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- Dec 5, 2013
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राधा चुप चाप अपने ख्यालों में खायी मेरे पीछे बैठी रही . ह्यूमेन मार्किट से सामान लिया और घर वापिस आ गए. दिव्या मौसी ने जल्दी से किचन में जा कर सारा इंतज़ाम किया और राधा उनका साथ दे रही थी. मैंने सब क साथ चाय पि और 5 बजे से पहले hi सबसे मिल कर मोहित क घर क लिए निकल पड़ा
अब आगे-
मैंने मोहित क घर पहुँच कर कपडे बदले और प्रैक्टिस करने चला गया मोहित अपने कमरे में सो रहा था और आंटी भी शायद अपने कमरे में होंगी. प्रैक्टिस से जब मैं वापिस लौटा तो मोहित क घर पर तीन गाड़ियां कड़ी थी. मैं अंदर गया तो हॉल में मोहित आंटी और मोहित क पापा बैठे हुए थे. मोहित क पापा को आज मैं पहली बार देख रहा था सामने. देखने में अचे थे नार्मल फिटनेस रंग भी साफ़ था .
मोहित : पापा ये है मेरा दोस्त अमित
मैंने आगे बाद कर अंकल क पाऊँ छुए उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया.
अंकल : भाई देखने में तो किसी अचे परिवार से लगते हो . और जो कुछ तुम्हारे बारे में सुना है मुझे यकीन हो गया है क मोहित ने तुमसे दोस्ती कर क बहुत ाचा काम किया है. मैं उम्मीद करता हूँ तुम दोनों अचे दोस्त साबित होंगे. इस दुनिया में दोस्ती सबसे नायब रिश्ता है मेरे बचो हमेशा एक दूसरे का साथ देना.
अमित : अंकल आप ने बिलकुल सही कहा दोस्ती सबसे नायब है . क्यूंकि रिश्ते हमें तक़दीर देती है मगर दोस्त हम खुद चुनते हैं और दोस्ती क लिए हमेशा जान हाज़िर है .
अंकल मेरी बात पर ख्यालों में खो गए और उनकी आँखों में पानी आ गया
मोहित : क्या हुआ डैड आप की आँखों में आंसू
अंकल मोहित की बात सुन कर होश में आये और मुझे कस क गले लगा लिया.
अंकल : शाबाश बीटा अब तो मुझे पूरा यकीन है तुम्हारे साथ मेरा बीटा हमेशा मेहफ़ूज़ रहेगा और सही रस्ते पर चलेगा. तुमने आज मुझे मेरे दोस्त की यद् दिला दी वो भी यारो का यार था. मैं आज जो कुछ भी उसी की बदौलत हूँ . काश वो आज मेरे साथ होता .
आंटी अंकल क पास आ गयी और अंकल कंधे पर हाथ रखा
आंटी : वो हमेशा आपके साथ हैं आपकी यादों में आप दिल मत छोटा करें
उसके बाद अंकल हमारे साथ काफी देर तक बातें करते रहे . अंकल दो दिन से आउट ऑफ़ स्टेशन थे इसी लिए मुलाकात नहीं हुई थी और आज अंकल क आ जाने से मुझे लगा क अब आंटी की प्यास अंकल बुझा hi देंगे सो रानी क पास जाने की उन्हें ज़रूरत माहि पड़ेगी. रत का खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए. मैंने भी सोने का सोचा मगर मेरे दिमाग में रानी की बातें घूम रहीं थी तो मैंने एक बार रानी का खेल अपनी आँखों से देखने का फैसला किया और 12 बजे का अलार्म लगा कर लेट गया.
मेरी आंख पता नहीं कब लग गयी थी मगर अलार्म की आवाज़ सुन कर मैं उठ गया. मैं जल्दी से उठा और अपने कमरे से बहार निकला घर में पूरा सन्नाटा था सब आराम से सो रहे थे . मैं चुप चाप दबे पाऊँ बहार निकला और पिछली तरफ बने हुए सर्वेंट क्वार्टर की तरफ गया.
एक क्वार्टर की लाइट जल रही थी मैं उसके पास चला गया. अंदर से आवाज़ें आ रही थी मैंने अंदर देखने की जगह ढूंढने की कोशिश की तो मुझे जगह मिल गयी. अंदर रानी पूरी नंगी थी नीचे घुटनो पर बैठ कर ड्राइवर का लैंड चूस रही थी. ड्राइवर भी नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ था. ड्राइवर सांवले रंग का था और लैंड भी मेरे मुकाबले छोटा और पतला था.
ड्राइवर लोकु : आह साली चूस और चूस मेरा लैंड . आज तेरा वो हाल करूँगा क तुझे पता चल जायेगा मेरी बात न मैंने का अंजाम क्या होता है.
लोकु रानी क सर को पकड़ कर पूरा लैंड उसके मुँह में घुसा रहा था जिससे रानी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और वो बार बार खांस रही थी .
रानी : ाखुन ाखुन आआह मैं क्या करूँ मैं तो पूरी कोशिश कर रही हूँ ाआखःह ोोूखह्ह्ह्ह
लोकु रानी को बात भी करने नहीं दे रहा था और बार बार लैंड उसकी हलक में उतर देता था
लोकु : साली चैनल कितने दिनों से कह रही है काम हो जायेगा मगर अभी तक हुआ नहीं लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी . मैं आज क बाद तेरी चुदाई बंद कर दूंगा और सब को बता दूंगा तू एक रंडी है . तेरी फिल्म सरे नौकरों क मोबाइल में होगी फिर देखना तू सब की रंडी बन जाएगी
रानी : नहीं ऐसा मत करना मैं तो वैसा hi कर रही हूँ जैसे तुमने कहा था. मालकिन को जूस में वो दवाई मिला कर देती हूँ जो तुमने दी थी जिससे उनके बदन में और आग लग जाती है . मैं तो उनकी छूट को भी चाट चाट कर उनकी आग बढ़ती रहती हूँ. आज तो मैंने उनको तुम्हारा लैंड दिखने की भी बात की थी शायद वो आ भी जाती मगर साहब आ गए
लोकु : क्याआ ! सच में वो मेरा लैंड देखने को मान गयी ?
रानी : हाँ वो लगभग मान hi गयी थी मैंने इतनी तारीफ की है तुम्हारे लैंड की क वो खुद hi मुझे कहेंगी तुम्हारा लैंड दिखने को
लोकु : बस एक बार उसको अपनी रासलीला दिखा दे फिर वो खुद को रोक नहीं पायेगी और मेरे आगे टाँगे उठा क लेट जाएगी. क्या माल है मालकिन स्वर्ग की अप्सरा है अप्सरा. एक बार उसको तबियत से छोड़ लूँ फिर तो जन्नत यही पर hi मिल जाएगी
रानी : तुम्हे तो जन्नत मिलेगी मगर मुझे क्या मिलेगा
लोकु : अरे तू क्यों चिंता करती है मेरी रानी अगर मालकिन हमारे बस में आ गयी तो फिर जो चाहो उससे ले सकते हैं तुझे तो माला माल करदूंगा.
