Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 3 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

अब दोनों सलीम के पहचान के पेस्ट कण्ट्रोल के पास पहुँच गए ..

“बोलिये सलीम जी कैसे आना हुआ”

वह आदमी रौशनी को देखने लगा.. उफ़ कितनी खूबसूरत महिला थी .. एकसूम से गोरी और गदराये बदन वाली … वह उसके गुलाबी होठों को ; गोरी बाँहों और चूचियों के वहां अपनी नज़र घुमाई ..

“अफ़ज़ल यह हैं रौशनी जी .. हमारे ंगो की नयी मैनेजर..”

“सलाम वालैकुम रौशनी जी…”

“नमस्ते अफ़ज़ल जी ..”

“बोलिये सलीम भाई कैसी मदत करू में आपकी ..” वह मर्द कुछ 40 के उम्र का होगा .. वह बस रौशनी की बदन को घूरे है रहा था ..

“अरे अफ़ज़ल , हमें न घर पर पेस्ट कण्ट्रोल कवनि हैं … इसलिए तुम्हारे पास आये हैं .. हमारी मां बहुत नेक दिल की हैं .. वह चाहती हैं की घर की पेस्ट कण्ट्रोल हो जाए ..”

“अच्छी बात है. सलीम में तोह कहता hi था तुम्हे करा लो पेस्ट कण्ट्रोल.”

“अफ़ज़ल पता हैं यार लेकिन वह पहले वाला पागल मैनेजर बात मानता hi नहीं था.. अब रौशनी जी जैसी मैडम आयी हैं तोह अब पेस्ट कण्ट्रोल करवा पाएंगे”

“अच्छा सलीम भाई .. वैसे सॉरी बूत आप दोनों अंदर प्लीज आइये .: रौशनी जी कुछ ठंडा मंगाई आपके लिए.”

रौशनी नहीं बोली ..

“आत्रेय मैडम जी आप सलीम भाई के वहां मि नयी मैनेजर हो और हुनरी सिमोले शॉप पर पहली बार आयी हो, कुछ तोह ठंडा पीजिये.”

रौशनी अब सलीम के तरफ देखती हैं.

“रौशनी जी आप पीजिये , अफ़ज़ल मेरा दोस्त हैं एकदम से मस्त एक जूस लाएगा पास के दूकान से .”

“सलीम भाई आप आपके नेरे साथ कुछ बात करनी हैं”

“चलो ठीक हैं. रौशनी जी आप आराम से अंदर बैठिये हम जूस लेट हैं आपके लिए.”

रौशनी अंदर कुर्सी पर एक पंखे के सामने बैठ गयी.

सलीम और अफ़ज़ल चले गए बहार.

“अरे सलीम भाई क्या मस्त माल हैं यार … इतनी सेक्सी लेडी हैं उफ्फ्फ्फ़”













“हाँ यार कड़क माल हैं न … यार मैनेजर बन गयी हैं क्या खुश किस्मत हैं यार सच में बहुत मस्त माल हैं”

“सलीम भाई आपका जवाब नहीं , ऐसी एक से एक आइटम तेरे नसीब में hi कैसे आती हैं यार .. हु मीनल भी थी मस्त युवा कड़क माल… साली जैसे इसे भी अपने लौड़े के निचे सुलाया हैं क्या ..”

“नहीं अफ़ज़ल अभी तोह मिली हैं कुछ दिनों पहले ..”

“अच्छा सलीम भाई मतलब आगे जा कर इसको अपने हवस के जाल में फ़साने का पूरा इरादा हैं तुम्हे .. उफ्फ्फ कड़क माल रात में मिले तोह रातें रंगीन हो हाय उफ्फ्फ्फ़ … क्या कर्व्स हैं , क्या बदन हैं , गोरा मखमल और गदरायी जिस्म वाली उफ्फ्फ मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया रे”

“ हाँ यार साड़ी में भी मालदार हैं न … सोच साड़ी उतरेगी तोह कितनी मस्त दिखेगी नंगी … यार मन करता हैं दबोच hi लूँ हमेशा ः.”

“वैसे अफ़ज़ल टब hi तोह उस एक औरत को अपनी आइटम बनाये था .. उसका क्या अभी भी लेता हैं उसकी .. बता न”

“हाँ भाई हु तोह आइटम हैं hi लेकिन आइटम अब ोुरानी हो गयी हैं .. नयी आइटम चाहिए यार उफ्फ्फ्फ़ लौड़ा तोह नयी छूट ढूंढ़ने लगा हैं.”

“तेरी तोह निकल पड़ेगी .. तू तोह इसको पता कर hi रहेगा .. फिर तेरे फौलादी लोडे के निचे पटक कर तू उसकी लेगा …”

“अफ़ज़ल वैसे मैडम हमारे साथ hi रह रही हैं ः.. इसलिए तोह वेस्ट कण्ट्रोल करवाना हैं आज ..”

“ओह तेरी सच हैं क्या सलीम भाई , अरे घर पर रहती हैं तोह अब ज़रूर जल्द से जल्द तेरे से छुड़ेगी ये मलाईदार माल”

“अफ़ज़ल ऐसी आइटम को पटना आसान नहीं हैं .. बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं , लेकिन हाँ यार एक बार पैट जाए तोह ऐसी औरतें तोह बड़ी मस्ती में चुदती हैं जब चाहो तब”

“अच्छा यह तेरे घर पर कैसर यह रही हैं और तेरे वहां हु ासकाममभी रहता हैं न , फिर कैसे?”

“अरे उसकी तोह अलग hi कहानी हैं लेकिन उससे तेरा क्या लेना देना, चल जूस लेकर जाते हैं.. यहाँ के कमीने सब उसे देखेंगे तोह लाइन बना कर घूरते रहेंगे उसे ..”

अफ़ज़ल मन में सोचते हुए ( उफ़ यह हरामी सलीम हैं साला बहुत लकी .. क्या जादू चलता हैं औरतों पर क्या पता .. साला बुद्धा होकर भी इतने औरतों को पटाया हैं और छोड़ा हैं, लेकिन यह सबसे से रापचिक छोड़ू माल हैं… इसको भी छोड़ेगा तोह सेल से क्लासेज लेने पड़ेंगे औरतों को पटाने के उफ्फ्फ)

अब दोनों उसके शॉप पहुँचते हैं और अफ़ज़ल रौशनी को जूस देता हैं ..

“रौशनी जी पुरे घर का करना हैं तोह 500 रा लूंगा .. पुरे ंगो के घरों के करने हैं तोह … 20 घरों के कुल मिलकर रस.9000.”

“अफ़ज़ल जी ोेहले आप सलीम जी के घर का कीजिये .. उसके दूंगी 500. उस काम को देख आगे के घरों के बारे में सोचूंगी.”

अफ़ज़ल सोचता हैं की काम मिले या न मिले थोड़ा वक़्त रौशनी के साथ बिताएगा तोह उसके बदन को निहारने का मौका मिलेगा … ऐसी मलाईदार महिला रोज़ रोज़ नहीं मिलता ..

“अच्छा मैडम ठीक हैं लेकिन आप काम देखोगी तोह सब घरों का कॉन्ट्रैक्ट आप हमें hi डौगी.”

“आज शाम को आ 4 बजे तब करिये तुम्हारा काम ठीक हैं अफ़ज़ल ..?”

“चलो ठीक हैं सलीम भाई..” फिर सब जुइ पिटे हैं इधर उधर की बातें लरते हैं . रौशनी टाइम देखती हैं .. अब उन्हें घर जाकर उसे लंच बनाना था असलम और सलीम के लिए.

“सलीम जी हमें जाना चाहिए , मुझे लंच बनाना हैं”

अफ़ज़ल मन में (उफ्फ्फ यह तोह इनके लिए लंच भी बनाएगी .. ये क्या हो रहा हैं .. ऐसी महिला उन बुद्धों के लिए लंच बनाएगी ..)

रौशनी बहार जाती हैं तोह सलीम अफ़ज़ल को देख आँख मात्रा हैं.

अब दोनों फिर से बस स्टैंड जाते हैं. इस बार दुपहर की वजह से थोड़ा काम भीड़ होने के कारन रौशनी को सीट मिल जाती है. सलीम उसके पीछे खड़ा रहता हैं.

विंडो सीट पर बैठी महिला ने विंडो ओपन और करि तब हवे जे झोके से रौशनी का पल्लू सरक गया … उस वजह से पीछे खड़े सलीम की नज़ारे जब निचे चली गयी तोह वह रौशनी की चूचियों की दरार डेल्ह पाया … उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हुआ … अब जिस तरह वह खड़ा था उसका लोढ़ा बिलकुल रौशनी के गलों के पास था .. रौशनी आगे देख रही थी इसीलिए उसे नहीं पता था की सलीम का पंत में उसका टाइट होता हुआ लोढ़ा अब उसके काफी करीब था ..

उसे यह भी नहीं पता चला की ऊपर से सलीम इससके गोरी गोरी मुलायम चूचियों के बीच के दरार को देख प् रहा था …





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सलीम उस नज़ारे को कई सेकंड एन्जॉय करने लगा ..

जब तक की रौशनी ने अपने पल्लू को फिर से एडजस्ट नहीं करि.

सलीम ला लोढ़ा तोह काफी टोघट हुआ था अब तक ..

अब एक स्टॉप पर रौशनी की बाजु में बैठी महिला उठा कर जाने लगी .. रौशनी साइड में सरक गयी विंडो सीट पर.. सलीम निचे बैठने hi वाला था की अचानक एक आदमी रौशनी की बगल वाली सीट में बैठ गया.

सलीम को ग़ुस्सा आया की वह बैठने hi वाला था की यह साला आदमी बैत गया.

रौशनी को भी एक अनजान मर्द के पास में बैठने से उनकंफर्टबले फीलिंग आयी..

वह ऊपर सलीम को देखि .. आँखों से इशारा करते हुए की वह छाती थिन्की सलीम बैठे इस आदमी की जगह पर..

रौशनी फिर उस आदमी से बोली की वह चाहती थी की सलीम जो उसके साथ था वह बैठ जाये.

उस आदमी ने उठने से इंकार किया..

सलीम फिर उस आदमी के कन्धों पर तप करा..

“भाईसाहब मैडम के साथ में आया हूँ .. तुम मुझे बैठने दो यहाँ .”

“ऐबी बुड्ढे तू खड़ा रह अब में बैठा हूँ न तेरे मैडम के साथ.”

भाईसाहब प्लीज उठिये मुझे वहां बैठने दो, मैडम ने आप से कहा था न.”

“अबे बुड्ढे नहीं उठूंगा .. अब तंग न कर.”

सलीम क ोटोः ग़ुस्सा आया “अबे लोदु तेरे को बोलै न की मैडम के साथ आया हूँ बैठने दो मुझे. चल उठ”

“अबे बुड्ढे औकात में रह .. ज्यादा मत उड़ .. में उठूंगा नहीं.”

“आ चूतिये बार बार बुद्धा मत बोल .. तेरे को दिखता हूँ बुद्धा होगा तेरा बाप .. अब उठ मैडम ने रिक्वेस्ट किट hi न … चल अब अच्छे से उठ जा और मुझे बैठने दे”

वह आदमी उठ कर सलीम का कालर ोाकड़ने लगा..

“कालर छोड़ चूतिये … तेरे को प्यार से बोलै तोह सुना नहीं .. फिर से बोलै तोह भी सुना नहीं .. फिस्शल न हो .. ज्यादा मत उड़ ..”

“अरे क्या हो रहा हैं यहाँ … कंडक्टर वहां आ गया”

“साहब देखो बैठा तहत ओह यह बुद्धा तंग करते रहा ..”

“कंडक्टर साहब देखो अब में मैडम के साथ आया हूँ , मैडम ने उसे रिक्वेस्ट किया की वह मुझे बैठने दे .. अब देखो इस उम्र में भी मुझे बैठने से इंकार कर रहा हैं.. आज कल के लौंडे , उनको बुज़ुर्गों से बात करने की तमीज नहीं हैं”

“अरे तू जवान हैं , इस बुज़ुर्ग को बैठने दे .. एक तोह उसके साथ आयी थी मैडम .. चल तू बाद में किसी और सीट में बैठ.. और यह उनका कालर चोर..”

उस आदमी ने कालर छोरा और कंडक्टर वहां से चला गया.

सलीम उस आदमी को घूरने लगा .. “चल अब जा नहीं तोह मेरे अंदर की बुराई न निकल .. बहुत तेरे जैसे लौंडो की पिटाई करा हूँ … अब जा ..”

रौशनी यह सब सन देख रही थी.. एक तरफ से वह सलीम के ऐसे बर्ताव से थोड़ी दरी हुयी थी .. लेकिन दूसरी तरफ वह सोचिन्की बुड्ढे होकर भी काफी स्ट्रांग और बोल्ड हैं सलीम… उसकी ख़ुशी के लिए झगड़ने पर भी आ सकते हैं … रौशनी को कही न कही यह बात इम्प्रेस करि.

अब दोनों बगल में बैठे हुए थे ..

सलीम का लोढ़ा अभी भी थोड़ा टाइट था .. अब रौशनी विंडो के बहार देखने लगी..

सलीम अब रौशनी के साइड में बैठा हुआ रौशनी की गोरी नाज़ुक बाँहों पर नज़र बीच बीच में डालते रहता..









“रौशनी जी … आप इतनी धुप में भी इतनी फ्रेश कैसी लगती हो … में तोह इस धुप में ढल जाता हु…”

“ऐसे कैच नहीं सलीम जी … बस अब शायद में मॉइस्चराइजर लगाती हूँ इसीलिए स्किन अभी भी इस धुप में भी ज्यादा ड्राई नहीं होतीहैं ..”

“रौशनी जी बुरा न मानिये लेकिन क्या में आपके हाथों की मुलायमता फील कर सकता हूँ ..?”

रौशनी इस रिक्वेस्ट से सलीम को देखती रही ..

“क्यों सलीम जी फील कर क्या मिलेगा आपको ः”

“बस ऐसे hi आपकी मुलायम त्वचा , मेरे इस काळा रफ़ त्वचा से तोह काफी अलग हैं न … सच आप बहुत hi अच्छी लगती हो इस साड़ी में … आपकी सुंदरता खिल उठ टी हैं.”

“ः सलीम जी आप भी न … अच्छा दो सेकंड टच कर सकते हो आप … वैसे आप मर्दो .. आपकी त्वचा तोह रफ़ एंड टफ चाहिए hi”

सलीम को अब रौशनी की बाँहों को चुने का सिग्नल मिल गया था .. वह हलके से उसके मुलायम बाँहों को टच करने लगा … उफ्फ्फ क्या फीलिंग थी .. उसका लोढ़ा अब झटके मारने लगा .. “उफ्फ्फ रौशनी जी इतनी मुलायम हो आप तोह … ववव यह मॉइस्चराइजर से ज्यादा आपकी नेचुरल त्वचा hi ऐसे हैं मुझे तोह लगता है ”





“सलीम जी हाँ अब औरत होकर हमारी त्वचा नटुरालय बहुत सॉफ्ट होती hi हैं”

“अच्छा फिर भी आपकी कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट हैं .. रौशनी जी सच कहता हूँ मेरी बीवी की भी इतनी मुलायम नहीं थी..”

कुछ सेकंड टच करने की बात हुयी थी लेकिन अब 2 मं हुए थे की सलीम ने रौशनी के बाँहों को अपने हाथों से hi फील करता .. निचे पंत में उसका लुंड झटके मारते रहा.. रौशनी को सलीम के टच से अंदर एक अच्छी फीलिंग महसूस होने लगी …”

उसकी नज़र अब निचे चली गयी तोह सीधे सलीम के पंत के ऊपर hi गयी .. वह अंदाज़ा लगा पायी की सलीम के वहां एक उभर बन गया था .. उफ्फ्फ्फ़ उसी के लुंड का उभर होने का एहसास होते hi रौशनी ने शर्मा कर बोली “बस सलीम जी बहुत फील करा आवे … प्लीज अब छोड़िये मेरी बाँहों को.”

“क्यों रौशनी जी आपको अच्छा नहीं लगा .. अभी तोह आप कुछ नहीं बोल रही थी अब अचानक”

प्लीज सलीम जी छोड़िये न .. प्लीज

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे .. और सलीम ने उसका हाथ चोर दिया..”

रौशनी फिर एक आखरी नज़र सलीम के उभर पर डाली और फिर शर्म से बहार देखने लगी ..

वहां सलीम को पता चला था की रौशनी ने उसके लोडे के उभर को देखि थी .. वह खुश था की धीरे धीरे रौशनी की नज़र उसने अपनी लोडे के वहां केंद्रित करि थी …

दोनों अपने स्टॉप पर पहुँच गए थे . रौशनी उतर गयी और सलीम उतरने hi वाला था की , जो आदमी , जिसके साथ झगड़ा हुआ था वह सलीम को देखने लगा .. और सलीम उसे .. कुछ पल में दोनों के चेहरे पर मुस्कान आयी ..

वह आदमी सलीम के पहचान का hi था .. वह जो हुआ था सब दोनों ने एक्टिंग किया था.. सलीम की चल थी … वह चाहता था की रौशनी देखे की सलीम उसके लिए लड़ाई कर सकता हैं .. उसके लिए एक स्टैंड ले सकता हैं..
 
सलीम जी अब मुझे खाना बनाना हैं .. में रसोई घर में हूँगी”

“हाँ जरूर रौशनी जी आप खाना बनाइये में भी थोड़ा बहार जाकर आता हूँ…”

अब सलीम चला गया बहार कही पर .. रौशनी खाना बनाना में लग गयी .. कुछ 20 मं बाद असलम घर पर आ गया.

“रुकसाना बेगम में आ गया हूँ .. कब तक खाना तैयार होगा”

रौशनी सुबह के इंसिडेंट से अभी भी असलम पर नाखुश थी इसीलिए वह कुछ नहीं बोली.

असलम रसोई घर में आ गया .. “रुकसाना बेगम अभी भी नाराज़ हो मुझे से .. उफ्फफ्फ्फ़ गलती माफ़ कीजिये बेगम.”

“डेल्हिये असलम जी आप बार बार ऐसी गलतियां कर माफ़ी न मांगे .. आप गलतियां hi न करो इससे बेहतर होगा”

“मुझे आपसे नहीं बात करनी .. आप जाइये ..”





“आखरी बार हैं रुकसाना बेगम , आखरी बार गलती करूँगा .. प्लीज इस बार माफ़ कीजिये …”

रौशनी जवाब नहीं देती बस खाना पकने में लग जाती हैं.

