Adultery Kundali Bhagya - Page 7 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 28

(सेक्स के मामले में मेरी हिम्मत खुलती जा रही थी, और क्यों न हो ऐसी खूबसूरत मैडम का प्रस्ताव में कैसे ठुकरा सकता था. ) शिव ने स्नेहा को किचन में hi पकड़ लिया था, शिव का ऐसे पहल करना उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो उसे दूध भी नहीं बनाने दे रहा था, उसकी बेशब्री देख उसके चेहरे पर मुस्कान फैली हुई थी. वो मेरे होठो को बड़ी बेदर्दी से चूस रहा था, उसका उतावलापन मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, में भी उसे चूमने लगी.





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उसके हाथ उसके स्तन पर, कमर पर हर जगह घूम रहे थे और उसके होठो को तपिश वो अपने कंधे पर महसूस कर रही थी.

स्नेहा :शहहहहह तुम न मुझे, अह्ह्ह्ह पागल बना के छोडो गए शहहह. थोड़ी देर तो रुको अह्हह्ह्ह्ह (उसका एक हाथ मेरी छूट पर चला गया और वो उसे स्कर्ट के उपरसे hi मसलने लगा, आज वो मुझसे हक़ से प्यार जाता रहा था) आह्ह्ह्ह षीयववव, रुको नाआ, थोड़ी देर बाद सब कर लेना, में कही भागी तो नहीं जा rahi(Me उसे रोक तो रही थी पर मेरे पेअर अपने आप खुलने लगे और उसे मेरी छूट पकड़ने में आसानी हो गयी, वो एक हाथ से मेरे स्तन को मसल रहा था और दूसरे हाथ से मेरी छूट को मसल रहा था, मेरा शरीर इस अशीम आनंद में लहरा रहा था और शरीर झटके खा रहा था. मेरे कहने पर उसने मुझे छोड़ दिया पर उसका छोड़ना मुझे अच्छा नहीं लगा, मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुराते हुए अपने घुटनो के बल बेथ गया और मेरी स्कर्ट पीछे से पकड़ कर ऊपर चढ़ा ने लगा, मेरी छूट पानी बहाने लगी थी, मेरे चुत्तड़ उस बेशरम के सामने थे, वो बड़ी हसरत से उसे देख रहा था, मेरी पतली पिंक पंतय चुत्तड़ो की दरार में फांसी हुई थी और वो नीचे बेथ कर मेरे चुत्तड़ो को सेहला रहा था, मेरे अंदर तूफान उठनेलगा था, वो मेरे चुत्तड़ो को दबाते हुए उसे चूमने और चाटने लगा. मेरे अंदर काम वासना का तूफान हिलोडे खाने लगा. ये लड़का मुझे पागल किये जा रहा था. में अपने कूल्हों को दये बाये हिला रही थी एक तो मुझे गुदगुदी हो रही थी और साथ में खुमारी चढ़ने लगी थी. उसने मेरी पंतय साइड में खिसकायी और छुटड़ो के बिच अपना मुँह घुसा दिया. उसकी जीभ मेरी छूट के होठो को फैलते हुए अंदर तक घुस गयी और उसकी नाक मेरी गांड के छेड़ पर तिकी हुई थी, वो जैसे जैसे मेरी छूट को अपनी जीभ से चाट रहा था मेरी कमर झटके खा रही थी. ऐसे किचन में तो कभी पवन ने भी प्यार नहीं किआ था. में उस असीम आनंद में डूबने लगी थी, में और झुक गयी. ऐसे तो उस निर्लज्ज को और सहूलियत हो गयी. मेरी भीगी हुई छूट उसके सामने और खुल गयी थी. वो उसकी फैंको को फैलाकर उसका निरिक्षण करने लगा, मेने पीछे मुड़कर देखा तो वो बड़े गौर से देख रहा था, फिर उसने एक ऊँगली से छूट के छेद में डाली तो मेरी सिसकी निकल गयी. उसने अपनी ऊँगली दबायी और छूट में और अंदर डालने लगा. छूट पूरी गीली हो चुकी थी तो उसकी ऊँगली भी गीली हो गयी और वो आगे पीछे करने लगा. (शिव के लिए छूट अभी भी एक रहश्य hi था, वो देख रहा था की छेड़ में कितनी आसानी से ऊँगली चली गयी, मतलब वह जगह तो है, पर लतादिदी के वह जगह क्यों नहीं) मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मेने उसको रोका नहीं और उसकी ऊँगली का मज़ा लेने लगी. उसकी ऊँगली भी उसकी की तरह लम्भी थी तो वो बहोत अंदर तक जा रही थी. जैसे जैसे वो ऊँगली चला रहा था मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी और छूट से पानी निकल रहा था. मुझे शर्म भी आ रही थी की कैसे में उसके सामने अपनी गांड फैलाये, छूट निकल कर कड़ी थी, ये सोच कर hi मेरी छूट से पानी टपकने लगा था, मेरी उत्तेजना भी चरम पर थी. जैसे hi दूध बना मेने गैस बांध किआ और दुःख को एक गिलास में निकला.

स्नेहा : शिव शहहह अह्ह्ह्ह रुको, दूध बन गया है shhhhh.(Wo छोड़ hi नहीं रहा था, तो में सीधे घूम gayi)utho Shiv(Maine उसको खड़ा किआ तो वो खड़े होते hi मेरे होठो को चूसने laga)mmmmm Shiiiiiv(Maine अपने होठ छुड़ाए और दूध का गिलास उसके हाथमे पकड़ाया) जितने तुम बेक़रार हो उस से कही ज्यादा में बेक़रार हु शिव, तुम दूध पिता में ये पीती हु. (में भी पूरी बेशरम बनती जा रही थी में वही बेथ गयी और उसकी पंत निचे खिसकायी और उसके अंडरवियर में से उसका लुंड बहार निकल दिया. उस प्यारे से अंग तो देख कर मुझसे रहा नहीं गया और में उस पर अपना चेहरा रगड़ कर प्यार जताने लगी.)





शिव : (वो मेरे लुंड से खेल रही थी, में दूध पिटे हुए उनकी हरकतों को देख रहा था, वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी, उन्होंने लुंड को अपने मुँह में भर लिया, उसके मुँह की गर्माहट को मेरे लुंड पर महसूस करते hi मेरी सिसकी निकलनेवाली थी और सायद दूध भी, मेने अपना मुँह दबा कर दोनों को रोका.)

स्नेहा : क्यों बच्चू अभी मुझे परेशान कर रहे थे न, अब देखो में क्या करती hu(Wo मेरे कूल्हों को पकड़ कर लुंड को चाटने और चूसने लगी, में दूध जल्दी जल्दी पिने लगा, मेने दूध ख़तम किआ और गिलास वही रख दिया और स्नेहा मैडम को पकड़ कर खड़ा किआ तो वो नाराजगी से मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया और उन्हें अपनी बहो में उठा liya)(Wo मुझे बहो में उठाये बड़े आराम से चल रहा था, मुझे उसकी ताकत पर गर्व हो रहा था, मुझे अपने फैसले पर भी गर्व हो रहा था की में इस इंसान से बच्चा पैदा करुँगी, मेरी आँखों में प्यार उमड़ आया था, में मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी, वो मुझे बैडरूम में ले आया और मुझे बिस्तर पर लेता दिया, वो मेरी बगल में बेथ कर मुझे देखने लगा, में भी उसे देख रही थी, मेरे बदन में आग लगी हुई थी)

उसकी निगाहे मेरे स्तन की और गयी, वो उसे बड़े गौर से देखने लगा, में उसके चेहरे के बदलते भाव देख रही थी. उसने मेरे टॉप को ऊपर किआ जिस से मेरे स्तन नंगे हो गए. वो उन्हें बड़े गौर से देखने लगा.





स्नेहा : इतने गौर से क्या देख रहे हो, पहलीबार तो नहीं देख रहे.

शिव : सच कहु तो पहलीबार hi ध्यान से देख रहा हु, आप कितनी गोरी है, और आपके शरीर पर कही भी बल नहीं है.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Wo इस लिए की मेने वैक्स करवाया है.

शिव : वो क्या होता है?

स्नेहा : लड़कीअ, अपने शरीर के बल निकलने के लिए ये करती है. अब तो ज्यादातर लड़कीअ ये करवाती है.

शिव : नहीं, अन्थालय में तो किसी भी लड़की ने ऐसा नहीं करवाया. उनके तो सबके पैरो पर और हाथ पर बाल है.

स्नेहा : (में समाज रही थी, उन बेचारिओ के पास पैसे कहा से आएंगे जो इन सब के लिए पैसे खर्च कर सके) ये सब छोडो, अभी यहाँ जो चल रहा है उसको करो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya करू.

स्नेहा : (शिव के हाथो को अपने स्तन पर रखते hue)Isse दबाओ, और मुझे प्यार करो.





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शिव : (मेने उस नरम मास्स के गोले को हाथ में भरा और उसे दबाने लगा, सच में वो बहोत मुलायम थे. निप्पल भी मेरे चुने से तन गया था. मेने जुक कर उसे अपने मुँह में भर लिया.





स्नेहा : ओह शिईयिव , shhhhhhhh(Wo मेरे स्तन को ऐसे चूस रहा था की मुझे हल्का दर्द भी हो रहा था, पर मुझे मज़ा आ रहा था तो मेने करने दिया, वो दोनों को बरी बरी दबाते हुए चूसने लगा, में उसका शिर सेहला रही थी, थोड़ी देर चुचिओ से खेलने के बाद वो नीचे चला गया, उसने मेरे स्कर्ट को ऊपर उठाया और मेरी पंतय को देखने लगा,





मेरे पति के अलावा ये पहला लड़का था जो इतने हक़ से मेरे निजी अंगो को देख रहा था, उसने ऊँगली से छूट के फुले हुए हिस्से को छुआ तो मेरी सिसकी निकल गयी, पता नहीं वो क्या सब गौर से देख रहा था, उसने पंतय को निकलना चाहा तो मेने अपनी गांड उठा कर उसकी सहायता ki,wo फिर मेरी छूट को देखने लगा )





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स्नेहा : क्या देख रहे हो?

शिव : इससे, कितनी प्यारी लगती है न, इस पर थोड़े से बाल है, अस्स पास क्यों नहीं है?

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Maine निकल दिए थे, क्यों तुम्हे बल पसंद है?

शिव : नहीं ऐसी कोई बात नहीं, इसपर बाल हो या न हो ये वैसे भी अच्छी hi लगती है.

स्नेहा : (उसकी बात पर में हसने lagi)Aisa क्यों?

शिव : वो तो मुझे भी पता नहीं, पर इससे देख कर कुछ कुछ होने लगता है.

स्नेहा : (में समाज रही थी उसकी बात ko)Ye कुदरती है शिव, मर्दो को ये पसंद आती है और औरतो को wo.(Usne अपनी एक ऊँगली मेरी छूट में डाली और age-pichhe करने लगा.): शःह्हीीिव्वववव, ahhhh(usne मेरी और देखा और अपना काम करता raha)shh. श. श अह्ह्ह बस शिईयिव अब्ब्ब्ब दाहाल दोऊ न.

शिव : थोड़ी देर मैडम.

स्नेहा : (पता नहीं उसके मान में क्या चल रहा था, उसने झुक कर अपना मुज मेरी छूट पर लगा दिया, में मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी)





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(उसकी जीभ छेद के अंदर जाने लगी तो मेरे चेहरे की रंगत बदलने लगी, उसकी lap-lapati जीभ, छूट की दीवारों पर फिसलने lagi,)Shhhhh अह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh)

मेने उसके शिर को अपने पैरो से पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पर दबाने लगी,





वो पूरी छूट को अपने होतो से चूसने लगा, और साथ में अपनी जीभ को छेद में अंदर बहार करने laga)Shhhhhh अह्ह्ह्हह बस शिव शहहह अब नहीं रहा जाता, शहहह, अब डाल्दो न.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya दाल दू मैडम?

स्नेहा : (उसके इस सवाल से मेने उसे देखा वो मुस्कुरा रहा था तो में भी muskurayi)Badmash ! तुम्हे पता है क्या डालना है.

शिव : आप क्या बोलती है उसे मैडम?

स्नेहा : क्यों तुजे पता नहीं उसे क्या कहते है?

शिव : मुझे तो पता है उसे पेनिस बोलते है किताब में लिखा था. पर आप क्या बोलती है.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Me भी पेनिस hi बोलती हु.

शिव : ओह! ठीक है.

उसने मेरा स्कर्ट निकल दिया, और मेरे पैरो को फैला कर बीचमे बेथ गया, उसका लुंड मेरी छूट को छू रहा था, वो थोड़ा ऊपर हुआ और मेरी छूट पे अपना लुंड घिसने लगा, फिर छेद के सामने रख दिया.

स्नेहा : रुको शिव, (मुझे पता था छूट गीली है पर फिर भी में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी, उसका काफी बड़ा है तो अभी भी थोड़ा दर्द होता है इसलिए मेने अपना थूक निकला और उसके लुंड को अच्छे से गिला कर दिया और थोड़ा थूक अपनी छूट पर भी लगा दी. उसके लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के छेद पर सेट किया फिर उसकी और देखते हुए मुस्कुराते हुए kaha)Ab अपना लुंड दाल दो Shiv.(Usne आश्चर्य से मेरी और देखा, तो में muskurayi)Kyu अब तो मेने सही कहा na?(Wo muskuraya)Kyu यही सुन न चाहता था मेरे मुँह से?

शिव : पता नहीं, आप कितनी प्यारी दिखती हो, अगर आप के साथ मेने ये सब न किआ होता तो में कभी ऐसा सोचता भी नहीं की आप ये सब भी कर सकती है. आप इतनी सीधी दिखती हो की में कभी सोच नहीं सकता की आप ऐसा कुछ बोलती भी होगी. बस इसीलिए पूछा था.

स्नेहा : तो क्या में सिर्फ शोकेस में रखने वाली गुड़िया हु, में भी औरत हु और में भी सब करती हु. मेरे मुँह से सुन कर कैसा लगा तुम्हे?

शिव : सच कहु तो थोड़ा अजीब लगता है पर साथ में मुझे उत्तेजित भी करता hai.(Wo लगातार अपना लुंड मेरी छूट पे घिसे जा रहा था)

स्नेहा : तो तुम चाहते हो में तुम्हारे साथ ऐसी बाटे करू? (उसने हिचकिचाते हुए हां में अपना शिर हिलाया) तो तुम थोड़ी देर पहले कह रहे थे न की में तुम्हे अपनी गर्लफ्रेंड लगती हु तो फिर मुझे पहले अपनी गिर्ल्फ़्रेडन बना लो फिर में ये सब कहूँगी.

शिव : आपको गर्लफ्रेंड बनालू, वो कैसे?

स्नेहा : (शिव का चेहरा सहलाते हुए उसकी आंखोमे बड़े प्यार से देखते hue)Tum मुझे मैडम मैडम कहना छोड़ दो और मेरे नाम से बुलाओ.

शिव : पर मैडम आप को में कैसे नाम से बुला सकता हु? आप मैडम भी हो और बड़ी भी हो.

स्नेहा :(रुठनेवाले भाव के sath)Kya में बुद्धि हु?

शिव : नहीं, मेरे कहने का वो मतलब नहीं था पर...

स्नेहा : (उसके हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खिंच कर, उसकी आंखोमे देखते hue)Bana लो न अपनी गर्लफ्रेंड शिव.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है Sne......ha.

स्नेहा : (मेरे नाम से बुलाने पर में इतनी खुस हो गयी की में उसके गले लग gayi)I लव यू शिव (मुझे उसका ऐसे बुलाना इतना पसंद आया की मेने अपने होठ उसके होठो पे चिपका दिए और उसको किश करने lagi)aise hi मुझे बुलाओ शिव में तुम्हारी गर्लफ्रेंड हु मुझे अपनी बना लो मेरे बॉयफ्रेंड. ी लव यू sweetheart.(Me इतनी खुस हो रही थी की पता नहीं मेरे मुँह से क्या क्या निकल रहा tha)Ab अपनी गर्लफ्रेंड को खुस करो शिव, अपना बड़ा सा लुंड मेरी छूट में दाल कर मुझे छोड़ो शिव में तड़प रही हु उसे लेने के liye.(Main ऐसा भी बोल सकती हु मुझे hi यकीं नहीं हो रहा था, ऐसे तो मेने कभी पवन के साथ भी नहीं बात की थी, मेरी बातो से उत्तेजित हो कर उसने मेरे होठो को चूसा फिर बेथ गया, मेरी टंगे फैलाकर अपने लुंड को मेरी छूट के मुहाने पर लगा कर अंदर डालने लगा उसका बड़ा लुंड सचमुच जान निकल देता था पर फिर भी मुझे वो बहोत पसंद था. उसे अपनी छूट में घुसता हुआ में महसूस कर रही थी और मेरी छूट इतनी फ़ैल रही थी की मुझे हल्का हल्का दर्द भी होने लगा





स्नेहा : aiiiiiiiiiiiiiiii (पर मेने उसे रोका नहीं और जब उसका लुंड मेरी बच्चे दानी से टकराया तो मेरी आंखे बंद हो गयी और मेने अपना शिर पीछे झुका लिया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मेरे शरीर पर पशीने की बुँदे निकल आयी थी. मेने थोड़ी सी आंख खोल कर शिव को देखा तो वो नीचे देख रहा था तो मेने भी निचे देखा जहा उसका मोटा लुंड मेरी छूट में धसा हुआ था)

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Kya देख रहे हो शिव, देखो मेरी छूट में तुम्हारा लुंड कैसे घुसा हुआ hai.(Wo मेरी और देख के muskuraya)Tumhe अच्छा लगरहा है न शिव?

शिव : है madam...oh! sorry...Sneha.(Man में, मैडम की छूट में भी मेरा लुंड चला गया)

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए) अब क्या सोच रहे हो शिव, अब छोड़ो अपनी स्नेहा को, मुझे प्यार करो Shiv.(Wo इतना उत्तेजित हो चूका था की उसका चेहरा लाल हो चूका था, उसने मुझे छोड़ना सुरु किया पहले आहिस्ता आहिस्ता पर फिर जोर जोर से, में उसके धक्को का मज़ा ले रही थी. वो मेरी छूट को देखते हुए मुझे छोड़ रहा था और में उसे उकसा रही थी)





अह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्ह ऐसे hi, मुझे वह अंदर बहोत अच्छा लग रहा है, अह्ह्ह तुम्हारा बड़ा लुंड मुझे बहोत मज़ा दे रहा है अह्ह्ह जोर से अह्ह्ह्ह और जोर से अह्ह्ह ahhh(me उसे उकसा रही थी, उसने मुझे इतना रगड़ रगड़ कर छोड़ा की मेरी छूट ने पानी hi छोड़ दिया तो मेने उसे अपनी बहो में कास लिया और झटके खाने लगी,





पशीने से भीगे बदन आपस में चिपके हुए थे, मेरे स्तन उसकी छाती से डाब गए थे. थोड़ी देर बाद उसने अपना लुंड निकला और मुझे पकड़ कर मुझे घोड़ी बना दिया. एक बार फिर उसका लुंड मेरी छूट को फैलाये अंदर घुस गया,)





स्नेहा : शिव मेरे कूल्हे तुम्हे कैसे लगते है?

शिव : बहोत मस्ट है आपके कूल्हे, और बहोत बड़े बड़े भी है.

स्नेहा : (अपने चुत्तड़ो को पकड़ कर फैलते hue)Tumhara लुंड अंदर बहार होते दिख रहा है tumhe(Wo और उत्तेजित हो गया और मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा)

शिव : है स्नेहा मुझे दिख रहा है, आपकी छूट बहोत फ़ैल गयी है, उसका छोटा छेद बहोत बड़ा बन गया है, और ये मुझे और उत्तेजित कर रहा है, तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा?

स्नेहा : नहीं शिव मुझे मज़ा आ रहा है, तुम्हारा लुंड मेरी छूट को हर जगह रगड़ रहा है, तुम्हे जैसे पसंद हो मुझे छोड़ो Shiv(Wo मेरे चुत्तड़ो को मसलने लगा और मुझे जोर जोर से छोड़ने laga)Muje तुम्हारा लुंड बहोत मज़ा देता है शिव, मुझे यकीं है इस बार में सचमुच माँ बन जाउंगी, तुम्हारे बच्चे की शिव, मुझे अपने बच्चे की माँ बनादो शिव, और छोड़ो मुझे, जितना चाहे chodo(Meri बाते उसको और उत्तेजित कर रही थी उसके धक्के काफी तेज हो चुके थे.)





शिव : मेरा निकलने वाला है.

स्नेहा : भर दो मेरे अंदर शिव, मेरा भी निकलने वाला hai.(Uske धक्के बहोत तेज हो गए थे, मुझसे बर्दास्त भी नहीं हो रहे थे पर साथ में मज़ा भी दे रहे थे, मेरी बच्चे दानी पर पद रही मर मुझे चरम पर ले जा रही थी, में अपनी गांड फैलाये उसके धक्को को सेह रही थी, मुझे यकीं था की मेरी छूट और मेरा चेहरा दोनों लाल हो चुके होंगे. उसका लुंड मुझे इतना मज़ा दे रहा था की में बता नहीं सकती. चरम पर होने की वजह से उसका सूपड़ा बहोत फूल चूका था जिसे में महसूस कर रही थी, मेरा स्खलन होनेही वाला था. में पूरी हिल रही थी और पशीने पशीने हो चुकी थी, मैनेपीछे मुड़कर शिव को देखा वो अपनी आंखे बंद किये हुए मुझे छोड़ रहा था, उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था. में उसकी और उसके लुंड की दीवानी हो चुकी थी. मेरा पूरा ध्यान अपनी छूट पर था में उसके लुंड के हर हिस्से को महसूस कर रही थी, तभी शिव जोर से धक्का मरते हुए मुज से चिपक गया और मुझे अंदर निकलता गरम गरम तरल महसूस होने लगा और मेभी झड़ने लगी. कितना आनंद मिल रहा था, उसने दो चार बार और धक्के मरे जिसे में अपने होठो को दांतो में दबाये सेहती रही. उसके अंदर से इतना वीर्य निकल रहा था और साथ में मेरे अंदर से भी निकल रहा था. दोनों ऐसे hi थोड़ी देर रहे, मेने जब पीछे देखा तो वो मेरी गांड को देख रहा था)

स्नेहा : (उसी पोसिटिव में अपनी गर्दन पीछे करके मुस्कुराते hue)Maza आया शिव?

शिव : (मुस्कुराते hue)Ha बहोत मज़ा आया. अब निकल लू?

स्नेहा : नहीं शिव अभी ऐसे hi रहो, मुझे अच्छा लग रहा है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aap जानती है अगर ऐसे रही तो फिर क्या होगा.

स्नेहा : (मुझे भी हसी आ गयी में जानती थी वो क्या karega)To मेने कहा रोका है तुम्हे. और ये मुझे आप आप क्यों कह रहे हो, में तुम्हारी गर्लफ्रेंड हु न हो तुम कहो.

शिव : नहीं स्नेहा, आप आप hi रहेंगी, किसने कहा की अपनी गर्लफ्रेंड को तुम कहकर hi बुलाया जाता है.

स्नेहा : पर शिव मुझे थोड़ा ऑक्वर्ड लगता है, में तुम्हे तुम कह कर बुलाती हु और तुम मुझे आप कह रहे हो. प्लीज मेरे लिए मुझे तुम कहो न, जब हम अकेले हो तब तो तुम कह hi सकते हो.

शिव : ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी. अब इसे निकलू की ऐसे hi रहने का इरादा है?

स्नेहा : मेरा इरादा तो ऐसे hi रहने का है पर कोई बात नहीं अब निकल lo.(Wo अपना लुंड निकलने लगा मेरी यह निकल गयी, जब उसने बहार निकला तो पक की आवाज आयी. में ऐसे hi रही क्यों की में उसके वीर्य को निकलने देना नहीं चाहती थी. पर हुआ ऐसे hi जिसका मुझे अंदाजा था, मुझे ऐसे देख कर वो दोबारा उत्तेजित हो गया और थोड़ी देर बज मुझे उसने जैम कर दोबारा छोड़ा. में भी खुसी खुसी उस से छुड़वाई.

में खुद उसके ऊपर चढ़ कर चूड़ी. क्या कहु उस से छुड़वाना मुझे इतना पसंद था की क्या hi कहु.









फिर हम दोनों ने खाना खाया. दोनों सोफे पर बैठे थे अपने पुरे कपडे पहने हुए. स्नेहा उसके शाइन से लगी अपने घुटने मोड बैठी थी और उसकी छाती पे हाथ फिर रही थी.

शिव :(घडी देखते hue)Ab मुझे चलना चाहिए, मुझे उन दोनों को यूनिफार्म लेने ले जाना है.

