Adultery Kundali Bhagya - Page 22 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

सॉरी गाइस फॉर लेट, टुडे इस माय बर्थडे, that's व्हाई ी ऍम बिजी विथ फॅमिली. एन्जॉय अपडेट.
 
अपडेट 150

शिव चला गया था, मनिषाने रहत की साँस ली की किसी को कुछ पता नहीं चला, दोपहर का टाइम था तो सब नौकर आराम के लिए चले गए थे, वो वापस अपने बैडरूम में आ गयी, अपने बच्चे को फिर से दूध पिलाया, फिर उसे सुला कर बीएड पर लेट गयी, उसका बदन दर्द कर रहा था, जिस तरह से शिव उसे निचोड़ता था ऐसा कोई नहीं कर पता था, उसके पति जेंटलमैन थे, वो उसको संतुस्ट कर देते थे, उसे कोई शिकायत नहीं थी, पर शिव के साथ वो जो महसूस करती थी वो आज तक किसी के साथ महसूस नहीं कर पायी थी, शायद ये उसके बड़े अंग की वजह से हो सकता था, इतनी चुदाई के बाद भी शिव को याद करके उसकी छूट गीली होने लगी थी, उसका हाथ फिर से अपनी छूट पर चला गया, वो साड़ी के ऊपर से hi अपनी छूट दबाने लगी, और शिव को याद करने लगी, वो सेक्स की भूखी तो नहीं थी, अपने पति से शादी करने के बाद उसने कभी किसी से सेक्स नहीं किआ था, पर पिछले कुछ समय से उसके पति का काम कुछ ज्यादा hi बढ़ गया था जिसकी वजह से वो अक्सर बहार रहने लगे थे, और कही न कही शिव पर उसका दिल आ गया था, तो शिव के साथ वो रिलेशन बना चुकी थी, और इस बात की उसे खुसी भी थी. थोड़ी देर छूट सहलाने के बाद उसकी ज्यादा हिम्मत नहीं हुई, क्यों की उसे वह दर्द हो रहा था तो वो आँखे बंद कर के सो गयी.

बिना और स्वर्ण दोनों बिना के घर में बैठे हुए थे, स्वर्ण अपनी गाड़ी ले कर आयी थी, बिना स्कूल से आयी थी तो दोनों खाना खाने साथ में बैठी थी, खाने के बाद अब दोनों सोफे पर बैठी हुई थी.

बिना : और सुनाओ दीदी, कैसा चल रहा है?

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Sab थी है भाभी, अच्छा घर है, मेरी पसंद से शादी की है, सब कुछ सही है.

बिना : अच्छी बात है, मुझे खुसी हुई जान कर. और क्या सोचा फिर, अनुष्ठान में आने का मान बना लिया की नहीं.

स्वर्ण : है आउंगी, वैसे भी शादी के बाद तो कभी घर गयी नहीं, अब वो खुद नौटा दे गए है तो आउंगी तो जरूर, पर अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा की इस अनुष्ठान की क्या जरुरत है, ये सब अंधविस्वास है, और वैसे भी ये अनुष्ठान इस्सलिये किआ जा रहा है की किसी को कोई संतान नहीं है, अबतो आप सब को पता चल गया की में प्रेग्नेंट हु, तो फिर उस अनुष्ठान का कोई मतलब नहीं रह जाता.

बिना : ये अनुष्ठान संतान के लिए नहीं है. (बिना ने कुछ सोच कर खुलासा किआ)

स्वर्ण : (उसने आश्चर्य से अपनी भाभी को देखा, क्यों की उसके चाचा ने तो यही बताया tha)Kya मतलब है भाभी आपका, माँ और चाचाजी तो बता रहे थे की ये अनुष्ठान संतान के लिए है, कुटुंबम किसी को संतान नहीं हो रही उस लिए रक्खा गया है.

बिना : (कुछ पल उसने सोचा की बताये की न बताये, पर अब वो स्वर्ण का राज़ जानती थी, और उसे शिव की ज्यादा फ़िक्र भी थी, तो ये अनुष्ठान तो जरुरी hi था) ये अनुष्ठान, संतान के बाप के लिए रक्खा गया है.

स्वर्ण : आकाश के लिए? (उसने आश्चर्य से kaha)Uske लिए क्यों?

बिना : (उसने अर्थपूर्ण ढंग से kha)Aakashjijaji के लिए नहीं दीदी, इस संतान के बाप के लिए.

स्वर्ण : (अपनी भाभी के मुँह से ये सुन कर वो अंदर तक हिल गयी, क्यों की वो एहि मानती थी की ये बात किसी को नहीं पता की इस बच्चे का बाप शिव है, उसकी जबान भी लड़खड़ा gayi)Ye..ye क्या कह रही हो आप, मेरे बच्चे का बाप तो आकाश hi है न.

बिना : (वो muskurayi)Mujse बेहतर तो आप जानती हो.

स्वर्ण : (नजर चुराते hue)Ye क्या मज़ाक कररही हो आप, आपको पता भी है की आप क्या बोल रही हो?

बिना : (शांति से उसके हाथ पर हाथ रख kar)Tumhe क्या लगता है? क्या में पागल हु? (स्वर्ण ने उनकी आँखों में देखा, भाभी गंभीर थी, पर उसको ये समाज नहीं आ रहा था की आखिर वो ये कैसे कह सकती है)

स्वर्ण : (अपना राज़ खुलने की कगार पर था, ये सोच कर hi उसे शर्मिंदगी हो रही थी, उसकी आँखों में आंसू आने लगे थे, उसका गाला भर aaya)Bhabhi....aapko पता है, आप क्या बोल रही है.

बिना : है पता है.

स्वर्ण : आप मुज पर इलज़ाम लगा रही है भाभी.

बिना : में कोई इलज़ाम नहीं लगा रही, बस बता रही हु. अगर में जूथ बोल रही हु तो अपनी कोख पर हाथ रख कर कस्सम खा कर बताइये की ये बच्चा आकाशजिजाजी का hi है. (स्वर्ण पूरी तरह से टूट गयी, उसकी आँखों से आंसू बहने लगे, बिना ने उसे गले लगा liya)Shant हो जाओ दीदी, इसमें डरनेवाली या शर्मिंदा होनेवाली कोई बात नहीं है, आपकी तसल्ली के लिए में भी आपको अपना राज़ बता रही हु, में भी प्रेग्नेंट हु..... (कुछ पल रुक kar)hamari कोख में पल रहे दोनों बच्चो का बाप एक hi है. (स्वर्ण बुरी तरह से चौंक गयी, वो अलग हो कर अपनी भाभी को देखने लगी, जो मुस्कुरा रही थी)

स्वर्ण : ये क्या कह रही हो आप?

बिना : वो hi जो आपने सुना.

स्वर्ण : पर ये कैसे संभव है? और आप प्रग्नेंट हो वो माँ को या चाचा को तो पता hi नहीं है.

बिना : कोई नहीं जनता. में जानती हु, इस बच्चे का पिता जनता है, अब आप जानती है और ममतादिदी.

स्वर्ण : क्या? ममता??? वो जानती है की आपके बच्चे के पिता जिग्नेशभाई नहीं है.

बिना : है.

स्वर्ण : उन्होंने आपको कुछ नहीं कहा?

बिना : नहीं.

स्वर्ण : (उसके दिमाग में एक और बात aayi)Mamta भी प्रेग्नेंट है, मतलब घर में तीन लोग प्रग्नेंट है. मतलब ये अनुष्ठान से इसका कोई लेनादेना नहीं.

बिना : है भी और न भी.

स्वर्ण : में सामजी नहीं भाभी.

बिना : जैसा की मेने कहा की इस का, हम माँ बन शेक, इस बात से कोई लेना देना नहीं है, क्यों की हम आलरेडी माँ बन ने वाली है, पर शायद बच्चो के पिता का लेना देना है.

स्वर्ण : (अभी भी उसके दिमाग में कई सवाल the)Ek बार मान भी लू की मेरे बच्चे का पिता कोई और है, पर मेरे और आपके बच्चे का पिता एक hi है ये आपको कैसे पता?

बिना : बच्चो के पिता ने hi बताया है.

स्वर्ण : (शिव ने? नहीं नहीं, वो नहीं बता शक्ति, पर अगर वो hi भाभी के बच्चे का बाप है तो ... पर kaise????)Bhabhi, आप साफ़ साफ़ बताओ, आपके बच्चे का पिता कोण है?

बिना : (Muskurakar)Wo hi जो आपके बच्चे का पिता है.

स्वर्ण : पहेलियाँ मात बुझाओ भाभी, मुझे नाम बताओ.

बिना : क्यों, अपने मुँह से नाम लेने से दर लग रहा है की कही वो दूसरा न हो.

स्वर्ण : (उसकी भाभी उसका मान पढ़ रही थी, पर वो अभी भी हथियार डालने को तैयार नहीं थी, क्यों की जहा तक वो शिव को जानती थी वो ये नहीं बताएगा, तो भाभी को पता चलने का सवाल hi नहीं पैदा hota)Bhabhi, प्लीज, नाम बताओ, मेरा दिमाग फैट जायेगा. (अपना शिर पकड़ कर)

बिना : इतना उत्तेजित मात होइए, आपको अभी भी विस्वास नहीं हो रहा है न तो सुनिए, में शिव की बात कर रही हु. (स्वर्ण की आंखे फ़ैल गयी और उसका मुँह खुला का खुला रह गया, बिना ने मुस्कराहट से जवाब diya)Ab तो आपको यकीं हुआ?

स्वर्ण : (उसने अपना शिर पकड़ लिया, वो अभी भी यकीं नहीं ार प् रही थी, उसकी भाभी अभी कुछ दिन से hi उसे जानती थी और वो शिव से प्रेग्नेंट तो कई दिनों पहले हो चुकी थी, उसके बाद तो वो बहार कही मिली भी नहीं थी, तो भाभी को कैसे पता chala)Kaise????? (वो बास इतना hi बोल पायी)

बिना : क्यों अब तो यकीं हुआ, है मेरे बच्चे का पिता भी शिव hi है, और वो भी मुझे आपके बारेमे नहीं बता रहा था, पर मुझे पता चल चूका था तो मेने hi कसम दे कर उस से बुलवाया था.

स्वर्ण : मतलब उसके बताने से पहले hi आपको पता था, कैसे????

बिना : जो बाबाजी ये अनुष्ठान करवा रहे है उन्होंने hi बताया था.

स्वर्ण : मेरे बारे में? में तो मिली भी नहीं उनसे.

बिना : आपके बारे में नहीं, मेरे और ममतादिदी के बारेमे.

स्वर्ण : (उसे फिर कुछ याद aaya)Aapne कहा ममतादिदी भी प्रेग्नेंट है... (वो आगे कुछ बोल तो नहीं पायी पर उसकी आँखों में सवाल था)

बिना : है वो भी.

स्वर्ण : भाभी, मेरा दिमाग फैट जायेगा, आप स्पस्ट सब्दो में बोलिये, क्या ममता भी शिव के कारन hi गर्भवती है?

बिना : है.

स्वर्ण : ये कैसे संभव है भाभी? वो ऐसा नहीं है.

बिना : जानती हु, पर ये उसकी नियति है.

स्वर्ण : कहना क्या चाहती है आप?

बिना : पूरा तो मुझे भी पता नहीं है, पर अगर आप प्रेग्नेंट हो तो वो शिव के अलावा कोई और हो hi नहीं सकता था, ऐसा क्यों है वो पता नहीं पर ये hi सच है. आपकी नियति hi आपको उसके पास ले गयी, उसके अलावा आप किसी के साथ भी रहती तो आप गर्भवती नहीं होती.

स्वर्ण : ऐसा कैसे संभव है भाभी. आपको पता नहीं है की में कितनी मजबूर थी, मेरा पति जो की मेरा प्रेमी भी है, उनके साथ धोखा करने में मुझे कितनी तकलीफ हुई है ये में hi जानती हु, पर समाज के बांचन और घरवालों की अपेक्षा के चलते मुझे ये कदम उठाना पड़ा था, आज तक में यकीं नहीं कर प् रही हु की मेने ऐसा कदम उठाया है, जब भी में आकाश के साथ होती हु तो मुझे अपने आप से नफ़रत होती है. (वो रोने लगी, बिना उसे सहलाने लगी, रट hue)Me अपना दुःख किसी को बता भी नहीं सकती थी भाभी, में दिल पर कितना बोझ ले कर चल रही थी.

बिना : आपकी कोई गलती नहीं है दीदी, ये सब भाग्य का खेल है. आपको शिव के पास जाना hi था, आप दिल पर बोझ मात रखिये.

स्वर्ण : पर शिव hi क्यों, उस का क्या सम्बन्ध है?

बिना : वो तो मुझे भी नहीं पता दीदी, पर कोई तो सम्बन्ध जरूर है, वर्ण बाबाजी उसके लिए अनुष्ठान करने की बात न करते, उसके लिए पुरे परिवार को इकठ्ठा होने को बोलै है.

स्वर्ण : (अपने ासु पोछ kar)Aap योगेंद्र चाचा के बारे में पूछ रही थी? क्या इसके लिए hi पूछ रही थी?

बिना : है दीदी, क्यों की और कोई तो है नहीं जिन्हे में न जानती हु, और वो चाचाजी है फिर भी मुझे कुछ नहीं पता तो कही न कही शक होता है.

स्वर्ण : मुझे भी जयदा पता नहीं है, पर आपके फ़ोन के बाद मेने माँ से बात की थी, तो उन्होंने बताया था, उनका एक बीटा भी था भाभी, शिवांश, पर वो तो मार गया है, उसके लिए hi चाचा और चची की हालत ख़राब है. चची तक़रीबन पागल हो चुकी है और चाचा कोमा में है.

बिना : शिव, इन सब में कही भी फिट नहीं बेथ ता, तो फिर क्या सम्बन्ध हो सकता है?

स्वर्ण : भाभी, कही वो शिवांस hi तो नहीं है, (पर फिर खुद hi निराश हो gayi)nahi पर ये कैसे संभव है, वो तो मर चूका है.

बिना : कुछ समाज में नहीं आ रहा.

स्वर्ण : ममता को पूछते है, और अगर उन्हें पता नहीं भी होगा तो वो चचाजी से या चची से पूछ सकते है, हमारे घर में तो इस बारेमे बात करना hi मन है, माँ ने भी बहोत डरते डरते ये बताया था. में फ़ोन करती हु. (स्वर्ण ने फ़ोन लगाया)

शिव को आने में देर हो गयी थी, जहान्वी बहोत बेचैन थी, आज उसने पिंकेश को नहीं पूछा, उसका मान कर रहा था की कॉल करे, पर फिर सोचा कही बिजी होगा तो उसने मश्ग कर दिया था की ‘कहा हो? आनेवाले हो?’. मश्ग करने के बाद वो सोच में पद गयी थी.

जहान्वी : में क्यों इतना सोच रही हु, मेरा और उसका क्या मेल है, वो अभी छोटा है, मेरा और उसका अफेयर कैसे संभव है, और अगर हुआ भी तो आगे क्या होगा. (मन : इसमें इतना क्या सोच रही है, ऐसा तो है नहीं की ये तेरा पहला अफेयर है, हमेशा से तेरा यही ख्याल रहा है न की ‘एन्जॉय थे लाइफ’, तो फिर अब क्या इतना सोच रही है, और वैसे भी पूरी जिंदगी थोड़ी न बितानी है तुजे, कुछ दिन मज़े कर उसके साथ, वैसे भी घरवाले तेरी शादी की सोच hi रहे है, शादी के बाद अहा आज़ादी मिलेगी, ज्यादा सोच मात और मज़े कर) सही है, पर पिछले अनुभव के बाद अब हिम्मत नहीं होती, कितना घटिया था वो, अपने hi दोस्तों के साथ करने को बोल रहा था, क्या में इतनी गिरी हुई हु की किसी के साथ भी कर लेती, पहले कितना पीछे पीछे घूमता था, मेने तो शादी का भी सोच लिया था, पर थैंक गॉड की समय पर पता चल गया, पर शिव के साथ कुछ अलग फील हो रहा है, ऐसा क्यों है, पता नहीं. यहाँ आने के बाद भी कितने hi लड़के प्रोपोज़ कर चुके है पर मेने किसी को है नहीं कहा, मेरी फ्रेंड्स भी अपने बॉयफ्रेड्न के साथ घूमती है पर मेने यहाँ कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं बनाया, पर शिव को देख कर कुछ फील हुआ मुझे, पता नहीं क्या बात है उसमे, बहोत खिंचाव महसूस कर रही हु, उम्र का फर्क देख कर आगे और कुछ तो संभव नहीं है पर फिर भी फिजिकल हो सकती हु क्या में? (मान : क्यूनही हो सकती, प्रॉब्लम क्या है) अगर उसे पता चलेगा की में पहले भी ये सब कर चुकी हु तो वो मेरे बारे में क्या सोचेगा? (मान : तूने ये तो कभी नहीं सोचा की तेरा पति क्या सोचेगा, और तू शिव की बात कर रही है की, क्या सोचेगा?) सच कहु तो वह विदेश में कल्चर hi ऐसा है की ये सब बेमानी लगता hai,waha की लड़कीअ और औरते कितना बेफिकरी से जीती है, मेरी फ्रेंड्स भी तो सब करती थी तो मेने भी कर लिया, पर यहाँ का माहौल अलग है, यहाँ लोग ये सब सोचते hai.(Maan : ऐसा कुछ नहीं है, आज कल तो ये सामान्य है, सेक्स करना कोनसी बड़ी बात है, उसे भी तो मज़ा आएगा, इतना क्यों सोच रही है, वो तुजे पकड़ कर किश तो कर hi चुकाहै, तू थोड़ा सा आगे बढ़ेगी तो वो सब कुछ कर देगा, अब ज्यादा सोच मात और लाइफ को एन्जॉय कर.)

जहान्वी को कुछ समाज नहीं आ रहा था तो वो उठ कर बहार चली गयी और सबके काम पर नजर रखने लगी. वाइज भी ये सब वो कई बार सोच चुकी थी, पर हर बार उसका मान hi जित जाता था, इसीलिए तो वो आज अच्छे से तैयार हो कर भी आयी थी, उसे पता था की शिव आएगा, खास उसके लिए hi वो तैयार होकर आयी थी.

में मनीषजी के घर से निकल कर सीधा साइट की और निकल गया, मेने रस्ते से hi काव्यजि को फ़ोन किआ था. पर वो कोर्ट में होंगी तो फ़ोन नहीं उठाया, मेने उन्हें मश्ग कर दिया. मुझे पता था की जहान्वी वही होगी, जब उसे पता चलेगा की मुझे कागजात मिलगये है तो वो कितना खुस होगी, उसके कारन hi तो ये संभव हुआ है, मेने उसके साथ कितना गलत सलूक किआ, भले वो थोड़ी गुस्सैल है, और काम के लिए hi तो सुनती थी, क्या गलत कहा था उसने, में hi ज्यादा कर गया, ये तो सुकर है की उसने कोई कदम नहीं उठाया, वर्ण हालत पतली हो जाती, अब में ऐसी वैसी कोई भी हरकत नहीं करूँगा, वैसे भी इतनी साडी तो है, और सब प्यार करनेवाली है तो मुझे क्या जरुरत है की में उसके साथ जबरदस्ती करू, गलती हो गयी है मुझसे, अब सुधारना hi पड़ेगा. उसके साथ सलीके से hi पेश आऊंगा. जब में साइट पर पंहुचा तो ऑफिस की और देखा तो वह कोई नहीं था, दरवाजा भी बहार से बंद था तो में आगे की और बढ़ गया, वह देखा तो जहान्वी मुझे दिख गयी.





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जहान्वी : (हलकी नाराजगी se)To फुर्सत मिल गयी जनाब को. (ये वही वाक्य था जो पहले भी वो बोलती थी, उस समय मुझे गुस्सा आता था पर आज हसी आयी)

शिव : सॉरी, लेट हो गया. (मेने माफ़ी माँगनेवाला चेहरा बनाया)

जहान्वी : (हलकी मुस्कराहटके sath)Koi बात नहीं. (सब ने मेरी और देखा फिर अपने काम में लग gaye,Pinkesh भी वही खड़ा था)

शिव : एक बात बतानी थी.

जहान्वी : हम्म्म, बोलो.

शिव : यहाँ नहीं, बहार चलिए न.

जहान्वी : (उसका दिल एक धड़कन चूक गया, सबके सामने शिव ने ऐसा बोलै था, वैसे तो ये सामान्य बात hi थी, पर जहान्वी को लगा जैसे शिव उसे प्रोपोज़ करनेवाला है, उसने सबकी और देखा तो सब अपने काम में hi थे, जहान्वी को अपने आप पर हसी आयी, वो कुछ ज्यादा hi सोच रही थी, अपने आपको सँभालते hue)Ha चलो. (हम दोनों बहार आ गए, कुछ कदम चलने के बाद) है बोलो.

शिव : ऊपर ऑफिस में चलते है. (जहान्वी का दिल जोर जोर से धक् धक् करने लगा, वो कुछ नहीं बोली और ऑफिस की और चलने लगी, उसकी साँस भी फूलने लगी थी, वो जैसे तैसे ऊपर गयी, जैसे hi अंदर गए)

जहान्वी : अब ठीक है?

शिव : है, मुझे कुछ बताना था.

जहान्वी : (हलकी शर्मा गयी, आवाज भी धीमी हो gayi)Bolo, सुन रही हु.

शिव : (मेरे मान में तो और hi कुछ चल रहा था तो मुझे उनके भाव समाज hi नहीं आये, या यु कहो की मेने देखा hi nahi)Anathalay के कागजात मिल गए. (मेने उत्साह पूर्वक कहा)

जहान्वी : (उसने सुना पर उसको और कुछ सुन न था तो वो सामजी nahi)Kya?

शिव : अनाथालय के कागजात मिल गए है. (मेरे हाथ का लिफाफा दिखते हुए मेने हस्ते हुए कहा)

जहान्वी : (वो संभल चुकी थी, तो उसने भी खुस हो कर kaha)Sach में? कहा से मिले?

शिव : आपकी वजह से hi मिले है. (में इतना खुस था की दिल किया की उसे गले लगा लू, में एक कदम बढभी गया था)

जहान्वी : (उसे लगा की शिव अभी उसे गले लगनेवाला है, क्यों की वो आगे भी बढ़ा और अपनी बहे भी फ़ैलाने लगा था, पर वो रुक गया, तो जहान्वी भी रुक गयी वर्ण वो भी गले लगने को बेक़रार थी, उसने अपने आपको sambhala)Meri वजह से? सामजी नहीं में.

शिव : आपने आईडिया दिया था न, प्रेस में बात फ़ैल गयी तो एक वकील है जो मनीषा मैडम को जनता था, वो उनसे मिलने आया, उसने बताया की कागजात उसके पास है, जानकीदास ने वो कागजात उनके पास रखवाए थे, अनाथालय यहाँ था तो कभी भी कागजात की जरुरत पद सकती है, तो इसी सहर में उन्होंने वकील के पास रखवाए थे, उसे नहीं पता था की अनाथालय में ये सब हो रहा है, और इतने सालो में कभी उसकी जरुरत भी नहीं पड़ी तो उनके दिमाग से भी निकल गया था. टीवी पर न्यूज़ देख कर उन्हें पता चला, मनीषा मैडम भी थी तो वो उनको पहचानता था तो उसने उन्हें कागजात की कॉपी दे दी. ये सब आपकी वजह से हुआ है (फिर मेरा मान किआ की गले लगा लू)

जहान्वी : थॉट्स गुड. (वो नीरस थी की शिव फिर से वैसा hi करनेवाला था पर वो रुक क्यों जा रहा है, वो समझने की कोशिस कर रही थी की आखिर बात क्या है, पिछली बार भी उसने कितने अच्छे से उसे किश किआ था, तो अब क्यों झिझक रहा hai)Chalo अच्छा हुआ, ये कागजात उस अफसर को दिखा देते है, तुम्हारी समस्या हल हो जाएगी. (शिव की आँखों में देखते hue)Yahi बताना था?

शिव : (उनके चेहरे पर उदासी दिखी मुझे, पता नहीं kyu)Ha (उदासी का कारन जान ने के लिए मेने puchha)aap को खुसी नहीं हुई?

जहान्वी : मुझे क्यों नहीं होगी, तुम खुस तो में खुस.

शिव : आपके चेहरे से ऐसा नहीं लग रहा, कोई और बात है क्या?

जहान्वी : (सँभालते hue)Are कुछ नहीं है, चलो पहले उस अफसर से मिलते है. (वो बहार की और चलने लगी, में भी पीछेपीछे निकल गया, वो गाड़ी में बेथ गयी, में वही खड़े उन्हें देख रहा था, सच कहु तो वो आज बहोत सुन्दर दिख रही थी, तैयार भी थी, पर उनके चेहरे की उदासी मुझे समाज नहीं आ रही थी, उन्होंने हाथ के इससरए से मुझे अंदर आने को कहा तो में दरवाजा खोल कर अंदर बेथ गया, उन्होंने गाड़ी बहार निकली और रस्ते पर दौड़ा दी, में बार बार उन्हें hi देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था)

जहान्वी : बार बार ऐसे क्या देख रहे हो (जहान्वी ने अपनी नजर रोड पर hi रक्खी)

शिव : (झेपते hue)Nahi, कुछ नहीं.

जहान्वी : क्या कुछ नहीं, बार बार मुझे देख रहे हो, अजीब लग रही हु क्या?

शिव : अरे नहीं, आप कैसे अजीब लग सकती हो आप तो खूबसूरत हो. (मेरे मुँह से निकल गया)

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)To इसीलिए मुझे देख रहे थे.

शिव : (झेपते hue)Nahi, .... में तो वो ... आप कितनी अच्छी गाडी चलती हो वो देख रहा था.

जहान्वी : (उसे पता था की शिव जूथ बोल रहा है पर उसने बात को खिंचा nahi)Tumhe आती है?

शिव : नहीं, मुझे कहा से आएगी, में तो अभी अभी गाड़ी में बैठता हु, उस से पहले तो कभी मौका भी नहीं मिला था की किसी गाड़ी में भी बेथ सकू.

जहान्वी : सीखना चाहते हो?

शिव : है क्यों नहीं. (ऐसेही बात करते करते दोनों ऑफिस पहुंच गए, ऑफिस में जा कर वो उस अफसर से मिले)

अफसर : (अब उसे पता था की ये लड़की मला की बेटी है पर वो दूसरी साइड है, तो रुआब झड़ते hue)Kaho, कैसे आना हुआ?

जहान्वी : (शांति से) अनाथालय के बारेमे बात करनी थी.

अफसर : आपको क्या लगता है, ऐसे सब नाटक करने से सरकारी काम रुक जायेगा? चाहे आपलोग कितने थी धरने कर लो, नियम नहीं बदलने वाले, जो होना है वो हो कर hi रहेगा.

जहान्वी : अच्छा, तो फिर आपको जो करना है वो करिये, में एक प्रेस कांफ्रेंस बुलवाती हु और उसमे कहूँगी की मेने आपको पैसे दिए थे, रिस्वत के तौर पर, और इसकी गवाही यहाँ के कक्तव भी देंगे, भले hi आपके कमरे में नहीं है पर बहार ऑफिस में तो है.

अफसर : (वो अंदर तक हिल गया, पर थोड़ी अकड़ दिखते hue)Tum मेरा कुछ नहीं बिगड़ पाओगी, ऐसे तो रोज़ मुझे कई लोग मिलने आते है, तुम कुछ साबित नहीं कर पाओगी.

जहान्वी : लगता है आपकी याददास्त कमजोर है, उस दिन मेरे हाथ में एक पैकेट था, जो वापस जाते वक़्त नहीं था, तो आपको hi जवाब देना है की उस पैकेट में आखिर क्या था, में तो बतादूंगी की उसमे पैसे थे.

अफसर : (उसकी हालत पतली हो गयी, पर फिर भी आखरी प्रयास kia)Tu तू तुम भी बच नहीं पाओगी, जेल तुम्हे भी होगी.

जहान्वी : (चेयर पर पीठ टिकके बैठते hue)Ho जाने दो, कितनी जेल होगी? अच्छा वकील कर के में बेल ले लुंगी, जब तक फैसला आएगा काफी टाइम बिट चूका होगा, पर तुम्हारी नौकरी जाएगी, फिर भीख मांगना.

अफसर : (उसने सोचा नहीं था की एक लड़की उसको इतने ठन्डे तरीके से धमकाएगी, वो पूरी तरह से टूट गया tha)M म में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति, कागजात नहीं है, कोई रिकॉर्ड भी नहीं है. (उसने डरते डरते कहा)

जहान्वी : वो भी तुमने hi गायब किये है, में साबित भी कर दूंगी (टेबल पर वो लिफाफा रखते hue)Ye रही डॉक्यूमेंट की कॉपी. (डरते हुए अफसर ने लिफाफा उठाया और कागजात को देखा) और मुझे ये भी पता है की आपने पुराने रिकॉर्ड डिलीट किये है, में कम्प्लेन करुँगी तो आईटी वाले सब खंगाल लेंगे.

अफसर : प्लीज आप ऐसा कुछ मात करना, आपके पिताजी के कहने पर hi मेने सब किआ था, में माफ़ी मांगता हु, प्लीज.

जहान्वी : तो अब सब ठीक हो जायेगा न?

अफसर : हो जायेगा, पर एक दिक्कत है.

जहान्वी : क्या?

अफसर : (डरते hue)Mene डॉक्यूमेंट की फाइल आपके पिताजी को दे दी थी, उसमे सरे रिकॉर्ड है, वो आप ले आओ, में अपडेट कर दूंगा.

जहान्वी : में क्यों लौ, तुमने किआ है तुम लाओ.

अफसर : प्लीज, आप के बिच मुझे मात लाइए, आप जैसे बड़े लोगो की लड़ाई में में पइसस जाऊंगा.

जहान्वी : वो में कुछ नहीं जानती, तुमको फ़ोन करना है तो करो, मुझे सब ठीक चाहिए, और सरे रिकॉर्ड की कॉपी भी चाहिए, तुमने गड़बड़ की है तो तुम hi सही करो. जाओ, पेअर पदों उनके या जो करना है करो, मुझे कल तक सब सही चाहिए. (उसके हाथ से वो डॉक्यूमेंट वापस ले कर, शिव की और dekha)Chalo शिव. (में तो इस लड़की का रूप देख कर दांग था, लड़ाई झगड़ा होता तो में हाथ पेअर चला भी लेता, पर इसने तो बिना हाथ पेअर चलाये, पूरी शांति से उस अफसर की सिटी पित्ती घूम कर दी थी, में उसके साथ बहार निकल गया, मान तो कर रहा था की उसे पकड़ कर किश कर लू, पर मेने अपने आप को कण्ट्रोल किआ और उसके साथ बहार निकल गया, हम दोनों कार में बेथ गए)

शिव : आप तो कमल हो यार, कमल क्या धमाल हो, उसकी क्या हालत कर दी. आपको ये सब कैसे पता था?

जहान्वी : (मसूकूरते hue)Us दिन काव्यजि से बात हुई थी, जो उन्हें पता था वो उन्होंने बताया था मुझे, बाकि सब मुझे पता था, कड़िया मिला ली तो पूरी बात समाज में आ गयी.

शिव : थैंक यू सो मच (मेरा मान कर रहा था की उनको किश कर लू, तो मेरी नजर उनके लिपस्टिक लगे होठो पर चली गयी, मुझे अपने आपको कण्ट्रोल करने के लिए अपने होठो को रोकना पड़ा, पर मेरे होठ फड़क रहे थे)

जहान्वी : (शिव को अपने होठो की और देखते देख उसे लगा की अभी वो पकड़ कर किश कर देगा, वो तैयार भी थी, पर वो आगे बढ़ नहीं रहा था, तो उसने अपने आपको sambhala)Aise थैंक यू से काम नहीं चलेगा, पार्टी देनी होगी. (उसने मुस्कुरा कर कहा)

शिव :पार्टी? कैसी पार्टी दू आपको? बोलिये.

जहान्वी : (मान में, मुझे जी भर कर प्यार करो, वो hi सबसे बेस्ट पार्टी होगी, पर अपने आपको संभाला और एक गहरी साँस ले kar)Fil हल तो एक कॉफ़ी चल जाएगी.

शिव : चलिए फिर, देर किश बात की.

वो मुस्कुरायी, और गाड़ी आगे बढ़ा दी, उन्होंने एक कफ शॉप पर गाड़ी रोकी, वो बड़ी शॉप थी, मेने देखा तो वह बड़े घर के लड़के और लड़कीअ hi दिख रहे थे, हम अंदर गए, हम दोनों को देख कर लड़के और लड़कीअ हमे देखने लगे, लड़कीअ मुझे घर रही थी और लेक जहान्वी को, एक कोन के टेबल पर हम बैठे. एक वेटर आया.

जहान्वी : तवो कैपेचीनो प्लीज. (वो चला गया)

शिव : आप कफ बोल रही थी, ये क्या मंगवाया?

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Mene कफ hi मंगवाई है, वैसे साडी लड़कीअ तुम्हे hi घर रही है, (मेने आस पास नजर दौड़ाई तो अभी भी कई लड़कीअ मुझे देख रही थी, जब मेने नजर दौड़ाई तो एक दो मुझे देख कर मुस्कुरायी भी, में झेप गया और जहान्वी को देखने लगा, वो मुस्कुरा रही thi)Line दे रही है, इच्छा हो तो बात कर सकते हो.

शिव: मुझे कोई बात नहीं करनी, और मेरी क्या बात कर रही है आप, लड़के भी आपको घर रहे है.

जहान्वी : घूरने दो, उनमे वो बात नहीं जो तुम में है, तो में क्यों देखु.

शिव : (शरमाते हुए) ये क्या बोल रही हो आप?

जहान्वी : ऐसे शर्मा रहे हो जैसे लड़की हो, (आवाज धीमी करते hue)us टाइम तो जबरदस्ती कर रहे थे मेरे साथ और अब शर्मा रहे हो.

शिव : मेने सॉरी कहा था न, अब वैसी गुस्ताखी नहीं करूँगा.

जहान्वी : (उसको दिल में दर्द हुआ, पर चेहरे पर मकान के sath)Kyu?

शिव : क्यों क्या, मुझे पता है की वो मेरी भूल थी, आप कितनी अच्छी हो, में hi बेवकूफ था जो आप पर गुस्सा हो गया और वो गलती कर बैठा, (जहान्वी मान में: में तो चाहती हु की तुम फिर वो गलती करो) आप ने मेरी कितनी माड़ की, अप्पने अपने पापा के खिलफ जा कर भी मेरी मदद की और में बेवकूफ, आपके साथ hi वैसा कर बैठा. (वेटर वह दो कप दे गया, मेने देखा तो कप में अंदर हार्ट शेप बना हुआ था, में पहली बार ऐसा कुछ देख रहा था, मेने मुस्कुरा कर जहान्वी को देखा तो मुझे लगा की वो कही खोयी हुई है और उनके चेहरे पर हलकी दर्द की लकीरे hai.)Kya हुआ, आपके चेहरे पर ये दर्द, कोई प्रॉब्लम है?

जहान्वी : (तुम hi प्रॉब्लम हो, समझते क्यों नहीं हो, में सब किआ इसका मतलब ये नहीं की तुम मुझसे दूर हो जाओ, अच्छे होने की ये सजा तो मत दो, इस से अच्छा होता की में बुरी बनकर hi रहती)

शिव : क्या हुआ, फिर कही खो गयी.

जहान्वी : कुछ नहीं. (फिर वो शांति से कफ पिने लगी, थोड़ी देर बाद बिल आया, मेने देखा तो 275/- का बिल था, सिर्फ दो कफ के इतने पैसे, में ध्यान से देखने लगा बिल को, दो कॉफ़ी के 250 और टैक्स के 25/-.)क्या हुआ?

शिव : कुछ नहीं, दो कॉफ़ी के इतने पैसे?

जहान्वी : सॉरी, यार मेरा ध्यान नहीं रहा, तुम रहने दो में दे देती हु, वो क्या है न अक्सर हम यही आते है तो में यही चली आयी.

शिव : नहीं पैसो की बात नहीं है, पैसे है मेरे पास, पर में ये सोच रहा हु की आप लोग एक कॉफ़ी के लिए जितना पैसा खर्च करते हो उसमे तो तीन लोग खाना खा सकते है. (मेने पैसे उसमे रख दिए, और वेटर ले कर चला गया, हम बहार निकले, मुझे अपना फैसला सही लगा, जहान्वी से दूर रहने में hi भलाई है, उनका लाइफ स्टाइल और मेरे लाइफस्टाइल कही भी मेल नहीं खता, हम गाड़ी में बेथ गए)

जहान्वी : (मुझे सोच में दुबे dekh)Sorry शिव, मेने कहा न मुझे ध्यान नहीं रहा.

शिव : ऐसी बात नहीं है, जिन जगह पर में कफ पिता हु, वह तो में आपको ले जा भी नहीं सकता, वह कफ मुझे 10/- में मिलती है.

जहान्वी : (शिव के हाथ पर हाथ रख kar)Tum मुझे वह भी ले चलते तो में आती शिव, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, अगली बार वह चलेंगे.

शिव : नहीं मैडम, में वैसी जगह पर आपको नहीं ले जा shakta.(Jhanvi का चेहरा ऐसा हो गया जैसे वो अभी रो देगी, में दर gaya)Kya हुआ मैडम.

जहान्वी : आज कितने दिन बाद तुम मुझे मैडम बोल रहे हो, मुझे नहीं पता था की एक कॉफ़ी मुझे इतनी महंगी पड़ेगी.

शिव : में तो मैडम hi बोलता हु न.

जहान्वी : तुमने पिछली बार कब मैडम बोलै था मुझे?

शिव : (याद करते हुए, वो गुस्सा था तो उसने किश भी कर लिया था और कभी मैडम भी नहीं बोलता tha)wo में गुस्सा था न तो...

जहान्वी : इस से अच्छा था की तुम गुस्सा hi रहते, कहा छोड़ू में तुम्हे. (उन्होंने हलकी नाराजगी से कहा, मुझे समाज नहीं आ रहा था की मेने गलत क्या किआ है)

शिव : रहने दीजिये, में चला जाऊंगा, अब घर hi जाऊंगा.

जहान्वी : चुप चाप बैठो (उन्होंने गाडी दौड़ा दी, और सीधे अनाथालय रोकी, बिच में न वो कुछ बोली न में, वो मेरी और देख भी नहीं रही थी, में गाड़ी से उतरा, और उन्हेबए कहने उनकी साइड गया)

शिव : Bye. (में मैडम नहीं बोलै, क्यों की वो मेरे मैडम बोलने से hi भड़की थी, वो बिना कुछ बोले चली गयी, में समझने की कोशिस कर रहा था की आखिर हुआ क्या?)

लता और शारिता दोपहर में काम कर रही थी, कपडे सूखते हुए सरिता ने पूछा.

सरिता : आज कहा सोयेंगे? (लता पिच्छले कई दिनों से शिव के साथ सोई थी पर कुछ करने का मौका नहीं मिला था क्यों की सरिता भी साथ में थी, वो नहीं चाहती थी की वो साथ में सोये)

लता : (हलकी नाराजगी se)Kyu पूछ रही है?

सरिता : कल शिव के बगैर सोई तो नींद hi नहीं आ रही थी, बड़ी मुश्किल से सोई थी, आज उसके साथ hi सोयेंगे.

लता : (उसे और गुस्सा आने laga)Muje नहीं सोना, तुजे जाना है तो सो जाना.

सरिता : (उसे लता की नाराजगी समाज नहीं aayi)Tuje क्या हुआ, मेने कुछ गलत कहा क्या?

लता: मुझे कुछ नहीं हुआ, मेने सिर्फ इतना कहा की अगर तुजे सोना है तो सो जाना.

सरिता : क्यों, तुजे नहीं सोना, उसके साथ?

लता : (नाराजगी se)Nahi.

सरिता : (उसको समाज नहीं आया की लता ऐसा क्यों बेहवे कर रही है, फिर उसके दिमाग की बत्ती जाली) ओह! मतलब तू अकेले सोना चाहती है.

लता : (वो झेप गयी, उसे लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो, उसने हड़बड़ा के kaha)Aisa कुछ नहीं है.

सरिता : (हसने lagi)Rehne दे रहने दे, तेरा चेहरा साफ़ साफ़ कह रहा है की तू क्या चाहती है. (उसके मज़े लेते hue)Tuje जहा सोना है सोना, में तो उसके साथ hi सोऊंगी.

लता : (गुस्से se)To सो जाना, मुझे क्यों सुना रही है.

सरिता : (मुस्कुराते हुए लता के पास गयी और उसको पीछे से पकड़ते hue)Aye है, मेरी लड़ो को जलन हो रही है, देख तो चेहरा कितना लाल हो रहा है.

लता : (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करते hue)Muje कोई जलन वालन नहीं हो रही.

