Adultery Kundali Bhagya - Page 11 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 62

कुछ सयो को देख मुझे अजीब लग रहा था. में सोचने लगा ये कोण है और यहाँ क्या कर रहे है. में निचे बेथ कर अपना शिर निकले उनकी हरकते देख रहा था. दीदी अभी भी मूत रही थी तो उनके मूतने की आवाज आ रही थी.

लतादिदी : शिव, क्या कर रहा है, निचे क्यों बेथ रहा है (वो अपना मूतना रोक नहीं प् रही थी) मुझे शर्म आ रही है, तू दूर जा.

शिव : (लतादिदी का हाथ दबाते hue)Shhhhh. आवाज मात करो.

लतादिदी :(धीमी आवाज me)Kya हुआ?

शिव : कोई है वह.

लतादिदी : (लता को दर लग रहा था पर वो कर भी क्या शक्ति थी, उसने जैसे तैसे मूतना ख़तम किआ, उसने देखा शिव, छत की दिवार से अपना शिर निकले कुछ देखने की कोशिस कर रहा था, जिस और शिव देख रहा था वो भी उस और देखने lagi,)Kaha hai?(Usne भी कुछ साये देखे जो आगे का गेट कूद कर अंदर आ रहे थे, उसने डरके मरे शिव की बाह पकड़ li)Kon है ये लोग?

शिव : पता नहीं दीदी, शायद चोर हो शक्ति है या और कोई भी.

लतादिदी : यहाँ क्या है चुराने को जो ये यहाँ चोरी करने आये है.

शिव : क्या पता दीदी, आप जल्दी से निचे जाओ और सबको बिना शोर किये जगादो, में निचे जा कर देखता हु.

लतादिदी : पर तू अकेला है और वो तीन चार लग रहे है. मुझे दर लग रहा है, तू वह मात जा.

शिव : आप चिंता मत कीजिये दीदी, मुझे देखना होगा, चलिए. (फटा फैट में कपडे के पास जाकर मेने कपडे पहनते hue)Didi आप लोगो के हाथ में जो आये वो ले लेना, लकड़ा, छुरी, या जो भी, आप समाज रही है na?(Unhone है में गर्दन हिलायी पर उनके चहरे पर दर साफ़ दिख रहा था, दोनों ने कपडे पहन लिए the)Hum निचे आ गए, मेने चूल्हे के पास से एक थोड़ा लम्बा लकड़ा लिया और पीछे के रस्ते से बहार निकल गया. लतादिदी ने पहले सरिता को जगाया, सरिता एक दम से नींद से जाग गयी तो लता ने उसका मुँह दबाते हुए उसे छुप रहने का इस्सर किआ, सरिता को कुछ समाज नहीं आ रहा था, फिर उन्होंने रंजन और विणा को भी उठाया और चुप रहने का कहा.

सरिता : क्या हुआ लता? तू इतनी घबराई क्यों hai?(Ass पास देखते hue)Shiv कहा है?

लतादिदी : कोई अनाथालय में घुस रहा है, शिव उस तरफ गया है, तुम लोग जो कुछ भी मिले ऐसा ले लो ताकि अगर कोई आये तो हमला कर शेक.

विणा : (वो बहोत दर गयी थी) अब क्या होगा दीदी?

रंजन : तू दर मत, चल कड़ी हो, (वो भी चूल्हे के पास से एक लकड़ा उठा लायी और विणा को एक बड़ा सा कडा दे दिया. सरिता ने एक पाइप का टुकड़ा उठा लिया और लता ने भी एक लकड़ा उठा लिया.)

में चुपके से पीछे के रस्ते से दीवाल की आड़ से उन सब को देख रहा था, वो चार लोग थे और चुपके से अनाथालय की और आ रहे थे. वो लोग नजदीक आ कर अनाथालय की दिवार से लग कर बेथ गए.

एक साया : देखो कोई आवाज नहीं, पहले घूम कर एक चक्कर लगा लेते है, फिर प्लान के मुताबित एक ऊपर जाने की कोशिस करेगा और हम वो खिड़की तोड़कर उसके अंदर पेट्रोल दाल कर आग लगा देंगे. कोनसी खिड़की कही थी, है वो बायीं वाली दीवाल पर दूसरी खिड़की.

दूसरा साया : भाई क्यों डरते हो, पहले उस लड़के को काबू कर लेते है, लड़कीअ अपने आप काबूमें आ जाएगी. फिर आराम से उनको छोड़ेंगे और फिर आग लगा कर चले जायेंगे.

शिव : (मान में )ये लोग ओफ्फिकेवली खिड़की की बात कर रहे है. पर इन्हे ऑफिस में आग क्यों लगनी है. शायद ये लोग वह रक्खे कागजात को जलना चाहते है ताकि सरे साबुत मिट जाये.

साया1 : ठरकी सेल, तू मानेगा नहीं, चल ठीक है, पहले पुरे माकन का जायजा ले लेते है. तू जाकर वो देख आ कही से ऊपर चढ़ा जा सकता है की नहीं. अगर ऊपर चले गए तो सीडीओ से अंदर दाखिल हो जायेंगे. और अगर ऐसा कुछ न मिले तो पीछे के दरवाजे पर ग्रिल नहीं है, अगर जरुरत पड़े तो वो तोड़ देंगे. तुम देख आओ तब तक हम लोग आग जलने के लिए मशाल बनाते है.

दूसरे दो साये : ठीक है.

शिव बिना आवाज किये वापस चला गया. वो पिछले दरवाजे से अंदर घुसा. बाकि सब बत्तिया तो बंद थी बस एक छोटा बल्ब, जल रहा था, वो फटाफट लड़कीओ के पास चला गया.

शिव : मुझे एक साड़ी या चुन्नी दो.

लता : क्या हुआ शिव, कोण है ये लोग.

शिव : ये लोग ऑफिस के कागजात जलने के लिए आये है, आप लोग डरिये मात और सब इक्कट्ठा रहना. शिव एक चुन्नी ले कर वापस दरवाजे की और चला गया. एक साया बाये और से चलते हुए हलकी सी रौशनी में ऊपर चढने का कोई जरिए जांचने लगा. और एक साया दाहिनी और से चलते हुए पीछे पहुंच गया. उसे एक दरवाजा दिखा. दरवाजे की दरार से हलकी रौशनी बहार आ रही थी, वो खुस हो गया क्यों की शायद दरवाजा खुला हुआ था. वो मान में सोचने लगा की चलो काम आसान हो गया, ये लोग शायद दरवाजा बंद करना भूल गए है, उसने हलके से दरवाजे को धकेला तो वो खुल गया. वो खुस हो गया, वो आहिस्ता से अंदर अपनी गर्दन दाल कर देखने लगा, अंदर हलकी रौशनी थी और एकदम शांति छायी हुई थी. उसने सोचा की एक बार अंदर जा कर देख लेता हाउ. वो थोड़ा और अंदर दाखिल हुआ, वो खुस हो रहा था की चलो अधकाम तो आसान हो गया, सब सो रहे होंगे, और उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी, अंदर दाखिल होने के लिए. वो ये खुशखबरी अपने साथियो को सुनाने के लिए वापस घूम hi रहा था की अचानक उसके मुँह पर एक कपड़ा आ गया वो कुछ समाज पता या चिल्ला पता उस से पहले hi वो जमीं पर था, उसके ऊपर कोई चढ़ा हुआ था, उलटे होने की वजह से वो उसे देख नहीं पाया, उसने अपने हाथ पीछे ले जाते हुए उसे धकेलने के कोशिस की पर उसने उसके हाथ को इतनी जोर से मरोड़ दिया की वो दर्द की वजह से चीखने लगा, पर मुँह पर कपड़ा होने की वजह से उसकी चीख उसके मुँह के अंदर hi घुट कर रह गयी, वो संभल ता उस से पहले उसके सर से कुछ जोर से टकराया और उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया. शिव ने दरवाजा बंद कर दिया, उस आदमी को घसीट कर एक खम्भे के पास बिठा दिया.

शिव : (लड़कीओ को) इससे बांध दो, पर आवाज मात करना.

सब लड़कीओ ने चुन्नी और साड़ी की मदद से उसके हाथ पेअर बांध कर उसे खम्बे के साथ बांध दिया.

शिव : वो लोग चार थे, एक ये रहा तो अब बचे तीन, वो लोग ऑफिस जलने की बात कर रहे है, अगर खिड़की टूटने की आवाज हो तो उस तरफ मत jana.(Aur कोई कुछ कहता उस से पहले शिव वापस चला गया)

वो दूसरा साया पूरा चक्कर लगाकर वापस अपने साथियो के पास पहुंच गया.

दूसरा साया : साइड में बरसाती पाइप है शायद उस से ऊपर चढ़ा जा शक्ति है.

पहला साया: वो दूसरा अभी तक क्यों नहीं लौटा.

दूसरा साया : क्या वो अभी नहीं आया, में तो पूरा घूम कर आया, मुझे तो वो नहीं दिखा.

पहला साया : क्या, ऐसा कैसे हो शक्ति है, कोई गड़बड़ तो नहीं?

दूसरा साया : क्या गड़बड़ होंगी, यहाँ चार लड़कीअ और एक hi लड़का है और बाकि सब बच्चे है. और जब से हम आये है तब से कोई हलचल नहीं है मतलब सब सो रहे है. वो साला मूतने चलागया होगा, में अभी देख कर आता हु.

वो वह से दबे पांव वापस उलटी और निकल गया, वो बड़ी सतर्क ता से चलते हुए आस पर देख रहा था, चाँद की हलकी रौशनी में भी उसकी आंखे अभ्यस्त हो गयी थी तो वो अस्स पास देखते हुए जा रहा था. जब दीवाल ख़तम हुई तो उसने वह रुक कर अपनी गर्दन निकल कर उस तरफ देखना चाहा तो उसे एक लम्बा साया नजर आया वो कुछ और सोचता उस से पहले hi उसके मुँह को किसी ने दबा दिया, वो छूटने की कोशिस कर रहा था पर जिसने उसे पकड़ा था वो बहोत ताकतवर था, वो हिल भी नहीं प् रथा था, उसने छत पटटे हुए अपने आपको छुड़ाने की कोशिस की पर, वो शिव की बहो के घेरे में और कसता गया, उसकी पसलीओ में जोर का दर्द उठा, वो गऊ गऊ की आवाज करने लगा, उसके शिर पर भी वॉर हुआ और वो धड़ाम से नीचे गिरा. शिव ने उसे जांचा तो वो हिलडुल नहीं रहा था. शिव ने उसे कंधे पर उठाया और अंदर ले गया और उसे भी बांध दिया.

यहाँ बचे हुए दोनों ने जलने की साडी तयारी कर्ली थी. उन्होंने मसल बना लिथि. जब काफी देर हो गयी और दूसरा भी वापस नहीं आया तो.

पहला साया: लगता है कुछ तो गड़बड़ है, ये दोनों कहा गायब हो गए.

दूसरा : क्या करे? उन्हें ढूंढे?

पहला साया : नहीं, अब जो करने आये है वो पहले करलेते है. ये केरोसिन खिड़की तोड़कर अंदर डालते है और आग लगा देते है.

दूसरा : पर हमें आग क्यों लगनी है, और लगनी है तो सिर्फ उसी कमरे में क्यों?

पहला : वो मुझे पता नहीं पर लगता है उस कमरे में कुछ है जो हमे तबाह करना है. अब बाते छोड़ और खिड़की तोड़ कर केरोसिन अंदर दाल.

दूसरा : पर आवाज होगी तो सब जाग जायेंगे.

पहला : अब वो सब सोचना छोड़ और काम कर, अगर वो लोग जाग भी गए तो उनके कुछ समजने के पहले हम आग लगा चुके होंगे.

में ये सब चुपके से सुन रहा था, अब मुझेलगा की सामने जाना hi पड़ेगा वर्ण ये लोग आग लगा देंगे, वैसे वह कुछ ज्यादा है नहीं, जो वो लोग धुंध रहे है. वो कागजात तो पहले से hi वह से निकल लिए है. में दबे पाव आगे बढ़ने लगा, अब खतरा ये भी था की वो लोग मुझे देख सकते थे पर खतरा लेना hi था. उपरवाले की मेहरबानी की उन्दोनो की पीठ मेरी और थी और दोनों अपने काम में व्यस्त थे, एक ने वह पड़ा पत्थर उठाया और खिड़की पे मर दिया जिस से ऊपर का शिक्षा टूट गया. में तेज कदमो से आगे बढ़ा, वो जैसे hi केरोसिन अंदर डालनेवाला था मेने जोर से उस को लात मरी, वो चिल्लाता हुआ दो कदम आगे जा कर निचे गिर पड़ा और साथ में केरोसिन का चैने भी उसके हाथ से छूट गया जिस से केरोसिन निचे गिरने लगा. उसकी गंध वातावरण में फ़ैल गयी, पर तब तक दूसरेवाले ने मसल जला दी थी. अब वह काफी उजाला हो गया था. हमदोनो की आंखे आपस में टकराई, वो एक हट्टाकट्टा आदमी था, काळा संध जैसा लग रहा था. वो जलती हुई मसल लेकर मेरी और बढ़ा. मेने भी मजबूती से अपना लकड़ा पकड़ा. जैसे hi उसने मुज पर प्रहार किआ मेने उसकी मसल पर जोर से लकड़ा मारा तो वो उसके हाथ से छूट गया और जहा केरोसिन गिरा था उस के ऊपर गिरा, अचानक एक आग का गोला बन गया और चारो और बहोत रौशनी हो गयी, में थोड़ा पीछे हैट गया और वो भी दूर हैट गया, जो निचे पड़ा हुआ था उसका पैरमे केरोसिन लग गया था तो उसका पेअर जलने लगा तो वो चिल्लाता हुआ इधर उधर भागने लगा और अपने पेअर की आग को बजाने की कोशिस करने लगा. मेने देखा की मसलवाले आदमी ने अपने हाथ में चाकू निकल लिया है. वो चाकू लेकर मेरी और सतर्क ता से बढ़ने लगा. मेरे हाथ में लकड़ा था तो में भी तैयार था. जैसे hi उसनेवार किआ मेने लकड़ा उसके कंधे पर दे मारा वो चिल्लाता हुआ दो कदम पीछे हैट गया और अपना कन्धा दबाने लगा. में उसकी और बढ़ने लगा तो वो एकदम से चाकू छोड़ कर भागने लगा, में भी उसके पीछे भगा. दौड़ में तो वो जितने से रहा, मेने भागते हुए hi उसकी पीठ पर लकड़ा मारा तो वो लड़खड़ाता हुआ नीचे गिर पड़ा. उतने में सब की चिल्लाने की आवाजे आने लगी. मेने देखा की लतादिदी और बाकि सब बहार आ गए थे और आग और उस आदमी को जलता हुआ देख सब चिल्लाने लगे थे. मेरा ध्यान उनकी और चला गया था तो वो आदमी उठकर वह से भागने लगा. में दौड़ते हुए सबके पास पंहुचा. उस आदमी के कपडे भी जलनेलगे थे तो वो जमीं पर लुढ़क कर आग बजाने की कोशिस कर रहा था और चिल्ला रहा था. में फटाफट अंदर गया और एक मोटा सा कम्बल ले आया और दौड़ कर उस आदमी के उप्पर दाल दिया. और उसे दबा दिया तो आग बुजगायी, पर वो चिल्ला गहा था. उतने में हमें पुलिस की सिरान सुनाई दी. पुलिस की गाड़ी हमारे गेट के बहार कड़ी थी, में दौड़ता हुआ अंदर गया और टेल की चाबी ले कर गेट खोल दिया तो पोलिसवाले अंदर आ गए.

पोलिसवाले : क्या हो रहा है यहाँ?

शिव : पता नहीं ये लोग यहाँ आये और उन्होंने आग लगा दी.

पोलिसवाले ने फ़ौरन फ़िरेब्रिगडे को फ़ोन लगाया और भार्गवी मैडम को भी फ़ोन कर दिया. भार्गवी मैडम के कहने पर hi ये लोग यहाँ से गुजर रहे थे, उन्होंने hi यहाँ ज्यादा पेट्रोलिंग करने को बोलै था. जब तक भार्गवी मैडम आयी तब तक फायर ब्रिगेड ने आग बुजदिति और एम्बुलेंस भी आ गयी थी. वो सब से पहले शिव के hi पास गयी.

भार्गवी : क्या हुआ शिव? कौन है ये लोग?

शिव : पतानहीं मैडम, ये लोग यहाँ आये और ऑफिस को जलने की बात कर रहे थे. मेने उनको देख लिया तो हम बचगये.

भार्गवी : (जलने से कराहते हुए उस आदमी को देख kar)Isse हॉस्पिटल ले जाओ और दो कांस्टेबल इसके साथ hi रहना.

शिव : दो और है मैडम, जो अंदर बंधे हुए है.

भार्गवी : (आश्चर्य से मेरी और देख kar)Kya?,Kaha?

शिव : आइये मैडम में दिखता हु.

में और भार्गवी मैडम को अंदर ले गया और साथ में दो कांस्टेबल भी आये. वह दो बंधे हुए थे जिनके शिर से खून निकल रहा था और दोनों छूटने की कोशिस कर रहे थे.

भार्गवी : (कांस्टेबल ko)Pakado इन्हे भी और हॉस्पिटल ले जाओ. एम्बुलेंस में इनके साथ तुम भी जाना और पुलिस जीप को भी बोलो इनके पीछे चलने को. में वही मिलती hu.(Constable “जी मैडम” बोल कर उन दोनों के पेअर खोल कर उन्हें हत्कडी पहना कर बहार ले गया.

भार्गवी : तुमने मारा इन्हे?

शिव : सॉरी मैडम, में क्या करता, ये चार लोग थे और यहाँ ऑफिस जलने के अलावा वो लोग लड़कीओ के साथ....

भार्गवी : तुम्हे कैसे पता की ये ऑफिस जलने आये थे.

शिव : मेने छुपकर इनकी बाते सुनी थी.

भार्गवी : ये किसी का नाम ले रहे थे, मेरा मतलब है की इनको किसने भेजा है. क्यों की ये लोग तो गुंडे hi लगते है, ये काम वो पैसो के लिए hi कर रहे होंगे.

शिव : नहीं मैडम, उन्होंने नाम तो किसी का नहीं लिया, पर जो भाग गया हे वही इन सब का लीडर था.

