Adultery Manhoos se mahan tak - Page 8 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 63

राधा चुप चाप अपने ख्यालों में खायी मेरे पीछे बैठी रही . ह्यूमेन मार्किट से सामान लिया और घर वापिस आ गए. दिव्या मौसी ने जल्दी से किचन में जा कर सारा इंतज़ाम किया और राधा उनका साथ दे रही थी. मैंने सब क साथ चाय पि और 5 बजे से पहले hi सबसे मिल कर मोहित क घर क लिए निकल पड़ा

अब आगे-

मैंने मोहित क घर पहुँच कर कपडे बदले और प्रैक्टिस करने चला गया मोहित अपने कमरे में सो रहा था और आंटी भी शायद अपने कमरे में होंगी. प्रैक्टिस से जब मैं वापिस लौटा तो मोहित क घर पर तीन गाड़ियां कड़ी थी. मैं अंदर गया तो हॉल में मोहित आंटी और मोहित क पापा बैठे हुए थे. मोहित क पापा को आज मैं पहली बार देख रहा था सामने. देखने में अचे थे नार्मल फिटनेस रंग भी साफ़ था .

मोहित : पापा ये है मेरा दोस्त अमित

मैंने आगे बाद कर अंकल क पाऊँ छुए उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया.

अंकल : भाई देखने में तो किसी अचे परिवार से लगते हो . और जो कुछ तुम्हारे बारे में सुना है मुझे यकीन हो गया है क मोहित ने तुमसे दोस्ती कर क बहुत ाचा काम किया है. मैं उम्मीद करता हूँ तुम दोनों अचे दोस्त साबित होंगे. इस दुनिया में दोस्ती सबसे नायब रिश्ता है मेरे बचो हमेशा एक दूसरे का साथ देना.

अमित : अंकल आप ने बिलकुल सही कहा दोस्ती सबसे नायब है . क्यूंकि रिश्ते हमें तक़दीर देती है मगर दोस्त हम खुद चुनते हैं और दोस्ती क लिए हमेशा जान हाज़िर है .

अंकल मेरी बात पर ख्यालों में खो गए और उनकी आँखों में पानी आ गया

मोहित : क्या हुआ डैड आप की आँखों में आंसू

अंकल मोहित की बात सुन कर होश में आये और मुझे कस क गले लगा लिया.

अंकल : शाबाश बीटा अब तो मुझे पूरा यकीन है तुम्हारे साथ मेरा बीटा हमेशा मेहफ़ूज़ रहेगा और सही रस्ते पर चलेगा. तुमने आज मुझे मेरे दोस्त की यद् दिला दी वो भी यारो का यार था. मैं आज जो कुछ भी उसी की बदौलत हूँ . काश वो आज मेरे साथ होता .

आंटी अंकल क पास आ गयी और अंकल कंधे पर हाथ रखा

आंटी : वो हमेशा आपके साथ हैं आपकी यादों में आप दिल मत छोटा करें

उसके बाद अंकल हमारे साथ काफी देर तक बातें करते रहे . अंकल दो दिन से आउट ऑफ़ स्टेशन थे इसी लिए मुलाकात नहीं हुई थी और आज अंकल क आ जाने से मुझे लगा क अब आंटी की प्यास अंकल बुझा hi देंगे सो रानी क पास जाने की उन्हें ज़रूरत माहि पड़ेगी. रत का खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए. मैंने भी सोने का सोचा मगर मेरे दिमाग में रानी की बातें घूम रहीं थी तो मैंने एक बार रानी का खेल अपनी आँखों से देखने का फैसला किया और 12 बजे का अलार्म लगा कर लेट गया.

मेरी आंख पता नहीं कब लग गयी थी मगर अलार्म की आवाज़ सुन कर मैं उठ गया. मैं जल्दी से उठा और अपने कमरे से बहार निकला घर में पूरा सन्नाटा था सब आराम से सो रहे थे . मैं चुप चाप दबे पाऊँ बहार निकला और पिछली तरफ बने हुए सर्वेंट क्वार्टर की तरफ गया.

एक क्वार्टर की लाइट जल रही थी मैं उसके पास चला गया. अंदर से आवाज़ें आ रही थी मैंने अंदर देखने की जगह ढूंढने की कोशिश की तो मुझे जगह मिल गयी. अंदर रानी पूरी नंगी थी नीचे घुटनो पर बैठ कर ड्राइवर का लैंड चूस रही थी. ड्राइवर भी नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ था. ड्राइवर सांवले रंग का था और लैंड भी मेरे मुकाबले छोटा और पतला था.

ड्राइवर लोकु : आह साली चूस और चूस मेरा लैंड . आज तेरा वो हाल करूँगा क तुझे पता चल जायेगा मेरी बात न मैंने का अंजाम क्या होता है.

लोकु रानी क सर को पकड़ कर पूरा लैंड उसके मुँह में घुसा रहा था जिससे रानी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और वो बार बार खांस रही थी .

रानी : ाखुन ाखुन आआह मैं क्या करूँ मैं तो पूरी कोशिश कर रही हूँ ाआखःह ोोूखह्ह्ह्ह

लोकु रानी को बात भी करने नहीं दे रहा था और बार बार लैंड उसकी हलक में उतर देता था

लोकु : साली चैनल कितने दिनों से कह रही है काम हो जायेगा मगर अभी तक हुआ नहीं लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी . मैं आज क बाद तेरी चुदाई बंद कर दूंगा और सब को बता दूंगा तू एक रंडी है . तेरी फिल्म सरे नौकरों क मोबाइल में होगी फिर देखना तू सब की रंडी बन जाएगी

रानी : नहीं ऐसा मत करना मैं तो वैसा hi कर रही हूँ जैसे तुमने कहा था. मालकिन को जूस में वो दवाई मिला कर देती हूँ जो तुमने दी थी जिससे उनके बदन में और आग लग जाती है . मैं तो उनकी छूट को भी चाट चाट कर उनकी आग बढ़ती रहती हूँ. आज तो मैंने उनको तुम्हारा लैंड दिखने की भी बात की थी शायद वो आ भी जाती मगर साहब आ गए

लोकु : क्याआ ! सच में वो मेरा लैंड देखने को मान गयी ?

रानी : हाँ वो लगभग मान hi गयी थी मैंने इतनी तारीफ की है तुम्हारे लैंड की क वो खुद hi मुझे कहेंगी तुम्हारा लैंड दिखने को

लोकु : बस एक बार उसको अपनी रासलीला दिखा दे फिर वो खुद को रोक नहीं पायेगी और मेरे आगे टाँगे उठा क लेट जाएगी. क्या माल है मालकिन स्वर्ग की अप्सरा है अप्सरा. एक बार उसको तबियत से छोड़ लूँ फिर तो जन्नत यही पर hi मिल जाएगी

रानी : तुम्हे तो जन्नत मिलेगी मगर मुझे क्या मिलेगा

लोकु : अरे तू क्यों चिंता करती है मेरी रानी अगर मालकिन हमारे बस में आ गयी तो फिर जो चाहो उससे ले सकते हैं तुझे तो माला माल करदूंगा.

रानी : बस इतना यद् रखना मालकिन की छूट मिलने क बाद मुझे भूल मत जाना

लोकु : बिलकुल भी नहीं मेरी रंडी तू तो मेरी रखैल है तुझे तो मैं मालकिन क साथ एक hi बिस्तर पर छोडूंगा . अब बस जल्दी से काम मर्दे मेरा

रानी : अभी 2-3 दिन साहब घर पर हैं ऐसे में कुछ नहीं हो पायेगा साहब क जाते hi कुछ करती हूँ .

मैं बहार खड़ा दोनों की बातें सुन कर हैरान था. दोनों मिल कर कैसे अपनी hi मालकिन को बर्बाद करना चाहते हैं. जिस थाली में कहते हैं उसी में छेड़ कर रहे हैं . इनकी तो माँ की . अब समझा आंटी क्यों इतनी प्यासी हैं क्यूंकि रानी उनकी आग को भड़का रही है. वो दोनों अंदर अपना काम कर रहे थे मैंने मोबाइल निकल कर उनकी रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.

लोकु : जब भी मालकिन को देखता हूँ तो लैंड फटने को हो जाता है . रानी तू बस एक बार मालकिन को मेरी बना दे मैं तुझे सच मच की रानी बना दूंगा.

रानी : मैंने कहा न तेरा काम हो जायेगा साहब को ज़रा बहार जाने दे फिर मैं मालकिन को तैयार कर लुंगी. अब पहले मेरी प्यास बुझा

लोकु ने रानी को बिस्तर पर लिटा दिया उसकी छूट में लैंड पेल दिया. लोकु ने वियाग्रा की गोली खायी थी जो उसकी बातों से पता चला फिर भी वो 10 मिनट्स से ज्यादा रानी को छोड़ नहीं पाया. दोनों का काम ख़तम होते hi मैंने रिकॉर्डिंग बंद की और वापिस अपने कमरे में आ गया.

लोकु और रानी क साथ क्या किया जाये मैंने इसके बारे में सोचने लगा . मोहित को बताता तो वो पता नहीं गुस्से में क्या कर बैठ ता और ये भी हो सकता था क वो आंटी को भी कसूरवार समझता . अंकल से भी बात नहीं की जा सकती थी. आंटी से hi बात करनी होगी और उन्हें समझाना होगा मगर उनसे बात कैसे करूँ. वैसे इन सब बातों की वजह तो अंकल का आंटी को टाइम न देना था अगर वो आंटी को टाइम देते तो शायद आंटी इतनी प्यासी न होती.

जो भी हो मोहित मेरा दोस्त है तो उसकी फॅमिली मेरी फॅमिली है उसकी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त . अब मुझे सब कुछ ठीक करना होगा. मैं लोकु और रानी को सबक सीखने क बारे में सोचता हुआ सो गया. सुबह मैं उठने में थोड़ा लेट हो गया इस लिए ग्राउंड से भी लेट वापिस आया . आंटी शायद योग कर क जा चुकी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया . अंकल डाइनिंग टेबल पर बैठे अख़बार पद रहे थे.

अमित : गुड मॉर्निंग अंकल कैसे हैं आप

अंकल : गुड मॉर्निंग अरे वह इतनी जल्दी उठ गए तुम तो और तैयार भी हो गए

तभी आंटी जूस लेकर आ गयी

आंटी : उठ गए ? अरे ये तो सब से पहले उठ जाता है और ग्राउंड में एक्ससरसीसे करने जाता है.

अंकल : क्या सच में ? वैसे कौन स ग्राउंड में जाते हो एक्ससरसीसे करने?

अमित : जी वो कॉलेज ग्राउंड में

अंकल : अरे इतनी दूर जाते हो एक्ससरीज़ करने यहीं पास में hi तो है ग्राउंड. वहां जाया करो. पता है शहर क सब बड़े लोग सब अफसर वहीँ होते है सुबह . और घर क इतना पास है क पैदल hi जा सकते हो . कॉलेज ग्राउंड में आने जाने में कितना टाइम ख़राब होता होगा

हम बातें कर रहे थे इतने में मोहित भी तैयार हो कर आ गया

मोहित : गुड मॉर्निंग डैड

अंकल : गुड मॉर्निंग . बीटा तुम भी अमित क साथ सुबह एक्ससरसीसे करने जाया करो और इसके जैसे मजबूत बनो

मोहित : डैड इसके जैसा तो बनना मुश्किल है ये तो पहलवान है मुझे तो आप माफ़ करो

बातों बातों में ह्यूमेन नाश्ता किया और कॉलेज चले गए. कॉलेज में रूटीन से लेक्चर अटेंड किये. फ्री लेक्चर में जब हम कैंटीन में बैठे थे तो शिवानी हमारे पास आ गयी.

शिवानी : कहाँ थे तुम दिखाई hi नहीं देते . लगता है तुम मुझे दोस्त भी नहीं समझते वर्ण एक फ़ोन तो कर hi सकते थे .

अमित : वो मैं बिजी था और वैसे भी मेरे पास तुम्हारा no. नहीं है.

शिवानी : ये क्या बात हुई no. नहीं है लाओ अपना मोबाइल दो

शिवानी ने ज़बरदस्ती मेरा मोबाइल लिया और मेरे फ़ोन से अपना no. डायल किया और मेरे मोबाइल में अपना no. सेव कर दिया. शिवानी मेरे साथ सेल्फी लेने की ज़िद करने लगी और मुझे hi सेल्फी लेने को कहा. मैंने पीछा छुड़ाने क लिए अपने मोबाइल से हम दोनों की सेल्फी ले ली. सेल्फी लेते वक़्त वो मेरे साथ चिपक गयी थी. उसने मेरे मोबाइल से फोटो सेंड करने क लिए मोबाइल ले लिया और मुझे कोल्ड ड्रिंक लेन को कहा.

शिवानी : अमित चलो आज हम मूवी देखने चलते हैं .

अमित : नहीं मुझे लेक्चर अटेंड करने हैं

शिवानी : अभी कौन सा इतनी स्टडी हो रही है वैसे भी एक दो लेक्चर बंक करने से कुछ नहीं होता.

अमित : नहीं मैं लेक्चर बंक नहीं करता.

शिवानी : क्या यर कितने बोरिंग हो तुम भी ाचा एक बात तुम्हे बतानी थी. मैं कॉलेज की ड्रामा टीम में चुनी गयी हूँ. और इस साल यूनिवर्सिटी क कम्पटीशन में कॉलेज टीम क साथ हिस्सा लुंगी.

अमित : ये तो बहुत ख़ुशी की बात है

मोहित : कोंग्रटुलतिओन्स इस बात पर तो पार्टी बनती है

शिवानी : वही तो मैं कह रही हूँ मगर अमित क पास तो मेरे लिए वक़्त hi नहीं है.

अमित : ऐसी बात नहीं है बस मैं लेक्चर बंक नहीं करना चाहता

शिवानी : तो कॉलेज क बाद चलें ?

अमित : नहीं शाम को मुझे प्रैक्टिस करने जाना होता है वो तो बिलकुल भी मिस नहीं कर सकता

शिवानी : ठीक है एक काम तो कर सकते हो न मेरे लिए ? मुझे मेरे प्ले की प्रैक्टिस में मेरी मदद तो कर सकते हो न?

अमित : अब इतना तो कर hi सकता हूँ मगर लेक्चर नहीं बंक करूँगा . तुम फ्री लेक्चर में एडजस्टमेंट कर लो

शिवानी : ठीक है अभी तो लेक्चर फ्री है न चलो मैं तुम्हे बता दूँ कहाँ प्रैक्टिस करते हैं हम.

मैं उसकी बात मन कर उसके साथ चल पड़ा और मोहित को भी अपने साथ ले लिया क्यूंकि मैं अकेला शिवानी क साथ नहीं जाना चाहता था. शिवानी हम दोनों को ऑडिटोरियम में ले गयी जहाँ पर स्टेज बानी हुई थी और उसके सामने 200/300 चेयर्स लगी हुई थी. स्टेज पर कुछ लड़के लड़कियां प्रैक्टिस कर रहे थे. शिवानी उनसे जा कर मिली . अगले लेक्चर का टाइम हो रहा था इस लिए मैं और मोहित जल्दी वापिस आ गए.

लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मई और मोहित साइंस ब्लॉक में गए . राधा नेहा दीदी और मीनल एक साथ थी. राधा का देखने का नजरिया आज बदला बदला सा था. नेहा दीदी क सामने मैं कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए मैंने इंदिरेक्ट्ली राधा से पुछा

अमित : राधा सब ठीक है न ? मछरों ने दोबारा तंग तो नहीं किया?

राधा मेरे सवाल पर मुस्कुरा दी और न में सर हिला दिया. आज राधा मुस्कुरा कर मेरे साथ पेश आ रही थी मेरे दिल को बहुत सुकून मिला. उसके बाद हम अपने अपने घर निकल गए . घर से फिर खाना प्रैक्टिस और फिर से वापिस रत का खाना सब रूटीन से हुआ कोई खाद बात नहीं हुई.

आज सैटरडे था और मैंने शाम को गाओं जाना था. आज कॉलेज में मंजू मम ने मुझे घर आने का प्रॉमिस यद् दिलाया और मुझे अपना एड्रेस बता दिया. मैंने भी मम को बता दिया क मैं 4 बजे आ जाऊंगा .

मैं कॉलेज से मोहित क साथ घर गया और 3 बजे क बाद गाओं जाने क लिए निकल गया. मोहित क घर से मैं मंजू मम क घर की तरफ निकल पड़ा . घर ज्यादा दूर नहीं था 30 मिनट्स में मैं मम क घर पहुँच गया. ये लोकैलिटी अछि थी मम का घर भी ाचा बना हुआ था . ज्यादा बड़ा तो नहीं मगर 2 मंज़िला था. मम क पास अपनी एक कार भी थी जिससे वो कॉलेज अति थी

मैंने जाकर बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला . मम हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी . मम ने कपडे चेंज कर लिए थे और नयी सदी बांध ली थी .

मंजू म : तुम आ गए ? मुझे तो लगा था कहीं तुम भूल जाओगे. आओ अंदर आओ

अमित : ऐसे कैसे भूल जाता मम. आप तो मेरी टीचर हैं भला आपको झूठ बोल सकता हूँ? वैसे भी माइन प्रॉमिस किया था और मैं अपने प्रॉमिस तोड़ता नहीं

मंजू म : ये तो बहुत अछि बात है. जो लोग अपने उसूलों क पक्के होते हैं वो दिल क हमेशा सच्चे होते हैं और तुम तो hi कितने अचे.

मैं मम क साथ घर क अंदर गया. घर में 2 बीएड रूम किचन और हाल था बिच में थोड़ा ओपन स्पेस . मम ने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स ले आयी

अमित : अरे मम इसकी क्या ज़रूरत थी

मंजू म : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? तुम पहली बार मेरे घर ए हो. तुमने मेरी इतनी मदद की थी मैं भला इतना भी नहीं कर सकती. और ये तकल्लुफ छोडो मैं मैडम तुम्हारी कॉलेज में हूँ यहाँ नहीं

अमित : मम आप तो हमेशा मम hi रहेंगी. वैसे आप क घर कोई और नज़र नहीं आ रहा?

मंजू म : कोई होगा तो नज़र आएगा . मैं अकेली hi रहती हूँ यहाँ

अमित : सर , ी मैं आपके हस्बैंड और आपके बचे ?

मेरी इस बात पर मम क चहरे की मुस्कुरहट गायब हो गयी और गंभीरता नज़र आने लगी.

मंजू म : मेरे हस्बैंड की डेथ बहुत पहले हो गयी थी शादी क कुछ महीनो बाद hi और बचे हैं नहीं क्यूंकि मैं माँ नहीं बन पायी थी.

मंजू मम की आँखों में पानी आ गया बात करते हुए शायद इस बात से उनके दिल की दुखती राग को मैंने छेड़ दिया.

अमित : ी म सॉरी मम . मुझे नहीं पता था . मगर आप अकेली क्यों हैं ? क्या आपका और कोई रिश्तेदार नहीं है ?

मंजू म : रिश्तेदार ? रिश्ते तो सब यहाँ मतलब क हैं . जब तक किसी को मतलब होता है तब तक hi रिश्ता होता है.

अमित : मतलब आपके रिश्तेदारों ने आप के साथ ाचा नहीं किया. वैसे आपके सेज भाई बहिन और माँ बाप कोई तो होगा?

मंजू म : माँ बाप तो बचपन में hi गुज़र गए थे. भाई हैं मगर मैंने उनसे सरे रिश्ते तोड़ लिए हैं

अमित : वो क्यों?

मंजू म : ये मेरी पर्सनल लाइफ है मैं ये नहीं बता सकती

अमित : सॉरी मम मुझे पूछना नहीं चाहिए था पर पता नहीं क्यों जब भी आपसे बात करता हूँ ऐसा hi लगता है क जैसे आप मेरी अपनी हैं.

मंजू म : मुझे भी ऐसा hi लगता है. इसी लिए तो तुम्हे घर आने को इन्विते किया वर्ण इस घर में और कोई नहीं अत. शाम को मोहल्ले क 4/5 बचे पड़ने आ जाते हैं .

अमित : तो आपका वक़्त कैसे गुज़रता है मम ? दुनिया की भीड़ में आप कितनी अकेली हैं. इंसान की ज़िन्दगी में कोई तो अपना होना hi चाहिए अकेला तो पेड़ भी सूख जाता है. क्या आपका मन नहीं होता किसी क साथ हँसा जाये किसी क साथ गम बनता जाये.

मंजू म : जिसको तकदीर ने hi अकेला कर दिया हो वो छह क भी किसी को अपना नहीं बना सकता अमित और वैसे भी अब तो ये ज़िन्दगी बस किसी तरह गुज़ारनी है . मैं गुज़ारे वक़्त की यादों और किताबों क सहारे ज़िन्दगी गुज़र रही हूँ.

अमित : आपकी एक एक बात में कितना दर्द छुपा है काश मैं आपके इस गम को मिटा सकता . आप क साथ शायद किसी जनम में मेरा रिश्ता ज़रूर रहा होगा जो आप क साथ तकदीर ने मुझे मिलाया है. अगर आप बुरा न मने तो मुझे अपना फॅमिली मेंबर समझ सकती हैं . मुझे ख़ुशी होगी अगर मैं अपने किसी काम आ सका.

मंजू म : तुम नहीं जानते तुमने इतना कह कर मेरे दिल को कितना सुकून दिया है. जब भी तुम्हे देखती हूँ मुझे भी यही लगता है क तुम मेरे अपने हो. और आज से तुम मुझे जैसे चाहे बुला सकते हो चाहे तो आंटी कहलो चाहे बुआ मौसी या जो तुम्हे ाचा लगे .

अमित : आपको देख कर तो लगता है जैसे आपने 5/6 साल पहले hi कॉलेज छोड़ा होगा ऐसे में आपको आंटी कहना गलत होगा आप तो मेरी बड़ी बहिन जैसी लगती हैं इस लिए मैं आपको दीदी कहूंगा.

मंजू म : बच्चू तुम्हे पता नहीं मेरी उम्र कितनी है वर्ण तुम दीदी नहीं कहते

अमित : मुझे तो जो लगा मैंने वो बता दिया . अब अगर आप कुछ और चाहती हैं तो मुझे अपनी उम्र बता दीजिये मैं उस हिसाब से देख लेता हूँ

मंजू म : मुस्कुरा कर) तुम्हे पता नहीं लेडीज से उनकी उम्र नहीं पूछते.

अमित : तो आप hi बताइये मैं आपको क्या कहूं

मंजू म : दीदी भी चलेगा वैसे इतना बुरा भी नहीं है . काम से काम इतना तो फील होगा hi क मैं अभी जवान हूँ.

अमित : तो ठीक है मैं आपको मंजू दीदी बुलाऊंगा . कॉलेज में मम hi ठीक रहेगा.

मंजू म : हम्म्म्म , मगर अब ख्याल भी रखना . दीदी बोलै है तो दीदी का ख्याल भी रखना होगा.

अमित : ज़रूर , आप जब बुलाएंगी हाज़िर हो जाऊंगा . आज क बाद आप खुद को कभी अकेला मत समझना मैं हमेशा आपके साथ हूँ.

मंजू म : ये हुई न बात तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया . तुम्हे कैसे बताऊँ तुम्हारी इस बात से दिल को कितनी ठंडक पहुंची है . बरसों से बंजर बन चुकी ज़िन्दगी में अपने पैन की जो बूंदे तुमने बरसाई हैं इनके लिए दिल कब से तड़प रहा था. तुम ज़रूर मेरे भाई थे पिछले जनम में भी

मंजू म ने भावुक हो कर मुझे गले लगा लिया. कितने सैलून से मैंने भाई को राखी नहीं बंधी इस बार ज़रूर बांधूंगी. तू अपनी इस दीदी को छोड़ कर कहीं जायेगा तो नहीं न.

अमित : बिलकुल नहीं दीदी . आप जब भी यद् करेंगी मुझे अपने करीब पाएंगी.

मंजू म : तो भाई तुमने मेरे बारे में तो सब जान लिया कुछ अपने बारे में भी बताओ

अमित : क्या जानना है पूछिए. वैसे मैं इतना बता देता हूँ क मैं हैं में रहता हूँ . गाओं में पहलवानी करता था उसी की वजह से कॉलेज में एडमिशन मिला है. घर में माँ है बाबा है दो छोटे मां हैं और ममी हैं .

मंजू म : तो गाओं से रोज़ उप डाउन करते हो.

अमित : जी मैं यहाँ हॉस्टल में रहता हूँ आज सैटरडे है आज गाओं जा रहा हूँ अब मंडे को आऊंगा.

मंजू म : तुम हॉस्टल में क्यों रह रहे हो? तुम चाहो तो यहाँ मेरे साथ रह सकते हो. अपनी दीदी क होते तुम हॉस्टल में रहो क्या यह ाचा लगता है?

अमित : मगर लोग क्या कहेंगे

मंजू म : मैं सब को बता दूंगी ये मेरा छोटा भाई है . वैसे भी मुझे यहाँ कोई नहीं जनता. अभी 4 महीने पहले hi ये माकन लिया है मैंने. ऊपर क पोरशन में भी 2 कमरे हैं तुम आराम से यहाँ रह सकते हो और कोई डिस्टर्बेंस भी नहीं होगी.

अमित : फ़िलहाल तो मैं हॉस्टल में हूँ मम सॉरी दीदी . जब ज़रूरत पड़ी मैं आपको बता दूंगा.

मंजू म : वैसे यहाँ मेरे पास रहोगे तो डबल फायदा होगा. एक तो घर का खाना खाने को मिलेगा दूसरा मैं तुम्हारी स्टडी में भी हेल्प कर दूंगी.

मैं और मम काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद मैंने मम से इजाज़त ली और अँधेरा होने से पहले घर क लिए निकल पड़ा. आज 5 दिन बाद मैं घर जा रहा था दिल में एक ख़ुशी थी मगर घर पर एक और बुरी खबर मेरे इंतज़ार में थी . मैं 6 बजे घर पहुँच गया . सब घर पर hi थे जैसे मेरा hi इंतज़ार हो रहा हो.
 
अपडेट 64



मैं और मम काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद मैंने मम से इजाज़त ली और अँधेरा होने से पहले घर क लिए निकल पड़ा. आज 5 दिन बाद मैं घर जा रहा था दिल में एक ख़ुशी थी मगर घर पर एक और बुरी खबर मेरे इंतज़ार में थी . मैं 6 बजे घर पहुँच गया . सब घर पर hi थे जैसे मेरा hi इंतज़ार हो रहा हो.

अब आगे -

मैं जब घर पहुंचा अँधेरा हो चूका था. सब घर पर hi थे मैं जाते hi सबके पाऊँ छुए. सब ने मुझे गले लगा कर प्यार दिया . कामिनी ममी और दीपिका ममी तो ऐसे खुश थी जैसे कितने दोनों बाद पति क घर आने पर पत्नियां होती हैं. बाबा सबसे ज्यादा खुश थे उन्होंने मुझे ऊपर उठा लिया

अमित : बाबा आज आप बहुत खुश हैं क्या बात है?

अजय मां : अरे बात hi ऐसी है तू सुनेगा तो तू भी ख़ुशी से पागल हो जायेगा.

अमित : ऐसी कौन सी बात hi मुझे भी बताइये

विजय मां : भगवन ने हमारी सुन ली अमित भगवन ने हमारी सुन ली तुम्हारी माँ , माँ बनने वाली है. उसकी तपस्या आज सफल हुई . अब कोई उसे तना नहीं दे सकेगा. मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ कहीं इतनी ख़ुशी से मेरा डैम न निकल जाये.

बाबा की आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए. सच है कभी कभी बहुत देर बाद मिली ख़ुशी भी जान ले लेती है . खैर बाबा की इस ख़ुशी में सब शरीक थे . बाबा ने सब को बता दिया था फ़ोन पर बस मुझे सरप्राइज देने क लिए नहीं बताया था. ये खबर सुन कर मैं भी ख़ुशी से नाच उठा और बाबा को उठा लिया. मुझसे भी ये ख़ुशी कण्ट्रोल नहीं हो रही थी . मैंने माँ को कितनी बार उदास होते देखा था . जाने लोगों ने कितने ताने दिए होंगे उनको माँ न बन पाने क लिए . आज भगवन ने उनके तमाम ज़ख्मों पर मलहम लगा दिया था.

मैं ख़ुशी में नाचता हुआ सब भूल गया और माँ क कमरे की तरफ भगा मगर माँ कमरा बंद कर क सो रही थी बाबा ने बताया क माँ की तबियत ठीक नहीं.

अमित : बाबा आप जल्दी से रजनी मौसी रीता मौसी दिव्या मौसी को फ़ोन कर क बता दो और उन्हें बुला लो

विजय मां : सबको फ़ोन कर दिया है और बुलाया भी है शायद कल को आ जायेंगे सब

अमित : इसका मतलब आपने सबसे आखिर में मुझे बताया ये आपने ाचा नहीं किया.

दीपिका ममी : अगर तुम्हे पहले बता देते तो तुम्हारे चहरे पर जो ख़ुशी अब नज़र आ रही है फिर वो कहाँ से देखते

विजय मां : ये सब तेरी छोटी ममी का hi आईडिया था मैं तो उसी वक़्त बता देता.

अमित : वैसे आपको पता कैसे चला क माँ माँ बनने वाली है?

विजय मां : तुम्हारी माँ की तबियत ठीक नहीं थी उसका मन कच्चा कच्चा हो रहा था आज डॉ से दिखने गए तो पता चला वो माँ बनने वाली है.

अमित : क्या आप शहर आये थे तो आप ने मुझे बताया क्यों नहीं?

विजय मां : तुम कॉलेज में थे तो हम नहीं चाहते थे तुम अपनी पड़े छोड़ कर आओ.

बाबा बहुत साडी मिठाई लाये थे मैंने पेट भर क खाई. कामिनी ममी अजय मां ने मेरी नयी लुक की तारीफ की वो दोनों भी मेरी इस लुक से खुश थे.

