Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 8 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

सुबह रौशनी की आँखें खुल जाती हैं … वह अपने आप को देखती हैं फिर बाजु में सोये रमेश के नग्न बदन को देखती हैं.

उसे शाम और रात में हुयी मस्ती की झलकें आँखों के सामने आ जाती हैं और शर्मा जाती हैं.

सलीम से छोड़ने के बाद जो उसे गिल्ट फीलिंग हुयी थी, वैसी फीलिंग न जाने क्यों उसे रमेश के साथ चुदाई के बाद आयी नहीं.

क्या वह चाहती थी की रमेश उसकी चुदाई करे और जो अब कर दिया हैं चुदाई तोह उसे कोई गिल्ट नहीं हैं या फिर दूसरी बार अब अपने पति पर चीट कर उसे हु पहली बार जैसी गिल्ट की फीलिंग नहीं आ रही हैं.

हु यह भी सोचती हैं की अगर उसके पति रोनित ने उसकी हवस को मिटै रहती तोह वह ऐसे दो मर्दों के साथ चुदाई नहीं करती और खासकर रमेश से खुद चुदती नहीं.. उसी की गलती हैं सब .. यही सोचती हुयी रौशनी उठ जाती हैं और बदन पर बेडशीट लपेटे बाथरूम चली जाती हैं..

आईने में खुद को हु देखने लगती हैं.. उसकी बाल बिखरे हुए थे , बदन पूरा लाल हो चूका था .. रमेश सच में जानवरों जैसे उसकी चुदाई करे थे . साला बुड्ढे होकर भी ऐसे चूड़ाकड होगा हु कभी सोची नहीं थी..





उन्होंने कितनी बार निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था रास भर ..गिनती भी नहीं कर पा रही थी रौशनी.. रोनित तोह ऐसी चुदाई करता नहीं था .. रमेश की चुदाई सलीम जैसे hi वाइल्ड थी लेकिन उसमें रौशनी को प्यार भी दिखाई दिया था .. सलीम के साथ चुदाई बस एक हवस मिटने की चुदाई थी. लेकिन सेल दोनों बुद्धों ने उसे काफी निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था और कई बार उसकी बुर से रास निकला था और कई बार खुद भी अपने अपने लुंड से इतना गधा माल छोरा था उफ्फ्फ्फ़. उसकी गांड की छेद में दर्द हो रहा था .. उस रमेश ने उसकी गांड की भी चुदाई करि थी ..: क्या तगड़े स्ट्रोक्स देते हुए छोड़ा था .. उसे तोह चलने में दिक्कत हो रही थी..

साले दोनों पागल चुदाई के भूके सांड बुड्ढे उसी को मिलने थे उफ्फफ्फ्फ़.

रौशनी अब मूतने बैठ जाती हैं और उसकी इतनी बड़ी सी धार निकलती हैं और निकलते जाती हैं .. उफ्फ्फ इतनी जोरों से पिशाब हो रही थी .. उफ्फ्फ रात को चूसते वक़्त भी उसकी काफी नुत निकल गयी थी .. ऐसी तोह बस एक जामदार चुदाई के बाद hi होती हैं उफ्फ्फ.

फिर अपने फेस अपर पानी छिड़क करा ुर वहां पड़े सोप से चेहरे को साफ़ कर हु बहार चली जाती हैं और रमेश अब बिस्तर पर बैठे अपने लोडे को हाथ में लिए रौशनी को देख रहा था ..

रमेश , रंगीन बुद्धा अब अपनी दोनों टांगो को चोरी करके बैठे रौशनी की और देख कर मुस्करा रहा था जबकि उनका 10 इंच का हथियार अब बी उनकी टांगों के बीच झटके मार रहा था . रमेश ने इशारे से रौशनी को पास आने को कहा तोह रौशनी शर्माती हुयी अपने आँखों से ये बताने की कोशिश करने लगी की उनका मोटा लुंड अभी तोह रात भर मेरी बुर में फसा हुआ था .. और अब फिर से तैयार हैं.





रमेश बस मुस्कुराया और रौशनी को इशारे से अपने लुंड को फिर से चुसवाने को कहने लगे.

रौशनी अब मुस्कुराते और शरमाते इधर उधर देखने लगी…

रमेश- जानू आओ ना देखो मेरा लोढ़ा कैसे फिर से खड़ा हैं, जरा इसको अपने होंठों से hi शांत करो, देखो अब ये तुम्हारे गुलाबी होंठों का प्यार फिर से पाने के लिए तड़प रहा हैं..

अब कोई भी औरत हो, हु जब मर्द उससे ऐसे तड़प कर अपने पास बुलाता हैं तो उस औरत के चेहरे की चमक एक्चुअली देखने लायक बनती हैं .. वैसे hi हाल था रौशनी का और वह दूर खड़े अब रमेश के मोठे काळा लोडे को देखती रही और मुस्कराती रही..

रौशनी “अरे रमेश जी अभी तोह शाम और रात भर मेरी बुर का ऐसे आपने हाल किया हैं .. उफ्फ्फ थोड़ा ब्रेक दीजिये उफ्फ्फ.”

रमेश बोलता हैं- वैसे सच कहु .. माँ कसम रौशनी तेरी जैसी मासूक हो ना तोह लोढ़ा खड़ा hi रहता हैं. कसम से एक दम मालदार लग रही हो .. अब नखरे न करो और चलो आ ना मेरे लोडे को चूस चूस कर इसका रास निकल दो फिर से..

अब रौशनी देख रही थी की रमेश अब इस तरह से खुली बातों से उसे उनकी माशूका बुला रहे थे और उसे फिर से उनका मोटा कला लुंड चूसने को बोल रहे थे…

रमेश का उसके साथ इस तरह रोमांस करते देख रौशनी भी फिर से थोड़े रोमांस के मूड मि आ गयी और हु रमेश के आँखों में देख उनके तरफ फिर से बढ़ने लगी .. और रमेश ने झट से रौशनी को फिर से अपने बाँहों में लेकर अपनी नाक को रौशनी की नाक से रगड़ने लगे और दोनों फिर से गहर्री चुम्बन में चले गए ..

रौशनी को अब रमेश के काळा भद्दे होठों पर अपने गुलाबी होठों को चिपकने में जार अभी शर्म नहीं महसूस हो रहे थी … निचे से उसका तना हुआ लुंड उसकी नाभि को छू रहा था और उसकी नाभि के अंदर अपना प्रेकम चोर रहा था …





उसे उस एहसास ने और गर्म कर दिया और वह जोरों से उसे चूमने लगी .. कुछ 5 मं तक राशन चलता रहा की उसकी नज़र ऊपर क्लॉक पर पड़ी.. सुबह के 9 बजे थे और उसे ंगो में काम पर भी जाना था .. वह रमेश से जुड़ा हुयी

“रमेश जी मुझे पहले घर जाना होगा और फिर ंगो … चलो न तैयार होने दीजिये ..”

“अर्रे मेरी जानू चोर दो आअज मेरे साथ hi बिताओ मस्ती में पल ..”

“‘नहीं रमेश जी जाना होगा प्लीज चलिए .. अब तोह जब भी बुलाओगे आउंगी .. लेकिन अब जाना होगा प्ल्ज़ जल्दी करिये..”

रमेश अब रौशनी की कमर को जोरों से दबाया हैं .. और रौशनी की मुँह से अहह निकल जाती हैं.

“अच्छा चलिए .. अब तोह आप और में दोस्त से भी बढ़ कर हैं …और रमेश अब आँख मारता हैं.

रौशनी अपना चेहरा अपनी हाथों में छिपाते हुए चली जाती हैं.

कुछ समय में दोनों तैयार होते हैं .. रौशनी अपना फ़ोन देखती हैं तोह सरप्राइज होती हैं की उसके पति के कोई मिस्ड कॉल्स भी नहीं थे .. क्या उन्होंने उसे मिस नहीं किया था, रात भर हु घर भी नहीं आयी थी , क्या उन्हें उसकी चिंता नहीं हैं ..

यशो सब सोचते अब रौशनी . रमेश के रिक्शा में बैठती हैं और रमेश उसे उसके घर ड्राप कर्तव्हीन.

“रौशनी जी चाहिए तोह से आपके साथ आपके घर … आपके बिस्तर” और रमेश आंक मारता हैं.

“धत बदमाश .. मेरे पति होंगे वहां .. कुछ भी कहते हो उफ्फ्फ आप रुको में आती हूँ.”

रमेश मन में ..(साला उसका पति नहीं होता तोह अभी उसी के बिस्तर में ले जाकर पटक पटक कर छोड़ता …)

“अच्छा, रौशनी जी आप तैयार हो जाइये में आपके लिए रुक जाता हूँ ..”

रौशनी स्माइल देते हुए अपनी चूतड़ों को हिलाते चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती डुलती चूतड़ों को देख अपना लोढ़ा दबाने लगता हैं.





रौशनी घर पर देखती हैं की रोनित उसके पति वहां पर नहीं थे ..

रौशनी फिर नहाने चली जाती हैं और फिर तैयार होने लग जाती हैं.. उसे काफी लेट हो गया था इसीलिए हु बस तैयार जल्दी होने में लग जाती हैं.

कुछ देर बाद तैयार होकर हु निचे रमेश की रिक्शा में बैठ जाती हैं और रमेश उसे ंगो ड्राप करता हैं.

रौशनी में शाम को आकर रुकूंगा यहाँ.. आप आइये फिर ले जाऊंगा में आपको..

रौशनी स्माइल देती हैं और आजु बाजू देखती हैं और कोई न दिखने पर हु रमेश के गलों पर अपनी गुलाबी होठों को चिपका देती हैं और फिर वहां से चली जाती हैं..

रमेश वहां खुश था की रौशनी जैसी मैरिड माल उसकी बन रही थी .. वह रौशनी के साथ ढेर सारी मस्तियाँ करना चाहता था …

रौशनी काम पर लग जाती है.. आज पहली बार उस दिन की चुदाई के बाद हु सलीम को कैसे फेस करे उसकी की सोचती रहती हैं..

दुपहर का वक़्त हुआ होता हैं , आज तोह लंच उसने लाया नहीं था इसीलिए उसे बहार जाकर लंच करना पद रहा था .. और वह ंगो के बहार जाने hi लगती हैं की ोीचे से उसे आवाज़ सुनाई देती हैं..

“रौशनी जी कहाँ जा रही हो …”

रौशनी आवाज़ से hi पहचानती हैं की हु असलम की hi आवाज़ हैं. वह पीछे मुद कर देखती हैं और उसे स्माइल देते हुए







“असलम जी में लंच लाना भूल गयी इसीलिए बहार जाकर खाउंगी.”

“रौशनी जी सारे बहार क्यों .. आप मेरे घर आइये , आज खुद में बिरयानी बनाई हैं..”

रौशनी तोह उस घर में सलीम से मिलने से कटरा रही थी..

“‘नहीं असलम जी आप क्यों तकलीफ करते हो .. में बहार खा कर आउंगी.”

“रौशनी जी आइये न .. सलीम भी नहीं हैं 2 दिन तक .. में अकेले अकेले लंच करने में बोर हो जाऊंगा..”

रौशनी यह बात सुनकर की सलीम नहीं होगा .. मन hi मन खींच हो जाती हैं.

“अच्छा ठीक हैं असलम जी .. लेकिन आप क्यों तकलीफ कर रहे हो ..

“अरे आप भी न रौशनी जी .. चलिए आइये , मस्त सा लंच करेंगे हम.”

फिर रौशनी और असलम उसके घर जाने लग जाते हैं.. रौशनी आगे चल रही होती हैं और असलम पीछे से रौशनी की चूतड़ों और नंग कमर को देख अपने लोडे को दबाने लग जाता हैं जो अब अपनी औकात में आ रहा था .





दोनों लंच करने लग जाते हैं.

“असलम जी बताइये अब आपको कैसे लग रहा हैं ..”

असलम कहता हैं दुखद बनने का नाटक कर..

“अच्छा नहीं हूँ सच कहु तोह .. रौशनी जी, मेरी हु बीमारी फिर से बड़े पैमाने में तंग कर रहे हैं..

फिलाल hi एक नौकरानी राखी थी ंगो ने और अपनी बेगम समझ कर उसे बाँहों में लेकर उसे बहुत चूमा .. और वह ग़ुस्से से मुझे देख चली गयी और फिर उसके भाइयों को लेकर मुझे बहुत पिता …”

“अरे ऐसे क्या .. उफ्फ्फ सॉरी में आपकी इस बीमारी का इलाज hi नहीं करवा पायी.. मुझे काफी गिल्ट फील हो रही हैं..”

“रौशनी आप क्यों .. आपने काफी तरय किया हैं अब क्या करू मेरी किस्मत hi ऐसी हैं तोह ..

आप मेरी बेगम बनती थी तब आपको देख .. आपको बाँहों में लेकर मेरी यह बिमारी मेरी काबू में रहती थी.. आप नहीं तोह तोह बेगम समझ कर किसी भी महिला को दबोच लेता हूँ.. मुझे भी यह पसंद नहीं .. में अपनी बेगम को बहुत hi किश कर रहा हूँ .. हु हमारी शादी की सालगिरह कल hi हैं. उसे बहुत मिस कर रहा हूँ, आपको क्या बताऊ.”

“ओह ी सी , अब में क्या करू .. आपको बीमारी का किसी और से इलाज करवाई क्या .. उफ्फ्फ्फ़”

“रौशनी जी क्या आप .. कल … नहीं चोर दीजिये..”

“असलम जी बताइये न क्या ..”

“नहीं चोर दीजिये आपने इतनी मदत करि हैं .. में hi अकेले में बिताऊंगा कल का दिन.”

“असलम जी नहीं बताइये न क्या कर सकती हूँ में आपके लिए?”

“वह … अगर आप कल शाम मेरे साथ hi बिताओगी और आप मेरी बेगम बनने का नाटक करोगी तोह शायद में अपनी बेगम को मिस नहीं करूँगा .. बस कल शाम के दिन ..”

रौशनी सोच में पद जाती हैं … फिर फैसला करती हैं की हु असलम की मदद जरूर करेगी और उसे हाँ कह देती हैं.

असलम बड़ा खुश हो जाता है ..

“शुक्रिया रौशनी जी … अगर आप मेरी सच में बीवी होती तोह बड़ा चूमने का मन करता .. आप बहुत अच्छी हो … कल मिलते हैं शाम में.

रौशनी फिर वहां से चली जाती हैं.

उसे जाते देख असलम सोचता हैं (मेरी बेगम तोह तुम्हे पूरी तरह से बना दूंगा कल शाम और रात भर मेरी जानू. कल तू असलम का बिस्तर गर्म करेगी और मेरे निचे चटपटा लेट हुए छुड़ेगी ….) और वह अपने लोडे को मसलते अपने बैडरूम में चला जाता हैं.





शाम का वक़्त अब हो चूका था और रौशनी ंगो के बहार जाती हैं तोह उसे रमेश की रिक्शा दिखाई देती हैं और उसमें चढ़ जाती हैं.

“कैसी हो रौशनी .. आज का दिन कैसे रहा.”

“रमेश जी बहुत अच्छा , बहुत काम हुआ आज कम्पलीट .. बस कल शाम को मेरी एक सहेली के घर जाना हैं और वही मुझे पिचकूप करने आएगी कल ंगो से.”

रमेश कहता हैं “अच्छा ठीक हैं .. फिर आज शाम चले मेरे वहां .. कल शाम और रात की मस्ती को फिर से करे क्या ..”

“उफ़ रमेश जी आप भी न … बड़े वह हो.”

“क्या हु हूँ रौशनी जी बताइये ..”

“उफ्फ्फ आप तोह पक्का वह hi हो ..”

“अरे जानू बता तोह जरा .. क्या हु हूँ में और रमेश पीछे मुद करा आंख मारता हैं..”

“उफ्फ्फ आप रिक्शा अच्छे से चलिए .. आगे देखिये रोड पर ..”

“ओह जानू तुम जैसी मालदार आइटम हो तोह कैसे तुमसे नज़र हटा लू .. उफ़ क्या लग रही हो मेरी जानू.”

रमेश जी आप तोह .. बड़े कमीने हैं ..”

“अरे इस कमीने को फिर से मस्ती करने दो .. फिर देखो कैसे कमीने से जानू बुलाओगी मेरे निचे चुड़ोगी तब .. चलो आज भी चुदाई का खेल खेलते हैं..”

रौशनी अब उस बुड्ढे रमेश को उसके सामने चूसै जैसे अश्लील शब् कहते देख शर्मा जाती हैं ..( उफ्फ्फ किस बुड्ढे से पला पड़ा हैं .. उफ्फ्फ ) रौशनी यही सोचती हैं लेकिन बुरे नज़र से नहीं मस्ती भरी नज़र से ..

रमेश को पता था की मछली उसके जाल में फस चुकी हैं .. वह उसे बिना बोले अपनी रिक्शा को उस गार्डन की तरफ ले जाने लगतभाईन जहाँ हु पहले रौशनी क ओले गया था..

“रमेश जी यह हम कहाँ जा रहे हैं ..?

“रौशनी जी उस दिन के पार्क में ले जा रहा हूँ … इस दिन मस्ती नहीं कर पाए .. चलो आज करते हैं खुले में.”

“उफ्फ्फ नहीं रमेश जी ऐसे मत करो मुझे घर चोरो.”

“रौशनी जी चलिए न , कहाँ मेरे घर ले जा रहा हूँ , पार्क hi तोह जा रहे हैं. वहां एन्जॉय करेंगे .. मुझे आप प्यार होने लगा हैं और आपको कहते हैं न गर्लफ्रेंड की तरह चाहने लगा हूँ .. आज मुझे मेरी गर्ल फ्रेंड को पार्क घूमना हैं. वैसे भी वहां बस कपल्स hi रहते हैं तोह क्या हर्ज़ है .”

रौशनी भी चाहती थी की उस पार्क में घूमे .. उसके पति तोह कभी ऐसे पार्क घूमते hi नहीं थे .. और उसे अनजाने में रमेश से भी चाहत होने लगी थी और उसकी गर्लफ्रेंड बनने में उसे अब कोई प्रॉब्लम नहीं था.

दोनों पार्क में पहुँच जाते हैं.

आज पार्क में और दिनों के कपड़े में भीड़ काम थी.. वैसे भी अब तक 8 बज चुके हुए थे तोह काफी तादाद में परिवार वाले भी अपने बच्चों के साथ उस समय पार्क आये थे. रौशनी और रमेश जैसे मस्ती वाले जोड़ियां काम थी

. कपल्स ज्यादातर 9:00 बजे hi पार्क में आने शुरू होते हैं, जब परिवार वाले वापस जाने लग जाते हैं. पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ था. बड़े ग्रीन ग्रास की अस पास एक वाकिंग ट्रैक था . और एक एरिया में छोटे बच्चों के लिए एक जगह पर कई तरह के झूले और स्लाइड्स भी बने हुए थे. पार्क के एक साइड पर , चारों और चाट, paav-bhaji, कफ ड्रिंक, आइसक्रीम, gol-gappe, खुशबूदार पान के कई स्टाल थे जिन पर काफी भीड़ थी. मान-

“रमेश जी , उफ्फ्फ आज तो तुम मुझे आईटी ी मस्त पार्क में ले आए हो. बहुत hi अच्छी जगह है...”

रमेश फिर बिना जूझि करे रौशनी के नाज़ुक गोरी चमड़ी वाली हाथों को अपने काळा रफ़ हाथों में लेते हुए उसे एक जगह ले जाता हैं जहाँ काम लाइट थी, मनो मूड लिघ्तों हे हो. और वहां पर एक फाउंटेन भी था वहां पर गाने चल रहे थे और संगीत की धुन और उस मूस लाइटिंग में दोनों रौशनी और रमेश खड़े थे. . फाउंटेन ऐसी जगह थी जहाँ के चारों और अब काफी सारे यंग कपल्स बी थे , कई तोह रौशनी से काफी काम उम्र के भी मनो कॉलेज के premi-premika हो. , रौशनी जैसी मस्त उम्र वाली लेडीज भी बहुत थी जिनका, शरीर रौशनी के शरीर जैसे उभारों को उजागर करते फिगर थे और काफी सेक्सी शर्ट स्कर्ट्स या फिर स्लीवलेस ब्लाउज साड़ी में सजी धजी लेडीज अपने प्रेमियों के साथ खुल कर हंस रही थी.





वहां के सब औरतें अब इस दिलकश वातावरण का पूरा मजा ले रही थी, अपने प्रेमियों के साथ हाथ में हाथ डाले घुल मिलकर बातें कर रहे थर. रौशनी की नज़र खासकर एक लेडी पर गयी जो उसी की उम्र की होगी , हो सकती हैं कुछ 3-4 साल इससे बड़ी .. उस महिला ने अपने होठों लोन पर एक रूबी रेड लिपस्टिक लगायी थी .. लम्बे खुले बाल थे उसे , उसने एक स्कर्ट जीन्स पहनी थी जो काफी टाइट थी जिसमें से उसके कैसे नितम्ब पीछे उभर आ रहा था और उसने अपनी झंघों की आधे से भी काम लेंथ की जीन्स शॉर्ट्स पहनी थी. उस औरत ने क्लीवेज दिखानी वाली टॉप पहनी थी. इतनी गहरी क्लीवेज की कभी भी एक hi झटके में उसकी चूचियां बहार भी आ सकती थी उसकी टॉप से.. वैसी कामुकता से भरपूर महिला थी हु. उसे देख रौशनी सोची की (उफ्फ्फ ऐसे भी खुले कपड़ों वाली लेडीज यहाँ आती हैं … यह तोह बढ़िया मॉडर्न पार्क हैं … फॉर रौशनी अपनी साड़ी को देखि .. और सोची की अगर हु महिला ऐसे कपडे पेहेन सकती थी तोह हु भी तोह उससे और जवान थी और बड़ी अच्छी फिगर वाली थी .. हु भी पेहेन कर रमेश के साथ घूमने यहाँ आ सकती हैं.)

-रौशनी की पहली सोच थी रमेश जैसे काळा बुड्ढे के साथ वापस उन कपड़ों में आने की न की उसके पति रोनित के साथ-

. . दोनों 15 मं तक उस फवारे का आनंद लेते रहे

. रमेश- “चलो डिअर, पहले कुछ पि लेते हैं फिर तुम्हें पूरा पार्क दिखाऊंगा...”

