क्या हल हो रहा है ये में hi जनता हु.

भाभी : (शरमाते hue)Muje वो देख hi रहा है.





(उनकी निग़ाहोंको देखा तो वो मेरे लुंड को देख रही थी, में भी मुस्कुरा दिया, में उनके नजदीक गया और उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया और उनके गले को और चेहरे को चाटने और चूमने लगा, अपनी खूबसूरती से प्रभावित इस युवक का स्पर्श और और आनंदित कर रहा था, वो भी उसको सेहला कर उसका उत्साह बढ़ा रही थी)

मुज से अब रहा नहीं गया तो मेने उन्हें उठाया और पलंग पर लेता दिया. आधे घंटे तक उनको प्यार करता रहा आखिर कर कर मेरा लुंड उनके अंदर था. उनके चेरे पर आज भी हलकी सिकन थी. में आहिस्ता आहिस्ता धक्के लगाने लगा. हम दोनों ने खुल कर प्यार किआ और आखिर मेरा वीर्य उनके अंदर भरने लगा, हम दोनों हफ्ते हुए एक दूसरे से लिपटे अपने आप को दुरस्त कर रहे थे.





थोड़ी देर बाद में साइड में लेट गया तो वो मेरी बाजु पर अपना शिर रक्खे लेती हुई थी.





शिव : भाभी, मजा आया? (उन्होंने मेरी और देखा, और अपनी तंग मेरे ऊपर चढ़ाते हुए)

भाभी : है शिव, तुम्हे?

शिव : है भाभी, बहोत. (फिर से हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे, थोड़ी देर बाद वो मेरी आँखों में देख रही thi)Bhabhi एक बात पुछु?

भाभी : पूछो.

शिव : भैया को वो वीडियो कैसे दिखाएंगे?

भाभी : उन्हें दिखने की कोई जरुरत नहीं है.

शिव : (मेरी समाजमे नहीं aaya)Aisa क्यों भाभी?

भाभी : जिस तरह से मेने माया को धमकाया है, वो उनसे रिस्ता तोड़ देगी, और अगर वो ऐसा न भी करे तो वो कभी ये दवा नहीं करेगी की वो मेरे पति से प्रेग्नेंट है, हो शक्ति है की वो पैसो के लिए मेरे पति से सम्बन्ध बनाये रक्खे. वैसे भी वो विधवा है, उसकी भी कुछ निजी जरूरते होती होगी. इस संसार में बेसहारा औरतो का जीना बहोत मुश्किल है. सच कहु तो मुझे उस पर दया आती है, वो अपनी दूसरी सदी का सोच रही है तो कुछ बुरा नहीं सोच रही. बस उसे सही रास्ता चुन न चाहिए. वैसे भी मेरे पति की हड्डी टूट गयी है, एक दो महीने तो वो उसके पास जा नहीं पाएंगे. और अगर उपरवालेने चाहा और मेरे भाग्य में होगा तो, तब तक तो मेरी कोख भी भर चुकी होगी, फिर उनको उसके पास जाने की जरुरत hi नहीं पड़ेगी. अगर ये वीडियो हम उनको दिखते है तो उनको यकीं हो जायेगा की वो बाप नहीं बाण शक्ति, ऐसे में अगर में गर्भवती हुई तो मेरे ऊपर सवाल खड़े हो शक्ति है, इस से बेहतर है की उनको इस बात से बेखबर hi रक्खा जाये. फिर जैसा मेरा भाग्य.

शिव : आप जरूर माँ बन जाओगी.

भाभी : (उसका चेहरा सहलाते हुए वो मुस्कुराती hai)Tuje ये कैसे पता.

शिव : मुझे यकीं है भाभी, आपका भाग्य इतना भी ख़राब नहीं हो शक्ति, आपने कभी किसी का बुरा नहीं सोचा, यहाँ तक की जो माया आपका बुरा छह रही थी उसे भी आपने बुरा नहीं कहा, आप उसका दर्द समझती हो, जो आपका बुरा चाहता है उसका भी आप भला hi सोचती हो, ऐसे में ऊपरवाला इतना भी निष्ठुर नहीं हो शक्ति की वो आप को दुखी देख शेक. आप जरूर माँ बनेगी.

भाभी : सच कहु तो मुझे भी ऐसा hi लगता है, पता नहीं पर मुझे अंदर से ये एहसास हो रहा है की में माँ जरूर बानगी. पर कुछ ऐसी बाते है जिनके चलते मान थोड़ा डगमगा जाता है.

शिव : ऐसी क्या बात है?

भाभी : सच कहु तो में भी ठीक से नहीं जानती, और विश्वास करना भी मुश्किल है, पर ऐसा हो रहा है, हमारे खंडन में कोई भी माँ नहीं बन पायी है, न बहुए और न लड़कीअ. मेने माँ से पूछा भी था पर उन्होंने कुछ न बताया. इस लिए मेरे मान में शंका hai.(Aur मुझे छेड़ने के अंदाज me)Jaise मेरे पति में कमी है वैसे अगर तुम में भी कमी हुई तो?

शिव : (मेने उन्हें देखा तो वो नटखट सा मुस्कुरा रही thi)Kya आप को लगता है ऐसा.

भाभी : ये किसी के चेहरे पर थोड़ी न लिखा होता है, ये तो नतीजे से hi पता चलता है, है अगर तुम्हारी शादी हुई होती और तुम दो चार बच्चे के बाप होते तो शायद यकीं हो जाता.

शिव : (वैसे तो वो मजाक hi कर रही थी, पर हो शक्ति है की उन्हें शंका हो, में चाहता था की उनके मान में जरा सी भी शंका न रहे, क्यों की माँ बन ने के लिए अंदर से पूरी तरह पॉजिटिव होना जरुरी hai)Bhabhi, एक बात कहु.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Ki तुम आलरेडी बाप बन ने वाले ho.(Me आश्चर्य से उन्हें देखने लगा, उनके चेहरे पर गंभीरता थी) जितना में तुम्हे जानती हु, तुम किसी के साथ हवस मिटने के लिए तो सेक्स करोगे नहीं, या तो वो तुम्हारी चाहनेवाली होगी या कोई जरूरतमंद. और जिस तरह से तुम मुझे बता रहे थे की बहोत है, उस से तो यही साबित होता है की तुमने इसीवजह से सब किआ होगा.

शिव : (उनकी और आश्चर्य से देखते hue)Bhabhi, आप बहोत चालक हो, आपसे तो कुछ बोलने से पहले भी दस बार सोचना पड़ेगा. (मेरी बात से वो मुस्कुरायी)

भाभी : क्यों मुझसे दर लग रहा है?

शिव : मुझे किसी बात का दर नहीं भाभी, वैसे भी उपरवाले ने मुझे कुछ दिया hi नहीं जिस के खोने का दर लगे, और आप पर में आंखे मुंड कर विस्वास कर शक्ति हु, तो फिर दर किस बात का.

भाभी : सच कहु तो मुझे ये जिज्ञासा हो रही है की वो कोण होगी जो तुम्हारे बच्चे की माँ बन ने वाली होगी, पर में पूछूँगी नहीं, क्यों की में तुम्हे जानती हु, तुम बताओगे नहीं क्यों की तुम उसकी इज्जत किसी के भी सामने उछालोगे नहीं. पर मुझे यकीं है की एक न एक दिन मुझे पता चल जायेगा, और ये भी जानती हु की उसको भी मेरे बारेमे पता चल hi जायेगा.

शिव : ये कैसे कह शक्ति है आप.

भाभी : पता है मुझे, कभी न कभी तो मुलाकात होगी hi, और चाहे उसकी जबान न बोले पर उसका चेहरा तो सब बयां कर hi देगा, जैसे मेरा चेहरा तुम्हारे प्रति मेरा प्यार छुपा नहीं शक्ति वैसे hi उसका भी चेहरा छुपा नहीं पायेगा.

शिव : ऐसी बाते मात करो भाभी, आप के प्रति में खींचता चला जा रहा हु और अगर ऐसा hi हुआ तो में फिर से आपके साथ वो सब करने लगूंगा.

भाभी : (मुस्कुराते hue)To रोका किसने है.

में मुस्कुराया और उनको अपने ऊपर खिंच लिया और उन्हें किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, लुंड खड़ा हो कर फिर से नन्ही से छूट को फैलते हुए अंदर उतर गया.





फिर वहॉ प्यार सुरु हो गया. दोबारा मेने अपना वीर्य उनके अंदर भर दिया. दूसरे दिन भी यही सब चला, वो मुझे किसी भी बात के लिए मन नहीं कर रही थी, मेरी पढ़ाई का ध्यान रखते हुए वो मुझे कभी टोकती नहीं थी. तीसरे दिन चन्द्रभाई और माजी घर आ गए. दिन में तो कुछ न हुआ पर देर रात वो फिर से ऊपर आ गयी. मेने उन्हें पूछा भी तो उन्होंने बताया की डॉक्टर की गोली की वजह से वो सो गए है. फिर से ह्यूमेन प्यार किआ. वैसे hi और दो दिन गुजर गए. उस रात को जूही का फ़ोन आया की वो कल सुबह ट्रैन से आ रही है. भैया तो जा नहीं शक्ति थे तो में hi चला गया. मुझे देख कर वो बहोत खुस हो गयी और वही सबके सामने मेरे गले लग गयी. फिर जब उसको ख्याल आया की यहाँ सब देख रहे है तो वो शर्मा गयी और हम बाइक से घर की और चल पड़े.
 
अपडेट 93

में और जूही घर की और जा रहे थे, अभी सुबह हुई नहीं थी, सूरज अभी भी निकला नहीं था, सिर्फ आसमान में उजाला हो चूका था. सुबह की ठंडी तजि हवा चल रही थी. सुबह की ठंडक को जूही का गर्म जिस्म मुझे छूने नहीं दे रहा था, वो पूरी तरह से सात कर मेरे साथ बैठी हुई थी, उसके शरीर की गर्माहट में अपनी पीठ पर साफ़ महसूस कर रहा था, उसने अपना एक हाथ मेरे कमर में लपेटे हुए था और दूसरा हाथ मेरी झंघ पर रक्खा था.

जूही : और, कैसा रहा मेरे घर पे रहने का अनुभव?

शिव : अच्छा है, ऐसा लगा hi नहीं की में कही बहार हु.

जूही : वो hi तो में तुमसे कह रही थी, है भैया थोड़े वैसे है पर वो भी अच्छे है, माँ और भाभी का तो क्या hi कहना. भाभी ने तुम्हारा ख्याल अच्छे से रक्खा न?

शिव : (अब में क्या कहता की भाभी ने कितना ख्याल रक्खा hai)Hmmmm., वह सब ठीक है न?

जूही : है सब ठीक है, में रोज तुम्हारे अनाथालय जा आया करती थी, गायत्री भी रोज गयम में मिल hi जाती थी.

शिव : उन्हें काम आ गया?

जूही : है, अच्छी है, वैसे ज्यादा बोलती नहीं पर अपने काम में अच्छी है.

ऐसे hi हम बाते करते हुए गांव आ गए, जैसे hi गांव आया वो थोड़ी दुरी बना कर बेथ गयी, में समाज सकता था. जब हम घर पहुंचे तो विष्णु भाई खड़े थे.

जूही : कैसे हो भैया?

विष्णुभाई : अब मुझे क्या होना है, तू सुना, कैसी है?

जूही : में भी ठीक हु, पारुल और घर में सब अच्छे है न?

माँ : है सब अच्छे है, अब बहार hi खड़े रहने का िर्रादा है क्या? (माँ मुस्कुराती हुई अपनी लाड़ली की और बढ़ी, जूही जा कर उनके गले लग गयी)

जूही : कैसी हो माँ, भैया की गाड़ी कड़ी है, वो लेने क्यों नहीं आये?

माँ : सब बताती हु, तू अंदर तो आ, आओ बीटा तुम भी अंदर आओ. (उन्होंने विष्णुभाई को कहा, हम सब अंदर गए) जा भाई को उनके कमरे में जा के मिल ले.

जूही : कमरे में क्यों?

माँ : तू जाएगी तब तो पता चलेगा.

जूही कमरे में गयी, हम सब भी उसके पीछे पीछे कमरे में दाखिल हुए. भाभी उन्हें दवाई खिला रही थी.

जूही : ये क्या हुआ? भैया आप ठीक तो हो न? किसीने मुझे बताया भी नहीं.

माँ : सब ठीक है, तुजे परेशां करना नहीं चाहते थे, इस लिए नहीं बताया.

जूही : पर ये सब हुआ कैसे? भाइये को इतनी चोट कैसे लगी?

माँ : तुजे तो पता है की तेरे चाचा के घरवालों के साथ हमारा बरसो से किसी न किसी बात पर झगड़ा हो जाता है, उसी का नतीजा है ये. पर अब सब ठीक है.

जूही : क्या, छोटे मोठे जगदे तो हो जाते थे पर भैया को इतना मारा है की उनको प्लास्टर लगाना पड़ा.

माँ : उनके घर जा कर देख तो पता चलेगा, वह ऐसी कई खातों पर लोग लेते हुए है और साथ में तुम्हारे बृजमोहनभाईया भी.