बातों में यूँ hi वक़्त गुज़र गया. खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले गए माँ तबियत ख़राब होने की वजह से दवा खा कर सो चुकी थी मैंने सोचा सुबह मिल लूंगा. दीपिका ममी सब क कमरों में जाने क बाद दूध का गिलास ले कर मेरे पास आयी.

दीपिका ममी : तो कैसा रहा हॉस्टल में पहला हफ्ता

अमित : ाचा रहा मगर मैं हॉस्टल में सिर्फ एक hi दिन रहा

दीपिका ममी : क्या? तो कहाँ रहा तू इतने दिन?

अमित : मोहित क घर. उसे जब पता चला मैं हॉस्टल में रह रहा हूँ तो ज़बरदस्ती मुझे अपने घर ले गया. मैं भी क्या करता उसने कसम दे दी थी

दीपिका ममी : ये तो अछि बात है क तुम घर पर रहोगे अब मुझे कोई टेंशन नहीं वर्ण मैं यही सोच रही थी क तुझे खाना ाचा मिलेगा भी या नहीं.

अमित : ममी मोहित का घर बहुत बड़ा है वो बहुत अमीर हैं. और अंकल आंटी की नेचर भी बहुत अछि hai.wo मुझे अपना hi बीटा मानते हैं

फिर मैंने मोहित और अंकल आंटी क बारे में सब बताया. इसके इलावा कॉलेज में क्या क्या चल रहा है छोटी बड़ी बातें सब बता दी. मुझे आंटी क बारे में समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ इस लिए ममी से सलाह लेने क बारे में सोचा.

मैंने ममी को आंटी का मुझे सडके करना , रानी का आंटी क साथ लेस्बियन , रानी की लोकु क साथ चुदाई और उनकी प्लानिंग सब बता दिया.

अमित : अब बताइये मुझे क्या करना चाहिए मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा. मैं कैसे उनको समझों वो बहुत अछि हैं मगर रानी और लोकु ने उनको अपनी साजिश से भटका दिया है

दीपिका ममी : हम्म्म तुम्हे मोहित की माँ को बता देना चाहिए था अगर पीछे से उन्होंने कोई चल चल दी तो?

अमित : रानी कह रही थी क अंकल अभी 2/3 दिन कहीं नहीं जाने वाले ऐसे में तो वो कुछ नहीं कर सकते

दीपिका ममी : जहाँ तक मुझे समझ आती है क मोहित क पापा मोहित की माँ क साथ सेक्स नहीं करते होंगे . मोहित की माँ जैसा तुमने बताया क अभी भी जवान लड़की लगती हैं तो ज़रूर उनके अंदर सेक्स भी ज्यादा होगा जिसको रानी ने और भड़का दिया है. ऐसे में उसे कोई न कोई तो चाहिए जो उसकी प्यास बुझाये. क्यूंकि ये आग दबाने से और भड़कती है. अगर लोकु का तुम इंतज़ाम कर भी दो तो वो किसी और को ढूंढेंगी . इसी लिए हो सकता है उन्होंने तुम पर धिरे डालने की कोशिश की हो. और वो आगे भी ऐसा करेंगी अगर तुमने उनको सटिस्फी न किया तो वो लोकु क पास जाएँगी और अगर लोकु न कर पाया तो किसी और क पास.

इसके बारे में न मोहित से बात की जा सकती है न अंकल से क्यूंकि इससे आंटी की इज़्ज़त और सम्मान को धक्का लगेगा. और फ़िलहाल इस कंडीशन में वो खुद भी समझ नहीं पाएंगी क्यूंकि वो आग में जल रही हैं.

एक hi तरीका हो सकता है उनको सब समझने का और वो है क मोहित क पापा उनको वो सटिस्फैक्शन दे . तुम मोहित से बात कर क दोनों को आपस में कुछ दिन एक साथ गुजरने क लिए कहीं भेज दो. और अगर ऐसा न हुआ तो जल्द hi मोहित की माँ किसी क नीचे पड़ी होगी . ऐसे में उनकी इज़्ज़त मन मर्यादा सब मिटटी में मिल जाएगी. और अगर तुम अपने दोस्त की इज़्ज़त बचाना चाहते हो तो तुम्हे मोहित की माँ को सहारा देना होगा.

अमित : मैं कैसे सहारा दे सकता हूँ?

दीपिका ममी : जैसे तुमने मुझे सहारा दिया था

अमित : मगर वो मेरे दोस्त की माँ है

दीपिका ममी : तो तुम क्या चाहते हो तुम्हारे दोस्त की माँ लोगो क हाथ का खिलौना बन जाये और लोग उसे बाजारू औरत बना दे? तब तुम्हे ाचा लगेगा ?

मैं सोच के पद गया ममी की बात बिलकुल सही थी मैं कैसे आंटी को बर्बाद होते देख सकता हूँ

दीपिका ममी : हो सकता है इसकी ज़रूरत न पड़े. तुम मोहित से बात कर क उसके मम्मी पापा को कहीं बहार भेज दो कुछ दिन क लिए और उनके आने से पहले तुम लोकु को निकलवा देना और रानी को भी

अमित : हाँ यही ठीक रहेगा आप ने मेरी टेंशन को हल कर दिया. इस ख़ुशी में चलिए आज आप को दिल खोल कर प्यार करूँ

मैंने दीपिका ममी को बहिन में भर लिया और उनके होंठो का रास पीने लगा . ममी ने थोड़ी देर किश करने क बाद मुझे खुद से अलग किया.

दीपिका ममी : अमित हम अब प्यार नहीं कर सकते

अमित : मगर क्यों ? अब क्या हुआ?

दीपिका ममी : कुछ नहीं हुआ है. ये देखो मेरा पेट कितना बहार आ गया है अब अगर तुम इस पर लटोगे तो तुम्हारे बचे को तकलीफ होगी . वैसे भी डॉ ने अब सेक्स करने से मन कर दिया है.

अमित : तो ठीक है अब से हम चुदाई नहीं करेंगे.

दीपिका ममी : क्यों नहीं करेंगे ? डॉ ने मुझे मन किया है लेकिन दीदी तो अभी कर सकती हैं और मैंने उनको बोल दिया है वो अभी आ जाएँगी.

हम बातें कर hi रहे थे क कामिनी ममी आ गयी . कामिनी ममी क एते hi दीपिका ममी मुझे किश करने क बाद चली गयी. कामिनी ममी ने आते hi मुझे कास क गले लगा लिया और हम दोनों एक दूसरे के होंठों का रास पीने लगे. कामिनी ममी 5 दिनों से मेरी जुदाई में तड़प रही थी इस लिए वो मुझे खा जाना चाहती थी . मैंने भी कामिनी ममी को रत भर जैम कर कर छोड़ा और उनकी साडी तड़प मिटा दी .

सुबह मैं देर से उठा और जब तैयार हो कर निचे गया तो घर में माँ दीपिका ममी और कामिनी ममी क इलावा कोई नहीं था . मैंने ममी से पुछा तो पता चला क आज रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी तीनो आने वाली हैं. माँ क माँ बनने की बात सुन कर सब बहुत खुश थे . बरसों बाद आज माँ की भगवन ने सुन ली थी . मैं माँ से मिलने गया तो वो बाथरूम में थी ममी ने मुझे पहले नाश्ता करने को कहा . मुझसे अपनी ख़ुशी कण्ट्रोल नहीं हो रही थी मगर ममी की बात मन कर मैंने जल्दी से नाश्ता किया. नाश्ता करते hi मैं भाग कर माँ क पास गया .

माँ अपने कमरे में थी . मैं सब कुछ भूल कर ख़ुशी से उछलता हुआ माँ क गले लग गया .

अमित : माँ आज मैं बहुत खुश हूँ माँ भगवन ने हमारी दुआ काबुल कर ली . अब देखता हूँ कोई कैसे तुम्हारे बारे में कुछ उल्टा सीधा बोलता है.

माँ ने मुझे धक्का मर कर खुद से अलग किया और एक ज़ोरदार तमाचा मेरे मुँह पर जड़ दिया .

गौरी ममी : मत कह अपनी गन्दी ज़ुबान से मुझे माँ . तूने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा . ये तेरा hi पाप है मेरे पेट में . पता नहीं मैं अब तक ज़िंदा कैसे हूँ मुझे मौत क्यों नहीं आ जाती. तेरे पाप को जनम देने से पहले मुझे मौत आ जाये तो समझूंगी मेरा प्राश्चित हो गया. तूने मेरी ज़िन्दगी नाटक बना दी है . कैसा होगा तेरे पाप का बीज कैसे मैं उसे देख पाऊँगी मुझे तो खुद से नफरत होने लगी है. ले जा अपना ये मनहूस चेहरा मेरी आँखों क सामने से

माँ की बातें सुन कर मेरा कलेजा फैट गया . ये क्या हो गया मैंने तो ऐसा कभी सोचा भी नहीं था. मेरी वजह से माँ अपने होने वाले बचे से hi नफरत करने लगी थी. मेरी सूरत भी देखना नहीं चाहती ऐसे में अगर मैं उनके सामने रहा तो वो खुद को या बचे को कुछ कर न दें. अगर किसी को ये बात पता चली तो क्या होगा. आज सब कितना खुश हैं अगर माँ ने कुछ उल्टा सीधा कर दिया तो सब की ख़ुशी को ग्रहण लग जायेगा. अब अगर मैं माँ क सामने रहा तो कुछ भी हो सकता है . मुझे घर से दूर चले जाना चाहिए . मैं आँखों से बहते आंसू लिए अपने कमरे की तरफ भगा और जल्दी से अपना बैग पैक कर लिया.

बिना वक़्त गवाए मैंने बैग लिया और बुलेट बहार निकली . मेरे इस तरह अचानक बैग लेकर जाने पर दीपिका ममी और कामिनी ममी दोनों टेंशन में आ गयी और मुझे रोका. मैंने दोनों को माँ क साथ हुई बात बता दी और ये भी बता दिया क अगर मैं यहाँ रहा तो माँ कुछ न कुछ कर लेगी इस लिए मुझे जाना होगा.

अमित : मैं जा रहा हूँ ममी जी और अब शायद जल्दी वापिस नहीं आऊंगा . आप मेरे बाद माँ का ध्यान रखना. अगर कोई भी बात हो तो मुझे बता देना और प्लीज मुझे वापिस आने क लिए मत कहना वर्ण माँ कुछ कर लेगी. अब मैं चलता हूँ अब मैं अपनी ये मनहूस शकल माँ क सामने लेकर कभी नहीं आऊंगा.

इतना कह कर मैं आँखों में आंसू लिए शहर की तरफ निकल गया. हालाँकि दोनों मुझे रोकती रही क आज मौसियां आने वाली हैं मैं उनसे मिल लूँ मगर मुझसे एक पल भी घर पर ठहरना मुश्किल हो गया था इस लिए मैं नहीं रुका . रस्ते में मुझे बाबा अजय मां और कमलेश मां क फ़ोन भी आये मगर मैंने नहीं उठाये. मैं शहर में पहुँच कर अपना मूड ठीक करने क लिए एक पार्क में जा कर बैठ गया . शाम तक मैं फ़ोन बंद कर क वहीँ बैठा रहा और सोचता रहा मुझे क्या करना चाहिए. जो कुछ हो चूका है उसे बदला तो नहीं जा सकता मगर अब यही सही होगा क मैं घर से दूर रहूं. शाम को जब कुछ मूड ठीक हुआ तो मैं मोहित क घर चला गया.

मैं संडे को वापिस आने का बोल कर गया था और एक दिन पहले hi वापिस आ जाने पर मोहित खुश हो गया. शाम को मोहित मुझे बहार घूमने ले गया जिससे मेरा मूड भी कुछ ठीक हो गया. मैंने अपना फ़ोन बंद hi रखा था मैं जनता था सब मुझे फ़ोन ज़रूर करेंगे और मुझे वापिस आने को फाॅर्स करेंगे दीपिका ममी और कामिनी ममी कोई न कोई बहाना बना hi लेंगी. रत यूँ hi बीत गयी और मैं खुद को समझा बुझा कर सो गया .

सुबह मैं रूटीन से कॉलेज ग्राउंड में एक्ससरसीसे कर क जब वापिस आया तो आज फिर से आंटी योग करते हुए नज़र आयी. आज उन्होंने स्किन टाइट ट्रॉउज़र और T-shirt पहनी हुई थी.

आंटी : तुम आ गए अमित . आओ इधर मेरी मदद करो ज़रा

मैं आंटी क पास गया . मुझे लगा अब तो अंकल घर पर hi है तो आंटी ऐसा कुछ नहीं करेंगी . आंटी मेरे सामने पीठ कर क कड़ी हो गयी .

आंटी : अमित तुम मेरी कमर को पकड़ कर रखना मैं अपने पाऊँ को छूने क लिए झुकूँगी कहीं गिरा न देना

मैंने आंटी की कमर को दोनों हाथों से थम लिया और आंटी झुकने लगी. मैं आंटी से थोड़ा डिस्टेंस बना क खड़ा था मगर जैसे hi आंटी आगे को पूरी झुकी वो गिरने को हुयी और मैं उन्हें बचने क चक्कर में कब उनसे सात गया मुझे पता hi नहीं चला.

आंटी : ाहूऊऊऊच ध्यान से पकड़ो न अभी मैं गिर जाती. अब ऐसे hi पकड़ क रखना

आंटी फिर से सीधी हुई और दोबारा झुकने लगी. मैं आंटी क साथ जुड़ा हुआ था . झुकने की वजह से आंटी की गांड का दबाव मेरे लैंड पर बढ़ता जा रहा था. गांड और छूट की गर्मी से लैंड महाराज की नींद टूट गयी और वो छूट की खुशबु को ढूंढते हुए उठ गए. आंटी बार बार झुकती और हर बार उनकी गांड पहले से ज्यादा मेरे लैंड बार दबाव बना देती. मेरा लैंड मेरे लाख रोकने पर भी खड़ा हो गया था और आंटी क चूतड़ों में घुस रहा था.

आंटी : बस हो गया तो अब क्या तुम मेरी टंगे उठाओगे ?

मैं आंटी की इस बात से बौखला गया . आंटी मुझे टांगें उठाने को कह रही थी. मैं सोच में पद गया. आंटी गहरी नज़रों से मुझे देखने लगी

आंटी : सोच क्या रहे हो आओ जल्दी मैं लेट टी हूँ तुम उस दिन की तरह मेरी टांगें मेरे सर की तरफ दबाओ

आंटी ने बात क्लियर की तो मैंने चैन की सांस ली और आंटी क पाऊँ की तरफ आ कर उस दिन क जैसे घुटनों पर बैठ गया. आंटी ने अपनी टंगे उठायी और मेरे कंधो पर रख दी. आंटी क गोर पाऊँ मेरे कन्धों पर थे मगर आज ट्रॉउज़र पाऊँ तक था. आंटी ने पाऊँ से मेरी गर्दन को जकड लिया और मुझे अपने ऊपर झुकाने लगी. आंटी की ये ऐडा बड़ी हु कामुक थी और मैं उनकी तरफ झुकता जा रहा था. आंटी अपने मखमली पाऊँ से मेरी गर्दन को सेहला रही थी . हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और मैं आंटी क माया जल में फास्ट जा रहा था .

मैं आंटी पर झुकता गया. मुझे आंटी की टाँगें पकड़नी थी मगर आंटी ने मेरे हाथ पकड़ लिए और मुझे अपने ऊपर झुकाती गयी. मैंने दोनों हाथ आंटी क सर क दाएं बाएं रख लिए और खुद आंटी क ऊपर आ गया. मैं अब भी आंटी की आँखों में hi देख रहा था . न वो कुछ बोल रही थी न मैं. आंटी क पाऊँ मेरे कन्धों पर थे जो मेरे उनके ऊपर झुकने की वजह से उनके सर क पास आ गए थे . मेरा लैंड कब आंटी की छूट पर सेट हो गया मुझे भी पता नहीं चला

आंटी : आअह्ह्ह शाबाश ऐसे hi और ज़ोर लगाओ

मैं तो जैसे रिमोट कण्ट्रोल से चल रहा था और कण्ट्रोल आंटी क हाथ में था. मुझे लगा आंटी मुझे छूट पर ज़ोर लगाने को कह रही हैं और मैंने वैसा hi किया. आंटी क मुँह से फिर से सिसकी निकली . मैंने अपनी कमर को पीछे कर क फिर से आगे किया जैसे चुदाई में धक्का मारा जाता है. आंटी और मुझे दोनों को मज़ा आया .

आंटी : ककक आआह्ह्ह्हह उम्म्म ऐसे hi शाबाश और ज़ोर लगाओ

मैं धीरे धीरे आंटी की छूट पर धक्के लगाने लगा . पता नहीं आंटी की आँखों में क्या आकर्षण था मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था. तभी किसी क आने की हलचल हुई और मैं जैसे नींद से जगा और जल्दी से आंटी क ऊपर से उठ गया. मेरा लैंड मेरे ट्रॉउज़र में खड़ा साफ़ नज़र आ रहा था. मैं जल्दी से अपने कमरे में घुस गया. अगर थोड़ी देर और आंटी की छूट पर लैंड को यूँ रगड़ता रहता तो मेरा पानी ज़रूर निकल जाता .मैंने जल्दी से कपडे निकले और बाथरूम में घुस गया नहाने क लिए .

मैं जब तैयार हो काट नीचे आया तो अंकल डाइनिंग टेबल पर hi थे आंटी ने भी कपडे चेंज कर लिए थे. आंटी मेरे लिए जूस ले आयी वो लगातार मेरी आँखों में hi देख रही थी और मैं बार बार उनसे नज़रें बचा रहा था. थोड़ी देर में मोहित भी आ गया और हम नाश्ता कर क कॉलेज को निकल गए .
 
भाई लोग अपडेट आज नहीं दे पाउँगा सॉरी
 
अपडेट 65

मैं जब तैयार हो काट नीचे आया तो अंकल डाइनिंग टेबल पर hi थे आंटी ने भी कपडे चेंज कर लिए थे. आंटी मेरे लिए जूस ले आयी वो लगातार मेरी आँखों में hi देख रही थी और मैं बार बार उनसे नज़रें बचा रहा था. थोड़ी देर में मोहित भी आ गया और हम नाश्ता कर क कॉलेज को निकल गए

अब आगे-

कॉलेज में आते मैंने अपना मोबाइल ों कर लिया और ढेर सरे संस आ गए जिसमे सब की कॉल्स क मेस्सगेस थे. हम अपने लेक्चर लगाने लगे आज मंजू मम बड़े प्यार से मुस्कुरा कर मुझे देख रही थी. उनकी आँखों में ख़ुशी देख कर मुझे भी ाचा लगा. फ्री लेक्चर में जब हम कैंटीन में बैठे थे तो मीनल भी कैंटीन में आ गयी.

मोहित : मीनल तुम यहाँ ?

मीनल : लेक्चर फ्री था तो सोचा कैंटीन चलती हूँ तुम लोग यहीं पर तो मिलते हो हमेशा

अमित : लेक्चर फ्री था तो राधा को भी ले आती

मीनल : वो तो बस किताबों में घुसी रहती है . पता नहीं कैसे इतना पद लेती है. अभी भी लाइब्रेरी में गयी है मैंने तो कहा था कैंटीन में चलने को मगर उसने कहा क उसे पड़ना है.

हम बातें कर रहे थे क शिवानी भी कैंटीन में आ गयी और आते hi हमारे पास बैठ गयी. मैंने मीनल और शिवानी का इंट्रो करवाया .

शिवानी : अमित क्या अपना मोबाइल दे सकते हो प्लीज मुझे घर पर फ़ोन करना है मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है.

मैंने अपना मोबाइल शिवानी को दे दिया और वो कॉल करने क लिए बहार चली गयी.

मीनल : ये क्या सन है ? क्या ये तुम्हारी गफ है?

अमित : अरे नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं . ये तो सीनियर है.

मोहित : वो इसकी गफ नहीं बल्कि ये उसका बर्फ है

मीनल : मतलब?

मोहित : मतलब ये क वो इसके पीछे पीछे घूम रही है दिल ले क और ये उससे जान छुड़ा रहा है.

मीनल : देखने में तो अछि है फिर बना लो न गफ तुम्हारा क्या जाता है

अमित : मुझे इस प्यार व्यार में कोई इंटरेस्ट नहीं मैं यहाँ पड़ने आया हूँ बस इन फ़ालतू चक्करों में मैं नहीं पड़ने वाला.

हम तीनो ऐसे hi काफी देर बातें करते रहे और चाय नाश्ता भी किया. लेक्चर की बेल्ल बजने वाली थी मगर शिवानी अभी तक नहीं आयी थी.

अमित : ये शिवानी अभी तक नहीं आयी लेक्चर शुरू होने वाला है.

तभी शिवानी भी आ गयी

मोहित : लो तेरे दिल की आवाज़ सुन ली तेरी लैला ने

मीनल और मोहित बसने लगे मैंने आँख निकल कर मोहित को देखा .

शिवानी : थैंक्स अमित ये लो अपना फ़ोन

हम लेक्चर का बोल कर जल्दी से कैंटीन से बहार निकल गए कहीं फिर से शिवानी पीछे न पद जाये . सब लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मैं और मोहित साइंस ब्लॉक में गए .

राधा : कैसे हो अमित ? तुम कहाँ चले गए थे कल ? मैं माँ क साथ मां क घर गयी थी मगर तुम नहीं थे

अमित : वो मुझे एक ज़रूरी काम ाँ पड़ा था प्रोफ सर का फ़ोन आया था.

राधा : ो ाचा . वैसे थैंक्स उस दिन क लिए

अमित : अब कितनी बार थैंक्स बोलोगी मुझे ाचा नहीं लगता . क्या तुम मुझे पराया समझती हो

राधा मेरी इस बात से मुस्कुरा उठी और शर्म से सर झुका लिया.

नेहा दीदी : क्या बात हो रही है और किस बात का थैंक्स राधा?

राधा : वो दीदी कुछ लड़के मुझे तंग करते थे उस दिन जब मां ममी घर ए थे उस दिन मैं अमित क साथ बाजार जा रही थी तो उन्होंने मुझे कमेंट किया . अमित ने फिर उन लोगों को

अमित : मैंने उन लोगों को फिर प्यार से समझा दिया था . राधा क्या उन्होंने फिर से तंग किया तुम्हे?

राधा मेरी बात का मतलब समझ गयी की नेहा दीदी क सामने लड़ाई का ज़िकर न किया जाये

राधा : हाँ वो अछि तरह समझ गए और उन्होंने मुझसे माफ़ी भी मांगी इसी लिए तो मैं थैंक्स कह रही थी

नेहा दीदी : वह ये तो अछि बात है लगता है अमित अछि तरह समझा लेता है सबको.

राधा आज खुद मेरे साथ बात कर रही थी और उसकी बातों से लग रहा था क उसे मेरा उस दिन उन लड़कों को सबक सीखना ाचा लगा . जिसकी वजह से राधा का मन शायद बदल गया था . जो पहले मेरी बात का जवाब भी नहीं दिया करती थी वो आज खुद मेरे साथ बात कर रही है. मैं दिल hi दिल में इस बात पर खुश था.

ह्यूमेन कुछ देर बातें की और अपने अपने घर की तरफ निकल पड़े . घर आ कर हमने खाना खाया और रेस्ट करने कमरों में चले गए. मैं मोहित से बात करने उसके कमरे में चला गया.

अमित : मोहित मुझे तुझसे एक ज़रूरी बात करनी है.

मोहित : हाँ बता क्या बात है

अमित : यार अंकल काम इतना बिजी रहते हैं क्या कभी वो छुट्टी नहीं करते ?

मोहित : अब यार अपने काम में यही तो दिक्कत होती है. नौकरी करने वाले लोग तो हफ्ते बाद एक छुट्टी करते हैं मगर जिसका काम अपना होता है वो छह कर भी छुट्टी नहीं कर पता . पापा काम को आगे बढ़ाने में इतनी मेहनत करते हैं क वो छुट्टी कर hi नहीं पते. अकेले हैं न बस इसी लिए

अमित : यार तुमने कभी ये नहीं सोचा क आंटी को भी अंकल का साथ चाहिए होता है. मैंने नोट किया है आंटी ऊपर से दिखती हैं क वो खुश हैं मगर अंदर से जैसे उदास हैं. तू अंकल को बोल क वी कुछ दिन काम से छुट्टी ले कर आंटी को कहीं घुमा लाएं जिससे उनका दिल भी बेहाल जाये.

मोहित : बात तो तुम्हारी सही है. पापा काम में hi इतना बिजी रहते हैं क माँ को टाइम नहीं दे पते मगर पापा काम छोड़ कर जाने को मानेंगे नहीं.

अमित : कुछ दिन क लिए क्या तू नहीं संभल सकता काम?

मोहित : यार मुझे अभी कहाँ अत है इतना

अमित : अबे इसमें क्या मुश्किल है अगर किसी बात का न पता चले तो तू फ़ोन पर भी तो पूछ सकता है.

मोहित : हम्म्म्म बात तो सही है. ऐसा करते हैं कल माँ डैड की मर्रिएगे एनिवर्सरी है . मैं पापा को बोलता हूँ वो माँ को कहीं बहार टूर पर ले जाएँ और ये माँ को सरप्राइज देंगे हम.

मोहित से बात कर क मैं अपने कमरे में आज्ञा. चलो ये तो ाचा हुआ कुछ दिन क लिए अंकल आंटी को बहार ले जायेंगे इतने में रानी और लोकु का इंतज़ाम भी हो जायेगा.

मैं आराम से सो गया और शाम को अलार्म की आवाज़ से उठा . तैयार हो कर मैं प्रैक्टिस पर निकल गया और फिर अपने टाइम पर घर आ गया. अंकल आज भी घर आने वाले थे जो मुझे मोहित से पता चला मतलब ये क आंटी की टेंशन ख़तम कल एनिवर्सरी है तो मोहित ने जैसा कहा अंकल आंटी को कहीं घूमने ले जायेंगे. मैं रिलैक्स हो गया. रत को चैन की नींद आयी .

अगली सुबह मैं जब एक्ससरसीसे कर क लौटा तो आंटी योग कर रही थी और मुझे देखते hi पास बुला लिया. आज आंटी क़यामत लग रही थी मैं तो उनको एक तक देखता hi रह गया. आंटी ने आज ब्रा क जैसे बानी हुई शार्ट सी बनियान पहनी हुई थी जो बस उनके बूब्स को hi धक् रही थी . उनके कंधे और पेट साफ नज़र आ रहा था. और नीचे एक शार्ट पहनी हुई थी जो मेरे ुंडेरवारे से भी छोटी थी. आंटी की ये शार्ट जांघों क जोड़ों तक hi थी और खुली खुली लग रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे आंटी ने बस ब्रा और पेंटी hi पहनी हो. आंटी का ये रूप बिजलियाँ गिरा रहा था. और उनका निशाना मैं था.

आंटी : ऐसे क्या देख रहे हो अमित इधर आओ मेरी मदद करो

मैं तो आंटी क यौवन क मायाजाल में hi फसा हुआ था . आंटी की आवाज़ सुन कर मैं रोबोट की भांति उनकी कमांड मंटा हुआ उनके पास चला गया. आंटी क चहरे पर कामुक मुस्कान थी जैसे उनका निशाना सही लगा हो.

आंटी : आओ यहाँ बैठो और मेरी टंगे उठा कर कल की तरह करो .

मुझे लगा आंटी मुझे कल की तरह छूट पर लैंड से धक्के मरने को कह रही हैं . मैं तो बस आर्डर फॉलो कर रहा था. आंटी ने अपनी टंगे में कंधो पर रख ली और मेरी गर्दन पर अपने पाऊँ रगड़ने लगी . आंटी की सुन्दर मखमली टंगे आज पूरी नंगी मेरे सामने थी . मैंने अपने हाथ आंटी की टांगों पर रखे तो उनके मुलायम एहसास ने मेरे अंदर की आग और बड़ा दी. मैं आंटी की टांगों को देख रहा था . मेरा दिल चल रहा था क मैं उनकी टांगों को अपने हाथो से मसलन उनकी जांघों को सेहलाऊं उनको चूमूँ . आंटी ने जो शार्ट पहनी थी वो खुली हवादार होने क कारन अंदर तक मेरी नज़र जा रही थी और ऐसा लग रहा था क अंदर से आंटी ने कोई पेंटी नहीं पहनी हुई है.

मुझसे खुद पर काबू नहीं रखा जा रहा था. मैंने घुटनो क पास से टांगों को पकड़ा और अपने हाथ धीरे धीरे ऊपर निचे करने लगा . मैं पाऊँ से लेकर घुटनो तक आंटी की टांगों पर अपने हाथ घूमने लगा. आंटी मुझे रोक नहीं रही थी बल्कि होंठों को दबाये हलकी हलकी सिसकीअन ले रही थी. मैंने अपने घुटनो को पूरा आगे को फैलते हुए अपना लैंड आंटी क चूतड़ों में घुसा दिया. खड़े लैंड को छूट पर महसूस करते hi आंटी ने सिसकी ली

आंटी : आअह्ह्ह्ह ककक अब करो भी और कितना इंतज़ार करवाओगे मुझसे ?

मुझे लगा आंटी मुझसे छोड़ने को तड़प रही हैं और अब मुझे जल्दी से छोड़ने को hi कह रही हैं. मैंने अपने हाथ घुटनो से नीचे ले जा कर आंटी की जाँघों पर रख दिए . ऐसा करते hi मेरा लैंड झटके खाने लगा . कितना नरम रेशमी एहसास था जैसे माखन को छू लिया हो. आंटी ने मदहोशी में आँखें बंद कर ली. मैंने आंटी की जांघों को पकड़ कर अपनी तरफ आंटी को खींचा और अपना लैंड छूट क अंदर घुसाने की कोशिश की जो कपड़ों क साथ अंदर जाना नामुमकिन था.

आंटी ने फिर से सिसकी ली जो बता रही थी वो भी इस वक़्त किस मज़े में है. मैंने आंटी क पाऊँ को चुम लिया . आंटी ने वासना भरी आँखों से मुझसे देखा जैसे कह रही हों अब अंदर घुसा दो मगर बीच में कपड़ों की दिवार थी.

