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- Dec 5, 2013
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दुपहर के 2 बजे –
“अह्ह्ह उफ्फ्फ सलीम मियां ममम क्या छोड़ते हो आप उफ्फ्फ आपके बड़े लोडे को बहुत मिस करि हूँ .. उफ़ अह्ह्ह ऐसे hi छोड़िये मम”
“उफ़ मीनल तेरी चुदाई कितने दिनों से नहीं की उफ्फ्फ क्या अस्त टाइट छूट हैं तेरी … इतनी चुदाई बाद भी इतनी टाइट उफ्फ्फ ये ले मेरे लोडे को अपनी छूट में. अह्ह्ह्ह”
“हाँ सलीम मियां आप hi हो मेरी चुदाई करने वाले उफ्फ्फ , आपके hi बड़े लुंड से चूड़ी हूँ अहह एस आप का लोढ़ा hi मेरी छूट में घुसा हैं आज तक अहह मम एस..”
सलीम ने अपने पुरे वज़न को मीनल के बदन पर दाल उसकी बुरी तरह से चुदाई कर रहा था … मीनल के रेड नेल पोलिश वाले हाथ अब सलीम की पीठ पर थे और उसकी पीठ पर निशाँ बनाए रहे थे ..


“अहह सलीम आप जब पूरा वज़न दाल मेरी चुदाई करते हो तुह उफ्फ्फ ममम क्या मस्त फीलिंग हैं मम एस हाँ मेरे बुड्ढे चूड़ाकड मेरी छूट की कुटाई करते रहिये अहह यस ममम मेरी छूट की चुदाई करते रहिये अह्ह्ह क्या लोढ़ा हैं आपका उफ्फ्फ ममम”
सलीम अब जोरों से निचे लेती मीनल की चुदाई ाकरते रहा .. अहह यह ले मम मीनल तू मेरी हैं बस मेरी रांड साली अहह क्या छूट हैं उफ़ मम ये ले मेरे मोठे लोडे को तेरी रसीली छूट में अहह मम एस लो ममम”
यहाँ दोनों की जमकर चुदाई चल रही थी
————————————————————————
अब दूसरी तरफ .. दुपहर का टाइम था तोह रौशनी असलम और सलीम के लिए लंच बनाने आती हैं उनके घरी..
वह रसोई घर में पहुंची hi थी की असलम पीछे से आकर उसे पकड़ लिया … “रुकसाना बेगम तुम्हे बहुत मिस किया .. उफ़ तुम नाश्ता बना कर इतनी जल्दी निकल गयी ममम”
“रौशनी को अब असलम के ऐसे पकड़ने से कोई ऐतराज़ नहीं था .. बल्कि उसे यह पसंद आने लगा था …
“उफ़ असलम जी काम पर जाना थान ा .. लेट हुयी थी … बस अब आ गयी हूँ .. लंच बनाना के लिए”
“रुकसाना बेगम आज लंच न बनाओ .. बस मेरे साथ वक़्त बिताओ ..”
“क्यों असलम जी .. सलीम जी भी आएँगे न उन्हें तोह लंच चाहिए न.
“रुकसाना बेगम आप सलीम से ज्यादा लगाव रखती हो या मुझे से .. उफ्फ्फ .. वैसे भी वह आज बहार hi कहाँ खाने वाले हैं उसने मुझे बताया हैं>”
“अच्छा ठीक हैं फिर आपको क्यों लंच नहीं करनी …?”
“रुकसाना बेगम आज मैंने बहार से बमगया हैं बिरयानी .. आज बस आप और में वक़्त बिताएंगे .. आइये न आज आपसे ढेर साड़ी प्यार की बातें करनी हैं …”
“अच्छा असलम जी …चलिए …”
असलम ऐसे hi रौशनी के कमर को पकड़ कर अपने तरफ खींच लिया और उसके साथ हॉल में जाने लगा … उसने रौशनी की मुलायम गोरी कमर को कास कर पकड़ लिया था .. वहां ला निशाँ भी हुए थे … रौशनी सच में बस थोड़ी सी दबोचने पर ला हो जाती थी …
रौशनी अब अपने सर को असलम के कन्धों पर राखी ..लेकिन जैसे मैंने बताया था असलम उससे काम कद का होने से उसे सर थोड़ा साइड में झुकना पड़ा .. और उसके गुलाबी होठं असलम के नज़दीक थे ..


