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अब दोनों सलीम के पहचान के पेस्ट कण्ट्रोल के पास पहुँच गए ..
“बोलिये सलीम जी कैसे आना हुआ”
वह आदमी रौशनी को देखने लगा.. उफ़ कितनी खूबसूरत महिला थी .. एकसूम से गोरी और गदराये बदन वाली … वह उसके गुलाबी होठों को ; गोरी बाँहों और चूचियों के वहां अपनी नज़र घुमाई ..
“अफ़ज़ल यह हैं रौशनी जी .. हमारे ंगो की नयी मैनेजर..”
“सलाम वालैकुम रौशनी जी…”
“नमस्ते अफ़ज़ल जी ..”
“बोलिये सलीम भाई कैसी मदत करू में आपकी ..” वह मर्द कुछ 40 के उम्र का होगा .. वह बस रौशनी की बदन को घूरे है रहा था ..
“अरे अफ़ज़ल , हमें न घर पर पेस्ट कण्ट्रोल कवनि हैं … इसलिए तुम्हारे पास आये हैं .. हमारी मां बहुत नेक दिल की हैं .. वह चाहती हैं की घर की पेस्ट कण्ट्रोल हो जाए ..”
“अच्छी बात है. सलीम में तोह कहता hi था तुम्हे करा लो पेस्ट कण्ट्रोल.”
“अफ़ज़ल पता हैं यार लेकिन वह पहले वाला पागल मैनेजर बात मानता hi नहीं था.. अब रौशनी जी जैसी मैडम आयी हैं तोह अब पेस्ट कण्ट्रोल करवा पाएंगे”
“अच्छा सलीम भाई .. वैसे सॉरी बूत आप दोनों अंदर प्लीज आइये .: रौशनी जी कुछ ठंडा मंगाई आपके लिए.”
रौशनी नहीं बोली ..
“आत्रेय मैडम जी आप सलीम भाई के वहां मि नयी मैनेजर हो और हुनरी सिमोले शॉप पर पहली बार आयी हो, कुछ तोह ठंडा पीजिये.”
रौशनी अब सलीम के तरफ देखती हैं.
“रौशनी जी आप पीजिये , अफ़ज़ल मेरा दोस्त हैं एकदम से मस्त एक जूस लाएगा पास के दूकान से .”
“सलीम भाई आप आपके नेरे साथ कुछ बात करनी हैं”
“चलो ठीक हैं. रौशनी जी आप आराम से अंदर बैठिये हम जूस लेट हैं आपके लिए.”
रौशनी अंदर कुर्सी पर एक पंखे के सामने बैठ गयी.
सलीम और अफ़ज़ल चले गए बहार.
“अरे सलीम भाई क्या मस्त माल हैं यार … इतनी सेक्सी लेडी हैं उफ्फ्फ्फ़”



“हाँ यार कड़क माल हैं न … यार मैनेजर बन गयी हैं क्या खुश किस्मत हैं यार सच में बहुत मस्त माल हैं”
“सलीम भाई आपका जवाब नहीं , ऐसी एक से एक आइटम तेरे नसीब में hi कैसे आती हैं यार .. हु मीनल भी थी मस्त युवा कड़क माल… साली जैसे इसे भी अपने लौड़े के निचे सुलाया हैं क्या ..”
“नहीं अफ़ज़ल अभी तोह मिली हैं कुछ दिनों पहले ..”
“अच्छा सलीम भाई मतलब आगे जा कर इसको अपने हवस के जाल में फ़साने का पूरा इरादा हैं तुम्हे .. उफ्फ्फ कड़क माल रात में मिले तोह रातें रंगीन हो हाय उफ्फ्फ्फ़ … क्या कर्व्स हैं , क्या बदन हैं , गोरा मखमल और गदरायी जिस्म वाली उफ्फ्फ मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया रे”
“ हाँ यार साड़ी में भी मालदार हैं न … सोच साड़ी उतरेगी तोह कितनी मस्त दिखेगी नंगी … यार मन करता हैं दबोच hi लूँ हमेशा ः.”
“वैसे अफ़ज़ल टब hi तोह उस एक औरत को अपनी आइटम बनाये था .. उसका क्या अभी भी लेता हैं उसकी .. बता न”
“हाँ भाई हु तोह आइटम हैं hi लेकिन आइटम अब ोुरानी हो गयी हैं .. नयी आइटम चाहिए यार उफ्फ्फ्फ़ लौड़ा तोह नयी छूट ढूंढ़ने लगा हैं.”
