Adultery Kundali Bhagya - Page 12 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

मैं अभी भी बाहर हूं पर फिर भी मैंने मोबाइल की मदद से यह अपडेट लिखा है अगर कोई गलती हो तो माफ कर देना
 
किंग सून...

ी ऍम फार अवे फ्रॉम होम. मई बे रेतुर्न आफ्टर थ्री डेज.
 
अपडेट 70

शाम को में जूही मैडम के साथ स्टेडियम चला गया, स्टेडियम में हम कसरत करने लगे. उनके बर्ताव में आये बदलाव को में साफ़ महसूस कर प् रहा था. वो दूसरे लड़को – लड़कीओ से तो नोर्मल्ली बात कर रही थी पर जब मुज से बात कर रही थी तो वो मुझसे नज़ारे मिलाने से कतरा रही थी. शायद अब वो झिझक रही थी. ऐसा होता है, उन्होंने मुजसे अपने दिल की बात कह दी थी पर मेने उन्हें है नहीं कहा था और बात को ताल दिया था, अब ऐसी सिचुएशन में उनका ऐसा बेहेवियर लाज़मी भी था. में क्या कहु कुछ समाज नहीं आ रहा था. न में है कह सकता था न में ना कह शक्ति था. वैसे भी है कैसे कहता, मेरे जीवन में आलरेडी लतादिदी थी, रंजन से मेने अभी तक शारीरिक फैसले बनाये रक्खे थे पर शायद वो ज्यादा देर न रह पाए. सरितादिदी भी थी. और अभी में इतना भी बड़ा नहीं हो गया था की शादी के बारेमे सोच सकू, पर अपने अनुभवों से में इतना तो समझने लगा था की लोग ऐसे सम्बन्ध एक से hi बनाते है, पर में कईओ के साथ बना चूका था. में जूही मैडम की बहोत इज्जत करता हु, में उनके साथ आईसीआईसी कोई हरकत करके उनका दिल नहीं दुखाना चाहता था. में सोच रहा था की वो थोड़े दिनों में समाज जाएगी. वैसे भी में उनको लतादिदी के बारेमे नहीं बता शक्ति था, और क्या बताता, एक और तो में उन्हें दीदी कह रहा हु और दूसरी और ये कहु की मेरे उनके साथ सम्बन्ध है. मेरी कुछ समाज नहीं आ रहा था. पर इन सब बातो का उनके परफॉरमेंस पर असर पद रहा था, वो दिल से रेस नहीं लगा रही थी. खैर जैसे तैसे हमने कसरत ख़तम की. जब हम वापस जा रहे थे तो मेने उन्हें प्रेजेंटेशन के बारेमे बताया जो बिना मैडम ने तैयार कर लिया था. अभी हमारे पास एक घंटे का समय था तो हम दोनों बिना मैडम के घर पहुंच गए.

बिना जब से घर आयी थी वो बार बार दरवाजे को hi देख रही थी. उसे यकीं था की आज शिव जरूर आएगा. उसका दिल बेचैन हो रहा था.

बिना (मान में) : ये किस तरह का एहसास है, क्यों में इतनी बेचैन हो रही हु? ऐसा तो कभी मेने अपने पति के बारे में भी नहीं महसूस किआ. क्या एक मर्द और औरत में ये शारीरिक सम्बन्ध इतने महत्वपूर्ण होते है? अगर किसी दो लोगो के बिच में से ये शारीरिक सम्बन्ध निकल दिए जाये तो उनका सम्बन्ध इतना गढ़ नहीं होता, एक मर्द और औरत बिना शारीरिक सम्बन्ध के इतने नजदीक नहीं महसूस करते. मेरे जीवन में जो कमी थी शायद वो कमी शिव ने पूरी कर दी है, और इसीलिए में उसके लिए इतना तड़प रही हु. मुझे ये पता है की में गलत कर रही हु फिर भी में अपने आप को रोक नहीं प् रही हु, और वो है भी तो ऐसा, जैसे सपनो का राजकुमार, खींचती चली जाती हु उसकी और. अभी आएगा तो पता नहीं क्या karega(Wo शर्माने लगी, उसे याद आने लगा कैसे उसने सेक्स किआ था, ये सोच कर hi उसकी छूट गीली होने लगी, वो अपनी झांघो को आपस में सताते hue)Shhhhhh, ये कैसा खुमार है? सच में इस लड़के ने तो मुझे पूरा पागल कर दिया है. आने दो उसे, आज तो में उसे छोडूंगी नहीं.

वो ये सब सोच रही थी की दरवाजे की घंटी बजी, बिना को पता था की ये शिव hi होगा, उसके चेहरे पर खुसी छलकने लगी, वो दौड़ते हुए दरवाजे तक पहुंची, उसने अपने आपको संभाला और अपने आपको शांत करते हुए दरवाजा खोला, उसके चेहरे पर हसी रुक नहीं रही थी, जैसे hi उसने दरवाजा खोला उसकी नजर शिव पर पड़ी, उसकी मुस्कान और बढ़ गयी, पर जैसे hi उसकी नजर जूही पर पड़ी, उसकी मुस्कान काम होने लगी, (जूही ने ये बदलाव देखा) बिना ने अपने आपको संभाला और फिर से होठो पे मुस्कान सजा दी, पर साफ़ पता चल रहा था की ये मुस्कान नकली है.

बिना मैडम : आओ शिव, आओ जूही.

जूही : कैसी है आप मैडम?

बिना मैडम : अच्छी हु, तुम कैसी हो?

जूही : में भी ठीक हु.

बिना मैडम : तुम भी आ गयी, चलो अच्छा किआ, बैठो में पानी लती हु. (हम दोनों बेथ गए)

जूही : लगता है, मेरा आना तुम्हारी मैडम को पसंद नहीं आया.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हे, (हलाकि मुझे पता था की वो सच बोल रही है), ऐसा कुछ भी नहीं है.

जूही : (मान में ,में सब समझती हु.) अगर उन्हें पसंद नहीं तो में चलती हु, तुम देख लेना.

शिव : ये क्या कह रही हे, ऐसा कुछ भी नहीं है, आप बैठी ये.

जूही : मेने कहा था न, मुझे आप आप कहना बंद करो.

शिव : ठीक है, पर अभी शांति से बैठो.

बिना मैडम : क्या खुसुर फुसुर हो रही है?

शिव : नहीं, कुछ नहीं, हम दोनों तो बस ऐसे hi बात कर रहे थे.

बिना मैडम : किस बारेमे बात कर रहे थे?

शिव : (अब में क्या बोलता) कुछ नहीं, जूही कह रही थी की कैसे ये प्रेसेंटाइओं वीडियो वायरल करेंगे, बस वही बात कर रहे थे.

बिना मैडम : (मान में :जूही मैडम से जूही ) मुझे भी तो बताओ, क्या सोचा है? (में क्या केहरा तो मेने जूही को देखा)

जूही : वो बाद में बात करेंगे पहले वीडियो देख ले.

बिना मैडम : है चलो.

हम तीनो वीडियो देखने लगे, बिना मैडम पक के सामने बेथ गयी, एक और जूही तो दूसरी और में बेथ गया. उन्होंने वीडियो प्ले किआ, 7 मं क वीडियो बनाया था, और सच कहु तो बहोत अच्छा बनाया था, उन्होंने जिस तरह से हमारे अनाथालय के प्रोब्लेम्स को उजागर किआ था बहोत hi बढ़िया था.

शिव : वह, मैडम, आपमें तो कितना अच्छा वीडियो बनाया है, में सोच भी नहीं सकता था की ऐसा भी हो शक्ति है.

बिना मैडम : तुम्हे कैसा laga?(Juhi को)

जूही : अच्छा है, पर अगर इसके साथ थोड़ा नररातिओं भी आड़ कर दिया जाये तो अच्छा लगे गए. आप को क्या लगता है?

बिना मैडम : तुम सही कहती हो, पर क्या स्पीच ऐड करेंगे?

जूही : वो तो सोचना पड़ेगा.

बिना मैडम : ठीक है, तुम सोचो तब तक में चाय बनती हु. (वो उठ कर चली गयई)

जूही मैडम ने वीडियो वापस प्ले कर दी और सोचने लगी, में उन्हें hi देख रहा था, थोड़ी देर सोचने के बाद वो मेरी और देखने लगी.

जूही : मुझे ऐसे मात घूरो, मेरे दिमाग में कुछ नहीं आ रहा है.

शिव : अब मेने क्या किआ?

जूही : तुम मुझे ऐसे देखते रहोगे तो मुझे कैसे कोई विचार आएगा?

शिव : ठीक है आप लिखो, में बहार जाता हु.

में वह से बहार आ गया, मेने देखा की मैडम किचन में है तो में चुपके से उनके पास चला गया. मेने मैडम को पीछे से बाहोंमे भर लिया. अचानक हुई क्रिया से बिना मैडम एक दम छुअक गयी, पर जैसे hi उन्हें पता चला ये शिव है, वो शांत हो गयी.

बिना मैडम : यहाँ क्या कर रहे हो? जूही क्या सोचेगी?

शिव : उन्होंने hi मुझे भगाया है, वो कह रही है, मेरे रहते वो सोच नहीं प् रही है. (में उनका पेट सहलाने लगा)

बिना मैडम : क्या कर रहे हो शिव? वो यही hai?(Apne पेट पर घूम रहे शिव के हाथ को महसूस कर के बिना की सांसे तेज होने lagi)Aissa मत करो शिव.

शिव : आप को देख कर रहा नहीं जाता.

बिना मैडम : चल जूठा, अगर ऐसा होता तो अकेले न आता. पता है में कितना इंतजार कर रही थी.

शिव : (गर्दन को चूमते hue)Kya सच में? (गर्दन पर जीभ फिरते हुए, एक हाथ में उनके स्तन को पकड़ लिया) उन्हें भी देखना था तो में ले आया.

बिना मैडम : अभी तो उसे जूही कह रहे थे और अब ‘उन्हें’?

शिव : (मेने मुस्कुराकर उन्हें देखा) वो कहती है की मुझे जूही बुलाओ, में इतनी बड़ी नहीं हु की मुझे मैडम मैडम करो.

बिना मैडम : (अपना मुँह बनाते hue)to क्या में इतनी बड़ी हो गयी हु?

शिव : (में फिर muskuraya)Aap तो सच में मेरी मैडम hi हो, प्यारी और क्यूट भी.

बिना मैडम : चल चल, अब ज्यादा मस्का मात लगा.

शिव : थोड़ी देर रुकिए न.

बिना मैडम : वो अभी यही है, अगर उसको पता चल गया तो में किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी. संजो शिव.

शिव : ठीक है, पर एक किश तो दे hi शक्ति है. (वो शर्मा गयी, मेने उनके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया,





में थोड़ी देर उनको चूमता रहा, सच में मुझे भी लगने लगा की जूही मैडम को नहीं लेके आना था., )

थोड़ी देर किश करने के बाद हम अलग हुए. वो भी तड़प रही थी और में भी तड़प रहा था, अगर आज जूही मैडम साथ न होती तो यक़ीनन अभी हम बिस्तर में होते. वो मेरे गले लग गयी और अपने आप को शांत करने लगी. थोड़ी देर बाद हम दोनों छायी ले कर आगे हॉल में बेथ गए. जूही मैडम को आवाज दी तो वो भी बहार आ गयी.

बिना मैडम : कुछ सज़ा?

जूही मैडम : अभी तो नहीं, पर आईडिया जरूर आ गया है. आप मुझे ये, मेरे मोबाइल में कॉपी कर दीजिये में रात को अच्छी तरह सोच लुंगी.

फिर हम उसी के बारेमे बात करने लगे, थोड़ी देर बाद हम वह से निकल गए, गयम में काम निपटा कर वो मुझे घर छोड़ गयी. हमने खाना खाया और पढ़ाई की. रात को हम सब सो गए. रात को बारिश हो रही थी तो आवाज से मेरी नींद खुल गयी. ठण्ड की वजह से मुझे पेशाब भी लगी थी तो में आधी नींद में चलते हुए बाथरूम की और निकल गया. में आधी नींद में था तो बाथरूम की पानी की आवाज मुझे सुनाई नहीं दी, और इतनी रात को कोण बाथरूम में नहायेगा. मेने जैसे hi दरवाजा खोला और मेरी नज़र सामने नंगी नाहा रही गायत्री दीदी पर पड़ी. ये तो अच्छा था की उनका ध्यान नहीं था.





मेने फ़ौरन दरवाजा बंद कर दिया. मुझे समाज नहीं आ रहा था की वो इतनी रात को क्यों नाहा रही है. में बाजु के बाथ रूम में चला गया. मेरी आँखों के सामने वो दृश्य एक बार फिर आ गया, मुझे उनकी उभरी हुई गांड और झूलते स्तन दिख रहे थे, मेरा लुंड अकड़ने लगा, मेने जैसे तैसे अपने आपको संभाला और मुतकर अपनी जगह पर आ गया. मेने देखा की रंजन लुढ़क कर मेरी जगह आ गयी है और विणा उसके साथ चिपकी हुई है. मेरे लिए जगह बची नहीं थी तो में विणा के पीछे लेट गया, गायत्री दीदी की भी जगह वही थी, पर अब जगह थी hi नहीं तो में वही लेट गया. मेरे जहँ में गायत्री दीदी नंगी नहाते दिख रही थी. मेरा लुंड अकड़ गया था.

गायत्री अब रहत महसूस कर रही थी. वो जानती थी की ये गलत है पर वो भी क्या करे, इतने समय से रोज सेक्स की आदत बन गयी थी. न चाहते हुए भी उसके शरीर की गर्मी बढ़ रही थी, इसीलिए इतनी रात को वो नहाने चली गयी थी. जैसे तैसे अपने आप को शांत किआ था. उसे इस बारेमे बिलकुल पता नहीं था की शिव उसे नहाते हुए देख चूका है. वो अपने बालो को तौलिये में लपेट कर किचन में गयी और पानी पिया. जब वो बिस्तर पर आयी तो उसने देखा की उसके बिस्तर के बाजु में शिव लेता हुआ है. उसे समाज नहीं आया की शिव यहाँ कैसे. उसने देखा की शिव की जगह रंजन लेती हुई है. वो उलझन में पद गयी की अब क्या करे, क्या वो शिव के साथ लेट जाये? वैसे तो ये बात कोई मायने नहीं रखती थी पर फिर भी एक लड़की थी वो, उसे शिव के साथ लेटने में शर्म आ रही थी. वो अपने बिस्तर पर बेथ गयी और उसने एक निगाह सब पर डाली. सब चैन से सो रहे थे, उसे लगा शिव भी सो रहा है. शिव ऊपर से पूरा नंगा था, बल्ब की माध्यम रौशनी में उसकी नज़ारे शिव के कषेहुए जिस्म पर फिसलने लगी, पर जैसे hi उसकी नजर ढीले पाजामे दिख रहे लुंड के उभर पर गयी तो उसकी सांसे तेज होने लगी. वो बड़ी मुश्किल से अपने आप को शांत कर के आयी थी और लुंड के उभर को देख कर उसके अरमान मचलने लगे. वो लुंड के उस उभर को बड़े गौर से देखने लगी, उसे वो उभर कुछ ज्यादा hi बड़ा लगा. अपनी उस बदनाम जिंदगी में उसने बहोत सरे लुंड देख लिए थे पर उसने ऐसा लुंड कभी नहीं देखा था. एक बार तो उसे यकीं hi नहीं हुआ, उसे दर लग रहा था पर फिर भी वो थोड़ा नजदीक खिसकी और लुंड को देखने लगी. उसे यकीं हो गया की ये सच में बड़ा है. उसका मान कर रहा था की वो उसे हाथ से पकड़ ले पर वो दर रही थी. भले hi उसने एक रंडी का जीवन बिताया था पर वो मान से रंडी नहीं थी. उसने शिव के मासूम चेहरे को देखा. ये वही था जिसने उसे उस नर्क से आज़ाद करवाया था. है अगर वो कहता तो वो जरूर उसके निचे लेटने को राज़ी हो जाती. पर वो जानती थी को वो एक रंडी की जिंदगी गुजर कर आयी है, वो छह कर भी शिव के साथ वो सब नहीं कर शक्ति थी. उसकी आँखों से आंसू टपक ने लगे. उसने अपने आपको संभाला और दूसरी और मुँह करके वो लेट गयी. काफी देर बाद उसे नींद आ गयी.

सुबह को अभी काफी टाइम था, पर फिर भी गायत्री की नींद खुल गयी, उसे एहसास हो रहा था की वो किसी की बहो में है, और उसकी छूट वाले भाग पर कुछ चुभ रहा है, पहले तो उसे लगा की शायद ये सपना है पर जैसे जैसे नींद टूट टी गयी, उसे यकीं हो गया की ये सपना नहीं है. उसने आंख खोल कर देखा तो वो शिव की बहो में थी, वो उसके शाइन से लगी हुई थी, वो जानती थी की ये सपना नहीं है फिर भी उसे ये सपने जैसा hi लग रहा था. नींद में न जाने कैसे ये हो गया था पर अभी वो शिव की बाहोंमे थी, एक बार तो उसे लगा की वो दूर हो जाये पर वो हो न शक्ति. आज पहली बार उसे किसी की बहो में अच्छा लग रहा था, उसको कितने hi मर्दो ने अपनी बहो में लिया था पर वो बे मर्जी से hi था. पर आज उसे शिव की बहो में अच्छा लग रहा था. उसका ध्यान अपनी छूट पर हो रही चुभन की और गया. उसने ध्यान से देखा तो पाया की उसकी तंग शिव के ऊपर चढ़ी हुई है, रात को नहाने के बाद उसने निचे पंतय पहनी नहीं थी. सिर्फ पेटीकोट पहन कर hi सो गयी थी. अभी उसका पेटीकोट ऊपर चढ़ा हुआ था और उसकी नंगी छूट के छेद पर शिव का लुंड पाजामे के कपडे समेत लगा हुआ था. उसका दिल जोरो से धड़कने लगा. एक बार उसने सोचा की वो सही से लेट जाये और शिव से दूर चली जाये पर उसका शरीर साथ नहीं दे रहा था. उसने डरते डरते अपनी कमर को आगे किआ तो लुंड छूट के छेड़ को फ़ैलाने लगा, गायत्री की आंखे बंद हो गयी. वो हलके हलके अपनी कमर हिलने लगी. उसे महसूस हो रहा था की उसकी छूट का छेड़ बहोत ज्यादा फ़ैल गया है, उसकी छूट में चींटिया काटने लगी, उसे अपनी छूट में लुंड चाहिए था. लुंड पाजामे के अंदर था. उसने डरते डरते शिव को देखा जो अभी सो रहा था. उसने अपनी कमर पीछे खिसकायी और लुंड को छू कर देखा. अपनी उंगलिओ से टटोल कर लुंड को बहार निकलने का रास्ता ढूंढने लगी. उसका दिल तड़प रहा था, पर उसे कोई रास्ता नहीं मिल रहा था, उसने देखा की पाजामे का नाडा बहार hi है तो उसने आहिस्ता से वो खिंच दिया, उसकी खुशनसीबी से नाडा आसानी से खुल गया. उसने आहिस्ता से लुंड को बहार निकला. उसका दीद जोरो से धड़क रहा था. लुंड इतना बड़ा था की आसानी से बहार नहीं निकल रहा था. गायत्री का चेहरा पशीने से भीग गया था. वो कुछ सोचने समझने के हालत में नहीं थी. जैसे तैसे उसने लुंड को बहार निकला, वो गरम गरम सख्त डंडा उसके हाथ में आते hi, उसकी छूट में पानी बहने लगा, पता नहीं पर आज उसे पहली बार ये एहसास हो रहा था. इतनी बार छोड़ने के बाद भी इस तरह की उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी. जैसे तैसे उसने लुंड बहार निकला और अपनी भीगी हुई छूट के छेड़ पर लगा दिया. वो धीरे धीरे अपनी कमर आगे खिसकने लगी. लुंड उसकी छूट के छेड़ को फ़ैलाने लगा, वो अंदर लेने लगी, उसकी छूट का छेड़ फ़ैल रहा था, आज पहली बार उसकी छूट में इतना बड़ा कुछ जा रहा था, उसने अपने होठो को दांतो से दबा दिया, उसने अपनी कमर से धक्का मारा तो लुंड का सूपड़ा उसकी छूट के छेड़ को फैट हुए अंदर चला गया. एक दम से फैला कर लुंड का सूपड़ा अंदर गया तो गायत्री के मुँह से आवाज निकलते निकलते रह गयी,





वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की जैसे hi सूपड़ा अंदर घुसा उसका बांध टूट गया और वो हफ्ते हुए झड़ने लगी. उसे खुद यकीं नहीं हो रहा था की ऐसा आनंद तो उसने कभी नहीं पाया था, वो लोहे सा कड़क लुंड उसकी छूट के छेड़ में फंसा हुआ था और उसकी छूट से गर्म गर्म लावा फुट रहा था. शिव नींद में था, उसे अपने लुंड पर हो रही गरम पानी की बौछार महसूस होने लगी. वो जैसे hi होश में आया तो उसे महसूस हुआ की उसका लुंड किसी गर्म जगह के अंदर है. वो चौंक गया, उसे होश आया की वो गायत्री दीदी को अपनी बहो में भरे हुए है, और उसका लुंड गायत्री दीदी की छूट के अंदर है.

ये क्या हो गया था, मेरा लुंड कैसे दीदी की छूट के अंदर चला गया था, अगर दीदी को पता लग राया तो वो क्या सोचे गई. मेने दीदी के पेअर को अपने ऊपर से हटाने की कोशिस की. (गायत्री को जैसे hi पता चल की शिव जाग चूका है तो उसकी हालत ख़राब होने लगी, वो सोचने लगी की अब क्या होगा, शिव उसके बारेमे क्या सोचेगा. उसकी साडी उत्तेजना रफूचक्कर हो गयी. उसे अपने आप पर शर्म आने लगी. वो बिना हिले डुले बस लेती रही, वो यही दिखा रही थी की वो सोई हुई है.) मेरा लुंड दीदी की छूट के अंदर घुसा हुआ था, मेने दीदी की और देखा तो वो सोई हुई थी, मैंने जैसे तैसे अपने लुंड को निकला और उनके पेअर को सीधा किआ. दीदी को सीधा लेता दिया और उठ खड़ा हुआ, दीदी का पेटीकोट कमर तक चढ़ा हुआ है, दीदी की छूट हलके बालो से ढंकी हुई थी, छूट के होठो के बिच से रास टपक रहा था, मेने फ़ौरन अपने लुंड को देखा पर मुझे यकीं था की ये वीर्य नहीं है, वैसे भी वो पानी हलके कलर का था. कुछ पल मेने दीदी को देखा, भरी हुई झांघो के बिच हलके बालो से सजी छूट काफी आकर्षक लग रही थी, मेने अपने लुंड को अंदर किआ और पाजामे का नाडा बांध दिया. मेने दीदी का पेटीकोट निचे किआ, और बाथरूम की और निकल गया. गायत्री दीदी के साथ जो हुआ था वो मेरी गलती की वजह से हुआ था, ये सोचते हुए में जूही मैडम के घर की और निकल गया.

गयम से में भार्गवी मैडम से मिलने पुलिस स्टेशन चला गया. रात को वो देर से गयी थी तो अभी वो आयी नहीं थी. एक हवलदार मुझे पहचानता था तो उसने भार्गवी मैडम को फ़ोन किआ और मेरी बात करवाई. मैडम ने मुझे अपने घर आने को कहा. एड्रेस ले कर में उनके घर चला गया.
 
अपडेट 71

में भार्गवी मैडम का घर ढूंढते ढूंढते पुलिस हेड क्वार्टर में पहुंच गया, आगे की तरफ तीन मज़ाले की इमारते थी जो कॉन्स्टेबलों के लिए बानी हुई थी, बहोत साडी औरते अपना काम कर रही थी कुछ बाटे कर रही थी, कुछ बच्चे वह खेल रहे थे, मेने एक आदमी से पता पूछा तो उसने मुझे रास्ता बताया. में चलते चलते कॉलोनी के आखिर में बने बंग्लोव्स की क़तर में चला गया, घर का नंबर धुंध कर में गेट के अंदर चला गया. दरवाजे पर जा कर मेने बेल बजायी. थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला तो भार्गवी मैडम नजर आयी. उन्होंने एक चुस्त T-shirt पहना हुआ था और निचे ट्रैक पंत था. T-shirt भी पशीने से थोड़ा भीगा हुआ था. मैडम का ये रूप देख कर में चकित रह गया. वैसे तो वो काफी सुन्दर थी, और पुलिस यूनिफार्म में भी वो कमल की दिखती है पर इस वक़्त वो बेमिसाल दिख रही थी. माध्यम से थोड़े बड़े आकर के स्तन अपना जलवा दिखा रहे थे, पेट सपाट था और कूल्हे साइड से बहार निकले हुए थे. परफेक्ट फिगर की वो मालकिन थी. पर वो थी तो एक पुलिसवाली, तो में उन्हें ऐसे देख नहीं सकता था, और वैसे भी वो सख्त थी. मेने अपनी निगाहे उनके चेहरे पर डाली, उन्होंने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किआ.

भार्गवी : आ जाओ शिव. कैसे हो?

शिव : जी में ठीक हु, आप कैसी है?

भार्गवी : (जवाब में वो सिर्फ मुस्कुरायी) आओ, बैठो. (अपने पास के तौलिये से वो अपने चेहरे का पसीना पोछ रही थी, उनको देख कर ऐसा लग रहा था की वो कसरत कर रही थी) कहो कैसे आना हुआ?

शिव : ऐसी तो कोई खास बात नहीं है, पर में पूछना चाहता था की अगर में दो तीन दिन के लिए बहार जाऊ तो चलेगा, मेरा मतलब है की अनाथालय की सुरक्षा के लिहाज़ से?

भार्गवी : कहा जाना है?

शिव : एक शादी में.

भार्गवी : है, जा शक्ति हो, वैसे भी जहा तक मुझे लग रहा है अब कोई परेशानी नहीं होगी. हमने उस इंस्पेक्टर को भी गिरफ्तार कर लिया है जिनके इससरए पर अनाथालय पर हुम्ला हुआ था. वो आदमी भी पकड़ा गया है जो वह से भाग गया था. तो मेरे ख्याल से तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

शिव : ये वही इंस्पेक्टर है न जिन्होंने गायत्री दीदी के साथ...

भार्गवी : है, वही है. वैसे एक तरह से अच्छा हुआ की वो पकड़ा गया, वर्ण उसी की पोस्टिंग यहाँ होनेवाली थी. इंस्पेक्टर धनपाल के पकडेजाने के बाद सीनियर इंस्पेक्टर के तोर पर मिश्रा को hi यही भेजनेवाले थे, अब वो भी पकड़ा गया है. हमे तो पता hi नहीं था की मैनेजर और वो मिले हुए है, अगर वो यहाँ आ जाता तो शायद सबूतों के साथ छेड़ छड़ कर के मैनेजर को बचने की कोशिस करता, पर तुम्हारी वजह से वो पकड़ा गया.

शिव : मेरी वजह से कैसे?

भार्गवी : तुम, गायत्री को छुड़ा लाये और उसी के बयां के आधार पर वो पकड़ा गया. अच्छा हुआ तुम आ गए, वैसे भी में तुम से मिलना चाहती थी.

शिव : वो क्यों मैडम.

भार्गवी : दो बातो के लिए, एक तो तुम्हे डांटना था और दूसरा तुम्हारा सुक्रिया भी करना था.

शिव : में कुछ समजा नहीं, डांटना भी है और सुक्रिया भी...

भार्गवी : सुक्रिया इस लिए की अब डिपार्टमेंट ने मुझे सीनियर इंस्पेक्टर के लिए प्रमोट करने का फैसला लिया है, और ये सब हुआ तुम्हारे केस की वजह से तो तुम्हारा सुक्रिया करना था.

