Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 4 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

दुपहर के 2 बजे –



“अह्ह्ह उफ्फ्फ सलीम मियां ममम क्या छोड़ते हो आप उफ्फ्फ आपके बड़े लोडे को बहुत मिस करि हूँ .. उफ़ अह्ह्ह ऐसे hi छोड़िये मम”

“उफ़ मीनल तेरी चुदाई कितने दिनों से नहीं की उफ्फ्फ क्या अस्त टाइट छूट हैं तेरी … इतनी चुदाई बाद भी इतनी टाइट उफ्फ्फ ये ले मेरे लोडे को अपनी छूट में. अह्ह्ह्ह”

“हाँ सलीम मियां आप hi हो मेरी चुदाई करने वाले उफ्फ्फ , आपके hi बड़े लुंड से चूड़ी हूँ अहह एस आप का लोढ़ा hi मेरी छूट में घुसा हैं आज तक अहह मम एस..”

सलीम ने अपने पुरे वज़न को मीनल के बदन पर दाल उसकी बुरी तरह से चुदाई कर रहा था … मीनल के रेड नेल पोलिश वाले हाथ अब सलीम की पीठ पर थे और उसकी पीठ पर निशाँ बनाए रहे थे ..









“अहह सलीम आप जब पूरा वज़न दाल मेरी चुदाई करते हो तुह उफ्फ्फ ममम क्या मस्त फीलिंग हैं मम एस हाँ मेरे बुड्ढे चूड़ाकड मेरी छूट की कुटाई करते रहिये अहह यस ममम मेरी छूट की चुदाई करते रहिये अह्ह्ह क्या लोढ़ा हैं आपका उफ्फ्फ ममम”

सलीम अब जोरों से निचे लेती मीनल की चुदाई ाकरते रहा .. अहह यह ले मम मीनल तू मेरी हैं बस मेरी रांड साली अहह क्या छूट हैं उफ़ मम ये ले मेरे मोठे लोडे को तेरी रसीली छूट में अहह मम एस लो ममम”

यहाँ दोनों की जमकर चुदाई चल रही थी

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अब दूसरी तरफ .. दुपहर का टाइम था तोह रौशनी असलम और सलीम के लिए लंच बनाने आती हैं उनके घरी..

वह रसोई घर में पहुंची hi थी की असलम पीछे से आकर उसे पकड़ लिया … “रुकसाना बेगम तुम्हे बहुत मिस किया .. उफ़ तुम नाश्ता बना कर इतनी जल्दी निकल गयी ममम”

“रौशनी को अब असलम के ऐसे पकड़ने से कोई ऐतराज़ नहीं था .. बल्कि उसे यह पसंद आने लगा था …

“उफ़ असलम जी काम पर जाना थान ा .. लेट हुयी थी … बस अब आ गयी हूँ .. लंच बनाना के लिए”

“रुकसाना बेगम आज लंच न बनाओ .. बस मेरे साथ वक़्त बिताओ ..”

“क्यों असलम जी .. सलीम जी भी आएँगे न उन्हें तोह लंच चाहिए न.

“रुकसाना बेगम आप सलीम से ज्यादा लगाव रखती हो या मुझे से .. उफ्फ्फ .. वैसे भी वह आज बहार hi कहाँ खाने वाले हैं उसने मुझे बताया हैं>”

“अच्छा ठीक हैं फिर आपको क्यों लंच नहीं करनी …?”

“रुकसाना बेगम आज मैंने बहार से बमगया हैं बिरयानी .. आज बस आप और में वक़्त बिताएंगे .. आइये न आज आपसे ढेर साड़ी प्यार की बातें करनी हैं …”

“अच्छा असलम जी …चलिए …”

असलम ऐसे hi रौशनी के कमर को पकड़ कर अपने तरफ खींच लिया और उसके साथ हॉल में जाने लगा … उसने रौशनी की मुलायम गोरी कमर को कास कर पकड़ लिया था .. वहां ला निशाँ भी हुए थे … रौशनी सच में बस थोड़ी सी दबोचने पर ला हो जाती थी …

रौशनी अब अपने सर को असलम के कन्धों पर राखी ..लेकिन जैसे मैंने बताया था असलम उससे काम कद का होने से उसे सर थोड़ा साइड में झुकना पड़ा .. और उसके गुलाबी होठं असलम के नज़दीक थे ..









असलम का लोढ़ा तोह इस स्पर्श से hi टाइट होने लगा था … रौशनी उसके बाँहों में थी ..उससे कोई शिकायत भी नहीं थी .. इसलिए असलम इस सब का मज़्ज़ा ले रहा था .. फिर असलम सोफे पर बैठ गया और उसने रौशनी को अपने पास खिंच लिया.

रौशनी अब असलम के गॉड में बैठी हुयी हैं उसकी काली ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे पर .. असलम उस की खुशबु सूंघते hi उसका लोढ़ा झटके मारने लगता हैं .. अब रौशनी उसकी गॉड में बैठी हैं तोह वह भी उसके बड़े लुंड के झटके महसूस कर रही थी …

“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न , में गिर जाती तोह ..”

“रुकसाना बेगम तुम कैसे गिरेगी में तुम्हे कास कर पकड़ रखा हूँ…. असलम फिर रौशनी को और अपनी बाँहों में दबोच लेता हैं…

“देखो रुकसाना बेगम मेरी मज़बूत बाहें तुम्हे पकडे रखा हैं .. आप गिर hi नहीं सकती ..”

फिर असलम रौशनी के गालों को चूमने लगता हैं … रौशनी को असलम के चुम्मे ाचे लग रहे थे … फिर असलम रौशनी के चेहरे को अपने तरफ करता हैं.. रौशनी की गुलाबी होठं अब असलम के होठों के करीब हैं और असलम आगे झुकते हुए रौशनी के होठों को चुम लेता हैं .. रौशनी भी बिना शिकायत किये इस बार असलम के चुम्बन का साथ देती हैं .. असलम के काळा होठं अब रौशनी की गुलाबी होठों पर दबने लगते हैं .. धीरे धीरे वह उसे और जोरों से चूमने लगता हैं .. रौशनी की मुलायम होतन्ह अब असलम के कठोर होठों को स्वीकार करती हैं और दोनों एक गहरी सी फ्रेंच किश में लग जाते हैं ..

फ्रेंच किश के दौरान असलम का लुंड ाबपुरा औकात में आ चुक्का हैं और रौशनी उसके लुंड को मह्सुश करती हूँ आह भर्ती हैं…

रोशनी और असलम अब गहरी चुम्बन में लगे हुए हैं और रौशनी के ज़ुल्फ़े असलम के चेहरे को कवर करती हुयी दोनों चूमने में मस्त मौला हैं..

दूसरी और मीनल अब अपने घुटनो के बल अपनी गांड को ऊपर उठाये बीएड पर हैं और सलीम पीछे से उसे एक कुत्ते की तरह उसे छोड़ने अपने लुंड को उसकी गुलाबी छूट के हटोहों पर रगड़ने लगता हैं

“उफ़ सलीम मियां मम आप कितने शरारती हैं उफ्फ्फ आपका मोटा लोढ़ा अब डालिये भी मेरी इस कमसिन छूट में उफ़ “

“हाँ मीनल मेरी रांड रुक न थोड़ा मज़े लेने दे न ममम क्या गोल मटोल चूतड़ हैं तेरे उफ्फ्फ…..”

सलीम अब धीरे धीरे अपने लोडे को मीनल की छूट में गहसूसने लगता हैं .. धीरे से अब उसका आधा लुंड उसकी छूट में जा चुका होता हैं और वह धीमी तरह से धक्के मारने लगता हैं ..

वहां मीनल जोरों की सिसकारियां मारने लगती हैं “उफ़ सलीम मियां तुम्हारा ये मोटा लुंड मम आधा अंदर जा चुक्का हैं .. उफ्फ्फ्फ़ और डालिये न मम ये घोड़े जैसा लुंड मेरी छूट में उतरिये न मममम सलीम मियां …”

अब सलीम अपने लोडे को पूरी तरह से मीनल की छूट में घुसा कर उसकी चुदाई करने लगता हैं

“उफ़ मीनल मम मेरी चूड़ाकड ट्रैंड उफ्फ्फ ये ले मेरा लोढ़ा मम उफ्फ्फ इतनी टाइट छूट हैं तेरी अहह मम मीनल ये ले मेरा मूसल तेरी इस कमसिन छूट में ..अह्ह्ह ये ले ये ले ममममम”

सलीम पीछे से जोरदार धक्के देता हैं और निचे मीनल की चूचियां हिलने लगती हैं … सलीम अब उसकी चूचियों को पकड़ते हुए और जोरों का धक्का देता है …

“मीनल मम ये ले उफ़ मेरा कला सांड जैसा लुंड तेरी इस छूट में अहह ले ले मेरी जान मेरी चूड़ाकड मेरी रांड उफ्फ्फ ये ले…”

“अहह मेरे छोड़ू जानवर उफ्फ्फ हाँ ममम मेरी छूट का भोसड़ा बना दे अपने इस फौलादी लोडे से उफ्फ्फ मेरी छूट तेरे लुंड के लिए hi बानी हैं मम सलीम मियां ममम उफ्फ्फ “









दोनों की ज़बरदस्त चुदाई उस एक कमरे के फ्लैट में चलती रहती हैं ..

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वहां ंगो में असलम के घर -

असलम अब रौशनी को अपने बाँहों में लेकर उसे बेतहाशा चुम रहा हैं और रौशनी भी उसका साथ दे रही हैं …

कुछ 5 मं की चुम्बन के बाद असलम और रौशनी के होतं जुड़ा होते हैं और रौशनी एबीएस हराम और कामुकता से असलम के चेहरे को देख रही हैं…

“रुकसाना बेगम उफ्फ्फ तुम्हारे होठों में ापृत हैं अमृत ममम क्या चूमती हो मममम”

“असलम मियां आप भी न उफ्फ्फ इना जोरों से चूमते हो ममम मेरे होठं दुःख रहे हैं उफ्फ्फ देखो कैसे लाल हुए हैं उफ्फ्फ आपने तोह मेरे होठों को काट भी लिया मममम ज़ालिम हो आप उफ्फ्फ्फ़”

“रुकसाना बेगम ज़ालिम नहीं हूँ बस आपसे बहुत प्यार करता हो .. अब तक तोह बस चूमा हैं तुम्हे .. अब तोह बहुत कुछ करना हैं मेरी जान मेरी बेगम”

रौशनी शर्माती हैं … ऐसी बातों से उसका ध्यान बस अब असलम के लुंड पर hi हैं .. वह देख प् रही हैं की उसका लुंड पूरा टाइट हो चुक्का हैं .. (उफ्फ्फ्फ़ किया यह मेरे लिए सख्त हैं या बस रुकसाना बेगम की याद में उफ्फ्फ इतना मोटा हैं ,ममममम)

“रुकसाना बेगम ज़रा इससे भी प्यार करो न .. देखो कैसे तुम्हारे लिए सलूट दे रहा हैं … उफ्फ्फ इसका भी कुछ करिये …”

“उफ़ असलम मियां मम अब खाना आएगा उफ़ मुझे चोर दीजिये ममम बस हुआ”

“उफ़ ऐसे कैसे चोरुन तुम्हे बेगम .. आज तोह तुम्हे मेरे इस सलामी देने वाले लुंड को तोह चुना hi होगा .. उससे भी तोह तुम्हारा प्यार चाहिए .. उफ्फ्फ देखो न कैसे तरस चुक्का हैं तेरे लिए मेरी बेगम”

रौशनी बस असलम के उभर को hi देख रही है, उसका दिल धधकने लगता हैं .. उसकी छूट भी अब थोड़ी गीली हो चुकी हुयी हैं असलम के लुंड को इमेजिन कर …

असलम अब अपनी पंत उतरता हैं और बस चड्डी में बैठा हुआ हैं सोफे पर…

रौशनी को उसके ऐसे करने से बहुत hi शर्म आ रही होती हैं … और वह बस असलम की चड्डी में बने तम्बू को hi देखि जा रही हैं… वह अपने निचले होठों को काट लेती हैं सोचते हुए (उफ्फ्फ इतना बड़ा तम्बू बना हैं असलम के अंडरवियर में उफ्फ्फ उसका मोटा लुंड तोह मुझे देख झटके मार रहा हैं मममम)









“रुकसाना बेगम चाहिए तोह बस ऊपर से hi उसे चूमो न ममम आपने होठों का स्पर्श चड्डी के ऊपर से भी मिले तोह उसे ख़ुशी होगी मम दे दीजिये न रुकसाना बेगम”

“उफ़ नहीं में कैसे दू .. में तोह शादी शुदा हूँ असलम में .. रुकसाना नाह….”

क्या हुआ रुकसाना बेगम तुम क्या नहीं हो .. उफ़ मेरी बेगम आओ न उसे चुम लो उसे प्यार करलो न मम देखो कैसे तुम्हारे लिए सलामी दे रहा हैं …”

अब रौशनी का दिल जोरों से धधकने लगता हैं .. वह बस उसके तम्बू को hi घुरि जा रही हैं और अपने निचले होठों को कान्त लेती हाँ इन ……

“मम असलम मियां आपका तोह इतना बड़ा हैं उफ्फ्फ इतना मोटा इस उम्र में भी मममम”

“रुकसाना बेगम क्या मोटा हैं खुल कर बताइये न ममम”

“असलम जी आपका .. उफ्फ्फ आपका …” रौशनी लुंड शब्द कहने से शर्मा रही होती हैं ….

“असलम बोलता हैं “रुकसाना बेगम खुल कर बताइये न .. इसे क्या कहते हैं बताइये न .. मुझे आपके मुँह से सुन्नी हैं मममम”

“असलम जी अआप्का मोटा लुंड .. आपका मोटा लुंड आपका मोटा लुंड उफ्फ्फ ममम मुझे बहुत शर्म आ रही हैं.”

“ रुकसाना बेगम शर्माओ मत ….”

और असलम अब रौशनी के हाथों को पकड़ कर अपनी चड्डी के अंदर डालने की कोशिश करता हैं .. लेकिन रौशनी उसे ऐसे नहीं करने दे रही हैं …

“रुकसाना बेगम डालिये न हाथ अंदर देखो न तुम्हारे लिए इतना सख्त और इतना गरम हैं मेरा लुंड .. मम डालिये मेरी चड्डी में हाथ उफ्फ्फ उसे पकड़िए .. सहलाइये न ममम आपका इंतेज़्ज़र हैं उसे मममम”

रौशनी को असलम के लुंड को चुना चाहती भी हैं लेकिन उसे यह भी एहसास होता हैं की वह शादी शुदा होकर ऐसे किसी गैर मर्द के लुंड को कैसे छू ले .. कितना भी बड़ा और मोटा हो उफ्फ्फ्फ़

अब असलम बिना कुछ बोले फिर से रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी चड्डी के अंदर डालने लगता हैं .. इस बार रौशनी शिकायत नहीं करती बस अब असलम के मोठे लुंड को उसकी चड्डी के अंदर से पकड़ लेती हैं …

(उफ़ इतना मोटा हैं उनका लुंड ममम मेरी उँगलियाँ भी उसे घेर नहीं प् रही हैं .. उफ़ इस उम्र में भी टीना मोटा हैं मम और इतना गर्म हैं ममममम)

रौशनी की छूट से अब पानी बहने लगता हैं …. वह धीरे से अब असलम के लुंड को सहलाती हैं .. और उसकी छूट से रास निकलता रहता हैं …

“ममम रुकसाना बेगम कैसे लगा असलम का लोढ़ा .. तेरे लिए hi तोह टाइट हुआ हैं … मममम तुम्हारे नाज़ुक हाथों के स्पर्श से तोह वह पानी भी चोर्ने लगा हैं मममम”

रौशनी देख रही थी की असलम के लुंड से प्रेकम निकल रहा हैं क्यूंकि उसकी चड्डी अब प्रेकम से गीली हो चुकी थी … वह अपने हाथों पर भी थोड़ा गीलापन महसूस कर रही हैं …. लेकिन वह अपना हाथ नहीं निकलती बस असलम के मोठे लुंड को सहलाती रहती हैं … उसकी छूट से तोह अब और पानी छूटने लगा था और उसकी पंतय अब गीली हो चुकी थी …

ऐसे कुछ सेकंड उसके मोठे लुंड को सहलाती हुयी रौशनी अहह भर्ती हैं और अपने आँखों को बंद कर लेती हैं …

जैसे hi वह ऐसे करती हैं दरवज़े की घंटी बजती हैं और वह होश में आकर अपने हाथों को असलम के चड्डी से निकलती हैं .. उसके उँगलियों पर असलम के प्रे छुम के वजह से चिप छिपा पैन रहता हैं … और वह अनजाने में अपनी उँगलियों को चाट लेती हैं .. रौशनी को ऐसे करते देख असलम का लुंड और झटके मारता हैं और उसके लुंड से और प्रेकम निकलने लगता हैं…

रौशनी शरमाते हुए अपने कमरे में जाती हैं … फिर असलम अपनी पंत पेहेन कर दरवाज़े के तरफ पार्सल लेने जाता हैं …

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वहां उस फ्लैट में सलीम और मीनल की चुदाई का सिलसिला और कुछ आधे घंटे चलता हैं और फिर सलीम अपना माल मीनल के खूबसूरत चेहरे पर चोर्ने लगता हैं …





 
अब खाने के पार्सल को लेकर .. उसे असलम ने टेबल पर रख दिया और लंच की सब सेटिंग की …

“रुकसाना बेगम आइये , खाना तैयार हैं .. गरमा गरम खाना हैं जल्दी आइये”

रौशनी अभी हुए असलम के साथ पलों के बारे में सोच रही थी .. उन पलों को सोच वह मन में शर्मा रही थी .. (उफ्फ्फ कुछ ज्यादा hi मस्ती चल रही थी उसकी और असलम की , वह अभी भी थोड़ी हैरान थी की वह असलम जैसे बुड्ढे की बातों में कैसे आ रही थी और उसके मोठे लुंड को कैसे पकड़ने तैयार हुयी थी .. उफ्फ्फ अब से थोड़ा कण्ट्रोल करना चाहिए ) ऐसे सोचते हुए रौशनी टेबल पर चली गयी जहाँ असलम बैठा था…

दोनों खाना खाने लगे … असलम रौशनी को बीच बीच में देख रहा था लेकिन रौशनी खाना खाने में hi लगी थी और उसके तरफ देख नहीं रही थी ..

“रुकसाना बेगम क्या हुआ .. अभी तोह मस्ती कर रहे थे , और अब आप मुझ से बातें तोह दूर मेरे तरफ देख भी नहीं रही हो…”

रौशनी कुछ नहीं बोली … असलम भी शांत बैठे खाना खाने लगे. रौशनी अब बीच बीच में चोर चुपके से आंखें उठाते हुए असलम को देख रही थी .. जैसे hi उसे महसूस हुआ की असलम ऊपर देख रही हैं वह अपने नज़रे निचे कर लेती थी ..

“रुकसाना बेगम , बिरयानी बहुत hi अच्छी हैं … बहुत hi स्वादिष्ट … आपको कैसे लगी.”

रौशनी बिना ऊपर देखे बोली “असलम मियां बहुत स्वादिष्ट हैं बिरयानी , वैसे आपने लेग पीेछे नहीं ली इस बार ,”

“रुकसाना बेगम आज ब्रैस्ट पीेछे खाने का मन कर रहा हैं , आज ब्रैस्ट पीेछे hi खाऊंगा में …” असलम यह सब रौशनी को देखते हुए कह रहे थे …









ऐसी बात सुन रौशनी की नज़र भी ऊपर उठी और वह असलम को उसकी चूचियों के वहां नज़र पायी .. और वह शर्मा गयी … ब्रैस्ट पीेछे का अब वह मतलब समझी … वह मन में (उफ़ बुद्धू यह लेग पीेछे और ब्रैस्ट पीेछे तोह तुम्हारे बारे में बात करते हैं , क्या सलीम जइब hi लेग पीेछे मतलब उसी की बात करते हैं .. उफ्फ्फ यह दोनों बुड्ढे काफी नटखट हैं , इनसे थोड़ा संभल कर hi रहना पड़ेगा तुझे)

‘रुकसाना बेगम आप मुझे देख बातें करिये न… हमने अभी इतनी मस्ती किट hi .. मुझे लगा तुम अब घुल मिल रही हो मेरे साथ.”

“असलम मियां खाना खाकर मुझे काम पर जाना हैं .. आपको क्या .. आपको तोह बस बिस्तर पर जाकर दुपहर सोना हैं ..”

“रुकसाना बेगम दुपहर में बिस्तर पर आप न हो तोह क्या फायदा .. आप पास होगी तोह नींद नहीं बहुत बाकी के काम करूँगा .. आपके hi साथ था .. एकदम थकने वाले काम करेंगे ः”

रौशनी समझ गयी वह किस काम की बात कर रहे थे .. और वह मन में मुस्कुरायी …(उफ्फ्फ बुड्ढे तू कितनी भी मस्ती कर ले मेरे साथ तेरे बिस्तर पर तेरे साथ बिलकुल न सोऊंगी …) रौशनी अब असलम से थोड़ा मज़्ज़ाक़ करने की सोची

“असलम मियां आप चोर hi देना , आपके बुढ़ापे में आप क्या काम करोगे बिस्तर पर … जल्द से थक जाओगे”

“रुकसाना बेगम तुम भूल गयी हो , मेरी स्टैमिना बहुत हैं , बुढ़ापे पर मत जाओ मेरे .. 2 घंटे तोह आराम से मस्ती कर पाउँगा तेरे साथ बिस्तर पर.”

“कुछ भी कहते हो असलम मियां , आप बातें बहुत करते हो …”

“रुकसाना बेगम फिर एक बार अस्मा कर देख लो न .. फिर देखेंगे कौन थकेगा .. आप या में ः”

रौशनी अब काफी ब्लश कर रही थी और उसके चेहरे पर हलकी सी मुसकाम आयी. उसे असलम ने देख लिया और बोलै “उफ़ रुकसाना बेगम हसी तोह फांसी ः”

“असलम मियां आप बुड्ढे हो और ुपुराने hi डायलाग मारते रहिये … में आसानी से हाथ नहीं आउंगी.”