असलम का लोढ़ा तोह इस स्पर्श से hi टाइट होने लगा था … रौशनी उसके बाँहों में थी ..उससे कोई शिकायत भी नहीं थी .. इसलिए असलम इस सब का मज़्ज़ा ले रहा था .. फिर असलम सोफे पर बैठ गया और उसने रौशनी को अपने पास खिंच लिया.
रौशनी अब असलम के गॉड में बैठी हुयी हैं उसकी काली ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे पर .. असलम उस की खुशबु सूंघते hi उसका लोढ़ा झटके मारने लगता हैं .. अब रौशनी उसकी गॉड में बैठी हैं तोह वह भी उसके बड़े लुंड के झटके महसूस कर रही थी …
“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न , में गिर जाती तोह ..”
“रुकसाना बेगम तुम कैसे गिरेगी में तुम्हे कास कर पकड़ रखा हूँ…. असलम फिर रौशनी को और अपनी बाँहों में दबोच लेता हैं…
“देखो रुकसाना बेगम मेरी मज़बूत बाहें तुम्हे पकडे रखा हैं .. आप गिर hi नहीं सकती ..”
फिर असलम रौशनी के गालों को चूमने लगता हैं … रौशनी को असलम के चुम्मे ाचे लग रहे थे … फिर असलम रौशनी के चेहरे को अपने तरफ करता हैं.. रौशनी की गुलाबी होठं अब असलम के होठों के करीब हैं और असलम आगे झुकते हुए रौशनी के होठों को चुम लेता हैं .. रौशनी भी बिना शिकायत किये इस बार असलम के चुम्बन का साथ देती हैं .. असलम के काळा होठं अब रौशनी की गुलाबी होठों पर दबने लगते हैं .. धीरे धीरे वह उसे और जोरों से चूमने लगता हैं .. रौशनी की मुलायम होतन्ह अब असलम के कठोर होठों को स्वीकार करती हैं और दोनों एक गहरी सी फ्रेंच किश में लग जाते हैं ..
फ्रेंच किश के दौरान असलम का लुंड ाबपुरा औकात में आ चुक्का हैं और रौशनी उसके लुंड को मह्सुश करती हूँ आह भर्ती हैं…
रोशनी और असलम अब गहरी चुम्बन में लगे हुए हैं और रौशनी के ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे को कवर करती हुयी दोनों चूमने में मस्त मौला हैं..
दूसरी और मीनल अब अपने घुटनो के बल अपनी गांड को ऊपर उठाये बीएड पर हैं और सलीम पीछे से उसे एक कुत्ते की तरह उसे छोड़ने अपने लुंड को उसकी गुलाबी छूट के हटोहों पर रगड़ने लगता हैं
“उफ़ सलीम मियां मम आप कितने शरारती हैं उफ्फ्फ आपका मोटा लोढ़ा अब डालिये भी मेरी इस कमसिन छूट में उफ़ “
“हाँ मीनल मेरी रांड रुक न थोड़ा मज़े लेने दे न ममम क्या गोल मटोल चूतड़ हैं तेरे उफ्फ्फ…..”
सलीम अब धीरे धीरे अपने लोडे को मीनल की छूट में गहसूसने लगता हैं .. धीरे से अब उसका आधा लुंड उसकी छूट में जा चुका होता हैं और वह धीमी तरह से धक्के मारने लगता हैं ..
वहां मीनल जोरों की सिसकारियां मारने लगती हैं “उफ़ सलीम मियां तुम्हारा ये मोटा लुंड मम आधा अंदर जा चुक्का हैं .. उफ्फ्फ्फ़ और डालिये न मम ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में उतरिये न मममम सलीम मियां …”
अब सलीम अपने लोडे को पूरी तरह से मीनल की छूट में घुसा कर उसकी चुदाई करने लगता हैं
“उफ़ मीनल मम मेरी चूड़ाकड ट्रैंड उफ्फ्फ ये ले मेरा लोढ़ा मम उफ्फ्फ इतनी टाइट छूट हैं तेरी अहह मम मीनल ये ले मेरा मूसल तेरी इस कमसिन छूट में ..अह्ह्ह ये ले ये ले ममममम”
सलीम पीछे से जोरदार धक्के देता हैं और निचे मीनल की चूचियां हिलने लगती हैं … सलीम अब उसकी चूचियों को पकड़ते हुए और जोरों का धक्का देता है …
“मीनल मम ये ले उफ़ मेरा कला सांड जैसा लुंड तेरी इस छूट में अहह ले ले मेरी जान मेरी चूड़ाकड मेरी रांड उफ्फ्फ ये ले…”
“अहह मेरे छोड़ू जानवर उफ्फ्फ हाँ ममम मेरी छूट का भोसड़ा बना दे अपने इस फौलादी लोडे से उफ्फ्फ मेरी छूट तेरे लुंड के लिए hi बानी हैं मम सलीम मियां ममम उफ्फ्फ “



दोनों की ज़बरदस्त चुदाई उस एक कमरे के फ्लैट में चलती रहती हैं ..
