Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 11 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

मई तोह अभी भी हांफ रही थी और बीएड पे लेती हुई थी. असलम ने जब मुझे हाँफते हुए देखा तोह वह मेरे पास आया. फिर उसने मेरी दूध जैसी गोरी चूचियों को सहलाना, चूसना, काटना शुरू कर दिया.

"उफ्फ्फ्फ़, निकाह तोह हमने कर लिया है रौशनी , लेकिन अब मई सचाई में भी तुम्हारा शौहर बनना चाहता हूँ," असलम ने मुझसे कहा.

मैं मुस्कुरायी और उसके गालों को और होठों को चूमती हुयी पूछी, "क्यों असलम जी?"

फिर वह मेरी पूरी बॉडी को किश करने लगे और बोले, "मुझे तुम्हारा शौहर इसलिए बनना है, ताकि मई तुम्हे दिन और रात छोड़ सकू. मई तुझे और तरीकों से रगड़ रगड़ कर छोड़ता."

मुझे बहुत एक्ससिटेमेंट हो रही थी और मैं अपने दोनों हाथो से उसका सर पकड़ ली और उसको अपनी तरफ खींच कर ज़ोर ज़ोर से गहरी चुम्बन दी, मेरी जीभ उसके मुँह के अंदर हर जगह ढूंढ रही थी.

"उफ्फ्फफ्फ्फ़, तुम तोह कमाल की किसर हो रौशनी!"





दोनों के बीच एक लम्बी वाइल्ड किश के बाद मुझे पानी चाहिए था, लेकिन असलम तोह पुरे मूड में था, और उसने मुझे अपनी तरफ खेचा और कहा, "उफ़ रौशनी जल्दी पानी पि कर आना , मई चाहता हु की तुम मेरा लुंड चुसो, इससे पहले की मई तुम्हारी सबसे मस्त और ताबड़ तोड़ , पलांद तोड़ चुदाई करू."

मई शर्मा गयी और मैंने बस कुछ न बोली , और अपनी चूतड़ों को हिलाते किचन दौड़ गयी".

में वापस आयी तोग असलम ने बिना वक़्त जाया किये मुझे अपने और खींचा और मेरी गर्दन के पीछे से पकड़ा और अपना लुंड मेरे चेहरे के पास ले आये. मैंने उसके मोठे लुंड को चूसने के लिए अपना मुँह खोला. असलम बहुत खुश हुआ मुझे राज़ी देख कर, उसने धीरे धीरे अपना कला और मोटा लुंड मेरे मुँह में और अंदर तक डालने लगे. मुझे उसका बड़ा लुंड चूसना बहुत पसंद था.

जब मई उसको चूस रही थी तोह वह बोलै, "हैं उफ्फ्फ्फ़ मममम रौशनी, चूसो मुझे उफ्फफ्फ्फ़, तुझे तोह मेरे मलते लोडे की चूसै बहुत अचे से आती है."

मेरे हस्बैंड रोनित कभी भी बीएड में अडवेंचरउस नहीं थे. असलम ने एक्सपर्ट तरीके से मेरी मुँह के गहराई तक लुंड दाल कर मेरी मुँह की चुदाई कर रहे थे जिससे मुझे कठिनाई काम हो रही थी .. ऐसे कुछ चूसै के बाद उसने अपने लुंड को मेरे मुँह से बहार निकला और मेरे चेहरे पर अपना गीला लुंड रगड़ने लगे. मुझे उनकी बुड्ढे होकर भी मर्दानगी फील हो रही थी और उसके लुंड की ज़ोरदार धड़क फील कर रही थी.

"oooooooooooooo," मई सिसकियाँ मार रही थी .

मैं उनके लुंड के निचे लटके, बड़े अंगूरों के साथ खेलना शुरू कर दिया जब मई चूसती रही. "ओह्ह्ह आह्ह्ह्हह स्साली क्या छुस्सत्ती ह्हैई", असलम प्लेअसुरे में कराहने करने लगा.

इस बुड्ढे लेकिन मज़बूत मर्द को सिस्यते सुन मुझे एक्ससिटेमेंट हो रही थी, क्युकी मैं अब उसके बैलन से भरे अंगूरों को चूसना शुरू कर दिया था. वह अपने अंगूरों मो मेरे मुँह पर रगड़ने लगे .. मुझे उनका ऐसा मस्त दुमदार रूप बहुत turn-on कर रहा था.

उसने मेरे सर के पीछे पकड़ लिया और मेरे मुँह में फिर से अपने लुंड से चुदाई करना शुरू कर दिया, पहले स्लो लॉन्ग थ्रुस्तस से और फिर शार्ट फ़ास्ट झटकों से. जब उसके लुंड से उनके हलवे के ज्वाला फटा तोह उसने मेरे मुँह को अपने लुंड के गाढ़े माल से से भर दिया. में बस फिर से असलम के लुंड के टिप को बेतहशा चूमने लगी







उसने अपना लुंड मेरे मुँह से निकला तब मेरे सेक्सी चेहरे, बालों, और शोल्डर्स पर आ गए थे.

हूँ ऐसे hi कुछ टाइम लेते . असलम जाकर दारु की कुछ पेग मार 15-20 मं बाद वापस आये

वह मेरे करीब ए और अपना लुंड अपने हाथ में लेकर मेरे चेहरे के करीब ले आये. मैंने अपना मुँह खोली यह एक्सपेक्ट करते हुए की वह अपने मोठे लुंड को मुँह के अंदर डालेगा लेकिन उसने मुझे तैसे कर अपने लुंड को मेरे मुँह पर रगड़ने लगे.

उसका लुंड फिर से सलामी देने लगा था ….







"aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa फिर से डालो इसको मेरे मुँह में," मई सिसकियाँ मार रही थी.. मुझे सिस्यते हुए सुनकर वह मेरी उत्साह पर हसने लगा.

अब उसने मुझे उठाया और बिस्तर पे फ़ेंक दिया. असलम ने मुझे एक राग डॉल की तरह खेचा और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. वह मुझे किश करने लगे और मेरे सेक्सी फेस और हैवी बूब्स को काटने में बिजी हो गए.

"uuuuuuuuuuuuuuuu hahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaaa अस्स्सलामममम," मई मोअन कर रही थी.

असलम ने मुझे बताया की "मेरे सेक्सी फेस को ओर्गास्म के थ्रोएस में देखना बहुत सेक्सी है. रौशनी तुम बहुत ब्यूटीफुल हो और तुम दम्म सेक्सी लगती हो जब तुम गेटिंग फुकेद." उसने मुझे तिघ्टलय हुग किया और मेरे लिप्स को काटा क्युकी मई मोअन कर रही थी. वह मुझे किश करता रहा और मेरी गर्दन और पूरी बॉडी को पैशन से लीक कर रहा था. मैंने इस तरह का प्यार या एक्ससिटेमेंट किसी से पहले कभी फील नहीं किया था और मई इससे रियली एन्जॉय कर रही थी.

मई चुदाई से अभी भी एक्ससिटेड फील कर रही थी और मुझे पता था की मुझे इस बूढ़े आदमी से साडी रात यह सब मिलने वाला है.

"रौशनी इधर आओ और मेरी गोद में बैठो" असलम ने मुझे कहा. असलम ने मुझे अपने ऊपर खेच लिया, उसने मेरी लेग्स को अलग किया और अपने लुंड को मेरी ओपन लेग्स के थ्रू मेरी बुर के होठों पर मस्सगे करने लगे. मैंने उसके लुंड के मोठे पहाड़ी ालो जैसे टोपे को चाटने लगी. उनका लुंड तोह करीबन 8 तो 9 इनचेस का था.







फिर अचानक से असलम मेरी आर्मपिट्स को चूसना शुरू कर दिए. उसे और वह मेरी आर्मपिट्स को पूरी तरह से चाटने लगे.

फिर वह मुझे पागलों की तरह होठों पर चूमने लगे और में भी उसे जकड कर चूमने लगी और मैं उसके बदन से लिपट कर बेतहाशा उसे चूमने लगी.

"oooooooooooooooo अआप बहुत वाइल्ड हो असलम जी"

"रौशनी तुम भी तोह एक बढ़िया सी मस्त माल हो जो मेरे बड़े लुंड के लिए भूखी हो," असलम रेतुर्न में बोले.

उसके वर्ड्स से मेरी बॉडी में एक एक्ससिटेमेंट आ गयी

उसने मुझे टर्न किया तोह मई अब उसके ड्रेसिंग टेबल के मिरर को फेस कर रही थी. वह मेरे नैक को चूमने लगे और एक हाथ मेरे बूब और इतर दूसरा मेरी कमर और फिर बुर को एक्स्प्लोर कर रहे थे और इससे मैं सिसकियाँ मारने शुरू कर दी "उफ्फ्फ्फ़ ममम असलममम मई अब और नहीं ले सकती मुझे छोड़ो प्लीज."

इससे उसे ेन्सॉरगेमेन्ट मिला और वह बोलै, " और एक राउंड की चुदाई के लिए तैयार हो जाओ रौशनी".

में मुस्कुरायी , शर्मायी .. “उफ्फ्फ्फ़ क्या मस्त है तेरी छूट रोषनीईई", असलम बोले

में हफ्ते हुए “असलम कितना मस्त लुंड है आपका मई कई दिनों से आपके इस मोठे डंडे से छोड़ने के लिए तड़प रही थी आज मई इससे रत भर छोडूंगी.”

मेरी उठी हुई छूट मई असलम अपने लुंड का एक जोर दर झटका मरता है की मेरे मुँह से आह की सिसकारी निकल जाती है, अह्ह्ह ुआठ छोड़ सेल बुड्ढे मिटा दे आज मेरी छूट की पियास अहह छोड़ छोड़ अपनी बेगम को अह्ह्ह अह्ह्ह है है है ऐसे hi छोड़िये आआआअह्ह्ह असलमममम ले अपनी बेगम को आज रात भर अह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्हह्ह.”





असलम अब ताबड़ तोड़ तरीके से मेरी छूट कूटने लगता है, उसके लुंड के हर धक्का इतना जोर से मरता है की उसका लुंड उसकी मेरी

बच्चेदानी से टकराने लगता है, में बस hay-hay करती हुई अपने भरी चूतड़ों को खूब उठाने लगती हूँ और असलम मेरी बुर में सटासट अपने लुंड को पेलने लगता है, . beech-beech मई असलम जब मेरी पहली हुई छूट देखता है तोह अपने लुंड को बहार निकल कर मेरी छूट बुरी तरह चाटने लगता है.

करीब आधे घंटे तक असलम मेरी छूट को कभी अपनी जीभ से छत्ता है कभी अपने लुंड से छोड़ता है,

असलम बोलते है “रौशनी तुझे छोड़ने मई मुझे सबसे ज्यादा मजा आ रहा है तेरी मस्तानी गांड और छूट दुनिया मई सबसे मस्त है. मन करता हैं तुम्हे अब मई दिन रत नंगी करके छोडूंगा और दिन रत तेरी मस्त गांड को मरता राहु अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ और तेरी पहली हुई छूट को दिनभर चूसूंगा तू बहुत मस्त छोड़ने लायक माल है रोशनी.





असलम मेरी छूट से अपने लुंड को बहार निकल कर उसे मेरे मुँह मई दे देता है और में असलम का लुंड फिर से पिने लगती हूँ,

असलम पास मई रखे तेल उठा कर मेरी गांड मई ऊँगली dal-dal कर तेल लगाने लगता है और अपने होंठो से मेरी

छूट भी चूसने लगता है, असलम की पहले एक फिर दो उंगलिया तेल मई भीगी होने से सात से उसकी माँ की मोती गांड के छेड़ मई घुसने लगती है, अब असलम अपने लुंड पर ढेर सारा तेल लगा कर अपने लुंड को धीरे से मेरी गुदा से लगा का dhire-dhire मेरी गांड मई पेलने लगता है,

में बस आह आह करती हुई रहती हिम और मेरी गांड नाचने लगती है जिससे असलम dhire-dhire

अपना आधा लुंड मेरी मोती गांड मई और फंसा देता है

अह्ह्ह उफ्फ्फ बहुत खुजला रही थी न तेरी ये गोल मटोल गांड …”

में बस आह आह की सिसकियाँ hi मारती रही..

असलम थोड़ा लुंड बहार खींच कर उस पर और तेल लगा

कर एक जोर दर धक्का जब मेरी मोती गांड मई मरता है तो उसका पूरा लुंड मेरी गदराई गांड मई पूरा का पूरा घुस जाता है और में बस आह मर गई रे आह करते हुए सीसीएनए लगती हूँ.

उफ्फ्फ्फ़ असलम का लुंड मेरी गांड मई फसा हुआ

और भी सख्त होकर फूलने लगता है और असलम मेरी गांड को cheer-cheer कर अपने मोठे लुंड को सटासट अंदर पेलने लगता है

में तोह बस अह्ह्ह ममम उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह करते हुए सीसियति रहती हूँ और असलम dhire-dhire मेरी गांड जितना हो सकता था अपने हाथो से phaila-phaila कर छोड़ रहा था,

उसे तोह बहुत मज़ा आ रहा था और में भी मस्ती मई इस बुड्ढे असलम के मोठे लुंड को अपनी मस्तानी गांड मई भरे हुए खूब kas-kas कर मरवा रही थी.







असलम के तोह और ताबड़ तोड़ विचार थे .. उसने कुछ देर बाद मेरी गांड पर chadh-chadh कर उसे छोड़ना शुरू कर दिया और इतना jor-jor से मेरी गांड की ठुकाई करने लगा की पुरे कमरे मई उनके

द्वारा की गई मेरी गांड की ठुकाई की आवाज गूंजने लगी,

असलम इतनी तगड़े स्ट्रोक्स मेरी गांड और छूट

पर कभी नहीं दी थी जितना तबियत से आज असलम मेरी गांड को छोड़ रहा था.

असलम तोह अब झरने की कगार पर थे .. में तोह पहले से hi 3 बार जहर चुकी थी .. लेकिन असलम पहली बहार झरने वाले थे .. एक बड़ी सी अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ममम मेरे मोठे लोडे का तभी असलम के लुंड का पानी रुक्मणि की

गांड मई गहराई तक भर गया और रुक्मणि निढाल होकर पेट के बल लेट गई और असलम भी मेरी गांड मई अपना लुंड

phasaye-phasaye hi उसकी गांड पर लेट गया, करीब 5 मिनट तक असलम वैसे hi पड़ा रहा फिर असलम उठ कर एक तरफ लेट गया

और में चुदाई के नशे और मस्ती मई , हाफति हुई लेती रही.

हम दोनों फिर एक दूसरे के बाँहों में बाहें दाल गहरी नींद में सो गए .
 
सुबह का अलार्म बजा 6 बजे का और रौशनी की आँखें खुली .. अपने साइड में वह देखि की असलम घोड़े बिछा कर नंग सोया था, उसने बस एक पतली सी निघ्त्य पहनी थी लेकिन अंदर कुछ नहीं. रौशनी असलम सोते हुए लेकिन फिर भी 7 इन मोठे और लम्बे लुंड को देख शर्मायी . वह अभी भी नहीं सोच सकती थी की कुछ hi महीनो में वह इस जानवर तरह दिखने वाले लुंड के निचे इतने बार सो चुकी हैं .. असलम तोह सच में सांड था , अब वह क्या सलीम और रमेश भी काफी बड़े सांड थे ..





यह सोच रौशनी मन hi मन मुस्कुरायी. एक लम्बी सी अंगड़ाई लेते हुए वह बिस्तर से उठ बाथरूम में चली गयी नहाने .. उसने रात बितायी थी असलम के बिस्तर पर लेकिन उसे अब घर जाकर रेडी होकर वापस ंगो आना भी था . वह जल्दी से नहायी , कल की साड़ी और सब वस्त्र पहनी और उसके ऊपर बुर्का ताकि वहां किसी को पता न चले उसके बारे में. में उस घर जैसे झोपड़े के बहार निकल गयी .. वहां पर बहार थोड़े लोग थे उसमें से थी कुछ फ्रेमलेस और कुछ मर्द .. में देख सकीय की लेडीज आपस में बातें कर रही थी मुझे देखते हुए .. वहां के मर्द भी मेरे तरफ देख रहे थे और उसमें से एक मर्द बोलते मुझे सुनाई दी ..

“आई है यह कौन मोहतरमा हैं असलम के घर से निकलने वाली उफ्फ्फ्फ़ क्या फिगर हैं .. साला लगता हैं नयी बेगम बना कर लाया था इसे ः …”

“वही दूसरा बोलै “नहीं यार निगम ऐसे चुप कर सुबह सुबह नहीं जाती ,. जरूर साले ने किसी आइटम को पता लिया हैं और अपनी रखैल बना दी हैं .. उफ्फ्फ बड़ी मस्त होगी ..”

इन सब बातें सुन में काफी ेम्बरस थी लेकिन मन hi मन मुस्कुरा भी रही थी .. (उफ्फ्फ्फ़ ये में क्या बन गयी हूँ , ऐसी अश्लील बातें मेरे बारे में उफ्फ्फ ज़िन्दगी में नहीं सोची थी ऐसी अश्लील बातें सुन्नी पड़ेगी मेरे बारे में उफ्फफ्फ्फ़… यह दोनों असलम और सलीम बुद्धों की वजह से hi हैं उफ्फफ्फ्फ़… )

वही और एक मर्द बोलै ..”ओह हो मालदार आइटम हो तुम , जरा नक़ाब उठा कर हमें भी तोह अपने जवानी के जलवे दिखा .. हम तोह उस बुड्ढे असलम से भी दुमदार मज़्ज़े करेंगे तेरे साथ …”

(उस मर्द की सुन में सोची अरे तू हो hi नहीं सकता असलम जैसा दुमदार … बुड्ढे होकर भी जवान घोड़ो से ज्यादा ताकत और हवस हैं उनमें .. उफ्फ्फ्फ़ रात भर सोने नहीं देते बस पटक पटक कर कभी छूट तोह कभी गांड पेलते रहते हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़)









रौशनी वहां से झट से एक रिक्शा करि और चली गयी. अपने घर वह पहुंची तोह देखा की उसके पति रोनित आ चुके थे ..

“अरे रोष नई कहाँ गम हो गयी थी , रात को कहाँ मुँह मारने गयी थी …

“उफ्फ्फ रोनित ऐसे क्या बातें कर रहे हो , में अपने सहेली के यहाँ गयी थी.”

“ओह्ह सहेली के यहाँ या किसी यार के यहाँ ..”

रौशनी को अब ग़ुस्सा आया और बोली “अरे आप को क्या , आप तोह कई दिन गायब रहते हो उसका क्या .. अभी तोह गए थे 3 दिन कहा पर .. आज आये हो और रॉब जमा रहे हो ..”

“हाँ जमाऊंगा , में तुम्हारा पति हूँ , और में कहाँ जाओ उससे क्या मतलब , में मर्द हूँ कहाँ भी जाऊंगा , तुम शादीशुदा औरत हो तोह रात अपने घर पर hi होनी चाहिए, न की किसी यार के घर ”

“अच्छा मर्द हो तोह दिनों दिन गायब होते रहो, आने का न पता न ठिकाना न समय … पीछे 2 महीने से कुछ 10 दिन मिले हो मुझसे नहीं तोह तुम्हारे उन नए ावरों दोस्तों के साथ बहार hi रहते हो , क्या पता तुम भी किसी के साथ बिस्तर गरम करते होंगे …”

“रौशनी अपने ज़बान पर काबू रख , जबसे वह ंगो की नौकरी करने लगी हैं कुछ ज्यादा hi छत्तर पत्तर करती रहती हो …”

“अरे तुम hi तोह हो जो मेरे उन पैसों पर जी रहे हो , जो कमेटी हूँ तुम तोह उदा देते हो तम्हारे यारों के साथ , उन्हें बोलो न तुम्हे पैसे दे तुम्हारी ऐयाशी के लिए>

“रौशनी तुमसे शादी क्र सबसे बड़ी गलती की हैं , साली कुट्टी ज़बान लड़ती हैं अपने पति के सामने ..”

रौशनी वहां से कमरे में जाती हैं . वह सोच रही थी की उसकी कुशाल शादी शुदा ज़िन्दगी बस मच hi महीनो में इतनी बिगड़ गयी थी .. दोनक जब भी घर होते थे बस लदए hi रहते और आज तोह उसके पति ने उस पर ऑलमोस्ट हाथ भी उठाया था. यह सब सोचते हए उसकी आँखों में आंसू बहने लगे थे ..





वह बिस्तर पर बैठी रोटी रही … की उसे घर के दरवाज़े की धाम आवाज़ सुनाई दी … रोनित वापस बहार कही गए थे …

रौशनी अपने उन दिनों की सोचती रही जहाँ उसके पति एक कामयाब बिज़नेस चलते थे और उन दोनों में ढेर सारा प्यार था और मस्ती भी .. अब तोह 3 बुद्धों के साथ कुछ ख़ुशी मिलती हैं और वह मस्ती भी ाकरते हैं लेकिन प्यार भी करते हैं .. क्या हो गयी हैं मेरी ज़िन्दगी …

रौशनी अपनी ाजनसुइन पोछती हैं और फिर वापस काम जाने की तैयारी में लग जाती हैं.

पूरा दिन रौशनी की सुबह की अपने पति रोनित से झगडे के असर से उसका मूड बिलकुल डाउन था .. निराश ..

रात को फिर से अपने बिस्तर पर रौशनी के आँखों में ासु आते आते वह सो गयी.

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अगली सुबह .. हुयी में उठी और खुद को आईने में देखि .. रौशनी अब तू सक्सेसफुल महिला हैं और एक बड़े ंगो की मैनेजर . अभी मूड डाउन होने का नहीं था .. बल्कि ज़िन्दगी जीने के दिन थे मेरे.

इस सोच अस कुछ 1 घंटे बाद तैयार होकर में निचे गयी तोह रमेश की रिक्शा मुझे दिखती हैं और उसमें बैठ ंगो के तरफ हम चले जाते हैं.

रमेश को देखता हैं , वह देखता हैं की आज रौशनी का चेहरा उतरा हुआ था .. वह हमेशा की तरह खिलखिलाती हुयी रौशनी आज नहीं थी.

“रौशनी जी क्या हुआ आज थोड़ी उदास उद्दस सी लग रही हो..”

में घुसे में बोली “तुम्हे क्या रमेश जी अपनी अपनी रिक्शा चलाओ बस.”

“अरे रौशनी जी बताइये न?”

में कुछ नहीं बोलती .

कुछ और मिनट बाद रमेश कहता हैं

“रौशनी जी आप मेरे साथ इस वीकएंड चलिए मेरे पुअरने गाँव, आपकी गम भुला दूंगा और आप की हसी वापस लाऊंगा.”

“नहीं आउंगी , आप जैसे खुद बा खुद .. आप को जो करना हैं कीजिये ..”

“ओह हो रौशनी , आप से गहरी दोस्ती की हैं , प्यार करता हूँ , आप मुझे बताइये न क्या हुआ.”

में अभी भी उस दिन पार्क के ग़ुस्से में और कल सुबह की अपने पति के साथ झगडे के ग़ुस्से में hi थी और बोली

“रमेश जी , आप तोह प्यार कहना चोर hi दीजिये .. आप नहीं करते मुझसे प्यार.”

“ओह रौशनी जी ऐसे क्या हुआ ..”

“ऐसे क्या हुआ ??”” अच्छा उस दिन पार्क में पुलिस आयी थी उसका क्या , आपने बताया था न की पैसा की राइड नहीं होती वहां फिर कैसे हुयी राइड..”

“अरे रौशनी मुझे क्या पता , नहीं होती वहां राइड .. उस दिन पता नहीं क्या हुआ.”

“मत बताइये आपको पता नहीं , पहले से hi उस गार्ड को पैसे दे रखे थे अपने .."

“अरे वह तोह ..”

“अरे वह तोह क्या? आपने पहले से hi पैसे दिए थे की राइड हुयी तोह पहले बताने के लिए , में सब सुन चुकी थी …”

“रमेश कुछ नहीं बोल सका ..