आंटी ने मेरे हाथ पकडे और मुझे अपनी तरफ खींचा मैं उनका मतलब समझ गया और उनके ऊपर झुकने लगा . मैंने अपने दोनों हाथ आंटी क सर क पास दाएं बाएं रखे और उनकी आँखों में देखते हुए अपने लैंड को पूरे ज़ोर से उनकी छूट पर दबा दिया. आंटी ने मेरे कन्धों पर हाथ रखे और मुझे अपनी तरफ खींचने लगी . मैं आंटी की आँखों में देखता हुआ उनके ऊपर झुक रहा था . आंटी मेरे होंठों को चूमने को बेकरार थी उनके गुलाबी होंठ मुझे दावत दे रहे थे क आओ और आकर हमारा सारा रास चूस लो. मैं भी उनके होंठों को चूमने क लिए झुकता जा रहा था क तभी मोहित की आवाज़ हमारे कानो में पड़ी.

मोहित आंटी को आवाज़ लगता हुआ इधर hi आ रहा था . हम दोनों जैसे होश में ए और मैं एक झटके में उठ कर खड़ा हो गया आंटी भी जल्दी से योग आसान में बैठ गयी और पास में पड़ा टॉवल से अपनी टाँगें धक् ली.

मोहित : हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी तो माय स्वीट स्वीट माँ . आज तो पार्टी होगी माँ आज आप और पापा को मैं स्पेशल गिफ्ट दूंगा

आंटी : थैंक्स बीटा . यू अरे माय स्वीट स्वीट सोन . आज तुम बड़ी जल्दी उठ गए. तुम्हारे पापा भी उठ गए हैं क्या?

मोहित : हाँ माँ पापा भी उठ गए हैं और वो आपको ढून्ढ रहे हैं . मैं आपको जल्दी उठ कर विश करना चाहता था मगर आप तो बहुत जल्दी उठ जाती हैं.

आंटी : ये तो मेरी रोज़ की आदत है . देखो अमित भी एक्ससरसीसे कर क आ गया है . ये अपने कमरे में जा रहा था मैंने यहीं बुला लिया क चलो मैं भी इससे कुछ सिख लूँ.

दोनों की बातों में जो समय मिला उसमे मेरा लैंड बैठ गया था . आज तो बाल बाल बचे अगर कहीं मोहित मुझे ऐसे देख लेता तो क्या सोचता क मैंने उसकी माँ क साथ ये सब. चीन चीन मुझे खुद पर काबू रखना चाहिए और आंटी से भी बात करनी चाहिए . मोहित और आंटी की बातों से मैंने भी खुद को नार्मल कर लिया और मैं भी आंटी को विश करने लगा

अमित : हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी आंटी जी भगवन करे आप हमेशा खुश रहें

आंटी : ये क्या बस ऐसे hi विश कर रहे हो. खुश तो मैं तब रहूंगी न जब तुम मुझे गिफ्ट डोज

इतना कह कर आंटी ने मेरे लैंड की तरफ देखा जैसे वी गिफ्ट में मुझसे मेरा लैंड मांग रही हों क बस इसी गिफ्ट से वो खुश होंगी. मैं आंटी की बात और अंदाज़ से हद बड़ा गया.

अमित : मैं नाहा लेता हूँ पसीने की बदबू आ रही है.

इतना कह कर मैं अपने कमरे में भाग गया. मैं तैयार हो कर जब नीचे आया तो आंटी कपडे बदल कर अंकल क साथ बैठी हुई थी दोनों खुश लग रागे थे शायद अंकल ने भी आंटी को प्यार भरी बातों से खुश कर दिया होगा.

अमित : हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी तो थे स्वीट कपल . आप दोनों ऐसे hi हमेशा मुस्कुराते रहें .

अंकल : थैंक्स बीटा तो तुम्हे भी पता चल गया आज क स्पेशल दी का. देखो आज कितना खास दिन है . आज hi क दिन तुम्हारी आंटी मेरे घर आयी थी और मेरी ज़िन्दगी को बदल कर रख दिया. मेरी कामयाबी क पीछे इसका भी बहुत बड़ा हाथ है.

हम बातें कर रहे थे क मोहित भी आ गया.

मोहित : आज तो पार्टी होनी चाहिए डैड आज आप ऑफिस क काम से छुट्टी लो और हम सब मिल कर आज का दिन सेलिब्रेट करते हैं.

अंकल : छुट्टी तो नहीं कर सकता मगर हाँ आज शाम को हम मिल कर कहीं बहार पार्टी करते है. मैं आज जल्दी वापिस आ जाऊंगा . रमा ( आंटी ) आज तुम शाम को तैयार रहना आज की शाम मैं स्पेशल बना दूंगा .

आंटी अंकल की बात से मुस्कुराने लगी. ह्यूमेन मिल कर नाश्ता किया और कॉलेज निकल गए. कॉलेज में सब रोज़ की तरह hi चल रहा था . पहले लेक्चर फिर कैंटीन फिर राधा और नेहा दीदी से मिल कर वापिस घर.

घर आकर हम खाना खा कर सो गए और शाम में मैं प्रैक्टिस पर चला गया. जब मैं प्रैक्टिस से वापिस लौटा तो घर पर सिर्फ आंटी hi थी वो बहुत hi सुन्दर ब्लैक गाउन पहने हुए थी . लॉन्ग गाउन एक साइड से कट था जिसमे से आंटी की गोरी मखमली तंग अपनी झलक दिखा रही थी. बूब्स का क्लीवेज गहराई तक नज़र आ रहा था और बैक साइड से भी काफी डीप कट था. आंटी शायद आज पार्लर से तैयार हो कर आयी थी उन्होंने खाद हेयर स्टाइल बना रखा था. आंटी आज स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी. कोई पागल hi होगा जो उनको आंटी कहेगा वो तो आज जवान खूबसूरत लड़की लग रही थी . लगे भी क्यों न आज उनका स्पेशल डे था और आज पार्टी भी होने वाली थी.

मैं आंटी की खूबसूरती में खोया हुआ था क आंटी मुझे होश में वापिस लायी

आंटी : कहाँ खो गए ऐसे क्या देख रहे हो ? क्या अछि नहीं लग रही मैं?

अमित : अछि ? आप तो आज कोई अप्सरा लग रही हो जो सीधी अभी अभी धरती पर उतरी है आज तो अंकल पक्का बेहोश होने वाले हैं आपको देख कर

आंटी अपनी तारीफ सुन कर मुस्कुरा कर शर्माने लगी

आंटी : इतनी भी अछि नहीं लग रही मैं . मेरी तो अब उम्र हो गयी है .

अमित : कोण कहता हैं आपकी उम्र हो गयी है. शरत लग लीजिये अभी आप ऐसे किसी कॉलेज में चली जाएँ तो सब लड़के आप क hi पीछे पीछे भागेंगे और लड़कियां तो आप को देख कर जल भून जाएँगी.

आंटी : तुम तो नहीं लगे मेरे पीछे फिर मैं कैसे तुम्हारी बात मन लूँ.

अमित : वो मैं वो आप वो ऐसा है न क मैं तो मोहित जैसा hi हूँ आपके लिए तो मैं कैसे आपके बारे में ऐसे सोच सकता हूँ . वैसे भी अंकल क होते हुए किसकी मजाल जो आपको तंग कर सके

आंटी : रहने दो अंकल की बात तुम बस मेरी झूठी तारीफ कर रहे हो. अगर मैं इतनी अछि होती तो क्या वो मुझे ऐसे इग्नोर करते?

मुझसे समझ नहीं आ रहा था क क्या बात करूँ इस लिए मैं कपडे चेंज करने का बहाना बना कर अपने कमरे में आ गया . मैंने कपडे चेंज कर लिए इतने में मोहित का फ़ोन आ गया.

मोहित : hello अमित कहाँ पर है?

अमित : मैं तो घर पर हूँ मगर तू कहाँ है ? आज तो पार्टी करनी थी न और तू बहार है . अंकल भी अभी तक नज़र नहीं आ रहे?

मोहित : यार एक गड़बड़ हो गयी है वो हमारा दूसरे शहर में जो प्लांट है वहां कुछ प्रॉब्लम हो गयी है. मैं पापा क साथ वहीँ पर जा रहा हूँ. माँ को हमने अभी तक नहीं बताया है वो गुस्सा होंगी. आज शाम की पार्टी क लिए वो कितना खुश थी और जब उनको पता चलेगा क पापा नहीं आ रहे हैं तो वो दुखी होंगी. प्लीज यार तू माँ को संभल लेना उनको दुखी मत होने देना.

तभी फ़ोन अंकल ने पकड़ लिया दोनों साथ hi थे.

अंकल : बीटा रमा को मैंने वडा किया था आज की शाम हम सब साथ में बिताएंगे मगर यहाँ बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है इस लिए मैं नहीं आ पाउँगा मोहित को मैंने कहा था क वो घर पर रहे मगर इसने मुझे अकेला नहीं जाने दिया. हम शायद कल hi वापिस आ पाएंगे बीटा तुम अपनी आंटी को संभल लेना . वो बहुत इमोशनल है जल्दी दुखी हो जाती है तुम ज़रा उसे संभल लेना .

अमित : अंकल आप चिंता मत कीजिये मैं आंटी का ख्याल रखूँगा आप बस अपना ख्याल रखिये .

अंकल : मैं रमा को अभी फ़ोन कर क बता देता हूँ क हम नहीं आ रहे . हो सके तो तुम उसे बहार ले जाना

अमित : ठीक है अंकल अगर आंटी मन गयी तो ले जाऊंगा

इसके बाद अंकल ने फ़ोन कट कर दिया . मैं भी कमरे से बहार निकला और निचे चला गया . आंटी हॉल में hi थी और फ़ोन पर बात कर रही थी और अंकल से नाराज़ हो रही थी. आंटी फ़ोन कट कर क गुस्से में अपने कमरे में चली गयी . मैं उनके पीछे उनके कमरे तक गया मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था .

मैंने आंटी का दरवाज़ा नॉक किया मगर अंदर से कोई रिस्पांस नहीं आया . मैंने 2/3 बार आंटी को आवाज़ भी लगाई पर आंटी ने कोई जवाब नहीं दिया . मैं मायूस हो कर हॉल में बैठ गया. मुझे समझ नहीं आ रहा था अब मैं कैसे आंटी को सम्भालूं वो तो गुस्से में खुद को कमरे में बंद कर क बैठ गयी हैं. अब वो बहार hi नहीं निकलेंगी तो मैं कैसे उनको कहीं ले कर जाऊंगा या समझाऊंगा. मैं यूँ hi काफी देर तक सोचता रहा पता नहीं कितनी देर से मैं बैठा ख्यालों में खोया था क आंटी क कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी .

मैंने पलट कर देखा तो आंटी हाथ में एक गिलास पकडे झूमती हुई मेरी तरफ आ रही थी. उनके गिलास में शायद शराब का गिलास था . आंटी शराब भी पि सकती हैं ये मैंने सोचा भी नहीं था. शायद आंटी आज बहुत ज्यादा दुखी थी इसी लिए उन्होंने शराब पि ली होगी.

आंटी : क्या कह रहे थे तुम क मैं बहुत खूबसूरत हूँ हाँ ? मैं अप्सरा हूँ ? देख लिया क्या औकात है मेरी ? मैं मरुँ चाहे जियूं किसी को कोई फरक नहीं पड़ता . मुझे तो बस घर में बाकि सामान की तरह समझ रखा है राघव ( अंकल ) ने . जैसे मेरी कोई फीलिंग hi नहीं जैसे मेरी कोई अपनी मर्ज़ी hi नहीं. मेरे इमोशंस की उसे कोई परवाह नहीं उसके पास मेरे लिए वक़्त hi नहीं है . और तुम मुझे अप्सरा बोल रहे थे. झूठ बोलते तुम्हे शर्म नहीं अति.

अमित : मैंने कुछ भी झूठ नहीं बोलै था आप सच में बहुत खूबसूरत हैं और अंकल भी आप से बहुत प्यार करते हैं. वो तो मज़बूरी में आज बहार फास गए हैं

आंटी : शट उप ! मजबूरी माय फुट . कितने सैलून से मैं यही सुनती आ रही हूँ . पता है औरत को सिर्फ पैसा और ऐशो आराम hi नहीं चाहिए होता. उसे अपने पति से प्यार भी चाहिए होता है. और राघव मुझे प्यार नहीं करता उसे सिर्फ पैसे से प्यार है. मैं जब भी उसे प्यार करने को कहती हूँ वो ऐसे दूर भागता है जैसे मैं उसके लिए कोई फ़ालतू बकवास चीज़ हूँ . पता नहीं आखिरी बार उसने कब मुझे प्यार किया था. मैं दिन रत आग में जलती रहती हूँ और मुझ पर उसे कोई तरस नहीं अत. और तुम ये कहते हो क मैं अप्सरा हूँ . अगर वाकई में मैं खूबसूरत हूँ तो मुझे प्यार करो और मुझे यकीन दिलाओ क मैं खूबसूरत हूँ . आओ मुझे प्यार करो के ों लव में किश में

आंटी मुझे खुद से चिपकने लगी . आंटी पर नशा चढ़ चूका था शायद जब से उन्होंने अपना रूम लॉक किया था तब से वो शराब पि रही थी . मैंने आंटी को खुद से अलग किया

अमित : ये आप क्या कर रही हैं मैं आपके बेटे जैसा हूँ. आप होश में नहीं हैं जाइये जा कर सो जाइये

आंटी : यू बास्टर्ड हाउ डरे यू ? तुम भी मुझे इग्नोर कर रहे हो . आखिर मुझे समझ क्या रखा है तुम लोगों ने ? के ों फ़क में जल्दी से मेरी आग बुझाओ . देखो मेरा ये जिस्म तुम्हारे प्यार क लिए तड़प रहा है . मुझे आज तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे प्यार कर क ये साबित करो क तुमने जो कहा था सही कहा था . के ों फ़क में फ़क में

आंटी मेरे कपडे नोचने लगी और मुझे अपने चूमने की कोशिश करने लगी . आंटी नशे में बेकाबू होती जा रही थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं आंटी को कैसे समझों क्यूंकि वो इस वक़्त कुछ भी सुनने और समझने की हालत में नहीं थी . मैं आंटी को उठा कर उनके कमरे में ले गया और उनको उनके बीएड पर लिटा दिया. आंटी खुश हो गयी क अब मैं उनकी प्यास बुझाऊंगा मगर मैं उनको वहीँ पर छोड़ कर उनके कमरे से बहार आ गया और उनके रूम को बहार से लॉक कर दिया मगर चाबी नहीं निकली. मुझे यही करना ठीक लगा वर्ण आंटी पता नहीं क्या क्या कर लेती.

आंटी अंदर से दरवाज़ा खोलने क लिए शोर मचने लगी और मुझे गलियां भी देने लगी. मैं चुप चाप अपने कमरे में चला गया और बीएड पर लेट गया . मैं सोचने लगा क अब क्या किया जाये आंटी की तड़प अब गुस्से में बदल गयी है और इस नशे की हालत में तो उन्हें कुछ दिखाई hi नहीं दे रह है. मैंने सोचा आंटी थोड़ी देर शोर मचाएंगी और खुद hi थक हर कर सो जाएँगी वैसे भी वो नशे में हैं तो जल्दी सो जाएँगी. मगर दिल में कहीं ये भी चिंता थी क कहीं वो कुछ कर न बैठें. इस लिए कुछ देर बाद मैं अपने कमरे से बहार निकला और नीचे आ गया. मैं आंटी क कमरे की तरफ बड़ा तो देखा आंटी क रूम का दरवाज़ा लॉक नहीं था और हल्का सा खुल हुआ था. अंदर से आंटी की कामुक सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी . मैं दौड़ कर दरवाज़े पर गया और अंदर देखा तो मेरा खून खोल गया
 
अपडेट 66

आंटी अंदर से दरवाज़ा खोलने क लिए शोर मचने लगी और मुझे गलियां भी देने लगी. मैं चुप चाप अपने कमरे में चला गया और बीएड पर लेट गया . मैं सोचने लगा क अब क्या किया जाये आंटी की तड़प अब गुस्से में बदल गयी है और इस नशे की हालत में तो उन्हें कुछ दिखाई hi नहीं दे रह है. मैंने सोचा आंटी थोड़ी देर शोर मचाएंगी और खुद hi थक हर कर सो जाएँगी वैसे भी वो नशे में हैं तो जल्दी सो जाएँगी. मगर दिल में कहीं ये भी चिंता थी क कहीं वो कुछ कर न बैठें. इस लिए कुछ देर बाद मैं अपने कमरे से बहार निकला और नीचे आ गया. मैं आंटी क कमरे की तरफ बड़ा तो देखा आंटी क रूम का दरवाज़ा लॉक नहीं था और हल्का सा खुल हुआ था. अंदर से आंटी की कामुक सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी . मैं दौड़ कर दरवाज़े पर गया और अंदर देखा तो मेरा खून खोल गया

अब आगे -

मैंने दरवाज़े जब अंदर देखा तो आंटी बीएड पर नंगी लेती हुई थी रानी उनके बूब्स मसलती हुई उन्हें किश कर रही थी और लोकु आंटी की छूट चाट रहा था. रानी क जिस्म पर पेटीकोट और ब्लाउज था जबकि लोकु ने कमीज़ पहनी हुई थी और पेण्ट उतर रहा था. आंटी मस्ती में डूबी छटपटा रही थी और रानी क सर को पकड़ कर उसे अपने बूब्स की तरफ धकेल रही थी . लोकु ने आंटी की छूट को चेतना बंद किया और पेण्ट उतर कर अपना लैंड आंटी की छूट में जैसे hi घुसाने लगा मैं बिजली की स्पीड से अंदर घुसा और ज़ोर से उसकी बगल में एक किक दे मरी. मैं इतना गुस्से में था क पूरा ज़ोर लगा कर किक मरी थी लोकु बीएड से दूर जा गिरा और उसके मग से एक दर्दनाक चीख निकली.

लोकु : aaaaaaaaaaaaaaa मर ग्याआ

लोकु की दर्दनाक चीख सुनकर रानी झट से पलट गयी और मुझे देख कर उसकी भी मैया चुद गयी . उसका रंग उड़ गया इससे पहले क वो कुछ कहती या करती मैंने एक करारा थप्पड़ उसके मग पर भी दे मारा और वो चक्कर खा कर बीएड से नीचे जा गिरी . आंटी भी मस्ती क आलम से जैसे बहार आयी और सामने मुझे देख कर गुस्से में आ गयी

आंटी : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की बहार निकालो मेरे कमरे से

मैंने आंटी की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और लोकु को पकड़ कर लात घूसों से उसे मरने लगा . लोकु ने मुझसे उलझने की कोशिश की मगर मेरी ताकत क आगे वो कहाँ ठहर सकता था . मैं तसल्ली से उसे पीटने लगा . लोकु की दुर्दशा देख कर रानी उसे बचाने आगे बड़ी तो मैंने उलटे हाथ का एक और थप्पड़ उसे धार दिया और वो पलट कर दूर जा गिरी . आंटी तब आगे बड़ी और मुझे खींच कर थप्पड़ मर दिया . मुझे गुस्सा तो बहुत आया मगर मुझे पता था वो होश में नहीं हैं इस लिए मैंने उन्हें बीएड पर धक्का देकर गिरा दिया और रानी को घसीट कर उनके कमरे से बहार निकला.

लोकि और रानी को कमरे से बहार निकल कर मैंने बहार से आंटी को फिर लॉक कर दिया और लोकु की बंद बजता हुआ उसे और रानी को क्वार्टर की तरफ ले गया . लोकु की हालत बहुत बुरी हो गयी थी उसके मुँह से खून आने लगा था. मैंने उसको उसका सामान बांधने को कहा और 10 मिनट्स में hi उसे उसके सामान क साथ मरता हुआ घर से बहार निकल दिया. अब बरी रानी की थी . मैंने रानी को भी उसका सामान बांधने को कहा मगर वो मेरे पैरों में गिर कर रोने लगी और माफ़ी मांगने लगी .

रानी : मुझे माफ़ कार्डो बाबू जी इसमें मेरी कोई गलती नहीं है. मुझे घर से मत निकालिये मैं कहाँ जाउंगी

अमित : तेरी गलती नहीं है ? मैं सब अछि तरह से जनता हूँ . तू hi आंटी को भड़का रही थी और उनको दवा खिला कर उस हरामी लोकु क आगे परोसना चाहती थी . मैं तेरी जान ले लूंगा.

रानी : मैं मजबूर थी साहब उसके पास मेरी नंगी तस्वीरें थी वो मुझे ब्लैकमेल करता था. मैं गलत माहि हूँ साहब मैंने अपनी इज़्ज़त बचने क लिए उसकी बात मणि

अमित : अपनी इज़्ज़त बचने की खातिर तूने अपनी मालकिन की इज़्ज़त का सौदा कर लिया. जिस थाली में खाया उसी में छेड़ कर दिया. तू माफ़ी क लायक नहीं है . चल निकल इस घर से और कभी दोबारा अपनी शकल न दिखाना

रानी : बाबू जी मैं कहाँ जाउंगी ? मैं तो यहाँ किसी को जानती तक नहीं . ज़रा सोचिये मेरा क्या होगा मुझे माफ़ कर दीजिये आप कहेंगे तो सुबह यहाँ से चली जाउंगी मगर आज रत का समय दे दीजिये मुझे . मैं मालकिन से माफ़ी भी मांग लूंगी

मुझे उसकी इस बात पर तरस आ गया . आखिर थी तो वो औरत . चाहे जैसी भी उसकी गलती हो मैं उसको इस वक़्त घर से निकल कर भूखे भेड़ियों क आगे तो नहीं परोस सकता था . इसी लिए मैंने उसे रत रुकने की छूट दे दी. उसके बाद मैं घर में वापिस दाखिल हुआ . आंटी क कमरे से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी मुझे आशंका हुई क कहीं वो कुछ और न कर दें .

मैं अपने मन की आशंका दूर करने क लिए आंटी क कमरे की तरफ गया और उनका कमरा खोला . सामने आंटी बीएड गाउन पेहेन कर बैठी हुई थी और उनके हाथ में शराब का पेग पकड़ा हुआ था. मुझे देखते hi वो गुस्से में कड़ी हो गयी और मेरे मुँह पर मर कर वो पेग खली कर दिया.

आंटी : ज़लील कुत्ते तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे कमरे में घुसने की . कहाँ है रानी और वो ड्राइवर बोल कहाँ है वो. तूने उस पर हाथ कैसे उठाया.

अमित : आंटी जी होश में आइये . वो दोनों आपका फायदा उठा रहे थे

आंटी : ज़ुबान बंद रख अपनी . वो दोनों मेरी आग बुझा रहे थे जो मेरा वो बास्टर्ड पति नहीं बुझाता . और तुम होते कौन हो मेरी पर्सनल लाइफ में दखल देने वाले ? तुम खुद तो कुछ कर नहीं सकते हिजड़े कहीं क दूसरों को भी नहीं करने डोज. मुझे मर्द चाहिए असली मर्द जो इस घर में नहीं है. जाओ उस ड्राइवर को मेरे पास लेकर आओ

अमित : अब वो नहीं आएगा मैंने उसे घर से निकल दिया है और आप भी खुद को कण्ट्रोल कीजिये

आंटी ने मुझे एक और थप्पड़ मर दिया ज़ोर से ‘चाताआक’

आंटी : तूने उसे घर से निकल दिया . जा अभी उसे लेकर आ अगर वो नहीं मिला तो सिक्योरिटी गार्ड को लेकर आना . मुझे मेरी आग बुझानी है .

मैं अपनी जगा से जब नहीं हिला तो आंटी ने मुझे धक्का दे कर साइड में किया और खुद बहार जाने लगी

आंटी : मैं खुद किसी को लेकर अति हूँ. आज मैं अपनी प्यास बुझा क रहूंगी

मैं दीद कर आंटी क आगे आ गया और उन्हें पकड़ लिया . आंटी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. वो मेरी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी. जब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा तो मुझे दीपिका ममी की बात यद् आयी क मुझे उनको सहारा देना पड़ेगा. मैं ऐसा करना तो नहीं चाहता था. मगर इस वक़्त आंटी को रोकने का ये एक hi तरीका था वर्ण आज मेरे दोस्त की इज़्ज़त सड़क पर नीलम हो सकती थी. मैं आंटी को कंधे पर उठा कर उनके बीएड रूम में ले गया और उनको बीएड पर पटक दिया.

आंटी : यू बास्टर्ड हाउ डरे यू ? मैं तेरा खून पि जाउंगी

आंटी मुझे मरने क लिए जैसे hi उठ कर मेरे करीब आयी . मैंने उनके दोनों हाथ मरोड़ कर उनकी पीठ पर लगा दिए. उनकी दोनों कलाइयां अपने एक हाथ में थम कर मैंने एक हाथ से उनकी गर्दन को सर क पीछे से पकड़ा और उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर उनकी बोलती बंद करदी.

पहले आंटी मुझसे छूटने को छटपटा रही थी मगर जल्दी hi वो शांत हो गयी और मेरा साथ देने लगी. उनके शांत होते hi मैंने उनके बाजु आज़ाद कर दिए और दोनों हाथों से उनके सर को थामे किश करता हुआ उनके साथ hi बीएड पर गिर पड़ा. आंटी मेरे साथ वीलडली किश करने लगी. हम दोनों एक दूसरे को लगातार किश कर रहे थे . आंटी की आग इतनी ज्यादा भड़की हुई थी क वो मेरे होंठो को खाने की कोशिश कर रही थी. आंटी मेरे पूरे चहरे पर किश करने लगी . मेरा पूरा चेहरा उनके थूक से लिथड़ गया. आंटी क आगे मैं पानी भरने लगा.

आंटी तो पूरी जंगली बिल्ली बन चुकी थी जो मुझे एक पल क लिए भी छोड़ना नहीं चाहती थी. मैंने बड़ी मुश्किल से उनको थोड़ा दूर हटाया और सांस लेने लगा. मगर आंटी कहाँ रुकने वाली थी. वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और मेरी दोनों तरफ घुटने रख कर मेरे पेट पर बैठ गयी . गाउन पट्टी वाला था जिसके अंदर से दोनों जाएंगे नंगी बहार निकल आयी . आंटी ने गाउन की पट्टी खोली और अपना गाउन उतर कर फेंक दिया.

आंटी का संगेमरमर सा तराशा हुआ गोरा चिकना बदन मेरी आँखों क सामने आ गया. मैंने उनके दूध से सफ़ेद बूब्स पर बने गुलाबी निप्पल देख कर उनकी खूबसूरती में खो गया . आंटी को चैन कहाँ था वो तो जल्दी से अपनी आग बुझाना चाहती थी. उन्होंने मेरी T-shirt खिंच कर निकालनी शुरू करदी मैंने उनका साथ दिया और जल्दी hi मैं ऊपर से नंगा उनके नीचे था.

आंटी मेरी चेस्ट पर हाथ फिरने लगी. जैसे मेरी मस्कुलर बॉडी का जायज़ा ले रही हों . फिर झुक कर वो मुझे किश करने लगी और फिर मेरी गर्दन पर किश करने लगी . किश करते हुए उन्होंने मेरी गर्दन पर दन्त गदा दिए. मैंने आज तक ऐसे वाइल्ड सेक्स कभी नहीं किया था. इस नए एक्सपीरियंस से मैं भी धीरे धीरे मज़े की वादियों में खोने लगा. आंटी मेरी छाती पर चुम्बन करती हुई नीचे बढ़ने लगी और मेरे ट्रॉउज़र को दोनों हाथों से पकड़ कर खींचने लगी. मैंने कमर उठा कर उनको ट्रॉउज़र उतरने लगा. आंटी ने ट्रॉउज़र और अंडरवियर एक साथ उतर दिया.

अब मैं आंटी क सामने पूरा नंगा था और मेरा लैंड भी पूरा मस्ती में सर उठाये खड़ा था. आंटी की आँखों में लैंड को देखते hi चमक आ गयी . आंटी ने अपने दोनों हाथो से लैंड को थम लिया और सुपडे पर अपने होंठ रख कर किश कर दिया.

आंटी : इतने दिनों से तूने इसे छुपा कर रखा हुआ था. आज मैं इसे खा जाउंगी आज ये मेरा है . आज ये मेरी प्यास बुझायेगा ये मेरा है.

आंटी की आँखों में हवस की लालजी साफ़ दिख रही थी और लैंड को देख कर तो उनके चहरे पर ऐसे भाव थे जैसे किसी को मुँह मांगी मुराद मिल गयी हो. आंटी ने मेरे लैंड पर सुपडे से लेकर जड़ तक कितने hi किश कर दिए और फिर अपनी जीभ निकल कर चाटने लगी. लैंड को अछि तरह चाटने क बाद उन्होंने एक एक मेरा लैंड अपने मग में भर लिया और एक बार में हु आधा लैंड मुँह में ले लिया.

