Adultery Kundali Bhagya - Page 30 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 215

यहाँ बिना बताये करुणा आ गयी थी.

जहान्वी : तुम इस वक़्त क्या कर रही हो यहाँ?

करुणा : क्यों नहीं आ शक्ति क्या? (करुणा ने स्माइल देते हुए कहा, वह जहान्वी के मम्मी पापा भी बैठे हुए the)Namaste अंकल, नमस्ते आंटी, देखा अंकल, अब ये काम में इतना बिजी हो गयी है की दोस्तों के लिए टाइम hi नहीं है, और में सामने से मिलने आयी तो मुझे सुना रही है.

जहान्वी : मेरा मतलब है की इस वक़्त तो तू फ्री होती नहीं है.

करुणा : अब में तो तुम्हारी तरह काम करती नहीं हु, में तो फ्री hi होती हु न, में बोर हो रही थी तो मिलने आ गयी, पर तेरा चेहरा देख कर तो लगता है की तुजे मेरा आना पसंद नहीं आया.

जहान्वी : ऐसी कोई बात नहीं है, आ बेथ.

करुणा : तेरे रूम में बैठते है.

जहान्वी : (वो नहीं जाना चाहती थी, पर मन भी नहीं कर सकती thi)Thik है. (दोनों जहान्वी के रूम में आ gaye)Ab बता, तू कैसे इस वक़्त फ्री हो गयी, तुजे तो कही और होना चाहिए था.

करुणा : वो बहार गया है, तू भी मिली नहीं थी तो सोचा तुजसे hi मिल लेती हु. और बता क्या चल रहा है, कहा बिजी रहती है आजकल?

जहान्वी : तुजे बताया तो था की में एक साइट पर काम कर रही हु, और पापा की साइट भी है, बस वही बिजी रहती हु.

करुणा : अभी से इतना काम करने लगेगी तो जवानी चली जाएगी, ये उम्र तो मज़े करने के लिए है, और वैसे भी हमे काम करने की क्या जरुरत है, एक अच्छा लड़का धुंध लो, वो काम करता रहेगा और हम ऐश करेंगे. (कहते हुए वो बिस्तर पर लेट गयी)

जहान्वी : तू नहीं बदलनेवाली. (वो मुस्कुराते हुए बोली और बीएड पर बेथ गयी)

करुणा : बदल कर फायदा भी क्या है. छोड़ वो सब, मेरा हीरो क्या कर रहा है आजकल?

जहान्वी : (वो समाज गयी की वो किसके बारे में बात कर रही hai)Abhi तो तूने बताया की तेरा हीरो बहार गया है. (उसने भी मसूकूरते हुए कहा)

करुणा : मज़ाक मात कर (अपना मुँह चढ़ाते hue)Tuje पता है में किस की बात कर रही हु.

जहान्वी : मुझे कैसे पता होगा, तेरे तो बहोत सरे हीरो होंगे.

करुणा : (अपना मुँह चढ़ाते हुए, नाराजगी से देखते हुए वो साइड के बल हुई और अपने बाये हाथ पर अपना शिर टिकते हुए वो boli)Kya में तुजे ऐसी लगती हु, तुजे पता है की ध्रुव के अलावा मेने किसी के साथ रिलेशन नहीं रक्खे.

जहान्वी : तो फिर इस हीरो के पीछे क्यों पड़ी है?

करुणा : उसकी बात hi अलग है यार, (कहते हुए वो फिर लेट गयी और तकिये को जोरो से कास liya)aur वैसे भी तेरा चक्कर तो है नहीं उसके साथ तो फिर क्या दिक्कत है, इस गरीब का hi कुछ भला हो जायेगा. या फिर तेरे और उसके बिछ कुछ हुआ?

जहान्वी : तुजे क्यों इतनी पंचाट है, जो होगा वो में देख लुंगी.

करुणा : तू कितनी किस्मतवाली है यार, मज़ा आता होगा तुजे उसके साथ, है न? (उसने ऐसे hi हवा में तीर छोड़ा)

जहान्वी : हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं है, तू क्या समझती है, में तेरी बातो में आ जाउंगी क्या.

करुणा : पागल है तू, तेरी जगह अगर में होती तो न जाने कबसे उसको अपनी जवानी के मज़े दे चुकी होती. तेरा मान नहीं होता क्या?

जहान्वी : तू यही बात करने आयी है क्या, कोई और बात कर. (जहान्वी ने चिढ़ते हुए कहा)

करुणा : भड़कती क्यों है, जब तू भड़कती है तो मुझे शक होने लगता है, अगर कुछ नहीं है तेरे और उसके बिच तो मिलने दे न मुझे.

जहान्वी : तो मेने कहा मन किया है, मिल ले जा कर.

करुणा : ऐसे कैसे बात करू यार, एक दो बार मिलवाना तू, फिर में संभल लुंगी.

जहान्वी : मुझसे ये उम्मीद मत रखना, में ऐसा वैसा कुछ नहीं करनेवाली.

करुणा : ऐसा क्या करना है तुजे, जब तू उसको मिलनेवाली हो तो मुझे बता दे, में आ जाउंगी, एक दो मुलाकात होगी तभी तो में कुछ कह पाऊँगी.

जहान्वी : उसका मुँह में तो ले चुकी है, अब किस बात की शर्म है तुजे?

करुणा : वो बात अलग थी यार, उस समय तो ऐसा दिखाया था न की में ये सब मजबूरी में कर रही हु, अब कैसे कह दू की आ जा, में तड़प रही हु.

जहान्वी : तू कहेगी, तब भी वो नहीं आएगा, वो वैसा नहीं है, में कितनी बार संजो तुजे.

करुणा : तूने तो अपने निचे टाला लगा लिया है, पर मेने तो नहीं लगाया न, जब से उसका देखा है यार सच कहती हु, ध्रुव का लेने में भी मज़ा नहीं आता, वो करता है पर सोचती हु शिव के बारे में, एक बार करवा दे यार, तू कहे तो जिंदगी भर तेरी गुलामी करुँगी.

जहान्वी : कितनी बेशर्म हो गयी है तू, और इतना भी क्या हो गया है तुजे जो ऐसा बोल रही है.

करुणा : अब कैसे संजो तुजे, पता नहीं तुजे कुछ क्यों नहीं होता. (वो बात कर रहे थे की ध्रुव का फ़ोन आया, उसने फ़ोन uthaya)Hello (xxxxxxx)Me जहान्वी के घर हु (क्सक्सक्सक्सक्स, सामने से बात सुन कर करुणा मुस्कुराने lagi)Achchha ठीक है, में घर पहुंच कर फ़ोन करती हु. (उसने फ़ोन रख diya)Tera नाम सुनते hi उसकी सिटी पित्ती गम हो जाती है. चल यार मुझे तो जाना होगा, फिर तुजे कहती हु, यार एक बार सेटिंग करवदना, आगे में खुद देख लुंगी.

जहान्वी : शर्म कर, जा अब यहाँ से, जिसका फ़ोन आया है उसी के साथ लगी रह.

करुणा : (मायूस हो kar)Wo तो है hi. चल कोई नहीं, मिलती रहना, और क्या कहु, bye.

जहान्वी : Bye. (करुणा निकल गयी, पर वो शिव के बारे में सोचने लगी, वो बीएड पर लेट कर करवाते बदल रही थी, पर उसको चैन नहीं मिल रहा था, बार बार उसके सामने शिव का चेहरा आ रहा था, वो शिव के साथ इतना आगे बढ़ चुकी थी, उसे शिव का वो छूना, उसके बदन को सहलाना, उसकी छूट पर लुंड रगड़ना, सब याद आ रहा था, वो आंखे बंद किये हुए अपनी छूट सहलाने lagi)Kya करू कुछ समाज में नहीं आ raha(wo बड़बड़ायी, अपनी छूट सहलाते हुए उसको सुकून आने लगा, वो और जोर से सहलाने lagi)Shhhhhh शिईयिव. (वो अपने आप को भी कोशने lagi)Tuje hi नखरे चढ़े थे, वैसे भी कुवारी तो है नहीं तू, वो भी कर लेता तो क्या फर्क पद jata.(Use शिव की बहोत याद आ रही थी, उसने फ़ोन निकला और कॉल कर दिया)

शिव : Hello. (सामने से कोई आवाज नहीं आयी) Hello. (शिव ने अपने फ़ोन को देखा, कही कट तो नहीं हो गया, पर कॉल चालू thi)Hello. (फिर भी सामने से आवाज नहीं आयी, शिव ने कॉल काट दिया और सामने कॉल lagaya)Hello. (मेने ध्यान से सुना तो मुझे सामने से ससो की आवाज आ रही thi)Jhanvi.

जहान्वी :हम्म्म्म.

शिव : क्या हुआ, बोल क्यों नहीं रही हो? (उसने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया, बस सस्से सुनाई दे रही थी) आप ठीक तो हो न? (फिर भी वो कुछ नहीं boli)Please कुछ बोलो.

जहान्वी : (उखड़ती ससो se)Kaaab आए रही होओओओ.

शिव : कल hi तो बताया था, क्या हुआ है आपको?

जहान्वी : प्लीज जल्दी आ जाओ. (कह कर उसने कॉल काट दिया)

मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा था, पर मेने फिर कॉल नहीं किया. वह बिना की धड़कने तेज हो चुकी थी, उसकी गॉड में एल्बम पड़ा हुआ था, उसकी सासे तेज चल रही थी, वो एल्बम को hi देखे जा रही थी, जो अभी बंद था, उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी उसको खोलने की. उस एल्बम में hi ये जवाब था की शिव hi शिवांस है की नहीं, पर पता नहीं क्यों उसका दिल घबरा रहा था.

सुखदेवजी : क्या सोच रही हो बेटी? (उन्हें भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर वो खोल क्यों नहीं रही है, कब से उसको तस्वीर देखनी थी, और अब जब एल्बम सामने है तो वो देख नहीं रही है)

बिना : हहह है. (कहते हुए उसने कांपते हाथो से पहला पेज ओपन किया, पहले hi पेज पर शिवांस की मुस्कुराती हुई क्लोज़अप तस्वीर थी, उसका दिल जैसे एक धड़कन चंक गया, ये शिव hi था, है इसमें थोड़ा छोटा था और थोड़ा भरा हुआ चेहरा था, पर वो शिव की बचपन की तस्वीर से पूरी तरह मेल खा रहा था, वो उसको देखे जा रही थी, उसकी आंखे, उसकी नाक, उसके होठ, वो इतनी खो गयी थी की वो उसी पेज को देख रही थी, सुखदेवजी और ऐश्वर्या, दोनों बिना को hi देख रहे थे)

सुखदेवजी : क्या हुआ बेटी?

बिना : (हकलाते hue)Nnnnahi, कककुछ नहीं, (सँभालते हुए) कितना क्यूट है न?

सुखदेवजी : हमने तो इस एल्बम को देखना hi छोड़ दिया है, पता नहीं आज कितने सालो बाद इसे बहार निकला है, इसे देख कर पुराणी यादे तजा हो जाती है, कितने खुस थे सब, पता नहीं क्या से क्या हो गया.

बिना : क्या में इसकी फोटो ले सकती हु? (उन्होंने है कहा तो बिना ने अपने फ़ोन से उस फोटो की इमेज ले ली. फिर वो दूसरे फोटो भी देखने लगी, ये एल्बम उसके दूसरे जन्म दिन का था, फोटो से hi लग रहा था की कितनी धूम धाम से मनाया होगा, सबके चेहरों पर खुसी साफ़ झलक रही थी, उसने कुछ आल फोटो को भी अपने मोबाइल में कैद किया, सारा एल्बम देखने के बाद उसने वो टेबल पर रख दिया, पर अभी भी उसकी नज़ारे उस एल्बम पर hi तिकी थी)

सुखदेवजी : कोई बात है क्या बेटी?

बिना : न न नहीं तो.

सुखदेवजी : कोई तो बात है बेटी, वर्ण तुम इतनी दूर नहीं आती, वो भी ऐसी हालत में,

बिना : नहीं अंकल, बस इनके बारे में सुना था तो देखना था, वह इनकी कोई भी तस्वीर नहीं है.

सुखदेवजी : ठीक है बेटी, रात बहोत हो गयी है, आराम करो.

बिना : जी अंकल. (वो अपने कमरे की और चल पड़ी, दोनों उसे जाता हुआ देख रहे थे)

ऐश्वर्या : आपको क्या लगता है?

सुखदेवजी : पता नहीं, पर कुछ तो है.

ऐश्वर्या : (थोड़े गुस्से se)Apko मेने कितनी बार संजय है की उस घर से नाता मत रखिये, आप जानते है न, आखिर ये भी तो है उसी घर की, पता नहीं अभी इसके दिमाग में क्या चल रहा होगा? प्रकृति भी अब बड़ी हो गयी है, आपको जरा भी फ़िक्र नहीं है उसकी, अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो देख लेना आप?

सुखदेवजी : मेने सिक्योरिटी लगा दी है उसकी, तुम चिंता मात करो, कुछ नहीं होगा उसको. (सुखदे भी चिंतित लग रहा था, वो सोच रहा था की उसने बिना को बुला कर कोई गलती तो नहीं कर दी, क्यों की उसका व्यव्हार कुछ संदिग्ध लग रहा tha)Vaise भी वो कल चली जाएगी, तुम नजर रखना, चलो, हम भी सोते है. (वो दोनों भी अंदर चले गए, अंदर आ कर |बिना फिर से वही फोटो देख रही थी, सामने हो कर भी उसको यकीं नहीं हो रहा था, पर जो सच था वो सच था, अब आगे क्या करना है वो hi सोच रही थी, पर उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था, उसने सुखदेवजी को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया था, हलाकि उसे लग रहा था की सुखदेवजी सही आदमी है पर फिर भी उसको अभी भी शिव को ले कर चिंता थी, वो अभी कोई भी कदम जल्दबाजी में लेना नहीं चाहती थी, उसने स्वर्ण को फ़ोन लगाया, खुशकिस्मती से स्वर्ण अभी अकेली hi थी रूम में)

स्वर्ण : Hello.

बिना : सो गयी थी क्या?

स्वर्ण : नहीं भाभी, अभी वो नहीं आये है तो इंतजार कर रही थी, आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?

बिना : है सब ठीक है, में सुखदेवजी से मिलने आयी हु.

स्वर्ण : क्या, आप वह पहुंच गयी. कुछ पता चला?

बिना : है.

स्वर्ण : (स्वर्ण का दिल भी जोरो से धड़कने laga)Kya पता चला? (उसकी आवाज में भी उत्सुकता थी)

बिना : मुझे लगता है की शिव hi योगेन्द्राचाचा का लड़का है.

स्वर्ण : क्या सच में? कैसे पता चला?

बिना : मेने उसकी बचपन की फोटो देखि, शामे तो शामे है.

स्वर्ण : मुझे भेजिए न, मुझे भी देखना है.

बिना : रुकिए. (कह कर उसने फ़ोन से दोनों फोटो भेजी, जो उसने रजिस्टर से ली थी वो और जो सुखदेवजी के पास से ली थी wo)Mene भेज दी.

स्वर्ण : एक मिनट भाभी. (कहते हुए उसने दोनों फोटो kholi)Ye दोनों फोटो तो शामे लग रही है.

बिना : एक फोटो मेने शिव के अनाथालय से ली थी और दूसरी फोटो मेने सुखदेवजी के एल्बम से ली है.

स्वर्ण : और क्या बताया उन्होंने?

बिना : आपको थोड़ा दुःख होगा, पर उन्होंने जो बताया उस से तो लगता है की ताऊजी ने hi शिवांस को मरने की कोशिस की है.

स्वर्ण : (अपने पापा के बारे में सुन कर उसे धक्का तो लगा पर उसे इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था, वो खामोश हो गयी)

बिना : देखो, बुरा मात मन न पर जो मुझे सुखदेवजी ने बताया उसी हिसाब से कह रही हु, वैसे तो उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जिस से साबित हो सके की ये सब ताऊजी ने किया है, हो सकता है की ये एक हादसा hi हो, कुछ भी यकीनी तौर पर नहीं कहा जा सकता, पर अगर ये सब ताऊजी ने जानबुज कर किया है तो वो दोबारा भी कर सकते है, इसीलिए सब सोच समाज कर फैसला करना पड़ेगा.

स्वर्ण : (उसकी आवाज में दर्द छलक aaya)Bhabhi, अगर शिव को पता चला की उसकी इस साजिस के पीछे मेरे पापा का हाथ है तो वो मुझसे नफ़रत करने लगेगा.

बिना : (बिना भी ये सुन कर सोच में जरूर पद गयी थी, पर वो शिव को जानती thi)Muje नहीं लगता, और इसमें आपकी क्या गलती है, आपने थोड़ी न कुछ किया है.

स्वर्ण : मेने भले hi कुछ न किया हो, पर किया तो मेरे hi पापा ने है न, उसका असर तो मुज पर भी होगा.

बिना : अभी से इतना दुखी होने की जरुरत नहीं है, आगे क्या करना है वो सोचना है. में ममता दीदी से भी बात करती हु, फिर हम सोचते है की आगे क्या करना है. मेने अभी ये बात किसी से शेयर नहीं की है, यहाँ तक की मेने सुखदेवजी को भी नहीं बताया है. शिव की सुरक्षा का सवाल है, अगर ये बात सामने आ गयी तो पता नहीं क्या होगा.