“तेरी तोह निकल पड़ेगी .. तू तोह इसको पता कर hi रहेगा .. फिर तेरे फौलादी लोडे के निचे पटक कर तू उसकी लेगा …”
“अफ़ज़ल वैसे मैडम हमारे साथ hi रह रही हैं ः.. इसलिए तोह वेस्ट कण्ट्रोल करवाना हैं आज ..”
“ओह तेरी सच हैं क्या सलीम भाई , अरे घर पर रहती हैं तोह अब ज़रूर जल्द से जल्द तेरे से छुड़ेगी ये मलाईदार माल”
“अफ़ज़ल ऐसी आइटम को पटना आसान नहीं हैं .. बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं , लेकिन हाँ यार एक बार पैट जाए तोह ऐसी औरतें तोह बड़ी मस्ती में चुदती हैं जब चाहो तब”
“अच्छा यह तेरे घर पर कैसर यह रही हैं और तेरे वहां हु ासकाममभी रहता हैं न , फिर कैसे?”
“अरे उसकी तोह अलग hi कहानी हैं लेकिन उससे तेरा क्या लेना देना, चल जूस लेकर जाते हैं.. यहाँ के कमीने सब उसे देखेंगे तोह लाइन बना कर घूरते रहेंगे उसे ..”
अफ़ज़ल मन में सोचते हुए ( उफ़ यह हरामी सलीम हैं साला बहुत लकी .. क्या जादू चलता हैं औरतों पर क्या पता .. साला बुद्धा होकर भी इतने औरतों को पटाया हैं और छोड़ा हैं, लेकिन यह सबसे से रापचिक छोड़ू माल हैं… इसको भी छोड़ेगा तोह सेल से क्लासेज लेने पड़ेंगे औरतों को पटाने के उफ्फ्फ)
अब दोनों उसके शॉप पहुँचते हैं और अफ़ज़ल रौशनी को जूस देता हैं ..
“रौशनी जी पुरे घर का करना हैं तोह 500 रा लूंगा .. पुरे ंगो के घरों के करने हैं तोह … 20 घरों के कुल मिलकर रस.9000.”
“अफ़ज़ल जी ोेहले आप सलीम जी के घर का कीजिये .. उसके दूंगी 500. उस काम को देख आगे के घरों के बारे में सोचूंगी.”
अफ़ज़ल सोचता हैं की काम मिले या न मिले थोड़ा वक़्त रौशनी के साथ बिताएगा तोह उसके बदन को निहारने का मौका मिलेगा … ऐसी मलाईदार महिला रोज़ रोज़ नहीं मिलता ..
“अच्छा मैडम ठीक हैं लेकिन आप काम देखोगी तोह सब घरों का कॉन्ट्रैक्ट आप हमें hi डौगी.”
“आज शाम को आ 4 बजे तब करिये तुम्हारा काम ठीक हैं अफ़ज़ल ..?”
“चलो ठीक हैं सलीम भाई..” फिर सब जुइ पिटे हैं इधर उधर की बातें लरते हैं . रौशनी टाइम देखती हैं .. अब उन्हें घर जाकर उसे लंच बनाना था असलम और सलीम के लिए.
“सलीम जी हमें जाना चाहिए , मुझे लंच बनाना हैं”
अफ़ज़ल मन में (उफ्फ्फ यह तोह इनके लिए लंच भी बनाएगी .. ये क्या हो रहा हैं .. ऐसी महिला उन बुद्धों के लिए लंच बनाएगी ..)
रौशनी बहार जाती हैं तोह सलीम अफ़ज़ल को देख आँख मात्रा हैं.
अब दोनों फिर से बस स्टैंड जाते हैं. इस बार दुपहर की वजह से थोड़ा काम भीड़ होने के कारन रौशनी को सीट मिल जाती है. सलीम उसके पीछे खड़ा रहता हैं.
विंडो सीट पर बैठी महिला ने विंडो ओपन और करि तब हवे जे झोके से रौशनी का पल्लू सरक गया … उस वजह से पीछे खड़े सलीम की नज़ारे जब निचे चली गयी तोह वह रौशनी की चूचियों की दरार डेल्ह पाया … उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हुआ … अब जिस तरह वह खड़ा था उसका लोढ़ा बिलकुल रौशनी के गलों के पास था .. रौशनी आगे देख रही थी इसीलिए उसे नहीं पता था की सलीम का पंत में उसका टाइट होता हुआ लोढ़ा अब उसके काफी करीब था ..