स्नेहा : अभी थोड़ा टाइम है.

शिव : नहीं अभी निकलूंगा तब तो पहुँचूँगा.

स्नेहा : में आ रही हु तुम्हारे साथ, गाड़ी में टाइम नहीं लगेगा.

शिव : (उसके बालो में बाथ फेरते hue)Kyu तुम क्यों आना चाहती हो?

स्नेहा : एक तो धुप बहोत है तो तुम्हे गाड़ी में ले चलूंगी और दूसरा तुम्हारे साथ और रह लुंगी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, पर तुम्हे नहीं लगता तुम कुछ ज्यादा hi कर रही हो.

स्नेहा : (मेरी आंखोमे देखते hue)Nahi मुझे नहीं लगता की में कुछ भी ज्यादा कर रही हु. मुझे तुम्हारा साथ पसंद है शिव, (मेरी और थोड़ा गुस्से का नाटक करते हुए देखती hai)kyu तुम्हे कोई परेशानी है मुज से?

शिव : नहीं मुझे कोई परेशानी नहीं, में तुम्हे परेशान नहीं करना चाहता इस लिए कह रहा हु.

स्नेहा : (फिर मेरे शाइन से लगते hue)Mene कहा न मुझे कोई परेशानी नहीं. में आ रही हु तुम्हारे साथ तो आ रही हु.

मेने भी कोई बहेश नहीं की, वो सच में मेरी गिर्ल्फ्रिएड की तरह मुज से चिपके हुए बैठी मुज से बात कर रही थी.
 
अपडेट 29

में और स्नेहा मैडम, उनकी गाड़ी में निकले और स्कूल पहुंच गए, स्कूल अभी छूटन्हि थी. हम गाड़ी में वेट करने लगे. वो मेरा हाथ पकड़ कर बैठी थी. आस पास कुछ लोग भी खड़े थे जो अपने बच्चो को स्कूल से लेने के लिए आये हुए थे. हमने थोड़ी देर इंतजार किआ. थोड़ी देर बाद स्कूल की घंटी बजी और सब बहार आने लगे, में गाड़ी से उतरा और थोड़ा आगे चलकर खड़ा हो गया.

कीर्ति और उसकी दोस्त भी स्कूल से निकल कर बाते करती हुई बहार निकल रही थी. उनकी नज़र वह खड़े शिव पर पड़ी.

एक लड़की : कीर्ति, देख वह, कितना हंसों लड़का खड़ा है.

कीर्ति : (उसे भी शिव हैंडसम hi लगा था पर फिर भी अपना ऐटिटूड कीखते हुए) इतना भी खास नहीं है.

दूसरी लड़की : क्या बात कर रही है यार, कितना मस्त है, रंग तो देख, लगता है मुझसे भी गोरा है और लम्बा भी कितना है.

कीर्ति : खम्भे जैसा लगता है. पर वो यहाँ क्यों खड़ा है, पहले तो कभी नहीं देखा.

पहली लड़की : किसी को लेने आया होगा. थोड़ी देर रुकते है, पता चल जायेगा.

कीर्ति : में किसी के लिए नहीं रूकती, तुम्हे रुकना है तो रुको, में चली.

वो दोनों भी उसके साथ चली गयी. में वही खड़ा रंजन और विणा का इंतजार कर रहा था. लड़कीअ जाते हुए मुझे घर रही थी, कुछ लड़कीअ थोड़ी दुरी पर कड़ी हो कर मुझे hi देख रही थी. में रंजन और विणा को धुंध रहा था. रंजन और विणा भी स्कूल से निकली. वो दोनों आपस में बात करते हुए चल रही थी. दो लड़कीअ उनसे थोड़ी दुरी पर चल रही थी.

एक लड़की : इ, वो लड़का तो देख, कितना मस्त है.

दूसरी : है यार मस्त है, कोण है?

पहली : पता नहीं, कभी देखा नहीं पहले.

रंजन ने भी वो बात सुनी और वो लड़कीअ जिस और देख रही थी उस और देखा तो उसे शिव, खड़ा हुआ दिखा. उसके चहरे पर मुस्कराहट आ गयी. उसने विणा का हाथ पकड़ा और उसे खींचती हुई शिव के पास पहोच गयी.

शिव : (उन्हें देख कर muskuraya)Kaisa रहा स्कूल?

रंजन : अच्छा था.

शिव : चलो तो फिर चलते है.

रंजन : कहा जाना है.

शिव : तुम चलो तो, में बताता hu.(Ranjan और विणा उसके साथ चलने लगी.)

एक लड़की : Hi, रंजन, कैसी hai.(Wo बात तो रंजन से कर रही थी पर नजर शिव की और थी)

रंजन : ठीक हु.

वही लड़की : अच्छा कल मिलते hai.(Mene उसकी और देखा तो वो मुस्कुरायी, तो में भी मुस्कुराया)

रंजन : है, मिलते he.(Ranjan को आश्चर्य हो रहा था, की आज तक तो कभी बात की नहीं और आज हलचल पूछ रही है, वो समाज रही थी क्यों, उसने मुस्कुराकर शिव की और देखा)

में उन्हें लेकर गाड़ी तक पंहुचा तो मुझे किसी के साथ ऐसे गाड़ी में देख कर रंजन चौकी पर बोली कुछ nahi.Mene उन दोनों को गाड़ी में बैठने को कहा तो

रंजन : किसकी गाड़ी है, और वो कोण है?

शिव : सब बताता हु, पहले बैठो तो (पीछे का दरवाजा खोल कर मेने उन्हें बिठाया और मागे बेथ गया. (गाड़ी में एक चल रहा था तो अंदर ठंडक थी. रंजन और विणा पहली बार ऐसी गाड़ी में बैठी थी, उनको संकोच भी हो रहा था) मेने उन तीनो का परिचय करवाया.

शिव: ये स्नेहा मैडम है, में जिस गयम में काम करता हु उसकी मालकिन है, और ये रंजन है और ये विणा.

स्नेहा मैडम : Hello, (शिव की और देख kar)Bahot प्यारी लड़कीअ है.

दोनों : Hello madam.(Apni तारीफ सुन कर दोनों खुस होगयी थी)

फिर हम सब यूनिफार्म लेने चले गए. मेने स्नेहा मैडम को रास्ता दिखाया, और एक जगह गाड़ी रुकवाई. स्नेहा मैडम ने गाड़ी लॉक की और हम चारो उस दुकान के अंदर चले गए. ये यूनिफार्म की स्पेशल दुकान थी, यहाँ कई स्कूल के यूनिफार्म मिलते थे. कुछ लड़कीअ और लड़के यूनिफार्म लेने आये हुए थे. स्नेहा मैडम बहोत उमड़ा कपडोमे थी तो उन्हें देख कर वह खड़ा आदमी हमे अंदर ले गया. हमने हमारे स्कूल के नाम बताये तो उस हिसाब से उन्होंने यूनिफार्म निकले. उन्दोनो के नाप के यूनिफार्म तो मिल गए पर मेरे नाप का यूनिफार्म नहीं मिला. मुझे सिलवाने के लिए दे दिया.

आदमी : कितनी जोड़ी बनाने है.

शिव : एक जोड़ी.

स्नेहा मैडम : क्यों एक जोड़ी, दो जोड़ी बनवाओ, पूरा हफ्ता पहन न होता है.

आदमी : सही कहा मैडम ने, दो जोड़ी तो चाहिए hi.(Wo मैडम की चापलूसी करने के अंदाज में बोल रहा था)

शिव : (में पैसे बचाना चाहता था, मेने गिना था, हम तीनो के एक एक जोड़ी के hi 2700 रुपए होते थे. और दो जोड़ी के गिने जाये तो 5400 होते थे, पैसे तो थे मेरे पास क्यों की 5000 स्नेहा मैडम ने दिए थे और 3000 बिना मैडम ने दिए थे, पर अभी स्कूल के शोज़ भी लेने थे. तो पैसे काम पद जाते) नहीं, एक एक जोड़ी hi दीजिये, हम मैनेज कर लेंगे.

स्नेहा मैडम : नहीं दो जोड़ी hi पैक कीजिये. (अब में क्या कहता, रंजन और विणा की वजह से मेने ज्यादा बहस नहीं की. उन्दोनो के दो दो जोड़ी कपडे पैक कर के एक प्लास्टिक बैग में दे दिए, में पैसे निकलने लगा तो स्नेहा मैडम ने मुझे roka)Me देती हु.

शिव : पर मैडम, में ...

स्नेहा मैडम : मेने कहा न, में देती हु.

उन्होंने hi पैसे दिए. उसके बाद हमने एक एक जोड़ी शूज भी लिए. वो हमे तीनो को अनाथाश्रम तक छोड़ने भी आयी. विणा और रंजन थी तो वो सिर्फ हम सब को bye बोल कर चली गयी.

रंजन : विणा तू जा मुझे शिव से बात करनी है (विणा आगे चली गयी, मुझे घर के देखते hue)Kon थी ये?

शिव : कोण थी मतलब, मेने तुम्हारा परिचय करवाया तो था, वो गयम के मालिक की बीबी है मतलब मालकिन है.

रंजन : वो तो मुझे पता है पर वो तुम पर इतनी मेहरबान क्यों है?

शिव : मेहरबान है से क्या मतलब है तुम्हारा?

रंजन : वो तुम्हे गाड़ी में घुमा रही है, पैसे भी उन्होंने hi दिए, हमे छोड़ने भी आयी. मेने तो ऐसा कभी नहीं देखा की कोई अपने यहाँ नौकरी करनेवाले पर इतना महेरबान होता हो.

शिव : (वैसे तो उसकी बात सही थी, पर में क्या उसको समजता, पर संजना तो था hi)Tum तो जानती हो, कितने hi लोग हम अनाथो पर दया दिखते हुए कुछ न कुछ देते है, कुछ अपने पुराने कपडे दे जाते है, कुछ खाना लेकर आते है. तुमने देखा तो है ये सब.

रंजन : है देखा है, पर यहाँ तो मुझे दया जैसा कुछ नहीं लगा.

शिव : (उसके शिर पर थपकी मरते hue)Tum न अपने छोटे से दिमाग को इतना ज्यादा कास्ट मत दो. वो मुझे जानती है इस लिए तुम्हे ऐसा नहीं लगा. और अब्ब ज्यादा सवाल मत करो मुझे वापस कही और भी जाना है.

रंजन : अब कहा जाना है?

शिव : हमारे गयम की ट्रेनर हैना जूही मैडम उनके साथ जाना है, उनके कोच को मिलने. और कुछ?.

रंजन : (वो संतुस्ट तो माहि थी पर फिर भी अपनी शकल बनाते hue)Nahi कुछ नहीं.

हम दोनों अंदर गए, अंदर हमे लतादिदी मिली.

लतादिदी : तू आ गया, (वो गभरायी हुई थी)

शिव : क्या हुआ दीदी, आप गभरायी हुई क्यों हो.

लतादिदी : वो गुड्डू है न, उसकी तबियत ख़राब हो गयी है, मैनेजर उसे एम्बुलेंस में दूसरे सहर ले गया है.

शिव : ऐसे कैसे ख़राब हो गयी, वो तो अच्छा भला था. और उसे दूसरे सहर क्यों ले गए?

लतादिदी : वो मुझे पता नहीं, पर वो कह रहे थे की तबियत काफी ख़राब है, अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा.

शिव : पर मुझे ये समाज में नहीं आ रहा, ऐसे कैसे अचानक तबियत ख़राब हो गयी, वो तो बिलकुल ठीक था.

लतादिदी : वो पता नहीं, चल तू फ्रेश हो जा, में खाना निकलती हु. मेने खाना काया फिर थोड़ी देर बाद में वह से निकल गया. में चलते हुए जूही मैडम के घर की और जा रहा था, बहार सचमुच बहोत ज्यादा धुप थी. बरसात के पहले वैसे भी बहोत गर्मी होती है. में चलते चलते जूही मैडम के घर पहुंच गया और बेल्ल बजायी. थोड़ी देर बाद उन्होंने दरवाजा खोला तो में देखता hi रह गया.

बुकमार्क

वो एक सलवार सूट पहने हुए थी. उनको ऐसे कपड़ो में, में पहलीबार देख रहा था. में तो उन्हें देखता hi रह गया. वो खूबसूरत चेहरे की मालकिन तो थी hi, पर आज कुछ सजी सवारी भी लग रही थी, होठो पे लिपस्टिक की हुई थी, आंखोमे काजल लगा हुआ था. उन्होंने चुडिया भी पहन रक्खी थी, एक तो वो इतनी लम्बी और ऊपर से ऐसे ऐडा से कड़ी मुस्कुरा रही थी की वो किसी मॉडल की तरह लग रही थी. में उन्हें ऊपर से निचे तक देख रहा था, में जैसे भूल hi गया था की में कहा हु. मुझे ऐसे मूर्ति बने खड़ा देख वो मंद मंद मुस्कुराने लगी. वो अंदर hi अंदर बहोत खुश हो रही थी. और हो भी क्यों न, जिस के लिए सजी सवारी थी, वो hi उसे देख ऐसे चका चौंध हो गया हो तो ख़ुशी तो होनी hi थी. वो ऐसे hi थोड़ी देर कड़ी रही पर शिव तो जैसे कही और hi था.

जूही मैडम : अब देखलिया हो तो अंदर भी आ jao.(Unki आवाज सुनते hi में हड़बड़ा गया और शर्मा भी गया, अपनी नज़ारे झुकाये में अंदर दाखिल हो गया और जा कर सोफे पर बेथ गया, वो भी थोड़ी दुरी पर उसी सोफे पर बेथ जगाई, मेने नोटिस किआ की उनके शरीर से भी ित्तर की खुसबू आ रही thi)Khana खा liya?(Unki खनकती आवाज में भी मुझे घंटिया सुनाई दे रही थी, मुझे सब स्लो मोशन में दिख रहा tha)(Jab शिव ने जवाब नहीं दिया तो जूही ने थोड़ी ऊँची आवाज में puchha)Khana खा लिया?

शिव :Jiiiiii...(sambhalte hue)Ji ...जी है खा लिया.

जूही मैडम : ऐसे क्यों बेहवे कर रहे हो?

शिव : सॉरी, वो ..वो दरअसल आप को ऐसे देख कर लग रहा है में किसी और को hi देख रहा हु.

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Ham हमेशा ऐसे टाइम पर मिलते है तो वैसे hi देखोगे न. क्यों ऐसे कपड़ो में अच्छी नहीं लग रही.

शिव : अच्छ??? अआप ताऊ बहोत मस्त डीइइख रही है, किसी हीरोइन की तरह, .....ओह सॉरी मेरा मतलब है .... में कहना चाहता hu....aap बहोत अच्छी लग रही hai.(Mene अपनी सांसे छोड़ी)

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Thaaank यूओ. अब बोलो क्या पिओगे. बहार गर्मी बहोत है ठंडा जूस चलेगा.

शिव : नहीं उसकी कोई जरुरत नहीं. हमे चलना भी तो है.

जूही मैडम : अभी देर है चार बजे चलना है.

शिव : चार बजे? तो अपने मुझे अभी इतनी जल्दी क्यों बुला लिया.

जूही मैडम : (मेरी और मायूसी से देखते hue)Kyu तुम्हे अच्छा नहीं लगा, ?(अपनी नज़ारे jhukaye)Muje लगा तुम्हारे साथ थोड़ा टाइम बिताउंगी. सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो.

शिव : अरे नहीं मैडम ऐसी बात नहीं है में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. ठीक है, जूस पिटे है.

जूही मैडम : (खुस होते हुए उछलकर कड़ी होती hai)Abhi लायी. (वो किचन में चली गयी.)

थोड़ी देर में वो दो गिलास जूस ले आयी और एक मुझे दिया और दूसरा वो खुद लेकर मेरे पास hi बेथ गयी. और बाटे करने लगी.

जूही मैडम : एक बात पुछु बुरा तो नहीं मानोगे?

शिव : नहीं मैडम, आप जो पूछना है पूछिए.

जूही मैडम : तुम यहाँ अनाथालय में क्यों हो? क्या तुम अपने माँ बाप के बारेमे जानते हो?

शिव : (उनकी और देखते हुए, थोड़ी मायूसी के sath)Nahi मैडम, मुझे इतना hi पता है जब में छोटा था तो किसी भिखारी के पास था, वह से एक सज्जन मुझे यहाँ ले आये थे. उस भिखारी से भी पुलिस ने पूछताछ की थी पर कुछ पता नहीं चला की में उसके पास कैसे आया. पर आप क्यों जान न चाहती है?

जूही मैडम : ऐसी कोई खास बात तो नहीं बस ऐसे hi पुछलिया, तुम्हे बुरा लगा हो तो सॉरी कहती हु. पर तुम्हे देख कर लगता है की तुम किसी अच्छे घर से रहे होंगे.

शिव : क्यों, ऐसा क्यों लगता है आपको?

जूही मैडम : तुम्हारी कद और तुम्हारा रंग ये बताते है क्यों की सामान्य घरो में रहनेवाले ज्यादातर दिखने में भी सामान्य hi होते है. तुम्हारा चेहरा भी इतना अच्छा है और तुम्हारा रंग भी गोरा है या यु कह सकते है कुछ ज्यादा hi गोरा hai,matlab तुम्हारे ma-bap भी ऐसे hi रहे होंगे. ऐसा रंग रूप ज्यादातर aish-o-aram से रहनेवाले लोगो का hi होता है.

शिव : जैसे की आप?

जूही मैडम: (हस्ते hue)Aisa क्यों कह रहे हो?

शिव : आप भी तो कितनी खूबसूरत है और गोरी भी है.

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Thank यू फॉर कॉम्पलिमेंट पर बात तुम्हारी हो रही है.

शिव : मेरी लाइफ में ऐसा कुछ खास नहीं है, अनाथालय में पलाबढ़ा, है मेरे नसीब से एक दीदी मिल गयी जिन्होंने मेरा बहुत ख्याल रखा तो मुझे कोई गिला सिकवा नहीं है अपनी लाइफ से. मुझे कभी लगा hi नहीं की में अकेला हु या अनाथ हु.

जूही मैडम : तुम्हारा यही स्वाभाव तुम्हे खास बनता है शिव. ज्यादातर लोग अपनी किस्मत को कोसते रहते है जब की तुम ऐसी परिस्थितिमे हो फिर भी अच्छा hi सोचते हो. बहोत अच्छी बात है.

शिव : मेरी छोडो आप अपनी बताओ, आप क्यों अकेली रहती है?

जूही मैडम : Mammy-papa है और एक बड़ा भाई और भाभी भी है जो गांव में रहते है. मुझे बचपन से hi कुछ बन न था, गांव की मिटटी ने मजबूत शरीर दिया था तो पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद में भी हिस्सा लिया. स्टेट प्लेयर बानी. स्पोर्ट्स क्लब में नौकरी मिली. नेशनल के लिए तरय किआ था पर कर नहीं पायी.

शिव : क्यों नहीं कर पायी?

जूही मैडम : है कुछ कारन, फिर कभी बताउंगी.

शिव : आपने शादी नहीं ki(Aare में ये क्या बोल गया) सॉरी मैडम बस मुँह से निकल गया.

जूही मैडम : इसमें सॉरी की क्या बात है, घर वाले तो बहोत कहते है पर मुझे अभी अपने आप को साबित करना है, (हस्ते hue)Aur तुम्हारे जैसा कोई मिला भी तो नहीं जिसे में खूबसूरत लागु.

शिव : (झेपते hue)Kya मैडम आप भी. में कह रहा हु तो ऐसे hi नहीं कह रहा, आप सचमे खूबसूरत है, आप ‘है’ तो करो देखो आपसे शादी करने के लिए लाइन लगजाएगी.

जूही मैडम :(जोर से हसतेहुए) अच्छा लाइन लग जाये गई ha..ha.ha..ha..ha. पर मुझे भी तो पसंद आना चाहिए. क्या में ऐसे hi किसीसे भी शादी कर लू.

शिव : आप है क्यों रही है में सच बोल रहा हु और ये बात भी सही हे की आपको भी पसंद आना चाहिए, आप को कैसा लड़का पसंद है?

जूही मैडम :(सोचते hue)Ye तो सोचनेवाली बात है, आज तक मैंने कभी सोचा hi नहीं की मुझे कैसा लड़का पसंद आ शक्ति है. वैसे तुम्हे क्या लगता है मुझे कैसे लड़के से शादी करनी चाहिए.

शिव : (झेपते hue)Muje क्या पता होगा मैडम, में तो अभी छोटा हु और इस बारेमे ज्यादा जनता भी नहीं.

जूही मैडम : तुम छोटे और में बहोत बड़ी हो गयी हु, यही कहना चाहते हो न.

शिव : नहीं मैडम, मेरा वो मतलब नहीं है, में तो ये कह रहा हु की में इस बारे में ज्यादा नहीं जनता, पर इतना तो कह शक्ति हुए की जो आप को पसंद हो, आप का ख्याल रखे और आप से प्यार भी करे, वैसे लड़के से आप को शादी करनी चाहिए.

जूही मैडम : है सही कहा तुमने पर अभी में शादी नहीं करना चाहती क्यों की अगर एक बार शादी हो गयी तो फिर बच्चे और जिम्मेदारियां उसीमे फास कर रह जाउंगी फिर में अपने कर्रिएर के बारे में नहीं सोच पाऊँगी. छोडो ये सब बाते वो तो होगा तब होगा अभी की बात करते है. तुम जानते हो में तुम्हे मेरे कोच से क्यों मिलाना चाहती हु?

शिव : ये तो आप hi बता शक्ति है. मुझे कैसे पता होगा?

जूही मैडम : वो बहोत पारखी है, उन्होंने बहोत से खिलाड़िओ को तैयार किया है. में तुम्हारे बारे में उनसे सलाह मश्वरा करना चाहती हु. और आगे तुम्हे कैसे बढ़ाया जाये ये भी पूछना चाहती hu.Khiladi बहोत पहले से तैयारियों में जुट जाते है या यु कहु तो बचपन से hi. तुम्हारी आगे में तो कई कपिशंस भी जित चुके होते है. अंडर 14, अंडर 16, और कई छोटे मोठे कॉम्पिटिओं में भाग ले चुके होते है. तुम ने तो अभी तक एक भी कॉम्पिटिओं में भाग नहीं लिया है, तुम्हारी परिस्थितियों को देखते हुए तुम्हे कैसे अप्रोच किया जाये, कैसे तुम्हे आगे बढ़ाया जाये, यही जानना है.

शिव : (में देख रहा था की जूही मैडम को मेरे बारे में कितनी परवाह है, मेरे दिल में उनके प्रति मान और भी badhgaya)To कब चलना है मैडम.

जूही मैडम : (अपनी घडी देखते hue)Aadhe घंटे बाद निकलते है.

मुझे भी अब टेंशन होने लगी थी. कोच सर क्या कहेंगे. क्या में रेस कर पाने के काबिल लगूंगा? मान में कई सरे सवाल थे.
 