सरिता : वो मुझे पता है, पर एक बात कह रही हु, में तो उसके साथ hi सोऊंगी, अगर तुजे आना है तो आ जाना. (उसकी फिरकी लेते हुए kaha)Aur अगर तू नहीं आयी तो मेरे तो मज़े hi मज़े है.

लता : (गुस्से se)To करना मज़े, अब छोड़ मुझे.

सरिता : (शांति se)Yaar तेरे अंदर आग लगी है में भी समझती हु पर तू भी समाज न, मेरे अंदर भी आग लगी है.

लता : (वो अपने आपको छुड़ाने की कोशिस कर रही thi)Chhod न कामिनी, मुझे कोई आग वाग नहीं लगी है.

सरिता : (कपड़ो के ऊपर से hi लता की छूट पकड़ते hue)Muje पता है की कितनी आग लगी है.

लता : (कसमसाते hue)Chhod कामिनी, शर्म नहीं आती ऐसा करते हुए.

सरिता : अब कहे की शर्म, तू भी जानती है की में शिव से चुदती हु और मुझे भी पता है तो फिर अब कैसी शर्म, चल न साथ में करते है.

लता : (एकदम से रुक gayi)Ye क्या बोल रही है तू?

सरिता : तो क्या हुआ, वैसे भी उसको संभालना एक के बस की बात नहीं है, साथ में मज़ा आएगा.

लता : तुजे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए, तू अकेली सो जाना उसके साथ अगर इतनी hi आग लगी है तो.

सरिता : वो तो में सो जाउंगी, पर याद रख, तुजे नहीं सोने दूंगी, तू उसके साथ सोने जाएगी तो में ाही जाउंगी.

लता : (रोनी सूरत बना kar)Kyu ऐसा कर रही है, मेने तुजे रोका क्या, आज तू सो जाना, में कल सो जाउंगी.

सरिता : सच सच बता, लगी है न आग.

लता : (झुंझलाते hue)Ha लगी है, बस.

सरिता : (लता का गाल चूमते hue)Sharir में ज्यादा आग है की मान में?

लता : कहना क्या चाहती है तू?

सरिता : सेक्स करना चाहती है की उसके साथ रहना चाहती है.

लता : (लम्बी साँस लेते hue)Uske साथ सोना hi बहोत है मेरे लिए, वो सब तो साइड में है, उसकी बहो में सोना hi बहोत है मेरे लिए.

सरिता : तुजे क्या लगता है, मुझे क्या चाहिए?

लता : वो तो तू hi जाने.

सरिता : तुजे क्या लगता है में सेक्स की भूखिहउँ, नहीं, मुझे भी उसकी बहे hi चाहिए, तू कर लेना उसके साथ में कुछ नहीं करुँगी, बॉस, पर में सोऊंगी तो तुमदोनो के साथ hi.

लता : कितनी कामिनी है तू, कभी लगता है कितनी समझदार है और कभी लगता है कितनी कामिनी है.

सरिता : कभी कभी बचपना करना अच्छा लगता है यार, बचपन तो हमारा वैसे भी छीन गया, माँ बाप तो मिले नहीं जो लाड करते, न कभी जिद करने को मिली, पर अब लगता है की कोई तो है जिसके सामने जिद कर शक्ति हु, भले वो उम्र में हमसे छोटा है पर वो हमारे शिर पर सहारा बन कर खड़ा है, तो अब जिद करना है, लड़ाई करनी है, रूठना है, मानना है, दिल के सरे अरमान पुरे करने है (सरिता की आँख से आंसू बह निकले, लता ने वो देखा और उसे गले लगा लिया)

लता : पागल है पूरी. (थोड़ी देर वो एक दूसरे के गले लगी रही)

सरिता : (थोड़ी देर में संभल gayi)Me तो उसके साथ hi सोऊंगी, अब अपना देख ले तू.

लता : कामिनी है तू एक नंबर की.

सरिता : वो तो हु, और है अगर वह सोने नहीं आयी न तो शिव को बोलूंगी की तुजे उठा के ले आये, तू चाहे जो कर ले सोयेगी तो हमारे साथ में hi. (काम ख़तम हो गया था तो वो मुस्कुराते हुए अंदर की और भाग गयी)

लता : (उसे भागते हुए जाता देख मुस्कुराने लगी, फिर सोचने लगी की वो उसके सामने शिव के साथ वैसे रह शक्ति है, उसके मान ने कहा नहीं, फिर बर्तन ले कर वो भी अंदर जाने lagi)Pagal है वो, और बेशरम भी, पर में नहीं हु.....
 
अपडेट 151

जहान्वी मुझे छोड़ के वापस लौट गयी, में उसे जाता देख रहा था, और उसकी उदासी या नाराजगी का कारन समझने की कोशिस कर रहा था, पहले मेने उसके साथ जो बदतमीजी की थी तब भी वो मुझसे नाराज थी, पर आज तो मेने ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किआ था, अच्छे से पेश आया था, फिर भी वो नाराज थी या उदास थी, मुझे लगा की कोई और वजह होगी. में घर के अंदर चला गया, मेने सबको खुशखबरी दी की कागजात मिलगये है, सब खुस हो गए, उनके चेहरे की हसी लौट आयी थी. में वह से जूही के घर चला गया, जैसे hi उसने दरवाजा खोला में अंदर गया और उसको बहो में ले लिया, वो भी खुस हो गयी.

जूही : क्या बात है, आज बड़ा प्यार आ रहा है?

शिव : एक खुस खबरि है.

जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Kya?

शिव : अनाथालय का प्रॉब्लम सोवे हो गया, कागजात मिल गए.

जूही : क्या सच में? वाओ! ये तो सचमे बहोत बड़ी खुस खबरि है.

शिव : ये तुम सबके सपोर्ट से hi मुमकिन हुआ है, थैंक यू.

जूही : ऐसा कैसा थैंक यू, थैंक यू कहना है तो अच्छे से कहो. (उसने नटखट सी स्माइल दी, में उसकी बात समाज गया और उसके होठो से होठ जोड़ दिए, वो भी सिद्दत से मुझसे लिपट गयी, कुछ देर तक हम होठो से लड़ते रहे, उसके गीले मखमली होठो ने अपना एस्सार दिखाड़िया और मेरा लुंड खड़ा हो gaya)(Juhi को भी वो चुभन महसूस हुई, उसका शरीर गंगना गया, उसने अपनी छूट वाले भाग पर लुंड की चुभन महसूस की तो वो जोरो से शिव के होठो को चूसने लगी, शिव के हाथ भी उसके कूल्हों पर चले गए और अपने लुंड की और खींचते हुए लुंड से छूट पर दबाव बनाने लगा, छूट के होठ भी फ़ैल गए थे, अगर कपड़ा बिच में न होता तो आज लुंड अंदर चला जाता, उसकी सांसे तेज हो गयी, पर शिव जल्द hi संभल गया और उसने पकड़ ढीली छोड़ दी, जूही ने भी अपने आपको संभाला और किश तोड़ दी, वो आंखे बंद किये हुए गहरी गहरी सांसे ले रही थी, बीर नशे से बोजिल आँखों से उसने शिव को नाराजगी से देखा, जैसे कह रही हो की क्यों रुक गए? वो मुस्कुराया, जिस पर वो प्यार से चीड़ gayi)Maar दूंगी में तुम्हे.

शिव : (अनजान बनते hue)Kyu? मेने क्या किया?

जूही : सब समझते हो तुम, बहोत गंदे हो तुम, मेरी भावनाओ को भी नहीं समझते.

शिव : सब समझता हु, मेने कहा है न की जल्द hi हम वो सब करेंगे, चाहो तो उस दिन की तरह अभी तुम्हे अपने मुँह से मज़ा दे सकता हु.

जूही : (शर्मगाई, अपनी नज़ारे निचे kiye)Nahi, मुझे अब पूरा मज़ा चाहिए.

शिव : वो दिन भी जल्द आएगा.

जूही : मुझे इंतजार है उस दिन का, तुम बैठो में दूध ले कर आती हु. (वो चली गयी, में सोचने लगा की क्या मुझे वो सब कर लेना चाहिए, अब वो इतना सब बोल चुकी है, हमने ओरल भी कर लिया है, पर फिर मेरा दिल कह रहा था की अब ये बात एक लक्ष्य के साथ जुड़ चुकी है, और उस लक्ष्य को पाने के लिए, ये बात उसकी मदद कर रही है तो मुझे सबर करना चाहिए, जिस दिन वो नाथिओनल में पहुंच जाएगी में उस खुसी को सेलिब्रेट करूँगा, और उसके सरे अरमान पुरे करूँगा, मेरे लिए भी वो सब उतना hi महत्व रखता है, भले hi में सब कुछ कर चूका हु पर किसी के साथ पहली बार करने का एक महत्व होता है और मुझे उसकी खुसी भी महसूस होती है, हर लड़की मेरे जीवन में महत्व रखती है, में जूही का वो पल यादगार बनाना चाहता हु. जितना उसके लिए वो पल महत्वपूर्ण है उतना hi मेरे लिए भी hai.)Kya सोच रहे हो? (वो दूध लिए हुए कड़ी थी, मेने मुस्कुरा कर दूध लिया)

शिव : तुम्हारे बारे में सोच रहा था. (वो भी अपना गिलास लिए साइड में बेथ गयी)

जूही : मेरे बारे में? ऐसा क्या सोच रहे थे? (में दूध पिने लगा तो कुछ देर शांत रहा, उसने भी अपना दूध पि लिया)

शिव : (अपना मुँह पोछते hue)Wo hi जो तुमने अभी अभी कहा.

जूही : (उसके गाल लाल हो gaye)Aisa क्या सोच रहे the?(Usne शर्मा के पूछा)

शिव : में वो दिन सोच रहा था जब हम दोनों नेशनल के लिए सेलेक्ट हो गए होंगे, वो रात हमारी होगी. (जूही उसकी आँखों में वो चमक देख सकती थी)

जूही : (उसके नजदीक खिसक कर उसके कंधे पर अपना शिर रख kar)Sorry यार, में कभी कभी बहक जाती हु, तुम मेरे लिए कितना सोचते हो, कभी कभी तो मुझे लगता है की तुम सचमे मुझे प्यार करते हो.

शिव : (उसको अपने से दूर कर के उसकी आँखों में देख kar)Lagta है से क्या मतलब है, क्या मेने नहीं कहा की में प्यार करता हु.

जूही : (फिर से नटखट सा हंसी और दूर से hi होठ सिकुड़ कर किश kia)Lagta है पर फिर तुम्हारी दूसरी चहनेवालिया भी याद आ जाती है, तो फिर शक होने लगता है, क्या करू, कभी ऐसा देखा नहीं न, हमेशा यही सुना है की सिर्फ दो लोग hi आपस में प्यार करते है.

शिव : तुम्हे पता है की में दुसरो से भी प्यार करता हु तो क्या तुम्हे मेरे प्यार में कोई कमी लगी?

जूही : नहीं लगाती, वो hi बात तो समाजमे नहीं आती. खैर छोडो, स्टेडियम चलो, में कोई कसार नहीं छोड़ना चाहती, वर्ण में तुम्हे कैसे पाऊँगी.

शिव : ये नहीं कहा की नेशनल कैसे पहुचुँगी.

जूही : नहीं, अब नेशनल इसलिए जाना है ताकि तुम्हे प् सकू, क्यों तुम्हे कोई प्रॉब्लम है?

शिव : तुम लड़कीओ का भी कुछ समाज नहीं आता, पुरे घर से, समाज से बगावत कर के खेल में आयी हो और अब मुझे पाना है.

जूही : ज्यादा स्मार्ट मत बनो, चलो वर्ण फिर न कहना की में बाहेक गयी, अभी के अभी तुम्हारा रपे कर दूंगी.

शिव : मेरा रपे करोगी?

जूही : है, अब चलो भी. (मुझे खींचते हुए उठाया, हम दोनों स्टेडियम चले गए, हम दोनों ने जी तोड़ म्हणत की, फिर हम वापस निकले, उसने puchha)Aaj किस सौतन के वह छोड़ना है तुम्हे?

शिव : (अभी रास्ता सुमसान था तो मेने अपने हाथ आगे किये और उसकी कठोर गोलाइयों को थम liya)Kahi नहीं जाना है, कहो तो तुम्हारे साथ चलता हु.

जूही : ोूच! क्या कर रहे हो बेशरम, जब कहती हु तो पीछे हैट जाते हो और अब मुझे परेशान कर रहे हो.

शिव : (उसके कठोर गोल स्तन को हलके हलके दबाते hue)Kitne मस्त है ये.

जूही : शह्ह्ह्ह, रस्ते पर है शिव, कोई देख लेगा.

शिव : मेरा ध्यान है, कोई नहीं है.

जूही : में मार दूंगी तुम्हे, करते कुछ नहीं और मुझे परेशान करते हो, खुद तो कही जा कर ठन्डे हो जाओगे, में कितना जलती हु पता है.

शिव : घर चलो, ठंडा कर देता हु. (तभी मेने देखा की सामने से कोई आ रहा है तो मेने हाथ हटा लिए)

जूही : (रहत की साँस लेते hue)Muje नहीं होना ठंडा, तुम हो लेना, में इस आग को बुजणेदेना नहीं चाहती, ये तड़प मुझे उस लक्ष्य की याद दिलाती है.

शिव : सच कह रही हो तुम, में भी रोज तुम्हे देखता हु, तुम्हारी खूबसूरती को पाना चाहता हु, तुम्हारे साथ सब करना चाहता हु, और वो तड़प मुझे और म्हणत करने को उकसाती है.

जूही : थैंक यू शिव, मुझे इतना महत्व देने के लिए, ी लव यू.

शिव : ी लव यू तू स्वीटहार्ट. (मेने उसकी पीठ पर किश किआ, जूही के चेहरे पर भी मुस्कान तैरने लगी, उसने मुझे घर छोड़ दिया)

फ्रेस हो कर कपडे बदल कर में बहार आया तो सब अभी खाने की तयारी कर रहे थे, में छत पर चला गया, मेने काव्यजि को फ़ोन लगा दिया, कागजात के बारे में बात कर ली हमने. फिर मेने पूछा

शिव : अभी बसी हो आप?

काव्य: नहीं, अभी तो नहीं, बस कुछ केस को लेकर सोच रही थी, क्यों?

शिव : कुछ नाह बस थैंक यू कहना था.

काव्य : क्यों?

शिव : आपके सपोर्ट के लिए.

काव्य : तो उसके लिए मेरा फ्री होना क्यों जरुरी था, वो तो तुम मुझे वैसे भी कह सकते थे.

शिव : ी लव यू. (अचानक सुन कर काव्य की धड़कन बढ़ गयी, वो रिलैक्स बैठी थी तो सीधी हो गयी)

काव्य : क्या? क्या कहा तुमने?

शिव : (उन्होंने ऐसे पूछा तो में हल्का सा दर gaya)Dekho फिर आप डांटने लगी, इसीलिए में कहता हु की मुझे दर लगता है आपसे.

काव्य : (खिलखिला कर हस्ते हसने लगी, थोड़ी देर baad)Mene कहा डांटा, में तो बस पूछ रही थी, ऐसे अचानक बोलोगे तो विस्वास नहीं होता न. ठीक है अब अच्छे से पूछती हु, क्या कहा तुमने?

शिव : (उसनहोने इतने प्यार से पूछा की मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)I लव यू.

काव्य : (ये सुन कर उसे बहोत अच्छा laga)Aaj अचानक कैसे प्यार उभर आया?

शिव : वकील हो न, शक करना नहीं छोड़ती. (मेने हलकी नाराजगी से कहा)

काव्य : (वो फिर hasi)Ab जो हु वो तो रहूंगी न, अपने आपको बदल थोड़ी न सकती हु. तो जवाब दो.

शिव : बोलने को दिल किआ तो बोल दिया, आपको थैंक यू कहु वो मुझे अच्छा नहीं लगा, मुझे लगा की थैंक यू से ज्यादा ये कहना अच्छा रहेगा, मेने कुछ गलत किआ?

काव्य : (वो मान hi मान बहोत खुस हो रही थी, वो किसी लड़की के जैसा महसूस कर रही थी, उसकी आवाज में भी शर्म उतर आयी थी, उसने आहिस्ता से kaha)Nahi, कभी सोचा नहीं था की ऐसा सुन ने को मिलेगा, क्या कर रहे हो तुम?

शिव : क्यों?

काव्य : घर आ जाओ न. (उसने रिक्वेस्ट करते हुए कहा)

शिव : क्यों ?

काव्य : (मान में: क्यों क्या बुद्धू, गुम्हे गले लगाना है, तुम्हारी बाहोंमे आना है, किश करना है)

शिव : (वो खामोस हो गयी तो मेने puchha)Kya हुआ?

काव्य : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi कह रही थी.

शिव : वैसे तो आ जाता, पर कोई नहीं, कल मिलता हु आपसे, चलेगा न?

काव्य : हम्म्म्म. (तभी उसने देखा की कोई मिलने आ रहा hai)Suno, कल मिलते है, क्लाइंट आये है.

शिव : ठीक है, टेक केयर, bye, लव यू.

काव्य : हम्म्म. (वो जवाब तो देना चाहती थी पर क्लाइंट की वजह से दे नहीं पायी, पर वो बहोत खुस थी)

मेने फ़ोन रख दिया, फिर भार्गवी को फ़ोन लगाया.

भार्गवी : है बोलो.

शिव : ी लव यू.

भार्गवी : (किसी को कहते hue)Aap ये सब रिपोर्ट बना दो, में बाद में कल देख lungi(Fir वो उसके जाने का इंतजार करने लगी, जैसे hi वो बहार गया, मुस्कुराते हुए boli)Bade रोमांटिक हो रहे हो, क्या बात है?

शिव : अभी भी स्टेशन में hi हो?

भार्गवी : है यार, थोड़ा काम था, अब घर hi जा रही हु, (फिर उसने सोचा की शिव रोमांटिक हो रहा है तो वो आने वाला hoga)Kya हुआ, आ रहे हो? (उसके आवाज में उत्साह था)

शिव : दिल तो है, पर घर पे हु, और अभी निकल नहीं सकता.

भार्गवी : क्या यार (वो थोड़ी निराश हो gayi)muje लगा की मस्का मार रहे हो तो आ रहे होंगे. (उसकी आवाज में निरसा साफ़ झलक रही थी)

शिव : में मस्का नहीं मर रहा था, जो था वो कह रहा था, क्या हुआ मान कर रहा था?

भार्गवी : (थोड़ा शर्मा gayi)Wo तो करेगा hi, खास ऐसा दिन होता की में जब भी घर औ तो तुम मिलते. (उसने दुखी मान से कहा)

शिव : आप क्या चाहती हो की में हाउसवाइफ की तरह हौसलोवर बन जाऊ.

भार्गवी : (है पड़ी) मेरा मतलब वो नहीं था, और अगर ऐसा हुआ तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, छोडो उस बात को, क्यों फ़ोन किआ?

शिव : खुसखबरी सुनाने के लिए, अनाथालय वाला प्रॉब्लम सोल्वे हो गया है, कागजात मिल गए है.

भार्गवी : सच में, ये तो बहोत अच्छी खबर है (खुस होते hue)Kaise हुआ ये सब?

शिव : वो जब मिलूंगा तब बताऊंगा. अभी आप घर जाइये और आराम कीजिये.

भार्गवी : क्या तुम सचमे नहीं आ शक्ति? (उसकी आवाज में बहोत तड़प थी)

शिव : संजोना यार, अभी नहीं आ सकता, पर जल्द hi मिलूंगा.

भार्गवी : ठीक है.

शिव : ऐसे उदास मात हो, मिलूंगा न जल्दी.

भार्गवी : (नार्मल हो ke)Jaldi आना. ी मिस यू सो मच बेबी.

शिव : ी मिस यू तू डिअर. Bye लव यू, टेक केयर.

भार्गवी : लव यू तू, bye.

मेने फ़ोन रख दिया, और सोचने लगा की आज में सब से खुल कर प्यार का इजहार कर रहा हु, और अच्छा भी लग रहा था, जो है उसे कहने में क्या बुराई है, मेने पवनसीर को भी खुशखबरी दे दी, स्नेहा से भी बात हुई, मेने बिना मैडम को भी बोल्दिया, वो भी मुझे बुला रही थी, उन्हें भी संजना पड़ा. उसके बाद मुझे जहान्वी याद आयी, भले hi वो किसी बात पर नाराज थी पर थैंक यू तो बनता था, तो मेने उसे फ़ोन नहीं किआ पर मश्ग लिख दिया. “थैंक यू सो मच, आपने जो कुछ भी किआ है मेरे लिए उसके लिए बहोत बहोत सुक्रिया, ये एहसान रहेगा मेरे ऊपर, गुड नाईट, टेक केयर”

मुझे याद आया की मुझे मंतभाभी को भी फ़ोन करना है पर अभी करना सही नहीं था, तो मेने सोचा की कल जूही के फ़ोन से बात कर लूंगा, ताकि किसी और ने उठाया तोभी कोई दिक्कत न हो.

मेने देखा की एक मश्ग भी आया हुआ है, देखा तो नाज़िआदिदी का था, लिखा था “आये नहीं तुम, कितना इंतजार किआ” मुझे याद आया की उन्होंने बुलाया था, पर भागादौड़ी की वजह से जा नहीं पाया में, मेने सॉरी लिखा और कल आने को बोल्दिया. जब में निचे आया तो सब मेरा hi वेट कर रहे थे.

सरिता : बहोत लम्बी बात चली, किसके साथ बात कर रहा था?

शिव : सबको बता रहा था की कागजात मिल गए है, सबने म्हणत की थी तो थैंक यू तो बोलना पड़ेगा न.

सरिता : में तो ऐसे hi कह रही थी, मुझे क्या जिस से भी बात करो.

शिव : है है, मुझे आपके चेहरे से hi पता चल रहा है की ‘आपको क्या?’.

सरिता : तो क्या हुआ, नजर तो रखनी पड़ती है, क्यों लता?

लता : मुझे मात घसीट इसमें, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है वो किसी से भी बात करे, (मुझे थाली देते hue)Le तू खाना खा, उसका तो चलता hi रहेगा. (में मुस्कुराया और खाना खाने लगा) मेरी एक और रंजन बैठी थी और दूसरी और विणा बैठी थी, लतादिदी, गायत्री और सरितादिदी सामने बेथ गयी, हम खाने लगे. खाना खाने के बाद.

सरिता : राजा, तू और विणा गायत्री के साथ सो जाना.

रंजन : में नहीं सोनेवाली, मुझे अभी पढ़ना है.

सरिता : तो पढ़ने के बाद सो जाना. (गायत्री सुन रही थी)

रंजन : आप सो जाना, आपको क्या प्रॉब्लम है? (सरिता, मान में गालिया दे रही थी, पर खुल कर तो कह नहीं सकती थी की मुझे शिव के साथ सोना है)

सारतीता : तुजे बोलै न की वह सो जाना.

रंजन : में नहीं सोनेवाली. (सरिता को गुस्सा आ रहा था की वो उसे धो डेल, लता मान में मुस्कुरा रही थी, मान तो उसका भी था की वो शिव के साथ सोये)

शिव : (सरितादिदी se)Aap क्यों उसको कह रही हो, नहीं सोना तो रहने दो न.

सरिता : में तो इस्सलिये कह रही थी की तुजे अकेले सोना पड़ता है, में और लता तेरे साथ आते है तो गायत्री अकेली हो जाती है.

रंजन : (मौके पे चौका मरते hue)Koi बात नहीं, में और विणा शिव के साथ सो जायेंगे. (विणा के तो दिल की धड़कन hi चक गयी)

सरिता : क्यों अब पढ़ाई नहीं करनी? (टॉन्ट मरते हुए)

शिव : में एक काम करता हु, में hi गायत्रीदिदी के साथ सो जाता हु, प्रॉब्लम सोल्वे. (ये सुन कर, गायत्री की धड़कन चूक गयी, वो काम करते करते रुक गयी और शिव को देखने लगी) क्यों दीदी आपको तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न? (गायत्री ने शर्मा के न में गर्दन हिलायी) बस प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी.

सरिता : तू वह नहीं सो पायेगा, कोई न कोई बच्चा रात को उठता है, उसे सुलाना, बाथरूम ले जाना, ये सब चलता रहता है, तू नींद ख़राब होगी.

शिव : मतलब की आप लोगो की भी तो नींद ख़राब होती होगी, एक काम करो आप और लता, साथमे सो जाना, एक दिन तो आराम से सो सको, आज में गायत्रीदिदी के साथ hi सोऊंगा. (सरिता का चेहरा लटक गया)

सरिता : (मायूसी se)Thik है, तुम्हे जो करना है वो करो. (और वो काम में लग गयी, गायत्री बहोत खुस थी की आज शिव उसके साथ सोयेगा)

में कमरे में गया और पढ़ाई करने लगा, थोड़ी देर बाद रंजन आयी और मुझे उनके साथ पढ़ाई करने को कहने लगी. में किताबे ले कर उनके कमरे में चला गया. रंजन बार बार मुझे लुभाने की कोशिस कर रही थी, वही विणा भी चुपके चुपके मुझे देखती थी. एक घंटे तक पढ़ाई करने के बाद मेने कहा.

शिव : (रंजन se)Aise तो तेरी पढ़ाई हो चुकी.

रंजन : (अनजान बनते hue)Kyu, मेने क्या किआ?

शिव : ज्यादा भोली बन ने का नाटक मात कर (में विणा के सामने खुल कर नहीं बोलै, मुझे विणा की और देखते हुए देख)

रंजन : अब उसके सामने क्या शर्मा रहा है, जो बोलना है खुल कर बोल.

शिव : मुझे कुछ नहीं कहना है, (खड़े होते hue)Me जा रहा हु, में अपने रूम में hi पढ़लुँगा.

रंजन : (मेरा हाथ पकड़ते hue)Ruk न, अब कुछ नहीं karungi.(usne भोलिसि मुस्कान दी)

शिव : मुझे पता है, नौटंकी, आज कुछ नहीं मिलेगा तुजे (विणा थी पर में बोल गया, मेने विणा को देखा तो उसने नज़ारे झुका li)Bado की बात नहीं मानती है न तो अब तू भी रह.

रंजन : (कड़ी हो गयी और मेरे करीब कड़ी हो kar)Are पर मुझे भी तो रहना होता है न, मेरा मान नहीं करता क्या?

शिव : (मेने एक लम्बी साँस ली, मेने विणा को देखा, में सबके सामने इस तरह बात नहीं करना चाहता था पर अब परिस्थितिया ऐसी हो चुकी थी की मुझे सबके सामने खुलना hi था, तो मेने रंजन से कहा) मेने तुजे क्या कहा था, बार बार ये सब तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है, और सबको मेरे साथ रहना होता है, तो तुजे समझना होगा, सबको स्पेस देनी होगी, समाज रही है तू.

रंजन : (अपना मुँह लटका kar)Thik है.

शिव : अब ज्यादा नौटंकी मात कर, और पढ़ाई कर, में जा रहा हु.

रंजन : एक किश तो दे कर जा. (विणा बैठी थी फिर भी वो बोली, मेने विणा को देखा तो वो नज़ारे निचे किये hi बैठी thi)Use क्या देख रहा है, वो भी यही चाहती होगी, (विणा की और देख kar)Sharmati रहेगी तो कुछ नहीं मिलनेवाला.

शिव : बहोत चांट है तू. (अपनी नाक सिकुड़ कर वो किश का इस्सर करने लगी, सच में वो नटखट थी, और वैसे hi वो अच्छी लगती थी) ओनली किश (अपना शिर हिला कर उसने सहमति जताई, उसकी नौटंकी देख कर सच में उस पर प्यार आ hi जाता था, में झुका और उसके होठो पर हलके से किस किआ और उसे छोड़ने लगा तो उसने मेरा शिर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से किश करने लगी, मेने उसे मनमानी करने दी, थोड़ी देर बाद वो अलग हुई, और उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान थी जैसे उसने बहोत बड़ा तीर मार्लिया हो, उसकी खुसी देख कर में मुस्कुराया, मेने विणा को देखा तो वो अभी भी शिव निचे किये hi बैठी थी, मेने उसे kaha)Vina..(Wo वैसे hi बैठी rahi)Upar देखो (उसने हिचकिचाते हुए ऊपर देखा, मेने हाथ बढ़ाया तो उसने अपना हाथ मेरे हाथ में दिया, मेने उसे खिंचा तो वो कड़ी हो गयी, एक और रंजन थी जिसकी कमर में मेने हाथ डाला हुआ था तो उसे दूसरी और मेने उसे खड़ा किआ, और उसकी कमर में हाथ डाला, वो शर्मा रही थी, उसका शिर फिर झुक gaya)Upar देखो. (विणा जानती थी की शिव उसे किस लिए ऊपर देखने को कह रहा है, उसकी धड़कने तेज तेज चल रही थी, वो रंजन के सामने hi उसे किश करनेवाला था, उसे अजीब लग रहा था पर, रंजन और वो पक्की सहेलिया थी, और हमेशा साथमे hi रहती थी, पर यहाँ कुछ अलग था, पर वो रोमांचित थी, उसने शरमाते हुए अपना चेहरे उठाया, शिव झुका और उसके नरम होठो को हलके से चूमने लगा, उसका भी दिल किआ की वो भी चूस ले पर वो शांत रही, कुछ पल बाद शिव ने उसके होठ छोड़े पर वो अभी भी आंखे बंद कए हुए ऊपर शिर उठाये कड़ी रही)

रंजन : शर्माती रहेगी तो ऐसा hi होगा. (विणा ने आंखे खोली, और दोनों को देखा और फिर शर्मा गयी)

शिव : सब तेरी तरह बेशरम नहीं होते सामजी. चलो अब पढ़ाई करो, में जाता हु. (रंजन ने फिर मेरे गाल पर किश कर liya)Tu सुधरेगी नहीं, है न? (वो नटखट सा muskurayi)Mene फिर दोनों के गाल पर किश किआ और bye बोल कर वह से निकल गया)

जब में अपने कमरे में पंहुचा तो लतादिदी और सरितादिदी दोनों लेती हुई थी और बाते कर रही थी. जैसे hi में अंदर गया तो दोनों ने मुझे देखा. मेने किताबे रक्खी, मेने कपडे निकले और एक शार्ट पहेलिया.

सरिता : यही सो जा, मेने गायत्री को बोल दिया है.

शिव : नहीं, आपने जिद की है न तो आज तो में उनके साथ hi सोऊंगा.

सरिता : मेने कोनसी जिद की, में तो बस रंजन को कह रही थी.

शिव : है, पर प्यार से भी संजय जा शक्ति है, सबके सामने कहने की क्या जरुरत थी.

सरिता : (मायूसी se)Sorry, में आगे से ख्याल रक्खूंगी, पर तू यही सो जा, तू कहता है तो में चली जाती हु, मेरे लिए लता पर क्यों नाराजगी निकल रहा है?

शिव : में कोई नाराज नहीं हु और न किसी पर नाराजगी निकल रहा हु, में सच में आज गायत्रीदिदी के साथ hi सोना चाहता हु, मेने देखा है की वो बेचारी हमेशा अपने काम में लगी रहती है, कभी वो कोई हक़ नहीं जताती, शायद अपनी पिछली जिंदगी के चलते वो ऐसी हो गयी है, मुझे सचमे उनकी फ़िक्र हो रही है, में चाहता हु की वो इस जगह को अपना घर hi समजे, और खुल कर रहे (लता की और देख kar)Me कुछ गलत कह रहा हु? (लता ने ना में शिर हिलाया) (सरिता की और देख kar)Aur ये बात आपको भी याद दिलाएगी की हमे सबको साथ मिलकर रहना है, तो सबके साथ सहमति से प्यार से समजा कर सब करना है, सबको सबकुछ चाहिए होगा, पर सबको समझदारी से रहना होगा.

सरिता : सही कहा तूने, में सचमे आगे से ध्यान रखूंगी, तू यही सो, वह बच्चो के बिच तुजे नींद नहीं आएगी, में गायत्री को यही भेजती हु, में वह सो जाउंगी.

लता : में भी चलती हु. (लतादिदी के जाने से मुझे भी दर्द हो रहा था पर मुझे सबको टाइम देना hi था और ये सबको समझना होगा)

शिव : आप नाराज नहीं हो न (मेने लतादिदी को कहा, उन्होंने न में शिर हिलाया)

लता : (सरिता को देख kar)Chal. (वो दोनों चली गयी, बहार निकल कर)

रंजन : ये शिव को हो क्या गया है, मन की मेने गलती की, पर वो तेरे साथ तो सो सकता था, मेरी वजह से तुजे भी दूर कर दिया.

लता : उसने कोई दूर नहीं किआ है, अब वो घर के मुखिया की तरह बेहवे कर रहा है, और सही भी है, घर के मुखिया का काम hi होता है सब को साथ ले के चलना, और ये बात हमे समझनी hi होगी, अगर तुजे लगता है की तू उसकी बात ताल सकती है तो ताल के दिखा.

सरिता : न बाबा, में उसकी बात नहीं ताल सकती, उसको किसी भी बात पर नाराज नहीं कर सकती. वो hi तो है मेरे ऊपर, और अबतो लगता है की तू भी उसके रंग में रंग चुकी है, वो घर का मुखिया और तू मुखियायिन. (वो हास्के बोली तो लता भी मुस्कुरा दी, दोनों को रूम में देख कर गायत्री चौंक गयी, उसे तो लगा था की शिव आएगा, पर वो उन दोनों को देख कर चौंकी पर चेहरे पर दिखने नहीं दिया और मुस्कुरायी)

गायत्री : क्या हुआ, तुम दोनों यहाँ?

सरिता : में और लता यही सोते है, तुम शिव के कमरेमे सो जाना.

गायत्री : (उसका दिल तो जैसे धड़कन hi चंक गया, शिव के साथ रहने की बात से नहीं पर सरिता, लता सामने से उसे शिव के कमरे में जाने को बोल रही थी, वो घबरा भी रही thi)Nahi... में यही ठीक हु.

लता : (उसके पास बैठते hue)Kya हुआ दीदी, (वो लता को देखने लगी)

गायत्री : में ऐसे कैसे उसके साथ सो सकती हु.

सरिता : तुम्हे जाना hi होगा, ये बड़े साहब का हुकुम है. (उसने थोड़ी नौटंकी से कहा)

लता : कोई हुकुम वुकुम नहीं है, चुप चाप बेथ तू, (गायत्री को देख ते hue)Didi, अगर आपको जाना है तो hi जाइये, कोई जबरदस्ती नहीं है.

गायत्री : (उसका तो पूरा मान था वह जाने का पर शर्म आ रही थी, इन दोनों के जानते बजते वो कैसे शिव के साथ सोने को चली jaye)Par लता, ये सही नहीं है.

लता : (उनके हाथ पर हाथ रखते hue)Kya सही नहीं है दीदी, में भी तो सोती हु वह.

गायत्री : तेरी बात अलग है. (वो खुल कर कुछ कहना नहीं चाहती थी)

लता : क्या अलग है, जैसी में हु, वैसी hi आप भी हो. वो बोल रहा था की वो आज आपके साथ रेहेगा, वो आपको बुला रहा है, अब आपकी मर्जी है, आपको जाना है तो जाओ, कोई जबरदस्ती थोड़ी न है. आपका भी घर है, आपकी मर्जी.

गायत्री : (उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो दोनों को देख रही थी) पर लता...

लता : शिव सही कहता है, अभी तक अपने हमे दिल से नहीं अपनाया, अभी भी आपको लगता है की आप हमसे अलग हो, आप अपने आपको अकेला महसूस करती हो, (उसका हाथ दबाते hue)aisa नहीं है दीदी, हो सकता है की में काम बात करती हो, पर मेरे दिल में आप इस घर का hi हिस्सा हो, जितना अधिकार में शिव पर रखती हु, उतना hi अधिकार आपका भी है. जाओ वो आपका इंतजार कर रहा है.

गयारती : Lata...(Bolte बोलते उनका गाला भर आया)

लता : अभी आप जाओ, हम कल बात करेंगे, सुबह जल्दी भी उठना है. (सीधे सब्दो में तो नहीं पर लता ने कह दिया था की अभी आपको जागना है)

गायत्री को बहोत शर्म आ रही थी, वो वह से कड़ी हुई, उसकी लता और सरिता से नजर मिलाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी, वो धड़कते दिल से शिव के कमरे की और बढ़ चली, आज कैसा अजीब दिन था, वो सबकी सहमति से शिव के साथ जा रही थी, कोई चोरी छुपी नहीं, उसके पेअर कैंप रहे थे, वो जानती थी की वह क्या हो सकता है तो वो बाथरूम में गयी और अपनी योनि को साबुन लगा कर अच्छे से साफ़ करने लगी. वह लता और रंजन लेते थे.

सरिता : कोई बात नहीं, कल तो में पक्का उसके साथ hi सोऊंगी, कितना मज़ा आएगा न हम दोनों साथ में.

लता : ज्यादा ख़याली पुलाव मात पका, तू बेशरम है, में नहीं, है मुझे पता है की तुम दोनों भी वैसे रहते हो इसका ये मतलब नहीं की हमदोनो साथ में करे.

सरिता : यार तू बड़ी बोर है, क्या प्रॉब्लम है तुजे, हम दोनों इतनी अच्छी सहेलिया है, क्या छुपा है हम दोनों में,.

लता : भले hi कुछ न छुपा हो, पर अभी ये संभव नहीं है, भविस्य का मुझे पता नहीं है.

सरिता : अगर शिव कहे तो?

लता : (उसकी आँखों में देखते hue)Wo कहेगा तो सब कुछ कर लुंगी, पर मुझे पता है वो ऐसा कहेगा नहीं. अब सो जा, कल हमे hi संभालना है.

सरिता : सही कह रही है तू (नटखट सा मुस्कुराते hue)Gayatri की हालत तो ख़राब होनेवाली है.

लता : चुप कामिनी, जरुरी नहीं की जो जानते हो वो सब बोलै जाये. कुछ बाटे न बोलने में hi समझदारी होती है. अब सो जा और मुझे भी सोने दे.

सरिता : (उसके पेट के ऊपर हाथ रख कर उसके गाल चुम kar)Sorry यार, मेरी वजह से तेरी रात ख़राब हो गयी.

लता : कोई रात ख़राब नहीं हुई है, वो कही भगा नहीं जा रहा, वो भी यही है और में भी. ज्यादा अधिरायी अच्छी नहीं.

सरिता : तू कितनी समझदार है. तुम दोनों छोटे हो पर हमारे ऊपर हो गए हो.

लता : ऐसा कुछ नहीं है, सब साथ hi है. अब सो जा.

सरिता : गुड नाईट.

लता : गुड नाईट.

वह गायत्री आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए कमरे के नजदीक पहुंची, ददरवाजा खुला था, वो कुछ पल रुकी वह पर, उसकी हालत उस दुल्हन की तरह थी जिसके बारे में सबको पता होता है की आज वो छुड़नेवाली है, और दुल्हन बेचारी शर्म से जमीं में गाढ़ी जा रही होती है, गायत्री ने अपने दिल को संभाला और आहिस्ता से अंदर गयी, शिव ऊपर से नंगा, शार्ट पहन कर लेता हुआ था, जैसे hi शिव ने उसकी और देखा उसने नज़ारे झुका ली.

शिव : दरवाजा बंद कर देना दीदी. (गायत्री का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने दरवाजा बंद किआ, अभी उसने सलवार कमीज पहना हुआ था, वो दरवाजे के पास hi कड़ी थी, वो दरवाजे की और मुँह करके कड़ी thi)(Mene दीदी को देखा, पीछे से उनके भरे हुए कूल्हे दिख रहे थे, मेने ऊपर नजर की )क्या हुआ, सोना नहीं है क्या? (ये परिस्थिति गयारत्री के लिए बिकुल नयी थी, वो शर्माभि रही थी और घबरा भी रही थी, किस बात के लिए वो तो उसे भी नहीं पता था, क्यों की वो पहले भी शिव के साथ सब कर चुकी थी, और दुसरो के साथ तो कई बार, पर ये अनुभव सबसे अलग था, वो खुद को नयी नवेली दुल्हन hi समाज रही थी, वही संकोच था, वही शर्म और दर था. वो आहिस्ता से चलते हुए शिव के नजदीक pahuchi.)Kya हुआ दीदी, इतना क्यों दर रही हो (शिव ने हाथ पकड़ा तो वो कैंप गयी, शिव ने हल्का सा hi खिंचा तो वो धड़ाम से निचे बेथ गयी शिव के नजदीक, वो शिव को देख भी नहीं रही थी, और संकुचती हुई बैठी रही) क्या बात है दीदी, आप इतना क्यों दार रही हो, नहीं आना था आपको?

गयारती : (तुरंत boli)Nahi, वैसी बात नहीं है. (उसने शिव की और देख कर कहा) वो कभी ऐसे आयी नहीं न.