रानी : बस इतना यद् रखना मालकिन की छूट मिलने क बाद मुझे भूल मत जाना
लोकु : बिलकुल भी नहीं मेरी रंडी तू तो मेरी रखैल है तुझे तो मैं मालकिन क साथ एक hi बिस्तर पर छोडूंगा . अब बस जल्दी से काम मर्दे मेरा
रानी : अभी 2-3 दिन साहब घर पर हैं ऐसे में कुछ नहीं हो पायेगा साहब क जाते hi कुछ करती हूँ .
मैं बहार खड़ा दोनों की बातें सुन कर हैरान था. दोनों मिल कर कैसे अपनी hi मालकिन को बर्बाद करना चाहते हैं. जिस थाली में कहते हैं उसी में छेड़ कर रहे हैं . इनकी तो माँ की . अब समझा आंटी क्यों इतनी प्यासी हैं क्यूंकि रानी उनकी आग को भड़का रही है. वो दोनों अंदर अपना काम कर रहे थे मैंने मोबाइल निकल कर उनकी रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.
लोकु : जब भी मालकिन को देखता हूँ तो लैंड फटने को हो जाता है . रानी तू बस एक बार मालकिन को मेरी बना दे मैं तुझे सच मच की रानी बना दूंगा.
रानी : मैंने कहा न तेरा काम हो जायेगा साहब को ज़रा बहार जाने दे फिर मैं मालकिन को तैयार कर लुंगी. अब पहले मेरी प्यास बुझा
लोकु ने रानी को बिस्तर पर लिटा दिया उसकी छूट में लैंड पेल दिया. लोकु ने वियाग्रा की गोली खायी थी जो उसकी बातों से पता चला फिर भी वो 10 मिनट्स से ज्यादा रानी को छोड़ नहीं पाया. दोनों का काम ख़तम होते hi मैंने रिकॉर्डिंग बंद की और वापिस अपने कमरे में आ गया.
लोकु और रानी क साथ क्या किया जाये मैंने इसके बारे में सोचने लगा . मोहित को बताता तो वो पता नहीं गुस्से में क्या कर बैठ ता और ये भी हो सकता था क वो आंटी को भी कसूरवार समझता . अंकल से भी बात नहीं की जा सकती थी. आंटी से hi बात करनी होगी और उन्हें समझाना होगा मगर उनसे बात कैसे करूँ. वैसे इन सब बातों की वजह तो अंकल का आंटी को टाइम न देना था अगर वो आंटी को टाइम देते तो शायद आंटी इतनी प्यासी न होती.
जो भी हो मोहित मेरा दोस्त है तो उसकी फॅमिली मेरी फॅमिली है उसकी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त . अब मुझे सब कुछ ठीक करना होगा. मैं लोकु और रानी को सबक सीखने क बारे में सोचता हुआ सो गया. सुबह मैं उठने में थोड़ा लेट हो गया इस लिए ग्राउंड से भी लेट वापिस आया . आंटी शायद योग कर क जा चुकी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया . अंकल डाइनिंग टेबल पर बैठे अख़बार पद रहे थे.
अमित : गुड मॉर्निंग अंकल कैसे हैं आप
अंकल : गुड मॉर्निंग अरे वह इतनी जल्दी उठ गए तुम तो और तैयार भी हो गए
तभी आंटी जूस लेकर आ गयी
आंटी : उठ गए ? अरे ये तो सब से पहले उठ जाता है और ग्राउंड में एक्ससरसीसे करने जाता है.
अंकल : क्या सच में ? वैसे कौन स ग्राउंड में जाते हो एक्ससरसीसे करने?
अमित : जी वो कॉलेज ग्राउंड में
अंकल : अरे इतनी दूर जाते हो एक्ससरीज़ करने यहीं पास में hi तो है ग्राउंड. वहां जाया करो. पता है शहर क सब बड़े लोग सब अफसर वहीँ होते है सुबह . और घर क इतना पास है क पैदल hi जा सकते हो . कॉलेज ग्राउंड में आने जाने में कितना टाइम ख़राब होता होगा
हम बातें कर रहे थे इतने में मोहित भी तैयार हो कर आ गया
मोहित : गुड मॉर्निंग डैड
अंकल : गुड मॉर्निंग . बीटा तुम भी अमित क साथ सुबह एक्ससरसीसे करने जाया करो और इसके जैसे मजबूत बनो
मोहित : डैड इसके जैसा तो बनना मुश्किल है ये तो पहलवान है मुझे तो आप माफ़ करो
बातों बातों में ह्यूमेन नाश्ता किया और कॉलेज चले गए. कॉलेज में रूटीन से लेक्चर अटेंड किये. फ्री लेक्चर में जब हम कैंटीन में बैठे थे तो शिवानी हमारे पास आ गयी.
शिवानी : कहाँ थे तुम दिखाई hi नहीं देते . लगता है तुम मुझे दोस्त भी नहीं समझते वर्ण एक फ़ोन तो कर hi सकते थे .
अमित : वो मैं बिजी था और वैसे भी मेरे पास तुम्हारा no. नहीं है.
शिवानी : ये क्या बात हुई no. नहीं है लाओ अपना मोबाइल दो
शिवानी ने ज़बरदस्ती मेरा मोबाइल लिया और मेरे फ़ोन से अपना no. डायल किया और मेरे मोबाइल में अपना no. सेव कर दिया. शिवानी मेरे साथ सेल्फी लेने की ज़िद करने लगी और मुझे hi सेल्फी लेने को कहा. मैंने पीछा छुड़ाने क लिए अपने मोबाइल से हम दोनों की सेल्फी ले ली. सेल्फी लेते वक़्त वो मेरे साथ चिपक गयी थी. उसने मेरे मोबाइल से फोटो सेंड करने क लिए मोबाइल ले लिया और मुझे कोल्ड ड्रिंक लेन को कहा.
शिवानी : अमित चलो आज हम मूवी देखने चलते हैं .
अमित : नहीं मुझे लेक्चर अटेंड करने हैं
शिवानी : अभी कौन सा इतनी स्टडी हो रही है वैसे भी एक दो लेक्चर बंक करने से कुछ नहीं होता.
अमित : नहीं मैं लेक्चर बंक नहीं करता.
