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यहाँ बिना बताये करुणा आ गयी थी.
जहान्वी : तुम इस वक़्त क्या कर रही हो यहाँ?
करुणा : क्यों नहीं आ शक्ति क्या? (करुणा ने स्माइल देते हुए कहा, वह जहान्वी के मम्मी पापा भी बैठे हुए the)Namaste अंकल, नमस्ते आंटी, देखा अंकल, अब ये काम में इतना बिजी हो गयी है की दोस्तों के लिए टाइम hi नहीं है, और में सामने से मिलने आयी तो मुझे सुना रही है.
जहान्वी : मेरा मतलब है की इस वक़्त तो तू फ्री होती नहीं है.
करुणा : अब में तो तुम्हारी तरह काम करती नहीं हु, में तो फ्री hi होती हु न, में बोर हो रही थी तो मिलने आ गयी, पर तेरा चेहरा देख कर तो लगता है की तुजे मेरा आना पसंद नहीं आया.
जहान्वी : ऐसी कोई बात नहीं है, आ बेथ.
करुणा : तेरे रूम में बैठते है.
जहान्वी : (वो नहीं जाना चाहती थी, पर मन भी नहीं कर सकती thi)Thik है. (दोनों जहान्वी के रूम में आ gaye)Ab बता, तू कैसे इस वक़्त फ्री हो गयी, तुजे तो कही और होना चाहिए था.
करुणा : वो बहार गया है, तू भी मिली नहीं थी तो सोचा तुजसे hi मिल लेती हु. और बता क्या चल रहा है, कहा बिजी रहती है आजकल?
जहान्वी : तुजे बताया तो था की में एक साइट पर काम कर रही हु, और पापा की साइट भी है, बस वही बिजी रहती हु.
करुणा : अभी से इतना काम करने लगेगी तो जवानी चली जाएगी, ये उम्र तो मज़े करने के लिए है, और वैसे भी हमे काम करने की क्या जरुरत है, एक अच्छा लड़का धुंध लो, वो काम करता रहेगा और हम ऐश करेंगे. (कहते हुए वो बिस्तर पर लेट गयी)
जहान्वी : तू नहीं बदलनेवाली. (वो मुस्कुराते हुए बोली और बीएड पर बेथ गयी)
करुणा : बदल कर फायदा भी क्या है. छोड़ वो सब, मेरा हीरो क्या कर रहा है आजकल?
जहान्वी : (वो समाज गयी की वो किसके बारे में बात कर रही hai)Abhi तो तूने बताया की तेरा हीरो बहार गया है. (उसने भी मसूकूरते हुए कहा)
करुणा : मज़ाक मात कर (अपना मुँह चढ़ाते hue)Tuje पता है में किस की बात कर रही हु.
जहान्वी : मुझे कैसे पता होगा, तेरे तो बहोत सरे हीरो होंगे.
करुणा : (अपना मुँह चढ़ाते हुए, नाराजगी से देखते हुए वो साइड के बल हुई और अपने बाये हाथ पर अपना शिर टिकते हुए वो boli)Kya में तुजे ऐसी लगती हु, तुजे पता है की ध्रुव के अलावा मेने किसी के साथ रिलेशन नहीं रक्खे.
जहान्वी : तो फिर इस हीरो के पीछे क्यों पड़ी है?
करुणा : उसकी बात hi अलग है यार, (कहते हुए वो फिर लेट गयी और तकिये को जोरो से कास liya)aur वैसे भी तेरा चक्कर तो है नहीं उसके साथ तो फिर क्या दिक्कत है, इस गरीब का hi कुछ भला हो जायेगा. या फिर तेरे और उसके बिछ कुछ हुआ?
जहान्वी : तुजे क्यों इतनी पंचाट है, जो होगा वो में देख लुंगी.
करुणा : तू कितनी किस्मतवाली है यार, मज़ा आता होगा तुजे उसके साथ, है न? (उसने ऐसे hi हवा में तीर छोड़ा)
जहान्वी : हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं है, तू क्या समझती है, में तेरी बातो में आ जाउंगी क्या.
करुणा : पागल है तू, तेरी जगह अगर में होती तो न जाने कबसे उसको अपनी जवानी के मज़े दे चुकी होती. तेरा मान नहीं होता क्या?
जहान्वी : तू यही बात करने आयी है क्या, कोई और बात कर. (जहान्वी ने चिढ़ते हुए कहा)
करुणा : भड़कती क्यों है, जब तू भड़कती है तो मुझे शक होने लगता है, अगर कुछ नहीं है तेरे और उसके बिच तो मिलने दे न मुझे.
जहान्वी : तो मेने कहा मन किया है, मिल ले जा कर.
करुणा : ऐसे कैसे बात करू यार, एक दो बार मिलवाना तू, फिर में संभल लुंगी.
जहान्वी : मुझसे ये उम्मीद मत रखना, में ऐसा वैसा कुछ नहीं करनेवाली.
करुणा : ऐसा क्या करना है तुजे, जब तू उसको मिलनेवाली हो तो मुझे बता दे, में आ जाउंगी, एक दो मुलाकात होगी तभी तो में कुछ कह पाऊँगी.
जहान्वी : उसका मुँह में तो ले चुकी है, अब किस बात की शर्म है तुजे?
करुणा : वो बात अलग थी यार, उस समय तो ऐसा दिखाया था न की में ये सब मजबूरी में कर रही हु, अब कैसे कह दू की आ जा, में तड़प रही हु.
जहान्वी : तू कहेगी, तब भी वो नहीं आएगा, वो वैसा नहीं है, में कितनी बार संजो तुजे.
करुणा : तूने तो अपने निचे टाला लगा लिया है, पर मेने तो नहीं लगाया न, जब से उसका देखा है यार सच कहती हु, ध्रुव का लेने में भी मज़ा नहीं आता, वो करता है पर सोचती हु शिव के बारे में, एक बार करवा दे यार, तू कहे तो जिंदगी भर तेरी गुलामी करुँगी.
जहान्वी : कितनी बेशर्म हो गयी है तू, और इतना भी क्या हो गया है तुजे जो ऐसा बोल रही है.
करुणा : अब कैसे संजो तुजे, पता नहीं तुजे कुछ क्यों नहीं होता. (वो बात कर रहे थे की ध्रुव का फ़ोन आया, उसने फ़ोन uthaya)Hello (xxxxxxx)Me जहान्वी के घर हु (क्सक्सक्सक्सक्स, सामने से बात सुन कर करुणा मुस्कुराने lagi)Achchha ठीक है, में घर पहुंच कर फ़ोन करती हु. (उसने फ़ोन रख diya)Tera नाम सुनते hi उसकी सिटी पित्ती गम हो जाती है. चल यार मुझे तो जाना होगा, फिर तुजे कहती हु, यार एक बार सेटिंग करवदना, आगे में खुद देख लुंगी.
जहान्वी : शर्म कर, जा अब यहाँ से, जिसका फ़ोन आया है उसी के साथ लगी रह.
करुणा : (मायूस हो kar)Wo तो है hi. चल कोई नहीं, मिलती रहना, और क्या कहु, bye.
जहान्वी : Bye. (करुणा निकल गयी, पर वो शिव के बारे में सोचने लगी, वो बीएड पर लेट कर करवाते बदल रही थी, पर उसको चैन नहीं मिल रहा था, बार बार उसके सामने शिव का चेहरा आ रहा था, वो शिव के साथ इतना आगे बढ़ चुकी थी, उसे शिव का वो छूना, उसके बदन को सहलाना, उसकी छूट पर लुंड रगड़ना, सब याद आ रहा था, वो आंखे बंद किये हुए अपनी छूट सहलाने lagi)Kya करू कुछ समाज में नहीं आ raha(wo बड़बड़ायी, अपनी छूट सहलाते हुए उसको सुकून आने लगा, वो और जोर से सहलाने lagi)Shhhhhh शिईयिव. (वो अपने आप को भी कोशने lagi)Tuje hi नखरे चढ़े थे, वैसे भी कुवारी तो है नहीं तू, वो भी कर लेता तो क्या फर्क पद jata.(Use शिव की बहोत याद आ रही थी, उसने फ़ोन निकला और कॉल कर दिया)
शिव : Hello. (सामने से कोई आवाज नहीं आयी) Hello. (शिव ने अपने फ़ोन को देखा, कही कट तो नहीं हो गया, पर कॉल चालू thi)Hello. (फिर भी सामने से आवाज नहीं आयी, शिव ने कॉल काट दिया और सामने कॉल lagaya)Hello. (मेने ध्यान से सुना तो मुझे सामने से ससो की आवाज आ रही thi)Jhanvi.
जहान्वी :हम्म्म्म.
शिव : क्या हुआ, बोल क्यों नहीं रही हो? (उसने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया, बस सस्से सुनाई दे रही थी) आप ठीक तो हो न? (फिर भी वो कुछ नहीं boli)Please कुछ बोलो.
जहान्वी : (उखड़ती ससो se)Kaaab आए रही होओओओ.
शिव : कल hi तो बताया था, क्या हुआ है आपको?
जहान्वी : प्लीज जल्दी आ जाओ. (कह कर उसने कॉल काट दिया)
मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा था, पर मेने फिर कॉल नहीं किया. वह बिना की धड़कने तेज हो चुकी थी, उसकी गॉड में एल्बम पड़ा हुआ था, उसकी सासे तेज चल रही थी, वो एल्बम को hi देखे जा रही थी, जो अभी बंद था, उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी उसको खोलने की. उस एल्बम में hi ये जवाब था की शिव hi शिवांस है की नहीं, पर पता नहीं क्यों उसका दिल घबरा रहा था.
सुखदेवजी : क्या सोच रही हो बेटी? (उन्हें भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर वो खोल क्यों नहीं रही है, कब से उसको तस्वीर देखनी थी, और अब जब एल्बम सामने है तो वो देख नहीं रही है)
बिना : हहह है. (कहते हुए उसने कांपते हाथो से पहला पेज ओपन किया, पहले hi पेज पर शिवांस की मुस्कुराती हुई क्लोज़अप तस्वीर थी, उसका दिल जैसे एक धड़कन चंक गया, ये शिव hi था, है इसमें थोड़ा छोटा था और थोड़ा भरा हुआ चेहरा था, पर वो शिव की बचपन की तस्वीर से पूरी तरह मेल खा रहा था, वो उसको देखे जा रही थी, उसकी आंखे, उसकी नाक, उसके होठ, वो इतनी खो गयी थी की वो उसी पेज को देख रही थी, सुखदेवजी और ऐश्वर्या, दोनों बिना को hi देख रहे थे)
सुखदेवजी : क्या हुआ बेटी?