“रुकसाना बेगम जल्दी किस को हैं , तुम्हे पाने के लिए तोह में इंतज़ार करूँगा .. तुम हो hi ऐसी मस्त आइटम की तुझे पाने टाइम लूंगा लेकिन जब मिलोगी तोह इतनी मस्ती करूँगा की तुम याद रखोगी असलम और उसके शैतान को”

रौशनी अब असलम के मोठे लुंड के बारे में सोच शर्मा गयी .. अब टेबल के निचे से असलम का पेअर रौशनी के पैरों को छू रहा था .. उसने हलके से अपने पैरों की उँगलियों को रौशनी की साड़ी के अंदर डाली और अब उसके पैरों को छू रहा था ..

रौशनी यह सब महसूस कर प् रही थी .. पहले तोह वह सरप्राइज थी की असलम ने ऐसे किया था .. “असलम मियां यह पैरों से क्यों छू रहे हो .. उफ्फ्फ खाना खाने दो न ,..”

“रुकसाना बेगम तुम भी न .. अरे में ऐसी छोटी सी मस्तियाँ नहीं करूँगा तोह कौन करेगा …” ौरस्लैम अब अपने पैरों के उँगलियों को रौशनी के पैरों के और ऊपर ले लिया … “असलम में बहुत हुआ .. ममम मेरा खाना हुआ हैं में जा रही हूँ.”

रौशनी उठ कर रसोई घर में प्लेट रखने गयी .. असलम भी अपनी प्लेट लेकर उसके पीछे चल पड़ा .. “(उफ़ क्या चल हाँ रौशनी की … कैसे अपने चूतड़ों को मटका कर चल रही हैं .. उफ्फ्फ उसे एक बार दबोचना हैं ममम)

अब प्लेट दोनों ने रख दी और रौशनी प्लेट साफ़ कर रही थी की असलम ने उसे जकड लिया … उसके आधे सख्त लुंड को वह अब फिर से रौशनी की चूतड़ों पर पीछे से दबाने लगा.

(उफ्फ्फ यह असलम जइब hi न जब देखो उनका लुंड खड़ा hi रहता हैं … जब भी देखो मुझे दबोच कर अपने लुंड को मेरी चूतड़ों पर रगड़ते हैं .. उफ्फ्फ्फ़ यह सब गलत हैं फिर भी मुझे बहुत पसंद आ रही हैं .. ममम बहुत दिन हो गए कुछ किया hi नहीं .. उफ्फ्फ उसके पति रोनित भी आज कल मूड में hi नहीं रहते थे , और यहाँ असलम जी तोह हमेशा मूड में hi रहते हैं उफ्फ्फ्फ़ उनका लुंड अब बहुत चुभ रहा हैं ममम.)

असलम उसे पलट कर चूमने जाता हैं की रौशनी उसे हलके से धक्का देते हुए खुद को उससे चुरा लेती हैं और फिर अपनी मटकती चूतड़ों को और मटकते हुए कमरे में चली जाती हैं …

असलम वहां अपना लोढ़ा खुज्लायता हैं (उफ्फ्फ कितनी देर बच कर भाग पाओगी रौशनी .. कभी न कभी तोह मेरे बाँहों में फिर से आना hi हैं , फिर बिस्तर पर ले जाऊंगा और जमकर बहुत घंटों तक हम कामसूत्र करेंगे हैयय) और वह अपने सख्त लोडे को मसलने लगा.

वहां रौशनी थोड़ा फ्रेश होकर जल्द से ंगो के ऑफिस के लिए निकल पड़ती हैं.

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अब ऊके जाने का वक़्त होता हैं .. अचानक उसे अपने कन्धों पर किसी के हाथ महसूस होते हैं .. वह मुद कर देखती हैं तोह वहां मीनल hi कड़ी हैं.

“नमस्ते रौशनी जी .. कैसी हो आप, बहुत दिन हो गए मिल कर .. सब ठीक”

“हाँ मीनल सब ठीक हैं .. तेरा कुया हाल हैं , आज कल क्या करती हो.”

रौशनी मीनल को दकह रही थी .. मीनल उससे भी गोरी थी और फिगर भी एकदम मस्त और फिट ... उसने अभी एक टॉप और जीन्स पहनी थी और उसमें वह सच में बहुत मस्त लग रही थी. रौशनी को मीनल की जवानी पर थोड़ा सा जेलस फील होने लगा था.









मीनल मन में सोचते हुए (आज तोह सलीम मियां से ज़बरदस्त चुदाई करि हूँ … अब तेरी बारी हैं)

“कुछ नहीं बस काम अउ रेज hi मस्ती … आप बताइये , सुना हैं आप असलम और सलीम जी के साथ रहते हो.”

“हाँ हु असलम जी की बिमारी का इलाज होने तक रुकूंगी. फिर चली जाउंगी”

“अच्छा ठीक हैं , वैसे एक बात पुछु आपसे?”

रौशनी सर हाँ में हिलती हैं, अपनी पर्स में सब डालने लगती हैं.

“रौशनी जी आपने कैसा जादू किया हैं सलीम जी पर …?”

रौशनी आश्चर्य से ऊपर देखती हैं “मीनल यह क्या कह रही हो , तुम्हारा मतलब?”

“रौशनी जी सलीम जी जब भी मिलते हैं आपकी hi टैरिफ करते रहते हैं .. रौशनी मैडम इतनी ाची हैं , नेक दिल की , तुम उनके जैसे बननी चाहिए”

“अच्छा सलीम जी तोह ऐसे hi तारीफ़ करते रहते हैं मीनल ..”

“रौशनी जी हाँ सही हैं लेकिन हर बार बस आप hi की बात करते हैं .. अब यह थोड़ा ज्यादा hi तारीफ़ हैं.. काश कोई मेरी ऐसी टैरिफ करते रहे “

“मीनल तू तोह जवान हैं … तेरी तोह सब तारीफ़ करते hi होंगे”

“हाँ लेकिन ऐसे कोई इतनी तारीफ़ करने वाल नहीं हैं ..”

“ः यस ी ऍम फ्लैटेरेद .. “

“सलीम जी वैसे बहुत अच्छे इंसान हैं .. बहुत मदत करते हैं . मेरे अच्छे दोस्त बन चुके हैं”

(वैसे तोह चूड़ाकड दोस्त हैं अब तोह ) मीनल मन में सोचती हैं.

“हाँ मीनल में द्केहि हूँ , आप दोनों में ऐसी दोस्ती कैसे हुयी.”

“रौशनी जी एक दिन की बात हैं , यहाँ ंगो के पास कोई मर्द ममुझे तंग कर रहे थे .. एक ने तोह मेरी कलाई पकड़ली और बोल रहा था “छमिया , आजा न मेरे कुटिया में आज रात मेरे बिस्तर को गरम कर .. तेरी छूट की ठुकाई करूँगा आजा”

फिर और एक आदमी आया और वह तोह मुझे उठाकर अपने गाडी में ले जाने लगा … में तोह इतनी दरी हुयी यही … सब ठरकी लग रहे थे ….”

“ओह ऐसे क्या उफ़ फिर क्या हुआ मीनल?”

“रौशनी जी फिर क्या होना था सलीम जी खुश नसीबी से वहां पर आये और उन लोगों को मारने लगे … उनकी हालत ख़राब कर दी उन्होंने .. में सोची सलीम जी ऐसे बुड्ढे होकर उन मर्दों की पिटाई कैसे कर रहे थे ..”

“अच्छा फिर क्या हुआ ..”

“रौशनी जी उन्होंने उन मर्दों को मुझे सॉरी बुलवाया , अब पता हैं वहां से गुज़रती हंट ओह वह मर्द मुझे अभी भी सॉरी कहते हैं .. और तब से वह किसी लड़की को तंग भी नहीं किये हैं.”

“मीनल तू कुछ भी कह रही हैं , सलीम जी तोह बुड्ढे हैं , फिर ऐसे जवान मर्दों की कैसे पिटाई की …”

“अब क्या बोलू आपको रौशनी जी , सलीम जी बहुत hi अच्छे हैं और मज़बूत भी .. वह बुड्ढे दीखते हैं लेकिन अभी भी जवान मर्दों जैसी ताक़त हैं उन में ..”

“रौशनी अब सोचने लगती हैं (उस दिन बस में भी वहां उस जवान मर्द से लड़ने तैयार थे और उसे मारा भी था .. हो सकता हैं मीनल की बात सच लेकिन पिटाई करनी … पता नहीं यार)

“रौशनी जी उस दिन से में तोह सलीम जी पर फ़िदा hi हुयी हूँ … बुड्ढे होकर भी मुझे उनसे अट्रैक्शन होता हैं .. पता हैं में उन्हें अपने पास लेन की कई कोशिशें की हैं लेकिन वह अच्छे आदमी हैं , कभी फायदा नहीं उठाया हैं मेरा.”

“अच्छा मतलब कैसे , तुम कैसे उन्हें पास लेन की कोशिश करि हैं.”

“अब क्या बताऊ रौशनी जी सब तरय कर लिया मैंने .. उन्हें डीप बैक स्लीवलेस ब्लाउज साड़ी में उनकी बेगम पसंद थी इसलिए में भी वैसे hi साड़ी पहने लगी थी .. सच कहु तोह आप जैसे hi सरिस और ब्लाउज उन्हें पसंद हैं ..”

“खैर .. में फिर भी लौ फ्रंट कट भी ब्लाउज पहनती थी .. उनसे पास जाकर बातें करती थी , उन्हें छूटे भी थी लेकिन सलीम जी कभी मुझे पर बुरी नज़र नहीं डाली … मुझे वह डांटे थे ..”

“अभी भी में उन्हें पास लेन की कोशिश करती हूँ , लेकिन आज कल तोह ऐसे दांत लेते हैं की , अब क्या कहु .. बोलते हैं अरे पगली जरा रौशनी मैडम जैसे बनो … देखो कैसे ड्रेसेस पहनती हैं वह .. कितनी खूबसूरत हैं लेकिन अपने बदन का प्रदर्शन बिलकुल नहीं करती …”

रौशनी उस बात को सुन मुस्कुराती हैं … सलीम जी सच में इतने अच्छे हैं क्या .. उफ़ और यहाँ वह उन्हें उस दिन कितना कुछ बोली थी …

“रौशनी जी आज तोह में एक दम शार्ट स्कर्ट और टाइट टॉप ेफेन कर उन्हें अपने घर बुला ली थी … मेरा मन कर रहा था उनसे ढेर साड़ी मस्ती करू …” फिर मीनल कुछ मं बोलती नहीं …

“फिर फिर क्या हुआ मीनल बता न”

“हाँ आज घर मेरे पेरेंट्स भी नहीं आने वाले थे.. में उन्हें उनकी फवौरीते शराब भी पिलाई .. और फिर अपनी क्लीवेज दिखाई .. मेरी शार्ट स्कर्ट उठाकर मेरी गोरी सी झंघों को भी दर्शायी .. लेकिन सलीम जी ने कुछ नहीं किया … कोई और मर्द होता तोह मेरे बदन को छू कर बहुत रगड़ते . लेकिन उन्होने कुछ नहीं किया …”

में तोह उनके लैप पर भी बैठ गयी लेकिन वह मुझे वहां से उठाये और मुझे बहुत दांत लिया … मेरे अकेलेपन का को गलत इस्तेमाल नहीं किया उन्होंने…”

वह बोले .. मीनल में ऐसे नहीं कर सकता , तुम अभी जवान हो बहुत खूबसूरत और भरे बदन वाली हो .. लेकिन प्लीज ऐसे न करो .. अपना ख्याल रखो .. देखो रौशनी जी कैसी हैं .. कभी ऐसे हरकतें नहीं करती .. उनके जैसे बनो .. वह इतनी खूबसूरत हैं , गदरायी बदन हैं .. लेकिन इतनी सुशिल .. उनके जैसे प्लीज बनो … “

रौशनी सब सुन मुस्कुराती हैं .. एक तोह इस बात से की मीनल का सलीम जी ने फायदा नहीं उठाया और दूसरी बात की वह उसकी इतनी टैरिफ कर रहे थे …

उस दिन के चिल्लाने का उसे अफ़सोस होने लगा और आज वह सलीम जी को उस दिन के लिए सॉरी कहने वाली थी ..”

“हाँ मीनल तू सही हैं , सलीम जी बहुत अच्छे आदमी हैं .. वह मेरे भी दोस्त बन चुके हैं.”

(अरे रौशनी जी तुम्हे तोह वह अपने निचे सुला कर बहुत छोड़ने का मन बनाये हुए हैं , दोस्ती करके तेरी चुदाई करेंगे कमीने सांड हैं .. उनका मोटा लुंड भी तुम्हारी छूट को बहुत पलेगा …. तू तोह उसकी बन कर hi रहेगी …)

“हाँ रौशनी जी , सलीम जी अच्छे हैं .. बस आपको बहुत लिखे करते हैं .. में कहूं तोह वह आपसे दोस्ती से भी और करीब आना चाहते हैं .. उन्हें आप बहुत hi पसंद हो … आप उन पर उनकी दारू की हैबिट से लेकर इतना नाराज़ न हो .. बस अपनी बेगम की जाने के गम में पीते हैं सलीम मियां…”

रौशनी सब सुन रही थी .. लेकिन आखिर में जब मीनल ने सलीम जी को सलीम मियां बुलाई तब उसे थोड़ी सी बात हैं न हुयी. किसी मर्द को मियां तब hi बुलाते हैं जब कोई एक दूसरे के बहुत hi करीब हो, मनो लवर्स हो .. और मीनल ने उस शब्द का इस्तेमाल किया … क्या सलीम और मीनल बस दोस्त नहीं , और लवर्स भी हैं .. लेकिन मीनल तोह ऐसी बातें करि की सलीम जी तोह बस दोस्ती में hi इंटरेस्ट रखते हैं .. उफ्फ्फ्फ़ अब क्या करे .. क्या मीनल और सलीम जी .. उफ्फ्फ्फ़ ऐसी जवान लड़की सलीम जैसे बुड्ढे की लवर कैसे हो सकती हैं .. उफ्फफ्फ्फ़ यह क्या चल रहा हैं दोनों के बीच , उफ़ लेकिन उनका तोह उस दिन उभर इतना बड़ा था . उफ़ क्या मीनल ाजीसी कमसिन काली उनके बड़े मोठे लुंड को ले भी पायेगी उफ्फ्फ यह सब वह क्या सोच रही थी ममम …. या यह बस मीनल का इन्फैटुएशन हैं सलीम जी से ….)

फिर मीनल वहां से चली जाती हैं , उसने सलीम न जैसे उसे बताया था वैसे hi बात करि थी रौशनी से .. सलीम का प्लान रौशनी को रिझाने का शुरू हुआ था …

मीनल वहां से चली जाती हैं और रौशनी घर जाती हैं , जहाँ आज शाम को बस सलीम hi हैं. असलम कहाँ गए थे कुछ काम के सिलसिले.

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सलीम रौशनी को आते देख अपने लोडे को मसलता हैं..

“नमस्ते रौशनी जी … फिर आप यहाँ रहने को राज़ी हुयी हैं .. अच्छी बात हैं”

“सलीम जो हाँ में असलम जी के इलाज होने तक यही रहूंगी.”

“वह बढ़िया , फिर आपसे और बातें का पाउँगा .. आपकी कंपनी और मिलेगी मुझे”

“हाँ सलीम जी अब आप के यहाँ रहने वाली हूँ जब तक असलम जी का इलाज होता नहीं. बस वक hi चीज़ हैं की इवेंट के बाद बस 2 दिन घर जाकर आउंगी, मेरे पति का ख्याल भी रखना हैं”

“हाँ जरूर जैसे आप कहे. दो दिन वहां रहकर वापस आइये.”

“हाँ सलीम जी: वैसे आज मीनल आयी थी मिलने”

“अच्छा सच क्या बोली मीनल … कुछ कहा उसने”

“नहीं ख़ास नहीं बस कह रही थी आप मेरी तारीफ कर रहे थे उससे”

“हाँ अब आपकी तारीफ करनी भी चाहिए और मीनल को भी आप जैसे hi बननी हैं..”

“मेरी जैसी मतलब सलीम जी” रौशनी कोमलता से ोुचि.

“आप जैसी स्मार्ट , ब्यूटीफुल, और आप जैसे साफ़ दिल की रौशनी जी”

“अच्छा यह सब आप सोचते हो मेरे बारे में.”

“हाँ में तोह आप के बारे में बहुत कुछ सोचता हूँ रोशनीजी”

“अच्छा इतना सोचते हो .. हम्म मुझे बताइये और क्या सोचते हो आप?”

“अब कैसे बताऊ .. बहुत कुछ हैं”

“अरे बताइये न टाइम हैं मेरे पास :. लगता हैं आज असलम जी भी बहार गए हुए हैं”

“हाँ हु रात को आएँगे 9 बजे . तब तक बस आप और में hi हैं”

“हाँ फॉर बताइये और क्या सोचते हो आप मेरे बारे में.”

रौशनी को उत्सुकता थिन्की सलीम और क्या बोलेंगे .. वहां सलीम को पता चला यही मौका हैं रौशनी को और अपने ाकरीब लाने के लिए”

“रौशनी जी आपकी ड्रेसिंग सेंस बहुत पस्न्द हैं मुझे ..”

“अच्छा क्यों .. क्या पसंद हैं उसमें सलीम जी”

“रौशनी जो मुझे आप पर आपकी स्लीवलेस ब्लौसेस और आपकी सरिस पहने का स्टाइल बहुत लाजवाब लगतभाईन”

रौशनी मुस्कुरायी .. अच्छा कौनसा पेहेन्ने का स्टाइल जरा बताइये”

ममम रौशनी जी आपके डीप बैक ब्लौसेस बेहत हॉट लगते हैं आप पर ..: आपकी साड़ी का ऐसे कमर के वह बांधना .. उससे आपकी कमर की गोरी सी त्वचा शाइन हो उठती हैं..”

“अच्छा सलीम जी तोह आपकी नज़र मेरे कमर पर hi होती हैं .. इसलिए वहां घूरते हैं आप ..”

“रौशनी जी आप हो hi एंटी हॉट ..”

“अच्छा यह हॉट का क्या मतलब …”

“मतलब आप को देख गर्मी बढ़ती हैं जहाँ भी आप जाती हो ..”









“अच्छा सलीम जी गर्मी बढ़तिभाईं … उफ्फ्फ आप भी न”

“सच रौशनी जी गर्मी बढ़ती हैं तोह मुझे भी आप और सेक्सी लगती हो”

“अच्छा सेक्सी लगती हूँ आपको , ऐसे सब विचार हैं आपको मेरे प्रति सलीम जी.”

“रौशनी जी अब क्या करे … आपको देख यह सब लगता हैं … अब आप रही अच्छे घर की महिला और में एक बुद्धा काम पैसों वाला .. हमें तोह आप से बात करनी hi हमारी खुश नसीबी है”

रौशनी को भी अच्छा लग रहा था सलीम का उसकी तारीफ करना .. उसके पति तोह अब यह सब करना भूल hi गए थे .. यहाँ सलीम जैसे बुड्ढे भी उसकी इतनी तारीफ कर रहे थे.”

अब रौशनी सुन्ना चाहती थी सलीम की राइ मीनल के बारे में. उसे जो शक था की दोनों के बीस कुछ चल रहा हैं चक्कर उसकी और जानकारी लेना चाहती थी.

“वैसे सलीम जी मीनल का क्या ख्याल हैं आपका … मुझे तोह लगा था की मर्दों को उसकी जैसी कमसिन लड़कियां पसंद आती हैं खूब”

“रौशनी जी मीनल नादान हैं, हाँ हैं तोह काफी खूबसूरत और गोरी लेकिन अभी तोह नादान हैं..”

“अच्छा. फिर भी सलीम जी उसे तोह आप बहुत अच्छे लगते हो वह बता रही थी .. अब एक कमसिन लड़की आप को चाहती हैं और आप हैं की उसमें इंटरेस्ट नहीं”

“रौशनी जी मुझे मीनल जैसी कमीशन लड़कियां नहीं पसंद .. मुझे तोह आप जैसी , आपकी उम्र वाली लेडीज पसंद हैं”

“अच्छा मेरी जैसी .. अरे में तो पुराणी हो गयी हैं .. मीनल तोह जवान हैं , कमसिन .. में तोह शादी शुदा हूँ ..”

“तोह क्या हुआ .. आप जैसी hi हमें पसंद हैं … आप स्मार्ट हो . टैलेंटेड हो और आप मुझ जैसे बुड्ढे को जवान hi लगती हो .. आप का बदन …” सलीम खुद को रोकता हैं . रौशनी की एक्सप्रेशंस देखना चाहता था ..

“सलीम जी मेरे बदन का क्या … बताइये ”

“रौशनी जी नहीं कुछ नहीं रहने दो.”

“अब बात शुरू किट ओह बताइये न …”

रौशनी उत्सुक थी की सलीम उसके बदन के बारे में क्या कहना चाहते थे… सलीम कभी ऐसे खुल कर बातें किये नहीं थे .. आज तोह रौशनी जानना चाहती थी उनके मन में क्या हैं.

“अच्छा बताएंगे , आपका गदराया बदन मुझे पसंद हैं … आपकी फिगर.. शादी शुदा होकर भी आप एंटी मैनटैनेड हो .. आपकी बाहें जो गोरी सी मुलायम सिभाईं वह बहुत पसंद हैं … और आप पीछे से जब चलती हो तोह आपकी चाल मुझे बेहत पसंद हैं …”

रौशनी यह सब सुन शर्मा गयी … आज सलीम जैसा बुद्धा उसके बदन की तारीफ कर रहा था ..

रौशनी शर्मा का पीछे मुड़ती हैं.. सलीम इसका फायदा उठाते हुए उसके करीब जाता हैं

रौशनी अभी भी शरमाते हुए मुड़ी हुयी हैं और फिर सलीम को अपने पास महसूस कर उसकी तरफ मुड़ती हैं…

सलीम अब रौशनी की आँखों में देखता हैं … रौशनी उसकी आँखों में ..

सलीम अब रौशनी से लिपट जाता हैं और रौशनी की गोरी मुलायम पीठ अपर हाथों को फेरने लगता है. .. कुछ सेकंड रौशनी भी बहकर उसे गले लगाती हैं … सलीम उसकी कमर अपर हाट दाल वहां पर दबोचता हैं..

