Adultery Manhoos se mahan tak - Page 9 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 72

कॉलेज में आज ज्यादा तर स्टूडेंट्स मुझे गौर से देख रहे थे . कल की घटना की वजह से मैं सबकी नज़रों में आ गया था मगर ये भी ाचा हुआ क सचाई जल्द hi सामने आ गयी वर्ण कॉलेज में रहना मेरे लिए मुश्किल हो जाता . पहले 2 लेक्चर लगाने क बाद जब मई और मोहित फ्री लेक्चर में कैंटीन की तरफ जा रहे थे तो एक लड़के ने आ कर मुझे बताया क प्रोफ वरिंदर ने मुझे उनके ऑफिस में बुलाया है. मैं तुरंत प्रोफ वरिंदर क ऑफिस की और चल पड़ा मोहित को मैंने कैंटीन में रुकने को कहा. प्रोफ ने मुझे ऑफिस में बिठाया और अपनी बात केहनी शुरू की

अब आगे-

प्रोफ व्: आओ बैठो अमित कैसे हो ?

अमित : ठीक हूँ सर आपने मुझे बुलाया था?

प्रोफ व् : हाँ तुमसे एक काम है. मगर पहले ये बताओ कल से आज तक किसी ने तुमसे कोई बात करने की कोशिश तो नहीं की जो भी कल कॉलेज में हुआ उसके रिलेटेड

अमित : नहीं सर ऐसी तो कोई बात नहीं हुई मगर बात क्या है?

प्रोफ व् : बात तो कोई खास नहीं है बस कल से प्रिंसिपल सर को बोर्ड क कुछ डायरेक्टर्स इस केस को रफा दफा करने और शिवानी को छोड़ने को कह रहे हैं.

अमित : तो सर ने क्या कहा?

प्रोफ व् : वो कभी नहीं मानेंगे मैं अछि तरह जनता हूँ उनको. हमारे प्रिंसिपल बहुत इंसाफ पसंद इंसान हैं. अगर उन पर ज्यादा दबाव बनाया गया तो वो रिजाइन करना पसंद करेंगे बजाये क उनके आगे झुकने क. और मुझे नहीं लगता क कॉलेज बोर्ड उनको रिजाइन करने देगा क्यूंकि आज कॉलेज का जो इतना नाम है उसके पीछे प्रिंसिपल साहब का बहुत बड़ा हाथ है. उनके होते hi यहाँ सब डिसिप्लिन में रह कर पड़े करते हैं वर्ण ये अमीर घरों क बिगड़े शहज़ादे किसी को क्या समझते हैं. इस कॉलेज में बड़े बड़े आईएएस और आईपीएस ऑफिसर्स क बचे पड़ते हैं ऐसे में वो नहीं चाहेंगे क कॉलेज क इतने अचे डिस्कॉपलीनेड प्रिंसिपल रिजाइन करें.

अमित : मगर इस सब में तो उनको काफी मुश्किलों को सामना करना पद सकता है

प्रोफ व् : तुम उसकी चिंता मत करो वो झुकने वालों में से नहीं है. मुझसे ज्यादा उनको कोई नहीं जनता . यहाँ बहुत काम लोगो ये बात जानते हैं क मैं और प्रिंसिपल सर कॉलेज में एक साथ पड़े हैं और अचे दोस्त हैं . अगर कहीं ऐसी कंडीशन आयी क उन्हें रिजाइन करना पड़ा तो उनके साथ मैं भी रिजाइन कर दूंगा. इसी लिए मैं आज तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूँ जिसकी ज़रूरत तुम्हे पद सकती है.

तभी बहार से किसी ने नॉक किया और अंदर आने की परमिशन मांगी

प्रोफ व् : के इन. आओ आओ नीरज बैठो मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था. इससे मिलो ये है अमित फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है और तुम्हारी तरह hi रेसलिंग का स्टूडेंट है तुम्हारा जूनियर . मैंने इसी क बारे में बात की थी तुमसे

उस लड़के ने आ कर पहले सर क पैन छुए और सर ने उसे मेरे बारे में बताया. मैं और नीरज दोनों एक दूसरे को देख कर छिनक गए .

नीरज : तुम यहाँ ? मैं कब से तुम्हे ढूंढ रहा हूँ . तुम एक बार भी मुझसे मिलने नहीं ए दोबारा ? मैंने डॉ से भी पूछा था मगर उनके पास भी तुम्हारे रिलेटेड कोई इनफार्मेशन नहीं थी. थैंक्स यार अगर उस दिन तू नहीं अत तो पता नहीं मेरा क्या होता.

प्रोफ व् : क्या तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो ?

नीरज : जनता तो नहीं था मगर अब जान गया हूँ. अभी आप hi ने इसका नाम बताया . सर ये वही है जिसने उस दिन मुझे उन लड़कों से बचाया था मगर ये मुझे हॉस्पिटल में छोड़ कर पता नहीं कहाँ गायब हो गया.

नीरज वही लड़का था जिसे मैंने कॉलेज रोड पर गुंडों से बचाया था और हॉस्पिटल में छोड़ कर मैं निकल गया था. नीरज क चहरे पर चोट का निशान अभी भी था और सर क बाल भी छोटे छोटे थे शायद इलाज क दौरान डॉ ने कटे होंगे.

अमित : वो बात ये थी क डॉ ने मुझे कहा था ये पुलिस केस है और उन्होंने पुलिस को भी फ़ोन कर दिया था. मुझे ये दर था क अगर कहीं मेरा नाम किसी केस में आ गया तो मेरे घर वाले मुझे शहर पड़ने आने नहीं देंगे इसी लिए मैं निकल गया था. और इसी वजह से मैं हॉस्पिटल तुमसे मिलने नहीं आया . वैसे अब तुम कैसे बो ?

नीरज : मैं बिलकुल ठीक हूँ और आज से प्रैक्टिस शुरू करने वाला हूँ. शाम को स्टेडियम में एक साथ एक्ससरसीसे करेंगे

प्रोफ व् : चलो ये तो ाचा हुआ तुम पहले hi एक दूसरे को जानते हो अब मुझे तुम्हारी टेंशन नहीं . नीरज तुम्हारी मदद करेगा अगर कोई भी मुश्किल कभी आयी तो

नीरज : आप चिंता मत कीजिये सर अमित का तू मुझ पर पहले hi एहसान है . इसी की वजह से मैं आज सही सलामत हूँ. मैं हमेशा इसका साथ दूंगा. और अमित तुम्हे भी डरने की ज़रूरत नहीं है. मोंटी मुझे अछि तरह जनता है पहले भी मैंने उसकी अछि तरह एक बार सेवा की थी. जब उसे पता चलेगा क तुम मेरे दोस्त हो तो वो खुद hi पीछे हैट जायेगा.

प्रोफ व् : मैं चाहता हूँ तुम एक दूसरे को अछि तरह समझ लो और एक दूसरे की ताकत बनना . तुम दोनों hi मेरी नज़र में अचे खिलाडी और स्टूडेंट हो . इस कॉलेज का नाम रोशन करना और हमेशा साथ रहना

अमित : ऐसा hi होगा सर हम भाइयों की तरह एक दूसरे का साथ देंगे

नीरज : मैं हमेशा इसे छोटे भाई की तरह अपने साथ रखूँगा.

प्रोफ व् : अब तुम लोग जा सकते हो मैं भी ज़रा प्रिंसिपल सर से मिल कर आता हूँ.

हम दोनों सर क ऑफिस से बहार आ गए . नीरज मुझे अपने साथ कैंटीन में ले आया. मोहित मीनल क साथ कैंटीन में hi बैठा हुआ था. नीरज को कॉलेज में हर कोई जनता था रस्ते में जो कोई भी मिला वो उसे बुला कर hi गया. कैंटीन में नीरज क आते hi कई लड़के उठ कर स्पेशलय उससे मिलने ए और नीरज ने सबको मुझसे भी मिलवाया और सब को यही बताया क ये मेरा छोटा भाई है. मोहित भी ये सब देख कर हैरान हो रहा था. मैं नीरज को मोहित क पास hi ले गया

अमित : नीरज भैया ये है मोहित . हम दोनों एक hi क्लास में है और ये मेरा एक मात्रा दोस्त है कॉलेज में.

और मोहित ये हैं नीरज भैया हमारे सीनियर हैं और ये भी रेसलिंग खेलते हैं

नीरज : hello मोहित तुम अमित क दोस्त हो सो आज से तुम मेरे भी दोस्त हो

मोहित : शुक्रिया भैया

मोहित ने मीनल को नीरज से इंट्रोडस करवाया और फिर हमने कोल्ड ड्रिंक पीनी शुरू की.

मोहित : यार वो तेरी कौसिन्स तुमसे मिलने क लिए आयी थी मैंने उनको बोलै था क तुम प्रोफ से मिलने गए तो शायद अब वो वापिस क्लास में चली गयी होंगी तुम उनसे मिल लेना

अमित : क्या कह रही थी वो

मोहित : कहा तो कुछ नहीं बस तेरे बारे में hi पूछ रही थी.

मीनल : वो इस वक़्त लाइब्रेरी में होंगी क्यूंकि लेक्चर तो फ्री है

अमित : चलो कोई बात नहीं बाद में मिल लूंगा .

नीरज : अमित तुझे मेरे साथ मेरे घर चलना होगा

अमित : कोई खास बात है क्या?

नीरज : मेरे माँ डैड तुमसे मिलना चाहते हैं. पता है उन्होंने तुम्हे कितना ढूँढा वो तुम्हारा शुक्रिया ऐडा करना चाहते हैं क तुमने मेरी जान बचाई .

अमित : इसमें कोण स बड़ी बात है . आप उनको बोल देना थैंक्स की कोई ज़रूरत नहीं मैं उनके बेटे जैसा hi हूँ.

नीरज : जो भी कहना है तू खुद hi बोल देना मिल कर. बस इतना सुन ले क तू मेरे साथ मेरे घर चल रहा है आज.

अमित : हम फिर किसी दिन चलेंगे न आप के घर

नीरज : एक बार बोल दिया तो बोल दिया आज hi चलना है. अब कोई बहाना नहीं

मैं मोहित की तरफ देखने लगा क क्या करूँ

नीरज : उसकी तरफ क्या देख रहा है? वो भी तो साथ में चलेगा

मोहित : अरे भाई मुझे बीच में मत घसीटो मुझे एक बहुत ज़रूरी काम है आप दोनों चले जाओ

अमित : ठीक है तो फिर मैं नीरज भैया क साथ उनके घर हो आऊंगा मगर मैं घर कैसे आऊंगा ?

नीरज : वो मैं देख लूंगा

उसके बाद लेक्चर की बेल्ल बज गयी मैं मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने चला गया और नीरज अपने दोस्तों से मिलने चला गया. हम दोनों ने एक दूसरे क no. एक्सक्स्चंगे किये . नीरज ने मुझे छुट्टी क वक़्त पार्किंग में मिलने लो कहा और चला गया.

मैंने बाकि क लेक्चर अटेंड किये और फिर मोहित क साथ साइंस ब्लॉक में चला गया. हम दोनों मीनल और राधा क वेट कर रहे थे क लेक्चर की बेल्ल बजते hi राधा मीनल और नेहा दीदी एक साथ आती हुई नज़र आयी

नेहा दीदी : ये सब क्या ड्रामा था ? उस लड़की ने%
 
अपडेट 73

शीला बुआ फिर से किचन में चली गयी और नीरज अपने डैड को फ़ोन करने लग गया. मैं बैठा सोचने लगा क वाकई में नीरज की बात सही थी दुनिया गोल है . कहाँ मैं शीला बुआ क घर आने क बहाने खोज रहा था और अब तो सीधा मेरी एंट्री घर में हो गयी मैं जब चाहे यहाँ आ सकता हूँ और शीला बुआ भी अब मुझे मेरे हर सवाल का जवाब भी दे देंगी . जाने अनजाने मैं अपनी मंज़िल क पास आ गया था. मेरे दिल में अपने माता पिता क बारे में जानने की तीव्र इच्छा फिर से जग उठी.

अब आगे -

नीरज : डरा भैया को कैसे जानते हो तुम

अमित : एक hi गाओं से हैं तो जान पहचान तो होगी hi. वैसे मैं उनके साथ hi कुश्ती करता हूँ और उनसे बहुत कुछ सीखा है.

नीरज : तो इसका मतलब वो तू hi हो जिसके बारे में भैया ने बताया था क इस बार उनके साथी ने जीता है मुकाबला तो क्या वो तुम्हे हो?

अमित : जी मुझे hi मौका मिला था इसी वजह से तो कॉलेज में एडमिशन मिला है

फिर मैंने नीरज को बताया क कैसे प्रिंसिपल सर ने मुझे वहां देखा था और कैसे मुझे एडमिशन मिला.

नीरज : इसका मतलब है तुम तो मुझसे भी अचे खिलाड़ी होंगे रेसलिंग में क्यों की जो डरा भैया क बराबर है वो तो मुझसे ाचा hi होगा. मैं जो खुद उनसे काफी कुछ सीखता हूँ.

अमित : ऐसी बात नहीं है मुझे तो अभी काफी कुछ सीखना है.

हम बातें कर रहे थे क शीला बुआ खाने को काफी कुछ ले आयी

अमित : अरे बुआ ये सब . इसकी क्या ज़रूरत थी मैं कौन सा कोई मेहमान हूँ.

शीला बुआ : बीटा तुम नहीं जानते नीरज को बचा कर तुमने जो एहसान हम पर किया है वो हम कभी नहीं उतर सकते . ये हमारी ज़िन्दगी का सहारा है. मैं तुम्हारे पेअर धो धो कर भी पियून तो काम है.

अमित : ये क्या बुआ आप ने तो ऐसा कह कर मुझे पराया कर दिया. अगर मेरी जगह डरा भैया होते तो क्या आप उनसे भी यही कहती? आप मेरी रीता मौसी की सहेली हैं तो मेरी भी मौसी हैं और बुआ भी तो बताइये मैंने क्या एहसान किया .

शीला बुआ ने फिर से मुझे अपने गले से लगा लिया और स्नेह से मेरे सर पर हाथ फिरने लगी.

शीला बुआ: तू सच में बहुत ाचा है . काश तुम्हारी माँ ज़िंदा होती तो कितनी खुश होती क उसने किस हीरे को जनम दिया है.

अमित : बुआ आप क मुँह से माँ क बारे में सुन्ना मुझे बहुत ाचा लगता है. आप मुझे बताया न उनके बारे में .

शीला बुआ: क्या जानना चाहता है ? मैं जो जानती हूँ सब बता दूंगी मगर पहले ये खाना खा के ठंडा हो रहा है.

मैं बुआ की बात मन कर उनके साथ खाना खाने लगा . खाने क साथ भी मैं बुआ से माँ क बारे में बात करता रहा . शीला बुआ में मुझे जनरल सी बातें बताई क गाओं में वो क्या किया करती थी कैसे रीता मौसी क साथ वो दिव्या मौसी और मेरी माँ क साथ खेला करती या कैसे दिव्या मौसी और मेरी माँ मिल कर रीता मौसी को तंग करती. मैं तो बुआ क मग से माँ क बारे में सुन कर अतीत को महसूस करने की कोशिश कर रहा था. बुआ क मुँह से माँ क बारे में सुनते सुनते कब 5 बजने को हो गए पता hi नहीं चला. हमारी बातों क दौरान नीरज रेस्ट करने भी चला गया मगर मैं वैसे hi बुआ क पास बैठा सब सुनता रहा. शीला बुआ भी मुझे वो सब बताते बताते जैसे अतीत में खो गयी थी . हम दोनों की बातों पर नीरज ने विराम लगाया.

नीरज : क्या माँ तुम अभी तक अमित को बातों में लगाकर बैठी हो . देखो टाइम क्या हो गया है और अब हमें प्रैक्टिस करने भी जाना है.

शीला बुआ: क्या इतना वक़्त हो गया ? बातों बातों में पता hi नहीं चला. और ये क्या कह रहा है अमित भी साथ जायेगा?

नीरज : अमित भी हमारे कॉलेज की रेसलिंग टीम में है तो इसे भी तो जाना होता है.

शीला बुआ: सच ! ये तो बहुत अछि बात है. मगर अमित तुम गाओं से कैसे आना जाना करते हो इस सब क लिए

नीरज : ये इसी शहर में रहता है अपने एक दोस्त क घर

शीला बुआ: ये क्या अमित ऐसे बिलकुल नहीं चलेगा . अपनी बुआ क होते हुए तू किसी और क घर रहे ये मुझे बिलकुल ाचा नहीं लगता. तुम हमारे साथ इसी घर में रहोगे मैं तुम्हे किसी और क घर नहीं रहने दूंगी.

अमित : अरे बुआ जी ऐसी कोई बात नहीं है . असल में मैं तो हॉस्टल में रहने आया था और वो मेरा दोस्त मुझे अपनी कसम देकर अपने घर ले गया . अब आप hi बताइये क ये ाचा लगेगा मैं उसकी कसम को तोडूं. मैं वडा करता हूँ मैं आपसे मिलने आता रहूँगा.