बिना : (हकलाते hue)Nnnnahi, कककुछ नहीं, (सँभालते हुए) कितना क्यूट है न?
सुखदेवजी : हमने तो इस एल्बम को देखना hi छोड़ दिया है, पता नहीं आज कितने सालो बाद इसे बहार निकला है, इसे देख कर पुराणी यादे तजा हो जाती है, कितने खुस थे सब, पता नहीं क्या से क्या हो गया.
बिना : क्या में इसकी फोटो ले सकती हु? (उन्होंने है कहा तो बिना ने अपने फ़ोन से उस फोटो की इमेज ले ली. फिर वो दूसरे फोटो भी देखने लगी, ये एल्बम उसके दूसरे जन्म दिन का था, फोटो से hi लग रहा था की कितनी धूम धाम से मनाया होगा, सबके चेहरों पर खुसी साफ़ झलक रही थी, उसने कुछ आल फोटो को भी अपने मोबाइल में कैद किया, सारा एल्बम देखने के बाद उसने वो टेबल पर रख दिया, पर अभी भी उसकी नज़ारे उस एल्बम पर hi तिकी थी)
सुखदेवजी : कोई बात है क्या बेटी?
बिना : न न नहीं तो.
सुखदेवजी : कोई तो बात है बेटी, वर्ण तुम इतनी दूर नहीं आती, वो भी ऐसी हालत में,
बिना : नहीं अंकल, बस इनके बारे में सुना था तो देखना था, वह इनकी कोई भी तस्वीर नहीं है.
सुखदेवजी : ठीक है बेटी, रात बहोत हो गयी है, आराम करो.
बिना : जी अंकल. (वो अपने कमरे की और चल पड़ी, दोनों उसे जाता हुआ देख रहे थे)
ऐश्वर्या : आपको क्या लगता है?
सुखदेवजी : पता नहीं, पर कुछ तो है.
ऐश्वर्या : (थोड़े गुस्से se)Apko मेने कितनी बार संजय है की उस घर से नाता मत रखिये, आप जानते है न, आखिर ये भी तो है उसी घर की, पता नहीं अभी इसके दिमाग में क्या चल रहा होगा? प्रकृति भी अब बड़ी हो गयी है, आपको जरा भी फ़िक्र नहीं है उसकी, अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो देख लेना आप?
सुखदेवजी : मेने सिक्योरिटी लगा दी है उसकी, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं होगा उसको. (सुखदे भी चिंतित लग रहा था, वो सोच रहा था की उसने बिना को बुला कर कोई गलती तो नहीं कर दी, क्यों की उसका व्यव्हार कुछ संदिग्ध लग रहा tha)Vaise भी वो कल चली जाएगी, तुम नजर रखना, चलो, हम भी सोते है. (वो दोनों भी अंदर चले गए, अंदर आ कर |बिना फिर से वही फोटो देख रही थी, सामने हो कर भी उसको यकीं नहीं हो रहा था, पर जो सच था वो सच था, अब आगे क्या करना है वो hi सोच रही थी, पर उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, उसने सुखदेवजी को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया था, हलाकि उसे लग रहा था की सुखदेवजी सही आदमी है पर फिर भी उसको अभी भी शिव को ले कर चिंता थी, वो अभी कोई भी कदम जल्दबाजी में लेना नहीं चाहती थी, उसने स्वर्ण को फ़ोन लगाया, खुशकिस्मती से स्वर्ण अभी अकेली hi थी रूम में)
स्वर्ण : Hello.
बिना : सो गयी थी क्या?
स्वर्ण : नहीं भाभी, अभी वो नहीं आये है तो इंतजार कर रही थी, आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?
बिना : है सब ठीक है, में सुखदेवजी से मिलने आयी हु.
स्वर्ण : क्या, आप वह पहुंच गयी. कुछ पता चला?
बिना : है.
स्वर्ण : (स्वर्ण का दिल भी जोरो से धड़कने laga)Kya पता चला? (उसकी आवाज में भी उत्सुकता थी)
बिना : मुझे लगता है की शिव hi योगेन्द्राचाचा का लड़का है.
स्वर्ण : क्या सच में? कैसे पता चला?
बिना : मेने उसकी बचपन की फोटो देखि, शामे तो शामे है.
स्वर्ण : मुझे भेजिए न, मुझे भी देखना है.
बिना : रुकिए. (कह कर उसने फ़ोन से दोनों फोटो भेजी, जो उसने रजिस्टर से ली थी वो और जो सुखदेवजी के पास से ली थी wo)Mene भेज दी.
स्वर्ण : एक मिनट भाभी. (कहते हुए उसने दोनों फोटो kholi)Ye दोनों फोटो तो शामे लग रही है.
बिना : एक फोटो मेने शिव के अनाथालय से ली थी और दूसरी फोटो मेने सुखदेवजी के एल्बम से ली है.
स्वर्ण : और क्या बताया उन्होंने?
बिना : आपको थोड़ा दुःख होगा, पर उन्होंने जो बताया उस से तो लगता है की ताऊजी ने hi शिवांस को मरने की कोशिस की है.
स्वर्ण : (अपने पापा के बारे में सुन कर उसे धक्का तो लगा पर उसे इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था, वो खामोश हो गयी)
बिना : देखो, बुरा मात मन न पर जो मुझे सुखदेवजी ने बताया उसी हिसाब से कह रही हु, वैसे तो उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिस से साबित हो सके की ये सब ताऊजी ने किया है, हो सकता है की ये एक हादसा hi हो, कुछ भी यकीनी तौर पर नहीं कहा जा सकता, पर अगर ये सब ताऊजी ने जानबुज कर किया है तो वो दोबारा भी कर सकते है, इसीलिए सब सोच समाज कर फैसला करना पड़ेगा.
स्वर्ण : (उसकी आवाज में दर्द छलक aaya)Bhabhi, अगर शिव को पता चला की उसकी इस साजिस के पीछे मेरे पापा का हाथ है तो वो मुझसे नफ़रत करने लगेगा.
बिना : (बिना भी ये सुन कर सोच में जरूर पद गयी थी, पर वो शिव को जानती thi)Muje नहीं लगता, और इसमें आपकी क्या गलती है, आपने थोड़ी न कुछ किया है.
स्वर्ण : मेने भले hi कुछ न किया हो, पर किया तो मेरे hi पापा ने है न, उसका असर तो मुज पर भी होगा.
बिना : अभी से इतना दुखी होने की जरुरत नहीं है, आगे क्या करना है वो सोचना है. में ममता दीदी से भी बात करती हु, फिर हम सोचते है की आगे क्या करना है. मेने अभी ये बात किसी से शेयर नहीं की है, यहाँ तक की मेने सुखदेवजी को भी नहीं बताया है. शिव की सुरक्षा का सवाल है, अगर ये बात सामने आ गयी तो पता नहीं क्या होगा.
स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, हमे सोच समाज कर कदम उठाना पड़ेगा.
बिना : अच्छा में रखती हु, ममतादिदी को भी बताना है.
स्वर्ण : अभी शिव को कुछ मत बताना भाभी. (उसने जैसे रिक्वेस्ट की)
बिना : है ठीक है. Bye. (उसने फ़ोन रख दिया, फिर ममता को भी फ़ोन पे सब बताया, ये सुन कर ममता भी बहोत खुस थी, पर अब कही न कही ये पता चल गया था की वो उसका भाई है और उसके होनेवाले बच्चे का बाप भी तो वो भी थोड़ी चिंतित थी, पर इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था तो ज्यादा जतका नहीं लगा उसे)
बिना फ़ोन रखने के बाद फिर से खयालो में खो गयी, उसको शिव का चेहरा नजर आने लगा, उसे शिव को खोने का दर भी सताने लगा, वो सोचने लगी की अब जब ये बात सामने आ जाएगी तो क्या वो शिव के साथ सम्बन्ध रख पायेगी. हलाकि इस बात को वो पहले भी कई बार सोच चुकी थी पर तब और अब में आसमान जमीं का फर्क था, पहले सिर्फ सनका थी और अब यकीं है. उसने कांपते हाथो से शिव को फ़ोन लगाया. शिव अभी अभी सोने के लिए बिस्तर में लेता था.
शिव : (कॉल लेते hue)Hello.
बिना : सो गए थे क्या?
शिव : नहीं, अभी पढ़ कर बिस्तर पर लेता hi था. आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?
बिना : क्यों में फ़ोन नहीं कर सकती क्या? (वो जैसे उस पर हक़ जताने लगी)
शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, में बस पूछ रहा था.
बिना : (प्यार se)Muje याद करते हो?
शिव : ये भी कोई पूछने की बात है, कहिये कैसे फ़ोन किया?
बिना : (थोड़ा रूत kar)Aise hi फ़ोन किया था, क्या में ऐसे hi फ़ोन नहीं कर सकती.
शिव : (वो समाज गया और उठ कर बहार बालकनी में चला गया क्यों की दुर्वेश पास के hi बीएड में सोया tha.)Muje लगा शायद मैडम ने फ़ोन किया था, इस लिए पूछ रहा था. (शिव ने मुस्कुराते हुए प्यार से कहा)
बिना : मैडम ने फ़ोन नहीं किया है, बिना ने किया है. (बोलते हुए भी उसको शर्म आ रही थी)
शिव : कैसी है आप, तबियत ठीक है न?
बिना : है ठीक है, तुम कैसे हो?
शिव : में भी अच्छा हु, ट्रेनिंग भी अच्छी चल रही है, शायद नेशनल टीम में सेलेक्ट हो जाऊंगा.
बिना : वो तो जरूर होंगे, तुम हो काबिल. (फिर वो शांत हो गयी)
शिव : क्या हुआ, खामोश क्यों हो गयी.
बिना : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi.
शिव : बात तो जरूर कुछ है, में महसूस कर सकता हु, कोई परेशानी तो नहीं है न?
बिना : (वो समाज रही थी की शिव उसके साथ कितना जुड़ चूका है, बिना कहे hi वो महसूस करनेलगा hai)Nahi, बस तुम्हारी याद आ रही थी. (उसने शरमाते हुए आखिर कह hi diya)Juhi के रहते हम अच्छे से मिल नहीं पाए न.
शिव : में समझता हु, इस बार मिलूंगा तो आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा.
बिना : (शरमाते hue)Jaldi आना.
शिव : ठीक है.
बिना : अच्छा में रखती हु, bye.
