Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 9 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

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असलम और रौशनी की चुदाई ज़ोरो से चल रही थी लेकिन असलम को कुछ अलग तरय करना था .. उसने अपना मोटा लोढ़ा रौशनी की बुर से बहार निकल बोले

रुकसाना डार्लिंग चलो कुछ नया करते हैं!!! रौशनी ने मन hi मन सोचा की आज रात उसने बहुत कुछ जो किया था और अनुभव करि थी, वह सब नया था, और ये नए चीज़ें क्या सीखने वाले थे असलम उसे आज?

असलम ने उसे पीठ के बल लिया दिया और कुछ पलों तक उसके चूचियों को फिर से पागलों जैसे चूसने लगा और उसने उसके स्तनों के बिच के दरार को छाता जिससे उसके चूचियों के बीच की दरार गीली हो गयी थी. फिर असलम ने उसके स्तनों को पकड़ लिया और अपने खुद के घुटनों के बल उसके ऊपर चढ़ गया. उसने अपना लोढ़ा रोषनिनके स्तनों के बिच में रख रौशनी के स्तनों को उसके लुंड के साइड्स पर दबाने के लिए रौशनी को कहा. रौशनी एक आज्ञाकारी महिला की तरह वही करि जो असलम कह रहा था. असलम ने अब अपना लोढ़ा रौशनी के चूचियों की दरार के बीच रगड़ने लगा जैसे वह उसकी चूचियों की चुदाई कर रहा हो और उसके लोडे को रौशनी की चूचियों के बीच aage-pichhe करना शुरू कर दिया. असलम रौशनी की ख़ूबसूरत काली आँखों में देखने लगा और उसकी चूचियों की चुदाई करते बोलै “उफ़ रुकसाना बेगम मेरी डार्लिंग, इसे चूचियों की चुदाई कहते हैं. तुम्हारे स्तनों की जोड़ी इतनी मस्त है उफ्फ्फ्फ़ ; क्या तुम्हें यह नयी तरकीब पसंद आयी उफ्फ्फ मम अह्ह्ह ले लो मेरा लोढ़ा तेरी चूचियों के बीच उफ़ मममम”









रौशनी अब असलम के आँखों में आँखें दाल मुस्कुराई और स्वीकृति में अपने सर को हाँ में हिलने लगी और सिसकियाँ मारती रही. असलम इसे तोह एक hi रात में इतने मज़्ज़े दिखा रहा था जो उसने अपनी पूरी शादीशुदा ज़िन्दगी में बस 3-4 बार hi महसूस करि थी.

उसे अपने स्तनों के बिच एक गर्म कठोर लोडे का एहसास बड़ा मस्त लगने लगा था और साथ hi असलम bich-bich में उसके चूचियों के निप्पल्स भी खिंच रहा था. असलम के लोडे के हर बार आगे की और धक्के देने पर असलम का मोटा लोढ़ा तोह उसकी चीन से भी टकरा रहा था .. उफ्फ्फ इतना कला और मोटा लोढ़ा था असलम का उफ्फ्फ मम रौशनी बस वही सोचती हुयी सिसकियाँ मारती रही. रौशनी अपने सर को झुका का अपने मुंह को इस तरह खोला की असलम का लोढ़ा उसके हर आगे के धक्के के साथ उसके मुँह में घुस रहा था . रौशनी की जीभ अब असलम के लोडे के सर पर चूमने लगी और इस एहसास से असलम जोरों से कराहना शुरू कर दिया.







असलम के लोडे से काफी प्रेकम निकल रहा था. रौशनी ने उसके लोडे को चूसते हुए उस प्रेकम का स्वाद चखने लगी और उसे उस प्रेकम की नमकीन स्वाद पसंद आने लगी और फिर इसे और चाटने लगी !!!!! अपनी चूचियों की इतनी मस्त और जोरदार चुदाई के साथ, रौशनी jor-jor से सांस ले रही थी. उसे इस रात में चुदाई का अनुभव दो बार हो चूका था और अब यह , लेकिन फिर भी असलम ने थकने का कोई संकेत नहीं दिखाया था.

असलम बस रौशनी की स्तनों को छोड़ता रहा और उसके निप्पल्स को दबाता रहा. कई मिनट तक तेज़ गति से चूचियों की चुदाई के बाद, असलम का सम्भोग बढ़ने लगा, वह jor-jor से सांस लेने लगा और उसका लोढ़ा बेतहाशा झटकों पर झटके मारने लगा था.

असलम: अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम रुकसाना बेगम ममम ....मैं मेरे लुंड से ज्वाला मुखी फूटने वाला हैं उफ्फ्फ ममम कहाँ चाहिए तुम्हे मेरे लोडे का सफ़ेद गधा माल आह उफ्फ्फ ममम ?

रौशनी सिसकियाँ मारती हुयी बोली … “ममममम असलम मियां ाः उफ़ मममम हाँ उफ्फ्फ एस्सस मम आह्ह्ह्ह हैं उफ्फ्फ अपने लोडे का रास मुझे आप मेरे मुंह में पिलाइये अहह एस मम हाँ ....मेरे मुंह में डालिये मियां . मैं आपके लुंड से निकलता सारा रास पीना चाहती हूँ. मैं उसका स्वाद लेना चाहती हूँ अह्ह्ह. आपका माल मुझे पिलाइये मियंन्त्र !!







रौशनी को इतनी ज़ोर से और खुलेआम उसके लुंड के वीर्य की छह को देख, असलम का जोश चरम पर पहुँच गया और उसने रौशनी को अपने मुंह को खोलने के लिए कहा. एक जुरडायर कराह के साथ आखिर कार 2 घंटे के रौशनी की चुदाई की लग अलग तरीकों के बाद उसने अपना वीर्य badi-badi लम्बी धारों में रौशनी के मुंह में छोर इ लगा. असलम के लोडे से इतने फव्वारे उड़ने लगे की कुछ उसका वीर्य रौशनी के मुँह से सीधा रौशनी के साइन पर गिरने लगा मनो रोशिनी के चीन से वह उसके गर्दन पर पहुंचने लगा जैसे को मोती का हार बन गया हो.

रौशनी अपने मुंह में जितना असलम का वीर्य पि सकीय पिने लगी और असलम को मुँह खोल कर अपनी जीभ दिखाई की कितना वीर्य वह पि रही थी. दोनों ek-doosare को देख मुस्कुराए. रौशनी ने अपनी चेरे पर छायी हुयी असलम के लोडे का वीर्य अपनी उँगलियों में ली और उसे चाट चाट कर साफ़ कर दी फॉर रौशनी ने असलम के लोडे को अपने मुँह में लेकर उसे चूसकर साफ़ करने लगी.























असलम रौशनी की ऐसी हरकतें देख दांग रह गया ..उसने अब तक कई छूट छोड़ी थी लेकिन रौशनी जैसी महिला पहली बार मिली थी उसे .. असलम मुस्कुराता हुआ रौशनी के मुलायम और पसीने से भरे बदन की बगल में गिर पड़ा. दोनों असलम और रौशनी, एक दूसरे को देखने लगे और उनकी आँखों में चुदाई की संतुष्टि झलक रही थी.

रोहणी अब असलम के बगल में पड़ी सोची “उफ्फ्फ असलम मियां नेट ओह आज उसकी बुरी तरह से चुदाई करि थी .. उफ़ ऐसी चुदाई जो सलीम और रमेश जैसी मस्त थी … ऐसे बुड्ढे में इतना दम होगा उसे तोह कभी लगा नहीं था जितना इन तीनो में था और खासकर असलम में जो तीनो से और भी उम्र में बड़ा था.

कुछ पल दोनों एक दूसरे को अपने बाँहों में hi आराम करने लगे .. कुछ 10 मं बाद असलम फिर से रौशनी की चूचियों के साथ खेलने लगा . रौशनी भी अपने हाथों को असलम के शरीर पर फेरती हुयी अपने हाथों को असलम के लोडे के तरफ ले गयी.. असलम के लोढ़ा में फिर से जान आ रही थी और रौशनी उसके लोडे को सहलाने लगी और कुछ hi पलों में असलम का मोटा कला लोढ़ा फिर से खड़ा होने लगा ..

उफ्फ्फ्फ़ अभी तोह इतनी मस्त दो घंटे की चुदाई करे थे और फिर से इनका लुंड सख्त हो रहा हैं उफ्फ्फ यह बुड्ढे में इतनी स्टैमिना उफ्फ्फ्फ़ आज तोह वह रात भर इस बुड्ढे के लोडे से चूसने वाली थी .. रौशनी ने भी थान ली की वह और बहुत छुड़ेगी असलम के मोठे काळा लोडे से .

असलम ने भी फिर से रौशनी को जकड लिया अपनी बाँहों में और दोनों एक गहरी चुम्बन में लग गए थे .. दोनों के बीच पूरी रात अभी भी बाकी थी और रौशनी अब खुद को मनो असलम की ुनोफ़्फ़िसल बेगम hi मान रही थी

रौशनी असलम के मोठे लोडे को सहलाती रही और स्लैम का लोढ़ा सख्त होते गया .. रौशनी ने झुक कर असलम के लोडे के सर को चूमि और उसे चूसने लगी और असलम कराहता रहा .. उसका लोढ़ा अब पूरा सख्त हुआ था और उसने रौशनी को पकड़ लिया और अपने ऊपर खींच लिया .. रौशनी समझ गयी की असलम को अब उसकी कैसी चुदाई करनी हैं और वह खुद उठकर असलम के लोडे को अपनी बुर पर निशाना लगायी . असलम अपने लोडे को रौशनी की बुर पर रगड़ने लगा .. रौशनी को रहा नहीं जा रहा था ..”उफ़ असलम मियां अब दाल भी दीजिये अंदर उफ्फ्फ देखिए न मेरी छूट ककैसे आपने लोडे के रास को पीना चाहती हैं .. अब आप अपने लोडे का रास फिर से पिलाइये न मेरी बुर को अहह उफ्फ्फ्फ़ मेरे असलम मियां ाः अब छोड़िये अपनी रुकसाना बेगम को फिर से अहह उफ़ फममम:”





“अच्छा बेगम अब छुड़ेगी तू मेरे लोडे से हम्म अब तोह तेरी खैर नहीं .. उफ्फ्फ अब तोह और भी लम्बी चुदाई का खेल खेलूंगा तेरी इस फुदकती बुर के साथ अहह ..”

फॉर असलम ने एक hi झटके में रौशनी की बबुर में अपने लोडे को घुसा दिया और रौशनी भी निचे असलम के लोडे पर बैठ गयी और उसका मोटा लोढ़ा अपनी फुदकती बुर के अंदर लेने लगी ..

असलम ने रौशनी की बुर में ज़ोर का धक्का लगा दिया. इस बार असलम का 9 इंच का कला मोटा लोढ़ा रौशनी की बुर को बरी बेरहमी से चीरता हुआ पूरा जार तक अंडर समां गया.













असलम लोडे के बारे बारे बॉल्स रौशनी के ऊपर की और उठे हूय विशाल चूतड़ों से चिपक गए जैसे जैस ईस्लाम रौशनी की चुदाई करता और रौशनी उसके लोडे पर ककुद्ती उसके बारे बारे बॉल्स रौशनी की चूतड़ों से टकराते जिससे रौशनी जोरों से सिसकियाँ मारती बोली "

आआआईईईई. ...ाःह. .आअह्ह्ह.. .... असलम मेंननननन, उफ़ क्या लोड अहइँ इतना दुमदार उफ्फ्फ्फ़ क्या छोड़ते हो आप उफ्फ्फ ममममम अह्हह्हंन ऊफ्फ मममम एससससस”

असलम बस रौशनी को चिढ़ाते जुए बोलै ... “रुकसाना बेगम उफ्फ्फ मममम तुम्हें यह अच्छा नहीं लूग रहा बेगम ?" असलम ने अपना आधा लुंड बाहर निकाल फिर से रौशनी के छूट के जार तक पेलता हुआ बोलै.

रौशनी भी सिसकियाँ मारती हुयी बोली" Aaaaaiii...issss. .जी बहुत अच्छा लूग रहा है. हम आज रात आपसे जी भर कर छुड़वाना चाहते हैं अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममममम.."

अब असलम बस उसकी कमर पकड़ कर उसे अपने लोडे के ऊपर निचे हिलने लगा .. रोशन ी भी खुद ऊपर निचे अब असलम के लोडे पर कूदने लगी और असलम उसकी बुर की चुदाई इस अलग मुद्रा में छोड़ने लगा ...

ऊपर रौशनी की बड़ी चकहियाँ हवे में लटक रही थी और अब बाउंस हो रही थी ऊपर निचे और असलम बस उसकी चूचियों को देखते hi रहा और उसकी चुदाई की गति भी धीमी हो गयी .....

रौशनी असलम की आँखों में देख कर मुस्कुरा कर बोली “असलम मियां उफ्फ्फ मममम ऐसे क्या देख रहे हो मुझे ...”

असलम कराहते बोलै .., “उफ्फ्फ रुकसाना में देख रहा हु मेरी बेगम कितनी सेक्सी और खूबसूरत हैं .. उसकी चुहकियों की आकर कितनी गोल हैं और मस्त हैं ....” रौशनी ने अपना एक हाथ असलम के सीने पैर रख उसकी कमर को तेज़ तेज़ उसके लोडे पर नाचती सिसकियाँ मारती हुयी बोली असलम मियां उफ्फ्फ मममम आपको अब पता चला की आपकी बेगम इतनी सेक्सी और खूबसूरत हैं अहह उफ्फ्फ ममममम”

ालसम बोले “उफ्फ्फ रुकसाना बेगम मममम, नहीं उफ़ मेरी बेगम अह्ह्ह्ह हम तो आप के कब से दीवाने थे बस अब तुम मिली हो और मुझे बड़ी मस्त लग रही हो उफ्फ्फ ममम चुड़ते हुए मेरे मोठे लोडे से.”

असलम अब रौशनी की हिलती चूचियों को फिर से बार बार देख उसकी बुर की कुटाई करने लगा और जोरों से .. रौशनी अपने लाल नेल पोलिश वाले नाज़ुक हाथों को असलम की मर्दानगी से भरी छाती पर रख उसके लोडे के ऊपर कूदने लगी .. अपने चूतड़ों को पहच पहच की आवाज़ों में ऊपर निचे करती रही ..

असलम उफ्फ्फ ममम मेरी इन लटकती चूचियों का कुछ करिये न उफ्फ्फ ममममम कितनी हैवी हैं आह उफ्फ्फ मम असलम मियां ाः कुछ करीईई,...”

असलम ने रौशनी की चूचियों को अपने कहता हाथों में ले दबाने लगा .. उसके निप्पल्स को पिंच करने लगा ., रौशनी आह उफ्फ्फ की सिसकियों से भरी आवाज़ें निकलने लगी और असलम के लोडे पर कूदती हुयी उसके मोठे लोडे से मस्ती में छोड़ने लगी.

रौशनी पूरी हवस में मग्न चुद रही थी असलम के लोडे से और फिर रौशनी ऊपर झुक कर अपनी लटक रही चूचियों को असलम के चेहरे पैर रगड़ती जोर जोर से अपनी कमर चलती हुए सिसकियाँ मारती हुयी बोली “वो तो आप hi जानते हैं की आप जैसे शौहर को उनकी बेगम को खुस रखना होता hi और हमारी सेवा करनी होती हैं”

“हाँ हाँ मेरी बेगम सब करेंगे तेरे साथ अहह उफ्फ्फ ये ले मेरा मोटा लोढ़ा तुम्हारी फुदकती छूट में .. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह”

रौशनी असलम की बातों को सुन उसके लुंड पैर उछलती असलम के होंठो को चूमने लगी.

अहह हैं उफ्फ्फ मममम असलम मियां अआप ऐसी hi मेरी फुदकती बुर की कुटाई करिये अहह उफ्फ्फ मममम आपको और मुझे आज साडी रात प्यार करना हैं .. आज साड़ी रात मुझे आपके लोडे से छोड़ना हैं अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ ममममम” रौशनी के मुँह से साडी रात उसकी छुड़वाने की बात सुन कर असलम ने रौशनी की चूचियों को पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया और अपना चेहरा उसकी चूचियों में रख कर उसकी चूचियों को चूसने लगे और रौशनी भी चुदाई में मग्न असलम के आँखों में देख बोली ... अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम हाँ असलम मियां मममम अआप मुझे अपनी बहो मि लिए अपनी बेगम को ऐसे hi प्यार करो उफ्फ्फ मममममम.

असलम मियां उफ्फ्फ ममम अआप उफ्फ्फ मममम अपनी बेगम जानू के चूचियों को पूरा अपने मुँह में भर चूसिये अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममम जब आप मेरी चूचियों को जब चूसते hi ना तोह मुझे उफ्फ्फ मममम बड़ा मज़ा आता हैं असलम मियांननननन”

असलम ने रौशनी को अपनी बाँहों में कस्ते हुए रौशनी की चूचियों को अपने मुँह में भर कर चूसते बोले “मेरी डार्लिंग को मज़ा आता हैं तो में रोज़ अपनी डार्लिंग को ये मज़ा दिया करूँगा..” और असलम ने रौशनी की बायीं निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगे और अपनी चकचियों की चूसै और अपनी बुर की चुदाई एक साथ होते देख और महसूस कर रौशनी को ऐसी फीलिंग हुयी जैसे वह जन्नत में उड़ने लगी थी ...

उस कुटिया के कमरे में अब बस दोनों की चुदाई की पांच पांच और रौशनी सिसकियों की hi आवाज़े गूंज रही थी. असलम के उसके निप्पल चूसने और निचे से उसकी छूट पैर धक्के महसूस कर रौशनी और तेज़ तेज़ असलम के लुंड पैर उछलने लगी जिस से उसके मुँह से और जोरों से सिसकियाँ और आवाज़ें निकलने लगी

“aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मियां aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh उफ्फ्फफ्फ्फ़ ममममम aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh धेरेईईईई dhereeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.”

























अब असलम निचे से अपनी गांड उठा कर रौशनी के कूदने को टक्कर देते हुए अपने खुद के धक्कों से जवाब दे कर रौशनी को मस्ती में छोड़ रहे थे की तभी रौशनी की छूट ने पानी चोर दिया और वह असलम के ऊपर की निढाल हो गिर पड़ी

असलम ने लेकिन रुकने का कोई नाम नहीं लिया और वह निचे से रौशनी की छूट में अपने लोडे को पेलते उसकी चूचियों को बस चूसे hi जा रहे थे

असलम के लोडे की अब तेज़ गति से रौशनी की छूट पैर धक्के लगाने रौशनी पूरी थकी हुयी थी लेकिन फिर भी चुदती रही और फिर ऐसी 1 घंटे और चुदाई से असलम और रौशनी फिर से दोनों थक चुके थे. असलम ने तोह रौशनी के पुररे बदन को निचोड़ डाला था. दोनों फिर पानी पिने नग्न hi हॉल में चले गए .. चलते चलते असलम बस रौशनी की चूतड़ों से hi खेलते रहा और उसे दबाता रहा और उसकी गांड के छेद में ऊँगली रगड़ने लगा ..

पानी पीकर असलम ने हॉल में पड़े तेल के डिब्बे को लेकर कमरे में ले आया .. वेब वह रौशनी की गांड की तेल से मालिश कर उसकी गांड की छेद की चुदाई करने वाला था .. रौशनी की गांड की चुदाई शुरू होने वाली थी ...

रौशनी की गांड क्या असलम के मोठे काळा लोडे को लेने तैयार थी ... इतना मोटा लोढ़ा तोह उसकी गांड के चीड़ की चुदाई की सोच से पूरा सख्त खड़ा था .. रौशनी की गांड की चुदाई होने वाली थी और रौशनी के मज़्ज़े तोह और भी होने बाकी थे . रात अभी भी बाकी थी और रात की जवानी ख़तम नहीं हो रही थी.
 
रौशनी के बदन पर असलम का माल गिरा हुआ था .. वह उसे साफ़ करने बाथरूम चली जाती हैं और नाहा कर बस एक तोलिये को लपेटे बहार कमरे में आ जाती हैं.









तभी असलम अभी हुयी चुदाई के बाद बाथरूम चले जाता हैं पिशाब करने.

कमरे से जाते जाते असलम रौशनी की चूचियों को दबोचता हैं और रौशनी भी बे झिझक असलम के लोडे को दबोचती हैं..

अब रौशनी उस कमरे मई ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने होंठो पर लिपस्टिक लगा रही थी. उसे पता था की असलम उसे रात भर छोड़ने वाला हैं .. वह असलम को और गरम करना चाहती थी इसीलिए जरा सा सवारने लग जाती हैं .

रौशनी कड़ी हो जाती हैं और अपने तोलिये को अपने मुलायम बदन से निचे फिसलने देती हैं ..

वह अब सामने के टेबल पर आईने को अपने गदराये हुस्न को ऊपर से निचे देख , निहार रही थी और मन hi मन सोच रही थी, (मई अब भी कितनी सेक्सी और कामुक दिखाई देती हु ) और रौशनी मिरर मई निहारती हुई अपनी मुलायम और गदरायी चूचियों पर अपने हाथ फेरने लगी फाई मिरर के

सामने अपने मस्ताने फिगर को निहारते हुए वह कभी अपनी चूचियों को अपने हाथो से





उठा उठा कर देखती कभी अपनी गहरी नाभि और अपनी फिट वाली पेट को देखती हैं और फिर रौशनी अपनी पहली हुई छूट पर हाथ फेरते हुए, सोचती हैं (है मेरी छूट कितनी पहली हुई है, वाकई में मेरा लाजवाब बदन हैं जो नग्न इतना गजब दिख रहा था ) रौशनी की जांघें, उसकी पेट का उठाव और मोठे मोठे चूचियां और उन पर एक लम्बी लकीर की गहराई उसके हुस्न को बड़ा मादक बना रहे थे.

फिर रौशनी पीछे घूम कर अपनी मोती चूतड़ों को मिरर में निहारने लगी और वह अपनी उभरी हुयी चूतड़ों को मिरर के सामने और उभर कर देखने लगी ( उफ्फ्फ्फ़ है कितनी बड़ी और मोती गांड है मेरी, तभी तो इस मतवाली गांड को देख कर असलम जैसा बुद्धा भी मेरी गदराई गांड मरने को तड़प रहा होगा उफ्फफ्फ्फ़ आज तोह मेरी गांड की चुदाई होनी निश्चिंक्ट हैं और में भी यही चाहती हूँ),









असलम वापस कमरे में आता हैं और रौशनी को नग्न देख बस एक लाल लिपस्टिक लगाए चमके हुए देख उसके लोडे में जान आने लग जाती हैं और वह बिना कण्ट्रोल किये उसे अपने बाँहों में भर लेता हैं .. रौशनी भी रेस्पोंद करती हैं और अब दोनों एक दूसरे के बाँहों में बाहें डेल एक दूसरे के होठों को चूमने लगते हैं और एक गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. रौशनी के हटोहों को चूमते हुए असलम अपने हाथों से उसकी चूतड़ों को जोरों से मसलता हैं और रौशनी चूमों के बीच बीच hi सिसकियाँ मारने लग जाती हैं .. इससे असलम और गरम होता हैं और उसका कला मोटा लोढ़ा खड़ा होने लग जयते हैं जो अब रौशनी के गोल आकर वाली नाभि से टकराता हैं .. उसके लोडे से ऑरेकम निकलते हुए रौशनी की नाभि को गीली करने लग जाता हैं और दोनों लम्बी और गहरी चुम्बन में लग जाते हैं … असलम फिर से रौशनी के चूतड़ों को मसलता हैं ..

“उफ़ रुकसाना ममम क्या चूतड़ हैं तेरे .. उफ्फ्फ पहले से भी और मस्त और गोल हैं .. उफ्फ्फ इतनी मुलायम .. मन करता हैं मसलता hi राहु मममम”

उफ़ असलम मियाँ आपके हाथों से मेरी चूतड़ों को मसलते हुए अलग hi मज़्ज़ा आरा अहइँ उफ्फ्फ मममम अब तोह यह आपके hi हैं जितना चाहे उन्हें मसलिये … ममम उफ्फ्फ्फ़”

असलम ने कमरे में तेल की डिब्बी लायी होती हैं और उसे अपने हाथों में लिए अब तेल से रौशनी की चकहियों की मालिश करते हुए वह उसकी चूचियों को हाथों में लिए मसलता हैं .. और उसके निप्पल्स मुँह में लिए चुस्त हैं “उफ्फ्फ रुकसाना बेगम तुम्हारी इन चूचियों ने मुझे कब से दीवाना बना दिया हैं ममम क्या मुलायम और रसीली चूचियां हैं तेरी ममममम दुकनिया की सबसे मस्त चूचियां हैं मेरी बेगम की मममम ..”

रौशनी भी असलम के सर को पकड़ते हुए उसे अपनी चकहियों पर दबती हैं .. “आह मियाना ममम चूसिये न उन्हें मम आप hi की हैं ममम आपके मुँह में लीजिये और चूसिये ममम एस अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम”

रौशनी की चूचियों की निप्पल्स पूरी तन कर कड़ी थी मनो दो पहाड़ियों की शिखर हो .., और असलम अब दोनों निप्पल्स को मुँह में लिए चुस्त हैं और हलके से दबाता हैं .. रौशनी की गर्मी बहुत बढ़ रही थी और वह अपनी बड़ी मुलायम चूचियों को पकड़े अपनी चकुचिओं को उसे खिलाती हैं… और असलम भी बड़े मज़्ज़े से उसे चूसते जाता हैं,.

अब फिर वह रौशनी को उसके पेट पर बिस्तर पर लिटा देता हैं और तेल की बोतल उठाकर बिस्तर पर बैठ जाता हैं ,रौशनी अपने दोनों घुटने मोड पड़ी हुई थी और उसकी मदमस्त चूचियां उसकी सांसो के साथ ऊपर नीचे हो रही थी. अब असलम तेल लेकर रौशनी की मस्तानी गोरी चूतड़ों पर लगाने लगा, और रौशनी की नंगी टैंगो को अपने हाथो से सहलाने लगा. रौशनी इस सब का आँखे बंद किये मज़ा ले रही थी उसकी छूट रास से भीगने लगी थी. असलम अब जोरों से रौशनी की जांघों को दबोचने लगा और बीच बीच में रौशनी की छूट को दबोचता हैं और फिर उसकी जांघों को दबोचने लगता हैं … रौशनी की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह अपनी दोनों जांघों को और फैला देती हैं .. असलम रौशनी की चूतड़ों को फैलाई हुए देख कण्ट्रोल नहीं कर पता और अपनी नक् ले जाकर रौशनी की पहली हुई बुर को सूंघने लगता है. रौशनी की ुबाहृ हुयी मटकती चूतड़ों को देख असलम सोचता हैं (उफ्फ्फ्फ़ आज रौशनी को ऐसा मज़ा दूंगा की वह खुद कहने लगेगी असलम मियां अपनी बेगम की गांड मई अपना मोटा लोढ़ा दाल कर मुझे खूब कास के छोड़ दे.













असलम की मालिश जारी रहती हैं और वह अब अपने हांथो मई तेल लेकर रौशनी की कमर पर तेल लगाने लगता है और धीरे धीरे अपनी उँगलियों को रौशनी की चूतड़ों के बन्स के बीच मई चलने लगता है .. फिर अपने अंगूठे को तेल में भिगोए एकदम से रौशनी की गांड के छेद में उतरने लग जाता हैं .. रौशनी इससे एकदम से चौंकती हैं लेकिन उसे पता था की यह बात तोह होने hi वाली थी .. असलम भी धीरे से अपने अंगूठे को रौशनी की गांड में अंदर बहार करने लगता हैं और आगे रौशनी बड़ी सी बड़ी सिसकियाँ मारती रहती हैं .. हे भगवान् उफ्फ्फ मेरी गांड में आपने उफ्फ्फ ममममम हाहहननन मम एससससस>”

असलम इस सब में बड़ा माहिर था और वह इस तरह मालिश करता है की उसकी ऊँगली रौशनी की गांड की गहरी मई सरकने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है और असलम अपनी ऊँगली जो अभी भी रोशनीकी गांड के छेद में फांसी हुयी थी - उसपर और तेल लगता हैं और अपने अंगूठे को रौशनी की गांड की गहराई मई ऊँगली थोड़ा दबा कर नीचे की और प्रेशर देता है जिससे उसका अंगूठा अब रौशनी की गांड के छेड़ मई पूरी अंदर तक सरक जाती है और रौशनी लेते हुए बॉइस्टर के बेडशीट को जकड़े हुए बस बड़ी सी बड़ी ाहुफ्फ मममम ऊईम्माए की सिसकियाँ मारती रहती हैं. असलम भी रौशनी के गांड के छेड़ पर अपने अंगूठे का दबाव देता हुआ अब उसके अंगूठे को अंदर बहार करने लगता हैं मनो अंगूठे से रौशनी की गांड की चुदाई कर रहे हो.

असलम बस रौशनी की गोरी गोरी गांड देखते हुए और पागल हो जाता है और खूब सारा तेल रौशनी की चिकनी गांड पर दाल कर अब अपने दोनों हांथो से रौशनी की चूतड़ों को दबोच दबोच कर मसलने लगता है और वहां रौशनी बस आह आह करके सिसकियाँ hi मारने में लुफ्त रहती हैं.

असलम फिर से रोशननि के गांड के छेड़ को सूंघता है और पागल हो जाता है और अपनी जीभ से रौशनी की गांड के छेड़ को चाटने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है. और दो बार रौशनी की गांड की जीभ से चाटने के बाद असलम फिर से अपनी ऊँगली रौशनी के गांड के छेड़ मई पेल देता है जिससे उसकी ऊँगली रौशनी की गांड मई आधी से ज्यादा उतर जाती है. असलम बस मन hi मन सोचते हैं की (आअज तोह इस घोड़ी की गांड मर मर के लाल कर दूंगा.)