शीला बुआ : ठीक है मगर तुम्हे हमारे घर रहने भी आना होगा वर्ण अगर रीता को पता चला क मेरे यहाँ होते तू किसी और क पास रहता रहा है तो वो मुझसे नाराज़ होगी

अमित : अरे गलती से भी ये बात आप किसी से मत कीजियेगा . असल में फॅमिली में किसी को नहीं पता क मैं अपने दोस्त क साथ रहता हूँ . सब को यही कहा है क मैं हॉस्टल में hi हूँ. वर्ण रीता मौसी और रजनी मौसी मेरा वो हल करेंगी क मैं सोच भी नहीं सकता. उनके होते मैं किसी और क साथ रहूँगा तो उनको तो गुस्सा आएगा hi.

शीला बुआ : क्या मतलब उनके होते? क्या वो भी इसी शहर में हैं?

अमित : आप नहीं जानती ? रजनी मौसी और रीता मौसी इसी शहर में शिफ्ट हो गयी हैं.

शीला बुआ: मुझे किसी ने बताया तक नहीं . ला मेरी उससे बात करवा कितने साल हो गए उससे बात हुए.

मैंने रीता मौसी को फ़ोन लगाया और उनकी शीला बुआ से बात करवाई. शीला बुआ की आवाज़ सुन कर पहले तो रीता मौसी शॉकेड हुई मगर बाद में दोनों ऐसे बातें करने लगी जैसे फिर से बचपन लौट आया हो. हमें देर हो रही थी इस लिए मैंने अपने फ़ोन से कॉल काट कर शीला बुआ क फ़ोन से रीता मौसी को कॉल लगा दी और नीरज क साथ निकल गया प्रैक्टिस करने

उधर राधा क अंदर भी आज हलचल मची हुई थी. आज पहली बार वो इस तरह मेरे गले मिली थी. वास्तव में उसके जिस्म पर आज पहली बार किसी लड़के का एहसास उसे विचलित कर रहा था. उसे समझ नहीं आ रही थी क ये कैसा एहसास है. एक और तो वो ये सोच रही थी क अमित ने जो कुछ भी किया है वो उसकी खातिर किया है और वो अब जिस मुसीबत में फसा था ये सब उसी की वजह से था. इस लिए उसके दिल में अमित क लिए चिंता और अट्रैक्शन थी. दूसरी और एक जवान जिस्म एक लड़के की छुहान उसके अंदर गुदगुदी पैदा कर रही थी. राधा को समझ नहीं आ रही थी क उसे ये क्या हो रहा है. वो जब से कॉलेज से लौटी थी तब से अपने कमरे में उठते बैठते उसका मन बस अमित क बारे में hi सोच रहा था. अमित ने किसी फ़िल्मी हीरो की तरह कॉलेज में पहले दिन hi उसकी इज़्ज़त की हिफाज़त की थी. और कैसे उन आवारा मजनुओं को सबक सिखाया था. पहले तो उसे अमित से कोई खास लगाव नहीं था और वो भी अपनी माँ की वजह से अमित को नापसंद करती थी. मगर अब उसकी सोच बदल रही थी.

राधा : ( मन में) कितना ाचा है अमित . सब से कितने प्यार से बात करता है. सब उसे पसंद करते हैं . मेरी खातिर उसने इतना बड़ा पन्गा ले लिया और खुद मुसीबत में फास गया. मुझे तो उसमे कोई बुराई नज़र नहीं आती फिर पता नहीं माँ क्यों उससे नफरत करती है और कुछ बताती भी नहीं. जो भी हो मुझे माँ से पता करना होगा आखिर क्या वजह है उनकी नफरत की.

राधा अपनी माँ दिव्या से अमित से नफरत का कारन जानने चली गयी मगर ऐसा ता पहले भी कई बार वो पूछ चुकी थी मगर दिव्या ने कभी उसे कोई संतुष्ट उत्तर नहीं दिया था.

शहर से बहार एक बड़े से फार्म हाउस में मोंटी शराब क पेग लगता हुआ साथ साथ सिगरेट क काश लगा रहा था. उसके साथ रॉकी और टोनी भी बैठे पेग और काश लगा रहे थे.

मोंटी : साला कौन गद्दार है समझ नहीं आ रहा है . ाचा भला प्रिंसिपल उसे मादरचोद को कॉलेज से निकल रहा था. और पुलिस भी ह्यूमेन ने बुला ली थी ऐन मोके पर किसी ने अपने माँ छुडाली . अगर मुझे पता चल जाये ये किसका काम है तो उसका वो हल करूँगा क उसे भी पता चल जाये मोंटी से गद्दारी का क्या अंजाम होता है.

रॉकी : गद्दार का पता लगाना तो ज़रूरी है hi साथ में उस देहाती का कोई और भी इंतज़ाम करना पड़ेगा. वो तो साला खुश हो रहा होगा क वो बच गया.

टोनी : भाई मैंने तो पहले भी कहा था हम खुद hi निपट लेते हैं उससे . है hi क्या वो गांडू . उसकी हड्डी पसली तोड़ कर फेंक देंगे न hi गेम खेल पायेगा न hi कॉलेज आ पायेगा.

मोंटी : मैं तो शीना की वजह से चुप था मगर अब मैं खुद hi उसका इंतज़ाम करता हूँ. मगर अभी हमें कुछ दिन वेट करना होगा जब तक ये मामला शांत नहीं होता नहीं तो वो प्रिंसिपल हमारे पीछे पद जायेगा.

तभी दरवाज़ा खुलता है और मोंटी का एक और साथी रघु अंदर दाखिल होता है.

रघु : मेरा वेट तो कर लेते अकेले अकेले hi शुरू हो गए

मोंटी : तू अकेला आया है या उसे साथ लेकर

रघु : अकेला आना होता तो पहले hi आ जाता . लो ले आया हूँ इसे भी

तभी शालू भी अंदर दाखिल हुयी इस वक्त वो जीन्स और T-shirt में थी और हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी. शालू को देखते hi टोनी और रॉकी की आँखों में हवस नाचने लगी.

मोंटी : इधर आओ मेरे पास वहां क्या कड़ी हो

शालू चलते हुए मोंटी क पास आ कर कड़ी हो गयी.

शालू : मुझे यहाँ क्यों बुलाया है?

मोंटी : सवाल नहीं कोई सवाल नहीं. तू मेरी रंडी है समझी इस लिए अपनी औकात में रह यहाँ सवाल सिर्फ मैं पूछूंगा

तूने hi वो वीडियो बनाया था न उस हरामज़ादे को बचने क लिए?

शालू : मैं ऐसा क्यों करुँगी ? तुमसे गद्दारी करने का अंजाम मैं अछि तरह जानती हूँ. मैं तो उस दिन से उससे मिली भी नहीं जब तुमने मुझे मन किया था.

मोंटी शालू की गर्दन दोनों हाथो से दबोच लेता है और कास क दबा देता है.

मोंटी : हरामज़ादी अगर तूने मेरे साथ कोई होशियारी दिखाई तो तेरा वो हल करूँगा की गली क कुत्तों से चुदती फिरेगी.

शालू : मैंने ऐसा कुछ नहीं किया अगर कभी साबित हो जाये क मैंने ऐसा कुछ किया है तो मैं तुम्हारे सामने हूँ जो चाहे कर लेना.

मोंटी : ठीक है मगर यद् रखना अगर तेरा इसमें हाथ हुआ तो मैं छोडूंगा नहीं.

शिवानी तो फ़ैल हो गयी मगर मुझे पूरा यकीन है तू ज़रूर पास होगी . इस लिए अब तुझे उसे अपने जाल में फसा कर मेरे पास लाना होगा. अब कोई और प्लान नहीं होगा अब सीधा एक्शन होगा तू उसे मेरे पास लाएगी और मैं उसे ठिकाने लगा दूंगा.

शालू : मैं ऐसा नहीं कर सकती . अब वो मेरी बात नहीं मानेगा क्यूंकि उस दिन उसने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया था कॉलेज में

मोंटी ने फिर से शालू की गर्दन को ज़ोर से दबा दिया जिससे उसकी सांस टूटने लगी

मोंटी : साली मुझे इंकार करती है कुटिया अपनी औकात भूल गयी.

मोंटी को गुस्से में शालू की गर्दन दबाते देख टोनी ने उठ कर मोंटी को रोका दिया क्यूंकि शालू की सांस टूटने लगी थी

टोनी : क्या करता है यार वो ठीक hi तो कह रही है अब वो साला आसानी से किसी पर भी यकीन नहीं करेगा . वैसे भी हमें किसी की ज़रूरत नहीं है हम खुद hi कर लेंगे सब. तू दिमाग ठंडा कर और चिल मर . शराब और शबाब दोनों अपने सामने हैं तू मज़ा कर. भूल जा साडी टेंशन

रघु जो अभी आया था उसने सबके लिए पेग बनाया और खुद भी पेग लगाने लगा. मोंटी टोनी क समझने से शांत हुआ और बैठ कर पेग लगाने लगा. शालू अपनी गर्दन को मसल कर अपनी हालत ठीक कर रही थी. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे. तभी मोंटी ने शालू को बालों से पकड़ कर घसीटा और अपने आगे घुटनो पर बिठा दिया.

मोंटी : चल अपना काम शुरू कर

शालू ने मोंटी की पेण्ट की जीप खोली और अंडरवियर को साइड कर क उसके लैंड को बहार खींच लिया जो अभी सोया हुआ था. शालू ने चुप चाप मोंटी क लैंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे सूचक करने लगी. शालू को मोंटी का लैंड चूसते हुए देख कर बाकि तीनो भी अपना लैंड पेण्ट से बहार निकल कर हिलने लगे.

शालू किसी प्रोफेशनल की तरह लैंड चूस रही थी जिससे मोंटी का लैंड उसके मुँह में पूरा खड़ा हो गया और उसका स्टाइल देख कर बाकि तीनो क भी लैंड खड़े बो गए. मोंटी का लैंड जैसे hi पूरी औकात में आया उसने शालू का सर दोनों हाथों से पकड़ लिया और खड़ा हो कर उसके मुँह में तेज़ तेज़ धक्के मरता हुआ उसे मुँह को छोड़ने लगा. मोंटी का लैंड सीधा शालू क गले में जाकर लग रहा था जिससे उसके गले की नसें फूलने लगी आँखें बहार आने लगी और मग से गऊओं गऊओं गऊओं की आवाज़ें निकलने लगी. मोंटी अपना पानी निकलने तक शालू क मुँह की बेदर्दी से चुदाई करता रहा और फिर ढीला हो कर सोफे पर आराम से बैठ गया. शालू भी अपनी साँसों को दुरुस्त करने लगी.

शालू की साँसे अभी संभाली hi थी क टोनी ने पीछे से आकर शालू की T-shirt पकड़ कर निकल दी. काली बरंडेड ब्रा में कैसे हुए बड़े बड़े गोर सफर बूब्स सबकी आँखों क सामने आ गए . टोनी ने जल्दी से उसकी ब्रा भी खींच कर उतर दी और पकड़ के झटके से उठा कर बड़े सोफे पर पटक दिया. टोनी ने शालू की जीन्स भी खींच कर उतर दी और पेंटी भी.

शालू का गोरा माध मस्त बदन चरों क सामने था जिसे कई बार सब मिल कर रगड़ चुके थे मगर हर बार उसे देख कर उनकी आँखों में हवस मचल जाती थी. शालू इन चरों की पर्सनल रंडी थी जिसे कई बार ये फार्म हाउस होटल और कॉलेज क कैंप टूर पर भी मिल कर रगड़ चुके थे. शालू को नंगी करने क बाद मोंटी को छोड़ कर सब ने अपने अपने कपडे उतर दिए और कदम लगा कर शालू पर चढ़ गए . टोनी ने शालू की टाँगें कंधो पर राखी और एक hi झटके में पूरा लैंड शालू की छूट में घुसा दिया. शालू क मुँह से तेज सिसकी निकली. टोनी ने जैसे hi झटके मरने शुरू किया शालू क मुँह से आवाज़ें निकलने लगी और उसकी आवाज़ को रॉकी ने बंद किया उसके मुँह में अपना लैंड घुसा कर.

एक तरफ टोनी शालू की छूट में धक्के पेल रहा था तो रॉकी उसके मुँह को छोड़ रहा था. रघु पास में बैठा लैंड हिला कर अपनी टर्न की वेट कर रहा था. 2 मिनट्स बाद टोनी अपनी जगह से हैट गया और उसकी जगह रघु आ गया . रघु ने पोजीशन चेंज की और सोफे पर hi शालू को अपनी तरफ मुँह कर क अपने लैंड पर बैठा लिया. अब रघु शालू क बड़े बड़े बूब्स मसलता हुआ उसे अपने लैंड पर नचा रहा था. टोनी सोफे पर खड़ा हो गया और शालू क मुँह में लैंड पेलने लगा तभी रॉकी शालू क पीछे आया अपना लैंड उसकी गांड में घुसा दिया. गांड में लैंड जाने से एक पल क लिए शालू का जिस्म झटके से हिला मगर अगले hi पल रॉकी का पूरा लैंड गांड क अंदर था. रॉकी और रघु एक दूसरे से ताल मिलते हुए बराबर धक्के मरते हुए शालू को छोड़ रहे थे और टोनी शालू क मुँह में धक्के पेल रहा था.

मोंटी पास में बैठा शराब पिता रहा और सिगरेट सुलगता रहा उसे जैसे शालू की चुदाई में कोई इंटरेस्ट नहीं था. मगर शालू की चुदाई देखते हुए उसे वो लड़की यद् आ गयी जिसकी वजह से ये सारा पन्गा शुरू हुआ था कॉलेज में .’ राधा ‘

मोंटी शराब पीटा हुआ उस लड़की को छोड़ने क बारे में सोचने लगा वो लड़की मोंटी क दिल में उतर गयी थी. चाहे मोंटी क पास लड़कियों की कोई कमी नहीं थी मगर उस लड़की की बात hi अलग थी . बिना किसी सजावट और मेकअप क सिंपल से कपड़ों में भी क्या क़यामत लगती थी. उसका वो मासूम सा चेहरा किसी को भी आकर्षित कर सकता था और उसके वो गुलाबी होंठ जिसे वो उस दिन चूसने hi वाला था क वो देहाती बीच में आ गया.

मंथ पेग को एक hi झटके में गले से नीचे उतरता हुआ खड़ा हो गया और बोलै.

मोंटी : तुझे तो मैं किसी भी कीमत पर अपने नीचे लेकर रहूँगा.

मोंटी की इस बात पर किसी का ध्यान नहीं गया . उसके तीनो साथी इस वक़्त बस शालू की चुदाई में hi लगे हुए थे. मोंटी उनको चुदाई करता हुआ देख कर बहार निकल गया और कार लेकर पता नहीं किधर गया.

एक और फार्म हाउस पर कॉलेज की घटनाओं पर चर्चा हो रही थी और चार लोग इस घटना पर मंथन कर रहे थे और आगे क्या किया जाये इसी पर चर्चा हो रही थी.

शीना : आखिर किस ने वो वीडियो बनायीं है ? हमारे इलावा और कौन था वहां पर जिसने हमारा प्लान फ़ैल कर दिया.

शिवानी : जो भी था वो बाद में पता करना पहले मेरे बारे में कुछ सोचो मुझे तो कॉलेज से निकल दिया जायेगा . प्रिंसिपल मेरी कोई बात सुनने को भी तैयार नहीं वो टी मुझसे तुम सब क नाम जानना चाहता है.

नितिका : ऐसी गलती भूल कर भी नहीं करना वर्ण हम सब मरे जायेंगे

शिवानी : मगर मैं क्या करूँ ? क्या तुम लोग मेरी मदद नहीं करोगी

शीना : रिलैक्स शिवानी मैंने पापा को बोल दिया था और उन्होंने कहा है क वो डायरेक्टर से बात करेंगे तुम टेंशन मत लो उसकी बात कोई ताल नहीं सकता

शिवानी : कब करेंगे बात मेरा तो टेंशन से बुरा हल है

वैशाली : रिलैक्स बेबी चिल . मैंने भी पापा से बात की है और उन्होंने तो मेरे सामने डायरेक्टर को बोल भी दिया था फ़ोन पर . तुम टेंशन मत लो तुम्हे कुछ नहीं होने देंगे.

निकिता : नाउ लेटस हैवे सम एन्जॉय तो गेट रीद ऑफ़ थी नॉनसेंस थिंग्स

इतना कह कर निकिता ने शिवानी क होंठो की अपने होंठो में पकड़ लिया और उकसे दूध मसलने लगी . वैशाली भी पीछे से शिवानी क साथ चिपक गयी और उसकी गर्दन पर किश करती हुई उसकी छूट को कपड़ो क ऊपर से रगड़ने लगी. चारो सहेलियों ने अभी कुछ देर पहले hi बेयर पि थी और हमेशा की तरह एक दूसरे क साथ सेक्स शुरू कर दिया ी मैं लेस्बियन. तीनो एक दूसरे क कपडे खींच कर उतर रही थी मगर शीना अभी भी कुछ सोच रही थी. वैशाली ने उसे अपने साथ मिलाने की कोशिश की मगर उसने मन कर दिया. और फिर तीनो वहीँ पर नंगी हो गयी. एक दूसरे क दूध मसलते हुए स्मूच करती और कभी छूट को चाट टी उनके पास यहाँ पर कई डिलडो वगैरह भी रखे हुए थे . जिनको साथ लेकर अब तीनो एक दूसरे की प्यास बुझाने लगी मगर शीना कुछ सोच सोच कर परेशां हो रही थी.
 