आंटी अपने गले की गहरायी तक लैंड को अंदर ले गयी और इतने से hi अंदर बहार करने लगी. मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा . आज एक अलग तरह का आनंद मैं अनुभव कर रहा था. मज़े में मदहोश हो कर मेरे हाथ आंटी क सर पर कब चले गए मुझे होश नहीं रहा. मैंने एयरी का सर दोनों हाथो से पकड़ा और अपनी कमर उठा कर अपना लैंड उनके गले की गहराई तक घुसाने लगा जिससे उनकी सांस सरकने लगी और उन्होंने मेरी जाँघों पर दोनों हाथ टिका कर जोर लगा कर अपना मग ऊपर उठाया. आंटी क गले में शायद लैंड ज्यादा hi अंदर चला गया था. वो ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी

आंटी : ाहुओं ाख़ूऊन अख्यूं

उनकी आँखों से आंसू बहने लगे और उनके मुँह से निकलती थूक की धार मेरे लैंड पर लगी हुई थी. आंटी ने बिना वक़्त गवाए अपने घुटने मेरी कमर क दोनों साइड पर टिकाये और लैंड को एक हाथ से पकड़ कर छूट पर सेट किया. आंटी की छूट लैंड क मुकाबले छोटी थी इस लिए लैंड आसानी से नहीं घुसने वाला था. फिर भी आंटी ने 3 इंच तक लैंड अंदर ले लिया . उनके चहरे से साफ़ नज़र आ रहा था क उनको ज़ोर लगाना पद रहा है. मगर वो अपनी गर्मी में इतनी ज्यादा जल रही थी क उनसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

आंटी ने बीएड पर पाऊँ टिकाये और अपना वजन पाऊँ पर डालते हुए थोड़ा सा ऊपर हुई जिससे लैंड थोड़ा सा छूट से बहार आया मगर सूपड़ा अभी अंदर hi था. फिर आंटी एक डैम से नीचे बैठ गयी और इसी क साथ मेरा लैंड आंटी की छूट की तंग गलियों को खोलता हुआ अंदर घुस गया. आंटी हिम्मत कर क एक झटके में बैठ तो गयी मगर छूट में हुए दर्द से वो चिल्ला पड़ी

आंटी : aaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmaaaaaaaaaaaa आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह एआईईईई सीसीसी सीसीसी सीसीसी आआआहहहहह कितना मोटा लैंड है फट्ट्ट्ट गईइइइइइ मेरिइइइइइइइ आआअह्ह्ह्हह मारर्र दलायआ फास्डडडड दी मेरी छूट आआह्ह्ह्हह

आंटी लैंड पर एक झटके में बैठ तो गयी मगर अब उनसे दर्द बर्दाश्त माहि हो रहा था . उन्होंने ऊपर उठने की कोशिश की तो मैंने उनको कमर से पकड़ कर उठने नहीं दिया.

आंटी : छोडो मुझे एआईईईई आआअह्ह्ह्हह बहुत दर्द हो रहा है बहार निकालो इसे मेरी छूट फैट गयी है आआह्ह्ह्हह्ह ममममआ

मैंने आंटी को अपने ऊपर झुकाया और पलट कर खुद उनके ऊपर हो गया. मैं आंटी क दोनों रसीले आम दबाने लगा . आंटी क बूब्स अभी तक ढीले नहीं पड़े थे . मैं आंटी क बूब्स ज़ोर ज़ोर से मसल कर ढीले करने लगा

आंटी : आअह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह्हह्ह धीरे धीरे आईई सीसीसी कक्कक्क्स धीरे करो

मैं आंटी क बूब्स मसलता हुआ उनके ऊपर झुका और एक चीची को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा . दूसरे दूध को दूसरे हाथ से मसलने लगा फिर मैंने दूसरे वाले बूब्स को चूसने लगा और पहले वाले को दबाने लगा. मेरे ऐसा करने से आंटी फिर से मस्ती में आ गयी और सिसकारियां लेती हुई मेरा सर अपने बूब्स पर दबाने लगी.

आंटी : आह्ह्ह्ह आह्हः सीसीसी कक आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म ोुह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म खा जाओ खा जाओ उम्म्म्म ककक स और ज़ोर से और ज़ोर से आअह्ह्ह्हह सीसीसी कक

मैंने देखा आंटी अब मस्ती में आकर कमर हिलने लगी हैं तो मैं सीधा हो गया और अपने लैंड को छूट में अंदर बहार करने लगा. छूट ने लैंड को जकड़ा हुआ था जिससे पता चल रहा था क आंटी ने जैसे अपनी बॉडी को फिट रखा है उसी तरह उनकी छूट भी पूरी फिट है. और आज तक उसके अंदर इतना तगड़ा लैंड कभी नहीं गया है. मैंने धीरे धीरे लैंड की गति बदनी शुरू कर दी और छूट ने भी लैंड को अपने अंदर जगह दे दी. जैसे जैसे मैं धक्के बढ़ाने लगा आंटी की सिसकियाँ बढ़ने लगी

आंटी : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आहहहबब सीसीसी स आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह और तेज़ और तेज़ आआह्ह्ह आअह्ह्ह शाबाश और तेज़ करो आअह्ह्ह कहाँ थे तुम अब तक आआह्ह्ह अह्ह्ह तुमने पहले क्यों नहीं मुझे ये मज़ा दिया आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह और ज़ोर लगाओ और तेज़ आआह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म

मेरे धक्कों क साथ आंटी और ज़्यादा मस्त होती जा रही थी और मुझे और तेज़ धक्के मरने को बोल रही थी . मैंने भी धक्कों की स्पीड बड़ा दी . अब मेरे धक्के इतने तेज़ हो गए थे क बीएड भी हिलने लगा था.

आंटी : आअह्ह्ह्ह ाःह्ह्ब ऊऊह्ह्ह्ह ऐसे hi शाबाश ऐसे hi आआह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्हब फाड़ दो मेरी छूट फाड़ दो आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह और अंदर तक घुसा दो आआह्ह्ह इतना बड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखा था आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह तुम्हारा पेनिस लाजवाब है आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह फाड़ डालो मेरी छूट बहुत तंग करती है मुझे फाड़ दो मार दो आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअज से रोज़ ऐसे hi मुझे छोड़ना ऐसे hi आआह्ह्ह्ह आआह्ह मैं आअज से तुम्हारी गुलाम हूँ जब कहोगे जहाँ कहोगे तुमसे चुदाई करवाउंगी आआह्ह्ह आआह्ह्ह्हह मुझे अपनी रखैल बना लो आज से मैं तेरी रखैल हूँ मुझे कभी छोड़ कर मत जाना आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

आंटी पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी उन्हें कोई होश नहीं था और मैं भी मस्ती में ताबड़तोड़ धक्के मर रहा था. मेरा जिस्म पसीने से भीग रहा था मगर अब परवाह किसे थी.

आंटी : ाःह्ह्ब आआह्ह्ह आअह्ह्ह मेरी प्यास बुझा दो बुझा दो मेरी आग मैं झड़ने वाली हूँ आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह और तेज़ करो और तेज़ आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह राघव चूतिये को तो छोड़ना hi नहीं अत आअह्ह्ह आअह्ह्ह अब तो उसे चुदाई भी भूल गयी है आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअज से तू hi मेरा पति है आआह्ह्ह्हह आज से रमा तेरी रखैल है तेरी गुलाम हैई आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म बोल रमा तू मेरी रखैल है आअह्ह्ह्ह बोलो एक बार अपने मग से मेरा नाम लो आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह एक बार जल्दी से मेरा नाम लो आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह बोल रमा तू मेरी रखैल है आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह ककक जल्दी करो जल्दीईई

अमित : हाँ रमा आज से तू मेरी रखैल है ककक आअह्ह्ह ओह्ह्ह तू मेरी रंडी है तुझे रंडी की तरह छोडूंगा रोज़ तेरी छूट मरूंगा

आंटी : आआह्ह मैं गयी आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आईईईई माआआआ आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह

आंटी का जिस्म अकड़ गया और उन्होंने मेरी पीठ पर अपनी टैंगो को कास लिया . आंटी की पकड़ इतनी बाद गयी क मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था . मुझे मेरे लैंड पर गरम पानी का शावर चलता हुआ महसूस हुआ पता नहीं कितनी आग थी आंटी क अंदर . पानी निकलते हुए आंटी का जिस्म झटके लेता हुआ विबरते होने लगा. मैं उनके नार्मल होने तक रुका रहा . मेरा पानी अभी नहीं निकल था इस लिए आंटी क शांत होते hi मैंने उनकी टांगों क शिकंजे को खोला और अपने कंधो पर रख लिया. आंटी आँखे बन किये रिलैक्स हो रही थी . मैंने लैंड को छूट में फिर से अंदर बहार करना शुरू कर दिया. आंटी तो ठंडी पद गयी थी मैं उनकी गोरी चिकनी टैंगो को धक्के लगता हुआ चूमने लगा . आंटी की टैंगो को जोड़ कर मैंने एक हाथ से पकड़ा और उनके सर की तरफ दबा दिया . दूसरे हाथ से मैं उनके बूब्स मसलने लगा . आंटी 5 मिनट्स में hi फिर से गरम हो गयी . मैंने आंटी को घुटनो पर झुका दिया और पीछे से लैंड उनकी छूट में घुसा कर धक्के मरने लगा . आंटी भी अपनी कमर को पीछे धकेल कर मेरा साथ दे रही थी . मैंने आंटी क गोल मटोल गोर चिकने चूतड़ों पर थप्पड़ मरने शुरू कर दिए जिससे उनके गोर सफ़ेद चूतड़ लाल नज़र आने लगे .

आंटी फिर से मस्ती में चीखने चिल्लाने लगी और मुझे तेज़ी से धक्के मरने को कहने लगी

आंटी : आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ककक और तेज़ मारो मैं तेरी कुटिया हूँ ऐसे hi तेज़ और तेज़ धक्के मर आआह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हब सीसीसी स छोड़ अपनी कुटिया को आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह

मेरा भी सबर जवाब देने लगा था मैं अब अपना पानी जल्दी से निकलना चाहता था मैंने आंटी के खुले बल अपने एक हाथ में पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उनके चूतड़ों पर थप्पड़ लगाने लगा . ये तो बिलकुल काऊबॉय स्टाइल बन गया था. आंटी बाल खींचने से आगे से ऊपर उठने लगी. मैं जानवर की तरह अंधाधुंध धक्के मरता हुआ उनके बाल खींचता जा रह था . और 15/20 खतरनाक धक्के मर कर मैंने अपना लैंड आंटी की छूट ने जड़ तक घुसा दिया . मेरे लैंड ने आंटी की छूट में पानी की बरसात कर दी . पानी निकलते hi मेरी पकड़ ढीली पद गयी और आंटी बीएड पर गिरी उनके ऊपर मैं भी गिर गया. हम दोनों पसीने में भीगे हुए थे आंटी की तो बुरी हालत हो रही थी. मैं भी थक गया था. मैं ऐसे hi कुछ देर आंटी क ऊपर आराम करने लगा . मुझे पता hi नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी और हम दोनों ऐसे hi नंगे एक दूसरे से चिपके हुए सो गए .
 
अपडेट 67

मेरा भी सबर जवाब देने लगा था मैं अब अपना पानी जल्दी से निकलना चाहता था मैंने आंटी के खुले बल अपने एक हाथ में पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उनके चूतड़ों पर थप्पड़ लगाने लगा . ये तो बिलकुल काऊबॉय स्टाइल बन गया था. आंटी बाल खींचने से आगे से ऊपर उठने लगी. मैं जानवर की तरह अंधाधुंध धक्के मरता हुआ उनके बाल खींचता जा रह था . और 15/20 खतरनाक धक्के मर कर मैंने अपना लैंड आंटी की छूट ने जड़ तक घुसा दिया . मेरे लैंड ने आंटी की छूट में पानी की बरसात कर दी . पानी निकलते hi मेरी पकड़ ढीली पद गयी और आंटी बीएड पर गिरी उनके ऊपर मैं भी गिर गया. हम दोनों पसीने में भीगे हुए थे आंटी की तो बुरी हालत हो रही थी. मैं भी थक गया था. मैं ऐसे hi कुछ देर आंटी क ऊपर आराम करने लगा . मुझे पता hi नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी और हम दोनों ऐसे hi नंगे एक दूसरे से चिपके हुए सो गए .

अब आगे-

सुबह जल्दी जागने की आदत की वजह से मेरी आँख जल्दी खुल गयी . मैंने देखा आंटी और मैं दोनों वैसे hi नंगे बीएड पर पड़े हुए हैं. आंटी क पेट क बल पड़ी हुई थी और उनके बाल बिखरे हुए थे. मैं आंटी क साइड में पड़ा हुआ था मगर मेरी एक तंग और बाजु आंटी क ऊपर hi थी. आंटी गोरी मखमली चिकनी पीट मेरे सामने थी जिस पर काली घटा सी रेशमी ज़ुल्फ़ें बिखरी हुई थी. मॉर्निंग इरेक्शन की वजह से मेरा लैंड खड़ा हो कर आंटी क गुद्दाज़ चूतड़ों पर दस्तक दे रहा था. आंटी की खूबसूरती को देखते हुए फिर से मेरा पापी मन उनके इस नायब जिस्म को भोगने को होने लगा. और मैं अपनी काम वासना में फिर से बेहटा गया मैंने आंटी की मखमली पीठ पर अपने होंठ चिपका दिए और एक चुम्बन अंकित कर दिया.

मेरे किश करने से आंटी क जिस्म में हलकी सी हलचल हुई. मुझे लगा आंटी शायद उठ रही हैं और इसी एहसास से मुझे रत की साडी घटनाएं यद् आने लगी और मैं डरने लगा क आंटी उठते hi जब अपनी और मेरी ऐसी हालत देखेगी तो वो पता नहीं मेरा क्या हल करेगी . मैं जल्दी से उठा और अपने कपडे पहन लिए. कपडे पहन कर मैंने आंटी के नंगे जिस्म को बीएड शीट से कवर कर दिया और चुप चाप कमरे से निकल कर अपने कमरे में आ गया.

आंटी जब होश में आएँगी तो उन्हें रत जो कुछ भी हुआ वो सब यद् आ जायेगा और फिर पता नहीं वो मेरे साथ क्या सलूक करें. इज़्ज़त की खातिर हो सकता है वो किसी से इस बारे में बात न भी करें मगर मुझे इसकी सजा ज़रूर देंगी. और अगर कहीं मोहित को इस बात की भनक भी लग गयी तो वो मुझे कितना ज़लील करेगा. मैं उसकी दोस्ती क काबिल नहीं हूँ मैंने उसकी माँ क साथ जो किया है इसके लिए वो मेरी जान भी ले सकता है खैर जान की परवाह किसे है मगर दोस्ती की नज़र से तो मैं गुनाह गर बन गया हूँ. चाहे ये गुनाह मैंने उसके घर की इज़्ज़त को बचने क लिए hi क्यों न किया हो.

मैं मन में यही सब सोच रहा था. आज न मैं एक्ससरसीसे करने गया और न hi मेरा दिमाग कुछ और करने की सोच प् रहा था. मुझे यही सही लग रहा था क आंटी क उठने से पहले मैं मोहित क घर से हमेशा क लिए चला जॉन. इसी लिए मैं जल्दी से उठा नाहा कर तैयार हुआ और अपना सारा सामान बैग में पैक करने लगा . मैं अपना सारा सामान समेत कर कमरा खली कर क नीचे उतर रहा था क आंटी ऊपर आती हुई मिल गयी. आंटी ने गाउन पहना हुआ था . आंटी को देख कर मेरी गांड फैट गयी क अब तो गए आंटी मेरी अब इज़्ज़त उतरेंगी. आंटी ने मेरे हाथ में बैग देखा तो उनके चहरे पर गुस्से और चिंता क मिले जुले भाव नज़र आने लगे. आंटी ने गुस्से से मेरी आँखों में देखा और मेरे हाथ से बैग चीन कर अपने कमरे की तरफ चल पड़ी .

मैं अपनी जगह पर आंटी को जाते हुए देख रहा था मुझे समझ नहीं आ था था क अब मैं क्या करूँ. आंटी क एक्सप्रेशन से मुझे समझ नहीं आ रहा था क आंटी करना क्या चाहती हैं. कहीं मेरा बैग अपने पास रख कर मुझे जाने से रोकना तो नहीं चाहती . कहीं मुझे रोक कर पीछे से पुलिस या अंकल को तो नहीं बुला लेंगी. मैं और भी दर गया मगर अब किया भी क्या जा सकता था. मैं सोच में पड़ा था क आंटी अपने रूम क दरवाज़े पर आयी और मुझे अपने पास बुलाया

आंटी : वहां खड़े खड़े क्या कर रहे हो यहाँ आओ मेरे पास

मैं किसी रोबोट की भांति उनका आर्डर फॉलो करता हुआ उनके कमरे में चला गया . मेरा बैग आंटी क बीएड पर पड़ा था. मुझे लगा इससे पहले आंटी कुछ करें मुझे उनसे अपने किये की माफ़ी मांग लेनी चाहिए. मैं तुरंत आंसू बहता हुआ आंटी क पाऊँ में गिर गया और उनसे माफ़ी मांगने लगा.

अमित : आंटी प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये कल जो कुछ भी हुआ मैं उसके लिए माफ़ी मांगता हूँ. मैंने आपके साथ बहुत गलत किया है. प्लीज आप जो सजा दें मुझे मंज़ूर है मगर आप भगवन क लिए किसी को बताइयेगा नहीं वर्ण मैं सबकी नज़रों में गिर जाऊंगा . प्लीज आंटी माफ़ कर दीजिये.

आंटी : तुम्हे पता है तुमने क्या किया है मेरे साथ?

अमित : प्लीज आंटी मुझे माफ़ कर दीजिये मैं बहुत शर्मिंदा हूँ . मैं बहुत बुरा इंसान हूँ . मैं आज hi इस घर से चला जाऊंगा और कभी आपको अपनी सूरत नहीं दिखाऊंगा . मैं ये शहर hi छोड़ जाऊंगा.

आंटी : और तुम्हे लगता है जो तुमने किया इससे वो बदल जायेगा? मैं तो होश में नहीं थी मगर तुम तो होश में थे ? कोई ऐसे करता है क्या ? अभी तक मुझे दर्द हो रहा है. इतनी जलन और दर्द है क पाऊँ फैला कर चलना पद रहा है. नशे में तो मैं थी मगर तुमने तो पूरा जंगली पैन दिखाया है. अभी तक अंग अंग दुःख रहा है मेरा.

मुझे आंटी की बातें समझ नहीं आ रही थी क वो मुझे गुस्सा दिखा रही हैं या रत की वाइल्ड चुदाई का गिला कर रही हैं मैं हैरान परेशां निगाहों से उनको देखने लगा

आंटी : तुमने जो मेरे साथ किया है अब तुमको उसकी सजा भुगतनी पड़ेगी.

मैं फिर से डरने लगा क आंटी अब पता नहीं क्या सजा देगी मुझे

आंटी : मैंने ज़िन्दगी में कभी राघव क इलावा किसी दूसरे मर्द क साथ सेक्स नहीं किया. और कल रत तुमने इतनी बेदर्दी से मुझे मेरे hi बिस्तर पर रोड दिया. ऐसा लग रहा है जैसे रत में कोई सांड मुझ पर चढ़ गया था और अब जब मेरे पति मेरे निचे की हालत देखेंगे तो उन्हें पता चल जायेगा क मैंने किसी और क साथ नाजाइज़ रिश्ता बनाया है. तुम में और उन में बहुत फरक है जो साफ नज़र आ रहा है.

मैं आंटी की बातों पर शर्मिंदगी से सर झुकाये बैठा था

आंटी : राघव क पास मेरे लिए वक़्त नहीं है और शायद अब उसका इन सब बातों से मन hi उठ चूका है . 2/3 महीने में कभी एक आध बार बहुत ज़ोर देने पर hi वो मुझे प्यार करते हैं . और मैं तड़पती रहती हूँ. ऐसे में मुझे जिस प्यार और सहारे की ज़रूरत थी वो मुझे कल रत तुमने दिया है. मैं तो तुम्हारी एहसान मंद हूँ क तुमने मेरी तड़प को मिटा दिया वर्ण कल रत पता नहीं मैं क्या कर जाती. तुमने जो कुछ भी किया है अब उसकी सजा यही है क तुम अब हमेशा इसी घर में रहोगे और हमेशा मुझे अपना प्यार देते रहोगे . मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगी . कल तुमने जिस तरह से मुझे ठंडा किया है अभी तक मेरा जिस्म उस नशे से बहार नहीं निकल प् रहा है. मैं चाहती हूँ अब तुम हमेशा मुझे ये प्यार दो . तुम एक असली मर्द हो मैंने इतनी सटिस्फैक्शन कभी महसूस नहीं की और तुम्हारा औज़ार भी कमल है.

आंटी क बातें सुन कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी . मैं क्या सोच रहा था और आंटी क्या कह रही हैं.

अमित : मगर आंटी ये सब पाप है मैंने अपने दोस्त को धोखा दिया hai.maine आपकी नशे की हालत का गलत इस्तेमाल किया है.

आंटी : तुमने कोई पाप नहीं किया और न hi अपने दोस्त को कोई धोखा दिया है. रही बात मेरी हालत की तो मुझे सन्यास है. मैं नशे में ज़रूर थी मगर रत जो कुछ भी हुआ मुझे यद् है. अगर तुम नहीं एते तो मैं उस ड्राइवर लोकु क आगे hi मजबूर हो चुकी थी . मुझसे अपने जिस्म की आग बर्दाश्त नहीं हो रही थी ऐसे में मुझे कोई तो चाहिए था चाहे वो कोई भी हो. अगर तुम सही वक़्त पर आकर मुझे न सँभालते तो पता नहीं कौन सा घटिआ इंसान तुम्हारे दोस्त की माँ का फायदा उठा लेता तो तब क्या तुम खुद को माफ़ कर पते ? तुमने तो अपने दोस्त क साथ वफादारी की है. ज़रूरत में दोस्त क काम आना hi दोस्ती है. जो दोस्त क इज़्ज़त की हिफाज़त क लिए करना चाहिए वो तुमने किया इसमें कोई पाप नहीं है. वो चाहे इसे गलत समझे मगर असल में इससे उसकी hi इज़्ज़त बची है.

मैं जानती हूँ मैंने जो किया है वो पाप है मगर इस शरीर की भी अपनी ज़रूरतें हैं अमित. सोने क पिंजरे में रह कर भी पंछी कैदी hi रहता है . राघव ने वो सब कुछ दिया जो ऐशो आराम क लिए चाहिए मगर औरत को पति क प्यार की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है जो वो मुझे नहीं दे पता. मैं जानती हूँ वो मुझसे प्यार करते हैं और मैं भी उनसे प्यार करती हूँ मगर इस जिस्म की अपनी ज़रूरतें हैं जो कल रत तुमने पूरी की हैं. मैं कभी किसी गैर क साथ ऐसे ताल्लुकात नहीं रखना चाहती क्या पता कौन कब मुझे बदनाम करदे. ऐसे में मेरे पास तुम hi एक आशा की किरण बन कर ए. मैंने कितनी कोशिश की तुम्हे सडके करने की मगर तुम खुद पर काबू रखे हुए थे कोई और होता तो कब का मुझ पर चढ़ जाता इसी लिए मेरे दिल में तुम्हारे लिए और भी प्यार बाद गया . मैं कभी तुम्हे मजबूर नहीं करुँगी तुम्हारी अपनी ज़िन्दगी है तुम चाहे जो करो मगर इतना ज़रूर यद् रखना क किसी मजबूर और लचर की मदद करना कभी पाप नहीं होता चाहे कोई इसे कुछ भी कहे मगर असल में ये hi परोपकार है. मेरी हालत वो है क मैं सब के सामने मुस्कुराती ज़रूर हूँ मगर अंदर से टूट चुकी हूँ मुझे जिस प्यार और सहारे की तलाश थी वो मुझे तुमने दिया है . अगर तुम्हे फिर भी ये गलत लगता है तो तुम्हे मैं कभी कुछ नहीं कहूँगी मगर अगर तुम्हे मेरे दर्द और अकेलापन का अंदाज़ा हो जाये तो यद् रखना मैं हमेशा तुम्हारा इंतज़ार करुँगी.

आंटी अपने दिल का दर्द बयां करते हुए आंसू बहाने लगी और अपने बीएड पर गिर गयी. मुझे आंटी की बातों से उनकी तड़प और अकेलापन का अंदाज़ा हो गया था. उनकी बात बिलकुल सही थी . अंकल ने उन्हें ऐशो आराम तो दिया मगर उन्हें प्यार देने क लिए उनके पास वक़्त hi नहीं था. आंटी ने मुझ में अपने लिए प्यार और सहारा ढूँढा अगर मैं भी उन्हें उनके हल पर छोड़ कर चला गया तो वो पहले से भी ज़्यादा अकेली हो जाएँगी और टूट जाएँगी. मुझे आंटी पर तरस आ रहा था. मुझे उनकी बात सही लगी क बेबस इंसान की मदद करना hi परोपकार है . इंसान कारोबार कर क पैसा तो कमा सकता है मगर दुआएं उसे मजलूमों की हिमायत करने से hi मिलती हैं.

आंटी मेरे सामने बीएड पर औंधी गिरी हुई आंसू बहा रही थी . मैं आंटी क पास गया और उनको पकड़ कर बिठाया. आंसुओं से उनका चेहरा भीग गया था. मैंने आंटी क आंसू पोंछे और कहा

अमित: बस आंटी अब और नहीं आप और आंसू नहीं बहाएंगी. मैं जनता हूँ आप बहुत अछि हैं और आज तक आपने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसके लिए आपको सर झुकना पड़े. अंकल पैसा कमाने की दौड़ में ये भूल गए क असली दौलत तो परिवार है. आप मेरे लिए बहुत अज़ीज़ हैं और मैं आपके दुःख को भी समझ रहा हूँ . मैं कहीं नहीं जाऊंगा और आपको वो सुख भी दूंगा जिसकी आपको ज़रूरत है मगर मेरी एक शरत है

आंटी क आंसू थम गए और वो सवालिया नज़रों से मुझे देखने लगी.

अमित : आज क बाद इन आँखों में मुझे कभी आंसू नज़र माहि आने चाहिए और ये भी क ये हमारा सीक्रेट किसी को पता नहीं चलना चाहिए.

आंटी मेरी बार सुन कर खुश हो गयी और मुझे गले लगा लिया. मैंने भी आंटी को बाँहों में कास लिया . आंटी मुझे ऐसे गले लगाए बैठी थी जैसे वो मुझे खुद से अलग नहीं होने देंगी उन्होंने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपाया हुआ था.

अमित : अब इजाज़त हो तो मैं अपना सामान अपने कमरे में वापिस रख लूँ

आंटी : उम्म्म नहीं यही रहने दो जब तक मोहित और राघव नहीं एते तुम यही रहोगे मेरे साथ . मैं तुम्हे जी भर क प्यार करना चाहती हूँ.

अमित : वो तो ठीक है मगर आंटी

आंटी : आंटी नहीं रमा , आज से अकेले में तुम मुझे मेरे नाम से बुलाना . मैं चाहती हूँ तुम मुझे पुरे हक़ से बुलाओ . मैं आज से तुम्हारी हूँ तुम चाहे मुझे जो भी समझो मुझे मंज़ूर है

अमित : तो रमा आज से तुम मेरी क्या हो?

आंटी : जो तुम्हे ाचा लगे मैं तो तुम्हारी दासी हूँ

अमित : वैसे तुम्हे देख कर कोई ये टी अंदाज़ा माहि लगा सकता क तुम्हारी उम्र कितनी होगी इस लिए आज से तुम मेरी गफ हो

आंटी : गफ तो part टाइम होती है मैं तो फुल टाइम रहूंगी तुम्हारी सेवा में तुम मुझे अपनी दासी समझो

अमित : नहीं तुम मेरी गफ हो . और अभी मुझे मेरा बैग कमरे में रख कर आने दो . सामान कमरे में रहेगा मगर मोहित क आने तक मैं तुम्हारे साथ hi रहूँगा.

मैंने आंटी क होठों पर किश किया और खड़ा हो गया. मैंने बैग उठाया और बहार जाने लगा.

आंटी : ये पेण्ट तुम्हारी है ?

मैंने पलट कर आंटी क हाथ में पकड़ी हुई पेण्ट देखने लगा . तभी यद् आया ये पेण्ट तो रत को लोकु ने पहनी हुई थी मैं उसे नंगा hi पिट ता हुआ बहार ले गया था. मैंने आगे बाद कर आंटी क हाथ से पेण्ट पकड़ ली . पेण्ट क अंदर उसका कुछ सामान और मोबाइल था. मुझे रानी की बात यद् आ गयी . उसने कहा था क लोकु क पास उसकी तस्वीरें हैं. मैं लोकु का मोबाइल चेक करने लगा. मोबाइल में सिक्योरिटी लॉक नहीं था इस लिए आराम से खुल गया. मैंने गैलरी में चेक किया तो रानी की नंगी तस्वीरें थी जैसे कपडे बदलते हुए चुदाई करते हुए . और कुछ वीडियोस भी थी जिसमे लोकु रानी की चुदाई कर रहा था और ये वीडियो उसने खुद बनायीं थी. आंटी पास कड़ी सब देख रही थी.

आंटी : लगता है लोकु रानी क साथ अपनी वीडियोस रिकॉर्ड करता है. याद आया ! कल तुमने लोकु क साथ क्या किया?

अमित : क्या करता ? वही किया जो नमक हराम क साथ करना चाहिए था. मर मर कर हड्डी पसली तोड़ दी और घर से बहार फेंक दिया.

आंटी : मगर इसमें उस बेचारे की क्या गलती थी?

अमित : गलती ! ये सब उसी का किया धरा है .

आंटी मेरी बात पर हैरान हो गयी

आंटी : क्या मतलब

अमित : मतलब ये क लोकु और रानी किले हुए थे और रानी hi लोकु के कहने पर आपको भड़का रही थी . मैं सब जनता हूँ रानी और आपके बीच क्या चल रहा था.

फिर मैंने आंटी को वो सब बताया जो मैंने सुना था लोकु और रानी क क्वार्टर क बहार. उसके बाद मैंने आंटी को वो वीडियो भी दिखाई. आंटी को ये सब सुन कर गुस्सा आ गया

आंटी : तुमने बहुत ाचा किया उस हरामज़ादे को तो पुलिस क हवाले कर देना चाहिए. और वो रानी कहाँ है?

अमित : रानी को मैंने रत उसके क्वार्टर में रुकने की इजाज़त दे दी थी आखिर वो एक औरत है उसे रत को बहार निकलना मुझे ठीक नहीं लगा. वैसे भी वो लोकु क कहने पर ये सब कर रही थी.

आंटी : मैं तुम्हारा एहसान कैसे उतरूंगी ? तुमने न सिर्फ मुझे प्यार दिया बल्कि मुझे उस हरामी भेड़िये क चंगुल से भी बचाया है. पता नहीं वो मेरे साथ क्या क्या करता.

अमित : मैंने कोई एहसान नहीं किया . कोई मेरी गफ पर बुरी नज़र डेल और मैं देखता रहूं ऐसा भला हो सकता है? अब मैं अपना सामान अपने कमरे में रख कर अत हूँ आप भी तैयार हो लो.

