अपडेट 151
जहान्वी मुझे छोड़ के वापस लौट गयी, में उसे जाता देख रहा था, और उसकी उदासी या नाराजगी का कारन समझने की कोशिस कर रहा था, पहले मेने उसके साथ जो बदतमीजी की थी तब भी वो मुझसे नाराज थी, पर आज तो मेने ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किआ था, अच्छे से पेश आया था, फिर भी वो नाराज थी या उदास थी, मुझे लगा की कोई और वजह होगी. में घर के अंदर चला गया, मेने सबको खुशखबरी दी की कागजात मिलगये है, सब खुस हो गए, उनके चेहरे की हसी लौट आयी थी. में वह से जूही के घर चला गया, जैसे hi उसने दरवाजा खोला में अंदर गया और उसको बहो में ले लिया, वो भी खुस हो गयी.
जूही : क्या बात है, आज बड़ा प्यार आ रहा है?
शिव : एक खुस खबरि है.
जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Kya?
शिव : अनाथालय का प्रॉब्लम सोवे हो गया, कागजात मिल गए.
जूही : क्या सच में? वाओ! ये तो सचमे बहोत बड़ी खुस खबरि है.
शिव : ये तुम सबके सपोर्ट से hi मुमकिन हुआ है, थैंक यू.
जूही : ऐसा कैसा थैंक यू, थैंक यू कहना है तो अच्छे से कहो. (उसने नटखट सी स्माइल दी, में उसकी बात समाज गया और उसके होठो से होठ जोड़ दिए, वो भी सिद्दत से मुझसे लिपट गयी, कुछ देर तक हम होठो से लड़ते रहे, उसके गीले मखमली होठो ने अपना एस्सार दिखाड़िया और मेरा लुंड खड़ा हो gaya)(Juhi को भी वो चुभन महसूस हुई, उसका शरीर गंगना गया, उसने अपनी छूट वाले भाग पर लुंड की चुभन महसूस की तो वो जोरो से शिव के होठो को चूसने लगी, शिव के हाथ भी उसके कूल्हों पर चले गए और अपने लुंड की और खींचते हुए लुंड से छूट पर दबाव बनाने लगा, छूट के होठ भी फ़ैल गए थे, अगर कपड़ा बिच में न होता तो आज लुंड अंदर चला जाता, उसकी सांसे तेज हो गयी, पर शिव जल्द hi संभल गया और उसने पकड़ ढीली छोड़ दी, जूही ने भी अपने आपको संभाला और किश तोड़ दी, वो आंखे बंद किये हुए गहरी गहरी सांसे ले रही थी, बीर नशे से बोजिल आँखों से उसने शिव को नाराजगी से देखा, जैसे कह रही हो की क्यों रुक गए? वो मुस्कुराया, जिस पर वो प्यार से चीड़ gayi)Maar दूंगी में तुम्हे.
शिव : (अनजान बनते hue)Kyu? मेने क्या किया?
जूही : सब समझते हो तुम, बहोत गंदे हो तुम, मेरी भावनाओ को भी नहीं समझते.
शिव : सब समझता हु, मेने कहा है न की जल्द hi हम वो सब करेंगे, चाहो तो उस दिन की तरह अभी तुम्हे अपने मुँह से मज़ा दे सकता हु.
जूही : (शर्मगाई, अपनी नज़ारे निचे kiye)Nahi, मुझे अब पूरा मज़ा चाहिए.
शिव : वो दिन भी जल्द आएगा.
जूही : मुझे इंतजार है उस दिन का, तुम बैठो में दूध ले कर आती हु. (वो चली गयी, में सोचने लगा की क्या मुझे वो सब कर लेना चाहिए, अब वो इतना सब बोल चुकी है, हमने ओरल भी कर लिया है, पर फिर मेरा दिल कह रहा था की अब ये बात एक लक्ष्य के साथ जुड़ चुकी है, और उस लक्ष्य को पाने के लिए, ये बात उसकी मदद कर रही है तो मुझे सबर करना चाहिए, जिस दिन वो नाथिओनल में पहुंच जाएगी में उस खुसी को सेलिब्रेट करूँगा, और उसके सरे अरमान पुरे करूँगा, मेरे लिए भी वो सब उतना hi महत्व रखता है, भले hi में सब कुछ कर चूका हु पर किसी के साथ पहली बार करने का एक महत्व होता है और मुझे उसकी खुसी भी महसूस होती है, हर लड़की मेरे जीवन में महत्व रखती है, में जूही का वो पल यादगार बनाना चाहता हु. जितना उसके लिए वो पल महत्वपूर्ण है उतना hi मेरे लिए भी hai.)Kya सोच रहे हो? (वो दूध लिए हुए कड़ी थी, मेने मुस्कुरा कर दूध लिया)
शिव : तुम्हारे बारे में सोच रहा था. (वो भी अपना गिलास लिए साइड में बेथ गयी)
जूही : मेरे बारे में? ऐसा क्या सोच रहे थे? (में दूध पिने लगा तो कुछ देर शांत रहा, उसने भी अपना दूध पि लिया)
शिव : (अपना मुँह पोछते hue)Wo hi जो तुमने अभी अभी कहा.
जूही : (उसके गाल लाल हो gaye)Aisa क्या सोच रहे the?(Usne शर्मा के पूछा)
शिव : में वो दिन सोच रहा था जब हम दोनों नेशनल के लिए सेलेक्ट हो गए होंगे, वो रात हमारी होगी. (जूही उसकी आँखों में वो चमक देख सकती थी)
जूही : (उसके नजदीक खिसक कर उसके कंधे पर अपना शिर रख kar)Sorry यार, में कभी कभी बहक जाती हु, तुम मेरे लिए कितना सोचते हो, कभी कभी तो मुझे लगता है की तुम सचमे मुझे प्यार करते हो.
शिव : (उसको अपने से दूर कर के उसकी आँखों में देख kar)Lagta है से क्या मतलब है, क्या मेने नहीं कहा की में प्यार करता हु.
जूही : (फिर से नटखट सा हंसी और दूर से hi होठ सिकुड़ कर किश kia)Lagta है पर फिर तुम्हारी दूसरी चहनेवालिया भी याद आ जाती है, तो फिर शक होने लगता है, क्या करू, कभी ऐसा देखा नहीं न, हमेशा यही सुना है की सिर्फ दो लोग hi आपस में प्यार करते है.
शिव : तुम्हे पता है की में दुसरो से भी प्यार करता हु तो क्या तुम्हे मेरे प्यार में कोई कमी लगी?
