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सुबह रौशनी की आँखें खुल जाती हैं … वह अपने आप को देखती हैं फिर बाजु में सोये रमेश के नग्न बदन को देखती हैं.
उसे शाम और रात में हुयी मस्ती की झलकें आँखों के सामने आ जाती हैं और शर्मा जाती हैं.
सलीम से छोड़ने के बाद जो उसे गिल्ट फीलिंग हुयी थी, वैसी फीलिंग न जाने क्यों उसे रमेश के साथ चुदाई के बाद आयी नहीं.
क्या वह चाहती थी की रमेश उसकी चुदाई करे और जो अब कर दिया हैं चुदाई तोह उसे कोई गिल्ट नहीं हैं या फिर दूसरी बार अब अपने पति पर चीट कर उसे हु पहली बार जैसी गिल्ट की फीलिंग नहीं आ रही हैं.
हु यह भी सोचती हैं की अगर उसके पति रोनित ने उसकी हवस को मिटै रहती तोह वह ऐसे दो मर्दों के साथ चुदाई नहीं करती और खासकर रमेश से खुद चुदती नहीं.. उसी की गलती हैं सब .. यही सोचती हुयी रौशनी उठ जाती हैं और बदन पर बेडशीट लपेटे बाथरूम चली जाती हैं..
आईने में खुद को हु देखने लगती हैं.. उसकी बाल बिखरे हुए थे , बदन पूरा लाल हो चूका था .. रमेश सच में जानवरों जैसे उसकी चुदाई करे थे . साला बुड्ढे होकर भी ऐसे चूड़ाकड होगा हु कभी सोची नहीं थी..

उन्होंने कितनी बार निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था रास भर ..गिनती भी नहीं कर पा रही थी रौशनी.. रोनित तोह ऐसी चुदाई करता नहीं था .. रमेश की चुदाई सलीम जैसे hi वाइल्ड थी लेकिन उसमें रौशनी को प्यार भी दिखाई दिया था .. सलीम के साथ चुदाई बस एक हवस मिटने की चुदाई थी. लेकिन सेल दोनों बुद्धों ने उसे काफी निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था और कई बार उसकी बुर से रास निकला था और कई बार खुद भी अपने अपने लुंड से इतना गधा माल छोरा था उफ्फ्फ्फ़. उसकी गांड की छेद में दर्द हो रहा था .. उस रमेश ने उसकी गांड की भी चुदाई करि थी ..: क्या तगड़े स्ट्रोक्स देते हुए छोड़ा था .. उसे तोह चलने में दिक्कत हो रही थी..
साले दोनों पागल चुदाई के भूके सांड बुड्ढे उसी को मिलने थे उफ्फफ्फ्फ़.
रौशनी अब मूतने बैठ जाती हैं और उसकी इतनी बड़ी सी धार निकलती हैं और निकलते जाती हैं .. उफ्फ्फ इतनी जोरों से पिशाब हो रही थी .. उफ्फ्फ रात को चूसते वक़्त भी उसकी काफी नुत निकल गयी थी .. ऐसी तोह बस एक जामदार चुदाई के बाद hi होती हैं उफ्फ्फ.
फिर अपने फेस अपर पानी छिड़क करा ुर वहां पड़े सोप से चेहरे को साफ़ कर हु बहार चली जाती हैं और रमेश अब बिस्तर पर बैठे अपने लोडे को हाथ में लिए रौशनी को देख रहा था ..
रमेश , रंगीन बुद्धा अब अपनी दोनों टांगो को चोरी करके बैठे रौशनी की और देख कर मुस्करा रहा था जबकि उनका 10 इंच का हथियार अब बी उनकी टांगों के बीच झटके मार रहा था . रमेश ने इशारे से रौशनी को पास आने को कहा तोह रौशनी शर्माती हुयी अपने आँखों से ये बताने की कोशिश करने लगी की उनका मोटा लुंड अभी तोह रात भर मेरी बुर में फसा हुआ था .. और अब फिर से तैयार हैं.

रमेश बस मुस्कुराया और रौशनी को इशारे से अपने लुंड को फिर से चुसवाने को कहने लगे.
रौशनी अब मुस्कुराते और शरमाते इधर उधर देखने लगी…
रमेश- जानू आओ ना देखो मेरा लोढ़ा कैसे फिर से खड़ा हैं, जरा इसको अपने होंठों से hi शांत करो, देखो अब ये तुम्हारे गुलाबी होंठों का प्यार फिर से पाने के लिए तड़प रहा हैं..
अब कोई भी औरत हो, हु जब मर्द उससे ऐसे तड़प कर अपने पास बुलाता हैं तो उस औरत के चेहरे की चमक एक्चुअली देखने लायक बनती हैं .. वैसे hi हाल था रौशनी का और वह दूर खड़े अब रमेश के मोठे काळा लोडे को देखती रही और मुस्कराती रही..
रौशनी “अरे रमेश जी अभी तोह शाम और रात भर मेरी बुर का ऐसे आपने हाल किया हैं .. उफ्फ्फ थोड़ा ब्रेक दीजिये उफ्फ्फ.”
रमेश बोलता हैं- वैसे सच कहु .. माँ कसम रौशनी तेरी जैसी मासूक हो ना तोह लोढ़ा खड़ा hi रहता हैं. कसम से एक दम मालदार लग रही हो .. अब नखरे न करो और चलो आ ना मेरे लोडे को चूस चूस कर इसका रास निकल दो फिर से..
अब रौशनी देख रही थी की रमेश अब इस तरह से खुली बातों से उसे उनकी माशूका बुला रहे थे और उसे फिर से उनका मोटा कला लुंड चूसने को बोल रहे थे…
रमेश का उसके साथ इस तरह रोमांस करते देख रौशनी भी फिर से थोड़े रोमांस के मूड मि आ गयी और हु रमेश के आँखों में देख उनके तरफ फिर से बढ़ने लगी .. और रमेश ने झट से रौशनी को फिर से अपने बाँहों में लेकर अपनी नाक को रौशनी की नाक से रगड़ने लगे और दोनों फिर से गहर्री चुम्बन में चले गए ..
रौशनी को अब रमेश के काळा भद्दे होठों पर अपने गुलाबी होठों को चिपकने में जार अभी शर्म नहीं महसूस हो रहे थी … निचे से उसका तना हुआ लुंड उसकी नाभि को छू रहा था और उसकी नाभि के अंदर अपना प्रेकम चोर रहा था …

उसे उस एहसास ने और गर्म कर दिया और वह जोरों से उसे चूमने लगी .. कुछ 5 मं तक राशन चलता रहा की उसकी नज़र ऊपर क्लॉक पर पड़ी.. सुबह के 9 बजे थे और उसे ंगो में काम पर भी जाना था .. वह रमेश से जुड़ा हुयी
“रमेश जी मुझे पहले घर जाना होगा और फिर ंगो … चलो न तैयार होने दीजिये ..”
“अर्रे मेरी जानू चोर दो आअज मेरे साथ hi बिताओ मस्ती में पल ..”
“‘नहीं रमेश जी जाना होगा प्लीज चलिए .. अब तोह जब भी बुलाओगे आउंगी .. लेकिन अब जाना होगा प्ल्ज़ जल्दी करिये..”
रमेश अब रौशनी की कमर को जोरों से दबाया हैं .. और रौशनी की मुँह से अहह निकल जाती हैं.
“अच्छा चलिए .. अब तोह आप और में दोस्त से भी बढ़ कर हैं …और रमेश अब आँख मारता हैं.
रौशनी अपना चेहरा अपनी हाथों में छिपाते हुए चली जाती हैं.
कुछ समय में दोनों तैयार होते हैं .. रौशनी अपना फ़ोन देखती हैं तोह सरप्राइज होती हैं की उसके पति के कोई मिस्ड कॉल्स भी नहीं थे .. क्या उन्होंने उसे मिस नहीं किया था, रात भर हु घर भी नहीं आयी थी , क्या उन्हें उसकी चिंता नहीं हैं ..
यशो सब सोचते अब रौशनी . रमेश के रिक्शा में बैठती हैं और रमेश उसे उसके घर ड्राप कर्तव्हीन.
“रौशनी जी चाहिए तोह से आपके साथ आपके घर … आपके बिस्तर” और रमेश आंक मारता हैं.
“धत बदमाश .. मेरे पति होंगे वहां .. कुछ भी कहते हो उफ्फ्फ आप रुको में आती हूँ.”
रमेश मन में ..(साला उसका पति नहीं होता तोह अभी उसी के बिस्तर में ले जाकर पटक पटक कर छोड़ता …)
“अच्छा, रौशनी जी आप तैयार हो जाइये में आपके लिए रुक जाता हूँ ..”
रौशनी स्माइल देते हुए अपनी चूतड़ों को हिलाते चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती डुलती चूतड़ों को देख अपना लोढ़ा दबाने लगता हैं.