भाई लोग कल पता नहीं किस प्रॉब्लम की वजह से लॉगिन नहीं हो प् रहा था . मैं कोशिश करूँगा आज एक अपडेट दे दूँ टेंशन मत लो
 
अपडेट 74



“आ गया मेरा शेर” जैसे hi मैं और नीरज स्टेडियम में पहुंचे कोच साहब ने इतना कहते हुए नीरज को गले लगा लिया.

कोच : अब तबियत कैसी है तेरी ?

नीरज : आपके आशीर्वाद से ाचा हूँ कोच साहब

कोच : तो आज से शुरू कर रहा है प्रैक्टिस?

नीरज : सोचा तो यही है. इसी लिए आज आ गया. बहुत दिन हो गए अब तो शरीर कुछ ढीला सा लगने लगा है.

कोच : ये तो हफ्ते में सेट हो जायेगा. कुछ पता चला वो कौन लोग थे ?

नीरज : मुझे लगता है वो बॉयज कॉलेज वाले hi होंगे इस बार फाइनल में उनके hi खिलाडी को हराया था न .

कोच : तो पुलिस कंप्लेंट क्यों नहीं की तुमने ? मैं देखता हूँ उनको

नीरज : उसकी कोई ज़रूरत नहीं है कोच साब उनको भी देख लेंगे

कोच : अपना भी ध्यान रखना. आओ तुम्हे तुम्हारे नए साथियों से मिलवाता हूँ

कोच साब ने सिटी बजा कर सब को इकठ्ठा किया और नीरज से सबको इंट्रोडस करवाया

कोच : ये है नीरज हमारे कॉलेज की शान और तुम लोगों का सीनियर . अन्तर कॉलेज में गोल्ड और अन्तर यूनिवर्सिटी में ब्रोंज जीत चूका है और इस बार गोल्ड जीतेगा .

मैं भी सबके साथ खड़ा ताली बजा रहा था. सब बरी बरी से नीरज से मिलने लगे. जो पुराने और सीनियर खिलाडी थे वो भी सब नीरज क लौट आने से खुश थे और उसको गले मिल रहे थे.

कोच : इधर आओ अमित तुम भी मिल लो नीरज से. नीरज ये है....

नीरज : मैं इसे अछि तरह जनता हूँ कोच साब . ये न होता तो शायद मैं अपने पैरों पर आपके सामने न खड़ा होता. इसी ने उस दिन मुझे बचाया था और हॉस्पिटल पहुँचाया था.

कोच : शाबाश मेरे बचे . तुमने बहुत ाचा काम किया है. नीरज क बाद अगर इसकी कोई जगह ले सकता है तो वो तुम hi हो. आज से तुम नीरज क साथ hi प्रैक्टिस करना ताकि जल्दी से उसके जैसे बन sako,usse सिख सको

नीरज : इसे मैं खा सिखाऊंगा कोच साब ये तो पहले hi मुझसे 21 hi है. मैंने आपको बताया था न अपने कजिन डरा क बारे में . ये उनके hi साथ रेसलिंग करता रहा है. और उनके सरे दो पेंच ये जनता है. हाँ इतना ज़रूर है क आज से हम साथ में प्रैक्टिस करेंगे क्यूंकि ये मेरा छोटा भाई भी है.

नीरज ने सबके सामने मुझे गले लगा कर सबको बता दिया क ये मेरा छोटा भाई है. नीरज ने सीनियर खिलाडियों को खास तौर पर ये हिदायत दी क कॉलेज में या बहार भी कहीं अगर मुझे किसी मुसीबत में देखें तो मेरी मदद की जाये. उसके बाद सभी सीनियर खिलाडियों ने मुझे गले लगा कर अपना समर्थन दिया.

आज का दिन तो बातों में hi निकल गया कोई प्रैक्टिस हुई नहीं इस लिए हम जल्दी hi फ्री हो गए और नीरज मुझे मोहित क घर क बहार छोड़ कर चला गया हालाँकि वो मुझे अपने घर पर रुकने क लिए भी ज़ोर लगता रहा. घर से अपनी किताबें साथ लेकर मैंने बाइक उठायी और मंजू मम क घर पहुँच गया. आज मम ने मुझे पड़ना शुरू कर दिया. ट्यूशन से फ्री हो कर मैं जब वापिस आया तो अंकल भी घर पर मौजूद थे. मैंने अंकल क पाऊँ छुए उन्होंने आशीर्वाद दिया

अंकल : इतना सब तुम्हारे साथ कॉलेज में हो गया और तुमने मुझे बताया भी नहीं. मैंने तुमसे कहा था न क तुम भी मुझे मोहित क सामान अज़ीज़ हो फिर तुमने मुझसे बात क्यों नहीं की? मैं बात करता प्रिंसिपल से

अमित : प्रिंसिपल सर ने सब ठीक कर दिया अंकल आप को चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है . वैसे भी मोहित ने मुझे बताया क फैक्ट्री में नुकसान हुआ है ऐसे में आपको मैं और परेशां नहीं करना चाहता था.

अंकल : वैसे है कौन वो लड़की जिसने इतना गन्दा काम किया है. उसे अपनी और अपनी फॅमिली की इज़्ज़त की परवाह नहीं है क्या.

मोहित : उस लड़की का तो अभी पता नहीं पर इस सब क पीछे मोंटी का हाथ है जो अमित से बदला लेना चाहता है. मोंटी D.P. इंटरनेशनल क मद का बीटा है.

अंकल : क्याआ ! तो बीटा बाप पर गया है. तुम दोनों उससे ज़रा सावधान hi रहना. मैं भी प्रिंसिपल से एक बार इस बारे में बात ज़रूर करूँगा.

मोहित : ाचा डैड मुझे ज़रा काम है अमित क साथ क साथ , क्या हम जा सकते हैं?

आंटी किचन से जूस का गिलास लती हुई हमारे पास आयी और मुझे गिलास पकड़ाया

आंटी : अभी तो अमित आया है उसे सांस तो लेने दे

मोहित : माँ हम लेट हो जायेंगे तो मार्किट बंद हो जाएगी मुझे कुछ ज़रूरी सामान लेना है.

मैंने जूस का गिलास जल्दी से फिनिश किया और मोहित क साथ मार्किट क लिए निकल गया .

अमित : हम जा कहाँ रहे हैं?

मोहित : अरे यार कल मीनल का बर्थडे है और मैंने अभी तक उसके लिए गिफ्ट नहीं लिया. कब से तू हरी वेट कर रहा था . अभी उसके लिए गिफ्ट लेने जा रहे हैं

अमित : तुझे अब यद् आया? पहले hi जा कर ले अत . चल ये भी ाचा हुआ अब मैं भी उसके लिए कुछ ले लूंगा.

थोड़ी देर में hi हम बढ़िए स गिफ्ट शॉप क अंदर खड़े थे जहाँ बहुत से एंटीक पीेछे पड़े थे और कुछ आर्चीव कार्ड्स और teddy’s भी. मोहित ने मीनल क लिए एक बड़ा सा टेडी लिया जिसके हाथों में दिल पकड़ा हुआ था . मोहित ने उसे पैक करवाया और एक ाचा सा कार्ड भी लिया. मैंने मीनल क लिए कपल पीेछे लिया जो बॉक्स ओपन होने पर म्यूजिक क साथ डांस करता था. गिफ्ट्स देखते हुए मुझे लड़कियों वाले ब्रेसलेट नज़र आये जो बहुत hi एंटीक लग रहे थे. मैंने नेहा दीदी और राधा क लिए 2 पीेछे ले लिए.

गिफ्ट्स ले कर हम घर आ गए और डिनर साथ में करने क बाद अपने अपने कमरों में चले गए. मैं बीएड पर लेता सोच रहा था क मोहित फिर से मेरे पास आ गया.

मोहित : अब क्या सोच रहा है?

अमित : कुछ नहीं बस ये सोच रहा हूँ क उस दिन किसने वो वीडियो बना कर मेरी मदद की है . ज़रूर वो मोंटी और शीना क करीबियों में से hi कोई होगा वर्ण किसी को कैसे पता होता क वहां क्या होने वाला है. अगर वो मोंटी का करीबी है तो उसने मेरी मदद क्यों की ? और अगर मोंटी को पता चल गया तो वो ज़रूर उसका कोई न कोई नुकसान कर देगा ऐसे में मेरा भी फ़र्ज़ है मैं उसकी मदद करूँ. मंजू मम ने कहा क स्टाफ रूम में उनके टेबल पर किसी ने वो मेमोरी कार्ड रखा था . शायद वो कुछ छुपा रही हैं या फॉर हो सकता है ये सच भी हो.

मोहित : फिर तो प्रॉब्लम सोल्वे

अमित : कैसे

मोहित : देख एडमिन ब्लॉक में सब तरफ कक्तव लगे हुए हैं और क्लास रूम्स की गैलरीज में भी . और hi सकता है क ऑडिटोरियम में भी लगे हों तो हमें कॉलेज क सर्वर से सरे फुटेज चेक करने चाहिए. पर इसमें भी एक पन्गा है. इसकी परमिशन नहीं मिलेगी

अमित : देखते है शायद कोई रास्ता निकल आये. और एक बात है जो हमें पता लगनी है.

मोहित : वो क्या

अमित : उस दिन मैंने शालू को मोंटी ग्रुप क साथ खड़े देखा . पिछले कुछ दिनों से वो हमसे मिल भी नहीं रही. मुझे लगता है शालू को पता था क क्या होने वाला है मगर उसने मुझे नहीं बताया. लगता है वो भी मोंटी क साथ मिली हुई है

मोहित : इसका पता भी लगा लेंगे . फ़िलहाल तू टेंशन को साइड में रख और कल की बर्थडे पार्टी क बारे में सोच. कल हमने सोचा है क बहार किसी रेस्टोरेंट में पार्टी करेंगे कॉलेज फ्रेंड्स क साथ और फिर रात को क्लब में .

हम बातें कर रहे थे क दरवाज़े पर आहात हुई और आंटी कमरे में आ गयी.

आंटी : तुम लोग सोये नहीं अभी तक. क्या सुबह उठना नहीं है.

आंटी बात करती हुई मेरी तरफ गहरी नज़रों से देख रही थी मैं समझ गया क आंटी क्या चाहती हैं. मगर आज तो अंकल घर पर हैं फिर भी आंटी मेरे साथ सेक्स करना चाहती हैं. लगता है अंकल जल्दी सो गए होंगे.

मोहित : माँ वो कल हमारे फ्रंड का बर्थडे है तो उसी क बारे में बात कर रहे थे. आप सो जाइये हम भी सो जायेंगे.

आंटी : ठीक है मगर जल्दी सो जाना.

आंटी फिर एक बार मेरी तरफ देखती हुई मायूस हो कर वापिस लौट गयी. मोहित और मैं थोड़ी देर बातें करते रहे और फिर मोहित अपने रूम में चला गया. उसके जाते मैं भी सो गया.

“आज बड़ी देर करदी तुमने , मैंने तो सोचा था तुम्हारे साथ थोड़ा योग कर लुंगी.” आंटी मेरे कमरे में जूस का गिलास लेकर आयी.

अमित : वो आज थोड़ा ज्यादा hi टाइम लग गया.

मैंने उनके हाथ से जूस का गिलास लिया और पि गया.

आंटी: क्या तुम्हे मेरी तड़प नज़र नहीं अति ? कल रत भी मैं तुम्हारे पास आयी थी मगर मौका नहीं मिला.

अमित : आप तो सब देख hi रही हैं वक़्त hi नहीं कील प् रहा . वैसे अंकल तो घर पर hi थे रात को

आंटी : उनकी तो बात hi मत करो अगर उनको मेरा ख्याल होता तो मैं भला यूँ प्यासी रहती? जल्दी से मेरा कुछ सोचो आज तीन दिन हो गए तुमने मेरा ख्याल भी नहीं किया और कहते हो मैं तुम्हारी गफ हूँ.

अमित : चिंता मत कीजिये जैसे hi मौका मिलेगा आपकी साडी प्यास बुझा दूंगा.

मैंने आगे बाद कर एक हाथ आंटी की छूट पर रख कर उसे मुठी में मसल दिया . आंटी इसके लिए तैयार नहीं थी और एक डैम से उछाल पड़ी

आंटी : आउउउच ‘ ये क्या कर रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ कितनी गर्मी है यहाँ

आंटी : तो क्या पता चला

अमित : लगता है जल्दी ये आग बुझानी पड़ेगी

आंटी : तू बुझा दो न

अमित : थोड़ा सबर रखिये . मैं तसल्ली से ये काम करूँगा अभी मुझे तैयार होना है आप अभी जाओ

आंटी क होंठो पर किश करने क बाद मैं बाथरूम में घुस गया नहाने क लिए. डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करते वक़्त आज रानी बार बार मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. उस दिन क बाद आज रानी से मेरी नज़र मिल रही थी. रानी की चल में कुछ बदलाव नज़र आ रहा था . अब उसकी गांड थोड़ी और बहार को उभर आयी थी. नज़रों से रानी का मुआयना करते हुए मैंने नाश्ता किया और मोहित क साथ कॉलेज निकल गया.

आज मीनल का बर्थडे था और मोहित ने आज पार्टी का प्लान बनाया था जिसके लिए मीनल ने अपनी क्लास की कुछ फ्रेंड्स को भी बुलाया था. सब कैंटीन में इकठे हुए और बहार रेस्टोरेंट में जा कर पार्टी करने का डीडे किया. मीनल की क्लास में से राधा क इलावा 2 और लड़कियां आयी थी. राधा बहार जाने क लिए तैयार नहीं थी उसे दिव्या मौसी का दर था मगर मेरे कहने से वो मान गयी. मैंने मीनल और मोहित से बात कर क नेहा दीदी को भी इन्विते कर लिया. वो भी पहले तो मन नहीं रही थी क उनको लेक्चर छोड़ने पड़ेंगे मगर मेरे और राधा क कहने पर वो मान गयी.

मोहित की कार में मैं मोहित और नेहा दीदी बैठ गए दूसरी कार में राधा मीनल और उनकी 2 क्लास मातेस बैठ गए. हम 15 मिनट्स में एक बढ़िए से रेस्टोरेंट में पहुँच गए जहाँ पर एक टेबल पहले से hi मोहित ने बुक करवा क रखा हुआ था. हम सब उस टेबल क साथ लगी चेयर्स पर बैठ गए.

मीनल : मोहित अमित इनसे मिलो ये है मेरी फ्रेंड रीमा और ये है अंकिता .

मैंने और मोहित ने उन दोनों को hello कहा. दोनों hi खूबसूरत थी मगर रीमा को देख कर तो एक बार मैं उसकी खूबसूरती में खो गया. ऐसा लग रहा था जैसे फिल्मो की हेरोइन हो . गोरा चमकदार मुखड़ा नशीली आँखें ब्रोनिश कर्ली बाल तीखे नैन नक्श गुलाबी गाल और होंठ तो जैसे चेरी हो. मैं उसकी खूबसूरती में खोया बार बार उसे hi देखने लगा. रीमा ने भी कई बार नज़र उठा कर मुझे देखा. उसने ब्लैक कलर का टॉप और शामे मैचिंग जीन्स पहनी हुई थी जिसमे उसका परफेक्ट फिगर क़यामत ढहा रहा था.

मीनल : रीमा तुम मिलना चाहती थी न अमित से तो अब बात कर लो . अब तो हम सब फ्रेंड्स हैं जैसे ये मेरा फ्रंड है वैसे hi तुम्हारा भी है. अमित रीमा कई बार तुम्हारे बारे में मुझसे पूछ चुकी है मगर टाइम hi नहीं मिल प् रहा था . आज तो मौका भी है दस्तूर भी एक दूसरे से जान पहचान बढ़ाओ

रीमा : ऐसी कोई बात नहीं है वो तो बस ऐसे hi मैंने सुना था राधा से क कैसे आपने उसकी मदद की थी और फिर अभी जो हुआ उसकी वजह से भी मुझे पता चला क आप एक अचे इंसान हैं तो इसी लिए आप से मिलना चाहती थी

अमित : इसमें कौन स बड़ी बात है . मैंने तो बस अपना फ़र्ज़ ऐडा किया था .

रीमा : यही तो अचे लोगों की पहचान होती है क वो कभी अपनी किसी बात पर क्रेडिट नहीं लेते. यहाँ कॉलेज में लड़के तो बहुत हैं मगर अभी तक आप जैसा कोई नज़र नहीं आया जो लड़कियों की इज़्ज़त क लिए खुद को दो पर लगा दे. मुझे ख़ुशी होगी अगर आप मुझे अपना दोस्त बना ले

अमित : आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं. मैं कोई विप नहीं हूँ जो आप ऐसे बात कर रही हैं . आज से हम दोस्त हैं और दोस्तों की तरह hi बात कीजिये मुझे वो hi ाचा लगेगा.