असलम को अब लगता हैं की सुबह की बात रौशनी जल्द से नहीं भूलेगी … वह कुछ सोचता हैं और फिर अपने घुटनो पर जाकर रौशनी को कहता हैं “ीा ऍम सॉरी मेरी रुकसाना बेगम , मुझे माफ़ कर दो , में आप से कभी ऐसे बिना बताइये कुछ नहीं करूँगा, इस बार मेरी बात मान लो”

रौशनी ऐसे असलम को देखती hi रहती हैं .. उफ्फ्फ अब यह क्या कर रहे हैं ..

“असलम जी आप यह क्या कर रहे हो . प्ल्ज़ उठिये …”

“नहीं रौशनी जी मेरी गलती की सजा हैं .. में नहीं उठूंगा .. प्लीज आप मुझे माफ़ कीजिये .. गलती दोहराऊंगा नहीं. “

“असलम जी प्लीज उठिये , मुझे खाना बनाना हैं , बस यह बचकाने हरकतें न करे आप”

“नहीं में नहीं उठूंगा .. मुझे माफ़ करो रुकसाना बेगम”

“अआप्को सजा hi चाहिए न ठीक हैं , ऐसे hi रहिये .. जब तक में खाना नहीं बनती हूँ तब तक आप रहिये ऐसे hi कोई प्रॉब्लम नहीं मुझे”

और रौशनी खाना बनाना में फिर से लग जाती हैं.

अब असलम वैसे hi घुटनो पर था .. अब हु क्या करेगा , रौशनी पर इस से कुछ फरक hi नहीं पड़ा ..

वह चुप चाप घुटनो पर रहा .. वहां रौशनी खाना बनती रही..

असलम ऐसे घुटनो पर था और उसे रौशनी की कमर दिखाई दी .. उसकी चुकनी गोरी कमर … वह उसकी कमर देखता रहा .. उफ्फ्फ क्या कमर थी .. रौशनी जी के बड़े सूचियां और गदरायी बदन पर उसके पतले कमर का तोह वह दीवाना बन चुक्का था .. वह चाहता था की वह कमर छुए और उसे कास कर दबोचे … रौशनी की कमर पर पसीने के कुछ बूँद दिख रहे थे … (अहह मन कर रहा हैं इसे चाट लूँ उफ्फ्फ क्या माल हैं यार …. आज चुम्मा भी लिया था उसके होठों पर .. उफ्फ्फ गुलाबी होठं हैं नाज़ुक से ममम)









कुछ 15 मं बाद अभी भी असलम घुटनो के बल था .. उसे देख रौशनी की थोड़ा बुरा लगा .. वह सच में वहां से उठ hi नहीं रहा था ..

“असलम जी आप को में नहीं माफ़ करने वाली .. आपको ऐसे hi रहना पड़ेगा …”

“ठीक हैं रुकसाना बेगम , अब गलती की थी तोह सज़्ज़ा भुगतूँगा .. “

रौशनी को अब बुरा लग रहा था … असलम ने गलती तोह की थी लेकिन उसके चेहरे को देख उसे लग रहा था की असलम सच में सॉरी थे … कुछ और 5 मं बाद रौशनी, असलम को देख बोली “असलम जी आप उठिये .. आपको माफ़ नहीं किया लेकिन आप पर ग़ुस्सा भी नहीं हूँ .. बस आप ऐसे फिर से ऐसी चीज़ें करोगे तोह फिर में चली जाउंगी ..

असलम बोलै “रुकसाना बेगम में फिर से नहीं करूँगा .. आपके पेर्मिशन बिना कुछ नहीं करूँगा”

“अच्छा ठीक हैं .. आप अब जाकर फ्रेश हो जाओ और फिर खाना परोसती हूँ .. वैसे आज 4 बजे एक पेस्ट कण्ट्रोल वाला आएगा और घर का पेस्ट कण्ट्रोल का काम करेगा ठीक हैं”

“ओह सच .. शुक्रिया रुकसाना बेगम , घर पर कितने दिनों से पेस्ट कण्ट्रोल करवाना था .. तुम बहुत अच्छी हो ..

“असलम जी जाओ फ्रेश हो जाओ खाना तैयार हैं परोसूँगी.

असलम चला जाता हैं .. रौशनी मन में सचति हुयी (लगता हैं असलम जी को पता चला की वह ऐसे चीज़ें नहीं कर सकते … लगता हैं अब उनका बर्ताव बेहतर होगा”

असलम फ्रेश होकर बहार आता हैं और रौशनी टेबल पर खाना परोस रही हैं .. सलीम अब तक नहीं आये हुए थे.

“रुकसाना बेगम बहुत भूक लगी हैं मुझे .. उफ्फ्फ्फ़ बहुत hi स्वादिस्ट खाना लगता हैं आज भी .. प्लीज तुम भी बैठो और साथ में खाना खाएंगे हम”

“लेकिन सलीम जी का क्या .. वह कब आएँगे”

असलम को थोड़ी सी जलन होते हुए “रुकसाना बेगम में हूँ न , हम दोनों खाना खाएंगे , सलीम आइए तब तुम फिरसे उन्हें परोसना .. मेरी बेगम मेरे साथ hi खाना खा लेना.

रौशनी चाहती थी की सलीम भी आये .. “असलम मियां आप शुरू करिये में रूकती हूँ उनके लिए”

“रुकसाना बेगम आप के साथ लंच करनी हैं , में भी रुकूंगा उसके लिए फिर”

दोनों रुकते हैं लेकिन 15 मं तक सलीम नहीं आता ..

“रुकसाना बेगम उन्हें लेट हो रहा होगा .. आप हमारे साथ लंच करिये न ..”

“ठीक हैं चलिए”

दोनों खाना ख़तम करते हैं .. उस दौरान सलीम भी आ जाते हैं .. फिर वह बैठ उसे रौशनी खाना परोसती हैं .. सब का खाना होते hi तीनो आराम करने कमरों में जाते हैं ..

अब शाम के 4 बज चुके हैं .. अफ़ज़ल और एक आदमी उनके वहां आता हैं और पेस्ट कण्ट्रोल का काम शुरू करते हैं ..

धीरे धीर सब घर का पेस्ट कण्ट्रोल होता हैं … फिर अफ़ज़ल बोलता हैं “हु कर्मा हैं न वहां थोड़ा और स्ट्रांग पेस्ट कण्ट्रोल करना पड़ा .. “

हु कमरा था जहाँ रौशनी सोइ थी रात में..

वहां पर आज का दिन वह स्मेल बहुत स्ट्रांग रहेगा इसलिए वहां आज रात कोई नहीं रह सकता .. कल सुबह से हु कमरे में रह सकोगे ..

(यह सब जान बुझ कर सलीम ने कहा था अफ़ज़ल को बोलने .. उस मदत के बदले वह उसे 500 रस देने वाला था)

रौशनी अब दुविधा में पद गयी .. अब अगर वहां हु नहीं सो पाएगी तोह फिर एक हिम कर्मा था सोन ेके लिए रात में .. अब वहां तोह सलीम और असलान दोनों सोते हैं .. अब क्या करे..

अफ़ज़ल वहां से चला जाता हैं …

रौशनी अब सलीम से कहती हैं “सलीम जी लेकिन वहां पर तोह में hi सोती हूँ , अब किऐसे करे .. सोन ेके लिए एक hi कर्मा हैं. “

रौशनी जी क्या करे , अफ़ज़ल ने hi बोलै हैं न आप के सोन ेके कमरे में आज रात कोई नहीं रह पाएगा … अब आपको तोह हमारे कमरे में hi सोना पड़ेगा .

“लेकिन कैसे … आप दोनों तोह उस एक बिस्तर पर सोते हो .. वहां कमरे में , में कहाँ सोऊंगी.”

असलम बोलै “रुकसाना बेगम आप और में सोएंगे न बिस्तर पर .. सलीम निचे सोएगा ..”

असलम मियां. आप तोह बात हो न करिये” रौशनी बोली. असलम को तीखी नज़र से देख.

सलीम बोलै “रौशनी जी ठीक हैं आप ऊपर सोइये और हम दोनों निचे सो जाएंगे”

“सलीम जी बहार हॉल में भी आप सो सकते हो न ..”

“रौशनी जी बहार बहुत मच्चर होते हैं . काट काट कर बदन लाल कर देंगे .. प्लीज हम निचे सोएंगे न आपको बिलकुल डिसट्रब नहीं करेंगे क्यों असलम”?”

“हाँ रुकसाना बेगम आप ऊपर सो जाइये में और सलीम निचे सो जाएंगे .. हम आपको कोई तकलीफ नहीं देंगे ..”

रौशनी कुछ सोचती हैं .. अच्छा ठीक हैं लेकिन असलम जी आप सो जाओ रात में तकलीफ न देना”

रुकसाना बेगम नहीं दूंगा , आपसे कहा न गलतियां नहीं करूँगा , आपके कहे बिना कुछ भी नहीं.”

फिर तैर हो जाता हैं की रौशनी उस कमरे में बिस्तर पर सोएगी और निचे दोनों .

सलीम अपने दोस्तों के साथ बहार गए थे .. जब से रौशनी आयी थी वह दारृ पिए नहीं थे .. उन्हें दारु पिलाने उसके दोस्त उसे बहार कही ले गए थे .. (यह सब रौशनी की नहीं पता था)

अब घर पर बस असलम और रौशनी hi थी. अब रौशनी खाना बनाए के लिए रसोई घर में चली गयी थी.

कुछ देर बाद असलम आये .. और वह सूधे जाकर ोीचे से रौशनी से चिपक गया “रुकसाना बेगम आज क्या हैं खाने में ?..

“असलम मियां आज में पुलाओ बना रही हूँ… आपको पुलाओ पसंद हैं न … उसके साथ में सब्ज़ी और चपाती बनाउंगी. ”

“वह बढ़िया रुकसाना बेगम” असलम के हाथ अब रौशनी की कमर पर थे .. “

“उफ़ असलम जी आप फिर से शुरू हुए … ममम छोड़िये न …”

“रुकसाना बेगम प्लीज हुग तोह करने दो न .. उतना तोह मेरा हक़ हैं न मेरी बेगम पर … बस हुग hi तोह हैं”

“अच्छा ठीक हैं …” रौशनी सोचती हैं 9 बस एक हुग से क्या होगा .. (उन्हें ऐसी चीजिएं करने दूंगी तोह शायद ज्यादा कुछ न करे .. )

असलम अब उसे कास कर पकडे हुए थे , रौशनी के चूतड़ अब असलम के झंघों पर ठीके हुए थे … असलम पीछे से और थोड़ा सा आगे दबाते हुए “रुकसाना बेगम वैसे तुम पुलाओ कितनी अच्छी बनती हो .. आज भी बड़ी स्वादिष्ट होगी ..”

“हाँ बनाउंगी … आपको अच्छी लगेगी …”

“रुकसाना बेगम वैसे एक बात कहु .. आप की सुगंध बहुत अच्छी हैं .. फूलों जैसी आपकी परफ्यूम बहुत hi अच्छी होगी.”

“शुक्रिया असलम जी .. “

रौशनी को असलम की गरम साँसे अपनी गर्दन पर महसूस होने लगी … “

“असलम तोह पीछे से उसकी खुशबु सिंह रहा था .. खूब सूंघते हुए उसका लोढ़ा टाइट होने लगा .. अब उसका लोढ़ा रौशनी की चूतड़ों पर टच करने लगा .. रौशनी को चुंबन मेहुस

“हाँ रुकसाना बेगम , ाचा बताये में कैसी मदत करू..”

“असलम जी मुझे खाना बनाने दीजिये न, बहुत टाइम हुआ हैं , जल्द से मुझे खाना बनाना दीजिये”

“उफ़ रुकसाना बेगम हर बार कुछ न कुछ आ hi जाता हैं हमारे ऐसे पलों के बीच …..” असलम एक आखिर बार रौशनी की कमर को मसलते हुए और अपने उभरते लोडे को रौशनी की चूतड़ों पर दबाते हुए उसे अलग हो जाता हैं .. उस आखरी दबाव से तोह रौशनी की अहह hi निकल जाती हैं …

रौशनी के बाल बिखरे हुए थे .. उसके माथे पर फ्लौर लगा हुआ था … कमर पर पसीना और उसकी बाँहों पर भी … असलम तोह रौशनी को ऐसे देख उसका लोढ़ा झटके मरने लगा .. उफ्फ्फ्फ़ ऐसी भी मस्त दिख रही थी रौशनी .. एक मुलायम नाज़ुक सी गोरी डॉल जैसे.









रुकसाना बेगम आप खाना बनाते वक़्त बेहद पसंद हो .. आप मेरा कितना ख्याल रखती हो. तुम दुनिया से सबसे खूबसूरत बेगम हो” ..

“असलम जी आप तोह बस मेरी कसीस भी छोटी चीज़ की भी तारीफ करते हो … इतना प्यार करते हो अपनी बेगम से”

“रुकसाना बेगम आप हो hi ऐसी , आप को जीतनेय टैरिफ दे उतने काम हैं”

और रही बात प्यार की , रुकसाना मेरी बेगम तुम प्यार करने डौगी तब न … प्यार करने डौगी तोह उफ्फ्फ्फ़ तुम मेरी hi हो जाओगी हमेशा के लिए …

“अच्छा ऐसे हैं क्या , देखते हैं आप कितना प्यार करोगे अपने बेगम के साथ.

“ओह रुकसाना बेगम तुम मुझे पूरी तरह से तुम्हारे साथ प्यार करने डौगी उफ्फ्फ , बाद में न नहीं कहो … में इतना प्यार करूँगा मेरी बेगुमसे .. उसे कास कर गले लगाऊंगा . किस्सेस भी दूंगा .. मेरी बेगम मेरी जान तुम मुझे होठों पर किस करोगी न ममम”

असलम जी फिर से किश वाली बात …”

“रुकसाना बेगम तुम चाहती हो में प्यार करू आपसे और आप हैं की होठों पर चूमने भी नहीं देती या डौगी .. ये तोह न इंसाफ़ी हैं”

रौशनी समझ गयी की असलम जी ने बातों बातों में उसे उलझाया था … बहुत स्मार्ट हैं असलम .. बहुत hi समेत .. यह सोचकर रौशनी मन में hi मुस्कुरायी …

“असलम जी आपसे तोह बातें करना hi … उफ्फ्फ्फ़ अब मुझे खाना बनाना हैं .. ..”

असलम का लोढ़ा काफी टाइट हो रहा था … उसे तोह रौशनी अपने पलग पर .. उसके बाँहों में चाहिए थी … वह रौशनी को अपना बनाना चाहता था , उसके गदरायी बदन के साथ खेलना चाहता था … रौशनी जब खाना बनाए में मग्न थी तब असलम ने अपने उभरते लोडे को पंत के ऊपर से खुजलाया .. (अह्ह्ह तेरी आदाओं से hi मेरा लोढ़ा खड़ा होयता हैं जानू , सच में इस लोडे से चुड़ोगी तोह उफ्फ्फ तेरे छूट का सारा रास निकल दूंगा मेरी जान ) असलम यही ख्यालों में खोया वहां से चलाया गया .

अब खाना बनाकर रौशनी ने उसे बुलाया … सलीम रात के वक़्त फिर से नहीं दिख रहे थे रौशनी को … अब असलम और रौशनी साथ खाना खाने लगे.

डिनर ख़तम होते hi असलम अपना हाथ धो कर वाशरूम चला गया और रौशनी वहां प्लेट सिंक में रख साफ़ करने लगी.. सब होने के बाद सलीम आ गया … वह पूरी तरह से दारु के नशे में था …

रौशनी सलीम को इतने दारु के नशे में धुत खुश नहीं थी

“सलीम जी आप इतनी दारु पि कर आये हो उफ्फ्फ “

“रौशनी जी पिने दो न , उससे hi रातों का माहौल बनता हैं … मेरिट ओह बेगम भी नहीं , न असलम जैसे मुझे आप में मेरी बेगम दिखती हैं .. मुझे पिने दो …”

“सलीम जी नहीं में घर पर हूँ न अब आप इतनी नहीं पि सकते .. हाँ थोड़ी सी चलेगी लेकिन देखो आपको अच्छी तरह से चलना भी नहीं आ रहा हैं ..”

“चोर न रौशनी .. तेरे को क्या में जब चाहे पिऊंगा …”

तब असलम आ जाता हैं .. “सलीम जी आप सच में बहुत पि रखे हो चलो अब कमरे में जाओ चलो .. आअज रात मेरी बेगम रुकसाना हमारे कमरे में रहने वाली हैं न आपको पता था फिर भी आप पि कर आये हो. “

“असलम रहने दे न , यह तेरी बेगम थोड़े hi हैं .. पता हैं न हम …. …. “ पहले की सलीम कुछ बोलता असलम उसे पकड़ कर कमरे में ले जाता हैं … वहां रौशनी सोच में पद गयी की यह सलीम जी क्या कहना चाहते थे .. लेकिन यह सोच कर की वह नशे में धुत बुदबुदा रहे होंगे वह उस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देती.

अज्ज रात को वह साड़ी में hi सोने वाली थी क्यूंकि उसे उन दोनों के कमरे में hi सोना था .. अब उसे थोड़ा डर था की सलीम ऐसे नशे में रात को कुछ कर बैठे तोह , ये जब मर्द इतना पिटे हैं उन्हें कुछ बौंडरीएस नहीं पता होती .. वैसे असलम जी का एक अच्छी बात हैं की वह यह दारु पिटे नहीं (असलम को सलीम जैसे दारु पिने की आदत वैसे नहीं थी .. थोड़ा एक दो पेग पिटे थे लेकिन कभी ऐसे इतनी पीकर नहीं आते थे या घर पर भी इतनी नहीं पिटे थे )

रौशनी अभी भी थोड़ी सेहमी थी की दारु के नशे में सलीम कुछ कर न बैठे इसलिए वह असलम के पास गयी.

“असलम जी मुझे थोड़ी सी टेंशन हैं , सलीम जी इतने पिए हैं की नियंत्रण खो कर कुछ उलटी सीधी हरकत करे तोह .. क्या करे फिर”

असलम का दिमाग दौड़ने लगता हैं ..”रुकसाना बेगम एक काम कर सकते हैं .. में आपके साथ बिस्तर पर सोऊंगा .. अगर सलीम नशे में उलटी सीधी हरकत करते हैं तोह में आपकी तुरंत मदत कर पाउँगा …”

रौशनी अब दुविधा में पड़ी थी .. वह कैसे असलम को अपने साथ सोने दे सकती हैं .. लेकिन अगर सलीम ने नशे में कुछ किया तोह फिर …??

