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- Dec 5, 2013
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रौशनी रमेश को देखि तब उसे सुबह के बारे में याद आने लगा .. रमेश के बड़े उभर के बारे में जो उसने देखा था ..
वह रमेश से बातें करने के लिए शर्मा रही थी.
रमेश भी ज्यादा कुछ बोले नहीं ..
अब रौशनी रिक्शा में बैठ गयी.
“रौशनी मैडम कैसा रहा आज का दिन ..”
रौशनी कुछ नहीं बोली बस बहार देख रही थी ..”
रौशनी जी क्या आप मुझसे नाराज़ हो ? बात क्यों नहीं कर रही हो आप.. बोलिये मैंने कुछ गलती की तोह माफ़ी मांग लूंगा..”
रौशनी मुस्कुरायी “नहीं रमेश जी ऐसे कुछ नहीं .. आप की कोई गलती नहीं हैं”
“फिर मैडम जी बात करिये न , आप की ख़ामोशी पसंद नहीं हमें”. आप हमेशा हस्ती हुयी बातें करती हुयी अच्छी होगी ..”
रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी आज ाचा गया दिन , आज बहुत काम हुआ और आज मेरे ऑफिस वालों ने और ंगो के लोगों ने मेरे लिए एक छोटी सी वेलकम पार्टी राखी थी ..”
“अच्छी बात हैं रौशनी जी , आप सच में इतनी प्यारी हो की सब ाबको पसंद करते होंगे .. उनकी किस्मत की उन्हें आप जैसी प्यारी अच्छे दिल की मैनेजर मिली हैं”
“शुक्रिया रमेश जी …”
“ रौशनी जी वैसे एक बात कहु आपसे”
“हाँ बोलिये रमेश जी”
“रौशनी जी सच बताइये , आप पूरा दिन काम कर के आयी हो फिर भी आप ऐसे लग रही हो जैसे सुबह आप आई थी .. इतनी फ्रेश लग रही हो आप , अपना राज़ तोह बताइये”


रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी ऐसे कुछ नहीं हैं , अब में क्या कहु आपसे .. नेचुरल हैं सब शायद
“रौशनी जी आप बहुत डाउन तो एअर्थ हो , आप जैसी सुंदरी जो होती हैं उनका ऐटिटूड बहुत होता हैं …”
ः रमेश जी आप भी न कुछ भी”
“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत hi सुन्दर हो , आप जैसी तोह सुन्दर लेडी मैंने आज तक नहीं देखि हैं … आप गज़ब दिखती हो.”
रौशनी को उसकी तारीफे पसंद आ रही थी .. वह मुस्कुरा रही थी …
रौशनी की मुस्कराहट देख रमेश और बोल्ड होने लगे .. “रौशनी जी आप काफी वेल मैनटिनेंड भी हो , रोज़ एक्सरसाइज करती हो आप , या डाइट ..”
“रमेश जी में न डाइट करती हूँ न एक्सरसाइज , बस खाना टाइम पर खरी हूँ , और घर के काम करती हूँ शायद उसके वजह से मैनटैनेड हूँ”
“रौशनी जी मुमकिन hi नहीं की आप एक्सरसाइज नहीं करती .. आपकी कमर कितनी पतली हैं , फिर भी आज कल की लड़कियों जैसी आप पतली भी नहीं हो”
“रमेश जी लगता हैं आपकी नज़र बहुत हैं मुझ पर ः …”
“रौशनी जी बस जो हैं हु बोल दिया मैंने , में बातें छुपता नहीं .. जो हैं बोल देता हूँ. अब आप की फिगर हैं इतनी अच्छी तोह हैं .. उसमें क्या झूट बोलना आपसे”
रौशनी मन में मुस्कुराती हैं, रमेश जी तोह ज्यादा hi तारीफ कर रहे थे उसकी , लेकिन उसे उनकी ऐसी बातें अच्छी लगी , बुड्ढे होकर भी जवान लड़कों जैसे बातें कर रहे थे”
“रमेश जी ज़रा रुकिए वहां एक पेड़ हैं वहां पर बहुत अच्छे फूल हैं , मुझे घर के लिए लेने हैं उन्हें”
रमेश गाडी रोक देता हैं ,
रौशनी निचे उतर कर फूलों को लेने लगती हैं पेड़ से .. रमेश बस रौशनी की पतली कमर और गोरी सी मखमली पीठ को hi देखे जा रहा था .. उफ्फ्फ क्या कमल की फिगर थी रौशनी की .. ऐसी फिगर मनो भगवन ने बहुत म्हणत से बनायीं हो …



“मैडम जी आपको फूल बहुत पसंद हैं लगतभाईन ..”