शिवानी : क्या यर कितने बोरिंग हो तुम भी ाचा एक बात तुम्हे बतानी थी. मैं कॉलेज की ड्रामा टीम में चुनी गयी हूँ. और इस साल यूनिवर्सिटी क कम्पटीशन में कॉलेज टीम क साथ हिस्सा लुंगी.
अमित : ये तो बहुत ख़ुशी की बात है
मोहित : कोंग्रटुलतिओन्स इस बात पर तो पार्टी बनती है
शिवानी : वही तो मैं कह रही हूँ मगर अमित क पास तो मेरे लिए वक़्त hi नहीं है.
अमित : ऐसी बात नहीं है बस मैं लेक्चर बंक नहीं करना चाहता
शिवानी : तो कॉलेज क बाद चलें ?
अमित : नहीं शाम को मुझे प्रैक्टिस करने जाना होता है वो तो बिलकुल भी मिस नहीं कर सकता
शिवानी : ठीक है एक काम तो कर सकते हो न मेरे लिए ? मुझे मेरे प्ले की प्रैक्टिस में मेरी मदद तो कर सकते हो न?
अमित : अब इतना तो कर hi सकता हूँ मगर लेक्चर नहीं बंक करूँगा . तुम फ्री लेक्चर में एडजस्टमेंट कर लो
शिवानी : ठीक है अभी तो लेक्चर फ्री है न चलो मैं तुम्हे बता दूँ कहाँ प्रैक्टिस करते हैं हम.
मैं उसकी बात मन कर उसके साथ चल पड़ा और मोहित को भी अपने साथ ले लिया क्यूंकि मैं अकेला शिवानी क साथ नहीं जाना चाहता था. शिवानी हम दोनों को ऑडिटोरियम में ले गयी जहाँ पर स्टेज बानी हुई थी और उसके सामने 200/300 चेयर्स लगी हुई थी. स्टेज पर कुछ लड़के लड़कियां प्रैक्टिस कर रहे थे. शिवानी उनसे जा कर मिली . अगले लेक्चर का टाइम हो रहा था इस लिए मैं और मोहित जल्दी वापिस आ गए.
लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मई और मोहित साइंस ब्लॉक में गए . राधा नेहा दीदी और मीनल एक साथ थी. राधा का देखने का नजरिया आज बदला बदला सा था. नेहा दीदी क सामने मैं कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए मैंने इंदिरेक्ट्ली राधा से पुछा
अमित : राधा सब ठीक है न ? मछरों ने दोबारा तंग तो नहीं किया?
राधा मेरे सवाल पर मुस्कुरा दी और न में सर हिला दिया. आज राधा मुस्कुरा कर मेरे साथ पेश आ रही थी मेरे दिल को बहुत सुकून मिला. उसके बाद हम अपने अपने घर निकल गए . घर से फिर खाना प्रैक्टिस और फिर से वापिस रत का खाना सब रूटीन से हुआ कोई खाद बात नहीं हुई.
आज सैटरडे था और मैंने शाम को गाओं जाना था. आज कॉलेज में मंजू मम ने मुझे घर आने का प्रॉमिस यद् दिलाया और मुझे अपना एड्रेस बता दिया. मैंने भी मम को बता दिया क मैं 4 बजे आ जाऊंगा .
मैं कॉलेज से मोहित क साथ घर गया और 3 बजे क बाद गाओं जाने क लिए निकल गया. मोहित क घर से मैं मंजू मम क घर की तरफ निकल पड़ा . घर ज्यादा दूर नहीं था 30 मिनट्स में मैं मम क घर पहुँच गया. ये लोकैलिटी अछि थी मम का घर भी ाचा बना हुआ था . ज्यादा बड़ा तो नहीं मगर 2 मंज़िला था. मम क पास अपनी एक कार भी थी जिससे वो कॉलेज अति थी
मैंने जाकर बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला . मम हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी . मम ने कपडे चेंज कर लिए थे और नयी सदी बांध ली थी .
मंजू म : तुम आ गए ? मुझे तो लगा था कहीं तुम भूल जाओगे. आओ अंदर आओ
अमित : ऐसे कैसे भूल जाता मम. आप तो मेरी टीचर हैं भला आपको झूठ बोल सकता हूँ? वैसे भी माइन प्रॉमिस किया था और मैं अपने प्रॉमिस तोड़ता नहीं
मंजू म : ये तो बहुत अछि बात है. जो लोग अपने उसूलों क पक्के होते हैं वो दिल क हमेशा सच्चे होते हैं और तुम तो hi कितने अचे.
मैं मम क साथ घर क अंदर गया. घर में 2 बीएड रूम किचन और हाल था बिच में थोड़ा ओपन स्पेस . मम ने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स ले आयी
अमित : अरे मम इसकी क्या ज़रूरत थी
मंजू म : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? तुम पहली बार मेरे घर ए हो. तुमने मेरी इतनी मदद की थी मैं भला इतना भी नहीं कर सकती. और ये तकल्लुफ छोडो मैं मैडम तुम्हारी कॉलेज में हूँ यहाँ नहीं
अमित : मम आप तो हमेशा मम hi रहेंगी. वैसे आप क घर कोई और नज़र नहीं आ रहा?
मंजू म : कोई होगा तो नज़र आएगा . मैं अकेली hi रहती हूँ यहाँ
अमित : सर , ी मैं आपके हस्बैंड और आपके बचे ?
मेरी इस बात पर मम क चहरे की मुस्कुरहट गायब हो गयी और गंभीरता नज़र आने लगी.
मंजू म : मेरे हस्बैंड की डेथ बहुत पहले हो गयी थी शादी क कुछ महीनो बाद hi और बचे हैं नहीं क्यूंकि मैं माँ नहीं बन पायी थी.
मंजू मम की आँखों में पानी आ गया बात करते हुए शायद इस बात से उनके दिल की दुखती राग को मैंने छेड़ दिया.
अमित : ी म सॉरी मम . मुझे नहीं पता था . मगर आप अकेली क्यों हैं ? क्या आपका और कोई रिश्तेदार नहीं है ?
मंजू म : रिश्तेदार ? रिश्ते तो सब यहाँ मतलब क हैं . जब तक किसी को मतलब होता है तब तक hi रिश्ता होता है.
अमित : मतलब आपके रिश्तेदारों ने आप के साथ ाचा नहीं किया. वैसे आपके सेज भाई बहिन और माँ बाप कोई तो होगा?
मंजू म : माँ बाप तो बचपन में hi गुज़र गए थे. भाई हैं मगर मैंने उनसे सरे रिश्ते तोड़ लिए हैं
अमित : वो क्यों?
