- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
रौशनी पुरे दिन बस असलम और सलीम के साथ हुयी मस्ती भरी पलों के बारे में hi सोचती हैं .. उसका लकाम पर ध्यान भी नहीं लग रहा था … आज तोह वह दोनों के साथ बहुत hi घुल मिल कर हरकतें कर रही थी .. रौशनी सुर्पीसे थी खुद पर की क्तिनी हु आज उन दोनों के साथ मस्तियाँ कर रही थी .. अब शाम को तोह रमेश भी उसे घूमने ले जाने वाला था .. अब न जाने वह क्या करेगा.. उस दिन जैसे पार्क में ले गए तोह हु क्या करेगी .. इस बता में वह सोचती रही.
ऐसे दिन बीत गया .. रौशनी अब अपने पर्स को लेकर ंगो के बहार चली गयी .. वहां रमेश उसके इंतेज़्ज़र में था .. आज रमेश जी ने सफ़ेद शर्ट पहनी थी और ट्राउज़र्स.. नयी वाली लग रही थी रौशनी को .. आज तोह स्मार्ट बन कर आये थे रमेश जी .. रौशनी उन्हें ऐसे देख मुस्कुरा रही थी मन में … वह भी थोड़ी फ्रेश होकर आइये थी ऑफिस से .. आअज रमेश जी उसे कहाँ घूमने वाले हैं उसी के सोच में वह उसके पास चलती गयी..
रमेश रौशनी को अपने पास आते देख खुश था .. आज सच में रौशनी जी बहुत hi मस्त साड़ी में बहुत हॉट लग रही थी .. आज का ब्लाउज उसने पहना हुआ सबसे सेक्सी था .. स्लीवलेस तो था hi और डीप बैक कट भी लेकिन आगे से भी कट गहरा था … और उसकी कमर तो हफ़ वह उसकी गोरी मुलायम कमर का तोह दीवाना hi हुआ था .. उसका लुंड उसकी पंत में अपने औकात में ाँ शुरू भी हुआ था ..


“नमस्ते रौशनी जी .. आज आप सुबह से और खिल उठ रहहि हो..”
“उफ़ रमेश जी जूठे कही के .. में दिन भर काम कर के आयी हूँ , कैसे आप बोल रहे हो खिल उठ रही हूँ .. आप भी न .. झूटी टैरिफ करते हो बस.”
“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत खिल उठ रही हैं… (है तेरी कमर , तेरी ब्लाउज उफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह सफर में बहुत मज़े से गुरुंगा तेरे इस गदरायी बदन को …)
आइये रौशनी जी बैठिये …” रमेश रौशनी को रिक्शा में बैठे देख रहा था .. जब रौशनी बैठने झूखी तोह उसकी चूतड़ों का गोल अकार रमेश देख रहा था .. (है क्या चूतड़ हैं रौशनी के .. मन करता हैं इन्हे दबोच लू .. उफ्फ्फ क्या गदरायी माल पायी हैं मैंने)
रौशनी को समझ आ रहा था की रमेश उसे घर रहे हैं .. वह मुस्कुरा रही थी मन hi मन … उसे रमेश जी के ऐसे नज़रों से अब इतनी आपत्ति नहीं होती थी …जब से वह दोनों पार्क में चुम्बन … उफ्फ्फ उसके बारे में सोचते hi रौशनी शर्मा जा रही थी.)
“अच्छा रमेश जी आज कहाँ ले जा रहे हो मुझे …”
“रौशनी जी यहाँ पास में एक फोर्ट हैं … वहां काफी लोग जाते हैं , काफी आप जैसे शहर में नए आये लोग जाते हैं .. बहार से भी कई कम सवारी कर भी लोग आते हैं इस फोर्ट ..”
“ववव रमेश जी मैनेसुना था इस फोर्ट के बारे में .. शहर से दूर हैं इसलिए वहां कभी जाना नहीं हुआ … वैसे काफी दूर हैं न .. कितना टाइम लगेगा सब कुछ देख कर मुझे घर वापस आने में.?
रौशनी जी 3 घंटे तोह लगेंगे .. देखो अब 6 बजे हैं .. 9 बजे तक घर पहुंचा दूंगा आपको.. चलेगा न …”
(उफ़ 9 बजे … इतनी लेट जाएगी तोह रोनित पूछेगा कहाँ गयी थी … उफ्फ्फ लेकिन वह भी तोह जाते हैं दोस्तों से मिलने देर रात तक .. में तोह बस 9 नबाजे तक घर पहुँच hi जाउंगी…)
“अच्छा रमेश जी 9 बजे तक घर चोर देना प्लीज.”
“हाँ रौशनी जी जरूर”
(उफ़ रौशनी जी अब 3 घंटे तोह मेरी हो तुम … मेरी कहते हैं न आज कल .. मेरी गर्ल फ्रेंड हो आप 3 घंटों के लिए …_)
फोर्ट कुछ 40 मं दुरी पर था …दोनों इधर उधर की बातें करते हुए फोर्ट तक पहुँच गए …
(उफ़ कितना बड़ा फोर्ट हैं … और काफी सारे टूरिस्ट्स भी हैं यहाँ .. सच कहा रमेश जी ने , बहुत hi पॉपुलर जगह हैं … बहुत मज़्ज़ा आएगा फोर्ट देखने )
“रौशनी जी जरा दूर हैं रिक्शा पार्किंग की जगह .. में वहां रक्षा लगा कर आता हूँ. “
रौशनी सर हिला कर वहां कड़ी रही फोर्ट के एंट्रेंस के बहार. रौशनी के तरफ सब मर्द घूरे जा रहे थे … वहां फोर्ट में लाइट से रौशनी सच में मस्त लग रही थी .. उसका गोरा बदन .. उसकी गदरायी फिगर देख मर्दों के लुंड खड़े हो रहे थे .. एक दो मर्दों के बीवियों ने तोह अपने पतियों के कान मरोड़े क्यूंकि वह रौशनी को घूरे जा रहे थे …
एक गाइड आया वहां रौशनी के paas.”Madam आपको गाइड की जरूरत हैं .. में बहुत अच्छा गाइड हूँ .. आसमा कर देखिये ..”वह जवान लड़का होगा और वह रौशनी के बदन को घूरे जार अहा था .. रौशनी समझ सकीय की जवानी के जोश का लड़का उसे देख घर रहा था .. वह उसे देख मुस्कुरायी ..”डिअर में कसी के सतह आयी हूँ , वह मुझे फोर्ट दिखाएंगे.”
“वह जवान लड़का बोलै “है मैडम .. कौन हैं वह लकी आदमी … आप जैसी पारी को फोर्ट ककी सैर करवाएगा … मैडम जी उन्हें छोड़िये में आपको दिखाऊंगा फोर्ट … और वह लड़का बेशरमी से रौशनी को देख आँख मारा … रौशनी उसकी बोल्डनेस देख चँउक उठी … लेकिन फिर मन में मुस्कुरायी .. ऐसे ओपनली बोल्ड जवान लड़के hi होते हैं … जवान खून हैं ः.
“वह उसे मुस्कुरायी और बोली “शुर्किया , लेकिन में जिसके साथ आयी हूँ वह आ hi रहे हैं …”
रमेश फिर आ गया और रौशनी के पास आया ..”रौशनी चले फोर्ट देखने ..”
वह जवान लड़का रौशनी और रमेश की बातें देख दांग रह गया .. इतना कला बुद्धा , हु भी ऐसी गोरी मेम के साथ … क्या जादू चलाया हैं बुड्ढे ने …. इतनी गदरायी माल पायी हैं इस बुड्ढे ने.”)
“मैडम अच्छा यह हैं आपके बॉयफ्रेंड … वह इस बुढ़ापे में भी ऐसी जवान गर्लफ्रेंड कहाँ से पटाया बुड्ढे …”
“बेशरम .. चुप कर ऐसे मत कहो रौशनी के बारे में .. मेरी ख़ास दोस्त हैं ठीक हैं .. चल जा अपने काम से काम रख.”