मैं जब रीमा से बात कर रहा था तो नेहा दीदी और राधा मुझे hi देख रही थी. नेहा दीदी की आँखों में ख़ुशी की झलक थी मगर राधा की नज़रों में क्या था ये मैं समझ नहीं प् रहा था. हम बातें कर रहे थे क वेटर ने टेबल पर एक सुन्दर सा केक सजा दिया जिस पर हैप्पी बर्थडे मीनल लिखा हुआ था और एक कैंडल जल रही थी.

मीनल और मोहित ने मिल कर केक कटा और हम सब मीनल को विश करने लगे. मीनल ने बरी बरी से सबको अपने हाथो से केक खिलाया और सब ने उसे . उसके बाद गिफ्ट्स की बरी आयी. राधा रीमा और उसकी फ्रंड मीनल क लिए गिफ्ट लायी थी मगर नेहा दीदी को इस सब का पता नहीं था इस लिए उनको बुरा लग रहा था क उन्होंने गिफ्ट नहीं दिया. मगर मैं गाड़ी से वो गिफ्ट ले आया जो मैंने मीनल क लिए लिया था और नेहा दीदी क साथ मिल कर मीनल को प्रेजेंट कर दिया.

मैंने अपनी पॉकेट से ब्रेसलेट निकल कर नेहा दीदी और राधा को दिया. ब्रेसलेट देखते hi राधा का चेहरा एक डैम से खिल गया और वो मुझे थैंक्स कहने लगी. ब्रेसलेट एंटीक था जिसे मीनल और रीमा भी गौर से देखने लगी

मीनल : वह ये तो बहुत सुन्दर है . मेरे लिए क्यों नहीं लाये ये वाला?

रीमा : वाकई में कितना खूबसूरत है ये स्टोन्स तो रेयर hi मिलते हैं . कहाँ से लिया आपने इसे ?

अमित : बस एक गिफ्ट शॉप से लिया था अगर आपको चाहिए तो मैं ले आऊंगा. फ़िलहाल तो मैं ये दो hi लाया था.

राधा : ये वाकई में बहुत ाचा है इसे मैं हमेशा संभल कर रखूंगी.

नेहा दीदी : वाकई में अमित ये बहुत सुन्दर है सिंपल और ब्यूटीफुल बिलकुल तुम्हारी तरह . मगर तुमने एक गड़बड़ करदी जब करुणा इसे देखेगी तो तुम्हारी सहमत आ जाएगी.

अमित : बाप रे ! ये तो मैंने सोचा hi नहीं . चलो कोई बात नहीं मैं और ले आऊंगा आप उन्हें बताना मत.

यूँही हम बातें करते रहे मोहित ने सबकी पसंद क हिसाब से खाना आर्डर कर दिया . सबने पार्टी एन्जॉय की कॉलेज टाइम ख़तम होने से पहले हम कॉलेज वापिस आ गए . राधा ने ब्रेसलेट पेहेन लिया था और उसे बार बार छू कर देख रही थी. राधा ने जाते जाते भी मुझे फिर से ब्रेसलेट क लिए थैंक्स कहा. उसकी आँखों में एक अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी जो मुझे बहुत अछि लग रही थी. राधा बहुत रिज़र्व नेचर की इनोसेंट लड़की थी . शायद आज तक उसे ऐसा गिफ्ट किसी ने दिया भी न हो यही वजह हो सकती है क वो इतनी खुश है.

राधा और नेहा दीदी स्कूटी पर निकल गयी . रीमा क पास अपनी कार थी. रीमा ने भी जाते जाते मुझसे हाथ मिलाया और मिलते रहने को कहा . अपनी प्यारी मुस्कराहट बिखेरती हुई वो भी अपनी गाड़ी से घर को चली गयी.

मोहित : बस कर भाई वो चली गयी है अब क्या उसके पीछे तक देखने जायेगा.

अमित : क्या बात कर रहा है मैं तो बस ऐसे hi

मीनल : वैसे जोड़ी मस्त रहेगी दोनों की और मुझे लगता है वो भी तुम में इंटरेस्टेड है . कई बार उसने तुम्हारे बारे में बात की है मुझसे . अगर तुम कहो तो मैं तरय करूँ

अमित : नहीं मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है गफ बनाने में

मोहित : देख तो ऐसे रहा था जैसे अभी उसे पर्पस कर देगा

मीनल : एनीवे जब तुम कहोगे मैं हेल्प कर दूंगी वैसे मुझे लगता है शायद तुम्हे मेहनत करनी hi न पड़े

अमित : तुम लोग मेरी टांग खींचना बंद करोगे ?

मोहित : चलो चलें . मीनल शाम को कितने बजे पिक करूँ तुम्हे?

मीनल : 8 बजे चलेंगे मगर 10 बजे वापिस आना होगा

मोहित : क्या यार तुम्हे पता तो है वहां टाइम लग hi जाता है. उससे ाचा नाईट क्लब और कोई है hi नहीं.

मीनल : 11 से लेट किसी कीमत पर नहीं वर्ण पापा बुरा मन जायेंगे . और बाकि सब से बात हो गयी न तुम्हारी?

मोहित : वो सब रेडी हैं .

हमने मीनल को उसके घर ड्राप किया और 8 बजे फिर से आने का बोल कर घर निकल गए.

उसके बाद खाना रेस्ट स्टेडियम में प्रैक्टिस और मंजू मम क पास ट्यूशन क बाद हम शाम की पार्टी क लिए रेडी होने लगे.

आंटी : कहाँ है पार्टी?

मोहित : होटेर्ज़ नाईट क्लब में

आंटी : हम्म देखना कोई ड्रिंक वगेरा मत करना. और अमित तुम भी ख्याल रखना तुम तो कभी गए नहीं होंगे नाईट क्लब में. इस लिए ज़रा ध्यान से रहना.

मोहित : माँ आप तो उसे डरा रही हैं

आंटी : मैं डरा नहीं रही समझा रही हूँ.

मोहित : ठीक है माँ हम थोड़ा देर से आएंगे आप खाना खा कर सो जाना

हम दोनों निकल गए मीनल को लेने. मीनल को देख कर मैं दांग रह गया. मीनल ने बहुत hi सेक्सी ड्रेस पहना हुआ था. एक बिकनी टाइप शार्ट ड्रेस पहनी हुई थी . कन्धों पर बारीक से लेस लगी हुई थी. ब्लैक ड्रेस में मीनल भी क़यामत लग रही थी. उसने लॉन्ग हील सांडले पहने हुए थे जिसकी वजह से उसकी चल किसी मॉडल की तरह हो गयी थी. उसकी लम्बी गोरी चिकनी झंगें आकर्षित कर रही थी. मैंने किसी तरह अपनी नज़रों ओर काबू किया और कार से बहार देखने लगा.

मोहित ने कार को एक बहुत hi आलिशान सी दिखने वाली ईमारत क बहार रोका जिस पर बड़े अक्षरों में होटेर्ज़ लिखा हुआ था. गेट पर बाउंसर्स खड़े थे जो चेक कर क अंदर जाने दे रहे थे. पार्किंग में कड़ी बड़ी बड़ी और मेहेंगी कार्स को देख कर मैं समझ गया क यहाँ पर अमीर बिगड़ैल लड़के लड़कियां आते होंगे. मैंने कभी नाईट क्लब नहीं देख था इस लिए मेरे अंदर एक एक्ससिटेमेंट थी. क्लब क अंदर जा रही हर लड़की भड़कीले कपड़ों में hi नज़र आ रही थी. हम गाड़ी से निकल कर जैसे hi गेट जी तरफ बड़े तो वहां पर खड़े 6/7 लड़के लड़कियों को ग्रुप हमारी तरफ आ गया जो हमारी तरफ आ गया.

मोहित और मीनल उनसे मिले और मुझे भी उनसे मिलवाया. ये सब मोहित और मीनल क स्कूल फ्रेंड्स थे जो शायद अब दूसरे शहरों में स्टडी करते थे मगर मीनल की बिठ्डाय पार्टी क लिए सब इकठे हुए थे. हम सब मिल कर नाईट क्लब में एंटर हुए जहाँ पहले हमारी जाँच की गयी . क्लब क अंदर का वातावरण बहुत ज़बरदस्त था. बहुत hi डिम लाइट थी और तेज म्यूजिक चल रहा था. स्मोग क साथ कपल्स फ्लोर पर नाच रहे थे. एक तरफ बार बानी हुई थी जहाँ लगी चेयर्स पर लड़के लड़कियां और कुछ मातुरे औरतें मर्द भी बैठे ड्रिंक्स ले रहे थे .

फ्लोर पर डांस कर रहे कपल बहुत hi रोमांटिक वे में एक दूसरे से छेड़छाड़ करते हुए डांस कर रहे थे . यहाँ पैट किसी को किसी की परवाह नहीं थी. ये बिलकुल वेस्टर्न स्टाइल था जो कभी मैंने देखा क्या सोचा भी नहीं था.

मोहित : दोस्तों डांस करने से पहले क्यों न कुछ ड्रिंक्स हो जाये ?

मोहित की बात का सब ने समर्थन किया. हम सब बार टेंडर क पास चले गए . मोहित ने ड्रिंक आर्डर किया. मैंने मोहित को मन कर दिया.

अमित : देख यार मैं ये सब माहि करता तुम लोग एन्जॉय करो

मोहित : अरे यार ये सिर्फ बेयर है और ये तो लड़कियां भी पीती हैं इससे कुछ नहीं होता.

मीनल : आज मेरा बर्थडे है मेरी खातिर एक पिलो वर्ण मुझे ाचा नहीं लगेगा. देखो हम सब दोस्त हैं और सब hi पि रहे हैं ऐसे में अगर तुम न पियो तो क्या ये सही होगा? वैसे भी बेयर से कुछ नहीं होता . आज तुम तरय कर क देख लो

मैं इंकार करता रहा मगर वो मुझे पीला कर hi मने . इसका टास्ते बहुत hi बक बका और कड़वा था. बेयर पि कर सब डांस फ्लोर पर चले गए. मुझे तो कुछ अत जाता नहीं था. इस लिए मैं बैठा रहा . धीरे धीरे मेरा सर थोड़ा भरी होने लगा और नज़रों का फोकस भी काम होने लगा. मेरे साथ वाली चेयर पर एक लेडी आ कर बैठ गयी वो भी कोई ड्रिंक पि रही थी. उस लेडी ने शार्ट ड्रेस पहना हुआ था जो उसकी जाँघों तक hi था. जिसमे से उसका गदराया हुआ बदन बहुत hi अट्रैक्टिव लग रहा था. वो लेडी भी ड्रिंक करती हुई बार बार मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे मेरी स्कैनिंग कर रही हो.

तभी मोहित मुझे पकड़ कर डांस फ्लोर पर ले गया. और मुझे भी उन सब क साथ उछाल कूद करनी पड़ी. अँधेरे में कुछ पता नहीं चल रहा था क कौन कहाँ नाच रहा है. मुझ पर बेयर और उस वातावरण का असर होता जा रहा था. मैं भी मस्ती में झूमने लगा. डांस करते हुए लड़कियां लड़कों क साथ ऐसे चिपक रही थी जैसे क कामसूत्र क सरे chapter यहीं पर दिखा देंगी. मोहित भी मीनल को अपने साथ चिपका रहा था और यही हल बाकि मंडली का भी था. डांस करते हुए मेरी नज़र बार की तरफ गयी तो वो लेडी ड्रिंक करती हुई अभी भी मुझे hi देख रही थी. उसकी आँखों में एक कशिश एक नशा नज़र आ रहा था.



अँधेरे में डांस करते हुए मैं अपनी धुन में hi कूद रहा था क किसी ने मुझे अपने साथ चिपका लिया और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया. अँधेरे में चेहरा तो नज़र नहीं आ रहा था मगर बॉडी से पता चल रहा था क ये कोई लड़की या औरत hi है. मेरी चेस्ट में उसके बूब्स लग रहे थे. उसने अपने दोनों हाथो को मेरे हिप्स पर कास लिया और अपना जिस्म मेरे साथ रगड़ने लगी . मैंने उसे पीछे हटाने की कोशिश की तो उसने मेरे हाथ अपने बूब्स पर रख कर कास दिए . मुझे समझ नहीं आ रहा था आखिर ये है कौन.
 
भाई लोग हाथ जोड़ कर रिक्वेस्ट करता हूँ क जिसको स्टोरी अछि न लगे वो लीव करदे मगर कोई ऐसा कमेंट न करे क दिल टूट जाये . अगर मेरी स्टोरी अछि नहीं लग रही तो बोल दो मैं बंद कर देता हूँ. मैंने तो स्टार्ट में hi कहा था क मैं राइटर नहीं हूँ फर्स्ट टाइम लिख रहा हूँ फिर भी आप अगर मुझे इस राइटिंग का इनाम घटिया कह कर डोज तो दिल तो टूटेगा hi न
 
सॉरी यार थोड़ी प्रॉब्लम हो गयी थी अभी अपडेट लिख रहा हूँ जल्दी hi पोस्ट कर दूंगा
 
अपडेट 76



आज आसमान में बदल छाए हुए थे और मस्त ठंडी हवा में सुबह सुबह बहुत आनंद आ रहा था. एक्सरसाइज करने क लिए ये बहुत hi ाचा मौसम लगता है हर किसी को. मैं आंटी क बुलाने पर उनके पास चला गया.

आंटी : कितने दिन से मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ और एक तुम हो की मेरी तरफ ध्यान hi नहीं दे रहे. क्या मन भर गया है मुझसे

अमित : आप से किसी का मन भर सकता है ? आप तो जानती हैं क्या क्या हुआ है तो थोड़ा अपसेट था

आंटी : आज मैं तुम्हारा मूड ठीक कर दूंगी.

आंटी ने अपनी बहन मेरे गले में दाल कर मेरे होंठो को अपने होंठो में भर लिया और किश करने लगी . इतने अचे मौसम में इतना रोमांटिक अंदाज़ , आंटी ने मुझे मजबूर कर दिया उनको प्यार करने क लिए. आंटी ने मुझे धकेलते हुए दीवार से लगा लिया . मैं भी आंटी का साथ देने लगा और उनको किश करते हुए अपना एक हाथ उनकी गांड पर लगाया तो मुझे एहसास हुआ क उन्होंने लोअर क निचे कुछ नहीं पहना है. मैं उनके नरम मुलायम चूतड़ों को मसलने लगा. आंटी ने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर रख दिया . उनके बूब्स का एहसास ऐसा लग रहा था जैसे क वो बिलकुल नंगे हों.

आंटी ने 5 मिनट्स मुझे किश किया और इस दौरान उन्होंने मेरे लोअर में हाथ दाल कर मेरा लैंड मसलना शुरू कर दिया. इतनी देर में hi आंटी ने मुझे पूरा गरम कर दिया था.

आंटी : मज़ा आया ? चलो अब थोड़ा योग करलें

आंटी अचानक मुझसे पीछे हैट गयी और योग क लिए बिछाये मत पर लेट गयी .मुझे समझ नहीं आ रहा था क इतनी अछि तरह मुझे किश करने क बाद अचानक फिर से योग की बात कैसे कर सकती हैं. मैं चुप चाप उनका साथ देने लगा.

आंटी : चलो मेरी टाँगें उठाओ और अपना कमल दिखाओ

आंटी ने मुझे हर बार की तरह स्ट्रेचिंग करने को कहा . मैंने पोजीशन ले कर आंटी की टैंगो को उनके सर की तरफ दबाना शुरू किया . जैसे hi मैंने उनको पेअर उनके सर क पास लगाए तो उनका वो ढीला ढाल लोअर जो जम्पर क जैसे था पूरा कास गया उनकी गांड पर और मुझे उनकी छूट की फांके दिखाई देने लगी. मेरा मुँह खुला का खुला रह गया . मेरा ध्यान उनकी छूट की तरफ hi लग गया तो आंटी मुझे होश में वापिस लायी

आंटी : सरप्राइज कैसा लगा? मैंने ये सिर्फ तुम्हारे लिए किया है अब देर मत करो इससे पहले कोई जग जाये मेरी प्यास बुझा दो

मैं आंटी की प्लानिंग पर हैरान था क वो छोड़ने क लिए क्या क्या कर रही हैं. अपने लोअर को नीचे से खुद hi फाड़ कर लैंड घुसाने क लिए जगह बना दी. अब मैं समझा उन्होंने नीचे पेंटी क्यों नहीं पहनी है. खैर आंटी ने बहुत रिस्क लिया था अंकल और मोहित क घर होते हुए खुले आसमान क नीचे दिन क वक़्त hi ये सब. वाकई जब औरत छोड़ने पर आती है तो उसका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है.

मैंने जल्दी से आगे से अपना लोअर और अंडरवियर थोड़ा सा नीचे कर क अपना लैंड बहार निकला जो पूरा खड़ा था. मैंने सूपड़ा छूट पर सेट किया और हल्का धक्का लगा कर लैंड अंदर किया. आंटी ने एक सिसकी ली.

मैंने आंटी की टांगो को कंधो पर किया और अपने हाथ उनके कंधो क साइड में रख कर पुश उप मरने वाली पोजीशन बनाई और धक्का मर कर पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुसा दिया

आंटी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म आअह्ह्ह्ह कितना सख्त है तुम्हारा हथियार ऐसे लगता है लोहे की रोड घुसा डी हो.

