Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 2 - SexBaba
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Adultery Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

रौशनी रमेश को देखि तब उसे सुबह के बारे में याद आने लगा .. रमेश के बड़े उभर के बारे में जो उसने देखा था ..

वह रमेश से बातें करने के लिए शर्मा रही थी.

रमेश भी ज्यादा कुछ बोले नहीं ..

अब रौशनी रिक्शा में बैठ गयी.

“रौशनी मैडम कैसा रहा आज का दिन ..”

रौशनी कुछ नहीं बोली बस बहार देख रही थी ..”

रौशनी जी क्या आप मुझसे नाराज़ हो ? बात क्यों नहीं कर रही हो आप.. बोलिये मैंने कुछ गलती की तोह माफ़ी मांग लूंगा..”

रौशनी मुस्कुरायी “नहीं रमेश जी ऐसे कुछ नहीं .. आप की कोई गलती नहीं हैं”

“फिर मैडम जी बात करिये न , आप की ख़ामोशी पसंद नहीं हमें”. आप हमेशा हस्ती हुयी बातें करती हुयी अच्छी होगी ..”

रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी आज ाचा गया दिन , आज बहुत काम हुआ और आज मेरे ऑफिस वालों ने और ंगो के लोगों ने मेरे लिए एक छोटी सी वेलकम पार्टी राखी थी ..”

“अच्छी बात हैं रौशनी जी , आप सच में इतनी प्यारी हो की सब ाबको पसंद करते होंगे .. उनकी किस्मत की उन्हें आप जैसी प्यारी अच्छे दिल की मैनेजर मिली हैं”

“शुक्रिया रमेश जी …”

“ रौशनी जी वैसे एक बात कहु आपसे”

“हाँ बोलिये रमेश जी”

“रौशनी जी सच बताइये , आप पूरा दिन काम कर के आयी हो फिर भी आप ऐसे लग रही हो जैसे सुबह आप आई थी .. इतनी फ्रेश लग रही हो आप , अपना राज़ तोह बताइये”







रौशनी मुस्कुरायी “रमेश जी ऐसे कुछ नहीं हैं , अब में क्या कहु आपसे .. नेचुरल हैं सब शायद

“रौशनी जी आप बहुत डाउन तो एअर्थ हो , आप जैसी सुंदरी जो होती हैं उनका ऐटिटूड बहुत होता हैं …”

ः रमेश जी आप भी न कुछ भी”

“नहीं रौशनी जी आप सच में बहुत hi सुन्दर हो , आप जैसी तोह सुन्दर लेडी मैंने आज तक नहीं देखि हैं … आप गज़ब दिखती हो.”

रौशनी को उसकी तारीफे पसंद आ रही थी .. वह मुस्कुरा रही थी …

रौशनी की मुस्कराहट देख रमेश और बोल्ड होने लगे .. “रौशनी जी आप काफी वेल मैनटिनेंड भी हो , रोज़ एक्सरसाइज करती हो आप , या डाइट ..”

“रमेश जी में न डाइट करती हूँ न एक्सरसाइज , बस खाना टाइम पर खरी हूँ , और घर के काम करती हूँ शायद उसके वजह से मैनटैनेड हूँ”

“रौशनी जी मुमकिन hi नहीं की आप एक्सरसाइज नहीं करती .. आपकी कमर कितनी पतली हैं , फिर भी आज कल की लड़कियों जैसी आप पतली भी नहीं हो”

“रमेश जी लगता हैं आपकी नज़र बहुत हैं मुझ पर ः …”

“रौशनी जी बस जो हैं हु बोल दिया मैंने , में बातें छुपता नहीं .. जो हैं बोल देता हूँ. अब आप की फिगर हैं इतनी अच्छी तोह हैं .. उसमें क्या झूट बोलना आपसे”

रौशनी मन में मुस्कुराती हैं, रमेश जी तोह ज्यादा hi तारीफ कर रहे थे उसकी , लेकिन उसे उनकी ऐसी बातें अच्छी लगी , बुड्ढे होकर भी जवान लड़कों जैसे बातें कर रहे थे”

“रमेश जी ज़रा रुकिए वहां एक पेड़ हैं वहां पर बहुत अच्छे फूल हैं , मुझे घर के लिए लेने हैं उन्हें”

रमेश गाडी रोक देता हैं ,

रौशनी निचे उतर कर फूलों को लेने लगती हैं पेड़ से .. रमेश बस रौशनी की पतली कमर और गोरी सी मखमली पीठ को hi देखे जा रहा था .. उफ्फ्फ क्या कमल की फिगर थी रौशनी की .. ऐसी फिगर मनो भगवन ने बहुत म्हणत से बनायीं हो …









“मैडम जी आपको फूल बहुत पसंद हैं लगतभाईन ..”

रौशनी पीछे मुद कर रमेश को देखती हैं , रमेश जी हाँ मुझे फूल बहुत पसंद है. …

“रौशनी जी मुझे एक जगह पता हैं वहां फूल बहुत अच्छे मिलते हैं .. चाहो तोह अभी आपको वहां ले जा सकता हूँ..”

रौशनी बोली “हैं रमेश जी ज़रूर थोड़ा टाइम हैं मेरे पास अभी, रस्ते में हैं तोह ज़रुर जाएंगे वहां.”

“रौशनी जी वह रस्ते पर नहीं हैं , अलग रास्ता लेना पड़ेगा कुछ 20 मं लगेंगे वहां पहुँचने में” लेकिन फूल एक से एक बढ़कर मिलेंगे आपको”

रौशनी सोचने लगती हैं , वैसे भी घर जाकर रोनित तोह उससे बातें नहीं करता , यहाँ रमेश जी उसे कंपनी भी अच्छे दे रहे हैं और उसे फूल भी मिल जाएंगे घर के लिए, इसीलिए वह रमेश जी के साथ वहां जाने के लिए हाँ करती हैं..

रमेश खुश हो जाता हैं , वह कुछ और समय बिता पाएगा इस सुंदरी के साथ .

अब दोनों रिक्शा में वहां चल पड़ते हैं ..

कुछ 10 मं बाद अचानक से बारिश गिरने लगती हैं … धीरे धीरे बारिश जोरों से गिरने लगती हैं…

“रौशनी जी बारिश बहुत तेज़ हैं , आप एक काम करिये वहां साइड में दोनों तरफ एक फ्लैप हैं .. उसे खोलिये , उससे बारिश अंदर नहीं आएगी .”

रौशनी वही करती हैं और फ्लैप निचे लारती हैं . रमेश अंदर एक लाइट हैं वह लगता हैं .. पीछे देखता हैं तोह रौशनी उस धीमी लाइट में मस्त लग रही थी , उसका गोरा बदन अँधेरे में चमक रहा था .. रमेश का लुंड तोह जोरों से झटके मारने लगा .. बहुत hi मस्त लग रही थी रौशनी.

रौशनी देख रही थी की वह तोह बारिश से बच कर बैठी थी लेकिन बारिश की तेज़ी से रमेश गीले हो रहे थे .. आगे रास्ता भी अच्छी तरह से नहीं दिख रहा था ..

रमेश जी आपके बगल में वह फ्लैप नहीं हैं , आप तोह भीगे जा रहे हो.. आपको रास्ता भी नहीं दिख रहा होगा …

“कुछ नहीं रौशनी जी ऐसे hi चला लूंगा .. आप तोह भीग नहीं रही हो न , बस और क्या , हम भीगेंगे कोई प्रॉब्लम नहीं .. हाँ रास्ता थोड़ा साफ़ नहीं दिख रहा हैं , लेकिन आपको लेट होगा काफी इसीलिए रोक नहीं सकता रिक्शा .. वैसे भी रिक्शा रोकूंगा तोह भी में भीगते जाऊंगा न ..”

रौशनी कुछ सोचती हैं , उसे दर था की रास्ता मजो दिखने के कारन कुछ एक्सीडेंट न हो, और रमेश भी इतने भीग रहे थे , उसे उनके लिए बुरा लग रहा था

“रमेश जी प्लीज आप मत चलाइये , आप चाहे तोह रिक्शा रोक कर पिछले सीट पर आ सकते हो … मुझे थोड़ा लेट हुआ तोह चलेगा रमेश जी.”

रमेश यह सुनकर बहुत खुश हुआ , वह अब रौशनी के करीब बैठ पाएगा. उसने रिक्शा साइड में रोक दी और निचे उतर कर रौशनी के साथ पीछे बैठ गया.

अब रौशनी और रमेश ोीचे बैठे थे और फ्लैप बंद कर दिया था .. अब दोनों अंदर थे और बस धीमी सी लाइट थी ..

रमेश जी आप तोह बहुत भीग गए हो ..

रौशनी जी इतस फाइन , मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं …

रौशनी की नज़र अनजाने में रमेश जी के क्रॉत्च एरिया पर गयी , सुबह का सिचुएशन सोचने लगी और फिर शर्मा कर झट से अपने आँखों को वाहन से हटा दिया ..

अब दोनों शांति से अंदर बैठे थे … फिर बिजली की कड़कने की आवाज़ आयी और रौशनी दर कर रमेश को पकड़ लिया ..

अब रौशनी के ज़ुल्फ़े रमेश के चेहरे पर थे .. और वह रमेश की बाँहों में थी .. रमेश इसी का मौका उठाते अपने हाथों को रौशनी के बदन पर फेरने लगा .. उसकी पीठ पर फिर उसके बाँहों पर .. उसकी मुलायम त्वचा को फील करते hi उसका लुंड उभरने लगा … और झटके मारने लगा ..

कुछ सेकंड दोनों ऐसे hi बाँहों में थे … फिर रौशनी ने अपना चेहरा ऊपर किया और रमेश को देखने लगी.. दोनों के आँखें एक दूसरे के आँखों को देखती रही ..

बहार बारिश और अंदर रिक्शा में दोनों उस धीमी लाइट में बैठे थे एक दूसरे के बाँहों में …

रौशनी के होठं अब रमेश के काफी करीब थे . रमेश और रौशनी के होठं एक दूसरे के तरफ बढ़ने लगे … और अब बस कुछ hi इन की दुरी थी दोनों के होठों में. रौशनी की हलबी होठं और रमेश के काळा भद्दे होठ बिलकुल करीब थे ..









रमेश जी का लुंड झटके मार रहा था .. रौशनी जैसी सुंदरी उसके बाँहों में थी और उसके गुलाबी होठं उसके होठों के बिल्कु करीब थे .. रमेश अपने हाथों को रौशनी के बाँहों में फेर रहा था जिससे रौशनी को गूसबम्प्स आने लगे .. कीच और सेकंड ऐसे hi रहकर रौशनी बुदबुदायी

“रमेश जी , आप प्लीज मुझे छोड़िये .. प्लीज …”

रमेश का दिमाग चलने लगा ज़ज़ वह झट से रौशनी से जुड़ा हुआ ..

“सॉरी रौशनी जी मुझे माफ़ कीजिये , मुझे ऐसे नहीं करना चाहिए था .. सॉरी में जाता हूँ ..”

रौशनी बस रमेश को देखती रही ..

“रमेश जी ोप्लेसे आपने कुछ गलत नहीं किया .. मुझे न बिजली से बहुत डर लगता हैं , में hi गलत थी की आपको ऐसे पकड़ने लगी ..”

“नहीं रौशनी जी आपको कोई गलती नहीं हैं इसमें .. कुछ भी हो मुझे आपको चुना नहीं चाहिए था.. कहाँ आप महलों की पारी और में बुद्धा सा रिक्शा ड्राइवर “

“रमेश जी प्लीज इसमें आपकी कोई गलती नहीं हैं …”

नहीं रौशनी जी आप कितनी भी सेक्सी हो .. मुझे आपको ऐसे नहीं चुना चाहिए था मुझे जैसे काळा बुड्ढे ड्राइवर ने .. आप जैसी सुन्दर सुशील महिला को ऐसे नहीं चुना चाहिए था ..”

रौशनी को बहुत बुरा लग रहा था .. उसकी नज़र निचे रमेश के पंत पर गयी तोह वह देखि की उनका लुंड खड़ा हुआ था … उफ्फ्फ काफी बड़ा लुंड था रमेश जैसे बुड्ढे का .. उसे अब बहुत शर्म आ रही थी .. वह झट से दूसरी तरफ देखने लगी.

रमेश समझ गया की रौशनी उसके लुंड को उसके पंत में उभरते देख शर्मा रही थी .. वह अब ऐसे बैह गया जिससे उसके उभरता लुंड पंत में से साफ़ साफ़ दिखाई दे .. लेकिन वह अनजान बने बैठे हुआ था ..

रौशनी को रहा नहींजा रहा था .. उसने कुछ सेकंड फिर से अपनी नज़र रमेश की उभर पर डाली ..

उफ्फ्फ बड़ा शैतान होगा इनका ममम …







(उफ़ ये क्या में सोच रही हूँ … रौशनी खुद के ख्यालों को पकड़ती हुयी )

रौशनी जी एक बात कहूंगा . आप सच में ेल खूबसूरत पारी हो … आपके पति बहुत hi लकी हैं … काश आप मेरी बीवी होती .. सच कहता हूँ आपको कभी काम करने नहीं भेजता , खुद बहुत कमाता आपको खुश रखने ..”

रौशनी को रमेश की बातें पसंद आने लगी .. वह ज़रूर बुड्ढे थे लेकिन बहुत एक अच्छे थे और उनकी तारीफों में सचाई थी ..

अब बारिश बंद हुयी थी .. रमेश फिरसे रिक्शा चलने लगा और कुछ देर में रौशनी को घर तक पहुंचा दिया

“रौशनी जी में चाहो तोह कल से नहीं आऊंगा आपको लेने .. मैंने गलती की हैं और उसकी सजा यही होगी की में अपनी प्यारी दोस्त को सवारी नहिन्दुंगा .. आप किसी और रिक्शा से जाइये ..

“ नहीं रमेश जी आप hi अब मेरे परमानेंट रिक्शा ड्राइवर हो . में आप hi की रिक्शा से जाउंगी और आप hi मुझे घर छोड़ोगे .. हम दोस्त हैं और आपको इस दोस्ती की बात माननी hi होगी..”

रमेश मन में मुस्कुराया … रौशनी जाल में फस्ती जा रही थी .. बहार से तोह वह मायूसी का चेहरा बनाये था .. फिर बोलै “हाँ ठीक हैं अब आपने दोस्त मान hi लिया हैं तोह यह दोस्ती कभी नहीं तोडूंगा .. आप सच में बहुत hi स्वीट हो रौशनी जी .. आपका दोस्त बनकर मुझे बेहद ख़ुशी होगी .”

रौशनी मुस्कुरा कर घर जाने मुद कर चली गयी .. रिक्शा में रमेश अपने बड़े लुंड को अपनी पंत में मसलता हुआ रौशनी की पतली कमर, हिलते चूतड़ों को देख बोलै (हैयय उफ्फ्फ क्या माल हैं यार , आज तोह मस्ती में थोड़ा सा रगड़ने मिला उसके नाज़ुक बदन को … अब तोह इसके हर अंग से खेला चाहता हूँ .. उफ्फ्फ रौशनी तुम्हे तोह में अपनी बना कर hi रहूँगा अह्ह्ह मेरी कामुक रानी )









 
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अपडेट को एडिट कर रही हूँ ..
 
अब अगले दिन की बात हैं .. रौशनी सुबह ब्रेकफास्ट बना कर नहाने चली गयी .. आज उसने रोनित को नास्ते पर बुलाने की कोई कोशिश न करि ..

फिर वह नहाने चली गयी … रौशनी नहाते वक़्त उसे कल शाम की बात याद आयी. उस रिक्शा में , रमेश के साथ उसके होठों के इतने करीब , वह ानकेहिं बंद करके उनके टच का एहसास करने लगी … रमेश ने उसे कास कर पलड़ा था एयर अपना हाथ उसके शरीर पर दौड़ा रहा था ..

एक हफ्ते से उसके और रोनित के बीच कुछ भी फिजिकल न होने के कारन वह एक मर्द के टच से अच्छा फील कर रही थी .. लेकिन रमेश एक बुद्धा था और हु भी एक रिक्शा ड्राइवर … वह उनके बारे में ऐसे कैसे सोच सकती थी ..

फिर अपनी ख्यालों से निकल कर रौशनी कपडे बदलने चली गयी ..

रौशनी का मूड काफी अच्छा था , उसके जॉब की शुरुवात बहुत अच्छी हुयी थी. सब लोग वहां उसे बेहत रेस्पेक्ट करते थे और प्यार भी दे रहे थे ..

आज उसने एक डीप बैक कट ब्लाउज पहनी जो बस 1 स्ट्रिंग और एक स्ट्राप से पीछे से बंधी हुयी थी ..

ब्लाउज स्लीवलेस थी . बाल आज उसने एक बन में बंधे थे जैसे उसकी पूरी मखमली पीठ दर्शा रही थी … वह फिर मिरर में खुद को देखने लगी .. उसने सच में लाफ़ी मेन्टेन राखी थी फिगर ज़ज़. फिर उसने हाथों में चूड़ियां और कानो में बलि पहनी ..









आज उसने डार्क रेड लिपस्टिक पहनी थी … हल्का सा मेक जैसे वह हमेशा पहनती थी ..

साड़ी थोड़ी और ट्रांसपेरेंट थी जिससे उसकी नाभि का गोल आकर साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था ..

खुद को एक बार आईने में देख वह खुद के खूबसूरती पर मुस्कुरायी .. उसे रमेश के तारीफे याद आने लगे थे ..

अब वह बिना रोनित से कुछ बोले घर के बहार रिक्शा स्टैंड निकल गयी ..

आज उसने देख की रमेश उसका इंतज़ार नहीं कर रहे थे .. वह कही भी नहीं दिख रहे थे .. रौशनी निराश हुयी … वह सोची की क्या कल के इंसिडेंट के वजह से आज रमेश जी उसे लेने नहीं आये थे ??

वहां फिर उसने एक दूसरी रिक्शा ली और वहां से निकल पड़ी…

रौशनी रमेश से बातें मिस कर रही थी ..उसे रमेश की कंपनी अच्छी लगती थी .. वह बुड्ढे जरूर थे लेकिन बातें किसी युवा जैसे करते थे .. खैर फिर रौशनी ंगो पहुँच गयी ..

ऑफिस में वह काम करने लगी .. फिर वहां के लोगों ने कहा की एक एक्टिविटी उन्हें रखनी थी कुछ 1 हफ्ते बाद .. उसके लिए उसे असलम जी और सलीम जी की मदद लेनी होगी

रौशनी असलम और सलीम के घर आकर उसे बुलाती हैं “असलम जी ,, असलम जी में रौशनी .. आपसे मिलने आयी हूँ कुछ काम था …”

तीन बार बुलाने पर भी असलम नहीं आये .. रौशनी को लगा की वह बहार गए होंगे ..फिर भी उनका थोड़ी और देर इंतज़ार करने की सोची.

वहां असलम को सब सुनाई दिया था … वह जान बुझ कर जल्द से रौशनी से मिलने नहीं आ रहा था .. आज वह अपनी ‘बिमारी’ का फायदा उठाने की सोच रहा था ..

वह धीमे क़दमों से रौशनी के पास आ गया और फिर रौशनी को पीछे से लप्पेट लिया “अरे जानेमन तू आ गयी ,, कितनी इंतज़ार करवाएगी जान ु उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी खुसबू मममम”

रौशनी इस हरकत से चौंक उठी ..





“असलम जी छोड़िये मुझे उफ्फ्फ में रौशनी हूँ का की आपकी बेगम .. िसष्ठ छोड़िये प्लीसीईए..”

“रुकसाना मेरी जान तू बहुत दिनों बाद आयी हैं मेरे पास ममम सूंघ लेने दो तुम्हारी खुशबु …”

असलम ने अपने बाँहों को रौशनी के इर्द गिर्द लपेटा था और वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था … असलम की सांसें रौशनी के नैक के वहां उसे महसूस हुयी..

“ममम रुकसाना मेरी जान मममम तुम अभी भी इतनी मस्त बदन वाली हो उफ्फ्फ क्या बदन हैं तेरा अह्ह्ह्ह”

“असलम जी , प्लीज छोड़िये हमें , में रौशनी हूँ रौशनी …”

लेकिन असलम आज नहीं सुनने वाला था .. वह अब रौशनी को और कास कर पकड़ने लगा …. उसके हाथ अब रौशनी के कमर को पकडे हुए था और से वह दबाने लगा .. रौशनी बहुत दिनों से अपने पति से ऐसे कुछ करि नहीं थी , उसे ऐसे एक मर्द का फिजिकल एहसास पाकर कंफ्यूज हुयी.