जूही : नहीं लगाती, वो hi बात तो समाजमे नहीं आती. खैर छोडो, स्टेडियम चलो, में कोई कसार नहीं छोड़ना चाहती, वर्ण में तुम्हे कैसे पाऊँगी.
शिव : ये नहीं कहा की नेशनल कैसे पहुचुँगी.
जूही : नहीं, अब नेशनल इसलिए जाना है ताकि तुम्हे प् सकू, क्यों तुम्हे कोई प्रॉब्लम है?
शिव : तुम लड़कीओ का भी कुछ समाज नहीं आता, पुरे घर से, समाज से बगावत कर के खेल में आयी हो और अब मुझे पाना है.
जूही : ज्यादा स्मार्ट मत बनो, चलो वर्ण फिर न कहना की में बाहेक गयी, अभी के अभी तुम्हारा रपे कर दूंगी.
शिव : मेरा रपे करोगी?
जूही : है, अब चलो भी. (मुझे खींचते हुए उठाया, हम दोनों स्टेडियम चले गए, हम दोनों ने जी तोड़ म्हणत की, फिर हम वापस निकले, उसने puchha)Aaj किस सौतन के वह छोड़ना है तुम्हे?
शिव : (अभी रास्ता सुमसान था तो मेने अपने हाथ आगे किये और उसकी कठोर गोलाइयों को थम liya)Kahi नहीं जाना है, कहो तो तुम्हारे साथ चलता हु.
जूही : ोूच! क्या कर रहे हो बेशरम, जब कहती हु तो पीछे हैट जाते हो और अब मुझे परेशान कर रहे हो.
शिव : (उसके कठोर गोल स्तन को हलके हलके दबाते hue)Kitne मस्त है ये.
जूही : शह्ह्ह्ह, रस्ते पर है शिव, कोई देख लेगा.
शिव : मेरा ध्यान है, कोई नहीं है.
जूही : में मार दूंगी तुम्हे, करते कुछ नहीं और मुझे परेशान करते हो, खुद तो कही जा कर ठन्डे हो जाओगे, में कितना जलती हु पता है.
शिव : घर चलो, ठंडा कर देता हु. (तभी मेने देखा की सामने से कोई आ रहा है तो मेने हाथ हटा लिए)
जूही : (रहत की साँस लेते hue)Muje नहीं होना ठंडा, तुम हो लेना, में इस आग को बुजणेदेना नहीं चाहती, ये तड़प मुझे उस लक्ष्य की याद दिलाती है.
शिव : सच कह रही हो तुम, में भी रोज तुम्हे देखता हु, तुम्हारी खूबसूरती को पाना चाहता हु, तुम्हारे साथ सब करना चाहता हु, और वो तड़प मुझे और म्हणत करने को उकसाती है.
जूही : थैंक यू शिव, मुझे इतना महत्व देने के लिए, ी लव यू.
शिव : ी लव यू तू स्वीटहार्ट. (मेने उसकी पीठ पर किश किआ, जूही के चेहरे पर भी मुस्कान तैरने लगी, उसने मुझे घर छोड़ दिया)
फ्रेस हो कर कपडे बदल कर में बहार आया तो सब अभी खाने की तयारी कर रहे थे, में छत पर चला गया, मेने काव्यजि को फ़ोन लगा दिया, कागजात के बारे में बात कर ली हमने. फिर मेने पूछा
शिव : अभी बसी हो आप?
काव्य: नहीं, अभी तो नहीं, बस कुछ केस को लेकर सोच रही थी, क्यों?
शिव : कुछ नाह बस थैंक यू कहना था.
काव्य : क्यों?
शिव : आपके सपोर्ट के लिए.
काव्य : तो उसके लिए मेरा फ्री होना क्यों जरुरी था, वो तो तुम मुझे वैसे भी कह सकते थे.
शिव : ी लव यू. (अचानक सुन कर काव्य की धड़कन बढ़ गयी, वो रिलैक्स बैठी थी तो सीधी हो गयी)
काव्य : क्या? क्या कहा तुमने?
शिव : (उन्होंने ऐसे पूछा तो में हल्का सा दर gaya)Dekho फिर आप डांटने लगी, इसीलिए में कहता हु की मुझे दर लगता है आपसे.
काव्य : (खिलखिला कर हस्ते हसने लगी, थोड़ी देर baad)Mene कहा डांटा, में तो बस पूछ रही थी, ऐसे अचानक बोलोगे तो विस्वास नहीं होता न. ठीक है अब अच्छे से पूछती हु, क्या कहा तुमने?
शिव : (उसनहोने इतने प्यार से पूछा की मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)I लव यू.
काव्य : (ये सुन कर उसे बहोत अच्छा laga)Aaj अचानक कैसे प्यार उभर आया?
शिव : वकील हो न, शक करना नहीं छोड़ती. (मेने हलकी नाराजगी से कहा)
काव्य : (वो फिर hasi)Ab जो हु वो तो रहूंगी न, अपने आपको बदल थोड़ी न सकती हु. तो जवाब दो.
शिव : बोलने को दिल किआ तो बोल दिया, आपको थैंक यू कहु वो मुझे अच्छा नहीं लगा, मुझे लगा की थैंक यू से ज्यादा ये कहना अच्छा रहेगा, मेने कुछ गलत किआ?
काव्य : (वो मान hi मान बहोत खुस हो रही थी, वो किसी लड़की के जैसा महसूस कर रही थी, उसकी आवाज में भी शर्म उतर आयी थी, उसने आहिस्ता से kaha)Nahi, कभी सोचा नहीं था की ऐसा सुन ने को मिलेगा, क्या कर रहे हो तुम?
शिव : क्यों?
काव्य : घर आ जाओ न. (उसने रिक्वेस्ट करते हुए कहा)
शिव : क्यों ?
काव्य : (मान में: क्यों क्या बुद्धू, गुम्हे गले लगाना है, तुम्हारी बाहोंमे आना है, किश करना है)
शिव : (वो खामोस हो गयी तो मेने puchha)Kya हुआ?
काव्य : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi कह रही थी.
शिव : वैसे तो आ जाता, पर कोई नहीं, कल मिलता हु आपसे, चलेगा न?
काव्य : हम्म्म्म. (तभी उसने देखा की कोई मिलने आ रहा hai)Suno, कल मिलते है, क्लाइंट आये है.
शिव : ठीक है, टेक केयर, bye, लव यू.
काव्य : हम्म्म. (वो जवाब तो देना चाहती थी पर क्लाइंट की वजह से दे नहीं पायी, पर वो बहोत खुस थी)
मेने फ़ोन रख दिया, फिर भार्गवी को फ़ोन लगाया.