शिव : ये सब मेरी वजह से थोड़ी न हुआ है, ये सब आप की वजह से hi हुआ है, आप ने किसी के दबाव में आये बगैर अपना काम किआ तो आप hi हक़दार थी. पर डांटना किसलिए था?

भार्गवी : डांटना इस लिए था की तुम अपने आप को समझते क्या हो, क्या तुम कोई सुपर हीरो हो? तुम जानते हो अगर रेडलीगत एरिया में कुछ ऊंच नीच हो जाती तो, वो कितना खतरनाक इलाका है. रोज के कितने hi मामले दर्ज़ होते है पर किसी बात का कोई साबुत नहीं मिलता, पूरा का पूरा आदमी गायब हो जाता है वह से. और तुम ऐसे hi वह घुस गए. एक बार मुझे बताना तो था.

शिव : सॉरी मैडम, वो सब अचानक से हो गया, में तो बस गायत्री दीदी को ढूँढना चाहता था, एक बार उन्हें धुंध लू फिर आगे क्या करना है वो सोच सकू, पर सब अचानक हो गया.

भार्गवी : सुना है वह लड़ाई भी हुई थी तुम्हारी.

शिव : (अपना शिर झुकाते hue)Ha मैडम, वह के दो लोग थे जिनके साथ हाथापाई हो गयी थी.

भार्गवी : तुम जानते हो वो कैसे खतरनाक लोगो को वह रखते है, वो दो लोग बिस के बराबर होते है, मुझे तो इस बात का आश्चर्य है की तुम ने उन्हें मात कैसे दी. दिखने में तो तुम ऐसे नहीं दीखते. (में क्या कहता, में बस शिर झुकाये बैठा रहा) अभी देखो, कैसे एक छोटे बच्चे लग रहे हो, जो अपनी गलती पर शिर झुकाये शर्मिंदा हो रहा है, सच कहु तू अभी भी मुझे यकीं नहीं हो रहा की तुमने उन्हें मारा था, और काव्यजि बता रही थी की रस्ते में भी तुमने चार लड़को को मारा था. वो भी उन्होंने देखा नहीं था, क्यों की जब वो पहुंची थी तब वो सब जमीं पर पड़े हुए थे. क्या सच में तुमने मारा था? (में फिर कुछ नहीं बोलै, सिर्फ शिर झुकाये बैठा रहा) सचमे यकीं करना मुश्किल है. उस दिन मेने अनाथालय पर उन आदमीओ की हालत देखि न होती तो में बिलकुल यकीं न करती. पता नहीं ये सब तुम कैसे करते हो, क्यों की तुम्हे देख कर तो लगता नहीं. क्या तुम लड़ना जानते हो? मेरा मतलब है, कोई करते वारते किआ हुआ है काया?

शिव : नहीं मैडम.

भार्गवी : देखो शिव, मुझे तुम्हारी चिंता हो रही है इस लिए कह रही हु, ऐसे किसी से भी उलझना खतरनाक होता है, वो गुंडे होते है, लड़ाई जगहदा hi उनका काम होता है, तुम एक सीधे सादे लड़के हो, तुम्हे संभल कर रहना चाहिए.

शिव : सॉरी मैडम, पर में क्या करू, कोई, किसी पर जुल्म करे तो में चुप नहीं रह शक्ति. रही मेरी सुरक्षा की बात तो क्या आप मुझे कुछ सीखा शक्ति है, क्यों की आप तो एक त्रिनेड अफसर है.

भार्गवी : मतलब ये हुआ की अभी भी तुम लड़ाई नहीं छोड़ोगे.

शिव : (झेपते hue)Nahi, मेरे कहने का वो मतलब नहीं है, पर अगर कुछ आता हो तो अपनी और अपनों की सुरक्षा क्र पाव, इसलिलिये कह रहा था.

भार्गवी :(मैडम मेरी और देख रही thi)Dekho शिव, पहली बात तो कभी ऐसी कोई सिचुएशन आये तो पुलिस को खबर कर दो, हम होते hi इसीलिए hai.Aur रही बात तुम्हे सीखने की तो थोड़ा बहोत तो में तुम्हे सीखा hi शक्ति हु, है पर सिखने के बाद तुम जितनी ज्यादा प्रैक्टिस करोगे उतना hi उसका इस्तेमाल कर पाओगे. है पर ये सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए hi करना, किसी पर झोर आजमाने के लिए नहीं.

शिव : जी मैडम.

भार्गवी : आओ मेरे sath.(Me उनके साथ पीछे की तरफ चला गया, वह मैडम ने एक बॉक्सिंग बैग, और बहोत सी चीजे लगा रक्खी थी. में सब आश्चर्य से देख रहा था. मुझे ऐसे देखते देख वो मुस्कुरायी.) हमारा भी यही काम है तो अपने आप को हर बात के लिए तैयार रखना पड़ता है. चलो अब आओ और मुज पर हमला करो, में भी तो देखु तुम में कितना दम है.

शिव : में आप पर हुम्ला...

भार्गवी : ये खेल है, अगर तुम्हे सीखना है तो आ जाओ, और हुम्ला ऐसे करो जैसे असल में हुम्ला कर रहे हो. (मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, में उन पर हुम्ला कैसे कर शक्ति था, फिर भी मेने सामान्य तरीके से उन्हें मरने के लिए अपना हाथ उठाया, में दर रहा था की अभी उन्हें लग जायेगा, पर में कुछ समझता उस से पहले hi उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और में हवा में उठ गया, में कुछ समझता उस से पहले hi में जमीं पर सीधे मुँह गिरा हुआ था, मेने अपने आप को संभाला और मैडम को देखा तो वो मुस्कुरा रही थी.) बस इतनी hi ताक़त है? (मुझे बुरा लगा, में वह से खड़ा हुआ, फिर मेने अपनी पोशण ली, और फिर मेने दूसरे तरीके से हुम्ला किआ, पर इस बार भी नतीजा शामे hi था, में फिर से जमीं पर गिरा हुआ था, मेने मैडम को देखा तो मुस्कुरा रही thi)Kyu क्या hua?(Me फिर उठा, इस बार मेने उन्हें मरने की एक्शन की पर मरने की बजाय उन्हें पकड़ लिया, मेने एक हाथ कमर में दाल दिया और दूसरे हाथ से उनकी गर्दन पकड़ ली, वो थोड़ी छत पटायी, पद मेरी पकड़ मजबूत थी, पर अचानक उन्होंने अपना हाथ इस तरह से मेरे हाथ में डाला की उनकी गर्दन से मेरा हाथ निकल गया और फिर एक बार में जमीं पर पड़ा था.) बहोत अच्छे शिव. (ये खेल काफी देर तक चला पर हर बार वो मुझे पछाड़ रही थी, में सचमे मान गया था की वो बहोत अच्छा लड़ती है, अब तक में काफी कुछ समाज गया था, इस्सलिये जैसे hi वो मुझे पछाड़ने गयी, मेने पत्र बदला और उन्हें अपनी गिरफ्तमें लिया, पर जैसे hi मुझे होश आया में दर गया क्यों की मेने सख्ती से उनके एक स्तन को पकड़ लिया था, में बहोत दर गया और तुरंत मेने उन्हें छोड़ दिया, और अपनी निगाहे झुकाये पीछे हैट gaya)(Bhargavi को तेज दर्द हुआ था अपने स्तन पर, उसने शिव की और गुस्से से देखा पर वो शिर झुकाये खड़ा था, वो समाज गयी की गलती से हो गया था, और वो ये भी समझती थी की शारीरिक लड़ाई में अकसर ऐसा कुछ हो जाता है, उसने शिव को देखा तो उसके चेहरे पर पछतावा दिख रहा था, वैसे भी वो दोनों काफी देर से ये सब कर रहे थे, वो भी थक गयी थी) चलो अंदर चलते hai.(Hum दोनों अंदर आ गए, उन्होंने मुझे पानी दिया, में उनसे नज़ारे नहीं मिला रहा tha)(Bhargavi ने बात को बदलना hi सही समजा) वैसे एक बात तो मान नई पड़ेगी, शिव. भले hi तुम हर रहे थे, पर तुम में दर्द सहने की क्षमता बहोत है, जितनी बार मेने तुम्हे पछाड़ा, उतनी बार अगर किसी और को पछाड़ा होता तो वो अभी चलने के लायक न होता. और यही तुम्हारा प्लस पॉइंट है, हम सामने वाले के प्रहार को जितना सेह लेते है उतना hi हम उस पर प्रहार करने ले काबिल बने रहते है. और शायद यही हथियार है तुम्हारा, तुम पर सामनेवाले के प्रहार का ज्यादा असर नहीं होता और वो तुम्हारे प्रहार को सेह नहीं पता. वैसे एक बात तो अच्छी हो गयी, आज बहोत दिनों बाद मेने इतनी प्रैक्टिस की है. जब वक़्त हो और अगर तुम आना चाहो तो फिर प्रैक्टिस के लिए आ शक्ति हो. में रोज सुबह यहाँ प्रैक्टिस करती हु.

शिव : जी मैडम. थैंक यू. अब में चलता हु, मुझे स्कूल भी जाना है.

भार्गवी : ठीक है, और अनाथालय की चिंता मात करना में देख लुंगी, तुम्हे शादी में जाना है तो जा आओ.

शिव : जी मैडम, थैंक यू, bye.

भार्गवी : Bye. (वो दरवाजे पर कड़ी, शिव को जाता देख रही थी, जब वो उसकी आँखों से ौजल हो गया तो वो दरवाजा बंद कर के सोफे पर बैठी, पर उसकी कराह निकल गयी, उसे अपने स्तन पर दर्द हुआ. उसने हाथ से दबाया तो भी दर्द महसूस हुआ. वो उठी और अंदर रूम में मिरर के सामने कड़ी हो गयी, उसने अपनी t-shirt निकली, और ब्रा भी निकल दी. उसके सुडोल स्तन हवामे आज़ाद थे, उसने स्तन को ध्यान से देखा तो उसके एक स्तन पर उंगलिओ के निशान उभर आये थे, ये सोच कर hi की शिव ने उसका स्तन दबा दिया था, उसकी आंखे शर्म से झुक गयी. आज पहलीबार किसी ने ये हरकत की थी. उसने एक बार अपनी नज़ारे उठा कर अपनी hi आँखों में देखा पर वो नज़ारे मिला न पायी, और फिर नज़ारे झुकाये वह से बाथरूम की और निकल गयी.

गायत्री सुबह से परेशां थी, वो रात की बात सोच सोच कर परेशां थी, उसे इतना तो पता चल गया था की शिव जब जगा तब उसका वो अंग उसके अंदर था, और वो ये सोच सोच कर परेशां हो रही थी की शिव क्या सोच रहा होगा. उसे ये सोच कर hi ग्लानि हो रही थी की उसने कैसी हरकत करदी थी. वो अपने आप को कोष रही थी की, भावनाओ में बह कर वो कितनी गन्दी हरकत कर गयी थी. वो अपने आप पर गुस्सा हो रही थी की जिस शिव ने अपनी जान पर खेल कर उसे बचाया था उसी के साथ वो ये सब कर गयी. पर कही न कही उसका दिल बहोत खुस भी था, अपने अंदर शिव के लुंड को महसूस करके वो सुबह से उत्तेजित हो रही थी. पर फिर अपने आप को कोशने लगती. वो चुप चाप अपना काम किये जा रही थी. लता और सरिता ने पूछा भी था की क्या हुआ, पर उसने बात को ताल दिया. वो सोच सोच कर परेशां थी की वो शिव से कैसे नज़ारे मिलाएगी.

जब में अनाथालय में दाखिल हुआ तो लतादिदी और सरिता दीदी खाना बना रही थी और गायत्रीदिदी बर्तन साफ़ कर रही थी. उन्हें देख कर hi मुझे कल की घटना याद आ गयी. मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा. वैसे मेरी गलती नहीं थी, जो कुछ हुआ था वो नींद में हुआ था, पर हुआ तो था, ये तो अच्छा हुआ की गायत्रीदिदी को पता नहीं चला वर्ण वो क्या सोचती. पर मुझे अभी भी एक बात समाज में नहीं आ रही थी की मेरा लुंड बहार निकला कैसे. वैसे भी गायत्रीदिदी को कुछ पता नहीं था यही मेरे लिए अच्छी बात थी. में पहले लतादिदी से मिला, उनको गाल पर किश किआ, फिर सरितादिदी को भी गाल पर किश किया, उन्होंने मेरा मैथ सहलाया. मेने गायत्रीदिदी को गुडमॉर्निंग कहा और अपने कमरेमे जाने लगा.

सरितादिदी : ऐसा पक्षपात क्यों कर रहा है शिव, मुझे प्यार किआ, लता को प्यार किआ तो फिर गायत्री को क्यों छोड़ दिया?

सरितादिदी की बात सुन कर में झेप गया, कल रात की बात से मुझे हिचकिचायत हो रही थी और यही हाल गायत्री का भी था, दोनों को यही लग रहा था की गलती उसकी है. अब सरितादिदी ने बोल दिया था तो में ऐसे hi चला जाता तो गायत्री दीदी को बुरा लगता इस लिया में गायत्रीदिदी के पास gaya(Gayatri की धड़कने तेज हो गयी thi)Wo मेरी और पीठ किये बैठी थी तो में झुका और उनके गाल पर किश किआ, मुझे महसूस हुआ की वो कैंप गयी थी. अभी में उनसे इतना घुलामिला नहीं था तो थोड़ा अजीब लग रहा था पर अगर न करता तो उन्हें बुरा लगता.

शिव : (सरितादिदी ko)Ab ठीक hai?(Sarita दीदी मुस्कुरायी, में वह से अपने रूम की और chalagaya)(Gayatri अपने गाल पर शिव के होठो का गीलापन महसूस कर के शर्माने लगी, और मुस्कुराते हुए अपने काम में लग गयी)

वह बिना स्कूल के लिए तैयार हो रही थी और साथ में बेचैन थी. कल शिव आया भी और चला भी गया पर कुछ हो न पाया.

बिना : (मान में) ये क्या हो गया है मुझे? ऐसा तो पहले कभी महसूस न हुआ. क्यों बेचैन हो रही हु में उसके लिए. ये सब नव्या की वजह से hi हुआ है, नहीं नहीं ऐसा में कैसे कह शक्ति हु, उसने थोड़ी न मेरे साथ कुछ किया है. सच में मुझे शिव की कमी बहोत खाल रही है, ओह शिव, आ जाओ. (वो ये सब सोच hi रही थी की नव्या का फ़ोन आ गया, उसने मुस्कुराते हुए फ़ोन उठाया)

बिना : शैतान का नाम लिया और शैतान हाजिर.

नव्या : है है है... मेरे बारेमे सोच रही थी?

बिना : है, गालिया दे रही थी.

नव्या : क्यों भाई? हमने ऐसा क्या कर दिया जो गालिया दी जा रही है?

बिना : तेरी वजह से तो ये सब हो गया.

नव्या : क्या हो गया? जरा खुल कर बता.

बिना : वो लड़का था न...

नव्या : कोण सा? तूने थप्पड़ मर दिया था वो?

बिना : है वही, उसके sath(Wo चुप हो गयी)

नव्या : क्या हुआ? क्या किआ फिर उसने? देख मुझे दर लग रहा है, ऐसे बात मात छोड़...

बिना : आरी नहीं ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ, वो और मेरे बिच वो हो गया.

नव्या : क्या? सच में ? कैसे? सब ठीक है न?

बिना : है सब ठीक है, ऐसी वैसी कोई बात नहीं, पर में उसके लिए बेचैन हो रही हु, इस लिए तुजे गालिया दे रही थी. तेरी वजह से ये सब हुआ और अब में उसे बहोत मिस कर रही हु.

नव्या : ो हो, ऐसा क्या जादू करदिया उसने की तू उसे मिस कर रही है? कैसा दीखता है वो? अगर फोटो है तो भेज न यार.

बिना : ठीक है चालू rakh(Usne शिव की एक चेहरेवाली फोटो भेजी) ले देख ले.





नव्या : एक minute(Usne फोटो ओपन की और उसे देखने के बाद) लड़का तो कितना हैंडसम है यार, पर छोटा है, अभी तो बच्चा है, तूने इसके साथ वो सब कर liya(Navya को लगा की बिना को पहलीबार सेक्स की ख़ुशी मिली है तो वो इस बच्चे से खुस हो गयी)

बिना : तुजे ये बच्चा लगता है? रुक अभी एक और पिक्चर भेजती hu(Usne उन दोनों की साथ वाली पुरे कद की पिक्चर भेजी) देख इससे.





नव्या : एक मिनट (फोटो देख कर) बापरे, ये तो ये तो कितना लम्बा है, इसके साथ तो तू बच्ची लग रही है.

बिना : (हस्ते hue)Kyu अभी तो कह रही थी की मेने बच्चे के साथ वो सब कर लिया. अब समाज में आया, वो कोई बच्चा नहीं है, मुझे ऐसे उथलेटा है जैसे में एक छोटी बच्ची हु.

नव्या : और उसका वो कैसा है?

बिना : (जूठा गुस्सा करते hue)Kya बेहूदा सवाल करती है?

नव्या : बता न यार, मुज से कैसी शर्म.?

बिना : वो भी बड़ा है, बहोत बड़ा.

नव्या : वो तो तू पहलीबार देख रही है इस लिए तुजे बड़ा लग रहा hoga.(Uske दिल में जलन हो रही थी, क्यों की जितना लम्बा वो फोटो में दिख रहा था उस हिसाब से उसे इतना तो पता चल गया था की सच में उसका लुम्बा hi होगा)

बिना : भले hi मेने अपने पति का देखा नहीं पर उसे छुआ तो है hi, उस हिसाब से तो ये बहोत बड़ा है.

नव्या : तूने ले लय उसका? कैसा रहा अनुभव?

बिना : ले लिया? जान हाथ में आ गयी थी, पहलीबार तो खून भी नक़ल गया था.

नव्या : चल इतनी भी फेंक मत, तू कुवारी थोड़ी थी जो खून निकलेगा.

बिना : वो मुझे नहीं पता, पर मेरे पास अभी भी वो बेडशीट है जिस पर वो निशान है.

नव्या : क्या? तूने वो संभल कर रख्खी है? ऐसा तो अक्सर लड़कीअ अपनी सुहागरात की चद्दर के साथ करती है जब वो बहोत खुस हो जाती है. लगता है तुजे बहोत मज़ा आया उसके साथ. वैसे कितनी देर कर लेता है?

बिना : जब भी वो करता है तो 1 बार में वो 1 घंटा तो काम से काम करता है. वैसे उसका एक बार होता है मेरा तो तीन –चार बार हो चूका होता है.

नव्या : क्या सच में? यार बुरा मात मन न, पर मुझे जलन हो रही है, ऐसा नहीं है की में खुस नहीं हु पर तेरा तो तू मच है यार. अभी तो मेरा मान कर रहा है की एक बार तेरे घर का चक्कर लगा लू.

बिना : वो वैसा नहीं है की किसी के भी साथ भी कर ले, वो अच्छा लड़का है. अनाथ है par...Are है एक बात याद आयी, हम ने एक वीडियो बनाया है, उसके अनाथालय के लिए डोनेशन के लिए, वो में तुजे भी भेजूंगी, अगर तू डोनेशन देना चाहे तो ठीक है पर अगर न भी देना चाहे तो उसे अपने ग्रुप में फॉरवर्ड कर देना.

नव्या : ऐसा क्यों कह रही है? में डोनेशन दूंगी भी और फॉरवर्ड भी करुँगी.

बिना : सो नीस ऑफ़ यू. अच्छा चल रखती हु मुझे स्कूल भी जाना है, फिर बात करेंगे. Bye.

नव्या : Bye, एंड एन्जॉय योर लाइफ.
 
अपडेट 72

रात को जब हम साथ में खाना खाने बैठे हुए थे तो मेने रंजन से पूछा.

शिव : तुम्हारी सहेली के वह शादी कब की है?

रंजन : (ऐसे अचानक पूछने से वो थोड़ा चौंक गयी) इस सैटरडे, संडे की है.

शिव : जाना जरुरी है क्या?

रंजन : वैसे तो कोई जरुरी नहीं पर...

लतादिदी : अरे जाने दे न, वैसे भी हमलोगो को कोण शादी में बुलाता है, इसकी सहेली बनगयी है तो उसे बुलाया है, वो भी तो देखे की ये सब क्या होता है.

शिव : मेने कब मन किआ, मेटो इस्सलिये पूछ रहा था की मुझे समाजमे आये की कब जाना है.

लतादिदी : तू भी जानेवाला है क्या?

रंजन : है दीदी, दिव्या ने खुद इससे भी निमंत्रण दिया है.

लतादिदी : चलो अच्छा है, तू जायेगा तो मुझे इनकी चिंता नहीं रहेगी, वर्ण दोनों को अकेले भेजने का मेरा दिल नहीं कर रहा था.

शिव : आप फ़िक्र मात करना, में इनदोनो के साथ hi जाऊंगा, वैसे भी इस बंदरिया को अकेला नहीं छोड़ shakte.(Sab हसने लगे, रंजन ने मुँह फुला लिया)

लतादिदी : क्यों चिड़ा रहा है इसको, खाना खाने दे, वर्ण उठ के चली जाएगी.

रंजन : में कही नहीं जानेवाली दीदी, अगर में बंदरिया तो ये भी तो बन्दर है.

लतादिदी : तुम दोनों फिर मात सुरु हो जाना, अब चुप चाप खाना खाओ.

सरितादिदी : लड़ने दे न दोनों को, आज कितने दिनों बाद ऐसा मस्ती का माहौल बना है. अब ये अनाथालय नहीं हमारा घर लग रहा है, क्या कहती हो गायत्री.

गायत्रीदिदी : सही कहा तुमने, कितना सब बदल गया है, पहले तो लगता था की कब यहाँ से छुटकारा मिलेगा, पर अब इससे छोड़ने का मान नहीं करेगा.

शिव : तो कोण आप को छोड़ने के लिए कह रहा है, आप hi का घर है.

गायत्रीदिदी : ये हम सब का घर है.

सरितादिदी : और हमारा मुखिया है tu(Shiv को)

शिव : में नहीं हु यहाँ का मुखिया, ये रही हमारी मैनेजर, कुमारी लता देवी.

लतादिदी : में कोई मैनेजर नहीं हु, तूने hi मुझे बना दिया है, हमारे लिए तो तू hi सब कुछ है. (सबने सहमति दी)

शिव : लगता है, सबने मिल कर मुझे बलि का बकरा बनाने का सोच लिया है.

सरितादिदी : अब चाहे जो भी समाज, पर हम सब का तू hi मुखिया है, क्या कहती हो sab.(Sab ने मिलकर है कहा) सुनलिया, अब तू भाग नहीं शक्ति, इन सब को तुजे hi संभालना है, समाज.

ऐसे hi हंसी मजाक करते करते हम सबने खाना खाया. आज सचमे खाने में मज़ा आ गया.

खाने के बाद...

रंजन : (लता से) दीदी हम हमारे कमरे में सो जाये?

लतादिदी : जैसा तुम्हे ठीक लगे, दर तो नहीं लगेगाना.

रंजन : अब कहे का दर दीदी, ये बन्दर है न.

शिव : बन्दर क्या करेगा, वो तो बेचारा गुलाटी hi मर शक्ति है, अगर में बन्दर हु तो तुम्हे खतरे से में नहीं बचा शक्ति.

रंजन : वो तो तूने मुझे बंदरिया कहा था इस्सलिये मेने कहा, वर्ण तू शेर है हमारा, क्यों दीदी.

शिव : पर तू तो बंदरिया hi है.

रंजन : Didiiiiiiiiii.

लतादिदी : अब बस करो तुम्हारा, जाओ रंजन, तुम और विणा, अपना बिस्तर अपने कमरे में लगा do.(Ye कह कर दीदी चली गयी)

रंजन : (मुझे घूरते hue)Tuje जो कहना है कह, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर तू मुझे बंदरिया कहेगा तो भी तू मेरा बन्दर रहेगा, अगर तू मुझे गाढ़ी भी कहेगा तो तू hi मेरा गधा बनेगा, अब तुजे तय करना है की तुजे क्या बन न है.

शिव : (मुस्कुराते हुए) मुझे कोई सोख नहीं कुछ भी बनने का.

रंजन : तू आ मेरे कमरे में तुजे दिखती हु. (वो ये कह कर नखरा दिखा कर चली गयी, में उसे मुस्कुराते हुए जाते देख रहा था.)

जब हम पढ़ने बैठे तो भी वो मुझे गुस्से से घर रही थी, में उसे देख कर मुस्कुरा रहा था. जैसे hi विणा ने कहा की मुझे सोना है, में समाज गया की अब रंजन मुज पर चढ़े गई, तो में भी वह से भागलिया, वो और गुस्सा हो गयी. में हस्ते हुए अपने कमरे में गया और किताबे रक्खी. में जब हॉल में पंहुचा तो तीनो दिदिया बेथ के बाटे कर रही थी. मुझे देख कर...

लतादिदी : आ गया तू?

शिव : है दीदी.

सरितादिदी : सुन लता, अगर तुजे भी अपने कमरे में सोना है तो चालिजा, में और गायत्री है यहाँ. (में दीदी को देखने लगा)

लतादिदी : (लता एकदम शर्मा गयी) नहीं अभी नहीं, कुछ दिनों बाद देखते है.

सरितादिदी : जैसी तेरी मर्जी. आजा शिव सोते है.

सरितादिदी और लतादिदी साथमे सोती थी और लतादिदी के बाजु में में, पर अब रंजन और विणा नहीं थी, तो मेरे बाजु में गायत्रीदिदी सोनेवाली थी, पर कल रात के हुए हादसे से में हिचकिचा रहा था.

शिव : में कहा सोउ दीदी.

सरितादिदी : अरे जैसे सोता है वैसे hi लता के साइड में सो जा न. क्यों गायत्री, तुजे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है न?

गायत्रीदिदी : (झेपते hue)Nahi, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं.

सरितादिदी : चल अब सो जा. सुबह जल्दी भी उठना है तुजे.

अब में क्या करता, में लेट गया, गायत्री दीदी भी थोड़ा अंतर रखते हुए लेट गयी. में आंखे बंद करके सोने की कोशिस कर रहा था, पर नींद नहीं आ रही थी. थोड़ी देर बाद मेने लतादिदी को देखा तो उनकी आंखे बंद थी, मेने गायत्रीदिदी को देखा तो उनकी भी आंखे बंद थी, फिर से मेने लतादिदी की और देखा तो उनकी आंखे खुली थी और वो मुझे hi देख रही thi(Mere शिर को इधर उधर घूमने से हुई आवाज से उन्होंने आंखे खोल दी थी क्यों की नींद तो उन्हें भी नहीं आ रही थी) मेने उन्हें देखा तो मुझे इससरए से पूछने लगी की क्या हुआ. मेने गर्दन हिला कर ना कहा (मतलब कुछ नहीं) वो थोड़ी देर मुझे देख रही थी, में भी उनकी आंखोमे देख रहा था, उन्होंने थोड़ा ऊपर उठ कर गायत्रीदिदी को देखा, फिर खिसक कर मेरे करीब आ गयी, मेने उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया, वो भी अपनी आंखे बंद किये हुए मेरे शाइन में समां गयी. थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना शिर उठाकर मुझे देखा, में भी उनकी आँखों में देख रहा था, मेने अपना शिर झुकाया और उनके होठो पे अपने होठ रख दिया, उन्होंने भी अपनी आंखे बंद कर ली, हम दोनों प्यार से एक दूसरे के होठो और जीभ से खेलने लगे.