रमेश अब रौशनी को लेकर वहां एक milkshake/juice के स्टाल्स में आ गए.. दोनों ने वहां की फेमस रोज मिल्कशेक पीने की ठान ली.

रौशनी दो मिल्कशेक मांगने वाली थी की रमेश ने उसकी कानों में खुश उस फुसफुसाते बोलै “ रौशनी डार्लिंग , आज हूँ मिलकर इस मिल्कशेक का आनद लुटाएंगे .. और रौशनी को देख हु मुस्कुराया.

रौशनी शर्मायी , “उफ़ आप भी न रमेश जी .. उफ़ एक hi गिलास में दोनों… ओह गॉड ऐसे तोह रोनित भी नहीं करते उफ्फ्फ..”

रमेश – “हाँ रौशनी जी में रोनित नहीं हूँ न .. चलिए मुझे तोह ऐसे hi मिल्कशेक पीना हैं ..”

रौशनी – “अच्छा बाबा नाराज़ न होना .. . भैया एक hi रोज मिल्कशेक देना और दो स्ट्रॉस.”

रमेश फिर से रौशनी की कानों में फुसफुसाते हुए

“ रौशनी जी अगर एक hi गिलास हैं तोह स्ट्रॉ क्यों दो .. और रमेश अब आँख मारता hain.”roshni शर्माती हैं और रमेश के चौड़े साइन पर अपने हाथों को मुट्ठी बनाकर हलके से मारती हैं..

रौशनी – “उफ़ रमेश जी आप भी न .. भैया बस एक hi स्ट्रॉ देना ..”

दोनों के बीच की बातें हु मिल्कशेक वाला आदमी दांग रह जाता हैं. ऐसे काळा से बुड्ढे के साथ ऐसी जवान गदरायी बदन वाली मॉडर्न लेडीज कैसे .. क्या माल पटाया हैं बुड्ढे ने . काश हम से भी ऐसी पैट जाती.

फिर दोनों वहां से चले गए

रमेश- “रौशनी जी यह पार्क बहुत बड़ा है. क्या पार्क का पूरा चक्कर काट के देखोगी तुम मेरे साथ साथ ?”

रौशनी-- “हाँ, जरूर वैसे भी देखिये न कैसे लोग कैसे चक्कर काट रहे हैं. चलो चक्कर काट ले..."

रौशनी की बात सुनकर रमेश ने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया, जिसे पकड़कर रमेश ने रौशनी को अपने बाँहों में खींच लिया और फिर उसके गोरी सी नाज़ुक कमर पर अपने हाथों को सर्किल करते हुए दोनों पार्क की चक्कर काटने निकल पड़े.

9:30 बज गए थे. जैसे हु पार्क की ुर भीतर जाने लगे , रौशनी को अब और नौजवान जोड़ियां अब दिख रही थी, , जितने भी जोड़ियां थी वहां के मर्द सब अपनी अपनी महिलाओं के हाथ में हाथ डाले, उनके कन्धों पर हाथ रखे, कई कई उन महिलाओं की कमर में हाथ डाले या उनके बदन को अपने बदन से बिलकुल सताए दीं दुनिया से बिलकुल बेखबर होकर चल रहे, बैठ रहे. थे.

वहां अब रौशनी और रमेश , एक खूबसूरत बीवी और एक कला बुद्धा रिक्शा वाला , अब उनकी जोड़ी दुनिया की नजर में जो भी हों, हु दोनों सब से बेखबर उस रोमांचक अपर में साथ साथ बिलकुल करीब हुए चल रहे थे.

chalate-chalate दोनों अब आख़िरकार पार्क के उस भाग में आ पहुंचे जहां कुछ अँधेरा था और काफी तादाद में घने झाड़ थे. हर झाड़ के से में एक जोड़ा बैठा हुआ था, एंट्रेंस के विपरीत दिशा में मुंह किए एक दूसरे को बाँहों में . समेटे गड्डमड्ड हो रहे थे, पुरुष महिलाओं की जाँघों पर लेते हुए थे, कुछेक पुरुष तो महिलाओं के चहरे पर झुके हुए होठं से होठं लगा कर किश कर रहे थे.





चारों तरफ बहुत hi रंगीन और वासनात्मक नज़ारा था. रौशनी अब साइड से वहां के जोड़ों की हरकतें देख रही थी और रमेश के साथ बैठी रही थी. ऐसे वातावरण में किसी भी गरम खून की युवा महिला का मन विचलित होना लाजिमी था खासकर जब एक जवान मस्त माल को एक बुद्धा पूरा, , अपना बनाना चाह रहा था. फिर भी अपने आप पर पूरा काबू कर रखा था और उसकी और से कोई जल्दबाज़ी करना नहीं चाहता था.

रमेश , रौशनी की सेक्स की भूख को पूरा जगा देना चाहता था और उसमें तड़प पैदा करना चाह रहा था.

दोनों अब बैठकर एक hi स्ट्रॉ से मिल्कशेक मजे से पि रहे थे.

पहले रौशनी एक सिप लेती और फिर रमेश एक सिप लेता उसी एरिया से जहाँ रौशनी ने सिप

लिया था . रौशनी , रमेश की ऐसी हरकते देख मज़्ज़े ले रही थी. फिर उसने भी वही जगह से पिने लगी और रमेश का सलीवा अब उसकी होठों अपर था और वह उसके साथ मिली हुयी मिल्कशेक पिने लगी.

दोनों एक दूसरे के आँखों में देख रहे थे .. रमेश न अब रौशनी को बिलकुल अपने से सताए हुए करीब ले रखा था सुर रौशनी भी उसके बगल में रमेश से चिपक कर बैठी थी.

रमेश ने मिल्कशेक के बाजु के स्टाल से strawberry’s लाये थे :.

उसने एक स्ट्रॉबेरी को अपने मुँह में राखी और रौशनी को दूसरे साइड से वहां पर बाईट लेने का इशारा करा.

रौशनी कुछ बोली नहीं बस अपने होठों को आगे लेकर एक साइड से स्ट्रॉबेरी की बाईट किआ ुर एक दो बाईट में डॉन ओने स्ट्रॉबेरी खा गए .. जैसे hi रमेश उस बहाने रौशनी को चूमने आगे बढ़ा , रौशनी पीछे हटी और उसे देख मुस्कुरायी और फिर अपनी जीभ बहार निकल उसे चिढ़ाने लगी:

रमेश भी मुस्कुराया और फिर से और एक स्ट्रॉ बेर मुँह में राखी और रौशनी ने वही बात फिर से दोहराई. ऐसे और सो बार हुआ .. अब 4तबार जा ऐसे hi स्ट्रॉबेरी खा गए दोनों रमेश ने अपने होठों को जोर से आगे बढ़ा कर रौशनी के होठों से चिपका hi दिया .. इस बार अब, दोनों के होठं एक दूसरे से जुड़ गए थे और दोनों बड़े लम्बे चुम्बन में समां गए .. रौशनी की बुर पानी टपका रही थी उसकी ोांत्य में और रमेश का फनफनाता हुआ लोढ़ा भी प्रेकम उसकी अंडरवियर में लीक करने लगा था .

ऐसी दोनों की चुम्बन चली रही और दो स्ट्रॉबेरी कहते हुए वैसे चुने .. फिर साथ पिटे पिटे मिल्कशेक भी ड्रिंक कर गए. फिर रमेश बोलै.

.रमेश - “रौशनी तुम यहीं बैठो, मैं ice/cream यहीं ले आता हूँ. कैसी लाऊं? कैंडी या कोन?”

रौशनी - “मेरे लिए तो वही चूसने वाली hi लाना ...”

और रौशनी ने रमेश को देख आंक मारी. इस हरकत से रमेश तोह और मदहोश हो गया , और फोड़ा हुआ रौशनी पर और एक लम्बी चुम्बन देते हुए आइसक्रीम लाने चला गया .

रौशनी अब अकेली बैठी कपल्स को देख रही थी.. (उफ़ रौशनी तू आज रमेश जैसे बुड्ढे से यह सब कर रहे हैं उफ़ .. फिर सोची – हाँ इसमें गलत क्या बात हैं , रोनित तोह ऐसे रोमांचक जगहों पर उसे लता hi नहीं .. उसकी जवानी की ख्याल कैसे रखनी हैं इस बुड्ढे को hi ज्यादा पता हैं .. और तोह और उसका हु फौलादी कला नाग .. ) उफ्फ्फ उसके बारे मैंने सोचता हुए रौशनी मन hi मन शर्मायी और मुस्कुरायी ..

तब तक रमेश भी पहुँच गया

रमेश- “रौशनी जी ये लो , तुम्हारे लिए एक कैंडी और मेरे लिए एक कोन लेकर आ गया हूँ

. रौशनी अब कैंडी आइसक्रीम बार को मुंह में लेकर चूसने लगी और रमेश की और देखने लगी .. ऐसे लग रहा था मनो रमेश के लोडे को hi उस कैंडी समझ कर चूस और चाट रहे हो, और वहां रमेश कोन में जीभ डुबो डुबो कर .. आइसक्रीम खाने लगा मनो हु रौशनी की छूट में अपने जीभ को डालते हुए उसकी बुर की क्रीम छठा रहा हो.

रमेश - "देखिये न रौशनी , तुम्हे आइसक्रीम कैंडी चूस के खाने में मजा आता है पर मुझे तो इस लम्बी कोन में जीभ दाल दाल कर उसे चाट के खाने में मजा आता है.”

रौशनी , रमेश की बातें सुन खिलखिलाकर हंस पड़ी फिर खुद अब रमेश के करीब जाते हुए उसकी होठों पर अपने गुलाबी होठों को सरकार उसे चूमने लगी और उसके मुँह से रास पिने लगी .. रमेश भी पूरी तरह से साथ देते हुए उसे चूमते रहा..





चुम्बन तोड़ते हुए रमेश - “क्यों रौशनी, यहां इस आज इस पार्क का आनंद आपको आ रहा है न?

रौशनी - “मुझे एक बात यहां की बहुत अच्छी लगी की लोग एक दूसरे से मतलब नहीं रखते की कौन क्या पेहेन रहा है, कैसे रह रहा है और यहाँ जोड़ियां एक दूसरे के साथ मस्तियों में लगे हुए हैं :? रमेश- "रौशनी, अब यहां तुम कैसे एन्जॉय करती हो, यह कोई देखने वाला नहीं या तुम्हारे बारे में कुछ गलत सोचने वाला नहीं. मैं तुम्हें हर वो सुख दूंगा जो आज तक तुझे तुम्हारे पति की इतनी सेवा करके भी नहीं मिला. अब से मेरा केवल एक hi उद्देश्य है की तुझे दुनिया का हर वह सुख हूँ जो तुम जैसी सुन्दर और जवान महिला को मिलना चाहिए...” रमेश dheere-dheere पास फ़ेंक रहा था.

रौशनी भी उस फांसी में आ रही थी और रमेश के काफी करीब आ चुकी थी.

गर्मी काफी बढ़ गयी थी दोनों के बीच लेकिन फिर उन्हें सुनाई दिया की पार्क बंद होने वाला हैं.. और रौशनी फिर अपनी वाच पर टाइम देखि .. उफ़ 10.30 बज चुके थे और उसे अब घर जाना था .. .रमेश को पता था की खेल लम्बा चलने वाला हैं और हु उस खेल को उसी पेस में खेलेगा .. चुदाई तोह हु रौशनी की कर hi चूका हैं .. अब उसे अपना बनाने का टाइम हैं और फिर रौशनी जब चाहे जैसे चाहे … जब बोले उसके पास चली आएगी और हु आराम से रात भर और कई बार रौशनी की बुर की कुटाई कर पाएगा .. उसे अपना बना लेगा ..

दोनों फिर पार्क में एक आखरी चक्कर काट के दोनों पार्क से बाहर आ गए. 11.00 बजे रमेश ने रौशनी को घर पहुँचाया .

रौशनी जाते जाते रमेश के होठों को चूमि और रमेश ने भी रौशनी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाया ..

रौशनी ने रमेश के इस हरकत को देख बोली “धत कमीने कही के .. बड़े ा तमीज दोस्त बन गए हो आप.”

फिर वहां से अपनी कमर और चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी.

आज घर पर फिर से एक नोट लिखा था और रोनित ने लिखा था की वह आज उसके दोस्तों के साथ बहार हैं और मिडनाइट के बाद hi आएगा .

पहले तोह रौशनी को बुरा लगता था जब हु घर आती और रोनित नहीं होते थे .. लेकिन अब उसे इतना फर्क नहीं पद रहा था .. वैसे भी देर रात तक वह एक रोमांचक बुड्ढे के साथ वक़्त बीते थी और उसे रोनित को भी उसका कुछ जवाब नहीं देना पद रहा था . रौशनी अब रमेश के बारे में सोचती हुई अपनी बैडरूम में चली गयी और रमेश के लोडे और आज की पार्क में हरकतों की सोचते हुए अपनी बुर में अपनी नयी लायी डिलडो के साथ खेलते हुए जहर गयी और फिर इत्मीनान से सो गयी. कल तोह उसे असलम के सात शाम बितानी थी , वह भी उसकी बेगम का नाटक कर .. उस बात को तोह हु भूल hi गयी थी.
 
सुबह हुयी और रौशनी उठ कर नहाने जा hi रही थी की उसे मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज था उसके पति रोनित का. रोनित ने अपने दोस्तों के साथ बहार कही जाने का प्लान बनाया था और उसी के बारे में बस एक मैसेज भेज दिया था रौशनी को. पहले ऐसे होता तोह रौशनी ग़ुस्सा करती, रोनित को कॉल करती और पूछती कहाँ जा रहे थे हु , नाराज़ भी होती उनपर . लेकिन आजकल उसे ऐसे कुछ नहीं फील होता था. हु तोह रेलिएवेद महसूस कर रही थी की रोनित नहीं हैं आज तोह हु शाम असलम के साथ वाया मस्ती हु भी बिना उसके पति के नोक झोंक से. वैसे भी क्यों , कहाँ, क्या ऐसे सवालों के जवाब उसे रोनित को देने hi नहीं थे. उसे अब अपनी इंडिपेंडेंस पसंद आने लगी थी. वह अब चाहती थी की वह ज्यादा समय रमेश जी के साथ बिताये . या फिर अब्दुल के साथ जैसे हु आज करने वाली थी हु भी उसकी बेगम की नक़ल कर. उसने अपनी एक बैग पाकक करि और उसमें दो सरिस डेल, दो ब्लौसेस. असलम ने कहा था की उसकी बेगम स्लीवलेस ब्लौसेस ज्यादातर पहनती थी और बुर्का के अंदर भी वैसी साड़ी और ब्लौसेस हु पहनती थी . उसने मेक उप का सामान भी पैक करि .. आज उसने स्लीवलेस बीज रंग की साड़ी पहनी थी जो उसके गोर मखमल बदन को और खिला कर दिखा रही थी. हल्का सा मेकअप भी लगाई और आँखों में काजल क्यूंकि असलम की बेगम काजल काफी लगाती थी. हु पूरी तरह से असलम के साथ उसके बेगम के जैसे hi सज धज कर वक़्त बिताना चाहती थी ताकि असलम जल्द से जल्द ठीक हो जाए और फिर उसे यह सब करने की कोई जरूररत नहीं पड़ेगी और न hi आगे जाकर असलम की बेगम जैसे बर्ताव करना पड़ेगा आज.





रौशनी निचे चली गयी तोह रोज़ जैसे रमेश को पायी उसकी रिक्शा में बैठा हुआ. रौशनी को आते देख रमेश बहार आकर खड़ा हुआ . रौशनी उसके नज़दीक आयी और मुस्कुरायी.. वह रमेश के साथ की गए साड़ी मस्तियों एक बारे में सोचकर काफी शर्मा रही थी. रमेश के चेहरे पर भी एक बड़ी मुस्कान थी. वह तोह यकीन नहीं कर प् रहा था की ऐसी मस्त कर्तव्य बदन वाली, अच्छे घर की गोरी आइटम उससे पत् hi नहीं लेकिन चूस भी गयी थी.. रमेश से रहा नहीं गया और उसने रौशनी की गोरी सी नाज़ुक कमर पर हाथ दाल देय अपने पास खिंच लिया . उफ्फ्फ रमेश जी यह आप क्या कर रहे हो उफ्फ्फ छोड़िये न उफ़ सब देखेंगे उफ्फ्फ छोड़िये बा.

“ओह रौशनी सुबह सुबह कोई नहीं हैं देखो .. उफ्फ्फ मेरी डार्लिंग तुम्हे बहुत मिस किया .. उस रात के बाद तोह मैं जी नहीं करता तुनंमहे चोर्ने का .. उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी आदतें , अदाएं, बिस्तर पर नखरे .. तुम्हारी चंचलता उफ्फ्फ्फ़ मन कर्तव्हीन फिर से अपने वहां ले जा आकर ढेर सारा प्यार दू .. ी लव यू…

“उफ़ रमेश जी आप भी न .. ओह गॉड उस .. उस रात जो हुआ वापस नहीं हो पाएगा उफ़ आप भूल जाइये हु बात उफ्फ्फ… “

“ओह रौशनी मेरी डालरिंग अब ऐसे कैसे भूल जाऊ .. तुम्हे भी वह रात रंगीन लगी थी मुझे पता हैं .. कल भी बड़ी मस्तियाँ करि हमें .. उसे भी भूल जाऊ .. नहीं हरकीज़ नहीं अब में कुछ नहीं भूल पाउँगा .. मुझे तुम बड़ी अच्छी लगती हो .. ी लव यू रौशनी .. तुम न लव करो लेकिन मेरा लव काफी स्ट्रांग हैं तुम्हारे लिए .. ी लव ोुउउउउ..

“ओह गॉड रमेश जी आप भी न धत्त्त..” रौशनी अपनी नजूल गोर से हाथों को रमेश के साइन पर मारती हैं .. रमेश उसके हाथों को पकड़ता हैं और फिर उन्हें चूमने लगता हैं .. “उफ़ रमेश जी लोग देखेंगे प्लीज छोड़िये हमें .. लेट भी हो रहा हैं आज प्ल्ज़ उफ्फ्फ्फ़ ..” रमेश एक आखिर बार कसकर रोष्नी को दबोचता हैं और उसकी मलाई जैसे गोरी सी कमर पर लाल निशाँ छोर देता है. फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर निकलते हैं.

रिक्शा में रमेश बोलता हैं "रौशनी जी एक बात कहूंगा आपसे … आप उस रात को न भूलना .. वह सबसे यादगार रात थी मेरे ज़िन्दगी की जो मैंने आप जैसी खूबसूरत महिला के सतह वह पल बिताए ..आप चाहती हो तोह फिर से में आपसे कभी बात नहीं करूँगा , न hi मिलूंगा लेकिन उस रात को और हमने बिताये पलों को कभी न भूलना … तुम मेरी जान हो और ऐसे करोगी तोह मुझे काफी बुरा लगेगा..”

रौशनी भी इमोशनल हो जाती हैं. उसे तोह उस राटा के सपने रोज़ आते हैं .. वह चाहती हैं की वह फिर से रमेश जी के सतह वैसे hi पल बिता.. रात और शाम बिताए … न जाने क्यों लेकिन रमेश जी बुड्ढे होकर भी उसे बहुत पसंद थे .. उनका प्यार करने का अंदाज़ तोह यंग मर्दों जैसे hi था और बिस्तर पर स्टैमिना तोह उफ्फ्फ्फ़ .. बुद्धा होकर बुइ रमेश जी मेरे पति रोनित से और अच्छी से और खूब मस्ती के साथ चुदाई करे थे .





रौशनी मुस्कुराती हैं “रमेश जी नहीं भूलूंगी वह पल .. आप न दुखी होना .. बस वह आप ने पब्लिक में मुझे ऐसे दबोचा .. उफ्फ्फ प्लीज वह सब न करना आप जो चाहे वह … जैसी hi रौशनी वह सब्द बोली वह खुद को रोकी .. रमेश मन hi मन मुस्कुरा रहा था .. उसका इमोशनल एंगल अच्छे से चला था और तीर सही निशाने पर लगा था .. अब वह रौशनी को और चिढ़ाना चाहता था.

“और क्या क्या करू आपके साथ … जो चाहे वह करू .. अच्छा क्या आप वह सब झेल पाओगी रौशनी जी …”

रौशनी शर्माने लगती हैं , उसके गाल लाल हो जाते हैं .. उफ्फ्फ वह क्या बोल बैठी थी … अब रमेश जी को क्या जवाब दे .. इसी सोच में वह थी और कुछ बोली नहीं. रमेश वहां और प्रेस करने लगा.

“बताइये न रौशनी जी और जो चाहे करुनाग तोह इंकार नहीं करोगी न .. और झेल पाओगी क्या .. बताइये … में तोह बहुत कुछ करने को तैयार हूँ आपके जैसी हुस्न की पारी के साथ..”

“उफ़ रमेश जी आप भी न .. बड़े hi बदमाश हो उफ्फ्फ्फ़”

“रौशनी जी .. अब बदमाश तोह आपने बना दिया हैं .. में तोह रहा सीधा साधा रिक्शा चलने वाला .. आप hi हो हुस्न की पारी जजों मेरे ज़िन्दगी में एक तूफ़ान बन कर आयी हो .. अब में उस तूफ़ान में बह गया हूँ तोह मेरा क्या कसूर.. कहे तोह जान दो मेरी ..

“उफ़ रमेश जी यह ड्रामा करना बंद करिये .. व्हाट इस थिस नॉनसेंस जान दू और सब .. आप यह सब बातें न करिये .. आपकी दोस्त हूँ और हमेशा रहूंगी..” “अच्छा बस दोस्ती hi करोगी या फिर कुछ और .. अब तोह बस दोस्ती से मन नहीं भरेगा मुझे .. मुझे आपका प्यार चाहिए .. मुझे आप चाहिए .. आपका मखमल बदन , आपकी कामुक ादाएँ आपका दिल, आपका हुस्न .. आपका सब कुछ ..”