उसे यह भी नहीं पता चला की ऊपर से सलीम इससके गोरी गोरी मुलायम चूचियों के बीच के दरार को देख प् रहा था …

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सलीम उस नज़ारे को कई सेकंड एन्जॉय करने लगा ..
जब तक की रौशनी ने अपने पल्लू को फिर से एडजस्ट नहीं करि.
सलीम ला लोढ़ा तोह काफी टोघट हुआ था अब तक ..
अब एक स्टॉप पर रौशनी की बाजु में बैठी महिला उठा कर जाने लगी .. रौशनी साइड में सरक गयी विंडो सीट पर.. सलीम निचे बैठने hi वाला था की अचानक एक आदमी रौशनी की बगल वाली सीट में बैठ गया.
सलीम को ग़ुस्सा आया की वह बैठने hi वाला था की यह साला आदमी बैत गया.
रौशनी को भी एक अनजान मर्द के पास में बैठने से उनकंफर्टबले फीलिंग आयी..
वह ऊपर सलीम को देखि .. आँखों से इशारा करते हुए की वह छाती थिन्की सलीम बैठे इस आदमी की जगह पर..
रौशनी फिर उस आदमी से बोली की वह चाहती थी की सलीम जो उसके साथ था वह बैठ जाये.
उस आदमी ने उठने से इंकार किया..
सलीम फिर उस आदमी के कन्धों पर तप करा..
“भाईसाहब मैडम के साथ में आया हूँ .. तुम मुझे बैठने दो यहाँ .”
“ऐबी बुड्ढे तू खड़ा रह अब में बैठा हूँ न तेरे मैडम के साथ.”
भाईसाहब प्लीज उठिये मुझे वहां बैठने दो, मैडम ने आप से कहा था न.”
“अबे बुड्ढे नहीं उठूंगा .. अब तंग न कर.”
सलीम क ोटोः ग़ुस्सा आया “अबे लोदु तेरे को बोलै न की मैडम के साथ आया हूँ बैठने दो मुझे. चल उठ”
“अबे बुड्ढे औकात में रह .. ज्यादा मत उड़ .. में उठूंगा नहीं.”
“आ चूतिये बार बार बुद्धा मत बोल .. तेरे को दिखता हूँ बुद्धा होगा तेरा बाप .. अब उठ मैडम ने रिक्वेस्ट किट hi न … चल अब अच्छे से उठ जा और मुझे बैठने दे”
वह आदमी उठ कर सलीम का कालर ोाकड़ने लगा..
“कालर छोड़ चूतिये … तेरे को प्यार से बोलै तोह सुना नहीं .. फिर से बोलै तोह भी सुना नहीं .. फिस्शल न हो .. ज्यादा मत उड़ ..”
“अरे क्या हो रहा हैं यहाँ … कंडक्टर वहां आ गया”
“साहब देखो बैठा तहत ओह यह बुद्धा तंग करते रहा ..”
“कंडक्टर साहब देखो अब में मैडम के साथ आया हूँ , मैडम ने उसे रिक्वेस्ट किया की वह मुझे बैठने दे .. अब देखो इस उम्र में भी मुझे बैठने से इंकार कर रहा हैं.. आज कल के लौंडे , उनको बुज़ुर्गों से बात करने की तमीज नहीं हैं”
“अरे तू जवान हैं , इस बुज़ुर्ग को बैठने दे .. एक तोह उसके साथ आयी थी मैडम .. चल तू बाद में किसी और सीट में बैठ.. और यह उनका कालर चोर..”
उस आदमी ने कालर छोरा और कंडक्टर वहां से चला गया.
सलीम उस आदमी को घूरने लगा .. “चल अब जा नहीं तोह मेरे अंदर की बुराई न निकल .. बहुत तेरे जैसे लौंडो की पिटाई करा हूँ … अब जा ..”
रौशनी यह सब सन देख रही थी.. एक तरफ से वह सलीम के ऐसे बर्ताव से थोड़ी दरी हुयी थी .. लेकिन दूसरी तरफ वह सोचिन्की बुड्ढे होकर भी काफी स्ट्रांग और बोल्ड हैं सलीम… उसकी ख़ुशी के लिए झगड़ने पर भी आ सकते हैं … रौशनी को कही न कही यह बात इम्प्रेस करि.
अब दोनों बगल में बैठे हुए थे ..
सलीम का लोढ़ा अभी भी थोड़ा टाइट था .. अब रौशनी विंडो के बहार देखने लगी..