शिव : Bye. (शिव को थोड़ा अजीब लगा, ऐसे कभी वो फ़ोन नहीं करती, पर अब वो भी समाज रहा था की ये स्वाभाविक है, वो उसकी मैडम नहीं पर उसके होनेवाले बच्चे की माँ है तो ये स्वाभाविक है की उस पर हक़ करे, उनके बारे में सोचते सोचते वो बिस्तर में आके सो गया)
सुबह उठ कर में अपनी ट्रेनिंग में लग गया, मेरा परफॉर्मन्स दिन बा दिन बिहार होते जा रहा था, मेरा स्टैमिना भी बढ़ रहा था. कोच ने मुझे बताया की उन्हें बहोत आशा है मुझसे, ये मेरा हौसला बढ़ने के लिए काफी था.
उस और बिना सुबह नास्ता वगैरह ख़तम कर चुकी थी, उसको सुखदेवजी और ऐश्वर्याजी के व्यव्हार में कुछ अलग लगा, जैसे वो उस से थोड़ा किनारा कर रहे है ऐसा लगा, इस बात से वो थोड़ी विचलित भी हुई, वैसे तो वो शिव के बारे में जीकर करने में असंजस में थी, पर अब उसने न बताना hi बेहतर समजा. अभी वो ऐसे किसी पर भरोसा नहीं कर सकती थी, वैसे तो उसको सुखदेवजी की बताई बातो पर यकीं था, पर यहाँ बात शिव के जीवन की थी तो वो फंक फंक कर कदम रखना चाहती थी. औपचारिक बातो के बाद वो विदा लेकर वह से अपने घर के लिए निकल गयी, सुखदेवजी ने hi गाड़ी भेजी थी.
कल रात से hi स्वर्ण का मान बहोत दर रहा था, उसने सुबह शिव को कॉल किया, पर उसने उठाया नहीं, इस बात से उसके मान में दार और गहराता गया, वो सोचने लगी की कही बीणाभाभी ने शिव को बता तो नहीं दिया, हलाकि उसने मन किया था, पर हो सकता है की उन्होंने बता दिया हो, उसने बिना को भी फ़ोन लगाया पर उनका फ़ोन ऑउटफ कवरेज आ रहा था. वो बेचैन हो रही थी. उसको कृपाली का भी फ़ोन आया था वो रो रही थी.
स्वर्ण : क्या हुआ, क्यों रो रही हो? (स्वर्ण ने चिंतित स्वर में पूछा)
कृपाली : दीदी, मेरे पीरियड्स चालू हो गए है.
स्वर्ण : (वैसे तो उसको यकीं था की ऐसा hi होनेवाला है, पर उसने कृपाली को हौसला diya)To क्या हुआ, इसमें रोनेवाली क्या बात है.
कृपाली : ये आप कह रही है, दीदी मेरा क्या होगा? (उसने रट हुए कहा)
स्वर्ण : अरे पागल, तू दवाई खा रही है न, तुजे क्या लगता है की ऐसे कोई चमत्कार हो जायेगा, दवाई का असर होने में समय तो लगता है न, ऐसा तो है नहीं की तूने दवाई चालू की और सब ठीक हो गया, शरीर है, उसको सही होने में समय लगता है.
कृपाली : पर दीदी, डॉक्टर ने तो कहा था की मुजमे कोई कमी नहीं है, फिर दवाइओ से क्या होगा?
स्वर्ण : तेरे इस सवाल का जवाब मेरे पास भी नहीं है.
कृपाली : (और रोने lagi)aap hi ऐसा कहोगी तो मेरा क्या होगा दीदी, में किस को अपना दर्द बताऊ.
स्वर्ण : देख तू रो मात, रोने से कोई हल नहीं निकलनेवाला, तुम टेस्ट तुबे बेबी के बारे में सोचो, शायद उस से बात बन जाये.
कृपाली : पर डॉक्टर ने तो कहा था की अगर आपके पति में शुक्राणु प्रॉपर नहीं है तो दूसरे के शुक्राणु से तरय करेंगे, वो नहीं मानेंगे दीदी. घरवाले भी इसके लिए तैयार नहीं होंगे. (वो रट हुए बोली)
स्वर्ण : तो फिर एक hi रास्ता है, पर वो शायद तुजे अच्छा नहीं लगेगा.
कृपाली : वो क्या दीदी?
स्वर्ण : देख मुझे गलत मात समझना, पर इसके अलावा कोई रास्ता मुझे नजर नहीं आता.
कृपाली : आप बताओ तो सही दीदी.
स्वर्ण : तू किसी और se...(Wo आगे नहीं बोली)
करअपलि : ये क्या कह रही हो दीदी, छी, में ऐसा नहीं कर सकती.
स्वर्ण : मेने कहा था न की तुजे अच्छा नहीं लगेगा.
कृपाली : अगर आप मेरी जगह होती तो ऐसा करती दीदी? (स्वर्ण खामोश हो गयी, वो क्या कहती की वो ऐसा कर चुकी hai)Dekha, आप खामोश हो गयी न, कहना आसान है दीदी.
स्वर्ण : अब में क्या कहु तुजे, चल छोड़ उसको, तू अगली बार तरय करना, अगर घर में कुछ हो तो मुझे बताना, में बात करुँगी, ऐसा थोड़ी न होता है की तुरंत कोई रिजल्ट मिल जाये.
कृपाली : मेने उन्हें भी नहीं बताया की मेरे पीरियड्स आ गए है, मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही है दीदी, में क्या करू समाज में नहीं आ रहा, में मर जाउंगी दीदी.
स्वर्ण : मरूंगी एक जो ऐसे वैसे कोई विचार अपने दिमाग में लायी तो. मरने को तैयार है, पर वो करने को तैयार नहीं है.
कृपाली : पर दीदी, वो कैसे कर सकती हु में, ये तो देखा होगा.
स्वर्ण : जब वो तुजे छोड़ देगा तब रोटी रहना.
कृपाली : ये आप क्या कह रही हो दीदी. (कहते हुए वो रोने लगी)
स्वर्ण : अभी तो रोना बंद कर, वैसे भी अभी तेरे पीरियड सुरु हुए है, वैसे भी दस पन्द्र दिन तो कुछ होनेवाला है नहीं, तू दवाई कहती रह, फिर बात करते है, और सुन, उलटे सीधे विचार दिमाग में लाये न तो मार खायेगी.
कृपाली : जी दीदी.
स्वर्ण : चिंता मात कर, सब ठीक हो जायेगा. चल में रखती हु.
कृपाली : जी दीदी, bye.
स्वर्ण को भी समाज में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, एक और उसका दिमाग शिव को ले कर अटका हुआ था और ऊपर से कृपाली की बाटे, उसको पता था की इसका हल शिव hi है, पता नहीं क्यों पर यही एक विकल्प है, ऐसा क्यों है वो उसकी समाज से बहार था पर यही एक विकल्प है, पर समस्या ये थी की इन दोनों को मिलाये कैसे, और ऊपर से कृपाली कुछ करने को तैयार नहीं है, करे तो क्या करे ये समाज में नहीं आ रहा था उसको. वो अपने काम में लग गयी. दोपहर को जब खाना निपटा कर वो किचन साफ़ करवाराही थी तभी शिव का फ़ोन आया, उसकी धड़कने तेज हो गयी, उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया.
स्वर्ण : Hello.
शिव : नमस्ते, स्वर्णजी, आपने फ़ोन किया था?
स्वर्ण : है, पर तुमने उठाया नहीं.
शिव : वो में ट्रेनिंग में था, कहिये कैसे याद किया? (शिव के लहजे और बात करने के तरीके से स्वर्ण को इतना तो यकीं हो गया की अभी उसको कुछ पता नहीं है)
स्वर्ण : बस ऐसे hi फ़ोन किया था, बहोत दिन हो गए तुमसे बात किये हुए तो फ़ोन किया था. कैसे हो tum?kaisa चल रहा है सब?
शिव : सब ठीक है, बढ़िया चल रहा है सब.
स्वर्ण : कब आने वाले हो तुम?
शिव : क्सक्स तारीख को ानेवाल हु. कोई काम था क्या?
स्वर्ण : नहीं बस ऐसे hi पूछ रही थी.
शिव : आपकी तबियत कैसी है?
स्वर्ण : (अपने पेट पर हाथ रखते hue)Sab ठीक है शिव, में भी और बच्चा भी. (अचानक से औपचारिक बात खास हो gayi)thank यू, पूछने के लिए.
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप?
स्वर्ण : नहीं कुछ नहीं, आओगे तो मुझसे मिलोगे तुम?
शिव : है क्यों नहीं.
स्वर्ण : शिव, मुझसे नाराज मात होना. (उसके दिल की बात उसकी जबान पर आ गयी)
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप, में क्यों नाराज होने लगा.
स्वर्ण : में तो बस ऐसे hi कह रही थी.
शिव : कुछ हुआ है क्या?
स्वर्ण : नहीं शिव, में तो बस ऐसे hi कह रही थी. तुम कोई टेंशन मात लो, आ जाओ तो बताना, में मिलने आउंगी.
शिव : है, ठीक है, अपना ख्याल रखियेगा.
स्वर्ण : तुम भी, bye.
उसने फ़ोन रख दिया, फ़िलहाल तो कोई टेंशन नहीं थी, पर क्या जब उसको पता चलेगा तो वो उसके साथ ऐसे hi रहेगा? इस सवाल का जवाब नहीं था उसके पास. उसने ऊपर की और देख कर हाथ जोड़े जैसे उपरवाले को प्राथना कर रही हो की सब ठीक कर देना.
खाने के बाद में और दुर्वेश बहार टहलने निकले, कारन नहीं आया, और कोई जगह पास में नहीं थी तो हम वही जूस सेंटर पर पहुंच गए. प्रकृति तो नहीं दिखी, पर उसकी सहेलिया बैठी हुई थी. हमे देख कर उसकी एक सहेली ने स्माइल दी और हमे वही आने का इस्सर किया तो हम वही चले गए,
जेनी : Hi.
शिव : Hello.
जेनी : मेरा नाम जेनी है, आओ न, हमारे साथ ज्वाइन करो.
शिव : नहीं, आप लोग बैठिये, बी थे वे, मेरा नाम शिव है और ये मेरा दोस्त दुर्वेश.
जेनी : तुम्हारा नाम तो याद है, उस दिन उस लड़के ने इंट्रो करवाया था न, क्या नाम था उसका, है कारन, वही नाम था न उसका?
दुर्वेश : इसका नाम याद है और हमारा नाम याद नहीं. (दुर्वेश ने ऐसे hi टॉन्ट मारा)
जेएनय : अब इसमें में क्या करू. (उसने मुस्कुरा के kaha)Betho न शिव, तुमसे बिल नहीं भरवाएंगे, चिंता मात करो.
शिव : ऐसी बात नहीं है. (कहते हुए हम उनके साथ बेथ गए) प्रकृति नहीं आयी?