“उफ़ रमेश जी आप भी न .. उफ़ ममम ठीक हैं बस दोस्ती नहीं और भी .. उफ्फ्फ अब चलिए मुझे देर हो रही हैं.” “रौशनी जी बहाना मत बनाइए .. आज जल्दी निकल गए थे हम आपके ऑफिस के लिए .. मुझे बस आप चाहिए .. आज मत जाओ ऑफिस और औ मेरे साथ .. दिखाऊंगा में आपसे कितना ज्यादा प्यार करता हूँ ..” “उफ़ नहीं नहीं आज बड़ी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग हैं”

अब रमेश को क्या पता रौशनी की शाम की मीटिंग एक दूसरे ठरकी बुड्ढे के साथ थी जिसका नाम था असलम और वह भी रौशनी को अपनी बेगम बनाने के सपने देख रहा था और आज रौशनी को बेगम बना कर ढेर साड़ी मस्ती करना चाहता था.

“अच्छा लेकिन अब रहा नहीं जा रहा हैं , आपको एक बा तोह चूमना चाहता हूँ, दबोचना चाहता हूँ .. “ रमेश ने फिर रिक्शा एक छोटे से देतौर पर ले गया और कही रोक दी रिक्शा.

“उफ़ रमेश जी रिक्शा क्यों रोक दी और रास्ता क्यों बदल दिया ..

“रौशनी जी रहा नहीं जा रहा हैं .. ापर बहुत प्यार आ रहा हैं .. कुछ मिनट .. आपको देरी नहीं होगी. रमेश फिर पीछे की सीट आ जाता हैं और रौशनी को बाँहों में भर लकेता हैं .. उसके गालों को चूमने लगता हैं कभी उसके कानों को चबाने लगता हैं..





रौशनी भी गर्मी की आग बढ़ रही थी और वह बिना हिचकिचाए रमेश का साथ देने लगी और आठ उफ़ की आवाज़ों से रेस्पोंद करने लगी .. कुछ सेकंड के बाद रौशनी ने रमेश को अलग करि

“उफ़ रमेश जी कोई देख लेगा रास्ते पर से .. उफ्फफ्फ्फ़”

“अच्छा फिर चुपकसे प्यार करना चाहती हो .. रौशनी कुछ न बोली बस शरमाते हुए रमेश के साइन में अपने चेहरे को छुपाई. रमेश ने रिक्शा के साइड के कर्टेंस खोल दिए और अब अंदर जो हो रहा हाँ बहार से कोई नहीं देख पाएगा.. और रमेश फिर से रौशनी की चूचियों को उसके साड़ी ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. अब रमेश गुटका चबा रहा था .. वह रौशनी को चूमने आगे बढ़ा तोह रौशनी ने उसके अपने होठों को अपने हाथों से धक् ली.

“उफ़ रमेश जी अआप .. आप गुटका खा रहे हो .. उफ़ ऐसे कैसे चूमोगे उफ्फ्फ्फ़ .. ममम नहीं ..”

“तोह क्या हुआ .. उसमें के बुराई हैं .. उफ़ मेरी जानू रहा नहीं जा रहा हैं चूमने दो तुम्हारे गुलाबी होठों को ..”

“मम नहीं उफ्फ्फ रमेश जी ….” लेकिन रौशनी उसे रोक नहीं पायी .. रमेश ने रौशनी के हाथों को हटाया और अपने गुठके से भरे होठों को उसके गुलाबी होठों के पास लाने लगा .. रौशनी की गर्मी काफी बढ़ गयी थी अब वह नहीं रोकना चाहती थी खुद को .. फिर दोनों के होठों का मिलान हो hi गया .. रमेश के गुठके से स्टैनेड होठं अब रौशनी ी गुलाबी होठों से भीड़ गए और जोरों से भीड़ गए और फिर दोनों चुम्बन में मग्न हो गए … रौशनी की गर्मी काफी बढ़ रही थी और वह भी रमेश का साथ देने लगी .. उसे चूमने लगी उसके बालों पर अपने हाथों को फेरने लगी … रमेश के गुठके से स्टैनेड होठों से वह रौशनी की गुलाबी होठों को चबाने लगा .. और उसकी मुँह में अपनी जीभ दाल दी और रौशनी के मुँह की जीभ का रास पीने लगा .. उसका गुटका अब रौशनी के मुँह मं चला गया और दोनों बड़ी गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी के हाथों को रमेश ने अपने हाथों में लिया और पानी क्रॉत्च क्षेत्र पर ले गया .. उसका हथ्यार मोटा हो गया था और उसके बुल्गे के स्पर्श से hi रौशनी की बूत पानी छोड़ने लगी..

रमेश ने अपनी ज़िप खोली और रौशनी के आहतों को अंदर गाइड करने लगा .. उसने आज चड्डी नहीं पहनी थी इसीलिए रौशनी एक हाथों में उसका मोटा लोढ़ा साइड से चला गया .. रौशनी उस इ चुम रही थी और निचे उसके लोडे को अपने नाज़ु मुलायम गोर हाथों से सहलाने लगी … उसकी गर्मी की आग बहुत बढ़ रही थी और उसकी बुर से काफी रास बह चूका था .. वह रमेश के मोठे लोडे को एक हाथस इ रगड़ने लगी और ऊपर उसकी गहरी सी चुम्बन में लगी रही … रामश का लोढ़ा काफी सारा प्रेकम चोर रहा था जिसने रौशनी के हाथों को वेट करि .. उस एहसास से तोह रौशनी की बुर और रास छोड़ने लगी..

रमेश फिर रौशनी की साड़ी के पल्लू को साइड में किये उसकी दूधियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. फिर अपना एक हाथ ब्लाउज में डाला उसकी चुकी दबाने लगा .. रौशनी ऊपर चुम्बन में लगे मम फफम्फम्फम्फ की आवाज़ hi णिअक पायी … रमेशने रोशन ी की एक चुकी उसके ब्लाउज से निकली और उसकी चुकी कास कास कर दबाने लगा .. जितने जोरों से वह उसकी चुकी दबा रहा था उसी जोर से रौशनी भी उसके लोडे को दबाने लगी.. दोनों भूल गए थे की वह रिक्शा में थे कही रास्ते पर साइड में रुके हुए न की बिस्तर पर … रमेश फिर अपने हाथों को पीछे ले जाकर रौशनी की ब्लाउज को उन्हुक करने लगा ..

रौशनी उस एहसास से चुम्बन तोड़ी और बोली .. “उफ़ रमेश जी क्या कर रहे हो मम उफ्फ्फ्फ़ ..”

लेकिन रमेश ने न सुनी और फिर से रौशनी के होतोहं पर पाने होतोहं को टिका दिया और चूमने लगा .. अब उसने सब हुक खोल दिए और झट से ब्लाउज निकल दिया .. रौशनी के कुछ समझने से पहले .. उसकी चुकी तोह ब्रा के बहार hi थी और अब दूसरी भी बहार निकल उसे रमेश दबोचने लगा … "उफ़ क्या चूचियां हैं उफ्फ्फ ममममम बहुत मिस कर्रा हूँ इन्हे अहह उफ़ मेरी जान … मेरी डार्लिंग उफ्फ्फ फमास्ट गोरी सी और मुलायम चूचियां हैं तेरी अहह ममममम…

“उफ़ रमेश जी छोड़िये न उफ़ फममम नहीं ..” रमेश फिर से अपने हतोहं को रौशनी के होठों पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. रौशनी के आँखें बंद हुयी और वह रमेश के चूमों का और भी जोरों से साथ देने लगी .. रमेश रौशनी की चकहियों को दबाते गया और उसके निप्प्लेसे से खेलते रहा .. रौशनी की बुर तोह अब बहुत रास छोर चुकी थी .. उसकी गर्मी बहुत बढ़ गयी थी.. रौशनी ने भी रमेश के लोडे से अपने हाथों को हटाई नहीं थी .. उसके मोठे लुंड से खेलती रही दबती रही और रमेश भी आह उफ़ मम करता रहा और उसकी आह िफ्फ़ अब रोशनीकी ममम उफ्फ्फ की सिसकियों से मेल करने लगी और अब तोह दोनों बिलकुल hi भूल गए थे वह किसी घर में नहीं थे बल्कि रिक्शा में बीच रास्ते कही थे. ऐसे hi 5 मं तक दोनों की मस्तियाँ चली और फिर रमेश ने चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी की सर को पकड़ अपने लोडे के तरफ ले जाने लगा .. रौशनी की हवस इतनी बढ़ चुकी थी की वह कुछ न बोली और अपने मुँह को रमेश के गर्म लोडे के पास पायी .. उसे वह चूमने लगी .. उसके लोडे का टोपा चाटने लगी … रमेश ने उसके सर को हॉक्स से पकडे रखा था और अपना लोढ़ा रौशनी से चुसवा रहा था ..





उसकी चुच्चियों से अपने हाथों को हटाए बिना उन्हें निचोड़ रहा था दबोच रहा था .. रौशनी अब रमेश के लोडे को चूस रही थी उसकी चूचियां उनके हाथों में डाब रही थी और उसकी बुर काफी रिस रही थी और ढेर सारा पानी चोर्ने लगी थी …रौशनी और जोरों से रमेश का लोढ़ा चूसने लगी , चाटने भी लगी … रमेश उसकी निप्पल्स को दबाता रहा और रौशनी आउच करि … वह सर ऊपर उठाने लगी की रमेश ने उसके सर को पकड़ अपने लोडे को अब रौशनी के मुँह में hi पेलने लगा .. रौशनी अब बस रमेश के लोडे को चूसने में मग्न थी .. रमेश उसकी मुँह में अपने लोडे को पेलते रहा और रौशनी उसके मोठे लोडे को चुस्ती रही .. पहली बारे चूसी थी उसके मोठे लोडे को तोह वह आधे तक hi पहुँच पायी थी .. लेकिन अब उसके लोडे के जड़ तक वह पहुंची और चूसने लगी .. उसके मुँह से लार टपकने लगी जो रमेश के लोडे को और चिकना कर रही थी जिससे रौशनी सके लोडे के जड़ तक चूस पर रहित hi .. रमेश जोरों स रौशनी की छकःकिओयों को दबोचने लगा .. अब उससे रहा नबी जा रहा था और वह अपने लोडे से माल निकलने के चार्म सिमा पर पहुँच गया … उसने रौशनी के सर को और जोर से पकड़ लिया और अपने लोडे को उसके मुँह में और पेलने लगा .. कुछ और सेकंड बाद अब रमेश को रहा नहीं जा रहा था .. वह झड़ने वाला था … उसका गृप रौशनी के सर पर लूसे हुआ और रौशनी ने अपने मुँह को उसके लोडे से निकलते हुए उसके लोडे को दबाने लगी और कुछ पलों में रमेश के मुँह से एक बड़ी अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममममममम निकल गया ुर उसके लोडे से उसका लावा झरने लगा … किसी वोल्केनो जैसे उसके लुंड से उसका लावा ेरुपत होने लगा … उसका सारा सफ़ेद माल रौशनी के हाथों पर फ़ैल गया …





रौशनी बिना सोचे उसकी ऊँगली चाटने लगी जिस पर रमेश के लुंड का गधा सफ़ेद माल लगा हुआ था ..

“ओह गॉड रौशनी उफ्फ्फ मममम क्या मज़्ज़ा आया आज अहह उफ्फ्फ तुम हो hi बड़ी मस्त चीज़ .. उफ्फ्फ्फ़ क्या हो तुम मममममम चूस चूस कर hi माल निकल दिया मेरे लोडे से अहह उफ़ पहली बार ऐसे हुआ हैं अह्ह्ह ममममममम.” रौशनी को एहसास हुआ की वह कहा हैं.. अभी अभी क्या कर रहे थे और वह चुप बैठी ..

“उफ़ रमेश जी आपने आज उफ्फ्फ …. यह आपने फिर से मुझे बहका दिया उफ्फ्फ्फ़ … हे भगवान् उफ्फ्फ लेट हुआ हैं उफ्फ्फ चलिए जाना होगा मुझे .. चलिए रमेश जी जल्दी करिये …”

रमेश बहार गए और रिक्क्ष्व में पानी था उससे अपने लोडे को साफ़ कर वापस रिक्शा में बैठ वह निकल गए. अब दोनों से कुछ बातें हो नौई रही थी.. रौशनी बहार देख रही थी ,, अभी जो भी हुआ उसके बारे में सोचते हुए उसकी गर्मी अभी भी शांत नहीं हुयी थी और बढ़ चुकी थी ..

अब रौशनी को तोह आज शाम को असलम की भी बेगम बनना था .. असलम अपने घर में था .. वह तोह आज पूरा का पूरा मूड में था की वह आज आखिर कार रौशनी को निचोड़ निचोड़ कर उससे ढेर साड़ी रात भर मस्ती करने वाला था. आअज रात वह रौशनी के साथ उसे अपनी बेगम बना कर , सुहागरात मानाने के सपने देख रहा था.
 
गाइस ी ऍम गोइंग तो स्टार्ट ा पोल्ल एंड प्लीज गिव योर ोपीनियंस एंड रिलीज इन थे कमैंट्स बिलो.

हु दो यू आल वांट रौशनी तो एन्ड उप विथ. शी विल फाइनली चूसे ओने पर्सन एंड माय रमैनिंग उपदटेस विल बे बेस्ड ों तहत.

शुड रौशनी बे

1. Salim’s रखेल

2. Aslam’s बेगम

3. Ramesh’s लवर

प्लीज कमेंट बिलो. इन 10 डेज डेपेंडिंग ों हु गेट्स मोस्ट वोट्स ी विल बे उप्दतिंग माय रमैनिंग पार्ट्स बेस्ड ों तहत.
 
अब रौशनी को तोह आज शाम को असलम की भी बेगम बनना था .. असलम अपने घर में था .. वह तोह आज पूरा का पूरा मूड में था की वह आज आखिर कार रौशनी को निचोड़ निचोड़ कर उससे ढेर साड़ी रात भर मस्ती करने वाला था. आअज रात वह रौशनी के साथ उसे अपनी बेगम बना कर , सुहागरात मानाने के सपने देख रहा था.

रौशनी ंगो ऑफिस पहुंची और कामों में लग गयी. लेकिन उसका कंसंट्रेशन आज काम पर नहीं लग रहा था. वह बस आज रिक्शा में हुए रमेश के साथ की गयी मस्तियों की सोचती रही.. उसकी गर्मी बढ़ रही थी जितने बार भी वह उस बातों की सोचने लगती. रमेश के साथ उसे बड़ा मज़्ज़ा आता था. वह काफी खुले और मज़ाकिया किसम के मर्द थे. वह उसे हस्ते और इतनी मस्तियाँ करते जो उसने कुंवारी होने पर भी किसी मर्द के साथ की नहीं हो. बुड्ढे थे लेकिन थे दिल से यंग इंसान hi ..

वह तोह कभी नहीं सोची थी की वह रमेश जैसे बुड्ढे से इतनी खुल मिल जाएगी और इतना सब कुछ मस्ती करेगी .. उसे अभीभी उस तूफानी रात में रमेश ने की गयी ठुकाई की सोचती तोह उसकी बुर काफी गीली होती और पानी भी छोड़ने लगती. उनका लोढ़ा .. इतना मोटा और बड़ा की घुसने में पहले तोह काफी तकलीफ हुयी थी लेकिन बाद मेंउन्होंने तोह उसे चुदाई का स्वर्ग मनो दिखाया था उफ्फ्फ .. और आज भी उसके लोडे लको वह चूसी थी वह भी उसी के रिक्शा में वह भी एक सुनसान रस्ते के साइड में .. उफ्फफ्फ्फ़ अब रौशनी की बुर उस बात को सोचते हुयी और भी बहने लगी ..

अब तोह उसे रात में असलम के साथ रात बितानी थी .. वह भी असलम उसे अपनी बेगम बना कर मज़्ज़े लेना चाहता था .. उसे भी उसकी बेगम hi बनना था बस एक रात के लिए टाल्की असलम की बीमारी सही हो जाए और वह अपनी गुज़री हुयी बेगम की यादें चोर कर अपने ज़िन्दगी को आगे बढ़ा सके ..

(अब हमें पता हैं की रौशनी काफी इमोशनल हो जाती हैं और इस ेमोटीनल स्टेट की वजह से वह असलम और सलीम ने उस जाल को बिछाया था उसके बारे में वह ठीक तरह से सोच नहीं प् रही थी. और तोह और उन बुद्धों ने उसकी हवस इतनी बधाई थी की उसे पता होना चाहिए था की अगर कोई मर्द अगर किसी औरत को अपनी बेगम की जैसे रख कर श्याम बिताना चाहता था तोह दोनों में चुदाई होनी तोह निश्चिंत हैं. लेकिन इमोशनल इतनी हो चुकी थी रौशनी, खासकर असलम के मामले में इन बातों को समझ नहीं प् रही थी. उसकी हवस बढ़ रही थी , और प्यास सलीम और रमेश ने बुझाने के बजाये काफी हद तक बढ़ा दी थी.)





सब काम ख़तम कर रौशनी अब असलम के घर चल पड़ी. उसे रहना था एक रात लेकिन उसने दो रातों के लिए पैकिंग कर ली थी.

रौशनी असलम के घर पह्नुंचइ तोह दरवाज़ा खुल था. अंदर अँधेरा था, हॉल की भी लाइट ों नहीं करि थी और अब शाम हो चुकी थी और ठंडी का मौसम था इसीलिए दिन भी जल्दी hi ख़तम हो रहा था और शाम का अँधेरा च रहा था.

असलम मियां … कहा हो … में हूँ रोष ..…. फिर खुद को सँभालते हुए बोली " में आपकी बेगम हूँ .. बहार हॉल में आ चुकी हो .. प्लीज बहार आइये ..”

“असलम कुछ मिनटों बाद बहार आ जाता हैं और पूरा पठानी सूट में आता हैं. बालों को तेल से पीछे सरका कर कोंब किये था और हाथों में दो ब्रेसलेट्स और गले में एक चैन, दाढ़ी बधाई हुयी. पता नहीं क्यों लेकिन असलम को ऐसे देख रौशनी उसे देखती रही , अला hi फीलिंग आ रहे थी उसे असलम को ऐसे देख. काफी स्मार्ट लग रहे थे असलम , नहीं तोह बाल ऐसे hi बिखरे हुए साढ़े से कपड़ों में आते थे वह. रौशनी ज़रा इम्प्रेस हुयी थी असलम को ीासे दीख.

“बेगम , मेरी बेगम आप आ गयी .. सलाम वालैकुम..

“वालैकुम सलाम असलम मियां …”

“आज तोह हमारी बेगम खिल उठी हैं .. बड़ी मस्त लगी हैं ठुमरी बेगम ..

“शुक्रिया असलम मियां …” रौशनी के गालों पर ब्लशेस छायी हुयी थी.

अब दोनों सोफे पर बैठ गए और असलम बिना झझक रौशनी के काफी नज़दीक बैठ गए. दोनों के बीच ज्यादा दुरी नहीं थी ..

“वह बेगम आज तोह बड़ी खुसबूदार हो .. वाह कोई नयी परफ्यूम डाली हैं"

“नहीं असलम मियां बस मेरी नार्मल परफ्यूम hi बस ज़रा नयी हैं , कल hi खरीदी थी.. आपको इतनी पसंद आयी”

“हाँ बेगम हमें बहुत पसंद आयी आपकी खुसबू .. असलम अब रौशनी के और करीब जाता हैं और उसके बालों को हाथों में लिए सूंघने लगता हैं ..”वाह क्या रेशमी बाल हैं मेरे बेगम के”

“असलम मियां आप hi के लिए कल पार्लर जाकर आयी हूँ …आपसे मुलाक़ात करने तैयार जो होनी थी मुझे.”

असलम रौशनी के नाज़ुक गोर से हाथों पर अपने काळा बाद हाथों को रख वहां स्क्वीज़ कर लेता हैं.. फिर एक हाथ को रौशनी की दाई झंघ पर रख वहां सहलाने लग जाता हैं.

रौशनी कुछ नहीं बोलती .. आज उसे असलम की बेगम बनना था और असलम को वह ऐसी हरकतों को इंकार नहीं कर न था. वैसे भी उसे मज़्ज़ा भी आ hi तोह रहा था.

असलम अब रौशनी के काफी करीब बैठ गया और दोनों की हिप्स एक दूसरे को टच कर रहे थे और असलम ने झट से रौशनी की नाज़ुक कमर पकड़ कर अपने पास खिंच लिया ..

रौशनी अहह .. की सिसक मारती हुयी असलम से चिपक गयी … असलम अब रौशनी की गालों को चूमने लगा .. और मनो चबाने hi लगा .. रौशनी की ानकेहिं बंद हुयी और वह हलके से सिसक मरती रही ..

“उफ़ मियाना आप अभी शुरू हुए उफ्फ्फ अभी तोह आयी हूँ .. कुछ पिलाइये हमें.”

“मेरी बेगम हाँ लेकिन पीलोगी तुम .. तुम्हारी इन रास भरे होठों का अमृत मुझे पिलाओ …”

रौशनी शरमाते हुए अपने चेहरे को असलम के सीने से चिपक दी … असलम ने मौके का फायदा उठाया और अपने हाथों को रौशनी की नग्न पीठ पर चलने लगा और वहां दबाने लगा … उसके लोडे में जान आने लगी थी .. उफ़ क्या मुलायम पीठ थी रौशनी की… इतनी मुलायम को उसका लोढ़ा उस मुलायम त्वचा के कारन खुद सख्त हो रहा था ..

असलम को रहा नहीं गया और उसने रौशनी के चेहरे को अपने हाथों में लिए साइन से अलग कर उसे चूमने होने काळा होतोहं को आगे बढ़ने लगा ..

रौशनी ने अपने गालों को फेर लिया और असलम के होठं उसके होठों से नहीं बल्कि उसके मुलायम गालों से जा चिपक गए. असलम ने फिर से रौशनी के चेहरे को अपने तरफ कर चूमने आगे बढ़ा तोह इस बार रौशनी दूसरी तरफ मुड़ी और फिर से उसके होठं रौशनी के होठों से नहीं बल्कि उसके नाज़ुक गोर गलों से चिपक गए ..

"उफ्फ्फ असलाम्मियाँ आप तोह जहा देखो शुरू hi हो जाते हो .. उफ्फ्फ्फ़ प्लीज आप सबर करिये ..”