स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, हमे सोच समाज कर कदम उठाना पड़ेगा.

बिना : अच्छा में रखती हु, ममतादिदी को भी बताना है.

स्वर्ण : अभी शिव को कुछ मत बताना भाभी. (उसने जैसे रिक्वेस्ट की)

बिना : है ठीक है. Bye. (उसने फ़ोन रख दिया, फिर ममता को भी फ़ोन पे सब बताया, ये सुन कर ममता भी बहोत खुस थी, पर अब कही न कही ये पता चल गया था की वो उसका भाई है और उसके होनेवाले बच्चे का बाप भी तो वो भी थोड़ी चिंतित थी, पर इस बात का अंदेसा तो पहले से hi था तो ज्यादा जतका नहीं लगा उसे)

बिना फ़ोन रखने के बाद फिर से खयालो में खो गयी, उसको शिव का चेहरा नजर आने लगा, उसे शिव को खोने का दर भी सताने लगा, वो सोचने लगी की अब जब ये बात सामने आ जाएगी तो क्या वो शिव के साथ सम्बन्ध रख पायेगी. हलाकि इस बात को वो पहले भी कई बार सोच चुकी थी पर तब और अब में आसमान जमीं का फर्क था, पहले सिर्फ सनका थी और अब यकीं है. उसने कांपते हाथो से शिव को फ़ोन लगाया. शिव अभी अभी सोने के लिए बिस्तर में लेता था.

शिव : (कॉल लेते hue)Hello.

बिना : सो गए थे क्या?

शिव : नहीं, अभी पढ़ कर बिस्तर पर लेता hi था. आपने इतनी रात को फ़ोन किया, सब ठीक है न?

बिना : क्यों में फ़ोन नहीं कर सकती क्या? (वो जैसे उस पर हक़ जताने लगी)

शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, में बस पूछ रहा था.

बिना : (प्यार se)Muje याद करते हो?

शिव : ये भी कोई पूछने की बात है, कहिये कैसे फ़ोन किया?

बिना : (थोड़ा रूत kar)Aise hi फ़ोन किया था, क्या में ऐसे hi फ़ोन नहीं कर सकती.

शिव : (वो समाज गया और उठ कर बहार बालकनी में चला गया क्यों की दुर्वेश पास के hi बीएड में सोया tha.)Muje लगा शायद मैडम ने फ़ोन किया था, इस लिए पूछ रहा था. (शिव ने मुस्कुराते हुए प्यार से कहा)

बिना : मैडम ने फ़ोन नहीं किया है, बिना ने किया है. (बोलते हुए भी उसको शर्म आ रही थी)

शिव : कैसी है आप, तबियत ठीक है न?

बिना : है ठीक है, तुम कैसे हो?

शिव : में भी अच्छा हु, ट्रेनिंग भी अच्छी चल रही है, शायद नेशनल टीम में सेलेक्ट हो जाऊंगा.

बिना : वो तो जरूर होंगे, तुम हो काबिल. (फिर वो शांत हो गयी)

शिव : क्या हुआ, खामोश क्यों हो गयी.

बिना : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi.

शिव : बात तो जरूर कुछ है, में महसूस कर सकता हु, कोई परेशानी तो नहीं है न?

बिना : (वो समाज रही थी की शिव उसके साथ कितना जुड़ चूका है, बिना कहे hi वो महसूस करनेलगा hai)Nahi, बस तुम्हारी याद आ रही थी. (उसने शरमाते हुए आखिर कह hi diya)Juhi के रहते हम अच्छे से मिल नहीं पाए न.

शिव : में समझता हु, इस बार मिलूंगा तो आपकी साडी शिकायते दूर कर दूंगा.

बिना : (शरमाते hue)Jaldi आना.

शिव : ठीक है.

बिना : अच्छा में रखती हु, bye.

शिव : Bye. (शिव को थोड़ा अजीब लगा, ऐसे कभी वो फ़ोन नहीं करती, पर अब वो भी समाज रहा था की ये स्वाभाविक है, वो उसकी मैडम नहीं पर उसके होनेवाले बच्चे की माँ है तो ये स्वाभाविक है की उस पर हक़ करे, उनके बारे में सोचते सोचते वो बिस्तर में आके सो गया)

सुबह उठ कर में अपनी ट्रेनिंग में लग गया, मेरा परफॉर्मन्स दिन बा दिन बिहार होते जा रहा था, मेरा स्टैमिना भी बढ़ रहा था. कोच ने मुझे बताया की उन्हें बहोत आशा है मुझसे, ये मेरा हौसला बढ़ने के लिए काफी था.

उस और बिना सुबह नास्ता वगैरह ख़तम कर चुकी थी, उसको सुखदेवजी और ऐश्वर्याजी के व्यव्हार में कुछ अलग लगा, जैसे वो उस से थोड़ा किनारा कर रहे है ऐसा लगा, इस बात से वो थोड़ी विचलित भी हुई, वैसे तो वो शिव के बारे में जीकर करने में असंजस में थी, पर अब उसने न बताना hi बेहतर समजा. अभी वो ऐसे किसी पर भरोसा नहीं कर सकती थी, वैसे तो उसको सुखदेवजी की बताई बातो पर यकीं था, पर यहाँ बात शिव के जीवन की थी तो वो फंक फंक कर कदम रखना चाहती थी. औपचारिक बातो के बाद वो विदा लेकर वह से अपने घर के लिए निकल गयी, सुखदेवजी ने hi गाड़ी भेजी थी.

कल रात से hi स्वर्ण का मान बहोत दर रहा था, उसने सुबह शिव को कॉल किया, पर उसने उठाया नहीं, इस बात से उसके मान में दार और गहराता गया, वो सोचने लगी की कही बीणाभाभी ने शिव को बता तो नहीं दिया, हलाकि उसने मन किया था, पर हो सकता है की उन्होंने बता दिया हो, उसने बिना को भी फ़ोन लगाया पर उनका फ़ोन ऑउटफ कवरेज आ रहा था. वो बेचैन हो रही थी. उसको कृपाली का भी फ़ोन आया था वो रो रही थी.

स्वर्ण : क्या हुआ, क्यों रो रही हो? (स्वर्ण ने चिंतित स्वर में पूछा)

कृपाली : दीदी, मेरे पीरियड्स चालू हो गए है.

स्वर्ण : (वैसे तो उसको यकीं था की ऐसा hi होनेवाला है, पर उसने कृपाली को हौसला diya)To क्या हुआ, इसमें रोनेवाली क्या बात है.

कृपाली : ये आप कह रही है, दीदी मेरा क्या होगा? (उसने रट हुए कहा)

स्वर्ण : अरे पागल, तू दवाई खा रही है न, तुजे क्या लगता है की ऐसे कोई चमत्कार हो जायेगा, दवाई का असर होने में समय तो लगता है न, ऐसा तो है नहीं की तूने दवाई चालू की और सब ठीक हो गया, शरीर है, उसको सही होने में समय लगता है.

कृपाली : पर दीदी, डॉक्टर ने तो कहा था की मुजमे कोई कमी नहीं है, फिर दवाइओ से क्या होगा?

स्वर्ण : तेरे इस सवाल का जवाब मेरे पास भी नहीं है.

कृपाली : (और रोने lagi)aap hi ऐसा कहोगी तो मेरा क्या होगा दीदी, में किस को अपना दर्द बताऊ.

स्वर्ण : देख तू रो मात, रोने से कोई हल नहीं निकलनेवाला, तुम टेस्ट तुबे बेबी के बारे में सोचो, शायद उस से बात बन जाये.

कृपाली : पर डॉक्टर ने तो कहा था की अगर आपके पति में शुक्राणु प्रॉपर नहीं है तो दूसरे के शुक्राणु से तरय करेंगे, वो नहीं मानेंगे दीदी. घरवाले भी इसके लिए तैयार नहीं होंगे. (वो रट हुए बोली)

स्वर्ण : तो फिर एक hi रास्ता है, पर वो शायद तुजे अच्छा नहीं लगेगा.

कृपाली : वो क्या दीदी?

स्वर्ण : देख मुझे गलत मात समझना, पर इसके अलावा कोई रास्ता मुझे नजर नहीं आता.

कृपाली : आप बताओ तो सही दीदी.

स्वर्ण : तू किसी और se...(Wo आगे नहीं बोली)

करअपलि : ये क्या कह रही हो दीदी, छी, में ऐसा नहीं कर सकती.

स्वर्ण : मेने कहा था न की तुजे अच्छा नहीं लगेगा.

कृपाली : अगर आप मेरी जगह होती तो ऐसा करती दीदी? (स्वर्ण खामोश हो गयी, वो क्या कहती की वो ऐसा कर चुकी hai)Dekha, आप खामोश हो गयी न, कहना आसान है दीदी.

स्वर्ण : अब में क्या कहु तुजे, चल छोड़ उसको, तू अगली बार तरय करना, अगर घर में कुछ हो तो मुझे बताना, में बात करुँगी, ऐसा थोड़ी न होता है की तुरंत कोई रिजल्ट मिल जाये.

कृपाली : मेने उन्हें भी नहीं बताया की मेरे पीरियड्स आ गए है, मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही है दीदी, में क्या करू समाज में नहीं आ रहा, में मर जाउंगी दीदी.

स्वर्ण : मरूंगी एक जो ऐसे वैसे कोई विचार अपने दिमाग में लायी तो. मरने को तैयार है, पर वो करने को तैयार नहीं है.

कृपाली : पर दीदी, वो कैसे कर सकती हु में, ये तो देखा होगा.

स्वर्ण : जब वो तुजे छोड़ देगा तब रोटी रहना.

कृपाली : ये आप क्या कह रही हो दीदी. (कहते हुए वो रोने लगी)

स्वर्ण : अभी तो रोना बंद कर, वैसे भी अभी तेरे पीरियड सुरु हुए है, वैसे भी दस पन्द्र दिन तो कुछ होनेवाला है नहीं, तू दवाई कहती रह, फिर बात करते है, और सुन, उलटे सीधे विचार दिमाग में लाये न तो मार खायेगी.

कृपाली : जी दीदी.

स्वर्ण : चिंता मात कर, सब ठीक हो जायेगा. चल में रखती हु.

कृपाली : जी दीदी, bye.

स्वर्ण को भी समाज में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, एक और उसका दिमाग शिव को ले कर अटका हुआ था और ऊपर से कृपाली की बाटे, उसको पता था की इसका हल शिव hi है, पता नहीं क्यों पर यही एक विकल्प है, ऐसा क्यों है वो उसकी समाज से बहार था पर यही एक विकल्प है, पर समस्या ये थी की इन दोनों को मिलाये कैसे, और ऊपर से कृपाली कुछ करने को तैयार नहीं है, करे तो क्या करे ये समाज में नहीं आ रहा था उसको. वो अपने काम में लग गयी. दोपहर को जब खाना निपटा कर वो किचन साफ़ करवाराही थी तभी शिव का फ़ोन आया, उसकी धड़कने तेज हो गयी, उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया.

स्वर्ण : Hello.

शिव : नमस्ते, स्वर्णजी, आपने फ़ोन किया था?

स्वर्ण : है, पर तुमने उठाया नहीं.

शिव : वो में ट्रेनिंग में था, कहिये कैसे याद किया? (शिव के लहजे और बात करने के तरीके से स्वर्ण को इतना तो यकीं हो गया की अभी उसको कुछ पता नहीं है)

स्वर्ण : बस ऐसे hi फ़ोन किया था, बहोत दिन हो गए तुमसे बात किये हुए तो फ़ोन किया था. कैसे हो tum?kaisa चल रहा है सब?

शिव : सब ठीक है, बढ़िया चल रहा है सब.

स्वर्ण : कब आने वाले हो तुम?

शिव : क्सक्स तारीख को ानेवाल हु. कोई काम था क्या?

स्वर्ण : नहीं बस ऐसे hi पूछ रही थी.

शिव : आपकी तबियत कैसी है?

स्वर्ण : (अपने पेट पर हाथ रखते hue)Sab ठीक है शिव, में भी और बच्चा भी. (अचानक से औपचारिक बात खास हो gayi)thank यू, पूछने के लिए.

शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप?

स्वर्ण : नहीं कुछ नहीं, आओगे तो मुझसे मिलोगे तुम?

शिव : है क्यों नहीं.

स्वर्ण : शिव, मुझसे नाराज मात होना. (उसके दिल की बात उसकी जबान पर आ गयी)

शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप, में क्यों नाराज होने लगा.

स्वर्ण : में तो बस ऐसे hi कह रही थी.

शिव : कुछ हुआ है क्या?

स्वर्ण : नहीं शिव, में तो बस ऐसे hi कह रही थी. तुम कोई टेंशन मात लो, आ जाओ तो बताना, में मिलने आउंगी.

शिव : है, ठीक है, अपना ख्याल रखियेगा.

स्वर्ण : तुम भी, bye.

उसने फ़ोन रख दिया, फ़िलहाल तो कोई टेंशन नहीं थी, पर क्या जब उसको पता चलेगा तो वो उसके साथ ऐसे hi रहेगा? इस सवाल का जवाब नहीं था उसके पास. उसने ऊपर की और देख कर हाथ जोड़े जैसे उपरवाले को प्राथना कर रही हो की सब ठीक कर देना.

खाने के बाद में और दुर्वेश बहार टहलने निकले, कारन नहीं आया, और कोई जगह पास में नहीं थी तो हम वही जूस सेंटर पर पहुंच गए. प्रकृति तो नहीं दिखी, पर उसकी सहेलिया बैठी हुई थी. हमे देख कर उसकी एक सहेली ने स्माइल दी और हमे वही आने का इस्सर किया तो हम वही चले गए,

जेनी : Hi.

शिव : Hello.

जेनी : मेरा नाम जेनी है, आओ न, हमारे साथ ज्वाइन करो.

शिव : नहीं, आप लोग बैठिये, बी थे वे, मेरा नाम शिव है और ये मेरा दोस्त दुर्वेश.

जेनी : तुम्हारा नाम तो याद है, उस दिन उस लड़के ने इंट्रो करवाया था न, क्या नाम था उसका, है कारन, वही नाम था न उसका?

दुर्वेश : इसका नाम याद है और हमारा नाम याद नहीं. (दुर्वेश ने ऐसे hi टॉन्ट मारा)

जेएनय : अब इसमें में क्या करू. (उसने मुस्कुरा के kaha)Betho न शिव, तुमसे बिल नहीं भरवाएंगे, चिंता मात करो.

शिव : ऐसी बात नहीं है. (कहते हुए हम उनके साथ बेथ गए) प्रकृति नहीं आयी?

मंजीत : मेरा नाम क्या है शिव? (में उसको देखने लगा, वो जैसे मेरा इन्तेहाँ ले रही थी)

शिव : जहा तक मुझे याद है, उस दिन आपकी पहचान नहीं करवाई गयी थी.

मंजीत : वो तो प्रकृति की भी नहीं करवाई थी.

शिव : है पर में उन्हें पहले से जनता हु.

जेनी : क्या सच में, वो कैसे?

शिव : वो मुझे एक कॉम्पिटिओं के दौरान मिली थी, मेरा चेकउप उसी ने किया था.

जेनी : कोनसा कॉम्पिटिओं? (मेने डिटेल batayi)Waha तो में भी थी, ओह याद आया, तभी मुझे लग रहा था की मेने तुम्हे कही देखा है. तुम उस दिन भी प्रकृति से बात कर रहे थे, अब याद आया.

फिर हम वह काफी देर बैठे, बहोत सी बाते हुई, बस ऐसे hi हसी मजाक चला, उन्होंने बताया की वो वह की कॉलेज में पढ़ती है और हॉस्टल में रहती है. जब पैसे देने की बात आयी तो मेने देने चाहे पर उन्होंने मन कर दिया, फिर हम वह से निकल आये. जब वो लोग हॉस्टल पहुंची तो अस उसुअल प्रकृति पढ़ रही थी.

जेनी : तूने बताया नहीं की तू शिव को जानती है.

प्रकृति : (वो जानती थी की जेनी किसकी बात कर रही है पर फिर भी उसने अनजान बनते हुए kaha)Kon शिव?

जेनी : अब ज्यादा नाटक मात कर, मुझे पता है की तुम शिव से पहले hi मिली हो.

प्रकृति : में क्यों मिलने लगी उस से. और तुम्हे किसने बताया की में मिली हु उस से.

जेनी : आज शिव मिला था, उसीने बताया.

प्रकृति : क्या बताया?

जेनी : यही की एक कॉम्पिटिओं की चेकउप कैंप में तुम उस से मिली थी.

प्रकृति : वो तो तुम भी कई लोगो से मिली थी, क्या तुम्हे सब याद है?

जेनी : ऐसे क्यों बात कर रही है, मेने तो बस ऐसे hi कहा था.

प्रकृति : तुम्हे पता है न की मुझे इन फालतू की बातो में कोई इंट्रेस्ट नहीं है.