असलम अपनी ऊँगली को रौशनी की गांड में रखते हुए उसके साइड में आ जाता हैं और उसके लोडे को रौशनी झट से पकड़ लेती हैं और वह और भी जोश मई आकर असलम के लुंड के बॉल्स को अपने हाथो से सहलाते हुए असलम के मोठे लोडे के गुलाबी सुपडे को चूसने लग जाती है

असलम फिर तेल मई अपनी इस बार दो उँगलियों को डुबो कर रौशनी की गांड मई पूरी भर देता है, थोड़ी देर बाद असलम रौशनी को फिर से घोड़ी बना कर अपने लोढ़ा पर ढेर सारा तेल लगा कर रौशनी की मोती गांड मई अपना लोढ़ा लगा कर एक तगड़ा झटका मरता है और इस हमले से रौशनी के मुँह से एक चीख hi निकल जाती है .





इतना सारा तेल लगा कर जो लोढ़ा अंदर घुसाया था असलम ने रौशनी की गांड में , अब वही असलम आधे से ज्यादा रौशनी की गांड मई फँस जाता है.









रौशनी चिहक्ति हुयी सिसकियाँ मारती हुयी .. “उफ्फ्फ असलम मममम दर्द कर रहा है अपना लोढ़ा बहार निकल ले … उफ्फ्फ मममममम आआआआह आआआआह.

असलम फिर कहता हैं “ ठीक है रुकसाना अभी निकलता हु लेकिन आप थोड़ा अपनी गांड को ढीली करो न. रौशनी असलम की बार मान कर अपनी गांड को ढीली करती है लेकिन असलम उसका लोढ़ा रौशनी की गांड से बहार निकलने के बजाय फिर से एक कास कर एक धक्का देता हैं जिससे उसका लोढ़ा रौशनी की गांड मई और घुस जाता है और रौशनी “ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ मममम मर गई रे उईईई माआआ आह आह” चीखने लगती हैं. असलम अब अपना लोढ़ा धीरे धीरे आगे पीछे करने लगता है रौशनी आह आह मत कर beta....aa आह आह फिर असलम अपने लोढ़ा को एक डैम झटके से बहार तक खींचता है और फिर से एक और तगड़ा झटका रौशनी की गांड मई मर देता है और अबकी बार उसका लोढ़ा एक hi झटके मई अब रौशनी की गांड के और गहराई में चला जाता है. रौशनी उस झटके के साथ hi बीएड पर पेट के बल पूरा गिरती है और असलम भी उसकी गांड के ऊपर गिर जाता है जिससे असलम का लोढ़ा पूरा रौशनी की गांड मई बहुत गहराई तक चला जाता है और रौशनी की आवाज धीमी हो जाती है. असलम समझ गया था की उसे अपने जोश को काबू में लाना होगा … इसलिए अब इस मुद्रा में कुछ देर असलम अपना मोटा लोढ़ा रौशनी की गांड मई फसाये रौशनी के ऊपर पड़ा रहता है और झटके मारना बंद कर देता हैं ताकि रौशनी उसके लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट कर सके.









असलम फिर रौशनी के बदन नीचे हाथ लेजाकर उसके चूचियों को पकड़ कर दबाने लगता है और अब धीरे धीरे लेकिन गहरे धक्के रौशनी की गांड मई मरते हुए रौशनी की मोती गांड को छोड़ने लगता है. असलम कुछ 5 मं ऐसे चुदाई करता हैं और रौशनी अब असलम के मोठे लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट होने लगती हैं और उसकी आवाज़ें और कंट्रोल्ड और सिसकियाँ और प्लेअसुरे में निकलने लगती हैं.

रौशनी अब अपनी गांड की चुदाई के मज़्ज़े और लेने लगश हैं . असलम फिर साइड से रौशनी के गोर गलो को चूमने लगता है, और रौशनी के मुँह से धीरे धीरे से मस्ती वाली सिसकियाँ निकलती हैं. असलम रौशनी की गांड छोड़ते छोड़ते “उफ्फ्फ रुकसाना मेरी बेगम ममम, कैसा लग रहा है आपको मेरा लोढ़ा तुम्हारी गांड में फंसा हुआ …” , रौशनी सिसकियाँ और मारती हुयी “उफ्फ्फ मममममम अह्ह्ह हैं मममम अच्छा लग रहा है मियां … आप अब और जरा तेज़ी से छोड़िये मेरी गांड ममम बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं अह्ह्ह ममममम उफ्फ्फ मममममम.”

कुछ दिएर बाद असलम ने रौशनी को उठा लिया और फिर बिस्तर पर उसके पीठ पर रख उसके लोडे को रौशनी की गांड के छेद पर रब करने लगा .. अब वह आगे से छोड़ने वाला था रौशनी की गांड … रौशनी की आँखें हवस भरे नज़रों से असलम को देख रही थी .. असलम अब रौशनी की टाँगूं क बीच था और मोटा लोढ़ा रौशनी की टाइट गांड के छेद पर रख इस बार आराम से अंदर ज़ोर देकर अपना लोढ़ा रौशनी स्वीट बहुत टाइट गांड के अंदर चला गया.

रौशनी वहां मज़्ज़े में सिसकियाँ लेती हुयी चुद रही थी असलम के लोडे से उसकी गांड में. अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ असलम मियां ममममम आराम से नहीं अब ज़ोर से छोड़िये मेरी गांड अहह उफ्फ्फ मम असलम मियानन्णन”

रौशनी की गांड मैं अभी असलम का लोढ़ा पूरा भी नहीं गया था. असलम ने फिर अपना लोढ़ा रौशनी की गांड के अंदर बहार करना शुरू कर दिए . वह अपने लोडे को थोड़ा सा बहार निकलता और फॉर से ी दोबारा रौशनी की गांड में दाल देता.

असलम ने रौशनी के हिलते चूचियों को मुँह में भर कर चूसने लगा और रौशनी क पूरे जिस्म पे हाथ फेरने लगा.

“उफ़ असलम मममम एस ममम और छोड़िये मेरी गांड ममम अह्ह्ह्ह ममम हे भगवान् मस्त फीलिंग हैं उफ्फ्फ ममममम ममम नहीं रुको नहीं थोड़ा और ज़ोर दो आह हाँ मियंन्त्र ऐसे hi ज़ोर दो और छोड़िये मुझे ममममम और मेरे निप्पल्स भी सूचक करिये मियंन्त्र उफ्फ्फ्फ़ ूऊई ममममआ मममम मुझे मज़ा आरा है ाः में ममममम और छोड़िये मेरी गांड मममम”

असलम आराम आराम से अपना लोढ़ा रौशनी के गांड में हिलता रहा और कुछ hi दिएर मैंवह रौशनी की निप्पल्स को भी सूचक करने लगा.

क़रीब 10 मिनट बाद असलम ने अपने होठों को रौशनी की गुलाबी होठों पर रखे और लूँ को आराम से उसकी गांड में हिलता रहुआ उसे जोरों से चूमने लगा .. रौशनी भी अपनी तरफ से पूरा चुम्मे का साथ दे रही थी ..

असलम ने फॉर अपने लोडे को बहार निकल क फिर पहले से कुछ ज़ियादा hi ज़ोर दिए और इस बार उसका लोढ़ा रौशनी की छोटी टाइट गांड को चीरता हुआ फरता हुआ अंदर घुस गया.

“उफ्फ्फ असलम मिन्न अहह मम ऐसे hi छोड़िये मेरी गांड आठ मम उफ्फ्फ ममम क्या छोड़ते हो मियां आआह्ह्ह ममम मज़्ज़ा आ रहा हैं बहुत ममममम एस सीएस अह्हह्ह्ह्ह.

असलम की रफ़्तार बढ़ती गयी और रौशनी की सिसकियों की गूंज भी बढ़ती गयी .. दोनों एक दूसरे की चुदाई में खो गए थे .. कुछ और देर बार रौशनी को मूतने की फीलिंग आयी और उसने असलम को यह बात बता दी. असलम उसकी चुदाई रोकना नहीं चाहता था तोह उसने एक तरकीब बनायीं.

असलम मुशकरते हुए रौशनी को अपनी बाँहों में बाहर उठ खड़ा हुआ.. ….रोशननि ने अपने दोनों पैरों को असलम की कमर में फसा के … और असलम रौशनी की दोनों छुटद को दोनों हाथ के सहारे पकड़ लिया ...और रौशनी ने भी अपनी दोनों हाथों को मिला के असलम के गले एक इर्द गिर्द दाल उसे पकड़ लेती है...

इसी पोजीशन में रौशनी अपनी गांड से असलम के लोडे को दबा रही थी...

“उफ्फ्फ अस्काम मियां मममम देखो कैसे दिन ला दिए हो मेरी गांड की छोड़ छोड़ के ऐसी हाल क्र दिए हो की अब मूतने तक खुद चल के नहीं जा सकती..

असलम बोलै “आआह मम रुकसाना डार्लिंग ऐसा सब दिन कहाँ होता है असली मज़्ज़ा तो यही है..”

“ हाँ असलम मियां ऐसे मज़्ज़ा तोह बरसो में नहीं दी किसी ने .. मममम सच में बहुत मज़्ज़ा आ रही है...

असलम अपनी गोदी में hi रौशनी को लिए बाथरूम पहुँच जाता है...

“उफ़ असलम मियां ममम मुझे थोड़ा निचे करो न उफ्फ्फ बहुत जोर की लगी है...

असलम मुस्कुटराते हुए - “नहीं जानू निचे उतरने का कोई ऑप्शन नहीं..”

रौशनी भी असलम को देख मुस्कराते हुए.. “अच्छा फिर ऐसे हिन् karungi..mein ठीक हैं न .. आपके ऊपर आएगी पिशाब ः.”

“हाँ रुकसाना बेगम तुम्हे ऐसे hi करना होगा .. .”.

उफ़ असलम मियां ाः मममम अब बर्दास्त नहीं हो रहा है ...

रौशनी ऐसे बोलती हुयी पिशाब करने लग जाती हैं … जो अब असलम के लोडे पर गिरने लगती हैं.

असलम भी रौशनी की आँखों में देखते हुए अपनी लुंड पे गर्म पेशाब महसूस करते हुए “ाआअह रुकसाना बेगम कितना अच्छा लग रहा है ...असली मज़्ज़ा तो इन सब में है ..” बोल रहा था

असलम फिर अपनी हाथ से रौशनी की गांड को पीछे धकेलता हैं तजिससे रौशनी की बुर से निकलती पिशाब की धार उसके लुंड पे नहीं आ रही थी ..

ऐसे इरोटिक सन था जब रौशनी की गोरी झंघ से होते हुए पेशाब निचे गिर रहा था ......

असलम फिर इसी तरह अपने गोदी में रौशनी को रखते हुए... 2 जग पानी बिलकुल लुंड और बुर के बिच में दाल देता है और वहां लगी हुई पेशाब बिलकुल साफ़ हो जाती hai....fir अपनी गोदी में रखे हुए रौशनी को छोड़ने लगता हैं …. वह बाथरूम के वाल पर उसे सत्ता के अब उसकी गांड की चुदाई करने वापस शुरू करता हैं और जोरों से उसकी गांड की ठुकाई करता हैं और रौशनी बस अहह उफ़ मम की सिसकियों की गूंज hi निकलती रहती हैं.











उफ़ असलम मियां ममममम ओह्ह्ह्ह आप तो मुझे आसानी से उठा लिए हो वह भी इतनी वक़्त के लिए उफ्फ्फ्फ़ में तोह पुरे 62 कग हूँ… उफ्फ्फ मियां अआप बुढ़ापे में भी इतने स्ट्रांग हैं ..” और रौशनी असलम को देख मुस्कुराती हैं और आँख मारती हैं.

“ अब ऐसी मस्त गदराई बेगम को अपनी गोदी में लिए हुआ हूँ तोह और ताक़त लग रही हैं.. ममम तेरी इस गांड को छोरना नहीं चाहता मममम”.

रौशनी मुस्कुराते हुए “अच्छा असलम मियां मई गदराई हूँ वो कैसे..

“रुकसाना बेगम तुम तो ऊपर से निचे तक गदराई हो “ गांड को मसलते हुए असलम बोलता हैं “ उफ्फ्फ ममम और सबसे ज्यादा तो तुम्हारी गांड गदराई है..

असलम मियां वो तो आप अपने लोडे से मेरी गांड को पेल पेल के और बड़ी बनाओगे उफ्फफ्फ्फ़”

ऐसे बातें करते हुए असलम और रौशनी बैडरूम तरफ चलते है और बीएड के पास पहुँचते हुए असलम अब रौशनी को बीएड पे लिटाते हुए बोलता है “ अब तोह बीएड पर रख कर तेरी गांड और भी मस्ती में छोडूंगा ..”

रौशनी असलम के आँखों में आखें दाल बड़े ऐटिटूड के साथ कहती हैं “ सुनिए मेरे असलम मियां , अगर आप मुझे रात भर छोड़ोगे तब भी मेरी छूट और गांड आपका मोटा लोढ़ा झेल legi..samjhe मियां.”

असलम फिर से रौशनी की गांड में अपने लोडे को पेलते हुए “ाआअह मम रुकसाना बेगम उफ्फ्फ्फ़ ममममम यही ऐडा पे मई मरता हूँ तुमपर … अब ये ले मेरा लोढ़ा तेरी टाइट गांड में …”









असलम अब धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ने लगता है और रौशनी अपने पैरो को थोड़ा और फैला देती है, इससे अब असलम के धक्को मई जैसे जैसे तेज़ी आती जाती है और रौशनी भी मस्ती मई सिसकियाँ मरने लगती है. ऐसे अब करीब आधे घंटे तक असलम रौशनी की मोती गांड मर मर कर लाल कर देता है उसका लोढ़ा रौशनी की मोती गांड मई सटासट सटासट आने जाने लगता है. असलम अपना हाथ रौशनी की छूट के नीचे लेजाकर छूट मई दो ऊँगली दाल कर और कास कास कर रौशनी की गांड मरने लगता है. रौशनी की गांड की चुदाई का एहसास और अपनी छूट की खिलवाड़ का एहसास .. ऐसे दोगुने मस्ती वाले एहसासों से अब. रौशनी का मज़ा दोगुना हो जाता है और वह चिल्लाना बड़ा काम और प्यार की सिसकियाँ और लगाने लगती है. “उफ्फ्फ मममम असलम मियां आह्हः ममम छोड़िये और जोर से छोड़िये आह आह मममम उफ्फ्फ्फ़ मममम हाँ एस ममममम आह और जोर से छोड़िये मियां मममममम. अपनी रुकसाना बेगम की गांड खूब कास कास कर छोड़ और छोड़ जोर से छोड़ मियंन्त्र आह आह सी सी आह उफ्फ्फ हे भगवान् क्या सुखद फीलिंग हैं मेरी गांड की चुदाई तुम्हारे जैसे विद्वान से अह्ह्ह उफ्फ्फ मममममम.” रौशनी को ऐसे बातें करते देख और सिकियाँ मारते देख असलम में एक नया जोश आ जाता हैं और फिर असलम एक करारा झटका मरता है और फिर से रौशनी आह्ह्ह्हह उईईई मायआ मममम उफ्फ्फ करके बीएड से चिपक जाती है और अब इस बार बेझिझक असलम रौशनी की गांड की गहराई मई अपना लोढ़ा दबा दबा कर उसकी गांड मारता हैं और रौशनी भी और मज़्ज़े लेते हुए असलम के मोठे लोडे से चुदती हुयी सिसकियाँ मारती हुयी बेडशीट पकड़ी हुयी मज़्ज़े लेने लग जाती हैं …

असलम और रौशनी की गांड चुदाई अब एक घंटे से ऊपर चल रही होती हैं और रौशनी आह उफ्फ्फ मम करते हुए जहर जाती हैं और असलम का भी लोढ़ा अपना माल छोड़ने तैयार हो जयते हैं और वह अपने लोडे को रौशनी की गांड से बहार निकलते हुए अपना सारा सफ़ेद गाढ़ा मॉल रौशनी की चूतड़ों पर छोर देता हैं और रौशनी के चूतड़ उसके लुंड के सफ़ेद माल से भर जाता हैं.









दोनों फिर अगल बगल लेते हुए हफ़्ते हुए लेट जाते हैं. रौशनी फिर से बाथरूम जाकर अपने गांड पर लगे असलम के गाढ़े माल को वाश करती हैं और फिर दोनों अगल बगल एक दूसरे के बाहों में लेट जाते हैं. 15 मं के रेस्ट के बाद असलम रौशनी के रसीले होंठो को अपने होंठो से दबा कर एक गहरा चुम्बन लेता है जिससे रौशनी भी आँखे खोल देती है और असलम उसे अपनी बांहो मई लेकर उसके चेहरे को अपने बिलकुल करीब लता है और एक और गहरा चुम्बन उसके होंठो पर कर के उसकी आँखों को एक कामुक नजर से देख कर मुस्कुराता है तोह गीता को एक पल के लिए शर्म आ जाती है और वह अपनी गर्दन झुका लेती है असलम के साइन मई अपना मुँह छुपाने लगती है.

असलम अब रौशनी के चेहरा ऊपर उठता है और ओके गलो पर अपने गलो को हलके हलके रगड़ता हुआ रौशनी के कण मई कहता हैं “उफ़ रुकसाना बेगम मममममममम इतना शर्मा क्यों रही हो, तेरी जैसी गदराई और जवान माल ……”

असलम कुछ और कहने से पहले रौशनी अपने सर को उठाते हुए असलम के आक्न्हों में आँखें दाल अपने रसीले होंठो को असलम के होठों के करीब लाती हैं और असलम उसके रसीले होठों को अपने मुँह मई भर कर चूसने लगता है. दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए एक दूसरे के बाँहों में लेते रहते हैं और फिर थकन से एक दूसरे के बाँहों में सो जाते हैं.

सुबह रौशनी उठकर अपने कपडे पहनती हैं और असलम के घर से बहार निकलती हैं और ऑफिस के तरफ चली जाती हैं .. तभी …. उसे सामने सलीम दिखाए देता हैं उसके ऑफिस के बहार. रौशनी अब पीछे मुद कर देखती हैं असलम के घर के तरफ , फिर आगे सलीम के तरफ और आखिर में गेट के तरफ जिसके बहार रमेश हैं ..

वह मन में सोचती हैं (उफ्फ्फ रौशनी … मुझे यकीन नहीं हो रहा हैं की में .. में एक शादीशुदा महिला तीन बुद्धों का बिस्तर गरम कर चुकी हूँ .. उफ्फ्फ मैंने जीवन में रोनित को छोर किसी से शारीरिक सम्बन्ध नहीं राखी थी और अब कुछ hi महीनों में तीन बुड्ढों के साथ चुद चुकी हु .. उफ्फफ्फ्फ़ अब क्या करू में .. मुझे तीनो बुद्धों से लगाव भी बहुत हैं … रमेश, असलम और सलीम तीनो ने मुझे शारीरक सुख दिया हैं जो मेरे पति कभी न दे सके . हे भगवान् में यह कहाँ फांसी हुयी हूँ इन तीन बुद्धों के साथ !!!!!!!!











 
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रौशनी उस रात की सोच से काफी गरम हो रही थी और दिन हर उसका मन काम पर लगा hi नहीं. शाम को वह घर चली गयी तोह रात की चुदाई के सपने देखते देखते उसे नींद लग गयी. उसके नींद में भी उसे असलम से की गयी चुदाई के सीन्स याद आ रहे थे





और उसकी बुर से काफी पानी निकलता रहा की सुबह जब वह उठी तोह पायी की उसकी पंतय पूरी गईली हो चुकी थी. उसे रात कल पूरी राटा कोई चुदाई के सपने देखने में hi गुज़र गयी थी. रौशनी अपनी ऐसी सोच पर काफी शर्मा रही थी. एक तोह वह असलम जैसे बुड्ढे के साथ पूरी रात चुदाई में बितायी थी और अगली सुबह भी उसकी चुदाई के सपने देखते hi जहर चुकी थी ..





रौशनी बस कुछ hi महीनो में एक संस्कारी बस पति से छोड़ने वाली पत्नी से तीन बुद्धों के साथ चुदाई कर बैठी थी .. उसने अब थान ली थी की वह फिर से उन बुद्धों से नहीं छुड़ेगी और अपनी डिस्टेंस मेन्टेन करेगी. लेकिन यह मुश्किल बात थी क्यूंकि सुबह रमेश उसे चोर्ने अत था , ंगो में असलम और सलीम से कुछ न कुछ काम आते रहता था तोह उसे उनसे मुलाक़ात भी करनी hi थी. रौशनी की अंग में गर्मी अब हर बार उन तीनों बुद्धों को देख काफी बढ़ती थी .. रात में बस वह कभी असलम के लोडे के बारे में या कभी रमेश के या फिर सलीम के … कभी कबर तोह वह तीनो के लुंड के बारे में एक साथ hi सोचती थी और मुठ मारती थी … इस से उसकी गर्मी थोड़ी तोह शांत हो चुकी थी लेकिन ऊँगली और लुंड में तोह बड़ा फरक होता हैं वह भी उन बुद्धों जैसे बड़े और मोठे लुंड से तोह कुछ ज्यादा hi ..





उसके दिमाग में सलीम और असलम के मोठे लोदों को साथ में चुसवाने की फाई इमेजेज आती रही.





उसकी ये मुसीबत थोड़ी सी काम हुयी क्यूंकि रमेश को अचानक अपने गाँव जाना था कुछ फॅमिली प्रोब्लेम्स के वजह से. इसीलिए एटलीस्ट वास् रमेश से मिलना अवॉयड कर पा रही थी .. लेकिन असलम और सलीम से तोह मुलाक़ात होती hi रहती और उसकी गर्मी काम नहीं हो रही थी जब वह उन दोनं के साथ होती थी तोह.

अब 4 दिन ऐसे hi बीत गए. अब कुछ ऐसा हुआ की रौशनी असलम और सलीम से दूर रह hi नहीं पाएगी. कुछ 3 हफ्ते पहले उसके ंगो ने आउटरीच प्रोग्राम्स शुरू किये थे. यह रौशनी ने पहला इनिशिएटिव लिया था जो ंगो के बोर्ड मेंबर्स ने फाइनली उसके किये हाँ कर दी थी. अब बार आयी थी उस आउटरीच प्रग्रामस में से पहला प्रोग्राम . ंगो का आउटरीच प्रोग्राम एक छोटे से शहर में रखा था. शहर कुछ 5 घंटे की दुरी पर थी और बस से hi उन्हें जाना था. प्रॉब्लम एक थी की उस शहर बस एक hi बस जाती थी वह भी शाम को 7 बजे निकलती थी. रात का सफर तैर करना था रौशनी को और ंगो के कुछ गिने चुने वर्कर्स और ंगो निवासियों को. उन्हें उस शहर रात के 12 बजे hi रीच कर ुशी फिर सुबह 8 बजे प्रोग्राम शुरू करना था.

रौशनी चाहती थी की सलीम और असलम न आये लेकिन उस वह दोनों उस ंगो के सबसे पुराने निवासी होने के वजह से उन्हें आना hi था प्रोग्राम के लिए. रौशनी को ऑर्डर्स का पालन करना hi पड़ा. अब जाने का दिन आया . रमेश गाँव चला गया था इसीलिए वह अवेलेबल नहीं था और रौशनी के बाद लक से उसके घर के पास का रिक्शा स्टैंड अब बंद कर दिया गया था और रशिक्षाव मिलते मिलते उसे काफी देर हुयी और वह बस निकलने के बस 5 मं पहले hi पहुंच पायी. बस में चढ़ने के बाद रौशनी ने देखा की बस पूरा भर चूका था और आगे के सीट्स सब लिए गए थे. बस लास्ट सीट बची थी और रौशनी वहां देखि तोह पायी की दोनों असलम और सलीम उस सीट के लेफ्ट में बैठे हुए थे. अब उसे कोई सीट नहीं दे रहा था तोह उसे अब उन दोनों के साथ hi बैठना पड़ा. रौशनी उनके पास गयी तोह दोनों ने उनके बीच में एक जगह बनाई उसे बैठने के लिए.

अपनी बैग ऊपर रख वह दोनों असलम और सलीम के बीच बैठ गयी. असलम लेफ्ट में विंडो सीट के वहां और सलीम राइट में बैठा था. अब दोनों को भनक hi नहीं थी की रौशनी दोनों से चुद चुकी हैं. दोनों मन hi मन कहसह थे की वह पूरी बस जर्नी रौशनी के साथ बितनेगे और मज़्ज़े करेंगे.

दोनों ने तैर किया की वह सबसे ज्यादा मस्ती करेगा रौशनी के साथ. रौशनी बस बीच में बैठ गयी और दूँ से ऑय कांटेक्ट अवॉयड कर रहे थी. अब रौशनी ने साड़ी पहनी थी जो स्लीवलेस थी और उसकी कमर और नाभि पूरी एक्सपोज़ थी. ब्लाउज भी काफी डीप बैक था.

असलम और सलीम के मन में , रौशनी को ऐसी ब्लाउज और साड़ी में देख लड्डू फुट रहे थे .. उनके लोदों में जान आने लगी थी.









आखिरकार बस निकल hi पड़ी. कुछ 30 मं बाद शाम का अँधेरा होने लगा . बस में लाइट भी काफी धीमी थी और बस के पिछले सीट्स के ऊपर वही दो लाइट तोह बंद hi थे.

शाम की ठंडी थोड़ो बढ़ गयी थी और रौशनी तोह ठण्ड लग रही थी . और कुछ 15 मं बाद रौशनी की उसकी झंघ पर एक हाथ महसूस हुआ .. वह साइड में नज़रे दाल देखि की असलम के अपने हाथों को उसके झंघ पर रखे थे .. फिर कुछ सेकंड बाद उसे अपनी दूसरी झंघ पर भी एक हाथ महसूस हुआ .. वह हाथ पक्का सलीम का था .. रौशनी समझ गयी. अब दोनों उसकी झागों को सहलाने लगे … अपने हाथों को उसकी घुटनो पर ले जाते और फिर ऊपर लाते हुए उसकी मनो पंतय के करीब हाथों को रख स्क्वीज़ करते … रौशनी की बुर में हलचल होने लगी दूँ के ऐसे हरकतों से .. असलम और सलीम तोह बे झिझिजक रौशनी के झागों पर हाथ रख ऊपर स ेनीचे सेहतले हुए कभी कबर उसकी झंघों को दबोचते .. इस इ रौशनी की बुर की हलचल और बढ़ती और उसकी बुर में नमी होने लगी. दोनों के मज़बूत हाथ उसकी पंतय के इतने करीब थे ,.. और दोनों वही और दबाव डालते … रौशनी की बुर की नमी बढ़ती रही.

फिर रौशनी ने अपने दाएं साइड पर असलम का हाथ अपनी कमर पर पायी .. उसकी नाज़ुक और मुलायम कमर असलम के मज़बूत हाथों के स्पर्श से डाब रहे थे .. असलम वहां काफी दबाव दाल रहा था .. रौशनी की वासना और बढ़ गयी .. असलम उसकी कमर को सेहला रहा था और सलीम भी उसकी झंघ को सेहला रहा था और दबोच रहा था … दोनों का कॉर्डिनेटेड अटैक लग रहा था लेकिन सच कहे तोह दोनों सलीम और असलम को पता hi नहीं था की एक दूसरा क्या कर रहा हैं.

असलम विंडो के बहार देख रहा था मनो कुछ नहीं कर रहा हो लेकिन रौशनी के कमर को सहलाता hi रहा. वहां दूसरी और सलीम रौशनी के कानों के पास अपने होठों को लेकर उसके कानों को लीक करने लगा .. रौशनी सलीम के ऐसे हरकत से चौंक गयी और अपनी नज़ारे तेरची करि ..









“सलीम जी उफ़ यह क्या कर रहे हो आप .. कोई देख लेगा .. उफ़ असलम मियां यही तोह बैठे हैं.”

“रौशनी जी उफ्फ्फ असलम को मियां और मुझे बस जी .. वह आपको अपनी बेगम समझता हैं तोह बस वही आपका मियां हुआ .. हमारी तोह चुदाई भी हुयी हैं और मुझे बस जी .. ना इंसाफ़ी हैं ..”

इतना कहते हुए सलीम ने रौशनी के झंघों को और जोड़ूँ से दबोचा और फिर से उसके कानों को लीक किया ..

“उफ़ सलीम जी .. मम प्ल्ज़ छोड़िये का करिये यह सब .. लोग देखेंहगे . असलम देखेंगे …”

“मियां कहिये फिर रोकने का सोचूंगा .” और सलीम ने फिर से रौशनी के कानों को लीक करा.

“उफ्फ्फ अच्छा ठीक हैं सलीम मियां … उफ्फ्फ छोड़िये ऐसे न करिये .. लीक न करिये उफ्फ्फ.”

“अच्छा झागों को तोह सेहला सकता हूँ न …” और सलीम ने रौशनी के झग्गों के ऊपरी हिस्से को पंतय के पास वाले हिस्से को दबोच लिया और फिर दूसरी तरह देखने लगा .. रौशनी की मुँह से उफ्फ्फ मममम निकल गयी ..





असलम फिर रौशनी को देखा ..”रौशनी जी कुछ हुआ क्या …”

असलम ने फिर जान बुझ कर रौशनी की कमर पर दबाव डाला और दबोच लिया …

“उफ़ मम असलम जी उफ्फ्फ आपने मेरी कमर .. उफ्फ्फ मम छोड़िये न ..”