“अच्छा मेरी बेगम अब सबर करूँगा लेकिन कितना वक़्त करना पड़ेगा .. अगर अब सबर की तोह जब सबर का वक़्त ख़तम होगा तोह फिर छोड़ूंगा नहीं .. मेरी प्यारी मलाईदार बेगम को…”

रौशनी यह बातों को सुन शर्मा गयी और वहां से उठ रसोई घर में भाग कर गयी.

असलम रौशनी की चूतड़ों को हिलते डुलते देखते रहा और अपना लोढ़ा मसल कर सोचने लगा (अब तोह मटक मटक कर चूतड़ों को हिला रही हो .. लेकिन आअज रात को उन्हें ऐसे दबोचूँगा और फिर उनके साथ इतना खेलूंगा और अपने लोडे से भी इतना ठोकूंगा की रात याद गार रहे गई तेरी .. मेरी बुलबुल , मेरी छमिया , मेरी चूड़ाकड बेगम ….)





रौशनी अपनी चूतड़ों को हिलाते रसोई घर में चली गयी. उसे रात के खाने की भी तैयारी करनी थी. आज्ज वह असलम के लिए बोइरयाणी बना रही थी क्यूंकि असलम ने कहा था की उसे उसकी बेगम की बनाई बिरायणि बहुत पसंद थी. असलम ने उस बिरयानी की रेसिपी भी बता दी थी रौशनी को . अब रौशनी बिरयानी बनाने में लग गयी. कुछ 20 मं बाद जब रौशनी रसोई घर में मसल भून रही थी तब अचानक से उसने पाया की उसके कमर को असलम ने पकड़ रखा था और उसकी नाभि में अपनी ऊँगली घुसा कर वहां कहल रहा था.

“उफ़ असलम कियाँ आप यहाँ पर भी शुरू हो गए हो .. उफ्फ्फ छोड़िये न मुझे बिरयानी बनाने दीजिये …

“अरे मेरी बेगम तुम हर बार बिरयानी बनाते ऐसी hi कहती हो, जब भी में तुम्हे जकड लेता था ..”

“उफ़ छोड़िये न असलम मियां कंसन्ट्रेट नहीं हो रहा हैं ..”

असलम ने फिर जानबूझ कर अपनी ऊँगली गीली कर फिर से रौशनी की ओवल नाभि में घुसाने लगा .. उसकी नाभि में ऐसे कुछ वेट पाकर रौशनी के मुहे से एक हलकी सी आह hi निकल गयी .. अह्ह्ह उफ्फ्फ असलम जी आपने ऐसे क्यों किया उफ्फ्फ्फ़”

“क्या किया मैंने मेरी बेगम ….. कुछ भी तोह नहीं ..” (असलम जान बुझ कर नादान बनने का नाटक करते हुए)

“उफ़ वह वह आवे अपनी ऊँगली गीली कर मेरी नाभि में डाली उसकी बात कर रही हूँ उफ्फ्फ ,… मुझे गुदगुदी हो रही यहीं उफ्फ्फ.”

उसकी टाइम में असलम का लोढ़ा जो अब अर्ध सख्त फिर से हुआ था , उसने एक झटके से उसके लोडे को रौशनी की साड़ी के बीच उसकी चूतड़ों के बीच घुसा दी..

“आह्हः असलम मियां यह क्या हैं उफ्फ्फ बहुत चुभ रहा हैं अह्ह्ह्हह"

असलम कुछ न बोलते फिर से एक झटका मारा और अपने अब उभरते लोडे को फिर से रौशनी की साड़ी के बीच उसके चूतड़ों के बीच रगड़ने लगा … वह और 2-3 धक्के ऐसे hi देता रहा और रसोहनी की बुर से अब उसके बुर का रास टपकना शुरू हुआ था …( वैसे भी दुपहर की रमेश के साथ की गयी मस्तियाँ उसे गरम कर hi चुकी थी .. उफ्फ्फ और अब असलम भी बढ़ावा दे रहा था उफ्फफ्फ्फ़…)

असलम अपने होठों को रौशनी के कानों के पास लेकर उसकी बालों की सुगंध सूंघ कर पुहलपुझाये

“उफ़ मेरी बेगम तुमने इस बिरयानी में टंगड़ी कबाब दाल दी हैं न .. मुझे टंगड़ी कबाब बहुत पसंद हैं” (और ऐसे कहते हुए उसने अपने हाथों को रौशनी की झंघों पर ले जाकर वहां उसे दबाने लगा .. रौशनी की झंघों को सहलाने लगा , दबाने लगा ….) बस इतने से hi रौशनी के मुँह से और एक हलकी सी आह निकल hi गयी .. फिर असलम और बोल्ड हुआ और उसने अपनी उँगलियों को रौशनी की झंघों और बुर के मिलान के वहां ला जाकर वहां भी सहलाने लगा .. इस हरकत से रोशनीकी बुर से और रास टपकने लगा और उसकी पंतय और गीली हो गयी.)

"उफ्फ्फ असलम मियां आप छोड़िये न उफ़ मममम आप ये … अह्ह्ह मममम .. आप ये …. (जैसे hi रौशनी आप ये कहती , असलम उसकी झागों को और दबाता और उसकी ऊँगली उसकी छूट के क्षेत्र के और करीब ले जाता … जिससे रौशनी फिर से आह करती ,….. और फिर से आप यह कहती और असलम की उसी हरकत से फिर से अह्ह्ह उफ्फ्फ ममम की सिसकियाँ निकलती …)

पीछे से असलम का बी पूरा सख्त लोढ़ा उसकी चूतड़ों के बीच चुभ रहा था उसे और आगे से असलम अपनी उँगलियों से उसकी बुर के काफी नज़दीक आ चूका था और उसकी झांघें जोरों से दबोचते हुए सेहला भी रहा था ,… उसकी बुर से अब एक कांस्टेंट रास का बहना शुरू हुआ था …रौशनी की गर्मी हद से ज्यादा बढ़ रही थी … फिर भी कैसे तोह कर उसने मसाला भून दिया और फिर चपाती बनाने के लिए जो फ्लौर उसे चाहिए था वह निचे की शेल्फ पर था और उसे बहार निकलने अब उसे झुकना पड़ा .. असलम ने इस मौके का फायदा उठाया और रौशनी की कमा hi जकड ली और उसकी कमर को शकलने लगा , दबोचने लगा .. रौशनी फिर से अहह की सिसक मारी ..

“उफ्फ्फ असलम मियां आप भी न .. अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ यह तोह निकलने दीजिये आह उफ्फ्फ कहा पर भी शुरू हो जाते हो आप उफ्फफ्फ्फ़”

रौशनी ने गफ़्लुर का डिब्बा कैसे तोह कर ऊपर काटते पर रख दिया और फ्लौर को एक कटोरे से बहार एक बाउल में उतरने लगी … कुछ फ्लौर बहार गिरने लगा तो उसने गिरे फ्लौर को हाथों में ली की अचानक असलम ने उसे जकड लिया और अपने तरह उसके मुँह को करने लगा .. रौशनी को इतना जोर का झटका लगा की वह मुद तोह सही लेकिन हाथ में जो फ्लौर था वह उदा और सीधा कुछ फ्लौर असलम के आँखों में चला गया ..

“उफ्फ्फ रौशनी अहह ..”

“ओह सॉरी असलम मियां रुकिए में साफ़ करती हूँ .. उसने अपने साड़ी से असलम के चेहरे पर उदा हुआ फ्लौर साफ़ करि ..

“ओह मेरी बेगम फ्लौर मेरी आँखों में गया हैं उफ्फ्फ …

“ओह रुकिए असलम मियां ..”

रौशनी ने असलम की नखों को वाइड करि और अंदर फुक्ने लगी .. रौशनी ें असलम के आँखों के नज़दीक जा वैसे कर hi रही थी की असलम ने झट से रौशनी को अपने बाँहों में जकड लिया और अपने काळा भद्दे होठों को रौशनी की गुलाबी होठों के साथ चिपका दिया और उसे चूमने लगा .. रौशनी कुछ रेसिस्ट करि लेकिन फिर गिव उप कर असलम के चुम्बन का साथ देने लगी और दोनों एक गहरी चुम्बन में लग गए … अब रौशनी की रेजिस्टेंस पूरी ख़तम हो hi रहे थी और वह असलम के चुम्बन का साथ एक्टीवेली देने लगी और उसके बालों को पकड़ कर उसकी जीभ को अपने मुँह की गहराई में लेते हुए उसे चूमने लगी .. उसकी भी जीभ अब असलम के मुँह में एंटर हुयी और दोनों की जीभ एक दूसरे से रास निचोड़ रही थी और दोनों एक सबसे गहरी चुम्बन में चले गए थे .. असलम ने रौशनी की कमर को निचोड़ा तोह रौशनी की आह निकलने की गुंजाईश hi नहीं रहे क्यूंकि असलम ने उसके होठों को अपने होठों में और दबा लिया …





फिर असलम ने रौशनी की चूतड़ों को पीछे से दबोच लिया और फिर से दो बार दबोच लिया … आगे से उसका सख्त लोढ़ा अब रौशनी की नाभि के गोलाई से टकरा रहा था और वह जोरों से भी टकरा रहा था .. इस सब से रौशनी की बुर में उसके रास बस टपकने hi नहीं लगा बल्कि अब बहना भी शुरू हुआ था और उसकी पंतय काफी गीली हो चुकी थी उसके बुर के रास की वजह से.

कुछ 5 मं बाद रौशनी ने असलम को आने से दूर करि

“उफ़ असलम मियां , प्लीज अब थोड़ा सबर करिये उफ्फ्फ बहुत काम करना हैं.”

“मेरी बेगम डार्लिंग , जैसे मैंने कहा था , अब सबर तोह कर लूंगा लेकिन जब और सबर नहीं कर पाउँगा तोह छोड़ूंगा नहीं तुम्हे .. ..”

रौशनी के चेहरे पर एक कातिलाना स्माइल छहाई और उसने अपने चेहरे को असलम के चौड़े साइन में छुपाने लगी …

रौशनी मन में सोची - उफ्फ्फ यह असलम जी .. ओह गॉड ऐसे सब करते थे अपनी बेगम के साथ .. उफ्फ्फ अभी तोह कुछ हुआ hi नहीं और मेरी छूट से रास बहा दी इन्होने … उफ्फ्फ इस बुड्ढे में भी उतना hi दम हैं जितना रमेश और सलीम में था .. उफ्फ्फ आअज रात और क्या दुमदार चीज़ें होंगी… - उस की सोच से hi रौशनी मन hi मन बड़ी शर्मायी और उसके गाल लाल हुए …

“मेरी बेगम क्या सोच रही हो … और मस्ती कर लूँ … ः”

“उफ़ असलम मियां आप जैसे अब , खाने की पूरी तैयारी करने दीजिये .. अभी तोह बस तैयारी हैं बाद में बिरयानी को दम भी लगाना हैं.. उफ्फ्फ अब आप जाइये …”

असलम ने एक आखिर बार रौशनी की चूतड़ों को दबोचते हुए फिर वहां से चला गया.

रौशनी अब तैयारी में लग गयी .. उसने बिरयानी बनाई और एक सब्ज़ी भी बनाई और चपाती भी. अब बस बिरयानी को दम देकर उसे कुछ टाइम और पकने देना था ..

“असलम मियां अब दम लग रहा हैं , में ज़रा सा फ्रेहसेन उप होकर आती हूँ .. आपको बिरयानी के दम पर ध्यान देना हैं और देखना हैं दम लगा की नयी. प्लीज क्या आप मेरे लिए टूना करोगे.”

“हाँ क्यों नहीं बेगम, मेरी जान तुम्हारे लिए कुछ भी लड़ूंगा .. जाओ फ्रेश होकर तैयार होकर आओ फिर डिनर करेंगे.”

रौशनी कमरे में गयी बैग लेकर .. वह बाथरूम में चली गयी तब पायी की पहल के जैसे फिर से इन दोनों के चड्डियाँ और बैनायन बाथरूम पर एक डोरी से टंगे हुए थे. फिर से धोये हुए कपडे और कहरब कपडे साथ सतह hi लटकाये गए थे ..

“उफ़ दोनों के साथ रहे थी तोह उन्हें दिखाया था कैसे रखना हैं कपडे .. लेकिन चली गयी तोह फिर से वैसे hi हरकतें करि .. उफ्फ्फ इनका तोह कुछ होगा hi नहीं ..

वह सोची की वह उनके यह चड्डियाँ बनियान सेपरेट करेगी एक आखरी बार फिर से बाद में असलम को सिखाएगी भी... रौशनी की गर्मी अभी भी थी ..जैसे hi उसने चड्डियों को हाथ में ली .. उन न धोये हुए चड्डियों से स्ट्रांग स्मेल आ रही थी और उसे पता था की स्मेल किस चीज़ का हैं .. वह स्मेल कुछ और नहीं दोनों के चड्डियों पर लगे सूखे वीर्य के दाग की hi स्मेल थी .. उसे उस स्मेल से कुछ अलग hi झुरझुरी उठी … उसे वह स्मेल और भी गरम कर रही थी .. उफ़ इतनी स्ट्रांग वीर्य की स्मेल इन दूँ के चड्डियों से hi आती थी. रमेश की चड्डी से भी इतनी स्मेल नहीं आती थी , लेकिन उसे वह स्मेल अच्छी लग रही थी , उसे गरम भी कर रही थी .. वह न चाहते हुए भी दोनों की चड्डियों को अपने नाक के पास लेकर सुघने लगी और उसकी गर्मी और बढ़ गयी और बुर से और रास टपकने लगा …उफ्फ्फ्फ़ क्या स्मेल हैं , पहले कभी अच्छा नहीं लगता उस इ.. लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा था और वह दो बुद्धों की चड्डियाँ जो सूखे वीर्य से भरी थी और स्मेल आ रही थी उन्हें खुद मस्ती से स्मेल कर रही थी .. उफ्फ्फ इन बुद्धों ने तोह उसे हवस में पागल hi कर दिया था …

उनकी चड्डियों को सूंघते वह अपनी चूचियों को दबाने लगी और अपनी बुर से भी खेलने लगीं .. इस सब में वह मग्न रह गयी थी …उसकी गर्मी बढ़ती रही .. अचानक से असलम की आवाज़ सुनाई दी उसे ..’

"मेरी बेगम जल्दी करो दम हो गया हैं .. ..”

रौशनी हड़बड़ा गयी और अपने हाथों में दोनों चसददियों को देख शर्मा गया ुर उन्हें एक बकेट में डाला फिर झट से नाहा कर बहार आयी तैयार होने.

उसने बैग से एक नेटेड ब्रा पहनी और एक पंतय जो मनो थोंग hi हो कुयूं वह रौशनी की चूतड़ों के बीच बारे बार फँस रही थी. उसने एक स्लीवलेस काफी डीप बैक ब्लाउज पहनी जो पीछे से बाद 3 स्ट्रिंग्स से बंधी हुयी थी .. साड़ी को अपनी नाभि के 3 इंच निचे पहनी जिससे उसकी ओवल नाभि का दर्शन असलम पूरा कर पता

फिर रौशनी बहार आयी.. उसे देख असलम की आक्न्हें फटी की [hati hi rahi .. Roshni ne Aslam ko use aise ghurte dekh Sharma gayi aur palat kar rasoi ghar mein chali gayi aur biryani ko do plates mein daale , un plates ko unke chite se dining table par rakh di. dono ko bas hawas ki bhukh , - JO LAGI TOH BAHUT THI - nahi thi .. unhe khane ki bhi bhuk lagi thi aur dono khana khane baith gaye aur kuch 20 min mein khatam ho gaya unka khana. Roshni dono plate rasoi ghar le gayi aur sink mein rakh di. bahar se aslam use bulane laga …

“Meri begum .. aaiye ab meetha khana reh gaya hain.”

Roshni ne toh meetha kuch banaya hi nahi tha isiliye use kuch bhi idea nahi tha us baare mein.

Rasoi ghar se nikalte woh Aslam ke paas chali gayi hall mein jahan Aslam sofe par aaram se baitha tha. Roshni ab Aslam ke paas gayi aur is baar bina Aslam ke kuch force kar Uske ekdum nazdeek satak kar baith gayi ..

Aslam ne samne banana rakhe the aur ek chocolate syrup ka bottle.

“Pata hain na meri begum , tumhe kele bahut pasand hai .. aur Aslam hasne laga ..

Roshni wah sun aur Aslam ki hasi dekh sharma gayi .. wah samajh gayi Aslam kya Kehna chahta tha …

Roshni bas sir haa mein hilayi .. use nahi pata tha ki Aslam ne aur kuch kinky socha tha jo wah ab Roshni ke saath karne wala tha.

"Meri begum ab humare purane andaaz mein hum dono kuch meetha khaenge ..” Roshni ko Samah nahi aa raha tha iska Matlab.

“Pehle toh hum apne positons mein baithenge aur Aslam ne Roshni ke hathon ko pakad liya aur use upar uthakar sidhe apne jhanghon par bitha diya ..

Roshni baith jate hi use niche chuban mehsius huyi jo Aslam ke ubahrte mote lode ki thi. Wah yeh baat smajh gayi aur usk gaal laal ho gaye.

Fir Aslam ne pure kele ka chilka nikal diya .. usne fir kele ko choclate syrup se nehlaya .. plate ko hathon mein liye unke muh ke niche rakh fir kele ka ek side aslam ne apne muh mein dala aur dusra side roshni ke muh mein dala diya

Ab Roshni samajh chuki thi yeh Aslam kya karna chata hain aur uske gaal aur laal huye.

Dono fir apne apne side se kele ko chabane lage aur chabate chabate kuch hi palon mein unke hothn ek dusre se mil gaye aur ek dusre ko chumne lage .. dono ke hotohn par chocolate syrup laga hua tha aur dono ek dusre ko kele ke saath chumban karne lage …. Roshni ki garmi kafi badh gayi thi aur uske Aslam ke sir ko pakad kar use aur khinch liya apne muh ke paas aur bahut buri tarah se chipak kar dono chumban mein lag gaye …

Roshni bhul gayi thi woh yeh Aslam ke saath aise Khud hi hawas ki giraft mein aakar joron se beinteah chum rahi thi ..





फिर दोनों ने ऐसे कर और दो केले कहते हुए फिर से चुम्बन में लग गए … असलम रोहणी की चुच्यों को दबाने लगा .. उसकी झंघों को दबोचने लगा .. रौशनी भी अब बिना झिझक असलम के लोडे को अपनी चूतड़ों से सेहला रही थी … असलम का मोटा कला लोढ़ा अब पूरी औकात में आ चूका था और रौशनी की चूतड़ों को निचे से चुभ रहा था .. असलम जान बुझ कर अपनी कमर उठाये रौशनी के चूतड़ों से अपने लोडे को और चुभा रहा था … रौशनी भी इसका पूरा मज़्ज़ा ले रही थी और असलम को और भी जोरों से चुम रही थी और अपनी जीभ असलम के मुँह में दाल उसके मुँह से केले और चॉकलेट सिरप की टास्ते करि जा रही थी.

फिर वह ऐसी ाड़जिउस्त हुयी की अब असलम के लोडे से बानी ुबाहर उसके सामने थी और वह उसके मोयते लोडे को पंत के ऊपर से सहलाने लगी .. उसी दौरान असलम अब रौशनी की बुर को ऊपर से सेहला रहा था और उसकी चूचियां दबा रहा था .. रौशनी के मुँह से अब बस ाः की सिसकियों के ऊपर सिकियाँ hi चल रही थी और वह इस सब कामर्स खेल के लुफ्त उठा रही थी मनो वह सच में hi असलम की बेगम हो और आज रात बेगम बन कर वह असलम के साथ उसके बिस्तर पर चुदाई निश्चित थी !!!
 
फिर वह ऐसी ाड़जिउस्त हुयी की अब असलम के लोडे से बानी ुबाहर उसके सामने थी और वह उसके मोठे लोडे को पंत के ऊपर से सहलाने लगी .. उसी दौरान असलम अब रौशनी की बुर को ऊपर से सेहला रहा था और उसकी चूचियां दबा रहा था .. रौशनी के मुँह से अब बस ाः की सिसकियों के ऊपर सिकियाँ hi चल रही थी और वह इस सब कामर्स खेल के लुफ्त उठा रही थी मनो वह सच में hi असलम की बेगम हो …

दोनों असलम और रौशनी हवस की आग में दुबे हुए सोफे पर अपने मुँह से एक दूसरे का रसपान कर रहे थे … फिर असलम ने चॉकलेट सीरम लिया और अपनी उनलगियों को उसमें डुबो कर रौशनी के होठों के पास ले गया .. हॉक्स से उस चॉक्लेट से कवर्ड उसके उँगलियों को रौशनी के गुलाबी होठों पर मलने लगा … रौशनी भी गर्मी में जल रही थी और उसने असलान के हाथ को पकड़ लिया और अपने होतोहं से उसके चॉक्लेट से भरे उनलगियों को हॉक्स से अपने मुँह में लेने लगी …





धीरे से उसे वह चूसने लगी … उसकी आँखें बंद थी और वास् असलम के चॉक्लेट से भरे उनलगियों ो अब पूरी तरह से चूस रही थी … ऐसी चूसै की मोटिनो देख असलम का लोढ़ा उसकी पंत में काफी बड़े झटके मारने लगा … वह मन में सोच रहा था की अगर रौशनी उसकी उँगलियों को ऐसे चूस रही हैं तोह उसके लोडे को तोह और भी मस्त तरीके से चूसेगी ..





रौशनी की ानकेहिं बंद थी और वास् असलम के उँगलियों को चूस कर साफ़ करि.. असलम ने फिर से चॉक्लेट सिरप में अपनी उँगलियों को भिगोके रौशनी की होठों के तरफ ले गया और रौशनी फिर से उसकी उँगलियों को होने मुँह में लेकर मस्ती में चुस्ती रही और फिर से साफ़ कर दी .. ऐसे कुछ और 3 बार करने के बाद रौशनी की ानकेहिं बड़ी नशीली लग रही थी जब वह उसे धीरे से खोलने लगी. वह r=aslam के आँखों में देख रहित hi और असलम उसकी आँखों में देख रहा था मनो अब दोनों एक दूसरे की आँखों में दुब गए हो.. असलम ने अपनी हाथों को रौशनी की गोरी मुलायम कमर पर इर्द गिर्द ले गया और उसे कसकर जकड अपने और करीब खिंच लिया .. रौशनी के मुँह से आह्ह्ह्हह की बड़ी सिसक निकल गयी और वह अब असलम के बाँहों में मनो बर्फ पिगल जाती हैं वैसे पिगल कर असलम ने उसे अपने बाँहों में भर लिया और फिर रौशनी के चेहरे को बेतहाशा चूमने लगा और गालों को चबाने लगा … रौशनी की बुर से तोह अब रास की मनो धाराएं hi निकल गयी थी और वह खुद को पूरी तरह से असलम के हवाले कर रही थी.