जेनी : सॉरी यार, मेने तो बस ऐसे hi कहा था. (उन्हें भी पता था की प्रकृति को ये सब पसंद नहीं है, वैसे भी वो प्रकृति से डरते hi थे तो ज्यादा बहस नहीं की, और वो लोग भी अपनी अपनी किताबे ले कर पढ़ने बेथ गयी)

वैसे तो प्रकृति को शिव याद hi था, और ये सुन कर की वो भी शिव को याद है, ये सुन कर उसे अंदर से अच्छा लगा, पर उसने अपने आपको संभाले रक्खा था, वैसे भी ये सब बाते उसके लिए फालतू hi थी. जब वो पहली बार शिव से मिली थी तब भी उसे शिव का चेहरा काफी जानापहचाना लगा था पर उसने इस बात को ज्यादा तवज्जु नहीं दिया था, उसे अपने काम के अलावा जैसे किसी बात में इंट्रेस्ट नहीं था, शिव ने भी जब उस से बात करने की कोशिस की थी तब भी उसने नकार दिया था. वो शिव के प्रति एक खिंचाव महसूस कररही थी पर उसने उस फीलिंग को दबा दिया था, वो अपने अंदर ऐसी कोई भी फीलिंग को पनपनेदेना नहीं चाहती थी. वो फिर अपनी किताबो में खो गयी.

दूसरे दिन नाज़िआ अपने मायके आयी थी, उसका पति भी साथ में आया था, संयम भी स्कूल नहीं गयी, नाज़िआ को बहोत अच्छा लगा जब उसने देखा की उसकी अम्मी और संयम मस्ती कर रहे थे.

नाज़िआ : लगता है इन दिनों में माँ बेटी बहोत करीब आ गए है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा था)

संयम : (चहकते हुए boli)Ha, में और अम्मी सहेलिया जो बन गयी है, क्यों अम्मी? (ज़ोया बस मुस्कुरायी)

नाज़िआ : में और अम्मी तो काफी पहले से सहेली बन गए है, क्यों अम्मी?

संयम : आप और मुज में बहोत फर्क है आप, में तो अम्मी की पक्किवली सहेली बन गयी हु. क्यों अम्मी?

नाज़िआ : तुजे पता नहीं है, में और अम्मी भी पक्की वाली सहेलिया hi है. क्यों अम्मी?

संयम : होंगी, पर में ज्यादा पक्की हु, क्यों अम्मी?

ज़ोया : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, मेरे लिए दोनों सामान हो. तू भी क्या नाज़िआ, तुजे पता हैना की ये कैसी है, फिर क्यों इस से बहस कर रही है. सामान ले कर नहीं आयी तू, क्यों रहना नहीं है?

नाज़िआ : मेने इनसे बहोत कहा पर ये आने hi नहीं दे रहे है, कह रहे है अगर मिलना है तो में साथ में चलता हु, मिल कर वापस आ जायेंगे. मुझे अकेला छोड़ते hi नहीं है, कही भी आने जाने नहीं देते, सब मेरा इतना ख्याल रख रहे है जैसे में कोई कांच की गुड़िया हु. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

ज़ोया : किसी की नजर न लगे मेरी बच्ची की खुसियो को. (कहते हुए ज़ोया ने अपनी आंख से काजल लिया और उसको टिका कर दिया)

नाज़िआ : (संयम ko)Shiv को फ़ोन कर दे, पर अभी तो वो स्कूल में होगा, मश्ग कर दे, जाते वक़्त यही से हो कर जाये.

संयम : कोई फायदा नहीं आप, वो सहर में hi नहीं है, बहार गया है.

नाज़िआ : (उसका दिल टूट गया, कितनी उम्मीदों से आयी थी वो, एक नजर देख hi लेती, उसने उदास हो कर kaha)Kaha गया है? (ज़ोया उसकी उदासी समाज रही थी, पर संयम को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था)

संयम : वो ट्रेनिंग के लिए गया है, क्सक्सक्स सहर में, चार दिन बाद आएगा. (उसने भी थोड़ी उदासी से कहा)

नाज़िआ: अब तो लड़ाई नहीं हो रही न तुम लोगो के बिच? (उसने ऐसे hi पूछा)

संयम : में क्यों लड़ूंगी उस से?

नाज़िआ : चलो अच्छा है. (ऐसे hi उनलोगो में बात होती रही)

बिना लौट आयी थी, स्वर्ण उस से मिलने आयी थी. दोनों एक दूसरे के गले मिली. जूही थी नहीं तो दोनों अच्छे से बात कर सकती थी.

स्वर्ण : अब क्या सोचा है भाभी?

बिना : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा. एक और तो लगता है की उसको सब बता दू, पर फिर लगता है की अभी वो कुछ हासिल करने के लिए लगा हुआ है, ऐसे में अगर उसकी जिंदगी में ये भूचाल आ गया तो वो डिस्टर्ब हो जायेगा, अगर उसने ताऊजी के बारे में सुना और वो उनसे उलझाने लगा तो पता नहीं क्या हो जायेगा, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा.

स्वर्ण : सही कह रही हो भाभी, अगर वो अभी अपनी दिशा से भटक गया तो वो जो हासिल करना चाहता है वो नहीं कर पायेगा. और वैसे भी उसने अपने पैरो पर चलना सिख लिया है, पर कभी न कभी तो उसको बताना होगा, उसे भी अपने mata-pita के बारे में जान ने का हक़ है. (फिर घबराते हुए, उसे बिना का हाथ पकड़ liya)Wo ये सब जान ने के बाद मुझसे नफ़रत तो नहीं करेगा न भाभी?

बिना : आप यु hi दर रही है, वो ऐसा नहीं है. और वैसे भी अगर उसको ताऊजी के बारे में पता चला और उसे ताऊजी के साथ निपटना हुआ तो आप hi हो जो उसकी सहायता कर सकोगी.

स्वर्ण : वो कैसे भाभी?

बिना : वो सब बाद की बाटे है, पर मुझे तो अभी लगता है की ये नौबत आने hi नहीं देनी है, अभी वो छोटा है, अगर उसको कुछ हो गया तो?

स्वर्ण : सही कह रही हो आप, अगर हम सुखदेवजी को बता दे तो? वो तो बहोत बड़े आदमी है, वो जरूर शिव की मदद करेंगे.

बिना : मुझे भी कई बार ऐसा लगा, पर फिर दिल में एक दर लग रहा है, अभी फ़िलहाल उसको इस जमले से दूर रखने में hi उसकी भलाई है.

स्वर्ण : वैसे अब आप उसको किस तरह मिलोगी, भाभी बन कर ki.....(Usne अपनी बात अधूरी छोड़ दी)

बिना : मेने बहोत सोचा है इस बारे में, वो जरूर मेरा देवर लगता है, पर उस से पहले वो कुछ और बन चूका है, और मुझे नहीं लगता की वो में भुला पाऊँगी, पर कोशिस जरूर करुँगी, मेरी छोडो, तुम्हारा तो वो भाई है, तुम क्या करोगी?

स्वर्ण : अब में क्या कहु, मेरी तो ये सोच कर hi जान चली जा रही है की वो मुझसे नाता भी रक्खेगा की नहीं.

बिना : तुम ख़म खा दर रही हो, ऐसा कुछ नहीं होगा.

स्वर्ण : वह कृपाली का भी अलग मसाला चल रहा है, एक तो वो टेंशन और दूसरी ये.

बिना : क्यों, कृपाली को क्या हुआ?

स्वर्ण : आप तो ऐसे पूछ रही हो जैसे कुछ पता hi न हो, वो भी कहा माँ बन प् रही है, अब में कैसे कहु की वो शिव के साथ....

बिना : है, ये भी है. सब उपरवाले पर छोड़ दो, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो hi कुछ करेगा. हमने कहा एक दूसरे की मदद की, फिर भी हम तीनो hi उस से जुड़ गयी न, अगर उसके भाग्य में होगा तो वो भी शिव से मिलेगी, वर्ण जैसी उसकी किस्मत.

स्वर्ण : में उसको ऐसे भी नहीं छोड़ सकती, वो मरने की बात कर रही थी, क्या करू कुछ समाज में नहीं आ रहा.

बिना : सब ठीक हो जायेगा, उपरवाले पर भरोसा रक्खो. जहा शिवांस के बचने की भी उम्मीद नहीं थी वह भी उसने उसको बचाया है न, तो फिर आगे भी वो मदद करेगा.
 
अपडेट 216

बिना, स्वर्ण और ममता की आपस में बाटे हो रही थी, अब सबको यकीं था की शिव hi शिवांस है तो फिर आगे क्या करना है और कैसे करना है उसके बारे में hi बाटे हो रही थी, एक और शिव को उसका हक़ दिलवाना था तो दूसरी और उसकी सुरक्षा को ले कर भी सवाल थे, क्या करे उसके बारे में hi चर्चा हो रही थी, पर कोई हल नहीं मिल रहा था. अगर शिव को बताया जाये तो वो अपने माँ बाप से मिलने जायेगा और ऐसे में उसके बारेमे सबको बता चल जायेगा और ये बात उदयसिंह को भी पता चल जाएगी, ऐसे में उसकी जान को खतरा हो सकता है, तो फील हल जब तक इसका कोई हल न निकले तब तक उसको बताना नहीं है ऐसा इन तीनो ने निर्णय लिया, पर कब तक ये बात वो छिपा सकते है वो उनमे से किसी को पता नहीं था.

इन सब से बे खबर शिव अपनी ट्रेनिंग में लगा हुआ था, उसकी जूही से भी बात हुई थी, उसकी भी ट्रेनिंग बढ़िया चल रही है, दोनों की ट्रेनिंग एक hi दिन ख़तम होनेवाली थी, शिव और प्रकृति की भी फिर मुलाकात नहीं हुई. शिव की ट्रेनिंग ख़तम हो गयी थी, नेशनल के लिए उसने क्वालीफाई कर लिया था, अगले महीने उसको फिर से नेशनल के लिए जाना था. जूही ने भी क्वालीफाई कर लिया था, वैसे भी दोनों स्टेट चैंपियन तो थे hi, क्वालीफाई करना तय hi था, पर औपचारिकता थी जो उन्होंने पूरी कर ली थी. आज शिव वापस घर लौट आया था. जब वो घर लौटा तो सब उसका hi इंतजार कर रहे थे, शिव ने फ़ोन कर के बताया नहीं था की वो कितने बजे आनेवाला है, आते आते उसको रात हो गयी थी, जब उसने दरवाजा खटखटाया तो सब जाग गए, क्यों की सबको शिव के आने का इंतजार था, रंजन ने दौड़ कर दरवाजा खोला और शिव से सबसे पहले लिपट गयी, सब पीछे आ रहे थे और जब उन्होंने रंजन को देखा तो सब मुस्कुराने लगे, शिव ने किसी को भी निराश नहीं किया, सबको बरी बरी गले मिला, जैसे hi लता आयी शिव ने उसको अपनी आगोश में ले लिया, लता भी जैसे बरसो की बिछड़ी हो वैसे उस से लिपट गयी, उसकी आँखों में ासु भी आ गए.

शिव : रो क्यों रही हो? (उसके ासु पोछते हुए जब शिव ने कहा तो उसने ना में गर्दन हिलायी)

शारिता : इसका तो ऐसा hi है, (वो अपनी बरी का इंतजार कर रही थी, जब शिव ने बहे फैलाई तो वो भी उसकी बहोत में समां गयी, उसकी भी आंखे भीग गयी)

लता : अभी मुझे कह रही थी, अब क्या हुआ? (शारिता मुस्कुराने लगी और अपने ासु पहोचने lagi)(Shiv ने गायत्री की और देखा तो वो भी हिचकिचाते हुए आयी, शिव ने उसको भी गले लगाया, शिव को महसूस हुआ की वो हिचकिचा रही है, पर वो बोलै कुछ नहीं)

शिव : (विणा ko)Ab तुजे क्या निमंत्रण देना पड़ेगा. (विणा भी शरमाती हुई आयी, सबके सामने उसको शर्म आ रही थी, पर जब शिव ने उसको अपनी आगोश में लिया तो वो सब भूल कर उस से लिपट गयी)

लता : खाना खाया? (शिव ने मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिलायी तो लता ने kaha)Chal जल्दी से हाथमुँह धो ले, में खाना गरम करती हु. (में जब हाथ मुँह धो कर वापिस आया तो सब की सब काम में लगी हुई थी, मेरे आते आते तो खाना थाली में रख दिया था और विणा रोटी सेक रही थी जब की रंजन रोटी बना रही थी)

शिव : अभी क्यों रोटी बना रही हो, जो है वो दे दो.

सरिता : तू चुप चाप बेथ और गरम गरम रोटी खा, जब इतनी साडी है तो फिर क्यों तुजे ठंडी रोटी खिलाये. (कहते हुए उसने गरम रोटी शिव की प्लेट में रक्खी और वही बेथ gayi)Chal में तुजे खिलाती हु. (कहते हुए उसने एक निवाला बनाया और शिव को खिलने लगी, फिर लता की और देख kar)Tu भी खिला सकती है, कोई कुछ नहीं कहेगा. (कहते हुए वो मुस्कुरायी तो लता भी मुस्कुरायी और रोटी का निवाला बना कर शिव को खिलने लगी, गायत्री बानी हुई रोटी ला रही थी और रंजन और विणा बना रही थी, जब रोटी बन गयी तो वो भी वह आ गयी, रंजन भी बेथ गयी और शिव को खिलने लगी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Lagta है मुझे ऐसे थोड़े थोड़े दिनों के लिए जाना चाहिए, कितना प्यार मिल रहा है.

रंजन : उसके लिए कही जाने की जरुरत नहीं है, तू कहे तो में रोज़ खिला सकती हु.

सरिता : में भी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Muje पता है. (कहते हुए मेने पूरा खाना ख़तम किया, विणा दौड़ कर पानी ले आयी, फिर हमारी बाते चली, मेने उन्हें सब बताया, वो सब बहोत खुस थी, दो घंटे कैसे निकल गए पता hi नहीं चला, कुछ बच्चे रो रहे थे तो गायत्री और सरिता उस हॉल में चली गयी, रंजन और विणा भी अपने रूम में चली गयी, अब सिर्फ लता और में hi थे) दरवाजा बंद कर लो.

लता : (शर्माते hue)Nahi, तुम आराम करो, में हॉल में सोने जाती हु.

शिव : तुम्हारे रहते hi मेरी थकन मिट जाएगी.

लता : (वो और शर्माने lagi)Abhi में नहीं कर शक्ति. (उसको बहोत शर्म आ रही थी)

शिव : क्यों?

लता : Periods.(Wo बस इतना hi बोली)

शिव : कोई बात नहीं, पर तुम यही सो रही हो, जाओ दरवाजा बंद कर दो. (लता उठी और दरवाजा बंद कर आयी, शिव ने t-shirt और अंडरवियर पहन रक्खी थी, शर्दी के दिन थे, लता ने अपनी चुन्नी साइड में रख दी और उसके साथ कम्बल में आ गयी, शिव ने उसको अपनी आगोश में दबोचलिया, लता कसमसाने लगी)

लता : सो जाओ न. (उसने प्यार से कहा)

शिव : सो तो रहा हु.

लता : ऐसा करोगे तो कहा सो पाओगे?

शिव : इतने दिन बाद मिली हो, क्या ऐसे hi सो जाऊंगा.

लता : (थोड़ी उदास हो kar)Me... (वो अभी बोली भी नहीं थी की शिव ने उसके होठो को बंद कर दिया, उसके नाजुक होठो को वो चूसने लगा, उसने भी अपने नाजुक हटो से उसको अपनी आगोस में ले लिया और उसके होठो को चूसने लगी, थोड़ी देर दोनों ऐसे hi एक दूसरे के होठो को चूमने लगे, थोड़ी देर बाद जब वो दोनों अलग हुए तो दोनों की सासे तेज चल रही थी, शिव को देखते हुए वो boli)Bahot मान कर रहा है?

शिव : है, पर जो तुम समाज रही हो उसके लिए नहीं, बस तुम्हे प्यार करना hai,aur कुछ नहीं.

लता : (वो मुस्कुरा uthi)Kya सच में, में तुम्हे इतनी पसंद हु?

शिव : ये मुझे बोल के बताने की जरुरत नहीं है. बस ऐसे hi मेरे साथ लेती रहो.

लता : (उसको शिव का खड़ा लुंड महसूस हो रहा था, उसका भी मान कर रहा था, अगर पीरियड्स न होते तो अब तक वो उसको अपने अंदर समां चुकी होती, उसने हिचकिचाते हुए कहा) अगर चाहो तो pichhe...(Uske चेहरे पर शर्म की लाली छ गयी)

शिव : नहीं, मेने कहा न कुछ करने की जरुरत नहीं है, वो तो तुम आगोश में हो इस लिए खड़ा हो गया है, जरुरी नहीं की वो सब करना है, सो जाओ अब.

लता : पर वो जग गया है. (उसने लुंड के बारे में कहा)

शिव : तुम मेरी बाहोंमे रहोगी तो वो तो जागेगा hi.

लता : इसीलिए तो कह रही हु.