(रौशनी सच कह रही थी , उसे पता था राइड हो सकती हैं लेकिन रौशनी के साथ वह रात गवाना नहीं चाहता था उसकी चुदाई करना चाहता था … लेकिन उस जल्दबाज़ी के वजह से वह उसे पुराने गाँव ले जाने का मौका खो दिया था , वह वहां तोह वह 3 रातों तक रौशनी को अपना लुंड चुसवा कर उसकी घुड़सवारी करते हुए गांड और छूट की चुदाई कर सकता था …”)















मेरी और रमेश के बीच कुछ भी बातें न हुयी और रमेश मुझे ंगो छोर चला गया. मुझे भी आज ंगो में बहुत काम और मीटिंग्स थे और उसमें में बिजी हो गयी.

शाम का वक़्त था और ंगो के बहार में गयी तोह रमेश भी नहीं थे .. और कोई रिक्शा भी नहीं. आअज असलम भी कही बहार गए थे और सलीम तोह अब तक वापस नहीं आये थे .. में सोची की बस लेकर जाउंगी आज लेकिन बस स्टॉप था कुछ 1 कम की दुरी पर .. में बस स्टॉप के लिए चल पड़ी.

बस स्टॉप के नज़दीक पहुंची तोह पायी की बुसस स्टॉप अब वहां पर नहीं था .. और बारिश भी हलके से होने लगी थी , और फिर थोड़ी तेज़ी से …

लेकिन बारिश बहुत जोरों से होने लगी और तेज़ हवा थी जो मेरी साड़ी को उड़ने की कोशिश कर रही थी . तोह में सोची की थोड़ी देर के लिए किसी नज़दीक के घर के शेल्टर में वेट कर लेती हूँ बारिश स्लो होने तक. बारिश इतनी हैवी थी की सिर्फ 3-4 मिनट्स में hi में पूरी भीग गयी. मेरी साड़ी मेरे ब्लाउज से चिपक गयी, मेरे जिस्म के सब कर्व्स नजर अन्य लगे.

"बारिश तोह और तेज़ हो रही थी और क्लाउड्स भी कितने डार्क हो गए थे…. मैं तोह बिलकुल रेस्टलेस हो रही थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करूँ, तभी मेरे पीछे का दूर खुला और मैंने सुना कोई मुझे बुला रहा है."

“Hello मैडम आप हो न उस दिन मेरे मोमोस की स्टाल पर आयी थी?"

मई तोह शॉक हो गयी उस मोमो स्टाल वाले बुद्धा को देह.

वह आगे बोले, "इतना चौंक क्यों हो रही हो, मैं तोह यहाँ पिछले 20 साल से रह रही हूँ आप मेरे घर के सामने मेरी कुश किस्मत हैं. तुम अंडर आजाओ."

में रिस्पांस ही नहीं दी, कैसे में किसी गैर मर्द के घर जाओ वह भी इस बुड्ढे के घर, उससे तोह बस एक बार मिली थी. में कुछ टाइम वही भीगती रही.

फिर वह बुद्धा बोलै - "इस प्रकार कब तक भिगो गई. बारिश रुक जाएगी तो चली जाना, घर भी फ़ोन करिये की आप इधर हो".

अब में किसे फ़ोन करती, रोनित तोह घर पर था hi नहीं और फ़ोन भी उठता नहीं था मेरा. कहाँ में असलम को तंग करू इस समय और सलीम तोह न जाने कहाँ हैं… बस रमेश जी को एक मश्ग करती हूँ. तोह मैंने उन्हें लोकेशन भी मश्ग करि लेकिन सेंड hi नहीं हो रही थी मैसेज लेकिन में भी ज्यादा रुक नहीं सकीय क्यूंकि मैं बहुत भीग गई थी.

वह बुद्धा बहुत पुकार रहा था और में सोची अब भीगने से और सर्दी होने से बेहतर हैं अंदर जाऊ.

मुझे थोड़ी हिचकिचाहट तोह हुई, पर मई अंदर चली गयी. अंदर जातो hi हाय, कितनी रहत मिली! मई खुद को सँभालने की कोशिश कर रही थी और साड़ी मेरे बदन से चिपक गयी, मेरी कर्व्स दिखा रही थी.





वह बना और पजामा पहने हुए थे, उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और वह लगभग 65 साल के थे.

"आप को कष्ट डे रही हूँ, जैसे हे बारिश थोड़ा रूकती है मैं चली जाऊंगी. ी ऍम सॉरी आप का कमरा भी गीला हो रहा है."

"ओह कोई बात नहीं, आप के कारन गीला होने मैं कोई आपात नहीं है. ो हाँ मेरा नाम किशोर है. मैडम उस दिन आपका नाम नहीं बताया था आपने .. आपका नाम तोह बताइये."

"मेरा नाम रौशनी है."

"रौशनी, तुम आराम से बैठ जाओ, मैं तुम्हारे लिया चाय लेकर आता हूँ," उसने बोलै और किचन की तरफ चल diya....aadhe रास्ते से वह पीछे मुद कर बोले, “माफ़ कीजिये, मेरे घर मैं कोई महिला नहीं है, लेकिन तुम यह गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए, रुको में तुमको मेरा ड्रेसिंग गाउन देता हूँ" तुम वो पहन कर अपना कपड़ा सूखा लू, फिर बारिश रुकते चली जाना."

"शुक्रिया किशोर जी लेकिन बारिश लगता हैं अभी बारिश रुक जाएगी तो मैं चली जाऊँगी, अभी के लिए साड़ी ok हैं."

"अरे नहीं रौशनी, ऐसे गीले कपड़ो में नहीं रहना चाहिए, सर्दी लग जायेगी तुझे. उनकी कोई गन्दी नियत तोह नहीं लग रही थी, और मुझे भी अजीब नहीं लगा बिलकुल. फिर उन्होंने मुझे बाथरूम दिखाया, किशोर जी ने अपना गाउन और एक बड़ा टॉवल दिया मुझे.

"यहां कोई नहीं आएगा, तुम अपना बदन टॉवल से सूखा के, मेरा गाउन पहन लो, मेरे पास एक इस्त्री हैं, थोड़े ड्राई होने पर उसे इस्त्री कर दूंगा देंगे . फिर बारिश रुकते hi चली जाना."

जैसे hi वह किचन की तरफ मुड़ने लगा, उसके पाजामे में उसके लुंड का आउटलाइन दिख रहा था...

ीाजीब सी फीलिंग आ रही थी एक अनजान के घर में नंगी होते हुए और बहार बारिश भी हो रही थी... कितना एक्सोटिक सन था यह.... मैंने अपनी साड़ी, ब्लाउज, उतार दी लेकिन ब्रा और पंतय बदन पर hi राखी. फिर एक फ्रेश टॉवल से अपनी बॉडी क्लीन करि.

एक अलग hi स्ट्रेंज और इरोटिक फीलिंग के साथ साथ मेरी छूट गीली गीली हो रही थी और अजीब सेंसेशन हो रहा था.

मैने अजनबी मर्द के गाउन अपने नंग बदन पर पहनी. मैं अभी भी अपने को नंगी महसूस कर रही थे और मुझे बहार जाते शर्म ा रही थी. इतने मैं बहार से आवाज आई रौशनी, चाय तैयार है…..

में बोली "हाँ जी मैं भी तैयार हूँ…"

बाथरूम से कमरे मैं आई, तो अपने को मिरर मैं देख कर ऐसा लगा जैसे कोई मस्त अप्सरा अपने प्रेमी के पास जा रही हो.

किशोर जी की बीएड पर गन्दी चादर पारी थे…. मन मैं आयी बात की, यहाँ लेट जाऊं और आंखे बंद करून . गाउन संभालते हॉल मैं आई तो चाय और कुछ बिस्कुट माइज़ पर रखे थे मैं उनके सामने कुर्सी पर बैठ गई और चाय का थैंक यू कहकर च पीने लगी.

मेरे मन मैं किया हो रहा था मुझे नहीं मालूम, एक तरफ तो ऐसा सेक्सी मौसम, फिर, अजनबी मर्द के घर. मैं इन सोच मैं थी की, मैं यह भी भूल गई की मेरे सामने किशोर जी बैठे hain…aur मुझे भी कुछ बोलना चाहयिये.

"आप की बीवी नहीं हैं?”

"मेरी बीवी तोह 15 साल पहले hi गुज़र गयी"

"ओह फिर किशोर जी अआप ने फिर से शादी नहीं की?"

" ममम रौशनी अब क्या करू कोई तुम जैसी सुंदरी मिली hi नहीं !!"

में मुस्कुरायी और मंद hi मंद शर्मायी.





हम लोग बातें करते और चाय पेटे जा रही थे…. बारिश अभी भी हो रही थी.. कभी कभी बिजली और थंडर भी बहुत करक हो रही थे. मौसम और किशोर जी की बातों से मैं भूल गई की मेरा गाउन सामने से सिडेवेस चला गया है और मेरी पिंक पंतय पूरी तरह से साफ़ साफ़ नजर आ रही थी.

"किशोर तोह बड़े गौर से यह सब देख रहे थे, किसी भी मर्द के लिए क्या मस्त नज़ारा था, अपनी इरेक्शन कण्ट्रोल कर रहे थे. उनकी नज़रें और बदलता पोस्चर देख कर, मैंने भी नीचे देखा तोह मेरी तोह हालत ख़राब… है राम, मेरे मुँह से अचानक निकला, यह क्या हो गया, यह बोलके शर्मा के और घबरा के मैंने जल्दी से कवर करने की कोशिश की.

किशोर; “अगर भगवन मुझे भी ऐसी सूंदर लड़की

देता जैसी आपके पति को मिली तो मेरे घर मैं भी इस

वक़्त मौसम की रंगीनता का पूरा लुत्फ़ आता……..…..

में: “ओह हो आप को बात करना बहुत आता है, मैं तो कोई ऐसी खूबसूरत नहीं हूँ”

किशोर: “रौशनी, मैने जितना कुछ अभी तक देखा

है, तुम किसी अप्सरा से काम नहीं….

में शर्मायी उनकी बस्तों को सुनते hi.

में: मगर किशोर जी आप भी तो इतने चाय हो आप को

तो कोई भी लड़की NO नहीं कह सकती.

किशोर: रियली, तुम मजुके तब मिलती तोह तुम भी हाँ कहती ?????

उफ़, उसकी वह नॉटी सी स्माइल थी और वह मेरी बूब्स को साइड से हल्का हल्का दिखने पर घूर रहा था.

मेरा दिल जोड़े जोड़े से धारक रहा था और मेरी छूट

मैं चींटी चल रही थी.. मैं उनकी ख़ुशी रखने कही , “Such……tab मेरी तरफ से हाँ होती”…. अचानक सी बिजली कड़की और िन्नी कोरों से आवाज़ आयी की में सीहे किशोर जी

से लपट गई, उनका खरा होता लुंड मेरी छूट के करीब होता जा रहा था.

"वह एक और कदम आगे बढ़ा, मेरे पास आया और मेरी गाउन पकड़ के, कंधे से गिरा दी, और मुझे उसके सामने सर मेरी नेटेड ब्रा और पंतय में कड़ी थी.





में मुश्किल से अपनी नेटेड ब्रा और पंतय को अपने हाथों से छिपाने की कोषसिंह करि.

“चलो रौशनी, आज की बरसात का दिन हम यादगार दिन

बनादें……. उस ने एकदम से अपनी पंतय उतरी और उनका लुंड अब एक्सपोज्ड था मेरे सम्मे . उनका लुंड बड़ा मोटा था लेकिन ज्यादा लम्बा नहीं.

में चाय पीना ख़तम करि तोह कुछ hi सेकण्ड्स में मुझे कुछ अजीब सा लगा .. मनो कोई नशा चढ़ा हो .. उफ़ क्या इस बुद्धा ने मेरे चाय में कुछ नशीली चीज़ डाली थी … ..

में देख सकीय की वहां उस बुड्ढे के चेहरे पर एक अलग hi मुस्कान थी … वह मेरे तरफ बढ़ने लगा .. में उसे रोकना चाहती थी लेकिन अब नशा चढ़ रहा था और रोक न पायी. अब किशोर मेरे पास था और मेरे को पकड़ कर अब उसने मेरे चूचियों को ब्रा के ऊपर से इतनी जोर से दबाने लगा की दर्द के मारे में आए चीखी. उसने झट से ब्रा निकली और में अब टॉपलेस थी .

वह मेरे सरीर को इस तरह मसल रहे थे की मेरे चूचियों पे उसकी उंगलिओ के निशान बन गए थे. फिर उसने मुझे अपनी गिरफ्त में और दबा के पकड़ लिए.

“चल साली अभ मौका मिला हैं , तेरे जैसी दूदू जैसी मक्खन माल की अब बजता हु”

मुझे खड़ा करके उसने मेरे बाल पकड़ के मुझे एक टेबल के पास धकेल ता गया. जब पीछे दिवार आगयी तो मेरे बाल को कीचते हुवे मेरे होतो पे आपने कल्ले भद्दे होठों को रख के इतनी जोर से किश करने लगा. अपनी जीभ मेरे मुहु में गणउस कर दाल दी और एक हाथ मेरे दायी चुकी पे लेजा के मेरा मेरी चुकी को जोर से दबाने लगा. निचे से मेरी झांग पे उसे मोठे लुंड दबने लगा. कमीना बुद्धा मुझे इस्तहारा नोच ने लगा की मुझे दार लगने लगा .. अब उसने मेरे होटों को छोड़ अभ मेरे गले पे अपनी जुबान फिरने लगा. मेरे पुरे फेस को अपनी जुबान से चाटने लगा. मेरे दोनों चूचियों को वह जोर से दबा के निचे निप्पल्स को जुबान से चाट ने लगा. राइट निप्पल को मुहु में भर के इतने जोर से चूसा की मेरी जान निकल गयी. उसके चूसने से मार्क हो गया. फिर लेफ्ट निप्पल को चूसा. निप्पल चूसते चूसते माय सूचियों को भी इतनी जोरो से दबाता था.

वह bola“Sali क्या बॉल है तेरे, जी करता है खा जावु उन्हें है तू साली तेरे मर्द ने जब तेरी छूट में पहेली बार लुंड डाला होगा क्या मजा आया होगा सेल को”

इतना बोलके मेरी कमर को दोनों हाथो से पकड़ के मुझसे जोर से चिपक गया. उसके हाथ कमर से होते हुवे मेरी पीठ पे आगये मुझे और अपनी और दबोचा उसने. में इस हंसले से एकदम शॉक थी .. वह मुझे पर फाॅर्स कर रहा था खुद को .. में इस जानवर से नहीं कुछ करना चाहती थी. लेकिन उस चाय में उसने ऐसा कुछ मिलाया था की में उसे रोक न पाई..

अब किशोर ने मुझे घुटनो के बल फाॅर्स कर उसने मेरे सर को हाथों से थमा और अपना लुंड मेरे होंठों से सत्ता दिया. “मुंह खोल” उसने ने कहा. “नननननहह” कर में मुंह को जोरसे बंद करती हुयी , इंकार में सर हिलाया.

“ऐरे तू साली मुंह नहीं खोल रही है. इसका इलाज करता हूँ” . उसने मेरी निप्पल्स की इतनी जोर से चुटकी बजायी की में “आआआआह” करके चीख उठी और उसका मोटा तगड़ा मोटा लुंड मेरे मुंह में समता चला गया. मेरे मुंह से “गुण गऊओं” जैसी आवाजें निकल रही थी. उसके लुंड से अलग तरह की स्मेल आरही थी मुझे उलटी जैसी आई और मई उसके लुंड को अपने मुंह से निकल देना चाहती थी मगर उसने मेरे सर को सख्ती से अपने लुंड पर दबाये हुए था. जब मई थोड़ी शांत हुई तो उसका लुंड मेरे मुँह के अंदर बहार होने लगा.

बुड्ढे ने आधा लुंड बहार निकाल कर फिर से तेजी से अंदर डालने लगा. उसला मोटा लुंड मेरे गले तक पहुँच जाता था. इसी तरह कुछ देर तक मेरे मुंह को छोड़ता रहा







में तड़पती रही , बेबस .. क्या मेरा आज ये बुद्धा बलात्कार करने वाला था …





अचानक से दरवाज़ा खुला . मेरी नज़र नशे से धुंधली होते जा रही थी लेकिन में देखा सकीय की वह रमेश थे .. उसने जोरों से किशोर बुड्ढे को एक पक्का मारा और वाओ ज़मीन पर गिर गया और उसज़ मुँह से खून आ रहा था .. रमेश उसपर चढ़ा था और उसकी पिटाई कर रहा था … मेरी धुंधली नज़र से में दिल्ली की अहन वह बुड्ढे के मुँह से खून आता हुआ ज़मीन पर था. और मेरी आँखें बंद हो गयी…
 
रौशनी की ानकेहिं खुली … वह एकदम से उठ गयी और इधर उधर देखने लगी ..

ेओ खिड़की से सुबह की सनलाइट आ रही थी उसके चेहरे पर चमकने लगी.

फिर उसे एक दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनाई दी. वह चौंकी और सोची की वह बुद्धा किशोर वापस आया होगा .. सूरज की रौशनी में वह कीच देख नहज पाएगी लेकिन जब देख सकीय तोह वह पायी की दरवाज़े से आता हुआ शख्स रमेश जी hi थे ..

और उसे सब याद आया कैसे रमेश ने उसकी बलात्कार होने से बचा लिया था . रमेश पास आते hi रौशनी उठी और रमेश को झट से गले लगा लिया ..

“शुक्रिया रमेश जी आपने मेरी लाज बचाई.”

“अरे रौशनी यह मेरा फ़र्ज़ था , तुमने वह लोकेशन मैसेज कर अच्छी बात करि, उस के मदत से में सही वक़्त पर पहुंच पाया.”

“हाँ शुक्रिया रमेश जी .. और रौशनी रमेश के साइन से लिपट गयी ..”

रमेश ने भी उसे अपने बाँहों में लपेट लिया अपने हाथों को उसकी मुलायम पीठ पर फेरने लगा .. रौशनी ने अपना सर उसकी छाती अपर रख खुद को उनकी बाँहों में सुकून पायी.

कुछ मं ऐसे hi लिपटे रहने बाद दोनों एक दूसरे की आँखों में आक्न्हें दाल फॉर दोनों के होठं .. रौशनी की गुलाबी होठं और रमेश के काळा होठं काफी करीब थे .. और कुछ सेकण्ड्स में दोनों के होठं एक दूसरे से मिले और दोनों गहरी चुम्बन में लग गए.

रौशनी ने अपने बाँहों को रमेश के इर्द गिर्द रख जोरों से उन्हें चूमने लगी…

कुछ 5 मं की चुंबन की बाद रौशनी बोली

“माफ़ करिये में कल आप से ग़ुस्से में कुछ बोली दी ..”

“अरे रौशनी तुम्हारा ग़ुस्सा जाइएज था . मुझे यकीन था की नहीं होगी राइड लेकिन अब पता हैं कुछ व्ही हो सकता हैं तोह मैंने उस गार्ड को कुछ पैसे दिए बताने के लिए अगर राइड होगी तोह , ताकि हमें नुक्सान नहीं होगा. वैसे भी ऐसी जगहों में ऐसे रिस्क होते hi हैं रौशनी .”

“हाँ फिर से सॉरी कहती हूँ आपसे .. सही हैं आपकी बात भी.”

फिर दोनों एक दूसरे को चूमते है और रमेश बोलता हैं.”

रौशनी जी आपने मेरी उस दिन के प्रस्ताव के बारे में कुछ सोचोगे फिर से”

“हम्म ठीक हैं लेकिन मुझे थोड़ा वक़्त दीजिये .. बस कल तक बता दूंगी आपको.”

“Ok रौशनी जी , बस कल सुबह तक बताइये. चलो आपको आपके घर छोर देता हूँ.”

“शुक्रिया रमेश जी ..चलिए.”

रमेश , रौशनी को घर छोर देता हैं .

रौशनी बिस्तर पर लेते सोचती हैं की रात को सच में उसका बलात्कार्र होने hi वाला था .. रमेश जी ने बचा लिया , ज़िन्दगी भर उस एहसान को कैसे चुकौ..

कुछ टाइम आराम करने के बाद रौशनी फ्रेश हो जाती हैं क्यूंकि उसे ंगो जाना था.

तैयार होकर निचे रमेश अपने रिक्शा में उसके इंतेज़्ज़र कर रहा होता हैं और वह रिक्शा में बैठ ंगो चली जाती हैं.

दिन भर काम बाबत होने के रमेश उसे और कुछ सोचने की फुर्सत hi नहीं होती. फिर शाम को काम होने के बाद वह निकलने वाली थी . रमेश भी आज कुछ काम की वजह से शाम को नहीं आने वाले थे इसलिए रौशनी सोचती हैं की वह असलम से मिलने जाएगी..

वह कुछ नज़दीक पहुँचते hi ेलदुम से फिर से जोरों से बारिश आ रही थी.

वह भाग कर असलम के घर पहुँचती hi हैं की उसे अंदर से कुछ आवाज़ें आने लगती हैं.. उनके घर के वह एक खिड़की थी वह वहां रौशनी अंदर देखती हैं और जो डेक्टि हैं उसे देख चौंक जाती हैं.

वहां सलीम किसी महिले के साथ बिस्तर पर उसकी चुदाई कर रहे थे.

“उफ्फ्फ अह्ह्ह ममम सलीम मिया उफ्फ्फ ममम क्या चुदाई कर रहे हो ममममम”

“अरे जानेमन तेरी छूट hi इतनी मस्त हैं , मेरी बड़े लोडे से देख कैसे तेरी हालत ख़राब का रहा हूँ उफ्फ्फ एले मम ले मेरी लोडे को तेरे इस बुर में”

“अह्ह्ह क्या बातें करते हो सलीम मिया उफ्फफ्फ्फ़ , ऐसा दमदार लुंड को बस खुशनसीब लड़कियों और औरतों को मिलता हैं उफ्फ्फ ममममम पहले तोह में आपसे डर्टी थी लेकिन उफ्फ्फ्फ़ ममम अब बस हवस की नज़रों से देखती हूँ आपको मममम छोड़िये मेरी छूट अह्ह्ह्ह”

“अरे ये ले कुटिया , ये ले मेरी घोड़े जैसा लुंड तेरी इस बुर में अह्ह्ह ये ले उफ्फ्फ ममम”

“उफ़ मेरी चूड़ाकड यार मममम पता नहीं था आप जैसे बुड्ढे में भी ऐसी चुदाई की ताक़त होगी मम उफ्फ्फ दे दो आपका लुंड मेरी इस छूट में अह्ह्ह, आपके इस लोडे को सलाम उफ्फ्फ्फ़”

… रौशनी को कुछ समय तक उस महिला का चेहरा नहीं दिख पता , लेकिन आखिर में दिख जाता हैं चेहरा और वह चेहरा और किसी का नहीं बल्कि था मीनल का चेहरा..

रौशनी के मन में ग़ुस्सा आने लगा मन में कही तोह जैपुश्य भी .. की कमीना सलीम उस मीनल की चुदाई कर रहे हैं…

जोरों की चुदाई चल रही थी … मीनल निचे लेते उचका उचका कर सलीम के ढाकों का साथ दे रही थी और चुद रही थी जोरों से…

वहां वह कला सांड सलीम भी उसकी बेहरहमी से चुदाई कर रहे थे ..











रौशनी वहां से फ़ौरन चली जाती हैं और एक रिक्शा में बैठ अपने घर चली जाती हैं. मन में ग़ुस्सा था उसके .. उस इ रमेश को कॉल की और बोली की वोन तैयार थी उनके साथ आने लेकिन उन्हें सैक ंज सच सब बता होगा की क्यों उसे वह ले जाना चाहते हैं फर hi वह आएगी. रमेश हाँ कहता हैं , कल वह बताएगा सब कुछ डिटेल में.

रौशनी ठीक हैं कहकर फ़ोन रखती हैं. वह बिस्तर पर सोने लगती हैं लेकिन सलीम और मीनल की चुदाई उसके आँखों के सामने आती रहती हैं. उसका ग़ुस्सा सलीम के प्रति काफी बढ़ चूका था.. साला उस छिनाल मीनल की चुदाई कर रहा हैं, मुझे उन्होंने बताया तक नहीं की वह वापस आए हैं.. और उस मीनल की चुदाई कर रहा हैं मेरी नहीं .. कमीना कही का.

बस ऐसे hi सोच विचार मन में आटे आते रौशनी आखिर कर सो जाती हैं..