मैंने वक़्त जाया न करते हुए धक्के मरने शुरू कर दिए. आंटी मज़े की सिसकारियां लेने लगी . आंटी को ऐसे खुले में छत पर छोड़णा मुझे एक्साइट कर रहा था. मैंने पूरा ज़ोर लगा कर लैंड अंडकोष क साथ hi छूट में घुसाने की कोशिश शुरू कर दी. 5 मिनट इसी पोस्टिं में छोड़ने क बाद आंटी ने मुझे रुकने का इशारा किया और मुझे लिटा कर वो घुटने मेरे दोनों तरफ लगा कर लैंड को छूट में ले कर बैठ गयी. आंटी ने बिना उठे ऐसे hi छूट को आगे पीछे हिलना शुरू कर दिया. मैंने हाथ बड़ा कर आंटी क बूब्स पकड़ने की कोशिश की तो आंटी ने अपनी उस स्ट्रेटचेब्ले ताहिरत का गाला खींच कर बड़ा कर दिया और अपने दोनों बूब्स बहार निकल लिए. मैं उनकी इन सब हरकतों से हैरान होता जा रहा था और उनका कायल भी.

आंटी मेरे ऊपर झुक गयी और मुझे अपना दूध पिलाने लगी . मैंने भी उनके एक बूब को मुँह में ले लिया और दूसरे को मसलने लगा. आंटी रुक गयी थी इस पोजीशन में इस लिए मैंने नीचे से कमर उठा कर धक्के मरने शुरू कर दिए. आंटी की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वो फिर से सीधी हो कर अपनी कमर पूरी तेज़ी से आगे पीछे रगड़ने लगी.

आंटी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म फ़क ..... उम्म्म्म फुकककक फ़क में हर्डर I’m क्युम्मिंग ी क क्युम्मिंग आआआहहहहहहह

इसी क साथ hi आंटी झटके कहती हुई मेरे ऊपर hi लेट गयी . उनकी छूट ने मेरे लैंड पर पानी की बरसात कर दी थी . आंटी ढीली पद गयी मगर मेरा अभी काम नहीं हुआ था. इस लिए मैंने आंटी को पलटा दिया . आंटी को मैंने घुटनो पर झुका कर पूछे से छूट में लैंड घुसा दिया और झटके मरने लगा . अभी 2 मिनट्स hi हुए थे मुझे इस पोजीशन ने झटके मरते हुए क रानी एक डैम से दरवाज़े पर आयी

रानी : मालकिन साहब आ रहे हैं.

रानी की बात सुनते hi मेरे तोते उड़ गए आंटी का भी कुछ ऐसा hi हल था मगर उन्होंने कोई हड़बड़ाहट नहीं दिखाई और जल्दी से टाँगे सीधी कर क ऐसे hi लेट गयी पेट क बल. आंटी ने मुझे ऐसे hi उनके ऊपर बैठने को कहा और मुझे अपनी पीठ पर हाथ रखने को कहा . मुझे आंटी की बात समझ में आ गयी . मैंने अपने घुटने आंटी की दोनों साइड में करके ऐसे hi उनकी गांड क पास बैठ गया. मेरा लैंड अभी भी आंटी की छूट में hi था . कपडे ठीक करने में टाइम लग सकता था इसी लिए मैंने अपनी T-shirt को आगे से फैला दिया जिससे पता न चले क मेरा लोअर आगे से नीचे है.

अंकल : अरे तुम यहां क्या कर रही हो और अमित तुम क्या कर रहे हो ऊपर ?

आंटी : योग करते हुए ज़रा नस चढ़ गयी थी . आप तो जानते hi हैं अमित को इन सब चीज़ों की पूरी नॉलेज है इसी लिए उससे थोड़ी मदद ले रही हूँ. दिखिए कितनी अछि तरह से मेरे सरे बल निकल रहा है

इतना कहते हुए आंटी ने अपनी छूट में मेरे लैंड को खींचा. मैं आंटी क इस करतब से हैरान भी था मगर इसमें एक अलग तरह का मज़ा भी आ था था. अगर अंकल को पता चल जाये क मैं उनके सामने उनकी hi बीवी की छूट में लैंड घुसाए हुए बैठा हूँ तो अभी मेरी गांड पर लात मर कर मुझे बहार निकल दें. मगर दाद देनी पड़ेगी आंटी की भी क कितनी सफाई से ये कारनामे को अंजाम दे रही हैं.

मरता क्या न करता मुझे अंकल को दिखने क लिए अब कुछ तो करना hi था इस लिए मैं भी आंटी की पीठ को दोनों हाथो से मस्सगे करता हुआ उनके कन्धों तक जाने लगा जिसकी वजह से मेरा लैंड जो अब ढीला पड़ने लगा था वो छूट क थोड़ा और अंदर को हुआ जिससे उसमे फिर से एनर्जी आने लगी.

मैंने बार बार कंधो को दबाने क बहाने अपना लैंड छूट में घुसाने लगा . अंकल ताज़ी हवा क मज़े लेते हुए छत पर टहलने लगे. उधर अंकल हवा का मज़ा ले रहे थे और इधर में उनकी बीवी का. आंटी को भी इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था जैसे वो जान बुझ कर ये सब कर क बदला ले रही हो अंकल की बेरुखी का. अंकल जब चलते हुए दूसरी तरफ जा रहे होते तो मैं तेज़ तेज़ धक्के मरता और जब वो हमारी तरफ वापिस आ रहे होते तो मैं बस कंधो पर दबाते हुए हल्का हल्का आगे पीछे हो कर लैंड को छूट में रगड़ता.

इस चुदाई का अपना hi अलग मज़ा आ रहा था . आंटी एक बार फिर से पानी छोड़ने क लिए तैयार थी और वो तेज़ धक्के चाहती थी. जैसे hi अंकल की पीठ हमारी तरफ हुई मैंने आंटी का इशारा समझते हुए घुटनो पर खुद को उठाया और आंटी की कमर को दोनों हाथो से थम कर थोड़ा ऊपर कर क तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा . मेरा भी पानी निकलने वाला था इस लिए मैंने फुल स्पीड में धक्के मरे और जड़ तक लैंड छूट में घुसा कर आंटी क ऊपर hi देह गया. लैंड ने छूट में पानी की उल्टियां कर दी और छूट ने भी बरसात कर दी. आंटी ने मुँह कास क बंद कर लिया था क आवाज़ बहार न निकले . मैंने जल्दी से आंटी की पीठ पर हाथ रख कर खुद को संभाला . हिम दोनों को पसीना आ गया था.

अंकल चलते हुए जब हमारी तरफ आये तो मेरे और आंटी क चहरे ओर पसीना देख कर उन्होंने पुछा

अंकल : रमा तुम ठीक तो हो? इतनी ठंडी हवा में भी तुम्हे पसीना आ रहा है. और अमित तुम्हे क्या हुआ तुम भी पसीने से भीग रहे हो.

आंटी जो आराम से लेती हुई थी और अपनी साँसे ठीक कर रही थी उन्होंने hi अंकल की बात का जवाब दिया.

आंटी : कैसी बच्चों जैसी बात करते हैं आप भी . एक्ससरसीसे में पसीना नहीं आएगा तो और क्या होगा. एक्ससरसीसे तो करते hi इस लिए हैं क पसीना आये. देखो अमित ने कितने अछि मालिश की है ऐसा लग रहा है शरीर हल्का हो गया है और मैं हवा में उड़ रही हूँ.

अंकल : तो अब नीचे चलें या फिर यहीं पर रहने का इरादा है . मैं कब से चाय का इंतज़ार कर रहा हूँ.

आंटी : आप चलिए मैं भी आयी आपके पीछे

अंकल सीढ़ियों से नीचे जाने लगे तो मैं भी आंटी क ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया और अपना लैंड वापिस कपड़ों में कर लिया. आंटी भी कड़ी हो गयी और मुझे गले लगा कर किश कर दिया

आंटी : आज बहुत मज़ा आया . तुम नहीं जानते मैं कितनी खुश हूँ. तुमने राघव क सामने मेरी चुदाई की मेरा पानी निकला ऐसा लग रहा है जैसे मैंने उसकी बेवफाई का बदला ले लिया हो. अगर उसे मेरी परवाह नहीं तो मुझे भी उसकी परवाह नहीं है. थैंक यू थैंक यू वैरी मच.

आंटी मुझे किश कर क नीचे चली गयी. रानी अभी तक जो सीढ़ियों ओर hi कड़ी थी उसने मुझे प्यासी नज़र से कुछ पल देखा और नीचे चली गयी. मैं कमरे में वापिस आया और नाहा कर फ्रेश हो गया. मैंने अपना फ़ोन चेक किया तो कल शाम से घर से कॉल्स आयी हुई थी . मेरे न आने से शायद परेशां होंगे और मैंने कोई कॉल भी नहीं की. दीपिका ममी और कामिनी ममी को तो पता hi है क मैं अपने वाला नहीं मगर बाबा अजय मां और कमलेश मां को तो फ़िक्र होगी . इससे पहले क वो मुझे खोजने शहर ए मुझे उनको बता देना चाहिए. मैंने बाबा को फ़ोन लगाया.

अमित : hello बाबा

विजय मां: बीटा कहाँ हो तुम कल से कितनी बार फ़ोन कर रहे हैं तुम कोई जवाब नहीं दे रहे अभी मैं और अजय तेरे शहर hi आने वाले हैं.

अमित : सॉरी बाबा वो फ़ोन कल से साइलेंट था मुझे ध्यान hi नहीं रहा. और आप यहाँ मत आइयेगा मैं कोच साहब क साथ किसी से मिलने आया हूँ बहार इसी लिए घर नहीं आ पाया. और आज भी नहीं आ पाउँगा आप चिंता न करें मैं ठीक हूँ.

विजय मां : बीटा पिछली बार भी तू मुझसे मिले बिना चला गया और इस बार तू घर भी नहीं आया . सच सच बता बात क्या है?

अमित : बाबा आप कैसी बातें कर रहे हैं मैंने बताया तो था क ज़रूरी काम ाँ पड़ा था इस लिए मई बिना मिले निकल गया था और आज भी कोच साहब ने किसी से मिलवाना था मेरी ट्रेनिंग क सिलसिले में . अगर ज़रूरी न होता तो मैं आपके पास होता.

विजय मां : पक्का यही बात है? क्या तुम सच बोल रहे हो?

अमित : सच बोल रहा हूँ बाबा और माँ कैसी है? आप उनका ध्यान तो रखते हैं न?

विजय मां : हाँ वो बिलकुल ठीक है और तुम्हे बहुत यद् करती है( झूठ) तू आ कर खुद hi उसका हल चल पूछ ले

अमित : बाबा मैं तो खुद उनसे मिलना चाहता हूँ , जैसे hi टाइम मिला मैं घर आ जाऊंगा अब मैं रखता हूँ बाबा . पाए लागु

विजय मां : जीते रहो बीटा सदा खुश रहो

मुझे पता था बाबा मेरा दिल रखने क लिए झूठ बोल रहे हैं . मगर माँ की बात करते hi मेरा दिल भर आया था और मेरी आँखों में आंसू आ गए . मुझसे बात करना मुश्किल हो रहा था इस लिए मैंने जल्दी बात ख़तम कर क फ़ोन काट दिया. उसके बाद मैंने अजय मां कमलेश मां दीपिका ममी और कामिनी ममी से भी बात की. दीपिका ममी और कामिनी ममी मुझसे नाराज़ हो रही थी क ऐसे वक़्त में मुझे उनके पास होना चाहिए और मैं माँ की नाराज़गी की वजह से उनको सजा दे रहा हूँ. मगर मेरे समझने पर वो मन भी गयी. इन सब क इलावा नैना दीदी और करुणा दीदी की भी मॉस्कल्स थी तो मैंने सोचा क्यों न आज इनसे hi मिल लिया जाये . मैंने रजनी मौसी क घर जाने का मन बनाया और रेडी हो कर नीचे आ गया.

आंटी भी नाहा कर फ्रेश हो चुकी थी और अंकल क साथ डाइनिंग टेबल पर बैठी थी . अंकल न्यूज़ पेपर पद रहे थे . मुझे देख कर आंटी ने रानी को आवाज़ दे कर जूस मंगवा दिया मेरे लिए

अंकल : क्या बात है इतनी जल्दी रेडी हो गए . आज तो संडे है फिर कहाँ की तयारी है?

अमित : वो मेरे मौसी जी इसी शहर में रहते हैं तो सोचा आज उनसे मिल आऊं . वो मुझे बुलाती रहती हैं

अंकल : ये तो अछि बात है. तुम उन्हें किसी दिन यहाँ क्यों नहीं ले आते हम भी मिल लेंगे उनसे

आंटी : आप क्या मिलेंगे किसी से आप का खुद का पता नहीं होता. अमित तुम मुझसे मिलाना अपनी मौसी को मुझे ख़ुशी होगी उनसे मिल कर.

अमित : ज़रूर . किसी दिन मैं उन्हें आपके साथ मिलवा दूंगा

रानी मेरे लिए जूस ले आयी . मैंने जूस पिया और उठने लगा

आंटी : कहाँ जा रहे हो नाश्ता तो करलो

अमित : आज नाश्ता मौसी क घर करूँगा.

मैं बुलेट ले कर निकल गया और 20 मिनट्स में hi रजनी मौसी क घर क बहार था मैं. मैंने बेल्ल बजायी तो गेट मौसी ने hi खोला. मुझे सामने देख कर वो चौंक गयी और मैंने उनके पाऊँ छुए. मौसी ने मुझे गले लगा कर मेरा माथा चूमा.

रजनी मौसी : जग जग जियो मेरे लाल आखिर तुझे अपनी मौसी की यद् आ hi गयी. मैं तो सोच रही थी क तू मुझे भूल hi गया है.

अमित : ऐसा मत कहिये मौसी जी भला मैं आपको भूल सकता हूँ.

मौसी मुझे अपने साथ अंदर ले आयी . मौसा जी सोफे पर बैठे टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे मैंने जा कर उनके पाऊँ छुए. मौसा जी बहुत सरल स्वभाव क इंसान थे जो काम बोलते थे और काम hi किसी से मिलते थे बस अपनी नौकरी पर hi ज्यादा ध्यान रहता था उनका.

मौसा जी : आओ बीटा आओ तुम तो कितने बड़े हो गए हो . आज कितनी देर बाद तुम्हे देख रहा हूँ

रजनी मौसी : कभी किसी से मिलो तो पता चले आपको तो अपनी नौकरी क इलावा और कुछ दिखाई hi नहीं देता. नौकरी न हुयी गुलामी हो गयी . आपकी नौकरी तो मेरी सौतें है कभी मेरे बारे में भी नहीं सोचते

मौसा जी : लो हो गयी शुरू . अगर नौकरी न करूँ तो ये घर कैसे चलेगा ? बच्चों क बारे में भी सोचना है या घर बैठा रहूं तुम्हारा पल्लू पकड़ कर . बीटा तुम बैठो तुम्हारी मौसी को तो बस एक hi काम है मेरी नौकरी को कोसना अब तुम hi बताओ घर क खरच कैसे चलेंगे अगर मैं नौकरी न करूँ तो.

रजनी मौसी: हाँ हाँ फॅमिली और रिश्तेदारों को मिलने से तो नौकरी छूट जाएगी. तुम इनकी मत सुनो अमित . पहले ये बताओ क इतनी सुबह कहाँ से आ रहे हो ? नाश्ता किया क नहीं?

अमित : मैं गाओं नहीं जा पाया तो सोचा आज आप से मिल लेता हूँ . छुट्टी क इलावा वक़्त hi कहाँ होता है. बाकि सब कहाँ है नज़र नहीं आ रहे?

रजनी मौसी: नैना तो सो रही है कारन बहार खेलने गया है अपने दोस्तों क साथ , पता नहीं कहाँ आवारागर्दी करता रहता है और निधि शायद नाहा रही होगी. तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय बनती हूँ. और आप भी ज़रा नाश्ते क लिए कुछ ाचा सा लेते आइये बाजार जा कर.

अमित : आप चाय बनाइये मैं तब तक दीदी से मिल लेता हूँ.

रजनी मौसी : उस महारानी को भी जगा देना मैं चाय ले कर आती हूँ.

मौसी क घर में 4 रूम्स थे एक मौसी और मौसा का बाकि तीन निधि नैना और कारन क थे नैना और कारन का रूम ऊपर था. मैं पहले निधि दीदी क कमरे में गया. मैं जैसे hi अंदर घुसा तो दीदी कपडे पहन रही थी . इस वक़्त वो सिर्फ वाइट ब्रा पेंटी में थी. मैं उन्हें इस रूप में देख कर वहीँ जैम गया. निधि दीदी अछि हाइट की थी और उनका फिगर एक मॉडल की तरह था . रंग दूध की तरह साफ़ था मैं उनको देखते हुए उनकी खूबसूरती में खो गया . वो झुक कर सलवार पहन रही थी जिसकी वजह से उनकी गांड कुछ ज्यादा hi बहार को उभर आयी थी . मैं निधि दीदी क हुस्न क जलवों में कैद होता जा रहा था न चाहते हुए भी मेरी नज़रें वहां से हैट hi नहीं प् रही थी. तभी मुझे दरवाज़े की आवाज़ आयी और मैं जल्दी से बिना कोई आवाज़ किये उलटे कदम लौट गया.