रौशनी घर पर देखती हैं की रोनित उसके पति वहां पर नहीं थे ..
रौशनी फिर नहाने चली जाती हैं और फिर तैयार होने लग जाती हैं.. उसे काफी लेट हो गया था इसीलिए हु बस तैयार जल्दी होने में लग जाती हैं.
कुछ देर बाद तैयार होकर हु निचे रमेश की रिक्शा में बैठ जाती हैं और रमेश उसे ंगो ड्राप करता हैं.
रौशनी में शाम को आकर रुकूंगा यहाँ.. आप आइये फिर ले जाऊंगा में आपको..
रौशनी स्माइल देती हैं और आजु बाजू देखती हैं और कोई न दिखने पर हु रमेश के गलों पर अपनी गुलाबी होठों को चिपका देती हैं और फिर वहां से चली जाती हैं..
रमेश वहां खुश था की रौशनी जैसी मैरिड माल उसकी बन रही थी .. वह रौशनी के साथ ढेर सारी मस्तियाँ करना चाहता था …
रौशनी काम पर लग जाती है.. आज पहली बार उस दिन की चुदाई के बाद हु सलीम को कैसे फेस करे उसकी की सोचती रहती हैं..
दुपहर का वक़्त हुआ होता हैं , आज तोह लंच उसने लाया नहीं था इसीलिए उसे बहार जाकर लंच करना पद रहा था .. और वह ंगो के बहार जाने hi लगती हैं की ोीचे से उसे आवाज़ सुनाई देती हैं..
“रौशनी जी कहाँ जा रही हो …”
रौशनी आवाज़ से hi पहचानती हैं की हु असलम की hi आवाज़ हैं. वह पीछे मुद कर देखती हैं और उसे स्माइल देते हुए


“असलम जी में लंच लाना भूल गयी इसीलिए बहार जाकर खाउंगी.”
“रौशनी जी सारे बहार क्यों .. आप मेरे घर आइये , आज खुद में बिरयानी बनाई हैं..”
रौशनी तोह उस घर में सलीम से मिलने से कटरा रही थी..
“‘नहीं असलम जी आप क्यों तकलीफ करते हो .. में बहार खा कर आउंगी.”
“रौशनी जी आइये न .. सलीम भी नहीं हैं 2 दिन तक .. में अकेले अकेले लंच करने में बोर हो जाऊंगा..”
रौशनी यह बात सुनकर की सलीम नहीं होगा .. मन hi मन खींच हो जाती हैं.
“अच्छा ठीक हैं असलम जी .. लेकिन आप क्यों तकलीफ कर रहे हो ..
“अरे आप भी न रौशनी जी .. चलिए आइये , मस्त सा लंच करेंगे हम.”
फिर रौशनी और असलम उसके घर जाने लग जाते हैं.. रौशनी आगे चल रही होती हैं और असलम पीछे से रौशनी की चूतड़ों और नंग कमर को देख अपने लोडे को दबाने लग जाता हैं जो अब अपनी औकात में आ रहा था .

दोनों लंच करने लग जाते हैं.
“असलम जी बताइये अब आपको कैसे लग रहा हैं ..”
असलम कहता हैं दुखद बनने का नाटक कर..
“अच्छा नहीं हूँ सच कहु तोह .. रौशनी जी, मेरी हु बीमारी फिर से बड़े पैमाने में तंग कर रहे हैं..
फिलाल hi एक नौकरानी राखी थी ंगो ने और अपनी बेगम समझ कर उसे बाँहों में लेकर उसे बहुत चूमा .. और वह ग़ुस्से से मुझे देख चली गयी और फिर उसके भाइयों को लेकर मुझे बहुत पिता …”
“अरे ऐसे क्या .. उफ्फ्फ सॉरी में आपकी इस बीमारी का इलाज hi नहीं करवा पायी.. मुझे काफी गिल्ट फील हो रही हैं..”
“रौशनी आप क्यों .. आपने काफी तरय किया हैं अब क्या करू मेरी किस्मत hi ऐसी हैं तोह ..
आप मेरी बेगम बनती थी तब आपको देख .. आपको बाँहों में लेकर मेरी यह बिमारी मेरी काबू में रहती थी.. आप नहीं तोह तोह बेगम समझ कर किसी भी महिला को दबोच लेता हूँ.. मुझे भी यह पसंद नहीं .. में अपनी बेगम को बहुत hi किश कर रहा हूँ .. हु हमारी शादी की सालगिरह कल hi हैं. उसे बहुत मिस कर रहा हूँ, आपको क्या बताऊ.”
“ओह ी सी , अब में क्या करू .. आपको बीमारी का किसी और से इलाज करवाई क्या .. उफ्फ्फ्फ़”
“रौशनी जी क्या आप .. कल … नहीं चोर दीजिये..”
“असलम जी बताइये न क्या ..”
“नहीं चोर दीजिये आपने इतनी मदत करि हैं .. में hi अकेले में बिताऊंगा कल का दिन.”
“असलम जी नहीं बताइये न क्या कर सकती हूँ में आपके लिए?”
“वह … अगर आप कल शाम मेरे साथ hi बिताओगी और आप मेरी बेगम बनने का नाटक करोगी तोह शायद में अपनी बेगम को मिस नहीं करूँगा .. बस कल शाम के दिन ..”
रौशनी सोच में पद जाती हैं … फिर फैसला करती हैं की हु असलम की मदद जरूर करेगी और उसे हाँ कह देती हैं.
असलम बड़ा खुश हो जाता है ..
“शुक्रिया रौशनी जी … अगर आप मेरी सच में बीवी होती तोह बड़ा चूमने का मन करता .. आप बहुत अच्छी हो … कल मिलते हैं शाम में.
रौशनी फिर वहां से चली जाती हैं.
उसे जाते देख असलम सोचता हैं (मेरी बेगम तोह तुम्हे पूरी तरह से बना दूंगा कल शाम और रात भर मेरी जानू. कल तू असलम का बिस्तर गर्म करेगी और मेरे निचे चटपटा लेट हुए छुड़ेगी ….) और वह अपने लोडे को मसलते अपने बैडरूम में चला जाता हैं.

शाम का वक़्त अब हो चूका था और रौशनी ंगो के बहार जाती हैं तोह उसे रमेश की रिक्शा दिखाई देती हैं और उसमें चढ़ जाती हैं.
“कैसी हो रौशनी .. आज का दिन कैसे रहा.”
“रमेश जी बहुत अच्छा , बहुत काम हुआ आज कम्पलीट .. बस कल शाम को मेरी एक सहेली के घर जाना हैं और वही मुझे पिचकूप करने आएगी कल ंगो से.”
रमेश कहता हैं “अच्छा ठीक हैं .. फिर आज शाम चले मेरे वहां .. कल शाम और रात की मस्ती को फिर से करे क्या ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न … बड़े वह हो.”
“क्या हु हूँ रौशनी जी बताइये ..”
“उफ्फ्फ आप तोह पक्का वह hi हो ..”
“अरे जानू बता तोह जरा .. क्या हु हूँ में और रमेश पीछे मुद करा आंख मारता हैं..”
“उफ्फ्फ आप रिक्शा अच्छे से चलिए .. आगे देखिये रोड पर ..”
“ओह जानू तुम जैसी मालदार आइटम हो तोह कैसे तुमसे नज़र हटा लू .. उफ़ क्या लग रही हो मेरी जानू.”
रमेश जी आप तोह .. बड़े कमीने हैं ..”
“अरे इस कमीने को फिर से मस्ती करने दो .. फिर देखो कैसे कमीने से जानू बुलाओगी मेरे निचे चुड़ोगी तब .. चलो आज भी चुदाई का खेल खेलते हैं..”
रौशनी अब उस बुड्ढे रमेश को उसके सामने चूसै जैसे अश्लील शब् कहते देख शर्मा जाती हैं ..( उफ्फ्फ किस बुड्ढे से पला पड़ा हैं .. उफ्फ्फ ) रौशनी यही सोचती हैं लेकिन बुरे नज़र से नहीं मस्ती भरी नज़र से ..
रमेश को पता था की मछली उसके जाल में फस चुकी हैं .. वह उसे बिना बोले अपनी रिक्शा को उस गार्डन की तरफ ले जाने लगतभाईन जहाँ हु पहले रौशनी क ओले गया था..
“रमेश जी यह हम कहाँ जा रहे हैं ..?
“रौशनी जी उस दिन के पार्क में ले जा रहा हूँ … इस दिन मस्ती नहीं कर पाए .. चलो आज करते हैं खुले में.”
“उफ्फ्फ नहीं रमेश जी ऐसे मत करो मुझे घर चोरो.”
“रौशनी जी चलिए न , कहाँ मेरे घर ले जा रहा हूँ , पार्क hi तोह जा रहे हैं. वहां एन्जॉय करेंगे .. मुझे आप प्यार होने लगा हैं और आपको कहते हैं न गर्लफ्रेंड की तरह चाहने लगा हूँ .. आज मुझे मेरी गर्ल फ्रेंड को पार्क घूमना हैं. वैसे भी वहां बस कपल्स hi रहते हैं तोह क्या हर्ज़ है .”
रौशनी भी चाहती थी की उस पार्क में घूमे .. उसके पति तोह कभी ऐसे पार्क घूमते hi नहीं थे .. और उसे अनजाने में रमेश से भी चाहत होने लगी थी और उसकी गर्लफ्रेंड बनने में उसे अब कोई प्रॉब्लम नहीं था.
दोनों पार्क में पहुँच जाते हैं.
आज पार्क में और दिनों के कपड़े में भीड़ काम थी.. वैसे भी अब तक 8 बज चुके हुए थे तोह काफी तादाद में परिवार वाले भी अपने बच्चों के साथ उस समय पार्क आये थे. रौशनी और रमेश जैसे मस्ती वाले जोड़ियां काम थी
. कपल्स ज्यादातर 9:00 बजे hi पार्क में आने शुरू होते हैं, जब परिवार वाले वापस जाने लग जाते हैं. पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ था. बड़े ग्रीन ग्रास की अस पास एक वाकिंग ट्रैक था . और एक एरिया में छोटे बच्चों के लिए एक जगह पर कई तरह के झूले और स्लाइड्स भी बने हुए थे. पार्क के एक साइड पर , चारों और चाट, paav-bhaji, कफ ड्रिंक, आइसक्रीम, gol-gappe, खुशबूदार पान के कई स्टाल थे जिन पर काफी भीड़ थी. मान-
“रमेश जी , उफ्फ्फ आज तो तुम मुझे आईटी ी मस्त पार्क में ले आए हो. बहुत hi अच्छी जगह है...”
रमेश फिर बिना जूझि करे रौशनी के नाज़ुक गोरी चमड़ी वाली हाथों को अपने काळा रफ़ हाथों में लेते हुए उसे एक जगह ले जाता हैं जहाँ काम लाइट थी, मनो मूड लिघ्तों हे हो. और वहां पर एक फाउंटेन भी था वहां पर गाने चल रहे थे और संगीत की धुन और उस मूस लाइटिंग में दोनों रौशनी और रमेश खड़े थे. . फाउंटेन ऐसी जगह थी जहाँ के चारों और अब काफी सारे यंग कपल्स बी थे , कई तोह रौशनी से काफी काम उम्र के भी मनो कॉलेज के premi-premika हो. , रौशनी जैसी मस्त उम्र वाली लेडीज भी बहुत थी जिनका, शरीर रौशनी के शरीर जैसे उभारों को उजागर करते फिगर थे और काफी सेक्सी शर्ट स्कर्ट्स या फिर स्लीवलेस ब्लाउज साड़ी में सजी धजी लेडीज अपने प्रेमियों के साथ खुल कर हंस रही थी.