मंजू म : ये मेरी पर्सनल लाइफ है मैं ये नहीं बता सकती
अमित : सॉरी मम मुझे पूछना नहीं चाहिए था पर पता नहीं क्यों जब भी आपसे बात करता हूँ ऐसा hi लगता है क जैसे आप मेरी अपनी हैं.
मंजू म : मुझे भी ऐसा hi लगता है. इसी लिए तो तुम्हे घर आने को इन्विते किया वर्ण इस घर में और कोई नहीं अत. शाम को मोहल्ले क 4/5 बचे पड़ने आ जाते हैं .
अमित : तो आपका वक़्त कैसे गुज़रता है मम ? दुनिया की भीड़ में आप कितनी अकेली हैं. इंसान की ज़िन्दगी में कोई तो अपना होना hi चाहिए अकेला तो पेड़ भी सूख जाता है. क्या आपका मन नहीं होता किसी क साथ हँसा जाये किसी क साथ गम बनता जाये.
मंजू म : जिसको तकदीर ने hi अकेला कर दिया हो वो छह क भी किसी को अपना नहीं बना सकता अमित और वैसे भी अब तो ये ज़िन्दगी बस किसी तरह गुज़ारनी है . मैं गुज़ारे वक़्त की यादों और किताबों क सहारे ज़िन्दगी गुज़र रही हूँ.
अमित : आपकी एक एक बात में कितना दर्द छुपा है काश मैं आपके इस गम को मिटा सकता . आप क साथ शायद किसी जनम में मेरा रिश्ता ज़रूर रहा होगा जो आप क साथ तकदीर ने मुझे मिलाया है. अगर आप बुरा न मने तो मुझे अपना फॅमिली मेंबर समझ सकती हैं . मुझे ख़ुशी होगी अगर मैं अपने किसी काम आ सका.
मंजू म : तुम नहीं जानते तुमने इतना कह कर मेरे दिल को कितना सुकून दिया है. जब भी तुम्हे देखती हूँ मुझे भी यही लगता है क तुम मेरे अपने हो. और आज से तुम मुझे जैसे चाहे बुला सकते हो चाहे तो आंटी कहलो चाहे बुआ मौसी या जो तुम्हे ाचा लगे .
अमित : आपको देख कर तो लगता है जैसे आपने 5/6 साल पहले hi कॉलेज छोड़ा होगा ऐसे में आपको आंटी कहना गलत होगा आप तो मेरी बड़ी बहिन जैसी लगती हैं इस लिए मैं आपको दीदी कहूंगा.
मंजू म : बच्चू तुम्हे पता नहीं मेरी उम्र कितनी है वर्ण तुम दीदी नहीं कहते
अमित : मुझे तो जो लगा मैंने वो बता दिया . अब अगर आप कुछ और चाहती हैं तो मुझे अपनी उम्र बता दीजिये मैं उस हिसाब से देख लेता हूँ
मंजू म : मुस्कुरा कर) तुम्हे पता नहीं लेडीज से उनकी उम्र नहीं पूछते.
अमित : तो आप hi बताइये मैं आपको क्या कहूं
मंजू म : दीदी भी चलेगा वैसे इतना बुरा भी नहीं है . काम से काम इतना तो फील होगा hi क मैं अभी जवान हूँ.
अमित : तो ठीक है मैं आपको मंजू दीदी बुलाऊंगा . कॉलेज में मम hi ठीक रहेगा.
मंजू म : हम्म्म्म , मगर अब ख्याल भी रखना . दीदी बोलै है तो दीदी का ख्याल भी रखना होगा.
अमित : ज़रूर , आप जब बुलाएंगी हाज़िर हो जाऊंगा . आज क बाद आप खुद को कभी अकेला मत समझना मैं हमेशा आपके साथ हूँ.
मंजू म : ये हुई न बात तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया . तुम्हे कैसे बताऊँ तुम्हारी इस बात से दिल को कितनी ठंडक पहुंची है . बरसों से बंजर बन चुकी ज़िन्दगी में अपने पैन की जो बूंदे तुमने बरसाई हैं इनके लिए दिल कब से तड़प रहा था. तुम ज़रूर मेरे भाई थे पिछले जनम में भी
मंजू म ने भावुक हो कर मुझे गले लगा लिया. कितने सैलून से मैंने भाई को राखी नहीं बंधी इस बार ज़रूर बांधूंगी. तू अपनी इस दीदी को छोड़ कर कहीं जायेगा तो नहीं न.
अमित : बिलकुल नहीं दीदी . आप जब भी यद् करेंगी मुझे अपने करीब पाएंगी.
मंजू म : तो भाई तुमने मेरे बारे में तो सब जान लिया कुछ अपने बारे में भी बताओ
अमित : क्या जानना है पूछिए. वैसे मैं इतना बता देता हूँ क मैं हैं में रहता हूँ . गाओं में पहलवानी करता था उसी की वजह से कॉलेज में एडमिशन मिला है. घर में माँ है बाबा है दो छोटे मां हैं और ममी हैं .
मंजू म : तो गाओं से रोज़ उप डाउन करते हो.
अमित : जी मैं यहाँ हॉस्टल में रहता हूँ आज सैटरडे है आज गाओं जा रहा हूँ अब मंडे को आऊंगा.
मंजू म : तुम हॉस्टल में क्यों रह रहे हो? तुम चाहो तो यहाँ मेरे साथ रह सकते हो. अपनी दीदी क होते तुम हॉस्टल में रहो क्या यह ाचा लगता है?
अमित : मगर लोग क्या कहेंगे
मंजू म : मैं सब को बता दूंगी ये मेरा छोटा भाई है . वैसे भी मुझे यहाँ कोई नहीं जनता. अभी 4 महीने पहले hi ये माकन लिया है मैंने. ऊपर क पोरशन में भी 2 कमरे हैं तुम आराम से यहाँ रह सकते हो और कोई डिस्टर्बेंस भी नहीं होगी.
अमित : फ़िलहाल तो मैं हॉस्टल में हूँ मम सॉरी दीदी . जब ज़रूरत पड़ी मैं आपको बता दूंगा.
मंजू म : वैसे यहाँ मेरे पास रहोगे तो डबल फायदा होगा. एक तो घर का खाना खाने को मिलेगा दूसरा मैं तुम्हारी स्टडी में भी हेल्प कर दूंगी.
मैं और मम काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद मैंने मम से इजाज़त ली और अँधेरा होने से पहले घर क लिए निकल पड़ा. आज 5 दिन बाद मैं घर जा रहा था दिल में एक ख़ुशी थी मगर घर पर एक और बुरी खबर मेरे इंतज़ार में थी . मैं 6 बजे घर पहुँच गया . सब घर पर hi थे जैसे मेरा hi इंतज़ार हो रहा हो.