“असलम जी आप कैसे सो सकते हैं ऊपर ेरे साथ बिस्तर में .. ?”

“नहीं असलम जी आप निचे hi सोइये .. अगर सलीम जी कुछ करते हैं तोह आपको कहूँगी वैसे भी अआप निचे hi सोये होंगे न “

“ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप ठीक समझे”

अब सलीम तोह तुरंत सो जाता हैं .. अब असलम और रौशनी भी सो जाते हैं.

अब रात के कुछ 2 बजे हुए थे … रौशनी की आँखें खुलती हैं .. उसे टॉयलेट जाना होता हैं .. वह आधे नींद में hi वहां तक जाती हैं .. अब टॉयलेट का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था … और अंदर असलम टॉयलेट कर रहा होता हैं.. रौशनी दरवाज़े को पुश करती हैं की एकदम से वह असलम को अंदर देखती हैं .. अब असलम टॉयलेट में पिशाब करने गया था और उसका मोटा लुंड उसके हाथ में लिए वह पिशाब कर रहा होता हैं ..

दरवाज़ा खुलते hi दोनों की नज़र एक दूसरे पर जाती हैं .. दोनों चँउके हुए एक दूसरे को देखते हैं .. तब रौशनी की नज़र निचे चली जाती हैं सीधे असलम के लुंड पर .. उसका आधा सख्त लुंड अभी भी 5 इन का लटक रहा था … रौशनी वही देखे जा रही हैं .. उसके मोठे लोडे को देखते रहती हैं …







 
अब ऐसी स्तिथि थिन्की असलम अपने लोडे को हाथ में लिए खड़ा था और रौशनी की नज़र असलम के लोडे पर थी …

रौशनी को ऐसे अपने लोडे को देखते हुए पाकर , असलम ला लोढ़ा और सख्त होने लगा था. रौशनी अब अपने आँखों के सामने उनके लुंड को और सख्त होते देख रही थी .. अब उसका लुंड पूरी ोुकत में आ चूका था .. पूरा 8 इन का मोटा लुंड था उसका ..

रौशनी की नज़र वहां से हैट hi नहीं रही थी … बहुत दिनों बाद लुंड देखा था उसने .. वह भी अब उसके सामने के मोटा कला लुंड था .. असलम का कट लुंड था इसलिए उसके लुंड का सर एक पहाड़ी ालो जैसे फुला हुआ था .. रौशनी को अपनी अंग में कुछ करंट जैसे महसूस हुआ .. फिर वह ऊपर असलम के तरफ देखि .. और फिर चेरा पीछे मोड़ लिया ..

अब बिना कुछ बोले असलम ने अपना लोढ़ा अपनी पंत में दाल वहां से निकल गया ..

रौशनी वही बहार कड़ी थी … असलम को जाते देख वह तुरंत टॉयलेट में चली गयी. उसे भी जोर से पिशाब लगी थी.

ोिशाब के बाद वह सोचने लगी (उफ़ अब में कैसे जाओ बहार , उनका लुंड का नज़ारा देखने के बाद उनसे कैसे बात कर पाऊँगी .. उफ्फ्फ कैसी मुसीबत हैं .. रौशनी के दिमाग में वह कल मोटा लुंड फिर से आ गया .. असलम इतने बुड्ढे होकर भी उनका इतना मोटा और बड़ा कैसे था … उफ्फफ्फ्फ़ इतना मोटा और बड़ा लोढ़ा उफ्फ्फ्फ़ …)

रौशनी की छूट में उस लोडे को देख कुछ होने लगा था .. ऐसे फौलादी लुंड देख की औरत की छूट में हलचल नहीं होगी .. अब रौशनी टॉयलेट के बहार गयी.

असलम बहार hi खड़ा था

“रुकसाना बेगम तुमने नॉक करना चाहिए था न .. ऐसे hi चली आयी अंदर.”

“असलम जी आपने भी तोग टॉयलेट का दरवज़ा लॉक नहीं करा था अंदर से …” रौशनी असलम को देख नहीं प् रही थी शर्म के मारे .. वह साइड में hi देख उनसे बात कर रही थी.”

“रुकसाना बेगम तुम मेरे तरफ देखो न .. आपने तोह बहुत बार देखा हैं मेरा लोढ़ा आज ऐसे क्यों”

(रौशनी मन में सोचती हुयी .. असलम जी में रौशनी हूँ तुम्हारी बेगम रुकसाना नहीं … )





“नहीं आपका लुंड .. मतलब आपका वह चीज़ उफ्फ्फ अस्काम जी आप अंदर से दरवाज़ा लॉक करना चाहिए थे”

“रुकसाना बेगम मुझे जोरों से पिशाब लगी थी … मुझे क्या पता आप को भी उसी समय पिशाब लगे गई ..”

अब ये पिशाब वाली बातों से तोह रौशनी और शर्मा रही थी .. लुंड .. पिषाब जैसी बातें वह एक काळा बुड्ढे के साथ कर रही थी …

“असलम जी बस अब मुझे सोने दीजिये कल सुबह जल्दी उठना हैं.”

“रुकसाना बेगम ठीक हैं .. कल बात करेंगे .. चलो अभी हम सो जाते हैं”

रौशनी चुप के से एक आखरी नज़र असलम के लुंड के वहां डालित हैं और फिर बिस्तर पर चली जाती हैं.

असलम सोचने लगा (अबे क बार तोह देख hi लिया हैं मेरे लोडे को रौशनी ने .. अब वह इमेज तोह फिट कर दी इसके दिमाग में .. अब आएगा मज़्ज़ा रौशनी मेरी जान)

असलम अपने लोडे को मसलते हुए रौशनी की तंग चूतड़ों को हिलते देखता हैं ..

रौशनी अपने आँखें बंद करती हैं तब उसे बस असलम के मोठे लुंड का दृश्य hi दिखने लगता हैं .. है राम ऐसे मोठे लुंड को तोह हु पहली बार देखि थी उफ्फ्फ. अनजाने में उस सपने के दौरान रौशनी का हाथ उसकी छूट की वहां जाता हैं और उसकी छूट को चुने लगती हैं …..

निचे सोया असलम भी सो नहीं प् रहा था .. उसे तोह बस रौशनी की नज़र उसके लोडे पर थी उसी की याद में था.. अपने लुंड को मसल रहा था …

अब कुछ मं बाद असलम जिसे अभी भी नींद नहीं आ रही थी वह उठ कर रौशनी को सोते देखने लगा .. उसके होठों पर , उसके बड़े चूतड़ों पर , उसके मुलायम से पीठ पर जो साड़ी के ब्लाउज से साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे .. और रष्णि की ज़ुल्फ़ों पर … (अहह मेरी रानी तेरी लूंगा तब बहुत मज़े करूँगा ममममम)

उसका कमीना दिमाग अब तेज़ी से चलने लगा .. वह उठ गया और धीमे पाँव से रौशनी के चेहरे तक जा खड़ा हुआ .. उसने अपनी पंत निचे करि और अपने मोठे लोडे को बहार निकल कर रौशनी के चेहरे के सामने हिलने लगा …. मन में (रौशनी मेरी जान ये ले मेरा लोढ़ा .. तेरे लिए hi तोह टाइट हो जाता हैं … उफ्फ्फ काश अभी इन होठों के बीच दाल मेरे लुंड को चुसवा लूँ ममममम..)

थोड़ा और बोल्ड होते हुए वह अपने अब सख्त लोडे को रौशनी के होठों के बिलकुल करीब लेकर गया …. इतना करीब की बस 1 इंच की दुरी hi थी … और उसके लुंड को हिलने लगा धीरे से … उसके लुंड से उसका प्रेकम निकलने लगा …. असलम अब और बोल्ड हो गया … वह अपने लोडे के प्रेकम को रौशनी के मुँह से टच करवाया … उसका थोड़ा प्रेकम जाकर रौशनी के होठों पर फ़ैल गया …

थोड़ी देर वैसे खड़े रह कर उसे महसूस हुआ की रौशनी कुछ हलचल करने वाली हैं .. झट से अपने पंत में अपने लोडे को दाल वह अपनी जगह पर जाकर लेट गया .. उसका दिल थोड़ा धधकने लगा .. उफ्फ्फ्फ़ अगर रौशनी जग जाती तोह फिर …..

वहां रौशनी नींद में थी लेकिन उसे महसूस हुआ की उसके होठों पर कुछ गीला सा हैं .. वह नींद में hi अपनी जीभ से उसे चाट ली .. (वह और कुछ नहीं बल्कि असलम के प्रेकम को चाट रही थी जी उसे पता नहीं था)… उस प्रेकम को उसने जीभ से पूरा चाट लिया था अनजाने में…

असलम उसकी हरकत से मन में मुस्कुरा रहा था .. (ममम मेरी जान तूने असलम के लोडे के निकलते प्रेकम को छठा लिया हैं .. अब देरी नहीं जब तुझे मेरे मोठे काळा लोडे से निकला हुआ पूरा सफ़ेद माल पिलाऊंगा ,

)





अब सुबह हो गयी .. रौशनी हमेशा की तरह 7 बजे hi उठ गयी थी … आज उसने पहले hi नहाने का डीडे किया था .. दोनों सलीम और असलम सोये थे .. असलम को देख उसे फिर से कल रात की इंसिडेंट याद आयी .. वह यह भी सोच रही थी की उसके मुँह से ये थोड़ी सी स्मेल क्यों आ रही हैं (ालसम के प्रेकम की स्मेल थी)

खैर फिर वह नहाने चली गयी … हीटर ों कर वह कुछ देर सोफे पर पानी को गरम होने तक बैठी रही. फिर 10 मं बाद वह अंदर गयी तोह उसने देखा की फिर से दोनों ने अपनी कच्छियों को वहां hi रखा था .. उसे देख लेकिन इस बार उस असलम के लोडे की याद आयी और सलीम के उस दिन के लुंड के उभर की .. उफ्फ्फ इसीलिए इनकी चड्डियाँ और बोसेर्स साइज में बड़े थे .. दोनों के बड़े मोठे लुंड थे उसमें .. ऐसे सोच रौशनी सिहर उठी .. )उफ्फ्फ यह क्या सोच रही हूँ में )..

फिर रौशनी नहाने लगी … उसकी आँखें बंद होती और असलम का मोटा कला लुंड उसके ख्यालों में आता .. (उफ्फ्फ ऐसे बुड्ढे की इतनी बड़ी कैसी हो सकती हैं .. इतना कला और इतना मोटा था उनका लुंड .. लुंड की अस पास काफी बाल भी थे .. उफ्फ्फ्फ़ )

रौशनी भी आख़िरकार औरत थी .. ऐसे मोठे लुंड को देख उसकी छूट में भी हलचल होने लगी … .. उसकी ऊँगली ढीरे से वहां चली गयी और उसकी क्लीट को चुने लगी … थोड़ी सी वहां पर वह अपनी उँगलियों से अपनी छूट की क्लीट दबाने लगी .. असलम का लुंड उसके दिमाग में घूम रहा था … कुछ सेकंड ऐसे कर एकदम से उसे एहसास हुआ की वह क्या कर रही थी ..(उफ़ रौशनी तू यह क्या कर रही हैं यह सब निकल अपने दिमाग से की)







अब नाहा कर वह अपने कमरे में गयी .. अब वहां पेस्ट कण्ट्रोल की स्मेल नहीं आ रही थी .. वह सोची की अब आज से तोह वह अकेले यहाँ सो सकेगी …

रौशनी ने आज स्लीवलेस ब्लाउज पहना .. पीछे से बस एक स्ट्राप से बंधा हुआ … अंदर कॉटन की ब्रा और पंतय … अपने बालों को वह ऊपर बाँध कर फिर रसोई घर में चली गयी.

रौशनी नाश्ता बना hi रही थी की पीछे से असलम ने उसे जकड लिया “गुड मॉर्निंग रुकसाना बेगम … कल रात कैसे कटी ….”

रौशनी मन में सोचते हुए (अरे कल तोह आपका लुंड देखा था .. उफ्फ्फ और पूछ रहे हैं कैसी कटी रात )

“असलम जी आपको पता हैं न कल रात क्या हुआ ,….”

“रुकसाना बेगम अरे उसे भूल भी जाओ .. गलती हुयी थी .. अब कहाँ उस पर इतना सोच रही हो .. क्यों राटा को उसके बारे में तुम सोच रही थी क्या?”

“नहीं नहीं ऐसे कुछ नहीं बस … आप प्लीज मुझे छोड़िये ….”

“अरे रुकसाना बेगम सुबह सुबह प्यार करने दो न …” पीछे से असलम अपने हिप्स को आगे दबाकर अपने लोडे को रौशनी की चूतड़ों पर दबाता हैं..”

“असलम जी यह क्या कर रहे हो छोड़िये न .. प्लीज ..”

असलम का लोढ़ा उसकी चटादो पर दबकर सख्त होने लगा … उसका लुंड एक झटका मार सीधे रौशनी की चूतड़ों से टकराया ..









“आउच .. असलम जी आपका हु पीछे .. उफ्फ्फ प्लीज आप जाइये न … छोड़िये मुझे …”

असलम अब रुकने नहीं वाला था वह काफी हॉर्नी था कल रात के इंसिडेंट से और उसने जो अपने प्रेकम को रौशनी की होठों पर लगाया था उससे ..वह और एक बार रौशनी को दबोच कर अपने सख्त लोडे को फिर से उसकी चूतड़ों पर दबाया…

पहले भी असलम के लुंड का चुंबन वह महसूस करि थी लेकिन अब जब उसे पता चला था की उसका लुंड इतना कला और मोटा हैं .. अब उसे उस चुंबन से और भी शर्म आने लगी थी …. इतना मोटा कला लोढ़ा उसकी चूतड़ों पर डाब रहा था .. बिना उसके जाने उसकी छूट में भी हलचल होने लगी थी ..

“मेरी बेगम .. मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ क्या बदन हैं तुम्हारा … मममम मन करता हैं ऐसे hi लपेटे राहु ममम”

“असलम जी प्लीज हटिये न .. आप का हु पीछे से डाब रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ प्लीज हटिये …”

“अरे रुकसाना बेगम क्या डाब रहा हैं खुल कर बताओ न मेरी जान”

“असलम जी आपका .. हु आपका …. अप्पके लुंड असलम जी वह डाब रहा हैं पीछे से प्लीज हटिये उनकंफर्टबले फील हो रहा हैं ..”

असलम आज तोह इसे जितना हो सके उतना खींचने वाला था .. आज वह रौशनी की सुनने नहीं वाला था ..

“ारीय रुकसाना बेगम तुम जैसी जान होगी तोह किसका नहीं खड़ा होगा लोढ़ा .. मममम क्या चूतड़ हैं तेरी मममम, रहने दो न मज़्ज़ा आ रहा हैं उफ्फ्फ क्या मस्त हो तुम उफ्फ्फ्फ़”

रौशनी ने अपने दम से असलम से खुद को चुरा ली … फिर असलम को देख उसे डाटने लगी “देखिये असलम जी आप ऐसे नहीं कर सकते .. आप… रौशनी की नज़रें बात करते करते असलम की बी सख्त लोडे पर जाता हाँ .. उफ्फ्फ्फ़ उसे उस काळा लोडे का उभर इतना बड़ा सा … मममम

“रुकसाना बेगम क्या देख रही हो , लगता हैं बहुत पसंद आने लगा हैं मेरा लोढ़ा … तेरा hi तोह हैं न तू hi मेरी बेगम हैं ..”

“असलम जी ऐसी बातें न करिये .. आपको पता हैं न … हमनें कल बात किट hi …”

“कौनसी बात .. मुझे कुछ याद नहीं . रुकसाना बेगम तुम मेरी हो … ऐसे चीज़ों पर इतना ग़ुस्सा न करो .. बस हुग तोह कुया था और क्या .. अब निचे मेरा लोढ़ा टाइट हुआ तोह में क्या करू … तुम हो hi इतनी हॉट और हुस्न की पारी जैसे ..”

रौशनी फिर से असलम को देखती हैं “असलम जी ऐसे करते रहोगे तोह में जाउंगी “

“अच्छा चली जाना … पहले भी चोर के गयी हो .. अब फिर से चोर कर जाओ मुझे … मेरी किस्मत hi ख़राब हैं .. क्या करे मेरी बेगम दो बार मुझे चोर कर चली जाएगी …” असलम फिर वहां से चला जाता हैं … और रौशनी वही रसोई घर में कड़ी उसे जाते देखती हैं जाते हुए.

रौशनी को समझ नहीं आ रहा था की अब हु क्या करे … कुछ सेकंड बाद वह फिर से नाश्ता बनाना में लग गयी और नाश्ता टेबल पर रख दोनों को नाश्ता करने बुलाई.

कुछ देर बाद पहले सलीम आये ..

“रौशनी जी माफ़ी चाहता हूँ , कल थोड़ा ज्यादा hi पि ली थी मैंने …. आपको ज्यादा तकलीफ नहीं दी न .. ी ऍम सॉरी”

“सलीम जी आपके ऐसे पीना अच्छा नहीं हैं सेहत के लिए .. आप को दारू काम hi करनी होगी .. और अगर करनी हैं तोह मुझे बता कर जाओ .. हु आपके दोस्त बस आपको पिलाने ले जाते हैं .. ऐसे दोस्त अचे नहीं होते हैं.”

“रौशनी जी अब क्या करे … आदत सी हो गयी हैं .. उसे बंद एक ऍम करना भी काफी मुश्किल हैं ..”

“सलीम जी देखते हैं आपकी मदत करुँगी में , अब आप प्लीज नाश्ता करिये मुझे अब ंगो जाना हैं .. 4 दिन में इवेंट हैं .. तैयारी बहुत करनी हैं …”

“रौशनी जी आज आप तोह जलवा लग रही हो … सच में आज सबसे खूबसूरत लग रही हो तुम .. कोई देखेगा आपका दीवाना होगा …”

“सलीम जी बस कीजिये .. आप इतने टैरिफ करते हो .. शर्मा देते हो कभी कभी .. चलो नाश्ता करिये मुझे जाना हैं.”