रौशनी की मुँह से आह निकलती हैं … सलीम और बोल्ड होकर अब रौशनी की चूतड़ों को भी हलके से दबाता हैं … कुछ सेकंड ऐसे hi वह एक दूसरे के बाँहों में रहते हैं की अचानक रौशनी सलीम को ढाका देकर उससे हंजूदा होती हैं ..

“उफ़ सलीम जी यह क्या कर रहे हो आप … उफ्फ्फ आप कुछ ज्यादा hi कर रहे हो ..”

“रौशनी जी क्या हुआ … बस हुग तोह करि आपको … इसमें क्या .. आपके बदन को बाँहों में लेने दो न ..”

“नहीं यह गलत हैं में शादी सुदा हूँ ..”

“रौशनी जी मुझे आप से बहुत लगाव होने लगा हैं. बस आप से मिलने का रोज़ इंतेज़्ज़र करता हूँ .. आपसे बातें करने का और आपकी कंपनी में रहने के लिए”

“मुझे आप चाहिए , आपको मेरी बेगम बनाने के सपने देखता हूँ”

“सलीम जी आप जवान लौंडो जैसे न बात करिये .. आप बुज़ुर्ग हैं आपको पता हैं में शादी शुदा हूँ .. आप सब जानकर भी ऐसे सपने कैसे देखते हो”

“रौशनी जी मुझे आपसे ोयार हैं .. मुझे बस आप चाहिए .. आप मेरी बन जाओ में आपको बहुत खुश रखूँगा”

“सलीम जी ऐसी बातें का करिये .. में यहाँ ंगो की मैनेजर हूँ , आप से ऐसे सम्बन्ध नहीं रख सकती..”

सलीम फिर से रौशनी के करीब आता हैं, रौशनी थोड़ा पीछे हैट जाती हैं .. सलीम रौशनी की कमर पर हाथ डालता हैं .. “छोड़िये मुझे सलीम जी ..”

(साली सुबह तोह असलम के साथ मस्ती कर रही थी और अब छोड़िये मुझे लेहती हैं … असलम के बीमारी की नौटंकी की शुरुवात में करवाया हूँ ..)

“रौशनी जी न मत कहिये .. प्यार को मत ठुकराना .. आइये बाँहों में .. खूब प्यार करूँगा आपसे”

“छोड़िये सलीम जी … आप ज़बरदस्ती न करे …

सलीम अब रौशनी की कमर को पकड़े उसे घूमता हैं.. रौशनी थोड़ा बैलेंस खो कर गिर रही हैं की सलीम उसे पलाद लेता हैं .. फिर वह उसके कमर को मसलने लगता हैं … रौशनी उफ्फ्फ की आवाज़ करती हुयी उससे जुड़ा होने लगती है. ..

फिर सलीम उसकी चूतड़ों को अपने तरफ कर उसकी डीप बैक कट ब्लाउज में पीठ को चूमता है. .. एक दो चुम्मेद एटा हैं .. वहां रौशनी उफ्फ्फ मम करती हुयी उससे दूर जाने की कोशिश करती हैं .. लेकिन सलीम उसे फिर से पकड़ कर उसकी पीठ पर और गीली चूमियाँ देता हैं .. रौशनी को सलीम की ज़बरदस्ती पसंद नहीं होती हैं वह उससे अब दूर हो जाती है. ..

“उफ़ सलीम जी आप कण्ट्रोल करिये .. प्लीज आप अच्छे हो आप को यह ऐसे करना सूट नहीं करता ..”

“रौशनी जी सच्चे प्यार को आप और न सोचिये .. आप के हर हिस्से से प्यार करता हूँ .. आपके हरंग से .: आप मेरी बनिए रौशनी …”

रौशनी अब सलीम को देख मुँह बनती हैं .. थड़े घुसे से उसे देख “सलीम जी आप भी न , ये प्यार का क्या शुरू कर रहे हो .. भले बस एक हफ्ते में ये प्यार कैसे .. मुझे तोह आपकी आँखों में हवस दिख रहा हैं ..

सलीम का लोढ़ा तोह टाइट हुआ होता हैं … ववाह रौशनी की गुलाबी हॉटफोन को देखते रहता हैं “उफ्फ्फ रौशनी जी आप ग़ुस्से में भी इतनी क्यूट लगती हो .. आप पर ग़ुस्सा नहीं अच्छा लगता हमें. आप बस मुस्कुराती हुयी hi रहो.”

“अब आप हवस बोलिये , में इस प्यार कहु गए .. प्यार में फिजिकल फीलिंग भी आती हैं ..”

रौशनी की नज़र अब सलीम के लोडे के उभर पर जाती है. .. उफ्फ्फ काफी बड़ा था उनका .. मनो असलम से भी बड़ा होगा .. रौशनी की नज़र वहां पर hi रहती हैं और अनजाने में अपने निचले होठों को वह दबती हैं दांतों से ..

“रौशनी जी आप भी पसंद कर रही हो मेरे ोयार को .. मुझे दिख रहा हैं आपकी आँखों में.”

रौशनी को इस बात से ेहास होता हैं की सलीम को उसकी नज़र उनके लोडे पर थी वह बात पता चली हैं .. वह अब शर्मा कर दूसरी तरफ मुद कर देखती हैं ..

“है रौशनी जी आपका शर्माना भी उफ्फ्फ .. आप हो hi हुस्न की पारी .. आप से तोह और ोयार होगा मुझे .. आप कभी हमें भी आज़मा कर देखिये .. आपके पति से भी ज्यादा प्यार देंगे .. आप के पति से ज्यादा प्यार करेगा यह बुद्धा ..”

रौशनी सोचती हैं (उफ़ यह कहा में फास गयी .. सलीम जी आज कुछ ज्यादा hi भावुक हो रहे हैं , वहां असलम भी मुझे अपनी रुकसाना सोच कर मेरे दीवाने से हो आगये हैं .. यह कहाँ में दो बुद्धों के बीच फास चुकी हूँ .. )

“सलीम जी आप थोड़े ठन्डे दिमाग से सोचिये .. आज आप बहुत भावुक हो गए हो .. आपके लिए जूस बनती हूँ आप बैठिये”

सलीम बैठ हटा हैं सोफे पर .. वास् रौशनी की मटकती चाल देखे जा रहा था … उफ्फ्फ है क्या माल हैं यार मममम रौशनी की जैसी कोई नहीं उफ़”

तभी रौशनी भी पीछे मुड़ती हैं और सलीम को उसे देखते हुए पाटो हैं .. “उफ्फ्फ सलीम मेरी चूतड़ों को hi देख रहे होंगे .. आज उन्हें क्या हुआ हैं किसे पता ..”





रौशनी फिर सलीम को देख हाथों से छठा मारने की इशारा करती हैं … उसे देख सलीम मुस्कुराता हैं और अपने गालों को दिखता हैं …

रौशनी सलीम को ग़ुस्से से घूरती हैं एक आखरी बार और फिर रसोई घर में जाने लगती हैं.. रसोई घर के पास आते hi रौशनी की होठों पर एक मुसकाम आती हैं और वह जूस बनाने लग जाती हैं.. वह जुइ बनती हैं और जान बुझ कर नमक डालती हैं जुइ में और मन में एक शरारती मुस्कान से जूस देने जाती हैं सलीम को.

सलीम जइसे की गिलास लेते वक़्त रौशनी की हाथों को दबाता हैं और फिर गिलास लेता हैं..

“रौशनी जी आप जुइ नहीं लोगी ..”

आप लीजिये में बाद में लुंगी.”

रौशनी अब सलीम को नमक वाली जुइ पिटे देखती हैं..

सलीम को पहले hi टास्ते में समझ आता हैं की जुइ में नमक हैं.. लेकिन वह चुप चाप उसे पूरा पि जाता हैं …

रौशनी सलीम को उस नमक वाली जुइ पिटे देख हैरान होती हैं ..

“रौशनी जी वह क्या जूस बनायीं हैं बिलकुल स्वादिस्ट हैं .. मज़्ज़ा आया”

“सलीम जी हु .. हु मैंने उसमें नमक मिलायी थी और आप नई यह पि भी ली और ऊपर से स्वादिष्ट बोल रहे हो उस नमक वाली जुइ को..”

“रौशनी जी मुझे लगा आप शक्कर के बजे नमक डाली होगी .. गलती हुयी होगी इसलिए कुछ नहीं बोलै .. वैसे आप कुछ गलत जान बुझ कर कभी नहीं करोगी मुझे पता हैं.. भरोसा हैं तुम पर.”

रौशनी अब मुस्कुरायी … उफ्फ्फ सलीम जी बिलकुल पागल हैं … नमक वाली जुइ पि गए ..

“वैसे रौशनी जी आपने खुद जुइ बनायीं हैं .. इसलिए नमक होकर भी बहुत मीठी hi लगती हैं .. आप हो hi इतनी मीठी ..”

“सलीम जी आपके ये तारीफ अब नहीं चलेंगे .. आप बहुत अमरत हो .. ऐसी तारीफ कटे हुए मन बहलाते हो फिर अभी कुछ देर पहले कैसी कैसी हरकतें करते हो .. उफ्फ्फ्फ़”

“रौशनी जी क्यूब आपको पसंद नहीं आयी .. आपके पति ऐसे नहीं करते हैं क्या ..”

“सलीम जी मेरे पति बहुत रोमांटिक हैं.. आप से भी ज्यादा .. आप को क्या पता कौनसे रोमांटिक चीज़ें करते हैं हु.”

“अच्छा जी फिर बाटिये कौनसी रोमांटिक चीज़ें करते हैं वह .. हम भी सिख लेंगे ः”

“उफ़ सलीम जी हु मेरे और रोनित के बीच हैं … आप को क्यों बताऊ ..”

“फिर लगता हैं इतने नहीं रोमांटिक हो सकते हैं वह … नहीं तोह आप बोल देती”

“हैं बहुत आपको क्या .. आप अपने रोमांटिक तरकीब रखिये अपने पास”

“रौशनी जी अरे अब रख कर क्या करू .. आप पर आज़मा लूंगा .. फिर देखते हैं मेरे रोमांटिक चीज़ें पसंद हैं तुम्हे या आपके पति के.”

“हरकीज़ नहीं .. आपको ऐसी चीज़ें आज़मा कर देने hi नहीं दूंगी .. अआप बस मेरे दोस्त रहिये नहीं तोह वह भी दोस्ती नहीं मिलेगी आपको.”

“रौशनी जी आपसे दोस्ती बस … उतना hi .. रौशनी जी आपसे प्यार करने लगा हूँ .. बस दोस्ती hi अब नहीं चलेगी..”

“अरे ये क्या ज़बरदस्ती हैं … दोस्त रहिये बस”

“कैसी ज़बरदस्ती रौशनी जी .. बस में बोल रहा हूँ किआ आपसे बस दोस्ती नहीं करनी .. में आपको प्यार करने लगा हूँ, आपसे में नहीं मानूंगा कुछ .. बस अपना पुआर जताऊँगा .. अब आप पर hi हैं आप उसको… ममममकहते हैं न इंग्लिश में - पॉजिटिव या नेगेटिव लोगी मेरे प्यार का इज़हार.”

“अच्छा देखते हैं सलीम जी .. आप करिये कोशिश में भी आसानी से नहीं हाथ आती”

“ओह रौशनी जी .. मतलब हाथ आ सकती हो अआप … मौका हैं बस कोशिश पूरी तरह से कठिन करनी होगी ..”

“सलीम जी आप भी न .. उफ्फ्फ आप तोह बस पीछे hi पद गए हो..”

“रौशनी जी अभी तोह बहुत पीछे पड़ना बाकी हैं …. अब तोह शुरुवात भी नहीं हुयी हैं”

रौशनी फिर सोफे से उठ जाती हैं..

“अच्छा अब बहुत हुआ आप से बात करना अब बेकार हैं .. आप पढ़िए पीछे , जब हाथ नहीं ोांगी न खुद इस बुढ़ापे में थक कर चोर डोज पीछा.”

“रौशनी जी मेरे बुढ़ापे पर मत जाओ .. घोडा अभी भी दौड़ सकता हैं … बड़ा भी हैं , ताक़तवर भी और स्टैमिना भी बहुत हैं ..”

रौशनी की नज़र सलीम के लोडे पर जाती हैं .. उसकी उभर को कुछ सेकंड देख अपने कमरे में चली जाती हैं…

(कमरे में वह बस सलीम को बातें और उसके बड़े लोडे के उभर के बारे में सोचती हुयी रौशनी कोह काफी शर्म आ रही थी)





वहां सलीम अपने लोडे को मसलता हैं … रौशनी को अपना बनाने की प्लानिंग में सोचते हुए बाथरूम जाकर अपने लुंड को जोरों से रौशनी का नाम लेते हुए मुठ मारता हैं और अपना सफ़ेद गधा माल पूरा चोर देता हैं … उसका सफ़ेद माल बाथरूम में पड़े रौशनी की पंतय पर जा गिरता हैं … सलीम उसे वैसे hi उठाकर एक साइड पर रख अंदर मुस्कुराते हुए चला जाता हैं.
 
रौशनी वाशरूम में चली गयी अपने चेहरे को धोने …



फ्रेश होने के बाद वह निकलने hi वाली थी की उसे , उसकी पंतय दिखी … उसकी पंतय पर एक सफ़ेद दाग था … वह अपनी पंतय लेकर उस दाग को देखने लगी .. सफ़ेद था और ज्यादा hi थिक लगा उसे .. उस दाग से जो स्मेल आ रही थी वह उसे जानी पहचानी से लगी .. थोड़ी और नज़दीक लेकर उसे सूंघने से रौशनी को एकदम से याद आया वह दाग केस चीज़ का हैं .. वह पंतय निचे रख दी ..(उफ़ इस पर तोह मर्द के लुंड से निकले वीर्य का स्मेल हैं .. उफ़ और दीखता भी कुछ वाइस hi हैं.. क्या यह अभी सलीम जी ने मुठ मारी हैं .. उफ्फफ्फ्फ़ ) फिर उसकी नज़र सलीम के भी चड्डी पर पड़ती हैं और उसकी चड्डी काळा रंग की होने से तोह उसे साफ़ पता चला की वह दाग सलीम के वीर्य का hi हैं .. (उफ्फ्फ यह सलीम जी क्या अभी यहाँ मस्टुर्बते कर चुके थे .. उफ़ फ्क्या वह मेरे नाम में ऐसे कर रहे थे .. कितने गंदे हैं उफ्फ्फ…. लेकिन अगर उन्हें कोंफ्रोंट करू तोह वह इंकार करेंगे की वह मेरे सोच से ऐसे कर चुके हैं और फिर और कुछ न कुछ सेक्सुअल बातें भी करेंगे .. उफ़ रहने दो उसे में अभी धो देती हूँ…

रौशनी ने साबुन लिया और उसकी पंतय धोने लगी .. सलीम के वीर्य का दाग वहां से निकलने के बाद उन्हें सूखने अपने कमरे में ले गयी… (उफ़ अब कुछ ज्यादा hi हो रहा हाँ .. लेकिन में भी क्या कहु , दोनों सालों से अपनी पत्नियों को खो चुके हैं तोह उनकी भी ज़रूरतें हैं .. अब ऐसे मस्टुर्बते कर वह निकलते हैं अपने अनादर की सेक्सुअल फीलिंग्स तोह इसमें हर्ज़ क्या हैं… बस मेरी पंतय को इनसे दूर रखनी चाहिए .. नहीं तोह मेरी पंतय में hi वह .. उफ्फ्फ्फ़ रौशनी तुम यह क्या सोच रही हैं … तेरा भी उनके जैसे गन्दा दिमाग हो रहा हैं. )

अब रौशनी डिनर बनाने लग गयी .. आज उसने जल्दी से hi डिनर बनाकर सलीम जी को खाने पर बुलाया … लेकिन अभी हुयी चीज़ों की याद रौशनी को ताज़ा थी इसलिए वह सलीम के साथ खाना नहीं खाना चाहती थी .. बस अपनी प्लेट अपने कमरे में ले जाकर वहां डिनर कर ली.. सलीम के पुकारने पर भी वह बहार नहीं आयी …

फिर जब सलीम भी डिनर कर अपने कमरे में चला गया तब रौशनी अपनी प्लेट और बाकी सब प्लेट साफ़ कर सोने चली गयी…

दुपहर का वक़्त हैं रमेश एक कस्टमर को ड्राप कर रहा हैं .. तब उसे रौशनी दिखती हैं … रौशनी भी उसे देख पाती हैं … रौशनी फिर बैग्स लेकर रमेश के पास जाती हैं ..

रौशनी को आते देख रमेश बहुत खुश होता हैं .. रौशनी ने आज एक ट्रांसपेरेंट साड़ी , स्लीवलेस ब्लाउज और बहुत hi डीप कट ब्लाउज पीछे से .. ऐसे पहनी थी. उसके बाल खुले चोर दिए थे उसने और होठों पर लाल लिपस्टिक .. बहुत hi मस्त आइटम लग रही थी ..









रमेश का लुंड अब अपनी पंत में अपनी औकात में आना शुरू हुआ था … रमेश पोचली गार्डन की मुलाक़ात के बारे में सोच रहा था .. क्या कहेगी रौशनी , क्या वह अभी भी दोस्त रहेगी या आज उसे कहने लायी थी की वह आज से कभी नहीं मिलेंगे … रमेश थोड़ा नर्वस था.

रौशनी जी पहले तोह माफ़ कीजिये रय उस दिन जो भी हुआ .. में जान बुझ कर नहीं करि … बस हु हो गया रौशनी जी .. उस वातावरण में सब में , में खो गया और आपको ऐसे जोरों से चूमने लगा था … माफ़ कर दीजिये रौशनी जी..

रौशनी कहती हैं “रमेश जी पहली बात तोह आप अभी मुझे ंगो तक थो ड्राप करिये.

अब रिक्शा चल पड़ी ..

रमेश फिर से हिम्मत करके कहता है आंखे चुरा कर “रौशनी जी मैं तोह दिल से माफ़ी मांगता हूँ पिछली बार गार्डन में जो हुआ....”

रमेश का चेहरा देख रौशनी पहले तोह मुँह टेड़ा कर लेती हैं … लेकिन फिर है देती है....

रौशनी कहती “अरे कोई बात नहीं.... बस आप hi नहीं हम दोनों बह गए थे उस वातावरण mein....aap की नियत गन्दी नहीं थी , मैं आपकी आक्न्हों में देखि है आपकी बातों में सच्चाई.

रमेश सांस लेता है.

रौशनी जी मुझे आपकी दोस्ती खोनी नहीं हैं .. आप का फ़ोन नंबर ले सकता हूँ .. मुझे आपकी दोस्ती लम्बे समय के लिए चाहिए …

रौशनी फिर अपना नंबर देती हैं.. रमेश खुश हो जाता हैं .. अब तोह नंबर भी मिल गया हैं , अब रोज़ रात को मेस्सगेस करूँगा , कॉल करूँगा … रौशनी से बहुत बातें कर उसे अपने पास खींच लूंगा.

फिर थोड़ी शान्ति होती है.... और ऑटो के रेडियो पे मिथुन चरबोरथ्य के गाना चल रहा होता है

जिसपे रौशनी कहती “यह तो इस फिल्म का है .... और रमेश हैरान होता हैं की एक जवान महिला को आज की दौर में मिथुन के गाने आते हैं और ऐसे गाने पसंद हैं , हु तोह मेरे फवौरीते एक्टर थे उस टाइम के .. कितने हेरोइनेस के साथ ऐसे कामुक डांस और सांग्स चलते थे उनके.

रमेश फिर पूछ लेता है.... “ रौशनी जी आपको कैसे पता यह गाना कौनसे फिल्म का हैं .. आपको पसंद हैं ऐसे गाने …?”

जिसपे रौशनी कहती हैं “हाँ ज़रूर मैं तो बचपन से देखती आयी हूँ सारी ऐसी पुराणी फिल्मों के गाने और हाँ मेरी माँ फैन थी मिथुन जी की .. और मुझे भी उनके पुराने फिल्म्स और ऐसे गाने पसंद हैं....

इधर रौशनी बता रही होती है .... और रमेश इम्प्रेस होजाता है.... उसका इस बात से लुंड पंत में झटके मारने लगता हैं .. उसकी और रौशनी की लाइक्स इतनी सिमिलर कैसे ….

फिर वह बोलती है रौशनी जी में मिथुन जी के डांस और गानों का शौक़ीन hun....lekin आज कल के गाने जमते नहीं मुझे....

रमेश कुछ ख्यालों में गम होजाता है कुछ पल के लिए....

इतने में दोनों ंगो पहुँच जाते हैं.... और पैसे देते वक़्त पिछली सीट में रौशनी अभी भी बैठी थी उसे.... रमेश पूछता है “क्या मैं आप से एक बात पूछूं तो आप बुरा तो नहीं मानेगी ?

रौशनी बोलती हैं “रमेश जी पूछिए न”

रमेश बोलता हैं “क्या उस दिन जैसे आप आज भी मेरे साथ …. क्या मैं आपको.....”

इतने मई रौशनी कहती है... “रमेश जी क्या आपको फिर से गार्डन चलना है???

रमेश कहता है थोड़ा ज़हिज़हाक कर “..... जी रौशनी में आपको फिर से वहां ले जाना चाहता हूँ…

रमेश रुका था की रौशनी न कहेगी लेकिन रौशनी कहती हैं “ज़रूर रमेश जी .. आप मुझे गार्डन ले जा सकते हैं....”

रमेश खुश होजाता hai...aur कहता है “रौशनी जी में आपको एक और पार्क लेके जाऊँगा.... आपको वह पार्क और भी बोहोत पसंद आएगा.... और वह कपल्स पार्क नहीं हैं.

रौशनी कहती “हम्म्म ठीक हैं रमेश जी ज़रूर ....”

रमेश अब एक नए पार्क में लेजाता जो बोहोत बड़ा था......

लम्बे लम्बे पेड़ भी होते हैं.... और लोग काम.... क्यूंकि यह शहर से थोड़ी दूरी पर है....