————————————————————————
वहां ंगो में असलम के घर -
असलम अब रौशनी को अपने बाँहों में लेकर उसे बेतहाशा चुम रहा हैं और रौशनी भी उसका साथ दे रही हैं …
कुछ 5 मं की चुम्बन के बाद असलम और रौशनी के होतं जुड़ा होते हैं और रौशनी एबीएस हराम और कामुकता से असलम के चेहरे को देख रही हैं…
“रुकसाना बेगम उफ्फ्फ तुम्हारे होठों में ापृत हैं अमृत ममम क्या चूमती हो मममम”
“असलम मियां आप भी न उफ्फ्फ इना जोरों से चूमते हो ममम मेरे होठं दुःख रहे हैं उफ्फ्फ देखो कैसे लाल हुए हैं उफ्फ्फ आपने तोह मेरे होठों को काट भी लिया मममम ज़ालिम हो आप उफ्फ्फ्फ़”
“रुकसाना बेगम ज़ालिम नहीं हूँ बस आपसे बहुत प्यार करता हो .. अब तक तोह बस चूमा हैं तुम्हे .. अब तोह बहुत कुछ करना हैं मेरी जान मेरी बेगम”
रौशनी शर्माती हैं … ऐसी बातों से उसका ध्यान बस अब असलम के लुंड पर hi हैं .. वह देख प् रही हैं की उसका लुंड पूरा टाइट हो चुक्का हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ किया यह मेरे लिए सख्त हैं या बस रुकसाना बेगम की याद में उफ्फ्फ इतना मोटा हैं ,ममममम)
“रुकसाना बेगम ज़रा इससे भी प्यार करो न .. देखो कैसे तुम्हारे लिए सलूट दे रहा हैं … उफ्फ्फ इसका भी कुछ करिये …”
“उफ़ असलम मियां मम अब खाना आएगा उफ़ मुझे चोर दीजिये ममम बस हुआ”
“उफ़ ऐसे कैसे चोरुन तुम्हे बेगम .. आज तोह तुम्हे मेरे इस सलामी देने वाले लुंड को तोह चुना hi होगा .. उससे भी तोह तुम्हारा प्यार चाहिए .. उफ्फ्फ देखो न कैसे तरस चुक्का हैं तेरे लिए मेरी बेगम”
रौशनी बस असलम के उभर को hi देख रही है, उसका दिल धधकने लगता हैं .. उसकी छूट भी अब थोड़ी गीली हो चुकी हुयी हैं असलम के लुंड को इमेजिन कर …
असलम अब अपनी पंत उतरता हैं और बस चड्डी में बैठा हुआ हैं सोफे पर…
रौशनी को उसके ऐसे करने से बहुत hi शर्म आ रही होती हैं … और वह बस असलम की चड्डी में बने तम्बू को hi देखि जा रही हैं… वह अपने निचले होठों को काट लेती हैं सोचते हुए (उफ्फ्फ इतना बड़ा तम्बू बना हैं असलम के अंडरवियर में उफ्फ्फ उसका मोटा लुंड तोह मुझे देख झटके मार रहा हैं मममम)


“रुकसाना बेगम चाहिए तोह बस ऊपर से hi उसे चूमो न ममम आपने होठों का स्पर्श चड्डी के ऊपर से भी मिले तोह उसे ख़ुशी होगी मम दे दीजिये न रुकसाना बेगम”
“उफ़ नहीं में कैसे दू .. में तोह शादी शुदा हूँ असलम में .. रुकसाना नाह….”