सलीम रौशनी की गदरायी बदन को देखते रहता हैं , रौशनी मुद कर जाने लगती हैं तब वह उसके हिलते चूतड़ों को देखे जाता हैं .. आज उसने अपने बालों को ऊपर बंधा था इसलिए उसकी पूरी गोरी मखमली पीठ दिख रही थी .. ऐसे नज़ारे से तोह उसका लोढ़ा बहुत टाइट होने लगा था .. (रौशनी मेरी कब बनोगी जान … तुझे देख हमेशा लोढ़ा टाइट होता हैं … जल्द से इस लोडे का दीवाना बनाऊंगा तुझे ममम)













रौशनी अब काम पर लग जाती हैं , उसे बहुत काम था आज .. इवेंट भी 4 दिन में hi आने वाला था .. अब उसे इस इवेंट के लिए असलम की मदत भी लेनी थी लेकिन कल रात और आज सुबह के बाद वह कैसे उनके साथ इस इवेंट का डिस्कशन करेगी .. उन्हें देल्हती हैं तोह उनके मोठे लुंड का hi दृश्य उसके नज़रों के सामने आता हैं .. उफ्फफ्फ्फ़ ..

आअज रौशनी को चार बजे इवेंट के स्पॉन्सरशिप के लिए एक कंपनी जाना था … वह एक रिक्शा पकड़ कर वहां चली गयी .. मीटिंग अच्छी हुयी और वहां से वह निकलने वाली थी की उसने रास्ते के बिलकुल सामने एक जाना पहचाना दृश्य देखा …

वह और कोई नहीं बल्कि रिक्शा वाले रमेश थे … रौशनी उन्हें देख खुश हुयी .. आखिर में इतने दिनों बाद वह दिखे थे …

रौशनी रोड क्रॉस करके उस रिक्शा स्टैंड चली गयी ..

पीछे से रमेश के कन्धों पर तप करते हुए “रमेश जी बहुत दिनों बाद …”

रमेश भी रौशनी को देख बहुत खुश होता हैं … “रौशनी जी कैसी हो आप .. हाँ बहुत दिन हो गए मिले हुए”

“रमेश जी अब आप hi गायब हुए थे .. उस दिन बाद दो दिन आपका सुबह इंतेज़्ज़र करि थी लेकिन आप आये नहीं “

“रौशनी जी उस शाम के बाद में आपसे कैसे मिलु बात करू सोचते रहा .. कैसे आपको अपना चेहरा दिखाऊ .. हमने जो किया हु गलत था .. मेरी hi गलती थी..”

“नहीं रमेश जी में आप पर इल्ज़ाम कभी नहीं दी .. उस शाम को जो कुछ हुआ मैंने कहा था की एक गलती मान कर चैलेंज”

“रौशनी जी आप बहुत अच्छे साफ़ दिल की हो .. सच कहु तोह उन दो दिनों बाद में फिर से आपके सोसाइटी के बहार के स्टैंड पर आया था .. लेकिन आप hi थी की दो दिन आयी hi नहीं .. ंगो के वहां भी आया था लेकिन आप आयी नहीं .. अंदर ंगो में भी एंट्री नहीं दे रहे थे इसलिए मुझे लगा आप भी नाराज़ हो.”

“नहीं हु ंगो में बहुत काम था तोह अब थोड़े दिन में वही रहूंगी , वहां एक घर में रह रही हूँ … बस वहां का काम ख़तम होते hi घर वापस जाउंगी … (रौशनी ने बाकी के कुछ डिटेल्स नहीं दिए की वह किसके साथ रह रही थी)

“ओह अच्छा फिर तोह और दिन मुलाक़ात नहीं होगी … हम्म वैसे अभी आपको चोर दू ंगो”

“हाँ रमेश जी ज़रूर”

रौशनी रिक्शा में बैठ रही थी .. रमेश की नज़र उसकी मुलायम से पीठ पर थी (उफ्फ्फ बहुत मिस किया तुम्हे रौशनी … तुम्हारे इस गदरायी बदन और गोरी सी त्वचा को … अब तोह तुझे कही नहीं जाने दूंगा ..)











रौशनी , रमेश से मिल सच में खुश थी … रमेश जी बहुत अच्छे हैं .. उस दिन जॉब hi हुआ उसपर उन्हें बहुत पछतावा लग रहा हैं .. उनसे अच्छी दोस्ती बानी हैं..

“रौशनी जी एक बात कहु .. “

“हाँ कहिये रमेश जी”

‘”रौशनी जी मैंने आपको बहुत मिस किया .. आप नहीं थे तोह ऐसे लग रहा था कुछ खो चुक्का हूँ में …”

“रमेश जी यह मेरा काम हुआ इस हफ्ते फिर रोज़ ंगो आप hi आओगे मुझे ड्राप करने ठीक हैं .. आप अब अच्छे दोस्त बन चुके हो..”

“शुक्रिया रौशनी जी , हाँ में आप को कभी नहीं छोड़ूंगा .. मतलब आप की सवारी में हमेशा हजार रहूँगा .. वैसे रौशनी जी अब आप और हम दोस्त बन hi गए हो तोह आज क्या आप शाम को मेरे साथ आओगे , यहाँ पास में hi एक गार्डन हैं अभी एक महीने पहले ओपन हुयी हैं, बहुत खूबसूरत हैं , में चाहता हूँ आपको वहां ले चालू.. प्लीज आइये”

“रमेश जी पता नहीं आज कैसे .. आज थोड़ा काम था … सोच कर बताउंगी …”

“ठीक हैं मैडम जैसे आप कहे”

रौशनी सफर में सोचने लगती हैं ( कल रात को और आज सुबह जॉब hi हुआ .. उसे वह आज असलम से आँखें मिला hi नहीं पाएगी … आज उस सब से ब्रेक लेना चाहिए .. क्यों न रमेश जी के साथ वह गार्डन चली जाऊ .. थोड़ी आउटिंग होगी , वैसे भी मुझे फूल और ग्रीनरी बहुत hi पसंद हैं .. रोनित तोह कभी ले hi नहीं जाते ऐसी जगहों पर.)

“रमेश जी ठीक हैं में पूरी गारंटी नहीं दे पाऊँगी लेकिन में कोशिश जरूर करुँगी आपके साथ उस गार्डन आने की”

“ओह बेहत शुक्रिया रौशनी जी .. में आपका इंतेज़्ज़र करूँगा 5.30 बजे .. बस 1-2 घंटों में आपको फिर से ड्राप करूँगा…” (है मेरी रानी आज तू सैर करेगी गार्डन में मेरे साथ … तेरे कंपनी में 2 घटने बिताऊंगा .. मेरी जान)

वह अपने लुंड को दबाते हुए शाम के बारे में सोचने लगा ….

वहां रौशनी भी खुश थी की वह आज थोड़ा गार्डन की फूलों और ग्रीनरी की सैर करेगी. उसे नहीं पता था की रमेश वहां इस एक डेट सम्जह्कर प्लानिंग कर रहा था .

रौशनी अब ंगो पहुँच गयी.

“रौशनी जी आपका में इंतेज़्ज़र करूँगा 5.30 बजे यहाँ .. प्लीज आप आइये.”

“रमेश जी बिलकुल में कोशिश करुँगी hi यहाँ आने की,”

रौशनी ंगो के अंदर चली जाती हैं और रमेश अपने रस्ते निकल जाता हैं.

रौशनी ंगो में काम ख़तम कर असलम और सलीम के घर जाती हैं …

असलम जी , सलीम जी कहाँ हो आप दोनों …. रौशनी वहां आवाज़ लगाती रही

लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा था .. वहां कोई था hi नहीं. दोनों असलम और सलीम गए थे कही बहार … रौशनी अपने कमरे में जाकर थोड़ी फ्रेश हुयी .. अपने बाल कोंब किये और उन्हें खुल चोर दिया .. थोड़ी मेक उप और हलकी सी लिपस्टिक लगा कर वह निकल पड़ी रमेश से मिलने. रौशनी खुश थी की रमेश फिर से मिले थे और वह आज एक गार्डन की सैर करेगी थोड़ा सा नेचर में रहेगी तोह उससे अच्छा लगेगा.

ंगो के बहार टाइम अनुसार रमेश वहां रिक्शा लिए खड़ा था .. रौशनी को आते देख उसका लुंड टाइट होने लगा … उफ्फ्फ सच में ऐसी माल उसकी दोस्त बनेगी उसे सपने में भी नहीं सोचा था.. दोस्त से उस तोह रौशनी को अपनी प्रेमिका बनाना था. रौशनी की मटकती चल देख, उसके गुलाबी होठों पर मुस्कान , गोरी त्वचा को देख रमेश का लुंड उसकी पंत में झटके मारने लगा था ..( उफ्फ्फ क्या खूबसूरती की बाला हैं रौशनी …. )









“Hi रमेश जी आप टाइम पर आये “

“आप भी तोह टाइम पर आयी हो रौशनी जी , आपने इस बुड्ढे को खुश करा हैं”

“उफ़ रमेश जी आप खुद को बुड्ढे न बुलाओ .. अभी भी आप जवान हो ः”

“रौशनी जी आप हमसे मज़्ज़ाक़ कर रही हो या सच में तारीफ… “

“रमेश जी मज़्ज़ाक़ नहीं कर रही हूँ .. आप ऐसे न सोचिये “

“रौशनी जी जैसे आप कहे .. अब चले गार्डन “

“हाँ रमेश जी चलिए .. दिखाए इस गार्डन को जिसके बारे में आप टैरिफ कर रहे थे. “

“हाँ जरूर वैसे रौशनी जी आप आओगी तोह उस गार्डन में और चार चाँद लग जाएंगे .. आप hi हो फूल जैसी हुस्न की पारी … “

“उफ़ रमेश जी आप भी न … थैंक्स .. आपकी तारीफ सुन अच्छा लगता हैं .. दिल से आती हैं आपकी तारीफ.”

“रौशनी जी हम झूट कभी नहीं बोलते हैं .. जो हैं वही कहते हैं .. अब्चलिये नहीं तोह अँधेरा हो जाएगा ..”

“हाँ रमेश जी चलिए ..”

दोनों रिक्शा में बैठ वहां निकल पड़ते हैं … गार्डन ंगो से दुरी पर था कुछ 30 मं …

रमेश जी आप को भी गार्डन्स .. मतलब बाग़ बहुत पसंद हैं ?”

(रौशनी जी बाग़ तोह पसंद नहीं लेकिन आप बेहत पसंद हो … आपको वहां इसीलिए ले जा रहा हूँ ताकि कुछ समय बितौ आपके साथ .. वैसे भी आपको पता नहीं वहां काफी कपल्स के लिए मशहूर हैं)

“रौशनी जी हाँ अच्छे लगते हैं मुझे भी , आप जैसे ोयार नहीं हैं उनसे लेकिन मुझे अच्छे लगते हैं”

“रमेश जी आपकी पसदं मेरे से थोड़ी तोह मिलती हैं.”

(रौशनी जी मुझे तोह आपका बदन , आपके होठं, कमर, गोरी त्वचा, बाहें, चूतड़ , चूचियां सब पसंद हैं .. आप भी मेरे लुंड को पसंद करोगी एक दिन )

“हाँ अच्छी बात हैं न”

अब ऐसे बातें करते हुए वह गार्डन पहुँच गए …

रौशनी अब रिक्शा से उतर गयी … रमेश रिक्शा को स्टैंड पर लगा कर रौशनी के पास आ गए .. अब दोनों गार्डन के अंदर जाने लगे..

बहार के सब उन दोनों को उस गार्डन में जाते हुए देख रहे थे .. वहां काफी कपल्स थे .. ऐसे बुड्ढे के साथ इतनी खूबसूरत महिला इस गार्डन में कैसे जा रही हैं सब सोचते रहे .. क्या दोनों कपल्स हैं उफ्फ्फ आज कल कुछ भी होता हैं”

रौशनी भी देख रही थी की लोग उन्हें घूरे जा रहे थे .. और काफी कपल्स भी थे वहां बहार ..

अब अंदर गार्डन तोह बहुत खूबसूरत था .. नया गार्डन था इसीलिए सब नया था .. फूलों से रंगीन थी गार्डन और पेड़ पौधों से भरपूर.. वहां के आस पास एक छोटा सा जॉगिंग ट्रैक था .. गार्डन के बीच और एक पत्थरों का वाकिंग ट्रैक भी था .. उस ट्रैक के साइड में बैठने के लिए जगह थी .. वहां पर सब कपल्स बैठे हुए थे … वह उस गार्डन के बहुत पेड़ पौधों हैवी इलाके में था और वहां अँधेरा सात है .. रौशनी पहले तोह कुछ देख नहीं पायी अंदर क्या हैं,..

अब गार्डन की एंट्री के लिए रस 1 देना था … रमेश ने दो सिक्के निकले और वहां के एंट्री पर दिए ..

“दो पासेज देना , मेरे लिए और मैडम के लिए”

वह आदमी दोनों को देखता रहा .. एक काळा बुड्ढे के साथ वह गोरी सी गदरायी बदन वाली माल क्या कर रही थी वह सोचने लगा .. साला बुद्धा लकी हैं ऐसी मम के साथ आया हैं.. दोनों में कुछ चक्कर तोह नहीं .. वह आदमी रमेश को देख रहा था ..

“देख क्या रहे हो … मेरी दोस्त हैं मेरी आइटम .. इतना मत घर उसे … च लैब पासेज दे और हमें अंदर जाने दो. “

वह आदमी पासेज दे दिया रमेश को और दोनों रमेश और रौशनी गार्डन के और अंदर चले गए.

“रौशनी जी कैसी हैं गार्डन .. जैसे तारीफ करि थी वैसे hi हैं न”

“हाँ रमेश जी बहुत hi मस्त गार्डन हैं .. एकदम मस्त. आप सच कह रहे थे”

‘रौशनी जी बोलै थान ा में झूट नहीं बोलता .. “

“हाँ रमेश जी .. चलो थोड़ा घूमते हैं”

रमेश और रौशनी अनादर षाले रहे साइड के ट्रैक पर … रौशनी इधर उधर देखि तोह पायी की काफी सारे कपल्स आये थे यहाँ … कोई कोई बीच के रस्ते के साइड में जो बैठने की जगह थी वहां बैठे थे .. एकदम पास में .. कोई लड़की अपने लवर के कन्धों पर सर रखे हुए , कोई कोई हाथों को पकड़े हुए … लगता था कपल्स hi यहाँ आते थे .

रौशनी बोली “रमेश जी यहाँ तोह कपल्स हो ज्यादा आते हैं …”

“ओह हाँ में भी देख रहा हूँ … कपल्स का पार्क लगता हैं .”

“हाँ रमेश जी “

अब थोड़ी और दूर चलते हुए रौशनी ने देखा की एक कपल तोह किश कर रहे थे … उफ्फ्फ्फ़ ये दोनों तोह किश कर रहे हैं…. फिर और एक कपल था यह तोह और भी गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. उन्हें देख तोह रौशनी शर्मा hi गयी … अब वह रमेश जी से कैसे कहती की एक कपल वहां पर चुम्मा छाती कर रहा था…

(रमेश को तोह सब पता था … वह यहाँ पहले भी आ चूका था , वह जो दो दिन रौशनी को स्टैंड पर नहीं देखा था यह एक्चुअली अपनी दूसरी जवान पत्नी को शहर लेन गया था .. वह अभी कल अपने बीवी को वापस गाँव चोर कर hi आया था ..उसने अपनी बीवी को यहाँ लाया था .. उससे बहुत मस्ती करि थी , चूमा था .. )

“रौशनी जी मुझे नहीं पता था .. मुझे लगा पार्क हैं वहां फॅमिली भी होंगे ..”

“कोई बात नहीं रमेश जी , वैसे गार्डन हैं बहुत hi सुन्दर .. देखो हु जस्मिने के फूल कैसे हैं …”

रौशनी वहां जाती हैं .. रमेश जी वह फूलों तक पहुँच नहीं प् रहे हूँ आप डोज मेरे लिए वहां से जस्मिने के फूल.”







“जरूर रौशनी जी .. और रमेश फूलों को निकलकर रौशनी को देता हैं … “रौशनी जी क्या आप इस दोस्त के लिए एक मार करोगी ..”

रौशनी सेवाओं के एक्सप्रेशंस से रमेश को देखती हैं.

“अप्प एक फूल अपने बलोंग में लगाओ न …. बहुत अच्छी लगेगी जस्मिने के फूल आप पर.”

रौशनी मुस्कुराती हुयी “उफ़ रमेश जी इतनी सी बात , लो दीजिये लगाती हूँ.”

“रौशनी जी मुझे लगनी हैं आपके बालों पर”

रौशनी मुस्कुराती हैं , बालों को बांधती हैं ऊपर …. “अच्छा रमेश जी लगाइये आप …”

रमेश फूलों को लगाने अपने हाथों के रौशनी की रेशमी बालों को छू लेता हैं .. और आराम से फूलों को वहां लगता हैं …

“रौशनी जी आप इन फूलों में और खिल रही हो …”

“शुर्किया रमेश जी.”

“कुछ और फूल देखने जाते हैं रौशनी जी ,,, चलिए”

रमेश अब बिना रौशनी को बोले उसके हाथों को पकड़ लेता हैं … और उसे आगे ले जाता हैं .. रौशनी बस रमेश को फॉलो करती हैं …

“उफ़ रमेश जी … “

“क्या हुआ रौशनी जी”

रौशनी कुछ नहीं बोलती बस हाथों में हाथ दिए रमेश के साथ चलती रहती हैं .. अब हाथों में हाथ डेल षाले देख सब लोगों को लगता हैं सच में यह कपल hi हैं .. रौशनी जैसी खूबसूरत , जवान , गोरी महिला उस काळा बुड्ढे मर्द के साथ …

रौशनी को न जाने क्यों रमेश का ऐसे उसके हाथों को पकडे रखना पसंद आता हैं … रमेश के हतः काफी रफ़ थे और उसके इतने मुलायम …

रमेश का लुंड तोह रौशनी के हाथों के स्पर्श से hi झटके मारने लगता हैं … रौशनी की ख़ामोशी का मतलब उसे इस बात से ऐतराज़ नहीं था .. रमेश फिर और कास कर उसके हाथों को पकड़ लेता हैं .. अब जॉगिंग ट्रैक पर एक दो लोग जॉगिंग भी कर रहे थे … अब ट्रैक इतना बड़ा तोह नहीं था .. कभी कबर रौशनी उन लोगों को साइड देने रमेश के और करीब जाती थी … रमेश भी इसका फायदा उठाते उसके और करीब जाते रहता हैं … दोनों काफी पास रह कर चल रहे थे .. रौशनी तोह बस साइड में सब कपल्स को मस्तियाँ करते देख शर्मा रही थी .. वह एक कपल्स के गार्डन में आयी थी .. अपने पति के साथ नहीं बल्कि एक रिक्शा ड्राइवर बुड्ढे के साथ …

“रौशनी जी देखिये वह फूल इतना अच्छा हैं .. बहुत मस्त हैं उसे देखने जाएं.”