अगले दिन रमेश के रिक्शा में रौशनी , रमेश को पूछती हैं की उसे hi क्यों आना था उसके पुराने गाँव.

रमेश कहता हैं.

“रौशनी बात हैं की मेरी पुराने गाँव में मेरी पुश्तैनी ज़मीन हैं, छोटी से hi हैं . अब पुराने गाँव की तोह छोर अर्ज़ा बीत गया और में वहां बस 12 साल की उम्र कर hi था फिर भी वहां के मेरी मां हैं और उन्होंने अपनी वसीयत में मेरा नाम लिखा था.

लेकिन प्रॉब्लम हैं की वह चाहते हैं में अपनी बीवी को भी वहां लाऊँ . लेकिन मेरी बीवी रथ यात्रा पर गयी हुयी हैं और वह अगले महीने hi आएगी. में बीवी को ले नहीं आया तोह वह मेरी दूसरे परिवार वालों को ज़मीन देंगे और मेरा बहुत नुक्सान होगा क्यूंकि ज़मीन काफी अच्छी हैं.

“अच्छा आप सच कह रहे हो न ..”

“सच हैं सब , अब क्या बताऊ आपको .. आपको नहीं आना तोह मत आइये फाॅर्स तोह नहीं करूँगा .. बस बिनती थी आपसे ..”

“लेकिन रमेश जी उन्हें तोह आओ क बीवी पता होगी .. मुझे देखेंगे तोह जान जाएंगे में आपकी बीवी नहीं हूँ. फिर कैसे”

“रौशनी जी बात यह हैं की उन्होंने कभी मेरी बीवी को नहीं देखा हैं, उन्हें तोह शादी पर भी नहीं बुलाया था . इसीलिए आप मेरी बीवी हो उसमें उन्हें शक नहीं होगा.”

“लेकिन रमेश जी आपकी और मेरी उम्र में अंतर हैं, उन्हें कैसे समझाओगे आपसे काम उम्र वाली लेडीज से शादी करि हैं”

“रौशनी जी उन्हें कुछ नहीं पता , लेकिन हाँ रिस्क तोह हैं लेकिन मुझे यकीन हैं की उन्हें आप यकीन दिलाओगी की आप hi मेरी बीवी हैं. फाॅर्स नहीं करूँगा आपको , आपकी मर्ज़ी”

रौशनी सोचती हैं (रमेश जी ने उस रात उसकी इज़्ज़त बचाई थी,, अब मौका था उनके लिए कुछ करने का और उनका एहसान चुकाने का.

रौशनी हाँ में सर हिलाते हुए “हाँ आउंगी में आपकी पत्नी बनकर .. और रौशनी शर्माती हैं.. उसने असलम और सलीम , दो बुद्धों से un-officially निकाह करने के लिए राज़ी ह्यु थी और अब वह रमेश बुड्ढे की ुनोफ़्फ़िसल पत्नी बनने को भी राज़ी हुयी हैं उफ्फफ्फ्फ़. “

बस और क्या अगले दिन जाने की तैयारी बाकी थी .. और दो दिन तक उसे अब रमेश की बीवी बनना था .. उफ्फफ्फ्फ़.

रमेश ने रौशनी के लिए एक मंगल सूत्र लाया था पहनने और एक नयी साड़ी जो गाँव के लेडीज पहनते हैं. वह साड़ी ऐसी थी की उसे ब्लाउज एक साइज काम थी और उस वजह से उसकी चकहियाँ ऊपर की तरफ पुश हो गयी थी और अगर वह जरा सą भी झक्ति तोह उसकी चूचियों की करार न hi sırf दिक्ति , उसकी चूचियां यही बहार आने की चान्सेस थे …

उफ्फ्फ ऐसे सोच से रौशनी शर्म से लाल हो गयी.

फिर रौशनी ने उसके हाथो में एल्बो तक रेड एंड वाइट कॉम्बिनेशन की चुडिया पहनी ली , बिलकुल वैसे hi जैसे एक गाँव की शादी शुदा औरत पहनती है. उसने ऊपर से घूँघट ओढ़ ली ताकि बहार कोई उसे ऐसे न देख सके.





अपने माथे पर एक लाल कलर की सुन्दर बिंदी लगा वह तैयार हो गई… और निचे अपने सोसाइटी के कुछ दुरी पर रमेश का इंतज़ार करि.

रौशनी को देख रमेश मज़्ज़ाकिये अंदाज़ में कहते हुए “ओह रौशनी उफ़ मेरी बीवी इतनी सुन्दर और मस्त , मेरी तोह भाग्य खुल गए ..”

रौशनी , रमेश के मुँह से उसे उसकी बीवी बुलाते हुए सुन शर्म से लाल लाल हो जाती हैं. फिर दोनों बस स्टॉप एक रिक्शा से जाते हैं और उसकी गाँव के एक बस में चढ़ बैठ जाते हैं आखिरी सीट के एक कोने में जाकर.

बस में रौशनी रमेश से एकदम सात क बैठी थी और अपना सर उनके खंड पर राखी थी.

रमेश उसे प्यार से देख रहे the.use तो विश्वास hi नहीं हो रहा था की रौशनी उसकी पत्नी बनकर गाँव जा रही हैं.

बस में रौशनी खुद को रमेश के काफी करीब पाकर उसे उस दिन की बस की यात्रा मन में आयी जो उसने असलम और सलीम के साथ करि थी. उस बस में दोनों ने तोह उसे बीच में रख उसका पूरा रास निचोड़ा था और फिर वहां उस लॉज में ले जाकर दो रातों तक उसकी बुरी तरह से चुदाई कर उसका पूरा रास फिर से निचोड़ा था .. उसे अब तक उतनी तोह समझ आ चुकी थी की रमेश उसे अपने गाँव उसकी बीवी बनाकर ले जाकर उसका भी पूरा रास निचोड़ने वाला था दो दिन जो वह वहां रहने वाली थी. इसी कामुक सोच के साथ उसकी बुर में हलके से नमी भरने लगी और उसकी गर्मी बढ़ने लगी थी.

सुबह का वांट था उसकी नींद अभी यही पूरी नहीं हुयी थी इसीलिए बस में तोह कुछ न हुआ .. आखिर कर दोनों रमेश के गाँव पहुँच hi गए.

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हम लोग गाओं पहुँच गए. जैसे hi हम बस से उतरे, मैं देखि की कुछ लोग गारलैंड और बॉकेट्स के साथ जमे हुए हैं. रमेश मेरी कानों में बोले,

"रौशनी, यह मेरी मां की फॅमिली है, वह लोग हमारा स्वाग करने आये हैं." मेरी मां, उनका नाम है मुकेश. उनके पेअर चुकार उन्हें ग्रीट करना और उनके ब्लेस्सिंग्स लेना. मुकेश मां और उनके फॅमिली मेंबर्स के साथ कुछ जाने पहचाने विल्लागेरस ने मेरा गारलैंड से और रमेश को बुके देकर स्वागत किया. में निचे झझक कर मुकेश मां के पेअर छुए और मुझे गारलैंड करते वक़्त, मुकेश मां ने ब्लाउज के ऊपर से मेरी चूचियां को हलके से प्रेस की और मुझे देखे और स्माइल की, जैसे मुझे कुछ हिंट दे रहे हों.

मुझे रीलीज़ हुआ की रमेश के यह मां तोह ठरकी हो सकते हैं और मुझे सरप्राइज हुआ की उनके press-touch से मुझे मेरी झंघों के बीच में नमी फील हुई. एक स्ट्रेंजर मेरी चूचियों को प्रेस कर रहे थे और मैं एन्जॉय कर रही थी. )उफ़, मुझे क्या हो गया है, मैं सोचती रही. )

गीता, जो उनकी बेटी थी, ने एक टिपिकल विलेज टाइप साड़ी पहनी हुई थी और मुझे और रमेश को हुग किया. मुकेश मां और बाकी मर्द लोग धोती और कुरता में थे.

मुकेश का टिपिकल पुअर फार्मर मन बदन नहीं था. उन्होंने एक स्माल गोल्ड चैन पहनी हुई थी, जो उनके घने बालों वाले चट्टी पर रेस्ट कर रही थी. उनके कुर्ते के जिसके टॉप के दो बटन्स लूसे थे सीस में से में उनके घने सफ़ेद बालों को देख प् रही थी. उन्होंने एक गोल्ड ब्रेसलेट और गोल्ड रिंग्स भी पहने थे और राइट वृस्त में एक पुराणी घडी, माथे पर एक तिलक और डार्क और थिक मच थी ऊनि. वह एक घने बालों वाले मर्द थे, जिनके बॉडी पर बाल hi बाल थे.

अब रमेश और असलम और सलीम के साथ, अपने एक्सपीरियंस से मैं सीखी हूँ की जिन मर्दों के पूरे बदन पर बाल होते हैं, वह बिस्तर में काफी हॉर्नी होते hain.Mein मन मैं सोची की यह मां मेरी साथ मस्ती करने की तरय करेंगे, और मुझे उनसे बच कर सवधननि बरनि पड़ेगी.

गारलैंड पहना कर और एक दूसरे को ग्रीट करने के बाद, हमे एक गाडी से एक विलेज हूत हाउस में गाइड की गया, जिसकी सीमेंट शीट रूफिंग थी और बहार एक गेस्टों का गोत्ता था और वहां से cow-dung की स्मेल आ रही थी.

वह हूत हाउस काफी बड़ा था एक गाँव के घर के लिए, जिसमें 3 रूम्स थे बड़े दरवाज़ों के साथ. वाल्स और डोर्स में कुछ स्माल गैप्स थे, जिससे आउटसाइड और दूसरी साइड की रोड़ा कुछ दिख सकता था गौर से देखेगा कोई तोह.

फिर मुकेश मां ने मुझे और रमेश को देखा और एक कहे, "रमेश, त्यार हो जा, ठहरे और ठहरी लुगाई खातिर एक घंटे में छोटा सो प्रोग्राम रेक हैं गाँव वालों ने.*"

लुगाई शब्द सुन में मन hi मन शर्मायी .. उफ्फ्फ हाँ में तोह दो दिन रमेश की लूग hi बनकर आयी हूँ उफ्फफ्फ्फ़.

उनकी बेटी गीता ने मुझे एक साड़ी दी और उसको पेहेन्ने के लिए कही. रमेश चेंज नहीं करे, लेकिन मैं अपनी साड़ी रिमूव की और गीता की दी हुई साड़ी पहनी, जो एक पलाइन पीच कलर साड़ी थी, शामे कलर पेटीकोट, पीछे से प्यूरीन जाम्बे वाले हुक वाले पूरी कवर करने वाली ब्लाउज लेकिन स्लीवलेस.

हमारे लिए एक छोटा सा डिनर अर्रंगे की गया था, एकदम टिपिकल विलेज स्टाइल में - रोटी, दाल, खिचड़ी, बैंगन (ब्रिंजल), मिक्स वेजिटेबल, तीखी लाल और हरी चिल्ली चटनी, बैंगन भरता और कला जमुनस. डिनर गरम था और हमने मज़े से खाना खाये. फिर खाने के बाद गीता अपने घर चली गयी और में मुकेश मां और रमेश स्टेज पर, जहाँ फंक्शन था, थोड़ी देर बातें किये, फिर कुछ और लोग भी चले गए. हम चार लोग थे वहां, रमेश, मुकेश मां, उनका एक अटेंडेंट और मैं. थोड़ी देर में मुकेश मां भी उनके घर के लिए निकल गए.

अब मैं और रमेश hi बचे थे, और रमेश, जो मेरी पास बैठे थे, मेरी बॉडी से छेड़खानी करने लगे. हु अपने हाथों से बार बार मेरी पल्लू गिरा रहे थे बातों बातों में . मैं भी बार बार अपना पल्लू अपने शोल्डर पर रख रही थी.

अचानक से रमेश ने मुझे पंडाल के पीछे खींच लिया और 'पंडाल' के एक बम्बू बार पर टिका दिया. पीछे से उन्होंने मेरी ब्लाउज की हुक्स खोल दी और मेरी पीठ को चूमने लगे , मैं ब्रा नहीं पहनी थी क्यूंकि ब्लाउज पहले से hi टाइट थी. फिर उन्होंने मेरी साड़ी मेरी कमर से ऊपर उठाई और फिर मेरी चिकनी झंघों को चूमने लगे ,मेरी अब गिल्ली पंतय को चूमे और मुझे 2-3 बार मेरी चूतड़ों को दबाये.





"अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह"! मैं एक्ससिटेमेंट में सिसकियाँ दे रही थी. फिर वह मेरी नाभि पर चूमे और ब्लाउज कप्स को मेरी नीचे धकेल कर मेरी निप्पल्स को बाईट किये और मेरी बड़े चूचियों को चाटने लगे. उसने अपना सर मेरी पंतय पर गाइड करे.

मैं एक हलकी सी आह भरी "अहह उठ उफ्फ्फ्फ़ ममममममम" रमेश ने मेरी पंतय के ऊपर से मेरी बुर की सुगंध लेनी शुरू कर दी. ऊपर लाइट की वजह से वह मेरी बुर देख सकते थे. फिर उन्होंने अपने लिप्स मेरी छूट के लिप्स पर लगा दिए और चाटने लगę. मैं अपने नंग चूचियों को मस्सगे करने में बिजी थी.

रमेश बोले, "तेरी बुर तोह कमाल की है रौशनी उफ्फ्फ. तेरे चकहियाँ के निप्पल्स देखो रेज खड़े हैं … उफ्फ्फ तुम बनी उतावली होते जा रही हो न डालरिंग मममम.”

फिर वह मेरी पंतय को साइड कर मेरी छूट को चाटने लगे और अपने हाथों से मेरी चूचियों को मसलने लगे.

मेरी सिसकियाँ तेज़ होने लगी "आह, आह अह्हह्ह्ह्ह, ओह्ह्ह्हह्ह, अह्ह्ह्हह, आह, उन्ह, उन्ह, उन्ह, उह, उह, अहं अहं, हाँ, हँ, हँ, Hun,chusiye मेरी बुर मममम!”





रमेश खड़ा हुआ और मुझे अपने घुटनो पर झुकाया और अपनी पंत की ज़िप खोली और में उनके मोठे लुंड को चाटने लगी ..





रमेश अपने खड़े लुंड के ब्लोजॉब के लिए मेरी मुँह में में धकेलने वाले hi थे ..

उनका लुंड मेरी गुलाबी होठनो को छू गए की कुछ अफवास आई और में कणुड को संभाली .. समझ आ गयी की में तोह एक ओपन पंडाल पर ऐसे सब अश्लील चीज़ें कर रही थी उफ्फ्फ्फ़..

मैं उठ गयी और मैं अपनी ब्लाउज और पेटीकोट एडजस्ट की और अपनी साड़ी ठीक से पहन ली. रमेश ने भी अपनी पंत ज़िप ऊपर कर ली. यह सब सही टाइम पर हुआ क्यूंकि मुकेश मां और उनकी बेटी गीता ने हमें ज्वाइन किया.

रात के 10 बज रहे थे. हम घर पहुंचे.

मुकेश मां बोले “थे दोनों lugai-dhani सो jao,Kaal बात करसा.

फिर मुकेश मां अपनी बेटी के साथ चले गए. उन्हें जस्ते देख मुझे यह बात अजीब लगी की मुकेश मां अपनी बेटी को कास कर उसकी कमर को पकडे हुए जा रहे थे. मुझे याद है रमेश और सलीम, असलम मुझे ऐसी hi कमर जकड़े पास राकी चलते थे जब उन्हें मस्ती सूझती थी.

मुझे लगा की मुकेश मां और उनकी बेटी के बीच कुछ यौन सम्बन्ध तोह थे ज़रूर.

वहां में और रमेश खःद को कमरे में अकेले पाए … आए तोह रमेश जी और मेरी बीच फाई काफी कुछ होने वाला था क्यूंकि में कुछ प्लान करके आई थी… और में उस सोच से शर्मायी.

वन्स थे हद गॉन एंड वे वेरे इनसाइड, ी टर्न्ड अराउंड एंड किस्ड रमेश. थे इंसिडेंट इन थे पंडाल हद मेड में वैरी हॉर्नी एंड ी वांटेड तो एन्जॉय थिस नाईट विथ रमेश.

"दरवाज़ा बंद करो रमेश जी. फिर, पलंग पर बैठो और अपनी आँखें बंद करो, जब तक मैं कपडे पहन लूँ. कोई झांकना नहीं." मैं कहा और परदे के पीछे चली गयी और तैयार होने लगी. रमेश ने मुझे चूमा. उसने वही की जो मैं उसे बताया था. वह मेरी प्रतीक्षा कर रहा था, अपनी आँखें बंद करके, यह सोचकर की मैं क्या करने वाली हूँ. मैं कपडे पहने. मैं मेकअप किया. मैं अपने बाल बनाये. इसमें आधे घंटे से ज़्यादा लग गया. आखिरकार, मैं तैयार थी. मैं परदे को खिसकने वाली थी, लेकिन उससे पहले मैं कहा, "आँखें बंद करो, रमेश जी." रमेश ने वैसा hi किया. मैं पर्दा खिसकाया. मैं अपना फ़ोन लिया और एक गाना बजाना शुरू कर दिया. जैसे hi संगीत रमेश के कानो में पड़ा, वह तुरंत गाने को जान गया,

'चोली के पीछे क्या है' फिल्म खलनायक से.

उसने जल्दी से अपनी आँखें खोली और मुझे देखा. उसका जबड़ा गिर गया. उफ़ रौशनी तुम गाने में मेरी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की तरह दिखती हो. मैं hare-peele रंग का लेहेंगा चोली पहना था जो मुझे मिला था क्यूंकि मुझे पता था की गाँव में वे ऐसा पहनते हैं. मेरा चेहरा उसी रंग के घूँघट से ढाका हुआ था. लेकिन रमेश ने देखा की, गाने की तरह, मेरी नाभि नंगी थी और मेरी खूबसूरत नाभि ने मेरी सुंदरता में बहुत इज़ाफ़ा किया. मैं कमर की चैन भी पहनी थी जो मेरी पति रोनित ने बहुत पहले गिफ्ट की थी. लेकिन मैं शर्त लगाने को तैयार थी की मैं माधुरी से कहीं ज़्यादा कामुक दिखती थी, खासकर मेरी और भी गोरी चिकनी त्वचा के कारण. इसने पोषक को बहुत अच्छी तरह से निखारा. गाना शुरू हो गया. मैं गाने पर अपनी नाभि को हिलना शुरू कर दी.

रमेश मुझे अपनी हरकतों से लुभाते हुए देख रहे थे. मैं देख सकती थी की उनका लम्बा और मोटा लुंड सख्त होने लगा है. उसकी आँखें मेरी नाभि और मेरी नाभि पर तिकी थीं.

गाना बजता रहा: 'चोली में दिल है मेरा चुनरी में दिल है मेरा ये दिल मैं दूँगी मेरी यार को, प्यार को!'

और गाने के आखरी लीनę के साथ, मैं अपने चेहरे से घूँघट उठाया और इसे अपने पति को दिखाया. रमेश का लुंड धड़क रहा था. मुझे यकीन है की ऐसा इसलिए था क्यूंकि उसने देखा की मैं अपना मेकअप कितना सही की है. मैं एक देसी गाँव की महिला की तरह दिख रही थी. मेरी चेहरे के भाव बहुत देसी थे. मैं नाचती रही. रमेश का लुंड सख्त और धड़क रहा था. उसने जल्दी से अपने सारे कपडे उतार दिए और नंगा हो गया. मैं नाचती रही. मेरी बारे में सब कुछ बहुत कामुक था, खासकर मेरी नाभि. अपने डांस सेटप्स से में सूरे करि की सारा ध्यान मेरी नाभि पर हो. रमेश ने अपना लुंड पकड़ा और उसे upar-neeche पंप करना शुरू कर दिया. मैं शरारती अंदाज़ में शर्मा गयी. मैं देख सकती थी की उसके लुंड से pre-cum टपक रहा है, यह इस बात का सबूत है की मैं अपना काम अच्छी तरह से कर रही थी. मैं मुस्कुराई और अपनी आँखें बंद कर ली और ताल पर अपनी कमर हिलने लगी. रमेश को उत्तेजित होते देखना मुझे भी उत्तेजित कर रहा था. अचानक, मैं अपने रमेश के हाथों को अपनी नाभि पर महसूस किया, उसे महसूस करते हुए, उसे गूंथते हुए और अपनी उँगलियों से मेरी नाभि को छेड़ते हुए. मैं अपनी आँखें खोली और मुस्कुराई. मैं रमेश की आँखों में मेरी लिए भूख और वासना देख सकती थी. और मेरी योनि भी गीली हो रही थी. लेकिन मैं रमेश की कलाइयों को पकड़ ली और उन्हें अपनी नाभि से छुड़ा लिया. फिर मैं उसे ऊँगली दिखाई और धीरे से अपना सर हिलायी जैसे की यह कह रही हो, 'अभी नहीं'.

गाने की ताल थोड़ी तेज़ हो गयी. मैं थोड़ा पीछे हटकर जवाब दिया और मुद गयी. मेरी कामुक पीठ सिर्फ मेरी ब्लाउज के दो धागों से ढकी हुई दिखाई दे रही थी. मेरा लेहेंगा भी kabhi-kabhi मेरी गांड का आकर दिखा देता था. तेज़ ताल के साथ, मैं तेज़ी से नाचना शुरू कर दिया. मैं अपनी कमर और अपनी गांड को हिलनी शुरू कर दी."

रमेश ने मुझे पकड़ लिया जब मैं zor-zor से अपनी कमर हिला रही थी, फ़ास्ट बीट पर. उनका लुंड फड़क रहा था. मैं पलटी और रमेश ने मेरी पेट को उत्तेजना से कांपते हुए देखा. मेरी नाभि बहुत सेंसुअल लग रही थी. फिर गाना अपनी ओरिजिनल बीट पर लौट आया. मैं पहले वाली रदम पर डांस कर रही थी. मुझे रमेश के लिए एक सेक्सी बुर्लेस्कुए गर्ल की तरह डांस करने में बहुत मज़ा आ रहा था. रमेश जान गए थे की वह अब ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. गाना चलता रहा.

'लड़की हो कैसी बोलो, लड़की हो कैसी' (एक लड़की कैसी होती है, बताओ, एक लड़की कैसी होती है) 'लड़का हो कैसा बोलो, लड़का हो कैसा' (एक लड़का कैसा होता है, बताओ, एक लड़का कैसा होता है) 'लड़की हो मेरी जैसी' (एक लड़की मेरी जैसी होती है) 'लड़का हो तेरे जैसा' (एक लड़का तेरे जैसा होता है)

(मैं रमेश की तरफ इशारा किया)

'आये मज़ा फिर कैसा, प्यार का, प्यार का!' (फिर प्यार का क्या मज़ा है, प्यार का, प्यार का!)

बस, रमेश से और सहा नहीं गया. वह बीएड से उठे, मेरा फेस पकड़ा, और मुझे चुम्मा. मैं चौंक गयी. मैं रमेश को गले लगाया और उन्हें किश किया. कुछ सेकंड बाद, मैं अपनी जीभ रमेश के मुँह में डाली, और वह फ्रेंच किश करने लगे. किश करते वक़्त, मुझे रमेश का सख्त लुंड नीचे मेरी बुर को छूटा हुआ महसूस की. रमेश के लुंड से निकला pre-cum मेरी पेट और नाभि पर लग रहा था. अपनी आँखें बंद करके, मैं यह सब महसूस की और इतनी कामुक हो गयी की मैं रमेश को और ज़ोर से किश करना शुरू कर दी. एक मिनट बाद, रमेश ने किश तोडा और मेरी आँखों में देखा. मैं रमेश की आँखों में भूख और लस्ट देखि. मैं अपने चेहरे पर एक कामुक एक्सप्रेशंस देते हुए रमेश को इशारा कर रही थी की मैं भी उन्हें बहुत चाहती हूँ. रमेश ने जल्दी से मेरी ब्लाउज के ज़रिये से मेरी चूचियां पकडे और उन्हें दबाना शुरू कर दिया. मैं अपनी आँखें बंद कर ली और रमेश को अपने चूचियां सहलाते हुए पाकर मज़ा लेने लगी. लेकिन रमेश के अंदर एक जनवरी, लस्ट थी, जो उनके ुर्हरते मोठे काळा लुंड से उगल रही थी. रमेश ने मेरी ब्लाउज के दोनों साइड पकडे और बड़ी ताकत से ब्लाउज को hi चीयर दिया.