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अपडेट 30

पहले सब मुझे आसान लग रहा था. मुझे लग रहा था की बस दौड़ना hi है. पर जैसे जैसे जूही मैडम से कॉम्पिटिओं के बारे में बाते हो रही थी, मुझे अंदाजा हो रहा था की ये सब इतना भी आसान नहीं. वो अपने अनुभव बता रही थी. कैसे उन्होंने कपिशंस ने भाग लेना सुरु किआ. वो कैसे कहा गयी, और कैसे कई बार जीती और कई बार हरी भी. क्या क्या ध्यान रखना होता है. हम लोग घर से उनके स्कूटर पैर निकले, सहर के बस डेपो में उन्होंने स्कूटी पार्किंग में रख दिया और हम बस में बेथ गए. बस हमारे सहर से hi निकल रही थी तो हमे बैठने के लिए सीट मिल गयी. मैडम खिड़की के पास बैठी और में उनकी बगल में बेथ गया. में उनसे थोड़ा डिस्टेंस बनाकर बैठा था. हमारी बाटे लगातार चल रही थी. एक स्टेशन पर एक व्यक्ति और हमारी सीट पर आया तो मुझे मैडम की और खिसकना पड़ा, तीन लोगो के बैठने पर मुझे मैडम से सात कर बैठना पड़ा. मेरे हाथ की नंगी त्वचा उनके हाथ की नंगी त्वचा को छू रही थी. उनके शरीर की गर्माहट में महसूस कर रहा था. उनके साथ ऐसे बैठना थोड़ा अजीब लगरहा था पर कर भी क्या शक्ति थे. उनको भी इस स्पर्श का एहसास था क्यों की उनका चेहरा hi बता रहा था, जिस तरह से उन्होंने मेरे सामने देखा मुझे पता चल रहा था. हम दोनों अब शांत हो गए थे, वो खिड़की के बहार देख रही थी, हवा उनके बालो को उदा रही थी, में वैसे तो खिड़की से बहार देखना चाहता था पर मेरी नजर उनके चेहरे पर hi अटक रही थी. उन्होंने एक दो बार मेरी और देखा और मुस्कुरायी तो में भी मुस्कुराया. खैर डेढ़ घंटे के सफर के बाद हम दूसरे शहर पहुंच hi गए. बस स्टॉप पे काफी भीड़ थी, हम वह से बहार निकले और हमने एक ऑटो ली और स्टेडियम चले गए. ये स्टेडियम, हमारे सहर के स्टेडियम से अलग था और बड़ा भी दिख रहा था. वह गेट कीपर के साथ मैडम ने बात की फिर हम अंदर गए. अंदर का नज़ारा और भी ज्यादा भव्य था, आस पास बैठने के लिए क़तर में कुर्शिया लगी हुई थी. बिच में बड़ा मैदान था. मेने देखा की कुछ ladke-ladkia एक्सेरसिस कर रहे थे, अलग अलग प्रकार के खेल की प्रैक्टिस चल रही थी, छोटे छोटे डालो को कोई न कोई सीखा रहा था. हम दोनों चलकर एक ग्रुप के पास गए. वो करीब बीस लोगो का दाल था और एक वयक्ति जो करीब 50साल के करीब का था वो उनको कुछ समाज रहा था. हम दोनों जाकर वही थोड़ी दुरी पर खड़े हो गए. जब उनका ध्यान मैडम पर गया तो उन्होंने मैडम की और हस्ते हुए अपना शिर हिलाया और मेडम ने भी अपने हाथ जोड़कर नमस्ते किआ. सब को समजा कर वो हमारे पास आये. जूही मैडम ने उनके पेअर छुए तो मेने भी उनके पेअर छुए. वो वही कोच सर थे जिन्हे मिलने हम आये थे.

कोच सर : सदा खुस रहो, कैसी हो जूही, बहोत टाइम बाद मिलना हुआ.

जूही मैडम : जी में अच्छी हु सर, आप कैसे है?

कोच सर : अपनी तो वही पुराणी दिनचर्या है. स्टेडियम से घर और घर से स्टेडियम. (मेरी और देख कर) तो यही वो लड़का है जिसके बारेमे तुमने बताया था.

जूही मैडम : जी सर, यही है, इसका नाम शिव है.

कोच सर: (मेरी और गौरसे देखते hue)Lambayi तो बहोत अच्छी है, स्टेमिना कैसा है इसका.

जूही मैडम : मेरी बराबरी दौड़ लगा लेता है सर.

कोच सर : ये तो अच्छी बात है पर तुम लड़की हो और काफी समय से तुम रेस से दूर भी हो. ये लड़का है तो इसका मुकाबला लड़को के साथ होगा, लोकल लेवल पे इतना चल शक्ति है पर आगे के लिए इतना नहीं चल शक्ति इससे और प्रैक्टिस की जरुरत होगी. मुझे यकीं है तुम इससे अच्छे से तराश लोगी. अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो एक दौड़ होजाये.

जूही मैडम : है है क्यों नहीं सर, 100 मत या 200 मत.

कोच सर : 100 मत hi देखलेते है. (उन्होंने एक दो लड़को को आवाज लगायी) नविन, मंजीत, यहाँ आओ. वो दोनों लड़के आये और उन्होंने कोच सर के पेअर छुए.) इसके साथ एक 100 मत की दौड़ लगाओ.

दोनों : जी Sir.(Hum तीनो ट्रैक की और बढ़ गए)

जूही : य दोनों कोण है सर.

कोच सर : स्टेट के लिए तयारी कर रहे है. इनके साथ दौड़ने से hi पता चलेगा की लड़का कितना तैयार है और अभी उसे कितनी मेहनत करनी है. आओ फिनिश लाइन पर खड़े रहते है.

हम तीनो ट्रैक पर पहुंच गए. वो दोनों स्पोर्ट्स के कपड़ो में hi थे. मेने पंत पहन रक्खी थी. वो दोनों शूज में थे. मेने अपनी चम्पल साइड में रख दी और नंगे पेअर ट्रैक पर पहुंच गया. नवीनभाई ने वह खड़े एक दूसरे कोच सर से कुछ कहा तो वो हाथ में एक क्लिपिंग बोर्ड लिए वह आ गए. मेरे चेहरे पर तनाव साफ दिखा जा शक्ति था. हम तीनो अपनी लाइन पर खड़े हो गए. जूही मैडम ने जो कुछ मुझे सिखाया था वो मेने एक बार आंख बंद कर के याद किआ. मेने अपनी पोसिटिव ली. कानो में आवाज आयी, गेट set...go... हम तीनो ने दौड़ लगा दी. में अपनी पूरी ताकत लगाकर दौड़ रहा था. मेरा ध्यान सिर्फ अपने ट्रैक पर था. हवा मुज से जोरो से टकरा रही थी, पंत पहने होने की वजह से मुझे दौड़ने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी. पर मेने हर नहीं मणि. मुझे फिनिश लाइन पर जूही मैडम कड़ी दिखाई दी. वो बड़ी आस लगाए मुझे देख रही थी, मेने अपनी साडी ताकत जमा की और पैरो में लगा दी. आखिर कर हमने फिनिश लाइन पर की. पशीने से मेरी शर्ट भी भीग गयी थी. नवीनभाई ने और मंजीत भाई ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और फिर मुज से भी मिलाया.

हम कोच सर के पास पहुंचे.

कोच सर: गुड, तीनो अच्छा दौड़े. नविन पहला, शिव दूसरा और मंजीत तीसरा आया. तुम दोनों जाओ में तुमसे बाद में बात करता हु. (कोच सर जूही मैडम की और देखने लगे)

जूही मैडम :(घबराये स्वर me)Kya कहते है सर.

कोच सर : (मुस्कुराते hue)Tumne ढूंढा है तो अच्छा तो होना hi था. पर सच कहु तो मेने नहीं सोचा था की इतना अच्छा होगा. बढ़िया टाइम है. और जैसा तुमने कहा की वो अभी अभी hi तुम्हे मिला है मतलब अभी उतनी ज्यादा प्रैक्टिस भी नहीं हुई है. अगर अच्छे से प्रैक्टिस करेगा तो यक़ीनन एक अच्छा खिलाडी बनेगा. तुम तो जानती hi हो की 100 मत्र की दौड़ लोग 10 से 11 सेकंड में कम्पलीट कर लेते है, मतलब एक सेकंड में 10 मत्र. यहाँ एक सेकंड के 100 वे हिस्से से रेस का रिजल्ट नक्की होता है, एक सेकंड तो बहोत ज्यादा होता है. ये नविन से तक़रीबन एक से डेढ़ मीटर पीछे था, तो इससे म्हणत तो करनी hi है. अभी वो दौड़ के कपड़ो में भी नहीं है और इसने शूज भी नहीं पहने. इन डस्ब बातो से भी बहोत ज्यादा फर्क पड़ता है. इसे शूज से प्रैक्टिस करवाओ उस से ज्यादा फर्क पड़ेगा.

जूही मैडम : (खुस होते hue)Ji जरूर सर, आपने इतना केहड़िया ये hi बहोत है. अगर कभी आप के पास आये तो..

कोच सर: इसमें पूछना क्या, भेज देना.

जूही मैडम : (खुश हो kar)Thank यू सर, थैंक यू सो मच..

कोच सर : इसका तो ठीक है पर तुमने अपने बारे में क्या सोचा है, बीती बाटे भूल जाओ बेटी, दो साल भी पुरे होने वाले hai.(Juhi मैडम की आँखों में आंसू चालक aaye)Dekho बेटी, सब लोग एक जैसे नहीं होते और तुम्हे डरना नहीं चाहिए, लड़ना चाहिए. अभी तुम्हारी उम्र है, तुम दौड़ सकती हो, एक बार ये उम्र निकल गयी फिर छह कर भी तुम कुछ नहीं कर पाओगी. मेरी बार पे गौर करना.

जूही मैडम : जी सर.

मुझे उनकी बाटे समाज तो नहीं आयी पर इतना तो पता लगा की जूही मैडम को कोई प्रॉब्लम हुई थी. हम लोग वह एक घंटे तक रहे. कोच सर ने काफी कुछ हिदायते दी जिन्हे में और जूही मैडम बड़े ध्यान से सुन रहे थे. जब उनको पता चला की में एक अनाथ हु तो उन्होंने आश्चर्य से मुझे देखा. पर फिर मेरी पीठ थपथपा कर मेरी हौसला अफ़ज़ाई की. हमदोनो फिर वह से निकले और बहार आ गए.

जूही मैडम : तो सुना न, अभी प्रैक्टिस की जरुरत है. तो तुम तैयार होना.

शिव : है तैयार हु, पर अभी तो फ़िलहाल पेट में चूहे कूद रहे है.

जूही मैडम : (मुस्कुराते हुए) मेरे भी. चलो कुछ कहते है.

हमने एक रेस्टोरेंट में नास्ता किआ. पंखा चल रहा था पर बहार गर्मी hi बहोत ज्यादा थी. हम ने ऑटो की और वापस हम bus-depo आ गए. जूही मैडम मुझसे बहोत बाटे कर रही थी वो इतनी खुस दिख रही थी की क्या बताऊ. जब हम एक बस में चढ़े तो काफी भीड़ थी और हमे बैठने की जगह भी नहीं मिली. जैसे तैसे रास्ता बना कर हम एक जगह खड़े हो गए. वो मेरी और मुँह करके कड़ी थी. शाम हो गयी थी और अँधेरा भी होने लगा था. गर्मी और भीड़, हालत और ख़राब कर रहे थे. जब बस चल पड़ी तब थोड़ी रहत हुई. बैठने की जगह नहीं थी पर खड़े रहने की भी जगह काम थी. शाम के समय लोग काम से अपने सहर लौट रहे थे तो इस टाइम भीड़ ज्यादा hi थी. हम दोनों जैसे तैसे अपनी जगह बना कर खड़े थे. इतनी भीड़ में बात करना मुमकिन नहीं था तो हम दोनों शांत hi खड़े थे. थोड़ी देर बाद मुझे मैडम के चेहरे पर परेशानी दिखी शायद उन्हें खड़े रहने में दिक्कत हो रही थी. मेने ध्यान दिया तो उनका ध्यान बार बार पीछे जा रहा था, उनके पीछे खड़े सख्स से उनको परेशानी हो रही थी. ऐसी भीड़ में हम किसी को कुछ कह भी नहीं सकते तो मेने उनकी कमर से पकड़ करापनी और खिसका लिया. वो मुझे देखने लगी तो मेने आँखों से शांत रहने का इस्सर किआ. उनके चेहरे पर रहत के भाव और मुस्कान तैर गयी. वो मुझसे काफी सात कर कड़ी थी. उस सख्स ने आगे आने की कोशिस की तो मेने उसे अपने हाथ से वही रोक दिया और उसे घर के गुस्से से देखा. वो थोड़ा हड़बड़ा गया और अपनी नज़ारे झुका कर दूसरी और घूम gaya.(Juhi ने वो सब देखा, उसने देखा की शिव कैसे उस सख्स को अपनी नजरो से hi धमका रहा था. उसने बड़े प्यार से शिव को देखा) उनके ऐसे देखने से मेने अपनी नजरो के इससरए से hi पूछा “क्या हुआ” तो उन्होंने अपनी गर्दन ना में हिलायी और प्यार से मुस्कुराते हुए मेरी और देखने लगी. मेने भी मुस्कुराकर उन्हें देखा. रास्ता काफी उबड़ खाबड़ था तो हमारे श्री आपस में रगड़ खा रहे थे. अचानक बस में ब्रेक लगने से हम आगे को हो गए तो गिरने से बचने के लिए उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली और मेने उन्हें बचने के लिए उनको कमर से थम लिया और अपनी और खींच लिया तो वो पूरी तरह से मेरे शाइन से लग गयी. जब बस वापस चलने लगी तो वो थोड़ी दूर हुई, उन्होंने मेरी और देखा और शर्म से अपनी नज़ारे झुका ली. मेने उन्हें छोड़ दिया और उन्होंने भी मुझे छोड़ दिया. बस फिर अपनी रफ़्तार से चलने लगी. शायद उनको शर्म आ रही थी तो उन्होंने अपनी नज़ारे झुकाये राखी. वो घूम कर आगे की और हो गयी. फिर बराक लगने से सब आगे खिसके पर जैसे hi बस आगे चली तो वापस सब पीछे खिसके पर मैडम पूरी तरह मुझसे सात गयी. उनकी पीठ मेरी और थी. थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ की उनके गोलाकार कूल्हों का स्पर्श मेरे लुंड पर हो रहा है. उन्होंने थोड़ा खिसकने की कोशिस की पर आगे ज्यादा जगह नहीं थी. बस के चलने पर बार बार उनका पिछवाड़ा मेरे लुंड को रगड़ रहा था और न चाहते हुए भी मेरे लुंड ने अंगड़ाई ली. अब में फास गया था क्यों की यक़ीनन उनको इसका पता चल जायेगा, चल क्या जायेगा चल रहा होगा. एक बार उन्होंने पीछे मुड़कर भी देखा, उनके चेहरे पर शर्म और परिस्थि में फँसेहोने के मिले झूले भाव थे. उनके ऐसे देखने पर मेरे चेहरे पर हवइया उड़ने लगी. पर मेने देखा की उनके चेहरे पर गुस्सा नहीं था वो बस ऐसे hi मुझे देख रही थी. मेने फीकी सी मुस्कान दी तो उन्होंने शरमाते हुए अपना चेहरा घुमा लिया. थोड़ी देर ऐसा hi चलता रहा, रास्ता भी अच्छा आ गया था और बस ज्यादा उछाल भी नहीं रही थी. पर वो थोड़ा पीछे खिसक ayi(Meri और) जिस से उनके कूल्हे मुज से चिपक से गए. मेरा लुंड ठीक उनके चुत्तड़ो की दरार में था. में मान में प्रार्थना कर रहा था की लुंड बेथ जाये पर लुंड तो लुंड था वो और कड़ा होने लगा. थोड़ी देर यु hi चलता रहा. वो पूरी तरह से मुज से सत्कार कड़ी थी यक़ीनन उनको मेरे लुंड का आभास हो रहा होगा, पर वो आगे खिसक क्यों नहीं रही थी. मेरा भी दिमाग अब ख़राब होने लगा था मुझे भी वो स्पर्श अच्छा लगने लगा था. मेने डरते हुए उनको कमर से थमा और अपने से छिपकलियाँ वो बिना किसी विरोध के मुझसे और सात गयी. (जूही को जब अपने पीछे कुछ चुभता महसूस हुआ तो वो समझने की कोशिस करने लगी, जब उसे एहसास हुआ की वी क्या हो शक्ति है तो उसकी धड़कने तेज होने लगी, वो पहली बार ऐसे किसी लड़के के उस अंग की चुभन महसूस कर रही थी, वो आगे खिसकना चाही पर आगे जगह नहीं थी. वो ऐसे hi कड़ी रही, शिव का वो अंग उसके चुत्तड़ो की दरार में घुस रहा था, वो शर्म से पानी पानी होने लगी. थोड़ी hi देर में उसे वो चुभन अच्छी लगने लगी, उसका दिल छह रहा था की वो अंग और अंदर तक जाये. वो शिव को पता न चले इस तरह से पीछे खिसकी, जिस से वो अंग और अंदर तक घुस गया, आज उसने सलवार पहनी थी तो कपड़ा भी पतला था. वो अंग उसकी अनछुई छूट के नजदीक पहुंच रहा था, उसके शरीर में अजीब से सनसनी होने लगी, उसे महसूस हुआ की उसकी छूट से तरल निकल रहा है. ये एहसास वो पहलीबार महसूस कर रही थी.) और तो कुछ होना नहीं था तो हम दोनों बस ऐसे hi खड़े रहे, मैडम ने अपना शिर मेरे शाइन पे टिका दिया. वो काफी ऊँची थी, जितनी लड़कीओ को में जनता था उनमे सबसे ऊँची. मेरा दिल कर रहा था की में उन्हें कास कर बहो में भर लू, पर ऐसा में नहीं कर शक्ति था. वो मेरे लिए कोई लड़की नहीं थी, वो मेरे जीवन में एक खास महत्व रखती थी. में उनके साथ ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करना चाहता था, पर ये शरीर कहा मान ने वाला था. वो तो उस मखमली स्पर्श का एहसास पते hi अपनी प्रतिक्रिया देने लगा था. थोड़ी देर हम ऐसे hi खड़े रहे उन्होंने अपना एक हाथ मेरे उस हाथ पर रख दिया जो उनकी कमर पर था. हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे का स्पर्श का आनंद लेते हुए खड़े रहे. हमारा स्टॉप आ गया. दोनों को उतरने का मान बिलकुल नहीं था पर उतरना तो था hi तो हम दोनों उतरे. वो भी मुज से नज़ारे चुरा रही थी और में भी गभरा रहा था. ख़ामोशी से चलते हुए हम स्कूटर पार्किंग की और बढ़ चले. वो स्कूटर निकलने अंदर गयी में वह बहार खड़ा रहा. उन्होंने स्कूटर निकला और मेरे पास आ कर स्कूटी रूक दिया. वो मेरी और देख hi नहीं रही थी. में थोड़ी देर खड़ा रहा बैठा hi नहीं तो उन्होंने सवालिया नजरो से मेरी और देखा. में स्थिति को सामान्य करने के लिए मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे आगे की और कर ली. में कर भी क्या शक्ति था, में उनके पीछे बैठगया और उनके कंधे पकड़ लिए. उनके सरीर में हो रही कम्पन में साफ महसूस कर पाया. उन्होंने स्कूटर चला दिया. पुरे रस्ते हम खामोस hi रहे. जब उनका घर आया तो वो धीमी आवाज में बोली.

जूही मैडम : खा कर जाओ.

शिव : नहीं मैडम, दीदी रह देख रही होगी. में कहकर नहीं आया वर्ण खा लेता. अगली बार.

जूही मैडम : ठीक है चलो में तुम्हे छोड़ देती हु.

शिव : रहने दीजिये में यहाँ से चला जाऊंगा.

जूही मैडम : चुप चाप बैठे रहो, मेने कहा न में छोड़ देती हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, जैसा आप का हुकुम.

उन्होंने मुस्कुराते हुए स्कूटी आगे बढ़ा दिया. जब अनाथालय नजदीक आया तो मेने उन्हें रोकने को बोलै. नीचे उतारकर में उनके सामने खड़ा हो गया. वो नज़ारे नहीं मिला रही थी.

शिव : (उनके हाथ पर हाथ रखते hue)Sorry, मेने जानबुज कर नहीं किआ था. बस हो गया. सॉरी अगर आप को बुरा लगा हो to.(Unhone मेरी और देखा फिर वापस अपनी नज़ारे झुका li)Please कुछ कहिये न, मुझे बहोत बुरा लग रहा है.

जूही मैडम :(नीचे देख कर मुस्कुरा रही thi)Kal मिलते है. (बिना मेरी और देखे स्कूटी घूमाः और स्कूटर आगे बढ़ा दिया में उन्हें जाते हुए देख रहा था की वो आगे जा कर रुकी और मुस्कुराते हुए पीछे देखा और bye के इससरए से हाथ हिलाया तो मेने भी मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर उन्हें bye किआ. वो चालीगयी और में भी मुस्कुराते हुए अंदर चला गया.)

में सीधे अपने रूम में गया जहा लतादिदी बिस्टेर बिछा रही थी. मेने जा कर उन्हें पीछे से पकड़ लिया तो वो चौकते हुए पीछे देखने लगी. मुझे देख कर खुस हो गयी.

लता दीदी : आ गया तू? खाना खाया?

शिव : नहीं दीदी, मुझे लगा आप मेरा इंतजार कर रही होगी तो नहीं खाया. आप ने खा लिया?

लता दीदी: नहीं, तू हाथ मुँह धो ले फिर साथमे कहते है.

खाना कहते वक़्त मेने उन्हें क्या क्या हुआ वो सब बताया. वो बड़े गौर से मेरी बाटे सुन रही थी. हम सोने अपने कमरे में चले आये. आज सचमुच गर्मी ज्यादा थी. पंखे की हवा भी गरम लग रही थी. पूरा शरीर पसीना पसीना हो रहा था.

शिव : दीदी गर्मी बहोत है, नहाने का मान कर रहा है.

लता दीदी: है सचमुच गर्मी बहोत ज्यादा है, मुझे भी ऐसा hi लग रहा है.

शिव : चलो न साथ में नहलेते है.

लता दीदी: (हैरानी से मेरे सामने देखते hue)Me तेरे साथ नहाउंगी, पागल हो गया है क्या?

शिव : क्यों दीदी इसमें क्या परेशानी है? आप मुझे तो नहलाती hi है, आज साथ में नाहा लेना.

लता दीदी: पागल, में तेरे सामने नहाउंगी क्या? मुझे शर्म नहीं है क्या?

शिव : आप मुझे नहलाती है तो मेने कभी कुछ कहा क्या? मुझे शर्म नहीं आती थी क्या? ठीक है आप अपने आप नहलेना और फिर कभी मुझे भी नहलाने की कोई जरुरत नहीं है. मुझे भी अब शर्म आती है.

में थोड़ा गुस्सा दिखा कर टॉवल लेकर बाथरूम की और निकल गया. मेने कपडे उतरे और अंडरवियर में नहाने लगा. थोड़ी देर बाद बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक हुई.
 
अपडेट 31

शिव : में नाहा रहा hu.(Muje नहीं पता था कोण है?)

लतादिदी: (धीमी आवाज़ me)Darwaja खोल.

में लतादिदी की आवाज को पहचान लिया, मेने दरवाजा खोला तो वो अपना शिर झुकाये अंदर दाखिल हो गयी. मेने दरवाजा बंद करदिया. मेने उनकी और देखा तो उनकी पीठ मेरी और थी और वो कपडे तंग रही थी. में वापस नहाने बेथ गया, उनकी और पीठ करके नहाने लगा.

लता : (आपने कपडे तंग कर पीछे मुड़ी तो शिव को दूसरी और अपना मुँह किये नहाते पाया. वो कड़ी कड़ी उसे देखने लगी. पछले कुछ दिनों से हुई घटना के कारन अब उसे शिव के साथ बहोत शर्म आ रही थी ऊपर से आज दोपहर में सरिता से उसकी बात हुई थी और उसने शिव के साथ नहाते वक़्त हुई घटना के बारेमे बहोत कुछ बताया था. उसके अंदर एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी, वो सोच रही थी क्या शिव उसके साथ भी वो सब करेगा, ये सोच सोच कर hi उसे शर्म आ रही थी, एक तरफ तो वो छह रही थी की शिव वो सब करे पर दूसरी और उसे शर्म भी बहोत आ रही थी. वो शिव को पहले भी नहलाती थी पर वो बात अलग थी. उस समय उसके दिल में ऐसा वैसा कुछ नहीं था, उसके लिए शिव, एक प्यारा सा भाई था, पर अब वो कुछ अलग महसूस कर रही थी इसीलिए वो आना नहीं चाहती थी पर वो शिव जिस तरह से रूत कर आया था तो वो उसको नाराज़ भी नहीं देखसकती थी और अब उसका भी मान करने लगा था उसे काठ हाडे पर करने का, पर ये शर्म उसका पीछा hi नहीं छोड़ रही थिए, ुस्कीकी वजह से वो हिचकिचा रही थी. उसे पता था की अगर उसे शिव को पाना है तो शर्म तो छोड़नी hi पड़ेगी. पर ये इतना आसान भी नहीं था. वो कभी किसी लड़के के संपर्क में नहीं आयी थी और नहीं hi पहले वो ऐसा कुछ महसूस कर पायी थी. पर अब शिव के साथ उसे कुछ अलग hi महसूस हो रहा था. उसका दिल जोरो से धड़क रहा था. वो जाकर शिव के पीछे कड़ी हो गयी, शिव अभी भी जैसे नाराज़ था वो अपने आप hi नाहा रहा था. उसने उसके हाथ से पानी का तीन ले लिया. शिव ने पीछे मुड़कर देखा और थोड़ी बेरुखी से कहा

शिव : में नहालुंगा didi.(Lata ने कोई जवाब नहीं दिया और वो शिव पर पानी गिराने लगी. साबुन ले कर शिव पर लगाने लगी तो शिव ने उनका हाथ पकड़ liya.)Didi आप रहने दो में नाहा लूंगा.

लता : (नरम आवाज me)Me नेहला रही हु न.

शिव : अगर आप साथमे नहाने वाली हो तो hi मुझे नहलाना.

लता : है, में भी नहालुंगी.