असलम ने रौशनी के पल्लू को साइड में कर उसकी गोरी दूधियों की दरार को घूरने लगा … फिर उसमें एक ऊँगली दाल उसकी चूचियों की दरार से खेलने लगा … रौशनी का मुलायम पिंक नेल पॉलिश वाले हाथ अब असलम के झंघों पर थे और उसके उभर के काफी जकरीब मनो वह कुछ 2 मम हाथ आगे बढ़ाये तोह असलम के सख्त बने उभर को छू hi ले .. असलम का लोडे बुरी तरह से रौशनी के मुलायम हाथों का स्पर्श अपनी झंघ पर वह भी अपने लोडे के बड़े उभर के करीब पाकर , बड़े झटके मार रहा था और उसके लोडे के टिप से अब प्रेकम भी काफी निकल उसकी चड्डी को गीली करने लगा ..

रौशनी अब असलम की झागों को सहलाती रही और ऊपर असलम उसकी पुरे चेहरे को चूमने लगा और फिर से उसके होठों को भी गहराई से चूमने लगा …

दोनों सोफे पर थे , अब तक तोह बिस्तर की तरफ जाने का कोई इरादा भी नहीं था फिर भी इतनी गर्मी थी दोनों में. अचानक रौशनी की फ़ोन की घंटी बजी जिसने उनके इस रासलीला में रोक लगाई ..

रौशनी खुद को सँभालने लगी और असलम की चुम्बन से अपने होतोहं को जफड़ा करि. लेकिन वह असलम को छोर दूर नहीं गयी. वह ऐसे hi असलम से बुरी तरह से पास मेंस अटक कर बैठी रही और फिर टेबल पर रखे अपने फ़ोन को देखि लेकिन उसपर कोई स्पैम कॉल hi था ..

“उफ़ रुकसाना अब आ hi जाओ बाँहों में फिर से उफ्फ्फ और बहुत प्यार करना हैं तुमसे मेरी बेगम जान …”

“नहीं असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ आप भी न .. उफ़ आपने मुझे बहका hi दिया उफ्फ्फ छोड़िये मुझे ..”

“रुकसाना बेगम मेरी जान , मैंने पकड़ा hi कहाँ हैं तुम्हे .. तुम्ही हो जो इतनी पास सटक कर मुझे से भिड़ी हो …” और असलम हॉक्स से हसने लगा ..

रौशनी सोची (उफ़ हाँ सही तोह कह रहे हैं , में hi इतनी स्टॉक कर इतने करीब बैठी हूँ उफ़”





उसके हाथ अभी भी असलम के झंघों पर hi थे और वह उसे वहां से नहीं हिलायी ..

फिर रौशनी उठ कर जाने लगी तोह असलम ने उसकी कलाई पकड़ ली और रौशनी के सरप्राइज से वह एक गाने के बोल गन गुनने लगा .. “

- “तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

और भी कुछ याद आता है, याद आता है

आज का अपना प्यार नहीं है

जन्मों का ये नाता है, तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

हो, प्यार के क़ातिल, प्यार के दुश्मन

लाख बानी ये दुनिया दीवानी

ो, हमने वफ़ा की राह न छोड़ी

हमने तो अपनी हार न मानी

उस मोड़ से भी हम गुज़ारे हैं

जिस मोड़ पे सब लूट जाता है, लूट जाता है” -

रौशनी इस गाने को सुन असलम को देखि .. उसे ये गाना बहुत अच्छा लगता था .. फिल्म प्यार झुकता नहीं उस फिम से था .. वह असलम को देखि रही और असलम फिर से वही बोल गुनगुनाने लगा

- “तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

और भी कुछ याद आता है, याद आता है

आज का अपना प्यार नहीं है

जन्मों का ये नाता है, तुमसे मिलकर न जाने क्यूँ

हो, प्यार के क़ातिल, प्यार के दुश्मन

लाख बानी ये दुनिया दीवानी

ो, हमने वफ़ा की राह न छोड़ी

हमने तो अपनी हार न मानी

उस मोड़ से भी हम गुज़ारे हैं

जिस मोड़ पे सब लूट जाता है, लूट जाता है” -

रौशनी इमोशनल लेडी थी और वह उस गाने के इमोशंस समझती थी .. लगता था की असलम अपनी बेगम को यह गण सुनाता था .. वह उस देख मुस्कुरायी फिर उसे चिढ़ाने खुद एक गण गुनगुनाने लगी.

रियशनी - “नहीं नहीं अभी नहीं थोड़ा करो इंतज़ार ,,

नहीं नहीं अभी नहीं थोड़ा करो इंतज़ार …

असलम मुस्कुराता हैं और उस गाने के बोल गन गुनने लग जाता हैं ..

“नहीं नहीं, कभी नहीं, मैं हूँ बेक़रार, नहीं नहीं, कभी नहीं मैं हूँ बेक़रार”-

रौशनी फर से गुनगुनाने लगती हैं

नहीं नहीं , अभी नहीं फिर कभी दिलदार” -

“नहीं नहीं अभी नहीं थोड़ा करो इंतज़ार ,

नहीं नहीं अभी नहीं थोड़ा करो इंतज़ार …

असलम भी गुनगुनाता हैं -

“नहीं नहीं, कभी नहीं, मैं हूँ बेक़रार, नहीं नहीं, कभी नहीं मैं हूँ बेक़रार”-

इस पुरे वक़्त न hi असलम रौशनी की कलाई चोरता हैं और न hi रौशनी अपनी कलाई को असलम के हाथों से छुड़ाने की कोई भी कोषसिंह करती हैं …

अब दोनों गुनगुनाते हैं ..

पहले रौशनी - “ नहीं नहीं, अभी नाह, अभी करो इंतज़ार

फिर असलम - नहीं नहीं, कभी नहीं, मैं हूँ बेक़रार

मैं भी जवान, तू भी जवान

कमी है किस बात की

Ha...Main भी जवान, तू भी जवान

कमी है किस बात की. यहाँ आओ, न घबराओ,

रुत है मुलाक़ात की

फिर से रौशनी गुनगुनाती हैं - नहीं नहीं हाँ, अभी नहीं फिर

कभी दिलदार, नहीं नहीं हाँ,

अभी नहीं फिर कभी दिलदा,

बड़े वोह हो तुम पिया,

ज़िद क्यूँ नहीं छोड़ते

कलियों को खिलने से

पहले नहीं तोड़ते

फिर से असलम गुनगुनाता हैं - नहीं नहीं, कभी नहीं,

चली जायेगी बहार

नहीं नहीं, कभी नहीं

मैं हूँ बेक़रार

असलम अब रौशनी की कलाई को खिंच लेता हैना ुर रौशनी अब असलम के ऊपर गिर जाती हैं और असलम फिर से रौशनी को जकड कर उसे चूमने लगता हैं ..

फिर से कुछ 5 मं की ऐसी चुम्मा छाती के बाद रौशनी, असलम को ढाका देते हुए उससे छूट जाती हैं और भाग जाती हैं. असलम उठ कर उसे फॉलो करता हैं . रौशनी की मलाई से भरी पीठ को असलम देख रहा था.







रौशनी ज्यादा दूर नहीं हैट पाती और असलम उसे पीछे से अपने बाँहों में जकड लेता हैं … असलम अब उसकी पीठ चूमने लगता हैं , वहां चाटने भी लग जाता हैं.. रौशनी बस आठ उफ़ की सिसकियाँ hi मार पा रहे थी .. फिर वह दोनों एक hi गण गुनगुनाने लग जाते हैं…

रौशनी - जाती हूँ मैं”

असलम - जल्दी है क्या

रौशनी - धड़के जिया

असलम - वह क्यों भला

रौशनी - खुद से hi डरने लगी हूँ

मैं प्यार करने लगी हूँ

असलम - खुद से जो इतना दरोगी

तुम प्यार कैसे करोगी

रौशनी - जाती हूँ मैं”

असलम - जल्दी है क्या

रौशनी - धड़के जिया

असलम - जादू तेरे जिस्म का

तेरी ओर खींचे मुझे

काबू न खुद पे रहे

Jab-jab मैं देखूं तुझे

रौशनी - कदम बहक जाएंगे

तुम पर मुझको यकीं है

.. खुद पर यकीं नहीं

असलम - लेके तेरे लैब की लाली

जीवन को रंगीन करेंगे

आँखों में तुझको भरेंगे

कल तक तभी जी सकेंगे

हो लेके तेरे लैब की लाली

रौशनी - “ खुद को संभाले रखिये

मुझ को सँभालने डीजे

होश मैं अपने खो दू

इतना प्यार न दीजिये

ऐसे दोनों वह गण कुछ सेकंड गुनगुनाते हैं और अब असलम रौशनी की मुलायम कमर को पकड़ कर उसे अपने तरफ खींच लेता यहीं और इस बार दोनों एक दूसरे से चूमने अपने होठों को आगे बढ़ाते हैं और असलम अपने काळा भद्दे होठों को रौशनी के होठों से चिपका hi देता है

रौशनी की गर्मी काफी हद्द तक बढ़ गयी थी और असलम ने उसे उठा लिया और उसे अपने बबिस्तर पर ले जाने लगा..

रौशनी के असलम को जकड रखा था और शरमाते हुए अपने चेहरे को असलम के साइन में छिपा रही थी.

आअज तोह असलम सच में रौशनी के सतह रात रंगीन बनाने वाला था और रौशनी भी उसे न कहने की पोसितों में नहीं रही ..

बैडरूम के अंदर जाते hi असलम ने उसे निचे उतरा और उसके साड़ी के पल्लू को खींचने लगा .. रौशनी कुछ रेसिस्ट करि लेकिन बस कुछ पलों के लिए hi और असलम रौशनी की साड़ी उतरने लगा …

रौशनी को बस ब्लाउज में देख असलम अपने मोठे लोडे को अपनी पंत के ऊपर से hi खुजलाने लगा और दबाने लगा ..

रौशनी शर्म से मुड़ी और उसकी डीप बैक बलोसुए में गोरी पीठ अब फिर से असलम के तरफ थी. असलम फिर से पीछे जाकर उसके पीठ को चूमने लग और वहां चाटने भी लगा ..इस एहसास से रौशनी और गर्म हो गयी .. उफ़ असलम उसकी ोपीठ को चाट रहा था उफ्फ्फ्फ़ उसे आज इतनी गर्मी लग रही थी .. उसके बदन में आग भड़क रही थी .. आज वह असलम के साथ उसकी बेगम बन कर निश्चिंत रूप से रंगीन रात बिताने hi वाली थी.



 
नॉट फीलिंग वेल .. अपडेट विल टेक सम टाइम लॉन्गर तो के !!
 
रौशनी को बस ब्लाउज में देख असलम अपने मोठे लोडे को अपनी पंत के ऊपर से hi झुंझलाने लगा और दबाने लगा ..

रौशनी शर्म से मुड़ी और उसकी डीप बैक बलोसुए में गोरी पीठ अब फिर से असलम के तरफ थी. असलम फिर से पीछे जाकर उसके पीठ को चूमने लग और वहां चाटने भी लगा ..

इस एहसास से रौशनी और गर्म हो गयी .. उफ़ असलम उसकी ोपीठ को चाट रहा था उफ्फ्फ्फ़ उसे आज इतनी गर्मी लग रही थी .. उसके बदन में आग भड़क रही थी .. आज वह असलम के साथ उसकी बेगम बन कर निश्चिंत रूप से रंगीन रात बिताने hi वाली थी.

लेकिन रौशनी अभी भी होश में थी और खुद की हवस पर काबू पाकर वह बैडरूम से वैसे hi ब्लाउज और पटिटकात में सीधे बतरह्रूम में जा घुसी और वहां की कड़ी लगा दी.

“उफ़ रुकसाना मेरी बेगम .. कितनी तडपाओगी तुम .. आजा और रात रंगीन करते हैं मेरी जानू ...”

रौशनी कुछ नहीं बोली .. अपनी सांसें जो उसकी बड़ी तेज़ी से चल रही थी और उसकी चकहियाँ जो उन तेज़ साँसों के वजह से ऊपर निचे झूल रहे थे वह उन्हें शांत करने उन्हें पकड़ ली .. आज वह क्या सच में एक बुड्ढे की बेगम बन कर उसके सात रातें रंगीन करने जा रही थी .. उफ्फ्फ यह सब उसे क्या हो रहा हैं .. वह अपने आप पर काबू क्यों नहीं प् रही हैं .. उफ्फ्फ यह गर्मी की आग उसके बदन में एक बुड्ढे के लिए कईओं ज्वाला मुखी जैसे बढ़ रही थी ...उफ्फ्फ्फ़

वही बाथरूम एक स्टूल पर रौशनी बैठी सोच रही थी .. फिर उसकी नज़र असलम के लटकते चड्डी पर गयी .. उसकी अंडरवियर पर .. वहां उसके गंदे अंडरवियर लटके थे और कुछ तोह सलीम के भी होंगे .. उनमें से बड़ी स्ट्रांग स्मेल आ रही थी जो

रौशनी की गर्मी बढ़ा hi रही थी .. इतनी स्ट्रांग स्मेल कबि उसे अपने पति रोनित की चड्डी से भी नै आती थी .. एक अलग hi सुगंध जैसे थी इन बुद्धों के गंदे चड्डियों में से .. उसे रहा नहीं जा रहा था .. वह एक चड्डी अपने हाथों में ले उस अपने नाक के पास ले जाकर उसे सूंघने लगी ... उफ्फ्फ पूरी तरह से जमे वीर्य की स्मेल काफी स्ट्रांग थी .. रौशनी यह बात तोह समझ hi चुकी थी की इन बुद्धों के लुंड से कितना प्रेकम निकलता था ... इतना प्रेकम तोह उसके पति के छुम से भी गधा था कभी कबर .. रौशनी अब असलम की चड्डी को सूंघने लगी और अपनी चूचियों को ब्लाउज के ुवार से दबाने लगी .. उसकी गर्मी बढ़ रही थी और वह असलम की चड्डी को सूंघती रहे एयर उसकी आग बढ़ती रही.. वह पेटीकोट के ऊपर से पानी छूट के क्षेत्र पर भी रगड़ने लगी ...

उफ़ क्या सुगंध थी .. मममम वह बस उस चड्डी को सूंघती रही और उसकी बुर से पानी टपकता रहा .. उसकी गर्मी बड़ी हो गयी थी अब वह असलम के साथ रात बीतने और गर्मी महसूस कर रही थी ..

उसने कड़ी खोली और वह बाथरूम के बहार जैसे hi गयी असलम जो बहार hi रुका हुआ था . उसने रौशनी को अपने बाँहों में जकड लिया और फिर से बेइंतेहा चूमने लगा उसके गालों को नाक को ,ाकानों को .. गर्दन को

, ोीठ .. फिर उसकी क्लीवेज पर अपने चेहरे को वह रगड़ने लगा ..

रौशनी अब असलम के सर को पकड़ कर उसे अपनी बदन को चूमने दे रही थी , उसकी बुर से काफी पानी टपक रहा था... ावाह ाः उफ़ की सिसक भी मारने लगी .. असलम पागलों की तरह से चूमने लगा और फिर से उसे अपने बाँहों में उठा कर बैडरूम के तरह ले चला ... असलम ने रौशनी को फिर से सीधा लिटा के उसपर झपट कर उसे अपने बाँहों में भरा और निचे लिटा कर उसके होंठो गालो और माथे को चूमते हुए चाटने लगा. वह अब रौशनी के चहरे पर लगी पसीने की हर बूँद को चाट रहा था और अपने जीभ से चाटते हुए उसके पुरे चहरे को गीला कर रहा था. रौशनी सिसकते हुए असलम से अपने चहरे को चटवा रही थी. चहरे को पूरा गीला करने के बाद असलम अब रौशनी की गर्दन को चाटने लगा फिर वह से उसकी चूचियों को उसकी जुबान से पूरा गीला कर उसने रौशनी के दोनों हाथो को पका, उसके सर के ऊपर कर दिया. रौशनी की दोनों आर्मपिट्स अब उसके सामने आ गयी. रौशनी के हाथ ऊपर पकड़े थे असलम ने और उसकी आर्मपिट्स से निकलती bheenee-bheeni खुशबु कमरे में छाने लगी थी.

असलम अब रौशनी की चाहती को चाटते हुए धीरे से उसकी आर्मपिट की तरफ मुंह ले गया औरउसमे अपने मुंह को गार दिया. काँखो के मांस को मुंह में भरते हुए असलम वहां चूमने लगा और जीभ निकाल कर चाटने लगा. रौशनी की आर्मपिट्स में जमा पसीने का नमकीन पानी अब असलम के मुंह के अंदर जा रहा था और स्लैम बस रौशनी की आर्मपिट्स के पसीने के सुगंध को सूंघते हुए मदहोश होते जा रहा था. मनो उसे एक नशा सा हो

गया था. उसने रौशनी की आर्मपिट्स को chaatate-chaatate पूरी आर्मपिट को अपने थूक और लार से भिगो दी

थी. रौशनी जोरों से सिसकारियां मारते हुए हुए बोली "है haraamee....seeeeeei...ye क्या कर रहे हो असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ मम मेरी आर्मपिट्स चाटने लगे हो उफ्फफ्फ्फ़ ....ममममममम”

“ रुकसाना बेगम तुम्हारी आर्मपिट्स में जो पसीना रहता है उसकी सुगंध ने मुझे बहुत

बार पागल किया hai.....haay आज मौका मिला है तो नहीं chhoruga....tumhaare पुरे बदन को

chaatoonga.....gaand में भी अपनी जुबान daaloonga...haay मेरी बेगम आज मत रोकना

mujhe....main पागल हो गया hoon.....ummmmmmmmm...."

रौशनी समझ गई की मैं सच में आज असलम उसे आसानी से नहीं छोड़ने वाला. उसको भी

मजा आ रहा था. उसने अपना पूरा बदन ढीला छोर दिया था और असलम को पूरी आजादी दे

दी थी.

असलम भी अब आराम से उसके काँखो को चाटने के बाद धीरे धीरे निचे की तरफ

बढ़ता चला गया और पेट की नाभि को चाटते हुए दांतों से पेटीकोट के नारे को खोल कर

खींचने लगा और इस पर रौशनी बोली "फॉर दे न.... असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ ...साड़ी तोह पहले hi निकल चुके ho....ufffff

कामिनी मममम...."

अब रौशनी की चूतड़ असलम के सामने थी ...





असलम ने उसके पेटीकोट का नाडा खींच कर अब रौशनी की पेटीकोट निचे उतर गयी.

अब रौशनी के दो बड़े गुब्बारों जैसे चूतड़ उसकी छोटी से थोंग में असलम के सामने थे .. असलम का लोढ़ा पूरा टाइट हो चूका था और ढेर सारा प्रेकम छोड़ने लगा था की उसकी चड्डी पूरी गीली हो चुकी थी ...

रौशनी की सांसें तेज़ चल रही थी .. असलम अपने घुटनो के बल गया और उसके रौशनी के चूतड़ों को चूमा ... रौशनी वहां बिस्तर पर आह की सिसक मारती रही और असलम उसकी चूतड़ों को चूमता रहा और फिर वहां बाईट करा ,,

“उफ़ आउच .. असलम मियां ये आपने मुझे वह काट लिया उफ्फ्फ ,मममममम.”

असलम कुछ न बोलै और फिर से रौशनी की दाएं चूतड़ को काट लिया ..

रौशनी फिर से अह्ह्ह इफ्फ्फ्फ़ की ऊँची स्वर में जोरों से सिसकियाँ मारती रही .. अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम ओह मियां आप धीरे से करिये न आह्हः उफ़ फ्मेरे जंगली मियां हो आप उफ्फ्फ ममममम”





असलम ने अपनी जीभ से रौशनी की थोंग साइड में करि और उसकी चूतड़ों के बीच उसकी जीभ जाती हुयी रौशनी की चूतड़ों की गुदा से टकराई और रौशनी एक बड़ी सी सिसक मार उठी अह्ह्ह्हह्हह असलम मियां ,,,,,,,,

असलम अपनी जीभ से अब वह चाटने लगा . और रौशनी बस बड़ी से बड़ी सिसकियाँ hi मारती रही ... असलम अब पागलों की तरह रौशनी की गुदा को चाटने लगा और उसकी चूतड़ों को दबाने लगा .. रौशनी ऊपर बड़ी से बड़ी सिसकियाँ मारित रही अहह उफ़ असलम ियाँ आप कितने गंदे हैं उफ़ वहां भले कोट चाट लेता हैं उफ्फ्फ्फ़ .. अहह मेरे मियां .. मेरे गंदे मियां अह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़...”

असलम ने अब बारे को पूरा खींचते हुए पूरी पेटीकोट को निचे उतार दिया और दोनों टांग

फैला कर उसके बीच बैठ एक पेअर को अपने हाथ से ऊपर उठा कर पेअर के अंगूठे को

चाटने लगा. धीरे धीरे पेअर की उँगलियों और टखने को चाटने के बाद पुरे तलवे को जीभ लगा कर चाटने लगा असलम. फिर वहां से आगे बढ़ाते हुए उसके पुरे पेअर को चाटते

हुए घुटने और जांघो को चाटने लगा. जांघो पर दांत गाराते हुए मांस को मुंह

में भरते हुए चाट रहा था. रौशनी अपने हाथ पेअर पकड़ते हुए छटपटा रही थी. असलम

मि ऐसी चटाई ने उसको पूरी तरह से गरम कर दिया था

असलम उसके काले हाट को रौशनी की गोरी पीठ पे रख देता है..

और उनको सहलाने लगता है, साथ साथ उसको चूम भी रहा था ..

असलम एक बार अपने एक हाथ से रौशनी के पीठ पे जो दूरी बंदी थी जो की उसके ब्लाउज की दूरी थी उसको एक जटके मई खोल देता है..