राधा चुप चाप अपने ख्यालों में खायी मेरे पीछे बैठी रही . ह्यूमेन मार्किट से सामान लिया और घर वापिस आ गए. दिव्या मौसी ने जल्दी से किचन में जा कर सारा इंतज़ाम किया और राधा उनका साथ दे रही थी. मैंने सब क साथ चाय पि और 5 बजे से पहले hi सबसे मिल कर मोहित क घर क लिए निकल पड़ा
अब आगे-
मैंने मोहित क घर पहुँच कर कपडे बदले और प्रैक्टिस करने चला गया मोहित अपने कमरे में सो रहा था और आंटी भी शायद अपने कमरे में होंगी. प्रैक्टिस से जब मैं वापिस लौटा तो मोहित क घर पर तीन गाड़ियां कड़ी थी. मैं अंदर गया तो हॉल में मोहित आंटी और मोहित क पापा बैठे हुए थे. मोहित क पापा को आज मैं पहली बार देख रहा था सामने. देखने में अचे थे नार्मल फिटनेस रंग भी साफ़ था .
मोहित : पापा ये है मेरा दोस्त अमित
मैंने आगे बाद कर अंकल क पाऊँ छुए उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया.
अंकल : भाई देखने में तो किसी अचे परिवार से लगते हो . और जो कुछ तुम्हारे बारे में सुना है मुझे यकीन हो गया है क मोहित ने तुमसे दोस्ती कर क बहुत ाचा काम किया है. मैं उम्मीद करता हूँ तुम दोनों अचे दोस्त साबित होंगे. इस दुनिया में दोस्ती सबसे नायब रिश्ता है मेरे बचो हमेशा एक दूसरे का साथ देना.
अमित : अंकल आप ने बिलकुल सही कहा दोस्ती सबसे नायब है . क्यूंकि रिश्ते हमें तक़दीर देती है मगर दोस्त हम खुद चुनते हैं और दोस्ती क लिए हमेशा जान हाज़िर है .
अंकल मेरी बात पर ख्यालों में खो गए और उनकी आँखों में पानी आ गया
मोहित : क्या हुआ डैड आप की आँखों में आंसू
अंकल मोहित की बात सुन कर होश में आये और मुझे कस क गले लगा लिया.
अंकल : शाबाश बीटा अब तो मुझे पूरा यकीन है तुम्हारे साथ मेरा बीटा हमेशा मेहफ़ूज़ रहेगा और सही रस्ते पर चलेगा. तुमने आज मुझे मेरे दोस्त की यद् दिला दी वो भी यारो का यार था. मैं आज जो कुछ भी उसी की बदौलत हूँ . काश वो आज मेरे साथ होता .
आंटी अंकल क पास आ गयी और अंकल कंधे पर हाथ रखा
आंटी : वो हमेशा आपके साथ हैं आपकी यादों में आप दिल मत छोटा करें
उसके बाद अंकल हमारे साथ काफी देर तक बातें करते रहे . अंकल दो दिन से आउट ऑफ़ स्टेशन थे इसी लिए मुलाकात नहीं हुई थी और आज अंकल क आ जाने से मुझे लगा क अब आंटी की प्यास अंकल बुझा hi देंगे सो रानी क पास जाने की उन्हें ज़रूरत माहि पड़ेगी. रत का खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए. मैंने भी सोने का सोचा मगर मेरे दिमाग में रानी की बातें घूम रहीं थी तो मैंने एक बार रानी का खेल अपनी आँखों से देखने का फैसला किया और 12 बजे का अलार्म लगा कर लेट गया.
मेरी आंख पता नहीं कब लग गयी थी मगर अलार्म की आवाज़ सुन कर मैं उठ गया. मैं जल्दी से उठा और अपने कमरे से बहार निकला घर में पूरा सन्नाटा था सब आराम से सो रहे थे . मैं चुप चाप दबे पाऊँ बहार निकला और पिछली तरफ बने हुए सर्वेंट क्वार्टर की तरफ गया.
एक क्वार्टर की लाइट जल रही थी मैं उसके पास चला गया. अंदर से आवाज़ें आ रही थी मैंने अंदर देखने की जगह ढूंढने की कोशिश की तो मुझे जगह मिल गयी. अंदर रानी पूरी नंगी थी नीचे घुटनो पर बैठ कर ड्राइवर का लैंड चूस रही थी. ड्राइवर भी नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ था. ड्राइवर सांवले रंग का था और लैंड भी मेरे मुकाबले छोटा और पतला था.
ड्राइवर लोकु : आह साली चूस और चूस मेरा लैंड . आज तेरा वो हाल करूँगा क तुझे पता चल जायेगा मेरी बात न मैंने का अंजाम क्या होता है.
लोकु रानी क सर को पकड़ कर पूरा लैंड उसके मुँह में घुसा रहा था जिससे रानी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और वो बार बार खांस रही थी .
रानी : ाखुन ाखुन आआह मैं क्या करूँ मैं तो पूरी कोशिश कर रही हूँ ाआखःह ोोूखह्ह्ह्ह
लोकु रानी को बात भी करने नहीं दे रहा था और बार बार लैंड उसकी हलक में उतर देता था
लोकु : साली चैनल कितने दिनों से कह रही है काम हो जायेगा मगर अभी तक हुआ नहीं लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी . मैं आज क बाद तेरी चुदाई बंद कर दूंगा और सब को बता दूंगा तू एक रंडी है . तेरी फिल्म सरे नौकरों क मोबाइल में होगी फिर देखना तू सब की रंडी बन जाएगी
रानी : नहीं ऐसा मत करना मैं तो वैसा hi कर रही हूँ जैसे तुमने कहा था. मालकिन को जूस में वो दवाई मिला कर देती हूँ जो तुमने दी थी जिससे उनके बदन में और आग लग जाती है . मैं तो उनकी छूट को भी चाट चाट कर उनकी आग बढ़ती रहती हूँ. आज तो मैंने उनको तुम्हारा लैंड दिखने की भी बात की थी शायद वो आ भी जाती मगर साहब आ गए
लोकु : क्याआ ! सच में वो मेरा लैंड देखने को मान गयी ?
रानी : हाँ वो लगभग मान hi गयी थी मैंने इतनी तारीफ की है तुम्हारे लैंड की क वो खुद hi मुझे कहेंगी तुम्हारा लैंड दिखने को
लोकु : बस एक बार उसको अपनी रासलीला दिखा दे फिर वो खुद को रोक नहीं पायेगी और मेरे आगे टाँगे उठा क लेट जाएगी. क्या माल है मालकिन स्वर्ग की अप्सरा है अप्सरा. एक बार उसको तबियत से छोड़ लूँ फिर तो जन्नत यही पर hi मिल जाएगी
रानी : तुम्हे तो जन्नत मिलेगी मगर मुझे क्या मिलेगा
लोकु : अरे तू क्यों चिंता करती है मेरी रानी अगर मालकिन हमारे बस में आ गयी तो फिर जो चाहो उससे ले सकते हैं तुझे तो माला माल करदूंगा.