सलीम अब रौशनी के साइड में बैठा हुआ रौशनी की गोरी नाज़ुक बाँहों पर नज़र बीच बीच में डालते रहता..


“रौशनी जी … आप इतनी धुप में भी इतनी फ्रेश कैसी लगती हो … में तोह इस धुप में ढल जाता हु…”
“ऐसे कैच नहीं सलीम जी … बस अब शायद में मॉइस्चराइजर लगाती हूँ इसीलिए स्किन अभी भी इस धुप में भी ज्यादा ड्राई नहीं होतीहैं ..”
“रौशनी जी बुरा न मानिये लेकिन क्या में आपके हाथों की मुलायमता फील कर सकता हूँ ..?”
रौशनी इस रिक्वेस्ट से सलीम को देखती रही ..
“क्यों सलीम जी फील कर क्या मिलेगा आपको ः”
“बस ऐसे hi आपकी मुलायम त्वचा , मेरे इस काळा रफ़ त्वचा से तोह काफी अलग हैं न … सच आप बहुत hi अच्छी लगती हो इस साड़ी में … आपकी सुंदरता खिल उठ टी हैं.”
“ः सलीम जी आप भी न … अच्छा दो सेकंड टच कर सकते हो आप … वैसे आप मर्दो .. आपकी त्वचा तोह रफ़ एंड टफ चाहिए hi”
सलीम को अब रौशनी की बाँहों को चुने का सिग्नल मिल गया था .. वह हलके से उसके मुलायम बाँहों को टच करने लगा … उफ्फ्फ क्या फीलिंग थी .. उसका लोढ़ा अब झटके मारने लगा .. “उफ्फ्फ रौशनी जी इतनी मुलायम हो आप तोह … ववव यह मॉइस्चराइजर से ज्यादा आपकी नेचुरल त्वचा hi ऐसे हैं मुझे तोह लगता है ”

“सलीम जी हाँ अब औरत होकर हमारी त्वचा नटुरालय बहुत सॉफ्ट होती hi हैं”
“अच्छा फिर भी आपकी कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट हैं .. रौशनी जी सच कहता हूँ मेरी बीवी की भी इतनी मुलायम नहीं थी..”
कुछ सेकंड टच करने की बात हुयी थी लेकिन अब 2 मं हुए थे की सलीम ने रौशनी के बाँहों को अपने हाथों से hi फील करता .. निचे पंत में उसका लुंड झटके मारते रहा.. रौशनी को सलीम के टच से अंदर एक अच्छी फीलिंग महसूस होने लगी …”
उसकी नज़र अब निचे चली गयी तोह सीधे सलीम के पंत के ऊपर hi गयी .. वह अंदाज़ा लगा पायी की सलीम के वहां एक उभर बन गया था .. उफ्फ्फ्फ़ उसी के लुंड का उभर होने का एहसास होते hi रौशनी ने शर्मा कर बोली “बस सलीम जी बहुत फील करा आवे … प्लीज अब छोड़िये मेरी बाँहों को.”
“क्यों रौशनी जी आपको अच्छा नहीं लगा .. अभी तोह आप कुछ नहीं बोल रही थी अब अचानक”
प्लीज सलीम जी छोड़िये न .. प्लीज
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे .. और सलीम ने उसका हाथ चोर दिया..”
रौशनी फिर एक आखरी नज़र सलीम के उभर पर डाली और फिर शर्म से बहार देखने लगी ..
वहां सलीम को पता चला था की रौशनी ने उसके लोडे के उभर को देखि थी .. वह खुश था की धीरे धीरे रौशनी की नज़र उसने अपनी लोडे के वहां केंद्रित करि थी …
दोनों अपने स्टॉप पर पहुँच गए थे . रौशनी उतर गयी और सलीम उतरने hi वाला था की , जो आदमी , जिसके साथ झगड़ा हुआ था वह सलीम को देखने लगा .. और सलीम उसे .. कुछ पल में दोनों के चेहरे पर मुस्कान आयी ..
वह आदमी सलीम के पहचान का hi था .. वह जो हुआ था सब दोनों ने एक्टिंग किया था.. सलीम की चल थी … वह चाहता था की रौशनी देखे की सलीम उसके लिए लड़ाई कर सकता हैं .. उसके लिए एक स्टैंड ले सकता हैं..