मंजीत : मेरा नाम क्या है शिव? (में उसको देखने लगा, वो जैसे मेरा इन्तेहाँ ले रही थी)
शिव : जहा तक मुझे याद है, उस दिन आपकी पहचान नहीं करवाई गयी थी.
मंजीत : वो तो प्रकृति की भी नहीं करवाई थी.
शिव : है पर में उन्हें पहले से जनता हु.
जेनी : क्या सच में, वो कैसे?
शिव : वो मुझे एक कॉम्पिटिओं के दौरान मिली थी, मेरा चेकउप उसी ने किया था.
जेनी : कोनसा कॉम्पिटिओं? (मेने डिटेल batayi)Waha तो में भी थी, ओह याद आया, तभी मुझे लग रहा था की मेने तुम्हे कही देखा है. तुम उस दिन भी प्रकृति से बात कर रहे थे, अब याद आया.
फिर हम वह काफी देर बैठे, बहोत सी बाते हुई, बस ऐसे hi हसी मजाक चला, उन्होंने बताया की वो वह की कॉलेज में पढ़ती है और हॉस्टल में रहती है. जब पैसे देने की बात आयी तो मेने देने चाहे पर उन्होंने मन कर दिया, फिर हम वह से निकल आये. जब वो लोग हॉस्टल पहुंची तो अस उसुअल प्रकृति पढ़ रही थी.
जेनी : तूने बताया नहीं की तू शिव को जानती है.
प्रकृति : (वो जानती थी की जेनी किसकी बात कर रही है पर फिर भी उसने अनजान बनते हुए kaha)Kon शिव?
जेनी : अब ज्यादा नाटक मात कर, मुझे पता है की तुम शिव से पहले hi मिली हो.
प्रकृति : में क्यों मिलने लगी उस से. और तुम्हे किसने बताया की में मिली हु उस से.
जेनी : आज शिव मिला था, उसीने बताया.
प्रकृति : क्या बताया?
जेनी : यही की एक कॉम्पिटिओं की चेकउप कैंप में तुम उस से मिली थी.
प्रकृति : वो तो तुम भी कई लोगो से मिली थी, क्या तुम्हे सब याद है?
जेनी : ऐसे क्यों बात कर रही है, मेने तो बस ऐसे hi कहा था.
प्रकृति : तुम्हे पता है न की मुझे इन फालतू की बातो में कोई इंट्रेस्ट नहीं है.
जेनी : सॉरी यार, मेने तो बस ऐसे hi कहा था. (उन्हें भी पता था की प्रकृति को ये सब पसंद नहीं है, वैसे भी वो प्रकृति से डरते hi थे तो ज्यादा बहस नहीं की, और वो लोग भी अपनी अपनी किताबे ले कर पढ़ने बेथ गयी)
वैसे तो प्रकृति को शिव याद hi था, और ये सुन कर की वो भी शिव को याद है, ये सुन कर उसे अंदर से अच्छा लगा, पर उसने अपने आपको संभाले रक्खा था, वैसे भी ये सब बाते उसके लिए फालतू hi थी. जब वो पहली बार शिव से मिली थी तब भी उसे शिव का चेहरा काफी जानापहचाना लगा था पर उसने इस बात को ज्यादा तवज्जु नहीं दिया था, उसे अपने काम के अलावा जैसे किसी बात में इंट्रेस्ट नहीं था, शिव ने भी जब उस से बात करने की कोशिस की थी तब भी उसने नकार दिया था. वो शिव के प्रति एक खिंचाव महसूस कररही थी पर उसने उस फीलिंग को दबा दिया था, वो अपने अंदर ऐसी कोई भी फीलिंग को पनपनेदेना नहीं चाहती थी. वो फिर अपनी किताबो में खो गयी.
दूसरे दिन नाज़िआ अपने मायके आयी थी, उसका पति भी साथ में आया था, संयम भी स्कूल नहीं गयी, नाज़िआ को बहोत अच्छा लगा जब उसने देखा की उसकी अम्मी और संयम मस्ती कर रहे थे.
नाज़िआ : लगता है इन दिनों में माँ बेटी बहोत करीब आ गए है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था)
संयम : (चहकते हुए boli)Ha, में और अम्मी सहेलिया जो बन गयी है, क्यों अम्मी? (ज़ोया बस मुस्कुरायी)
नाज़िआ : में और अम्मी तो काफी पहले से सहेली बन गए है, क्यों अम्मी?
संयम : आप और मुज में बहोत फर्क है आप, में तो अम्मी की पक्किवली सहेली बन गयी हु. क्यों अम्मी?
नाज़िआ : तुजे पता नहीं है, में और अम्मी भी पक्की वाली सहेलिया hi है. क्यों अम्मी?
संयम : होंगी, पर में ज्यादा पक्की हु, क्यों अम्मी?
ज़ोया : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, मेरे लिए दोनों सामान हो. तू भी क्या नाज़िआ, तुजे पता हैना की ये कैसी है, फिर क्यों इस से बहस कर रही है. सामान ले कर नहीं आयी तू, क्यों रहना नहीं है?
नाज़िआ : मेने इनसे बहोत कहा पर ये आने hi नहीं दे रहे है, कह रहे है अगर मिलना है तो में साथ में चलता हु, मिल कर वापस आ जायेंगे. मुझे अकेला छोड़ते hi नहीं है, कही भी आने जाने नहीं देते, सब मेरा इतना ख्याल रख रहे है जैसे में कोई कांच की गुड़िया हु. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)
ज़ोया : किसी की नजर न लगे मेरी बच्ची की खुसियो को. (कहते हुए ज़ोया ने अपनी आंख से काजल लिया और उसको टिका कर दिया)
नाज़िआ : (संयम ko)Shiv को फ़ोन कर दे, पर अभी तो वो स्कूल में होगा, मश्ग कर दे, जाते वक़्त यही से हो कर जाये.
संयम : कोई फायदा नहीं आप, वो सहर में hi नहीं है, बहार गया है.
नाज़िआ : (उसका दिल टूट गया, कितनी उम्मीदों से आयी थी वो, एक नजर देख hi लेती, उसने उदास हो कर kaha)Kaha गया है? (ज़ोया उसकी उदासी समाज रही थी, पर संयम को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था)
संयम : वो ट्रेनिंग के लिए गया है, क्सक्सक्स सहर में, चार दिन बाद आएगा. (उसने भी थोड़ी उदासी से कहा)
नाज़िआ: अब तो लड़ाई नहीं हो रही न तुम लोगो के बिच? (उसने ऐसे hi पूछा)
संयम : में क्यों लड़ूंगी उस से?
नाज़िआ : चलो अच्छा है. (ऐसे hi उनलोगो में बात होती रही)
बिना लौट आयी थी, स्वर्ण उस से मिलने आयी थी. दोनों एक दूसरे के गले मिली. जूही थी नहीं तो दोनों अच्छे से बात कर सकती थी.
स्वर्ण : अब क्या सोचा है भाभी?
बिना : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा. एक और तो लगता है की उसको सब बता दू, पर फिर लगता है की अभी वो कुछ हासिल करने के लिए लगा हुआ है, ऐसे में अगर उसकी जिंदगी में ये भूचाल आ गया तो वो डिस्टर्ब हो जायेगा, अगर उसने ताऊजी के बारे में सुना और वो उनसे उलझाने लगा तो पता नहीं क्या हो जायेगा, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा.
स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, अगर वो अभी अपनी दिशा से भटक गया तो वो जो हासिल करना चाहता है वो नहीं कर पायेगा. और वैसे भी उसने अपने पैरो पर चलना सिख लिया है, पर कभी न कभी तो उसको बताना होगा, उसे भी अपने mata-pita के बारे में जान ने का हक़ है. (फिर घबराते हुए, उसे बिना का हाथ पकड़ liya)Wo ये सब जान ने के बाद मुझसे नफ़रत तो नहीं करेगा न भाभी?
बिना : आप यु hi दर रही है, वो ऐसा नहीं है. और वैसे भी अगर उसको ताऊजी के बारे में पता चला और उसे ताऊजी के साथ निपटना हुआ तो आप hi हो जो उसकी सहायता कर सकोगी.
स्वर्ण : वो कैसे भाभी?
बिना : वो सब बाद की बाटे है, पर मुझे तो अभी लगता है की ये नौबत आने hi नहीं देनी है, अभी वो छोटा है, अगर उसको कुछ हो गया तो?
स्वर्ण : सही कह रही हो आप, अगर हम सुखदेवजी को बता दे तो? वो तो बहोत बड़े आदमी है, वो जरूर शिव की मदद करेंगे.
बिना : मुझे भी कई बार ऐसा लगा, पर फिर दिल में एक दर लग रहा है, अभी फ़िलहाल उसको इस जमले से दूर रखने में hi उसकी भलाई है.
स्वर्ण : वैसे अब आप उसको किस तरह मिलोगी, भाभी बन कर ki.....(Usne अपनी बात अधूरी छोड़ दी)
बिना : मेने बहोत सोचा है इस बारे में, वो जरूर मेरा देवर लगता है, पर उस से पहले वो कुछ और बन चूका है, और मुझे नहीं लगता की वो में भुला पाऊँगी, पर कोशिस जरूर करुँगी, मेरी छोडो, तुम्हारा तो वो भाई है, तुम क्या करोगी?
स्वर्ण : अब में क्या कहु, मेरी तो ये सोच कर hi जान चली जा रही है की वो मुझसे नाता भी रक्खेगा की नहीं.
बिना : तुम ख़म खा दर रही हो, ऐसा कुछ नहीं होगा.
स्वर्ण : वह कृपाली का भी अलग मसाला चल रहा है, एक तो वो टेंशन और दूसरी ये.
बिना : क्यों, कृपाली को क्या हुआ?
स्वर्ण : आप तो ऐसे पूछ रही हो जैसे कुछ पता hi न हो, वो भी कहा माँ बन प् रही है, अब में कैसे कहु की वो शिव के साथ....
बिना : है, ये भी है. सब उपरवाले पर छोड़ दो, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो hi कुछ करेगा. हमने कहा एक दूसरे की मदद की, फिर भी हम तीनो hi उस से जुड़ गयी न, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो भी शिव से मिलेगी, वर्ण जैसी उसकी किस्मत.
स्वर्ण : में उसको ऐसे भी नहीं छोड़ सकती, वो मरने की बात कर रही थी, क्या करू कुछ समाज में नहीं आ रहा.
बिना : सब ठीक हो जायेगा, उपरवाले पर भरोसा रक्खो. जहा शिवांस के बचने की भी उम्मीद नहीं थी वह भी उसने उसको बचाया है न, तो फिर आगे भी वो मदद करेगा.