शिव : (मेने लतादिदी की आंखोमे देख kar)Kapade पहन कर नहाती हो aap?(Pata नहीं में ये कैसे कह गया था, पर अल्फ़ाज़ मेरे मुँह से अपने आप hi निकल चुके थे)

लता : (अपनी नज़ारे झुकाते hue)Nahi.

शिव : तो फिर.

लता : तू क्यों ऐसा कर रहा है शिव?

शिव : मेने आप से कोई जबरदस्ती तो नहीं की, अगर आप को मुझे नहलाना है तो मेरे साथ नहाना पड़ेगा, बस.

लता : ठीक है पर तू पीछे मुद कर मुझे देखेगा नहीं.

शिव : (पीछेमुद कर लतादिदी को देखा) ठीक है दीदी.

फिर लता ने गहरी साँस ली और कड़ी हो गयी और अपने कपडे उतरने लगी. उसने ब्रा और पंतय पहने राखी और वापस शिव के पीछे बेथ गयी. उसे बहोत शर्म आ रही थी पर वो शिव को नाराज नहीं करना चाहती थी और उसका भी मान कर रहा था. उसका भी दिल जोरो से धड़क रहा था, वो ऐसी अवस्था में शिव के साथ थी. उसने साबुन लिया और शिव को नहलाने लगी.

शिव : आप भी साथ में नहाओ.

(लता ने खुद पर भी पानी डाला और अपने शरीर पर साबुन लगाने लगी. वो पीछे से शिव के आगे के भाग पर भी साबुन लगा रही थी. वह से शिव के पैरो पर साबुन लगाने में दिक्कार हो रही थी तो उसके पैरो तक पहुंचने के लिए उसने हाथ बढ़ाया तो उसके सुडौल स्तन शिव की पीठ पर डाब गए. (मुझे अपनी पीठ पर हो रहे स्पर्श से पता चलगया की ये क्या है. न चाहते हुए भी मेरा लुंड अंगड़ाई लेते हुए खड़ा होने लगा. सरितादिदी की बातो से मुझे लग रहा था की कहना कही लतादिदी भी कुछ ऐसा hi सोच रही है वर्ण सरितादिदी वैसा न कहती, वो दोनों एकदूसरे से बहोत नजदीक है.) (लता भी जब उसकी झांघो पर साबुन लगा रही थी तो एक दो बार उसका हाथ उसके लुंड से टकरा गया. वो जान चुकी थी की शिव का वो अंग उत्तेजित हो चूका है. ये सोच कर hi उसकी टैंगो के बिच सरसराहट होने लगी. दोनों के शरीर कम्प गए थे जब ये स्पर्श हुआ था. पर दोनों चुप hi रहे.) (मुझे सरिता दीदी की याद आ गयी.)

शिव : (मान me)Kass अभी सरिता दीदी होती तो कुछ हो जाता. मेरा ये कभी भी खड़ा हो जाता है इस पागल को ये नहीं पता की ये सरितादिदी नहीं लता दीदी है.

लता :(लता ने शिव के चेहरे पर साबुन लगा दिया जिस से उसकी आंखे बंद हो gayi)Khada हो जा मेरे हाथ तेरे पैरो पर पुरे नहीं पहुंच रहे hai.(Shiv खड़ा हो गया तो लता साबुन लगाने लगी. जब उसकी नजर उसके तने हुए लुंड पर पड़ी तो उसकी सांसे अटकने लगी. वो साबुन तो पैरो पर लगा रही थी पर उसकी नज़र उस बड़े से उभर पर hi थी. वो मान में सोचने lagi)Kitna बड़ा है, सरिता जैसे बता रही थी उसको भी काफी दर्द हुआ जब उसने शिव के साथ वो किया था. ऊपर से बेशरम बता रही थी की उसे बहोत मज़ा आया. कैसे वो शिव की तारीफ कर रही थी. उसके चेहरे से hi लग रहा था की वो बहोत खुस थी. क्या शिव मेरे साथ भी वो सब karega.(Usne शिव के चेहरे को देखा जो साबुन की वजह से अपनी आंखे बंद किये खड़ा था, लता का दिल छह रहा था की वो उस बड़े से उभर को अपने हाथ से पकड़े पर वो जानती थी वो ऐसा नहीं कर sakti)Ab बेथ जा में पानी दाल कर धो देती हु, इतना लम्बा है की हाथ भी नहीं pahuchte.(Shiv मुस्कुराता हुआ बेथ गया और लता उसपर पानी डालने लगी. फिर उसने अपने मुँह पर साबुन लगाया पर जब वो tin(dibba) को ढूंढने लगी तो डिब्बा उसके हाथ से लग कर दूर चला गया, उसने ढूंढने की कोशिस की पर उसको वो नहीं मिला.

लता: शिव तीन दे तो, मुझे मिल नहीं रहा hai(Wo जानती थी की शिव को उसकी और देखना पड़ेगा, उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा, उसकी धड़कने तेज चलने लगी.)

मेने पीछे मुड़कर देखा तो देखता hi रह गया. लता दीदी सिर्फ ब्रा और पंतय में बैठी थी. पुरे शरीर पर साबुन लगा हुआ था. माध्यम आकर के स्तन ब्रा में कैद थे, आधे से ज्यादा स्तन बहार थे, वो भरे हुए स्तन शान से खड़े थे, भीगी पंतय से उनकी छूट का आभास स्पस्ट हो रहा था, फुले हुए होठो से भींच की दरार भी अपनी उपस्थिति बता रही थी. लतादिदी को देख कर मुझे कुछ कुछ होने लगा. मान कर रहा था की उन्हें अपनी बहो में जकड लू पर में ऐसा नहीं कर शका. में उनकी छूट को देख चूका था पर अभी ये नज़ारा बहोत hi आकर्षक और उत्तेजक था. उनका भीगा बदन चमक रहा था, उनका नाजुक सा बदन मुज पर बिजलिया गिरा रहा था.

लता : दे न.

(दीदी की आवाज सुन कर में हड़बड़ा गया और हड़बड़ाते हुए मेने आस पास देखा और तीन उठा कर लतादिदी को दिया. अब वो बाल्टी ढूंढ़ने लगी तो उनके हाथ शिव से टकराने lage.)Ab ये बाल्टी कहा चली gayi.(Shiv ने उनके हाथ को पकड़ कर बाल्टी पे रक्खा, लता जानती थी शिव उसे देख रहा है, वो अंदर hi अंदर बहोत शर्मा रहे थी, पर वो अपने आपको सँभालते हुए उसे देखने दे रही थी. लता अपना मुँह धोने लगी. (दीदी को चिह्रा साफ करते देख मेने अपनी नज़र घुमा ली. नहाने के बाद मेने अपने शरीर को पोछा, उन्होंने अपने. में उनकी और देख नहीं प् रहा था)

शिव : दीदी आप का हो गया.

लतादिदी : (धीमी आवाज़ me)Ha तू चल में आती hu.(Me वह से अपने रूम में चला आया, थोड़ी देर बाद दीदी भी आ गयी, भीगे हुए बालो को उन्होंने टॉवल में लपेट रक्खा था, वो इतनी खूबूसरत लग रही थी की दिल कर रहा था की उन्हें अपनी बाहोंमे समेत लू)

शिव : दीदी आप बहोत सुन्दर ho.(Lata उसकी बात सुन कर शर्माने लगी, मुज से और कुछ तो कहा नहीं गया) चलिए दीदी सोते है.

लता : (लता सोच रही थी की शिव उसके साथ कुछ करेगा पर उसने सोने को बोलै, तो वो मायूस हो गयी, वो सामने से तो कुछ कह नहीं शक्ति thi)Thik है, चलो.

दोनों लेट गए और रोज की तरह लता ने शिव की और करवट लेते हुए अपना शिर शिव की बाह पर रकते हुए अपना पेअर शिव पर चढ़ा दिया और शिव से चिपक गयी जिस से उसके कड़क चुके शिव की छाती में अपना आभास करवाने लगे.. (मेने लतादिदी को अपनी और खींचते हुए अपने शाइन में छुपालिया) (वैसे भी वो गरम था तो उसका लुंड सीधा लता की छूट को छूने लगा.)

लता : शह्ह्ह्हह्ह

शिव : क्या हुआ दीदी.

लता :(शरमाते hue)Kuchh nahi.(Usne शिव को और कास लिया)

शिव : (मुस्कुराते हुए मनें उनके गाल पे छोटी सी पापी di)Good निगह दीदी.

लता : उसका शिर सहलाते hue)Good नाईट शिव.

फिर दोनों ने अपनी आंखे बंद कर्ली. दोनोमे से किसी की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी, वो दोनों जो था उसी का मज़ा ले रहे थे और एकदूसरे को सेहला रहे थे, और ऐसे कब वो नींद की वदीओ में चले गए उनको hi पता न चला. दोनों के चेहरे शुकुन से भरे हुए थे.

सुबह जब में उठा तो लता दीदी को अपने से चिपका हुआ पाया. में आंखे खोले इस एहसास का मज़ा ले रहा था. फिर में आहिस्ता से उठा, एकबार लता दीदी की और देखा. वो चैन से सो रही थी और उनके चेहरे पर मुस्कान थी. पूरी नंगी थी वो. मेने बड़े प्यार से उनको देखा फिर टॉवल लपेट कर बाथरूम की और निकलगया. में बाथरूम के नजदीक पहुँचातो मुझे विणा आती दिखाई दी. वो मुझे देखकर थोड़ा जिजकी, मुझे पता था की वो क्यों आयी है.

शिव : जाओ तुम जा आओ पहले.

वो शर्माती हुई बाथरूम में घुस गयी. थोड़ी देर में मुझे वही आवाज सुनाई दी. ये सोच कर की अभी वो अपनी छूट खोले मूत रही है, मुझे उत्तेजना महसूस होने लगी. जब विणा बहार निकली, उसने एकबार नुजे देखा, फिर मुस्कुराते हुए अपनी नज़ारे झुकाते हुए वह से निकलगई. में बाथरूम में घुस गया, जब में बाथरूम से निकला तो सामने रंजन कड़ी थी. वो मुझे देखकर खुस हो गयी. अनाथालय में सन्नाटा था, आस पास कोई था नहीं तो वो मुझसे लिपटगाई.

रंजन : गुड मॉर्निंग शिव.

शिव : (मुस्कुराते हुए उसको बाहोंमे लेते hue)Good मॉर्निंग, आज जल्दी उठ गयी.

रंजन : Wo...(Kehte कहते रुकजाति है)

शिव : (मुस्कुराते hue)Bathroom जाना था इसलिए जग गयी.

रंजन : (शरमाते हुए मुस्कुराती hai)Hummmm.

शिव : ठीक है तुम जाओ मुझे भी जाना है

मेने उसके होठो पर एक छोटी सी किश की और वह से निकल गया. रंजन उसे जाता देखती रही. फिर वो बाथरूम में घुस जाती है. में जूही मैडम के घर पंहुचा और बेल्ल बजायी. थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और वही नज़ारा मेरे सामने था.

शिव : गुड मॉर्निंग मैडम.

जूही मैडम : गुड मॉर्निंग. अंदर आओ.

में जा कर सोफे पर बेथ गया थोड़ी देर में वो कपडे पहन कर आ गयी, अपने हाथ में दूध के दो गिलास के साथ. दूध का स्वाद आज कुछ अलग लग रहा था.

शिव : आपने कुछ डाला है क्या दूध में.?

जूही मैडम : है प्रोटीन पाउडर डाला है. क्यों अच्छा नहीं लगा?

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं, वो स्वाद अलग लगा न इसीलिए पूछा.

जूही मैडम : अब तुम्हे इसकी जरुरत पड़ेगी.

शिव : मैडम एक बात पुछु अगर आप बुरा न माने तो.

जूही मैडम :(मेरी और सवालिया नजरो से देखते hue)Nahi, पूछो.

शिव : क्या मुझे थोड़ा लेट आना चाहिए?

जूही मैडम : क्यों? ऐसा क्यों पुछराहे हो?

शिव : वो मैडम आप को रोज ऐसी हालत में दरवाजा खोलना पड़ता है इसीलिए कहा. या में बहार खड़ा राहु थोड़ी देर?

जूही मैडम :(थोड़ी शर्म की लाली छ जाती hai)Nahi ऐसी बात नहीं है, मुझे पता होता है तुम आओगे तो में निश्चिंत होकर नहाती होती हु. तुम लेट भी आओगे तो भी में उस वक़्त तक नाहा रही hi होउंगी.

क्या तुम्हे कुछ गलत लगता है?

शिव : नहीं, मेरे कहने का मतलब है की आपको ऐसे निकलना पड़ता है तो आप को बुरा लगता होगा इसीलिए मेने कहा.

जूही मैडम : मुझे कोई दिक्कत नहीं है. में तुम्हे अच्छी जानती हु तुम एक अच्छे लड़के हो वर्ण में तुम्हारे सामने ऐसे न आती. और दूसरी बात में एक एथलिट हु तो जब कॉम्पिटिओं होता है तो हजारो दर्शको के सामने भी में छोटे कपड़ो में होती हु. निचे तो इतनी छोटी चड्डी होती है की झंघ की जोड़ तक hi होती है.

शिव: आप क्यों इतने छोटे कपडे पहनती है, क्या लम्बे कपडे नहीं पहन सकती.

जूही मैडम : पहन सकते है पर उस से तुम्हारे परफॉरमेंस पर फर्क पड़ता है.

शिव : वो कैसे?

जूही मैडम : जब हम दौड़ते है तो हमारी बॉडी बहोत गर्म हो जाती है और उसे ठंडा रखना भी जरुरी होता है, इस लिए जितनी बॉडी खुली रहेगी उतना शरीर जल्दी ठंडा होगा और हम ज्यादा दौड़ शक्ति है. तो इतने छोटे कपडे की मुझे आदत है. है तुम्हे अगर दिक्कत है तो अब में तुम्हारे सामने ऐसे नहीं आउंगी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi मुझे कोई दिक्कत नहीं और आप को कैसे पता में अच्छा हु. एक गलती तो कर चूका hu.(Kal रत बस में हुई घटना के बारे में बात कर रहा था.)

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Wo तुम्हारी गलती नहीं थी. और हम लड़कीओ को लड़को की नजर समाज में आ जाती है. है अगर तुम्हे कोई परेशानी है तो में कैसे जल्दी तैयार होजाय करुँगी.

शिव : थैंक यू की आप मुझपर इतना भरोसा करती है. और मुझे कोई दिक्कत नहीं hai.(Fir मज़ाक करते hue)Muje तो बल्कि सुबह सुबह ऐसा खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है तो मेरा दिन सुधरजाता है.

जूही मैडम : (आंखे निकलते हुए मुस्कुराती hai)Badmash कही के, में तो तुम्हे सरीफ समझती थी.

शिव : वो तो में हु, पर अगर सामने नज़ारा इतना खूबसूरत हो तो कभी कभी मन दोल जाता hai.(Fir में जोरो से हसने लगा)

जूही मैडम : Ha..ha..very फनी. चलो अब देर हो रही है. आज से तुम्हे ज्यादा म्हणत करनी है, कल कोच सर ने क्या कहा था याद है न तुम्हे?

शिव : (में खड़ा हो गया और तन कर सेलुटे करते हुए) ी.. ी.. मैडम, शिव आपकी ट्रेनिंग के लिए तैयार है.

जूही मैडम : (मुस्कुराती hai)Chal अब नौटंकी बहोत हो चुकी त्रि. आज में तेरी गयम में खबर लेती हु.

फिर हम दोनों गयम आ गए. सच में आज जूही मैडम ने मेरी हालत ख़राब कर दी. उन्होंने बहोत एक्सेरसिस करवाई. (कई औरते शिव को hi देख रही थी उसका स्टेमिना देख कर दांग थी. शिव भी जान लगा कर जूही मैडम की हर आज्ञा का पालन कर रहा था. मैडम के जाने के बाद भी शिव उनकी बताई एक्सेरसिस कर रहा था. मदन सर और दूसरे लोग भी उसकी म्हणत देख रहे थे.)

घर आ कर में तैयार हो रहा था की लता दीदी आयी. वो बिलकुल सामान्य दिख रही थी. उनसे थोड़ी हसी मजाक की और फिर स्कूल के लिए निकल गया. रस्ते में मुझे संयम कड़ी दिखी. वो थोड़ी दरी हुई लग रही थी. मेरे तो दिमाग से hi निकल गया था की कल वो अकेली स्कूल गयी होंगी, शायद उस लड़के ने कुछ किआ न हो, उसे देख कर में थोड़ा चिंता में पद गया और उसके पास चला गया.

शिव : क्या हुआ तुम इतनी दरी हुई क्यों हो?

संयम : शिव तुम एक दो दिन स्कूल मत आना.

शिव : (उसकी बात थोड़ी अजीब थी और उसे देख कर उसका दर साफ दिखा जा शक्ति tha)Kyu क्या हुआ?

संयम : वो लड़का था न जिसे तुमने मारा था वो कल आया था और मुझे रोक कर तुम्हारे बारे में पूछ रहा था.

शिव : (मुझे गभरहट होने लगी, मेरे लिए नहीं, संयम के लिए, कही उस लड़के ने संयम के साथ...) उसने तुम्हारे साथ कोई बदतमीजी तो नहीं की?

संयम :(आश्चर्य से शिव को देखने लगी और मान में सोचने lagi)Me इससे ये कह रही हु की वो तुम्हे ढूंढ रहा था मतलब उसको खतरा है और ये मेरे लिए परेशान हो रहा hai.(Fir शिव को)

नहीं वो बस तुम्हारे बारे में पूछ रहा था और उसके साथ दो तीन और लड़के भी थे शिव. मुझे बहोत दर लग रहा है, तुम वापस चले जाओ और अभी एक दो दिन स्कूल मत आना.

शिव : और अगर उन्होंने तुम्हे परेशान किआ तो? मुझे लगता है वो लोग ऐसे तो शांत होनेवाले नहीं. तुम फ़िक्र मत करो, चलो स्कूल चलते है.

संयम : पर....

शिव : तुम फ़िक्र मत करो और चलो देर हो रही है.

संयम दरी हुई थी फिरभी वो chup-chap उसके साथ चलने लगी. वो कभी ass-pass तो कभी शिव को देख रही थी. उसको जो दर था वही हुआ थोड़ी देर बाद उसे रस्ते में वो लड़का नजर आया और उसके साथ तीन और लड़के थे. वो अपनी दो बाइक कड़ी करके उन्ही का इंतजार कर रहे थे. जैसे hi उनकी नजर इनदोनो पर पड़ी वो सब खड़े हो गए और इनदोनो की और देखने लगे.

संयम : (डरते hue)Shiv, देखो वो लोग, वह खड़े है.

शिव : (मेने भी उन्हें देख लिया tha)Tum चलती raho.(Jab हम वह उनके करीब पहुंचे तो वो लड़का जिसको शिव ने थप्पड़ मारा था)

लड़का 1: आइए, रूक बे .

शिव : (मेने रूक कर उनकी तरफ देखा, और शांति से kaha)Bolo.

लड़का 1: क्यों बे उस दिन बड़ा हीरो बन राजा था, कहा गायब हो गया था?

शिव : तुम क्यों इस बात को बढ़ाना चाहते हो? उस दिन जो हुआ उसे बहुलजाओ और इस लड़की को परेशान करना बंद करो, इससे तुम में कोई इंट्रेस्ट नहीं है. ऐसी हरकते करके तुम और इसकी नज़र में गिर रहे हो.

लड़का 1: वो में देखलूँगा, वो मेरा और इसका मामला है, तू क्यों खामखा अपनी तंग बिच में ऐडा रहा है, ये तेरी बहन है या फिर गर्लफ्रेंड?

शिव : मेरी जो कोई भी हो पर तुम्हारी तो पक्का बहन hi है.

लड़का 2: ोई.... अपने आप को हीरो समझता है क्या.

शिव : अब तू कोण है? ये हम लोगो के बिचकि बात है तू दूर hi रह.

लड़का 2 : (लड़का2 आगे आते hue)Kya करलेगा बे? तूने मेरे दोस्त को मारा था न अब हम तुम्हे बताएँगे की हमरे दोस्त पे हाथ डालने का क्या अंजाम होता है.

शिव : मेने तुजे मारा था kya?(Ladka 1 की तरफ देख kar)Mene तुजे मारा था न, तो तू भी मुझे मर ले और ये किस्सा यही ख़तम कर, और आगे से इस लड़की को परेशान करना बंद कर दे.

लड़का 1 : वो तो तुजे पड़नेवाली है hi (संयम की और देखते hue)aur रही बात इस साली की इससे तो में ऐसा सबक सिखाऊंगा की ये जिंदगीभर याद रक्खेगी.)

शिव : देख भाई लड़की के साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए, अगर तुजे ये पसंद है तो इस को खुस करने की कोशिस कर शायद ये है बोल दे पर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए.

लड़का 1: सहना बनता है? मेरे सामने सहना बनता है, तू जनता नहीं मुझे, जो मुझे पसंद आती है उसे में कैसे भी हांसिल कर hi लेता हु, तू मुझे मत sikha.(Shiv का गिरेबान पकड़ते hue)Aaj तेरा हिसाब करते है, अब से तू इस लड़की के साथ नजर आया तो तेरे हाथ पेअर तोड़ दूंगा समजा.

शिव : (शिव को हंसी आ रही थी, वो उसके सामने छोटा था, शिव को उस से बात करने के लिए निचे देखना पद रहा tha)Sorry भाई में तो रोज hi नजर आऊंगा. और अगर तुमने इसकी मर्जी के खिलाफ कुछ भी किया तो उस दिन जो हुआ था वो दोबारा होगा. (वो, एक घुसा शिव के पेट में मरता है)

संयम: सीईव

लड़का 1 : क्यों बे साली मर इससे रहा हु तकलीफ तुजे हो रही है? तेरा यार है क्या?

शिव : (उसने घुसा मारा था पर मुझे कुछ खास असर नहीं hua)Aab हुम्हारा हिसाब बराबर हो गया अब निकालो यहाँ से.

लड़का 2: अभी हिसाब बराबर नहीं हुआ be(Shiv का गिरेबान पकड़ते hue)Abhi तो सुरु हुआ है, और जिस को तू बचाना चाहता है न, उसे तो हम सब मिलकर chodenge.(Itna सुनते hi शिव ने एक झन्नाटे दर झापड़ उसको मारा )Aahhhh(Jhapad इतना जोर से लगा की उसको कुछ समाज hi नहीं आया क्या हुआ वो लड़खड़ाते हुए दो कदम पीछे हैट गया)

शिव : (लड़का 1 की तरफ देखते hue)Aab तू जायेगा की पिटेगा. (वो गुस्से में मुझे मरने गया तो मेने उसको भी एक झपट पड़ा, झापड़ इतना जोर से लगा की उसको दिन में टारे नज़र आने लगे और वो पीछे गिर पड़ा, मेने शांति से kaha)Aab निकल यहाँ se.(Tamasha देख लोग इक्कट्ठा होने लगे थे, मेने दूसरे दो लड़को की और देखा )तुम्हे भी मर कहानी hai.(Wo दोनों डरगए थे, वो तो बस अपने दोस्तों का साथ देने आ गए थे)

लड़का 2: (वो अब थोड़ा संभल चूका था) सेल तूने मुझे mara(Kehte हुए वो आगे बढ़ा और शिव को मरने के लिए हाथ उठाने लगा, शिव ने अपनी लम्बाई का फायदा उठाते हुए एक लात मरी, वैसे भी शिव के पैरो में बहोत ताकत थी )ोोोू माआ, मर गयाआ.

शिव : (गुस्से से) निकालो बोलै na.(Ladke2 को एक और झापड़ मारा तो वो अपना शिर पकड़ लिया , लड़के 1 का गिरेबान पकड़ कर खड़ा kiya)Agar दोबारा दिखा तो अब बात नहीं करूँगा सीधे झापड़ रशीद करूँगा समजा. अब निकल यहाँ से.

लड़का 1 : (वो दर रहा था, आस पास लोग जमा होने लगे थे, वो लड़खड़ाते कदमो से अपनी बाइक की और गया, उसने बाइक चालू की, सब अपनी अपनी बाइक पर बेथ gaye)Me तुजे देख लूंगा. में तुजे छोडूंगा नहीं.

वो लोग निकल गए. मेने भीड़ को देखा, सेल सब तमाशा देखनेवाले लोग थे. में संयम के पास गया.

शिव : चलो.

संयम :(वो बिना कुछ बोले अपनी साइकिल ले कर उसके साथ चलने लगी, जो कुछ हुआ था उसे देख कर उसे शिव के प्रति बहोत प्यार आ रहा था, वो बार बार शिव को hi देख रही थी, थोड़ी देर ख़ामोशी से चलने के baad)School के लिए देर हो रही है शिव, तुम्हे साइकिल चलनी आती है?