मैं खुद को गलियां देता हुआ कोसने लगा क मैं कितना गन्दा हो गया हूँ जो हर किसी को एक hi निगाह से देखने लगा हूँ. मैं चुप चाप ऊपर चला गया . सोचा क नैना दीदी से hi मिल लेता हूँ . जब नैना दीदी क कमरे में गया तो वो आराम से सो रही थी और उनके चहरे पर एक दिलकश मुस्कान थी. मैं कुछ पल उनका चेहरा देखता रहा . मौसी ने कहा था क नैना दीदी को उठा दूँ तो मैंने उनके ऊपर से बेडशीट खींच दी . नैना दीदी एक डैम से उठ गयी

नैना दीदी : क्या माँ सुबह सुबह उठा देते हो आज तो संडे है न काम से काम आज तो सोने दो.

दीदी ऑंखें बंद किये hi बोले जा रही थी मैंने उन्हें पकड़ कर हिलाया

अमित : ऑंखें खोल कर देखिये सामने कौन है

मेरी आवाज़ सुनकर जब दीदी ने आँख खोली तो फिर से आँख बंद कर ली

नैना दीदी : ये सपना है मैं अभी भी नींद में हूँ

मैंने नैना दीदी क हाथ पर ज़ोर चिकोटी काट दी

नैना दीदी : ाओऊच ! तो क्या ये सपना नहीं है ? तू सच में मेरे सामने है ?

मैंने हाँ में अपनी गर्दन हिलायी तो दीदी ने उठ क मुझे गले लगा लिया. वो मुझसे ऐसे चिपक गयी जैसे अम्बारबेल हो . फिर अचानक मुझे खुद से अलग किया और शुरू हो गयी

नैना दीदी : जा मैं तुझसे बात माहि करती मैं तुझसे नाराज़ हूँ. तुझे ज़रा भी मेरी परवाह नहीं. तू न मुझसे मिलने अत है न मेरा फ़ोन उठता है. शहर में हो क भी तुझे वक़्त नहीं मिलता मुझसे मिलने का बात करने का. अब आ गया है सुबह सुबह मेरी नींद ख़राब करने

अमित : ठीक है तो मैं वापिस चला जाता हूँ आप आराम से अपनी नींद पूरी कीजिये मैंने तो सोचा था सरप्राइज दूंगा मगर लगता है आपको मेरा आना ाचा नहीं लगा

मैं जाने का नाटक करता हुआ जैसे मुदा तो दीदी ने पीछे से hi मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. ख़बरदार अगर जाने क बारे में सोचा दुफर. यहाँ मैं तुमसे मिलने क बहाने सोचती रहती हूँ और तू है क यहाँ आकर मेरी नाराज़गी दूर करने की बजाये ऐसे भाग रहा है. मैं भी देखती हूँ कैसे जाता है. एक कदम भी बहार रखा तो टाँगे तोड़ दूंगी

‘ अरे भाई किसकी टंगे तोड़ डौगी सुबह सुबह’ इतना कहते हुए निधि दीदी कमरे में आ गयी. उन्होंने सलवार सूट पहन लिया था. नाहा कर अपने से फूल की तरह खिली खिली लग रही थी और उनके फेस पर हमेशा की तरह एक दिलकश मुस्कान थी. मुझे सामने देख कर उनके चहरे पर भी ख़ुशी आ गयी

नैना दीदी : देखो न दीदी एक तो इतने दिनों बाद मिलने आया है और ऊपर से आते hi जाने की बात कर रहा है.

निधि दीदी ने मुझे पहले अपने गले लगाया और फिर बोली

निधि दीदी : क्यों रे क्या तुझे हमसे मिलना ाचा नहीं लगता ?

अमित : मैंने ऐसा कब कहा? मैं तो सरप्राइज देने आया था और ये सो रहीं थीं मौसी ने कहा था की मैं इन्हे जगा दूँ और जब मैंने जगा दिया तो उल्टा मुझसे लड़ने लगी क मैंने इनकी नींद ख़राब कर दी

नैना दीदी : दीदी ये झूठ बोल रहा है

निधि दीदी : सब पता है मुझे कुम्भकरण की बहिन तुझे अपनी नींद कितनी प्यारी है . चल अब जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ जा . अमित तुम मेरे साथ आओ

मैंने जाते जाते नैना दीदी को मुँह बना कर चिड़ा दिया . इससे पहले क वो मुझ पर हमला करें मैं कमरे से बहार था.

निधि दीदी : तू मेरे पास क्यों नहीं आया पहले?

अमित : मैं तो आपके पास hi आया था दीदी मगर आप....

मैं बात करते करते रुक गया कहीं दीदी को पता न चल जाये क मैंने उन्हें कपडे बदलते देखा है.

निधि दीदी : क्या आप ?

अमित : आप शायद नाहा रहीं थी इसी लिए मैं नैना दीदी क पास चला गया.

रजनी मौसी : पहले चाय पीलो नहीं तो ठंडी हो जाएगी. नैना नहीं आयी अभी तक

नैना दीदी : तुमने पुकारा और हम चले आये दिल हथेली पर ले आये रे ......

नैना दीदी इतनी जल्दी नाहा कर तैयार हो कर भी आ गयी और आते hi गण गए कर एंट्री मरी. नैना दीदी क इस अंदाज़ से सबके चहरे पर हसीं आ गयी.

नैना दीदी : क्यों रे दुफर अकेले अकेले चाय पी रहा है मेरी वेट नहीं कर सकता था.

रजनी मौसी : नैना ये क्या तरीका है बात करने का . अमित तेरा छोटा भाई है और तू इस तरह उससे बात कर रही है.

अमित : अरे मौसी ये तो दीदी का प्यार है मेरे लिए. मैं अछि तरह जनता हूँ ये ऊपर से कुछ भी कहें मगर दिल से मुझे बहुत प्यार करती हैं

मौसी क डांटने से दीदी क चहरे पर एक पल क लिए जो भाव आये थे वो मेरी बात सुनते hi बदल गए और वी मेरी तरफ गहरी नज़र से देखने लगी मनो वो शुक्रिया कह रही हो.

निधि दीदी : ये तो सबका लाडला है माँ नैना भी इसे बहुत चाहती है मगर नैना तुझे अब ख्याल करना चाहिए अब अमित भी बड़ा हो गया है और कॉलेज जाने लगा है. क्या तू ये चाहेगी क कोई तेरी बात सुन कर बाद में अमित को इसी नाम से पुकारे

नैना दीदी : जुबान काट दूंगी जो मेरे इलावा इसे दुफर कहेगा . ये सिर्फ मैं hi कह सकती हूँ

निधि दीदी ने प्यार से नैना दीदी को समझाया और नैना दीदी ने भी अपनी बात से साफ कर दिया क उन्हें मेरी कितनी परवाह है. बातें करते हुए मौसा जी बाजार से सामान ले ए . उनके एते hi निधि दीदी ने उनके हाथ से सामान लिया और किचन में ले गयी. किचन से चाय ला कर मौसा जी को देते हुए निधि दीदी ने बता दिया क वो अपने हाथों से मेरे लिए नाश्ता बनाने वाली हैं

नैना दीदी मौसा जी क सामने ज्यादा खुल कर बात माहि कर रही थी मगर फिर भी वो एक मिनट भी चुप नहीं हुई और मौसा जी भी टीवी देखते हुए बिच बिच में नैना दीदी की किसी बात पर मुस्कुरा देते. रजनी मौसी ने निधि दीदी क साथ मिल कर खाना बनाया और फिर हमने मिल कर नाश्ता किया. कारन भैया अभी तक नहीं ए थे और हम सब नाश्ता कर क चाय पीते हुए बातें करने लगे .

अमित : दीदी मज़ा आ गया आज तो आपके हाथो में तो जादू है. कितनी दिनों बाद आज इतना मज़ेदार नाश्ता किया है. आपके हाथ क आलू क परांठे खा कर तो मज़ा hi आ गया .

निधि दीदी : सच में तारीफ कर रहा है या दिल रखने क लिए कह रहा है?

अमित : क्या बात करती हो दीदी मैं आपसे झूठ बोलूंगा? खाना सच में बहुत स्वादिष्ट था. काश रोज़ आपके हाथों का खाना खाने को मिले . काश मैं आपका सागा भाई होता तो हर वक़्त आप के पास रहता और हमेशा मुझे आपका प्यार मिलता.

निधि दीदी : तू अब भी मेरा सागा भाई hi है तो क्या हुआ हमने एक माँ क पेट से जनम नहीं लिया. मेरे लिए तू कारन से भी पहले है . तू यहीं मेरे पास क्यों नहीं रह जाता तुझे मैं रोज़ अपने हाथों से खाना खिलाऊंगी.

निधि दीदी ने भावना वाश मुझे अपने साथ लगा लिया और मेरे सर पर हाथ से सहलाने लगी. उनका ये स्नेह हमेशा से hi मेरे साथ ऐसे hi था और मेरे दिल को बहुत सुकून देता था. मैंने जब रजनी मौसी की तरफ देखा तो उनकी आँख से आंसू बह रहे थे. मुझसे रहा न गया तो मैंने आगे बाद कर उनकी आँखों क आंसू साफ किये और उन्होंने मुझे कास क गले लगा लिया और मेरे चहरे को चूमने लगी.

रजनी मौसी : कौन कहता है तू मेरा सागा नहीं ? तू मेरी दामिनी का बीटा है मेरी सब से प्यारी छोटी बहिन का बीटा है मेरी गुड़िया का बीटा है. मैं तुझे कहीं जाने नहीं दूंगी . तू अब से मेरे पास hi रहेगा सुना तूने तू मेरे पास hi रहेगा. जब भी तुझे देखती हूँ मुझे दामिनी hi नज़र अति है . उसकी शरारतें उसकी हसीं मैं तुम में hi देखती हूँ. मैं तुझे अब कहीं नहीं जाने दूँगी . तू मेरा बीटा है तू मेरी दामिनी की अमानत है.

रजनी मौसी की आँखों से लगातार आंसू बहते जा रहे थे और उन्होंने मुझे अपने सीने में छुपा लिया था . उनकी ऐसी बातें और प्यार देख कर मैं भी खुद पर काबू नहीं रख प् रहा था मुझे भी माँ की यद् आने लगी हालाँकि मुझे उनका चेहरा भी यद् नहीं था मगर माँ तो माँ hi होती है जिसने आपको दुनिया में जनम दिया उसे आप कैसे भूल सकते हैं.

निधि दीदी ने रजनी मौसी को चुप करवाते हुए उन्हें पानी पिलाया और मैं भी खुद को ठीक करने लगा . निधि दीदी ने जब मेरी आँखों में भी पानी देखा तो मुझे फिर से गले लगा लिया .

निधि दीदी : रोटा क्यों है भाई ? तू तो मेरा ाचा और समझदार भाई है न ? क्या तू मुझे भी रुलाना चाहता है ? देख अगर तू रोयेगा तो मैं भी रोने लगूंगी.

निधि दीदी हम सब में सब से बड़ी थी और उनकी नेचर में एक ठहराव था वो सब से समझदार थी और सबसे ज्यादा प्यार भी मुझे hi करती थी. रजनी मौसी क सरे गन निधि दीदी में थे . निधि दीदी मुझे प्यार से गले लगा कर मेरा सर सेहला रही थी क नैना दीदी बोली

नैना दीदी : ोये दुफर करदी न तूने फिर अपनी हरकत. देख कैसे रुला दिया माँ और दीदी को इसी लिए तुझे मैं दुफर बोलती हूँ. ाचा भला सब है रहे थे क तूने सब को रुला दिया. अब रो रो कर कीचड कर देंगी यहीं पर तू hi सफाई करना यहाँ की मैं नहीं कुछ करने वाली.

नैना दीदी की बात पर मेरी हंसी छूट गयी और निधि दीदी भी हसने लगी. नैना दीदी में यही खासियत थी वो सबको हसती और खुद भी मुस्कुराती रहती थी.

रजनी मौसी: ठहर मैं अभी तुझे बताती हूँ . किसी काम को हाथ तो लगाती नहीं बस बातें करवा लो जितनी मर्ज़ी आज घर की साडी सफाई तू hi करेगी .

नैना दीदी : ये क्या बात हुई माँ सबको रुलाये ये और सजा मुझे ? थिस इस नॉट फारे

नैना दीदी ने जान बुझ कर मुँह फुला लिया तो मैंने आगे बाद कर नैना दीदी को पीछे से गले लगा लिया .

अमित : वाकई में आप सबकी जान हैं सबका दिल लगा कर रखती हैं एक पल में hi सबका मूड ठीक कर दिया. आप सही कहती हैं मैंने गलती की है तो सजा भी मुझे मिलनी चाहिए इस लिए मैं आपकी जगह सफाई कर देता हूँ.

नैना दीदी एक डैम पलट गयी और मुझे बाँहों में भर लिया . मैं उनके इस एक्शन को समझ नहीं पाया क मेरी टांग खींचते हुए उन्हें क्या सूझी मुझे ऐसे गले लगाने की. मैंने उनको पीछे हटा कर देखा तो उनके चहरे पर मुस्कराहट थी मगर उनकी ऑंखें बता रही थी क उनमे भी पहले आंसू आये थे. मगर मैं उन्हें फिर से भावुक नहीं करना चाहता था इस लिए फ़िलहाल मैंने इस बारे में कोई बात नहीं की.

निधि दीदी : कोई ज़रूरत नहीं तुम्हे कुछ करने की मैं हूँ न . मैं कर लुंगी सब.

रजनी मौसी : तूने hi बिगड़ रखा है इसे. इतनी बड़ी हो गयी है मगर घर क कामो को हाथ नहीं लगाती . कल को ससुराल जाएगी तो वो ताने देंगे क माँ ने कुछ सिखाया hi नहीं.

नैना दीदी : क्या बात करती हो माँ मुझे काम करने की ज़रूरत क्या है मैं नौकर रख लुंगी. और अगर फिर भी बात न बानी तो दहेज़ में आपको साथ ले जाउंगी.

रजनी मौसी: मुझे दहेज़ में ले कर जाएगी रुक तुझे अभी बताती हूँ .

रजनी मौसी जैसे hi मरने क लिए आगे बड़ी नैना दीदी उछलती हुई भाग गयी अपने कमरे में और पीछे छोड़ गयी हंसी की आवाज़ जो मेरे निधि दीदी और रजनी मौसी क मुँह से आ रही थी मौसा जी तो खाना कहते hi बहार निकल लिए थे.

निधि दीदी : तो बता कैसा चल रहा है तेरा कॉलेज ? बहुत तारीफ सुनी है तेरे कॉलेज की.

अमित : सब ठीक है दीदी . कॉलेज तो ऐसा है जैसे फिल्मो में होता है और स्टडी भी बहुत बढ़िए है.

निधि दीदी : पड़े पर ध्यान देना ज्यादातर स्टूडेंट्स कॉलेज लाइफ को एन्जॉय करने में पड़े को भूल जाते हैं और ज़िन्दगी में अपने गोआल अचीव नहीं कर पते. मैं चाहती हूँ तुम पद लिख कर एक कामयाब इंसान बनो.

अमित : मैं आपको निराश नहीं करूँगा दीदी. आप बताइये आप की जॉब कैसे चल रही है?

निशि दीदी : नयी जगह है अभी थोड़ा टाइम तो लगेगा सेट होने में पर कंपनी बड़ी है इस लिए एडजस्टमेंट तो करनी पड़ेगी. पाय अछि है मैं भी खुश हूँ और घर वाले भी . और तुम्हे अपनी स्टडी में कोई हेल्प चाहिए हो तो मुझे बताना.

रजनी मौसी : पड़े में तो ये अव्वल है बिलकुल अपनी माँ पर गया है . भैया में बताया था क स्कूल में फर्स्ट आया है.

अमित : तो क्या माँ भी पड़े में अव्वल आती थी ?

रजनी मौसी : हाँ वो हमेशा अव्वल आती थी हम सब में सबसे ज्यादा इंटेलीजेंट वही थी . वो तो सबकी .......

तुम लोग बैठो मैं ज़रा किचन में बर्तन साफ़ कर आऊं

मौसी बोलते बोलते अचानक रुक गयी जैसे उन्हें कुछ यद् आ गया हो और वो बात ख़तम कर क जल्दी किचन में घुस गयी. मैं माँ क बारे में और जानना चाहता था मगर मौसी पहले hi निकल गयी और मैं जनता था अब मेरे पूछने पर भी वो कुछ नहीं बताएंगी इस लिए मैं उनके पीछे नहीं गया .

निधि दीदी : तो आज क्या प्लान है ? संडे कैसे मन रहे हो?

अमित : आप बताइये जैसे आप कहेंगी वैसे करेंगे

निधि दीदी : मुझे तो ऑफिस की कुछ फाइल्स पर काम करना है मुझे माफ़ कर हाँ नैना से पूछ लो वही प्लान बना सकती है कोई.

मैं निधि दीदी से बात कर क ऊपर नैना दीदी क रूम में चला गया वो बीएड पर बैठी कुछ सोच रही थी. मैंने जा कर उनके पास बैठ गया मगर फिर भी वो सोच में hi घूम थी.