यहाँ बिना बताये करुणा आ गयी थी.
जहान्वी : तुम इस वक़्त क्या कर रही हो यहाँ?
करुणा : क्यों नहीं आ शक्ति क्या? (करुणा ने स्माइल देते हुए कहा, वह जहान्वी के मम्मी पापा भी बैठे हुए the)Namaste अंकल, नमस्ते आंटी, देखा अंकल, अब ये काम में इतना बिजी हो गयी है की दोस्तों के लिए टाइम hi नहीं है, और में सामने से मिलने आयी तो मुझे सुना रही है.
जहान्वी : मेरा मतलब है की इस वक़्त तो तू फ्री होती नहीं है.
करुणा : अब में तो तुम्हारी तरह काम करती नहीं हु, में तो फ्री hi होती हु न, में बोर हो रही थी तो मिलने आ गयी, पर तेरा चेहरा देख कर तो लगता है की तुजे मेरा आना पसंद नहीं आया.
जहान्वी : ऐसी कोई बात नहीं है, आ बेथ.
करुणा : तेरे रूम में बैठते है.
जहान्वी : (वो नहीं जाना चाहती थी, पर मन भी नहीं कर सकती thi)Thik है. (दोनों जहान्वी के रूम में आ gaye)Ab बता, तू कैसे इस वक़्त फ्री हो गयी, तुजे तो कही और होना चाहिए था.
करुणा : वो बहार गया है, तू भी मिली नहीं थी तो सोचा तुजसे hi मिल लेती हु. और बता क्या चल रहा है, कहा बिजी रहती है आजकल?
जहान्वी : तुजे बताया तो था की में एक साइट पर काम कर रही हु, और पापा की साइट भी है, बस वही बिजी रहती हु.
करुणा : अभी से इतना काम करने लगेगी तो जवानी चली जाएगी, ये उम्र तो मज़े करने के लिए है, और वैसे भी हमे काम करने की क्या जरुरत है, एक अच्छा लड़का धुंध लो, वो काम करता रहेगा और हम ऐश करेंगे. (कहते हुए वो बिस्तर पर लेट गयी)
जहान्वी : तू नहीं बदलनेवाली. (वो मुस्कुराते हुए बोली और बीएड पर बेथ गयी)
करुणा : बदल कर फायदा भी क्या है. छोड़ वो सब, मेरा हीरो क्या कर रहा है आजकल?
जहान्वी : (वो समाज गयी की वो किसके बारे में बात कर रही hai)Abhi तो तूने बताया की तेरा हीरो बहार गया है. (उसने भी मसूकूरते हुए कहा)
करुणा : मज़ाक मात कर (अपना मुँह चढ़ाते hue)Tuje पता है में किस की बात कर रही हु.
जहान्वी : मुझे कैसे पता होगा, तेरे तो बहोत सरे हीरो होंगे.
करुणा : (अपना मुँह चढ़ाते हुए, नाराजगी से देखते हुए वो साइड के बल हुई और अपने बाये हाथ पर अपना शिर टिकते हुए वो boli)Kya में तुजे ऐसी लगती हु, तुजे पता है की ध्रुव के अलावा मेने किसी के साथ रिलेशन नहीं रक्खे.
जहान्वी : तो फिर इस हीरो के पीछे क्यों पड़ी है?
करुणा : उसकी बात hi अलग है यार, (कहते हुए वो फिर लेट गयी और तकिये को जोरो से कास liya)aur वैसे भी तेरा चक्कर तो है नहीं उसके साथ तो फिर क्या दिक्कत है, इस गरीब का hi कुछ भला हो जायेगा. या फिर तेरे और उसके बिछ कुछ हुआ?
जहान्वी : तुजे क्यों इतनी पंचाट है, जो होगा वो में देख लुंगी.
करुणा : तू कितनी किस्मतवाली है यार, मज़ा आता होगा तुजे उसके साथ, है न? (उसने ऐसे hi हवा में तीर छोड़ा)
जहान्वी : हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं है, तू क्या समझती है, में तेरी बातो में आ जाउंगी क्या.
करुणा : पागल है तू, तेरी जगह अगर में होती तो न जाने कबसे उसको अपनी जवानी के मज़े दे चुकी होती. तेरा मान नहीं होता क्या?
जहान्वी : तू यही बात करने आयी है क्या, कोई और बात कर. (जहान्वी ने चिढ़ते हुए कहा)
करुणा : भड़कती क्यों है, जब तू भड़कती है तो मुझे शक होने लगता है, अगर कुछ नहीं है तेरे और उसके बिच तो मिलने दे न मुझे.
जहान्वी : तो मेने कहा मन किया है, मिल ले जा कर.
करुणा : ऐसे कैसे बात करू यार, एक दो बार मिलवाना तू, फिर में संभल लुंगी.
जहान्वी : मुझसे ये उम्मीद मत रखना, में ऐसा वैसा कुछ नहीं करनेवाली.
करुणा : ऐसा क्या करना है तुजे, जब तू उसको मिलनेवाली हो तो मुझे बता दे, में आ जाउंगी, एक दो मुलाकात होगी तभी तो में कुछ कह पाऊँगी.
जहान्वी : उसका मुँह में तो ले चुकी है, अब किस बात की शर्म है तुजे?
करुणा : वो बात अलग थी यार, उस समय तो ऐसा दिखाया था न की में ये सब मजबूरी में कर रही हु, अब कैसे कह दू की आ जा, में तड़प रही हु.
जहान्वी : तू कहेगी, तब भी वो नहीं आएगा, वो वैसा नहीं है, में कितनी बार संजो तुजे.
करुणा : तूने तो अपने निचे टाला लगा लिया है, पर मेने तो नहीं लगाया न, जब से उसका देखा है यार सच कहती हु, ध्रुव का लेने में भी मज़ा नहीं आता, वो करता है पर सोचती हु शिव के बारे में, एक बार करवा दे यार, तू कहे तो जिंदगी भर तेरी गुलामी करुँगी.
जहान्वी : कितनी बेशर्म हो गयी है तू, और इतना भी क्या हो गया है तुजे जो ऐसा बोल रही है.
करुणा : अब कैसे संजो तुजे, पता नहीं तुजे कुछ क्यों नहीं होता. (वो बात कर रहे थे की ध्रुव का फ़ोन आया, उसने फ़ोन uthaya)Hello (xxxxxxx)Me जहान्वी के घर हु (क्सक्सक्सक्सक्स, सामने से बात सुन कर करुणा मुस्कुराने lagi)Achchha ठीक है, में घर पहुंच कर फ़ोन करती हु. (उसने फ़ोन रख diya)Tera नाम सुनते hi उसकी सिटी पित्ती गम हो जाती है. चल यार मुझे तो जाना होगा, फिर तुजे कहती हु, यार एक बार सेटिंग करवदना, आगे में खुद देख लुंगी.
जहान्वी : शर्म कर, जा अब यहाँ से, जिसका फ़ोन आया है उसी के साथ लगी रह.
करुणा : (मायूस हो kar)Wo तो है hi. चल कोई नहीं, मिलती रहना, और क्या कहु, bye.
जहान्वी : Bye. (करुणा निकल गयी, पर वो शिव के बारे में सोचने लगी, वो बीएड पर लेट कर करवाते बदल रही थी, पर उसको चैन नहीं मिल रहा था, बार बार उसके सामने शिव का चेहरा आ रहा था, वो शिव के साथ इतना आगे बढ़ चुकी थी, उसे शिव का वो छूना, उसके बदन को सहलाना, उसकी छूट पर लुंड रगड़ना, सब याद आ रहा था, वो आंखे बंद किये हुए अपनी छूट सहलाने lagi)Kya करू कुछ समाज में नहीं आ raha(wo बड़बड़ायी, अपनी छूट सहलाते हुए उसको सुकून आने लगा, वो और जोर से सहलाने lagi)Shhhhhh शिईयिव. (वो अपने आप को भी कोशने lagi)Tuje hi नखरे चढ़े थे, वैसे भी कुवारी तो है नहीं तू, वो भी कर लेता तो क्या फर्क पद jata.(Use शिव की बहोत याद आ रही थी, उसने फ़ोन निकला और कॉल कर दिया)
शिव : Hello. (सामने से कोई आवाज नहीं आयी) Hello. (शिव ने अपने फ़ोन को देखा, कही कट तो नहीं हो गया, पर कॉल चालू thi)Hello. (फिर भी सामने से आवाज नहीं आयी, शिव ने कॉल काट दिया और सामने कॉल lagaya)Hello. (मेने ध्यान से सुना तो मुझे सामने से ससो की आवाज आ रही thi)Jhanvi.
जहान्वी :हम्म्म्म.
शिव : क्या हुआ, बोल क्यों नहीं रही हो? (उसने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया, बस सस्से सुनाई दे रही थी) आप ठीक तो हो न? (फिर भी वो कुछ नहीं boli)Please कुछ बोलो.
जहान्वी : (उखड़ती ससो se)Kaaab आए रही होओओओ.
शिव : कल hi तो बताया था, क्या हुआ है आपको?
जहान्वी : प्लीज जल्दी आ जाओ. (कह कर उसने कॉल काट दिया)
मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा था, पर मेने फिर कॉल नहीं किया. वह बिना की धड़कने तेज हो चुकी थी, उसकी गॉड में एल्बम पड़ा हुआ था, उसकी सासे तेज चल रही थी, वो एल्बम को hi देखे जा रही थी, जो अभी बंद था, उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी उसको खोलने की. उस एल्बम में hi ये जवाब था की शिव hi शिवांस है की नहीं, पर पता नहीं क्यों उसका दिल घबरा रहा था.
सुखदेवजी : क्या सोच रही हो बेटी? (उन्हें भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर वो खोल क्यों नहीं रही है, कब से उसको तस्वीर देखनी थी, और अब जब एल्बम सामने है तो वो देख नहीं रही है)
बिना : हहह है. (कहते हुए उसने कांपते हाथो से पहला पेज ओपन किया, पहले hi पेज पर शिवांस की मुस्कुराती हुई क्लोज़अप तस्वीर थी, उसका दिल जैसे एक धड़कन चंक गया, ये शिव hi था, है इसमें थोड़ा छोटा था और थोड़ा भरा हुआ चेहरा था, पर वो शिव की बचपन की तस्वीर से पूरी तरह मेल खा रहा था, वो उसको देखे जा रही थी, उसकी आंखे, उसकी नाक, उसके होठ, वो इतनी खो गयी थी की वो उसी पेज को देख रही थी, सुखदेवजी और ऐश्वर्या, दोनों बिना को hi देख रहे थे)
सुखदेवजी : क्या हुआ बेटी?