“बोलिये सलीम जी कैसे आना हुआ”
वह आदमी रौशनी को देखने लगा.. उफ़ कितनी खूबसूरत महिला थी .. एकसूम से गोरी और गदराये बदन वाली … वह उसके गुलाबी होठों को ; गोरी बाँहों और चूचियों के वहां अपनी नज़र घुमाई ..
“अफ़ज़ल यह हैं रौशनी जी .. हमारे ंगो की नयी मैनेजर..”
“सलाम वालैकुम रौशनी जी…”
“नमस्ते अफ़ज़ल जी ..”
“बोलिये सलीम भाई कैसी मदत करू में आपकी ..” वह मर्द कुछ 40 के उम्र का होगा .. वह बस रौशनी की बदन को घूरे है रहा था ..
“अरे अफ़ज़ल , हमें न घर पर पेस्ट कण्ट्रोल कवनि हैं … इसलिए तुम्हारे पास आये हैं .. हमारी मां बहुत नेक दिल की हैं .. वह चाहती हैं की घर की पेस्ट कण्ट्रोल हो जाए ..”
“अच्छी बात है. सलीम में तोह कहता hi था तुम्हे करा लो पेस्ट कण्ट्रोल.”
“अफ़ज़ल पता हैं यार लेकिन वह पहले वाला पागल मैनेजर बात मानता hi नहीं था.. अब रौशनी जी जैसी मैडम आयी हैं तोह अब पेस्ट कण्ट्रोल करवा पाएंगे”
“अच्छा सलीम भाई .. वैसे सॉरी बूत आप दोनों अंदर प्लीज आइये .: रौशनी जी कुछ ठंडा मंगाई आपके लिए.”
रौशनी नहीं बोली ..
“आत्रेय मैडम जी आप सलीम भाई के वहां मि नयी मैनेजर हो और हुनरी सिमोले शॉप पर पहली बार आयी हो, कुछ तोह ठंडा पीजिये.”
रौशनी अब सलीम के तरफ देखती हैं.
“रौशनी जी आप पीजिये , अफ़ज़ल मेरा दोस्त हैं एकदम से मस्त एक जूस लाएगा पास के दूकान से .”
“सलीम भाई आप आपके नेरे साथ कुछ बात करनी हैं”
“चलो ठीक हैं. रौशनी जी आप आराम से अंदर बैठिये हम जूस लेट हैं आपके लिए.”
रौशनी अंदर कुर्सी पर एक पंखे के सामने बैठ गयी.
सलीम और अफ़ज़ल चले गए बहार.
“अरे सलीम भाई क्या मस्त माल हैं यार … इतनी सेक्सी लेडी हैं उफ्फ्फ्फ़”



“हाँ यार कड़क माल हैं न … यार मैनेजर बन गयी हैं क्या खुश किस्मत हैं यार सच में बहुत मस्त माल हैं”
“सलीम भाई आपका जवाब नहीं , ऐसी एक से एक आइटम तेरे नसीब में hi कैसे आती हैं यार .. हु मीनल भी थी मस्त युवा कड़क माल… साली जैसे इसे भी अपने लौड़े के निचे सुलाया हैं क्या ..”
“नहीं अफ़ज़ल अभी तोह मिली हैं कुछ दिनों पहले ..”
“अच्छा सलीम भाई मतलब आगे जा कर इसको अपने हवस के जाल में फ़साने का पूरा इरादा हैं तुम्हे .. उफ्फ्फ कड़क माल रात में मिले तोह रातें रंगीन हो हाय उफ्फ्फ्फ़ … क्या कर्व्स हैं , क्या बदन हैं , गोरा मखमल और गदरायी जिस्म वाली उफ्फ्फ मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया रे”
“ हाँ यार साड़ी में भी मालदार हैं न … सोच साड़ी उतरेगी तोह कितनी मस्त दिखेगी नंगी … यार मन करता हैं दबोच hi लूँ हमेशा ः.”
“वैसे अफ़ज़ल टब hi तोह उस एक औरत को अपनी आइटम बनाये था .. उसका क्या अभी भी लेता हैं उसकी .. बता न”
“हाँ भाई हु तोह आइटम हैं hi लेकिन आइटम अब ोुरानी हो गयी हैं .. नयी आइटम चाहिए यार उफ्फ्फ्फ़ लौड़ा तोह नयी छूट ढूंढ़ने लगा हैं.”