अब वह फूल उस एरिया में था जहाँ कपल्स बैठे थे ..

“रमेश जी वहां तोह सब कपल्स hi हैं, नहीं वहां नहीं जाएंगे”

“रौशनी जी हम भी तोह कपल hi हैं और रौशनी को देख उसने आंक मारी.

“रैश जी आप भी न .. धत .. हम कपल कैसे उफ्फ्फ….”

“रौशनी जी दो लोग साथ होते हैं उन्हें कपल hi कहते हैं न , न की सिंगल ः …”

“रमेश जी कपल का मतलब वह नहीं हैं उफ्फ्फ्फ़”

रौशनी जी आप hi बताइये कपल्स किसे बुलाते हैं”

रौशनी शर्मा रही थी .. “उफ्फ्फ रमेश जी कैसे सवाल कर रहे हो आप. कपल्स उनको बुलाते हैं हैं जो लवर्स होते हैं.. जो एक दूसरे के करीब होते हैं उन्हें .”

“रौशनी जी ये लवर्स क्या होता हैं , इंग्लिश इतनी नहीं समझ आती हमें”

”उफ्फ्फ रमेश जी …. लवर्स मतलब … प्रेमिका और प्रेमी .. जो एक दूसरे से प्यार करते हैं हु …”

“अच्छा ऐसे हैं कपल्स का मतलब और रमेश रौशनी के नाज़ुक हाथों को अपने हाथों में दबाता हैं .. वैसे वहां जाने में क्या बुराई हैं बस फूल देखने hi जा रहे हैं न .. मुझे आपको वह फूल देने हैं .”

“रमेश जी प्लीज “

रौशनी जी आपने हमें दोस्त मन हैं न .. दोस्त की बात को ना मत कहो .. बस 5 मं वहां जाएंगे आप फूल देख लो और उसे निकल कर में aapki]o दूंगा बस”

“अच्छा ठीक हैं रमेश जी चलिए”

दोनों वहां जाते हैं .. अब गार्डन में थोड़ा और अँधेरा छाया हुआ था, फूलों के पास , वहां एक कपल बैठे हैं वह एक दूसरे को जोरों से छुमने लगे जैसे hi रौशनी और रमेश उनके करीब आये .. उन्हें चूमते देख रौशनी तोह पूरी तरह से शर्मायी .. रमेश उन्हें देख मुस्कुराया … उफ्फ्फ सही टाइम पर इन प्रेमियों ने एक दूसरे को चूमा हैं … काश एक दिन ऐसे रौशनी को बाँहों में भर जोरों से चुम लूंण.. वह देखता हैं रौशनी शर्म के मारे निचे देख रही हैं ..

“रौशनी जी क्या हुआ , अरे यह कपल्स हैं न अब यहाँ नहीं करेंगे कपल्स पार्क में मस्ती तोह कहाँ करेंगे .. बताइये आप.”

रौशनी कुछ नहीं बोलती … माहौल सच में काफी गरम हो रहा था .. वह कपल्स तोह एक दूसरे को चूमते hi रहे एकदम फ्रेंच किसिंग … रमेश का लुंड टाइट होने लगा … वहां रौशनी उन्हें देख उस शाम के रमेश और उसके चुम्मे के बारे में सोचने लगी … (उफ्फ्फ उस दिन अगर कण्ट्रोल नहीं करते तोह रमेश जी भी मुझे ऐसे hi चूमते .. उफ्फफ्फ्फ़.)

रौशनी उस शाम के बारे में सोच ौरी तरह से उसके गाल लाल हुए …

रौशनी ने अपने पति रोनित से भी बहुत दिनों पहले ऐसे चुम लिया था .. आज कल उनके ज़िन्दगी में रोमांस मनो ख़तम hi हुआ हैं …. और आज यहाँ ऐसे कपल्स पार्क में वह एक बुड्ढे रिक्शा चलने वाले के साथ युवा प्रेमियों को एक दूसरे को फ्रेंच किश करते देख रही थी..

उसके ऐसे थॉट्स के बिच रमेश बोले “रौशनी जी कहाँ खो गयी हो , अपने किसी प्रेमी के बारे में सोच रही हो क्या”

“धत बदमाश कही के , ऐसे कुछ नहीं .. आप बस हु फूल दे दीजिये हमें .. मुझे सच में इन कपल्स को ऐसे किश करते देख शर्म आ रही हैं.”

“रौशनी जी करने दीजिये न उन्हें , कहाँ में और हम ऐसे गहरी चुम्बन में लगे हुए हैं…”

“रमेश जी फिर भी ….. “ कुछ कहने से पहले hi एक और कपल वहां से चला जाता हैं .. रमेश उन्हें जाते देख दिमाग चलने लगता हैं .. वह फूल लेते वक़्त जान बुझ कर फूल के काँटों को पकड़ लेता हैं .. अब फूल के सब कांटे उसे चुभते हैं और वह अहह करके आवाज़ करता हैं …

“रमेश जी क्या हहआ .. उफ्फ्फ उस फूलों के कांटें बहुत होते हैं …”

“रौशनी जी हाँ देखो पूरा हाट काँटों से चुबा हुआ हैं उफ़ दर्द कर रहा हैं..”

“रमेश जी यहाँ बैठिये में उन काँटों को निकलती हूँ.”

अब दोनों उस सीट पर बैठ जाते हैं … रमेश के हाथों से रौशनी कांटें निकलने लगती हैं …

रमेश मन में मुस्कुरा रहा था .. रौशनी की मुलायम पीठ उसके आँखों के सामने थी .. उसके नाज़ु हाथों में उसके हतः थे और वह प्यार से काँटों को निकल रही थी

“उफ्फ्फ्फ़ ममम मस्त गोरी सी डॉल हैं रौशनी जी .मन कर रहा हैं उनके पीठ को चुमू वहां चाट लूँ उन्हें .. ममम क्या माल हैं यार .. …)

सब कांटे निकलने के बाद रौशनी ऊपर होकर रमेश को द्केहि .. “रमेश जी सब कांटे निकल दिए मैंने …”

“शुक्रिया रौशनी जी आप बहुत अच्छी हो ..”

अब रमेश अपनी आँखों से रौशनी की आँखों में देखने लगा .. रौशनी भी उन्हें देख रही थी … माहौल गरम था .. वह ान सब कपल्स मस्ती में लगे हुए थे … दोनों एक दूसरे को देख रहे थे … धीरे से रमेश अपने काळा होठों को रौशनी की गुलाबी होठों के पास लेन लगे .. रौशनी भी वहां से अपने होठों को हटा नहीं रही थी .. रमेश के होठं अब रौशनी के बिलकुल करीब थे … रौशनी की आँखें बंद हुयी जैसे hi रमेश के होठं उसके होठों से मिले ….

रमेश अब अपने होठों को रौशनी की गुलाबी होठों के प्रति दबा कर उसे अब चूमने लगे .. रौशनी भी आँखें बंद रमेश को चुम रही थी … रमेश अब अपने हाथों से रौशनी के चेरे को पकड़े उसे और गहरी चुम्बन देने लगे .. उसका लुंड निचे झटके मार रहा था .. वह बोल्ड होकर रौशनी के बाएं हाथ को पकड़ अपने उभरते लुंड पर रख दी .. रौशनी भी उस चुम्बन के अघोष में ..









अपने हाथों से रमेश के पंत पर उसके उभरते लुंड पर हाथ फेरने लगी

रमेश का लुंड टाइट होता गया

ऐसे कुछ पलों के लिए दोनों चूमते रहे … रौशनी उस चुम्बन में खो चुकी थी …

रमेश का लुंड पूरा टाइट हो चुक्का था और झटके मारने लगा जोरों से .. एकदम से रौशनी उन झटकों से उसकी आँखें खुली .. वह रमेश को चुम रही थी उसका हाथ उसके लुंड पर था … वह एकदम से अपने होठों को उनकी होठों से जुड़ा करि और अपने हाथों को रमेश के लुंड के ऊपर से हटा कर वहां से उठ कर जाने लगी …

सब कुछ इतना फ़ास्ट हुआ की रमेश बस बैठे रौशनी को जाते देखते रहा …

वह फिर उठ कर रौशनी के पीछे दौड़ने लगा ..

“रौशनी जी प्लीज रुकिए ..” लेकिन रौशनी रुक नहीं रही थी.. रमेश दौड़ के उसके पास गया और उसकी कलाइयों को पकड़ लिया ..

“रौशनी जी प्लीज रुकिए ..”

रौशनी रुक गयी और रमेश के तरफ देखि … “रमेश जी जो भी हुआ उसे भूल जाओ … “

“रौशनी जी कैसे भूलू … आपके गुलाबी होठों का स्पर्श अब में कैसे भूल जाऊ … रौशनी जी आप भी भूल जाओगी आज जो हुआ हमारे बीच.”

“रमेश जी यह गलत हैं .. में शादी शुदा महिला हूँ और आप भी .. और तोह और आप एक रिक्शा ड्राइवर हो और में …..”

“रौशनी जी आखिर कार आपने दिखा hi दिया मेरी औकात .. मामूली सा रिक्शा ड्राइवर हूँ में और आप एक हुस्न की पारी ..”

“रमेश जी चलिए यहाँ से .. मुझे ंगो ड्राप कीजिये प्लीज”

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी चलिए ..” और दोनों रिक्शा में जा बैठ जाते हैं .

(रौशनी अभी भी हैरान थी की उसने रमेश जी को ऐसे कैसे चुम लिया था .. वह भी उसके चुम्बन को साथ दे रही थी .. उफ़ क्यों .. यह तोह एक मामूली रिक्शा ड्राइवर हैं उनसे में कैसे किश करि .. और तोह और उनके लुंड के उभर को छू ली .. उनके मोठे बड़े लुंड को .. उफ्फ्फ यह में क्या सोच रही हूँ.. रौशनी तू तोह पागल हो चुकी हैं .. वहां असलम के मोठे लुंड को देखा तूने , सलीम के मोठे लुंड के उभर को भी .. और आज तोह हद हो गयी थी …रमेश जी जैसे एक बुड्ढे रिक्शा ड्राइवर के चुम्बन का साथ देने लगी थी और उसके भी मोठे लुंड के उभर पर अपने हाथों को फेरने लगी थी … उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं …)

रमेश भी वहां बैठे सोच रहा था क्या आज कुछ ज्यादा नहीं हुआ था .. क्या यह आखरी बार हैं वह रौशनी से मिलेगा . …

आएगी क्या होने वाला हैं .. रौशनी और हु तीन काले सांड जैसे बुड्ढे और उनके अंदर गर्मी बढ़ती हुयी.. आगे और क्या होगा …



 
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रौशनी वापस असलम के घर आयी .. वह अभी भी शीश में थी की उसने रमेश , एक बुड्ढे रिक्शा ड्राइवर के साथ एक कपल्स पार्क में चुम्बन करि थी .. और तोह और वह खुद उसके चुम्बन का साथ देने लगी थी और उसके उभरते लुंड पर भी खुद हाथ राखी थी .. वाहन षिक और शर्म लेमारे अपने कमरे में चली गयी.. कुछ देर बाद उसके दरवज़े पर नॉक सुनाई दी उसे..

“रुकसाना बेगम, रुकसाना बेगम तुम आ गयी .. जानू तू कहाँ चली गयी थी …?”

रौशनी ने कुछ उतर नहीं दिया तब असलम ने और दो बार दरवाज़ा नॉक करा ..”रुकसाना बेगम, रुकसाना बेगम .. बात तोह करिये …”

रौशनी अब किसी से बातें करने के मूड में नहीं थी , न असलम से न सलीम से … कल राटा से अब तक के घटनाओं के बारे में hi सोचती हुयी वह बिस्तर पर लेती थी..

उसे बस असलम का नग्न लुंड , सलीम के चांदी का बढ़ा उभर और रमेश के उभर पर अपना हाथ फेरना वही दिमाग में चलता रहा ..(वह कसिए बहक के ऐसे कर सकीय रमेश से .. और असलम का भी लुंड देखि थी .. कला सा इतना मोटा उफ्फ्फ और सलीम भी मोठे लुंड का hi बुद्धा था .. वह कैसे इन बुद्धों के बीच हैं उफ्फ्फ्फ़)





उसे क्या सच में रमेश के चुम्बन से कुछ असर हुआ था .. क्या वह उस चुम्मे को पसंद करि थी .. या फिर रोनित से बहुत दिनों तक फिजिकल न होने का नतीजा था .. उफ्फ्फ वह अपने शादी के पहले एक साल की सोचने लगी.. (वह रोनित के साथ सुहागरात में चुदाई से पहले बिलकुल वर्जिन थी .. फिर रोनित ने उसे चुदाई का सुच दिया और उसके बाद वह अपने पति के साथ चुदाई का आनंद लेती रही … अभी 2 महीने तक सब मस्त चल रहा था उनके सेक्स लाइफ में खासकर .. लेकिन अब .. उफ्फ्फ क्या वह उस कमी को महसूस कर रही थी .. ) ऐसे सब चीज़ें वह सोचती रही ..

बहार असलम बेचैन था की रप्शनि उसके सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही हैं.. क्या वह अभी भी रात के सन और सुबह के बातों से उससे नाराज़ थी .. उफ्फ्फ्फ़ रात को तोह वह जनता hi नहीं था ऐसे कुछ होने वाला था .. वह तोह बस पिशाब करने गया था .. उसी वक़्त रौशनी चली आयी थी . वह यह बात भी सोचने लगा की रौशनी कैसे उसके लोडे को देखे जा रही थी .. उसकी नज़र उसके मोठे लोडे से हाथ नहीं रही थी… क्या उसे उसका लोढ़ा पसंद आया था .. या बस शॉक से hi वह उस्ले लोडे को देख रही थी रात में … उफ़ और उसके चूतड़ मम आज सुबह अपने खाद ेलोडे को उसकी चूतड़ों में जब वह दबाने लगा था अपने लोडे को तोह क्या मस्त फेलिंग थी .. उसकी नाज़ुक गोल गोल चूतड़ ममम उसका लुंड तोह उससे महसूस कर कितना सख्त हुआ था उफ्फ्फ्फ़.

दोनों उसी ख्याल में अपने अपने कमरे के बिस्तर पर लेते थे ..

वहां रमेश अब अपने घर पहुंचा था .. वह बस रौशनी की चुम्बन के hi सन अपने मन में दौड़ा रहा था … उसके नाज़ुक गुलाबी होठं जिसे वह कुछ 5 मं तक चूमे थे … उसके पंत के ऊपर से उसके लुंड पर रौशनी के हाथों का स्पर्श .. उफ्फ्फ्फ़ .. लेकिन फिर रौशनी नाराज़ दिखी उसे .. क्या वह आखरी बार मिलेगा इस हुस्न की पारी से वह सोचते रहा …क्या कुछ जदबाज़ी में hi वह कुछ कर बैठा था .. उसे तोह लगा hi नहीं रौशनी जैसी गोरी अच्छे घर की महिला उस जैसे कमीने बुड्ढे को प्यार से ऐसे चुम्बन देगी … उसका लुंड झटके मारने लगा … रौशनी का नाम लेते हुए वह मुठ मारने लगा ..

(अहह रौशनी ममम क्या मस्त गुलाबी होठं थे तेरे ममम, और तेरे चूतड़ उफ्फ्फ उस साड़ी में तुम्हारा स्लीवलेस डीप कट ब्लाउज और तुम्हारी गोरी मुलायम पीठ मममम तू मेरी हो जा फिर रात भर तेरे से मस्ती करता रहूँगा जानू ) यह सोचते हुए और रौशनी का नाम लेते हुए रमेश झाड़ गया …

अब तीसरा बुद्धा सलीम फिर से पाने दोस्तों के साथ पिने चला गया था …

वहां पर .. उसका एक दोस्त बोलै “सलीम मियां तुम्हारी तोह लाटरी हैं , उस मैडम के साथ जो घर में रह रहा हैं .. साले कमीनेकुछ किया या नहीं उसके साथ .. तेरे से तोह इतनी छमिया पैट जाती हैं .. इसे भी पत्ता”













“अरे उस जैसी गोरी महिला को प्यार से पैट एते हैं .. ऐसे जल्दबाज़ी नहीं करते … जल्दबाज़ी से हाथ से चली जाती हैं .. “

“हाँ लेकिन हैं तोह मस्त माल , उस जैसी हमें भी दिला दे न … घर पर रखेंगे और नेत्र सुख तोह लेंगे … यार कितनी गोरी हैं , गदरायी बदन वाली … आँखों में नशा हैं बस नशा मममम उसे देख हमारा भी लोढ़ा टाइट होता हैं ..”

“हु सिर्फ मेरी हैं समझे कमीनो .. रौशनी को बस में पतङ्गा .. उसके बदन के सतह बस में मज़े लूंगा …”

“लेकिन सलीम मियां तेरा हु असलम बुद्धा दोस्त भी तोह रहता हैं अगर वह बाज़ी मारे तोह. …”

“उसका बस इस्तेमाल कर रहा हूँ … वह चाहिए मेरे रौशनी जैसी मैडम को पटाने के प्लान के लिए … एक बार पता लूँ तोह उसका काम ख़तम हाहाहा”

“सही हैं …. सलीम मियां … वैसे तेरे उस बुलबुल … मीनल का क्या हाल हैं , उसे भी छोड़ते हो क्या …”

“हाँ हैं न मेरी hi हैं हु भी .. उसकी लेता हूँ न. साली आजकल और भी मस्ती में हैं .. रौशनी को देख उसे जलन होती हैं .. जब रौशनी की टैरिफ करता हूँ तोह जलती बहुत हैं, लेकिन फिर और मस्ती से चुदती हैं … बस रौशनी का नाम लेकर जलाता हूँ फिर .. उससे बेहतर हैं यह दिखने मुझे से बहुत चुदती भी हैं … मस्त पटक पटक कर ठोकता हूँ .. मेरे लोडे की दीवानी सी बन गयी हैं”

“हाँ यार सही हैं … एक हाथ में हु और जल्द HI दूसरे हाथ में रौशनी मैडम .. टूट ओह बारी बारी जल्द hi दोनों की चुदाई करेगा ः …”

“हाँ हु तोह हैं .. अब चल जल्दी से और एक पेग लगा … अब जाना हैं वापस …”

“क्यों सलीम मियां , रौशनी मैडम डाँटेगी क्या ः … इसलिए बस 3 पेग के बाद जार अहा हैं घर हाहाहा”

“तुम लोगों को क्या पता .. ऐसी मैडम की बात पहले सुन्नी पड़ती हैं . फिर बाद में बस तुम्हारी hi सुनती हैं … फिर तुम जो बोलगे वही करेगी .. थोड़ा पहले सैक्रिफाइस करना पड़ता हैं”

ऐसे मस्ती मज़्ज़ाक़ में सलीम और एक पेग लगता हैं और फिर घर चले जाता हैं.