ब्लाउज पहात गया, और फिर मेरी सुन्दर बड़ी और सूदół चूचियां उन्हें दिख गए. मेरी आँखें खुल गयी. मेरी ब्लाउज के फटने की फीलिंग ने मुझे और भी ारोउसे कर दिया. मेरी आँखों में हवस रमेश की हवस से मैच कर रही थी. रमेश ने अपना मुँह मेरी एक निप्पल की तरफ बढ़ाया और उसे चूसना शुरू कर दिया, जबकि वह मेरी दुसरे निप्पल को पिंच कर रहे थे, खींच रहे थे और उससे खेल रहे थे. इससे मैं और भी ारोउसे हो गयी, और मैं मोअन करने लगी. रमेश ने मेरा ब्लाउज कम्प्लीटली निकाल दिया, मेरी उप्पेर बॉडी को कम्प्लीटली नंगा छोड़ दिया. उन्होंने मुझे गले लगाया और मुझे गहराई से चूमने लगę. रमेश ने मेरी चूचियां को अपनी छाती के अगेंस्ट महसूस करे और मेरी सख्त निप्पल्स उन्हें चूब रहे थे.

जब हम एक दूसरे को चूमते रहे, रमेश ने अपने हाथो से मेरी चूतड़ों के गोलों को पकड़ लीरा और दबाने लगę. उन्होंने उन्हें दबाना, मसलना और उनपर थपड मारना शुरू कर दिया. मैं जॉर्डन से इस हरकत से सिसककियाँ देती रही. मैं रमेश के लुंड को धड़कते हुए महसूस कर रही थी, उनका pre-cum उस पर मेरी पेट के अगेंस्ट प्रेस हो रहा था. मैं अपनी खुद की हवस में खो गयी थी. मुझे यह भी पता नहीं चला की रमेश ने मेरी लेहेंगा की स्ट्रिंग कब खींच ली और उसे खोल दिया. एक सेकंड में, लेहेंगा ज़मीन पर गिर गया और मेरी पैरो के ird-gird ढेर हो गया. मैं अब पूरी नंगी थी. मैं सिर्फ वह कमरबंद पहनी थी जो मेरे पति नरोनित ने पल्ले कभी मुझे गिफ्ट की थी. मैं रमेश को एक हवस अंदाज़ से देखि. मैं महसूस कर सकती थी की रमेश मेरी बॉडी के भूखे थे. रमेश ने मुझे किश की और फिर अपने घुटनो पर आ गए. सबसे पहले, उन्होंने मेरी पेट को चुम लिया और उसे चुम्मों के गीलेपन से से नहलाये. उन्होंने मेरी पेट को हर जगह किश किया. फिर उन्होंने मेरी नाभि के अंदर अपनी जीभ दाल वहां चेतना शुरू कर दिया. मुझे यह बहुत अच्छा लगा. मेरी उंगलियां उनके बालों में थी, उन्हें अपनी नाभि के और करीब खींच रही थी. मैं तेज़ी से सांस ले रही थी, रमेश के साथब छोड़ने बिलकुल तैयार थी. रमेश ने मज़े से मेरी पेट का लुफ्त उठाया. मेरी नाभि पर एक फाइनल किश के साथ, उन्होंने मेरी पेट को छोड़ दिया और मेरी बुर तक पहुँचने .मैं अपनी बुर पर उनके चुम्मे महसूस की, और मैं सिसकियाँ मरने लगी जोरों से.





रमेश मेरी रिएक्शन से खुश थे. उन्होंने अपनी बुर को कुछ और वेट किस्सेस से नहलाया. मेरी बुर उनकी थूक और मेरी खुद के बुर के रास की वजह से और भी गीली हो गयी. जल्दी hi, उन्होंने अपनी जीभ निकली और मेरी छूट के दाने को चाटना करना शुरू कर दिया. मेरी बुर तोह उन्होंने कई बार छाती थी था, लेकिन इस बार उनकी चाटने किआ अंदाज़ अलग महसूस करि. मनो पहले, यह सिर्फ उनकी लवर की बुर थी. अब, वह मुझे अपनी बीवी के रूप में इमेजिन कर रहे थे और मेरी बुर को चूस रहे थे.

मैं उत्तेजना से सिसकियों पर सिसकियाँ देने लगी. मैं वह प्लेअसुरे महसूस कर सकती थी जो रमेश दे रहे थे. थोड़ी देर बाद, रमेश उठे, और अपनी जीभ की टिप से, मेरी छूट के होठों को अपने होठों में लेना और कबाना शुरू करे. मैं छापने लगी और कोरों से सिसकियाँ मरने लगी. मेरी छूट का दाना काफी सेंसिटिव हैं. रमेश बस उसकी को चाट और चुम रहे थे … उन्होंने फिर मेरी बुर के अंदर एक ऊँगली डाली और मेरी छूट के डेन को चाटना कंटिन्यू रखा. और वहń चाट चाट कर मैं ज़ोर से सिसकियाँ दी. “हे भगवान्!… उफ़ मत रुकिए डार्लिंग ममममम.” मैं चीखी. मैं अब रमेश से छोड़ने तैयार थी , उनकी पत्नी बन कर उनसे छोड़ना चाहती थी उफ्फ्फफ्फ्फ़ ……



 
रमेश ने मेरी बुर को और ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. उनकी जीभ मेरी क्लीट के चारो तरफ घूम रही थी, कभी कभी वह उसको हलके से काट भी लेते थे. मेरी टाँगे काँप रही थी, मैं अपने हाथों से उनके सर को पकड़ कर अपनी छूट में और गहरा धकेल रही थी.

“अह्ह्ह… रमेश जी… उफ्फ्फ्फ़… ऐसे hi चूसिये… मेरी छूट आपकी है आज… आपकी बीवी की छूट… मममममम!”

रमेश ने मेरी बुर से मुँह उठाया, उनके होठ मेरी रास से चमक रहे थे. उन्होंने मुझे उठाया और पलंग पर फ़ेंक दिया. मैं लेती हुई थी, नंगी, सिर्फ वह कमर की चैन पहनी हुई.

में उनके लुंड को चूसने लगी ... चुदाई के लिए तैयार करने लगी





रमेश ने अपना मोटा, काला, घोडा जैसा लुंड पकड़ा और मेरी छूट के मुँह पर रगड़ने लगे.

“रौशनी… मेरी जान… आज मैं तुझे अपनी बीवी बना के छोडूंगा… पूरी रात तेरी छूट को अपना माल से भर दूंगा…”

मैं शर्मा कर आँखें बंद कर ली और अपनी टाँगे खोल दी. रमेश ने एक ज़ोर का धक्का मारा और उनका लुंड मेरी गीली छूट में आधा घुस गया.

“Ahhhhhhhhhh!” मैं ज़ोर से चीख पड़ी. उनका लुंड इतना मोटा था की मेरी छूट फटने जैसी हो गयी. लेकिन हवस में मैंने अपनी कमर ऊपर उठा कर उनका पूरा लुंड अंदर ले लिया.

रमेश ने zor-zor से धक्के मरने शुरू किये. हर धक्के के साथ उनके हैवी बॉल्स मेरी गांड पर टकरा रहे थे. उनकी काली छाती मेरी गोरी चूचियों पर रगड़ रही थी, उनके घने सफ़ेद बाल मेरी स्किन को छेड़ रहे थे.

“उफ्फ्फ… तेरी छूट बहुत टाइट है मेरी बीवी… आज तक कितनो ने छोड़ा है इसको? बता… बोल न!”

मैं हवस में पागल होकर बोली, “दो… तीन… नहीं… बहुत सारे… असलम… सलीम… सबने छोड़ा… लेकिन आपका लुंड सबसे मोटा है रमेश जी… अह्ह्ह… और ज़ोर से छोड़िये… अपनी रंडी बीवी को छोड़िये!”

रमेश का गुस्सा और हवस दोनों बढ़ गया. उन्होंने मेरी टाँगे अपने कंधे पर रख दी और बहुत तेज़ी से छोड़ने लगे. हर धक्के में उनका लुंड मेरी सर्विक्स तक जा रहा था. मेरी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी. मैं उनके कंधे को पकड़ कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी.

“हांण… हाँ… छोड़िये… अपनी पत्नी को छोड़िये… उफ्फ्फ्फ़… कितना मोटा है आपका लुंड… मेरी छूट पहाड़ दो आज!”

कुछ देर बाद रमेश ने मुझे घुमा दिया. अब मैं कुटिया बन गयी थी. उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और पीछे से एक और ज़ोर का धक्का मारा. पूरा लुंड एक hi बार में अंदर.

“अह्ह्ह्हह फुककककक!” मैं सिरहाने को पकड़ कर चीखी.

रमेश ने मेरी गांड पर do-thaapad मारे और तेज़ी से छोड़ने लगे. उनका एक हाथ आगे बढ़ कर मेरी क्लीट को रगड़ रहा था. मैं पूरी तरह से उनके लुंड की गुलामी कर रही थी.

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे उठा कर अपनी गोदी में ले लिया. मैं उनके लुंड पर ऊपर नीचे हो रही थी. मेरी चूचियां उनके मुँह के सामने थी. वह उनको चूस रहे थे, काट रहे थे. मैं उनके गले में बाहें दाल कर उन्हें किश कर रही थी.

“रमेश जी… मैं आपकी बीवी बन गयी हूँ न… अब रोज़ ऐसे hi छोड़ना मुझे…”





“हाँ मेरी रंडी बीवी… तू अब मेरी प्रॉपर्टी है… जितनी बार मैं करे छोडूंगा तुझे…”

मुझे ओर्गास्म आ रहा था. मैं तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी.

“अह्ह्ह… आ रही हूँ… रमेश जी… आअह्हह्ह्ह्ह!”

मैं ज़ोर से झाड़ गयी. मेरी छूट ने उनके लुंड को अपने रास से नहला दिया. लेकिन रमेश नहीं रुके. उन्होंने मुझे पलंग पर लिटाया और मेरी टाँगे फैला कर फिर से छोड़ने लगे.

रमेश ने मुझे अपने सीने से चिपका रखा था, लेकिन उनका लुंड अभी भी मेरी छूट के अंदर hi हल्का सा फड़क रहा था. कुछ hi मिनट बाद मैंने महसूस किया की उनका लुंड फिर से सख्त होने लगा है.

“रमेश जी… अभी भी खड़े हो आप?” मैं शर्मा कर उनके कान में बोली.

उन्होंने मेरी गांड पर ज़ोर से थप्पड़ मारा और मुस्कुराते हुए बोलै, “अरे मेरी बीवी, एक बार में कैसे थक जाऊं? आज पूरी रात तेरी छूट का भूखा हूँ मैं.”

उन्होंने मुझे सीधा लिटाया और मेरी टाँगे फैला दी. उनका मोटा काला लुंड अभी भी गीला था मेरे रास और उनके माल से. उन्होंने लुंड को मेरी छूट पर रगड़ा और एक hi ज़ोर के धक्के में पूरा अंदर धकेल दिया.







“अह्हह्ह्ह्ह… फ़क… इतना मोटा… फिर से…” मैं कराह उठी.

रमेश ने मेरी टाँगे अपनी कमर पर लपेट ली और तेज़ी से छोड़ने लगे. हर धक्के के साथ बीएड की चादर हिल रही थी और कमरे में “पूछ पूछ पूछ” की आवाज़ें गूँज रही थी.

मैंने अपनी टाँगे उनके कन्धों पर रख दी और उनकी पीठ को अपने नाखो से खरोचने लगी. उनकी घनी सफ़ेद छाती मेरी गोरी चूचियों पर रगड़ रही थी.

“छोड़िये… और ज़ोर से छोड़िये रमेश जी… आपकी बीवी की छूट फाड़ दो आज… अह्ह्ह… हाँ… ऐसे hi!”

रमेश का पेस बढ़ गया. वह अब बिलकुल जानवर बन गए थे. उन्होंने मेरी एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रख दी और साइड पोजीशन में छोड़ने लगे. इस एंगल में उनका लुंड मेरी छूट के बिलकुल अंदर तक जा रहा था.

“उफ्फ्फ्फ़… तेरी छूट तोह बिलकुल स्वर्ग है रौशनी… कितनी गीली… कितनी टाइट… ले… ले… ले मेरी बीवी!”

उन्होंने मेरी चूचियों को zor-zor से मसलने शुरू कर दिया. मेरी निप्पल्स को पिंच कर रहे थे और कभी कभी काट भी लेते थे. दर्द और मज़ा दोनों साथ में हो रहा था.





मैं पागल हो रही थी. “हाँ… काटो… मसलो… मेरी चूचियां आपकी हैं… पूरी बॉडी आपकी है आज… छोड़िये मुझे जैसे आपकी रंडी को छोड़ते हो!”

रमेश ने मुझे घुमा दिया. अब मैं उनके ऊपर थी. उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और मुझे ऊपर नीचे करने लगे. मेरी बड़ी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी. मैं अपने हाथों से उनके सीने पर टिका कर तेज़ी से कमर हिला रही थी.

“उफ्फ्फ… कितना गहरा जा रहा है… आपका लुंड मेरी पेट तक पहुँच रहा है… अह्ह्ह… अह्ह्ह… अह्ह्ह्हह!”

मैंने अपनी कमर को गोल गोल घूमना शुरू कर दिया. रमेश के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी. उन्होंने नीचे से धक्के मरने शुरू किये. हर धक्के में उनके बॉल्स मेरी गांड पर टकरा रहे थे.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और डोगग्य स्टाइल में पोजीशन चेंज कर दिया. पीछे से मेरी कमर पकड़ कर उन्होंने इतनी तेज़ी से छोड़ना शुरू किया की मैं सिरहाने को पकड़ कर चीख रही थी.

“मर जाउंगी… अह्ह्ह… बहुत ज़ोर से… हाँ… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी छूट को!”

रमेश ने मेरी बाल पकडे, मेरा सर पीछे खिंच लिया और और तेज़ी से छोड़ने लगे. उनका एक हाथ आगे बढ़ कर मेरी क्लीट को रगड़ने लगा.

मैं दोबारा झड़ने वाली थी.

“रमेश जी… मैं आ रही हूँ… फिर से… ahhhhhhhhhhhhh!”

मेरी छूट ने उनके लुंड को कास कर पकड़ लिया और मैं ज़ोर से झाड़ गयी. मेरी टाँगे काँप रही थी. लेकिन रमेश अभी नहीं रुके. उन्होंने मुझे उठा कर वाल के साथ टिका दिया और khade-khade छोड़ने लगे.

मेरी पीठ वाल से लगी हुई थी, टाँगे उनकी कमर पर लपेटी हुई. वह नीचे से zor-zor से धक्के मार रहे थे. मेरी चूचियां उनके मुँह में थी, वह चूस रहे थे और काट रहे थे.

“अब मेरा माल ले मेरी बीवी… ले अंदर hi… पूरा भर दूंगा तुझे!”

उनका लुंड फड़कने लगा. उन्होंने एक गहरा धक्का मारा और garam-garam माल की बौछार मेरी छूट के अंदर छोड़ दी. जेट आफ्टर जेट… इतना सारा की मेरी छूट से निकल कर मेरी झंघों पर बहने लगा.

हम दोनों थक कर ज़मीन पर hi लेट गए. रमेश ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मेरी फ़ोरेहेअद पर किश किया.

“लेकिन अभी रात बाकी है रौशनी… थोड़ी देर बाद फिर से तैयार हो जाना… आज तेरी हर होल छोडूंगा मैं.”

मैं उनके सीने पर सर रख कर शर्मा कर बोली, “जी… पति जी… आपकी बीवी आपकी हर इच्छा पूरी करेगी…”



 
रमेश ने मुझे अपने सीने से चिपका रखा था. थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी गांड पर प्यार भरा थप्पड़ मारा और कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोलै, “अब उठ मेरी प्यारी रंडी बीवी… रात अभी बाकी है. पहले अपने पति के इस मोठे काले लुंड को अपने मुँह से सेवा कर… जैसे तू हमेशा करती है.”





मैं शर्मा कर मुस्कुरायी और उनके पैरों के बीच घुटनो पर लेट गयी. उनका लुंड अभी भी थोड़ा गीला था हमारे मिलान के रास से, लेकिन फिर से खड़ा होकर फड़क रहा था. मैंने हाथ में पकड़ा और सुपाड़ी को चूमते हुए बोली, “जी पति जी… आपकी बीवी आपके लुंड की पूरी पूजा करेगी आज… जैसे उस तूफानी रात को किया था दो हफ्ते पहले.”

रमेश ने मेरा बाल प्यार से पकड़ा और मेरा मुँह अपने लुंड की तरफ खिंच लिया, “हाँ मेरी जान… चूस ज़ोर से… अपने पति का पूरा लुंड गले तक अंदर ले… उफ्फ्फ्फ़ तेरी गुलाबी होठ कितने प्यारे हैं इस लुंड के लिए!”

मैं ने अपनी जीभ निकाल कर उनके सुपाड़ी को चाटना शुरू किया, फिर पूरा लुंड मुँह में ले लिया – तक… तक… तक… जब तक मेरा गाला उनके मोठे लुंड से भरा नहीं गया. मेरी आँखों से आंसू निकल आये थे लेकिन मैं ने चूसना नहीं छोड़ा. मेरी नाक उनके घने काले बालों से रगड़ रही थी. साथ hi मैंने उनके भारी बॉल्स को हाथों से मसलते हुए मुँह में ले लिया और zor-zor से चूसने लगी.





“उफ्फ्फ्फ़… क्या मुँह है तेरा रौशनी… बिलकुल वैक्यूम जैसा… अह्ह्ह… बॉल्स भी चूस मेरी प्यारी बीवी… तेरी जीभ आज बहुत नॉटी हो रही है… ले… पूरा माल निकाल अपने पति का!”

मैंने अपनी गर्दन आगे की और उनके लुंड को गले तक andar-bahar करने लगी, थूक की धार उनके लुंड पर से टपक रही थी. रमेश के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी, “हाँ… ऐसे hi… तेरी पति का लुंड पूरा अंदर ले… उफ्फ्फ्फ़ तेरी रंडी मुँह में कितना मज़ा आ रहा है!”

कुछ देर बाद रमेश ने मुझे उठाया और पलंग पर लिटाया. उन्होंने मेरी टाँगे फैला कर मेरी गांड को दोनों हाथों से फैला दिया और बोली, “अब तेरी गांड की बारी है मेरी प्यारी बीवी… जैसे उस तूफानी रात को दो हफ्ते पहले मारी थी, आज फिर से अपनी बीवी की गांड में अपना मोटा लुंड घुसूंगा.”





मैंने आँखें बंद करके मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ पति जी… आपकी बीवी की गांड आपकी hi है… जैसे पहले छोड़ चुके हो, आज भी ज़ोर से छोड़िये… मेरी छूट और गांड दोनों आपके लिए तैयार हैं.”

रमेश ने मेरी गांड के छेद पर अपनी जीभ घुमाई, गीला किया, फिर अपने लुंड पर थूक लगाकर सुपाड़ा मेरी गांड के मुँह पर रगड़ने लगे. एक hi ज़ोर के धक्के में उनका मोटा लुंड मेरी गांड में पूरा उतर गया – जैसे पहले भी उतरा था.

“अह्ह्ह्हह्हह… हाँ पति जी… ऐसे hi… मेरी गांड फिर से भर दो अपने लुंड से… उफ्फ्फ्फ़ कितना मोटा और गरम है आपका लुंड… मार दो अपनी बीवी की गांड!”

रमेश ने मेरी कमर पकड़ी और तेज़ी से धक्के मरने शुरू किये. हर धक्के के साथ उनके भारी बॉल्स मेरी गीली छूट पर टकरा रहे थे. उनकी घनी छाती मेरी पीठ से रगड़ रही थी.

“ले… ले मेरी प्यारी रंडी बीवी… तेरी टाइट गांड अभी भी इतनी कासी हुई है… जैसे पहली बार छोड़ रहा हूँ… अह्ह्ह… तेरी गांड मेरे लुंड को कास कास कर चूस रही है… छोड़ रहा हूँ अपनी पत्नी की गांड को पूरी तरह से!”





मैं पीछे की तरफ धक्के मरने लगी, उनके साथ मिल कर, “हाँ… और ज़ोर से पति जी… मेरी गांड छोड़िये… अपनी बीवी की गांड को अपना माल से भर दो… उफ्फ्फ्फ़… कितना गहरा जा रहा है… मेरी पेट तक पहुँच रहा है आपका लुंड… अह्ह्ह… हाँ… छोड़िये और ज़ोर से!”

रमेश का एक हाथ आगे बढ़ कर मेरी क्लीट को रगड़ने लगा, दो उँगलियाँ मेरी छूट में andar-bahar कर रहे थे. मैं पागल हो गयी थी. “फ़क… पति जी… दोनों होल्स भर दो आज… मेरी छूट और गांड दोनों आपकी हैं… छोड़िये अपनी प्यारी बीवी को जैसे कोई रंडी को छोड़ते हो… लेकिन प्यार से… उफ्फ्फ्फ़ मैं आ रही हूँ!”

मेरा ओर्गास्म तेज़ था. मेरी गांड उनके लुंड को कास कास कर पकड़ रही थी. रमेश ने मेरी बाल पकडे, मेरा सर पीछे खिंच लिया और बहुत तेज़ी से धक्के मरने लगे, “ले मेरी जान… आ रहा है तेरा पति का माल… तेरी गांड के अंदर hi… ले पूरा… भर दूंगा तेरी गांड को… आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!”

उनका लुंड फड़का और garam-garam माल की बौछार मेरी गांड के अंदर भरने लगी – जेट आफ्टर जेट, इतना सारा की जब उन्होंने लुंड निकला तोह उनका माल मेरी गांड से निकल कर मेरी झंघों पर और छूट पर बहने लगा.

हम दोनों थक कर पलंग पर लेट गए. रमेश ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया, मेरी फ़ोरेहेअद पर प्यार भरा किश किया और बोलै, “अब तू सच में मेरी पत्नी बन गयी है रौशनी… हर होल तेरी पति का है. और रमेश हसने लगे .. में भी हसी उनके मर्दानी बदन के बालों से खेलते हुए. फिर हम दोनों सो गए.

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अगले सुबह subah-subah hi रमेश उठ कर तैयार हो गया. मैं अभी भी बिस्तर पर नंगी लेती हुई थी, कल रात की थकान अभी भी शरीर में थी – मेरी छूट और गांड दोनों में हल्का सा दर्द और मिठास saath-saath थी. रमेश ने मुझे अपने सीने से चिपकाया, मेरी चूचियों पर एक गहरा किश किया और बोलै,

“रौशनी मेरी प्यारी बीवी… मैं आज थोड़ा काम के सिलसिले में बहार जा रहा हूँ. मां के यहाँ कुछ ज़मीन के पेपरवर्क के लिए. शाम तक लौट आऊंगा. तू घर पर hi रहना और मुकेश मां का ख्याल रखना… जैसे मेरी बीवी करती है.”

मैं शर्मा कर उनके गले लग गयी और उनके कान में धीरे से बोली, “जी पति जी… मैं आपकी बीवी की तरह hi रहूंगी. आप जल्दी आइये… कल रात जैसा मज़ा फिर से लेना है मुझे आपके लुंड का.”

रमेश मुस्कुराये, मेरी गांड पर प्यार भरा थप्पड़ मारा और चले गए.

मैं थोड़ी देर बाद उठी, नाहा कर तैयार हुई. आज भी मैंने वही पीच कलर की साड़ी पहनी थी जो गीता ने दी थी – टाइट स्लीवलेस ब्लाउज, पेटीकोट ऊपर तक, और पल्लू को थोड़ा साध के रखा था ताकि मेरी बड़ी चूचियां और पतली कमर अच्छे से दिखे. घूँघट नहीं ओढ़ा था, बस बिंदी और चूड़ियां पहनी हुई थी. जैसे hi मैं बहार निकली, मुकेश मां बहार hi खड़े थे – उनकी घनी दादी, मोती मुछ, सफ़ेद बालों वाली छाती और वह ठरकी आँखें मुझे देखते hi चमक उठी.