असलम ने अब अपने मुँह से रौशनी के मुलायम पीठ पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. उफ्फ्फ रुकसाना तुम्हारी यह पीठ ममम बहुत hi मुलायम हैं , दूध से नहाती हो न मममम और उसने फिर एक गीली से चुम्मी दी रौशनी के पीठ पर …

रौशनी को उस चुम्मी से अउ रेज एक मर्द के फिजिकल टच से थोड़ी सी आह निकल गयी … “छोड़िये न असलम जी “ और वह अपने आप को चुराने की कोशिश करि लेकिन असफल रही .. असलम था बुद्धा लेकिन काफी मज़बूत बदन वाला था .. आसानी से रौशनी नही जुड़ा हो पाएगी उसके बाँहों से …

ऐसे कर असलम ने और दो पुप्पियाँ दी रौशनी की पीठ पर .. उसके चूमियाँ सब गीले थे और वह ऐसे hi रौशनी के पीठ पर अपनी गीली चूमियों की निशानी चोरे जार अहा था …. करीबन 5 ऐसे चुम्मों के बाद असलम ने रौशनी को पलटा कर उसका चेरा अपने तरफ करवाया .. वह रौशनी की गुलाबी होठों को देखे जार अहा था … अब उसके हाथ रौशनी के पीठ पर थे और वह उसकी पीठ पर अपने हाथों को फेरने लगा

“रुकसाना मेरी जान उफ्फ्फ्फ़ तुझे देख तेरा यार बहुत गरम हो रहा हैं मममम क्या आइटम हैं तू उफ्फ्फ्फ़”

असलम का लुंड अब उसकी पंत में उभरने लगा था … उसका लुंड ाजिसे hi और सख्त होता , वह रौशनी की क्रॉत्च पर जा टकराने लगता .. रौशनी को उसकी चुभन महसूस हुयी … “असलम जी मम प्लीज छोड़िये उफ्फ्फ यह गलत हैं , में आपकी बेगम रुकसाना नहीं हूँ , में रौशनी हूँ प्लीज याद करिये यह सब असलम जीईई





असलम रौशनी की बात न सुनने का नाटक कर रहा था और रौशनी के पीठ पर अपने गंदे कठोर हाथों को पहरने लगा .. ृष्णि की मुलायम पीठ अब असलम के कठोर हाथों द्वारा मसली जा रही थी .. उसके पीठ पर लाल निशाँ चोर रहे थे ….

“रुकसाना मेरी बेगम में आज तुम्हे हर हाल में पाना चाहता हूँ ,,, आज तुझे दुनिया की सैर करवाऊंगा .. उफ्फ्फ चलो न मज़्ज़ज़ करते हैं मममम”

रौशनी के अंदर मिक्स्ड फीलिंग थी , एक तरफ उसे ऐसे एक मर्दाने हुग का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और दूसरी तरह यह किसी बुड्ढे के बाँहों में थी .. कला सा गन्दा बुद्धा..

असलम अब निचे झुक कर रौशनी के नाभि को चूमने लगा , वहां पर भी गीली चूमियाँ वह देने लगा … रौशनी को अपनी नाभि पर चुम्मियाँ पा कर वह थोड़ा हसने लगी .. वह वहां बहुत hi सेंसिटिव थी .. उफ्फ्फ असलम वही पर क्यों चुम्मियाँ दे रहा हैं उफ्फ्फ वह तोह मेरी वीक स्पॉट हैं .. रौशनी के मुँह से हलकी सी आठ निकल गयी और रौशनी की आँखें अब बंद हो गयी .. वह असलम से कुछ बोल नहीं रही थी बस हलकी सी सिकरियाँ मार रही थी …









असलम ने और थोड़े चुम्मों के साथ फिर से रौशनी के मुँह की तरफ अपने मुँह को करवा लिया ..

“डार्लिंग मेरी बेगम, मेरी रुकसाना , मेरी जान उफ्फ्फ तुम बहुत hi स्पेशल हो मेरे लिए ममम आज तुम हाथ आयी अब तुम्हे छोड़ूंगा नहीं ममम चलो अब हम बिस्तर पर जा कर पूरी मस्ती कर लेते हैं ममममम”

बिस्तर का नाम सुन कर रौशनी की आँखें खुली , अब उसे पूरी तरह से एहसास हुआ की वह असलम बुड्ढे के बाँहों में थी ..” चिरये असलम जी अब बहुत हुआ छोड़िये मुझे असलम जीई”

असलम अब पूरी तरह से बहक गया था , अब तोह वह बस रौशनी की चुदाई hi करना चाहता था …. ौसे रौशनी को और दबोचा और उसे और मसलने लगा …

फिर एकदम से दोनों को सलीम की आएवज़ सुनाई दी ..

“असलम अरे तू क्या कर रहा हैं , यह रौशनी मैडम हैं तेरी बेगम रुकसाना नहीं .. अरे चोर इसे ….”

असलम रौशनी को अभी भी अपने बाँहों में लपेटे हुए था .. रौशनी फिर पीछे मुद कर सलीम को देखि .. उसे असलम के बाँहों से चुराने के लिए इशारा करने लगी … विनंती करने लगी .. सलीम थोड़ी और देर असलम को रौशनी को मसलने दिया

“असलम अरे रौशनी मैडम को चोर .. तेरी बेगम जैसे दिखती होगी और उसके जैसे गदरायी सेक्सी औरत होगी लेकिन यह तेरी बेगम नहीं हैं …”

रौशनी को सलीम से ऐसी बातें सुन शर्मा गयी .. क्या वह रुकसाना को ऐसे कह रहा था या उसे .. वह सोच रही थी ..

सलीम ने दोनों के पास जाकर असलम को एक तमाचा मारा.

“असलम तू क्या कर रहा था .. अरे रौशनी मैडम हैं यह .. पागल हैं क्या .. तेरी इस बिमारी की वजह से बहुत प्रोब्लेम्स हो रहे हैं …

रौशनी साइड में कड़ी थी .. उसके बाल बिखरे हुए थे , वह बन आधा खुल चुक्का था ..





उसकी मुलायम पीठ पर लाल रंग के निशाँ बने थे , उसकी नाभि और कमर पर भी लाल निशाँ थे … उसकी पीठ और कमर पर असलम की सुखी हुयी सलीवा भी थी …

सलीम “असलम तू पागल हैं , इस बिमारी ने तुम पर हावी बोल दिया हैं .. कल भी तुम मीनल को अपनी बेगम समझ कर उसे भी मसलने लगा था .. उसे तोह तूने उसके होठों पर चूमा भी …. वह तोह में आ ता नहीं तोह उसे तोह तुह पूरा निचोड़ hi लेता …”

मुझे माफ़ करिये रौशनी मैडम , में .. में खुद पर काबू भूल गया उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … मुझे माफ़ कीजिये …”

रौशनी को अभी भी असलम पर थोड़ा ग़ुस्सा था … वह उसे घर रही थी …

असलम फिर एक दो बार और माफ़ मांग कर रोने hi लग गया “उफ्फ्फ यह मेरी बिमारी … इसके वजह से मैंने अपनी फूल जैसी मैडम से ऐसी गन्दी हरकत की .. मुझे सजा दीजिये रौशनी जी .. में आपके दोस्ती के लायक नहीं हूँ .. मुझे मार hi दीजिये आप “ और असलम वही घुटनो के बल जाकर रोने लगा …

रौशनी को असलम की रोने से बुरा लगा … हाँ उसने एक बहुत hi गन्दी हरकत किट hi लेकिन बिचारा उस बिमारी का शक्कर भी तोह हैं … वह उस बिमारी में ऐसे कर बैठा … अब उसे इतना पछतावा हो रहा हैं… उफ्फ्फ्फ़ और रौशनी बोली

“असलम जी आप प्लीज रोइये मत .. आप की बिमारी की वजह से आपने ऐसे किया होगा … आप प्लीज न रोइये … प्लीज में आपको माफ़ कर दूंगी प्लीज न रोइये …

वहां साइड में खड़ा सलीम मन में मुस्कुरा रहा था – साला असलम भी न क्या ज़बरदस्त एक्टिंग करता हैं .. साला कमीना पूरी तरह से बिमारी का फायदा उठा कर रौशनी को नोचोद लिया .. उफ़ उसके बदन पर भी लाल निशाँ हैं . फिर सलीम रौशनी को देखने लगा –उफ्फ्फ क्या मखमली गोरी सी पीठ हैं इसकी . उफ्फ्फ इतने नोचोड़ने से hi इतनी लाल हुयी हैं ममम असलम साला लकी हैं ..

असलम कुछ और रोने की नाटक कर के फिर खड़ा हुआ और मुँह लटकाये खड़ा रहा …

सलीम बोलै “रौशनी जी वैसे आप यहाँ आयी क्यों थी ?”

रौशनी बातों के मुद में नहीं थी .. वह स्पच रही थी की क्या उसे असलम के ऐसे करने से हल्का सा मज़्ज़ा आया था .. क्या वह ऐसे इस बुड्ढे की बाँहों में खुद को पाकर उसे अच्छा लगा था .. उफ्फ्फ यह क्या हो रहा हैं उसे …

“कुछ नहीं बाद में बताउंगी … बाद में . मुझे वाशरूम कहा हैं बताइये वहां थोड़ा फ्रेश उप होकर में जाती हूँ.”

सलीम ने रौशनी को वाशरूम कहा हैं वहां गाइड किया ..

रौशनी वाशरूम का दरवाज़ा खोला तोह वह देखि की एक डोरी पर उन दोनों के कच्चे और बनियान लटक रहे थे … वह धोये हुए थे इसलिए रौशनी को उनसे बदबू नहीं आयी लेकिन वह देख रौशनी सेहम सी गयी .. उफ्फ्फ्फ़ यह मर्द भी न , सब एक जैसे हैं अगर अकेला चोरो तोह वाशरूम तोह ेस्पेशलय कैसे भी रखते हैं … हमेशा रोनित को भी बताना पड़ता हैं कैसे घर की चीज़ें रखनी चाहिए उफ्फ्फ.

रौशनी उनके कच्चों को देख एक बात उसे काफी अजीब लगी .. उनके सब कच्चे बड़े थे … और कई कई तोह बोसेर्स hi थे .. सब साइज सल वाले … रोनित तोह उनसे और हत्ता कटा हैं लेकिन उसके बोसेर्स या कच्चियाँ भी ल साइज के hi हैं … क्या उनके अंदर वह .. उफ्फ्फफ्फ्फ़ यह में क्या सोच रही हूँ … जल्दी से फ्रेश उप होकर निकलना चाहिए .. आज का दिन पूरा अजीब hi हैं उफ्फ्फ्फ़.

और रौशनी फ्रेश उप होकर वहां से निकल गयी…

अब रौशनी के जाते हैं असलम बोलै सलीम से “कमीने तूने ऐसे जोर से तमाचा क्यों मारा मुझे “

“अरे चूतिये तू कैसे मसल रहा था रौशनी को … तू पूरा बेकाबू हुआ था .. बोल्ट ु उसे छोड़ने का इरादा बना लिया था …”

“सलीम उफ़ क्या बताऊ रौशनी का बदन इतना मस्त हैं .. इतनी मुलायम पारी हैं वह … इतनी गोरी … उसके बदन को मसलते मेरा लोढ़ा तोह पूरा टाइट हो गया था .. मममम माल हैं माल “

“असलम तू भी न मेरे hi आईडिया को उसे करके रौशनी को निचोड़ा तुमने … उफ्फ्फ्फ़ मज़्ज़ा आ या होगा न … साली वैसे थोड़े मज़े ले रही थी .. में हलकी सी आह सुन रहा था … तुमने तोह उसे चुम भी लिया पीठ पर और नाभि पर … साले तू बहुत लकी हैं”

सलीम यार इसकी चुदाई करनी हैं उफ्फ्फ्फ़ लोढ़ा सख्त होता हैं उसके बारे में सोचता हंट यह ,, उसकी गुलाबी होठं, चिकनी कमर, हिलते डुलते चूतड़ .. गोरी बाहें और उसकी नशीली आँखें उफ्फ्फ्फ़.”

“असलम दिख रहा हैं तेरा लोढ़ा कैसे टाइट हुआ हैं .. हाँ तू सही कहता हैं , रौशनी को देख मेरा भी लोढ़ा इतना टाइट होता हैं क्या कहूं … उसके नाम मर एक बार मुठ भी मार चुक्का हूँ उफ्फ्फ्फ़, मुझे भी उसकी चुदाई करनी हैं “

असलम मन में सोचते हुए (साला कमीना , तेरी तोह एक आइटम हैं न वह मीनल लड़की , साली को पता कर कितनी बार छोड़ा हैं तूने .. साला अब तेरी नज़र मेरी आइटम पर हैं .. रौशनी की चुदाई तोह में hi पहले करूँगा ….)

दोनों फिर अपने कमरों में जाकर रौशनी की ख्यालों में खो गए.

वहां ऑफिस में रौशनी असलम से हुयी चीज़ों के बारे में सोच रही थी … उस काळा बुड्ढे ने उसे बहुत मसला था … उसकी बिमारी तोह ज्यादा hi ओरसे होते जा रही हैं … पहले की कुछ कर बैठे उसके इलाज के बारे में कुछ करना होगा .. लेकिन कम्बक्त ंगो का डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएगा .. और अगले हफ्ते तोह वह इवेंट हैं जिसमें मुझ असलम जी मदत तोह लगेगी हैं … मम जाने से पहले एक बार शाम को उनसे मिल लेती हूँ फिर से .. इस बार सलीम को भी बुलाऊंगी ..

सलीम नहीं आते तोह आज असलम और मेरे बीच कुछ हो hi जाता .. असलम बुद्धा होकर बहुत मज़बूत हैं .. उससे तोह खुद को चुरा hi नहीं पाती … सलीम बहुत अच्छे इंसान हैं उन्होंने मुझे बचाया आज.

रौशनी अपने कुछ मीटिंग ख़तम करती हैं और जाने से पहले शाम को सलीम और असलम से मिलने जाती हैं .. इस बार वह पहले से hi कॉल करती हैं सलीम को की वह आ रही हैं और असलम को काबू में रखने के लिए उसे भी आना होगा.

सलीम तोह बहुत खुश होता हैं .. सोचता हैं की इस असलम का इस्तेमाल करके रौशनी से मज़े ले पाउँगा … सेल को भी मज़े करने देना hi पड़ेगा …

रौशनी अब उनके घर जाती हैं तोह सलीम और असलम दोनों उसका इंतेज़्ज़र कर रहे होते हैं .. असलम एक कुर्सी पर बैठा हुआ हैं और सलीम सोफे पर ..

रौशनी भी सोफे पर बैठ जाती हैं ..

रौशनी को फिर से देख दोनों के कच्छियों में हलचल होने लगती हैं …. वह बस रौशनी के बदन को hi देखे जा रहे थे …

“असलम जी अगले हाफत ीक इवेंट हैं , सुना हैं इसमें आप का योगदान बहुत होता हैं.. इसलिए इस बार भी आप hi मैं मदत करेंगे हमें.”

“ज़रूर रौशनी जी में आपकी और ंगो की मदत करूँगा ..”

रौशनी मुस्कुराती हैं ..”सलीम जी आप भी हेल्प कीजिये .. इस बारे में इवेंट और बड़ा रखना चाहती हूँ .. आपकी भी मदत लगेगी..”

सलीम बोलता हैं “रौशनी जी आपके लिए शह हमारी जान हाज़िर , फिर यह इवेंट क्या चीज़ हैं और अपने काळा होठों पर मुस्कराहट लाता हैं .

रौशनी सलीम के बातों को सुन है पड़ती हैं “सलीम जी आप भी न .. ुर तू मच” और रौशनी बड़ी स्माइल देती हैं .





सलीम सोचते हुए (उफ्फ्फ रौशनी तेरे गुलाबी होठं तोह मेरे लोडे पर चुम्मे देने लायक हैं.. ऐसे गुलाबी होठों को तोह मेरे लोडे का सलाम)

तीनो इवेंट के बारे में कुछ देर बातें करते हैं. फिर रौशनी बोलती hain”accha तोह इवेंट की तोह बातें होती रहेगी .. आप दोनों से एक इम्पोर्टेन्ट बात करनी हैं.” आज जॉब hi हुआ वह और नहीं होना चाहिए .. असलम जी आप की बिमारी का कुछ इलाज जल्द से जल्द ढूँढना होगा, लेकिन ंगो के डॉक्टर तोह अगले हफ्ते hi आएँगे.”

असलम बोलता हैं “रौशनी जी दुपहर के लिए में माफ़ी फिर से मांगता हूँ .. हाँ इस बिमारी का इलाज होना hi चाहिए … मेरे पास एक उपाय हैं”

रौशनी ,असलम की बातें सुनने उत्सुक थी.

“मैंने …..” फिर सलीम बीच में बोलता हैं “हमनें”

“हाँ हाँ हमनें एक डॉक्टर धुंध लिया हैं … थोड़ी सी दुरी पर हैं उनका क्लिनिक. वह भी दिमागी बिमारी का इलाज करते हैं. चाहे तोह कल वहां जा पाएंगे . उनका क्लिनिक दुपहर को ओपन होता हैं.”

रौशनी कहती हैं “वाओ गुड न्यूज़ दिया हैं आपने .. हाँ कल सुबह जरूर जाएंगे वहां.”

असलम बोलता हैं “लेकिन रौशनी जी वह थोड़ी सी दुरी पर हैं , यही कुछ 7-8 कम .. वहां हम तीनो कैसे जाएंगे .. न आपके पास न हमारे पास गाडी भी हैं.”

सलीम बोलता हैं “हम तोह दो बाइक अर्रंगे कर पाएंगे … बस वहां जाने के लिए आपको हमारे साथ बाइक पर आना पड़ेगा …”

रौशनी अब सोचने लगती हैं .. बात तोह सही थी .. गाडी तोह नहीं थी अब उसके पास. रमेश जी का क्या पता वह वापस आएँगे या नहीं .. और आए भी तोह दुपहर को उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहूंगी उनके काम के वक़्त. फिर कुछ सोचती हैं “अच्छा ठीक हैं में आउंगी बाइक पर .. असलम जी का इलाज करना बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं ..में एक बाइक पर बैठूंगी कोई और दूसरी बाइक लेकर आइये.

सलीम बोलता हैं “ठीक हैं रौशनी जी हम बाइक अर्रंगे करेंगे .. फिर दुपहर जाकर उस डॉक्टर से मिलकर असलम जी के इलाज का सलूशन निकालेंगे …”

रौशनी खुश हो जाती हैं … असलम जी की बिमारी का हल निकलेगा तोह फिर असलम जी की दोस्ती को भी नहीं तोड़नी पड़ेगी .. और वह भी आराम से अभी ज़िन्दगी बिता पाएंगे.

दोनों को अलविदा कहते हुए रौशनी वहां से चली जाती हैं .. उसकी हिलती चूतड़ों और कमर को देख .. दोनों अपने लोडे मसलने लगते हैं ..

उन लोगों ने ऐसे सेटिंग की थी की असलम की जूठी बिमारी का वह अपने फायदे के लिए पूरी तरह से उस डॉक्टर के वजह से इस्तेमाल करने वाले थे .. यह कैसे आगे उपदटेस में देखिये !!!!
 
शाम को भी रमेश जी नहीं आये रौशनी को पिक उप करने .. रौशनी इस बात से निराश थी. वह फिर से कोई और रिक्शा कर घर पहुँच गयी :.

अगले दिन सुबह सब काम निपटा कर रौशनी ंगो के लिए रावण हुयी. आज फिर से रमेश नहीं आये थे. रौशनी की निराशा और हुयी. क्या सच में अब रमेश जी उससे पिक उप करने नहीं आएँगे , क्या वह उनसे नहीं मिलेगी .. ? इन सब ख्यालों से वह ंगो पहुँच गयी.

आज वह एक बात से खुश थी की असलम जी की इलाज आजाए शुरू होने वाली थी. सुबह का काम ख़तम कर वह असलम और सलीम के घर पहुंची . असलम और सलीम तोह पहले से hi तैयार थे …

वह रौशनी को आते देख उनके लुन्डों में हलचल होने लगी .. रौशनी थी hi इतनी मस्त और सेक्सी किआ एते hi दोनों के लुंड उभरने लगे थे ..

आज रौशनी ने आज फिर से बहुत अच्छी एक साड़ी पहनी थी.. इस बार भी स्लीवलेस ब्लाउज थी .. डीप बैक कट भी .. असलम के कल के दबोचने के लाल निशाँ अभी भी उसकी मुलायम पीठ पर झलक रहे थे ..

रौशनी ने आज एक लाल रंग की लिपस्टिक पहनी थी .. असलम की नज़र सीधे रौशनी की लिपस्टिक पर गयी … (उफ्फ्फ्फ़ क्या होठं हैं रौशनी के .. ममम मन लरता हैं उन्हें चुम कर चूस लूँ … ऐसे होठं तोह बस एक गहरी चुम्बन के लिए hi बने हैं )











सलीम मन में (आज से शुरुवात हैं रौशनी को हमारी बेगम बनाने की )

रौशनी “नमस्ते सलीम और असलम जी कैसे हो आप .. आज के लिए तैयार हो …

हाँ रौशनी जी हम तोह तैयार हैं … चलिए जाना होगा डॉक्टर के क्लिनिक की तरफ.

हाँ जरूर चलिए न ..

फिर असलम बोले “लेडीज फर्स्ट मोहतरमा”

रौशनी मुस्कुरायी … “ओह आप बड़े जेंटलमैन बने हो आज असलम जी ः”

अब रौशनी आगे चल रही थी और दोनों बुड्ढे उसके पीछे .. उसकी कमर, चूतड़, पीठ सब देख दोनों अपने लुन्डों को ऊपर से मसल रहे थे .. दोनों अब रोज़ रौशनी के आने किआ ुर उसकी फिगर देखने के hi इंतज़ार में गुज़रते थे … वह रौशनी के मनो दीवाने hi हुए थे ..