भार्गवी : है बोलो.
शिव : ी लव यू.
भार्गवी : (किसी को कहते hue)Aap ये सब रिपोर्ट बना दो, में बाद में कल देख lungi(Fir वो उसके जाने का इंतजार करने लगी, जैसे hi वो बहार गया, मुस्कुराते हुए boli)Bade रोमांटिक हो रहे हो, क्या बात है?
शिव : अभी भी स्टेशन में hi हो?
भार्गवी : है यार, थोड़ा काम था, अब घर hi जा रही हु, (फिर उसने सोचा की शिव रोमांटिक हो रहा है तो वो आने वाला hoga)Kya हुआ, आ रहे हो? (उसके आवाज में उत्साह था)
शिव : दिल तो है, पर घर पे हु, और अभी निकल नहीं सकता.
भार्गवी : क्या यार (वो थोड़ी निराश हो gayi)muje लगा की मस्का मार रहे हो तो आ रहे होंगे. (उसकी आवाज में निरसा साफ़ झलक रही थी)
शिव : में मस्का नहीं मर रहा था, जो था वो कह रहा था, क्या हुआ मान कर रहा था?
भार्गवी : (थोड़ा शर्मा gayi)Wo तो करेगा hi, खास ऐसा दिन होता की में जब भी घर औ तो तुम मिलते. (उसने दुखी मान से कहा)
शिव : आप क्या चाहती हो की में हाउसवाइफ की तरह हौसलोवर बन जाऊ.
भार्गवी : (है पड़ी) मेरा मतलब वो नहीं था, और अगर ऐसा हुआ तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, छोडो उस बात को, क्यों फ़ोन किआ?
शिव : खुसखबरी सुनाने के लिए, अनाथालय वाला प्रॉब्लम सोल्वे हो गया है, कागजात मिल गए है.
भार्गवी : सच में, ये तो बहोत अच्छी खबर है (खुस होते hue)Kaise हुआ ये सब?
शिव : वो जब मिलूंगा तब बताऊंगा. अभी आप घर जाइये और आराम कीजिये.
भार्गवी : क्या तुम सचमे नहीं आ शक्ति? (उसकी आवाज में बहोत तड़प थी)
शिव : संजोना यार, अभी नहीं आ सकता, पर जल्द hi मिलूंगा.
भार्गवी : ठीक है.
शिव : ऐसे उदास मात हो, मिलूंगा न जल्दी.
भार्गवी : (नार्मल हो ke)Jaldi आना. ी मिस यू सो मच बेबी.
शिव : ी मिस यू तू डिअर. Bye लव यू, टेक केयर.
भार्गवी : लव यू तू, bye.
मेने फ़ोन रख दिया, और सोचने लगा की आज में सब से खुल कर प्यार का इजहार कर रहा हु, और अच्छा भी लग रहा था, जो है उसे कहने में क्या बुराई है, मेने पवनसीर को भी खुशखबरी दे दी, स्नेहा से भी बात हुई, मेने बिना मैडम को भी बोल्दिया, वो भी मुझे बुला रही थी, उन्हें भी संजना पड़ा. उसके बाद मुझे जहान्वी याद आयी, भले hi वो किसी बात पर नाराज थी पर थैंक यू तो बनता था, तो मेने उसे फ़ोन नहीं किआ पर मश्ग लिख दिया. “थैंक यू सो मच, आपने जो कुछ भी किआ है मेरे लिए उसके लिए बहोत बहोत सुक्रिया, ये एहसान रहेगा मेरे ऊपर, गुड नाईट, टेक केयर”
मुझे याद आया की मुझे मंतभाभी को भी फ़ोन करना है पर अभी करना सही नहीं था, तो मेने सोचा की कल जूही के फ़ोन से बात कर लूंगा, ताकि किसी और ने उठाया तोभी कोई दिक्कत न हो.
मेने देखा की एक मश्ग भी आया हुआ है, देखा तो नाज़िआदिदी का था, लिखा था “आये नहीं तुम, कितना इंतजार किआ” मुझे याद आया की उन्होंने बुलाया था, पर भागादौड़ी की वजह से जा नहीं पाया में, मेने सॉरी लिखा और कल आने को बोल्दिया. जब में निचे आया तो सब मेरा hi वेट कर रहे थे.
सरिता : बहोत लम्बी बात चली, किसके साथ बात कर रहा था?
शिव : सबको बता रहा था की कागजात मिल गए है, सबने म्हणत की थी तो थैंक यू तो बोलना पड़ेगा न.
सरिता : में तो ऐसे hi कह रही थी, मुझे क्या जिस से भी बात करो.
शिव : है है, मुझे आपके चेहरे से hi पता चल रहा है की ‘आपको क्या?’.
सरिता : तो क्या हुआ, नजर तो रखनी पड़ती है, क्यों लता?
लता : मुझे मात घसीट इसमें, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है वो किसी से भी बात करे, (मुझे थाली देते hue)Le तू खाना खा, उसका तो चलता hi रहेगा. (में मुस्कुराया और खाना खाने लगा) मेरी एक और रंजन बैठी थी और दूसरी और विणा बैठी थी, लतादिदी, गायत्री और सरितादिदी सामने बेथ गयी, हम खाने लगे. खाना खाने के बाद.
सरिता : राजा, तू और विणा गायत्री के साथ सो जाना.
रंजन : में नहीं सोनेवाली, मुझे अभी पढ़ना है.
सरिता : तो पढ़ने के बाद सो जाना. (गायत्री सुन रही थी)
रंजन : आप सो जाना, आपको क्या प्रॉब्लम है? (सरिता, मान में गालिया दे रही थी, पर खुल कर तो कह नहीं सकती थी की मुझे शिव के साथ सोना है)
सारतीता : तुजे बोलै न की वह सो जाना.
रंजन : में नहीं सोनेवाली. (सरिता को गुस्सा आ रहा था की वो उसे धो डेल, लता मान में मुस्कुरा रही थी, मान तो उसका भी था की वो शिव के साथ सोये)
शिव : (सरितादिदी se)Aap क्यों उसको कह रही हो, नहीं सोना तो रहने दो न.
सरिता : में तो इस्सलिये कह रही थी की तुजे अकेले सोना पड़ता है, में और लता तेरे साथ आते है तो गायत्री अकेली हो जाती है.