“तेरी तोह निकल पड़ेगी .. तू तोह इसको पता कर hi रहेगा .. फिर तेरे फौलादी लोडे के निचे पटक कर तू उसकी लेगा …”
“अफ़ज़ल वैसे मैडम हमारे साथ hi रह रही हैं ः.. इसलिए तोह वेस्ट कण्ट्रोल करवाना हैं आज ..”
“ओह तेरी सच हैं क्या सलीम भाई , अरे घर पर रहती हैं तोह अब ज़रूर जल्द से जल्द तेरे से छुड़ेगी ये मलाईदार माल”
“अफ़ज़ल ऐसी आइटम को पटना आसान नहीं हैं .. बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं , लेकिन हाँ यार एक बार पैट जाए तोह ऐसी औरतें तोह बड़ी मस्ती में चुदती हैं जब चाहो तब”
“अच्छा यह तेरे घर पर कैसर यह रही हैं और तेरे वहां हु ासकाममभी रहता हैं न , फिर कैसे?”
“अरे उसकी तोह अलग hi कहानी हैं लेकिन उससे तेरा क्या लेना देना, चल जूस लेकर जाते हैं.. यहाँ के कमीने सब उसे देखेंगे तोह लाइन बना कर घूरते रहेंगे उसे ..”
अफ़ज़ल मन में सोचते हुए ( उफ़ यह हरामी सलीम हैं साला बहुत लकी .. क्या जादू चलता हैं औरतों पर क्या पता .. साला बुद्धा होकर भी इतने औरतों को पटाया हैं और छोड़ा हैं, लेकिन यह सबसे से रापचिक छोड़ू माल हैं… इसको भी छोड़ेगा तोह सेल से क्लासेज लेने पड़ेंगे औरतों को पटाने के उफ्फ्फ)
अब दोनों उसके शॉप पहुँचते हैं और अफ़ज़ल रौशनी को जूस देता हैं ..
“रौशनी जी पुरे घर का करना हैं तोह 500 रा लूंगा .. पुरे ंगो के घरों के करने हैं तोह … 20 घरों के कुल मिलकर रस.9000.”
“अफ़ज़ल जी ोेहले आप सलीम जी के घर का कीजिये .. उसके दूंगी 500. उस काम को देख आगे के घरों के बारे में सोचूंगी.”
अफ़ज़ल सोचता हैं की काम मिले या न मिले थोड़ा वक़्त रौशनी के साथ बिताएगा तोह उसके बदन को निहारने का मौका मिलेगा … ऐसी मलाईदार महिला रोज़ रोज़ नहीं मिलता ..
“अच्छा मैडम ठीक हैं लेकिन आप काम देखोगी तोह सब घरों का कॉन्ट्रैक्ट आप हमें hi डौगी.”
“आज शाम को आ 4 बजे तब करिये तुम्हारा काम ठीक हैं अफ़ज़ल ..?”
“चलो ठीक हैं सलीम भाई..” फिर सब जुइ पिटे हैं इधर उधर की बातें लरते हैं . रौशनी टाइम देखती हैं .. अब उन्हें घर जाकर उसे लंच बनाना था असलम और सलीम के लिए.
“सलीम जी हमें जाना चाहिए , मुझे लंच बनाना हैं”
अफ़ज़ल मन में (उफ्फ्फ यह तोह इनके लिए लंच भी बनाएगी .. ये क्या हो रहा हैं .. ऐसी महिला उन बुद्धों के लिए लंच बनाएगी ..)
रौशनी बहार जाती हैं तोह सलीम अफ़ज़ल को देख आँख मात्रा हैं.
अब दोनों फिर से बस स्टैंड जाते हैं. इस बार दुपहर की वजह से थोड़ा काम भीड़ होने के कारन रौशनी को सीट मिल जाती है. सलीम उसके पीछे खड़ा रहता हैं.
विंडो सीट पर बैठी महिला ने विंडो ओपन और करि तब हवे जे झोके से रौशनी का पल्लू सरक गया … उस वजह से पीछे खड़े सलीम की नज़ारे जब निचे चली गयी तोह वह रौशनी की चूचियों की दरार डेल्ह पाया … उसका लोढ़ा एकदम से टाइट हुआ … अब जिस तरह वह खड़ा था उसका लोढ़ा बिलकुल रौशनी के गलों के पास था .. रौशनी आगे देख रही थी इसीलिए उसे नहीं पता था की सलीम का पंत में उसका टाइट होता हुआ लोढ़ा अब उसके काफी करीब था ..