सलीम ने असलम को देख उसके कानों में फिसफुसाया “असलम आज तोह रौशनी जी और भी खिल उठा रही हैं … आज तोह उसकी चाल और भी मेढक हैं यार … तूने किया न जो मैंने कहा था ..?”

सलीम बेफिक्र रहिये सब सेट किया हैं मैंने …”

अब बहार आते hi सलीम बोलै “रौशनी मैडम आपको बताना हम भूल गए .. एक hi दिक्कत हैं आज ..”

कैसी दिक्कत सलीम जी बराइये न.”

वह .. वह .. ऐसी बात हैं की …

बोलिये न सलीम जी .. क्या दिक्कत हैं बताइये न” रौशनी मधुर स्वर में बोली ..

रौशनी जी हु हम बस एक hi बाइक अर्रंगे कर पाए हैं आज डॉक्टर के पास जान ेके लिए

“अरे यह तोह दिक्कत है. .. अब हम तीनो वहां कैसे जाएंगे”

“वही तोह दिक्कत हैं रौशनी जी … तीनो एक साथ वहां कैसे जाएंगे ..”

रौशनी कुछ सोचने के बाद “अच्छा बाइक छोड़िये हूँ रिक्शा से जा सकते हैं न ..”

असलम बोलै “मैडम जी हु डॉ का क्लिनिक ऐसे एरिया में हैं जहाँ रिक्शा नहीं जा पाएंगे … रस्ते छोटे हैं . 4 कम पर मैं रोड हैं वहां तक तोह ठीक हैं लेकिन उसके बाद अंदर और 3 कम हैं जहाँ बाइक hi जा पाएगी .. रिक्शा नहीं जा पाएंगे …”

रौशनी “उफ्फ्फ यह तोह बड़ी दिक्कत हैं … अब क्या करे .. आप दोनों hi इस समस्या का समाधान करे”

असलम बोलै “मैडम एक काम हैं लेकिन पता नहीं आप इस बात को मानोगी या नहीं ..

“बताइये न असलम जी आज आपको वहां उस डॉक्टर को दिखाना काफी इम्पोर्टेन्ट हैं .. आज मुझे यह कार्य करना hi हैं..”

सलीम बोलै “रौशनी मैडम आपको हमारे साथ बाइक पर ट्रिपल सीट से जाना होगा वहां .. यही उपाय हैं अगर आज वहां जाना हैं तोह.”

रौशनी सोच में पद जाती हैं.. पहले तोह उसने कभी ऐसे ट्रिपल सीट नहीं राइड करि बाइक ..दूसरी बाद इन दोनों के साथ वह कैसे जा पाएगी .. क्या तीनो ेल साथ बैठ पाएंगे और सबसे महत्वपुर्ण बात थी की उसे इन दो ो के साथ एक टाइट स्पेस में सवारी करनी होगी और इस बात से वह उनकंफर्टबले फील कर रही थी.

“पता नहीं सलीम जी कैसे हम तीनो जा पेंगे एक hi बाइक पर ..

“रौशनी जी हमने ट्रिपल सीट बाइक चलायी है. .. बस आपको हमारे साथ एक hi बाइक पर बैठना पड़ेगा ..

रौशनी “न न मुझसे नहीं होगा कल जाएंगे न कोई प्रॉब्लम नहीं बस एक hi दिन की बात हैं..”

प्लान को हाथ से निकलते देख सलीम बोलै “रौशनी जी आपको बतानी नहीं थी बात लेकिन कर फिर से असलम जी ने उस बिमारी के वजह से एक और लड़की को अपनी बेगम समझ बैठे ज़.. इनका इलाज करना hi होगा ..”

असलम मन में मुस्कुरा रहा था (साला बहुत कमीना हैं सलीम … दिम्माग तेज़ चलता हैं साला)

रौशनी कहती हैं “असलम जी फिर से आपने ऐसे किया … असलम जी सच में बिमारी हैं या नखरे कर रहे हो ..” रौशनी असलम तरफ देख बोली सीरियस अंदाज़ में.

असलम और सलीम दोनों डर गए .. क्या उनके नाटक की भनक लगी होगी रौशनी को .. अब क्या करे …

फिर रौशनी मुस्कुरा पड़ी और हसी ..

उसे ऐसे कर देख दोनों ने रहत की सांस ली …

सलीम अब असलम को देख “असलम मैंने न कहा था की रौशनी जी नहीं मानेगी ऐसी ट्रिपल सीट की मांग से .. तुझे बोलै था अर्रंगे करने बाइक .. अब तेरा hi नुकसान हैं .. रौशनी जी नहीं आएगी और तेरे इलाज की शुरुवात नहीं होगी.”

असलम “अब में क्या करू सलीम , मेरी किस्मत hi फूटी हैं .. यहाँ रौशनी जी को मेरी इलाज करनी हैं और वहां मेरी इलाज होने से रह जाएगी ..”

सलीम जी आप न दातिए असलम जी को .. बेचारे उन्होंने बहुत तरय किया होगा बाइक अर्रन्हे करने .. नहीं हुआ होगा … और इस बीमारी का इलाज जल्द से जल्द शुरू करना hi होगा .. हम्म ठीक हैं में आउंगी आपके साथ ट्रिपल सीट लेकिन में कभी ट्रिपल सीट राइड नहीं करि हूँ”

सलीम मुस्कुराता हैं “अरे मैडम उसकी चिंता न करो हम एक्सपर्ट हैं ट्रिपल सीट राइड में .. बस आपको हमारे बीच बैठना होगा , अक्सर फर्स्ट टाइम ट्रिपल सीट करने वाले कभी कबर लास्ट में बैठते हैं तोह उनके गिरने के चान्सेस हैं .. हमें पता हैं लास्ट में बैठ कर कैसे अच्छी से राइड हो सकती हैं.. इसलिए हम में से एक पीछे बैठेगा और आप हमारे बीच”

रौशनी (उफ्फ्फ दोनों के बीच बैठना पड़ेगा .. दोनों बुद्धों के अंग से हलकी सी बदबू आती रहती हैं .. उसे झेलना पड़ेगा .. लेकिन असलम जी के इलाज के सामने वह कुछ भी नहीं.)

“चलो ठीक हैं जाते हैं जल्दी से .. फिर वापस आकर इवेंट की तैयारी करनी हैं ..”

असलम और सलीम दोनों खुश की रौशनी बात मान गयी .. सब प्लान के हिसाब से hi चल रहा हैं ..

“रौशनी बस थोड़ा ंगो से दूर शुरू करते हैं .. मुझे यहाँ के लोगों के सामने नहीं करनी ट्रिपल सीट .. प्ल्ज़ समझिये बात.

जरूर मैडम जी .. चलो थोड़ी दूर 500 मत्र तक हम चलते हुए जाएंगे और फिर वहां से बाइक पर .. चलिए ..”

500 मत्र की दुरी पर असलम बाइक पर बैठ जाता हैं .. फिर रौशनी बैठ जाती हैं ..

रौशनी जी आपको और करीब होकर बैठना पड़ेगा असलम जी के तरफ .. थोड़ा और आगे सरकिये प्लीज .. रौशनी अंदर सरकती हैं और अब उसके और असलम के बीच बस 1-2 इंच की hi दुरी हैं . अब पीछे से सलीम बैठ जाता हैं …

सलीम के सामने रौशनी की मुलायम सी गोरी पीठ हैं और उसे देखते रह जाता हैं.. फिर कुछ सेकंड बाद हु भी पीछे से थोड़ा आगे सरक जाता है और अब रौशनी और उसके बीच भी बस1-2 इंच का hi अंतर था ..

रौशनी उनकंफर्टबले फील कर रही थी … पहली बार वह ऐसे दो मर्दों के बीच थी .. वह भी दो काळा बुद्धों के बीच ..













रौशनी जी ठीक हैं न , आराम से बैठी हो न आप ..”

रौशनी मन में सोचती हुयी (क्या आराम सलीम जी .. आप दोनों के बीच बैठी हूँ और इंच की hi दुरी हैं .. उफ़ ऐसे में कभी नहीं बैठी हूँ … अब इन्हे क्या बताऊ )

“ठीक हैं सलीम जी अब ऐसी hi सवारी करनी होगी , में एडजस्ट कर लुंगी .. असलम जी आप बाइक चलना शुरू कीजिये”

असलम बाइक शुरू करता हैं और तीनो रस्ते लग जाते हैं ..

सलीम के सामने रौशनी की मुलायम पीठ और उसकी कमर और बाहें सं साफ साफ बस 1-2 इंच की hi दुरी पर थी .. उसका मन लार रहा था रौशनी के पीठ को चूमने का .. उसके बाँहों को हाथों में लेकर मसलने का .. उसकी कमर को पकड़ कर उसकी चिमटी लेने की .. लेकिन वह यह सब नहीं कर सकेगा .. बस इस सोच से hi उसका लुंड अब धीरे से झटके मारने लगता हैं उसकी पंत में.

असलम ने जानबूझ कर एक पॉटहोल में से अपनी बाइक ले चला .: इससे अब रौशनी थोड़ी सी सीट में उछाल गयी ..

“अहह असलम जी धीरे चलाइये ने … उफ्फ्फ्फ़”

माफ़ कीजिये लेकिन रास्ता hi कुछ ऐसे हैं क्या करू … आप एक काम करिये आप के हाथों को मेरी कमर पर रखिये , थोड़ा सपोर्ट मिलेगा ..

“नहीं नहीं में ठीक हूँ ऐसे बैठे रहूंगी असलम जी”

पीछे से सलीम रौशनी के कानों में फीस फसाने लगता हैं.. “रौशनी जी वहां नाह तोह उनके कन्धों पर तोह रखिये जैसे आप रखती होंगी आपके पति के साथ बाइक पर जाते हुए ..”

रौशनी सोचती हैं (उफ्फ्फ हाँ लेकिन वह मेरे पति थे इसलिए … अब यह तोह असलम जो हैं .. में कैसे उनके कन्धों पर हाथ राखु)

“मैडम आपको ऐसे hi करना होगा प्लीज बात मानिये .. बस कन्धों पर सपोर्ट के लिए रखिये न”

रौशनी हाँ में सर हिला कर अपने हाथों को असलम जी के कन्धों पर रखती हैं. असलम को रौशनी की मुलायम टच पसंद आ रही हैं .. लेकिन वह तोह चाहता था की रौशनी उसके कमर पर अपने हाथों को बाँध ले ..

इसीलिए वह फिर से एक खड़े में बाइक चलता हैं .. रौशनी फिर से थोड़ी सी बैलेंस आउट होती हैं ..

उसे समझ आता हैं की ऐसे अपने हाथों को असलम जी के कन्धों पर रखने से यह रस्ते पर नहीं चलेगा. वह फिर अपने हाथों को असलम के कमर पर डालती हैं ..

पीछे से सलीम तोह बस रौशनी की मुलायम नाज़ुक गोरी सी पीठ को hi देखे जा रहा था ..उसे तोह वहां चूमना था … वहां जीभ से चेतना था … उफ्फ्फ रौशनी जैसी माल उसके सामने इतने करीब थी .. उसका लुंड निचे से अब और जोर से झटके मारने लगा ..









अब रास्ता और भी ख़राब हो चूका था .. हर सेकंड पर खड़े थे .. रौशनी उछलती रहती ऑलमोस्ट बैलेंस शार्ट के वजह से उसे गिरने का दर होता हैं ..

अब वह असलम के कमर को कास कर पकड़ती हैं ..

इससे तोह असलम को और भी मज़्ज़े आने लगे .. अब उसका कुंडा ुर भी बुरी तरह से झटके मार रहा था और अब उसका लोढ़ा टाइट भी होने लगा था ..

अब ऐसे हुआ की एक बड़ा सा खड़ा था जो न असलम को दिखा न किसी और को .. उसपर बाइक चलते hi तीनो को बुरा झटका लगा ..

अब ऐसे हुआ की झटके से रौशनी पूरी तरह से असलम के पीठ से चिपक जाती हैं और उसकी चूचियां अब असलम की पीठ से डाब जाती हैं .. रौशनी की आह निकलती हैं सीधे असलम के कानों में .. इससे असलम का लुंड एक जोरदार झटका मरता हैं और वह जा कर रौशनी के हाथों से हलके से टकराता हैं ..

रौशनी को अब असलम के बड़े लोडे का एहसास होता हैं .. उसके मुँह से फिर एक यह निकलती हैं .. अब पीछे से ऐसे हुआ होता हैं की सलीम अब पूरी तरह से चिपका हुआ हैं रौशनी से और उस झटके से सलीम के होठं रौशनी की मुलायम पीठ से टकराते हैं और रौशनी को उसके हटोहों का एहसास होने पीठ पर होते hi .. उस वजह से भी उसकी अहह निकलती हैं .. सलीम का लुंड भी इस हरकत से बुरी तरह से झटके मरता हैं और उसका लुंड भी टाइट होने लगता हैं …

अब कुलमिला कर सन ऐसे था कुछ सेकंड के लिए की सलीम के होठं रौशनी के मुलायम नाज़ुक पीठ से चिपके हुए थे , पीछे से सलीम का लुंड अब रौशनी की कमर के निचे की हिस्से से जा टकराता हैं , आगे से वह असलम की पीठ से चिपकी हुयी अपनी चूचियों को असलम के पीठ से दबायी हुयी हैं और असलम का लुंड निचे झटके मारते हुए रौशनी के हाथों से टकराया था .. – ऐसे मेढक सन से रौशनी किट ओह दो बार आह निकल जाती हैं…

रौशनी के मन में (उफ्फ्फ यह क्या हुआ मममम सलीम के होठं मेरी पीठ पर अउ रेज लगता हैं असलम का लुंड था जो मेरी कलाई से टकराया था .. उफ़ और तोह और मेरी चूचियां भी मम यह क्या हो गया उफ्फ्फ्फ़)





असलम और सलीम के तोह मज़े hi थे , भीना कुछ किये यह सब हुआ था और सलीम को ख़ुशी थी की वह रौशनी के पीठ को चुम पाया था .. अब सलीम भी कमीना था उसने उस चुम्मे के साथ साथ रौशनी की पीठ को हलके से जीभ से लीक भी किया था .. और उसने उसके सलीवा को रौशनी के पीठ से वाइप करने की भी कोशिश न करि .

“माफ़ कीजिये रौशनी जी वह खड्डा नहीं दिखा , ी ऍम सो सॉरी … बस और 1 कम बस ..

रौशनी को कुछ समझ नहीं आ रहा था .. वह बस सोच रही थी की क्या वह सच में असलम के लुंड से उसकी हाथों से टकराई थी .. उफ्फ्फ्फ़ बहुत hi बड़ा लग रहा था .. मममम नहीं रौशनी कुछ और hi होगा .. ऐसे रौशनी खुद को तसली दे रही थी , लेकिन मन hi मन उसे समझ थी की वह गलत सोच थी उसकी..

सलीम भी माफ़ी मांगने लगा .. .

रौशनी बोली “असलम जी आप खड़े को अच्छे से देखिये अगली बार . ऐसे नहीं चलनी चाहिए आपको बाइक .. सलीम जी आपकी कोई गलती नहीं हैं , असलम जी ने hi धीरे से बाइक चलनी चाहिए थी …”

असलम जी अब चलिए 1 कम hi तोह हैं .. लेकिन आराम से चलाइये ..

अब उस एरिया के मर्द और औरतें देख प् रहे थे की एक कमसिन नुवा महिला दो काळा भद्दे बुद्धों के बीच बैठी थी बाइक पर एकदम से बिना कुछ स्पेस चोरे …

उसे देख सब मर्द वहां के उन्हें उन बुद्धों से जलन होने लगी थी .. और औरतें तोह बस सोचती हुयी “की ऐसी मैडम कैसे इन दो बुद्धों से ऐसे सत्ता कर बैठ सकती हैं ..

रौशनी को भी उन सब की नज़ारे दिखी और उसके मन में एक मिक्सचर ऑफ़ गिल्ट और शर्माहट थी .. लेकिन वह अब कुछ नहीं कर पा रही थी

आख़िरकार उस डॉक्टर के क्लिनिक के पास वह तीनो पहुँच hi गए ..

चलो अब बस असलम के बिमारी का इलाज होना चाहिए बस .. उतनी hi सोच चल रही था रौशनी के दिमाग में. .

वह डॉक्टर का नाम था कमलेश .. रौशनी को उम्मीद थी की यह डॉक्टर मदत कर पाएंगे …

रौशनी बोली “नमस्ते डॉक्टर .. में हूँ रौशनी . में इनके ंगो की मैनेजर हूँ .. अभी ज्वाइन हुयी हूँ कुछ 3 दिन पहले.”

“अच्छी बात हैं रौशनी जी .. अच्छा बताइये क्या आप पेशेंट हो …?

नहीं नहीं में नहीं , हमें असलम जी का इलाज करना हैं … उन्हें बिमारी हैं .. उनकी बीवी की मौत हुयी थी कुछ साल पहले .. कुछ महीनों से वह कभी कबर किसी लेडीज को अपनी बेगम रुकसाना समझते हैं .. कुछ hi देर के लिए होता हैं और फिर उन्हें होश आ जाता हैं..

“अच्छा ऐसे हैं .. हम्म उनकी बिमारी तोह रियल हैं … क्या होता हैं की अक्सर ऐसी बिमारी में आदमी रियलिटी भल कर अतीत के चीज़ें याद करते हैं .. एक तोह कोई इंसिडेंट के बारे में उन्हें सदमे के वजह से वह याद आती हैं .. या कुछ पर्सनल खोने पर .. ऐसे होता हैं विडोस में .. जब दोनों पति पत्नी में बहुत प्यार था जब वह ज़िंदा थे तब जो विडो होते हैं वह आसानी से अपनी पत्नी को भूल नहीं पाते और उन्हें ऐसी दिमागी बिमारी हो जाती हैं ..

“ओह अच्छा .. और एक बात , उनकी बीवी की मौत तोह 3 साल पहले हुयी थी लेकिन उन्हें यह सब बस 3-4 महीनों से हो रहा हैं …”

हाँ हो सकता हैं न , उसे एक टर्म देते हैं रेट्रोग्रेड .. पहले कभी हुआ होगा वह हादसा लेकिन कुछ सैलून बाद अचानक से उन्हें वह चीज़ याद आती हैं और यह बिमारी शुरू हो जाती हैं … मैंने ऐसे केसेस दो बार सोल्वे किये हैं .. सेंसिटिव केसेस होते हैं .. सावधानी से इसे एप्रोच करना होता हैं ..

रौशनी थोड़ी सी डर जाती हैं .. असलम भी वहां नाटक करता हैं

“डॉक्टर साहिब सच में , सडोक्टर साहिब प्लीज आप कुछ करिये .. मुझे ऐसे इस बिमारी के साथ नहीं जीना हैं .. प्लीज ..” और असलम रोने का नाटक करता हैं

रौशनी को बहुत बुरा लग रहा होता हैं असलम को ऐसे रट हुए देख ..”डॉक्टर लेकिन यह सीरियसनेस कैसे पता चलेगा .. कुछ टेस्ट्स होंगे न दिमागी टेस्ट्स ..”

“हाँ हैं न .. लेकिन काफी एक्सपेंसिव हैं – असलम जी उन्हें अफ़्फोर्ड नहीं कर पाएंगे .. आप कर पाओगी तोह बताइये .. करीबन 10-15 हज़ार का खर्चा आएगा ..”

रौशनी के पति का बिज़नेस अभी भी होता तोह ऐसी रकम वह स्पेंड कर पाती लेकिन अब उनके हालत अच्छे नहीं थे .. इसलिए वह भी यह खर्चा नहीं उठा पाएगी ..

“हाँ थोड़ा फण्ड का इशू हैं .. में कुछ इंतज़ाम करती हूँ ..तब तक कुछ सलूशन दीजिये .. असलम जी हमारे ंगो के इम्पोर्टेन्ट सदस्य हैं और उनकी मदत मुझे लगेगी .. क्या करे आप hi बताइये डॉक्टर जी.”

हाँ एक उपाय हैं जो में एक बार करके देख पाया हूँ और सफल भी हुआ था .. लेकिन उसके लिए … पता नहीं आप वह कर पाएंगी या नहीं …”

“डॉक्टर जी मतलब मुझे कुछ करना होगा ? में कैसी मदत कर पाऊँगी?”





रुकिए पहले आप थोड़ा बहार जाओगी तोह में दो तीन सिंपल टेस्ट्स करूँगा असलम जी पर .. फिर थोड़ा सा आईडिया तोह आएगा उनकी बिमारी कितनी सीरियस हैं .. फिर एक हफ्ते बाद फंड्स होंगे तोह टेस्ट करके साइंटिफिक जवाब मिलेंगे.

“Ok डॉ .. में जाती हूँ , आप टेस्ट्स करिये ..”

फिर सलीम और रौशनी दोनों बहार जाते हैं.

कुछ 15 मं बाद उन्हें अंदर बुलाया जाता हैं . लेकिन बस उसे बुलाते हैं डॉक्टर.

“रौशनी जी इनिशियल एग्जामिनेशन से तोह उनकी बिमारी इतनी सीरियस नहीं लगती हैं.”