रानी : बस इतना यद् रखना मालकिन की छूट मिलने क बाद मुझे भूल मत जाना
लोकु : बिलकुल भी नहीं मेरी रंडी तू तो मेरी रखैल है तुझे तो मैं मालकिन क साथ एक hi बिस्तर पर छोडूंगा . अब बस जल्दी से काम मर्दे मेरा
रानी : अभी 2-3 दिन साहब घर पर हैं ऐसे में कुछ नहीं हो पायेगा साहब क जाते hi कुछ करती हूँ .
मैं बहार खड़ा दोनों की बातें सुन कर हैरान था. दोनों मिल कर कैसे अपनी hi मालकिन को बर्बाद करना चाहते हैं. जिस थाली में कहते हैं उसी में छेड़ कर रहे हैं . इनकी तो माँ की . अब समझा आंटी क्यों इतनी प्यासी हैं क्यूंकि रानी उनकी आग को भड़का रही है. वो दोनों अंदर अपना काम कर रहे थे मैंने मोबाइल निकल कर उनकी रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.
लोकु : जब भी मालकिन को देखता हूँ तो लैंड फटने को हो जाता है . रानी तू बस एक बार मालकिन को मेरी बना दे मैं तुझे सच मच की रानी बना दूंगा.
रानी : मैंने कहा न तेरा काम हो जायेगा साहब को ज़रा बहार जाने दे फिर मैं मालकिन को तैयार कर लुंगी. अब पहले मेरी प्यास बुझा
लोकु ने रानी को बिस्तर पर लिटा दिया उसकी छूट में लैंड पेल दिया. लोकु ने वियाग्रा की गोली खायी थी जो उसकी बातों से पता चला फिर भी वो 10 मिनट्स से ज्यादा रानी को छोड़ नहीं पाया. दोनों का काम ख़तम होते hi मैंने रिकॉर्डिंग बंद की और वापिस अपने कमरे में आ गया.
लोकु और रानी क साथ क्या किया जाये मैंने इसके बारे में सोचने लगा . मोहित को बताता तो वो पता नहीं गुस्से में क्या कर बैठ ता और ये भी हो सकता था क वो आंटी को भी कसूरवार समझता . अंकल से भी बात नहीं की जा सकती थी. आंटी से hi बात करनी होगी और उन्हें समझाना होगा मगर उनसे बात कैसे करूँ. वैसे इन सब बातों की वजह तो अंकल का आंटी को टाइम न देना था अगर वो आंटी को टाइम देते तो शायद आंटी इतनी प्यासी न होती.
जो भी हो मोहित मेरा दोस्त है तो उसकी फॅमिली मेरी फॅमिली है उसकी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त . अब मुझे सब कुछ ठीक करना होगा. मैं लोकु और रानी को सबक सीखने क बारे में सोचता हुआ सो गया. सुबह मैं उठने में थोड़ा लेट हो गया इस लिए ग्राउंड से भी लेट वापिस आया . आंटी शायद योग कर क जा चुकी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया . अंकल डाइनिंग टेबल पर बैठे अख़बार पद रहे थे.
अमित : गुड मॉर्निंग अंकल कैसे हैं आप
अंकल : गुड मॉर्निंग अरे वह इतनी जल्दी उठ गए तुम तो और तैयार भी हो गए
तभी आंटी जूस लेकर आ गयी
आंटी : उठ गए ? अरे ये तो सब से पहले उठ जाता है और ग्राउंड में एक्ससरसीसे करने जाता है.
अंकल : क्या सच में ? वैसे कौन स ग्राउंड में जाते हो एक्ससरसीसे करने?
अमित : जी वो कॉलेज ग्राउंड में
अंकल : अरे इतनी दूर जाते हो एक्ससरीज़ करने यहीं पास में hi तो है ग्राउंड. वहां जाया करो. पता है शहर क सब बड़े लोग सब अफसर वहीँ होते है सुबह . और घर क इतना पास है क पैदल hi जा सकते हो . कॉलेज ग्राउंड में आने जाने में कितना टाइम ख़राब होता होगा
हम बातें कर रहे थे इतने में मोहित भी तैयार हो कर आ गया
मोहित : गुड मॉर्निंग डैड
अंकल : गुड मॉर्निंग . बीटा तुम भी अमित क साथ सुबह एक्ससरसीसे करने जाया करो और इसके जैसे मजबूत बनो
मोहित : डैड इसके जैसा तो बनना मुश्किल है ये तो पहलवान है मुझे तो आप माफ़ करो
बातों बातों में ह्यूमेन नाश्ता किया और कॉलेज चले गए. कॉलेज में रूटीन से लेक्चर अटेंड किये. फ्री लेक्चर में जब हम कैंटीन में बैठे थे तो शिवानी हमारे पास आ गयी.
शिवानी : कहाँ थे तुम दिखाई hi नहीं देते . लगता है तुम मुझे दोस्त भी नहीं समझते वर्ण एक फ़ोन तो कर hi सकते थे .
अमित : वो मैं बिजी था और वैसे भी मेरे पास तुम्हारा no. नहीं है.
शिवानी : ये क्या बात हुई no. नहीं है लाओ अपना मोबाइल दो
शिवानी ने ज़बरदस्ती मेरा मोबाइल लिया और मेरे फ़ोन से अपना no. डायल किया और मेरे मोबाइल में अपना no. सेव कर दिया. शिवानी मेरे साथ सेल्फी लेने की ज़िद करने लगी और मुझे hi सेल्फी लेने को कहा. मैंने पीछा छुड़ाने क लिए अपने मोबाइल से हम दोनों की सेल्फी ले ली. सेल्फी लेते वक़्त वो मेरे साथ चिपक गयी थी. उसने मेरे मोबाइल से फोटो सेंड करने क लिए मोबाइल ले लिया और मुझे कोल्ड ड्रिंक लेन को कहा.
शिवानी : अमित चलो आज हम मूवी देखने चलते हैं .
अमित : नहीं मुझे लेक्चर अटेंड करने हैं
शिवानी : अभी कौन सा इतनी स्टडी हो रही है वैसे भी एक दो लेक्चर बंक करने से कुछ नहीं होता.
अमित : नहीं मैं लेक्चर बंक नहीं करता.