शिव : क्यों अपने पिछवाड़े के पीछे पड़ी हो, जिस दिन ये घुसा न, उस दिन चिल्लाओगी. (मेने मुस्कुराते हुए कहा, वो भी शर्माने लगी)

लता : वो तो एक न एक दिन होना hi है, अच्छा चाहो तो मुँह से कर दू.

शिव : नहीं रहने दो, वो अभी शांत हो जायेगा.

लता : मुझे छूना है उसे. (उसके चेहरे पर बे बसी थी, वो बहोत छह रही थी, में उसको देखने laga)Bas हाथ में पकड़ कर रक्खूंगी. (उसने शरारत से कहा)

शिव : ठीक है. (लता खुस हो गयी, वो मेरी अंडरवियर निचे खिसकने लगी, जैसे hi लुंड बहार आया उसने अपने छोटे हाथ में उसको थम लिया, मेरी भी आंख बंद हो गयी)

लता: शह्ह्ह्ह कितना गर्म है. (वो उसको दबा के महसूस करने लगी, हम दोनों कम्बलमे hi थे, मेने अपना जेठ उसके कूल्हे पर रख दिया और सहलाने लगा, उसने बहोत ाशसे मुझे देखा, में बस मुस्कुराया, और उसके कूल्हे को मसलने लगा, वो मेरे लुंड को सहलाने लगी, जब में आगे नहीं बढ़ा तो उसने अपने पेटीकोट को ऊपर उठाना सुरु कर दिया)

शिव : क्या कर रही हो? (वो कुछ नहीं बोली बस अपने पेटीकोट को ऊपर तक उठा दिया, उसके कूल्हे पंतय में थे, उसने मेरा हाथ पकड़ा और फिर से अपने कूल्हे पर रख दिया, में उसके आधे नंगे कूल्हे को दबाते हुए सहलाने लगा, वो गर्म गर्म थे)

लता : शहहहहह हाआआ, शह्ह्ह्हह्ह हाआआआ (वो मेरे लुंड को जोरो से खींचने लगी)

शिव : उखाड़ने का इरादा है क्या?

लता : (मेरे होठो पर टूटपड़ी और मेरे होठो को जोर जोर से चूसने lagi)Ummhhhh, श्रुणुप, श्रुणुप, श्रुणुप. दाल दो न शिव, शहहह कुछ नहीं होगा.

शिव : क्यों इतनी बेशबर हो रही हो?

लता : पता नहीं, बहोत मान कर रहा है, अगर नहीं करना है तो सिर्फ वह रख दो. (अपने गांड के बारे में कहते हुए)

शिव : अच्छा ठीक है. (मेरा इतना कहते hi उसके चेहरे पर खुसी छलक आयी, वो शरमाते हुए करवट बदल कर लेट गयी और अपने कूल्हे मेरी और कर दिए, और अपनी पंतय थोड़ी निचे कर दी, अंदर पद लगा हुआ था तो पूरी निचे नहीं की, वो मेरे हाथ पर लेती थी, मेने अपना हाथ निचे किया और उसके कूल्हों को सहलाया, और दरार में हाथ दाल कर गांड के छेड़ को टटोला, वो बहोत गर्म था, लता सिसकिया ले रही थी, मेने लुंड को पकड़ा और गांड की दरार में लगाया, लता अपना हाथ पीछे लायी और मेरे लुंड को पकड़ कर अपने गांड के छेड़ पर सही से लगाया, उसका शरीर गैन गण गया)

लता : शह्ह्हह्ह्ह्ह, हाआआआ, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : बहोत कामुक होती जा रही हो.

लता : तेरे साथ नहीं करुँगी तो किसके साथ करुँगी, तू hi तो मेरा सबकुछ hai,(Wo अपनी गांड को पीछे धकेलते हुए उसपर दबाव बढ़ने लगी, और मेरे हाथ को पकड़ कर अपने स्तन पर रख दिया, में उसकी मनसा समाज गया और उसके स्तन मसलने लगा, वो अपने निचले होठ को दांत से काटने lagi)Ummmhhhh शहहहहह धीरे से दबा shhhhh(Mere लुंड से प्रेकम निकल रहा था, गांड का छेड़ गिला होने लगा, वो अपनी गांड को हिलाते हुए पीछे हलके हलके धक्के लगा रही थी, धीरे धीरे प्रेकम की वजह से छेड़ पूरा चिप छिपा हो गया था, मेने लता के ब्लॉउज को खोल दिया, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, में उसकी गोल गोल मस्त चुचिओ को मसलने लगा और साथ में उसके निप्पल को मसलने laga)Shhhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, तुजे में अच्छी लगती हु न?

शिव : ये कैसा सवाल है?

लता : भले hi में जवाब जानती हु, पर फिर भी तेरे मुँह से सुन न अच्छा लगता है, बोलना, में तुजे अच्छी लगती हु न?

शिव : है मेरी लता, तू मुझे बहोत अच्छी लगती है (उसने थोड़ा जोर से गांड को दबाया, मुझे लगने लगा की लुंड गांड के छेड़ को फैला रहा है और सूपड़ा अंदर जाने लगा hai)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्ह. (लता को भी महसूस हो रहा था की उसकी गांड का छेड़ फ़ैल रहा है और लुंड थोड़ा अंदर जा रहा hai)(Me उसकी हालत समाज रहा था, मेने भी लुंड के हलके हलके धक्के लगते हुए लुंड दबाना सुरु कर diye)Shhhhh शीइइइइव (वो मेरे हाथ को सहलाने लगी, और एडजस्ट हो कर अपनी गांड को लुंड की सिद्ध में ले आयी, और अपना हाथ पीछे कर के मेरी कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने lagi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है शहहहहह अह्ह्ह्ह shhhhhhh(Me धक्के लगा रहा था पर हलके से, लुंड से निकलता प्रेकम, अब गांड के छेड़ में जा रहा था, क्यों की लुंड का टोपा थोड़ा अंदर चला गया था, वह की गर्मी मुझे महसूस हो रही thi)Shhhhhh Shiiiiiiiv.(Wo शिव की कमर को जोरो से खींचने लगी, जैसे कह रही हो की दाल dona)(me ध्यान से हलके हलके धक्के लगा रहा था, चिकनाहट की वजह से आधा सूपड़ा अंदर जा रहा था, साथ में में लता के स्तन को जोरो से मसल रहा था और उसकी गर्दन को चाट रहा था, पहले के मुकाबले अब उसके स्तन काफी भर गए थे, में उसके गले को चुम रहा था)

शिव : लता.

लता : हम्म्म्म.

शिव : तुम्हारा शरीर भरता जा रहा है.

लता : अब तू प्यार करनेलगा है और ऊपर से अच्छा खाना भी मिल रहा है, फिर ये तो होगा hi.

शिव : (वो अपनी कमर कुछ ज्यादा hi हिला रही thi)Jyada मात हिलो वर्ण वो अंदर चला जायेगा.

लता : तो दाल दो उसे, रुके क्यों ho....shhhhhh दाल दो na...(Wo बहोत गर्म हो चुकी थी, मेरा भी मान मचल रहा था, मेने थोड़ा जोर से कमर दबा दी और सूपड़ा गांड के छेड़ को फैला कर अंदर घुस gaya)Shhhhh आआआआअह्ह्ह्ह (गांड के छेड़ पर हल्का सा दर्द होनेलगा, छेड़ पूरा फ़ैल गया था, अपनी गांड में घुसे लुंड को महसूस कर के वो सेह नहीं पायी, और झटके कहते हुए झड़ने लगी, उसकी कमर जटके खा रही थी, और वो झाड़ रही thi)Shhhhhh शीइइइइइव shhhhhhhhhh. (में वैसे hi रहा, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गयी)

शिव : मजा आया मेरी जान ko?(Uske गाल को चूमते हुए मेने कहा)

लता : (अपना हाथ पीछे ले जाकर शिव के बाल सहलाते hue)Haaaa, (मेरा सूपड़ा अभी भी गांड के छेड़ में घुसा हुआ था, (में लुंड निकलने के लिए पीछे होने लगा तो उसने मेरी कमर पकड़ li)Kya कर रहे हो?

शिव : निकल रहा हु.

लता : अभी तुम्हारा नहीं हुआ है.

शिव : मुझे करना भी नहीं है.

लता : ऐसा क्यों कह रहे हो, अब तो वो अंदर चला गया है न.

शिव : जनता हु, पर फिर भी अभी बहोत कुछ होना बाकि है, अगर कर लिया तो कल तुम चल नहीं पाओगी, और चिंता मात करो, एक दिन अच्छे से तुम्हारे इस छेड़ को भी फैलाऊंगा, पर अभी में तुम्हे वो दर्द देना नहीं चाहता, जितना हुआ है वो बहोत है.

लता : तुम क्यों मेरी इतनी फ़िक्र करते हो, में कोई कांच की गुड़िया नहीं हु, में तुजे पूरा सेह सकती हु.

शिव : में जनता हु, पर सब इतना जल्दी नहीं करना है, अभी तो पूरी जिंदगी साथ रहना है, करेंगे सब धीरे धीरे.

लता : सच में तू मुझे इतना चाहता है?

शिव : अब क्या मुझे इसका प्रमाण देना होगा?

लता : नहीं, तुजे कोई प्रमाण नहीं देना है, पर उसको अभी बहार मत निकालो, वैसे hi रहने do,muje अच्छा लग रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे में और तुम एक hi है, जुड़े हुए.

शिव : ठीक है. मेने उसको अच्छे से पकड़ लिया, लुंड से गांड पर दबाव बढ़ा और लुंड थोड़ा अंदर घुसा)

लता : अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : सॉरी.

लता :(शिव की आगोश में खोते hue)Me तुम्हे बहोत चाहती हु शिव.

शिव : मुझे पता है और में भी तुम्हे बहोत चाहता हु, बस कभी कभी अफ़सोस होता है की में तुम्हे धोखा दे रहा हु.

लता : तुम कोई देखा नहीं दे रहे हो, देखा वो होता है जो छुपाया जाये, तुमने कुछ नहीं छुपाया है, हो सकता है की देर से बताया हो, पर छुपाया कुछ भी नहीं है, तो अपने दिल पर ये बोझ मत रक्खो.

शिव : तुम बहोत अच्छी हो लता.

लता : तुम भी बहोत अच्छे हो शिव. ऐसे hi रहना.

शिव : (मुझे कुछ याद aaya)Ye गयारत्री दीदी को कुछ हुआ है क्या?

लता : पता नहीं, वो कुछ बताती नहीं, पर खोयी खोयी रहती है, मेने पूछा भी था, पर कुछ बताया नहीं.

शिव : कोई बात नहीं, में बात करता हु. अब सो जाओ.

लता : (मुस्कुराते hue)Hmmmm.(Aise hi एक दुआरे से जुड़े वो दोनों सो गए)

सुबह उठा तो, लता सीधी हो कर मुझसे लिपटी हुई थी, लुंड कब गांड से निकल गया था पता नहीं, वो मुझे कास के पकड़े हुई थी जैसे में कही भाग जानेवाला हु, मेने उसके माथे को चहुमा, में दौड़ने नहीं गया था, देर से भी उठा था. स्कूल जाना था तो में स्कूल के लिए तैयार होने लगा, जब बहार आया तो लता नास्ता बना रही थी, विणा और रंजन भी तैयार हो चुके थे, वो निकल रहे थे.

शिव : रुको, में छदो देता हु.

रंजन : (मसूकूरते hue)Chinta मात कर, हम चले जायेंगे.

वो निकल गयी, मेने नास्ता किया और में भी स्कूल के लिए निकल गया, आज जूही का भी फ़ोन नहीं आया था, शायद वो भी सो रही थी, में जब संयम के वह पंहुचा तो वो वह कड़ी थी, जैसे hi मुझे देखा तो वो उछाल कर मेरे गले लग गयी,

शिव : क्या कर रही हो, रस्ते पर है हम. (संयम को भी एहसास हुआ, और वो अलग हो गयी)

संयम : (चहकते hue)Kab आये तुम?

शिव : रात को hi आया था.

संयम : कैसा रहा सब, वैसे तो यकीं है की सिलेक्शन हो गया होगा, है न?

शिव : है, हो गया है.

संयम : मुझे यकीं था, मेने दुआ भी मांगी थी.

शिव : थैंक यू.

संयम : मुझे थैंक यू कहने की जरुरत नहीं है, ये सब मेने तुम्हारे थैंक यू के लिए नहीं किया है.

शिव : तो किसके लिए किया है?

संयम : किसी के लिए नहीं, में बस तुम्हे कामियाब देखना चाहती हु, में बस उतने में hi खुस हु, मुझे कुछ भी नहीं चाहिए. (उसने बहोत प्यार से कहा, अभी हम बाटे कर रहे थे की वैस्वी भी आती दिखी, मुझे वह खड़ा देख कर उसके भी चेहरे पर ख़ुशी छलक आयी, उसने अपना स्कूटर मेरे पास hi रोका)

वैस्वी : (खुसी se)Kab आये?

शिव : रात को.

वैस्वी : (संयम की वजह से वो थोड़ी हिचकिचा रही thi)Kaise हो, कैसा रहा सब?

शिव : सेलेक्ट हो गया.

वैस्वी : कोंग्रटुलतिओन्स.

शिव : थैंक यू.

वैस्वी : (संयम की और देख kar)Ab तो उसके साथ hi बैठेगी न?

संयम : नहीं मेरी गुड़िया, में तेरे साथ hi बेठुंगी, जल मात.

वैस्वी : में क्यों जलूँगी, तुजे बैठना है तो बेथ, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

संयम : में जानती हु, और वैसे भी आते वक़्त तो में बेठनेवाली hi हु, एक काम कार आज तू बेथ जा, में तेरा स्कूटर चला लेती हु.

वैस्वी : सच में?

संयम : है सच में. (में तो बस इन दोनों को hi देख रहा था, कितना बढ़ाव आ गया है इन दोनों में, वैस्वी अपना बैग अपने कंधे पर लटकते हुए मेरे पीछे बेथ गयी और संयम ने स्कूटर ले लिया, हम स्कूल की और बढ़ चले, मुझे अभी भी आश्चर्य हो रहा था, वैस्वी मेरी पीठ से सात कर बैठी थी, उसके बड़े बड़े स्तन का एहसास मुझे अपनी पीठ पर हो रहा था)

शिव : हो क्या गया है तुम दोनों को?

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Kyu, क्या हुआ?

शिव : दोनों ऐसे बेहवे कर रही हो, समाज नहीं आ रहा तुम दोनों का.

वैस्वी : इसमें समजनेवाली क्या बात है, मुझे पता है की मेरे लिए तुम उसको छोड़नेवाले नहीं हो, और न उसके लिए मुझे छोड़नेवाले हो, फिर जगदा किस बात का.

संयम : क्या कह रहा है?

वैस्वी : कह रहा है, तुम दोनों का कुछ समाज नहीं आ रहा. (संयम भी मुस्कुरायी, वैस्वी, शिव ko)Padhayi कैसी चल रही है, एग्जाम आनेवाले है.

शिव : इस बात तुम्हारा फर्स्ट आना तय है. (मेने मुस्कुरा के कहा)

वैस्वी : मुझे कोई फर्स्ट नहीं आना, तुम्हे hi आना है फर्स्ट.

शिव : वो मुमकिन नहीं है, तुम जानती हो की में ठीक से पढ़ नहीं पाया हु.

वैस्वी : तो क्या हुआ, में तयारी करवा दूंगी.

शिव : तुम्हे फर्स्ट आने का मौका मिल रहा है और तुम मुझे कह रही हो.

वैस्वी : वो मेरी नादानी थी, अब मुझे ऐसा कोई मोह नहीं है, चाहे में फर्स्ट औ, चाहे तुम, एक hi बात है.

शिव :यार, इतने शॉक मात दो, एक साथ में इतने शॉक झेल नहीं पाउँगा.

वैस्वी : अब किया है तो भुगतो, में क्या कर सकती हु इसमें. (हम लोग स्कूल कंपाउंड में आ गए थे, वैस्वी थोड़ा पीछे हो गयी, हमने बाइक और स्कूटर पार्क कर दिए, हर्ष और महेश भी वही मिल गए, वो दोनों भी बहोत खुस हो गए थे, दोनों मुझसे गले मिले)

हर्ष : आ गया मेरा शेर.

महेश : कैसा है?

शिव : सब ठीक है, तुमलोगो का कैसा चल रहा है?

दोनों : सब बढ़िया है.

संयम : तुम नहीं थे तो ये दोनों हमारे साथ नहीं बेथ रहे थे.

हर्ष :ऐसा कुछ नहीं है, (तभी स्कूल की घंटी baji)Chalo, बेल्ल भी बज गयी. (हम अंदर जा रहे थे, बिना मैडम हमे रस्ते में मिली, सब ने गुड मॉर्निंग कहा, उन्होंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया)

बिना : आ गए?

शिव : जी.

बिना : कोंग्रटुलतिओन्स. जूही ने सब बताया था.

शिव : थैंक यू. (तभी वीरेंदरासीर भी वह आये)

वीरेंदर : आ गए तुम?

शिव : जी सर.

वीरेंदर : चलो मेरे साथ.

शिव : कहा सर?

वीरेंदर : प्रिंसिपल सर से मिलने, उन्होंने कहा था की जैसे hi तुम आओ तुम्हे उनके पास ले जाऊ.