“असलम जी में आपकी बेगम रुकसाना नहीं हूँ .. प्ल्ज़ छोड़िये ..”

“रौशनी जी तोह क्या हुआ बस हाथ hi तोह रखा हैं .. मज़्ज़ाक़ मज़्ज़ाक़ में .. टेंशन न लो ..

असलम ने फिर से रौशनी की कमर दबोच ली .. और इस बार रौशनी अपनी निचले होठों को काट अपने आप को रोकी.





अब सन था की सलीम उसकी मांसल झंघों को दबा रहा था और असलम उसकी कमर को उसके साइड से दबोचे हुए था. दोनों के इस हरकत से रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी और उसकी बुर से रास बहने लगा था …

(उफ्फ्फ में तोह इन दोनों बुद्धों के बीच में hi फँस गयी हूँ .. उफ़ और 4 घंटे का सफर हैं … उफ्फ्फ रौशनी यही सोच में थी और उसकी गर्मी बढ़ती रही.

असलम और सलीम के लोडे , रौशनी की मुलायम गदरायी बदन को दबोचे खड़े हो रहे थे .. पूरी औकात में आने लगे थे.

फिर असलम ने रौशनी की एक बायीं हाथ को पकड़ अपने गरम उभरते लोडे पर पंत के ऊपर रख लिया .. इससे रौशनी की मुँह से हलकी से अहह निकल गयी .. सलीम को लगा की उसके रौशनी के झागों को दबाने से ऐसे रौशनी कर रही हैं .. लेकिन सच था की वह असलम के गरम लोडे के उभर पर हाथ राखी थी …

रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी और अनजाने में वह असलम के लोडे को हाथों से सहलाने लगी .. असलम और भी गरम हो उठा और जोरों से उसकी कमर दबोची … रौशनी ज़रा और जोरों से आह करि .. वहां सलीम अब रौशनी को देखने लगा ..

रौशनी क्या हुआ .. आप को ..?

“कुछ नहीं उफ़ सलीम जी वह कोई चींटी ने कमर काट ली .. उफ़ पता नहीं … अआप छोड़िये …”

सलीम अब रौशनी की कान में फुसफुसाया ..”अच्छा चींटी ने काट लिया .. मममम अब में अज़गर छोरु उस चींटी को खाने .. और सलीम हसने लगा . रौशनी उसकी डबल मीनिंग समझ गयी और शर्म से लाल हुयी. वहां सलीम बातें कर रहा था और ब्लैंकेट के अंदर रौशनी असलम के लोडे से बानी उभर पर हाथों को घूमती रही …









फिर सलीम ने उसके साइड में राखी रौशनी की मुलायम हाथ को अपने खुद के लोडे के उभर पर राखी .. अब रौशनी के दोनों हाथ असलम और सलीम के लोडे के उभारों पर थी और वह अनजाने में दोनों के उभर ऊपर से सहलाने लगी ..

असलम से रहा नहीं गया और उसने अपनी पंत की ज़िप निचे करि और अपने लोडे को बहार निकल रौशनी के मुलायम हाथों में रकः दिया …रौशनी की गर्मी बढ़ती रही और वह असलम के अब नग्न लोडे को सहलाने लगी …वहां सलीम ने भी वही किया और अब रौशनी सलीम और असलम के सख्त हुए लोदों को सहलाने लगी थी .. दोनों असलम और सलीम के लुंड से प्रेकम निकलने लगा और रौशनी एक दोनों हाथों को दोनों की प्रेकम की बूँदें महसूस हुयी .. उसकी हवस और गर्मी बढ़ती गयी और उसकी बुर से काफी रास बहने लगा और उसकी पंतय गीली होने लगी. उनके लोदो को अपने मुलायम हाथों से ऊपर निचे स्ट्रोक करते हुए रौशनी हवस की आग में डूबी अब आँखों को बंद किये मज़्ज़े लेने लगी .. ऊपर निचे ऊपर निचे उनके लोदों को वाहन सहलाने लगी और उसकी उँगलियाँ उन दोनों के मोठे लोदों के प्रेकम से वेट हो गयी … कुछ और देर ऐसे hi दोनों के लुंड सहलाना जारी राखी ...





कुछ 10 मीन्स बाद बस रुक गयी . वह शहर के बस स्टेशन पहुँच गए थे. असलम और सलीम ने रौशनी के हाथों को अपने लोदों से निकलते उन्हें अपनी पंत में रख दिए..

रौशनी की उँगलियाँ अब उनके प्रेकम के रास से भीहजी थी .. उसने बिना सोचे अपनी उँगलियों को मुँह में दाल उनके प्रेकम को चाटने लगी .. असलम और सलीम यह देख चौंक उठे और फिर मन hi मन मुस्कुराये (साली रांड जैसे मेरे लोडे के रास को ाकिसे चाट रही हैं .. दोनों यही बात सोचते हुए मन hi मन स्माइल देने लगे .. रौशनी को बाद में एहसास हुआ की उसने क्या किया हैं और उसकके गालों पर एक लाली चा गयी

बस ड्राइवर ने उन्हें बताया की गाडी की इंजन से धुआँ निकल रहा हैं और बंद हो चुकी हैं. गाडी ठीक करने में मैकेनिक बुलाना पड़ेगा जो काफी दूर हैं और उसे ठीक होने में रात जाने वाली हैं .. अब एक hi रास्ता था और वह था की पास hi में एक लॉज था और सब लोग वहां चले गए कुछ देर वहां वह रुकेंगे और फिर बस शुरू होने पर सब वापस निकल जाएंगे.

फिर सब वहां चले गए और वहां उन्हें सब को रूम मिले. अब ऐसा हुआ की रौशनी को जो रूम मिला वह बिलकुल असलम और सलीम दोनों के रूम्स के बीच में hi था . तीनो रूम्स एक दूसरे से कनेक्टेड थे एक दरवाज़े से. रौशनी अपने कमरे में चली गयी और बाथरूम में चली गयी नहाने ..

उसने अपने सारे कपडे उतार नग्न हो गयी .. बाथरूम जाते वक़्त पास hi में एक आईने में रौशनी अपने आप को देखने लगी ..

उसकी गोरी त्वचा . मुलायम और स्मूथ .. उसकी बड़ी चूचियां जो मनो पीछे कुहक महीनो में आकर में और बढ़ गए थे .. उसके नुकीले निप्पल्स , गोल नाभि .. अपने आप को देख वह अपने खूबसूरती पर बड़ी खुश थी .. फिर वह बाथरूम में जाकर नहाने के लिए शावर शुरू करि. हीटर ों था इसीलिए गर्म पानी भी आने लगा शावर से .. गरम पानी के निचे जाकर अपने बदन पर गर्म पानी गिरते hi उसे काफी अच्छा लगा .. वह फिर वहां के सपा से अपने. बदन पर मलने लगी .. शावर से गरम पानी आ रहा था और अपने बदन पर साबुन लगते लगते उसके उँगलियाँ उसकी बुर के वहां चले गए .. आँखें बंद करि रौशनी नाहा रही थी की उसे असलम और सलीम के लोदों का नज़ारा घूमने लगा .. वह उनके लोदों के बारे में सोच गरम हो रही थी और अपनी उंगलियों से अपनी बुर के होठों से खेलने लगी .. आँखें बंद अब वह हलके से आह की कराहें मारने लगी .. वह असलम ुर सलीम के मोठे लोदों को के बारे में सोचती हुयी , गरम होती हुयी अपनी उंगिलयों से अपने छूट के होठों से खेलने लगी .. उसकी बुर से अब रास टपकने लगा और वह गर्मी में अपनी छूट की होतोहं से खेलती रही ..





मन hi मन वह सोचने लगी ..( उफ्फ्फ ये बुद्धों के मोठे लुंड कितने मस्त हैं .. मममम अभी बस में भी उन्हें हिलने लगी थी में उफ्फ्फ ममम यह मुझे क्या हो रहा हैं .. में ींबुद्धों के लुंड की दीवानी क्यों बन रही हनु , में इन बुद्धों की दीवानी क्यों हो रही हूँ उफ्फ्फ ,मममम उनके मोठे लुंड उफ्फ्फ इतनी गरम हैं … इतने मोठे काळा लम्बे लुंड मममम उफ्फ्फ्फ़ मन करता हैं बस उनसे खेलु और मज़्ज़े कुन उफ्फ्फ मम यह मुझे क्या हो रहा हैं ममम मुझे ऐसी पीलिंग्स क्यों आ रही हैं ममम….)

रौशनी गर्मी में मग्न छूट के होठों से खेलती रही ..असलम और सलीम के मोठे लोदों का दृश्य अआंखों के सामने घूमते हुए … अह्हह्ह्ह्ह की ाआवाज़ें करती हुयी झरने लगी.

झरने के बाद और अपनी गर्मी शांत करने के बाद रौशनी के अंग अंग में शर्म की लेहेर दौड़ी .. उफ्फ्फ्फ़ इन दोनों बुड्ढों के लुंड मेरे मन में बस गए हैं ..









यह मेरी हालत इन दो बुद्धों ने क्या किया हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़ ….
 
रौशनी गर्मी में मग्न छूट के होठों से खेलती रही ..असलम और सलीम के मोठे लोदों का दृश्य अआंखों के सामने घूमते हुए … अह्हह्ह्ह्ह की ाआवाज़ें करती हुयी झरने लगी. झरने के बाद और अपनी गर्मी शांत करने के बाद रौशनी के अंग अंग में शर्म की लेहेर दौड़ी .. उफ्फ्फ्फ़ आज मैंने फिर से इन दोनों बुड्ढों के लोदों के सपने देखते देखते हुए झरि हूँ उफ्फ्फ्फ़ यह मेरी हालत इन दो बुद्धों ने क्या किया हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़ ….









रौशनी को झरने के बाद अच्छी नींद आयी और सुबह जल्दी 8 बजे वह उठी. उसने एक नेटेड कोटों पिंक ब्रा पहनी और निचे एक सफ़ेद थीं कॉटन पंतय. उसने एक स्लीवलेस ब्लाउज पहना , पीछे काफी डीप कट ब्लाउज थी और उसकी नग्न पीठ काफी दृष्यति रही. फिर जस्मिने परफ्यूम दाल और लिपस्टिक लाइट ब्राउन की पेहेन कर , कानो में एअर स्टड्स और हाथों में राण ग बिरंगी चुडिया पेहेन कर वह अपने आप को आईने में निहारने लगी ..









(उफ्फ्फ्फ़ रौशनी तुम तोह इतनी मस्त लग रही हो .. असलम और सलीम तोह तुझ पर टूट hi पड़ेंगे .. उनका तोह लुंड सलामी देगा तुझे देख …) रौशनी यही सोच hi रही थी की उसे ध्यान गया की वह क्या सोच रही ऐन,.. उफ्फ्फ रौशनी तू ऐसी कैसे सोच सकती हैं उफ्फ्फ्फ़ तू भी न .. उन बुद्धों ने तुझे बिगड़ दिया हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़ … चल अब जाना होगा लेट होगा नहीं तोह.

फिर रौशनी कमरे से बहार निचे लॉबी में गयी की असलम और सलीम बस रौशनी को देखते hi रहे .. जैसे रौशनी ने सोचा था बिलकुल वैसे hi उनका लुंड उनकी चड्डी में उसे देख सलामी दे रहे थे …

फिर उन्हें बताया गया की जहाँ कैंप था वह शहर के भीतरी जगाओं पर था और वहां बस रिक्शा से hi जा सकते थे . काफी छोटी गलियां थी वहां इसीलिए बस वहां अंदर नहीं जा सकता था.

अचानक रौशनी को एहसास हुआ की वह सनस्क्रीन भूल गयी थी रूम में और वह उसे लेने रूम चली गयी.

अब टोटल 21 लोग थे ंगो से . 3 की जोड़ियां बनाते हुए सब एक एक करके रिक्शा में बैठ गए. रौशनी जब सनस्क्रीन लेकर आयी तोह पायी की बस अब वह , असलम और सलीम hi रह गए थे

असलम बोले “चलो रौशनी जी अब हमें जाना होगा …”

रौशनी ने देखा की बस वही तीन लोग रह गए थे. अब कोई उपचार भी नहीं था तोह वह कुछ न बोली.

सलीम बोलै - “रौशनी जी वह सड़क पार रिक्शा स्टैंड हैं वहां चलिए.”

रौशनी जाने लगी की सलीम ने आकर उसके एक हाथ पकड़ लिया, और फिर असलम ने आकर उसका दया हाथ पकड़ लिया.

दो काळा सांड के बीच थी शादी शुदा माल रौशनी





असलम बोलै -“चलिए रौशनी जी बहुत ट्रैफिक हैं , साथ में क्रॉस करेंगे रास्ता.”

रौशनी कह भी क्या सकती थी .. अब सलीम ने अपने उँगलियों को रौशनी के हाथों में फंसा लिया और असलम ने भी वही किया .. दोनों रौशनी के मुलायम हाथों को दबाने लगे .. रौशनी को उनके टच से एक करंट सा लगने लगा … उसकी बुर में ज़रा हलचल हुयी , उसकी साँसे तेज़ हुयी और चलते चलते उसकी चूचियां बलपुसे में हीवे करने लगी .., उसे इन दोनों के साथ रहते हुए एक अलग हु झुनझुनी महसूस लगने लगी थी ..वह बस उन दोनों का कहना मान ले चल रही थी.





रौशनी देख रही थी की वहां के सब लोग उन तीनो को देख घर रहे हैं. बेशक वह लोग सोचते होंगे की एक जवान गोरी मुलायम लेडीज कैसे इन दो काळा बुद्धों के साथ हैं वह भी इतने करीब हाथों में हाथ डालने .. क्या कुश नसीबी हैं इन बुद्धों की , रौशनी जैसी माल मिली हैं उन्हें .. यही सोचते होंगे लोग .. और यही बात सोचते हुए रौशनी मन hi मन काफी शर्मा रही थी ..

फिर रास्ता क्रॉस कर वह रिक्शा में बैठ गए. बस की तरह उन दोनों ने उसे उनके बीच hi बिठाया था .. और रास्ते भर असलम और सलीम की झाघें रौशनी की झागों के सीडी से टकराती रहती .. फिर अचानक रिक्शा एक स्पीड ब्रेकर के ऊपर से जोर से चली तोह रौशनी सीट से थोड़ी सी उछली और फिर अपने आप को सँभालने के लिए दोनों हाथों को असलम और सलीम के झांगों पर राखी सहारे के लिए ..

रौशनी के हाथों के स्पर्श से असलम और सलीम के लोडे उनकी चड्डी में भी झटके मारने लगे और फिर से खड़े होने लगे .. रौशनी ने अपने हाथों को अनजाने में दोनों के लोदों के इतने लरीब राखी थी की जब उनके लुंड झटके मारने लगे तोह उसके दोनों हाथों में रौशनी वह महसूस करि.. उसे जब ाबत समझ आयी की क्या हुआ हैं तोह वह मन hi मन शर्मायी लेकिन आश्चर्य से उसने दोनों हाथों को वहां से हटाया नहीं और वही राखी .. असलम और सलीम या देख सुरपोसे थे लेकिंखुश थे और उन्होंने जान बुझ कर अपने लोदों को फिर से झटके मारने दिए .. रौशनी यह बात फिर महसूस करि और फिर शर्मायी लेकिन हाथों को वहां से नहीं हटाई ..





उसकी बुर में अब नमी होने लगी इस स्तिथि में खुद को पाकर … उसका तोह मन कर रहा था की वह दोनों के पांत में हाथ डाले और उनके लुंड पकड़ स्ट्रोक करे … फिर अपने आप को इस सोच में पाकर वह बहुत शर्मायी और उसके गाल शर्म से लाल हो गए .

असलम ने ने रौशनी को देख बोलै “ओह हो रौशनी जी आपकी लाली तोह चा गयी हैं .. उफ्फ्फ्फ़

सलीम बोलै - रौशनी जी आप तोह और बेहत खूबसूरत लग रही हो आज .. आपका राज़ क्या हैं हमें भी तोह बताइये …

और दोनों असलम और सलीम हसने लगे और रौशनी की शर्म और भी बढ़ गयी .. वह तिरछी नज़र से देखि की ृच्क्षा वाला भी अब सामने की आईने से उन्हें देख मुस्कुरा रहा था ..

है उफ्फ्फ्फ़ यह दोनों भी न उफ्फ्फ्फ़ मज़्ज़ाक़ करते हैं और रक्षा वाला भी मुस्कुरा रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ में मर हो जाऊ .. उफ्फ्फ्फ़ इस शर्म से कैसे जीउ उफ्फ्फफ्फ्फ़ ममममम-

फिर रौशनी ने आख़िरकार अपने हाथों को दोनों के झांगों से हटाई ..

असलम और सलीम का बोल्डनेस बढ़ गया और फिर अगली बार जब रिक्शा स्पीड बुम्प के ऊपर से चली तोह असलम ने अपने हाथों को रौशनी की झागों पर राकी और सलीम ने अपने हाथों को रौशनी के पीछे दाल उसकी गोरी नग्न पीठ को छूने लगे ..





फिर असलम उसकी झंघों को रगड़ने लगे और सलीम उसकी पीठ को रगड़ने लगा ..

रिक्शा वाला असलम जो कर रहा हैं न देखे इसीलिए असलम के हाथों को साड़ी से धक् लिया .. असलम यह देख खुश हुआ (साली मस्त लाइन पर आयी हैं … अब हटाने की तोह कोषसिंह दूर , यह छुपा रही हैं ताकि कोई न देखे लेकिन वह खुद इसके मज़्ज़े ले .. उफ्फ्फ्फ़ मस्त हो रही हैं तू मेरी चमक चलो.)

वहां सलीम अपने हाथों को रौशनी के पुरे पीठ पर फेरने लगा और वहां दबोचने लगा .., रौशनी मन hi मन कफी गर्मी महसूस कर रही थी. अपने हाथों को ढके हुए देख असलम और बोल्ड होते गया .. उसका हाथ अब रौशनी की झागों को सहलाते हुए ऊपर की और चले गए और अब उसके हाथ रौशनी की नाभि को चुने लगा .. वहां वह अब रौशनी की नाभि में अपनी ऊँगली डालने लगा .. रौशनी के मुँह से बड़ी हलकी से आठ निकलने hi वाले थी की रौशनी खुद को कण्ट्रोल करि.

वहां रौशनी की ना में हाँ समझी और अब धीरे से हाथों को रौशनी की ब्लाउज के अंदर डाली और उसके ब्रा स्ट्राप से खेलने लगा … रौशनी अब उस हरकत से और गर्म हुयी और खुद के मुँह से आह निकलने से और भी कण्ट्रोल करि … लेकिन दोनों बुड्ढे उसके कुछ न बोलने को हाँ में सोचते हुए मस्ती करते रहे .. वहां असलम ने अब एक ऊँगली मुँह में डाली और उसे गीली कर फिरसे अब रौशनी की नाभि में वही ऊँगली डाली .. रौशनी ने असलम की हरकतें सब देख ली थी और अब उसकी गीली ऊँगली अपनी गोल आकर वाली दिए नाभि में पाकर अब उसकी गर्मी इतनी बढ़ी की उसके बुर से अब रास टपकने लगा और उसकी पंतय गीली होने लगी.

वहां सलीम अपने हाथों से रौशनी की ब्रा स्ट्राप से खेलते रहा .. और उसकी ब्लाउज के अनादर से पीठ और भी रगड़ने लगा … दोनों के लोडे काफी बुरी तरह से अपनी चड्डी में झटके मार तरहे थे जो अब रौशनी की नज़र उन पर चली गयी तोह उसे भी पता चला .. उसका तोह काफी मन कर रहा था की दोनों के लोदों को पंत में हाथ दाल चड्डी में हाथ दाल उन्हें पकड़े और उन्हें स्ट्रोक करे .. उसकी गर्मी इन बुद्धों ने काफी हद तक फिर से उजागर करि थी और इस बार रौशनी उनका साथ दे रही थी और माज़े काफी ले रही थी.

यह सब कुछ और 15 मं चला की आख़िरकार वह उस जगह पहुँच hi गए .. असलम ने एक आखिर बार रौशनी की जहगों को दबोचा और सलीम ने उसकी पीठ दबोची .. अब रौशनी से नहीं रहा गया और एक ाः निकल hi गयी ..

तीनो अब सलीम, असलम और रिक्शा वाला उस पर नज़र दलए थे जो रौशनी ने भी देख लिया और उसकी शर्म अब काफी हदेई पार करने लगी .. ( उफ्फफ्फ्फ़ यह क्या हुआ .. अब तीनो मुझे घर रहे हैं .. उफ्फ्फ में मर्डर क्यों नहीं जाती उफ्फ्फ्फ़ इतनी शर्मिंदगी उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़)

असलम और सलीम आगे चले गए और में रक्षा वाले को पैसे देने लगी किराये के ..

रिक्शा वाला भी बड़े उम्र का था .. बुड्ढे तोह नहीं थे लेकिन 45-50 के तोह होंगे .. रौशनी उसे पैसे दे रही थी की उसने रौशनी के हाथों को हलके से छू लिया .. फिर एक दम से उसके मुलायम हाथों को पकड़ लिया..

रिचसकाव वाला - है मैडम आप कभी हमें भी मौका दीजिये गए जो आपने उन बुद्धों को दिया हैं .. उफ्फ्फ्फ़ उनसे और भी दुमदार हूँ में , और काफी मज़्ज़े दूंगी…

रौशनी बोली - भैया आप रहने hi दीजिये .. उनसे तोह दुमदार आप हो hi नहीं सकते .. दोनों काफी दुमदार हैं और रात में तोह … रौशनी अचानक से खुद को रोकी .. उफ्फ्फ यह में के बोल रही हूँ वह भी इस अनजान रिक्शा वाले को उफ्फफ्फ्फ़..)

रिक्शा वाला तोह स्तब्ध hi रह गया … साली क्या माल हैं यार इन दो बुद्धों ने भी ली हैं इसकी …

रिक्शा वाला - हाँ होंगे दुमदार लेकिन में भी काम नहीं हूँ मैडम .. हाज़मा कर देखिये में यही शहर में रहता हूँ , कहूं तोह शाम को आप आओगी रिक्शा में आपको शहर घुमाऊंगा …

रौशनी को बस रमेश की याद आयी . ऐसे hi वह रमेश के रिक्शा में अपनी शहर घूमी थी और वहां से चुदाई तक सफर काटी थी … उफ्फ्फफ्फ्फ़

एक बात थी , इस साब बातों में रौशनी ने एक बार भी अपने हाथों को उस रिक्शा वाले के हाथों से नहीं हटाई थी ..

वह रिक्शा वाले के आँखों में बहुत हवस देखि और शर्मायी .. पता नहीं रौशनी को क्या हुआ और वह बोली

“अच्छा ऐसे हैं क्या .. फिर ठीक हैं शाम को आओ वही जहाँ से आपने अभी लिफ्ट दी थी और घुमाओ शहर ..” और रौशनी ने रक्षा वाले को देख आँख मारी.





रिक्शा वाला तोह सातबड रह गया , वह तोह मज़्ज़ाक़ कर रहा था और यह मैडम तोह सच में मान गयी … बड़ी माल हैं यार उफ्फ्फ्फ़ और रिक्शा वाले ने रौशनी के हाथों को चोर दिया और रिक्शा वहां से ले चला गया.

रौशनी फिर मन hi मन हसी .. है है .. खुद को दुमदार कह रहा था लेकिन महिला बोल्ड निकली तोह भाग कर चला गया .. थोड़ी क्या महिला बोल्ड हो जाए खुद तोह काफी मर्दों की मर्दानगी फूस हो जाती हैं… इसीलिए तोह असलम और सलीम दुमदार हैं .इतनी बोल्ड वह होगी उतने hi बोल्ड वह भी होते जा रहे थे .. रौशनी उन दोनों के ब्यौरे में सोचती हुयी आगे बढ़ी.





रौशनी फिर कैंप के अंदर चली गयी ..

कैंप बड़ी सक्सेसफुल चल रही थी .. असलम और सलीम तोह रौशनी का पीछा hi नहीं चोर रहे थे , जहाँ वह जाती ये दोनों वही जाते .. सब के सामने रौशनी की काफी तारीफ़ करते. अपनी तारीफ उनसे सुन रौशनी मन hi मन (उफ्फ्फ यह दोनों तोह तारीफों के ऊपर तारीफों के पल बांधते जा रहे हैं .. उफ्फ्फ्फ़ इतना यह दोनों मुझे पसंद करते हैं … उफ्फफ्फ्फ़ सच में दोनों मेरे दीवाने हैं .. और कही न कही में भी इनकी दीवानी होते जा रही हूँ .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह मुझे क्या हो रहा हैं … ऐसी सोच मेरी कबसे बदल गयी हैं उफ्फफ्फ्फ़) रौशनी इसी सोच में थी.

कैंप ख़तम हुआ और रक्षा से सब फिर से होटल चले गए . इस बार रौशनी को ंगो के कुछ लेडीज ने कहा की वह उनके साथ hi चले … रौशनी ने हाँ बोलै और वह कुछ महिलाओं के साथ होटल चली गयी. होटल के रेस्टोरेंट में कहने की सब तैयारी करि थी लेकिन असलम और सलीम को रौशनी के साथ अकेले में डिनर करना था … फिर दोनों ने रौशनी को कही और ले जाने के सोचे और फिर दोनों रौशनी को बोले की वह उसे ट्रीट देना चाहते हैं तोह कही और जाएंगे डिनर करने.

रौशनी भी न कहने में कोई बात न सोची और उन्हें हाँ करि . वहां सब को रौशनी बोली की वह डिनर अपने एक वहां शहर की सहेली के साथ करने जाएगी ..

रौशनी की साड़ी कैंप में गाँधी हो चुकी थी इसीलिए वह अपने कर्म जाकर अपनी सरे चेंज कर वास निचे आई.

असलम और सलीम रौशनी को इस साड़ी में देखा उसकी एक्सपोज्ड गोल आकर वाली नाभि और उसज़ गोर मूलतम पीठ को देख फिर से गरम हो गए और उनके लोदों में फिर से जान आने लगी.









फिर तीनो असलम, सलीम और रौशनी चले गए एक अलग रेस्टोरेंट में डिनर करने.

गार्डन रेस्टोरेंट था और वहां एक अलग सा प्राइवेट बूथ था और असलम ुर सलीम रौशनी को वही ले गए .. रौशनी एक आज्ञाकारी महिला की तरह उनकी हर बात मान रही थी और वह भी उनके साथ चली गयी वहां बैठने.

रौशनी एक साइड पर बैठी और असलम और सलीम टेबल के दूसरे साइड पर. फिर वेटर आया और उनका आर्डर ले लिया. रौशनी ने मॉकटेल आर्डर करि और फिर असलम और सलीम ने ओल्ड मोंक.

असलम - “अच्छा रौशनी जी चिकन में क्या खाओगी आप ?

रौशनी “असलम जी वह आज मेरा सोमवार हैं .. non-veg नहीं खा सकती ..

सलीम - “ओह अच्छा ठीक हैं फिर हम भी वेग hi खाएंगे क्यों असलम ?”

असलम- हाँ क्यों नहीं .. वैसे भी आज रौशनी जी बैंगन की सब्ज़ी खाएगी न .. यहाँ बैंगन मशहूर हैं . बड़े और मोठे बैंगन होते हैं ..

रौशनी शर्मा गयी .. वह समझी की असलम कौंसे बैंगन की बता कर रही हैं .. मेनू पर की तोह हरकीज़ नहीं .. अपने hi बैंगन की बात कर रह हैं .. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी मुस्कुरायी …उफ्फ्फ यह मुझे क्या हुआ हैं उफ़ डबल मानैं बातें आसानी से समझ आ रहे हैं उफ्फ्फ.

सलीम -“हाँ हम दो बैंगन की सब्ज़ी आर्डर करेंगे .. मुझे लगता हैं दो दो बैंगन की सब्ज़ियां रौशनी जी खाना चहिते हैं.. हैं न रौशनी जी.”

हे भगवन असलम तोह थे hi नोट्टी लेकिन उसे पता था की अगर असलम शेर हैं तोह नोटीनेस में सलीम सवा शेर हैं .. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी बस मुस्कुरायी और कुछ न बोली.





असलम - “सलीम लगता हैं की रौशनी जी की शान्ति में भी हाँ हैं ..

सब आर्डर करने के बाद तीनो कैंप में हुयी चीज़ों के बात करने लगे ..

रौशनी - वैसे आप दोनों बताइये आप यह इतनी तारीफ़ मेरी करते हो .. सच की करते हो या झूट मुठ की मुझे मस्का मारने …

सलीम - सच्ची हैं मेरी करि गयी तारीफ … अब असलम की नहीं पता

असलम - “अरे मेरी भी करि रौशनी जी के प्रति तारीफ सच हैं . मुझे तोह इन में अब मेरी बेगम दिखती हैं .. और रौशनी तोह रुकसाना से भी बड़ी तारीफों के लायक हैं..”

रौशनी यह सुन शर्मा गयी और मुस्कुरायी .. उसके ब्राउन लिपस्टिक होटों पर स्माइल आने लगी.

फिर खाना भी आ गया .. पहले तोह स्टार्टर आये जिसमें था मलाई पनीर.

बिना कुछ बोले सलीम उठ खड़ा हुआ और रौशनी के बगल में आ बैठा .. पहले की रौशनी कुछ बोलती , असलम भी उठकर उसके बगल में आकर बैठ गए. फिर से रौशनी दोनों सलीम और असलम के बाच खुद को पायी .. है भगवान् यह दोनों तोह बार बार मेरी सैंडविच कर रहे हैं .. दोनों भी न .. उफ्फ्फ्फ़ एक शेर तोह दूसरा सवा शेर .. और रौशनी मन hi मन मुस्कुरायी.