रौशनी की इसपर आखे बंद हे रहती है.

असलम अपने गंदे मुँह से उसकी बैक को चेतना शुरू कर देता है..

वो अपना गन्दा थूक रौशनी की पूरी पीठ पे मलने लगता है..

जिससे उसकी पीठ पूरी भीग जाती है..

अब असलम अपना एक हाथ आगे ले जेक रौशनी के मुलायम चूचियों को जोरसे मसल देता है ..

असलम अब आगे बढ़ता है...

और अपना एक हाथ से रौशनी के चेहरे को उप्पर करता है...

दोनों की आखे फिरसे जुड़ जाती है.. और दोनों फिर से एक गहरी सी चुम्बन में लग जाते हैं.









असलम अब रौशनी के हातो को अपने हातो मई ले लेता है..

और रौशनी का ब्लाउज नीचे गिर जाता है.... अब रौशनी उप्पर से सिर्फ एक काली ब्रा मई थी सिर्फ .. जो की उसके गूरे गूरे बूब्स को कवर कर रही थी...

उसके मुलायम गूरे बूब्स उसकी ब्रा के बहार आने को तरस रहे थे...

वो अपने गन्दी नजरे रौशनी के बदन पे उप्पर से नीचे को चलना शुरू कर देता है..

असलम को खुदको ऐसे देखता देख रौशनी शर्मा जाती है..

असलम अपने गंदे डाट निकल कर रौशनी के हाथ को पकड़ लेता है..

असलम के काले जंगली हाथो मई रौशनी के गूरे मुलायम हाथ थे..

असलम अब अपने खुरदुरे हातो से रौशनी की कमर और पीठ सेहला रहा था.. और अपनी बदबूदार गरम सासे रौशनी की नैक पे छोड़ रहा था...

रौशनी जो की कोई होश मई नहीं थी ..

वो बड़े हे प्यार से अपने मुँह को उप्पर करके असलम के आन्ह्को मई देखती है..

रौशनी खुद हे अपने हूंठ आगे करके असलम के काले मोटे हूंठ से जुड़ा लेती है और असलम भी साथ साथ उसको चूसता रहता है..

दोनों के जेब एक दूसरे के मुँह मई दाखिल हो रही थी.. असलम तो रौशनी के जीब ऐसे चूसे रहा था .. जैसे उसमे से सेहद( हनी) निकल रहा हो..

दोनों एक दूसरे के लिप्स चूसे जा रहे थे,

रौशनी असलम के काले हूंतो को अपने डाट से काट रही थी.. और उसकी जीब को भी अपने डाट से काट रही थी..

असलम के मुँह का गन्दा थूक उसके मुँह मई जा रहा था , जिसे वो बड़े हे प्यार से अपने अंदर ले रही थी...

दोनों एकदूसरे को काफी पशनातेली स्मूच कर रहे थे

असलम ने अपने एक हाट से उसकी गांड को सेहला रहा था.

और दूसरा हाट उसकी कमर को..

अब असलम रौशनी के साडी निकलने की कोशिश करता है..

जिससे देख दोनों को किश टूट जाता है..

असलम अब रौशनी के साड़ी को निकल फेकता है..

अब रौशनी के गूरे बदन पर सिर्फ उप्पर ब्रा और नीचे एक छोटी सी थोंग में hi थी..
 असलम खुदका भी कुरता निकल फेकता है..

और अपनी पंत को भी निकल देता है..

असलम के शरीर पर अब सिर्फ एक फटी हुई चड्डी थी

अब ..

जिससे उसका घोड़े जैसा मोटा , कला लोढ़ा बहार आने को मरे जा रहा था..
 उसका लुंड साफ़ दिखाई दे रहा था ..

रौशनी जिसे देख उस पर से नजर नहीं हटा प् रही थी..

रौशनी खुद को काबू करने की जी जान कोशिश कर रही थी ..

पर वो नहीं कर पा रही थी...

उसकी नजर साह कर भी असलम के लुंड से नहीं हट प् रही थी...

जिसे असलम देख लेता है..

असलम स्माइल देता हैं “ रुकसाना बेगम, लगता है आपको हमारा हतियार पसंद आया ..
 देखो कही आप हमारे हतियार की दीवानी

हो जाएंगी ..

एकबार इसको इस्तेमाल तो करके देखिएगा

एक असली मर्द क्या होता है ये आप समझ जाएंगी...

असलम के ऐसे अश्लील बाते सुन के रौशनी खुदको सँभालने की कोशिश करती है ..
 असलम रौशनी का हाथ पकड़ कर अपने चड्डी मई छुपे लुंड पर रख देता है...

जिससे छू कर रौशनी को जोरो से करंट लगता है..

असलम का लुंड किसी नाग की तरह फहकार मर रहा था...

रौशनी अपना हाट वह से नहीं हटती है .. बल्कि उसके असलम के आखो मई देख बड़े हे प्यार से सहलाने लगती है..

असलम रौशनी की आखो मई देखते हुए अपनी गन्दी से चड्डी को भी उतर देता है.

अब असलम के काले शरीर पर एक भी कपडा नहीं बचा था..

वो पूरा नंगा हो चूका था..

उसकी छाती सफ़ीद बालो से भरी हुई थी ..

और पेट भी थोड़ा बहार को आ रहा था..

लुंड का क्या बोलना ..

वो उसकी बॉडी का सबसे काला हिस्सा था..

पर वो मोटाई और लम्बाई मई बहुत बड़ा था..

असलम का लुंड कुछ जयदा हे लम्बा और मोटा हो गया था..

होंगे भी क्यों न उसके सामने उसके सपनो की पारी रौशनी जो कड़ी थी वो भी इस आज उसकी बेगम बन कर तैयार थी...

असलम के लुंड के आस पास सफ़ीद बालो का जंगली था..

रौशनी की नजर उसके लुंड पे पड़ती है

तो उसकी आखे फटी रह जाती है..

असलम का लुंड बिलकुल वैसा था जैसा अफ्रीकन लौड़ा हो ..





अब बहुत हे हॉट सन था , रौशनी जिसका शरीर दूध जैसा गोरा है वो सिर्फ एक काली ब्रा एंड थोंग मई असलम जैसे काले , बुड्ढे के सामने थे जो भी पूरा नंगा था ...

असलम खुद पर काबू नहीं कर पा रहा था.. रौशनी का मखमली गोरा बदन उस काली ब्रा , पंतय और भी जयदा नशीला लग रहा था.. जिसका नशा असलम को चढ़ता चला जा रहा था..

असलम " रुकसाना बेगम आज से आप सिर्फ मेरी हो.. इस असलम की ...

मई आपको बहुत प्यार करूँगा ...

मई आपको अपने रानी बनाऊंगा..

ऐसा रहते हुए वो रौशनी के बूब्स को मसाले जा रहा था और साथ साथ उसकी नैक को चूम भी रहा था...

उससे काट रहा था...

असलम अब अपने असली रूप मई आ रहा था.. वो अपना जंगली पैन रौशनी के मुलायम बदन पे दिखा रहा था...

असलम के काले और बाड़े हातो मई रौशनी के गूरे और मुलायम बूब्स पुरे समां गए थे ...

वो अब उसके निप्पल को अपने उंगलियों मई रख कर मसल देता है... जिससे रौशनी के चीक निकल जाती है..

रौशनी " थोड़ा आराम से असलम ...

दर्द हो रहा है... ाः ...."

असलम " हाँ मेरी जान .. जैसा तू बोले..

असलम अब मैडम से मेरी जान तक आ गया था .. आप से तू पर आ गया था...

रौशनी को पर इस्पे कोई ऐतराज नहीं था..

वो दोनों अब बहुत जयदा गरम हो चुके थे.. असलम बेहरमी से रौशनी के बूब्स मसल रहा था...

असलम अपना हाथ पंतय के अंदर ले जाकर

उसकी छूट के आस पास सहलाने लगता है..

असलम " मेरी जान तेरी छूट तो पूरी गीली हो गयी है...

और वो अपनी एक ऊँगली को उसकी छूट के अंदर डालने लगता है...
 क्या गरम है तेरी छूट ..जानेमन..

रौशनी कुछ नहीं बोलती बस आपके बंद कर खुद के सासो को कण्ट्रोल करने की कोशिश करती रहती है...

असलम अपनी ऊँगली को रौशनी की छूट के अंदर बहार करने लगता है...

असलम " उतर दू क्या तेरी चड्डी भी..

रौशनी कुछ नहीं बोलती और हां मई मुंडी हिला देती है..

जिससे देख असलम खुसी से उसकी पंतय को नीचे निकल के फ़ीक देता है...

अब रौशनी पूरी तरह से नंगी हो गयी थी...

असलम से अब रहा नहीं गया ..

उसने रौशनी को खुदकी तरफ खींचा और उसके गूरे मुलायम बदन को खुदके काले बदन से सत्ता लिया..

रौशनी असलम के लाल आखो मई देखती है, जिसमे उसके सिर्फ हवस नजर आ रही थी खुद के लिए...

ये देख कर वो थोड़ा और एक्साइट हो जाती है.. उसकी सासे तेज होने लगती है...

असलम रौशनी की आखो मई देखते हुए धीरे से अपने काले गंदे हूंठ रौशनी के गुलाबी, नरम, रसीले होंटो पे रख देता है, और वो पागलों की तरह उससे चूमने लगता है...

रौशनी " ममममममममम.......

रौशनी को दर्द हो रहा था ऐसे किसिंग से.. क्युकी असलम अपने पुरे जंगली अवतार मई आ गया था अभी..

इतनी जयदा रफ़ किश उसने कभी नहीं की थी..

लेकिन रौशनी असलम को रोकना भी नहीं कहती थी, खुद पर से हटाना भी नहीं कहती थी....

वो अब खुद बा खुद बुड्ढे की हवस का शिकार बने जा रही थी....

रौशनी को काफी दर्द हो रहा था...

वो असलम को थोड़ा धक्का देने की कोशिश करती है..

पर असलम उससे चूमते रहता है...

असलम अब अपना काला मुँह नीचे ले जाता है..

अब उसकी नजर के सामने रौशनी की गोरी , खुसबूदार छूट थी..





रौशनी और असलम दोनों नंगे एक छोटे दे गंदे कमरे मई थे इस वक्त..

असलम एक बार उसकी गूरे क्लीन पुसी को देखता है...

फिर वो बिना समय गवय अपना कला मुँह नीचे करके उसकी छूट पर रख देता है..

"owwwww...ahhhhhhh..uhhh..ahhhhhh....Aslam ....अह्ह्ह्ह....."

रौशनी के दिल दी धड़कन इस हरकत से बहुत जयदा तेज हो जाती है...

वो जोर जोरसे हाफने लगती है...

रौशनी की गर्मी अब बहुत बाद गयी थी...

असलम रौशनी की छूट गीली होती देख समझ जाता है की मर्ज रौशनी अब चुदाई के लिए रेडी है..

वो मन हे मन बहुत खुश हुए जा रहा था.. जिस पल का उसको हमेशा से इंतजार था... वो पल बस आने वाला हे था...

असलम बड़े हे प्यार से रौशनी की छूट चाट रहा था... वो अपनी जुबान को उसकी छूट पे फेर रहा था...





असलम को रौशनी को यु गरम करने मई बहुत मज़ा आ रहा था...

असलम अपनी जुबान को उसकी छूट के और अंदर डालने लगता है...

जिससे रौशनी की छूट काफी पानी छोड़ने लगती है...

रौशनी अपने हाथ से असलम के सर को उसके बालो मई दाल कर सहलाने लगती है..

और उसके मुँह को अपनी छूट पर दबाने लगती है...

रौशनी जो की एक शादीशुदा औरत थी और जिसने बस अपने प्राप्ति से hi चुदाई करि थी , कुछ महीनो में hi अब तीसरे बुड्ढे के साथ चुदाई का खले खेलने वाली थी. लेकिन अब उसको इस बात की कोई परवा नहीं thi..aab वो सिर्फ और सिर्फ मज़े करना चाहती थी और असलम की बेगम बनने वाली थी ..

असलम ने फिर से रौशनी को जकड लिया अपनी बाँहों में और दोनों एक गहरी चुम्बन में लग गए थे .. अब दोनों के बीच पूरी रात बाकी थी और रौशनी आज असलम से बहुत छोड़ने वाली थी रात भर उसकी बेगम बनकर.
 
असलम ने रौशनी को फिर से सीधा लिटा के उसपर झपट कर उसे अपने बाँहों में भरा और निचे लिटा कर उसके होंठो गालो और माथे को चूमते हुए चाटने लगा. वह अब रौशनी के चहरे पर लगी पसीने की हर बूँद को चाट रहा था और अपने जीभ से चाटते हुए उसके पुरे चहरे को गीला कर रहा था. रौशनी सिसकते हुए असलम से अपने चहरे को चटवा रही थी. चहरे को पूरा गीला करने के बाद असलम अब रौशनी की गर्दन को चाटने लगा फिर वह से उसकी चूचियों को उसकी जुबान से पूरा गीला कर उसने रौशनी के दोनों हाथो को पकड़ , उसके सर के ऊपर कर दिया. रौशनी की दोनों आर्मपिट्स अब उसके सामने आ गयी. रौशनी के हाथ ऊपर पकड़े थे असलम ने और उसकी आर्मपिट्स से निकलती bheenee-bheeni खुशबु कमरे में छाने लगी थी.

असलम अब रौशनी की चूचियों को चाटते हुए धीरे से उसकी आर्मपिट की तरफ मुंह ले गया और उसमे अपने मुंह को गार दिया. काँखो के मांस को मुंह में भरते हुए असलम वहां चूमने लगा और जीभ निकाल कर चाटने लगा. रौशनी की आर्मपिट्स में जमा पसीने का नमकीन पानी अब असलम के मुंह के अंदर जा रहा था और स्लैम बस रौशनी की आर्मपिट्स के पसीने के सुगंध को सूंघते हुए मदहोश होते जा रहा था. मनो उसे एक नशा सा हो गया था.

उसने रौशनी की आर्मपिट्स को chaatate-chaatate पूरी आर्मपिट को अपने थूक और लार से भिगो दी थी.









रौशनी जोरों से सिसकारियां मारते हुए हुए बोली "है haraamee....seeeeeei...ye क्या कर रहे हो असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ मम मेरी आर्मपिट्स चाटने लगे हो उफ्फफ्फ्फ़ ....ममममममम”

“ रुकसाना बेगम तुम्हारी आर्मपिट्स में जो पसीना रहती है उसकी सुगंध ने मुझे बहुत बार पागल किया hai.....haay आज मौका मिला है तो नहीं chhoruga....tumhaare पुरे बदन को chaatoonga.....gaand में भी अपनी जुबान daaloonga...haay मेरी बेगम आज मत रोकना mujhe....main पागल हो गया hoon.....ummmmmmmmm...."

रौशनी समझ गई की मैं सच में आज असलम उसे आसानी से नहीं छोड़ने वाला. उसको भी मजा आ रहा था. उसने अपना पूरा बदन ढीला छोर दिया था और असलम को पूरी आजादी दे दी थी. असलम भी अब आराम से उसके काँखो को चाटने के बाद धीरे धीरे निचे की तरफ बढ़ता चला गया और पेट की नाभि को चाटते हुए दांतों से पेटीकोट के नारे को खोल कर खींचने लगा

. इस पर रौशनी बोली "फॉर दे न.... असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ ...साड़ी तोह पहले hi निकल चुके ho....ufffff कामिनी मममम...."

असलम ने अब बारे को पूरा खींचते हुए पूरी पेटीकोट को निचे उतार दिया और दोनों टांग फैला कर उसके बीच बैठ एक पेअर को अपने हाथ से ऊपर उठा कर पेअर के अंगूठे को चाटने लगा. धीरे धीरे पेअर की उँगलियों और टखने को चाटने के बाद पुरे तलवे को जीभ लगा कर चाटने लगा असलम. फिर वहां से आगे बढ़ाते हुए उसके पुरे पेअर को चाटते हुए घुटने और जांघो को चाटने लगा. जांघो पर दांत गाराते हुए मांस को मुंह में भरते हुए चाट रहा था. रौशनी अपने हाथों से बेडशीट पकड़ते हुए छटपटा रही थी. असलम की ऐसी चटाई ने उसको पूरी तरह से गरम कर दिया था.









असलम ऊपर से निचे तक रौशनी की पूरी बुर चाट रहा था … ऊपर से निचे फिर निचे से ऊपर .. बीच बीच में अपनी जीभ पूरी तरह से रौशनी की बुर में घुसा कर चुस्त और फिर से ऊपर से निचे उसकी बुर्र चाट लेता .. रौशनी सिसकियों के ऊपर सिक्सकीयां मारती रही और पीछे से असलम बस उसकी बुर चाट चाट कर पूरा रास साफ़ कर रहा था …

“उफ़ असलम मियां अहह ममम.. हे भगवान् आप मेरी छूट चाटना कब बंद करेंगे ाहब उफ्फफ्फ्फ़ इतना भी कोई छूट चाट लेता हैं क्या ahhhh.mmmmmm हे भगवान उफ्फ्फ्फ़ ऐसी चटाई छूट की आठ उफ्फ्फ्फ़ ममममम”

असलम अब रौशनी की छटड़ों पर हॉक्स से थप्पड़ मारते हुए उसकी चूतड़ों को और फैलते हुए और जोरों से उसकी बुर चाटने लगा .. असलम तोह पागल hi हो गया था रौशनी की गुलाबी और फुदकती हुयी छूट देख कर … वह उसकी बुर चाट चाट कर लाल कर रहा था और ऊपर रौशनी बस चटपटा रही थी और सिसकियाँ मार रही थी ..

फिर असलम ने एक जोर से रौशनी की बाएं चूतड़ को काट लिया ..

“अह्ह्ह ोुछःह उफ्फ्फ असलम पागल हो क्या उफ्फ्फ्फ़ पीछे इतना क्यों काट लिया उफ्फ्फ्फ़,….

असलम कुछ न बोलै और फिर दूसरी चूतड़ भी काट ली …

रौशनी मुद गयी और असलम के सर पर मारी .. पागल .. मेरी चूतड़ क्यों काट रहे हो अह्ह्ह उफ्फ्फ दुःख रहा हैं …

रौशनी आगे की तरफ मुड़ी तोह असलम ने मौका पाया और फिर से आगे से hi रौशनी की बुर से अपने चेहरे को सत्ता कर उसकी बुर फिर से चाटने लगा .. और पीछे से उसकी चूतड़ों को दबोचता रहा .. असलम की इस हरकत ने तोह रौशनी की बड़ी ाः निकल दी .. असलम फिर से उसकी छूट चाटने में लग गया और रौशनी उसके सर को पकड़ कर अपने छूट को फिर से उसके मुँह पर मारने लगी …उसके सर के बालों पर अपने हाथों को फेरते हुए अपनी छूट उसके मुँह पर मारती रही .. असलम ने भी रौशनी की छटड़ों को पीछे से दबोचते हुए आगे धकेला और अपनी जीभ पूरी तरह से रौशनी की बुर की गहराई तक घुसा दी और बुर से रास निचोड़ निचोड़ कर चूसने लगा .. रौशनी का बदन सिहर उठा और वह अह्ह्ह उफ्फ्फ हे भगवान् ाः मेरी छूट की चटाई .. असलम मियां अआप ममम हहहह उफ्फ्फ आअह्ह्ह ममम एस्सस आह्ह्ह्ह बस ऐसी hi सिसकियाँ मारती रही ..”

असलम ने रौशनी की छूट अब तक 20 मं टाक चूसी थी और रुकने का नाम नहीं ले रहा था .. रौशनी भी उसके मुँह पर अपनी बुर मारती रही और अपनी बुर चतवती रही असलम से …इतना वक़्त तोह चुदाई में लेते हैं मर्द .. लेकिन असलम तोह बस उसकी बुर की चूसै में hi दुगना टाइम ले रहा था .. लेकिन रौशनी को कोई शिकायत नहीं थी और वह बस असलम से अपनी बुर चटवा रही थी…







आखिर कार कुछ आज घंटे की चूसै के बाद रौशनी अह्ह्ह उफ्फ्फ करते हुए झरने के करीब आ गयी ..

“आठ असलम मियां आपने तोह बस मेरी बुर चटवा चटवा कर मुझे अपने चरमसीमे तक ला गए हो अहह उफ्फ्फ मेरी बुर से सारा रास छूटने वाला हैं अह्ह्ह उफ्फ्फ असलम में आठ मममम एस एस असलम मियां ,.. मेरे बुर से रास छूटने वाला हैं अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़…”

असलम पागलों तरह छूट चूसते hi रहा और कुछ hi पलों में रौशनी ने असलम के सर को जोरों से जकड लिया और अपनी बुर उसके मुँह प[ar joron se chipka di aur ahhh ufff karte huye uski bur se jahdne lagi …. Uski bur se ras mano squirt kar raha tha aur aslam uski bur ka pura ras apne muh mein lekar chus gaya … Roshni ke pair niche kaanp arhe the aur wah jhar rahi thi sara ras sidhe aslam ke muh mein .. ahhbufffff mein Jhar rahi hun aslam miaynn ahhh ufff mmmmmm mere miyan aap ne chaat chaat kar bura haal kar diya haina hhb mere ras ko piyo miyan ahahhh ufff mmmmmmmmm…….”











रौशनी का झरना कुछ मींचे चला और आखिर कार पूरा रास वह असलम के मुँह में जहर गयी और फिर निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी .. असलम भी उसके बगल में गिर पड़ा और दोनों हांफते हुए अब एक दूसरे की बिस्तर पर ेते जोरों से चूमने लगे …. रौशनी की जीभ असलम के मुँह में उसके मुँह का रास पि रही थी और असलम की जीभ रौशनी के मुँह में उसके मुँह का रास पि रहा था …. दोनों पागलों जैसे इतनी गहरी चुम्बन के अघोष में लग गए थे की एक दूसरे से जुड़ा होने hi नहीं वाले थे …

अब तक तोह बस छूट छतवई से hi रौशनी और असलम का माशूकाओं जैसे हाल हुआ था ,.. अब तोह चुदाई बाकी थी और ढेर साड़ी मस्ती .. रात जवान थी और एक बुद्धा और एक गदरायी शादी शुदा महिला बिस्तर पर अपनी रास लीला की बस शुरुवात hi करि थी …

आगे का खेल और भी लम्बा और बढ़िया सा होने वाला था … आज उस कमरे में बड़े से बड़े विस्पोट होने वाले थे .. लावा उगलने वाला था और तबै मचने वाली थी …

कुछ 5 मं बाद असलम का लोढ़ा जो अभी भी गर्म था और प्रेकम काफी निकाल रहा था उसे वह हिलने लगा .. फिर रौशनी को देख बोलै ..