रौशनी पीछे मुद कर रमेश को देखती हैं , रमेश जी हाँ मुझे फूल बहुत पसंद है. …
“रौशनी जी मुझे एक जगह पता हैं वहां फूल बहुत अच्छे मिलते हैं .. चाहो तोह अभी आपको वहां ले जा सकता हूँ..”
रौशनी बोली “हैं रमेश जी ज़रूर थोड़ा टाइम हैं मेरे पास अभी, रस्ते में हैं तोह ज़रुर जाएंगे वहां.”
“रौशनी जी वह रस्ते पर नहीं हैं , अलग रास्ता लेना पड़ेगा कुछ 20 मं लगेंगे वहां पहुँचने में” लेकिन फूल एक से एक बढ़कर मिलेंगे आपको”
रौशनी सोचने लगती हैं , वैसे भी घर जाकर रोनित तोह उससे बातें नहीं करता , यहाँ रमेश जी उसे कंपनी भी अच्छे दे रहे हैं और उसे फूल भी मिल जाएंगे घर के लिए, इसीलिए वह रमेश जी के साथ वहां जाने के लिए हाँ करती हैं..
रमेश खुश हो जाता हैं , वह कुछ और समय बिता पाएगा इस सुंदरी के साथ .
अब दोनों रिक्शा में वहां चल पड़ते हैं ..
कुछ 10 मं बाद अचानक से बारिश गिरने लगती हैं … धीरे धीरे बारिश जोरों से गिरने लगती हैं…
“रौशनी जी बारिश बहुत तेज़ हैं , आप एक काम करिये वहां साइड में दोनों तरफ एक फ्लैप हैं .. उसे खोलिये , उससे बारिश अंदर नहीं आएगी .”
रौशनी वही करती हैं और फ्लैप निचे लारती हैं . रमेश अंदर एक लाइट हैं वह लगता हैं .. पीछे देखता हैं तोह रौशनी उस धीमी लाइट में मस्त लग रही थी , उसका गोरा बदन अँधेरे में चमक रहा था .. रमेश का लुंड तोह जोरों से झटके मारने लगा .. बहुत hi मस्त लग रही थी रौशनी.
रौशनी देख रही थी की वह तोह बारिश से बच कर बैठी थी लेकिन बारिश की तेज़ी से रमेश गीले हो रहे थे .. आगे रास्ता भी अच्छी तरह से नहीं दिख रहा था ..
रमेश जी आपके बगल में वह फ्लैप नहीं हैं , आप तोह भीगे जा रहे हो.. आपको रास्ता भी नहीं दिख रहा होगा …
“कुछ नहीं रौशनी जी ऐसे hi चला लूंगा .. आप तोह भीग नहीं रही हो न , बस और क्या , हम भीगेंगे कोई प्रॉब्लम नहीं .. हाँ रास्ता थोड़ा साफ़ नहीं दिख रहा हैं , लेकिन आपको लेट होगा काफी इसीलिए रोक नहीं सकता रिक्शा .. वैसे भी रिक्शा रोकूंगा तोह भी में भीगते जाऊंगा न ..”
रौशनी कुछ सोचती हैं , उसे दर था की रास्ता मजो दिखने के कारन कुछ एक्सीडेंट न हो, और रमेश भी इतने भीग रहे थे , उसे उनके लिए बुरा लग रहा था
“रमेश जी प्लीज आप मत चलाइये , आप चाहे तोह रिक्शा रोक कर पिछले सीट पर आ सकते हो … मुझे थोड़ा लेट हुआ तोह चलेगा रमेश जी.”
रमेश यह सुनकर बहुत खुश हुआ , वह अब रौशनी के करीब बैठ पाएगा. उसने रिक्शा साइड में रोक दी और निचे उतर कर रौशनी के साथ पीछे बैठ गया.
अब रौशनी और रमेश ोीचे बैठे थे और फ्लैप बंद कर दिया था .. अब दोनों अंदर थे और बस धीमी सी लाइट थी ..
रमेश जी आप तोह बहुत भीग गए हो ..
रौशनी जी इतस फाइन , मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं …
रौशनी की नज़र अनजाने में रमेश जी के क्रॉत्च एरिया पर गयी , सुबह का सिचुएशन सोचने लगी और फिर शर्मा कर झट से अपने आँखों को वाहन से हटा दिया ..