आंटी : फिर से आप ?

अमित : सॉरी सॉरी मेरी प्यारी रमा तुम तैयार हो जाओ फिर नाश्ता करते हैं साथ में .

आंटी : ठीक है तुम जाओ मगर पहले मैं ज़रा रानी को भी देख लूँ.

मैं आंटी क कमरे से निकल कर अपने कमरे में गया और फिर से अपना सामान सेट करने लगा. आंटी अपनी जगह पर सही थी मगर अंकल भी गलत नहीं थे. हाँ उन्होंने ये गलती ज़रूर की थी क वो पैसों क पीछे दौड़ते दौड़ते आंटी को भूल गए. अब मुझे ऐसा कुछ करना होगा क वो फिर से आंटी क पास लौट आएं और उन्हें प्यार करें तभी ये घर सही रह सकता है. मगर तब तक मुझे भी आंटी को प्यार देना होगा.

मैंने अपना सारा सामान फिर से सेट कर दिया और फिर मोहित को फ़ोन लगाया.

मोहित : हाँ अमित कैसा है

अमित : मैं तो ठीक हूँ तू कहाँ है अभी और अंकल कहाँ हैं

मोहित : यार पापा और मैं फैक्ट्री में hi हैं. कल यहाँ पर मशीनरी में ब्रेक डाउन हो गया था. एक मज़दूर की बाजु काट गयी है . उसका हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है . किसी ने पुलिस में शिकायत कर दी थी तो अभी आज उनसे hi निपट रहे हैं. हम आज वापिस नहीं आ सकेंगे हो सकता है कल दोपहर को या शाम को वापिस आएं . तुम प्लीज माँ को संभल लेना वो नाराज़ होंगी.

अमित : उनकी टेंशन न ले मैं उनका ध्यान रख रहा हूँ. तू बाद जल्दी अजा

मोहित : यहाँ से फ्री होते hi मैं वापिस आ जाऊंगा मुझे भी तो कॉलेज जाना है अपनी जान से मिलने

अमित : चल ठीक है bye

उसके बाद मैंने कॉल कट कर दी . मैं अपने कमरे से बहार निकल कर नीचे आ गया. किचन से बर्तनो की आवाज़ें आ रही थी मुझे लगा आंटी नाश्ता बना रही हैं इस लिए मैं सीधा किचन में चला गया. किचन में पहुंचा तो देखा क सामने रानी नाश्ता तैयार कर रही थी. रानी को देख कर मुझे गुस्सा आ गया

अमित : तुम यहाँ क्या कर रही हो? मैंने तुम्हे घर से चले जाने को कहा था.

रानी : माफ़ कर दीजिये साहब . मैं तो मालकिन से माफ़ी मांग कर वापिस जाने वाली थी मगर मालकिन ने hi मुझे यहाँ रहने को कहा है.

अमित : क्या कहा, आंटी ने तुम्हे यहाँ रहने को कहा है? तुम झूठ बोल रही हो

रानी : मैं सच बोल रही हूँ साहब आप चाहे तो पूछ ले मालकिन से

मैं आंटी से सच जानने क लिए उनके कमरे में गया मगर वो अभी बाथरूम में थी . आंटी का कमरा बहुत बड़ा था . बाकि कमरों की तरह यहाँ भी अटैच बाथरूम था एक साइड में सोफे सेट लगा हुआ था. रूम में एक और टीवी भी था. एक कार्नर में ड्रेसिंग टेबल था और अलमीरा की जगह दिवार में hi कप्बोर्ड लगा हुआ था

मैं सोफे पर बैठ गया और टीवी ों कर दिया. थोड़ी देर में hi बाथरूम का दरवाज़ा खुला और आंटी अंदर से बहार निकली. मैंने आंटी की तरफ देखा और देखता रह गया. आंटी क खूबसूरत जिस्म पर सिर्फ एक टॉवल लिप्त हुआ था जो उनके बूब्स क ऊपर से लेकर जांघों क जोड़ों से थोड़ा सा नीचे तक था. आंटी क बालों से पानी की कुछ बूंदे टपक रही थी. मैं आंटी क रूप यौवन का आँखों से रसपान करने लगा.

आंटी : ऐसे क्या देख रहे हो?

अमित : देख रहा हूँ क भगवन ने तुमको कितनी खूबसूरत बनाया है.

आंटी : झूठी तारीफ करना बंद भी करो . मैं इतनी भी अछि नहीं हूँ

अमित : तुम क्या हो ये मेरे दिल से पूछो . तुम्हे इस हालत में देख कर तो लोग अपनी जान तक दे दे

आंटी : ाचा !! मगर तुम्हे तो कुछ हुआ नहीं ?

मैं तुरंत अपनी जगह से उठा और भाग कर आंटी को अपनी बाँहों में जकड लिया . मैं आंटी क चहरे पर लगातार जगह जगह किश करने लगा. आंटी भी मेरे ऐसा करने से मस्ती में आ गयी और मेरा साथ देते हुए मुझे किश करने लगी . मैंने अपने दोनों हाथ आंटी क नितम्बों पर रखे जहाँ पर टॉवल था. मैंने टॉवल क नीचे से आंटी क नंगे चूतड़ अपनी मठों में भरने शुरू कर दिए. हम दोनों फिर से काम अग्नि में जलने लगे . मैंने आंटी को नितम्बों से पकड़ कर hi ऊपर उठा लिया और उन्होंने ने भी अपनी दोनों टैंगो को मेरी कमर पर कैंची मर कर कास लिया . मैं आंटी को ऐसे hi अपनी गॉड में उठाये हुए उनको दिवार से चिपका दिया और उनका टॉवल आगे से खोल दिया . आंटी गोर माखन से मुलायम रसीले आम मेरी आँखों क सामने आ गए. मैंने देर न करते हुए एक आम को मुँह में ठूस लिया और दूसरे को मसलने लगा. आंटी क मुँह से सिसकारियां निकलने लगी. मेरा लैंड पूरा अकड़ चूका था और फिर से आंटी की छूट में धमाल मचने क लिए तैयार था. तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई

मैंने जल्दी से आंटी को नीचे उतरा और उनसे अलग हो गया. आंटी ने भी जल्दी से अपना टॉवल लपेट लिया और पुछा

आंटी : कौन है?

रानी : मालकिन मैं हूँ. वो नाश्ता तैयार है

आंटी : ठीक है तुम नाश्ता लगाओ मैं बस अभी आयी.

रानी क जाते hi आंटी मेरी तरफ देखने लगी.

आंटी : बच गए अभी अगर वो अंदर आ जाती तो सब अपनी आँखों से देख लेती काम से काम दरवाज़ा तो बंद कर देते

अमित : मुझे क्या पता था क तुम इस तरह मुझ पर अपने हुस्न से बिजलियाँ गिराने लगोगी. वैसे मैं तुमसे यही जानने आया था क तुमने रानी को घर से क्यों नहीं निकला.

आंटी मेरे साथ बात करती हुई कपडे पहने लगी.

आंटी : सोचा तो मैंने यही था क उसे घर से निकल दूँ. मगर क्या करूँ बेचारी क हालातों पर तरस आ गया. तुम नहीं जानते ये हमारी पुराणी नौकरानी की बेटी है. उसकी मौत क बाद मैंने इसे काम पर रख लिया. ये बहुत गरीब है इसका पति दूसरे शहर में मजदूरी करता है. परिवार बहुत बड़ा है जिससे इनका गुज़ारा नहीं होता. बेचारी पर ससुराल क साथ साथ अपने सेज भाई बहनो का भी बोझ है. इसकी माँ क बाद इसके छोटे भाई बहनो का भी कोई सहारा नहीं है. बस उन सब की खातिर और इसकी माँ ने जो हमारी इतने साल सेवा की है उसे देखते हुए मैंने इसे काम से नहीं निकला.

अमित : मगर इसने जो कुछ किया वो क्या ऐसे hi जाने डौगी . तुम्हे बर्बाद करने में इसने भी कसार नहीं छोड़ी थी

आंटी: उसने मुझे सब बता दिया है. वो बेचारी बेबस थी . लोकु ने उसका फायदा उठाया वर्ण रानी ऐसी नहीं है. ये तो हमारी भरोसेमंद है . मैं जानती हूँ इंसान जब मजबूर हो जाता है तो वो हर गलत काम कर जाता है. आखिर मैं भी तो मजबूर हो कर उस ड्राइवर क आगे लेट गयी थी. मुझे लगता है रानी को एक मौका तो ज़रूर देना चाहिए. वैसे भी वो मेरी प्यास बुझती रही है . वो केरे बारे में इतना जानती है मुझे नहीं लगता क मुझे उसे ऐसे जाने देना चाहिए. उल्टा वो हमारे काम आ सकती है. वो मेरा राज़ राज़ रखेगी. हाँ उसने जो गलती की है उसकी भी उसे थोड़ी बहुत सजा तो मिलनी hi चाहिए जो मैं अपने तरीके से दूँगी.

बातों बातों में आंटी ने कपडे पहन लिए. आंटी ने बढ़िए सा सूट पहन लिया था जो डिज़ाइन से hi लग रहा था क मेहेंगा होगा. आंटी इस ब्लैक डिज़ाइनर सूट में कमल लग रही थी. आंटी क गोर रंग पर ये कला सूट उनकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रहा था. उनका बैक से गाला काफी डीप था और आगे से भी क्लीवेज काफी नुमाया हो रहे थे. आंटी ने हल्का फुल्का मेकअप किया और मुस्कुरा कर मुझे चलने को कहा. हम दोनों बहार आ गए . रानी ने नाश्ता टेबल पर लगा दिया था. हम दोनों बैठ कर नाश्ता करने लगे.
 
अपडेट 68



बातों बातों में आंटी ने कपडे पहन लिए. आंटी ने बढ़िए सा सूट पहन लिया था जो डिज़ाइन से hi लग रहा था क मेहेंगा होगा. आंटी इस ब्लैक डिज़ाइनर सूट में कमल लग रही थी. आंटी क गोर रंग पर ये कला सूट उनकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रहा था. उनका बैक से गाला काफी डीप था और आगे से भी क्लीवेज काफी नुमाया हो रहे थे. आंटी ने हल्का फुल्का मेकअप किया और मुस्कुरा कर मुझे चलने को कहा. हम दोनों बहार आ गए . रानी ने नाश्ता टेबल पर लगा दिया था. हम दोनों बैठ कर नाश्ता करने लगे.

अब आगे-

नाश्ता करने क बाद मैं कॉलेज जाने क लिए उठा तो आंटी ने मुझे रोक दिया.

आंटी : कहाँ जा रहे हो?

अमित : कॉलेज

आंटी : मगर अभी तो तुम लेट हो चुके हो तो आज छुट्टी क्यों नहीं कर लेते?

अमित : अभी तो पहला लेक्चर लग रहा होगा काम से काम बाकि तो अटेंड कर hi सकता हूँ

आंटी : बिलकुल नहीं , आज तुम सारा दिन मेरे साथ रहोगे . चलो आज कहीं बहार घूम कर आते हैं.

मेरे कुछ कहने से पहले hi आंटी ने रानी को आवाज़ लगाई

आंटी : रानी मैं ज़रा बहार जा रही हूँ काम से तुम घर का ख्याल रखना.

आंटी अपने कमरे में चली गयी और रानी बर्तन उठा कर किचन में चली गयी. 15 मिनट्स बाद आंटी अपने रूम से बहार आयी. आंटी ने एक हैंड बैग बाजु में लटकाया हुआ था . आंटी ने बिलकुल सदा मेकअप किया था उनके मेकअप से नहीं लग रहा था क वो शादीशुदा हों. मैं आंटी को देख रहा था और वो मेरे पास आ गयी.

आंटी : तो चलें ?

अमित : मगर जाना कहाँ है?

आंटी: कहीं घूम कर आते हैं और थोड़ी बहुत शॉपिंग भी कर लेंगे.

अमित : मगर ड्राइवर को तो निकल दिया है और मुझे कार चलनी नहीं अति तो हम जायेंगे कैसे?

आंटी कुछ सोचने लगी और बोली

आंटी : तुम्हारे पास तो बाइक है न?

अमित : मगर आप बाइक पर कैसे?

आंटी : क्यों ? मैं क्या बाइक पर नहीं बैठ सकती ? आज हम बाइक पर hi चलेंगे वैसे भी कितने साल हो गए बाइक पर बैठे हुए जब से राघव ने बाइक चलना छोड़ा है कभी बाइक पर बैठ कर नहीं देखा. अब तो घर में कोई बाइक चलता भी नहीं. आज मैं तुम्हारे पीछे बाइक पर बैठ कर अपने जवानी क दिन यद् करना चाहती हूँ

अमित : जवानी क दिन? अरे अभी आपकी उम्र है hi क्या. आप तो अभी भी जवान लड़की hi नज़र अति हैं

मेरी बात पर आंटी ने शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी

आंटी : अब चलें या यहीं बातें करते रहोगे?

फिर हम बहार आ गए मैंने अपनी बुलेट निकली और आंटी को पीछे बिठा लिया. सिक्योरिटी गार्ड भी आंटी को बाइक पर बैठे देख कर हैरान हुआ और उसने हमें सलूट किया. आंटी ने अपना एक बाजु मेरे पेट पर लपेट लिया और मेरे साथ जुड़ कर बैठ गयी.

अमित : कास क पकड़ लो कहीं गिर मत जाना?

आंटी : मुझे पता है तुम मुझे गिरने नहीं डोज. अगर तुम्हे मेरी परवाह न होती तो कल रत मुझे बचने नहीं एते.

आंटी की बात सुन कर मुझे बहुत ाचा लगा और मैं मुस्कुराता हुआ बाइक चलने लगा.

वहीँ आज मेरे कॉलेज न आने से कॉलेज क hi खली क्लास रूम में कुछ लोग मीटिंग कर रहे थे.

लड़की 1 : क्या हुआ ? तुमने पता किया क वो अभी क्यों नहीं आया?

लड़की 2 : सुना है उसका दोस्त आउट ऑफ़ सिटी गया हुआ है शायद इसी लिए वो भी न ए आज

लड़की 3 : क्या ! उसका दोस्त बहार है ? फिर तो यही सही मौका है . वो अकेला होगा और आराम से हम अपने प्लान में सफल हो जायेंगे. उसे कैसे भी कर क कॉलेज बुलाओ

लड़की 3 : मैं फ़ोन तरय तो कर रही हूँ मगर वो कोई रिस्पांस नहीं दे रहा .

लड़की 1 : तुम तो बिलकुल निकम्मी हो. बड़ी बड़ी डींगे मरती हो और एक देहाती तुम्हारे काबू नहीं आया

लड़की 3 : मैं क्या करूँ उस पर तो किसी बात का असर hi नहीं होता . पता नहीं किस मिटटी का बना है , कोई और होता तो कब का मुझे बिस्तर पर ले जाता.

लड़की 1 : रहने दो रहने दो तुम उसे फस्स नहीं पायी और अब दलीलें दे रही हो. अब बस उतना hi करो जितना कहा है. और हाँ कल हर हल में काम हो जाना चाहिए. खुद को हेरोइन समझती हो और एक देहाती काबू नहीं आया

लड़की 3 : तुम्हे वो देहाती इतना hi आसान लगता है तो तुम खुद तरय कर क देखलो . तुम तो बड़ी मिस इंडिया हो न?

लड़की 1 : अपनी ज़ुबान को काबू में रख वर्ण तू जानती है मैं क्या कर सकती हूँ. और वो देहाती की इतनी औकात कहाँ क मेरे पाऊँ की जुटी को भी छू सके

लड़की 4 : क्या यार तुम लोग आपस में hi झगड़ा करने लगे अभी आगे क्या करना है वो सोचो . उसे आज कॉलेज में बुलाओ अगर वो आज नहीं आया तो मौका हाथ से निकल जायेगा

लड़की 1 : ऐसे कैसे मौका निकल जायेगा. अब तो वो हो कर रहेगा जो मैंने सोचा है तुम बस उतना करो जितना मैंने कहा.

वो चरों लड़कियां मिल कर आगे की प्लानिंग करने लगी और इधर मैं आंटी को अपने पीछे बिठाये बाइक पर घूम रहा था. आंटी मुझे सिनेमा में ले गयी और हमने एक साथ एक रोमांटिक मूवी देखि. आंटी बिलकुल एक गफ की तरह बेहवे कर रही थी. लाइट्स ऑफ होते hi मेरे साथ चिपक कर बैठ गयी और मूवी क हर किसिंग सन पर ह्यूमेन एक दूसरे को किश किया.

मूवी देखने क बाद ह्यूमेन होटल में खाना खाया और फिर मॉल में शॉपिंग करने गए. आंटी ने अपने लिए एक मेहेंगा सूट लिया और मेरे लिए भी मेहेंगी बरान्देड़ जीन्स और T-shirt भी ली. मैं मन करता रहा पर मुझे अपना वास्ता देकर आंटी ने मुझे मन लिया. शाम को हम घर आ गए . आंटी अपने कमरे में चली गयी और मैं अपने कमरे में.

मैं बीएड पर जा कर लेट गया. अभी मैं लेता hi था क मोबाइल की रिंगटोन से मैं फिर उठ गया. मैंने पॉकेट में हाथ डाला तो यद् आया मोबाइल तो मेरे पास है hi नहीं वो तो सुबह घर में hi भूल गया था था जो बीएड की साइड में पड़ा हुआ था. मैंने मोबाइल देखा तो घर से फ़ोन आ रहा था. मैंने कॉल अटेंड की

अमित : hello

दीपिका ममी : शहर जा कर लगता है तू मुझे भूल गया और एक बार भी मेरा हल जानना तुझे ज़रूरी नहीं लगा.

अमित : सॉरी सॉरी पहले ये बताओ आप कैसी हो ?

दीपिका ममी : कोई पति ऐसे बात करता है अपनी पत्नी से? तुम तो बड़े हरजाई हो तुम्हारी बीवी तुम्हारे बचे की माँ बनने वाली है और तुम उसके पास बैठना तो दूर उसका हल भी नहीं पूछते

अमित : लगता है मेरी जान इस वक़्त अकेली है . काश मैं इस वक़्त तुम्हारे पास होता तो तुम्हे जी भर क प्यार करता

दीपिका ममी : बातें मत बनाओ तुम अछि तरह जानते हो इस हालत में हम प्यार नहीं कर सकते हाँ मगर कोई और है जिससे तुम प्यार कर सकते हो और वो तुम्हे बहुत यद् कर रही है लो बात करो

कामिनी ममी : hello . क्या तुम्हे मेरी यद् नहीं अति इतने दिनों से एक बार भी फ़ोन नहीं किया.

अमित : ऐसी बात नहीं है . मैं हर पल सबको यद् करता रहता हूँ मगर क्या करूँ आप तो जानती हैं मैं क्या मुँह ले कर घर आऊं

कामिनी ममी : हम समझती हैं दोनों इसी लिए तुम्हे मजबूर तो नहीं कर सकती मगर इतना सुनलो क हम तुम्हारे बिना तड़पती रहती हैं. काम से काम अपने बच्चों क लिए तो आ hi सकते हो न.

अमित : आप चिंता मत करो जब वक़्त आएगा मैं आप क पास hi हूँगा.

मैंने दोनों से बरी बरी काफी बातें की जिससे दीपिका और कामिनी ममी को भी तसल्ली हुई और मुझे भी थोड़ा सुकून मिला. मैंने उनसे बात करने क बाद फ़ोन चेक किया तो मेरे फ़ोन पर काफी साडी मॉस्कल्स आयी हुई थी. जिनमे शाळा शिवानी मोहित करुणा दीदी नैना दीदी और कुछ अननोन no. थे. मैंने करुणा दीदी और नैना दीदी को बरी बरी फ़ोन किया . दोनों को नेहा दीदी से मेरे कॉलेज न आने का पता चल गया था इस लिए वो मेरी खैरियत जानना चाहती थी. उसके बाद मैंने मोहित को कॉल की उसने बताया क वो कल दोपहर को वापिस आ जायेगा . फिर मैंने शालू को फ़ोन किया मगर उसने उठाया नहीं और शिवानी को मैंने कॉल किया नहीं.

कॉल्स चेक करने क बाद मैंने मेस्सगेस चेक किये तो इन्ही सब क थे. मैं सब क मेस्सगेस चेक करने लगा. शालू और शिवानी दोनों ने मेरे कॉलेज न आने क बारे में hi पूछा था . मैं मोबाइल में hi बिजी था क आंटी मेरे रूम में दूध का गिलास ले आयी.

आंटी : क्या हो रहा है?

अमित : कुछ नहीं कॉल्स चेक कर रहा था आज मोबाइल यहीं भूल गया था.

आंटी : तो ाचा hi हुआ न किसी ने डिस्टर्ब नहीं किया. वैसे आज तो तुम्हारी प्रैक्टिस से छुट्टी हो गयी मेरी वजह से

अमित : कोई बात नहीं अपनी गफ क लिए क्या इतना भी नहीं कर सकता

मेरी बात से आंटी खुश हो गयी. आंटी मेरे पास अपने कपडे चेंज करने क बाद आयी थी और फ्रेश फ्रेश लग रही थी. आंटी ने इस वक़्त टी शर्ट और ट्रॉउज़र पहना हुआ था. जिसमे उनके बूब्स अपना सही आकर बता रहे थे. आंटी ने दूध का गिलास मेरे आगे किया

आंटी : लो दूध पि लो

अमित : मुझे तो ताज़ा दूध चाहिए

मैं आंटी क बूब्स की तरफ देख रहा था आंटी मेरा मतलब समझ गयी और शर्मा गयी

आंटी : ताज़ा दूध तो अब नहीं अत फिर भी कोशिश करना चाहो तो करलो

मैंने आंटी क हाथ से दूध का गिलास पकड़ा और एक झटके में hi गिलास खली कर क साइड में रख दिया और आंटी क बूब्स दोनों हाथों में पकड़ कर मसलने लगा.

आंटी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ोुह्ह्हह्ह उम्म्म्म ककक एआइइइइ धीरे करो दर्द होता है.

अमित : धीरे कैसे करूँ अभी तक आपके ये रसीले आम इतने ठोस हैं लगता है अंकल ने अचे से मेहनत नहीं की. अभी मैं इनको मसल मसल कर पिलपिले बना दूंगा तभी इनका रास चूसने में मज़ा आएगा.

आंटी : उसका नाम मत लो अब ये सब तुम्हारा है. आज तक इनको तुम्हारे hi मजबूत हाथों का इंतज़ार था आआअह्हह्ह्ह्ह धीरे कक्कक्क्स मैंने तो मोहित को भी इनसे दूध नहीं पिलाया इसी लिए ये इतने ठोस हैं. उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्क्स मेरे योग करने से मेरा जिस्म आज भी कैसा हुआ है आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स इसे अब तुम hi ढीला करोगे

अमित : मैं तो आपके इस कयामती बदन को पूरा मसल कर रख दूंगा आपका एक एक अंग ढीला कर दूंगा आपके ये रसीले आम ये याकूति होंठ ये कैसे हुए गोल पहाड़ और ये मस्त रसभरी छूट सब कुछ मैं मसल कर रख दूंगा.

मैंने बात करते हुए आंटी क होंठ चूसने शुरू कर दिए और एक हाथ से बूब्स मसलते हुए एक हाथ उनकी छूट ओर रख कर छूट को मसलना शुरू कर दिया.

आंटी को पता नहीं क्या यद् आया अचानक आंटी ने मुझे दूर कर दिया . मैं आंटी क इस तरह करने से हैरान हो गया और सवालिया नज़रों से उनको देखने लगा. आंटी अपनी उखड़ी हुई सांसे ठीक कर रही थी. उनका चेहरा लाल हो चूका था.

आंटी : हम घर पर अकेले नहीं हैं. रानी भी है यहाँ ज़रा खुद को काबू में रखो

अमित : मैंने तो पहले hi कहा था उसे निकल दो ाचा भला मौका था

आंटी : मुझे उसकी ज़रूरत है . घर क काम कौन करेगा ? वो हमारी भरोसे मंद है उसने एक बार गलती करदी तो क्या हुआ क्या उसे एक और मौका नहीं देना चाहिए मुझे. वैसे भी वो मेरे बड़े काम आ सकती है. उसे लोकु क पास जाने की ज़रूरत क्यों पड़ी ? क्यूंकि मेरी तरह वो भी प्यासी थी . और अगर अब हम उसकी ज़रूरत पूरी करदें तो वो हमारा राज़ राज़ रखेगी . उसके बाद हम बिना किसी दर क जब चाहे प्यार कर सकते हैं

अमित : मैं समझा नहीं

आंटी : रानी को मर्द चाहिए और उसकी ज़रूरत तुम पूरी करोगे. इससे वो हमारी राज़दार बन जाएगी और तुम्हे भी एक नयी छूट मिल जाएगी.

अमित : उसका भला आपसे क्या मुकाबला कहाँ आप और कहाँ वो. मुझे ये मंज़ूर नहीं. वैसे भी वो कहाँ मानेगी मैंने तो उसको भी मारा था.

आंटी : वो सब मैं देख लूंगी . तुम बस तैयार रहो आज रत को तुम्हे रानी की ठुकाई करनी है . और ये उसके लिए सजा भी होगी मेरी तरफ से

अमित : सजा मगर वो कैसे . इसमें तो उल्टा उसका फायदा है

आंटी : मेरे राजा तुम्हे पता नहीं तुम्हारे पास कौन सी टॉप है. अगर मैं कल नशे में न होती तो कभी तुम्हारा ये हथियार अंदर नहीं ले सकती थी. ज़रा उसे भी तो पता चले क असली लैंड किसे कहते हैं. वो तो उस ड्राइवर क लैंड को hi सबकुछ समझ रही थी.

अमित : ठीक है मगर ये सब होगा कैसे?

आंटी : खाना खाने क बाद मैं तुम्हे सब समझा दूंगी पहले तुम फ्रेश हो जय और चेंज करलो

आंटी खली गिलास ले कर बहार जाने लगी तो मैंने आंटी क गदराये हुए दोनों गोल गोल पहाड़ों पर एक चपत लगा दी . आंटी ने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा

आंटी : रत क लिए तैयार रहना आज तुम्हारी अछि खासी मेहनत होने वाली है

इतना कह कर आंटी बहार निकल गयी और मैं उठ कर बाथरूम में फ्रेश होने चला गया . फ्रेश हो कर कपडे चेंज किये और कुछ देर आराम कर क मैं नीचे आ गया. डिनर का वक़्त हो गया था. रानी ने खाना लगा दिया मैंने और आंटी ने मिल कर खाना खाया . रानी ने बर्तन उठाये और किचन में ले गयी . आंटी ने मुझे अभी वेट करने को कहा.

करीब एक घंटे क बाद आंटी बे मुझे कोल्ड कॉफ़ी का कप देते हुए एक टेबलेट भी दी.

आंटी : लो ये टेबलेट खा लो . ये सेक्स पावर बढ़ाने क लिए है. आज तुम्हे हम दोनों को एक साथ ठंडा करना है इस लिए तुम्हे ज़रूरत पड़ेगी . और हाँ मुझ पर थोड़ा तरस खाना. कल रत से मुझे वहां दर्द हो रही है वैसे तो मैं आज करने नहीं वाली थी मगर जब मेरे सामने तुम उसके साथ करोगे तो मुझसे भी कहाँ कण्ट्रोल होगा.

अमित : इसकी ज़रूरत नहीं है मैं वैसे भी एक साथ दोनों को ठंडा कर सकता हूँ

आंटी: वो मैं जान गयी हूँ कल रत से hi मगर फिर भी तुम खा लो मैं चाहती हूँ मेरी तरह रानी भी तुम्हारी गुलाम हो जाये और कभी कोई गद्दारी न करे

मैंने वो टेबलेट खा ली और आंटी में मुझे अपने कमरे में जा कर छुप जाने की कहा. आंटी किचन में रानी क पास चली गयी और मैं आंटी क रूम में जा कर कप्बोर्ड में छिप गया. कोई 20 मिनट्स बाद आंटी रूम में आयी और बीएड पर लेट गयी. थोड़ी देर बाद रानी भी रूम में आयी और आंटी ने उसे दरवाज़ा लॉक करने को कहा . रानी दरवाज़ा लॉक कर क आंटी क पास चली गयी.

आंटी: सोच क्या रही है चल शुरू हो जा

आंटी ने जल्दी से अपने कपडे उतर दिए और नंगी हो कर रानी क सामने टंगे फैला कर लेट गयी. रानी अभी भी वैसे hi कड़ी थी.

आंटी: अब क्या ऐसे hi कड़ी रहेगी? चल जल्दी कपडे उतर अपने और शुरू हो जा

रानी: मुझे माफ़ कर दीजिये मालकिन मैंने आपके साथ धोखा किया. मैं आपके प्यार क लायक नहीं हूँ. मैंने आपके इतने एहसानो का ये सिला दिया आपको. मुझे माफ़ कर दीजिये

रानी ये सब कहते हुए रोने लगी और आंटी ने उसे चुप करवाया

आंटी: जो कुछ हो गया अब उसे भूल जा. देख मैं समझती हूँ तू बहक गयी थी. तू कभी मेरा बुरा कर hi नहीं सकती और मैं भी तुझे अपनी नौकरानी काम और सहेली ज्यादा समझती हूँ. अब रोना बंद कर और जल्दी से मेरी प्यास बुझा दे आज मैं तेरी भी प्यास बुझा दूंगी

रानी की सदी का पल्लू आंटी ने पकड़ कर खींच दिया और फिर रानी ने भी अपनी सदी और बाकि कपडे उतर दिए. रानी का जिस्म भी गोरा था उसके चहरे से नहीं पता चलता था क उसका जिस्म इतना साफ़ हो सकता है . काम काज करने की वजह से उसका जिस्म काफी कैसा हुआ था और उसके चूतड़ बड़े बड़े थे जो बहार को निकले हुए थे. उसकी जाँघे गोरी और मांसल थीं. हाइट कोई 5’4” होगी और उम्र भी 25 क लगभग. दोनों बूब्स भी बड़े बड़े थे मगर निप्पल काळा थे. छूट पर झांटे बड़ी हुई थी. मैं तो रानी क बड़े बड़े चूतड़ देख कर उन पर फ़िदा हो गया. कैसे गोर गोर और बड़े बड़े चूतड़ थे जो भी देखे पागल हो जाये.