“तुम्हरी मलाईदार रास भरी छूट को तोह चाट लिया हैं .. अब ज़रा मेरे इस बेकाबू लुंड को चूस रुकसाना बेगम .. चलो निचे बैठो मेरी बेगम रानी और मेरा लुंड चुसो. खोलो अपने गुलाबी होठों को और मेरा मोटा लुंड लो मुँह मई. "

रौशनी की आग अभी भी जल रही थी … उसकी आँखें हवस से भरपूर लाल हो चुकी थी और असलम की हर बात मैंने के लिए वह तैयार थी..

रौशनी अब निचे बैठके असलम का लुंड सहलाने लगती है

असलम अब रौशनी के बाल पकड़के लुंड उसके मुँह मई अपने लुंड को डालते हुए कहता है, “चलो डार्लिंग अब मुँह खोलो और मेरा लुंड चुसो. ठीक से लुंड चुसो मेरे लुंड को रुकसाना बेगम. "

रौशनी भी बड़ी आज्ञाकारी तरीके से अपनामुह खोलके असलम के मोठे लुंड को आपने होठों के बीच लेते हुए चूसने लगती है. रौशनी कुछ hi पलों में हवस की गिरफ्त में बेशरम होक उसका लुंड चूसने लगती है.

रौशनी का मुँह लुंड से halke-halke छोड़ते असलम बोलता है, "आह्ह्ह्ह अच्छा लग रहा है तेरे मुँह मई लुंड डार्लिंग.









अब बोलो भी की तुम्हे मेरा लुंड चाहिए और फिर छुड़ेगी मेरे लुंड से"

रौशनी बेशरम होक असलम की नंगी कमर मई हाथ डालके उसका लुंड पुराचुस्ने लगती है. असलम के लुंड इतनी देर तक झूलते हुए देख उससे असलम के इस लुंड से छोड़ने का बहुत मान कर रहा था.

अब पूरा लौड़ा अच्छे से चूसते रोशनिबोली

" मुझे आपका लुंड चूसना है बहुत बड़ा मज़्ज़ा आ रहा हैं असलम मियां… "



इस बात को सुन कर बड़ा खुश होते हुयेअसलाम, रौशनी के बाल पकड़के अपना लुंड उसके मुँह मई और अंदर तक डालते हुयेकेहता है, “अह्ह्ह उफ्फ्फ बेगम आज तोह ऐसी लुंड की चुसवाई करो की रास hi पि जाओ अह्ह्ह्ह मेरी डार्लिंग. “

पूरी तरह बेशरम होक अब रौशनी बोली, "हाँ असलम मियां बहुत चूसूंगी आपका यह लुंड .. इतना प्यारा हैं ..” रौशनी इतना बोलके फिरसे असलम का लुंड जोरों से चूसने लगती है.

असलम खुश होक रौशनी से अपना लुंड चुसवाते रहता हैं और फिर झुकके उसके मम्मो को रगड़ते अब असलम रौशनी का मुँह छोड़ रहा था. रौशनी जो बड़ी प्यासी थी वह भी बड़े मस्ती से बेशरम होक असलम का लुंड चूस रही थी.







उफ्फ्फ क्या मस्त लुंड चूस रही हो रुकसाना बेगम . उफ्फ्फ तुम तोह बहुत गर्म माल हो, बहुत माज़ा आएगा तुम्हे छोड़ने को रुकसाना बेगम. “

अब असलम बीएड पर बैठ जाता हैं और रौशनी को बिस्तर पर लिटा कर उससे अपना लुंड चुसवाते हैं.

रोषबी अब असलम का लुंड पकड़के बड़ी मस्ती उससे मुठ मरते चूस रही है. लुंड पूरा गिला करके उससे चुस्की, बाहेर निकालके फिर से उसको पूरा चटके फिर मुँह मई डालके जोरसे चूसते अब रौशनी अपनी चूचियों को खुद मसल रही थी. अच्छे से असलम का लुंड चुस्की रौशनी अब असलम की झंगहोंपे hi बैठके अपने चूचियों को असलम केमुह मई डालके कहती है, "ओह्ह्ह असलम उफ्फ्फ, माज़ा आपका लुंड चूसने. ओह्ह्ह्हह असलम मियां उफ्फ्फ मममम अब सहा नहीं जाता, आओ और अपनी बेगम की चुदाई करो …"

अच्छे से रौशनी के चूचियों को चुस्की असलम उसकी गांड मसलते बोलता है.

“ अरे रुकसाना बेगम अभी तोह तुम्हे कुछ ऐसे करना हैं जो हम बहुत करते थे .. तुम तोह भूल hi गयी हो ..

रौशनी आश्चर्य से असलम को देखती हैं …

“अरे रुकसाना बेगम तू तोह भूल hi गयी … तू अब मेरी गांड चाटेगी, जैसे हम कई बार किये हैं . बोल चाटेगी न मेरी गांड रुकसाना मेरी बेगम?"

गांड चाटने की बात सुनके रौशनी को घिन नहीं आयी बल्कि उसमें इतनी गर्मी थी की वह किसी भी बात के लिए तैयार थी. बिना कुछ बोले उसने हाँ मई अपना सर हिलाया. रोशनीकी रज़ामंदी देख असलम खुश होक दोनों हाथो से अपनी गांड फैलाके बीएड पे सोये रौशनी की उसकी गांड चाटने को इशारा करता हैं. एक बार असलम की गांड देखके रौशनी ने अपने हाथ उसकी कमर मई डालके, उसकी गांड को पास लेट अपनी जीभबाहर निकली. पहले तो अजीब से टास्ते लगने से उसने अपनी जीभ हटाई लेकिन असलम के फिर से उसे बोलने पर उसने अपनी जीभको असलम के गांड पे लगाई. 2-3 बार हलके से गांड चटके उसने फिर पूरी गांड पे झीब फेरने शुरू किया. रौशनी पूरी तरह से असलम की छूट चाटने में मस्त हुयी और 5 मं तक असलम की गांड चाट चाट कर साफ़ करने लगी.





असलम भी अब 69 पोज़ में आना उचित समझा . रौशनी उसकी गांड फैला कर चाट रही थी और असलम

उसके चूचियों को जोरों से दबाते रहा ..

अब रौशनी jaise-jaise और जोरसे गांड पे झीब घूमने लगी तो असलम ने अपना लुंड रौशनी के हाथ मई देते हुए उसकी छूट मई ऊँगली करते कहा, "अह्ह्ह्ह बेगम … क्या मस्त चाट रही हो मेरी गांड. और छतो मेरी गांड..

गांड चाट चाट कर मेरे लुंड को और जोरसे भी हिला मेरी जानेमन बेगम. "









अपनी गांड रौशनी से चटवाके असलम अब फिर से अपने मुँह को रौशनी की गिल्ली गर्म छूट में दाल चाटने लगा और एक ऊँगली से रौशनी की गांड रगड़ने लगा. छूट मई असलम की जीभ और गांड पे ऊँगली पके रौशनी और सिहर उठी और उसने अपनी कमर उप्पर करते असलम के मुँह पे अपनी छूट रगड़ते बोली





"उफ़ असलम फिर से चट्ट्टो मेरी छूट, बहुत दिनों से प्यासी हूँ. असलम मियां आप जी भरके चाटिये मेरी छूट हैईईई उफ्फ्फ्फ़ मममम उउउउइइइइइइ माआआआआ. "

रौशनी की छूट को अपने जीभ से छोड़ते, उसकी गांड मई ऊँगली डालते हुए असलम बोले, "रौशनी यह छूट मेरी बेगम की छूट है. क्या मस्त गदरायी माल हैं मेरी बेगम .. "

असलम की गांड चटके गिल्ली करते रौशनी पूरा लुफ्त उठा रही थी. उसे तोह अब गांड चाटने मई ज़रा भी ख़राब नहीं लग रहा था. किसी मर्द से ऐसा माज़ा उससे आज पहले बार मिल रहा था. असलम की गांड और गोटिया चटके, उसके लुंड को मसलते वह बोली, "देखिये न आपकी बेगम की छूट कैसे तरस गयी है आपके लुंडसे छुड़वाने, प्लीज असलम मियां अब छोड़ डालो मुझे, अपनी बेगम को और मत तरसाओ. "

रौशनी की छूट मई 2 उंगलिया डालके असलम बोले, "हाँ मेरी बेगम रुकसाना में आज तुझे जी भरके छोडूंगा. सबसे मस्त छोडूंगा, जो मस्ती किसी मर्द ने छोड़ते वक़्त तेरे साथ नहीं करता वह सब मई करते तुझे छोडूंगा.”

रौशनी भी एक बड़ी सिसक मारते हुए ज़ोरो से असलम के मोठे काळा लुंड को मुठ मरते बोलती है, "ओह्ह असलम मियंन्त्र आपको जो करना है कर लेकिन मुझे जी भरके छोड़िये मियां. आओ असलम मियां अब छोड़ डालो अपनी रुकसाना बेगम की फुदकती छूट . "

असलम अब खड़ा हुआ और रौशनी को बिस्तर पर लिया कर अपने लोडे को सहलाते उसके तरह बढ़ा ..

अब आख़िरकार असलम और रौशनी की चुदाई होने hi वाली थी .. असलम अब रौशनी को अपनी चूड़ाकड बेगम बनाने तैयार था.





 
असलम अब रौशनी के पास आता हैं . रौशनी बस असलम के मोठे और काळा लुंड को लटकते और झूलते देखती हैं और बस देखते hi बड़ी सिसकियाँ मार रही थी .. असलम भी अब रौशनी के पास खड़ा होकर उसके गदराये बदन को देखने लगता है उसने इतनी

गदराई और मस्त नंगी औरत अपने जीवन मई कभी नहीं देखि

थी और वह सीधे जाकर रौशनी से चिपक जाता है,

“रुकसाना बेगम तेरी बहुत मस्तानी छूट है तेरी जैसी छूट देख कर दुनिया का

हर आदमी तुझे छोड़ने के लिए मरने लगे तेरे जैसी गदराई माल जिसकी भी होगी वह काम से काम 4 बार रोज तुझे नांगीकरके छोड़ेगा, तेरा पूरा बदन ितं भरा हुआ है उफ्फ्फ मेरी बेगम”









असलम अब रौशनी को पीठ के बल लिटा कर उसकी मोती मोती जांघो को चूमने

लगता है कभी वह उसके गदराये पेट नाभि को चूमता

है कभी उसकी पहली हुई बुर को चूमता हैं. वह रौशनी की छूट और गांड की छेदों को अपने मुँह से दबा दबा कर सूंघता है फिर अपनी लम्बी जीभ निकल कर फिर से

रौशनी की पहली हुई बुर की मोती मोती फैंको को फैला कर उसके गुलाबी छूट के छेड़ मई अपनी जीभ दाल कर उसके छूट का रास चूस चूस कर पीने लगता है और निचे रौशनी बस सिसकियाँ मारती हुई असलम के सर पर हाथ फेरत्न लगती है.

रौशनी –असलम मियां खूब चूस और जोर से चूस अपनी बेगम की बुर सारा रास पी जा मियां , मई काफी दिनों से तड़प रही हु आज सारा रास पी ले मियां. अपनी बेगम की छूट का आह आह ओह ओह ऐसे hi आह आह और असलम भी रौशनी के बुर को फैला फैला कर दबोच दबोच कर कभी उसकी गांड के छेड़ को कभी उसकी छूट के छेड़ को छत्ता है और रौशनी पूरी मस्ती मई अपनी कमर हिला हिला कर अपनी छूट को उठा उठा कर असलम के मुँह पर मरने लगती हैं.

असलम अब खड़ा हो जाता हैं और अपने मोठे काळा लोडे को अब रौशनी की छूट को ऊपर अच्छे से उभर कर अपना मोटा लुंड रौशनी की छूट के छेद पर रगड़ते हुए .. एक दम से कर एक कास कर धक्का मरता है और उसका लुंड रौशनी की छूट में पूरा एक hi बार में समां जाता है.

असलम रौशनी के ऊपर चढ़ कर उसके चूचियों को दबोचते हुए उसकी छूट को kas-kas कर छोड़ने लगता है,

रौशनी बस आह असलम मियां आह उफ्फ्फ्फ़ ुह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह करती हुई निचे से अपनी चूतड़ों को utha-utha कर असलम के मोठे लुंड पर मरने लगती है, असलम रौशनी पर चढ़ा कर खूब kas-kas कर उसकी छूट कूटना शुरू कर देता है रौशनी अपनी दोनों टैंगो को उठाये अपने छूट मैं असलम का लुंड खूब kas-kas कर लेने लगती है.

रौशनी सिसकियाँ मारती हुई “ ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh….ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh….uiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…..ahhhhhhhhhhhhhhhhh marrrrrrrrrrr gyiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii”Aslam मियां बड़ा मस्त लुंड है आपका छोड़ और छोड़ अपनी बेगम को खूब kas-kas कर छोड़ आज चोदे दे अपनी बेगम की मस्तानी छूट को खूब तेज ठोकर मर अपने मोठे मुसल लुंड से उफ्फ्फ्फ़ छोड़िये अपनी बेगम की छूट को आह आह ahhahhhhhhhhhhhhhhhh पूरा मस्त बना diyaaaaaaaaaaaaaaaa mujheeeeeeeeeeeee अपनी”









रौशनी ऑंखें बंद किये असलम के लुंड का मज़ा ली रही थी

रौशनी और भी जोरों की सिसकियाँ मारती हुयी “ ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh असलम मियां रुक jaaaaaaaaaaaaaaaa zaraaaaaaaaaaa मगर असलम आज कहाँ रुकने वाला था.

असलम अपने लोडे को रौशनी की छूट में सरासर मारते हुए “ahhhhhhhhhhhhhhhhh कैसा लग रहा है बेगम मेरा के लुंड को लेकर”

वो इतने ज़ोर ज़ोर से रौशनी के छुड़ाए करने लगता है के रौशनी का मुँह खुला का खुला रह जाता है सिर्फ हवा उसके मुँह से निकलने लगते है

रौशनी किसी तरह बोलती हैं “आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़िये मुझे अहह …. ..छोड़ अपनी बेगम को रंडियो की तरह… .अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मसल मेरे चूचियों को और कास कास क छोड़ छूट मेरी.

असलम ढाका धक् पेल रहा था और रौशनी लपलप पिलवा रही थी

असलम चुदाई करते हुए हाँफते हुए “क्या माल है ऋ tu.....oohhh maaaaaaaaaaaaaaaa...............kya छूट है teri..........kya मस्ती है re...................din रत पेलुँगा तुझे मेरी बेगम .. .

असलम रौशनी की छूट mar-mar कर मस्त लाल कर देता है और फिर असलम अपने लुंड को बहार निकल कर बड़े प्यार से रौशनी की छूट को चाटने लगता है वह रौशनी को पूरी तरह मुंह के बल जमीन से सत्ता कर उसकी चूतड़ों को ऊपर उठा कर अपनी बेगम की चूतड़ों के बीच के छेद में थूक laga-laga कर पहले अपनी एक ऊँगली दाल कर छूट चाटने लगता है

फिर असलम अपनी दो उंगलिया रौशनी की गांड में दाल कर उसकी छूट के गुलाबी और रसीले छेद को चूसने लगता है,

रौशनी मस्ती में झुकी हुई अपने भरी चूतड़ मटकती रहती है और सिसकती रहती है,

रौशनी पुरे वक़्त असलम के मोठे और काळा लोडे को सहलाती हुयी रहती हैं .

Roshni,,,”aaaaaaaaaahhhhhhhh

ुह्ह्हह्ह्ह्ह म ahhhhhhhhhhh कितना मोटा लुंड है आपका असलम मियां अहहहजहहहहहहहहह





फिर से असलम पूरा का पूरा लुंड रौशनी की छूट मई उतारते हुए झटके मारना शुरू कर देता है, कुछ hi पालो मई असलम के हाथ की उँगलियाँ रौशनी की गांड के छेद के ऊपर चली जाती है,

असलम, “आआह्ह्ह्हह क्या कदककक माल हाई तू begum……puri गरम गांड और मस्त छूट हैं …….माजा आ गया आज तोह…..”

रौशनी जोरों से सिसकियाँ मारते हुए “aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh………haiiiiii raammmmmmmmmmmmmmm………..marr रर गईइइइइइइ मेरिइइइइ छूट”

और असलम रौशनी की गांड को पीछे से खड़े खड़े मारने लगता है और उसका एक हाथ रौशनी की गांड के छेद में फांसी रहती हैं

….

और उसकी रफ़्तार रौशनी की छूट मारते हुए बढ़ती hi जा रही थी जिससे रौशनी की सिसकिया तेज हो गयी थी और अब वोह और भी मज़्ज़े लेने लगी थी.

रौशनी,, “छोड़िये असलम मियां छोड़िये अपनी बेगम की छूट ……….ahhhhhhhhhhhhhhhhhh……

असलम भी जोर जोर झटका क साथ रौशनी की छूट छोड़ रहा था, उसका एक हाथ रौशनी की गांड के छेड़ को मसल रहा था. कुछ देर बाद असलम रौशनी क कमर दोनों हाथो से पकड़ क उसे जोर जोर छोड़ना लगा .इस प्रकार चुदाई से रौशनी बहुत गरम हो रही थी और बार बार और तेज़ी से असलम को चुदाई करने को बोल रही thi….ahhhhhhhhhh ाहः अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ की सिसकियाँ मारते हुए.

असलम भी अब रौशनी की चूचियों को कास कास कर दबा रहा था,

रौशनी -- जगह अह्ह्ह ओह ओह्ह ओह मियां तेरा बहुत मोटा है

असलम बस जोर जोर उसकी छूट मई धक्का लगता हुआ रौशनी की चुकी दबाते हुए उसके गलो को चुम कर, “ तेरे चूतड़ भी तो इतने भरी है की इन्हे मेरे जैसे तगड़े लैंड की hi जरुरत थी है न,

रौशनी- है असलम मियां आप सच कह रहे हो ऐसी hi चुदाई करिये .. अह्ह्ह उफ्फ्फ ममम बहुत अच्छा लग रहा है, है ऐसे hi आह ओह सीईई आह यह छोड़ छोड़ मुझे ..”

असलम की धक्को की रफ़्तार बढ़ने लगी और अब उसका लुंड रौशनी की छूट मई सत्ता सात जाने लगा था . असलम के लुंड मई बहुत जोश भर गया था और असलम खूब कास कास कर उसकी छूट मरने लगा, रौशनी भी असलम क धक्को के जवाब मई अपनी गांड कास कर असलम क लोडे पर मरती और पूरी तरह उछाल उछाल कर चुद रही थी और फिर असलम उसकी छूट मई धक्के मरता और थापक कीआवाज गुजने लगती.

असलम रौशनी का चुकी को मसलता हुआ छूट को दबोचता है इसा रौशनी ahhhhhhhhhhh क्र क उठ टी अह्हह्ह्ह्ह मियां उम्मम्मम्म nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह. असलम और जोर जोर से उसकी छूट मैं लुंड डालता है





Roshni“””ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh choddddddddddddddddiyeeee मियंन्त्र अपनी बेगम की छूट माररररररर जोररर सीई पुराआ लुँड्ड्ड अंदर दाल दे …

इधर असलम की उसकी गांड दबोच ने से रौशनी खूब गरम हो जाती है ओह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह करती हुई बिस्तर लेट जाती है जिससे असलम का लुंड रौशनी क छूट से बहार आजाती है

रौशनी अब लेट के असलम को देखने लगती है उसकी नज़र अब असलम की नज़रों से टकराती है और दोनों एक दूसरा को काम वासना भरी नज़र से देखते है तभी और तभी Roshni;ke छूट से पानी के फुवार बहार निकलने लगते है और वो असलम को अपने ऊपर आने की फिर से दावत देते हुए अपने दोनों पेअर खोल देती है.

असलम अपने लुंड पे थोड़ा सा थूक गिरता है और रौशनी के तंग को अपने हाथ में पकड़ के लुंड को जैसे हे रौशनी के छूट पे रखता है रौशनी के ऑंखें बंद होजाते है और छूट खुलते चले जाते है.

रौशनी असलम एस्सस उफ्फ्फ मममम

असलम – “अह्ह्ह्हह्हह बेगम ahhhhhhhhhhhhhh सश्सस्स्स्सस्स्स्स

रौशनी “अह्हह्ह्ह्ह असलम मियां आपका बहुत मोटा और बड़ा लुंड है रईईईई मर जाऊँगी मई अह्हह्ह्ह्ह थोड़ा आराम से धक्के मरना असलम मियां.

असलम ;को कुछ सुनाये नहीं देरहा था न कुछ समजह आरहा था बस दिमाग में एक आवाज़ घूम रही थी असलम अपनी रौशनी बेगम को बस छोड़ने की

रौशनी असलम मिउआअन अअअअअ उफ्फ्फ ममम धीरे धीरे अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह धीरे reeeeeeeeee.

असलम “अरे मेरी बेगम , छोड़ने दे न अह्ह्ह्हह्हह ऐसे मज़्ज़ा मुझे आज तक नहीं मिल्स हैं अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कसम से बेगम तेरी छूट का जवाब नहीं है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. मेरी बेगम मुझे तू रोज देगी न तेरी ये मस्तानी छूट

Roshni-ha असलम मियां उफ्फ्फ मम रोज छोडूंगी आपके मोटा लुंड से

रौशनी-- अह्ह्ह छोड़ता रह अह्ह्ह दाल दाल अह्ह्ह ऐसे hi डालता रह ुह्ह्हहभ ..

रौशनी की निचे से गांड उछाल रही थी तोह असलम ने उसकी चूतड़ को पकड़ राखी और रौशनी ने उसके छूट को ऊपर hi दबती रही और असलम के ऊपर से लुंड को गप गैप खा रही थी और उसकी छूट क पानी मैं फच फछहः लुंड अंदर बहार होने की आवाज़ गूंज रही थी और वह छोटा सा कमरे मैं दोनों चुदाई क मज़्ज़े लुटा रहे थे इ.