शिव : है आती है.

संयम : तुम चला लो में पीछे बैठती हु.

मुझे भी लगा यही सही है. मेने साइकिल ली, संयम पीछे बेथ गयी और मेने साइकिल, स्कूल की और बाधादि. संयम पीछे बेथ मंद मंद मुस्कुरा रही थी. भले hi झगड़ा हुआ था पर वो लड़का बार बार उसे शिव की गर्लफ्रेंड बुलाता था, संयम को भी कह रहा था की ये तेरा यार है क्या? ये सब सोच कर वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी. उसने धड़कते दिल से शिव की कमर पकड़ ली. जहा पहले वो दरी हुई थी वही अब वो बहोत खुस थी. वो अपनी सोच में गम थी और मुस्कुरा रही थी. ऐसे hi दोनों स्कूल आ गए. बेल्ल बज चुकी थी और बहार कोई नहीं था तो दोनों जल्दी से अपने क्लास में पहुंचे तो क्लास सुरु हो चुकी थी. बिना मैडम पढ़ा रही थी.

शिव : मई ी के इन मैडम.

बिना मैडम : क्यों लेट आये हो?

संयम : मैडम मेरी साइकिल ख़राब हो गयी थी तो इसने मेरी मदद की इस लिए दोनों लेट हो गए.

बिना मैडम : ठीक है बैठो.

फिर वो दोनों अपनी अपनी जगह जा कर बेथ गए. वैस्वी ने देखा था की वो दोनों साथ आये थे, उसके दिल में बहोत सरे सवाल आ रहे थे, वैस्वी ने बात करने की कोशिस की पर क्लास चल रही थी तो बिना मैडम ने उसे टोका तो वो चुप हो गयी. वो बेचैन हो रही थी वो रेसस्स का इंतजार करने लगी.
 
अपडेट 32

जैसे hi पीरियड ख़तम हुआ, वैस्वी संयम को पूछने लगी और यहाँ ये दोनों भी मुझसे पूछने लगे. संयम ने और मेने शार्ट में सब उनको बता दिया. शाम को जब छुट्टी हुई तो संयम और वैस्वी पार्किंग में कड़ी थी. संयम की निगाये शिव को ढूंढ रही थी.

वैस्वी : किसे धुंध रही हो?

संयम : शिव को?

वैस्वी : क्यों?

संयम : अगर वो लड़का फिर आ गया तो, शिव साथ होगा तो मुझे दर नहीं लगेगा. तू होती तो तुजे पता चलता, एक एक झापड़ पड़ते hi उन लड़को की हालत ख़राब हो गयी थी. शिव दिखने के कितना सीधा लगता है पर जब वो मेरे लिए लड़ रहा था तब तुजे देखना था. उन लड़को की मर की भी उस पर कोई असर नहीं हो रही थी, और उसकी मर से उनको दिन में टारे नजर आ गए होंगे. शिव कितना स्ट्रांग है न.

वैस्वी : अंदर hi अंदर जल भून रही थी, जिस तरह से संयम, शिव के बारे में बाते कर रही थी उस से उसे लगने लगा था की पक्का संयम, शिव पर मर मिटी है. पता नहीं पर ये उसे अच्छा नहीं लग रहा था. वैसे तो उसे शिव से कोई लेना देना नहीं था, ऐसा नहीं था की वो शिव को पसंद करती थी, पर जैसे समिमने hi बताया था की शिव उसे देखता है तो उसे लगने लगा था की शिव उसे पसंद करता है. ये सोच कर उसे अंदर hi अंदर ख़ुशी मिल रहे थी. और अभी जैसे संयम, शिव के बारेमे बाते कर रही है उस से उसे लगने लगा था की वो शिव को छीन लेगी.

शिव, महेश और हर्ष तीनो साथ में स्कूल से बहार आ रहे थे, संयम और वैस्वी दोनों ने ये देखा. दोनों की निगाहे शिव पर hi थी, संयम तो दीवानी हो कर शिव को देख रही थी, और ये देख कर वैस्वी जल रही थी. जब शिव और उसके दोस्त नजदीक ए तो

वैस्वी : (संयम se)Me निकलती हु.

संयम : (उसका हाथ पकड़ते hue)Rook na.(Shiv की और देखते hue)Shiiiiv (उसने प्यार से शिव को pukara)(Mene संयम की और dekha)tum मेरे साथ चलोगे? अगर वो लड़के फिर आये तो.

शिव : (मुझे भी उसकी बात सही लगी) है ठीक hai(Mahesh और हर्ष की और देखते hue)Me इसके साथ hi निकलता हु.

महेश : हम भी तुम लोगो के साथ hi चलते है. अगर वो लोग फिर आ गए तो.

शिव : इसकी जरुरत नहीं.

हर्ष : क्या जरुरत नहीं. अगर वो ज्यादा लोगो को लेकर आया तो.

वैसे तो मुझे फर्क नहीं पड़नेवाला था पर मेने बहेश नहीं की क्यों की वो ठीक कह रहा था, इतना ज्यादा भी वरकॉन्फिडेंट होना ठीक नहीं. वो दोनों भी साइकिल पे थे और में महेश के पीछे बेथ गया. संयम को ये अच्छा नहीं लगा, पर वो क्या कहती. हम सब साथ में वह से निकले और वैस्वी अपने स्कूटर पर निकल गयी. हमने संयम को उसके इलाके में छोड़ा और वो दोनों मुझे छोड़ने मेरे घर तक आये. सच में मुझे अच्छे दोस्त मिल गए थे. में फ्रेस हुआ कपडे बदले और गयम चला गया. जब मदन सर और सब चले गए तो में सब ठीक कर रहा था तो स्नेहा मैडम आ gayi.Ab में स्नेहमड़ाम से अच्छी तरह से खुल चूका था. मुझे ये भी पता था की वो क्यों आयी है तो बिना शर्माए मेने उनकी जमकर ली. वो भी खुसी खुसी अच्छी चूड़ी और फिर मुझे छोड़ने अनाथालय भी आयी. रात को सोते वक़्त मेने दीदी से पूछा.

शिव : दीदी, मैनेजर आया? गुड्डू की कोई खबर?

लतादिदी : नहीं, कोई खबर नहीं.

शिव : ऐसा कैसे दीदी, हमें उसकी खबर लेनी चाहिए.

लतादिदी : में भी चाहती हु, पर क्या कर शक्ति है. वो उसे कहा ले गए है, कोनसे हॉस्पिटल में है कुछ पता नहीं है.

शिव : ये कैसी जिंदगी है न दीदी, अपनों ने हमे छोड़ दिया, न कोई पूछनेवाला न कोई खबरलेनेवाला, हम जीते है या मर गए, किसी को कोई भी परवाह नहीं.

लतादिदी : (मेरे गले में हाथ दाल कर मेरी छाती से अपना शिर चिपकते हुए) में हु न शिव.

शिव : (उन्हें अपनी बहो में कस्ते हुए) है दीदी, तुम hi तो हो, भगवन ने मेरे लिए इस पारी को भेजा है, अगर ये पारी मेरी जिंदगी में न आती तो पता नहीं मेरा क्या होता. ी लव यू दीदी.

लतादिदी : ी लव यू तो शिव, तेरे जीवन में मुझे भेजा है या मेरे जीवन में तुजे भेजा है पता नहीं पर जो कुछ भी हुआ उस से मुझे इतना तो पता चल रहा है की कही न कही भगवन मुज पर मेहरबान है, जो तुजे मेरी जिंदगी में भेजा.

हमदोनो ऐसे hi बाते करते हुए सो गए. दूसरे दिन भी जूही मैडम ने मेरी हालत ख़राब कर दी, वो जाम कर मुझे प्रैक्टिस करवा रही थी. वो दिन ऐसे hi गुजर गया. उसके दूसरे दिन में बिना मैडम के घर गया. वो बहोत hi अच्छी थी, और स्कूल से उलट, वो घर में बहोत ज्यादा मिलनसार थी. उन्होंने मुझे कंप्यूटर सीखना सुरु कर दिया. में दोपरह को गया था तो उन्होंने खाना भी कहिल्या. बिना को भी शिव का साथ पसंद आया, हलाकि सेक्स को लेकर उसके दिल में उथल पुथल मची हुई थी, पर उसे शिव के साथ टाइम बिताना अच्छा लगा था. अकेलेपन में जैसे उसे एक सहारा मिल गया था. एक बुरी खबर भी मिली, मैनेजर ने बताया की गुड्डू की मौत हो गयी है. किसी को समाज नहीं आ रहा था की ये कैसे हो सकता है, वो बिलकुल ठीक था और ऐसे अचानक, पर इसका जवाब किसी के पास नहीं था. मैनेजर ने भी गोल गोल जवाब देकर सब को ताल दिया.

रोज की तरह हम सब क्लास में बैठे हुए थे, बिना मैडम आयी और हम सब की हजारी ली.

बिना मैडम : आज से में क्लास के लिए एक मॉनिटर को अप्पोइंट कर रही हु. स्कूल के रूल के अनुसार जिस के मार्क्स सबसे ज्यादा होते है उसे hi क्लास का मॉनिटर बनाया जाता है. (सब मेरी और देखने लगे) और एक सुब मॉनिटर भी होगा जो मैं मॉनिटर की अनुपस्थिति में काम करेगा. तो इस के लिए में शिव को मैं मॉनिटर और वैस्वी को सुब मॉनिटर अप्पोइंट करती हु.

सब स्टूडेंट तालिया बजने लगे, मेने वैस्वी की और देखा तो उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की उसे ये पसंद नहीं आया. और वैसे भी में मॉनिटर नहीं बन न चाहता था. मेरे मॉनिटर न बन ने की दो वजह थी. एक तो में फ्री टाइम में पढ़ नहीं पाउँगा और जिस तरफ से जूही मैडम मुझे एथलीट बनाने के लिए म्हणत कर रही थी में यहाँ इतना टाइम नहीं दे पाउँगा. तो में अपनी जगह खड़ा हुआ.

शिव : एक्सक्यूज़ में, मैडम.

बिना मैडम : है बोलो शिव.

शिव : मुझे माफ़ कीजिये, पर में मॉनिटर नहीं बनना चाहता. में शायद टाइम नहीं दे पाउँगा. मेरे ख्याल से वैस्वी hi बेस्ट है इसके लिए. तो आप उसे hi मॉनिटर बनादिजिये. वो इंटेलिजेंट भी है और ये सब अच्छे से संभल शक्ति hai.(Vaiswi को पहले तो झटका सा लगा पर फिर वो अपनी तारीफ सुन कर इतराने लगी)

बिना मैडम : ठीक है, अगर तुम बनना hi नहीं चाहते तो यही सही रहेगा. तो ये तय रहा की क्लास की मैं मॉनिटर वैस्वी होगी, तुम सुब मॉनिटर तो बनोगे न की वो भी नहीं बन न चाहते.

शिव : वो में बाण शक्ति हु. वैसे भी वैस्वी कभी एब्सेंट तो रहती नहीं, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं hai.(Shiv की बात सुन कर वैस्वी अंदर hi अंदर मुस्कुराने लगी, सब ने उसके लिए तालिया बजायी तो वो और खुस हो गयी)

पुरे दिन की भगा दौड़ी के बाद रात को जब में रंजन और विणा के कमरे में में पढ़ने गया तो देखा विणा सोई होइ थी.

शिव : ये क्यों सो गयी है?

रंजन : कब से लिखने का होमवर्क मिला था तो लिख रहे थे तो थक गयी और सो गयी.

शिव : और तुम नहीं थकी?

रंजन : तुम आनेवाले थे, इसलिए नहीं सोई.

शिव : ठीक है अगर थक गयी हो तो सो जाओ, में चलता हु. (रंजन ने मेरा हाथ पकड़लिया)

रंजन : बैठो न थोड़ी देर. (में उसकी बात सुन कर बेथ गया)

शिव : रंजन एक बात समाज में नहीं आयी.

रंजन : किस बारे में बात कह रहे हो.

शिव : वो गुड्डू के बारे में. ऐसे कैसे उसके साथ ये सब हो गया.

रंजन : सही कह रहे हो. मुझे भी समाज नहीं आया. उसे देख कर ऐसा नहीं लगता था की उसके साथ ये सब हो जायेगा.

शिव : ऐसा क्या हो गया था उसे, क्या तुम कुछ जानती हो.

रंजन : नहीं, में ज्यादा तो कुछ नहीं जानती पर तुम सरितादिदी से पूछ लेना, शायद उन्हें पता होगा.

शिव : ऐसा तुम्हे क्यों लगता है?

रंजन : उस दिन, जब गुड्डू की तबियत ख़राब हुई थी उसे से पहले उन्होंने hi गुड्डू को कोई दवाई दी थी.

शिव : उन्होंने दवाई दी थी तो उनको पता होगा. ठीक है में उनसे बात करलूँगा. ठीक है तुम आराम करो में चलता hu.(Me उठनेलगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसे सवालिया नज़रो से देखा तो वो शर्मा गयी, मेने मुस्कुराते hue)To इसीलिए जाग रही thi.(Wo शरमाते हुए मेरे गले लग गयी. मेने भी उसे अपनी बहो में भर लिया, पता नहीं ऐसा क्यों होता था पर थोड़ी hi देर में सिर्फ गले लगने से hi में गरम होने लगा और मेरा लुंड खड़ा होने लगा, वो भी गरम हो गयी थी)

राजा :(शरमाते hue)Me दरवाजा बंद कर देती हु.

शिव : पागल हो गयी हो, कोई आएगा और दरवाजा बंद मिला तो?

रंजन :( वो मुस्कुराते हुए गयी और दरवाजा बंद करके आ gayi)Jise जो सोचना है सोचे, अगर दीदी मारेगी तो मार भी खा लुंगी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Lagta है इरादे ठीक नहीं tumhare.(Wo शर्मा गयी और मेरे गले लग गयी, मेने उसको बहो में भरा और उसकी पीठ सहलाने लगा, वो भी मेरी पीठ को सहलाने लगी. मेने अपने हाथ निचे ले जाते हुए उसके दोनों कूल्हों को पकड़ लिया और मसलने लगा, वो मेरे गले को चूमने लगी, उसकी सांसे तेज होने लगी थी. उसने घुटनो तक की फ्रॉक पहनी थी तो मैंने उसे ऊपर उठाया तो वो निचे से नंगी थी, उसके नंगे चुत्तड़ो को पकड़ते hi मेरे लुंड ने झटका खाया.) लगता है पूरी तयारी करके बैठी हो.

रंजन : शह्ह्ह्ह हा, (मेरे बालो को पकड़ते हुए मेरे होठो को चूमने लगी, नशीली आवाज me)Muje तुम्हारे साथ बहोत अच्छा लगता है शिव, मुझे ऐसे hi प्यार करो शिव.

शिव : पर विणा?

रंजन : वो सो चुकी है, तुम उसकी चिंता मत करो.( पर विणा जाग रही थी) मुझे प्यार करो shiv(Maine उसके नंगे चुत्तड़ो को मसल दिया, गोल आकर के छोटे चुत्तड़ मेरे हाथ में समां गए, वो नरम नरम एहसास मेरे अंदर उत्तेजना भरने लगे )हआ ऐसे hi, शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह सीईव shhhhhh.(Mene उसके चुत्तड़ो को दबाते हुए, उसके गले और चुचिओ को चूमने laga.)(Ranjan इस खुमारी से भरने लगी, उसे और ज्यादा मज़ा चाहिए था) आआआह, शह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्ह शीइइइइइव पीछे फ्रॉक की चैन है उसे खोल do.(Mene पीछे चैन को टटोला और उसे निचे सरका दी, फ्रॉक ढीला हो गया तो उसने खुद आगे से निचे कर दिया जिस से उसके कड़क चुके मेरे सामने आगये. मेरी आँखों में लाल डोरे उतर आये, मेने उसके चेहरे को देखा तो उसकी भी यही हालत थी, मेने झुकते हुए एक निप्पल को अपने मुहमे भर लिया और उसे चूसने लगा, उसके संतरे के आकर के स्तन पर छोटा सा निप्पल था, में अपनी झिबह से उस से खेलने laga.)Ohhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह मुझे बहोत अछ्हा लग रहा है मुझे कुछ हो रहा है शिव shhhhhh(Wo अपनी छूट वाले भाग को आगे करके लुंड पर रगड़ने लगी. मेरे कान को अपने दांतो से काट ते हुए, मेरे लुंड को पकड़ liya)isse निकालो न शिव, मुझे देखना hai(Mene विणा की और dekha)Uski चिंता मत करो, वो नहीं jagegi(Mene पजामा, अंडरवियर समेत निचे शार्क दिया, मेरा लुंड उछाल कर बहार आ गया, वो अपनी पलके जपकाये बिना उसे देख रही थी, उसके चेहरे से लग रहा था उसे यकीं नहीं हो रहा था. मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरी और देखा, जैसे hi हमारी नज़ारे टकराई वो शर्मा गयी, में उसका हाथ खींच कर मेरे लुंड की और ले जाने लगा तो वो थोड़ा दर रहित hi, वो अपना हाथ पीछे खिच्च रही थी)

शिव : (प्यार से )अभी तो देखने को मचल रही थी और अब दर रही हो.

रंजन : ये कितना बड़ा है शिव.

शिव : अपने हाथ में पकड़ो, ये कटेगा nahi.(Wo थोड़ी संभल गयी थी, मेने उसका हाथ पकड़ कर लुंड पर रखा तो उसने अपने हाथ से उसे हलके से थम लिया, वो उसे दबा कर चेक कर रही थी, उसने मेरी और dekha)Kaisa laga(Wo शर्मा gayi)Ab अगर दर लग रहा है तो उसे वापस दाल du.(Usne शरमाते हुए न में गर्दन हिलायी, वो मेरे बाजु में कड़ी थी और निचे देखते हुए मेरे लुंड को टटोल रही थी. मेने वापस उसके चुत्तड़ो पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबाने लगा, (रंजन बड़े गौर से लुंड को हर जगह छू कर, दबाकर चेक कर रही थी, उसने ऊपर की चमड़ी को भी निचे खिसका कर चेक किया, आज पहली बार वो लुंड को इतने करीब से देख रही थी, उसकी छूट में सरसराहट होने लगी थी, वो उस गरम और कड़क डंडे को हाथ में थामे पागल हो रही thi)Kya देख रही हो इतना गौर से.

रंजन : ये कितना लम्बा और मोटा है शिव, ये अंदर कैसे जाता hoga.(Wo भावनाओ में बह कर बोल गयी थी)

शिव : (हस्ते hue)Kaha जाता है ye.(Mere सवाल से उसे एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी, उसने मेरी और देखा और शर्मा गयी, तो मेने फिर puchha)Kaho न कहा जाता है.

रंजन : (शरमाते हुए मेरे शाइन पर अपना शिर टिका kar)Tum जानते हो फिर क्यों पूछ रहे हो.

शिव : तुम्हे कैसे पता की में जनता हु, मुझे तो कुछ भी पता नहीं है.

रंजन : (मेरी और देख कर नखरे से,) ज्यादा भोले मत बनो, में तुम्हारी सब करतूत जानती हु. मुझे पता है तुम सब करचुके हो.

शिव :(उसकी बात सुन कर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, ये कैसे जानती है और क्या जानती hai)Kya जानती हो?

रंजन : वो सब छोडो, पर क्या ये अंदर चला जाता है. मेरी तो बहोत छोटी है.

शिव : (छेड़ते hue)Kya छोटी है.

रंजन : (वो उत्तेजना में लाल टमाटर जैसी हो गयी thi)Shiiiiiv, तुम जानते हो में किसकी बात कर रही हु, (थोड़ा सीरियस हो kar)Kaho न शिव क्या ये अंदर चला जायेगा.

शिव : इस के लिए तो मुझे देखना होगा की तुम्हारा छेड़ कितना है. Dekhu?(Wo शर्मा गयी फिर मुस्कुरायी और अपनी गर्दन है में hilayi,)Mene कब रोका है तुम्हे, जो देखना है देख लो( में भी मुस्कुराया और उसे देखते हुए उसके होठो को चूमा, मेरी भी उत्तेजना से सांसे तेज चल रही थी, में अपने घुटनो पर बेथ गया, वो मुझे बड़े गौर से देख रही थी, मेने नज़ारे निचे की और उसका फ्रॉक आगे से उठाया.)

इससे pakado(Ranjan ने फ्रॉक थम लिया, और अपनी छूट को थोड़ा आगे कर दिया, उसे भी इस खेल में बहोत उत्तेजना हो रही थी, वो भी अपनी छूट में हो रही सरसराहट को शांत करना चाहती थी)( मेरे सामने बहोत hi उत्तेजक और दिलकस नज़ारा था, रंजन की झंघे पतली थी, पतली मतलब दुबली नहीं थी, झांघो के बिच में हलके बालो से सजी छूट थी. छूट के बालो के निचे की चमड़ी भी दिख रही थी. छूट से रास बहने के वजह से एक जगह से वो चिपचिपी दिख रही थी. में भी सच में मोहित हो गया था. मदहोशी में hi मैंने अपना हाथ बढ़ाया और हलके से छूट के बालो को सहलाया)

रंजन : Shhhhhhh(Usne अपनी छूट औरतअगे कर दी और अपनी टंगे फैला दी, मैंने सहलाते हुए अंगूठे से दरार को सहलाया तो दरार पूरी गीली हो गयी, मेरा लुंड ठुमके मर रहा था, वो छूट को देख कर कूद रहा था, थोड़ा दबाव बनाते हुए पूरी दरार को अंगूठे से सेहलाहा तो पूरी दरार चुतरस से भीग gayi)Shhhh, अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह आईईईई अह्ह्ह्हह shiiiiiiv(Mene उसे देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, उसकी आँखों में उत्सुकता थी की में अब क्या करूँगा, मैंने उसकी छूट की पंखुड़ियों को दोनों अंगूठो की मदद से फैलाया, छूट पर दाना दिख रहा था पर छेड़ नहीं, मैंने छूट पर फंक mari)Ahhhh शीइइइइइइव, शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो, में पागल हो जाउंगी.

शिव : तुम्हारा छेड़ नहीं दिख रहा?

रंजन : (अपनी और टंगे रैलते hue)Ab दिखा?

शिव : (मेने देखा , पर छेद कहा है बस वही दिख रहा था कितना है वो नहीं) ऐसे खड़े खड़े नहीं दिख रहा, निचे लेट jao.(Ranjan भी काफी उत्तेजित हो गयी थी, उसने हामी भरी और वह बिस्तर पर लेट गयी, मेने उसकी टंगे फैलाई और उसके सामने बेथ गया, रंजन को देखा तो वो अपना शिर उठाये मुझे देख रही थी, जब में उसे देख रहा था तो उसने मुस्कुराते हुए मुझे पूछा ‘ क्या hua?’)Mast है ये.

रंजन : (वो शर्मा गयी), तुम्हे अच्छी लगी शिव?

शिव : है यार, छोटी सी है.

रंजन : तुम्हारे लिए hi है ये Shiv.(Muje सच में उसकी इस बात पर बहोत प्यार आया) अब देखो न use.(Maine झुक कर उसकी छूट के होठो को फैलाया, छेड़ वाकई में बहोत छोटा था. मेने छूट को फैलाया और उस गुलाबी छेड़ को हलके हलके से सहलाया, रंजन के पुरे शरीर से एक कम्पन गुजर गया, उसने अपना शिर निचे रख दिया और अपनी आंखे बंद कर li)Shhhhhhh अह्ह्ह्ह shiiiiiiiiiiv(Maine अपने अंगूठे पर थूक लगाया और उसे उस छेद पर रगड़ने लगा, रंजन ने अपना शिर उठाया और मुझे देखा पर कहा कुछ नहीं, वापस वो अपना शिर टिकाये लेट गयी और छत को टांकते हुए अपनी छूट पर शिव के अंगूठे से हो रहे अद्भुत आनंद का एहसास लेने लगी,) (में छूट को सेहला रहा था और उसमे से रास निकलते hi जा रहा था, मेरा अंगूठा भी उस छेद के लिए बड़ा दिख रहा था, वाकई में छूट बहोत छोटी थी, आस पास के बल छूट रास से भीग गए थे, में उस छेड़ को टटोलना चाहता था तो मैंने अपनी ऊँगली छेद पर घुमाई जिस से ऊँगली छूट रास से चिकनी हो गयी. मेने हलके से उसे छेड़ पर दबायी तो ऊँगली छेड़ को फ़ैलाने लगी और थोड़ी अंदर चली gayi)Aaaaiiiiiiiii शह्ह्ह्हींईईईई,

शिव : (मेने डरते हुए रंजन को dekha)Dard हो रहा है?