सलीम ने पनीर का एक टुकड़ा हाथ में लिया और रौशनी को खिलने बढ़ा .. रौशनी कुछ न बोली और मुँह खोली .. सलीम ने रौशनी को मलाई पनीर खिलने लगा .. पन्नेर से मलाई की बूँद रौशनी के होठों पर थी .. सलीम अपने ऊँगली से उसे लेकर रौशनी के मुँह में डालने लगा .. और रौशनी मलाई लेते हुए कुछ सेकंड सलीम के उँगलियों को भी मुँह में ली और उसे चूसने लगी. असलम ने भी वही करा और फिर से मलाई की रही बून्द राशि को खिलाई और खिलते हुए रौशनी ने असलम की ऊँगली से भी मलाई की बूडन चूसी ली .. अब दोनों सलीम और असलम ऐसी रौशनी की हरकतों से दांग थे .. रौशनी तोह उनकी उँगलियाँ भी चूस रही थी .. ाओसे करते लरते दोनों ने do-do पीसेस पनीर मलाई के खिलाये रौशनी को और हर बार आखरी में रौशनी उनकी उँगलियों को चूसी .. दोनों के लोडे तोह सलामी देते हुए बुरी तरह से झटकों के ऊपर झटके मारते रहे .. रौशनी भी गर्मी में जल रही थी और जो कर रही थी बिना सोचे समझे कर रही थी.

असलम को अचानक एक कॉल आया और वह कॉल अटेंड करने ज़रा बहार चला गया .. और सलीम और रौशनी अब अकेले थे. सलीम ने इस मौके का फायदा उठाया और बोले.

“रौशनी जी और एक तरीके से खिलौ आपको पनीर . इसमें से हम दोनों खा पाएंगे एक साथ.

“अच्छा कैसे बताओ सलीम जी.”

सलीम ने पनीर का पीेछे लिया और अपने मुँह में रखा .. आँखों से रौशनी को उस साइड से पनीर खाने का इशारा करने लगा .. रौशनी की गर्मी काफी हद तक बढ़ चुकी थी .. वह दूसरे एन्ड से पनीर खाने लगी.. पनीर कहते कहते अब दोनों के होठं जुड़ गए और दोनों गहरी चुम्बन में लग गए …









दोनों सब भूल कर अब एक दूसरे को चूमते रहे .. सलीम रौशनी की पीठ पर हाथ फेरने लगा और रौशनी की गर्मी और बढ़ी और उसकी चुम्बन और भी गहरी होती गयी … दोनों कुछ और सेकंड ऐसे hi चुम्बन में गम होते रहे की अचानक असलम की आने की आवाज़ सुनी तोह दोनों अलग हुए ..

असलम अंदर आया तोह दोनों को देखने लगा .. सलीम और रौशनी ऐसे बैठे थे जैसे अभी कुछ हुआ hi नहीं हो .. सलीम और रौशनी एक दूसरे को एक जहलक दिए और मुस्कुराये .. रौशनी के गालों पर लाली चा गयी .. उसे देख असलम को लगा की ज़रूर कुछ तोह हुआ हैं दोनों के बीच… मन hi मन hi मन सोचा ..(उफ्फ्फ यह सलीम भी न सच में महा कमीना हैं .. कुछ न कुछ मस्ती की होगी रौशनी के साथ .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ कम्बक्त मुझे भी फ़ोन आना था इसी वक़्त उफ्फ्फफ्फ्फ़.

स्टार्टर शुरू हो गए और मैं कोर्स भी .. अब बारी थी डेजर्ट की.

असलम ने बनाना स्प्लिट आर्डर करि और सलीम ने चकते सॉस डिपेंड ब्राउनी. पहले असलम का आर्डर आया .. सलीम को एकदम से टॉयलेट जाने की आवश्यकता पड़ी और उसका आर्डर नहीं आया था इसीलिए वह टॉयलेट चला गया ..

असलम ने यह अच्छा मौका देखा और बोलै

“रौशनी जी चलो हम इसे शेयर करेंगे ..

“अच्छा ok असलम जी.

रौशनी एक साइड से स्पप्न से बनाना कट करने hi वाली थी की असलम ने उसके हाथ पकड़ उसे रोका.

“उफ़ ऐसे नहीं खाइये रौशनी जी ..”

“फिर कैसे खो असलम..”

“ डेल्हिये में एक साइड से बनाना मुँह में रखूँगा और आप दूसरे साइड से पकड़ न .. फिर बीच में थोड़ा स्वीट वैनिला सुअस दाल दोनों एक एक साइड से बनाना खाएंगे.”

रौशनी समझ गयी असलम को क्या करना था .. वही जैसे सलीम ने पनीर के साथ किउया था .. रौशनी शर्म सब भूल चुकी थी .. वह सर हाँ में हिलायी.

फिर दोनों एक एक साइड से बनाना खाने लगे और फिर कुछ hi पलों में एक दूसरे के होठों का मिलान हो गया और दोनों का किस्स्स का किस्सा शुरू हुआ .. दोनों की चुम्बन हर सोंड गहरी होती गयी .. गहरी होती गयी और रौशनी सब शर्म हाय छोर अपने हाथों को असलम के शोल्डर्स से घेरा और उसे अपने पास खींचते हुए उसके चूमने लगी …. असलम का लुंड निचे झटकों पर झटके मार रहा था और ऊपर वह रौशनी की होठों को चूमते रहा …





कुछ मं यह सिलिसला चला और फिर स्टेप्स की आहात आयी तोह दोनों के होठं जुड़ा हुए और वाह ऐसे बैठ गए जैसे अभी कुछ हुआ hi नहीं दोनों के बीच.

सलीम अंदर आया और दोनों को देखने लगा .. फिर डिश देखि बनाना स्प्लिट वाली तोह एक बनाना ख़तम हुआ था तोह वह समझ गया की अभी क्या हुआ था दोनों असलम और रौशनी के बीच.

सलीम बस मुस्कुराया और मन hi मन सौंहे लगा ( चलो अब असलम ने अपनी बाज़ी मार ली हैं.. शाबाश मेरे दोस्त, मेरे साथ रहकर सीख रहे हो …)

सलीम ने अपना डिजर्ट रौशनी की खिलने लगा और ब्राउनी कहते हिउए फिर से रौशनी ने उसकी ऊँगली चूसी .. और ऐसे दोनों डेजर्ट ख़तम हुए .. फिर बिल भी आ गया और बिल की भरपाई कर तीनो रेस्टोरेंट से सीधे होटल चले गए. रौशनी केक बता तोह भूल hi गयी थी की उसकी सैंडविच और एक बार बानी थी. उसका रूम था असलम और सलीम के बीच. उसे पहली बार इस बात का एहसास हुआ और वह मन hi मन शर्मायी .. अब क्या गुल खिलेंगे आज रात वह सोचती रही और तीनो अपने अपने रूम्स में चले गए.

अब बात ऐसे थी की तीनो के रूम्स एक दूसरे से कनेक्टिंग रूम्स थे. फ्लोर पर लास्ट तीन रूम्स होने के कारन वह कनेक्टिंग रूम्स बने थे. रौशनी के दोनों साइड पर दरवाज़े थे जो एक असलम के रूम से कनेक्टेड था और दूसरा सलीम के रूम से.

रौशनी बाथरूम में फ्रेश होने और नहाने चली गयी .. नहाने के बाद वह अपने गोर से मुलायम कर्तव्य बदन पर टॉवल लपेटे हुए बहार आयी. उसे असलम के कनेक्टिंग दूर से क्नॉकिंग की आवाज़ सुनाई दी . वह दरवाज़े के पास गयी .. वहां से असलम कुछ बोल रहे थे तोह वह कानों को दरवज़े के पास ले गयी .

असलम - “रौशनी जी ज़रा दरवाज़ा खोलिये न …

“क्यों असलम जी क्या हुआ … बड़ी रात हुयी हैं अब सो जाइएगा.

असलम -“नींद नहीं आ रही हैं रौशनी जी ,.. बस ाफी के खलायों में रहता हूँ.. आपको देख रुकसाहना की इतनी याद आती हैं … खोलिये न दरवाज़ा आपसे बातें करनी हैं .

“नहीं असलम जी प्लीज अब सो जाइये .. रात बहुत हुयी हैं.”

“नहीं नींद आ रही हैं .. उफ़ बस कुछ बातें करेंगे रुकसाना मेरी बेगम…

रौशनी झट से एक निघ्त्य डाली स्लीवलेस वाली .. लेकिन जल्द जल्द में अंदर अपनी ब्रस्सिएरे पेहेनना भूल hi गयी.

दरवाज़ा खोलयते hi असलम उसके कमरे में आ गया .. वह बस एक बनियान और शॉर्ट्स में थे .. गर्मी का मौसम था इसलिए रौशनी बात समझ गयी.. उसकी नज़र बिना झिझक साइड असलम के क्रॉत पर गयी जहाँ वह उसके लुंड का बड़ा आकर देख पायी .. (ीुफ्फ्फ्फ़ रौशनी तुम्हारी नज़र पहले से hi इनके क्रॉत पर गयी हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह तुझे सच में क्या हुआ है उफ्फ्फ्फ़.)

असलम अब रौशनी की देखता रहा .. स्लीवेल्स निघ्त्य में थी रौशनी और असलम पहले hi नज़र में देख पाया की वह ब्रस्सिएरे पेहेनना भूल गयी थी. उसका लोढ़ा इस बात से बड़े झटके मारने लगा …

रौशनी को असलम की उस घूरने की आदत पता थी लेकिन आज वह उसे खासकर उसकी चूचियों के वहां घर रहा था .. असलम को उसकी चूतड़ बेहद पसंद थी , सलीम था जिससे उसकी छुयों से ज्यादा लगाव था लेकिन आज असलम उसकी चूचियों की तरफ आँखें फटी हुयी देख रहा था .. फिर कुछ सेकंड बाद वह देखि अपनी नीस और उसे पता चला असलम की उसकी चूचियों में इतनी दिलजस्पी का राज़ .. उफ्फ्फ वह तोह अपना ब्रस्सिएरे hi पेहेनना भूल गयी थी ..





उफ्फ्फ वह निघ्त्य के अंदर नंगी थी और यह बात असलम को पता चली थी.. असलम ने उसे नंगी देख लिया हैं पहले कई बार फिर भी उसे उसकी ट्रांसपेरेंट निघ्त्य के अंदर बिना ब्रस्सिएरे पहने हुए उसे देख वह काफी शर्मिंदा हो रही थी और अपनी चूचियों को ढकने लगी ..

असलम _ “उफ्फ्फ्फ़ रुकसाना बेगम तुम ऐसे क्यों कड़ी हो … उफ्फ्फ्फ़ अपनी हाथों को तोह निकाओ वैसे भी कई बार में तुम्हे बिना टॉप का देखा हूँ hi .. पूरी नंग भी देखा हूँ ः … अब कैसा शर्माना रुकसाना बेगम …. असलम रौशनी की नज़र ऊपर करते बोलता हैं.





रौशनी मन hi मन .. उफ्फ्फ्फ़ यह अब फिर से मुझे रुकसाना बेगम समझ रहे हैं .. फिर से अब वह मुझे पर टूट पड़ने के ख्वाब देख रहे होंगे .. फिर से मेरी चुदाई की प्लानिंग कर रहे होंगे .. उफ्फ्फ उनका मोटा लोढ़ा तोह इतने झटके मार रहा हैं उनकी चड्डी में .. फिर रौशनी सोचने लगती हैं (उफ़ मन कर रहा हैंउनके गरम लोहे जैसे लुंड को निकलू और छू लू उफ्फ्फ ममम क्या कला मोटा लोढ़ा हैं इनका ममम)

रौशनी इन ख्यालों में डूबी खुद को पाती हैं और शर्मा जाती हैं .. उफ्फ्फ उसे तोह एक अलग hi नशा चढ़ा था असलम के मोठे लोडे का उफ्फफ्फ्फ़ कला नाग था बिलकुल ममममम

असलम अब उसके करीब आता हैं और बिना कुछ बोले रौशनी की मुलायम हाथों को अपने हाथों में लेकर चूमते हैं … और उसका हाथ अपने लोडे के उभर पर रखता हैं और फिर उसके हाथ उसकी चड्डी के अंदर दाल उसके लोडे को रौशनी की जुलयम हाथों में थमा देता हैं .. वहां उसका लोढ़ा हाथ में लिए बिना कुछ सोचे रौशनी उसके लोडे को सहलाने लगती हैं प्यार से .. दोनों एक दूसरे के आँखों में ाकाहें डाले हुए खड़े थे और रौशनी का बाय हाथ असलम के सख्त मोठे लोडे पर था… असलम ने अपंनी दायी हाथ की ऊँगली रौशनी के होठों पर रगड़ने लगा .. रौशनी भी बिना बोले उसके ुणलगलियों को अपने मुँह में लेते हुए चूसने लगती हैं .. असलम को रौशनी की इस हरकत को देख उसका लोढ़ा बड़े झटके मारने लगता हैं रौशनी के मुलायम हाथों में… वहां रौशनी अब ानकेहिं बंद कर असलम के मोठे काळा गंदे उँगलियों को चूसने लगती हैं .. अंदर बहार अंदर बहार … उसके उँगलियों को पूरा गिला करती हैं चूस चूस कर ..





रौशनी अपनी आँखिन कुछ मं बाद खोलती हैं और फिर उसे एहसास होता हैं वह क्या कर रही हैं … लेकिन वह रूकती नहीं और ऊपर से असलम के उँगलियों को चुस्ती हैं और निचे उसके मोठे सख्त काळा लोडे को सहलाना जारी रखती हैं ..

दोनों के बीच काफी गरम माहौल बना था और अचानक दरवाज़े के दूसरे कनेक्शन दूर से दोनों को किसी की क्नॉकिंग की आवाज़ीं आती हैं ..

दोनों समझ जाते हैं की बगल के कमरे से सलीम hi नॉक कर रहा हैं और फिर सलीम की ाज़व सुनाई देती हैं ..

सलीम - “रौशनी जी … ज़रा दरवाज़ा तोह खोलिये …. आपसे मिलना हैं .. आपसे उस दिन जैसे सब कुछ करना हैं उफ्फ्फ मममम खोलिये दरवाज़ा , मेरा लोढ़ा आपके लिए hi तोह सख्त हुआ खड़ा हैं … उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ….

असलम और रौशनी एक दूसरे को देखने लगते हैं ..

रौशनी - “उफ्फ्फ असलम जी अब छोड़िये मुझे .. सलीम मियां बहुत बुला रहे हैं …”

असलम - “अरे रुकसाना बेगम ऐसे कैसे चोरु .. आप मेरी बेगम हैं .. सलीम को मारो गोली .. आप बस मेरे साथ hi मज़्ज़े लेंगी …”

रौशनी अपनी आँखों से विनंती करते हुए “उफ्फफ्फ्फ़ प्लीज असलम मियां …. सलीम जी को निपटा कर जल्द से आपको बुलाऊंगी उफ्फ्फ्फ़ अब तोह छोड़िये ….

वहां सलीम जोरों से दरवज़े पर नॉक करने लगता हैं …

रौशनी अब अपने हाथ को असलम के चड्डी के अंदर से निकलते हुए उसे पुश करती हैं उनके कमरे में वापस जाने , अपनी आँखों को असलम की और चौड़ी कर उनसे वहां से जाने की रिक्वेस्ट करते हुए ..

असलम वहां से चला जाता हैं और रौशनी दरवज़ा लॉक कर लेती हैं .. वह अपने बालों को ठीक करते हुए लिप ग्लॉस वापस ज़रा लगते हुए .. (लेकिन फिर से अपनी चूचियों को ढकने के लिए ब्रस्सिएरे पहना भूलते हुए) वह सलीम के रूम से अपने कनेक्टिंग दरवाज़े को खोलने आगे बढ़ती हैं…





 
असलम वहां से चला जाता हैं और रौशनी दरवज़ा लॉक कर लेती हैं .. वह अपने बालों को ठीक करते हुए लिप ग्लॉस वापस ज़रा लगते हुए .. (लेकिन फिर से अपनी चूचियों को ढकने के लिए ब्रस्सिएरे पहना भूलते हुए) वह सलीम के रूम से अपने कनेक्शन दरवाज़े को खोलने आगे बढ़ती हैं…





रौशनी ने दरवाज़ा खोला और सलीम अंदर आ गए और बोलने लगे

रौशनी स्वागत नहीं कर ……..”

आगे के बोल आने से पहले hi सलीम की गन्दी नज़र रौशनी की निघ्त्य पर गयी खासकर उसकी चूचियों के एरिया पर जो उस निघ्त्य से उसे दिखाई दे रही थी क्यूंकि रौशनी अंदर ब्रस्सिएरे पेहेनना भूल hi गयी थी.

“ओह रौशनी … स्वागत तोह कोई तुमसे करना सीखे .. अहह वहहह वह .. क्या नज़ारा हैं .. क्या दिर्श्य दिखाकर स्वागत करती हो आप उफ्फ्फ मज़्ज़ा आ गया ..

रौशनी को कुछ सेकंड लगे कुछ समझने के लिए लेकिन वह समझ गयी की असलम की तरह सलीम की गन्दी नज़र उसकी चूचियों के वहां गयी हैं जो ब्रा बिना पहने वजह से काफी सफाई से दिख रही थी उन्हें. वह शर्म से ला हो गयी लेकिन खुद को ढकने की कोशिश भी न करि ..

सलीम से तोह रहा नहीं जगाया .. वह दृश्य देख उसका लोढ़ा तो झटके मारने लगा और ुबाहरणे लगा .. वह झट से झपटा और रौशनी को अपने बाहों में भर लिया …

“उफ़ सलीम मियां ये क्या कर रहे हो ाप्प उफ्फ्फ ममम छोड़िये न ..”

“रौशनी जी अब तोह नहीं छोड़ेंगे .. महीने बाद हाथ जो आयी हो तुम .. उस रात की यादें अभी भी ताज़ा हैं उफ्फ्फ्फ़ ममम क्या मस्ती करि थी हम दोनों ने .. उफ़ तब तोह रुकिए .. थामिए .. मत करिये .. ये बोल तोह नहीं जा रही थी .. तब तोह हे भगवन , और करिये .. पकड़ पकड़ कर रङ्गिए … मममम रैगर रैगर कर छोड़ …..

रौशनी अपनी लाल नेल पोलिश वाली ऊँगली सलीम के होठों पर रखती हैं …

“उफ़ वह बात अलग थी सलीम मियां …. उफ्फ्फ आप hi ने मुझे बहकाया था उस रात …. उफ्फ्फफ्फ्फ़.”

सलीम बस रौशनी की आँखों में देखता रहा और फिर रौशनी की ऊँगली को चूमने लगा… सलीम बस अभी अभी बीड़ी फुक के आया था ,.. इसीलिए उसके मुँह के अंदर तंबाकू भी था बीड़ी का .. उसकी मुँह से वह फिओर रौशनी की मुलायम और गोर नाज़ुक उनलोगों को मुँह में लेकर चूसने लगा ..

रौशनी तोह मनो इस हरकत से सिहर hi उठी और अपनी ऊँगली को सलीम के मुँह से निकलने की कोशिश भी न करि .. सलीम बस उसकी ऊँगली चूसते रहा … उसके मुँह के अंदर का तम्बाकू रौशनी के ऊँगली पर लगता गया और उसकी ऊँगली काली हुयी .. फिर रौशनी कुछ 2 मं बाद अपनी ऊँगली हटाई तोह उसकी ऊँगली पर तम्बाकू का कला रंग लगा हुआ था … रौशनी ने अपनी गन्दी ऊँगली को साफ़ करने का भी नहीं सोची .. वह पता नहीं क्यों ऐसी पागलों तरह हरकतों का सलीम का साथ दे रही थी.

रौशनी अपने आप को संभाली और साली के गृप से कैद होकर बिस्तर की वहां चली गयी .. सलीम उसके पीछे पीछे चलता रहा और उसकी निघ्त्य पकड़ ली और फिर से रौशनी को अपने तरह खींच लिया .. उसने इस बार इतने जोर से उसे अपने पास खींचा था की रौशनी की चकहियाँ जोरों से सलीम के साइन से चिपक गयी और उसके होठं भी जाकर सलीम के होतोहं से छिपकर गए. साली. ने ऐसे मौके को नहीं गवाने दिया और जोरों से रौशनी को चूमने लगा और रौशनी से भी कोई रेजिस्टेंस न पाते हुए दोनों एक लाबी और गहरी चुम्बन में जड़ गए … सलीम अब अपने हाथों को पीछे लेजाकर रौशनी के कमर पर रख उसे और करीब खींचते हुए चूमने लगा .. अब सलीम का उभरता मोटा लोढ़ा सीधे जाकर रौशनी की छूट के क्षेत्र को टच किया और उसके लोडे ने एक झटका दिया जो रौशनी अपनी बुर पर महसूस करि और एक हलकी से ाः निकली उसके मुँह से … सलीम के गर्मी और बढ़ गयी और वह और एक दो लुंड के झटके सीधे रौशनी की बुर के क्षेत्र पर ज्यादा दिए जिससे रौशनी के मुँह से इस बार और जोरों क ाः निकल गयी…





पता नहीं था रौशनी को की सलीम में ऐसे क्या जादू था की वह खुद को संभल न पायी और उसके आग़ोश में रह कर उसको चूमती रही





और अपने बदन को सलीम के हाथों खिलवाती रही …

सलीम ने रौशनी को चूतड़ों को पीछे से दबोच लिए और इससे तोह रौशनी के मुँह से अब तक की सबसे लम्बी और बड़ी आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी … लेकिन दोनों का चुम्बन टुटा नहीं बल्कि और गहराई में जाता रहा … रौशनी तोह अपने ऊपर कण्ट्रोल खो चुकी थी और सलीम जो कर रहा था जैसे कर रहा था उससे सेहती रही और मज़्ज़े भी लेती रही…

फिर से अपने आप को सँभालते हुए रौशनी खुद को सलीम से जुड़ा करि.

सलीम से मिलकर रौशनी की प्यास सबसे ज्यादा बढ़ गयी थी. लेकिन रौशनी अपने चेहरे का एक्सप्रेशन नार्मल करने की पूरी कोशिश कर रही थी ताकि सलीम को न दिखे की वह कितने मज़्ज़े ले रही थी ..

लेकिन उसकी छूट की अब बढ़ती प्यास का दर्द किसी सच्चे मर्द को काफी साफ़ समझ आ सकता था और सलीम तोह था hi सबसे माहिर खिलाडी.

सलीम जी उफ्फ्फ अब छोड़िये … बस हुआ ..

रौशनी डिअर उस रात के बाद तोह रहा hi नहीं जा रहा हैं न उफ्फ्फ .. क्या यादगार रात बीते थी हम दोनों ने ..

“उफ्फ्फ अब उसे भूल जाइये .. वैसे भी आपकी वह मीनल हैं न … कमसिन हसीना .. उसके पास जाइये और उसी के साथ रातें बिताइए.

“वह वह .. मैंने उसे कभी नहीं …

“छोड़िये चूरिये मुझे सब पता हैं .. आप जैसे हवसी मर्द ऐसी कमीशन हसीना को छोड़ेगा क्या …”

“अच्छा तोह तुझे पता चला .. ममम हाँ उसके साथ तोह बड़ी मस्त रातें बितायी हैं मैंने … अभी कुछ हफ्ते पहले दो रातें बिता कर आया हूँ …”

“अक्कजा सलीम मियां .. फिर जाइये उसी के पास और उसी को बोलिये अआप्की प्यास बुझाने … वही हैं आपकी सबसे प्यारी न .. जाइये उसके साथ जाइये और रातें बिताइए और करिये रंगीन.”

सलीम जरा सा रौशनी के पास आता हैं और सूंघने लगता हैं ..

“अरे कुछ स्मेल आ रहा हैं न .. कुछ जलने का स्मेल … क्यों रौशनी जी जल रही हो न की में मीनल के साथ कई रातें रंगीन बिताये हैं .. ः”

“अरे में क्यों जलु उस कल मुहि से …”





“अच्छा कल मुहि … क्यों .. तुम तोह आज से पहले बड़ी मीठी और पायरी बातें करती थी उसके बारे में … मेरी माल हैं तोह अब कल मुहि हो गयी .. ः … इतना जलने की बू आ रही हैं न तुमसे रौशनी हाहाहाहा”

वहां सलीम हसने लगा और रौशनी शर्माने लगी …

“उफ्फ्फ ऐसे कुछ नहीं …. आप कुछ भी .. मुझे क्या .. जो करना हैं करो उसके साथ बस मुझे छोड़िये अब ..”

“अरे. नहीं डिअर इतना भी न जलो और गुस्सा हो .. तुम तोह अलग hi हो डार्लिंग .. तुमसे कोई न आया हैं पहले न आएगा आगे .. तुम मुझसे फिर से रातें बिताओं और में मीनल को पूरा भूल जाऊंगा … असली मज़्ज़ा तोह आप जैसे पक्के आम खाने में हैं …”

रौशनी मन hi मन शर्मायी और मुस्कुराई





सलीम की अपनी तारीफ़ सुनते हुए मीनल की नहीं .. लेकिन फिर से अपने चहेरे पर वह भाव न लाने दी रौशनी.

रौशनी कुछ न बोली और सलीम फिर मौका देख फिर से रौशनी की और झपटा .. रौशनी मुड़ने hi वलै थी की सलीम ने आगे झुक कर रौशनी की निघ्त्य क अंदर हाथ डालकर उसे गॉड में उठा लिया. अब सलीम का हाथ रौशनी की निघ्त्य के अंदर उसकी पंतय पहनी हुयी चूतड़ों पे था और वो रौशनी को उठाकर बिस्तर की तरफ ले चला.

रौशनी बोली “आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो आप उफ्फ्फ सलीम जी छोड़िये मुझे …. असलम मियां हैं दूसरे कमरे में वह आएँगे अंदर उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.”

सलीम ने रौशनी को बिस्तर पर राख बोलै “तो देख लेने दो. वो कोई बच्चा थोड़े hi है. उसका लोढ़ा सख्त होगा और हमें देखता रहेगा .. हाहाहा”

सलीम जोरों से हसने लगा …

“उफ्फ्फ नहीं उनके सामने ऐसे आपके साथ … उफ्फफ्फ्फ़ नहीं …” ऐसे बोलती हुई रौशनी निघ्त्य को निचे करके अपना बदन ढकने लगी. वह नहीं चाहती थी की सलीम अंदर देखे क्यूंकि उसे तोह तुरंत पता चलेगा की नाईट के अंदर और उसकी पंतय ने अंदर उसकी फुदकती बुर में क्या मस्ती छ रही हैं.

दूसरी तरह असलम दरवाज़े पर अपना कान लगाए रौशनी और सलीम के बीच की बातें सुनने की कोषसिंह कर रहा था .. वह तोह बड़ा बैचैन हो रहा था .. क्या गुल खिल रहे थे अंदर सलीम और रौशनी के बीच .. वही वह सोचते रहा .. लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा था और वह जोरों से दरवज़ा धड़कने लगा … रौशनी जी .. क्या हुआ .. उफ्फ्फ्फ़ दरवज़ा खोलिये ….

रौशनी फिर सलीम को देखि .. “प्लीज सलीम जी अब जाइये .. प्ल्ज़ रात भी हुयी हैं उफ्फ्फ कल सुबह जल्दी उठ कर जाना हैं कैंप …

सलीम कुछ बोलने से पहले hi फिर से दरवाज़े पर कोकिंग शुरू हुयी लेकिन इस बार नॉक मैं दूर से आ रही थी … रौशनी हड़बड़ा गयी और उठ कर दरवज़े के कीहोल से देखि की उसके ंगो के कुछ महिलाऐं बहार कड़ी थी.

वह सलीम को देखि … सलीम उसे देखने लगा … फिर अपने लोडे को मसलते हुए वापस कनेक्टिंग दरवाज़े से अपने रूम में चला गया ..

रौशनी ने दो मं का टाइम लेते हुए अपने आप को ठीक कर दरवज़ा खोला ..

ंगो के महिलाओं से बातें हुयी और उन्होंने कहा की वह कल कैंप के बाद वहां के पास के पार्क में सब ंगो के लोग और कैंप के कुछ वालंटियर्स साथ में मिलकर एक छोटी से पिकनिक मनाएंगे शाम को और रौशनी को भी आना था.

फिर वह सब चले गए और रौशनी कमरे में अकेली थी .. उसके दिमाग में अभी हुए और शाम को रेस्टोरेंट में हुए सलीम और असलम के इन्सिडेंट्स की सोचती रही. अजीब स्थिति में थी रौशनी. निघ्त्य में कमरे में वह इधर से उधर बैचैन होकर टहल रही थी. उसकी छूट पूरी तरह गरम थी और पिघल कर उसकी जांघों को चिपचिपा कर रही थी.

उस्सने निघ्त्य निकल वह नाग्नि hi बिस्तर पर बैठ गयी.





वो पागल सा हुई जा रही थी अपनी छूट में गर्मी के वजह से. वह उँगलियों से अपनी छूट रैगर रही थी सलीम और असलम की यादें उसे गरम करती हुयी.