अब तीनो घर पर हैं .. असलम और सलीम अपने कमरे में और रौशनी अपने.

शाम के 8 बज चुके हैं , और बी असलम और सलीम दोनों को बहुत भूक लगी होती है. लेकिन रौशनी न कमरे से बहार आ रही हैं न कुछ बोल रही थी अगर वह बुलाते तोह भी ..

आख़िरकार रौशनी बहार चली आयी … सुनिए .. असलम जी और सलीम जी , आज खाना बनाना का मूड नहीं हैं … आप को बहुत भूक लगी हैं तोह बहार खा कर आइये.

दोनों बहार आ जाते हैं … “रुकसाना बेगम क्या हुआ ?” असलम बोलता हैं ..

“आज नहीं प्लीज .. अब नहीं होगा मुझसे यह सब.. मुझे न अपनी रुकसाना बेगम बन कर रहना हैं न आपके यहाँ रहना हैं .. में वापस घर जाना चाहती हूँ”

“रौशनी जी क्या हुआ .. में माफ़ी मांग ली न , में बहुत पिऊंगा नहीं .. न जाइये आप , असलम टब hi अगर कुछ करा हैं तोह सॉरी बोल…”

“नहीं अब नहीं .. प्लीज में घर जाउंगी कल .. आज रात रुकूंगी क्यूंकि बहुत लेट हुआ हैं ..”

“रौशनी जी प्लीज न जाइये .. आप जब से आयी हो , हमसे गलती हुयी हैं तोह माफ़ की जिए .. आप जब से आई हो , माहौल घर का अच्छा हुआ हैं .. हम बुद्धों का हैं hi कौन अब इस दुनिया में .. आप hi थे जो हमें अपना मान कर हमसे दोस्ती करि हो..

बहुत सालों से कभी किसी महिला के सतह हम रहे नहीं हैं.. भूल गए थे हम .. ये बैचलर लाइफ हैं hi ऐसी हम मर्दों की .. “

रौशनी बस सुनती रही असलम की बातें.

“रौशनी जी जबसे आप रुकसाना बनने के लिए तैयार हुयी हो मुझे जब उसकी याद आती हैं तब आपसे बात करता हूँ फिर आप रुकसाना बन कर बातें करती हैं तोह दिल को सुकून मिलता हैं , जैसे मेरी बेगम फिर से वापस आयी हो ..इसलिए कभी कभी कुछ ज्यादा फीलिंग्स आते हैं .. आप प्लीज न जाइये”

रौशनी असलम को ऐसे दिल से बातें करते हुए सुन उसका थोड़ा मूड बदलता हैं …

“रौशनी जी आप मनो या न मनो लेकिन आप जब से रुकसाना बनने के लिए हाँ करि हो और यहाँ रहने लगी हो तोह असलम में काफी चंगेस आये हैं , उसे अब रुकसाना के दौरे काम पड़ते हैं .. वह अब किसी भी महिला को रुकसाना समझता नहीं .. बस आप को इसलिए जो हु फीलिंग्स उन्हें आती थी अब बस आप पर वह रुकसाना समझ कर वही करता हैं , आपको जाना हैं तोह आप जा सकती हो हम रोकेंगे नहीं ….”

रौशनी अब सोच में पद जाती हैं .. वह तोह उसे नहीं रोक रहे हैं लेकिन क्या उसे इस इलाज को ऐसे बीच में हो चोर कर जाना चाहिए .. आख़िरकार उसने खुद यह डिसिशन लिया था … “

असलम और सलीम फिर बोते हैं “रौशनी जी आपको जाना हैं तोह बताइये हम आपकी पैकिंग में मदत करेंगे .. कल आपको ड्राप भी करेंगे आपके घर .. आप की इतने दिन की मदत के लिए हम आपसे थैंक यू कहना चाहते हैं.”

रौशनी को अब बुरा लग रहा था .. यह दोनों बहुत अच्छे से पेश आ रहे थे .. न ग़ुस्सा न कुछ .. उनको एक मौका देना चाहिए … उसे भी थोड़ा और एडजस्ट होना पड़ेगा .. आख़िरकार उसी केन जो के हैं तोह उनकी मदत करेगी तोह ंगो की भी मदत होगी hi .. इवेंट भी हैं कुछ दिनों में .. बहुत काम हैं .. यहाँ रहेगी तोह असलम सलीम के सात शाम को भी इवेंट की तैयारी कर पाएंगे. लेकिन वह कल सुबह hi फाइनल डिसिशन लेगी.

असलम जी , सलीम जी कल में डिसिशन बताउंगी .. अब एक काम करते हैं .. रात का डिनर कही बहार करे.. आज सच में खाना बनानेका मेरा मूड बिलकुल नहीं हैं. एक अच्छा सा रेस्टोरेंट बोलिये न वहां जाएंगे , में करुँगी खर्चा .. अगर आज मेरी लास्ट दिन हैं यहाँ आपके साथ तोह थोड़ा बहार रेस्टोरेंट में खा कर शाम बिताएंगे .. चलेगा आपको?”

दोनों ख़ुशी से हाँ बोलते हैं .. उन्हें एक रेस्टोरेंट का पता था , गार्डन रेस्टो था , वह दोनों तोह वहां कभी नहीं गए थे क्यूंकि वह रेस्टो उनके जैसों के लिए नहीं था लेकिन आज रौशनी के साथ वह जाने का प्लान बनाये ..

रौशनी अब अपने कमरे में गयी तैयार होने .. कुछ मं बाद सब तैयार थे .. रौशनी ने स्लीवलेस डीप बैक का ब्लाउज पहना था .. शिफॉन साड़ी थी .. माथे पर बिंदी, कानो में झुमके और हाथिन में चुडिया .. हल्का सा मेकअप और पिंक कलर की लिपस्टिक…









असलम बोलै “रौशनी जी एक बात माननी पड़ेगी आपकी .. आप सजती सवारती बहुत hi ाचे से हो .. हमेशा एक दम बेस्ट लगती हो आप …

“हाँ रौशनी जी सच कहता हैं असलम , आप के साथ घूमते हैं तोह लगता हैं हम सातवें असलमन पर हैं .. आप जैसी हुस्न की पारी के साथ घूमना नहुत अच्छा लगता हैं ..”

“हाँ आप दोनों तारीफ़ करना तोह काम नहीं करते .. हर बार इतनी टैरिफ करते हो फिर इतना क्यों तंग करते हो मुझे ..”

“मैडम अब आपको तंग न करे तोह किसको , आप जैसी दोस्त मिली हैं मन करता हैं मस्ती मज़्ज़ाक़ का .. वैसे आप को हु बात भी बुरी लगती हैं तोह न करेंगे दोनों .”

“उफ्फ्फ आप दोनों भी न , आप जब ऐसे तारीफ़ करते हो , तब अच्छा लगता हैं .. क्यों न लगे . हर औरत को तारीफ़ पसंद hi होती हैं .. “

हाँ हु तोह हैं hi आपकी बात सही रौशनी जी चलिए .. हमें रिक्शा लेना पड़ेगा ..”

तीनो उसमें बैठ रेस्टो पहुँच जाते हैं.

सलीम और असलम पीछे से बस रौशनी की मुलायम गोरी पीठ को देख अपने लुंड मसलते हैं...











 
अब तीनो बहार बैठे थे गार्डन में .. एक वेटर आया .. वह रौशनी को उन काळा बुद्धों के साथ देख चंक गया .. ऐसी मस्त बदन वाली गोरी से महिला इन बुद्धों के साथ यहाँ कैसे वह सोचता हुआ उनका आर्डर लेने लगा …









अब रौशनी आर्डर देना शुरू हुयी .. उसने दो कबाब और एक टंगड़ी कबाब आर्डर दी ..

“सलीम जी आपको टंगड़ी कबाब पसंद हैं न .. मुझे याद हैं ..”

“हाँ रौशनी जी मुझे भी टंगड़ी कबाब बहुत पसंद हैं .. बहुत टेस्टी और रसीले कबाब होते हैं …”

असलम भी बोलै “हाँ मुझे भी बहुत hi पसंद हैं मलाई टंगड़ी कबाब …”

रौशनी “अरे अच्छा ऐसे हे क्या .. वेटर फिर आप दो टंगड़ी कबाब आर्डर कीजिये … “

“और कुछ मैडम .. ड्रिंक्स में कुछ चाहिए आपको …”

“नहीं no ड्रिंक्स .. आज no ड्रिंक्स इनके लिए … और रौशनी सलीम को देख मुस्कुरायी ..

“हाँ आज no ड्रिंक्स जैसे आ कहे रौशनी जी .. आज सलीम ड्रिंक नहीं पिएगा ..”

वह वेटर वही खड़ा था रौशनी के पास और उसके बदन को देखे जार अहा था ..उसकी गोरी मुलायम पीठ, बाँहों को और उसके गुलाबी होठों को …

“बस आर्डर हुआ भैया जल्दी लाओ ..”

लेकिन वह वेटर वही खड़ा रहा रौशनी को देखे जार अहा था …

“अबे मैडम ने बोलै न जा आर्डर दे कर आ .. रुका क्यों हैं जा “ सलीम जोर से बोलै … जब वह वेटर चला गया तोह रौशनी सलीम को ग़ुस्से की नज़र से देखि “सलीम जी आप को ऐसे नहीं कहना चाहिए था उससे … गलत हैं , मुझे नहीं पसंद यह सब”

“रौशनी जी लेकिन वह आपको घूरे जार अहा था .. इसलिए उसे बोलै की आर्डर देने जा..”

“सलीम जी ऐसे बर्ताव नहीं करना चाहिए आपने , बस वह अपना काम hi कर रहा था .. कुछ सेकंड रुका हुआ था बस .. ऐसे नहीं पॉलिटेली उसे कह सकते थे आप”

“माफ़ कीजिये रौशनी जी , आइंदा ऐसे नहीं करूँगा .. लेकिन क्या करे कोई था hi नहीं ऐसे सब सीखने .. मेरी बीवी भी नहीं कहती थी और बचपन से तोह बिलकुल कोई नहीं .. हम ऐसे hi जीते आ रहे हैं”

“हम्म अच्छा लेकिन अब में बोली न की ऐसे नहीं करना चाहिए आपने .. अब जब आएगा तोह उस वेटर को सॉरी बोलना …”

“रौशनी जी सॉरी किसलिए , इतनी भी बड़ी गलती नहीं थी ..”

“गलती थी या नहीं फिर भी आप को उसे सॉरी बोलना पड़ेगा फिर hi में आपसे बात करुँगी”

“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे …”

असलम अब सलीम को देख मुस्कुरा रहा था … (मस्त दांत पड़ी हैं इसे … रौशनी मैडम से)

सलीम अब असलम को देख “अरे तुझे क्या हुआ तू क्यों स्माइल दे रहा हैं ..

कुछ नहीं सलीम बस ऐसे hi”

असलम फिर बोलै “वैसे रौशनी जी आप को यह गार्डन रेस्टो कैसे लगी …”

“हाँ काफी ाची हैं , खुली हवा हैं , पेड़ हैं .. मुझे ऐसे नेचर में रहना पसंद हैं.”

“अच्छा फिर आइये हमारे साथ किसी गार्डन या पार्क में …”

पार्क सुनते hi रौशनी को रमेश के साथ उन पलों की याद आयी .. मन में अब उसे वह पल सोचकर अच्छा लग रहा था … “

“नहीं बस बहुत पार्क घूमी हूँ .. आप को बस पार्क में hi घूमना होता हैं क्या …”

“अरे रौशनी जी हमने तोह पहली बार पूछा आप से …”

“हाँ सॉरी बस पार्क में नहीं घूमना मुझे”

“ठीक हैं वैसे यहाँ एक नया पार्क खुला हैं ..”(असलम उसी पार्क का नाम लेता हैं जहाँ रमेश लेकर गया था और उसे सुन कर रौशनी थड़ा सेहम जाती हैं)

रौशनी बोल पड़ती हैं “नहीं वह पार्क तोह बस कपल्स के लिए …..” फिर अपने आप को संभालती हैं …

“रौशनी जी कपल्स पार्क ??, आप को ऐसे क्यों लगता हैं “

“कुछ नहीं बस नाम से लगा मुझे .. में जहाँ पहले रहती थी वहां ऐसे पार्क्स हुआ करते थे …”

“अच्छा रौशनी जी आपके पति वहां कभी ले गए थे आपको …” अब सलीम मुस्करातेब हुए पूछता हैं …

“सलीम जी आप को उससे क्या …”

“रौशनी जी अगर आप हर बात पर ग़ुस्सा करेगी तोह बातें करनी मुश्किल हैं..”

“ओह सॉरी … सलीम जी .. तोडा सा निजी मामला हैं मेरे और पति के बीच इसलिए .. सॉरी”

“No प्रोब्लेम्स … वैसे हम सब दोस्त हैं , दोस्ती में आप कह सकती हो , हम किसी से बताएंगे नहीं और हम आपको जज तो बुल्कुल नहीं करेंगे ..”

असलम बोलै “वैसे में गया था रुकसाना के साथ ऐसे पार्क्स में … थोड़ा एक्ससिटेमेंट होता हैं न ऐसे खुले में अपने पार्टनर के साथ … “

“हाँ असलम में भी अपनी बेगम को ले गया हूँ ऐसे पार्क्स में … हम काफी जवान थे तब .. “









रौशनी थोड़ी से रिलैक्स होती हैं ..

“रौशनी जी मेरी बेगम पहली बार आयी थी तब वह चौंक गयी थी .. पूछती थी .. असलम मियां क्या पार्क हैं यह ,, ऐसे कपल्स कैसे पास रहकर चुम रहे हैं .. उफ्फ्फ मुझे शर्म आ रही हैं .. मुझे अभी भी याद हैं ” और असलम मुस्कुराता हैं ..

“लेकिन बाद में उसे भी पसंद आने लगा पार्क में घूमना मेरे साथ … हमने बहुत मस्तियाँ की ऐसे पार्क्स में .. काफी मिस करता हूँ ऐसे सब चीज़ें ..” और स्लैम मायूसी का चेहरा बनाये बैठा रहता हैं ..

रौशनी को थोड़ा बुरा लग रहा था … असलम के हाथों पर अपना रख वह बोली “असलम जी आप बहुत याद करते हो न अपनी बेगम को .. आप उनसे इतना प्यार करते थे .. ी ऍम टोक्यूहेद>”

असलम अब रौशनी के हाथों को अपने हाथ पर महसूस कर अच्छा लगता हैं … वहां सलीम देख सोचता हैं (कमीना कितने नखरे करता हैं … )

तब खाना आ गया और सब खाने लग गए …

“रौशनी जी आप को भी कबाब पसंद हैं ….”

“हाँ सलीम जी बहुत पसंद हैं कबाब… में बहुत कहती थी पहले.. अभी थोड़ा काम हुआ हैं”

“रौशनी जी अब और खाइये न कबाब हमारे साथ .. हम आपको कबाब खिलाना चाहते हैं”

असलम को समझ आया सलीम का मतलब क्यात है लेकिन रौशनी उस मतलब को समझी नहीं थी ..

“हाँ सलीम जी आप के साथ रहकर बहुत कबाब खाउंगी … कबाब की टास्ते आप की वजह से और डेवेलोप होगी …”

“रौशनी जी हम तोह बस बड़े कबाब hi खिलाएंगे आपको , छोटे कबाब बिलकुल नहीं ..”

“अच्छा सलीम जी बस बड़े कबाब hi खिलाओ आप …”

असलम सब सुन मुस्कुरा रहा था …

“रौशनी जी मुझे भी कबाब खिलाना हैं आपको … आप मेरे से भी खाओगी न कबाब बड़ा वाला ..”

असलम जी आप रुकसाना जी को भी खिलाए थे कबाब ….”

“रौशनी जी रुकसाना बेगम को तोह मेरे कबाब बहुत पसंद थे .. रोज़ कहती थी .. मेरा भी मन करता था उसे रोज़ कबाब खिलाना .. बड़े बड़े कबाब बस “

“चलो रौशनी जी अब मुझे आपको खिलने दो … असलम एक फोर्क में कबाब लेता हैं .. रौशनी जी मेरे हाथ से खिलने दो मुझे ..”

रौशनी बस थोड़ा आगे झुकती हैं .. और असलम उसे कबाब खिला था हैं … फिर सलीम भी उसे एक कबाब खिलता हैं फोर्क से … (दोनों मन में सोचते हुए – उफ्फ्फ रौशनी हमारा असली में पंत के अंदर का कबाब भी आपको खिलाना हैं … हु कबाब कब खाओगी ममम)

रौशनी मन में खुश थी की आज दोनों उससे अच्छी तरह से बिना छुए या तंग किये समय बिताए थे .. उसे वह बात अच्छी लगी.

अब उनका मैं कोर्स भी अत हैं और तीनो खाना खा कर अब रेस्टो से बहार निकल रहे थे.. उन्ह ीक रिक्शा मिलती हैं और तीनो उसमें बैठ जाते हैं … अब कुछ 5 मं बाद रक्षा में ठंडी हवा चलती हैं और रौशनी को बहुत ठण्ड लगने लगती हैं ..वह अपने बाँहों पर हाथ फेरती हैं खुद को वार्म रखने .. यही बात सलीम देखता हैं ..

“रौशनी जी आपको ठण्ड बहुत लग रही हैं … आप एक काम कर पाओगे .. आप हम दोनों के बीच बैठ जाइये … आपको ठण्ड काम लगेगी .. “

रौशनी कुछ सोचती हैं .. “नहीं सलीम जी रहने दो थोड़ा सेहेन कर लुंगी..”