गायत्री को भी शिव के बाजु में लेटने से नींद नहीं आ रही थी, बार बार उसे कल रात वाला किस्सा hi याद आ रहा था, उसे अपनी छूट के अंदर शिव का लुंड महसूस हो रहा था, वो गरम हो रही थी, पर क्या कर शक्ति थी, वो बस अपनी आंखे मूंदे लेती हुई थी. जब उसे हलचल महसूस हुई तो उसने अपनी आंखे खोली, और जो उसने देखा उसे देखा कर वो दांग रह गयी. पेले तो उसे यकीं hi नहीं हुआ, पर गौर से देखने के बाद वो समाज गयी की शिव और लता किश कर रहे है. वो देख तो रही थी पर उसपर यकीं नहीं हो रहा था. शिव, लता को दीदी बुलाता था, और उसने शिव और लता को बचपन से देखा था, उसे यही लगता था की इन दोनों में भाई बहवला प्यार है, पर यहाँ वो दोनों को एक दूसरे के होठो को चूमते हुए देख रही थी, और जिसतरह लता, शिव से लिपट रही थी, ये भाई बहवला प्यार तो कही से नहीं लग रहा था. उसने थोड़ा ध्यान से देखा तो पाया की शिव, लता के कूल्हों को सेहला रहा है, और लता उसकी पीठ को कास रही थी. यक़ीनन ये पहलीबार तो नहीं हो रहा था, मतलब ये दोनों पहले भी ऐसा कर चुके है. उसका दिमाग पूरी तरह घूमने लगा था, उसने करवट बदली और दूसरी और घूम गयी.

गायत्रीदिदी की और आवाज होने से हम दोनों चौके और हमने किश तोड़ी. मेने गायत्रीदिदी की और देखा, लतादिदी ने भी देखा, वो दूसरी और करवट ले कर लेती हुई थी. में फिर से दीदी को किश करने लगा तो उन्होंने मन करदिया. में भी उनकी बात समाज रहा था, तो फिर हम दोनों ऐसे hi बहो में लिपटे सो गए.

गायत्री को काफी देर नींद नहीं आयी, उसने एक बार आहिस्ता से शिव की और देखा तो कोई हलचल न दिखी. उसने गौर किआ तो लता, शिव की बहो में चैन से सो रही थी. उसने भी अपनी आंखे बंद की और सो गयी.

सुबह उठ कर में गयम चला गया. गयम के बाद मुझे भार्गवी मैडम के घर जाने की इच्छा हुई पर मुझे दर लग रहा था, जैसे मेने उनका स्तन पकड़ लिया था, में दर रहा था, हलाकि ये मुज से गलती से हो गया था पर फिर भी वो हुआ था, और मैडम भी ये बाद भलीभांति जानती थी. वो एक पुलिसवाली थी और वो अगर गुस्सा हो गयी तो मेरी खटिया कड़ी कर शक्ति थी. तो फ़िलहाल तो मेने वह जाना ताल दिया. जब में घर पंहुचा तो मेने एक कार को खड़े पाया. मुझे कुछ समाज नहीं आया की कार किसकी है. जब में अंदर गया तो ओफ्फिसेवाले कमरे से आवाजे आ रही थी. मेने अंदर झाका तो मुझे लतादिदी दिखी, उनके सामने कोई बैठा हुआ था पर उनकी पीठ मेरी और थी.

लतादिदी : लो आ गया शिव. (उस औरत ने मुड़कर देखा तो में चंक गया, ये मनीषा मैडम थी, पर वो यहाँ क्या कर रही है) आओ शिव, ये तुमसे hi मिलने आयी है.

शिव : नमस्ते मैडम, आप यहाँ.

लतादिदी : तुम बाते करो में बहार जाती हु.

मनीषा मैडम : कैसे हो शिव?

शिव : में ठीक हु मैडम, पर आप यहाँ?

मनीषा म : तुमसे मिलने का दिल किआ तो चली आयी, तुम तो आये नहीं फिर मिलने.

शिव : में क्यों आता?

मनीषा म : पैसो की जरुरत.

शिव : नहीं, अब मुझे जरुरत नहीं है मैडम. आप ने उस वक़्त मदद कर दी उसके लिए आप का सुक्रिया पर मुझे अब उसकी जरुरत नहीं है.

मनीषा म : चलो, अच्छा है, तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी, पर फिर भी तुम मुझसे मिलने आ शक्ति हो. (मनीषा को शिव अच्छा लगा था और वो उस से ऐसे hi रिस्ता ख़तम नहीं करना चाहती थी)

शिव : मुझे मेरी जरुरत आपके पास खिंच लायी थी, मैडम.

मनीषा म : और मुझे मेरी जरुरत यहाँ खिंच लायी है.

शिव : आप कहना क्या चाहती है?

मनीषा म : यहाँ ये सब बाते करना अच्छा नहीं है, घर आओ, वही बेथ कर बात करेंगे.

शिव : मेने कहा न मैडम, मुझे अब पैसे नहीं चाहिए.

मनीषा म : क्यों तुम्हे मेरे साथ मज़ा नहीं आया?

शिव : (उनके ऐसे सीधे सवाल से में बोखला गया, अगर ऐसी बाटे लतादिदी को पता चलेगी तो गड़बड़ हो शक्ति थी) ये क्या कह रही है मैडम.

मनीषा म : तुम्हारी उम्र के लड़को को अगर छूट का स्वाद मिल जाये तो वो पीछे पीछे चलने लगते है, लगता है तुम्हारे पास छूट की कमी नहीं है, और ये सही भी है, जो तुम्हारे पास है, उसके पीछे तो कोई भी पागल हो जाएगी.

शिव : प्लीज धीरे बोलिये मैडम.

मनीषा म : इसीलिए तो कह रही हु, मेरे घर आओ, इत्मीनान से बात करेंगे.

शिव : ठीक है मैडम, में आता हु.

मनीषा म : कब?

शिव : अभी तो मुझे स्कूल जाना है, में कल िसिटीमे आता हु.

मनीषा म : ठीक है, में इंतजार करुँगी. (हम दोनों ऑफिस से बहार निकले)

लतादिदी : (हमे देख कर वो हमारे पास चली aayi)Aap जा रही है?

मनीषा म : (मुस्कुराते hue)Ha, बस शिव का हल चल पूछने चली आयी थी. अब मिल ली तो चलती हु.

स्कूल कॉम्पिटिओं में मुलाकात हुई थी, बड़ा होनहार है शिव, तो सोचा की हल चल पूछ लू. अब चलती हु, और है शिव, कोई भी जरुरत हो हिचकिचाना नहीं. ठीक है?

शिव : जी मैडम (मन में तो इतना गुस्सा आ रहा था, पर में अभी कुछ कर नहीं शक्ति था)

लतादिदी : (मनीषा म के जाने के baad)Kitni अच्छी है न शिव.

शिव : जी दीदी. (अब में दीदी को क्या बोलता, की वो किस लिए आयी थी)

मेने अपना काम निपटाया और स्कूल चला गया. रस्ते में नाज़िआदिदी और संयम खड़े मिले तो में उनके पास चला गया.

शिव : Hi संयम, कैसी हो दीदी.

संयम : (उत्साह से) Hi शिव (पर नाज़िआदिदी ने फीकी सी मुस्कान hi दी)

शिव : (में अभी उस बारेमे बात नहीं करना चाहता था, क्यों की में जनता था की उनके जीवन में क्या चल रहा है) अभी वाइसविमडम नहीं आयी क्या?

संयम : (मेरा ऐसे कहने पर संयम हसने lagi)Wo देखो आ रही hai(Usne इस्सर किआ तो मेने उस और देखा तो वैस्वी आ रही थी, जब वो आ गयी to)Hi.

वैस्वी : (संयम को) Hi(Usne मेरी और देखा पर मेने कुछ न kaha)(Samim ko)Chale?

संयम : है चलो, bye शिव, स्कूल में मिलते है.

शिव : ठीक है (वो दोनों चली गयी) क्या हुआ दीदी? परेशान हो?

नाज़िआदिदी : कुछ नहीं, तुम तो जानते हो क्या चल रहा है?

शिव : आप चेकउप के लिए गयी थी?

नाज़िआदिदी : है गयी थी, उन्होंने कहा की सब ठीक है, आप के पति का चेकउप करवाना पड़ेगा.

शिव : तो फिर उनको बताइये.

नाज़िआदिदी : मेने कोशिस की थी पर वो नहीं मानते, वो कह रहे है तुम में hi कोई दोष है. वैसे भी दुनिया में कोई मर्द नहीं मंटा की कमी उसमे है.

शिव : तो अब क्या होगा दीदी?

नज़्दीएडीडी : क्या हो शक्ति है, वो जल्द से जल्द तलाक लेना चाहते है और क्या.

शिव : तो फिर ले लो तलाक, वैसे भी ऐसे आदमीके साथ रहने का क्या फायदा.

नाज़िआदिदी : तुम नहीं संजोगे शिव, ये इतना भी आसान नहीं है, तलाक लेने के बाद भी में क्या करुँगी, किसी और के साथ शादी करवाएंगे तो भी क्या होगा, और तलाकशुदा औरत को कैसे कैसे लोगो से शादी करनी पड़ती है, कोई बच्चो का बाप भी हो शक्ति है या कोई उम्रदराज़ भी हो शक्ति है. ये सब इतना आसान नहीं है.

शिव : तो फिर क्या करेंगी दीदी?

नाज़िआदिदी : अब किस्मत hi ख़राब है तो कोई क्या कर शक्ति है, जो भाग्य में लिखा होगा वही हो कर रहेगा. ठीक है तुम जाओ, तुम्हे लेट हो रहा होगा.

शिव : ऐसी कोई बात नहीं है दीदी, स्कूल आपसे ज्यादा तो महत्व नहीं hai.(Bade प्यार से शिव को देखने लगी, पर जिंदगी के ऐसे मोड पर वो कर भी क्या शक्ति थी) एक बात कहु दीदी, आप डॉक्टर से दोबारा मिलो और इस समस्या का समाधान पूछो, कुछ न कुछ तो रास्ता निकल hi आएगा.

नाज़िआदिदी : ठीक है, तुम कहते हो तो आज hi चली जाती हु, पर मुझे नहीं लगता की वो इसका कोई समाधान दे शक्ति है, वैसे वो डॉक्टर दिल की बहोत अच्छी है, में बात करके देखती हु.

शिव : ठीक है दीदी, bye, चिंता मात करिये सब ठीक हो जायेगा.

नाज़िआदिदी : Bye, अपना ध्यान रखना. (वो शिव को दौड़कर जाते हुए देखती रही, जब शिव आँखों से ोजल हो गया तो वो उदास मन से अपने घर की और निकल गयी)

मनीषा अपने घर लौट आयी थी, अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए वो शिव के बारेमे hi सोच रही थी. तभी उसके घर की घंटी बजी, नौकरानी ने दरवाजा खोला तो एक खूबसूरत औरत जो की करीब 25 साल के आस पास की होगी वो अंदर आयी.

मनीषा : अरे स्वर्ण, आज बहोत दिनों बाद इस तरफ आयी, कैसी हो?

स्वर्ण : (फिक्की हसी हस्ते hue)Achchhi हु, तुम कैसी हो?

मनीषा : क्या हुआ, तुम्हारा चेहरा क्यों बुझा हुआ है?

स्वर्ण : अरे कुछ नहीं, में ठीक हु.

मनीषा : अब मुज से झूठ मात बोल, हम दोस्त है, क्या तू मुझे दोस्त नहीं मानती?

स्वर्ण : अरे तू भी क्या बात को खिंच रही है, कुछ नहीं हुआ, बस घर की बाते है, और कुछ नहीं.

मनीषा : चल अंदर चलते है, वह इत्मीनान से बाते करेंगे.

स्वर्ण : (उसके बच्चे ko)La इससे मुझे दे.

मनीषा : अभी अभी सोया है, जब जाग जाये तो खेल लेना.

स्वर्ण : सोया है तो क्या हुआ, तू दे न मुझे, कितना अच्छा लगता है उसे गॉड में लेना.

मनीषा : (उसे बच्चा देते hue)Agar बच्चे इतने hi पसंद है तो अपना ले aa.(Uski बात सुन कर स्वर्ण उदास हो गयी) क्या मेने कुछ गलत कह दिया.

स्वर्ण : नहीं यार, पर इसमें में क्या कर शक्ति हु, हम तरय तो कर रहे है पर कुछ हो नहीं रहा.

मनीषा : कहना क्या चाहती है?

स्वर्ण : हम कोई प्रोटेक्शन उसे नहीं करते पर कोई फायदा नहीं, मेरी साँस भी हर रोज मुझे सुनती रहती है, इसीलिए तो में तेरे पास चली आयी की मान हल्का हो जाये.

मनीषा : (वो दोनों अंदर बैडरूम में aagayi)Agar कुछ नहीं हो रहा तो डॉक्टर की सलाह लो. अब तो बहोत सरे रस्ते है.

स्वर्ण : मेने उनसे कहा था, पर वो नहीं मान रहे, अब तो ऐसी परिस्थिति हो रही है की मेरी साँस उनको दूसरी शादी के लिए कह रही है.

मनीषा : ये क्या बकवास है, कोनसे ज़माने में जी रहे है वो लोग. तू तो पढ़ीलिखी है, इतने बड़े घर की बेटी है, ऐसे कैसे वो लोग ऐसा सोच सकते है. तूने उनसे कहा नहीं कुछ?

स्वर्ण : वो सीधे सीधे कुछ नहीं कहते, घुमा फिर के तना मरते रहते है. वैसे वो अच्छी है, काम के लिए या किसी और के लिए कभी कुछ नहीं कहती, पर तुजे तो पता है, हर किसी को अपने खंडन का वरिष्ठ चाहिए, मेरी ननद भी बहोत अच्छी है, सब ठीक है बस इसी मामले में मेरी किस्मत ख़राब है.

मनीषा : (कुछ सोचते hue)Agar बुरा न माने तो एक बात कहु?

स्वर्ण : तुज से क्या बुरा मान न, कह जो कहना है.

मनीषा : यार बात hi कुछ ऐसी है, चल फिर भी कह देती हु, किसी और से तरय कर ले.

स्वर्ण : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Kya कहना चाहती है?

मनीषा : मेरे कहने का मतलब है किसी और से बच्चा तरय कर ले.

स्वर्ण : ये क्या बकवास कर रही है तू, तू होशमे तो है?

मनीषा : मुझे जो सही लगा वो तुजे कह दिया, वैसे भी जैसा तू बता रही है वो लोग दूसरी शादी की बात कर रहे है तो फिर तू hi बता और कोई रास्ता हो तो.

स्वर्ण : इसका मतलब ये नहीं की में ऐसा रास्ता अपनौ, में अपनी इज्जत के साथ ऐसा खिलवाड़ नहीं कर शक्ति.

मनीषा : अगर तुजे तेरा पति डिवोर्स दे देगा तो फिर कोनसी तेरी इज्जत बढ़ेगी.

स्वर्ण : पर में ऐसा वैसा कुछ नहीं कर शक्ति, और फिर किसके साथ? (कुछ देर खामोस रहने के baad)Ye में क्या बोल रही हु, नहीं में ऐसा नहीं कर शक्ति.

मनीषा : देख में समझती हु, तुम कोई गवर नहीं हो, तुम समाज शक्ति हो की तुम्हारी जिंदगी तुम्हे कैसे सावर्णि है. आज के ज़माने में ये सब कोई नहीं सोचता, अब सब जानते है की किस चीज का हल कैसे निकला जाता है. दुनिया में कितने hi लोग है जो ऐसा कर चुके है और अपनी जिंदगी में खुस है, अब तुजे सोचना है की तुजे क्या करना hai.(Kafi देर दोनों में ख़ामोशी छायी रही) देख में तेरी दोस्त हु इस लिए तुजे समजा रही हु, मुझे तो इसमें कुछ गलत नहीं लगता, देख अपनी गॉड में लेते हुए बच्चे को, क्या तू ये सुख नहीं पाना चाहती. और डिवोर्स ले कर भी क्या होगा, अगर कमी तुजमे hi हुई तो फिर वही प्रॉब्लम होगी, इस से अच्छा है की जो में कह रही हु वो कर.

स्वर्ण : पर यार ये सही नहीं लगता मुझे.

मनीषा : सही गलत को छोड़, अपनी खुसियो के बारे में सोच.

स्वर्ण : पर ऐसा में किसके साथ....

मनीषा : इसमें कोनसी बड़ी बात है, तू इतने लोगो को जानती होगी, कोई न कोई तो होगा, कोई फ्रेंड या कोई पुराण लवर.

स्वर्ण : ऐसा कोई नहीं है, तू तो जानती है हमारे घर को, है कभी ऐसा रिस्ट्रिक्शन नहीं था पर घर की इज्जत के लिए कभी ऐसा कदम नहीं उठाया.

मनीषा : अरे कोई दूर का रिस्तेदार, कोई अच्छा दोस्त कोई तो होगा.

स्वर्ण : (काफी देर वो सोचती rahi)Nahi यार मेरे दिमाग में तो ऐसा कोई नहीं है, और वैसे भी में उसके साथ ऐसी बात करुँगी कैसे, न बाबा न, ये मुज से नहीं होगा.

मनीषा : (गुस्से se)Tera कुछ नहीं होने वाला, तू बस रोटी रह. (सच में hi स्वर्ण की आँखों में आंसू आ gaye)Ab रोना बंद कर, मुझे कुछ सोचने दे. (अचानक उसे शिव याद आया, पर वो शिव को इस जमले में घसीटना नहीं चाहती थी, उसे लगता था की शिव बस उसका हो कर रहे, पर स्वर्ण उसकी अच्छी सहेली थी, और वो जानती थी की स्वर्ण एक अच्छी लड़की है, तो वो उसकी मदद भी करना चाहती थी. पर उसे शक था की शिव इस बात के लिए राज़ी होगा, उसके बर्ताव से तो यही लग रहा था की वो उसके साथ भी करने को तैयार नहीं है तो वो स्वर्ण के साथ कैसे राज़ी होगा, अचानक उसके दिमाग में एक आईडिया aaya)(Maan me)Yahi ठीक रहेगा, इस से मेरा काम भी हो जायेगा और स्वर्ण का भी. सॉरी शिव, मुझे तुम्हारे साथ ये करना पड़ेगा, पर में मजबूर hu.(Swarna से) एक काम कर कल तू सुबह आठ सादे आठ बजे यहाँ आ जाना, एक लड़का है अगर वो मान गया तो तेरा काम हो जायेगा.

स्वर्ण : नहीं यार, में ऐसा नहीं कर शक्ति, मुझे दर लग रहा है.

मनीषा : देख मुझे जो कहना था वो मेने तुजे कह दिया, आगे तेरी मर्जी.

(दोनों में कुछ देर और बहस चलती रही पर स्वर्ण को दर लग रहा था, आखिर कर वो अपने घर लौट गयी)
 
अपडेट 73

स्कूल में रेसस्स टाइम में में और मेरे दोस्त बैठे हुए थे, थोड़ी दुरी पर वैस्वी और संयम भी बैठे हुए थे, जब भी मेरी नजर उस और जाती तो संयम मेरी और hi देख रही होती थी, जैसे hi हमदोनो की नज़ारे टकराती तो वो स्माइल कर देती थी तो में भी मुस्कुरा देता. आज हर्ष ने कुछ अजीब hi टॉपिक छेड़ दिया था.

हर्ष : यार तुमने कभी सेक्स किआ है? (में क्या जवाब देता तो में चुप hi रहा)

महेश : नहीं यार, कभी मौका hi नहीं मिला, पर तू ये क्यों पूछ रहा है?

हर्ष : यार एक दीदी है, हमारे घर के नजदीक hi रहती है, उनका भाई मेरा दोस्त है तो कभी कभी उनके घर आना जाना होता है, थोड़े दिन पहले में उनके घर गया था तो मेरा दोस्त बाजार गया था, आंटी किचन में काम कर रही थी, दीदी नहाके बहार निकली तो वो मुझे दिख रही थी, सिर्फ तौलिया लपेटे हुए थी. वो अपने रूम में जा रही थी तो बीचमे पड़े एक डिब्बे से वो टकरा गयी और अपने आपको सँभालने के चक्कर में उनका तौलिया छूट गया, उनको ऐसे देख कर मेरी हालत ख़राब हो गयी थी, यार.

महेश : क्या देखा तूने, बताना यार.

हर्ष : अरे मेने बताया न की उनका तौलिया गिर गया था तो वो नंगी हो गयी थी.

महेश : कैसी लग रही थी वो?

हर्ष : यार क्या कहु, उनके चुत्तड़ गोल गोल थे, और वो तौलिया लेने के लिए झुकी तो उनकी छूट भी थोड़ी दिख गयी थी, वो घबरा गयी थी और उन्होंने आसपास देखा तो मुज पर नज़र पड़ी तो वो और घबरा गयी, वो तौलिया उठा कर वैसे hi अपने रूम की और भागी तो उनके चुत्तड़ ऐसे हिल रहे थे की मेरा तो लोढ़ा hi खड़ा हो गया था.

महेश : फिर क्या हुआ?

हर्ष : होना क्या था, में भी दर गया था तो में वह से निकल लिया. पर फिर दो दिन बाद जब में उनके घर गया तो वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, वो ऐसे मुस्कुरा रही थी जैसे वो निमंत्रण दे रही हो.

महेश : फिर?

हर्ष : यार मेरी तो फैट रही थी, फिर में कभी उनके घर गया hi नहीं.

महेश : धत तेरे की, खोदा पहाड़ और निकली चुहिया. (वो जोर जोर से हसने लगा)

हर्ष : तो सेल दर नहीं लगेगा क्या, अगर तू मेरी जगह होता तो तेरा भी यही हल होता. सेल यहाँ लड़की के साथ बात करने में फैट टी है और यहाँ तो वो खुल्ला निमंत्रण दे रही थी, अगर में आगे बढ़ता तो सेक्स जरूर हु जाना था. और मुझे इस बारेमे ज्यादा पता नहीं है, इसीलिए तो पूछ रहा था.

महेश : यार मेरा भी कोई एक्सपीरियंस नहीं है, तेरा शिव? (में कुछ बोलता उस से पहले hi हर्ष बोल पड़ा)

हर्ष : इस से क्या पूछता है, ये पढ़ाकू है, ये किताबे और स्पोर्ट्स, बस ये दो hi बाटे जनता है, क्यों सही कहा न मेने.

शिव : (में मुस्कुराया) है, सही कहा.

महेश : यार तूने वो वाली फिल्म देखि है कभी?

हर्ष : कोनसीवाली?

महेश : अरे वही, क्सक्सक्स फिल्म.

हर्ष : नहीं यार, मेने तो नहीं देखि. तूने देखि है क्या?

महेश : देखि तो मेने भी नहीं है, पर एक दोस्त है, मेरे घर की तरफ, वो बता रहा था, में उस से पूछ लूंगा, फिर इस संडे मेरे या तुम्हारे घर मिलते है और फिर देखेंगे, क्या कहते हो?

हर्ष : है यार , मज़ा आएगा, क्यों शिव क्या कहते हो?

शिव : नहीं यार मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं, तुम hi देखलेना.

महेश : क्या छुटियापन्ति कर रहा है, यार सब मिलेंगे तो मौज मस्ती करेंगे.

शिव : अभी तो ये मुमकिन नहीं, और वैसे भी संडे को में बहार हु, तुम लोग देखलेना. फिर कभी हम मिलेंगे.

महेश : छोड़ इससे, ये तो है hi ऐसा, हम दोनों मिलते है.

हर्ष : ठीक है, दोने.

रेसस्स भी ख़तम हो गयी थी तो हम वापस क्लास में चले गए. रात को में गयम में सब ठीक कर रहा था तो स्नेहा मैडम आयी, उन्हें देख कर में थोड़ा चौंक गया, पर फिर अपने आपको संभल कर मेने उन्हें स्माइल दी. गयम में कोई और था नहीं तो वो आ कर मेरे गले लग गयी, मेने भी आहिस्ता से उन्हें गले लगाया.

स्नेहा : क्या हुआ, मुझे देख कर ख़ुशी नहीं हुई?

शिव : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है? कैसी है aap?(Sneha देख रही थी की शिव उस से आंखे चुरा रहा है, वो ऐसे बेहवे कर रहा है जैसे किसी अजनबी से मिला हो)

स्नेहा : क्या हुआ शिव, नाराज़ हो मुज से?

शिव : नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं.

स्नेहा : तो फिर मुझे आप क्यों कह रहे हो? सच सच बताओ शिव, क्या बात hai?(Mera हाथ पकड़ kar)Kya हुआ शिव, मुज से कोई गलती हो गयी है kya?(Sneha की आँखों में आंसू छलकने लगे)

शिव : ऐसा क्यों कह रही है.

स्नेहा : (आंसू बह nikale)Kya हुआ शिव, मुझे सच सच बताओ, तुम्हे मेरी कसम. तुम्हारी ये बेरुखी में सहन नहीं कर शक्ति, प्लीज, जो भी बात है मुझे बताओ.

शिव : (स्नेहा की आँखों में देखते hue)Pawansir बहोत अच्छे है,..

स्नेहा : है है, तो?

शिव : उन्होंने मेरे लिए कितना कुछ किआ है, उन्होंने हमेसा मेरी मदद की है, और में तुम्हारे साथ, मेरा मतलब है उनकी बीवी के साथ... मुझे अच्छा नहीं लग रहा, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. और आपको जो चाहिए था वो तो आप को मिल hi गया है न तो....

स्नेहा : (अपने आंसू पोछते हुए, थोड़ी मुस्कुराती hai)Oh! तो ये बात है, मेने सोचा पता नहीं क्या हो गया है, शिव तुम्हारी इतनी सी बेरुखी ने भी देखो मेरा क्या हाल कर दिया. अगर तुम्हारे दिल में कोई बात हो तो कह दिया करो, ऐसी बेरुखी मात दिखाओ, मेरी तो जान निकलने लगी थी. और रही बात पवन की तो है वो अच्छे है, इसमें कोई शक नहीं, पर हमारा रिस्ता भी कोई माईने रखता है न शिव.

शिव : पर ये पवनसीर के साथ धोखा है. जो इंसान मेरे लिए इतना कुछ कर रहा है, ऐसे इंसान को में धोखा नहीं दे सकता.

स्नेहा : तुम कोई धोखा नहीं दे रहे हो शिव.

शिव : ये धोखा hi है, उनकी पीठ पीछे उनकी बीवी के साथ...

स्नेहा : में ये नहीं कहना चाहती थी शिव, में चाहती थी की ये राज़, राज़ hi रहे, मुझे भी पवन से प्यार है, में भी उनकी बेइज्जती बर्दास्त नहीं कर शक्ति, पर तुमने मुझे मजबूर करदिया है, तुम क्या सोचते हो, मेने तुमसे ये रिस्ता क्यों बनाया?

शिव : बच्चे के लिए.

स्नेहा : है वो सही है पर तुमसे hi क्यों? क्या में तुम्हे जानती थी, क्या तुम ऐसा समझते हो की में इतनी गिरी हुई हु की ऐसे hi तुम्हारे साथ आ कर ये सब कर liya...(Wo रोने लगी, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था पर इतना तो समाज आ रहा था की वो दुखी है, अपनी आंसुओ से भीगी आँखों से मुझे देखते hue)Mene ये सब उनके कहने पर hi किआ है Shiv(Wo अपना शिर झुकाये उलटी घूम गयी, और रोने लगी)

शिव : (मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, पवनसीर ने hi स्नेहा मैडम को कहा था, पर क्यों? वो कैसे ऐसा कर शक्ति है? मेने स्नेहा के कंधे पर हाथ रक्खा, उन्होंने मेरा हाथ झटक दिया)

स्नेहा : मात छुओ मुझे, तुम्हे लगता है की ये सब गलत है तो अब में कभी तुमसे नहीं मिलूंगी, मेरी तो कोई वैल्यू hi नहीं है जैसे, मेरे कोई जज्बात नहीं, उन्होंने भी नहीं सोचा की अगर तुम्हारे साथ ये सब करना इतना आसान है क्या, एक औरत किसी के साथ ऐसे hi ये सब कर शक्ति है, एक ने कहा ऐसा करो और दूसरे ने कहा चली जाओ. क्या मेरा वजूद, मेरी भावनाये कोई मायने नहीं रखता, हमारा रिस्ता कुछ भी मायने नहीं रखता तुम्हारे लिए. तुम पवन के लिए मुझे छोड़ने को तैयार हो गए, क्या में कुछ भी नहीं तुम्हारे लिए.?