वहां के सब औरतें अब इस दिलकश वातावरण का पूरा मजा ले रही थी, अपने प्रेमियों के साथ हाथ में हाथ डाले घुल मिलकर बातें कर रहे थर. रौशनी की नज़र खासकर एक लेडी पर गयी जो उसी की उम्र की होगी , हो सकती हैं कुछ 3-4 साल इससे बड़ी .. उस महिला ने अपने होठों लोन पर एक रूबी रेड लिपस्टिक लगायी थी .. लम्बे खुले बाल थे उसे , उसने एक स्कर्ट जीन्स पहनी थी जो काफी टाइट थी जिसमें से उसके कैसे नितम्ब पीछे उभर आ रहा था और उसने अपनी झंघों की आधे से भी काम लेंथ की जीन्स शॉर्ट्स पहनी थी. उस औरत ने क्लीवेज दिखानी वाली टॉप पहनी थी. इतनी गहरी क्लीवेज की कभी भी एक hi झटके में उसकी चूचियां बहार भी आ सकती थी उसकी टॉप से.. वैसी कामुकता से भरपूर महिला थी हु. उसे देख रौशनी सोची की (उफ्फ्फ ऐसे भी खुले कपड़ों वाली लेडीज यहाँ आती हैं … यह तोह बढ़िया मॉडर्न पार्क हैं … फॉर रौशनी अपनी साड़ी को देखि .. और सोची की अगर हु महिला ऐसे कपडे पेहेन सकती थी तोह हु भी तोह उससे और जवान थी और बड़ी अच्छी फिगर वाली थी .. हु भी पेहेन कर रमेश के साथ घूमने यहाँ आ सकती हैं.)
-रौशनी की पहली सोच थी रमेश जैसे काळा बुड्ढे के साथ वापस उन कपड़ों में आने की न की उसके पति रोनित के साथ-
. . दोनों 15 मं तक उस फवारे का आनंद लेते रहे
. रमेश- “चलो डिअर, पहले कुछ पि लेते हैं फिर तुम्हें पूरा पार्क दिखाऊंगा...”
रमेश अब रौशनी को लेकर वहां एक milkshake/juice के स्टाल्स में आ गए.. दोनों ने वहां की फेमस रोज मिल्कशेक पीने की ठान ली.
रौशनी दो मिल्कशेक मांगने वाली थी की रमेश ने उसकी कानों में खुश उस फुसफुसाते बोलै “ रौशनी डार्लिंग , आज हूँ मिलकर इस मिल्कशेक का आनद लुटाएंगे .. और रौशनी को देख हु मुस्कुराया.
रौशनी शर्मायी , “उफ़ आप भी न रमेश जी .. उफ़ एक hi गिलास में दोनों… ओह गॉड ऐसे तोह रोनित भी नहीं करते उफ्फ्फ..”
रमेश – “हाँ रौशनी जी में रोनित नहीं हूँ न .. चलिए मुझे तोह ऐसे hi मिल्कशेक पीना हैं ..”
रौशनी – “अच्छा बाबा नाराज़ न होना .. . भैया एक hi रोज मिल्कशेक देना और दो स्ट्रॉस.”
रमेश फिर से रौशनी की कानों में फुसफुसाते हुए
“ रौशनी जी अगर एक hi गिलास हैं तोह स्ट्रॉ क्यों दो .. और रमेश अब आँख मारता hain.”roshni शर्माती हैं और रमेश के चौड़े साइन पर अपने हाथों को मुट्ठी बनाकर हलके से मारती हैं..
रौशनी – “उफ़ रमेश जी आप भी न .. भैया बस एक hi स्ट्रॉ देना ..”
दोनों के बीच की बातें हु मिल्कशेक वाला आदमी दांग रह जाता हैं. ऐसे काळा से बुड्ढे के साथ ऐसी जवान गदरायी बदन वाली मॉडर्न लेडीज कैसे .. क्या माल पटाया हैं बुड्ढे ने . काश हम से भी ऐसी पैट जाती.
फिर दोनों वहां से चले गए
रमेश- “रौशनी जी यह पार्क बहुत बड़ा है. क्या पार्क का पूरा चक्कर काट के देखोगी तुम मेरे साथ साथ ?”
रौशनी-- “हाँ, जरूर वैसे भी देखिये न कैसे लोग कैसे चक्कर काट रहे हैं. चलो चक्कर काट ले..."
रौशनी की बात सुनकर रमेश ने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया, जिसे पकड़कर रमेश ने रौशनी को अपने बाँहों में खींच लिया और फिर उसके गोरी सी नाज़ुक कमर पर अपने हाथों को सर्किल करते हुए दोनों पार्क की चक्कर काटने निकल पड़े.
9:30 बज गए थे. जैसे हु पार्क की ुर भीतर जाने लगे , रौशनी को अब और नौजवान जोड़ियां अब दिख रही थी, , जितने भी जोड़ियां थी वहां के मर्द सब अपनी अपनी महिलाओं के हाथ में हाथ डाले, उनके कन्धों पर हाथ रखे, कई कई उन महिलाओं की कमर में हाथ डाले या उनके बदन को अपने बदन से बिलकुल सताए दीं दुनिया से बिलकुल बेखबर होकर चल रहे, बैठ रहे. थे.
वहां अब रौशनी और रमेश , एक खूबसूरत बीवी और एक कला बुद्धा रिक्शा वाला , अब उनकी जोड़ी दुनिया की नजर में जो भी हों, हु दोनों सब से बेखबर उस रोमांचक अपर में साथ साथ बिलकुल करीब हुए चल रहे थे.
chalate-chalate दोनों अब आख़िरकार पार्क के उस भाग में आ पहुंचे जहां कुछ अँधेरा था और काफी तादाद में घने झाड़ थे. हर झाड़ के से में एक जोड़ा बैठा हुआ था, एंट्रेंस के विपरीत दिशा में मुंह किए एक दूसरे को बाँहों में . समेटे गड्डमड्ड हो रहे थे, पुरुष महिलाओं की जाँघों पर लेते हुए थे, कुछेक पुरुष तो महिलाओं के चहरे पर झुके हुए होठं से होठं लगा कर किश कर रहे थे.