जूही : क्या? इतना बड़ा जगहदा हो गया, अपने मारा उनको bhaiya?(Chandrapal बोलै कुछ नहीं पर शिव को देखने लगा, जूही की समाजमे नहीं आया की वो शिव को क्यों देख रहे है, उसने सवालिया नजरोसे शिव को देखा फिर अपनी माँ को)

माँ : है, उन्हें शिव ने मारा, वो तेरी भाभी के बारे में अनब सनाब बोलने लगा तो शिव ने उसको hi नहीं उसके सरे आदमीओ को मारा, सिर्फ मारा नहीं, इतना मारा की सब के सब खटिया पर है.

जूही : (शिव की और देख kar)Kya, तुमने? (वो मेरे कंधे और बाह को टटोलने lagi)Tumhe तो कही चोट नहीं आयी न? (जब जूही को एहसास हुआ की वो अपने भाई और माँ के सामने hi मुझे ऐसे छू रही है तो वो थोड़ी झेप गयी, फिर संभल kar)Tumhe कितनी बार मन किआ है, जगहदो से दूर रहो, तुम्हे कही चोट लग जाती तो?

माँ :(अपनी बेटी की हरकत को नजर अंदाज करते hue)Use क्यों दन्त रही है, अगर वो नहीं होता तो पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता, तेरा भाई किसी को मुँह दिखने के काबिल न होता, मर खा कर उसकी क्या इज्जत रह जाती, इसकी वजह से तो सब सही हो गया है, तुम्हारे चाचा के घरवालोने भी अपना जगहदा ख़तम कर लिया है, तेरी चची और बृजमोहन की बीबी, दोनों रोज अस्पताल में मुझसे मिलने आती थी. उन्होंने भी जगदा छोड़ कर मेल मिलाप से रहने का फैसला किआ है. ये सब इसकीवजह से हुआ है और तू इससे hi दन्त रही है.

जूही : (शांति se)Aisi बात नहीं है माँ, ये हर जगह ऐसा करता है, किसी न किसी के जगहादे में अपनी तंग घुसा hi देता है, अगर इससे चोट लग गयी तो उसको दौड़ने में परेशानी होगी, और इससे अभी बहोत से मुकाम हांसिल करने hai.(Sab जूही को गौर से देख रहे थे, सब उसे शिव की इतनी फ़िक्र करते देख हैरान थे, सब की नजर का मतलब समाज कर वो थोड़ी झिझक गयी और शर्मा भी गयी, सब चुप थे)

विष्णुभाई : बाते तो बाद में भी होती रहेगी, हमे देर हो रही है जाने में.

जूही : है चलिए, माँ में भी जाती हु, मुझे भी कोच ने बुलाया है.

माँ : ठीक है बेटी.

जूही : सॉरी भाभी, में आप से तो मिली hi नहीं, आ कर आपसे मिलती hu(Bhabhi सिर्फ मुस्कुरायी, एक बार मेरी और भाभी की नज़ारे भी मिली, उन्होंने शर्मीली मुस्कान दी और अपने काम में लग गयी, हम तीनो वह से निकल गए, मेने एक बाइक ले ली और जूही उस पर बेथ गयी, दूसरी विष्णुभाई चलने लगे, मेरी बाह पर मरते hue)Tumne मुझे बताया नहीं की इतना सब हो गया?

शिव : (उसने इतना जोर से मारा था की मेरे मुँह से निकल gaya)Ahhhh, क्या करती हो.

जूही : तुम्हे तो में इतना मरूंगी की याद रक्खोगे. (में मुस्कुराने लगा) है क्यों रहे हो, तुमने मुझे बताना भी ठीक नहीं समजा?

शिव : ऐसी बात नहीं है, में तुम्हे परेशान नहीं करना चाहता था, और वैसे भी सब ठीक था, और में भी तो था, तुम आ कर भी क्या कर लेती, खामखा परेशान होती. इस्सलिये तुम्हे नहीं बताया.

जूही : फिर भी तुम्हे मुझे बताना चाहिए था, मुझे तुम पर इतना गुस्सा आ रहा है की....

शिव : कीई.

जूही : (में थोड़ा पीछे मुद कर पूछा था तो उसने मेरे गाल पर पप्पी कर di)Thank यू.

शिव : (मुस्कुराते hue)Gusse आ रहा था और पप्पी.

जूही : (मुस्कुराते hue)Thank यू, तुमने मेरे घरवालों का ख्याल रक्खा.

शिव : इसमें थैंक यू कैसा, में भी घर में रहता हु तो में भी उस घर का हिस्सा hi हुआ न, अगर कुछ होता है तो ये मेरा फर्ज था.

जूही : तुम क्यों इतने अच्छे हो?

शिव : अब जैसा हु वैसा हु.

हम दोनों मुस्कुराये, ऐसे hi बाते करते हुए हम स्टेडियम पहुंच गए. हम सबने प्रैक्टिस की, मेरा परफॉरमेंस तो वह सब से अच्छा था hi पर जूही भी बेस्ट थी, कोच ने भी तारीफ की.

कोच : देखा juhi,tumne अभी भी अपना दम ख़म खोया नहीं है, तुम फिर से स्टेट लेवल में पार्टिसिपेट कर सकती हो. इस इवेंट के नतीजे भी वह जायेंगे तो तुम्हे एंट्री मिलजाएगी.

जूही : थैंक यू सर, ये सब पिछले कुछ समय की ट्रेनिंग का नतीजा है, इससे ट्रैन करते करते मेरी भी ट्रेनिंग हो गयी.

कोच : चलो अच्छा hi हुआ. सबका परफॉरमेंस देख कर तो यही लगता है की इस कैंप में लड़को में ये और लड़कीओ में तुम hi विजेता बनोगे. पर फिर भी नतीजा तो नतीजा होता है, तो अपना बेस्ट hi देना. तीन दिन बाद कॉम्पिटिओं है तो तैयार रहना. और शिव को भी कुछ प्राइवेट इवेंट में और ऑफिसियल इवेंट में पार्टिसिपेट करवाओ, तो चार महीने बाद होनेवाले स्टेट चैंपियनशिप में इसकी भी एंट्री हो जाएगी. अगर कोई दिक्कत हो तो मेरा कांटेक्ट करना.

हम दोनों : ठनक यू सर.

हम तीनो वह से घर की और निकल गए. विष्णुभाई ने जूही को घर आने का निमंत्रण दिया और वो घर चले गए. हम दोनों फ्रेस हुए और सब खाने बेथ गए. जूही को ये देख आश्चर्य हो रहा था की भाभी और माँ दोनों शिव का अच्छे से ख्याल रख रहे थे, ऐसा लग hi नहीं रहा था की शिव मेहमान है, ऐसा hi लग रहा था की जैसे शिव इस घर का hi सदस्य है.

जूही : क्या बात है, जब में इससे यहाँ छोड़ कर गयी थी, उस दिन और आज में कितना अंतर है, उस दिन शिव यहाँ मेहमान था और आज लगता है में मेहमान हु.

माँ : ऐसा क्यों कह रही है?

जूही : तुम्ही देखो, भाभी मुझे पूछ पूछ कर सब दे रही है और शिव को बिना मांगे hi दे रही है, ऐसा लगता है जैसे उन्हें शिव की सब आदतों का पता चल गया हो, बिना मांगे उसे रोटी दे रही है, सब्जी दे रही है, ऐसा लगता है की जैसे उन्हें पता है की शिव कितना खायेगा.

माँ : तो इसमें कोनसी बड़ी बात है, वो इतने दिन से यहाँ है तो क्या पता नहीं चलेगा. ये के गृहिणी के लक्षण है, तू तो रहती कहा है yaha,aati है तू एक दिन में भाग जाती है, तो कैसे किसी को पता chalega.(Apni बहु ko)Beta तू अपना काम कर, ये तो ऐसे hi बोल रही है.

जूही : देखा, देखा माँ, अब तुम भी ऐसे hi बात कर रही हो जैसे में बहार की hi हु.

माँ : है, तू बहार की hi है, अब थोड़े दिनों की hi मेहमान है, तेरे हाथ पिले कर के तुजे भेज hi देना है.

जूही : माआ, (अपना मुँह बनाते hue)Me कही नहीं जानेवाली.

माँ : सब लड़कीअ यही कहती है, देख अपनी भाभी को, वो नहीं चली आयी अपना सबकुछ छोड़ कर, में नहीं आयी. कल तेरे पिताजी भी आ रहे है, इस बार तो तेरे हाथ पिले करने का इंतजाम कर hi दूंगी.

जूही : में अभी शादी नहीं करनेवाली, पता है आज कोच सर कह रहे थे की चार महीने बाद स्टेट चैंपियनशिप में मुझे हिस्सा लेना है, उसके बाद नेशनल, मेरे पास टाइम hi नहीं है शादी करने का.

माँ : शादी नहीं करेगी तो अकेली रह जाएगी, क्या साडी उम्र ऐसे hi रहने का िर्रादा है?

जूही : तू चिंता मात कर, शादी तो में करुँगी, और तुजे भी नानी बनाउंगी, पर अपने समय पर.

माँ : (उसकी पीठ पर मरते hue)Kitni बेशरम हो गयी है, सबके सामने hi ऐसी बाते कर रही है.

जूही : में कहा गैरो के साथ हु, अपनों के साथ hi तो हु.

माँ : है है, चल अब खाना खा.

जिस तरह से सबके सामने जूही मुझे अपनों में शामिल कर रही थी, मेने उसे देखा तो वो भी मुस्कुरायी. फिर हम सब खाना खाने लगे. सच में मुझे लग hi नहीं रहा था की में यहाँ मेहमान हु. खाना खाने के बाद में ऊपर चला गया और पढ़ाई करने लगा. जूही भाभी की मदद करने लगी, तो भाभी ने आश्चर्य से उसे देखा, और सब करने से मन किआ.

भाभी : तुम रहने दो में कर लुंगी.

जूही : करने दीजिये न भाभी, आप अकेली करोगी तो देर होगी, में मदद कर दूंगी तो आप जल्दी फ्री हो जाओगी और भाई के साथ वक़्त बिता पाओगी.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Lagta है मेरी नानन्द रानी सायानी हो गयी है, लगता है माजी की बात सही hi है, अब तुम्हारे हाथ पिले करदेने hi चाहिए.

जूही : (शरमाते hue)Kya भाभी आप भी, में ये सब रोज करती हु, मेरे घर पे कोण करने आता है, सब में hi तो करती हु. और शादी शादी आप भी मात करने लग्न, क्या शादी hi सबकुछ होता है, मेरा कर्रिएर कुछ भी नहीं?

भाभी : (सोचते hue)Sach कह रही हो तुम, लड़की बड़ी हुई नहीं की ये समाज यही सोचने लगता है की अब उसकी शादी कर दी जाये, लड़की से कोई नहीं पूछता. पर में तुजसे पूछती हु, क्या तू शादी नहीं करना चाहती?

जूही : (भाभी की आँखों में देखते hue)Sach कहु तो भाभी में भी करना चाहती हु, पर फिर ख्याल आता है की अभी थोड़ी देर है.

भाभी : ऐसे में अगर वो हाथ से निकल गया तो?

जूही : (आश्चर्य से भाभी की और देखते hue)Kiski बात कर रही हो भाभी?

भाभी : (मुस्कुराते hue)Kya तू चाहती है की में नाम बताऊ, मेरे पास भी आंखे और दिमाग दोनों है.

जूही : (शर्मजाति है, फिर सोच kar)Usi को देख कर तो शादी करने का मान करता है भाभी, पर फिर ख्याल आता है की अगर एक बार शादी कर ली तो उसी में फास कर रह जाउंगी, ऐस क्यों होता है भाभी, हम लड़कीओ को hi इतनी परेशानिअ क्यों होती है, अगर मेरी जगह कोई लड़का होता तो उसे कोई परेशानी नहीं होती, वो आराम से शादी भी करता और अपना कर्रिएर भी बनता.

भाभी : इसमें तू और में कुछ नहीं कर शक्ति, ये कुदरती है, शादी के बाद उनको बच्चा नहीं होता, हमे होता है और हमारा शरीर भी बदलता है.

जूही : वही तो भाभी, इसीलिए में अभी शादी करना नहीं चाहती.

भाभी : फिर वही सवाल आता है, अगर ऐसे में वो हाथ से निकल गया तो?

जूही : इसमें में क्या कर शक्ति हु, जैसा मेरा भाग्य.

भाभी : एक बार उस से बात करके तो देख.

जूही : क्या कहु भाभी?

भाभी : यही की तू उस से प्यार करती है और शादी करना चाहती है, पर कुछ सालो बाद.

जूही : पता नहीं भाभी, देखती हु.

भाभी : अगर तुजे कहने में झिझक हो रही है तो में बात करू?