फिर रमेश ने उस जवान लड़के को जलने रप्शनि के हाथों को पकड़ लिया फिर रौशनी के कमर को भी …. चलिए रौशनी … फोर्ट की सैर करवाऊंगा ..”
रौशनी ऐसे हरकत से पहले तोह दांग रह गयी … रमेश बिना कुछ कहे सीधे उसकी कमर को जकड लिया था … लेकिन रौशनी को न जाने क्यों ऐसे बोल्डनेस रमेश जी की पसंद आने लगी… वह फिर उस लड़के को देखि की वह लड़का मन में कुछ बुदबुदा रहा था …
अब दोनों फोर्ट के अंदर चले गए .. रमेश ने अभी भी रौशनी की कमर जकड कर रखे था … उसकी उँगलियाँ रौशनी की मुलायम पेट के क्षेत्र में लाल निशाँ बनाये था .. इतनी गोरी थी रौशनी … वह अब ऐसे चल रहे थे मनो कपल हो .. वहां रौशनी भी कुछ बोल नहीं रही थी तोह इसलिए रमेश ऐसे hi उसके कमर पर हाथ डेल उसके साथ चल रहा था .. फिर से आस पास के सब मर्द उन दोनों को देख रहे थे … जलन से की ऐसे काळा बुड्ढे के साथ ऐसी गोरी मलाईदार माल कैसे हैं … वाहन के लेडीज तोह मन में बुदबुदा रहे थे उफ़ कैसे इस काळा बुड्ढे के सतह यह महिला जा रह हैं .. जरूर दोनों में चक्कर हैं .. साला बुद्धा मस्त मज़े लेता होगा इस जवान महिला के साथ…
रौशनी को सब की नज़र दिख रही थी और वह शर्मा रही थी .. वह धीरे से रमेश जी के कान में फुसफुसाई. “रमेश जी छोड़िये न मेरी कमर , सब लोग देख रहे हैं …”
“रौशनी जी क्या बता हैं फिर .. बस कमर पर हाथ hi तोह राखी हैं … चलिए न आप बस फोर्ट देखिये .. इस शहर की फेमस टूरिस्ट स्पॉट हैं .. आप इसके मज़े लीजिये.
(और में तुम्हारे साथ ऐसे मज़्ज़े लेता रहूँगा रौशनी डार्लिंग)
“हाँ रमेश जी हैं तोह बहुत hi खूबसूरत ये फोर्ट .. शुक्रिया आप मुझे यहाँ ले आये .. मुझे बहुत पसंद हैं आपकी चॉइस.”
“रमेश ने रौशनी के कमर को और कास कर पकड़ लिया … फिर रौशनी को देख बोले “हाँ रौशनी जी बहुत hi मस्त चॉइस रहती हैं मेरी हमेशा … “
रौशनी सोची की क्या रमेश उसे देख उसकी … नहीं नहीं फोर्ट की hi बात कर रहे होंगे रमेश ज.”
“रौशनी जी आप भी तोह मेरी चॉइस हो …”
“मतलब रमेश .. क्या मतलब आपका.”
“रौशनी जी आपकी साथ दोस्ती का चॉइस जो मैंने लिया उसकी बात कर रहा थूं … और रमेश फिर से रौशनी के कमर को और थोड़ा कास कर दबाता हैं …
“उफ़ रमेश जी धीरे से … आप तोह मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड सोच रहे हो क्या ..”


“रौशनी जी में कब बोलै गर्लफ्रेंड हो आप मेरी .. और रही बात उसकी .. क्यों में आप जैसी जवान लेडीज को गर्लफ्रेंड नहीं बना सकता …”
“रमेश जी आप भी न , आप शादी शुदा हो .. आप कैसे गर्लफ्रेंड बनाओगे..”
“रौशनी जी क्यों नहीं अब इंग्लिश में अगर किसी महिला को फ्रेंड बनाऊ .. तोह महिला मतलब गर्ल और फ्रेंड मतलब दोस्त हैं न .. तोह अगर आप मेरी दोस्त हो और एक महिला हो तोह आप मेरी गर्ल .. और फ्रेंड .. मतलब गर्लफ्रेंड न बानी … और रमेश रौशनी को देख मुस्कुराता हैं. फ्रेंड हो तोह गर्ल फ्रेंड hi कहते है न …
“उफ़ रमेश जी इंग्लिश में ऐसे बस दो शब्द जोड़ने से उसका मीनिंग वही नहीं होता… गर्लफ्रेंड मतलब होता हैं …..”
“रौशनी जी रुक क्यों गयी बताइये न … गर्लफ्रेंड किसको बुलाते हैं… बताइये ..”
“उफ़ रमेश ज ऐकोर दीजिये .. में नहीं कह सकती ..”
“ओह हो शरमाते हुए कितनी खूबसूरत लग रही हो रौशनी जी … काश में सिंगल होता तोह आपको गर्ल फ्रेंड बनता .. फिर हम करते जो बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड करते हैं.”
“रमेश जी उफ़ आप भी न .. चलिए फोर्ट दिखाइए .. फिरत दिखने hi लाये थे न”
(फोर्ट गया तेल लेने .. तेरे साथ मज़े करने लाया हूँ तुझे रौशनी … इस फोर्ट में ऐसी जगह ले जाऊंगा जहाँ अपनी बेगू को ले गया था और बहुत मज़्ज़ाए किये थे उसके साथ)
रमेश तोह रौशनी की कमर पर अपनी पकड़ तोह चोर नहीं रहा था .. वहां रौशनी भी अब उन्हें ऐसे उसके कमर को पकडे रखने दे रही थी …. रौशनी को रमेश फोर्ट की लग अलग हिस्सों के बारे में थोड़ी जानकारी भी दे रहा था …
“रमेश जी आपको इस फोर्ट के बारे में इतना कैसे पता हैं.”
“रौशनी जी अब क्या कहु … रिक्शा चलने के साथ में शुरुवात में यहाँ गाइड का काम करता था ..”
“ओह अच्छा बिलकुल उस जवान गाइड की तरह रमेश जी ..”
“हाँ में अच्छा भी था .. लेकिन इसमें पैसे काम हैं .. बस टिप से काम चलता हैं और वह भी घर चलने में नहीं चलता रौशनी जी”
“अच्छा तोह आप ने गाइड बन कर काफी साड़ी महिलाओं को टूर दिया होगा .. यहाँ बहार के देश की गोरियां भी आती होगी न ..”
“रौशनी जी अब झूट नहीं बोलूंगा .. हाँ बहार के देश की गोरी लडीएसको गाइड करता था .. इसलिए तोह थोड़ी टूटी फूटी इंग्लिश आती हैं .. और समझ भी आती हैं .. में 2 साल गाइड का काम करा हूँ. और हाँ उसमें कई महिलाओं को दिखाया हूँ फोर्ट … लेकिन किसी को दोस्त या गर्लफ्रेंड की तरह नहीं घुमाया हूँ फोर्ट “ और रमेश रौशनी के तरफ सीधा देख मुक्सुराता हैं.
रौशनी तोह शर्मा hi रही थी . रमेश आज बार बार गर्लफ्रेंड का शब् इस्तेमाल कर रहे थे … उसे वह सुन शर्माहट महसूस हो रही थी.. और तोह और फोर्ट घूम कर 30 मं हुए थे और पूरा टाइम रमेश ने उसकी कमर पकड़े हुए hi उसे गाइड किया था …
अब रमेश रौशनी को एक थोड़ी सी सुनसान जगह ले गया .. “रौशनी जी गाइड होने का फायदा हैं की मुझे यहाँ के ऐसे चीज़ पता हैं जो टूरिस्ट को भी नहीं दिखता कोई … चलो देखते हैं ..