रंजन : (मौके पे चौका मरते hue)Koi बात नहीं, में और विणा शिव के साथ सो जायेंगे. (विणा के तो दिल की धड़कन hi चक गयी)
सरिता : क्यों अब पढ़ाई नहीं करनी? (टॉन्ट मरते हुए)
शिव : में एक काम करता हु, में hi गायत्रीदिदी के साथ सो जाता हु, प्रॉब्लम सोल्वे. (ये सुन कर, गायत्री की धड़कन चूक गयी, वो काम करते करते रुक गयी और शिव को देखने लगी) क्यों दीदी आपको तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न? (गायत्री ने शर्मा के न में गर्दन हिलायी) बस प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी.
सरिता : तू वह नहीं सो पायेगा, कोई न कोई बच्चा रात को उठता है, उसे सुलाना, बाथरूम ले जाना, ये सब चलता रहता है, तू नींद ख़राब होगी.
शिव : मतलब की आप लोगो की भी तो नींद ख़राब होती होगी, एक काम करो आप और लता, साथमे सो जाना, एक दिन तो आराम से सो सको, आज में गायत्रीदिदी के साथ hi सोऊंगा. (सरिता का चेहरा लटक गया)
सरिता : (मायूसी se)Thik है, तुम्हे जो करना है वो करो. (और वो काम में लग गयी, गायत्री बहोत खुस थी की आज शिव उसके साथ सोयेगा)
में कमरे में गया और पढ़ाई करने लगा, थोड़ी देर बाद रंजन आयी और मुझे उनके साथ पढ़ाई करने को कहने लगी. में किताबे ले कर उनके कमरे में चला गया. रंजन बार बार मुझे लुभाने की कोशिस कर रही थी, वही विणा भी चुपके चुपके मुझे देखती थी. एक घंटे तक पढ़ाई करने के बाद मेने कहा.
शिव : (रंजन se)Aise तो तेरी पढ़ाई हो चुकी.
रंजन : (अनजान बनते hue)Kyu, मेने क्या किआ?
शिव : ज्यादा भोली बन ने का नाटक मात कर (में विणा के सामने खुल कर नहीं बोलै, मुझे विणा की और देखते हुए देख)
रंजन : अब उसके सामने क्या शर्मा रहा है, जो बोलना है खुल कर बोल.
शिव : मुझे कुछ नहीं कहना है, (खड़े होते hue)Me जा रहा हु, में अपने रूम में hi पढ़लुँगा.
रंजन : (मेरा हाथ पकड़ते hue)Ruk न, अब कुछ नहीं karungi.(usne भोलिसि मुस्कान दी)
शिव : मुझे पता है, नौटंकी, आज कुछ नहीं मिलेगा तुजे (विणा थी पर में बोल गया, मेने विणा को देखा तो उसने नज़ारे झुका li)Bado की बात नहीं मानती है न तो अब तू भी रह.
रंजन : (कड़ी हो गयी और मेरे करीब कड़ी हो kar)Are पर मुझे भी तो रहना होता है न, मेरा मान नहीं करता क्या?
शिव : (मेने एक लम्बी साँस ली, मेने विणा को देखा, में सबके सामने इस तरह बात नहीं करना चाहता था पर अब परिस्थितिया ऐसी हो चुकी थी की मुझे सबके सामने खुलना hi था, तो मेने रंजन से कहा) मेने तुजे क्या कहा था, बार बार ये सब तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है, और सबको मेरे साथ रहना होता है, तो तुजे समझना होगा, सबको स्पेस देनी होगी, समाज रही है तू.
रंजन : (अपना मुँह लटका kar)Thik है.
शिव : अब ज्यादा नौटंकी मात कर, और पढ़ाई कर, में जा रहा हु.
रंजन : एक किश तो दे कर जा. (विणा बैठी थी फिर भी वो बोली, मेने विणा को देखा तो वो नज़ारे निचे किये hi बैठी thi)Use क्या देख रहा है, वो भी यही चाहती होगी, (विणा की और देख kar)Sharmati रहेगी तो कुछ नहीं मिलनेवाला.
शिव : बहोत चांट है तू. (अपनी नाक सिकुड़ कर वो किश का इस्सर करने लगी, सच में वो नटखट थी, और वैसे hi वो अच्छी लगती थी) ओनली किश (अपना शिर हिला कर उसने सहमति जताई, उसकी नौटंकी देख कर सच में उस पर प्यार आ hi जाता था, में झुका और उसके होठो पर हलके से किस किआ और उसे छोड़ने लगा तो उसने मेरा शिर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से किश करने लगी, मेने उसे मनमानी करने दी, थोड़ी देर बाद वो अलग हुई, और उसके चेहरे पर विजयी मुस्कान थी जैसे उसने बहोत बड़ा तीर मार्लिया हो, उसकी खुसी देख कर में मुस्कुराया, मेने विणा को देखा तो वो अभी भी शिव निचे किये hi बैठी थी, मेने उसे kaha)Vina..(Wo वैसे hi बैठी rahi)Upar देखो (उसने हिचकिचाते हुए ऊपर देखा, मेने हाथ बढ़ाया तो उसने अपना हाथ मेरे हाथ में दिया, मेने उसे खिंचा तो वो कड़ी हो गयी, एक और रंजन थी जिसकी कमर में मेने हाथ डाला हुआ था तो उसे दूसरी और मेने उसे खड़ा किआ, और उसकी कमर में हाथ डाला, वो शर्मा रही थी, उसका शिर फिर झुक gaya)Upar देखो. (विणा जानती थी की शिव उसे किस लिए ऊपर देखने को कह रहा है, उसकी धड़कने तेज तेज चल रही थी, वो रंजन के सामने hi उसे किश करनेवाला था, उसे अजीब लग रहा था पर, रंजन और वो पक्की सहेलिया थी, और हमेशा साथमे hi रहती थी, पर यहाँ कुछ अलग था, पर वो रोमांचित थी, उसने शरमाते हुए अपना चेहरे उठाया, शिव झुका और उसके नरम होठो को हलके से चूमने लगा, उसका भी दिल किआ की वो भी चूस ले पर वो शांत रही, कुछ पल बाद शिव ने उसके होठ छोड़े पर वो अभी भी आंखे बंद कए हुए ऊपर शिर उठाये कड़ी रही)
रंजन : शर्माती रहेगी तो ऐसा hi होगा. (विणा ने आंखे खोली, और दोनों को देखा और फिर शर्मा गयी)
शिव : सब तेरी तरह बेशरम नहीं होते सामजी. चलो अब पढ़ाई करो, में जाता हु. (रंजन ने फिर मेरे गाल पर किश कर liya)Tu सुधरेगी नहीं, है न? (वो नटखट सा muskurayi)Mene फिर दोनों के गाल पर किश किआ और bye बोल कर वह से निकल गया)
जब में अपने कमरे में पंहुचा तो लतादिदी और सरितादिदी दोनों लेती हुई थी और बाते कर रही थी. जैसे hi में अंदर गया तो दोनों ने मुझे देखा. मेने किताबे रक्खी, मेने कपडे निकले और एक शार्ट पहेलिया.