चारों तरफ बहुत hi रंगीन और वासनात्मक नज़ारा था. रौशनी अब साइड से वहां के जोड़ों की हरकतें देख रही थी और रमेश के साथ बैठी रही थी. ऐसे वातावरण में किसी भी गरम खून की युवा महिला का मन विचलित होना लाजिमी था खासकर जब एक जवान मस्त माल को एक बुद्धा पूरा, , अपना बनाना चाह रहा था. फिर भी अपने आप पर पूरा काबू कर रखा था और उसकी और से कोई जल्दबाज़ी करना नहीं चाहता था.
रमेश , रौशनी की सेक्स की भूख को पूरा जगा देना चाहता था और उसमें तड़प पैदा करना चाह रहा था.
दोनों अब बैठकर एक hi स्ट्रॉ से मिल्कशेक मजे से पि रहे थे.
पहले रौशनी एक सिप लेती और फिर रमेश एक सिप लेता उसी एरिया से जहाँ रौशनी ने सिप
लिया था . रौशनी , रमेश की ऐसी हरकते देख मज़्ज़े ले रही थी. फिर उसने भी वही जगह से पिने लगी और रमेश का सलीवा अब उसकी होठों अपर था और वह उसके साथ मिली हुयी मिल्कशेक पिने लगी.
दोनों एक दूसरे के आँखों में देख रहे थे .. रमेश न अब रौशनी को बिलकुल अपने से सताए हुए करीब ले रखा था सुर रौशनी भी उसके बगल में रमेश से चिपक कर बैठी थी.
रमेश ने मिल्कशेक के बाजु के स्टाल से strawberry’s लाये थे :.
उसने एक स्ट्रॉबेरी को अपने मुँह में राखी और रौशनी को दूसरे साइड से वहां पर बाईट लेने का इशारा करा.
रौशनी कुछ बोली नहीं बस अपने होठों को आगे लेकर एक साइड से स्ट्रॉबेरी की बाईट किआ ुर एक दो बाईट में डॉन ओने स्ट्रॉबेरी खा गए .. जैसे hi रमेश उस बहाने रौशनी को चूमने आगे बढ़ा , रौशनी पीछे हटी और उसे देख मुस्कुरायी और फिर अपनी जीभ बहार निकल उसे चिढ़ाने लगी:
रमेश भी मुस्कुराया और फिर से और एक स्ट्रॉ बेर मुँह में राखी और रौशनी ने वही बात फिर से दोहराई. ऐसे और सो बार हुआ .. अब 4तबार जा ऐसे hi स्ट्रॉबेरी खा गए दोनों रमेश ने अपने होठों को जोर से आगे बढ़ा कर रौशनी के होठों से चिपका hi दिया .. इस बार अब, दोनों के होठं एक दूसरे से जुड़ गए थे और दोनों बड़े लम्बे चुम्बन में समां गए .. रौशनी की बुर पानी टपका रही थी उसकी ोांत्य में और रमेश का फनफनाता हुआ लोढ़ा भी प्रेकम उसकी अंडरवियर में लीक करने लगा था .
ऐसी दोनों की चुम्बन चली रही और दो स्ट्रॉबेरी कहते हुए वैसे चुने .. फिर साथ पिटे पिटे मिल्कशेक भी ड्रिंक कर गए. फिर रमेश बोलै.
.रमेश - “रौशनी तुम यहीं बैठो, मैं ice/cream यहीं ले आता हूँ. कैसी लाऊं? कैंडी या कोन?”
रौशनी - “मेरे लिए तो वही चूसने वाली hi लाना ...”
और रौशनी ने रमेश को देख आंक मारी. इस हरकत से रमेश तोह और मदहोश हो गया , और फोड़ा हुआ रौशनी पर और एक लम्बी चुम्बन देते हुए आइसक्रीम लाने चला गया .
रौशनी अब अकेली बैठी कपल्स को देख रही थी.. (उफ़ रौशनी तू आज रमेश जैसे बुड्ढे से यह सब कर रहे हैं उफ़ .. फिर सोची – हाँ इसमें गलत क्या बात हैं , रोनित तोह ऐसे रोमांचक जगहों पर उसे लता hi नहीं .. उसकी जवानी की ख्याल कैसे रखनी हैं इस बुड्ढे को hi ज्यादा पता हैं .. और तोह और उसका हु फौलादी कला नाग .. ) उफ्फ्फ उसके बारे मैंने सोचता हुए रौशनी मन hi मन शर्मायी और मुस्कुरायी ..
तब तक रमेश भी पहुँच गया
रमेश- “रौशनी जी ये लो , तुम्हारे लिए एक कैंडी और मेरे लिए एक कोन लेकर आ गया हूँ
. रौशनी अब कैंडी आइसक्रीम बार को मुंह में लेकर चूसने लगी और रमेश की और देखने लगी .. ऐसे लग रहा था मनो रमेश के लोडे को hi उस कैंडी समझ कर चूस और चाट रहे हो, और वहां रमेश कोन में जीभ डुबो डुबो कर .. आइसक्रीम खाने लगा मनो हु रौशनी की छूट में अपने जीभ को डालते हुए उसकी बुर की क्रीम छठा रहा हो.
रमेश - "देखिये न रौशनी , तुम्हे आइसक्रीम कैंडी चूस के खाने में मजा आता है पर मुझे तो इस लम्बी कोन में जीभ दाल दाल कर उसे चाट के खाने में मजा आता है.”
रौशनी , रमेश की बातें सुन खिलखिलाकर हंस पड़ी फिर खुद अब रमेश के करीब जाते हुए उसकी होठों पर अपने गुलाबी होठों को सरकार उसे चूमने लगी और उसके मुँह से रास पिने लगी .. रमेश भी पूरी तरह से साथ देते हुए उसे चूमते रहा..

चुम्बन तोड़ते हुए रमेश - “क्यों रौशनी, यहां इस आज इस पार्क का आनंद आपको आ रहा है न?
रौशनी - “मुझे एक बात यहां की बहुत अच्छी लगी की लोग एक दूसरे से मतलब नहीं रखते की कौन क्या पेहेन रहा है, कैसे रह रहा है और यहाँ जोड़ियां एक दूसरे के साथ मस्तियों में लगे हुए हैं :? रमेश- "रौशनी, अब यहां तुम कैसे एन्जॉय करती हो, यह कोई देखने वाला नहीं या तुम्हारे बारे में कुछ गलत सोचने वाला नहीं. मैं तुम्हें हर वो सुख दूंगा जो आज तक तुझे तुम्हारे पति की इतनी सेवा करके भी नहीं मिला. अब से मेरा केवल एक hi उद्देश्य है की तुझे दुनिया का हर वह सुख हूँ जो तुम जैसी सुन्दर और जवान महिला को मिलना चाहिए...” रमेश dheere-dheere पास फ़ेंक रहा था.
रौशनी भी उस फांसी में आ रही थी और रमेश के काफी करीब आ चुकी थी.
गर्मी काफी बढ़ गयी थी दोनों के बीच लेकिन फिर उन्हें सुनाई दिया की पार्क बंद होने वाला हैं.. और रौशनी फिर अपनी वाच पर टाइम देखि .. उफ़ 10.30 बज चुके थे और उसे अब घर जाना था .. .रमेश को पता था की खेल लम्बा चलने वाला हैं और हु उस खेल को उसी पेस में खेलेगा .. चुदाई तोह हु रौशनी की कर hi चूका हैं .. अब उसे अपना बनाने का टाइम हैं और फिर रौशनी जब चाहे जैसे चाहे … जब बोले उसके पास चली आएगी और हु आराम से रात भर और कई बार रौशनी की बुर की कुटाई कर पाएगा .. उसे अपना बना लेगा ..
दोनों फिर पार्क में एक आखरी चक्कर काट के दोनों पार्क से बाहर आ गए. 11.00 बजे रमेश ने रौशनी को घर पहुँचाया .
रौशनी जाते जाते रमेश के होठों को चूमि और रमेश ने भी रौशनी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाया ..
रौशनी ने रमेश के इस हरकत को देख बोली “धत कमीने कही के .. बड़े ा तमीज दोस्त बन गए हो आप.”
फिर वहां से अपनी कमर और चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी.
आज घर पर फिर से एक नोट लिखा था और रोनित ने लिखा था की वह आज उसके दोस्तों के साथ बहार हैं और मिडनाइट के बाद hi आएगा .
पहले तोह रौशनी को बुरा लगता था जब हु घर आती और रोनित नहीं होते थे .. लेकिन अब उसे इतना फर्क नहीं पद रहा था .. वैसे भी देर रात तक वह एक रोमांचक बुड्ढे के साथ वक़्त बीते थी और उसे रोनित को भी उसका कुछ जवाब नहीं देना पद रहा था . रौशनी अब रमेश के बारे में सोचती हुई अपनी बैडरूम में चली गयी और रमेश के लोडे और आज की पार्क में हरकतों की सोचते हुए अपनी बुर में अपनी नयी लायी डिलडो के साथ खेलते हुए जहर गयी और फिर इत्मीनान से सो गयी. कल तोह उसे असलम के सात शाम बितानी थी , वह भी उसकी बेगम का नाटक कर .. उस बात को तोह हु भूल hi गयी थी.
उसे शाम और रात में हुयी मस्ती की झलकें आँखों के सामने आ जाती हैं और शर्मा जाती हैं.
सलीम से छोड़ने के बाद जो उसे गिल्ट फीलिंग हुयी थी, वैसी फीलिंग न जाने क्यों उसे रमेश के साथ चुदाई के बाद आयी नहीं.
क्या वह चाहती थी की रमेश उसकी चुदाई करे और जो अब कर दिया हैं चुदाई तोह उसे कोई गिल्ट नहीं हैं या फिर दूसरी बार अब अपने पति पर चीट कर उसे हु पहली बार जैसी गिल्ट की फीलिंग नहीं आ रही हैं.
हु यह भी सोचती हैं की अगर उसके पति रोनित ने उसकी हवस को मिटै रहती तोह वह ऐसे दो मर्दों के साथ चुदाई नहीं करती और खासकर रमेश से खुद चुदती नहीं.. उसी की गलती हैं सब .. यही सोचती हुयी रौशनी उठ जाती हैं और बदन पर बेडशीट लपेटे बाथरूम चली जाती हैं..
आईने में खुद को हु देखने लगती हैं.. उसकी बाल बिखरे हुए थे , बदन पूरा लाल हो चूका था .. रमेश सच में जानवरों जैसे उसकी चुदाई करे थे . साला बुड्ढे होकर भी ऐसे चूड़ाकड होगा हु कभी सोची नहीं थी..