पहले की रौशनी कुछ बोलती रमेश उसे कमर से पकड़े हुए एक काम पॉपुलटेड एरिया में लेकर गया …
“रमेश जी कहाँ ले जा रहे हो मुझे उफ्फ्फ्फ़ … वाहन कोई नहीं हैं रमेश जी .. वहां नहीं चलते हैं.”
रमेश तोह सुन नहीं रहा था बस रौशनी केकमर को जकड़े उसे वहां उस जगह लगाया ..
रौशनी अब रमेश पर ग़ुस्सा होने hi वाली थी की उसे एक वह के तालाब के पास ले गया रमेश. तालाब की अस पास काफी सुन्दर फूल थे … तालाब तोह छोटा था लेकिन वहां आस पास ग्रास था और काफी सरे रंग बिरंगी फूल..
“रौशनी जी यह देखिये .. ख़ास आपके लिए … यह इस फोर्ट का तालाब हैं .. वैसे तोह प्यूरीन ज़माने से इसका कुछ तलूक तोह नहीं लेकिन फिर भी यहाँ के फूल अलग रंग के हैं .. काफी रंग बिरंगी .. इस स्पॉट की यहाँ के किसी भी गाइड बुक में ज़िकर नहीं हैं.”
“उफ़ इतस सो ब्यूटीफुल रमेश जी .. बहुत hi खूबसूरत …”
रमेश जी आपको पता हैं मुझे फूल इतने पसंद हैं .. आप बहुत अच्छे हो .. रौशनी फिर रमेश को गले लगाती हैं .. रमेश इस का मौका लेकर अपने हाथों को रौशनी की मुलायम पीठ पर और बाँहों पर फेरने लगा … रौशनी को वह महसूस हुआ और वह कुछ नहीं बोली … रमेश अब और बोल्ड होकर उसकी बाँहों को दबाने लगा फिर उसकी पीठ को दबोचने लगा … रौशनी फिर अपने हुग कोह तोड़ रमेश की आँखों में देखने लगी … रमेश भी उसकी आँखों में देख रहा था .. वहां पास की हलकी सी रौशनी अब दोनों पर दर्शा रही थी … रमेश और रौशनी एक दूसरे को देखते रहे .. फिर रौशनी अपने चेहरे को आगे की तरफ करि .. रमेश भी आगे अपनी होठोनो को कर फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे .. रमेश फिर से रौशनी को गले लगा कर इस बार जोरों से उसे चूमने लगा … उसे बाँहों में लेकर उसे मसलते हुए वह रौशनी की गुलाबी होठों को जोरों से चुम रहा था … रौशनी के हाथ रमेश के सर पर उसके बालों कोप हेर रहे थे और दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. निचे रमेश का लुंड अब पूरी औकात में आ चुक्का था और उसने रौशनी को गले से कसकर लगाया और उसका खड़ा लौड़ा रौशनी के नाभि से टकराया … रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों चुम्बन में लगे रहे .. रमेश अब अपने लोडे को रौशनी के पेट से कसकर दबाने लगा .. रौशनी के मुँह से आह निकली लेकिन फिर भी दोनों चुम्बन में लगे हुए थे .. रमेश अब रौशनी को कसकर दबोचा रखा था और बी अपनी जीभ को रौशनी के मुँह में डालने की कोषसिंह करने लगा .. पहले तोह रौशनी रेसिस्ट कर रही थी लेकिन धीरे से उसका मुँह खुल गया और रमेश के जीभ को अपने मुँह में स्वीकार करने दी … धीरे से रमेश की जीभ अब रौशनी की जीभ को ढूंढने लगी और उसे मिलते hi उसके जीभ से वह रौशनी के जीभ से उसकी अनादर का रास पिने लगा …. रमेश के हाथ अब रौशनी की चूतड़ों पर थे और वाहन उसे हलके से वह दबाने लगा ..

रौशनी की मुँह से फिर से आह निकलने वह अपने मुँह को खोलने लगी लेकिन रमेश ने अपनी मुँह से उसके मुँह पर फिर से चुम्बन गाडी राखी …
अब दोनों की जीभ एक दूसरे क ेरस को पिने लगी थी …. रमेश ने रौशनी की चूतड़ों को और जोर से दबाया …
रौशनी भी काफी गरम हो चुकी थी .. वह भी रमेश को कास कर पकड़ राखी थी … उसे महसूस हुआ की रमेश का मोटा लुंड उसकी नाभि से टकरा रहा था … उससे उसकी छूट में हलचल होने लगी और हलके से छूट से पानी निकलने लगा .. वह भूल गयी थी की वह एक बुड्ढे से चिपकी हुयी थी अँधेरे में और उससे चुम्बन में लगी हुयी थी और बस आहें भर रही थी.

रमेश अब आगे पीछे अपने लोडे को हिलने लगा और वह रौशनी की गरम और नरम पेट से दबता गया … उसके लुंड से भी थोड़ा प्रेकम निकला रहा था …
अब रमेश ने अपनी उँगलियों से रौशनी की पीठ पर एक चिमटी मारी. उससे रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों का चुम्बन टूटा … रौशनी अब काफी शर्मा गयी .. वह रमेश जी को एक गहरी चम्बां दी थी और उसकी जीभ से भी रास पिलाई थी … वह मुद कर दूसरी तरफ देखने लगी .. रमेश फिर पीछे से उसे जकड लिया और उसके लोडे को अब रौशनी की चूतड़ों में
“उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. ममम प्लीज मुझे छोड़िये …”
“रौशनी जी क्या सही क्या गलत … आप और में बस अपना प्यार जाता रहे हैं …”
“रमेश जी में आपसे प्यार नहीं करती उफ्फ्फ में शादी शुदा हूँ और आप भी .. और तोह और आप तोह ….”
“बुद्धा हूँ , रिक्शा ड्राइवर हूँ … हाँ बताइये .. दीजिये गालियां मुझे …. रौशनी जी मुझे आप बहुत पसंद हो .. मुझे आप hi चाहिए ..”
रमेश पीछे से अपने लोडे को अब जोरों से रौशनी की चूतड़ों पर दबाने लगा … रौशनी कुछ समय उस एहसास को महसूस करती रही और उसकी छूट गीली होती रही .. लेकिन फिर उसे याद आया वह क्या कर रही थी .. वह मुद गयी और उसने रमेश को एक जोरों का छाता मारा ..
“रमेश जी यह ज़बरदस्ती हैं .. मुझे नहीं चाहिए .. आप बहुत बुरे हो …”
रमेश उस थप्पड़ से थोड़ा ग़ुस्सा हुआ लेकिन वह अपने चेहरे पर वह ग़ुस्से को झलकने नहीं दिया…
“रौशनी जी आप को भी पसंद हैं यह सब .. आपने मुझे ऐसी गहरी चुम्बन दी .. और बी मुझे थप्पड़ मार दिया . आप के मुलायम हाथ ऐसे थप्पड़ मारने नहीं बने हैं डिअर ... उन्हें तोह प्यार hi करना चाहिए."
रमेश ने फिर रौशनी के हाथ क पकड़ कर उसे चूमने लगा … “रौशनी जी इन सच में हाथों को बस प्यार करना चाहिए और कुछ नहीं."
रौशनी हैरान थी की थप्पड़ मारने के बाद भी रमेश फिर से उसके हाथों को लेकर उसे चुम रहे थे …
“रमेश जी प्लीज चोरए .. में ऐसे नहीं कर सकती .. प्लीज आप फाॅर्स न करिये …”
“रौशनी जी फोरे कैसी .. मैंने आपको चुम्बन देने में कोई फाॅर्स नहीं करि .. आप खुद भी चाहती थी .. में बस आप के चुम्बन का साथ hi दिया ..”