जूही : नहीं भाभी, में hi बात करुँगी, उसकी एग्जाम ख़तम हो जाने दो, फिर सही मौका देख कर बात करुँगी, पर फिर भी भाभी मुझे यही लगता है की ये बात करना hi बेकार है क्यों की में छह कर भी अभी शादी नहीं कर शक्ति, हम लड़की खिलाड़िओ की ये हमेसा से दिक्कत रही है, हमे घरगृहस्ती और कर्रिएर दोनों में एक चुन न पड़ता है. पर एक बात तो तय है, में शादी करू न करू उसकी तो हो कर hi रहूंगी.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Bina शादी के?

जूही : (शर्माती है पर फिर मक्कमता se)Ha भाभी.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Jaisa तेरा मान करे, में हमेसा तेरे साथ हु.

जूही : इसीलिए तो आप भाभी से ज्यादा मेरी सहेली है. थैंक यू की आप मेरी भावनाओ को समझती है.

दोनोने ऐसे hi बाते करते हुए काम ख़तम कर दिया. भाभी अपने कमरे में चली गयी और जूही शिव के पास गयी. शिव पढ़ाई कर रहा था, उसका मान किआ की वो शिव से लिपट जाये पर वो उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी तो वो उलटे पॉ वापस लौट गयी और पारुल के घर चली गयी. शाम को फिर से हम सब स्टेडियम गए और लौट आये. रात का खाना खाने के बाद में फिर से पढ़ाई में लग गया. आज जूही थी तो भाभी का आना संभव नहीं था. रात के करीब 11 बजे मुझे लगा की कोई मेरे पीछे खड़ा है, मेने पीछे मुड़कर देखा तो रात के कपड़ो में जूही कड़ी थी, उसने लेहंगा और शामे शर्ट पहना हुआ था.

शिव : अरे जूही, तुम, आओ न वह क्यों कड़ी हो?

जूही : में तुम्हे डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी.

शिव : ऐसी कोई बात नहीं है, मेरा पूरा होही गया है, में तो बस रेविसिओं hi कर रहा था. तुम सोई नहीं अभी तक.

जूही : अंदर आते हुए, बस सोने hi जा रही थी, फिर सोचा तुम्हे पूछ लू अगर तुम्हे कुछ चाहिए तो.

शिव : है, वो पानी चाहिए था, वैसे तो रोज भाभी दे जाती थी पर शायद आज वो भूल गयी.

जूही : में ले आती हु (वो निचे गयी और पानी निकल कर ले जाने लगी की भाभी सामने मिली)

भाभी : अरे तुम, अभी सोई नहीं?

जूही : थोड़ी देर में सोने hi वाली हु, शिव से पूछने गयी थी उसे कुछ चाहिए की नहीं, तो उसी के लिए पानी लेने आयी थी.

भाभी : है, में रोज दे देती थी, में वही देने जा रही थी, चलो कोई नहीं आज मेरी जगह तुम दे दो.

जूही : अगर आपको देना है तो आप दे आईये.

भाभी : (मान में, मुझे तो और भी कुछ देना था, जूही, फिर मुस्कुरा kar)Tum hi दे आओ, में सोने जा रही हु. (एक बार के लिए तो भाभी के मान में भी आ गया की जूही वो देने जा रही है जो वो पिछले कुछ दिनों से वो देती आ रही है, अपनी सोच पर उसे hi हंसी आ गयी, फिर संभल kar)Waise भी उसे देने का पहला हक़ तुम्हारा hi तो है.

जूही : किस बारे में बात कर रही है भाभी?

भाभी : पानी की hi बात कर रही हु, रोज में पानी देती हु आज तू दे de(Fir से भाभी को अपनी छूट के पानी का याद आ गया, वो थोड़ी हड़बड़ा gayi)Tu..tu जा, में सोने जा रही हु. (वो अपने रूम में चली गयी, दरवाजा बंद karke)Ye क्या हो गया है मुझे, कैसी कैसी बाते सोचने लगी हु. इस लड़के ने तो मुझे पूरा पागल कर दिया है. वैसे भी आज तो कुछ हो नहीं शक्ति, सो hi जाती hu.(Usne अपने पति को देखा जो दवाई की वजह से गहरी नीं में सोया हुआ था, वो भी लेट गयी और अपनी आंखे बंद कर दी)

जूही :(पानी रखने के baad)Aur कुछ chahiye?(Jis तरह से वो मुझे पूछ रही थी, में उसकी भावनाओ को समाज रहा था, वो जितना मेरे लिए कर रही थी, अगर में उसके लिए कुछ भी न करू तो ठु है मेरी जिंदगी पर, में खड़ा हुआ और उसके करीब जा कर खड़ा हो गया)

शिव : हां. (वो मेरी आँखों में देख रही थी, उसकी आँखों में खुमारी उतर आयी, उसकी सांसे तेज होने लगी, वो मेरी आँखों में देखते हुए समझने का प्रयास कर रही थी की वो जो सोच रही है क्या वही में करने जा रहा हु, मेने दरवाजे की और देखा जो खुला था, मेरी निगाहो का पीछा करते हुए उसने भी दरवाजे की और देखा, फिर मेरी और देख कर वो शर्माने लगी, में उसकी बाह पकड़ कर उसे दरवाजे से लगी दीवाल तक ले गया और उसे देवल से सत्ता दिया, वो बड़ी बेशब्री से मेरी आंखोमे देख रही थी, में भी उसकी आँखों में देख रहा था, मेने उसके चेहरे पर आये बालो की लत को साइड में किआ,) (वो शिव की आंखोमे देख कर समझने की कोशिस कर रही थी, पर उसके दिल को यकीं था की वो क्या करनेवाला हे, उसके चेहरे पर हलकी मुस्कान और शर्म छ गयी, सच तो यही था की वो इस्सलिये तो आयी thi.)(Me हल्का सा झुका और उसके होठो की और बढ़ने लगा, उसके प्यारे होठ कंपनी लगे, उसकी निगाये भी मेरे होठो पर थी, जैसे hi मेरे होठो ने उसके होठो को छुआ उसकी आंखे बंद हो gayi)(Juhi का रोम रोम मचलने लगा, अपने होठो को शिव हलके हलके चूस रहा था, वो गीलापन वो garm-narm होठ उसके दिल और शरीर के हर तार को छेड़ रहे थे, उसके हाथ अपने आप hi शिव की छाती पर चले गए, ऊपर से नंगे बदन पर वो अपने नरम हाथो से सहलाने लगी, शिव की छाती के सख्त उभर को वो महसूस कर रही थी, ऊपर से शिव की जीभ भी उसके मुँह के अंदर प्रवेश कर गयी थी, उसकी चिकनाहट वो अपनी जीभ पर महसूस कर रही थी, वो सके जीभ को अपने होठो से चूसने लगी, उसके शरीर में कुछ होने लगा, जिसे जैसे वो शिव की जीभ को चूस रही थी उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जब शिव ने अपनी जीभ वापस अपने मुँह में कर दी तो उसकी जीभ उसका पीछा करते हुए उसके मुँह में जा घुसी, और वो उसे लड़ने लगी की क्यों वापस चली आयी, पर तभी शिव के होठो ने उसकी जीभ को पकड़ लिया और उसे चूसने लगा, उसने शिव की कमर को थमा और उसे अपनी और खिंचा, जैसे hi शिव उसके नजदीक आया, एक कहता उसकी छूट को छूने लगा, वो गंगना गयी और शिव को और अपनी और खींचने लगी, अपनी छूट की पंखुडिओ पर हो रही वो चुभन उसे बहोत अच्छी लगने लगी, वो शिव को खींचते हुए खुद भी आगे हो रही thi)(Me उसकी हालत समाज रहा था, मेने कोई विरोध नहीं किआ, उसे करने दिया जो वो करना चाहती थी, मेरे दिल में थोड़ा संकोच जरूर था पर आखिर मेने अपने हाथ को उसकी पतली कमर से सहलाते हुए ऊपर ले जाने लगा, जब मेरे हाथो को उसके उभारो का एहसास हुआ तो में रुक gaya)(Juhi शिव के हाथ को अपने स्तन के निचले हिस्से पर महसूस कर रही थी, पर शिव वही रुक गया था, कुछ पल तो उसने इंतजार किआ पर फिर उस से रहा न गया, उसने आंखे खोल कर शिव को देखा जो उसे hi देख रहा था, वो उसकी झिझक समाज रही थी, सुने अपनी पलके जपकायी और हलके शिर को है में हिलाया, जैसे उसको अनुमति का hi इंतजार था, शिव का हाथ ऊपर बढ़ा और उसके स्तन को पकड़ लिया, उसने आज ब्रा भी नहीं पहनी थी, उसका निप्पल भी तन गया था, ये कैसा नशा था वो समाज नहीं प् रही थी पर जो भी था वो उसे बहोत अच्छा लग रहा था. उसकी आंखे फिर से बंद हो गयी, उसका पूरा ध्यान तो अपनी छूट पर चुभ रहे उसे अंग पर था, उसकी छूट के अंदर उसे हजारो चींटिया रेंगती महसूस हो रही थी, ऐसे एहसास को वो पहलीबार महसूस कर रही थी, वो हलके हलके अपनी कमर हिला रही थी, एक और शिव उसके स्तन से खेल रहा था और दूसरी और उसका वो अंग, उसकी छूट पर चुभ रहा था, वो पागल हुई जा रही thi)(Muje एहसास हो गया था की उसने ब्रा नहीं पहनी है, उसका narm-kadak स्तन मेरे हाथ में था, सख्ताई के बावजूद उसकी कोमलता में महसूस कर रहा था, में हलके हलके उसे दबाते हुए उसे सहलाने लगा, मेरा दिल कर रहा था की में उसे नंगा पकडू, पर अभी भी में हिचकिचा रहा था, उसके निप्पल का कड़ा पैन में महसूस कर रहा था, मेने उसके निप्पल को पकड़ कर मसलने लगा तो जूही झटके खाने लगी, वो मुझसे पूरी तरह से लिपट गयी और उसकी कमर निचे से झटके खाने लगी, उसकी परिस्थिति से में समाज रहा था की वो झाड़ रही है, वो जैसे गिरनेवाली थी तो मेने उसे पकड़ लिया और अपने शाइन से चिपका diya)(Juhi को समाज hi नहीं आ रहा था की ये क्या हुआ, उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, उसका शरीर एक अद्भुत आनंद के सागर में गोते खा रहा था, उसके शरीर में एक अजीब सी तरंग दौड़ रही थी, उसे एहसास हुआ की वो गिरनेवाली है तभी शिव ने उसे थम लिया, वो ये सब बस अपनी आंखे बंद किये महसूस कर रही थी, थोड़ी देर ऐसे hi वो शिव से चिपकी कड़ी रही, जब वो शांत हुई तो उसे एहसास हुआ की अभी उसने क्या किआ था, एक और तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहा थी वही उसे शर्म भी आ रही थी., वो शिव से लिपटी अपनी सांसो को दुरस्त करने की कोशिश कर रही thi)(Bhabhi बहार कड़ी ये सब सुन रही थी, वो सिर्फ शिव से मिलने आयी थी, उसे लगा की जूही चली गयी होगी, पर दरवाजा खुला था और शिव नजर नहीं आ रहा था, वो अंदर जाने की सोच hi रही थी की उसे जूही की सिस्किअ सुनाई दी थी,, उसे एहसास हो गया था की वो दोनों दरवाजे के पीछे खड़े है, वो बिना आवाज किये वापस लौट gayi)(Mene थोड़ा दूर हैट कर जूही को देखा तो वो शर्मा रही थी, में मुस्कुराया तो वो नज़ारे चुराने लगी)

शिव : क्या तुम ये नहीं चाहती थी? (उसने मेरी और dekha)Kaho न जूही, तुम चाहती थी न? (उसने शर्मा कर है में गर्दन हिलायी, उसका चेहरा सहलाते hue)Ab तुम जाओ, बहोत देर हो गयी है.

जूही : (शरमाते हुए, उसने हिचकिचाते हुए kaha)Sab सो रहे है. (उसके कहने का अर्थ में समाज रहा था, वो अभी जाना नहीं चाहती थी, वो और मेरे साथ वक़्त बिताना चाहती थी)

शिव : जूही, में समझता हु तुम्हारे जज्बात को पर अभी खेल पर ध्यान दो, बाकि सब वक़्त पर छोड़ दो, तुम मेरी बात समाज रही हो न? (उसने है में गर्दन हिलायी. )अभी सिर्फ अपने लक्ष पर ध्यान दो.

जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Wo सब तो होता रहेगा शिव में कहा अपने लक्ष से पीछे हैट रही हु..

शिव : (में उसकी बातो का अर्थ समाज रहा tha)Ye भी सब होता रहे गए जूही, पर पहले वो, जो तुम्हारा सपना है, जिस के लिए तुम सब से लड़ रही हो, जो तुम्हारी पहचान बनेगा.

जूही : (मेरी छाती पर अपना हाथ फेरते hue)Ye भी तो मेरा सपना है (मेने उसको आंखे सिकुड़ते हुए देखा तो वो शर्मा gayi)Muje ऐसे मात देखो, मेने कुछ गलत नहीं कहा, जितना वो मेरे लिए महत्वपूर्ण है उतना तुम भी हो.

शिव : में कही भगा नहीं जा रहा, पहले अपना वो लक्ष पूरा करो.