अमित : हम्म्म आज पता चला मुझे क सबको हँसाने वाली मेरी इस दीदी की आँखों में आंसू भी आते हैं.

नैना दीदी : आंसू ? मेरी आँखों में कब आंसू आये . चल चल झूठे कहीं क मेरी आँखों में आंसू नहीं एते मुझे तो सख्त एलर्जी है आंसुओं से .

अमित : झूठ , आप बाक़िओं को बेवक़ूफ़ बना सकती हैं मुझे नहीं. मैंने देख लिया था जब की आँखों में आंसू आ गए थे नीचे बात करते हुए. बताइये किस लिए ए आपकी आँखों में आंसू .

नैना दीदी : तू सबको बातों से रुलाएगा तो क्या मेरी आँखों में आंसू नहीं आएंगे? मैं भी इंसान हूँ पत्थर नहीं. और मैं तुमसे नाराज़ भी हूँ

अमित : नाराज़ ? मगर किस लिए?

नैना दीदी : तुमने नेहा और राधा को गिफ्ट दिया तो मेरे लिए क्यों नहीं लाया? क्या मेरी कोई वैल्यू नहीं तेरी नज़रों में

अमित :अरे ये आप कैसी बात कर रही हैं. मैंने तो सबके लिए वो ब्रेसलेट लिए थे मगर आते वक़्त रूम में hi भूल गया .

नैना दीदी : झूठे कहीं क मुझे सब पता है तूने कुछ माहि लिया मेरे लिए. खैर ये भी ाचा है अब मैं अपनी मर्ज़ी से अपना गिफ्ट लूंगी

अमित : ठीक है तो बताइये क्या चाहिए आपको?

नैना दीदी : आज संडे है तो आज का दिन तू मेरे साथ रहेगा मुझे मूवी सिखाएगा और मेरे लिए गिफ्ट भी लेगा मेरी मर्ज़ी का.

अमित : अरे अरे इतना कुछ लगता है आप आज मुझे लूटने वाली हैं.

नैना दीदी : चिंता मत कर मूवी क टिकट्स मैं अपनी पॉकेट मनी से ले लुंगी.

अमित : अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था भला मेरे होते मेरी दीदी को पैसे खरच करने पड़े तो मेरा क्या फायदा. मैंने बहुत साडी पॉकेट मनी बचा कर राखी है .

नैना दीदी : तो ठीक है मैं अभी चेंज करती हूँ तब तक तू माँ को मन ले . मुझे तो वो मेरी बात नहीं मानेगी .

अमित : मेरा इसमें क्या फायदा होगा.

नैना दीदी : फ़ायदाआआ ! अभी बताती हूँ तुझे फायदा .

नैना दीदी तकिया उठा कर मुझे मरने लगी और मैं जल्दी से कमरे से बहार भाग गया. मैं नीचे आ गया निधि दीदी क पास और उनसे मूवी देखने जाने की बात की तो उन्होंने चलने से इंकार कर दिया. फिर मैंने मौसी से पूछा उन्होंने ने मुझे इंकार नहीं किया और हरी झंडी दे दी . मगर साथ में ये भी हिदायत दी क मैं नैना दीदी का ध्यान रखूं और घर जल्दी लौट आऊं.

नैना दीदी टाइट जीन्स और स्किन फिट पिंक टॉप पहन कर निचे आ गयी . मैं तो एक पल उनकी खूबसूरती को देखता hi रह गया आज पहली बार मैंने उनको ऐसे कपड़ों में देखा था. उनका हुस्न ऐसे टाइट कपड़ों में और भी केहर ध रहा था. मेरी नज़र उनके ऊपर hi जैम गयी और मुँह खुला का खुला रह गया.

नैना दीदी : बस भी कर क्या आँखों से खा जायेगा मुझे ? शर्म नहीं अति ऐसे घूरते हुए मैं तेरी बहिन हूँ.

नैना दीदी ने आहिस्ते से ये सब मुझे कहा था. उनकी बातों में शरारत थी और उनकी मुस्कराहट और शरमाना साफ साफ बता रहा था क उनको मेरा इस तरह देखना कितना ाचा लगा है. मेरी इस हालत ने उनके हुसैन की मौन रूप से तारीफ कर दी थी जो क भाई क रूप में मैं नहीं कर सकता.

रजनी मौसी : क्या इन कपड़ों में तू बहार जाएगी?

नैना दीदी : इन कपड़ों में क्या खराबी है ? ये तो नार्मल स बात है हर कोई ऐसे hi कपडे पहनता है.

रजनी मौसी : तुझे और कोई कपडे नहीं मिले ? कोई सलवार सूट पेहेन ले जा कर.

निधि दीदी : जाने दो माँ अमित क साथ hi तो जा रही है वैसे भी शहर में ऐसे कपडे तो आम बात है इसमें कोई बुराई भी नहीं है.

रजनी मौसी : मगर

नैना दीदी : अगर मगर छोड़िये अब तो दीदी ने भी परमिशन दे दी है अब मैं चली bye माँ

रजनी मौसी : टाइम से घर लौट आना और कोई शरारत नहीं करना.



रजनी मौसी समझती रह गयी मगर नैना दीदी उछलती हुई बहार निकल गयी. मैंने भी मौसी क पाऊँ छुए और बहार निकल कर अपनी बाइक स्टार्ट कर क नैना दीदी को पीछे बिठा कर निकल गया
 
भाई लोग स्टोरी में कुछ चीज़ों को मैं पेंडिंग छोड़ कर चल रहा हूँ जिसको राइट टाइम पर hi डिस्क्लोसे करूँगा इस लिए उन चीज़ों का वेट करो और अगर कोई सुग्गेस्टिव देना हो तो दे सकते हो
 
भाई लोग सॉरी बूत आज अपडेट नहीं लिख पाउँगा तबियत थोड़ी ठीक नहीं लग रही
 
अपडेट 77



हम घर से निकल पड़े मगर पहले कहाँ जाना है ये तो डीडे किया hi नहीं था इस लिए मैंने बाइक चलते हुए दीदी से पुछा

अमित : तो दीदी पहले कहाँ जाना है?

नैना दीदी : धुप में बहार कहीं घूम तो सकते नहीं इस लिए पहले सीधा मूवी देखने चलते हैं उसके बाद कहीं और चलेंगे

मैं दीदी को लेकर सीधा सिनेमा में पहुँच गया. दीदी ने टिकट क पैसे देने की कोशिश की मगर मैंने मन कर दिया. टिकट लेकर हम हॉल में बैठ गए . संडे की वजह से अछि खासी भीड़ थी मगर रोमांटिक मूवी होने की वजह से ज्यादातर जवान लड़के लड़कियां hi थे हॉल में. हॉल की लाइट्स बंद होते hi कपल्स ने अपना रोमांस शुरू कर दिया और उनको देखते हुए मुझे भी यद् आ गया क लास्ट टाइम किस तरह से मैं दीपिका ममी और कामिनी ममी क साथ मूवी देखते हुए एन्जॉय कर रहा था.

मैं अतीत की यादों में खोया था क नैना दीदी ने मेरी बाजु दोनों हाथो में थम ली और मेरे साथ चिपक कर मेरे कंधे पर सर रख कर मूवी देखने लगी. मैंने इस बात पर कोई खास ध्यान माहि दिया और मूवी देखने लगा. धीरे धीरे दीदी ने मेरी बाजु को अपने सीने से कास क लगा लिया और मुझे अपनी बाजु पर उनके नरम कोमल चुचों का एहसास होने लगा. मुझे समझ नहीं आ रही थी मैं क्या रिएक्शन दूँ . दीदी पर शायद आसपास क माहौल का असर हो रहा था . वो बीच बीच में मुझे देख रही थी मगर मैं मूवी पर आँखें लगाए बैठा था.

नैना दीदी : कितनी अछि मूवी है न ? जानते हो तुम बिलकुल इस फिल्म क हीरो जैसे हो .

अमित : मगर आप तो हमेशा मुझे दुफर कहती रहती हैं.

नैना दीदी : वो तो मैं तुझे प्यास से कहती हूँ . तू क्या ये सोचता है क मैं तेरा मज़ाक उड़ाती हूँ? तुम मेरे लिए क्या हो ये मैं hi जानती हूँ. अगर तुम्हे मेरा ऐसा कहना ाचा नहीं लगता तो मैं आज क बाद कभी तेरे साथ मज़ाक नहीं करुँगी. मगर तुम मुझसे नाराज़ मत होना.

अमित : अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था आप तो सीरियस हो गयी. मुझे तो आपकी हर बात अछि लगती है . पता है आपका हस्ता खिल खिलता चेहरा देख कर मैं हमेशा खुश होता हूँ.

नैना दीदी : तुम सच कह रहे हो न?

अमित : कसम से

नैना दीदी : पता है मैं आज तक किसी लड़के क साथ मूवी देखने नहीं आयी. मेरी साडी फ्रेंड्स अपने बर्फ क साथ मूवी देखने जाती हैं और मज़े ले कर अपने किस्से सुनती हैं . मैंने आज तक कभी कोई बर्फ नहीं बनाया इसी लिए सब मेरा मज़ाक उड़ाती रहती हैं. हालाँकि मुझे बहुत सरे लड़कों ने पर्पस भी किया मगर मैंने कभी किसी क साथ फ्रेंडशिप नहीं की. मैं हमेशा ऐसा बर्फ बनाना चाहती थी जो बिलकुल हीरो जैसा हो जो सबकी रेस्पेक्ट करता हो और मेरी भी करे , जो ईमानदार हो सेक्स हो भरोसेमंद हो. आज कल ऐसे लड़के hi कहाँ हैं . हर कोई बस मतलब क लिए रिश्ते बनता है और मतलब निकल जाने पर छोड़ क चला जाता है. मैं नहीं चाहती कोई मुझे धोखा दे मेरा दिल तोड़े .

अमित : आप बहुत अछि हैं दीदी आपको ज़रूर आपकी मन पसंद का हीरो जैसा लड़का मिलेगा आप देखना. अगर आपको कोई पसंद आ जाये तो मुझे ज़रूर बताना.

नैना दीदी : तुम्हे hi तो बताना चाहती हूँ ( कैसे कहूं क मैं जो कुछ भी अपने राजकुमार में चाहती हूँ वो सब तुम में है , तुम सबकी रेस्पेक्ट करते हो , ईमानदार हो , वफादार हो, करैक्टर क अचे हो और मुझे पता है तुम कभी मुझे धोखा नहीं डोज मेरा दिल नहीं तोड़ोगे)

अमित : बताना चाहती हैं ? मतलब आपको कोई पसंद आ गया है?

नैना दीदी: मेरा मतलब है क मैं तुम्हे hi बताउंगी .( तुम समझ क्यों नहीं जाते मेरी आँखों की भाषा मेरे दिल की धड़कन मेरी सांसे बस तुम्हारा hi तो नाम लेती हैं.)

दीदी ख़ामोशी से मेरी आँखों में देख रही थी . उनकी आँखों में कुछ था जो मुझे समझ नहीं आ रहा था या मैं समझना नहीं चाहता था. मुझे उनके हाव् भाव देख कर चिंता होने लगी कहीं दीदी बहक तो नहीं रही.

अमित : वो देखिये दीदी हीरो ने क्या स्टंट मारा है.

मैंने माहौल को बदलने और दीदी का ध्यान हटाने क लिए ऐसा कहा मगर दीदी लगातार मेरी और hi देखि जा रही थी जैसे ख़ामोशी की ज़ुबान में मुझसे बहुत कुछ कह रही हों अपनी आँखों से . मुझसे उनकी नज़रों क ये सवाल बर्दाश्त नहीं हो रहे थे . नैना दीदी वैसे hi मेरे कंधे से सटी मेरी आँखों में देखे जा रही थी तभी लाइट्स ों हो गयी मुझे लगा जैसे भगवन ने मेरी सुन ली. इंटरवल हो गया था और सभी अपनी जगह से उठ रहे थे मैं भी खड़ा हो गया और दीदी भी होश में अति हुई कड़ी हो गयी.

‘ हए नैना व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज ? तुम तो कभी हमारे बिना आती नहीं हो मूवी देखने तो आज कैसे आ गयी? फॅमिली क साथ आयी हो? ‘

मैं जब स्नैक्स ले रहा था हम दोनों क खाने क लिए तो एक लड़की नैना दीदी क पास आ कर उनके साथ बात करने लगी.

नैना दीदी : रश्मि तुम यहाँ? किसके साथ आयी हो?

रश्मि : मैं तो बर्फ क साथ आयी हूँ . तुम किस क साथ आयी हो?

नैना दीदी क जवाब देने से पहले hi मैं स्नैक्स ले कर उनके पास आ गया. नैना दीदी क फ्रंड मुझे सर से पैन तक घूर घूर क देखने लगी. इससे पहले मैं कुछ बोलता दीदी बोल पड़ी .

नैना दीदी : रश्मि इससे मिलो ये है अमित और अमित ये है मेरी क्लासमेट रश्मि

अमित : hello

रश्मि : hello .

रश्मि गहरी नज़रों से मुझे देख रही थी . उसकी आँखों में एक चमक थी और मुझे घूरे जा रही थी. नैना दीदी को शायद उसका ऐसा देखना ाचा नहीं लगा

नैना दीदी : अमित ज़रा कोल्ड ड्रिंक भी ले आओगे.

मैं स्नैक्स दीदी को पकड़ा कर कोल्ड ड्रिंक लेने चला गया

नैना दीदी : ऐसे क्या घूर घूर कर देख रही थी ? खा जाएगी क्या ?

रश्मि : तू तो बड़ी तेज़ निकली क्या हाथ मारा है. ये हीरो कहाँ से ढून्ढ लिया तुमने ? हए क्या टार्ज़न जैसी बॉडी है बिलकुल ववे का रेसलर लगता है . पर्सनालिटी तो ऐसी है जैसे फिल्मो का हीरो हो. तेरी तो लाटरी लग गयी यार . कहाँ से चुरा लायी है इसे हए ! काश ये मेरा बर्फ होता

नैना दीदी : बस बस सपने देखना बंद कर और क्या करती तू अगर वो तेरा बर्फ होता?

रश्मि : (आँख दबाते हुआ) उसे छुपा क रख लेती अपनी टांगों क बीच

नैना दीदी : हट गन्दी कहीं की . वो तेरा बर्फ नहीं है जा अपने बर्फ क पास

रश्मि : वैसे अभी तक उसने तेरी ओपनिंग की या नहीं ? अगर तुझे नहीं करवानी तो मैं उसकी सेवा करने क लिए तैयार हूँ एक मौका देदे मुझे

नैना दीदी : चुप होती है या मर खायेगी मुझसे

रश्मि की ऐसी खुली बातों से नैना दीदी क दिल में भी खलबली मच गयी थी मगर वो खुद को काबू में किये हुए थी. इतने में रश्मि का बर्फ भी आ गया और रश्मि ने उसे नैना दीदी से मिलवाया. मैं कोल्ड ड्रिंक ले कर दीदी की तरफ आ रहा था तो मैंने देखा क रश्मि क साथ जो लड़का खड़ा था वो दीदी को घर घर कर देख रहा था. उसकी ऑंखें दीदी की छाती पर थी . उसका इस तरह दीदी को घूरना मुझे ाचा नहीं लग रहा था इस लिए मैं तेज़ कदमो से दीदी क पास पहुँच गया .

रश्मि : विनोद इससे मिलो ये है अमित नैना का बर्फ और अमित ये है विनोद मेरा बर्फ

रश्मि क मुँह से अपने लिए नैना का बर्फ सुन कर मैं शॉकेड हो गया. मेरी इस हालत को दीदी समझ गयी इससे पहले मैं कुछ बोलता उन्होंने ने मेरी बाजु थम ली और बोली

नैना दीदी : चलें

रश्मि तो और बातें करना चाहती थी मगर नैना दीदी मुझे खींच कर अंदर ले गयी और पीछे पीछे रश्मि भी अपने बर्फ क साथ चाक आयी. उसके बर्फ की तो आँखें फ़ैल गयी थी मुझे देख कर क्यूंकि मैं हत्ता कट्टा पहलवान था और वो मरियल सा था. मुझे देखते hi उसके हवसी विचार हवा हो गए . हमारी सीट्स अलग अलग जगह थी इस लिए रश्मि अपने बर्फ क साथ किधर गयी हमने नहीं देखा.

अमित : दीदी ये सब क्या था ? वो मुझे आपका बर्फ कह रही थी और अपने उसे कुछ नहीं कहा.

नैना दीदी : चिल करो कुछ नहीं होता. वैसे भी क्या फरक पड़ता है. मुझे तो ाचा लगा उसका ऐसा कहना इससे मेरा फायदा हो गया.

अमित : फायदा ! मैं समझा नहीं

नैना दीदी: मैंने कहा था न मेरी सब फ्रेंड्स क बर्फ हैं और वो अपने किस्से सुनती रहती हैं. वो मुझे अक्सर छेड़ा करती हैं बहनजी कह कर अब रश्मि ने तुम्हे मेरा बर्फ समझ लिया है तो वो सबको ये बात बता देगी फिर कोई मुझे छेड़ेगा नहीं. तो हुआ न मेरे फायदा

अमित : मगर कहीं ये बात घर तक पहुँच गयी तो

नैना दीदी : कुछ नहहीं होगा तू टेंशन मत ले और बस मूवी एन्जॉय कर

दीदी फिर से मेरे साथ चिपक कर बैठ गयी और हम स्नैक्स कहते हुए मूवी देखने लगे.