शिवानी : क्या यर कितने बोरिंग हो तुम भी ाचा एक बात तुम्हे बतानी थी. मैं कॉलेज की ड्रामा टीम में चुनी गयी हूँ. और इस साल यूनिवर्सिटी क कम्पटीशन में कॉलेज टीम क साथ हिस्सा लुंगी.
अमित : ये तो बहुत ख़ुशी की बात है
मोहित : कोंग्रटुलतिओन्स इस बात पर तो पार्टी बनती है
शिवानी : वही तो मैं कह रही हूँ मगर अमित क पास तो मेरे लिए वक़्त hi नहीं है.
अमित : ऐसी बात नहीं है बस मैं लेक्चर बंक नहीं करना चाहता
शिवानी : तो कॉलेज क बाद चलें ?
अमित : नहीं शाम को मुझे प्रैक्टिस करने जाना होता है वो तो बिलकुल भी मिस नहीं कर सकता
शिवानी : ठीक है एक काम तो कर सकते हो न मेरे लिए ? मुझे मेरे प्ले की प्रैक्टिस में मेरी मदद तो कर सकते हो न?
अमित : अब इतना तो कर hi सकता हूँ मगर लेक्चर नहीं बंक करूँगा . तुम फ्री लेक्चर में एडजस्टमेंट कर लो
शिवानी : ठीक है अभी तो लेक्चर फ्री है न चलो मैं तुम्हे बता दूँ कहाँ प्रैक्टिस करते हैं हम.
मैं उसकी बात मन कर उसके साथ चल पड़ा और मोहित को भी अपने साथ ले लिया क्यूंकि मैं अकेला शिवानी क साथ नहीं जाना चाहता था. शिवानी हम दोनों को ऑडिटोरियम में ले गयी जहाँ पर स्टेज बानी हुई थी और उसके सामने 200/300 चेयर्स लगी हुई थी. स्टेज पर कुछ लड़के लड़कियां प्रैक्टिस कर रहे थे. शिवानी उनसे जा कर मिली . अगले लेक्चर का टाइम हो रहा था इस लिए मैं और मोहित जल्दी वापिस आ गए.
लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मई और मोहित साइंस ब्लॉक में गए . राधा नेहा दीदी और मीनल एक साथ थी. राधा का देखने का नजरिया आज बदला बदला सा था. नेहा दीदी क सामने मैं कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए मैंने इंदिरेक्ट्ली राधा से पुछा
अमित : राधा सब ठीक है न ? मछरों ने दोबारा तंग तो नहीं किया?
राधा मेरे सवाल पर मुस्कुरा दी और न में सर हिला दिया. आज राधा मुस्कुरा कर मेरे साथ पेश आ रही थी मेरे दिल को बहुत सुकून मिला. उसके बाद हम अपने अपने घर निकल गए . घर से फिर खाना प्रैक्टिस और फिर से वापिस रत का खाना सब रूटीन से हुआ कोई खाद बात नहीं हुई.
आज सैटरडे था और मैंने शाम को गाओं जाना था. आज कॉलेज में मंजू मम ने मुझे घर आने का प्रॉमिस यद् दिलाया और मुझे अपना एड्रेस बता दिया. मैंने भी मम को बता दिया क मैं 4 बजे आ जाऊंगा .
मैं कॉलेज से मोहित क साथ घर गया और 3 बजे क बाद गाओं जाने क लिए निकल गया. मोहित क घर से मैं मंजू मम क घर की तरफ निकल पड़ा . घर ज्यादा दूर नहीं था 30 मिनट्स में मैं मम क घर पहुँच गया. ये लोकैलिटी अछि थी मम का घर भी ाचा बना हुआ था . ज्यादा बड़ा तो नहीं मगर 2 मंज़िला था. मम क पास अपनी एक कार भी थी जिससे वो कॉलेज अति थी
मैंने जाकर बेल्ल बजायी तो मम ने दरवाज़ा खोला . मम हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी . मम ने कपडे चेंज कर लिए थे और नयी सदी बांध ली थी .
मंजू म : तुम आ गए ? मुझे तो लगा था कहीं तुम भूल जाओगे. आओ अंदर आओ
अमित : ऐसे कैसे भूल जाता मम. आप तो मेरी टीचर हैं भला आपको झूठ बोल सकता हूँ? वैसे भी माइन प्रॉमिस किया था और मैं अपने प्रॉमिस तोड़ता नहीं
मंजू म : ये तो बहुत अछि बात है. जो लोग अपने उसूलों क पक्के होते हैं वो दिल क हमेशा सच्चे होते हैं और तुम तो hi कितने अचे.
मैं मम क साथ घर क अंदर गया. घर में 2 बीएड रूम किचन और हाल था बिच में थोड़ा ओपन स्पेस . मम ने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स ले आयी
अमित : अरे मम इसकी क्या ज़रूरत थी
मंजू म : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? तुम पहली बार मेरे घर ए हो. तुमने मेरी इतनी मदद की थी मैं भला इतना भी नहीं कर सकती. और ये तकल्लुफ छोडो मैं मैडम तुम्हारी कॉलेज में हूँ यहाँ नहीं
अमित : मम आप तो हमेशा मम hi रहेंगी. वैसे आप क घर कोई और नज़र नहीं आ रहा?
मंजू म : कोई होगा तो नज़र आएगा . मैं अकेली hi रहती हूँ यहाँ
अमित : सर , ी मैं आपके हस्बैंड और आपके बचे ?
मेरी इस बात पर मम क चहरे की मुस्कुरहट गायब हो गयी और गंभीरता नज़र आने लगी.
मंजू म : मेरे हस्बैंड की डेथ बहुत पहले हो गयी थी शादी क कुछ महीनो बाद hi और बचे हैं नहीं क्यूंकि मैं माँ नहीं बन पायी थी.
मंजू मम की आँखों में पानी आ गया बात करते हुए शायद इस बात से उनके दिल की दुखती राग को मैंने छेड़ दिया.
अमित : ी म सॉरी मम . मुझे नहीं पता था . मगर आप अकेली क्यों हैं ? क्या आपका और कोई रिश्तेदार नहीं है ?
मंजू म : रिश्तेदार ? रिश्ते तो सब यहाँ मतलब क हैं . जब तक किसी को मतलब होता है तब तक hi रिश्ता होता है.
अमित : मतलब आपके रिश्तेदारों ने आप के साथ ाचा नहीं किया. वैसे आपके सेज भाई बहिन और माँ बाप कोई तो होगा?
मंजू म : माँ बाप तो बचपन में hi गुज़र गए थे. भाई हैं मगर मैंने उनसे सरे रिश्ते तोड़ लिए हैं
अमित : वो क्यों?