जूही : तुम मेरे साथ हो न?

शिव : है हु.

जूही : (मेरे शाइन से लगते hue)Thank यू शिव, थैंक यू. अपना लक्ष हांसिल कर के में मेरा इनाम मांगूंगी, डोज न?

शिव : Hmmmm(Thodi देर हम दोनों ऐसे hi खड़े rahe)Ab जाओ, सुबह जल्दी उठना है.

जूही : (मेरे होठो को चुम kar)Good नाईट शिव.

शिव : (मुस्कुराते hue)Good नाईट.

वो चली गयी, मेरा लुंड अभी भी खड़ा था, में सोच रहा था की मेने जो किआ सही किआ या नहीं, मेने सोने की कोशिस की, थोड़ी देर में मुझे नींद आ गयी. वह भाभी बेचैनी से करवाते बदल रही थी, वो तड़प रही थी, वो खुद समाज नहीं प् रही थी की ऐसा क्यों हो रहा है, उसकी छूट से लगातार रास बह रहा था, अपने शरीर की ऐसी बेचैनी उस से बर्दास्त नहीं हो रही थी, ऐसा तो उसके साथ कभी न हुआ था. बार बार उसे शिव याद आ रहा था, उसे यही लग रहा था की शिव उसके ऊपर चढ़ा हुआ है, उसके अंग को वो अपने अंदर महसूस करना छह रही थी, एक दो बार तो उसका हाथ भी अपनी छूट पर चला गया और उसने उसे जोर से दबा दिया, पर आग बजने की बजाये बढ़ रही थी, जैसे तैसे उसने अपने आपको शांत किआ और सोने की कोशिस की, तीन चार घंटे वो सोई होगी की सपने में उसे यही लगा की शिव उसे छोड़ रहा है तो वो जाग गयी, उसका शरीर पशीने से भीग गया था, वो हांफ रही थी, उसने बाजु में देखा तो उसका पति सो रहा था. उसने चेहरा पोछा और बिस्तर पर बेथ गयी. उसने पानी का लोटा उठाया तो वो खली था. वो उठी और बहार आयी. पुरे घर में सन्नाटा छाया था. उसने पानी पिया, वो फिर से अपने कमरे में लौट रही थी तो उसे शिव की याद आयी. वो सोचने लगी की क्या करे. उसने घडी देखि तो साढ़े चार बज रहे थे, अभी उसकी सास को उठाने भी भी देर थी, फिर भी वो अपने सास के कमरे के पास गयी, वो दरवाजा खुला रख कर hi सोती थी, उसने देखा की वो गहरी नींद में है, और उनके नाक से आ रही आवाज इस बात का साबुत है, वो जूही के कमरे के पास गयी, उसका दरवाजा भी अंदर से बंद था, उसे पता था की उसे भी उठने में अभी देर है और रात को वो देर से सोई थी तो उसका उठने का चांस नहीं है. उसने अपना चेहरा पोछा और वो बहार आ गयी. रात की ठंडी हवा में भी उसको पसीना आ रहा था, उसने अपना चेहरा पोछा और धड़कते दिल से सीढिया चढ़ गयी. शिव का दरवाजा खुला हुआ hi था. अंदर अंदर था पर बहार से आती चांदनी में सब दिख रहा था. वो गहरी नींद में सोया हुआ था.

भाभी : मेरी नीं ख़राब कर के कैसे गहरी नीं में सोया है. (उसकी निगाह अंडरवियर पर पड़ी, उभर दिख रहा था, कपड़े के अंदर भी उसका आकर स्पस्ट दिख रहा tha)Tu भी मेरी तरह जाग रहा है. (जब उसे एहसास हुआ की वो कैसे शिव के लुंड से बात कर रही है तो वो शर्मा गयी, उसे लगने लगा की वो सच में पागल हो रही है, पता नहीं ऐसा क्या जादू कर दिया है शिव ने की वो यहाँ चली आयी, वो शिव के नजदीक बेथ gayi.)Ye कैसा जादू है शिव, में पहले तो ऐसी नहीं थी, ऐसा क्या बदल गया मेरे अंदर की में ऐसी बेशर्म बन gayi.(Shiv कहा सुन नेवला था वो तो बेचारा सोया हुआ था) मेरी नींद तुमने बिगड़ी है, में भी तुम्हे सोने नहीं दूंगी, ऐसे बेखबर हो कर सोये हो और मेरी क्या हालत हो रही है वो तुम जानते ho(Wo शिव पर झुकी और उसके होठो को चूमने लगी, थोड़ी देर चूमने के बाद भी शिव नहीं utha)(Sach में शिव जाग चूका था, उसने आंख खोल कर देखा था की कोण उसके होठ चूस रहा है पर जब उसने देखा की भाभी है, तो उसने वापस अपनी आंखे बंद कर दी थी) Shiv,utho न (उसने शिव को थोड़ा हिलाया)

शिव : (मेने भी नाटक करते हुए कहा, जैसे में नींद में बड़बड़ा रहा hu)Sone दो न, क्यों जगा रही हो दीदी?

भाभी : में तुजे दीदी नजर आती हु, (उसने शिव के लुंड को पकड़ लिया और हलके हलके दबाते हुए) में तेरी दीदी नहीं, तेरे बच्चे की माँ बन ने आयी हु, लगता है तू ऐसे नहीं उठेगा, पता नहीं ममता को भी क्या सनक उठी थी, वो उठी और उसके पेअर के पास बेथ गयी और उसके अंडरवियर को निचे खिसका दिया, लुंड जो पहले से खड़ा था वो उछाल कर बहार आ गया) तू सो रहा है पर इससे देखो, मुझे देखते hi खड़ा हो गया, तुज से अच्छा तो ये है जिसे मेरी तड़प का ख्याल है. (भाभी की ऐसे बातो से मुझे को हसी आ रही थी पर मेने अपने आपको काबू किआ और सोने का नाटक जारी rakkha)(Bhabhi ने देखा की शिव अभी भी नहीं जग रहा, उसने लुंड को देखा तो उसका दिल मचलने लगा, पता नहीं ऐसा क्या हो गया था की वो लुंड को देख कर उत्तेजित हो रही थी, उसने एक बार शिव को देखा फिर वो झुकी और लुंड को चाटने lagi)(Bhabhi की गर्म जीभ का एहसास होते hi मेरे अंदर तरंगे दौड़ने लगी, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की भाभी ऐसा भी कर शक्ति है, में सोया हुआ था फिर भी वो मेरे लुंड को चाट रही thi)(Bhabhi थोड़ा झुंझलाते hue)Pata नहीं क्या जादू है इस में की पागल हुई जा रही हु, अपनी मान मर्यादा सब छोड़ कर, सब से बचते बचते में यहाँ आयी हु और इन्हे सोना है. में भी देखती हु तू कैसे सोता hai(Usne शिव के लुंड को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगी, वो जैसे जैसे चूस रही थी उसकी छूट से रास की नदिया बह रही थी, इतनी बेशर्मी से तो उसने अपने पति का भी लुंड कभी नहीं चूसा था, वो कितनी बार बोलता तब वो कभी कभार मुँह में लेती थी, पर यहाँ उसका खुद का दिल कर रहा था उस प्यारे से अंग को चूसने का, वैसे भी वो उसे इतना मजा देता था तो उस पर प्यार आना भी लाज़मी था, थोड़ी देर तक वो शिव के लुंड से खेलती रही, उसके सुपडे को खोल कर वो उसके छेड़ में अपनी जीभ दाल रही थी, वह से निकलते नमकीन रास को वो चाट रही थी, लुंड को वो जितना हो सके अपने मुँह में लेने की कोशिस कर रही थी, ऐसे लुंड को चूसना एक अजीब तरह का आनंद दे रहा था, उसने शिव को देखा तो वो अभी भी सो रहा था, तो झुंजला kar)Me जानती हु शिव, मेरे ऐसा करने पर भी तू न जगे ये हो नहीं शकता, तू जाग रहा है और मुझे परेशान कर रहा है, में भी देखती हु की तू कब तक अपने आप को संभाले रखता hai(Wo उठी और उसने अपनी पंतय निकल दी, अपनी साड़ी को घुटनो तक उठा कर वो पलंग पर चढ़ गयी और शिव की छाती के आस पास पेअर रख कर वो नीचे बैठने लगी, बैठते बैठते उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठा diya,jis से उसकी गांड नंगी हो gayi)(Mene थोड़ी सी आंख खोल कर देखा तो मेरे सामने अद्भुत नज़ारा था, भाभी के गोर गोर कूल्हे मेरे सामने थे, मुझे रास टपकती छूट भी साफ़ दिख रही थी, सच कहु तो मुझे मज़ा आ रहा था, भाभी की हरकतों पर, वो ऐसे एडजस्ट हुई की छूट मेरे होठो से बस एक दो इंच hi दूर थी) में भी देखती हु कब तक सोने का नाटक करते हो (उनकी फुसफुसाहट सुन कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उन्होंने अपनी छूट को मेरे होठो पर रख दिया, मेने कोई हरकत नहीं की, हलाकि छूट की खुसबू मुझे पागल कर रही थी, पर में देखना चाहता था की भाभी किस हद तक जाती है, उनकी ऐसी बेशबरी मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी, मेरा लुंड लोहे जैसा सख्त हो रहा था, वो मेरे होठो पर अपनी छूट घिस रही थी, छूट से निकलता रास मेरे होठो पर फ़ैल रहा था, वो अपनी छूट को ऐसे रगड़ रही थी की मेरी नाक भी उनके छूट के छेड़ में घुस रही थी, मेरे लुंड को उन्होंने फिर से चूसना सुरु कर diya)Mere मज़े ले रहा है, तेरा ये इतना कड़क हो गया है की मुझे पता चल रहा है की तू जाग चूका है, में भी देखती हु की कब तक नाटक करता hai(Wo लगातार मेरे लुंड को चूस रही थी और अपनी छूट को मेरे चहरे पर घिस रही थी, मेरा मान कर रहा था की उनके कूल्हों को मसल कर पूरी छूट को अच्छे से चाट लू. में अपनी आंखे खोले छूट और गांड के छेड़ को लपलपाते हुए देख रहा था, उन्हें देख कर मेरी उत्तेजना भी चरम पर thi)(Mamta को भी ऐसे मजा आ रहा था, ऐसा खेल तो उसने कभी अपनी जिंदगी में नहीं खेला था, वो पूरी बेशर्मी से शिव को रिजने की कोशिस कर रही थी, वो उसे उकसा रही थी की उठ और मुझे छोड़, पर जब शिव काफी देर बाद भी न जगा तो वो उसके चेहरे से उठ gayi)(Mene अपनी आंखे बंद कर di)(Bhabhi घूम गयी और अब उनका चेहरा शिव के चेहरे की और था, वो फिर से नीचे बैठने लगी, वो शिव की कमर के ird-gird अपनी टंगे फैलाये बेथ गयी. वो थोड़ी झुकी और अपनी छूट के रास से भीगे हुए शिव के चेहरे को देख कर शर्मा गयी, उसे चाट ते हुए वो साफ़ करने lagi)Kyu तड़पा रहा है शिव, क्या चाहता है? कितनी बेशर्म बन गयी हु, अब और क्या चाहता है मुज से, प्लीज आंखे खोल न. (उनकी तड़प टी पुकार से मेने आंखे खोल दी और मुस्कुरा कर उन्हें देखने लगा, मुझे मुस्कुराता देख वो भी मुस्कुरायी और मेरे शाइन से लग gayi)Tum बहोत गंदे हो, कितना तड़पाया मुझे.

शिव : आप का ये रूप तो कातिलाना है भाभी, मेने कभी सपने भी नहीं सोचा था का आप ऐसी भी हरकत कर शक्ति हो.

भाभी : क्यों में औरत नहीं हु क्या, मान मर्यादा सब होती है पर फिर भी औरत को अपने बिस्तर पर खुल कर प्यार करने का तो हक़ है न.

शिव : बिलकुल है, और मुझे बहोत अच्छा लगा आप को ऐसे खुल कर प्यार जताते देख.

भाभी : मुझे पता था तुम मुझे परेशान कर रहे थे, पर मुझे इतना यकीं नहीं था की तुम इतने सयमित हो. तुम्हारी जगह और कोई होता तो अब तक झाड़ भी चूका होता.

शिव : उसका तो मुझे पता नहीं पर, आपका ये रूप बेमिसाल था, आप जैसी प्यारी लड़कीका ये रूप भी हो शक्ति है, यकीं नहीं होता.

भाभी : में लड़की नहीं औरत हु, और ऐसा कुछ भी नया नहीं था जो हमने न किआ हो, तो शर्म थोड़ी काम हो hi जाती है. तू बड़े मज़े ले रहा था मेरे है न?.

शिव : है भाभी, सच में बहोत मज़ा आया, आप कैसे अपनी वो मेरे चेहरे पर रगड़ रही थी, मुझे तो अभी भी यकीं नहीं हो रहा

भाभी : अगर इतना hi मज़ा आया तो अब मेरी तड़प भी शांत कर दे, रात से में तड़प रही हु, पता नहीं ऐसा क्या हो गया है मुझे, ऐसा तो मेने कभी भी महसूस नहीं किआ था.