शिव : (पवनसीर ने ऐसा क्यों किआ वो मुझे समाजमे नहीं आ रहा था पर स्नेहा के दिल पर क्या बिट रही है वो मुझे एहसास हो रहा था, मेने उसे पीछे से बहो में पकड़ा, पर वो मेरा हाथ छुड़ाने लगी, पर मेने इतनी मजबूती से पकड़ा था की वो छुड़ा नहीं पायी, पर मेने ऐसी नज़ाकत से पकड़ा था की वो डाब न जाये. जब वो छुड़ा न पायी तो वो बिलख बिलख कर रोने लगी, मेने उसे मेरी और घुमाया और उसके आंसू पोछने लगा तो वो मेरी और देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी) सॉरी यार, माफ़ कार्डो मुझे.

स्नेहा : सॉरी मात कहो, तुम बहोत बुरे ho(Muje और कस्ते hue)Bahot बहोत बुरे हो. मुझे रुला दिया. कितनी उम्मीदों से आयी थी, तुमसे मिलने, सोचा था इतने दिन बाद मुझे देखोगे तो मुझे अपने गले लागलोगे, मुझे बहोत प्यार करोगे. और तुम मुझे रुला रहे हो. तुम बहोत बुरे हो.

शिव : (उसे बहो में भरे, उसकी पीठ सहलाते hue)Sorry बाबा, आगे से ऐसा नहीं करूँगा.

स्नेहा : ये सच है की में सिर्फ बच्चे के लिए तुम से जुडी थी, पर अब ये एहसास होरहा है की ये इतना भी आसान नहीं है, जब में सोचती हु की मेरी कोख में तुम्हारा और मेरा मिलाजुला रूप पनप रहा है तो तुम्हारे लिए एक अलग hi तरह की भावना जन्म लेती है. इस दुनिया में एक नया जीव आएगा जो तुम्हारे और मेरे, दोनों के मिलान का प्रमाण होगा, जिसे इस संसार का कोई भी जुटला नहीं सकता, सोचो शिव, में तुम्हारे साथ किस गहराई से जुड़ चुकी हु. ये बच्चा हमारे मिलान की निसानी है, न तुम इससे जुटला शक्ति हो न पवन. तुम कैसे मुझे जुड़ा कर शक्ति हो Shiv?(Uski बातो में सच्चाई थी, बच्चा पैदा होना कोई सामान्य घटना नहीं होती है, ये बच्चा और उसके द्वारा आगे बढ़नेवाली पीढ़ी, हम दोनों के मिलान का प्रमाण रहेगी. मेने उसके चेहरे को ऊपर उठाया और उसके होठो को चूमने लगा, वो भी मुज से लिपट गयी, काफी देर हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे, हम दोनों सिर्फ प्यार कर रहे थे, थोड़ी देर प्यार करने के बाद में उस से अलग हुआ)

शिव : (मुस्कुराते हुए) अब ज्यादा चिपको मात वर्ण यही कुछ हो जायेगा.

स्नेहा : (मुझे हलके से घुसा मरते हुए) गंदे कही के, एक तो मुझे रुलाया और अब तने मर रहे हो, (मुज से लिपट ते हुए) ी लव यू शिव, ी लव यू, चाहे जो भी हो, मुझे मात छोड़ना, में मर जाउंगी.

में उसके प्यार को समाज रहा था, फिर मेने उसे एक बेंच पर बिठाया और में अपना काम करने लगा, काम करते हुए हम दोनों बाते कर रहे थे, काम ख़तम कर के वो मुझे घर छोड़ गयी. रात को लेते हुए में मनीषा मैडम के बारे में सोच रहा था, मेने लतादिदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, मेने उन्हें अपनी बहो में ले लिया और उन्हें किश करने लगा, (गायत्री आज भी इन दोनों को देख रही थी). सुबह मेने दीदी को बता दिया की में गयम से घर नहीं आऊंगा सीधे स्कूल चला जाऊंगा. उन्होंने कोई एतराज नहीं किआ. गयम ख़तम कर के में मनीषा मैडम के घर की और निकल गया.

कल पूरी रात स्वर्ण बेचैन रही, वो बार बार एक hi बात सोच रही थी, क्या उसे मनीषा की बात मान लेनी चाहिए? ये सोच कर hi की वो किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाएगी, उसका दिल बहोत घबरा रहा था. दोपहर को उसकी सासुमा की कोई पेहचानवाली आयी थी, जब वो उन्हें सरबत देने जा रही थी तो उसके कानो में उनकी बात पड़ी थी. वो शायद अपनी बहु की गोदभराई का न्योता देने आयी थी,

सास की पेहचानवाली : देखिये बुरा मात मान न, पर अपनी बहु को मात लेके आना, आप तो जानती है की ऐसे मौको पर किसी बांज का आना अपशकुन मन जाता है.

सास : ये आप क्या कह रही है, मेरी बहु बांज नहीं है, अभी शादी को कितना hi टाइम हुआ है, आप तो जानती है की आज कल के बच्चे, जल्दी बच्चा पैदा नहीं करना चाहते.

सास की पेहचानवाली : जहा तक मुझे याद है, उनकी शादी को करीब पांच साल तो होने आये, देखिये हम कितने भी मॉडर्न क्यों न हो जाये, इन बातो को छोड़ नहीं शक्ति. प्लीज बुरा मात मानिये, पर में नहीं चाहती की मेरे घर के वारिस पर कोई बुरा साया पड़े, आप समाज रही है न.

सास : ठीक है, आप जाइये, न मेरी बहु आएगी न में आउंगी.

सास की पेहचानवाली : देखिये बुरा मात मानिये, पर में कोई खतरा नहीं ले शक्ति, अब जो परंपरा चली आ रही है, वो ऐसे hi तो नहीं बानी होगी.

सास : में समझती हु, पर में अपनी बहु का भी अपमान नहीं सेहन कर शक्ति, मेरा आशीर्वाद दे देना अपनी बहु को पर में नहीं आउंगी.

स्वर्ण अपनी आँखों में आंसू लिए वही से लौट गयी, उसने सरबत एक नौकरानी के हाथ से भिजवादिया. वो पूरी रात बेचैन रही, ऊपर से उसका पति भी आ कर उसके बाजु में सो गया, वो उन्हें देख कर आंसू बहाने लगी. सुबह उठ कर उसने अपनी सास को कहा की उसकी सहेली बीमार है वो उसकी खबर देखने जा रही है. उसकी सास ने भी मन नहीं किआ. वो धड़कते दिल से अपनी कार ले कर मनीषा के घर पहुंच गयी.

मनीषा : (उसे गले लगते हुए) आ गयी, आ अंदर.

स्वर्ण : (अंदर जाते hue)Yaar आ तो गयी हु, पर दिल बहोत घबरा रहा है.

मनीषा :(दोनों साथ में सोफे पर बेथ जाती है) क्यों इतना घबरा रही है, कुछ नहीं होगा, में हु न.

स्वर्ण : अगर किसी को पता चल गया तो?

मनीषा : किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. तू दर मात.

स्वर्ण : पर वो है कोण? अगर उसने किसी को बता दिया तो?

मनीषा : तू वो सब चिंता छोड़, वो किसीको कुछ नहीं बताएगा.

स्वर्ण : पर वो है कोण? और तू इतना यकीं के साथ कैसे कह शक्ति है? और मुझे जहा तक पता है, यहाँ तुम्हारा कोई रिस्तेदार भी नहीं है, तो आखिर है कोण? यार मुझे बहोत दर लग रहा है, छोड़ मुझे कुछ नहीं करना, में वापस जाती हु.

मनीषा : तू क्यों इतना टेंशन ले रही है? तू मेरी पक्की सहेली है, क्या में तेरा बुरा कर शक्ति हु? उसका नाम शिव है, बहोत अच्छा लड़का है, तू एक बार उसे देखेगी तो खुद hi तैयार हो जाएगी, और सच कहु तो तू है इसीलिए में ये करने के लिए तैयार हो गयी, वर्ण उसके बारे में में किसी को न बताती.

स्वर्ण : क्या तेरे उसके साथ सम्बन्ध है?

मनीषा : है और नहीं भी, बस एक बार किया है, पर सच कहु तो यार, दिल आ गया है उस पर, तू नहीं जानती पर आज अगर तू न होती तो में hi उसके साथ रहनेवाली थी. तेरी वजह से आज में उसे छोड़ रही हु.

स्वर्ण : पर तू ऐसा क्यों कर रही है? तुजे क्या जरुरत है?

मनीषा : वो सब में तुजे बाद में बताउंगी, अभी वो आता hi होगा.

स्वर्ण : नहीं यार, मुज से नहीं होगा, में जाती हु.

मनीषा : एक बार तू उसे देख लेगी फिर कहना, यार ट्रस्ट में, में ऐसी hi किसी ाइरे गैर के साथ ये सब करुँगी क्या? मुझे भी तेरी और मेरी दोनों की इज्जत का ख्याल है. (उतने में hi दरवाजे की घंटी बजी) लगता है वो आ गया. (स्वर्ण ने मनीषा का हाथ पकड़ लिया) अरे तू क्यों इतना दर रही है, एक काम कर तू अंदर मेरे बैडरूम में जा, में उसे भेजती हु.

स्वर्ण : नहीं यार, मुज से नहीं होगा. (उतने में दोबारा घंटी बजी)

मनीषा : (उसे धकेलते हुए) तू जा, में हु न. (स्वर्ण निसाहयता से देखते हुए बैडरूम में चली गयी, मनीषा ने जा कर दरवाजा खोला तो सामने शिव hi खड़ा था, पल भर के लिए वो उसे देखती hi रह गयी) आओ, अंदर आओ. (में अंदर दाखिल हो गया, उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया, मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, में जा कर सोफे के पास खड़ा हो गया) खड़े क्यों हो, बैठो न.

शिव : (थोड़ी रूढ़ आवाज में) आपने मुझे क्यों बुलाया है?

मनीषा : (पेअर पर पेअर चढ़कर बैठते हुए बड़ी शांति से जवाब देती hai)Bulaya तो किसी और काम के लिए था पर अब कुछ और काम है.

शिव : (शिव भी जैस अपने आपको तैयार कर रहा था) और आपको क्यों लगता है की में आप का कोई भी काम करने के लिए राज़ी हो जाऊंगा.

मनीषा : (मुस्कुराते हुए) मुझे यकीं है, तुम जरूर करोगे.

शिव : आप धमकी दे रही है?

मनीषा : तुम्हे जो समजना है संजो.

शिव : आपको जो करना है करलीजिये, में आप का कोई भी काम नहीं करूँगा (खड़े होते हुए) में जा रहा हु.

मनीषा : (मुस्कुराते हुए) तुम्हे क्या लगता है शिव, क्या में पागल हु? मुझे अपने घर में देख कर hi तुम्हारी क्या हालत हो गयी थी, क्या में नहीं जानती.

शिव : वो सब अचानक से हुआ था इस्सलिये था, पर अगर आप मुझे इस बात पर धमका रही है की आप वह सब को बता देंगी तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप को जो करना है कर लीजिये.

मनीषा : (शांति से) तुम इस तरह से क्यों बात कर रहे हो जैसे हम दुसमन हो. में तो बस तुम्हे ऐसे hi मिलने चली आयी थी, सच कहु तो तुम मुझे अच्छे लगे, इसलिलिये आयी थी, तो क्या में गलत हु?

शिव : (मेने उनकी आँखों में देखा तो सच में वो शांत hi थी, उनकी आँखों में कोई फरेब जैसा कुछ नज़र नहीं आ रहा था) देखिये, उस दिन जो हो गया वो हो गया, अब उस बात को यही छोड़ देना चाहिए.

मनीषा : पहले मुझे भी यही लगा था शिव, पर में ऐसा नहीं कर शक्ति, सच में तुम मुझे बहोत पसंद आ गए हो शिव, मेरा यकीं करो.

शिव : वो जो भी हो पर ये ठीक नहीं है, इस बात को यही छोड़ना बेहतर है.

मनीषा : में नहीं छोड़ शक्ति.

शिव : तो क्या कर लेंगी आप.

मनीषा : क्यों, हमारे रिश्ते बिगड़ने पर तुले हुए हो शिव, में ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहती की हमारे बिच कोई भी तनाव हो.

शिव : सॉरी मैडम, में चलता हु.

मनीषा : (मुस्कुराते हुए) ठीक है जाओ, और पुलिस का इंतजार करो.

शिव : पुलिस???

मनीषा : है पुलिस, हमने जब पहलीबार सम्बन्ध बनाये थे तो उन कपड़ो को मेने संभल कर रक्खा था, उस वक़्त और कारन थे उसे सँभालने के पर अभी वो किसी और काम आ शक्ति है? (मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, में सवालिया नज़रो से उन्हें देखने लगा) उन कपड़ो पर तुम्हारा वीर्य लगा हुआ है (अभी भी मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था) में वो कपडे पुलिस में दे दूंगी और तुम पर बलात्कार का इल्जाम लगा दूंगी.

शिव : पर वो सब तो आपने अपनी मर्जी से किआ था.

मनीषा : है किआ था, पर में उल्टा कहूँगी.

शिव : इस से आपकी hi बदनामी होगी.

मनीषा : है थोड़ी बहोत, पर वो में सब पैसो से संभल लुंगी, क्यों की कोर्ट ऐसे मामले बांध दरवाजो के पीछे चलता है ताकि मुज जैसी अबला नारिओ की इज्जत ख़राब न हो, और तो और वो बिना बात के मेरा नाम भी कही नहीं लेंगे. वो सब बाद की बात है, पर पहले मेरी कम्प्लेन से वो लोग तुम्हे जेल में दाल देंगे, और जब तक ये केस चलेगा तुम अंदर hi रहोगे.

शिव : (मान me)Ye तो सब सच है, क्यों की गायत्री दीदी के बयां पर उस पोलिसवाले को भी अंदर कर दिया, और उन्होंने दीदी का नाम भी कही न उछाला. दीदी की गवाही और कम्प्लेन भी उन्होंने घर आ कर ली.

मनीषा : ऐसे मामलो में अक्सर लोग औरतो के साथ hi खड़े रहते है.

शिव : (में समाज रहा था. और अगर मुझे जेल हो जाएगी तो अनाथालय में सब का क्या होगा, लतादिदी का क्या होगा) आप चाहती क्या है?

मनीषा : ये हुई न बात, आओ बैठो यहाँ. (मेरा हाथ पकड़ कर अपने बाजु में बैठते हुए) शिव, मेरा यकीं करो, में सच में तुम्हे नहीं जाने दे शक्ति, इसीलिए मुझे ये सब करना पद रहा है, में खुस हु अपनी लाइफ में यार, पर तुम्हारी बात hi अलग है. प्लीज यार, मुझसे नाराज मात हो.

शिव : (वैसे भी मुझे उन पर गुस्सा आ रहा था, वो मुझे सम्बन्ध बनाने पर मजबूर कर रही थी और में ये सेह नहीं प् रहा था, पर अभी फ़िलहाल मेरे लिए और कोई रास्ता नहीं tha)Aap को अगर दोबारा वो सब करना है तो जल्दी कीजिये, मुझे स्कूल भी जाना है.

मनीषा : (शिव के गाल पर किश करते हुए) माय बब्बी, (थोड़ा सीरियस हो kar)mera मान तो नहीं कर रहा पर आज तुम्हे किसी और के साथ वो सब करना है.

शिव : (चौंकते hue)Ye क्या बकवास है?

मनीषा : सॉरी बब्बी, बूत यू don’t हैवे ा चॉइस, सच में यार मुझे भी बुरा लग रहा है पर दोस्ती का सवाल है, अंदर मेरी सहेली है, आज तुम्हे उसके साथ करना है. (मुझे सच में बहोत गुस्सा आ रहा था, ये मुझे समझती क्या है, में गुस्से में उन्हें देखने लगा) सॉरी बब्बी, प्लीज.

कमरे में दरी और सेहमी हुई स्वर्ण बैठी हुई थी. वो अपने आप को कोष रही थी की क्यों वो इस परिस्थिति में पड़ी. उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, उसके शेर पर, एक की ठंडक में भी, पशीने की बुँदे चालक रही थी. वो बार बार अपने हाथ मसल रही थी. जैसे hi उसने दरवाजे के खुलने की आवाज सुनी उसका दिल तेज रफ़्तार से धड़कने लगा, उसने दरवाजा बंद होने की भी आवाज सुनी, उसके माथे से पसीना टपकने लगा. अपनी और बढ़ते कदमो की आहत से वो बहोत ज्यादा घबराने लगी.

मेरे अंदर से बहोत गुस्से में था, पर भी फ़िलहाल मेरे पास कोई रास्ता नहीं था, मनीषा मैडम ने मुझे कमरे का रास्ता बताया तो में उस कमरे की और बढ़ चला. मेने दरवाजा खोला और अंदर दाखिल हुआ. मेने देखा की एक औरत मेरी और पीठ किये हुए बीएड पर बैठी हुई है. मुझे उस पर भी गुस्सा आ रहा था. मेने दरवाजा बंद किआ, और उसकी और बढ़ने लगा.
 
अपडेट 74

में जब रूम में दाखिल हुआ तो मेने देखा की एक औरत साड़ी पहने मेरी दूसरी और मुँह किये हुए बैठी हुई थी. बालो की छोटी बंधी हुई थी, साड़ी पहने होने की वजह से उनकी पीठ का थोड़ा हिस्सा और कमर का थोड़ा हिस्सा नज़र आ रहा था. छोटी लम्बी थी जो की बिस्तर तक लगी हुई थी. में जाकर उनके पीछे खड़ा हो गया, वो औरत अभी भी दूसरी तरफ hi देख रही थी. ब्लॉउज के पीछे के हिस्से से उनकी पीठ दिख रही थी, जिस से पता चल रहा था की रंग काफी गोरा है, और शरीर भी नाप में hi था, न दुबली पतली न ज्यादा भरी हुई दिख रही थी. मेरे मान में गुस्सा भरा हुआ था, मुझे यही लग रहा था की ये इन दोनों की मिलीभगत है तो में उन पर भी गुस्सा हो रहा था. में वह खड़ा था पर वो दूसरी और hi देख रही थी जो मुझे समाज नहीं आ रहा था. अगर उसको ये सब करना hi है तो फिर उस तरफ क्यों घूम कर बैठी हुई है. खैर मुझे क्या, मुझे पता था की मुझे यहाँ किसलिए बुलाया गया है तो मेने अपने कपडे निकलने शुरू किये, मेने अपना पंत निकल दिया, अपने शर्ट को भी निकल दिया और साइड में रख दिया, मेरी नज़ारे उस औरत पर hi थी पर वो मेरी और देख hi नहीं रही थी. मुझे इतना तो पता चल रहा था की उन्हें पता है की में कमरे में हु. मेने बनियान भी निकल दी, अब में सिर्फ अंडरवियर में था. मेरे कपडे निकलने से आवाजे हो रही थी फिर भी वो मुड़ी नहीं तो मेने कहा

शिव : में आ गया हु. (वो फिर भी कुछ नहीं बोली) देखिये मुझे अभी स्कूल भी जाना है. (वो अभी भी दूसरी और hi देख रही थी, मुझे कुछ समाज में नहीं आ रहा था, मेने आगे बढ़ कर उनके कंधे पर हाथ रक्खा तो वो पूरी कैंप गयी, मुझे गुस्सा आ रहा था, एक तो मुझे फंसा कर यहाँ ये सब करने के लिए बुलाया है और वो दूसरी और देख रही है, में थोड़े गुस्से में बोलै) आप को करना है की नहीं? (वो अभी भी सेहमी हुई बैठी रही, साला मेरे तो दिमाग का दही हो रहा था, जब वो अभी भी न पलटी तो मेने उसकी बाह पकड़ कर खिंचा तो वो मेरी और घूमते हुए कड़ी हो गयी, और मेरी और देखने लगी. उनका चेहरा बहोत hi प्यारा था, तीखी नक् और प्यारे होठ उनके चेहरे को और निखार रहे थे, माथे पर बिंदी और गले में मंगल सूत्र देख कर में इतना तो समाज गया की ये शादीसुदा है, वो दर रही थी और मुज से नज़ारे चुरा रही थी, साली एक तो मुझे फंसा कर ये काम करवा रही है और खुद hi दर रही है, मेने घर कर उसकी आंखोमे देखते hue)Ye क्या नाटक लगा रक्खा है? तुम्हे करना है की नहीं? उसने दर के मरे है में गर्दन हिलायी. में देख रहा था की वो एक बेहद खूबसूरत औरत है, औरत क्या चेहरा तो एक लड़की जैसा hi है, उसके चेहरे का दर मेरी समाजमे नहीं आ रहा था, वो मुझसे नज़ारे चुराने लगी, मेने आखरी बार puchha)Karna है की nahi?(Usne फिर से डरते हुए है में गर्दन हिलायी) तो कपडे निकालो. (वो फिर ऐसे hi कड़ी रही, वो मुझे ऐसे देख रही थी की जैसे कंफ्यूज हो, अब मेरे सबर का बांध टूटता जा रहा था और गुस्सा बढ़ते जा रहा था, मेने उसकी सदी पकड़ी और उसे खींचते हुए निकलने लगा, वो मुझे रोकने का प्रयास कर रही थी पर मेने झटके से उसका हाथ छुड़ाया और उसकी सदी निकल दी, वो अपने दोनों हाथो से अपने स्तन छुपाने लगी. साला मेरा तो दिमाग hi फटने को हो गया था, गुस्से की वजह से मेरा लुंड भी उठा नहीं tha.Me उसकी और गया और उसके शिर के बालो को पकड़ते हुए उसके शिर को ऊपर उठाया, वो दर से मुझे देख रही थी, में उसके होठो को चूसने लगा, सोचा शायद होठ चूसने से लुंड खड़ा हो जायेगा. मुझे खुद समाज नहीं आ रहा था की में क्यों ऐसा बेहवे कर रहा हु. आज तक मेने किसी के साथ ऐसी हरकत नहीं की थी, पर शायद मुझसे जबरदस्ती ये सब करवाया जा रहा था तो मुझे गुस्सा आ रहा था, वो अभी भी बूत की तरह कड़ी रही, में उसके होठ चूसते हुए उसके कूल्हों को मसलने लगा, स्त्री शरीर का स्पर्श प् कर मेरे लुंड ने अपना शिर उठाया, में उसके एक स्तन को दबाते हुए उसके मुँह में अपनी झीब दाल दी, वो मुझे बस देखे जा रही थी. उसकी और से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं थी, मेने उसे बीएड पे धक्का दिया और उसके पेटीकोट को ऊपर उठा दिया, वो उसे वापस ढकने का प्रयास कर रही थी तो मेने उसके हाथ को झटक दिया, उन्होंने दूसरी और अपना शिर घुमा लिया, मेने देखा तो उन्होंने काळा कलर की पंतय पहनी हुई थी, गोरी गोरी झांघो पर वो पंतय काफी उत्तेजक लग रही थी, मेने देखा की गोरी झांघो के जोड़ पर पंतय का भाग फुला हुआ था, छूट का अबास स्पस्ट हो रहा था, ऐसा नज़ारा देख कर मेरा लुंड ठुमके मरने लगा, मेने उनकी पंतय पर से उनकी छूट को सहलाया तो वो कंपनी lagi.(Swarna की हालत ख़राब थी, एक तो वो पहले से दरी हुई थी और ऊपर से शिव के ऐसे बर्ताव से वो और दर गयी थी, उसने शिव को देखा था तो वो सच में बहोत अच्छा दिख रहा था पर अभी परिस्थितिया hi ऐसी थी की उसे दर लग रहा था, पर उसे माँ बन न था, इस लिए वो बस शिव को सब करने दे रही थी, जब शिव उसकी पंतय खिंच कर निकलने लगा तो शर्म के मरे एक बार उसने अपनी पंतय पकड़ ली पर शिव ने ताकत से उसका हाथ झटक दिया, उसके चेहरे का गुस्सा देख कर वो और दर रही थी, वो दरी सेहमी सी लेती रही, उसने अपनी आंखे बंद कर दी और सब किस्मत पर छोड़ दिया) मेने छूट को देखा, गोर रंग की चमड़ी पर काळा रंग के झांट के बाल बहोत ज्यादा आकर्षक लग रहे थे, छूट के होंठ आपस में चिपके हुए थे, अगर और कोई वक़्त होता तो में छूट से अच्छे से प्यार करता, पर यहाँ में ये सब मजबूरी में कर रहा था तो मुझे उनपर प्यार नहीं आ रहा था, मुझे बस छुड़ई करनी थी और अपना काम ख़तम करना था. मेने छूट के होठो पर हलके से ऊँगली चलायी और अपनी एक उंगली छूट के छेड़ में डाली, तो वो अपनी झंघे आपस में सताने लगी, मेने झटके से उनके पेअर को साइड में फैलाया और ऊँगली को अंदर दाल दिया, उन्होंने अपना मुँह दबा दिया, सायद वो आवाज नहीं करना चाहती थी. छूट की गर्मी का एहसास होते hi मेरा लुंड पूरी तरह से खड़ा हो गया, मेने अपनी अंडरवियर निचे खिसकायी और अपने खड़े लुंड को बहार निकला और बीएड पर चढ़ गया, (स्वर्ण की शिव की और देखने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी, वो अपनी आंखे बंद किये हुए आनेवाले पालो का इंतजार करने लगी, उसकी भी मजबूरी थी, वो भी तने सुन सुन कर थक गयी थी, उसे कैसे भी माँ बन न था) मेने लुंड को छूट पर लगाया, और उसकी और देखा तो वो अपनी आंखे बंद किये हुए थी, मुझे क्या, मेने अपनी पोसिटिव ली और लुंड पे दबाव बनाते हुए अंदर डालने लगा, लुंड छूट के होठो को फैलते हुए छेद में उतरने लगा, लुंड का सूपड़ा hi अंदर गया था की वो मुझे रोकने लगी तो मेने उसके हाथ पकड़ लिए और लुंड को धकेलते हुए और अंदर डालने लगा, वैसे भी मुझे तो छूट छोटी hi लगनी थी, तो में छूट को देखते हुए लुंड अंदर और अंदर धकेल रहा था (वो कराह रही थी और अपनी कमर उठा कर लुंड को सहने का प्रयास कर रही थी, वो मुझे अपने हाथ से रोकने का भी प्रयास कर रही थी, पर मुझे उसकी कोई परवाह नहीं थी, आधे से ज्यादा लुंड अंदर डालने के बाद में सही से पोशण लेने लगा क्यों की अब आगे लुंड जा नहीं रहा था तो मुझे धक्का मरना था, में उनके ऊपर होने लगा तो मेरी नजर उनके चेहरे पर पड़ी, वो रो रही थी और काफी दरी हुई लग रही थी, आंसुओ की धार दोनों और से निकल रही थी. चाहे मुझे उनपर कितना भी गुस्सा क्यों न हो में किसी को दर्द में नहीं देख शक्ति था और ये तो एक प्यारी सी खूबसूरत औरत थी, जब में उनकी और देखने लगा तो उन्होंने भी मेरी और देखा, हमारी नज़ारे मिली तो वो बड़ी याचना से मुझे देख रही थी, उसकी ऐसी हालत देख कर मुझे दया आ गयी, मेने अपना लुंड निकल लिया और वापस अंडरवियर में दाल कर साइड में बेथ गया. (लुंड के निकलते hi स्वर्ण ने रहत की साँस ली, इतने बड़े लुंड को अपनी छूट में जाने से उसे बहोत दर्द होने लगा था, वो इतना दर गयी थी की वो चिल्ला भी न शक्ति, दर की वजह से उसकी छूट भी चिकनी नहीं हुई थी जो एक और कारन था उसके दर्द का, वो लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी, उसकी आँखों से बहते आंसुओ से आंख के पास एक लकीर सी बन गयी थी) मेने उनकी और देखा.