क्या हुआ रुकसाना बेगम तुम क्या नहीं हो .. उफ़ मेरी बेगम आओ न उसे चुम लो उसे प्यार करलो न मम देखो कैसे तुम्हारे लिए सलामी दे रहा हैं …”
अब रौशनी का दिल जोरों से धधकने लगता हैं .. वह बस उसके तम्बू को hi घुरि जा रही हैं और अपने निचले होठों को कान्त लेती हाँ इन ……
“मम असलम मियां आपका तोह इतना बड़ा हैं उफ्फ्फ इतना मोटा इस उम्र में भी मममम”
“रुकसाना बेगम क्या मोटा हैं खुल कर बताइये न ममम”
“असलम जी आपका .. उफ्फ्फ आपका …” रौशनी लुंड शब्द कहने से शर्मा रही होती हैं ….
“असलम बोलता हैं “रुकसाना बेगम खुल कर बताइये न .. इसे क्या कहते हैं बताइये न .. मुझे आपके मुँह से सुन्नी हैं मममम”
“असलम जी अआप्का मोटा लुंड .. आपका मोटा लुंड आपका मोटा लुंड उफ्फ्फ ममम मुझे बहुत शर्म आ रही हैं.”
“ रुकसाना बेगम शर्माओ मत ….”
और असलम अब रौशनी के हाथों को पकड़ कर अपनी चड्डी के अंदर डालने की कोशिश करता हैं .. लेकिन रौशनी उसे ऐसे नहीं करने दे रही हैं …
“रुकसाना बेगम डालिये न हाथ अंदर देखो न तुम्हारे लिए इतना सख्त और इतना गरम हैं मेरा लुंड .. मम डालिये मेरी चड्डी में हाथ उफ्फ्फ उसे पकड़िए .. सहलाइये न ममम आपका इंतेज़्ज़र हैं उसे मममम”
रौशनी को असलम के लुंड को चुना चाहती भी हैं लेकिन उसे यह भी एहसास होता हैं की वह शादी शुदा होकर ऐसे किसी गैर मर्द के लुंड को कैसे छू ले .. कितना भी बड़ा और मोटा हो उफ्फ्फ्फ़
अब असलम बिना कुछ बोले फिर से रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी चड्डी के अंदर डालने लगता हैं .. इस बार रौशनी शिकायत नहीं करती बस अब असलम के मोठे लुंड को उसकी चड्डी के अंदर से पकड़ लेती हैं …
(उफ़ इतना मोटा हैं उनका लुंड ममम मेरी उँगलियाँ भी उसे घेर नहीं प् रही हैं .. उफ़ इस उम्र में भी टीना मोटा हैं मम और इतना गर्म हैं ममममम)
रौशनी की छूट से अब पानी बहने लगता हैं …. वह धीरे से अब असलम के लुंड को सहलाती हैं .. और उसकी छूट से रास निकलता रहता हैं …
“ममम रुकसाना बेगम कैसे लगा असलम का लोढ़ा .. तेरे लिए hi तोह टाइट हुआ हैं … मममम तुम्हारे नाज़ुक हाथों के स्पर्श से तोह वह पानी भी चोर्ने लगा हैं मममम”
रौशनी देख रही थी की असलम के लुंड से प्रेकम निकल रहा हैं क्यूंकि उसकी चड्डी अब प्रेकम से गीली हो चुकी थी … वह अपने हाथों पर भी थोड़ा गीलापन महसूस कर रही हैं …. लेकिन वह अपना हाथ नहीं निकलती बस असलम के मोठे लुंड को सहलाती रहती हैं … उसकी छूट से तोह अब और पानी छूटने लगा था और उसकी पंतय अब गीली हो चुकी थी …
ऐसे कुछ सेकंड उसके मोठे लुंड को सहलाती हुयी रौशनी अहह भर्ती हैं और अपने आँखों को बंद कर लेती हैं …
जैसे hi वह ऐसे करती हैं दरवज़े की घंटी बजती हैं और वह होश में आकर अपने हाथों को असलम के चड्डी से निकलती हैं .. उसके उँगलियों पर असलम के प्रे छुम के वजह से चिप छिपा पैन रहता हैं … और वह अनजाने में अपनी उँगलियों को चाट लेती हैं .. रौशनी को ऐसे करते देख असलम का लुंड और झटके मारता हैं और उसके लुंड से और प्रेकम निकलने लगता हैं…
रौशनी शरमाते हुए अपने कमरे में जाती हैं … फिर असलम अपनी पंत पेहेन कर दरवाज़े के तरफ पार्सल लेने जाता हैं …
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वहां उस फ्लैट में सलीम और मीनल की चुदाई का सिलसिला और कुछ आधे घंटे चलता हैं और फिर सलीम अपना माल मीनल के खूबसूरत चेहरे पर चोर्ने लगता हैं …

“अह्ह्ह उफ्फ्फ सलीम मियां ममम क्या छोड़ते हो आप उफ्फ्फ आपके बड़े लोडे को बहुत मिस करि हूँ .. उफ़ अह्ह्ह ऐसे hi छोड़िये मम”
“उफ़ मीनल तेरी चुदाई कितने दिनों से नहीं की उफ्फ्फ क्या अस्त टाइट छूट हैं तेरी … इतनी चुदाई बाद भी इतनी टाइट उफ्फ्फ ये ले मेरे लोडे को अपनी छूट में. अह्ह्ह्ह”
“हाँ सलीम मियां आप hi हो मेरी चुदाई करने वाले उफ्फ्फ , आपके hi बड़े लुंड से चूड़ी हूँ अहह एस आप का लोढ़ा hi मेरी छूट में घुसा हैं आज तक अहह मम एस..”