मंजू म : ये मेरी पर्सनल लाइफ है मैं ये नहीं बता सकती
अमित : सॉरी मम मुझे पूछना नहीं चाहिए था पर पता नहीं क्यों जब भी आपसे बात करता हूँ ऐसा hi लगता है क जैसे आप मेरी अपनी हैं.
मंजू म : मुझे भी ऐसा hi लगता है. इसी लिए तो तुम्हे घर आने को इन्विते किया वर्ण इस घर में और कोई नहीं अत. शाम को मोहल्ले क 4/5 बचे पड़ने आ जाते हैं .
अमित : तो आपका वक़्त कैसे गुज़रता है मम ? दुनिया की भीड़ में आप कितनी अकेली हैं. इंसान की ज़िन्दगी में कोई तो अपना होना hi चाहिए अकेला तो पेड़ भी सूख जाता है. क्या आपका मन नहीं होता किसी क साथ हँसा जाये किसी क साथ गम बनता जाये.
मंजू म : जिसको तकदीर ने hi अकेला कर दिया हो वो छह क भी किसी को अपना नहीं बना सकता अमित और वैसे भी अब तो ये ज़िन्दगी बस किसी तरह गुज़ारनी है . मैं गुज़ारे वक़्त की यादों और किताबों क सहारे ज़िन्दगी गुज़र रही हूँ.
अमित : आपकी एक एक बात में कितना दर्द छुपा है काश मैं आपके इस गम को मिटा सकता . आप क साथ शायद किसी जनम में मेरा रिश्ता ज़रूर रहा होगा जो आप क साथ तकदीर ने मुझे मिलाया है. अगर आप बुरा न मने तो मुझे अपना फॅमिली मेंबर समझ सकती हैं . मुझे ख़ुशी होगी अगर मैं अपने किसी काम आ सका.
मंजू म : तुम नहीं जानते तुमने इतना कह कर मेरे दिल को कितना सुकून दिया है. जब भी तुम्हे देखती हूँ मुझे भी यही लगता है क तुम मेरे अपने हो. और आज से तुम मुझे जैसे चाहे बुला सकते हो चाहे तो आंटी कहलो चाहे बुआ मौसी या जो तुम्हे ाचा लगे .
अमित : आपको देख कर तो लगता है जैसे आपने 5/6 साल पहले hi कॉलेज छोड़ा होगा ऐसे में आपको आंटी कहना गलत होगा आप तो मेरी बड़ी बहिन जैसी लगती हैं इस लिए मैं आपको दीदी कहूंगा.
मंजू म : बच्चू तुम्हे पता नहीं मेरी उम्र कितनी है वर्ण तुम दीदी नहीं कहते
अमित : मुझे तो जो लगा मैंने वो बता दिया . अब अगर आप कुछ और चाहती हैं तो मुझे अपनी उम्र बता दीजिये मैं उस हिसाब से देख लेता हूँ
मंजू म : मुस्कुरा कर) तुम्हे पता नहीं लेडीज से उनकी उम्र नहीं पूछते.
अमित : तो आप hi बताइये मैं आपको क्या कहूं
मंजू म : दीदी भी चलेगा वैसे इतना बुरा भी नहीं है . काम से काम इतना तो फील होगा hi क मैं अभी जवान हूँ.
अमित : तो ठीक है मैं आपको मंजू दीदी बुलाऊंगा . कॉलेज में मम hi ठीक रहेगा.
मंजू म : हम्म्म्म , मगर अब ख्याल भी रखना . दीदी बोलै है तो दीदी का ख्याल भी रखना होगा.
अमित : ज़रूर , आप जब बुलाएंगी हाज़िर हो जाऊंगा . आज क बाद आप खुद को कभी अकेला मत समझना मैं हमेशा आपके साथ हूँ.
मंजू म : ये हुई न बात तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया . तुम्हे कैसे बताऊँ तुम्हारी इस बात से दिल को कितनी ठंडक पहुंची है . बरसों से बंजर बन चुकी ज़िन्दगी में अपने पैन की जो बूंदे तुमने बरसाई हैं इनके लिए दिल कब से तड़प रहा था. तुम ज़रूर मेरे भाई थे पिछले जनम में भी
मंजू म ने भावुक हो कर मुझे गले लगा लिया. कितने सैलून से मैंने भाई को राखी नहीं बंधी इस बार ज़रूर बांधूंगी. तू अपनी इस दीदी को छोड़ कर कहीं जायेगा तो नहीं न.
अमित : बिलकुल नहीं दीदी . आप जब भी यद् करेंगी मुझे अपने करीब पाएंगी.
मंजू म : तो भाई तुमने मेरे बारे में तो सब जान लिया कुछ अपने बारे में भी बताओ
अमित : क्या जानना है पूछिए. वैसे मैं इतना बता देता हूँ क मैं हैं में रहता हूँ . गाओं में पहलवानी करता था उसी की वजह से कॉलेज में एडमिशन मिला है. घर में माँ है बाबा है दो छोटे मां हैं और ममी हैं .
मंजू म : तो गाओं से रोज़ उप डाउन करते हो.
अमित : जी मैं यहाँ हॉस्टल में रहता हूँ आज सैटरडे है आज गाओं जा रहा हूँ अब मंडे को आऊंगा.
मंजू म : तुम हॉस्टल में क्यों रह रहे हो? तुम चाहो तो यहाँ मेरे साथ रह सकते हो. अपनी दीदी क होते तुम हॉस्टल में रहो क्या यह ाचा लगता है?
अमित : मगर लोग क्या कहेंगे
मंजू म : मैं सब को बता दूंगी ये मेरा छोटा भाई है . वैसे भी मुझे यहाँ कोई नहीं जनता. अभी 4 महीने पहले hi ये माकन लिया है मैंने. ऊपर क पोरशन में भी 2 कमरे हैं तुम आराम से यहाँ रह सकते हो और कोई डिस्टर्बेंस भी नहीं होगी.
अमित : फ़िलहाल तो मैं हॉस्टल में हूँ मम सॉरी दीदी . जब ज़रूरत पड़ी मैं आपको बता दूंगा.
मंजू म : वैसे यहाँ मेरे पास रहोगे तो डबल फायदा होगा. एक तो घर का खाना खाने को मिलेगा दूसरा मैं तुम्हारी स्टडी में भी हेल्प कर दूंगी.
मैं और मम काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद मैंने मम से इजाज़त ली और अँधेरा होने से पहले घर क लिए निकल पड़ा. आज 5 दिन बाद मैं घर जा रहा था दिल में एक ख़ुशी थी मगर घर पर एक और बुरी खबर मेरे इंतज़ार में थी . मैं 6 बजे घर पहुँच गया . सब घर पर hi थे जैसे मेरा hi इंतज़ार हो रहा हो.