इधर रौशनी को देख रमेश बोहोत एक्ससिटेड फील करता है.... फिर उसे वह कैंडी खिलता hai....aur फिर एक एरिया में वह चले जाते हैं फिर रमेश कहता है.... आपको डांस बोहोत पसंद है न रौशनी जी??

और आपको मिथुन के फिल्में भी पता है... एक गाना हाड आगया आपको इस ड्रेस से मैच करते hay....aap मेरे साथ उसपे डांस karengi...thoda मज़ा आएगा...

रौशनी सोचती है और कहती हैं

“ उफ्फ्फ वह तो.... उस गाने में एक एक्ट्रेस गौतमी की तरह वाली साड़ी पहनी है आपको ऐसे लग रहा हैं …. आपको पता हैं न की गाना फिल्म आदमी से....

रौशनी कहती है जी धक् धक् दिल मेरा करने लगा...

रौशनी कहती चलिए गाने को प्लेबैक करके नाचते हैं....

रमेश कहता है आपके फ़ोन पे चाहे तो रिकॉर्ड कराकटय हैं और मेरे फ़ोन से गाना प्ले करदेंगे....

रौशनी और रमेश दोनों ेक्सक्टेड हो जाते है और रमेश bhi....kyunki इस बहाने अब वह रौशनी के अंग के मज़े लेते हुए उसे छू भी सकेगा...

अब दोनों नाचते हैं … फिर एक्चुअल गाने के जैसे .... रमेश रौशनी की गर्दन, छाती, पल्लू के ऊपर से नाभि.... और खुली पीठ पे चूमता है....

उसके साथ जितना हॉसकय वह इसको एन्जॉय करना चाहता था...

दोनों गाना और नाच जारी रखते hain....roshni बोहोत इम्प्रेस होती है रमेश se...usko गाना याद भी है और वह हीरो के तरह स्टेप्स कर रहा होता है...

रमेश अब रौशनी की अपने पास खींचता हैं .. उसके गालों को चूमता हैं ..





निचे से उसका लुंड पूरा टाइट हुआ हैं .. वह रौशनी को अपने पास जकड कर रखता हैं और अपनी उभर को रौशनी के पेट से टकराता हैं .. रौशनी अहह उफ्फ्फ करती हैं और रमेश से दूर नहीं जाने की कोशिश करती हैं.. इसे देख रमेश और भी उत्सुक होता हैं और अब जोरों से रौशनी के बदन को रगड़ता हैं … उसके पीठ को रगड़ता हैं , उसकी कमर मसलता हैं .. उसकी चूतड़ों को भी .. रौशनी बस उफ़ मम अहह रमेश जी मममम ऐसे करिये .. कहती हैं और रमेश को और उत्तेजित करती हैं..

रमेश अब अपने फ़ोन पर उस गाने का एक रीमिक्स वर्शन शुर करता हैं .. इससे ुवः और भी करीब से रौशनी के साथ नाचता हैं .. बीच बीच हैं रौशनी की गोरी बाँहों को चूमता हैं .. उसके नाभि को .. रौशनी बस मज़्ज़े लेते हुए रमेश का साथ देती हैं ..

उस गाने के आखरी part के anusar....gaane में एक्ट्रेस अब जाती है "धक् धक्" और रमेश रौशनी के नाभि पर चूमता हैं …





फिर से "धक् धक्" part चलता हैं और फिर से रौशनी अपनी चूचियों को ऊपर निचे करते हुए

रमेश उसकी नाभि पर एक वेट किश लगता हैं … .... रमेश चाहता था वह part और रिपीट होता rahay.....jisse की वह फिर रौशनी के गोर से मखमली बदन के अलग अलग एरियाज को चुम सके और रौशनी मस्त में इस हरकत से रियेक्ट करे ..

और वही हुआ. गाने के हिसाब से रमेश रौशनी को ऊपर उठता हैं और फिर जब रमेश रौशनी को नीचे ला रहा होता है तब वह रौशनी को उसके होठों पर एक हल्का सा चुम्बन देता है और फिर उसका रिएक्शन देखता है जिसपे रौशनी कुछ रिएक्शन नहीं देती और दोनों फिर किश करने लगते hai...neechay चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी अब रमेश की आँखों में सडक्टिवेली देखती हैं.... रमेश अब इसे पॉजिटिव सिग्नल पाकर उसे फिर से उसके गुलाबी होठों पर चुम लेता हैं .. अब दोनों चुम्बन की आग़ोश में हैं और रमेश का लुंड रौशनी के पेट पर मसलता हैं … रमेश अब रौशनी को लेटने कहता हैं और रौशनी लेट जाती है....





और एक बार पलट जाती है.... रौशनी अपनी ज़ुल्फ़े लेफ्ट कंधे पे करके अपने गोरी मुलायम पीठ के पूरा एक्सपोज़ कर देती है जैसे उस गाने में एक्ट्रेस करती है...

ऐसे hi गाना चलता रहता हैं और रमेश रौशनी के हर अंग को चूमता हैं … रौशनी भी अहह उफ़ मम की आवाज़ें करती हैं ..





गणना ख़तम होता हैं और फिर रमेश और बोल्ड हो जाता हैं .. वह अब रौशनी के सर के पास अपने उभरते हुए लुंड को ले जाता हैं … अपनी पंत निचे कर अपनी चांदी को रौशनी के नाक से रगड़ता हैं .. वहां रौशनी अपनी ानकेहिं बंद करि उफ्फ्फ मम की आवाज़ें करीत हैं .. कोई ाएस पास नहीं हैं बस झाडिया .. रमेश और बोल्ड होकर अपनी चड्डी निचे कर अपने खड़े लोडे को रौशनी के गालों पर रगड़ता हैं ..उसका प्रेकम रौशनी की गालों पर से लेकर उसके लुंड तक एक धरा बना लेती हैं ..

फिर रमेश अपने खड़े लुंड को रौशनी के मुँह के सामने ले जाता हैं .. उसके होतोहों पर टच करता हैं .. और रौशनी का मुँह खुलता हैं और वह रमेश के लुंड को अपने मुँह में लेने जाती hi हैं ………..

..

त्रीनगगगगग तृणणगगगग … अलार्म क्लॉक बजता हैं .. और रमेश नींद में बुदबुदाता हैं “उफ़ रौशनी ममम चुसो ममममम” फिर उसकी आँखें और एक अलार्म के तृणणगगगग त्रीनगगग से खुलती हैं …

(उफ्फ्फ में तोह घर पर hi हूँ मेरे .. यह सब सपना था .. उफ्फफ्फ्फ़ बस सपना ओह गॉड…. रमेश निराश होता हैं की यह सब उसके सपनो में hi हो रहा था … .)

वहां दूसरी और रौशनी भी उठ जाती हैं .. उसे नहीं पता की वहां रमेश के घर वह रमेश जी उसके बारे में कौनसे सपनों में थे …

अब रौशनी सुबह उठी जल्दी से नाश्ता बनाकर ऑफिस चली गयी .. आज उसे इवेंट के बहुत काम थे .. उसने असलम को भी ऑफिस बुलाया था दुपहर को .. आज उसे बिलकुल टाइम नहीं था जाकर खाना बनाना के लिए भी इसलिए वह सलीम और असलम को को बोली बहार से खा ले दोनों

दुपहर का टाइम हुआ और असलम ऑफिस आ गया ..

“नमस्ते रौशनी मां ..”

“नमस्ते असलम जी ..” ऑफिस में और 3-4 लोग थे .. सब इवेंट के बारे में डिसकशंस में लग गए …

“सब डिसकस हो गया था , खान ेके बारे में , सीटिंग के बारे में चीफ गेस्ट्स के बारे में सब कुछ .. बस एक hi बता रह गयी थी.. इवेंट के दिन कौन उसे कम्पेरे करेगा वह रह गया था और इवेंट में एक दो और पर्फॉर्मन्सेस रखने भी थे . प्रॉब्लम यह था की एक जो परफॉरमेंस होने वाली थी उनके परफॉर्मर्स बीमार पद गए थे और इतनी काम नोटिस में और कोई परफॉरमेंस करने मिलना मुश्किल था ..

रौशनी वैसे बहुत अच्छी डांसर hi .. वह बचपन से डांस की शौक़ीन थी और बचपन में और कॉलेज में डांस के लिए अवार्ड्स भी जीते थे .. उसके रिज्यूमे में सब लिखा था जो एक ऑफिस के वर्कर ने देखि थी और उसने सुग्गेस्टिव दे दी की रौशनी डांस परफॉरमेंस कर सकेगी..

रौशनी ने साल हुए डांस नहीं करि थी “नहीं मुझे 2 साल हुए हैं डांस किये .. में नहीं कर पाऊँगी .. बहुत रहेएरसेल लगेंगे .. और मुझे अब थोड़ा परफॉरमेंस करने से नर्वस भी हूँ .. में नहीं कर सकती”

असलम बोलै “रौशनी जी आप क्यों टेंशन में हो .. आप करिये न परफॉरमेंस .. मुझे यकीन हैं आप अच्छा करोगी.”

असलम अब रौशनी को एक सेक्सी ब्लाउज और साड़ी में नाचते हुए इमेजिन करता है







“असलम जी नहीं मुझे नर्वस्नेस हो रही हैं .. बस 2 दिन रह गए हैं .. इतने काम समय में कैसे में करुँगी रहेएरसेल.. “

“रौशनी जी अब यही उपाय हैं .. आप hi करिये .. अरे दोस्तों बोलिये न रौशनी जी को परफॉरमेंस करने …”

सब ऑफिस के फिर रौशनी को कहने लगे ..”मादाम प्लीज आप hi करिये पर्फॉर्मन्सेस .. आप पर hi हमीं सब को यकीन हैं , की आप बहुत अच्छे से करोगी परफॉरमेंस.”

“उफ़ नहीं अकेले नहीं कर सकती में .. आप भी करिये मेरे साथ. ग्रुप परफॉरमेंस करेंगे.”

रौशनी जी इवेंट भी तोह कंडक्ट करना हैं .. वैसे भी हमें तोह डांस बिलकुल hi नहीं आती .. सब कहने लगे लेकिन असलम चुप था ..

उसका दिमाग तोह तेज़ी से दौड़ रहा था “रौशनी जी में मदत करूँगा .. में करूँगा आपके साथ डांस बस आपको मुझे थोड़ा तोह सीखना पड़ेगा ..” में मेरे पूरिनेमोहल्ले के लिए किया था डांस पर्फॉर्मन्सेस लेकिन उसे तोह बहुत साल हुए हैं”

“रौशनी फिर सोचने लगी .. फिर बोली “असलम जी हाँ ठीक हैं लेकिन गण कौनसा चूसे करना हैं .. और मुझे तोह पता नहीं आप कितने अच्छे डांस करते हो ..”

असलम बोलता हैं “अच्छा लागू गण में दिखाऊंगा … सब लोग बोले “हाँ असलम जी दिखाइए .. “

असलम बोले “हाँ डांस करूँगा लेकिन रौशनी जी ने रिक्वेस्ट करनी चाहिए ..

रौशनी मुस्कुरायी और बोली “असलम जी आप डांस दिखाइए आप को जॉब hi लगे आप कर सकते हो वही.”

असलम स्माइल दी बोलै .. अच्छा फिर दबंग का लगाओ में नाच कर दिखाऊंगा ….

फिर दबंग का गण शुरू हुआ .. असलम ने सलमान के थोड़े स्टेप्स देखे फिर दबंग गाने पर नाचने लगा .. असलम अच्छे से नाच रहे थे .. रौशनी काफी इम्प्रेस हुयी थी ….

ऑफिस के सब लोग तालियां बजने लगे .. वह वह असलम जी आप इतना ाचे नाचते हैं .. आपको hi रौशनी मैडम के साथ नाचना होगा .. आप दोनों एक अच्छे परफॉरमेंस डोज .. हमें यकीन हैं .. ऐसे ऑफिस में से कोई बोलै . और बाकी सब भी हाँ सही हैं कहने लगे.

“रौशनी बोली “अच्छा फिर ठीक हैं , असलम जी और में परफॉरमेंस करेंगे ..” असलम मुस्कुराया (उफ़ अब तोह नाचते हुए बहुत बदन से खेलूंगा रौशनी के .. उफ्फ्फ पास लेकर बहुत मस्ती करेंगे … रौशनी जी तैयार रहिये असलम तुमसे नाचते हुए बहुत मस्ती करेगा ..)

िर सब कौनसे गाने पर नाचेंगे उसपर सोचने लगे …कुछ टाइम बाद रौशनी बोली “हाँ यह शॉर्टलिस्ट अच्छी हैं , में और आद्ळम जी यह सब तरु करेंगे .. जो पसंद हैं और हम कर पाएंगे उसपर नाचेंगे हम.”

असलम के दिमाग में तोह कुछ और hi गाने चल रहे थे .. खासकर वह अक्षय कुमार और रवीना के बरसात के डांस के बारे में सोच रहा था.





वह तोह उस डांस का रिहर्सल करने hi वाला था रौशनी के साथ और बहुत मस्ती भी करने वाला था उस दौरान … उसका लोढ़ा उसकी पंत में यह बात सोच टाइट होने लगा …



अब असलम वहां से चला गया और रौशनी अपना और काम ख़तम कर शाम को वापस घर चली गयी. रात में डांस प्रैक्टिस होने वाला था .. अब क्या होगा डांस के दौरान वक़्त hi बताएगा .
 
शाम की वक़्त थी . रौशनी घर पर थी अपने कमरे में .. सलीम गया था फिर से मीनल की चुदाई करने … रौशनी फिर खाना बनाए लग गयी. आज उसने झट से खाना बना लिया था क्यूंकि उसे असलम के साथ डांस प्रैक्टिस करनी थी. ..

खाना बनाकर वह कमरे में कपडे बदलने चली गयी .. तब तक असलम भी घर आ गया.


“रुकसाना बेगम मेरी जान कहाँ पर हो ..”

रौशनी अपने कमरे से बहार आयी .. वह एक स्लीवलेस टहनी स्ट्राप वाली ब्लाउज पहनी थी और साड़ी पिंक और रेड और थोड़ी ग्रीन रंग की …










“असलम जी आज नहीं .. आज इवेंट के परफॉरमेंस का रिहर्सल करना हैं .. चलिए आप मुँह धोकर आइये और रिहर्सल शुरू करते हैं ,,”

“अच्छा रौशनी जी बताइये … कौनसे गाने पर परफॉरमेंस करनी हैं..?”

“हाँ तोह असलम जी हम कला चस्मा उसपर डांस करेंगे … मैंने स्टेप्स भी देख लिए हैं .. और उनमें से आसान बनाये भी हैं .. आप जल्दी आइये हम शुरुवात करेंगे”

“अच्छा रौशनी जी रुकिए अभी आता हूँ …”

अब असलम अपने कमरे में गया … रौशनी सोफे पर बैठी थी … फिर असलम कमरे के बहार आ गया .. उसने बस एक बनियान और एक टॉवल पहनी थी … रौशनी सब देख रही थी …

असलम जान बुझ कर अपने लोडे को मसलने लगा .. उसे पता था की रौशनी उसे देख रही हैं .. रौशनी देख रही थी की असलम अपने लोडे को टॉवल के ऊपर से रगड़ रहे थे ,. वह सन देख वह शर्मा गयी .. असलम ऐसे और 2-3 बार करने लगा .. अब रौशनी देख सकती थी की उनका लोढ़ा उनकी टॉवल में से उभर बनाये हुए था… उसके गाल और लाल हो गए .. वह सोचने लगी उफ्फ्फ असलम जी का तोह लुंड अभी से सख्त हो रहा हैं .. उफ्फ्फ और इतना बड़ा लग रहा हैं .. वह फिर शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी. असलम फिर बोलै “रौशनी जी अरे आपने नज़र क्यों फेर ली .. जो डेक रही थी पसंद नहीं हैं क्या ः”

“उफ़ असलम जी आपकी बेगम नहीं हूँ अब .. जाओ ऐसी बातें न करिये .. में ऐसे कुछ नहीं देख रही थी.”

असलम अब रौशनी के सामने hi अपने लुंड को मसलता हैं और फिर बाथरूम चला जाता हैं. रौशनी के दिम्माग में बस असलम के मोठे लुंड के उभर का नज़ारा hi घूम रहा था … (उफ़ रौशनी क्या आकर रही हो कण्ट्रोल करो … ऐसे गन्दी चीज़ के बारे में क्यों सोच रही हो उफ्फ्फ) ऐसे सोचते हुए वह खुद को कोसने लगी.

रौशनी की पानी पीना था इसलिए वह रसोई घर जाने लगी .. जाते वक़्त वह दखी की बाथरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था … उफ्फ्फ असलम जी फिर से दरवाज़ा ओपन hi रखे हैं .. ममम नाहा रहे हैं उफ्फ्फ नंगे भी होंगे … ऐसी सोच से वह रसोई घर में गई और पानी पीकर बहार आने लगी तब उसे वह खुला बाथरूम का दरवाज़ा फिर से नज़र आया … वह हलके कदम से वहां जाने लगी ..

दरवाज़े के पास पाखुँचते hi वह देखि की असलम नंग थे और बदन पर साबुन लगाइये हुए थे .. अब वह साबुन अपने लुंड पर लगाने लगा … अपने हाथों से वह अपने लोडे पर साबुन लगाने लगा .. रौशनी यह सब देख रही थी .. उसकी नज़र असलम के बदन पर थी .. इस उम्र में भी काफी हट्टे काटते थे … और उनका लुंड तो हफ़ इतना मोटा था … एकदम कला सा और आसपास बहुत बाल भी थे .. रौशनी को समझ थी की यह गलत हैं ऐसे उन्हें नग्न देखना लेकिन वह अपनी आँखें उनके मोठे ुण्ड से निकल नहीं पायी … उफ्फ्फ क्या मोटा लुंड हैं इनका … ऐसे सोचते हुए अनजाने में वह अपने हाथों से अपनी चूचियों को दबाने लगी .. निचले होठों को कान्त कर असलम के लुंड के तरफ देखने लगी … अब असलम ने पुरे लुंड और आस पास साबुन लगाया था ,… रौशनी बस उनके खड़े लुंड को देखे जा रही थी . हलके से अपनी चूचियों को भी दबाने लगी .. फिर अपनी हाथों को अपनी छूट के वहां ले जाकर वहां थोड़ा मसलने लगी …. बहुत दिनों से उसने चुदाई नहीं करि थी .. और यहाँ एक मोटा कला लुंड देख वह गरम हो रही थी … बुड्ढे का लुंड था इस बात का एहसास तोह उसे हो नहीं रहा था बस उस मोठे काळा लुंड को देखती रही .. फिर पानी से असलम ने अपने लुंड को धो दिया तोह अब पानी की बूंदों से उसका लुंड चमकने लगा था …

रौशनी मन में (उफ्फ्फ इनका तोह लुंड का सर hi इतना मोटा हैं एकदम आलू जैसे .. उफ्फफ्फ्फ़ किसी भी महिला की बुर तोह चीरेगा उफ्फ्फ्फ़…..) रौशनी के मन में ऐसी चीज़ें चल रही थी …. अब उसे लगा की असलम नहाना बंद कर hi रहा हैं की रौशनी वहां से चली गयी और सोफे पर बैठ गयी… असलम ने जान बुझ कर बाथरूम का दरवाज़ा खुला छोरा था .. उसने देख भी था रौशनी का उसके लोडे को घूरना .. … आज तोह वह पूरा मौका उठाने वाला था रौशनी से और मस्ती और मज़े करने का.

असलम फिर कमरे में चला गया .. रौशनी उन्हें नहीं देखने की कोशिश कर रही थी इसलिए उनके तरफ देखि नहीं.

असलम कपडे पेहेन कर बहार आ गया .. “चलिए रौशनी जी डांस प्रैक्टिस करेंगे ..”

रौशनी तोह अभी भी असलम के खड़े लोडे के बारे में सोच रही थी .. वह शर्म से असलम की तरफ आँख उठा कर भी नहीं देख प् रही थी…

“चलिए न रौशनी जी क्या हुआ … चलिए डांस प्रैक्टिस करेंगे.”

रौशनी सोची (उफ़ रौशनी हु सब चोर अब प्रैक्टिस कर .. परफॉरमेंस करना हैं न इवेंट में .. अब सब गन्दी सोच निकल कर डेन पर ध्यान दे)

रौशनी और असलम फिर डांस प्रैक्टिस करने लगे …. रौशनी ने स्टेप्स बहुत आसान किये थे असलम के लिए … असलम भी वैसे ाचे से नाच लेता था इसलिए प्रैक्टिस में कोई प्रॉब्लम नहीं huyi…Ab उन्होंने 30 मीन्स तक डांस प्रैक्टिस की …

असलम को तोह एक सेक्सी डांस करना था रौशनी के साथ … वह बोलै “रौशनी जी बढ़िया प्रैक्टिस हुआ ..”

“हाँ असलम जी अच्छे से हमने प्रैक्टिस कर ली”

रौशनी जी पता हैं रुकसाना को भी मेरे साथ नाचना बहुत पसंद था … हम कभीकभी शाम को गाना लगा कर साथ में नाचते थे ..”

“ओह ऐसे हैं असलम जी … कौनसे गानों पर डांस करते थे आप दोनों”

असलम दो तीन गांव का नाम लेकर फिर बोलै “हाँ और उनकी सबसे फवौरीते थी अक्षय कुमार और रवीना टेंडन वाली बरसात में डांस उस मोहरे फिल्म में .. आपको याद हैं वह गाना …”

“रौशनी को समझ आया किस गाने की असलम बात कर रहे थे … “अच्छा वह गाना टिप टिप बरसा पानी .. अच्छा उस पर नाचते थे आप दोनों … हाउ स्वीट”

“हाँ स्वीट तोह था hi .. लेकिन में मिस करता हूँ रुकसाना के साथ उस गाने पर नाचना … ममम रौशनी जी आप भी रुकसाना जैसी बहुत अच्छी डांसर हो .. क्या हम उस गाने पर डांस कर सकते हैं….”

“असलम जी लेकिन वह तोह गण बहुत hi …”

“बहुत hi क्या रौशनी जी .. बताइये न .. उस गाने पर नाचने में क्या प्रॉब्लम हैं”

“नहीं बस उस गाने में रवीना तोह अक्षय कुमार को सडके करने के लिए ….”