भार्गवी : कोई बात नहीं, में देखती हु, वो भाग कर जायेगा कहा. वैसे तुमने काम तो बहादुरी का किया है. मान न पड़ेगा. पर ऐसे पंगे तुम्हे भी नुकसान पंहुचा शक्ति hai.(Me क्या kehta,bas मुस्कुराया) मेने रात की पेट्रोलिंग जीप को यहाँ निगरानी रखने को बोलै था, पर मुझे भी नहीं पता था की ये सब इतना जल्दी हो जायेगा, यहाँ में दो कांस्टेबल को छोड़ जाती हु. तुम्हे, कम्प्लेन करने के लिए पुलिस स्टेशन आयना पड़ेगा.

शिव : ठीक है मैडम.

में दीदी के पास चला गया तो सब मुझसे लिपट गए, विणा तो रो रही thi.(Bhargavi सब जायजा ले रही थी, उसकी नजर शिव पर गयी जो सब को दिलासा दे रहा था, सब लड़कीअ उसके गले लगे हुई थी, सब जायजा ले कर दो कांस्टेबल को वह छोड़ वो पुलिस स्टेऑन निकल गए, वह कम्प्लेन दर्ज करवा कर शिव को वापस अनाथालय छोड़ दिया, वो हॉस्पिटल की और निकल गयी) मेने कांस्टेबल को बैठने के लिए कुर्शिया दी और में अंदर आ गए. अंदर बच्चे सो रहे थे पर लड़कीअ सब जाग रही थी. मेने उन्हें सब बता दिया की क्या हुआ. रात बहोत हो गयी थी तो हम सब सोने लगे.

लतादिदी : तुजे कही लगी तो नहीं न शिव?

सरितादिदी : अरे इससे क्या होगा? देखा नहीं सब की बंद बजा दी.

लतादिदी : तू चुप कर, तुजे पता भी है कितना खतरनाक था ये सब, वो लोग चाकू के साथ थे, अगर कुछ हो जाता तो?

सरितादिदी : सॉरी यार, सही कह रही है तू. (चिंता se)Tu ठीक है न शिव?

शिव : है दीदी, में ठीक हु. मुझे कुछ नहीं हुआ है.

लतादिदी : ठीक है सो जा.

सब अभी सोये थे तो लतादिदी मुझसे दूर hi सो गयी, पर रंजन मुज से सात कर लेती थी, उसने अपनी उंगलिया मेरी उंगलिओ में फसा कर मेरा हाथ पकड़ लिया. मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, विणा भी मुझे देख रही थी, में उसकी और भी मुस्कुराहा. मेने उन्हें सोने का इस्सर किआ तो उन्होंने आंखे बंद कर ली. थोड़ी देर बाद सब सो गए. रंजन मेरा हाथ पकड़े hi सो गयी.

रात को देर से सोया था पर सुबह अपने टाइम पर उठ गया और गयम के लिए निकल गया. जूही मैडम को भी सब कुछ बता दिया जो रात को हुआ था. पवनसीर को भी मेने सब बता दिया. उतने में काव्य मैडम भी वह आ गयी तो पवनसीर ने उन्हें ऑफिस में बुलाया और उन्हें बता दिया. ऑफिस से बहार आ कर वो मेरे पास आयी.

काव्य जी : तुम ठीक हो न? तुम्हे कही चोट तो नहीं लगी?

शिव : नहीं मैडम, में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ.

काव्यजि : ठीक है, तो फिर मेरे ऑफिस आ जाना, मुझे साडी डिटेल बता देना, में भार्गवी जी से भी बात कर लुंगी. तुम थोड़ा संभल कर रहना.

शिव : जी मैडम. थैंक यू.

वो अंदर कसरत करने चली गयी. में भी वही सब रूटीन में लग गया, मेने जूही मैडम को भी बता दिया. उन्होंने कहा मेरा स्कूटर ले जाना. गयम से में फटाफट घर गया और वापस जूही मैडम के घर से स्कूटी ले कर काव्य मैडम के एड्रेस पर चला गया. मेने बेल्ल बजायी तो एक 50 साल के करीब महिला ने दरवाजा खोला.

महिला : किस से मिलना है.

शिव : काव्य मैडम से मिलना था.

महिला : तुम्हारा नाम शिव है?

शिव : जी.

महिला : आप बैठो, वो अभी आ रही है.

में वह बड़े से हॉल में रक्खे सोफे पर बेथ गया. वो भी वही बेथ गगयी, वह काम करनेवाली एक औरत ने मुझे पानी दिया. मेने पानी पिया और काव्य मैडम का इंतजार करने लगा. थोड़ी देर बाद वही कामवाली आयी.

कामवाली : आइये, दीदी आप को बुला रही है.

में उसके पीछे पीछे चल दिया, वो ऊपर बने ऑफिस में मुझे ले गयी, वह काव्य मैडम बैठी हुई थी. मुझे देख कर

काव्य मैडम : आओ शिव, बैठो. (में बेथ गया) कैसे हो?

शिव : में ठीक हु, अआप किसी है?

काव्य मैडम :(मुस्कुरायी) में भी ठीक हु. शिव मुझे तुमसे कुछ पूछ न था. क्या तुम्हारे यहाँ कोई हॉस्पिटल वाले या डॉक्टर वगैरह कोई आता है.

शिव : वैसे तो नहीं पर कभी कभी चेकउप के लिए आते है.

काव्य मैडम : तुम्हारे यहाँ के लड़के लड़कीअ जो अब नहीं है वह, वो क्यों चले गए, और कहा गए इसके बारेमे तुम कुछ जानते हो.

शिव : ज्यादा तो मुझे कुछ पता नहीं, पर जो मैनेजर सब को मरता पिट ता रहता है तो कई लड़के वह से भाग गए, और अब इस हादसे के बाद मुझे ये भी पता चला है की उसने कुछ लड़कीओ के साथ वो सब किआ या करने की कोशिस की तो वो भी चली गयी. और आप जो हॉस्पिटल के बारेमे पूछ रही है, उसका पहले का तो मुझे खास ध्यान नहीं पर अभी एक लड़का था गुड्डू, जिसकी अभी हल hi में मौत हो गयी थी.

काव्य मैडम : ये काब की बात है? (मेने उन्हें डेट बताई तो वो, अपने कंप्यूटर में कुछ देखने लगी, एक जागर एंट्री देख कर उसकी आंखे चमक उठी)

काव्य मैडम : शिव, मेने तुम्हारे अनाथालय और उस मैनेजर के दस्तावेज को चेक किआ और अभी तुम जो मुझे बता रहे हो उस से मुझे इसकी एक और वजह भी दिख रही है.

शिव : वो क्या मैडम.

काव्य मैडम : मुझे लगता है वो लड़के और लड़कीओ को या उनके शरीर के अंगो को बेचता था.

शिव : अंगो को बेचता था से क्या मतलब है मैडम.

काव्य मैडम : यही की, वो उनके दिल, या किडनी या और कुछ.

शिव : ये क्या कह रही है मैडम, क्या सचमे?

काव्य मैडम : (अपने लैपटॉप का स्क्रीन शिव की और करते हुए, वो उठकर शिव के पीछे कड़ी हो गयी ) ये देखो शिव, यहाँ ये पैसे जमा हुए है और जो डेट तुम बता रहे हो उसके कुछ दिन बाद hi ये हुआ है, यहाँ देखो, ये हॉस्पिटल से जमा, ऐसा लिखा हुआ है, और ये एक बार नहीं कई बार हुए है, पिछले कुछ समय से ये बंद हो गया था. पर अभी गुड्डू की मोत के बाद ये फिर जमा हुआ है. हो सकता है अब तुम्हारे वह ज्यादा बच्चे बचे न हो इस लिए ऐसा हुआ हो.

शिव : मैडम कई लड़के लड़कीअ बीमार होकर मर गए the.(Shiv ने पीछे मुद कर जवाब दिया पर काव्य मैडम झुकी हुई थी तो उसका शिर उनके स्तन से टच कर गया, उसने फ़ौरन अपना शिर वापस खिंच लिया पर जो होना था वो हो गया था)

काव्य मैडम : (काव्य को भी ये एहसास हुआ तो वो शिव से थोड़ा दूर हो गयी) हो सकता है की वो बीमार न हो, उन्हें कुछ खिला कर बीमार बनाया गया हो और फिर उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया हो. और मेडिकल चेक उप के बहाने उनकी साडी डिटेल जमा की जाती हो जिस से जब भी किसी को कोई अंग चाहिए हो तो उस रिपोर्ट के आधार पर जिसका भी मच होता हो उसे बीमार बना कर लेजाया जाता हो.

शिव : (अचानक से) है मैडम, गुड्डू को भी उसने कोई दवाई खिलाई थी, उसके बाद hi वो ज्यादा बीमार हो गया था.

काव्य मैडम : शिव ये सब बहोत खतरनाक चीजे है, हो सकता है इन्हे छिपाने के लिए अनाथालय को और तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की कोशिस की गयी है. मेने भार्गवी मैडम से भी ये सब कहा था तो उन्होंने तुम्हारे वह ध्यान रखने के लिए पुलिस को कह दिया थाई.

शिव : है मैडम, मेने देखा था पुलिस की गाड़ी थोड़ी थोड़ी देर में वह से गुजर रही थी.

काव्य मैडम : शिव, तुम्हे भी ध्यान रखना होगा, हो शक्ति है ये लोग तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की फिर कोशिस करे. उन्हें नहीं पता है की हम ये सब कागजात वह से ले आये है तो इस कागजात के लिए वो फिर से वह आये, और उसे मिटने की कोशिस करे. तो तुम ध्यान रख न.

शिव : ठीक है मैडम. और थैंक यू, आप हमारा इतना ख्याल रख रही है, पता नहीं इसका एहसान में कैसे चुकाऊंगा.

काव्य मैडम : एहसान कैसा, में वकील हु, और मेने तुम्हे कहा था न के में बिना फीस लिए तो काम करुँगी नहीं, वार्ना ऐसे तो मेरी वकालत hi बंद हो जाएगी.

शिव : मैडम आपने जो बात कही थी वो सही थी. में वादा करता हु में आप को फीस जरूर दूंगा, अभी नहीं तो बादमे पर दूंगा जरूर.

काव्य मैडम : अच्छा, और वो kaise?(Wo मेरी बगलवाली कुर्शी पर बेथ गयी)

शिव : वो पता नहीं पर दूंगा जरूर, आज नहीं तो कल में कमाने लगूंगा तब दूंगा.

काव्य मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मज़ाक कर रही थी शिव कुछ काम अपनी ख़ुशी के लिए भी किये जाते है.

शिव : मतलब आप हम अनाथो पर महेरबानी करना चाहती है, अक्सर लोग हम पर तरस खा कर हमारी मदद करते है, शायद पुण्य कमाने के लिए.

काव्य मैडम :(शिव के हाथ पर हाथ रखते hue)Nahi ऐसी बात नहीं hai(Unhone अचानक हाथ रख दिया था पर फिर उन्हें एहसास हुआ तो उन्होंने अपना हाथ हटा लिया) शिव, में तुमपर कोई दया वाया नहीं दिखा रही, में तुम्हे जानती हु तो क्या में तुम्हारी मदद नहीं कर शक्ति, अगर कभी मुझे किसी मदद की जरुरत पड़ी तो क्या तुम अपना फायदा या नुकसान देखोगे.

शिव : नहीं मैडम, अगर कभी आप को मेरी मदद की जरुरत हो तो सिर्फ बोलके देखना, में आपके लिए कुछ भी करने से पीछे नहीं हटूगा.

काव्य मैडम :(मेरी आँखों में देख रही thi)Dekha जैसे तुम मेरी मदद करने को तैयार हो गए वैसे क्या में तुम्हारी मदद नहीं कर शक्ति.

शिव : (उनकी बातो से प्रभावित हो कर, मेने उनका हाथ अपने दोनों हाथमे ले liya)Thank यू मैडम. थैंक यू वैरी मुछ. अब में चलता हु, मुझे स्कूल जाना है.

काव्य मैडम : ठीक है. पर अपना ध्यान rakhna.(Kavya उसे जाता हुआ देख रही थी, उसके जाने के बाद उसने अपने हाथ को देखा जिसे शिव ने पकड़ा था, फिर कड़ी हो कर कोर्ट जाने के लिए तैयार होने लगी, तैयार होते होते उसे एक आईडिया आया, उसने फ़ौरन भार्गवी को फ़ोन लगा दिया.

काव्य : Hello मैडम , में काव्य बोल रही हु.

भरवावी : बोलिये मैडम, कैसे याद किआ.

काव्य : मैडम, ये जो कल रात हुआ, वो अनाथालय के कागजात के लिए हुआ है, ये तो आप को पता चल hi गया होगा, एक बार वो लोग नाकाम हुए है, दोबारा भी हुम्ला कर शक्ति है, में क्या कह रही थी, अगर हम ये प्रेस और मीडिया में ये बात कह दे की पुलिस ने अनाथालय के कागजात को अपने कब्जे में ले लिया है, तो फिर वो लोग अनाथालय पर हुम्ला नहीं करेंगे.

भार्गवी : ये सही कहा आपने, ठीक है, में करवाती हु.

काव्य : पर फिर आप पैर परेसुरे बढ़ जायेगा मैडम.

भार्गवी : आईटी इस part ऑफ़ ड्यूटी मैडम, में हैंडल कर लुंगी. पर ऐसा करने से शिव और उन लड़कीओ के ऊपर से खतरा हैट जायेगा. आज hi में प्रेस में ये बयां दे देती हु.

काव्य : थैंक यू वैरी मच मैडम. और कागजात मेरे पास सेफ है, में उसकी एक कॉपी आप को भी भिजवाडेति हु.

भार्गवी : Ok, चलिए, फिर मिलते है.

काव्य : जी मैडम.

उन्होंने फ़ोन रख दिया और वो कोर्ट के लिए निकल गयी.
 
अपडेट 63

में स्कूल के लिए निकल गया, आज बदल बहोत घिरे हुए थे, बारिश होने के पुरे आसार नजर आ रहे थे, में जल्दी दौड़ते हुए स्कूल की और जा रहा था. मेने देखा की नाज़िआ दीदी कड़ी थी. संयम नजर नहीं आ रही थी.

शिव : कैसी हो दीदी?

नाज़िआ : में ठीक हु, तुम कैसे हो?

शिव : में भी ठीक हु, संयम गयी?

नाज़िआ : है अभी अभी गयी.

शिव : तो आप अकेले क्यों कड़ी हो?

नाज़िआ : तेरा इंतजार कर रही थी.

शिव : मेरे इंतजार, क्यों?

नाज़िआ : बस ऐसे hi, वो दोनों अकेले होती है न, तू उनके पीछे जाता है तो मुझे रहत हो जाती है.

शिव : आप चिंता मात करो, सब ठीक है, वो लड़का भी काफी दिनों से नज़र नहीं आया.

नाज़िआ : फिर भी चिंता तो लगी रहती है न.

शिव : ठीक है, में चलता हु.

नाज़िआ : घर काब आ रहा है?

शिव : जल्द hi आता हु दीदी. मुझे देर हो रही है bye.

नाज़िआ : Bye. (वो शिव को दौड़ कर जाते हुए देखती रही, फिर अपने घर की और निकल गयी)

में स्कूल पहुंचने वाला था की जोरो से बरसात सुरु हो गयी, में थोड़ा सा भीग गया पर में स्कूल पहुंच गया था. सब क्लास में चले गए थे, में क्लास के दरवाजे तक पंहुचा तो मुझे सामने से आती हुई बिना मैडम दिखी. वो मुझे देख कर शर्माने लगी, में मुस्कुराते हुए उन्हें देख रहा था. वो एक दो पल के रुक गयी, वो मेरी और मुस्कुराते हुए देख रही थी. पर क्लास का बेल्ल बज गया था तो उन्होंने मुझे अंदर जाने का इस्सर किआ. में मुस्कुराते हुए अंदर दाखिल हो गया, वो भी मेरे पीछे अंदर दाखिल हो गयी.

जब बड़ी रेसस्स में में और मेरे दोस्त निकले तो हमे कई लड़के और लड़कीअ देख रहे थे, उनमे से कुछ लड़को ने मुझे ‘Hi शिव’ कहा और हाथ भी मिलाया. कुछ लड़कीओ ने भी ‘Hi शिव’ कहा.

महेश : ये क्या है भाई, बड़ा पॉपुलर हो गया है तू तो, जिसे देखो तुजे hi बुला रहा है, साला हमें तो कोई पूछता hi नहीं.

शिव : (मुस्कुरा रहा था, मेने देखा संयम और वैस्वी बैठे थे तो )Hi.

संयम : (खुस होते hue)Shiiiiv, hi, आओ न बैठो.

शिव : (मेने वैस्वी की और देखा तो उसका मुँह फुला हुआ था, शायद उसे हमारा यहाँ बैठना पसन् नहीं tha)Are नहीं, तुमलोग बैठो हम वह बैठते hai.(samim भी समाज गयी तो उसने ज्यादा फाॅर्स नहीं किआ)

हर्ष : (हम थोड़ी दुरी पर बेथ gaye)Sale बेथ जाता, क्यों नखरे दिखा रहा था. इस बहाने हमारा भी कुछ भला हो जाता.

महेश : और नहीं तो क्या.

शिव : तुम लोगोने देखा नहीं, हमारा वह बैठना वैस्वी को पसंद नहीं था. और जबरदस्ती किसी के गले पड़ना मेरी आदत nahi.(Hum अलग बेथ कर अपना नास्ता करने लगे)

संयम : तुम्हारा मुँह क्यों ऐसा हो गया. तुम्हे क्या प्रॉब्लम है शिव से.

वैस्वी : अगर तुजे उनके साथ बैठना है तो तू चली जा, में क्लास में जाती hu.(Wo उठने लगी तो संयम ने हाथ पकड़ कर वापस बिठा दिया)

संयम : बेथ!, मुझे कही नहीं जाना. पता नहीं तेरी क्या प्रॉब्लम है शिव से. चल नास्ता कर.

आज दिन में काफी बारिस हुई थी, मुझे लग रहा था की आज स्टेडियम भी पानी से भरा होगा तो, स्टेडियम जाना बेकार है. आसमान में अभी भी बदल छाए हुए थे, पानी गिरने की वजह से वातावरण ठंडा हो गया था, में दौड़ते हुए जा रहा था, संयम को छोड़ कर वैस्वी वापस लौट रही थी, उसने मेरी और देखा, मेने भी उसे देखा, वो निकल गयी, संयम मुझे देख कर रुक गयी.