शिव : ये सब प्यार से होता है, किसी के साथ जबरदस्ती करोगी तो ऐसा hi होगा.

स्वर्ण : (उस बेचारी को तो कुछ पता hi नहीं था, उसने रट हुए kaha)Mene कोनसी जबरदस्ती की, तब से तुम hi मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे.

शिव : अच्छा में जबरदस्ती कर रहा था, मुझे ब्लैकमेल कर के मुझे यहाँ ये सब करने के लिए बुलाया, ये जबरदस्ती नहीं है?

स्वर्ण : (उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था पर वो निचे से नंगी लेती हुई थी तो उसने अपना पेटीकोट ठीक करते हुए अपनी छूट को धक् दिया) मेने ? नहीं शिव, मेने कोई जबरदस्ती नहीं की, और में किस बात पर तुम्हे ब्लैकमेल करुँगी.

शिव : अब भोली मात बनो, मुझे अपनी सहेली के साथ मिल कर, फंसने की धमकी दे कर ये सब करने के लिए किसने मजबूर किआ?.

स्वर्ण : में भगवन की सौगंध खा कर कहती हु, मुझे कुछ नहीं पता, तुम क्या कह रहे हो किस बारेमे कह रहे हो मुझे कुछभी नहीं पता है.

शिव : अच्छा तो तुम्हे कुछ भी नहीं पता, तो तुम यहाँ क्या कर रही हो? (स्वर्ण सोचने लगी की सच में कुछ तो कन्फूसिओं है)

स्वर्ण : में यहाँ क्यों हु इसका जवाब में तुम्हे देती hu(Swarna ने शिव को शार्ट में सब बता diya)Muje सच में नहीं पता शिव की तुम्हे मजबूर किआ गया है इन सब के लिए, चलो, मनीषा से अभी बात करती हु, और जहा तक मुझे पता है वो भी ऐसी नहीं है, में उसे बरसो से जानती हु, वो ऐसा कैसे कर शक्ति है. (वो उठने लगी तो मेने उन्हें रोक दिया)

शिव : वो बाद में देखलेंगे, आप की बातो से मुझे यकीं हो गया है की शायद आप को कुछ भी नहीं पता, आप को आप की जरुरत यहाँ खिंच लायी है. और अगर में आप की मदद कर शक्ति हु तो में जरूर करूँगा, तो अभी जिस काम के लिए आप आयी हो, वो करते है, और सॉरी मेने आपके साथ ऐसा दुर्व्यव्यार किआ.

स्वर्ण : नहीं शिव, सॉरी मुझे बोलना चाहिए, मुझे बिलकुल भी नहीं पता था की मनीषा ने ऐसा किआ है, में तुम्हारे साथ हु शिव, में उसे ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करने दूंगी. तुम चिंता मात करो, तुम जाओ, मुझे ऐसे किसी के साथ जबरदस्ती से कोई ख़ुशी नहीं चाहिए. में जैसी हु वैसी ठीक हु, जब मेरे भाग्य में hi ये ख़ुशी नहीं लिखी तो में उसे जबरदस्ती नहीं प् शक्ति, और में तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती नहीं होने दूंगी शिव, चलो तुम , कपडे पहन लो हम अभी मनीषा से बात करते है और तुम किसी बात की चिंता मात करो, वो तुम्हे कोई नुकशान नहीं पहुचायेगी.

शिव : मेने बोलै न, वो सब बाद में, मुझे आप पर यकीं है, मुझे आप पर अब कोई गुस्सा नहीं है, पहले वो करते है जिसके लिए आप यहाँ आयी हो (माहौल को हल्का करने के उद्देश्य सॅमने kaha)Waise भी इतनी खूबसूरत लड़की के साथ मुझे ऐसा करने का मौका मिल रहा है तो में कैसे जाने दू. (स्वर्ण ने शिव को आश्चर्य से देखा, उसकी नटखट मुस्कान देख कर स्वर्ण शर्मा गयी और मुस्कुराते हुएनींचे देखने lagi)Kya नाम है आप का.

स्वर्ण : (शरमाते हुए) स्वर्ण.

शिव : मतलब सोने जैसी (गोल्ड), सच में आपका नाम एकदम सही है, आप सचमे सोने जैसी hi गोरी हो.

स्वर्ण :(Sharmakar)Shiiiiiiiv.

शिव : सच में आप बहोत सुन्दर हो स्वर्ण (स्वर्ण ने शिव को dekha)Swarna, मुझे लग रहा है की आप के होठ मुझे बुला रहे है (शिव की ऐसी खुली बात से स्वर्ण शर्मा gayi)Kya में इससे चुम लू? (स्वर्ण को कुछ समाज नहीं आ रहा था पर उसे शिव का ऐसे बात करना अच्छा लग रहा था, उस ने मुस्कुराते हुए शर्म से है का इस्सर किआ) ( आखिर कर था तो में मर्द hi, एक खूबसूरत औरत के ऐसे निमंत्रण को में कैसे नकार शक्ति था, में उनके नज़दीक खिसका, प्यार से उनके कंधे पर हाथ रक्खा तो वो मुझे देखने लगी, मेने उनको निचे लेटते हुए उनके साइड में लेते लेते मेने अपना चेहरा उनके ऊपर ले गया और उनके होठो को अपने होठो से चूमने लगा. वो मुझे देखे जा रही थी, थोड़ी देर उन्हें चूमने के बाद में उनके होठो को चूसने लगा तो उनकी आंखे बंद हो गयी, वो थोड़ी देर बस ऐसे hi लेती रही (स्वर्ण जो थोड़ी देर पहले शहमी शमी थी वो इस प्यारे से लड़के के चुम्बन से पिघलने लगी, वो सब कुछ भूल गयी, उसे जैसे अब कुछ भी याद नहीं था न उसका पति न और कुछ, वो बस इस पल के एहसास में खोने लगी, थोड़ी देर वो बस ऐसे hi लेती रही पर शिव के चुम्बनों ने उसे मजबूर कर दिया, उसने भी अपने होठो को चलना सुरु किआ, वो शिव के होठो को चूसते हुए चुम्बन में साथ देने लगी, पता नहीं क्यों पर इस अनजान से लड़के के ऐसा करने से उसके अंदर एक अजीब सी हलचल होने लगी थी, जब शिव की जीभ उसकी जीभ से टकराई तो उसके शरीर में एक करंट सा दौड़ गया, शिव उसकी जीभ को अपने होठो से चूस रहा था,





वो अपनी जीभ को जितना हो शेक उतना उसके मुँह में दाल रही थी. थोड़ी देर होठो को चूमने के बाद जब शिव उनकी गर्दन को चाटने लगा तो उसका बदन आनंद से कंपनी लगा)





स्वर्ण : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो स्वर्ण, अगर कोई ज्यादा गुस्ताखी कर दू तो माफ़ कर देना. (अपनी तारीफ सुन कर स्वर्ण को बहोत अच्छा लग रहा था, घर के कामो में और जिम्मेदारिओं में वो ऐसे मसरूफ हो गयी थी की वो इस एहसास को जैसे भूल hi गयी थी, अब तो उसका पति भी उसकी तारीफ नहीं करता था, कभी कभार सेक्स हो जाता था पर वो भी सिर्फ एक मचिनी तौर पर, शिव जैसे जैसे उसके शरीर को चाट रहा था वो मचल रही थी. थोड़ी देर पहले के शिव में और इस शिव में कितना अंतर था, पहले तो उसे लगा था की ऐसे किसी अनजान के साथ सम्बन्ध बनाने का उसका फैसला hi गलत था, पर अब उसे ये सब अच्छा लग रहा था, उसके हाथ अपने आप hi शिव की पीठ पर कसने लगे, उसे ये सब इतना अच्छा लग रहा था की वो शिव की नंगी पीठ को सहलाने लगी. वैसे भी शिव का शरीर कैसा हुआ और आकर्षक था, वो खुद hi अपने पति के शरीर की तुलना शिव से करने लगी, उसके पति ला शरीर एक सामान्य शरीर था, है वो भी आकर्षक था पर शरीर ऐसा कैसा हुआ नहीं था, उसने फिल्मो में ऐसे शरीर वाले हीरो देखे थे, आज वो सच में ऐसे एक आकर्षक शरीर के मालिक की बाहोंमे थी. जब शिव का मुँह उसके स्तन पर घूमने लगा तो वो बहोत उत्तेजित होने लगी, एक और उसे शर्म आ रही थी की एक अनजान लड़का उसके निजी अंग को सेहला रहा है पर साथ में उसके अंदर एक अजीब सी उत्तेजना उभरने लगी, वो शिव के बालो को सहलाते हुए उसे अपनी और खींचने लगी)

स्वर्ण : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़. (जब में उनके ब्लॉउज पर से उनके स्तन दबाने लगा तो वो आंखे बंद किये हुए आनंद ले रही थी, उनके चेहरे पर उत्तेजना साफ़ दिख रही थी, उनके गाल और कान लाल हो गए the)(Jab शिव उसके ब्लॉउज के हुक खोलने लगा तो शर्म से उसने शिव का हाथ पकड़ लिया, शिव उसकी आँखों में देख रहा था, जैसे पूछ रहा हो की क्या हुआ, स्वर्ण ने शर्म के मरे अपनी नज़ारे फेर ली और अपना हाथ हटा diya)(Unki सहमति प् कर में ब्लॉउज के हुक खोलने लगा, जब ब्लॉउज खुल गया तो दोनों तरफ के हिस्सों को साइड में हटाया तो गोर गोर स्तन जो की ब्रा में कैद थे मेरे सामने आ गए, माध्यम से ज्यादा आकर के वो उभरे होए गोले मुझे अपनी और खींचने लगे, मेने ब्रा में कैद उन गोलों को अपने हाथ से मसल दिया)

स्वर्ण : शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhh(Usne चद्दर को मिट्ठी में कास liya)Dhire shhhhhh.(Wo थोड़ी सख्ती से मेरे स्तन दबा रहा था, इतने जोरो से कभी मेरे पति ने नहीं दबाये थे तो मुझे दर्द का एहसास हुआ पर मेने उसे रोका नहीं, उसके ऐसा करने से मेरे तन बदन में उत्तेजना बढ़ रही थी, नारी सहज में इस मरदाना पकड़ के आगे बेबस होती जा रही थी, सब भूल कर में इस आनंद को महसूस कर रही थी, जब उसने मुझे उल्टा पलट दिया तो मुझे लगा जैसे में उसके हाथ की कठपुतली हु, उसने मेरा ब्लॉउज मिकल दिया और मेरी पीठ पर चूमने लगा, में आंखे बंद किये हुए उस गरम होठो के आनंद का मज़ा लेने लगी, जब उसने मेरी ब्रा के हुक खोले तो मुझे बहोत शर्म आने लगी मेने मुस्कुराते हुए अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया, पर मेने उसे रोका नहीं, वो मेरी नंगी कमर को सहलाते हुए मुझे चुम रहा था, काफी समय से मेरे पति ने ये सब करना बंद hi कर दिया था, जब उसके हाथ ने मेरे नितम्ब को सहलाया तो मेरा शरीर उत्तेजना से कंपनी लगा, वो मेरे कूल्हों को ऐसे मसल रहा था जैसे अंता गुंड रहा हो, वो उसे सहलाते हुए दरार में अपना हाथ गुसा रहा था, उसे रोकने का तो कोई सवाल hi नहीं था, चाहे मुझे जितनी भी शर्म आ रही हो पर में आयी hi इसीलिए थी, तो में बस अपनी आंखे मूंदे सिसकिया लेते हुए उसके स्पर्श का आनंद ले रही थी. एक बार फिर उसने मुझे पलट दिया तो में सीधी लेट गयी, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो मुझे देख कर मुस्कुराया, सच में मनीषा की ये बात तो बिलकुल सही थी, इससे देख कर इसके ऊपर मोहित होना तो लाज़मी था, उसकी मुस्कान देख कर में उसमे खोने लगी

वो मेरे पेटीकोट का नाडा ढूंढने लगा तो में बहोत शर्मा गयी, में जानती थी की वो मुझे पूरी नंगी कर देगा पर ये सोच कर hi मुझे कुछ हो रहा था, उसने जब नदी को खिंचा तो मेरी मुट्ठी एक बार फिर चद्दर पर कास गयी. मेरी कमर से पेटीकोट का नाडा ढीला हो गया था, वो जब मेरा पेटीकोट शरक़ने लगा तो मेरी मुट्ठी ने चद्दर को और कास लिया. जैसे जैसे पेटीकोट निचे सरक रहा था मेरे चेहरे के भाव बदल रहे थे, में पूर्ण रूप से उसके सामने नंगी होने जा रही थी. इतने सालो के अनुभव से मुझे इतना तो पता hi था की ये सब तो होना hi है, में कोई नयी नवेली दुल्हन नहीं थी पर सच कहु तो आज मुझे उसी बात का एहसास हो रहा था जब में पहली बार नंगी हुई थी. फर्क ये था की उस वक़्त मेरा पति था, पर इस बार एक अनजान युवक था. जब पेटीकोट मेरे नीचे फंस रहा था तो मेने खुद अपने कूल्हे उठा कर उसे सहूलियत कर दी, मेरी आंखे खोलने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी, में बस सब महसूस कर रही थी, जब पेटीकोट निकल गया तो थोड़ी देर कोई हलचल न हुई, मुझे कुछ समाज नहीं आया तो मेने हलके से आंख खोल कर देखा तो शिव, मुझे देख रहा था, उसके ऐसे मेरे नंगे शरीर को देखने से में शर्म के मरे पानी पानी होने लगी, मेने एक हाथ से अपने स्तन और दूसरे हाथ से अपनी योनि को छुपाने की कोशिस की पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, वो जिस बेशर्मी से मेरे नंगे बदन को निहार रहा था, में शर्म से गाढ़ी जा रही थी. वो मेरे साइड में लेता और मेरे पुरे शरीर को सहलाने लगा, वो मेरे स्तन से ले कर मेरे पेट और योनि के बालो को हलके हलके छू रहा था. में मछली की तरह मचल रही थी. मुझे लगा की वो अपनी अंडरवियर उतर रहा है तो मुझे और शर्म आयी. उसने अपना एक हाथ मेरी योनि पर रक्खा और उसे सहलाने लगा, उसकी ऊँगली योनि की दरार में धंस रही थी, इस बार मुझे एहसास हुआ की मेरी योनि से चिपचिपा रास बह रहा था जो उसकी ऊँगली से लग कर मेरी पूरी योनि की दरार पे लग रहा था, जैसे जैसे वो ऊँगली चला रहा था, योनि से रास और ज्यादा बह रहा था, एक अजीब सी लहर मेरे अंदर दौड़ रही थी. मेरे मुँह से लगातार सिस्किअ निकलने लगी थी. उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने निजी अंग पर रख दिया, में घबरा गयी, अचानक हुए उस स्पर्श से में पूरी तरह कैंप गयी. मेने अपना हाथ पीछे खिंच लिया. उसने दोबारा मेरा हाथ पकड़ा और वापस उस और ले जाने लगा, मुझे पता नहीं किस बात पर इतनी शर्म आ रही थी, में हिचकिचा रही थी, में अपने हाथ को वापस खिंच रही थी पर उसकी ताकत के आगे मेरी एक न चली.

शिव : प्लीज, पकड़ियेना.

स्वर्ण : (में क्या बोलती, मुझे बहोत शर्म आ रही थी, मेने बड़ी मुश्किल से bola)M..mmuje शर्म आ रही है.

शिव : अगर ये सब नहीं करेगी तो न आप को मज़ा आएगा न मुझे. (उसकी बात एकदम सही थी, जब इतना सब हो गया था तो अब पीछे हटने से क्या फायदा, मेने झिचकिचाते हुए उसके अंग को पकड़ा, वो बहोत बड़ा था, पहली बार हाथ में पकडाडते hi मुझे पता चल गया की ये बहोत बड़ा है, पहलीबार तो मुझे यकीं hi नहीं हुआ की मेने सच में वही पकड़ा है न, तो मेने थोड़ा उठ कर उस और देखा, वो सचमे वही था, में वापस लेट गयी, और उसे पकड़ कर महसूस करने लगी, मेने अपने पति का भी पकड़ा था तो मुझे पता था की ये कैसा होता है, आज पूरी तरह से वो अलग एहसास था, वो एकदम गरम था और कड़क तो इतना था की में उसे जरा भी दबा नहीं प् रही थी. में जैसे कही खोयी हुई थी और उस अंग को छू कर उसका जायजा ले रही थी, जब मेने शिव की ऊँगली को अपनी योनि के अंदर बहार होते पाया तब में होशमे आयी, एक अजीब सी सिचुएशन थी, वो मेरी योनि में ऊँगली कर रहा था और में उसके बड़े अंग को सेहला रही थी. वो बैठने लगा तो में उसे देख रही थी, वो अपनी पीठ लगाए बस्तर पर बेथ गया, उसने मुझे अपनी और खिंच कर अपने साथ बैठा दिया, मेरी पीठ उसकी छाती पर लग रही थी, उसने पीछे से अपना हाथ बढ़ाया और मेरी योनि को सहलाने लगा. अपने आप hi मेरी टंगे फ़ैल गयी, उसने मेरे हाथ को वापस अपने अंग पर रख दिया, हम दोनों बेथ थे, मेरी नजर के सामने उसका वो अंग शिर उठाये खड़ा था, एक और मुझे शर्म आ रही थी दूसरी और मज़ा भी आ रहा था, वो मेरे स्तनों को बरी बरी मसल रहा था, में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की मेरी योनि सिकुड़ने लगी थी, उसकी ऊँगली से hi मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, जब उसकी ऊँगली किसी खास जगह को रगड़ रही थी तो मेरे अंदर जैसे करंट लग रहा था.

स्वर्ण : आह्हः शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह. (में जल्दी जल्दी उसके अंग को हिला रही थी, शर्म अब छूट टी जा रही थी. वैसे भी पूरी नंगी हो कर तो उसके साथ थी. ऐसा एहसास मुझे पागल किये जा रहा था, थोड़ी देर बाद उसने मुझे सीधा लेता दिया, मुझे लगा की अब वो पल आ गया है पर उसने मेरी टंगे फैलाई और अपने होठ मेरी योनि पर रख दिए, मेरे लिए ये एक अलग बात थी, मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया था, में उसको रोकने लगी पर उसके होठ मेरी योनि के होठो को ऐसे चूसने लगे जैसे वो मेरे मुँह के होठो को चूस रहा हो, थोड़ी hi देर में मेने विरोध करना बंद कर दिया और अपनी आंखे बंद किये इस अजीब से एहसास को महसूस करने लगी, ये किस तरह का मज़ा था, कितना अच्छा लग रहा था, उसकी जीभ जब मेरे छेड़ में जा रही थी तो मेरे मुँह से सिसकिया निकल रही थी, वो मेरी योनि को ऐसे चाट रहा था जैसे कोई मनपसंद चीज उसे मिल गयी हो,





में पूरी नंगी अपने खास निजी अंग को एक अनजान लड़के के सामने परोसे हुए थी. वो मेरी योनि को इतनी सिद्दत से चाट रहा था की मुझे उस पर प्यार आने लगा. मेरी हालत ऐसी हो गयी थी की अब मुझे मेरी योनि में वो बड़ा अंग चाहिए था. इतनी बेसब्री मुझे कभी महसूस नहीं हुई थी, हलाकि मुझे दर भी लग रहा था की इतना बड़ा अंग मेरे अंदर जायेगा तो क्या होगा पर फिर भी मुझे उसे अपने अंदर महसूस करना था. मेने उसके शिर को धकेलते हुए kaha)bus शिव शहहह अब में नहीं सेह पाऊँगी.

शिव : (मुस्कुराते हुए) क्यों मज़ा नहीं आया?

स्वर्ण : (शरमाते hue)Bahot मज़ा आ रहा था शिव पर अब मुझे wo...(bolte बोलते वो कुछ पल रुकी, वो और शर्मा रही thi)wo करना hai.(Me मुस्कुराया, में उनकी बात समाज रहा था, में खड़ा हुआ, मेने अपने लुंड को उनके मुँह के सामने कर दिया)

शिव : इससे पहले गिला कर do(Swarna उसकी बात समाज रही थी क्यों की उसके पति ने कई बार उसको अपना ये अंग चुसवाया था, पर यहाँ वो एक अनजान लड़के के साथ थी, वो थोड़ी झिझकने लगी) आप को पसंद नहीं तो रहने dijiye(Shiv उनकी टैंगो की तरफ जाने लगा तो स्वर्ण ने उसका हाथ पकड़ लिया)

स्वर्ण : मुझे शर्म आ रही है शिव.

शिव : कोई बात नहीं. (में फिर उनके पैरो की तरफ जाने लगा तो फिर उन्होंने मुझे खिंच कर रोका, में उन्हें देखने लगा, वो झझकते हुए अपनी पोशण लेने लगी, वो घुटनो के बल मेरे सामने बेथ गयी, जब हमारी नज़ारे मिली तो वो शर्मा गयी, उन्होंने अपने हाथ से मेरी झंघे सेहलायी, फिर हिचकिचाते हुए अपने हाथ मेरे लुंड की और बढ़ाये, वो मुज से नज़ारे चुरा रही थी पर मुस्कुरा रही थी, आहिस्ता आहिस्ता उन्होंने अपना हाथ बढ़ा कर मेरे लुंड को थम लिया, वो थोड़ा ऊपर उठी और लुंड को ध्यान से देखने लगी, चमड़ी को थोड़ा पीछे खिंचा, अपने होठो पर जीभ फेर कर उसे गिला किआ, एक बार मेरी तरफ देखा, फिर शर्म से नज़ारे झुका li.)(Swarna का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसे ये करना कभी अच्छा नहीं लगा था, पर आज उसे पता चला की अपने मुँह से भी वह कितना मज़ा आता है, शिव ने उसे वो मज़ा दिया था तो वो पीछे नहीं रहना चाहती थी, जब उसे उसका पति कहता था तब उसे ये करना अच्छा नहीं लगता था क्यों की उसके पति ने कभी उसे ऐसा मज़ा दिया नहीं था, पर यहाँ बात अलग थी, उसने हिचकिचाते हुए अपना मुँह खोला और आहिस्ता आहिस्ता से वो उस बड़े अंग को अपने मुँह में ले जाने लगी.





उसको अपना पूरा मुँह खोलना पद रहा था, जब वो गरम सूपड़ा उसके मुँह में समां गया तो उसने अपने मुँह को उस पर कास दिया, एक अजीब सा एहसास हो रहा था, वो आहिस्ता आहिस्ता से अपना मुँह आगे पीछे करने लगी, शिव उसके शिर को सेहला रहा था, उसने शरमाते हुए एक बार शिव को देखा तो वो मुस्कुरा रहा था. उसे शर्म आ रही थी पर मज़ा भी आ रहा था. वो उसे चूसने लगी, थोड़ा थोड़ा वो अंग उसके मुँह में अंदर बहार हो रहा था, जब उसने ज्यादा अंदर लेने की कोशिस की तो वो उसके हलक से टकराया, तो उसे खासी होने लगी)

शिव : रहने दीजिये.

स्वर्ण : नहीं, में कर लुंगी.

शिव : नहीं अभी रहने दीजिये, टाइम भी काम है, आप उस पर थूक लगा दीजिये. (उसने अपने हाथ पर थूक निकला और लुंड पर लगाने लगी, लुंड चमक रहा था, उसने और थूक निकला और उस पर लगाने लगी) बस chalega(Jab शिव उसकी टंगे फैलते हुए वह बैठा तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो थोड़ा ऊपर उठ कर अपनी योनि की और hi देख रही थी. जब शिव ने अपने उस अंग को योनि पर घिसा तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी, जैसे जैसे वो घिस रहा था उसकी योनि रास बहा रही थी, आखिरकार शिव ने उस अंग के सुपडे को उसकी योनि के छेड़ पर लगा दिया, और उसकी और देखा, वो समाज रही थी की शिव उसकी इजाजत मांग रहा है तो उसने है में शिर हिलाया, आहिस्ता से शिव ने जोर लगाया तो वो बड़ा सूपड़ा उसकी योनि के छेड़ को फैलते हुए अंदर उतरने लगा. उसकी योनि का छेड़ पूरी तरह फ़ैल गया था, चिकनाहक़ की वजह से वो सूपड़ा उसकी योनि में प्रवेश कर गया. उसकी यह निकल गयी, शिव ने उसकी और देखा तो वो शर्मा गयी, क्यों की शिव ने अपना वो अंग उसकी योनि में दाल दिया था, उसने शरमाते हुए एक मुस्कराहट दी, पर जैसे hi वो अंग और अंदर जाने लगा उसकी मुस्कुराहट बंद होती गयी, आखिर कर वो इतना अंदर चला गया की अब आगे जगह hi नहीं थी )

स्वर्ण : अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : दर्द हो रहा है?

स्वर्ण : थोड़ा thoda.(Me ने उतने लुंड से hi अंदर बहार करना शुरू किया, एक और औरत मेरे निचे थी, पता नहीं मेरे भाग्य में क्या लिखा हुआ था, आखिर मेरे साथ hi ये सब क्यों हो रहा था, में आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार किये जा रहा था)





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स्वाना : शहहह अह्ह्ह शहहह शहहह अह्ह्ह्ह shhhh(Kafi देर तक में धक्के लगता रहा, आप वो काफी रिलैक्स लग रहा थी, मेने उनके स्तन को सहलाना सुरु किया तो वो मेरे हाथ को सहलाने lagi)(Swarna को इतना मज़ा आ रहा थकी वो बार बार अपनी योनि में अंदर बहार हो रहे उस बड़े से अंग को देख रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था की वो उसके अंदर था, वो उसकी मासपेशिओ के हर हिस्से को छू रहा था, उसका वो बड़ा सा सूपड़ा वो साफ़ साफ महसूस कर प् रही थी, उसने शिव को प्यार से देखा, उस पर उसे इतना प्यार आ रहा था की उसने उसे अपनी और खिंच लिया और उसके होठो को चूसने लगी, शिव लगातार अपने उस अंग को अंदर बहार कर रहा था जो उसे बहोत अच्छा लग रहा था. वो उसके शिर के बालो को सहलाते हुए उसे चूमे जा रही थी, लगातार हो रहे धक्को से वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की अब वो झड़ने के करीब आ गयी थी, इतना जल्दी वो स्खलन के करीब पहुंच गयी तो उसे आश्चर्य हुआ क्यों की इतने सालो में वो कभी कभार hi इस सुख को प् शक्ति थी. वो शिव को अपनी और खींचने लगी, उसकी कूल्हे को पकड़ कर उसे धक्के लगाने को उकसा रही थी.)





(शिव भी समाज रहा था, वो लगातार धक्के लगा रहा था, उसकी गति भी बढ़ रही थी, जब उसने महसूस किआ की स्वर्ण झाड़नेवाली है तो ुसीवक़्त उसने दो तीन जोर से ढ़काकके लगा दिए और वो स्वर्ण की छूट में पूरा समां gaya)(Swarna इस सुख और दर्द के मिलेजुले एहसास के साथ झड़ने लगी, उसे लगा की उसकी योनि अंदर से फैट गयी है, पर जब उसने महसूस किआ की वो अंग उसकी बच्चेदानी तक पहुंच गया है तो उसे सुकून हुआ. शिव थोड़ी देर रुका रहा तो उसे रहत हुई, थोड़ी देर बाद उसने शिव को देखा तो पशीने से भीगा हुआ वो उसे देख मुस्कुरा रहा था, उसके चेहरे से पशीने की बुँदे टपक रही थी, उसने हाथ फैलाकर अपने पेटीकोट को लिया और शिव के चेहरे के पशीने को साफ़ किआ)

शिव : आप ठीक हो?

