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अब ट्रैन स्टेशन पर रुक जाता हैं …
“रौशनी जी स्टेशन आ चूका हैं .. मुझे अब स्टेशन पर आपके केबिन में छिपकली और उसकी थड़ी साफ़ सफाई करने जिनको बुलाया हैं वह आते hi होंगे .. आप केबिन चलिए मेरे साथ वह आएँगे वहां पर.”
“ठीक हैं खालिद जी चलिए”
“रौशनी जी पहले आप चलिए..”
रौशनी अब अपनी गांड मटकते हुए आगे चली जाती हैं ,

पीछे से खालिद अब रौशनी की मटकती चाल देख अपने उभरते लोडे को खुजलाता हैं ..(है क्या चूतड़ हैं इसकी उफ्फ्फ्फ़ … अगर पकड़ कर दबा लूँ तोह अह्ह्ह कितना मजा आएगा )… इस सोच से उसका लोढ़ा एक जोरदार झटका मारता हैं …
खालिद की नज़र फिर उसकी गोरी से बाँहों पर , डीप ब्लाउज वाली मुलायम मखमली पीठ पर जाती हैं .. उसका लोढ़ा तोह उसकी पंत में बिना कण्ट्रोल के जहटकोण पर झटका मारता हैं … उफ्फ्फ्फ़ इस लोडे को दबा लूँ पुरे बदन पर इसके अहह उफ्फ्फ क्या कड़क माल हैं यार …. )
ऐसे सब खालिद तक के दिमाग में बातें चलती रहती हैं और वह दोनों केबिन पहुँच जाते हैं …
“सलीम जी उठिये .. यहाँ क्लीनिंग करने तक सर ने किसको बुलाया हैं .. छिपकली भी निकालेंगे ..”
सलीम अब खालिद को देखता हैं और समझ जाता हैं ठरकी साला रौशनी पर ानकेहिं टिकाये हुए हैं …
खालिद भी सलीम को देख मुस्कुराता हैं …(साला ऐसी मस्त माल को पटाया होगा कमीने ने .. मज़े लेता होगा साला बुद्धा …)
फिर कुछ 5 मं बाद दो लोग आते हैं केबिन की क्लीनिंग और छिपकली को निकलने …
“रौशनी जी मुझे जाना होगा .. इस स्टॉप का लोग करना पड़ेगा .. इस स्टेशन पर इतना बड़ा एसटीपी नहीं होता हैं .. इसलिए अब इसके बारे में नोट डॉन करना पड़ेगा … में अब जाता हूँ …”
सलीम कही और देख रहा होता हैं तोह खालिद रौशनी के कानों में कहता हैं
“रौशनी जी अगर कुछ तकलीफ हो तोह आपके पास तोह मेरा नंबर हैं hi .. कॉल कर लीजिए .. आपका इंतज़ार करूँगा … “ और खालिद रौशनी को देख मुस्कुराता हैं ..
“हाँ खालिद जी ठीक हैं .. आप जाइये”. फिर खालिद तक वहां से चला जाता हैं.
कुछ 10 मं बाद सब काम ख़तम होता हैं और वह आदमी वहां सेचले जाते हैं.. और ट्रैन अपनी सफर पर फिर से निकल जाती हैं.
“रौशनी जी अच्छा काम किया आपने ..”
“सलीम जी आप तोह सो चुके थे मस्त … अब करना तोह पड़ा hi न .. आपको पता हैं मुझे छिपकली से कितना दर और घिन्न होती हैं … चलो अब सब क्लीन हो चूका हैं …”
फिर एक लड़का चाय लेकर आता हैं और कुछ स्नैक्स .. और दोनों सलीम और रौशनी चाय पीते पीते स्नैक्स ख़तम कर देते हैं.
“सलीम जी आप रुकिए में जरा तक सर को शुक्रिया करके आती हूँ.”
“रौशनी जी अरे क्यों , उसने काम किया न अपना .. अब चोर दीजिये ..”
“अरे .. बहुत मदत की हैं .. काफी जल्दी से मदत करि हैं , ऐसे यह ट्रैन वाले नहीं करते काम .. उन्हें शुक्रिया तोह कहना hi होगा..”
“अच्छा में भी अत हूँ … रौशनी जी”
“अरे क्या आप मेरे बॉडी गार्ड हो .. ः …” रौशनी हस्ती हैं.. “मुझे पता हैं उनका ऑफिस में जाकर शुक्रिया कर आती हूँ तब तक आप आराम कीजिये ..
सलीम अब क्या बोलता .. छुपकर से वही बैठे रहता हैं और रौशनी चली जाती हैं
(साला तक .. सफर में 3 घंटे हुए हैं और अब तक में hi न ले पाया और वहां हु तक तोह खुद hi मज़े ले रहा हैं रौशनी के कंपनी का .. कुछ करना होगा यार नहीं तोह सफर ख़तम होगी और रौशनी से कुछ मस्ती और बातें भी नहीं हो पाएगी … सलीम कुछ प्लान की सोचता हैं.)
दूसरी और रौशनी तक के ऑफिस चली जाती हैं .. वहां हु तक को उनकी चेयर में देखती हैं .. तक कुछ मोबाइल पर देख रहा होहिं और कुछ टेबल के निचे हरकतें करते रौशनी को दीखता हैं .. (दरअसल तक रौशनी को देख इतना गरम हो चूका था हु अपनी मोबाइल पर कुछ पोर्न देख रहा था और अपने मोठे लोडे को हिला रहा था