“अरे बहु… आज इतनी सुन्दर लग रही हो! रमेश तोह काम पे चला गया, लेकिन चलो, मैं तुझे पुश्तैनी खेत दिखता हूँ. वहां की मिटटी में hi हमारा पूरा खानदान पला है,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया – थोड़ा ज़्यादा देर तक.

मैं शर्मा कर बोली, “जी मां… आप जो कहे.”

हम दोनों खेत की तरफ चल दिए. रास्ता थोड़ा सुनसान था, गाओं के बहार. मुकेश मां मेरे बिलकुल paas-paas चल रहे थे, kabhi-kabhi उनकी कोहनी मेरी चूचियों से रगड़ जाती. उनकी आवाज़ में एक अलग सी गरम सी मिठास थी.

खेत पहुँच कर उन्होंने मुझे एक पेड़ के नीचे खड़ा किया. चारो तरफ hara-bhara जवार और गेहूं का खुला मैदान. मां ने मेरी कमर पर हाथ रख कर बोलै, “देख बहु… यह ज़मीन मेरी है, और अब रमेश की होगी… और अब तोह तू भी इस घर की बहु बन गयी है न? इतनी gori-chikni, इतनी जवान… रमेश की किस्मत खुल गयी है. तेरी जैसे पत्नी पाने के लिए तोह मैं भी अपनी उम्र भूल जाऊं.”





मैं आँखें झुका कर शर्मा गयी, लेकिन मन में एक गरम सी लहरा उठी. उन्होंने मेरी कमर से हाथ नीचे की तरफ सरका दिया और धीरे से बोली,

अरे बहु… यह साड़ी तोह बिलकुल टाइट है तेरी चूचियों पर. ब्लाउज भी छोटी लग रही है… अगर थोड़ा झुक जाए तोह क्या नज़ारा होगा… हम्म?” उनकी आँखें मेरी क्लीवेज पर टिक गयी थी. उन्होंने एक हाथ से मेरी पल्लू को थोड़ा सा साइड किया और मेरी नाभि के पास ऊँगली घुमाई,

“रमेश ने तुझे कितनी अच्छे से तैयार किया है… लेकिन बीटा, यह गाओं की हवा में और भी खिल जायेगी तू. मैं तुझे यहाँ की पुराणी ट्रडिशन्स सीखा दूंगा… जैसे बहु अपने ससुर को खुश रखती है.”

उनकी बात सुन कर मेरी बुर में फिर से नमी फील होने लगी. मां ने और पास आ कर मेरी गांड पर हल्का सा हाथ फेरते हुए बोलै,

“कल रात रमेश के साथ कितना मज़ा किया होगा न मेरी प्यारी बहु? तेरी आवाज़ें तोह मुझे तक पहुँच रही थी… उफ्फ्फ्फ़… इतनी मस्त आवाज़ है तेरी. अगर कभी रमेश न हो तोह… मां भी तुझे खुश रख सकता है. तेरी छूट और गांड दोनों को प्यार से संभल सकता हूँ… जैसे एक बुद्धा मर्द अपनी बहु को संभालता है.”





मैं शर्मा कर पीछे हटी, लेकिन उनकी आँखों में वही ठरकी भूख थी जो असलम और सलीम में देखि थी. उन्होंने मेरी एक चुडिया पकड़ी और उसको चूमते हुए बोलै,

“बोल न बहु… मां के साथ थोड़ी मस्ती कर लेगी? सिर्फ फ़्लर्ट नहीं… अगर मैं करे तोह यहीं खेत में, पेड़ के पीछे… मैं तुझे वह मज़ा दे दूंगा जो रमेश भी नहीं दे पाया होगा. तेरी badi-badi चूचियां… तेरी टाइट गांड… सब मां के लिए तैयार है न?”

उनका हाथ अब मेरी कमर से नीचे मेरी गांड पर था और dheere-dheere मसल रहा था. मेरी सांस तेज़ हो गयी थी. मैं आँखें झुकाये हुए बोली,

“मां… आप… आप तोह बहुत शरारती हो… रमेश जी को पता चल गया तोह?”

मुकेश मां हिस्से और मेरे कान के पास मुँह ले आये, गरम सांस छोड़ते हुए,

“अरे बहु… यह गाओं है… यहाँ sasur-bahu के रिश्ते बहुत गहरे होते हैं. तू बस हाँ बोल… मैं तुझे आज hi यहीं खेत की मिटटी पर लिटाकर अपना मोटा लुंड दिखा दूंगा. तेरी छूट को मां का माल से भर दूंगा… रेस्पेक्टफुल्ली, प्यार से… जैसे एक बहु अपने ससुर को खुश करती है.”

मुकेश मां ने मेरी गांड पर हाथ को और गहरा फेरते हुए, अपनी हरयाणवी बोली में गरम आवाज़ में बोलै:

“अरे बहु… तेरी यह moti-moti गांड तोह बिलकुल अनार जैसी फूली हुई है! क्या बात है… रमेश ने इसको इतना अच्छे से पहला दिया क्या रात भर? हम्म… ससुर की नज़र पड़ते hi तेरी छूट में पानी आ गया होगा न?”

मैं अंदर hi अंदर काँप गयी. उनकी यह खुली हरयाणवी बातें सुन कर मेरी बुर में एक गरम सी लहार उठी, लेकिन कुछ शब्द मुझे समझ नहीं आ रहे थे. फिर भी उनकी आवाज़ और उनका हाथ मेरी गांड को दबाते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

मां ने और पास आकर मेरी कमर को कास कर पकड़ लिया और मेरे कान में धीरे से बोलै:

“सुन बहु… यह ब्लाउज तोह बिलकुल छोटी है तेरी badi-badi चूचियों के लिए. ऊपर से तेरी मोती चूचियां डाब रही हैं… एक बार मां को दिखा दे न… कितनी भारी दूध वाली चूचियां हैं तेरी. मैं तोह बस चूस के hi रात भर पानी निकाल दूंगा इनमे से!”

उनकी यह बात सुन कर मैं शर्मा कर आँखें झुका ली, लेकिन अंदर से मेरा शरीर गरम हो रहा था. उनकी हरयाणवी में “दूध वाली चूचियां” और “पानी निकाल दूंगा” सुन कर मेरी निप्पल्स सख्त हो गए थे.





मां ने मेरा पल्लू थोड़ा सा साइड किया, मेरी नाभि पर ऊँगली घूमते हुए बोलै:

“अरे वाह… तेरी कमर तोह बिलकुल पतली है और गांड तोह बिलकुल भारी! यह तोह परफेक्ट है बहु… ससुर के लिए. रमेश तोह अभी बहार गया है… चलो, पेड़ के पीछे चली… मां तुझे अपना मोटा सा लुंड दिखा दे. तेरी छूट में थोड़ा सा घुसा के देखूं कितनी टाइट है मेरी बहु की बुर… पहले से hi गीली हो रही होगी न?”

मैं हलकी सी सिसकारी भर कर बोली, “मां… आप… आप बहुत शरारती हो…”

उन्होंने हस्ते हुए मेरी गांड को ज़ोर से दबाया और बोलै:

“शरारती? अरे बहु, यह तोह कुछ भी नहीं! गाओं में sasur-bahu का रिश्ता ऐसा hi होता है. तू बस हाँ बोल दे… मैं तुझे यहीं खेत की मिटटी पर लिटाकर तेरी साड़ी ऊपर कर दूंगा. तेरी छूट को मां का मोटा लुंड दिखा दूंगा… और dheere-dheere अंदर घुसा दूंगा. तेरी छूट पहाड़ के भी मज़ा दे दूंगा… जैसे कल रात रमेश ने तेरी गांड मारी थी, वैसे hi मां भी मरेगा… लेकिन और प्यार से, और गहराई से!”

उनकी यह खुल कर बोली सुन कर मेरी बुर से हल्का सा रास निकल आया. मैं अंदर hi अंदर सोच रही थी – “उफ्फ्फ… यह बुद्धा इतना ठरकी है… लेकिन बातें सुन कर कितना मज़ा आ रहा है. कुछ समझ नहीं आ रहा उनकी बोली का, फिर भी मेरी छूट गीली हो रही है.”

मां ने मेरी एक चूची के ऊपर से ब्लाउज के थ्रू हल्का सा दबाया और आँख मारती हुए बोलै:

“देख बहु… तेरी चूचियां तोह बिलकुल उभरी हुई हैं… जैसे दूध से भरी गाय के थूं. एक बार मां इनको मुँह में ले ले… चूस के दूध निकाल लेगा. बोल न प्यारी बहु… मां को अपनी छूट और गांड दोनों खोल के दे देगी न? सिर्फ दो घंटे का टाइम है… रमेश लौटने से पहले मैं तुझे पूरी तरह से छोड़ के तेरी छूट को अपना माल से भर दूंगा.”

उनका हाथ अब मेरी साड़ी के पल्लू के अंदर घुस चूका था और मेरी पेट पर, नाभि पर घूम रहा था. मेरी सांस तेज़ हो गयी थी. मैं शर्म से लाल हो रही थी लेकिन अंदर से बहुत एन्जॉय कर रही थी उनकी यह ठरकी हरयाणवी फ्लिर्टिंग

मुकेश मां ने मेरी गांड को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया और मेरी चूची को ब्लाउज के ऊपर से zor-zor से मसलते हुए गरम हरयाणवी में बोलै,

“अरे बहु… तेरी यह फूली गांड तोह बिलकुल रसीले आम जैसी है! मां को भी मारने दे ek-do थप्पड़… तेरी छूट में तोह अभी से पानी टपक रहा होगा न? बोल न प्यारी… यहीं पेड़ के नीचे लेट जा, मां तुझे अच्छे से छोड़ के तेरी बुर को अपना माल से भर देगा.”

मैंने आँखें बंद कर ली थी. मेरी सांस तेज़ हो रही थी. मां का मोटा हाथ मेरी गांड पर घूम रहा था, उनकी उँगलियाँ मेरी साड़ी के ऊपर से भी मेरी छूट की गर्मी महसूस कर रही थी. मेरी निप्पल्स सख्त हो चुके थे और मेरी बुर से halka-halka रास निकल रहा था.





लेकिन तभी… अंदर से एक तेज़ आवाज़ ने मुझे रोक दिया.

(बस… बस कर रौशनी. यह बहुत गलत हो रहा है. रमेश जी ने कल रात मेरी इज़्ज़त बचाई थी… मेरी छूट और गांड को प्यार से अपना बनाया था. उन्होंने मुझे अपनी बीवी बना के यहाँ लाया… और मैं उनके मां के हाथों में अपनी गांड दबवा रही हूँ? यह धोखा है… बड़ा धोखा. उनका एहसान मैं इस तरह नहीं चूका सकती. गिल्ट से मर रही हूँ… हाँ, मां की बातें और उनका टच मुझे गरम कर रहा है… मेरी बुर तड़प रही है… लेकिन यह सही नहीं. मैं रमेश जी की हूँ…)

मैंने एक गहरी सांस ली और मां के हाथों को धीरे से अपने शरीर से हटा दिया. पल्लू को ठीक किया, ब्लाउज को ऊपर की तरफ खिंच कर अपनी चूचियां कवर की और एक कदम पीछे हैट गयी.

“मां… प्लीज… यह सब मत कीजिये,” मैं धीरे लेकिन मज़बूत आवाज़ में बोली. मेरी आवाज़ में शर्म और गिल्ट साफ़ था. “मैं रमेश जी की बीवी हूँ… आप उनके मां हैं. यह गलत है. आपने जो कहा… वह सब बहुत अच्छा लगा… लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती. मुझे बहुत गिल्ट हो रहा है रमेश जी के लिए. चलिए… घर चलते हैं.”

मां थोड़ा हैरान हुए, लेकिन उनकी आँखों में अभी भी वह ठरकी चमक थी. उन्होंने हाथ हटा लिया और मुस्कुराते हुए बोलै,

“अरे बहु… क्या बात कर रही है? यह तोह गाओं का पुराण रिश्ता है… sasur-bahu का. कोई नहीं देख रहा है यहाँ.”

मैं ने सिर्फ ज़मीन की तरफ देखते हुए कहा, “नहीं मां… मैं सच में नहीं कर सकती. प्लीज… आप समझ लीजिये. मैं आपकी बहु हूँ… और मैं अपने पति के साथ वफादार रहना चाहती हूँ.”

उफ्फ्फ्फ़… फाइनली बोल दिया. अब थोड़ा सा सुकून महसूस हो रहा है. गिल्ट अभी भी है… लेकिन यह सही डिसिशन था. मां का टच अभी भी मेरे शरीर पर महसूस हो रहा है… मेरी बुर अभी भी गीली है… लेकिन मैं रमेश जी को धोखा नहीं दे सकती. उन्होंने मेरी लाज बचाई थी… मैं उनके एहसान को इस तरह नहीं चुकाऊँगी. फिर भी… यह थ्रिल था… यह फोर्बिडन मज़ा… लेकिन अब बंद करना hi ठीक था.

मां ने थोड़ा सा उदास मुस्कराहट के साथ कहा, “ठीक है बहु… जैसे तू कहे. चलो घर चलते हैं. लेकिन याद रख… अगर कभी मैं करे तोह मां हमेशा तैयार है तेरी छूट और गांड को प्यार देने के लिए.”

उन्होंने मेरी कमर पर हाथ रख कर (सिर्फ सपोर्ट के लिए) मुझे घर की तरफ ले चले. घर तरफ चलते चलते रौशनी फिर से सोच में पद गयी ...



उफ्फ्फ इन बुद्धों ने तोह .. पहले रमेश और फिर असलम, सलीम.. और वह मेले में फ़िरोज़ और फिर वह कमीना मोमो वाला , इतनी हवस से भरा था की मेरे बलात्कार hi करने वाला था उफ्फ्फ … और अब ये रमेश के मां… उफ्फ्फ .. जब से उन तीनो ने मेरी मस्ती भरी चुदाई करि हैं उफ्फ्फ में बुद्धों के प्रति काफी गर्मी फील करती रहती हूँ , थोड़ा भी फ़्लर्ट करते हैं तोह मेरे बुर m,ein नमी और तेज़ धड़कन होने लगती हैं उफ्फ्फ्फ़




 
मुकेश मां और मैं आगे की तरफ चलते हुए. उनका हाथ अभी भी मेरी कमर पर था, हल्का सा सपोर्ट जैसा, लेकिन मैं जानती थी की उसमे वह पुराणी ठरकी भूख अभी भी जल रही थी. हर कदम के साथ मेरी साड़ी की घूंघर वाली घुंघरू सी आवाज़ हो रही थी, और मेरी बुर अभी भी गीली थी उनकी बातों और छुए हुए से. उफ्फ्फ्फ़… यह बुद्धा इतना कॉंफिडेंट था, जैसे गाओं की साड़ी बहुओं को छोड़ चूका हो.

वहां पर एक छोटा सा घर था खेतीं के बीचो बीच. वहां अंदर पहुँच कर मां ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे ड्राइंग रूम की तरफ ले गए. वह सोफे पर बैठ गए, अपनी मोती टाँगे फैला कर, और मुझे अपने सामने खड़े रहने को इशारा किया.

“बहु… पानी पि ले. थक गयी होगी न? खेत में तोह बहुत गर्मी थी,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उनकी नज़र मेरी चूचियों पर थी, जहाँ से पसीना की बूँदें ब्लाउज को गीला कर रही थी.

मैं पानी का गिलास ले कर पि रही थी जब मां उठ कर मेरे बिलकुल पीछे आ गए. उनकी सांस मेरी गर्दन पर पद रही थी. उन्होंने धीरे से मेरी कमर पकड़ी और कान में बोलै,

“रौशनी बीटा… तू बहुत अच्छी लड़की है. रमेश की वफादारी कर रही है… यह बात बहुत अच्छी लगी. लेकिन… kabhi-kabhi ज़िन्दगी में chhote-chhote मज़ा भी लेने चाहिए. मैं तुझे ज़बरदस्ती नहीं करूँगा… बस एक बार मां को अपनी चूचियां दिखा दे. बस देखने के लिए. फिर जो तू कहेगी, वही होगा.”





मेरी सांस तेज़ हो गयी. मैं गिलास साइड पर रख कर कड़ी रही. उनकी उँगलियाँ मेरी कमर पर घूम रही थी. अंदर से गिल्ट और हवस का संघर्ष चल रहा था. पहले Aslam-Salim, फिर फ़िरोज़, मोमो वाला… और अब यह. मेरी बॉडी इन बुद्धों के लिए इतनी रेस्पॉन्सिव क्यों हो गयी थी?

“मां… प्लीज…” मैं धीरे से बोली, लेकिन मेरी आवाज़ में मज़बूती काम थी.

मां ने मेरा पल्लू धीरे से साइड किया और मेरी नाभि को ऊँगली से छेड़ते हुए बोलै, “अरे बहु… बस एक बार. तेरी यह पतली कमर और उभरी हुई चूचियां… मां को बस छू लेने दे. देख, मेरा लुंड तोह अभी से खड़ा हो गया है तेरी वजह से.”

उन्होंने मेरी एक हाथ पकड़ कर अपनी धोती के ऊपर से अपने मोठे लुंड पर रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… वह बहुत मोटा और गरम था. मेरा हाथ अपने आप उस पर से हटा नहीं प् रहा था. मां ने मेरी ब्लाउज के हुक पर हाथ रखा और धीरे से एक हुक खोल दिया.

“बस… मां को देखने दे तेरी दूध वाली चूचियां…”

मैंने आँखें बंद कर ली. गिल्ट था, लेकिन शरीर मान नहीं रहा था. ब्लाउज के दोनों हुक खुल गए और मेरी badi-badi, भरी चूचियां बहार आ गयी – निप्पल्स सख्त और उभरे हुए. मां की सांस तेज़ हो गयी.

“अरे वाह बहु… कितनी सुन्दर हैं! जैसे दो bade-bade रसीले आम. यह तोह रमेश भी रोज़ नहीं देख पाटा होगा इतने खुले.”

उन्होंने दोनों हाथों से मेरी चूचियां पकड़ ली और dheere-dheere मसलने लगे. उनकी उँगलियाँ निप्पल्स को पिंच कर रही थी. मैं सिसकारी भर उठी, “आह्हः… मां… यह गलत है…”

लेकिन मां ने एक चूची मुँह में ले ली और zor-zor से चूसने लगे. मेरी टाँगे काँप रही थी. उनकी दादी मेरी सॉफ्ट स्किन पर रगड़ रही थी, जो एक अलग सी मज़ा दे रही थी. मैंने अपना हाथ उनके सर पर रख दिया, न जाने क्यों.

“उफ्फ्फ्फ़ बहु… कितनी गीली है तेरी बुर! पानी तोह बाह रहा है.

मेरी चूचियां नंगी थी, ब्लाउज के हुक्स खुले हुए, और उनकी उँगलियाँ मेरी निप्पल्स के अराउंड घूम रही थी – halke-halke से, जैसे उन्हें छेड़ रही हो. मेरी बुर अभी भी गीली और तड़प रही थी उनकी बातों और छुए हुए से, लेकिन मैंने अपने आप को रोक लिया था.





“Mama… bas… yeh bahut ho gaya,” main dheere se boli, meri awaaz mein sharm aur hawas dono the. Maine apni chuchiyan cover karne ki koshish ki, lekin Mama ne mera haath pakad liya aur muskurate hue bola,

“Arre bahu… itni jaldi kyun chhupa rahi hai? Yeh doodh wali choochiyan toh bilkul perfect hain. Itni bhaari, itni mulayam… dekho kaise ubhar rahi hain. Mama ko bas chhoo lene de thodi der aur. Kuch nahi karunga jo tu nahi chahe.”

Unhone meri ek choochi ko dheere se masla, thumb se nipple ko halka sa pinch kiya. Main siskari bhar uthi, “Aahh… Mama… aap bahut shararti ho…” Meri taange ek dusre se ragad rahi thi, bur mein nami phir se badh rahi thi.

Mama ne meri kamar par haath ghumaya, neeche ki taraf, meri gaand ki curve ko sehlाते हुए. Unki daadi meri gardan par ragad rahi thi jab woh kaan mein garam saans chhodte hue bole,

“Roshni beta… teri yeh patli kamar aur phooli hui gaand dekh kar Mama ka dil nahi maanta. Kal raat Ramesh ne teri gaand ko kitna maza diya hoga… teri awaazein sun kar main soch raha tha ki ek din yeh moti gaand Mama ke haathon mein bhi aayegi. Bas abhi itna hi… tujhe chhoo raha hun, teri garam skin feel kar raha hun.”

Unka haath meri saree ke upar se hi meri gaand par ghum raha tha, dheere-dheere dabate hue, shape ko mehsoos karte hue. Main sharma kar unke seene se lag gayi, unki ghani daadi meri soft chuchiyon par ragad rahi thi. Unki dhoti ke andar unka mota lund khada hua saaf mehsoos ho raha tha meri jangh se.

Maine aankhein band kar li. Unki Haryanvi awaaz, unka garam saans, unke haathon ka pressure – sab kuch itna seductive tha. Woh meri chuchiyon ko dheere-dheere sehlate rahe, kabhi unhe utha kar dekh rahe, kabhi nipples ko chhed rahe. Meri bur tadap rahi thi, lekin maine apne haath se unki ungliyan pakad li aur rok diya.

“Bas Mama… please… ab nahi. Yeh thrill bahut hai… lekin main Ramesh ji ko dhokha nahi de sakti.”

Mama hasse, thoda udaas lekin samajhdaar. Unhone meri blouse ke hooks band kar diye, pallu theek kiya, lekin meri gaand par ek pyar bhara, gehra sa thappad maar diya jisse meri gaand hil gayi.

“Theek hai meri jawan bahu… Mama intezaar kar sakta hai. Jab mann kare, bas ek ishara kar dena. Teri yeh ubhari choochiyan, teri tight gaand, teri geeli chut – sab Mama ke liye taiyar rahegi. Ab jaa, fresh ho ja. Ramesh aata hoga.”

Main jaldi se uthi, andar bedroom mein gayi. Mirror mein dekha toh chehra laal tha, nipples blouse ke upar se bhi ubhare hue dikhai de rahe the. Unka maal meri panty mein abhi bhi mehsoos ho raha tha, aur sharir abhi bhi unke touch ki yaad mein sulag raha tha.

Shaam ko jab Ramesh ghar aaya, maine usse gale lagaya – lekin man mein Mama ke saath hui woh forbidden masti chal rahi thi. Ramesh ne meri gaand par thappad maara aur kaan mein bola, “Kya baat hai meri pyari biwi… aaj bahut garam lag rahi ho.”

Main sharma kar muskurayi, lekin andar se soch rahi thi – yeh thrill kab tak rok paungi?

Dinner ke time woh baar-baar meri taraf dekhta raha – meri saree ke tight blouse mein ubhari chuchiyan, meri patli kamar aur pallu ke neeche se jhalakti nabhi.

“Roshni… aaj tu bahut khil rahi hai,” usne muskurate hue kaha

hum dono bedroom mein chale gaye. Darwaza band karte hi Ramesh ne mujhe apne seene se chipka liya. Uski badi-badi, garam bahen meri kamar ke around lapet gayi. Usne meri gardan par gehra kiss kiya, phir dheere-dheere choomte hue kaan tak pahuncha aur garam saans chhodte hue bola,

“Uffff meri pyari biwi… din bhar tujhe yaad karta raha. Teri yeh mulayam skin, teri badi chuchiyan… sab kuch.”

Maine sharma kar uske seene par sir rakh diya. Usne mera pallu dheere se side kiya aur meri nabhi ke around ungli ghumai. Phir uski ungliyan upar chadhi, blouse ke upar se meri chuchiyon ko sehlane lagi. Mere nipples turant sakht ho gaye.

Ramesh ne mujhe palang par litaya aur mere upar jhuk kar meri chuchiyon ke beech apna muh daal diya. Blouse ke upar se hi woh unhe choosne-chhedne laga. Main siskari bhar uthi,

“Aahh… pati ji… dheere…”

Usne meri saree ka pallu poora hata diya. Meri petticoat ki naada khol kar usne meri jhanghon tak haath ghumaya. Uski ungliyan meri inner thighs par ghum rahi thi, bahut dheere-dheere, teasing karte hue. Meri bur garam aur geeli ho chuki thi.

“Kitni garam hai meri randi biwi aaj…” usne kaan mein dheere se bola, “Teri chut toh abhi se tadap rahi hai na? Bata… din bhar kya soch rahi thi?”