आंटी ने रानी का हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया. रानी भी आंटी की टैंगो क बीच आकर उनके ऊपर लेट गयी और उनके होंठो को चूसते हुए उनके बूब्स मसलने लगी. मैं कप्बोर्ड में खड़ा सब देख रहा था . आंटी क मग से कामुक सुंस्कारियाँ निकलने लगी थी. धीरे धीरे रानी आंटी की छूट पर पहुँच गयी और उनकी गुलाबी छूट को चाटने लगी. मैंने कल रत आंटी पर ज्यादा गौर नहीं किया था. आंटी की छूट पर एक भी बल नहीं था और छूट किसी जवान लड़की की तरह थी मगर कल रत की चुदाई से उसके होंठ थोड़े खुले और सूजे हुए थे. जैसे hi रानी ने आंटी की छूट को चूसना शुरू किया आंटी क मुँह से मज़े और दर्द से भरी सिसकारी निकली

रानी : मालकिन क्या हुआ. आपकी छूट कुछ सूजी हुई स लग रही है.

आंटी : क्या बताऊँ रानी कल से बुरा हल है इसी लिए ये सूजी हुई है

रानी आंटी की छूट को चाटने और चूसने लगी . आंटी की सिसकियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी . आंटी रानी का सर अपनी छूट पर दबती जा रही थी. मेरा लैंड भी पूरा अकड़ चूका था सामने चल रही काम क्रीड़ा देख कर और वियाग्रा टेबलेट क असर से मेरे लैंड की नसें फटने जी हद तक फूल गयी थी. मैं कप्बोर्ड से बहार निकल आया . रानी घुटनो क बल झुकी हुई आंटी की छूट चाट रही थी. रानी क बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने मुझे बुला रहे थे. आंटी की नज़र जैसे hi मुझ पर पड़ी उन्होंने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया.

आंटी का इशारा पते hi मैंने कपडे उतर दिए और बीएड की तरफ बड़ा . मैं रानी क पीछे आकर खड़ा हो गया. रानी अपनी मस्ती में आंटी की छूट चाटने में लगी हुई थी और एक हाथ से अपनी छूट को भी मसल रही थी. आंटी ने मुझे इशारे से अपना काम शुरू करने को कहा. आंटी ने रानी का सर अपनी छूट पर ज़ोर से कास दिया ताकि उसे कोई अंदाज़ा न हो क उसके साथ क्या होने वाला है. रानी ने अपना हाथ अपनी छूट से हटा लिया और दोनों हाथो से आंटी को थम कर तेज़ी से उंगली आंटी की छूट में चलने लगी. मैं बीएड पर चढ़ गया और घुटने मोड़ कर एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर रानी की छूट क मुँह पर लगाया.

छूट पर लैंड का एहसास होते hi रानी ने आंटी की छूट से सर उठाना चाहा मगर आंटी ने उसे ऐसा नहीं करने दिया. मैंने एक हाथ से रानी की कमर को पकड़ा और सूपड़ा छूट में फसा दिया. रानी की छूट लैंड क हिसाब से टाइट थी जिससे रानी क जिस्म में ऐंठन हुई उसका मुँह छूट पर दबा होने की वजह से उसकी आवाज़ नहीं निकली. मैंने दोनों हाथो से रानी की कमर को पकड़ा और पूरा ज़ोर लगा कर एक ज़ोरदार धक्का मारा. सूपड़ा छूट में फसे होने की वजह से लैंड बिलकुल भी नहीं फिसला परिणाम स्वरुप पूरा लैंड जड़ तक एक hi बार में छूट में घुस गया. रानी छूट पर हुए इस भयानक हमले को बर्दाश्त नहीं कर सकीय आज तक उसकी छूट में इतना बड़ा लैंड माहि घुसा था इस लिए उसे भयंकर दर्द हुआ.

रानी : aaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मर gyiiiiiiiiiiiii माआआआआ बचाओ एआइइइइइइइइइ निकालो बहार माआआआ मर गईइइइइइइ मालकिन बचाओ aaaaaiiiiiiiiii

मैंने बिना इंतज़ार किये लैंड को आधा बहार खींचा और फिर से जड़ तक एक hi झटके में घुसा दिया. रानी फिर से चीखी मगर मैंने तरस नहीं किया और उसकी कमर को थम कर तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा. मेरा धक्का ज़ोरदार था . रानी से मेरे धक्के बर्दाश्त नहीं हो रहे थे और वो बार उसे छोड़ने क लिए मिन्नतें कर रही थी. रानी की आँखों से आंसू निकल रहे थे. आंटी अपनी जगह से उठी और रानी को सांत्वना देने लगी

आंटी : बस रानी हो गया अब और दर्द नहीं हो गया देख तूने पूरा अंदर ले लिया है

मैं बिना किसी बात पर ध्यान दिए लगातार धक्के मरता गया . थोड़ी देर में hi रानी की छूट में मेरे लैंड की जगह बन गयी और अब छूट ने लैंड को एक्सेप्ट कर लिया था. रानी को अब मज़ा आने लगा अब उसके मग से सिसकियाँ निकलने लगी

रानी : आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह ककक उम्मम्मम आआअह्ह्ह्ह ाआहभः ऐसे hi और ज़ोर से और ज़ोर से आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह लैंड है क मुसल कक्कक्क्स आआअह्ह्ह्ह छूट को फाड़ कर रख दिया है आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

10 मिनट्स की धुआंधार चुदाई में रानी की छूट ने हथ्यार दाल दिए और मेरे लैंड पर पानी की बरसात कर दी . पानी निकलते hi रानी बीएड पर औंधे मुँह गिर गयी और मेरा लैंड छूट से बहार आ गया जो छूट रास से भीगा हुआ था. मैंने रानी की छूट देखि तो उसके किनारे चिर गए थे छूट से दो बूँद खून भी निकल आया था. रानी निढाल हो गयी मगर अभी मेरा टाइम बहुत दूर था. मैंने रानी की टैंगो को पकड़ कर सीधा करने की कोशिश की तो आंटी ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया .

आंटी ने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गयी. मेरी कमर क दोनों तरफ पेअर रखे और मेरे लैंड को छूट पर टिका कर धीरे धीरे बैठ गयी. मेरा लैंड आंटी की छूट में पूरा चला गया और आंटी क मग से एक सिसकी निकल गयी . आंटी मेरे लैंड पर धीरे धीरे उठक बैठक करने लगी . आंटी अपने बालों को खींचती हुई मस्ती में लैंड पर धीरे धीरे कूद रही थी शायद वो छूट क दर्द की वजह से ज्यादा तेज़ नहीं उछाल प् रही थी . मगर मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था. आंटी की सिसकियाँ सुन कर रानी ने भी आँखें खोली और मुझे सामने देख कर हैरानी से मुझे देखने लगी. उसने अभी तक मुझे चुदाई करते हुए देखा नहीं था. फिर उसकी नज़र मेरे लैंड पर कूद रही आंटी पर गयी और उसकी आँखें बड़ी हो गयी.

आंटी पहले से hi गरम थी रानी की छूट चटाई से इस लिए ज्यादा देर वो रुक नहीं सकीय और उनका पानी निकल गया. आंटी मेरे ऊपर hi लुढ़क गयी. मैंने आंटी को पलट कर नीचे लिटा दिया और आंटी की टंगे उठा कर अपने कन्धों पर राखी और धक्के मरने लगा. आंटी की छूट में जलन होने लगी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी.

रानी नार्मल हो चुकी थी इस लिए मैंने आंटी की छूट से लैंड बहार निकला और रानी की टाँगे पकड़ कर अपनी तरफ घसीटा . रानी मुझसे छूटने की कोशिश करनी लगी मगर मैं कहाँ मैंने वाला था मैंने रानी की टांगों क बीच हो गया और लैंड को उसकी छूट पर टिका कर एक hi धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया. रानी एक बार फिर से चीखी मगर मैंने कोई परवाह नहीं की और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा . रानी 10 मिनट्स में फिर से झाड़ गयी . मैंने फिर से आंटी को अपनी तरफ खींचा मगर आंटी मेरे आगे हाथ जोड़ने लगी.

मेरे ऊपर चुदाई का भूत सवार था मुझे तो बस अपना पानी निकलना था मैंने रानी को पकड़ा और उसके मुँह में अपना लैंड घुसा दिया. रानी की आँखें बहार आ गयी . मैं उसके सर को पकड़ कर उसका मुँह छोड़ने लगा. रानी की सांस टूटने लगी उसका गाला फूल रहा था और आँखें बहार आने लगी थी मैंने उसके मग से लैंड बहार निकला और उसे बीएड पर कुटिया बना कर नीचे खड़ा हो गया. मेरे सामने रानी क बड़े बड़े चूतड़ थे. मैंने रानी क चूतड़ मसाले और दोनों पर थप्पड़ मर कर उन्हें लाल कर दिया. रानी क चूतड़ों को पकड़ कर मैंने दोनों तरफ फैलाया तो रानी की गांड का सुराख़ मेरे सामने आ गया. रानी की गांड का सुराख़ ब्राउन था और छोटा था . लगता है क रानी ने कभी गांड में लैंड नहीं लिया. कुंवारी गांड देख कर मेरा लैंड ख़ुशी से पागल होने लगा और झटके मरने लगा.

मैंने रानी की कमर की कमर को थम कर अपना लैंड एक हाथ से पकड़ा और रानी की गांड क सुराख़ पर लगाया . रानी मेरी मंशा समझ गयी और मेरे हाथो से छूटने की कोशिश करने लगी

रानी : नहीं नहीं वहां नहीं मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी मैंने आज तक पीछे से नहीं किया मुझे छोड़ दो

रानी लगातार छूटने की कोशिश करने लगी जिससे मेरा लैंड गांड पर सेट नहीं हो रहा था . मुझे गुस्स्सा आने लगा मैंने रानी क दोनों बाजु पकड़ कर मरोड़ दिए और उसकी पीठ पर लगा कर एक हाथ से पकड़ लिया. रानी का सर बीएड पर लगा दिया अब रानी मेरे काबू में थी. मैंने जैसे hi लैंड को गांड में घुसाने की कोशिश की रानी नीचे लेट गयी . मेरा दिमाग गरम था पहले बी मैंने उसकी गांड पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मरे और दो तकिये एक साथ उसकी छूट क नीचे रख दिए जिससे उसकी गांड बहार निकल आयी.

रानी मेरे इस रूप से दर गयी मगर वो अभी भी मन कर रही थी. मैं रानी क ऊपर चढ़ गया और उसकी गांड पर लैंड फसा कर अपना वजन उसके ऊपर दाल दिया. जिससे लैंड गांड में फास्ट हुआ अंदर जाने लगा. जैसे hi सूपड़ा गांड में घुसा रानी ज़ोर से चिल्लाई

रानी : aaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiii मालकिन बचाओ आआआईइइइइइइइ माआआआ मैं मररररर गईइइइइइइ

रानी की चीख सुन कर आंटी जल्दी से उठी और मुझे उसकी गांड में लैंड घुसते हुए देख कर वो सारा माज़रा समझ गयी . आंटी जानती थी इस वक़्त मैं किसी की नहीं सुनने वाला और वैसे भी वो रानी को सजा तो देना hi चाहती थी इस लिए उन्होंने मुझे रोकने की बजाये रानी क होंठों को अपने होंठो में कास लिया और उसके दूध दबाने लगी. मैंने रानी की गांड में सूपड़ा घुसते hi एक शक्तिशाली धक्का मारा जिससे मेरा लैंड आधे से ज्यादा गांड में घुस गया . रानी से दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ और वो चीखती हुई बेहोश हो गयी. मगर मैं नहीं रुका और 2 तगड़े झटके मर कर पूरा लैंड गांड की गहरायी में उतर दिया.

आंटी ने जल्दी से रानी क मुँह पर पानी क छींटे मरे जिससे रानी होश में आयी . होश में आते hi रानी फिर से दर्द से चिल्लाने लगी मगर मैं नहीं रुका और उसकी टाइट गांड को खुला करने लगा. फनी की टाइट गांड मरने में मुझे थोड़ी परेशानी तो हो रही थी मगर मुझे इतनी टाइट गांड मरने में मज़ा भी बहुत आ रहा था. 10 मिनट्स गांड में लैंड क धक्कों से अब रानी की गांड में लैंड की जगह बन गयी और रानी ने भी खुद को काफी हद तक संभल लिया था.

अब रानी क मुँह सिसकियाँ निकलने लगी आंटी लगातार उसके बूब्स मसल रही थी. मैं रानी की कमर थामे लगातार धक्के मरता जा रहा था. अब मेरा भी समाया नज़दीक था 10 मिनट्स और गांड की ठुकाई करने क बाद मैंने आखरी 20/25 तूफानी धक्के लगाए और लैंड को जड़ तक गांड में घुसा कर मैंने रानी की गांड में पानी की बरसात करदी. रानी तो दर्द से पहले hi बेहाल थी वो वैसे hi नीचे गिर गयी. और मैं भी पसीने में नहाया हुआ रिलैक्स होने क लिए वैसे hi लैंड को गांड में घुसाए रानी पर लेट गया. मुझे पता hi नहीं चला कब मैं सो गया . सुबह जब मेरी आँख खुली तो मेरे एक तरफ आंटी नंगी पड़ी हुई थी और दूसरी तरफ रानी. रानी उलटी hi सो रही थी उसकी गांड पर जैसे hi मेरे नज़र पड़ी तो मैंने देखा क उसकी गांड सूज गयी है. उसकी गांड क आसपास खून क निशान थे जो सुख गया था और मेरा पानी भी सूखा हुआ कहीं कहीं नज़र आ रहा था. पास में hi पिलो पड़े थे जो खून से लाल थे इसका साफ साफ मतलब था क मैंने रानी पर बहुत ज़ुल्म कर दिया नशे में.

मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया और फ्रेश हो कर नाहा लिया. आंटी क बाथरूम में बाथ टब लगा हुआ था मैं ये पहली बार देख रहा था. मैं बहार निकल और आंटी को उठाया . आंटी ने भी उठ कर रानी की हालत देखि और मुझसे शिकायत करने लगी

आंटी : तुम्हे पता भी है कल रत तुमने क्या किया है रानी क साथ. बेचारी दर्द से बेहोश hi हो गयी थी

अमित : ये सब आपका कसूर है अपने hi मुझे वी टेबलेट दी थी और मुझे होश hi नहीं रहा. अब वो सब छोड़िये और इसे उठाइये इसकी हालत भी ठीक करने पड़ेगी.

आंटी : मैं बाथटब में गरम पानी भर देती हूँ फिर इसकी सिकाई करते हैं .

आंटी ने बाथ टब में हॉट वाटर भर दिया और फिर उन्होंने रानी को जगाया. रानी उठते hi दर्द से तड़पने लगी. उससे हिला भी नहीं जा रहा था . मैंने रानी को उठाया और बाथ टब में लिटा दिया. कुछ देर में उसे थोड़ा आराम मिला आंटी ने उसकी मदद की और रानी ने खुद को साफ किया. आंटी ने उसे पैन किलर दे दी और उसे आराम करने को कहा . मैंने टाइम देखा तो 7 बज रहे थे इस लिए कॉलेज में प्रैक्टिस करने क लिए जाने का टाइम नहीं था. इस लिए मैं जो पास में hi ग्राउंड थी वहां चला गया और एक्ससरसीसे कर क जल्दी hi लौट आया.
 
अपडेट 69

आंटी ने बाथ टब में हॉट वाटर भर दिया और फिर उन्होंने रानी को जगाया. रानी उठते hi दर्द से तड़पने लगी. उससे हिला भी नहीं जा रहा था . मैंने रानी को उठाया और बाथ टब में लिटा दिया. कुछ देर में उसे थोड़ा आराम मिला आंटी ने उसकी मदद की और रानी ने खुद को साफ किया. आंटी ने उसे पैन किलर दे दी और उसे आराम करने को कहा . मैंने टाइम देखा तो 7 बज रहे थे इस लिए कॉलेज में प्रैक्टिस करने क लिए जाने का टाइम नहीं था. इस लिए मैं जो पास में hi ग्राउंड थी वहां चला गया और एक्ससरसीसे कर क जल्दी hi लौट आया.

अब आगे-

मैं सीधा अपने रूम में गया और तैयार हो कर नीचे आ गया . किचन से बर्तनो की आवाज़ आ रही थी मैं हैरान हो गया क रानी इतनी जल्दी ठीक हो गयी. जब देखने किचन में गया तो आंटी गाउन पहने नाश्ता बना रही थी.

अमित : ये क्या आप खुद काम कर रही हैं?

आंटी : और कौन करेगा ? रानी की तो बुरी हालत है मैंने उसे रेस्ट करने को बोलै है .

अमित : आपको क्या ज़रूरत थी खाना बनाने की बहार से मंगवा लेती आप और मैं तो कैंटीन में खा hi लेता

आंटी : क्या मैं तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकती

मैंने बात करते हुए आंटी को पीछे से गले लगा लिया और उनकी गर्दन पर किश करते हुए एक हाथ से उनके बूब्स मसलने लगा और एक हाथ छूट की तरफ ले जाने लगा. आंटी ने छूट की तरफ बाद रहे मेरे हाथ को पकड़ लिया

आंटी : रत भर दोनों की हालत बुरी करदी अभी तक मन नहीं भरा क्या? आज मुझे और रानी को आराम करने दो. कल जो चाहे कर लेना . पता भी है क्या हल है हमारा ?

अमित ; तो क्या आपको मज़ा नहीं आया?

आंटी : मज़ा तो इतना आया है क कभी ज़िन्दगी में इतना मज़ा नहीं मिला. मगर अभी नीचे हालत ख़राब है ऐसे में मज़ा काम और दर्द ज़्यादा होगा. तुम क्या मुझे दर्द देना चाहते हो?

अमित : मैं आपको भला दर्द में कैसे देख सकता हूँ . चलिए आज कुछ नहीं करते अब जल्दी से मुझे नाश्ता दीजिये मैं कॉलेज क लिए निकलता हूँ.

आंटी ने मेरे लिए नाश्ता लगा दिया और मैं नाश्ता कर क आंटी से गले मिला उनको किश कर क मैं बाइक पर कॉलेज क लिए निकल गया. जैसे hi मैं कॉलेज में पहुंचा मुझे पार्किंग में hi शिवानी मिल गयी.

शिवानी : गुड मॉर्निंग !

अमित : गुड मॉर्निंग

शिवानी : कल से कहाँ गायब हो ? और मेरे किसी कॉल या मैसेज का जवाब क्यों नहीं दिया? मुझे तुमसे बहुत ज़रूरी काम था और तुम हो क पता नहीं कहाँ गायब रहते हो.

अमित : वो कल एक ज़रूरी काम ाँ पड़ा था बस उसी में सारा वक़्त निकल गया. मोबाइल कल घर पर hi छूट गया था . रत को जाकर देखा तो मैंने उस वक़्त जवाब देना ठीक नहीं समझा.

शिवानी : तुम मुझे किसी भी वक़्त फ़ोन कर सकते हो . लाओ मुझे अपना फ़ोन दिखाओ . मैं भी तो देखूं मेरे मेस्सगेस पहुंचे भी थे या नहीं

अमित : क्या करोगी देख कर वो सब तो मैंने डिलीट कर दिए. अब बताओ क्या काम था मुझसे

शिवानी : यार मैं प्रॉब्लम में हूँ और तुम मेरे दोस्त हो तो तुमसे hi मदद मांग सकती हूँ न.

अमित : बात क्या है?

शिवानी : वो क्या है क मेरी जगह किसी और को रोले देने की बात हो रही है ड्रामा क लिए. और इसी लिए आज हमारा टेस्ट लिया जायेगा . मैं प्रैक्टिस करना चाहती हूँ मगर कोई मेरा साथ नहीं दे रहा ऐसे में तुम hi मेरी मदद कर सकते हो.

अमित : मगर इसमें मैं क्या कर सकता हूँ ? मुझे तो इसके बारे में कुछ भी नहीं पता.

शिवानी : वो ऐसा है क आज 4तह लेक्चर क टाइम टेस्ट है जिसमे एक सन का टास्क दिया जायेगा. मैं चाहती हूँ तुम उस सन की रिहर्सल क लिए मेरी मदद करो .

अमित : मगर मुझे तो कुछ अत नहीं

शिवानी : बड़ा hi सिंपल है तुमने बस थोड़ी स एक्टिंग करनी है बाकि सब काम मेरा है.

अमित : इसके लिए तुम अपने किसी और दोस्त को भी तो बोल सकती थी

शिवानी : सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं और मुझे सिर्फ तुम पर यकीन है . क्या तुम मेरी मदद नहीं करोगे ? अगर मैं ाचा न कर पायी तो मुझे टीम से निकल दिया जायेगा और ये मेरा आखिरी साल है मैं ये ड्रामा हर हल में करना चाहती हूँ. प्लीज मेरी मदद करो .

अमित : ाचा ठीक है मैं थर्ड लेक्चर में मिलता हूँ तुम्हे

शिवानी : तब तक तो टेस्ट लेने की तयारी हो चुकी होगी. तुम अभी चलो मेरे साथ ऑडिटोरियम में इस वक़्त वहां काम hi स्टूडेंट्स होंगे . प्लीज आओ जल्दी करो

मैं शिवानी क साथ जाना तो नहीं चाहता था मगर बेचारी का लास्ट ईयर था तो मैंने सोचा अगर मेरी थोड़ी स मदद से उसका सपना पूरा होता है तो कर देता हूँ मेरा इसमें क्या जायेगा. मैं शिवानी क साथ चल पड़ा और वो मुझे ऑडिटोरियम में ले आयी. ऑडिटोरियम बिलकुल खली पड़ा था. अभी पहला लेक्चर शुरू हुआ था इस लिए ज्यादा तर स्टूडेंट्स क्लासेज में hi थे.

अमित : यहाँ पर तो कोई भी नहीं है

शिवानी : ाचा है न . कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा और हम आराम से प्रैक्टिस भी कर लेंगे.

शिवानी ने दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया मैंने कारन पुछा तो कहने लगी क कोई तंग न करे इस लिए बंद किया है. शिवानी मुझे स्टेज पर ले आयी .

शिवानी : देखो अमित ये सन मेरे किये बहुत इम्पोर्टेन्ट है . मैं ये सन किसी और क साथ नहीं कर सकती इसी लिए मैं तुम्हे कल से ढून्ढ रही थी. तुम्हे कुछ भी नहीं करना है. इस सन में लड़का लड़की का रपे करने की कोशिश करता है और लड़की उससे बचने की कोशिश करती है . बाद में लड़का लड़की को बताता है क वो बस मज़ाक कर रहा था डरा रहा था. कायदा तर डायलाग मैं hi बोलूंगी ये लो इसमें से तुम अपने डायलाग देख लो.

शिवानी ने मुझे एक कागज़ दिया जिस डायलाग लिखे हुए थे.

अमित : शिवानी प्लीज कोई और सन कर लो यार ये मुझे ाचा नहीं लग रहा.

शिवानी : ये सन मैंने नहीं चुना ये मुझे टास्क दिया गया है. और फिर भी तुम अगर मेरी मदद नहीं करना चाहते तो तुम जा सकते हो


इतना कह कर शिवानी पलट गयी दूसरी तरफ मग कर क रोना शुरू कर दिया. औरत क आंसू मर्द की कमज़ोरी होते है. मेरे साथ भी कुछ ऐसा hi था. मैं उसके आंसुओं से पिघल गया और न चाहते हुए भी उसके साथ वो सन करने क लिए तैयार हो गया. शिवानी ने जो डायलाग वाला पेपर मुझे दिया था उसे पद कर मुझे कुछ समझ नहीं आ रही थी बड़े अटपटे से डायलाग थे. खैर अब मदद तो करनी hi थी.

डायलाग -

अमित : तुम बहुत खूबसूरत हो शिवानी जब से मैंने तुम्हे देखा है मुझे नींद नहीं आती बस हर वक़्त तुम hi तुम दिखाई देती हो . एक बार बस एक बार मेरी बन जाओ मैं तुम्हे इतना प्यार करूँगा क तुम दुनिया भूल जाओगी

शिवानी : मगर मैं तुमसे प्यार नहीं करती तुम मेरे छोटे भाई जैसे हो . मैं तुम्हे अपना भाई समझ कर hi मिलती हूँ

अमित : मैं इस दिल को कैसे समझों जो सिर्फ तुम्हे hi पाना चाहता है किसी भी कीमत पर . जब से तुम्हे बाथरूम में देखा है मैं खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा हूँ

शिवानी : तुम्हे शर्म नहीं आती ? लड़कियों क बाथरूम में घुसकर उनकी वीडियो बनाते हो ? और मेरी वीडियो बना कर अब मुझे ब्लैकमेल करना चाहते हो.

अमित: मैं तो तुम्हे प्यार करना चाहता हूँ . अगर तुमने मेरी बात नहीं मणि तो फिर कॉलेज वाले भी देखेंगे क तुम बिना कपड़ो क कैसे दिखती हो

अमित : यार ये कैसे डायलाग हैं मुझे ठीक नहीं लग रहे

शिवानी : तुम बस बोलते जाओ भला इससे क्या फरक पड़ता है कौन सा तुमने किसी को सुनाने हैं वो तो कोई और hi बोलेगा न मेरे साथ स्टेज पर . और हाँ अब थोड़ा एक्ट भी करो जैसे फिल्मो में लड़की को पकड़ क खींचते है उसके कपडे फाड़ने की कोशिश करते है. बस वैसे hi करो

अमित : मुझसे नहीं होगा

शिवानी : प्लीज अमित मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते? तुम्हे तुम्हारी दोस्ती की कसम प्लीज मेरी मदद करो .

अमित : ाचा ठीक है.

डायलाग -

अमित : बस एक बार मेरी बात मन जाओ और मुझे खुद को प्यार करने दो मैं वडा करता हूँ फिर कभी तुम्हे तंग नहीं करूँगा

शिवानी : ज़लील कुत्ते गंदे इंसान मैं क्या समझी थी और तुम क्या निकले .

अमित : क्या कहा कुत्ता ? अभी बताता हूँ ये कुत्ता क्या कर सकता है.

इसके साथ शिवानी में मुझे एक्टिंग करने को कहा और मैंने उसकी बात मानते हुए उसे पकड़ लिया. शिवानी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी और मैं उसे पकड़ने की. शिवानी ने मुझे धक्का दे कर गिरा दिया और अपने कपडे फाड़ने लगी . मैं देख कर हैरान हो गया भला एक्टिंग क लिए कपडे फाड़ने की क्या ज़रूरत है. अभी मैं देख hi रहा था क शिवानी ने अपने कपडे गले से कंधे से और कमर से फाड़ लिए . उसने अपने बाल भी बिखरा दिए . मैं उसे रोकने क लिए उठा तो उसने मेरी गर्दन और चहरे पर नाख़ून मार दिए .

उसने नाख़ून लगने से मेरा मॉस छील गया और खून भी निकल आया . मैं अभी अचम्बे में hi था क शिवानी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी .

शिवानी : बचाओ बचाओ हेल्प कोई है प्लीज हेल्प में ये मेरी इज़्ज़त लूट लेगा प्लीज समबडी हेल्प .

मैं तो समझ नहीं प् रहा था क ये सब चल क्या रहा है . तभी बहार से कोई दरवाज़ा पीटने लगा . दरवाज़ा अंदर से बंद था . मैं दर गया क अब क्या होगा . इससे पहले की मैं उठ कर दरवाज़ा खोलने जॉन शिवानी ने फिर से मुझे धक्का मर कर गिरा दिया और रोटी चिल्लाती भगति हुई दरवाज़े क पास पहुँच गयी. जैसे hi शिवानी ने दरवाज़ा खोला बहार से कई स्टूडेंट्स और 3/4 प्रोफेस्सोर्स क साथ चंद्रकांता मैडम और उनके साथ एक और मैडम आ गए.

अंदर आते hi उन्होंने शिवानी को संभाला और उसकी हालत देख कर वो समझ गए क मैंने उसके साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की है. इससे पहले क मैं अपनी तरफ से कोई सफाई पेश करूँ लड़कों ने मुझे पीटना शुरू कर दिया. मैं तो होश में hi नहीं था जो कुछ अभी हुआ उसकी वजह से मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था और ऊपर से इतने सरे लड़की मुझे मरने लगे .

एक प्रोफेसर ने उन लड़कों को मुझे मरने से रोका और मुझे उठा कर मेरी T-shirt को गले से पकड़ कर खींचते हुए मैडम क सामने ले गए .

चंद्रकांता : तेरी इतनी हिम्मत तूने कॉलेज क अंदर hi इतनी घटिया हरकत कर दी . लगता है तुझे किसी ने औरत की इज़्ज़त करना नहीं सिखाया . किसी गन्दी नाली का कीड़ा लगता है तू .

इतना कह कर चन्दर्कांता मैडम ने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा. सभी लड़कियां लड़के मुझे पुलिस क हवाले करने और कॉलेज से निकलने की मांग करने लगे .

एक प्रोफेसर ने कहा क ये फैसला प्रिंसिपल सर hi कर सकते हैं इस लिए मुझे उनके सामने पेश किया जाये . मुझसे किसी ने एक बार भी नहीं पूछा क ये मामला क्या है सब शिवानी की बात को hi सच मन रहे थे. और जिस हालत में सबने उसे देखा था उसने तो कोई भी पहली नज़र में उसकी बात को hi सच मानेगा. मैं अंदर hi अंदर टूट रहा था क अभी अभी मेरे साथ क्या हो गया. अगर मुझे पुलिस क हवाले कर दिया गया तो मुझे जेल जाना पड़ेगा और जब ये बात मेरे घर वालो को पता चलेगी तब उन पर क्या बीतेगी.