सरिता : यही सो जा, मेने गायत्री को बोल दिया है.
शिव : नहीं, आपने जिद की है न तो आज तो में उनके साथ hi सोऊंगा.
सरिता : मेने कोनसी जिद की, में तो बस रंजन को कह रही थी.
शिव : है, पर प्यार से भी संजय जा शक्ति है, सबके सामने कहने की क्या जरुरत थी.
सरिता : (मायूसी se)Sorry, में आगे से ख्याल रक्खूंगी, पर तू यही सो जा, तू कहता है तो में चली जाती हु, मेरे लिए लता पर क्यों नाराजगी निकल रहा है?
शिव : में कोई नाराज नहीं हु और न किसी पर नाराजगी निकल रहा हु, में सच में आज गायत्रीदिदी के साथ hi सोना चाहता हु, मेने देखा है की वो बेचारी हमेशा अपने काम में लगी रहती है, कभी वो कोई हक़ नहीं जताती, शायद अपनी पिछली जिंदगी के चलते वो ऐसी हो गयी है, मुझे सचमे उनकी फ़िक्र हो रही है, में चाहता हु की वो इस जगह को अपना घर hi समजे, और खुल कर रहे (लता की और देख kar)Me कुछ गलत कह रहा हु? (लता ने ना में शिर हिलाया) (सरिता की और देख kar)Aur ये बात आपको भी याद दिलाएगी की हमे सबको साथ मिलकर रहना है, तो सबके साथ सहमति से प्यार से समजा कर सब करना है, सबको सबकुछ चाहिए होगा, पर सबको समझदारी से रहना होगा.
सरिता : सही कहा तूने, में सचमे आगे से ध्यान रखूंगी, तू यही सो, वह बच्चो के बिच तुजे नींद नहीं आएगी, में गायत्री को यही भेजती हु, में वह सो जाउंगी.
लता : में भी चलती हु. (लतादिदी के जाने से मुझे भी दर्द हो रहा था पर मुझे सबको टाइम देना hi था और ये सबको समझना होगा)
शिव : आप नाराज नहीं हो न (मेने लतादिदी को कहा, उन्होंने न में शिर हिलाया)
लता : (सरिता को देख kar)Chal. (वो दोनों चली गयी, बहार निकल कर)
रंजन : ये शिव को हो क्या गया है, मन की मेने गलती की, पर वो तेरे साथ तो सो सकता था, मेरी वजह से तुजे भी दूर कर दिया.
लता : उसने कोई दूर नहीं किआ है, अब वो घर के मुखिया की तरह बेहवे कर रहा है, और सही भी है, घर के मुखिया का काम hi होता है सब को साथ ले के चलना, और ये बात हमे समझनी hi होगी, अगर तुजे लगता है की तू उसकी बात ताल सकती है तो ताल के दिखा.
सरिता : न बाबा, में उसकी बात नहीं ताल सकती, उसको किसी भी बात पर नाराज नहीं कर सकती. वो hi तो है मेरे ऊपर, और अबतो लगता है की तू भी उसके रंग में रंग चुकी है, वो घर का मुखिया और तू मुखियायिन. (वो हास्के बोली तो लता भी मुस्कुरा दी, दोनों को रूम में देख कर गायत्री चौंक गयी, उसे तो लगा था की शिव आएगा, पर वो उन दोनों को देख कर चौंकी पर चेहरे पर दिखने नहीं दिया और मुस्कुरायी)
गायत्री : क्या हुआ, तुम दोनों यहाँ?
सरिता : में और लता यही सोते है, तुम शिव के कमरेमे सो जाना.
गायत्री : (उसका दिल तो जैसे धड़कन hi चंक गया, शिव के साथ रहने की बात से नहीं पर सरिता, लता सामने से उसे शिव के कमरे में जाने को बोल रही थी, वो घबरा भी रही thi)Nahi... में यही ठीक हु.
लता : (उसके पास बैठते hue)Kya हुआ दीदी, (वो लता को देखने लगी)
गायत्री : में ऐसे कैसे उसके साथ सो सकती हु.
सरिता : तुम्हे जाना hi होगा, ये बड़े साहब का हुकुम है. (उसने थोड़ी नौटंकी से कहा)
लता : कोई हुकुम वुकुम नहीं है, चुप चाप बेथ तू, (गायत्री को देख ते hue)Didi, अगर आपको जाना है तो hi जाइये, कोई जबरदस्ती नहीं है.
गायत्री : (उसका तो पूरा मान था वह जाने का पर शर्म आ रही थी, इन दोनों के जानते बजते वो कैसे शिव के साथ सोने को चली jaye)Par लता, ये सही नहीं है.
लता : (उनके हाथ पर हाथ रखते hue)Kya सही नहीं है दीदी, में भी तो सोती हु वह.
गायत्री : तेरी बात अलग है. (वो खुल कर कुछ कहना नहीं चाहती थी)
लता : क्या अलग है, जैसी में हु, वैसी hi आप भी हो. वो बोल रहा था की वो आज आपके साथ रेहेगा, वो आपको बुला रहा है, अब आपकी मर्जी है, आपको जाना है तो जाओ, कोई जबरदस्ती थोड़ी न है. आपका भी घर है, आपकी मर्जी.
गायत्री : (उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था, वो दोनों को देख रही थी) पर लता...
लता : शिव सही कहता है, अभी तक अपने हमे दिल से नहीं अपनाया, अभी भी आपको लगता है की आप हमसे अलग हो, आप अपने आपको अकेला महसूस करती हो, (उसका हाथ दबाते hue)aisa नहीं है दीदी, हो सकता है की में काम बात करती हो, पर मेरे दिल में आप इस घर का hi हिस्सा हो, जितना अधिकार में शिव पर रखती हु, उतना hi अधिकार आपका भी है. जाओ वो आपका इंतजार कर रहा है.