स्वर्ण : (दर्द तो था पर वो खुस thi)Ha, में ठीक हु शिव. तुम्हारा वो बहोत बड़ा है.

शिव : (झुक कर उनके होठो को चुम kar)Achchha लगा?

स्वर्ण : (शरमाते hue)Ha.

शिव : अब पीछे गम जाओ.

स्वर्ण : (उसका मतलब समझते हुए शर्माने लगी, पर शिव ने अपना लुंड बहार निकला और उसे घोड़ी बना diya)Aaram से शिव. (मेने मुस्कुराते हुए, उनकी गांड को फैलाया और छूट पर चुम्बन kiya)(Swarna को शर्म आ रही थी पर उसे शिव का ऐसा करना अच्छा लगा, वो थोड़ी और झुक गयी जिस से उसकी गांड उभर कर बहार निकल आयी, उसे बहोत शाम आ रही थी पर साथ में एक तरह का मज़ा भी आ रहा था, ऐसे एक अनजान लड़के के साथ वो कितना आगे बढ़ रही थी, पूरी नंगी हो कर वो घोड़ी बानी उसको आमंत्रण दे रही थी, शिव ने जब उसका वो अंग उसकी योनि पर घिसा तो उसकी आंखे बंद हो गयी, और जैसे hi वो उसके अंदर घुसा वो अपने हाथो के बल ऊपर उठने लगी, शिव उसकी पतली कमर को पकड़ कर अपनी और खिंच रहा था और उसका वो अंग वापस उसकी योनि की गहराइयो में उतरने लगा,





जब वो पूरा उतर गया तो उसके मुँह से एक आह निकल गयी, फिर से वो उसकी कमर को थामे धक्के लगाने लगा, अपने अंदर उस अंग को महसूस करके वो लगातार सिस्किअ ले रही थी) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिईयिव अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह (शिव की लगातार स्पीड बढ़ती जा रही थी, पर उसे और ज्यादा मजा आ रहा था, ये पहला अनुभव था उसके लिए जब वो इतने टाइम से चुद रही थी, आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ था, उसे वो अंग अपने पेट की गहराइयो में महसूस हो रहा था, उसने अपने पेट पर हाथ लगा कर उसको महसूस किआ तो अचंबित होने लगी, उस अंग की ठोकरे लगातार उसकी बच्चेदानी की दीवाल पर लग रही थी, शिव ने काफी देर तक उसे इस पोसिटिव में छोड़ा. वो फिर एक बार झाड़ गयी थी, वो हांफ रही थी, जब शिव ने अपना वो अंग बहार निकला तो वो धड़ाम से बिस्तर पर गिर गयी, जब शिव ने उसे पलटा तो जैसे उसके शरीर में कोई दम hi नहीं था, वो फिर से दीधी हो गयी और जब शिव ने वापस अपना अंग अंदर डाला तो थोड़ी ऊपर उठ गयी. फिर से शिव की गति चालू हो गयी, वो शिव को hi देख रही थी, पशीने से लतपथ वो सोहनी सूरत पर उसे बहोत प्यार आ रहा था, उसने फिर शिव को अपनी और खिंच लिया और उसके होठो पे पागलो की तरह टूट पड़ी.





शिव उसे इतना अपना लग रहा था की अब उसे जरा भी शर्म महसूस नहीं हो रही थी, वो सामने से अपनी कमर हिलाते हुए उसके धक्को का जवाब दे रही थी, शिव के धक्के काफी तेज हो गए थे, उसे दर्द भी हो रहा था पर उसे इस बात की कोई परवाह नहीं थी. उसकी गति से लग रहा था की अब वो झाड़नेवाला है, तो वो उसे अपनी और खींचने लगी, उसने अपने पेअर उसकी कमर के इर्दगिर्द लपेट दिए, वो उसे खिंच कर उसकी गति काम करना चाहती थी पर शिव की ताकत के सामने वो बेबस थी, वो पूरी तरह से हिल रही थी, दोनों इतने भीग गए थे की लग रहा था की दोनों शावर के निचे हो. आखिर कर गुर्राते हुए शिव ने अपना लावा छोड़ दिया जिसे स्वर्ण अपनी कोख में महसूस करने लगी, आज पहली बार उसे इस तरह का एहसास हो रहा था, वो अपने अंदर भर रहे उस वीर्य को साफ़ मेहुस कर रही थी, वो गर्माहार उसे रहत पंहुचा रही थी, वो शिव से ऐसे लिपट गयी थी की जैसे वो कभी छूटना hi न चाहती हो. दोनों काफी देर तक ऐसे लिपटे रहे, शिव का अंग अब थोड़ा ढीला पड़ने लगा था, जब शिव ने उठना चाहा तो स्वर्ण ने उसे उठने नहीं दिया, वो उसके साथ लिपटी रही.

अब जब उसके ऊपर से खुमारी उतरी तो उसे शर्म आने लगी, जब शिव ने उसे देखा तो वो शर्मा के नज़ारे चुराने लगी. (में उनकी हालत समाज रहा था तो मेने मुस्कुराते हुए उनके होठो को चूमा तो वो और शर्माने लगी, में और चूमता गया, थोड़ी hi देर में वो मुझे जोरो से चूमने लगी, परिस्थितिया ऐसी हो गयी की एक बार फिर मेरा लुंड अकड़ गया, और मेने दोबारा उनके साथ सम्भोग कर लिया. उनकी हालत जब मेने देखि तो बाल बिखर गए थे, चेहरे पर कई जगह थूक लगा हुआ था, आदि टेढ़ी वो पड़ी हुई थी, जब में उन्हें देख रहा था तो वो शर्माने लगी और चद्दर खिंच कर अपने ऊपर ले ली. में फ्रेस हुआ और तैयार होने लगा. टाइम काफी हो गया था तो मेने स्कूल यूनिफार्म hi पहन लिया. जब स्वर्ण ने शिव को स्कूल यूनिफार्म में देखा तो वो चौंक गयी.

स्वर्ण : तुम कोनसी स्कूल में पढ़ते हो? (मेने जब स्कूल का नाम बताया तो उनके चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आयी)

शिव : क्या हुआ?

स्वर्ण : ककककुछ नहीं.

शिव : तो इतना दर क्यों रही है?

स्वर्ण : शिव, हम दोनों के बिछ की ये बात तुम किसी से कहोगे तो नहीं?

शिव : (मुस्कुराते हुए) नहीं.

स्वर्ण : मुज से वडा करो.

शिव : उसकी जरुरत नहीं फिर भी आप के लिए, में अपनी कसम खा कर कहता हु की में किसी से नहीं कहूंगा. अब ये मात कहना की किसी और की कसम खाओ, में अनाथ हु तो मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है.

स्वर्ण : मेरा ये मतलब नहीं था, मेरे हाथ पर हाथ रख कर कह देते तो भी में मान जाती. और ये मात कहना की इस दुनिया में कोई नहीं है. में जिस वजह से तुम्हारे पास आयी हु उस से तो मेरे और तुम्हारा भी सम्बन्ध हो गया, और अगर भाग्य में लिखा है तो आनेवाले से भी तुम्हारा सम्बन्ध रहेगा. तो ये मात कहो की इस दुनियामे तुम्हारा कोई नहीं है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है, अब में चलता हु.

स्वर्ण : (मेरा हाथ पकड़ kar)Fir काब मिलोगे?

शिव : (Muskurakar)Fir मिलना hai?(Usne है में शिर hilaya)Thik है, जल्द मिलूंगा.

स्वर्ण : और मनीषा की चिंता मात करना, में उस से बात कर लुंगी. और अब किसी दर के लिए मुझसे मिलने मात आना.

शिव : तो किस के लिए औ.

स्वर्ण : मेरे लिए.

शिव : (मेने उनके माथे पर किश kia)Thik है

में वह से बहार निकला तो मनीषा म वह बैठे हुए थी. उन्होंने मुझे आवाज दी पर में न रुका और वह से चला गया. मनीषा उसे जाता हुआ देख रही थी. जब शिव चला गया तो बैडरूम में गयी जहा स्वर्ण चद्दर लपेटे हुए थी, उसकी हालत देख कर उसे हंसी आ गयी. मनीषा को हस्ते देख स्वर्ण शर्म से पानी पानी हो गयी.

मनीषा : कैसा रहा?

स्वर्ण : हैट बे शर्म, ऐसा भी कोई पूछता है?

मनीषा : नहीं बता न तो मात बता, ये तेरी हालत और तेरे चेहरे की मुस्कान तेरा हल बयां कर रही है.

स्वरमा : (स्वर्ण ने गंभीरता से puchha)Tune उस से क्या कह कर बुलाया था?

मनीषा : वो सब छोड़, तेरा काम हो गया न.

स्वर्ण : मुझे बेवकूफ मात बना, शिव ने मुझे सब बतादिया है, तुजे शर्म नहीं आयी, उसे ब्लैकमेल करते हुए?

मनीषा : अब मुझे मात सीखा, अपने आप को hi देख, में इतने सालो से तेरी दोस्त हु और एक hi दिन में तू उसके लिए मेरे साथ लड़ने लगी.

स्वर्ण : में लड़ नहीं रही हु, तूने ये गलत किया है, तू कैसे उसे ब्लैकमेल कर शक्ति है?

मनीषा : देख मुझे जो सही लगा वो किआ, एक बात बता, क्या तू दोबारा शिव से मिलेगी?

स्वर्ण : (उसके ऐसे सवाल से वो मनीषा को देखने लगी, उसका दिल चाहता था की वो दोबारा शिव से मिले, इस लिए वो शर्मा गयी, पर कोई जवाब नहीं दिया)

मनीषा : देखा, तू कैसे उस से मिलना चाहती है, और अगर वो तुमसे मिलने को मन कर दे तो?

स्वर्ण : (सचमे, ये सोच कर hi वो अंदर से हिल गयी)

मनीषा : देखा क्या हाल हुआ तेरा, उसने मुज से मिलने से मन कर दिया तो मुझे भी ऐसा hi लगा था, तो मुझे जो सही लगा वो मेने किआ.

स्वर्ण : ये गलत है मनीषा, अगर वो मिलना न चाहे तो में अपने आप को मन लुंगी, पर उसके साथ ऐसे जबरदस्ती तो नहीं करुँगी.

मनीषा : वो छोड़ अभी, जा फ्रेस हो जा, घर नहीं जाना kya?(Swarna जैसे तैसे उठी और लंगड़ाते हुए बाथरूम की और जाने लगी तो एक बार फिर मनीषा की हंसी निकल गयी, स्वर्ण शरमाते हुए बाथरूम की और जाने लगी)

स्वर्ण : (बाथरूम से आने के बाद) एक बात तो में तुजे बताना hi भूल गयी, तुजे पता है शिव कोनसी स्कूल में पढता है?

मनीषा : पता है?

स्वर्ण : (आश्चर्य se)Aur तुजे पता है मेरी नानन्द कोनसे स्कूल में है?

मनीषा : पता है?

स्वर्ण : तो तूने मुझे बताया क्यों नहीं?

मनीषा : क्या फर्क पड़ता है?

स्वर्ण : कभी उसे पता चल गया तो?

मनीषा : क्या तू बतानेवाली है, और क्या तुजे पता है की शिव और वो एक दूसरे को जानते है, तू क्यों बेकरमे टेंशन ले रही है.

थोड़ी देर दोनों में बातचीत चली फिर स्वर्ण अपने घर लौट गयी. उसकी साँस ने भी पूछा की क्या हुआ तो उसने बताया की चलते हुए ठोकर लग गयी थी. वो सीधे अपने रूम में गयी और सो गयी.

में भी स्कूल पहुंच गया, वैसे तो स्वर्णजी ने मनीषा म से बात करने को बोलै था पर मुझे अभी भी सनका थी थी की मनीषा म उनकी बात नहीं मानेगी, में इस समस्या का रास्ता सोचने लगा. में सोच रहा था की काव्य मैडम से बात करू या भार्गवी मैडम से, पर ऐसी बात में कैसे उनसे कह शक्ति था, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. ऐसे hi पूरा दिन गुजर गया.

में शाम को जूही मैडम के घर पहुंच गया.
 
अपडेट 75

जूही मैडम के घर जा कर मेने बेल्ल बजायी तो उन्होंने दरवाजा खोला, उन्होंने औपचारिक तौर पर hi कहा, मेने भी जवाब दिया. हम दोनों वह से स्टेडियम चले गए. मैडम का बर्ताव वैसे सामान्य था पर वो पहले जैसी घुलमिल नहीं रही थी. में इसका कारन भी समाज रहा था पर में इस चीज से दूर रहना चाहता था. हमने प्तक्टिस की और में गयम चला गया. गयम ख़तम करके मेने सोचा की एक बार काव्य मैडम से बात कर hi लेता हु, में वह से उनके घर के लिए निकल गया. पुरे रस्ते में यही सोच रहा था की उनसे कैसे बात करू. में उनके घर पंहुचा तो उनकी माँ ने hi दरवाजा खोला. वो मेरा नाम भूल गयी थी पर मुझे पहचानती थी तो उन्होंने अंदर आने को कहा.

शिव : काव्य मैडम है, आंटी?

आंटी : है है, अभी फ्री हुई है, तुम बैठो में बुलाती हु.

शिव : सॉरी आंटी, अगर ऐसा है तो में कल औ?

आंटी : उसका मुझे कुछ पता नहीं रहता, हो सकता है की वो तुम्हारे आने से नाराज़ भी हो और हो शक्ति है की वो तुम्हारे जाने से नाराज़ हो, इस लड़की का कुछ कहा नहीं जा शक्ति. इस से बेहतर है की में तुम्हारे बारेमे उसको बता देती हु, आगे जो तुम्हारा भाग्य. वैसे क्या नाम है तुम्हारा, में भूल गयी

शिव : जी, Shiv(Unki बातो से मुझे दर लगने लगा था, वैसे भी पुरे दिन काम करके जब कोई रिलैक्स कर रहा हो और दोबारा काम आ जाये तो गुस्सा तो आता hi हे. में चुप चाप वह बैठा रहा, थोड़ी देर बाद आंटी वापस आयी.

आंटी : उसने तुम्हे बैठने को कहा है, आ रही है थोड़ी देर में.

शिव : सॉरी आंटी.

आंटी : ये तो उसका रोज़ का है, तू चिंता मात कर. कुछ खाओगे, या शरबत दू?

शिव : नहीं, कुछ भी नहीं आंटी, थैंक यू. अभी घर जा कर खाना hi है. (उतने में काव्य मैडम आयी, वो फॉर्मल ड्रेस में hi थी, एक ढीला लेहंगा और ऊपर शामे शर्ट पेन्हि हुई थी, बल भीगे हुए थे तो टॉवल से पोछते हुए आ रही थी. नहाने की वजह से वो बहोत फ्रेश लग रही थी और भीगे हुए बालो की वजह से वो ज्यादा खूबसूरत भी दिख रही थी. में खड़ा हो gaya)Good इवनिंग मैडम.

काव्य म : अरे बैठो, क्या फॉर्मेलिटी कर रहे हो. कैसे हो तुम?

शिव : में ठीक हु मैडम, आप कैसी है?

काव्य म : में भी ठीक हु, कैसे आना हुआ?

शिव : (में थोड़ा हिचकिचा रहा था क्यों की कैसे बात करू मुझे समाज नहीं आ रहा tha)Kkkuchh नहीं, यहाँ से गुजर रहा था तो सोचा आप को मिलता चालू.

काव्य म : (मुस्कुराते हुए) अच्छा किआ, चलो ओफ्फ्स में चलते है, वही बात करेंगे.

शिव : सॉरी मैडम, मेने आप को डिस्टर्ब किआ.

काव्य म : ऐसी कोई बात नहीं है, आओ. (हम दोनों ऑफिस में आ गए) तो कहो क्यों आये हो?

शिव : बस ऐसे hi, मेने सोचा की पूछ लू की अब क्या हो रहा है उस केस में.

काव्य म : अभी तो उन तीनो का रिमांड चल रहा है, दोनों पुलिसवालो को ससपेंड करदिया गया है और उस मैनेजर के बैंक अकाउंट सील करदिये गए है. मेने कोर्ट में अर्जी दाल दी है की जितना भी पैसा उस मैनेजर ने अनाथालय के नाम पर लिया है वो सारा पैसे अनाथालय को दे दिया जाये.

शिव : एक बात पुछु मैडम.

काव्य म : है पूछो.

शिव : मैनेजर और यहाँ के उस पोलिसवाले का तो समाज में आता है की वो रेंज हाथो पकड़े गए थे पर वो दूसरे सहर वाला पोलिसवाले जिसके खिलाफ गायत्रीदिदी ने कम्प्लेन की है, क्या सिर्फ दीदी के कम्प्लेन पर hi उनको जेल हो जाती है?

काव्य म : अभी उनको जेल नहीं हुई है, अभी वो लोग पुलिस कस्टूडी में है.

शिव : पर है तो जेल में hi न.

काव्य म : है एक तरह से कह शक्ति हो.

शिव : अगर कोई ऐसी जूठी कम्प्लेन करे तो भी क्या किसी को जेल हो जाएगी?

काव्य म : (शिव को गौर से देखते हुए) कोई जूठी कम्प्लेन क्यों करेगा?

शिव : जूठी कम्प्लेन से मेरा मतलब है की अगर कोई लड़की अपनी मर्जी से ये सब किसी के साथ करती है, और उसके बाद उस पर रपे का इल्जाम लगाती है तो क्या उसे जेल हो जाएगी.

काव्य म : अगर किसी लड़की ने ऐसा किआ है तो भी जब तक इन्वेस्टीगेशन चलेगी उसे लॉकअप में hi रक्खा जाता है, हमारे कानून में लड़कीओ को ज्यादा महत्व दिया गया है और वैसे भी बहोत काम केस ऐसे होते है जिसमे ऐसा होता है, जब तक केस चलता है तब तक कोर्ट पे देपेंद करता है की उसको जेल में रक्खा जाये या बैल दी जाये. पर अक्सर लड़कीओ के मामले में उसे बैल नहीं मिलती.

शिव : ये तो गलत है न मैडम, अगर कोई लड़की, किसी को फ़साने के लिए ऐसा करे तो वो लड़का तो बेचारा फास जायेगा न.

काव्य म : ऐसा भी नहीं है, अगर कोई जूठा केस करता है और अगर ये कोर्ट में साबित हो जाये तो उस लड़की को भी सजा हो शक्ति है. अक्सर लड़कीअ ऐसा जूठा केस करती नहीं क्यों की उन्हें बदनामी का दर रहता है और किसी लड़की का बैकग्राउंड hi ख़राब है तो कोर्ट उस लड़के के साथ इतनी सख्ती नहीं बारात टी, पर फिर भी ये सब होने तक उसे कस्टूडी में hi रक्खा जाता है. पर मुझे ये समाज नहीं आ रहा की तुम क्यों ये सब पूछ रहे हो? कुछ हुआ है क्या?

शिव : नहीं ऐसी कोई बात नहीं, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था, दिमाग में आया तो पूछ लिया.

काव्य म : अच्छा तो ये सब पूछने के लिए तुम यहाँ आये हो, मुझे लगा की मुझसे मिलने आये थे.

शिव : नहीं मैडम, में आपसे बस ऐसे hi मिलने आया था, दिन को टाइम मिलता नहीं तो रात को आ गया.

काव्य म : अच्छा किआ, और सुनाओ, कैसा चल रहा है सब?

शिव : सब ठीक है मैडम, और आप का?

काव्य म : मेरा भी वही रूटीन चल रहा है.

शिव : कभी कभी काम से छूती भी लेनी चाहिए, कही घूमने फिरने भी जाना चाहिए.

काव्य म : किसके साथ जाऊ, क्या तुम चलोगे?

शिव : मेई??? में कैसे ? आप को अपने दोस्तों के साथ जाना चाहिए.

काव्य म : मेरे कोई दोस्त नहीं है, बस कुछ पहचानवाले है, दोस्त कह शकु ऐसा कोई नहीं. पढ़ाई और काम में इतना बिजी रही की कभी मौका hi नहीं मिला. मेने सोचा की शायद तुम मेरा साथ डोज पर कोई बात नहीं.

शिव : पर में कैसे ?

काव्य म : है तुम कैसे चल शक्ति हो, बोर हो जाओगे मेरे साथ.

शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा, अगर आप को ठीक लगता है तो में तैयार हु.

काव्य म : (मुस्कुराते हुए) अभी तो नहीं चल शक्ति, में कुछ प्लानिंग करती हु.

शिव : इसमें क्या प्लानिंग करना, हमे कोनसा कुछ दिनों के लिए जाना है, सुबह निकालेंगे, शाम तक वापस.

काव्य म : ठीक है इस संडे चलते है.

शिव : नहीं इस संडे नहीं, मुझे एक शादी में जाना है, उसके अगले संडे.

काव्य म : ठीक है. आओ खाना कहते है.

शिव : नहीं मैडम, मेने घर पे बोलै नहीं है, सब मेरी रह देख रहे होंगे, फिर कभी.

काव्य म : ठीक है चलो, में तुम्हे छोड़ देती हु.

शिव : नहीं मैडम, इसकी जरुरत नहीं, में चला जाऊंगा.

काव्य म : चलो भी, इस बहाने मेरी शेर भी हो जाएगी, और में सब से मिल भी लुंगी.

मेने बहोत मन किआ पर वो नहीं मणि, और वो अनाथालय आयी मुझे छोड़ने, वो सब से मिली भी, गायत्रीदिदी से भी उन्होंने बात की. उनके आने से सब बहोत खुस भी हुए, और एक वकील उनके साथ है ये जान कर सब को रहत भी मिली. हम सब उन्हें बहार तक छोड़ने गए, वो भी हाथ हिलाते हुए सब को bye बोल कर चली गयी. हम सब अंदर गए, सरिता और लता साथ में अंदर जा रही थी.

सरिता : लिस्ट में एक और बढ़ गयी.

लता : क्या बकवास कर रही है, तुजे और कुछ सूज़ता नहीं क्या.

सरिता : जो दीखता है, वही कह रही हु, तुजे अपनी आंखे बंद कर के रहना है तो रह, मुझे क्या.

लता : चल अब अंदर, भूख लगी है, खाना कहते है.

रात को हमने सैटरडे का प्लान बना दिया. सुबह बस से वह चले जायेंगे, और संडे लौट आएंगे. मेने एक बार भार्गवी मैडम से भी बात कर ली. उन्होंने भी ध्यान रखने का वडा किआ. में, रंजन और विणा तीनो बस में बेथ गए, विणा खिडक़ीवाली सीट पर बैठी, बीचमे रंजन और लास्ट में, में बेथ गया. थोड़ी देर में हमारा सफर सुरु हो गया, हमारे सहर से निकलने के बाद दोनों और खेत दिखने लगे. विणा खिड़की पे बैठी थी तो वो बहार का नज़ारा देख कर बहोत चहक रही थी, जो भी रस्ते में उसे दीखता तो वो रंजन को दिखा रही थी. करीब adhe-paune घंटे में हम दिव्या के गांव पहुंच गए. बस से उतर कर वह नजदीकी एक छोटी सी दुकान से मैंने दिव्या के घर का पता पूछा तो उसने दिव्या के पापा का नाम पूछा. हम निमंत्रण पत्रिका साथ ले कर आये थे तो वो हमने उसे बताई तो उसने हमे रास्ता समजा दिया. गांव था तो दिव्या का घर नजदीक hi था तो हम तीनो चलते चलते उसके घर की और जाने लगे. आते जाते लोग हमे देख रहे थे खास कर के मुझे.

शिव : ये सब लोग मुझे क्यों घर रहे है?

रंजन : (मजाक उड़ाते hue)Unhone कभी खम्भे जैसा आदमी देखा नहीं होगा न इस लिए. (वो दोनों खिलखिलाकर हसने लगी)

शिव : वैरी फनी.

रस्ते में हमे गे और भेसो का झुण्ड मिला, हम सब साइड में हो गए, वो दोनों बहोत दर रही थी क्यों की भी बहोत नजदीक से गुजर रही थी, में उन्हें देख कर है रहा था. थोड़ी देर चलने के बाद हमे ढोल की आवाज सुनाई देने लगी. हम लोग आवाज की दिशा में hi चलने लगे, थोड़ी hi दुरी पर हमे बड़ा सा मंडप दिखाई दिया, वही गेट के पास hi ढोली ढोल बजा रहे थे. हम अंदर गए तो कुछ लोग वह कुर्सिओं पर बैठे हुए थे तो औरते गड्डो पर बैठी हुई थी. बच्चे भगा दौड़ी कर रहे थे. रंजन ने एक लड़की को दिव्या के बारेमे पूछा तो उसने हमे बैठने को कहा और वो अंदर चली गयी. थोड़ी hi देर में वो दिव्या के साथ वह आयी. दिव्या जल्दी से चलते हुए हमारी तरफ hi आ रही थी, उसने एक नज़र मेरी और देखा और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, वो सीधे रंजन के पास गयी और उसका हाथ पकड़ते हुए.

दिव्या : आ गए तुम, मुझे तो यकीं hi नहीं था की तुम आओगे.

रंजन : क्यों? तुमने न्योता दिया था तो आना hi था.

दिव्या : बहोत अच्छा किआ, आओ में तुम्हे अपने पापा से मिलवाती hu.(Usne आस पास देखा और वजा कुछ लोग खड़े थे उनकी तरफ वो रंजन का हाथ पकड़ कर लेजाने लगी. में और विणा भी पीछे पीछे चल दिए.

दिव्या : पापा, ये मेरी सहेलिया है, रंजन और विणा, और ये इनका भाई है शिव. (मुझे भाई बोलने पर रंजन के चेहरे पर नाराजगी साफ़ दिख रही थी पर वो बोली कुछ नहीं)

दिव्या के पापा : कैसे हो बच्चो, बहोत ख़ुशी हुई की आप लोग शादी में आये. इससे अपना hi घर समाज न. दिव्या इनका ख्याल रखना, दिखना इन्हे कोई तकलीफ न हो.

शिव : नहीं अंकल, इसकी कोई जरुरत नहीं, हम मेहमान नहीं है, आप हमे अपना hi समजिये, मेरे लायक कोई भी काम हो तो बेझिझक कहियेगा.

दिव्या के पापा : बहोत खुसी हुई ये सुन कर बीटा, अभी तो कुछ भी नहीं है, तुम सब आराम करो, अभी सब रस्मे होनी बाकि है. दिव्या इन्हे शरबत पिलाओ.

दिव्या : जी पापा. (सब लोग वह भी मुझे hi घर रहे थे, पर अब मुझे आदत हो चुकी थी) चलो मेरे साथ. (वो हमे घर के अंदर ले गयी, वह पंखे के निचे उसने कुर्शिया लगा दी और हमे बैठने को कहा, थोड़ी देर में वो शरबत ले कर आयी और साथ में एक औरत भी थी) ये मेरी मम्मी है, और ये मेरी सहेलिया है और ये इनका भाई है. (रंजन फिर नाराज़ हुई और वो मेरी और देखने लगी, में क्या कहता, में बस मुस्कुराया)

दिव्या की मम्मी : तुम सब आये बहोत अच्छा लगा बीटा, इससे अपना hi घर संजो, आराम से बैठो, देखो दिव्या...

दिव्या : है मुझे पता है, इनका ख्याल रखना है. (उसकी मम्मी ने मुस्कुराकर दिव्या के गाल पर हलके से मारा और वो अंदर चली गयी) लो शरबत पीओ. (उसने मुझे diya)Le रंजन तू भी ले.