“क्या कहाँ आपने रौशनी जी .. सडके .. ?? यह क्या होता हैं भला”

रौशनी शर्मा उठी .. अब इन्हे कैसे बताऊ सडके मतलब क्या होता हैं उफ्फ्फ्फ़…

“कुछ नहीं भूल जाइये असलम जी”

“नहीं प्लीज बताइये न सडके क्या होता हैं .. ज़रा हमें भी पता होने दो …”

“उफ़ रहने दीजिये न असलम जी”

“नहीं आप बताइये नहीं तोह परफॉरमेंस नहीं करूँगा आपके साथ ..”

“उफ्फ्फ आप कैसी ज़िद्द पर अड़े रहते हैं असलम जी उफ्फ्फ”

“हम तोह हैं hi ज़िद्दी रौशनी जी .. अब बताइये सडके का मतलब.”

“उफ़ असलम जी सडके मतलब लुभाना .. अपने तरफ अत्त्रक्ट करना .. “

“अच्छा मतलब रवीना उस गाने में अक्षय कुमार को पटाने की कोषसिंह करती हैं ..?”

“उफ़ हाँ जो आपने कहा .. अब में कैसे वह डांस करू …”

“अरे आसान हैं आपक रुकसाना बन जाओ और आप अपने मियां को लुबाहने के लिए नाच रही हो ऐसे करिये …”

“असलम जी में आपकी रुकसाना नहीं हूँ …”

“रौशनी जी आपने कहा थान ा इलाज करने में मदत करेगी .. अगर में रुकसाना के साथ उन पलों को याद करू तोह मेरी इलाज के तरफ वह एक स्टेप होगा न … “

रौशनी सोची ..(बात तोह सही हैं .. डॉ ने बोलै था की उन्हें जीतनेय रुकसाना की याद आएगी उतना hi वह ऐसे बीच बीच में औरतों को रुकसाना समझ कर दबोचेंगे नहीं … वैसे भी डांस hi तोह हैं .. इसमें क्या.)

“अच्छा ठीक हैं असलम जी … करेंगे हम डेन .. आप गण लगाओ..”

असलम खुश होता हैं और गण लगता हैं … “रौशनी जी लेकिन मुझे आप रुकसाना हो ऐसे सोच कर hi नाचना हैं ..”

“अच्छा ठीक हैं असलम जी”

रौशनी नाचने लगती हैं … असलम बस रौशनी को उस साड़ी में नाचते हुए देखे जार अहा हैं … उफ़ क्या मटक हैं ममम रौशनी तोह ऐसी मस्त डांसर हैं .. रुकसाना को तोह डांस का एब्स भी नहीं पता था …ः.

असलम अब रौशनी के करीब जाकर उसे जकड लेता हैं और उसके साथ नाचने लगता हैं ..






अब असलम पीछे रौशनी के खड़े नाचता हैं .. रौशनी की मटकती चूतड़ों को देख और उसकी सुगंध से असलम का लोढ़ा टाइट होने लगता हैं .. और पीछे से वह रौशनी की चूतड़ों से डाब जाता हैं… रौशनी यह चुभन मह्सुश करती हैं .. असलम और पीछे से अपने खड़े लुंड को रौशनी की चूतड़ों में दबाता हैं .. रौशनी की मुँह से आह निकलती हैं… वह आँखें बंद कर लेती हैं .. इस बात अक मौका देख असलम जोर से पीछे से झटके मारता हैं और उसका लोढ़ा पूरा रौशनी की चूतड़ों से चिपक जाता हैं …

फिर असलम रौशनी को अपने तरफ करता हैं .. और गाने के हिसाब से उसके गले को चूमता हैं … “उफ़ असलम मियां आप भी न .. प्ल्ज़ न चूमिए वहां .. बस डांस करिये …”

असलम अब अपने कमर से झाकतके मरते हुए अपने खड़े लोडे को रौशनी की नाभि पर टकराता हैं .. उससे रौशनी उफ्फ्फ ममम करने लगती हैं …

रौशनी को ऐसी मूड में देख असलम उसे और अपने बाँहों में मसलता हैं ….

“अहह आउच असलम मियां धीरे से उफ़ आपका निचे से ….”

“रुकसाना बेगम बताओ न खुल कर क्या हो रहा हैं निचे से .. क्या चुभ रहा हैं डार्लिंग …”

“असलम जी आप भी न आपको मपता हैं उफ़ आपका वह बड़ा सा .. उफ्फ्फ उसे हटाइये न बहुत चुभ रहा हैं.”

“क्या हतौ ज़रा खुल कर बताओ फिर hi में उसे हटाऊँगा ..”

“उफ़ असलम मियां आपका मोटा लुंड का उभर चुभ रहा हैं मम उसे हटाइये “

असलम हटाने के बजाय उसे और अंदर चिपकता हैं ,.. “उफ़ असलम मियां आपने तोह उसे और अंदर उफ्फ्फ प्लीज मममम”

रुक्सना बेगम तुम कह कुछ रही हो और तुम्हारे अंदर फीलिंग कुछ और hi हैं … ममम अपने असलम मियां को मज़े लेने दो न .. बहुत दिन हो गए तुमसे इस गाने पर नाचकर … मममम और असलम फिर से एक जोर का जहतका देते हुए अपने लुंड को रौशनी की मुलायम पथ पर दबाता हैं ….

रौशनी को अब बहुत गरम महसूस हो रहा हैं .. वह ानकेहिं बंद असलम से चिपक कर नाच रही थी .. असलम भी उसे मसलने का मौका नाह ऐकोर रहा था … उसने तोह अपने हाथों को रौशनी के चूतड़ों पर रखने लगा … “असलम मियाना वहां से हाथ हटाइये न मम प्लीज हटाइये …”

“रुकसाना बेगम डांस तोह ऐसे hi हैं … और वह रौशनी की चूतड़ों को फिर से मसलता हैं …”

रौशनी को न जाने क्यों इन सब हरकतों से और गर्मी बढ़ती हैं .. वह भूल गयी थी की वह एक बुड्ढे के साथ ऐसे नाच रही हैं … अब असलम और जोरों से उसकी चूतड़ दबाने लगता हैं … और आगे से अपने खड़े लोडे को रौशनी के पथ से और चिपका देता हौं … रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी और उसकी छूट से थोड़ा सा रास बहने भी लगा था …

अब गण ख़तम होता हैं और रौशनी और असलम एक दूसरे से जुड़ा होते हैं .. रौशनी का हाल बुरा हुआ होता हैं… उसकी अंदर की गर्मी बढ़ी हुयी थी .. असलम के टाइट लोडे पर उसकी नज़र जाती हैं और वह आँखें फेर लेती हैं ….

“असलम मियां आपने … क्या किया .. आप हद से आगे जा रहे थे.”

“रौशनी जी गण hi ऐसे हैं .. बस में स्टेप्स फॉलो कर रहा था .. अब उसमें क्या बुराई … थी हैं मत करिये डांस … बस रुकसाना की याद रखने आपसे डांस करने की रिक्वेस्ट किट hi …

रौशनी की नज़र असलम के अब पुरे से टाइट लुंड पर थी ..

असलम फिर रौशनी के करीब जाता हैं … रौशनी की उनके खड़े लुंड ने बनाये उभर पर hi नज़रें तिकी हुयी रहती हैं.. रौशनी जी मुझे आप बेहत पसंद हो .. आप बिलकुल रुकसाना जैसी hi हो … में रुकसाना से बहुत प्यार करता था .. मुझे ाआपसे भी प्यार होने लगा हैं … आप जब साथ होती हैं तोह में रुकसाना को hi अपने पास महसूस करता हूँ .. अआपने मेरी बहुत मदत की हैं इसकिये लिए में आपको कैसे शुक्रिया करू … असलम अब रौशनी की गोरी नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेता हैं ..

रौशनी जी मुझे अब किसी और महिला में रुकसाना नहीं दिखती .. बस ाप्प में hi मुझे रुकसाना दिखती हैं .. आप की वजह से मेरा इलाज काफी अच्छा चल रहा हैं …

रौशनी अब सब भूल कर इमोशनल होती हैं .. दोनों एक दूसरे के आँखों में अब देखने लगते हैं … असलम अब आ गए बढ़ता हैं .. और रौशनी के हाथों को कमता हैं …. रौशनी जी बस एक बार आपको चूमने दीजिये जैसे में रुकसाना को चूमता था … बस मुझे उसके हटोहों का एहसास करना हैं आपको किश करते हुए .. पलेआसे इसके लिए मन न कीजिये ..”

रौशनी की गर्मी तोह बढ़ गयी hi थी .. लेकिन असलम की बातों से वह इमोशनल भी हुयी थी .. “असलम जी बस एक बार .. और मत कहना .. “

“हाँ रौशनी जी बॉस एक बार मुझे आपको चूमने दीजिये जैसे में अपनी बेगम रुकसाना को चूमता था …”

रौशनी कुछ नहीं बोलती .. इसे पॉजिटिव सिग्नल समझ कर असलम अब रौशनी को चूमने बढ़ता हैं . रौशनी भी आगे बढ़ती हैं .. दोनों के होठं एक दूसरे के काफी करीब थे … और फिर असलम रौशनी को चूमने लगता हैं ..






उसका लोढ़ा पूरा टाइट हुआ होता हैं … अब वह रौशनी को कसकर पकड़े गहरी चुम्बन में लग जाता हैं .. रौशनी भी उसका साथ देती हैं .. निचे से असलम अपने लोडे को आगे चिपकता हैं .. दोनों एक दूसरे के चुम्बन में खो गए थे … असलम ने अब रौशनी का हाथ लेकर पाने पंत के अंदर दाल दिया .. रौशनी अब अंडरवियर के ऊपर से असलम के मोठे लोडे को सहलाने लगती हैं … वह अब पूरी भूल चुकी हैं वह किस्से किश कर रही हैं और किसके लुंड के उभर को सेहला रही हैं .. हफ़्तों से उसे ऐसी फीलिंग नहीं हुयी थी ..

अब असलम और बोल्ड होकर रौशनी के हाथों को अपनी अंडरवियर के अंदर दाल देता हैं .. रौशनी चुम्बन के साथ सतह असलम के लोडे को सेहला रही हैं .. असलम का मोटा लोढ़ा पूरा टाइट अब उसके हाथों में था.. असलम अब अपने हाथों से रौशनी की कमर को दबोचता हैं … उफ्फ्फ मममम की आवाज़ निकलती हैं रौशनी की मुँह से .. फिर उसे एहसास होता हैं वह क्या कर रही हैं .. वह चुम्बन तोड़कर अपने हाथों को हटाने लगती हैं की असलम उसके हाथों को पकडे रखता हैं ..

“उफ्फ्फ प्लीज ऐसे hi उसे सहलाना .. बहुत दिनों बाद ऐसी फीलिंग महसूस हो रही हैं ,ममममम… “

“रौशनी अपने हाथों को चुरा लेती हैं …

“उफ़ असलम जी आप को में रुकसाना लगती हो ठीक हैं लेकिन में यह सब नहीं कर सकती … में शादी शुदा हूँ .. में आपसे ऐसे … “
रौशनी फिर मुद कर कमरे में जाने लगती हैं





कमरे के अंदर जाते hi वह अंदर से दरवाज़ा लॉक करती हैं .. वहां असलम अपने खड़े लोडे को अपनी अंडरवियर में दाल लेता हैं .. (उफ्फ्फ क्या मैंने कुछ ज्यादा hi किया हैं आअज ) इस सोच से वह भी अपने कमरे में चला जाता हैं.
 
रात थी सलीम भी वापस आये थे मीनल की मस्त चुदाई कर … असलम और रौशनी खाना खा रहे थे .. सलीम अपने हाथ मुँह धो कर खाने पर आ गए ..

वह देख सकता था की रौशनी और असलम चुप थे और एक दूसरे से बातें नहीं कर रहे थे ..

“अरे क्या हुआ असलम और रुकसाना बेगम आपस में बातें नहीं कर रहे हैं ..”

रौशनी फिर सलीम को देख बोली ..”सलीम जी अभी रुकसाना मत बुलाइये अभी बस रौशनी”

सलीम को एहसास हुआ की कुछ तोह दोनों के बीच हुआ था .. क्या हुआ था उसे उसका कोई अंदाज़ा नहीं था .. वह चुप से खाना खाने लगा ..

“सलीम जी में कल के इवेंट के बाद वापस घर जा रही हूँ .. कुछ दिन वही रहूंगी अब ..”

“रौशनी जी क्या हुआ भी तोह आप यहाँ रहने तैयार थी .. कुछ हुआ क्या .. असलम तुमने कुछ किया क्या …”

रोशनी बलि “कुछ नहीं हुआ बस अब मुझे कुछ दिन मेरे पति का भी ख्याल रखना पड़ेगा .. सलीम जी आप खुद अपना ख्याल तोह रख hi सकते हो और असलम भी रख पाएंगे … अब मुझे अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी में फिर से जाना चाहिए.”

सलीम निराश था .जरूर उस असलम ने कुछ किया होगा जिससे रौशनी नाराज़ हैं…

“ठीक हैं रौशनी जी अब आप सही कहती हो .. आपकी भी लाइफ हैं.. हम बुड्ढे जीते रहे थे आप आने से पहले और आप जाने के बाद भी दिन बैठाएंगे”

फिर सब खाना खा कर अपने अपने कमरों में चले गए ..

सुबह नाश्ता बना कर रौशनी जल्द hi ऑफिस गयी थी … आज उसे इवेंट की पूरी तैयारी करनी थी .. वह दुपहर को भी ऑफिस में hi खाना खा ली …

उसे असलम के साथ वह इवेंट का परफॉरमेंस इ नहीं करना था .. लेकिन ंगो के भलाई के लिए वह सोची की वह परफॉरमेंस कर hi लेंगी और फिर इवेंट के बाद घर पर जाएगी .. उसने अपनी बैग भी पैक कर ली थी.

अब शाम का वक़्त हुआ .. उसे डांस प्रैक्टिस करनी थी .. असलम के पास वह जा बोली “असलम जी हमें डांस प्रैक्टिस करनी हैं कल के इवेंट के लिए चलिए .. लेकिन बस उस डांस का hi प्रैक्टिस करेंगे .. “

असलम बोलै “रुकसाना बेगम हमें तोह …”

रौशनी अब असलम के तरफ ग़ुस्से से देख बोली “नहीं कुछ रुकसाना बेगम वेगम नहीं .. बस अब आप और में डांस प्रैक्टिस करेंगे और फिर में खाना बनाए जाउंगी .. कल में शाम को hi इवेंट के बाद घर जाने वाली हूँ..

असलम कुछ नहीं बोलै .. उसे लगा hi की कल कुछ ज्यादा hi हुआ था और रौशनी अब नाराज़ थी .. वह सोचा वह रौशनी की शांत होने देगा फिर आगे देखेगा क्या करना हैं .. फिर दोनों डांस प्रैक्टिस ाचे से करे और रौशनी खाना बनाना चली गयी.

खाना भी हुआ और अब तीनो खाना खाने बैठ गए .. तीनों के बीच कुछ बातें नहीं हुयी और खाना खा कर और प्लेट धो कर रौशनी कमरे में गयी.

कुछ मं बाद रौशनी को अपने कमरे के दरवाज़े पर दस्तक सुनाई दी

“रौशनी जी में सलीम , प्लीज दरवाज़ा खोलिये … मुझ से आप नाराज़ हो .. में आज तोह पि कर भी नहीं आय हूँ.”

“सलीम जी आपसे कुछ शिकायत नहीं अभी ..”

दरवाज़ा खोलिये तोह सही

रौशनी ने कमरे का दरवाज़ा खोला ..

सलीम रौशनी की कमर पर नज़र डाली .. उफ़ क्या गोरी सी गदरायी बदन वाली माल हैं यार … मीनल की चुदाई कर भी रौशनी को देख गर्मी बढ़ती हैं उफ्फ्फ.





“क्या हैं सलीम जी बताइये ..”

“कुछ नहीं रौशनी जी अगर मुझसे नाराज़ नाह हो तोह ठीक हैं.. आप को भी अपने घ रकि देखभाल करनी चाहिए सही हैं आपकी बात … आप जाइये लेकिन प्लीज दोस्ती न भूलिए …”

“सलीम जी आप से दोस्ती तोह रखूंगी .. आप उस दिन थोड़े ज्यादा भावुक हुए थे लेकिन आप से दोस्ती तोड़ने की कोई वजह तोह नहीं दी आपने.. बस घर भी संभालना हैं इसलिए.”

“रौशनी जी एक बात करनी थी आपसे … कैसे कहु सोच रहा था लेकिन अब कह देता हूँ .. आप हाँ या न अक फैसला खुद करिये.”

रौशनी अपनी बड़ी आँखों से सलीम को देखती हैं “हाँ पूछिए सलीम जी”

“रौशनी जी मेरा दोस्त हैं उसकी बेटी की शादी हैं …. कुछ 50 कम दूर एक गाँव में .. में सोच रहा था की अगर आप आती तोह अच्छा होता .. मुझे कंपनी मिल जाता .. वैसे मेरे दोस्त ने वहां सब इंतेज़ाम कर लिया हैं.. आप उसकी बेटी और बाकी के महिलाओं के साथ रहेगी और में सब मर्दों के साथ .. बस आपका इंट्रोडक्शन करवाना था ..इसलिए अगर आप आ सकोगी तोह मुझे ख़ुशी होगी.”

रौशनी सोच में पड़ती हैं .. उसे तोह अब इन दोनों से थोड़ा ब्रेक hi चाहिए था … “सलीम जी अभी मुमकिन नहीं हैं ..”

“रौशनी जी यह तोह अगले हफ्ते हैं .. आप तब तक सोचिये इस बता पर … आप नाब hi कह सकती हो बस एक बार सोचिये इस पर प्लीज”

“ठीक हैं सोचूंगी … सलीम जी वैसे आज आप बहार गए थे लेकिन पि कर नहीं आहे .. में इम्प्रेस हूँ.”

अरे डार्लिंग में तोह अभी मीनल की मस्त चुदाई कर आया हूँ .. साली खुद hi शराब हैं .. मस्त नशा हैं उसका .. अब बस टब hi आ जाओगी मेरे निचे तोह फिर मेरे तोह डबल मज़्ज़ इ हैं)

“क्या सोच रहे हो सलीम जी”

“कुछ नहीं रौशनी जी .. (उफ़ तेरे बदन से भी कहलना हैं मेरी रानी .. कभी आजा मेरे बिस्तर पर)

“अच्छा अब में सोने जाती हूँ…”

“रौशनी जी अंदर से लॉक न करिये .. राटा का समय हैं कुछ छिपकली आयी तोह … “

“सलीम जी आप भी न . ठेके हैं लेकिन इसका मतलब नहीं आप अंदर आओ रात में .. और रौशनी हसने लगी..

सलीम खुश था की रौशनी अभी भी मज़ाक के मूड में थी ..

सलीम एक आखरी बार रौशनी के बदन के नज़ारे को देख वहां से चले जाता हैं .. अपने कमरे में जाते वक़्त वह अपने लुंड को खुजलाता हैं …

अब इवेंट का दिन आता हैं .. सुबह से सब पूरी तैयारी में लग जाते हैं .. इवेंट शाम को 4 बजे होता हैं … कुछ थोड़ा सामान बचा था उसे लेने रौशनी खुद मार्किट जाने की सोचती हैं .. एक रिक्शा से वह मार्किट जाती हैं.. सब सामन लेने के बाद वह एक रक्षा के लिए रुकी hi थी की उसे रमेश दीखता हैं अपने रिक्शा में ..

रौशनी उस दिन गार्डन में हुयी बातों को सोच शर्माती हैं .. वह सोचती हैं की क्या उस ेजकर रमेश जी से मिलना चाहिए … कुछ देर सोचने के बाद वह रमेश की रिक्शा तरफ जाती हैं.

रमेश वहां रौशनी को आते देखती हैं … वह अपने उस सपने के बारे में सोचता हैं … उफ़ क्या सपना था .. रौशनी मस्त गौतमी एक्ट्रेस जैसी नाच रही थी .. रमेश अब सच में रौशनी का दीवाना हुआ था … बस हवस से नहीं लेकिन प्यार भी.





“Hello रमेश जी कैसे हो आप”

रौशनी जी अच्छा हूँ .. बस उस दिन के लिए ….”

“रहने दीजिये रमेश जी सच कहु तोह हम दोनों hi भावुक हो उठे थे .. में आपको नहीं ब्लामे करती .. बस ऐसे पार्क में न ले जाना प्लीज ..”

“हाँ रौशनी जी जरूर .. रौशनी जी एक बता कहु , में आपको बहुत मिस करता हूँ जब आप नहीं मिलती हो तोह .. मुझे आपकी दोस्त बरक़रार रखनी हैं .. क्या में आपका फ़ोन नंबर ले पाउँगा .. बस मिले नहीं तोह आपकी आवाज़ no सुन पाउँगा .. या वीडियो कॉल ….”

रौशनी कुछ सोचती हैं .. “रमेश जी अब में वापस घर जा रही हूँ .. अब से वहां से hi उप डाउन करुँगी .. आप आओगे न सुबह और शाम पहले की तरह ..”

“बाँदा आपकेलिए हमेशा हाज़िर हैं रौशनी जी ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं .. पता नहीं क्यों उसे रमेश की कंपनी अच्छी लगती थी .. वह कभी ज़बरदस्ती नहीं करते थे .. बस उस दिन थोड़ा सा बहक गए थे लेकिन उसमें भी मेरी भी थोड़ी गलती थी. ऐसे सोचते हुए फिर वह रिक्शा में बैठ जाती हैं , और रमेश उसे ंगो ड्राप करता हैं.

रमेश जी आज हमारे ंगो का इवेंट हैं … लेकिन शाम को उसके बाद में घर जाने वाली हूँ .. क्या आप आओगे मुझे पिक उप करने ..

“रौशनी जी इवेंट हैं और आपने मुझे बुलाया नहीं “

“रमेश जी सिलेक्टेड इवेंट हैं … इसलिए नहीं बुला पायी … वैसे भी मेरे पास नहीं हैं कोई पासेज.”