संयम : Hi.

शिव : Hi.

संयम : चलो घर, पानी पि कर jana.(Muje आज स्टेडियम जाना नहीं था तो में ने बात मान ली, हम दोनों उसके घर पहुंच गए, संयम ने दरवाजा खटकाया तो उसकी अम्मी ने दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो थोड़ा हिचकिचाई)

अम्मी : आ ो बीटा. (हम दोनों अंदर गए तो नाज़िआ दीदी अपना चेहरा साफ़ कर रही थी पर साफ़ पता चल रहा था की वो रो रही थी.)

संयम : क्या हुआ अम्मी, आप क्यों रो रही है?

नाज़िआ : नहीं, में कहा रो रही हु?

संयम : आप, जूथ क्यों बोल रही हो, क्या हुआ?

नाज़िआ : कुछ नहीं हुआ, शिव, आ न बेथ. (मुझे समाज नहीं आ रहा था की में क्या करू, में अब जा भी नहीं शक्ति था, मुझे लग रहा था की में गलत वक़्त पर आ गया)

शिव : नहीं, में चलता हु, बाद में आऊंगा.

संयम : देखो आप, आपकी वजह से शिव जा रहा है, क्या हुआ, बतावा.

अम्मी : होना क्या है, अभी थोड़ी देर पहले इसके ससुरालवाले आये थे.

नाज़िआ : अम्मीी.

अम्मी : शिव कोई गैर नहीं है, मेरा बीटा hi है, अब इस से क्या छुपाना. इसके ससुरालवाले आये थे, वो लोग जल्द से जल्द तलाक लेना चाहते है.

संयम : तो दे दो न तलाक, वैसे भी ऐसे लोगो से रिस्ता रख कर क्या फायदा, जिन्हे इंसानो की कदर hi न हो.

अम्मी : तू चुप कर, अभी तेरी समाज में ये सब नहीं आएगा. जा शिव के लिए पानी और कुछ खाने को ले कर आ, जब देखो तब अपनी जुबान चलती रहती है.

संयम : है है, आप को तो में hi खटकती हु. (वो गुस्सा करती हुई अंदर चली गयी)

शिव : क्या बात है आंटी, अगर आप को दिक्कत न हो तो मुझे बता शक्ति है.

अम्मी : अरे नहीं बीटा, कुछ नहीं है, इसकी फूटी किस्मत और क्या, पता नहीं उपरवाले ने इसकी किस्मत में क्या लिखा है. तू बेथ, ये सब तो अब चलता hi रहेगा. में अपने कमरे में hu.(Wo उठ कर चली गयी, अब में और दीदी hi थे)

शिव : क्या बात है दीदी, वो आपको तलाक क्यों दे रहे है?

नाज़िआ : तू छोड़ न ये सब, मेरी किस्मत hi ख़राब है. तू आया और यहाँ ये सब बखेड़ा चल रहा था, तू छोड़ ये सब और बता तेरा कैसा चल रहा है?

शिव : (में दीदी के पास बेथ गया, उनका हाथ पकड़ते hue)Kya हुआ दीदी?

नाज़िआ : (उनकी आँखों से आंसू टपकने lage)Tu छोड़ न, मेने कहा न मेरी किस्मत hi ख़राब है, इसमें कोई क्या कर शक्ति है.

शिव : पर दीदी प्रॉब्लम क्या है?

नाज़िआ : (वो मेरी आँखों में देख रही थी, उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे) में माँ नहीं बन shaki(Wo फुट फुट कर रोने लगी) में उन्हें बच्चा नहीं दे शक्ति इस लिए वो मुझे तलाक दे रहे है.

(संयम अंदर कड़ी सब सुन रही थी, उसकी भी आँखों से आंसू निकलने लगे)

शिव : पर आप डॉक्टर का सहारा ले शक्ति है न, मेने सुना है आज कल तो बहोत साडी सुविधा हो गयी है. आप डॉक्टर से क्यों नहीं मिलती. (वो मेरी और देख रही थी) आप एक बार उनसे मिलके तो देखो.

संयम : (अंदर आते हुए) है आप, आप एक बार डॉक्टर से तो मिल लो. बिना वजह ये बखेड़ा खड़ा किआ हुआ है.

नाज़िआ : ठीक है, कल चलते है.

शिव : ये हुई न बात, चलिए अब मुस्कुरा दीजिये, आप रट हुए बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती.

नाज़िआ : (आँखों में आंसू थे पर मुस्कुरा रही thi)Ha जैसे मुस्कुराते हुए अच्छी लगती हु न.

शिव : कसम से, मुस्कुराते हुए तो आप जन्नत की हर लगती हो, क्यों सही कह रहा हु न संयम.

संयम : है आप, आप बहोत खूबसूरत हो.

शिव : आप इतनी खूबसूरत हो की आपके सामने ये संयम भी फीकी लगती है.

संयम : (मुँह फूलते hue)Shiiiiiv.

शिव : सच्ची दीदी, आप के सामने तो ये कुछ भी नहीं.

संयम : शीइइइइव, में मरूंगी तुम्हे.

नाज़िआ : तुम लड़ो मात, ये तो मुझे खुश करने के लिए कह रहा है, तू तो मेरी प्यारी गुड़िया है, किसी की नज़र न लगे मेरी गुड़िया को.

ऐसे hi थोड़ी देर उनके साथ मजाक मस्ती चलती रही, दीदी का मूड भी अच्छा हो गया. में वह से निकल गया. और जूही मैडम के घर पहुंच गया. आज बारिश की वजह से स्टेडियम जाना नहीं था तो वो फॉर्मल कपड़ो में hi दिखी. उन्होंने ब्लैक कलर का टॉप और जीन्स पहना हुआ था.

जूही म : आओ शिव, स्टेडियम में पानी भर गया है, तो आज जाना नहीं है.

शिव : मुझे भी ऐसा hi लगा था मैडम. फिर भी मेने सोचा की पूछ लू.

जूही म : नहीं अच्छा किआ, काव्य जी का भी फ़ोन आया था, उन्होंने कहा है की कल सुबह जल्दी निकलना है तो तुम उनके वह 7 बजे पहुंच जाना. स्नेहा का भी फ़ोन आया था, वो भी तुम्हारे बारे में पूछ रही थी. तुम्हारे लिए सब के फ़ोन मुझे hi आते है, तुम एक फ़ोन क्यों नहीं ले लेते.

शिव : ठीक है में सुबह पहुंच जाऊंगा. और रही फ़ोन की बात तो अभी तो वो मुमकिन नहीं, है फिर भी कुछ होता है तो ले लूंगा. सब आप को hi फ़ोन करते है क्यों की सब को पता है की में और आप रोज मिलते hi है, या यु कहे के मेरी लगाम आप के hi हाथ में है. और वैसे भी अच्छा है की मेरे पास फ़ोन नहीं है, मेरे लिए सरे कॉल आपके पास hi आते है तो आप को मेरे बारे में पता रहता है.

जूही म : (मुस्कुराते हुए) है वो तो है. तुम बैठो में तुम्हारे लिए दूध और नास्ता लती hu.(Wo कड़ी हो कर किचन में गयी)

शिव : नास्ते की जरुरत नहीं, में संयम के वह कर के आया हु.

जूही म : ओह, तो इसीलिए लेट आये, कैसी है वो, वो लड़का अभी भी परेशान करता है क्या?

शिव : अच्छी है वो, और अभी तो लगता है की सब ठीक है, वो लड़का दोबारा दिखा नहीं.

जूही म : में तुम्हे जितना लड़ाई झगड़े से दूर रहने को बोलती हु उतना hi तुम्हारे साथ ये सब होता रहता है. (मुझे दूध देते हुए) अपना ध्यान रक्खा करो, कही चोट लग गयी तो प्रॉब्लम न हो जाये.

शिव : में क्या कर शक्ति हु मैडम, में तो कही लड़ने गया नहीं, ये सब हो रहा है तो में भाग भी नहीं शक्ति.

जूही म : में बस इतना कह रही हु की अपना ध्यान रखना.

शिव : जी मैडम.

जूही म : और है, तुम वह से वापस आओ फिर, हम तुम्हारे डोनेशन के लिए जो सोचा है उसका काम करेंगे.

शिव : ठीक है मैडम.

उसके बाद गयम गया और वह से घर लोट आया. आज भी वह दो हवलदार बैठे हुए थे. मेने उनसे बात की और उन्हें कुछ चाहिए हो तो आवाज लगाने के लिए बोल दिया. रात को हम पढ़ने भी बैठे. एक घंटा पढ़ने के बाद विणा ये कह कर चली गयी की मुझे नींद आ रही है. रंजन जैसे उसके जाने का hi वेट कर रही थी, उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे दरवाजे के पीछे ले गयी और मेरे होठो को चूमने लगी.

शिव : क्या हुआ?

रंजन : कुछ नहीं, बस थैंक यू बोलना था.

शिव : किस बात के लिए?

रंजन : हम सब के साथ रहने के लिए, हम सब को बचने के लिए, और बहोत कुछ है.

शिव : पागल, इसमें थैंक यू कैसा, ये मेरा फ़र्ज़ है.

रंजन : फिर भी थैंक you.(Ye कह कर वापस वो मेरे होठ पे किश करने लगी)

शिव : (किश करने के baad)Chal अब, सोना है, दीदी भी इंतजार कर रही होंगी.

रंजन : अरे एक बात तो कहना भूल gayi(Wo एक लिफाफा ले आयी) ये तुम्हारे लिए आया था. दीदी ने कहा था की तुजे याद कर के दे दू.

शिव : क्या है ये?

रंजन : पता नहीं. खुद देख ले.

मेने लिफाफा खोला तो अंदर एक चिट्ठी थी.

Hello शिव,

शायद तुम मुझे जानते होंगे, मेरा नाम गायत्री है, में भी इसी अनाथालय में hi रहती थी. अगर मेरे बारे में याद न आये तो लता से पूछ लेना. मेने अनाथालय के बारे में समाचार देखा था, वैसे में जहा हु वह मुझे ये समाचार दिखा वो भी मेरी किस्मत hi है, शायद भगवन अभी भी मुझपे कही न कही मेहरबान है. तो मेरी अच्छी किस्मत से मुझे वो समाचार दिख गए, मुझे ये जान कर बहोत ख़ुशी हुई की तुमने उस मैनेजर को सबक सिखाया. सच में इतनी ज्यादा ख़ुशी मुझे कभी नहीं हुई. उस हैवान की वजह से आज में इस हालत में हु. मेने तुम्हे ये चिट्ठी लिखी है, पर ये भी नहीं जानती की तुम तक पहुंचे गई भी या नहीं. में भगवन से प्रार्थना कर रही हु की ये तुम तक पहुंच जाये. आज तक मेने किसी को भी ये नहीं बताया था, बताती तो भी किस से, कोण है इस दुनिया में जिसे में कुछ बताती. तुम्हारे बारे में सुन कर अच्छा लगा, मुझे ऐसा लगा की अनाथालय hi एक ऐसी जगह हे जिसे में घर कह शक्ति हु, पर मैनेजर के रहते वो भी मुज से छूट गया.

तुम सोच रहे होंगे की मैंने तुम्हे ये चिट्ठी क्यों लिखी. अब क्या बताऊ और कैसे बताऊ समाज नहीं आ रहा. शिव में एक रंडी खाने में हु, क्सक्सक्स सहर के रेडलीगत एरिया मेचुन्नीबाई के कोठे में रहती हु. रहती हु नहीं कह शक्ति, कैद हु. पता नहीं क्यों पर तुम्हारे बारे में सुन कर मुझे कुछ उम्मीद दिखी, अगर हो शेक तो मुझे यहाँ से बचा लो. मेने ये चिट्ठी भी मेरे एक ग्राहक के हाथ से भिजवाई है, पता नहीं वो तुम्हे भेजेगा की नहीं, अगर तुम्हे वो मिले तो हो शेक तो प्लीज मेरी मदद करना.

और अगर न कर पाओ तो दिल में कोई बोझ मत रख न. वैसे भी हम अनाथो का कोई भाग्य नहीं होता, और हमारी कुंडली में तो भगवन ने ऐसा कुछ लिख दिया है की हम दर दर की ठोकरे खा रहे है. अब इतनी ख़ुशी है की अनाथालय को उस मैनेजर से छुटकारा मिल गया है, अब कोई गायत्री नहीं बनेगी.

अपना और अनाथालय का ख्याल रखना.

एक अभागी

गायत्री.

शिव : (चिट्ठी पढ़ कर मेरे होश उड़ गए, मेरे चेहरे पर आये दर्द को देख कर रंजन भी बेचैन हो गयी)

रंजन : किसकी चिट्ठी है?

शिव : किसी गायत्री की है, वो इसी अनाथालय में रहती थी, क्या तुम जानती हो.

रंजन : मुझे याद है वह तक तो एक गायत्री दीदी थी, पर एक दिन वो यहाँ से भाग गयी थी. क्यों क्या hua?(Mene वो चिट्ठी रंजन को दी, वो पढ़ने लगी, उसके चेहरे के हावभाव भी बदलने लगे) ये कैसे हो गया. अब क्या होगा?

शिव : वो मेरी मदद मांग रही है.

रंजन : (समजते हुए) देखो शिव, ऐसा सोचना भी मात, वो एक अनजान सहर है, और मेने जहा तक सुना है ये बहोत खतरनाक लोग होते है. नहीं शिव, जो होना था वो हो गया, तुम अपनी जान जोखिम में नहीं डालना.

शिव : अगर उसकी जगह तुम होती to?(Itna सोच कर hi रंजन अंदर तक कैंप गयी) सिर्फ सोच कर hi तुम्हारी ये हालत है तो सोचो, उन पर क्या बिट रही होगी.

रंजन : पर तुम क्या कर पाओगे, वो बहोत खतरनाक जगह होती है, वह के लोग भी बहोत खतरनाक होते है शिव, अगर तुम्हे कुछ हो गया तो हमारा क्या होगा. में समझती हु की वो बहोत मुस्किलो में है पर अगर तुम्हे कुछ हो गया तो हम सब मुस्किलो में आ जायेंगे शिव. में लतादिदी को बताती हु.

शिव : नहीं, तुम उन्हें कुछ नहीं बताओगी. और अभी तक तो मेने भी उस बारेमे नहीं सोचा है. अभी ये सब निपट जाये तो फिर उसके बारेमे सोचेंगे. चलो अभी सोते है.

दोनों सोने चले गए. रंजन का दिल घबरा रहा था. शिव की भी समाज में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, अपने खयालो में सोचते हुए वो सो गया. सुबह उठ कर में तैयार हुआ और दीदी को बता कर में निकल गया. में सीधा नव्या मैडम के घर चला गया. मेने दुर्बल बजायी तो, वही आंटी ने दरवाजा खोला.

आंटी : आ जाओ शिव, betho.(Wo मेरा नाम जानती थी, शायद नव्यमादाम ने बताया होगा की में आनेवाला हु) क्या करते हो बीटा?

शिव : जी में, 11वि क्लास में पढता हु.

आंटी : काव्य से किस काम के लिए मिलने आते हो?

शिव : जी, वो अनाथालय में कुछ हो गया था, इसी वजह से मैडम हमारी हेल्प कर रही है. (इतने में मैडम भी आ गयी, आज मैडम अलग hi कपड़ो में थी, उन्होंने जीन्स पहना हुआ था और ऊपर T-shirt पहनी हुई थी, वो इतनी खूबसूरत लग रही थी की में उन्हें देखता hi रह gaya,)(Kavya ने भी ये नोटिस किआ की शिव उसे आंखे फाडे देख रहा है, नारी सहज उसे ये अच्छा लगा)

नव्या म : गुड मॉर्निंग शिव.

शिव : (खड़े होते hue)Ggg...Good मॉर्निंग मैडम.

नव्या म : क्या बाटे हो रही थी मम्मी से.

शिव : कुछ नहीं, बस ऐसे hi.

न की माँ : कब तक वापस आओगी?

नव्या : शाम तक या रात तक.

न की माँ : बेटी, संभल कर जाना, तेरी शादी हो गयी होती तो मुझे ऐसी चिंता न होती.

नव्या : क्या मम्मी, आप की हर बात घूम फिर कर शादी पर hi आ जाती है.

न की माँ : तो कोनसा गलत कह रही हु, (Muje)tum hi बताओ बीटा, इससे में शादी करने के लिए कह रही हु तो क्या गलत कह रही हु, इसकी उम्र की लड़कीओ के यहाँ तो बच्चे भी होगये है, क्या हमारा मान नहीं करता की हम तेरा सुखी संसार देखे. (अब में क्या कहता, में बस उनको सुन रहा था और मैडम को देख रहा था)

नव्या : इसमें तुम शिव को क्यों घसीट रही हो, उसे क्या पता इन सब का.

न की माँ : पर तुम्हे तो पता है न, अभी भी टाइम है, शादी कर लो फिर उम्र बढ़ जाने के बाद कोई भी लड़का मिलेगा नहीं.

नव्या : क्या शादी करना इतना जरुरी है, मम्मी. में खुस हु अपनी जिंदगी से, में किसी को अपने ऊपर हुकुम चलते हुए बर्दास्त नहीं कर शक्ति. मुझे नहीं करनी शादी. और अब इस बारे में कोई बहेश नहीं. हमें चाय नास्ता दो ताकि हम जा shake.(Muh फुला कर उनकी मम्मी अंदर चली गयी, और नव्या मैडम मुस्कुराते हुए सोफे पर बेथ गयी) तो तैयार जाने के लिए.

शिव : जी मैडम, पर हमें जाना कहा है.?

मैडम : क्सक्सक्स सहर.

शिव : (सहर का नाम सुन कर में चौक गया, ये वही सेहर था जहा गायत्रीदिदी रहती थी.)

क मैडम : (शिव के चेहरे पर आये बदलाव देख कर काव्य ने पूछ hi liya)Kya हुआ शिव, सहर का नाम सुन का तुम चौंक क्यों गए, कभी गए हो वह?