मूवी ख़तम होने क बाद रश्मि और उसका बर्फ हमें बहार hi मिल गए . वो तो हमें साथ में किसी होटल रेस्टोरेंट में चलने को कह रही थी मगर दीदी ने मन कर दिया. लेकिन रश्मि क सामने नैना दीदी जान बुझ कर मेरे साथ चिपक चिपक कर बात करती रही जैसे उसे जाता रही हो की ये मेरा बर्फ है.

उसके बाद मैं दीदी को शॉपिंग करवाने ले कर गया. दीदी ने मुझे मेरी पसंद का टॉप उनके लिए सेलेक्ट करने को कहा और मैंने कर दिया . मार्किट से चाट और पानी पूरी खाने क बाद हम घर को वापिस लौट चले . शाम हो चुकी थी और दीदी मेरे पीछे अब लड़कों की तरह दोनों तरफ टंगे कर क बैठी थी जिस वजह से दीदी क ठोस उभर मेरी पीठ पर चुभ रहे थे. उनके निप्पल नोकीले थे जो बार बार मेरी पीठ पर गड रहे थे. मैं जब भी ब्रेक लगता तो ऐसा लगता क वो पीठ क अंदर hi धंस जायेंगे . मगर साथ hi उनका नरम एहसास भी मुझे ाचा लग रहा था.

घर आने पर दीदी सीधा अपने कमरे में चली गयी और मैं मौसी क पास बैठ गया. मैंने जाने क आज्ञा मांगी तो मौसी ने साफ साफ मन कर दिया . आखिर कर डिनर करने क बाद बड़ी मुश्किल से मौसी ने मुझे जाने दिया नहीं तो वो मुझे फैट रुकने को hi कह रही थी. जाते जाते नैना दीदी ने मुझे गले लगा कर कान में धीरे से थैंक्स कहा और मेरी छाती में फिर से अपने नोकीले तीर चुभो दिए.

रत मैं मोहित क घर वापिस आ गया . बाकि सब भी डिनर कर चुके थे. अंकल और मोहित अपने कमरों में जा चुके थे मगर आंटी अभी हॉल में थी उन्होंने मुझे डिनर का पुछा मगर मैंने मन कर दिया और अपने कमरे में चला गया .

अगले दिन कॉलेज में फ्री लेक्चर में नीरज से मिलने उसके ब्लॉक में जा रहा था तो शालू मुझे रस्ते में मिल गयी. मैंने उसे आवाज़ दी मगर वो नहीं रुकी इस लिए मैंने उसका रास्ता रोका

शालू : क्या काम है ? मेरा रास्ता क्यों रोका है?

अमित : तुमने ऐसा क्यों किया?

शालू : क्या किया है मैंने?

अमित : मोंटी तुम्हारा दोस्त है और तुमने मुझे बताया नहीं. उसने मेरे खिलाफ इतना कुछ किया मगर तुमने मेरी मदद करने क बजाये वहां कड़ी उसके साथ है रही थी . इसका मतलब है तुम भी शामिल थी मोंटी क साथ और मेरे साथ वो दोस्ती करना वो सब नाटक था न. मैंने तुम्हे एक अछि लड़की समझा था मगर तुमने मेरे साथ धोखा किया है .

शालू : तुम्हे जो समझना है समझो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता अब मेरा रास्ता छोडो

शालू मुझे साइड कर क निकल गयी और मैं उसे जाते हुए देखता रहा पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा

नीरज : क्या बात कर रहे थे तुम उसके साथ ?

अमित : आप से hi मिलने आया था और वो रस्ते में मिल गयी . वैसे आप जानते हैं उसे?

नीरज : मेरी क्लास में है तो मुझे तो पता hi होगा . तुम क्यों पूछ रहे हो?

अमित : असल में ये खुद hi मेरे पास आयी थी दोस्ती करने और हम दोस्त बन गए मगर जिस दिन मेरे ऊपर वो इलज़ाम लगाया गया ये मोंटी क साथ कड़ी है रही थी. मुझे बस ये पता लगाना है क अगर ये उसी की दोस्त है तो इसने जान बुझ कर मुझ से दोस्ती की और धोखा दिया. मगर सोचने वाली बात ये है क वो सब ये खुद भी कर सकती थी. आप बताइये आप क्या जानते हैं

नीरज : वेल ये मोंटी की खास है ये बात सही है. फर्स्ट ईयर में तो ये स्कालरशिप पर आयी थी मगर फिर मोंटी क चक्कर में पद गयी . इसके इलावा मैंने कई दोस्तों से सुना है क ये मोंटी और उसके दोस्तों की रखैल है और इसका सारा खर्चा वही लोग करते हैं . मगर कई बार मुझे यकीन नहीं होता इस बात पर क्यूंकि इसकी नेचर ऐसी नहीं है . ये एक मिडिल क्लास फॅमिली से है. तू दूर hi रहना इससे

नीरज की बात ने पहले मुझे शॉक किया मगर उसकी लास्ट बात ने फिर से मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया क्यूंकि मेरा दिल भी शालू को गलत नहीं मंटा था मगर जो नीरज ने बताया वो भी शॉकिंग hi था.

नीरज : किस सोच में पद गए?

अमित: कुछ नहीं भाई वो असल में मुझे एक काम था आपसे. आपकी तो अछि जान पहचान है कॉलेज में. मुझे उस दिन क कक्तव फुटेज चाहिए

नीरज : मगर तू क्या करेगा ?

अमित : भाई मुझे पता लगाना है क मेरी मदद आखिर किसने की है

नीरज : ठीक है . कॉलेज का तकनीशियन मेरा नोन है मैं उससे बात करता हूँ काम हो जायेगा. चल आ कैंटीन में चलते हैं.

नीरज मुझे अपने साथ कैंटीन ले गया और फिर अपनी साडी मंडली से मुझे मिलवाया और सबको यही कहा क ये मेरा छोटा भाई है. सबने मेरा ाचा वेलकम किया. उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ राधा और नेहा दीदी से थोड़ी बहुत बातचीत हुई और हम घर आ गए.

शाम को प्रैक्टिस से जब मैं ट्यूशन क लिए मंजू मम क घर गया तो वो घर में सामान इधर से उधर शिफ्ट कर रही थी .

अमित : मैं कुछ मदद करूँ?

मंजू मम : तुम आ गए. कई दिनों से सोच रही थी सेटिंग चेंज करने की आज दिल किया तो करने लगी.

अमित : कल संडे था आप मुझे कल बता देती हम आराम से कर लेते

मंजू म : संडे को तुम्हे परेशां करना मुझे सही नहीं लगा और मैं भी कल सारा दिन बस लेती रही .

अमित : लाइए इसे मैं रख देता हूँ.

मैं मम क साथ उनका सामान सेट करने लगा. सामान सेट करने क बाद मम मुझे बिठा कर कॉफ़ी बनाने चली गयी. मेरी नज़र सामने पड़े बॉक्स पर गयी जिसमे कुछ सामान पड़ा था. मैंने उसे देखा तो उसने एक एल्बम था मैंने वो उठा लिया और देखने लगा. ये मंजू मम का पर्सनल एल्बम था जिसमे वो और उनके हस्बैंड की फोटोग्राफ्स थी . मम पहले जीन्स और सुइट्स वगैरह पहनती थी और उन तस्वीरों में वो बहुत खूबसूरत दिख रही थी . मगर अब जैसे उन्होंने अपना पूरा स्टाइल hi बदल दिया था. मैं एल्बम देखने में खोया था क मुझे पता भी नहीं चला कब मम कॉफ़ी ले आयी.

मंजू म : गलत बात . तुम्हे ऐसे पर्सनल चीज़ों को नहीं देखना चाहिए.

अमित : ी ऍम सॉरी पर क्या मुझे अपनी दीदी की एल्बम देखने का भी हक़ नहीं है.

मंजू म : बिलकुल है क्यों नहीं है मगर मैं नहीं चाहती पुराणी यादों को फिर से ताज़ा करना. अब वो सब पुराणी बातें हो चुकी हैं.

अमित : ऐसे कैसे पुराणी हो चुकी हैं. आप अभी बीड़ी नहीं हुई हैं . हाँ मगर लगता है अपने खुद को बीड़ी मन लिया है इसी लिए ओल्ड फाशिवेद रहती हैं . हमेशा सदी में hi . क्या आपको नहीं लगता आप टाइम से पहले बूढी होना चाहती हैं

मंजू म: मुझे बूढी कहा अभी तुझे बताती हूँ.

मम मुझे मरने क लिए उठ कर मेरे पास आयी तो मैं उठ कर भगा और उन्हें बूढी दीदी कहता हुआ भागने लगा.

अमित : बूढी दीदी मैं आपके हाथ नहीं आऊंगा

मनु म : ठहर अभी तुझे बताती हूँ मुझे बूढी कहता है. तू होगा बूढ़ा उल्लू गधा रुक तुझे बताती हूँ

मैं मंजू म को चहकता हुआ इधर से उधर भाग रहा था और वो मुझे पकड़ने की कोशिश कर रही थी . मैं तो रेसलिंग प्लेयर होने क कारन इस सब का आदि था मगर मम जल्दी hi थक गयी और उनकी सांस फूल गयी.

अमित : लीजिये पानी पीजिये

मंजू म : थैंक्स

मेरे हाथ से पानी की बोतल पकड़ कर मम पानी पिने लगी. और पानी पिटे hi मेरा कण पकड़ लिया

मंजू म: अब बोल क्या कह रहा था. मैं बूढी हूँ ?

अमित : मेरा कान छोड़िये प्लीज दीदी दर्द हो रहा है छोड़िये. अब आपको बूढी नहीं कहूंगा

मम ने मेरा कान छोड़ दिया.

अमित : आठ कान उखाड़ना था क्या

मंजू म : अब बोल क दिखा बूढी

अमित : नहीं अब मैं आपको बूढी नहीं कहूंगा. अब तो सिर्फ बूढी दीदी कहूंगा

मम ने इतना सुनते फिर से मुझे मरने क लिए उठी मगर मैंने खुद hi अपने कान पकड़ लिए और सॉरी कहते हुए उनको कॉफ़ी पिने को कहा. मम मेरी इस हरकत पर खिल खिला क है पड़ी.

अमित : आप ऐसे hi हस्ती रहा कीजिये . आपकी हंसी बहुत प्यारी है.

मेरी बात सुन कर एक डैम से मम की हंसी रुक गयी और उनका चेहरा घंभीर हो गया और वो उठ कर अपने कमरे में चली गयी. उनका यूँ जाना मुझे ाचा नहीं लगा और मैं भी उनके पीछे उनके कमरे में चला गया. वो अपने बीएड पर उलटी लेती आंसू बहा रही थी . मैंने जाकर उनको बिठाया और उनके आंसू साफ करने लगा.

अमित : आप रो क्यों रही हैं? अगर मेरी किसी बात पर आपको बुरा लगा तो प्लीज मुझे माध कर दीजिये. मैं कान पकड़ता हूँ .

मम अभी भी रोये जा रही थी

अमित : अगर आप चुप नहीं हुई तो मैं कल से आपके पास नहीं आऊंगा.

मेरे ऐसा करते hi मम चुप हो गयी. मैंने उनका चेहरा साफ़ किया

अमित : अब बताइये आप ऐसे अचानक क्यों रो इ लगी. क्या मेरी बात आपको बुरी लगी?

मंजू म : नहीं अमित तुमने कुछ गलत नहीं कहा. असल में मैं हसना hi भूल गयी थी आज कितने सैलून बाद मैं हंसी हूँ और जब तुमने ये कहा क मेरी हंसी प्यारी है मुझे अपना अतीत यद् आ गया. मेरे भैया अक्सर मुझे यही कहा करते थे क मंजू तेरी हंसी बहुत प्यारी है तू ऐसे hi हँसते रहा कर. और देखो मुझे हंसने का कह कर हमेशा क लिए रोटा छोड़ गए.

इतना कह कर मम फुट फुट कर रोने लगी मैंने उनको रोकने की बहुत कोशिश की मगर उनके अंदर का गुबार शायद बहार आ रहा था . उनकी ज़िन्दगी में उनके पास कोई भी नहीं था इस लिए शायद मेरे रूप में अपने भाई पाकर अपना दर्द ज़ाहिर कर रही थी. मैंने उनको खुद से लगा लिया और उनके सर पर पीठ पर हाथ फेरने लगा. मम सिसकियाँ लेती हुई रो रही थी बिलकुल किसी छोटी बची की तरह . मैंने उनके शांत होने तक उन्हें कुछ नहीं कहा . जब वो शांत हुई तो मैंने उन्हें खुद से दूर किया और कहा

अमित : ये क्या किया? रो रो कर मेरे सरे कपडे गीले कर दिए अब मैं घर कैसे जाऊंगा?

मेरी बात पर मम क चहरे पर हलकी सी स्माइल आ गयी

मंजू म : थैंक्स अमित . ऐसा लग रहा है जैसे मन हल्का हो गया हो . थैंक यू वैरी मच

अमित : लो करलो बात . एक तरफ भाई भी बोलती हैं और दूसरी तरफ थैंक्स कह क पराया भी कर देती हैं. ठीक है अगर मैं पराया hi हूँ तो आज क बाद मैं नहीं आऊंगा

इतना कह कर मैं उठ कर जाने लगा तो मम ने मुझे कान से पकड़ लिया.

मंजू म : क्या कहा ? नहीं आएगा ? तू जाकर तो दिखा तेरी टंगे तोड़ दूंगी . मैं भी तो देखूं कैसे जाता है यहाँ से.

अमित : सॉरी सॉरी मैं तो मज़ाक कर रहा था. कॉफ़ी ठंडी हो रही है और आप मेरा कान पकडे कड़ी हैं.

मंजू म: हे भगवन कॉफ़ी का तो भूल hi गयी . मैं बही गरम कर क लायी.

मम कॉफ़ी को फिर से गरम कर क ले आयी और हम बातें करते हुए कॉफ़ी पीने लगे. मुझे लगा अब मैं मम से अगर उनकी फॅमिली क बारे में बात करूँगा तो वो शायद फिर से रोने लग जाएँ इस लिए मैंने उनकी एल्बम खोल कर उनके सामने रख दी.

अमित : आप इन सुइट्स में कितनी अछि लग रही हैं इन पिक्टुरेस में फिर अब आप सूट क्यों नहीं पहनती?

मंजू म : छोडो वो सब गुज़ारे ज़माने की बातें हैं वैसे भी कॉलेज फैकल्टी में सब साडी hi पहनती हैं. और अब सूट पेहेन कर मैं करुँगी भी क्या. एक विधवा क लिए इन सब का कोई मतलब नहीं है.

अमित : मगर आप सुइट्स में ज्यादा अछि लगती हैं. और विधवा हो जाना किसी की मर्ज़ी से तो नहीं होता. ये तो ऊपर वाले की मर्ज़ी है जिसका जितना वक़्त लिखा है वो पूरा कर क चला जाता है. मगर इसका मतलब ये तो नहीं उसके बाद उसके चाहने वाले उसके परिवार वाले भी मर जाएँ. ज़िन्दगी को अपने हिसाब से जियो अगर समाज क दर से आप अपनी इच्छाओं को छोड़ कर जीने की कोशिश करेंगी तो आप को ज़िन्दगी सजा से ज्यादा और कुछ नहीं लगेगी. क्या आप उस जुर्म की सजा भुगतना चाहती हैं जो अपने किया hi नहीं. अगर किसी की गलती है तो वो ऊपर वाले की है फिर आप खुद को सजा क्यों दे रही हैं. ज़रा सोचिये अगर वो न चाहता क आप जियें तो आप कब की दुनिया छोड़ गयी होती. मगर आप अब भी ज़िंदा हैं इसका सिर्फ ये hi मतलब है क आप अपनी ज़िन्दगी को जियें. और ये भी तो सोचिये आपका जो भाई आपको हमेशा हँसता देखना चाहता था क्या उसकी आत्मा को दुःख नहीं होता होगा आपको इस हल में देख कर . आप किस लिए ये सब कर रही हैं ? खुद को रुला कर आप अपने उस प्यार करने वाले भाई को भी रुला रही हैं.

अमित : ी ऍम सॉरी अगर मैं कुछ ज्यादा बोल गया हूँ तो . मैं बस इतना hi कहना चाहता हूँ क आप जैसी थी वैसी बन जाइये. आपका भाई सही कहता था क आपको हंसी बहुत प्यारी है और आप हमेशा हँसते रहा कीजिये ताकि देखने वालों को भी कुछ पल क लिए ख़ुशी मिल सके.



मंजू मम शुन्य में खोई मेरी बातों पर जैसे मन hi मन मंथन कर रह थी . आज पड़े तो कोई हुई नहीं बातों बातों में काफी टाइम हो गया था इस लिए मैंने कॉफ़ी का कप खली कर क रखा और मम को गुड bye बोल कर निकल गया. मम मेरे जाने क बाद भी मेरी कही बातों पर hi सोचती रही.
 
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