शिव : जी सर. (हम दोनों प्रिंसिपल की ऑफिस में गए, उन्होंने भी मुझे कोंग्रटुलतिओं kaha,fir वही से hi उन्होंने स्कूल में मेरी कामियाबी की अनाउंसमेंट की, सरे क्लास से तालिओं की आवाज आने लगी, फिर में अपने क्लास में गया तो बिना मैडम हजारी ले रही थी, जैसे hi मेने अंदर आने की परमिशन मांगी, सरे क्लास ने फिर एक बार मेरा तालिओं से स्वागत किया, में थैंक यू कहते हुए अपनी जगह गया तो हर्ष फिर मेरे गले लग गया, महेश भी गले लगा, वैस्वी भी वो दृश्य देख रही थी.

संयम : तू अकेली रह गयी.

वैस्वी : मतलब.

संयम : मेने तो आते hi उसको गले लगा लिया था.

वैस्वी : कोई बात नहीं, रेसस्स में. (कहते हुए वो मुस्कुरायी, संयम भी समाज गयी, फिर पढ़ना सुरु हो गया, पहली रेसस्स छोटी hi थी, हम बाथरूम गए थे, में बहार आके खड़ा था तो वैस्वी आ गयी) बड़ी रेसस्स में पीछे आना.

शिव : क्या हुआ.

वैस्वी : मेने कहा न, आना मतलब आना.

शिव : ठीक है, पर संयम?

वैस्वी : वो सब तुम मुझपर छोड़ दो.

शिव : ठीक है. (संयम भी आ गयी, फिर से हम क्लास में आ गए, में अपनी जगह पर चला गया, महेश और हर्ष भी आ गए)

शिव : तुम दोनों का क्या चल रहा है, कहा चले जाते हो?

हर्ष : तेरा तो सेटिंग है, हमे भी तो सेटिंग करने दे. (मेने उनसे कोई बहस नहीं की, वैसे टीचर भी आ गए थे, फिर पढ़ाई सुरु हो गयी)

रेसस्स में हम बहार निकले, में ,हर्ष और महेश, पर बहार आते hi हर्ष बोलै,

हर्ष : तू तो उनके साथ hi बैठेगा न?

शिव : क्यों तुम कहा जा रहे हो?

हर्ष : मुझे और महेश को कही जाना है.

शिव : कहा जाना है?

हर्ष : हमारे सेटिंग से मिलने.

शिव : क्या? कोण है?

हर्ष : Hai,barahvi क्लास में पढ़ती है, तुजे आना है तो बोल, उसकी सहेली के साथ तेरा भी सेटिंग करवाडेंगे.

शिव : नहीं भाई, तुम दोनों जाओ.

महेश : चल न तू, वो क्यों आने लगा, उसका तो सेटिंग है.

शिव : ये क्या बोल रहा है तू?

महेश : अब हमसे छुपाने की जरुरत नहीं है, हमे सब पता है, बस ये नहीं पता की दोनों में से कोण है. तू लगा रह, हम जाते है. चल हर्ष. (वो दोनों चले गए, वैसे भी उनकी बात काफी हद तक सही भी थी, तो मेने उन्हें रोका नहीं, वैसे भी मुझे वैस्वी से मिलने जाना था, पर संयम का मुझे कुछ पता नहीं था, वो दोनों बहार आयी, संयम सीधे सीधे जाने लगी, उसने मुझसे कोई बात नहीं की, वैस्वी मेरे पास आयी)

वैस्वी : तुम घूम कर पीछे आना. (इतना कह कर वो संयम के साथ चली गयी)

मेने आस पास देखा, और स्कूल के दूसरी और बढ़ा जहा से पीछे जा सकते थे, पीछे की और पेड़ लगे हुए थे तो में कुछ झाडीअ पर कर के आगे बढ़ा, मुझे कुछ लोग वह दिखाई दिए, वो पेड़ के पीछे थे, मेरा ध्यान उसी और था, जब मुझे एक लड़का दिखा तो वो हर्ष था, में समाज गया की दूसरे पेड़ के पीछे महेश hi होगा, लड़कीअ कोण थी वो दिखा नहीं, क्यों की लड़कीअ पेड़ के तने से लग कर कड़ी थी, में वह से आगे बढ़ गया और पीछे की और पहुंच गया, वह वैस्वी नजर आयी, वो थोड़ी गभरायी हुई दिख रही थी, पर जैसे hi उसकी नजर मुझपर पड़ी उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी, में आस पास देखते हुए आया था, और किसी के होने का प्रमाण नहीं था. में वैस्वी के पास पहुंच गया, वो मुझे देख रही थी, मेने उसका हाथ पकड़ा और उसको थोड़ी दूर एक पेड़ के पीछे ले गया, और उसको भी पेड़ के तने के सहारे खड़ा कर दिया.

शिव : अब बोलो.

वैस्वी : (मुस्कुराते और शरमाते hue)Kya बोलू?

शिव : ऐसे क्यों बुलाया, तुम्हे पता है न की पकड़े गए तो क्या होगा.

वैस्वी : (अपना मुँह टेढ़ा कर ke)Jao फिर.

शिव : अब रूठो मात, बताओ, क्या बात है?

वैस्वी : इतने दिन बाद मिले हो, क्या मिल भी नहीं सकती. (उसके चेहरे पर नाराजगी थी, टाइम तो वैसे भी नहीं था, मेने बाये हाथ से उसकी कमर पकड़ी और उसे अपनी और खिंचा और उसकी और झुका, उसके होठो पर अपने होठ रख दिए, उसने भी मेरी कमर में हाथ दाल दिए, वो और में एक दूसरे के होठो को चूसने लगे, (वैस्वी तो इसके लिए hi तरस रही थी, वो उसको अपनी और खींचते हुए उसके होठो को जोरो से चूसने लगी, उसकी सासे फूलने लगी, उसके नथुनों से गर्म गर्म हवा शिव के चेहरे पर पड़ने लगी) (उसके गर्म हो जाने से में भी उत्तजित हो गया, मेने उसके भरे हुए बाये स्तन को अपने दाहिने हाथ से दबाया, वो बहोत बड़े थे, मेरा पूरा हाथ भर गया था, (वैस्वी के लिए ये बहोत उत्तेजित करनेवाला था, कितनी रातो से वो इस पल के लिए तरस रही थी, उस से सास लेना भी मुश्किल होने लगा, उसने अपने होठ छुड़ाए और हांफने लगी),( में उसके गले को चूमने laga)Shhhhhhh, कबसे तड़प रही थी शिव, तुम क्यों मेरी हालत नहीं समाज रहे हो, क्या तुम्हे मुझसे मिलने की इच्छा नहीं हो रही थी? (उसने शिकायत की, पर में उसके स्तन को जोरो से दबा रहा था और उसके निप्पल को ऊपर से निचोड़ रहा था,) शह्ह्हह्ह्ह्ह धीरे दबाओ, शह्ह्ह्ह दर्द होता है (उसने शिकायत जरूर की पर मन नहीं किआ, में उसके गले को छत रहा था, वो मेरी पीठ को सहलाने लगी और मुझे अपनी और खींचने लगी, मेरा लुंड वैसे भी खड़ा हो गया था, मेने उसकी छुटवाले भाग पर दबा diya)(apani छूट पर लुंड का एहसास होते hi उसकी छूट जो पहले से भीगी थी उस से पानी और तेज होने लगा, उसकी पंतय भी गीली होने lagi)Shhhhhhh, शिव, कितने दिन बाद मिले हो, में रोज़ तुम्हे महसूस करती हु शिव शहहहहह (वो और मुझसे लिपटने लगी, मेने उसकी कमर पर जो हाथ था उसको निचे ले गया और उसके भरे हुए बड़े कूल्हों को पकड़ कर अपनी और खिंचा और मेरी कमर को आगे करते हुए लुंड का धक्का उसकी छूट पर मारा, उसने अपने पेअर फैला diye)Shhhhhhh शीइइइइइव. (कहते हुए वो मेरे कंधे को चाटने लगी और काटने lagi)Kitne दिन बाद मिले हो, (कहते हुए उसने अपना हाथ मेरे कूल्हों पर ले गयी और अपनी और खींचने लगी, और लुंड को अपनी छूट पर दबाने लगी, उसको कोई भी झिझक नहीं थी, फिर में सीधा हुआ और उसके दोनों स्तन सहलाते हुए दबाने लगा, उसने मेरे लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ लिया और उसको दबाने लगी)

शिव : क्या कर रही हो? जानती हो न यहाँ कुछ नहीं हो सकता.

वैस्वी :(मेरे कान की लौ को अपने मुँह में भरते hue)Janti हु, पर दिल नहीं मान रहा, जब से तुमने मेरे साथ वो सब किया है में तड़प रही हु शिव, मुझे ये chahiye.(Apani गर्म सासे छोडते हुए वो बोली, वो बहोत गर्म हो रही थी, में उसकी हालत समाज रहा था, पर अभी ये मुमकिन नहीं था, पर उसको शांत करना भी जरुरी था, मेने उसका स्कर्ट आगे से उठाया और उसकी पंतय के ऊपर से hi उसकी छूट को दबोच लिया, पंतय इतनी गीली थी की रास टपक रहा था, में उसकी छूट के फुले हुए होठो को अपनी उंगलिओ पर महसूस कर प् रहा था, मन तो मेरा भी मचलने लगा tha)Shhhhh मुझे कुछ हो रहा है शिव, शह्ह्ह्हह्ह, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, शहहहहह, जब में छूती हु तो ऐसा नहीं लगता शहहहहह (वो क्या क्या बोले जा रही थी, मेने पंतय के ऊपर से अंदर हाथ दाल दिया, उसकी छूट के ऊपर के बालो का एहसास मेरी भावनाओ को और भड़का रहा था, मेने ऊँगली उसकी छूट की दरार पर फिराई, और उसकी छूट को सहलाया, वो पूरी तरह से गीली thi)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, मुझे कुछ हो रहा है (में उसकी छूट की दरार को सहलाने लगा साथ में उसके डेन को भी सहलाने laga)Shhhhh शीइइइइव, मुझे कही ले चलो शह्ह्हह्ह्ह्ह, में नहीं रह सकती शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (उसकी गर्म गर्म बाटे सुन कर मुझे भी कुछ हो रहा था, पर मेने खुद पर काबू किया और उसकी छूट को जल्दी जल्दी सहलाने लगा, वैस्वी लुंड को जोर जोर से दबाने lagi)Shhhhh शीइइइइव मुझे कुछ हो रहा है, शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, (में लगातार उसकी छूट को सेहला रहा था, मेने उसकी छूट के छोटे से छेड़ में थोड़ी सी ुन्डली अंदर दबायी, उसकी कमर झटके खाने lagi)Ahhhh शहहहहह शिव शह्ह्ह्हह्ह (में थोड़ी सी ऊँगली से जल्दी जल्दी छेड़ में अंदर बहार करने laga)Shhhh अह्ह्ह्हह शीइइइइइव shhhhhhh(Wo जोरो से झटके खाने लगी और वो झड़ने lagi)Ahhhh शह्ह्ह्ह शीइइइइइव. (वैस्वी की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा और, पेअर कंपनी लगे और वो निचे बैठने लगी पर शिव ने उसको थम लिया, और उसकी छूट से हाथ हातलिया, वो शिव के गले लग गयी और हांफ रही थी, थोड़ी देर बाद वो शांत hui)(jab मेने उसको देखा तो वो शर्मा ने लगी और खुद को ठीक करने लगी, उसने अपने कपडे ठीक किये और बल वाल सब ठीक किये, जब हमारी नज़ारे टकराई तो वो फिर से मेरे गले लग gayi)I लव यू मेरी जान, ी रॉय लव यू. (मेने टाइम देखा तो रेसस्स ख़त्म होनेवाली थी)

शिव : अब जल्दी से जाओ. (उसने शरमाते हुए है कहा और गेट की और चली गयी, में भी जल्दी जल्दी घूम कर जाने लगा, मेने देखा तो हर्ष लोग भी वह नहीं थे)

वैस्वी जब गेट के अंदर पहुंची तो संयम वह कड़ी थी, उसको देख कर hi वैस्वी को बहोत शर्म आ गयी, वो नज़ारे झुकाये मुस्कुराती हुई उसके पास पहुंची.

संयम : क्या हुआ?

वैस्वी : कुछ नहीं, चल बाथरूम जाना है.

संयम : में तो हो आयी हु, मुझे नहीं जाना है.

वैस्वी : चल न मेरी माँ, ज्यादा सवाल मात कर. (दोनों वह गयी, वैस्वी अंदर चली गयी, उसने अपना स्कर्ट ऊपर कर के पंतय निकली, वो पूरी भीग गयी थी, जब वो मूतने बैठी तो उसकी गोरी गोरी छूट से पिली पिली अमृत की धार बहने लगी और साथ में छूट से चिप छिपा रास भी निकल रहा था, शरीर को मिले इस सुखद एहसास से उसके चेहरे पर मुस्कान थी, उसने अपनी छूट पानी से अच्छे से साफ़ की, अपने स्क्रित के जेब से हैंडकरचीफ निकला और छूट के पास पद की तरह रख दिया और पंतय वापस पहन ली. जब वो बहार आयी तो संयम उसको गौर से देख रही थी, ये देख कर उसको और शर्म आने लगी. (तभी रेसस्स ख़त्म होने की बेल्ल भी बज gayi)Aise क्या देख रही है, चल.

संयम : क्या हुआ ये तो बता.

वैस्वी : कुछ नहीं हुआ, तू चल न. (वो जिसतरह से शर्मा रही थी और मुस्कुरा रही थी, संयम को पता था की कुछ न कुछ तो हुआ है, पर वो कुछ नहीं बोली)

जब में क्लास में पंहुचा तो हर्ष और महेश वह भी नहीं थे, में अपनी जगह पर बेथ गया, थोड़ी देर बाद संयम और वैस्वी भी गुसपुस्स करती हुई मुस्कुराती हुई अंदर आयी, दोनों की नज़ारे मेरी और पड़ी, संयम मुझे खा जानेवाली नजरो से देख रही थी वही वैस्वी की नजरो में शर्म थी और ढेर सारा प्यार उमड़ रहा था, महेश और हर्ष भी आ गए, वो दोनों भी खुस लग रहे थे.

शिव : बहोत खुस लग रहे हो.

हर्ष : वो तो है. (कहते हुए उन दोनों ने एक दूसरे को hi फाइव किया, अभी वो दोनों बैठे hi थे की टीचर आ गए, क्लास शांत हो गया, फिर पढ़ाई सुरु हो गयी, दोपहर में जब हम छूटे तो वो दोनों जल्दी से भागे.

शिव : कहा जा रहे हो.

हर्ष : तू अपना देख न, पार्किंग में मिलते है.

उसने सररत से कहा और भाग गए दोनों, में पार्किंग में पंहुचा, थोड़ी देर में संयम और वैस्वी भी आ गए, वैस्वी बहोत शर्मा रही थी और मुझे तिरछी नजरो से देख कर मुस्कुरा भी रही थी.

संयम : हर्ष और महेश कहा है?

शिव : पता नहीं, आ रहे होंगे.

संयम : क्या हमे वेट करना है?

शिव : नहीं, चलो चलते है. (मेने वैस्वी को देखा और bye कहा, उसने भी शरमाते हुए bye कहा, में और संयम वह से निकल गए)

संयम : घर चल रहे हो न?

शिव : क्यों?

संयम : क्यों kya....(Abhi वो कुछ बोलनेवाली hi थी की मेरे मोबाइल की रिंग बजी, मेने बाइक साइड में कड़ी की और फ़ोन देखा, बिना मैडम का था, संयम ने भी dekha)Ye क्यों फ़ोन कर रही है.

शिव : मुझे क्या पता (मेने फ़ोन रिसीव kiya)Hello.

बिना : निकल गए तुम?

शिव : है, क्यों?

बिना : वो स्वर्णादिदी मेरे घर आयी है, उनका फ़ोन आया था, कह रही थी की शिव को लेते आना.

शिव : ठीक है, मेरे साथ संयम है, में उसको छोड़ कर आता हु. (कह कर मेने कॉल काट दिया).

संयम : (वो नाराजगी से boli)Unko क्या काम है?

शिव : तू क्यों नाराज हो रही है, होगा कुछ काम.

संयम : अब में नाराज भी न हो, कितने दिन बाद मिले हो, अच्छे से मिल भी नहीं पायी में अभी.

शिव : अच्छे से तो मिली हो, अभी और कितना अच्छे से मिलना है? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

संयम : ज्यादा बनो मत, में कुछ नहीं जानती, चलो थोड़ी देर घर.

शिव : इतना क्या जिद कर रही हो, घर पे खजाना गधा है क्या?

संयम : तो क्या नहीं है? (उसने अपने स्तन मेरी पीठ में दबाते हुए कहा)

शिव : अच्छा बाबा, देखता हु, अगर जल्दी आ गया तो आऊंगा, बस.

संयम : ठीक hai.(Wo मुँह फुलाए बैठी रही, मेने उसको घर छोड़ा और लता को फ़ोन कर के बताया, फिर में बीनमदं के घर की और निकल गया, बेल्ल बजायी तो जूही ने hi दरवाजा खोला)

जूही : (खुसी se)Congratulations.