रौशनी को वहां पड़ी एक छोटी सी बोतल दिखी जिसका ऊपर हिस्सा स्मूथ और राउंड था .. वह कुछ सोची और फिर बोतल को लेकर उसके आगे का हिस्सा अपनी छूट पर थोड़ी देर सहलाने क बाद वो उसे अंदर छूट में डालने लगी. रौशनी सोफे पे आकर लेट गयी और अपने दोनों पेअर फैला कर उस बोतल को अपनी बुर में डालने लगी. बोतल अंदर घुसता हुआ छूट की दीवारों पर रैगर खाने लगा और रौशनी बड़ी मस्ती में सिहर उठी. अब बोतल तोह सलीम और असलम के मोठे लोदों जैसा इतना मज़ा नहीं दे सकता था, लेकिन अभी तो इसी एहसास से मज़्ज़े लेने की सोची रौशनी. रौशनी बोतल के स्मूथ राउंड हिस्से को अपनी छूट के अंदर भर करने लगी मनो वह सलीम और असलम के मोरे लुंड हो





फिर उसे और एक आईडिया सुझा .. वह अब ऐसे बैठी थी की बोतल का टॉप हिस्सा बस उसकी छूट में hi अटका रहे. वो उसे अपनों छूट में hi रहने दी. और फिर उसके ऊपर निचे करने लगी ..इस एहसास ने तोह उसे और मस्ती करि .. और वह थोड़ा और जोर से वही करि … ऐसे करते करते वह एक बाड़ी से आआह करती हुयी उस बोतल पर जहर गयी ,… सोफे भी जरा वेट हो गया और रौशनी आखें बंद लेती रही…

कुछ टाइम ऐसे hi लेते रहने के बाद उसकी आँख खुल गयी .. और निचे सोफे वेट देख और अपने आप को नग्न देख वह शर्मा उठी और फिर वापस निघ्त्य पेहेन कर सोने चली गयी .

सुबह हुयी और रौशनी एक बड़ी सी अंगदी लेते हए उठी … फिर निघ्त्य उतरे और टॉवल लपेटे बाथरूम चली गयी. अज्ज कैंप का दूसरा दिन था और सबसे हार्ड वर्क वाला और इम्पोर्टेन्ट दिन .. गर्मी भी काफी थी इसीलिए रौशनी आज ठन्डे पानी से hi नहायी और फिर बहार अपना मेकअप और कपडे पहने लगी. गर्मी के कारन उसने एक लाइट मटेरियल की नेटेड ब्लाउज पहनी .. रौशनी आईने में अपने चूचियों को देखि और सोची …”उफ्फ्फ कम्बख्त इतने बढ़ गए हैं .. इनके वजह से hi तोह वह असलम और सलीम में इतने उतावले होते रहते हैं … ही तुम दोनों इतनी कैसी बड़ी हो गयी हो उफ्फ्फ्फ़ पहले के कोई भी ब्रस्सिएरे तोह फिट hi नहीं होते उफ्फ्फ्फ़ .… रौशनी अपने चुचुईओं को देख बोली …





आअज रौशनी ने एक काफी डीप बैक कट और स्लीवलेस ब्लाउज पहनी ..













हल्का सा मेक उप और एक लाइट पिंक लिपस्टिक अप्लाई करने लगी . उसने अपने नेल्स पर भी एक फ्रेश कोट ऑफ़ पिंक नेल पोलिश लगायी . रौशनी ने फिर साड़ी पहनी जो भी एक लाइट मटेरियल की थी. रौशनी कुछ 20 मं में पूरी तैयारी के साथ रूम के बहार निकल गयी.





फिर अपने आप कोई आईने में देखि .. - उफ्फ्फ्फ़ रौशनी तू तोह कुछ महीनो से इतनी कामुक हो गयी हो .. क्या फिगर बना ली हो .. ऐसी फिगर के hi तोह इतने बुड्ढे भी दीवाने हो रहे हैं .. वह मन में इस बात को सोच हसी और फिर निचे लॉबी में चली गयी.

लॉबी में बैठे सब मर्द उसी को घर रहे थे … मर्दों को उसे घूरते देके रौशनी और भी मटक मटक कर चलने लगी .. चूतड़ हिलाते हिलाते









रौशनी उन्हें दिल्ली और उसकी नज़र अनजाने में उन मर्दों के लुंड के क्षेत्र पर चली गयी .. कुछ सेकंड बाद वह होनी नज़र संभाली .. उफ्फ्फ रौशनी ये क्या हुआ हैं तुझे .. आजकल सीधे नज़र तेरी इन मर्दों के वहां क्यों जाती हैं उफ्फ्फ .. यह क्या हुआ हैं मुझे … उफ्फ्फ्फ़ - इतने सोच से hi वह काफी शर्मायी मन hi मन और फिर बहार चली गयी. आअज उसे कैंप जल्दी जाना था और वह इसी वजह से ंगो के कुछ महिलाओं के साथ वहां चली गयी.

असलम और सलीम भी पहले से hi वहां मौजूद थे. वह रौशनी को इम्परसस करने जल्द hi वहां काम करने आये थे .. वह चाहते थे की रौशनी उनसे इम्प्रेस हो और असलम चाहता था की रौशनी उससे इम्प्रेस हो और सलीम चाहता था की रौशनी उससे इम्प्रेस हो न की असलम से.

रौशनी भी दोनों को पहली बार इतनी म्हणत कर देख खुश हुयी .. चलो कुछ तोह अच्छा कर रहे हैं दोनों .. नहीं तोह बस मुझे hi ताकते रहते हैं , फ़्लर्ट करते रहते हैं और समय बिताते रहते हैं.

कैंप का काम ख़तम hi होने वाला था की असलम को मौका मिला रौशनी से अकेले में बात करने का .. वह झट से उसके पास गया और एक कमरे में रौशनी के हाथों को खींचता हुआ ले चला..

“उफ़ असलम मियां ये क्या कर रहे हो अप्प .. उफ्फ्फ कोई देख लेगा तोह .. ममम छोड़िये न मुझे …”

“ओह हो अभी तोह पकड़ लिया हैं .. इतने जल्दी कैसे छोरु आपको मेरी रुकसाना बेगम..”

“उफ़ असलम मियां अब यहाँ भी रुकसाना की याद आती हैं आपको … उफ्फफ्फ्फ़ क्या मुश्किल हैं उफ्फ्फ्फ़.”

“मुझे तोह मेरी बेगम हर जगह दिखती हैं …. हैं hi मेरी बेगम सबसे प्यारी…

“ओह हो मियां उफ्फ्फ ममम छोड़िये न कोई आएगा ममममम..

असलम तोह रौशनी को छोड़ने वाला तोह नहीं था .. लेकिन बुंचे अचानक बहार से अवे अंदर आते हुए सुनाई दी .

“अच्छा चोर दूंगा .. लेकिन कैंप ख़तम होने बाद तुम्हे एक पार्क ले जाऊंगा नज़दीक hi हैं .. प्रोमिनेन्ट पार्क नाम हैं याद रखना .. काम होने बाद आप वहां आइये में आपका इंतज़ार करूँगा ठीक 6 बजे.”

“ओह उफ्फ्फ मम ठीक हैं अब छोड़िये मुझे …”

असलम फिर अपने लोडे को सहलाता वहां से चला गया ..

रौशनी ने असलम को अपने लुंड को खुजलाते देख ली थी और शर्मायी .. उफ्फ्फ ये असलम मियां भी न .. हर बार अपने लुंड को खुजलाते रहते हैं उफ्फ्फ.”





रौशनी फिर से काम में लग गयी .. कुछ और मिनट बाद सलीम उसके पास आया और उसकी कलाई पकड़ एक कमरे में ले गया ..

“उफ़ आप भी न … छोड़िये .. उफ्फ्फ आपके इस दिमाग में बस एक hi चीज़ चलती हैं क्या सलीम मियां..”

“हाँ अब क्या करे तेरे जैसी माल हैं तोह वही दिमाग में बात आती हैं .. आपकी खूबसूरती से खेलु , ताकू , मज़्ज़े लू …”





सलीम झट से रौशनी को अपने तरफ खींचता हैं और उसके गालों पर ढेर सारे गीले चुम्मे देने लगता हैं ,,

“उफ्फ्फ्फ़ सलीम मिया …..

रौशनी तोह सलीम के बाँहों में पिगल सी hi जाती थी .. सलीम के चम्मोन का साथ देने लगी और दोनों गहरी सी चुम्बन में लग गए … “





सलीम अभी तोबायको की पुड़िया खा कर आया था और रौशनी को उन्हें चूमते हुए उसका एहसास हुआ .. लेकिन उसकी गर्मी इतनी बढ़ी थी की वह उस बात की परवाह न िये बिना उस गहरी चुम्बन में लगी रही .. आखिर कार 4-5 मं की चुम्बन के बाद रौशनी और सलीम के होठं जुड़ा हुए और रौशनी की लिप्स पर तंबाकू का कला दाग रह गया जिससे उसने हटाने की भी कोषसिंह का करि. …

सलीम रौशनी कम होठों पर उसकी काल टोबाको की चीते देख स्माइल देकर बिला .. “रौशनी जी .. पिंक लिपस्टिक पर आपको कला रंग मस्त जांच रहा हैं …”

रौशनी कुछ न बोली बस शर्मायी और अपना चेहरा फेर ली .. उसने उस दाग को वाइप ऑफ किया ..

रौशनी अब मुड़ी हुयी थी और सलीम के सामने उसकी गोरी पीठ का नज़ारा साफ़ दिखा देने लगा और वह बिना मौका गवाए अपने होठों को रौशनी के डीप बैक ब्लाउज से दिखाई देने वाली मुलायम गोरी मलाईदार बैक को चूमने लगा .. फिर सलीम उसके गालों को चुनने लगा





इस एहसास से रौशनी घु उठी और एक लम्बी आह दी .. सलीम ने और धीरे सरे गीले चुम्मे वालः दिए और फिर एक बार लीक भी करने लगे ..

“उफ़ सलीम मियां क्या कर रहे हो .. उफ्फ्फ यहाँ भी शुरू हुए आप उफ्फ्फ मममममम.”

बातों से तोह रौशनी न कह रही थी लेकिन उसने ऐसा कुछ न किया जिससे सलीम के होठं जो उसके बैक से चिपके थे .. उन्हें हटाए ..

उसकी भी गर्मी बढ़ रही थी और उसकी मलाईदार पीठ उसकी एक वीकनेस भी थी …

यह सिलसिला कुछ और मं चला … रौशनी को फिर होश आया और कुछ बहाना बना कर वहां से जाने लगी ..

रौशनी जी कहाँ जा रही हो मेरी चमक चलो … एक काम करो आज शाम को 5 बजे मुझे यहाँ नज़दीक एक पार में मिलो .. नाम हैं प्रोमिनेन्ट पार्क .. वहां आयना ज़रूर …”

रौशनी पीछे मुद कर सलीम को देखि , मुस्कुरायी .. “नहीं आउंगी वहां ..” और फिर अपनी जीभ बहार निकल सलीम को तैसे करने लगी …”

“आए है … में मर जावा … रौशनी जी आपके ीन्हो होठों और जीभ को बहुत चूसूंगा पार्क में .. आना ज़रूर …”

रौशनी सीधे आगे देखि .. एक हाथ को अपने माथे पर मारी चली गयी ..”उफ्फ्फ यह सलीम मियां भी न .. बिलकुल किसी आशिक़ जैसे बातें करते हैं उफ्फफ्फ्फ़.”

अब आख़िरकार कैंप ख़तम हुआ .. ंगो और वॉंटेरस उसके पास आये ..

“रौशनी माँ आपको शाम का प्लान याद हैं न ..”

“कौनसा प्लान ??”

“अरे आप भूल गयी .. काल रात को आपसे उसके बारे में बताने आये थे न .”

फिर रौशनी को पार्क में पिकनिक की बात यद् आयी.

“हाँ में तोह भूल hi गयी थी .. ाचा कहाँ और कितने बजे ..”

“रौशनी मम यही पास में हैं प्रोमिनेन्ट पार्क .. वहां जाएंगे ठीक 5 बजे.

रौशनी को कुछ सेकंड में फिर बात याद आयी .. “उफ्फ्फ इसी पार्क में hi तोह असलम और सलीम मियां ने भी 5 बजे बुलाया हैं मुझे .. उफ्फफ्फ्फ़ अब क्या करू .. ये बाकी के लोग भी वही पिकनिक मन रहे हैं .. उफ्फफ्फ्फ़”

अब क्या करू .. कैसे झेल पाऊँगी इनको और उन दो हवसी बड़े मोठे लुंड वाले बुद्धों को …





उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ यह नयी कौनसी मुसीबत में फांसी हैं तू रौशनी उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.
 
रौशनी को कुछ सेकंड में फिर बात याद आयी .. “उफ्फ्फ इसी पार्क में hi तोह असलम और सलीम मियां ने भी 5 बजे बुलाया हैं मुझे .. उफ्फफ्फ्फ़ अब क्या करू .. ये बाकी के लोग भी वही पिकनिक मन रहे हैं .. उफ्फफ्फ्फ़”

अब क्या करू .. कैसे झेल पाऊँगी इनको और उन दो हवसी बुद्धों को … उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ यह नयी कौनसी मुसीबत में फांसी हैं तू रौशनी उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.

अब आएगी

कैंप का काम ख़तम होते Hi रौशनी अपने कमरे चली गयी. रौशनी कमरे के मिरर के सामने चली गयी और अपने कपडे उतरने लगी. अब रौशनी सिर्फ अपनी ब्रा और पंतय में कड़ी थी और वह फिर से अपन बदन को निहारने लगी … वह सोचने लगी की कैसे होगा अगर दोनों असलम और सलीम उसके साथ उसके बगल में खड़े होंगे बस उनके अंडरवियर में जिसके अंदर दोनों का मोटा लुंड तम्बू बनाये खड़ा होंगे …





अपनी आँखें बंद वह फिर असलम और सलीम को नग्न अपने साथ सोची .. उनके काळा लोडे हवा में लहराते हुए उसे सलामी देते हुए .. उसकी बुर गिरिली हो ने लगी इस सोच से …फिर वह खुद को अपने घुटनो के बल सोची दोनों के लुंड उसके इर्द गिर्द मंडराते हुए .. अगली सोच में वह दोनों के लुंड को हाथ में लिए थी .. राइट में असलम के काळा मोठे लुंड को पकडे और लेफ्ट में सलीम के लम्बे और मोठे लुंड को पकडे … अब वह भी इस सोच में नग्न थी .. और अगली सोच में वह दोनों के लुंड हिलने लगी थी .. उसकी बुर से और भी रास बहने लगा था इस दृश्य के बारे में सोचते हुए .. फिर वह दोनों के लुंड स्ट्रोक करने लगी थी और उनके लुंड से ढेर सारा प्रेकम निकल रहा था जो उसके नजूल मुलायम हाथों को वेट कर रहे थे .. रौशनी बिना सोचे अगले hi शान में अपने हाथों को अपने मुँह के पास ले जाकर अपने उँगलियों को चाटने लगी मनो दोनों असलम और सलीम के मोठे लुंड का प्रेकम चाट रही हो .. उसकी बुर काफी गीली हुयी थी और बड़ी फुदक रही थी .. अचानक से वह इस सोच से बहार आयी और आईने में खुद को इस स्तिथि में पाकर हैरान रही.

(उफ़ रौशनी यह तुम्हे कुछ हो गया हैं .. बस इनके लुंड के सपने hi देखती रहती हो .. पहले तोह राटा में देखती थी अब तोह दिन भर वही लुंड hi तेरे मन पर होते हैं उफ्फ्फ ये में इनके लुंड की दीवानी कैसे बानी हूँ उफ्फ्फ)





वह न जाने का सोची .. लेकिन उसकी हवस उसे उनके तरफ खिह्न वाली hi थी .. वह फिर एक नयी ब्रा पंतय पहनी लास वाली ब्रा और लास पंतय.. वह अपने बदन पर काफी जस्मिने की परफ्यूम लगायी .. फिर एक पीले रंग की स्लीवलेस और काफी डीप बैक ब्लाउज पहने लगी .. यह ब्लाउज तोह पहले ब्लाउज से भी ज्यादा डीप कट थी और उसकी गोरी मुलायम पीठ को और भी दर्शाने वाली .. और तोह और बस दो दिओरियों से hi पीछे से बंधी हुयी ब्लाउज उसने पहने थी. चेरे पर उसके दुपहर से ज्यादा मेक उप डाली थी क्यों शाम का वक़्त था और उसे पिकनिक पर जाना था ..

वह लास्ट बची कुछ तैयारी कर फिर कमरे से प्रोमिनेन्ट पार्क के लिए निकल गयी. असलम ने उसे 5 बजे बुलाया था पार्क , 5.30 को ंगो के महिलाओं ने बुलाया था और 6 बजे सलीम ने .. इसीलिए रौशनी ने तीनो जगहों पर मैनेज करना आसान सोची .. वह आखिर कर पार्क पहुँच गयी ..

अब पार्क का नाम था प्रोमिनेन्ट पार्क और यह इसीलिए था क्यूंकि वह उस शहर का सबसे पुराण पार्क था .. पार्क था उस शहर के पुराने टाउन में .. इसीलिए मैं सिटी से ज़रा दुरी पर था पार्क. अब पार्क की खासियत यह थी की पर वैसे तोह फॅमिली पार्क था लेकिन पार्क के अंत का क्षेत्र अब कपल्स के लिए ज्यादा जाना मन था .. वह पार्क का सबसे पुराण क्षेत्र था और वहां झाड़ियां काफी साड़ी थी .. जहाँ फॅमिली पार्क एरिया में ओपन ग्राउंड था , वहां कपल्स पार्क एरिया में सब ढाका हुआ था जेहादियों से .. इसीलिए वहां ज्यादातर कपल्स hi रहते थे .. अब यह बात तोह रौशनी को पता नहीं थी .. वह असलम का मैसेज पढ़ी जहाँ उसने लोकेशन भेजा था जहाँ वह खड़ा था .. जहाँ पर पार्क का कपल्स एरिया शुरू होता था वहां पर hi असलम रुका हुआ था रौशनी के लिए . रौशनी को अपने तरफ आते देख वह खुश हुआ .. उसका लोढ़ा सख्त होने लगा जैसे hi उसने देखा की रौशनी ने बड़ी मस्त और सेक्सी साड़ी पहनी थी और ब्लाउज भी इतना सेक्सी था की वह पहली बार रौशनी को इतनी सेक्सी ब्लाउज में देखा था .. उसका लोढ़ा तोह उस ब्लाउज में रौशनी को देख अब डायरेक्ट अपनी चड्डी में उसे सलामी देने लगा था ..









रौशनी उसके पास आते hi असलम ने बिना मुका गवाए उसके कमर को पकड़ कर अपने तरफ खींच लिया और दोनों के कमर एक दसूरे से चिपक गए .. असलम अपने हाथों से रौशनी की मुलायम पीठ पर फेरने लगा और उसके बदन को चुने लगा .. असलम के ऐसे डायरेक्ट टच ने एक करंट सा डूडा दिया रौशनी के बदन में और वह सिहर उठी .. बिना कुहक बोले वह भी असलम से चिपक गयी थी और कोई देखता तोह लगता दोनों न hi कपल्स हैं मियां बीवी hi होंगे .. बहुत करीब थे दोनों और फिर पार्क एक भीतरी हिस्से में चलने लगे .. रौशनी तुरंत समझ गयी की इस हिस्से के पार्क में कपल्स hi हैं .. रमेश जी के साथ रह कर उसे इन चीज़ों की भनक बड़ी जड़ी होने लगी थी .. वह सरप्राइज भी नहीं थी की असलम उसे ऐसी पार्क में बुलाएगा क्यों उसे अब मर्दों का सब पता चल चूका था खासकर इन तीनो बुद्धों के हवसी अन्तरे के बारे में .. और कही न कही यही नेचर उसे बड़ा पसंद आने लगा था …

अब बात ऐसी हुयी जकी असलम के बिना कुछ बोलने या करने पर hi रौशनी उसके कंधे पर सर रख उसके साथ चलती रही ..

रौशनी सच में असलम के काफी करीब आयी थी और वह बिना कुछ समझे सोचे उसके कदम से कदम मिला रही थी .. वहां के सब कपल्स एक बुड्ढे और जवान खूबसूरत लेडी को इतने जकरीब इस सिटिहि में देख हैरान थे .. मर्दों को असलम से जलन और महिलाओं को रौशनी से इर्षा .. यही पीलिंग्स उनके अंदर थे जैसे जैसे वह रौशनी और असलम को साथ साथ देखने लगे थे.





असलम को लोगों की उन पर नज़र पाकर बड़ी ख़ुशी और गर्व मेहसुसु हो रहा था .. रौशनी उस पार्क की सबसे सेक्सी और खूबसूरत लेडी थी .. वह इतना लकी था की ऊके बुढ़ापे में उसे ऐसी मस्त माल मिली थी .. आज तोह पार्क में वह काफी मज़्ज़े करने वाला था रौशनी के साथ.

आखिर में असलम को एक सुनसान और फ्री जगह मिली और वह रौशनी के साथ वहां दोनों पहुँच गए. वहां काफी साड़ी झाड़ियां थी इसलिए प्राइवेसी भी थी और जैसे hi प्राइवेसी पायी असलम रौशनी के गालों को चूमने लगा …

रौशनी कुछ न बोली . वह तैयार थी असलम के इस हरकत के लिए .. अब वह भी साथ आयी hi थी .. उसकी भी गर्मी बढ़ रही थी .. वह भी एक महिला थी और उसके अंदर असलम के प्रति काफी साड़ी पीलिंग्स भी थी .. इतनी प्राइवेसी देख वह भी काफी खुश थी की कोई उसे असलम जैसे बुड्ढे के साथ गुल जो खिलने वाले थे वह नहीं देख पाएंगे ..

असलम , रौशनी के होठों को हॉक्स से चुम लिया .. रौशनी शर्मा कर मुँह फेर ली और फिर शरमते हुए असलम के चौसे साइन में छिपाई .. उफ़ असलम मियां ऐसे पब्लिक में मुझे आप चुम रहे हो फुफ्फ बड़ी शर्म आए रही हैं .. आप तोह बस यही सब सोचते रहते हो उफ्फ्फ.

“ओह हो तुम्हारे साथ तोह यही सब तोह करना हैं मुझे .. मेरी बेगम हो तुम तोह कैसा शर्माना ..

उफ़ असलम मियां वह प्ल्ज़ .. अब छोड़िये मुझे जाना हैं वह ंगो के महिलाओं ने पिकनिक रखा हैं ..

“अरे ऐसे कैसे जाने दू .. अब मेरा मौका हैं .. तुम मेरे सतह हो और शाम भर मेरे साथ hi रहोगी .. बाकी सब कुछ भूल जाओ ….

नहीं प्ल्ज़ अब जाने दीजिये अपने बुलाया था तोह में आयी लेकिन अब मुझे जाना हैं ..

“नहीं कही नहीं जाओगी तुम …”

असलम ने रौशनी की ठुड्डी पर हाथ रख उसकी नज़ारा ऊपर करि और दोनों की नज़रे मिली .. फिर असलम बोलै

“उफ्फ्फ्फ़ ममममम” आँखों मि आँखे दाल कर असलम बोलै .. उफ्फ्फ मेरी बेगम मममम जो नशा तुम्हारी इन नशीली आँखों में हैं वही नशा मुझे पिलाओ ….. मुझे और कुछ न चाहिए बस मेरी बेगम की उसकी मदमस्त नशीली आँखें का नशा hi चढ़ा लो … किसी नशे से लम नहीं हैं .. बल्कि सबसे बड़ा नशा हैं तुम्हारा ..”

असलम की ऐसी बात सुन कर रौशनी काफी रोमांटिक फैले करने लगी और एक बड़ी सी कामुक नज़र देकर असलम के साइन में अपने चेहरे को फिर से छुपा ली. .

असलम ने फिर से रौशनी की नाज़ा को ऊपर लायी और बोले “वैसे मेरी बेगम तुम्हारे ये गुलाबी होंठभी तोह इतने रास से भरे बैन उफ्फ्फ्फ़ मन करता हैं बार बार तुम्हारी होंठों को चुम लूँ और तुम्हारी होठों के रास के नशे में पागल हो जाओ …





अब तुम मुझे , तुम्हारे इन गुलाबी होंठो का रास पिलाओ ..

असलम के मुँह से इतनी रोमांटिक बात सुन रौशनी की शर्म बढ़ती रही और फिर से अपना चेहरा झुकाने वाली थी की असलम ने उसे रोका और उसकी ाज़ार अपनी नज़र से मिलते रहे.

रौशनी भी अब असलम के आँखों में देख बोली - “उफ्फ्फ्फ़ नहीं बाबा … चूमुंगी नहीं आपको … उफ्फ्फ चूमते हो तब हर बार आप तोह पागल हो जाते हो .. उफ्फफ्फ्फ़ जब भी चूमते हो उफ्फ्फ्फ़ आप तोह कितनी बेदर्दी से चूसते हैं मेरी इन गुलाबी रास भरी होठों को .. उफ्फ्फ्फ़ ….”





असलम … रौशनी के आँखों में आँखें दाल चूमने बढ़ा तोह रौशनी ने अपने गुलाबी होठों और असलम के काळा होठों के बीच हाथ राखी .. और न में सर हिलने लगी …

“ओह रौशनी मेरी डार्लिंग.”

ओह रौशनी … हम्म रुकसाना बेगम नहीं बुलाओगे ..

“रौशनी सच कहता हूँ में रुकसाना बेगम को तुम में देखता हूँ लेकिन मुझे आप तुम्हे बेगम बनाना हैं .. रुकसाना की जगह तुम hi ले लो .. में तुमसे प्यार करने लगा हूँ ातुमहे बहुत चाहने लगा हूँ …”

रौशनी , असलम से यह बात सुन .. की वह उसे बेगम बनाना चाहते हैं और इतना प्यार करते हैं और चाहने लगे हैं .. यह सुन शर्मायी ,, मन hi मन कुश होते हुए और मन मन मुस्कराते हुए बोली

“ उफ़ में शादी शुदा हूँ पहले से hi असलम .. में आपकी बेगम नहीं बन सकती .. और तोह और हम दोनों तोह अलग अलग रे ……

फिर असलम ने अपनी बहो का घेरा रौशनी के इर्द गिर्द करके फिर से उसकी आँखों मि आँखे दाल कर बोले “रौशनी मुझे कुछ न सुन्ना हैं … उफ्फ्फ्फ़ में चाहता हूँ तुम मेरी बेगम बनो … रिश्ता न बना लो लेकिन बेगम बन जाओ जभी भी मिलोगी .. मेरी बेगम जैसे बर्ताव करो ..”

रौशनी रिप्लाई दी .. “उफ़ नहीं ममम में शादी शुदा हूँ. आपकी बेगम नहीं …..”

असलम रौशनी के होटोहनो को हॉक्स से चूमता है और बोलने लगता हैं “उफ्फफ्फ्फ़ यही तो तुम्हारी जैसी मस्त महिलाओं की ऐडा हैं … उफ्फफ्फ्फ़ सब चाहते हुए बी ऐसे दिखती हो जैसे कुछ चाहती hi नहीं हो .. उफ्फफ्फ्फ़

“रौशनी में अब समझने लगा हूँ की हम दोनों एक जिस्म एक जान हैं … .तुम मेरी बेगम बनोगी … तुम बनोगी मेरी बेगम ….”

रौशनी अपने आप को असलम से चुरा कर पीछे चली जाने लगती हैं … उसकी चूतादें हिलती डुलती असलम देखने लगता हैं और मन hi मन कहता हैं

रौशनी कहाँ भाग कर चली जाओगी… भाग भाग कर मेरे पास hi तोह होगी तुम .. मेरी बेगम बनोगी तुम रौशनी .. असलम की बेगम बनोगी तुम …

रौशनी वहां से जल्दी जल्द चकते हुए पार्क के फॅमिली एरिया में पिकनिक के पास पहुँच hi जाती हैं … वह वहां कुछ तुम बिताती हैं की उसे मैसेज अत हैं सलीम का .. और उसने उसे एक लोकेशन भेजा था उसी पार्क में .. रौशनी सोच राइ थी की उसे जाना चाहिए या नहीं .. लेकिन पता नहीं क्यों वह एक खिचाव महसूस कर रही थी .. उसे भी सलीम से मिलना था .. उसकी भी सलीम के प्रति कामुक पीलिंग्स की जाग्रति हो चुकी थी .. फिर ंगो के महिलाओं को कुछ बहाना कर वह फिर से कपल्स पार्क क्षेत्र में जाने लगती हैं .. इस बार सलीम ने उसे पार्क के अलग कार्नर में बुलाया था … रौशनी अपनी चूतड़ों को हिलाते हुए वहां सलीम के पास पाझंच जाती हैं ..

वहां सलीम ने एक आइए जगह चुनी थी जो पार्क के काफी एन्ड में थी .. वहां अँधेरा सबसे ज्यादा था .. 6 भी बज चुके थे इसीलिए शाम के आंखरी उजाले का टाइम था .. असलम के साथ अभी की गयी मस्ती ने रौशनी की गर्मी में आग डाला दी थी .. इस बार वह सलीम के वहां अपनी बुर में नमी मेहसुसु करती चली गयी .. सलीम तोह रौशनी को उसके सेक्सी साड़ी और ब्लाउज में देख बेहत खुश हुआन.. वह अपने लोडे को मसलने लगा जो रौशनी को देख एकदम से तनाव में खड़ा था उसकी चड्डी में. रौशनी पास आते hi उसने उसे दानोच लिया और उसकी चूचियों को और चूतड़ों को कास कर दबाने लगा .. रोशन ी के मुँह से बड़ी सी आहें निकलती रही … वह बस सलीम के मज़बूत हाथों में एक डॉल की तरह थी .. सलीम अपने हाथों को रौशनी के मुलायम पीठ पर रडने लगा .. अपने हाथों को रौशनी के ब्लाउज के थीं स्ट्राप में डाला उसके ब्रा के स्ट्राप से खेलने लगा .. काफी गर्मी चाहिए थी कुछ hi पलों में दोनों के बीच ..