रंजन : है शिव, थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है. (वो चिंता से मेरी और देख रही thi)Tumhari ऊँगली से दर्द हो रहा है तो वो कैसे जायेगा शिव?.

शिव : (मेने ऊँगली निकल ली और उसके बाजु में लेट गया, उसको बहो में भर kar)Par तुम्हे वो क्यों डलवाना है.

रंजन : (मुझे अपनी बहो में भर kar)Kyu की सब यही करते है. मुझे भी करना है शिव, तुम्हारे साथ.

शिव : और दर्द?

रंजन : मैंने सुना है की वो एक बार तो होता hi है, तो सेह लुंगी. तू कर ले.

शिव : पागल, अभी नहीं ,अभी में ज्यादा जानता नहीं हु तो पहले थोड़ी जानकारी ले लू, फिर बाद में करेंगे. अगर कुछ उल्टा सीधा करदिया और तुजे कुछ हो गया तो. इस से अच्छा है पहले थोड़ी जानकारी ले ली जाये.

रंजन : मुझे इंतजार rahega.(Mere होठ को चुम कर) अभी वो मत कर पर ऊपर ऊपर से तो कर शक्ति है न शिव, मुज से रहा नहीं जा रहा है, मेरे अंदर बहोत कुछ हो रहा hai.(Mene उसे देखा तो वो शर्मा भी रही थी और एक छह थी उसकी आँखों में,

में उसके ऊपर होने लगा और उसे अपनी बाहोंमे ऐसे भरा की मेरा वजन मेरी कोहनिओ पर हो, उसकी टंगे फैली हुई थी तो मेरा लुंड उसकी छूट पर लग गया. वो मुज से लिपटने लगी, मेने उसके होठो को चूसना सुरु किआ और लुंड उसकी छूट पर रगड़ने लगा. वो मुझे और कास के बहो में जकड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह अह्ह्ह सीईव कितना अच्छा लगता है न ये sab(Wo अपनी कमर हिलाते हुए छूट को लुंड से रगड़ने लगी मेने उसके चुकी को मसलते हुए निप्पल को अपने मुँह में ले liya)Shhhhhh शठ शहहह शठ अह्ह्ह्हह शिईयिव मुझे कुछ हो रहा hai.(Me उठा और उसे भी बैठाया, में उसका फ्रॉक निकल ने लगा तो उसने खुद पूरा फ्रॉक निकल दिया, वो पूरी नंगी हो चुकी थी. मेने भी अपने कपडे निकले और नंगा हो गया. में विणा के बारे में तो जैसे भूल hi गया था. में उसकी टंगे फैलाई और अपने लुंड को छूट पर रखदिया, वो मेरी आंखोमे देख रही थी, मेरा लुंड छूट को लग कर ऊपर की और निकला हुआ था, उसने अपनी टंगे भी मेरी कमर पर लपेट ली और अपनी छूट मेरे लुंड पर रगड़ने लगी.) ओह्ह्ह्ह शीइइइइव करो न, कितना मज़ा आ रहा hai(Wo अपनी कमर चला रही थी में भी अपनी कमर चलते हुए लुंड को छूट पर घिसने laga(Mene उसकी हाथ की उंगलिओ में अपनी उंगलिया फास्यी और उसके दोनों हाथ को ऊपर की और कर दिया, उसकी बगल में भी बल उगे हुए थे, उसके श्री पर बल मुझे उत्तेजित कर रहे थे, मेने उन्हें चाटने लगा तो उसे गुदगुदी होने लगी, मनें अपने मुँह से उसके शरीर को रगड़ते हुए उसकी चुचिओ से खेलने लगा, उसकी लगातार निकलती ाहो से में और उत्तेजित हो रहा था. लुंड को घिसते हुएमे एक निप्पल को चूसने लगा , वो नागिन से बलखा रही थी) शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह सीईव मुझे बहोत कुछ हो रहा hai(Thodi छूट पर लुंड घिसने के बाद में उसके चुचिओ से लेकर पेट को चूमते चाट ते उसकी छूट तक पहुंच गया, उसकी पतली कमर लहरा रही थी, मेने उसकी टंगे फैलाई और अपने हॉट छूट पे रख दिए,) शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhh(Mene उसकी पूरी छूट को अपने होतो में भर लियाऔर छूट के होठो को चूसने लगा, उसके डेन को भी चूसा) अह्ह्ह्ह शहहह सीईव ये क्या कर रहे हो में पागल हो जाउंगी, (उसकी छूट का राशिला पानी चाटने में मुझे बहोत आनंद आ रहा था, जैसे जैसे उसके छेड़ कोजिबह से कुरेद रहा था वह से और रास निकल रहा tha)shhhh अह्ह्ह्ह मुझे बहोत कुछ हो रहा है शिव, अह्ह्ह्ह शिव मुझे तुम्हारा पकड़ना है शहहहहह( उसकी बात सुन कर में उसके बाजु में लेट गया और उसकी टंगे फैलते हुए उसकी छूट को अपनी और खींच लिया और उसे चूसने लगा, (रंजन इस खेल से बहोत आनंदित थी, अपने सामने लुंड को देख कर वो अपना चेहरा लुंड से रगड़ने लगी और उसे चाटने लगी, उसे ये लुंड इस वक़्त दुनिया की सब चीजों से ज्यादा प्यारा लग रहा था, उसने लुंड को पकड़ लिया और उसकी चमड़ी निचे खिसकायी और उस लाल लाल सुपडे पर अपनी जीभ फिरने lagi.(Ye सब वो पहले भी देख चुकी थी, सरितादिदी को करते हुए) लुंड से प्यार करते हुए वो लुंड को हिलने लगी,) (मेने अपनी जीभ से छूट के छेद को कुरेद रहा था चाट रहा था, उसके डेन को अपने होठो से दबा रहा tha)Ahhh सीईव ahhhh(Wo अपनी कमर हिलाते हुए मेरे मुँह पर धक्के लगा रही थी, मुझे यकीं नहीं हुआ पर उसने लुंड अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, उसके छोटे से गरम मुँह में लुंड बड़ी मुश्किल से जा रहा था और वो लुंड चूसने में थोड़ी अनादि भी थी, वो पहलीबार hi तो चूस रही thi,)mmmm, उम्म्म्म ममममम (रंजन को लुंड चूसना बहोत hi अच्छा लग रहा था, पहले उसे अपने मुँह में थोड़ा अजीब लग रहा था पर उसका नमकीन स्वाद उसे पसंद आ रहा था. शिव उसकी छूट को चाट रहा था, अपनी छूट पर हो रहे इस अजीब से एहसास से वो पागल हो रही थी, वो बहोत मस्त हो चुकी थी और अपनी साडी मस्ती वो लुंड पर निकल रही थी, उसका पूरा मुँह फ़ैल गया था पर उसे एक अजीब सा सुकून मिल रहा tha)(Dono अपने अपने काम में लगे हुए थे, विणा को यकीं hi नहीं हो रहा था, इन दोनों की ये क्रिया देख कर, दोनों नंगे थे, रंजन की उसे परवाह नहीं थी पर शिव को ऐसे नंगा देख कर उसकी हालत ख़राब हो चुकी थी, एक नंगा लड़का जिसका बड़ा लुंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ था, उसकी छूट से पानी बह कर उसकी कच्ची को गिला कर चूका था. शिव रंजन की छूट को चाट रहा था और रंजन शिव के लुंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही thi,Ye दृश्य उसकी कल्पना से परे tha,uski उत्तेजना के मरे हालत बहोत ख़राब हो चुकी थी, उसका हाथ अपने आप hi अपनी छूट पर चला गया था, वो उसे मसल रही थी) मेरे और रंजन का खेल काफी देर तक चला. आखिर में रंजन झटके कहते हुए झड़ने लगी, वो लुंड से गाल चिपकाये शिव से लिपट गयी , उसने अपनी छूट शिव के मुँह पर दबा दी, शिव भी बड़े प्यार से उस बह रहे रास को चाट रहा था, एक अजीब सा आनंद मिल रहा था. जब वो शांत हुई तो मेने उसे सीधा किआ और अपनी बहो में भर लिया, आज पहली बार वो और में पूरी तरह नंगे हो कर एक दूसरे से लिपटे हुए थे. वो पूरी नंगी मेरी बहो में थी और लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी. विणा के बारे में तो हम भूल hi गए थे.

शिव : कैसा लगा?

रंजन : (अपनी नशीली आँखों से मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी) में बता नहीं शक्ति शिव, इतना मज़ा आता है ये मेने सपने में भी नहीं सोचा था.

शिव : अब मुझे चलना चाहिए.

रंजन : यही रुक जाओ न, मेरे साथ.

शिव :(उसका माथा चुम kar)Aaj नहीं पर जल्दी hi रुकूंगा. तुम खुस तो हो न. अब शर्म तो नहीं आ रही.

रंजन :(मुस्कुराते हुए शुकुन से मेरी छाती से चिपकते hue)Nahi शिव, पर तुम्हारा तो हुआ hi नहीं. तुम कर लो न, कुछ नहीं होगा मुझे.

शिव : (उसके चेहरे पर आ रहे बालो को ठीक करते hue)Tum उसकी चिंता मत करो. तुम आराम करो.

मैंने कपडे पहने, किताबे ली और में वह से निकल गया. दीदी सो रही थी, तो में उनकी बगल में लेट गया और उन्हें बहो में भर के सो गया.
 
अपडेट 33

सुबह में जूही मैडम के घर गया. वो तौलियेमे hi दिखी. मैंने अपने आपको बहोत रोका पर लुंड साला खड़ा हो hi गया. थोड़ी देर बाद वो मेरे लिए दूध बना कर लायी. में अपने हाथ को अपने लुंड के उभर पर रक्खे बैठा था.

जूही मैडम : क्या हुआ? जल्दी दूध पीओ जाना नहीं है क्या?

शिव : जी ...जी madam.(Ab में लचर था, मेने एक हाथ से उभर ढाका और दूसरे हाथ से गिलास उठाया और दूध पिने लगा.)

जूही को उसका बर्ताव थोड़ा अजीब लगा तो वो उसी को दूधपीते देख रही थी. जब उसकी नजर निचे गयी तो वो सारा माजरा समाज गयी. वो एक हाथ से अपने खड़े लुंड को छुपाने की कोशिस कर रहा था. उसको हसी आ गयी पर उसने अपने आप को संभाला और चेहरे से जाहिर न होने दिया. जब दूध ख़तम हुआ तो उसने दोनों गिलास अंदर रख दिए.

जूही मैडम : चलो उठो अब यही बैठे रहने का इरादा है क्या?

शिव : H...ha चलिए आआप आगे चलिए में पीछे अत हु.

जूही को पता था माज़रा तो वो मुस्कुराती हुई आगे निकली और शिव उनकी नजरो से अपने उभर को छुपत हुए उनके पीछे पीछे निकला. वो जैसे तैसे उनकी नजरो से बच रहा था. उसकी इस हड़बड़ाहट का जूही मज़ा ले रही थी. उसने ऐसे hi दिखाया की उसको कुछ पता नहीं. गयम पहुंचते पहुंचते शिव ने अपने आप को कण्ट्रोल किआ और जाकर दौड़ कर अंदर घुस गया और अपनी जगह बेथ गया. उसको ऐसे भागते देख जूही जोरो से है पड़ी. जब वो अंदर पहुंची तो शिव अपनी जगह बेथ चूका था और पवनसीर अपनी केबिन में थे तो उसने जेक गुड मॉर्निंग कहा.

पवन सर : गुड मॉर्निंग जूही, और सब बढ़िया?

जूही मैडम : जी Sir.(Wo थोड़ी हिचकिचा रही थी)

पवन सर : क्या हुआ जूही कोई काम था?.

जूही मैडम : जी सर, शिव के बारेमे बात करनी थी.

पवन सर : (गौर से जूही को देखते hue)Ha बोलो क्या हुआ?

जूही मैडम : जी हुआ कुछ नहीं दरअसल 10 दिन बाद इंटरस्कूल कॉम्पिटिशन है, में सोच रही थी अगर शिव को शाम को ज्यादा टाइम मिले जाता तो ठीक रहता.

पवन सर : (सोचते hue)Wo कैसे?

जूही मैडम : सर अगर वो शाम को थोड़ा लेट आये तो? शाम को उसको स्टेडियम में प्रैक्टिस का टाइम मिल जायेगा.

पवन सर : जूही जिस रस्ते तुम उसे भेजना चाहती हो, क्या वो यहाँ ज्यादा नौकरी कर पायेगा?

जूही मैडम : में मानती हु सर, पर शिव टेलेंटेड है और अगर आगे जाकर उसका नाम होगा तो आपके गयम का भी नाम होगा.

पवन सर : (सोचते hue)Baat तो तुम्हारी सही है, चलो कोई बात नहीं, पर आगे के लिए भी में तुम्हे कह रहा हु अगर वो न आ शका तो तुम्हे hi सब संभालना पड़ेगा.

जूही मैडम : (खुस होते hue)Thank यू सर, आप निश्चिंत रहिये सब अच्छे से हो जायेगा.

फिर वो अपने काम में जुट गयी. उसने शिव को भी एक्सरसाइज करवाई. ये सब ख़तम करके घर जाकर में स्कूल के ीये निकल गया. रस्ते में मुझे संयम और उसके साथ में एक और लड़की कड़ी दिखी. उसने पूरा अपने आपको बुर्के में ढाका हुआ था. सिर्फ उनकी आंखे दिख रही थी. जब में नजदीक पंहुचा तो

संयम : गुड मॉर्निंग शिव

शिव : गुड मॉर्निंग Samim.(Me कभी संयम को तो कभी उस लड़की को देख रहा था.)

संयम : ये मेरी आप है मेरी बड़ी बहन नाज़िआ आप. (उन्होंने अपने चेहरे पर का नकाब उठाया तो वो काफी कुछ संयम जैसी hi दिख रही थी, वो संयम से बड़ी तो थी पर ज्यादा बड़ी नहीं थी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Hello दीदी.

नाज़िआ दीदी : Hello Shiv(Wo इस लम्बे और हैंडसम युवक को देख बहोत इम्प्रेस हुई थी) थैंक यू मेरी बहन की मदद करने के लिए. मुझे संयम ने बताया की कैसे तुमने उसे उस लड़के से बचाया.

शिव : अरे दीदी इसमें थैंक यू की क्या बात है. ये तो मेरा फर्ज था.

नाज़िआ दीदी : नहीं शिव सुक्रिया तो बनता है. तुमको नहीं पता कितनी मुश्किल से तो इसको पढ़ने की इजाजत मिली है और अगर अब्बू को ये सब पता चल जायेगा तो वो इसका पढ़ना hi बंद करवाडेंगे. इस लिए अब्बू से भी इस बारेमे नहीं कह शक्ति.

शिव : आप चिंता मत करो में रोज इससे यही से ले जाऊंगा और यही छोड़ भी दूंगा.

नाज़िआ दीदी: थैंक यू सो मच शिव, तुम बहोत अच्छे हो.

शिव : मेने कहा न दीदी थैंक यू की कोई जरुरत नहीं आप बेफिक्र रहिये, (संयम se)Chale संयम.

संयम : है चलो, Bye आप.

शिव : (शिव ने साइकिल ले ली और संयम पीछे बेथ गयी और हम स्कूल की और निकल gaye)Ye तुमने क्या कहा, आप?

संयम : है दीदी को हमारी ज़बान में आप hi कहते है.

शिव : ओह! ऐसा.

फिर वो दोनों बाटे करते हुए स्कूल पहुंच गए. जब वो दौड़ने स्कूल पहुंचे तब वैस्वी पार्किंग में hi कड़ी थी. जब उसने दोनों को साथ देख उसे अच्छा नहीं लगा, पता नहीं उसे किश बात पर गुस्सा आता था. उसे संयम की शिव के साथ दोस्ती अच्छी नहीं लगती थी. क्या बात थी ये तो उसे खुद को hi समाज नहीं आ रहा था. शिव ने संयम को साइकिल दे दी और वो अपने दोस्तों की और चला गया. वैस्वी ने अपने आप को संभाला और चेहरे से कुछ जाहिर नहीं होने दिया. दोपहर में संयम और वैश्वि बात कर रहे थे. मुद्दा शिव hi था.

वैस्वी : (कब से संयम शिव की hi बाते कर रही थी तो वैस्वी गुस्सा हो गयी thi)Ye क्या सारा दीदी उसकी की बाते करती रहती है, तेरे पास बात करने के लिए और कोई टॉपिक नहीं है क्या.

संयम : तो उसमे क्या गलत है, और मुझे ये समाज नहीं आता तेरी शिव से क्या प्रॉब्लम है?

वैस्वी : ऐसे आवारा लड़को की बात करना hi मुझे पसंद नहीं, न उसके घर का पता न जाट का. ऐसे लड़के आवारा hi होते है, वो चाहे कितना भी अच्छा बनाने की कोशिस करे, एक दिन तू जरूर पछ्तायेगी.

संयम : वो ऐसा नहीं है.

वैस्वी : अगर तुजे लगता है की मेरा उसके साथ व्यव्हार ठीक नहीं तो तू मुझसे दोस्ती तोड़ शक्ति है.

संयम : ये कैसी बाटे कर रही है तू, तू मेरी बचपन की सहेली है, और तुजे पता hi है एक लड़का मुझे परेशां कर रहा है, में अब्बू को भी नहीं बोल शक्ति, अगर उन्हें पता चल गया तो वो मेरी पढ़ाई रुकवा देंगे. शिव मेरे साथ होता है तो वो लड़का मुझे परेशां करने नहीं आता. तू क्या चाहती है की वो लड़का मुझे परेशां करे.

वैस्वी : अगर ऐसी बात है तो में तुजे लेने और छोड़ने आ जाया करुँगी.

संयम : उस से क्या होगा, तू लड़ेगी उस लड़के से.

वैस्वी : तू उसकी चिंता मात कर, अगर उस ने मेरे साथ बदतमीजी की तो वो जनता नहीं मेरे पापा को. अगर उन्हें पता चल गया तो उसकी समेत आ जाएगी. में भी तो देखु वो कोण है, फिर में पापा को बता दूंगी उसके बारेमे.

संयम : चल एक बार में तेरी बात मान भी लू पर क्या तू मेरे लिए रोज ऐसे घूम कर आएगी. शिव का और मेरा रास्ता एक hi है तो हम साथ आ जाते है. में तुजे ऐसे roj-roj तो परेशां नहीं कर शक्ति न.

वैस्वी : ऐसा क्यों नहीं कहती की तुजे भी उसके साथ hi आना- जाना पसंद है.

संयम : तुजसे तो बहेश करना hi बेकार है, चल ठीक है कैसे मुझे लेने आ जाना.

ऐसे hi स्कूल ख़तम हो गया. जब शाम को में बहार निकला तो जूही मैडम को वह खड़े पाया. शिव उनके पास चला गया.

शिव : मैडम आप यहाँ?

जूही मैडम : तुम्हे लेने आयी हु.

शिव : मुझे लेने, क्यों? अभी तो गयम जाने में टाइम है.

जूही मैडम : हम गयम नहीं स्टेडियम जा रहे है. गयम हमे देरसे जाना है और वो मैंने पवन सर से बात कर ली हे. तुम चलो.

शिव : पर मैडम मेने घर भी कुछ नहीं बोलै, वो मेरा इंतजार करेंगे.

संयम और वैस्वी जब स्कूल से बहार निकली तब उन्होंने शिव को एक लड़की के साथ देखा. वो लड़की दिखने में लम्बी, ऊँची और बहोत खूबसूरत थी. शिव के साथ उस लड़की को देख कर जहा वैस्वी को गुस्सा आया वही संयम को भी अच्छा नहीं लगा. उस लड़की को देख उसके दिल में भी जलन हुई. एक तो वो लड़की, उसके मुकाबले शिव की तरह hi ऊँची थी और दूसरी वो दोनों साथ में बहोत अच्छे लग रहे थे जैसे दोनों की जोड़ी हो.

वैस्वी :(गुस्से और जलन से) अब अपनी आँखों से देख ले, इससे तू अच्छा कहती है न, पता नहीं और कितनी लड़कीओ के साथ इसके सम्बंद होंगे. (संयम भी अंदर से हिल गयी थी, उनलोगो से थोड़ी दुरी पर वैस्वी का स्कूटर था तो वो वही कड़ी हो कर अपना सामान रखने लगी और संयम बुझे मान से उनके पास चली गयी)

शिव : (संयम को देख कर ) और मुझे इससे भी घर छोड़ने जाना है. (मुझे याद आया की ये दोनों तो एक दूसरे को जानती hi nahi)Oh सॉरी, ये संयम है मेरे क्लास में पढ़ती है और ये जूही मैडम है.

संयम : (शिव के मुँह से मैडम सुन कर संयम को आश्चर्य hua)Madam? (मान में, पर ये तो एक लड़की है, हमारी उम्र से थोड़ी hi बड़ी लड़की को शिव मैडम कह रहा है, उसे समाज नहीं आया तो वो सवालिया नजरो से शिव को देखने लगी)

शिव : ये मुझे सिखाती है तो ये मेरी मैडम हुई न.

संयम : ओह! ऐसा, गुड इवनिंग मैडम.

जूही मैडम : (वो संयम को बड़े गौर से देख ने लगी. शिव को उसे यु मिलवाना पतानहीं क्यों पर उसे अच्छा नहीं लगा, उसने सपाट लहजे में )गुड इवनिंग, और में तुम्हारी मैडम नहीं hu.(Shiv को देखते हुए) तुम्हे इससे छोड़ने क्यों जाना है, कोण है ये?

शिव : वो सब में आप को बाद में बताऊंगा. आप अभी इसको अपने पीछे बिठालीजिये में इसकी साइकिल ले लेता हु. (संयम se)Tum अपने उतरने की जगह मैडम को बता देना.

संयम : ठीक hai(Wo जूही मैडम के स्कूटर पैर बेथ गयी, अपना सामान रखने का दिखावा करते हुए वैस्वी भी सब सुन रही थी)

जूही मैडम और संयम, आगे आगे निकले, में उनके पीछे पीछे निकले. जब में वह पंहुचा तो संयम के घर के मोड़ पर वो दोनों खड़े थे. मेने संयम को साइकिल दे दी और bye कहा.

संयम : शिव, कल से वैस्वी मुझे लेने और छोड़ने आनेवाली है.

शिव : ये तो अच्छी बात है, पर वो भी एक लड़की है, ध्यान रखना, और अगर वो लड़का फिर परेशां करने आये तो मुझे बताना. (फिर में जूही मैडम के पीछे बेथ गया).

शिव : आज पहले घर ले लीजिये में दीदी को बोल देता हु. कल से आप मेरा अपने घर पर hi इंतजार करना हम वही से सीधा निकल जायेंगे.

जूही मैडम : क्यों में तुम्हे स्कूल लेने औ तो कोई परेशानी है?

शिव : (मुस्कुराते हुए) नहीं मुझे कोई परेशानी नहीं, में आप को परेशां नहीं करना चाहता हु इस लिए कह रहा था, फिर जैसे आप की मर्जी. वैसे भी कल से वो लड़की मेरे साथ नहीं आने वाली तो कोई प्रॉब्लम नहीं है. हम मेरे घर पहुंच गए, में दौड़ कर अंदर गया और लता दीदी को सब बता कर वापस आ गया. वह से हम दोनों निकले तो रस्ते में जूही ने मुझे पूछ hi लिया.

जूही : कोण थी वो लड़की और तुम क्यों उसे छोड़ने जाते थे?

शिव : Wo...(Mene उन्हें सब बता diya)To इसीलिए में उसे छोड़ने जाता था.

जूही : ओह! ऐसा है, पर तुम क्यों झगड़ा मोल लेते हो? अगर तुम्हे चोट लग गयी तो?

शिव : तो क्या ऐसे किसी लड़की को मुसीबत में देखकर में मुँह मोड़ लू?

जूही : मेरे कहने का वो मतलब नहीं था. पर तुम्हे अपना भी ध्यान रखना चाहिए की नहीं.

शिव : क्यों मुझे क्या हुआ, अच्छा भला तो हु.

जूही :तुम्हे कॉम्पिटिओं की तयारी करनी है ऐसे में तुम्हे कही चोट लग गयी तो प्रॉब्लम हो जाएगी.

शिव :कैसी कॉम्पिटिओं?

जूही : सब बताती हु.

फिर उन्होंने बहोत कुछ बताया और संजय. हमने स्टेडियम पहुंचकर प्रैक्टिस चालू कर दी. थोड़ी वार्मअप कसरत के बाद हम दौड़ की प्रैक्टिस करने लगे. कई लोग हमदोनो को दौड़ते हुए देख रहे थे. पर हमने अपने काम पर ध्यान दिया. हमने कई बार रेस लगायी पर हर बार झुहि मैडम hi जीत रही थी. ऐसे hi दौड़ न और रेस में दौड़ना एक अलग अनुभव था. वो हवा को चीरती हुई ऐसे दौड़ती थी की आसपास वाले भी देखते रह जाते थे.