शिव : ऐसे मतलब?

गायत्री : वो वो लता और बाकि सब जानते है की में यहाँ...

शिव : (मुस्कुराते hue)Wo लोग सोते है तो आपको पता होता है न? (उसने है में शिर hilaya)To फिर, उनका यहाँ सोना आपको गलत लगता है? (उसने न में शिर हिलाया) तो फिर, अब इतना मात सोचिये, सो जाइये. (गायत्री दूसरी और मुँह कर के लेट गयी, उसके दिल में उथल पुथल मची हुई थी, शिव ने उसके साथ कुछ भी ऐसा वैसा नहीं किआ और नहीं कोई गलत बात की, वो सोचने लगी की वो hi बेवकूफ है जो सब सोच रही है, शिव ने सिर्फ ऐसे hi सोने के लिए बुलाया है, उसने आंखे तो बंद कर ली थी पर नींद नहीं thi)(Mene गायत्री दीदी को देखा, साइड से लेती हुई थी तो उनकी कूल्हे का भाग ऊपर उठा हुआ था और वह से गहरायी में उनकी कमर थी, थोड़ी देर में उनको देख रहा था, उनका शर्माना लाजमी tha)Didi, सो गयी क्या?

गायत्री : नहीं (उन्होंने धीरे से कहा)

शिव : (उनके कंधे से पकड़ कर उन्हें मेरी और किया तो वो खुद सीधी हो गयी) क्या हुआ दीदी (मेने उनके हाथ को पकड़ कर ऊपर किआ और उनकी ुणलिओ से खेलने लगा)





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आप उनकंफर्टबले हो क्या? (शिर हिला कर उन्होंने न कहा, हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, वो मुस्कुरा रही थी, मेने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और उंगलिओ से कलाई तक ले गया और हाथ आगे बढ़ने लगा, वो मुझे hi देख रही थी पर उनकी सांसे तेज होने लगी thi)Aap अपनी मर्जी से आयी हो न दीदी?

गायत्री : (शिव की आँखों में देखते hue)Aisa क्यों पूछ रहा है तू, वैसे तो मुझे कहता है की मुज पर आपका हक़ है, तो क्या तेरा नहीं है, तू हक़ नहीं कर शक्ति. (उन्होंने उखड़ती सांसो से कहा)

शिव : सोचलो, फिर अगली बार नहीं पूछूंगा. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

गायत्री : तुजे पूछने की जरुरत भी नहीं है शिव. (मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो खुद खिसक कर नजदीक आ गयी, हमदोनो ने एक दूसरे को देखा, उनकी आंखे बता रही थी की वो क्या चाहती है, मेने उनके होठो को अपने होठो से पकड़ लिया,





तो वो खुद मेरे होठो को काटने lagi)(Gayatri के लिए ये सेक्स नहीं था, ये प्यार था, कोई उसे इतनी इज्जत दे रहा था, सबने दिखाया था की वो अलग नहीं है, वो उनके जैसी hi है, हमेसा उसके दिल में अपने भूतकाल को लेकर एक तिस रहती थी, वो अपने आपको बहोत निचे महसूस करती थी, पर सबके प्यार ने आज उसे अपने बारे बार का स्थान दिया था, वो खुल कर शिर के होठो को चूसने लगी, पहले सब उसको नोचते थे, पर आज वो खुद से किसी को चुम रही थी चूस रही थी काट रही थी, वो उसको खिंच कर अपने ऊपर करने लगी, वो भी उसके ऊपर आ गया और उसके गले को और होठो को चूमने और चाटने लगा,





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उसकी सिस्किअ निकल रही थी पर उसे किसी का दर नहीं था, वो खुल कर शिव के प्यार को महसूस कर रही थी, वो उसके मजबूत शरीर को छू कर महसूस कर रही थी, उसने अपने पेअर फैला दिए ताकि शिव बीचमे आ जाये, उसे अपनी छूट पर शिव का लुंड महसूस होने लगा, वो पागल होने लगी और शिव को बेतहासा चूमने लगी, वो इतनी गरम हो गयी की वो खुद अपनी कमर हिला कर लुंड पर अपनी छूट रगड़ने लगी, शिव ऊपर से नंगा था तो उसके शरीर में अपने नाख़ून घड़ने लगी, ये उसके जीवन का बेहतरीन समय था, वो इतनी बावली हो चुकी थी की उसने शिव के शार्ट को अंडरवियर समेत निचे खिसकाया और उसके कूल्हों पर अपने नाख़ून गढ़ने लगी) (में भी बहोत उत्तेजित हो चूका था, मेने उनके स्तन को जोर से दबा diya)Shhhhhh माआआआआ (गायत्री दर्द से बिलख उठी पर शिव को रोका नहीं, वो उसके कूल्हों में नाख़ून घड़ने लगी और उसके कुफो को नोचने lagi)(Unke नाखुनो से मुझे दर्द महसूस हुआ तो मेने उनके स्तन को काट liya)Ohhhh माआआआ, (गायत्री भी दर्द से बिलख उठी, शिव उसके ऊपर से उठा और अपने कपडे उतर दिए, वो पूरा ननगा था, उसका वो महाकाय लुंड पूरी तरह उत्तेजना से खड़ा था, उसे देख कर गायत्री को दर भी लगा पर वो उसके आकर्षण से भाव विभोर होने लगी, शिव ने उसे बिस्ता पर बिठाया और उसका कुरता निकलने लगा, उसने भी निकलने दिया, उसने ब्रा भी निकल दी, वो अपने स्तन छुपाने लगी पर शिव को जैसे कोई परवाह hi नहीं थी, उसने उसको कूल्हों से पकड़ कर घोड़ी बनाया और उसके सलवार को खींच कर पंतय समेत निचे खिसका दिया, पेरो से निकलना था तो उसने धक्का दिया तो वो बिस्तर पर लेट गयी, शिव ने सलवार भी पूरी निकल दी अब वो पूरी नंगी थी, कुछ पल शिव उसे देखने लगा तो वो शर्मा गयी और संकुचन लगी, उसने अपने पेअर आपस में चिपका दिए और अपने स्तन को एक हाथ से धक् दिया, शिव उसके ऊपर आया और उसके हाथ पकड़ कर साइड में किये और ऊपर आ कर उसके स्तन को निप्पल से पकड़ कर जोरो से चूसने लगा) Shhhhhhhhhhhhhhhh माआआआ shhhhhhhhhh (अपने पैरो से उसने मेरे पेअर फैलाये और वो बीचमे आ गया, उसका लुंड मेरी योनि पर रगड़ खाने लगा, मेरी हालत ख़राब थी, सिसकीओ से कमरा गूंज रहा था, में अपने होठो को काट रही थी, दांतो को भींच रही थी, में सचमे बहोत ज्यादा उत्तेजित थी, इतनी उत्तेजना तो में जीवन में कभी महसूस नहीं की थी, उसका लुंड मेरी योनि के होठो को फैला कर वह कोहराम मचाये हुए था, मेरी छूट से कितना पानी निकल रहा था में बता नहीं सकती, वो मेरे निप्पलों को इतनी जोरो से छुस रहा था की दर भी हो रहा था, पर मज़ा अपने चरम पर था, मेरा पूरा ध्यान उस लुंड पर था जो मेरी छूट पर रगड़ खा रहा था, में अपनी छूट को एडजस्ट करने की कोशिस कर रही थी ताकि वो अंदर चला जाये पर शिव मुझे तड़पा रहा था, वो जानबुज कर अंदर दाल नहीं रहा था, में जब भी अपनी छूट के छेड़ को लुंड की सिद्धमे लती वो हटा लेता tha)Shhhhhhh ऐसा मात करो शिव शठ में पागल हो जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह अंदर डालो न शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेने फिर प्रयास किआ और लुंड के सुपडे को जैसे तैसे अपने छेड़ पर लगाया और अपनी कमर उचका कर अंदर लेने hi वाली थी की उसने हटा लिया, वो हलके गुस्से से boli)Shhhh क्यों सत्ता रहे हो ममममम शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अंदर डालो न shhhhhhhhhh मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है शीइइइइव शह्ह्ह्ह (मेने फिर से लुंड पर अपनी छूट सेट की तो उसने धक्का लगा दिया और लुंड चुटको चीरता हुआ अंदर तक चला गया, मुझे दर्द महसूस hua)Ooooo माआआआआ माआर gayiiiiiiiiiiiiiiii. (भले दर्द हुआ पर उसके अंदर जाने से मुझे चैन मिला, में अपनी छूट सिकुड़ कर उसको निचोड़ने लगी, में अपनी कमर हिलाकर लुंड को अपनी छूट में एडजस्ट कर रही थी, मान के साथ साथ शरीर को भी एक मज़ा चाहिए होता है शिव का लुंड सचमे कमल का था, वो मुझे पूरी तरह से भर देता था, वो मेरे स्तनों को काट रहा था पर मुझे कोई परवाह नहीं थी, में अपनी कमर उंचका कर उसे छोड़ने के लिए उकसाने लगी, मुझे पता था की वो अगर चालू हो गया तो मेरी छूट की धज्जिया उदा देगा पर शायद में वो hi चाहती थी, वो में अपनी छूट से लुंड को खींचने लगी, वो मेरी भावनाओ को समाज गया और लुंड को अंदर बहार करने लगा, वो जोर जोर से मुझे छोड़ रहा था,





कमरे में ठप थप थप थप की आवाजे हो रही थी और मेरी सिस्किअ भी हाली छ्कीखो में बदल गयी थी, पसीना तो जैसे पानी की तरह बह रहा था. एक घंटे तक वो मुझे हर तरह से रोंद्ता रहा या यु कहे की मेरी इच्छा पूरी कर रहा था, में खुद उस से ऐसे hi छोड़ना चाहती थी, कभी घोड़ी बना कर छोड़ा तो कभी उलटी लेता कर छोड़ा, कमरे में जैसे तूफान आया हुआ था, मुझे पूरी गॉड में उठा कर भी पूरी ताकत से छोड़ा, कितनी बार में झड़ी मुझे खुद याद नहीं, दूसरी बार तो उसने मेरी गांड भी मरी, में उसे सब करने दे रही थी, जितना मज़ा उसे आ रहा होगा उस से कही गुना मज़ा मुझे आ रहा था, जब हमारा खेल ख़तम हुआ तब मेरी हिलने की भी हालत नहीं बची थी, पुरे कमरे में वीर्य और मेरे रास की गंध फैली हुई थी, छूट और गार्डन में दर्द होने के बावजूद में जैसे बेसुध हो गयी थी और गहरी नींद में चली गयी. आज मेरे जीवन की सुनहरी रात थी. में इस सजीले राज कुमार की बहो में थी.

सुबह जब में उठा तो गायत्रीदिदी नंगी hi लेती हुई थी, उनकी उभरी हुई गांड देख कर मेरा फिर से लुंड खड़ा होने लगा, पर मुझे जाना था, तो मेने उनको चद्दर ओढ़ाई और बहार निकल गया, में बाथरूम को जा रहा था तो मुझे विणा अपने कमरे से निकलती हुई दिखी, मुझे देख कर वो शर्मा गयी, पर में उसे देखते हुए खड़ा रहा तो वो धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आयी, वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी और मुस्कुरा रही थी, मेने आस पास देखा तो कोई नहीं था, में उसे बाथरूम में ले गया और दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया, वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, में झुका और एक हाथ से उसके नन्हे स्तनों को दबाते हुए उसको किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, दो एक मिनट किश करने के बाद में अलग हुआ.

शिव : गुड मॉर्निंग. (वो खिलखिलाई पर बिना आवाज किये हसी जैसे कोई सुन न ले)

विणा : (धीमी आवाज me)Good मॉर्निंग.

शिव : तुम अपना निपटाओ, में बाजु के बाथरूम में निपटा ता हु. (वो शर्मा गयी, में वह से निकल कर बाजु के बाथरूम में घुस गया, सुबह सुबह पहला काम मूतना hi होता है तो में मूतने laga)(Shiv के मूतने की आवाज को विणा शरमाते हुए ध्यानसे सुन रही थी, वो जानती थी की जब वो मुटेगी तो शिव भी सुनेगा, वो कई बार सुन भी चूका है ये वो जानती थी, पर आज वो खुद उसे सुनना चाहती थी, जब शिव का ख़तम हुआ तो वो अपनी चड्डी उतर कर निचे बेथ गयी और मूतने लगी, उसकी सिटी बजने लगी तो वो शरमाते हुए मुस्कुराने लगी क्यों की वो जानती थी की शिव सुन रहा है, इन सब में उसको एक अजीब सी खुसी मिल रही थी. उसके बाद में वो पूरी नंगी हो गयी और नहाने लगी, दूसरे बाथरूम से शिव के नहाने की आवाज आ रही थी, वो जानती थी की वो भी नंगा होगा, ये सोच कर hi उसके शरीर में तरंगे उठ रही थी, वो मुस्कुराते हुए नहाने लगी, और दुआरे बाथरूम में शिव भी यही सोचते हुए नाहा रहा था. शिव को विणा की चुडिओ की खान खान सुनाई दे रही hi. जब वो बहार निकला तो वो अभी बहार नहीं आयी थी, वो तौलिया लपेटे वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद वो तौलिया लपेटे बहार निकली, शिव को देख कर वो चौंक गयी, उसे लगा था की वो चला गया होगा, शिव ने भी इस कमसिन हसीना को ऊपर से निचे तक देखा, और जैसे hi उसने कदम बढ़ाया वो वह से भाग गयी, वो मुस्कुराते हुए उसके हिलते कूल्हों को देखरहा था, दरवाजे पर जा कर वो रुकी और मुद कर शिव को देखने लगी, शिव उसे hi देख रहा था तो वो शर्मायी और मुस्कुरा कर अंदर चली गयी.

में तैयार हो गया और बहार आया तो देखा की विणा और रंजन नास्ता कर रहे थे, में भी रंजन के पास बेथ गया, विणा ने मेरी और देखा तो में मुस्कुराया, उसने शर्मा के नज़ारे झुका ली, रंजन शिव को बाजुमें बैठते देख खुस हो गयी. सबने नास्ता किआ वो दोनों निकल गयी, में भी थोड़ी देर बाद स्कूल के लिए निकल गया, जब में संयम के वह पंहुचा तो वो लोग मेरा hi वेट कर रहे थे, नाज़िआ दीदी को आज आनेका बोलै मेने और हम तीनो निकल गए.
 
अपडेट 152

संयम मेरे पीछे बैठी हुई थी, वैस्वी को जैसे कोई उत्साह hi नहीं था, उसके चेहरे से hi उदासी छलक रही थी, पर अभी बात करना मेने सही नहीं समजा, हुमतिनो स्कूल पहुंच गए, अभी थोड़ा टाइम था तो हम खड़े थे ताकि दूसरे दोस्त भी आ जाये, तभी मुझे बिना मैडम आती दिखी, उन्होंने भी मुझे देखा, मेने स्माइल की, हमारे नजदीक में hi उन्होंने भी अपना स्कूटर पार्क कर दिया. उन्होंने सबके hello का जवाब दिया, मुझे लगा जैसे वो मुझसे नज़ारे चुरा रही है, मुझे कुछ समाज नहीं आया, क्यों की ऐसा तो कुछ हुआ नहीं था, पर मुझे अंदर से लग रहा था की कोई तो बात है, में सबके सामने तो बात कर नहीं सकता था तो में कुछ नहीं बोलै. वो बिल्डिंग की और चली गयी, उतने में महेश और हर्ष भी आ गए तो हम पांचो भी बिल्डिंग की कर चले गए.

स्वर्ण भी अपने घर में सोच में डूबी हुई थी, वही ममता का भी यही हाल था, और ये उनके तीनो के बिच हुई बातचीत की वजह से था. उस दिन बिना ने फ़ोन कर दिया था,

ममता : कैसी हो भाभी, आखिर आज हमारी याद आ hi गयी.

बिना : मुस्कुराते हुए, ऐसा क्यों कह रही हो आप, अभी तो बात की थी.

ममता : है की थी, पर ऐसा लगता है की आप रोज़ बात करो.

बिना : ठीक है में रोज़ बात करुँगी, पर अभी एक खास वजह से फ़ोन किआ है.

ममता : अच्छा, कहिये?

बिना : में किसी को फ़ोन दे रही हु बात kijiye.(Mamta मान में खुस हो गयी क्यों की उसे लगा शायद शिव होगा, पर सामने से किसी औरत की आवाज आयी)

स्वर्ण : Hello.

ममता : (उसे आवाज जनि पहचानी तो लगी पर समाज नहीं आया की कोण hai)Hello, कोण????

स्वर्ण : तू भूलगायी मुझे मम्मू.

ममता : (अपना ऐसा नाम सुन कर उसके तो रोंगटे खड़े हो गए, उसके चेहरे पर ढेर साडी खुसिया छलक aayi)Swarni. (उसके आवाज में उत्साह खुसी और आश्चर्य चालक रहा था. दोनों लगभग एक hi आगे की थी, ममता थोड़ी बड़ी थी तो कभी कभी वो दीदी भी बोलती थी पर कभी कभार hi, एकस्वर वो सहेलिओ के जैसे hi बात करती थी)

स्वर्ण : तू भूल गयी मुझे, कहती थी की तेरी आवाज से भी पहचान सकती हु तुजे.

ममता : ऐसी बात नहीं है यार, पर एक्सपेक्ट नहीं किआ था न तुजे, तू कैसे पहुंच गयी वह?

स्वर्ण : एक hi सहर में रहते है तो मिलने आ गयी, भाभी को कुछ बात करनी थी इस्सलिये फ़ोन किआ था, में बाद में बात karungi.(Usne बिना को फ़ोन दिया)

बिना : (ममता se)Ek बात पुच्छनि थी?

ममता : है बोलिये न भाभी.

बिना : आपको योगेंदर चहके बेटे के बारेमे पता है?

स्वर्ण : भाभी, स्पीकर पे फ़ोन कीजिये न, मुझे भी सुन न है. (बिना ने फ़ोन स्पीकर पर कर दिया)

ममता : शिवांस की बात कर रही हो आप?

बिना : है.

ममता : क्यों क्या हुआ, उसके बारेमे क्यों जान न है?

बिना : आप पहले बताइये तो.

ममता : जहातक मुझे पता है की वो मर चूका है.

बिना : कैसे?

ममता : वो पता नहीं है. स्वर्ण को पता नहीं है?

स्वर्ण : नहीं मुझे भी ज्यादा मालूम नहीं है, उस वक़्त हमारी आगे hi क्या थी जो ऐसी बातो में इंट्रेस्ट लेते.

ममता : पर हुआ क्या है, उसके बारे में क्यों जान न है.

बिना : मुझे लगता है की शायद ये शिव से जुडी बात हो सकती है.

ममता : (स्वर्ण के सामने hi शिव का जीकर होने से ममता थोड़ी बेचैन हो gayi)Bhabhi...

बिना : (वो ममता की बात समाज gayi)Aapko एक और खुस खबरि सुनती हु, स्वर्णादिदी भी प्रेग्नेंट है.

ममता : (खुस और सरप्राइज होते hue)Are वह! ये तो बहोत खुसी की बात है.

बिना : पर आपको आश्चर्य नहीं हुआ की ये कैसे हुआ, जबकि कोई माँ नहीं बन रहा.

ममता : (उसे संकोच हो रहा था की भाभी क्यों सब बाते खोल रही है, स्वर्ण को पता चल गया तो वो क्या सोचेगी, और भाभी है की बोले जा रही है, वो भाभी को रोकना चाहती thi)Bhabhi...

बिना : में आपकी चिंता समाज रही हु, पर एक बात आपको बता दू, स्वर्ण भी हमारी कस्ती में hi सवार है.

ममता : क्या ? (उसकी आवाज से hi लग रहा था की वो शोकेड है, वही स्वर्ण शर्म से पानी पानी हो रही thi)Kaise?

बिना : कैसे वो बाद में बात करेंगे, पहला सवाल है की क्यों, शिव hi क्यों?

ममता : मेने भी कई बार सोचा है पर समाज hi नहीं आ रहा है.

बिना : (हलके दर के sath)Kya Shiv....Shivans हो सकता है?

ममता : (वो तो अंदर तक हिल गयी, शिवांस , Shiv?)Ye क्या कह रही हो भाभी, वो कैसे हो सकता है?

बिना : अपने बताया था की वो आपको जाना पहचाना लगा था, क्यों?

स्वर्ण : (बीचमे बोलते hue)Muje भी वो जाना पहचाना लगा था, पता नहीं ऐसा क्यों लग रहा था जैसे में उसे जानती हु, तभी तो में राज़ी हुई थी, पता नहीं उसमे कुछ है जो मुझे खिंच रहा था. (बोलते बोलते तो वो बोल गयी पर फिर शर्मा गयी)

बिना : आप संकोच मात कीजिये, हमारा भी यही हाल है, पर सवाल अभी भी यही है की आखिर क्यों? क्यों वो आपको जाना पहचाना लगता है? ममतादिदी, क्या वो शिवांश हो शक्ति है?

ममता : वो तो पता नहीं पर अगर हुआ तो????? (तीनो के अंदर से एक कप कपि दौड़ गयी, तीनो खामोश थी)

बिना : (डरते darte)Devar... (वो आगे बोल भी नहीं पायी, वही उन्दोनो के मान में शब्द आया ‘भाई’, वापस तीनो शांत हो गयी किसी को भी कुछ भी बोलने का नहीं सूज रहा था)

ममता : भाभी, क्या हो सकता है ऐसा? (उसने बहोत डरे हुए अंदाज में कहा)

बिना : (डरते डरते) मुजेकैसे पता होगा?

ममता : अगर वो हुआ तो वो मेरा भाई होगा भाभी, छियई, में मर जाउंगी भाभी.

बिना : मेरा छोटा देवर लगेगा, बीटा लगेगा वो मेरा, में कैसे मुँह दिखाउंगी. (तीनो के चेहरे गंभीर हो गए थे)

ममता : ये नहीं हो सकता भाभी, वो तो मर गया था, शिव, शिवांस नहीं हो सकता, आप डरिये मात.

बिना : वो तो रोज़ मुझे मिलता है, में कैसे नजर मिलाऊँगी उस से, और अगर उसने मुझे फिर से अपने साथ रहने को कहा तो में कैसे रहूंगी, क्या कहूँगी उसे?

ममता : (जहा ममता को पहले शिव से दूर रहने का दर्द सत्ता रहा था वही उसे वो रहत दिख रही थी की कमसे काम उसकी नजरो का तो सामना नहीं करना पड़ेगा, वो भाभी को संभालना चाहती thi)Bhabhi, ऐसा कुछ नहीं है, वो शिवांस हो hi नहीं सकता.

बिना : प्लीज आप पता करवाइये, में अपने आपको मुँह भी नहीं दिखा पाऊँगी. और अगर और किसी को पता चल गया तो बर्बाद हो जाउंगी में.

ममता : में, माँ से बात करती हु भाभी, पता करने की कोशिस करती हु, स्वर्ण तू भी चाही से बात कर, क्यों की उस बात का ज्यादा लेना देना तुम्हारे घर से hi है, कैसे भी कर के पता करने की कोशिस कर.

स्वर्ण : (वो भी दरी हुई thi)Me क्या कहती हु, इस बात को यही छोड़ देते है, हम कुछ जानते hi नहीं है तो फिर पता क्यों करना, जैसे पहले शिव हमारे लिए अजनबी था वैसे hi रहने देते है न.

ममता : ऐसा नहीं कर शक्ति, उसका भी तो सोचो, वो बचपन से अनाथालय में पलाबढ़ा है, अगर वो सचमे वो hi हुआ जो हम सोच रहे है तो सोचो उसे कहा होना चाहिए.

स्वर्ण : वो नहीं हो सकता. (उसने डरते डरते कहा)

ममता : भगवन करे आपकी बात सच हो. में रखती हु अब, जैसे hi बात होती है में बताती हु, अगर आपको पता चले तो भी बताना.

ऐसे hi बात ख़तम हुई थी उनकी, बिना इसीलिए शिव से बात करने से कतरा रही थी, क्यों की अगर वो उसका देवर हुआ तो उसने क्या गलती करदी है ये उसे पता था. वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी.

बिना : (स्टाफ रूम में, मान में) अभी तो शक है तो ये हल है अगर ये बात शिव को पता चली तो क्या होगा, वो उसे किस नजर से देखेगा, वो उसे कितनी गिरी हुई समजेगा.( अपने पेट पर हाथ रख कर) पूरी जिंदगी मुझे इसी सचके साथ जीना पड़ेगा, अपने पापा को वो चाचा कहेगा और अपने चाहको वो पापा कहेगा, में कैसे बर्दास्त करुँगी. पहले ये सब नहीं सोचा था क्यों की वो दोनों दूर रहनेवाले थे, पर अगर वैसा हुआ तो दोनों एक hi घर में रहेंगे, हे भगवन, क्या होगा?

पढ़ते वक़्त भी जब hi उसकी नजर शिव पर जाती तो वो अपनी नज़ारे घुमलेटी थी पर फिर भी बार बार उसकी नजर शिव पर hi जा रही थी. वो मान में सोचने लगी, जिस तरह से ममतादिदी और स्वर्णादिदी कह रही थी ये जाना पहचाना लगता है तो मुझे वैसा क्यों नहीं लगता, शायद वो बचपन में उसे जानती थी तो ऐसा हो सकता है. उसका ध्यान बार बार उसी दिशा में चला जाता था, पढ़ने में भी वो डिस्टर्ब थी, ये शिव ने भी नोटिस किआ. उसने सोचा की बाद में मिल कर पुचलूँगा.

छोटी रेसस्स में भी वैस्वी ज्यादा बोल नहीं रही थी, मुझे अजीब लग रहा था की इसको क्या हुआ है, सब थे तो में पूछ नहीं पाया, पर बड़ी रेसस्स में मुझे मौका मिल गया, संयम किसी लड़की से बात कर रही थी और महेश और हर्ष कैंटीन गए थे तो में और वैस्वी अकेले थे.

शिव : क्या हुआ, कोई परेशानी है?

वैस्वी : (उसने शिव की और देखा, उसके चेहरे पर उसके लिए फ़िक्र थी, पर वो क्या बताती की क्या परेशानी है, उसे परेशानी थी मिक्की से, उसका फ़ोन अयथा कल, वो उसे मिलने को बोल रहा था पर उसका कोई मान नहीं था तो उसने वैस्वी के पापा को फ़ोन कर दिया था तो वैस्वी को जाना पड़ा. वो बार बार उसे शिव के बारे में पूछ रहा था और उसे धमका रहा था की उस से दूर रहे, वो भी गुस्सा हो गयी थी और उसने भी कह दिया था की उसकी जो मर्जी होगी करेगी, वो उस पर भड़क रहा था, जहा वो लोग खड़े थे वह आस पास भी सब उनको hi देख रहे थे, वैस्वी को रोना आ गया था. वो रिक्शा करके वह से घर चली गयी थी, वो उसके पीछे पीछे गाड़ी ले कर घर पहुंच गया था, उसकी माँ ने भी पूछा पर उसने कोई बात नहीं की और अपने कमरे में चली गयी थी. जब मिक्की उसके पीछे पीछे घर में आया तो संध्यादेवी ने मिक्की से पूछा था की क्या हुआ,

मिक्की : अपनी बेटी से hi पूछना, मुझे पसंद नहीं है की वो किसी भी लड़के से मिले, समजा देना उसे (कहते हुए वो चला गया था)

संध्यादेवी : (वो वैस्वी के कमरे में गयी, तो वो रो रही thi)Kya हुआ बेटी? मिक्की किस लड़के की बात कर रहा था?

वैस्वी : शिव की, मुझे नहीं करनी इस से शादी, में कहदेवी हु, अगर किसी ने भी मेरे साथ जबरदस्ती की तो में आत्महत्या कर लुंगी, फिर करना मेरी लाश की शादी.

संध्यादेवी : ये क्या बोल रही है बेटी, उसे नहीं पसंद तो शिव से बात मात कर.

वैस्वी : (गुस्से से अपनी मम्मी को घर kar)Wo होता कोण है मुझपर हुकुम चलनेवाला, में कह देती हु में मर जाउंगी पर उस से शादी नहीं करुँगी, पापा से भी बोल देना.

संध्यादेवी: ऐसा नहीं बोलते बेटी, तू तो जानती है की तेरे पापा के सामने कहा चलती है हमारी.

वैस्वी : मेने कह दिया न की में नहीं करुँगी मतलब नहीं करुँगी, अगर ज्यादा जिद की तो में भी अनाथालय चली जाउंगी, वैसे भी वो सबकी देखभाल कर hi रहा है, मेरी भी कर लेगा.

संध्यादेवी : तू क्या बोल रही है पता भी है तुजे.

वैस्वी : है पता है, वैसे भी में आप लोगो पर बोझ हु, तो नहीं रहूंगी इस घर में, नहीं चाहिए मुझे एआइस ये आराम, में समाज लुंगी की में अनाथ हु, कमसे काम अपनी मर्ज़ी से तो रहूंगी.

संध्यादेवी : ऐसा नहीं बोलते बेटी, में बात करुँगी तेरे पापा से, तू चुप हो ja(Vaiswi को अपनी आगोश में लेते हुए उन्होंने कहा, वैस्वी फुट फुट कर रोने लगी)

शिव : किस सोच में पद गयी, क्या हुआ? घर में कोई परेशानी हुई? (वैस्वी को लगा की अभी वो रो देगी) पापा ने कुछ कहा? (उसने न में गर्दन hilayi)Mummy ने? (उसने न में गर्दन हिलायी, शिव, स्वर्ण को तो जनता hi था, वो कभी ऐसा नहीं कर शक्ति, फिर भी डरते डरते puchha)Tumhari भाभी? (उसने फिर न में गर्दन हिलायी) तो किसने कहा? (वैस्वी, शिव को देखने लगी, वो मिक्की के बारे में कुछ नहीं बताना चाहती thi)Kuchh बताएगी तो समाज में आएगा, (तभी उसे संयम आती dikhi)School के बाद मुझे छोड़ने घर आना, हम वही बात करेंगे. (वैस्वी ने शिव को देखा) ठीक है? (उसने है में गर्दन हिलायी, तब तक संयम आ चुकी थी, उसने देखा की दोनों कोई सीरियस बात कर रहे थे)

संयम : क्या हुआ? (दोनों में से किसी ने कोई जवाब नहीं दिया) क्या हुआ, कुछ बताओगे भी.

शिव : कुछ नहीं हुआ, वो थोड़ी परेशान है तो में पूछ रहा था की क्या हुआ.

संयम : (वैस्वी को देखते hue)Kya हुआ? (वैस्वी ने सिर्फ न में गर्दन हिलायी) क्या हुआ शिव?

शिव : कुछ नहीं, घर में उसके पापा ने दन्त दिया था, और कुछ नहीं.

संयम : (वो जैसे पूरी बात जान न चाहती थी) क्यों?

शिव : तुजे हर बात क्यों जान नई है?

संयम : (मायूसी se)Me तो बस ऐसे hi पूछ रही थी, में उसकी परेशानी जान न चाहती थी.

शिव : कुछ नहीं, वो उस दिन मेरे वह आयी थी न तो उसके पापा ने डांटा की वह क्यों गयी थी, उनकी बातो में पड़ने की क्या जरुरत थी (शिव ने तो ऐसे hi बोल दिया था, पर वैस्वी अस्चर्य से उसे देखने लगी, क्यों की बात तो वही थी, वैस्वी को ऐसे देखते देख मुझे भी लगा की शायद यही बात है, तभी घंटी बज gayi)Chalo, क्लास में चलते है.

में भी सोचमे पद गया था, की मेरी वजह से hi ये प्रॉब्लम हुई है. जब स्कूल से निकले तो भी बिना मैडम ने मुझे वैसे नहीं देखा जैसे पहले देखती थी, उनका भी कुछ समाज नहीं आ रहा था, में, संयम और वैस्वी स्कूल से निकल गए, संयम मेरे पीछे बैठी थी, उसने मेरे पेट पर हाथ रक्खा था, एक गड्ढे की वजह से उसका हाथ निचे गिर गया और मेरे लुंड के नजदीक पहुंच गया. (संयम का कोई ध्यान नहीं था, वो बस चुप चाप बैठी thi)(Uska हल्का सा दबाव लुंड पर हो रहा था, लड़की के हाथ की वजह से लुंड महाराज उठने लगे, मुझे टेंशन हुई पर लुंड साला मान hi नहीं रहा था. (सिचुएशन ये हो गयी की लुंड खड़ा हो कर संयम में उंगलिओ और हथेली के बिछ चला गया, संयम नार्मल hi बैठी थी तो उसका हाथ हल्का सा मुदा हुआ था जैसे लुंड की मुठ मरते है वैसे, उसको पता hi नहीं चला की लुंड खुद बा खुद उसके हाथ के अंदर आ चूका है) (मेरी हालत ख़राब थी, में सोच रहा था की संयम को पता न chale)(Samim अपने खयालो में hi थी की एक गद्दे की वजह से उसे महसूस हुआ की उसके हाथ के अंदर कुछ है, अनजाने में hi उसने अपनी उंगलिअ कस ली तो उसे वह कुछ मोती सी चीज महसूस हुआ, अनजाने में hi उसने उसे दबा कर चेक किआ, उसको समाज नहीं आया की क्या है. (में संयम के हाथ को महसूस कर रहा था, वो मेरे लुंड को दबा रही है, वो क्यों ऐसा कर रही है मेरी समाज में नहीं आया, पर उसके ऐसा करने से लुंड और कड़क होने लगा) (संयम अपने खयालो से बहार आयी, और उस चीज को महसूस करने लगी की आखिर है है क्या जो वह है, वो सोच hi रही थी की उसकी सांसे भरी हो गयी, वो घबरा गयी की ये वही तो नहीं है, उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खिंचलीया और मान में सोचने लगी, क्या वो, वही था, नहीं नहीं वो कैसे हो सकता hai...to फिर क्या था वो? वह क्या hoga?...uski जेबमे कुछ hoga...par जेब वह कहा होती hai...mera हाथ वह कैसे चला गया, शिव ने मेरा हाथ महसूस किआ होगा, या xxxx...wo क्या सोचेगा मेरे बारे में. (तब तक उसके उतरने की जगह भी आ गयी, वो निचे उतरी, वो शिव को देख नहीं रही थी, पर जब वो अपनी बैग लेने आगे गयी तो उसकी नजर उस जगह चली गयी, उसे महसूस हुआ की वह अंदर कुछ है, उसकी सांसे उखाड़ने लगी, वो तुरंत पलट गयी और bye बोल कर तेज कदमो से अपने घर की और निकल गयी.

वैस्वी : इससे क्या हुआ?

शिव : (वो क्या bolta)Muje क्या पता?

वैस्वी :अजीब है ये लड़की भी, (सीट पर बैठते hue)Tum चलो. (हम दोनों वह से मेरे घर की और निकल गए)

शिव : अब बताओ, क्या हुआ है तुम्हे?

वैस्वी : (जवाब देने मेरे नजदीक आयी और मुझसे चिपक के बेथ गयी, उसके स्तन का एहसास भी मुझे मेरी पीठ पर हो रहा tha)Kuchh नहीं हुआ है.

शिव : कुछ तो है, वर्ण तुम्हारे चेहरे पर उदासी नहीं दिखती.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Bahot ध्यान हे मुज पर. (उसे ये बात अच्छी लगी की शिव उसका ध्यान रख रहा है, बिना उसके कुछ कहे भी वो उसकी उदासी समाज रहा है)

शिव : ऐसा भी नहीं है, पर हमेशा तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा देखने की आदत सी हो गयी है, उस पर उदासी अच्छी नहीं लग रही थी. (वैस्वी बस मंद मंद मुस्कुरा रही थी) बोलो न कुछ, क्या प्रॉब्लम हुई है, मेरी वजह से तो नहीं हुई है न?

वैस्वी : ऐसा तुम्हे क्यों लगा की तुम्हारी वजह से प्रॉब्लम हुई होगी?

शिव : स्कूल में जब मेने ये कहा था तो तुम्हारे चेहरे के भाव बदल गए थे, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, पर तुम्हारे चेहरे के भाव बदलते देख में समाज गया की ये मेरी वजह से hi है.

वैस्वी : तुम कुछ ज्यादा hi नहीं देख रहे मुझे? (मीठी नाराजगी जाता कर उसने कहा)

शिव : है देखता हु, क्यों न देखु?

वैस्वी : क्यों देखते हो?

शिव : मेरी मर्जी, मुझे जहा देखना है देखु.

वैस्वी : तो जहा देखना है देखो न, मुझे क्यों देखते हो?

शिव : क्यों की एक लड़की जो मुझसे ी लव यू, ी लव यू कहा करती थी अचानक दूर हो गयी, तो समझने के लिए देख रहा था.

वैस्वी : किसने कहा की में दूर हो गयी हु?

शिव : लगता तो ऐसा hi है.

वैस्वी : अभी तो कह रहे थे की मेरा चेहरा देख कर समाज जाते हो, तो ये समाज नहीं आ रहा क्या?

शिव : कभी कभी समझने से अच्छा होता है की पूछ लिया जाये, सब क्लियर हो जाता है.

वैस्वी : कभी कभी सब क्लियर करने से अच्छा होता है की हम अपने hi खयालो में रहे, वो हमे ज्यादा सुख देता है.

शिव : पर रॉलिटी से भाग तो नहीं सकते.

वैस्वी : बेशक, पर हर बार रॉलिटी देखना जरुरी तो नहीं, अपनी खुसी के लिए भी सपने देखने चाहिए. (हम लोग मेरे घर के दरवाजे तक आ गए थे, मेने स्कूटर रोका, और दरवाजा खोलने laga)Kya कर रहे हो, (उसने स्कूटर से उतारते हुए कहा)

शिव : अंदर चलो.

वैस्वी : देर हो जाएगी.

शिव : घर फ़ोन कर दो.

वैस्वी : क्या कहूँगी?

शिव : रॉलिटी.

वैस्वी : मतलब?

शिव : कह देना की अनाथालय आयी हु, और क्या?

वैस्वी : वो पूछेंगे की क्यों, तो?

शिव : तो क्या, कह देना की मिलने का मान किआ.

वैस्वी : मम्मी नहीं मानेगी.

शिव : बात तो करो.

वैस्वी : (उसे पता था की मन hi करेगी पर फिर भी फ़ोन kia)Hello, मम्मी.

मम्मी : फ़ोन क्यों किआ, क्या हुआ?

वैस्वी : में थोड़ी देर से आउंगी.

मम्मी : क्यों?

वैस्वी : में अनाथालय आयी हु.

मम्मी : (वो घबरा gayi)Waha क्यों गयी, मेने कहा है न की में तेरे पापा से बात करुँगी.

वैस्वी : (अपनी मम्मी से हुई बात याद आ गयी use)Are नहीं, जो आप समाज रही हो वैसे नहीं आयी हु, में तो बस मिलने आयी हु, वो उस दिन हो हुआ था उसकी वजह से इनका प्रॉब्लम सोल्वे हो गया है तो बस मिलने आयी हु, थोड़ी देर में आ जाउंगी.

मम्मी : (उनको भी गभरहट हो रही थी, उसकी बेटी अनाथालय चले जाने को कह रही थी इस्सलिये वो ज्यादा बहस नहीं करना छह रही थी, वो उस पर कोई दबाव नहीं डालना चाहती थी, उसने प्यार से kaha)Thik है बेटी, पर खाना, भूख नहीं लगी क्या?

वैस्वी : में आ कर खा लुंगी, ज्यादा टाइम नहीं लगेगा, थोड़ी देर में वापस आ जाउंगी.

मम्मी : ठीक है बेटी. (फ़ोन रखने के बाद भी वो सोचने लगी, की उसकी बेटी सचमे कोई गलत कदम न उठा ले, एक hi तो बेटी थी, उसने मान में सोच लिया की वो अपने पति से जरूर बात करेगी)

वैस्वी : (फ़ोन रख कर, खुस होते hue)Unhone है कहा है, चलो. (वो फिर स्कूटर पर बेथ गयी, शिव ने स्कूटर अंदर ले लिया, स्कूटर पार्क करते हुए)

शिव : देखा, मेने कहा था न की रॉलिटी का सामना करना चाहिए, हल मिल जाता है.

वैस्वी : (नटखट सा मुस्कुराते hue)Waisi बात नहीं है, मेने मम्मी को धमकी दी थी की में घर छोड़ कर अनाथालय चली जाउंगी, इस लिए उन्होंने दर के मारे मुझे है कहा है.

शिव : (आश्चर्य se)Kya? ऐसा क्यों कहा तुमने?

वैस्वी : छोडो न यार, अब बताओ, मुझे यहाँ क्यों लाये हो?