बिना : (हकलाते hue)Nnnnahi, कककुछ नहीं, (सँभालते हुए) कितना क्यूट है न?
सुखदेवजी : हमने तो इस एल्बम को देखना hi छोड़ दिया है, पता नहीं आज कितने सालो बाद इसे बहार निकला है, इसे देख कर पुराणी यादे तजा हो जाती है, कितने खुस थे सब, पता नहीं क्या से क्या हो गया.
बिना : क्या में इसकी फोटो ले सकती हु? (उन्होंने है कहा तो बिना ने अपने फ़ोन से उस फोटो की इमेज ले ली. फिर वो दूसरे फोटो भी देखने लगी, ये एल्बम उसके दूसरे जन्म दिन का था, फोटो से hi लग रहा था की कितनी धूम धाम से मनाया होगा, सबके चेहरों पर खुसी साफ़ झलक रही थी, उसने कुछ आल फोटो को भी अपने मोबाइल में कैद किया, सारा एल्बम देखने के बाद उसने वो टेबल पर रख दिया, पर अभी भी उसकी नज़ारे उस एल्बम पर hi तिकी थी)
सुखदेवजी : कोई बात है क्या बेटी?
बिना : न न नहीं तो.
सुखदेवजी : कोई तो बात है बेटी, वर्ण तुम इतनी दूर नहीं आती, वो भी ऐसी हालत में,
बिना : नहीं अंकल, बस इनके बारे में सुना था तो देखना था, वह इनकी कोई भी तस्वीर नहीं है.
सुखदेवजी : ठीक है बेटी, रात बहोत हो गयी है, आराम करो.
बिना : जी अंकल. (वो अपने कमरे की और चल पड़ी, दोनों उसे जाता हुआ देख रहे थे)
ऐश्वर्या : आपको क्या लगता है?
सुखदेवजी : पता नहीं, पर कुछ तो है.
ऐश्वर्या : (थोड़े गुस्से se)Apko मेने कितनी बार संजय है की उस घर से नाता मत रखिये, आप जानते है न, आखिर ये भी तो है उसी घर की, पता नहीं अभी इसके दिमाग में क्या चल रहा होगा? प्रकृति भी अब बड़ी हो गयी है, आपको जरा भी फ़िक्र नहीं है उसकी, अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो देख लेना आप?
सुखदेवजी : मेने सिक्योरिटी लगा दी है उसकी, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं होगा उसको. (सुखदे भी चिंतित लग रहा था, वो सोच रहा था की उसने बिना को बुला कर कोई गलती तो नहीं कर दी, क्यों की उसका व्यव्हार कुछ संदिग्ध लग रहा tha)Vaise भी वो कल चली जाएगी, तुम नजर रखना, चलो, हम भी सोते है. (वो दोनों भी अंदर चले गए, अंदर आ कर |बिना फिर से वही फोटो देख रही थी, सामने हो कर भी उसको यकीं नहीं हो रहा था, पर जो सच था वो सच था, अब आगे क्या करना है वो hi सोच रही थी, पर उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, उसने सुखदेवजी को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया था, हलाकि उसे लग रहा था की सुखदेवजी सही आदमी है पर फिर भी उसको अभी भी शिव को ले कर चिंता थी, वो अभी कोई भी कदम जल्दबाजी में लेना नहीं चाहती थी, उसने स्वर्ण को फ़ोन लगाया, खुशकिस्मती से स्वर्ण अभी अकेली hi थी रूम में)
स्वर्ण : Hello.
बिना : सो गयी थी क्या?
स्वर्ण : नहीं भाभी, अभी वो नहीं आये है तो इंतजार कर रही थी, आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?
बिना : है सब ठीक है, में सुखदेवजी से मिलने आयी हु.
स्वर्ण : क्या, आप वह पहुंच गयी. कुछ पता चला?
बिना : है.
स्वर्ण : (स्वर्ण का दिल भी जोरो से धड़कने laga)Kya पता चला? (उसकी आवाज में भी उत्सुकता थी)
बिना : मुझे लगता है की शिव hi योगेन्द्राचाचा का लड़का है.
स्वर्ण : क्या सच में? कैसे पता चला?
बिना : मेने उसकी बचपन की फोटो देखि, शामे तो शामे है.
स्वर्ण : मुझे भेजिए न, मुझे भी देखना है.
बिना : रुकिए. (कह कर उसने फ़ोन से दोनों फोटो भेजी, जो उसने रजिस्टर से ली थी वो और जो सुखदेवजी के पास से ली थी wo)Mene भेज दी.
स्वर्ण : एक मिनट भाभी. (कहते हुए उसने दोनों फोटो kholi)Ye दोनों फोटो तो शामे लग रही है.
बिना : एक फोटो मेने शिव के अनाथालय से ली थी और दूसरी फोटो मेने सुखदेवजी के एल्बम से ली है.
स्वर्ण : और क्या बताया उन्होंने?
बिना : आपको थोड़ा दुःख होगा, पर उन्होंने जो बताया उस से तो लगता है की ताऊजी ने hi शिवांस को मरने की कोशिस की है.
स्वर्ण : (अपने पापा के बारे में सुन कर उसे धक्का तो लगा पर उसे इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था, वो खामोश हो गयी)
बिना : देखो, बुरा मात मन न पर जो मुझे सुखदेवजी ने बताया उसी हिसाब से कह रही हु, वैसे तो उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिस से साबित हो सके की ये सब ताऊजी ने किया है, हो सकता है की ये एक हादसा hi हो, कुछ भी यकीनी तौर पर नहीं कहा जा सकता, पर अगर ये सब ताऊजी ने जानबुज कर किया है तो वो दोबारा भी कर सकते है, इसीलिए सब सोच समाज कर फैसला करना पड़ेगा.
स्वर्ण : (उसकी आवाज में दर्द छलक aaya)Bhabhi, अगर शिव को पता चला की उसकी इस साजिस के पीछे मेरे पापा का हाथ है तो वो मुझसे नफ़रत करने लगेगा.
बिना : (बिना भी ये सुन कर सोच में जरूर पद गयी थी, पर वो शिव को जानती thi)Muje नहीं लगता, और इसमें आपकी क्या गलती है, आपने थोड़ी न कुछ किया है.
स्वर्ण : मेने भले hi कुछ न किया हो, पर किया तो मेरे hi पापा ने है न, उसका असर तो मुज पर भी होगा.
बिना : अभी से इतना दुखी होने की जरुरत नहीं है, आगे क्या करना है वो सोचना है. में ममता दीदी से भी बात करती हु, फिर हम सोचते है की आगे क्या करना है. मेने अभी ये बात किसी से शेयर नहीं की है, यहाँ तक की मेने सुखदेवजी को भी नहीं बताया है. शिव की सुरक्षा का सवाल है, अगर ये बात सामने आ गयी तो पता नहीं क्या होगा.
स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, हमे सोच समाज कर कदम उठाना पड़ेगा.
बिना : अच्छा में रखती हु, ममतादिदी को भी बताना है.
स्वर्ण : अभी शिव को कुछ मत बताना भाभी. (उसने जैसे रिक्वेस्ट की)
बिना : है ठीक है. Bye. (उसने फ़ोन रख दिया, फिर ममता को भी फ़ोन पे सब बताया, ये सुन कर ममता भी बहोत खुस थी, पर अब कही न कही ये पता चल गया था की वो उसका भाई है और उसके होनेवाले बच्चे का बाप भी तो वो भी थोड़ी चिंतित थी, पर इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था तो ज्यादा जतका नहीं लगा उसे)
बिना फ़ोन रखने के बाद फिर से खयालो में खो गयी, उसको शिव का चेहरा नजर आने लगा, उसे शिव को खोने का दर भी सताने लगा, वो सोचने लगी की अब जब ये बात सामने आ जाएगी तो क्या वो शिव के साथ सम्बन्ध रख पायेगी. हलाकि इस बात को वो पहले भी कई बार सोच चुकी थी पर तब और अब में आसमान जमीं का फर्क था, पहले सिर्फ सनका थी और अब यकीं है. उसने कांपते हाथो से शिव को फ़ोन लगाया. शिव अभी अभी सोने के लिए बिस्तर में लेता था.
शिव : (कॉल लेते hue)Hello.
बिना : सो गए थे क्या?
शिव : नहीं, अभी पढ़ कर बिस्तर पर लेता hi था. आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?
बिना : क्यों में फ़ोन नहीं कर सकती क्या? (वो जैसे उस पर हक़ जताने लगी)
शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, में बस पूछ रहा था.
बिना : (प्यार se)Muje याद करते हो?
शिव : ये भी कोई पूछने की बात है, कहिये कैसे फ़ोन किया?
बिना : (थोड़ा रूत kar)Aise hi फ़ोन किया था, क्या में ऐसे hi फ़ोन नहीं कर सकती.
शिव : (वो समाज गया और उठ कर बहार बालकनी में चला गया क्यों की दुर्वेश पास के hi बीएड में सोया tha.)Muje लगा शायद मैडम ने फ़ोन किया था, इस लिए पूछ रहा था. (शिव ने मुस्कुराते हुए प्यार से कहा)
बिना : मैडम ने फ़ोन नहीं किया है, बिना ने किया है. (बोलते हुए भी उसको शर्म आ रही थी)
शिव : कैसी है आप, तबियत ठीक है न?
बिना : है ठीक है, तुम कैसे हो?
शिव : में भी अच्छा हु, ट्रेनिंग भी अच्छी चल रही है, शायद नेशनल टीम में सेलेक्ट हो जाऊंगा.
बिना : वो तो जरूर होंगे, तुम हो काबिल. (फिर वो शांत हो गयी)
शिव : क्या हुआ, खामोश क्यों हो गयी.
बिना : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi.
शिव : बात तो जरूर कुछ है, में महसूस कर सकता हु, कोई परेशानी तो नहीं है न?
बिना : (वो समाज रही थी की शिव उसके साथ कितना जुड़ चूका है, बिना कहे hi वो महसूस करनेलगा hai)Nahi, बस तुम्हारी याद आ रही थी. (उसने शरमाते हुए आखिर कह hi diya)Juhi के रहते हम अच्छे से मिल नहीं पाए न.
शिव : में समझता हु, इस बार मिलूंगा तो आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा.
बिना : (शरमाते hue)Jaldi आना.
शिव : ठीक है.
बिना : अच्छा में रखती हु, bye.