“देखिये रौशनी जी , असलम की बिमारी ऐसी हैं की. वह कुछ हद तक बहुत सोल्वे हो सकेगी लेकिन उसके लिए. आपको कुछ दिन असलम जी कह साथ रहना पड़ेगा .. उनकी बेगम रुकसाना जॉब hi करती थी उसे आपको करना होगा … जैसे उनका नाश्ता बनाना , खाना बनाना, उनकी देखभाल करना, घर की देख बाल करना .. उन्हें ऐसे एहसास होते रहना चाहिए की आप रुकसाना हो .. इस एहसास से उन्हें दिमागी दौरा नहीं पड़ेगा जिससे वह पूरा संतुलन खो बैठ ते हैं”

रौशनी अब सोच में पद गयी .. वह एक शादी शुदा महिला होकर अनजान मर्द के घर कैसे रह पाएगी वह भी 3 दिन से ज्यादा देर … अपने पति को वह क्या बोलेगी .. और तोह और अगर वह असलम की बेगम का नाटक करेगी तोह असलम उसे अपनी सच की बीवी समझ कर्त ओह कुछ भी कर सकते हैं .. वह उस दिन तोह उसे चुम्मे भी दिए थे और कितने दोबाचे थे उन्होंने मेरे बदन को), (लेकिन उसे असलम की बिमारी का इलाज करना hi था .. और तोह और सलीम जइब hi होंगे घर पर .. अगर असलम ने ज्यादा ज़बरदस्ती की मुझे अपनी बेगम समझ कर तोह वह मेरा ख्याल रखेंगे ..)













डॉक्टर जी ठीक हैं में उन टेस्ट्स के लिए पैसों का इंतेज़ाम करुँगी तब तक में करुँगी हो आप कहते हो ..

“अच्छा रौशनी जी आप सच में बहुत नेक दिल हो … आप उनके इलाज के लिए यह सब करने तैयार हो .. आप बहुत अच्छी हो .. लेकिन इससे असलम जी की बिमारी काफी हद तक कण्ट्रोल में रहेगी.

रौशनी सब सुन रही थी .. “यह सब कैसे .. और एक हफ्ते तक उनके साथ कैसे रह सकती हूँ, में तोह मैरिड हूँ, मेरे पति हैं .. ऐसे नहीं कर पाऊँगी .. और रही बात रुकसाना जैसे उन्हें एहसास दिलाने की .. लेकिन रात का .. डॉ उसका कैसे … यह मुमकिन नहीं हैं डॉ.”

“रौशनी जी यही इलाज हैं उन टेस्ट्स करने तक … अब में और क्या कहु आपसे .. आपके hi हाथ में हैं अब .. आपको उनकी मदत करनी हैं तोह .. यह बस आपको तब तक करना हैं जब तक आप उनके टेस्ट्स करने का इंतज़ाम नहीं करते.. उस रिपोर्ट से में बता पाउँगा आगे कैसे मेडिसिन्स से कुछ हो पाएगा या नहीं .. अभी मेडीसीनिएस दिए तोह रिएक्शन बुरा हो सकता हैं”

अगर आप तैयार हो तोह अब उन दोनों को भी एहि बात बतानी होगी .." फिर डॉ ने सब बोल दिया दोनों को , और दोनों बस हाँ में हाँ मिलते रहे ..”

फिर डॉक्टर को अलविदा कर तीनो चले गए …

रौशनी सोच में थी और वहां असलम और सलीम एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे .. उनके प्लान का फर्स्ट स्टेप कम्पलीट हुआ था ..
 
असलम बाइक चलने लगे और पहले जैसे तीनो बाइक पर बैठ गए ..

रौशनी बोली “असलम जी इस बार थोड़ा धीरे चलाइये बाइक ..: खड़े देख कर”

हाँ रौशनी जी बस रास्ता ख़राब हैं आप को मेरे कमर को कास कर पकड़ना होगा ..

सलीम बोलै “मैडम आप बुरा न मनो लेकिन आप को अगर बाइक राइड पहले जैसी नहीं चाहिए तोह मुझे भी थोड़ा आपको पीछे से सपोर्ट देना होगा .. अगर पीछे से सपोर्ट दूंगा तोह अगर खड़े भी आये तोह भी में आपको संभल पाउँगा और खुद को भी ताकि लास्ट टाइम जैसे कोई प्रॉब्लम न हो ..

रौशनी सोच में पद गयी ( आते वक़्त जो भी हुआ था वह उसे फिर से रिपीट नहीं कर ा था .. रस्ते पर खड़े तोह आते hi रहेंगे और अगर खड्डों से बचना हैं तोह उसे सपोर्ट लेना hi पड़ेगा .. लेकिन वह कैसे सलीम कोई से चुने दे सकेगी .. इसलिए वह मन करती हैं.

सलीम ठीक हैं कहता हैं “आपकी मर्ज़ी रौशनी जी .. बबस संभल कर बैठिये ..

राइड शुरू हुयी .. पहले जैसे खड्डो से रौशनी को तकलीफ हो रही थी .. वह महसूस करती रही की वह गिरेगी .. एक ऐसा खड़ा आया जिससे तोह वह गिरने से बच भी गई .. अब उसे लगा की उसे सलीम का सपोर्ट लेना hi चाहिए.





सलीम जी अच्छे हैं वह मुझे नहीं तकलीफ में डालेंगे इतना सोचते हुए वह बोली “ठीक हैं सलीम जी आप सपोर्ट दे सकते हैं ..

सलीम बोलै “हम आपके कमर को पकड़ कर सपोर्ट दे सकते हैं या आपके कन्धों को .. कमर से सपोर्ट मज़बूत होगा और कन्धों को पकड़ कर थोड़ा काम.. अब आप hi बताइये .. सब आप पर चोरता हूँ.

अब और क्या कर सकती थी रौशनी .. उसे गिरने का डर था इसलिए वह सलीम के सपोर्ट के लिए मान गयी. ..

सलीम तोह बहुत खुश हुआ … रौशनी ने यह भी ok कर ली की उसे असलम के कमर को भी सपोर्ट के लिए कास कर पकड़ कर रखना पड़ेगा …

सलीम जी आप मेरी कमर पकड़ सकते हैं सपोर्ट के लिए …

सलीम तोह बहुत hi खुश हुआ .. वह आज रौशनी की कमर को पकड़ने का मौका मिला था … उसकी गोरी मखमली नाज़ुक कमर को पकड़ने का मौका .. उसके हाथ थोड़े काँप रहे थे .. उसने अपने हाथों को रौशनी के कमर पर टिका दी ..

सलीम के मर्दाने और कठोर हाथों को अपनी नाज़ुक कमर पर महसूस करि ..

सलीम जैसे बुड्ढे के टच से रौशनी को कुछ अजीब hi फेलिंग आ रही थी .. उसके हाथ काफी कठोर थे और उसका नाज़ुक कमर उसके हाथों डाब गया था … उसे पता नहीं क्यों एक अच्छी सी अजीब वाली फीलिंग आयी ..





उधर सलीम तोह सब का मज़्ज़ा ले रहा था .. सपोर्ट के बहाने वह रौशनी के कमर को पकड़ रहा था .. उसने जान बुझ कर हर बाइक के धक्कों पर उसने रौशनी के कमर को और कास कर दबाया ..

सलीम का लुंड तोह अब झटके मार रहा था उसके पंत में .. रौशनी की नाज़ुक कमर उसके हाथों में थी .. और उसका लुंड झटकों पर झटके मार रहा था ..

आगे असलम का लुंड भी झटके मार रहा था … रौशनी के हाथ उसके कमर को पकड़े थे और उसके हतः कुछ इंच दुरी पर थे उसके उभरते लुंड के …

तीनो अब ऐसे hi चिपके हुए बाइक पर राइड कर रहे थे .. आस पास के सब जाने वाले लोग इन तीनो को देख रहे थे .. एक गोरी खूबसूरत महिला दो काळा बुद्धेन लेकिन मज़बूत मर्दों के बीच बैठी थी …

उफ्फ्फ क्या नज़ारा था ..





रौशनी को पूरी राइड में अजीब सी लेकिन अच्छी फीलिंग hi लग रही थी .. ाकहीरकर वह सब ंगो के कुछ 500 मत्स्य दूर पहुँच गए. असलम ने बाइक जहाँ से ली थी उसे दे दी और रौशनी ऑफिस चली गयी और असलम और सलीम अपने घर,

अब रौशनी को घर जाकर रोनित से बात करनी होगी , की उसे यहाँ ंगो में 3 दिन से ऊपर रहना पड़ेगा .. वह क्या कहेगा उसके बारे में वह सोचती रही.

दूसरी बात रही वहां रहने की .. अब उनके पास तोह दो hi कमरे थे और उसे अब असलम की बीवी बनने का नाटक भी करना पड़ेगा .. अब हु सोयेगी कहाँ, कैसे सब मैनेज करेगी उसी के बारे मं सोचती रही.

अपना काम ख़तम कर वह घर चली गयी.

घर पर रोनित नहीं थे , वह नोट चोरे थे की वह 2 घंटे बाद आएँगे. रौशनी अपने कपड़ों को बदल कर नहाने जा रही थी तब उसने अपनी नाज़ुक कमर पर लाल निशाँ देखे .. सलीम के कठोर हाथों की निशानी थी .. उन्होंने उसके कामर को कास कर पकड़ लिया था .. रौशनी को उनके स्पर्श के बारे में सोचते हुए एक अजीब सी फीलिंग आ रही थी .. एक मर्द के कठोर हाथ हु भी एक बुड्ढे के ..

रौशनी नहाने चली गयी और गरम पानी के अंदर सुकून से अच्छी तरह से नाहा कर निघ्त्य पेहेन ली.

रोनित अब घर पर आये थे … रौशनी उसके पास जाकर “रोनित एक बात करनी थी तुमसे”

रोनित ने हम्म से जवाब दिया

“रोनित हु ंगो में एक बहुत इम्पोर्टेन्ट इवेंट हैं तोह मुझे कुछ 3 दिन के ऊपर वहां hi रहना पड़ेगा .. 3 दिन से लेकर एक हफ्ता भी लग सकता हैं… में क्या करू ?

रोनित अब रौशनी को देख बोलै “डार्लिंग चलेगा न .. आप वहां रहिये , आपका काम बहुत इम्पोर्टेन्ट हैं .. में यहाँ संभल लूंगा.

“लेकिन रोनित तुमने पूछा नहीं में कहाँ रहूंगी वहां और अकेली रहूंगी या किसी के साथ .. तुम्हे कुछ परवाह नहीं.”

“अरे तुमने बोलै न काम के सिलसिले हैं , और वहां रहेगी कोई क्वार्टर रहने के लिए , काफी अच्छा ंगो हैं न.”

रौशनी मन में सोची “में वहां दो बुद्धों के साथ रहने वाली हूँ जिस में से एक की बेगम का नाटक करना हैं मुझे , न जाने वह उस बिम्मरि के वजह से कुछ कर बैठा तोह .. उफ्फ्फ अब यह सब रोनित को कैसे बताऊ .. उसे तोह कोई परवाह नहीं हैं मेरी.

रौशनी फिर चुप बैठी और अपना खाना खा कर रूम चली गयी और असलम और सलीम के साथ रहने के लिए अपनी बैग पैक कर ली.

वहां रोनित खुश था की रौशनी नहीं रहेगी फिर न उसके तने सुनने पड़ेंगे , और वह रात को अपने दोस्तों के साथ be-jhijhak मस्ती करने जा पाएगा …

अब सुबह हुयी … आज से तकरीबन एक हफ्ते तक रौशनी को सलीम और असलम के साथ रहना था. रोनित वहां खुश था की एक हाफत ेके लिए वह अकेले रह कर मज़्ज़े करेगा.. उसे न उसकी बीवी के तने सुनने पड़ेंगे न कुछ करना होगा ..

“रोनित में जा रही हूँ … 3 दिन तक तोह वही रहूंगी और अगर लगे तोह और कुछ दिनों तक. अपना ख्याल रखना , कोई जॉब धुंध लो तब तक और चाहिए तोह घर पर एक कुकिंग माइड का इंतज़ाम में कर लुंगी..”

“ठीक हैं रौशनी , अपना ख्याल रखना , में जैसे बोल रही हूँ वैसे hi करूँगा .. बस कुछ दिक्कत हुयी तोह मुझे कॉल करना ..”

रौशनी फिर वहां से चलो जाती हैं … अब एक हफ्ते ले लिए उसकी ज़िन्दगी अलग hi मोड़ लेने वाली थी ..उसे तोह नहीं पता था की दो ठरकी बुद्धों के साथ वह रहने जाने वाली हैं .. एक शादी शुदा गडाई जिस्म वाली औरत दो ठरकी मुस्टंडे बुद्धों के साथ …

रमेश का तोह कुछ अत पता hi नहीं था .. वह उसे थोड़ा मिस कर रही थी .. उसे चिंता थी की कुछ हुआ तोह नहीं होगा रमेश जी को

रौशनी अब ंगो पहुँच गयी … उसने सलीम को कॉल किया था उसके सामान लेने में मदत के लिए .. सलीम तोह तैयार hi खड़ा था ..

वह रौशनी को देख खुश था , आज से एक हफ्ते तक वास् उसके साथ रहने वाली थी .. सलीम तोह उसको अपनी बना कर hi रहने वाला था .. वही उसके दिमाग में चल रहा था ..

रौशनी इस से बेखबर सलीम को देख मुस्कुरायी.

“गुड मॉर्निंग रौशनी जी , रोज़ की तरह आज भी आप बहुत फ्रेश लग रही हो …

“गुड मॉर्निंग, शुक्रिया सलीम जी … प्लीज सामान ले जाने में मेरी मदद कीजिये .. रौशनी ने दो बैग लाये थे ..

सलीम पास आकर दोनों बैग उठा लिए

“सलीम जी बस एक बैग लीजिये , में दूसरी बैग लुंगी”

“अरे नहीं रौशनी जी आप मेहमान हैं हमारे घर की .. में लेता हूँ न बैग्स कोई प्रॉब्लम नहीं.”

रौशनी देख रही थी की दो बड़े बैग सलीम ने काफी आराम से उठाये थे … वह थोड़ी इम्प्रेस थी.. सलीम 60 के थे लेकिन अभी भी काफी स्ट्रांग थे .. आज कल के मर्द तोह 40 मकई उम्र में भी इतने आसानी से यह बैग नहीं उठा पाते.. कितने अच्छे आदमी हैं सलीम जी ..





अब ऐसे रौशनी के दिनों का बेसिक सचेडूले होने वाला था ..

सुबह 7 बजे उठ कर असलम और सलीम के लिए नाश्ता बनाना और लंच भी क्यूंकि . खाना ऐसा जो असलम की बीवी रुकसाना बनती थी , रुकसाना जो डिशेस बनती थी उसकी लिस्ट उसे असलम ने दे दी.

फिर उनका नाश्ता होने के बाद वह खुद नाश्ता करेगी और फिर ऑफिस जाएगी. दुपहर 2-4 उनकी मीटिंग थी उस इवेंट के बारे में .. वह सब डिस्कशन ऑफिस में hi होने वाला था.

फिर शाम को सब काम ख़तम कर वह वापस सलीम और असलम के घर जाएगी और फिर रात का नाश्ता और सब उसके बाद सोना. उन तीनो ने डीडे किया था की रौशनी के कमरे में रहेगी और सलीम और असलम दोनों साथ में दूसरे कमरे में.

यह था उसका बेसिक सचेडूले.

अब तीनो घर पर थे .. असलम bola”Roshni जी शुक्रिया आप मेरे लिए यह करने के लिए तैयार हो .. आप बहुत अच्छी हैं.”

“असलम जी आपकी मदत करने के लिए में जो चाहे वही करुँगी .. बस आपकी इस बिमारी का पूरा इलाज करना हैं मुझे”

“हाँ शुर्किये आप इतनी नेक दिल की हो .. “

रौशनी मुस्कुरायी “ठीक हैं असलम जी अब से आपकी बिमारी का इलाज मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट हैं, अभी में काम पर जाती हूँ फिर शाम को मिलेंगे .. “

असलम मुस्कुराया (रौशनी जी आइये शाम को .. में इंतेज़्ज़र में रहूँगा )

अब रौशनी काम करने ऑफिस चली गयी .. आज पूरा दिन उसने बहुत काम किया था .. वह खुश थी आज के दिन से .. अब शाम को वह फिरसे असलम और सलीम के घर चली गयी.

जब तक वह उनके घर रहने वाली थी उसे रुकसाना जैसे hi बर्ताव करना था .. उसे असलम भी रुकसाना या रुकसाना बेगम से hi बुलाने वाला था .. सलीम को भी उसे रुकसाना hi बुलाना था.

अब असलम के हिसाब से रुकसाना हमेशा घर पर साड़ी hi पहनती थी .. हु भी स्लीवलेस और डीप बैक कट्स वाली .. इसे सुन रौशनी को थोड़ा अजीब लगा.. ऐसे कपडे हु भी घर पर रुकसाना पहनती थी ?? .. लेकिन अब वह असलम की बात से इंकार भी नहीं कर पाएगी.

रौशनी ने अपने अच्छे ख़ास सरिस hi लाये थे … वह अपने कमरे में जाकर एक साड़ी चूसे करि .. साड़ी स्लीवलेस थी और पीछे से काफी डीप बैक कट .. साड़ी उसने अपने नाभि से 2 इन निचे बंधी थी .. इससे उसकी कमर और उसके कमर के दो छोटे फोल्ड्स दिख सकते थे साफ़ साफ़ … फिर जैसे असलम ने कहा था उसने रुकसाना जैसे काजल डाली और हल्का सा मेक उप .. लिपस्टिक था क्रीम कलर का ..





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हाथों में उसे रुकसाना के प्यूरीन बँगलेस पहने थे… असलम ने उसके प्यूरीन बँगलेस अपने पास रखे थे वही सब रौशनी को दे दिए.

रौशनी पूरी तैयार हुयी .. एक बात थी , दोनों ने घर की सफाई नहीं करि थी .. सब वैसे के वैसा hi था .. कमरे में असलम की कच्चियाँ बीएड पर, उसके कपडे भी बिखरे हुए, कप्बोर्ड पूरा बिखरा हुआ .. सब जगह गन्दगी.. उसे पहले तोह सब सफाई करनी होगी , वह ऐसे नहीं रह सकती उनके घर पर , उसे घर साफ़ सूत्र hi पसंद था … चीज़ें अपनी अपनी जगहों पर अच्छी तरह से राखी हुयी.

वह फिर काम में लग गयी .. अब रौशनी पहले जब उसके पति का बिज़नेस था तब नौकरानियां रखती थी घर के कामों के लिए. जब से उसके पति का बिज़नेस दुब गया था यह खुद hi साफ़ सफाई करती थी इसलिए उसे अब यह सब थोड़ा नार्मल लग रहा था.

वह साफ़ सफाई कर रही थी की उसे आवाज़ सुनाई दी “रुकसाना मेरी बेगम , कहाँ हो तुम .. देखो में घर आ गया हूँ, मेरे लिए चाय बनाना.”

रौशनी सोची की अब उसे रुकसाना hi बनना था .. सब असलम की बिमारी के इलाज के खातिर.

“हाँ असलम मियां में आ रही हूँ जरा रुकिए , घर के काम कर रही हूँ .. रूम की सफाई .”

“रुकसाना बेगम आजा चाय बना पहले , देखो तुम्हारा पति थक कर आया हुआ हैं .. चलो पहले आकर चाय बनाओ.”

रौशनी ने सब काम चोर बहार चली गयी .. वहां असलम सोफे पर पेअर ऊपर किये बैठा था .. उसके जुटे पास में थे और सॉक्स भी बहार पड़े हुए ..

“असलम मियां आप भी न , ऐसे जूतों को और सॉक्स को कोई रखता हैं .. सॉक्स को धोने केलिए डालो और जुटें वहां उस रैक में”

“देख रुकसाना , यह सब में नहीं करूँगा , तुझे करना हैं तोह कर नहीं तोह यही पर रख .. अब तू बस मेरे लिए चाय बनाना”

“रौशनी अपने पति रोनित को बहुत दांत लेती अगर वह ऐसे बोलते तोह , लेकिन वह रुकसाना बानी हैं इसीलिए अब वह असलम से वैसे बातें नहीं कर सकती. “हाँ ठीक हैं असलम मियां , लेकिन मुझे थोड़ा ये काम करने दो ..”

असलम कुछ नहीं बोलता बस हम्म करता हैं.

रौशनी अब असलम के बगल में उसके सॉक्स और जूतों को इखट्टा करते हुए झुकती हैं .. तब असलम को रौशनी की चूतड़ों का शेप दिखाई देता हैं .. उसका तोह मन अकर्ता हैं उसे दबोचने का .. मसलने का .. उसके लोडे में भी हलचल होने लगती हैं … फिर वह कुछ सोचते हुए , अपने हाथों से रौशनी की चूतड़ों को हलके से दबाता हैं ..”अह्ह्ह रुकसाना मेरी बेगम उफ्फ्फ तुम्हारे यह चूतड़ मममम क्या शेप हैं .. मार hi डालोगी “.. और वह फिर से उसे मसलता हैं

रौशनी इससे से चौंक उठ टी हैं .. फिर ग़ुस्से से असलम को देखती हैं ..”असलम जी आप से कहाँ था न ऐसी हरकतें न करे … आप अपने आप को कण्ट्रोल करिये नहीं तोह में निकलती हूँ ..