“उफ़ सलीम मियां आप भी शुरू हुए .. उफ्फ्फ्फ़ छोड़िये ..”

स्लैम मन hi मांस ोचने लगा .. उफ्फ्फ आप भी मतलब .. क्या वह कमीना असलम पहले hi बाज़ी मार लिए हैं … उफ्फ्फ्फ़ ..

फिर वह रौशनी के बदन और चेहरे पर एक नज़र दलाई और वह समझ गया की असलम ने सच में मुका पहले hi उसका फायदा उठा लिया हैं .. जब भी कोई मर्द रौशनी जैसी कामुक औरत के साथ खेल चूका होता हैं तभी ऐसी महिला इतनी बेचैन रहती हैं और चेहरे पर ऐसी ग्लो मनो वैसे रहता हैं ..

सलीम को कुछ फरक नहीं पड़ने लगा की असलम ने क्या किया हैं .. वेब रौशनी बस उसके पास हैं और वह उसे रैगर रैगर कर उसके बदन के साथ खेलेगा .. आज पार्क में रौशनी उसकी थी और वह उसे खूब मसलने वाला था ..

रौशनी भी सलीम के आँखों मेंउसके पार्टी हवस नज़र आने लगी थी .. उसकी भी गर्मी बढ़ी हुयी थी .. वह भी कही न कही चाहती थी की सलीम उसे बुरी तरह से रगड़े और उसके मस्त गोर से शादी शुदा बदन के साथ खूब खेले …

वह हॉक्स आह मारती रही जिससे सलीम की उत्तेजना और बढ़ती गयी और वह और जोरों से रौशनी के बदन को रगड़ने लगा .. उसका मोटा लोढ़ा सावधानी में रौशनी की मुलायम नाभि से टकराने लगा जिससे उसका लुंड और बुर तरह से झटके मारने लगा ..

यह सब रौशनी मह्सुश करि और सलीम के बदन से चिपकी hi रही ..

“उफ्फ्फ छोड़िये न सलीम मियां “ रौशनी पहने लगी लेकिन अभी भी पूरी तरह से सलीम से चिपकी थी ..

“ओह हो जानेमन … तुम भी मस्त माला हो .. तेरी जैसी आइटम हमेशा कहती कुछ और हैं लेकिन चाहती कुछ और hi हो ..” उफ्फ्फ आज तोह तुझे नहीं जाने दूंगा रौशनी .. मेरी हो तुम और मेरी रहोगी आज ममममम.. सच क्या मस्त पाठक लग रागी हो तुम





“नहीं नहीं वह मुझे वापस पिकनिक जाना हैं .. वह धुंध रहे होंगे मुझे”

सलीम. मन hi मनमें (साली पिकनिक जाना हैं या फिओर से असलम के बाँहों में … तेरी जैसी आइटम को तोह उसने बहुत रगड़ा होगा ..,

“अच्छा पिकनिक जाना हैं या कही और .. हँ रौशनी .." और सलीम उसे देख आँख मारा”

“नहीं बस पिकनिक जाना हैं ..”

“ओह मुझे लगा किसी यार के पास जाना हैं बदन को और खूब रअगरवाने …” और सलीम हसंता हैं.

वहां रौशनी सोचती हैं की क्या सलीम को पता चला की वह असलम के बाँहों में थी कुछ hi देर पहले उफ्फ्फ …. मम हाँ जानते होंगे .. हैं hi इतने मस्त स्मार्ट खिलाडी सलीम मियां .. लेकिन उफ्फ्फ अब में कैसे उफ़ इन दोनों बुद्धों के बीच फांसी हूँ मममममम”





सलीम रौशनी के चेहरे पर गर्मी देख कर बोले “है जानू .. उफ्फ्फ तुम्हारी ये ादाएँ उफ्फ्फ्फ़ हमारा दिल लूट ले . तुम्हारी ये झील सी गहरी आंखों में डूब जाने का मन कर रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ .. और तुम्हारे ये गुलाबी गालों को देख कर कोई बी मचल जाए और फिर सलीम रौशनी के होंठो पैर अपनी उंगलिया फिरा कर बोले “ उफ्फ्फ जानेमन तुम्हारी ये गुलाब की गुलाबी रसीले रास से भरे होंठ जिस का रास चूसने को कोई भी पागल हो जाए मममम ये सब मेरे भाग्य में कैसे आये हैं उफ्फ्फ मममम बोलो ना रौशनी यह कोई खवाब तो नहीं.

रौशनी सलीम के ऐसे बातिओं को सुन मंद hi मंद मुस्कुरायी .. और कुहक न बोली , बस सलीम के आक्न्हों में ाकाहें डालती कड़ी रही,

रौशनी से नकारी न सुनी इसीलिए सलीम और बोल्ड हुआ और उसने अपने होंठ रौशनी के होंठों पैर रख दिए और उसके होंठो को चूसने लगे .





रौशनी के ऊपर वाले होंठ अपने होंठो मेंदाबा कर चूसने लगा सलीम तोह रौशनी भी उसके काळा होंठों को चूस कर उनके चुम्बन का साथ देने लगी. रौशनी के होंठ मनो सलीम बुरी तरह से चबा रहा था .… A=itne बेहरमी से चबा रहे थे मनो की सलीम आज hi रौशनी के होंठो का सारा रास निचोड़ लेना चाहते हो.

जिस तरह से सलीम रौशनी के होंठों को और उसकी जीभ को चूस रहे थे रौशनी जान गयी थी की आज की शाम सलीम जी उसके बदन के हर अंग को ऐसे hi चूसेंगे .

फिर रौशनी कामुकता से कुछ सेकंड किश तोड़ते बोली “ उफ्फ्फ सलीम मियां आप तो मेरे होंठों का सारा रास hi चूस जाना चाहते हो .. उफ्फ्फ ममम आप तोह इतनी मस्ती और अछि तरह से मेरे होंठो का रास चूस रहे हो उफ्फ्फ ममममम की जैसे कोई भावरा किसी काली का रास चूस रहा हो. सलीम अब रौशनी के बालों में अपने हाथों को सवेरे उसके होंठ फिर से चूसने और चूमने लग गए ौरिस गर्मी में रौशनी की आँखे बंद हो गयी और वह भी सलीम मियां के होंठो का रास चूस रही थी. फिर उसे अपनी दोनों बहे सलीम के गले में दाल दी और अब रौशनी के मुलायम गुलाबी होठं , सलीम के काळा भद्दे होठों से चिपके हुए थे.





सलीम रौशनी के होंठों को चूस रहे थे और उनके कठोर हाथ रौशनी की मुलायम और गोरी पीठ सहला रहे थे की सलीम धीरे से अपना एक हाथ आगे रौशनी के पेट पैर रख दिया और उसकी साड़ी को साइड में करके रौशनी के नंगे पेट को सहलाने लगा और रौशनी की नाभि में उनकी उंगलिया दाल कर उसकी नाभि से छेड़खानी करने लगे.

इस एहसास से तोह रौशनी का पूरा बदन सिहर उठा.

रौशनी सोच ने लगी .. अब सलीम मियां आखिर उसके होठों को चूसते बी क्यों न.. उनके पास तो अब मेरे इन गुलाबी होंठो का रास चूसने का लाइसेंस था जो में hi उन्हें दिया था उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.

सलीम अब रौशनी के जीभ अपने होंठो से खींच ली और उसकी जीभ को भी चूसने लगे

दोनों रौशनी और सलीम एक दूसरे को चूमते हुए चिपके हुए होने के कारन उसकी चूचियां सलीम जी के सीने से घिस रही थी.. दोनों रौशनी और सलीम लवर्स की तरह पूरी तरह से एक दूसरे के कामुकता में गम हुए थे.

एक तकरीबन 60 साल का बुद्धा मर्द और उसके साथ एक मस्त सी सेक्सी गदराई किसी और की बीवी ऐसे लिपटे हुए थे मनो दोनों hi मियां बीवी हो …





सलीम ने फिर धीरे से रौशनी को निचे घास पर लिटा दिया और वह उसके ऊपर लेत गए. सलीम का भारी भरकम शरीर के निचे रौशनी का मुलायम बदन छुप सा गया था..

कुछ देर ऐसे hi सलीम ने रौशनी को घास पर उसके बहो में रौशनी के होंठन और गालो और मेरी गर्दन को चूमते रहे और रौशनी भी सलीम को अपनी बाँहों मि कस्ते हुए मस्ती से भरी कामुकता से भरी , अपने मुँह को िस्दार उधर झटक कर कसमसा रही थी और रौशनी के मुँह से बड़ी से बड़ी सिसकियो के साथ सतह hi उसके मुँह से निकल गया.

उफ्फफ्फ्फ़ .aaahhh……..jaanu ......ये क्या मम मियंन्त्र ......aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मर गयी.............. ये क्या हो रहा हैं ............aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh..................... रुक जाईये............... plzzzzzzzzzzzzzzz .. हम पब्लिक प्लेस में एक पार्क में हैं न की कमरे के बिस्तर पर उफ्फ्फ ,मममम सलीम मियाणं …..

लेकिन सलीम के कानों कुछ न पड़ा और वह इसी तरह से रौशनी से लिपट कर घास पर उसके होठों को चुम रहे थे और रौशनी भी उनके बदन से ऐसे लिपटी थी मनो किसी पेड से कोई नंगीं लिपटी हो …





सलीम धीरे धीरे से उस स्तिथि में रौशनी के नाभि के साथ भी खेलने लगे .. सलीम मियां जिस हाथ से रौशनी नाभि से खेल रहे थे वो हाथ उन्होंने धीरे धीरे करके ऊपर ले कर रौशनी की चूचियों के स्थान पैर रख दिए और पहले उससे बड़े प्यार से दबाने लगे .. प्यार से शेल्वाने में hi रौशनी का शर्म से बुरा हाल था .. रौशनी उन्हें रोकना चाहती थी पैर मेरे मुँह से और कुछ बी नहीं निकल रहा था .. और फिर सलीम और गरम होते हुए अब रौशनी की बायीं चुकी को जोर से जोर से दबा दिए जिस से रौशनी के मुँह से चीख निकल पड़ी .. “उफ्फफ्फ्फ़ ममम सलीम ियाँ ममममम ुयी माँ.”

सलीम , रौशनी की चीख सुने और उसकी आँखों मि देखते हुए बोले “जानू क्या हुआ…?”

तो रौशनी उनसे शिकायत करते हुए बोली “ उफ्फ्फ सलीम मियां ममम धीरे करिये न दर्द होता हैं.

सलीम , रौशनी के आँखों मि आंखे दाल कर बोले “सॉरी जान पैर क्या करू तुम चीज़ hi ऐसी हो एकदम मुलायम माखन की तरह … मममम तुम जैसी सुन्दर अप्सरा के सामने तो कोई न काबू पाएगा उफ्फफ्फ्फ़ …..”

सलीम की इन्ही बातो से रौशनी मन hi मन मुस्कराये बिना न रह न सकीय. उसे भी इस खेल मि बहुत मज़ा आ रहा था..

सलीम मियां रौशनी को अपने बहो लिए और ुसंक होंठो को उसकी चिकनी गालो परे फिरते बोले “ रौशनी जानू, तुम मेरी हो गयी हो विश्वास hi नहीं रहा , ी लोवे ु डिअर , माय लव क्या तुम भी मुझ से उतना hi प्यार करती हो..”

रौशनी तोह सलीम के स्पर्श से काफी गरम हो गयी थी और बस आँखे बंद किये बिना सोचे बोल पड़ी “ जी मेरे मियां … आप hi मेरी डार्लिंग हो

सलीम मियां .”

मेरे गालो पैर अपने होंठ रगड़ते रहिये उफ्फ्फ ममममम aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh मुझसे ऐसे hi प्यार करते रहिये ….

सलीम बस इसी बात से और बोल्ड हो गया और उसने रौशनी के ब्लाउज के पीछे बंधे स्टिंग्स को खोलना शुरू करा और झट से दो स्ट्रिंग्स खोलते हुए ब्लाउज भी फ़ेंक दी साइड में .. .. रौशनी कुछ समझ पाती या बोल पाती उससे पहले hi उसके बदन पैर बस अब ब्रा थी और तोह और उसकी ब्रा से बहार निकली हुयी उसकी दायी चुकी भी thi….Roshni ने आखिर कार हिम्मत करके लड़खड़ती आवाज़ में बोली “उफ़ सलीम मियां ये क्या हो रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ ये आपने क्या कर दिया उफ्फ्फ्फ़ … हम तोह पार्क में हैं एक पब्लिक प्लवे में उफ्फफ्फ्फ़ मियां ममम जानू में तोह शर्म से मर जयुंगी उफ्फ्फ ममम प्लीज मेरी ब्लाउज फिर पेहेनाइये उफ्फ्फफ्फ्फ़ मममम. पैर सलीम मियां उस समय कहा रोकने वाले था, उस पैर तो जैसे रौशनी की किसी बात का असर hi नहीं हो रहा था .. वह बस मस्ती में रौशनी की चुकी दबाये और गीत झट से अपना मुँह बड़ा कर रौशनी की दायी चुकी पैर रख उसके निप्प्लेस को अपने होंठो के बीच दबा लिया









सलीम तोह अब जैसे पागल hi हो गए थे , वो कभी रौशनी की निप्पल को अपने होंठों में दबा कर खींच देते या कभी उसकी पूरी चुकी को जैसे कोई आम चुस्त हों, उसी तरह मेरी पूरी की पूरी चुकी अपने मुँह मि भर कर आम की तरह चूसने लगे .

सलीम मियां इस तरह मेरी चूचियों को चूसने पैर वह भी एक पार्क में , रौशनी मनो जन्नत में उड़ने लगी थी . सलीम मियां कभी उसकी निप्पल को अपने दांतो से काट ते और कभी अपनी जीभ से छेड़ते और कभी उसकी चुकी को जितना हो सकता अपने मुँह मि भर कर ऐसे चूसते मनो उसकी चुकी नहीं कोई ालपोहंसो आम हो.

रौशनी को यकीन था की अगर सलीम मियां कुछ देर और इसी तरह उसकी चूचियों का रास चूसते रहे तो वह भी किसी भी पल शर्माने की दिवार को तोड़ देगी.

रौशनी को मस्ती के कारन उसका कण्ट्रोल करना बहुत मुश्किल हो गया और उसकी साँसे तेज़ तेज़ चलने लगी थी और उसके मुँह से aahhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaahhhhhhhhhhhh आवाज़ें निकलती रही… वह वहां घास पर लेते लेते अपने होंठो को कामुकता से काटने लगी.

रौशनी की आँखें बंद थी और वह मज़्ज़े लेने लगी , भूल गयी थी की वह बिस्तर पर नहीं लेकिन एक पब्लिक पार्क में हैं …. रौशनी की आँखें कुछ सेकंड बाद खुली तोह सामने नज़ारा देख वह हैरान हुयी .. सामने और कोई नाभि बल्कि असलम थे और वह सलीम और उसके बीच की रासलीला को स्तब्ध देख रहे थे…..

रौशनी भी असलम को देख अपने आप पर काबू पाने लगी और कड़ाही “ aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh सलीम मियां उफ्फफ्फ्फ़ बस कीजिये aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh रुक जाईये aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh और नहीं plzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz अआप छोड़िये मुझे अहह उफ्फ्फफ्फ्फ़ मममम प्ल्ज़ छोड़िये मुझे अह्ह्ह .. उफ्फ्फ्फ़.

रौशनी ने फिर कही से एक ताकती जोर लगायी और अपने आप को सलीम से अलग करि .. और अपनी ब्रा स्ट्राप को पहनी और ब्लाउज से अपनी चूचियों को कवर करने की कोषसिंह करि और वह असलम के चेहरे को शर्म के मारे नहीं देख प् रही थी और उसने नज़ारे फिरा ली …

वहां सलीम को भी पता चला असलम वही था .. वह मन hi मन मुस्कुरा रहा था .. (देख असलम तू तोह बस उसे अपनी बेगम बुलाता हैं लेकिन रौशनी तोह मेरी बेगम hi बनेगी ..)

असलम और सलीम आमने सामने थे .. रौशनी उनके बगल में कड़ी थी ..

“असलम बोलै “सलीम तू मेरा दोस्त था न .. तुम रौशनी के साथ यह क्या हरकतें कर रहे हो ..

सलीम बोलै “अबे तू भोला मत बन. मुझे पता हैं तूने भी रौशनी को रैगर लिया हैं बहुत आज hi कुछ समय पहले ..”

“हाँ तोह वह मेरी हैं सिर्फ मेरी .. तेरी नहीं हैं तू छोर उसे “

“नहीं .. उसे छोड़ेगा तोह तू hi साले … अब रौशनी मेरी हैं सिर्फ मेरी …”

“नहीं रौशनी मेरी बेगम हैं ..

“नहीं रौशनी को में बेगम बनाऊंगा .





दूनो के बीच ऐसी hi बातें होते रही .. रौशनी समझ नहीं पायी की क्या करे …

फिर एकदमसे दोनों उसके तरफ मुड़े ..

“रौशनी तुम hi बताओ , तुम किसकी बेगम बनोगी ..?

रौशनी क्या कहती … दोनों से उसे लगाव था , दोनों से उसकी कामुकता और गर्मी की आग जलती थी .. दोनों ने उसकी चुदाई भी की हैं उफ्फ्फ्फ़ .. दो बुड्ढे मुझे अपना बनाना चाहते हैं .. दोनों काळा सांड .. बड़े बड़े मोठे लुंड वाले मर्द मेरे पीछे उफ्फ्फ्फ़…



 
होटल के लिफ्ट में दोनों उसे पूछने लगे रौशनी जी फिर आपने डीडे कर ली की किस्की बेगम बनोगी आप ..?? रौशनी तोह सोच में पद गयी की क्या करे .. क्या जवाब देती हु.. उसे दोनों पसंद थे , दोनों से वह प्यार करती थी, दोनों उसे पूरी तरह से शारीरिक सुख देते थे , उसमें भी कीच फरक नहीं था .. उनकी आँखों में तोह उसके लिए साफ़ साफ़ लस्ट नज़र आती थी उसे .. और कहीं न कही वह भी दोनों से लस्ट और लव करती थी .. दोनों बुड्ढे बोकर भी तगड़े मर्द थे , दोनों के लुंड मोठे और लम्बे थे .. उसमें भी दोनों में फरक ज्यादा नहीं था .. प्यार और लस्ट भी दोनों के सामान थे उसके प्रति .. क्या दोनों से उसने करनी थी निकाह .. उफ्फफ्फ्फ़ क्या करे यही सोचती रही. लेकिन वह डीडे नहीं कर पायी और भाग कर अपने कमरे में चली गयी और लॉक करि दरवाज़ा. फिर वह एक स्लीवलेस निघ्त्य में चनगे कर बिस्तर पर लेट गयी .. वह आज की पार्क में हुए घटनाओं और सब से बहुत थकी हुयी थी और उसे काम आँख लग गयी उसे hi पता न चला .





___

रौशनी कैंप ख़तम होते hi असलम और सलीम को ढूंढे लगी और दोनों उसे मिल गए .. वह खुद उनके पास गयी और बोली

“असलम जी , सलीम जी आज आखरी दिन हैं .. क्यों न साथ बिताए … प्ल्ज़ आप दोनों लड़िएगा नहीं .. मुझे नहीं देखा जा रहा हैं मेरे दो ाकरीबी दोस्त लड़ते हुए , वह भी मेरे ऊपर … आप नहीं लादेनेगे वडा करिये फिर साथ में वक़्त बिता सकेनेगे नहीं तोह में जाती हूँ ंगो के महिलाओं के साथ घूमने.”

असलम और सलीम रौशनी को देखने लगे .. आज तोह रौशनी सबसे कामुक और सेक्सी लग रही थी . पहली बार उन्होंने रौशनी को इतनी सेक्सी ब्लाउज और साड़ी में देखा था .. आज ीासे लग रही थी मनो एक सेक्स की देवी निचे आयी हो .. उसकी गोरी बाहें . गोरी पीठ जो और भी चमक रही थी .. सफ़ेद दुद्ध जैसी था रौशनी का बदन. और कमर पर चैन तोह और भी कामुक बना रही थी रौशनी की लुक को ..

दोनों रौशनी के नज़दीक आये .. “हाँ रौशनी जी नहीं लड़ेंगे आज सही कहा न असलम .. “

“हैं बिलकुल सही आज नहीं लड़ाई करेंगे .. आज जो तुम चाहो व्है करेंगे ..”

रौशनी एक कामुक मुस्कान झलकै.

क्यों न हम उसी पार्क में जाते हैं जहाँ कल गए थे .”

असलम और सलीम रौशनी से ये सुन स्तब्ध रह गए .. वह तोह काफी खुश थे क्यूंकि उन्हें आज अच्छा मौका मिलगा रौशनी से मस्ती करने का और उसे बदन से खेलने के लिए.





दोनों हाँ बोले और फिर तीनो उसी पार्क के लिए निकल पड़े. रौशनी दोनों के साथ पार्क में एंटर करि .. एंटर करते hi उसकी बुर की नमी शुरू होने लगी .. उसे पता था की दोनों के साथ पार्क में जाना मतलब दोनों खूब साड़ी मस्तियाँ करेंगे .. रौशनी भी चाहती थी उनके साथ मस्ती कर इ.. उसकी गर्मी की आग अब दोनों ने बढ़ा hi दी थी तोह बुझाने का काम भी उन्हें hi करना होगा .. रौशनी बड़ी खुल कर उनसे साथ चल रही थी . पार्क के भीतरी हिस्सों में जाते hi असलम ने रौशनी की कमर पकड़ लीऔर सलीम ने उसके कन्धों को और तीनो चिपक कर साथ चल रहे थे .. रौशनी भी कामुक फील करती हुयी अपनी सर कभी असलम के बाजूओंप पर रख चलती तोह कभी सलीम के बाजुओं पर रख .. असलम एक साइड से रौशनी की कमर दोबोचते हुए और दिस्री तरह से सलीम उसे डबछते हुए रौशनी की मुँह से हलकी से आह निकलती हुयी , बुर की नमी बढ़ती हुयी और दोनों के लुंड ुबहरते हुए आखिर कर वह पार्क के सबसे अंदरि हिस्से में एक सेक्लुडेड एरिया में पहुँच गए..

तीनो वहां नीस बैठ गए … नज़दीकी रखते हुए … वहां अँधेरा भी च चूका था .. रौशनी ने अपनी हाथों को असलम और सलीम के झंघों पर राखी और हॉक्स से वहां दबाने लगी .. इससे असलम और सलीम के लोदों में बड़ी जान आयी और वह झटके मारने लगे उत्साह से ..

फिर दोनों सलीम और असलम रौशनी के गालों को चूमने लगे … नैक को चूमे … और रौशनी को निचे लिटा कर असलम उसकी झंघों को चूमने लगा और सलीम उसकी नाभि को … रौशनी के मुँह से हलकी से आह निकलती रही .. असलम ने उसकी झंघों को दबोचते हुए उसकी साड़ी ऊपर करि और उसकी गोरी मांसल झंघों को दबाने लगा .. वहां सलीम उसकी नाभि में जीभ दाल वहां चाटने लगा …





रौशनी ुयी उफ़ ममम की सिसकियाँ मार रही थी .. असलम और सलीम भी गरमी की आग में जल रहे थे ..

फिर दोनों ने पोजीशन बदला और मज़्ज़े करते रहे … कुछ पलों बाद असलम ुर सलीम दोनों रौशनी को देखने लगे और उसके बगल में लेत गए .. रौशनी अपने हाथों को उनके झंघों पर रख उनके लोदों के पास दबाने लगी .. वह महसूस करि की दोनों के लुंड अब पूरी औकात में आ चुके थे .. फिर वह बोल्ड होते हुए अपने हाथों को उनके लुंड के क्षेत्र पर रख वहां दबाने लगी .. असलम और सलीम भी उसकी दायी और बायीं चूचियों के स्थान पर दबाने लगे उसकी ब्लाउज के पर …

पूरा गर्मी का माहौल चाय हुआ था .. तीनो भूल गए थे की वह किसी पार्क में हैं का की बिस्तर पर ..

फिर असलम और सलीम बारी बारी रौशनी के मुँह को चूमने लगे …. पहले सलीम ने एक बड़ी गहरी चुम्बन चिपके और फिर असलम ने वही करा … रौशनी की बुर अब रास टपकना शुरू कर चुकी थी .. और दोनों के गहरी चुम्बनों का पूरा साथ दे रही थी .. आज वह सब भूलना चाहती थी , की वह शादी शुदा हैं और यहाँ दो बुद्धों के साथ रंगरलियां मन रही हैं…

फिर तीनो खड़े हुए और रौशनी दोनों के बीच सैंडविच बन गयी .. असलम आगे से और सलीम पीछे से … असलम और सलीम के सख्त लोडे अब रौशनी की चूतड़ों और छूट के क्षेत्र पर टकरा रहे थे .. रौशनी की लेफ्ट साइड की नैक पर सलीम उसे चुम रहंता और राइट साइड पर असलम .. रौशनी गर्मी की आग में जलती हुयी दोनों के बालों से खेलती हुयी उन्हें और चूमते सिसकियाँ मारी ..













“उफ़ मम असलम मियां ,, सलीम मियां आह मम ऐसे hi चूमिए उफ्फ्फ ममम आओ दोनों के साह्य असली मज़्ज़ा हैं उफ्फ्फ ममममम अआप दोनों उफ़ ममम….”

अब असलम और सलीम आगे से और पीछे से मनो रौशनी को ड्राई हंपकार रहे थे … रौशनी की चूतड़ों पर सलीम का सख्त लोढ़ा घिसता तोह असलम का सख्त लोढ़ा वह अपने पैरों के बीच अपनी बुर पर मह्सुश कर रही थी रौशनी …

“हहहह उफ्फ्फ मममम रौशनी उफ्फ्फ मममम क्या मस्त माला हो तुम अहह उफ़ मममम…. क्या चूतड़ हैं तेरे .. गोल और सॉफ्ट उफ्फ्फ ममममम मन करता हैं अपने लोडे को ऐसे hi तुम्हारे चूतड़ों से चिपकाए राखु उफ़ ,ममममम…”

“हैं रौशनी उफ़ फमम क्या मस्त बुर हैं तुम्हारी .. उफ्फ्फ ममम मन करता हैं अभी यहाँ तुम्हारी बुर का रास अपने लोडे को पुलाव उफ्फ्फ मममम क्या माल हो तू ….मलाईदार सेक्स बम हो तुम अहह उफ्फ्फ ममममम”

दोनों की ऐसी अश्लील बातों से रौशनी की गर्मी और बढ़ रही थी और उसकी साहहह उफ्फ्फ की सिसकियाँ और जोरों से होने लगी थी …

असलम और सलीम निचे बैठ गए और अपनी पाजामे को लूसे करते हुए निचे करे और अपनी चड्डी में थे और पजामा उनकी अंकलेस पर ..उनके लोडे दोनों उनकी चांदी को मनो फाड़ कर बहार आने की कोषसिंह कर रहे थे ..रौशनी उस कामुक दृश्य को देख उसकी बुर से रास अब बहने लगा .. वह फिर दोनों के बीच बैठ उनके चड्डी के ऊपर से hi लोदों को सेहला रही थी … और फिर चड्डी के अंदर अपने हाथों को दाल दोनों के लोदों के साथ खेलने लगी और उनके लोडे अब पुरे औकात में तोह थे hi लेकिन काफी सारा प्रेकम उगल रहा था उनके लड़ूँ से ..





रौशनी फिर बारी बारी झुक कर दोनों के लोदों को चूसने लगी … कभी असलम का लुंड चुस्ती तोह कबि सलीम का लोढ़ा … बारी बारी दोनों का लुंड चुस्ती रही …

“अह्ह्ह्ह रौशनी उफ्फ्फ ममम मज़्ज़ा आ रहा हैं उफ्फ्फ क्या चुस्ती हो लोढ़ा उफ़ ममम”

हाँ सच उफ्फ्फ चूसना तोह कोई तुमसे सीखे अहह उफ्फ्फ क्या चूस रही हो मरे लोडे को अहह ममम.””

फिर असलम ने उसके सर को पकड़ कर अपने लुंड से उसकी मुँह की चुदाई करने लगा .. फिर सलीम ने भी वही करा और रौशनी की मुँह की चुदाई करने लगा …





अब दोनों ने उसकी ब्लाउज भी उतर दी और ब्रा से चूचियों को निकलते उनसे खेलने लगे … उसकी निप्पल्स प्रेस करने लगे .. रौशनी उफ्फ्फ मम अहह ाएस मम ऐसी hi चूचियों को दबाइयूए ममम कहती हुयी सिसकियों पर सिसकियाँ मार रही थी…

वहां वह लोदों को चुस्ती रही और वह उनकी चूचियों से खेलते रहे … दोनों खड़े हुए और रौशनी की घुटनो के बल दोनों के बीच रख अह्ह्ह करते हुए दोनों अपने लुंड से रास उगलने लगे सीधे रौशनी के चेहरे पर और रौशनी का चेहरा दोनों के लुंड के छुम से भर गया था ….