Maine sharma kar uske baalon mein haath ghumaya. Woh meri gaand par haath fer raha tha – dono haathon se uski shape ko mehsoos karte hue, halke-halke thappad maarte hue jisse meri gaand hilti.

Phir usne mujhe ghuma diya. Main uske saamne peeth karke let gayi. Ramesh ne meri peeth par kiss karte hue meri blouse ke hooks khol diye. Meri badi chuchiyan bilkul nangi ho gayi. Usne peeche se dono haathon se unhe pakad liya aur dheere-dheere masalne laga – kabhi unhe utha kar dekh raha, kabhi nipples ko pinch kar raha.

“Uffff… kitni bhaari aur mulayam hain teri choochiyan… inhe chhoo kar hi mera lund khada ho jata hai,” usne garam awaaz mein kaha.

Meri saans tez ho rahi thi. Usne meri gaand par apna mota lund (dhoti ke upar se) ragadna shuru kar diya, dheere-dheere hips hilate hue. Meri bur uske lund ki garmi feel kar rahi thi. Woh meri gardan choos raha tha, ek haath meri chut ke upar se sehla raha tha – sirf upar se, andar nahi.

Hum dono aise hi bahut der tak ek dusre ko chhoo rahe the, kiss kar rahe the, garam-garam baatein kar rahe the. Usne mujhe apni bahon mein kas kar pakad rakha tha, meri chuchiyan uske seene se dab rahi thi aur meri gaand uske lund par ragad rahi thi.

“Kal raat jaisa hi maza dena hai tujhe aaj bhi meri jaan…” usne kaan mein fuskara.

Main sirf siskari bhar kar usse aur chipak gayi. Sharir pura sulag raha tha, lekin hum dono dheere-dheere hi ek dusre ko mehsoos karte rahe – pyar bhare touch, teasing caresses aur dirty whispers ke saath.

Ramesh ne mujhe apne seene se chipkaye rakha aur dheere se bola, “ raat abhi baaki hai.”

tabhi achanak se darwaza khatkhataya gaya ..

Ramesh mujhe apne seene se kas kar chipkaye hue tha. Uski garam saans meri gardan par pad rahi thi aur uske haath meri nangi peeth par dheere-dheere ghum rahe the. Meri badi chuchiyan uske solid seene se dab rahi thi, nipples sakht ho kar ragad rahi thi. Usne meri gaand par ek haath rakh kar usko halke-halke sehlaya aur masla aur mein siskiyan chhorne lagi





तभी…

नॉक! नॉक! नॉक!

“चाचा! भाभी! बहार आ जाओ न… डिनर तैयार है!” गीता की जवान और मस्त आवाज़ दरवाज़े के बहार से आयी.

रमेश ने मुझे और टाइट से पकड़ लिया, मेरी गांड को ज़ोर से दबाते हुए कान में गरम आवाज़ में बोलै, “उफ्फ्फ्फ़… अभी तोह तेरी यह मुलायम गांड और चूचियां एन्जॉय कर रहा था… गीता भी इतनी जल्दी याद कर लेगी.”

मैंने शर्मा कर उसके सीने पर मुँह छुपा लिया. मेरी सांस अभी भी तेज़ थी. “पति जी… छोड़िये… वह इंतज़ार कर रही होगी.”

लेकिन रमेश ने मुझे जल्दी से नहीं छोड़ा. उसने मेरी एक चूची को हाथ में लेकर धीरे से मसला और निप्पल को ऊँगली से छेड़ते हुए फुस्कुराय.

नॉक! नॉक!

“अरे जल्दी आ जाओ दोनों! आज तोह स्पेशल फीस्ट है – चाचा और भाभी की नयी शादी की ख़ुशी में! सब तैयार है,” गीता ने ज़ोर से कहा, आवाज़ में ख़ुशी और चंचलपन था.

मैंने जल्दी से अपनी साड़ी संभाली. ब्लाउज के हुक्स बंद किये, लेकिन मेरी चूचियां अभी भी उभरी हुई थी और निप्पल्स ब्लाउज के कपडे से साफ़ दिखाई दे रहे थे. पल्लू को ठीक से लपेटने की कोशिश की, लेकिन रमेश ने पीछे से आ कर मेरी कमर पकड़ ली और मेरी गांड पर अपना मोटा लुंड (धोती के ऊपर से) एक बार ज़ोर से रगड़ दिया.

“रौशनी… रात को यह अधूरा काम पूरा करेंगे मेरी प्यारी बीवी,” उसने कान में गरम सांस छोड़ते हुए कहा.

हम दोनों बहार निकले. वृंदा में सुन्दर सजावट थी – दिया, फूल, रंगोली. टेबल पर बहुत सारा खाना – पराठे, सब्ज़ियां, हलवा और स्पेशल डिशेस.

गीता वहां कड़ी थी. रमेश की निस, उम्र लगभग 24-25 साल, बहुत सुन्दर और जवान – पतली कमर, बड़ी उभरी चूचियां और मोती गांड वाली. वह टाइट salwar-kameez में थी जो उसके कर्व्स को अच्छे से दिखा रही थी. वह मुस्कुराते हुए हम दोनों को देख रही थी.

“अरे वह चाचा… भाभी को इतना चिपकाये हुए हो! शादी का असर अभी तक है क्या?” गीता ने मज़ाक किया और मुझे गले लगाया. उसकी बड़ी, टाइट चूचियां मेरी चूचियों से रगड़ गयी, जो मुझे एक करंट सी लगा गयी.

मुकेश मां भी वहां बैठ कर मुस्कुराते हुए मुझे देखे जा रहे थे. उनकी नज़र सीधा मेरी ब्लाउज पर थी.





डिनर के दौरान रमेश मेरा हाथ पकडे बैठा था. टेबल के नीचे उसका पेअर मेरी झंघों से रगड़ रहा था. गीता खाना सर्वे कर रही थी और baar-baar हम दोनों की “नयी जोड़ी” की तारीफ़ कर रही थी. कभी वह झुक कर सर्वे करती तोह उसकी कमीज से उसकी क्लीवेज साफ़ दिखाई देती.

“भाभी… आप बहुत सुन्दर लग रही हैं आज. यह पीच साड़ी आप पर कितनी अच्छी लगती है,” गीता ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उसकी नज़र मेरी उभरी चूचियों पर ठहर गयी थी.





मुकेश मां ने मुझे एक्स्ट्रा हलवा रखते हुए कहा, “बहु… यह खा लो. रात में एनर्जी चाहिए होगी.” उनकी ठरकी आँखें मुझे छेड़ रही थी.

गीता ने रमेश से मज़ाक किया, “चाचा, भाभी को इतना मत थका देना… कल सुबह भी तोह उठना है.” फिर वह मुझे आँख मारती हुई बोली, “भाभी, अगर चाचा ज़्यादा परेशां करे तोह मुझे बता देना… मैं संभल लुंगी.”

मेरी बुर अंदर से फिर से गीली होने लगी थी – रमेश का पेअर टेबल के नीचे, मां की नज़रें, और गीता की चंचल बातें और उसके टाइट बदन का नज़ारा.

खाना khate-khate रमेश ने मेरे कान में धीरे से फुस्कुराय, “जल्दी ख़तम कर मेरी जान… बैडरूम में तेरी गांड और चूचियों का इंतज़ार कर रहा है.”

कुछ पलों में लेकिन रमेश किसी से बातें करने चले गए तभी मां आये मेरे पास.

मां सोफे पर मेरे बिलकुल पास आ कर बैठ गए. उनका मोटा बदन मेरी तरफ झुक गया. उन्होंने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रख दिया और गरम आवाज़ में बोलै,

“अरे बहु… आज रात में भी इतनी सुन्दर लग रही हो. यह पीच रंग की साड़ी तेरी पतली कमर पर कितनी टाइट है. और यह उभरी हुई चूचियां… ब्लाउज में भी सामने नहीं आ रही हैं.”

उनका हाथ मेरी स्मूथ पीठ पर घूमने लगा. उनकी उँगलियाँ मेरी पीठ की मुलायम स्किन को सहलाते हुए ऊपर नीचे करने लगी. मेरी सांस तेज़ हो गयी.

“मां… आप…” मैं धीरे से बोली, लेकिन उनका हाथ नहीं हटाया.

मां हिस्से और मेरे कान के पास मुँह ले आये, गरम सांस छोड़ते हुए बोले, “क्या बात है बहु? मां को अपनी यह मुलायम पीठ छू लेने दे. कितनी नरम और गरम है तेरी पीठ… जैसे दूध की तरह. रमेश तोह अभी गया है, अभी तोह मां तुझे प्यार से छू सकता है.”

उन्होंने मेरी एक स्मूथ बाँहों पर हाथ फेरते हुए उसको धीरे से सहलाया. फिर दूसरी बाँहों को भी पकड़ कर मसलने लगे. उनकी उँगलियाँ मेरी बाँहों की नरम स्किन पर घूम रही थी, कभी हलके से दबाते हुए.

“उफ्फ्फ्फ़ बहु… तेरी यह बहन कितनी मुलायम हैं. इतनी चिकनी और पतली… हाथ लगते hi मन नहीं भर रहा.”

मां का हाथ धीरे से नीचे की तरफ सरका और मेरी झंघों पर पहुँच गया. उन्होंने मेरी साड़ी के ऊपर से hi मेरी मोती झंघों को पकड़ कर ज़ोर से दबाया. मेरी टाँगे काँप उठी.





“अरे वाह… तेरी यह झांघें तोह बिलकुल रसीली हैं बहु. इतनी भारी और नरम… मां को दबाने दे थोड़ा. देख, कितनी अच्छे से मेरे हाथ में आ रही हैं.”

उन्होंने दोनों हाथों से मेरी झंघों को मसलने शुरू कर दिया, कभी ऊपर की तरफ सहलाते हुए, कभी ज़ोर से स्क्वीज़ करते हुए. मेरी बुर अंदर से फिर से गीली होने लगी थी. मां की नज़रें मेरी चूचियों पर टिक गयी थी.

“बहु… तेरी यह मोती झांघें दबाते हुए hi मां का लुंड खड़ा हो गया है. अगर तू परमिशन दे तोह मां तुझे और भी प्यार से छू ले. तेरी स्मूथ पीठ, तेरी नरम बहन, तेरी भारी झांघें… सब मां के लिए तैयार हैं न?”

मैं शर्मा कर आँखें झुका ली, लेकिन शरीर उनके हाथों से दूर नहीं हो रहा था. मां मेरी पीठ पर हाथ घूमते हुए, मेरी बाँहों को सहलाते हुए और मेरी झंघों को दबाते हुए baar-baar garam-garam बातें कर रहे थे.

उनका एक हाथ मेरी स्मूथ पीठ पर धीरे धीरे घूम रहा था, कभी उँगलियों से हलके से खरोंचते हुए, कभी पूरी पाम से मसलते हुए. मेरी पीठ की मुलायम स्किन पर उनकी गरम उँगलियाँ ऊपर से नीचे की तरफ जा रही थी, जिससे मेरी पूरी पीठ में सिहरन दौड़ रही थी.

“अरे बहु… तेरी पीठ कितनी नरम और चिकनी है… हाथ लगते hi मन नहीं भर रहा,” मां ने गरम सांस छोड़ते हुए कान में बोलै.





मेरी सांस तेज़ हो गयी थी. मैं शर्मा कर आँखें झुका ली, लेकिन शरीर उनके स्पर्श से दूर नहीं हो प् रहा था. उनका हाथ मेरी पीठ के नीचे की तरफ सरका और मेरी कमर की चउरवे को पकड़ कर ज़ोर से दबाने लगा. मेरी बुर में फिर से नमी फील होने लगी.

फिर उनका दूसरा हाथ मेरी दूसरी बाँहों पर पहुँच गया. उन्होंने मेरी बाँहों को दोनों तरफ से पकड़ कर धीरे धीरे सहलाने शुरू किया, उँगलियों से मेरी नरम स्किन को छेड़ते हुए. कभी कभी उनकी उँगलियाँ मेरी बाँहों के अंदर की तरफ घूम जाती, जहाँ स्किन सबसे मुलायम थी. मेरी टाँगे काँप रही थी.

मां का हाथ फिर से मेरी झंघों पर लौट आया. उन्होंने साड़ी के ऊपर से hi मेरी मोती झंघों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से स्क्वीज़ करने लगे. उनकी उँगलियाँ मेरी झंघों के अंदर की तरफ डाब रही थी, बिलकुल क्लोज लेकिन अंदर नहीं जा रही.

“उफ्फ्फ्फ़ बहु… तेरी यह झांघें तोह बिलकुल रास भरी हैं. इतनी भारी, इतनी नरम… दबाते हुए मां को बहुत मज़ा आ रहा है,” उन्होंने गरम आवाज़ में कहा.

मैं सिसकारी भर उठी, “मां… आप… बहुत शरारती हो…” मेरी आवाज़ काँप रही थी. मेरी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी तेज़ सांस के साथ और निप्पल्स ब्लाउज के अंदर सख्त हो चुके थे. मेरी बुर अब बहुत गीली हो चुकी थी, अंदर से गरम लहरें उठ रही थी.

मां ने मेरी पीठ पर हाथ को और गहरा फेरते हुए मेरी कमर को कास कर पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरी झंघ को ऊपर की तरफ सहलाने लगे. उनकी उँगलियाँ मेरी इनर तइस के बहुत पास तक पहुँच रही थी, जिससे मेरी पूरी बॉडी में करंट दौड़ रहा था. मैं अपनी जांघों को एक दूसरे से दबाने लगी, लेकिन उनका हाथ वहां से हैट नहीं रहा था.

मेरी आँखों में शर्म और हवस दोनों थे. गिल्ट भी हो रहा था रमेश जी के लिए, लेकिन मां के गरम हाथों का यह स्पर्श मेरे शरीर को सुलगा रहा था. मेरी स्मूथ पीठ, मेरी नरम बहन और मेरी भारी झांघें सब उनके हाथों के नीचे तड़प रही थी.





आगे क्या होना चाहिए? बताओ.

मैं सिर्फ शर्मा कर अपनी जांघों को दबाये बैठी रही. रात और गरम होने वाली थी.
 
मां और भी हिम्मत करते हुए मेरे बिलकुल सीने से चिपक कर बैठ गए. उनका मोटा बदन मेरी तरफ झुक गया था, हम दोनों सोफे पर इतने पास थे की उनकी घनी दादी मेरी बाँहों से रगड़ रही थी. उनका एक हाथ मेरी स्मूथ पीठ पर और गहरा फेरने लगा – धीरे धीरे ऊपर से नीचे तक घूमते हुए, कभी पूरी पाम से मसलते हुए, कभी उँगलियों से हलके हलके खरोंचते हुए. मेरी पूरी पीठ सिहरन से भर गयी.

“अरे बहु… तेरी यह मुलायम पीठ कितनी चिकनी और गरम है… हाथ लगते hi मां का दिल नहीं मानता,” उन्होंने गरम सांस छोड़ते हुए कान में बोलै.

उनका हाथ पीठ पर hi रुक नहीं रहा था. उन्होंने मेरी ब्लाउज के अंदर दो उँगलियाँ धीरे से घुसा दी और ब्रा की पतली स्ट्राप को पकड़ कर खींचने और छेड़ने लगे. उनकी उँगलियाँ मेरी पीठ की नरम स्किन पर ब्रा स्ट्राप के ऊपर नीचे घूम रही थी, कभी स्ट्राप को थोड़ा सा साइड करते हुए मेरी पीठ को सीधे छू रहे थे.





मेरी सांस तेज़ हो गयी. मैं शर्मा कर आँखें झुका ली, लेकिन शरीर उनके स्पर्श से हैट नहीं प् रहा था. “मां… आप… यह क्या कर रहे हैं…” मेरी आवाज़ काँप रही थी.

उनका दूसरा हाथ मेरी कमर पर पहुँच गया और उसको ज़ोर ज़ोर से स्क्वीज़ करने लगा. उनकी उँगलियाँ मेरी पतली कमर की चउरवे को पकड़ कर दबाते हुए मेरी कमर को अपनी तरफ खिंच रहे थे. हम दोनों अब और भी पास थे, उनकी जांघ मेरी जांघ से चिपकी हुई थी.

फिर उनका हाथ नीचे सरका और मेरी मोती झंघों पर पहुँच गया. उन्होंने साड़ी के ऊपर से hi दोनों हाथों से मेरी झंघों को पकड़ कर ज़ोर से मसलने और स्क्वीज़ करने शुरू कर दिया. उनकी उँगलियाँ मेरी झंघों के अंदर की तरफ डाब रही थी, बहुत गहराई तक सहलाती हुई.

मेरी बुर अंदर से फिर से गीली होने लगी. मैं शर्मा कर अपनी टाँगे एक दूसरे से दबाने लगी, लेकिन मां का हाथ वहां से हैट नहीं रहा था. उनका हाथ पीठ पर ब्रा स्ट्राप से खेलता रहा, कमर को स्क्वीज़ करता रहा और झंघों को ज़ोर ज़ोर से दबाता रहा.





मेरे मन में एक अलग सी शर्म और दर की लहार उठी. उफ्फ्फ्फ़… अगर गाओं के लोग यहाँ से गुज़र कर हम दोनों को इस तरह चिपके हुए देख लें तोह क्या सोचेंगे? मां अपनी बहु के साथ इतने पास बैठ कर उसकी पीठ और झंघों को छू रहे हैं… कोई देख लेगा तोह पूरा गाओं बात बनाएगा. और अगर रमेश जी अचानक आ गए और हम दोनों को इस हालत में देख लिया तोह? उनकी बीवी उनके मां के साथ ऐसे चिपकी हुई… मेरी बुर में नमी के साथ साथ एक गहरा गिल्ट भी उठ रहा था, लेकिन शरीर मां के गरम हाथों के स्पर्श से तड़प रहा था.

मां ने मेरी पीठ पर हाथ को और ज़ोर से घूमते हुए ब्रा स्ट्राप को खींच कर बोली, “बहु… तेरी यह नरम पीठ और कमर देख कर मां को बहुत मज़ा आ रहा है. तेरी झांघें भी कितनी रसीली हैं… दबाते हुए hi मन नहीं भर रहा.”

मैं सिर्फ सिसकारी भर कर उनके सीने से थोड़ा सा लग गयी, शर्म से लाल हो रही थी, लेकिन उनके बोल्ड स्पर्श से दूर भी नहीं हो प् रही थी.

मां ने मेरी पतली कमर को और कास कर पकड़ा और अपनी मोती उँगलियों से ज़ोर से पिंच कर दिया – बिलकुल सेंसिटिव जगह पर जहाँ स्किन सबसे नरम थी.

“आअह्ह्ह…” मैं थोड़ी ज़ोर से सिसकारी भर उठी. मेरी आवाज़ पहले से ज़्यादा निकल गयी थी

तुरंत मेरी नज़र चारो तरफ घूम गयी – क्या गीता ने सुन लिया? क्या गाओं के कोई लोग या रमेश जी के दोस्त ने अचानक आ कर देख लिया? दिल zor-zor से धड़क रहा था. शर्म से मेरा चेहरा लाल हो गया. मैं जल्दी से मां की तरफ देखि और गुस्से से उनकी तरफ आँख से घूरते हुए अपनी नाक को सिहकाते हुए ट्विस्ट कर दिया.





मां ने सिर्फ एक ठरकी मुस्कराहट दी और फिर से मेरी कमर पर हल्का सा पिंच कर दिया, जैसे मज़ाक कर रहे हों.

मैं उनकी तरफ देख कर सिलेंटली माउथिंग किया – “ोी माँ… उफ्फ्फ्फ़ बस भी करिये न मां जी…”

लेकिन मां को कोई फरक नहीं पड़ा. उन्होंने मुस्कुराते हुए अपना हाथ नीचे की तरफ सरका दिया और मेरी मोती झंघों को दोनों हाथों से kas-kas कर स्क्वीज़ करने लगे. उनकी उँगलियाँ मेरी झंघों की नरम और भारी फलेश को ज़ोर से दबाते हुए अंदर की तरफ घूम रही थी.

“अरे बहु रे… तेरी यह moti-moti रास भरी झांघें तोह बिलकुल अनार जैसी फूली हुई हैं! इतनी नरम, इतनी गरम और इतनी भारी… मां को दबाते hi बहुत मज़ा आ रहा है रे. यह टाँगे तोह सच में बहुत मस्त हैं बहु… हाथ लगते hi दिल नहीं मानता!”

मां के हाथ से मेरी कमर पर वह ज़ोर का पिंच पड़ते hi मेरी सिसकारी ज़ोर से निकल गयी थी. उफ्फ्फ्फ़… अंदर hi अंदर एक गरम सी लहार उठी और मेरी बुर में फिर से तेज़ नमी फील होने लगी. शरीर तोह बिलकुल तड़प रहा था, लेकिन दिमाग में एकदम से चाओस मच गया.

यह क्या हो रहा है मेरी ज़िन्दगी में? मां जी इतने बोल्ड हो गए हैं… उनकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर ब्रा स्ट्राप के अंदर घूम रही हैं, मेरी कमर को पिंच कर रहे हैं और अब मेरी झंघों को इतने ज़ोर से मसल रहे हैं जैसे उनकी अपनी हो. उफ्फ्फ्फ़… कितना मज़ा आ रहा है उनके गरम हाथों का स्पर्श, लेकिन यह गलत है न? रमेश जी ने कल रात मुझे अपनी बीवी बना कर इतना प्यार दिया… मेरी छूट और गांड दोनों को अपना बनाया… और मैं यहाँ उनके मां के सीने से चिपकी हुई, उनके हाथों से छुड़वा रही हूँ?





मेरी आँखें चारो तरफ घूम गयीं – दरवाज़े की तरफ, बहार वृंदा की तरफ. कहीं गीता ने तोह मेरी सिसकारी सुन ली होगी? या कोई गाओं वाला यहाँ से गुज़र रहा हो और हम दोनों को इस तरह देखे? मां जी अपनी बहु के साथ सोफे पर इतने चिपके हुए, हाथ मेरी झंघों पर… अगर किसी ने देख लिया तोह पूरा गाओं बोलता रहेगा की बहु ससुर के साथ… उफ्फ्फ्फ़ शर्म से मर जाउंगी मैं! और अगर रमेश जी अचानक आ गए?

फिर भी… शरीर मान नहीं रहा था. मां जी की उँगलियाँ मेरी मोती झंघों को kas-kas कर दबाते हुए अंदर की तरफ घूम रही थी और मेरी बुर तड़प रही थी. गिल्ट बहुत गहरा था, लेकिन साथ hi एक फोर्बिडन थ्रिल भी था – यह बुद्धा इतना ठरकी और कॉंफिडेंट था की मेरी बॉडी उसके टच से hi सुलग उठी. पहले Aslam-Salim, फिर फ़िरोज़… और अब यह… क्यों हर बार बुड्ढे मुझे इतना गरम कर देते हैं? मैं रमेश जी की अच्छी बीवी बनना चाहती थी… लेकिन यह हाथ, यह बातें… मेरी बुर को गीला कर hi देती हैं.





मैं अपने होंठों को काट कर उनकी तरफ देखि – गुस्से में नाक सिहकाते हुए – लेकिन अंदर से एक छोटी सी आवाज़ भी थी जो कह रही थी, “बस थोड़ा और… सिर्फ टच hi तोह है…”

मां जी अभी भी मेरी झंघों को मसलते हुए मुस्कुराते जा रहे थे.

मां जी ने मेरी मोती झंघों को एक बार और ज़ोर से स्क्वीज़ किया, फिर अपना मुँह मेरे कान के बिलकुल पास ले आये. उनकी गरम सांस मेरी गर्दन पर पद रही थी और उनकी घनी दादी मेरी चीक से रगड़ रही थी. उन्होंने बहुत हलके, गरम हरयाणवी में धीरे से फुस्कुराय,

“अरे बहु रे… यहाँ पर तोह बहुत लोग आ सकते हैं. तू थोड़ी देर बाद सुनसान वाले पीछे वाले रास्ते में आ जा… जहाँ पुराण गोडाउन जैसा है, कोई नहीं आता वहां. मैं अभी चला जाता हूँ… तू कुछ मिनट बाद आना रे. तेरी यह नरम पीठ और रास भरी झांघें मां को और गहराई से छू लेने दे… बस छू के hi देखूंगा, कुछ ज़्यादा नहीं करूँगा.”