अब दोनों शांति से अंदर बैठे थे … फिर बिजली की कड़कने की आवाज़ आयी और रौशनी दर कर रमेश को पकड़ लिया ..
अब रौशनी के ज़ुल्फ़े रमेश के चेहरे पर थे .. और वह रमेश की बाँहों में थी .. रमेश इसी का मौका उठाते अपने हाथों को रौशनी के बदन पर फेरने लगा .. उसकी पीठ पर फिर उसके बाँहों पर .. उसकी मुलायम त्वचा को फील करते hi उसका लुंड उभरने लगा … और झटके मारने लगा ..
कुछ सेकंड दोनों ऐसे hi बाँहों में थे … फिर रौशनी ने अपना चेहरा ऊपर किया और रमेश को देखने लगी.. दोनों के आँखें एक दूसरे के आँखों को देखती रही ..
बहार बारिश और अंदर रिक्शा में दोनों उस धीमी लाइट में बैठे थे एक दूसरे के बाँहों में …
रौशनी के होठं अब रमेश के काफी करीब थे . रमेश और रौशनी के होठं एक दूसरे के तरफ बढ़ने लगे … और अब बस कुछ hi इन की दुरी थी दोनों के होठों में. रौशनी की हलबी होठं और रमेश के काळा भद्दे होठ बिलकुल करीब थे ..



रमेश जी का लुंड झटके मार रहा था .. रौशनी जैसी सुंदरी उसके बाँहों में थी और उसके गुलाबी होठं उसके होठों के बिल्कु करीब थे .. रमेश अपने हाथों को रौशनी के बाँहों में फेर रहा था जिससे रौशनी को गूसबम्प्स आने लगे .. कीच और सेकंड ऐसे hi रहकर रौशनी बुदबुदायी
“रमेश जी , आप प्लीज मुझे छोड़िये .. प्लीज …”
रमेश का दिमाग चलने लगा ज़ज़ वह झट से रौशनी से जुड़ा हुआ ..
“सॉरी रौशनी जी मुझे माफ़ कीजिये , मुझे ऐसे नहीं करना चाहिए था .. सॉरी में जाता हूँ ..”
रौशनी बस रमेश को देखती रही ..
“रमेश जी ोप्लेसे आपने कुछ गलत नहीं किया .. मुझे न बिजली से बहुत डर लगता हैं , में hi गलत थी की आपको ऐसे पकड़ने लगी ..”
“नहीं रौशनी जी आपको कोई गलती नहीं हैं इसमें .. कुछ भी हो मुझे आपको चुना नहीं चाहिए था.. कहाँ आप महलों की पारी और में बुद्धा सा रिक्शा ड्राइवर “
“रमेश जी प्लीज इसमें आपकी कोई गलती नहीं हैं …”
नहीं रौशनी जी आप कितनी भी सेक्सी हो .. मुझे आपको ऐसे नहीं चुना चाहिए था मुझे जैसे काळा बुड्ढे ड्राइवर ने .. आप जैसी सुन्दर सुशील महिला को ऐसे नहीं चुना चाहिए था ..”
रौशनी को बहुत बुरा लग रहा था .. उसकी नज़र निचे रमेश के पंत पर गयी तोह वह देखि की उनका लुंड खड़ा हुआ था … उफ्फ्फ काफी बड़ा लुंड था रमेश जैसे बुड्ढे का .. उसे अब बहुत शर्म आ रही थी .. वह झट से दूसरी तरफ देखने लगी.
रमेश समझ गया की रौशनी उसके लुंड को उसके पंत में उभरते देख शर्मा रही थी .. वह अब ऐसे बैह गया जिससे उसके उभरता लुंड पंत में से साफ़ साफ़ दिखाई दे .. लेकिन वह अनजान बने बैठे हुआ था ..
रौशनी को रहा नहींजा रहा था .. उसने कुछ सेकंड फिर से अपनी नज़र रमेश की उभर पर डाली ..
उफ्फ्फ बड़ा शैतान होगा इनका ममम …


(उफ़ ये क्या में सोच रही हूँ … रौशनी खुद के ख्यालों को पकड़ती हुयी )
रौशनी जी एक बात कहूंगा . आप सच में ेल खूबसूरत पारी हो … आपके पति बहुत hi लकी हैं … काश आप मेरी बीवी होती .. सच कहता हूँ आपको कभी काम करने नहीं भेजता , खुद बहुत कमाता आपको खुश रखने ..”