उन्होंने कितनी बार निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था रास भर ..गिनती भी नहीं कर पा रही थी रौशनी.. रोनित तोह ऐसी चुदाई करता नहीं था .. रमेश की चुदाई सलीम जैसे hi वाइल्ड थी लेकिन उसमें रौशनी को प्यार भी दिखाई दिया था .. सलीम के साथ चुदाई बस एक हवस मिटने की चुदाई थी. लेकिन सेल दोनों बुद्धों ने उसे काफी निचोड़ निचोड़ कर छोड़ा था और कई बार उसकी बुर से रास निकला था और कई बार खुद भी अपने अपने लुंड से इतना गधा माल छोरा था उफ्फ्फ्फ़. उसकी गांड की छेद में दर्द हो रहा था .. उस रमेश ने उसकी गांड की भी चुदाई करि थी ..: क्या तगड़े स्ट्रोक्स देते हुए छोड़ा था .. उसे तोह चलने में दिक्कत हो रही थी..
साले दोनों पागल चुदाई के भूके सांड बुड्ढे उसी को मिलने थे उफ्फफ्फ्फ़.
रौशनी अब मूतने बैठ जाती हैं और उसकी इतनी बड़ी सी धार निकलती हैं और निकलते जाती हैं .. उफ्फ्फ इतनी जोरों से पिशाब हो रही थी .. उफ्फ्फ रात को चूसते वक़्त भी उसकी काफी नुत निकल गयी थी .. ऐसी तोह बस एक जामदार चुदाई के बाद hi होती हैं उफ्फ्फ.
फिर अपने फेस अपर पानी छिड़क करा ुर वहां पड़े सोप से चेहरे को साफ़ कर हु बहार चली जाती हैं और रमेश अब बिस्तर पर बैठे अपने लोडे को हाथ में लिए रौशनी को देख रहा था ..
रमेश , रंगीन बुद्धा अब अपनी दोनों टांगो को चोरी करके बैठे रौशनी की और देख कर मुस्करा रहा था जबकि उनका 10 इंच का हथियार अब बी उनकी टांगों के बीच झटके मार रहा था . रमेश ने इशारे से रौशनी को पास आने को कहा तोह रौशनी शर्माती हुयी अपने आँखों से ये बताने की कोशिश करने लगी की उनका मोटा लुंड अभी तोह रात भर मेरी बुर में फसा हुआ था .. और अब फिर से तैयार हैं.

रमेश बस मुस्कुराया और रौशनी को इशारे से अपने लुंड को फिर से चुसवाने को कहने लगे.
रौशनी अब मुस्कुराते और शरमाते इधर उधर देखने लगी…
रमेश- जानू आओ ना देखो मेरा लोढ़ा कैसे फिर से खड़ा हैं, जरा इसको अपने होंठों से hi शांत करो, देखो अब ये तुम्हारे गुलाबी होंठों का प्यार फिर से पाने के लिए तड़प रहा हैं..
अब कोई भी औरत हो, हु जब मर्द उससे ऐसे तड़प कर अपने पास बुलाता हैं तो उस औरत के चेहरे की चमक एक्चुअली देखने लायक बनती हैं .. वैसे hi हाल था रौशनी का और वह दूर खड़े अब रमेश के मोठे काळा लोडे को देखती रही और मुस्कराती रही..
रौशनी “अरे रमेश जी अभी तोह शाम और रात भर मेरी बुर का ऐसे आपने हाल किया हैं .. उफ्फ्फ थोड़ा ब्रेक दीजिये उफ्फ्फ.”
रमेश बोलता हैं- वैसे सच कहु .. माँ कसम रौशनी तेरी जैसी मासूक हो ना तोह लोढ़ा खड़ा hi रहता हैं. कसम से एक दम मालदार लग रही हो .. अब नखरे न करो और चलो आ ना मेरे लोडे को चूस चूस कर इसका रास निकल दो फिर से..
अब रौशनी देख रही थी की रमेश अब इस तरह से खुली बातों से उसे उनकी माशूका बुला रहे थे और उसे फिर से उनका मोटा कला लुंड चूसने को बोल रहे थे…
रमेश का उसके साथ इस तरह रोमांस करते देख रौशनी भी फिर से थोड़े रोमांस के मूड मि आ गयी और हु रमेश के आँखों में देख उनके तरफ फिर से बढ़ने लगी .. और रमेश ने झट से रौशनी को फिर से अपने बाँहों में लेकर अपनी नाक को रौशनी की नाक से रगड़ने लगे और दोनों फिर से गहर्री चुम्बन में चले गए ..
रौशनी को अब रमेश के काळा भद्दे होठों पर अपने गुलाबी होठों को चिपकने में जार अभी शर्म नहीं महसूस हो रहे थी … निचे से उसका तना हुआ लुंड उसकी नाभि को छू रहा था और उसकी नाभि के अंदर अपना प्रेकम चोर रहा था …

उसे उस एहसास ने और गर्म कर दिया और वह जोरों से उसे चूमने लगी .. कुछ 5 मं तक राशन चलता रहा की उसकी नज़र ऊपर क्लॉक पर पड़ी.. सुबह के 9 बजे थे और उसे ंगो में काम पर भी जाना था .. वह रमेश से जुड़ा हुयी
“रमेश जी मुझे पहले घर जाना होगा और फिर ंगो … चलो न तैयार होने दीजिये ..”
“अर्रे मेरी जानू चोर दो आअज मेरे साथ hi बिताओ मस्ती में पल ..”
“‘नहीं रमेश जी जाना होगा प्लीज चलिए .. अब तोह जब भी बुलाओगे आउंगी .. लेकिन अब जाना होगा प्ल्ज़ जल्दी करिये..”
रमेश अब रौशनी की कमर को जोरों से दबाया हैं .. और रौशनी की मुँह से अहह निकल जाती हैं.
“अच्छा चलिए .. अब तोह आप और में दोस्त से भी बढ़ कर हैं …और रमेश अब आँख मारता हैं.
रौशनी अपना चेहरा अपनी हाथों में छिपाते हुए चली जाती हैं.
कुछ समय में दोनों तैयार होते हैं .. रौशनी अपना फ़ोन देखती हैं तोह सरप्राइज होती हैं की उसके पति के कोई मिस्ड कॉल्स भी नहीं थे .. क्या उन्होंने उसे मिस नहीं किया था, रात भर हु घर भी नहीं आयी थी , क्या उन्हें उसकी चिंता नहीं हैं ..
यशो सब सोचते अब रौशनी . रमेश के रिक्शा में बैठती हैं और रमेश उसे उसके घर ड्राप कर्तव्हीन.
“रौशनी जी चाहिए तोह से आपके साथ आपके घर … आपके बिस्तर” और रमेश आंक मारता हैं.
“धत बदमाश .. मेरे पति होंगे वहां .. कुछ भी कहते हो उफ्फ्फ आप रुको में आती हूँ.”
रमेश मन में ..(साला उसका पति नहीं होता तोह अभी उसी के बिस्तर में ले जाकर पटक पटक कर छोड़ता …)
“अच्छा, रौशनी जी आप तैयार हो जाइये में आपके लिए रुक जाता हूँ ..”
रौशनी स्माइल देते हुए अपनी चूतड़ों को हिलाते चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती डुलती चूतड़ों को देख अपना लोढ़ा दबाने लगता हैं.