रमेश ने फिर से रौशनी को जकड लिया .. और उसके गालों को चूमने लगा .. उसका लोढ़ा अभी भी टाइट था … रौशनी को अपनी अंदर गर्मी महसूस हो रह थी .. वह अपनी छूट को गीली महसूस करि .. उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे … क्या वह सच में रामश के साथ यह सब मस्तियाँ चाहती थी .. उसकी छूट क्यों गीली थी .. और उसे रमेश का खड़ा लोडे के उभर को अपने चूतड़ों पर , नाभि पर पसंद क्यों आने लगा था …
रमेश फिर से रौशनी के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर उसे चूमने आगे बढ़ा .. रौशनी भी किसी ट्रांस में थी वैसे आग झुक कर फिर से रमेश को चूमने लगी …
रमेश ने चुम्बन तोड़ दिया .. फिर रौशनी के बाँहों को चूमने लगा … उसे हलके से चाटने लगा .. रौशनी को ऐसी रमेश की हरकतों से और गर्मी मह्सुश हुयी .. बहुत दिनों बाद वह किसी मर्द के इतने करीब थी .. रमेश धीर धीरे से उसके बाँहों को चूमते हुए फिर निचे घुटनो पर जाकर रौशनी की नाभि को चूमने लगा .. फिर अपनी जीभ से उसकी नाभि में दाल वहां चाटने लगा …
“उफ़ रमेश जी मममम प्लीज न चूमिए .. उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. रमेश जी पलज़्ज़ज़्ज़ज़”
रमेश बस उसकी नाभि को चूमते रहा वहां अंदर चाटने लगा .. रौशनी अपनी नाभि में रमेश जी की चाटने से उसके सलीवा को महसूस कर रही थी .. न जाने क्यों इससे उसकी छूट और भी फुदकने लगी …. रमेश फिर खड़ा हुआ और रौशनी के मुलायम हाथों को अपने पंत के उभर पर रख दिया
“रौशनी जी देखिये न आपके वजह से मेरे अंदर इतनी गर्मी बढ़ गयी हैं की में पूरा हार्ड हुआ हूँ .. रौशनी जी यह आपके लिए सलामी दे रहा हैं .. इसे मेहसूस करिये .. इसे सहलाइये …”
“रमेश नहीं प्लीज में ऐसे उसे नहीं छू सकती .. उफ्फ्फ्फ़… रौशनी अब हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी .. लेकिन रमेश ने उसके हाथों को कास कर जकड़े रखा था और अपने लुंड के उभर पर रख दिया …
रौशनी न चाहते हुए भी अब उस लोडे के उभर से आकर्षित होते हुए वहां सहलाने लगी .. वह निचे देखि तोह सच में रमेश का मोटा लुंड पूरी तरह से खड़ा होकर बड़ा सा उभर बनाये हुए था … (उफ़ इस बुढ़ापे में भी रमेश जी का लुंड कितना बड़ा उभर दिखा रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ सच में बहुत मोटा होगा .. क्या वह असलम जी और सलीम जी के लुंड ाजिसे मोटा और बड़ा होगा उफ्फ्फ यह में ऐसे कसीस गैर मर्द के उभर को ऐसे सेहला रही थी उफ्फ्फ्फ़..)
रमेश ने अब रौशनी के हाथोंको पानी पंत के अंदर दाल अपनी अंडर वियर के अंदर भी डालने लगा .. रौशनी हाथ हटाने की कोशिश करती रही लेकिन रमेश काफी स्ट्रांग गृप रखे हुए थे .. उसका हाथ वह उसके हड्डी के अंडर जाते महसूस करि .. उफ्फ्फ बहुत गर्माहट थी उनके चड्डी के अंदर .. आखिर कर उसके हाथों में अब रमेश जी का मोटा लुंड था … उनका लुंड असलम जैसे कट नहीं था .. ऊपर अभी भी लुंड की चमड़ी थी … अब वह खुद से रमेश के लुंड की चमड़ी को निचे धकेल उसके मोठे लुंड के टोपे को सहलाने लगी ….
“अहह रौशनी जी आपकी नरम हाथ मेरे सख्त लोडे पर उफ्फ्फ्फ़ … ममम सेहलिये उसे और सहलाइये रौशनी जी .. मुझे पता हैं आपको मेरा मोटा लोढ़ा पसंद आया हैं .. और सहलाइये इसे ममममम”
“नहीं रमेश जी प्लीज … नहीं …” रौशनी नहीं तोह कह रही थी लेकिन फिर भी प्यार से रमेश के लोडे के टोपे को सेहला रही थी .. उसके अनादर गर्मी बहुत बढ़ गयी थी … उसकी छूट काफी गीली हो चुकी थी .. इतना मोटा लोढ़ा .. रमेश जैसे बुड्ढे का भी हो सकता हैं .. उसी के बार में सोचती हुयी उसके लुंड को सहलाने लगी ….
रमेश देख सकता था की रौशनी के अंदर गर्मी बढ़ रही थी .. वह फिर से रौशनी के गुलाबी होठों को चूमने लगा … इस बार रौशनी अब रमेश के लोडे को सेहला रही थी और ऊपर दोनों फिर से गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. इस बार रौशनी की आँखें बंद थी .. उसे अब इस सब का थोड़ा मज़्ज़ा आ रहा था … वह अब सोच नहीं रही थी बस अपनी गर्मी की गुलाम बन चुकी थी .. ऊपर रमेश जी के काळा होठों को वह चुम रही थी और निचे उसके काळा मोठे लोडे को सेहला रही थी .. वह काफी गरम हो चुकी थी .. बहुत दिनों बाद किसी के लोडे को ऐसे सेहला रही थी …
सर्दी का मौसम था लेकिन दोनों के बीच काफी गर्मी थी …
अब रमेश फिर से रौशनी की चूतड़ों को दबाने लगा … वह अपने हाथों को ऊपर की और उठा कर पीछे से रौशनी की ब्लाउज में डालने लगा … अपने दो उँगलियों को अब वह रौशनी की ब्लाउज में दाल चुक्का था … फिर वहां से निकलकर वह अपने हाथों को आगे की तरफ से रौशनी की ब्लाउज पर रख वहां दबाने लगा … रौशनी ए.बी.ए. यह भर रही थी … वह खुद को खो चुकी थी .. उसे कुछ ध्यान नहीं था वह कहाँ हैं , किसके साथ कैसी अश्लील हरकतें कर रही थी …
अब सन ऐसा था की रौशनी रमेश के मोठे लोडे को सेहला रही थी और रमेश ऊपर से , आगे से रौशनी की ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाते रहा …

फिर उन्ह ीक विस्सल की आवाज़ सुनाई दी .. कोई वॉचमन वहां सीटी बजा रहा था ..
दोनों घबराते हुए वहां से निकल गए … रौशनी के हाथों को रमेश पकड़ के वहां से वह भागते गए .. रौशनी की चूचियां अपने ब्लाउज में ऊपर निचे हिल रहे थे और दोनों एग्जिट तक भागते गए ..
फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर वहां से निकल गए …
रौशनी रिसकशव में बैठे गुइली फील कर रही थी .. (उफ्फ्फ्फ़ यह में क्या कर रही थी .. उफ्फ्फ हम दोनों पकड़े जाते तोह .. उफ़ और वह आज रमेश जैसे बुड्ढे से ऐसी अश्लील हरकतें कैसे कर रहे थी .. वह काफी ऐम्बर्रास फील कर रही थी …)
पुरे रस्ते तक दोनों बात नहीं कर रहे थे … ऐसे hi बिना कुछ बातें किये अब वह रौशनी के घर पहुँच गए …. रौशनी अब रिक्शा के बहार उतर कर अपने घर की तरफ जाने लगी …
रमेश पीछे से रौशनी की हिलती चूतड़ों को देख (उफ़ आज तोह ज्यादा hi मस्ती करि .. उफ्फ्फ क्या कल रौशनी जी मुझसे बातें करेगी … उफ्फ्फ आज तोह उसको अपने लोडे को सहलाने दिया .. ए.बी.ए. आगे जाकर इस लोडे से इसकी चुदाई करनी दूर नहीं … उफ्फ्फ्फ़ और रमेश अपने लोडे को मसलते हुए वहां से निकल गया…
10 बज गए थे .. रोनित अब रौशनी के इंतेज़्ज़र में सोफे पर बैठा था…. काफी ग़ुस्से में उसके इंतेज़्ज़र में.