गयारती : Lata...(Bolte बोलते उनका गाला भर आया)
लता : अभी आप जाओ, हम कल बात करेंगे, सुबह जल्दी भी उठना है. (सीधे सब्दो में तो नहीं पर लता ने कह दिया था की अभी आपको जागना है)
गायत्री को बहोत शर्म आ रही थी, वो वह से कड़ी हुई, उसकी लता और सरिता से नजर मिलाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी, वो धड़कते दिल से शिव के कमरे की और बढ़ चली, आज कैसा अजीब दिन था, वो सबकी सहमति से शिव के साथ जा रही थी, कोई चोरी छुपी नहीं, उसके पेअर कैंप रहे थे, वो जानती थी की वह क्या हो सकता है तो वो बाथरूम में गयी और अपनी योनि को साबुन लगा कर अच्छे से साफ़ करने लगी. वह लता और रंजन लेते थे.
सरिता : कोई बात नहीं, कल तो में पक्का उसके साथ hi सोऊंगी, कितना मज़ा आएगा न हम दोनों साथ में.
लता : ज्यादा ख़याली पुलाव मात पका, तू बेशरम है, में नहीं, है मुझे पता है की तुम दोनों भी वैसे रहते हो इसका ये मतलब नहीं की हमदोनो साथ में करे.
सरिता : यार तू बड़ी बोर है, क्या प्रॉब्लम है तुजे, हम दोनों इतनी अच्छी सहेलिया है, क्या छुपा है हम दोनों में,.
लता : भले hi कुछ न छुपा हो, पर अभी ये संभव नहीं है, भविस्य का मुझे पता नहीं है.
सरिता : अगर शिव कहे तो?
लता : (उसकी आँखों में देखते hue)Wo कहेगा तो सब कुछ कर लुंगी, पर मुझे पता है वो ऐसा कहेगा नहीं. अब सो जा, कल हमे hi संभालना है.
सरिता : सही कह रही है तू (नटखट सा मुस्कुराते hue)Gayatri की हालत तो ख़राब होनेवाली है.
लता : चुप कामिनी, जरुरी नहीं की जो जानते हो वो सब बोलै जाये. कुछ बाटे न बोलने में hi समझदारी होती है. अब सो जा और मुझे भी सोने दे.
सरिता : (उसके पेट के ऊपर हाथ रख कर उसके गाल चुम kar)Sorry यार, मेरी वजह से तेरी रात ख़राब हो गयी.
लता : कोई रात ख़राब नहीं हुई है, वो कही भगा नहीं जा रहा, वो भी यही है और में भी. ज्यादा अधिरायी अच्छी नहीं.
सरिता : तू कितनी समझदार है. तुम दोनों छोटे हो पर हमारे ऊपर हो गए हो.
लता : ऐसा कुछ नहीं है, सब साथ hi है. अब सो जा.
सरिता : गुड नाईट.
लता : गुड नाईट.
वह गायत्री आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए कमरे के नजदीक पहुंची, ददरवाजा खुला था, वो कुछ पल रुकी वह पर, उसकी हालत उस दुल्हन की तरह थी जिसके बारे में सबको पता होता है की आज वो छुड़नेवाली है, और दुल्हन बेचारी शर्म से जमीं में गाढ़ी जा रही होती है, गायत्री ने अपने दिल को संभाला और आहिस्ता से अंदर गयी, शिव ऊपर से नंगा, शार्ट पहन कर लेता हुआ था, जैसे hi शिव ने उसकी और देखा उसने नज़ारे झुका ली.
शिव : दरवाजा बंद कर देना दीदी. (गायत्री का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने दरवाजा बंद किआ, अभी उसने सलवार कमीज पहना हुआ था, वो दरवाजे के पास hi कड़ी थी, वो दरवाजे की और मुँह करके कड़ी thi)(Mene दीदी को देखा, पीछे से उनके भरे हुए कूल्हे दिख रहे थे, मेने ऊपर नजर की )क्या हुआ, सोना नहीं है क्या? (ये परिस्थिति गयारत्री के लिए बिकुल नयी थी, वो शर्माभि रही थी और घबरा भी रही थी, किस बात के लिए वो तो उसे भी नहीं पता था, क्यों की वो पहले भी शिव के साथ सब कर चुकी थी, और दुसरो के साथ तो कई बार, पर ये अनुभव सबसे अलग था, वो खुद को नयी नवेली दुल्हन hi समाज रही थी, वही संकोच था, वही शर्म और दर था. वो आहिस्ता से चलते हुए शिव के नजदीक pahuchi.)Kya हुआ दीदी, इतना क्यों दर रही हो (शिव ने हाथ पकड़ा तो वो कैंप गयी, शिव ने हल्का सा hi खिंचा तो वो धड़ाम से निचे बेथ गयी शिव के नजदीक, वो शिव को देख भी नहीं रही थी, और संकुचती हुई बैठी रही) क्या बात है दीदी, आप इतना क्यों दार रही हो, नहीं आना था आपको?
गयारती : (तुरंत boli)Nahi, वैसी बात नहीं है. (उसने शिव की और देख कर कहा) वो कभी ऐसे आयी नहीं न.
शिव : ऐसे मतलब?
गायत्री : वो वो लता और बाकि सब जानते है की में यहाँ...
शिव : (मुस्कुराते hue)Wo लोग सोते है तो आपको पता होता है न? (उसने है में शिर hilaya)To फिर, उनका यहाँ सोना आपको गलत लगता है? (उसने न में शिर हिलाया) तो फिर, अब इतना मात सोचिये, सो जाइये. (गायत्री दूसरी और मुँह कर के लेट गयी, उसके दिल में उथल पुथल मची हुई थी, शिव ने उसके साथ कुछ भी ऐसा वैसा नहीं किआ और नहीं कोई गलत बात की, वो सोचने लगी की वो hi बेवकूफ है जो सब सोच रही है, शिव ने सिर्फ ऐसे hi सोने के लिए बुलाया है, उसने आंखे तो बंद कर ली थी पर नींद नहीं thi)(Mene गायत्री दीदी को देखा, साइड से लेती हुई थी तो उनकी कूल्हे का भाग ऊपर उठा हुआ था और वह से गहरायी में उनकी कमर थी, थोड़ी देर में उनको देख रहा था, उनका शर्माना लाजमी tha)Didi, सो गयी क्या?
गायत्री : नहीं (उन्होंने धीरे से कहा)
शिव : (उनके कंधे से पकड़ कर उन्हें मेरी और किया तो वो खुद सीधी हो गयी) क्या हुआ दीदी (मेने उनके हाथ को पकड़ कर ऊपर किआ और उनकी ुणलिओ से खेलने लगा)

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आप उनकंफर्टबले हो क्या? (शिर हिला कर उन्होंने न कहा, हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, वो मुस्कुरा रही थी, मेने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और उंगलिओ से कलाई तक ले गया और हाथ आगे बढ़ने लगा, वो मुझे hi देख रही थी पर उनकी सांसे तेज होने लगी thi)Aap अपनी मर्जी से आयी हो न दीदी?