रौशनी घर पर देखती हैं की रोनित उसके पति वहां पर नहीं थे ..
रौशनी फिर नहाने चली जाती हैं और फिर तैयार होने लग जाती हैं.. उसे काफी लेट हो गया था इसीलिए हु बस तैयार जल्दी होने में लग जाती हैं.
कुछ देर बाद तैयार होकर हु निचे रमेश की रिक्शा में बैठ जाती हैं और रमेश उसे ंगो ड्राप करता हैं.
रौशनी में शाम को आकर रुकूंगा यहाँ.. आप आइये फिर ले जाऊंगा में आपको..
रौशनी स्माइल देती हैं और आजु बाजू देखती हैं और कोई न दिखने पर हु रमेश के गलों पर अपनी गुलाबी होठों को चिपका देती हैं और फिर वहां से चली जाती हैं..
रमेश वहां खुश था की रौशनी जैसी मैरिड माल उसकी बन रही थी .. वह रौशनी के साथ ढेर सारी मस्तियाँ करना चाहता था …
रौशनी काम पर लग जाती है.. आज पहली बार उस दिन की चुदाई के बाद हु सलीम को कैसे फेस करे उसकी की सोचती रहती हैं..
दुपहर का वक़्त हुआ होता हैं , आज तोह लंच उसने लाया नहीं था इसीलिए उसे बहार जाकर लंच करना पद रहा था .. और वह ंगो के बहार जाने hi लगती हैं की ोीचे से उसे आवाज़ सुनाई देती हैं..
“रौशनी जी कहाँ जा रही हो …”
रौशनी आवाज़ से hi पहचानती हैं की हु असलम की hi आवाज़ हैं. वह पीछे मुद कर देखती हैं और उसे स्माइल देते हुए


“असलम जी में लंच लाना भूल गयी इसीलिए बहार जाकर खाउंगी.”
“रौशनी जी सारे बहार क्यों .. आप मेरे घर आइये , आज खुद में बिरयानी बनाई हैं..”
रौशनी तोह उस घर में सलीम से मिलने से कटरा रही थी..
“‘नहीं असलम जी आप क्यों तकलीफ करते हो .. में बहार खा कर आउंगी.”
“रौशनी जी आइये न .. सलीम भी नहीं हैं 2 दिन तक .. में अकेले अकेले लंच करने में बोर हो जाऊंगा..”
रौशनी यह बात सुनकर की सलीम नहीं होगा .. मन hi मन खींच हो जाती हैं.
“अच्छा ठीक हैं असलम जी .. लेकिन आप क्यों तकलीफ कर रहे हो ..
“अरे आप भी न रौशनी जी .. चलिए आइये , मस्त सा लंच करेंगे हम.”
फिर रौशनी और असलम उसके घर जाने लग जाते हैं.. रौशनी आगे चल रही होती हैं और असलम पीछे से रौशनी की चूतड़ों और नंग कमर को देख अपने लोडे को दबाने लग जाता हैं जो अब अपनी औकात में आ रहा था .

दोनों लंच करने लग जाते हैं.
“असलम जी बताइये अब आपको कैसे लग रहा हैं ..”
असलम कहता हैं दुखद बनने का नाटक कर..
“अच्छा नहीं हूँ सच कहु तोह .. रौशनी जी, मेरी हु बीमारी फिर से बड़े पैमाने में तंग कर रहे हैं..
फिलाल hi एक नौकरानी राखी थी ंगो ने और अपनी बेगम समझ कर उसे बाँहों में लेकर उसे बहुत चूमा .. और वह ग़ुस्से से मुझे देख चली गयी और फिर उसके भाइयों को लेकर मुझे बहुत पिता …”
“अरे ऐसे क्या .. उफ्फ्फ सॉरी में आपकी इस बीमारी का इलाज hi नहीं करवा पायी.. मुझे काफी गिल्ट फील हो रही हैं..”
“रौशनी आप क्यों .. आपने काफी तरय किया हैं अब क्या करू मेरी किस्मत hi ऐसी हैं तोह ..
आप मेरी बेगम बनती थी तब आपको देख .. आपको बाँहों में लेकर मेरी यह बिमारी मेरी काबू में रहती थी.. आप नहीं तोह तोह बेगम समझ कर किसी भी महिला को दबोच लेता हूँ.. मुझे भी यह पसंद नहीं .. में अपनी बेगम को बहुत hi किश कर रहा हूँ .. हु हमारी शादी की सालगिरह कल hi हैं. उसे बहुत मिस कर रहा हूँ, आपको क्या बताऊ.”
“ओह ी सी , अब में क्या करू .. आपको बीमारी का किसी और से इलाज करवाई क्या .. उफ्फ्फ्फ़”
“रौशनी जी क्या आप .. कल … नहीं चोर दीजिये..”
“असलम जी बताइये न क्या ..”
“नहीं चोर दीजिये आपने इतनी मदत करि हैं .. में hi अकेले में बिताऊंगा कल का दिन.”
“असलम जी नहीं बताइये न क्या कर सकती हूँ में आपके लिए?”
“वह … अगर आप कल शाम मेरे साथ hi बिताओगी और आप मेरी बेगम बनने का नाटक करोगी तोह शायद में अपनी बेगम को मिस नहीं करूँगा .. बस कल शाम के दिन ..”
रौशनी सोच में पद जाती हैं … फिर फैसला करती हैं की हु असलम की मदद जरूर करेगी और उसे हाँ कह देती हैं.
असलम बड़ा खुश हो जाता है ..
“शुक्रिया रौशनी जी … अगर आप मेरी सच में बीवी होती तोह बड़ा चूमने का मन करता .. आप बहुत अच्छी हो … कल मिलते हैं शाम में.
रौशनी फिर वहां से चली जाती हैं.
उसे जाते देख असलम सोचता हैं (मेरी बेगम तोह तुम्हे पूरी तरह से बना दूंगा कल शाम और रात भर मेरी जानू. कल तू असलम का बिस्तर गर्म करेगी और मेरे निचे चटपटा लेट हुए छुड़ेगी ….) और वह अपने लोडे को मसलते अपने बैडरूम में चला जाता हैं.

शाम का वक़्त अब हो चूका था और रौशनी ंगो के बहार जाती हैं तोह उसे रमेश की रिक्शा दिखाई देती हैं और उसमें चढ़ जाती हैं.
“कैसी हो रौशनी .. आज का दिन कैसे रहा.”
“रमेश जी बहुत अच्छा , बहुत काम हुआ आज कम्पलीट .. बस कल शाम को मेरी एक सहेली के घर जाना हैं और वही मुझे पिचकूप करने आएगी कल ंगो से.”
रमेश कहता हैं “अच्छा ठीक हैं .. फिर आज शाम चले मेरे वहां .. कल शाम और रात की मस्ती को फिर से करे क्या ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न … बड़े वह हो.”
“क्या हु हूँ रौशनी जी बताइये ..”
“उफ्फ्फ आप तोह पक्का वह hi हो ..”
“अरे जानू बता तोह जरा .. क्या हु हूँ में और रमेश पीछे मुद करा आंख मारता हैं..”
“उफ्फ्फ आप रिक्शा अच्छे से चलिए .. आगे देखिये रोड पर ..”
“ओह जानू तुम जैसी मालदार आइटम हो तोह कैसे तुमसे नज़र हटा लू .. उफ़ क्या लग रही हो मेरी जानू.”
रमेश जी आप तोह .. बड़े कमीने हैं ..”
“अरे इस कमीने को फिर से मस्ती करने दो .. फिर देखो कैसे कमीने से जानू बुलाओगी मेरे निचे चुड़ोगी तब .. चलो आज भी चुदाई का खेल खेलते हैं..”
रौशनी अब उस बुड्ढे रमेश को उसके सामने चूसै जैसे अश्लील शब् कहते देख शर्मा जाती हैं ..( उफ्फ्फ किस बुड्ढे से पला पड़ा हैं .. उफ्फ्फ ) रौशनी यही सोचती हैं लेकिन बुरे नज़र से नहीं मस्ती भरी नज़र से ..
रमेश को पता था की मछली उसके जाल में फस चुकी हैं .. वह उसे बिना बोले अपनी रिक्शा को उस गार्डन की तरफ ले जाने लगतभाईन जहाँ हु पहले रौशनी क ओले गया था..
“रमेश जी यह हम कहाँ जा रहे हैं ..?
“रौशनी जी उस दिन के पार्क में ले जा रहा हूँ … इस दिन मस्ती नहीं कर पाए .. चलो आज करते हैं खुले में.”
“उफ्फ्फ नहीं रमेश जी ऐसे मत करो मुझे घर चोरो.”
“रौशनी जी चलिए न , कहाँ मेरे घर ले जा रहा हूँ , पार्क hi तोह जा रहे हैं. वहां एन्जॉय करेंगे .. मुझे आप प्यार होने लगा हैं और आपको कहते हैं न गर्लफ्रेंड की तरह चाहने लगा हूँ .. आज मुझे मेरी गर्ल फ्रेंड को पार्क घूमना हैं. वैसे भी वहां बस कपल्स hi रहते हैं तोह क्या हर्ज़ है .”
रौशनी भी चाहती थी की उस पार्क में घूमे .. उसके पति तोह कभी ऐसे पार्क घूमते hi नहीं थे .. और उसे अनजाने में रमेश से भी चाहत होने लगी थी और उसकी गर्लफ्रेंड बनने में उसे अब कोई प्रॉब्लम नहीं था.
दोनों पार्क में पहुँच जाते हैं.
आज पार्क में और दिनों के कपड़े में भीड़ काम थी.. वैसे भी अब तक 8 बज चुके हुए थे तोह काफी तादाद में परिवार वाले भी अपने बच्चों के साथ उस समय पार्क आये थे. रौशनी और रमेश जैसे मस्ती वाले जोड़ियां काम थी
. कपल्स ज्यादातर 9:00 बजे hi पार्क में आने शुरू होते हैं, जब परिवार वाले वापस जाने लग जाते हैं. पार्क बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ था. बड़े ग्रीन ग्रास की अस पास एक वाकिंग ट्रैक था . और एक एरिया में छोटे बच्चों के लिए एक जगह पर कई तरह के झूले और स्लाइड्स भी बने हुए थे. पार्क के एक साइड पर , चारों और चाट, paav-bhaji, कफ ड्रिंक, आइसक्रीम, gol-gappe, खुशबूदार पान के कई स्टाल थे जिन पर काफी भीड़ थी. मान-
“रमेश जी , उफ्फ्फ आज तो तुम मुझे आईटी ी मस्त पार्क में ले आए हो. बहुत hi अच्छी जगह है...”
रमेश फिर बिना जूझि करे रौशनी के नाज़ुक गोरी चमड़ी वाली हाथों को अपने काळा रफ़ हाथों में लेते हुए उसे एक जगह ले जाता हैं जहाँ काम लाइट थी, मनो मूड लिघ्तों हे हो. और वहां पर एक फाउंटेन भी था वहां पर गाने चल रहे थे और संगीत की धुन और उस मूस लाइटिंग में दोनों रौशनी और रमेश खड़े थे. . फाउंटेन ऐसी जगह थी जहाँ के चारों और अब काफी सारे यंग कपल्स बी थे , कई तोह रौशनी से काफी काम उम्र के भी मनो कॉलेज के premi-premika हो. , रौशनी जैसी मस्त उम्र वाली लेडीज भी बहुत थी जिनका, शरीर रौशनी के शरीर जैसे उभारों को उजागर करते फिगर थे और काफी सेक्सी शर्ट स्कर्ट्स या फिर स्लीवलेस ब्लाउज साड़ी में सजी धजी लेडीज अपने प्रेमियों के साथ खुल कर हंस रही थी.