.. लेकिन रौशनी यह देख नहीं पाती टेबल की वजह से. )
“खालिद जी ,…. आप बिजी लगते हो …”
रौशनी की अचानक आवाज़ सुन वह हड़बड़ा जाता हैं … उफ्फ्फ यह तोह वापस आ गयी … इतना सोचते hi वह अपने लोडे को झट से पंत में दाल ता हैं .. लेकिन ज़िप लगाना भूल जाता हैं ..
“अरे रौशनी जी आप आ गयी .. “
“हाँ खालिद जी आपको शुक्रिया करने आयी हूँ .. आप बिजी तोह नहीं थे …?”
(उफ़ अब क्या बताऊ तूने इतना गरम कर दिया हैं पोर्न देख रहा था और तेरे बारे में सोच मुठ मार रहा था ….)
“नहीं नहीं कुछ नहीं बैठिये न..”
रौशनी बैठ जाती हैं … तक फिर अपनी चेयर को टेबल के पीछे से निकल करा आगे लता हैं …
रौशनी उसे देखती हैं और उसकी नज़र खालिद के क्रॉत्च एरिया पर जाती हैं .. और उसका ज़िप खुला देख चौंक जाती हैं लेकिन चेहरे पर कोई भाव नहीं बदलती …
(उफ्फ्फ खालिद जी की तोह ज़िप खुली हैं .. उफ्फ्फ्क्या हु मोबाइल पर … उफ्फ्फ्फ़ और क्या हु म…. उफ्फ्फ्फ़ )
खालिद इस बता से बेखबर चेयर एडजस्ट करता हैं .. वहां रौशनी उसकी खुली ज़िप पर फिर से नज़र डालती है .. उसे अंदर कुछ हिलते हुए भी दीखता हैं .. लेकिन अपनी नज़र हटाए हुयी बैठी रहती हैं.
“रौशनी जी कैसी शुक्रिया की बातें कर रही हो आप .. फ़र्ज़ हैं मेरा …”
रौशनी खालिद को देख नहीं प् रही थी .. बस उसके खुले ज़िप की सोचती रहती हैं..
“रौशनी जी क्या हुआ .. ज़रा यहाँ देखिये …”
रौशनी धीरे से चेहरा खालिद के तरफ करती हैं .. कण्ट्रोल करते हुए की उसकी नज़र उसके खुले ज़िप पर न जाए..
“नहीं बस शुक्रिया करने आयी थी .. में जाती हूँ”
“अरे रौशनी जी न जाइये रुकिए न … फिर खालिद आगे अपनी बैठे की ोस्तिओं एडजस्ट करता hi हैं की रौशनी की नज़र उसके खुले ज़िप पर जाती हैं और रौशनी उसके लोडे के कुछ हिस्से को देख पति हैं ..
(उफ्फ्फ उनका लोढ़ा का हिस्सा दिख रहा हैं उफ्फ्फ में क्या करू ….)
खालिद कुछ और एडजस्ट करता हैं सीट और रौशनी को अब उसका लोढ़ा और साफ़ दीखता हैं .. उसके गाल तोह पुरे लाल हो जाते हैं …
खालिद भी आखिर कर देख hi लेता हैं रौशनी की नज़र उसके क्रॉत्च के वहां पहले की रौशनी उसकी नज़र वहां से हटा लेती हैं तब तक… .. फिर खालिद खुद निचे देखता हैं तोह उसे समझ आता हैं की उसकी ज़िप्खुली हैं और रौशनी की नज़र वही पर थी … लेकिन इस बात से बेखबर होते का नाटक कर वह बोलता हैं
“रौशनी जी फिर से आप कही और देख रही हो .. देखिये न यहाँ ..”
खालिद कमीना था .. वह अब जान बुझ का रेज बैठा हुआ था की उसका लोढ़ा ज़िप में से रौशनी को और दिखे ..
रौशनी मुड़ती हैं और नज़र फिर से ज़िप पर जाती हैं … खालिद मज़े लेता हैं इस सब का … रौशनी जी कहाँ नज़र हैं आपकी ..
रौशनी शर्माती हैं पूरी लाल गालों की शर्माहट से …