“अच्छा ठीक हैं.. शाम को में आऊंगा आपको घर ड्राप करने …”

रमेश रौशनी को देख मुस्कुराता हैं .. रौशनी चली जाती हैं और जाते वक़्त रमेश उसकी हिलती चूतड़ों को देख उसका लोढ़ा टाइट होने लगता हैं …

अब इवेंट का टाइम हैं .. रौशनी एक मस्त सी स्लीवलेस साड़ी और ब्लाउज पीछे से 2 स्ट्रिंग वाली वैसे पहनती हैं .. कानों में ेआरींग्स लम्बे वाले और हाथों में रेड न ग्रीन चूड़ियां .. मनो क़यामत hi दिख रही थी .. सलीम और असलम दोनों उसे देख उनके लोडे टाइट होने लगते हैं.. दोनों उसकी बहुत टैरिफ करते हैं … रौशनी अभी भी असलम से ज्यादा बात नहीं कर रही थी .. बस एक स्माइल देकर वह चली जाती हैं इवेंट के लिए और दोनों भी उसके ीचे पीछे उसकी गोरी से पीठ और मटकती चूतड़ों को देख अपने लोडे मसलते हैं …

इवेंट शुरू होती हैं .. अब रौशनी और असलम का परफॉरमेंस की बारी हैं… दोनों स्टेज पर जाते हैं ..

वह नाचते वक़्त क्राउड से तालियों की बरसात होती हैं उनके परफॉरमेंस को लेकर … उस क्राउड में 3 बदमाश लड़के आये हुए थे .. वह बहुत जोरों से सीटियां बजा रहे थे … डांस के बाद रौशनी कुछ जूस पिने एक स्टाल में गयी थी .. तब वह बदमाश लड़के उसके पास पहुँच जाते हैं

बदमाश no1 बोलता हैं “है है क्या आइटम हेंतु … रौशनी नाम हैं न तेरा … उफ्फ्फ क्या नाच रही थी मज़्ज़ा आ गया ..

दूसरा बदमाश बोलै “हाँ यार .. बस उस बुड्ढे के साथ क्यों नाच रही थी .. हुएमिन बुलाती हम सब नाचते तेरे साथ चमक चलो गाने पर.”

तीसरा फिर रौशनी की कलाई पकड़ ली और अपने तरफ उसे खींचने लगा … रौशनी आउच कर आवाज़ निकली .. छोड़िये मुझे … क्या कर रहे हो .. कितने बदमाश हो तुम सब .. “

वह तीनो सुनने के मूड में नहीं थे .. रौशनी को पकड़ कर वह उसे एक सुनसान जगह सब स्टाल्स के पीछे वहां लेने लगे … कोई पास नहीं था और कोई नहीं देख प् रहा था उन्हें उसे वहां ले जाते हुए

दूसरा बदमाश रौशनी को अपने बाँहों में बाहर उसे चूमने की कोशिश करने लगा .. रौशनी वहां स्ट्रगल कर रही थी खुद को चराने उनसे … तभी एक बदमाश लड़का उसे ग्राउंड पर पड़ते दिखा … फिर ऊपर देखि तोह रौशनी पायी की दोनों असलम और सलीम वहां पहुँच चुके थे …

रौशनी ने रहत की साँसे ली .. एक आखरी पुश के सतह वह उस बदमाश लड़के के बाँहों से छूट कर सलीम और स्लैम के पीछे चली गयी..

“ारीय चूतिये …. मेरे दोस्त को यूँ मारा … साले बुड्ढे ..”

“हराम जड़े एक औरत पर ज़बरदस्ती करता हैं .. तुझे दिखता हूँ .. “ अब पांचो में झड़गा सुरु हुआ … रौशनी देख हैरान थी की असलम और सलीम आसानी से उन जवान लड़कों से निपट रहे थे … और कुछ हटा पायी के बाद वह तीनो वहां से भर गए .. “देखेंगे तुम दोनों बुद्धों को .. तुम्हे पता नहीं किस्से से पन्गा लिया हैं तुम बुद्धों ने … “ ऐसे कहते हुए वह बदमाश लड़के वहां से चले गए.

“ओह सलीम जी , असलम जी आपने मुझे बचाया उनसे .. अआप का शुर्किया कैसे करू ….”

रौशनी जी आपने दोस्ती करि हैं .. आप को सेफ रखना हमारा कर्त्तव्य हैं … हम दोनों आपके लिए जान देने रेडी हैं हम पहले से hi बोले थे ..”

रौशनी मुस्कुरायी .. आप ने मुझे बचा लिया .. आप दोनों बहुत अच्छे हो ..

“रौशनी जी चलिए इवेंट जाते हैं .. आप को याद कर रहे हैं सब चलिए …”

रौशनी फिर दोनों के सतह जाती हैं इवेंट के मैं स्टेज पर …

फिर वहां का कम्पेरे इवेंट की सक्सेस के लिए रौशनी का नाम लेता हैं और सब लोग तालियां बजाते हैं .. रौशनी बहुत खुश थी की इवन सक्सेसफुल हुआ था .. वहां असलम और सलीम भी तालियां बजा रहे थे .. उन्हें देख रौशनी मुस्कुराती हैं और वह दोनों उसे देख मुस्कुराते हैं .. इवेंट में और थोड़े परफॉरमेंस बाकी थे इसलिए वह शुरू रहते हैं और उस देखने निचे रौशनी बैठ जाती हैं .. असलम और सलीम भी उसके अगल बगल बैठ जाते हैं …

सलीम कहता हैं .. रौशनी जी इवेंट बहुत अच्छी चल रही हैं न”

“हाँ सलीम जी बहुत hi अच्छी से सब चल रहा हैं .. “

असलम और सलीम तोह बीच बीच में मुद कर रौशनी को देखने लगते हैं .. रौशनी सामने पर्फॉर्मन्सेस एन्जॉय कर रही थी और दोनों बुड्ढे रौशनी की खूबसूरती के नज़ारे को एन्जॉय कर रहे थे …

सलीम जी मुझे कुछ जूस चाहिए .. में जुइ पिने गयी थी लेकिन उन बदमाशों ने सब जूस गिरा दिया ..”

“रौशनी जी आप भी आइये .. साथ में जाएंगे …”

असलम भी बोलता हैं “रौशनी जी में भी आता हूँ ..” लेकिन रौशनी उन्हें कहती hain”Aslam जी रहने दीजिये अभी सलीम जी के साथ जा कर आउंगी”

सालिम खुश था की वह रौशनी के साथ कुछ पल पवत में बिता पाएगा..

दोनों फिर वहां से जूस स्टाल चले जाते हैं .. असलम उन्हें जाते देख hi सकता हैं.

“सलीम जी आपने फिर से मुझे बचाया .. उस दिन बस में भी आपने उस आदमी को बतमीज़ी करने से रोक लिया था और आज तोह मेरी इज़्ज़त आपने बचा ली.”

“रौशनी जी आपको तोह कुछ होने hi नहीं दूंगा में .. ऐसे मवालियों से तोह आपको हमेशा संभल कर रखूँगा ..”

(रौशनी जी तुम बस मेरी हो , और कोई मर्द तुम्हे नहीं कुछ करेगा .. बस में hi तेरे बदन कसे पूरा रास निचोड़ने वाला हूँ बस में) ऐसे सोचते हुए सलीम रौशनी की गोरी बाजुओं को देखता हैं और उसका लोढ़ा टाइट होने लगता हैं … आज तोह रौशनी के बदन से अलग hi खुशबु आ रही हैं .. सलीम का लोढ़ा उस खुसबू से एक दो झटके मारता हैं.. अब दोनों जूस स्टाल गए हैं और सलीम एक जूस गिलास रौशनी को थमता हैं .. उसी दौरान वह रौशनी के मुलायम हाथों को छूटा भी हैं और उसका लोढ़ा और एक झटका मारने लगता हैं …

रौशनी जूस पि रही हैं और सलीम उसके बदन को देखे जार अहा था .. रौशनी को एहसास होता हैं की सलीम उसे देख रहा हैं लेकिन कुछ कहती नहीं ..

“सलीम जी आप वीएस इस उम्र में भी काफी मज़बूत हैं .. आप क्या जवानी में कुश्ती कुछ करते थे “ रौशनी मुक्सुराती हैं ..

वहां सलीम मन में (अब तुम्हे क्या बताऊ जवानी में हम क्या हुआ करते थे … रौशनी जी हमें तोह आपको हमारी मज़बूती दिखानी हैं बिस्तर पर … मरे जा रहे हैं ेटर इस नाज़ुक बदन को नग्न कर निचोड़ने उफ्फ्फ)

“हाँ रौशनी जी ऐसा hi कुछ समझिये ..” वैसे आपको पसंद हैं मज़बूत मर्द में .. बताइये ?”

“हाँ पसंद तोह हैं hi , किस औरत को नहीं पसंद …”

“रौशनी जी फिर तोह आपको मेरा बदन भी पसंद होगा .. मज़बूत हैं नाह अहा”

रौशनी शर्माती हैं और मुस्कुरा कर कहती हैं “उफ़ सलीम जी फिर से शुरू हुए आप .. अभी लगा था बदल गए हो …उफ्फ्फ”

“रौशनी जी देखिये जो हूँ में हूँ , में न कुछ दिखावा करता हूँ न कुछ .. में ने कहा था उस दिन भी की मुझे आप बेहत पसंद हो .. और आपसे और करीबी दोस्ती करना चाहता हूँ …”

“हाँ हाँ पता हैं .. बड़ी आशिकी हैं आप में इस उम्र में भी ..”

“आशिक़ तोह हम पहले से hi हैं और ा आगे भी रहेंगे रौशनी जी..”

“उफ़ सलीम जी आप भी न .. सुधरोगे नहीं ..”

“रौशनी जी आप जब ऐसे खुल कर मुस्कुराती हैं तोह दिल घायल हो जाता हैं … क्या करे …”

“ओह गॉड सलीम जी … आप भी न … लेकिन शुक्रिया आपकी तारीफों के लिए”

“रौशनी जी वैसे बताइये .. आपको पसंद आया न मेरे लड़ने का तरीका ः”

“एस आप तोह हीरो हो हीरो सलीम जी ः”

“रौशनी जी तोह में आपके दिल का हीरो समझ लू खुद को “

“ओह गॉड सलीम जी .. ाचा मेरे दिल के हीरो हो आप ः .. अब बस “ रौशनी मुस्कुराती हैं सलीम को देख .. सलीम के बात करने की मस्ती का ढंग उसे अच्छा लगने लगता हैं … उसकी नज़र फिर से सलीम के निचे उनके उभर पर जाती हैं ..

(ओह गॉड सलीम जी का तोह जब देखु वहां उभर hi होता हैं … और मेरी भी नज़र वही क्यों चली जाती हैं उफ्फ्फ) रौशनी फिर वहां से नज़रे हटा लेती हैं ..

“सलीम जी हु लास्ट पेर्फमोअन्स एक बड़ा ग्रुप करने वाला हैं .. उन्हें लेन के लिए बहुत म्हणत करनी पड़ी .. चलिए न वहां जाते हैं ..”

“हाँ रौशनी जी चलिए .. आप आगे चलिए में पीछे पीछे चलता हूँ .. ेकलीस में कहते हैं न ..”लेडीज फर्स्ट के ..”

“उफ़ सलीम जी इतस लेडीज के फर्स्ट आप भी न …. आप इंग्लिश छोड़िये हिंदी hi बोलिये ः”

रौशनी आगे जाती हैं और ोीचे से सलीम उसकी मटकती गांड और कमर को देख लोढ़ा असलने लगता हैं ….

अब उस परफॉरमेंस के लिए सब इंतेज़्ज़र कर रहे थे … थोड़ी भीड़ बन चुकी थी …

“सलीम जी चलिए न जल्दी .. आगे जाना हैं .. पीछे से नहीं दिखेगी परफॉरमेंस …

“रौशनी जी आप चलिए आगे में पीछे hi हूँ आपके चलिए ..”

भीड़ होने का फायदा उठाने की सोचता हैं सलीम .. वह रौशनी को पुश करने उसकी कमर पर रख उसे पुश करता हैं .. इससे उसके हाथ रौशनी के कमर को निचोड़ने लगते हैं … रौशनी जी चलिए .. पीछे न देखिये नहीं तोह आप जा नहीं पाओगे आगे की लीनतक…

अब सलीम पूरी तरह से रौशनी से चिपक गया था .. उसे आगे भीड़ में से पुश करने लगता हैं .. उसका आधा सख्त लोढ़ा रौशनी की चूतड़ों पर दबाने लगता हैं …लेकिन वह और आगे नहीं जा प् रहे थे ..

“रौशनी जी अब हमें यहाँ पर hi रुकना होगा .. और आगे नहीं जा पाएंगे …”

रौशनी वही कड़ी रहती हैं .. पीछे से कोई थोड़ा धक्का देता हैं तोह सलीम रौशनी से चिपक जाता हैं .. उसका लोढ़ा उसे निचे चुभता हैं.. रौशनी को उस चुंबन से थोड़ी आह निकलती हैं .. उसे समझ आता हैं की वह सलीम के लोडे की hi चुंबन होगी .. लेकिन बीहड़ इतनी थी की और कोई ऑप्शन नहीं था …

सलीम अब रौशनी को कमर से पकड़ लेता हैं ..”रौशनी जी आप गिर जाओगी इस भीड़ के धक्कों से .. अआप्को पकड़ने दे मुझे .. रौशनी को कोई प्रॉब्लम नहीं थी .. उसे सलीम के टॉचेस पसंद आ रहे थे … आज रौशनी को उनके टॉचेस से ऐतराज़ नहीं था .. उसे पसंद था सलीम का उसे प्रोटेक्ट करना …

रौशनी जी सच में बहुत मस्त परफॉरमेंस हैं .. आप का जवाब नहीं आप इतनी म्हणत करि हो … “

परफॉरमेंस कुछ और देर चली .. सलीम का हाथ अभी भी रौशनी के कमर पर hi था … वहां पर वह हलके से दबा रहा था .. रौशनी को भी इस एहसास से कोई प्रॉब्लम नहीं थी .. उसे सलीम पसंद आने लगे थे .. वह कुछ सेकंड सलीम को देखने लगी .. बुड्ढे होकर भी वह काफी स्ट्रांग थे … उसे सलीम की स्ट्रेंथ अच्छी लग रही थी

परफॉरमेंस के बाद “सलीम जी चलिए अब फाइनल थैंक यू देना मुझे हैं .. चलो वहां जाते हैं.”

रौशनी फिर स्टेज पर गयी और वहां थैंक यू नोट स्पीच देकर इवेंट ख़तम होती हैं … सब रौशनी को इवेंट की सक्सेस के लिए कॉंग्रट्स करने लगे. इवेंट अब ख़तम हुआ था और उसके बाद तीनो घर चले गए.

रौशनी फिर सलीम और असलम से बोली ..”सलीम जी , असलम जी में अब घर जाउंगी … मैंने सब तैयारी करि हैं … कुछ दिन जाकर वापस आउंगी … आप ख्याल रखना .. और असलम जी आप भी अपना ख्याल रखना ..”

“रौशनी जी आप जाएंगे कैसे .. हम ड्राप करे ..”

रौशनी झूट बोलकर “नहीं मेरे पति आ रहे हैं मुझे पिक उप करने .. उनके साथ जाउंगी …”

रौशनी सब सामान लेकर ंगो के बहार जाती हैं .. वहां प्लान के अनुसार रमेश उसका इंतज़ार कर रहा था ..

फिर रौशनी रिक्शा में बैठ जाती हैं और वहां से अपने घर निकल जाती हैं
 
रौशनी जी कैसी थी इवेंट …

“बहुत अच्छी हुयी रमेश जी .. सब को पसंद आयी .. आईटी वास् ा सक्सेस.

“अच्छा हैं रौशनी जी आपको खुश देख अच्छा लगता हैं …”

“रौशनी जी अगली बार हमें भी इनविटेशन देना .. “

“जरूर रमेश जी दूंगी इनविटेशन .”

“रौशनी जी पर्सनल इनविटेशन hi चाहिए .. और रमेश पीछे रौशनी को देख मुस्कुराता हैं”

“रमेश जी रस्ते पर ध्यान दीजिये “

“रौशनी जी आपकी मुस्कराहट देखनी थी .. आप बहुत hi खूबसूरत लग रही हो आज इतनी खुश ..”

“शुर्किया रमेश जी .. अब रमेश जी आप आइये कल सुबह मुझे पिक उप करने”

“जरूर रौशनी जी अब तोह आपको छोड़ूंगा नहीं …”

“मतलब रमेश जी” रौशनी पूछ रही थी ..

“मतलब रौशनी जी रोज़ आऊंगा आपको पिक उप और ड्राप करने के लिए .. मुझे तोह बहुत हकुशी होगी आपकी सवारी से”

रौशनी मुस्कुराती हैं ..”That’s ग्रेट रमेश जी”

(उफ्फ्फ अब फिर से रोज़ रौशनी को ड्राप करूँगा .. बातें करूँगा .. और धीरे धीरे उनसे मस्ती भी करूँगा … आज सच में मैट्स लग रहे हैं …उफ़ हु गोरा सा बदन .. गदरायी माल हैं रौशनी … आज तोह साड़ी में कमल लग रही हैं .. काश एक बार उन्हें एक दर्ज़ी के पास ले जाकर उनके लिए एक मस्त सा ब्लाउज सिलवाना हैं … जैसे मुझे चाहिए उनके लिए वैसे वाली …)

“रौशनी जी एक बात पूछनी थी.”

“हाँ पूछिए रमेश जी”

रौशनी जी आपकी सारस की ब्लौसेस क्या कस्टम मेड हैं या आप उन्हें खरीदती हैं.”

“रमेश जी ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हो आप”

“रौशनी जी बस पूछ रहा हूँ … मेरे दोस्त का बीटा हैं , एक दिन वह मुझे पूछ रहा था की उसे अपनी बीवी के लिए ब्लाउज लेनी हैं तोह कुछ सुग्गेस्ट करे ., अब उसकी बीवी आप की उम्र की हो होगी .. इसलिए सोचा आपको पता होगा तोह उसे बता दूंगा .. शॉप या टेलर का नाम.”

“अच्छा ऐसे हैं हम्म, रमेश जी सब ब्लौसेस कस्टम मेड हैं .. मतलब में टेलर से hi सिलवाती हूँ जैसे मुझे चाहिए वैसे .. रेडीमेड बुय करती हंट ओह साइज का इशू होता हैं न ..”

“अच्छा रौशनी जी साइज का इशू हम्म्म , क्यों आपकी साइज क्या हैं ..”

“रमेश जी यह आप क्या पूछ रहे हो छी … आप मेरे ब्लाउज का साइज कैसे … उफ्फ्फ”

“माफ़ कीजिये जस्ट पूछ लिया …. कभी कबर मुँह से निकल जाती हैं गलत बात … वैसे रौशनी जी इस बार्ट पर आप मुझे थप्पड़ मार सकती हो .. “

“उफ़ रमेश जी ज्यादा ड्रामेटिक न बनो …”

ड्रामेटिक मतलब रौशनी जी ?”

“मतलब नखरे इतने न करिये .. कुछ ज्यादा hi आप भी न … बस ऐसे चीज़ें न ुचिये अपनी पत्नी को चोर किसी भी महिला से .. नहीं तोह सच में थप्पड़ मिलेगा आपको”

“रौशनी जी मेरी कहाँ किस्मत आप जैसी लेडीज से चमत खाने की …”

“अच्छा रमेश जी लगता हैं आपको चमत मारनी hi चाहिए “

“हाँ मारिये न जरूर”

“धत्त रमेश जी ,, नहीं आप अच्छे आदमी हो .. बस ऐसे न पूछना ..”

“हाँ तोह रौशनी जी फिर साइज नहीं मिलता आपका इसलिए आप ब्लौसेस सिलवाती हो .. “

“मिलता हैं न साइज … बस कभी कबर मेरे साइज की असलनि से नहीं मिलती इसलिए सिलवाती हूँ”

(हाँ रौशनी जी क्यों नहीं , आपकी चूचियां हैं hi बड़ी .. ब्लाउज वैसे साइज की मिलनी मुश्किल hi होगी .. मेरे भी चड्डी की वही हाल हैं ः)









रमेश जी वैसे मर्दों का अच्छा हैं .. रेडीमेड मिलता हैं सब कुछ”

“कहाँ राशि नई , हमें भी कभी कभी किसी चीज़ों की साइज नहीं मिलती .. “

“अच्छा ऐसे कौनसी चीज़ हैं जिसकी साइज मिलनी आपको मुश्किल होती हैं?”

रमेश अब मौका देख बोलता हैं “वही रौशनी जी जो हम पंत के अंदर पेहेनते हैं वही …”

रौशनी वह बात पहले तोह समझ नहीं पाती … फिर उसे समझ आती हैं की रमेश किस बात की ज़िकर कर रहे थे .. और वह शर्मायी और कुछ बोली नहीं.

“रमेश जी आप भी न .. आप कैसी बातें करते हो उफ्फ्फ”

“रौशनी जी आपने पूछा तोह मैंने जवाब दिया … अब जवाब भी न दू , हु भी बुरी बात हैं न”

रौशनी बस बहार देखती हाँ, उसकी याद रमेश के उस दिन वाले उभर पर जाती हैं और पार्क में कब रोशन ने उनके उभर को उनके पंत के ऊपर से छू लिया था और उसे सहलाया था …

“रौशनी जी शांत क्यों हुयी … आप बहुत दिनों से सवारी करि हो .. ऐसे शांत न बैठिये”

“रमेश जी अब कुछ और बातें करे”

“क्यों रौशनी जी अब क्या गलत बात की मैंने .. बस आप hi पूछी और में जवाब दिया बस..”

“अच्छा ok रमेश जी … “

“रौशनी जी वैसे आप अगर आपके टेलर का नाम डौगी तोह में उसका नाम मेरे दोस्त के bête को दूंगा … वह अपनी बीवी को वहां ले जाकर आप जैसे इतने मस्त स्लीवलेस डीप बैक ब्लौसेस सिल्वा सकेगा अपनी बीवी के लिए … उनकी भी आप जैसे hi साइज की प्रॉब्लम होगी ..”

रमेश जान बुझ कर नटखट वाली बातें कर रहा था रौशनी के साथ.