सलीम ने अपने पुरे वज़न को मीनल के बदन पर दाल उसकी बुरी तरह से चुदाई कर रहा था … मीनल के रेड नेल पोलिश वाले हाथ अब सलीम की पीठ पर थे और उसकी पीठ पर निशाँ बनाए रहे थे ..


“अहह सलीम आप जब पूरा वज़न दाल मेरी चुदाई करते हो तुह उफ्फ्फ ममम क्या मस्त फीलिंग हैं मम एस हाँ मेरे बुड्ढे चूड़ाकड मेरी छूट की कुटाई करते रहिये अहह यस ममम मेरी छूट की चुदाई करते रहिये अह्ह्ह क्या लोढ़ा हैं आपका उफ्फ्फ ममम”
सलीम अब जोरों से निचे लेती मीनल की चुदाई ाकरते रहा .. अहह यह ले मम मीनल तू मेरी हैं बस मेरी रांड साली अहह क्या छूट हैं उफ़ मम ये ले मेरे मोठे लोडे को तेरी रसीली छूट में अहह मम एस लो ममम”
यहाँ दोनों की जमकर चुदाई चल रही थी
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अब दूसरी तरफ .. दुपहर का टाइम था तोह रौशनी असलम और सलीम के लिए लंच बनाने आती हैं उनके घरी..
वह रसोई घर में पहुंची hi थी की असलम पीछे से आकर उसे पकड़ लिया … “रुकसाना बेगम तुम्हे बहुत मिस किया .. उफ़ तुम नाश्ता बना कर इतनी जल्दी निकल गयी ममम”
“रौशनी को अब असलम के ऐसे पकड़ने से कोई ऐतराज़ नहीं था .. बल्कि उसे यह पसंद आने लगा था …
“उफ़ असलम जी काम पर जाना थान ा .. लेट हुयी थी … बस अब आ गयी हूँ .. लंच बनाना के लिए”
“रुकसाना बेगम आज लंच न बनाओ .. बस मेरे साथ वक़्त बिताओ ..”
“क्यों असलम जी .. सलीम जी भी आएँगे न उन्हें तोह लंच चाहिए न.
“रुकसाना बेगम आप सलीम से ज्यादा लगाव रखती हो या मुझे से .. उफ्फ्फ .. वैसे भी वह आज बहार hi कहाँ खाने वाले हैं उसने मुझे बताया हैं>”
“अच्छा ठीक हैं फिर आपको क्यों लंच नहीं करनी …?”
“रुकसाना बेगम आज मैंने बहार से बमगया हैं बिरयानी .. आज बस आप और में वक़्त बिताएंगे .. आइये न आज आपसे ढेर साड़ी प्यार की बातें करनी हैं …”
“अच्छा असलम जी …चलिए …”
असलम ऐसे hi रौशनी के कमर को पकड़ कर अपने तरफ खींच लिया और उसके साथ हॉल में जाने लगा … उसने रौशनी की मुलायम गोरी कमर को कास कर पकड़ लिया था .. वहां ला निशाँ भी हुए थे … रौशनी सच में बस थोड़ी सी दबोचने पर ला हो जाती थी …
रौशनी अब अपने सर को असलम के कन्धों पर राखी ..लेकिन जैसे मैंने बताया था असलम उससे काम कद का होने से उसे सर थोड़ा साइड में झुकना पड़ा .. और उसके गुलाबी होठं असलम के नज़दीक थे ..