“माफ़ कीजिये रौशनी जी बस में ऐसे मेरी रुकसाना बेगम से मस्ती मज़ाक करते रहता था .. माफकीजिये ..में उन्हें बहुत याद कर रहा हूँ … में खुद को बहुत कण्ट्रोल कर रहा हूँ रौशनी जी प्लीज बात मानिये .. गलती हुयी बस अपने इमोशंस को कण्ट्रोल नहीं कर पाया …

“असलम जी यह गलत हैं , में बस रुकसाना जैसे घर के काम करुँगी आपकी सेवा करुँगी लेकिन यह फिजिकल होना बड़ी गलत बात हैं .. आप की बीमारी हैं में जानती हूँ लेकिन आप ऐसे नहीं कर सकते ..”

असलम कुछ सोचता हैं “रौशनी जी ठीक हैं अब क्या करे .. चोर दीजिये , में अपनी बिमारी संभल लूंगा .. आपको मेरी दोस्ती नहीं रखनी उस वजह से तोह मत रखिये .. आप से पहले भी ऐसे hi गुज़ारे हैं दिन मैंने .. आगे भी करता रहूँगा .. आपकी मदत के लिए शुक्रिया ..”

और असलम वहां से उठ कर अपने कमरे में चले जाता हैं …

वहां रौशनी को समझ नहीं आता हैं की वह क्या करे .. असलम जी तोह नाराज़ हुए हैं .. उफ्फ्फ उनकी बिमारी और ख़राब होते जाएगी डॉक्टर ने बोलै था .. उनकी मदत नहीं करि तोह सब रियलिटी भूल जाएंगे और बड़े प्रोब्लेम्स होंगे उनके दिमाग में.. उफ्फ्फ क्या करे .. यह फिजिकल रहना उनके साथ मुश्किल होगी .. लेकिन ऐसे उन्हें इस हालत में नहीं रख सकती हूँ.

रौशनी सोफे पर बैठ गयी सोचती हुयी की क्या करे.

वहां असलम ने यह सब तोह किया था .. लेकिन 10 मं रौशनी से कुछ रिस्पांस न आते देख वह भी सोचने लगा की क्या वह चली गयी होगी .. उसने क्या सब प्लान पर खुद hi पानी फेर दिया हैं .. वह अब बहार जाकर देखने hi वाला था की रौशनी हैं या नहीं तब उसे रौशनी की मीठी आवाज़ सुनाई दी.

“असलम जी .. असलम जी प्लीज बहार आइये , प्लीज आप नाराज़ न होना .. में आपकी बिमारी की इलाज 100% करना चाहती हूँ .. प्लीज बहार आइये कुछ सलूशन निकलते हैं.”

असलम 2-3 मं कुछ न बोलै .. रौशनी उसे और 2 बार आवज़ देती हैं .. फिर असलम चेहरे पर नाराज़गी का एक्सप्रेशन लाकर बहार आता हैं,

“हाँ बताइये रौशनी जी … “

प्लीज बैठए सोफे पर असलम जी ..

असलम कुछ सेकंड बाद सोफे पर बैठ जाता हैं.

“हां तोह असलम जी में तोह आपका इलाज करके hi रहूंगी .. बस थोड़े से रूल्स बनाते हैं .. “

असलम हाँ में सर हिलता हैं.

“हाँ तोह बाकी सब ठीक हैं बस इस फिजिकल के चीज़ों से hi दिक्कत हैं मुझे .. में शादी शुदा हूँ और किसी गैर मर्द के ऐसे चुने से अजीब लगता हैं .. गलत लगता हैं मुझे .. इसिलए में ऐसी रिएक्शन दी.”

“रौशनी जी में और रुकसाना अक्सर ऐसी मस्ती मज़्ज़ाक़ करते हैं .. अगर आप रुकसाना बनोगी तोह अगर ऐसी मस्ती मज़्ज़ाक़ नहीं करूँगा तोह आप रुकसाना होने का फायदा काम होगा न.”

“असलम जी में सब समझती हूँ आपके भावनाओं को लेकिन यह गलत हैं ..”

“रौशनी जी में वडा करता हूँ की बस मस्ती माज़क करूँगा , इस चीज़ को आगे नहीं बढ़ने दूंगा … प्लीज थोड़ी मस्ती मज़्ज़ाक़ करने दीजिये न… इससे मुझे सच में लगेगा मेरी बेगम रुकसाना मेरे पास hi हैं. फिर इस बिमारी का भी इलाज होगा .. फिर एक हफ्ते बाद क्या पता मुझे रुकसाना की ऐसी याद नहीं आती रहेगी अचानक से”

“असलम जी … हम्म अब कैसे करे … अच्छा ठीक हैं आप मस्ती माज़क कीजिये .. लेकिन प्लीज कण्ट्रोल रखिये आप वैसे अच्छे इंसान हैं मुझे पता हैं .. आप कण्ट्रोल रखोगे ी ट्रस्ट .. बस मुझे भी थोड़ा टाइम दो एकदम से ऐसे न करिये ..”

“ठीक हैं रौशनी जी ..” - और मन में सोचते हुए (एकदम से न करिये .. मतलब बाद में पूरा करू क्या .. उफ़ रौशनी तू hi मेरी बेगम हैं .. तेरे साथ तोह पूरी मस्ती करने का मन हैं उफ्फ्फ्फ़)

“अच्छा फिर से शुरू करते हैं .. असलम मियां में सॉक्स और शूज रख चाय बनती हूँ..”

“अच्छा ठीक हैं लेकिन चाय जल्दी से बनाओ रुकसाना मेरी बेगम..”

अब रौशनी किचन की तरफ जाती हैं चाय बनाना के लिए .. तब तक सलीम भी आ जाता हैं ..

“रुकसाना भाभी आप मेरे लिए भी चाय बनाओ ..” सलीम कहता हैं ..

रौशनी मुस्कुराती हैं , वह खुश होती हैं की सलीम भी आये हैं .. वह रखेंगे असलम को कण्ट्रोल में.

हाँ सलीम जी जरूर में आपके लिए भी चाय बनती हूँ ..

रौशनी दोनों के लिए चाय बनाकर बहार आती हैं … सलीम तोह बड़ा खुश था की असलम के बिमारी के नाटक से रौशनी उनके साथ रहने वाली हैं .. अब हु रोज़ उसके बदन को निहार पाएगा , ऐसी गदरायी माल जैसे महिला के करीब रहेगा.

अब रौशनी चाय टेबल पर रख hi रही थी सोफे के सामने की झुकते हुए उसका पल्लू सरक गया … अब असलम को और सलीम , दोनों उसकी गोरी चूचियों के दरार को देख रहे थे .. उनका लुंड तोह इस नज़ारे से एक दम से टाइट होने लगा …

रौशनी खुद को संभालती हुयी झट से पल्लू को ठीक करि .. और शरमाते हुए वहां से चली जाने लगी.

“रुकसाना बेगम कहाँ चली जा रही हो .. आओ न हमारे साथ चाय पीने .. मेरी बेगम आजा न … साथ में चाय पिएंगे ….

रौशनी उस पल्लू के गिरने से अब शर्मा रही थी .. लेकिन उसे तोह रुकसाना बना था .. फिर वह मुद कर वापस उनके तरफ चली आयी.

“असलम मियां मैंने तोह बस 2 कप hi बनाए थे चाय के .. और नहीं हैं चाय …”

“अरे रुकसाना टूट ओह भूल गयी .. हम एक hi कप से चाय पिटे थे याद हैं तुझे .. चलो आओ एक कप में hi पिएंगे. “

रौशनी शर्मा रही थी .. उफ्फ्फ एक hi कप से कैसे .. उसे याद था की शादी हुयी थी तब रोनित भी ऐसे कुछ छठा था लेकिन रौशनी ने उसे मन किया था .. अब वह असलम को कैसे मन करे .. अगर रुकसाना और स्लैम एक hi कप से चाय पिटे थे , और वह रुकसाना बन हुयी थी तोह उसे भी वही करना होगा ..

“असलम मियां आप पीओ चाय में और एक चाय बनाउंगी मेरे लिए “

“नहीं रुकसाना बेगम तुम्हे एक साथ hi चाय पीनी हैं इसी कप से .. नहीं तोह में भी चाय नहीं पिऊंगा …”

सलीम यह सब देख मुस्कुरा रहा था .. रौशनी क्या करेगी उसी के बारे में सोचता रहा.

“असलम जी आप बहुत ज़िद्दी हैं … मैंने बनाउंगी न खुद के लिए चाय 2 मं में”

“नहीं तुम्हे मेरे साथ पीनी हैं .. चलो इतनी सीट ओह बात हैं .. तुम इतना नहीं करोगी “

अब रौशनी को कुछ और रास्ता नहीं दिख रहा था .. उसे अगर रुकसाना बनना हैं तोह उसे यह सब करना होगा जिसे असलम और उसकी पूर्व पत्नी रुकसाना करते थे वैसे hi

ठीक हैं असलम जी .. पहले आप पीजिये , फिर बाकी का में पिऊँगी..”

“नहीं रुकसाना मेरी बेगम मेरी जान .. एक सिप में लूंगा फिर एक सिप तुम लोगी .. बस ऐसे HI करेंगे .. चलिए ..”

अब असलम और रौशनी सोफे पर थोड़े करीब बैठे हुए एक कप से चाय पिने जा रहे थे .. वहां सलीम बड़ी उत्सुकता से देख रहा था ..

असलम ने एक सिप ली और फिर रौशनी ने ..

असलम दूसरा सिप लेते hi “अह्ह्ह और मीठी हुयी हैं चाय … रुकसाना बेगम आपके पिने से और मीठी हैं मज़्ज़ा आगया ….”

रौशनी अब मुस्कुरा रही थी .. और उसने और एक सिप ली .. फिर तीसरी सिप लेते वक़्त फिर से असलम बोले “मममम शहद जैसे मीठी हैं चाय .. बहुत अच्छी हैं रुकसाना बेगम आपका जवाब नहीं .. इससे भेटेर चाय में नहीं पि हैं तुम्हारे हाथों…

“शुक्रिया असलम मियां .. रौशनी खुश थी की असलम को अच्छी लगी चाय ..

सलीम बोलै “असलम तुम्हारा और तुम्हारी बेगम रुकसाना में इतना प्यार हैं … तुम्हारी जोड़ी बहुत मस्त लग रही हैं .. एकदम मस्त. मिया बीवी की जोड़ी मस्त हैं..

रौशनी इस बात को सुन शर्मा गयी ..





सलीम दोनों को मिया बीवी कह रहा था ..

अरे भाभी जान आप तोह शर्माने लगी .. बस चाय hi तोह पिलाई हैं अपने .. इसी में इतना शर्माना ..”

रौशनी समझ सकीय की सलीम क्या बोलना चाहता था…

ऐसे एक के बाद एक सिप से दोनों ने चाय ख़तम करि. रुकसाना बेगम वैसे आज खाने में क्या बनाओगी … बेशक बहुत hi टेस्टी खाना होग़ाज रात ..

सलीम आज रुकसाना बेगम के हाथ का खाना खाओगे तुम … बहुत लाजवाब बनती हैं मेरी बेगम.

असलम कहता हैं “चलो में अब थोड़ा आराम करने जार अहा हूँ .. रुकसाना बेगम खाना बनाकर मुझे बताओ फिर हम तीनो डिनर करेंगे.. रौशनी सर हाँ में हिलती हैं ..

असलम अब कमरे में जाता हैं .. बहार बस सलीम और रौशनी बैठे हुए हैं

रौशनी जी आप को असलम ने तंग नहीं किया हैं न …

रौशनी अभी कुछ पल सलीम आने से पहले हुयी पलों के बारे में सोचती हैं .. लेकिन सलीम को नहीं बताना hi ठीक समझती हैं.

“नहीं असलम जी बहुत अच्छे हैं .. कोई प्रॉब्लम नहीं ..वैसे सलीम जी आप कहाँ गए थे ..”

“सलीम कुछ नहीं बास्ते क दोस्त से मिलने गया था .. रौशनी जी आप इस साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही हो .. आपके साड़ी का कलेक्शन का जवाब नहीं .. एक से बढ़कर एक .”

शुक्रिया सलीम जी ..

रौशनी जी एक बात केहनी हैं ाआपसे.

हाँ बताइये न सलीम जी

आप इस ब्लाउज में क़यामत दिख रही हो , सच कहता हूँ झूट नहीं बोलंगा .. आप ने टेलर से ऐसी बनवायी हैं साड़ी?

“हाँ सलीम जी … कस्टम मेड हैं ..

“उफ़ रौशनी जी क्या सही का ब्लाउज बनवाया हैं आपने .. आपके बदन पर बहुत अच्छे से फिट होती हैं ..”





रौशनी ऐसे बातों से शर्मा रही थी ..

सलीम बोले “आप की फिगर भी मस्त हैं .. कितना मेन्टेन करती होगी आप .. काश मेरी भी आप जैसे hi बीवी होती .. आपके पति तोह बहुत लकी हैं”

सलीम जी कुछ भी .. ज्यादा टैरिफ न करिये मेरी .. आप की बेगम जरूर मुहसे अच्छी हुयी होगी”

अरे कुछ नहीं आपके सामने .. आप तोह इतनी मस्त , गोरी सी और खूबसूरत हो .. उसका तोह आपके सामने कोई कम्पलीशन नहीं .. आप बड़ी मस्त हो रौशनी जी आपसे दोस्ती कर बहुत खुश हूँ”

रौशनी को सलीम की तारीफें और बातें पसंद आ रही थी ..

माँ कसम आप जैसी बीवी होती न तोह आपकी सेवा hi करता .. दिन रात …”

रौशनी मुस्कुरायी .. ऐसी बातें उसने पहली बार सुनी थी अपने बारे में वह भी एक बुड्ढे से .. अच्छा लगा उसे ..

रौशनी जी क्या हम एक वाक के लिए जा सकते हैं अभी .. वापस आकर खाना बनाओ …

रौशनी कहती हैं .. अच्छा सलीम जी ठीक हैं , आप भी यहाँ की अस पास क्या हैं दिखाइए … में थोड़ा तैयार होती हूँ ..”

सलीम रौशनी की कमर देखता रहा .. उसके हिलते चूतड़ों से उसका लोढ़ा टाइट होने लगा .. वह ऊपर से उसके लोडे को खुजलाने लगा “है क्या माल हैं यार … ऐसे कमर मटकती हैं .. पीछे से लूंगा तोह उफ्फ्फ कैसे हिलेंगे … मेरी माल रौशनी.

रौशनी थोड़ा फ्रेश होती हैं और फिर दोनों बहार वाक जाते हैं. बारिश हुयी थी कुछ टाइम पहले इसलिए रास्ते पर थोड़ी गन्दगी थी .. बस एक छोटा सा रास्ता था जहाँ थोड़ा ड्राई था और वह दोनों चल पाते .. बाकी आस पास पानी था और थोड़ी सी गन्दगी.

अब दोनों इस वजह से काफी करीबी से चलने लगे … सलीम थोड़ा पीछे था और रौशनी की मुलायम पीठ के नज़ारे से लुंड टाइट होते महसूस करने लगा ..

हु अब चल रहे थे की एक बाइक थोड़ी तेज़ी से आ रहा था और वह साइड में एक पड़ले पर से जाने वाला था .. जैसे hi वह बाइक उस पर से चलने लगा सलीम एक दम से आगे बढ़ कर रौशनी को जकड लिया .. और निचे उस बाइक से उछाले हुए मिटटी से सलीम की पंत ख़राब हुयी .

“ोी माँ सलीम जी क्या कर रहे हो … “ रौशनी अब सलीम के बाँहों में थी .. सलीम के हाथ उसकी कमर को पकडे था और उसका चेरा रौशनी के काफी करीब था .. वह रौशनी की खुशबु सूंघ रहा था और उसका लोढ़ा तगत हो रहा था ..

“उफ़ सलीम जी छोड़िये न .. क्या कर रहे हो आप “





“माफ़ कीजिये रौशनी जी उस आदमी ने मिटटी उछली बाइक से तोह आप पर गिरने से रोक रहा था ..”रौशनी फिर निचे देखि की सलीम का पंत मिटटी से ख़राब हुआ था .. और उसकी साड़ी पर एक भी मिटटी के निशाँ नहीं थे ..

रौशनी अभी भी उनके बाँहों में थी लेकिन सलीम के पंत पर मिटत देख वह फिर सलीम को देखि … “सलीम जी आप ने मेरे लिए … सलीम जी आप बहुत अच्छे हो..”

सलीम अभी भी रौशनी को जकड़े हुए hi था ..





“रौशनी जी पहले से hi आप से बोलै हूँ की आपके लिए जान हाज़िर हैं”

“शुक्रिया सलीम जी .. लेकिन आप मुझे अब अपने बाँहों से चोर सकते हो ः”

सलीम मुस्कुराया “हाँ रौशनी जी माफ़ कीजिये …”

रौशनी को सलीम की बाहें काफी मज़बूत लगी .. उसे उनके चुने से एक अजीब सी फीलिंग हुयी ..

रौशनी जी थोड़ी ज्यादा hi मिटटी हैं आस पास .. हमें फिर से जाना होगा ..

“नहीं सलीम जी और चलिए न.. इतनी मस्त खुशबु हैं बारिश के बाद की ..”

रौशनी जी आगे रास्ता थोड़ा और ख़राब हो सकता हैं .. ऐसे हम नहीं चल पाएंगे थोड़ा और पास रह कर hi चल पाएंगे..”

रौशनी “सलीम जी ठीक हैं कोई प्रॉब्लम नहीं आप पर भरोसा हैं ..”

सलीम ने फिर बिना पूछे रौशनी के कमर पर हाथ दाल उसे पास खिंच लिया .. सलीम के मज़बूत हाथों को अपनी नाज़ुक कमर पर पाकर रौशनी शर्मायी … सलीम बोले “रौशनी जी ऐसे hi चलना पड़ेगा …”

ठीक यहीं सलीम जी …

रौशनी को सलीम का अपने कमर पर हाथ रखना एक ेजीब सी लेकिन अच्छी फीलिंग हुयी ..

फिर दूसरी तरफ से कोई लोग जा रहे थे .. वह दोनों को देख बोले .. क्या खूब जोड़ी हैं .. मियां बीवी की .. कैसे सटक कर चल रहे हैं दोनों”

रौशनी शर्माने लगी .. उसे पता नहीं क्यों ऐसे सुन कर बुरा नहीं लगा …

सलीम और कास कर रौशनी की कमर को पकड़ रखे ..

उफ्फ्फ आउच … सलीम जी थोड़ा ज्यादा hi दबाव लग रहा हैं उफ्फ्फ थोड़ा लूसे करिये गीरप.”





रौशनी जी आप से कहा था रास्ता ख़राब हैं आपको hi चलना था .. अब ऐसे hi चल पाएंगे नहीं तोह वापस चलिए”

रौशनी बहुत दिनों से रोनित से फिजिकल नहीं हुयी थी .. उसे सलीम के ऐसे अपने कमर को पकडे हुए उसके नज़दीक होना कही अच्छा लग रहा था ..

सलीम तोह मस्ती में था .. उसका लोढ़ा अब पूरा टाइट हुआ था .. वह रौशनी की नाज़ुक पतली गोरी कमर को हलके से मसल रहा था .. रौशनी भी उससे दूर होने की कोई कोषसिंह नहीं कर रही थी .. ऐसे hi दोनों कुछ मं चलते रहे ..

अब अँधेरा भी होने लगा था .. “सलीम जी वापस जाते हैं .. आज खाना बना न हैं आप दोनों के लिए .. चलिए न “

सलीम रौशनी को पकड़ते हुए उसकी तरफ देखता हैं .. “जरूर रौशनी जी जैसे आप कहे .. चलिए फिर से घर जाते हैं .. आपको वाक अच्छी लगी न ..”

हाँ सलीम जी अच्छी वाक थी ..

अब सलीम ऐसे hi उसके कमर को पकड़े हुए वापस घर जाने लगे .. रौशनी भी उनके साथ चलती रही .. एक कला बुद्धा और एक गोरी सी गदरायी महिला एक दम करीब सटक कर चल रहे थे ..





दोनों घर पहुँच गए और फिर रौशनी रात का डिनर बनाना किचन चली गयी.

सलीम अपने लोडे को मसलते हुए अपने कमरे में चला गया .. (है आज तोह रोशनीजी की कमर कास कर पकड़ने का मौका मिला था .. और मसलना हैं इस गदरायी आइटम को .. उफ्फ्फ्फ़) सलीम अपने लोडे को खुजलाते हुए कमरे में चला गया.
 
अब रौशनी खाना बनाने गयी किचन में .. आज उसे खाने के साथ स्वीट डिश में खीर बनाना था.. वह उसकी तैयारी में लग गयी .. तभी उसे असलम कोई आवाज़ सुनाई दी.

“रुकसाना बेगम खाना बन गया हैं क्या , पेट में चूहे दौड़ रहे हैं”

“असलम मियां हाँ बन रहा हैं बस खीर बनानी रह गयी हैं ..”

“आई है मस्त सुगंध आ रही हैं खाने से .. चलो में आता हूँ.”

असलम फिर रसोई घर में आ गए .. वह सीधे जाकर रौशनी को पीछे से लपेट लिए ..