जूही मैडम : देखा शिव, ये इतना आसान भी नहीं है, तुम्हे अपना सतमिना और बढ़ाना होगा. में एक लड़की हु फिर भी तुम्हे हरा रही हु, तो वह तो लड़के होंगे वो भी कई सालो की प्रक्टिसे और महेनत वाले. शाम ढल चुकी थी और अँधेरा होने लगा था. अब वह कुछ गिने चुने लोग hi थे. काफी म्हणत के बाद हम स्टेचिंग करने लगे. में उनके एक पेअर को घुटने से मोड़ कर उनकी छाती तक लगा रहा था, बरी बरी ये क्रिया दोहराने पर मेरे लुंड वाला भाग उनकी छूट वाले भाग को टच भी हो रहा था. न मेने ज्यादा उस बात पे ध्यान दिया न उन्होंने, हम दोनों अपने अपने काम में लगे हुए थे. स्ट्रेचिंग करते हुए हम दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह छू रहे थे. एक बार हम दोनों की आंखे भी टकराई पर उन्होंने कुछ ज्यादा रिएक्शन नहीं दिया.

स्टेडियम से निकल कर हम दोनों गयम आ गए. लास्ट बैच का टाइम ख़तम होनेवाला था तो थोड़ी देर बाद मदन सर और दूसरे सब निकल गए. हमदोनो सब ठीक करने लगे. मेने उन्हें बहोत मन किआ पर वो नहीं मानी. हम सब ठीक कर hi रहे थे की वह स्नेहा मैडम आ गयी. उन्हें देख कर में थोड़ा घभ्रा गया, मुझे मालूम था की वो यहाँ क्यों आयी है पर जूही मैडम वह थी और में नहीं चाहता था उन्हें कुछ पता चले. स्नेहा मैडम भी जूही मैडम को देख कर चौक गयी. उन्होंने भी जूही मैडम को इस वक़्त एक्सपेक्ट नहीं किआ था. जैसे तैसे उन्होंने अपने आप को संभाला और चेहरे पर सामान्य भाव लेन की कोशिस की. जूही मैडम की नजर भी स्नेहा मैडम पर पद चुकी थी.

जूही मैडम : (आश्चर्य se)Hi स्नेहा ! तुम यहाँ इस वक़्त.

स्नेहा मैडम : H...ha वो में यहाँ से गुजर रही थी तो आगयी. पर तुम इस वक़्त यहाँ.

जूही मैडम :(उसे स्नेहा का बर्ताव और हावभाव कुछ अजीब laga)Ha वो शिव को स्टेडियम प्रैक्टिस के लिए लगाई थी. अब उसे शाम को प्रैक्टिस करनी है ताकि वो कॉम्पिटिओं में part ले सके.

स्नेहा madam:(Snehamadam का चीरा मायूस हो gaya)Oh ! aisa(Fir अपने आपको संभल कर मुस्कराहट लेट hue)Ye तो अच्छी बात है. वैसे शिव है भी मजबूत तो उसे एथलीट बन न hi चाहिए.

जूही मैडम : (जूही को आश्चर्य हुआ, क्यों की उसके मुताबिक शिव तो कभी स्नेहा से मिला नहीं tha)Tum शिव को इतना कैसे जानती हो?

स्नेहा मैडम :(एक बार के लिए उनके चेहरे पर परेशानी आ गयी, फिर अपने आपको सँभालते hue)Wo पवन ने बताया था. ठीक है मई तो ऐसे hi आ गयी थी अब में चलती हु तुम लोग अपना काम karo.(Unhone एक बार मेरी और मायूसी से देखा, फिर वो चली गयी)

जूही madam:(Usko स्नेहा का उतरा चेहरा देख कुछ अजीब लगा, उसने शिव को देखा तो शिव भी हड़बड़ा गया और अपने काम में लग gaya)(Maan me)Ajib है, स्नेहा ऐसे क्यों बेहवे कर रही थी और ये शिव इतना क्यों घबरा रहा है?
 
अपडेट 34

जूही को शिव और स्नेहा का बर्ताव कुछ अजीब लगा पर वो इस हद तक नहीं सोच पायी की इन दोनों के बिच सेक्स वाले रिलेशन भी हो शक्ति है. वैसे भी शिव, उसके लिए अभी एक बोलै भला लड़का hi था और वो स्नेहा को भी जानती थी. वो एक अच्छे घर की और शरीफ औरत थी. वो इतनी मिलनसार थी की जूही उसे उसके नाम से hi बुलाती थी. तो इन दोनों के बिच ऐसा रिस्ता हो शकता है ऐसा तो वो सपने में भी नहीं सोच सकती थी. पर उसका दिमाग ये जरूर कह रहा था की कुछ न कुछ गड़बड़ तो जरूर है. उसने शिव से भी फ़िलहाल इस बारे में कोई बात नहीं की. दोनों गयम का काम निपटा कर वह से निकल गए. जूही ने शिव को उसके घर छोड़ा और वो अपने घर लौट गयी.

खाना ख़तम करके में पढ़ने जा रहा था तो मैंने सरितादिदी को देखा. वो काम कर रही थी. लतादिदी आसपास नहीं दिखाई दी तो में उनके पास चला गया.

शिव : दीदी.

सरिता : (शिव को देख kar)Ha बोल शिव.

शिव : दीदी मुझे आप से एक काम है.

सरिता : है बोल न.

शिव : यहाँ नहीं, अकेलेमें.

सरिता : (अकेले में सुन कर उसका चेहरा चमक उठा, उसने शर्मा के शिव से pucha)Akeleme क्यों?

शिव : (उसके मन में तो ऐसा विचार भी नहीं था, वो नॉर्मली hi बात कर रहा tha)Hai kaam,par कहा मिलेंगे?

सरिता : छत पर, 11 बजे.

शिव : ठीक है दीदी. (में वह से निकल gaya)(Sarita उसे जाता हुआ देख रही थी और मान hi मान मुस्कुरा रही थी.)

में पढ़ने बेथ गया, आज विणा भी थी तो हम तीनो पढ़ने लगे. 11 बजे तो में उठने लगा.

रंजन : क्या हुआ, शिव.

शिव : कुछ नहीं, आज जल्दी सोना है, आज बहोत प्रैक्टिस की न, तो बदन थक गया है.

रंजन : पहले नहीं कह शक्ति था, ला में तेरा बदन दबा दू.

शिव : नहीं उसकी कोई जरुरत नहीं. तुम पढ़ो ने चलता hu.(Vina के सामने रंजन ने और तो कुछ न कहा पर वो थोड़ी मायूस हो गयी)

में वह से निकला, मेने देखा की लतादिदी बिस्तर पर लेती थी, में चुपके से छत की और बढ़ गया. जब में ऊपर पंहुचा तो सरिता दीदी मेरा hi इंतजार कर रही थी, मेने किताबे वह साइड में राखी और हम दोनों छत के एक कोने में आ गए.

चाँद की मद्धम रौशनी में सब हल्का हल्का दिख रहा था. निचे के मुकाबले यहाँ अभी ठंडक थी. हम दोनों छत के किनारे बने घेरे से तक लगाकर खड़े हो गए. सरिता मंद मंद मुस्कुरा रही थी. ऐसा पहली बार था की किसी लड़के ने उसे ऐसे मिलने के लिए बुलाया था. वो जानती थी लड़का ऐसे क्यों बुलाता है. वो ये सब सोच कर hi अंदर hi अंदर मचल रही थी. वो इंतजार कर रही थी की शिव कैसे उस से पूछेगा.

शिव : दीदी एक बात पूछनी थी आप से.

सरितादिदी :तो पूछ न. इसमें पूछनेवाली क्या बात है.

शिव : दीदी, आपने गुड्डू को कोनसी दवाई दी थी.

सरितादिदी : (पहले तो उसे शिव का सवाल समाज hi नहीं आया, वो कुछ और सोच रही थी और शिव कुछ और hi पूछ रहा था. उसने शिव की और dekha)Tu कहना क्या चाहता है.

शिव : आप जानती है दीदी, गुड्डू के साथ क्या हुआ. वो अच्छा भला खेलता बच्चा था. ऐसे अचानक उसके साथ ऐसा कैसे हो गया. और ये सब हुआ उसके दवाई खाने के बाद.

सरितादिदी : (सरिता की अब बत्ती जाली, ये तो सच hi था की गुड्डू की तबियत वो दवाई खाने के बाद hi बिगड़ी थी) उस दवाई के बारे में मुझे कुछ नहीं पता, वो दवाई मुझे मैनेजर ने दी थी उसे देने के लिए.

शिव : आपने पूछा नहीं की ये दवाई किस लिए है?

सरितादिदी : मेने पूछा था, तो उन्होंने बताया की जो रिपोर्ट निकलवाए थे उसमे पता चला है की उसमे कुछ कमी है, और उसकी वजह से उसकी तबियत कभी भी बिगड़ सकती है, तो डॉक्टर ने वो दवाई भिजवाई थी.

शिव : उस पर कोई नाम लिखा हुआ था?

सरितादिदी : नहीं, वो तो एक पेपर में लिपटी हुई थी. एक लाल और पिले रंग की कैप्सूल थी और दूसरी सफ़ेद रंग की गोली थी.

शिव : कितनी गोलिया दीठि आप को, क्या अभी बची हुई है.

सरितादिदी : नहीं, उन्होंने तो ek-ek गोली hi दी थी. शायद उनके पास हो.

शिव : (सोचने laga)To इसका मतलब, ऑफिस में ढूँढना पड़ेगा., पर वो तो लॉक रहता है.

सरितादिदी : उसकी चाबी मेरे पास रहती है, साफ़ सफाई के लिए.

शिव : आप मुझे देंगी?

सरितादिदी : इसमें पूछनेवाली कोनसी बात है. निचे रक्खी है.

शिव : चलो फिर, देखते hai.(Shiv चलने लगा पर सरिता वही कड़ी रही, उन्हें रुका देख शिव भी रुक gaya)Chaliye न दीदी.

सरितादिदी : तूने सिर्फ इसी लिए मुझे बुलाया था. (ऐसे हलकी रौशनी में भी उसके चेहरे की मायूसी साफ़ देखि जा शक्ति थी, उनकी ये मायूसी मुझे समाज नहीं आयी. अचानक मेरे दिमाग की बाटी जाली, ऐसी सुमसान रात में ऐसे छत पर कोई लड़की मेरे बुलाने पर आयी थी)

शिव : (में उनके पास गया, में उन्हें देख रहा था, हलकी रौशनी में भी उनकी आंखे चमक रही thi)Sorry दीदी, मेरे दिमाग में गुड्डू hi चल रहा था तो मेने ये सोचा hi नहीं.

सरितादिदी : (फिक्की हसी है kar)Koi बात नहीं. चल में तुजे चाबी देती हु.

शिव : वो कल सुबह भी हो जायेगा. पर अभी जो होना है वो तो हो जाये.

मेरी बात सुन कर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेने उनका चेहरा पकड़ा और उनके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया. भीगे होठो की गर्माहट से शरीर गरम होने लगे, हमारी सांसे चढ़ें लगी. वो भी मेरे बालो को पकड़ कर किश करने लगी, होठो को चूसते हुए, अपनी जीभ लड़ते हुए हम किश करने लगे. मेने उनके उभर को अपनी हथेली में भर कर सहलाने लगा. जाने क्या जादू होता है इन गुब्बारों में की छूटे hi शरीर में उत्तेजना भरने लगती है. में उन्हें अच्छे से मसल रहा था और निप्पल को अंगूठे से सेहला रहा था.

सरितादिदी : (थोड़ी देर बाद किश तोड़ कर muskurayi)Bahot कुछ सिख गया है.

शिव : तो क्या ये अच्छी बात नहीं. आप को अच्छा नहीं laga.(Hum दोनों धीमी आवाज में बात कर रहे थे)

सरितादिदी : मेरी छाती पर हाथ फिरते हुए, बहोत अच्छा लगा शिव. तुम सीखोगे तभी तो अपनी चहनेवालीओ को खुस कर पाओगे.

शिव : चनेवालीओ को? चाहनेवाली कहो, आप एक hi तो हो.

सरितादिदी : (मेरे गाल पर चपत लगते hue)Rehne दे, रहने दे. मुझे सब समाज आता है. अभी ये बाते छोड़, कितना अच्छा मौसम है न यहाँ.

शिव : है दीदी, पर दीदी यहाँ हम कैसे करेंगे?

सरितादिदी : (निचे घुटनो के बल बैठते हुए, मेरे लुंड को कपड़ो के ऊपर से hi सहलाने lagi)Sab हो जायेगा, पहले में इस से तो तैयार कर du(Unhone मेरा पजामा निचे खिसका दिया और मेरे लुंड को अपने हाथ में थम कर हिलने lagi.)Ye तो पहले से hi तैयार है.

शिव : आप को छूने से hi ये तैयार हो जाता है. आपके शरीर से आती गंध जब मेरे अंदर पहुँचती है तो मुझे कुछ कुछ होने लगता है( वो मुस्कुरायी और मेरे लुंड को बड़े प्यार से देखा, और अपना चेहरा लुंड पर रगड़ने लगी, वो अपने नर के मरदाना अंग से प्यार जाता कर उसका प्यार पाने को लालायित थी. वो अपना चेहरा रगड़ते हुए लुंड को चुम भी रही थी, में उन्हें देख रहा था, कितना अच्छा लग रहा था किसी लड़की का मेरे लुंड के साथ ऐसा करना, उन्होंने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में ले लिया. वो गरम मुँह का एहसास पते hi मेरा लुंड उछलने लगा. वो मेरी और देखते हुए लुंड को चूस रही थी. मद्धम रौशनी में भी मेरा लुंड उनके थूक की वजह से चमकने लगा, वो लुंड को चूसते हुए हाथ से हिला भी रही थी. में उनके शिर को सहलाते हुए अपना प्यार जाता रहा था. मेरा लुंड उनके गले तक छू रहा था, गरम गरम मुँह में लुंड पर अजीब सा एहसास हो रहा था.





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थोड़ी देर बाद वो कड़ी हो गयी और अपना घाघरा उठा दिया, उन्होंने भी निचे कुछ नहीं पहना था, उन्होंने अपनी गीली हो चुकी छूट पर भी थोड़ा थूक लगाया और मेरे लुंड को पकड़ कर मुझे नजदीक खींचा,) दीदी ऐसे माहि पुरे कपडे निकल दो na.(Ek बार उन्होंने मेरी और देखा फिर मुस्कुरायी, वो कैसे अपने शिव को मन कर शक्ति थी,) उन्होंने अपने सरे कपडे निकल दिए, मेने भी अपने कपडे निकल दिए, उनको नंगा देख कर मुझे कुछ होने लगा तो में उनके नजदीक गया और उनकी गर्दन को चूमते हुए एक हाथ से उनके चुत्तड़ और एक हाथ से उनकी चूचिया मसलने लगा. उनके मुँह से मादक सिसकिया निकलने लगी, उनके नंगे पैन का एहसास मेरे अंदर उत्त्जना का संचार कर रहा था. वो मेरे बालो में हाथ फिरते हुए मुझे चूमने लगी. खुली छत पर दो नंगे बदन आपस में उलझ रहे थे, शरीर का तापमान इतना बढचुका था की शरीर पर पशीने की बुँदे दिखाई देने लगी थी. उनके शरीर का नरम एहसास मेरे लुंड को और कड़क कर रहा था. मेने दोनों हाथो से उनके चुत्तड़ो को थम लिया और उन्हें मसलने लगा, वो बड़े गोले मेरे अंदर और जोश भर रहे थे, उन्हें मसलते हुए में उनकी चूचिया पिने लगा. उन्होंने मेरे लुंड को थम लिया और उसे जोर जोर से दबाते हुए हिलने लगी.)

सरिता दीदी : शहहह शिव, अह्ह्ह्ह अब दाल दे, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मुज से तो अब रहा नहीं जा raha.(Kaise करू ये में सोच hi रहा था की उन्होंने अपनी एक तंग उठा कर मुझे पकड़ने को कहा. मेरे लुंड को पकड़ कर मुझे अपनी और खिंचा तो लुंड छूट के नजदीक पहुंच गया, वो लुंड को अपनी छूट पर रगड़ने लगी, छूट से बहते पानी से लुंड का सूपड़ा भीगने लगा, चार पांच बार ऐसा करने पर पूरा सूपड़ा भीग चूका था. उन्होंने लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर लगा दिया और मेरी कमर पर रक्खे हाथ से मुझे अपनी और खींचने लगी तो मेने लुंड पर दबाव बनाया तो लुंड छूट में उतरने लगा. मेरे लिए ये एक नया अनुभव था, दीदी की गरम छूट का एहसास मुझे मेरे लुंड पर हो रहा था (सरिता अपने अंदर घुस रहे बड़े लुंड को देख रही थी, आहिस्ता आहिस्ता पूरा लुंड छूट में उतर गया,) उन्होंने मुझे रुकने को कहा और वो लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी)





सरितादिदी : (मुझे देख कर )तेरा लेते लेते पशीने छूट जाते है शिव.

शिव : (मेने मुस्कुरा कर उनके होठ chume)To क्यों लेती हो. कहो तो निकल दू.

सरितादिदी : (नखरे से )बड़ा आया nikalnewala.(Hum दोनों मुस्कुराने लगे)

शिव : (उनके स्तन को सहलाते hue)Didi एक बात पुछु.

सरितादिदी : क्या हर बार पुछु पुछु करता है, पूछ न क्या पूछना है?

शिव : दीदी ये आपके अंदर तो चलाजाता है, par...(Shiv सोचनेलगा कहु की न कहु)

सरितादिदी : पर क्या?

शिव : पर किसी किसी के अंदर नहीं जाता.

सरितादिदी : (मुस्कुराते hue)Kiske अंदर नहीं jata(Wo जानती तो थी पर शिव के मुँह से सुन न चाहती थी)

शिव : वो मत पूछो दीदी. में बता नहीं शक्ति.

सरितादिदी :(मुस्कुरा kar)Tuje नहीं बताना तो मत बता, में सब समझती हु. सुन अगर तुजे पहलीबार किसी के साथ करना हो, मेरा मतलब है वो लड़की पहलीबार ये सब कर रही होगी तो तुजे अपना ये डालने के लिए थोड़ी ताकत लगनी पड़ेगी या हो शक्ति है तुजे जोर से धक्का लगाना पड़े. उसे दर्द भी होगा और खून भी निकल शक्ति है.

शिव : वो क्यों दीदी.?

सरितादिदी : अगर लड़की ने कभी ऐसा करवाया न हो तो उसकी छूट के अंदर एक झिल्ली होती है, पर्दा या सील भी कह शक्ति है, तेरा अंदर जाने से वो टूट जायेगा तो खून निकल शक्ति है, और तेरा तो इतना मोटा है की उसकी चमड़ी भी अंदर से फ़ैल कर फैट शक्ति है. तू चाहे तो थोड़ा थोड़ा करके भी अंदर दाल शक्ति है, जैसे एक दो धक्के मरे और रुक गया, पर इस से उस लड़की को बार बार दर्द सहना पड़ेगा. मेरा तो यही मन्ना है की जब तू डालना शुरू करे तो जितना जल्दी हो शेक उतना दाल देना. जरुरी नहीं की पूरा hi दाल दे. थोड़ी देर उसे दर्द होगा पर वो एक बार के लिए hi होगा. और खून निकलने से घबरा मत जाना, वो बी ठीक हो जायेगा. एक बार डालने के बाद थोड़ा रुक जाना और उसको प्यार करना, उसे चूमना, उसके चुचो से खेलना. ताकि उसे रहत मिले. वो भी तेरी चाहनेवाली hi होगी और तुजे भी उस से प्यार होगा तभी तो तू उसके साथ ये कर रहा होगा. तू भी उसे दर्द नहीं देना चाहता पर एक बार तो देना hi होगा ताकि वो आगे आनेवाले सुखो को भोग सके.

शिव : पर दीदी खून?

सरितादिदी : पहलीबार करने से थोड़ा खून बेहटा है ये नार्मल है. पर उसे दर्द हो रहा है ये सोचके अपना लुंड बहार निकल मत लेना क्यों की तेरे लुंड के दबाव से hi वो खून भी रुक जायेगा. जब उसे अच्छा महसूस हो तो फिर धीरे धीरे सुरु हो जाना, अब और कुछ पूछना है?

शिव : नहीं दीदी, अगर कुछ होगा तो पूछ लूंगा.

सरितादिदी : (मेरे गाल सहलाते hue)To अभी जो मेरे अंदर घुसाए खड़ा है वो काम तो पूरा कर. सच कहती हु शिव, भले इससे लेने में दर्द महसूस होता है पर तेरे साथ मज़ा भी उतना hi आता hai(Me मुस्कुया और आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करना सुरु कर दिया, खड़े खड़े छोड़ने में भी बहोत मज़ा आ रहा था, में दीदी को धीरे धीरे छोड़ने लगा, पता नहीं ये छूट में ऐसा क्या जादू होता है की मान hi नहीं भरता, दीदी के कूल्हों को पकड़ कर में धक्के लगा रहा था, सरिता दीदी आहे भर रही thi)Ahhh अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ahhh(Chut से पानी का झरना निकल कर उनकी झांघो से बहते हुए निचे टपक रहा था, में दीदी की चुचिओ चूसते हुए उन्हें छोड़ने लगा)

शिव : दीदी आप को अच्छा लग रहा है?

सरितादिदी: अच्छा? पागल शह्ह्ह्हह्ह हहहह बहूऊऊत अच्छाआआ लग रहा हैईईई, शह्ह्ह्ह तेरा है hi ऐसा, बड़ा और एक दम कड़क, अह्ह्ह्ह शठ अंदर अंदर हर जगह रगड़ता हुआ आगे पीछे होता है तो पुरे शरीर में तरंगे दौड़ने लगती है, (दीदी मेरे सर को सेहला रही thi)Ahh शठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिव अह्ह्ह क्या जड़ो है तेरे इस डंडे में अह्ह्ह शठ कितना मज़ा देता है, अह्ह्ह अब तो इसके बगैर रहा भी नहीं जाता शठ अह्ह्ह टाइम निकल कर मुझे बुलाया कर शह्ह्ह्ह में हर पल तुजसे छोड़ने के लिया बेक़रार रहती हु शहहह, अह्ह्ह, तुजे मज़ा नहीं आता क्या मुझे छोड़ने में?

शिव : बहोत मज़ा आता है दीदी, आपकी छूट कितनी मस्त है, मेरे लुंड को ऐसे पकड़ रही है जैसे उसे छोड़ना hi न चाहती ho.(Aisi बातो से मेरे धक्के तेज तेज लग रहे थे, दीदी भी सामने से धक्के लगा रही थी.

सरितदिदी : अह्ह्ह ऐसे hi शिव, श श श अह्ह्ह ऐसे hi छोड़ मुझे थोड़ा जल्दी जल्दी मेरा निकलनेवाला है.( स्पीड बढ़ने के लिए मुझे ये पोजीशन ठीक नहीं लग रही थी, दीदी थोड़ी छोटी थी तो मेने उन्हें पूरा अपनी गोदी में उठा लिया जोर जोर से छोड़ने लगा.