प्रोफेसर क कहने पर मुझे पकड़ कर प्रिंसिपल क ऑफिस में ले जाने लगे तो मुझे शीना उसकी सहेलियों क साथ मुझे देख कर हस्ती हुई नज़र आयी . जैसे कह रही हो क उसने बदला ले लिया . उससे कुछ आगे मोंटी भी अपनी गैंग क साथ खड़ा था और वो भी मेरी हालत पर है रहा था उसके साथ शालू भी कड़ी थी . मैं शालू को मोंटी क साथ देख कर हैरान हुआ मगर अब मेरी जो हालत थी उसके बाद तो सब ख़तम hi था. आज कॉलेज से मुझे निकल दिया जायेगा और पुलिस मुझे जेल में दाल देगी. मैं सर झुकाये आंसू बहता हुआ प्रिंसिपल क ऑफिस तक पहुँच गया. प्रिंसिपल सर अभी ऑफिस में नहीं थे शायद वो अभी पहुंचे नहीं थे.

सभी मैडम और प्रोफेसर शिवानी को हौसला दे रहे थे उसे पानी पिलाया गया उसे आराम से बिठाया गया मगर मुझे ऐसे खड़ा रखा हुआ था जैसे बिना किसी सुनवाई क hi मुझे मुजरिम डिक्लेअर कर दिया गया हो. थोड़ी देर में hi प्रोफेसर वरिंदर ऑफिस में दाखिल हुए और सीधा मेरे पास आये.

प्रोफ व् : ये सब क्या है अमित ? ये सब कैसे हुआ?

प्रोफ वरिंदर पहले शख्स थे जिसने मुझसे आ कर सच जानने की कोशिश की .

अमित : सर मैंने कुछ नहीं किया . मुझ पर झूठा इलज़ाम लगाया जा रहा है . ये मुझे ऑडिटोरियम में ये कह कर ले कर गयी थी क इसे ड्रामा क लिए रिहर्सल करनी है और मैं इसकी मदद करूँ . इसने दरवाज़ा अंदर से बंद कर क खुद hi अपने कपडे फाड़ लिए और शोर मचने लगी. मैं कसम खता हूँ सर मैं बिलकुल निर्दोष हूँ

प्रोफ व् : मैं जनता हूँ अमित मैंने भी ज़माना देखा है . तुम गलत नहीं हो सकते ये मेरा दिल कहता है . तुम चिंता मत करो मैंने प्रिंसिपल सर को फ़ोन कर दिया है वो आ रहे हैं अभी .

प्रोफ वरिंदर ने मुझे हौसला दिया और मेरे पास hi चेयर पर बैठ गए. प्रोफ की इन बातों से मुझे कुछ हौसला मिल गया क कोई तो है मेरी बात सुनने वाला और प्रिंसिपल सर भी अचे आदमी हैं तो वो भी मेरे साथ कुछ गलत नहीं होने देंगे. थोड़ी देर में hi बहार से स्टूडेंट्स का शोर सुनाई देने लगा वो सब मुझे कॉलेज से निकलने और पुलिस क हवाले करने की डिमांड कर रहे थे. तभी प्रोफ बसरा और प्रोफ वर्मा भी अंदर आ गए

प्रोफ बसरा: ची ची ची आज तक कभी इस कॉलेज में ऐसी घटना नहीं हुई थी . इस घटिया लड़के ने तो कॉलेज क नाम पर कालिख पाठ दी है. अब बहार सब स्टूडेंट्स हल्ला कर रहे हैं इसे पुलिस क हवाले करने क लिए. पता नहीं क्या होगा मुझे तो लगता है हमारा कॉलेज पूरे शहर में बदनाम हो जायेगा . इसे जल्दी से पुलिस क हवाले कर देते हैं इससे पहले की स्टूडेंट्स कोई हंगामा खड़ा करें.

प्रोफ व् : प्रोफ मेरे ख्याल में प्रिंसिपल सर को इस मामले की जाँच करनी चाहिए . हो सकता है बात कुछ और हो

चंद्रकांता : और क्या बात होगी ? हम सब ने अपनी आँखों से देखा है. सारा कॉलेज इसकी करतूत का गवाह है और आप अभी भी इसकी वकालत कर रहे हैं

प्रोफ व् : मैं किसी की वकालत नहीं कर रहा मैं तो प्रिंसिपल सर क आने का इंतज़ार करने को कह रहा हूँ

थोड़ी देर में hi प्रिंसिपल सर भी आ गए सब अपनी जगह पर खड़े हो गए. प्रिंसिपल सर ने अपनी चेयर पर बैठ कर सबको बैठने को कहा . प्रिंसिपल ने एक नज़र मुझे और शिवानी को देखा फिर प्रोफ से बात करने लगे.

प्रिंसिपल : ये क्या मामला है कोई मुझे बताएगा?

प्रिंसिपल सर क इतना पूछते hi चंद्रकांता मैडम ने साडी बात बता दी जो कुछ उन्होंने देखा था . प्रिंसिपल सर ने मेरी तरफ नज़र भर क देखा और शिवानी से सवाल किया

प्रिंसिपल : बीटा तुम बताओ क्या हुआ था और मुझे साडी बात शुरू से सच सच बताओ

शिवानी : सर मैं फाइनल ईयर की स्टूडेंट हूँ मेरा नाम शिवानी है. ये लड़का फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है . मेरा कोई भाई नहीं है इस लिए मैंने इसे अपना भाई समझ कर इससे कभी कभी बात कर लेती थी मगर इसके दिल में तो कुछ और hi था. इसने मेरा पीछा करना शुरू कर दिया मुझे फ़ोन पर तंग करने लगा मैंने इसे जब समझने की कोशिश की तो इसने कहा क ये मुझे प्यार करता है और मैं भी इससे प्यार करूँ. इसने ऐसी ऐसी बातें और हरकतें मेरे साथ करने की कोशिश की है की मैं बता भी नहीं सकती. सर इसने गर्ल्स टॉयलेट में मेरी वीडियो बना ली और मुझे तंग करने लगा इसने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया सर . आज इसने मुझे ब्लैकमेल कर क ऑडिटोरियम में बुलाया और मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की.

शिवानी की बातें सुन कर जहाँ सब को गुस्सा आ रहा था वहीँ मेरा दिमाग घूम रहा था . साला इतना तगड़ा झोल और मैं बेवक़ूफ़ बन गया ज़रूर ये मोंटी और शीना की hi साथी है . प्रिंसिपल सर ने शिवानी की बात सुनने क बाद मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछा

प्रिंसिपल : अमित तुम बताओ तुम्हे अपनी सफाई में कुछ कहना है? क्या शिवानी ने जो कहा वो सही है ?

अमित : सर ये बिलकुल झूठ है. इसने खुद मुझसे दोस्ती की ये खुद मेरे पीछे पड़ी हुई थी आप चाहे तो मेरे क्लास मात मोहित से पूछ सकते हैं. ये कह रही है मैंने इसकी वीडियो बनायीं ये बिलकुल झूठ है . मैं आज तक गर्ल्स टॉयलेट की तरफ नहीं गया तो वीडियो कहाँ से बनाऊंगा. और सर मैंने कभी इसे न फ़ोन किया है न मैसेज किया है. रही बात ऑडिटोरियम की तो सर इसने कहा था क इसे ड्रामा टीम से निकल दिया जायेगा और टीम में बने रहने क लिए इसे आज टेस्ट देना है जिसके लिए इसे एक सन की रिहर्सल करनी है. मुझे दोस्ती का वास्ता देकर ये मुझे वहां लेकर गयी और खुद hi अपने कपडे फाड़ कर शोर मचाना शुरू कर दिया.

शिवानी : सर ये झूठ बोल रहा है आप चाहें तो मेरे मोबाइल में देखले . इसने मेरा मंस बना कर मेरे फ़ोन पर भेजा था और मुझे अश्लील मेस्सगेस भी भेजे थे

शिवानी ने अपना मोबाइल प्रिंसिपल सर को चेक करवाया. 5 मिनट्स तक प्रिंसिपल सर उसका फ़ोन चेक करते रहे शिवानी ने सर को कुछ मेस्सगेस वीडियोस और पिक्टुरेस चेक करवाए. प्रिंसिपल सर क चहरे पर गुस्सा नज़र आने लगा . मुझे भी हैरानी हो रही थी क आखिर फ़ोन में ऐसा क्या है. फ़ोन चेक करने क बाद प्रिंसिपल सर ने गुस्से से मेरी तरफ देखा.

प्रिंसिपल : मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी मैंने तो ये सोचा था क तुम एक अचे लड़के हो मगर तुमने मुझे निराश किया. कुछ कहना तुम्हे इसके बारे में ?

प्रिंसिपल सुर ने मुझे शिवानी का मोबाइल पकड़ा दिया. मैंने शिवानी क मोबाइल में वीडियो देखि जिसमे वो टॉयलेट में बैठी हुई थी और ऊपर से किसी ने वीडियो रिकॉर्ड किया था . शिवानी की नंगी कमर नज़र आ रही थी. फिर उसके फ़ोन में मैंने मेस्सगेस भी देखे जो मेरे hi फ़ोन से सेंड हुए थे . अब मुझे समझ में आया क ये सब कैसे हुआ .

अमित : सर ये सब झूठ है . ये सब इसकी चल है . ये बार बार मेरा मोबाइल मांग कर ले जाती थी घरवालों को फ़ोन करने का बहाना बना कर. आप मोहित से पूछ सकते हैं.

शिवानी : तो आज जो कुछ ऑडिटोरियम में हुआ वो भी झूठ है? सर मैं किसी ड्रामा टीम में नहीं हूँ बल्कि मैंने आज तक कभी किसी स्टेज परफॉरमेंस में हिस्सा भी नहीं लिया. पूछिए इससे इसने मुझे वहां क्यों बुलाया ?

प्रिंसिपल : तुम्हारे पास कोई सुबूत है अपनी किसी बात को साबित करने क लिए?

मेरा दिमाग घूम गया मेरे आठ इतनी तगड़ी गेम हो गयी और अब मेरे पास एक भी सुबूत नहीं था अपनी बात साबित करने क लिए मैं भगवन से मदद मांगने लगा.

अमित : सर प्लीज मेरी बार पर यकीन कीजिये ये सब झूठ है. आप एक बार ड्रामा टीम से भी पूछ कर देखिये ये मुझे उनसे मिलवाने ले कर गयी थी क नहीं.

प्रिंसिपल सर ने पेओन को भेज कर ड्रामा टीम को बुलाने भेजा. थोड़ी देर में वो भी आ गए. वो सब फाइनल ईयर क hi स्टूडेंट्स थे उन्होंने भी शिवानी की हाँ में हाँ मिलायी और मैं फिर एक बार गलत साबित हो गया. उम्मे से एक लड़की ने प्रिंसिपल सर को वीडियो क्लिप दिखाई और कुछ स्नैप्स . वो सब देखने क बाद तो प्रिंसिपल सर का पारा चढ़ गया क्यों ये वही वीडियो थी जिसमे मैं शिवानी को पकड़ रहा था और वो छूटने की कोशिश कर रही थी. ये सब तो मैंने उसके कहने पर hi सन की रिहर्सल क नाम पर किया था. उस वक़्त तो ऑडिटोरियम में कोई भी नहीं था फिर ये सब किसने रिकॉर्ड किया. और इस वीडियो में मेरी और शिवानी की जो बीच में बातचीत हुई थी वो भी नहीं थी यानि क इसकी एडिटिंग की गयी थी.

प्रिंसिपल : मैं सोच भी नहीं सकता था तुम इतने गिरे हुए हो . ज़िन्दगी में पहली बार मुझसे किसी को पहचानने में इतनी बड़ी गलती हुई है . आज अभी इसी वक़्त मैं तुम्हे इस कॉलेज से निकलता हूँ और तुम किसी और कॉलेज में एडमिशन नहीं ले सकोगे. प्रोफ पुलिस को बुलाओ और इसे उनके हवाले कर दो. किसी लड़की की इज़्ज़त पर हमला करने वाले को मैं बिलकुल भी माफ़ नहीं कर सकता.

सरे सबूत मेरे खिलाफ थे और मेरे पास अपनी सचाई साबित करने का कोई भी रास्ता नहीं था. प्रिंसिपल की बात सुन कर मेरी आँखों क सामने अँधेरा छाने लगा . मेरी साडी उम्मीदें मिटटी में मिल गयी. मैंने क्या क्या सपने देखे थे एक hi पल में सब मिटटी हो गए. पुलिस मुझे जेल में दाल देगी और मुझे सजा हो जाएगी उसके बाद मेरी फॅमिली का क्या होगा. वो सब मुझे hi मुजरिम समझेंगे. मैं पूरी तरह निराश हो गया और अंतिम बार आशा की निगाह से प्रोफ वरिंदर की तरफ देखा मगर उन्होंने भी नज़रें झुका ली.

प्रिंसिपल ने बेल्ल बजे और पेओन अंदर आ गया .

प्रिंसिपल : पुलिस को फ़ोन कार्डो क वो इसे आकर ले जाये.

पेओन : सर पुलिस तो आ चुकी है

प्रिंसिपल : आ चुकी है ? मगर किसने बुलाया उनको ?

पेओन : पता नहीं सर किसी ने कॉलेज से hi फ़ोन किया है.

प्रिंसिपल : ठीक है . जाओ अफसर को यहीं ले आओ . बहार स्टूडेंट्स गुस्से में खड़े हैं कहीं इस ओर हमला न कर दें.

पेओन प्रिंसिपल का आर्डर सुन कर बहार चला गया पुलिस को लेन. मैं अपनी बर्बादी पर अपनी बर्बादी पर रो रहा था और मन hi मन ये फैसला कर लिया क मैं तो बर्बाद हो hi गया हूँ मगर जिस जिस ने मुझे बर्बाद किया है मैं उससे बदला ज़रूर लूंगा. मेरी नस नस में गुस्सा लावा बन क दौड़ने लगा. और मैंने जलती हुई आँखों से शिवानी को देखा . वो मगरमच्छ क आंसू बहा रही थी और चंद्रकांता मैडम उसे सांत्वना देती हुई मुझे गुस्से से देख रही थी.

पेओन क साथ पुलिस अफसर और 2 कांस्टेबल अंदर गए . प्रिंसिपल सर ने उनको मुझे अरेस्ट करने को कहा.

प्रिंसिपल : अफसर मुझे बहुत अफसोस है मेरे कॉलेज में ऐसी शर्मनाक घटना हुई . आपका मुजरिम ये रहा और ये रही वो लड़की जिस पर इसने रपे करने की कोशिश की है . सुबूत आप इनके मोबाइल्स में से ले सकते हैं.

प्रिंसिपल की बात सुन कर पुलिस अफसर ने कांस्टेबल को मुझे अपने साथ ले जाने को कहा और शिवानी को भी अपने बयान दर्ज करवाने को कहा. साथ hi उसके मोबाइल और जो ड्रामा टीम क स्टूडेंट में जो वीडियो थी उसको जमा करवाने को कहा. जैसे hi मुझे पुलिस वाले ऑफिस से बहार ले जाने लगे तभी मंजू मम ऑफिस में एंटर हुई और प्रिंसिपल सर को मुझे रोकने को कहा

मंजू म : सर प्लीज अमित को रोक लीजिये . ये निर्दोष है ये कभी ऐसा काम नहीं कर सकता . प्लीज आप एक बार मेरी बात सुनिए
 
अपडेट 70

प्रिंसिपल की बात सुन कर पुलिस अफसर ने कांस्टेबल को मुझे अपने साथ ले जाने को कहा और शिवानी को भी अपने बयान दर्ज करवाने को कहा. साथ hi उसके मोबाइल और जो ड्रामा टीम क स्टूडेंट में जो वीडियो थी उसको जमा करवाने को कहा. जैसे hi मुझे पुलिस वाले ऑफिस से बहार ले जाने लगे तभी मंजू मम ऑफिस में एंटर हुई और प्रिंसिपल सर को मुझे रोकने को कहा

मंजू म : सर प्लीज अमित को रोक लीजिये . ये निर्दोष है ये कभी ऐसा काम नहीं कर सकता . प्लीज आप एक बार मेरी बात सुनिए

अब आगे -

मंजू मम ने प्रिंसिपल सर को पुलिस को रोकने क लिए कहा तो प्रिंसिपल सर ने उनसे वजह पूछी .

प्रिंसिपल : मैडम आप जानती हैं इसने क्या किया है ? और आप फिर भी पुलिस को रोकने को कह रही हैं.

मंजू म : जी सर मैंने सब सुन लिया है मगर प्लीज आप मेरी भी एक बार बात सुन लीजिये .

प्रिंसिपल : कहिये आप क्या कहना चाहती हैं.

मंजू म : सर कहने से ज्यादा मैं आपको कुछ दिखाना चाहती हूँ.

मंजू मम की बात पर सब उनकी तरफ गौर से देखने लगे. मुझे भी मम की बात से उम्मीद की किरण नज़र आयी . मंजू मम अपना मोबाइल हाथ में लिए प्रिंसिपल सर की चेयर क पास चली गयी और उन्हें कुछ दिखने लगी . प्रिंसिपल सर गौर से देखने लगे और मैडम क हाथ से मोबाइल पकड़ लिया. पता नहीं मैडम क्या दिखा रही थी मगर वो जो भी था उसे देखते हुए प्रिंसिपल सर को गुस्सा आने लगा . जैसे hi प्रिंसिपल सर ने वो सब देख लिया उन्होंने गुस्से से एक बार शिवानी की तरफ देखा और फिर सिचुएशन को देखते हुए उन्होंने पुलिस अफसर को कुछ देर बहार वेट करने को बोलै और मुझे ऑफिस में hi रहने दिया. पुलिस वालों क बहार जाते hi प्रिंसिपल सर गुस्से से बोले

प्रिंसिपल : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई एक शरीफ इनोसेंट लड़के को बदनाम करने की. क्या यही संस्कार हैं तुम्हारे परिवार क . तुम जानती भी हो क अभी इसके साथ क्या होने वाला था ? इसका पूरा कर्रिएर बर्बाद हो जाता . इसे जेल भेज दिया जाता और इसके परिवार की जो बदनामी होती सो अलग. आखिर ये सब तुमने किस लिए किया किसके कहने पर किया और कौन कौन तुम्हारे साथ है ? अगर तुमने साडी हकीकत अभी इसी वक़्त मुझे नहीं बताई तो तुम्हे मैं इसी वक़्त कॉलेज से निकल दूंगा . बताओ सचाई क्या है?

शिवानी का रंग hi उड़ गया प्रिंसिपल क मुँह से ये सब सुन कर . वहीँ मैं भी हैरान हो गया क अचानक ऐसा क्या देख लिया क सर ऐसे चेंज हो गए. ऑफिस में मौजूद हर कई हैरान था मगर कोई उनसे कुछ पूछ नहीं सकता था. शिवानी की तो समझ नहीं आ रहा था क वो क्या बात करे

शिवानी : स स सर म मम मैंने स सब सच hi बताया है.

प्रिंसिपल : ाचा तो ये सब क्या है ?

प्रिंसिपल सर ने मोबाइल से वो वीडियो चला दी जिसमे मैं ऑडिटोरियम में शिवानी क साथ एंटर हुए और उसने खुद hi दूर लॉक किया और फिर सब कुछ जैसे हुआ वो भी बिना एडिटिंग और कटाई क . वीडियो से साफ़ पता चल रहा था क शिवानी ने खुद hi सारा ड्रामा रचा था. वीडियो देख कर सभी शॉकेड हो गए . मेरे पास खड़े प्रोफ वरिंदर ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर मुझे अपने साथ लगा लिया . उनके चहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी . शिवानी की तो माँ चुद गयी देख कर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वी क्या बोले.

प्रिंसिपल : अब सच बताओ क्यों किया तुमने ये सब ? और किसके कहने पर किया है?

शिवानी से जब कोई बात माहि बानी तो उसने रोना शुरू कर दिया और वहीँ ज़मीन पर बैठ कर रोने लगी

प्रिंसिपल : ी ऍम नॉट गोइंग तो टोलेराते थिस नॉनसेंस थिंग . तुमने सब कुछ जान बुझ कर किया है और एक शरीफ लड़के को बर्बाद और बदनाम करने की कोशिश की है . अभी क अभी मुझे या तो पूरी सचाई बताओ या फिर तुम्हे मैं कॉलेज से निकलता हूँ इसी वक़्त .

शिवानी प्रिंसिपल सर से माफ़ी मांगने लगी .

शिवानी : मुझे माफ़ कर दीजिये सर ी एक्सट्रेमेली सॉरी सर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था सर . इसने सब क सामने मेरी इन्सुलर की थी सर मैं बस इसे सबक सीखना चाहती थी मैंने बस इसी लिए ये किया सर ी एक्सट्रेमेली सॉरी मुझे एक बार माफ़ कर दीजिये सर

प्रिंसिपल : गुस्से में किया ? No no शिवानी ये सब तुमने अछि तरह सोच समझ कर किया है पूरे प्लान क साथ और मुझे पूरा यकीन है तुम इसमें अकेली नहीं हो . अगर इसने तुम्हारे साथ कोई बदतमीजी की थी तो तुम इसकी शिकायत करती . मगर तुमने तो इसे रेपिस्ट hi साबित कर दिया . सरे कॉलेज क सामने तुमने इसे बदनाम कर दिया. तुम जानती भी हो क इज़्ज़त क्या होती है ? मैं कुछ नहीं सुनने वाला मुझे सब क नाम चाहिए अभी . मम आप इसे कागज़ पेन दो और इससे कॉन्फेशन लिखवाओ . जब तक ये साडी सचाई नहीं बताती इसे मैं किसी कीमत पर छोड़ने वाला नहीं.

प्रिंसिपल सर क कहने पर चंद्रकांता मैडम शिवानी को लेकर साइड में चली गयी और उसका कागज़ पेन दे दिया लिखने क लिए . शिवानी बार बार माफ़ी मांग रही थी मगर अब उसका झूठ सामने आ चूका था.

प्रिंसिपल : थैंक यू वैरी मच मंजू मम आज आपने मुझे बहुत बड़ी गलती करने से बचा लिया. अगर आप समय पर आ कर मुझे नहीं रोकती तो एक इनोसेंट लाइफ मेरी वजह से बर्बाद हो जाती. वैसे आपके पास ये सब कैसे आया ? अगर आपको पहले hi ओट चल गया था तो आप पहले क्यों नहीं आ गयी मेरे पास?

मंजू म : सर मुझे भी अभी कुछ देर पहले ये मिला है. मैं स्टाफ रूम में बैठी थी क किसी ने पेपर में लपेट कर एक मेमोरी कार्ड मेरी टेबल पर रख दिया उसके ऊपर मेरा नाम लिखा था. जब मैंने एनवेलप खोला तो बिच में मेमोरी कार्ड था उसके साथ एक कागज़ पर लिखा था क अमित निर्दोष है. मैंने जब मेमोरी कार्ड मोबाइल में डालकर देखा तो ये वीडियो था .

प्रिंसिपल : जिसने भी ये वीडियो आप तक पहुंचे है भगवन उसका भला करे . मेरा दिल अंदर से कह रहा था क कुछ तो गड़बड़ है मगर सरे सबूत अमित क खिलाफ थे मैं भी मजबूर हो गया था.

अमित प्लीज तुम मुझे माफ़ कार्डो मैंने तुम पर यकीन नहीं किया.

अमित : आप ऐसा मत कहिये सर . जो कुछ आप क सामने पेश किया गया उसे देख कर तो हर कोई मुझे hi दोषी मानेगा . मैं तो भगवन का शुक्रिया ऐडा करता हूँ जिसने मेरी मदद क लिए किसी अनजान मददगार को भेज दिया वर्ण आज मुझे जेल जाने से कोई बचा नहीं सकता था. और मंजू मम आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया आपने समय पर आकर मुझे बचा लिया

मंजू म : ये तो मेरा फ़र्ज़ था . मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा था क जो सब तुम्हारे बारे में बोल रहे हैं वो कभी हो भी सकता है.

प्रोफ वरिंदर : मैं जनता था क अमित कभी ऐसा गलत काम कर hi नहीं सकता . और सर अगर बुरा न मने तो मुझे लगता है कहीं न कहीं इस सब क पीछे मोंटी और शीना का हाथ है. क्यूंकि पहले दिन hi वो दोनों अमित से उलझ गए थे और मेरे आ जाने से उस दिन वो रुक गए मगर उनको देख कर लग hi रहा था क वो अमित को नुकसान ज़रूर पहुंचाएंगे

प्रिंसिपल : हम्म्म मगर बिना किसी सुबूत क किसी पर इलज़ाम नहीं लगाया जा सकता . मैं चौंगा क आप खुद इसकी जांच करें और अगर उनके खिलाफ कोई साबुत मिले तो मेरे पास ले कर आइयेगा फिर मैं देख लूँगा. फ़िलहाल आप अमित को लेकर जाइये और सब क सामने साडी बात बता दीजिये वर्ण सब स्टूडेंट्स इसे hi दोषी मानते रहेंगे. और हाँ वो पुलिस वालों को भी वापिस भेज दीजिये मैं नहीं चाहता क ये बात बहार निकले . शिवानी को मैं ससपेंड करता हूँ जब तक ये अपने पेरेंट्स को साथ लेकर अपना पूरा कॉन्फेशन लिख कर नहीं देती इसे कॉलेज में एंटर नहीं होने दिया जाये.

प्रिंसिपल सर क आर्डर को सुन कर प्रोफ वरिंदर मंजू मम और मैं भी खुश हो गया. प्रोफ मुझे बहार ले आये सरे स्टूडेंट्स बहार भीड़ लगा कर खड़े थे और वेट कर रहे थे क कब पुलिस मुझे ले कर जाती है. प्रोफ ने सब क सामने बता दिया क मुझ पर लगाए गए इलज़ाम झूठे हैं और ये सब क साजिश थी. प्रोफ की बात सुन कर सब खुसर फुसर करने लगे मगर शीना और मोंटी गैंग की शक्लों पर 12 बज गए उनको अपना दर सताने लगा क कहीं उनकी पोल न खुल जाये इस लिए वो चुप चाप खिसक गए.

प्रोफ ने सबको क्लासेज में जाने को कहा और मुझे साथ अपने ऑफिस में ले आये .

प्रोफ वरिंदर : देख लिया ? मैंने कहा था न सावधान रहना . अगर आज मंजू मम नहीं आती तो तुम इस वक़्त कहाँ होते. ये दुनिया बहुत बुरी है मेरे बचे अगर खुद को तुम खुद नहीं बचाओगे तो दूसरा तुम्हारा गाला काट कर आगे निकल जायेगा. जब किसी से दुश्मनी पद जाये तो हमेशा अलर्ट रहना चाहिए. शिवानी तो सिर्फ मोहरा है चाल तो किसी और ने hi चली है और मुझे पूरा यकीन है क ये मोंटी का hi काम है. मगर तुम्हे इससे सबक लेना होगा वर्ण तुम कल को किसी और पंगे में फास सकते हो और शायद अगली बार मंजू मम की तरह कोई तुम्हारी मदद करने न आ पाए. तुमने इस सब से क्या सबक सीखा?

अमित : यही क किसी पर भरोसा मत करो

प्रोफ व् : गलत . भरोसा करना चाहिए मगर आँखें बंद कर क नहीं और जिसे तुम अछि तरह नहीं जानते या जिसके इरादे तुमने नहीं परखे उस पर बिलकुल यकीन मत करो. अब देखो तुम्हारे फ़ोन का इस्तेमाल तुम्हारे hi खिलाफ किया गया. तुम्हे उसने कैसे बेवक़ूफ़ बना कर खुद को ड्रामा टीम का मेंबर बता दिया जबकि ऐसे नहीं था. तुमने कभी किसी बात पर ध्यान तक नहीं दिया. उसने तुम्हे ऑडिटोरियम में ले जा कर दूर लॉक किया तुम्हे तो उसी वक़्त समझ जाना चाहिए था.

अमित : मगर सर उसने मुझसे मदद मांगी थी और मैं यही सोच रहा था क मैं उसकी मदद कर रहा हूँ मुझे क्या पता था क वो क्या करना चाहती है.

प्रोफ व् : यही तो बात है मेरे बचे . दुनिया में जो लोग दिल क अचे होते हैं न उन्हें बेवक़ूफ़ बनाना सबसे आसान होता है. तुमने उसकी मदद करने का सोचा और देखो तुम कितनी आसानी से ट्रैप में फास गए . ये तो भगवन का शुक्र मनाओ क पैट नहीं किसकी दुआओं ने तुम्हे आज बचा लिया और आगे से इस बात का ख्याल रखना क कोई भी मदद मांगे तो पहले एक बार अछि तरह उस पर विचार ज़रूर कर लेना . और अब कभी किसी क झांसे मत आना . तुम्हे कहीं कोई चोट तो नहीं लगी ज्यादा?

अमित : नहीं सर मैं ठीक हूँ

प्रोफ व् : अब तुम घर जाओ और आज जो भी हुआ उसकी टेंशन मत लेना बस जो सबक मिला है उसे ध्यान में रखना.

उसके बाद मैंने सर क पाऊँ छुए और उनसे मिल कर बहार आ गया . मैं पार्किंग की तरफ जा रहा था क्यूंकि कॉलेज का टाइम तो ख़त्म हो hi चूका था तभी मेरा फ़ोन बजने लगा मैंने देखा तो मोहित की hi कॉल थी मैंने फ़ोन उठाया .

मोहित : कहाँ है तू ? कब से तेरा फ़ोन तरय कर रहा हूँ ? ये क्या पन्गा हो गया मुझे मीनल का फ़ोन आया था . बस आ hi रहा हूँ वापिस अभी रस्ते में हूँ. तू चिंता मत करना मैं सीधा तेरे पास hi आ रहा हूँ.

अमित : अरे टेंशन वाली कोई बात नहीं है सब ठीक हो गया है. तुझे मिल कर बाटूंगा तू आराम से घर पहुँच वहीँ मिलते हैं

मोहित : पक्का सब ठीक है न

अमित : अरे यार तेरी कसम सब ठीक है मिल कर बाटूंगा सब कुछ

मोहित : चल फिर घर पर मिलते हैं.