खालिद अब “रौशनी जी जरा मुझे टॉयलेट जाना हैं .. आप कही न जाइये रुकिए ..प्ल्ज़”
रौशनी कुछ नहीं बोलती … फिर खलीदूत जाता हैं तोह अब उसका लोढ़ा थोड़ा बहार hi आता हैं ज़िप के .. रौशनी की तोह शर्माहट और बढ़ती हैं .. (उफ्फ्फ इन्हे पता हैं क्या ज़िप खुला हैं और में इनके लुंड को उफ्फ्फ फ… अब में क्या कहु इनसे उफ्फ्फ्फ़ )
खालिद इस सब का मज़्ज़ा लेते हुए जाता हैं उसी के ऑफिस के बहार टॉयलेट में .. और जान बुझ कर दरवाज़ा ज़रा खुला चोरता हैं …
वहां रौशनी से रहा नहीं जार अहा था .. वह अब खालिद के लोडे को देखने उत्सुक थी ..
उसकी डेविल थॉट्स फिर से आती हैं
“रौशनी जा कर देखो कितना मोटा लोढ़ा होगा तक का .. जाओ …”
“अरे रौशनी पागल हो क्या .. ऐसे न करो .. क्या हुआ हैं तुम्हे”
“अरे ज आना देख .. ऐसे मौके नहीं मिलते .. मर्दों के लुन्डों को देखने .. जा .. मन की मुराद पूरी कर .. मुझे पता हैं तुझे उसका लुंड देखना हैं..”
“नहीं मत करना ऐसे रौशनी तुम अच्छी लेडी हो प्ल्ज़ न करो…”
लेकिन रौशनी अपने डेविल थॉट्स को अपने ऊपर हावी होने देती हैं और उठ कर टॉयलेट के पास जाती हैं.
वहां कहलीद अपने लोडे को पिचसाब करते हुए वह देखती हैं .. उसकी दिल में छुरियां चलने लगती हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ काफी मोटा हैं … अब सलीम और असलम और रमेश से तोह मोटा नहीं लेकिन उफ्फफ्फ्फ़ काफी मस्त हैं .. ओह गॉड रौशनी यह तुम क्या सोच रही हो उफ्फ्फ्फ़..)
खालिद भी अपने लोडे को हिलता हैं .. उसकी आक्न्हों के कोने से वह देख पता हैं रौशनी की नज़रें.. और अपने लोडे को और हिलता हैं .. और पूरा सख्त करता हैं अपने लोडे को..

वहां रौशनी के अनादर क गर्मी और एक लोडे को देख बढ़ती हैं ..उसकी नज़र बस खलीलड़ के मोठे लोडे पर hi टिके रहती हैं … उफ्फ्फ्फ़ कितना अच्छा हैं .. मुँह में तोह …)

(उफ्फ्फ रौशनी क्या सोचती रहती हो ऐसे गन्दी चीज़ें उफ्फ्फ …उफ्फफ्फ्फ़ उनका मूतना ख़तम हो रहा हैं .. यहाँ से जाना चाहिए उफ्फ्फ्फ़…)
और एक आखरी नज़र दाल रौशनी वहां से जाकर ऑफिस में बैठ जाती हैं.
खालिद अब वहां आता हैं इस बार ज़िप बंद किये .. वह तोह खुश था की रौशनी उसके लोडे को देख चुकती थी … ऐसी गोरी गदरायी बदन वाली महिला उसके लोडे को देख चुकी थी .. इस बात से उसका लोढ़ा तोह सख्त hi रहता हैं पंत में.
वह ऑफिस आता हैं तोह रौशनी की नज़र सीधे वहां जाती हैं और उसके सख्त उभर को देख पति हैं.. लेकिन उसकी नज़र वहां से हटने का नाम hi नहीं लेती … उसकी छूट में हलचल होनी शुरू हुयी थी …
“रौशनी जी … कैसा लगा …”
“खालिद जी मतलब …” रौशनी हड़बड़ा कर बोलती हैं .. अपने नज़रों को वहां से निकलती हुयी.
“रौशनी जी .. ट्रैन कैसा लगा …. बस वही पूछ रहा हूँ ..”
“हम.. हम्म.. हाँ अच्छा हैं .. बहुत अच्छा …”
सवाल यह था की रौशनी लोडे की बाटकर रही थी .. या ट्रैन की ???….
“खुश हूँ आपको बहुत अच्छा लगा .. ट्रैन …”
“रौशनी फिर खालिद को देख हड़बड़ाती हुयी ..
“हाँ ट्रैन .. हाँ ट्रैन बहुत अच्छी हैं …”
“रौशनी जी काफी क्लीन हैं न …. में बहुत क्लीन रखता हूँ यहाँ …”
“हाँ खालिद जी काफी क्लीन हैं .. ट्रैन …”
“अच्छा और क्या अच्छा लगा .. वैसे बड़ी ट्रैन हैं न …”
“हाँ काफी बड़ी हैं … ट्रैन ..”
रौशनी कितनी भी तरय करे उसकी नज़र खालिद के लोडे के वहां चली hi जाती हैं .. उसके सख्त लोडे के उभर पर..
फिर खालिद उठ खड़ा होता हैं और कुछ पेपर अपनी टेबल से उठाने रौशनी ेके ज़रा नज़दीक जाता hi हैं .. और रौशनी की आँखों के सामने अब खालिद का सख्त उभर था … काफी करीब उसके लिप्स के ..
खेद जान बुझ कर कुछ ढूंढ़ने का नाटक करता हैं .. रौशनी की नज़र भी उसके लोडे के सख्त उभर पर hi थी.. वहां से हटा नहीं रही थी नज़र और उसकी आँखें भी हलके से बंद हो रही थी …