दीदी मुज से पूरी तरह लिपट गयी, )Aiiiiiiiiiii shhhhhhhhhhhh ऐसा तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था ahhhhhhhhhh, तेरे में बहोत ताकत है शहहहहह तेरा लुंड मेरी आखरी दीवाल को छू रहा है शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आ रहहहह है शह्ह्ह्ह में जानेवाली हु अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह छोड़ शहहह जोर से अह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्ह में गयी शिईयिव अह्ह्ह्हह ऊऊओऊमायआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने दो तीन धक्के बहोत जोर से लगा दिए फिर रुक गया दीदी झाड़ रही थी, मेरे गले से लिपटे हुए वो झटके खा रही थी) अह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह कितना मज़ा आता हे तेरे साथ शह्ह्ह्हह्ह तेरा लुंड मुझे पूरी निचोड़ देता है आआह्ह्हह्ह्ह्ह.( मेने उन्हें निचे उतरा मेरा लुंड छूट से बहार आ गया, दीदी ने लुंड को देखा और झुक कर लुंड को मुहमे भर कर चूसने लगी, वो झुकी हुई थी तो मेने उनके कूल्हों की दरार को सहलाते हुए ऊँगली उनकी छूट में दाल दी. वो मेरा लुंड चूस रही थी और में ऊँगली अंदर बहार कर रहा था, थोड़ी देर में वो दोबार गरम होने लगी, वो अपनी कमर लहरा रही थी. मेने उन्हें खड़ा किआ, उनके होठ चूमे और उन्हें छत की बौंडरी के सहारे झुका कर खड़ा कर दिया, वो नशे से भरे हुए चेहरे से मुझे देख रही थी. उन्होंने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई और एक कूल्हे को पकड़ कर फैलते hue)Aaja शिव दाल दे, ये तेरे लुंड के बगैर नदिया बहा रही है शहहहहह इसे जरा भी चैन nahi.(Wo झुकी हुई मेरे लुंड का स्वागत करने को तैयार थी. क्या नज़ारा था, मेने उनके चुत्तड़ फैलाये और छूट और गांड के छेड़ को देखा, मैंने छूट पे अपना मुँह लगाया और उसे चाटने लगा) अहह शीइइइइइइव, कितना मज़ा देता है तू, अह्ह्ह्हह शहहहहह तेरे से चुड़ते हुए लगता है की स्वर्ग की सैर हो रही है, शहहहहह, अब दाल दे अपना क्यों तड़पा रहा है मुझे , शह्ह्ह्ह तेरे लुंड के बगैर तो अंदर सब खली खली लग रहा hai(Me खड़ा हुआ और अपने लुंड को छूट पर रगड़ा. मेने लुंड को छेद पर टिकाया और पूरा लुंड छूट में उतर diya)Shhhhhhhhhhhh, धीरे आईईईई कितना बड़ा है तेरा अह्ह्ह्ह धीरे शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह अहह अहह





(मेने दीदी के झूलते हुए चुचो को पकड़ लिया और उन्हें मसलते हुए धक्के लगाने लगा.) अह्ह्ह शिव अह्ह्ह अह्ह्ह मेरी पूरी छूट भर गयी है अह्ह्ह अह्ह्ह ahhhh(Wo अपना मुँह दबाये आवाज को रोकने का प्रयास कर रही थी., थोड़ी देर धक्के लगाने के बाद मेने उनकी पतली कमर को थम कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा, धक्के इतने तेज थे की उनके चुत्तड़ थर्रा रहे थे, मेरे लुंड पर छूट की मांसपेशिया दबाव बना रही थी, दीदी और में पशीने से नाहा रहे थे. दीदी पीछे मुद कर मुझे धक्के लगते हुए देख रही थी)

शिव : (में muskuraya)Didi मज़ा आ रहा है?

सरितादिदी : हा शिव अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह तू मस्त छोड़ता है, शठ तेरे साथ में छुड़ाने का मज़ा hi अलग है शिव अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मुझे अंदर बहोत कुछ हो रहा है शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह मेरा फिर होनेवाला है शिव अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह. मुझे छोड़ने में तुजे मज़ा आए रहा है? तेरा लुंड घुसाए हुए मेरे छूट कैसी लग रही है?

शिव : पूरी फ़ैल गयी है दीदी, लुंड से कास के लिपटी हुई है. दीदी मेरा भी निकलने वाला है (मेरे धक्के लगातार चल रहे थे मेरी कमर तेज तेज चल रही थी, तेज धक्को को वो सेह नहीं पायी और वो झड़ने लगी, में भी झाड़नेवाला था तो में तेज तेज धक्के लगाने लगा, दीदी की टंगे कैंप रही थी, मेने उन्हें कमर से थम रखा था, उनकी टंगे हवामे हो गयी, में तेज तेज धक्के लगा रहा था, जब मुझे लगा की अब मेरा निकलने वाला है तो मेने अपना लुंड बहार निकल लिए. दीदी निचे बैठी और मेरे लुंड को अपने मुँह में ले लिया, पिचकारियां मरते हुए मेरा वीर्य निकलने लगा, में उन्हें देख रहा था वो लुंड से निकल रहे वीर्य को अपने गले के निचे उतर रही थी, चाट चाट कर वो सारा वीर्य अपने मुँह में ले कर पि गयी. फिर उन्होंने मेरे लुंड को चाट चाट कर साफ भी किआ.

सरितादिदी : (खड़े हो कर मेरी छाती से लिपट कर मेरे लुंड को सहलाते हुए) तेरा जब भी मान करे मुझे बुला लिया कर, में तुज से छोड़ने को हमेशा तैयार मिलूंगी शिव. (मेने दीदी को देखा तो अपने लिए उनकी आँखों में बहोत प्यार पाया, मेने है कहा और उनके होठो को चूमा. थोड़ी देर बाद हम दोनों निचे आ गए. अभी नींद नहीं आनेवाली थी तो मेने दीदी से चाबी ली और ऑफिस को खोला. एक साइड टेबल और कुर्शिया थी. दूसरी और बीएड लगा हुआ था. मेने सरे ड्रॉवर खोल कर चेक किये पर वह कुछ नहीं मिला. एक तिजोरी थी पर वो बंद थी. मेने चाबी ढूंढी पर वह मिली नहीं. मेने दीदी से भी पूछा पर उन्हें भी उस चाबी के बारेमे नहीं पता था. हमने ऑफिस बंद किआ और अपने अपने कमरे में चले गए. में अपने रूम में पंहुचा तो दीदी सो गयी थी तो में उनके बगलमे सो गया.).

सुबह गयम ख़तम कर के जूही मैडम मुझे स्टेडियम ले गयी. वह हमने दौड़ की प्रैक्टिस की. उसके बाद उन्होंने मुझे स्ट्रेचिंग करवाई. मेने भी उनकी स्ट्रेचिंग में मदद की पर उस दौरान मेरी उंगलिया उनके नरम उभारो को साइड से छू गयी. में दर रहा था पर उन्होंने ज्यादा मंद नहीं किआ. जूही मैडम को कुछ काम था तो वो गयम के बिल्डिंग में गयी. में वही रक्खी एक बेंच पर बेथ गया. स्पाइरट्स क्लब में स्विमिंग पूल भी था तो कुछ लड़के वह से आ रहे थे. में पार्किंग में बैठा था और वो लोग भी वही कड़ी उनकी बाइक्स के पास आ कर बाते करने लगे.

एक लड़का : यार अपना माल नहीं दिख रहा.

दूसरा : मेने उसे ऑफिस की और जाते हुए देखा था. (वो मेरी पीछे की और थे तो मेने मुड़कर देखा, उनलोगो का ध्यान नहीं था. लड़के अक्सर ऐसी बाते करते रहते होते है, मेने उनकी और ज्यादा ध्यान नहीं दिया)

पहला लड़का : साली, कमल की है, एक बार अपनी दे तो मज़ा आ जाये.

दूसरा : अगर तुजे वो चाहिए तो पूछ ले, वो तो हमेशा उस शिव के साथ चिपकी होती है.

पहला लड़का : है, उस सेल का कुछ न कुछ करना पड़ेगा, वो स्कूल में भी हमारे माल को लिए घूम रहा है.

मेरा नाम सुन कर मुझे आश्चर्य हुआ. कोण है ये लोग और मेरे बारे में बात कर रहे है. मेने मुड़कर ध्यान से देखा तो वो मेरे hi स्कूल के लड़के थे. वो 12 वि क्लास के लड़के थे. मेने उन्हें देखा था पर नाम नहीं जनता tha.(Ye विक्रम, पार्थ और रिज़वान थे)....
 
अपडेट 35

मेरा नाम सुन कर मुझे आश्चर्य हुआ. कोण है ये लोग और मेरे बारे में बात कर रहे है. मेने मुड़कर ध्यान से देखा तो वो मेरे hi स्कूल के लड़के थे. वो 12 वि क्लास के लड़के थे. मेने उन्हें देखा था पर नाम नहीं जनता tha.(Ye विक्रम, पार्थ और रिज़वान थे)....

रिज़वान (दूसरा लड़का): संयम तेरा नहीं मेरा माल है, सेल.

विक्रम (पहला लड़का): अबे, हम लोगो में ये तेरा और मेरा कब से हो गया, हम सब मिल बात के खानेवालों में से है. हमे कोनसा उसे घर में रखना है. खाया पिया और हाथ साफ़ कर के आगे चल दिए.

रिज़वान : (हस्ते hue)Sahi कहा तूने, पर यार इस जूही का कुछ जुगाड़ कर न. मेने आज तक ऐसी लम्बी लड़की नहीं छोड़ी, सलीकी छूट कितनी बड़ी होगी न.

ये सब सुन कर मुज से रहा न गया और में उठ कर उनलोगो के पास चला आया. मुझे देख कर वो सब चौक गए.

शिव : (अपने दन्त पिस्टे hue)Ye सब क्या बकवास है.

विक्रम : ओह! शिव, तुम यही थे, अरे यार गुस्सा क्यों होता है? अगर तुजे बुरा लगा हो तो सॉरी, पर यार, हम जो चाहते है तू भी तो वही चाहता होगा. हम से दोस्ती कर ले फायदे में रहेगा. तेरे पास सिर्फ दो है, और मुझे यकीं है की अभी तक तूने उनपे हाथ साफ़ किआ नहीं होगा. दोस्त हमारे पास ऐसी कई है, हम से हाथ मिला ले, ऐसी कई चखने को मिलेगी, हम यारो के यार है, सब मिल बात के खानेवाले, क्यों दोस्तों.

रिज़वान : (हस्ते हुए ताली देता hai)Bilkul सही भाई, हम से दोस्ती करने में तेरा hi फायदा है. तू हमें जूही और संयम की दिलादे हम तुजे ऐसी और भी कई है, उनकी दिलवा देंगे.

शिव : (मेने रिज़वान का गिरेबान पकड़ liya)Apni जबान संभल के बात करो.

विक्रम : अरे ठण्ड रख भाई, हम से दुश्मनी कर के तू अपना hi नुकशान करवाएगा, इस से अच्छा है हम से दोस्ती कर ले. चल कोई नहीं पहले तू जूही की लेना, हम बाद में लेंगे...

अब मेरी बर्दास्त से बहार था तो मेने एक झण्टेदार झापड़ विक्रम के गाल पर दे मारा. (अपने गाल पर पड़े झापड़ से उसके शिर की साडी तार हिल गयी) विक्रम पर हाथ उठाने से रिज़वान एक दम से गुस्से में आ गया और वो मुझे कमर से पकड़ मेरे ऊपर कूड़ा, अचानक हुए हमले से मेरा बैलेंस बिगाड़ा और में निचे जमीं पर गिरा, मेने शम्भल कर उसे पकड़ा और उसे पलट दिया, अब वो जमीं पर था और में उसके ऊपर, ये देख कर तीसरा लड़का (पार्थ) आया और उसने मुझे पीछे से गले में हाथ दाल कर पकड़ कर मुझे खींचने लगा. मेने अपने शिर से उसके शिर पर वॉर किआ तो उसकी नाक में जोर से लगी, उसने मुझे छोड़ दिया और वो अपनी नाक पकड़ कर पीछे गिरा. हम चारो में मारा मरी सुरु हो गयी, जिससे देखने के लिए सब वह जमा होने लगे. वह खड़ा सिक्योरिटी गॉर्ड और जूही मैडम और दूसरे लोग भी वह आ गए.

जूही मैडम : (जोर se)Band करो, ये क्या कर रहे हो... में तुम लोगो की कम्प्लेन कर दूंगी. छोड़ो शिव उसे, सब रुक जाओ.

सब के बिच में आ जाने से लड़ाई बंद हो गयी. पार्थ की नाक से खून निकल रहा था. रिज़वान अपना पेट पकड़ कर खड़ा था, उसके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था. विक्रम भी अपना गाल सहलाते हुए अपना जबड़ा ठीक कर रहा था, मुझे एक गार्ड ने पकड़ रक्खा था, में अभी भी गुस्से में था.

जूही मैडम : स्टॉप आईटी शिव, क्यों झगड़ रहे हो तुम लोग. (विक्रम की और देख kar)Yaha यही सब करने आते हो क्या.

विक्रम : झगड़ा इसने सुरु किआ, हम लोग तो यहाँ बाते कर रहे थे.

जूही मैडम : शिव क्यों झगड़ रहे हो? (मेने गुस्से से विक्रम की और देखा तो वो कामिनी हसी है रहा था, वो जनता था की शिव एक अच्छा लड़का है और अच्छे लड़के ऐसी बाते सब के सामने नहीं बोलते) में तुम से पूछ रही हु शिव, क्यों जगहदा कर रहे हो,

शिव : (अपने दांत पिस्टे हुए) ये लोग, गन्दी गन्दी बाते बोल रहे थे.

जूही मैडम : किसके बारे में? (शिव कुछ न बोलै) किसके बारे में शिव?

शिव : सब लड़कीओ के बारे में.

जूही मैडम : तो तुम्हे क्या, मेने मन किआ था न ऐसे झगड़ो में पड़ने के लिए. (विक्रम की और देख कर) तुम लोग यही सब करने आते हो यहाँ? अगर मेने तुम लोगो की कम्प्लेन कर दी तो तुम लोगो का यहाँ आना बन हो जायेगा.

विक्रम : हम लोग तो आपस में बाते कर रहे थे, पूछ लो किसी भी लड़की से, क्या हमने किसी को छेड़ा. पूछ लो.

जूही मैडम : में सब जानती हु, में तुम्हे पहली और आखरी वार्निंग दे रही हु, अगर दोबारा ऐसा कुछ हुआ तो में तुम्हारा और तुम्हारे दोस्तों का यहाँ आना बन करवाडुंगी. जाओ यहासे.

वो लोग मुझे घूरते हुए वह से निकल गए. दूसरे सब लोग भी निकलने लगे. मुझे भी कोहनी में थोड़ा लगा था तो में उसे देखने लगा.

जूही मैडम : (मेरा हाथ पकड़ कर कोहनी को देखते हुए) मेने तुम्हे मन किआ है न, तुम सुधरोगे नहीं. (शिव कुछ नहीं बोलै) चलो अब यहाँ से.

हम लोग वह से उनके घर गए, जहा उन्होंने मेरी कोहनी पर पट्टी लगा दी. फिर हम गयम गए. वो गुस्से में थी तो अपना काम ख़तम करके वो गयम से चली गयी. वो मुज से कोई बात नहीं कर रही थी. में सब काम निपटा कर अनाथालय पंहुचा तो मैनेजर आया हुआ था, और वो किसी बात पर सब पर चिल्ला रहा था.

मैनेजर : (सरिता दीदी से) ऐसा कैसे हुआ बता.

सरितादिदी : मेने सफाई की थी तो हो गया होगा.

मैनेजर : तुजे मन किआ है न वह सब छूने को. सिर्फ ऊपर ऊपर से hi सफाई करनी होती है न तुजे.

सरितादिदी : सब गन्दा हो गया था तो कर दी.

मैनेजर : ठीक है, फिर कभी मुझे पूछे भीना सब छूना नहीं. (उसकी नजर मुज पर पड़ी)

मैनेजर : क्यों बे कहा घूमता रहता है, यहाँ के काम कोण तेरा बाप करने आएगा. सालो एक तो तुम्हे पालो और ऊपर से काम भी ढंग से नहीं करते. लकडिया क्यों इतनी काम कटी हुई है, जा पहले वो काम निपटा फिर खाना मिलेगा. तुम लोगो के लिए में दर दर भटकता हु, भीख मांगता हु लोगो से तब जा कर तुम्हारा खर्चा चलता है. और तुम्हे मुफ्त की रोटियां तोड़नी है.

मेने दीदी की और देखा जो निसाहयता से मुझे देख रही थी. मेने कुछ नहीं बोलै और लकडिया काटने चला गया. वो कमीना, न भी कहता तो भी आज तो मुझे लकडिया काटनी hi थी. में लकडिया काटने लगा तो पीछे पीछे रंजन भी आ गयी. मुझे गुस्से में देख वो चुप चाप अपना काम करने लगी. एक घंटा में लकडिया काट ता रहा और रंजन उन्हें अंदर रख रही थी. थोड़ी देर बाद मैनेजर वह आया. आस पास सब देखा फिर.

मैनेजर : ये लकडिया जितनी बहार पड़ी है उनको केबिन के अंदर जितनी हो सके सब रख देना वर्ण बारिस में सब भीग जाएगी. में कल शाम तक वापस आऊंगा तो ये काम मुझे पूरा चाहिए.

ये कह कर वो चलागया. हम काम करने लगे.

रंजन : तू उसकी बातो को दिल पर मात ले. उसकी तो आदत है.

शिव : क्या आदत है, जब देखो तब चिल्लाता रहता है, खुद तो यहाँ रहता नहीं और कभी कभी आता है. क्या सरे काम ऐसे hi हो जाते है? कभी नाज की एक बोरी भी उठायी है, जब भी रसन आता है सारा में अकेला उठा कर अंदर रखता हु.

रंजन : मेने बोलना उसकी बातो को दिल पर मात ले. वैसे भी अब वो ज्यादा कुछ कर नहीं सकता. उसे पता है अगर वो तुझपर ज्यादा सख्ती करेगा और अगर तू यहाँ से चला गया तो तेरे साथ लता दीदी भी चालीजयेगी और में भी. फिर यहाँ का काम कैसे चलेगा. अब कोई बड़ा तो रहा नहीं यहाँ. हमे भी उसकी बातो को ज्यादा महत्वा नहीं देना चाहिए. चल अभी धुप ज्यादा बढ़गयी है बाकि सब शाम को करेंगे.

शिव : मुझे नहीं आना, तू जा.

वो नहीं मानी और मुझे खींच कर अंदर ले गयी. मैनेजर सामने hi मिल गया.

मैनेजर : तुजे बोलै था न काम ख़तम किये बगैर अंदर मत आना.

रंजन : (अपना मुज बिगड़ kar)Abhi धुप बहोत है और काफी लकडिया काट दी है, बाकी शाम को करलेंगे.

मैनेजर : तेरी जबान बहोत चलने लगी है, लगता है तेरे भी पर काटने पड़ेंगे.

रंजन :(घर कर मैनेजर को देखती hai)Muje दुसरो की तरह कमजोर मात समझना. तूने औरो के साथ जो किया वो किआ. अगर मेरे साथ किसीभी तरह की जबरदस्ती की तो अपनी जान से जायेगा, और उस से पहले पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दूंगी तुजे.

मैनेजर : साली मुझे धमकी देती है.

वो रंजन की तरफ बढ़ने लगा तो सरिता दीदी बीचमे आगयी और मैनेजर को देख कर.

सरितादिदी : वो बच्ची है, आप जाईये में समजती हु उसे.

मैनेजर : समजादे उसे यहाँ रहना है तो मेरी हर बात मान नई पड़ेगी वर्ण बहार निकलडूँगा.

रंजन : चल जा, अपना काम कर, बड़ा आया निकलने वाला. अगर हम सब यहाँ से निकल गए तो ये अनाथालय hi बंद हो जायेगा फिर तू भी यहाँ से निकला जायेगा.

मैनेजर : तेरी तो...

सरिता दीदी : (मैनेजर आगे बढ़ने लगा तो उसे रोकते hue)Aap jaiye(Ranjan se)Tu थोड़ीदेर चुप रहेगी. जा हाथमुँह धो ले और शिव को भी खाना किलदे.

रंजन गुस्से में मैनेजर को घूरते हुए मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाथरूम की और ले गयी. में बड़ा हैरान था रंजन के ऐसे बर्ताव से. कितनी सीधी और मासूम सी दिखने वाली लड़की आज क्या तेवर दिखा रही थी. वो मेरे हाथ धुलवा रही थी और में उसे hi देख रहा था.

रंजन : (मुस्कुराते हुए) मुझे यया देख रहा है.? हाथ धो.

शिव : तू तो बड़ी खतरनाक है.

रंजन : बन न पड़ता है, वार्ना इस मैनेजर जैसे भेड़िये खा जाते है.

शिव : तुजे उस से दर नहीं लगता?

रंजन : में क्यों दारू? तू है न, क्या तू मुझे कुछ होने देगा? वो मैनेजर को तू एक झापड़ भी मरेगा न तो दो दिन तक साला बिस्तारसे उठेगा नहीं. बचपन की बात और थी वो तुजे मरता था, हम सबको मरता था पर अब बात और है. वो दूसरे थे जो दर कर भाग गए में नहीं भगनेवाली और मुझे पता है न तू डरके भगनेवालोमेसे है. अगर उसने मुज पर या लतादिदी पर हाथ भी डाला तो तू उसका क्या हल करेगा ये मुझे पता है. चल अब खाना कहते है.

शिव : (उसके साथ चलते हुए उसे अपने साइड से लगते hue)Muje नहीं पता था तू इतनी हिम्मतवाली है?

रंजन : (मुस्कुराते hue)Jald hi तुजे देखदुंगी की में कितनी हिम्मतवाली हु.

शिव : (हैरानीसे उसे देखता hai)Wo कैसे.

रंजन : चल न, अभी बहोत भूख लगी है.

फिर हमदोनो खाना खाने आ गए. लतादिदी, शारिता दीदी, विणा किसी ने भी खाना नहीं खाया था. सब मेरा hi इंतजार कर रहे थे. में और रंजन बेथ गए, लता दीदी ने मुझे और रंजन की थाली में खाना रक्खा. हम साथ एक साथ खाना खाने लगे.

सरिता दीदी : रंजन ये सब क्या था? क्यों उस से उलझ रही थी.

रंजन : दीदी, कब तक उस से दर कर रहेंगे? अगर वो समझता है की में सरिता हु तो वो भूल कर रहा है.

सरिता दीदी: (हैरानी से रंजन को देखती hai)Kya कहना चाहती है तू?

रंजन : रहने दीजिये दीदी, मुझे सब पता है कैसे उसने आपके दर का फायदा उठाया है, पर में नहीं डरनेवाली. मुझे वो हथलगाकरके तो दिखाए. सेल को जान सा न मर दू.

सरिता दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे. वो कड़ी हो कर अपने कमरे की और चली गयी.

लता दीदी : (थोड़ा गुस्से से )राजाआं, अब बस कर.

रंजन : पर दीदी मेने कुछ गलत कहा क्या. वो तो आप को भी...

लता दीदी : (रंजन को बीचमे hi टोकते हुए) बस रंजन अब एक सब्द भी नहीं.

रंजन उनका गुस्सा देख कर चुप हो गयी. लतादिदी भी उठ कर सरितादिदी के कमरे में चली गयी. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. ये क्या बाते हो रही है. पर सब खाना खाना रोक कर बैठे हुए थे. लता दीदी थोड़ी देर में सरिता दीदी को समझकर ले आयी और वो अपना सर निचे किये खाने बेथ गयी. जब सरितादिदी ने खाना चालू किया तभी सभी ने खाना खाना सुरु किआ. में देख रहा था की सरितादिदी बहोत उदास दिख रही थी. ये रंजन ने भी देखा, उसे भी बहोत बुरा लगा.

रंजन : सॉरी सरितादिदी, मेरा वो मतलब नहीं था.

लतादिदी : रंजन, चुप चाप खाना खा, बाद में बात करेंगे. सब चुप चाप खाना खाने लगे. खाना खा कर सब अपने अपने कमरों में चले गए. मुझे आज बिना मैडम के घर भी जाना था, में सोच में पद गया की जाऊ की न जाऊ. तभी लतादिदी वह आयी.

लतादिदी : ऐसे क्यों खड़ा है, क्या सोच रहा है.

शिव : वो दीदी, कंप्यूटर सिखने जाना था, पर सोच रहा हु की जाऊ की न जाऊ. यहाँ ये सब हो रहा है और वो मैनेजर भी चिल्लायेगा.

लतादिदी : तेरी पढ़ाई ज्यादा जरुरी है शिव, ये सब तो हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चूका है. वो चिल्लायेगा तो चिल्लाने दे. आज रंजन की हिम्मत देख कर मुझे भी लगने लगा है की कब तक ऐसे दर कर रहेंगे. तू जा शिव, जो होगा वो देख लेंगे.

शिव : (लतादिदी का हाथ पकड़ कर) आप चिंता मात करो दीदी, में सब संभल लूंगा.

लतादिदी : में जानती हु शिव, पर उसके लिए तुजे इस काबिल बन न पड़ेगा. और उसके लिए पढ़ाई जरुरी है. तू जा हम सब देख लेंगे.

में वह से निकला, मैनेजर अपने कमरे में था. वह से निकल कर में बिना मैडम के घर पहुंच गया.

मैनेजर नंगा कुर्शी पर बैठा था, और शारिता बे मान से उसका लुंड चूस रही थी. वो उस से छोड़ना नहीं चाहती थी, इस लिए वो ऐसे चूस रही थी जिस से उसका पानी निकल जाये. उसे पता था एक बार उसका पानी निकल जायेगा फिर वो कुछ नहीं कर पायेगा.

मैनेजर : (मान में सोच रहा था) साली कुटिया, मुज से जबान लड़ती है, तू देख में तेरा क्या हाल करता हु. तुजे रंडी बनाकर न रख दिया तो कहना. मुझे आंखे दिखती है. ...
 
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