शिव : नहीं में वह कभी नहीं गया, मैडम आप हमारे यहाँ से जो कागजात लेकर आये हो उसमे एक रजिस्टर भी होगा जिसमे सब बच्चो की डिटेल लिखी हुई है. और वह उनके फोटो भी चिपकाये हुए है.

क मैडम : है है.

शिव : एक बार में उसे देखना चाहता हु.

क मैडम : है चलो, ऑफिस में है. (हम ऑफिस में आ गए, उन्होंने वो रजिस्टर निकल कर दिया, में उसमे गायत्रीदिदी की डिटेल ढूंढने लगा) क्या धुंध रहे हो?

शिव : एक गायत्री नाम की लड़की है, उसके बारे में.

क मैडम : क्यों, क्या हुआ है?

शिव : वो में आप को बाद में बता ता hu(Muje वो मिल गया, उनकी कुछ तस्वीर भी लगी हुई थी, लास्ट तस्वीर कुछ सालो पहले की थी, चेहरा देख कर मुझे भी कुछ कुछ याद आने लगा, मेरे दिमाग में भी उनकी यादे उभरने लगी, ज्यादा तो मुझे याद नहीं था पर वो मुझे याद आ गयी, मेने रजिस्टर मैडम को वापस दे दिया) ठीक है चलिए मैडम चलते है.

हम नीचे आ गए, मैडम ने अपनी कार निकली, में उनके साथ आगे बेथ गया. मैडम ने सहर से बहार गाड़ी निकल ली और अब हाईवे पर गाड़ी स्पीड से चल रही थी.
 
दो दिन से बहार था तो टाइम नहीं मिला, आज लिख रहा हु, जैसे hi ख़तम होगा, में पोस्ट कर दूंगा.
 
अपडेट 64

गाड़ी, अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी, कार के शीशे बंद थे और अंदर एक की ठंडक थी, थोड़ी दूर जाने के बाद मैडम ने धीमी आवाज में गाने चालू कर दिए.

काव्य म : में देख रही हु शिव की जब से हम निकले है तुम चुपके चुपके मुझे hi देख रहे हो.

शिव : (हड़बड़ाते हुए) N...nahi तो मैडम.

काव्य म : (हस्ते हुए) जूथ मत बोलो, में कब से ये देख रही हु, अब बता भी दो क्या देख रहे हो.

शिव : सॉरी मैडम, वो आप को अब तक ऐसे कपड़ो में देखा नहीं था न, आज आप एकदम अलग लग रही हो.

काव्य म : अलग लग रही हु से क्या मतलब है तुम्हारा, क्या में अच्छी नहीं लग रही?

शिव : आप तो बहोत अच्छी लग रही है मैडम, ऐसा लग रहा है जैसे कोई कॉलेज जानेवाली लड़की हो.

काव्य म : (खिल खिला कर हस्ते हुए) क्या, मुझे बना तो नहीं रहे हो?

शिव : बिलकुल नहीं मैडम, आप सच में वैसी hi लग रही है, कसम से.

काव्य म : चलो मान लिए, पर तुम मुझे क्यों देख रहे हो?

शिव : सॉरी मैडम, वो बार बार नजर चली जाती है, सॉरी.

काव्य म : (काव्य ने देखा की शिव अब संभल कर बैठा है और सिर्फ सामने की और hi देख रहा था, उसकी और नहीं देख रहा था, वो उसकी इस मासूमियत पर मुस्कुरायी, वो बोली कुछ नहीं बस गाड़ी चलती रही, वैसे भी रास्ता लम्बा था और ऐसे बिना बात किये चलना बोर्रिंग हो जाता इस लिए उसने hi बात chhedi)Mere कहने पर तो तुम एकदम चुप हो गए.

शिव : ंन्न नहीं तो.

काव्य म : तो फिर बोलते क्यों नहीं, मेने तो बस ऐसे hi कहा था.

शिव : है पर ऐसे किसी को देखना अच्छी बात नहीं होती न.

काव्य म : पर मेने तुम्हे कुछ कहा क्या, छोडो उस बात को, और कोई बात करो.

शिव : क्या बात करू मैडम.

काव्य म: कुछ भी, पर ऐसे चुप मात रहो, अभी हमे बहोत लम्बा रास्ता तय करना है, और अगर ऐसे चुप चुप बैठे रहे तो रास्ता बहोत ज्यादा लम्बा लगेगा और बोर भी हो जायेंगे, इस लिए कुछ भी बात करो.

शिव : आप की मम्मी कह रही थी आप को शादी करने के लिए, तो आप शादी क्यों नहीं करलेती?

काव्य म : (काळा चश्मे में से रस्ते पर नजर रक्खे हुए hi वो muskurayi)Wo इसलिए की, मुझे ऐसा कोई इंटरेस्ट नहीं है.

शिव : ऐसा क्यों मैडम?

काव्य म : ऐसा क्यों से क्या मतलब है तुम्हारा, इंटरेस्ट नहीं है तो नहीं है.

शिव : आप की मम्मी तो आप को बार बार शादी के लिए कह रही थी, और देखा जाये तो वो सच hi कह रही थी. आप को शादी तो करनी hi चाहिए.

काव्य म : क्यों करनी चाहिए मुझे शादी, मुझे किसी की जरुरत नहीं है. में खुद कमेटी हु, मुझे किसी पर निर्भर नहीं रहना, में अकेली hi ठीक हु.

शिव : इसमें जरुरत कहा से आ गयी मैडम, आप शादी करोगी तो आप को एक साथी मिलेगा, शादी करने से आप को उसका प्यार मिलेगा है और फिर परिवार भी मिलेगा.

काव्य म : ऐसा कुछ नहीं होता, में रोज कितने hi लोगो को कोर्ट में देखती हु जिन्होंने शादी की है और कोर्ट में ऐसे लड़ते है जैसे जन्मो के दुसमन हो. मुझे तो उनलोगो में कभी प्यार नहीं दिखा.

शिव : सब एक जैसे थोड़ी न होते है, आप के मम्मी पापा को भी आप देखती hi होंगी, उन्होंने शादी की तभी तो उन्हें आप जैसे एक प्यारी बेटी मिली.

काव्य म : (मुस्कुराते हुए शिव की और देखती hai)Bate अच्छी बना लेते हो. कहा से सीखा ये सब.

शिव : हमे कोण सिखाएगा, जिंदगी की ठोकरों ने सब सीखा दिया, हम से ज्यादा, परिवार की जरुरत कोण समाज पायेगा.

काव्य म : (उसकी और देख रही थी, उसके चेहरे पर तड़प थी) मुझे ये सब समाज नहीं आता शिव, मुझे तो ये समाज नहीं आता की शादी करनी hi क्यों होती है, सिर्फ परिवार बढ़ने के लिए.

शिव : ऐसा थोड़ी हे मैडम, किसी के साथ रहने से कितना अच्छा लगता है, उसके साथ प्यार करने जैसा एहसास की तुलना इस दुनिया में किसी से नहीं की जा शक्ति.

काव्य म : तुम्हे कैसे पता, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या. (काव्य म की बात से शिव झेप गया)

शिव : Nahi....me तो बस वही कह रहा था जो सब कहते hai.(Shiv ने अपने आप को सँभालते हुए कहा)

काव्य म : तो जिस चीज का तुमने कोई अनुभव hi नहीं किआ उसके बारे में ऐसे कैसे कह शक्ति हो?

शिव : में तो बस ये कह रहा था की, किसी के साथ प्यार करने से दिल को बहोत शकुन मिलता है, में तो अपने अनाथालय के सभी लोगो से प्यार करता हु, तो मुझे अच्छा लगता है.

काव्य म : वैसे तो में भी अपने मम्मी पापा से प्यार करती हु और वो भी मुझे अच्छा लगता है, तो फिर शादी करने की क्या जरुरत?

शिव : वो प्यार अलग होता है मैडम.

काव्य म : मुझे पता था की तुम सब जानते हो, में वकील हु बच्चू, मुज से जूथ बोलोगे तो एक hi मिनट में पकड़ लुंगी. बताओ कोण है वो?

शिव : (अब में क्या कहता, एक हो तो बताऊ, मुझे तो हर जगह से प्यार मिला है, चाहे वो लतादिदी हो, रंजन हो स्नेहा मैडम हो या फिर सरिता दीदी) नहीं ऐसा कोई नहीं है, में तो बस ऐसे hi कह रहा था, ऐसा सब कहते है, इसी लिए मेने कहा.

काव्य म : तुम बताना न चाहो पर मुझे पता है वो कोण है?

शिव : क्या आप को पता है, कोण?

काव्य म : जूही. सही कहा न.

शिव : ये आप क्या बोल रही है मैडम, जूही मैडम, न न वो तो वो तो, नहीं मैडम में उनके बारे में ऐसा सोच भी नहीं शक्ति.

काव्य म : क्यों नहीं सोच सकते, इतनी तो खूबसूरत है वो.

शिव : वो बहोत खूबसूरत है मैडम, पर वो मेरी जिंदगी में एक खास महत्व रखती है, उन्ही की वजह से तो मुझे जीवन में एक मकसद मिला है, वो hi तो है जिन्होंने मेरा हाथ थम कर मुझे सही रह दिखाई है, में उनके बारे में ऐसा सोच भी नहीं शक्ति.

काव्य म : सॉरी, अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो, मेने तो वही कहा जो मुझे दिखा, तुम दोनों एक दूसरे के इतने नजदीक हो तो मुझे लगा की वही होगी. और कोई है?

शिव : नहीं मैडम, कोई नहीं है.

काव्य म : तुम बताना नहीं चाहते तो कोई बात नहीं, तुम्हारी मर्जी, पर मुझे ऐसे रिलेशन में कुछ खास नहीं लगता इस लिए में शादी नहीं करना चाहती.

शिव : (में थोड़ी देर खामोस रहा, वो गाड़ी चला रही थी, में कभी उनको तो कभी रास्तो को देख रहा था) मुझे लगता है आप ने आज तक किसी लड़के के साथ कोई रिस्ता नहीं बनाया है.

काव्य म : ऐसी कभी जरुरत hi नहीं लगी मुझे. मुझे पढ़ाई पसंद थी और में हमेशा पढ़ाई में hi रही.

शिव : आप किसी के साथ रिस्ता बना कर तो देखिये, फिर पता चलेगा आप को.

काव्य म : ऐसा क्या होता है? चलो तुम उसका नाम मात बताओ पर ये तो बता शक्ति हो न की तुम्हे उसके साथ कैसा फील होता है?

शिव : (कुछ देर सोचने के baad)Me उन्हें देखता हु तो ऐसा लगता है की बस उन्हें देखता hi राहु, उन्हें छूना उन्हें महसूस करना, उनकी आँखों में अपने लिए प्यार देखना, ये सब बहोत अच्छा लगता है. जब में उन्हें छूटा हु या वो मुझे छूती है तो शरीर में एक अजीब सा एहसास होता है, खून दुगनी रफ़्तार से दौड़ने लगता है और धड़कने तेज हो जाती है.

काव्य म : (मेरी और देखते hue)Unhe... मतलब वो तुम से बड़ी है या फिर एक से ज्यादा है.

शिव : (उनकी बात सुन कर में हड़बड़ा गया, क्यों की वो जो कह रही थी एकदम सही था) ाआआप तो मेरे शब्दों को पकड़ रही है.

काव्य म : (वो खिल खिला कर हसने लगी, थोड़ी देर हसने के baad)Sorry.... पेषे से वकील हु तो अब आदत हो गयी है.

शिव : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Muje अब कुछ नहीं बताना.

वो मेरी और मुस्कुरा कर देख रही थी, फिर उन्होंने कुछ नहीं पूछा, गाड़ी अपनी रफ़्तार से आगे चली जा रही थी, करीब दो घंटे चलने के बाद उन्होंने गाड़ी एक ढाबे पर रोकी.

काव्य म : आओ, फ्रेश हो जाते है, और चाय नास्ता भी करते है, ताकि में रिलैक्स हो जाऊ. गाड़ी चलते चलते हड्डिया अकड़ गयी है.

शिव : जी मैडम.

वह औरतो के लिए बाथरूम बना था उस और वो चली गयी, में भी एक और बने बाथरूम में चला गया. जब में बहार आया तो वो अभी भी आयी नहीं थी तो में उनका वेट करने लगा. मेने देखा की ढाबे के आस पास काफी जगह थी और वह एक दो ट्रक भी पड़े हुए थे. ढाबे के आगे जगह बड़ी थी और वह खत बिछा रक्खी थी पर धुप की वजह से वह कोई बैठा नहीं था.

काव्य म : क्या देख रहे हो?

शिव : (पीछे से एकदम से हुई आवाज से में चौक गया, मेने पीछे पलट कर देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, सच में वो कमल की thi)Kuchh नहीं, बस ऐसे hi.

काव्य म : चलो, अंदर चलते है. (हमदोनो अंदर चले गए, अंदर टेबल और कुर्शिया थी जिसपर हम जा कर बेथ गए, हम चाय नास्ता करने lage)Kya तुम लड़कीओ की तरह शर्मा रहे हो, में किसी को कुछ नहीं बताउंगी, और मुझे जरुरत भी क्या है किसी को कुछ बताने की. में तो बस ये जान न चाहती हु की आखिर ऐसा क्या होता है जिस से दो लोग आपस में जुड़ कर रहते है. प्लीज बताओ न.

शिव : ठीक है, हम कार में hi बात करेंगे.

(वो मुस्कुरायी, हमने इधर उधर की बात करते हुए चाय नास्ता किआ और फिर हम निकल पड़े अपनी मंजिल की और, थोड़ी देर चलने के बाद उन्होंने फिर बात छेड़ी)

काव्य म : तो अब बताओ, क्या कह रहे थे?

शिव : क्या जान न चाहती है आप?

काव्य म : में ये जान न नहीं चाहती की तुम्हारा सम्बन्ध किसके साथ है, ये तुम्हरो पर्सनल बात है तो में तुम पर कोई दबाव नहीं बना न चाहती, हां अगर तुम कभी बताना चाहो तो ठीक है, अभी बस में ये जान न चाहती हु की ऐसा क्या है जो तुम्हे वो अच्छी लगती है या तुम्हे उसके साथ अच्छा लगता है.

शिव : में खुद इस बारे में ज्यादा नहीं जनता पर (थोड़ी देर में खामोश raha)par ऐसा कुछ है उसमे जो मुझे उसकी और आकर्षित करता है. ये सब अंदर से hi होता है, उसका हसना, उसका चेहरा, उसके बाल, उसका बाटे करना aur...(Me बोलते बोलते रुक गया)

काव्य म : और क्या?

शिव : मैडम वो सब में नहीं बता शक्ति, ये थोड़ा ज्यादा हो जायेगा.

काव्य म : प्लीज बताओ न, मुझे जान न है की आखिर ऐसा क्या होता है जो एक इंसान दूसरे इंसान के प्रति आकर्षित होता है. मेने पढ़ाई के आलावा और अपने प्रोफेशन के आलावा कभी कुछ सोचा hi नहीं, शायद इसीलिए में आज अकेली हु, या मुझे अकेले रहना hi अच्छा लगता है. जो चीज हम जानते hi नहीं उसके प्रति हमे कैसे आकर्षण होगा.

शिव : पर मैडम, ये बाते थोड़ी निजी जो जाएगी, हो शक्ति है शायद आप को अच्छा न भी लगे.

काव्य म : तुम बताओ, में कुछ बुरा नहीं मानूंगी, सच में आज तक ऐसा कोई दोस्त बना hi नहीं, जिस के साथ मेने ऐसी बाते की हो, आज अगर ये बात निकल रही है तो प्लीज मुझे बताओ.

शिव : मैडम, में एक लड़का हु और में अपना नजरिया बता शक्ति हु, वो एक लड़की है तो मुझे उनमे क्या अच्छा लगता है वो में बता शक्ति हु, पर वो एक लड़की की तरह मेरे लिए क्या सोचती है वो में नहीं बता शक्ति.

काव्य म : तुम अपनी बात तो बताओ, तुम उसमे क्या देखते हो, तुम्हे उसमे क्या अच्छा लगता hai?(Me क्या कहु कुछ समाज नहीं आ रहा था, में रस्ते पर देख रहा था पर मेरे दिमाग में बहोत कुछ चल रहा था, मुझे शर्म भी आ रही थी की इनके साथ ऐसी बाते करना क्या ठीक है, ये क्या सोचेगी मेरे बारे me)(Kavya उसके चेहरे के बदलते भाव देख रही थी, उसने फिर अपनी निगाहे रस्ते पर jamayi)itna क्या सोच रहे हो, अब बता भी दो.

शिव : (मेने एक लम्बी साँस ली) सामान्य तौर पर हमे सामनेवाला तब अच्छा लगता है जब वो हमारे साथ अच्छा व्यव्हार करता है, अगर वो हमारे साथ अच्छा व्यव्हार नहीं करता तो वो हमें अच्छा नहीं लगता, चाहे वो रिश्ते में कोई भी हो, अगर माँ हमारे साथ अच्छा सलूक न करे तो वो भी हमे अच्छी नहीं लगेगी, तो सबसे महत्वपूर्ण है की उसका हमारे प्रति व्यव्हार कैसा है. इन सब के लिए काफी समय जाता है, क्यों की हम किसी को एक मुलाकात में या छोटे से अंतराल में तो जान नहीं shakte.(Kavya बड़े गौर से उसकी बाते सुन रही थी, वो ये मान रही थी की शिव जो कुछ भी कह रहा है वो सात प्रतिशत सही है) पिछले कुछ समय से एक बात में और समाज रहा हु, कभी कभी हमे कोई इंसान सिर्फ देखने से hi अच्छा लगने लगता है, हम उसके बारेमे कुछ भी नहीं जानते पर सिर्फ देखा है, पता नहीं क्यों पर सिर्फ देखने से hi हमे वो अच्छा लगता है, हम उसके प्रति आकर्षित होते है. मुझे लगता है ये इस्सलिये होता है क्यों की कुदरत ने हमारे अंदर ऐसा कुछ बनाया है ताकि हम किसी को देख कर उसकी और आकर्षित होते है. जैसे हमे कोई अच्छा चेहरा दीखता है, या उसका शरीर अच्छा होता है या उसके शारीरिक लक्षण कुछ खास होते है तो हम उसकी और आकर्षित होते है. है ये पल भर का भी हो शक्ति है या फिर कुछ समय का भी हो शक्ति है, हम उसके शारीरिक देखव से उसकी और आकर्षित हो गए हो पर अगर हमे उनका बर्ताव अच्छा न लगे तो फिर वो हमे अच्छा नहीं लगता.