उसे यह भी नहीं पता चला की ऊपर से सलीम इससके गोरी गोरी मुलायम चूचियों के बीच के दरार को देख प् रहा था …

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सलीम उस नज़ारे को कई सेकंड एन्जॉय करने लगा ..
जब तक की रौशनी ने अपने पल्लू को फिर से एडजस्ट नहीं करि.
सलीम ला लोढ़ा तोह काफी टोघट हुआ था अब तक ..
अब एक स्टॉप पर रौशनी की बाजु में बैठी महिला उठा कर जाने लगी .. रौशनी साइड में सरक गयी विंडो सीट पर.. सलीम निचे बैठने hi वाला था की अचानक एक आदमी रौशनी की बगल वाली सीट में बैठ गया.
सलीम को ग़ुस्सा आया की वह बैठने hi वाला था की यह साला आदमी बैत गया.
रौशनी को भी एक अनजान मर्द के पास में बैठने से उनकंफर्टबले फीलिंग आयी..
वह ऊपर सलीम को देखि .. आँखों से इशारा करते हुए की वह छाती थिन्की सलीम बैठे इस आदमी की जगह पर..
रौशनी फिर उस आदमी से बोली की वह चाहती थी की सलीम जो उसके साथ था वह बैठ जाये.
उस आदमी ने उठने से इंकार किया..
सलीम फिर उस आदमी के कन्धों पर तप करा..
“भाईसाहब मैडम के साथ में आया हूँ .. तुम मुझे बैठने दो यहाँ .”
“ऐबी बुड्ढे तू खड़ा रह अब में बैठा हूँ न तेरे मैडम के साथ.”
भाईसाहब प्लीज उठिये मुझे वहां बैठने दो, मैडम ने आप से कहा था न.”
“अबे बुड्ढे नहीं उठूंगा .. अब तंग न कर.”
सलीम क ोटोः ग़ुस्सा आया “अबे लोदु तेरे को बोलै न की मैडम के साथ आया हूँ बैठने दो मुझे. चल उठ”
“अबे बुड्ढे औकात में रह .. ज्यादा मत उड़ .. में उठूंगा नहीं.”
“आ चूतिये बार बार बुद्धा मत बोल .. तेरे को दिखता हूँ बुद्धा होगा तेरा बाप .. अब उठ मैडम ने रिक्वेस्ट किट hi न … चल अब अच्छे से उठ जा और मुझे बैठने दे”
वह आदमी उठ कर सलीम का कालर ोाकड़ने लगा..
“कालर छोड़ चूतिये … तेरे को प्यार से बोलै तोह सुना नहीं .. फिर से बोलै तोह भी सुना नहीं .. फिस्शल न हो .. ज्यादा मत उड़ ..”
“अरे क्या हो रहा हैं यहाँ … कंडक्टर वहां आ गया”
“साहब देखो बैठा तहत ओह यह बुद्धा तंग करते रहा ..”
“कंडक्टर साहब देखो अब में मैडम के साथ आया हूँ , मैडम ने उसे रिक्वेस्ट किया की वह मुझे बैठने दे .. अब देखो इस उम्र में भी मुझे बैठने से इंकार कर रहा हैं.. आज कल के लौंडे , उनको बुज़ुर्गों से बात करने की तमीज नहीं हैं”
“अरे तू जवान हैं , इस बुज़ुर्ग को बैठने दे .. एक तोह उसके साथ आयी थी मैडम .. चल तू बाद में किसी और सीट में बैठ.. और यह उनका कालर चोर..”
उस आदमी ने कालर छोरा और कंडक्टर वहां से चला गया.
सलीम उस आदमी को घूरने लगा .. “चल अब जा नहीं तोह मेरे अंदर की बुराई न निकल .. बहुत तेरे जैसे लौंडो की पिटाई करा हूँ … अब जा ..”
रौशनी यह सब सन देख रही थी.. एक तरफ से वह सलीम के ऐसे बर्ताव से थोड़ी दरी हुयी थी .. लेकिन दूसरी तरफ वह सोचिन्की बुड्ढे होकर भी काफी स्ट्रांग और बोल्ड हैं सलीम… उसकी ख़ुशी के लिए झगड़ने पर भी आ सकते हैं … रौशनी को कही न कही यह बात इम्प्रेस करि.
अब दोनों बगल में बैठे हुए थे ..
सलीम का लोढ़ा अभी भी थोड़ा टाइट था .. अब रौशनी विंडो के बहार देखने लगी..
सलीम अब रौशनी के साइड में बैठा हुआ रौशनी की गोरी नाज़ुक बाँहों पर नज़र बीच बीच में डालते रहता..