लेकिन रौशनी को बहुत hi ठण्ड लग रही होती है .. अब वह सलीम से कहती हैं ..”सलीम जी बहुत ठण्ड हैं .. में बैठूंगी आप दोनों के बीच”

“सलीम तोह बहुतखुश होता हैं , और स्लैम भी .. दोनों उसे बीच में बिठाकर उससे मज़े लेने वाले थे..”

अब रिक्शा एक साइड रुक गयी और बी रौशनी दोनों के बीच बैठ गयी .. रिक्शा ड्राइवर देख सकता था की यह गोरी सी हुस्न की पारी दो काळा बुद्धों के बीच बैठने वाली थी .. वह सोचा की इन दो बुद्धों को ऐसी खूबसूरत महिला मिली hi कैसे …?)

अब जैसे रिक्शा चलती दोनों असलम और सलीम मौका धुंध रहे थे रौशनी को टच करने के लिए .. जब भी रिक्शा थोड़ा सा हिलती तोह दोनों के तइस रौशनी की तइस से टकराने लगते हैं … दोनों रौशनी के इतने करीब बैठे थे उस एहसास से hi उनके लुंड उभरने लगते हैं …

अब रास्ता थोड़ा ख़राब था इसलिए सलीम और असलम के तइस रौशनी के तइस से और टकराने लगते हैं .. रौशनी को ठण्ड तोह नहीं लग रही थी लेकिन उसे एहसास हो रहा था सलीम और असलम के तइस के टॉचेस का .. वह उन्हें देखि तोह दोनों बहार देख रहे थे .. रौशनी अब उनकी गलती से टॉचेस मानकर शांत बैठ गयी ..

एकदम से एक बड़ा स्पीड ब्रेकर आता हैं और रौशनी थोड़ा उछाल कर जैसे hi निचे खुद को सँभालने बैठने जाती हैं उसका देना हाथ असलम के झंघों पर आता हैं और बया हाथ सलीम के जहांग पर.

उसे हाथों को पाकर दोनों के लुंड झटके मरने लगे … यह बात रौशनी को समझ आयी तोह वह शर्मा कर वहां से हाथ निकले .. उसकी नज़र दोनों के उभर पर गयी .. और उसके गाल शर्म से लाल हुए … ुसफ्फ दोनों के मोठे लुंड फिर से उभरते देख और खुद को उनके बीच बैठे पाकर वह कुछ कर भी नहीं सकती थी ..

दोनों ने रौशनी के हाथों को अपने झांघों पर पाकर कोई रिएक्शन दिया नहीं था .. लेकिन मन में बहुत खुश थे और वह ख़ुशी उनके झटके मारते हुए लोडे से hi पता चल सकती थी …

वहां अब रौशनी की नज़र उन के उभर से वह पूरी तरह से निकल नहीं प् रही थी .. बीच बीच में चोरी चुपके से वह उन दोनों के लुंड के उभर को देखती रहती .. उसे अब अंदर थोड़ा सा करंट जैसे लगा .. इतने बड़े मोठे लुंड दोनों के उभरते हुए उसे दिख रहे थे और वह दोनों के बीच बैठी थी ..









सलीम फिर रौशनी की तरफ मुद कर बोलै “रौशनी जी आपको तकलीफ तोह नहीं हो रही हैं न … अब रौशनी कैसे बोलती की वह क्या फील कर रही थी दोनों के बड़े लोंद के उभर को अपने इतने नज़दीक पाकर.. इस बार तोह ऐसे भी नहीं था की वह दोनों कुछ कर रहे थे ..

रौशनी ने रहत की सनस ली जब वह देखि की रिक्शा अब ंगो तक पहुँच hi गयी थी .. वह झट से रिक्शा से उतर गयी … सलीम जी प्लीज आप ड्राइवर को पाय करिये में आगे जाती हूँ …

रौशनी जल्द से आगे जाने लगती हैं की उसके पेअर एक पत्थर से टकरा कर वह गिर जाती हैं .. “अह्ह्ह्ह ोीिमा.

“रौशनी जी उफ़ क्या हुआ .. आप तोह गिर गयी .. मम रुकिए हम आते हैं”

दोनों उसके तरफ भाग कर गए … रौशनी अब निचे बैठी थी .. उसके पैरों को पकडे हुए जहाँ पत्थर लगा था ..

रौशनी जी वैसे खून तोह नहीं आ रहा हैं .. लेकिन आप चल नहीं पाओगी .. तरय करिये .”

रौशनी चलने तरय करती हैं लेकिन उसके पेअर में मोच आयी थी और वह चल नहीं प् रही थी.

“रौशनी जी अब आपको हमें hi अंदर ले जाना पड़ेगा … आप चल नहीं पा रही हो…”

“रौशनी जी हाथ दीजिये …”

रौशनी फिर एक हाथ सलीम को देती हैं और दूसरा असलम को … फिर दोनों के गले पर अपने दाए और बाएं आर्म्स को रख वह दोनों उसे अब ले जाने लगते हैं …

रौशनी के नाज़ुक मुलायम गोर बाहें अब असलम और सलीम के गार्डन पर थे .. और तीनो साथ चल रहे थे…

रौशनी फिर भी ठीक से चल नहीं प् रही थी ..

रौशनी जी आपको और सपोर्ट की जरूरत हैं .. हमें आपके कमर को पकड़ कर hi ले जाना पड़ेगा ..”

अब रौशनी भी कुछ कह नहीं सकती थी .. उसे चलने में मुश्किल हो रहा था .. वह बस हाँ में सर हिलायी ..

अब दोनों बुड्ढे खुश होकर उसके कमर को पकड़े रखे .. सलीम बाएं और से और असलम दाईं और से … उसके कमर पर अपने हाथों का एहसास होते hi उनके लुंड झटके मारने लगे … उफ्फ्फ उसकी मुलायम सी नाज़ुक कमर उनके हाथों में थी … उसके बाहें उनकी गार्डन के ऊपर … उसकी सुगंध से भी उनके लोडे झटके मार रहे थे …

दोनों के उसके कमर को पकड़ने से वहां हल्का सा लाल निशाँ हुआ था .. इतनी गोरी और नाज़ुक थी रौशनी …

(उफ्फ्फ मैडम की कमर इतनी नाज़ुक हैं .. और उनकी सुगंध उफ्फ्फ मममम रौशनी जी आप को तोह बिस्तर पर ले जाकर जमकर चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ क्या माल हो तुम तोह)









वह दोनों यही सोचते हुए रौशनी को घर के अंदर ले जाते हैं …
 
दोनों सलीम और असलम रौशनी को उसके कमरे में ले जाने में मदद करि .. पुरे रस्ते उन्होंने उसकी कमर को काफी निचोड़ा था मदत के बहाने :. उसके गोरी त्वचा ओर काफी लाल निशाँ बन चुके थे … उसे देख दोनों के लोडे बहुत सारे झटके मारने लगे ..

रौशनी को भी दर्द हो रहा था , उसे उनके उसके कमर को निचोड़ने पर भी ध्यान नहीं था .. वह बस बिस्तर पर लेटना चाहती थी ..

दोनों ने उसे लिटाया बिस्तर पर .. दोनों के कमीने दिमाग में एक hi बात चल रही थी .. की काश वह रौशनी के साथ बिस्तर पर उसपर जाकर उसे मस्ती करे .. उनके लोडे तोह पुरे टाइट हुए रौशनी को बिस्तर पर लिटा कर देख ..

“उफ्फ्फ बहुत दुःख रहबहैं असलम .. सलीम कुछ करो न कुछ दवाई देना उफ्फ्फ बहुत दर्द हैं ..”

सलीम बोलता “अरे घर पर तोह दवाई नहीं हैं रौशनी जी.”

सलीम जी प्लीज किसी ोहार्मास्य से लाइए न बहुत hi दर्द हो रहा हैं प्लीज …”

सलीम को ऐसे रौशनी को चोर जाना नहीं था लेकिन दवाई लानी थी तोह वह चला गया.. अब असलम रौशनी के पास खड़ा था ..

“रौशनी जी कहा लगी हैं दिखाओ तोह ..”

असलम जी यहाँ एड़ियों पर (एंकल) और थोड़ा इसके ऊपर मोच आ गयी हैं आउच उफ्फ्फ चुने से दुःख रहा है. ..”





असलम अब इस मौके का फायदा उठा कर रौशनी की साड़ी थोड़ी ऊपर कारणउसके एड़ियों के आस पास सहलाने लगता हैं .. “रौशनी जी वीएस तोह कहाँ कुछ ब्लीडिंग तोह नाहीभाई. .. ा

“अच्छा लेकिनसलाम जी वहां दुःख तो रहा हैं ..”

“हाँ मोच की वजह से और दुःख रहा हैं आपको रुकिए ..”

असलम अपने हाथों को उसकी एड़ियों के आस पास घुमाने लगता हैं हलके से .. रौशनी जी यहाँ भी दर्द हो रहा हैं !!??”

नहीं असलम जी वहां नहीं .. उफ्फ्फ अच्छा लग रहा हैं थोड़ा और वहां मालिये प्लेज़ असलम जी”

असलम तोह ऐसे मौकों का hi फायदा लेना चाहता था .. वह फिर से वह आस पास हाथों को फेरता हैं .. उसके गोरी बाज़ुक त्वचा को फील करता हैं .. उसका लोढ़ा उसकी पंत में झटके मारने लगगभाई. ..

(उफ़ कितने अच्छे हैं असलम जी , बहुत एक कग ी तरह से मॉल रहे हैं वहां … आज उन्होंने बहुत अच्छे से बर्ताव किया हैं ..)

असलम बस वहां मलते रहता हैं .. रौशनी को अब वह बात अच्छी लागतिभाईं .. “शुक्रिया असलम जी बहुत अच्छा महसूस hi रहा हैं ..”

असलम ान अपने हाथों को थोड़ा और ऊपर लेजाकर माल्टा हैं .. उसका लुंड रोशनीकी त्वचा के महसूस से टाइट हुआ था ..

रौशनी ने आँखें बंद कर ली थी तोह असलम उसके बदन को देखने लगता हैं .. उफ्फ्फ इतनी गोरी सी मुलायम माल हैं रौशनी .. बिस्तर ओर लेते कितनी मस्त लग रही है. .. उसे रौशनी की नाभि और कमर अब साफ़ दिख रहे थे .. गोरी सी नाज़ुक सी .. उसके कमर पर अभी भी उनले निचोड़ने के लाल दाग थे .. उफ्फ्फ क्या मस्त लग रहे हैं रौशनी .. उसका लुंड पूरा औकात में आ चूका था .. काश अभी इस पर बस्तर पर चढ़ जाऊ और बदन चुम लूँ मम कितनी सेक्सी लग रही हैं रौशनी ..

रौशनी अब बीएड पर लेती थी और असलम उसके एड़ियों की अस पास हाथों से मस्सगे कर रहा था रौशनी को उस मस्सगे से काफी आराम मिल रहा था .. लेकिन उसका सर अब दुखने लगा था …

“असलम जी मेरे सर में भी दर्द हो रहा हैं .. उफ्फ्फ्फ़ आप के पास कुछ बाम हैं सर दर्द के लिए “

असलम बोलै “हाँ हु तोह हैं साइड में hi हैं ड्रावर में.. क्या में लागू बाम आपके सर पर …”

“असलम जी प्लीज लगा सकोगे तोह लगाइये न .. सर दर्द हो रहा हैं ..”

असलम अब रौशनी के पास चला गया और ड्रावर से बाम निकलने लगा .. अब उसका टाइट लोढ़ा रौशनी के सर के काफी करीब था .. लेकिन रौशनी ने अपने चेहरे को साइड में करि थी और उसके आँखें बंद थी …

असलम का टाइट लोढ़ा अब ऐसे था की अगर रौशनी अपने चेरे को उसके तरफ करती तोह उसका टाइट लोढ़ा उसके मुँह से टकराता … असलम ने बाम निकली ड्रावर से और रौशनी के सर पर लगाने लगा … “असलम जी साइड में नहीं बल्कि यहाँ सर के यहाँ दर्द हो रहा हैं ..

“रौशनी जी फिर तोह आपको ऐसे एंगल चेंज करके लेटना पड़ेगा ताकि में आपके सर के पीछे रहकर आपके सर पर बाम लगा सकू …”

रौशनी फिर तकिये को लेकर बिस्तर के फुट के और अपने सर को कर अपने पैरों को बिस्तर के टॉप तरफ राखी .. अब असलम उसके पीछे जाकर खड़ा हुआ … उसका टाइट लोढ़ा अब रौशनी के सर के काफी करीब था .. रौशनी अपनी ानकेहिं बंद करि थी .. और अब असलम उसके सर को दबाने लगा बाम लगा कर …

“असलम जी आप बहुत अच्छी से मलते हो … “रप्शनि की आँखें अभी भी बंद थी .. असलम उस मौके का फायदा उठाकर और पास सरक गया .. अब उसका लोढ़ा उसके पंत में से रौशनी के मुँह के ऊपर लहरा रहा था .. और वह रौशनी के सर पर बाम मलते रहा .. अब सन ऐसे था की अगर रौशनी की आँखें खुलती तोह उसकी आँखें उसकी साइड में खड़े असलम के लोडे के ुबाहर पर hi पड़ती … असलम का लोढ़ा झटके मारता रहा , उसका दिल धड़कने लगा .. उफ्फ्फ इतने पास उसके लोडे का उभर रौशनी के चेहरे के करीब था .. उसका मन कर रहा था की पंतय निचे उतर कर अपना लोढ़ा साइड रौशनी के होठों पर hi मेल .. फिर उसके मुँह में दाल उसके लोडे की चूसै करे … ऐसे कुछ 2 मीन्स चला .. फिर असलम को एहसास हुआ की रौशनी ानकेहिं खोल रही हैं इसलिए वह थोड़ा पीछे हटा ..

“अब रौशनी के आँखें खुली तोह वह पायी की असलम उसके काफी करीब था .. अपने आँखों को वह ऊपर करि तोह उसे असलम के लोडे का उभर दिखाई दिया ..

वह शर्मा गयी ..”असलम जी बस अब सर दर्द काम हुआ हैं . “





“नहीं रौशनी जी थोड़ी और देर लगाने दो … सर दर्द पूरा काम करूँगा में बस थोड़ा टाइम दो इस बाम को मलने के लिए …

रौशनी के दिल की धधकने तेज़ हो रही थी .. असलम के लुंड का बड़ा उभर उसके आँखों के सामने था … वह महसूस कर रही थी उसके लुंड की गर्माहट …

उसे इस पोजीशन से हन्ता था लेकिन असलम के बाम लगाने से सच में उसके सर का दर्द काम हो रहा था .. वह बस लेती रही असलम को बाम मलने देने लगी .. उसकी नज़र वह बार बार असलम के लुंड के उभर पर डालती और उसका दिल और धधकने लगता ..(उफ्फ्फ उनका मोटा लुंड जो उसने परसों रात को देखा था .. कितना मिटा था .. ममम काश वह उसके ुण्ड को फिर से दकह सके .. ) इस सोच को रौशनी झट से अपने दिमाग से निकली ..(उफ्फ्फ रौशनी तू यह क्या सोच रही हैं . तुझे क्या हुआ हैं उफ्फफ्फ्फ़)

रौशनी की ख़ामोशी से असलम और बोल्ड हो गया .. वह फिर से थोड़ा और आगे झुकने लगा .. अब रप्शनि के होठों के ऊपर hi उसके लोडे का उभर था … रौशनी का दिल धड़कने लगा .. उसे निचे अपनी छूट में भी हलचल महसूस हुयी …

(उफ्फ्फ असलम जी आपका लुंड सच में टीना मोटा हैं मममम क्या यह मुझे देख टाइट हुआ हैं ममम) रौशनी के दिमाग में यही सोच दौड़ने लगी .. असलम भी मज़े से यह सब एन्जॉय कर रहा था … फिर उन्हें सलीम को आवाज़ सुनाई दी और फिर असलम ने मालिश करना चोर दिया .. और रौशनी भी फिर से बस्तर पर सीधी लेट गयी … उसका दिल धधक रहा था और छूट में हलचल महसूस कर रही थी … उसके गाल शर्म के मारे लाल हुए थे ..

अब सलीम को तोह इसका कुछ पता नहीं था .. वह गोलियां लाया था और फिर पानी भी लेकर रौशनी को दे दिया .. रौशनी उठाकर बैठ गयी और गोलियां लेने लगी …

“शुक्रिया सलीम जी.. मेरे लिए आप इतनी रात को फार्मेसी गए .. शुक्रिया “

असलम वहां खुश था की सलीम की न मौजूदगी में उसने रौशनी के साथ हु पल बिताये थे.

उसका लोढ़ा काफी टाइट हुआ था .. वह फिर बाथरूम चला गया .. उसे अब अपने लोडे की रिहाई करनी hi थी .. उसकी चांदी में प्रेकम का बड़ा स्पॉट बन चुक्का था …

अब वहां बस सलीम और रौशनी थे …

“रौशनी जी आपका दर कैसे हैं अभी ….”

‘हाँ थोड़ा काम हुआ हैं .. असलम जी ने बाम माला था .. “

रौशनी जी आपने क्या सोचा हैं .. आप कल जाने वाली हो या आप रुकने वाली हो”

“सलीम जी में अभी डिसिशन नहीं ली हूँ … मुझे सोचने दो क्या करना हैं मुझे कल…

“अच्छा हैं रौशनी जी आप आराम करिये …. कल सुबह देखेंगे ..”

“हाँ शुक्रिया सलीम जी .. में अब थोड़ा आराम कर लेती हूँ .. कल सुबह जल्दी उठना हैं..”

“हाँ ठीक हैं रौशनी जी ..” सलीम ने एक आखरी मौका लिया रौशनी के बदन को देखने का और अपने लोडे को मसलते हुए कमरे के बहार चला गया .. वहां बाथरूम में असलम अपने लोडे को हिला रहा था और रौशनी के बदन के बारे में और अभी जो हुआ उसकी सोच में लोडे को हिलने लगा … (अह्ह्ह रौशनी मेरी मेहबूबा बना कर hi रखूँगा आपको ममम कल न जाना मेरी बेगम अहह ममम तेरी यह महमालि बदन से मेरे अंदर की प्यास बुझाऊंगा अह्ह्ह.. और असलम झरने लगा .. )









वहां रौशनी के दिमाग में भीअसलाम के साथ अभी हुयी मालिश और उसके बड़े लोडे के उभर की सोच में लेती रही ..(इतना मोटा कला लुंड हैं उनका उफ्फ्फ्फ़ रुकसाना जी की तोह मज़े थे .. इतने प्यार करने वाला और इतने बड़े लुंड वाला पति जो था उसका … …असलम के नंगे लोडे के दृश्य को अपनी आँखों के सामने घूमते हुए अनजाने में उसकी उँगलियाँ उसकी पेटीकोट के अंदर उसकी पंतय के ऊपर से अपने छूट पर गयी … वहां पर गीलापन महसूस कर रौशनी वहां अपने उँगलियों को चलने लगी ..