शिव : (हाथमिलते hue)Tumhe भी.

जूही : आओ. (में अंदर गया तो बीनमदं और स्वर्णजी वही बैठी हुई थी, वो दोनों भी कड़ी हो गयी)

स्वर्ण : कोंग्रटुलतिओन्स. (उन्होंने भी हाथ मिलाया, मेने थैंक यू कहा)

बिना : कोंग्रटुलतिओन्स. (मेने उन्हें भी थैंक यू kaha)Ao बैठो. (मेने बैग रक्खी और में सोफे पर बेथ गया, दोनों जिस तरह से मुझे देख रही थी, उनके चेहरे पर एक अलग hi भाव था, दोनों के चेहरे जैसे खिले हुए थे, मुझे लगा की शायद मेरी कामियाबी की खुसी है उन्हें)

शिव : (स्वर्णजी की और देख kar)Kahiye? (मुझे लगा की उन्हें कोई काम होगा जो मिलने आयी है)

स्वर्ण : में तो बस तुमसे मिलने आयी थी, भाभी ने तुम्हारे बारे में बताया था तो सोचा कोंग्रटुलतिओं कह दू. (जूही पानी ले आयी, मेने पि लिया) सच में बहोत खुसी हुई, तुम दोनों का सुन कर. (जूही भी मुस्कुराते हुए बेथ गयी)

जूही : दीदी कब से आ गयी थी, उन्होंने hi खाना भी बनाया है, खास तुम्हारे लिए.

स्वर्ण : (जूही को प्यार से दांत ते hue)Aisa क्यों कह रही है, तुम दोनों के लिए बनाया है, तुम दोनों ने जीत हासिल की है. (जूही बस मुस्कुरायी)

बिना : मुझसे तो रहा नहीं जा रहा, जोरो से भूख लगी है.

स्वर्ण : तो देर किस बात की है, चलो.

बिना : तुम हाथ मुँह धो लो शिव.

शिव : जी. (कहते हुए में उठा और हाथ मुँह धो आया, जब में दिन्निग टेबल के पास पंहुचा तो स्वर्ण जी मेरी थाली परोस रही thi)Are आप क्यों तकलीफ कर रही है, में ले लूंगा.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Chup चाप बैठो, में परोस रही हु न. (पता नहीं क्यों, पर आज उनके व्यव्हार में एक अपना पैन लग रहा था, और वो पुरे हक़ से बात कर रही थी, शायद वो मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली थी इस लिए, पर इस तरह खुल कर वो अपना प्यार दर्शा रही थी, मुझे आश्चर्य हो रहा tha)(Ascharya तो जूही को भी हो रहा था, पर वो बोली कुछ nahi)(Me थाली को देखने लगा, एक कटोरी में अंगूर राबड़ी थी, दो सब्जी, रोटी, पापड़, कचौड़ी, डालफॉय.

स्वर्ण : ऐसे क्या देख रहे हो, सुरु करो.

शिव : सोच रहा हु कहा से सुरु करू.

स्वर्ण : यहाँ से सुरु karo,(Kehte हुए उन्होंने, कटोरी से राबड़ी चम्मच में भरी और मेरी और बधाई, मुझे संकोच होने लगा, में जूही और बीनमदं को देखने laga)Are उनकी और क्या देख रहे हो, में खिला रही हु न. (मेने खा liya)Kitna शर्मा रहा है. (कहते हुए वो मुस्कुरायी, फिर जूही की और देख kar)Lagta है तुजे बुरा लग रहा है.

जूही : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं.

स्वर्ण : दिख रहा है तेरे चेहरे पर. (कहते हुए उन्होंने उसकी कटोरी से भी राबड़ी ली और उसको khilaya)Ab तो खुस है न. (वो मुस्कुराने लगी, जूही भी muskurayi)(Beena को देख kar)Aap भी मुँह मीठा करवाइये. (बिना मैडम ने भी हम दोनों को khilaya,ab मुझे सब सामान्य लगा, और शायद जूही को भी, हमने जैम कर खाया, उन्होंने भी बहोत प्यार से परोस कर खिलाया, आखिर कर हमने खाना ख़तम किया, जूही पहले hi ख़तम कर चुकी थी, वो हाथ धो कर बैठी थी, फिर बिना मैडम भी हाथ धो आयी, स्वर्ण जी मेरे लिए रुकी थी, खाना ख़तम करने के बाद में हाथ धोने गया, जूही और बीनमदं सब किचन में ले जाने लगी, स्वर्ण जी ने हाथ धोये, मेने इंतजार किया, उसके बाद में हाथ धोने लगा, पर जैसे hi मुदा, स्वर्ण जी मेरे गले लग गयी, और कास के मुझे पकड़ लिया, मेने देखा तो जूही और बीनमदं किचन में थे, पर जो मेने सुना उस पर मुझे यकीं नहीं हुआ, मुझे लगा शायद मेरे कान बजे, स्वर्ण जी शायद बोली thi)Mera भाई. (वो कुछ स्पस्ट नहीं बोली थी पर शायद मुझे लगा की वो यही बोलो थी, में कंफ्यूज हो गया था, में समाज रहा था की वो मुझे अपने बच्चे का बाप समाज कर अपना प्यार लुटा रही है, वो अलग हो गयी थी)

शिव : क्या कहा आपने?

स्वर्ण : (सकपका ते hue)Me कहा कुछ बोली. (तभी तर्तन उठाने की आवाज aayi)Lo ये टॉवल, हाथ पोछो. (वो भी बर्तन उठाने में मदद करने लगी, में सोचने लगा की क्या वो वही बोली थी जो में समजा, पर वो ऐसा क्यों बोलेंगी, वो मेरे होनेवाले बच्चे की माँ है, वो क्यों मुझे भाई बनाएगी, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, मुझे लगा की मेरे कान बजे थे, या मुझे कुछ और सुनाई दिया था, बीनमदं आयी)

बिना : क्या सोच रहे हो?

शिव : नहीं कुछ नहीं.

बिना : तो कैसा रहा सब? (हम ऐसे hi सब बाते करने लगे, मेने उन्हें मेरी ट्रेनिंग के बारे में बताया, मेरे सिलेक्शन के बारे में बताया, जूही भी बता रही थी, हम बात कर रहे थे की झन्वीजी का फ़ोन आया)

शिव : Hello?

जहान्वी : कहा हो, घर नहीं आये?

शिव : में आ hi रहा था, आप घर पे हो?

जहान्वी : है आयी थी, पर तुम्हारा तो अत पता hi नहीं है.

शिव : में आ hi रहा था.

जहान्वी : ठीक है.

बिना : लता का फ़ोन था?

शिव :नहीं, झन्वीजी का, वो घर पर काम चल रहा है न तो आयी होंगी.

स्वर्ण : में तुमसे मिलने आयी और तुम जा रहे हो. (स्वर्ण ने झूठमूठ रूठने का नाटक करते हुए kaha)(Me उन्हें देखने लगा, में सोच रहा था की क्या जवाब दू, वो हसने lagi)Me तो मज़ाक कर रही थी बुद्धू, पर तुम्हे मेरे घर भी आना पड़ेगा. औगेना?

शिव : जी. (फिर में वह से निकल गया)

जूही बर्तन साफ़ करने अंदर चली गयी,

बिना : ये क्या कर रही थी आप, अगर जूही ने देखा होता तो? (बिना ने स्वर्ण को शिव को गले लगते हुए देख लिया था)

स्वर्ण : में अपने आपको रोक नहीं पायी, आपको पता है मेने एक और गलती कर दी.

बिना : (गौर से देखते hue)Konsi?

स्वर्ण : जब मेने उसको गले लगाया तो मेरे मुँह से निकल गया की “ मेरा भाई”.

बिना : क्या?

स्वर्ण : इतना चोंकिये मात, वो धीरे से निकला था, उसको भी ठीक से सुनाई नहीं दिया था, वो भी मुझे पूछ रहा था की में क्या बोली.

बिना : आप पागल हो गयी हो क्या, मेने कहा था न की अभी उसको नहीं बताना है.

स्वर्ण : उसको अपने सामने देख कर में रह नहीं पायी, एक मेरा भाई है जो कभी भाई लगा hi नहीं, और ये तो वो है जिसने मुझे इतनी खुसी दी है, भले hi उसके और मेरे भींच चाहे कैसे भी सम्बन्ध हो पर वो मेरा भाई है, उसने कितना कुछ सहा है, उसको जो मिलना चाहिए था, कुछ भी नहीं मिला, जिसे महलो में होना चाहिए था, वो अनाथालय में रहा, पता नहीं कैसे कैसे दिन देखे होंगे उसने, में नहीं चाहती की अब वो वैसे जिए, आप कुछ करो, कुछ सोचो, उसको सब मिलना चाहिए.

बिना : आप भावनाओ में बह रही हो, आप जानती हो न की आप क्या कह रही हो.

स्वर्ण : मुझे कुछ नहीं जान न, अब वो बच्चा नहीं है और नहीं वो अकेला है, अगर उसके लिए मुझे अपनी जान भी देनी पड़े तो में पीछे नहीं हटूंगी, चाहे सामने मेरा बाप hi क्यों न हो, पर उसको उसकी खुसिया मिलनी चाहिए. (स्वर्ण बोलते बोलते रोने लगी, बिना ने कास के उसको गले लगा लिया, वो भी समाज रही थी की शिव को उसका हक़ मिलना hi चाहिए, पर उसकी सुरक्षा भी महत्व रखती थी)

बिना : सब मिलेगा उसको, सब उसका hi तो है, पर हमे उसकी सुरक्षा को भी देखना है, हम भावनाओ में नहीं बह सकते.

स्वर्ण : में सब समझती हु, पर में उसको ऐसे नहीं देख सकती.

बिना : शहहह, शांत हो जाओ, हम है न, उसको कोई भी तकलीफ नहीं होने देंगे.

जूही : किसकी बात कर रही हो आप, और रो क्यों रही हो आप दोनों?

बिना : नहीं कुछ नहीं. (दोनों अपने अपने आंसू पोछने लगी और सँभालने लगी, जूही को कुछ समाज में नहीं आया की आखिर क्या हुआ है, वो दोनों किसी की बात कर रही थी, पर उसकी समाज में नहीं आया).

में घर पहुंच गया, वह झन्वीजी की कार थी.
 
अपडेट 281

पृथ्वी पद्मा को बल पकड़ कर खिंच रहा था और जब शिव ने बचाव करने की कोशिस की तो उसने उसको लात मार दी (अब आगे)

पृथ्वी :हैट यहाँ से, तू कोण होता है हमारे बिच में पड़नेवाला. (स्वर्ण भी अपने कपडे पहन कर बहार आ चुकी थी)

स्वर्ण : ये क्या कर रहे हो तुम पृथ्वी? (स्वर्ण को शिव के कमरे से निकलते देख पृथ्वी का पारा और चढ़ गया)

पृथ्वी : मेरी छोडो तुम क्या कर रही थी इसके कमरे में?

स्वर्ण : क्या कर रही थी से क्या मतलब है तुम्हारा?

पृथ्वी : एक गैर मर्द के कमरे में क्या कर रही थी यही पूछा मेने.

स्वर्ण : वो भाई है मेरा, कोई गैर नहीं है, और तुम ये क्या कर रहे हो, छोडो भाभी को. (वो पृथ्वी के हाथ से पद्मा के बाल छुड़ाने लगी जिस से पद्मा को और तकलीफ हो रही थी क्यों की पृथ्वी और जोरो से बाल खिंच रहा था) छोडो उन्हीए जानवर कही के. (स्वर्ण ने इतना चिल्ला के कहा और पृथ्वी को ऐसी नजरो से देखा की पृथ्वी ने हाथ छोड़ दिया, स्वर्ण पद्मा को सँभालने lagi)Kya हुआ भाभी? (पद्मा रोए जा रही थी, तभी निचे से उदयसिंह की आवाज आयी)

उदयसिंह : क्या हो रहा है वह? (वो और कामना सीढिया चढ़ते हुए ऊपर आये, निचे बैठी पद्मा और उसको दिलासा देती स्वर्ण पर नजर padi)Kya हो रहा है यहाँ?

स्वर्ण : ये भाभी को मार रहा था, क्या हुआ है मुझे नहीं पता, पूछिए इसी से की क्यों मार रहा था इन्हे?

उदयसिंह : (गुस्से se)Ha क्या कर काट है पृथ्वी?

पृथ्वी : मुझसे क्या पूछ रहे है, इसी से पूछिए. (दरअसल पृथ्वी नशे में आया था, और ऊपर से उसके गले में दन्त गधे हुए थे जो बता रहे थे की वो किसी के साथ सो कर आया है, ऊपर से वो पद्मा को दन्त रहा था की उसी की वजह से मेले में बबल हुआ होगा और उसको गालिया दे रहा था की वो रंडी है वगैरह वगैरह)

कामना : क्या हुआ बहु? (प्यार से उसके पास बैठते हुए वो बोली तो पद्मा उनसे लिपट कर रोने लगी, पर बताया कुछ नहीं, और बताती तो भी क्या बताती, वो बस रोये जा रही थी)

पृथ्वी : अब बोल क्या बोल रही थी? मुज पर जूठा इल्जाम लगा रही है और खुद क्या है ये सब को नहीं पता काया. तुजे किसने कहा था मेले में घूमने जाने को, जरूर वह डोरे डालने गयी होगी, चाहे कुछ भी कर ले, तू बांज है और बांज hi रहेगी.

कामना : ये क्या बकवास कर रहे हो तुम, नशे में कुछ भी बोले जा रहे हो, और कहा घूम रहे थे तुम जब ये सब हो रहा था, तुम्हे वह होना चाहिए था.

पृथ्वी : मेरी क्या जरुरत थी, ये था न वह, आपका लाडला (शिव की और इस्सर कर के वो बोलै) पता नहीं क्यों इस कचरे को अपने शिर पर चढ़ा रहे हो? और ये बड़ी सटी सावित्री बन रही है, मुझसे जवाब मांग रही है, जा नहीं देता जवाब, मेरी जो मर्जी आएगी में करूँगा, जिसके साथ रहना है में रहूँगा, तू होती कोण है मुझसे सवाल पूछने वाली. (वो नशे में कुछ भी बोले जा रहा था, कामना ने उसको एक थप्पड़ मर दिया)

कामना : ये क्या बेहूदगी है, निकल जा यहाँ से, कोण खड़ा है कोण नहीं, कोई मर्यादा hi नहीं है, कुछ भी बोले जा रहा है, निकल यहाँ से , जा जहा रहना है. (वो भी पुरे गुस्से में थी, पृथ्वी ने गुस्से से देखा और लड़खड़ाते हुए सीढिया उतर गया, कामना ने स्वर्ण से kaha)Padma को अंदर ले जाओ.

स्वर्ण : चलो भाभी. (वो दोनों उनके कमरे की और बढ़ गयी, कामना ने एक नजर शिव की और देखा और फिर निचे जाने लगी, उदयसिंह भी चला गया, शिव भी अपने कमरे में चला गया)

सुबह शिव खुद को ठीक महसूस कर रहा था तो वो कसरत करने चला गया. जब वापस आया तो स्वर्ण सोफे पर बैठी हुई थी और कामनादेवी भी बैठी हुई थी.

स्वर्ण : आ गए तुम, जाओ फ्रेश हो जाओ, नास्ता लगवाती हु.

शिव : जी. (कहते हुए वो अपने कमरे में चला गया थोड़ी देर बाद वो नास्ते के टेबल पर था, उदयसिंह भी वह नास्ता करने आ चूका था) में घर जाना चाहता हु.

उदयसिंह : (उसको देखते hue)Kyu?

शिव : मेरा स्कूल भी है, मुझे पढ़ाई का भी देखना है.

उदयसिंह : ठीक है, जरुरत होगी तो में तुम्हे फ़ोन करूँगा. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, बड़ी माँ ने कुछ नहीं कहा वो बस नास्ता कर रही थी)

स्वर्ण : में भी उसके साथ hi चली जाती हु.

उदयसिंह : तुम्हे क्यों जाना है, तुम रहो यहाँ, वैसे भी कुछ दिनों में तुम्हे वापस hi आना है.

स्वर्ण : इसीलिए तो जा रही हु, वैसे भी सब चले गए है तो में भी चली जाती हु, अकेले जाने से तो अच्छा है की शिव के साथ hi चली जाऊ.

उदयसिंह : ठीक है. (उसके बाद सब अपने अपने काम में लग गए, में भी पैकिंग करने लगा, स्वर्ण भी पैकिंग कर रही थी, पद्मा उन्हें रोक रही थी)

पद्मा : आप भी चली जाएँगी? रुक जाइये न दीदी, मुझे अब यहाँ दर लगने लगा है, आप थी तो थोड़ी रहत थी अब आप भी चली जा रही है.

स्वर्ण : में जल्द hi वापस आ जाउंगी, वैसे भी डिलीवरी के लिए तो यही आनेवाली हु.