रौशनी को रमेश की बातें पसंद आने लगी .. वह ज़रूर बुड्ढे थे लेकिन बहुत एक अच्छे थे और उनकी तारीफों में सचाई थी ..
अब बारिश बंद हुयी थी .. रमेश फिरसे रिक्शा चलने लगा और कुछ देर में रौशनी को घर तक पहुंचा दिया
“रौशनी जी में चाहो तोह कल से नहीं आऊंगा आपको लेने .. मैंने गलती की हैं और उसकी सजा यही होगी की में अपनी प्यारी दोस्त को सवारी नहिन्दुंगा .. आप किसी और रिक्शा से जाइये ..
“ नहीं रमेश जी आप hi अब मेरे परमानेंट रिक्शा ड्राइवर हो . में आप hi की रिक्शा से जाउंगी और आप hi मुझे घर छोड़ोगे .. हम दोस्त हैं और आपको इस दोस्ती की बात माननी hi होगी..”
रमेश मन में मुस्कुराया … रौशनी जाल में फस्ती जा रही थी .. बहार से तोह वह मायूसी का चेहरा बनाये था .. फिर बोलै “हाँ ठीक हैं अब आपने दोस्त मान hi लिया हैं तोह यह दोस्ती कभी नहीं तोडूंगा .. आप सच में बहुत hi स्वीट हो रौशनी जी .. आपका दोस्त बनकर मुझे बेहद ख़ुशी होगी .”
रौशनी मुस्कुरा कर घर जाने मुद कर चली गयी .. रिक्शा में रमेश अपने बड़े लुंड को अपनी पंत में मसलता हुआ रौशनी की पतली कमर, हिलते चूतड़ों को देख बोलै (हैयय उफ्फ्फ क्या माल हैं यार , आज तोह मस्ती में थोड़ा सा रगड़ने मिला उसके नाज़ुक बदन को … अब तोह इसके हर अंग से खेला चाहता हूँ .. उफ्फ्फ रौशनी तुम्हे तोह में अपनी बना कर hi रहूँगा अह्ह्ह मेरी कामुक रानी )




वह रमेश से बातें करने के लिए शर्मा रही थी.
रमेश भी ज्यादा कुछ बोले नहीं ..
अब रौशनी रिक्शा में बैठ गयी.
“रौशनी मैडम कैसा रहा आज का दिन ..”
रौशनी कुछ नहीं बोली बस बहार देख रही थी ..”
रौशनी जी क्या आप मुझसे नाराज़ हो ? बात क्यों नहीं कर रही हो आप.. बोलिये मैंने कुछ गलती की तोह माफ़ी मांग लूंगा..”
रौशनी मुस्कुरायी “नहीं रमेश जी ऐसे कुछ नहीं .. आप की कोई गलती नहीं हैं”
“फिर मैडम जी बात करिये न , आप की ख़ामोशी पसंद नहीं हमें”. आप हमेशा हस्ती हुयी बातें करती हुयी अच्छी होगी ..”
रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी आज ाचा गया दिन , आज बहुत काम हुआ और आज मेरे ऑफिस वालों ने और ंगो के लोगों ने मेरे लिए एक छोटी सी वेलकम पार्टी राखी थी ..”
“अच्छी बात हैं रौशनी जी , आप सच में इतनी प्यारी हो की सब ाबको पसंद करते होंगे .. उनकी किस्मत की उन्हें आप जैसी प्यारी अच्छे दिल की मैनेजर मिली हैं”
“शुक्रिया रमेश जी …”
“ रौशनी जी वैसे एक बात कहु आपसे”
“हाँ बोलिये रमेश जी”
“रौशनी जी सच बताइये , आप पूरा दिन काम कर के आयी हो फिर भी आप ऐसे लग रही हो जैसे सुबह आप आई थी .. इतनी फ्रेश लग रही हो आप , अपना राज़ तोह बताइये”


रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी ऐसे कुछ नहीं हैं , अब में क्या कहु आपसे .. नेचुरल हैं सब शायद
“रौशनी जी आप बहुत डाउन तो एअर्थ हो , आप जैसी सुंदरी जो होती हैं उनका ऐटिटूड बहुत होता हैं …”
ः रमेश जी आप भी न कुछ भी”
“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत hi सुन्दर हो , आप जैसी तोह सुन्दर लेडी मैंने आज तक नहीं देखि हैं … आप गज़ब दिखती हो.”