शिव : अंदर चलो, मिलवाता हु सबसे. (दोनों अंदर चले गए, लता अस उसुअल काम में थी)

सरिता : (उसको कोहनी मरते hue)Dekh, शिव किसी लड़की को ले कर आया है. (लता ने मुद कर देखा, वो लड़की भी स्कूल ड्रेस में hi थी)

लता : उसके स्कूल की है, उस दिन भी तो आयी थी. (वो हाथ पोछते हुए उनकी और बढ़ी)

शिव : ये वैस्वी है. ये लता है.

वैस्वी : नमस्ते लतादिदी.

लता : (मुस्कुराते hue)Namaste. (फिर शिव की और देखने लगी जैसे पूछ रही हो की ये यहाँ क्यों?)

शिव : वो मुझे छोड़ने आयी थी तो में अंदर ले आया, उस दिन इसकी वजह से hi स्कूल के इतने सरे लोग आये थे.

लता : (मुस्कुराते hue)Ha, मुझे याद है, कैसी हो तुम, तुमने उस दिन बहोत मदद की थी, शायद इसीलिए ये प्रॉब्लम भी सोल्वे हो गयी.

वैस्वी : (शरमाते hue)Aisa कुछ नहीं है दीदी, ये तो ऐसे hi बोलता है, उस दिन जो भी किआ था इसने hi किआ था, पता नहीं मेरा नाम क्यों ले रहा है.

शिव : आईडिया तो तुमने hi दिया था न, किसी को रास्ता दिखाना भी बहोत बड़ी बात होती है (लता की और देख kar)Me सही कह रहा हु न?

लता : (मुस्कुराते hue)ha, सही कहा तुमने. (तभी रंजन और विणा भी अंदर दाखिल हुई, वो दोनों वैस्वी को देख कर चौंक गयी, उन्हें पता था की ये वही लड़की है जिसे शिव किश कर रहा tha)Aa गयी तुम. (उनकी और देख kar)(Shiv ने और वैस्वी ने भी उनकी और देखा तो वो दोनों उनके पास hi आ गयी)

शिव :ये रंजन है और ये विणा, और ये वैस्वी है, मेरे साथ पढ़ती है. (उन्होंने एक दूसरे से Hi कहा) (लता की और देख kar)(Vaiswi se)Aao, हम दोनों मेरे रूम में बैठते है. (सब एक दूसरे को देखने लगे, वैस्वी एक दम से शर्मा गयी, वैसे तो कुछ भी गलत नहीं था पर ऐसे सबके सामने शिव ने बोलै तो वो अंदर hi अंदर शर्मा गयी, वही रंजन और विणा ने एक दूसरे की और देखा, लता ने बात को सँभालते हुए)

लता : है है क्यों नहीं, पर खाना?

शिव : थोड़ी देर बाद खता हु, वैस्वी भी खायेगी.

वैस्वी : नहीं, में घर जेक खा लुंगी.

शिव : आज हमारे साथ खा लो, पता तो चले की हम क्या कहते है, यहाँ रहने आना था न तुमको. (शिव ने मुस्कुराते हुए कहा, वैस्वी झेप गयी वही तीनो को आश्चर्य हुआ)

लता : ये क्या बोल रहा है तू?

शिव : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, अपनी मम्मी से जगहदा होने पर इसने धमकी दी थी की वो अनाथालय चली जाएगी, तो इससे भी पता चले की उनके घर में और हमारे घर में क्या अंतर है.

लता : ऐसा क्यों कहा तुमने, ये बुरी बात है, वैस्वी. अपनी मम्मी से जगहाड़ना नहीं चाइये.

वैस्वी : अरे नहीं दीदी, ये तो ऐसे hi कह रहा है, मेने तो बस ऐसे hi कहा था (शिव को घर कर देखते हुए)

शिव : देखो, मुझे कैसे डरा रही hai(Kehte हुए वो हसने लगा)

लता : तुम्हारी मर्जी वैस्वी, तुम्हे खाना हो तो hi खाना.

वैस्वी : ऐसी बात नहीं है दीदी, पर इसने जिस तरह से कहा न, इसलिए मेने गुस्से से देखा, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, में खाउंगी.

लता : ठीक है, तुम बैठो में खाना गरम कर के बुलाती हु.

शिव : (अपने कमरे की और ले जाते hue)Aao. (शिव आगे आगे चलने लगा और वैस्वी शिर झुकायेउसके पीछे चली गयी, सबके सामने ऐसे शिव के साथ कमरे में जाने से उसे शर्म आ रही थी, पर वो कुछ न बोली, वही रंजन और विणा उन दोनों को देख रही थी)

लता : तुम दोनों भी जाओ, कपडे बदलो, वह क्या देख रही हो?

रंजन और विणा : जी दीदी. (वो दोनों अपने कमरे में भाग गयी)

वैस्वी : (कमरे में जाते hi शिव पर हलकिनाराजगी se)Aisa कहते है? क्या सोच रही होगी वो मेरे बारे में.

शिव : मेने क्या किआ, मेने तो वही कहा जो तुमने कहा था.

वैस्वी : मरूंगी में तुम्हे, कब क्या बोलना चाहिए जरा भी अकाल नहीं है.

शिव : रिलैक्स यार, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, बैठो यहाँ. (उसने कुर्शी दी जिस पर वो पढता था, वो टेबल पर बेथ gaya)Ab बोलो क्या हुआ है?

वैस्वी : छोडना उस बात को, कुछ नहीं हुआ है.

शिव : अगर तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं, भले hi मेने मजाक किआ था पर में बेवकूफ नहीं हु, तुमने ऐसे hi तो इतनी बड़ी बात नहीं कह दी होगी की में अनाथालय चली जाउंगी. (वैस्वी ने शिव को देखा जो पूरी तरह से गंभीर था) अगर तुम्हे लगता है की तुम मेरे साथ अपनी प्रॉब्लम शेयर कर शक्ति हो तो बताओ.

वैस्वी : (नज़ारे झुका ke)Gharwalo ने मेरे लिए एक लड़का पसंद किआ है. (उसकी एवं भी बहोत काम थी, बोल कर वो रुक गयी, कमरे में सन्नाटा tha)(Uski बात सुन कर मेरे दिल में कुछ हुआ, जैसे दर्द हुआ हो, पर मेने अपने आपको संभाला, क्यों की मेरा हल तो मुझे पता hi था, में उसे अपने चक्कर में नहीं फसा सकता था, मेने चेहरे पर हसी लेट हुए कहा)

शिव : अरे वह, ये तो अच्छी बात है न, है थोड़ी जल्दी कर रहे है. (वैस्वी ने मुझे गुस्से से घर कर देखा, मुझे लगा अभी वो मुझे कास के थप्पड़ मर degi)Kyu प्रॉब्लम क्या है, तुम्हे पसंद नहीं वो.

वैस्वी : (वो अभी भी मुझे घर रही थी, और दन्त पिस्टे हुए kaha)Isme तुम्हे प्रॉब्लम नहीं लग रही?

शिव : (जबर दस्ती मुस्कुराने का प्रयास कर्त hue)Kyu, प्रॉब्लम क्या है, क्या वो पसंद नहीं?

वैस्वी : (अचानक उसके चेहरे के भाव बदले, अब गुस्से की जगह उदासी छ gayi)Wo अच्छा हो या बुरा, पर लगता है तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ा, है न?

शिव : (अपने चेहरे का भाव छुपाते hue)M .म. मुझे क्यों फर्क पड़ेगा?

वैस्वी : अगर तुम्हे कोई फर्क hi नहीं पद रहा तो में यहाँ बैठी hi क्यों हु, (कड़ी होते hue)Me जा रही हु. (में टेबल से उतर गया)

शिव : (नार्मल होने का प्रयास करते hue)Kya हुआ, ऐसे क्यों बेहवे कर रही हो. (उसने मेरी और देखा भी नहीं और अपना बैग लेने लगी, मेने उसका हाथ पकड़ liya)Kya हुआ?

वैस्वी : (गुस्से से शिव को देखते hue)Kya हुआ? में ऐसा क्यों बेहवे कर रही हु? (वो अपने दन्त पीस कर बोल रही थी पर आवाज धीमी hi thi)Hath छोडो मेरा, में जा रही हु.

शिव : (अपने हथियार डालते hue)Betho तो, हम बात करते है न.

वैस्वी : जब तुम्हे कोई फर्क hi नाहीपाद रहा तो बात क्या करनी.

शिव : तुम बैठो, प्लीज. (वैस्वी ने घर कर शिव की और देखा, शिव के चेहरे पर दर्द था, वो एकदम से शांत हो गयी, अब उसके चेहरे पर फिर से उदासी आ गयी) तुम बैठो (शिव ने बड़ी नरमी से kaha)(Vaiswi वापस बेथ gayi)Kya वो अच्छा नहीं है? (वैस्वी ने फिर शिव को देखा पर शिव उदास hi था)

वैस्वी : उस से क्या फर्क पड़ता है?

शिव : नहीं, मेरे कहने का मतलब है की अगर वो अच्छा लड़का है तो...

वैस्वी : तो है केहड़ू, यही न? (उसने उदासी से कहा)

शिव : तुम जैसा सोच रही हो वैसा मुमकिन नहीं है.

वैस्वी : अच्छा, तुम्हे बड़ा पता है की में क्या सोच रही हु. (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : (उसने वैस्वी को देखा, दोनों कुछ पल खामोश rahe)Ha पता है.

वैस्वी : अच्छा, क्या पता है?

शिव : तुम जानती हो.

वैस्वी : में तुम्हारे मुँह से सुन न चाहती हु.

शिव : तुम जो चाहती हो वो मुमकिन नहीं है वैस्वी, मेरी बात को संजो.

वैस्वी : (मेरा मजाक उड़ने का लहजा पर उदासी से) अरे पर पता तो चले की में चाहती क्या हु, लगता है तुम्हे बड़ा पता है तो बता दो, मुझे भी कुछ समाज आये.

शिव : तुम मुझसे ...(में बोलते बोलते रुक गया)

वैस्वी : में सुन रही हु.

शिव : तुम मुझसे शादी करना चाहती हो.

वैस्वी : (कड़ी हो गयी, और मुझे देखने लगी, देखने क्या लगी घूरने लगी, फिर मेरा मजाक उड़ने के अंदाज se)Are वह, तुम्हे तो बड़ा पता है, तुम्हे क्या लगता है की में मरी जा रही हु तुमसे शादी करने के लिए, क्या है क्या तुम्हारे पास, अपने आपको चरम खा समाज रहे हो. बहोत हैंडसम हो जो में मरी जा रही हु शादी करने के लिए. (में उसको देख रहा था, वो क्यों ऐसा बोल रही है कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो गुस्से में थी ये तो साफ़ दिख रहा था, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था तो में चुप hi रहा) बोलो बोलते क्यों नहीं, तुम्हे क्यों ऐसा लगता है की में ऐसा चाहती हु.

शिव : (शांति se)Muje पता है.

वैस्वी : (अचानक फिर उसके चेहरे के भाव बदले और शकल रोने जैसी हो गयी, और देखते देखते आंसू भी निकल आये, रोनी आवाज me)Agar इतना hi समझते हो तो फिर ऐसा क्यों कर रहे हो (उसने मेरा गिरेबान पकड़ लिया) (तभी बहार से आवाज आयी)

लता : शिईयिव, खाना लगाडिया है.

शिव : ायाआआ. (वैस्वी खुद को सँभालने लगी, अपने आंसू पोछने लगी) में सब समझता हु वैस्वी, और ये भी समझता हु की अगर तुमने अपनी माँ के सामने इतनी बड़ी बात बोल दी है तो उसका क्या मतलब होता है, हम इस बारेमे शांति से बात करेंगे.

वैस्वी : (वो शिव से चिपक कर नजदीक कड़ी थी, दरवाजा खुला था, पर जैसे उसे कोई फर्क hi नहीं पद रहा था, उसने भराई आवाज में kaha)Kab?

शिव : कल तुम्हारी शादी है? (हलके से दन्त ते हुए मेने कहा)

वैस्वी : (मुस्कुराते हुए, ना में गर्दन हिलाते hue)Nahi.

शिव : तो फिर, हम बात करेंगे. चलो खाना कहते है.

वैस्वी : तुम मुझसे प्यार करते हो?

शिव : मेने कहा न की हम बाद में बात करेंगे. (में दूर होने लगा तो उसने मेरा गिरेबान कास के पकड़ लिया)

वैस्वी : मुझसे प्यार करते हो? (उसने फिर पूछा)

शिव : (हलके से उसका हाथ छुड़ाने का प्रयास करते hue)Mene कहा न हम बात करेंगे.

वैस्वी : (उसने जोरो से शिव का गिरेबान पकड़ liya)Me जवाब जानती हु, पर मुझे तुम्हारे मुँह से सुन न है, तुम्हे मेरी कसम है जो जूथ बोलै तो, मुझसे प्यार करते हो?

शिव : (में उसकी आँखों में देखने लगा, वो बड़ी बेचैनी से तड़प रही थी, मेने एक लम्बी साँस ली और kaha)Haaa....

वैस्वी : (उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान thi)Me जानती थी, (कहते हुए वो शिव के होठो से जा लगी, और उसे ऐसे hi किश करती रही,





लता बुलाने आयी थी, पर अंदर का दृश्य देख कर वही से दबपव लोट gayi)(Thodi देर बाद, वैस्वी ने शिव को देखा तो उसके चेहरे पर चिंता thi)Tumhare गले नहीं पड़ूँगी, जो इतना सोच रहे हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Gala पकड़ कर तो बूल्वरहि हो और कह रही हो की गलेनाही पड़ोगी.

वैस्वी : वो मेरे बस में नहीं है, में चाहती हु तुम्हे (उसने बड़े प्यार से शिव की आँखों में देखते हुए कहा), आगे देखती हु क्या होता है मेरा.

शिव : चल अब, खाना कहते hai.(Mene उसे मुस्कुराते हुए कहा, वो भी मुस्कुरायी)

दोनों बहार आ गए, लता ने खुद अपने हाथो से वैस्वी को खाना परोसा, जैसे hi एक निवाला उसने खाया...

वैस्वी : उम्मम्मम, कितना स्वादिस्ट है, (शिव की और हलके गुस्से से देख kar)aur ये मुझे डरा रहा था.

रंजन : तो फिर आने का मान बना लिया न, कब आ रही हो? (वैस्वी झेप गयी, उसके गले में खाना अटक गया और वो खस्ने लगी)

लता : (रंजन को दांते हुए, वैस्वी की और पानी बढ़ाते hue)Kuchh भी बोलती है, लो पानी पीओ. (वैस्वी के शिर पर थपकी मरते हुए, वैस्वी शांत hui)Wo क्यों आएगी, अपना इतना बड़ा घर छोड़ कर.

रंजन : ये तो वो hi कह रही थी न, मेने तो बस याद दिलाया.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Agar में औ तो तुम्हे कोई प्रॉब्लम है?

रंजन : मुझे क्यों प्रॉब्लम होगी, मुझे थोड़ी न रखना है तुम्हे, ये सब तो शिव कोई hi संभालना है (शिव को देख kar)Sambhal लोगे न शिव? (अब शिव की बरी थी, वो खस्ने लगा, लता उसको पानी देने लगी)

लता : तू चुप चाप खाना नहीं खा शक्ति. (वैस्वी ko)Tum खाना खाओ, ये तो ऐसे hi बोलती रहती है, तुम्हे खाना सच में अच्छा लगा?

वैस्वी : है दीदी, बहोत अच्छा है.

रंजन : वो तो....

लता : चुप बोलै न (उसने दांते हुए कहा, तो रंजन चुप हो गयी)

रंजन : मुझे क्या जितनी इकठ्ठा करनी है करे (उसने बड़बड़ाते हुए कहा)

लता : क्या बोली तू?

रंजन : (हड़बड़ाते hue)Kuchh नहीं दीदी, में कहा कुछ बोली, (विणा को देख kar)Boli क्या में? (विणा को पता था की वो क्या बोली पर फिर भी ना में शिर hilaya)Dekha, में कुछ नहीं बोली.

लता : मुझे पता है, चुप चाप खाना खा.

हम सबने खाना खाया. मेने लता को बताया की मुझे संयम के वह जाना है और उसके बाद साइट चला जाऊंगा. में वह से निकल गया.

झोया को पता था की आज शिव आनेवाला है, नाज़िआ ने जब बताया तो उसका दिल धड़कन चूक गया था, वैसे तो सब घर पर थे hi, तो ऐसी वैसी कोई बात नहीं थी, पर उस दिन के बाद उसके दिल में एक युद्ध छिड़ा हुआ था, कभी उसे लगता था की वो अपने पति को धोखा दे रही है और उसे ऐसा करना सोभा भी नहीं देता, पर फिर कभी कभी वो अपनी भावनाओ में बह जाती थी. वो खुद समाज नहीं प् रही थी की क्या करे. अब फिर से उसका सामना शिव से होनेवाला था तो वो थोड़ी टेंशन में थी.

वह जहान्वी भी शिव का इंतजार कर रही थी, उसे भी शिव का नार्मल होना समाज नहीं आ रहा था. आज वो कुछ ज्यादा hi सेक्सी हो कर आयी थी. वो देखना चाहती थी की शिव क्या करता है?



 
आज मेरा ध्यान गया, पिछले साल आज hi के दिन ये स्टोरी सुरु हुई थी, जब स्टोरी सुरु की थी तब मुझे लगा था की 5-6 महीनो में स्टोरी ख़तम हो जाएगी, पर आज एक साल हो गया.

थैंक यू आल फॉर योर सपोर्ट.



 
अपडेट 153

में और वैस्वी वह से निकले, वो मुझे संयम के वह छूने आ रही थी. स्कूटर में चला रहा था, वो मेरे पीछे बैठी थी और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून चुभो रही थी जिस से मुझे गुदगुदी हो रही थी.

शिव : क्या कर रही हो, गुदगुदी हो रही है.

वैस्वी : (अपने नाखुनो को ज्यादा जोर से चुभोते हुए) अच्छा गुदगुदी हो रही है, और अब.

शिव : शठ क्या कर रही हो, चुभ रहे है.

वैस्वी : मन कर रहा है मि तुम्हे पूरा का पूरा नोच दालु.

शिव : क्यों, अभी तो प्यार जाता रही थी.

वैस्वी : इसीलिए hi गुस्सा आ रहा है, तुम जैसे से प्यार कर बैठी इस लिए.

शिव : मुज जैसे से से क्या मतलब है?

वैस्वी : जो संयम को पसंद आया वो hi मुझे भी पसंद आया, तुम्हारी वजह से हम दोनों साहिलियो में जगदा हो गया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene थोड़ी न कहा था, और मेने कभी तुम्हे वैसे कुछ कहा था क्या, न hi मेने संयम से कुछ कहा है.

वैस्वी : है, तुम तो बहोत सरीफ हो न, अब तुम्हारी वजह से पता नहीं हम दोनों में क्या होगा?

शिव : मेरा उसके साथ कुछ भी नहीं है, तुम खामखा मुज पर इल्जाम मत लगाओ.

वैस्वी : (जोर से नाख़ून चुभोते hue)Bade आये, मुज पर इल्जाम मत लगाओ वाले. उसकी जिस तरह की हरकते है आज नहीं तो कल वो कुछ न कुछ तो करेगी hi.

शिव : तो में क्या कर शक्ति हु?

वैस्वी : में क्या कर शक्ति hu...(Usne मेरी नक़ल उतरी)

शिव : तुम तो ख़म खा मुज पर भड़क रही हो, वो ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी, में जनता हु उसे.

वैस्वी : तुमसे ज्यादा में जानती हु, तुमसे पहले वो मेरी सहेली है, बड़े सरीफ बनते हो न तो कहो जब में तुम्हारे पीछे बैठती हु तो क्या फील करते हो?

शिव : (अनजान बनते hue)Kehna क्या चाहती हो? (उसने फिर नाख़ून mare)Ouch क्या कर रही हो, गिर जायेंगे.

वैस्वी : जब में पीछे बैठती हु तो मेरा सब तुम्हे टच नहीं होता?

शिव : तो इसमें में क्या करू?

वैस्वी : में क्या karu(Meri नक़ल उतरी).... वो बैठती है तो????

शिव : (में समाज रहा था की वो क्या कहना चाहती है) इसमें में क्या कर शक्ति हु.

वैस्वी : उसको कह सकते हो न, पर नहीं, तुम्हे तो अच्छा लग रहा होगा क्यों? (फिर नाख़ून मरे)

शिव : Shhhh....pagal हो तुम, में क्या kahunga...kya में ऐसा कहु की संयम जब तुम मेरे पीछे बैठती हो तो तुम्हारे वो मुझे चुभते है, तुम पीछे बैठो और वैस्वी को बैठने दो, उसके चुभेंगे तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है. ऐसा कहूंगा?

वैस्वी : (उसका लहजा सुन कर वो है पड़ी, फिर सीरियस हो kar)Jaise मुझे पता है वैसे hi उसको भी पता होगा न की तुम क्या महसूस कर रहे हो.

शिव : है, ये तो है.

वैस्वी : तो फिर वो जान बुज कर क्यों बैठना चाहती है.?

शिव : यार अब में इसमें क्या कहु?

वैस्वी : तुम क्यों कुछ कहोगे, तुम्हे तो मज़ा आता होगा न. (फिर कुछ सोच kar)Ab सोचो की वो क्यों बैठती है, जबकि उसे पता है की क्या होगा.

शिव : में क्या जणू? ोुछः! नाख़ून मात मार यार.

वैस्वी : ज्यादा भोले मात बनो, तुम जानते हो की उसके दिल में क्या चल रहा है.

शिव : चलो एक बार मन भी लिया की मुझे पता है, पर फिर भी में इसमें क्या कर सकता हु, जितना हो सके में उतना डिस्टेंस बनता हु न, में तो तुम्हारे साथ भी डिस्टेंस बनके रखता हु. (फिर नाख़ून chubhoye)Ouchhh ! लगता है यार, अब क्यों ऐसा किआ, अब तो मेने अच्छा hi कहा है न.

वैस्वी : मुझसे डिस्टेंस बनाने को किसने कहा है, उसदिन वह पदावली जगह पर हम गए थे तब भी मेने कहा था न की में प्यार करती हु तुमसे, और उस दिन जब तुमने मुझे बचाया था तब भी तो मेने कहा था, फिर क्यों डिस्टेंस बनाते थे. जब संयम की वजह से मेने कहा की में अब दूर रहूंगी तो क्यों मानाने नहीं आये? अभी भी ये मात सोचना की में पैट गयी हु, वो तो उस लड़के की वजह से में डिस्टर्ब हो गयी थी, अभी भी तुम्हे मुझे पटना है समजे.

शिव : (अजीब लड़की है ये भी, मेने मुस्कुराते हुए kaha)Aur न पटना हो तो?

वैस्वी : (दोनों हाथो के नाख़ून चुभोते hue)Maar डालूंगी तुम्हे.

शिव : पागल हो क्या तुम?

वैस्वी : जो समझना है वो संजो (हम दोनों संयम की गली के पास पहुंच गए थे, मेने स्कूटर रोका और उतर गया, वो आगे सरक गयी और स्कूटर पकड़ लिया, फिर मेरी और देख kar)Us से दुरी बनाकर रखना.

शिव : अगर वो मुझसे कहे की में तुम्हारी दोस्त पहले से हु तुम वैस्वी से दुरी बनालो तो. (वैस्वी सीरियस हो गयी, फिर मेरी और गुस्से से देखते हुए)

वैस्वी : भाड़ में जाओ तुम दोनों. (में मुस्कुराया) मुस्कुराओ मात, मेने कहा था की गले नहीं पड़ूँगी, उसे ज्यादा सीरियस मात लेना, गले पद भी सकती हु. (में मुस्कुरा रहा था, और वो ज्यादा गुस्सा हो रही thi)Dur रहना उस से, ज्यादा भाव मात देना वार्ना मार डालूंगी तुम्हे. कल मिलते है (कहते हुए वो चली गयी, में वही खड़े हुए उसे देख रहा था, आगे जा कर उसने पीछे मुद कर देखा और मुस्कुरायी, मेने भी मुस्कुरा कर bye कहा, वो चली गयी)

शिव : मान में... अब तुम्हे केस संजो की संयम से तो मेरा कुछ भी नहीं है पर और बहोत सी है, इसीलिए में तुम्हे दूर रखना चाहता था, पर रख नहीं प् रहा हु. (मेने आसमान की और देखा, जैसे पूछ रहा हु की हे भगवन तू क्या चाहता है, फिर में संयम के घर की और निकल गया)

अभी में गली में मुदा hi था की सामने से संयम आती दिखी, वो कभी मुझे तो कभी रस्ते की और देख रही थी, जब वो नजदीक आयी तो बोली

संयम : तुम वैस्वी के साथ आये? (उसने वैस्वी को देखा था)

शिव : है, वो मुझे छोड़ने आयी थी.

संयम : (आश्चर्य se)Wo अभी तक तुम्हारे साथ थी, घर नहीं गयी?

शिव : (उसने शक वाली नजर से मुझे देखते हुए kaha)Ha, वो अनाथालय आयी थी, सबसे मिलने.

संयम : किस से मिलने?

शिव : सब से मिलने, फिर सबने खाने को बोलै तो उसने खाना भी खाया तो वो वही थी.

संयम : (वो अंदर hi अंदर जल रही थी, शिव और वैस्वी साथमे थे ये सोच कर hi उसे जलन हो रही thi)Use ले गए, मुझे नहीं कहा.

शिव : में उसे नहीं ले गया, उसे मिलना था तो वो आयी, तुम कहा जा रही हो?

वैस्वी: दुकान से कुछ सामान लाना था तो जा रही थी, तुम जाओ में आती हु.

शिव : ठीक है. (वो आगे चली गयी में घर की और चला गया, मेने बेल्ल बजाय तो आंटी ने दरवाजा खोला, उन्होंने एक पल मुझे देखा फिर अपनी नज़ारे झुका ली, मुझे भी अजीब लग रहा था, उस दिन हमारे बिच वो सब हो गया था, पर अभी वो ावक्वार्ड लग रहा था, उन्होंने धीरे से कहा)

आंटी : आओ. (न उन्होंने नजर उठायी न मेने उनकी और देखा, में अंदर चला gaya)(Shiv को देख कर ज़ोया की हालत ख़राब हो गयी थी, उसे बहोत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, भले hi वो सब हो गया था पर उसे अभी बहोत शर्म आ रही थी, उसका दिल बुलेट ट्रैन की रफ़्तार से दौड़ रहा था, उस से बोलै भी नहीं जा रहा था, वो जल्दी से वह से किचन की और चली गयी और जाते जाते chillayi)Nazia, ो Nazia...Shiv आया है. (बोलते बोलते वो अंदर चली गयी, में सोफे पर बैठा, थोड़ी hi देर में नाज़िआदिदी ऊपर से निचे उतरती दिखाई di)(Jaise hi नाज़िआ की नजर शिव पर पड़ी वो खुस हो गयी और मुस्कुराते हुए उसकी और चल di)(Mene भी नाज़िआदिदी को देखा, पटिआला सूट में वो बहोत खूबसूरत लग रही थी. वो मेरे नजदीक आयी)

नाज़िआ : (धीमी आवाज में प्यार se)Kaise हो?

शिव : अच्छा हु. (वो मेरे नजदीक hi बेथ गयी)

नाज़िआ : तुम्हे डिस्टर्ब तो नहीं किआ इस वक़्त.

शिव : नहीं.

नाज़िआ : रुको, में पानी लती हु. (वो कड़ी होने लगी तो मेने उनका हाथ पकड़ कर बिठाते हुए कहा)

शिव : कोई जरुरत नहीं है, में घर से hi आया हु. (मेरे हाथ पकड़ने से उनका चेहरा खिल गया, वो बड़े प्यार से मुझे देखने लगी, और दोनों हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया, आंटी थी तो मुझे ावक्वार्ड लगा, कही वो आ न जाये, पर मेने हाथ नहीं chhudaya)Kyu बुलाया मुझे? कोई काम था?

नाज़िआ : क्यों काम हो तो hi बुलाऊ, ऐसे hi देखना था तुम्हे (उन्होंने धीमी आवाज में कहा, और मुस्कुराते हुए मुझे प्यार से देखने लगी, में समझने की कोशिस कर रहा था, आंटी निचे hi थी, और वो कभी भी आ शक्ति थी, तो मुझे थोड़ा दर भी लग रहा था, कुछ पल वो मुझे ऐसे hi देखती रही, की तभी दरवाजे की बेल्ल बजी, उन्होंने मेरा हाथ छोड़ा और दरवाजा खोलने चली गयी, मेने देखा तो अंकल अंदर आ रहे थे और साथमे संयम भी थी, उन्हें देख कर में खड़ा हो गया)

शिव : नमस्ते अंकल. (मेने हाथ जोड़ कर कहा)

हसनजी : नमस्ते, कब आये?

शिव : बस अभी अभी आया.

हसनजी : (सोफे में बैठते hue)Betho बैठो, (नाज़िआ se)beta नास्ता वास्ता कुछ दिया की नहीं.

शिव : (बैठते hue)Nahi अंकल, में अभी अभी खा कर आया हु.

हसनजी : एक बात करनी थी बीटा, क्या तुम पैरो फ्री हो?

शिव : (मुझे समाज नहीं aaya)Kyu अंकल?

हसनजी : (नाज़िआ की और इस्सर करते hue)Iske ससुराल जाना है, उस दिन मुझे एक अर्जेंट काम है तो मेरा जाना नहीं हो पायेगा, मेने इनसे कहा की हमारे एक रिस्तेदार है उन्हें ले जाये तो ये कहने लगी की वो तुम्हे ले जाएगी, तो क्या तुम जा सकते हो इनके साथ.

शिव : (कुछ सोच kar)Ji चला जाऊंगा, पर क्यों जाना है?

हसनजी : कुछ खास नहीं है, इन औरतो का hi मामला है, नाज़िआ बेटी को अच्छे दिन चल रहे है तो उन्होंने कहा है की एक दिन के लिए उसे घर भेजे ताकि उनकी कोई मन्नत है वो पूरा कर शेक. औरतो का काम है तो वैसे भी मेरा वह कोई काम नहीं है पर इनको आने जाने के लिए कोई चाहिए होगा, उसी दिन वापस आ जाते तो गाड़ी कर देता, पर इन्हे वह एक रात रुकना है, तो बस से जाना पड़ेगा, दो- तीन घंटे का सफर है, तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं होगी न, (उन्होंने एक पल मुझे dekha)Kuchh हो तो सोच कर बता देना, में कोई और इंतजाम कर दूंगा.

शिव : नहीं अंकल, चला जाऊंगा.

हसनजी : थैंक यू बीटा, तुमने है कह कर बहोत रहत पहुचायी, (थोड़ा जोर se)Suno...(Zoya को आवाज़ दी, वो किचन में hi थी, बहार hi नहीं आयी थी, वो अंदर से hi सब सुन रही थी, अपने पति की आवाज सुन कर वो बहार आयी) तुमने सुना न, ये आ जायेगा, अब तो कोई दिक्कत नहीं है न?

ज़ोया : आप आते तो अच्छा था, बेटी का ससुराल है वो.

हसनजी : हमारी पहले भी बात हुई है न फिर क्यों बहस कर रही हो, और मेरी करिममिआ से बात हो गयी है, मेने उन्हें बता दिया है.

ज़ोया : जैसा आप कहे (उसने शांति से hi उत्तर दिया)

हसनजी : ठीक है बीटा, तुम बैठो, मुझे एक काम है तो जाना है.

शिव : नहीं अंकल, में भी निकलता हु.

संयम : नहीं, तुम रुको, मुझे काम है, वो एक सवाल समाज नहीं आ रहा है, अब जब तुम आये hi हो तो मुझे समजा दो, कल होम वर्क में करके ले जाना है न. (सब संयम की और देखने लगे)

हसनजी : (मुस्कुराते hue)Tum रुको बीटा, में चलता हु. (ज़ोया se)Koi सामान लाना है क्या?

ज़ोया : नहीं, में और नाज़िआ कल बाजार चले जायेंगे.

हसनजी : ठीक है, में निकलता हु फिर. (वो चले गए)

संयम : चलो शिव, ऊपर कमरे में. (मेने नाज़िआदिदी और आंटी की और देखा, आंटी कुछ नहीं बोली)

नाज़िआ : है है तुम जाओ शिव.

नाज़िआ और ज़ोया दोनों को ऊपर जाते हुए देख रही थी, ज़ोया फिर अंदर चली गयी, और नाज़िआ अभी भी सीढ़ियों को देख रही थी. शिव इतना नजदीक था तो उसका दिल बेकाबू हो रहा था पर संयम थी तो कुछ होना संभव नहीं था. वो अपनी अम्मी के पीछे किठचें में चली गयी. वही संयम और में कमरे में पहुंचे.

शिव : क्या समाज में नहीं आया? (संयम जो की बहाना बना कर hi शिव को लायी थी, वो सोचने लगी की क्या कहे)

संयम : (कन्फूसिओं me)Tum बेटो में दिखती हु. (में वही बीएड पर बेथ गया, वो वह राखी कबत को खोल कर कुछ ढूंढने लगी, वो झुकी हुई थी तो उसके कूल्हे सलवार के ऊपर से hi दिख रहे थे, झुकने से बिच की दरार भी दिख रही थी, मेने अपनी नजर घुमा ली, पर उसने ढूंढने में समय लगाया तो एक दो बार मेरी नजर वह चली गयी, अब नटुराली मान में विचार आने लगे तो मेने दिमाग को शांत किआ और दूसरी और देखने लगा, उसने एक किताब ली और बहार निकली, मेने देखा की केमिस्ट्री की किताब थी. उसने पगपालते हुए एक टॉपिक निकला, और बुक मेरी गॉड में रख di)Ye समाज में नहीं आ रहा hai.(Ungli रखते हुए वो मुझसे सात कर hi बेथ गयी, वो इतना नजदीक बैठी थी की हमदोनो के हाथ आपस में टच हो रहे थे, मेने उसकी और देखा तो वो किताब में hi देख रही थी, तो मेने सोचा की वो नोर्मल्ली hi बैठी hai)(Par संयम के दिमाग में बहोत कुछ चल रहा था, वो जान बुज कर उसके इतने नजदीक बैठी थी, वो बखूबी नाटक कर रही thi)(Mene टॉपिक देखा जो आज hi पढ़ाया था)

शिव : इतना इजी तो है, मैडम ने कितनी अच्छी तरह से संजय था.

संयम : (मेरी और देख कर, अपना मुँह बनाते hue)Tumhe इजी लगा होगा, मेरी तो ऊपर से hi गया था, प्लीज मुझे समजा दो न, उसने मेरी बाह में हाथ डालते हुए मुझे रिक्वेस्ट की, उसके ऐसे पकड़ने से उसके स्तन का नरम मास्स मुझे अपनी बाह पर महसूस होने लगा)

शिव : ठीक है में समजता हु पर सीधी तो बैठो.

संयम : (बुरा सा मुँह बनाते hue)Sidhi तो बैठी हु, दूर से थोड़ी न समाज में आएगा, मुझे भी किताब में देखना पड़ेगा न. (अब में क्या कहता उस से, मेने गहरी साँस ली और संजना सुरु kia)(Samim निचे झुके हुए बार बार शिव की झनगहो के बिच देख रही थी, उसका शिर निचे था तो शिव को इसका पता नहीं चला की वो कहा देख रही है, पता नहीं संयम को क्या हो रहा था, वो बड़ी हसरत से वह देख रही थी, उसका मान कर रहा था की वो वह हाथ रक्खे पर दर लग रहा था, वैसे भी वो ऐसा नहीं कर सकती थी)

शिव : समाज में आया?

संयम : (जो कुछ कुछ hi सुन रही थी वो थोड़ा hadbadayi)H... हआ, उसने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और किताब में एक जगह ऊँगली रखते hue)Iss इक्वेशन को एक्सप्लेन करो न. (दिखने के बाद भी उसने हाथ पीछे नहीं खींचा और वही हल्का पीछे कर के रख दिया, अब उसका हाथ शिव की झंघ पर था और उंगलिअ झंघ की जोड़ par)(Usne ऐसी जगह हाथ रक्खा था की में बेचैन हो उठा, मेने उसकी और देखा तो वो किताब में hi देख रही थी, तो मुझे लगा की उसने अनजाने में hi हाथ रक्खा है तो में कुछ नहीं बोलै, में समजा hi रहा था की मुझे लगा जैसे उसके दाहिने हाथ की छोटी ऊँगली कुछ हरकत कर रही है, वो मेरी बायीं और बैठी थी और उसका दाहिना हाथ मेरी झंघ पर था, तो उसकी छोटी ऊँगली अंदर की और थी, और उसकीअंदली की हरकत से वही नजदीक सोये मेरे लुंड में हरकत करनी सुरु कर di.(Samim अपनी ऊँगली से कुछ धुंध रही थी, उसे एहसास हुआ की वह कुछ फूलने लगा है, सो वही देख रही थी, उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी, जैसे जैसे वो ऊँगली चला रही थी वो जगह और फूल रही थी, उसकी धड़कन तेज होने lagi)(Meri हालत ख़राब थी, पता नहीं वो जान बुज कर कर रही थी या क्या, पर जो भी हो मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, में जल्द hi इस टॉपिक को ख़तम करना चाहता था तो में जल्दी जल्दी समजने लगा, और टॉपिक ख़तम करके मेने कहा)

शिव: समाज आ गया?

संयम : (जैसे नींद से जगी और हड़बड़ा gayi)H... हा है.

शिव : ठीक है, में चलता हु. (में खड़ा होने लगा तो उसने जोर से मेरी बाह थम ली जिस से उसके स्तन मेरी बाह में धस गए)

संयम : इतनी क्या जल्दी है, बैठो न.

शिव : तुम्हे जो जान न था वो हो गया न, अब क्या है, मुझे देर हो रही है.

संयम : बैठो न, ऐसे तो कभी मिलते नहीं हो की अच्छे से बात हो सके, आज आये हो तो थोड़ी देर बैठो.

शिव : रोज़ तो मिलते है, बात भी तो करते है.

संयम : वैसे नहीं.

शिव : तो कैसे? (वह नाज़िआ का दिल भी नहीं लग रहा था तो वो काम निपटा कर ऊपर आने लगी, मेने कदमो की आवाज सुनी, संयम ने भी सुनी तो उसने मेरी बाह छोड़ दी और सीधी बेथ गयी और किताब में देखने लगी)

नाज़िआ : (वो भी बहाने से hi आयी थी, उसने देखा की संयम और शिव बीएड पर साथ में बैठे है और किताब में देख रहे hai)Kuchh खाओगे शिव, कुछ लौ क्या? (संयम को गुस्सा आ रहा था पर बोली कुछ नहीं)

शिव : नहीं, कुछ नहीं चाहिए, मुझे निकलना भी है अब.

नाज़िआ : अरे बैठो न, (संयम ko)Aur आज तू कैसे इतनी देर जाग रही है, वर्ण रोज़ तो इस वक़्त घोड़े बेच कर सो जाती है.

संयम : (अपना गुस्सा दबाते hue)Muje पढ़ना था तो नहीं सोई. आप यहाँ क्या कर रही हो?

नाज़िआ : क्या कर रही हो से क्या मतलब है, में पूछने आयी थी.

शिव : आप लोग बैठिये, मुझे साइट पर भी जाना है, में चलता हु. बाद में आऊंगा. (दोनों रोकना चाहती थी पर क्या कर सकती थी, दोनों ने अपनी उदासी छुपाते हुए कहा, ठीक है, दोनों उसे छोड़ने निचे आयी) (मेने देखा की आंटी अंदर hi थी, वो कही दिख नहीं रही थी, मेने ये भी महसूस किआ था की वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी, में उसकी वजह जान न चाहता था, पर मुझे उनसे बात करने का मौका नहीं मिला था) (नाज़िआ ने अपनी ामी को आवाज दी तो वो बहार आयी, पर मुझसे नज़ारे मिलाने से कतरा रही थी, मेने सबसे इजाजत ली)

में वह से निकल गया. रस्ते में मेने देखा की जहान्वी का मश्ग आया हुआ है ‘कहा हो? कब आओगे?’. मश्ग पढ़ के में सोचने लगा की अब इनका क्या करू, वो तो ऐसे इंतजार कर रही है जैसे कोई बॉयफ्रेंड का इंतजार करता है, मेने मन में सोच लिया की ज्यादा क्लोज नहीं होना है वर्ण एक और काण्ड हो जायेगा. में वह पंहुचा तो देखा की वो बालकनी में hi कड़ी थी, मुझे देख कर उसने स्माइल दी, मेने भी स्माइल दी, हाथ से इस्सर करके मेने hi कहा और आगे जाने लगा. (जहान्वी को ये बिलुल अच्छा नहीं लगा तो वो तुरंत बोल पड़ी)

जहान्वी : कहा जा रहे हो?

शिव : (मेने रुक कर उनकी और देखा और मुस्कुराते हुए kaha)Dekh लू जरा, क्या चल रहा है.