ऐसे दिन बीत गया .. रौशनी अब अपने पर्स को लेकर ंगो के बहार चली गयी .. वहां रमेश उसके इंतेज़्ज़र में था .. आज रमेश जी ने सफ़ेद शर्ट पहनी थी और ट्राउज़र्स.. नयी वाली लग रही थी रौशनी को .. आज तोह स्मार्ट बन कर आये थे रमेश जी .. रौशनी उन्हें ऐसे देख मुस्कुरा रही थी मन में … वह भी थोड़ी फ्रेश होकर आइये थी ऑफिस से .. आअज रमेश जी उसे कहाँ घूमने वाले हैं उसी के सोच में वह उसके पास चलती गयी..
रमेश रौशनी को अपने पास आते देख खुश था .. आज सच में रौशनी जी बहुत hi मस्त साड़ी में बहुत हॉट लग रही थी .. आज का ब्लाउज उसने पहना हुआ सबसे सेक्सी था .. स्लीवलेस तो था hi और डीप बैक कट भी लेकिन आगे से भी कट गहरा था … और उसकी कमर तो हफ़ वह उसकी गोरी मुलायम कमर का तोह दीवाना hi हुआ था .. उसका लुंड उसकी पंत में अपने औकात में ाँ शुरू भी हुआ था ..


“नमस्ते रौशनी जी .. आज आप सुबह से और खिल उठ रहहि हो..”
“उफ़ रमेश जी जूठे कही के .. में दिन भर काम कर के आयी हूँ , कैसे आप बोल रहे हो खिल उठ रही हूँ .. आप भी न .. झूटी टैरिफ करते हो बस.”
“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत खिल उठ रही हैं… (है तेरी कमर , तेरी ब्लाउज उफ्फ्फ रौशनी जी आज तोह सफर में बहुत मज़े से गुरुंगा तेरे इस गदरायी बदन को …)
आइये रौशनी जी बैठिये …” रमेश रौशनी को रिक्शा में बैठे देख रहा था .. जब रौशनी बैठने झूखी तोह उसकी चूतड़ों का गोल अकार रमेश देख रहा था .. (है क्या चूतड़ हैं रौशनी के .. मन करता हैं इन्हे दबोच लू .. उफ्फ्फ क्या गदरायी माल पायी हैं मैंने)
रौशनी को समझ आ रहा था की रमेश उसे घर रहे हैं .. वह मुस्कुरा रही थी मन hi मन … उसे रमेश जी के ऐसे नज़रों से अब इतनी आपत्ति नहीं होती थी …जब से वह दोनों पार्क में चुम्बन … उफ्फ्फ उसके बारे में सोचते hi रौशनी शर्मा जा रही थी.)
“अच्छा रमेश जी आज कहाँ ले जा रहे हो मुझे …”
“रौशनी जी यहाँ पास में एक फोर्ट हैं … वहां काफी लोग जाते हैं , काफी आप जैसे शहर में नए आये लोग जाते हैं .. बहार से भी कई कम सवारी कर भी लोग आते हैं इस फोर्ट ..”
“ववव रमेश जी मैनेसुना था इस फोर्ट के बारे में .. शहर से दूर हैं इसलिए वहां कभी जाना नहीं हुआ … वैसे काफी दूर हैं न .. कितना टाइम लगेगा सब कुछ देख कर मुझे घर वापस आने में.?
रौशनी जी 3 घंटे तोह लगेंगे .. देखो अब 6 बजे हैं .. 9 बजे तक घर पहुंचा दूंगा आपको.. चलेगा न …”
(उफ़ 9 बजे … इतनी लेट जाएगी तोह रोनित पूछेगा कहाँ गयी थी … उफ्फ्फ लेकिन वह भी तोह जाते हैं दोस्तों से मिलने देर रात तक .. में तोह बस 9 नबाजे तक घर पहुँच hi जाउंगी…)
“अच्छा रमेश जी 9 बजे तक घर चोर देना प्लीज.”
“हाँ रौशनी जी जरूर”
(उफ़ रौशनी जी अब 3 घंटे तोह मेरी हो तुम … मेरी कहते हैं न आज कल .. मेरी गर्ल फ्रेंड हो आप 3 घंटों के लिए …_)
फोर्ट कुछ 40 मं दुरी पर था …दोनों इधर उधर की बातें करते हुए फोर्ट तक पहुँच गए …
(उफ़ कितना बड़ा फोर्ट हैं … और काफी सारे टूरिस्ट्स भी हैं यहाँ .. सच कहा रमेश जी ने , बहुत hi पॉपुलर जगह हैं … बहुत मज़्ज़ा आएगा फोर्ट देखने )
“रौशनी जी जरा दूर हैं रिक्शा पार्किंग की जगह .. में वहां रक्षा लगा कर आता हूँ. “
रौशनी सर हिला कर वहां कड़ी रही फोर्ट के एंट्रेंस के बहार. रौशनी के तरफ सब मर्द घूरे जा रहे थे … वहां फोर्ट में लाइट से रौशनी सच में मस्त लग रही थी .. उसका गोरा बदन .. उसकी गदरायी फिगर देख मर्दों के लुंड खड़े हो रहे थे .. एक दो मर्दों के बीवियों ने तोह अपने पतियों के कान मरोड़े क्यूंकि वह रौशनी को घूरे जा रहे थे …
एक गाइड आया वहां रौशनी के paas.”Madam आपको गाइड की जरूरत हैं .. में बहुत अच्छा गाइड हूँ .. आसमा कर देखिये ..”वह जवान लड़का होगा और वह रौशनी के बदन को घूरे जार अहा था .. रौशनी समझ सकीय की जवानी के जोश का लड़का उसे देख घर रहा था .. वह उसे देख मुस्कुरायी ..”डिअर में कसी के सतह आयी हूँ , वह मुझे फोर्ट दिखाएंगे.”
“वह जवान लड़का बोलै “है मैडम .. कौन हैं वह लकी आदमी … आप जैसी पारी को फोर्ट ककी सैर करवाएगा … मैडम जी उन्हें छोड़िये में आपको दिखाऊंगा फोर्ट … और वह लड़का बेशरमी से रौशनी को देख आँख मारा … रौशनी उसकी बोल्डनेस देख चँउक उठी … लेकिन फिर मन में मुस्कुरायी .. ऐसे ओपनली बोल्ड जवान लड़के hi होते हैं … जवान खून हैं ः.
“वह उसे मुस्कुरायी और बोली “शुर्किया , लेकिन में जिसके साथ आयी हूँ वह आ hi रहे हैं …”
रमेश फिर आ गया और रौशनी के पास आया ..”रौशनी चले फोर्ट देखने ..”
वह जवान लड़का रौशनी और रमेश की बातें देख दांग रह गया .. इतना कला बुद्धा , हु भी ऐसी गोरी मेम के साथ … क्या जादू चलाया हैं बुड्ढे ने …. इतनी गदरायी माल पायी हैं इस बुड्ढे ने.”)
“मैडम अच्छा यह हैं आपके बॉयफ्रेंड … वह इस बुढ़ापे में भी ऐसी जवान गर्लफ्रेंड कहाँ से पटाया बुड्ढे …”
“बेशरम .. चुप कर ऐसे मत कहो रौशनी के बारे में .. मेरी ख़ास दोस्त हैं ठीक हैं .. चल जा अपने काम से काम रख.”
फिर रमेश ने उस जवान लड़के को जलने रप्शनि के हाथों को पकड़ लिया फिर रौशनी के कमर को भी …. चलिए रौशनी … फोर्ट की सैर करवाऊंगा ..”