उनकी आवाज़ में इतनी ठरकी मिठास थी की मेरी बुर में एक तेज़ सी लहार उठ गयी. मां जी उठ कर धीरे से बहार की तरफ चले गए, जैसे कुछ काम करने जा रहे हों.

मैं वहां सोफे पर hi बैठी रही. दिमाग में तूफ़ान मच गया था.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी अब सुनसान कमरे में बुला रहे हैं… अकेला… कोई नहीं होगा वहां. यह गलत है न? रमेश जी अभी दोस्त से मिलने गए हैं… अगर वह जल्दी लौट आये और मुझे वहां मां जी के साथ देख लिया तोह? या गीता या कोई गाओं वाला… पूरा रिश्ता टूट जायेगा. मैं उनकी बीवी हूँ इन सब के लिए ..… उनकी प्यारी बीवी… फिर भी यह बुद्धा मेरी पीठ, मेरी कमर, मेरी झांघें छू रहा है और अब अकेला बुला रहा है…





लेकिन शरीर की गर्मी और अंदर की हवस बहुत ज़ोरावर थी. मेरी चूचियां ब्लाउज के अंदर सख्त हो चुकी थी, निप्पल्स तड़प रहे थे. मेरी बुर अब बहुत गीली हो चुकी थी और झंघों के बीच गरम नमी फील हो रही थी. मां जी के गरम हाथ, उनकी ृस्टिक बातें, उनकी बोल्ड उँगलियाँ… सब कुछ मेरे अंदर की मस्ती को और भड़का रहा था.

पहले Aslam-Salim ने मुझे इतना तड़पाया था… फिर फ़िरोज़… अब यह मां जी… क्यों हर बार बुड्ढे मुझे इतना गरम कर देते हैं? मैं जाना नहीं चाहिए… लेकिन यह थ्रिल… यह फोर्बिडन मज़ा… सिर्फ छू लेने देना hi तोह है… कुछ ज़्यादा नहीं… बस थोड़ा और फील कर लुंगी…

मैं कुछ मिनट तक वही बैठी सोचती रही, हाथों को अपनी झंघों पर रगड़ते हुए. फिर अंदर की हवस ने जीत ली. मैं धीरे से उठी, पल्लू ठीक किया, ब्लाउज को ऊपर की तरफ खिंच कर अपनी उभरी चूचियां कवर की और सुनसान पीछे वाले कमरे की तरफ चल पड़ी. दिल zor-zor से धड़क रहा था… शर्म और हवस दोनों saath-saath.

रौशनी ने अंदर की हवस को रोक नहीं पायी. वह कुछ मिनट बाद dheere-dheere उठी, पल्लू ठीक किया और सुनसान पीछे वाले पुराने गोडाउन जैसे कमरे की तरफ चल पड़ी. दिल zor-zor से धड़क रहा था, हाथों की उँगलियाँ काँप रही थी. यह गलत है… बहुत गलत… लेकिन यह गर्मी… यह तड़प… सिर्फ थोड़ी देर के लिए… बस छू लेने देना hi तोह है…





जैसे hi वह कमरे में घुसी, मां जी ने तुरंत उसकी पतली कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया और ज़ोर से अपने सीने से खिंच लिया. उनका मोटा बदन उसके बिलकुल चिपक गया, उनकी घनी दादी उसकी चूचियों पर रगड़ रही थी.

“अरे बहु रे… आ गयी तू… तेरी यह पतली कमर पकड़ कर hi मां का दिल खुश हो गया रे!” मां जी ने गरम हरयाणवी आवाज़ में बोलै और उसके दोनों गालों पर ek-ek गहरा चुम्मा लगा दिया. उनके मोठे होठ उसकी नरम गाल की स्किन पर garam-garam पद रहे थे.

फिर मां जी ने उसके होठों पर चूमने के लिए अपना मुँह झुका दिया. रौशनी ने जल्दी से अपनी ऊँगली उनके होठों के बीच रख दी और धीरे से बोली, “मां जी… नहीं…”

लेकिन मां जी ने मुस्कुराते हुए उसकी कमर को एक तेज़ ट्विस्ट कर दिया – बिलकुल सेंसिटिव जगह पर.

“आअह्ह्ह…” रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकल गयी. उसी पल मां जी ने उसी का फायदा उठाया और उसके होठों को अपने मोठे, गरम होठों से कास कर चुम लिया. उनकी दादी उसके चेहरे पर रगड़ रही थी और उनकी जीभ उसके होठों को छेड़ रही थी.

रौशनी पहले तोह अपना मुँह idhar-udhar घुमा कर अपने होठों को उनके जकड से छुड़ाने की कोशिश करने लगी. उसकी आँखें बंद थी, चेहरा शर्म से लाल हो रहा था और हाथों से मां जी की छाती को धीरे से धकेल रही थी.

“उफ्फ्फ्फ़… मां जी… बस… यह नहीं…” उसने होठ चुराते हुए धीरे से सिसकारी भरी, लेकिन मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़े रखा और चूमता hi रहा –





लेकिन रौशनी और नहीं सेह पायी. उसकी अंदर की गर्मी और हवस ने पूरा ज़ोर लगा दिया. पहले तोह वह अपना मुँह idhar-udhar घुमा रही थी, लेकिन मां जी के मोठे, गरम होठों की kas-m-kas और उनकी दादी की रगड़ ने उसके होश उदा दिए. एक गहरी सांस ले कर वह खुद hi उनके होठों से लिपट गयी. अब वह भी चुम्बन में ghul-mil कर गहराई से चूमने लगी – उसकी जीभ उनकी जीभ से मिल गयी, दोनों के होठ एक दूसरे को choosne-chhedne लगे, जैसे भूखे हो.

“उम्म्म्मठ…” रौशनी के मुँह से एक मदहोश सिसकारी निकल गयी जब वह पूरी तरह से किश में खो गयी.





मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़े रखा और अपने हाथों को उसके शरीर पर घूमने लगे. उनका एक हाथ उसकी पतली कमर पर zor-zor से सहलाता रहा, कभी स्क्वीज़ करता, कभी चउरवे को महसूस करता. दूसरा हाथ ऊपर चढ़ा और उसकी उभरी हुई चूचियों के आकर पर घूमने लगा – ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी भारी, मुलायम शेप को पकड़ कर dheere-dheere मसलता, उँगलियों से उनके उभर को छेड़ता. फिर वह हाथ उसकी नंग बाँहों पर पहुँच गया – उनकी नरम, गोरी स्किन को सहलाता, मसलता और ऊपर से नीचे तक फेरते हुए.

सबसे गहरा स्पर्श तोह उसकी गोरी मुलायम पीठ पर था. मां जी ने ब्लाउज के अंदर हाथ दाल कर उसकी नंगी पीठ पर पूरी पाम घुमाई – ऊपर से नीचे तक, ब्रा स्ट्राप को साइड करते हुए, उसकी स्मूथ स्किन को छेड़ते हुए. हर चुम्बन के साथ उनके हाथ उसके शरीर के हर हिस्से को फील कर रहे थे – कमर, चूचियों का उभर, नंग बहन और वह मुलायम पीठ.

रौशनी पूरी तरह से किश में खो चुकी थी. उसकी आँखें बंद, हाथों से मां जी की गर्दन को पकड़ कर वह और गहराई से चुम रही थी. उसकी सांस तेज़ हो रही थी, शरीर उनके गरम स्पर्श से तड़प रहा था. गिल्ट और शर्म अभी भी दिल में थी, लेकिन हवस ने सब कुछ दबा दिया था. वह सिर्फ महसूस कर रही थी – उनके हाथों की गर्मी अपनी कमर पर, अपनी चूचियों के आकर पर, अपनी नंग बाँहों पर और अपनी गोरी मुलायम पीठ पर.





मां जी ने किश के बीच hi में फुस्कुराय,

“अरे बहु रे… अब तू भी पूरी तरह से घुल गयी न मां के होठों में… तेरी यह गोरी पीठ, तेरी मोती चूचियां और तेरी पतली कमर… सब मां के हाथों में तड़प रही हैं रे! कितनी प्यारी है तू मेरी बहु…”

रौशनी सिर्फ और गहरा किश देती रही, उनके हाथों के स्पर्श में पूरी तरह से खो सी गयी थी

एक दम से गीता की तेज़ और चंचल आवाज़ बहार से आयी – “अरे यहाँ पीछे वाले रास्ते में कौन क्या कर रहा हैं? कौन हैं जल्दी से बोलो .......”

दोनों एक डैम से सेहम कर जकड गए. मां जी के होठ अभी भी उसके होठों पर थे, उनके हाथ उसकी गोरी मुलायम पीठ और उभरी चूचियों के आकर पर hi थे. रौशनी की धड़कने तेज़ हो गयी – दिल zor-zor से धड़क रहा था जैसे फटने वाला हो. उसकी आँखें फैल गयी, चेहरा एक डैम से लाल पद गया. उफ्फ्फ्फ़… गीता ने आवाज़ दे दी… अगर वह अंदर आ गयी तोह? हम दोनों इस तरह चिपके हुए, किश करते हुए… पूरा रिश्ता टूट जायेगा!





रौशनी ने जल्दी से अपने आप को मां जी के kas-m-kas गृप से छुरा लिया. उसने अपनी कमर को एक झटके से आगे की और मां जी के सीने से दूर हटी. हाथों से jaldi-jaldi अपना पल्लू ठीक किया, ब्लाउज को ऊपर की तरफ खिंच कर अपनी उभरी चूचियों को कवर किया और पीठ पर हाथ फेर कर ब्रा स्ट्राप को सही जगह पर किया. मेरी सांस अभी भी बहुत तेज़ चल रही थी, होठ अभी भी उनके चुम्बन से सुलग रहे थे.

“बहु रे… रुक तोह…” मां जी ने धीरे से गरम हरयाणवी में बोलै, लेकिन रौशनी ने उनकी तरफ एक दर भरी नज़र डाली और तुरंत पीछे मुद कर कमरे से बहार निकल भागी.

वह तेज़ क़दमों से वापस ड्राइंग रूम की तरफ चली गयी. जैसे hi वह मैं घर के अंदर पहुंची, उसकी नज़र रमेश पर पड़ी – वह अभी अभी दोस्त से मिल कर लौट आया था और सोफे पर बैठा था, अपनी कमीज ठीक कर रहा था.

रौशनी को देख कर रमेश मुस्कुराया, “अरे मेरी प्यारी बीवी… कहाँ थी तू? इतनी देर से…”

लेकिन रौशनी को देख कर उसकी स्माइल थोड़ी सी रुक गयी. रौशनी का चेहरा लाल था, सांस तेज़ चल रही थी, होठ थोड़े से सूजे हुए थे और उसकी आँखों में एक अलग सी बेचैनी थी. वह रमेश को देख कर एक डैम से सेहम गयी. उफ्फ्फ्फ़… रमेश जी आ गए… और मैं अभी अभी मां जी के साथ… उनके होठों से चिपकी हुई थी… उनके हाथ मेरी पीठ पर, मेरी चूचियों पर… अगर उन्हें पता चल गया तोह? मैं उनकी यहाँ बीवी बनकर आयी हूँ… और में यहाँ उनके मां के साथ .. उफ्फ्फ …

रौशनी ने जल्दी से आँखें झुका ली, अपने हाथों को अपनी झंघों पर रगड़ते हुए कड़ी रही. उसकी बुर अभी भी गीली थी, शरीर मां जी के स्पर्श की याद में तड़प रहा था, लेकिन रमेश जी को देख कर गहरा गिल्ट जकड लिया था लेकिन मन में हवस भी भरपूर जगी हुयी थी .. आज तोह वह अपने हवस रमेश के साथ शेयर करने वाली थी रात भर !!!



 
रमेश पुराने लकड़ी के चारपाई पर बैठा था. उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए अपने पास बुलाया, “आ मेरी प्यारी बीवी… यहाँ मेरे पास बैठ जा. मैं दोस्त के यहाँ से अभी लौट आया हूँ. बता तोह सही, मैं जाने के बाद यहाँ क्या हुआ? खाने के बाद मां जी के साथ क्या बातें हुई?”

मैं थोड़ी देर तक चुपचाप कड़ी रही. मेरे गाल लाल हो गए, आँखें झुक गयी. दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैंने धीरे से उसके पास चारपाई पर बैठ कर अपना पल्लू अपनी बड़ी चूचियों पर और टाइट से लपेट लिया और शर्मा कर बोली,

“कुछ नहीं पति जी… बस थोड़ी सी बातें हो रही थी. मां जी ने घर का kaam-kaj और खेत की बातों की… चाय पि… ऐसी hi नार्मल बातें हुई.”

रमेश मुस्कुराया और मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे अपने सीने की तरफ खिंच लिया, “अच्छा… ठीक है मेरी जान. तू आज बहुत थकी और laal-chehre वाली लग रही है.”

लेकिन अंदर hi अंदर मेरे मन में पूरा गर्म सन ek-ek करके घूम रहा था...

उफ्फ्फ्फ़… कैसे बताऊँ पति जी? जब आप गए थे, मां जी मुझे इस लकड़ी के चारपाई पर अपने बिलकुल सीने से चिपका कर बैठ गए थे. उन्होंने मेरी मुलायम पीठ पर हाथ घुमाया, ब्लाउज के अंदर उँगलियाँ दाल कर ब्रा की पतली डोरी से खेला, मेरी पतली कमर को kas-kas कर दबाया और मेरी मोती रसीली झंघों को zor-zor से मसलता रहा. फिर उन्होंने मुझे सुनसान पीछे वाले कमरे में बुला लिया… वहां उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर मुझे अपने सीने से बिलकुल चिपका लिया, मेरे गालों पर गहरे चुम्मे दिए और फिर मेरे होठों पर गहरा चुम्बन करने लगे… मैं पहले रोक रही थी लेकिन उनकी गरम सांस और हवस ने मुझे जीत लिया. मैं भी उनके मोठे होठों से लिपट कर गहराई से चूमने लगी… उनके हाथ मेरी कमर पर, मेरी उभरी हुई चूचियों के उभर पर, मेरी नंगी बाँहों पर और मेरी गोरी मुलायम पीठ पर घूम रहे थे…





मेरी बुर अभी भी उनके स्पर्श की याद में गीली और तड़प रही थी. पूरा शरीर सुलग रहा था, लेकिन मैंने कुछ नहीं बताया. सिर्फ रमेश जी के सीने से लग कर आँखें बंद कर ली.

रमेश ने मेरी गर्दन पर प्यार भरा चुम्मा दिया और धीरे से बोलै, “कोई बात नहीं मेरी प्यारी बीवी… तू आज बहुत गरम लग रही है. रात में तेरी यह तड़प पूरी कर दूंगा.”

मैं सिर्फ शर्मा कर उससे और चिपक गयी, लेकिन मन में मां जी के साथ हुई वह गुप्त और निषेध मस्ती चल रही थी.

रमेश ने मुझे अपने सीने से और कास कर चिपका लिया. लकड़ी के चारपाई पर बैठ कर उसने मेरी गर्दन को हलके से ऊपर उठाया और धीरे से मेरे होठों पर अपने मोठे गरम होठ रख दिए. पहले तोह वह प्यार भरा चुम्बन था, लेकिन जल्दी hi उसकी जीभ मेरी होंठों के बीच घुस गयी.

मेरे मन में तुरंत मां जी वाला सन रीप्ले होने लगा...

उफ्फ्फ्फ़… मां जी ने भी इसी तरह मेरी कमर पकड़ कर मुझे चिपकाया था… उनके मोठे होठ मेरे होठों पर कास कर लगे थे… उनकी दादी मेरी गाल पर रगड़ रही थी और उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस रही थी… मैं भी उनके साथ गहराई से चुम रही थी…

इस याद से मेरी अंदर की गर्मी एक डैम से भड़क उठी. मैं और वाइल्ड हो गयी. अपने दोनों हाथों से रमेश जी का सर पकड़ लिया, उनके बालों में उँगलियाँ घुसा दी और उनके होठों को ज़ोर से चूसने लगी. मेरी जीभ उनकी जीभ से लिपट गयी, दोनों के मुँह एक दूसरे में गहराई से ghul-mil गए. हम दोनों गहरा फ्रेंच किश करने लगे – जीभ एक दूसरे की जीभ को चूस रही थी, मुँह के अंदर गहराई तक जा रही थी, थूक की धार एक दूसरे के मुँह में मिल रही थी.

रमेश जी ने मेरी पतली कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया. उनकी मोती उँगलियाँ मेरी मुलायम कमर की स्किन को zor-zor से स्क्वीज़ कर रही थी. वह भी मेरे वाइल्ड होने से और गरम हो गए और मुझे और गहराई से चूमने लगे.

“उम्म्म्मठ…” मैं उनके मुँह में hi मदहोश सिसकारी भर रही थी. मां जी के चुम्बन की याद मेरे दिमाग में घूम रही थी और उससे मुझे और ज्यादा जोश आ रहा था. मैं रमेश जी के सर को और कास कर पकड़े हुए उनके होठ चूस रही थी, जीभ andar-bahar कर रही थी, बिलकुल भूखी तरह.

रमेश जी ने मेरी कमर को और टाइट पकड़ कर मुझे अपनी गॉड में खिंच लिया और हम दोनों के होठ एक दूसरे से अलग hi नहीं हो रहे थे. गहरी, गीली और वाइल्ड फ्रेंच किश चल रहा था – दोनों के मुँह एक दूसरे में घुसे हुए थे, सांसें तेज़ हो रही थी.

मेरे मन में सिर्फ एक hi बात चल रही थी — उफ्फ्फ्फ़… मां जी के होठ इतने गरम थे… और अब पति जी… दोनों की याद से मेरी बुर बिलकुल गीली हो चुकी है…

रमेश ने मुझे गहरे फ्रेंच किश के बाद अपनी गॉड से उतरा और मुस्कुराते हुए बोलै, “मेरी प्यारी बीवी… तू यहाँ आराम कर. मैं थोड़ा फ्रेश होकर आता हूँ. आज रात तुझे बहुत प्यार करूँगा.”

वह उठ कर अंदर के छोटे बाथरूम की तरफ चला गया. गाओं के घर में बाथरूम बहार की तरफ था, लेकिन रमेश ने दरवाज़ा बंद करके अपने कपडे उतरे. उसने ठन्डे पानी से नहाया – उसका मोटा, मज़बूत बदन पानी के निचे चमक रहा था. उसने अपनी घनी छाती, पेट और टाँगे को अच्छे से धोया. नहाते हुए उसका मोटा काला लुंड थोड़ा सा खड़ा हो रहा था, शायद दिन भर की मस्ती और अभी अभी हुए वाइल्ड किश की याद में.

नहाकर वह बहार निकला, शरीर पर सिर्फ एक सफ़ेद धोती लपेट ली. उसके भींगे बाल से पानी टपक रहा था, छाती पर बाल चमक रहे थे. उसने अपने बदन पर थोड़ा सा तेल लगा लिया ताकि उसकी स्किन और चमकदार और मुलायम दिखे. फिर उसने अपनी धोती को थोड़ा नीचे खींच कर अपनी कमर को और पतला दिखाया और एक हल्का कुरता पेहेन लिया जो उसकी छाती के उभर को अच्छे से दिखा रहा था.





वह वापस कमरे में आया. लकड़ी के चारपाई पर मुझे लेती हुई देख कर उसकी आँखों में हवस चमक उठी. उसने मुझे देखते हुए धीरे से बोलै,

“रौशनी… अब मैं बिलकुल तैयार हूँ तेरी रात के लिए. तेरी यह उभरी चूचियां, तेरी पतली कमर और तेरी मोती झांघें… सब देख कर मेरा मैं नहीं भर रहा.”

रमेश चारपाई पर मेरे पास लेट गया, अपना एक हाथ मेरी कमर पर रख कर मुझे अपनी तरफ खिंच लिया. उसकी भींगी स्किन की ठंडी गर्मी मुझे महसूस हो रही थी. उसने मेरी गर्दन पर गहरा चुम्मा दिया और धीरे से फुस्कुराय,

“अब बता मेरी बीवी… रात भर तुझे कैसे प्यार दूँ?”

मेरी बुर अभी भी मां जी के चुम्बन और रमेश जी के किश की याद से तड़प रही थी. मैं शर्मा कर उसके सीने से लग गयी.

रमेश मुझे अपनी तरफ खिंच hi रहा था और मेरी गर्दन पर चुम्मा दे रहा था की मैंने उसके सीने पर हाथ रख कर उससे रोक दिया. मेरी आँखों में अब पूरी सेडक्टिव चमक आ चुकी थी. मां जी के साथ हुई मस्ती और अब रमेश जी के किश ने मेरी अंदर की हवस को बिलकुल जगा दिया था.

मैं धीरे से उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोली, “पति जी… आज रात मैं आपको कुछ अलग hi दिखाना चाहती हूँ. आप यहाँ बैठिये… मैं अंदर जा कर तैयार होकर आती हूँ. सिर्फ कुछ मिनट.”

रमेश मुस्कुराया और चारपाई पर लेट कर मुझे देखने लगा. मैं उठी और अंदर के कमरे में चली गयी.

अंदर जा कर मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतर दिया. फिर मैंने वह खास लिंगेरी निकली जो मैंने सिर्फ रमेश जी के साथ रातों के लिए सेक्रेटली खरीदी थी – बिलकुल सेक्सी और रेवेलिंग black-red ट्रांसपेरेंट लास लिंगेरी.

रौशनी का लुक:

मैंने पहली बार इतनी बोल्ड और सेडक्टिव तरह तैयार हुई थी. लिंगेरी बहुत रेवेलिंग थी – ऊपर का ब्रा बिलकुल ट्रांसपेरेंट ब्लैक लास का था जो मेरी badi-badi, गोल और उभरी हुई चूचियों को सिर्फ आधा कवर करता था. दोनों चूचियों के उभर बहार दिखाई दे रहे थे और निप्पल्स के अराउंड सिर्फ पतली लास की लाइनिंग थी. ब्रा के नीचे डीप क्लीवेज साफ़ दिखाई दे रहा था.







नीचे मैचिंग ट्रांसपेरेंट पंतय थी जो मेरी मोती झंघों और गांड को बहुत काम कवर कर रही थी. पंतय का पिछले हिस्सा बिलकुल स्ट्रिंग जैसा था जो मेरी भारी गांड के बीच में घुस गया था. साथ में एक छोटी सी ट्रांसपेरेंट ब्लैक बेबीडॉल निघ्त्य थी जो मेरी नाभि और पतली कमर को एक्सपोज़ करती हुई मेरी झंघों तक आ रही थी.





मेकअप:

मैंने अपना चेहरा बहुत सेडक्टिव बनाया था. लिप्स को डीप रेड ग्लॉसी लिपस्टिक लगाया था जो बिलकुल चमक रहा था और किश के लिए बिलकुल तैयार लग रहा था. आँखों में कला काजल और थोड़ा स्मोकी ेयेशादौ लगा कर आँखें और बड़ी और सेडक्टिव बना दी थी. गालों पर हल्का सा ब्लश और हाइलाइटर जो मेरी गोरी स्किन को चमका रहा था. बालों को खोल कर वेवी बना दिया था जो मेरी पीठ पर गिर रहे थे. थोड़ी सी जस्मिने की फ्लावर की खुशबू वाली परफ्यूम भी लगायी थी.

अपनी टांगों को अच्छे से रेजर से स्मूथ किया था और थोड़ा सा बॉडी लोशन लगाया था जिससे मेरी गोरी मुलायम स्किन चमक रही थी.

में डीडे करि की में एक इतनी सेक्सी और मस्त ब्लाउज पहनूंगी जो रमेश को और पागल बनदेगा और वह मुझे स्ट्रिप करने लगेंगे और स्ट्रिप करेंगे तो मेरी यह अल्ट्रा सेक्सी लिंगेरी देखो तोह और भी हवस में दुब जाएंगे ..

मैंने वह ट्रांसपेरेंट येलो साड़ी पहनी जो सुरेश ने मुझे गिफ्ट की थी. यह साड़ी इतनी पतली और ट्रांसपेरेंट थी की अंदर की हर चीज़ हलकी सी चमक के साथ दिखाई देती थी. मैंने इसे अपनी कमर से काफी नीचे, बिलकुल नैवेल के नीचे बंधा था. कमरबंध ने मेरी पतली कमर को और हाईलाइट कर दिया था. साड़ी को मैंने अपनी मोती और गोल गांड के अराउंड टाइट से लपेटा था, जिससे मेरी भारी गांड का शेप साफ़ और इंविटिंग दिखाई दे रहा था.