जहान्वी : में अभी अभी देख कर आयी हु, अभी तो आये हो, थोड़ी देर बैठो, ऊपर आ जाओ.

शिव : (मुझे लगा जैसे वो अपने ऊपर आने का नौटा दे रही है, उनके कपडे देख कर मेरा भी मन मचलने लगा था की चला जाऊ, पर फिर मेने अपने आपको संभाला और मुस्कुराके kaha)Aata हु, थोड़ी देर में. (कहते हुए में आगे निकल गया, जहान्वी शिव को जाते हुए देख रही थी, जब वो एक माकन में चला गया तो वो अंदर आ गयी और सोफे पर बेथ गयी और शिव के बारे में सोचने लगी)

जहान्वी : (मान me)Kyu कर रहे हो ऐसा, ऐसे बेहवे कर रहे हो की जैसे हमारे बिच कुछ हुआ hi न हो, किश कर लिया था मुझे फिर भी मेने कोई विरोध नहीं किआ है, तो फिर क्यों कर रहा हे वो ऐसा. शायद उसकी कोई गर्लफ्रेंड होगी, है हो भी सकता है, कितना हैंडसम है, कोई गर्लफ्रेंड न हो ऐसा तो हो hi नहीं सकता, और जिस तरह से उसने मुझे किश किआ था तो काफी माहिर भी लग रहा था, शायद सेक्स भी किआ होगा. तभी तो दूर भाग रहा है मुज से. वैसे में हु भी तो बड़ी, वो मुझे क्यों गर्लफ्रेंड बनाएगा, वो तो अपने जितनी hi किसी लड़की को गर्लफ्रेंड बनाएगा न. पर मुझे क्यों जलन हो रही है, एक बार सोच भी लू की उसने मुझे गर्लफ्रेंड बना लिया तो भी क्या होगा, आगे तो बात बढ़नी नहीं है. वैसे भी पापा तो उसे अपना प्रतिस्पर्धी hi मानते है, वो क्यों भला मेरा रिस्ता होने देंगे. पता नहीं क्या काया सोच रही हु में, वैसे भी में आज कल की लड़की हु, थोड़ा बहोत उसके साथ हो भी जाये तो क्या प्रॉब्लम है, वैसे भी में सब कर तो चुकी हु, एक बार और हो जायेगा तो भी क्या लूट जायेगा. पर वो माने तो न. वो तो ऐसे दूर भाग रहा है जैसे में उसे खा जाउंगी, उस दिन तो ऐसे किश कर रहा था जैसे मुझे खा hi जायेगा, इस से अच्छा था की वो मुज पर गुस्सा hi रहता. (वो अपने खयालो में hi सोच रही थी, उसने बहार जा कर भी देखा की शिव आ रहा है की नहीं पर वो नहीं आया था, वो निचे उतरी और उस माकन की और चल दी जहा काम चल रहा था, वो वह गयी तो देखा की शिव वह नहीं है, वो किसी से पूछ तो नहीं सकती थी तो थोड़ी देर वो वह कड़ी रही फिर बहार निकली और देखने लगी की शिव कहा है, शायद वो गोडाउन में हो सकता है, सामान चेक कर रहा होगा, तो वो उस और बढ़ चली. जब वो नजदीक पहुंची तो उसे कुछ आवाजे सुनाई दी, ये किसी लड़की की आवाज थी और वो कुछ कह रही थी, पता नहीं क्यों पर उसे कुछ अजीब लगा तो वो बिना आवाज किये नजदीक गयी तभी उसे शिव की आवाज सुनाई दी, उसका दिल जोरो से धक् धक् करने लगा, क्यों की कोई लड़की और शिव थे अंदर. वो ध्यान लगा कर सुन ने लगी.

लड़की : क्यों ऐसा कर रहे हो, क्या में अच्छी नहीं हु?

शिव : मेने कितनी बार कहा है की तुम अच्छी हो, इसका ये मतलब नहीं की में कुछ करू, तुम जाओ यहाँ से, कोई देख लेगा तो क्या होगा?

लड़की : क्या होगा, लोग जो कहेंगे मुझे कहेंगे, में तुम पर बात नहीं आने दूंगी, इतना तो भरोसा करते हो न मुज पर.

शिव : है है भरोसा, पर हर चीज का एक सही वक़्त होता है.

लड़की : अभी क्या दिक्कत है, किसी को पता नहीं चलेगा.

शिव : पागल मत बनो, में अभी जा रहा हु. (जहान्वी जो अपना दिल थामे सब सुन रही थी वो फ़ौरन वह से भागी और नजदीकी माकन में चली गयी और छुपके देखने लगी, शिव बहार आया, वो लड़की उसका हाथ पकाते हुए उसे खिंच रही थी, और उसे नादेर आने को कह रही थी, वो पहचान गयी की ये भोली है, वो शिव को खिंच रही थी पर शिव के सामने कहा उसका जोर चलता, तो दोनों बहार आ चुके थे, शिव ने अपना हाथ छुड़ा liya)Tum पागल हो गयी हो, इतनी भी क्या आग लगी हुई है. थोड़ी तो शर्म करो.

भोली : तुम्हे क्या दिक्कत है मुझे समाज नहीं आ रहा, जब में सामने से कह रही हु की कर लो फिर भी तुम भाग रहे हो.

शिव : देखो भोली, अगर तुम्हारा यही रवैया रहा तो में तुमसे बात भी नहीं करूँगा, जाओ तुम अभी.

शिव आगे बढ़ गया और ऑफिस की और जाने लगा, भोली उदास मान से कुछ देर वह कड़ी रही और फिर जहा काम चल रहा था वह चली गयी. जहान्वी मौका देख कर बहार निकली और ऑफिस की और चल दी, जब वो अंदर जा रही थी तो शिव बहार निकल रहा था, शायद वो वह नहीं थी तो वापस जा रहा था. उसे देख कर वो रुक गया.

शिव : कहा गयी थी आप? (शिव ने तो नॉर्मली hi पूछा था)

जहान्वी : वाशरूम गयी थी. (हड़बड़ाहट में वो बोल गयी पर फिर ख्याल आया की वो क्या बोल गयी है तो अपनी नज़ारे झुका ली, अपनी नज़ारे झुकाये वो आगे बढ़ी और शिव की बाजु से गुजरते हुए boli)aao, ऊपर चलते है. (वो सीढिया चढ़ रही थी, न चाहते हुए भी मेरी नजर हिलते कूल्हों पर चली hi गयी, वो कुछ ज्यादा hi हिल रहे थे, मेने नज़ारे दूसरी और कर ली और सीढिया चढ़ने लगा, ऊपर पहुंच kar)Betho. (में सोफे पर बेथ गया, वो टेबल के सहारे hi कड़ी हो gayi)Kya किआ? (शिव ने उसकी आँखों में देखा)

शिव : कुछ नहीं, बस स्टॉक देख रहा था.

जहान्वी : हम्म्म. (उसे समाज में नहीं आ रहा था की क्या bole)Ghar पे बता दिया?

शिव : क्या?

जहान्वी : वो hi पेपर वाला मामला.

शिव : है बता दिया, सब बहोत खुस है, वो आपको भी थैंक्स कह रहे थे.

जहान्वी : हम्म्म्म. (झांवी को ऐसी सिंपल बात में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, उसके मान में अभी जो हुआ था वही चल रहा था, उसे वो सब जान न था तो उसने हिचकिचाते हुए पूछ hi liya)Tumhari कोई गर्लफ्रेंड है?

शिव : (ऐसे साइड सवाल से में चौंक gaya)Kya?

जहान्वी : (वो भी हड़बड़ा गयी पर जान न तो था hi तो उसने नज़ारे झुका के puchha)Tumhari कोई गर्लफ्रेंड है?

शिव : (वैसे तो में इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहता था पर मुझे लगा की यही सही मौका है, उनका मेरे प्रति झुकाव में देख रहा था और में नहीं चाहता था की ये बात आगे बढे तो मेने सोचा की यही सही मौका hai)Ha.

जहान्वी : (उसे झटका लगा, पर उसने चेहरे से जाहिर न होने दिया, और muskurayi)Oh! कोण है वो?

शिव : (हलकी मुस्कराहट के sath)Sorry, पर वो में नहीं बता सकता, किसी की इज्जत उछालना मुझे पसंद नहीं.

जहान्वी : में किसी को नहीं बताउंगी, मुझसे कह सकते हो.

शिव : आप किसी को बताये या न बताये, पर में किसी के बारे में ऐसे नहीं बोल सकता, है जब वक़्त आएगा तो में बता दूंगा.

जहान्वी : (उसे यकीं होने लगा की वो भोली के बारे में बता रहा है, उसने हिचकिचाते हुए kaha)Muje पता है.

शिव : (मुझे आश्चर्य हुआ की इन्हे कैसे पता है, और वैसे भी में गर्लफ्रेंड कह सकू वैसी तो बहोत सी है, ये किसके बारे में बता रही है मुझे समाज नहीं aaya)Achchha, कोण है?

जहान्वी : तुम बात नहीं करना चाहते तो में भी क्यों बताऊ, पर एक बात कहूँगी, अपने लेवल का तो ख्याल रक्खा होता.

शिव : (मेरी समाजमे नहीं आया की वो क्या बोल रही hai)Aisa क्या पता है जिस से आपको लगता है की मेरा लेवल गिर गया.

जहान्वी : (उसको वैसे भी जलन हो रही थी, उसे लगा था की वो जिस से इम्प्रेस हो रही थी वो एक मजदुर के पीछे है, उसको ये सहन नहीं हो रहा था) मेने देखा अभी, गोडाउन में.

शिव : (में हल्का चंक गया, पर फिर आपने आपको सँभालते हुए मेने सोचा की चलो अच्छा hi है, ग़लतफ़हमी तो ग़लतफ़हमी hi sahi)Kyu उसमे क्या दिक्कत है?

जहान्वी : मुझे लगा था की तुम्हारा स्टैण्डर्ड ऊँचा है, पर तुम तो...

शिव : मुझे नहीं लगता की कोई सिर्फ इसलिए निचले स्टैण्डर्ड का हो गया की उसके पास पैसे नहीं है, या वो गुजरे के लिए मजदूरी करता है.

जहान्वी : मुझे लग रहा है तुम जल्दबाजी कर रहे हो, तुम्हे और अच्छी मिल सकती है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha, मुज जैसे अनाथ को कोण मिलेगा, जिसकी न जाट का पता है न खंडन का, न कोई घर है न और कुछ.

जहान्वी : अपने आपको इतना निचे मात संजो.

शिव : (हलके मज़ाक़िआ अंदाज se)Achchha, आपको लगता है की आप जैसे कोई बड़े घर की लड़की मुझे पसंद करेगी.

जहान्वी : (मुझसे कहो में hi तैयार हो जाउंगी, मुज जैसी kyu?)Ho सकता है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi मैडम, मेरी उतनी ौकान नहीं है, ये तो अच्छा है की अपने मेरी शिकायत नहीं की वजन तो अभी मेरे माथे पर जेल का सिक्का भी लग गया होता.

जहान्वी : (हलकी नाराजगी se)Tum बार बार क्यों कह रहे हो, मेने कोई शिकायत की क्या?

शिव : ये तो आपकी अच्छाई है, या मेरे जैसे लड़के के साथ आपका नाम जुड़ने से आपकी बदनामी होगी, ये सोच कर भी शायद आपने शिकायत न की हो.

जहान्वी : (हलके गुस्से se)Mene शिकायत नहीं की उसका तुम्हे बड़ा पता है, है न? (तुम्हे क्या पता की मेने शिकायत क्यों नहीं की?)

शिव : पता तो नहीं है, पर अनुमान से तो यही लगता है.

जहान्वी : है, है बहोत होशियार हो न तुम, बेवकूफ.

शिव : क्या, बेवकूफ, मेने कोई बेवकूफी वाली बात तो नहीं की है, फिर भी आप मुझे ऐसा कह रही है.

जहान्वी : (बेवकूफ hi हो तुम जो समाज नहीं रहे हो). अच्छा छोडो इस बात को, ये बताओ की ऐसा क्या है उसमे जो तुम उसके साथ...

शिव : (मुझे बहोत हसी आ रही थी और साथ में मुझे ये भी लग रहा था की कोई इंसान बड़ा या छोटा नहीं हो सकता, सिर्फ परिस्थिति छोटी होने से भोली बुरी नहीं बन gayi)Wo मुझसे प्यार करती है, मेरे लिए सब कुछ काने को तैयार है.

जहान्वी : (झुंझलाते hue)Sabkuchh मतलब क्या?

शिव : में कैसे बताऊ आपको, (में शर्माने की एक्टिंग करने लगा)

जहान्वी : (हलके गुस्से से, क्यों की वो समाज गयी थी की वो क्या बात कर रहा hai)Bahot शर्म आ रही है, तुम लड़को को सिर्फ वो hi चाहिए होता है, और कुछ दीखता नहीं है क्या?

शिव : वो hi से क्या मतलब है आपका?

जहान्वी : (हलके गुस्से se)Jyada भोले मात बनो, जितने दीखते हो उतने भोले हो नहीं तुम.

शिव : (अंदर hi अंदर इतनी हसी आ रही थी मुझे) वो वो आपके सामने ऐसी बात काने में शर्म आ रही है मुझे.

जहान्वी : है, है, किसी लड़की को जबरदस्ती पकड़ कर किश करने में शर्म नहीं आती क्यों?

शिव : आप बार बार मुझे उसका तना मात दीजिये, मेने कहा न की गुस्से में गलती हो गयी.

जहान्वी : (गलती करदी जनाब ने, यहाँ मेरी हालत क्या हो गयी है उसका अंदाजा नहीं है, वो झुंझलाते हुए सोचने lagi)Khair, मुझे क्या, तुम्हारी जिंदगी है, तुम जैसे चाहे जिओ, (फिर कुछ सोच kar)Us से शादी करनेवाले हो?

शिव : शादी (शरमाते hue)Abhi तो में छोटा हु, और वो भी कह रही है की शादी तो अपने लोगो में hi करेगी.

जहान्वी : तो फिर ऐसे hi...

शिव : (शर्माने की एक्टिंग करते hue)Mene थोड़ी न कुछ कहा है, वो hi कह रही है.

जहान्वी : तुम बेवकूफ हो क्या, वो अच्छी लड़की नहीं होगी, समाज नहीं आता तुम्हे?

शिव : नहीं, वो अच्छी hai?(Mene फिर शरमाते हुए कहा)

जहान्वी : (गुस्से se)Tumhe कैसे पता?

शिव : वो... वो ...उसने कहा tha....ki उसने .....वो सब पहले कभी नहीं किआ.

जहान्वी : उसने कहा और तुमने मान लिया क्यों?

शिव : (पता नहीं पर मुझे जहान्वी की फिरकी लेने में बहोत मज़ा आ रहा था, मेने फिर शर्मा के kaha)Wo उसने मुझे दिखाई थी.

जहान्वी : क्या दिखाई थी (वो गुस्से में बोल तो गयी पर फिर उसे लगा की वो गलत पूछ बैठी, पर अब पूछ लिया तो पूछ लिया)

शिव : मैडम मुझे शर्म आती है.

जहान्वी : अब ज्यादा नाटक मात करो, बताओ.

शिव : मुझे शर्म आती है मैडम , में कैसे बताऊ की उसने वो लड़कीओ को होती है न वो दिखाई थी.

जहान्वी : (अपना शिर पकड़ liya)Tum जाओ अभी, मुझे कुछ नहीं जान न, भाड़ में जाओ तुम.

शिव : (उन्होंने अपना चेहरे अपने हाथ से छुपालिया था, मुझे बहोत हसी आ रही थी पर में ने भोले पैन से kaha)Me जाऊ.

जहान्वी : जाओ, कहा न. (में मुस्कुराते हुए वह से निकल gaya)(Jhanvi बाद बढ़ाने lagi)Bevakuf, पूरा बेवकूफ है. (अपने दिमाग को जोर देने पर उसने socha)Par जैसा मेने उसको देखा है वो इतना बेवकूफ तो नहीं है, क्या वो मुझे बेवकूफ बना रहा है? नहीं वो लड़की उसे बेवकूफ बना रही है, लड़को का क्या है, लड़की ऐसे सब दिखाएगी तो पागल हो hi जायेंगे, पागल है वो भी, मुझे क्या जो करना है करे. (उसके शिर में दर्द होने लगा सब सोच सोच कर तो वो वह से निकल गयी)

मेने जहान्वी की गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज सुनी तो मेने बहार देखा, वो जा रही थी, मुझे हसी आ गयी. वही मेने मौका देख कर भोली को भी कहा,

शिव : (आहिस्ता se)Mene कहा था न की ध्यान रक्खो, जहान्वी मैडम को पता चल गया है की तुम गोडाउन में थी.

भोली : है दिया, अब क्या होगा?

शिव : मुझे क्या पता, में तुम्हे समजता हु पर तुम्हे कहा समाज आता है.

भोली : में आगे से ध्यान रखूंगी. (वो चली गयी, में मुस्कुरा दिया)

शाम को में घर गया तो मेने लता को बता दिया की में स्टेडियम के बाद काव्यजि से मिलने जाऊंगा तो थोड़ी देर होगी, मेरा इंतजार मात करना. उन्होंने मुस्कुरा कर हामी भरी. स्टेडियम में हमने सब कुछ भूल कर जी तोड़ म्हणत की, अँधेरा हो गया तब तक हम प्रैक्टिस करते रहे, जब मेने जूही को काव्यजि के वह छोड़ने को कहा तो फिर से उसने मुझे सुनाया और मुझे उनके घर उतर कर चली गयी.

जब में उनके घर गया तो एक नौकरनी ने दरवाजा खोला, वही काव्यजि और उनके mata-pita सब बैठे हुए थे. मेने उनके पेअर छुए तो उन्होंने खुस हो कर आशीर्वाद दिया. हमने कुछ देर बात की और फिर में और काव्यजि ऑफिस में आ गए.

शिव : आज कोई क्लाइंट नहीं आया है क्या?

काव्यजि : नहीं, मेने आज किसी की अपॉइंटमेंट नहीं रक्खी. (उन्होंने शरमाते हुए कहा)

शिव : (में muskuraya)Aisa क्यों, आराम करने का इरादा था क्या, अगर ऐसा था तो मुझे बता देती, में भी डिस्टर्ब काने नहीं आता.

काव्यजि : बड़े आये डिस्टर्ब करनेवाले, तुम्हारी वजह से to...(Wo बोलते बोलते रुक गयी और फिर शर्मा गयी)

शिव : (वो अपनी कुर्शी में बेथ गयी और में samne)Achchha तो मेरी वजह से अपना नुकसान करवलिया.

काव्य : मेने कोई नुकसान नहीं करवाया, वो कल आ जायेंगे, वैसे भी तुम मिलते कहा हो तो सोचा इत्मीनान से बाते करेंगे. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : अच्छा, सिर्फ बाटे करने के लिए बुलाया है? (मेने अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराते हुए कहा)

काव्य : (शरमाते hue)Aur नहीं तो क्या, मम्मी पता निचे है.

शिव : नीचे है न. (उनकी आँखों में देखते हुए कहा)

काव्य : (शिव का ऐसे बात करना उसे भी बहोत अच्छा लग रहा था, और शिव की इतनी बोल्डनेस उसको पसंद भी थी, उसने शिव को चिढ़ाते हुए kaha)Aaj ज्यादा hi नहीं उड़ रहे हो?

शिव : अब क्या करू, सामने इतनी खूबसूरत लड़की हो और सब माहौल तैयार करके बैठी हो तो बहकना तो लाज़मी है.

काव्य : (शर्म के साथ मुस्कुराते hue)Mene कोई माहौल तैयार नहीं किआ है, और पहले तो बहोत दर लगता था मुझसे, अब नहीं लगता.

शिव : दर तो लगता है (मेने अपने नंगे पेअर टेबल के नीचे से आगे बढ़ाये और उनके पैरो को छू लिया, उनके ठन्डे पैरो को छूटे hi एक गर्म लहर दौड़ गयी)

काव्य : (शिव के गर्म पैरो की छुअन से hi वो पूरी हिल गयी, उसकी आंखे भी बंद हो गयी, और हलकी सिसकी भी निकल gayi)Shhhhh.

शिव : दर के सामने जित बहोत बड़ी दिख रही है तो फिर हिम्मत तो करनी पड़ेगी न. (मेने मुस्कुरा कर कहा, में देख रहा था की उनका चेहरा मेरे छूने से कैसा हो गया था, टेबल पर रक्खे उनके हाथ को पकड़ कर हलके हलके सहलाते hue)Itni प्यारी लड़की को देख कर बहकना तो बनता है.

काव्यजि : (मुस्क़ुअते हुए उसने शिव को dekha)Ladki नहीं हु...

शिव : अच्छा, तो अप्सरा हो.

काव्य : (उसकी बातो से वो खिल खिला di)Bahot रोमांटिक हो रहे हो आज.

शिव : आपको देख कर हो गया.

काव्य : (हलकी शर्म se)Par कुछ मिलनेवाला नहीं है.

शिव : उसकी आप चिंता मात कीजिये, मुझे जो चाहिए होगा वो में ले लूंगा.

काव्य :(उसका भी दिल मचलने लगा था पर निचे mummy-papa थे तो वो मजबूर thi)Mummy-papa है यार. (उसने हलकी मायूसी से कहा)

शिव : (अपनी जगह से उठ कर में उनकी कुर्शी के पीछे चला गया, और उनकी बाह को सहलाने laga)To क्या हुआ.

काव्य : (उसका दिल जोरो से धक् धक् करने laga)Please यार, वो आए सकते है (उसका दिल तो छह रहा था पर साथ में दर भी था)

शिव : (ब्याह से हाथ को खिसका कर उनके कंधे को सहलाते hue)Mene कहा कुछ किआ तो आप इतना दर रही हो.

काव्य : (शिव के हाथ उसके गले और कंधे पर ऐसे चल रहे थे जैसे वो मस्सगे कर रहा हो, उसकी आंखे बंद हो gayi)Shiiiiiiv, मात करो यार.

शिव : में कहा कुछ कर रहा हु, में तो बस आपका मस्सगे कर रहा हु. (हलाकि इतने से hi मेरा लुंड उठने लगा था, और शायद उनकी भी यही हालत थी, वो मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर उसे सेहला रही थी)

काव्य : शह्ह्ह्ह, मात करो यार, में रुक नहीं पाऊँगी. (शिव के बढ़ते हाथ उसे महसूस हो रहे थे, कंधो को सहलाते हुए उसके हाथ उसके उरोजों की और बढ़ रहे थे, वो उसे रोकना भी चाहती थी और आगे बढ़नेदेना भी चाहती thi)Shiiiiv शहहह मात करो न यार, (उसके हाथ आगे बढ़ रहे थे, स्तन के ऊपरी भट पर उसके हाथ का दबाव महसूस हो रहा था, वो कुर्शी पर अपना शिर टिकाये आंख बंद कर के बैठी थी और खुद उसके हाथ को सेहला रही थी, जैसे जैसे उसके हाथ निचे हो रहे थे, उसकी हालत ख़राब हो रही थी, उसके हाथ उसके निप्पल तक चले जा रहे the)Shhhh मात करो शहहह शीइइइइइइइव. (वो उसे रोक तो रही थी पर नहीं चाहती थी की वो ruke)Shiiiiiiv शह्ह्हह्ह्ह्ह. (आज जैसे शिव भी अलग मूड में था, उसने हाथ बढ़ाये और पुरे स्तन को अपनी हथेली में समां liya)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv शह्ह्हह्ह्ह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (काव्य को दर था की अगर इस खेल को यहाँ रोका न गया तो आगे बढ़ता hi जायेगा, उसे इस बात का भी दार था की वो उसका बड़ा लुंड इतनी आसानी से तो नहीं झेल पायेगी, उसे पता था की उस दिन उसकी क्या हालत हुई थी, अगर उसकी चिक्ख निकल गयी तो निचे सबको पता चल जायेगा. शिव उसकी बात मान hi नहीं रहा था, वो उसके कड़क स्तन को ढीला करने में लगा हुआ था, शिव को जैसे उस से कोई दर नहीं था, न उसके रुतबे से न उसके पैसे से, वो उसको एक लड़की की तरह hi ट्रीट कर रहा था, उसे शिव का ये अंदाज पसंद आ रहा था, दर के बावजूद उसे ये सब अच्छा लग रहा था, उसे पता था की ये रिस्की है, पर न शिव मान रहा था न उसका दिल)
 
बिच में संडे आ गया.

आज अपडेट नहीं आएगा.
 
अपडेट 154

जहान्वी बहोत बेचैन थी, उसे बार बार शिव याद आ रहा था. उसे बार बार शिव की वो बात याद आ रही थी की उस लड़की ने कभी सेक्स नहीं किआ है, मतलब वो कुवारी थी. जहान्वी को अफ़सोस हो रहा था की वो कुवारी नहीं है, शायद शिव इसीलिए उस लड़की की और आकर्षित हो रहा है. उसे याद आया की कैसे उसने सेक्स किआ था. जब वो पढ़ती थी तब उसके कॉलेज की लड़कीओ के बॉयफ्रेंड थे, उसका hi नहीं था, तो जब वो वीकेंड पर एक पार्टी पार्टी में गयी थी वह उसकी मुलाकात एक लड़के से हुई थी, वैसे भी सब लड़कीअ सेक्स कर लेती थी तो उसने भी सेक्स कर लिए था, तीन चार बार hi सेक्स किआ था और उस लड़के ने अपने दोस्त के साथ उसको करने को कहा तो उसने मन कर दिया. जब उस लड़के ने ऐसा कहा था तो उसने उसे थप्पड़ मर दिया था. उसके बाद कभी वो उसके साथ नहीं गयी न hi किसी और के साथ उसने कभी कुछ किआ. पर आज उसे गिलटी फील हो रहा था की काश वो कुवारी होती तो वो शिव से कह सकती थी, पर अब अफ़सोस करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था. पर फिर बार बार उसको लग रहा था की एक बार तो वो शिव के साथ वो सब करेगी, और शिव से जरूर पूछेगी की उसमे क्या कमी है, क्या सेक्स की हुई लड़की फिर किसी के काबिल नहीं रहती क्या. वो इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी की कैसे वो शिव के साथ वो सब करे.

उसे ये भी याद आया की शिव ने उसे बताया था की उस लड़की ने उसको अपनी छूट भी दिखाई थी, और शिव इसीलिए उसके पीछे पड़ा है, उसने भी सोचा की वो अपने जलवे भी शिव को दिखाएगी. उसे अपनी और आकर्षित करने का पूरा प्रयत्न करेगी. आखिर उसमे कमी क्या है, उस से कई गुना बेहतर दिखती है, उसे यकीं था की वो शिव को अपनी और आकर्षित कर लेगी. वह लगे शीशे में वो अपने बूब्स और अपने कूल्हे देख रही थी. उसे पता था की लड़के उसके इन्ही अंगो को घूरते रहते है. मतलब उसके अंदर कोई तो बात है. मान में सोचलिया की वो कल ऐसे कपडे पहन कर जाएगी जिस से वो हॉट लगे.

यहाँ शिव और काव्य, उसके ऑफिस में थे. शिव उसके स्तन मसल रहा था और काव्य बेकाबू हो रही थी.

काव्य : शहहह सीईव, शह्ह्ह्ह मत करो यार.

शिव : (उनकी गर्दन में चूमते हुए दोनों स्तन मसल रहा था, भरे हुए स्तन को मसलते हुए उनके निप्पल को भी मसल रहा था, काव्य की गरम गरम सिस्किअ उसे और उत्तेजित कर रही थी, भरे हुए स्तन को मसलने में उसे बहोत मज़ा आ रहा tha)Aap बहोत हॉट हो. (उसने फिर स्तन को जोर से मसल दिया)

काव्य : अह्ह्ह्हह शहहहहह दर्द होता है यार, शहहह धीरे करो न, शह्ह्हह्ह्ह्ह. मेरे साथ ऐसा करने में तुम्हे शर्म नहीं आती. शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : शर्म करता रहूँगा तो इतनी हॉट लड़की को कैसे प् शाकुंगा.

काव्य : शह्ह्ह्ह मायआ, शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव, क्या में सचमे हॉट हु शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. Aiiiiiiiiii धीरे यार शह्ह्ह्ह दर्द होता है.

शिव : आप बहोत हॉट हो, (उन्हें कुर्शी से खड़ा किआ तो वो कड़ी हो गयी, वो उनके पीछे चला गया और अपना लुंड कूल्हों के बिच दबाने लगा)

काव्य : (अपने कूल्हों में चुभते लुंड को महसूस कर के वो और गरम होने lagi)Shhhhhh शीइइइइइव, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव कूल्हों पर धक्के लगाने laga)Shhhhh क्या कर रहे हो शहहहहह मात करो सीईव शह्ह्ह्हह्ह, कोई आ जायेगा यार.

शिव : आपने कहा था न की ऊपर कोई नहीं आता.

काव्य : शहहहहह है पर शहहह कभी कभी आ जाते है, शहहह जब उन्हें पता हो की में अकेली हु.

शिव : (कपड़ो के ऊपर से hi छूट को मसलने laga)Par अभी तो में हु न.

काव्य : शह्ह्ह्ह, वह नहीं शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. उन्हें पता है तुम क्लाइंट नहीं हो, शह्ह्ह्ह तो वो आ शक्ति है.

शिव : आएगी तो पता चल जायेगा, अभी मुझे आपकी फूली hui(Kavya ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि वो आगे न बोल शेक)

काव्य : गन्दा मात बोलो, shhhhhhhhhh. (शिव ने काव्य का एक हाथ पकड़ा और अपने लुंड का रास्ता दिखाया, काव्य अपना हाथ हटाना चाहती थी पर शिव ने उसका हाथ पकड़े रक्खा था, उसे वो कड़क डंडा पंत के ऊपर से hi महसूस होने लगा, उसकी हालत और ख़राब होने लगी)

शिव : उसे पकड़ो. (काव्य की कान की बूत को चूसते हुए)

काव्य : शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइइव. (वो उसके लुंड को दबाने लगी, उसका कड़क पैन देख कर उसकी छूट से पानी और ज्यादा बहने लगा, शिव उसकी छूट मसल रहा था, उसकी सांसे बेकाबू हो रही थी, वो जोर जोर से उसके लुंड को दबाने लगी, उसका दिल छह रहा था की वो उसे बहार निकले, पर अभी समय अनुकूल नहीं था. शिव उसके स्कर्ट को ऊपर उठाने लगा तो उसने उसका हाथ पकड़ी liya)Nahi शिईयिव, मात करो.

शिव : कुछ नहीं होगा. (में जनता था की वो मन नहीं करेगी, तो मेने स्कर्ट ऊपर कर के पंतय के ऊपर से hi छूट को दबोच लिया, पंतय पूरी गीली हो चुकी थी, और निचोड़ने से रास निचे टपक रहा था, रूम में उस रास की मादक गंध फैलने लगी, मुझे और ज्यादा उत्तेजित करने लगी, में जोर से छूट को मसलने लगा, वो मेरे हाथ को पकड़ कर और अपने पारी आपस ने सत्ता कर मुझे रोकने का प्रयास करने लगी)

काव्य : शह्ह्ह्ह नहीं शिईयिव शह्ह्ह्ह बस करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (हलाकि उसका दिल hi रुकने को तैयार नहीं tha)Shhhhh मम्मी आजायेगी यार शहहहहह संजो न.

शिव : ये इतनी गीली क्यों हो गयी है? (शिव तो उनकी बातो का जवाब hi नहीं दे रहा था वो अपने में hi लगा हुआ था)

काव्य : शहहहहह ऐसा मात बोलो शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : बताओ न, ये इतनी गीली क्यों है?

काव्य : शहहह मुझे नहीं पता. (उसने शरमाते हुए जवाब दिया)

शिव : में बताऊ?

काव्य : शह्ह्ह्ह कोई जरुरत नहीं hai.(Kavyan ने लुंड छोड़ दिया था तो उसने फिर कूल्हों के बिच लुंड की ठोकर मरी) शह्ह्हह्ह्ह्ह मुम्मीईईई.

शिव : मम्मीय मम्मीय करोगी तो वो ऊपर आ जाएगी. में बताऊ ये गीली क्यों है, (एक दो पल रुक kar)Use पता है की कोई अंदर आनेवाला है तो वो तयारी कर रही है.

काव्य : (वो दर गयी, क्यों की उसे पता था की अगर ऐसा हुआ तो वो जोर से चिल्ला देगी, उसने डरते हुए kaha)Nahi शिईयिव शहहहहह वो मात करना. (मेने चड्डी की साइड से हाथ अंदर डाला तो छूट का बुरा हल था, रास से वो पूरी चिकनी हो चुकी थी, फुले हुए होठो के बाल भी गीले हो चुके थे, उसको छूने का एक अलग hi मज़ा था, में उस गरम दरार में ऊँगली चलने लगा तो काव्यजि ने फिर मेरा हाथ पकड़ liya)Shhhhhhhh नहीं यार शह्ह्ह्हह्ह वह नहीं shhhhhhhhhhh.

शिव : मुझे चेतना है उसे.

काव्य : (नशीली आँखों से शिव को देखते hue)Shhhhhh नहीं शिईयिव, कोई आ जायेगा.

शिव : आप ध्यान रखना (मेने फिर उन्हें कुर्शी पर बिठा दिया, वो अपनी टंगे आपस में जोड़ कर मुझे धकेलने लगी)

काव्य : नहीं शीइइइइव प्लीज.

शिव : कुछ नहीं होगा, (में निचे बेथ गया और उनके पेअर फ़ैलाने लगा, वो मन कर रही थी, पर मेने पेअर फैला hi दिए, और छूट पर पंतय के ऊपर से hi चूसने लगा, छूट की खुसबू मेरे नथुनों में भरने लगी और छूट का नमकीन रास मेरे मुँह में भरने लगा)

काव्य : Shhhhhhhhhh shiiiiiiiiiiiiiiiiv (काव्य कुर्शी पर पीछे लुढ़क gayi)Shiiiiiiiiv शह्ह्हह्ह्ह्ह





(वो आंखे बंद किये हुए शिव के शिर को धकेल रही थी पर अब उसमे ताकत नहीं थी, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था वो अपनी टंगे फैला रही थी और आहे भर रही thi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह. (थोड़ी hi देर में वो शिव के शिव को अपनी और खींचने lagi)Shhhhhhh शहीइइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह शहहहहह (आंखे बंद किये हुए वो उस अलौकिक आनंद में डूबने लगी, शिव ने उसकी पंतय को साइड में खिसकाया तो भी उसने कोई विरोध नहीं किआ. शिव ने उसे अपनी और खिंचा तो वो अपनी hi कुर्शी पर लेट गयी,





उसके कूल्हे कुर्शी के बहार हो गए पर शिव ने उसे थामे रक्खा था, उसने शिव को देखा तो वो उसकी छूट को चाट रहा था, वो अपनी अधखुली आँखों से उसे देखती फिर आंख बंद कर लेती, फिर देखती फिर आंख बंद कर लेती, वो उसके शिर को सेहला रही थी, छूट चुसाई से वो पागल हो रही थी, उसे कोई होश नहीं था की वो अपने ऑफिस में है और उसके माँ बाप निचे है. उसकी सिस्किअ भी धीमी आवाज में मादक हो गयी thi)Shhhhhh शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhh (उसकी छूट के छेड़ में जीभ अंदर जाने लगी तो उसने अपनी टंगे और फैलाई ताकि जीभ अंदर तक जा शेक, वो सिसकते हुए शिव के शिर को सेहला रही थी, जब उसने अपनी अधखुली आँखों से शिव को देखा तो वो उसको देखते हुए उसकी छूट चाट रहा था, वो भी शिव को देखने लगी, उसकी हालत ऐसी थी की अब शर्म तो जैसे कोसो दूर थी.)

शिव : (छूट पर जीभ फेरते hue)Achchha लग रहा है? (काव्य ने अपने कामुक हो चुके चेहरे से है में शिर hilaya)(Unka कामुक चेहरा देख कर में जोर जोर से छूट पर जीभ फिरते हुए चाटने लगा)

काव्य : शह्ह्ह्हह्ह Shiiiiiiiiiiv (वो बस बोल रही थी, आवाज भी मुज तक नहीं पहुंच रही thi)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiiv(Wo एकदम धीमी आवाज में मेरे नाम की माला जप रही थी, मुझे लगा की एक बार अंदर दाल देता हु, क्यों की में भी काफी उत्तेजित हो चूका था, में उठा और काव्यजि को देखा तो वो आंखे बंद किये हुए बाद बड़ा रही थी, मेने लुंड पकड़ा और छूट के छेड़ पर सेट करने लगा, में छेड़ पर अभी रगड़ hi रहा tha)(Kavya नशे में थी, जब उसे एहसास हुआ की कोई गरम गरम कड़क डंडा उसके छूट पर है तो वो समाज गयी की क्या है और वो हड़बड़ा के सीधी होने lagi)Nahi shiiiiiiiiiv.(Wo उठने लगी तो मेने उन्हें उठने नहीं दिया, उन्होंने मेरी और गभराते हुए dekha)Nahi शीइइइइव, वो नहीं.

शिव : करने दो न, कुछ नहीं होगा.

काव्य : प्लीज शिव, में नहीं कर पाऊँगी, वो बहोत बड़ा है.

शिव : अब कुछ नहीं होगा, जो होना था वो उस दिन हो गया.

काव्य : (फिर से उठने का प्रयास करने lagi)Nahi शिव, अभी नहीं.

शिव : अभी नहीं तो कब?

काव्य : कोई नहीं होगा तो में तुम्हे बुला लुंगी, पर अभी नहीं.

शिव : कुछः नहीं होगा. (में फिर लुंड को छेड़ पर सेट करने लगा, वो हड़बड़ा के मुझे धकेलते हुए उठने का प्रयास करने लगी, में देख रहा था की वो काफी दरी हुई है, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो अब क्यों इतना दर रही hai)Ab दर्द नहीं होगा, जो होना था वो हो गया.

काव्य : नहीं शिव, उस दिन मुझे पता नहीं था की कितना दर्द होगा, पर अब में जानती हु यार, प्लीज, अभी मात करो, में मन नहीं कर रही हु, पर अभी नहीं. (मेने उनका चेहरा देखा तो वो सचमे दरी हुई थी, मेने उदास हो कर कहा)

शिव : ठीक है.

काव्य : (शिव को देखते hue)Gussa हो?

शिव : (मायूसी se)Nahi.

काव्य : (उसे मानते hue)Please यार, में मन नहीं कर रही हु, पर अभी मेने किआ तो में चिल्ला दूंगी, और अगर न भी चिल्लाई तो भी वह इतना दर्द होगा की में ठीक से चल नहीं पाऊँगी, में क्या जवाब दूंगी, संजो न यार.

शिव : ठीक है, कोई बात नहीं. (में खड़ा हो गया, वो भी कुर्शी पर बेथ gayi)(Kavya शिव को hi देख रही थी, उसे पता था की वो नाराज है, कोई भी नाराज हो जायेगा, पर अभी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, वो भी क्या करे, उसने शिव के लुंड को पकड़ लिया और हिलने लगी, और शिव को देखने लगी)

काव्य : नाराज हो गए? (में कुछ नहीं बोलै) में जानती हु यार (काव्य जानती थी की अभी उसे लुंड चूसना नहीं आता, पर फिर भी वो शिव को खुस करना चाहती थी, तो उसने हिचकिचाते हुए लुंड को अपने मुँह में भर लिया, उसे पता था की वो बहोत बड़ा है, उसका पूरा मुँह फ़ैल गया था, पर वो रुकी नहीं और उसे चूसने का प्रयास करने लगी,





थोड़ी hi देर में वो एडजस्ट हो गयी और लुंड को चूसने लगी, जब उसने देखा की शिर उसके शिर को सेहला रहा है तो उसने ऊपर देखा, शिव उसे कामुक नजर से देख रहा था, उसने लुंड बहार निकला और मुस्कुराते हुए kaha)sorry यार.

शिव : कोई बात नहीं.