काव्य म : (शिव की बातो से वो काफी प्रभावित हो रही थी) क्या बात है शिव, मुझे नहीं लगा था की तुम इतना गहरायी से सोचते हो. तुम्हे देख कर तो यही लगता है की तुम एक भोले भले स्कूल जानेवाले लड़के हो. तुम्हारी बात बिलकुल सच है.

शिव : यही तो में कह रहा था की आपने मुझे देखा और मेरे बारे में कुछ धारणाये बना ली, ऐसा hi होता है, जब हम किसी को देखते है तो उसके चेहरे के अनुसार हम उसके बारेमे धारणाये बनलेते है. तो ऐसे hi जब कोई लड़का किसी खूबसूरत लड़की को देखता है तो वो ऐसे hi धारणाये बनालेता है, और यही लड़कीओ के साथ भी होता है. हो शक्ति है की जैसा हमने सोचा हो या जैसा हमें लगा हो वैसा वो न भी हो. पर में बात कर रहा हु उस फर्स्ट लुक की, या यु कहे की हमारी पहली नज़र की. तो हम पहली hi नज़र में किसी को पसंद करने लगते है, ये इस लिए होता है की हमारे अंदर कुदरत ने ये सब बनाया है, जब हम बड़े हो जाते है, मेरा मतलब है की पुख्त हो जाते है तो हमे विरुद्ध जाती के प्रति आकर्षण होता है, उसके शरीर की रचना, उसके शारीरिक लक्षण, ये सब हमें आकर्षित करते है. और ये सब इस्सलिये होता है की कुदरत अपना काम कर रही है, और कुदरत का काम है, संतति को आगे बढ़ाना.

काव्य म : रुको रुको... ये सब क्या कह रहे हो, मेरे तो ऊपर से जा रहा है, कुछ आसान सब्दो में समजाओ तो कुछ पता भी चले.

शिव : (मुस्कुराते हुए मेने उन्हें dekha)Aasan सब्दो में शायद आप को अच्छा नहीं लगेगा.

काव्य म : तुम बोलो तो.

शिव : आप और में या यु कहे के इंसान या प्राणी या पौधे या कोई भी जिव, क्यों पैदा हुआ है?

काव्य म : क्यों?

शिव : किसी भी प्राणी का उसके जीवन में एक hi काम होता है, सब से पहला काम है, अपने जीवन की रक्षा करना, दूसरा, अपने जीवन को टिकाये रखने के लिए खाना, और तीसरा, अपनी जाती तो आगे बढ़ने के लिए प्रजनन करना.

काव्य म : तो फिर हम सब ये सब क्यों करते है, क्यों ये पढ़ाई लिखाई करते है, या दूसरी सब चीजे.

शिव : ये सब समझने के लिए आप को बहोत गहरायी से सोचना पड़ेगा, अभी आप इतना hi समाज लीजिये, कुदरत में नर और मादा, ये दो hi होते है, या तो नर मादा को आकर्षित करता है, या मादा नर को, ये सब संतति के लिए होता है, जो कुदरत का तीसरा उद्देस्य है. नर या मादा, किसी को आकर्षित करने के लिए, खुद को दुसरो से बेहतर प्रदर्शित करता है, िस्ससि लिए प्राणिओ में लडाईअ होती है, जो जीता उसके प्रति वो आकर्षित होता है, तो हम सब भी अपने आप को बेहतर बनाते है ताकि हम किसी को आकर्षित कर शेक, पर हम इंसान, इस सोच से थोड़ा आगे निकल गए है, अब हमें खुद को सबसे अच्छा साबित करना है, और ये सायद हमारा ईगो है, पर शुरुआत तो वही से हुई थी. ये सब बहोत ज्यादा हो जायेगा मैडम, तो बात इतनी सी है की हम किसी के अच्छे शरीर से आकर्षित होते है और हम अपने आपको अच्छा दिखा कर किसी को आकर्षित करते है ताकि वो सब हो शेक.

काव्य म : तो तुम ये कहना चाहते हो की में आज अच्छे से तैयार हो कर इस लिए आयी हु ताकि में किसी को, आकर्षित कर शकु.

शिव : नहीं, ऐसा तो नहीं कह शक्ति पर है, कोई भी सजता सवरता इसीलिए है ताकि वो दुसरो से अच्छा दिखे, तो आप बताइये आप दुसरो से अच्छी क्यों दिखना छह रही है?

काव्य म : अरे बाप रे... ऐसा तो मेने कभी सोचा hi नहीं था. (मुस्कुराते hue)Kya तुम कोई संत महात्मा हो?

शिव : (उनकी बात से में है pada)Nahi मैडम, में तो एक सामान्य सा लड़का हु.

काव्य म : (वो भी है पड़ी, हम दूसरे दो घंटे बिता चुके थे, अब्बी भी हमारी मंज़िल एक घंटा दूर थी) चलो, कही खाना कहते है, फिर आगे का प्रवचन sunugi.(Me भी मुस्कुरा दिया)

उन्होंने एक अच्छे से होटल के पास गाड़ी रोकी जहा रेस्टोरेंट भी था और हम दोनों फ्रेश होने के बाद अपना आर्डर दे कर खाने का वेट करने लगे. यहाँ पर कुछ ट्रांसपोर्ट की बस भी रुक रही थी, और कुछ प्राइवेट गाड़िया भी रुक रही थी. हमारे टेबल से कुछ दुरी पर चार लड़के बैठे हुए थे और मस्ती कर रहे थे. मैडम मेरे सामने बैठी हुई थी, तो उनकी पीठ उन लड़को की तरफ थी. थोड़ी देर में खाना आ गया और हम खाना खाने लगे. हमारा खाना तक़रीबन ख़तम होने को आया था. मेने देखा की एक लड़का बहार किसी की और इस्सर करते हुए दूसरे लड़के को कुछ दिखा रहा था. मेने भी उस और देखा तो एक लड़की अकेली कड़ी थी. दूसरे भी लोग होटल के अंदर आ रहे थे पर वो वही कड़ी थी और आस पास कुछ धुंध रही थी. मेने उन लड़को की और देखा तो अब वो चारो उस और देख रहे थे, एक दूसरे को इस्सर करके वो लोग बहार चले गए. मेने देखा की वो लड़की बहार बने वाशरूम की और चली गयी. वो चारो भी उसके पीछे चले गए. मेरे मान में आशंका हुई.

शिव : मैडम, में वाशरूम हो कर आता हु.

काव्य म : ठीक है, तुम जाओ, में बिल चूका कर कार में तुम्हारा वेट करती हु.

शिव : ठीक है मैडम. (में फटाफट उस और निकल गया)
 
अपडेट 65

में जब साइड में बने बाथरूम की और गया तो वह कोई नहीं था. न मुझे वो लड़के दिखे न hi वो लड़की. में पुरुषो के लिए बने पेशाबखाने के अंदर गया पर वह भी कोई नहीं था. में जल्दी से बहार निकला और महिलाओ के लिए बने पेशाबखाने के पास गया. में दुविधा में था, में अंदर तो जा नहीं शक्ति था, में वही खड़ा रहा, एक दो महिलाये अंदर से बहार निकली, वो सामान्य लग रही थी, मतलब अंदर तो कोई गड़बड़ नहीं थी. में परेशान हो कर इधर उधर देखने लगा. ये होटल, हाईवे पर बना हुआ था तो पीछे खेत थे. गर्मी का मौसम अभी अभी ख़तम हुआ था तो वह लगभग सब खेत खली hi थे. में सोचने लगा की आखिर ये लोग गए तो गए कहा. थोड़ी दुरी पर मुझे एक टूटी हुई दुकान की दिवार दिखी, आस पास झाडिया दिख रही थी, में तेज कदमो से उस और चलने लगा. जब में वह पंहुचा तो देखा वो चारो लड़के उधर hi थे, उन्होंने उस लड़की को पकड़ रक्खा था. एक ने उसके मुँह पर हाथ दबा रक्खा था, और दुसरो ने उसके पेअर और हाथ पकड़ रक्खे थे. उस लड़की के कपडे गंदे भी हो गए थे और अस्तव्यस्त भी हो गए थे. एक लड़के का ध्यान मेरी और गया.

लड़का : आई कोण हे बे, जा यहाँ से. (वो लड़की मुझे देख और ज्यादा छटपटाने लगी, और छूटने का प्रयत्न करने लगी) अबे सुना नहीं, जा यहाँ से वार्ना... (में कुछ भी बोले बिना वही खड़ा रहा)

आई जाता है की मार खायेगा?

लड़का 2 : ै, लफड़ा मात कर, (मुज se)Tuje भी छोड़ना है तो आ जा, सब मिल के मज़े करेंगे.

शिव : छोड़ दो use.(Wo लड़के इस लम्बे लड़के को देख कर थोड़ा दर गए थे और ऊपर से शिव की ऐसी गुर्राहट से वो कैंप गए)

लड़का 2 : देख भाई, लफड़ा नहीं, ये रंडी है, में जनता हु इससे. (मेने उस लड़की की और देखा तो वो मुझे देख रही थी, और अपनी गर्दन न में हिला रही थी)

शिव : जैसा तू बोल रहा है, अगर ये लड़की वैसी भी है तो अभी ये मन कर रही है, तो छोड़ दो उसे.

लड़का 3 : अबे इस से क्या बहस कर रहे हो, मारो सेल ko(Jis लड़के ने लड़की का मुँह दबाया था उसको छोड़ कर तीनो लड़के मेरी और बढे)

लड़का 2: तुजे सीधी तरह संजय था न, अपने आप को बहोत हुसियार समझता है न. अभी भी कह रहा हु या तो चला जा या फिर हमारे साथ मिल कर मज़े कर. (में उसे शांति से देख रहा था) जल्दी बता, मज़े करेगा या पिटेगा.

शिव : छोड़ दो उस लड़की को, और शांति से चले जाओ, में तुम्हे जाने दूंगा.

लड़का 3 : ये साला तो हमे बच के जाने को बोल रहा है, अबे अपनी खेर मन, मारो सेल को...

ये कह कर तीनो एक साथ मेरी और बढे, जैसे hi वो मेरे नजदीक आये उस लड़के 3 को मेने एक जोर से झापड़ मारा तो वो लड़खड़ाते हुए निचे गिर गया, लड़का2 कुछ समझता उस से पहले hi मेने उसे एक लात मरी तो वो पीछे लुढ़क गया, अपने दोस्तों की दुर्गति देख कर भी वो तीसरा लड़का आगे बढ़ा तो मेने उसके पेअर पर एक लात मरी तो वो अपना पेअर पकड़ कर चिल्लाने लगा.

Kavya,Shiv का वेट कर रही थी, काफी देर हो गयी पर वो नज़र नहीं आया था, वो गाड़ी लॉक कर के वाशरूम की और गयी, जब वो जा रही थी तो कुछ लोगो को दौड़ कर एक और जाते देखा. वो तेज कदमो से चलने लगी. उसने एक आदमी को रोक कर पूछा

काव्य म : क्या हुआ, भाई?

आदमी : वह लड़ाई हो रही है.

काव्य का दिल जोरो से धड़क ने लगा, एक तो शिव आया नहीं था और लड़ाई का नाम सुन कर उसे लगा की कही शिव की तो लड़ाई नहीं हो रही. पर उसकी लड़ाई क्यों होगी, वो तो किसी को जनता भी नहीं. वो फिर आस पास देखने लगी पर शिव उसे कही नज़र नहीं आ रहा था. वो घबराई हुई उसी दिशा में चलने लगी जिस और सब जा रहे थे. जब वो वह पहुंची तो उसने देखा की शिव वही खड़ा हुआ था, और चार लड़के जमीं पर गिरे पड़े थे और कराह रहे थे. काव्य जल्दी से शिव के पास गयी.

काव्य म: क्या हुआ शिव, कोण है ये लोग.

शिव : (अपने कपड़ो से धूल फटकते hue)Pata नहीं मैडम, ये लोग इस लड़की के साथ जबरदस्ती कर रहे the.(Kavya ने उस लड़की को देखा तो वो रो रही थी, वह खड़े सब लोग उसे hi घर रहे थे, काव्य फ़ौरन उस लड़की के पास गयी)

काव्य म : कोण हो तुम और ये कोण है?

लड़की : मेरा नाम आरती है, ये लोग मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे थे.

काव्य म : शहहह चुप हो जाओ, रो मत. सब ठीक है, कुछ नहीं हुआ. (वो लड़की मैडम के गले लग कर रो रही थी) किसके साथ हो तुम.

आरती : (रट hue)Me अकेली हु, में दूसरे सहर पढ़ती हु, छुट्टी थी तो में बस से घर जा रही थी.

काव्य म : रो मात, सब ठीक है, में एक वकील हु, और ये लड़का जिसने तुम्हे बचाया, वो मेरे hi साथ है. (वो लड़की मेरी और देखने लगी) तुम्हे इनके खिलाफ पुलिस में शिकायत करनी है?

आरती : नहीं, मुझे घर जाना है. (वो फिर से रोने लगी)

काव्य म : कहा है तुम्हारा घर.

आरती : क्सक्सक्स सहर में.

काव्य म : ओह, हम भी वही जा रहे है, अगर तुम हमारे साथ आना चाहो तो आ शक्ति हो. (मैडम उस लड़की को देखने लगी) आना चाहती हो? (उस लड़की ने है में शिर हिलाया) शिव इसका सामान ले आना.

शिव : इन लोगो का क्या करना है?

काव्य म : पड़े रहने दो. चलो यहाँ से.

हम लोग उस लड़की के बस के पास गए और उसने जहा बताया वह से में उसका सामान ले आया. एक छोटा सा बैग था. वो मेने गाड़ी में रख दिया. काव्य मैडम ने उस लड़की को पानी दिया तो वो पिने लगी. हमने उसे पीछे बिठाया और फिर से हम अपनी मंजिल की और चल पड़े. मैडम उस लड़की से बात कर रही थी, की वो क्या पढ़ती है, घर में कोण है. उस लड़की ने बता या की उसकी माँ hi है. में उस लड़की को कभी कभी देख रहा था. दिखने में अच्छी थी, पर मेरी समाज में ये नहीं आ रहा था की वो लड़के इसे रंडी क्यों बोल रहे थे, मुझे तो ये कही से भी वैसी लड़की नहीं लग रही थी. में जब उसका बैग लेने गया था तो मेने बस के अंदर उसका बैग भी खोल कर देखा था, उसके अंदर कुछ कपडे और किताबे hi थी. मुझे नहीं लग रहा था की ये लड़की जूथ बोल रही है, तो फिर वो लड़के ऐसा क्यों बोल रहे थे. बातो बरो में हम लोग सहर आ गए. मैडम ने उस लड़की को उसके घर का पता पूछा तो उसने कहा की वो चली जाएगी. हमने उसे एक रिक्शा स्टैंड पर छोड़ दिया. वो बार बार मुझे देख रही थी, उसने मैडम को कई बार थैंक यू बोलै. और जाते जाते हिचकिचाते हुए मुझे भी बो गयी..

आरती : थैंक यू शिव.

में बस मुस्कुरा दिया और हम लोग हमारी मंजिल की और चले गए. मैडम जो अब तक शांत थी वो मुज पर भड़क पड़ी.

काव्य म : जहा देखो वह, हीरो बन ने निकल पड़ते हो, यहाँ अनजान सहर में भी लड़ाई मोल ले ली.

शिव : सॉरी मैडम, पर इसमें हीरो वाली कोई बात नहीं है, मेने देखा था की वो लड़के उस लड़की के पीछे गए थे, मुझे शक हुआ तो में वह गया था. और आप hi सोचिये अगर में वह नहीं गया होता तो क्या हो जाता.

काव्य म : पर तुम्हे क्या जरुरत है हर जगह तंग अदने की. एक तो अभी उस केस से निकले नहीं हो और दूसरे में जाने की तयारी कर रहे हो.

शिव : सॉरी मैडम. (मेने अपना शिर झुका लिया)

काव्य म : (शिव को ऐसे शिर लटकाये देख, काव्य के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, क्यों की वो जानती थी की शिव ने कुछ भी गलत नहीं किआ है, फिर भी वो उसके सामने ऐसे बैठा था की जैसे उसी की गलती ho)Thik है, आगे से ध्यान रखना.

शिव : जी मैडम.

हम दोनों एक ऑफिस पे चले गए. एक बहु मंजिला ईमारत में आठवे मेल पर ऑफिस था. वह जा कर मैडम ने किसी से मिलने को कहा तो उन्होंने बताया की वो नहीं है. फिर एक आदमी आया और उसने बताया की ट्रस्टी तो है नहीं, उनका बीटा hi सब देखता है, वो आज आपका hi इंतजार कर रहे थे पर एक जरुरी काम के लिए उन्हें जाना पड़ा है और उन्होंने माफ़ी मांगी है. वो आज रात तक वापस आ जायेंगे. आप उन्हें कल मिल शक्ति है. मैडम ने अपना फ़ोन नंबर उन्हें दिया और हम बहार आ गए. हम दोनों गाड़ी के पास खड़े थे.

काव्य म : हमे आज यही रुकना पड़ेगा.

शिव : यहाँ कहा रुकेंगे मैडम.

काव्य म : होटल में रूम बुक करलेते है. वैसे भी दोपहर हो गयी है, और में गाड़ी चलकर बहोत थक गयी हु, तो मुझे भी आराम चाहिए. चलो किसी होटल में रूम ले लेते है.

(हम दोनों एक होटल में चले गए, मैडम ने मुझे एक जगह बैठने को कहा, में आस पास सब देख रहा था, मैडम रिसेप्शन पे जेक बात करने लगी, थोड़ी देर में वो आयी और मुझे ले कर एक लिफ्ट में चली गयी, तीसरे मेल पर एक रूम में उन्होंने चाबी डाली और रूम खोल दिया. रूम अंदर से काफी बड़ा था.