सन ऐसे ता की अगर ट्रैन थोड़ा भी बड़ा झटका देता तोह खालिद का सख्त उभर जाकर सीधे रौशनी के मुँह से टकराता …
फिर खालिद कुछ पेपर निकलता हैं … और बैठ जाता हैं कुर्सी पर…
“रौशनी जी … ..
रौशनी इस सब से काफी सेहम चुकी थी .. उसकी छूट में गर्माहट बढ़ रही थी … गर्मी च रही थी … पहले की कुछ और होता वह उठ जाती हैं..
“खालिद जी मुझे जाना होगा .. फिर से शुक्रिया आपका ..”
“अरे रौशनी जी कहाँ जार यही हो …” और खालिद रौशनी के हाथों को थम लेता हैं ..
रौशनी की बदन में मनो छुरियां चलने लगती हैं…
“खालिद जी .. क्या कर रहे हो आप … मेरा हाथ छोड़िये न..”
खालिद एक हल्का सस्क्वीज़ देता हैं ..”ओह सॉरी रौशनी जी .. “ और अपना हाथ निकलता हैं ..
“ी ऍम सो सॉरी रौशनी . ी didn’t मैं तो..”
“इतस फाइन खालिद जी … बूत ी नीड तो जो.. मुझे जाना होगा …”
“हाँ रौशनी जी ज़रूर में कौन हूँ आपको रोकने वाला .. ु मई जो..”
रौशनी इम्परसस थी खालिद के इंग्लिश से .. काफी फ़्लूएंट थे .. “खालिद जी बस सलीम जी इंतज़ार कर रहे होने ..”
“No प्रोब्लेम्स जाइये .. बस हमें न भूलिए रौशनी जी … हमारा नंबर भी दिया हैं आपको .. जब कोई तरीन की बुकिंग होय ा और कुछ काम , मुझे कॉल करिये …”
“हाँ खालिद जी ठीक हैं …”
फिर रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसके दिमाग में खालिद का मोटा लोढ़ा घूमते रहता हैं .. छूट की गर्माहट भी उसे महसूस होते हुए रौशनी अब वहां से केबिन के तरफ चली जाती हैं.
अब दूसरी और इस सब के डरुअन सलीम अपने प्लान को अमल करने में लगा हुआ था …
वह इस सफर में किसी भी हाल में रौशनी के साथ पूरी मस्ती करना चाहता था … अगर सीधे तरीके से रौशनी उससे पैट नहीं जाती तोह वह घी टेडी ऊँगली से भी निकलना जनता था …
उसने एक सेक्सुअल फीलिंग्स बढ़ने वाली गोली लायी थी .. उसने उसे रौशनी पर उसे करने का प्लान बनाया था अगर वह सीधे तरीके से उससे मस्ती नक् आरती तोह.. सलीम अब काफी डेस्पेरेट हो चुके थे और उसे अभी इस्तेमाल करने का सोच लिया था उसने.
ट्रैन में सॉफ्ट ड्रिंक्स बेचते हुए एक आदमी को पकड़ कर उसने दो सॉफ्ट ड्रिंक्स ले ली थी .. और वह उसे कोक में मिलाने वाला था और उसे रौशनी को देने वाला था पीने.
रौशनी केबिन में आ गयी ..
“रौशनी जी सब ठीक हैं न .. “
“हाँ सलीम जी ठेके हैं सब .. क्यों नहीं होगा .. ठीक हूँ “
रौशनी के दिमाग में खालिद तक का लोढ़ा घूम रहा था और उस कामुक सोच की वजह से रौशनी के बदन के अंदर की गर्मी बढ़ी हुयी थी.
“रौशनी जी मैंने सॉफ्ट ड्रिंक्स खरीदी हैं .. हम दोनों पिएंगे उसे अभी ठीक हैं न …”
“हाँ ठीक हैं .. लेकिन जरा रुकिए बैग से थोड़ा वाइप निकलने दीजिये .. मेरे हाथ थोड़े गंदे हैं,,,”
रौशनी उठ कर बैग से वाइप निकलने लग जाती हैं .. और सलीम उसी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सॉफ्ट ड्रिंक में वह नशीली गर्मी बढ़ने वाली गोली मिलता हैं…
रौशनी अपने हाथों को क्लीन करती हैं .. फिर सलीम एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल रौशनी को देता हैं .. जिस में नशीली गोलियां मिलायी हुयी थी.