काव्य : ये इतना बड़ा है तो में भी क्या करू. (शिव को देखते हुए वो लुंड को चाटने लगी, उसे भी ऐसा करना अच्छा लग रहा था, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वो किसी लड़के के लुंड के साथ ऐसा कर रही है, पर वो जानती थी की ये सब इस खेल का हिस्सा hi है, और उसे ये करना hi पड़ेगा. उसकी म्हणत रंग लायी और शिव उस पर खुस हो गया, वो झुक कर उसकी योनि में अपनी ऊँगली घुसाने लगा तो उसने अपने पेअर फैला कर उसको करने दिया, जैसे जैसे वो ऊँगली चला रहा था वो और उत्तेजित होने लगी और वो जोर जोर से लुंड को चूसने का प्रयास करने लगी, वो जानती थी की अभी वो नौसिखिया है तो अच्छी नहीं कर प् रही है, पर वो करती गयी, शिव की उंगलिओ ने अपना काम कर दिया और वो छूने के किनारे पर आ गयी, वो जोर जोर से लुंड चूसने लगी, शिव भी तेज तेज ऊँगली चला रहा था, उसकी घुटी हुई आवाज लुंड के मुँह में होने से बहार नहीं आ रही थी, उसकी कमर अकड़ने लगी, और थोड़ी hi देर में वो झटके कहते हुए झड़ने लगी, वो थोड़ी देर वैसे hi रुक गयी. थोड़ी देर बाद जब उसको होश आया तो अभी भी शिव का लुंड उसके हाथ में hi था, वो फिर लुंड को चूसने के लिए आगे बढ़ी तो शिव ने उसे रोक दिया)

शिव : रहने दीजिये, ऐसे मेरा नहीं होगा.

काव्य : हो जायेगा, में कर रही हु न.

शिव : नहीं होगा, रहने दीजिये.

काव्य : (हलकी मायूसी se)Muje अभी नहीं आता न?

शिव : (मुस्कुराते hue)Koi बात नहीं, धीरे धीरे आ जायेगा.

काव्य : (वो मायूस हो गयी थी, उसे बुरा लग रहा था, उसने शिव को देखा और फिर वो सीट पर लेट गयी और अपने पेअर खोल kar)Koi बात नहीं शिव, लो कर लो.

शिव : (में क्या करू इन लड़कीओ का, क्यों इतना प्यार करती है ये मुझे, पता है की क्या हो सकता है, फिर भी तैयार हो जाती है, में अपने लुंड को अंदर करने की कोशिस करने लगा) कोई बात नहीं, में नाराज नहीं हु.

काव्य : (शिव को लुंड अंदर करते हुए देख, सीट पर बेथ गयी और शिव का हाथ पकड़ liya)Kar लो शिव.

शिव : वो तो करूँगा hi, पर अभी नहीं, सही टाइम पर.

आवाज : Kavya...O काव्याआआ. (अपनी मम्मी की आवाज सुन कर काव्य हद बड़ा गयी औरअपने कपडे ठीक करने लगी.

मम्मी : (आवाज और नजदीक aai)Kavyaaaaa, ो काव्याआ.

काव्य : आईइइइइइइइ mummiiiiiiiiii. (मुझे एक दो फाइल देते hue)Isse अभी धक् दो (मेरे लुंड की और इस्सर कर के) ाआईईईई (कहते हुए वो बहार निकल गयी, बहार जेक देखा तो उसकी मम्मी आधी सीडीओ पर कड़ी thi)Ha मुम्माआ.

मम्मी : खाना नहीं है बीटा?

काव्य : आपने खा लिया?

मम्मी : है, खा लिया, शिव भी खायेगा क्या?

काव्य : (सोच kar)Ha खा लेगा मुम्मा, में उसे ले कर आती हु. (उसकी मम्मी वापस लौट गयी और काव्य ऑफिस में आयी. (शिव अभी भी अपना लुंड छुपाये बैठा था, उसे समाज नहीं आया क्या kare)Mummi खाने के लिए बुला रही है, उसने चिंता से मेरी और देखा, और फिर गॉड में रक्खी फाइल की और.

शिव : आप जाओ में आता हु.

काव्य : साथ चलो न.

शिव : आपको देख कर ये खड़ा hi रहे गए.

काव्य : (काव्य शर्मा गयी, शिव ने फाइल हटाई तो लुंड अभी भी खड़ा था, काव्य का दिल मचल गया, वो उसके नजदीक गयी और लुंड को पकड़ कर उसको चूमते हुए) सॉरी बेतु, मुझे माफ़ करदे, ागलीबार में मन नहीं karungi.(Wo जिस तरह से मेरे लुंड से बात कर रही थी मुझे हसी आ गयी, मेरी हसी सुन कर उन्होंने मेरी और देखा और शर्मा गयी, और उठ के बहार जाने लगी, दरवाजे पर रुक कर पलटी और फिर मेरे गले लग gayi)Sorry यार, मुझे माफ़ करदे.

शिव : कोई बात नहीं, और अच्छा hi हुआ, वर्ण आपकी मम्मी ऊपर आ जाती और सब पता चल जाता.

काव्य : में जल्दी hi कुछ करती हु, हम कही बहार जायेंगे, में सब करनेडुंगी. (वो जैसे मुझे मन रही थी)

शिव : में नाराज नहीं हु, आप जाओ वर्ण ये ऐसा hi रहेगा.

काव्य : (मेरे होठो पर किश कर ke)Sorry, बाबू. (मेरे लुंड को पकड़ कर फिर झुक गयी और उसको चुम kar)Sorry सोना, अगली बार नहीं रोकूंगी, प्लीज नाराज मात होना. (वो जाएगी नहीं तो लगता नहीं था की ये बैठेगा)

शिव : आप जाओ, वर्ण.....

काव्य : (घबराते hue)Me जा रही हु,( वो जल्दी से बहार जाने लगी, दरवाजे से mudi)Jaldi आना, में खाना गरम कर रही हु. (में मुस्कुराया, वो चली गयी, में अपने आपको शांत करने लगा, थोड़ी देर बाद अचे सोये लुंड को पंत में दाल दिया, में नीचे गया तो अंकल आंटी नहीं थे, में डाइनिंग टेबल की और चला गया. काव्यजि खाना लगा रही थी, उनकी नजर मेरे लुंड की और hi गयी जहा अभी भी उभर था, वो शर्मा गयी और खाना निकलने लगी, वो बार बार मुझे ढक कर शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी, मेरा बहोत मान कर रहा था, वो बैठी भी साथ में थी तो मेने उनकी झंघ पर हाथ रख दिया.) यहाँ मात करो शिव, कोई देख लेगा (उन्होंने भरी साँस लेते हुए कहा)

शिव : बहोत मान कर रहा है (मेने छूट वाले भाग को ऊँगली से दबाते हुए कहा)

काव्य : (वो कैंप gayi)Shhhh, मेरा भी कर रहा है शिव, में मौका देख कर मश्ग करती हु तुम्हे. (काव्य का बहोत मान कर रहा था, पर बेचारी क्या करती)

खाना खाने के बाद में जल्दी से वह से निकल गया, में घर पंहुचा तो भी में बेचैन hi था, मेने देखा की सब काम में लगे हुए है. मेने कपडे बदले और में छत पर चला गया. लता ने उसे छत पर जाते हुए देखा तो वो जल्दी जल्दी हाथ चलने लगी, और अपना काम निपटा कर छत की और चली गयी. सबने ये देखा.

विणा : (गायत्री ko)Didi में आज आपके साथ सो जाउंगी. (वो जानती थी की लतादिदी को शिव के साथ जाना है, गायत्री बस मुस्कुरायी)

रंजन : में भी आ जाउंगी दीदी. (सरिता कुछ नहीं बोली, वो काम में लगी रही)

लता जब ऊपर गयी तो देखा की शिव छत की रेलिंग को पकड़ कर बहार देख रहा है. वो उसके पास जाने लगी, आहत सुन कर शिव ने उस और देखा तो लता को आते हुए पाया. वो मुस्कुराया और रेलिंग को तक लगाए खड़ा हो गया. लता भी साथ में आ कर कड़ी हो गयी, दोनों ने हलकी रौशनी में एक दूसरे को देखा.

शिव : काम ख़तम हो गया?

लता : हम्म्म्म. ऊपर क्यों आ गए?

शिव : दोपहर में वापस क्यों चली गयी थी? (शिव ने प्यार से पूछा, उसने देख लिया था जब वो वैस्वी को किश कर रहा था तो लता आयी थी)

लता : (नज़ारे झुका ke)Tumhe कैसे पता की में आयी थी?

शिव : आप को तो में कैसे भी देख लेता हु, जब आप मेरे नजदीक आती हो तो मेरे दिल को पता चल जाता है.

लता : (ये सुन कर उसे बहोत खुसी hui)To क्या में वह आ जाती.

शिव : नाराज़ हो? (उसने न में शिर हिलाया) ऐसा तो हो नहीं सकता, मुझे किसी और के साथ देख कर...

लता : वो बहोत अच्छी है. (उसने बस इतना hi कहा)

शिव : (लता की कमर में हाथ दाल कर उसे अपने से सत्ता kar)Wo मुझे किश कर रही थी (मेने अपना बचाव किआ)

लता : और तुमने करने दिया. (उसने तुंत मारा, में उन्हें देखने लगा, उन्होंने भी मुझे देखा) ऐसे क्या देख रहे हो?

शिव : आप दुखी हो? (उन्होंने न में शिर hilaya)Meri और देख कर कहो. (मेने उन्हें अपने आगे कर लिया और कमर पकड़ कर अपनी और खिंच लिया, उन्होंने अपने हाथ मेरी छाती पर रख दिए, हम दोनों निचे से सटे हुए थे, उनके चेहरे पर हलकी उदासी थी, उन्होंने अपनी नज़ारे झुका li)Sorry.

लता : (मेरे शाइन से लग kar)Me तुम्हे बांड कर नहीं रखना चाहती शिव, और वैसे भी मुझसे जुड़े रहते तो क्या हासिल करते, वो सब है तो आज तुम किसी मुकाम पर हो, पर मेरे सामने मात किआ करो. (उन्होंने प्यार से कहा)

शिव : (माहौल को हल्का करने के इरादे se)Matlab आपके पीछे करू तो चलेगा.

लता : वो तो तुम करते hi हो. (उन्होंने शिकायत वाले लहजे में कहा)

शिव : पतानहीं यार, में किसी को नीरस नहीं कर शक्ति.

लता : तो क्या सबको साथ ले के चलोगे?

शिव : पता नहीं. (हम दोनों चुप हो गए, में उनकी पीठ पर हाथ चलने लगा)

लता : किसी को धोखा मात देना शिव, वो जानते बजते आती है तो कोई बात नहीं, पर किसी को जूथ बोल कर फ़साना मात.

शिव : आपको लगता है की में ऐसा कर शक्ति हु.

लता : में जानती हु, पर फिर भी बता रही हु.

शिव : अच्छ सुनो, आज मुझे आपके साथ रहना है. (लता सुन कर खुस हो गयी और साथ में शर्मा भी गयी, पर बोली कुछ नहीं, शिव के हाथ उसकी पीठ पर चल रहे थे, वो बस आंखे बंद किये महसूस कर रही थी, उसके हाथ निचे जाने लगे तो उसकी धड़कन तेज होने लगी, थोड़ी hi देर में उसके हाथ उसके नितम्ब तक पहुंच गए, उसकी तो जैसे साँस hi अटकने लगी, शिव उसके गोल कूल्हों को मसल रहा था, उसके अंदर कामाग्नि भड़क रही thi)(Unhone कोई जवाब नहीं दिया तो मेने पूछा) क्या हुआ, जवाब नहीं दिया.

लता : वो Sarita...(Usne वाक़्या अधूरा छोड़ दिया)

शिव : उन्हें बोलो वो गायत्रीदिदी के साथ सो जाये.

लता : वो नहीं मानती.

शिव : क्यों?

लता : वो कहती hai...(Kehte कहते रुक गयी)

शिव : क्या कहती है?

लता : वो कहती है हम तीनो... (वो ज्यादा बोल न पायी)

शिव : और आप क्या चाहती हो?

लता : वो तुम्हारे साथ रहे उस से मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, पर जब में हो तो मुझे कोई नहीं चाहिए, बस में और तुम, और कोई नहीं.

शिव : (में उनके माध्यम आकर के कूल्हों को मसल रहा था, उनकी बढ़ती सांसे मुझे भी बे काबू कर रही thi)To फिर कह दो उन्हें.

लता : शह्ह्ह्हह्ह, (अपनी सिसकी को दबाने की कोशिस करते hue)wo जिद कर रही है.

शिव : ठीक है, आने दो उन्हें, में बात करता हु.

लता : मेरे सामने ऐसी बात मात करना.

शिव : वो आ गयी तो? (वो कुछ नहीं बोली, में उनके गले को चूमने लगा तो वो मेरा शिर सहलाने लगी) आपका मान है न? (लता ने शरमाते हुए हां में शिर hilaya)(Mene फिर से अपने हाथ को ऊपर की और लाया और उनके माध्यम आकर के स्तन को दबोच लिया.

लता : शहहहहह, आहिस्ता शिईयिव. (लता अपनी छूट के नजदीक खड़े उस लैंड को महसूस कर के गरम होने लगी थी)

शिव : आप उनसे बात करो, न मने तो मुझे बताना.

लता : में बात करती हु. चलो निचे चलते है.

शिव : (मेने उनका शिर पकड़ कर मेरी और किआ और आँखों में देखते हुए kaha)Aa जाना, वर्ण सबके सामने पकड़ कर ले आऊंगा.

लता : (उसका चेहरा खिल उठा, वो मुस्कुराते हुए शिव को देखने लगी, जैसे कह रही हो, उठा लाना, में कहा मन करुँगी)

शिव : चलो. (मेने उनका हाथ पकड़ा और नीचे जाने लगे, जब हम निचे गए तो सब काम में लगे हुए the)Jaldi आना. (उन्होंने है में शिर हिलाया और किचन की और चली गयी, में रूम में चला गया तू किताब खोल कर पढ़ने लगा)

गायत्री : आज रंजन और विणा मेरे साथ सोने वाले है. (गायत्री ने पोछा लगते हुए लता को कहा, दरअसल वो कहना चाहती थी की आज तुम शिव के साथ सो सकती हो)

लता : हम्म्म्म. (उसने सरिता को देखा तो वो अपने काम में hi थी, वो जान बुज कर ऐसा बर्ताव कर रही थी जैसे कुछ सुना hi न हो, लता भी काम करने लगी, गायत्री अंदर रूम में चली गयी, विणा और रंजन भी चली गयी, लता ने सरिता की और देखा, वो बर्तन पोछ रही thi)Tu कहा सोयेगी?

सरिता : (बिना लता की और dekhe)Wo दोनों गायत्री के साथ सो रही है तो हम दोनों शिव के साथ सो जायेंगे.

लता : (उसने देखा की सरिता उसकी और देख भी नहीं रही है, उसने मान मार कर kaha)Tu सो जाना, में सब के साथ सो जाउंगी. (सरिता का हाथ रुक गया, उसने लता की और देखा, वो उसे hi देख रही थी)

सरिता : तुजे दिक्कत क्या है ये मुझे समाज नहीं आ रही, हम दोनों को hi पता है फिर क्या प्रॉब्लम है तुजे.

लता : मेने कहा न तू सो जा, में नहीं आउंगी.

सरिता : तुम दोनों में ऊपर क्या बात हुई? (लता कुछ न बोली) बोल न, क्या बात हुई?

लता : (हिचकिचाते hue)Usne मुझे आने को कहा है.

सरिता : (फिर बर्तन साफ़ करते hue)Thik है, तू चली जा.

लता : मुझे नहीं जाना, तू hi चली जा. (उसने उदास हो कर कहा)

सरिता : अब क्या दिक्कत है तुजे ? (आखरी बर्तन साफ़ कर के रख दिया और कड़ी हुई)

लता : मुझे ऐसे नहीं जाना. (वो सरिता को नाराज करके नहीं जाना चाहती थी)

सरिता : (उसके पास आयी और मुस्कुराते hue)To फिर कैसे जाना है? बारात बुलाऊ क्या?

लता : (वो भी muskurayi)Tu चली जा, में कल सो जाउंगी.

सरिता : उसने तुजे बुलाया है न, में तो बस इस लिए कह रही थी की कुछ अलग करते है, साथ में मज़ा आएगा, और कुछ नहीं.

लता : तू नाराज़ तो नहीं है न?

सरिता : अरे पागल, में क्यों नाराज होने लगी, तू खुसी खुसी जा. (लता उसके गले लग गयी)

लता : सॉरी, पर में उसको किसी के साथ देख नहीं सकती, भले hi मुझे पता है की कमरे के अंदर क्या हो रहा है, पर फिर भी में उसे अपनी आँखों से दूसरे के साथ नहीं देखना चाहती.

सरिता : तू तो सेंटी हो गयी, तू जा, में सब कर लुंगी. और है, अपने सैया को अच्छे से खुस करना. (लता शर्मा gayi)Sharma तो ऐसे रही है जैसे पहली सुहागरात हो.

लता : उसके साथ मेरे लिए हर रात सुहागरात hi है. (अपनी नज़ारे झुकाये उसने कहा)

सरिता : ठीक है, तू जा, में कर लुंगी सब. और है, बाथरूम जा कर सब अच्छे से धो कर जाना. (लता शर्मा गयी और वह से बाथरूम की और भाग गयी, सरिता उसे जाता हुआ देख कर मुस्कुरा रही थी)

में पढ़ाई कर रहा था की किसी के रूम में आने की आहत हुई, मेने पीछे मुद कर देखा तो लतादिदी थी, जैसे hi हमारी नजर मिली उन्होंने नज़ारे झुका ली. उन्हें इतना शर्माता हुआ देख मुझे उन पर बहोत प्यार आ रहा था.

शिव : दरवाजा बंद कर देना. (लता कैंप रही थी, उसने कपट हाथो से दरवाजा बंद कर दिया और घूम कर कड़ी हो gayi)(Mene देखा की वो दरवाजे के पास hi खाई है तो मेने किताब बंद की और उनके पास गया, उनका हाथ पकड़ा तो वो कैंप रही thi)Kya हुआ आपको? (वो तुरंत मेरे शाइन से लग गयी, मेने उन्हें अपनी बहो में समेत लिया, वैसे भी वो नाजुक सी थी, शरीर से भी वो पतली hi थी, है, जहा भरी पैन होना चाहिए वह नपा तुला सब कुछ था, पर अब मुझे पता चल रहा था की वो मेरी गुड़िया कितनी नाजुक thi)Kya हाउ, कैंप क्यों रही ho?(Unhone ना में शिर हिल्या, मेने उन्हें गॉड में उठालिया, वो मेरे गले में बहे दाल कर मेरे शाइन से लग gayi)Dar लग रहा है? (उन्होंने बिना मेरी और देखे ना में इस्सर किआ, में महसूस कर रहा था की उनकी सांसे तेज चल रही है, में उन्हें बिस्तर पर ले गया और उन्हें निचे रक्खा, वो मेरे गले से अपना हाथ निकल hi नहीं रही थी, मेने मुस्कुरा कर kaha)Sharm आ रही है? (उनके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, उन्होंने है में गर्दन hilayi)To रहने देते है. (मेने चुटकी ली, वो और शर्मा गयी, उनका ऐसा बर्ताव मुझे बेहद पसंद था, वो मेरे लिए बहोत खास thi)Meri और देखिये. (उन्होंने ना में गर्दन हिलायी, मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था, सच कहु तो सिर्फ इतने से hi मेरा लुंड पूरी तरह खड़ा हो चूका था, वो मेरी और साइड से लेती हुई थी तो मेने उनके कूल्हे पर हाथ रखा)

लता : शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उनकी भी हालत समाज रहा था, वो बहोत गरम हो चुकी थी, इतनी गर्मी के साथ तो में एक मिनट भी टिक नहीं सकता था, मेने अपने आपको कण्ट्रोल किआ.)

शिव : इतना तो आप पहले दिन भी नहीं शर्मायी थी. (वो कुछ नहीं boli)Baat करिये न, इतना भी क्या शर्माना.

लता : उस दिन की बात अलग है, उस दिन में कोई और थी. (में उनका मतलब नहीं समजा)

शिव : में समजा नहीं, कहना क्या चाहती हो आप?

लता : (उसने अपनी बहे शिव के गले से निकली और थोड़ा सीधी लेट गयी, और शिव की आँखों में देखते हुए boli)Us दिन तुम मुझे क्या बुलाते थे.

शिव : दी... (में दीदी बोलणेहि वाला था की उन्होंने मेरे होठ पर हाथ रख दिया)

लता : में वो थी. (उन्होंने शरमाते हुए kaha)Ab में वो नहीं हु.

शिव : तो अब क्या हो? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

लता : (वो भी शरमाते हुए मुस्कुराने lagi)Wo तुम्हे पता.

शिव : मुझे तो अभी आप मेरी गर्लफ्रेंड लग रही हो.

लता : (शिकायत se)Sirf गर्लफ्रेंड.

शिव : गर्लफ्रेंड छुम प्रेमिका.

लता : सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होगा, बना के दिखाओ.

शिव : बना तो लिया है, अब कितना बनाऊ.

लता : कोई अपनी प्रेमिका से ऐसे बात करता है?

शिव : ऐसे मतलब कैसे?

लता : आप आप कह के.

शिव : वो तो मेने आपको पहले hi बोलै था की, में आपको आप कह कर hi बुलाऊंगा.

लता : पर मुझे हमेसा ये याद दिलाता है की में तेरे लिए क्या थी, और ये भी की में बड़ी हु तुजसे. (उन्होंने हलकी उदासी से कहा, मेने उनकी आँखों में dekha)Sabke सामने नाम से तो बुलाते hi हो तो फिर इतना नहीं कर शक्ति.

शिव : आप समझती क्यों नहीं.

लता : मुझे कुछ नहीं समझना, में अपने शिव की दासी बन न चाहती हु. (में उनकी आँखों में देख रहा था)

शिव : आप दासी नहीं हो.

लता : ऐसे तो कहते हो की मुझे बीवी बनाना चाहते हो, तो क्या ऐसे बुलाओगे मुझे.

शिव : तो क्या हुआ, क्या बुराई है?

लता : मुझे नहीं पसंद, मुझे पूरी तरह से तुम्हारी बन न है शिव, आज में चाहती हु की मुझे अपनी बना लो शिव.

शिव : लता (मेने उनकी आँखों में देखा, उनका चेहरा sehlaya)Tum मेरी hi हो लता. (उन्होंने जैसे hi ये सुना वो मेरे शाइन से लिपट गयी)

लता : ोोोू सीईव, मेरे शीइइइइइव. (थोड़ी देर वो मुझसे लिपटी रही, में उनका शिर सहलाता रहा)

शिव : पर इसमें एक प्रॉब्लम है. (वो अलग हुई और मेरी आँखों में देखा, जैसे पूछ रही हो की क्या प्रॉब्लम hai)Agar में आप से तुम पर आ गया तो फिर मनमानी ज्यादा कर बैठूंगा. (मेरी बात से वो मुस्कुरायी और शर्मा गयी) सोच लो.

लता : जब ओखली में शिर दे दिया है तो फिर मुसल से क्या डरना. (वो नॉर्मली hi कहावत बोल गयी थी)

शिव : पर ये मुसल कुछ ज्यादा hi बड़ा hai(Mene मजाकिए अंदाज में kaha)(Lata को भी अपनी बात का मतलब ज्ञात हुआ, वो शर्मा gayi)Ab जब मेरी प्रेमिका hi मेरे बिस्तर पर लेती है तो में तो रुक नहीं सकता. (कहते हुए में झुका और उनके होठो को चूसने लगा, उन्होंने भी मेरे गले में अपने हाथ लपेटे और मुझे सामने से किश करने लगी, मेरे हाथ अपने आप hi उनके सुडौल स्तन पर चले गए, उस माध्यम आकर के स्तन को में मसलने लगा, आज सख्ताई कुछ ज्यादा hi thi)(Lata को हल्का दर्द हुआ पर मस्ती ज्यादा थी, वो शिव के होठो को जोरो से चूसने लगी, मेने भी हाथ निचे किया और उनकी छूट को पाजामे के ऊपर से hi दबोच लिया)

लता : (अपना मुँह हटते hue)Shhhhhhhhhh. (मेने फिर उनके होठो को दबोच लिया और छूट को मसलने लगा, कपड़ो के ऊपर से भी उनकी छूट का आकर मुझे महसूस हो रहा था, मेने छूट की दरार में ऊँगली दबायी और उसे सहलाने laga)(Lata बहोत ज्यादा गरम हो चुकी थी, उस से सास लेने भी मुक्सिल हो रहा tha)Shhhhhhhhh हाआआआ शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने पाजामे का नाडा खोला दिया और हाथ अंदर दाल कर साइड नानाजी छूट पर रख दिया, और उसे दबोच liya)Shhhhhhh shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhh(Wo चाट पटाने लगी, अपनी कमर ऊपर निचे उठाने लगी, में जोर जोर से उनकी छूट को दबोच रहा था और साथ में एक ुन्डली को अंदर दाल दिया, छूट पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, उस संकरे छेड़ में मेरी ऊँगली अंदर चली गयी, छेड़ अंदर से भट्टी की तरह तप रहा था, में ऊँगली करता raha)Shhhhh शीइइइइइइव shhhhhh(Wo मेरा हाथ पकड़ने lagi)Shhhhhhh शीइइइइव shhhhhhhh(Lata बे काबू हो रही थी, उसको लुंड चाहिए था, उसने शिव के लुंड को ढूंढा और उसको चड्डी के ऊपर से hi पकड़ liya)Shhhhhh शीइइइइव (वो लुंड को पकड़ कर दबाने लगी, और चड्डी को खींचने लगी, जैसे कह रही हो इससे बहार nikalo)Shhhhhh शीइइइइइइव (में उनको समाज रहा था पर आज में कोई जल्दी नहीं करना चाहता था, में छूट को दबोचता रहा और झुक कर कुर्ते के ऊपर से hi स्तन को काटने लगा, वो मछली के जैसे तड़प रही thi)(Lata कुछ ज्यादा hi गरम हो चुकी थी, वो लुंड को पकड़ कर खिंच रही थी, वो उसे बहार चाहती थी, पर शिर उसे बहार निकल hi नहीं रहा था, उसने चड्डी के अंदर हाथ डालने की कोशिस की पर हाथ दाल नहीं पायी, तो झुनहलाके kaha)Isse बहार निकालो शिव शह्ह्ह्ह जल्दी.

शिव : (मुस्कुराते हुए, अपना हाथ छूट से हटा लिए और बहार निकल लिया, और लता का हाथ पकड़ लिया, लता ने शिव की और dekha)Itni भी क्या हल्दी है. (लता लचर हो कर शिव को देख रही थी, उसकी सकल रोने जैसी हो गयी थी, शिव मुस्कुराते hue)Thoda सबर रक्खो, आज कोई जल्दी नहीं है, मुझे सब मज़ा लेना है. (लता शिव को देख रही थी, वो उसे देखते हुए उसकी सलवार निकलने लगा तो वो शर्मा गयी, पर उसे रोका नहीं, शिव ने सलवार निकल दी, निचे वो रेड कलर की पंतय में thi)Lata. (लता शर्मा रही थी तो अपना मुँह छुपार रही thi)Lataaa.

लता : ह्म्मम्म्म्म.

शिव : अपने पेअर फैलाओ. (ये सुन कर लता शर्म से गाढ़ी जा रही थी, पर वो शिव को खुस करना चाहती थी, उसने हिचकिचाते हुए अपने पेअर फैला दिए. रूम में ख़ामोशी थी, सिर्फ सांसो की आवाज hi आ रही थी, लता जानती थी की क्या हो रहा है, पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी देखने की, कुछ पल बाद उसने हलकी आंख खोल कर शिव को देखा तो वो उसकी छूट की और देख रहा था, उसे बहोत शर्म आ रही थी, पर वो गर्म भी हो रही थी, उसने देखा की कैसे शिव उसकी छूट की और देख रहा है. थोड़ी देर बाद हलचल हुई और शिव का हाथ उसकी छूट पर लगा)

लता : शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो बलखा गयी और उसकी कमर हवा में उठ गयी, शिव उसकी छूट को पंतय के ऊपर से सहलाने लगा, वो अंगूठे को दबा भी रहा था, मान में वो बोली, हटा दे उसे, पर शर्म के मारे बोल नहीं payi)Shhhhhhhh. (शिव उसकी पंतय को निकलने लगा तो उसने खुद अपने कूल्हे उठा दिए, वो निचे से नंगी हो चुकी थी. शिव उसकी छूट के होठो को छू कर जैसे चेक कर रहा tha)(Lata की छूट सच में बहोत प्यारी थी, हलके बालो वाली छूट मुझे पसंद थी, में उसे अच्छे से देख रहा था,





और उसके होठो को फैला कर अंदर का गुलाबी छेड़ देख रहा था, अब वो थोड़ा बड़ा हो चूका था, उसका जिम्मेदार में hi था, पर फिर भी अभी वो छोटा hi था, पता नहीं इतना छोटा छेड़ कैसे मेरे लुंड को समां लेता है. में झुका और उस छेड़ को चाटने laga,)Shhhhhhh मायआ (शिव इतनी जोरो से मेरी छूट चूस रहा था की मेरी हालत ख़राब होने लगी थी, थोड़ी hi देर में मेरी हालत जल बिन मछली की जैसे हो gayi)Shhhhhh बस्स्स शह्ह्हह्ह्ह्ह बस्स्स shiiiiiiiiiiv (मुझे उसका लुंड चाहिए था, में पागल हो रही थी, में इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी की किसी भी पल झाड़ सकती थी, में उसके बाल खिंच कर उसे दूर करने लगी ताकि वो अपना लुंड अंदर दाल दे, पर वो जैसे मेरी छूट के पीछे पागल हो चूका था, वो ऐसे चाट रहा था जैसे वह से चासनी निकल रही ho)Shhhhhh शीइइइइइव बस करो shhhhhhh.(Unki तड़प देख कर में वह से उठा, तड़प तो में भी रहा था पर अपने आपको संभाले हुए था, मेने उन्हें खड़ा किआ तो वो मुझे देखने लगी, में muskuraya)Aise क्या देख रही हो? (लता नाराजगी से देखते हुए मान में, अब उठा क्यों रहा है, लेती तो हु, दाल दे न अंदर. पर शिव के खींचने से वो बिस्तर पर बेथ गयी, वो उसके नजदीक खड़ा हो गया, लता ने शिव की और देखा)

शिव : अपने हाथो से इससे बहार निकालो. (ये सुन कर लता शर्मा गयी, और अपनी नज़ारे झुका li)Aise शर्माने से काम नहीं चलेगा, अगर आप ने नहीं खोला तो फिर में नहीं करूँगा कुछ. (लता ने नाराजगी से देखा और अपने घुटने पर आते हुए चड्डी को खोलने का प्रयास करने लगी तो शिव ने उसे रोक दिया, वो सोचने लगी अब क्या hua)Pehle उसे महसूस करो, फिर बहार निकलना. (लता ने हलकी नाराजगी से देखा, फिर लुंड की और देखा, चड्डी में वो पूरी तरह खड़ा था, बहार न आ पाने की वजह से साइड में हो रखा था. उसकी सांसे अटकने लगी, वो लुंड उसे अपनी और सम्मोहित करने लगा, उसने एक बार शिव की और देखा तो उसने आगे बढ़ने को कहा, दर, झिझक और शर्म से उसने लुंड के उभर पर हाथ रक्खा, थोड़ी देर पहले भी उसने पकड़ा था पर अब बात अलग थी, शिव उसे देख रहा था, उसे शर्म आ रही थी पर उसने लुंड के ऊपर हाथ फिराया, वो सचमे बहोत बड़ा दिख रहा था, उसे खुद आश्चर्य हो रहा था की ये उसके अंदर कैसे चला जाता है. वो थोड़ी ऊपर उठी और लुंड पर चेहरा रगड़ते हुए उसे महसूस करने लगी, हलाकि ये सब करने में उसे शर्म आ रही थी, पर साथ में मज़ा भी आ रहा था, वो आज कुछ ज्यादा hi खुला महसूस कर रही थी. वो लुंड को कपडे के ऊपर से hi चुस्ती रही और चाट टी रही, निचे उसकी छूट टपक रही थी, उसने ज्यादा रहा नहीं गया और वो लुंड को निकलने लगी, चड्डी को अंडरवियर के साथ उसने निचे उतर दिया, तो लुंड उछाल कर उसके गाल पर लगा तो वो पीछे गिर गयी. उसने देखा तो शिव मुस्कुरा रहा था. शिव ने हाथ बढ़ाया तो उसने भी हाथ दिया, और वो वापस घुटनो के बल हो गयी. लुंड उसके सामने hi था, उसकी गंध उसके नाक में जाने लगी, उसने शिव को देखा तो वो कह रहा था की आगे badho.Lata ने कांपते हाथो से उस दैत्याकार लुंड को पकड़ा , उसकी उंगलिअ भी आपस में नहीं मिल रही थी. वो लुंड के सहारे hi थोड़ी ऊपर हुई. वो लुंड को हिलने लगी, अब उसे शर्म नहीं आ रही थी. ऐसे खुल कर प्यार करने में उसे भी मज़ा आने लगा था, उसने सुपडे की चमड़ी पीछे खिसकायी और उसे ध्यान से देखने लगी, उसके आगे एक छोटा सा छेड़ था, उसने अपनी जीभ निकली और उस छेड़ को छटने लगी. उसने शिव की और देखा तो वो आंखे बंद किये हुए था, उसे पता चल गया की शिव को अच्छा लग रहा है तो, उसने लुंड को चेतना सुरु कर दिया, और साथ में होठो के अंदर ले जा कर चूसने भी लगी, उसको भी बहोत अच्छा लग रहा था, वो बड़े प्यार से लुंड को चूसने लगी,





शिव उसका कुरता निकलने लगा तो उसने अपने हाथ उठा कर मदद की. अब वो केवल ब्रा में hi थी. थोड़ी देर बाद शिव ने अपना लुंड वापस खिंच लिया तो वो नाराजगी से देखने लगी. शिव मुस्कुराया और उसके पीछे बेथ उसके स्तन मसलने लगा.)

शिव : तुम बहोत गरम हो लता. (लता आंखे बंद किये हुए उस मजबूत हाथ को महसूस कर रही थी)

लता : शहहहहह शीइइइइइव.

शिव : मुझसे रहा नहीं जा रहा लता, में तुम्हे छोड़ना चाहता हु.

लता : Shiiiiiiiiiiii ऐसा मात बोलो शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : (ब्रा खोल कर साइड में रखते hue)To क्या बोलू (उसने लता के स्तन पीछे से hi मसल दिए.





लता : शह्ह्ह्ह धीरे जानू.

शिव : (जोर से मसलते hue)Shhhh क्या कहा तुमने?

लता : धीरे दबाओ, सष दुखता है.

शिव : उसके बाद क्या कहा.?

लता : शह्ह्ह्ह जानू शहहह. ोोूमायआ धीरे जाएं, में मर जाउंगी shhhhhhhhhh.

शिव : अपनी जान को कैसे मरने दूंगा, पर ये मुझे पागल कर रहे है. तुमने जवाब नहीं दिया.

लता : ोीिमा, शहहह क्याआ?

शिव : में तुम्हे छोड़ना चाहता हु.

लता : शहहहहह तो करो न, शह्ह्ह्ह मेने कहा रोका है.

शिव : ऐसे नहीं, अपने मुँह से कहो.

लता : शहहह नहीं शह्ह्ह्ह में ऐसा नहीं बोल शक्ति.

शिव : कहो न जाएं, मुझे सुन न है. (एक हाथ से छूट और एक हाथ से स्तन मसलते हुए)

लता : (अपने hi होठो को काट ते hue)Uiiii मा शहहहहह शीइइइइइव शह्ह्ह्ह करो न मुझे. शह्ह्ह्हह्ह में तड़प रही हु.

शिव : पूरा बोलो.

लता : (ऐसा गन्दा वर्ड बोलने में उसे शर्म आ रही थी पर वो अपनी आग से पिघल रही thi)Shhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे शह्ह्ह्ह muje.....(Shiv की ऊँगली उसकी छूट में अंदर बहार हो रही thi)Shhh ऊँगली से नहीं सीईव शह्ह्ह्ह मुझे उस से करो.

शिव : किस से मेरी जान.

लता : शह्ह्ह्ह मा शीइइइइव शह्ह्ह्ह लाआ.... शहहह लुंडडडड से शह्ह्हह्ह्ह्ह. (लुंड वार्ड बोलते बोलते तो उसकी कामाग्नि चरम पर thi)Shhhhh मुझे जल्दी छोडो शिईयिव शहहहहह मुझे जल्दी छःदो.

शिव : ये हुई न बात. (मेने जल्दी से उन्हें निचे लेटाया और उनके पेअर फैला कर में बेथ गया, मेने लुंड को छूट पर रगड़ा तो लता मचलने lagi)Daal दू.

लता : हाआआ शहहहहह जल्दीईईई. (मेने भी लुंड को छेड़ पर सेट किआ और अंदर को दबा diya)Aaaaaaaaaaa, Shiiiiiiiiiiiiv, (वो मुझे धकेलने लगी, पर मेने उनके कंधे पकड़ लिए और लुंड को और अंदर किआ)









नाहीईई शह्ह्ह्हह्ह धीरे अअअअअ माआ शीइइइइव (मेने आधा लुंड अंदर दाल दिया और रुक gaya(Lata जोर जोर से सांसे ले रही थी, में उसके ऊपर झुक गया और उनके गले को और गाल को चूमने लगा, थोड़ी देर में वो नार्मल हुई)

शिव : ठीक हो?

लता : हाआआआ. (मेने लुंड बहार khincha)Aiiiiiiii. (मेने लुंड अंदर dala)Shhhhhhh, (फिर बहार nikala)Uuuffffff. (फिर अंदर dala)Maaaaaa. (थोड़ी देर ऐसा करने से फिर से छूट में पानी आना सुरु हो gaya,lund अच्छे से फिसलने लगा, वो मूर्ति पीठ को सहलाने लगी)

शिव : ठीक हो?

लता : शहहह हाआआआ, शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhh.(Me देख रहा था की जैसे hi लुंड अंदर जाता उनके चेहरे पर हल्का दर्द आ जाता, पर में रुका nahi)Shhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह ahhhhh.(Karib पांच मिनट में ऐसे hi करता raha)Shhhhh शीइइइइव shhhhhh(Ander ठोकर मार रहे लुंड से वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी, कितनी देर से भरी हुई उसकी गागर अब छलकने वाली thi.)Shhhh शिईयिव शहहह मेरे शिईयिव शहहहहह. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : मज़ा आ रहा है लता?

लता : शहहह हा सीईव तुम्हे पा कर तुम्हारी लता बहोत खुस है, मुझे अपनी किस्मत से कोई शिकायत नहीं है शह्ह्हह्ह्ह्ह तुम मिले मुझे सब कुछ मिल गया. भगवन से कोई शिकायत नहीं है, अच्छा किआ जो उसने मुझे अनाथ बनाया. शह्ह्ह्हह्ह. ी लव यू जान, शह्ह्ह्हह्ह. में झाड़नेवाली हु शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उन्हें दबोच कर अच्छे से छोड़ने लगा, स्पीड भी बढ़ा दी thi)Aaaah मा शह्ह्ह्ह शिईयिव आहिस्ता शह्ह्ह्हह्ह वो बहोत बड़ा है शहहहहह में मर जाउंगी जाएं. (वो उन धक्को से बेहाल हो रही thi)Shhhhhh (लुंड अंदर और अंदर जा रहा tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह shhhhhh(Ander जाते हुए वो उसके गर्भ के द्वार तक पहुंच गया, होठो को काट ते hue)Shhhhh शीइइइइइव शहहहहह तुम बहोत अच्छे हो शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो उसे चुम रही थी, इतने आनंद देनेवाले पर प्यार आना तो स्वाभाविक hi tha)Shhhhhh मुझे हमेसा ऐसे hi प्यार करना शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, में करीब हु ष्ठीीीिव. (शिव के झड़प और बढ़ गयी)





शहहह अह्ह्ह्ह मा शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (धक्के जोरो से उसकी बच्चे दानी पर पद रहे the)Aiii अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहह (वो झड़ने lagi)Ahhhhhhhh ाआअह आअह्हह्ह्ह्ह मम्माआआआ. (कुछ धक्को के बाद शिव रुक gaya)Wo उस से लिपट गयी. वो उसे बे तहासा चूमने lagi)I लव यू, ी लव यू, थैंक यू, थैंक यू मुझे पीरा करने के लिए. थैंक यू भगवन, थैंक यू इसे भेजने के लिए. उम्मम्मम्म, उम्मम्मम्म, उम्मम्मम्म. (लता जैसे पागल सी हो गयी थी, वो उसके बाल नोच रही थी, उसकी कमर पर पैर लपेट कर चिपक सी गयी थी)
 
अपडेट 155

शिव और लता अपने सम्भोग में लिप्त थे, लता अबतक दो बार झाड़ चुकी थी, वो नाजुक सी काली जैसी थी जब की शिव एक संध के जैसा था, लता के अंजीर पंजेर ढीले हो चुके थे, फिर भी वो अपने सबसे प्यारे प्रेमी को अपने शरीर का मज़ा दे रही थी, उसका कड़क लुंड उसकी योनि को रोड रहा था, वो पूरी तरह से थक चुकी थी, आखिर कर उसका समर्पण रंग लाया और शिव उसके अंदर hi झाड़ गया, उसने भी रोका नहीं क्यों की ये उसका सेफ पीरियड था. वो तृप्त हो चुकी थी. एक hi बार के संसर्ग ने उसकी हालत ख़राब कर दी थी. जब शिव उसके ऊपर से हटा तो उसकी योनि से वीर्य बहार चालक आया. जैसे hi शिव साइड में लेता वो उसकी और करवट ले कर उस से लिपट गयी. इस वक़्त अपने नंगे पैन से उसे कोई दिक्कत नहीं थी, उसके संतरे जैसे स्तन शिव की सख्त छाती में डाब गए थे.