रौशनी ऐसे हरकत से पहले तोह दांग रह गयी … रमेश बिना कुछ कहे सीधे उसकी कमर को जकड लिया था … लेकिन रौशनी को न जाने क्यों ऐसे बोल्डनेस रमेश जी की पसंद आने लगी… वह फिर उस लड़के को देखि की वह लड़का मन में कुछ बुदबुदा रहा था …
अब दोनों फोर्ट के अंदर चले गए .. रमेश ने अभी भी रौशनी की कमर जकड कर रखे था … उसकी उँगलियाँ रौशनी की मुलायम पेट के क्षेत्र में लाल निशाँ बनाये था .. इतनी गोरी थी रौशनी … वह अब ऐसे चल रहे थे मनो कपल हो .. वहां रौशनी भी कुछ बोल नहीं रही थी तोह इसलिए रमेश ऐसे hi उसके कमर पर हाथ डेल उसके साथ चल रहा था .. फिर से आस पास के सब मर्द उन दोनों को देख रहे थे … जलन से की ऐसे काळा बुड्ढे के साथ ऐसी गोरी मलाईदार माल कैसे हैं … वाहन के लेडीज तोह मन में बुदबुदा रहे थे उफ़ कैसे इस काळा बुड्ढे के सतह यह महिला जा रह हैं .. जरूर दोनों में चक्कर हैं .. साला बुद्धा मस्त मज़े लेता होगा इस जवान महिला के साथ…
रौशनी को सब की नज़र दिख रही थी और वह शर्मा रही थी .. वह धीरे से रमेश जी के कान में फुसफुसाई. “रमेश जी छोड़िये न मेरी कमर , सब लोग देख रहे हैं …”
“रौशनी जी क्या बता हैं फिर .. बस कमर पर हाथ hi तोह राखी हैं … चलिए न आप बस फोर्ट देखिये .. इस शहर की फेमस टूरिस्ट स्पॉट हैं .. आप इसके मज़े लीजिये.
(और में तुम्हारे साथ ऐसे मज़्ज़े लेता रहूँगा रौशनी डार्लिंग)
“हाँ रमेश जी हैं तोह बहुत hi खूबसूरत ये फोर्ट .. शुक्रिया आप मुझे यहाँ ले आये .. मुझे बहुत पसंद हैं आपकी चॉइस.”
“रमेश ने रौशनी के कमर को और कास कर पकड़ लिया … फिर रौशनी को देख बोले “हाँ रौशनी जी बहुत hi मस्त चॉइस रहती हैं मेरी हमेशा … “
रौशनी सोची की क्या रमेश उसे देख उसकी … नहीं नहीं फोर्ट की hi बात कर रहे होंगे रमेश ज.”
“रौशनी जी आप भी तोह मेरी चॉइस हो …”
“मतलब रमेश .. क्या मतलब आपका.”
“रौशनी जी आपकी साथ दोस्ती का चॉइस जो मैंने लिया उसकी बात कर रहा थूं … और रमेश फिर से रौशनी के कमर को और थोड़ा कास कर दबाता हैं …
“उफ़ रमेश जी धीरे से … आप तोह मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड सोच रहे हो क्या ..”


“रौशनी जी में कब बोलै गर्लफ्रेंड हो आप मेरी .. और रही बात उसकी .. क्यों में आप जैसी जवान लेडीज को गर्लफ्रेंड नहीं बना सकता …”
“रमेश जी आप भी न , आप शादी शुदा हो .. आप कैसे गर्लफ्रेंड बनाओगे..”
“रौशनी जी क्यों नहीं अब इंग्लिश में अगर किसी महिला को फ्रेंड बनाऊ .. तोह महिला मतलब गर्ल और फ्रेंड मतलब दोस्त हैं न .. तोह अगर आप मेरी दोस्त हो और एक महिला हो तोह आप मेरी गर्ल .. और फ्रेंड .. मतलब गर्लफ्रेंड न बानी … और रमेश रौशनी को देख मुस्कुराता हैं. फ्रेंड हो तोह गर्ल फ्रेंड hi कहते है न …
“उफ़ रमेश जी इंग्लिश में ऐसे बस दो शब्द जोड़ने से उसका मीनिंग वही नहीं होता… गर्लफ्रेंड मतलब होता हैं …..”
“रौशनी जी रुक क्यों गयी बताइये न … गर्लफ्रेंड किसको बुलाते हैं… बताइये ..”
“उफ़ रमेश ज ऐकोर दीजिये .. में नहीं कह सकती ..”
“ओह हो शरमाते हुए कितनी खूबसूरत लग रही हो रौशनी जी … काश में सिंगल होता तोह आपको गर्ल फ्रेंड बनता .. फिर हम करते जो बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड करते हैं.”
“रमेश जी उफ़ आप भी न .. चलिए फोर्ट दिखाइए .. फिरत दिखने hi लाये थे न”
(फोर्ट गया तेल लेने .. तेरे साथ मज़े करने लाया हूँ तुझे रौशनी … इस फोर्ट में ऐसी जगह ले जाऊंगा जहाँ अपनी बेगू को ले गया था और बहुत मज़्ज़ाए किये थे उसके साथ)
रमेश तोह रौशनी की कमर पर अपनी पकड़ तोह चोर नहीं रहा था .. वहां रौशनी भी अब उन्हें ऐसे उसके कमर को पकडे रखने दे रही थी …. रौशनी को रमेश फोर्ट की लग अलग हिस्सों के बारे में थोड़ी जानकारी भी दे रहा था …
“रमेश जी आपको इस फोर्ट के बारे में इतना कैसे पता हैं.”
“रौशनी जी अब क्या कहु … रिक्शा चलने के साथ में शुरुवात में यहाँ गाइड का काम करता था ..”
“ओह अच्छा बिलकुल उस जवान गाइड की तरह रमेश जी ..”
“हाँ में अच्छा भी था .. लेकिन इसमें पैसे काम हैं .. बस टिप से काम चलता हैं और वह भी घर चलने में नहीं चलता रौशनी जी”
“अच्छा तोह आप ने गाइड बन कर काफी साड़ी महिलाओं को टूर दिया होगा .. यहाँ बहार के देश की गोरियां भी आती होगी न ..”
“रौशनी जी अब झूट नहीं बोलूंगा .. हाँ बहार के देश की गोरी लडीएसको गाइड करता था .. इसलिए तोह थोड़ी टूटी फूटी इंग्लिश आती हैं .. और समझ भी आती हैं .. में 2 साल गाइड का काम करा हूँ. और हाँ उसमें कई महिलाओं को दिखाया हूँ फोर्ट … लेकिन किसी को दोस्त या गर्लफ्रेंड की तरह नहीं घुमाया हूँ फोर्ट “ और रमेश रौशनी के तरफ सीधा देख मुक्सुराता हैं.
रौशनी तोह शर्मा hi रही थी . रमेश आज बार बार गर्लफ्रेंड का शब् इस्तेमाल कर रहे थे … उसे वह सुन शर्माहट महसूस हो रही थी.. और तोह और फोर्ट घूम कर 30 मं हुए थे और पूरा टाइम रमेश ने उसकी कमर पकड़े हुए hi उसे गाइड किया था …
अब रमेश रौशनी को एक थोड़ी सी सुनसान जगह ले गया .. “रौशनी जी गाइड होने का फायदा हैं की मुझे यहाँ के ऐसे चीज़ पता हैं जो टूरिस्ट को भी नहीं दिखता कोई … चलो देखते हैं ..
पहले की रौशनी कुछ बोलती रमेश उसे कमर से पकड़े हुए एक काम पॉपुलटेड एरिया में लेकर गया …
“रमेश जी कहाँ ले जा रहे हो मुझे उफ्फ्फ्फ़ … वाहन कोई नहीं हैं रमेश जी .. वहां नहीं चलते हैं.”
रमेश तोह सुन नहीं रहा था बस रौशनी केकमर को जकड़े उसे वहां उस जगह लगाया ..