उदयसिंह अपनी ऑफिस में बैठा था और गहरी सोच में डूबा हुआ था. वो अपनी बीवी और सुखदेव की कही बातो के बारे में सोच रहा था. वैसे उसको भी पूरा पता तो था नहीं की शिव hi शिवांस है पर जितना भी उसको समाज आ रहा था उस से यही सम्भावना थी की वो hi शिवांस है, पर अभी फील हल उसकी पुस्टि नहीं करना चाहता था वो, उसको पता था की सुखदेव इसकी पुस्टि मांगेगा और डीएनए टेस्ट की मांग करेगा, पर वो अभी उस टेस्ट से दूर रहना चाहता था, उसके दो कारन थे, अगर डीएनए टेस्ट नेगटिव आएंगे तो उसका रचाया पूरा खेल बिगड़ जायेगा और अगर पोसिटिव आये तो शिव को यकीं हो जायेगा की वही शिवांस है तो फिर आगे शायद वो उसकी बात मन ने से इंकार कर दे, इस लिए फील हल वो उस टेस्ट का रिस्क लेना नहीं छठा था, वो कैसे भी कर के सुखदेव को यकीं दिलाना चाहता था की वही शिवांस है और शिव को भी ये रीलीज़ नहीं होने देना चाहता था की वो शिवांस है. यही सब उसके दिमाग में चल रहा था.

कामना भी अपने कमरे में गुमसुम सी बैठी हुई थी, स्वर्ण और शिव निकल गए थे, उसका दिल बहोत दुःख रहा था, वो शिव को जानेदेना नहीं चाहती थी पर उसने खुद hi उसकी असलियत जाहिर की थी, तो वो कैसे उसको रोक सकती थी. बिना ने भी जब ये सब जाना तो वो भी उनके साथ जाने को कहने लगी पर उसकी सास ने मन कर दिया, वैसे भी इस हालत में उसको स्कूल जाने से मन कर दिया था, वो नहीं चाहती थी की बच्चे पर कोई दुष्प्रभाव पड़े, उसने स्कूल से छुट्टी लेने को बोल दिया या तो नौकरी छोड़ने को कह दिया. बिना लचर थी तो वो अभी कुछ नहीं कर प् रही थी.

शिव अपने घर पहुंच गया, सब बहोत खुस हो गए, घर में जैसे रौनक लौट आयी थी. सब शिव से गले मिले. रात काफी हो गयी थी तो सब सो गए.

दूसरे दिन शिव सब से पहले भार्गवी मैडम के बारे में पता करने निकल गया, पुलिस सततयों में कोई और इंचार्ज था, उसने कहा की उसको इस बारे में कुछ नहीं पता है. उसने बताया की उन्होंने खुद hi इस्तीफा दे दिया है वो कोई गायब नहीं हुई है, अब वो कहा है वो उनकी पर्सनल बात है तो वो उसमे कुछ नहीं कर सकते. शिव भी ये बात समाज रहा था पर उसको अभी भी समाज नहीं आ रहा था की आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया और वो है कहा, कोई भी कांटेक्ट क्यों नहीं हो प् रहा है. वो काव्य मैडम से मिलने चला गया,

काव्य : (शिव को देख कर बहोत खुस हो gayi)Are शिव, आज कैसे रास्ता भूल गए?

शिव : कैसी है आप?

काव्य : अच्छी हु, तुम बताओ क्या चल रहा है?

शिव : बहोत कुछ चल रहा है, इतना की मेरी समाज से भी बहार है.

काव्य : ऐसा क्या हो रहा है, (वो उसके हाथ पर हाथ रखते हुए बोली, दोनों सोफे में साथ में बैठे हुए थे, शिव ने उन्हें भार्गवी के बारे में bataya)Me भी परेशान थी, मेने भी अपने तरीके से जान ने की कोशिस की पर कोई कांटेक्ट hi नहीं हो प् रहा है, पता नहीं वो अचानक कहा चली गयी, मुझसे भी कुछ नहीं कहा.

शिव : ऐसे में क्या करना चाहिए? मेने पुलिस स्टेशन में बात की तो उन्होंने कहा की वो खुद गयी है तो वो गायब हो गयी है ऐसा तो नहीं कह सकते.

काव्य : सही बात है, कानूनी तौर पर तो कुछ नहीं किया जा सकता, में तरय करती हु की उनके घर का एड्रेस निकलवाया जाये, वह पता करने की कोशिस कर सकते है.

शिव : ठीक है, अगर कुछ पता चलता है तो मुझे बाइयेगा. अब में चलता हु. (काव्य ने भी देखा की ऑफिस के बहार कोई क्लाइंट वेट कर रहा है तो वो बोली)

काव्य : रात को मिलते है? (उसने सवाल पूछ था)

शिव : ठीक है में फ़ोन करता हु. (फिर वो वह से निकल गया)

उसको समाज नहीं आ रहा था की आखिर बात क्या है. दूसरी और उसको अपने माँ बाप से भी मिलना था, पर अब कैसे मिले वो सोच रहा था. उसने प्रकृति को फ़ोन करने को सोचा.

प्रकृति अभी अभी घर लौटी थी.

ऐश्वर्या : आ गयी बेटी, निष्ठा से मिलने गयी थी?

प्रकृति : (बिना किसी उत्साह se)Hmmm.

ऐश्वर्या : (वो जानती थी की उसकी बेटी दुखी है, तो बनावटी खुस होने का दिखावा करते hue)Bhukh लगी होगी, चल खाना कहते है, तुम्हारी पसंद का खाना बनवाया है.

प्रकृति : आप खा लो, मुझे भूख नहीं है मम्मी.

ऐश्वर्या : ऐसे कैसे, (उसको अपने पास सोफे पर बिठाते हुए उसके शिर पर हाथ फेरते hue)thik से खायेगी पीयेगी नहीं तो बीमार पद जाओगी, तुम खुद डॉक्टर का पढ़ रही हो, अब क्या मुझे तुम्हे संजना padega?(Pyar से वो बोली)

प्रकृति : मेने अभी कॉफ़ी पि थी, फ़िलहाल मुझे भूख नहीं है.

ऐश्वर्या : तू क्यों इतना दिल छोटा कर रही है बेटी, पापा ने कहा था न की वो एक बहरूपिया hai,tu फ़िक्र मात कर, उस लड़के का क्या हुआ जिसके बारे में तुम बता रही थी?

प्रकृति : मुझे किसी लड़के से नहीं मिलना है माँ, में जैसी थी वैसी hi ठीक थी.

ऐश्वर्या : क्यों? क्या हो गया? तुम दोनों के बिच जगहदा हो गया क्या?

प्रकृति : ऐसा कुछ भी नहीं है, उसकी दुनिया अलग है. (प्रकृति दुखी स्वर में बोली)

ऐश्वर्या : क्यों ऐसा क्या हो गया? कुछ बता तो, शायद में कुछ मदद कर दू.

प्रकृति : ऐसा कुछ भी करने की जरुरत नहीं है, में ठीक हु, में अपने कमरे में जा रही हु.

ऐश्वर्या : बीटा थोड़ा खाना तो खा ले, में भी भूखी हु.

प्रकृति : ठीक है, में चेंज कर के आती हु. (वो अपने कमरे की और चली गयी, ऐश्वर्या अपनी बेटी का मुजाय चेहरा देख बहोत दुखी हो रही थी. (प्रकृति अपनेकपडे बदल रही थी की उसके मोबाइल की घंटी बजी, वो अभी ब्रा और पंतय में कड़ी thi,agar उसको ऐसे कोई देख ले तो अपनी तपस्या भांग कर दे इतनी ज्यादा खुनसुरत लग रही थी, उसने फ़ोन देखा तो शिव का नाम मोबाइल पर फ़्लैश कर रहा था, उसका मान नहीं किया उठाने का तो वो अपने कपडे पहन ने लगी, मोबाइल की पूरी रिंग बज कर बंद हो गयी, वो कपडे पहन चुकी थी की फिर से मोबाइल पर रिंग बजी, उसने फ़ोन उठाया और साइलेंट कर दिया, बस सिर्फ स्क्रीन पर शिव का नाम फ़्लैश कर रहा था और लाइट चालू बंद हो रही thi.Thodi देर बाद वो भी बंद हो गयी, वो थोड़ी देर अपने फ़ोन को देखती रही पर फिर फ़ोन नहीं आया, वो सोचने लगी की वो क्यों फ़ोन कर रहा hoga?Jab फ़ोन आया था तो उसने उठाया नहीं और अब वो उसके बारे में सोच रही थी, पर फिर फ़ोन बजा तो उसकी मम्मी का फ़ोन tha)Ha मम्मी आती हु. (कह कर वो निचे चली गयी)

शिव भी समाज नहीं प् रहा था की आखिर वो उसका फ़ोन क्यों नहीं उठा रही है, पर इस बार बात उसके माँ बाप की थी तो उसने बाद में फ़ोन करने का सोचा और घर की और निकल गया. घर जा कर उसने खाना खाया, उसके बाद सब अपने अपने काम में लग गए. वो अपने कमरे में था की तभी उसको वैस्वी का फ़ोन आया.

वैस्वी : Hello. (वो बहोत प्यार से बोली)

शिव : है बोलो.

वैस्वी : (उसको शिव का ऐसे सपाट तरीके से पूछना पसंद नहीं आया पर फिर भी खुद को सँभालते हुए वो boli)Kya कर रहे हो?

शिव : रूम में बैठा हु.

वैस्वी : अगर कोई काम न हो तो मिलते है.

शिव : क्यों?

वैस्वी : ऐसे क्यों बात कर रहे हो? क्या कुछ हुआ है?

शिव : में थोड़ा काम में हु, इसलिए.

वैस्वी : ठीक है (वो दुखी मान से बोली) मेने तुम्हे डिस्टर्ब किया, सॉरी, में रखती हु. (कह कर उसने फ़ोन काट दिया, शिव जनता था की वो नाराज हो गयी है पर फ़िलहाल वो कुछ नहीं कर सकता था, वो सच में परेशान था, वो बैठे बैठे सोच रहा था की लता उसके कमरे में आयी)

लता : क्या कर रहे हो?

शिव : कुछ नहीं, आओ न. (लता संकुचती हुई उसके करीब आयी तो शिव ने उसको खिंच कर अपने पास बिठा दिया, वो भी बेथ gayi)Kaam हो गया?

लता : हम्म्म. (उसको देखते hue)Kya हुआ? कोई परेशानी है?

शिव : नहीं कोई परेशानी नहीं है.

लता : जूथ क्यों बोल रहे हो, नहीं बताना तो मात बताओ पर जूथ तो मात बोलो. (वो नाराजगी से बोली)

शिव : (मुस्कुराते hue)Tumhe कैसे सब पता चल जाता है?

लता : पता नहीं, पर पता चल जाता है (वो भी मुस्कुराते हुए boli)Kya में कोई मदद कर सकती हु?

शिव : तुम आलरेडी काफी मदद कर रही हो, तुम यहाँ सब इतने अच्छे से संभल रही हो की मुझे यहाँ की कोई फ़िक्र नहीं रहती, यही बहोत बड़ी मदद है.

लता : ये कोई बात है भला, ये सब देखा तो मेरी जिम्मेदारी है.

शिव : ऐसा तुम सोचती हो, वर्ण दूसरे लोग तो सब बड़े होते hi ये सब छोड़ कर अपने अपने रस्ते निकल गए थे.

लता : तुम तो नहीं गए. (वो मुस्कुराते हुए बोली, उसकी बात से शिव भी muskuraya)Batao न क्या बात है? (शिव उसको सब बताता गया, वह क्या क्या हुआ था, पूरी बात सुन ने के baad)Tumhe कोशिस करनी चाहिए, ये बहोत बड़ी बात है की तुम्हारी भी कोई फॅमिली है.

शिव : है भी की नहीं पता नहीं.

लता : पर तुम्हे कोशिस तो करनी चाहिए.

शिव : वो तो में करूँगा hi.

लता : अगर वो बात सच निकली तो तुम तो बहोत बड़े घर के बेटे निकलोगे. (वो थोड़ी खुसी से और थोड़े गाम से बोली)

शिव : क्या हुआ, ऐसे क्यों बोल रही हो?

लता : ऐसे मतलब कैसे?

शिव : तुम्हारी आवाज में दुःख भी झलक रहा है.

लता : ऐसी कोई बात नहीं है.

शिव : अब तुम भी मुझसे बाते छुपाओगी?

लता : नहीं ऐसी बात नहीं है, में बस सोच रही थी की अगर तुम इतने बड़े घर के बेटे निकले तो shayad...(Usne बात अधूरी छोड़ दी, वो ऐसी बात जुबान पर भी नहीं लाना चाहती थी)

शिव : चाहे कुछ भी हो, लता शिव के पास hi रहेगी, कोई कुछ नहीं कर सकता. (लता उसको देखने लगी और उसकी आँखों के कोने भर आये, जो बात वो जुबान पर भी नहीं लाना चाहती थी वो बात शिव बिना कहे hi समाज रहा tha)Pagal, ऐसा सपने में भी नहीं सोचना. (उसने उसको साइड से अपने साथ लगा लिया, लता ने भी अपना शिर उसके कंधे पर रख दिया)

लता : तुम्हे देखती हु तो अपने भाग्य पर रंज नहीं गर्व होता है, भले hi उपरवाले ने मुझे इस दशा में पंहुचा दिया हो पर उसके लिए भी में उसका धन्यवाद hi करती हु.

शिव : अच्छा ऐसी बात है तो फिर आज रात मेरे साथ hi सोना. (माहौल को हल्का करने के लिए उसने कहा, इस बात से वो शर्मा गयी) क्या हुआ, जवाब नहीं दिया.

लता : वो कमला चची यही सोती है. (उसने अपनी असमर्थता जताई)

शिव : तो मुझे उस से क्या, मेने कहा न की तुम आज रत मेरे साथ सोवोगी तो मेरे साथ hi सोवोगी.

लता : (उसको प्यार से देखते hue)Thik है, में देखती हु. (शिव ने उसका चेहरा सहलाया और उसके होठो को प्यार से चूस लिया, लता ने कोई विरोध नहीं किया वो बस उसके प्यार को महसूस कर रही थी, थोड़ी देर बाद जब उसने छोड़ा तो वो प्यार से उसको देखते हुए boli)Ab में जाऊ?

शिव : रात को होगी न? (उसने हां में शिर हिलाया, फिर वो चली गयी, उसके बाद शिव भी बहार चला गया, वो जहान्वी से मिलने गया पर वो नहीं मिली, उसके बाद वो गायत्रीदिदी से मिलने चला गया, शाम को उसने फिर प्रकृति को फ़ोन किया पर फिर उसने फ़ोन नहीं उठाया तो शिव ने उसको मश्ग कर diya)Bahot इम्पोर्टेन्ट है, प्लीज मुझसे बात करो.

यहाँ वैस्वी भी संयम से मिलने उसके घर आयी थी. दोनों सहेलिया संयम के कमरे में बैठी हुई थी और बहोत साडी बाते कर रही थी. वैस्वी एक खास मकसद से आयी थी, वो चाहती थी की वो संयम को अपना और शिव का सच बता दे.

वैस्वी : एक बात करनी थी तुजसे.

संयम : (मुस्कुराते hue)Kya परमिशन मांग रही है? (संयम ने मजाक में कहा, पर वैस्वी सीरियस thi)Kya बात है बोल न.

वैस्वी : मेरी शादी शिव से होनेवाली है.

संयम : क्या? (उसको जैसे जतका सा लगा)

वैस्वी : उसके ताऊजी और मेरे पापा ने बात कर ली है.

संयम : पर इतना जल्दी? (वो अपना दुःख छुपाते हुए बोली)

वैस्वी : अभी सिर्फ बात चल रही है, पर उन्होंने कहा है की वो मेरी शादी उस से करवाएंगे.

संयम : (खुद के ासु रोकते hue)Oh! कोंग्रटुलतिओन्स.

वैस्वी : देख में जानती हु की दुखी है पर तुम्हे ये बताना जरुरी था.

संयम : क्यों? क्यों जरुरी था? (जैसे उस पर तंज कास रही थी, पर वैस्वी ने कोई जवाब नहीं diya)To तू चाहती है की में शिव से दूर हो जाऊ, है न?

वैस्वी : यही सही रहेगा.

संयम : अभी शादी हुई नहीं है, और एक बात कह देती हु, चाहे कुछ भी हो, में उस से दूर होनेवाली नहीं हु. (संयम ने अपना इरादा जाहिर किया)

वैस्वी : ये क्या कह रही है तू, तू हम दोनों को अलग करना चाहती है?

संयम : तू भी तो वही कर रही है, शिव को मुझसे छीन रही है.

वैस्वी : पर ये सब बड़ो ने तय किया है, मेने नहीं.