डबल बड़े था, नजदीक में बैठने के लिए सोफे था, ड्रेसिंग टेबल और टीवी भी लगा हुआ था. हम दोनों रूम में आये, मैडम ने एक चालू कर दिया, थोड़ी hi देर में रूम में ठंडक फ़ैल गयी. ऐसी गर्मी में एक की ठंडक से बहोत आराम मिल रहा था. में दुविधा में था की एक hi डबल बीएड है, मैडम के साथ तो में ऐसे नहीं रह सकता था. पर में कर भी क्या सकता था. मैडम बाथरूम में चली गयी, में वही सोफे पर बेथ गया. बाथरूम से आनेवाली आवाजे मुझे स्पस्ट सुनाई दे रही थी, अंदर से आनेवाली पानी की आवाजे सुनते हुए में सोफे पर बैठा रहा. थोड़ी देर में मैडम बहार आयी.

काव्य म : जाओ तुम्हे भी फ्रेश होना है तो जा आओ.

शिव : नहीं, में ठीक हु. अब क्या करेंगे मैडम.

काव्य म : अब कर भी क्या शक्ति है, कल तक वेट करना पड़ेगा.

शिव : पर हम यहाँ करेंगे क्या.

काव्य म : अभी फ़िलहाल तो आराम करेंगे, में घर पर इन्फॉर्म कर देती हु की आज हम नहीं आ शकेंगे. तुम भी इन्फॉर्म कर दो.

शिव : में कैसे इन्फॉर्म करूँगा.

काव्य म : जूही को फ़ोन कर देते है, वो अनाथालय में कह देगी. में भार्गविजई को भी इन्फॉर्म कर देती हु ताकि वो तुम्हारी गैरहाजरी में वह ध्यान रख सके. वैसे तो अब चैसिस काम है पर फिर भी सतर्क रहना चाहिए. (मैडम ने सब को फ़ोन कर दिया) अब थोड़ी देर आराम करते है, शाम को सिटी में घूमने चलेंगे.

शिव : ठीक है, आप बीएड पर आराम कीजिये में सोफे पर बैठा हु, वैसे भी में कोनसा गाड़ी चलकर आया हु जो मुझे थकन होंगी.

काव्य म : ठीक है, तुम टीवी देख शक्ति हो.

में काम आवाज में टीवी चलकर देखने लगा, वैसे भी मुझे टीवी देखने का सुख नहीं था तो में ऐसे hi देख रहा था, थोड़ी देर स्पोर्ट्स की चैनल देखने के बाद मेने टीवी बंद कर दिया, मैडम आंखे बंद करके लेती हुई थी. एक बार मेरी नजर उनके पुरे शरीर पर गयी पर मेने आंखे फेर ली और आंखे बंद कर के वही सोफे पर बैठा रहा. दिमाग में गायत्रीदिदी के बारेमे सोच रहा था की वो यही इसी सहर में है पर में उनको ढूढूंगा कैसे और अगर वो मिल भी गयी तो फिर क्या करूँगा. सोचते सोचते मेरी भी आंख कब लग गयी मुझे पता hi न चला. शाम के करीब पांच बजे मैडम ने मुझे आवाज दी तो में हड़बड़ा के जाग गया.

काव्य म : यहाँ क्यों सो गए थे, बीएड पर सो जाते.

शिव : में वह कैसे सो सकता था मैडम.

काव्य म : क्यों क्या प्रॉब्लम है, बीएड काफी बड़ा है, तुम सो शक्ति थे. रात को क्या यही सोने का िर्रादा है. (में क्या बोलता, में बस चुप hi raha)Chalo फ्रेश हो जाओ, बहार चलते है.

शिव : (में बाथरूम में चला गया और फ्रेश हो गया) चलिए मैडम, कहा जायेंगे?

काव्य म : ऐसे hi, घूमेंगे, सिटी dekhenge.(Hum लोग सिटी देखने के लिए चले गए, हमारे सिटी के मुकाबले ये ज्यादा बड़ा था, रस्ते पर गाड़ियों की कतरे चल रही थी, कई सरे चुराहे थे, ट्रैफिक सिग्नल भी बहोत ज्यादा थे. हम दोनों ऐसे hi घूम रहे थे और नार्मल बाटे चल रही थी.)

शिव : क्या हम ऐसे hi घूमते रहेंगे?

काव्य म : मेने एक गार्डन का बोर्ड पढ़ा था, चलो वही चल कर देखते है, कुछ शेर hi हो जाएगी.

हम दोनों गार्डन में आ गए. बहार कई लोग खड़े थे, वह रेकडिया लगी हुई थी, लोग उस पर खा रहे थे, बाते कर रहे थे. हम दोनों गार्डन के अंदर चले गए. गार्डन अंदर से काफी बड़ा था, हम दोनों पगडण्डी पर चलते हुए आस पास का नजारा देख रहे थे. मेने देखा तो ज्यादातर कपल में लड़के लड़कीअ घूम रहे थे. हम दोनों चलते चलते काफी अंदर चले गए.

काव्य म : आओ थोड़ी देर बैठते है, चलते चलते में थक गयी हु.

शिव : ठीक है मैडम.

हम दोनों एक जगह घास पर बेथ गए, आस पास कुछ कपल बैठे हुए थे, कुछ लोग किसी झड़ी के पीछे तो कुछ किसी पेड़ के निचे बैठे हुए थे. सब लोग अपनी hi मस्ती में थे, किसी को किसी की परवाह नहीं थी. हम दोनों बाते कर hi रहे थे की मेने देखा की एक कपल वह किश करने लगा, वो लोग हमसे थोड़ी दुरी पर बैठे हुए थे, पर में उनको साफ़ साफ़ देख शक्ति था, मुझे बड़ा अजीब लगा, लोग ऐसी खुले में किश कर रहे थे.

काव्य म : (काव्य, शिव से बात कर रही थी, पर शिव का ध्यान कही और hi था, उसने उसकी नजरो का पीछा किआ तो उसने भी उन लोगो को किश करते देखा. उसके लिए भी ये नजारा नया था, वो पहले तो थोड़ी चौंक गयी, पर वो दोनों बड़ी बेशर्मी से एक दूसरे की होठो को चूस रहे थे, ये पहली बार था की ऐसे वो किसी को किश करते देख रही थी, है कई बार फिल्मो में देखा था पर यहाँ तो अलग hi सन चल रहा था. उसने शिव की और देखा तो वो अभी भी वही देख रहा था, काव्य को शर्म भी आ रही थी, पर दिल छह रहा था की उन्हें देखे, उसने तिरछी नजरो से उस कपल को देखा तो लड़का किश करते हुए उस लड़की से स्तन भी दबाने लगा था. काव्य अजीब सी परिस्थिति में फास गयी थी, वो लड़की भी उसका साथ दे रही थी, लड़की के चेहरे से लग रहा था की उसे बहोत अच्छा लग रहा था. उसने शिव की और देखा तो शिव ने भी उसकी वक़्त उसकी और देखा, दोनों झेप गए.

काव्य म : चलो यहाँ से. (में भी चुप चाप खड़ा हो गया और हम दोनों वह से दूसरी और चलने लगे, हम दोनों खामोसी से चल रहे थे, पर उस गार्डन में कई कपल यही सब कर रहे थे) चलो यहाँ से बहार hi चलते है, कितने बेशर्म लोग है.

हम दोनों वह से बहार चले आये, हम दोनों कार में बेथ गए, हम दोनों एक दूसरे से बात करने से कतरा रहे थे, और एक दूसरे को देखने से भी कतरा रहे थे. पर थोड़ी देर बाद हमदोनो को नज़ारे मिल hi गयी, हम दोनों जोर जोर से हसने लगे. हम दोनों काफी देर तक हस्ते रहे.

काव्य म : कैसा सहर है ये, इनको अगर ये सब करना है तो अपने घर में नहीं कर शक्ति.

शिव : हो सकता है की अभी इनकी शादी hi न हुई हो, तो ऐसी जगहों पर मिलते हो. (हम दोनों है रहे थे)

काव्य म : बाप रे, ऐसा नजारा तो मेने कभी अपने जीवन में नहीं देखा, बे शर्म लोग. चलो कही और चलते है. (तक़रीबन 7 बजे तक हम दोनों ऐसे hi घूम रहे थे)

शिव : मैडम एक बात कहु?

काव्य म : इसमें पूछने की क्या बात है, कहो.

शिव : मैडम, मुझे रेडलीगत एरिया जाना है.

काव्य म : (गाड़ी को साइड में लगते हुए) क्या, पागल हो गए हो, तुम जानते हो वो क्या होता है?

शिव : पहले नहीं पता था, पर अब अंदाजा है.

काव्य म : ये क्या बकवास कर रहे हो, मेरे सामने hi तुम...

शिव : आप जैसा सोच रही हो वैसा नहीं hai(Mene उन्हें जेब से वो लेटर दिखाया, वो पढ़ने के बाद)

काव्य म : शिव, ये बहोत खतरनाक है, तुम जानते नहीं हो, यहाँ बहोत खतरनाक लोग होते है, अगर तुम उसे छुड़ाने की सोच रहे हो तो मुझे नहीं लगता की ये मुमकिन है.

शिव : अगर हम पुलिस का सहारा ले तो.

काव्य म : अगर हम पुलिस को भी कहेंगे तो वो कोई एक्शन नहीं लेगी और अगर ले भी लेगी तो जब हम वह पहुंचेंगे तब तक ये लड़की गायब हो चुकी होगी. इन लोगो की पुलिस में भी बहोत जान पहचान होती है. यु कह सकते है की ये लोग पुलिस को हफ्ता खिलते है.

शिव : पर मुझे जाना hi होगा. आप सोचो, वो किस मुसीबत में है.

काव्य म : में समाज रही हु, शिव पर ये मुमकिन नहीं.

शिव : ठीक है, आप होटल जाइये, में आता हु.

काव्य म : ठीक है, में तुम्हे वह ले जाती हु, में वही नजदीक hi रहूंगी, अगर तुम दो घंटे में नहीं आये तो में पुलिस के पास चली जाउंगी.

शिव : ठीक है, चलिए.

मैडम तो किसी को रेडलीगत का पता पूछ नहीं सकती थी तो मेने hi एक रिक्शेवाले को वह का पता पूछा, और हम दोनों वह पहुंच गए.

वह से थोड़ी दुरी पर एक कफ शॉप के पास हमने गाड़ी रख दी.

काव्य म : में यही कफ शॉप में तुम्हारा इंतजार कर रही हु, अगर कुछ गड़बड़ हो तो मुझे मेरे नंबर पर कॉल कर देना.

शिव : आप चिंता न करो, में तो बस देखने जा रहा हु. एक बार उनसे मिल लू, फिर क्या करना है पता चले.

काव्य म : है पर संभल कर जाना. वैसे पैसे है तुम्हारे पास.

शिव : है मैडम.

में वह से उस गली की और निकल गया जिसे रेडलीगत एरिया कहते है. रात अभी ढली नहीं थी, पर अँधेरा होने लगा था, गली में लोगो की चहल पहल दिख रही थी. रस्ते के दोनों तरफ क़तर में घर बने हुए थे, वह दरवाजे पर लड़कीअ और औरते सज सवार कर कड़ी थी. मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, कुछ लड़कीअ मुझे इस्सर कर के अपने पास बुला रही थी. मुझे चुन्नीबाई का कोठा ढूँढना था, ऐसा तो था नहीं के यहाँ बोर्ड लगे हो. हिम्मत करके में एक लड़की के पास चला गया जो मुझे इस्सर कर के बुला रही थी.

लड़की : चल आजा अंदर, 500 रुपए लुंगी.

शिव : नहीं, मुझे सिर्फ ये जान न है की चुन्नीबाई का कोठा किधर है.

लड़की : अरे छोड़ उसको, मेरे साथ आ, और भी मज़ा दूंगी, और तू है भी कितना गोरा चिट्टा, चल न, चाहे तो पैसे काम दे देना.

शिव : (वो मुझे पकड़ कर अंदर खिंच रही thi)Nahi, मुझे सिर्फ चुन्नीबाई के कोठे पर जाना है.

लड़की : अरे चल न, भाव क्यों खता है, मेरे वह कांटे नहीं लगे है, जो तुजे वह मिलेगा वही में तुजे यहाँ दूंगी, चल aaja(Wo मुझे खींच कर अंदर ले जाने लगी)

शिव : प्लीज, मुझे छोड़िये.

लड़की : चल न, उठता नहीं है क्या, चल, मर्द है की nahi.(Wo मुझे उकसा रही थी पर जैसे तैसे उस से पीछा छुड़ा कर में आगे बढ़ गया, आस पास देखते हुए में चल रहा था की एक आदमी मेरे पास आया)

आदमी : क्या धुंध रहे हो babu(Uske मुँह में पान भरा हुआ था)

शिव : जी, मुझे चुन्नीबाई के कोठे पर जाना है.

आदमी : 1000 रुपए लगेंगे वह.

शिव : जी, चलेगा.

आदमी : तो चलो फिर.

वो मुझे ले कर चल दिया, में उसके पीछे पीछे चल रहा था, लड़कीअ मुझे घर रही थी, आखिर एक लोहे की ग्रिल के दरवाजे से वो मुझे अंदर ले गया, दरवाजे पर दो लम्बे चौड़े गुंडे जैसे आदमी खड़े हुए थे. शायद वो उस आदमी को जानते थे इस लिए उन्होंने हमें रोका नहीं. ऊपर के बड़ा सा हॉल था, कई लड़कीअ और इधर उधर घूम रही थी, कुछ आदमी भी बैठे हुए थे. वो आदमी सीधा एक औरत के पास गया.

आदमी : ग्राहक है Chunnibai.(Wo औरत मुझे ऊपर से निचे तक देख रही थी)

मुन्नीबाई : इसी सहर के हो या बहार से आये हो?

शिव : जी, बहार से.

चुन्नीबाई : कलुवा, रेट बतादिये हो न?

आदमी : जी, बाई.

चुन्नीबाई : ो, सरला, लीला, रानी.... आजाओ यहाँ, ग्राहक आया है. (मेरे सामने दस बारे लड़कीअ कड़ी हो gayi)Dekh ले छोरे, पसंद कर ले. (में गौर से सब लड़कीओ को देखने लगा, जैसे जैसे में देख रहा था वो लड़कीअ मुझे रिझाने के लिए इससरए कर रही थी, कुछ शांत थी. मुझे इनमे से कोई गायत्री दीदी जैसी कोई नहीं लगी.) क्या हुआ बबुआ, पसंद नहीं आयी, ऐसा माल तुजे पुरे बाजार में नहीं मिलेगा. और भी है, देखेगा.

शिव : जी, इनमे से गायत्री कोण है?

चुन्नीबाई : (घर के मुझे देखने लगी) कोण है बे तू? इ कलुवा, ये किसे ले आया है तू?

कलुवा : (डरते hue)Maaf कर दीजिये बाई, ये आप का पता पूछ रहा था तो में ले आया.

चुन्नीबाई : इ लड़कीओ, जाओ तुम. (मुज से) कोण है बे तू, यहाँ क्यों आया है?

शिव : जी, क्या हुआ, मेने कुछ गलत कह दिया क्या?

चुन्नीबाई : तू मेरे कोठे की लड़की को धुंध रहा है, कोई रिस्तेदार है काया उसका?

शिव : नहीं, आप गलत समाज रही है, पिछले महीने मेरा दोस्त यहाँ आया था, उसने बताया था की उसने मुन्नीबाई के कोठे पर गायत्री नाम की लड़की के साथ किआ था, उसे बहोत मज़ा आया था तो में इसीलिए पूछ रहा था.

चुन्नीबाई : (हस्ते हुए) ओह तो ऐसा है, में तो कुछ और hi समाज बैठी थी. इ रानी, जा गायत्री को बुला, वो क्यों पहले नहीं आयी थी.

रानी : बजी, आप तो उसका जानती hi हो.

चुन्नीबाई : लगता है आज उसकी मरम्मत करनी hi पड़ेगी, जा भेज उसको. (एक लड़की सेहमी सेहमी सी धीमे कदमो से आयी, में देख कर hi पहचान गया की यही गायत्रीदिदी है, है फोटो से वो थोड़ी अलग लग रही थी) क्या नाटक है तेरा, तेरे आशिक़ दूर दूर से तुजे ढूंढते हुए आ रहे है. ला छोरे, पैसे de.(Maine उन्हें 1000 रुपए दिए) जा इससे अपने कमरे में ले जा.

गायत्री : (दीदी ने मेरी और देखा, उनकी आँखों में बेबसी थी) आइये. (में उनके पीछे पीछे उनके कमरे में गया, में अंदर गया तो उन्होंने कमरे की कुण्डी लगा दी, वो धीमे कदमो से जा कर बीएड पर बेथ गयी. वो अपनी गर्दन नीचे किये बैठी हुई थी, में उनके पास गया, मेने उनके कंधे पर हाथ रक्खा तो वो कैंप गयी)

शिव : दीदी, में शिव हु. (मेरे मुँह से दीदी सुन कर वो चौक गयी, वो मुझे देखने लगी, उनकी आँखों में आंसू बह निकले, वो मेरा नाम बोलने वाली थी, की मेने उनके होठो को दबा diya)Shhhhhh.

गायत्री : (धीरे से) शीइइइइव.

शिव : आपने hi तो मुझे बुलाया था, क्यों पहचाना नहीं?

गायत्री : अख़बार में तेरा नाम पढ़ा था, और देख तो तुजे कई साल बाद रही हु, कितना छोटा था और अब देखो पेड़ की तरह लम्बा हो गया hai(Kehte कहते वो मेरे गले लग गयी और रोने लगी, थोड़ी देर मेने उन्हें रोने दिया, फिर अचानक से) शिव, तुजे यहाँ नहीं आना चाहिए था, में भी तुजे चिट्ठी लिखने के बाद पछता रही हु, मेने उस समय खुदके बारेमे hi सोचा था, फिर ख्याल आया की अगर तू यहाँ आया तो तेरी जान को भी खतरा हो शक्ति है. तू चला जा, छोड़ दे मुझे अपने हाल पे.

शिव : कुछ नहीं होगा, पहले अपने आप को ठीक कीजिये, और बहार चलिए.

गायत्री : बहार क्यों?

शिव : आप चलिए to.(Didi दर रही थी, वो और में बहार आ गए)

चुन्नीबाई : क्या हुआ बबुआ, इतनी जल्दी ख़तम हो गया?

शिव : जी नहीं, यहाँ मुझे अच्छा नहीं लग रहा है, क्या में इन्हे बहार ले जा शक्ति हु?