शिव : आप hi ने तो कहा था की जब औरत अपने गर्भाधान के सही समय पर होती है तो उसकी तड़प बढ़ जाती है, हो शक्ति है आज वही दिन हो?

भाभी : हो शक्ति है, पर आज से पहले मेरी इतनी ख़राब हालत कभी नहीं हुई.

शिव : आज से पहले आप माँ भी तो नहीं बानी.

भाभी : (मेरे होठो को चुम kar)Please शिव, मुझे माँ बना दे, में सच में बहोत तड़प रही हु, नाम ममता है फिर भी अपनी ममता लुटाने को तरस रही हु.

शिव : आपका नाम ममता है?

भाभी : क्यों तुम्हे पता नहीं था?

शिव : कैसे पता होगा, जूही आपको भाभी कहती है, आंटी बहु और भैया को तो कभी आपको बुलाते सुना hi नहीं.

भाभी : सच कह रहे हो तुम, है, मेरा नाम ममता है और में अपनी ममता के लिए hi बच्चा चाहती हु, पर उसके लिए तुम्हे कुछ करना पड़ेगा, में कब से राह देख रही हु और तुम हो की सोने का नाटक कर रहे थे, अब जल्दी से करो. (भाभी की आवाज में बहोत तड़प थी)

शिव : आप सुरु करो. (वो मुझे देखने lagi)Waise भी अआप मेरे ऊपर hi हो तो आप hi सुरु करो.

भाभी : (शरमाते hue)Muje शर्म आ रही है, तुम hi करो न. (मेने ज्यादा बहस करना ठीक नहीं समजा, मैंने उनकी कमर पकड़ी और उन्हें थोड़ा निचे खिसकाया और अपने लुंड को छूट के छेड़ पर सेट किआ)

शिव : अंदर ले लो bhabhi(Meri बात मानते हुए उन्होंने अपनी स्थिति सही की और लुंड पर बैठने लगी, मेरा लुंड उस ताप्ती छूट में उतरने लगा, उनके चेहरे पर वही सिकन उभरने लगी, पर वो रुकी नहीं और पूरी तरह से मेरे लुंड को अपनी छूट में समां लिया, मेरा लुंड आखरी छोर रक् घुस चूका था, उन्होंने अपने होठो को दबा दिया था, थोड़ी देर में रुका रहा फिर मेने लुंड को अंदर बहार करना सुरु किआ, उनके स्तनों को ब्लॉउज के ऊपर से hi सहलाते हुए में उन्हें निचे से धक्के लगाने लगा, उनके चेहरे पर भाव बदल रहे थे, कभी दर्द और कभी मज़े से उनका चेहरा बदल रहा था. मेने छूट को देखा तो उभरे हुए होठो के बिच से मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था, छूट इतना पानी बहा रही थी की मेरा पूरा लुंड चिकना हो कर चमक रहा था, मेने उनके कूल्हों को निचे से थामे रक्खा था ताकि उन्हें ज्यादा म्हणत न करनी पड़े. उनकी सिस्किअ बता रही थी की अब सिर्फ मज़ा hi आ रहा है, दर्द नहीं hai)Kaisa लग रहा है भाभी? (वो मुस्कुरायी, और शर्माने लगी, वो बोली कुछ नहीं, में लगातार उन्हें अपने लुंड पर ऊपर नीचे कर रहा था, वो भी कभी आंखे बंद किये तो कभी मुझे देखते हुए ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उनके मुँह से आहे निकल रही थी, वो मेरे होठो पर झुकी तो मेने उन्हें छोड़ दिया, वो खुद मेरे लुंड पर अपनी छूट पटक रही थी, थप थप की आवाजे गूंज रही थी, उनकी सांसे तेज चलने लगी थी, पता नहीं वो शायद बहोत ज्यादा उत्तेजित थी क्यों की थोड़ी hi देर में वो झड़ने लगी और वो मुझसे लिपट गयी, मेरा पूरा लुंड उनके अंदर समाया हुआ था, लुंड पर हो रही गर्म पानी की बरसात में महसूस कर रहा था.)

भाभी : (नशेमे डूबी आवाज के साथ) अब जेक सुकून मिला शिव, पूरी रात में करवाते बदल रही थी, पता नहीं ऐसा क्या जादू कर दिया है तुमने, मेरे ऊपर आ जाओ Shiv.(Unki बात मानते हुए मेने उन्हें निचे लेता दिया, उन्होंने अपनी टंगे फैला कर पकड़ ली, में उन्हें देख कर मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, उन्होंने अपना चेहरा घुमा लिया अपर वो वैसे hi रही, मेने फिर से अपने लुंड को छूट पर लगाया.

शिव : भाभी, मेरी और देखो.

भाभी : मुझे शर्म आ रही है

शिव : अगर आप नहीं देखो गई तो में अंदर नहीं डालूंगा bhabhi(Unhone तुरंत मेरी और देखा, में मुस्कुराया तो वो मुस्कुरायी, मेने लुंड को अंदर उतर दिया, उनके चेहरे पर हलकी सिकन आयी फिर वो नार्मल हो gayi)Bhabhi आप बहोत टाइट हो.

भाभी : (पहले आश्चर्य से मेरी और देखा उन्हें यकीं नहीं आ रहा था की मेने खुल कर उनसे ऐसी बात की है, पर फिर वो sharmagayi)Dhat! बेशरम.

शिव : (बेशर्मी se)Sach कह रहा हु, आपकी छूट बहोत मस्त है.

भाभी : (उनके चेहरे पर कामुकता बढ़ रही thi)Aisi बाते मात करो शिव. ये गन्दी बात है.

शिव : अगर मुझे अच्छे से कहना हो तो कैसे कहु भाभी?

भाभी : (मेरी और देख kar)Muje नहीं पता.

शिव : जो है वो कह रहा हु भाभी, आप को मेरा लुंड कैसा लग रहा है? (थोड़ी बेशर्मी जरुरी थी, वैसे भीआज वो बहोत खुल कर पेश आयी थी, तो मेरी लालच और बढ़ रही थी)

भाभी : शीइइइइव शहहहहह, ऐसा मात बोलो, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : आपने कभी ऐसे बोलै है? (उन्होंने मेरी आँखों में देखा और ना में इस्सर किआ) अगर आपका मान हो तो hi बोलना भाभी, पर जैसे आपको कुछ हो रहा है वैसे hi आपके मुँह से सुन कर मुझे भी अच्छा hi लगे गए)

भाभी : मुझे शर्म आ रही है शिव, मेने कभी किसी से ऐसी बाटे नहीं की न hi कभी ऐसे गंदे सब्दो का प्रयोग किआ है.

शिव : अगर आप का मान हो तो hi बोलना, में कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा, पर सच कहता हु भाभी आपको ऐसे देख ते हुए आपकी छूट में लुंड जाता देख मुझे कुछ कुछ हो रहा है, क्या आप को मेरा लुंड अच्छा लग रहा है?

भाभी : शहहहहह हाआआआ.

शिव : ऐसे नहीं, पूरा बोलो भाभी.

भाभी : (ममता की भी हालत ख़राब हो रही थी, उसने ऐसा सब सुना तो था पर कभी खुद नहीं बोलै था, वैसे भी एक सभ्य महिला के लिए ऐसे सब्दो का प्रयोग उचित नहीं मन जाता, पर ऐसे सब्द सुन कर उसके अंदर अजीब सी हलचल हो रही थी, शिव सच hi कह रहा था की अगर छूट को छूट न कहे तो क्या कहे, वैसे भी अपनी छूट में अंदर बहार हो रहा लुंड उसे बहुत hi ज्यादा अच्छा लग रहा था, चाहे जो भी हो पर वो अभी शिव के लुंड से चुद hi रही थी, तो बोलने में क्या हर्ज है, उसने अपने आपको तैयार kiya)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह हआ शिव शह्ह्ह्ह मुझे शहहह अह्ह्ह तुम्हारा शहहह अह्ह्ह्ह llllll(Fir भी वो लुंड न बोल पायी) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह वो बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : (मेने उन पर दबाव नहीं डाला क्यों की में उनकी हालत समाज सकता था, वो बहोत सीधी और अच्छी महिला थी, उनके लिए ऐसे सब्द बोलना बहोत बड़ी बात थी, पर मुझे ऐसे बोलने में बहोत अच्छा लग रहा था और मुझे ये भी लग रहा था की उन्हें भी ऐसे सब्द सुन न अच्छा लग रहा tha)Muje भी आपकी छूट बहोत अच्छील लग रही है, उसकी चिकनाहट और जिस तरह से आप मेरे लुंड को अंदर से पकड़ रही है वो मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.

भाभी : ओह्ह्ह्ह सीईव शहहह में पागल हो जाउंगी, मुझे कुछ हो रहा है, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह तुम्हारा लुंड बहोत बड़ा है शहहहहह ahhhhhhh(Mene उनके मुँह से लुंड सुन कर उनको देखा तो वो मुस्कुरायी, उनका चेहरा कामेच्छा से पुअरा लाल हो चूका था) मुझे वो मेरे अंदर बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह ऐसे hi करो शिव शहहह अह्ह्ह्ह ऐसे hi मुझे karo.(Unke ऐसे कहने पर मेरे धक्को की रफ़्तार बढ़ रही थी, में उनकी टंगे पकड़ कर धक्के मर रहा था, छूट से रास टपक टपक कर निचे गिला धब्बा बन चूका था, छूट पूरी तरह से फैली हुई थी, सच में छूट को देख कर मेरा नशा भी बढ़ रहा था, लुंड ऐसे अंदर फास रहा था जिस से मेरे लुंड पर सरसराहट हो रही थी)

शिव : करो नहीं छोड़ो कहो भाभी.

भाभी: (ममता भी जैसे अब थान चुकी थी, अगर सब खोल कर लेती हु तो बोलने में क्या फर्क पड़नेवाला hai)Shhhhh अह्ह्ह्ह हां छोड़ो मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ो शह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शिव शहहह ये कैसा जादू है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जोर से छोड़ो मुझे शहहह मेरी छूट झाड़नेवाली है शह्ह्ह्ह (मेने देखा की उनकी आंखे बंद थी, उनका ऐसा कामुक रूप देख में भी छूटने के कगार पर पहुंच gaya)Shhhhh जोर से शहहह ऐसे hi करो शहहहहह भर दो मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मायआ ये कैसा एहसास है शठ में बार बार पाना चाहती हु शहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइव जोर से आह्हः अह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु.

शिव : (में उनके ऊपर हो गया, उन्होंने अपने पेअर मेरी कमर पर सख्ती से लपटे दिए, वो मेरे धक्को का जवाब अपने धक्को से दे रही थी, उनकी कमर जोरो से धक्के लगा रही थी, में स्त्री का ऐसा रूप देख अचंबित था, शायद ये कुदरती था, क्यों की स्त्री चाहे जैसी भी हो उसका काम है बच्चे पैदा करना और यही कुदरती भी है, चाहे कितनी भी सभ्य महिला हो वो कुदरत के आगे बेबस है, उनके धक्को से में भी झड़ने के कगार पर पहुंच gaya)Me भी भाभी, आपकी छूट मेरे लुंड को बहोत जोरो से जकड रही है शहहह आहिस्ता भाभी स्स्स्सह्ह्ह्ह वो टूट न जाये शहहह अह्ह्ह्हह.

भाभी : ओह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसा मज़ा शह्ह्ह्ह पता नहीं क्या जादू है शह्ह्ह्ह में झाड़ रही हु शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

शिव : में भी भाभीईईई

दोनों अपने चरम पर पहुंच गए, मेरा वीर्य उनके अंदर गिरने लगा, दोनों हांफ रहे थे, और एक दूसरे से पूरी ताकत से लिपटे हुए थे.
 
अपडेट 94

सुबह सुबह में और भाभी बिस्तर पर निचे से जुड़े हुए थे, में उनके ऊपर झुका हुआ था, मेरा लुंड अभी भी भाभी की छूट में था, में उनको फिर से चूमने लगा तो थोड़ी देर उन्होंने मेरा साथ दिया पर फिर मुझे दूर धकेल ने लगी.

शिव : क्या हुआ भाभी, मुझे क्यों धक्का दे रही हो?

भाभी : (चिंतित स्वर me)Bahot देर हो गयी है शिव, निचे सब जागनेवाले होंगे, जागते hi सबसे पहले मुझे ढूंढेंगे, मुझे जाना होगा.

शिव : थोड़ी देर रुक जाओ न भाभी.

भाभी : थोड़ी देर क्या, मेरा मान कर रहा है की तेरे साथ hi रुक जाऊ, पर ये मुमकिन नहीं. इतने काम दिन में मेरी ये हालत है तो पता नहीं जब तू चला जायेगा तो मेरा क्या होगा?

शिव : तो मेरे साथ चलो.

भाभी : अगर ऐसा मुमकिन होता तो जरूर आती, पर ये संभव नहीं है. चलो जल्दी हटो, कोई जाग गया तो मुसीबत हो जाएगी.