रौशनी को उसकी तारीफे पसंद आ रही थी .. वह मुस्कुरा रही थी …
रौशनी की मुस्कराहट देख रमेश और बोल्ड होने लगे .. “रौशनी जी आप काफी वेल मैनटिनेंड भी हो , रोज़ एक्सरसाइज करती हो आप , या डाइट ..”
“रमेश जी में न डाइट करती हूँ न एक्सरसाइज , बस खाना टाइम पर खरी हूँ , और घर के काम करती हूँ शायद उसके वजह से मैनटैनेड हूँ”
“रौशनी जी मुमकिन hi नहीं की आप एक्सरसाइज नहीं करती .. आपकी कमर कितनी पतली हैं , फिर भी आज कल की लड़कियों जैसी आप पतली भी नहीं हो”
“रमेश जी लगता हैं आपकी नज़र बहुत हैं मुझ पर ः …”
“रौशनी जी बस जो हैं हु बोल दिया मैंने , में बातें छुपता नहीं .. जो हैं बोल देता हूँ. अब आप की फिगर हैं इतनी अच्छी तोह हैं .. उसमें क्या झूट बोलना आपसे”
रौशनी मन में मुस्कुराती हैं, रमेश जी तोह ज्यादा hi तारीफ कर रहे थे उसकी , लेकिन उसे उनकी ऐसी बातें अच्छी लगी , बुड्ढे होकर भी जवान लड़कों जैसे बातें कर रहे थे”
“रमेश जी ज़रा रुकिए वहां एक पेड़ हैं वहां पर बहुत अच्छे फूल हैं , मुझे घर के लिए लेने हैं उन्हें”
रमेश गाडी रोक देता हैं ,
रौशनी निचे उतर कर फूलों को लेने लगती हैं पेड़ से .. रमेश बस रौशनी की पतली कमर और गोरी सी मखमली पीठ को hi देखे जा रहा था .. उफ्फ्फ क्या कमल की फिगर थी रौशनी की .. ऐसी फिगर मनो भगवन ने बहुत म्हणत से बनायीं हो …



“मैडम जी आपको फूल बहुत पसंद हैं लगतभाईन ..”
रौशनी पीछे मुद कर रमेश को देखती हैं , रमेश जी हाँ मुझे फूल बहुत पसंद है. …
“रौशनी जी मुझे एक जगह पता हैं वहां फूल बहुत अच्छे मिलते हैं .. चाहो तोह अभी आपको वहां ले जा सकता हूँ..”
रौशनी बोली “हैं रमेश जी ज़रूर थोड़ा टाइम हैं मेरे पास अभी, रस्ते में हैं तोह ज़रुर जाएंगे वहां.”
“रौशनी जी वह रस्ते पर नहीं हैं , अलग रास्ता लेना पड़ेगा कुछ 20 मं लगेंगे वहां पहुँचने में” लेकिन फूल एक से एक बढ़कर मिलेंगे आपको”
रौशनी सोचने लगती हैं , वैसे भी घर जाकर रोनित तोह उससे बातें नहीं करता , यहाँ रमेश जी उसे कंपनी भी अच्छे दे रहे हैं और उसे फूल भी मिल जाएंगे घर के लिए, इसीलिए वह रमेश जी के साथ वहां जाने के लिए हाँ करती हैं..
रमेश खुश हो जाता हैं , वह कुछ और समय बिता पाएगा इस सुंदरी के साथ .
अब दोनों रिक्शा में वहां चल पड़ते हैं ..
कुछ 10 मं बाद अचानक से बारिश गिरने लगती हैं … धीरे धीरे बारिश जोरों से गिरने लगती हैं…
“रौशनी जी बारिश बहुत तेज़ हैं , आप एक काम करिये वहां साइड में दोनों तरफ एक फ्लैप हैं .. उसे खोलिये , उससे बारिश अंदर नहीं आएगी .”
रौशनी वही करती हैं और फ्लैप निचे लारती हैं . रमेश अंदर एक लाइट हैं वह लगता हैं .. पीछे देखता हैं तोह रौशनी उस धीमी लाइट में मस्त लग रही थी , उसका गोरा बदन अँधेरे में चमक रहा था .. रमेश का लुंड तोह जोरों से झटके मारने लगा .. बहुत hi मस्त लग रही थी रौशनी.