संयम : तो तू मुझे यहाँ आ कर ये सब बता कर शिव से दूर रहने के लिए केने आयी है, है न? पर में ऐसा कुछ नहीं करुँगी (वो थोड़ा गुस्से से बोली)

वैस्वी : (वो समाज गयी की संयम क्या सोच रही hai)Thik है, में चलती हु, मुझे बस तुम्हे बताना था तो बता दिया, आगे तुम्हारी मर्जी. (कहते हुए वो कमरे से बहार निकल गयी, ज़मीन थोड़ी देर गुस्से से उसको देखती रही फिर उसकी आँखों से ासु टपकने लगे)

रात को शिव काव्यजि के घर नहीं जा पाया क्यों की स्नेहा ने उसको जबरदस्ती अपने घर खाने को रोक लिया था, पवनसीर से भी बहोत साडी बाते हुई, उसके बाद वो घर चला गया. घर पर सब काम में लगे हुए थे तो उसने फिर से प्रकृति को फ़ोन लगाया. उसको पता था की वो नहीं उठाएगी पर फिर भी यही एक रास्ता था जिस से वो अपने माँ बाप से मिल सकता था. उसकी सोच से विपरीत थोड़ी देर बाद प्रकृति ने फ़ोन उठाया.

प्रकृति : Hello. (शिव को बहोत रहत महसूस हुई)

शिव : थैंक गॉड के तुमने फ़ोन उठाया.

प्रकृति : (सपाट लहजे me)Kaho क्या काम है?

शिव : क्या बात है, किस बात से तुम नाराज हो?

प्रकृति : (खुद को सँभालते hue)Agar कोई काम नहीं है तो फिर फ़ोन क्यों कर रहे थे?

शिव : नहीं रुको, बहोत इम्पोर्टेन्ट काम है.

प्रकृति : तो जल्दी बोलो. (प्रकृति सख्त होने का नाटक कर रही थी पर वो जानती थी की वो किसी भी वक़्त पिघल सकती है)

शिव : (बहोत शांत हो kar)Wo तुमने मुझे हॉस्पिटल में जिस से मिलवाया था न, उनकी तबियत कैसी है? (प्रकृति को कुछ समाज नहीं आया)

प्रकृति : वो सब छोडो, तुम्हे क्या काम है वो बताओ, क्या पैसे चाहिए?

शिव : वही काम है, मुझे बस उनकी तबियत जान नई है, और हो सके तो क्या मुझे तुम उन से मिलवा सकती हो.

प्रकृति : तुम्हे क्यों मिलना है? और तुम्हारा क्या लेना देना उनसे?

शिव : (संभल kar)Aisi कोई बात नहीं है, में बस जान न चाहता हु, पता नहीं क्यों पर जब में उनसे मिला था तो वो मुझे बहोत अपने से लगे थे, क्या तुम मुझे उनसे मिलवा सकती हो?

प्रकृति : (मान me)Ye क्यों मिलना चाहता है उनसे, पापा ने सख्त निर्देश दिए हुए है की कोई भी बहार का आदमी उनकी इजाजत के बगैर उनसे नहीं मिल सकता. उन्हें शक है की वो लड़का जो शिवांस बन कर आया है वो कोई नुकसान न पंहुचा दे उनको. पर शिव क्यों मिलना चाहता है?

शिव : (सामने से कोई जवाब न आने par)Hello, hello.

प्रकृति : पापा ने किसी को भी मिलने से मन किया हुआ है.

शिव : क्या में तुमसे मिल सकता हु, हम मिल कर बात कर सकते है, अगर तुम्हे लगे तो उनसे मिलवाना.

प्रकृति : ठीक है. (प्रकृति खुद नहीं समाज प् रही थी की आखिर वो क्यों इस बात के लिए मान gayi)Kab आ रहे हो बता कर आना.

शिव : में कल hi आ जाता हु.

प्रकृति : ठीक है. (उसने फ़ोन रख दिया, पर उसका दिमाग ये समाज ने में लगा हुआ था की आखिर वो मिलना क्यों चाहता है?, उसने सोचा की पहले वो उस से मिलकर hi वो समझेगी और अगर सही नहीं लगा तो वो उसको नहीं मिलवाएगी, वो खुद पर भी हैरान थी की आखिर वो मिलने के लिए मान कैसे गयी, क्यों की उसने सोच लिया था की वो अब शिव से दूर hi रहेगी, वो तर्क वितर्क से खुद को सही साबित करने की कोशिस करने लगी, वो खुद को समजा रही थी की वो किसी और वजह से उसको मिलने को तैयार हुई है उसको शिव से मिलने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है वो बस उसकी मिलने की रिक्वेस्ट की वजह से hi मिलने को तैयार हुई है)

शिव के लिए यही खबर बहोत संतोष देनेवाली थी की प्रकृति मिलने के लिए मान गयी है, वो कैसे भी कर के अपने माँ बाप से मिलना चाहता था, वो जनता था की जैसा पिछली बार हुआ था अगर वैसे hi कुछ हुआ तो उनके माँ बाप का ठीक होने का चांस बहोत ज्यादा बढ़ जायेगा, एक बार वो ठीक हो गए तो फिर आसानी से सब ठीक हो जायेगा. वो लता का इंतजार करने लगा पर काफी समय हो गया फिर भी वो नहीं आयी थी.

इस तरफ लता, सरिता और कमलामौसी तीनो रूम में लेती हुई थी, सरिता को पता था की लता को शिव के कमरे में जाना है, पर वो कमलामौसी की वजह से हिचकिचा रही थी, उसने फुसफुसाते हुए कहा

सरिता : क्या सोच रही है, जाना नहीं है?

लता : (वो शर्मा भी रही थी और गभरा भी रही thi)Par मौसी?

सरिता : उनका क्या है, वो सो गयी है.

लता : (थोड़ा ऊपर हो कर उनको देखते hue)To में जाऊ?

सरिता : इतना क्यों सोच रही है, तुजे नहीं जाना है?

लता : उसने बुलाया है तो जाना तो पड़ेगा hi.

सरिता : मतलब वो नहीं बुलाएगा तो नहीं जाएगी?

लता : ऐसा नहीं है, बस हिचकिचाहट हो रही है, कही मौसी को पता चल गया तो?

सरिता : तो क्या हुआ, वो कोनसा तुम्हे खा जाएगी और उन्हें क्या लेना देना इन सब से.

लता : ठीक है में जाती हु. (कहते हुए वो बैठी और एक नजर कमलामौसी को देखा फिर कड़ी होने लगी, सरसराहट सुन कर मौसी ने उसकी और देखा)

कमलामौसी : क्या हुआ?

लता : (थोड़ा घभराते hue)Kya हुआ?

कमलामौसी : कहा जा रही हो?

लता : वो बस बाथरूम जा रही थी.

कमलामौसी : हम्म्म. (वो फिर आंखे बंद कर ली, लता ने सरिता को देखा तो उसने जाने का इस्सर किया और वो बहार निकल गयी, पहले वो बाथरूम गयी फिर वापस आते वक़्त उसने शिव के कमरे की और देखा, जाये की न जाये वो सोचने लगी, उसको पता था की शिव इंतजार कर रहा होगा, उसने सोचा की उसको बता के वापस आ जाती हु की वो नहीं आ सकती, वो आहिस्ता से शिव के कमरे की और बढ़ी, दरवाजा खुला hi था, वो अंदर गयी तो शिव आंखे बंद किये हुए लेता था, उसने सोचा की शायद वो सो गया है, वो अभी सोच hi रही थी की शिव ने कहा

शिव : इतनी देर क्यों लगा दी?

लता : वो में वो ...

शिव : दरवाजा बंद कर दो. (लता को समाज नहीं आ रहा था की क्या करे, वो शिव को मन भी नहीं कर सकती थी क्यों की शिव के साथ रहने का उसका भी बहोत मान था, वो अभी सोच hi रही थी ki)Kya सोच रही हो, दरवाजा बंद करो और आ जाओ.

लता : वो कमलामौसी जग रही है.

शिव : तो क्या हुआ, तुम दरवाजा बंद कर दो. (लता को कुछ समाज नहीं आ रहा था की क्या करे पर उसने दरवाजा बंद किया और शिव की और आयी, अभी उसने घाघरा चोली पहन रक्खी थी, जैसे hi वो नजदीक आयी शिव ने हाथ पकड़ कर उसको अपनी और खिंच लिया तो वो साइड शिव के बगल में बेथ gayi)Kya हुआ इतना क्यों दर रही हो?

लता : वो मौसी...

शिव : इतना क्यों दर रही हो? (लता ने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस गभरा रही थी, शिव भी बिस्तर में बेथ गया, वो सिर्फ ुंडेरवेर पहने हुए tha)Itna डरने की जरुरत नहीं है, एक न एक दिन उनको पता चलना hi है, उनको क्या सबको पता चलना है, अब डरना छोडो. (कहते हुए वो लता के चहेरे को प्यार से देखने लगा और साथ में उसके चेहरे पर आये बाल को हटा कर उसके कान के पीछे करने लगा, उसकी हरकत से लता मुस्कुरायी और शर्मा गयी) कितने दिन हो गए इस प्यारे से चेहरे को इतना नजदीक से देखे हु. (लता उसकी आँखों में देखने लगी जहा प्यार hi प्यार था, वो जानती थी की वो शिव के जीवन में क्या महत्व रखती है)

लता : इतनी पसंद हु तुम्हे? (वो प्यार से शरमाते हुए बोली)

शिव : ये भी कोई पूछने की बात है (कहते हुए उसने लता में माथे को चूमा, लता ने आंखे बंद कर ली और उस प्यार को महसूस करने लगी, फिर आंखे खोल कर उसको देखने lagi)Kya देख रही हो? (उसने बस ना में गर्दन हिलायी) कल मुझे जाना है.

लता : अब कहा जाना है? (उसका दिल जैसे टूट गया)

शिव : क्सक्सक्स सहर.

लता : क्यों? (शिव ने उसको सब bataya)Jo भी करो सोच समाज कर करना, मुझे तुम्हारी चिंता लगी रहती है.

शिव : चिंता मात करो, सब ठीक हो जायेगा, बस एक बार मुझे यकीं हो जाये की में वो हु या नहीं.

लता : कितना अच्छा हो अगर ये बात सच होजाये और तुम्हे तुम्हारे माता पिता मिल जाये. तुम्हारे ऊपर से ये अनाथ का सिक्का निकल जाये इस से अच्छी बात क्या होगी.

शिव : देखते है.

लता : चिंता मात करो सब ठीक hi होगा.

शिव : ठीक है, चलो सोते है. (उसकी बात से लता शर्मा गयी, शिव भी समाज रहा था की वो क्यों शर्मा रही है, लता को देख कर उसका भी बहोत मान करने लगा था, उसने लता को पकड़ कर अपनी और खिंचा तो लता भी उसकी और सरक आयी, दोनों एक दूसरे की आँखों में देखने लगे, शिव झुका और उसके होठो की और बढ़ने लगा, लता की धड़कन तेज होने लगी, जैसे hi शिव उसके होठो को चूमने लगा उसकी सासे बेकाबू होने लगी, उसको किश करते हुए शिव ने उसको बिस्तर पर लेता दिया और बगल से वो आधा उसके ऊपर हो कर उसके होठो को किश करने लगा, लता आंखे बंद किये हुए उसके प्यार का मज़ा लेने लगी, तभी उसका एक हाथ उसके स्तन पर कास गया और उसको मसलने लगा, वो अंदर से जल उठी, उसको भी शिव का प्यार चाइये था, वो शिव को बहो में भरने लगी और खुद को शिव को सौंप दिया. सिर्फ किश से hi शिव का लुंड पूरी औकात में आ गया था, वो उसके ऊपर होने लगा और उसके पेअर फैलते हुए बिच में आ गया और उसके होठो को जोरो से निचोड़ने लगा, लता भी अपनी छूट पर वो सख्त डंडे को साफ़ महसूस कर रही थी, उसकी भी सासे फूलने लगी, उसका सास लेना मुश्किल हो रहा था, उसने अपने होठ छुड़ा लिए और जोर जोर से सासे लेने लगी पर शिव उसके गले को चूमने लगा तो वो उसके बालो को नोचने लगी, दोनों की सासे जोरो से चल रही थी, थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे को चुम और चाट रहे थे, शिव भी अब बेकाबू होने लगा था क्यों की उसकी सबसे पसंदीदा स्त्री उसकी बहो में थी, वो अब एक पल गवाना नहीं छठा था तो वो उसके ऊपर से उठ गया, लता ने भी उसको छोड़ दिया क्यों की आगे बढ़ने के लिए ये जरुरी था, वो इतनी शर्मा रही थी की शिव से नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी, शिव उसकी चुन्नी निकलने लगा, उसने बस आंखे बंद कर ली, शिव उसका ब्लाउज खोने लगा, वो बस चद्दर को जोरो से अपनी मुठी से पकड़ने लगी पर उसको रोका नहीं, वो रोकना चाहती थी नहीं थी.

मेने उसका ब्लाउज आगे से खोल दिया, उसकी सफ़ेद ब्रा में कैद उसके गोर स्तन अध् नंगे मेरे सामने थे, वो मुझे बहोत ज्यादा आकर्षित करती थी, में झुका और ब्रा के ऊपर से hi उसके स्तन चूसने लगा, मेरी इस हरकत से उसका शरीर अकड़ गया और वो कमर से ऊपर हो गयी और जोरो से चद्दर को मुट्ठी में पीसने लगी.

लता : Shhhhhhhhhhhh. (उसकी गर्म सिसकारी मुझे और उत्तेजित करने लगी, उसके स्तन को ब्रा के ऊपर से चूसने में मजा काम होने लगा तो में उसकी ब्रा को ऊपर उठाने लगा पर ब्रा छोटी थी और बहोर टाइट हो रही थी, मेने उसको साइड में किया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए, साथ में उसके ब्लाउज को भी एक और से निकल दिया, वापस उसको सीधा किया, ब्रा अब ढीली हो चुकी थी, मेने उसको ऊपर उठा दिया, दोनों स्तन अपना आकर स्पस्ट दिखा रहे थे, माध्यम आकर के थे पर कड़क और ऊपर की और पूरी तरह से उठे हुए थे, वो उनको देखने में hi खो गया, कुछ पर देखने से वो और आकर्षित हुआ और झुकते हुए उसके निप्पल को अपने मुँह में भर लिया,





तो लता ने उसके शिर के बाल पकड़ लिए, वो जैसे जैसे निप्पल को चूस रहा था वो उसके बल नोच रही थी, वो जोरो से उसके निप्पल चूस रहा था, और लता जोरो से सिसकिया ले रही थी और अपनी झंघे आपस में रगड़ रही थी, शिव से ज्यादा रुकना मुमकिन नहीं था, उसने लता के घाघरे का नाडा पकड़ा और खिंच दिया, अनायास hi लता का हाथ उसको रोकने लगा पर उसने हाथ हटा दिया, लता ने भी चद्दर पकड़ ली और उसको जो करना है वो करने की आज़ादी दे दी, कुछ hi पालो में उसका घाघरा खिंच कर उसने निकल दिया, और उसकी ब्रा और ब्लाउज को भी निकल दिया, वो अब सिर्फ सफ़ेद पंतय में थी, वो जोरो से चद्दर पकड़ कर और अपनी झंघे आपस में सत्ता कर खुद को कण्ट्रोल करने लगी और खुद की शर्म से बेहाल होती जा रही थी, उसको इस हाल में देख कर शिव भी बेकाबू हो रहा था उसका लुंड पूरी औकात में था, उसने अपना अंडरवियर उतर फेंका और लता की पंतय भी खींचने लगा, लता अपनी झंगे कास कर उसको रोकने का विफल प्रयास करती रही पर उसने उसको पूरा नंगा कर दिया, उसने जोरो से अपनी आंखे कास ली, शिव उसके ऊपर आ गया और उसको उसका नंगा शरीर महसूस होने लगा और लुंड उसकी योनिपर चुभने लगा )

शिव : लता (वो बहोत प्यार से बोलै, लता ने भी आंखे खोल दी और उसको देखने lagi)Tum बहोत प्यारी हो. (लता मुस्कुराते हुए उसको देखने lagi)Tum चाहती हो न में ये सब तुम्हारे साथ करू. (लता एक दो पल उसकी आँखों में देखती रही फिर हां में सर hilaya)Tum हमेशा मेरे साथ रहोगी न? (उसने फिर हां में सर hilaya)Me तुम्हे बहोत प्यार करूँगा.

लता : (उसका चेहरा सहलाते hue)Me भी. (फिर से दोनों के होठ आपस में भीड़ गए और फिर उनके बिच खेल सुरु हो गया)

































लता थक कर चूर हो गयी थी, उसका पूरा बदन टूट रहा था, शिव ने उसको बहो में भर लिया था और वो बस उसकी बहो में खुद की थकन मिटा रही थी, वो पूरी तरह से संतुस्ट थी, पर वो जानती थी की शिव का इतना जल्दी मान नहीं भरेगा, वो अभी उसको सोने नहीं देगा और न खुद वो सोना चाहती थी, आखिर कितने दिवो बाद वो उसकी बहो में आयी थी, फील हल उसको किसी बात की फ़िक्र नहीं थी, वो बस अपने शिव को खुस करने में लगी हुई थी.
 
में जनता हु की समय लग रहा है, पर आप सबको सफाई देने में मुझे अपने निजी जीवन में क्या चल रहा है वो सब बताना पड़ता है, आप सब समाज रहे है की मेरी हालत क्या हुई थी, मुझे कोई अकेला नहीं छोड़ता और ऐसेमे में लिख नहीं पता क्यों की ये सब सबके सामने तो लिख नहीं सकता, माफ़ कीजियेगा.
 
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