“उफ़ मेरी बेगम मस्त स्वादिष्ट पकवान बन रहे हैं आज …” फिर रौशनी की गोरी सी मुलायम पीठ देख बोले “मन कर रहा हैं उन्हें चख लूँ … इतनी मस्त दिख रही हैं उफ्फ्फ्फ़

रौशनी “असलम मियां आप फिर शुरू हो गए उफ्फ्फ्फ़ …”





रुकसाना बेगम प्लीज आज मन न करो .. बहुत दिनों बाद आयी हो , आज तुम्हारी बात नहीं सुनूंगा ..

रौशनी अब कर भी क्या सकती थी , ऐसे hi खड़े असलम के बाँहों में वह खीर में अब शकर मिज़ कर उसे हिला रही थी ..

असलम मियां आप भी न उफ्फ्फ्फ़ … थोड़ा तोह लूसे छोड़िये .. खीर जल्द से बनानी हैं की नहीं , आपको भूख लगी हैं न”

असलम सोचते हुए (उफ्फ्फ भूक तोह लगी हैं लेकिन तेरे इस मलाईदार बदन के लिए मेरी जान , उफ्फ्फ्फ़ क्या नाज़ुक बदन हैं … पूरी तरह से मसलने का मन हो रहा हैं उफ्फ्फ)

“रुकसाना बेगम आप बनाओ न खीर तुमसे पहले कभी मेरी बाँहों में होने के वजह से खीर बानी नहीं ऐसे हुआ hi नहीं हैं … मुझे भी देखने दो मेरी बेगम

मस्त स्वादिष्ट खाना बनती कैसे हैं ..”

फिर असलम रौशनी के पीछे से उसके बालों को एक साइड में कर उसकी गर्दन के ऊपर अपने चीन को रख खीर को देखने लगे ..

रौशनी को असलम की टच अपने गर्दन की साइड पर होने से एक अजीब सी फीलिंग हुयी … वह असलम के गरम साँसों को महसूस कर रही थी .. उसके मुँह से थोड़ी बदबू भी आ रही थी .. लेकिन वह बस खीर बनाने में लगी रही. जल्द से खीर बनेगी तोह वह उन्हें खाने को परोसेगी ..

रुकसाना बेगम आप ने हमें इसकी टास्ते नहीं करवाई.. असलम अब रौशनी को देख रहा था और रौशनी मुद कर उसे .. असलम तोह रौशनी की गुलाबी होठों को देख बोलै “उफ्फ्फ ऐसी रसीली टास्ते के लिए hi तोह रुका हूँ रुकसाना मेरी बेगम …”

रौशनी “मतलब क्या हैं आपका?” रौशनी पूछताछ की नज़र से देखती हुयी.

… असलम बोले “में खीर की बात कर रहा हूँ मेरी जान देखो कैसी रसीली टेस्टी दिख रही हैं … तुम मुझे खीर का टास्ते तोह करवाओ …” असलम खीर शब्द का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन देख रहा था बिलकुल रौशनी की गुलाबी होठों को ..





“हाँ अच्छा समझी असलम जी .. प्लीज काफी गर्मी हैं .. आप थोड़ा साइड हो जाइये न.”

असलम ने एक आखरी बार रौशनी के कमर को कास कर दबोचा … रौशनी के मुँह से .. आठ hi निकल गयी ..

असलम इस बात मर मुस्कुराता हुआ अलग हो गया . हाँ अब टास्ते करवाओ इस रसीली चीज़ की … यानि खीर की मेरी बेगम.

“ असलम जी यहाँ टेस्टिंग स्पून नहीं हैं …”

“रौशनी जी यह टेस्टिंग स्पून क्या होती हैं चीज़ हमनें तोह कभी उसके बारे में सुना hi नहीं हैं.”

रौशनी भूल गयी की वह इन गरीब बुद्धों के घर पर हैं … “असलम मियां मतलब छोटा सा स्पून नहीं दिख रहा हैं”

“रुकसाना बेगम स्पून देता हुआ रुकिए लेकिन मुझे सोऊँ से टास्ते नहीं करनी.”

फिर कैसे टास्ते करोगे खीर असलम मियां.

अरे रुकसाना बेगम स्पून की क्या जरुरत खिलने को .. आप स्पून से गरम खीर को ठंडा करिये फिर अपनी ूँगी को दिबोगे मुझे वह पिलाइये .. रुकसाना तू भूल गयी तू ऐसे hi टास्ते करवटो थी मुझे खाना ताकि नमक या शकर का अनुमान आ सके.”

रौशनी को रोनित की याद आयी .. उसके पति भी ऐसी बचकाना हरकतें करते थे .. और वह मन में मुस्कुरायी (सब मर्द एक जैसे hi होते हैं िष)

ठीक हैं असलम मियां .. रौशनी स्पून में खीर लेती हैं और उसे थोड़ा ठण्ड कर अपनी ऊँगली खीर में डूबती हैं और फिर असलम के मुँह के तरफ ले जाती है. …

असलम झट से अपने मुँह को रौशनी की उँगलियों पर पकड़ते हुए उसकी उँगलियों को चूसने लगता हैं ..

रौशनी को अजीब सी फीलिंग आती हैं .. एकदम एक गुदगुदी सी .. उसकी उँगलियों को एक कला बुड्ढे चाट रहा था … उफ्फ्फ्फ़ यह असलम भी न वह सोचती रही .

ममममम क्या स्वादिष्ट हैं … लेकिन थोड़ी सी शकर काम पद गयी.. आप को टास्ते करवौ”

“में टास्ते खुद करुँगी असलम मियां”

“रुकसाना बेगम को में अपने उँगलियों से टास्ते करवाऊंगा जैसे तुमने मुझे करवाया ..”

असलम ने स्पून से खीर ली और थोड़ा ठंडा कर अपनी उँगलियों को डुबोकर रौशनी के मुँह के पास ले गया ..

रौशनी असलम की आँखों में देखि .. उसे अब कोई और चारा नहीं था .. उसने असलम की उँगलियों को अपने मुँह में लेते हुए उसे चूसने लगी …





“हैं न थोड़ी सी शकर काम उसमें रुकसाना बेगम”

रौशनी के गुलाबी होठं अब असलम के उँगलियों पर लपेटे हुए थे … वह ऊपर असलम को तरफ ान्हकेँ दाल देख रही थी…

असलम का लुंड ने इस एहसास और दृश्य से अब टाइट होने लगा … उसका लुंड झटके मारने लगा .. .. एक काळा बुड्ढे की उँगलियों को एक गोरी सी महिला अपने मुँह में लिए थी उफ्फ्फ ऐसा नज़ारा तोह असलम ने सोचा hi नहीं था ..

ऐसे बस कुछ सेकंड रहा और फिर असलम ने अपनी उँगलियों को रौशनी के मुँह से निकल लिया लेकिन उसे साफ़ नहीं करा ..

“हाँ असलम मियां थोड़ी सी काम हैं शकर.”

“ कोई नहीं रुकसाना बेगम तुम जब अपने हाथों से खिलाओगी तोह मीठी खुद बा खुद बन जाएगी खीर ..”

रौशनी इस बात पर मुस्कुरायी .. असलम जी भी न …

अब ऐसे हुआ की जैसे रौशनी खीर को देखने अपनी आँखें फेर रही थी उसकी नज़र असलम के ोान्त में बनाये तम्बू पर चली गयी .. क्या वह , वही देख रही थी जो उसे लग रहा था .. क्या असलम जी का लुंड का उभर हैं …

उफ्फ्फ्फ़ .. उसने झट से अपनी आँखें फेर ली

“रुकसाना बेगम पसंद आया क्या”

… और असलम हसने लगे

रौशनी हड़बड़ाती हुयी , क्या पसंद आया मुझे असलम मियां ..”

“असलम जनता था की रौशनी ने उसके लुंड के उभर को hi देख था ..”

वही जो अभी हुआ .. खीर के बारे में पूछ रहा हूँ रुकसाना बेगम .. और असलम मुस्कुराया अपने दांतों को दिखते हुए..

रौशनी के गाल तोह लाल hi हो गए …

“उफ़ असलम मियां आप जैसए जल्द से खीर बनाने दो मुझे आप बहुत डिस्ट्रक्ट कर रहे हो”

“रुकसाना बेगम यह डिस्ट्रशन .. मतलब ..”

रौशनी है पड़ी “उफ़ असलम मियां डिस्ट्रशन नहीं .. उसे तोह ……. उफ्फ्फ असलम मियां मतलब आप मुझे यहाँ पर खीर बनाने पर ध्यान नहीं देने दे रहे हो …”

“रुस्काना जी में समझा … वैसे और क्या डिस्ट्रशन आपको लग रहा था” … और वह मुस्कुराया..

अब रौशनी को असलम के उभरे हुए लुंड का दृश्य यद् आया और वह शर्मायी .. “लुक नहीं और बस आप जाइये में आती हूँ खाना लेकर .. जरा सलीम जी को भी बुलाइये …. वह भी हैं न डिनर के लिए ..”

"हाँ हैं , बुलाता हूँ उसे , जल्द से आना रुकसाना बेगम” और असलम ने धीमे से रौशनी की चूतड़ों पर हाथ फेरा और एक छोटा सा चमत मार वहां से चला गया ..

रौशनी तोह चौंक hi गयी.





रौशनी कुछ समझती और बोलती उससे पहले hi असलम वहां से चला गया था ..

“उफ्फ्फ असलम जी कुछ ज्यादा hi मुझे रुकसाना समझ रहे हैं … ये डॉक्टर का इलाज सही होगा या नहीं उफ्फ्फ .. असलम जी को में रुकसाना जितनी लगूंगी वह तोह उतने hi खुल कर मुझे से ऐसी छेद की कर पाएंगे ..

फिर कुछ सोचती ह्युई (धत .. रौशनी तू खुद थोड़े hi डॉक्टर हैं .. जैसे डॉ बोले थे वही करो .. उन्हें इलाज के बारे में ज्यादा पता हैं..)

रौशनी अब खाने को परोसने लगी …

(रौशनी अब असलम की तरफ देखती हैं … जैसे वह उससे कुछ इशारा मिले की क्या वह खाना खा पाएगी .. उसे लगा की शायद असलम पुराने ख्यालों के हैं तोह क्या उसे उनकी बीवी होने के वजह से उनके होने के बाद खाना होगा)

“रुकसाना बेगम क्या हुआ आइये खाना खाइये न हूयमर साथ..”

असलम मियां मुझे लगा की में बाद में …”

“रुकसाना बेगम क्या बोल रही हो आप , आप हमारी बेगम हैं , आप हमारे साथ hi खाना खाएंगी .. चलिए ..

अब वहां डाइनिंग टेबल मतलब बस एक छोटा सा पुराण टेबल था और तीन कुर्सियां थी.

रौशनी एक साइड बैठने गयी ..

“रुकसाना बेगम वहां नहीं आपको हमारे बगल में hi बैठना हैं … आपको हमें खीर खिलानी हैं याद हैं न ..”

रौशनी अपनी कुर्सी असलम के साइड पर रखती हैं और बैठ जाती हैं .. टेबल छोटी थिस इसलिए उसे असलम के काफी करीब बैठना पड़ा ..

सलीम यह सब देख रहा था …

अब तीनो खाना खाने लगे .. असलम और रौशनी इतने करीब बैठे थे की कभी कबर उनके तइस टच करते एक दूसरे से.

रौशनी को यह एहसास होता था लेकिन कुछ कर नहीं पा सकती थी ..

“रुकसाना भाभी उफ्फ्फ आप तोह उँगलियों को चटवाओगी .. ऐसी स्वादिष्ट खान ेके लिए तोह हम तरस गए थे .. क्यों असलम .. सही हैं न”

“हाँ सलीम तुम सच कहता हैं .. अभी रुकसाना बेगम ने मुझे खीर अपनी उँगलियों से टास्ते करवाई थी .. बड़ी स्वादिस्ट चीज़ हैं … यह खीर”

“ाचा ऐसे क्या .. ओह भाभी जी आप में और असलम में इतना प्यार हैं.. क्या मस्त जोड़ी हैं आपकी ..”

सलीम ने दूसरी बार वह बात कही थी - जोड़ी वाली बात -

"भाभीजी बस खीर hi टास्ते करवावी आपने .."

रौशनी को सलीम की बातें समझ आयी .. वह उन्हें टेबल के निचे अपने पैरों से उनके पैरों पर मारी ...

सलीम और रौशनी फिर एक दूसरे को देखने लगे ... रौशनी उससे तीखी नज़रों से देख सलीम चुप बैठ गए.





असलम बीच में बोल पड़े “रुकसाना बेगम खीर से याद आया , चलो अब खीर ख्यालो मुझे … “

रौशनी एक स्पून में खीर लेती हैं और असलम को पिलाने लगती हैं ..

“मममम बड़ी स्वादिष्ट हैं … सलीम मेरी बेगम ने इतनी मस्त खीर बनायीं हैं … तू भी खा ले …”

खीर टास्ते करते हुए “उफ़ सच हैं असलम , रुकसाना भाभी ने सबसे अच्छी खीर बनायीं हैं… बहुत hi टेस्टी हैं, उनके हाथों में तोह जादू हैं”

“अरे सलीम , रुकसाना मेरी प्यारी बेगम तोह खुद hi जादूगरनी हैं .. हाथों में तोह जादू होगा ी इनके, मेरी रुकसाना जैसी कोई नहीं ..”और असलम फिर रप्शनि के बाँहों को साइड से कास कर पकड़ लेता हैं “मेरी सबसे अच्छी बेगम मेरी जान रुकसाना ..” इतना कह कर असलम रौशनी के दिए बाहें को चुम लेता हैं …

रौशनी उस चुम्मे से शर्मा उठ टी हैं .. पता नहीं क्यों उसे असलम की बातें पसंद आ रही थी और इस हरकत से भी वह कुछ बोली नहीं …

“असलम मियां अब चोर भी दो भाभी जी को , यह सब सुकून से कमरे में करो मेरे सामने नहीं”.. और सलीम हसने लगता हैं

सलीम के ऐसे बात से रौशनी शर्मा जाती हैं … उसे समझ आता हैं सलीम क्या कहना चाहता हैं .. वह तोह बस निचे देख शर्माती हैं

“सलीम में तोह मेरी बेगम से जहाँ चाहे प्यार करू .. मेरी बेगम हैं न … में देखो यहाँ बहार भी उन्हें चूमूंगा .. और असलम बोल्डनेस दिखते हुए रौशनी के गालों को एक चुम्मा देता हैं मुआहहहह>

फिर से और एक चुम्मा देता हैं … रौशनी इस सब से एकदम स्टन होती हैं ..

वहां सामने सलीम हस्ता हैं “अरे अरे ठीक हैं असलम जहाँ चाहे प्यार करो अपनी बेगम से … यहाँ पर या फिर कमरे में ले काजर मुझे क्या …

रात तोह पूरी बाकी हैं तेरे लिए …

रौशनी इस बात को सुन सलीम को घूरती हैं .. उफ़ यह सलीम जी थोड़े ज्यादा hi बहक रहे हैं .. उफ्फ्फ रात की बात कर रहे हैं …

असलम कहता हैं “हाँ रात पूरी बाकी हैं बस बेगम मेरी माननी चाहिए … में तोह उनके कहने पर करूँगा जो चाहिए उन्हें …”

“हाँ असलम जरूर .. रुकसाना बेगम को भी तोह आपसे बहुत प्यार हैं .. क्यों हैं न रुकसाना भाभी जी”

अब रौशनी और क्या कह सकती थी “असलम को देख मुस्कुरा कर कहती hain”haan ज़रूर बहुत प्यार करती हूँ असलम मियां से …”

अच्छा भाभी जी फिर प्रोवे करिये .. आप असलम को अभी उनके गालों पर किश कीजिये .. अपना प्यार दर्शाइए”

रौशनी फिर से सलीम को घूरती हैं .. उफ्फ्फ अब हु खुद कैसे असलम को चुम सकती हैं .. उफ़ क्या मुसीबत हैं

दीजिये न चुम्मी , श्रमो मत भाभी जी …”

असलम बस रौशनी को देखता हैं और मुस्कुराता हैं ..”रुकसाना बेगम क्या आपको नहीं प्यार हमसे .. बस एक गालों पर चुम्मी तोह देनी हैं”

रौशनी फिर अपने होठों से असलम के गालों को चूमती हैं …

“मेरी बेगम और एक चाहिए .. मैंने आपको दो दी थी या नहीं ..”

रौशनी फिर से एक चुम्मी देती हैं असलम को ..

इससे असलम का लुंड बुरी तरह से झटके मारने लगता हैं … रौशनी ने अभी उसे चूमा था .. अब देर नहीं जब वह उसके होठों पर एक लम्बी किश देगा …

सलीम भी इस सब का मज़्ज़ा ले रहा था ..(अभी तोह बस चुम्मी दी हैं , अभी तोह हम दोनों को बहुत कुछ करना हैं तुम्हारे साथ मेरी रानी) सलीम बस यही सोच रहा था.

रौशनी तोह काफी शर्मा रही थी .. दोनों सलीम और स्लैम हसने लगे .. भाभीजी को सच में तुमसे प्यार हैं असलम .. तुम काफी लकी हो तुम्हारी भाभी अभी भी तुमसे उतना hi प्यार करती हैं ..

असलम “2 मं रुकिए थोड़ा हल्का होकर अत हूँ ..”

असलम जाने के बाद रौशनी सलीम को देख घूरती हैं ..”सलीम ये क्या आपने मुझे उन्हें चूमने क्यों कहा”

“रौशनी जी देखो कैसे खुश हुए थे असलम .. पहली बार देखा हैं रुकसाना की याद में ऐसे भूके शिकारियों जैसे बर्ताव नहीं कर रहे हैं असलम “

“आपको पसंद नहीं आयी बात तोह माफ़ी मानूंगा लेकिन मुझे लग रहा हैं की इस नाटक से असलम का इलाज शुरू हुआ हैं”

रौशनी मुस्कुराती हैं “सच आपको ऐसे लगता हैं सलीम जी …”

“हाँ में तोह उसे महीनों से देख रहा हूँ न रौशनी जी .. मुझे पता हैं. एक दो चुम्मी से क्या होता हैं अगर असलम का इलाज हो रहा हैं तोह”

रौशनी भी सोचती हैं “एक दो चुम्मों से वह भी गाल पर उससे क्या फरक पड़ता हैं .. अगर असलम की बिमारी का इलाज शुरू हो रहा हैं तोह चलेगा ..”

असलम वापस आ जाता हैं .. अब वह फिर से नार्मल जैसे बातें करने लगता हैं ..

रौशनी जी चलिए हम सब सोने जाते हैं … शुक्रिया आप ने आज रुकसाना की सच में याद बहुत दिलाई .. आप का हमेशा के लिए इस मदत के लिए शुक्रिया कहता रहूँगा …

“असलम जी आप भी न , प्लीज आप की इलाज में , में कोई भी कसार नहीं छोड़ूंगी आप बेफिक्र रहिये ..”

सलीम कहता हैं “अरे रौशनी जी सबसे प्यारी हैं … उनके जैसी कोई नहीं .. नेक दिल की और खूबसूरत .. उनके कॉम्बिनेशन का जवाब नहीं”

रौशनी मुस्कुराती हैं ..





“शुक्रिया सलीम जी आप कुछ ज्यादा hi बोल गए .. चलिए अब हम सोने जाएंगे .. कल सुबह जल्दी उठ कर फिर से सब शुरू करना हैं …”

(जब असलम और रौशनी खीर बनाते वक़्त रसोई घर में थे तब सलीम ने चुप के से रौशनी के कमरे में दो छिपकली राखी थी क्यूंकि उसे याद था एक बार बातों बातों में रौशनी ने कहा था की उसे छिपकली बिलकुल पसंद नहीं हैं और उससे डर्टी भी हैं.)

अब क्या होगा रात में !!!
 
अब रौशनी कपडे बदलती हैं … गर्मी का मौसम था और इस घर में तोह उसे और भी गर्मी लग रही थी इसलिए वह सोची की आज वह एक स्लीवलेस निघ्त्य पहनेगी जो बस घुटनो तक कवर कर रही थी .. किसी दूसरे के घर होने के कारन वह आज ब्रा पंतय पेहेन कर hi सोई थी. घर पर होती तोह वह ब्रा कभी नहीं पहनती थी निघ्त्य के अंदर रात के वक़्त . निघ्त्य के अंदर ब्रा वाइट रंग की और पंतय थी क्रीम कलर की..









वह अपना बिस्तर बना कर फिर सोने गयी …

रात का वक़्त था .. रौशनी सो रही थी की ेलदुम से उसे अपने कानों के पास कुछ एहसास हुआ .. पहले तोह उसे लगा था की कोई मचार होगा .. लेकिन बाद में उसे कुछ भरी पैन का एहसास हुआ उसके कान के पास ..

उसकी आँखें खुली और वह अचानक डर गयी .. उसके कानों ले पास एक छिपकली आयी हुयी थी ..

“अह्ह्ह्ह छिपकली अह्ह्ह” आवाज़ें निकलती हुयी रौशनी उठा गयी अपने बिस्तर से .. वह बिस्तर पर कड़ी थी और उसके ोैरों के बॉस बिस्तर पर एक छिपकली थी :.. दर कर वह अपने साइड में देखि तोह उसे और एक छिपकली नज़र आयी ..