रौशनी देख रही थी की वह तोह बारिश से बच कर बैठी थी लेकिन बारिश की तेज़ी से रमेश गीले हो रहे थे .. आगे रास्ता भी अच्छी तरह से नहीं दिख रहा था ..
रमेश जी आपके बगल में वह फ्लैप नहीं हैं , आप तोह भीगे जा रहे हो.. आपको रास्ता भी नहीं दिख रहा होगा …
“कुछ नहीं रौशनी जी ऐसे hi चला लूंगा .. आप तोह भीग नहीं रही हो न , बस और क्या , हम भीगेंगे कोई प्रॉब्लम नहीं .. हाँ रास्ता थोड़ा साफ़ नहीं दिख रहा हैं , लेकिन आपको लेट होगा काफी इसीलिए रोक नहीं सकता रिक्शा .. वैसे भी रिक्शा रोकूंगा तोह भी में भीगते जाऊंगा न ..”
रौशनी कुछ सोचती हैं , उसे दर था की रास्ता मजो दिखने के कारन कुछ एक्सीडेंट न हो, और रमेश भी इतने भीग रहे थे , उसे उनके लिए बुरा लग रहा था
“रमेश जी प्लीज आप मत चलाइये , आप चाहे तोह रिक्शा रोक कर पिछले सीट पर आ सकते हो … मुझे थोड़ा लेट हुआ तोह चलेगा रमेश जी.”
रमेश यह सुनकर बहुत खुश हुआ , वह अब रौशनी के करीब बैठ पाएगा. उसने रिक्शा साइड में रोक दी और निचे उतर कर रौशनी के साथ पीछे बैठ गया.
अब रौशनी और रमेश ोीचे बैठे थे और फ्लैप बंद कर दिया था .. अब दोनों अंदर थे और बस धीमी सी लाइट थी ..
रमेश जी आप तोह बहुत भीग गए हो ..
रौशनी जी इतस फाइन , मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं …
रौशनी की नज़र अनजाने में रमेश जी के क्रॉत्च एरिया पर गयी , सुबह का सिचुएशन सोचने लगी और फिर शर्मा कर झट से अपने आँखों को वाहन से हटा दिया ..
अब दोनों शांति से अंदर बैठे थे … फिर बिजली की कड़कने की आवाज़ आयी और रौशनी दर कर रमेश को पकड़ लिया ..
अब रौशनी के ज़ुल्फ़े रमेश के चेहरे पर थे .. और वह रमेश की बाँहों में थी .. रमेश इसी का मौका उठाते अपने हाथों को रौशनी के बदन पर फेरने लगा .. उसकी पीठ पर फिर उसके बाँहों पर .. उसकी मुलायम त्वचा को फील करते hi उसका लुंड उभरने लगा … और झटके मारने लगा ..
कुछ सेकंड दोनों ऐसे hi बाँहों में थे … फिर रौशनी ने अपना चेहरा ऊपर किया और रमेश को देखने लगी.. दोनों के आँखें एक दूसरे के आँखों को देखती रही ..
बहार बारिश और अंदर रिक्शा में दोनों उस धीमी लाइट में बैठे थे एक दूसरे के बाँहों में …
रौशनी के होठं अब रमेश के काफी करीब थे . रमेश और रौशनी के होठं एक दूसरे के तरफ बढ़ने लगे … और अब बस कुछ hi इन की दुरी थी दोनों के होठों में. रौशनी की हलबी होठं और रमेश के काळा भद्दे होठ बिलकुल करीब थे ..



रमेश जी का लुंड झटके मार रहा था .. रौशनी जैसी सुंदरी उसके बाँहों में थी और उसके गुलाबी होठं उसके होठों के बिल्कु करीब थे .. रमेश अपने हाथों को रौशनी के बाँहों में फेर रहा था जिससे रौशनी को गूसबम्प्स आने लगे .. कीच और सेकंड ऐसे hi रहकर रौशनी बुदबुदायी
“रमेश जी , आप प्लीज मुझे छोड़िये .. प्लीज …”
रमेश का दिमाग चलने लगा ज़ज़ वह झट से रौशनी से जुड़ा हुआ ..
“सॉरी रौशनी जी मुझे माफ़ कीजिये , मुझे ऐसे नहीं करना चाहिए था .. सॉरी में जाता हूँ ..”
रौशनी बस रमेश को देखती रही ..