वहां के सब औरतें अब इस दिलकश वातावरण का पूरा मजा ले रही थी, अपने प्रेमियों के साथ हाथ में हाथ डाले घुल मिलकर बातें कर रहे थर. रौशनी की नज़र खासकर एक लेडी पर गयी जो उसी की उम्र की होगी , हो सकती हैं कुछ 3-4 साल इससे बड़ी .. उस महिला ने अपने होठों लोन पर एक रूबी रेड लिपस्टिक लगायी थी .. लम्बे खुले बाल थे उसे , उसने एक स्कर्ट जीन्स पहनी थी जो काफी टाइट थी जिसमें से उसके कैसे नितम्ब पीछे उभर आ रहा था और उसने अपनी झंघों की आधे से भी काम लेंथ की जीन्स शॉर्ट्स पहनी थी. उस औरत ने क्लीवेज दिखानी वाली टॉप पहनी थी. इतनी गहरी क्लीवेज की कभी भी एक hi झटके में उसकी चूचियां बहार भी आ सकती थी उसकी टॉप से.. वैसी कामुकता से भरपूर महिला थी हु. उसे देख रौशनी सोची की (उफ्फ्फ ऐसे भी खुले कपड़ों वाली लेडीज यहाँ आती हैं … यह तोह बढ़िया मॉडर्न पार्क हैं … फॉर रौशनी अपनी साड़ी को देखि .. और सोची की अगर हु महिला ऐसे कपडे पेहेन सकती थी तोह हु भी तोह उससे और जवान थी और बड़ी अच्छी फिगर वाली थी .. हु भी पेहेन कर रमेश के साथ घूमने यहाँ आ सकती हैं.)
-रौशनी की पहली सोच थी रमेश जैसे काळा बुड्ढे के साथ वापस उन कपड़ों में आने की न की उसके पति रोनित के साथ-
. . दोनों 15 मं तक उस फवारे का आनंद लेते रहे
. रमेश- “चलो डिअर, पहले कुछ पि लेते हैं फिर तुम्हें पूरा पार्क दिखाऊंगा...”
रमेश अब रौशनी को लेकर वहां एक milkshake/juice के स्टाल्स में आ गए.. दोनों ने वहां की फेमस रोज मिल्कशेक पीने की ठान ली.
रौशनी दो मिल्कशेक मांगने वाली थी की रमेश ने उसकी कानों में खुश उस फुसफुसाते बोलै “ रौशनी डार्लिंग , आज हूँ मिलकर इस मिल्कशेक का आनद लुटाएंगे .. और रौशनी को देख हु मुस्कुराया.
रौशनी शर्मायी , “उफ़ आप भी न रमेश जी .. उफ़ एक hi गिलास में दोनों… ओह गॉड ऐसे तोह रोनित भी नहीं करते उफ्फ्फ..”
रमेश – “हाँ रौशनी जी में रोनित नहीं हूँ न .. चलिए मुझे तोह ऐसे hi मिल्कशेक पीना हैं ..”
रौशनी – “अच्छा बाबा नाराज़ न होना .. . भैया एक hi रोज मिल्कशेक देना और दो स्ट्रॉस.”
रमेश फिर से रौशनी की कानों में फुसफुसाते हुए
“ रौशनी जी अगर एक hi गिलास हैं तोह स्ट्रॉ क्यों दो .. और रमेश अब आँख मारता hain.”roshni शर्माती हैं और रमेश के चौड़े साइन पर अपने हाथों को मुट्ठी बनाकर हलके से मारती हैं..
रौशनी – “उफ़ रमेश जी आप भी न .. भैया बस एक hi स्ट्रॉ देना ..”
दोनों के बीच की बातें हु मिल्कशेक वाला आदमी दांग रह जाता हैं. ऐसे काळा से बुड्ढे के साथ ऐसी जवान गदरायी बदन वाली मॉडर्न लेडीज कैसे .. क्या माल पटाया हैं बुड्ढे ने . काश हम से भी ऐसी पैट जाती.
फिर दोनों वहां से चले गए
रमेश- “रौशनी जी यह पार्क बहुत बड़ा है. क्या पार्क का पूरा चक्कर काट के देखोगी तुम मेरे साथ साथ ?”
रौशनी-- “हाँ, जरूर वैसे भी देखिये न कैसे लोग कैसे चक्कर काट रहे हैं. चलो चक्कर काट ले..."
रौशनी की बात सुनकर रमेश ने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया, जिसे पकड़कर रमेश ने रौशनी को अपने बाँहों में खींच लिया और फिर उसके गोरी सी नाज़ुक कमर पर अपने हाथों को सर्किल करते हुए दोनों पार्क की चक्कर काटने निकल पड़े.
9:30 बज गए थे. जैसे हु पार्क की ुर भीतर जाने लगे , रौशनी को अब और नौजवान जोड़ियां अब दिख रही थी, , जितने भी जोड़ियां थी वहां के मर्द सब अपनी अपनी महिलाओं के हाथ में हाथ डाले, उनके कन्धों पर हाथ रखे, कई कई उन महिलाओं की कमर में हाथ डाले या उनके बदन को अपने बदन से बिलकुल सताए दीं दुनिया से बिलकुल बेखबर होकर चल रहे, बैठ रहे. थे.
वहां अब रौशनी और रमेश , एक खूबसूरत बीवी और एक कला बुद्धा रिक्शा वाला , अब उनकी जोड़ी दुनिया की नजर में जो भी हों, हु दोनों सब से बेखबर उस रोमांचक अपर में साथ साथ बिलकुल करीब हुए चल रहे थे.
chalate-chalate दोनों अब आख़िरकार पार्क के उस भाग में आ पहुंचे जहां कुछ अँधेरा था और काफी तादाद में घने झाड़ थे. हर झाड़ के से में एक जोड़ा बैठा हुआ था, एंट्रेंस के विपरीत दिशा में मुंह किए एक दूसरे को बाँहों में . समेटे गड्डमड्ड हो रहे थे, पुरुष महिलाओं की जाँघों पर लेते हुए थे, कुछेक पुरुष तो महिलाओं के चहरे पर झुके हुए होठं से होठं लगा कर किश कर रहे थे.