रौशनी इस सब से बेखबर सॉफ्ट ड्रिंक पिने , बोतल को अपने होठों से लगाती हैं…

“रौशनी जी स्टेशन आ चूका हैं .. मुझे अब स्टेशन पर आपके केबिन में छिपकली और उसकी थड़ी साफ़ सफाई करने जिनको बुलाया हैं वह आते hi होंगे .. आप केबिन चलिए मेरे साथ वह आएँगे वहां पर.”
“ठीक हैं खालिद जी चलिए”
“रौशनी जी पहले आप चलिए..”
रौशनी अब अपनी गांड मटकते हुए आगे चली जाती हैं ,

पीछे से खालिद अब रौशनी की मटकती चाल देख अपने उभरते लोडे को खुजलाता हैं ..(है क्या चूतड़ हैं इसकी उफ्फ्फ्फ़ … अगर पकड़ कर दबा लूँ तोह अह्ह्ह कितना मजा आएगा )… इस सोच से उसका लोढ़ा एक जोरदार झटका मारता हैं …
खालिद की नज़र फिर उसकी गोरी से बाँहों पर , डीप ब्लाउज वाली मुलायम मखमली पीठ पर जाती हैं .. उसका लोढ़ा तोह उसकी पंत में बिना कण्ट्रोल के जहटकोण पर झटका मारता हैं … उफ्फ्फ्फ़ इस लोडे को दबा लूँ पुरे बदन पर इसके अहह उफ्फ्फ क्या कड़क माल हैं यार …. )
ऐसे सब खालिद तक के दिमाग में बातें चलती रहती हैं और वह दोनों केबिन पहुँच जाते हैं …
“सलीम जी उठिये .. यहाँ क्लीनिंग करने तक सर ने किसको बुलाया हैं .. छिपकली भी निकालेंगे ..”
सलीम अब खालिद को देखता हैं और समझ जाता हैं ठरकी साला रौशनी पर ानकेहिं टिकाये हुए हैं …
खालिद भी सलीम को देख मुस्कुराता हैं …(साला ऐसी मस्त माल को पटाया होगा कमीने ने .. मज़े लेता होगा साला बुद्धा …)
फिर कुछ 5 मं बाद दो लोग आते हैं केबिन की क्लीनिंग और छिपकली को निकलने …
“रौशनी जी मुझे जाना होगा .. इस स्टॉप का लोग करना पड़ेगा .. इस स्टेशन पर इतना बड़ा एसटीपी नहीं होता हैं .. इसलिए अब इसके बारे में नोट डॉन करना पड़ेगा … में अब जाता हूँ …”
सलीम कही और देख रहा होता हैं तोह खालिद रौशनी के कानों में कहता हैं
“रौशनी जी अगर कुछ तकलीफ हो तोह आपके पास तोह मेरा नंबर हैं hi .. कॉल कर लीजिए .. आपका इंतज़ार करूँगा … “ और खालिद रौशनी को देख मुस्कुराता हैं ..
“हाँ खालिद जी ठीक हैं .. आप जाइये”. फिर खालिद तक वहां से चला जाता हैं.
कुछ 10 मं बाद सब काम ख़तम होता हैं और वह आदमी वहां सेचले जाते हैं.. और ट्रैन अपनी सफर पर फिर से निकल जाती हैं.
“रौशनी जी अच्छा काम किया आपने ..”
“सलीम जी आप तोह सो चुके थे मस्त … अब करना तोह पड़ा hi न .. आपको पता हैं मुझे छिपकली से कितना दर और घिन्न होती हैं … चलो अब सब क्लीन हो चूका हैं …”
फिर एक लड़का चाय लेकर आता हैं और कुछ स्नैक्स .. और दोनों सलीम और रौशनी चाय पीते पीते स्नैक्स ख़तम कर देते हैं.
“सलीम जी आप रुकिए में जरा तक सर को शुक्रिया करके आती हूँ.”
“रौशनी जी अरे क्यों , उसने काम किया न अपना .. अब चोर दीजिये ..”
“अरे .. बहुत मदत की हैं .. काफी जल्दी से मदत करि हैं , ऐसे यह ट्रैन वाले नहीं करते काम .. उन्हें शुक्रिया तोह कहना hi होगा..”
“अच्छा में भी अत हूँ … रौशनी जी”
“अरे क्या आप मेरे बॉडी गार्ड हो .. ः …” रौशनी हस्ती हैं.. “मुझे पता हैं उनका ऑफिस में जाकर शुक्रिया कर आती हूँ तब तक आप आराम कीजिये ..
सलीम अब क्या बोलता .. छुपकर से वही बैठे रहता हैं और रौशनी चली जाती हैं
(साला तक .. सफर में 3 घंटे हुए हैं और अब तक में hi न ले पाया और वहां हु तक तोह खुद hi मज़े ले रहा हैं रौशनी के कंपनी का .. कुछ करना होगा यार नहीं तोह सफर ख़तम होगी और रौशनी से कुछ मस्ती और बातें भी नहीं हो पाएगी … सलीम कुछ प्लान की सोचता हैं.)
दूसरी और रौशनी तक के ऑफिस चली जाती हैं .. वहां हु तक को उनकी चेयर में देखती हैं .. तक कुछ मोबाइल पर देख रहा होहिं और कुछ टेबल के निचे हरकतें करते रौशनी को दीखता हैं .. (दरअसल तक रौशनी को देख इतना गरम हो चूका था हु अपनी मोबाइल पर कुछ पोर्न देख रहा था और अपने मोठे लोडे को हिला रहा था