शिव : (लता को प्यार से सहलाते hue)Thik हो तुम?

लता : हम्म्म्म. (उसे hi पता था की उसकी हालत कैसी है, पर वो शिव को चिंतित नहीं करना चाहती थी, उसकी योनि में जलन हो रही थी, अंदर तक दर्द महसूस हो रहा था, पर ये उस खुसी के सामने कुछ भी नहीं था) तुम्हे मज़ा आया? (उसने शरमाते हुए पूछा)

शिव : (उसके कूल्हों को हलके हलके मसलते hue)Tum अद्भुत हो लता, मेरी नाजुक सी गुड़िया. (लता शर्मा gayi)(Thoda चिंतित हो kar)Mene ज्यादा तो नहीं कर दिया न? दर्द हो रहा है?

लता : (अपने भीगे हुए और हलकी सूजन लिए होठो से muskurayi)Nahi... (शिव उसको सेहला रहा था तो उसका लुंड फिर से खड़ा होने लगा जो लता ने महसूस किआ, उसकी आंखे बंद हो गयी, वो जानती थी की शिव इतना जल्दी शांत नहीं हो शक्ति, वो अपने नाजुक हाथ निचे ले गयी और छूट रास से भीगे हुए लुंड को सहलाने lagi)Aur करना है? (वो भले hi थक चुकी थी पर वो शिव के लिए कुछ भी कर शक्ति थी)

शिव : (मेरा मान तो बहोत था पर में उनकी हालत समझता tha)Nahi.

लता : जूथ क्यों बोल रहे हो, तुम्हारा ये सब कुछ बयां कर रहा है. (उसने हलकी मुस्कान के साथ कहा)

शिव : अब ऐसे नंगी मेरी बहो में रहोगी तो वो तो उठेगा hi.

लता : तो फिर रुक क्यों रहे हो, कर लो (मान तो उसका भी कर रहा था, भले hi उसकी हालत ऐसी थी)

शिव : कोई जरुरत नहीं है, अभी तुम्हारी वो बहोत टाइट है, मुझे पता है तुम्हे दर्द हो रहा है.

लता : (संकुचाते hue)Sarita को बुला दू? (दोनों की आंखे एक हुई)

शिव : नहीं. अब सो जाओ.

लता : (लुंड को पकड़ कर अपनी योनि के छेड़ को लुंड पर टिकते hue)Kar लो न, में ठीक हु.

शिव : (लता को अपने ऊपर खिंच लिया, लुंड फिसल कर लता की झांघो के बिच चला gaya)Chup बोलै न, सो जाओ अब. (लता शिव के शाइन पर शिर रख कर लेट गयी, लुंड भी भी खड़ा hi था, शिव उसकी पीठ को सेहला रहा था, थकावट से उसकी आंखे बोजिल होने लगी, और वो वैसे hi शिव के ऊपर सो गयी)

सुबह जब शिव की आंख खुली तो लता अभी भी उसके ऊपर सोई हुई थी, वो बिना हिले वैसे hi लेता रहा. बहार से बर्तन की आवाजे आ रही थी, मतलब कोई उठा हुआ था. उसने घडी देखि तो स्कूल जाने में आधा घंटा बचा था. उसने लगा की पीठ सेहलायी, तो वो थोड़ी कसमसाई और अपनी बोजिल पलके उठा कर शिव को देखने लगी)

लता : (नींद me)Kitne बजे?

शिव : साढ़े 6 बजे है. (लता हड़बड़ाके उठने लगी, उसको पकड़ते hue)Tum सोई रहो.

लता : नहीं, तुम्हे स्कूल भी जाना है. (वो उठी और अपने बिखरे कपड़ो को पहन ने लगी, शिव ने पीछे से पकड़ कर उसके स्तन dabaye)Shhhhhhh, क्या कर रहे हो, छोडो मुझे. (प्यार से कहा)

शिव : ी लव यू. (लता फ़ौरन घूमी और शिव से लिपट गयी)

लता : ी लव यू तो मेरी जान. (वो फिर अलग हुई और अपनी ब्रा पहन ने lagi)Tum जाओ, तैयार हो, में आती हु.

में शार्ट पहन कर बहार निकल गया, मेने देखा तो गायत्री, रंजन और विणा किचन में थी और सरिता खाने की जगह पर पोछा लगा रही थी, उन्होंने मेरी और देखा, और नज़ारे झुका ली. उनके चेहरे पर नाराजगी थी, में समाज सकता था पर जो संभव नहीं वो संभव नहीं. में बाथरूम में चला गया और जल्दी से तैयार हो कर तौलिया लपेट कर आ गया. लता दीदी नास्ता निकल रही थी. में कमरे में गया और यूनिफार्म पहन कर आ गया. रंजन और विणा भी यूनिफार्म पहने हुए थी. कोई कुछ बोल नहीं रहा था.

शिव : क्या हुआ, सब चुप चुप क्यों हो?

रंजन : अब सुबह सुबह तो बक बक करुँगी नहीं, स्कूल के लिए लेट हो रहा है तो नास्ता कर रहे है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, में भी मुस्कुराया, हमने नास्ता ख़तम किआ और वो दोनों अपना बैग ले कर निकल गयी, में भी अपना बैग लिया और बहार आके कीतचने में देखा तो सब काम में व्यस्त थे, में वह गया और bye बोल के निकल गया)

संयम के वह पंहुचा तो तीनो देविओ ने स्माइल के साथ मेरा स्वागत किआ. आज वैस्वी पीछे बेथ गयी थी. संयम थोड़ी लेट हो गयी, उसे बुरा लगा था पर वो कुछ नहीं कर शक्ति थी. में स्कूटर चला रहा था और वैस्वी मेरे पेट पर अपने नाख़ून हलके हलके चला रही थी. उसके प्रूस्त स्तन अपना अस्तित्वा महसूस करवा रहे थे. में मुस्कुराते हुए स्कूटर चला रहा था. हम तीनो स्कूल पहुंच गए. हर्ष और महेश खड़े थे, हम पांचो क्लास की और बढ़ गए.

दोपहर को रेसस्स में भी सब नार्मल hi रहा. वापस स्कूल से आते वक़्त संयम मेरे पीछे बेथ गयी, उसने अपना बया हाथ मेरी झंघ पर रक्खा था, वो दोनों ऐसे hi स्कूल की बाटे कर रही थी, पर मुझे लगा जैसे संयम के अंगूठे में हलचल थी, वो जान बुज कर कर रही थी या अनजाने में हो रहा था मुझे समाज नहीं आया. संयम के घर जब में उतरा तो वैस्वी बोली.

वैस्वी : बैठे रहो, में छोड़ देती हु.

शिव : नहीं मैडम, मेरी आदत मात बिगाड़िए, में चला जाऊंगा. (संयम ने अपना बैग ले लिया, और वैस्वी को bye कहा, शिव को भी bye कहा, पर दोनों bye में अंतर था, और ये दोनों ने महसूस किआ, वो अपने घर को निकल गयी)

वैस्वी : बैठो न, में छोड़ देती हु.

शिव : में नहीं चाहता की तुम मुझे छोडो.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Flirt कर रहे हो?

शिव : है.

वैस्वी : (उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो जाना नहीं चाहती थी, भले hi कुछ पल hi सही पर वो शिव के साथ रहना चाहती thi)Chalo न, में तुम्हे घर छोड़ देती hu(Usne प्यार से रिक्वेस्ट करते हुए कहा)

शिव : क्यों आदत बिगड़ रही हो मेरी, इसी बहाने मेरी एक्सरसाइज हो जाएगी.

वैस्वी : स्टेडियम में मेरे नाम का एक राउंड और दौड़ लेना, पर अभी चलो. (उसने बड़े प्यार से कहा, में मुस्कुराते हुए वापस बेथ गया, और स्कूटर चलने लगा, उसने अपने नाख़ून फिर मेरी कमर में धसा दिए)

शिव : क्या कर रही हो? बिल्ली कही की.

वैस्वी : (जोरो से नाख़ून गढ़ते hue)Billi नहीं हु में, शरणी हु, बिल्लिया शेर को पसंद नहीं karti.(wo मुझे शेर बुला रही थी, में हसने लगा, उसने मुझे कमर से कास के पकड़ लिया और अपने स्तन मेरी पीठ में दबा दिए, हाला की अभी भी वैस्वी के मान में सेक्स करने की तैलप नहीं थी, वो तो बेचारी ये सब ज्यादा जानती भी नहीं थी, उसे तो बस इन सब में मज़ा आता tha)Muj पर है रहे हो?

शिव : नहीं मेरी शेरनी, में तुम पर नहीं है रहा, तुमने मुझे शेर कहा इस लिए हँसा.

वैस्वी : (शरमाते hue)Wo तो तुम हो, उन गीदड़ो को तुमने कैसे रोंडा था ये मेने देखा था, तब से तो तुम पर फ़िदा हो गयी थी, है पर ये मात समझना की इस शेरनी को पाना इतना आसान है, पंजा मरती है ये.

शिव : (मेने मुस्कुराते हुए kaha)Jis दिन इस शेर से पला पड़ेगा तब पता चलेगा.

वैस्वी : ऐसा क्या पता चलेगा, बताओ.

शिव : अभी तुम भोली हो, नादाँ हो, तुम्हे समाज नहीं आएगा.

वैस्वी : है है, तुम hi बड़े जानकर हो, मुझे पता hi था, सीधे नहीं हो तुम.

शिव : तो फिर क्यों पीछे पड़ी हो?

वैस्वी : में कोई पीछे विच्चे नहीं पड़ी हु, गलतफैमी मात पालो, बड़े आये पीछे पड़ी हु वाले. (मेरा घर आ गया तो मेने स्कूटर बहार hi रोक दिया, में निचे उतरा और अपना बैग लिया, उसने मायूसी से घर की और देखा)

शिव : क्या हुआ?

वैस्वी : (मायूसी se)Kitna जल्दी आ गया न.

शिव : क्यों?.. अभी तो कह रही थी की पीछे नहीं पड़ी हु, तो अच्छा hi हुआ न जल्दी मेरा घर आ गया, में चला जाऊंगा.

वैस्वी : (ऐडा se)wo तो में पीछे नहीं पड़ी हु, पर तुम्हे जाने भी नहीं दे सकती.

शिव : ऐसे चला जाऊंगा की पता भी नहीं chalega(Ekdum उदास हो गयी, और ऐसी सकल बना ली जैसे अभी रो degi)Are...me तो मज़ाक कर रहा था यार. (मेने उसके माथे पर किश किआ, वो रोनी सूरत के साथ मुस्कुरायी). अभी तो शेरनी बन रही थी और एक दम से खरगोश बन गयी. (वैस्वी खुद नहीं समाज प् रही थी की ऐसा क्यों हुआ, शिव के दूर जाने की बात से hi वो विचलित हो गयी thi)Sorry यार, में बस मज़ाक कर रहा था, में कहा जा रहा हु, कल मिलते है.

वैस्वी : ह्म्म्मम्म.

शिव : क्या हम्म्म, अब है do,(Wo फिक्की हसी hasi)Bye. (उसने bye भी नहीं कहा, बस मुस्कुरायी और जाने लगी, आगे जा कर पीछे मुड़ी, मेने फ्लाइंग किश दी तो उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आयी, वो चली गयी, में अंदर की और जाने laga)Kya होगा मेरा....

में कपडे बदल रहा था की मेरे मश्ग की घंटी बजी, मेने देखा तो नाज़िआ दीदी का मश्ग था. “आधे घंटे बाद घर आना”. में सोचमे पद गया की इनको क्या हुआ, खैर मेने जल्दी से खाना खाया और नाज़िआ दीदी से मिलने चला गया. मेने दरवाजा खत खतया तो संयम ने दरवाजा खोला, वो थोड़ी दरी हुई थी, उसने आस पास देखा और मुझे अंदर आने को कहा, मेरी कुछ समाज में नहीं आया, में अंदर चला गया, उसने दरवाजा बंद कर दिया. वो दरी हुई थी और उसकी सांसे भी तेज चल रही थी.

शिव : क्या हुआ? दरी हुई क्यों हो?

संयम : में... में कहा दरी हुई हु (उसने हकलाते हुए कहा)

शिव : नाज़िआदिदी कहा है, उन्होंने बुलायतः मुझे.

संयम : तुम बैठो, में पानी लती हु. (वो घबराते हुए अंदर भाग गयी, में सोफे पर बेथ गया, घर में सन्नाटा था, मेरी समाज में नहीं आ रहा था, थोड़ी देर बाद पानी ले कर आयी, मेने पानी लिया और पिने लगा)

शिव : (उसको खली गिलास देते hue)Naziadidi कहा है?

संयम : कोई नहीं है. (उसने डरते हुए कहा)

शिव : (मेरी समाज में नहीं aaya)Par उन्होंने तो मुझे आने को मश्ग किआ था.

संयम : वो मश्ग मैंने किआ था (उसने डरते हुए kaha)Jaldi में अपना नाम लिखना भूल गयी.

शिव : तुमने मश्ग किआ? (मुझे आश्चर्य hua)Kyu? और सब कहा गए है?

संयम : वो आप के वह जाना है तो सब खरीदी करने गए है. (उसने नज़ारे झुकाये हुए जवाब दिया)

शिव : मुझे क्यों बुलाया? (उसने कोई जवाब नहीं दिया बस नज़ारे झुकाये कड़ी रही, में समाज गया की क्या माजरा है, अब में घबराने लगा, अगर किसी को पता चला तो उसकी समेत पक्की थी) पागल हो गयी हो क्या, किसी को पता चला तो क्या होगा पता है?

संयम : तुम तो मुझे मिलते नहीं हो तो फिर क्या करती. (वो अभी भी मेरी और नहीं देख रही थी)

शिव : रोज तो मिलते है.

संयम : वैसे nahi...(Wo खामोश हो गयी)

शिव : तुम पागल हो गयी हो, तुम जानती हो, घर में किसी को पता चला तो क्या होगा?

संयम : मुझे डाटेंगे, मरेंगे, कोई बात नहीं.

शिव : (में उसकी हालत समाज रहा था, मेने उसके हाथ सेगलस्स लिया और वह टेबल पर रक्खा, और उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाते hue)Betho (वो बेथ gayi)Kyu कर रही हो ऐसा?

संयम : मुझे तुम पसंद हो. (उसने नज़ारे झुकाये हुए कहा)

शिव : (मेने लिघ्टलय liya)to क्या हुआ, तुम भी मुझे पसंद हो. (मेने नोर्मल्ली hi कहा)

संयम : वैसे nahi....(Wo कुछ पालो खामोस rahi)Jaise वैस्वी तुम्हे पसंद करती है वैसे.

शिव : इसमें वैस्वी बीचमे कहा से आ गयी?

संयम : वो hi तो बिच में आ गयी है, तुमने उसे बचाया और उसे तुमसे हो गया, पर उस से पहले तो तुमने मुझे बचाया था, तो मुझे नहीं होगा क्या.

शिव : (दिल में घंटी बजी, संभल भाई संभल) देखो, संयम, तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है.

संयम : तुम्हे क्या लगता है में अंधी हु. (में क्या जवाब deta)Me सुन्दर नहीं हु?

शिव : पागल है क्या तू, तू बहोत सुन्दर है.

संयम : तो फिर दिक्कत क्या हुई? तुम ने मेरे साथ क्यों कुछ नहीं किआ.?

शिव : क्या नहीं किआ?

संयम : प्यार. (उसने मेरी आँखों में देख कर कहा)

शिव : (उसको समजते hue)Dekho संयम, तुम शांत हो जाओ और संजो, में कोई प्यार व्यार नहीं करता उस से (मेने जूथ कहा)

संयम : तो फिर प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी, (मेरा हाथ पकड़ कर) मुझसे कर लो. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : तुम समाज नहीं रही हो संयम, में किसी से प्यार नहीं कर सकता, तुम जानती हो में कोण हु, फिर भी.

संयम : तो क्या हुआ, उस से क्या फर्क पड़ता है.

शिव : (उसे समजते hue)Tum समाज नहीं रही हो, सोचो अगर तुम्हारे घर में पता चल गया तो क्या होगा? (में उसको डरना चाहता था)

संयम : वो मुझे नहीं पता, तब की तब देखेंगे, तुम ये कहो की तुम मुझसे प्यार करते हो की नहीं.

शिव : हम बाद में बात करेंगे, अभी मुझे साइट पर जाना है, और किसी को पता चल गया की तुम अकेली हो और में यहाँ आया हु तो तुम्हारी और तुम्हारे घरवालों की बदनामी होगी, हम शांति से बात करेंगे. (में खड़ा होने लगा, वो नज़ारे झुकाये बैठी थी, और उसकी आवाज से मुझे पता चला की वो रोने लगी है, उसकी सिसकी मुझे सुनाई दी, मेने अपना शिर पकड़ लिया, मेने अपने आपको शांत kia)Mene तुम्हे कहा न की हम बाद में बात करेंगे.

संयम : (रोनी आवाज़ me)Tum मुझे ठुकरा रहे हो, है न? (में फिर उसके बाजु में बेथ गया)

शिव : में कोई ठुकरा वक्र नहीं रहा हु तुम्हे, मेने कहा न की हम शांति से बात करेंगे.

संयम: में नहीं आउंगी अब, में स्कूल भी नहीं आउंगी. (उसने रट हुए कहा)

शिव : पागलपन मात करो, अच्छा मान लो की मेरे और वैस्वी के बिछ है, अब???

संयम : (वो मेरे सामने देखने लगी, कुछ देर कुछ नहीं बोली, उसकी आँखों से आंसू निकल रहे the)Tum जाओ शिव.

शिव : (मुझे दर लगने लगा, अगर इसने कुछ कर लिया to)Samim, तुम समाज नहीं रही हो, तुम जैसा मेरे बारे में सोचती हो वैसा नहीं हु में, मेरे जीवन में बहोत साडी लड़कीअ है.

संयम : (आश्चर्य से मुझे देखते hue)Aur वैस्वी????

शिव : में उसे भी मन करता हु, वो भी समझती hi नहीं, में समजा रहा हु तुम्हे भी, में वैसा नहीं हु जैसा तुम समाज रही हो. इसीलिए मेने तुमसे कहा है की हम बाद में बात करेंगे.

संयम : बूत ी लव यू शिव.

शिव : (मान में: तू तो गया शिव, मेने अपने आपको शांत किआ, और बड़े प्यार से kaha)Me जनता हु संयम, पर में तुम्हारे लायक नहीं हु.

संयम : तुम जानते हो?

शिव : है.

संयम : तुम जानते हो तो फिर मुझसे कहा क्यों नहीं?

शिव : मेने कहा न की में अच्छा लड़का नहीं हु.

संयम : मुझे उल्लू बना रहे हो न?

शिव : में सच बोल रहा हु.

संयम : अगर तुम अच्छे न होते, तो तुम्हे भी मुझसे वही चाहिए होता जो लड़के अक्सर लड़कीओ से चाहते है, अगर तुम्हे पता था की में तुम्हे चाहती हु तो में तुम्हारा आसान सीकर हो सकती थी, तुम मेरा फायदा उठा सकते थे, में मन भी नहीं करती.

शिव : (मेरा मान किआ की में अपना शिर फोड़ लू, में उसे इसलिए बता रहा था की वो मुझसे दूर जाये, और ये मुझे मेरी hi बातो में फसा रही है, मेने अपने आपको शांत kia)Muje पता है की तुम बहोत इंटेलीजेंट हो, तो थोड़ा अपना दिमाग मुझे जान ने भी लगाओ, जल्दबाजी मात करो. मेरी बात को संजो.

संयम : ठीक है, में देखती हु, और अगर फिर भी मुझे लगा की ऐसा वैसा कुछ भी नहीं है तो तुम मुझे अपनाओगे.

शिव : है, जरूर (वैसे भी मुझे पता था की ये होना नहीं है, मेरे कांड इसको पता चलेंगे तो खुद दूर भाग जाएगी) पर एक प्रॉमिस तुम भी करो की इस चक्कर में पढ़ाई का नुकसान नहीं करोगी, शिव तो आज है कल नहीं होगा, पर ये तुम्हारी पूरी जिंदगी का सवाल है.

संयम : (वो समाज रही थी की शिव को उसका कितना ख्याल है, वो muskurayi)Promise.

शिव : चल अब में चलता हु, तेरे चक्कर में आज फिर मुझे दन्त पड़नेवाली है. (मेने खड़े होते हुए कहा, वो भी कड़ी हो गयी)

संयम : (बड़े प्यार se)Shiiiiv. (मेने उसको देखा) मुझे एक बार गले लगाओ न.

शिव : Samim...(Uske चेहरे पर जैसे बिनती थी)

संयम : प्लीज यार, दोस्त समज कर hi लगा लो.

शिव : पागल है तू भी (मेने झुक कर उसको बहो में भर लिया, वो भी मुझसे कास के लिपट गयी, वो भी छरहरे बदन की खूबसूरत लड़की थी, वो जैसे मेरी बहो में घूम हो गयी, ऐसा नहीं था की वो खूबसूरत नहीं थी, वो बहोत ज्यादा खूबसूरत थी, और रंग तो जैसे दूध सा सफ़ेद था, उसने मेरे गाल पर किश किआ)

संयम : ी लव यू शिव, चाहे तुम्हारा जवाब जो भी हो, में तुमसे प्यार करती रहूंगी.

शिव : (मेने डरते हुए kaha)Samim...

संयम : Shhhhhh(Usne मुझे चुप करने के उद्देश्य से कहा, मेने अपनी बहे खोल दी पर वो अभी भी लिपटी रही थोड़ी देर बाद वो अलग हुई, हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, मेरा मान किआ की में उसके होठो को चुम लू पर जैसे तैसे मेने अपने आपको संभाला)

शिव : मिलता हु फिर.

संयम : इंतजार रहेगा. (संयम ने बड़ी बेकरारी से कहा, शिव बहार निकल गया, संयम दरवाजे पर खड़े हो कर देख रही थी, तभी उसके पड़ोस में रहनेवाली उसकी सहेली आयी, उसका नाम परवीन था, उसने भी उस लड़के को देखा था)

परवीन : कोण था ये लम्बू?

संयम : दोस्त है मेरा. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

परवीन : (घर में दाखिल होते hue)Koi नहीं है घर में?

संयम : नहीं.

परवीन : (अपने मुँह पर हाथ रख kar)Tum दोनों अकेले थे घर में?

संयम : (मुस्कुराते hue)Ha.

परवीन : और तू कह रही है की वो तेरा दोस्त है, चल जूठी.

संयम : वो दोस्त hi है, तुजे तो पता है की आजकल के लड़के कैसे है, सोच ऐसे अकेली लड़की मिले तो क्या करेंगे?

परवीन : ओह्ह्ह..

संयम : (मुस्कुराते hue)Use भी पता था की में घर में अकेली हु, पर फिर भी वो चला गया.

परवीन : (अस्चर्यासे दरवाजे की और देख kar)Kon था वो? मेरी नजर गयी थी उस पर, हंसों दिख रहा था.

संयम : शिव नाम है उसका.

परवीन : लटगा है तू फुल लट्टू है उस पर.

संयम : है हु.

प्रवीण : तो फिर प्रॉब्लम क्या थी, बता देती उसे, मौका भी अच्छा था.

संयम : वो जनता है.

प्रवीण : फिर भी उसने कुछ नहीं किआ? (आश्चर्य से) कोई फरिस्ता है क्या?

संयम : मेरे लिए तो है.

परवीन : नाम से तो हिन्दू लगता है?

संयम : तो क्या हुआ, उसको खुद को नहीं पता है की वो हिन्दू है की मुस्लमान. इंसान है वही बहोत है, और ये हिन्दू, मुस्लमान, इससे, ये सब मेरी समाज में नहीं आता. हम इंसान है और इंसानियत hi हमारा धर्म है. मुझे नहीं लगता की किसी भी धर्म के फरिस्ते ने ये कहा हो की ऊपरवाला अलग अलग है, बस नाम अलग है और कुछ नहीं.

परवीन : लगता है पूरा मान बना चुकी है.

संयम : ऐसा कुछ नहीं है, में तो बस गेनेराल्ल्य बता रही थी, और सुना तेरे क्या हल है?

परवीन : अब हमारी ऐसी किस्मत कहा. (दोनों हसने लगी)

में संयम के बारेमे सोचते हुए, साइट की और निकल गया. जैसा की मेरा अनुमान था जहान्वी का मश्ग भी आ hi चूका था. “कहा रह गए?”. में अपनी किस्मत पर नाज़ करू या अफ़सोस करू समाज में hi नहीं आ रहा था. में साइट पर चला गया. बालकनी खली थी, जहान्वी की गाड़ी पड़ी हुई थी, ऑफिस का दरवाजा खुला हुआ था तो में अंदर hi चला गया. दरवाजा खुला था तो में अंदर दाखिल हुआ, वो सोफे में बैठी थी किसी खयालो में. उसने लाल रंग का फ्रॉक जैसा कुछ पहना था जिस पर सफ़ेद फूल लगे हुए थे. घुटनो तक आती फ्रॉक से उनके गोर गोर पेअर झांक रहे थे. में वह खड़ा था पर फिर भी वो किसी खयालो में थी.





शिव : कहा खोई हो? (मेरी आवाज सुन कर वो चौंक गयी पर जैसे hi मुझे देखा वो मुस्कुरायी)

जहान्वी : आ गए तुम? (हलके टॉन्ट से कहा)

शिव : (मेने मुस्कुरा के kaha)Ji, आ गया, कहिये, क्या हुकुम है?

जहान्वी : (मुस्कान बड़ी हो gayi)Ha, जैसे मेरा हुकुम मानते हो न बड़ा.

शिव : मंटा तो हु, कहिये क्या हुकुम है.

जहान्वी : कुछ नहीं, बैठो.

शिव : मुझे बैठने की पगार नहीं मिलती, में देख लेता हु क्या चल रहा है.

जहान्वी : बड़ी जल्दी है, वो भागी नहीं जा रही, में अभी आयी हु, कर रहे हे सब अपना काम, पिंकेश भी है, तुम बैठो. (उन्होंने मुझे भोली के नाम का तना दिया)

शिव : मेरा वो मतलब नहीं tha(Samne बैठते hue)Itna क्या सोच रही थी, मेरे आने का भी पता नहीं चला.

जहान्वी : (तुम्हारे बारे में और क्या) कुछ नहीं बस ऐसे hi.

शिव : कुछ तो सोच रही थी आप.

जहान्वी : तुम्हारे बारे में सोच रही थी बस. (हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : अच्छा, ऐसा क्या सोच रही थी.

जहान्वी : वो hi, तुम्हारे और उस लड़की के बारे में, मुझे तुम्हारा टेस्ट कुछ अच्छा नहीं लगा (अपना मुँह बनाते हुए उन्होंने कहा, में मान hi मान मुस्कुरा रहा था)

शिव : अच्छा अगर में कहु की वो मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है तो.

जहान्वी : (एक्सिट होते hue)Muje पता था, मुझे नहीं लगता की तुम इतने भी पागल हो.

शिव : मतलब थोड़ा तो हु, है न?

जहान्वी : वो तो हो hi, बिना कुछ सोचे समजे कुछ भी कर देते हो (हलका शर्मा के, फिर सोच ke)To फ्री तुमने क्यों कहा था की तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

शिव : है तो फिर कहूंगा hi न. (मुझे उन्हें चिढ़ाने में मज़ा आ रहा था)

जहान्वी : (हलकी मायूसी se)Kon है फिर वो?

शिव : है कोई.

जहान्वी : (मायूसी se)How लकी शी इस! (मेरी और देख kar)Batao न, कोण है? स्कूल में पढ़ती है (फिर अचानक उसके दिमाग में वैस्वी का चेहरा उभर आया, पर अपने दिमाग को समजते हुए, नहीं वो कैसे हो सकती है, उसका तो मेरे भाई के साथ होनेवाला है, तो फिर कोण होगी)

शिव : है कोई, छोड़ना उस बात को, और वैसे भी में उसकी बात कर के उसके लिए मुस्किले कड़ी नहीं कर सकता.

जहान्वी : (धड़कते दिल से, कही वैस्वी hi तो नहीं, उसने डरते हुए puchha)Kya में जानती हु उसे?

शिव : (वो कोई जानकारी नहीं देना चाहता tha)Muje क्या पता? छोड़िये न इस बात को.

जहान्वी : अरे बताओ न, अब तो हम दोस्त है न.

शिव : में और आपका दोस्त, मेरी उतनी औकात नहीं है मैडम.

जहान्वी : (उदास हो kar)Isme औकात की कहा बात आ गयी, मेरे पापा आमिर है तो क्या मेरी गलती है? (वो मेरी आँखों में देखने लगी, थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रही, फिर अपने आपको सँभालते हुए वो boli)Achchha नाम मत बताओ, पर ये तो कह सकते हो न की बात कहा तक पहुंची? (अपनी आंखे नाचते hue)Kuchh हुआ क्या?

शिव : नहीं, ऐसी कोई भी बात नहीं है (मेने शरमाते हुए कहा)

जहान्वी : बलुशिंग है (वो मुस्कुरायी) बताओ न, बात कहा तक पहुंची, किश विस्स किआ क्या?

शिव : नहीं, ऐसी वैसी कोई बात नहीं है, वो बस मुझे अच्छी लगती है, और कुछ नहीं. (में ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहता था, में बस इतना चाहता था की उनका चेप्टर ओपन न हो बस)

जहान्वी : सहित! यार, तुमने तो सब पानी फेर दिया, मतलब बात एक तरफ़ा है, है न?

शिव : ऐसा hi समाज लीजिये.

जहान्वी : (जहान्वी को अपने लिए स्कोप लगा तो उसने अपने पेअर पर पेअर चढ़ाया और पीछे तक लगा कर बेथ गयी, वो जानती थी की शिव उसके सामने बैठा है तो बहोत कुछ उसे दिखेगा,





और हुआ भी ऐसा hi, शिव बेचैन होने लगा, वो जानती थी की शिव की नजर कहा गयी है, वैसे भी ये बात उसके लिए सामान्य hi थी, वो अक्सर विदेश में ऐसे कपडे पहनती hi थी, पर यहाँ उसने कुछ ज्यादा hi एक्सपोज़ कर दिया tha)Kya यार, मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी, यतो उसके साथ आगे बढ़ो या फिर ऐसा कोई ढूंढो जो तुम्हे सामने से पसंद करता हो.

शिव : (उनके पेअर के ऊपर पेअर चढाने से उनकी झंघे दिख रही थी, अब में भी था तो लड़का hi, ऐसा नजारा देख कर मेरी हालत ख़राब होने लगी, मुझे लगा की मेरा लुंड भी खड़ा होने लगा है, मेने नज़ारे चुरा कर kaha)Aisa कोई नहीं है. (मेने थूक निगलते हुए कहा)

जहान्वी : (वो फिर सीधी बेथ गयी, उसे जो देखना था वो दिखा दिया tha)Apni नजर दौडाओगे तब तो पता चलेगा.

शिव : ऐसा कोई नहीं है. (मेने संभल कर कहा)

जहान्वी : अच्छा अगर वो बड़ी हुई तो तुम क्या करोगे?

शिव : में समजा नहीं.

जहान्वी : मेरा कहने का मतलब है की अगर कोई लड़की जो तुमसे आगे में बड़ी हो, वो तुम्हे प्रोपोज़ करे तो?

शिव : मुझे कोण प्रोपोज़ करेगा, मुजमे है hi क्या?

जहान्वी : (अरे जालिम, कभी मेरी निगाह से भी देख पता चल jayega)Aisa क्यों बोल रहे हो, अच्छे खासे तो दीखते हो.

शिव : सिर्फ अच्छा दिखने से hi सब हो जाता है क्या, उसे जैसे hi पता चलेगा की में अनाथ हु तो वो भाग जाएगी. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : और न भागे तो.

शिव : फिर भी में उसे क्या दे सकता हु?

जहान्वी : (अब वो इतना तो समाज गयी थी की यहाँ ऐसा तो सम्बन्ध हो नहीं सकता की वो उस से शादी करे, आगे भी मटर कर रही थी, तो उसने सोचा की अफेयर भी होगा तो चलेगा, कमसे काम उसके साथ कुछ समय तो बिता payegi)Aaj कल ऐसा कोण सोचता है, दो लोगो को अगर आपस में अच्छा लगता है तो वो साथ रहते है, इसमें कोई बन्दिस नहीं होती, आगे चल कर वो अपने अपने रस्ते चले जाते है. तुम्हे भी एक्सपीरियंस मिल जायेगा.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab आप मेरी खिंचाई कर रही है, आप बैठिये, में काम देखलेता हु.

जहान्वी : (शिव को बहार जाता देख रही thi)Ye तो किसी भी तरह मान ने को तैयार नहीं है, क्या होगा तेरा झानवीईई. (उसने फिर आंखे बंद कर ली और सोच में दुब गयी)

में समाज रहा था की जहान्वी मैडम के िर्रादे क्या है, पर मेरी ये समाज में नहीं आ रहा था की में hi क्यों, वैसे भी वो इतनी खूबसूरत है, कोई भी उन्हें है बोल देगा, में थोड़ी देर काम करता रहा.

जहान्वी हर मन ने को तैयार नहीं थी, वो उठी और बहार निकली, जहा काम चल रहा था वह पहुंची, काम कर रहे मजदुर नजर बचके उसे घूरने लगे, ये उसके लिए नयी बात नहीं थी. उसने शिव को आवाज लगायी.

जहान्वी : शीइइइइइव. (बहार आ कर)

शिव : जी कहिये?

जहान्वी : देख लिया सब?

शिव : है देख लिया, कहिये?

जहान्वी : में सोच रही थी की बहार चलते है, वैसे भी तुम कह रहे थे न की तुम्हे कार सीखनी है, चलो न, वैसे भी कोई खास काम नहीं है, और पिंकेश तो है hi, (पिंकेश की और देख kar)Kyu पिंकेश?

पिंकेश : (मेने पिंकेशभाई की और dekha)Ha है, कोई बात नहीं.

शिव : (वैसे भी कोई खास काम तो था नहीं, मेने सोचा इसी बहाने कार सिख लेता हु, में बहार आया, हमदोनो आगे बढ़ गए)

पिंकेश : (मान में : इसके भी मज़े है)

में और जहान्वी बहार आ गए, गाड़ी में बेथ गए. जहान्वी खुस थी, पर अब कार चलने के बहाने से शिव को लायी थी तो कार के बारे में समजने लगी.





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(वो समजा रही थी और में सब ध्यान से समझने की कोशिस कर रहा था, वैसे भी अब थोड़ा थोड़ा तो मुझे पता चल चूका था, क्यों की में जब भी कार में या फोर व्हीलर में बेथ ता तो ध्यान से देखता hi था.
 
अपडेट 156

दो पहर में बिना खाना खाने के बाद बैठी थी और शिव के बारेमे hi सोच रही थी, अभी तक ममता की और से कोई भी खबर नहीं मिली थी. उसने ममता को फ़ोन लगाया.

बिना : (थोड़ी देर घंटी बजती रही, थोड़ी देर बाद किसी ने फ़ोन uthaya)Hello.

आवाज : Hello, कोण?

बिना : में बिना बोल रही हु, ममतादिदी की भाभी.

आवाज : में रागिनी बोल रही हु बीटा, कैसी हो तुम?

बिना : नमस्ते माजी, में अच्छी हु, आप कैसी है, और घर में सब?

रागिनी : सब अच्छे है बीटा, तुम कैसी हो? अकेले रहती हो, जांच तो रहा है न?

बिना : अब क्या कर सहते है, नौकरी करनी है तो थोड़ा तो सहन करना पड़ता है, वैसे कोई परेशानी नहीं है, सब ठीक है.

रागिनी : वो पागल मिलती है की नहीं?

बिना : कोण माजी?

रागिनी : जूही और कोण, पता नहीं क्या बहुत सवार है उस लड़की के, हमें तो चिंता लगी रहती है, वो भी तो अकेले hi रहती है, जवान लड़की है, अब क्या संजय उसे.

बिना : है मिलती है, आप उसकी चिंता मात कीजिये, समझदार है, अपना ख्याल रखना जानती है वो.

रागिनी : खाक समझदार है, शादी की उम्र हो गयी है फिर भी खेल कूद में लगी हुई है, अगर तेरी बात होती हो तो समजा उसे भी, क्या रक्खा है इन सब में, घर गृहस्थी नहीं बसायेगी तो फिर क्या होगा उसका.

बिना : जी में बात करुँगी उस से, (वो ज्यादा बहस करना नहीं चाहती thi)Didi है?

रागिनी : रुक, बुलाती hu.(Thodi देर बाद)

ममता : Hello भाभी, कैसी है?

बिना : में अच्छी हु, आप कैसी हो?

ममता : में भी अच्छी hi हु, और सुनाई ये.

बिना : आप की बात हुई थी क्या?

ममता : है, हुई थी, पर कोई कुछ जयदा बताने को तैयार नहीं है, मेरे ज्यादा जोर देने पर इतना hi पता चला की शिवांस की नदी में डूबने से मौत हो गयी थी, उस वक़्त और कोई तो साथ में था नहीं, योगेन्द्राचाचा, चन्द्रिका चची, उदयसिंह चाचा और कामना चची, ये लोग कुम्भ के मेले में गए थे, तभी वह भगदड़ हुई थी और ऐसे में शिवांस उदयसिंह चाचा के हाथ से छूट गया और नदी में गिर गया था, पानी का तेज बहाव था, योगेन्द्राचाचा उसे बचने नदी में कूद गए थे पर वो नहीं बचा पाए, पत्थरो में चोट लगने की वजह से उन्हें भी काफी छोटे आयी थी, वो अभी भी कोमा में है.

बिना : और शिवांस?

ममता : मेने कहा न की वो दुब कर मर गया.

बिना : वो मर गया है ये कैसे पता, उसकी लाश...

ममता : नहीं, लाश तो नहीं मिली थी शायद, मेले की वजह से पानी इतना था की किसी का भी बचना न मुमकिन था, उस हादसे में कई लोग पानी में गिरे थे, कई लोगो की लाशे मिली, कई लोगो की नहीं मिली, पुलिस ने भी बहोत छानबीन की थी, पर कुछ पता नहीं चला.

बिना : हो सकता है की वो बच गया हो?

ममता : मुमकिन तो नहीं लगता, इतने पानी में बड़े बड़े नहीं बच सके तो एक छोटा बच्चा जिसे तैरना तक न आता हो वो कैसे बढ़ सकता है.

बिना : बात तो आपकी सही है, अच्छा, उसकी कोई तस्वीर या और कुछ?

ममता : नहीं, कोई तस्वीर नहीं है.

बिना : ऐसा कैसे हो सकता है, की कोई तस्वीर तक न हो.

ममता : जैसा की माँ बता रही थी, योगेन्द्राचाचा की साडी प्रॉपर्टी उदयसिंह चाचा के पास hi है, तो गर तस्वीर होगी तो भी उनके पास hi हो सकती है. पर वो इस बारे में किसी से बात करना पसंद नहीं करते, अगर कोई कुछ पूछे तो भी वो गुस्सा हो जाते है. और उनसे बात करने की किसी में हिम्मत नहीं है. मम्मी तो ये भी बता रही थी की वो बहोत खतरनाक है, उन्होंने hi हे सारा कांड किआ है, उन्हें भी सही से पता नहीं है पर कुछ तो गलत हुआ है ऐसा वो बता रही थी. पर किसी की पूछने की हिम्मत नहीं है. पुलिस ने भी कोई ज्यादा छानबीन नहीं की थी, हो सकता है की उन्होंने पैसे खिलाये हो.

बिना : मतलब शिवं मर चूका है, है न?

ममता : मुझे भी बुरा लग रहा है, पर यही सच्चाई लग रही है.

बिना : पता नहीं क्यों दीदी, पर मुझे यकीं नहीं हो रहा है, आपको लगता है की आप उसे पहचानती है, स्वर्णादिदी को भी लगता है, कोई तो रिलेशन है हमारा, और शिवांश hi एक पॉसिब्लिटी लगती है, पर वो रहा नहीं, कुछ समाज में नहीं आ रहा.

ममता : उस से मिली थी क्या तुम?

बिना : नहीं दीदी, कैसे मिलु? अब तो दर लग रहा है की अगर वो आएगा और मेरे sath...(Wo आगे बोली नहीं, कुछ देर रुक kar)me क्या करुँगी दीदी, कुछ समाज में नहीं आ रहा.