“अह्ह्ह्हह असलम जी , सलीम जी प्लीज आइये छिपकली हैं मेरे कमरे में अह्ह्ह”

कुछ मं बाद सलीम कमरे में आ गए

“क्या हुआ रौशनी जी … यह छिपकली क्यों चीला रही हो कहा हैं छिपकली ..”

रौशनी अपनी नज़रों से बिस्तर पर इशारा करि .. और फिर साइड के सीलिंग पर भी..

“वववव वहां हैं सलीम जी .. छी मुझे छिपकली बिल्लुल पसंद नहीं … उफ्फ्फ उसे हटा दीजिये न …”

सलीम मन में मुस्कुराया .. उसी ने बिस्तर के साइड पर एक छिपकली राखी थी ..

अब वह छिपकली रौशनी के पैरों के पास थी …

सलीम डेल्ह सकता था की रौशनी ने माइटी बस अपने घुटनो तक आने वाली ोेहनी थी .. उसकी गोरी सी नाज़ुक पेअर दिख रहे थे … उसकी छोटी सी उँगलियाँ लाल नेल पोलिश वाली भी उसे दिखी .. उफ्फ्फ इतनी चिकनी आइटम हैं रौशनी .. सब जगह बस गोरापन और नाज़ुक उफ्फ्फ्फ़ …









सलीम ने अब जान बुझ कर छिपकली उठाने के बहाने उसे थोड़ा पुश किया और छिपकली अब रौशनी के पैरों पर थी ..

“उफ्फ्फ सलीम जी चीई छिपकली मेरे पैरों पर हैं प्ल्ज़ उसे हटा दीजिये प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़”

सलीम मज़्ज़े ले रहा था .. उसने कुछ सेकंड बाद हाथ में एक नैपकिन से उस छिपकली को उसमें उठा लिया … उस छिपकली को उठाते वक़्त उसने रौशनी के पैरों को टच किया .. उफ्फ्फ बहुत hi नाज़ुक थे रौशनी के पेअर .. क्या ोेरफेक्ट सोजे की उँगलियाँ थी रौशनी के पास … उफ्फ्फ.

उसने फिर छिपकली को कमरे के खिड़की से बहार फ़ेंक दिया ..

“रौशनी जी रुकिए दूसरी छिपकली भी फ़ेंक देता हूँ .. और वह बिस्तर पर चढ़ गया .. अब रौशनी बिस्तर पर hi कड़ी थी ..

रौशनी तोह वही कड़ी थी और पास में छिपकली .. वह डर से हिल नहीं रही थी .. वह छिपकली को डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी .. क्या पता हलचल किट ओह छिपकली उसके अंग पर भी आएगी इसलिए वह चुप से कड़ी रही.

सलीम को छिपकली निकालनी थी तोह उसे रौशनी के पास hi जाना पड़ा .. वह फिर थोड़े आगे झुक कर नैपकिन से उस छिपकली को उठाने की कोशिश करि .. उसने फिर से जान बुझ कर ऐसे किया की छिपकली उठाने के बाद वह जान बुझ कर नैपकिन को ड्राप करा .. नैपकिन से वह छिपकली जाकर रौशनी के निघ्त्य पर गिर पड़ा ..

“चीई सलीम जी वह मेरे निघ्त्य पर हैं …”

इतना कह कर वह सीधे सलीम की बाँहों में गयी … प्लीज उसे हटा दीजिये सलीम जी प्लीज..

सलीम तोह निघ्त्य वाली रौशनी को बाँहों में पाकर खुश हुआ … उफ्फ्फ उसकी गोरी मुलायम सी बाँहों को वह फिर से चुने लगा .. अपने हाथों को उसपर से चलने लगा ..

“रौशनी जी बिलकुल न मूव करे .. नहीं तोह छिपकली वहां से सरक जाएगी ..”

रौशनी एकदम बिना मूवमेंट के कड़ी रही .. सलीम ने एक हाथ से उसके दाईं बाहें को पकडे हुए थे .. छिपकली अब रौशनी के नाभि के वहां उसके निघ्त्य पर थी ..

सलीम ने नैपकिन से वह छिपकली पकड़ने झुक गया … उसने छिपकली फिर उठा ली … और खिड़की के बहार जाकर उसे भी फ़ेंक दिया ..

“शुक्रिया सलीम जी … आप नहीं होते तोह वह छिपकली … चीई … और हैं क्या यहाँ छिपकली.. मुझे बिलकुल घिन्न आती हैं उनसे …”

सलीम नाटक करते हुए .. रौशनी जी क्या पता हो भी सकते हैं … हमें तोह कोई ऐतराज़ नहीं .. ऐसे होते रहता हैं यहाँ .. छिपकली या फिर कॉकरोच या चूहे भी .. ंगो को बहुत बार बोलै हैं कुछ करिये इन चीज़ों का लेकिन वह कुछ करते hi नहीं .. क्या करे ..

“सलीम जी कल hi में इसका कुछ करती हूँ, आपको भी मदत करनी होगी . कल वैसे संडे हैं इसलिए में फ्री हूँ. में ंगो से सैंक्शन कर लुंगी पेस्ट कण्ट्रोल का काम मंडे को. हम दोनों कल जाएंगे किसी पेस्ट कण्ट्रोल वाले के पास और कल सब काम कर लेंगे.”

“ठीक है रौशनी जी जैसे आप कहे , शुक्रिया , वैसे कल वह जगह मेरे एक दोस्त की हैं जो थोड़ा दूर उसका दूकान हैं. हमें बस से जाना होगा वहां.”

“ठीकभें सलीम जी कल हम जाएंगे. अब हम सो जाते हैं”

सलीम जाते जाते एक बार फिर से पलट कर रौशनी को उस मस्त स्लीवलेस निघ्त्य में देख आपके लोडे को खुजलाते हुए जाता हैं





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अब सुबह का दिन .. रौशनी ब्रेकफास्ट बनती हैं .. दोनों सलीम और असलम सोये हुए हैं.

“सलीम जी , असलम जी खाना तैयार हैं .. ब्रेकफास्ट कीजिये”

रौशनी फिर उनके कमरे में झांकती हैं .. दोनों अभी भी सोये हुए थे … लेकिन असलम ने ऊपर कोई शर्ट नहीं पहनी थी ..

रौशनी उसके शरीर को देखने लगती हैं, बुड्ढे होकर भी काफी हट्टे काटते थे असलम .. उसके सीने पर से सफ़ेद बाल दिख रहे थे .. चौड़ी छाती और उसपर बाल .. रौशनी ऐसे उन्हें देख शर्मा जाती हैं , अपने पति को चोर उसने पहले किसी मर्द को टॉपलेस लाइव देखा था ..

सलीम भी सोये थे लेकिन उनपर चद्दर ोधी हुयी थी.

रौशनी ने दरवाज़ा बंद किया और फिर नॉक करने लगी. “असलम मियां और सलीम जी उठिये ब्रेकफास्ट तैयार हैं, दोनों से कुछ आवाज़ नहीं निकलती तभी फिर से वह दरवाज़ा खोल उन्हें बुलाती हैं

“असलम की आँखें खुलती हैं , “ ुहह्म्म कौन हैं .. उफ्फ्फ आज संडे हैं सोने दो …”

“असलम मियां उठिये आपके लिए नाश्ता बनायीं हूँ .. उठिये न प्लीज ब्रश करके आइए न”

असलम रौशनी को देख मुस्कुराता हैं “रुकसाना बेगम तुमने नाश्ता बनाया हैं .. कितनी अच्छी हो .. असलम अब बिना शर्ट के बस एक पंत में आता हैं रौशनी ने पास.

“रुकसाना बेगम हमें एक मॉर्निंग किश नहीं डौगी हमेशा की तरह … चलो एक किश दो”

रौशनी मुस्कुराती हैं “असलम मियां धत्त चलो आओ नाश्ता करने चलो.”

“रुकसाना बेगम में नाश्ता नहीं करने आऊंगा जब तक आप मुझे किश नहींकरती हो .. “

उफ्फ्फ बाबा ठीक हैं … फिर रौशनी असलम के गालों पर किश करती हैं.

“रुकसाना बेगम गालों पर नहीं होठों पर जानू”

“असलम मियां वक तोह ब्रश नहीं करे हो जाओ ब्रश करो”

“रुकसाना बेगम अच्छा ठीक हैं , फिर ब्रश करने बाद तोह डौगी न किश”

रौशनी शर्मा जाती हैं .. “अरे असलम मियां नहीं होठों पर नहीं”

रुकसाना बेगम अभी तोह आप बोली की ब्रश करके आओ .. इसका मतलब ब्रश के बाद तोह डौगी न चुम्मी मुझे होठों पर”

“नहीं नहीं मेरा ऐसे नहीं था कहना , उफ्फ्फ नहीं आप जाइये और नाश्ता करने आइये. और अपने दोस्त सलीम जी को भी उठाओ न”

“उसे चोर दो बेगम, मुझे खिलाओ .. नाश्ता पहले .. में आका षौहर हूँ नहीं की सलीम” और असलम मुस्कुराता हैं अपने काळा दायीं को दिखते हुए

उसके मुँह से सच मच बदबू आ रही थी .. (उफ्फ्फ बहुत बदबू हैं इनके मुँह से , इतनी बदबू छी)

“असलम मियां पहले जाओ ब्रश करो चलो चलो.

“अच्छा ब्रश कर आता हूँ फिर तोह होठों पर चुम्मी लेकर hi रहूँगा बेगम”

रौशनी शर्मा जाती हैं ,,, असलम तोह अब होठों पर चुम्मे की ज़िद्द कर रहे हैं उफ्फ्फ”

असलम ब्रश कर आता हैं टेबल पर ..

“ हाँ चलो नाश्ता दीजिये लेकिन पहले मुझे यहाँ चुम्मी दो रुकसाना बेगम”

असलम अपने होठों पर इशारा करता हैं ..

“नहीं असलम मियां बस गालों पर , होठों पर नहीं ..”

“अच्छा ठीक हैं दे दो गालों पर”

रौशनी अब उसे गालों पर चूमने बढ़ती हैं तोह लास्ट सेक् में असलम अपना मुँह फेरता हैं और रौशनी की चुम्मी जाती हैं उसके होठों पर .. मुआहहह करके …

रौशनी इससे तोह सरप्राइज होती हैं ..

अब उसके गुलाबी रसीले होठं असलम के काले भद्दे होठों पर तिकी हुयी हैं .. असलम थोड़ा जोर देता हैं अपनी तरफ से .. रौशनी को कुछ समझ नहीं आता कुछ सेकंड .. फिर अपने होठों को अलग करती हैं

“बद्तमीज़ हो आप असलम मियां, कहा था न गालों पर दूंगी आपने तोह आपकी होठों पर hi … उफ़ और वह अपनी नाज़ुक हाथों को असलम के कठोर साइन पर मारती हैं.. अब जाओ नाश्ता करिये हमसे बातें न करिये.”









“उफ़ रुकसाना गुस्सा न होना .. वैसे मेरी बेगम में तुम्हारी यही गुस्से वाली ादाएँ पर फ़िदा हूँ .. अब एक दी हैं चुम्मी तोह और एक दो बड़ी वाली …”

“नहीं बस अभी एक मिली न चुम्मी अब नाश्ता करो चलो” रौशनी फिरमली असलम को कहती हैं.

असलम मुँह मायूसी का

बना कर कुर्सी पर बैठ जाता हैं ..

“ ममम स्वादिस्ट हैं नाश्ता .. तुम्हारे हाथों में वही जादू हैं रुकसाना बेगम .. ममम खूब बढ़िया बनायीं हो”

रौशनी कुछ एक्सप्रेशंस नहीं देती हैं वह असलम के ऐसे धोके से उसके किश करना पसंद नहीं आया था. “हम्म ठीक हैं असलम मियां.”

रौशनी देखती हैं की असलम पूरी प्लेट खा लेता हैं और एक प्लेट माँगा कर वह भी ख़तम करते हैं. रौशनी उन्हें देकब सोचती हैं की उसके पति तोह आजकल जो भी खाना वह बनती थी , उस पर नेगेटिव कमेंट करते थे और यहाँ असलम मज़्ज़े से दो प्लेट नाश्ता कर रहे थे .. वह इस बात से तोह खुश थी की उसका बनाया नाश्ता असलम को बहुत पसंद आ रहा था.

बस उसे उस असलम के चुम्मे की हरकत का सन अभी भी नाराज़ कर रहा था .

नाश्ते के बाद असलम - “रुकसाना बेगम अब नहाने जाता हूँ और आप सलीम को भी खिलाओ नाश्ता.”

रौशनी बस देखती हैं असलम को और बिना कोई एक्सप्रेशंस के प्लेट सिंक में रखती हैं.

-.. अब घर पर नहाने के लिए एक hi जगह थी.. हु भी बहार दोनों बैडरूम के बहार कॉमन एरिया में. ंगो ने उनके रहने वालों के लिए नए वाटर हीटर लगवाए थे. रौशनी ने हीटर ों hi रखा था . वह अब तक नहायी नहीं थी. वह नाश्ता बनाने में hi बिजी थी सुबह से.-

असलम नहाने गए तोह वह सलीम को उठाने गयी ..

अब इस बार वह दरवाज़े को खोली तोह उसने देखा की सलीम के ऊपर चद्दर नहीं थी और वह बस एक शर्ट और बोसेर्स में hi लेते थे बीएड पर ..

रौशनी की उनके बॉक्सर पर नज़र गयी तोह उसके मुँह से ाःह निकल गयी .. सलीम का बॉक्सर एक बड़ा सा तम्बू बनाये हुए था … रौशनी समझ सकीय की वह उनके लुंड ने बनाया उभर होगा .. वह तोह उस नज़ारे से आँखें अलग करना चाहती थी लेकिन अपनी नज़र वहां से हटा नहीं पायी .. इतना बड़ा उभर देख वह चौंकी हुयी वहां देखती रही .. (करीबन 9 इन का लुंड था सलीम बुड्ढे के बॉक्सर में) .. उसने ऐसे अपने पति रोनित के बोसेर्स में भी नहीं देखा था इतना बड़ा उभर..

सलीम अब वहां खुजलाने लगा .. उसकी आँखें बंद थी वह अनजाने में वहां खुजला रहा था .. खुजलाते खुजलाते उसका बॉक्सर वह निचे साइड में सरकने लगा .. और उसका लुंड कभी भी बहार निकल सकता था…













रौशनी समझ गयी की उसे किसी भी सेकंड सलीम का लुंड दिख सकता हैं तोह उसने शर्माकर अपना मुँह फेर लिया और दरवाज़ा हलके से बंद किया..

फिर वह वैसे hi कड़ी काफी शर्मा रही थी , उफ्फ्फ अनजाने में वह सलीम के लुंड का दृश्य देखने वाली थी ..: उफ्फ्फ्फ़ ये क्या हुआ …

रौशनी लेकिन उस बने उभर के बारे में भूल नहीं प् रही थी .. सच में बड़ा सा उभर था .. क्या सच में सलीम जी का लुंड इतना बड़ा होगा , या उसे ऐसे लग रहा था .. उफ्फ्फ इतना बड़ा उभर तोह फिर उनका लुंड भी बड़ा और मोटा … उफ्फ्फ अपने आप के सोच को रोकते हुए मन में रौशनी

(उफ्फ्फ रौशनी यह क्या सोच रही हैं तू .. उफ़ निकल दे दिमाग से यह सब ) लेकिन एक महिला होते हुए वह यह बात कैसे मन से निकलती , इतना बड़ा उभर कोई भी महिला देखती तोह सोचती hi न की उस मर्द का लुंड भी कितना बड़ा होगा .. अब वह कैसे सलीम को नज़रे उठा कर देख पाएगी उफ्फ्फ .. अब क्या करे ..)

( वहां सलीम ने यह जान बुझ कर किया था .. उसने देखा था जब रौशनी ने असलम के गालों पर चुम्मा दिया था .. उसे लगा की फिर से आएगी रौशनी उसे भी उठाने इसलिए उसने चद्दर साइड में करि थी .. अपने लोडे से खेलते हुए और रौशनी के फिगर और कर्व्स और मलाईदार रंग को इमेजिन करते हुए उसका लोढ़ा टाइट हुआ था उन्स्की बोसेर्स में. उसने तिरछी नज़रों से देखा था रौशनी को उसके उभर पर नज़र डालते हुए इसलिए वहां वह अनजाने में खुजलाने लगा था और चाहता था की उसका बड़ा मोटा सख्त लोढ़ा रौशनी को दिखाई दे .. लेकिन रौशनी नेट अभी अपनी नज़रें हटा कर दरवाज़ा बंद करि थी. )
 
रौशनी कुर्सी पर बैठी hi थी की सलीम बहार आ जाता हैं. उसने अभी पंत पहनी थी. लेकिन उसका लोढ़ा अभी भी सख्त था ..

“रौशनी जी गुड मॉर्निंग.. आप संडे को भी जल्दी उठती हो .. हमें इसकी आदत नहीं हैं”

रौशनी अब ऊपर सलीम को देखने अपनी नज़रें उठती hi हैं की उसकी नज़र फिर से सलीम के क्रॉत्च पर चली जाती हैं.. अब भी वहां रौशनी एक उभर देख पाती हैं , पंत थीं मटेरियल होने के कारन सलीम के लुंड का आकर भी उसे थोड़ा दिखाई देता हैं … फिर से उसकी नज़र वहां पर कुछ पल रहती हैं.









“रौशनी जी कहाँ खो गयी आप , ऊपर देखिये हमारी तरफ..”

रौशनी फिर शर्माती हैं … फिर नज़रें ऊपर उठा लेती हैं..

“सलीम जी आप नाश्ता करिये न … में अपने कमरे में जाती हूँ … कुछ काम हैं”

“रौशनी जी नहीं ऐसे नहीं चलेगा .. आपको हमारे साथ बैठना पड़ेगा और थोड़ा नाश्ता करना hi पड़ेगा”

रौशनी कुछ नहीं बोलती फिर जाकर प्लेट लती हैं और सलीम को परोसती हैं.

“लीजिये सलीम जी .. नाश्ता करिये” .. रौशनी मुद कर जाने लगती हैं तोह सलीम उसकी कलाई पलाद लेता हैं

“रौशनी जी प्लीज बैठिये … कंपनी दीजिये न हमें … कल रात को उस छिपकली को मैंने hi फ़ेंक दी थी .. अब आप भी बैठिये न हमारे साथ रिक्वेस्ट कर रहा हूँ.”

रौशनी सोचती हैं (हाँ उन्होंने मदत तोह किट hi .. वैसे भी सुबह जो हुआ उनकी गलती नहीं थी वह तोह सोये थे बस में hi गलत टाइम उनके कमरे में झांकी थी. वैसे भी उसे वह बात भूलनी चाहिए थी. आज उन्हें जाना था पेस्ट कण्ट्रोल के उस शॉप पर.)

अच्छा ठीक हैं सलीम जी .. और रौशनी बैठ जाती हैं..

असलम जैसे सलीम भी नाश्ते की तारीफ करने लगे और दो प्लेट खाये .. रौशनी खुश थिन्की दोनों को उसने बनाया नाश्ता इतना पसंद आया था.

“रौशनी जी आप नहायी नहीं …?

“नहीं सलीम जी नाश्ता बनाने में hi टाइम लगा था”

तभी असलम नाहा कर बहार आता हैं…

“रुकसाना बेगम में कपडे बदलने जा रहा हूँ , आज एक दोस्त से मिलना था , उसे मिलने जाऊंगा और अब दुपहर को hi आऊंगा लंच के लिए.. तुम क्या करने वाली हो”

रौशनी अभी भी उस इंसिडेंट से खुश नहीं थी असलम से .. “हम्म असलम मियां में घर रहूंगी , थोड़ा आराम करुँगी फिर लंच बनाउंगी .. आप जाइये”

“रुकसाना बेगम लव यू माय जान”

रौशनी कुछ नहीं बोलती बस सलीम का प्लेट सिंक में रखती है .

सलीम दोनों को देख रहा होता हैं.. कुछ तोह हुआ हैं इनके बीच .. और रौशनी ने असलम को बताया भी नहीं था की वह अभी नहाने के बाद उस पेस्ट कण्ट्रोल शॉप जाने वाले थे. कुछ तोह हैं — वही बात सोचते सोचते सलीम नहाने जाते हैं.

रौशनी अपने कमरे में जाती हैं और अपनी ब्लाउज और साड़ी जो पहने वाली थी वह अपने बैग से निकल कर रखती हैं बिस्तर पर.

सलीम भी नहाकर अपने कमरे में जाता हैं. वह अस्काम से पूछता हैं की क्या हुआ था उसके और रौशनी के बीच .. असलम कुछ नहीं कह कर वहां से निकल जाता हैं. सलीम फिर सोचता हैं की वह रौशनी को hi पूछेगा.

अब रौशनी नहाने जाती हैं…

वाशूम में जाते hi उसने पाया की वहां पर भी दोनों के कच्चियाँ ऐसे hi पड़े हुए थे .. यह कचियाँ तोह अभी की थी , धोये हुए नहीं थे अभी भी गंदे थे और उससे स्मेल आ रही थी. काफी स्ट्रांग स्मेल आ रही थी दोनों कच्छियों से .. उफ्फ्फ एक अलग hi स्मेल थी .. रोनित के कच्छियों से भी ऐसी स्ट्रांग स्मेल नहीं आती थी..