गायत्री : (शिव की आँखों में देखते hue)Aisa क्यों पूछ रहा है तू, वैसे तो मुझे कहता है की मुज पर आपका हक़ है, तो क्या तेरा नहीं है, तू हक़ नहीं कर शक्ति. (उन्होंने उखड़ती सांसो से कहा)
शिव : सोचलो, फिर अगली बार नहीं पूछूंगा. (मेने मुस्कुरा कर कहा)
गायत्री : तुजे पूछने की जरुरत भी नहीं है शिव. (मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो खुद खिसक कर नजदीक आ गयी, हमदोनो ने एक दूसरे को देखा, उनकी आंखे बता रही थी की वो क्या चाहती है, मेने उनके होठो को अपने होठो से पकड़ लिया,

तो वो खुद मेरे होठो को काटने lagi)(Gayatri के लिए ये सेक्स नहीं था, ये प्यार था, कोई उसे इतनी इज्जत दे रहा था, सबने दिखाया था की वो अलग नहीं है, वो उनके जैसी hi है, हमेसा उसके दिल में अपने भूतकाल को लेकर एक तिस रहती थी, वो अपने आपको बहोत निचे महसूस करती थी, पर सबके प्यार ने आज उसे अपने बारे बार का स्थान दिया था, वो खुल कर शिर के होठो को चूसने लगी, पहले सब उसको नोचते थे, पर आज वो खुद से किसी को चुम रही थी चूस रही थी काट रही थी, वो उसको खिंच कर अपने ऊपर करने लगी, वो भी उसके ऊपर आ गया और उसके गले को और होठो को चूमने और चाटने लगा,

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उसकी सिस्किअ निकल रही थी पर उसे किसी का दर नहीं था, वो खुल कर शिव के प्यार को महसूस कर रही थी, वो उसके मजबूत शरीर को छू कर महसूस कर रही थी, उसने अपने पेअर फैला दिए ताकि शिव बीचमे आ जाये, उसे अपनी छूट पर शिव का लुंड महसूस होने लगा, वो पागल होने लगी और शिव को बेतहासा चूमने लगी, वो इतनी गरम हो गयी की वो खुद अपनी कमर हिला कर लुंड पर अपनी छूट रगड़ने लगी, शिव ऊपर से नंगा था तो उसके शरीर में अपने नाख़ून घड़ने लगी, ये उसके जीवन का बेहतरीन समय था, वो इतनी बावली हो चुकी थी की उसने शिव के शार्ट को अंडरवियर समेत निचे खिसकाया और उसके कूल्हों पर अपने नाख़ून गढ़ने लगी) (में भी बहोत उत्तेजित हो चूका था, मेने उनके स्तन को जोर से दबा diya)Shhhhhh माआआआआ (गायत्री दर्द से बिलख उठी पर शिव को रोका नहीं, वो उसके कूल्हों में नाख़ून घड़ने लगी और उसके कुफो को नोचने lagi)(Unke नाखुनो से मुझे दर्द महसूस हुआ तो मेने उनके स्तन को काट liya)Ohhhh माआआआ, (गायत्री भी दर्द से बिलख उठी, शिव उसके ऊपर से उठा और अपने कपडे उतर दिए, वो पूरा ननगा था, उसका वो महाकाय लुंड पूरी तरह उत्तेजना से खड़ा था, उसे देख कर गायत्री को दर भी लगा पर वो उसके आकर्षण से भाव विभोर होने लगी, शिव ने उसे बिस्ता पर बिठाया और उसका कुरता निकलने लगा, उसने भी निकलने दिया, उसने ब्रा भी निकल दी, वो अपने स्तन छुपाने लगी पर शिव को जैसे कोई परवाह hi नहीं थी, उसने उसको कूल्हों से पकड़ कर घोड़ी बनाया और उसके सलवार को खींच कर पंतय समेत निचे खिसका दिया, पेरो से निकलना था तो उसने धक्का दिया तो वो बिस्तर पर लेट गयी, शिव ने सलवार भी पूरी निकल दी अब वो पूरी नंगी थी, कुछ पल शिव उसे देखने लगा तो वो शर्मा गयी और संकुचन लगी, उसने अपने पेअर आपस में चिपका दिए और अपने स्तन को एक हाथ से धक् दिया, शिव उसके ऊपर आया और उसके हाथ पकड़ कर साइड में किये और ऊपर आ कर उसके स्तन को निप्पल से पकड़ कर जोरो से चूसने लगा) Shhhhhhhhhhhhhhhh माआआआ shhhhhhhhhh (अपने पैरो से उसने मेरे पेअर फैलाये और वो बीचमे आ गया, उसका लुंड मेरी योनि पर रगड़ खाने लगा, मेरी हालत ख़राब थी, सिसकीओ से कमरा गूंज रहा था, में अपने होठो को काट रही थी, दांतो को भींच रही थी, में सचमे बहोत ज्यादा उत्तेजित थी, इतनी उत्तेजना तो में जीवन में कभी महसूस नहीं की थी, उसका लुंड मेरी योनि के होठो को फैला कर वह कोहराम मचाये हुए था, मेरी छूट से कितना पानी निकल रहा था में बता नहीं सकती, वो मेरे निप्पलों को इतनी जोरो से छुस रहा था की दर भी हो रहा था, पर मज़ा अपने चरम पर था, मेरा पूरा ध्यान उस लुंड पर था जो मेरी छूट पर रगड़ खा रहा था, में अपनी छूट को एडजस्ट करने की कोशिस कर रही थी ताकि वो अंदर चला जाये पर शिव मुझे तड़पा रहा था, वो जानबुज कर अंदर दाल नहीं रहा था, में जब भी अपनी छूट के छेड़ को लुंड की सिद्धमे लती वो हटा लेता tha)Shhhhhhh ऐसा मात करो शिव शठ में पागल हो जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह अंदर डालो न शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेने फिर प्रयास किआ और लुंड के सुपडे को जैसे तैसे अपने छेड़ पर लगाया और अपनी कमर उचका कर अंदर लेने hi वाली थी की उसने हटा लिया, वो हलके गुस्से से boli)Shhhh क्यों सत्ता रहे हो ममममम शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अंदर डालो न shhhhhhhhhh मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है शीइइइइव शह्ह्ह्ह (मेने फिर से लुंड पर अपनी छूट सेट की तो उसने धक्का लगा दिया और लुंड