“रौशनी मुस्कुरायी .. रमेश जी में देती पाती लेकिन वह अब नहीं हैं शहर में .. वह शिफ्ट हुए हैं कही और कुछ 15 दिन पहले. मुझे भी अब टेलर ढूंढनी hi हैं ..”

रमेश यह बता सुन खुश हो जाता हैं ,, अब मौका था , उसका तोह वैसे भी एक दोस्त था जो टेलर था. .. उसका नंबर था उसके पास लेकिन वह खुद रौशनी को वहां ले कर जाना था ..

“रौशनी जी ढूंढता हूँ आप के लिए आप फ़िक्र न करिये .. अपने दोस्त के िये भी ढूँढना था लेकिन पहले आपके लिए ढूंढूंगा … “

“रमेश जी अपने दोस्त के bête की मदत करनी चाहिए आपने …”

“रौशनी जी करूँगा लेकिन आपके लिए खासकर ढूंढूंगा … आप फिर और सरे नए ब्लौसेस बनवा पाओगे, जैसे चाहिए आपके बड़े साइज वाले, वैसे hi बिलकुल…”

रमेश बोड़ा साइज बोल चुप रहता हैं .. वहां रौशनी भी शर्माती हैं … वैसे सच तोह थी बात उनकी .. उसकी साइज की ब्लौसेस आसानी से मिलती नहीं तोह उसे hi सिलवणी पड़ती थी .. वैसे भी उसे एक टेलर चाहिए hi था .. उसके पास ब्लाउज पीसेज थे और उसे और सरे ब्लौसेस बनाना थे .. अब रोज़ जॉब के लिए उसे नए ब्लौसेस चाहिए भी थे.

“रमेश जी ठीक हैं .. प्लीज ढूंढिए आप .. मुझे न काम से फुर्सत hi नहीं मिलती.”

“रौशनी जी ज़रूर आपके लिए कुछ भी ..”

फिर रौशनी थोड़ा सोचती हैं की वह रमेश जी को चिढ़ाएगी.

“रमेश जी वैसे आप को मेरे ब्लौसेस इतने क्यों पसंद … बताइये आपको उनमें कुछ ज्यादा hi इंटरेस्ट दीखता हैं.”

“रौशनी जी अब आप इतनी स्टाइलिश पहनती हो .. मेरे बीवी किट ओह इतनी सिंपल होती हैं .. आपकी देख मुझे पता चला की ऐसी स्टाइलिश ब्लौसेस भी बनवाती हैं लेडीज … वैसे आप पर बहुत सूट करता हैं आपके ब्लौसेस .. आपकी चोइसस सही हैं …”

















“शुक्रिया .. रमेश जी अब करना पड़ता हैं … आज कल ब्लौसेस के स्टाइल कितने बदल गए हैं .. टाइम के हिसाब से वैसे hi सिलवाने पड़ते हैं ब्लौसेस.”

हाँ रौशनी जी वैसे आपके हमेशा स्लीवलेस होती हैं और दिए बैक .. उसे तोह आपका बदन और निखार उठ जाता हैं.”

“अच्छा ऐसे क्या .. “

“हाँ रौशनी जी … बहुत मस्त होती हैं आपकी ब्लौसेस .. मेरी बीवी आप जैसे जवना होती तोह और सरे ब्लौसेस सिलवाता खुद उसे वहां ले जाकर .. अलग अलग स्टाइल के जैसे मुझे चाहिए वैसे ..”

“अच्छा रमेश जी आपको ब्लौसेस से इतना आकर्षण..”

“रौशनी जी ब्लौसेस में जो आप जैसी लेडीज होती हैं उनके वजह से hi तोह ब्लौसेस इतनी मस्त लगती हैं.”

रौशनी मुस्कुराती हैं… उफ़ रमेश जी आप भी न …

“रौशनी जी देखिये जो हैं वही बोलता हूँ … आप की ब्लौसेस ऐसी मैंने बहुत काम लेडीज पर देखि हैं .. इसलिए .. मेरी पत्नी आप जैसी होती तोह अब उस खूबसूरत देखना मुझे अच्छा लगेगा न .”

“हाँ बीवी पर hi न .. बस .”

“रौशनी जी हाँ बीवी पर hi .. अब आप जैसी उम्र वाली कहाँ इस बुड्ढे की बीवी बनेगी .. बीवी तोह दूर आप हमारी गफ भी थोड़े hi बनोगी .. इसलिए अब बस आप जैसी लेडीज पर हो ब्लौसेस देखने से अच्छा लगने लगता हैं”

“रमेश जी आप को इस उम्र में गिरलफिरंद चाहिए ..”

रौशनी जी मैंने कब कहाँ गफ चाहिए .. बस अब दोस्ती करूँगा तोह hi बहुत हैं .. आप जैसी दोस्त भी तोह कभी नहीं मिली हैं मुझे .. आप जैसी इतनी खूबसूरत और स्मार्ट महिला कब मेरे जैसे बुड्ढे की दोस्त भी बनती हैं”

“रमेश जी .. दोस्ती तोह ठीक हैं ..”

रौशनी जी हाँ लेकिन कभी मन करता हैं कोई गफ हो .. पता हैं 23 का था तब शादी हुयी थी … यह गफ तोह कभी नहीं थी मेरी ..बस मेरी बीवी …”

“वीएस रौशनी जी आपके बफ्स थे .. आपके पति से पहले”

“रमेश जी आपको बहुत दिलजस्पी?”

“रौशनी जी कुछ पूछा तोह सीधे आप ऐसे hi क्यों कहती हो … आपको कुहक पूछ भी नहीं सकता दोस्त होकर”

“हम्म रमेश जी अच्छा ठीक हैं बाबा .. .. मेरा एक बर्फ था रमेश जी कॉलेज में .... “

“अच्छा रौशनी जी उस बर्फ ने आपको बीवी नहीं बनाया … पागल हैं क्या आप जैसी लेडी को गफ बना दिया लेकिन बीवी नहीं ..”

“रमेश जी वह अब क्या बोलना .. बस पुराणी बात हैं छोड़िये”

“रौशनी जी वह आदमी मिला तोह उसे बोलूंगा .. रौशनी जी जैसी लेडीज को बीवीव नहीं बनकरउ उसने इतनी बड़ी गलती की .. आप जैसी खूबसूरत बीवी होती उसकी .. मुझे यकीन हैं अभी उसकी बीवी हैं वह आपके मुक़ाबले कुछ नहीं हैं”

“उफ़ रमेश जी आप भी न .. उसकी भी बीवीव अच्छी hi हैं”

“रौशनी जी आप से तोह बिलकुल नहीं अच्छी .. आप सबसे अच्छी हो>”

रौशनी इस बात पर मुस्कुराती हैं ..

“यह सबसे अच्छी क्यों रमेश जी .. “

रौशनी जी आप सबसे खूबसूरत, सबसे स्मार्ट, सबसे अच्छे दिल की महिला हो.. आप से दोस्ती कर में बहुत खुश हूँ , कभी नहीं सोचा था आप ाजसि ब्यूटी मेरी दोस्त बनेगी.”

“रमेश जी आज कुछ ज्यादा hi टैरिफ चल रही हैं .. उस दिन तोह आप गार्डन लेजाकर मुझे किश करने लगे .. और आज इतनी टैरिफ .. क्या चल रहा हैं रमेश जी.”

“रौशनी जी कुछ नहीं चल रहा हैं .. दोस्ती चल रही हैं .. गार्डन आपको इसलिए ले गया था क्यूंकि मेरी अच्छी दोस्त ने कहा था उसे नेचर पसंद हैं .. और रही तर्रीफ़ की .. जो सच हैं वही बोलता हूँ .. झूट नहीं बोल रहा हूँ ..”

“ओह इतने ख्याल रखने वाले और टैरिफ करने वाले दोस्त कभी नहीं मिले .. लगता हैं में hi लकी हूँ आप दोस्त बने हो.”

(रौशनी जी आप मुझे पसंद हो .. आप की हर चीज़ मुझे पसंद हैं .. बस आपके साथ hi वक़्त गुजरने का मन करता हैं हर बार .. आपको तोह मेरी गफ बनाना हैं … मेरी रौशनी मेरी गफ ….)

अब वह रौशनी के घर पहुँच जाते हैं .. रौशनी निचे उतरती हैं ..

“रौशनी जी कल सुबह आऊंगा में अआप्को लेने …”

रौशनी मुस्कुराती हैं … रमेश की नज़र उसे अपनी कमर पर उसे दिखती हैं .. रौशनी फिर जान बुझ कर अपनी कमर थोड़ी और दिखती हैं, और रमेश वहां और घूरे जार अहा हैं. “रमेश जी कहाँ नज़र हैं आपकी …

(रौशनी जी तुम्हारे गोर से नाज़ुक कमर पर हैं .. मन कर रहा हैं वहां चुम लूँ डिअर)

रौशनी जी कुछ नहीं बस … “

“रमेश जी मेरे कमर को घर रहे थे न .. सच बताओ.”

“रौशनी जी अब आपकका बड़ा हो हैं की ….”

रौशनी इस बात से थोड़ी सेहम जाती हैं .. ताजुब से उसे इस बात अक बुरा नहीं लग रहा था .. उसे रमेश के ऐसे बोलने से अच्छा लग रहा था … वहां उसके पति तोह कभी उसकी टैरिफ न करते … यहाँ रमेश जैसा बुद्धा उसे घूरता रहता हैं और टैरिफ पर टैरिफ hi करता हैं … उसे यह रमेश की बात पसंद थी काफी.

“रमेश जी लगता हैं बीवी को बहुत मिस कर रहे हो … छुट्टी ले लो और उसे फिर से मिलने जाओ ः.”

(रौशनी जी अब आप हो इतनी मस्त तोह अब बीवी से क्या करू .. आप hi आओ मेरी बीवी जैसे बनो .. बहुत hi मज़े लूंगा तेरे इस बदन की … तेरे इस होठों पर जहाँ से तू इतनी प्यारी मुस्कान देती हैं , वही पर अपने लुंड की चुम्मे लेना चाहता हूँ .. उफ्फ्फ्फ़..)

रमेश की लुंड उभरा हुआ था … रौशनी वहां एक नज़र डालती हैना ुर मुद कर चली जाती हैं… रमेश रिक्शा में बैठे हीरो जैसे मन में बुदबुदाता हैं “पलट .. मेरी रानी पलट और देख अपने हीरो को.”

उसी समय रौशनी भी पलट कर देखती हैं … रमेश उसे देख मुस्कुराता हैं … रौशनी अपने माथे पर हलके से मरती हूँ .. फिर चली जाती हैं अपनी चूतड़ों को मटकते हुए ..

वहां रमेश उसकी मटकती चल और कमर को देख अपने लुंड को जोरों से मसलता हैं .. आज तोह वह रात में रौशनी के नाम पर मुठ मारकर बहुत सारा माल निकलने वाला था …

रौशनी घर के अंदर जाती हैं तोह वह रोनित को बुलाती हैं…

“ाजी सुनते हो , में आ गयी हूँ घर पर .. आप कहाँ हो.”

रोनित घर पर नहीं था .. कही बहार गए थे .. रौशनी अपने कमरे में जाकर निघ्त्य में चेंज कर लेती हैं ..

2 घंटे बाद कुछ 1.30 बजे रोनित घर आता हैं..

“रोनित आप कहाँ थे … आप फ़ोन भी नहीं उठा रहे थे,.”

“बहार गया था दोस्तों के साथ”

“इतनी रात .. जबकि में बोली थी की में घर आने वाली हूँ आज.”

“फिर में क्या करू .. इतने दिन तोह नयी थी .. अब आयी हो तोह ताने मरना शुरू”

“रोनित तुम देर रात पिने गए थे दोस्तों के साथ .. में बोली थीं ा तुम्हारे आवारा दोस्त उनके साथ न जाओ .. उन्हें तुम्हारी भलाई की खैर नहीं.”

“जिअसे मेरे बीवी को बहुत हैं , कितने दिनों बाद आयी हो … यहाँ मुझे अकेले चोर दिया .. अब दोस्तों के साथ गया तोह उससे भी प्रॉब्लम.”

“रोनित में काम के सिलसिलसे नहीं आयी न .. में हमारे लिए काम करने वहां ंगो जाती हूँ न, तुम्हारे जैसे बेकार तोह नहीं बैठी हूँ घर पर.”

“रौशनी तुम कुछ ज्यादा hi बोल रही हो … मत करो काम किसने बोलै था ..”

“किसने बोलै था ?? … अरे आपकी गलती के वजह से बिज़नेस दुब गया हैं .. और आप तोह काम नहीं कर रहे हो, मुझे hi घर चलने के लिए जॉब लेनी पड़ी..”

“रोनित कुछ बोलता नहीं कुछ सेकंड और फिर “बिज़नेस दुब गया तोह में क्या करू .. में तोह बहुत म्हणत किट hi …”

“हाँ लेकिन अब वही म्हणत जॉब शुरू करने में करो .. बस इस ंगो के जॉब पर घर आसानी से नहीं चलेगा .. और तुम्हारी दारू की आदत तोह हमें और डूबा ले जाएगी..”

रोनित ग़ुस्से से कमरे में जाता हैं और फिर बिस्तर बिना कपडे निकले सो जाता हैं …

रौशनी अब सोफे पर बैठी अपने ख्यालों में

(फिर वह सोचती हैं – वहां तीन बुड्ढे मेरे दीवाने बने बैठे हैं मेरे बदन को मसलने की कोशिशों में जारी हैं … और यहाँ मेरे hi पति मेरी तरफ प्यार से तोह देखते hi नहीं … हफ्ते हो गए हम बिस्तर पर फिजिकल भी नहीं हुए हैं .. अब कितनी और बर्दाश्त करू मेरी रोमांटिक लाइफ उजड़ते हुए देखकर. हम में प्यार तोह बहुत दूर की बात हैं. में रोनित की गलती को सुधरने इतना सब कुछ कर रही हूँ और यहाँ वह खुद को सुधरने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं.. )

(रौशनी क्या अब उन तीन बुद्धों के और पास चली जाएगी .. क्या वह अपनी फिजिकल नीड्स तो मिटने उन तीन बुद्धों को अपने बदन की और लुफ्त उठाने देने वाली हैं ...)
 
कुछ एक घंटे बाद रौशनी थोड़ी शांत होती हैं . उसे रोनित से ऐसे बात करने में अच्छा नहीं लता इसलिए उसे मानाने वह कमरे में जाती हैं .. रौशनी बहुत दिनों से रोनित के साथ इरोटिक पल भी बितायी नहीं थी .. वह मिस लार रही थी अपने पति से रोमांटिक पल .. और खासकर से उनकी चुदाई . वह काफी हॉट मूड में थी इसलिए वह सोची की वह रोनित को मन कर रात में उनसे सेक्स करेगी ..

लेकिन रोनित बिस्तर पर पड़े लेते थे … रौशनी उसके पास गयी और उसे हिलने लगी .. “रोनित, रोनित उठिये न .. रोनित ी ऍम सॉरी … आप से ऐसी नहीं बात करनी चाहिए थी.. उठिये न”

रोनित कुछ मं के बाद उठ बैठ जाता हैं..

“बोलो रौशनी क्या हुआ .. मुझे क्यों उठाया … बहार जोट ुम बोली उससे जी नहीं भरा तुम्हारा ..”

“रोनित ी ऍम सोर्री … प्लीज में इतने दी ो बाद आयी हूँ… आप नाराज़ न होना..”

“हम्म ठीक हैं , बोलो क्या चाहिए”

रौशनी अब रोनित के करीब जाती हैं .. वह उसके गले में अपने हाथ डालती हैं और रोनित को गालों पर चूमती हैं :.. रोनित कुछ रिएक्शन नहीं देता ..

“रोनित … बहुत दिनों से हम कुछ सेक्सी नहीं आकर हैं .. प्लीज मुझे भी चूमिए ..”

रोनित रिएक्शन hi माहि देता ..

रौशनी उसके गालीन को और चूमती हैं … और उसके होठों पर चूमने बढ़ती हैं ..

रोनित फिर रौशनी के हाथों को हटा देता हैं ..

“रोनित क्या हुआ … डिअर प्लीज अभी भी नाराज़ हो”

“रौशनी मुझे नहीं बात करनी तुमसे .. जतूम जाओ उस ंगो के उन बुद्धों से करो जो चाहिए … वहां 4 दिन रहकर गुल खिलाये होंगे तुमने उन् बुद्धों को. अब वहां जी जाओ मज़्ज़े करो उनके साथ. मुझे नहीं बात करनी तुमसे”

रौशनी बहुत नाराज़ होती हैं .. वह उनके लिए इतना कुछ कर रही थी और रोनित उस पर hi इलज़ाम लगा रही हैं .. बस अपने पति का प्यार hi तोह चाहिए .. अब वह भी नहीं मिलेगा ..

“रोनित ये क्या बक रहे हो तुम … वहां में बस अपने काम के लिए गयी थी .. बड़ी इवेंट थी इसलिए .. तिम्हे तोह परवाह hi नहीं इवेंट कैसी गयी क्या हुआ कुछ पूछा नहीं बस चिलाना शुरू .. जब कोई लेडीज जाती हैं कोई मर्द दोस्त बनते हैं तोह क्या उसके करैक्टर पर हमेशा सवाल पूछोगे आप जैसे मर्द ..”

“रोनित तुम्हारी असली फीलिंग्स अब जाकर बहार आयी हैं मेरे बारे में ..”

रोनित फिर अपना पिलो और ब्लैंकेट लेकर कमरे के बहार जाता हैं सोफे पर सोने..

वहां कमरे में रौशनी बहुत नाराज़ बैठी रहती हैं.. (आज तोह रोनित ने हद कर दी .. मेरे करैक्टर पर शक कर रहे हैं .. यहाँ एक ाची बीवी के नाते में हमारे लिए इतना कुछ कर रही हूँ … उसकी परवाह तोह चोर , मुझे पर hi ऐसे गंदे इलज़ाम लगा रहे है. … वहां उन बुद्धों को मेरी जोसम चाहिए मुझे दीखता हैं और मैंने तोह कभी उनसे ऐसी …यहाँ में कितने दिनों से प्यासी हूँ और रोनित को मेरी प्यास की कोई परवाह नहीं .. अब रोनित मेरी अंदर की प्यास नहीं बुझाएंगे तोह और कोई सही) इतना सोचते हुए वह बिस्तर पर लेट गयी ..

(कल से रोशिनी अपनी ऐटिटूड बदलने वाली थी .. वह अब उन तीन बुद्धों के साथ मस्तियाँ करने से ज्यादा कतराने नहीं वाली थी .. अब तीन बुड्ढे और इस हसीं महिला के बीच बहुत आगे तक बातें जानी वाली थी)

रौशनी ने एक दिन छुट्टी ली .. वह ोारकौर गयी और अपने बदन पर पूरी वैक्सिंग करा ली .. उसकी छूट के ऊपर भी वैक्सिंग करि बस एक बालों का स्ट्रिप चोर कर.. .. वह एक स्लीवेल्स ब्लाउज जो की डीप बैक कट तोह थी hi लेकिन आगे से भी डीप कट वाली पहनी थी. ट्रांसपेरेंट साड़ी जो उसके नाभि और कमर साफ़ साफ़ दर्शाती .. कानों में लम्बे ेआरींग्स, होठों पर रेड लिपस्टिक .. बालों को ओपन चोरे हुए .. माथे पर लाल बिंदी .. कलाई में चूड़ियां .. आज तोह रौशनी सब मर्दों के लुन्डों को खड़ा करने वाली दिख रहे थी .. आज से तीनो बुद्धों के बहुत मज़्ज़े होने वाले थे ..

निचे अपने रिक्शा के पास रौशनी को आते देख रमेश तोह दांग रह गए .. आज रौशनी पहले से भी काफी सेक्सी साड़ी और ब्लाउज पहने हुयी थी .. उसमें एक अलग hi आकर्षण था आज . रमेश का तोह कुंड रौशनी को देख hi आज खड़ा होने लगा था पूरा का पूरा..











रौशनी अब रमेश को अपने बदन को घूरते देखि और अंदर मुस्कुरायी.. उसे पता था बुद्धा उसे ऐसे गरमी की नज़र से देख रहा था .. उसके पास जाकर वह मुस्कुरायी

“रमेश जी क्या घर रहे हो आज … इतनी पसंद आयी हूँ आपको …” और रौशनी एक वाइड स्माइल दी

रमेश का लुंड तोह उसकी ोान्त में खटके मार रहा था ..

“रौशनी जी आज तोह आप…”

“रमेश जी बोलिये .. जरा खुल कर बोलिये ..”

“रौशनी जी आज आप तोह सही में बहुत hi अस्त लग रही हो .. आअज की साड़ी तोह आप पर खूब जांच रही हैं”

“अच्छा रमेश जी क्यों … आपको ज्यादा सेक्सी लग रही हूँ में …” और रौशनी मुस्कुराने लगी.

“रमेश अब रौशनी को खुद से सेक्सी शब्द इस्तेमाल करते देख सरप्राइज था.. उसे रौशनी को खुल कर बात करते देख ख़ुशी हुयी थी.

“रौशनी जी हाँ आप काफी सेक्सी लग रही हो .. आप से तोह किसी लेडीज की टक्कर बी नहीं..”

“अच्छा रमेश जी ऐसे हैं … ाचा चलिए काम पर जाना हैं नहीं तोह यहाँ पर hi बैठे बस तारीफ करते रहोगे आप .. काफी नोट्टी बुड्ढे हो आप ..” रौशनी फिर हसने लगी हैं..

“रौशनी जी काम छोड़िये … आप आज हुनर साथ hi घूमिये न .. अलग अलग चीज़ें दिखाऊंगा शहर के .. आइये मेरे साथ”

“रमेश जी आप तोह चोर hi दीजिये .. आप तोह पार्क्स में hi मुझे घुमागोई उस दिन जैसे उन कपल्स पार्क में वैसे .. आप से तोह दूर hi रहूंगी ..”