असलम --रौशनी का चुकी को चुस्त हुआ hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii बड़े मज़ेदार है रे तेरे आम , तेरा छेद ahhhhhhhhhhhhhhhhhh बेगम मजा आ रहा है न मेरा सांप तुम्हारे बिल मैं घुसा क अह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhh , पहले बता दिए होता अब तक कितनी बार तेरे अम्म का रास पि लिए hota...tera छेद भी पेल देता तेरा और तेरे छेद और खोल देता अह्ह्ह उफ्फ्फ मम ले खा खा मेरा लुंड ahhhhhhhhhhhh

निचा से ढाका मरती ऊपर से लुंड कहती रौशनी की बुर चार्म सिमा पर पहुँच गई थी और वह अपनी टैंगो को फैलाती हुई असलम को कमर पे कस्ती हुई गांड को उछलती हुई चिलाती अह्ह्ह उफ्फ्फ मियां मर दे तेरी बेगम की छूट ssssssssss उफ्फ्फ्फ़ मियांणं aaaaaaaaaaaaaaaaa hhhhhhhhhhhhhhhhhnnnnaaaaa आआ दाल दे पानी बेगम की छूट क अंदर ahhhhhhhhhhhhhhhh अपना घोडा जैसा लुंड का माल दाल दे बेगम की छूट क अंदर ahhhhhhhhhhhhhhhh मियंन्त्र ahhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhh माआआआ ahhhhhhhhhhh दाल दे छुट्ट्ट्ट ममममममममम

असलम भी ओर्गास्म के करीब था और जोरों से चुदाई करते हुए कास कास कर दो चार धक्के देता हुआ रौशनी की छूट मैं पानी का फव्वारा चोर्ने लगता है. असलम और रोशिनी अब अपने होठों से अपने होठों को चिपका देते हैं और दोनों क बदन अकड़ जाते है और दोनों इतना चिपके हुआ थे और दोनों पसीने से लटपट थे. रौशनी की छूट मैं जब असलम का लुंड का माल गिरने लगा तो उसे लगा की उसकी दिनों की प्यास बुझ गई हैं.

रौशनी की गर्मी तोह अभी भी बहुत थिस ुर कुछ 5 मं बाद रौशनी उठ कर असलम के लुंड को किसी कुटिया जैसे सूंघते हुए फॉर से चूमने लगती हैं और चाटने लगती हैं और फिर चूसने लगती है













और असलम रौशनी के mote-mote दूध और पेट और उसकी छूट में खूब सारा तेल लगा कर उसे खूब चिकनी कर देता है.

फिर उसके बाद असलम रौशनी को अपने साइन से चिपका कर उसकी छूट में अपना लुंड फिर से पेल देता है और अपनी बेगम के होंठो को पिटे हुए उसके दूध daba-daba कर उसकी छूट को खूब kas-kas कर छोड़ने लगता है,

रौशनी अब अपने पेरो को हवा में उठा कर मोड़ लेती है और असलम के लुंड को अपनी छूट पर खूब दबोचने लगती है, असलम रौशनी की चूतड़ों के निचे हाथ दाल कर उसके भरी चूतड़ों को अपने हाथो में भर कर जोर से दबोचते हुए रौशनी की छूट मैं सटासट लुंड dal-dal कर ठोकने लगता है,

और वह अपना मोटा लैंड रौशनी की बुर में थोक देता है और रौशनी की नंगे बदन पर लेट कर उसे

पागलो की तरह चूमते हुए अपने लैंड के झटके रौशनी की छूट पर मरने लगता है, रौशनी भी अपनी पूरी तंग उठा उठा कर असलम के लुंड के झटको का जवाब देने लगती है और बड़ी सिसकियाँ लगायी हैं और तभी असलम अपने पंजो के बल बैठ कर रोशिनी मि बुर में तगड़े झटके मरने लगता है और पहच पहच की आवाज़ों से पूरा कमरा गूंजने लगता है

फिर असलम अपने दोनों हाथों मई रौशनी के दूध पकड़ कर उन्हें दबाते हुए उसकी छूट खूब कास कास कर मरने लगता है.

रौशनी आह आह करती हुई अपनी छूट को उसके लैंड पर मरने लगती है उसकी छूट के पानी से असलम का लैंड पूरा गिला हो जाता है और इससे असलम का मोटा लोढ़ा और आसानी से रौशनी की छूट मई सटासट अंदर बहार होने लगता है.







बिना अपने लोडे को रौशनी के बुर से निकलते हुए वह रौशनी को घोड़ी बना कर उसकी छूट को पीछे से मरने लगता है और रौशनी की गांड को अपने हाथो से दबोचने लगता है. उसका मोटा लोढ़ा रौशनी की छूट मई सटासट अंदर बहार होने लगता है और उसकी छूट का छेड़ बिलकुल फैला हुआ दिखाई देता है असलम को.

असलम का कला मोटा लोढ़ा रौशनी की छूट को तबियत से छोड़नेलगता है. अभी तक तोह बस 1 घंटा hi हुआ था रौशनी को असलम से चुद कर .. अभी तोह पूरी रात बाकी थी और देखना यह था की असलम अब रौशनी की कौनसी कौनसी मुद्राओं में चुदाई करेगा ..
 
करीब दस मिनट तक रौशनी को छोड़ने के बाद असलम ने रौशनी को उल्टा करके झुका दिया और उसकी मस्त गांड को देखते hi पागलो की तरह रौशनी की गांड और छूट को पीछे की तरफ से बुरी तरह चाटने लगा, रौशनी जोर जोर से सिसकियाँ मारने लगी और इससे असलम रौशनी की गांड और छूट की मदहोश कर देने वाली महक को शुंग कर पागलो की तरह उसकी गांड के छेड़ और बुर को चाटने और चूसने लगा

करीब 5 मिनट तक छूट और मोती गांड की चटाई के बाद असलम ने फिर अपने मोठे लुंड को रौशनी की छूट में एक बड़े झटके के साथ अंदर पेलते hi रौशनी के मुँह से एक चीख निकल गई .. रौशनी के ऐसे चिल्लाने से असलम को और गरम कर दिया और वह सटासट अपना लुंड रौशनी की छूट में पीछे से कुटाई करने लगा.









असलम अब और जोर जोर से कास कास कर धक्के मरने लगा और रौशनी “हे भगवान् उफ़ असलम मियाँ आपका मोटा लोढ़ा अह्ह्ह मम एस्सस हैं और कुटाई करिये इस छूट की ाः ममम सिसकियाँ मारती रही. अब पुरे कमरे में ऐसे मस्त गर्मागर्म महिला बन चूका था की उनकी ठुकाई से थप थप की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी और फिर असलम ने और ने एक जोरदार झटका रौशनी की छूट में मारा और रौशनी की छूट ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया .. उसका पहला ओर्गास्म ज़ोरों से आ रहा था और अभी तोह चुदाई का खेल और लम्बा चलने वाला था क्यूंकि असलम ला लोढ़ा तोह अब तक ओर्गास्म से कोसो मिल दूर था ..





असलम बस रौशनी की कमर पकड़ते हुए धक्कों पर धक्के मारता रहा और रोष इस हह उफ़ की आवाज़ें करते हुए बस ज़हरटी hi रही . असलम तोह बस पागल हो चूका था और रौशनी भी अभी हवस के गिरफ्त में hi थी और अभी भी धरने के बाद भी चुदती hi रही . असलम भी कहाँ अपनी घुड़सवारी से उतरने वाला था .. बल्कि उसने रौशनी को आगे किआ ुर पेट पर धकेला की रौशनी पूरी बिस्तर पर hi पेट के बल लेती रही और पीछे से असलम रौशनी की छूट को तबियत से छोड़ता hi रहा ..









रौशनी अब पलंग की शीट को अपने नाज़ुक हाथों से पकड़ी हुयी हाँफते हुए बस असलम के लोडे को अपनी छूट में लेती रही और बड़ी से बड़ी सिसक मारती रही ..

असलम ने अपने हाथों को रौशनी के हाथों के ऊपर रखा और उन्हें पकड़ करा ुर जोरों से पीछे से रौशनी की बुर ठोकते रहा .. पहच पहच की आवाज़ें चल रहे थी असलम की तइस अब रौशनी की चूतड़ों से टकराती और वह आवाज़ें आती रहती .. रौशनी की चूतड़ भी इस पीछे से हमले से हिलती रही और बाउंस करती रही हु असलम के मोठे लोडे पर ..

“ये ले बेगम अहह मेरा लोढ़ा तेरी मस्तानी छूट में अह्ह्ह यस ले नमममम मेरी घोड़ी और में तेरा घुड़सवार अहह ये ले ले .. ले मेरा लोढ़ा अह्ह्ह्ह …

असलम अब पूरी तरह से पीछे से रौशनी की ऊपर लेता था और उसके हिप्स को ऊपर निचे करते हुए रौशनी की बुर की बुरी तरह से कुटाई कर रहा था .. रौशनी ऐसी चुदाई का बड़ा मज़्ज़ा ले रही थी और उसकी आँखें मदहोशी में बंद होती और फिर असलम के एक टैग्ड म्हात्रे से फिर से खुल जाती ..





रौशनी पीछे मुड़ी और असलम आगे झुका और दोनों के होठों ने मिलान पाया और असलम अब रौशनी की चुनते चुनते उसकी छूट की कुटाई जारी रखा .. असलम के होठों को चुम कर रौशनी हाँफते हुए चुस्ती हुयी बोल पड़ी “-अहह असलम मियां उफ्फ्फ मममम आज चुदाई में इतना मजा मिला जैसे में पहली बार चूड़ी हूँ अह्ह्ह तेरा ये लोढ़ा गज़ब का हे रे अह्ह्ह मेरी बुर की क्या हालत बना रहे हो अहह उफ्फ्फ मममम दर्द भी हैं लेकिन मीठा दर्द है रे आज ममम उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह मेरा पानी चूर चुकी हूँ फिर भी और छोड़ना चाहती हूँ तेरे लोडे से अहह ममम असलम मियां अह्ह्ह्ह मम एस एस अहह हे भगवान् उफ्फ्फ इतना दमदार लोढ़ा ाः उफ़ ममम”









“रुकसाना बेगम तेरी बुर भी तोह इतनी चंचल और मस्तानी हैं रे अहह मममम उफ्फ्फ मेरे लोडे में दम की वजह हैं बस तेरी यह फुदकती हुयी मस्तानी छूट अह्ह्ह मममम. कैसा लगा इस बुड्ढे का लोढ़ा अहह ये ले मेरी घोड़ी आअह्ह्ह मेरी घुडसवारीय तेरे लिए हैं बस आह्ह्ह्ह रुक्सानाआ बेगमममम”

रौशनी हांफती हुयी चुस्ती हुयी सिसकियाँ के बिच बिच बोली “वाकई में असलम मियां आपका यह बुद्धा लुंड तोह किसी गम गबरू जवान से भी ज्यादा सुन्दर हैं अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ क्या लुंड हैं उफ्फ्फ ममम तेरे इस लुंड में गजब की ताकत है अह्ह्ह्ह ममम एस उफ्फ्फ्फ़ , तुमने मुझे मस्त कर दिया है आज रात अह्ह्ह.”

असलम बोल पड़ा “रात तोह अभी नयी हैं .. अब तोह तेरी बहुत चुदाई करनी बाकी हैं अहह ममम उफ्फ्फ इस लोडे से तेरी मस्तानी फुदकती छूट को में रात बार छोडूंगा रे अह्ह्ह मममम .. उफ्फ्फ मेरी बेगम आह्हः यह ले मेरा दुमदार लोढ़ा तेरी छूट में अह्ह्ह्ह”







असलम ने फिर से रौशनी को अपने तरफ कर लिया और बिस्तर पर लिया कर उसपर चढ़ कर उसकी छूट की चुदाई साड़ी राखी .

बिस्तर को पकडे हु पागलों की तरह रौशनी की बुर ठोके लगा की फिर से उसे महसूस हुआ की रौशनी की छूट से गीलापन निकल रहा हैं ..

“उफ्फ्फ्फ़ बेगम अभी तोह झरि थी उफ्फ्फ्फ़ फिर से इतने जल्दी वापस उफ्फ्फ ममम”

रौशनी कुछ न बोली. असलम को रौशनी के चेहरे पर शर्मिंदगी दिखी ..

“उफ्फ्फ रुकसाना बेगम इतनी चुद रही हो और अभी शर्मा रही हो उफ़ मम ये ले .. ऐसी शर्म अब कैसे ाः देख मेरा लोढ़ा तोह तेरी छूट में hi पेल रहा हैं उसे ..”





“असलम मियां नहीं हु बात नहीं हैं हु यह हैं की .. उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह .. हु यह हैं की …”

रौशनी फिर से शर्म से लाल होते हुए आगे कुछ न बोली.

“बोल न अब कैसे शर्माना डार्लिंग .. जो चाहिए खुल कर बोलो .. खुल कर छुड़वा तोह रही hi हो तुम अहह ये ले मेरा लोढ़ा उफ्फ्फ ममम तेरी बूत इतनी चकनी हुयी हैं अह्ह्ह”

“हु असलम जी हु मेरा रास नहीं हैं बल्कि मेरे बुर से तेरे इस चुदाई ने तोह पीस…..”

“क्या बोल रही हैं बता जल्दी आआ यह ले नहीं बटेगी तोह और तबियत से ठोकूंगा ये ले मेरा लोढ़ा अह्ह्ह ये ले धक्के ..”

असलम तोह और जोरों से उसकी बुर की ठुकाई कर रहा था और रौशनी अब्दी सी बड़ी सिसकियाँ मार रहे थी”

“बोल न बेगम क्या हुआ ..”

“असलम मियां हु हु मेरे बुर का रास नहीं बल्कि अहह उफ़ मम एस अह्ह्ह हु मेरे बुर से आपकी चुदाई ने आज उफ़”

“अरे बोल न जल्दी अहह ये ले लोढ़ा.. बोल न क्या हुआ आह्व ममम बेगम बोलो अह्ह्ह”

“ असलम मियां हु रास नहीं बल्कि मेरी बुर से पिशाब निकल रहा हैं आपकी ऐसी ठुकाई के वजह से अहह ममममम पिशाआबबबबब निकल रहा हैं….”













असलम के चेहरे पर के मुस्कान आयी और उसकी ठुकाई की तेज़ी और बढ़ गयी .. वहां अब रौशनी से रहा नहीं गया और उसकी बुर से जोरों से पिशाब निकलने लगा और बीएड पूरा गिला कर दिया .. असलम की ठुकाई लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रही थीं.. अब तोह यह रौशनी के लिए एक अलग hi फाइलिंग थी और भी इंटेंस फाइलिंग .. वह पिशाब कर रही थी और ऊपर से असलम बस उसकी बुर को ठोके hi जा रहा था .. रौशनी को तोह पिशाब निकलते हुए चुद कर एक अलग hi मदहोशी छ रही थी और उसके पेअर अब काँप रहे थे .. उसकी पिशाब निकली और स्लैम के झटके जारी रहे . अह्ह्ह उफ़ मम्मीएस ओह गॉड यह क्या है अलग की मज़्ज़ा हैं ाः क्या फाइलिंग हैं असलम मियां उफ्फ्फ ममममम मेरे मूतने पर भी आप चीड़ रहे हह उफ्फफ्फ्फ़ क्या हो अआप ाहहमममम इतने चूड़ाकड होंगे नहीं लगा था आप जैसे बुद्धा अह्ह्ह्हह.”

असलम से अब रहा नहीं जा रहा था .. 2 घंटे से चुद रहे थी रौशनी उसके लोडे से और रौशनी की कितने से असलम को मनो अपने खुद के ओर्गास्म पर ला रखा था … असलम अब रौशनी के ऊपर पूरा वज़न दाल लेट गया और उसके स्ट्रोक्स थोड़े धीमे हुए क्यूंकि वह खुद झरने के पॉइंट पर था . उसे भी रौशनी जैसी मस्तानी बुर पहले बार मिली थी … ऐसी फुदकती छूट में उसका लुंड था .. उफ्फ्फ ममम उसके धक्के उसने और बढ़ा दिए .. उसके स्ट्रोक्स इतने बढे थे की उसका लोढ़ा ठुकाई के दौरान रौशनी की छूट से निकल गया और वह अहह उफ्फ्फ ममम जैसे बड़ी सी सिसकियाँ के साथ उसके लोडे से उसका गधा माल निकलने लगा और वह माल बिस्तर पर गिरते रहा और कुछ सेकंड बाद उसके मोठे लोडे से उसका पूरा माल निकल गया.

रौशनी अब बिस्तर पर पड़ी पड़ी हाफने लगी और असलम भी उसकी बगल में लेट गया उसके हाथ रौशनी के चूचियों पर थे और दोनों जोरों की साँसे लेने लगे.

रौशनी ने अपनी आँखे बंद कर दित hi .. कुछ सेकंड बाद असलम बे अपनी ऊँगली रौशनी की छूट के ऊपर से निचे तक रगड़ने लगा. इस से रौशनी सहम गई थी और “ओह अहह असलम मियां अच्छा लगा रहा हैं” ऐसे कहती रही.

ऐसे कहते हुए रौशनी की बुर से पिशाब असलम की उँगलियों के ऊपर फव्वारे के जैसे छूट गया. असलम ने फिर अपनी ऊँगली रौशनी की छूट पर रगड़ना जारी रखा. असलम बार बार अपनी उँगलियों को रौशनी की छूट पर और जोर से मसल दिया,

अब इससे रौशनी चिल्ला उठी, अह्ह्ह्हह असलम मियाणं!” “रौशनी जोरों से आवाज़ें कर रही थी को असलम उसके करीब लेट कर उसके होंठो पर अपने होंठो को चिपका दिया और रौशनी की होठों को चूसने लगा. रौशनी के निचे के होंठो को असलम ने उसके दांतों से हलके से काट लिया. फिर असलम बोलै “रुकसाना बेगम तुम भी अपनी जीभ बहार निकालो.

रौशनी ने भी अपनी जीभ बहार निकाली और असलम उसके होंठो से रौशनी की जीभ का स्वाद चखने लगा और फिर उसे चूसने लगा. रौशनी ने भी अपने दोनों हाथो को असलम के गर्दन पर दाल दी और उसके आँखों में मदहोशी से देखने लगी. अब असलम ने रौशनी की जीभ को उसके मुहँ में फिर से ले लिया और उसके होंठो को जोर से बंद किया और रौशनी की जीभ को बहुत प्यार देने लगा. अब रौशनी और असलम , दोनों hi अह्ह्ह्ह अह्ह्ह हम्म्म करने लगे थे.

रौशनी इस असलम के हरकत से पूरी मदहोश बन गयी थी और वह बोली “ असलम मियां उफ्फ्फ मम आप का थूंक बड़ा hi स्वादिष्ट हे ममम मुझे और पीना हैं अह्ह्ह.”

असलम बोलै “रुकसाना बेगम, मेरा तो सब कुछ स्वादिष्ट हे डार्लिंग”

रौशनी बोली “अच्छा ऐसे हैं असलम मियां उफ्फ्फ्फ़ फिर आज अपनी बेगम को अपने सब कुछ का सवाद दे दीजिये. असलम ने रौशनी के चूचियों को दोनों हाथों से रगड़ने लगा. “ रौशनी मदहोशी में बोली “ ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममम अह्ह्ह्ह असलम मियां और जोर से दबाओ न, रौशनी बोली पूरी छुडासी आवाज़ में. ये सुनकर असलम फिर से रौशनी की चूचियों को जोर जोर से दबाना जारी रखा.

रौशनी की चूचियों को दबाते हुए असलम ने अपनी थूंक रौशनी के मुँह में सीधे सीधे दाल दी.”

रौशनी भी मदहोशी से असलम के आँखों में देख उसका थूक की गयी .. असलम ने और दो तीन बार रौशनी के मुँह में थूक गिरा दी और रौशनी हर बार उसे ली गयी.

अब असलम ने अपनी बाहें ऊपर करि और उसे रौशनी के चेरे के पास ले गया .









रौशनी मदहोशी में अपने जीभ से असलम के बंगलों को चूमने लगी और चाटने लगी. असलम के बगलों में बाल काफी थे और वहां काफी पसीना था चुदाई के वजह से और रौशनी अब मदहोशी में उसके बगलों में मुँह दाल पूरा चाटने लगी और उसके बगलों के बालों से खेलने लगी और चूसने लगी .. रौशनी , एक अच्छी खासी शादी शुदा महिला को अपनी गन्दी बगलों को मस्ती में चाटते हुए देख असलम पगला गया और उसके अपने बागों को रौशनी के मुँह पर दबाया और उसे कास कर पकड़ लिया .. रौशनी तोह गर्मी और मदहोशी में बस असलम

के बगलों को चाट hi रही और फिर वही उसके असलम के दाहिने हाथ के आर्मपिट्स को भी चाटने लगी , चूसने लगी और मस्ती से स्वाद चखती रही. असलम का लोढ़ा रौशनी के ऐसे करने से फिर से पूरा सख्त हुआ और उसने उसे रौशनी के नाज़ुक लाल नेल पोलिश वाले हाथों में थाना दिया .. रौशनी एक हाथ से असलम के मोठे लोडे को सहलाती और उसके दोनों बगलों को बारी बारी चाटने लगी ..

असलम का लोढ़ा अब 2ंद राउंड की चुदाई के लिए पूरा तैयार खड़ा था … लेकिन अब रौशनी बस उसके बगलों को चाटने में hi मग्न थिस ुर असलम भी अपने बगलों को रौशनी से चटवाने में बड़ा मज़्ज़ा ले रहा था .. रौशनी ऐसे करेगी उसके साथ असलम ने कभी भी नहीं सोचा था .. वह रौशनी को जितना चाहे उसके बगलों को चटवाने देने वाला था .. फिर उसे अपनी गोदी में चढ़वाकए बहुत जोरों से चुदाई करने वाला था ..

रौशनी की बुर और गांड की अब खैर नहीं थी .. असलम तोह उसे तबियत से रात भर छोड़ने वाला था और रौशनी भी छोड़ने वाली थी रात भर असलम के काळा मोठे लोडे से .
 
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