रंजन : (शरबत लेते hue)Ye क्या बार बार इससे मेरा भाई बना रही है, ये मेरा कोई भाई बाई नहीं है.

दिव्या : (मुस्कुराते हुए) ये गांव है, सहर नहीं है, यहाँ लोग ऐसे hi बाते बनाएंगे, और तुजे क्या दिक्कत है, ये तेरे साथ रहता है तो भाई hi हुआ न. और क्या कहूँगी?

रंजन : ये भी तो कह शक्ति थी की ये भी तुम्हारा दोस्त है.

दिव्या : मेने कहा न की ये सहर नहीं है, और क्या फरक पड़ता है, वह सहर में कोई देखने आनेवाला है की ये तेरा भाई है की नहीं. क्या कहते हो शिव.

शिव : (मुझे रंजन की हालत पर बहोत मज़ा आ रहा था) है सही कहा तुमने. (मेरा ऐसा कहने पर रंजन मुझे गुस्से से घूरने लगी)

दिव्या : चल छोड़ ये सब, अभी थोड़ी देर में हल्दी होनेवाली है, तुम दूसरे कपडे लायी हो न.

रंजन : है, दो दिन रहना है तो उस हिसाब से लाये है.

दिव्या : अरे घर में पहन नेवले कपडे लायी है?

रंजन : नहीं, वैसे तो कपडे नहीं लाये है, क्यों?

दिव्या : वो तुम्हे अभी पता चल जायेगा, तुम दोनों आओ मेरे साथ, में तुम्हे कपडे देती हु.

वो रंजन और विणा को लेकर अंदर चली गयी, मुझे भी कुछ समाज में नहीं आ रहा था तो में वही बैठा रहा. थोड़ी देर बाद वो सब सिंपल कपड़ो में बहार आ गयी. दिव्या को काम था तो वो अंदर चली गयी, हम तीनो वही बैठे रहे. थोड़ी देर बाद हल्दी की रसम सुरु हो गयी, मंडप के बीचमे दिव्या के भाई को बिठाया गया. औरते सब कुछ गए रही थी. मुझे कुछ कुछ समाज आ रहा था और कुछ कुछ समाज नहीं आ रहा था. बरी बरी औरते दूल्हे को हल्दी लगा रही थी, उसे तिलक लगा कर पैसे भी दे रही थी. में दूर खड़ा ये सब देख रहा था, रंजन और विणा, दिव्या के साथ वह कड़ी थी. कुछ औरते जो काम उम्र की थी वो दूल्हे के साथ मस्ती भी कर रही थी, उनकी बातो से पता चला की ये दूल्हे की भाभियाँ है. वह हसी मज़ाक चल रहा था. एक भाभी ने दिव्या से कहा

भाभी : अरे वह दूर क्या कड़ी है, ये कुमकुम की कटोरी तो पकड़, मेरे दोनों हाथ हल्दीवाले हो गए hai.(Divya ने वो कटोरी पकड़ी, भाभी ने कटोरी से कुमकुम लेने की बजाये दिव्या के दोनों गलो पर हल्दी लगा दी, दिव्या भागने लगी तो उन्होंने उसका हाथ पकड़ liya)Are भगति कहा है, अब अगला नंबर तेरा hi है, थोड़ी प्रैक्टिस कर ले (ये कहते हुए उन्होंने उसके कपड़ो और गले पर हल्दी लगा दी, सब है रहे थे, दिव्या भी कहा पीछे रहनेवाली थी, उसने भी हल्दी उठायी और उस भाभी के चेहरे पर लगा दी, कुछ औरते दिव्या की तरफ और कुछ उस भाभी की तरफ थी, धीरे धीरे माहौल ऐसा हो गया की सब दूल्हे को छोड़ कर एक दूसरे को हल्दी लगा रहे थे, सब के कपडे हल्दीवाले हो रहे थे, दिव्या ने रंजन और विणा को भी हल्दी लगायी. सब मस्ती कर रहे थे, में उन्हें देखने में खोया हुआ था की किसीने पीछे से मेरे गाल पर कुछ लगा दिया, मेने चौक कर पीछे देखा तो ये कुसुम थी, वो काब आयी हमे पता hi नहीं चला, जैसे hi दिव्या की नज़र पड़ी वो भी दौड़ते हुए आयी और मेरे पुरे चेहरे पर हल्दी लगा दी, मेने उनके हाथ पकड़ कर उनके चेहरों पर hi मॉल दिए. वह का माहौल hi कुछ ऐसा हो गया था की सब मस्ती कर रहे थे. मेने भी रंजन और विणा को भी हल्दी लगायी, उन्होंने भी मुझे हल्दी लगायी. सच में बहोत मज़ा आया इस रस्म में. आखिर रस्म पूरी हुई, दूल्हे को सब भाभियाँ गण गेट हुए अंदर ले गयी, दिव्या भी हम सब को ले कर उनके पीछे चल दी.

घर के पीछे दूल्हे को फिर से एक ऊँचे आसान पर बैठा दिया. तीन चार भाभियाँ दूल्हे को रगड़ रगड़ कर नहलाने लगी. दूल्हा बहोत शर्मा रहा था. पर भाभियाँ कहा शर्म करती, वो दूल्हे के कूल्हों को भी मॉल रही थी. एक भाभी ने कहा

भाभी 2: अरे देवरजी हमसे इतना शर्मा रहेहो तो हमारी देवरानी के साथ क्या कर पाओगे. (सब भाभियाँ हसने लगी) ये रस्म इसीलिए होती है ताकि आप की शर्म काम हो, हम तो तुम्हारी भाभियाँ है, हम से कैसी sharm.(Sab मस्ती कर रही थी और दूल्हे को नेहला रही थी.)

दिव्या की मम्मी : आरी अब बॉस भी करो, मेरे बच्चे को खा जाओगी क्या?

भाभी 1: अब अपने बच्चे को पल्लू से बहार निकालो काकी, वर्ण तुम्हारी बहु भाग जाएगी. अगर बच्चा hi था तो पल्लू में रख कर दूध hi पिलाती, शादी क्यों करवाराही हो.

डी क मम्मी : बेशरम, आने दे तेरी साँस को कहती हु उसे.

भाभी 1 : जो कहना है कहना काकी, पर आज तो आपका लल्ला हमारे हाथो में hi है, क्यों लल्ला, मजा आ रहा है न. (सब मुस्कुराने लगे)

दिव्या : मम्मी, हम लोग खेत चले जाये, वही नाहा कर आते है.

डी क मम्मी : है बीटा जाओ, इन बेशर्मो के साथ रहोगी तो इनके जैसे hi हो जाओगी.

दिव्या हम सब को ले कर खेत आ गयी. खेत में दो तीन फ़ीट तक की फसल उगी हुई थी, वह एक कुआ था. दिव्या ने पंप चला दिया तो पानी आने लगा, वह बानी एक टंकी में पानी गिरने लगा.

दिव्या : चलो, सब नाहा लो.

कुसुम : (दिव्या से धीमी आवाज में, मेरी और इस्सर करके) शिव.

दिव्या : (धीमी आवाज me)Nangi हो कर नहीं नाहा न है जो इतना शर्मा रही है. और शिव को बुलाया hi इसीलिए है, अब अगर सहरम करती रहोगी तो हो चूका, तुजे शर्म आ रही है तो तू बैठी रह, में तो शिव को अपने जलवे दिखा कर रहूंगी.

रंजन : क्या खुसुर फुसुर कर रही हो दोनों?

दिव्या : कुछ नहीं, ये कुसुम, शिव की वजह से शर्मा रही है, तुजे तो कोई दिक्कत नहीं है न शिव से, और कपडे पहन कर नहाने में कैसी शर्म, है शिव चाहे तो कपडे उतर शक्ति है. क्यों शिव तुम्हे तो कोई परेशानी नहीं है न.

शिव : नहीं मुझे कोई परेशानी नहीं.

दिव्या : तो आ जाओ फिर. (दिव्या, पाइप से निकलते पानी के नीचे कड़ी हो गयी और नहाने लगी, रंजन भी उसके पास चली गयी, कुए के ताजे ठन्डे पानी में नहाने में रंजन को बहोत मज़ा आने लगा, वो चहकते हुए अपना मुँह और जिस्म धोने लगी, दिव्या भी मज़े से नहाने लगी. मेने उन दोनों को देखा, कपडे भीगने से चिपक गए थे और उनके शरीर के उतर चढाव स्पस्ट दिखाई दे रहे थे, कपडे पारदर्शक होने से उनकी ब्रा और पंतय भी दिख रही थी. रंजन तो कमल की थी hi, दिव्या का फिगर भी कमल दिख रहा था, वो थोड़े भरे बदन की थी, पर कमर पतली hi थी. वो बड़ी मस्ती में नाहा रही थी, मुझे लग रहा था जैसे दिव्या जान बुज कर अपना बदन मुझे दिखा रही है, उन्हें ऐसे देख कर एक बार मुझे भी झझक होने लगी पर जब उन्हें कोई शर्म नहीं तो में क्यों शरमारता. मेने कपडे निकले और ऊपर से नंगा हो गया. में भी उस पानी के निचे चला गया और नहाने लगा)

एक साथ सब तो पानी के निचे नहीं खड़े रह शक्ति थे, तो बरी बरी पानी के निचे खड़े रहते थे, कभी कभी एक दूसरे का स्पर्श भी हो रहा था. थोड़ी देर नहाने के बाद दिव्या और रंजन पानी की टंकी में बेथ गयी और मुझे नहाते हुए देखने लगी. दिव्या, शिव के शरीर की मांसपेशिया देख कर उसी में खो गयी थी, वो बस पानी में बैठे बैठे शिव को देख रही थी, रंजन का भी वही हल रहा. कुसुम और विणा दोनों वही कड़ी देख रही थी, वो भी बहार कड़ी शिव को देख रही थी, आखिर कर विणा से रहा न गया, उसने आस पास देखा तो दूर दूर तक कोई नहीं था, वो भी अंदर आने लगी, उसे देख कुसुम भी अंदर आ गयी. मेने देखा की कुसुम और विणा भी अंदर आयी तो में पानी के निचे से निकल गया और टंकी की बॉउंड्री पे हाथ रक्खे हुए बेथ गया ताकि वो दोनों भी नाहा शेक, वो दोनों भी शरमाते हुए नहाने लगी. में उन दोनों को देख रहा था की मेरी नजर दिव्या पर गयी, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, उसके चेहरे से hi लग रहा था की वो मुझे पूछ रही थी की क्या देख रहे हो, मेने नज़ारे घुमा ली और बैठे बैठे नहाने में ध्यान केंद्रित किआ. टंकी इतनी भी बड़ी नहीं थी, थोड़ी hi देर में मुझे किसी का पेअर छूने लगा, मेरे सामने रंजन और दिव्या बैठी हुई थी, मुझे समाज नहीं आया की किसका पेअर है, मेने दोनों के चेहरे को गौर से देखा तो पता hi नहीं चला की किसका पेअर है. मुझे लग रहा था की वो जो कोई भी है वो जानबुज कर मुझे पेअर लगा रही है. में पेअर पकड़ने के लिए अपने हाथ को अंदर ले गया तो उसने पेअर हटा लिया. मेने फिर दोनों को देखा पर समाज नहीं आया. जैसे hi मेने अपने हाथ वापस निकले तो फिर से वो पेअर आ गया. अब मुझे क्या दिक्कत थी तो में शांति से बैठा रहा, मेने सोचा की देखे तो सही वो क्या करती है. आहिस्ता आहिस्ता वो पेअर मेरी झांग पर घूमने लगी, में दोनों के चेहरे को देख रहा था पर पता hi नहीं चल रहा था. थोड़ी hi देर में वो पेअर रेंग ते रेंग ते मेरे लुंड के करीब आ गया. मैंने चौकते हुए रंजन को देखा तो वो सामान्य hi दिखी, मेने दिव्या को देखा तो वो भी नहाने में बिजी थी. मुझे पता था की अगर में हाथ अंदर ले गया तो वो अपना पेअर हटा लेगी, वैसे मुझे भी अच्छा hi लग रहा था तो में शांति से बैठा रहा, वो पेअर मेरे लुंड को घिसने लगी तो मेरा लुंड कड़क होने लगा, जैसे जैसे वो पेअर लगा रही थी लुंड कड़क हो रहा था. मेने फिर से दोनों को देखा तो दिव्या का चेहरा गंभीर हो गया था, उसके चेहरे पर हवइया उडी हुई थी. मुझे लगा की शायद ये दिव्या hi है. पर वो ऐसा क्यों कर रही है. वो लगातार मेरे लुंड पर अपना पेअर घिस रही थी, लुंड पूरी औकात में आ चूका था, मेने देखा की दिव्या की आंखे बंद हो चुकी थी, कुसुम और विणा निचे बैठी तो रंजन कड़ी हो गयी और पानी के निचे नहाने लगी, दिव्या को इस बात का पता hi न चला, वो अभी भी आंखे बंद किये हुए थी और उसका पेअर लगातार मेरे लुंड से खेल रहा था. में हाथ निचे ले गया और उसके पेअर को पकड़ लिया, वो चौंक गयी और अपनी आंखे खोल कर देखने लगी, उसने देखा की रंजन कड़ी है तो वो मेरे सामने देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो समाज गयी की वो पकड़ी गयी है, तो वो शर्माने लगी, उसने अपने पेअर को पीछे खींचने की कोशिस की पर मेने पकड़ रक्खा था. मेने भी सोचा की वो जिसे छूना चाहती है तो क्यों न उसे इसका आनंद दे hi दिया जाये. मेने अपनी ज़िप खोली और लुंड को अंडरवियर से बहार निकल दिया. मैंने उसके पेअर को अपने लुंड से सत्ता दिया. नंगे लुंड का स्पर्श होते hi उसकी आंखे बड़ी हो गयी, वो मुझे hi देखे जा रही थी. अपने पेअर पर नंगे लुंड को वो पहचान गयी थी, मेने उसके पेअर को छोड़ दिया, उसने अपना पेअर पीछे खींच लिया. में मुस्कुराया तो वो शर्माने लगी. मेने अपने हाथ वापस बहार निकल लिए. वो मुज से नज़ारे चुरा रही थी. रंजन भी वापस बेथ गयी और वो सब कितना मज़ा आ रहा hi ऐसे नहाने में उसकी बाते करने लगी. पर दिव्या का ध्यान तो कही और hi था, थोड़ी hi देर में वापस पेअर ने मेरे लुंड को छुआ तो मेने दिव्या को देखा तो वो शर्मा के मुस्कुरा रही थी, में भी मुस्कुराया.

रंजन : यार तुम्हारे खेत में तो मज़ा आ गया, तुम कितनी खुस नशीब हो की जब चाहो यहाँ आ शक्ति हो. (रंजन ने देखा की दिव्या का ध्यान कही और hai)Divya, ो दिव्या.

दिव्या : (हड़बड़ा ke)Hhhh , है.

रंजन : क्या हहह है कर रही है, तेरा ध्यान किधर है.

दिव्या : नहीं, कुछ नहीं, क्या कह रही थी तू?

रंजन : में कह रही थी की कितना मज़ा आ रहा है न?

दिव्या : (मेरे लुंड को अपने पेअर से छूटे hue)Haaa, कितना मज़ा आ रहा है, कितना गरम है.

रंजन : क्या? पानी तो ठंडा है.

दिव्या : हहह है में वही कह रही थी की पानी कितना ठंडा है, वो जबान फिसल गयी.

कुसुम : (कुसुम को कुछ कुछ सनका होने लगी thi)Ha तू मात फिसल jana.(Divya हड़बड़ा गयी, उसने अपना पेअर पीछे खिंच लिया, मेने भी अपना लुंड वापस अंदर कर दिया, दिव्या बहार निकलने लगी) कहा जा रही है.

दिव्या : आती हु में.

कुसुम : रूक में भी आती हु. (वो दोनों बहार निकल गई और उस खोली के पीछे चली गयी, में समाज गया की वो किस लिए गयी hai)(Divya खोली के पीछे चली गयी, उसे मूतना था, दोनों पक्की सहेलिया थी तो उसने बेझिझक अपना नाडा खोला और मूतने बेथ गयी, उसने मूतने के बाद अपनी छूट को छू कर देखा तो वह सब चिप छिपा हो गया था, दिव्या को उठने में देर लगी तो कुसुम ने उस और देखा, उसने देखा की वो अपनी छूट के साथ कुछ कर रही hai)Kya कर रही है, हुआ नहीं क्या तेरा.

दिव्या : सब चिप छिपा हो गया है.

कुसुम : क्या चिप छिपा हो गया है?

दिव्या : यहाँ (उसने अपनी छूट की और इस्सर किआ)

कुसुम : क्यों? (दिव्या शर्माने लगी, कुसुम चौकते हुए) तूने शिव के साथ कुछ किआ? कब? कैसे?

दिव्या : वो मैंने उसके वह पेअर रक्खा था.

कुसुम : क्या, क्या कह रही है तू, इतना जल्दी?

दिव्या : मौका मिल गया तो हो गया, और दो दिन के लिए hi तो वो आया है, पता नहीं फिर मौका मिले न मिले.

कुसुम : क्या तू सच में वो सब करेगी?

दिव्या : इसीलिए तो मेने उसे भी बुलाया है, पर अब दर लग रहा है?

कुसुम : क्यों?

दिव्या : उसका वो बहोत बड़ा है?

कुसुम : क्या? तूने उसे भी छू लिया? लगता है तू उसके पीछे पागल हो गयी है.

दिव्या : है यार, जब से उसे देखा है उस पर दिल आ गया है. अभी चल बाद में बात करेंगे, वो लोग क्या सोचेंगे की ये दोनों कहा गायब हो गयी.

वो दोनों बहार आ गयी, हम भी बहार निकल आये थे. कपडे बदलने थे तो मेने एक टॉवल लिया ऑर्थोडा दूर चला गया, सब लड़कीअ शिव को जाता हुआ देख रही थी, जब शिव कपडे बदलने लगा तो सब बदलने लगी, वो सब बार बार शिव की और देख रही थी पर शिव बिना पीछे मुड़े कपडे बदल रहा था. सब ने कपडे बदल लिए. फिर हम सब वापस घर चलने लगे, दिव्या मेरे साथ hi चल रही थी, वो सबसे बच कर मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मुझे उसके इरादे समाज आने लगे थे, मुझे लगने लगा था की संभल कर रहना पड़ेगा. सूरज शिर पर आ गया था, हम सब घर पहुंच गए. वह खाना चल रहा था. दोपहर को सिर्फ आये हुए मेहमानो के लिए hi खाना बना था. शाम को पुरे गांव को नौटा था. जब हम सब भी खाना लेने गए तो वो भाभियाँ मुझे घर रही थी. एक ने तो दिव्या को बुलाया भी और हमारी और इस्सर करते हुए बाते कर रही थी. दिव्या बहोत शर्मा रही थी, मुझे लगा hi की वो दिव्या की खिंचाई कर रही है और वो सब मेरी और देख रही थी मतलब टॉपिक में hi था. थोड़ी hi देर में दिव्या उन से पीछा छुड़ा कर हमारे पास आ गयी. मुझे देख कर वो बहोत शर्मा रही थी. हम सब खाना खाने लगे.
 
ी हैवे प्रॉब्लम तो ओपन साइट.

मोस्ट ऑफ़ थे टाइम it's फ़्लैश 'पेज कुड नॉट लोडेड'
 
अपडेट 76

हम सब साथ में बेथ कर खाना खा रहे थे, दिव्या मेरे बाजु की कुर्शी पर hi बैठी हुई थी. दूसरी और रंजन, फिर विणा और उसके बाजु में कुसुम. हम सब एक घेरा बना के बैठे हुए थे. खेत में आये मज़े की hi बाटे चल रही थी. रंजन को बहोत मज़ा आया था, वो दोबारा जाने का प्लान बना रही थी.

रंजन : यार सच में बहोत मज़ा आया वह, मेरा तो आने का दिल hi नहीं कर रहा था, (दिव्या se)Kya हम दोबारा वह जायेंगे.

दिव्या : देखते है, अगर मौका मिला तो जायेंगे.

रंजन खुस हो गयी. दिव्या ने अपने घुटने को मेरे घुटने से टच करवादिया. मेने उसकी और देखा तो वो ऐसे दिखा रही थी की उसे जैसे पता hi नहीं हो. मुझे भी लगा की शायद बेध्यानी में हो गया होगा, में अपना खाना खाने लगा, पर वो बार बार मेरे घुटने को अपने घुटने से धक्का दे रही थी. में समाज गया की वो ये जानबुज कर कर रही है. मेने सामने बैठी विणा और कुसुम को देखा तो वो दोनों अपना खाना खाने में व्यस्त थी, रंजन तो बाजुमें थी तो उसको ये नहीं दिख रहा था. मेने दिव्या को देखा तो उसने नटखट सी स्मिल दी. वो हाथ मुँह धो कर मेरे पीछे पद गयी थी.

हम सब खाना खा रहे थे की एक टेम्पो में कुछ सामान आया. कुछ लोग सामान उतर रहे थे, दिव्या के पापा वही खड़े रह कर सब गईं रहे थे. सामान में कुछ टेबल भी थे जो एक साथ रक्खे हुए थे. में भी खाना कहते हुए उन को देख रहा था. काम करने के लिए मजदुर थे तो सिर्फ उन पर नज़र hi रखनी थी. दिव्या के पापा एक नोट में सब लिख रहे थे. सब खिंचा तानी में मुझे लगा की जो तब्लो की थप्पी थी वो सरक रही है, जैसे जैसे सामान खिसक रहा था वो थप्पी झुकती जा रही थी, किसी का भी ध्यान उस और नहीं था, मुझे लगा की वो गिरनेवाली है, और निचे hi दिव्या के पापा खड़े हुए थे, अगर वो गिरती तो उनके ऊपर hi गिरनी थी. मेरा अंदेशा सही निकला और वो सरकते हुए गिरने लगी, मेने फाटक से थाली फेंकी और उस और दौड़ा, कोई कुछ समझता उस से पहले वो टेबल गिरने लगे, दिव्या के पापा का भी ध्यान गया पर अब देर हो चुकी थी, उन्होंने बचने के लिए अपने हाथ ऊपर उठा दिए, तब्लो के खिसकने की आवाज से सब का ध्यान उस और गया, सब को लग रहा था की ये सब दिव्या के पापा पे गिरेंगे, में स्फूर्ति से वह पंहुचा और अपनी पूरी ताकत से उसे पकड़ लिया, उस से बचने के लिए दिव्या के पापा धड़ाम से निचे बेथ गए, पर मेने तब्लो को पकड़ लिया था, सब एक दम से दर गए, जैसे hi मजदूरों ने देखा की मेने तब्लो को पकड़ा है वो सब मेरी मदद को आ गए. जब उन्होंने पकड़ लिया तो मेने छोड़ दिया और दिव्या के पापा को हाथ पकड़ कर खड़ा किआ. सब देख रहे थे की उन चारो को वो टेबल उठाने में परेशानी हो रही थी तो कुछ और लोग भी मदद को आये. सब ने मिल कर तब्लो को वापस धकेल दिया. एक आदमी जो तब्लो को उठाने में मदद कर रहा था वो हमारी तरफ आया.

आदमी : मोतीलाल जी आप बच गए, (मेरी और देख kar)Bahot ताकतवर हो बेटे, हम सब मिलकर उसे सम्बल नहीं प् रहे थे और तुमने अकेले hi उसे पकड़ लिया था. (मोतीलाल, दिव्या के papa)Sach कहता हु, अगर ये लड़का सही समय पर उसे न पकड़ता तो अनर्थ हो जाता. आपको इस लड़के ने बचालिया मोतीलालजी.

मोतीलाल : (मेरी और बड़े आदर से देखते hue)Sukriya बीटा, तुम्हारा बहोत बहोत सुक्रिया.

दिव्या :(वो भी वह आ गयी thi)Papa आप ठीक है न?

मोतीलाल : है बीटा, में ठीक हु, (मेरी और देखते hue)isne मुझे बचलिया. (कुछ और लोग भी मुझे शाबाशी देने लगे, थोड़ी देर बाद में वापस खाने के लिए बैठा तो देखा की मेरी थाली निचे पड़ी हुई थी)

दिव्या : तुम रुको, में दूसरी थाली ले कर आती हु. (वो गयी और दूसरी थाली में खाना ले कर आ गयी, मुझे थाली देते हुए) थैंक यू शिव, अगर आज तुम नहीं होते तो पता नहीं क्या हो जाता.

शिव : इसमें थैंक यू की क्या बात है, ये तो मेने देख लिया तो अच्छा हुआ.

दिव्या की मम्मी : (जैसे hi उन्हें पता चला वो घबरा गयी, और भागते हुए बहार आयी, अपने पति se)Aap ठीक है न? आप को लगी तो नहीं, मेने कितनी बार कहा आप दूर रहिये इन सब से, पर नहीं सब काम खुद hi करने है. अगर आप को कुछ हो जाता तो.

मोतीलाल : अरे गंगा क्यों इतना उत्तेजित हो रही हो, देखो में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ. (मेरी और इस्सर करते हुए) उसने मुझे बचालिया, इतने भरी तब्लो को मेरे ऊपर गिरने से उसने hi रोकलिया था.

गंगादेवी : है दिया, उस लड़के ने? वो तो अभी छोटा बच्चा है.

मोतीलाल : सिर्फ दिखने में, चार लोग जिसे नहीं उठा प् रहे थे उसने अकेले hi उसे उठालिया था. सच कहता हु अगर वो न होता तो आज अनर्थ हो जाता.

गंगादेवी : सुबह सुबह बोलिये जी. (वो मेरी और आयी, में खाना खा रहा था, मेरे शिर पर हाथ रखते हुए) जग जग जिओ मेरे बच्चे, आज तूने हमे bachaliya(Mene उनकी और देखा तो उनकी आँखों में आंसू थे.) आज तेरी वजह से एक बहोत बड़ा खतरा ताल गया. (दिव्या ko)Hat तू, मुझे मेरे बच्चे के पास बैठने दे, (बेथ kar)La में तुजे खिलाती हु, मेरा बच्चा. (मोतीलाल जी भी वह आगये)

शिव : रहने दीजिये आंटी, में खेलूंगा.

मोतीलाल : खिलने दे उसे बीटा, उसका दिल है तो उसे रोक मात.

वो रोये जा रही थी और मुझे खिला रही थी, दुल्हन भी जब वो सुना तो वो वह आगया था, काफी लोग वह खड़े हो गए थे, आंटी की आँखों में आंसू तो थे पर चेहरे पर मुस्कान थी, वो मुझे खिला रही थी, दिव्या की भी आँखों से आंसू टपक रहे थे. सब खुसी खुसी ये दृश्य देख रहे थे. मेरा पेट भर जाने तक वो मुझे खिलाती रही. जब खाना ख़तम हुआ तो दिव्या ने अपनी मम्मी के हाथ से थाली ले ली. कुसुम जा कर पानी ले आयी. आंटी मुझे पिलाने लगी तो मेने उनके हाथ से ले लिया और खुद पि लिया.

परम (दिव्या का भाई) : थैंक यू भाई, तुम ने पापा को बचालिया.

शिव : ऐसा कुछ नहीं है, मेने तो बस...

परम : तुमने जो किआ, वो सबने देखा.

गंगादेवी : इससे भगवन ने भेजा था, हमारी मदद के लिए. (दिव्या को) अनजाने में hi सही पर आज पहलीबार तूने एक सही काम किआ है. (दिव्या फूली नहीं समां रही थी) अब जा इससे आराम करने के लिए उपरवाले कमरे में ले जा, (रंजन और विणा ko)Jao बेटी, तुम भी सब आराम करो, अब सब कुछ शाम को hi है.