रौशनी की ानकेहिं खुल जाती हैं … वह खुद को अपनी बुर से खेलते हुए अपनेरूम के कमरे में पाती हैं .. उफ्फ्फ्फ़ यह तोह सपना था .. सपने में वह दोनों के लुंड को चूस रही थी पार्क में और अपने बदन पर उनका माल ली थी उफ्फ्फ …. मुझे तोह इन बुद्धों ने पागल hi बना दिया हैं उनके हवस में उफ्फ्फ्फ़ … रौशनी मममम ये क्या हुआ हैं तुझे उफ्फ्फ….

रौशनी फिर कुछ समय बाद वापस सो जाती हैं.

____

रौशनी खुद को एक अलग से कमरे में पायी . वह एक आईने के सामने बैठी थी और आईने में उसने एक बुरक पेहेन रखा था. बुरखा भी कोई साधारण नहीं था , बुर्का एकदम से सेक्सी वाला था .. जो उसकी चूचियों पर ओपन था और उसकी दूधियों के बीच की क्लीवेज साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी. वह अपने आप को ऐसी बुर्का में प् कर स्तब्ध रही ..





फिर उसे कुछ दरवाज़ा खोलने की आवाज़ सुनाई दी .. रौशनी वहां मुद कर देखि तोह पायी की असलम दरवाज़े से अंदर आ रहे थे .. असलम ने एक सफ़ेद कुरता और पजामा पहना था और सर पर टोपी पहनी थी जो उनके ट्राडितों के हिसाब से पहना जाता हैं …

फिर और एक दरवाज़ा खुला और वहां से उसे सलीम आते दिखे जिसने वही ड्रेस पहनी थी बस असलम का सफ़ेद रंग का था कुरता और पजयमा और सलीम का सिल्वर रंग का था …

वह दोनों उसके नज़दीक आने लगे … रौशनी अपनी जगह से उठ कड़ी उन दोनों के बीच थी.

“सलीम बोलै “रौशनी मेरी बेगम बनने को तैयार हो न …”

असलम वही बात रिपीट करि.

रौशनी कुछ कहने से पहले सन बदल गया और अब वह दोनों सलीम और असलम के बीच बैठी थी और नमाज़ पढ़ा जा रहा था … रौशनी को पहले तोह कुछ समझ नहीं आयी बात … लेकिन फिर उसे पता चला की क्या हो रहा हैं … वहां तोह उसका निकाह हो रहा था असलम और सलीम दोनों के साथ …

रौशनी बस बैठी रही और नमाज़ चलता रहा … फिर अचानक सन बदल गया और अब वह एक बिस्तर पर थी जो सजी हुयी थी .. वह उसी सेक्सी स्टाइल वाली बुर्का में बेटीः थी बिस्तर पर .. और बिस्तर के साइड में दो गिलास दूध भी था. क्या यह वही हो रहा हैं जिसके बारे में वह सोच रही हैं .. क्या ये उसकी सुहागरात होगी .. फिर असलम और सलीम दोनों उसके दाएं और बाएं साइड आये.

“रौशनी क्या तुम हमें दूध नहीं पिलाओगी … अब तोह तुम हमारी बेगम बन चुकी हो .. हम दोनों ककी बेगम ..”

रौशनी ये बात सुन शॉक हुयी .. क्या .. वह दोनों की बेगम बन गयी थी .. दोनों सलीम और असलम ,बुद्धों की बेगम …. फिर जैसे कोई उसे कण्ट्रोल कर रहा हो उसने दूध का एक गिलास लिया और असलम को पिलाने लगी और फिर दूसरा गिलास लेकर सलीम को … दोनों ने दूध पि लिया फिर उन्होंने रौशनी के मुँह खोलने का इशारा करे और फिर दोनों पिए हुए दूध फिर से रौशनी को पिलाने लगे एक साथ .. वही दूध जो उसने उन्हें पिलाई थी अब दोनों अपने hi मुँह से फिर से उसे पीला रहे थे .. रौशनी की बुर इस हरकत से गीली होने लगी थी …

फिर अगल पल में दोनों असलम और सलीम खड़े हुए और दोनों ने अपनी पजामा निचे करि और अपने काळा मोठे लुंड को आज़ाद किये .. अब दोनों मोठे तगड़े लुंड इन बुद्धों के रौशनी के सामने झूल रहे थे ..

“उफ्फ्फ रौशनी अब तोह इन्हे पकड़ लो .. तुम्हारे मियां के लोडे अब तुम्हारे हुए हैं .. जैसे चाहें इन्हे प्यार करीब…”

रौशनी क्या करती .. उसकी गर्मी बढ़ रही थी और बुर से रास टपकने लगा था .. वह चाहती थी दोनों के लुंड वह चाहती थी .. उन्हें प्यार करना चाहती थी , ढेर सारा प्यार …. वह दोनों के लुंड को किश करने लगी और फिर चूसने लगी … वहां सलीम और असलम आह्हः उफ्फ्फ की आवाज़ें कर रहे थे और रौशनी दोनों के मोठे काळा तगड़े लुंड चूस रही थी .. और तोह और अपनी बुर्क़े को ऊपर कर अपनी बुर के लिप्स से भी खेलने लगी थी .. उसकी बुर जो रास से बह रही थी .. ऊपर से दोनों के लुंड चूस रही थी और निचे से वह अपनी बुर से खेल रही थी .. अंदर एक ऊँगली फिर दो उँगलियाँ दाल खुद की बुर की चुदाई कर रही थी … बड़ी से बड़ी आह उफ़ फममम की सिसकियाँ मारते हुए ..

छूट से खेलती हुयी .. रास टपकते हुए … फिर एक बड़ी से अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम की सिसकी दे कर वह झरने लगी .. जोरों से झरने लगी और उसी समय दोनों के लुंड से विस्पोट हुआ और रौशनी का चेहरा फिर से सलीम और असलम के लोदों से निकलते गरम रास से भीग चुकी थी …

अचानक रौशनी की आँखें खुली .. वह पायी की वह अपने होटल के कमरे में अब नग्न थी और अपनी बुर से पानी बहने लगा था … यह सब सपना था … एक कामुक सपना जिसमें व दोनों सलीम और असलम से निकाह कर उनकी बेगम बन चुकी थी. उफ्फ्फ यह कैसा सपना हैं उफ्फ्फ इतना गरम और कामुक सपना ..… क्या यही उसकी फ्यूचर की हकीकत हैं .. दोनों सलीम और असलम की बेगम बनना … उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ …..

बाथरूम में जाकर खुद के बदन को साफ़ कर रौशनी सोने चली गयी .. उसे इस बार बड़ी गहरी और चैन की नींद आयी.

सुबह सुबह वह फ्रेश होकर उठी .. कल रात का सपना अभी भी उसके दिमाग में ताज़ा hi दौड़ रहा था .. इतना कामुक सपना .. दोनों असलम और सलीम की बेगम बनने का सपना … उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.





रौशनी नहायी और फिर तैयार होने लग गयी .. उसने जो साड़ी ोेहनी थी वह कल से भी और सेक्सी थी … बैकलेस ब्लाउज था … हल्का मटेरियल वाला और फुल्ली ट्रांसपेरेंट साड़ी .. उसकी ब्लाउज साफ़ साफ़ दीहै दे वैसी साड़ी … आज उसने अछि तरह से मेक उप लगाई , होतोहं पर लाल लिप्सटॉक, हाथूं में चूड़ियां, कमर में एक चैन .. ब्लाउज ऐसा जो उसकी दूधियों के बीच की दरार गहराई तक दिखाए वैसी थी … उसने उसकी दरार को अच्छे से पल्लू से छिपकर फिर रौशनी आईने में एक कामुक मुस्कान देते हुए बाकी की तैयारी निपटा के एक लाबी 3 इन हील पेहेन वहां से निकल गयी .. दिमाग में सपना घूमते हुए और छूट में से चिप छिपाहट महसूस करती हुयी …









आज कैंप का आखरी दिन था इसीलिए कैंप बस दुपहर 2 तक hi था .. कैंप के बाद शाम सबको फी थी क्यूंकि काम सुबह 10 बजे hi सब वापस जाने वाले थे उनके शहर… आअज रौशनी ने एक बात थान ली थी और वही सोचते हुए वह सलीम और असलम के साथ कैंप ख़तम होते hi होटल चली गयी

तीनो होटल पहुँच गए … वहां पर तीनो आएग अलग चलने लगे और फिर लेफ्ट में एक साथ …

लिफ्ट में असलम ने रौशनी के कमर को पकड़कर उसके करीब कर लिया था .. वहां सलीम ने उसके कन्धों को पकड़ कर अपने करीब लणान चाहा. तोह बात ऐसी हुयी की अब तीनो चिपक चिपक कर खड़े थे और रौशनी दोनों बुद्धों के बीच. उनके हाथों का स्पर्श उसके बदन की गर्मी जलती रही …

रौशनी दोनों के बीच चिपकी हुयी थी और कल के पार्क में हुए घटनाओं के बारे में और फिर रात के सपनों के बारे सोचने लगी. (दोनों बुड्ढे उसे बेगम बनाना चाहते थे , इसे तोह दोनों से लगाव था और हु नहीं चूसे कर पाएगी .. और तोह और वह एक शादी शुदा औरत थी हु भी उसकी दुनिया इन दोनों बुद्धों से सब मैंने में अलग थी. )

वहां असलम उसकी कमर दबोच रहा तहत ओह सलीम उसकी गोर बाहें दबोचे था .. रौशनी की नज़र निचे दोनों के लुंड के क्षेत्र पर गयी और वह समझ गयी किध वो के मोठे काळा लुंड में फिर से जान आने लगी हैं.. वह शर्मा कर आँखें बंद करि और जैसे hi आँखें बंद करि दोनों के मोठे काळा लुंड मग्न उसके आँखों के सामने झूल रहे थे .. रौशनी उस सोच में मग्न अपनी निचली होठों को काट ली .. उसकी बुर से रास टपकना शुरू हो चूका था ..









आख़िरकार वह अपने फ्लोर पर पहुँच गए .. उसकी ानकेहिं अभी भी बंद थी की उसे सलीम की आवाज़ सुनाई दी ..

“रौशनी .. रौशनी … ानकेहिं खोलो हम पहुँच गए हैं “

रौशनी ने फॉर अपने आँखें खोली.. खुद को फिर से उन दोनों के मोठे तगड़े लुंड के बारे में सोचते हुए गर्म होते हुए उसे बड़ी शर्म महसूस हुयी.

वहां असलम बोलने लगा “लग रहा हैं रौशनी तुम मेरे बारे में सोच रही थी न , मारे लुंड के बारे में मेरी होने व्लाओँ बेगम ..”

सलीम बोलै “चुप सेल , रौशनी मेरे हुए मेरे लोडे के बारे में सोच रही थी , हु मेरी बेगम बनेगी और तेरी भाभी.”

असलम बोलै “चुप कमीने , हु मेरी बेगम बनेगी बस मेरी …”

“हे हरामी , तू क्या सोचता हैं, रौशनी तुझे चुनेगी .. ः .. बस तू सिर्फ सपने देखा कर ..”

“हाँ मुझे बी चुनेगी , वह मेरी रुकसाना बेगम की जगह लेगी ..”

रौशनी बस उन्हें उसके ऊपर लड़ते देखती रही .. दोनों बुड्ढे उस पर लड़ रहे थे , उसे अपना बनाना चाहते थे , बेगम बनाना चाहते थे .. और उसकी शादी हुयी थी हु मर्द तोह उसका कोई ख्याल भी नहीं रखता था .. रौशनी मन hi मन रोनित पर भी ग़ुस्सा होने लगी . अगर रोनित उसकी प्यास बुझाता और उससे प्यार देता तोह फिर वह इन बुद्धों से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश नहीं करती ... अब तोह उसकी चाहत भी दोनों बुद्धों के प्रति बढ़ रही थी..

रौशनी और कुछ लड़ाई सुनी दोनों के बीच तो आख़िरकार बोल पड़ी.

“सलीम मियां, असलम मियां .. आप दोनों फिर से शुरू हो गए हो. देखिये मुझे बिलकुल पसंद नहीं की आप दोनों मुझ पर लड़ रहे हो .. आप दोनों दोस्त हो. मैंने आप दोनों में कभी भेदबाह्व नहीं करि हूँ. मुझे आप दोनों पसंद हैं … आप दोनों मेरे करीबी दोस्त हो .. आप का लड़ना मुख्य नहीं पसंद .. आप ऐसे hi लड़ते रहे तोह में आज से आप दोनों से बातें नहीं करुँगी. दोस्ती भी ख़तम हमारे बीच. में जा रही हूँ”

असलम और सलीम चँउक गए रौशनी की बातें सुन ..

रौशनी मुद कर अपने कमरे में जाने लगी की असलम और सलीम में उसके दोनों हाथों को पकड़ लिया .. और अपने तरफ खींच लिया. रौशनी उन दोनों से चिपक गयी .. असलम उसकी चूतड़ों को दबोचने लगा और सलीम उसकी गोरी नंगी पीठ पर हाथों को फेरने लगा ..

इस हरकत से फिर से रौशनी की बदन आग जलने लगी ..

कुछ पल ऐसे hi तीनो चिपके रहे और फिर दोनों ने रौशनी की नगरों को उनसे मिले ..

“रौशनी जी आप नाराज़ नहीं होना .”

“हाँ रौशनी जी आप नाराज़ नहीं होना”

“ठीक हैं लेकिन यह लड़ाई बंद करो हु भी मेरे ऊपर ..”

“अच्छा रौशनी जी .. नहीं लड़ेंगे हम.”

सलीम “लेकिन सच कहु रौशनी में आपको बहुत चाहने लगा हूँ, बहुत महीनो से आपको अपना बनाना चाहने लगा हूँ..”

असलम – “हाँ रौशनी मुझे भी आपसे बहुत बहुत प्यार हैं.. आप किसी की होगी तोह मुझे बड़ा बुरा लगेगा .. इसीलिए में आपको खुद के लिए चाहता हूँ.”

कुछ पल बिट चुके लेकिन वह कुछ न बोली .. बस अपने कमरे तक पहुंची और फिर कमरे का दरवाज़ा खोल वह अंदर जाने लगी .. फिर अंदर जाते hi वह पलट गयी और दोनों सलीम और असलम को देखने लगी और एक नज़र उनके लुंड के क्षेत्रों पर भी डाली ..

“असलम मियां, सलीम मियां मैंने फैसला कर लिया हैं ..” रौशनी को यकीन hi नहीं था , आगे जो बात वह करने वाली थी उसपर ..

“आप दोनों पहले कमरे में आइये ऐसे बहार नहीं रुक सकते हम कोई आया तोह ..”

दोनों असलम एयर सलीम एक दूसरे को देखने लगे .. फिर अंदर कमरे में चले आये .

रौशनी वहां रूम के सोफे पर बैठ गयी और असलम और सलीम भी उसके अगल बगल बैठ गए ..

रौशनी ने फिर अपने हाथों को दोनों के झंघों अपर रख दिए जिससे दोनों के लुंड उस स्पर्श से फिर से झटके मारने लगे . रौशनी दोनों के आँखों में बारी बारी देखि .. कभी सलीम को तोह कभी असलम को ..





“असलम मियां और सलीम मियां .. मैंने फैसला कर लिया हैं ..” असलम मियां में आपकी बेगम नहीं बन पाऊँगी , सलीम मियां न hi बस आपकी बेगम बन पाऊँगी . में … में … … फिर रौशनी दोनों के तरह आँख मारती हुयी और एक किश देती हुयी बोली

में आप दोनों की बेगम बनूँगी …… !!!!!!!!!!!



 
सलीम और असलम दोनों स्तब्ध रहे .. वह एक दूसरे को देखने लगे फिर रौशनी को देखे .. क्या उन्होंने सुना था वही सच था .. रौशनी उन दोनों की बेगम बनने के लिए तैयार थी .. वह इतने स्तब्ध थे की आगे कुछ न बोल पाए.

कुछ पलों बाद रौशनी hi बोल पड़ी.

“देखिये असलम और सलीम मियां , में आप दोनों में से एक को तोह नहीं चुन सकती. मुझे आप दोनों से उतना hi लगाव हैं और प्यार हैं .. आप की बेगम बनूँगी तोह दोनों की साथ में .. यही मेरा फैसला हैं. और मेरे कुछ शर्त भी हैं . अगर वह मानोगे तोह में बनूँगी आप की बेगम.

दोनों असलम और सलीम साइड में गए और बात करने लगे .. कुछ मं की बातों के बाद वह फिर से रौशनी के सामने आ खड़े हुए ..

“ओह हम्म .. अच्छा रौशनी हमें मंज़ूर हैं लेकिन आपके ये शर्त क्या हैं.

(रौशनी को लगा नहीं था की इतने जल्दी वह मानेंगे की वह दोनों की बेगम बनने को तैयार थी .. वह कुछ टाइम और सोचके बोली)

“Ok शर्तें बताउंगी.

  1. बेगम बनने के बाद में आप दोनों के साथ नहीं रह पाऊँगी .. में शादी शुदा भी हूँ इसीलिए रहूंगी तो मेरे पति के साथ hi.
  2. अआप अपना पूरा हक़ नहीं जाता सकते मुझ पर , आप जो चाहिए मुझे बता सकते हो , जो भी रूल्स होते हैं लेकिन उन्हें न कहने में मुझे ऑप्शन पहला मिलगा , यदि में माज़ूर करती हूँ या नहीं.
  3. हाँ अब बेगम बन hi गयी हूँ तोह हफ्ते में 1 रात आप दोनों के घर बिता पाऊँगी लेकिन बिस्तर पर जो भी करना हैं अलग अलग करोगे .. एक बार असलम मियां के साथ और दूसरा सलीम मियां के साथ.
  4. हाँ आपके घर रहूंगी तोह साडी पहनूंगी , में बुर्का नहीं पहनूंगी , आपकी बेगम हूँ लेकिन में वह नहीं पहनूंगी.
  5. वह दो दिन जब आपके साथ रहूंगी तोह घर के सारे काम में करुँगी , खाना ,कपडे धोना , साफ़ सफाई करना .. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं क्यूंकि में आप दोनों की बेगम हूँ और आपका घर मेरा भी घर हैं और उसकी देखभाल करना मेरा फ़र्ज़ हैं.

असलम और सलीम फिर से ापास में जरा दूर जाकर बातें करने लाए .. और कुछ मिंटो बाद वापस रौशनी के पास आ गए.

“देखिये रौशनी , जब आप हमारी बेगम बनती हो तोह जो आपके हम शौहर कहेंगे आपको दरअसल वही करना होता hain.lekin हम आपसे बेहत प्यार करते हैं और आपक हमारी बेगम स्वीकार करते हैं लेकिन हमारे भी थोड़े शर्त हैं.

रौशनी कुछ न बोली बस सर हाँ में हिलने लगी.





अच्छा तोह शर्त ऐसे हैं

  1. पहेली बात हैं की हमें आप से निकाह करना होगा .. ये ओफ्फिकल होगा तभी हम आगे बढ़ेंगे . हम वापस अपने शहर जाएंगे तोह वहां पर कुछ कम दूर एक हैं जगह जहाँ हम तीनो निकाह कर पाएंगे .. हम सब अर्रंगे कर लेंगे .. काफी दूर हैं जगह इसीलिए ंगो के कोई लोगों को भनक नहीं होगी न hi आपके पति को.
  2. हम तोह चाहते हैं आप हमारे सतह hi हमारे वहां रहे लेकिन हम समझ सकते हैं वह ंगो के वहां हैं तोह लोग शक करेंगे ये क्या हो रहा हैं . लेकिन आप को एक रात नहीं बल्कि दो दिन और रात जो आप बिताओगी हम दूँ के साथ एक साथ. रात भी एक साथ आप हम दोनों की बिस्तर गरम करोगी… आपको हम दोनों की बेगम बननी हैं तोह ऐसे hi करना होगा .

(रौशनी यह बात सुन कर की वह दोनों के साथ बिस्तर गरम करेगी .. इससे काफी शर्माने लग जाती हैं .. उसके गाल लाल और बुर में नमी शुरू हो जाती हैं वह सुन. )

3. निकाह होते hi दो पुरे दिन और रात हमारे साथ बिताओगी मनो हनीमून जैसे .. वह कहाँ और कब जाएंगे वह आपको बाद में हम बताएंगे ..

(इस बात से भी रौशनी की बुर में नमी और बढ़ती हैं , उसके निप्पल्स सकत और उजागर होते हैं और उसकी शर्म का ठिकाना नहीं रहता .. उसे पता हैं की दोनों हनीमून के नाम मर उसके साथ पूरी मस्ती करेंगे और सोने न देंगे रात भर उफ्फ्फ्फ़ मम दोनों के तगड़े मोठे लुंड तोह उसके बदन से भटकेंगे hi नहीं वह दो दिन और रात उफ्फ्फ.)

उसके बाद उन्होंने और कुछ रूल्स बताये जिससे सुन रौशनी सिहर उठी .. एक अलग सी झुनझुनी उसके बदन में दौड़ने लगी .. (वह सब बातें बाद में पता चलेगी )

लेकिन उसे बस एक बात ठेके नहीं लगी तोह वह बोल पड़ी.

“देखिये मेरे मियां … में निकाह तोह नहीं करुँगी .. में पहले से hi शादी शुदा हूँ .. आपसे कह तोह नहीं करुँगी..

आपकी बेगम बनूँगी मतलब आपके साथ जब भी रहूंगी आप दोनों की सेवा करुँगी , घर के कामों में हो या फिर रात में बिस्तर पर .. लेकिन यह ऑफिसियल निकाह मत करवाइये मुझसे में आप दोनों से बिनती करती हूँ…

असलम और सलीम दोनों कुछ सोचते हैं (उनकले रीतिरिवाज़ों के मैंने रखते हुए उन्हें पता था की वह किसी भी महिला को निकाह करने से फाॅर्स नहीं कर सकते .. दोनों महिला और मर्द की ुन्दरस्तादनिंग शामे हो तोह hi निकाह हो सकता हैं .. इसीलिए वह निकाह की ज़िद्द छोर देते हैं - अभी के लिए, और वीएस भी दोनों अभी भी रौशनी से निकाह अकेले अकेले में करना चाहते थे न की एक साथ, अभी के लिए तोह बस एक साथ रौशनी के बदन के मज़्ज़े तोह वह ज़रूर लेने वाले थे)

अच्छा रौशनी जी निकाह नहीं करेंगे लेकिन आपको यह बाकी के हमारे शर्त ठीक लगते हैं तोह बताइये .. फिर हमें आपको बेगम बनाने में कोई आपत्ति नहीं. रौशनी भी सर हाँ में हिलायी और कामुक स्वर में बोली .. “हाँ मंज़ूर हैं मियां … आपकी बेगम बनना चाहती हूँ और आपके शर्त सब मंज़ूर हैं.. इस बार रौशनी के दिमाग से ज्यादा उसके भावनाएं और गर्मी बात कर रही थी , वह चीज़ों के वजह से वह सब शर्त उनके मानी थी.





फिर असलम बोलता हैं .. “ निकाह मत करिये लेकिन अब तुम हमारी बेगम हो इसीलिए हम तीनो हनीमून पर भी जाएंगे .. और असलम आँख मारी रौशनी को देख. रौशनी शर्मा गयी , उसकी बुर में काफी नमी थी ..

सलीम और असलम फिर से कुछ बातों में लग गए और फिर सलीम बोलै “रौशनी अब तैर हो गया हैं हम कल hi जाएंगे हमारे हनीमून पर. हम तीनो…

“ओह , लेकिन कल तोह हमें वापस जाना हैं और परसो से फिर से काम पर जाना हैं मुझे ..”

“हाँ पता हैं .. हमने उस पर भी सोचा हैं. कल आप सब को .. कहोगी की आपकी सहेली हैं जो इस शहर में हैं उसने आपको 2 दिन बुलाया हैं उसके कुछ फॅमिली फंक्शन के लिए .. फिर वह सब बस से शेरे वापस लौटेंगे और हम तीनो एक अलग बस पकड़ कर हमारे होनेमूद पर जाएंगे .. और रही बात परसो की काम की तोह आपको छूती लेनी पड़ेगी . हमें 2 दिन और रातें तोह आपके सतह बिताने hi हैं हनीमून पर .. सलीम रौशनी को आँख मारी .. रौशनी मन hi मन शरमाई और चेहरे पर मुस्कराहट छायी उसकी.

“हम्म ठीक हैं लेकिन बस दो दिन क्यूंकि इस महीने की एक hi छूती बची हैं मेरी.”

“हाँ हाँ दो दिन काफी हैं तुम्हारे साथ मस्ती करने के लिए हनीमून पर …”

रौशनी उनके बार बार हनी मून कहने पर शर्मा रही थी . अभी तक तोह उसकी एक hi हनीमून हुयी थी .. और अब ये दोनों मोठे लुंड वाले बुड्ढे भी उसके साथ हनीमून मानाने वाले हैं .. रबनित ने hi उसे इतना तंग किया था हनीमून पर , और ये दोनों बुड्ढे तोह और भी ठरकी और मोठे लुंड वाले कमीने हैं .. यह तोह मेरी ऐसी चुद…. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी यह क्या कह रही हैं उफ्फ्फ …. ओह गॉड हे भगवान् में कहाँ इन दोनों के साथ फँस गयी उफ्फफ्फ्फ़.

असलम बोल पड़ता हैं “अच्छा तोह तैर हैं , हम एक ऐसी मस्त पहाड़ियों के इलाके में जाएंगे जो काफी मशहूर नहीं हैं लेकिन बड़ी अच्छी और सुन्दर जगह हैं .. में अपनी रुकसाना बेगम को वही लेकर गया था .. उफ्फ्फ अब मेरी नयी बेगम को वहां ले जाऊंगा और सब यादें ताज़ाअ करूँगा .. और कही तोह मुझे लगता हैं की यह हनीमून तोह उस हनी मून के मुक़ाबले और भी मस्त होगी .. मेरी नयी बेगम तोह और भी मस्त और गदराई हैं …”





वह बस इन दोनों मोठे तगड़े लुंड वाले बुद्धों के साथ अपनी दूसरी हनीमून की रातों की मस्तियों और चुदाई के बारे में रौशनी सोचने लगी.. दोनों तोह उसके बदन को निचोड़ निचोड़ कर मसल देंगे होनेय्यमुन पर उफ्फ्फ … और मेरी बुर की कास कर चुदाई करने वाले हैं.





उफ्फफ्फ्फ़….. रौशनी मन hi मन बड़ी शर्मायी …>

असलम और सलीम ने रौशनी के हाथों को पकड़ खड़ा कर लिया और दोनों ने बारी बारी रौशनी को गहरी चुम्बन देने लगे .. असलम उसकी लेफ्ट चुकी दबाने लगे और सलीम उसकी राइट .. रौशनी भी गर्म हुयी थी और अपनी निचली होठों को काट कर वह दोनों के लुंड मसलने लगी….

उफ्फ्फ मम रौशनी जी …. उफ्फफ्फ्फ़ सबर करिये रौशनी … हमें पता हैं आप आपने मियां के लुंड से बड़ा प्यार करना चाहती हो … लेकिन हनीमून तक रुको फिर तोह दो दिन और रात आपके साथ hi रहेंगे और सोने नहीं देंगे .. इसलिए अब आज रात आप आराम करिये …”

रौशनी की शर्माहट का ठिकाना hi नहीं रहा … उफ्फ्फ्फ़ उसे तोह मन कर रहा था अभी इसी वक़्त उनके लोदो को निकल कर ढेर सारा प्यार करे .. उफ्फ्फ उसे यह अलग hi आग और मस्ती च गयी थी .. सब इन दो बूढ़ों की खैरियत के वजह से था उफ्फफ्फ्फ़.









फिर दोनों अपने अपने कमरे में चले गए अउ रौशनी भी निघ्त्य बदल कर सोने चली गयी.. रात भर बस दोनों के लोदों की सोचती रौशनी और बुर से खेलती और एक दो बार बुर से रास भी निकल दी थी …

फिर अगले दिन रौशनी ने

रौशनी ने सुबह अपना सामान पैक कर लिया. अपना मेकअप किट और कपडे सब पैकिंग की. दोनों असलम और सलीम पहले hi पहुँच चुके थे लेकिन रौशनी को उसके बारे में पता hi नहीं था और .. इसीलिए रौशनी अकेले से रिक्शा से बस स्टेशन निकल पड़ी. स्टेशन पर काफी सरे मर्द थे जो उसे घर रहे थे. उसने एक स्लीवलेस ब्लाउज वाली साडी पहनी हुई थी, जिसे उसकी गहरी कट वाली ब्लाउज पहनी थी और पीछे तीन डोरियन थी जो उसके पीठ के और लपेटे हुए थे और. रौशनी ने अपने लम्बी रेशमी बालों को उसने खुला छोर नहीं राखी थी क्यूंकि वह उसके बड़े गोल उछलते चूतड़ों तक आते और सब मर्दों की नज़र फिर वही पर पड़ती इसिलए स्ने अपने बालों को अपने सर से एक हेयर क्लिप से बाँध रखा था. लेकिन बात यही हुयी की क्लिप लूसे हो रही थी और उसके बाल ओपन हो रहे थे और वह चलते समय उसके गोल भारी छटड़ों से टकरा रहे थे.

अपने बाँहों को ऊपर करती तोह उसकी आर्मपिट्स की सुगंध से भी वहां के मर्द उसके लिए पागल बनते





उसने अपनी साडी को अपनी नाभि के नीचे पहनी थी, और उसकी नाभि साफ़ साफ़ मर्दों को दिखाई दे रही thi.use एक सीट मिली स्टेशन पर और वह वहां बैठ गई. उसने ऊपर देखा तोह देखा की वहां बहुत से मर्द hi थे और काफी काम महिलाऐं थी, और उस के जैसी बड़े शहर की महिला तोह बिलकुल नहीं थी. रौशनी वहां आधे घंटे तक बैठी रही. उसे पुरे दौरान बहुत से मर्द उसे सर से पेअर तक घर रहे थे. रौशनी समझ गयी की ये सब मर्द मन hi मन लालसा रहे थे उसके बड़े से चूचियों और गदराई से गोर बदन को देख.