अब एक बात थी की रौशनी नहीं जानती थी. अभी नहाने से पहले असलम ने मुठ मारी थी , रौशनी के किश के बारे में सोचते हुए .. और सब मुठ जाकर असलम की कच्ची पर लगी थी इसीलिए इतनी स्ट्रांग स्मेल आ रही थी ..

सलीम जी की भी कच्ची उसके प्रेकम से थोड़ी भीगी थी.. सुबह जब वह इंसिडेंट हुआ था तब उसके लोडे से प्रेकम निकल कर उसकी कच्ची थोड़ी भीग गयी थी..

बहुत स्ट्रांग स्मेल थी … रौशनी को बहुत hi स्ट्रांग लगी.. उसे और कोई चारा नहीं था .. उसने दोनों कच्छियों को हाथों में लेकर एक बकेट में दाल दी और बकेट पानी से भर दी और थोड़ी सी डिटर्जेंट डाली बकेट में.

और एक बात थी की आज रौशनी आज बालों को वाश करने वाली थी. लेकिन वह शैम्पू लेकर जाना भूल गयी थी. अब रौशनी अपने नंग्न मुलायम बदन पर साबुन लगाने लगी.









साबुन लगाने के बाद वह फिर शैम्पू लगाने सोची तब उसे पता चला की शैम्पू तोह हु लायी hi नहीं थी. उसे आज किसी भी हाल में बालों को वाश करना था..

अब उसे सलीम को hi बताना पड़ेगा उसके कमरे से शैम्पू लाने के लिए. वाशरूम का दरवाज़ा थोड़ा ओपन कर “सलीम जी , सलीम जी …. ज़रा सुनिए न”

“रौशनी जी हाँ बताइये ..

सलीम तोह काफी खुश था .. रौशनी नाहा रही हैं , नंगी होगी .. उफ्फ्फ उसका गोरा सा मखमल बदन ममम , सोचते hi उसका लुंड टाइट होने लगा … “रौशनी जी बताइये न क्या छाइये .. सलीम अब वाशरूम के बहार hi खड़ा था … “सलीम जी मुझे मेरी शैम्पू चाहिए .. यहाँ बहार रखिये न में लेती हूँ.”

सलीम झट से कमरे में चला गया .. वह उसने बिस्तर पर रौशनी ने निकले हुए साड़ी और ब्लाउज और ब्रा पंतय देखने लगा .. उफ्फ्फ रौशनी की ब्रा देख सलीम का लुंड सच में टाइट हुआ .. उसने वह ब्रा ली और अपने पंत के अंदर अपने लुंड से रगड़ने लगा.. फिर उसने ब्रा फिर से साड़ी पर रख दी.

फिर शैम्पू ढूंढ कर वह शैम्पू देने चला गया.. “रौशनी जी शैम्पू लाया हूँ”

“शुक्रिया सलीम जी प्लीज उसे बहार नकिहे रखिये में लेती हूँ.”

“रौशनी जी निचे सब गन्दा हैं … शैम्पू निचे से गन्दा हो जाएगा .. आप को आपके हाथों में देता हूँ आप बस हाथ बहार करिये.”

रौशनी ने हाथ बहार किये तब सलीम उसके गोर मखमली हाथों को देख पाया .. उफ्फ्फ क्या गोरी मैडम थी रौशनी ममम उसका लुंड अब पूरा टोघट हुआ था … मन लार रहा था की वह दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गए और रौशनी के साथ नंग नाहा सके .. उफ्फ्फ वहां पर hi अपने सख्त लुंड को चुसवागा ..

“सलीम जी जल्दी दीजिये नाहा कर हमें जाना हैं लेट हो जाएगा ..”

सलीम ने शैम्पू रौशनी के हाथों में देकर वहां से चला गया .. – है मैडम जी आप के साथ कब नहाने का मौका मिलेगा उफ्फ्फ …. रोज़ नहलाना चाहूंगा तेरे मस्त से गोर और मुलायम बदन को .. टिहरी चूचियां दबाऊंगा .. चूतड़ भी मसलूंगा उफ्फ्फ्फ़ मेरी आइटम बन जा रौशनी जी.

सलीम अब बहक कर अपने लोडे को जोरों से हिलने लगा .. (है मैडम मेरा लोढ़ा तेरे से hi चुसवाना चाहता हूँ … और तेरी चुदाई करूँगा अहह मेरी जानू ..)

वहां रौशनी अब बालों पर शैम्पू लगा कर नहाने लगी और फिर नहाने के बाद एक लम्बी निघ्त्य जैसी ड्रेस पेहेन कर अपने कमरे में चली गयी.

अब रौशनी तैयार होने लगी … उसने एक वाइट साड़ी पहनी थी .. स्लीवलेस वाइट ब्लाउज … टॉवल से फिर वह अपने बालों को ड्राई करने लगी … बालों को वैसे ड्राई करके वह बहार आयी कमरे से ताकि वह टॉवल वाश बकेट में दाल सके …. तभी सलीम बहार आता हैं और रौशनी की सुंदरता देखते hi रह जाता हैं .. (उफ्फ्फ क्या मस्त लग रही हैं रौशनी ममममम क्या कमर हैं , क्या हसीं हैं उफ्फ्फ , लम्बे घने बाल .. गोल सिन अभी उफ्फ्फ और वह ऐसी लग रहे थी फ्रेश नाहा कर उफ्फ्फ्फ़ उसका लोढ़ा टाइट हो गया … मममम यार आज तोह और मज़्ज़े लूंगा रौशनी के साथ)













“रौशनी जी आप तोह हुस्न की पारी हो … आप पर यह साड़ी मस्त जजती हैं ..”

रौशनी मुस्कुरायी “आप भी न सलीम जी जब देख बस मीठी तारीफ hi करते हो ..”

रौशनी शर्मा कर फिर मुद जाती हैं .. तब सलीम को उसकी गोरी सी पीठ फिर से दिख जाती हैं और उसकी कमर .. उसके पीठ पर एक लाइन से बानी हुयी थी उफ्फ्फ क्या नज़ारा था … सलीम हेय में मर जावा बोल दिया

“सलीम जी आप कुछ बोले मुझसे …”रौशनी मीठी स्वर में पीछे मुद कर बोली सलीम से ..

सलीम ने अपने दोनों हाथों को दिल पर रख लिया … और रौशनी को देख स्माइल देने लगा ..

“सलीम जी आप भी न तोह उफ्फ्फ चलो अब आती हूँ तैयार होकर जाना हैं हमें.” फॉर रौशनी मुस्कुराती हैं और मुद कर कमरे में वापस जाती हैं.

अब रौशनी को नहीं पता था की उसने जो ब्रा पहनी थी वह अभी कुछ समय पहले सलीम के लोडे पर थी और वह उसे वहां रगड़ लिया था .. उसने वही ब्रा पहनी थी .. सलीम के लुंड से रागादि हुयी ब्रा ..

अब तैयार होकर दोनों बहार निकलते हैं ..

“मैडम आज रिक्शा का स्ट्राइक हैं इसलिए हमें बस से hi जाना पड़ेगा ..”

“उफ़ सलीम जी सच कहु तोह में बस से कॉलेज के बाद कभी नहीं गयी हूँ. जब गयी थी तब भी बस दोस्तों के साथ.”

“यहाँ बस में बहुत भीड़ होती हैं मैंने देखि हैं यहाँ के स्टॉप की बुस्सेस.”

सलीम मन में खुश था .. आज मौका था वह बस में रौशनी को मसल पाएगा .. उसे पता था भीड़ वाली बुस्सेस में कैसे लेडीज को छेड़ा जाता हैं ..

“रौशनी जी में हूँ न आपके साथ, में पूरी लाइफ बुस्सेस में सवारी की हैं .. भीड़ में कैसे जाना हैं मुझे पता हैं .. मेरे साथ आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी में आपका ख्याल रखूँगा.”

“शुक्रिया सलीम जी .. आप प्लीज मेरा ख्याल रखिये .. इतनी भीड़ में पहली बार जा रही हूँ न”

“फ़िक्र न करिये में संभल लूंगा सब , अब चलिए रौशनी जी.”

“हाँ चलिए ..” रौशनी खुश थी की सलीम इतने अच्छे हैं .. उनकी मदत करने हमेशा तैयार हैं. उन्हें सलीम अच्छे लगने लगे थे ..

अब बस आयी .. हमेशा की तरह भीड़ थी , लेकिन आज कुछ ज्यादा hi, क्यूंकि रिक्शा स्ट्राइक था इसलिए.

पहले बस में तोह बहु भीड़ थी .. बिलकुल जगह नहीं थी.. फिर एक बुसस आयी कुछ मं बाद .. भीड़ थोड़ी कंठी ..

“रौशनी जी आप पहले चढ़ जाइये .. में आपके पीछे hi हूँ” .. आगे से तोह फुल थी बस , पीछे थोड़ी जगह थी..

रौशनी अब बस में चढ़ गयी .. लेकिन आगे का एक आदमी वहां खड़ा था और वह पीछे हटा .. रौशनी पीछे गिर पाती उससे ोेहले सलीम ने उसके कमर को पीछे से पकड़ किया … और थोड़ा आगे पुश करने लगा.. और वह भी पीछे से चढ़ गया बस में..

रौशनी की कमर पर अपने हाथों को पलर सलीम के लुंड में हलचल होने लगी .. सलीम के हाथ उसके कमर पर थे और जब वह देखि तोह रौशनी कुछ नहीं बोली .. उसने तोह उसे गिरने से बचाया था.

अब दोनों बस में चढ़ गए थे .. भीड़ थी इसलिए हिलने की जगह नहीं थी.. रौशनी उनकंफर्टबले फील कर रही थी , गर्मी काफी थी.. पसीना आ रहा था .. सलीम की नज़र तोह रौशनी किले कमर पर , उसकी मुलायम पीठ पर बाँहों पर hi थी .. वह उसे चुना छठा था .. मसलना चाहता था ..

साइड से एक आदमी रौशनी को छू रहा था .. रौशनी को वह बहुत उनकंफर्टबले लगी बात लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी … लेकिन बुसस के एक ढ़ाके से उस आदमी ने रौशनी की कमर को साइड से थोड़ा और दबोचा .. तब रौशनी पीछे सलीम की तरफ मुद वहां इशारा किया..

सलीम उस आदमी को देख बोलै

“कमीने , अपनी औकात में रह, मैडम को क्यों छू रहा हैं … जरा स्पेस दे , दिख नहीं रहा है की यह एक महिला है. … टच नहीं करने का.”

“अबे सेल में ने जान बुझ कर नहीं छू लिया .. अब भीड़ हैं में क्या करू .. इतनी प्रॉब्लम हैं तोह उतर जाओ.”

“में क्या चुटिया लगता हूँ तुझे .. मुझे पता हैं तेरे जैसे मर्द … महिला देखि नहीं भीड़ में शुरू हो जाते हो .. अब साइड में सरक.”

वह आदमी फिर साइड में सरक गए..

रौशनी सब सुन रही थी .. सलीम को ऐसे गाली देते हुए देख रौशनी चौंक गयी थी ..

उसने यह सुना नहीं था उनसे .. लेकिन एक बात थी वह उसके लिए उस आदमी से झगड़ने लगे थे .. उसे वह बात अच्छी लगी ..

सलीम को मुद कर वह थैंक यू बोली. सलीम मुस्कुराया (रौशनी जी बस में भीड़ में बस में hi आपको चुने वाला हूँ .. और कोई आदमी नहीं कर सकता)

अब भीड़ थोड़ी और बढ़ गयी .. रौशनी अब बिलकुल सलीम से सटक कर कड़ी थी .. सलीम रौशनी से एक इंच शार्ट था .. इसलिए उसकी नज़र पीछे से उसकी गर्दन तक आती थी. उसकी सुंगंध से और इतनी पास होने से उसका लुंड निचे टाइट होने लगा था . अब भीड़ की वजह से रौशनी पीछे सर्कि और इसकी चूतड़ अब सलीम के क्रॉत्च से टकराई .. उससे सलीम का लुंड और टाइट होने लगा .. अब रौशनी पीछे से कुछ चुंबन महसूस करि अपनी चूतड़ों पर .. वह पीछे देखने मुड़ी तब सलीम ने अपनी कमर थोड़े पीछे करि ..

फिर रौशनी आगे देखने लगी.. बस एक स्पीड ब्रेकर के ऊपर से चली तब सलीम जाकर रौशनी से एकदम से चिपक गया … उसका टाइट लोढ़ा अब रौशनी की चूतड़ों पर और दबने लगा .. रौशनी की मुँह से आह निकल पड़ी .. “सलीम जी यह क्या कर रहे ho”wah फुसफुसाई

“माफ़ कीजिये में क्या करू , बस hi ऐसे ब्रेक मर्री …”

रौशनी थोड़ी सेहम गयी थी ..

अब उनके साइड में बैठे हुए एक आदमी बोतल से पानी पि रहा था .. उस ब्रेक से उसके हाथों से बोतल डगमगाया था और पानी निचे गिरा था ..

भीड़ के वजह से आगे वाला आदमी पीछे पुश करने लगा और रौशनी भी पीछे हटी .. उसके पेअर पानी पर से चले और वह और पीछे स्लिप कर गिरने hi वाली थी और सलीम ने उसके कमर को पूरी तरह से कास कर पकड़ किआ ुर वह गिरने से रुक गयी.

सलीम ने इस मौके का फायदा उठाया और रौशनी की कमर को और दबोचा … उसकी गोरी नाज़ुक सी कमर सलीम के काळा हाथों से डाब गयी .. उसकी मुँह से आह निकली ..

रौशनी फिर सीधे कड़ी हुयी ..

ऊपर बस के बनाये प्लास्टिक हैंडल्स पर कोई जगह नहीं थी … सब मर्दों के हाथ hi थे उसपर ..

सलीम फिर एक आदमी से बोले

“भैया थोड़ा अपना हाथ हटाइये न मैडम को वहां पकड़ने दीजिये”

“भाई साहब में हैंडल पहले पकड़ ली थी .. मैडम को कोई और पकड़ने दो हैंडल”

सलीम अब ग़ुस्से से “अबे बोलै न हैंडल से हाथ हटा और मैडम को रखने दे .. सीधी बात समझते नहीं हो क्या ..”

“साला पागल बुद्धा …” और उस आदमी बे अपने हाथों को हैंडल से निकल दिया .

रौशनी सब सुन रही थी .. आज सलीम के मुँह से ऐसी बातें सुन उसे अजीब लगा. लेकिन सलीम उसकी मदत के लिए सब कर रहा था उस बात से उसे अच्छा लगा.

सलीम साइड से रौशनी के कानों में “रौशनी आप प्लीज यहाँ. ऊपर हैंडल पकड़िए .. फिर आपको सपोर्ट मिलेगा यहाँ हैंडल फ्री हुआ हैं.. यहाँ पकड़ लीजिये और आपको बस के धक्कों से सपोर्ट मिलेगा.”

“हाँ सही हैं सलीम जी शुक्रिया”

अब रौशनी हैंडल पकड़ कर कड़ी रही .. उसे अब अच्छा सुप्परत मिलने लगा.

अब बात फिर से वही हुयी उसके हाथों को बाकी के मर्द रख उसे वहां चुने लगे.. रौशनी सलीम को देखि

“सलीम जी आप भी हैंडल पकड़िए न .. आप को भी सपोर्ट मिलेगा..”

“लेकिन रौशनी जी वहां हैंडल पर जगह नहीं..

“सलीम जी आप मेरे हाथों पर रखिये हाथ और पकड़िए .. मुझे कोई ऐतराज़ नहीं.”

सलीम बहुत खुश हुआ … रौशनी खुद hi उसे उसके हाथों को टच करने को अल्लोव कर रही थी .. सलीम को वापस बोलना नहीं पड़ा , वह रौशनी के हाथों के ऊपर अपने हाथ रखे .. उफ्फ्फ वह अब रौशनी की नाज़ुक सी नेल पोलिश वाली हाथों पर अपने हाथ रखे थे .. उसके हाथ इतने बड़े थे की वह रौशनी ले हाथों को उसमें धक् लिए ..

रौशनी को सलीम के मज़बूत हाथों का सोष एक सुर सूरी सी लगी .. उसके हाथ सच में बहुत मज़बूत थे .. सलीम वहां अपने हाथों से रौशनी के हाथों को मसलने लगा .. रौशनी ने हाथ ऊपर किये थे इसीलिए उसकी आर्मपिट्स भी सलीम देख रहा था .. वहां से पसीने की बदबू और उसके परफ्यूम को सुगंध के मिश्रण को वह सूंघ प् रहे थे … इस सुगंध से उसके लुंड ने झटके मारना शुरू करा .. अब दोनों काफी सटक आकर खड़े थे इसीलिए पीछे से उसके लुंड के झटके रौशनी की चूतड़ों को डाब रहे थे ..

आगे रौशनी अहह की सिसकी भरी .. उसे सुन सलीम और बोल्ड हो गया और उसने ऊपर से रौशनी के हाथों को दबाया और पीछे से अपनी कमर को और आगे बढ़ाते उसके खड़े लोडे को रौशनी की चूतड़ों में दबा दिए . रौशनी किट ओह फिर से यह निकली .. इस बार वह पीछे जोर से चुंबन महसूस करि ..





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वह निचे देखि तब उसे पता चला की वह चुंबन तोह सलीम के लोडे में वजह से हैं ..

वह ग़ुस्सा होने के बजाय शर्माने लगी .. उसे सलीम के बॉक्सर में उसके सख्त उभर की सोच रही थी .. उफ़ अब इनको कैसे बताऊ की उन्ही का वहां का .. मुझे पीछे से चुभ रहा हैं .. उफ्फ्फ

तभी और एक ब्रेक से बस रुक गयी तब सलीम का सख्त लोढ़ा अब और भी जोर से रौशनी की छटड़ों पर डाब गया .. इस बार इससे रौशनी के मुँह से थोड़ी और अहह निकली .. (उफ्फ्फ है यह उनका वहां उफ्फ्फ कुछ बोलना पड़ेगा उन्हें लेकिन कैसे बोलू उफ्फ्फ )

वह सलीम को पीछे मुद देखि .. सलीम अनजान बनते हुए रौशनी को देखने लगे .. रौशनी अपने आँखों से निचे इशारा कर रही थी लेकिन सलीम अनजान बन के उसे क्या हुआ सर हिला कर पूछने लगे ..

रौशनी सलीम के कानों में बुदबुदायी “सलीम जी निचे से आपका कुछ चुभ रहा हैं मुझे … प्लीज उसे हटाइये न .. बहुत hi चुभ रहा हैं जब ब्रेक लग रहा हैं तब .. प्लीज ..”

सलीम मन में मुस्कुराया .. “क्या चुभ रहा हैं आपको रौशनी जी .. साफ़ साफ़ बताइये समझ नहीं आ रहा हैं मुझे”

रौशनी अब शर्मा रही थी, सलीम को वह कैसे बोलती उफ्फ्फ..

“सलीम आपके निचे जो हैं न बड़ा सा अह्ह्ह चुभ रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ प्लीज हटाइये उसे ..”

“रौशनी जी उफ्फ्फ्फ़ माफ़ कीजिये .. वैसे बड़ा सा हैं आपको कैसे पता ..”

रौशनी तोह अब पूरी तरह से शर्माने लगी .. उसके गाल लाल हुए शर्म से .. अब वह कैसे बताती की सुबह वह उनके सख्त लुंड के उभर को देखि थी .. वह देखि थी की वह कैसे खुद के लुंड को खुजला रहे थे और उनका बड़ा लुंड ऑलमोस्ट उसे दिखाई भी दिया था ..

रौशनी चुप रही .. फिर बोली “सलीम जी बस आप उसे हटाइये .. प्लीज काफी उनकंफर्टबले फील हो रहा हैं ..”

सलीम अब पीछे हैट जाता हैं .. अब ज्यादा पीछे से दबाना नहीं चाहिए वह समझ गया .. और अभी भी उसके हाथ थे रौशनी के हाथों पर थे और उस बात से तोह रौशनी को कुछ ऐतराज़ नहीं था इसलिए सलीम खुश थे .

कुछ मं ऐसे hi अपने नाज़ुक हाथों पर सलीम के कठोर मज़बूत हाथों के स्पर्श का आनंद रौशनी लेने लगी .. वह भी सरप्राइज थी की उसे यह बात अच्छी लगने लगी थी .

फिर आख़िरकार उनका स्टैंड आ hi गया .. भीड़ में से उन्हें जल्द hi उतरना था .. पीछे से सलीम रौशनी की पुश करने लगा .. उसका हाथ अब रौशनी की कमर को पुश कर रहा था फिर रौशनी को उसके हाथों का स्पर्श अपने चूतड़ों पर भी महसूस हुयी .. लेकिन निचे उतरने की जल्दबाज़ी में वह कुछ बोली नहीं .. वहां सलीम उस मौके का फायदा उठाते हुए वह रौशनी के चूतड़ों को धीरे से मसलने लगा ..

फिर दोनों बस के निचे उतर गए .. और पेस्ट कण्ट्रोल के शॉप तक चलने लगे.
 
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