रौशनी अब रमेश पर ग़ुस्सा होने hi वाली थी की उसे एक वह के तालाब के पास ले गया रमेश. तालाब की अस पास काफी सुन्दर फूल थे … तालाब तोह छोटा था लेकिन वहां आस पास ग्रास था और काफी सरे रंग बिरंगी फूल..
“रौशनी जी यह देखिये .. ख़ास आपके लिए … यह इस फोर्ट का तालाब हैं .. वैसे तोह प्यूरीन ज़माने से इसका कुछ तलूक तोह नहीं लेकिन फिर भी यहाँ के फूल अलग रंग के हैं .. काफी रंग बिरंगी .. इस स्पॉट की यहाँ के किसी भी गाइड बुक में ज़िकर नहीं हैं.”
“उफ़ इतस सो ब्यूटीफुल रमेश जी .. बहुत hi खूबसूरत …”
रमेश जी आपको पता हैं मुझे फूल इतने पसंद हैं .. आप बहुत अच्छे हो .. रौशनी फिर रमेश को गले लगाती हैं .. रमेश इस का मौका लेकर अपने हाथों को रौशनी की मुलायम पीठ पर और बाँहों पर फेरने लगा … रौशनी को वह महसूस हुआ और वह कुछ नहीं बोली … रमेश अब और बोल्ड होकर उसकी बाँहों को दबाने लगा फिर उसकी पीठ को दबोचने लगा … रौशनी फिर अपने हुग कोह तोड़ रमेश की आँखों में देखने लगी … रमेश भी उसकी आँखों में देख रहा था .. वहां पास की हलकी सी रौशनी अब दोनों पर दर्शा रही थी … रमेश और रौशनी एक दूसरे को देखते रहे .. फिर रौशनी अपने चेहरे को आगे की तरफ करि .. रमेश भी आगे अपनी होठोनो को कर फिर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे .. रमेश फिर से रौशनी को गले लगा कर इस बार जोरों से उसे चूमने लगा … उसे बाँहों में लेकर उसे मसलते हुए वह रौशनी की गुलाबी होठों को जोरों से चुम रहा था … रौशनी के हाथ रमेश के सर पर उसके बालों कोप हेर रहे थे और दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. निचे रमेश का लुंड अब पूरी औकात में आ चुक्का था और उसने रौशनी को गले से कसकर लगाया और उसका खड़ा लौड़ा रौशनी के नाभि से टकराया … रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों चुम्बन में लगे रहे .. रमेश अब अपने लोडे को रौशनी के पेट से कसकर दबाने लगा .. रौशनी के मुँह से आह निकली लेकिन फिर भी दोनों चुम्बन में लगे हुए थे .. रमेश अब रौशनी को कसकर दबोचा रखा था और बी अपनी जीभ को रौशनी के मुँह में डालने की कोषसिंह करने लगा .. पहले तोह रौशनी रेसिस्ट कर रही थी लेकिन धीरे से उसका मुँह खुल गया और रमेश के जीभ को अपने मुँह में स्वीकार करने दी … धीरे से रमेश की जीभ अब रौशनी की जीभ को ढूंढने लगी और उसे मिलते hi उसके जीभ से वह रौशनी के जीभ से उसकी अनादर का रास पिने लगा …. रमेश के हाथ अब रौशनी की चूतड़ों पर थे और वाहन उसे हलके से वह दबाने लगा ..

रौशनी की मुँह से फिर से आह निकलने वह अपने मुँह को खोलने लगी लेकिन रमेश ने अपनी मुँह से उसके मुँह पर फिर से चुम्बन गाडी राखी …
अब दोनों की जीभ एक दूसरे क ेरस को पिने लगी थी …. रमेश ने रौशनी की चूतड़ों को और जोर से दबाया …
रौशनी भी काफी गरम हो चुकी थी .. वह भी रमेश को कास कर पकड़ राखी थी … उसे महसूस हुआ की रमेश का मोटा लुंड उसकी नाभि से टकरा रहा था … उससे उसकी छूट में हलचल होने लगी और हलके से छूट से पानी निकलने लगा .. वह भूल गयी थी की वह एक बुड्ढे से चिपकी हुयी थी अँधेरे में और उससे चुम्बन में लगी हुयी थी और बस आहें भर रही थी.

रमेश अब आगे पीछे अपने लोडे को हिलने लगा और वह रौशनी की गरम और नरम पेट से दबता गया … उसके लुंड से भी थोड़ा प्रेकम निकला रहा था …
अब रमेश ने अपनी उँगलियों से रौशनी की पीठ पर एक चिमटी मारी. उससे रौशनी के मुँह से आह निकली और दोनों का चुम्बन टूटा … रौशनी अब काफी शर्मा गयी .. वह रमेश जी को एक गहरी चम्बां दी थी और उसकी जीभ से भी रास पिलाई थी … वह मुद कर दूसरी तरफ देखने लगी .. रमेश फिर पीछे से उसे जकड लिया और उसके लोडे को अब रौशनी की चूतड़ों में
“उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. ममम प्लीज मुझे छोड़िये …”
“रौशनी जी क्या सही क्या गलत … आप और में बस अपना प्यार जाता रहे हैं …”
“रमेश जी में आपसे प्यार नहीं करती उफ्फ्फ में शादी शुदा हूँ और आप भी .. और तोह और आप तोह ….”
“बुद्धा हूँ , रिक्शा ड्राइवर हूँ … हाँ बताइये .. दीजिये गालियां मुझे …. रौशनी जी मुझे आप बहुत पसंद हो .. मुझे आप hi चाहिए ..”
रमेश पीछे से अपने लोडे को अब जोरों से रौशनी की चूतड़ों पर दबाने लगा … रौशनी कुछ समय उस एहसास को महसूस करती रही और उसकी छूट गीली होती रही .. लेकिन फिर उसे याद आया वह क्या कर रही थी .. वह मुद गयी और उसने रमेश को एक जोरों का छाता मारा ..
“रमेश जी यह ज़बरदस्ती हैं .. मुझे नहीं चाहिए .. आप बहुत बुरे हो …”
रमेश उस थप्पड़ से थोड़ा ग़ुस्सा हुआ लेकिन वह अपने चेहरे पर वह ग़ुस्से को झलकने नहीं दिया…
“रौशनी जी आप को भी पसंद हैं यह सब .. आपने मुझे ऐसी गहरी चुम्बन दी .. और बी मुझे थप्पड़ मार दिया . आप के मुलायम हाथ ऐसे थप्पड़ मारने नहीं बने हैं डिअर ... उन्हें तोह प्यार hi करना चाहिए."
रमेश ने फिर रौशनी के हाथ क पकड़ कर उसे चूमने लगा … “रौशनी जी इन सच में हाथों को बस प्यार करना चाहिए और कुछ नहीं."
रौशनी हैरान थी की थप्पड़ मारने के बाद भी रमेश फिर से उसके हाथों को लेकर उसे चुम रहे थे …
“रमेश जी प्लीज चोरए .. में ऐसे नहीं कर सकती .. प्लीज आप फाॅर्स न करिये …”
“रौशनी जी फोरे कैसी .. मैंने आपको चुम्बन देने में कोई फाॅर्स नहीं करि .. आप खुद भी चाहती थी .. में बस आप के चुम्बन का साथ hi दिया ..”