रौशनी बैठी थी और उसकी डीप फ्रंट कट ब्लाउज के सामने से पल्ली सरक गया और उसकी चूचियों की बड़ी वाल्लेस सब मर्दों को दिल्ही दे रही थी.. और उन सब के लोदों में जान भी पूरी आयी होगी और अपनी औकात में पूरी सख्त हुयी होगी





वह वहां वेट कर बोर हो रही थी की उसे मैसेज आया की वह कहा हैं?

रौशनी ने रिप्लाई दी की वह उनका hi वेट कर रहे हैं. फिर सलीम ने रिप्लाई दी की वह दोनों तोह बस में पहले से hi बैठे थे , बस की सबसे पिछली सीट पर.

रौशनी फिर बस की और गयी तोह देखि की बस में चढ़ने के लिए बड़ी लाइन लगी थी. उसके पीछे वाला मर्द dheere-dheere उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था. रौशनी को खुद पर आश्चर्य था की उसे , उस मर्द के ऐसे करने से कोई आपत्ति hi नहीं थी. वह मन hi मन तसली करि खुद को की बड़ी भीड़ थी इसीलिए हुआ होगा उस मर्द से ऐसे.





अआखिरकर वह बस में चढ़ गयी और अपनी सीट पर पहुंची. वहां दोनों असलम और सलीम पहले से hi बैठे हुए थे. उन्हने फिर से उसकी सीट उनके बीच में वाली hi रकहि थी.. रौशनी अपनी बैग ऊपर रखने लगी . निचे वह देखि की असलम उसकी नाभि को घूर रहा था. असलम ने उसे उसकी नाभि को घूरते हुए देख लिया और असलम मुस्कुराया. रौशनी भी मुस्कुरा दी. फिर असलम और नज़दीक आकर उसकी नाभि की गोलाई में जीभ दाल एक चुम्मा दिया .. उफ्फ्फ्फ़ उसकी ऐसी पब्लिक में हरकत देख रौशनी शेर उठी .. उफ्फ्फ कितने नॉटी हैं असलम मियां उफ्फफ्फ्फ़ … रौशनी ने फिर झूट मूत की एक तपली दी असलम के सर पर .. फिर उसने रौशनी को अंदर जाने के लिए थोड़ी सी hi जगह दी. अब ऐसे हुआ की आगे से सलीम ने भी असलम जैसे उसकी नाभि की गोलाई को चूमा .. और पीछे से रौशनी अपने बड़े और गोल चूतड़ों को असलम के चेहरे पर महसूस करने लगी .. इस हरकत से रौशनी की बुर में नमी होने hi लगी.

असलम के हाथों ने रौशनी की चूतड़ों को दबाया .. और आगे से सलीम उसके बड़े गोल और सॉफ्ट चूचियों को हलके से मसलने लगे . … रौशनी की बुर की नमी और हुयी..

रौशनी फिर असलम के और सलीम के बीच बैठ गयी .. सलीम उसके कानों में फुसफुसाने लगे

“अरे आपके शौहर तोह भाग्यशाली होंगे की उसे तुम्हारे जैसे गदराई और खूबसूरत बेगम मिली हैं . उफ्फफ्फ्फ़ रौशनी सोची .. यह सलीम भी न ऐसे कर रहे हैं जैसे वह मुझे अपनी बेगम बना कर अभी हनीमून नहीं ले जा रहे हैं उफ्फ्फफ्फ्फ़… रौशनी चेहरा पर बस एक शर्माहट hi ला सकीय.





]

ख़राब सड़कों के वजह से रौशनी को में थोड़ा झटके लग रहे थे और झटकों के कारण रौशनी उछाल रही थी, इसलिए उसने असलम और सलीम दोनों के हाथ पकड़ लिए. दोनों ने उसके हाथों को कसकर पकड़ रखे उसकी गोरी और मुलायम उँगलियों में अपने काळा और भद्दे उँगलियों को फंसाये हुए. . कुछ देर बाद झटके बंद हो गए लेकिन रौशनी ने उनके हाथों को नहीं छोड़ी.

असलम उसके तरह मुद कर बोलै "तुम बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो रौशनी." रौशनी बस शर्मा गई और बोली “शुक्रिया असलम मियां.”

फिर असलम ने अपने हाथ उसकी झंघों पर रखे और उसकी साडी के ऊपर से उसकी झंघों को रगड़ना शुरू कर दिया. Dheere-dheere असलम के हाथ उसके पल्लू के बीच से होते हुए उसकी नाभि की और बढे और फिर वह रौशनी की ब्लाउज पर से उसके चूचियों को सहलाते रहा. असलम ने फिर रौशनी के हाथों को ऊपर करते हुए उसे चूमा. रौशनी भी बस हलकी सी कराह भरी. असलम ने फिर उसकी साड़ी उंगलियां चूसी और रौशनी को ऐसा लग रहा था जैसे वह उसकी उँगलियों को नहीं बल्कि उसकी निप्पल्स चूस रहे थे. असलम ने उन्हें छाता और चूसने लगा. फिर असलम ने रौशनी के हाथ लिए और उसकी पंत के ऊपर से hi उसके लोडे के उभर पर रख दिया. सलीम यह सब हरकतें देख गरम हो रहा था और उसने भी वही किया जो असलम ने अभी किया था. अब रौशनी के मुलायम हतः दोनों के लुंड के उभर पर थे और उनके लोडे अब आधे सख्त हुए थे. फिर दोनों ने रौशनी को उनके लोदों के उभर को रगड़ने के लिए कानों में फुसफुसाए. वहां लास्ट की सीट और उनकी आगे की सीट पर भी कोई नहीं था इसीलिए कोई उन तीनो की धीमी स्वर की बातें नहीं सुन सकता था

रौशनी ने उनके पंत के ऊपर से उनके लोदों के उभर को रगड़ना शुरू करि. उनका लोढ़ा अब सख्त हो गए. उन्होंने रौशनी को उनके पंत की ज़िप खोलने के लिए बोले. सलीम ने एक कम्बल उनकी झांघों पर रखा और रौशनी ने अपने हाथों को उनके ज़िप खोलकर उनके पंत के अंदर अपने हाथों को दाल दिए. अब रौशनी तोह बोल्ड हो गयी थी , उसने तोह सीधे अंदर उनके चड्डियों में अपने हाथों को दाल दोनों के लोदों बाहर निकाल लिया और रौशनी उन्हें अपने हाथों में पकड़ उनके लोदों को jor-jor से रगड़ने लगी. रौशनी अब जोर से उनके लोदों को सहलाने लगी. कुछ टाइम ऐसे कर फिर रौशनी ने अपने हाथ कम्बल से बाहर निकाले और दोनों को देख उसकी उँगलियों पर लगे उनके गधे प्रेकम को चाटने लगी … जिसे देख दोनों असलम और सलीम स्तब्ध रहे .. रौशनी के हाथ उनके गर्म गाढ़े प्रेकम से गीले थे. रौशनी अपने उँगलियों को चाटने लगी और उसके हाथ पर लगे प्रेकम पूरी तरह से साफ करि. सलीम इधर उधर देखे और फिर उसने रौशनी के होंठों को चूमा और दोनों एक गहरे चुम्बन में लगे कुछ पल. रौशनी सब शर्म हाय भूल गयी थी और चूमि सलीम को , असलम ने भी फिर वही करा.

सलीम ने अब कम्बल और ऊपर रखा और कवर के अंदर अपने हाथ रौशनी की नाभि के ठीक नीचे से साडी के अंदर hi दाल दिया. सलीम की उँगलियाँ रौशनी की बुर के क्षेत्र तक पहुँच कर उसके पंतय के ऊपर से hi उसके बुर को रगड़ने लगे. असलम ने भी वही करा .. और अब दोनों रौशनी की बुर को पंतय के ऊपर से बहुत जोर से और तेज़ी से रगड़ने लगे. रौशनी बस अपने निचले होंठों को काट ली और हलके से कराह रही थी.





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बस रुकी एक स्टॉप पर… रौशनी उनके उसकी छूट से खेलने के वजह से और सुबह रश में बाथरूम न जाने के वजह से वह अब मूतना चाहती थी, रौशनी ने असलम और सलीम को रुकने बोली और अपनी साडी ठीक कर बहार वाशरूम जाने के लिए उठी. सीट से बाहर आते समय रौशनी के बड़े गोल चूतड़ असलम के चेहरे की और थी. असलम ने उन्हें पकड़ लिया और उसके चूतड़ों पर एक चुम्बन दी. अब रौशनी आगे की और थी और असलम पीछे इसीलिए उसकी यह हरकत हिडन थी .. रौशनी एक हलके से कराह के साथ निकली और असलम ने उसके चूतड़ों को और एक बार कसकर दबोचते उसे छोड़ दिया. रौशनी बहार स्टॉप पर के एक वाशरूम गई . बाथरूमंमें वह मूतने बैठी तोह उसे एहसास हुआ की उसकी बुर पूरी तरह से गीली थी. उफ़ यह दोनों यह बस में फिर से शुरू हुए उफ्फफ्फ्फ़ …

मूतने के बाद रौशनी ने अपनी साडी ठीक से पहनी और बस चढ़ा कर सीट पर वापस आ गयी. अब अंदर बैठने के लिए आगे बढ़ी तोह सलीम उसके आगे थे और वह रौशनी के चूचियों को सहलाने लगा … और तोह और रौशनी की सख्त निप्पलों की चुटकी निकली जिसे रौशनी ज़रा सा बड़ी आह निकली .. उफ्फफ्फ्फ़ उसकी गाल इतने शर्म से लाल हुए .. सोची की क्या किसी ने बस में उसकी कराह सुनी थी उफ्फ्फफ्फ्फ़ …. यह सफर तोह अभी से hi इन्होने गरम बना दी हैं उफ्फ्फ.. रौशनी बैठे यही सोची.





अब बात हुयी की उस स्टॉप पर बहुत लोग बस में चढ़े और अब उन तीनो के सामने की सीट पर लोग थे और बगल में भी .. इसीलिए और कुछ मस्ती का मौका न मिला तीनो को.

लकिन पूरी सफर में रौशनी कभी सर असलम के कन्धों पर रखती और कभी सलीम के .. बस के सभी मर्द रौशनी जैसी बड़ी शहर की सुन्दर और सुशील शादी शुदा महिला को असलम और सलीम जैसे काळा बुद्धों से इतनी चिपकी हुयी बैठे और इतने रोमांटिक पलों को बिताते देख शताब थे ..

लेकिन सलीम , असलम और रौशनी को कोई फरक नहीं पद रहा था और तीनो ऐसे hi करीबी से चिपके हुए बैठे सफर काट ली और आख़िरकार वह पहाड़ी हिल स्टेशन पर पहुँच hi गए .

जैसे असलम ने कहा था वह पहाड़ी इलाका काफी काम तौरीसत्य था.

अब श्याम हुयी थी और .. असलम बोलै

“देखिओ हमें यहाँ पर hi डिनर करनी होगी .. जहाँ हम जा रहे हैं वहां खाने की कोई बंदोबस्त नहीं हैं ..”

सलीम और रौशनी सर हाँ में हिलाये और तीनो दीनने रकरने के रेस्टोरेंट में बैठे .. डिनर ख़तम होते hi वहां पास के एक शॉप में गए .. वहां पर असलम ने कुछ पानी के बोतल और कुछ नमकीन स्नैक्स लिए . सलीम ने पास की वाइन शॉप से दारु की बोत्तलें ली ..

रौशनी रेस्टोरेंट में hi बैठी थी. असलम और सलीम फिर उसे बहार से इशारा करे उनके साथ चलने के लिए और रौशनी निकल पड़ी.

फिर तीनो वहां एक रिक्शा में बैठे उस छोटे से टाउन के भी ऑउटस्कर्ट्स तक गए.

रिक्शा वाला बायकी सबा मर्दों जैसे तीनो को देख दांग hi था. एक जगह पहुँच वह बोलै .. अच्छा अब आगे का रास्ता आपको पैदल तैर करना हैं , रिक्शा वहां नहीं जाएगी.

रिक्शा वाला एक आखरी बार तीनो को देखा फिर वहां से चला गया. फिर तीनो आगे चल पड़े.

“असलम जी यह कहाँ हैं .. हम उस छोटे से टाउन के भी बहार आये हैं …

“यही हैं और 10 मं की दुरी पर..”

आखिर वह पहुँच hi गए .. आगे जो देखा रौशनी वह देखती hi रही .. उफ्फ्फ कितनी सुन्दर जगह थी , पहाड़ियां hi पहाड़ियां .. ट्रीज hi ट्रीज नेचर hi नेचर ..उफ्फ्फ्फ़ क्या जगह थी .. फिर वह असलम और सलीम को देखि ..

वहां एक छोटा सा घर जैसे कुछ था ….

“असलम जी यहाँ तोह कोई नहीं हैं…

“रौशनी जी यह मेरे दोस्त ने बनाया था . वह आता हैं यहाँ अपनी बेगम के साथ कभी कबर .. उसने हमें रहने की इज़ाज़त दी हैं .. अब चलिए .”

रौशनी वहां उफ़ वह दो दिन और रात उनके साथ उसे चीते से जगह पर बिताएगी .. बस वह तीनो .. वहां आस पास कोई नहीं उनकी रंगरलियों को रोकने टोकने … ऐसी जगह पर तोह दोनों उसकी बहुत बजने वाले हैं बंद .. रौशनी उन तीनो के साथ चल दी . असलम ुर सलीम उसके कमर में अपने हाथों को फसाये उसे करीब रखते हुए अंदर उस छोटे से माकन में चले गए.

वहां कुछ टाइम रेस्ट के बाद असलम और सलीम रात की तैयारी में लग गए . उन्होंने दारु के बोतल और नमकीन टेबल पर रखे .. रौशनी उन्हें देख रहे थी .. दोनों ने पूरा प्लान बनाया था .. मस्त पिएंगे और उसके बदन के साथ रात भर कहलने का प्लान . उसकी बुर की नमी बढ़ने लगी.

रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी .. वह उन्हें देख बोली .. “क्या आप दोनों कुहक टाइम बहार रहेंगे मुझे चेंज करना हैं.”

“अरे क्यों , हमारे सामने hi करिये रौशनी .. “

नहीं प्ल्ज़ मुझे आप दोनों के लिए सज कर तैयार होने दीजिये न “

“है है ाचा .. चलिए .. सज धजिये हमारे लिए .. वैसे भी बहुत टाइम नहीं रहेंगे आपके वस्त्र आपने बदन पर .. ः और दोनों आँख मारते हुए हसने लगे .. रौशनी के गाल ों पर बड़ी शर्म की लाली छायी. दोनों बहार गए .

अंदर रौशनी पहले नग्न हुयी .. बदन पर कुछ लोशन लगायी

उसने फिर अपना बैग खोला और उसमें 4 सरिस थी, उनमें से एक पीली और एक लाल रंग की साडी थी . और एक पीले रंग की डीप बैक ब्लाउज थे. अपना खुद का सारा मेकअप किट तैयार कर रौशनी एक शीशे के सामने बैठ गई. रौशनी ने अपने बालों को एक पोनीटेल हैरस्टीले में बाँध राखी. रौशनी ने काजल, ऑय लाइनर, लाल लिपस्टिक, काली गोल बिंदी लगाई.

रौशनी ने एक सजावटी चोकर नैक पीेछे पहनी जो उसने लायी थी रोनित के साथ पेहेन्ने लेकिन वह इन डॉन बुद्धों के लिए पहने वाली थी.. उसने एक लम्बा मंगलसूत्र भी पहनी जो असलम और सलीम ने साथ मिलकर लायी थी …

वह उसे बेगम बना चाहते थे लेकिन वह चाहते थे की रौशनी के खुद के रीती रिवाज का एक ऑर्नामेंटल लिहाज़ा भी वह रखे और वह था एक मंगलसूत्र.









वह मंगलसूत्र लम्बा था और वह रौशनी के बड़े चूचियों के ऊपर लटक रहा था रौशनी ने उसकी साडी के रंग से मेल खाने के लिए लाल प्लास्टिक चूड़ियाँ पहनी जो असलम और सलीम ने hi खरीद कर लायी थी . मैंने एक लम्बी लटकती हुई कानों में बालियान पहनी और फिर पैरों में पायल पहनी. यह सब चीज़ें असलम और सलीम लाये थे इसीलिए वह पहले hi बस स्टेशन के लिए निकल चुके थे ..

रौशनी ने अपने पैरों पर लाल नेल पोलिश लगायी. रौशनी कड़ी हो गई शीशे के सामने ये सब पहने हुए. रौशनी इतनी सेक्सी लग रही थी की कोई भी मर्द उसकी चुदाई करने के लिए तैयार हो जाएगा . उसके साथ दो दो ठरकी और बड़े मोठे लुंड वाले बुड्ढे थे जो उसकी रात भर चुदाई करने वाले थे … उफ्फ्फ सी सोच से रौशनी की बुर की नमी बढ़ती गयी.

अंदर रौशनी ने एक प्रदर्शि फूलों वाली पंतय पहनी थी. उसने ब्रा भी पहनी लास वाली और ब्लाउज फिर पहनी थी जो पीछे से बस 2-3 धागों से बंधी हुयी ब्लाउज थी. उसकी ब्लाउज मुश्किल से उसके बड़े गोल और नरम चूचियों को संभाल प् रहा था. उसने एक लाल चमकदार ऊँची हील वाली संदल पहन ली.





तोह यह था रौशनी का अपने हनीमून की पहली रात के लिए सेटअप. एक स्लीवलेस पीली ब्लाउज और लाल साडी जिसकी ब्लाउज अब तक की उसकी सबसे डीप बैक कट ब्लाउज थी और इस बार बड़ी डीप फ्रंट ट्रायंगल कट की भी ब्लाउज थी .. उसने कमर में एक चैन, हाथों पर पिंक नेल पोलिश और रेड लिपस्टिक.

रौशनी शीशे के सामने कड़ी हुई खुद को निहारने लगी. वह एक सेक्सी लेकिन आदर्श विवाहित महिला के तरह लग रही थी.

उसने सब तैयारी कर, फिर दोनों बुद्धों को बड़े प्यार से अंदर आने को पुकारी.





“उफ्फ्फ है मममम … क्या माल काग रही हो तुम रौशनी ,.., उफ्फ्फ क्या गदराई बदन वाली बेगम हैं हमारी .. हैं न असलम …”

“हाँ सलीम उफ्फफ्फ्फ़ मन करता हैं नाग्नि hi कर लूँ इसे …”…

रौशनी दोनों की बातें सुन शर्मा hi रही थी ..

सलीम फिर बोलै “ रौशनी तुम तोह इस हनीमून के ख़तम होने के बाद कहोगी .. हनीमून हो तोह ऐसा !!!”

अब तोह रौशनी को कोई फरक नहीं पड़ा की वह शादी शुदा हैं और उसका एक पति हैं रोनी. … उसके मन में बस बल्कि ख़ुशी hi थी की वह इन दो बुद्धों के साथ और गर्मी के पल बिता पाएगी बिना समय का सोचते हुयी न hi कुछ और .. वह तोह इन डॉन काळा बूढ़ों के साथ मस्ती में पूरी तरह से अपने हनीमून के मज़्ज़े लेने वाली थी ....

रौशनी असलम और सलीम को देख शर्मा रही थी. वह दोनों पास के दो कुर्सी पर पर बैठ गए. रौशनी दो दारु के बोतल और कुछ नमकीन लेकर फिर झुकार उन्हें टेबल पर राखी . दोनों सलीम और असलम लगातार रौशनी के तरफ देख रहे थे.

सलीम “ओह हो यार यहां तो बस दो hi कुर्सियां हैं .. . उफ़ हमारी बेगम रौशनी कहाँ बैठेगी?

असलम हाँ यार सही बात हैं तेरी.

सलीम: चलो कोई बात नहीं. रौशनी तुम मेरे गॉड में बैठ जाओ. उसने अपनी बाईं जांघ पर थपकी दी और रौशनी को वहां आकर बैठने का इशारा करा. रौशनी और शर्मा गयी.

रौशनी शरमाते हुए बोली ठीक है.

अब बैठते समय रौशनी टेढ़ी होकर झुक गई इसीलिए ताकि असलम उसकी बड़े गोल सुडौल चूतड़ों को नज़दीकी से देख सके. सलीम ने रौशनी की कमर पकड़ कर उसे सके झंघ पर बिठा दिया.

रौशनी की जांघ उसके क्रॉत्च क्षेत्रक से टकरा रही थी और रौशनी महसूस करि की वहां पहले से hi उनके मोठे लुंड का उभार बना था.

असलम: क्या मस्त लम्बे घने बाल है न हमारी रौशनी के?

सलीम: बाल hi नहीं, रौशनी तुम्हारे गुब्बारे भी काफी गोल और मस्त है.





असलम: हाँ yaar...jara रौशनी खड़े होकर घूमोगी ताकि हम तुम्हारे इन कर्व्स को और ठीक से देख सकें? घूमोगी तुम?

रौशनी : (शर्माते हुए) “है ज़रूर घुमुनि मेरे मियां..

रौशनी सलीम के गॉड से उठ कर कड़ी हो गयी और पलट कर असलम को उसकी पीठ दिखा दी.

असलम: उफ्फ्फफ्फ्फ़ सलीम देखो इसके चूतड़ों ko…nangi बदन, पतली कमर, उसपर ये चैन और कितने बड़े मटकते हुए गोल बड़ी गांड.









सलीम: हाँ हमारी किस्मत hi हैं की हमें रौशनी जैसी एक गोल कड़क मस्त गदराई माल मिली हैं.”

अब असलम ने मेरे हाथ पकडे और रौशनी को उनके गॉड में बैठा लिया. रौशनी उनकी साड़ी बातें सुनकर उत्तेजित हो रही थी और शर्मा रही थी. असलम ने रौशनी की कमर से पकड़ी और उसकी मुलायम मनो नग्न पीठ को चूमने और चाटने लगा.

रौशनी के शरीर के हर इंच से लेकर उसकी गीली बुर तक एक सिहरन दौड़ गई. सलीम अब उठे और रौशनी के चहरे के सामने आकर खड़े हो गए. उनहोंने उनका हाथ रौशनी के हाथों में डाला और फिर रौशनी के हाथों को अपनी जाँघों के बीच में रख उसके अर्ध से ज्यादा खड़े लुंड पर रगड़ना शुरू कर दिया.





कुछ समय ऐसे करने के बाद और उनके औज़ार पुरे सख्त हो गए. असलम , रौशनी के सामने जो थे और उनके हाथ उसने रौशनी के गालों पर रख दिए. उसने रौशनी के गालों को स्ट्रोक करने लगे और रौशनी ने अपनी आँखें बंद कर ली. असलम ने अपने उनलगियों से रौशनी के मांसल निचले होंठ को पकड़कर उन पर अपनी उँगलियों को घुमाते हुए वाहन दबा दिया. रौशनी के निचले होंठ को पकड़कर उनहोंने उसे उसके ऊपरी होंठों से अलग कर रौशनी का मुंह खोला. असलम ने अपनी जीभ रौशनी के मुंह में दाल दी और उसे मेरी जीभ से अपने जीभ को घूमने लगे और उसे चूमने लगे .… वे बहुत देर तक रौशनी के होंठों को चूमते रहे. असलम रौशनी के होंठों को चूमने में व्यस्त थे रौशनी के लम्बे रेशमी बालों को पकड़े हुए.

रौशनी इतनी गर्म हो गई थी की वह बस नंगी होकर उन दोनों का लुंड चूसना चाहती थी और उनके मोठे लुंड को अपनी गीली छूट में लेना चाहती थी.

सलीम भी रौशनी चूमने लगे … और फिर दोनों ने रौशनी के सारिका पल्लू गिरा दिया और उन दोनों ने रौशनी के चूचियों को पकड़ कर दबाने लगे .. असलम बायीं चुकी को रगड़ने लगे और सलीम दाईं .. फिर दोनों ने पोजीशन चेंज करि और सलीम बाएं चुकी को दबाने लगे और असलम दाएं चुकी को ..

इस पुरे दौरान. अब रौशनी बड़ी सी बड़ी सिसकियाँ माँ ररहै तिह “उफ्फ्फ मेरे दोनों शौहर .. मेरे मियां उफ्फ्फ मममम कितने उतावले हो अपनी बेगम के लिए उफ्फ्फ मममममम इस्सस मममम”

सलीम ने रौशनी पल्लू गिरा दिया और रौशनी कामुक अंदाज़ में सलीम को देखने लगी.





फिर असलम ने ब्लाउज के ऊपर से रौशनी के चूचियों को पकड़ लिए. असलम ने रौशनी को अपने बाहों में ले लिया और वासना से रौशनी के आँखों में देखने लगे. सलीम ने फिर उसे खींच लिया अपने बाँहों में और अपने वासना से भरे निगहाओं से रौशनी के आक्न्हों में देखने लगे …

रौशनी की ब्लाउज अब असलम उतरने लगा … वहां सलीम घुटनो के बल जाकर उसकी पेटीकोट का नाडा लूसे कर उसे निउकलने लगा .. निकलते हुए वह उसकी नग्न झंघों को और पैरों को चूमने लगा चाटने लगा … ऊपर असलम उसकी ब्रा में से hi उसकी चूचियों को बहार निकल उसकी निप्पल्स को चाटने लगा और फिर उसकी चूचियों को बारी बारी चूमें और चूसने लग गया और रौशनी उम् अह्ह्ह की सिसक मारती रही

रौशनी कैसे तोह कर दोनों से खुद को चुरा ली. असलम और सलीम उसके तरफ आगे बढ़ रहे थे और रौशनी पीछे पीछे जाती रही और बिस्तर से टकराई और बिस्तर पर बैठ गयी दोनों के तरफ देखते हुए

उनके तरफ देख रौशनी ने शर्मिंदगी महसूस की.

ek-ek करके सलीम और असलम ने अपने पंत उतार दी और चड्डियाँ भी.

दोनों के मोठे काळा लोडे अब रौशनी के सामने थे और वे उसके खड़े थे. असलम ने रौशनी के रेशमी बाल पकड़े और वह दोनों अपने लोदों को रौशनी के चेहरे के पास लाए और उनके लोदों से रौशनी के गालों और बालों और गुलाबी होठों पर उन्हें थपथपाने लगे .. रौशनी की होठों अब दोनों के गधे प्रेकम से गीली हो चुके थे.

सलीम: क्या मदमस्त होठं हैं रौशनी के. लोगी हमारा लोढ़ा अपने मु में, रौशनी बेगम?

रौशनी की गर्मी बड़ी तेज़ हुयी थी और वह बे झिझक बोल पड़ी

रौशनी: है लुंगी ना





सलीम “ तुम हम दोनों की बेगम रौशनी हूँ ना उफ्फ्फ”

असलम: कितनी बेशरम बेगम हैं हमारी, सलीम दे इसके लम्बे बाल मेरे हाथों में.”

सलीम ने रौशनी के बाल असलम के हाथों में दे दिए.

सलीम और असलम ने ने फिर अपने लोदों को रौशनी के होठों पर baaree-baaree से थप्पड़ मारे. जब वह दोनों रौशनी के होंठों पर अपने लोदों को थपथपा रहे थे तब रौशनी की नाक से उनके लोडे टकराते रहे और रौशनी उन दोनों के लोदों की खुशबु सूंघ रही थी. दोनों ने उनके लुंड और थपथपाने के बाद बारी बारी रौशनी के मुँह को खोलने लगे और रौशनी की लाल गीले होंठ दोनों के लिए बारी बारी खुल गए और dheere-dheere दोनों के लुंड एक के बाद एक अल्टेरनाटेली रौशनी के गीले मुँह में अंदर बहार करने लगे.









कुछ टाइम ऐसे करने के बाद उन दोनों ने उनके लोडे रौशनी के जीभ पर रख दिए और उसके जीभ से रगड़ने लगे. सलीम ने dheere-dheere अपना लोढ़ा रौशनी के मुँह के अंदर डाला और रौशनी के मुँह में उनका लोढ़ा और अंदर गया और फिर रौशनी बड़ी मस्ती से उनका लुंड चूसने लगी.

… जैसे ही रौशनी ने उनका लोढ़ा चूसा, उसका सर aage-peechhe हो रहा था . सलीम और असलम दोनों के लोडे रौशनी ऐसे hi बारी बारी चूस रही थी. रौशनी ने अपने दोनों हाथों में उन दोनों का मोटा लोढ़ा पकड़ लिया था और असलम का लोढ़ा चूसते हुए वह सलीम का लोढ़ा अपने नाज़ुक हाथों से हिला रही थी. असलम ने कुछ देर तक रौशनी के मुंह को छोड़ा जोर फिर सलीम भी रौशनी के मुँह की चुदाई करने लगा .. दोनों के लोदों को रौशनी बारी बारी चूसना शुरू कर दिया.

रौशनी “ उफ्फ्फ्फ़ ये आप दोनों मिलकर उफ्फ्फ अपना लोढ़ा चुसवा रहे हो उफ्फ्फ्फ़ मममममम ममममममममम मैं मैं आपकी बेगम बन कर बड़ी खुश हूँ अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ मममम और दो अपने लोदों को चुसवाने अपनी बेगम को ाः उफ्फ्फ्फ़ ममममम एस मममम”





पुरे उस छोटे से घर में चुदाई का माहौल जैम चूका था ….

एक बेगम और उसके दो मियां …



 
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