ममता : ये ऐसे सवाल है जिस के कोई जवाब नहीं.

बिना : पर दीदी आप परिस्थिति समाज रही है न, में कैसे उसे रोकूंगी, अगर वो आपके पास आया तो क्या आप उसे रोक पाओगी? (ममता भी सोच में पद गयी)

ममता : में दूर हु, यही मेरे लिए अच्छा है.

बिना : इतना ज्यादा यकीं मात कीजिये, किस्मत ने क्या करवाया है हमसे, अगर उसने चाहा तो वो पहुंच जायेगा आपके पास, फिर क्या करोगी.

ममता : वो शिव है, शिवांस नहीं है, आपको ऐसे hi लग रहा है, वहम है आपका और कुछ नहीं.

बिना : दिल को तसल्ली देने के लिए ख्याल अच्छा है. (उसने टॉन्ट मारा)

ममता : आप डराओ मात, वो शिव hi है, और कोई नहीं. में रखती हु, मुझे उनको नहलाना है.

बिना : ओह! में तो भूल hi गयी थी, कैसे हे जीजाजी?

ममता : अच्छे है, अभी पत्तिया है, अगले हफ्ते शायद निकलने को बोल रहे है.

बिना : ठीक है, में रखती हु.

फ़ोन रखने के बाद बिना ने आंखे बंद कर ली.

बिना : (मान me)Ek और तो शिव से मिलने के लिए तड़प रही हु और दूसरी और भगवन से प्राथना भी कर रही हु की अभी वो न आये. कैसे सामना करुँगी में उसका, अगर बाद में पता चला की वो मेरा देवर है तो... नहीं नहीं, जब दीदी को लग रहा है की वो शिवांस नहीं हो सकता तो नहीं hi होगा. पर अगर हुआ तो, कैसे पता करू, (Dil)Tuje क्यों जान न है, छोड़ न, और क्या फर्क पद जायेगा, वो शिव बना रहे ये hi तुम्हारे लिए अच्छा है. (वो दिल और दिमाग की उधेड़बुन में लगी रही)

में और जहान्वी सहर से बहार एक कॉलेज था जिसका बड़ा सा मैदान था वह आ गए थे. मैदान पूरा खली था.

जहान्वी : जैसा मेने बताया है वैसे hi तुम्हे करना है, अब आ जाओ ड्राइविंग सीट पर. (मुझे दर लग रहा था, पर में हिम्मत कर के ड्राइविंग सीट पर बेथ gaya)Ab गाड़ी स्टार्ट करो. (मेने गाड़ी स्टार्ट ki)Ab क्लच दबाओ.

शिव : कोनसा वाला? (में नर्वस्नेस में भूल गया)

जहान्वी : सीईव (नाराजगी se)Mene कहा था न, वो लेफ्ट वाला क्लच है और राइट वाला बराक है.

शिव : सॉरी वो में भूल गया, पर मेरी ये समाज में नहीं आ रहा की पैर दो hi है तो फिर यहाँ तीन तीन क्यों दिया है?

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Kyu की जब बराक करना होता है तब एक्सेलरेटर की जरुरत नहीं होती और जब अक्सेलराते करना होता है तब बराक की जरुरत नहीं होती. अब क्लच पूरा दबा दो (मेने दबा दिया) अब गियर को फर्स्ट में डालो (मेने डाला) नहीं ये थर्ड है (उसने नूट्रल किआ और फिर फर्स्ट में dala)Aise (फिर वापस न्यूट्रल कर diya)Ab रम करो. (मेने किआ) ये थर्ड है शिव (उसने नाराजगी से kaha)Ruko फि र बताती हु, (मेने अपना हाथ हटा लिया) अपना हाथ वापस रक्खो (मेने उनकी और देखा और वापस अपना हाथ रख दिया, उन्होंने मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रक्खा, उनके नाजुक नरम हाथ के छूने से मेरे अंदर जैसे करंट दौड़ गया, मेने एक सेकंड उन्हें देखा, हमारी नज़ारे टकराई, मेने नजर घुमा li)(Jhanvi मान में: शर्म तो देखो, यहाँ शर्माना मुझे चाहिए और शर्मा ये रहा है, अगर ये ऐसा न होता तो शायद में कभी इसकी और आकर्षित न होती, जहा लड़के लाटू बने घूम रहे है वह मुझे इसको पटना पद रहा है) (उन्होंने मुझे 1सत में गियर दाल के bataya)Aiiiiise.

शिव : ओह! थोड़ा जोर से उस और दबाना था, पहले बता देती.

जहान्वी : बता तो रही थी, तुमने ठीक से देखा नहीं.

शिव : आपने ऐसा नहीं कहा था की उसे जोर से दबाओ.

जहान्वी : तो क्या में सब कुछ बताउंगी, थोड़ा देख कर भी सिख लो. (मेने हलकी नाराजगी से dekha)Ab मुँह मात बनाओ, (वापस न्यूट्रल करते hue)ab तुम खुद करो. (मेने सही से 1सत में दाल diya)Ha ऐसे hi. अब क्लच को आहिस्ता आहिस्ता छोड़ना. (में छोड़ने लगा पर अचानक से गाड़ी ने झटका खाया और बंद हो gayi)Kya कर रहे हो, धीरे धीरे छोड़ना था न.

शिव : वैसे hi तो किआ था.

जहान्वी : क्या वैसे hi किआ था, दोबारा करो. (मेने फिर तरय किआ, फिर वही हुआ) फिर तरय करो (फिर वही hua)Kya कर रहे हो शिव, ठीक से करो, कितना आसान है.

शिव : मुझे भी यही लगता था, की कितना आसान है, पर अब नहीं लग रहा.

जहान्वी : होगा, फिर तरय करो. (फिर वही हुआ, गाड़ी ने झटका खाया और रुक गयी, उनके चेहरे पर नाराजगी थी) तुम उतरो, में फिर दिखती हु. (में उतर गया वो बेथ गयी, में बाजु में बेथ gaya)Ab देखो में कैसे करती हु. (में देख रहा था पर मेरी नजर उनके पैरो पर जा रही थी, में भी क्या करता, एक तो स्कर्ट छोटी थी और टंगे इतनी गोरी थी की नजर चली hi जाती थी, मुझे पता hi नहीं चला उन्होंने बता diya)Samaj में आया. (में हड़बड़ा गया, मेने तो कुछ देखा hi नहीं था)

शिव : सॉरी, वो एक बार फिर से बताइये न.

जहान्वी : क्या कर रहे हो शिव. निचे झुको और ध्यान से देखो. (मेने उनकी और dekha)Jhuko (हलके गुस्से से कहा, में झुक गया अब पेअर और नजदीक हो गए थे, जहान्वी ने भी ये देख लिया, उसे भी समाज आ गया की क्या माजरा है, वो शर्मा गयी, वैसे भी वो यही तो चाहती थी, पर उसने अपने आपको संभाला और kaha)Kaha देख रहे हो?

शिव : (में हड़बड़ा gaya)Wo वो क्लच.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Dhyan से देखो. (मेने ध्यान लगा कर देखा, कैसे उन्होंने गाड़ी चलायी, उनसे गाड़ी नहीं रुक रही thi)Samaj में आया.

शिव : हा. (में कंफ्यूज तो था hi पर लगा की हो जायेगा)

जहान्वी : चलो, फिर तुम तरय करो. (में वापस ड्राइविंग सीट पर बेथ गया, पूरी सिद्दत से में करने लगा, में आहिस्ता आहिस्ता क्लच छोड़ने लगा, गाड़ी थोड़ी हिली थी और फ्री थककककक. रुक गयी, मेने जहान्वी को देखा, वो नाराजगी से मुझे देख रही थी)

शिव : अब में क्या करू, जैसा बताया वैसा hi तो कर रहा था, कितना मुश्किल है ये.

जहान्वी : कोई मुश्किल नहीं है, में कितनी आसानी से चला लेती हु, क्या मुश्किल है मेरी समाज में नहीं आ रहा.

शिव : कोई बात नहीं, छोडो, मुझे नहीं आएगी शायद.

जहान्वी : ऐसे कैसे नहीं आएगी. एक आईडिया है. (वो उतरी और मेरी साइड आ गयी, में उतरने लगा तो वो boli)Nahi तुम बैठे रहो. (जहान्वी ने आस पास नजर दौड़ाई तो कोई नै tha,)Apane जुटे निकालो (उन्होंने अपने जुटे निकले, में वैसे hi बैठा tha)Nikaloooo. (मेने भी अपने जुटे निकल दिया, दोनों ने जुटे पीछे रख दिए, वो अंदर बैठने लगी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था, पर वो मेरी गॉड में बेथ गयी, उनके नरम गद्दे दर कूल्हे मेरे लुंड से सात गए, उनके शरीर की खुसबू मेरे अंदर भर गयी, मेरी आंखे बंद हो गयी) (जहान्वी को भी शर्म आ रही थी पर वो इस मौके का पूरा आनंद लेना चाहती थी तो उसने एक बोल्ड कदम उठा लिया था)

शिव : आप....

जहान्वी : चुप रहो, अब ध्यान से देखो, अपने पेअर फिर क्लच पर रखो, मेने पेअर रख दिया, उन्होंने मेरे पेअर के ऊपर अपने पेअर रख दिए, ठन्डे ठन्डे पेअर से मेरी गर्मी बढ़ने लगी, मेने अपने आपको सँभालने की कोशिस की, वर्ण लुंड खड़ा होना hi tha)Apane पेअर पर जरा भी जोर मात देना, मेरे पेअर को महसूस करना. (में मान में, वो hi तो नहीं करना चाहता, उन्होंने मेरी और देखा, तो मेरी आंखे जैसे नशीली हो चुकी thi)(Jhanvi उसकी हालत समाज रही थी, वो अंदर hi अंदर मुस्कुराने lagi)Ab ध्यान से महसूस करना, में कैसे करती हु (उन्होंने मेरे पेअर पर अपना पेअर दबाया, फिर गाड़ी गियर में डाली, फिर आहिस्ता आहिस्ता पेअर पे दबाव काम करने लगी, जैसे hi गाड़ी चलने लगी वो वही रुक गयी, फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने क्लच को पूरा छोड़ा, अब मुझे मेरी गलती समाज में आ गयी थी, थोड़ी दूर जा कर उन्होंने गाड़ी roki)Samaj में आया. (वैसे तो में समाज गया था पर उनका ऐसे गॉड में बेथ न मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मेने कहा)

शिव : एक बार और बता दीजिये (जहान्वी उसकी आवाज में आती कामुकता महसूस कर रही थी, वो समाज गयी की शिव की क्या हालत है, उसे भी मज़ा आ रहा था, वो फिर थोड़ी अच्छे से bethi)(Unke हिलने से में अपना आप खो बैठा और लुंड अपनी औकात में आने लगा, अब में क्या कर शक्ति tha)(Jhanvi फिर से उसे कर के दिखने लगी, दिखने के बाद उसने गाड़ी रोकी तो उसकी साँस अटक गयी, अपने कूल्हों के निचे उसे सख्त डंडा महसूस हुआ, ये सोच के की वो क्या है उसकी आंख बंद हो gayi)(Dono चुप थे, कोई कुछ बोल नहीं रहा tha)(Mene आस पास देखा तो कोई भी नहीं था, मेरा मान मचल रहा था, पर मेने अपने ऊपर काबू पाने की कोशिस ki)Me करता हु आप देखि ये. (मेने हॉकी लड़खड़ाहट से कहा)

जहान्वी : ह्म्म्मम्म. (उसकी भी सांसे तेज चल रही थी तो बोलने में दिक्कत हो रही thi)(Unki बगल से हाथ निकल ते हुए मेने स्टेरिंग पर रक्खा, मेरे हाथ पर उनके स्तन का साइड का भाग महसूस हो रहा था, मान किआ की दबोच लू, पर मेने अपने आपको संभाला, पर मेरी कमर ने हलके से ऊपर को झटका maara)(Jhanvi की आंखे बंद हो गयी, उसकी पंतय भीगने लगी thi)(Mene जैसे तैसे क्लच को संभाला और गाड़ी चलायी, गाड़ी बंद नहीं हुई (पर जहान्वी को कहा ध्यान था, उसका तो पूरा ध्यान अपने कूल्हे के निचे दबे उस डंडे पर था, वो अपने कूल्हे सिकुड़ कर हलके हलके झटके खा रही थी)

शिव : (गाड़ी रोक kar)Mene ठीक किआ न??? (जहान्वी ने कोई नवाब नहीं दिया, उसने सुना कहा जो जवाब deti)Mene ठीक किआ न (मेने फिर से पूछा)

जहान्वी : Hhhhh.....haaaa. (वो hadbadayi)Kya हुआ?

शिव : मेने ठीक किआ न, गाड़ी बंद नहीं हुई.

जहान्वी : हम्म हआ, फिर प्रैक्टिस करो (वैसे भी वो उतरना नहीं चाहती थी, शिव आगे देखने के लिए पूरी तरह से उस से सत्ता हुआ था, एक तरह से वो पूरी तरह से उसकी बहो में थी, उसका मान कर रहा था की खास शिव उसे पकड़ ले, दबोच ले उसे, उसकी हालत ख़राब हो रही थी, इस तरह की फीलिंग तो उसने कभी महसूस नहीं की थी, वो बहोत उत्तेजित हो रही थी, इस वक़्त अगर शिव उसको लेता कर छोड़ने भी लगता तो वो मन नहीं करती, शिव गाड़ी चला रहा था, वो बस गाड़ी को उठता और फिर रोक देता, बार बार के झटको से उसके कूल्हों पर लुंड की रगड़ हो रही थी, वो अपने कूल्हे अच्छे रगड़ना चाहती थी पर अभी वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी ) (थोड़ी देर बाद शिव बोलै)

शिव : मेने ठीक किआ न.

जहान्वी : Haa....(Ab उसके पास कोई बहाना नहीं था तो वो निचे उतर गयी, उसने एक नजर शिव की झांघो के जोड़ पर डाली तो वह एक बड़ा सा भाग फुला हुआ था, वो नहीं चाहती थी की शिव उसे देखते हुए देखे तो उसने फ़ौरन अपनी नजर हटा ली,)( पर शिव देख चूका tha.)(Baju की सीट की और बेथ ते hue)Thki है अब थोड़ी देर प्रैक्टिस करो.

हम दोनों थोड़ी देर प्रैक्टिस करते रहे, मेरा लुंड भी बेथ गया था. जहान्वी ने जी भर के उस उभर को देखा था क्यों की शिव गाड़ी चलने में व्यस्त था. वो आगे बढ़जाना चाहती थी पर जितनी भी बोल्ड हो वो अभी वो इतना भी नहीं खुली थी. हम दोनों वह से निकले उन्होंने मुझे घर छोड़ा. वो ज्यादा बात नहीं कर रही थी और न में ज्यादा बात कर पाया था. में उनकी कार को जाते हुए देखता रहा. मुझे घर आया देख सबको आश्चर्य भी हुआ. मेने कहा की काम नहीं था तो आ गया. फिर वह से जूही के साथ स्टेडियम चला गया. पता नहीं पर मेरा मान आज बिना मैडम को मिलने को कर रहा था, मेने महसूस किआ था की वो मुझसे नज़ारे चुराती थी, मुझे वजह समाज नहीं आ रही थी तो में बात करना चाहता था. जब जूही ऑफिस में अंदर गयी थी तो मेने मैडम को फ़ोन किआ.

बिना : (उसने शिव का फ़ोन देखा तो उसकी हालत ख़राब हो गयी, क्यों फ़ोन कर रहा होगा, ये सोच कर गभरहट होने lagi)Hhh hello..

शिव : Hello, कैसी हो?

बिना : म म में अच्छी हु, तुम?

शिव : में भी अच्छा हु, क्या कर रही है आप?

बिना : ममम में कुछ नहीं, बस टीवी देख रही थी.

शिव : ठीक है में आधे घंटे में आता हु.

बिना : क कक क्यों?

शिव : (मुझे उनकी घबराहट समाज में नहीं आ रही thi)aap ठीक तो हो न?

बिना : (सँभालते hue)H है ठीक हु.

शिव : कोई आया है क्या?

बिना : (एक लम्बी साँस ले kar)Nahi, यहाँ कोण आएगा.

शिव : आप ऐसे बात कर रही हो तो मेने सोचा कोई आया होगा.

बिना : तुम्हारे अलावा यहाँ कोई नहीं आता शिव.

शिव : ये आप कैसे बोल रही हो, मेने वैसे तो नहीं कहा था, मेरा मतलब था की कोई घर से आया हो.

बिना : नहीं, कोई नहीं आया.

शिव : तो में आ रहा हु.

बिना : न न नहीं, में अभी बाजार जा रही हु, मुझे कुछ सामान लाना है.

शिव : हम साथ में जायेगे, आप मेरा वेट करना.

बिना : नहीं, में चली जाउंगी.

शिव : में आ रहा हु, मेरा वेट करना. (शिव ने फ़ोन रख दिया)

बिना तेज तेज सांसे ले रही थी, क्या करे समाज में नहीं आ रहा था. एक बार तो हुआ की जो बोलै है वही करती हु बाजार चली जाती हु. पर वो शिव को नाराज भी नहीं कर शक्ति थी, उसने अपने आपको संभाला और शिव का इंतजार करने लगी.

वैस्वी अभी किताब बंद कर के बैठी थी, वो शिव के बारे में सोच रही थी. जब वो शिव को चिढ़ाती थी तो उसे बहोत अच्छा लगता था, जैसे जैसे उसके और शिव के बिछ बातचीत बढ़ रही थी वैसे वैसे शिव उसे और अच्छा लग रहा था. जितना वो शिव से दूर रहती शिव उतना hi उसके नजदीक आ रहा था. उस दिन शिव संयम के घर गया था, उस बारे में भी उसकी बात नहीं हुई थी. उसको संयम से कोई दिक्कत नहीं थी, पर उसे लग रहा था की संयम भी उसे पाने की कोशिस कर रही है, उसे बेचैनी हो रही थी. वो अपनी दोस्त और उसके बिच के सम्बन्ध को ख़राब नहीं करना चाहती थी, एक बार के लिए उसने शिव को भी किनारे कर दिया था, पर शिव के प्रति उसका लगाव और बढ़ रहा था. शिव के साथ बिताये पल बार बार उसके जहँ में आ रहे थे. शिव के घर में hi उसने शिव को किश किआ था, पता नहीं पर उसे दर नहीं लग रहा था, उसको इस बात की भी चिंता नहीं थी की किसी को पता चल जायेगा तो क्या होगा. जिस वक़्त वो दोनों अकेले में मिलते तो वो कितना आगे बढ़ गयी थी, अगर सही मौका होता तो पता नहीं वो क्या बेथ टी, ये सोच कर hi वो मन hi मन मुस्कुरा रही थी. उस से रहा नहीं गया और उसने शिव को मश्ग कर दिया.

वैस्वी : Hi.

थोड़ी देर वो फ़ोन को देखती रही पर सामने से कोई रिप्लाई नहीं आया. उसने घडी देखि तो पता चला की इस वक़्त वो स्टेडियम होगा या फिर किसी काम में बिजी होगा. थोड़ी देर तक वो मोबाइल लिए बैठी रही पर उसका कोई रिप्लाई नहीं आया. उसे शिव पर गुस्सा आ रहा था की कहा बिजी है.

शिव उस वक़्त जूही को ले कर उसके घर की और जा रहा था, जूही के घर पहुंच कर...

शिव : में तुम्हारा स्कूटर ले जाता हु, थोड़ी देर में वापस आ जाऊंगा.

जूही : कहा जा रहे हो?

शिव : बिना मैडम से मिलने.

जूही : है है जाओ, दुनिया भर से मिलने का समय है तुम्हारे पास बस में hi एक हु जिस से मिलने का मान नहीं करता (उसने अपना मुँह बना कर कहा)

शिव : अभी तक तो तुम्हारे साथ hi तो था.

जूही : वो भी क्या साथ होना था, अभी जैसे उनसे मिलने जा रहे हो वैसे बात कर रही हु (रूठते हुए उसने कहा)

शिव : अरे में बस मिलने जा रहा हु, और कुछ नहीं.

जूही : मुझे मात बनाओ, में सब जानती हु.

शिव : तुम भी न...

जूही : (मुँह बना kar)Ha है जाओ, पर जल्दी आना.

शिव : क्यों?

जूही : बस ऐसे hi.

शिव : (में muskuraya)Thik है.

में वह से निकल गया. में मैडम के घर पंहुचा, अभी में स्टैंड कर hi रहा था की उनका दरवाजा खुला, उन्होंने मुझे देखा फिर आस पास देखा, वैसे भी कोई बहार नहीं था, में अंदर चला गया. (बिना की धड़कने तेज चल रही थी, दोपहर में hi वो सोच रही थी की शिव से मुलाकात न हो तो अच्छा है और अभी वो उसके घर था, वो मन भी नहीं कर शक्ति थी) में अंदर चला गया, न उन्होंने मुझे आने को कहा न स्माइल दी, उनके चेहरे पर चिंता दिख रही थी, मुझे भी लगा की मुझे नहीं आना चाहिए था. में अंदर चला गया था, पर मेने दरवाजा बंद नहीं किआ.

शिव : कुछ हुआ है क्या? (बिना मेरी और देखे)

बिना : नहीं तो.

शिव : तो ऐसे क्यों बेहवे कर रही हो आप?

बिना : ठीक तो हु.

शिव : मेरा आना अच्छा नहीं लगा तो में चला जाता हु.

बिना : (भले hi वो उस बात से परेशान थी पर ऐसा भी नहीं चाहती थी, वो फ़ौरन उसकी और ghumi)Mene ऐसा तो नहीं कहा. (उसकी नजर दरवाजे पर पड़ी तो वो गयी और दरवाजा बंद कर दिया) वो इस वक़्त मच्छर आ जाते है न. (उसने बहाना बनाया)

शिव : (मुझे उनका बर्ताव कुछ अजीब लग रहा था, में उनके नजदीक गया तो वो मुझे देख कर विचलित होने लगी, मेने उनके दोनों हाथ पकड़े तो वो मेरी आँखों में देखने lagi)Kya हुआ है? (उदासी से उन्होंने न में गर्दन हिलायी) क्यों जूथ बोल रही है, आपका चेहरा कुछ और कह रहा है, मुझसे कोई गलती हो गयी है क्या (उन्होंने फिर ना में शिर हिलाया) किसी को पता चल गया? (उन्होंने फिर ना में गर्दन hilayi)To प्रॉब्लम क्या है.

बिना : नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं है शिव. (उनकी सूरत रोने जैसी हो गयी थी)

शिव : अगर मेरी वजह से है तो क्या में चला जाऊ? (बिना से बर्दास्त नहीं हुआ और वो शिव से लिपट गयी और रोने लगी)

बिना : शीइइइइव उउउहुउउ उउउउहुउउउ (वो रोने लगी, मेरी तो कुछ समाज आ नहीं रहा था की आखिर समस्या क्या है, तो में उन्हें बहो में भरे खड़ा रहा, थोड़ी देर तक वो रोटी रही, फिर रोना काम हुआ तो मेने उनको थोड़ा दूर किआ और उनका चेहरा जो ासु ो से भीग गया था मेने उसे साफ किआ)

शिव : कुछ तो बताइये, मेरा दिल बैठा जा रहा है.

बिना : कुछ नहीं शिव, अकेली थी न तो बेचैनी हो रही थी, और कुछ नहीं (उसने अपने आपको संभाला)

शिव : तो मुझे फ़ोन कर देती, में आ जाता.

बिना : (हलकी मुस्कराहट के sath)Bade आये आ जाता, पूरा दिन तो बिजी रहते हो. (शिकायत भरे स्वर में कहा)

शिव : बोलती तो, सब छोड़ के चला आता. (ये सुन कर बिना के चेहरे पर मुस्कान आ गयी)

बिना : सच???

शिव : और नहीं तो क्या, पता है में कितना परेशान हो गया था, आप बुजी बुजी सी क्लास में भी, आपको में ऐसे नहीं देख सका, इसीलिए तो आ गया. (बिना अपनी रोनी सूरत से मुस्कुरा रही थी, शिव का ऐसे केयर करना उसे बहोत अच्छा लगा था)

बिना : आओ बैठो, में पानी लती हु.

शिव : (पकड़ के बिठाते hue)Koi जरुरत नहीं है, आप बैठो. (बिना बेथ गयी, शिव उसे hi देख रहा था, उसके चेहरे पर उसके लिए चिंता थी, उसका मान किआ की वो शिव के गले लग जाये, उसे ढेर सारा प्यार करे, पर जो बात उसके दिल में बेथ गयी थी की शायद ये उसका देवर हो सकता है तो उसके कदम रुक gaye)(Wo मुझे देख रही थी और साथ में लग रहा है की किसी उधेड़बुन में लगी है, कोई तो बात thi)Kya हुआ, क्या सोच रही हो?

बिना : कुछ नहीं. (उसने हड़बड़ाके जवाब दिया)

शिव : कोई तो बात है, पर शायद आप बताना नहीं चाहती.

बिना : ऐसी कोई बात नहीं है शिव, शायद में hi कुछ ज्यादा सोच रही हु, और सोच सोच के बेचैन हो रही हु.

शिव : मेरे पास आपकी बेचैनी का इलाज है (मेने मुस्कुराते हुए कहा, वो मेरी आँखों में देख रही थी, में उनके चेहरे की और झुकने लगा, वो बस मुझे देख रही थी, पहले तो उनके चेहरे पर खुसी दिखी पर फिर अचानक उनके चेहरे पर उल्जन नजर आने लगी, पर में रुका नहीं और उनके होठो की और बढ़ गया, पर जैसे hi उनके होठो के नजदीक आया उन्होंने चेहरा घुमा लिया)

बिना : नहीं शिव.

शिव : (मेरी समाज में नहीं आ रहा था की आखिर हुआ क्या है, पर में उन्हें इस उल्जन से जैसे आज़ाद करना चाहता था, मेने उनका चेहरा पकड़ लिया और मेरे सामने कर दिया, वो छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, मेने सख्ती से पकड़ा हुआ था, वो मेरे हाथ के पंजो को पकड़ कर अपना चेहरा छुड़ाने की कोशिस करने लगी पर में रुका नहीं, आखिर कार मेने अपने होठ उनके होठो से लगा दिए, उन्होंने बहोत कोशिस की पर वो छूटन नहीं पायी, तो उन्होंने कोशिस छोड़ दी, में आहिस्ता आहिस्ता उनके होठो को चूमने लगा, वो कुछ नहीं कर रही थी पर कोई विरोध भी नहीं कर रही थी, में चूमता गया, उनके होठो को हलके हलके खींचते हुए चूसने लगा)

बिना : (वो थोड़ी देर विरोध कर रही थी पर जैसे जैसे शिव के होठ उसको चुम रहे थे उसका विरोध काम होता गया, आखिर कर उसने अपने हाथ शिव के शिर के पीछे लगा दिए और शिव को चूमने लगी, वो जोर जोर से शिव को चूमने लगी, वो शिव पर जैसे चढ़ने लगी तो शिव सोफे पर पीछे लेट गया और वो उसके ऊपर चढ़ के उसको किश करने लगी, शिव के हाथ भी अब उसके कूल्हों को मसल रहे थे, वो आंखे बंद किये हुए उसे किश कर रही थी, उसे अपनी योनि पर शिव का लिंग भी महसूस होने लगा तो वो गरम होने लगी वो सब भूल गयी और अपनी कमर हिलने लगी)

शिव : (में उनके कूल्हों को अच्छे से मसल रहा था, वो मुझे किश कर रही थी, वो अपनी कमर हिला रही थी जिस से मेरा लुंड कड़क हो चूका था, मेने उनकी कमीज ऊपर की और उनकी सलवार के ऊपर से उनके सुडौल कूल्हों को मसलने लगा और ुंली से छूट को छेद ने लगा)

बिना : (जैसे hi शिव ने छूट को छुआ, बिना हड़बड़ा गयी और उसका मान कहने लगा रोक अपने आप को रोक ले, और वो कड़ी होने लगी)

शिव : (वो मुझसे दूर होने लगी, मेरी समाज में नहीं आया पर मेने उन्हें रोका नहीं, वो सोफे पर बेथ गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, में भी बेथ गया, और उनका हाथ पकड़ kar)Kya हुआ? (उन्होंने न में गर्दन हिलायी) क्या परेशानी है, बताएंगी तभी तो पता चले गए. मेरा आना या ऐसा करना आपको पसंद नहीं है?

बिना : (उसका हाथ जोरो से पकड़ kar)Aisi बात नहीं है शिव.

शिव : तो आखिर बात क्या है?

बिना : में अभी कुछ नहीं बता सकती, में खुद नहीं जानती हु शिव.

शिव : ऐसी क्या बात है?

बिना : में खुद नहीं जानती हु शिव, मेरा यकीं करो.

शिव : लोई तो चीज है जो आपको रोक रही है, एक बात पुछु, सच सच जवाब देंगी (बिना ने असहयतासे शिव को dekha)Aap मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली है इस बात से तो विचलित नहीं है न?

बिना : ये क्या बोल रहे हो तुम?

शिव : नहीं अगर ऐसा है तो मेने सुना है की एबॉर्शन भी होता है.

बिना : (गुस्से से मेरी और देख kar)Maar दूंगी तुम्हे जो फिर कभी ऐसा बोलै तो, (फिर अचानक रोने lagi)Aisi बात नहीं है शिव, तुम नहीं संजोगे, में खुस हु की मेरी कोख में बच्चा है.

शिव : पर शायद इस्सलिये खुस नहीं की ये मेरा बच्चा है, आपके पति का नहीं.

बिना : ऐसी कोई बात नहीं है शिव, अब में कैसे तुम्हे संजो.

शिव : जो भी है, बोल दो.

बिना : क्या बताऊ तुम्हे, जब मुझे hi नहीं पता है.

शिव : क्या नहीं पता है?

बिना : यही की तुम मेरे देवर हो की नहीं.

शिव :देवर???

बिना : है शिव, मुझे ऐसा लग रहा है की तुम मेरे देवर हो.

शिव : वो कैसे?

बिना : मुझे नहीं पता (उसने फ़्रस्ट्राटे हो कर कहा)

शिव : कुछ तो पता है आपको, ऐसे hi तो नहीं सोचा होगा?

बिना : हमारे घर में कोई भी माँ नहीं बन रही थी, फिर अचानक तुम हमारी जिंदगी में आये, में माँ बन रही हु, ममतादिदी माँ बन रही है, स्वर्णादिदी माँ बन रही है... क्यों? कैसे? ऐसा क्या हो गया अचानक.

शिव : इसमें कोनसी बड़ी बात है, अगर कोई किसी के साथ ऐसे रहेगा तो प्रेग्नेंट तो होगा hi.

बिना : तो क्या हम, हमारे पति के साथ नहीं रहती थी, मेरा छोडो, ममतादिदी और स्वर्णादिदी, उनका तो सब सही था, फिर क्यों माँ नहीं बानी.

शिव : उनमे कोई दिक्कत होगी.

बिना : हो सकती है, पर सबमे एक साथ? कैसे?

शिव : वो मुझे क्या पता, पर इस से में आपका देवर कैसे हो गया?

बिना : मेरे चाचा ससुर का एक लड़का था, शिवांस, वो नदी में दुब कर मर गया है ऐसा सब सोचते है, पर मुझे लगता है की वो तुम हो.

शिव : (मुझे झटका laga)Meeee?????

बिना : तुम्हे ममता दीदी जब पहली बार मिली थी तब क्या कहा था?

शिव : क्या कहा था?

बिना : उन्होंने नहीं कहा था की वो तुम्हे पहचानती है ऐसा उन्हें लग रहा है?

शिव : है कहा था.

बिना : तो उन्हें ऐसा क्यों लगा?

शिव : मुझे क्या पता?

बिना : हो सकता है की तुम्हारा चेहरा बता रहा हो, वैसे भी एक कुटुंब के लोगो की सकल मिलती है.

शिव : तो आप भी अपने घर के लोगो को जानती hi हो न, आपको मेरी सकल जनि पहचानी नहीं लगी.

बिना : नहीं.

शिव : तो फिर, यु hi आप बात बना रही हो, और वैसे भी आपने कहा न की वो क्या नाम बताया, वो लड़का तो मर गया है न.

बिना : शिवांश.

शिव : है वही, और जैसा की अपने कहा की मेरी सकल मिल सकती है तो आपके दूसरे घरवालों के साथ भी मेरी सकल मिलनी चाहिए न, क्या आपको लगता है?

बिना : (उसके चेहरे को देख रही थी, वो अपने ससुर को जानती थी, अपने चाचा ससुर को जानती थी, कद काठी तो वैसी hi लगती थी, पर सकल अलग दिख रही thi)Nahi.

शिव : आप यु hi परेशान हो रही हो. और ज्यादा सोच सोच कर अपनी तबियत ख़राब कर लोगी, एक काम करो, आप मेरे साथ चलो.

बिना : कहा?

शिव : मेरे घर.

बिना : नहीं, में ठीक हु.

शिव : मेने कहा न चलो, मतलब चलो.

बिना : पर में ऐसे कैसे?

शिव : (हाथ पकड़ kar)Jaisa की आपको लगता है की हमारा रिस्ता क्या हो सकता है, पर क्या आपको ये नहीं दिख रहा की हमारा रिस्ता क्या है (एक हाथ उनके पेट पर रखते hue)Is से इंकार है आपको?

बिना : नहीं शिव, कभी नहीं.

शिव : तो इस रिस्टमे में आपका क्या लगा? (बिना शर्मा गयी) अब चलो, और है कपडे ले लेना, कल वही से स्कूल चले जायेंगे. आप अपना स्कूटर भी ले लो, ये जूही का है तो उसे देते चलेंगे.

बिना : (हलके कन्फूसिओं me)Juhi क्या कहेगी???

शिव : कुछ नहीं कहेगी, ज्यादा न दिमाग मात लड़ाइये. (बिना सचमे रिलैक्स हो चुकी थी, वो अंदर गयी और एक बैग में कपडे रक्खे और स्कूटर ले कर शिव के साथ चल पड़ी)

बिना : (मान me)Sahi तो कहता है ये, अब जो रिस्ता बन चूका है उसे कैसे बदल सकती हु, और शिव hi शिवांस है इसका भी कोई लॉजिक या प्रूफ नहीं है, में ख़म खा hi कुछ ज्यादा सोच रही हु. वो मेरा कितना ख्याल रख रहा है, देखा नहीं कैसे परेशान हो गया, मुझे अकेले भी नहीं रहने दिया.

शिव : (जूही के घर जा के दरवाजे की बेल्ल बाजई) (बिना बहार hi कड़ी थी, उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो शिव के साथ उसके घर जा रही थी, पता नहीं जूही क्या सोचेगी) (जूही ने दरवाजा खोला, और जब उसने शिव को देखा तो वो रोज की तरह उसके गले लग gayi)Kya कर रही हो, मैडम है साथ में.

जूही : कोण मैडम?? (उसने आस पास देखा तो उसे बिना मैडम दिखाई दी, वो शर्मा गयी)

शिव : लो चाबी.

जूही : क्यों दिल नहीं भरा जो साथ में आगयी, रात वही रुकनेवाले हो kya???(Juhi ने टॉन्ट मारा)

शिव : मार खाओगी तुम, कुछ भी बोलती हो, वो परेशान है, अकेली है तो मेने सोचा की अकेले अकेले अपनी तबियत ख़राब कर लेगी तो अपने साथ ले जा रहा हु.

जूही : क्यों क्या हुआ?

शिव : परेशान थी वो, मुझे लगा की उन्हें अकेले छोड़ना ठीक नहीं. वैसे भी वो तुम्हारी भी रिस्तेदार है, ऐसा क्यों नहीं करती अपने घर रख लो.

जूही : में तो ऐसे hi कह रही थी, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, ले जाओ तुम.

शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती, वो तुम्हारी रिस्तेदार है, उनका हल चल पूछो, अपने वह ठहरने का बोलो, बिलकुल अकाल नहीं है तुम में.

जूही : (अपना मुँह बनाते हुए, बिना मैडम की और चली gayi)Bahar क्यों कड़ी हो भाभी, अंदर आओ न.

बिना : नहीं, वो में...

जूही : शिव ने बताया, आप मेरे घर रुक जाओ न.

बिना : नहीं... में वो तुम्हे परेशान नहीं करना चाहती.

जूही : मुझे क्या परेशानी है (शिव भी वह आ गया था, बिना शिव को देखने लगी)

शिव : आप जैसा ठीक समजे, वैसे भी आप रिस्तेदार है, जूही को भी अच्छा लगेगा.

बिना : ठीक है.

शिव : ठीक है, आप जाओ, में चलता हु.

बिना : मेरा स्कूटर ले जाओ.

जूही : नहीं भाभी, उसे जाने दो (शिव ko)Daudte हुए जाना, आज कल बहोत अलशी हो रहे हो.

शिव : जी मैडम, (बिना ko)Bye.

बिना : Bye.

जूही : और अब कही मात जाना, सीधे घर, समजे (उसने ऐसे कहा जैसे आर्डर दे रही हो, में हस्ते हुए दौड़ते हुए वह से निकल गया) आइये भाभी.

बिना : तुम मुझे भाभी क्यों बुला रही हो? (हल्का शरमाते हुए)

जूही : आप भाभी की भाभी हो तो और क्या कहु?

बिना : हम्म्म्म. (दोनों अंदर आ gaye)Waise शिव बहोत डरता है तुमसे. (उसने मुस्कुरा कर कहा)

जूही : (हल्का शर्मा kar)Koi डरता वार्ता नहीं, बस नाटक है उसके.

बिना : लगता है बहोत पसंद करती हो?

जूही :वो तो आप भी करती हो (अचानक जूही के मुँह से निकल गया, फिर उसको अपनी गलती का एहसास हुआ, पर वो बोली कुछ नहीं, बीन अभी चुप hi रही, उसे भी शर्म आ रही थी) खाना खाया आपने?

बिना : है खा लिया, अकेली होती हु तो जल्दी खा लेती हु.

जूही : मेरा भी वैसा hi है, कफ पियोगी?

बिना : ठीक है, बना लो.

जूही : शिव बता रहा था की आप परेशान है, क्या हुआ?

बिना : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi.

जूही : आपको अकेला लग रहा हो तो मेरे साथ आ जाया करो, में भी अकेले hi होती हु.

बिना : तुम डिस्टर्ब होगी.

जूही : में क्यों डिस्टर्ब होने लगी, आप आ सकती हो.

बिना : ठीक है, आ जाउंगी, वैसे भी तुम्हारी मम्मी से बात हुई थी, वो भी बोल रही थी, तुम्हे समजने को बोल रही थी. (दोनों किचन में थी)

जूही : शादी के लिए न. वो एक मौका नहीं छोड़ती.

बिना : सच hi तो कह रही है, आज नहीं तो कल करनी hi है, वैसे शिव भी अच्छा hi है. (जूही शर्मा gayi)Kahe तो में बात करू?

जूही :नहीं भाभी, ऐसी बात नहीं है, में चहु तो में भी कर सकती हु, पर शादी मेरे लिए ठीक नहीं है, आपतो जानती hi हो की शादी के बाद बच्चे की ख्वाहिस होती है, अभी कुछ साल में ये नहीं कर सकती.

बिना : और शिव ने कही और कर ली तो?

जूही : (हलकी उदास हो gayi)Kya कर सकती हु, वो लड़का है, वो कर सकता है, हम लड़कीओ का शरीर हमे इजाजत नहीं देता.

बिना : करियर के पीछे कही वो न छूट जाये.

जूही : क्या कर शक्ति हु भाभी, है अगर मौका मिला तो उसकी दूसरी बीवी बन जाउंगी, मुझे कोई दिक्कत नहीं.

बिना : पागल है क्या? ऐसा थोड़ी न होता है?

जूही :अच्छा hi है न भाभी, उसके बच्चे होंगे, मुझे भी अच्छा लगेगा, टाइम आने पर में भी बच्चे ले आउंगी, यही बेस्ट सलूशन लग रहा है.

बिना : पागल है तू, ऐसा कोई सोचता है?

जूही : अकेली रह जाऊ उस से तो यही अच्छा है, अगर वो कहेगा तो में तो तैयार हु. और अभी से क्या सोचना, अभी समय है. न वो अभी शादी कर रहा है न में.

बिना : और तुजे क्या लगता है की उसकी जो भी बीवी होगी वो मानेगी?

जूही : क्या पता? छोड़िये इन बातो को, अभी से क्या सोचना.

वो दोनों ऐसे hi बाटे करती रही. में घर पहुंच गया था. मेने खाना खाया. मेरा ध्यान मोबाइल पर गया तो देखा की वैस्वी का मश्ग आया हुआ था. मेरी समाज में नहीं आया की इसने क्यों मश्ग किआ. मेने भी “Hi “ लिख कर भेज दिया.
 
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