चुटको चीरता हुआ अंदर तक चला गया, मुझे दर्द महसूस hua)Ooooo माआआआआ माआर gayiiiiiiiiiiiiiiii. (भले दर्द हुआ पर उसके अंदर जाने से मुझे चैन मिला, में अपनी छूट सिकुड़ कर उसको निचोड़ने लगी, में अपनी कमर हिलाकर लुंड को अपनी छूट में एडजस्ट कर रही थी, मान के साथ साथ शरीर को भी एक मज़ा चाहिए होता है शिव का लुंड सचमे कमल का था, वो मुझे पूरी तरह से भर देता था, वो मेरे स्तनों को काट रहा था पर मुझे कोई परवाह नहीं थी, में अपनी कमर उंचका कर उसे छोड़ने के लिए उकसाने लगी, मुझे पता था की वो अगर चालू हो गया तो मेरी छूट की धज्जिया उदा देगा पर शायद में वो hi चाहती थी, वो में अपनी छूट से लुंड को खींचने लगी, वो मेरी भावनाओ को समाज गया और लुंड को अंदर बहार करने लगा, वो जोर जोर से मुझे छोड़ रहा था,

कमरे में ठप थप थप थप की आवाजे हो रही थी और मेरी सिस्किअ भी हाली छ्कीखो में बदल गयी थी, पसीना तो जैसे पानी की तरह बह रहा था. एक घंटे तक वो मुझे हर तरह से रोंद्ता रहा या यु कहे की मेरी इच्छा पूरी कर रहा था, में खुद उस से ऐसे hi छोड़ना चाहती थी, कभी घोड़ी बना कर छोड़ा तो कभी उलटी लेता कर छोड़ा, कमरे में जैसे तूफान आया हुआ था, मुझे पूरी गॉड में उठा कर भी पूरी ताकत से छोड़ा, कितनी बार में झड़ी मुझे खुद याद नहीं, दूसरी बार तो उसने मेरी गांड भी मरी, में उसे सब करने दे रही थी, जितना मज़ा उसे आ रहा होगा उस से कही गुना मज़ा मुझे आ रहा था, जब हमारा खेल ख़तम हुआ तब मेरी हिलने की भी हालत नहीं बची थी, पुरे कमरे में वीर्य और मेरे रास की गंध फैली हुई थी, छूट और गार्डन में दर्द होने के बावजूद में जैसे बेसुध हो गयी थी और गहरी नींद में चली गयी. आज मेरे जीवन की सुनहरी रात थी. में इस सजीले राज कुमार की बहो में थी.
सुबह जब में उठा तो गायत्रीदिदी नंगी hi लेती हुई थी, उनकी उभरी हुई गांड देख कर मेरा फिर से लुंड खड़ा होने लगा, पर मुझे जाना था, तो मेने उनको चद्दर ओढ़ाई और बहार निकल गया, में बाथरूम को जा रहा था तो मुझे विणा अपने कमरे से निकलती हुई दिखी, मुझे देख कर वो शर्मा गयी, पर में उसे देखते हुए खड़ा रहा तो वो धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आयी, वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी और मुस्कुरा रही थी, मेने आस पास देखा तो कोई नहीं था, में उसे बाथरूम में ले गया और दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया, वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, में झुका और एक हाथ से उसके नन्हे स्तनों को दबाते हुए उसको किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, दो एक मिनट किश करने के बाद में अलग हुआ.
शिव : गुड मॉर्निंग. (वो खिलखिलाई पर बिना आवाज किये हसी जैसे कोई सुन न ले)
विणा : (धीमी आवाज me)Good मॉर्निंग.
शिव : तुम अपना निपटाओ, में बाजु के बाथरूम में निपटा ता हु. (वो शर्मा गयी, में वह से निकल कर बाजु के बाथरूम में घुस गया, सुबह सुबह पहला काम मूतना hi होता है तो में मूतने laga)(Shiv के मूतने की आवाज को विणा शरमाते हुए ध्यानसे सुन रही थी, वो जानती थी की जब वो मुटेगी तो शिव भी सुनेगा, वो कई बार सुन भी चूका है ये वो जानती थी, पर आज वो खुद उसे सुनना चाहती थी, जब शिव का ख़तम हुआ तो वो अपनी चड्डी उतर कर निचे बेथ गयी और मूतने लगी, उसकी सिटी बजने लगी तो वो शरमाते हुए मुस्कुराने लगी क्यों की वो जानती थी की शिव सुन रहा है, इन सब में उसको एक अजीब सी खुसी मिल रही थी. उसके बाद में वो पूरी नंगी हो गयी और नहाने लगी, दूसरे बाथरूम से शिव के नहाने की आवाज आ रही थी, वो जानती थी की वो भी नंगा होगा, ये सोच कर hi उसके शरीर में तरंगे उठ रही थी, वो मुस्कुराते हुए नहाने लगी, और दुआरे बाथरूम में शिव भी यही सोचते हुए नाहा रहा था. शिव को विणा की चुडिओ की खान खान सुनाई दे रही hi. जब वो बहार निकला तो वो अभी बहार नहीं आयी थी, वो तौलिया लपेटे वही खड़ा रहा, थोड़ी देर बाद वो तौलिया लपेटे बहार निकली, शिव को देख कर वो चौंक गयी, उसे लगा था की वो चला गया होगा, शिव ने भी इस कमसिन हसीना को ऊपर से निचे तक देखा, और जैसे hi उसने कदम बढ़ाया वो वह से भाग गयी, वो मुस्कुराते हुए उसके हिलते कूल्हों को देखरहा था, दरवाजे पर जा कर वो रुकी और मुद कर शिव को देखने लगी, शिव उसे hi देख रहा था तो वो शर्मायी और मुस्कुरा कर अंदर चली गयी.
में तैयार हो गया और बहार आया तो देखा की विणा और रंजन नास्ता कर रहे थे, में भी रंजन के पास बेथ गया, विणा ने मेरी और देखा तो में मुस्कुराया, उसने शर्मा के नज़ारे झुका ली, रंजन शिव को बाजुमें बैठते देख खुस हो गयी. सबने नास्ता किआ वो दोनों निकल गयी, में भी थोड़ी देर बाद स्कूल के लिए निकल गया, जब में संयम के वह पंहुचा तो वो लोग मेरा hi वेट कर रहे थे, नाज़िआ दीदी को आज आनेका बोलै मेने और हम तीनो निकल गए.