.. लेकिन रौशनी यह देख नहीं पाती टेबल की वजह से. )
“खालिद जी ,…. आप बिजी लगते हो …”
रौशनी की अचानक आवाज़ सुन वह हड़बड़ा जाता हैं … उफ्फ्फ यह तोह वापस आ गयी … इतना सोचते hi वह अपने लोडे को झट से पंत में दाल ता हैं .. लेकिन ज़िप लगाना भूल जाता हैं ..
“अरे रौशनी जी आप आ गयी .. “
“हाँ खालिद जी आपको शुक्रिया करने आयी हूँ .. आप बिजी तोह नहीं थे …?”
(उफ़ अब क्या बताऊ तूने इतना गरम कर दिया हैं पोर्न देख रहा था और तेरे बारे में सोच मुठ मार रहा था ….)
“नहीं नहीं कुछ नहीं बैठिये न..”
रौशनी बैठ जाती हैं … तक फिर अपनी चेयर को टेबल के पीछे से निकल करा आगे लता हैं …
रौशनी उसे देखती हैं और उसकी नज़र खालिद के क्रॉत्च एरिया पर जाती हैं .. और उसका ज़िप खुला देख चौंक जाती हैं लेकिन चेहरे पर कोई भाव नहीं बदलती …
(उफ्फ्फ खालिद जी की तोह ज़िप खुली हैं .. उफ्फ्फ्क्या हु मोबाइल पर … उफ्फ्फ्फ़ और क्या हु म…. उफ्फ्फ्फ़ )
खालिद इस बता से बेखबर चेयर एडजस्ट करता हैं .. वहां रौशनी उसकी खुली ज़िप पर फिर से नज़र डालती है .. उसे अंदर कुछ हिलते हुए भी दीखता हैं .. लेकिन अपनी नज़र हटाए हुयी बैठी रहती हैं.
“रौशनी जी कैसी शुक्रिया की बातें कर रही हो आप .. फ़र्ज़ हैं मेरा …”
रौशनी खालिद को देख नहीं प् रही थी .. बस उसके खुले ज़िप की सोचती रहती हैं..
“रौशनी जी क्या हुआ .. ज़रा यहाँ देखिये …”
रौशनी धीरे से चेहरा खालिद के तरफ करती हैं .. कण्ट्रोल करते हुए की उसकी नज़र उसके खुले ज़िप पर न जाए..
“नहीं बस शुक्रिया करने आयी थी .. में जाती हूँ”
“अरे रौशनी जी न जाइये रुकिए न … फिर खालिद आगे अपनी बैठे की ोस्तिओं एडजस्ट करता hi हैं की रौशनी की नज़र उसके खुले ज़िप पर जाती हैं और रौशनी उसके लोडे के कुछ हिस्से को देख पति हैं ..
(उफ्फ्फ उनका लोढ़ा का हिस्सा दिख रहा हैं उफ्फ्फ में क्या करू ….)
खालिद कुछ और एडजस्ट करता हैं सीट और रौशनी को अब उसका लोढ़ा और साफ़ दीखता हैं .. उसके गाल तोह पुरे लाल हो जाते हैं …
खालिद भी आखिर कर देख hi लेता हैं रौशनी की नज़र उसके क्रॉत्च के वहां पहले की रौशनी उसकी नज़र वहां से हटा लेती हैं तब तक… .. फिर खालिद खुद निचे देखता हैं तोह उसे समझ आता हैं की उसकी ज़िप्खुली हैं और रौशनी की नज़र वही पर थी … लेकिन इस बात से बेखबर होते का नाटक कर वह बोलता हैं
“रौशनी जी फिर से आप कही और देख रही हो .. देखिये न यहाँ ..”
खालिद कमीना था .. वह अब जान बुझ का रेज बैठा हुआ था की उसका लोढ़ा ज़िप में से रौशनी को और दिखे ..
रौशनी मुड़ती हैं और नज़र फिर से ज़िप पर जाती हैं … खालिद मज़े लेता हैं इस सब का … रौशनी जी कहाँ नज़र हैं आपकी ..
रौशनी शर्माती हैं पूरी लाल गालों की शर्माहट से …