चुन्नीबाई : (मेरी और घर के देखते हुए) न, बबुआ, मेरी लड़कीअ बहार नहीं जाती, जो करना है यही कर. वर्ण दफा हो यहाँ से.

शिव : में यहाँ होटल में hi रुका हु, में उन्हेवहि ले जाना चाहता हु.

चुन्नीबाई : न बोलै न, (गायत्री से) जा तू अंदर. और छोरे, तू भी निकल, पकड़ तेरे paise.(Gayatri दीदी वही कड़ी thi)Tuje बोलै न जा अंदर. इ सरला, इसे अंदर ले जा.

गायत्री : (एक लड़की उन्हें खिंच कर अंदर ले जाने lagi)Shiiiiiiv.

चुन्नीबाई : तो तू इससे जानती है, मुझे शक तो पहले से hi हो रहा था, इ बब्बन, गोला, बहार करो इससे. (निचे से वो दो हट्टे काटते आदमी ऊपर आ गए)

शिव : देखिये, ये हमारे अनाथालय की लड़की है, इससे वापस जाने दीजिये.

चुन्नीबाई : एक बार कोई इस कोठे पर आ गयी फिर वो कभी वापस नहीं जाती, (उन दोनों ko)Fek दो सेल को बहार.

वो दोनों मुझे पकड़ कर बहार ले जाने लगे, और दो लड़कीअ गायत्री दीदी को पकड़ कर ले जाने लगी.

गायत्री : सीईव, शीइइइइइइव.
 
अपडेट 66

मुझे वो दोनों धकेल कर बहार ले जा रहे थे. मेने एक आदमी के पैर में लात मरी तो उसने फौरन अपना पेअर पकड़ लिया, मेने दूसरे को सँभालने का मौका दिए बगैर उसके पेट में कोहनी से प्रहार किआ तो वो अभी अपना पेट पकड़ कर दो कदम पीछे हैट गया. सब लड़कीअ और चुन्नीबाई मुझे हैरानी से देखने लगे.

चुन्नीबाई : सेल भड़वो, एक लड़के से मार खा रहे हो, मारो सेल को. (वो दोनों अपने आप को संभल कर मेरी और बढे, वो जैसे नज़दीक आये मेने एक की छाती पर लात मर दी, वो धड़ाम से पीछे गिरा, पीछे एक ग्राहक बैठा था, वो उसके ऊपर गिरा तो वो चिल्लाने लगा. दूसरा मेरी और बढ़ा तो मेने उसके घुटनो में जोर से लात मरी तो वो वही बेथ गया, मेने दो तीन घुसे उसके चहेरे पर मार दिया. जो उस आदमी पर गिरा था उसने अपनी जेब से चाकू निकल लिया, और वो मेरी और बढ़ा, जैसे hi वो मेरी और लपका तो वह पड़ा एक जग मेने उसके शिर पर दे मारा, उसके हाथ से चाकू छूट गया, मेने वो चाकू उठा लिया और चुन्नीबाई के गले पर लगा दिया. सब लड़कीअ चिल्लाने लगी.

शिव : रोक दो इन्हे.

चुन्नीबाई : इ लड़के, तू ये ठीक नहीं कर रहा है, तू यहाँ से बहार नहीं जा पायेगा. आज तेरी कबर यही खुदेगी.

शिव : (मेने उसकी गर्दन को अपनी गिरफ्त में लिया तो उसकी साँस बंद हो गयी, कुछ सेकंड में hi उसकी हालत ख़राब हो गयी, तो मेने उसे छोड़ diya)Jyada फुदक मात, एक मिनट में hi तेरी आत्मा शरीर से अलग कर दूंगा.

एक लड़की की आवाज : शीइइइइइइव. (मेने उस आवाज की और देखा तो वो आरती थी)

शिव : Tum....tum यहाँ, तो वो लड़के ठीक hi कह रहे थे.

आरती : शिव, छोडो इन्हे, ये मेरी माँ है. माँ ये वही लड़का है जिसने मेरी इज्जत बचायी थी.

शिव : Ijjat...(Me मुस्कुराया)

आरती : में वैसी नहीं हु शिव, में यहाँ सिर्फ इनसे मिलने आयी थी. में धंधा नहीं करती.

शिव : वह चुन्नीबाई, इन लड़कीओ से जबरदस्ती धंधा करवाती हो, और अपनी लड़की को पढ़ा रही हो, क्यों? उस से भी धंधा करवाओ. मुझे पता होता की ये तुम्हारी लड़की है तो में इससे कभी नहीं बचता, वो तो भगवन का इंसाफ था, जो तुम दूसरी लड़कीओ के साथ करती हो वो तुम्हारी लड़की के साथ हो रहा था, मुज से गलती हो गयी.

आरती : (रट hue)Aisa मात कहो शिव.

शिव : क्यों न कहु, तुम इन सब से दूर रहना चाहती हो, कभी अपनी माँ को रोका तुमने.

चुन्नीबाई : (उसकी आँखों से भी आंसू बह रहे थे) तुम क्या जानते हो मेरे बारे में, मुझे फसा कर इस धंधे में दाल दिया गया था, मेने खुदने ये जिंदगी नहीं चुनी.

शिव : किसी ने फंसा कर तुम्हे इस धंधे में डाला तो तुम्हे इन लड़कीओ का दर्द पता होना चाहिए, अगर तुम्हे लगता है की तुम्हारे साथ गलत हुआ तो, तुम्हे इनके साथ गलत होने से रोकना चाहिए, न की तुम खुद वो गलती करो. तुम्हारे साथ गलत हुआ तो क्या तुम इन के साथ गलत करोगी. तो उन हैवानो , जिन्होंने तुम्हे बर्बाद किआ और तुम में क्या फर्क है, तुम भी उनकी तरह hi हैवान हुई न.

चुन्नीबाई : मुज से गलती हो गयी शिव, मेने कभी ऐसा सोचा hi नहीं था. जैसा मेरे साथ इस दुनियाने किआ था वही में इस दुनिया के साथ कर रही थी. जाओ बीटा गायत्री, चली जाओ यहाँ से. इस बदनाम दुनिया से.

शिव : ये सिर्फ गायत्रीदिदी की बात नहीं है, जो भी यहाँ जबरदस्ती रक्खी गयी है, उन सबके लिएहोणा चाहिए.

चुन्नीबाई : आज से यहाँ किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की जाएगी, जिसे रहना है रहे, जिसे जाना है जाये, और में वडा करती हु तुमसे, यहाँ कभी भी किसी भी लड़की को में जबरदस्ती नहीं खरीदूंगी न बेचूंगी. और जितना भी हो शेक दुसरो को भी नहीं करने दूंगी. जो अपनी मर्जी से यहाँ रहना चाहे वही यहाँ रहेगी.

शिव : (गायत्रीदिदी, दौड़ कर मेरे गले लग गयी) और दूसरी सभी बहनो को में ये कह देता हु, मेरा नाम शिव है, और में क्सक्सक्स सहर के अनाथालय में रहता हु, अगर किसी भी बहन को मेरे वह आना हो तो मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे.

अब माहौल पूरा बदल गया था. सब लड़कीअ मुज से मिल रही थी पर अब में उनके लिए ग्राहक नहीं था, में उनका अपना था. गायत्री दीदी ने अपना सामान लिया और वो मेरे साथ चल दी. पुरे बाजार में ये बात फ़ैल गयी थी, तो जैसे hi हम बहार निकले, सभी लड़कीअ बूम दोनों को देख रही थी, कुछ लड़कीअ जो दीदी को जानती hi वो उनसे मिलने भी आयी, उनसे गले भी मिली, सब की आँखों में दीदी के लिए ख़ुशी थी, मुझे खुद यकीं नहीं हो रहा था, की ये इतनी आसानी से हो गया. में यहाँ क्या सोच कर आया था और क्या होगया था. हम दोनों चलते चलते कॉफ़ी शॉप पहुंचे, (कफ शॉप में से जैसे hi काव्य ने शिव को देखा वो दौड़ते हुए बहार आयी, क्यों की काफी देर हो गयी थी, और उसका दिल घबरा रहा था, रास्ता क्रॉस करती गायत्री पर उसकी नज़र नहीं गयी थी, वो तो बस शिव को hi देख रही थी, पर जैसे hi गायत्री आ कर शिव के पास कड़ी हुई, वो आश्चर्य से उसे देखने लगी)

शिव : ये गायत्रीदिदी है, और ये काव्य मैडम है, ये वकील है.

गायत्री : नमस्ते मैडम.

काव्य म: नमस्ते, (मुझे देख kar)Ye कैसे हुआ, गायत्री तुम्हारे साथ, कैसे? किसी को पता नहीं चला, कोई तुम्हारे पीछे तो नहीं आ रहा?

शिव : आप शांत हो जाइये, जैसा आप सोच रही हो वैसा कुछ नहीं है, चुन्नीबाई ने खुद, दीदी को भेजा है, और कोई हमारे पीछे नहीं आ रहा.

काव्य म : क्या? पर कैसे?

शिव : आप चलिए, हम होटल चलते है, वही साडी बाते करेंगे.

काव्य मैडम को अभी भी यकीं नहीं हो रहा था, वो कभी मुझे तो कभी गायत्री दीदी को देख रही थी, हम होटल पहुंच गए, रिसेप्शनिस्ट गायत्री को देख कर अचंबित थी, काव्य मैडम ने उनसे बात की, उन्होंने मैनेजर को बुलाया, मैनेजर से उन्होंने बात कर के गायत्री दीदी को हमारे साथ रहने के लिए, मैनेजर को मन लिया. पहले तो मैनेजर मन कर रहा था पर मैडम ने अपना विजिटिंग कार्ड दिया तो मैनेजर मान गया. हम तीनो कमरे में आ गए, मैडम ने एक ों कर दिया, और वो सोफे पर बेथ गयी, गायत्री दीदी सेहमी सेहमी सी कड़ी थी.

काव्य म : आओ गायत्री बैठो, डरो नहीं. (वो दोनों सोफे पर बेथ गयी और में बीएड पर बेथ gaya)To अब बताओ शिव, ये सब कैसे हुआ.

शिव : आप को आरती याद है, वो जो हमारे साथ आयी थी.

काव्य म : है, उसका क्या लेना है इस बात से?

शिव : उसी का तो लेना hai(Mene उन्हें साडी बात बता दी) तो ऐसा हुआ.

काव्य म : क्या तुमने फिर लड़ाई की, शीइइइइव.

शिव : मेने लड़ाई नहीं की, मेने बचाव किआ था मैडम. और में कर भी क्या शक्ति था.

काव्य म : (एक लम्बी साँस लेते hue)Chalo जो हुआ वो, गायत्री ठीक है, वही बहोत है. पर गायत्री तुम यहाँ पहुंची कैसे?

गायत्री : मैडम, वो मैनेजर था न, उसने मुझे कहा था की वो मुझे एक अच्छी जगह नौकरी पर रखवा रहा है, ताकि मेरी आगे की जिंदगी अच्छे से गुजर शेक, वो मुझे ले कर एक पोलिसवाले के घर ले गया था, उसने मुझे बताया की जो नौकरी दे रहे है वो इनकी पहचान के है, और हमे इनके साथ hi जाना है, हम तीनो वह से इस सहर में आये थे, यहाँ एक घर में मुझे ले गए. (वो ये कहते कहते रो पड़ी) Waha....(rote hue)unhone मेरे sath....tin दिन tak...(Rone lagi)(Kavya मैडम ने उसे पानी दिया और उसकी पीठ सेहलायी) उसके बाद मैनेजर मुझे चुन्नीबाई के यहाँ ले गया, वह मुझे उसने बेच दिया. तब से में वही thi.(Wo फुट फुट कर रोने लगी)

काव्य म : (गायत्री को दिलासा देते हुए उसे शांत कराया) ये कब की बात है, क्या तुम उस पोलिसवाले को जानती हो?

गायत्री : है मैडम, उस कमीने का चेहरा और नाम मेरे दिमाग में छाप गया है, उसका नाम शेखर था. और ये xx/xx/xxxx दिन की बात है.

काव्य म : तब तुम्हारी उम्र क्या रही होगी?

गायत्री : क्सक्स साल थी.

काव्य म ने फ़ौरन भार्गवी को फ़ोन लगा दिया.

भार्गवी: है मैडम, कहिये?

काव्य म : क्या मैडम, आप भी, मुझे काव्य कह शक्ति है.

भार्गवी : आप भी मुझे मेरे नाम से बुला शक्ति hai.(Dono है pade)Kaho काव्य, क्या हुआ.( काव्य म ने सब शार्ट में उसे बता दिया) क्या? ये लड़का भी न, वह ये सब कर दिया, ये कितना खतरनाक है, वह पुलिस भी कुछ नहीं कर पति.

काव्य म : अब में क्या कहु, ये तो करके भी आ गया, पर मेने इस लिए फ़ोन किआ है, की इस लड़की के यहाँ आने में आप के डिपार्टमेंट का एक इस्पेक्टर शेखर है, जहा तक मुझे याद है, पहले वो हमारे शहर में hi थे, शेखर मिश्रा. हमारे पास उनके खिलाफ गायत्री का बयां है, आप उसे गिरफ्तार करने की कार्यवाही कीजिये.

भार्गवी : में अभी, उसके लिए कार्यवाही करती हु, पर वो पुलिस का आदमी है इस लिए दिक्कत आ शक्ति है, मुझे ये सब अपने तरीके से करना होगा, में अभी उसकी गिरफ़्तारी की कार्यवाकि करती हु, में आपको बाद में कॉल करती हु, हो शक्ति है की गायत्री से बात करने के लिए, जज फ़ोन करे, आप अपनी लोकेशन किसी के साथ शेयर मात करना, और अभी में इससे गुप्त hi रक्खूंगी, क्यों की वो उसी सहर में है.

काव्य म : ठीक है, यहाँ का काम ख़तम कर के हम कल hi निकल जायेंगे. गुड नाईट.

भार्गवी : गुड नाईट.

मैडम ने खाना वही मँगवालिया, खाने के बाद हम सब सोने लगे. मैडम और गायत्री दीदी, बीएड पर सो गयी और में सोफे पर सो गया. पुरे दिन की भगा दौड़ी से मुझे फ़ौरन नींद आ गयी. काव्य दो पहर में सो गयी थी तो उसे नींद नहीं आ रही थी, वो टीवी देख रही थी और सोच रही थी. मूवी में एक किश का सन आया तो उसे वो गर्दनवली बात याद आ गयी. उसे अब भी यकीं नहीं हो रहा था की कैसे वो लड़की उस लड़के को इतना सब करने दे रही थी, वो लड़का उसके स्तन को सेहला रहा था और उसने उसके निचे भी हाथ रख कर उसे दबोच रहा था. ये सोच कर hi उसके शरीर में एक कम्पन दौड़ गया. वो इस एहसास से तो अनजान थी पर ये सोच कर hi उसके शरीर ने हरकत करना सुरु कर दिया था. ऐसा उसके साथ पहले कभी नहीं हुआ था. वो शिव के साथ हुई बाते भी सोचने लगी, वो सोच रही थी की किसी को देख कर hi क्या कुछ हो शक्ति है, उसकी नज़र शिव पर गयी, जो गहरी नींद में सोया हुआ था. वो उसके चेहरे को ध्यान से देखने लगी, एक मासूम और प्यारा चेहरा पर एकदम सख्त शरीर. चेहरे से एक बच्चा पर शरीर से एक पूरा मर्द. वो जैसे जैसे उसे देख रही थी उसके शरीर में कुछ कुछ हो रहा था. वो उठी और चलते हुए उसके नजदीक गयी. वो उसे ध्यान से देखने लगी. सचमे वो उसकी और आकर्षित हो रही थी, उसे वो याद आ गया जब शिव उसकी झांघो की मालिस कर रहा था, ये सोच कर hi उसके पैरो के बिछ गीलापन मेंसूस होने लगा. वो वही बेथ गयी और नज़दीक से शिव को निहारने लगी. उसे गार्डन की वो किश याद आ गयी तो उसकी निगाहे शिव के होठो पर चली गयी, उसके अपने होठो में कम्पन होना सुरु हो गया था. वो सोचने लगी की वो एहसास कैसा होता होगा. उसे उस लड़की का चेहरा याद आ गया, किश करते समय उसके चेहरे साफ़ पता चल रहा था की उसे कितना मज़ा आ रहा था. उसका मान भी कर रहा था की वो उस एहसास का अनुभव करे, पर वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी. शिव उसे पसंद था पर वो उस से काफी छोटा था, तो वो छह कर भी वैसा नहीं कर शक्ति थी. वो उठ कर वापस अपने बीएड पर चली गयी, काफी देर आंखे खोले जागती रही, आखिर कर वो सो गयी.

सुबह सब तैयार हुए और फिर से अनाथालय के ट्रस्टी के वह चले गए, आज वो मिल गए थे, उन्हें सब बताने के बाद उन्होंने सरे फॉर्म पर सिग्न कर दिए. और ये भी कहा की हो सकेगा तो वो कुछ दिनों बाद वह आएंगे. उन्होंने लतादिदी को वह की मैनेजर बना दिया था. और सब पावर उनके नाम ट्रांसफर कर दिए थे. उन्होंने मेरी भी तारीफ की. उन्होंने कहा की उन्हें ये समाचार मिले थे पर उस समय वो इंडिया के बहार थे, और देवीलाल का फ़ोन भी बंद आ रहा था. वो वह आने की सोच hi रहे थे की हम वह आ गए. उन्होंने ये भी कहा की अगर कुछ हो तो सीधे उन्हें फ़ोन कर सकते है. हमने उनका नंबर लिए और वापस अपने सहर की और चले गए. वापस जाते वक़्त कुछ खास न हुआ, हम सब ऐसे hi बाते करे हुए अपने सहर पहुंच गए.

उन्होंने हमें अनाथालय छोड़ा और वो चली गयी, अँधेरा होने को आया था. लतादिदी मेरे साथ गायत्रीदिदी को देख कर चौंक गयी, वो उन्हें पहचानती थी. जब गायत्री दीदी ने उन्हें अपने बारेमे बताया तो वो रोने लगी, पर साथ में गुस्सा भी हो गयी, वो मुझे मारने आयी तो में भागने लगा.

लतादिदी : अब इतना बड़ा हो गया है की मुझे बताना भी सही नहीं समझा, वह कुछ हो जाता to(Wo रोने लगी, में वापस उनके पास गया और उन्हें गले लगा लिया तो वो मुज से लिपट gayi)Agar तुजे कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता.