ऊपर मैंने एक नयी डिज़ाइनर स्लीवलेस ब्लाउज पहना था. यह ब्लाउज बहुत डीप कट था — फ्रंट इतना गहरा था की वह मेरे निप्पल्स के बिलकुल ऊपर से शुरू होता था. अगर थोड़ा सा भी स्लिप होता तोह मेरे निप्पल्स साफ़ नज़र आ जाते. ब्लाउज बिलकुल टाइट था, मेरी बड़ी और उभरी हुई चूचियों को अच्छे से सपोर्ट देता हुआ, लेकिन इतना डीप था की मेरी गहरी क्लीवेज और उभर दोनों साफ़ दिखाई दे रहे थे. स्लीवलेस होने की वजह से मेरी गोरी, मुलायम बहन बिलकुल नंगी दिखाई दे रही थी.

मैंने थोड़ा सा मेकअप किया था — रेड लिपस्टिक जो मेरे होठों को चमका रही थी, येलो बिंदी, आँखों में काजल और मस्कारा, एएब्रोस नेअटली दोने. मेरे लम्बे, सिल्की बाल खुले छोड़े थे जो मेरी पीठ पर और kabhi-kabhi मेरी गोल गांड तक जा कर टच कर रहे थे — बिलकुल इंविटिंग लुक दे रहे थे.







मैं मिरर में खुद को देखती रही. ट्रांसपेरेंट येलो साड़ी, डीप कट ब्लाउज, नीचे नैवेल तक खुली कमर, टाइट लपेटी गांड, खुले बाल… मैं खुद को देख कर थोड़ी सी शर्मा गयी, लेकिन अंदर से बहुत कॉंफिडेंट और सेडक्टिव फील कर रही थी.

मैं मिरर में अपने आप को देखती रही. उफ्फ्फ्फ़… बिलकुल एक जवान, हवस भरी रंडी बीवी लग रही थी – लेकिन सिर्फ अपने पति के लिए.

मैंने धीरे से बहार आयी. लकड़ी के चारपाई पर लेट कर रमेश जी को देख कर मैंने एक सेडक्टिव मुस्कराहट दी और अपनी आवाज़ में मिठास मिला कर बोली,

“पति जी… अब आपकी बीवी आपके लिए तैयार है… कैसी लग रही हूँ मैं आज रात?”

रमेश जी की आँखें फैल गयी. उनकी नज़र मेरी ट्रांसपेरेंट साड़ी पर, डीप क्लीवेज पर, खुली कमर पर और मेरी टाइट गांड के शेप पर अटक गयी. वह कुछ पल तक कुछ बोल नहीं पाए.

में देखि उनके धोती के अंदर उनका लुंड अब सख्त होने लगा था ... उफ्फ्फ इतना मोटा और बड़ा लुंड , जितना सोचु उस लुंड के बारे में उतनी hi गीली मेरी बुर हो जाती हैं.

आखिर कर रमेश बोले " रौशनी आप एक छुडासी माल हो उफ्फ्फ ... तुम्हारी यह पतली कमर. उसपर यह कमरबंद. तुम्हारे यह लम्बे घने बाल.

और उसे इतनी सेक्सी तरह से बाँधने का तरीका. यह लाल रसीले honth.Yeh बड़े बड़े मुम्मे और बड़ी गोल टाइट गांड.





रमेश धीरे से चारपाई से उठा. जैसे hi वह खड़ा हुआ, उसकी धोती के अंदर उसका मोटा और लम्बा लुंड एक बड़ा सा बुल्गे बना कर साफ़ दिखाई देने लगा. रौशनी की नज़र सीधा उसके बुल्गे पर पद गयी. उसकी सांस रुक सी गयी, दिल ज़ोर से एक झटका खाया और उसकी बुर एक डैम से और गीली हो गयी. उफ्फ्फ्फ़… इतना बड़ा और मोटा… बिलकुल तैयार था उसके लिए.

दोनों के अंदर अब हवस इतनी बढ़ चुकी थी की इंतज़ार और नहीं हो रहा था. रमेश ने रौशनी को अपनी तरफ खिंच लिया. उसने उसकी नंगी बाँहों को अपने हाथों में पकड़ा और उसके गले पर गहरे चुम्मे देने लगा. फिर उसने उसकी स्लीवलेस ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल के अंदर से उसकी स्मूथ, नंगी और मुलायम बाँहों को चूमना शुरू किया – ऊपर से नीचे तक, dheere-dheere, गरम होठों से.

रौशनी की आँखें बंद हो गयी. उसके मुँह से धीमी सी सिसकारियां निकलने लगी, “आह्हः… पति जी… उम्म्म…”

रमेश ने उसके गहरे क्लीवेज पर अपने होठ रख दिए. उसने उसकी badi-badi चूचियों के बीच गहरा किश किया, फिर धीरे से दोनों तरफ चूमता हुआ नीचे की तरफ बढ़ा. उसने उसकी पतली कमर को पकड़ कर उसके पेट पर चुम्मे दिए और फिर उसकी नाभि पर पहुँच गया. उसने अपनी जीभ निकाल कर रौशनी की नाभि के अंदर धीरे से घुमाया और लीक करने लगा.

रौशनी का शरीर काँप रहा था. वह धीरे धीरे सिसकारियां भर रही थी और धीमी आवाज़ में फुस्कुरा रही थी, “पति जी… आह्हः… यह मत कीजिये… उम्म्म… बहुत मज़ा आ रहा है… आपकी जीभ… अह्ह्ह…”

रमेश अब भी उसकी नाभि को चूमता और लीक करता रहा, एक हाथ उसकी कमर पर और दूसरा उसकी मोती जांघ पर घूम रहा था. दोनों के अंदर आग सी लग रही थी. रौशनी के मुँह से लगातार धीमी सिसकारियां और फुसकारे निकल रहे थे.

रौशनी dheere-dheere अपने घुटनो के बल बैठ गयी. उसकी आँखें अब भी रमेश के बड़े बुल्गे पर टिक्की हुई थी. उसने धीरे से उसकी धोती के क्नॉट को खोला और उसको नीचे की तरफ खींचने लगी. धोती dheere-dheere उसके मोती टांगो से सरकती हुई फर्श पर गिर गयी.

अब सिर्फ एक छोटा सा, थोड़ा सा फटा हुआ अंडरवियर hi रमेश के लुंड को रोक रहा था. उसका मोटा, लम्बा और काला लुंड अंदर hi अंदर इतना बड़ा हो चूका था की अंडरवियर की बुनाई खिंच रही थी. लुंड एक तरफ से उभर रहा था, जैसे आज़ादी मांग रहा हो. उसके ऊपर से hi एक छोटी सी गीली जगह बन गयी थी – प्रेकम की नमी.

रौशनी की सांस तेज़ हो गयी. उसने धीरे से फुस्कुराय, “पति जी… यह इतना बड़ा… और इतना गरम लग रहा है… आपका लुंड बहार आना चाहता है न?”

उसने अपनी ऊँगली से अंडरवियर के ऊपर से hi उसके लुंड को हलके से टच किया. फिर धीरे से दोनों तरफ से अंडरवियर को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगी. जैसे hi अंडरवियर नीचे गया, रमेश का मोटा लुंड एक झटके से बहार आ गया – लम्बा, मोटा, काला और बिलकुल खड़ा. ऊपर से एक चमक्दा सा प्रेकम की लार निकल रही थी.

रौशनी ने उसको अपने हाथों में पकड़ा. लुंड उसके दोनों हाथों में भी पूरा नहीं आ रहा था. उसने धीरे से उसके सुपाड़ी को अपने होठों के पास ले आयी. जैसे hi उसने सुपाड़ी को अपने होठों से छुआ, प्रेकम की गीली लार उसके लोअर लिप पर लग गयी – एक पतली सी चमकदार धार बन गयी जो उसके होठ से नीचे की तरफ खिंच रही थी.

रौशनी की आँखें ऊपर उठी और उसने धीमी, मदहोश आवाज़ में कहा, “पति जी… आपका लुंड इतना गरम और गीला है… यह मेरी होठों पर लग रहा है… उम्म्म…”







रौशनी ने रमेश के मोटा लुंड को दोनों हाथों में पकड़ रखा था. उसका सुपाड़ा बिलकुल लाल और चमक रहा था. उसने धीरे से अपने होठों को उसके बड़े मशरुम हेड पर रख दिया और एक प्यारा सा चुम्मा दे दिया. फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर सिर्फ सुपाड़ी के ऊपर halke-halke से चेतना शुरू किया – जैसे कोई मीठा फल चूस रही हो.

रमेश का लुंड उसके हाथों में फड़क उठा. उसने धीरे से सिसकारी भरी, “उफ्फ्फ्फ़… रौशनी…”

लेकिन रौशनी ने सिर्फ उसके सुपाड़ी पर फोकस किया. उसने उसके बड़े हेड को अपने होठों में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी – हलके से, प्यार से, लेकिन पूरा लुंड को मुँह में लिए बिना. सिर्फ टॉप का बड़ा हिस्सा उसके गरम होठों और जीभ के बीच था. वह जीभ से उसके सुपाड़ी के होल को चाट रही थी, कभी हलके से दांत से छेड़ रही थी, और फिर ज़ोर से चूस लेती थी.

रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से बोलै, “मेरी जान… पूरा लुंड मुँह में ले लो न… उफ्फ्फ्फ़ यह सिर्फ टॉप चूस रही हो… पागल कर रही हो मुझे…”

लेकिन रौशनी ने उसकी बात नहीं मानी. वह सिर्फ उसके बड़े मशरुम हेड को चूस रही थी – कभी जीभ से लोल्लिपोप की तरह चाट रही थी, कभी होठों से कास कर चूस लेती थी, लेकिन नीचे का लम्बा शाफ़्ट बिलकुल टच नहीं कर रही थी. सिर्फ टॉप का हिस्सा उसके मुँह में था.







रमेश की सांसें तेज़ हो गयी थी. उसने चारपाई का किनारा पकड़ लिया और सिसकारियां भरने लगा, “रौशनी… बस… अब मत तड़पाओ… पूरा मुँह में ले लो… उफ्फ्फ्फ़ यह क्या कर रही हो मेरी बीवी… सिर्फ सुपाड़ा चूस रही हो… मैं पागल हो रहा हूँ…”

रौशनी ने ऊपर देखा, उसके होठों पर अभी भी उसके प्रेकम की चमक थी. उसने धीरे से मुस्कुराते हुए सुपाड़ी को चूसते हुए फुस्कुराय, “पति जी… आज मैं सिर्फ आपके इस बड़े हेड को hi चूसूंगी… देखिये कितना तड़प रहे हैं आप…”

रमेश का लुंड उसके मुँह के सामने फड़क रहा था. उसके शरीर में आग लग रही थी. रौशनी सिर्फ उसके टॉप को चूस रही थी – किश, लीक और सूचक – बिलकुल धीरे और प्यार से, लेकिन उसके हर एक्शन से रमेश की हवस और बढ़ती जा रही थी.







उसने अपनी जीभ निकाल कर धीरे से उस प्रेकम को अपने होठों से चाट लिया और फिर सुपाड़ी को हलके से चूमते हुए धीरे से बोली, “आपका लुंड बहुत प्यारा लग रहा है पति जी… बिलकुल तैयार है आज रात के लिए…”

रमेश का लुंड उसके हाथों में फड़क रहा था.

रौशनी ने रमेश के बड़े सुपाड़ी को चूसते हुए धीरे से नीचे की तरफ अपना मुँह ले जाय. अब उसने उसके भारी, काले और थोड़े से बालों वाले बॉल्स को अपने होठों के पास ले लिया. उसने पहले एक बॉल को अपने मुँह में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी – हलके से, प्यार से, जैसे कोई मीठा चूस रही हो.

“उम्म्म्म… मममहह…” रौशनी के मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी. वह बॉल्स को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी, “आह्हः… पति जी… आपके बॉल्स इतने भारी और गरम हैं… उम्म्म…”

फिर उसने दूसरे बॉल को भी मुँह में ले लिया और दोनों बॉल्स को एक साथ चूसने लगी. उसकी जीभ उनके नीचे घूम रही थी. Beech-beech में वह मोअन करती रही, “मममहह… कितने बड़े हैं… आपका लुंड और बॉल्स दोनों बहुत प्यारे हैं पति जी…”

रौशनी ने अब लुंड को थोड़ा साइड किया और रमेश की मोती, बालों वाली और गहरी टांगें चूमने लगी. उसने उसकी हेयरी थिक तइस पर गहरे चुम्मे दिए – ऊपर से नीचे तक, dheere-dheere. हर किश के साथ उसके मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल रही थी. वह उसकी जांघों की अंदर की सॉफ्ट और गरम स्किन को भी चूम रही थी.

रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… यह क्या कर रही हो… बॉल्स चूस रही हो और मेरी जांघों को किश… पागल कर देगी तू मुझे आज…”

रौशनी ने फिर से ऊपर आकर उसके बॉल्स को मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगी. बीच में वह मोअन करती रही, “मममहह… आह्हः… पति जी… आपके बॉल्स चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है… उम्म्म… आपकी मोती हेयरी जांघें भी कितनी गरम हैं…”

रमेश अब बिलकुल कण्ट्रोल में नहीं था. उसका लुंड उसके मुँह के सामने फड़क रहा था और वह धीरे से सिसकारियां भर रहा था. रौशनी सिर्फ उसके बॉल्स चूस रही थी और उसकी मोती जांघों को किश कर रही थी – और हर किश और सूचक के साथ उसके मुँह से मदहोश सी आवाज़ें निकल रही थी.









रमेश अब और नहीं सेह पाया. उसने जल्दी से रौशनी को अपनी बाँहों में उठा लिया और उसको चारपाई पर लेटते हुए खुद भी उसके ऊपर झुक गया. उसने उसकी ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल के नीचे से उसके ब्लाउज के हुक्स खोलने शुरू कर दिए. Ek-ek हुक खोलता गया और उसकी badi-badi चूचियों के उभर साफ़ दिखने लगे.

रौशनी ने नीचे हाथ बढ़ा कर उसके मोटा लुंड को अपने हाथों में पकड़ लिया और dheere-dheere सहलाने लगी. उसका लुंड अब भी गीला था उसके मुँह के थूक और प्रेकम से. वह उसको upar-neeche करते हुए सेहला रही थी.

रमेश ने ब्लाउज के सारे हुक्स खोल दिए. फिर उसने उसकी साड़ी को भी जल्दी से नीचे की तरफ खिंच कर पूरा निकाल दिया. अब रौशनी सिर्फ उस सेक्सी ट्रांसपेरेंट black-red लिंगेरी में थी – उसकी बड़ी चूचियां लास के अंदर से उभर रही थी, पतली कमर और मोती झांघें साफ़ दिख रही थी.

अब साड़ी फर्श पर थी और में बस मेरी ट्रांसपेरेंट लिंगेरी में रमेश जी के सामने झड़ी थी , मेरी उभरी चूचियां, पतली कमर, मोती गांड और स्मूथ झांघें सब कुछ उनके सामने थे.







रमेश ने जैसे hi उसको इस लिंगेरी में देखा, उसका लुंड रौशनी के हाथों में hi एक ज़ोर से फड़का. बहुत सारा प्रेकम उसके सुपाड़ी से निकल कर उसके हाथों पर गिरने लगा. उसका लुंड अब बिलकुल सख्त और गरम हो चूका था.

रमेश ने रौशनी के कान में गरम सांस छोड़ते हुए गंदे, सेक्सी और लुस्टि वर्ड्स बोले,

“उफ्फ्फ्फ़ मेरी प्यारी बीवी… यह लिंगेरी में तू बिलकुल रंडी जैसी लग रही है… तेरी बड़ी चूचियां इस ट्रांसपेरेंट ब्रा में बहार आने को तड़प रही हैं… तेरी मोती गांड और झांघें इतनी सेक्सी दिख रही हैं… मेरा लुंड देख कितना फड़क रहा है तेरे लिए… इतना सारा प्रेकम निकल रहा है… मैं अब और नहीं रुक सकता…”

रौशनी उसके लुंड को सहलाती हुई धीरे से बोली, “पति जी… आपका लुंड इतना गरम और गीला हो गया है… आप मुझे इस तरह देख कर इतना एक्ससिटेड हो रहे हैं…”

रमेश ने उसके होठों पर एक ज़ोर से चुम्मा दिया और फिर उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi ज़ोर से मसलने लगा. उसका लुंड अब भी रौशनी के हाथों में फड़क रहा था और प्रेकम की धार लगातार निकल रही थी.





**तो बे कॉन्टिनोएड...**

रमेश ने अब रौशनी की badi-badi चूचियों को ब्रा के ऊपर से hi zor-zor से दबाना शुरू कर दिया. उसकी मोती उँगलियाँ उसकी सॉफ्ट और उभरी चूचियों को मसल रही थी. ब्रा के अंदर से उसके निप्पल्स सख्त हो चुके थे और ब्रा के ऊपर से hi उभर रहे थे.

रौशनी ने रमेश के मोटा लुंड को अपने हाथों में पकड़ कर dheere-dheere सहलाना जारी रखा. जैसे hi रमेश ने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाया, रौशनी की आँखें बंद हो गयी और उसके मुँह से zor-zor से सिसकारियां निकलने लगी.

“आअह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… आह्हः… ज़ोर से दबाइये… मममहह…”

आंखें बंद करते hi उसके दिमाग में मां जी का चेहरा आ गया. वह उसी चारपाई पर उसके साथ खड़ा था, उसकी बड़ी चूचियों को ब्रा के ऊपर से hi मसल रहा था, उसके कान में वही ृस्टिक हरयाणवी में गंदे वर्ड्स बोल रहा था…





*उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप भी ऐसे hi मेरी चूचियों को दबा रहे थे… आपकी मोती उँगलियाँ… आपका गरम सांस…*

इस इमेजिनेशन से रौशनी की अंदर की गर्मी और बढ़ गयी. वह और लुस्टि हो गयी. उसका हाथ रमेश के लुंड पर और तेज़ हो गया. वह उसको jor-jor से सहलाने लगी और zor-zor से मोअन करने लगी.

“आअह्ह्ह… पति जी… बहुत मज़ा आ रहा है… उम्म्म… आपकी उँगलियाँ… आह्हः…”

लेकिन उसके दिमाग में अब मां जी का चेहरा घूम रहा था. वह सोच रही थी की अगर मां जी उसकी ब्रा के अंदर हाथ दाल कर उसकी नंगी चूचियों को डायरेक्टली मसल रहे होते तोह कितना मज़ा आता…

रौशनी की आँखें बंद थी, लेकिन उसके दिमाग में मां जी का चेहरा साफ़ दिखाई दे रहा था. रमेश उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दबा रहा था, लेकिन रौशनी के शरीर पर असर मां जी की याद का हो रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आपके हाथ इतने मोटा और गरम थे… जब आप मेरी पीठ पर हाथ घूमते थे और ब्रा स्ट्राप से खेलते थे… और जब आपने मेरी कमर को ट्विस्ट किया था और मैं ज़ोर से सिसकारी भरी थी… उसी वक़्त आपने मुझे किश किया था…

इस इमेजिनेशन के असर से उसकी बुर और भी ज़्यादा गीली हो गयी. उसकी सांसें और तेज़ हो गयी. वह रमेश के लुंड को और जोर से सहलाने लगी, लेकिन उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें अब सिर्फ रमेश के लिए नहीं थी.







“आअह्ह्ह… उम्म्म… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्हः…”

रौशनी के शरीर में एक अलग hi करंट दौड़ रहा था. मां जी के साथ वाली मस्ती की याद उसके हर स्पर्श को और सेंसिटिव बना रही थी. जब रमेश ने उसकी नाभि के पास हाथ फेर्रा, तोह उसको लगा जैसे मां जी hi उसकी नाभि को लीक कर रहे हैं. जब उसने उसकी जांघों पर हाथ रखा, तोह उसको लगा जैसे मां जी की मोती जांघें उसके मुँह के पास हैं.

उसके दिमाग में एक hi थॉट चल रहा था — अगर मां जी अभी यहाँ होते और रमेश जी के साथ मुझे दोनों तरफ से छू रहे होते… तोह मैं क्या करती?

इस गंदे इमेजिनेशन के असर से उसकी हवस इतनी बढ़ गयी की उसने खुद hi अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और अपनी बड़ी चूचियों को बहार निकाल लिया. अब वह रमेश के लुंड को सहलाती हुई और ज़ोर से मोअन कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में मां जी उसकी नंगी चूचियों को मसल रहे थे.

रौशनी के दिमाग में अब मां जी का चेहरा इतना साफ़ हो गया था की वह खुद को रोक नहीं पा रही थी. इमेजिनेशन के असर से उसकी हवस डबल हो गयी थी. वह और वाइल्ड हो गयी.

रमेश ने उसकी ब्रा के हुक्स खोल दिए थे और उसकी badi-badi, नंगी चूचियां बहार आ चुकी थी. जैसे hi उसने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक कुछ को अपने मुँह में ले लिया, रौशनी का शरीर एक झटके से काँप उठा.

“आअह्ह्ह… उम्म्म… पति जी…”

रमेश उसकी कुछ को ज़ोर से चूस रहा था, जीभ से उसके निप्पल को चाट रहा था और कभी दांतों से हल्का सा काट रहा था. दूसरी कुछ को वह हाथ से मसल रहा था. रौशनी की आँखें बंद थी और उसके मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी.

लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी थे.

उफ्फ्फ्फ़ मां जी… आप भी मेरी चूचियों को ऐसे hi चूसते थे… आपकी दादी मेरी स्किन पर रगड़ रही थी… आपके होठ इतने गरम थे…

रौशनी ने अपने हाथ से रमेश के सर को पकड़ लिया और उसके बालों में उँगलियाँ घुसा दी. वह और जोर से मोअन करने लगी, लेकिन उसके मुँह से एक बार “मां जी…” निकलने वाला था. वह खुद को रोक लेती, लेकिन उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ में अब कन्फूसिओं साफ़ थी.

“आअह्ह्ह… पति जी… उम्म्म… आप… आप बहुत अच्छे से चूस रहे हैं… मममहह…”

रमेश ने उसको चारपाई पर लेटाया और खुद भी उसके ऊपर चढ़ गया. अब वह उसकी दोनों चूचियों को baari-baari से मुँह में ले रहा था और zor-zor से चूस रहा था. रौशनी की टांगें चौकोर हो गयी थी. उसका शरीर तड़प रहा था.





लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी उसकी चूचियों को चूस रहे थे. वह सोच रही थी की अगर मां जी अभी यहाँ होते और रमेश जी के साथ उसकी दोनों चूचियों को चूस रहे होते… तोह वह क्या करती?

रौशनी के मुँह से फिर से एक हलकी सी सिसक निकली, “आआह्ह्ह… मां… जी… उम्म्म…”

वह झट से रुक गयी. उसने आँखें खोल कर रमेश की तरफ देखा. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था.





रमेश ने कुछ नहीं सुना था. वह अब भी उसकी चूचियों को चूस रहा था. लेकिन रौशनी के अंदर अब दर और एक्ससिटेमेंट दोनों saath-saath थे.

रौशनी ने फिर से आँखें बंद कर ली. अब वह पूरी तरह से अपनी इमेजिनेशन में खो चुकी थी. रमेश उसके शरीर के साथ खेल रहा था, लेकिन उसका दिमाग अब मां जी के साथ था — उनके हाथ, उनकी जीभ, उनका मोटा लुंड और उनकी ृस्टिक आवाज़.

रौशनी के मुँह से लगातार धीमी और मदहोश सिसकारियां निकल रही थी… और हर सिसकारी के साथ उसके दिमाग में एक hi नाम घूम रहा था — मां जी.

उफ्फ्फ्फ़… मैंने ऑलमोस्ट मां जी का नाम ले लिया… अगर पति जी को पता चल गया तोह? लेकिन… यह इमेजिनेशन… यह गर्मी… मैं और नहीं रोक पा रही…
 
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