“रौशनी जी नहीं दूर न जाइये , अभी तोह पास आयी हो इतने दिनों बाद .. अब तोह आपको दूर जाने hi नहीं दूंगा …”

अच्छा रमेश जी पास hi रखोगे .. क्यों क्या इरादा हैं .. आप कुछ जयादा hi नोट्टी न सोचो मेरे बारे में रमेश जी .. आप के बीवी को बोलूंगी आपकी करतुते ..” रौशनी अब हलके से रमेश के कन्धों पर मुट्ठी मरती हैं .. “अब चलिए नहीं तोह ंगो जाने को लेट होगा मुझे”

अब रिक्शा शुरू कर वह सवारी कर रहे हैं.. रमेश आईने में से ोीचे रौशनी को देखता हैं .. आज रौशनी ने कुछ और डीप फ्रंट चइत ब्लाउज ोेहनी थी .. आज तोह वह मस्त कमाल की आइटम लग रही थी .. रमेश का कुंड तोह उसकी ोान्त में लगातार झटके मार रहा था .. उफ्फ्फ क्या क्लीवेज होगी ममम थोड़ा झुकिए न रौशनी जी … अपने चूचियों की दरार का दृश्य तोह दिखाइए .. रमेश फिर अपने पंत के ऊपर से अपने लोडे को खुजलाता हैं.

वहां रौशनी को एहसास हुआ था की रमेश उसे आईने ऐ घर रहे है. .. वह कुछ सोची फिर थोड़ा आगे झुकी मनो अपने सैंडल्स को ठीक कर रही हो. रमेश तोह अब आईने से बस देखता रहा .. उफ्फ्फ रौशनी की गोरी सी मुलायम चूचियों की दरार का नज़ारा बहुत hi हॉट था .. उसका लुंड अब उस दृश्य से बुरी तरह से झटके मार रहा था .. ही उफ्फ्फ क्या चूचियां होंगी मैडम की … ममममम मुँह से तोह ोानी आ रहा हैं एबीएस उनकी चूचियों की दरार देख .. उनकी नंगी चूचियां देखेगा तोह सीधा उसे होने मुँह में लेकर चूसूंगा ममम काश रौशनी की चूचियों को चूस सकू मममम..

रमेश अब एक हाथ से रिक्शा चला रहा था और दूसरे हाथ से अपने लोडे को मसल रहा था .. जो अब बुरी तरह से झटके मार रहा था ..

अचानक से रिक्शा एक खड़े से गुज़रता हैं ..

“ोूई माँ रमेश जी जरा ध्यान रस्ते पर भी दीजिये , न की यहाँ वहां … इधर उधर नज़र न डालिये .. बस रस्ते पर डालिये ..”

“रौशनी जी माफ़ कीजिये .. ऐसे नज़ारे देख रहा था की ध्यान रस्ते पर नहीं रही .. आक्न्हों के सामने तोह दो बड़े चीज़ देखे .. की यह छोटा सा खड़ा देखना भूल गए ..”

“रमेश जी बड़े बड़े आइटम्स को न देखो … वैसे भी जो चीज़ हाथ नहीं आएँगे तोह खली पिली वहां नज़र दाल कर कुछ फायदा नहीं हैं..”

“अच्छा रौशनी जी .. अरे रौशनी जी हमें बड़े hi पस्न्द हैं .. वैसे आप को भी पसंद हैं न बड़े बड़े चीज़ें..”

रौशनी अब शर्मायी … बातें हद से बहार जा रही थी … उसे अभी शर्म आ रही थी रमेश जी के बातों से ..

“रौशनी जी आज शाम को आइये न थोड़ा घूम लेंगे .. उस पर में आओगी फिर से ..”

“रमेश जी आप को मुझे उस पार्क में ले जाकर

क्या करना हैं मुझे अच्छी तरह से ोाता हैं … अआप बहुत नोट्टी हो .. आप के साथ नहीं आउंगी .. आप तोह मुझे वहां से छोड़ोगे नहीं ..”

“रौशनी जी क्यों छोड़ूंगा आपको .. आप की कंपनी में बहुत अच्छा लगता हैं .. मुझे तोह मन करतभाईन उस पार्क में लेजाकर वहां आपके साथ 2-3 घंटे बितौ .. वहां पार्क में और बहुत हैं करने के लिए , आपने बस ट्रेलर hi देखा था..”

“ अच्छा रमेश जी उस पार्क में उस दिन आपने बस ट्रेलर दिखाया था .. अगली बार पूरी फिल्म दिखाओगे क्या … बड़े आये डायरेक्टर साहब ..”

रमेश तोह काफी गरम हो रहा था रौशनी की ऐसी बातें सुन .. उसका लोढ़ा तोह पूरा औकात में आ चुक्का था … उफ्फ्फ आज तोह रौशनी जी खुल कर बातें कर रही हैं .. बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं .. यार अब तोह उन्हें पार्क ले जाऊंगा और खूब मस्ती करना चाहूंगा मम.

अब वह ंगो पहुँच गए .. रौशनी अब रिक्शा के बहार निकल गयी ..

रमेश भी रिक्शा से उतर गया … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे ..

“रौशनी जी आज आप शाम को मेरे साथ थोड़ा टाइम बिताइए न .. आपसे बहुत बात करनी हैं .. मुझे आप की कंपनी चाहिए आज शाम को …”

“रमेश जी उफ्फ्फ आप भी न .. देखिये शाम का बाद में देखेंगे .. अभी लेट हुआ हैं मुझे … शाम को घर ड्राप करोगे तब देखेंगे .. अच्छा में जाती हूँ.”

रौशनी जी एक मं रुकिए … रमेश अब बोल्ड होकर रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में लेता हैं .. रौशनी बस उसे देखती हैं .. फिर रमेश उसके हाथों को ऊपर उठाते हुए उसकी हाथों को चूमता हैं …

“रौशनी जी आप की दोस्ती फिर से पाकर बहुत खुश हूँ .. सच अब आपकी दोस्ती हमेशा के लिए चाहिए मुझे”

“रमेश जी … मुझे भी चाहिए आपसे दोस्ती .. आप अच्छे हो .. आपकी कंपनी में मुझे अच्छा लगता हैं .. आज शाम को आप मुझे और घुमा सकते हो… लेकिन अब थोड़ा हाथ छोड़िये .. काम पर जाना हैं.. “ रौशनी को दिख रहा था की रमेश का लुंड अब उसकी पंत में एक तम्बू बनाये हुए था ..

रमेश फिर से रौशनी एक हाथों को चूमता हैं .. फिर रौशनी मुद कर चली जाती हैं और रमेश उसकी हिलती चूतड़ों को देख अपने खड़े लोडे को मसलता हैं.

वहां रौशनी आज के रमेश के साथ बातों के बारे में सोचते हुए अंदर मन में मुस्कराते हुए ंगो के अंदर चली जाती हैं.

ंगो में अपना काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के वहां जाती हैं .. अंदर असलम सोफे पर बैठा हुआ था ..

आज रौशनी ने जो साड़ी और ब्लाउज पहनी थी उससे तोह रमेश जैसे असलम का लोढ़ा भी झटके मारने लगा था .. उफ़ फहाय क्या माल लग रही हैं आज रौशनी जी .. आज तोह इसे ऐसे मसलूंगा उफ्फ्फ क्या बदन हैं यार ….

“रौशनी जी आप आ गयी .. छुट्टी कैसी थी ..”

“अच्छी थी असलम जी … अब वापस काम पर .., वैसे असलम जी में सोच लिया की में अब बस आपके घर आउंगी तोह आप मुझे रुकसाना hi समझ कर बातें करिये .. आप की इलाज के लिए में 100% आपका साथ दूंगी.”

असलम इस बात से बहुत खुश होता हैं ..

“रुकसाना बेगम .. फिर आइये गले लागिये ..”

अब असलम रौशनी को अपने बाँहों में लेकर पूरा मसलता हैं .. “रुकसाना बेगम चलिए अब मस्त गरम खाना बनाइये ..”

“असलम मियां जरूर .. जरा हलके से फ्रेश होने दीजिये …”

रौशनी थोड़ा फ्रेश होकर लंच बनाने लग जाती हैं

पीछे से असलम उसे जकड लेता हैं.. रुकसाना बेगम ही … आपके बदन का दीवाना हूँ में उफ्फ्फ”

“असलम मियां आप भी न .. बस मेरे बदन से hi प्यार हैं आपको ..,”

“रुकसाना बेगम अब हैं hi आइटम जैसे बदन आपकी “

“असलम मियां उफ्फ्फ आप भी न “

असलम अब अपने हाथों को रौशनी के पेट पर फेरता हैं … फिर वहां हलके से दबाता हैं.. “उफ़ असलम मियां धीरे से .. उफ्फ्फ आपके कठोर हाथों से इतना मत मसलो उफ्फ्फ.”

रुकसाना बेगम अब आप हैं hi ऐसी … मसलने दो न .. बहुत मिस किया अपनी बेगम को.”

रौशनी कुछ नहीं कहती .. उसकी ख़ामोशी से और बोल्ड होते हुए असलम अब पीछे से अपने खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबाता हैं .. और आगे से उसके पेट को मसलता हैं.. “उफ़ असलम जी आपका पीछे से बहुत चुभ रहा हैं .. लगता हैं आज बहुत hi मस्ती में हो आप और आपका शैतान”

“हाँ रुकसाना बेगम .. अब क्या कहु आप जैसी चूतड़ों का जादू हैं जो मेरे शैतान पर चा चुक्का हैं.”

“अच्छा असलम मियां अब आप हमारे सामने ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल करोगे .. आज कुछ जयादा hi मूड में हो.”

“रुकसाना बेगम आप आती हो तोह गर्मी बढ़ती हैं .. अब आप को तोह देख मूड खुद बा खुद बनता हैं .. वैसे आप आज मस्त साड़ी पहनी हो … “

“असलम जी आपको अच्छा लगा .. उफ्फ्फ थैंक यू .. हाँ नयी हैं लेकिन आज hi मिली मुझे .. सोचा पेहेन लू.”

“रुकसाना बेगम ऐसे hi पहनिए .. बहुत कमाल की लग रही हो …”

असलम माल शब्द पर जोर देता हैं .. रौशनी समझ जाती हैं और हस्ती हैं…

“असलम जी इतनी कमाल की लगती हूँ आज सच में .. उफ्फ्फ आप आज बहुत टैरिफ कर रहे हो.”

“रुकसाना बेगम जब ऐसी कमाल की बेगम हो तोह क्या करे … “ फिर असलम और एक पीछे से धक्का देता हैं और बी उसका सख्त लोढ़ा और अंदर रौशनी की चूतड़ों में घुसता हैं ..”

अहह असलम जी उफ्फफ्फ्फ़ … आपका पीछे से .. उफ्फ्फ्फ़.”

असलम बहुत गर्मी में था और वह और एक झटका मारता हैं अपने लुंड से … रौशनी की चूतड़ों के अंदर और घुसता हैं उसकी साड़ी के ऊपर से …

“असलम मियां धीरे से .. आपका बहुत बड़ा हैं निचे उफ्फ्फ्फ़. और जोर न दीजिये मममम बहुत अंदर घुस चुक्का हैं अह्ह्ह्ह”

“रुकसाना बेगम अब तोह बस साड़ी के ऊपर से hi घुसा हैं .. कभी मौका दीजिये .. साड़ी बिना अंदर घुसूंगा … मेरी बेगम …”

रौशनी असलम की ऐसी बातों से और गरम होती हैं .. आज उसे उनकी ऐसी बातों से बहुत मज़्ज़ा आ रहा था .. उसकी छूट थोड़ी से गीली हो चुकी थी .. उसे असलम के नंगे लुंड का ख्याल आता हैं और वह और गरम हो जाती हैं …

“असलम फिर रौशनी को अपनी तरफ कर उसकी होठों को चूमता हैं .. इस बार रौशनी कुछ ऑब्जेक्ट नहीं करती और दोनों गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. सामने से असलम एक झटका मारता हैं … अहह असलम जी धीरे से आपका बहुत hi बड़ा हैं उफ्फफ्फ्फ़.

असलम अब अपने हाथों से रौशनी की बाँहों को बुरी तरह से मसलता हैं और उसे फिर से चूमने लगता हैं .. अब रौशनी की छूट गीली हो चुकी थी .. इतने दिन से वह प्यासी थी … आज वह अपनी इन्हिबिशंस खो चुकी थी और स्लैम के मस्ती का साथ दे रही थी …

फिर असलम अपने हाथों से रौशनी के पीठ को मसलता हैं … फिर उसकी चूतड़ों को … उस पुरे समय दोनों एक गहरी चुम्बन में लगे हुए थे … माहौल काफी गरम हो चुक्का था ….

असलम ने तोह पूरी तरह से आज रौशनी को मसलने लगा था … दोनों के दूसरे से चिपके हुए थे ..असलम का सख्त लोढ़ा अब रौशनी के मुलायम पेट पर डाब रहा था … उफ्फ्फ्फ़ रौशनी की तोह अब छूट गीली हो चुकी थी .. आज वह असलम को मन नहीं कर रही थी .. बल्कि उसका पूरा साथ दे रही थी .. उसकी प्यास सच में बढ़ रही थी … असलम को वहां बस रौशनी की प्यास बुझाने और खुद की प्यास बुझानी थी … दोनों चिपके हुए एक दूसरे के बाँहों में खो गए थे ….

असलम और बोल्ड होकर अब रौशनी के आहतों को अपने सख्त उभर पर दाल उसे वहां खुद दबाने लगा … रौशनी फिर कुछ मं बाद खुद से उसके मोठे लोडे को पंत के ऊपर दबा रही थी .. फिर दोनों की चुम्बन टूटी तोह रौशनी अब कामुक भरी नज़रों से असलम की आँखों में देख रही थी … असलम भी हवस की नज़र से रौशनी को देख रहा था .. दोनों के बीच सेक्सुअल टेंशन बहुत हाई हो चुक्का था …

“उफ़ असलम मियां आपका तोह शैतान बहुत hi मोटा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ आप मममम”

“रुकसाना बेगम हाँ मोटा हैं और कला भी . तुमने तोह देख hi लिया हैंउसे .. जब आज़माना हो बताओ … “

“उफ़ असलम मियां .. अब खाना बनाना दीजिये उफ्फ्फ्फ़”

“रुकसाना बेगम बोलिये न … मेरे बड़े हथ्यार को आज़माना चाहती हो .. उफ्फ्फ बहुत टाइम हुआ मेरी रुकसाना बेगम की प्यास बुझा कर …

रौशनी पूरी मदहोशी में थी .. वह भूल गयी थी असलम एक बुद्धा था … बस उसकी प्यास .. उसके हवस को उकसा रही थी .. वह असलम के लोडे को मसलती रही .. असलम भी रौशनी के कमर को मसलता रहा …

अचानक से उन्हें सलीम की आवाज़ सुनाई देती हैं .. सलीम की आवाज़ सुन रौशनी असलम से अलग होती हैं .. उसे अब एहसास होता हैं की वह क्या कर रही थी अभी असलम के साथ .. वह फिर बहार सलीम को मिलने जाती हैं…

“उफ़ साले कमीने को अभी आना था .. रौशनी मस्त हाथ लगी थी यार .. बहुत हवस बढ़ रही थी दोनों में .. कमाइना साला .. उफ्फ्फ मेरे खड़े लोडे का क्या करू … उफ्फ्फ रौशनी .. और कब तक बचेगी तुम मुझ से .. अब तोह तुझे बिस्तर पर लजाकर तेरी कुटाई करने में देर नहीं हैं ..

सलीम रौशनी को देख खुश होता हैं .. वह भी रमेश और असलम जैसे रौशनी को इस साड़ी और ब्लाउज में देख मस्त होता हैं और उसका लोढ़ा भी सख्त होने लगता हैं .. (है आज क्या मस्त लग रही हैं रौशनी जी .. उफ्फ्फ ज़रा झुकेगी तोह साली की चूचियों की दरार साफ़ साफ़ दिखेगी … आज तोह बड़ी माल बन कर आयी हैं .. लगता हैं उसके पति ने उसे प्यासा hi चोर दिया हैं .. उफ्फ्फ रौशनी जी में प्यास बुझाऊंगा तुम्हारी ..)













रौशनी सलीम के गले मिलती हैं .. सलीम उसे मसलता हैं .. उसकी पीठ को मसलता हैं …

“रौशनी जी आप आ गए …. रौशनी जी आप से एक दिन भी जुड़ा नहीं रह सकता .. आपको बहुत मिस किया ..”

“अच्छा सलीम जी इतना क्यों मिस किया”

“रौशनी जी अब आप जैसी खूबसूरत दोस्त को कौन पागल मिस नहीं करेगा ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं “अच्छा ऐसे हैं सलीम जी … वैसे सलीम जी मैंने भी आपको मिस किया.”

“ओह सच्ची रौशनी जी आपने हमें मिस किया … कैसी खुश नसीबी हैं मेरी …”

“रौशनी जी फिर तोह आप अब वापस नहीं जाना .. यही पर रहिये … आपकी कंपनी अच्छी लगेगी…”

दोनों अब सोफे पर बैठ जाते हैं .. रौशनी इस बार सलीम के काफी करीब बैठ जाती हैं ..

“रौशनी जी वैसे आपने मेरी उस बात पर सोची”

“किश बात पर सलीम जी”

“वही मेरे दोस्त के बेटी की शादी हैं और मुझे इन्विते किया था .. में सोचा अगर आप भी आ जाये तोह मेरे दोस्त को आपकी इंट्रोडक्शन करवाऊंगा .. उसे बोलै था आप नयी मैनेजर हो.”

“हाँ सलीम जी हम्म्म , हाँ में आउंगी आपके साथ .. लेकिन बस एक रात रहेंगे , फिर वापस आएँगे … ंगो में काम काफी हैं बाकी”

रौशनी जी जरूरर बस आप आइये तोह सही … वैसे आप आओगी तोह शादी को चार चाँद लग जाएंगे ….”

“शुक्रिया सलीम जी .. आप बहुत तारीफ़ करते हैं.”

“रौशनी जी वैसे एक बात हैं .. आप आओगी तोह दुल्हन आपको देख जलनि नहीं चाहिए .. कहते हैं न शादी में दुल्हन hi सबसे खूबसूरत लगनी चाहिए .. आप आओगी तोह उसे कड़ा मुक़ाबला होगा .. ः”

“सलीम जी आप भी न .. उफ्फ्फ्फ़ कुछ भी .. वह कितनी जवान और खूबसूरत होगी .. में तोह अब जवान नहीं उतनी …”

“रौशनी जी आप जवान हो .. और आपकी जवानी के जलवे तोह मुझे बेहत पसंद हैं ..”

रौशनी अब अपना हाथ साली के तइस पर रखती हैं .. उससे सलीम का लुंड झटके मारने लगता हैं … “वैसे आप भी न सलीम जी … मीनल हैं न .. उसकी जैसी जवान दोस्त हैं न आपके पास.”

“रौशनी जी आप की जवानी पसंद हैं मुझे .. मीनल तोह हैं खूबसूरत लेकिन आप ाजीसी बात कहाँ उसमें.”

“ओह सलीम जी मुझे में क्या बात हैं …”

सलीम अब रौशनी की चूचियों के तरफ देखता हैं …

“रौशनी जी आप में सब कुछ बेस्ट हैं.”

“सलीम जी अच्छा .. क्या बेस्ट हैं जरा बताइये …”

सलीम काफी एक्सपेरिएंस्ड था .. उसे पता था कब कौनसे महिला प्यासी होती हैं .. वह सोचा की अभी मौका हैं रौशनी के और करीबी बनाना के लिए”

“रौशनी जी … मममम आपका गोरापन .. आपकी फिगर .. आपकी नशीली आँखें .. आपके रैसले होठं .. आपकी नाज़ुक कमर .. … आपकी …”

“उफ़ सलीम जी .. बस .. आप तोह .. उफ्फ्फ्फ़ शुरू hi हो गए ..”

“रौशनी जी शुरुवात कहाँ की हैं अब तक … आप शुरवात करने दीजिये .. “

“सलीम जी .. कैसी शुरवात करनी हैं आपको …”

“रौशनी जी .. अपने प्यार की शुरुवात .. आपसे बहुत प्यार करना चाहता हूँ … आप से पूरी मस्ती …”

“उफ्फ्फ सलीम जी .. बहुत हुआ .. यह प्यार छोड़िये .. उफ्फ्फ में रही जवान .. आप रहे बुड्ढे .. यह प्यार चोर दीजिये . आपकी उम्र नहीं हैं प्यार की.”

“रौशनी जी प्यार के लिए कहाँ उम्र देखि जाती हैं .. प्यार कभी भी हो सकता हैं .. किसी के साथ भी .. अब मुझे तोह आपसे प्यार हैं .. एक तरफ़ा hi सही लेकिन हैं .. अब आप को मेरे प्यार को स्वीकारना हैं वह आपके हाथों में हैं ..”

“ओह गॉड तू मच ु अरे … उफ्फ्फ आप भी न .. सलीम जी आप …”

रौशनी फिर दूसरी तरफ देखती हैं .. सलीम अपने हाथों से रौशनी के चेहरे को पाने तरफ करते हुए …”रौशनी जी आप शरमाते हुए और भी मस्त लगती हो …”

सलीम अब रौशनी के तरफ अपने चेहरे को करता हैं .. उसके हॉट नाब रौशनी के होठों के काफी करीब थे .. रौशनी ने ानकेहिं बंद करि थी … सलीम अब मौका गवाने वाला नहीं था .. वह रौशनी के होठों को चूमने लगा ….

रौशनी आज दूसरी बार किसी को चुम रही थी .. इस बार सलीम को … दोनों गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी आज तोह सब हाडे पार कर रही थी … रौशनी इन बुद्धों के जाल में फस रही थी .. उसकी प्यास भी उसे उनके तरफ धकेल रही थी …

कुछ 5 मं किश के बाद रौशनी उठा कर घर के बहार भगति हुयी गयी ..उसके हिलती चूतड़ों को देख सलीम अपने लोडे को मसलने लगा … उफ्फ्फ रौशनी कहाँ भागोजी .. मेरे पास hi आओगी तुम .. तुम्हारी प्यास बढ़ रही हैं .. और यह बुद्धा तेरी प्यास बुझाएगा .. मेरे मोठे लोडे से तेरी मस्त छूट की चुदाई करूँगा .. बहुत देर नहीं अब मेरे लुंड की रानी रौशनी ….











 
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