शिव : Bye. (शिव को थोड़ा अजीब लगा, ऐसे कभी वो फ़ोन नहीं करती, पर अब वो भी समाज रहा था की ये स्वाभाविक है, वो उसकी मैडम नहीं पर उसके होनेवाले बच्चे की माँ है तो ये स्वाभाविक है की उस पर हक़ करे, उनके बारे में सोचते सोचते वो बिस्तर में आके सो गया)
सुबह उठ कर में अपनी ट्रेनिंग में लग गया, मेरा परफॉर्मन्स दिन बा दिन बिहार होते जा रहा था, मेरा स्टैमिना भी बढ़ रहा था. कोच ने मुझे बताया की उन्हें बहोत आशा है मुझसे, ये मेरा हौसला बढ़ने के लिए काफी था.
उस और बिना सुबह नास्ता वगैरह ख़तम कर चुकी थी, उसको सुखदेवजी और ऐश्वर्याजी के व्यव्हार में कुछ अलग लगा, जैसे वो उस से थोड़ा किनारा कर रहे है ऐसा लगा, इस बात से वो थोड़ी विचलित भी हुई, वैसे तो वो शिव के बारे में जीकर करने में असंजस में थी, पर अब उसने न बताना hi बेहतर समजा. अभी वो ऐसे किसी पर भरोसा नहीं कर सकती थी, वैसे तो उसको सुखदेवजी की बताई बातो पर यकीं था, पर यहाँ बात शिव के जीवन की थी तो वो फंक फंक कर कदम रखना चाहती थी. औपचारिक बातो के बाद वो विदा लेकर वह से अपने घर के लिए निकल गयी, सुखदेवजी ने hi गाड़ी भेजी थी.
कल रात से hi स्वर्ण का मान बहोत दर रहा था, उसने सुबह शिव को कॉल किया, पर उसने उठाया नहीं, इस बात से उसके मान में दार और गहराता गया, वो सोचने लगी की कही बीणाभाभी ने शिव को बता तो नहीं दिया, हलाकि उसने मन किया था, पर हो सकता है की उन्होंने बता दिया हो, उसने बिना को भी फ़ोन लगाया पर उनका फ़ोन ऑउटफ कवरेज आ रहा था. वो बेचैन हो रही थी. उसको कृपाली का भी फ़ोन आया था वो रो रही थी.
स्वर्ण : क्या हुआ, क्यों रो रही हो? (स्वर्ण ने चिंतित स्वर में पूछा)
कृपाली : दीदी, मेरे पीरियड्स चालू हो गए है.
स्वर्ण : (वैसे तो उसको यकीं था की ऐसा hi होनेवाला है, पर उसने कृपाली को हौसला diya)To क्या हुआ, इसमें रोनेवाली क्या बात है.
कृपाली : ये आप कह रही है, दीदी मेरा क्या होगा? (उसने रट हुए कहा)
स्वर्ण : अरे पागल, तू दवाई खा रही है न, तुजे क्या लगता है की ऐसे कोई चमत्कार हो जायेगा, दवाई का असर होने में समय तो लगता है न, ऐसा तो है नहीं की तूने दवाई चालू की और सब ठीक हो गया, शरीर है, उसको सही होने में समय लगता है.
कृपाली : पर दीदी, डॉक्टर ने तो कहा था की मुजमे कोई कमी नहीं है, फिर दवाइओ से क्या होगा?
स्वर्ण : तेरे इस सवाल का जवाब मेरे पास भी नहीं है.
कृपाली : (और रोने lagi)aap hi ऐसा कहोगी तो मेरा क्या होगा दीदी, में किस को अपना दर्द बताऊ.
स्वर्ण : देख तू रो मात, रोने से कोई हल नहीं निकलनेवाला, तुम टेस्ट तुबे बेबी के बारे में सोचो, शायद उस से बात बन जाये.
कृपाली : पर डॉक्टर ने तो कहा था की अगर आपके पति में शुक्राणु प्रॉपर नहीं है तो दूसरे के शुक्राणु से तरय करेंगे, वो नहीं मानेंगे दीदी. घरवाले भी इसके लिए तैयार नहीं होंगे. (वो रट हुए बोली)
स्वर्ण : तो फिर एक hi रास्ता है, पर वो शायद तुजे अच्छा नहीं लगेगा.
कृपाली : वो क्या दीदी?
स्वर्ण : देख मुझे गलत मात समझना, पर इसके अलावा कोई रास्ता मुझे नजर नहीं आता.
कृपाली : आप बताओ तो सही दीदी.
स्वर्ण : तू किसी और se...(Wo आगे नहीं बोली)
करअपलि : ये क्या कह रही हो दीदी, छी, में ऐसा नहीं कर सकती.
स्वर्ण : मेने कहा था न की तुजे अच्छा नहीं लगेगा.
कृपाली : अगर आप मेरी जगह होती तो ऐसा करती दीदी? (स्वर्ण खामोश हो गयी, वो क्या कहती की वो ऐसा कर चुकी hai)Dekha, आप खामोश हो गयी न, कहना आसान है दीदी.
स्वर्ण : अब में क्या कहु तुजे, चल छोड़ उसको, तू अगली बार तरय करना, अगर घर में कुछ हो तो मुझे बताना, में बात करुँगी, ऐसा थोड़ी न होता है की तुरंत कोई रिजल्ट मिल जाये.
कृपाली : मेने उन्हें भी नहीं बताया की मेरे पीरियड्स आ गए है, मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही है दीदी, में क्या करू समाज में नहीं आ रहा, में मर जाउंगी दीदी.
स्वर्ण : मरूंगी एक जो ऐसे वैसे कोई विचार अपने दिमाग में लायी तो. मरने को तैयार है, पर वो करने को तैयार नहीं है.
कृपाली : पर दीदी, वो कैसे कर सकती हु में, ये तो देखा होगा.
स्वर्ण : जब वो तुजे छोड़ देगा तब रोटी रहना.
कृपाली : ये आप क्या कह रही हो दीदी. (कहते हुए वो रोने लगी)
स्वर्ण : अभी तो रोना बंद कर, वैसे भी अभी तेरे पीरियड सुरु हुए है, वैसे भी दस पन्द्र दिन तो कुछ होनेवाला है नहीं, तू दवाई कहती रह, फिर बात करते है, और सुन, उलटे सीधे विचार दिमाग में लाये न तो मार खायेगी.
कृपाली : जी दीदी.
स्वर्ण : चिंता मात कर, सब ठीक हो जायेगा. चल में रखती हु.
कृपाली : जी दीदी, bye.
स्वर्ण को भी समाज में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, एक और उसका दिमाग शिव को ले कर अटका हुआ था और ऊपर से कृपाली की बाटे, उसको पता था की इसका हल शिव hi है, पता नहीं क्यों पर यही एक विकल्प है, ऐसा क्यों है वो उसकी समाज से बहार था पर यही एक विकल्प है, पर समस्या ये थी की इन दोनों को मिलाये कैसे, और ऊपर से कृपाली कुछ करने को तैयार नहीं है, करे तो क्या करे ये समाज में नहीं आ रहा था उसको. वो अपने काम में लग गयी. दोपहर को जब खाना निपटा कर वो किचन साफ़ करवाराही थी तभी शिव का फ़ोन आया, उसकी धड़कने तेज हो गयी, उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया.
स्वर्ण : Hello.
शिव : नमस्ते, स्वर्णजी, आपने फ़ोन किया था?
स्वर्ण : है, पर तुमने उठाया नहीं.
शिव : वो में ट्रेनिंग में था, कहिये कैसे याद किया? (शिव के लहजे और बात करने के तरीके से स्वर्ण को इतना तो यकीं हो गया की अभी उसको कुछ पता नहीं है)
स्वर्ण : बस ऐसे hi फ़ोन किया था, बहोत दिन हो गए तुमसे बात किये हुए तो फ़ोन किया था. कैसे हो tum?kaisa चल रहा है सब?
शिव : सब ठीक है, बढ़िया चल रहा है सब.
स्वर्ण : कब आने वाले हो तुम?
शिव : क्सक्स तारीख को ानेवाल हु. कोई काम था क्या?
स्वर्ण : नहीं बस ऐसे hi पूछ रही थी.
शिव : आपकी तबियत कैसी है?
स्वर्ण : (अपने पेट पर हाथ रखते hue)Sab ठीक है शिव, में भी और बच्चा भी. (अचानक से औपचारिक बात खास हो gayi)thank यू, पूछने के लिए.
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप?
स्वर्ण : नहीं कुछ नहीं, आओगे तो मुझसे मिलोगे तुम?
शिव : है क्यों नहीं.
स्वर्ण : शिव, मुझसे नाराज मात होना. (उसके दिल की बात उसकी जबान पर आ गयी)
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप, में क्यों नाराज होने लगा.
स्वर्ण : में तो बस ऐसे hi कह रही थी.
शिव : कुछ हुआ है क्या?
स्वर्ण : नहीं शिव, में तो बस ऐसे hi कह रही थी. तुम कोई टेंशन मात लो, आ जाओ तो बताना, में मिलने आउंगी.
शिव : है, ठीक है, अपना ख्याल रखियेगा.
स्वर्ण : तुम भी, bye.
उसने फ़ोन रख दिया, फ़िलहाल तो कोई टेंशन नहीं थी, पर क्या जब उसको पता चलेगा तो वो उसके साथ ऐसे hi रहेगा? इस सवाल का जवाब नहीं था उसके पास. उसने ऊपर की और देख कर हाथ जोड़े जैसे उपरवाले को प्राथना कर रही हो की सब ठीक कर देना.
खाने के बाद में और दुर्वेश बहार टहलने निकले, कारन नहीं आया, और कोई जगह पास में नहीं थी तो हम वही जूस सेंटर पर पहुंच गए. प्रकृति तो नहीं दिखी, पर उसकी सहेलिया बैठी हुई थी. हमे देख कर उसकी एक सहेली ने स्माइल दी और हमे वही आने का इस्सर किया तो हम वही चले गए,
जेनी : Hi.
शिव : Hello.
जेनी : मेरा नाम जेनी है, आओ न, हमारे साथ ज्वाइन करो.
शिव : नहीं, आप लोग बैठिये, बी थे वे, मेरा नाम शिव है और ये मेरा दोस्त दुर्वेश.
जेनी : तुम्हारा नाम तो याद है, उस दिन उस लड़के ने इंट्रो करवाया था न, क्या नाम था उसका, है कारन, वही नाम था न उसका?
दुर्वेश : इसका नाम याद है और हमारा नाम याद नहीं. (दुर्वेश ने ऐसे hi टॉन्ट मारा)
जेएनय : अब इसमें में क्या करू. (उसने मुस्कुरा के kaha)Betho न शिव, तुमसे बिल नहीं भरवाएंगे, चिंता मात करो.
शिव : ऐसी बात नहीं है. (कहते हुए हम उनके साथ बेथ गए) प्रकृति नहीं आयी?