रमेश ने फिर से रौशनी को जकड लिया .. और उसके गालों को चूमने लगा .. उसका लोढ़ा अभी भी टाइट था … रौशनी को अपनी अंदर गर्मी महसूस हो रह थी .. वह अपनी छूट को गीली महसूस करि .. उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे … क्या वह सच में रामश के साथ यह सब मस्तियाँ चाहती थी .. उसकी छूट क्यों गीली थी .. और उसे रमेश का खड़ा लोडे के उभर को अपने चूतड़ों पर , नाभि पर पसंद क्यों आने लगा था …
रमेश फिर से रौशनी के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर उसे चूमने आगे बढ़ा .. रौशनी भी किसी ट्रांस में थी वैसे आग झुक कर फिर से रमेश को चूमने लगी …
रमेश ने चुम्बन तोड़ दिया .. फिर रौशनी के बाँहों को चूमने लगा … उसे हलके से चाटने लगा .. रौशनी को ऐसी रमेश की हरकतों से और गर्मी मह्सुश हुयी .. बहुत दिनों बाद वह किसी मर्द के इतने करीब थी .. रमेश धीर धीरे से उसके बाँहों को चूमते हुए फिर निचे घुटनो पर जाकर रौशनी की नाभि को चूमने लगा .. फिर अपनी जीभ से उसकी नाभि में दाल वहां चाटने लगा …
“उफ़ रमेश जी मममम प्लीज न चूमिए .. उफ़ रमेश जी यह गलत हैं .. रमेश जी पलज़्ज़ज़्ज़ज़”
रमेश बस उसकी नाभि को चूमते रहा वहां अंदर चाटने लगा .. रौशनी अपनी नाभि में रमेश जी की चाटने से उसके सलीवा को महसूस कर रही थी .. न जाने क्यों इससे उसकी छूट और भी फुदकने लगी …. रमेश फिर खड़ा हुआ और रौशनी के मुलायम हाथों को अपने पंत के उभर पर रख दिया
“रौशनी जी देखिये न आपके वजह से मेरे अंदर इतनी गर्मी बढ़ गयी हैं की में पूरा हार्ड हुआ हूँ .. रौशनी जी यह आपके लिए सलामी दे रहा हैं .. इसे मेहसूस करिये .. इसे सहलाइये …”
“रमेश नहीं प्लीज में ऐसे उसे नहीं छू सकती .. उफ्फ्फ्फ़… रौशनी अब हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी .. लेकिन रमेश ने उसके हाथों को कास कर जकड़े रखा था और अपने लुंड के उभर पर रख दिया …
रौशनी न चाहते हुए भी अब उस लोडे के उभर से आकर्षित होते हुए वहां सहलाने लगी .. वह निचे देखि तोह सच में रमेश का मोटा लुंड पूरी तरह से खड़ा होकर बड़ा सा उभर बनाये हुए था … (उफ़ इस बुढ़ापे में भी रमेश जी का लुंड कितना बड़ा उभर दिखा रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ सच में बहुत मोटा होगा .. क्या वह असलम जी और सलीम जी के लुंड ाजिसे मोटा और बड़ा होगा उफ्फ्फ यह में ऐसे कसीस गैर मर्द के उभर को ऐसे सेहला रही थी उफ्फ्फ्फ़..)
रमेश ने अब रौशनी के हाथोंको पानी पंत के अंदर दाल अपनी अंडर वियर के अंदर भी डालने लगा .. रौशनी हाथ हटाने की कोशिश करती रही लेकिन रमेश काफी स्ट्रांग गृप रखे हुए थे .. उसका हाथ वह उसके हड्डी के अंडर जाते महसूस करि .. उफ्फ्फ बहुत गर्माहट थी उनके चड्डी के अंदर .. आखिर कर उसके हाथों में अब रमेश जी का मोटा लुंड था … उनका लुंड असलम जैसे कट नहीं था .. ऊपर अभी भी लुंड की चमड़ी थी … अब वह खुद से रमेश के लुंड की चमड़ी को निचे धकेल उसके मोठे लुंड के टोपे को सहलाने लगी ….
“अहह रौशनी जी आपकी नरम हाथ मेरे सख्त लोडे पर उफ्फ्फ्फ़ … ममम सेहलिये उसे और सहलाइये रौशनी जी .. मुझे पता हैं आपको मेरा मोटा लोढ़ा पसंद आया हैं .. और सहलाइये इसे ममममम”
“नहीं रमेश जी प्लीज … नहीं …” रौशनी नहीं तोह कह रही थी लेकिन फिर भी प्यार से रमेश के लोडे के टोपे को सेहला रही थी .. उसके अनादर गर्मी बहुत बढ़ गयी थी … उसकी छूट काफी गीली हो चुकी थी .. इतना मोटा लोढ़ा .. रमेश जैसे बुड्ढे का भी हो सकता हैं .. उसी के बार में सोचती हुयी उसके लुंड को सहलाने लगी ….
रमेश देख सकता था की रौशनी के अंदर गर्मी बढ़ रही थी .. वह फिर से रौशनी के गुलाबी होठों को चूमने लगा … इस बार रौशनी अब रमेश के लोडे को सेहला रही थी और ऊपर दोनों फिर से गहरी चुम्बन में लगे हुए थे .. इस बार रौशनी की आँखें बंद थी .. उसे अब इस सब का थोड़ा मज़्ज़ा आ रहा था … वह अब सोच नहीं रही थी बस अपनी गर्मी की गुलाम बन चुकी थी .. ऊपर रमेश जी के काळा होठों को वह चुम रही थी और निचे उसके काळा मोठे लोडे को सेहला रही थी .. वह काफी गरम हो चुकी थी .. बहुत दिनों बाद किसी के लोडे को ऐसे सेहला रही थी …
सर्दी का मौसम था लेकिन दोनों के बीच काफी गर्मी थी …
अब रमेश फिर से रौशनी की चूतड़ों को दबाने लगा … वह अपने हाथों को ऊपर की और उठा कर पीछे से रौशनी की ब्लाउज में डालने लगा … अपने दो उँगलियों को अब वह रौशनी की ब्लाउज में दाल चुक्का था … फिर वहां से निकलकर वह अपने हाथों को आगे की तरफ से रौशनी की ब्लाउज पर रख वहां दबाने लगा … रौशनी ए.बी.ए. यह भर रही थी … वह खुद को खो चुकी थी .. उसे कुछ ध्यान नहीं था वह कहाँ हैं , किसके साथ कैसी अश्लील हरकतें कर रही थी …
अब सन ऐसा था की रौशनी रमेश के मोठे लोडे को सेहला रही थी और रमेश ऊपर से , आगे से रौशनी की ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाते रहा …

फिर उन्ह ीक विस्सल की आवाज़ सुनाई दी .. कोई वॉचमन वहां सीटी बजा रहा था ..
दोनों घबराते हुए वहां से निकल गए … रौशनी के हाथों को रमेश पकड़ के वहां से वह भागते गए .. रौशनी की चूचियां अपने ब्लाउज में ऊपर निचे हिल रहे थे और दोनों एग्जिट तक भागते गए ..
फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर वहां से निकल गए …
रौशनी रिसकशव में बैठे गुइली फील कर रही थी .. (उफ्फ्फ्फ़ यह में क्या कर रही थी .. उफ्फ्फ हम दोनों पकड़े जाते तोह .. उफ़ और वह आज रमेश जैसे बुड्ढे से ऐसी अश्लील हरकतें कैसे कर रहे थी .. वह काफी ऐम्बर्रास फील कर रही थी …)
पुरे रस्ते तक दोनों बात नहीं कर रहे थे … ऐसे hi बिना कुछ बातें किये अब वह रौशनी के घर पहुँच गए …. रौशनी अब रिक्शा के बहार उतर कर अपने घर की तरफ जाने लगी …
रमेश पीछे से रौशनी की हिलती चूतड़ों को देख (उफ़ आज तोह ज्यादा hi मस्ती करि .. उफ्फ्फ क्या कल रौशनी जी मुझसे बातें करेगी … उफ्फ्फ आज तोह उसको अपने लोडे को सहलाने दिया .. ए.बी.ए. आगे जाकर इस लोडे से इसकी चुदाई करनी दूर नहीं … उफ्फ्फ्फ़ और रमेश अपने लोडे को मसलते हुए वहां से निकल गया…
10 बज गए थे .. रोनित अब रौशनी के इंतेज़्ज़र में सोफे पर बैठा था…. काफी ग़ुस्से में उसके इंतेज़्ज़र में.
