शिव : थोड़ी देर भाभी.

भाभी : थोड़ी देर में न तेरा मान भरनेवाला है न मेरा, अब उठ मुझे बाथरूम भी जाना है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Me भी चालू?

भाभी : है चल, फिर जब तेरी जूही पूछे तो जवाब देते rehna.(Juhi का नाम सुनते hi में खड़ा हो गया, मेने देखा की भाभी की छूट से ढेर सारा वीर्य निकल ने लगा तो भाभी ने अपने पेटीकोट से अपनी छूट को दबा दिया, और छूट को साफ़ करने लगी, उनको टंगे फैलाये ये करता देख सचमे मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया, पर में कुछ नहीं कर सकता था क्यों की इतना समय भी नहीं था, मेरे खड़े लुंड को देख कर भाभी मुस्कुरायी, वो भी कड़ी हो गयी और अपने कपडे ठीक करने लगी, मेने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनके स्तन को दबाने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव ऐसा मात कर, में रोक नहीं पाऊँगी अपने आप को, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेरा बहोत मान हो रहा था पर में परिस्थितिओ को समाज रहा था, मेने उन्हें छोड़ दिया, वो मुस्कुरायी और मेरे होठो को हलके से चुम कर बहार निकल गयी)

मेने भी कपडे पहने और निचे चला गया. में निचे गया तो भाभी बाथरूम में थी और तभी दरवाजे से मुझे आंटी आती हुई दिखी. मेने उन्हें नमस्ते किआ.

माजी : जल्दी उठ गए बीटा?

शिव : है आंटी नींद खुल गयी.

माजी : बहु शायद नहाने गयी है, तुम भी फ्रेस हो जाओ, में जूही को जगती हु.

शिव : सोने दीजिये उसे, अभी देर hai.(Wo मुस्कुरायी और बहार से फूल चुन ने लगी, में ब्रश कर रहा था की भाभी नाहा के निकली, उन्होंने मुझे देखा, में भी उन्हें hi देख रहा था, ताजे गुलाब की तरह, गुलाबी साड़ी पहने वो बहोत खूबसूरत दिख रही थी, मेरा मान कर रहा था की उनको अपनी बहो में भर लू, मेरे चेहरे से उन्हें भी इसका एहसास हो रहा था, वो शर्मायी और मुस्कुराते हुए अंदर चली गयी. में भी बाथरूम में घुस गया, जब नाहा कर निकला तो जूही जाग गयी थी और वो ब्रश कर रही थी. मेने उसे देखा तो वो थोड़े बिखरे हुए बालो में रात के कपड़ो में hi दिखी. उसने मुझे देखा, रात की घटना की वजह से उसके चेहरा भी गुलाबी हो गया, में उसे देख मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी. पता नहीं क्या भाग्य था मेरा, एक से एक हसीं लड़कीअ और औरते हमेशा मेरे आसपास hi होती थी. में ऊपर चला गया और कपडे पहन कर नीचे आगया, जूही भी तैयार थी, हम दोनों ने दूध और नास्ता किआ, उतने में विष्णुभाई भी आ गए, हम तीनो स्टेडियम चले गए. आज फिरसे वही रेस का दौर चला. हम दोनों hi आकर्षण का केंद्र थे, लड़के और लड़कीअ हम दोनों को साथ देख कर जलन के मरे देख रहे थे. जब हम घर लौटे तो अंदर एक आदमी बैठा हुआ था, उन्हें देख कर जूही उनकी और बढ़ी.

जूही : पापाआ.

पापा : (वो खड़े हो गए, और जूही उनके गले लग gayi)Kaisi है मेरी बेटी?

जूही : अच्छी हु पापा, आप कैसे हो? (वो मुस्कुराये, उनकी नज़र मेरे ऊपर पड़ी, वो मुझे देख रहे the)Papa, ये शिव है. (मेने उनके पेअर छुए, उन्होंने मेरी पीठ थप थपाई, वैसे भी उनकी बीवी ने उन्हें सब फ़ोन पर बतादिया था)

पापा : तो तुम शिव हो, तुम्हारे बारेमे Ragini(Juhi की माँ) ने बताया था, आओ बैठो. तुम्हारा सुक्रिया की तुमने मेरे बेटे के लिए और मेरे घर के लिए इतना किआ.

शिव : ऐसी कोई बात नहीं अंकल, ये तो मेरा फर्ज था.

पापा : सही कहा बीटा तुमने, पर फर्ज निभाने के लिए भी हिम्मत और ताकत लगती है, तुमने हिम्मत दिखाई उसके लिए तो तुम्हारा शुक्रियादा बनता है.

माँ : (बहार आते hue)Kya आप भी बातो में लाग गए, बच्चे भूखे होंगे, उन्हें खाने दीजिये, और आप भी आ जाइये.

पापा : (खड़े होते hue)Chalo भाई, खाना कहते है, रागिनिदेवीजी का हुकम हम नहीं ताल शक्ति.

माँ : क्या आप भी, आओ बीटा, पहले खाना खा लो.

जूही : देखा पापा आपने, माँ ने शिव को बुलाया, मुझे तो जैसे नजर अंदाज hi कर दिया है माँ ने, ऐसा लगता है की ये इनका बीटा है और में कोई बहार की.

माँ : अपनी चपड़ चपड़ बंद कर और चल तू भी. (सब खाने बेथ गए, जूही के पापा का स्वाभाव भी अच्छा था, हम सब ने खाना खाया. खाने के बाद में ऊपर पढ़ाई करने जा रहा था की जूही ने कहा.)

जूही : में पारुल के घर जा रही हु, चलना है तुम्हे?

शिव : नहीं, तुम जा आओ.

जूही : वैसे पता नहीं पर किसी बात पर पारुल तुमसे नाराज है, जब भी में तुम्हारी बात करती हु तो वो तुम्हारे बारे में कुछ न कुछ उल्टा hi बोलती है, कुछ हुआ है तुम दोनों के बिच.

शिव : (मुस्कुराते hue)Na hi, शायद उसने मुझे घर बुलाया था पर पढ़ाई के वजह से में जा नहीं पाया तो वो नाराज होगी, तुम समजा देना की मेरे एग्जाम के चलते में नहीं आ पाया.

जूही : ओह ऐसी बात है, कोई बात नहीं, में उस से बात कर लुंगी. जाओ तुम पढ़ाई करो, में जाती हु.

वो चली गयी और में पढ़ाई करने लगा. आधे घंटे बाद मेने देखा की मेरे रूम के दरवाजे पर भाभी कड़ी थी, उन्हें देख कर मुझे आश्चर्य हुआ क्यों की इस वक़्त उनके आने की सम्भावना नहीं थी.

शिव : अरे भाभी आप, बहार क्यों कड़ी है, अंदर आइये. (वो अंदर आयी और दरवाजे को बंद कर के चिटकनी लगा दी, में उन्हें आश्चर्य से देखते हुए खड़ा हो गया, वो मेरे नजदीक आयी और मेरे शाइन से लग गयी) भाभी????

भाभी : माँ बाउजी अपने कमरे में है, unko(apne पति को) मेने खाना खिला दिया है, वो गोली खा कर सो गए है. मेने सुबह तुम्हे रोका था न.

शिव : (जूही का तो मुझे पता था की वो घर पर नहीं है, पर फिर भी थोड़ा खतरा तो था hi) भाभी, उस बात से में नाराज नहीं हु, में तो बस ऐसे hi कह रहा था, हमे खतरा मोल लेने की कोई जरुरत नहीं है.

भाभी : कोई खतरा नहीं है, माँ और बाबूजी काफी समय बाद मिले है तो अपने रूम से निकलनेवाले नहीं है, और अगर जूही आयी तो उसकी बाइक की आवाज से पता चल जायेगा.

शिव : (मुस्कुराते hue)To सब प्लान बनाकर आयी हो आप.

भाभी : (मुस्कुरा kar)Ha, पर अगर तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान न हो रहा हो to.(Me मुस्कुराया और उनके स्तन पर अपना हाथ रख कर दबा दिया, वो शरमाते hue)Kapade निकलना मात, अगर जूही आ गयी तो जल्दी से मुझे जाना होगा.

शिव : पर मुझे इन्हे चूसना है (वो मुस्कुरायी, उन्होंने ब्लॉउज के ऊपर के कुछ हुक खोल दिए और अपने स्तन को पकड़ कर बहार निकला, उनके खुद से ऐसा करने से में मुस्कुराया और उनके स्तन को सहलाते हुए निप्पल को मसलने लगा) आप क्यों मेरी हर बात मान लेती है?

भाभी : क्यों की मुझे अच्छा लगता है.

शिव : तो फिर ब्लॉउज पूरा खोल दीजिये, एक हुक बंद होने से वैसे भी क्या कुछ फर्क पड़नेवाला है.

भाभी : ठीक है, खोल दो, पर निकलना मात. (मेने ब्लॉउज खोल दिया और ब्रा को ऊपर खिसका दिया, और झुक कर उनके निप्पल को मुँह में भर लिया, मेरे निप्पल चूसने से उनके मुँह से शह्ह्ह्ह की सिसकारी निकली, दोनों निप्पल को में बरी बरी चूसने लगा पर खड़े खड़े दिक्कत हो रही थी तो उन्हें उठाया और बिस्तर पर लेता diya)Shhhhhh शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह, ज्यादा टाइम नहीं है शिव, ध्यान rakhana.(Mene चूचिया चूसते हुए उनके पैरो को सहलाना सुरु किआ और साथ में पेटीकोट को ऊपर उठता गया, जब मेरा हाथ झंघ के जोड़ पर पंहुचा तो वह पंतय नहीं थी, मेरी उंगलिया सीधी छूट से टकराई, मेरी उंगलिओ पर चुटकी होठो की नर्माहट के साथ चिकनाहट भी महसूस हुई, जो बताती थी की वो पहले से hi गर्म है, में हलके हलके छूट सहलाते हुए एक ऊँगली अंदर दाल di)Shhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह, तुमने पागल कर दिया है मुझे शिव, में कब से तरस रही थी इसके लिए.

शिव : आप तो पूरी तयारी से आयी हो? (वो सिर्फ मुस्कुरायी, मेने भी अपने कपडे निकल दिए, में पूरा नंगा हो गया, वो मुझे देख रही थी, में उनके करीब गया, में जमीं पर खड़ा था और वो पलंग पर लेती हुई थी, में उनके शिर के पास खड़ा हो गया, उन्होंने मेरे लुंड को देखा और मेरी आँखों में देखा, फिर वो थोड़ी बहार की और खिसकी, में भी थोड़ा अंदर खिसका, मेरा लुंड अब उनके मुँह के पास था, उन्होंने लुंड पकड़ा और साइड के बल लेट ते हुए मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया, उनके गरम मुँह का एहसास होते hi मेरी भी सिसकी निकल गयी, वो लुंड के सुपडे को चाट ते हुए उसे चूस रही थी, प्यारी सी सूरत वाली इस भाभी के मुँह में लुंड देख मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मने उनका घाघरा थोड़ा ऊपर उठा दिया तो उनके चुत्तड़ नंगे हो गए, गोर गोर नंगे छुटड़ो को देखते हुए में उन्हें सहलाने लगा और वो मेरे लुंड को चूस रही थी. मेने उनके चेहरे को देखा तो वो मेरे लुंड को चूसने में खोयी हुई थी, उनका मासूम चेहरा देख सच में मुझे यकीं नहीं होता था की वो ऐसा कर शक्ति है, हलाकि वो ऐसा कई बार कर चुकी थी पर फिर भी उनके चेहरे की मासूमियत मुझे और उत्तेजित कर देती थी. ज्यादा टाइम था नहीं था तो में थोड़ा पीछे हुआ, तो लुंड उनके मुँह से निकल गया, लुंड और मुँह के बिच एक माहिम सा थूक का तर जुड़ा हुआ था जो एक दो पल में hi टूट गया. वो मेरी और देखने लगी तो मेने उनके पेअर पकड़े और उन्हें मेरी और खिंचा, अब उनकी छूट मेरी और हो चुकी थी, वो पलंग पर लेती हुई थी, उन्होंने भी अपने पेअर फैला दिए और घुटनो से मोड़ दिए. वो पलंग पर थी और में निचे खड़ा था, उनकी नंगी छूट मेरी आँखों के सामने थे, भले टाइम नहीं था पर उस प्यारी सी छूट को कहते बगैर मुझे कहा चैन आनेवाला था, मेने छूट के होठो को सहलाया ) शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (में झुका और छूट को मुँह में भर लिया, पेअर फैले हुए थे तो छूट का छेड़ भी खुल कर मेरे सामने था, मेने जीभ अंदर डाली और उसे चाटने लगा)