खालिद अब “रौशनी जी जरा मुझे टॉयलेट जाना हैं .. आप कही न जाइये रुकिए ..प्ल्ज़”
रौशनी कुछ नहीं बोलती … फिर खलीदूत जाता हैं तोह अब उसका लोढ़ा थोड़ा बहार hi आता हैं ज़िप के .. रौशनी की तोह शर्माहट और बढ़ती हैं .. (उफ्फ्फ इन्हे पता हैं क्या ज़िप खुला हैं और में इनके लुंड को उफ्फ्फ फ… अब में क्या कहु इनसे उफ्फ्फ्फ़ )
खालिद इस सब का मज़्ज़ा लेते हुए जाता हैं उसी के ऑफिस के बहार टॉयलेट में .. और जान बुझ कर दरवाज़ा ज़रा खुला चोरता हैं …
वहां रौशनी से रहा नहीं जार अहा था .. वह अब खालिद के लोडे को देखने उत्सुक थी ..
उसकी डेविल थॉट्स फिर से आती हैं
“रौशनी जा कर देखो कितना मोटा लोढ़ा होगा तक का .. जाओ …”
“अरे रौशनी पागल हो क्या .. ऐसे न करो .. क्या हुआ हैं तुम्हे”
“अरे ज आना देख .. ऐसे मौके नहीं मिलते .. मर्दों के लुन्डों को देखने .. जा .. मन की मुराद पूरी कर .. मुझे पता हैं तुझे उसका लुंड देखना हैं..”
“नहीं मत करना ऐसे रौशनी तुम अच्छी लेडी हो प्ल्ज़ न करो…”
लेकिन रौशनी अपने डेविल थॉट्स को अपने ऊपर हावी होने देती हैं और उठ कर टॉयलेट के पास जाती हैं.
वहां कहलीद अपने लोडे को पिचसाब करते हुए वह देखती हैं .. उसकी दिल में छुरियां चलने लगती हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ काफी मोटा हैं … अब सलीम और असलम और रमेश से तोह मोटा नहीं लेकिन उफ्फफ्फ्फ़ काफी मस्त हैं .. ओह गॉड रौशनी यह तुम क्या सोच रही हो उफ्फ्फ्फ़..)
खालिद भी अपने लोडे को हिलता हैं .. उसकी आक्न्हों के कोने से वह देख पता हैं रौशनी की नज़रें.. और अपने लोडे को और हिलता हैं .. और पूरा सख्त करता हैं अपने लोडे को..

वहां रौशनी के अनादर क गर्मी और एक लोडे को देख बढ़ती हैं ..उसकी नज़र बस खलीलड़ के मोठे लोडे पर hi टिके रहती हैं … उफ्फ्फ्फ़ कितना अच्छा हैं .. मुँह में तोह …)

(उफ्फ्फ रौशनी क्या सोचती रहती हो ऐसे गन्दी चीज़ें उफ्फ्फ …उफ्फफ्फ्फ़ उनका मूतना ख़तम हो रहा हैं .. यहाँ से जाना चाहिए उफ्फ्फ्फ़…)
और एक आखरी नज़र दाल रौशनी वहां से जाकर ऑफिस में बैठ जाती हैं.
खालिद अब वहां आता हैं इस बार ज़िप बंद किये .. वह तोह खुश था की रौशनी उसके लोडे को देख चुकती थी … ऐसी गोरी गदरायी बदन वाली महिला उसके लोडे को देख चुकी थी .. इस बात से उसका लोढ़ा तोह सख्त hi रहता हैं पंत में.
वह ऑफिस आता हैं तोह रौशनी की नज़र सीधे वहां जाती हैं और उसके सख्त उभर को देख पति हैं.. लेकिन उसकी नज़र वहां से हटने का नाम hi नहीं लेती … उसकी छूट में हलचल होनी शुरू हुयी थी …
“रौशनी जी … कैसा लगा …”
“खालिद जी मतलब …” रौशनी हड़बड़ा कर बोलती हैं .. अपने नज़रों को वहां से निकलती हुयी.
“रौशनी जी .. ट्रैन कैसा लगा …. बस वही पूछ रहा हूँ ..”
“हम.. हम्म.. हाँ अच्छा हैं .. बहुत अच्छा …”
सवाल यह था की रौशनी लोडे की बाटकर रही थी .. या ट्रैन की ???….
“खुश हूँ आपको बहुत अच्छा लगा .. ट्रैन …”
“रौशनी फिर खालिद को देख हड़बड़ाती हुयी ..
“हाँ ट्रैन .. हाँ ट्रैन बहुत अच्छी हैं …”
“रौशनी जी काफी क्लीन हैं न …. में बहुत क्लीन रखता हूँ यहाँ …”
“हाँ खालिद जी काफी क्लीन हैं .. ट्रैन …”
“अच्छा और क्या अच्छा लगा .. वैसे बड़ी ट्रैन हैं न …”
“हाँ काफी बड़ी हैं … ट्रैन ..”
रौशनी कितनी भी तरय करे उसकी नज़र खालिद के लोडे के वहां चली hi जाती हैं .. उसके सख्त लोडे के उभर पर..
फिर खालिद उठ खड़ा होता हैं और कुछ पेपर अपनी टेबल से उठाने रौशनी ेके ज़रा नज़दीक जाता hi हैं .. और रौशनी की आँखों के सामने अब खालिद का सख्त उभर था … काफी करीब उसके लिप्स के ..
खेद जान बुझ कर कुछ ढूंढ़ने का नाटक करता हैं .. रौशनी की नज़र भी उसके लोडे के सख्त उभर पर hi थी.. वहां से हटा नहीं रही थी नज़र और उसकी आँखें भी हलके से बंद हो रही थी …