उसके बाद मैंने कॉल कट कर दी . मैंने देखा क मोबाइल पर काफी साडी मिस कॉल्स अति हुई थी मगर अभी मैं देखना नहीं चाहता था. मैं पार्किंग से बाइक निकल कर बहार आया तो मंजू मम भी कार से वापिस जा रहे थे मुझे देख कर वो रुक गए और मुझे अपने पास बुलाया.

मंजू मम : मैं तुम्हे hi ढून्ढ रही थी मेरे घर चलो मुझे तुमसे कुछ बात करनी है

अमित : जी चलिए मैं आपके पीछे पीछे आ रहा हूँ.

मंजू मम आगे निकल गए और मैं उनके पीछे बाइक पर चल पड़ा. 20 मिनट में मैं मम क घर पर था. मंजू मम ने दरवाज़ा खोला और मुझे अपने साथ अंदर ले गए.

मंजू मम : जाओ पहले अपनी हालत ठीक करलो . सारा हुलिया बिगाड़ा हुआ है.

मैं बाथरूम में गया और हाथ मुँह धोया. मैंने शीशे में देखा तो बाल बिखरे हुए थे चहरे ओर निशान थे T-shirt भी गले से फैट गयी थी. मैं थोड़ा बहुत खुद को ठीक कर क बहार आ गया. थोड़ी देर में मैडम भी कपडे चेंज कर क आ गए और किचन से कुछ खाने पीने को ले आये.

मंजू मम : तो अब बताओ तुम इस चक्कर में कैसे फास गए . वो लड़की न तो तुम्हारी क्लास की है और न hi तुम्हारे लेवल की फिर तुम कैसे उसके चाकर में फसे

अमित : मैं आपको साडी बात शुरू से बताता हूँ

मैंने शिवानी क बारे में पहली मुलाकात से hi सब कुछ बात दिया. मंजू मम ध्यान से साडी बात सुनती रही .

मंजू मम : हम्म तो उसने ये सब वाकई में मोंटी क कहने पर किया होगा . वैसे तुम्हारा उसके साथ क्या पन्गा है?

फिर मैंने फर्स्ट डे वाला किस्सा भी मैडम को बता दिया क कैसे मोंटी क साथ मेरा झगड़ा हो गया था.

मंजू मम : देखो अमित मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगी बस इतना समझ लो वो अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद है . उसे पड़े से कोई लेना देना नहीं है. उसके पास बहुत पैसा है मगर तुम्हारे लिए पड़े बहुत ज़रूरी है . तुम्हे अपनी फॅमिली क लिए बहुत कुछ करना है लाइफ में आगे बढ़ना है. तुम इन सब से दूर hi रहो क्या पता कल कोई नयी मुसीबत कड़ी कर दें

अमित : मैं तो दूर hi रहता हूँ मम ये सब तो उन्होंने hi किया धोके से . वैसे आप ने बताया नहीं क आपको वो मेमोरी कार्ड किसने दिया . मुझे लगता है आप जान बुझ कर छुपा रही हैं क्यूंकि बिना बताये कोई स्टाफ रूम में कैसे आ सकता है . वहां पर और टीचर भी तो होते हैं.

मंजू मम : मैं भला क्यों छुपाउंगी . मैंने तो वही बताया जो सच है और तुम मुझ पर शक कर रहे हो ?

(मन में) - सॉरी अमित मैं तुम्हे उसके बारे में नहीं बात सकती उसने मुझसे वडा लिया है.

अमित : अरे मैं आप पर क्यों शक करने लगा ? आप न बचती तो मैं तो गया था आज

मंजू मम : ऐसे कैसे तुम्हे कुछ होने देती ? अभी अभी तो मुझे छोटा भाई मिला है मैं भला तुम्हे कहीं खोने दूंगी. तुम्हे तो कैसे भी कर क मैं बचा लती. अब पहले कुछ खा पि लो आज तो बहुत गलियां और मार खायी है तुमने थोड़ा खाना भी खा लो .

मैं मंजू मम क साथ बातें करता हुआ खाने लगा. खाने से फ्री हो कर जब मैंने जाने की इजाज़त मांगी तो मम ने मुझे और थोड़ी देर रुकने को कहा.

मंजू मम : ाचा मुझे ये बताओ तुम्हारी पड़े कैसे जा रही है? ी मैं तुम पहले गाओं में थे तो वहां से यहाँ की पड़े थोड़ी डिफरेंट तो होगी. तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं होती?

अमित : परेशानी बस इतनी स है क मैं वहां हिंदी में सब सब्जेक्ट्स पड़ता था और यहाँ सब इंग्लिश में है.

मंजू मम : लो करलो बात मेरे होते हुए तुम इंग्लिश में पीछे रह जाओ ये तो बुरी बात है. कोई क्या कहेगा क बड़ी बैगन इंग्लिश टीचर और छोटे भाई को इंग्लिश नहीं आती . तुम तो मेरा नाम बदनाम कर डोज. अब से तुम रोज़ शाम को मेरे पास पड़ने आ जाया करो. मैं तुम्हे इंग्लिश में एक डैम मास्टर बना दूंगी.

अमित : मगर शाम को तो मुझे प्रैक्टिस पर जाना होता है मैं कैसे आ सकता हूँ?

मंजू मम : कितने से कूटने बजे तक जाते हो तुम प्रैक्टिस करने ?

अमित : 5 से 6:30 तक तो करता hi हूँ

मंजू मम : तो 7 बजे मेरे पास आ जाया करो

अमित : ठीक है मैं कोशिश करूँगा.

मंजू मम : कोशिश नहीं तुम्हे आना पड़ेगा अब बहिन बोलै है तो बहिन की बात भी माननी पड़ेगी.

अमित : ठीक है ठीक है मम

मंजू मम : मम ?

अमित : मेरा मतलब है दीदी

मंजू मम : अब आज शाम से hi शुरू कर दो ट्यूशन

अमित : वैसे ट्यूशन फी कितनी होगी

मंजू मम : वो मैं खुद ले लुंगी तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं है.

उसके बाद मैंने मम से इजाज़त ली और घर की तरफ चल पड़ा. घर पर पहुंचा तो देखा मोहित की गाडी अंदर कड़ी थी . मैंने बाइक अंदर कड़ी की और जैसे hi घर में एंटर हुआ तो सामने मोहित और आंटी दोनों hi मेरा वेट कर रहे थे. दोनों क चहरे पर परेशानी साफ़ नज़र आ रही थी.

मोहित : कहाँ था तू अब तक ? मैं कब से तेरी वेट कर रहा हूँ.

अमित : वो ज़रा एक काम था वहीँ से आ रहा हूँ.

मोहित : चल पहले बता ये सब क्या ड्रामा हुआ आज

अमित : अरे ठहर पहले सांस तो लेने दे

आंटी मेरे लिए पानी ले आयी मैंने पानी का गिलास पिया और फिर आंटी और मोहित मेरे पास hi बैठ गए मुझसे सारा किस्सा सुनने. मैंने आज जो कुछ भी हुआ सब विस्तार से बता दिया जिसे सुन कर मोहित और आंटी दोनों को hi गुस्सा आ गया.

मोहित : मुझे पहले से hi शक था ज़रूर ये कोई ड्रामा करने वाली है मगर इस हद तक वो गिर जाएगी मैं सोच भी नहीं सकता था.

आंटी : ऐसी बेहूदा गन्दी लड़की को तो पुलिस क हवाले कर देना चाहिए था . मेरा बस चले तो मैं उसका वो हल करूँ क साडी उम्र वो कभी ऐसा करने का सोच भी न सके.

मोहित : तू टेंशन मत लेना भाई अभी तेरा ये दोस्त ज़िंदा है. तू देखना उसका क्या हल करता हूँ मैं

अमित : अरे यार तू टेंशन क्यों लेता है. उन्होंने मेरे साथ एक गेम खेला है न अब मैं भी उनको उनकी भाषा में hi जवाब दूंगा. तू बस खुद को ठंडा रख . मैं उसे ऐसे आसानी से जाने तो नहीं दूंगा. ये बता फैक्ट्री का क्या हल है और अंकल कहाँ हैं?

मोहित : फैक्ट्री का मसला तो सॉर्ट आउट हो गया है . पापा कल तक आ जायेंगे आज वो वहीँ पर रुक गए हैं. मैं भी रुकने वाला था मगर जैसे hi मुझे पता चला तेरे बारे में मैं फ़ौरन वापिस चला आया.

इधर मैं मोहित और आंटी क साथ बातें कर रहा था और उधर मोंटी और उसकी गैंग एक फार्म हाउस पर एक साथ बैठी हुई थी.

मोंटी : पता करो भेनचोद कौन है वो जिसने हमारे प्लान पर पानी फेर दिया . ज़रूर कोई अपना hi है जिसने गद्दारी की है . कितना फुल प्रूफ प्लान था और हम तो कामयाब भी हो गए थे साला लास्ट में आकर सब चौपट हो गया.

शिवानी : तुम्हारा क्या गया मरी तो मैं प्रिंसिपल ने साफ़ कहा है मैं सब क नाम बताऊँ और सब कुछ कंफेस्स करूँ वर्ण मुझे कॉलेज से निकल दिया जायेगा

शीना : कुछ नहीं होगा तुम्हे हम सब ठीक कर लेंगे पहले उस गद्दार को ढूंढना है जिसने गद्दारी की है. ऑडिटोरियम में क्या होने वाला है ये सब सिर्फ हम लोग hi जानते थे और जिसने भी वो वीडियो बनाया मतलब वो उस वक़्त वहीँ पर मौजूद था यानि वो सब जनता था. इसका साफ़ साफ़ यही मतलब है वो हम में से hi एक है . इस लिए सच सच बताओ ये सब किसने किया है.

मोंटी और शीना की पूरी मंडली इस वक़्त वहीँ मौजूद थी सबकी नज़रें झुक गयी हर कोई खुद को बेक़सूर बता रहा था. मगर कोई तो था जिसने मदद की थी अमित की

रॉकी : मोंटी यार हम सब तो शुरू से hi एक दूसरे क पक्के साथी हैं और आज तक ह्यूमेन जो भी किया है मिल कर किया है ऐसे में तू hi बता हम में से कौन ऐसा कर सकता है.

मोंटी : मैं जनता हूँ तुम लोग ऐसा नहीं कर सकते मगर साला है तो कोई अपना hi और उसका पता लगाना बहुत ज़रूरी है.

टोनी : इस वक़्त यहाँ पर सिर्फ एक hi शख्स नहीं है और हो सकता है ये काम उसी का हो.

शीना : कौन ?

टोनी : शालू

मोंटी : वो ऐसा नहीं कर सकती वो जानती है अगर उसने ऐसा किया तो उसके साथ क्या हो सकता है.

रॉकी : मुझे भी टोनी की बात सही लगती है . हम में से तो कोई ऐसा नहीं कर सकता . हो सकता है उसने hi उस देहाती की मदद की हो .

मोंटी : वो ऐसा नहीं कर सकती मगर फिर भी तुम लोग कहते हो तो उससे पूछताछ कर hi लेते हैं . जाएगी कहाँ वो रहना तो उसे मेरी जुटी में hi है.

मैं शाम को अपने टाइम पर प्रैक्टिस करने चला गया. आज मंजू मम क घर जाने की वजह से टाइम नहीं मिला रेस्ट का इस लिए बस कपडे बदल कर hi चला गया. वहां से फ्री हो कर मैं मंजू मम क घर की और चल पड़ा इस दौरान मुझसे कई साडी कॉल्स आयी मगर मैंने किसी की कॉल अटेंड नहीं की सोचा रत में बात करूँगा. ज़रूर नेहा दीदी से करुणा दीदी और नैना दीदी को पता चल गया होगा इसी लिए वो कॉल्स कर रही थी. मैं 7 मंजू मम क घर पहुँच गया और जा कर बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला
 
अपडेट 71

मैं शाम को अपने टाइम पर प्रैक्टिस करने चला गया. आज मंजू मम क घर जाने की वजह से टाइम नहीं मिला रेस्ट का इस लिए बस कपडे बदल कर hi चला गया. वहां से फ्री हो कर मैं मंजू मम क घर की और चल पड़ा इस दौरान मुझसे कई साडी कॉल्स आयी मगर मैंने किसी की कॉल अटेंड नहीं की सोचा रत में बात करूँगा. ज़रूर नेहा दीदी से करुणा दीदी और नैना दीदी को पता चल गया होगा इसी लिए वो कॉल्स कर रही थी. मैं 7 मंजू मम क घर पहुँच गया और जा कर बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला

अब आगे -

मंजू म: तुम आ गए ? आओ मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी.

मैं मम क पीछे पीछे अंदर चला गया . कुछ छोटे बचे द्यिंग रूम में बैठे पद रहे थे.

मंजू म: चलो बचो आज क लिए इतना बहुत है . अब तुम लोग जाओ और कल टाइम पर आ जाना .

उसके बाद बचो ने अपने बैग समेटे और चले गए. मैं वहीँ सोफे पर बैठ गया . मम मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक ले आयी.

मंजू म : ये क्या तुम खली हाथ hi चले आये ? कोई कॉपी किताब नहीं लाये?

अमित : वो क्या है मम मैं सीधा प्रैक्टिस से hi आ रहा हूँ और आपने बताया भी नहीं था क कौन स किताब ले कर आऊं इस लिए खली हाथ hi चला आया.

मंजू म : चलो कोई बात नहीं आज सिर्फ बातें hi करते हैं और हाँ घर पर मैं मम नहीं दीदी हूँ ठीक है ?

अमित : सॉरी मम मेरा मतलब है दीदी

मंजू म : वैसे मैं देख रही हूँ इतना कुछ होने क बाद भी तुम इतने शांत हो . इसका क्या मतलब है?

अमित : कुछ भी नहीं . सचाई सब क सामने आ गयी अब मुझे क्या करना चाहिए कुछ भी तो नहीं

मंजू म : तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया और तुम ऐसे रियेक्ट कर रहे हो जैसे कुछ हुआ hi नहीं. मुझे इतना गुस्सा आ रहा था क उस लड़की को ऐसी सजा दूँ क वो यद् करे और तुम ऐसे शांत हो ? देखो अमित गुस्से को अंदर दबाना नहीं चाहिए वर्ण इससे इंसान की सोच समझ भी ख़राब हो जाती है. मैं जानती हूँ तुम में बहुत गुस्सा है इसी लिए तो उस लड़की क साथ बदतमीज़ी करने पर तुमने मोंटी पर हाथ उठाया था. मैं कैसे मन लूँ क इतना कुछ होने पर भी तुम्हे गुस्सा नहीं आ रहा

अमित : देखिये दीदी जो कुछ भी शिवानी ने किया है वो सब उसने मोंटी क कहने पर hi किया होगा. इस लिए मैं उस पर गुस्सा नहीं कर रहा और रही बात मोंटी की उसे समय आने पर देख लूंगा.

मंजू म : बिलकुल भी नहीं. अगर मुझे वाक़ई में अपनी दीदी मानते हो तो मोंटी और शीना से दूर hi रहना. तुम नहीं जानते वो किस हद तक घटिया हैं . ट्रेलर तो तुमने देख hi लिया है. तुम नहीं जानते मगर मैं अछि तरह जानती हूँ उनकी फॅमिली को. तुम्हे तो शायद ये भी नहीं पता होगा वो दोनों सेज भाई बहिन हैं. उनका बाप बहुत घटिया आदमी है और उसी क खून का असर है ये सब . मोंटी का तो मुझे अंदाज़ा था मगर शीना भी ऐसी निकलेगी ये नहीं पता था. उनका बाप बहुत पैसे वाला है . वो तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकते हैं मेरी मनो तो तुम किसी किस्म की बदला लेने की कोशिश न करना. मैं नहीं चाहती फिर से तुम्हारे साथ कुछ गलत हो . ये तो भला हो उस शख्स का जिसने समय रहते तुम्हारी बेगुनाही क साबुत मुझे दे दिए. वर्ण तुम्हे कोई बचा नहीं पता.

अमित : मैं ध्यान रखूँगा आप चिंता मत कीजिये. आप बच्चों पर ट्यूशन पादरी हैं ?

मंजू म : बात मत बदलो मैंने जो कहा है उसे दिमाग में बिठा लो . और हाँ उस शिवानी क बारे में भी सोचने की ज़रूरत नहीं उसे तो प्रिंसिपल सर ज़रूर सजा देंगे . और रही इन बच्चों की बात तो मैं इन्हे मुफ्त में पड़ती हूँ इसी बहाने मेरा भी दिल लगा रहता है . वर्ण और कौन है जिससे में बातें कर सकूँ कॉलेज और ट्यूशन क बीच बस मैं हूँ और ये सूनी दीवारें . कभी कभी सोचती हूँ क मैं ज़िंदा किस लिए हूँ मगर फिर ये सोच कर मरने का इरादा नहीं करती क जब तक ज़िंदा हूँ काम से काम किसी की कोई मदद hi कर दूँ किसी क काम आ जॉन. ये सब बचे गरीब परिवारों से हैं इनकी स्कूल फी भी मैं hi देती हूँ . बस ये एक घर और एक कार hi बहुत मेरे लिए . खाने पीने क इलावा जो भी बचता है बस दूसरों पर hi लगा देती हूँ.

मंजू मम की ज़िन्दगी कितनी तनहा कितनी उदास थी ये उनकी बातों से पता चल रहा था. बात करते हुए उनकी आँखों में एक सूनापन साफ़ नज़र आ रहा था. उनका चेहरा एक डैम से ऐसे खामोश हो गया जैसे अतीत की कड़वी यादों ने उनके ज़ख्मों को फिर से हरा कर दिया हो

अमित : आप मुझे अपनी ज़िन्दगी क बारे में क्या कुछ नहीं बताएंगी ? अगर आप को ठीक लगे तो आप मुझे अपने बारे में बता सकती हैं.

मंजू म : छोडो इन सब बातों को काटों में हाथ लगाने से सिर्फ ज़ख़्म hi मिलते हैं. तुम मुझे अपने बारे में बताओ तुम्हारी फॅमिली क बारे में तुम्हारे घर में कौन कौन है. तुम्हारी होब्बीएस तुम्हारी लाइफ क इम्पोर्टेन्ट पर्सन्स जो कुछ भी है तुम्हारी लाइफ में मैं सब जानना चाहूंगी

अमित : ये क्या बात हुई ? आप मुझसे सब जानना चाहती हैं और मुझे कुछ बताना नहीं चाहती

मंजू म : ाचा ठीक है एक डील करते हैं तुम मुझे अपने बारे में सब बताओ फिर मैं भी अपने बारे में बताउंगी मगर धीरे धीरे बोलो मंज़ूर है?

अमित : ठीक है

मंजू म : तो शुरू करो

अमित : मेरा नाम तो आप जानती हैं मेरी फॅमिली में मेरे तीन मां और तीन मौसी हैं. मैं अपने मां क साथ hi रहता हूँ . मेरे माता पिता बचपन में hi गुज़र गए थे मैंने उन्हें कभी नहीं देखा. बचपन से बड़े मां ममी ने hi मुझे पला है इस लिए मैं उन्हें माँ बाबा कह कर बुलाता हूँ. सब मुझे बहुत प्यार करते हैं मैं सबका लाडला हूँ. मेरा कोई और भाई बहिन नहीं है. किसी मां क भी कोई औलाद नहीं थी इस लिए मुझसे सब से बहुत प्यार मिला. मगर अब मेरी तीनो ममियां माँ बनने वाली हैं और जल्द hi मेरे भाई बहिन आने वाले हैं. मेरा बचपन अकेले hi गुज़ारा है. मेरा कोई दोस्त नहीं था गाओं में सिवाय एक क . राजू नाम है उसका मगर जब से कॉलेज शुरू हुआ है उससे भी मिलना नहीं हो पता . मैंने ज़िन्दगी तनहा गुज़री है इस लिए मैं आपका दर्द समझ सकता हूँ. आप वडा कीजिये आज क बाद कभी खुद को अकेला नहीं समझेंगी जब कभी आप उदास हों तो मुझे यद् कर लिया कीजिये.

मंजू म: ी म सॉरी मुझे नहीं पता था क तुम्हारे माँ बाप नहीं हैं . कोई कितना भी प्यार क्यों न कर ले मगर माँ बाप की जगह कोई नहीं ले सकता . वैसे तुम सब क होते भी तनहा क्यों रहे ये बात मुझे समझ नहीं आयी .

अमित : मुझे पता नहीं क्यों पर मेरे जन्म दिन वाले दिन hi मेरे माता पिता एक एक्सीडेंट में मरे गए थे इस वजह से लोग मुझे मनहूस समझते थे और मुझे कोई दोस्त नहीं बनता था.

मंजू म : मैं समझ सकती हूँ तुमने कैसा वक़्त गुज़ारा होगा. और आज से तुम भी कभी खुद को तनहा नहीं समझना . जब भी दिल करे आ जाना मुझसे मिलने.

अमित : आप जब भी बुलाएंगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा और जब मेरा दिल करेगा तब भी आपको तंग करने आ जाऊंगा.

मंजू म : अन्य्तिमे . यू ऑलवेज वेलकम . तुम्हे पता है तुम पहले इंसान हो जिसे मैंने दिल से अपना समझा है. कभी कभी तो मैं खुद इस बात पर हैरान होती हूँ की क्यों मैं तुम्हे इतना पसंद करती हूँ. जब भी तुम्हे देखती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे तुम मेरे अपने हो.

अमित : शायद पिछले जनम में भी हम भाई बहिन रहे होंगे.

मंजू म : हो सकता है. तुमने अपनी मौसी क बारे में नहीं बताया?

अमित : हम्म मेरी तीन मौसी हैं. दो मेरी माँ से बड़ी हैं और एक मेरी माँ क बराबर hi है. सब मुझसे बहुत प्यार करते हैं और पता है मेरी तीनो मौसी इसी शहर में रहती हैं.

मंजू म : कमल है फिर hi तुम हॉस्टल में रहते हो भला वो क्यों ?

अमित : नहीं मम मैं हॉस्टल में नहीं बल्कि मोहित क साथ उसके घर में रहता हूँ . वो क्या है क जब मैंने हॉस्टल में रहना शुरू किया तो वो मुझसे नाराज़ हो गया और उसकी नाराज़गी दूर करने क लिए मुझे उसके घर पर रहना पड़ा. और रही बात मौसी क घर न रहने की तो मैं नहीं चाहता मैं किसी पर बोझ बनु . वो तीनो तो मुझे बुलाती रहती हैं मगर मैं खुद hi नहीं जाता. हर किसी क घर की अपनी ज़रूरतें होती हैं और मैं नहीं चाहता क मेरी वजह से किसी को कोई प्रॉब्लम हो.

मंजू म : बहुत गहरी सोच है तुम्हारी. तो अब तुम्हारा एक और दोस्त भी है . मुझे यकीन है क वो भी तुम्हारी तरह hi ाचा होगा.

अमित : आपने बिलकुल ठीक कहा मोहित बहुत ाचा है और उसके माँ डैड भी मुझे बहुत प्यार करते हैं मुझे कभी ये नहीं लगता क मैं किसी गैर क घर में हूँ.

मंजू म : ये तो बहुत अछि बात है. और बताओ फॅमिली में कौन कौन है तुम्हारे कजिन वगैरह.

अमित : बड़ी मौसी क एक बीटा 2 बेटियां हैं जो मुझे बहुत प्यार करती हैं . दूसरी मौसी क दो बेटियां है और तीसरी मौसी क सिर्फ एक बेटी है. मेरी दो कौसिन्स हमारे hi कॉलेज में पड़ती हैं और वो साइंस स्ट्रीम में हैं.

मंजू म : वैरी गुड मुझे भी मिलवाना उनसे

अमित : ज़रूर मम अब आप भी कुछ बताइये अपने बारे में

मंजू म : मेरी ज़िन्दगी में अब कुछ भी नहीं बचा है . मेरे हस्बैंड शादी क कुछ महीनो बाद hi चल बेस . कहने को एक बड़ा भाई है मगर सौतेली होने की वजह से वो मुझसे नफरत करता है और मैं भी उससे नफरत करती हूँ . उसके इलावा मेरा कोई सागा अब दुनिया में नहीं है

अमित : तो क्या आपका कोई और भाई बहिन नहीं था ?

मेरे इस सवाल से मम कुछ देर क लये शांत हो गयी. और बहुत गंभीरता से बोली

मंजू म : था तो सही मगर वो अब है नहीं तो बात भी क्या करूँ जब भी उनको यद् करती हूँ तो आँखों से आंसू बहने लगते हैं. कोई और बात करो

अमित : ी म सॉरी मम . आपकी कोई सहेली भी नहीं है क्या?

मंजू म : सहेली कोई खास तो है नहीं . कॉलेज में मेरा एक ग्रुप हुआ करता था मगर धीरे धीरे सब अपनी अपनी लाइफ में बिजी हो गयी उसके बाद किसी से मिलना नहीं हुआ.

अमित : चलिए कोई बात नहीं आज से मैं आपका भाई भी हूँ और दोस्त भी और आपको कुछ भी काम हो कोई भी बात हो आप मुझसे कहेंगी

मंजू म : बिलकुल , और तुम्हे भी हर बात माननी होगी वर्ण बड़ी बहिन होने क नाते तुम्हारे कान भी खिंच लूंगी

हम दोनों को बातें करते हुए काफी वक़्त बीत गया था. मेरे फ़ोन पर मोहित का फ़ोन आया और वो मुझे घर आने का पूछ रहा था . मैंने उसे जल्दी आने का कह कर फ़ोन काट दिया .

अमित : ाचा तो दीदी मैं चलता हूँ बातों बातों में काफी वक़्त बीत गया मोहित मेरा इंतज़ार कर रहा है.

मंजू म : खाना यहीं पर खा कर जाओ . मैं इतना भी बुरा नहीं बनती

अमित : है है है मुझे पता है आप खाना ज़रूर ाचा hi बनती होंगी . मैं फिर किसी दिन आपके हाथ का खाना ज़रूर खाऊंगा मगर अभी मुझे जाना होगा.

मंजू म : ठीक है जाओ और हाँ कल अपनी बुक्स साथ लेते आना .

अमित : ठीक है दीदी अब मैं चलता हूँ

मैं मंजू मम क घर से सीधा मोहित क घर आ गया. आज मंजू मम से बहुत साडी बातें हुयी थी पता भी क्यों मैं सब कुछ उनको ऐसे बताता जा रहा था जैसे मुझे उनके पूछने भर का hi इंतज़ार था. खैर जब मैं घर पहुंचा तो आंटी ने खाना बना लिया था और मेरा hi इंतज़ार था. आंटी ने पहले मुझे जूस और ड्राई फ्रूट खाने को दिया और फिर बातें करते है खाने का वक़्त भी हो गया. रानी अभी भी नज़र नहीं आ रही थी और आंटी अकेली hi सारा काम कर रही थी. मैंने आंटी की मदद की और फिर ह्यूमेन मिल कर खाना खाया.

रत में मैं अपने बीएड पर लेता आज जो कुछ हुआ उसके बारे में सोच रहा था और मुझे क्या करना चाहिए इस पर विचार कर रहा था क मोहित मेरे पास आ गया.

अमित : मोहित इस वक़्त तू यहाँ ? कोई काम था क्या?

मोहित : मैं जनता हूँ तू क्या सोच रहा है. और मैं भी वही सब सोच रहा हूँ.

अमित : मतलब ?

मोहित : आज जो कुछ भी हुआ उसके बाद नींद कैसे आ सकती है . मैं जनता हूँ तू भी यही सोच रहा होगा क कैसे उनको सबक सिखाया जाये. तू ये बात जान ले क कुछ भी हो जाये मैं तेरे साथ हूँ और हम उन कमीनो को सजा ज़रूर देंगे.

अमित : तू इतनी चिंता क्यों करता है यार मैं नहीं चाहता मेरी वजह से तुम पर कोई बात आये इस लिए तू इन बातों से दूर hi रह.

मोहित : एक तरफ मुझे दोस्त भी कहता है और दूसरी तरफ ऐसा बोल कर पराया भी करता है. एक बात कान खोल कर सुन ले क मैं हर हल में तेरे साथ हूँ , तू जो भी करेगा मैं तेरा साथ दूंगा.

अमित : ाचा बाबा माफ़ कर मगर फ़िलहाल मैं कुछ नहीं करना चाहता . मुझे यकीन है प्रिंसिपल सर शिवानी को सजा ज़रूर देंगे और रही बात मोंटी की तो उसके लिए ठन्डे दिमाग से कुछ सोचते हैं अगर सीधा सीधा उससे झगड़ा किया तो इससे प्रोफ मुझसे नाराज़ हो जायेंगे और उस हरामी का क्या पता कहीं मेरी कौसिन्स को hi तंग करना शुरू कर दे. और तू भी खुद को ठंडा रखना वो ज़रूर हमें गुस्सा दिला कर झगड़ा करने की कोशिश करेंगे मगर हमें कॉलेज में झगडे से बचाना होगा.

मोहित काफी देर तक मेरे साथ इसी मुद्दे पर बात करता रहा और फिर अपने कमरे में जा कर सो गया. मैं भी उसके जाने क बाद अपनी सोच को विराम देता हुआ सो गया. सुबह मैं रूटीन से एक्ससरसीसे कर क वापिस आ गया और नाश्ता कर क मोहित क साथ कॉलेज क लिए निकल गया.

कॉलेज में आज ज्यादा तर स्टूडेंट्स मुझे गौर से देख रहे थे . कल की घटना की वजह से मैं सबकी नज़रों में आ गया था मगर ये भी ाचा हुआ क सचाई जल्द hi सामने आ गयी वर्ण कॉलेज में रहना मेरे लिए मुश्किल हो जाता . पहले 2 लेक्चर लगाने क बाद जब मई और मोहित फ्री लेक्चर में कैंटीन की तरफ जा रहे थे तो एक लड़के ने आ कर मुझे बताया क प्रोफ वरिंदर ने मुझे उनके ऑफिस में बुलाया है. मैं तुरंत प्रोफ वरिंदर क ऑफिस की और चल पड़ा मोहित को मैंने कैंटीन में रुकने को कहा. प्रोफ ने मुझे ऑफिस में बिठाया और अपनी बात केहनी शुरू की .
 
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