“रौशनी जी … आप इतनी धुप में भी इतनी फ्रेश कैसी लगती हो … में तोह इस धुप में ढल जाता हु…”
“ऐसे कैच नहीं सलीम जी … बस अब शायद में मॉइस्चराइजर लगाती हूँ इसीलिए स्किन अभी भी इस धुप में भी ज्यादा ड्राई नहीं होतीहैं ..”
“रौशनी जी बुरा न मानिये लेकिन क्या में आपके हाथों की मुलायमता फील कर सकता हूँ ..?”
रौशनी इस रिक्वेस्ट से सलीम को देखती रही ..
“क्यों सलीम जी फील कर क्या मिलेगा आपको ः”
“बस ऐसे hi आपकी मुलायम त्वचा , मेरे इस काळा रफ़ त्वचा से तोह काफी अलग हैं न … सच आप बहुत hi अच्छी लगती हो इस साड़ी में … आपकी सुंदरता खिल उठ टी हैं.”
“ः सलीम जी आप भी न … अच्छा दो सेकंड टच कर सकते हो आप … वैसे आप मर्दो .. आपकी त्वचा तोह रफ़ एंड टफ चाहिए hi”
सलीम को अब रौशनी की बाँहों को चुने का सिग्नल मिल गया था .. वह हलके से उसके मुलायम बाँहों को टच करने लगा … उफ्फ्फ क्या फीलिंग थी .. उसका लोढ़ा अब झटके मारने लगा .. “उफ्फ्फ रौशनी जी इतनी मुलायम हो आप तोह … ववव यह मॉइस्चराइजर से ज्यादा आपकी नेचुरल त्वचा hi ऐसे हैं मुझे तोह लगता है ”

“सलीम जी हाँ अब औरत होकर हमारी त्वचा नटुरालय बहुत सॉफ्ट होती hi हैं”
“अच्छा फिर भी आपकी कुछ ज्यादा hi सॉफ्ट हैं .. रौशनी जी सच कहता हूँ मेरी बीवी की भी इतनी मुलायम नहीं थी..”
कुछ सेकंड टच करने की बात हुयी थी लेकिन अब 2 मं हुए थे की सलीम ने रौशनी के बाँहों को अपने हाथों से hi फील करता .. निचे पंत में उसका लुंड झटके मारते रहा.. रौशनी को सलीम के टच से अंदर एक अच्छी फीलिंग महसूस होने लगी …”
उसकी नज़र अब निचे चली गयी तोह सीधे सलीम के पंत के ऊपर hi गयी .. वह अंदाज़ा लगा पायी की सलीम के वहां एक उभर बन गया था .. उफ्फ्फ्फ़ उसी के लुंड का उभर होने का एहसास होते hi रौशनी ने शर्मा कर बोली “बस सलीम जी बहुत फील करा आवे … प्लीज अब छोड़िये मेरी बाँहों को.”
“क्यों रौशनी जी आपको अच्छा नहीं लगा .. अभी तोह आप कुछ नहीं बोल रही थी अब अचानक”
प्लीज सलीम जी छोड़िये न .. प्लीज
“अच्छा ठीक हैं रौशनी जी जैसे आप कहे .. और सलीम ने उसका हाथ चोर दिया..”
रौशनी फिर एक आखरी नज़र सलीम के उभर पर डाली और फिर शर्म से बहार देखने लगी ..
वहां सलीम को पता चला था की रौशनी ने उसके लोडे के उभर को देखि थी .. वह खुश था की धीरे धीरे रौशनी की नज़र उसने अपनी लोडे के वहां केंद्रित करि थी …
दोनों अपने स्टॉप पर पहुँच गए थे . रौशनी उतर गयी और सलीम उतरने hi वाला था की , जो आदमी , जिसके साथ झगड़ा हुआ था वह सलीम को देखने लगा .. और सलीम उसे .. कुछ पल में दोनों के चेहरे पर मुस्कान आयी ..
वह आदमी सलीम के पहचान का hi था .. वह जो हुआ था सब दोनों ने एक्टिंग किया था.. सलीम की चल थी … वह चाहता था की रौशनी देखे की सलीम उसके लिए लड़ाई कर सकता हैं .. उसके लिए एक स्टैंड ले सकता हैं..

























