सन ऐसे ता की अगर ट्रैन थोड़ा भी बड़ा झटका देता तोह खालिद का सख्त उभर जाकर सीधे रौशनी के मुँह से टकराता …
फिर खालिद कुछ पेपर निकलता हैं … और बैठ जाता हैं कुर्सी पर…
“रौशनी जी … ..
रौशनी इस सब से काफी सेहम चुकी थी .. उसकी छूट में गर्माहट बढ़ रही थी … गर्मी च रही थी … पहले की कुछ और होता वह उठ जाती हैं..
“खालिद जी मुझे जाना होगा .. फिर से शुक्रिया आपका ..”
“अरे रौशनी जी कहाँ जार यही हो …” और खालिद रौशनी के हाथों को थम लेता हैं ..
रौशनी की बदन में मनो छुरियां चलने लगती हैं…
“खालिद जी .. क्या कर रहे हो आप … मेरा हाथ छोड़िये न..”
खालिद एक हल्का सस्क्वीज़ देता हैं ..”ओह सॉरी रौशनी जी .. “ और अपना हाथ निकलता हैं ..
“ी ऍम सो सॉरी रौशनी . ी didn’t मैं तो..”
“इतस फाइन खालिद जी … बूत ी नीड तो जो.. मुझे जाना होगा …”
“हाँ रौशनी जी ज़रूर में कौन हूँ आपको रोकने वाला .. ु मई जो..”
रौशनी इम्परसस थी खालिद के इंग्लिश से .. काफी फ़्लूएंट थे .. “खालिद जी बस सलीम जी इंतज़ार कर रहे होने ..”
“No प्रोब्लेम्स जाइये .. बस हमें न भूलिए रौशनी जी … हमारा नंबर भी दिया हैं आपको .. जब कोई तरीन की बुकिंग होय ा और कुछ काम , मुझे कॉल करिये …”
“हाँ खालिद जी ठीक हैं …”
फिर रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसके दिमाग में खालिद का मोटा लोढ़ा घूमते रहता हैं .. छूट की गर्माहट भी उसे महसूस होते हुए रौशनी अब वहां से केबिन के तरफ चली जाती हैं.
अब दूसरी और इस सब के डरुअन सलीम अपने प्लान को अमल करने में लगा हुआ था …
वह इस सफर में किसी भी हाल में रौशनी के साथ पूरी मस्ती करना चाहता था … अगर सीधे तरीके से रौशनी उससे पैट नहीं जाती तोह वह घी टेडी ऊँगली से भी निकलना जनता था …
उसने एक सेक्सुअल फीलिंग्स बढ़ने वाली गोली लायी थी .. उसने उसे रौशनी पर उसे करने का प्लान बनाया था अगर वह सीधे तरीके से उससे मस्ती नक् आरती तोह.. सलीम अब काफी डेस्पेरेट हो चुके थे और उसे अभी इस्तेमाल करने का सोच लिया था उसने.
ट्रैन में सॉफ्ट ड्रिंक्स बेचते हुए एक आदमी को पकड़ कर उसने दो सॉफ्ट ड्रिंक्स ले ली थी .. और वह उसे कोक में मिलाने वाला था और उसे रौशनी को देने वाला था पीने.
रौशनी केबिन में आ गयी ..
“रौशनी जी सब ठीक हैं न .. “
“हाँ सलीम जी ठेके हैं सब .. क्यों नहीं होगा .. ठीक हूँ “
रौशनी के दिमाग में खालिद तक का लोढ़ा घूम रहा था और उस कामुक सोच की वजह से रौशनी के बदन के अंदर की गर्मी बढ़ी हुयी थी.
“रौशनी जी मैंने सॉफ्ट ड्रिंक्स खरीदी हैं .. हम दोनों पिएंगे उसे अभी ठीक हैं न …”
“हाँ ठीक हैं .. लेकिन जरा रुकिए बैग से थोड़ा वाइप निकलने दीजिये .. मेरे हाथ थोड़े गंदे हैं,,,”
रौशनी उठ कर बैग से वाइप निकलने लग जाती हैं .. और सलीम उसी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सॉफ्ट ड्रिंक में वह नशीली गर्मी बढ़ने वाली गोली मिलता हैं…
रौशनी अपने हाथों को क्लीन करती हैं .. फिर सलीम एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल रौशनी को देता हैं .. जिस में नशीली गोलियां मिलायी हुयी थी.

रौशनी इस सब से बेखबर सॉफ्ट ड्रिंक पिने , बोतल को अपने होठों से लगाती हैं…











































