भाभी : शहहह, ष्ठीीीिव शह्ह्ह्ह आआह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह में पागल हो जाउंगी शहहहहह में अपने आपको रोक नहीं पति हु शिव शह्ह्ह्ह (वो मेरे बालो को सहलाने लगी और अपनी छूट को चाटने के लिए मुझे उकसाने लगी, थोड़ी देर छूट चाटने के बाद में खड़ा हुआ और लुंड को छूट पर रक्खा और उसे छूट पर रगड़ने लगा, वो मेरी और देख रही थी, मेने नीचे इस्सर किआ तो वो अपनी कोहनिओ के बल थोड़ी ऊपर उठी और निचे देखने लगी, वो टंगे फैलाये थी तो उनके चेहरे पर शर्म की लाली छ गयी, में मुस्कुराया तो वो शर्माने lagi,)(Waise भी वो बहोत गर्म हो चुकी थी, मान के सुख के साथ साथ सरीर का सुख भी उन्हें शिव की और आकर्षित कर रहा था, उस बड़े से लुंड को अपनी छूट के होठो पर फिसलता देख उसके अंदर जैसे चींटिया दौड़ रही थी, भले hi वो एक संस्कारी औरत थी पर थी तो वो औरत hi और कुदरत के सामने वो बेबस थी, अपने शरीर का ये आनंद उसे बहोत अच्छा लग रहा था) (मेने लुंड को छेड़ पर लगाया, वो अपनी छूट को hi देख रही थी, मेने लुंड पर दबाव बढ़ाया तो वो अंदर जाने laga)(Apni छूट में जाते उस बड़े से लुंड को देख सच में उसे आश्चर्य हो रहा था, उसे पता था की वो अंदर चला जायेगा फिर भी उसे आश्चर्य होता hi था, अपने छोटे से छेड़ को फैलाकर अंदर जाते उस दैत्याकार लुंड को वो आश्चर्य से देखती रही, जब थोड़ा थोड़ा कर के पूरा लुंड उसकी छूट में समां गया तो उसने रहत की साँस ली, शिव आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार कर रहा था, उसने शिव को देखा फिर वो अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे उस लुंड को देखने लगी, इतना खुल कर तो वो कभी अपने पति के साथ भी सेक्स नहीं कर पायी थी, अपनी छूट की दीवारों पर हो रहे घरसँ से वो मचलने लगी, वो पीछे लुढ़क गयी और शिव को देखते हुए अपने अंदर आ जा रहे उसे लुंड को महसूस करने lagi.)Shhhhhh शह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह शहहह शह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है shhhhhh(Apni इस नग्नता पर भी अब उसे शर्म नहीं आ रही थी, वो उस आनंद को महसूस करने लगी)

शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शिव शहहह मुझे किश करो शिव shhhh(Me झुका और उनके होठो को चूसने लगा तो वो भी बड़ी तीव्रता से मेरे होठो को चूसने लगी, लुंड के धक्के लगातार चल रहे थे जिस से उनके मुँह से आवाजे निकल रही thi)Ummmh ुम्मम्ह स्लुर्प स्लुर्प उम्मम्मम ummmm(Bhabhi उसे अपनी बहो में कस्ते हुए उसके होठो को चूस रही थी, शिव उसके स्तन को भी मसल रहा था, शिव काफी देर तक उसे ऐसे hi छोड़ता रहा तो वो सेह न पायी और झाड़ गयी, उसने आनंद का एक पड़ाव पर कर लिया था, जब वो रुका तो उसने शिव को देखा, उसने लुंड बहार निकल लिया, वो उसके नए आदेश का जैसे इंतजार कर रही थी. शिव ने उसे खड़ा किआ और उसे पलंग पर झुका दिया, खड़े होने से पेटीकोट वापस निचे हो गया था, वो अपनी कोहनी टिकाये हुए झुक गयी, उसे पता था की शिव अब उसे पीछे से छोड़ेगा, शर्म के बावजूद छोड़ने का आनंद लेने वो अपनी गांड उठाये शिव के आगे बढ़ने का इंतजार करने लगी. शिव ने उसका पेटीकोट ऊपर उठा दिया, फिर से उसके चुत्तड़ उसके सामने नंगे थे, उसे शर्म आ रही थी पर उसने मुद कर शिव को देखा. वो कामुकता से उसके चुत्तड़ो को देख रहा था, एक औरत के तौर पर उसे अपने चुत्तड़ो को ऐसे देखता प् कर वो फूली नहीं समां रही थी, दूसरी औरतो की तरह उसे भी ये अच्छा लग रहा था की शिव उसके चुत्तड़ो को खा जानेवाली नजरो से देख रहा था, उसने खुद अपनी झंगे और फैलाई और अपने कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठा दिया, उसने देखा की शिव उसे देख कर अपने लुंड को हिला रहा था, उसे शिव का ऐसा करना बहोत अच्छा लगा, शिव उसके कूल्हे को फैला कर उसकी छूट और गांड के छेड़ पर अपनी ऊँगली से सेहला रहा था, मज़े से उसकी आंखे बंद होने लगी, उसके कूल्हों को फैलते हुए जैसे hi शिव ने उसके गांड के छेड़ को अपनी जीभ से कुरेदा तो उसके मुँह से सिस्किअ निकलने लगी, अपनी गांड के छेड़ पर उसे जीभ का एहसास बहोत पसंद आ रहा था, उसके पति ने तो कभी ऐसा किआ नहीं था और सही भी था क्यों की वो गन्दी जगह थी पर शिव को जैसे इन सब से कोई फर्क hi नहीं पड़ता था, उसने अपने पेअर थोड़े झुकाये और गांड को और चौड़ा किआ ताकि शिव को सहूलियत हो jaye)Shhhhhh उफ्फफ्फ्फ़ शठ आआह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह तुम्हे वह क्या अच्छा लगता है शिव जो ऐसे उस गंदे छेड़ को चाट रहे ho?(Mene मुँह हटाया और ऊँगली को थोड़ा ठुकवाला किआ और गांड के छेड़ में डालने लगा) वह क्यों दाल रहे हो शिव, वो गन्दा है.

शिव : एक मिनट रुको तो सही भाभी (शिव ने और थूक लगाया और ऊँगली छेड़ को फैला कर अंदर चली gayi(Mamta को ये अजीब लग रहा था पर थोड़ी hi देर में ऊँगली से उसे मज़ा आने लगा, उसकी गान के छेड़ में आज तक उसके अलावा किसी ने ऐसा नहीं किआ था, उसने भी सिर्फ उसे साफ़ करते वक़्त hi ऐसा किआ था, पर आज जब शिव कर रहा था तो उसे अजीब लग रहा था, शिव की ऊँगली काफी अंदर तक जा रही थी, जिस से उसको अपने उस छेड़ में अजीब सा महसूस हो रहा tha)Aap को पता है भाभी, यहाँ भी छोड़ते है.

भाभी : क्या कह रहे हो, वह क्यों?

शिव : बस करते है, वह भी मज़ा hi आता है.

भाभी : (शिव को देखते hue)Tumne किआ है ऐसा?

शिव : (वैसे hi में भाभी को बहोत कुछ बता चूका tha)Ha भाभी.

भाभी : मेरे साथ भी तुम्हे वह करना है? (भले hi उसे अजीब लग रहा था पर वो चाहती थी की वो शिव को हर सुख दे) अगर तेरा मान है तो कर ले.

शिव : क्या भाभी आप भी, मेरी हर बात के लिए तैयार हो जाती हो, आप को पता है, अगर अभी किआ तो आप ठीक से चल भी नहीं पाओगी.

भाभी : तो क्या हुआ, में सेह लुंगी, तू कर ले.

शिव : (भाभी को खड़ा करते हुए, उनकी आँखों में देख कर) पागल हो गयी हो आप.

भाभी : (प्यार से शिव को देखते hue)Ha शायद, तेरे लिए कुछ भी कर शक्ति hu.(Mene उनके होठो को चुम लिया, वो भी मुज से लिपट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी)

शिव : अभी नहीं, फिर कभी, मौका मिला तो इस का भी अनुभव करवाऊंगा आप को, अभी फील हल वो hi जो कर रहे थे (वो मुस्कुरायी और फिर से पलंग पर कोहनी टिकते हुए कड़ी हो गयी, मेने फिर से उनका पेटीकोट उठाया और अपना लुंड छूट पे लगाया और उसे धक्का मारा)

भाभी : आयआईई shhhhh(Usne अपने मुँह को दबा दिया पर शिव को रोका नहीं, दो hi धक्को में पूरा लुंड उसकी बच्चेदानी को तक पहुंच गया, वो बिस्तर पर झुक गयी और अपने मुँह को बिस्तर में छुपा दिया, शिव फिर से उसे छोड़ने लगा था, धक्को के साथ उसके मुँह से आनंद की सिस्किअ फुट रही थी, अपनी आवाज को वो बिस्तर में अपना मुँह दबाये रोकने का प्रयास कर रही थी, शिव के धक्के तेज थे और उसके धक्को से वो बिस्तर पर भी पूरी हिल रही थी, पता नहीं पर उसे बहोत मज़ा आ रहा था, अपने अंदर कोहराम मचाते उस लुंड को वो महसूस करते हुए फिर से झड़ने लगी, उसे अपनी झंगो से बेहटा पानी भी महसूस हो रहा था, शिव उसे जोर जोर से छोड़ रहा था, दर्द के बावजूद उसे बहोत मज़ा आ रहा था, ऐसा दर्द तो वो बार बार सहने को तैयार thi.)Ahhh उफ्फ्फ ैई ैई शहहह ाः ahhhhh(Shiv का फुला हुआ सूपड़ा उसकी छूट को अच्छी तरह से रगड़ कर छोड़ रहा था, उसकी ऐसी चुदाई से hi तो वो अपने आपको रोक नहीं पति थी, उसे बार बार ये सुख चाहिए था, और उसे ये भी पता था की शिव चला जायेगा तो ये मुमकिन नहीं, इस्सलिये तो वो जितना प् शक्ति थी प् लेना चाहती thi.Shiv ने फिर से लुंड बहार निकल दिया तो वो धड़ाम से बिस्तर पर ौंदे मुँह गिर पड़ी. शिव ने फिर से उसे सीधी की और फिर वो लुंड उसकी छूट में उतर गया, उसने आंखे बंद कर ली और शिव को जो करना था करने दिया, उसके कपडे भी पशीने से भीग गए थे, जब शिव उसके ऊपर झुका और उसके स्तन को चूसने लगा तो उसने अपनी बहे शिव के गलेमे दाल दी. शिव के लगातार धक्को से उसकी छूट पानी की नदिया बहा रही थी, उसने शिव की कमर पर अपने पेअर फसा दिया, शिव के तेज धक्को से उसे लग रहा था की अब वो भी झाड़नेवाला hai,)Ummmm उम्म्म्म उम्म्म्म अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्ह शहहह छोड़ो सीईव शहहह अह्ह्ह्ह छोड़ो शहहह ऐसे hi शहहह अह्ह्ह्ह तुम्हे अच्छा लग रहा है न शठ अह्ह्ह्ह मुझे छोड़ना पसंद है न तुम्हे?

शिव : है भाभी अह्ह्ह शहहह अआप बहोत मस्त हो शहहह आपकी छूट बहोत मज़ा दे रही है हम्म हम्म हम्म्म.

भाभी : तुम्हारे लिए hi है शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह जितना मर्ज़ी छोड़ो मुझे शठ अह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शठ अह्ह्ह्ह और छोड़ो शहहह, मेरा ऐसा कहना तुम्हे अच्छा लगता है न शठ अह्ह्ह शहहहहह तुम जैसा कहोगे वैसा में बोलूंगी शहहह अह्ह्ह्हह जोर से शहहह अह्ह्ह छोड़ लो मुझे शहहह अह्ह्ह्हह में फिर झाड़नेवाली हु शहहह अह्हह्ह्ह्ह, मुझे बिस्तर पर लेता कर पुरे मेरे ऊपर आजाओ शिव, मुझे अपने निचे दबा कर chodo.(Mene उन्हें पूरा उठा कर एक hi पल में उन्हें बिस्तर पर लेता दिया, लुंड भी नहीं निकला और फिर से उन्हें छोड़ने लगा, वो मेरे निचे दबी हुई थी पर मेरे शिर को और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून घड़ा रही थी, वो मुझे अपनी और खिंच रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शहहहहह तुम्हारा लुंड पूरा मेरे अंदर है शह्ह्ह्ह जोर से शिव शहहह अह्ह्ह मेरी चिंता मात करो शह्ह्ह्ह मुझे मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे शहहह जोर से छोड़ो शहहहहह आईई आईई आईईईई शहहह आआह ैई आईईईई मुमीइ शठ अह्ह्ह्ह.

शिव : में भी झाड़नेवाला हु भाभी.

भाभी : झाड़ जाओ शहहह में तो कब की पूरी हो चुकी हु शठ आह्हः मेरी छूट को भर दो शठ अह्ह्ह्ह मेरे गर्भ में अपना बीज बो दो शहहह अह्ह्ह्हह मुझे माँ बना दो शहहह अह्ह्ह्हह में फिर से गयीईइ शहहहहह. अह्ह्ह ये कैसा जादू है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह इतना मज़ा शह्ह्ह्ह अह्ह्ह में शेनही प् रही हु शहहह अह्हह्ह्ह्ह मेरे शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : आप खुस हो न भाभी शठ हम्म्म हम्म्म हम्म्म.