असलम का लोढ़ा तोह इस स्पर्श से hi टाइट होने लगा था … रौशनी उसके बाँहों में थी ..उससे कोई शिकायत भी नहीं थी .. इसलिए असलम इस सब का मज़्ज़ा ले रहा था .. फिर असलम सोफे पर बैठ गया और उसने रौशनी को अपने पास खिंच लिया.
रौशनी अब असलम के गॉड में बैठी हुयी हैं उसकी काली ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे पर .. असलम उस की खुशबु सूंघते hi उसका लोढ़ा झटके मारने लगता हैं .. अब रौशनी उसकी गॉड में बैठी हैं तोह वह भी उसके बड़े लुंड के झटके महसूस कर रही थी …
“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न , में गिर जाती तोह ..”
“रुकसाना बेगम तुम कैसे गिरेगी में तुम्हे कास कर पकड़ रखा हूँ…. असलम फिर रौशनी को और अपनी बाँहों में दबोच लेता हैं…
“देखो रुकसाना बेगम मेरी मज़बूत बाहें तुम्हे पकडे रखा हैं .. आप गिर hi नहीं सकती ..”
फिर असलम रौशनी के गालों को चूमने लगता हैं … रौशनी को असलम के चुम्मे ाचे लग रहे थे … फिर असलम रौशनी के चेहरे को अपने तरफ करता हैं.. रौशनी की गुलाबी होठं अब असलम के होठों के करीब हैं और असलम आगे झुकते हुए रौशनी के होठों को चुम लेता हैं .. रौशनी भी बिना शिकायत किये इस बार असलम के चुम्बन का साथ देती हैं .. असलम के काळा होठं अब रौशनी की गुलाबी होठों पर दबने लगते हैं .. धीरे धीरे वह उसे और जोरों से चूमने लगता हैं .. रौशनी की मुलायम होतन्ह अब असलम के कठोर होठों को स्वीकार करती हैं और दोनों एक गहरी सी फ्रेंच किश में लग जाते हैं ..
फ्रेंच किश के दौरान असलम का लुंड ाबपुरा औकात में आ चुक्का हैं और रौशनी उसके लुंड को मह्सुश करती हूँ आह भर्ती हैं…
रोशनी और असलम अब गहरी चुम्बन में लगे हुए हैं और रौशनी के ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे को कवर करती हुयी दोनों चूमने में मस्त मौला हैं..
दूसरी और मीनल अब अपने घुटनो के बल अपनी गांड को ऊपर उठाये बीएड पर हैं और सलीम पीछे से उसे एक कुत्ते की तरह उसे छोड़ने अपने लुंड को उसकी गुलाबी छूट के हटोहों पर रगड़ने लगता हैं
“उफ़ सलीम मियां मम आप कितने शरारती हैं उफ्फ्फ आपका मोटा लोढ़ा अब डालिये भी मेरी इस कमसिन छूट में उफ़ “
“हाँ मीनल मेरी रांड रुक न थोड़ा मज़े लेने दे न ममम क्या गोल मटोल चूतड़ हैं तेरे उफ्फ्फ…..”
सलीम अब धीरे धीरे अपने लोडे को मीनल की छूट में गहसूसने लगता हैं .. धीरे से अब उसका आधा लुंड उसकी छूट में जा चुका होता हैं और वह धीमी तरह से धक्के मारने लगता हैं ..
वहां मीनल जोरों की सिसकारियां मारने लगती हैं “उफ़ सलीम मियां तुम्हारा ये मोटा लुंड मम आधा अंदर जा चुक्का हैं .. उफ्फ्फ्फ़ और डालिये न मम ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में उतरिये न मममम सलीम मियां …”
अब सलीम अपने लोडे को पूरी तरह से मीनल की छूट में घुसा कर उसकी चुदाई करने लगता हैं
“उफ़ मीनल मम मेरी चूड़ाकड ट्रैंड उफ्फ्फ ये ले मेरा लोढ़ा मम उफ्फ्फ इतनी टाइट छूट हैं तेरी अहह मम मीनल ये ले मेरा मूसल तेरी इस कमसिन छूट में ..अह्ह्ह ये ले ये ले ममममम”
सलीम पीछे से जोरदार धक्के देता हैं और निचे मीनल की चूचियां हिलने लगती हैं … सलीम अब उसकी चूचियों को पकड़ते हुए और जोरों का धक्का देता है …
“मीनल मम ये ले उफ़ मेरा कला सांड जैसा लुंड तेरी इस छूट में अहह ले ले मेरी जान मेरी चूड़ाकड मेरी रांड उफ्फ्फ ये ले…”
“अहह मेरे छोड़ू जानवर उफ्फ्फ हाँ ममम मेरी छूट का भोसड़ा बना दे अपने इस फौलादी लोडे से उफ्फ्फ मेरी छूट तेरे लुंड के लिए hi बानी हैं मम सलीम मियां ममम उफ्फ्फ “



दोनों की ज़बरदस्त चुदाई उस एक कमरे के फ्लैट में चलती रहती हैं ..