“रमेश जी ोप्लेसे आपने कुछ गलत नहीं किया .. मुझे न बिजली से बहुत डर लगता हैं , में hi गलत थी की आपको ऐसे पकड़ने लगी ..”
“नहीं रौशनी जी आपको कोई गलती नहीं हैं इसमें .. कुछ भी हो मुझे आपको चुना नहीं चाहिए था.. कहाँ आप महलों की पारी और में बुद्धा सा रिक्शा ड्राइवर “
“रमेश जी प्लीज इसमें आपकी कोई गलती नहीं हैं …”
नहीं रौशनी जी आप कितनी भी सेक्सी हो .. मुझे आपको ऐसे नहीं चुना चाहिए था मुझे जैसे काळा बुड्ढे ड्राइवर ने .. आप जैसी सुन्दर सुशील महिला को ऐसे नहीं चुना चाहिए था ..”
रौशनी को बहुत बुरा लग रहा था .. उसकी नज़र निचे रमेश के पंत पर गयी तोह वह देखि की उनका लुंड खड़ा हुआ था … उफ्फ्फ काफी बड़ा लुंड था रमेश जैसे बुड्ढे का .. उसे अब बहुत शर्म आ रही थी .. वह झट से दूसरी तरफ देखने लगी.
रमेश समझ गया की रौशनी उसके लुंड को उसके पंत में उभरते देख शर्मा रही थी .. वह अब ऐसे बैह गया जिससे उसके उभरता लुंड पंत में से साफ़ साफ़ दिखाई दे .. लेकिन वह अनजान बने बैठे हुआ था ..
रौशनी को रहा नहींजा रहा था .. उसने कुछ सेकंड फिर से अपनी नज़र रमेश की उभर पर डाली ..
उफ्फ्फ बड़ा शैतान होगा इनका ममम …


(उफ़ ये क्या में सोच रही हूँ … रौशनी खुद के ख्यालों को पकड़ती हुयी )
रौशनी जी एक बात कहूंगा . आप सच में ेल खूबसूरत पारी हो … आपके पति बहुत hi लकी हैं … काश आप मेरी बीवी होती .. सच कहता हूँ आपको कभी काम करने नहीं भेजता , खुद बहुत कमाता आपको खुश रखने ..”
रौशनी को रमेश की बातें पसंद आने लगी .. वह ज़रूर बुड्ढे थे लेकिन बहुत एक अच्छे थे और उनकी तारीफों में सचाई थी ..
अब बारिश बंद हुयी थी .. रमेश फिरसे रिक्शा चलने लगा और कुछ देर में रौशनी को घर तक पहुंचा दिया
“रौशनी जी में चाहो तोह कल से नहीं आऊंगा आपको लेने .. मैंने गलती की हैं और उसकी सजा यही होगी की में अपनी प्यारी दोस्त को सवारी नहिन्दुंगा .. आप किसी और रिक्शा से जाइये ..
“ नहीं रमेश जी आप hi अब मेरे परमानेंट रिक्शा ड्राइवर हो . में आप hi की रिक्शा से जाउंगी और आप hi मुझे घर छोड़ोगे .. हम दोस्त हैं और आपको इस दोस्ती की बात माननी hi होगी..”
रमेश मन में मुस्कुराया … रौशनी जाल में फस्ती जा रही थी .. बहार से तोह वह मायूसी का चेहरा बनाये था .. फिर बोलै “हाँ ठीक हैं अब आपने दोस्त मान hi लिया हैं तोह यह दोस्ती कभी नहीं तोडूंगा .. आप सच में बहुत hi स्वीट हो रौशनी जी .. आपका दोस्त बनकर मुझे बेहद ख़ुशी होगी .”
रौशनी मुस्कुरा कर घर जाने मुद कर चली गयी .. रिक्शा में रमेश अपने बड़े लुंड को अपनी पंत में मसलता हुआ रौशनी की पतली कमर, हिलते चूतड़ों को देख बोलै (हैयय उफ्फ्फ क्या माल हैं यार , आज तोह मस्ती में थोड़ा सा रगड़ने मिला उसके नाज़ुक बदन को … अब तोह इसके हर अंग से खेला चाहता हूँ .. उफ्फ्फ रौशनी तुम्हे तोह में अपनी बना कर hi रहूँगा अह्ह्ह मेरी कामुक रानी )































