भाभी : हआ शिव, में बहोत खुस हु शहहह ये मेरी जिंदगी के बहोत खास लम्हे है शहहहहह पता नहीं फिर कभी मिलेंगे की नहीं शहहह अह्ह्ह्हह.

शिव : हुईं मिलनेगे भाभी, फिर जरूर मिलेंगे.

भाभी : तुम सच कह रहे हो नाआ अह्ह्ह शहहह अह्ह्ह, शहहह मुज से मिलोगे न शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : है भाभी, जरूर मिलूंगा, शहहह अह्ह्ह्हह. में झाड़नेवाला हु भाभी.

भाभी : शहहह अह्ह्ह्ह भर दो शठ अह्ह्ह भर दो अंदर. (में झड़ने लगा और मेरे वीर्य की पिचकारियां छूट पड़ी) शहहहहह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह सच कहती हु शहहह ऐसा मेने पहले कभी महसूस नहीं किआ था शहहह अह्हह्ह्ह्ह, तुमने मुझे एक औरत के शरीर का एहसास दिलाया है मुझे शहहह शिईयिव शहहह ी रॉय लव यू, माय बेबी शहहह अह्ह्ह्ह ी रॉय लव यू.

में झाड़ गया, थोड़ी देर में उनसे किश कर ता रहा और उनके बूब्स दबा ता गया, लुंड तो छूट में hi था. वो पूरी तरह से संतुस्ट हो कर थकी हुई बेहाल लेती हुई थी, पर फिर भी मेरी पीठ को सेहला रही थी, कभी कभी मेरे गाल को मेरे गले को चुम रही थी. थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद.

भाभी : अब छोडो मुझे शिव, मुझे जाना है.

शिव : मान नहीं कर रहा.

भाभी : मेरा भी मान नहीं कर रहा, में फिर सुबह आउंगी.

हम दोनों अलग हुए, मेने कपडे पहनने और वो भी अपने कपडे सही करने लगी, तभी हमे बाइक की आवाज आयी.

शिव : जूही आ गयी भाभी.

भाभी : तुम दरवाजा खोल दो. (मेने दरवाजा खोल दिया, वो जल्दी जल्दी अपने कपडे सही करने लगी फिर बिस्तर भी सही करने लगी)

जूही घर में दाखिल हुई, अंदर कोई नहीं था, वो भैया के कमरे में गयी तो भैया सोये हुए थे, उसने भाभी को पुकारा पर कोई आवाज नहीं आयी. मां कर दरवाजा बंद था, उसने बहार भी देखा तो कोई नजर न आया, वो ऊपर गयी. जब वो रूम में दाखिल हुई तो शिव पढ़ रहा था जैसे hi वो अंदर गयी तो उसने देखा की भाभी झाड़ू लगा रही थी.

जूही : भाभी आप यहाँ?

भाभी : है, साफ़ सफाई कर रही थी. तू कब आयी?

जूही : अभी आयी भाभी.

भाभी : जा तू माँ बाबूजी के लिए चाय बना, में ये ख़तम कर के आती हु, फिर तुम्हारे और शिव के लिए दूध बनती हु.

जूही : ठीक है भाभी. (वो नीचे चली गयी, भाभी ने दरवाजे से बहार झक कर ये कन्फर्म किआ, फिर मेरी और देखा)

शिव : (हम दोनों मुस्कुरा diye)Aap बहोत चालक हो भाभी.

भाभी : (मुस्कुराते hue)Tum भी नीचे आ जाओ, में चलती हु.

वो नीचे चली गयी, थोड़ी देर बाद में भी निचे चला गया. दोपहर में जूही की मम्मी और पापा अपने रूम में थे, दोनों नंगे लेते हुए थे.

रागिनी : इस बार दो हफ्ते लगा दिए आने में?

हरिसिंह :(जूही के papa)Ha, काम की वजह से नहीं आ पाया. चंद्र की खबर सुन कर भी आना चाहता था पर आ न पाया.

रागिनी : कोई बात नहीं, शिव ने वैसे भी सब संभल लिया था. अच्छा लड़का है.

हरिसिंह : हम्म्म्म.

रागिनी : में क्या कहती हु, जूही के लिए उसकी बात चलाये तो?

हरिसिंह : वो अनाथ है, न उसके खंडन का पता न माँ बाप का, लोग क्या कहेंगे, की अपनी बेटी के लिए कोई ढंग का घर भी नहीं धुंध पाए.

रागिनी : आप इतने समय से उसके लिए लड़के धुंध रहे है, क्या शिव के जैसा एक भी मिला, हमारी बेटी इतनी लम्बी है की कोई उसके बराबर भी नहीं मिला और अगर मिला तो वो दिखने में अच्छा नहीं था या और कुछ.

हरिसिंह : इसका मतलब ये नहीं की हम उसे किसी अनाथ को सूप दे.

रागिनी : आप ऐसा क्यों सोचते है, ऐसा सोचिये की हम शिव को भी यही रखलेंगे, हमारी लड़की हमेसा अपने साथ hi रहेगी.

हरिसिंह : तुम्हारा मतलब है घर जमाई.

रागिनी : तो उसमे बुरा hi क्या है, वैसे भी वो अनाथ है तो वो मन भी नहीं करेगा.

हरिसिंह : मुझे सोचने का टाइम दो. में ऐसे hi निर्णय नहीं ले शक्ति.

रागिनी : मुझे तो शिव बहोत पसंद है, और मुझे लगता है जूही भी उसे पसंद करती है.

हरिसिंह : ये क्या कह रही हो तुम, ऐसे फैसले जल्द बजी में नहीं लिए जाते, हमे समाज में रहना है, मुझे थोड़ा टाइम डोफिर देखते है.

रागिनी : आप मेरी बात कभी सुनते hi नहीं. ठीक है जो करना है वो कीजिये.

रागिनी ने कपडे पहने और वो बहार निकल गयी. हरिसिंह उसकी बातो को सोच रहा था. हम सब ने नास्ता ख़तम किआ और फिर हम वह से स्टेडियम चले गए.

माजी : बहु, तुम्हे शिव कैसा लगा?

ममता : (अचानक हुए ऐसे सवाल से वो अंदर तक हिल गयी, वो माजी को देखने लगी, उसका शरीर हल्का हल्का कैंप रहा था, वो क्या जवाब दे उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था)

माजी : अरे ऐसे क्या देख रही है, जवाब दे, में सोच रही थी की जूही के लिए वो कैसा रहेगा?

ममता : (उसने रहत की साँस ली, माजी तो किसी और hi बात के लिए पूछ रही thi)Aap ने ऐसा क्यों सोचा माजी.

माजी : तू तो जानती है, हम जब भी जूही से शादी की बात करते है तो वो ताल देती है, और सच कहु तो आज तक मुझे भी उसकी टक्कर का कोई दिखा नहीं, पर मान मार कर में है कर देती, पर शिव को देख कर लगता है जैसे वो hi है जो इस लड़की को संभल शक्ति है. तुजे क्या लगता है?

ममता : जो आप सोचे माजी, शिव अच्छा hi है.

माजी : वो hi तो, मेने तेरे बाबूजी से कहा तो वो उसके अनाथ होने की बात को लेकर बैठे है, में तो कहती हु अच्छा hi है न वो अनाथ है, वो हमारे साथ hi रहेगा, जूही भी सदा हमारे आँखों के सामने रहे गई, क्या कहती हो तुम.

ममता : (शिव हमेसा यहाँ रहेगा इस बात से hi वो तो खुस हो gayi)Sahi कहा आपने माजी.

माजी : तू शिव से बात कर के देख, वो क्या कहता है?

ममता : (कुछ सोचते hue)Maaji एक बात कहु, अगर बुरा न माने तो?

माजी : है बोल न.

ममता : माजी, वैसे भी ऐसे मामलो में जल्द बजी करना ठीक नहीं, और अभी जैसा आप कह रही है बाबूजी भी तैयार नहीं है, तो हमें वक़्त पर छोड़ देना चाहिए, है अगर जूही कभी इस बारेमे कहती है तो फिर हम शिव से पूछ सकते है, दोनों समझदार है, अगर वो आपस में ऐसा फैसला करते है तो हमे कोई एतराज नहीं होगा, पर पहले उन्दोनो को तो लगने दो.

माजी : शायद तू सही कह रही है, ठीक है, देखते है.

उस रात फिर से हमे विष्णुभाई के घर से खाने का नौटा था क्यों की जूही उस वक़्त नहीं आयी थी. में वह नहीं जाना चाहता था पर जाना पड़ा. पारुल मुज से बात hi नहीं कर रही थी, न मेरी और देख रही थी, जूही ने भी ये देखा.

जूही : अब तुजे क्या दिक्कत है, तूने कहा था की वो फिर तेरे घर नहीं आया तो तू नाराज है, अब तो वो आ गे, अभी भी क्यों मुँह फुलाए है. (मेने पारुल को देखा, उसने भी मुझे देखा, हम दोनों समाज रहे थे की वो क्यों नाराज है पर जूही के सामने तो वो बोल नहीं शक्ति थी)

शिव : (उसको छेड़ते hue)Sach कह रही हो तुम, अब कैसी नाराजगी, में तो आ hi गया न. (वो मुझे घर कर देखने लगी, में मुस्कुराया, वो दूसरी और देखने लगी, और अच्छा hi था की हमे ऐसा कोई मौका नहीं मिला,)

हम वह से घर लौट आये, अंकल टीवी देख रहे थे तो जूही को मौका नहीं मिला, में भी पढ़ाई कर के सो गया. भाभी आनेवाली थी तो में दरवाजा खुला रख कर hi सो गया. सुबह फिर हमने सेक्स किआ. (ममता ने शिव को शदीवाली बात नहीं बताई, क्यों की वो चाहती थी की जो भी निर्णय करे वो शिव और जूही मिल कर करे)

हमारा कॉम्पिटिओं था तो उस दिन वही हुआ जो होना था. मेने और जूही ने कॉम्पिटिओं जीत लिया था. विष्णुभाई भी ावाल आये थे. हम सबने वह छोटी सी पार्टी की और फिर घर आ गए. जूही के पापा चले गए थे. आज शाम की ट्रैन से हमें निकलना था. भाभी बहोत उदास थी. में जब ऊपर पैकिंग कर रहा था तो वो किसी बहाने से ऊपर आयी. जब मेने उनकी और देखा तो वो दौड़ती हुई मुझसे लिपट गयी, और रोने लगी. मेरी भ आंखे नाम हो गयी, सच में में जैसे भाभी से जुड़ चूका था.

भाभी : (रट hue)Tum वापस आओगे न?

शिव: है भाभी, जरूर आऊंगा, आप खुस खबरि सुनना में जरूर आऊंगा.

भाभी : (उनको अभी भी शंका तो thi)Nahi, खुस खबरि हो या न हो, तुम मुझसे मिलने आओगे, वडा करो.

शिव : में वडा करता हु भाभी, पर मुझे यकीं है की में आपकी खुशखबरी पर hi आऊंगा. आप को यकीं नहीं?

भाभी : आशा है, पर भाग्य के आगे बेबस हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Bhabhi, में अभागा और अनाथ हु, तो मुझे देख कर आपका बुरा भाग्य भी भाग जायेगा.

भाभी : (मुझे कास के गले लगते hue)Shiiiiiiiv, मुझे फ़ोन करना.

शिव : फ़ोन से याद आया, वो वीडियो क्लिप आपको भेजदेता हु.

भाभी : उसकी जरुरत नहीं, अपने पास रखना, अगर कभी जरुरत पड़े तो. ठनक यू फॉर एव्री थिंग व्हिच यू दीद फॉर में. यू ऑलवेज रिमेंस इन माय हार्ट शिव, ी रियली लव यू.

शिव : में तू भाभी, एंड don’t बे थैंकफुल्ल, आपो को कभी थैंक यू नहीं कहते.

भाभी : सच कहा तुमने, मुझसे मिलने आना और फ़ोन भी करते rehna.(Wo फिर से रोने लगी, मेने उनके माथे को चूमा, उनके गाल को चूमा, उन्हें गले लगाया, जैसे तैसे उन्हें शांत किआ)

जब हम जा रहे थे तो आंटी ने भी मुझे फिर से आने को कहा, चंद्रपाल भाई ने भी कहा, जब हम निकले तो भाभी की आंखे फिर से लाल हो गयी, आंसू जैसे टपकने को हो रहे थे, वो सबसे पीछे कड़ी थी तो किसी की उनपर नजर नहीं थी, वो अपने आंसू साड़ी के पल्लू से पोछ कर छुपाने की कोशिस कर रही थी पर उनकी आँखों की लाली नहीं छुप रही थी, मेरा मान कर रहा था की में उनको गले लगा लू, पर में ऐसा नहीं कर शक्ति था. विष्णुभाई हमे स्टेशन छोड़ गए. ट्रैन में हमे रिजर्वेशन मिल गया था तो कोई दिक्कत नहीं थी. जूही ने सामान एक बिरथ पर रक्खा और वो मेरे पास आ कर बेथ गयी. वैसे भी अभी सोने की देर थी तो हम बाते करने लगे.
 
Back
Top