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वहां ंगो में असलम के घर -
असलम अब रौशनी को अपने बाँहों में लेकर उसे बेतहाशा चुम रहा हैं और रौशनी भी उसका साथ दे रही हैं …
कुछ 5 मं की चुम्बन के बाद असलम और रौशनी के होतं जुड़ा होते हैं और रौशनी एबीएस हराम और कामुकता से असलम के चेहरे को देख रही हैं…
“रुकसाना बेगम उफ्फ्फ तुम्हारे होठों में ापृत हैं अमृत ममम क्या चूमती हो मममम”
“असलम मियां आप भी न उफ्फ्फ इना जोरों से चूमते हो ममम मेरे होठं दुःख रहे हैं उफ्फ्फ देखो कैसे लाल हुए हैं उफ्फ्फ आपने तोह मेरे होठों को काट भी लिया मममम ज़ालिम हो आप उफ्फ्फ्फ़”
“रुकसाना बेगम ज़ालिम नहीं हूँ बस आपसे बहुत प्यार करता हो .. अब तक तोह बस चूमा हैं तुम्हे .. अब तोह बहुत कुछ करना हैं मेरी जान मेरी बेगम”
रौशनी शर्माती हैं … ऐसी बातों से उसका ध्यान बस अब असलम के लुंड पर hi हैं .. वह देख प् रही हैं की उसका लुंड पूरा टाइट हो चुक्का हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ किया यह मेरे लिए सख्त हैं या बस रुकसाना बेगम की याद में उफ्फ्फ इतना मोटा हैं ,ममममम)
“रुकसाना बेगम ज़रा इससे भी प्यार करो न .. देखो कैसे तुम्हारे लिए सलूट दे रहा हैं … उफ्फ्फ इसका भी कुछ करिये …”
“उफ़ असलम मियां मम अब खाना आएगा उफ़ मुझे चोर दीजिये ममम बस हुआ”
“उफ़ ऐसे कैसे चोरुन तुम्हे बेगम .. आज तोह तुम्हे मेरे इस सलामी देने वाले लुंड को तोह चुना hi होगा .. उससे भी तोह तुम्हारा प्यार चाहिए .. उफ्फ्फ देखो न कैसे तरस चुक्का हैं तेरे लिए मेरी बेगम”
रौशनी बस असलम के उभर को hi देख रही है, उसका दिल धधकने लगता हैं .. उसकी छूट भी अब थोड़ी गीली हो चुकी हुयी हैं असलम के लुंड को इमेजिन कर …
असलम अब अपनी पंत उतरता हैं और बस चड्डी में बैठा हुआ हैं सोफे पर…
रौशनी को उसके ऐसे करने से बहुत hi शर्म आ रही होती हैं … और वह बस असलम की चड्डी में बने तम्बू को hi देखि जा रही हैं… वह अपने निचले होठों को काट लेती हैं सोचते हुए (उफ्फ्फ इतना बड़ा तम्बू बना हैं असलम के अंडरवियर में उफ्फ्फ उसका मोटा लुंड तोह मुझे देख झटके मार रहा हैं मममम)


“रुकसाना बेगम चाहिए तोह बस ऊपर से hi उसे चूमो न ममम आपने होठों का स्पर्श चड्डी के ऊपर से भी मिले तोह उसे ख़ुशी होगी मम दे दीजिये न रुकसाना बेगम”
“उफ़ नहीं में कैसे दू .. में तोह शादी शुदा हूँ असलम में .. रुकसाना नाह….”
क्या हुआ रुकसाना बेगम तुम क्या नहीं हो .. उफ़ मेरी बेगम आओ न उसे चुम लो उसे प्यार करलो न मम देखो कैसे तुम्हारे लिए सलामी दे रहा हैं …”
अब रौशनी का दिल जोरों से धधकने लगता हैं .. वह बस उसके तम्बू को hi घुरि जा रही हैं और अपने निचले होठों को कान्त लेती हाँ इन ……
“मम असलम मियां आपका तोह इतना बड़ा हैं उफ्फ्फ इतना मोटा इस उम्र में भी मममम”
“रुकसाना बेगम क्या मोटा हैं खुल कर बताइये न ममम”
“असलम जी आपका .. उफ्फ्फ आपका …” रौशनी लुंड शब्द कहने से शर्मा रही होती हैं ….