अब सुबह हो गयी .. रौशनी नाहा कर ब्रेकफास्ट बना रही थी .. पीछे से असलम आया .. “रौशनी जी आप नहीं जाने वाली हो … क्या डिसिशन लिया आपने ?”

असलम जी में रहूंगी .. आपकी इलाज होने तक नहीं जाउंगी ….”

असलम यह बात सुन खुश हुआ .. उसने रौशनी को गले लगाया … रौशनी जी आप इतनी अच्छी हो .. आप जैसी दोस्त नसीब वालों को hi मिलती हैं …”

जिअसे hi असलम ने उसके पीछे से पकड़ लिया रौशनी मह्सुश करि की सुका लुंड उसकी चूतड़ों पर डाब रहा था ,,… उसके गाल लाल हुए उस एहसास से …

“असलम जी कल आपने और सलीम जी ने मेरी इतनी ख्याल राखी .. में भी आप दोनों का ख्याल रखूंगी खाकर आपक…. …… आपके इलाज का..”

असलम को लगा की रौशनी थोड़ी लाइन पर आ रही हैं .. आज उसने उसे बिलकुल पीछे हटने को नहीं कहा था .. असलम ने फिर थोड़ा और आगे झुक रौशनी को और तिघ्टलय पकड़ने लगा . और उसका उभरता लोढ़ा फिर से रौशनी के चूतड़ों पर दबने लगा ..

“रौशनी जी .. में आपको फिर से रुकसाना बुला सकता हु .. मेरी बेगम की बहुत याद आ रही हैं मुझे ..”

“अच्छा ठीक हैं असलम जी आप मुझे अपनी रुकसाना बुला सकते हो … आप अब मेरे लिए असलम मियां हो और में आपकी रुकसाना ..”

“असलम रौशनी को इस बता पर और जोर से जकड़ने लगा .. अब रौशनी महसूस करि की असलम का लुंड और भी उसकी चूतड़ों पर डाब रहा था .. उसकी मुँह से आह निकल गयी ..

“रुकसाना बेगम मेरी जान ी लव यू …..”

फिर असलम ने रौशनी को अपने तरफ मुदा लिया .. अब दोनों की आँखें एक दूसरे से मिली और रौशनी मुस्कुरायी









“मेरी रुकसाना बेगम .. तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला हो .. “

“असलम मियां आप भी न बस कीजिये .. उफ्फ्फ्फ़ छोड़िये न ममम नाश्ता बनाना दीजिये ..”

“रुकसाना बेगम आज नहीं .. आज तोह तुम्हे पकड़ कर तुम्हे चूमूंगा .. मेरी रुकसाना बेगम , ी लव यू ….”

असलम, रौशनी के गुलाबी होठों को देखते रहा …. उसका लोढ़ा और टाइट होने लगा .. और अब सीधा जाकर रौशनी के एक्सपोज्ड नाभि से टकराया .. रौशनी भी इस बात पर कुछ नहीं बोली … वह बस असलम के मोठे लोडे को अपने नाभि पर महसूस कर ानकेहिं बंद करि …

असलम अब आगे झुक कर रौशनी के होठों पर अपने काळा होठों को टिकने लगा .. रौशनी भी कुछ नहीं बोली .. ानकेहिं बंद उसके लिप्स भी असलम के काळा होठों से मिल गए और दोनों एक चुम्बन में लगे हुए थे … असलम अपने हाथों को रौशनी के मुलायम पीठ पर रगड़ने लगा और उसे अब जोरों से चूमने लगा .. रौशनी भूल गयी थी की वह असलम की अघोष में हैं उसे चुम रही हैं .. वह भी उसके चुम्बन का साथ देने लगी .. उसकी बुर थोड़ी गीली होने लगी .. वह असलम के मोठे लुंड की चुंबन कहसुस कर रही थी …

चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी अब कामुकता से असलम को देखने लगी … असलम मियां अब बहुत हुआ , मुझे नाश्ता बनाए दीजिये न “

“उफ़ उकसाना बेगम मुझे तुम्हे चूमकर बहुत अच्छा लगा .. मेरे शैतान को तुमने तोह जगा hi दिया …”

रौशनी असलम को ऐसे बात करते सुन शर्मा गयी और अपने मुँह को फेर ली …

असलम अपने लोडे को मसलने लगा … फिर झुक कर उसने रौशनी के कमर को चुम लिया ..

“उफ़ असलम में आप भी न .. मममम चुम्बन से जी नहीं भरा आपका … उफ्फ्फ्फ़ ममम वहां मत चूमिए उफ्फ्फ मममम”

रुकसाना बेगम तुम्हे तोह हर जगह चूमना चाहता हूँ … अभी तोह बस होठों पर और कमर hi चूमा हूँ .. और बहुत साड़ी जगहों पर चूमा हैं और रुकसाना बेगम …”

दोनों इसी तरह से लिपटे हुए बात कर रहे थे .. लेकिन उन्हें नहीं पता था की यह सब सलीम देख रहा था … (उफ्फ्फ असलम बाज़ी मार रहा हैं .. कुछ तोह करना होगा .. अब रौशनी यहाँ रहने वाली हैं तब तक मेरे प्लान की शुरुवात करनी hi होगी …. असलम से पहले में hi रौशनी को अपना बनाऊंगा और उसकी चुदाई करूँगा ….)



 
सेक्स एनकाउंटर्स वाली बहुत साड़ी कहानियां हैं .. यहाँ स्लो बिल्डप hi होगा .. स्लो सेडस्टियन अभी तोह शुरू हुयी हैं
 
अब सलीम वहां से चला गया … रौशनी और असलम अभी भी रसोई घर में थे एक दूसरे के बाँहों में.

अब रौशनी फिर से नाश्ता बनाने में लग गयी. असलम अभी भी उसे पीछे से पकडे हुआ था … उसके नाक से वह रौशनी के गर्दन की खुशबु सूंघ रहा था .

उसका लोढ़ा निचे तोह झटके मारते रहा .. ान उसका लोढ़ा पूरी औकात में आये रौशनी के चूतड़ों से और डाब चूका था ..

रौशनी यह सब महसूस कर आज बहुत उत्तेजित हो रही थी .. (उफ्फ्फ आज असलम जी कुछ जायदा hi एक्ससिटेड हैं .. उनका हु बड़ा सा उफ्फ्फ पीछे जोर से चुभ रहा बैन .. लेकिन आज वह चुभन मुझे अच्छी लग रही हैं .. उफ्फ्फ)

असलम अब मौका देख थोड़ा और रौशनी को जकड़ने आगे अपने हिप्स करे .. अब उसका खड़ा लोढ़ा रौशनी की साड़ी के बीच उसकी चूतड़ों के बीच जा रहा था हलके से ..

रौशनी को अब वह महसूस हुआ तोह ववाह और शर्मा गयी .. अब वह असलम को ालोंसे बोले की उसका उभर उसकी चूतड़ों के बीच hi जा रहा हैं उफ्फ्फ .. इतना मोटा हैं उनका मममम









असलम “रुकसाना बेगम आज तोह में बहुत खुश हु.. आज तुम्हे और कसकर पकड़ना हैं ममम”

“उफ़ असलम जी प्लीज और नहीं .. यहाँ नाश्ता बनान मुश्किल हो रहा हैं मममम”

“रुकसाना बेगम तुम hi मेरे लिए नाश्ता हो … तुम्हे hi खा जाऊंगा”

“उफ्फ्फ असलम मियां पलेआसे उफ्फ्फ आप का पीछे बहुत चुभ रहा हैं ममम”

“रुकसाना बेगम क्या चुभ रहा हैं खुल कर बताओये न .. मुझे नहीं समझ आ रहे हैं आपकी बात ..”

“असलम जी आपका हु बड़ा सा जो हैं न वही .. चुभ रहा हैं उफ्फ्फ्फ़”

“ क्या बड़ा सा रुकसाना बगम खुलकर बताइये …

“उफ्फ्फ असलम मियां आप भी न .. वहींजोनस रात मैंने देखा था उफ्फ्फ वही बड़ा सा कला सा आपका उफ्फ्फ प्लीज आगे बताने में शर्म आ रही हैं”

“अरे कैसी शर्म अपने पति से बोलने में … उफ्फ्फ बताइये न ..”

असलम अब एक हल्का सा झटका देता हैं और उसका लुंड अब और रौशनी की साड़ी के बीच चूतड़ों के बीच घुसता हैं …

“असलम मियां आप का हु बड़ा लुंड .. िफ्फ्फ वह चुभ रहा हैं पीछे मम”

“अच्छा रुकसाना बेगम ज़रा बताइये मेरा लोढ़ा कहाँ चूब रहा हैं आपको”

“उफ्फ्फ असलम

जी अब उएह भी बतानी पड़ेगी उफ्फ्फ .. आप भी न मममम”

“अब कैसे शर्माना रुकसाना बेगम मम खुल कर बात करिये “

“असलम मियां आपका बड़ा लुंड मेरी चूतड़ों के बीच चुभ रहा हैं उफ्फ्फ हटिये न मममम आपका हथ्यार वहां से निकालिये मम असलम मियां प्लीसीईए”

असलम खुश था की रौशनी खुल कर उससे बातें कर रही हैं .. वह कुछ और देर वही रहा और हलके से झटकेदेने लगा रौशनी की चूतड़ों पर अपने बड़े लोडे से …”

रुकसाना बेगम आपकी चूतड़ हमेशा से hi नरम हैं .. मम क्या करे मेरा सख्त लोढ़ा उनमें आसानी से घुसता हाजिन ,…. अब आप हो hi इतनी नाज़ुक”

असलम अब जोर से एक झटका मरता हैं की रौशनी के मुँह से सिसकारियां निकलती हैं अहह उठ मममम असलम जी उफ्फ्फ्फ़ बस हटिये न अह्ह्ह मममम”

असलम एक आखिर का झटका मारते फिर रौशनी के गार्डन को चूमता हैं और वहां हलके से चाट लेता हैं..

“उफ़ असलम मियां अब क्या कर रहे हो उफ्फ्फ वहां क्यों चाट रहे हो उफ्फ्फ आपकी सलीवा सब लग रही हैं वहां छी ममम हटिये अब आप बहुत नटखट बन चुके हो ममम हटिये न असलम मियां …”

असलम अब रौशनी को चोरड एटा हैं .. उसका लोढ़ा अभी भी काफी सख्त हैं और वह रौशनी के साइड में जा खड़ा होता हैं..

रौशनी अब साइड में देखती हैं तोह उसको असलम का बड़ा उभर दिखाई देता हैं और उसके गाल शर्म से लाल होते हुए वह फिर से वहां से अपनी नज़र हटाने लगती हैं…

“रुकसाना बेगम … अरे नज़ारे क्यों हटाई .. अभी भी आप वहां देख सकती हो .. कैसी शर्म .. देखो कैसे सख्त हुआ हैं मेरी रुकसाना बेगम के लिए ..”

रौशनी की नज़र वह फिर से वहां घूमती हैं (उफ्फ्फ्फ़ ये असलम का लुंड तोह इतना टाइट हुआ हैं.. उफ़ क्या यह मेरे लिए टाइट हुआ हैं .. मुझे देख कर … या रुकसाना बेगम की सोच कर उनका खड़ा हुआ हैं उफ्फफ्फ्फ़)

“रुकसाना बेगम हैं न बड़ा और मोटा … कभी देखा हैं मोटा ऐसा …”

“नहीं असलम मियां आपका बहुत मोटा हैं उफ्फ्फ्फ़ आप प्लीज वह हटाइये वहां से उफ्फ्फ्फ़ “

“क्यों रुकसाना बेगम … देखो न .. तुम्हारा hi हैं .. तुम्हे देख कर hi तोह खड़ा हुआ हैं … तुम्हारे गदराये बदन को देख hi तोह खड़ा हुआ हैं मेरा शैतान …” अब यह आप hi का हैं जब चाहिए उसे देखो .. चाहो तोह उसके साथ खेल भी सकती हो आप.”

“उफ़ असलम मियां कैसी बातें कर रहे हो .. उफ्फ्फ आपका शैतानं नहीं चाहिए मुझे …. मुझे नहीं चाहिए उफ्फ्फ्फ़”

(रौशनी मन में (उफ्फ्फ मोटा लुंड उनका उस दिन देखा था उफ्फ्फ अब उसके बारे में में उनसे hi बातें कर रही हूँ … मुझे यह क्या हुआ हैं …)

“रुकसाना बेगम निकल कर दू आपको खेलने … ले लो ाची तरह से खेलो उसके साथ”

“की नहीं असलम मियां आप जैसे .. मुझे नाश्ता बनाने दीजिये …. “

“रुकसाना बेगम देखिये न उसे .. खेलिए उसके साथ आपके लिए hi तोह इतना सख्त हुआ हैं … “ फिर असलम रौशनी के कलाई को पकड़ लेता हैं और उसके हाथों को उसके खड़े उभर के तरफ ले जाता हैं … पता नहीं क्यों लेकिन रौशनी अपने हाथों को चुराने की कोषसिंह नहीं कर रही थी … असलम उसके हाथ को उसके उभर पर ले जार अहा था और वह कुछ नहीं कर रही थी … असलम ने फिर रौशनी के हाथों को उसके लुंड के उभर पर रख hi दिया .. रौशनी भी हाथ अब उसके उभर पर हेर्ने लगी …(उफ्फ्फ असलम जी का लुंड इतना मोटा हैं .उफ्फ्फ्फ़ कैसे धधक रहा हैं मेरे हाथों में उफ्फ्फ्फ़ …..)

रौशनी के हाथ असलम के उभर पर थे और उसने अपनी निचली हाथों को दाँतों से कान्त लिया … वह असलम के उभर पर अपने हाथों को फेरने लगी …. जैसे असलम को रौशनी के हाथों का ापर्श अपने उभर पर हुआ उसका लुंड झटके मारने लगा सीधे रौशनी के हाथों पर….

“रौशनी जी और पास से चुना चाहती हो तोह डालो अपने हाथों को मेरी पंत में … मम मेरी चांदी को छुओ और देखो कितना गरम हो चुक्का हैं मेरा लोढ़ा … रास भी चोर रहा हैं … महसूस करिये न ..

रौशनी अब थोड़ी होश में आती हैं और वहां से हाथ हटाने लगती हैं और शर्म के मारे रसोई घर से निकल कर अपने कमरे में जाती हैं .. वहां उसका दिल जोरों से धधकने लगता हैं उफ्फ्फ्फ़ आज तोह उसने बिना शिकायत के असलम के मोठे लुंड के उभर पर अपने हाथों को फेरी थी .. और तोह और जब असलम पीछे से अपने लुंड को उसकी चूतड़ों पर दबा रहा था तब भी वह बस उसे महसूस कर उत्तेजित फील कर रही थी … (उफ़ यह तुझे क्या हुआ हैं रौशनी … क्या तुम्हे असलम का लोढ़ा .. उफ़ मतलब लुंड पसंद आने लगा हैं … उफ्फ्फ सभलो खुद को .. तुम शादी शुदा हो .. और असलम बस एक बुद्धा हैं जिसे तुम बस एक हफ्ते पहले hi मिली हो .. उफ्फ्फ्फ़ )

वहां असलम रसोई घर में अपने लोडे को मसलने लगा था … (उफ़ आज तोह रौशनी ने बिना शिकायत के उससे मस्ती करि थी .. रौशनी जी अब तोह तुम जल्द hi मेरे लुंड को छुओगी और उससे चुड़ोगी … तेरी उस गुलाबी छूट की कुटाई करूँगा जल्द hi जल्द से …)







अब रौशनी अपने कमरे में तैयार हुयी .. जब वह बहार आयी तब तक असलम नाश्ता किये बाथरूम चले गए थे .. रौशनी फिर थोड़ा नाश्ता कर वहां से ऑफिस के लिए निकल गयी … बाथरूम में असलम फिर से रौशनी का नाम लेते हुए जहर गया ….

अब दूसरी तरफ सलीम ने जो देखा था असलम और रौशनी के बीच उससे वह नाराज़ था .. असलम बाज़ी मार रहा था .. अब उसे अपना मौका लेना चाहिए ..

उसने मीनल को कॉल किया …

“सलाम सलीम जी .. बहुत दिनों बाद मुझे याद किया आपने … क्यों रौशनी मैडम घास नहीं दे रही आपको ः “

“अरे छमिया … रौशनी को तोह में पा कर hi रहूँगा .. लेकिन टब hi तोह माल हैं .. कहाँ हैं तू बता . मुझे तुमसे मिलना हैं ..”

“अच्छा सलीम मियां आपका लुंड उतावला हो रहा हैं मेरी छूट के लिए .. बताइये .. उस मोठे लुंड को मेरी छूट चाहिए न …”

“मीनल तू हैं माल, तेरी तोह मस्ती से चुदाई कितनी बार कर चुक्का हु .. अब बहुत दिन हुए तेरी छूट नहीं मिली … उफ़ बता कहाँ हैं तू. अभी आकर तेरी चुदाई करूँगा “

“सलीम जी फिर आइये में घर पर hi हूँ , आज कोई नहीं घर पर .. आओ तुम्हारे लुंड के लिए भी में बेताब हूँ.”

“नहीं तुम्हारे घर पर नहीं … तू आ जा मेरे दोस्त का एक छोटा फ्लैट हैं वहां आओ अभी 1 घंटे में … बहुत मस्ती करेंगे .. आजा में एड्रेस भेजता हूँ.”

“अच्छा सलीम मियां आउंगी … तैयार रहिये , मेरी छूट की प्यास बुझाऊँगी आज आपके मोठे लुंड से ..”









सलीम अपने लुंड को मसलने लगता हैं .. वह मीनल की मदत लेने वाला था रौशनी को पाने के लिए .. लेकिन उससे पहले मीनल की आज वह जमकर चुदाई करने वाला था…
 
वार्निंग - इतस ा स्लो सेडक्टिव स्टोरी .. रौशनी सेक्स सीन्स विल टेक टाइम तो के !!
 
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