मंजीत : मेरा नाम क्या है शिव? (में उसको देखने लगा, वो जैसे मेरा इन्तेहाँ ले रही थी)
शिव : जहा तक मुझे याद है, उस दिन आपकी पहचान नहीं करवाई गयी थी.
मंजीत : वो तो प्रकृति की भी नहीं करवाई थी.
शिव : है पर में उन्हें पहले से जनता हु.
जेनी : क्या सच में, वो कैसे?
शिव : वो मुझे एक कॉम्पिटिओं के दौरान मिली थी, मेरा चेकउप उसी ने किया था.
जेनी : कोनसा कॉम्पिटिओं? (मेने डिटेल batayi)Waha तो में भी थी, ओह याद आया, तभी मुझे लग रहा था की मेने तुम्हे कही देखा है. तुम उस दिन भी प्रकृति से बात कर रहे थे, अब याद आया.
फिर हम वह काफी देर बैठे, बहोत सी बाते हुई, बस ऐसे hi हसी मजाक चला, उन्होंने बताया की वो वह की कॉलेज में पढ़ती है और हॉस्टल में रहती है. जब पैसे देने की बात आयी तो मेने देने चाहे पर उन्होंने मन कर दिया, फिर हम वह से निकल आये. जब वो लोग हॉस्टल पहुंची तो अस उसुअल प्रकृति पढ़ रही थी.
जेनी : तूने बताया नहीं की तू शिव को जानती है.
प्रकृति : (वो जानती थी की जेनी किसकी बात कर रही है पर फिर भी उसने अनजान बनते हुए kaha)Kon शिव?
जेनी : अब ज्यादा नाटक मात कर, मुझे पता है की तुम शिव से पहले hi मिली हो.
प्रकृति : में क्यों मिलने लगी उस से. और तुम्हे किसने बताया की में मिली हु उस से.
जेनी : आज शिव मिला था, उसीने बताया.
प्रकृति : क्या बताया?
जेनी : यही की एक कॉम्पिटिओं की चेकउप कैंप में तुम उस से मिली थी.
प्रकृति : वो तो तुम भी कई लोगो से मिली थी, क्या तुम्हे सब याद है?
जेनी : ऐसे क्यों बात कर रही है, मेने तो बस ऐसे hi कहा था.
प्रकृति : तुम्हे पता है न की मुझे इन फालतू की बातो में कोई इंट्रेस्ट नहीं है.
जेनी : सॉरी यार, मेने तो बस ऐसे hi कहा था. (उन्हें भी पता था की प्रकृति को ये सब पसंद नहीं है, वैसे भी वो प्रकृति से डरते hi थे तो ज्यादा बहस नहीं की, और वो लोग भी अपनी अपनी किताबे ले कर पढ़ने बेथ गयी)
वैसे तो प्रकृति को शिव याद hi था, और ये सुन कर की वो भी शिव को याद है, ये सुन कर उसे अंदर से अच्छा लगा, पर उसने अपने आपको संभाले रक्खा था, वैसे भी ये सब बाते उसके लिए फालतू hi थी. जब वो पहली बार शिव से मिली थी तब भी उसे शिव का चेहरा काफी जानापहचाना लगा था पर उसने इस बात को ज्यादा तवज्जु नहीं दिया था, उसे अपने काम के अलावा जैसे किसी बात में इंट्रेस्ट नहीं था, शिव ने भी जब उस से बात करने की कोशिस की थी तब भी उसने नकार दिया था. वो शिव के प्रति एक खिंचाव महसूस कररही थी पर उसने उस फीलिंग को दबा दिया था, वो अपने अंदर ऐसी कोई भी फीलिंग को पनपनेदेना नहीं चाहती थी. वो फिर अपनी किताबो में खो गयी.
दूसरे दिन नाज़िआ अपने मायके आयी थी, उसका पति भी साथ में आया था, संयम भी स्कूल नहीं गयी, नाज़िआ को बहोत अच्छा लगा जब उसने देखा की उसकी अम्मी और संयम मस्ती कर रहे थे.
नाज़िआ : लगता है इन दिनों में माँ बेटी बहोत करीब आ गए है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था)
संयम : (चहकते हुए boli)Ha, में और अम्मी सहेलिया जो बन गयी है, क्यों अम्मी? (ज़ोया बस मुस्कुरायी)
नाज़िआ : में और अम्मी तो काफी पहले से सहेली बन गए है, क्यों अम्मी?
संयम : आप और मुज में बहोत फर्क है आप, में तो अम्मी की पक्किवली सहेली बन गयी हु. क्यों अम्मी?
नाज़िआ : तुजे पता नहीं है, में और अम्मी भी पक्की वाली सहेलिया hi है. क्यों अम्मी?
संयम : होंगी, पर में ज्यादा पक्की हु, क्यों अम्मी?
ज़ोया : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, मेरे लिए दोनों सामान हो. तू भी क्या नाज़िआ, तुजे पता हैना की ये कैसी है, फिर क्यों इस से बहस कर रही है. सामान ले कर नहीं आयी तू, क्यों रहना नहीं है?
नाज़िआ : मेने इनसे बहोत कहा पर ये आने hi नहीं दे रहे है, कह रहे है अगर मिलना है तो में साथ में चलता हु, मिल कर वापस आ जायेंगे. मुझे अकेला छोड़ते hi नहीं है, कही भी आने जाने नहीं देते, सब मेरा इतना ख्याल रख रहे है जैसे में कोई कांच की गुड़िया हु. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)
ज़ोया : किसी की नजर न लगे मेरी बच्ची की खुसियो को. (कहते हुए ज़ोया ने अपनी आंख से काजल लिया और उसको टिका कर दिया)
नाज़िआ : (संयम ko)Shiv को फ़ोन कर दे, पर अभी तो वो स्कूल में होगा, मश्ग कर दे, जाते वक़्त यही से हो कर जाये.
संयम : कोई फायदा नहीं आप, वो सहर में hi नहीं है, बहार गया है.
नाज़िआ : (उसका दिल टूट गया, कितनी उम्मीदों से आयी थी वो, एक नजर देख hi लेती, उसने उदास हो कर kaha)Kaha गया है? (ज़ोया उसकी उदासी समाज रही थी, पर संयम को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था)
संयम : वो ट्रेनिंग के लिए गया है, क्सक्सक्स सहर में, चार दिन बाद आएगा. (उसने भी थोड़ी उदासी से कहा)
नाज़िआ: अब तो लड़ाई नहीं हो रही न तुम लोगो के बिच? (उसने ऐसे hi पूछा)
संयम : में क्यों लड़ूंगी उस से?
नाज़िआ : चलो अच्छा है. (ऐसे hi उनलोगो में बात होती रही)
बिना लौट आयी थी, स्वर्ण उस से मिलने आयी थी. दोनों एक दूसरे के गले मिली. जूही थी नहीं तो दोनों अच्छे से बात कर सकती थी.
स्वर्ण : अब क्या सोचा है भाभी?
बिना : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा. एक और तो लगता है की उसको सब बता दू, पर फिर लगता है की अभी वो कुछ हासिल करने के लिए लगा हुआ है, ऐसे में अगर उसकी जिंदगी में ये भूचाल आ गया तो वो डिस्टर्ब हो जायेगा, अगर उसने ताऊजी के बारे में सुना और वो उनसे उलझाने लगा तो पता नहीं क्या हो जायेगा, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा.
स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, अगर वो अभी अपनी दिशा से भटक गया तो वो जो हासिल करना चाहता है वो नहीं कर पायेगा. और वैसे भी उसने अपने पैरो पर चलना सिख लिया है, पर कभी न कभी तो उसको बताना होगा, उसे भी अपने mata-pita के बारे में जान ने का हक़ है. (फिर घबराते हुए, उसे बिना का हाथ पकड़ liya)Wo ये सब जान ने के बाद मुझसे नफ़रत तो नहीं करेगा न भाभी?
बिना : आप यु hi दर रही है, वो ऐसा नहीं है. और वैसे भी अगर उसको ताऊजी के बारे में पता चला और उसे ताऊजी के साथ निपटना हुआ तो आप hi हो जो उसकी सहायता कर सकोगी.
स्वर्ण : वो कैसे भाभी?
बिना : वो सब बाद की बाटे है, पर मुझे तो अभी लगता है की ये नौबत आने hi नहीं देनी है, अभी वो छोटा है, अगर उसको कुछ हो गया तो?
स्वर्ण : सही कह रही हो आप, अगर हम सुखदेवजी को बता दे तो? वो तो बहोत बड़े आदमी है, वो जरूर शिव की मदद करेंगे.
बिना : मुझे भी कई बार ऐसा लगा, पर फिर दिल में एक दर लग रहा है, अभी फ़िलहाल उसको इस जमले से दूर रखने में hi उसकी भलाई है.
स्वर्ण : वैसे अब आप उसको किस तरह मिलोगी, भाभी बन कर ki.....(Usne अपनी बात अधूरी छोड़ दी)
बिना : मेने बहोत सोचा है इस बारे में, वो जरूर मेरा देवर लगता है, पर उस से पहले वो कुछ और बन चूका है, और मुझे नहीं लगता की वो में भुला पाऊँगी, पर कोशिस जरूर करुँगी, मेरी छोडो, तुम्हारा तो वो भाई है, तुम क्या करोगी?
स्वर्ण : अब में क्या कहु, मेरी तो ये सोच कर hi जान चली जा रही है की वो मुझसे नाता भी रक्खेगा की नहीं.
बिना : तुम ख़म खा दर रही हो, ऐसा कुछ नहीं होगा.
स्वर्ण : वह कृपाली का भी अलग मसाला चल रहा है, एक तो वो टेंशन और दूसरी ये.
बिना : क्यों, कृपाली को क्या हुआ?
स्वर्ण : आप तो ऐसे पूछ रही हो जैसे कुछ पता hi न हो, वो भी कहा माँ बन प् रही है, अब में कैसे कहु की वो शिव के साथ....
बिना : है, ये भी है. सब उपरवाले पर छोड़ दो, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो hi कुछ करेगा. हमने कहा एक दूसरे की मदद की, फिर भी हम तीनो hi उस से जुड़ गयी न, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो भी शिव से मिलेगी, वर्ण जैसी उसकी किस्मत.
स्वर्ण : में उसको ऐसे भी नहीं छोड़ सकती, वो मरने की बात कर रही थी, क्या करू कुछ समाज में नहीं आ रहा.
बिना : सब ठीक हो जायेगा, उपरवाले पर भरोसा रक्खो. जहा शिवांस के बचने की भी उम्मीद नहीं थी वह भी उसने उसको बचाया है न, तो फिर आगे भी वो मदद करेगा.