चारों तरफ बहुत hi रंगीन और वासनात्मक नज़ारा था. रौशनी अब साइड से वहां के जोड़ों की हरकतें देख रही थी और रमेश के साथ बैठी रही थी. ऐसे वातावरण में किसी भी गरम खून की युवा महिला का मन विचलित होना लाजिमी था खासकर जब एक जवान मस्त माल को एक बुद्धा पूरा, , अपना बनाना चाह रहा था. फिर भी अपने आप पर पूरा काबू कर रखा था और उसकी और से कोई जल्दबाज़ी करना नहीं चाहता था.
रमेश , रौशनी की सेक्स की भूख को पूरा जगा देना चाहता था और उसमें तड़प पैदा करना चाह रहा था.
दोनों अब बैठकर एक hi स्ट्रॉ से मिल्कशेक मजे से पि रहे थे.
पहले रौशनी एक सिप लेती और फिर रमेश एक सिप लेता उसी एरिया से जहाँ रौशनी ने सिप
लिया था . रौशनी , रमेश की ऐसी हरकते देख मज़्ज़े ले रही थी. फिर उसने भी वही जगह से पिने लगी और रमेश का सलीवा अब उसकी होठों अपर था और वह उसके साथ मिली हुयी मिल्कशेक पिने लगी.
दोनों एक दूसरे के आँखों में देख रहे थे .. रमेश न अब रौशनी को बिलकुल अपने से सताए हुए करीब ले रखा था सुर रौशनी भी उसके बगल में रमेश से चिपक कर बैठी थी.
रमेश ने मिल्कशेक के बाजु के स्टाल से strawberry’s लाये थे :.
उसने एक स्ट्रॉबेरी को अपने मुँह में राखी और रौशनी को दूसरे साइड से वहां पर बाईट लेने का इशारा करा.
रौशनी कुछ बोली नहीं बस अपने होठों को आगे लेकर एक साइड से स्ट्रॉबेरी की बाईट किआ ुर एक दो बाईट में डॉन ओने स्ट्रॉबेरी खा गए .. जैसे hi रमेश उस बहाने रौशनी को चूमने आगे बढ़ा , रौशनी पीछे हटी और उसे देख मुस्कुरायी और फिर अपनी जीभ बहार निकल उसे चिढ़ाने लगी:
रमेश भी मुस्कुराया और फिर से और एक स्ट्रॉ बेर मुँह में राखी और रौशनी ने वही बात फिर से दोहराई. ऐसे और सो बार हुआ .. अब 4तबार जा ऐसे hi स्ट्रॉबेरी खा गए दोनों रमेश ने अपने होठों को जोर से आगे बढ़ा कर रौशनी के होठों से चिपका hi दिया .. इस बार अब, दोनों के होठं एक दूसरे से जुड़ गए थे और दोनों बड़े लम्बे चुम्बन में समां गए .. रौशनी की बुर पानी टपका रही थी उसकी ोांत्य में और रमेश का फनफनाता हुआ लोढ़ा भी प्रेकम उसकी अंडरवियर में लीक करने लगा था .
ऐसी दोनों की चुम्बन चली रही और दो स्ट्रॉबेरी कहते हुए वैसे चुने .. फिर साथ पिटे पिटे मिल्कशेक भी ड्रिंक कर गए. फिर रमेश बोलै.
.रमेश - “रौशनी तुम यहीं बैठो, मैं ice/cream यहीं ले आता हूँ. कैसी लाऊं? कैंडी या कोन?”
रौशनी - “मेरे लिए तो वही चूसने वाली hi लाना ...”
और रौशनी ने रमेश को देख आंक मारी. इस हरकत से रमेश तोह और मदहोश हो गया , और फोड़ा हुआ रौशनी पर और एक लम्बी चुम्बन देते हुए आइसक्रीम लाने चला गया .
रौशनी अब अकेली बैठी कपल्स को देख रही थी.. (उफ़ रौशनी तू आज रमेश जैसे बुड्ढे से यह सब कर रहे हैं उफ़ .. फिर सोची – हाँ इसमें गलत क्या बात हैं , रोनित तोह ऐसे रोमांचक जगहों पर उसे लता hi नहीं .. उसकी जवानी की ख्याल कैसे रखनी हैं इस बुड्ढे को hi ज्यादा पता हैं .. और तोह और उसका हु फौलादी कला नाग .. ) उफ्फ्फ उसके बारे मैंने सोचता हुए रौशनी मन hi मन शर्मायी और मुस्कुरायी ..
तब तक रमेश भी पहुँच गया
रमेश- “रौशनी जी ये लो , तुम्हारे लिए एक कैंडी और मेरे लिए एक कोन लेकर आ गया हूँ
. रौशनी अब कैंडी आइसक्रीम बार को मुंह में लेकर चूसने लगी और रमेश की और देखने लगी .. ऐसे लग रहा था मनो रमेश के लोडे को hi उस कैंडी समझ कर चूस और चाट रहे हो, और वहां रमेश कोन में जीभ डुबो डुबो कर .. आइसक्रीम खाने लगा मनो हु रौशनी की छूट में अपने जीभ को डालते हुए उसकी बुर की क्रीम छठा रहा हो.
रमेश - "देखिये न रौशनी , तुम्हे आइसक्रीम कैंडी चूस के खाने में मजा आता है पर मुझे तो इस लम्बी कोन में जीभ दाल दाल कर उसे चाट के खाने में मजा आता है.”
रौशनी , रमेश की बातें सुन खिलखिलाकर हंस पड़ी फिर खुद अब रमेश के करीब जाते हुए उसकी होठों पर अपने गुलाबी होठों को सरकार उसे चूमने लगी और उसके मुँह से रास पिने लगी .. रमेश भी पूरी तरह से साथ देते हुए उसे चूमते रहा..

चुम्बन तोड़ते हुए रमेश - “क्यों रौशनी, यहां इस आज इस पार्क का आनंद आपको आ रहा है न?
रौशनी - “मुझे एक बात यहां की बहुत अच्छी लगी की लोग एक दूसरे से मतलब नहीं रखते की कौन क्या पेहेन रहा है, कैसे रह रहा है और यहाँ जोड़ियां एक दूसरे के साथ मस्तियों में लगे हुए हैं :? रमेश- "रौशनी, अब यहां तुम कैसे एन्जॉय करती हो, यह कोई देखने वाला नहीं या तुम्हारे बारे में कुछ गलत सोचने वाला नहीं. मैं तुम्हें हर वो सुख दूंगा जो आज तक तुझे तुम्हारे पति की इतनी सेवा करके भी नहीं मिला. अब से मेरा केवल एक hi उद्देश्य है की तुझे दुनिया का हर वह सुख हूँ जो तुम जैसी सुन्दर और जवान महिला को मिलना चाहिए...” रमेश dheere-dheere पास फ़ेंक रहा था.
रौशनी भी उस फांसी में आ रही थी और रमेश के काफी करीब आ चुकी थी.
गर्मी काफी बढ़ गयी थी दोनों के बीच लेकिन फिर उन्हें सुनाई दिया की पार्क बंद होने वाला हैं.. और रौशनी फिर अपनी वाच पर टाइम देखि .. उफ़ 10.30 बज चुके थे और उसे अब घर जाना था .. .रमेश को पता था की खेल लम्बा चलने वाला हैं और हु उस खेल को उसी पेस में खेलेगा .. चुदाई तोह हु रौशनी की कर hi चूका हैं .. अब उसे अपना बनाने का टाइम हैं और फिर रौशनी जब चाहे जैसे चाहे … जब बोले उसके पास चली आएगी और हु आराम से रात भर और कई बार रौशनी की बुर की कुटाई कर पाएगा .. उसे अपना बना लेगा ..
दोनों फिर पार्क में एक आखरी चक्कर काट के दोनों पार्क से बाहर आ गए. 11.00 बजे रमेश ने रौशनी को घर पहुँचाया .
रौशनी जाते जाते रमेश के होठों को चूमि और रमेश ने भी रौशनी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाया ..
रौशनी ने रमेश के इस हरकत को देख बोली “धत कमीने कही के .. बड़े ा तमीज दोस्त बन गए हो आप.”
फिर वहां से अपनी कमर और चूतड़ों को मटकते हुए चली गयी.
आज घर पर फिर से एक नोट लिखा था और रोनित ने लिखा था की वह आज उसके दोस्तों के साथ बहार हैं और मिडनाइट के बाद hi आएगा .
पहले तोह रौशनी को बुरा लगता था जब हु घर आती और रोनित नहीं होते थे .. लेकिन अब उसे इतना फर्क नहीं पद रहा था .. वैसे भी देर रात तक वह एक रोमांचक बुड्ढे के साथ वक़्त बीते थी और उसे रोनित को भी उसका कुछ जवाब नहीं देना पद रहा था . रौशनी अब रमेश के बारे में सोचती हुई अपनी बैडरूम में चली गयी और रमेश के लोडे और आज की पार्क में हरकतों की सोचते हुए अपनी बुर में अपनी नयी लायी डिलडो के साथ खेलते हुए जहर गयी और फिर इत्मीनान से सो गयी. कल तोह उसे असलम के सात शाम बितानी थी , वह भी उसकी बेगम का नाटक कर .. उस बात को तोह हु भूल hi गयी थी.






































