“असलम बोलता हैं “रुकसाना बेगम खुल कर बताइये न .. इसे क्या कहते हैं बताइये न .. मुझे आपके मुँह से सुन्नी हैं मममम”
“असलम जी अआप्का मोटा लुंड .. आपका मोटा लुंड आपका मोटा लुंड उफ्फ्फ ममम मुझे बहुत शर्म आ रही हैं.”
“ रुकसाना बेगम शर्माओ मत ….”
और असलम अब रौशनी के हाथों को पकड़ कर अपनी चड्डी के अंदर डालने की कोशिश करता हैं .. लेकिन रौशनी उसे ऐसे नहीं करने दे रही हैं …
“रुकसाना बेगम डालिये न हाथ अंदर देखो न तुम्हारे लिए इतना सख्त और इतना गरम हैं मेरा लुंड .. मम डालिये मेरी चड्डी में हाथ उफ्फ्फ उसे पकड़िए .. सहलाइये न ममम आपका इंतेज़्ज़र हैं उसे मममम”
रौशनी को असलम के लुंड को चुना चाहती भी हैं लेकिन उसे यह भी एहसास होता हैं की वह शादी शुदा होकर ऐसे किसी गैर मर्द के लुंड को कैसे छू ले .. कितना भी बड़ा और मोटा हो उफ्फ्फ्फ़
अब असलम बिना कुछ बोले फिर से रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी चड्डी के अंदर डालने लगता हैं .. इस बार रौशनी शिकायत नहीं करती बस अब असलम के मोठे लुंड को उसकी चड्डी के अंदर से पकड़ लेती हैं …
(उफ़ इतना मोटा हैं उनका लुंड ममम मेरी उँगलियाँ भी उसे घेर नहीं प् रही हैं .. उफ़ इस उम्र में भी टीना मोटा हैं मम और इतना गर्म हैं ममममम)
रौशनी की छूट से अब पानी बहने लगता हैं …. वह धीरे से अब असलम के लुंड को सहलाती हैं .. और उसकी छूट से रास निकलता रहता हैं …
“ममम रुकसाना बेगम कैसे लगा असलम का लोढ़ा .. तेरे लिए hi तोह टाइट हुआ हैं … मममम तुम्हारे नाज़ुक हाथों के स्पर्श से तोह वह पानी भी चोर्ने लगा हैं मममम”
रौशनी देख रही थी की असलम के लुंड से प्रेकम निकल रहा हैं क्यूंकि उसकी चड्डी अब प्रेकम से गीली हो चुकी थी … वह अपने हाथों पर भी थोड़ा गीलापन महसूस कर रही हैं …. लेकिन वह अपना हाथ नहीं निकलती बस असलम के मोठे लुंड को सहलाती रहती हैं … उसकी छूट से तोह अब और पानी छूटने लगा था और उसकी पंतय अब गीली हो चुकी थी …
ऐसे कुछ सेकंड उसके मोठे लुंड को सहलाती हुयी रौशनी अहह भर्ती हैं और अपने आँखों को बंद कर लेती हैं …
जैसे hi वह ऐसे करती हैं दरवज़े की घंटी बजती हैं और वह होश में आकर अपने हाथों को असलम के चड्डी से निकलती हैं .. उसके उँगलियों पर असलम के प्रे छुम के वजह से चिप छिपा पैन रहता हैं … और वह अनजाने में अपनी उँगलियों को चाट लेती हैं .. रौशनी को ऐसे करते देख असलम का लुंड और झटके मारता हैं और उसके लुंड से और प्रेकम निकलने लगता हैं…
रौशनी शरमाते हुए अपने कमरे में जाती हैं … फिर असलम अपनी पंत पेहेन कर दरवाज़े के तरफ पार्सल लेने जाता हैं …
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वहां उस फ्लैट में सलीम और मीनल की चुदाई का सिलसिला और कुछ आधे घंटे चलता हैं और फिर सलीम अपना माल मीनल के खूबसूरत चेहरे पर चोर्ने लगता हैं …












