पूरा माहौल hi बदल गया था. हर कोई मुझे दिखा कर बाते कर रहा था. जिन्होंने देखा नहीं था वो सब मेरी और देखते हुए बड़े ध्यान से उनकी बाते सुन रहा था. हम सब ऊपर आ गए.

दिव्या : तुम सब बैठो में सरबत ले आती हु.

शिव : अरे भाई नहीं, अभी नहीं, आंटी ने इतना खिलाड़िया है की एक घूंट पानी भी निचे नहीं उतरेगा.

दिव्या : ठीक है, तुम आराम करो में नीचे जाती हु. चलो कुसुम.

रंजन : में भी आती हु, मुझे भी कोई आराम नहीं करना.

विणा : में भी आती हु.

शिव : है भाई, तुम लोग जाओ, मेने तो इतना खा लिया है की अभी लेटना hi पड़ेगा.

में बिस्तर पर लेट गया, वो सब चली गयी, मेने आंखे बंद कर ली. पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी. कितनी देर तक सोता रहा मुझे पता नहीं था, मेरी नीं तब खुली जब मुझे अपने होठो पर हलचल महसूस हुई, जैसे जैसे मेरी नींद टूटी मुझे लगा कोई मेरे होठो को किश कर रहा है. में थोड़ा हिला तो वो जो कोई भी था वो तुरंत वह से भगा, नींद से आंखे खोलता उस सेपहले वो दरवाजे के बहार चली गयी, मेने थोड़ी सी hi झलक देखि थी जिस से मुझे लग रहा था की वो दिव्या थी पर में सूरे नहीं था. में थोड़ी देर लेते लेते hi सोचता रहा की ये दिव्या थी या कोई और. ये दिव्या hi हो शक्ति थी, क्यों की वो सुबह से hi aisi-waisi हरकते कर रही थी. मेने मुँह हाथ धोये और वह से निचे चला गया. सब लड़कीअ मेहँदी लगवा रही थी. मेने देखा की दिव्या और रंजन बेथ कर मेहँदी लगवा रही थी. मेने ये भी देखा की दिव्या अपने एक हाथ पर लगवा चुकी थी और दूसरा हाथ चल रहा था, रंजन का एक हाथ ख़तम होने को आया था. कुसुम और विणा वह बैठी अपनी बरी का इंतजार कर रही थी. मुझे देख कर रंजन बोली

रंजन : उठ गया, कितनी देर सोता रहा पता hai.(Mene देखा तो शाम के पांच बजनेवाले थे. में तक़रीबन तीन घंटे तो सो hi गया था, में पूछनेवाला था की मुझे कौन उठाने आया था पर में चुप रहा, वह काफी लड़कीअ बैठी हुई थी. में वह से बहार निकला तो परम मुझे सामने मिलगया)

परम : उठ गए भाई, चाय वाई पि की नहीं?

शिव : नहीं, अभी उठा हु. (उन्होंने किसी को आवाज दी और मेरे लिए छायी मंगवाई)

परम : तुम आराम से छायी पीओ, मुझे थोड़ा काम है.

वो चले गए, में एक कुर्शी पे बेथ कर चाय पिने लगा. उतने में hi दिव्या के पापा मेरे पास आये, उनके साथ दो और भी लोग थे.

मोतीलालजी : उठ गए बीटा.?

शिव : जी अंकल.

मोतीलालजी : (उन दोनों ko)Ye hi है शिव, मैंने तुम्हे बताया था न.

एक आदमी : भाई तुमने तो कमल कर दिया, वर्ण आज शादी में विघ्न आना तय था.

शिव : मेने कुछ नहीं किआ अंकल, वो तो बस ऐसे hi.

दूसरा आदमी : अरे क्या कहती हो, जिन्होंने भी ये देखा है वो यही कह रहा है. (अब में क्या बोलता, में बस मुस्कुरादिया)

मोतीलालजी : तुम चाय पीओ, चलो भाई बहोत काम है. (वो लोग चले गए, और दिव्या आ गयी, वो वही कुर्शी पर बेथ गयी)

दिव्या : देखो शिव, कैसी है मेरी मेहँदी.

शिव : बहोत अच्छी है.

दिव्या : चाय पि रहे हो, मुझे भी पिणि थी, कब से मेहँदी लगवा रही थी, पर अब कैसे पिऊ.

शिव : में पीला दू?

दिव्या : (मुस्कुराते हुए) तुम पिलाओ गए, सच्ची, (उसने किसी को आवाज दी और छायी मंगवाई, वो लड़का छायी ले कर आया और दिव्या के सामने खड़ा हो गया) इन्हे de.(Mere हाथ में आलरेडी चाय थी, तो वो लड़का सवालिया नजरो से मुझे देखने लगा, मेने चाय ले ली, और दिव्या को पिलाने लगा, में खुद भी पि रहा था)

शिव : कोई मुझे उठाने आया था क्या?

दिव्या : है, कुसुम आयी थी, क्यों, तुम्हे नहीं पता था क्या.

शिव : (अब में क्या bolta)Nahi वो मुझे जगा रही थी पर में जगा नहीं तो वो वापस मुद गयी थी, पर मुझे लगा की मुझे कोई जगा रहा था.

दिव्या : है वो थोड़ी शर्मीली है, वो तो आने से दर रही थी मेने hi उसे जबरदस्ती भेजा था, में मेहँदी लगवा रही थी वर्ण में hi आनेवाली thi.(Hum बात कर hi रहे थे की वह से दिव्या की मम्मी गुजारी, किसी औरत ने उसकी मम्मी का दयँ हमारी और खिंचा तो हमारी और hi चली आयी)

गंगादेवी : आरी बे शर्म, मेरे बच्चे से ये क्या काम करवा रही है? सब देख रहे है, तुजे जरा भी शर्म नहीं.

दिव्या : मेरे दोनों हाथो में मेहँदी लगी हुई है, मुझे कोई चाय नहीं पीला रहा था तो मेने शिव को बोल दिया, उसे कोई दिक्कत नहीं है, क्यों शिव?

शिव : जी आंटी, कोई बात नहीं.

गंगादेवी : इससे ज्यादा शिर पर मात चढ़ा, वार्ना ये तेरे शिर पर hi नाचेगी, (दिव्या रूठे हुए चेहरे से अपनी माँ को देखने लगी)

शिव : कोई बात नहीं आंटी.

गंगादेवी : मेरा प्यारा बीटा, (उन्होंने मेरे शिर पर हाथ रक्खा और चली गयी, अभी हम बात hi कर रहे थे की रंजन भी आ गयी, मुझे चाय पिलाते देख उसे जलन हुई)

रंजन : मुझे भी चाय पिणि है.

शिव : मेरी भी चाय ख़तम hi होनेवाली है, ख़तम करके में तुजे पिलाता हु.

रंजन : तेरे में से hi मुझे पीला दे.

शिव : मेरी झूठी चाय पीयेगी.

रंजन : तो क्या हुआ, मुझे कोई एतराज नहीं है, तू पीला. (अब में क्या कहता, में दोनों को चाय पिलाने लगा, आते जाते सब लोग देख रहे थे और है रहे थे )

चाय पीने के बाद हम थोड़ी देर बाते करते रहे, विणा और कुसुम भी आ गयी, मेने कुसुम की और देखा तो वो नज़ारे चुरा रही थी. वैसे उसने जो किआ था तब में नींद में था, पता नहीं इन लड़कीओ को क्या हो जाता है. मेने सोचा अगर वो दोबारा कुछ करेंगी तो में उसे रोक दूंगा, पर अभी उसकी हालत देख कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, वो मुज से ऐसे दर रही थी की मेरी तरफ देखने भी हिम्मत नहीं कर रही थी. मुझे उसे और छेड़ने का मान किआ.

शिव : दिव्या, ऐसा लगता hai,tumhare घर में चूहे ज्यादा है.

दिव्या : नहीं तो, ऐसा क्यों कह रहे हो?

शिव : में सोया हुआ था तो मुझे लगा कोई चूहा मेरे चेहरे पर घूम रहा hai(Mene कुसुम की और देखा तो मेरी बात सुन कर वो चूकते हुए मुझे hi देख रही थी, जैसे hi हमारी नज़ारे मिली, उसने घबराकर अपनी नज़ारे निचे झुका ली)

दिव्या : नहीं, शिव, जहा तक मुझे पता है हमारे घर में कोई चूहा नहीं है.

शिव : हो शक्ति है कोई चुहिया, बाजु के घर से आयी हो?

दिव्या : में पापा से कहती हु.

शिव : अरे नहीं, उन्हें क्यों डिस्टर्ब करती हो, अगर दोबार वो नजर आयी तो में hi उसे दबोच लूंगा.

रंजन : तुम्हे कैसे पता की वो चुहिया hi थी.

शिव : मेरे होठो के पास सूंघ रही थी तो शायद मेरी चुम्मी ले रही हो, तो चुहिया hi होगी न, चूहा तो तुम्हारे पास आता, मेरे पास थोड़ी न आता.

दिव्या : (सब हसने lage)Tum भी न शिव.

सब है रहे थे पर कुसुम दर रही थी. खैर हम सुब बाटे करते रहे फिर सब तैयार होने चले गए. वैसे भी लड़कीओ को तैयार होने में टाइम लगता है, मेने वही कपडे पहने थे, बस हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया. लड़कीअ तो अभी आयी नहीं थी तो में उस तरफ चला गया जहा, खाने की तैयारियां हो रही थी. परमभाई और अंकल सब को सब बता रहे थे. में उनके पास गया.

शिव : नमस्ते अंकल, मेरे लायक कोई काम.

मोतीलालजी : अरे नहीं बीटा, कोई काम नहीं है, सब हो गया है, तुम आराम से बैठो. (तभी एक लड़की आयी)

लड़की : अंकल, दिव्या को कुछ सामान लाना है, आप किसी को भेजिए न.

मोतीलालजी : इस लड़की को भी अभी सब सूझता है, मेने पहले से hi बोलरेखा था की जो चाहिए वो याद से मँगवाले, अभी इस वक़्त सब काम में व्यस्त है किसको bheju(Meri और देख कर) शिव बीटा, तुम्हे स्कूटर आता है?

शिव : है अंकल.

मोतीलालजी : जा न बीटा, दिव्या को कुछ लाना है, उसे ले जा, वर्ण मुँह फुला कर घूमती रहेगी.

शिव : जी अंकल.

में उस लड़की के साथ गया, वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर में चहकते हुए दिव्या आयी.

दिव्या : तुम साथ चल रहे ho(Uske चेहरे से hi खुसी टपक रही थी)

शिव : है सब काम में व्यस्त थे तो अंकल ने मुझे hi कह दिया.

दिव्या : है चलो, ये लो चाबी.

मेने स्कूटर चालू किआ और वो पीछे बेथ गयी, अभी भी उसने मेहँदी नहीं निकली थी, पर मेहँदी सुख जरूर गयी थी. वो मुझे बताती गयी वैसे वैसे में स्कूटर चलने लगा. ये एक कॉस्मेटिक की दुकान थी. हम अंदर चले गए, उसे जो जो चाहिए था वो बताती गयी और वो दुकानदार निकलता गया. जब पैसे देने की बरी आयी तो वो दुविधा में पद गयी.

शिव : (मेने puchha)Kya hua?(Wo मेरी और देख रही थी, मेने फिर पूछा) क्या हुआ?

दिव्या : (दुकानदार se)Ek मिनट भैया, (वो मुझे एक कौन में ले गयी, यहाँ हम दुकानदार से थोड़ी दुरी पर थे, दुकान दर दूसरे ग्राहक के साथ व्यस्त था)

शिव : क्या हुआ?

दिव्या : मैंने पैसे जल्दी जल्दी में यहाँ रक्खत्वा दिए थे, (वो अपनी छाती की और इस्सर कर रही थी और शर्मा भी रही थी)

शिव : (हमारी छाती पर तो जेब होती है पर मुझे वह कोई जेब नहीं dikhi.)Kaha?

दिव्या : यहाँ अंदर.

शिव : तो फिर?

दिव्या : तुम निकल दो.

शिव : पागल हो क्या, चलो, में अभी दे देता हु, तुम बाद में मुझे दे dena.(Divya मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, मेने पैसे दिया और हम वह से निकल गए, हम स्कूटर के पास जा रहे थे पर वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी) क्या हुवा, इतना क्यों मुस्कुरा रही हो?

दिव्या : शिव, तुम बहोत अच्छे हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Paise दिए इस लिए?

दिव्या : नहीं शिव, में ने खुद तुम्हे मेरे वह से पैसे निकलने को कहा, तुम्हारी जगह और को लड़का होता तो ऐसा मौका अपने हाथ से जाने न देता, पर तुम वैसे नहीं हो, इस्सलिलिये कह रही हु की तुम बहोत अच्छे हो.

शिव : सुबह से में तुम्हारी हरकते देख रहा हु, आखिर तुम मेरे बारे में जानती hi क्या हो, मेरी इतनी सी बात से तुम्हे लग रहा है की में अच्छ हु, में कोई अच्छा नहीं हु, अपने दिमाग से ये सब निकल दो.

दिव्या : तुम्हे क्या लगता है, में सुबह से तुम्हारे पीछे पड़ी हु, नहीं शिव, में उस दिन से तुम्हारे पीछे पड़ी हु जिस दिन मेने तुम्हे पहलीबार स्कूल में देखा था.

शिव : देखो दिव्या, जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ मुंकिन नहीं है, बेहतर है तुम इन सब में न पदों.

दिव्या : अब जो होना था वो हो गया.

शिव : कुछ नहीं हुआ है, अभी घर चलो, तुम्हारे भाई की शादी है, और अपने दिमाग से ये सब निकल दो. (मेने स्कूटर चालू किआ, पर वो बैठी nahi)Dekho दिव्या, यहाँ तमाशा मात करो, यहाँ तुम्हे और अंकल को सब जानते है, तो तमाशा मात करो और बेथ जाओ. (उसने रोनी शकल से मुझे देखा और स्कूटर पर बेथ गयी, पुरे रस्ते न में कुछ बोलै न वो, मेने उसे घर छोड़ दिया और में फिर से वह चला गया जहा सब तयारी कर रहे थे. लगभग सब तयारी हो गयी थी और काफी लोग वह इकठ्ठा भी हो चुके थे, थोड़ी देर में खाने का कार्यक्रम चला, सब मेहमान आने लगे, बहोत सरे लोग खाने आये थे, में भी सब की मदद में लग गया, करीब दो घंटा बहोत भीड़ रही, फिर धीरे धीरे भीड़ काम होने लगी, दूसरे आधे घंटे में तक़रीबन सब खाना खा चुके थे अब सिर्फ घर वाले और कुछ घर के मेहमान hi बचे थे)

मोतीलालजी : शिव बीटा, तुमने बहोत मदद की, अब खाना खा लो फिर संगीत भी है.

शिव : जी अंकल, में सब को बुलाके लता हु. (में अंदर गया वह मुझे विणा दिखी, मेने उसे कहा की सब को ले कर बहार खाने के लिए आ जाये. थोड़ी देर बाद रंजन, विणा और कुसुम और दो और लड़कीअ वह खाने के लिए आयी, दिव्या नहीं आयी थी) दिव्या कहा है?

रंजन : वो कह रही है, उसे नहीं खाना है.

शिव : क्यों?

रंजन : पता नहीं कब से मुँह फुला के बैठी हुई है, कोई कुछ पूछता है तो कुछ जवाब नहीं देती, तैयार भी नहीं हुई. उसकी मम्मी भी कब से पूछ रही है.

शिव : में देखता हु.

रंजन : रहने दे, वो किसी की बात नहीं सुन रही है.

शिव : एक बार तरय तो करने दे.

रंजन : वो हमारी सहेली है, जब हमारी बात नहीं सुन रही तो तुम्हारी बात क्यों सुनेगी?

शिव : अरे एक बार बात तो करने दे.

रंजन : तुम्हारी मर्जी, जाओ.

में मुस्कुराते वह से घर के अंदर चला गया. बहोत सरे लोग इधर उधर घूम रहे थे, एक दो कमरों में मेने देखा पर वह मेहमाहो की भीड़ लगी हुई थी, मुझे दिव्या की मम्मी दिख गयी.

शिव : आंटी, दिव्या कहा है?

गंगादेवी : क्या कहु बीटा, पता नहीं किस बात पर मुँह फुला के बैठी है, अपने भाई की शादी है और वही ऐसा कर रही है, कुछ बताये तो भी पता चले, उसके पापा भी पूछ चुके, कुछ बताती hi नहीं, वैसे भी मेहमानो को सँभालने का इतना टेंशन है और ऊपर से वो भी पतानहीं किस बात पे नाराज़ हो कर बैठी है.

शिव : पर वो है कहा?

गंगादेवी : उपरवाले कमरेमे बैठी है, क्या करू इस लड़की का समाजमे hi नहीं आता.

शिव : में देखता हु.

गंगादेवी : है बीटा, जरा समाज उसको, अगर कुछ चाहिए तो बोल दे.

शिव : में बात करता हु आंटी.

में ऊपर की और चला गया, निचे सब खाने का कार्यक्रम चल रहा था तो ऊपर कोई नहीं था, मेने देखा तो दरवाजा बंद था, मेने खटकाया तो कोई जवाब न मिला, एक दो बार और खटकाया, पर कोई उत्तर न मिला.

शिव : दरवाजा खोलो, में हु शिव. (फिर भी दरवाजा न खुला) देखो, मुझसे बात तो करो (फिर भी दरवाजा न खुला) अगर तुम दरवाजा नहीं खोलोगी तो में अभी यहाँ से वापस सहर चला जाऊंगा. (मेरी बात का असर हुआ और दरवाजा अंदर से खुलने की आवाज आयी, मेने दरवाजा धकेल कर अंदर गया तो वो दीवाल से सात कर कड़ी थी, उसे देख कर hi लग रहा था की वो रो रही थी, और अभी अभी आंसू पोछे है.) ये क्या कर रही हो तुम, तुम्हारे भाई की hi शादी है और तुम इस तरह अपने आप को कमरे में बंद किये हुए बैठी हो, तुम्हारे घरवाले कितने परेशान हो रहे है. (वो कुछ बोल नहीं रही थी) अभी मुझसे मिले तुम्हे कुछ hi दिन हुए है, तुम मुझे ठीक से जानती भी नहीं और मेरे लिए अपने भाई की शादी को तुम बिगड़ रही हो, तुम्हारी माँ और पापा कितने परेशान है. उन्हें समाज नहीं आ रहा की अपने बेटे की शादी की ख़ुशी मनाये या तुम्हारे रूठने का गाम.

दिव्या : मेरा मान नहीं है.

शिव : ऐसा क्या हो गया की तुम्हारा मान नहीं है, ऐसा क्या है मुज में जो मेरे लिए तुम अपने माँ बाप को दुखी कर रही हो, अपने भाई के बारे में तो सोचो.

दिव्या : क्या में अच्छी नहीं हु?

शिव : क्या कहना चाहती हो?

दिव्या : क्या में अच्छी नहीं हु, तुम क्यों मुझे मन कर रहे हो?

शिव : पागल, अभी न तुम मुझे जानती हो, न में तुम्हे जनता हु, आज सुबह hi तो मिले है, तुम क्या जानती हो मेरे बारे में जो मेरे लिए ये सब कर रही हो?

दिव्या : मुझे तुम अच्छे लगते हो.

शिव : तो क्या, मुझे भी तुम अच्छी लगती हो इसका ये मतलब थोड़े न है की में तुम्हारे साथ जुड़ जाऊ, मेरी जिंदगी में कोई और भी हो शक्ति है.

दिव्या : (मेरे सामने देखते हुए) क्या, तुम्हारी जिंदगी में कोई और लड़की है?

शिव : है है.

दिव्या : कोण है वो?

शिव : इस से तुम्हे क्या मतलब है?

दिव्या : मुझे जान न है, बताओ न कोण है वो?

शिव : में ऐसे किसी का नाम नहीं उछलता. और इस से तुम्हे कोई फर्क भी नहीं पड़ना चाहिए. चलो अब तैयार हो जाओ और निचे चलो, सब का मूड बिगाड़ा हुआ है.

दिव्या : (मेरी और देखते हुए) मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

शिव : (मुझे उसकी बात समाज नहीं आयी) क्या कहना चाहती हो?

दिव्या : अगर तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है तो भी मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, मुझे भी अपनी गर्लफ्रेंड बना लो.

शिव : तुम पागल हो गयी हो, ऐसा होता है क्या?

दिव्या : में ऐसी कई लड़कीओ को जानती हु, जिनके बॉयफ्रेंड थे और आज उनकी शादी कही और हो गयी है, वो खुस भी है, मुझे तुम्हारी दूसरी गर्लफ्रेंड बन ने में कोई प्रॉब्लम नहीं है. और अभी शादी तो बहोत दूर की बात है, वैसे भी पापा ने कोई लड़का देख रक्खा है, मेरी पढ़ाई पूरी होते hi वो मेरी शादी करवाडेंगे, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

शिव : ये क्या बकवास किये जा रही हो तुम.

दिव्या : अब तुम्हे क्या प्रॉब्लम है, में कहा तुम्हे मेरे साथ बांध कर रख रही हु, प्लीज मान जाओ न, सच में तुम मुझे बहोत पसंद हो, तुम्हारे साथ भले hi कुछ टाइम hi मिले, पर मिलेगा तो सही, मान जाओ न, प्लीज.

शिव : मुझे सोचने का टाइम दो.

दिव्या : इसका मतलब में तुम्हे बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती है न. क्या में जरा भी खूबसूरत नहीं हु शिव.

शिव : क्या पागलो जैसी बाते कर रही हो, तुम बहोत खूबसूरत हो, पर.

दिव्या : पर वॉर कुछ नहीं, में सिर्फ गर्लफ्रेंड बनाने के लिए hi तो कह रही हु, में तुम्हारे रस्ते में नहीं आउंगी, प्लीज मान जाओ न. प्लीज.

शिव : (अब में क्या कहता, मुझे लगा अभी मान जाता हु फिर धीरे धीरे इससे समजा दूंगा, कमसे काम शादी में तो बखेड़ा नहीं करेगी) ठीक है, पर अभी तैयार हो जाओ, सब वेट कर रहे है.

दिव्या : ओह शिव (वो दौड़ कर मेरे गले लग गयी, उसने मुझे बाहोंमे भर लिया, में वैसे hi खड़ा रहा, थोड़ी देर गले लगे रहने के बाद उसने मुझे देखा, वो मुझे देखती रही)

शिव : क्या हुआ?

दिव्या : में समाज गयी शिव, तुम सिर्फ मेरा दिल रखने के लिए कहा. (उसके चेहरे पर उदासी छ गयी)

शिव : ऐसा क्यों कह रहे हो?

दिव्या : अगर ऐसा न होता तो तुमने भी मुझे अपनी बाहोंमे लिया होता.

शिव : ऐसा कुछ नहीं है, ऐसे एकदम से अचानक तुम मेरे गले लगी तो मुझे कुछ समाज नहीं आया.

दिव्या : (उसकी आँखों में देखते हुए) अगर ऐसा है तो मुझे किश करो.

शिव : दिव्या, हम ये सब बाद में करेंगे, अभी चलो, सब वेट कर रहे है.

दिव्या : देखा, हो गया न साबित, अगर में तुम्हे पसंद नहीं तो कोई बात नहीं, मेरे भाग्य में hi नहीं है, तुम जाओ ,में आती हु.

शिव : (मेने उसे देखा तो वो बहोत उदास हो गयी थी, ऐसा लग रहा था की मेरे जाते hi वो रोने लगेगी, मुझे समाज नहीं आ रहा था की में इससे कैसे संजो, मेने मन कर दिया, मेने यहाँ तक कह दिया की मेरे जीवन में कोई और है, फिर भी ये समझने को तैयार नहीं, अब जो होगा सो होगा, अभी से इसकी चिंता करने का कोई फायदा नहीं, और वैसे भी मेने उसे सब सच बता दिया है) ठीक है, अगर तुम ऐसा hi चाहती हो तो ऐसा hi सही.

दिव्या : नहीं शिव, में कोई जबरदस्ती की किश नहीं चाहती, ये मेरे जीवन की पहली किश होगी, तुम अगर बे मान से करो गए तो मुझे पूरी जिंदगी अफ़सोस रहेगा.

शिव : बहोत बोलती हो tum(Mene उसे दीवाल से सत्ता दिया, और उसके गाल को गले के साथ सहलाने लगा, वो मेरी आँखों में देख रही थी) में चाहता था की तुम मुज से दूर रहो, में तुम्हे वो सब नहीं दे पाउँगा जो दो लोग ऐसे रिलेशन में आशा रखते है, इसीलिए में चाहता था की आगे जा कर तुम्हे कोई दुःख न हो, अब जैसा तुम्हारा भाग्य.

दिव्या : मेरा भाग्य अच्छा hi है, तुम्हारे साथ जितने भी पल बितौ ये मेरा ाचाहहए भाग्य hi होगा, मुझे अभी कुछ नहीं सोचना, आगे क्या होगा पता नहीं पर में अभी इस समय को बर्बाद कर के पूरी जिंदगी अफ़सोस नहीं करना chahti.(Mere छूने से उसकी आंखे बोजिल हो रही थी, उसकी सांसे भी तेज चलने लगी थी, में उसकी और झुकने लगा) शिव, अगर में तुम्हे पसंद हु तो hi मुझे किश karna.(Me कुछ न बोलै बस झुकता चला गया. वैसे भी वो खूबसूरत थी, इसमें तो कोई शक था hi नहीं, उसके तड़पते होठो को मेने अपने होठो से पकड़ लिया, उसकी आंखे बंद हो गयी, में उस से और सात गया, में लम्बा था तो उसने अपने पंजो पर कड़ी हो गयी, में नीचे झुका हुआ था, उसने अपनी बहे मेरे गले में दाल दी, में उसके होठो को चूसने लगा, वो बस ऐसे hi रही, थोड़ी hi देर में उसे समाज आ गया की क्या करना है तो वो भी मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी सांसे भी बहोत तेज तेज चलने लगी थी, मेने एक हाथ से उसकी पीठ को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़ ली, में सीधा होता गया और वो हवामे ऊपर उठने लगी, उसने मुझे कास के पकड़ लिया, जब उसकी सांसे फूलने लगी तो उसने अपने होठ अलग किये और जोर जोर से सांसे लेने लगी, में उसे hi देख रहा था, जब उसकी सांसे कुछ नियंत्रित हुई तो उसने मुझे देखा, मुझे मुस्कुराता देख, वो शर्मा गयी और मुझसे लिपट गयी. वो हवामे hi लटकी हुई थी. थोड़ी देर बाद मेने उसे नीचे उतरा तो उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था.

शिव : (मेने मुस्कुराते हुए पूछा) अब खुस.

दिव्या : (मुस्कुराते हुए फिर से मुज से लिपट gayi)Haaa.

शिव : अब चलो, सब रह देख रहे है.

दिव्या : है चलो.

शिव : ऐसे hi?

दिव्या : है, खाने के बाद तैयार हो जाउंगी.

शिव : ठीक है, चलो. (हम दोनों नीचे चले गए)

गंगादेवी : (हमे देखते hi) आ गयी मेरी बच्ची.

दिव्या : (उसकी मम्मी को गले लगते हुए) सॉरी मुम्मा.

गंगादेवी : (उसका शिर सहलाते हुए) सब ठीक है न बीटा, कुछ चाहिए था क्या?

दिव्या : नहीं मुम्मा, कुछ नहीं. में खाना खाने जा रही हु, मुझे बहोत भूख लगी है.

गंगादेवी : है जा (शिव का गाल सेहला kar)Mera बच्चा.

हम दोनों वह से खाना जहा हो रहा था वह चले गए. हम दोनों को साथ आते देख रंजन, विणा और कुसुम का मुँह खुला का खुला hi रह गया. उनको ऐसे देखता देख कर दिव्या शर्माने लगी. हम चलते चलते वह आ गए.
 
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