शिव : पर हुआ तो कुछ नहीं न. देख लीजिये में बिलकुल ठीक हु. अब रोना बंद कीजिये मैनेजर साहिबा, सब देख रहे है.

लतादिदी : (मुझे और कस्ते hue)Muje कोई मैनेजर बनगर नहीं बन न, मुझे पूछना तो चाहिए था.

शिव : आप hi बताओ सरितादिदी मेने ठीक किआ की नहीं, क्यों रंजन, विणा.

सरितादिदी : तूने बिलकुल ठीक किआ. वैसे भी यही तो है जो सब संभालती है.

लतादिदी : नहीं, में नहीं संभालती, हम सब मिल कर सँभालते है.

सरितादिदी : वही तो, आगे भी सब मिल कर hi संभालेंगे.

वो भी मेरे गले लग गयी, रंजन कहा पीछे रहती, वो भी आ कर मेरे गले लग रही, विणा वही बैठी देख रही थी, गायत्रीदिदी भी हम सबका प्यार देख कर खुस हो रही थी. आज उसे लग रहा था की वो घर वापस आ गयी है. पर इतने दिनों में उसके दिल पर जो जखम लगे थे वो इतनी जल्दी तो बरनेवाले थे नहीं. वो बस प्यार से शिव को देख रही थी, वो दिल से उसका शुक्रियादा कर रही थी की उसने उसे उस नर्क से आज़ाद करवाया था. रात को हम साथ में सो गए. सुबह जब उठा तो लतादिदी मुज से लिपट कर सो रही थी. मेने लतादिदी को प्यार से देखा जो शुकुन से सो रही थी. मेने उनके होठो पर हलके से किश किआ. लतादिदी नींद में भी मुस्कुराई और मुज से लिपट गयी. में भी इस आनंद से दूर नहीं होना चाहता था तो में थोड़ी देर लेता रहा. फिर आहिस्ता से उठ कर में बाथरूम की और चला गया. मैंने जैसे hi बाथरूम का दरवाजा खोला तो एक अद्भुत नज़ारा मेरी आँखों के सामने था.

(विणा आधी नींद में मूतने बैठी थी. जिस वक़्त शिव ने दरवाजा खोला उसी वक़्त उसने मूतना सुरु किआ था. जब उसने दरवाजे की आहत सुनी तो उसने शिव को देखा पर अब वो रूक नहीं शक्ति थी. शिव तो जैसे खो सा गया था. विणा के गोलगोल कूल्हे उभर कर दिख रहे थे. वो सिटी की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही थी. विणा बेबसी से शिव को अपने कूल्हों को घूरते देख रही थी. वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी.) जब सिटी की ध्वनि बंद हुई तो मुझे होश आया. मेने फ़ौरन दरवाजा बंद किआ. अभी में सोच hi रहा था की ये क्या हो गया, मुझे ऐसे नहीं देखना चाहिए था. तभी विणा नज़ारे झुकाये बहार निकली. वो शर्म से घड़ी जा रही थी.

शिव : (हिचकिचाते hue)Sorry विणा, मुझे ध्यान नहीं रहा.

विणा ने मुझे देखा, वो शरमाते हुए मुस्कुरा के भाग गयी, मेने अपने आपको संभाला और जल्दी से बाथरूम में घुसा. जब में जूही मैडम के घर पंहुचा तो आज फिर जूही मैडम टॉवल लपेटे भीगी हुई hi दिखी. मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी जो उन्होंने भी देखा. वो भी मुस्कुरायी. पता नहीं पर आज उनकी चूचिया थोड़ी ज्यादा hi बहार दिख रही थी. में उन्हें देखने में खो सा गया.

जूही मैडम : (जूही को पता था की शिव को उसे ऐसे देखना पसंद है, उसे भी अच्छा लग रहा था पर उसे शर्म भी आ रही थी, शर्मीली आवाज me)Ander aao.(Par शिव तो जैसे सुन hi नहीं रहा था जूही शर्म से लाल होने लगी, उसने मुस्कुराते हुए शिव का हाथ पकड़ा और अंदर खींच liya)Bhar hi खड़े रहने का इरादा है क्या.

उनके खींचने से में कटे पेड़ की तरह उनसे टकराया, मुझे सँभालने के लिए उन्होंने मुझे पकड़ लिया और मेने उन्हें. मेरी आंखे बंद हो गयी उस सुगंध को सूंघ के जो उनके सरीर से आ रही थी. (जूही भी शांत हो कर कड़ी रही उसे भी ऐसा अच्छा लग रहा था) जब जूही को अपनी स्थिति का एहसास हुआ तो दूर हुई और रूम में चली गयी. पर में अभी भी बूत बना खड़ा था. ( जब कपडे पहन कर जूही वापस आयी तो उसने शिव को देखा जो अभी भी बूत बना खड़ा था और कुछ सोच रहा था. उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी और वो शरमाते हुए रूम में आयी.

जूही :(मान me)Kaise घर रहा था. (अपने आप को दन्त ते hue)Tu hi तो जान बुज कर ऐसा कर रही है. बेचारा सीधा लड़का है और तू उसे ऐसे रिज़ा रही है. सीधा? , कहा से वो सीधा है, स्नेहा के साथ सब करचुका है. और वो कैसे इसकी तारीफ कर रही थी इसकी. जैसे लड़के की मुझे आरजू थी बिलकुल वैसा hi तो है ये. माँ हमेशा बोलती थी की खम्भे जैसी है तेरे लिए कहा से ऐसा लड़का लाऊंगी. इतनी लम्बी हो गयी है की लड़के शर्मा जाते है. तेरे जितना भी मिल जाये तो भी बहोत है. (जूही मन me)Maa ये मेरे जितना नहीं मुज से भी लम्बा है. अगर ये मेरी उम्र का होता तो एक मिनट न लगाती शादी करने में. पर हाय ऋ किस्मत मिला तो भी उम्र में छोटा. पता नहीं क्या होगा मेरा.

वो रूम से बहार आयी तो शिव अभी भी कही खोया हुआ था. वो उसे हिला कर बेथ ने को बोलती है और किचन में गयी और दोनों के लिए दूध ले आयी. जब हम दोनों निकले तो स्कूटर में hi चला रहा था. जूही मैडम ने मेरी कमर में अपना एक हाथ दाल रक्खा था. में कर भी क्या सकता था. में स्कूटर चलते हुए गयम पहुंच गया.
 
अपडेट 67

गयम ख़तम कर के जब हम जूही मैडम के घर पहुंचे तो उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा. में उनके साथ अंदर चला गया.

जूही मैडम : (मुझे पानी देते हुए) तो क्या किआ दो दिन, सब ठीक से हो गया.

शिव : है, मैडम सब हो गया, उसके अलावा भी एक घटना हो गयी.

जूही मैडम : ऐसा क्या हो gaya?(Mene उन्हें शार्ट में गायत्री दीदी के बारेमे बता दिया), क्या? शिव तुम पागल हो, क्या समझते हो अपने आप को, तुम्हे पता भी है तुम क्या कर के आये हो, अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो, क्यों करते हो ये सब.

शिव : पर कुछ हुवा तो नहीं न, में एकदम ठीक हु और गायत्रीदिदी भी ठीक है, में उन्हें कैसे उस नर्क में रहने देता.

जूही मैडम : वो सब ठीक है पर फिर भी, तुम कोई सुपर हीरो नहीं हो समजे, जाया देखो किसी से भी बिना सोचे समझे भीड़ जाते हो.

शिव : आप सच कह रही है, में कोई सुपर हीरो नहीं हु, पर अपनों के लिए अगर में इतना भी न कर शकु तो फिर ये जीना किस काम का. क्या आप किसी अपने को ऐसी स्थिति में देख पति.?

जूही मैडम : (मुस्कुराते हुए) सच कहु तो तुम सच में सुपर हीरो hi हो, सच कहा तुमने, अगर में भी होती तो शायद यही करती. चलो, जो हुआ अच्छा hi हुआ है फिर बुरा क्यों सोचना. अच्छा मेने एक बात सोची है, वही तुम्हारे और अनाथालय के लिए पैसे जुटाने के लिए, जैसे की मेने कहा था हम सोशल मीडिया की हेल्प लेंगे, उसके लिए हम एक वीडियो बनाएंगे और उसमे एक बैंक अकाउंट नंबर देंगे और और लोगो से अपील करेंगे की वो डोनेशन दे. मेने ऐसा hi कुछ टीवी पर देखा था जहा वो बच्चो की हेल्प के लिए डोनेशन मांग रहे थे. मुझे लगता है की इस से हमारा काम हो जायेगा.

शिव : मुझे इस बारेमे कुछ नहीं पता, अगर आप को लगता है की ये हो शक्ति है तो हम वही करेंगे.

जूही मैडम : इस के लिए हमे एक कंप्यूटर भी चाहिए होगा ताकि हम वीडियो सही से एडिट कर पाए. और आज hi कर लेते है क्यों की उसे वायरल होने में भी टाइम तो लगेगा.

शिव : (मुझे पता था की बिना मैडम के पास कंप्यूटर hai)Ha वो में कर लूंगा. आप अपना स्कूटर दीजिये में कंप्यूटर के लिए बात कर के आता हु.

जूही मैडम : किसके पास है?

शिव : मेरी क्लास टीचर, बिना मैडम.

जूही मैडम : क्या वो उसे करने देंगी?

शिव : है वो मुझे मन नहीं कर शक्ति.

जूही मैडम : (शिव को घूरते हुए) क्यों?

शिव : अरे वो बहोत अच्छी है, वो मेरी बहोत हेल्प भी करती है, आप स्कूटर की चाबी दो में अभी आता hu(Me उनका स्कूटर लेकर बिना मैडम के घर चलागया, में जनता था उनको स्कूल के लिए निकलना होगा तो में टाइम पर वह पहुंचना चाहता था)

बिना मैडम : (बिना अपना काम निपटा कर, टिफ़िन रेडी कर के नहाने गयी थी. वो मान में शिव को hi याद कर रही थी, ये उसका रोज का हो गया था, शिव उसके जहँ से हैट hi नहीं रहा था, उसके साथ बिताये पल याद करके वो शर्मा जाती थी. अभी भी उसका मान दुविधा अनुभव कर रहा था, किआ क्या उसने सही किआ. पर दिल और शरीर बहोत खुस थे, वो ये सब सोच hi रही थी की उसने दरवाजे की घंटी सुनी. उसे आश्चर्य हुआ. आमतौर पर उसके घर कोई नहीं आता. एक बार तो उसको ख्याल आया कही शिव तो नहीं? पर उसके मान ने hi जवाब दे दिया, दो दिन से तो वो स्कूल भी नहीं आया और अगर वो आज आनेवाला होगा तो भी अभी वो स्कूल के लिए तैयार हो रहा होगा. उसे भी तो स्कूल आना है. तो कौन होगा इस वक़्त? तब तक एक दो बार और घंटी बज चुकी थी. उसने सोचा की जो भी होगा उसे बहार से hi निपटा देगी, इस्सलिये वो टॉवल लपेटे hi बहार आ गयी. दरवाजे के पास जा कर उसने puchha)Kon है?

शिव : में हु मैडम शिव.

बिना मैडम : (ये तो शिव hi है, उसकी आवाज सुन कर वो खुस हो गयी, पर अचानक उसे अपनी हालत का ख्याल आया, उसको शर्म भी आने लगी, वो नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्माने लगी जिसकी अभी अभी सुहागरात हुई थी, पता नहीं पर ऐसे अकेले में उसे शिव के सामने जाने पर शर्म आ रही थी. )एक मिनट ruko(Usne सोचा पहले कुछ पहेंलेटी हु, पर फिर उसके दिल ने कहा रहने दे, ये शिव hi तो है जिसने तुजे पूरा नंगा देखा है, अपनी hi सोच पर वो और शर्मा गयी)

शिव :(ये मैडम क्यों इतना टाइम लगा रही hai)Madaaaam.(Darwaja अंदर से खुलने की आवाज आयी. फिर दरवाजा धीरे धीरे खुलने लगा पर कोई दिखा नहीं, में अंदर गया तो रूम में भी कोई नहीं था, मेने पीछे मुड़कर देखा तो वो दरवाजे के पीछे कड़ी दिखी, वो भी सिर्फ टॉवल में, उन्हें देख कर मेरी धड़कन एक बार तो चूक गयी, मेने ऐसा अनुमान नहीं किआ था, वो टॉवल में लिपटी अप्सरा दिख रही थी, भरे बदन की वो मालकिन थी, बड़े स्तन अपनी उपस्थिति को उजागर कर रहे थे. अपनी नज़ारे झुकाये वो शर्मा रही थी. उनको देख कर hi मेरे लुंड में जान आने लगी. में भूल गया की में क्या करने आया था. में धीरे से bola)Madam(Me उनकी और बढ़ा तो वो पीछे हटी, जिस से दरवाजा बंद हो गया और वो दरवाजे से सात कर कड़ी हो गयी, उन्होंने अपना चेहरा साइड में कर रक्खा था, मैंने उनके भीगे हुए बालो की एक लत को सही किआ जिस से मेरी उंगली उनके गलो को छू गयी. वो कैंप गयी मेरी छुअन से. )

बिना मैडम : सीईव.

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो मैडम. (में उनके चहरे को सहलाने लगा, वो मेरी आंखोमे देख रही थी)

बिना : (पहले संसर्ग के बाद वो इस एहसास के लिए बहोत मचल रही थी, वो जानती थी की वो जो भी कर रही है वो गलत है पर वो खुद को रोक नहीं प् रही थी, शिव की छुअन से वो पिघलने लगी थी, शिव उसकी और झुका और उसके तड़पते होठो पे अपने होठ रख दिए, उसकी आंखे बंद हो गयी इस सुखद अनुभव से, शिव बड़े प्यार से उसके होठो को चूस रहा था, उसके होठ भीगने लगे थे,





शिव की जीभ उसके मुख में प्रवेश कर गयी, उसने भी अपनी जीभ आगे बढ़ा दी, दोनों के मुख रास आपस में मिलने लगे, उसके शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही थी, वो अपने हाथ शिव के बालो में घूमने लगी, होठो की लड़ाई तीव्र होती गयी, वो इस बहाव में बहती जा रही थी, वो इस सुख के सागर में डूबती जा रही थी)( थोड़ी देर उन्हें किश करने के बाद में उनको देखने लगा, वो मेरी आंखोमे देख रही थी, उनकी आंखे बता रही थी की वो भी वही चाहती है जो में चाहता हु. माहौल hi कुछ ऐसा हो गया था की मैंने उनको अपनी गॉड में उठा लिया. वो शरमाते हुए मुस्कुराते हुए मेरे गलेमे बहे डालते हुए मुझसे लिपट गयी. में उनको बैडरूम में ले आया और उन्हें बीएड पर लेता diya.)(Bina का दिल तड़प रहा था, अपने शरीर में उठती तरंगो को वो रोक नहीं प् रही थी, उसने शिव को देखा)

बिना मैडम : (धीमी आवाज me)Time नहीं है Shiv....School जाना hai...(Hala की वो चाहती थी की कुछ हो)

शिव :(मैंने उनकी आँखों में देखा, उनकी आंखे कुछ और hi कह रही थी, मेने उनके बदन का जायजा लिया, भीगा बदन ,भीगे बल, आधी चूचिया टॉवल से बहार, और निचे बस छूट ढके वह तक hi टॉवल , उनकी गोरी गोरी मसल झंघे आपस में सटी हुई थी, आनेवाले पालो को सोच कर उनकी सांसे तेज होने लगी थी, चेहरे पर वो शर्म हाय, में पागल होने लगा. में झुका और उनके होठो पे किश किआ, वो बिना कुछ किए ऐसे hi रही, में बरी बरी उनके होठो को चूसने लगा, मेरे हाथ उनके स्तन को सहलाने लगे, माहौल में गर्मी बढ़ने लगी, वो मेरे शर्ट को पकड़ कर खींचने लगी, में उनके बगल में लेट गया और उनकी झांघो को सहलाते हुए टॉवल को ऊपर उठाया, वो मेरी और करवट ले कर मेरे होठो को चूसने लगी और मेरे हाथ उनके नंगे कूल्हे को सहलाने लगे. में उनके होठ को चूसने लगा, नरम मुलायम भीगे होठ मुझे और ललचाने लगे, में उनके होठो को निचोड़ ने लगा)

बिना मैडम :(बिना बहोत गर्म हो गयी थी, वो शिव से लिपट ने लगी और उसके होठो को चूसने लगी, इस झड़प में उसका टॉवल खुल गया और शिव के हाथ को अपने नंगे कूल्हों और झांघो पर महसूस कर के वो पागल होने लगी, वो शिव से कास के लिपटने लगी, वो इतनी गरम हो गयी थी की अब उसे लगने लगा था की वो अब बिना चूड़े नहीं रह पायेगी, उसने शिव से होठ अलग kiye)Shiiiiv, टाइम नहीं है, अह्ह्ह जल्दी से कर lo(Bolte बोलते वो शर्मा गयी).

शिव : (मुझे भी लगा की टाइम नहीं है तो मई खड़ा हुआ और फटाफट अपने सरे कपडे निकल दिए, मुझे यु तने हुए लुंड के साथ नंगा खड़ा देख कर मैडम शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए दूसरी और देखने लगी. बीएड पर बिछे इस बेमिसाल हुस्न को देख मेरे लुंड ने एक ठुमका मारा. मैंने उनकी भरी हुई झंघ पर हाथ रखते हुए उसे ऊपर की और ले जाने लगा. उन्होंने अपनी झंगे आपस में सत्ता ली. मैंने उनकी छूट के बालो को सहलाते हुए पुरे छूट के फुले हुए भाग पर हाथ फिराया, उनका बदन लहराने लगा. क्या बदन था मैडम का, बड़े स्तन तने हुए थे, पतली कमर के निचे का हिस्सा फ़ैल रहा था. सीधा लेटने पर उनके कूल्हे और साइड में फ़ैल गए थे.)

बिना मैडम :(शिव को अपने बदन को देखते पाया तो वो और शर्मा गयी, टाइम नहीं tha)Shiv, टाइम नहीं है.

शिव : (में नंगा हो चूका था पर में जनता था की तिने काम टाइम में ये सब होगा नहीं, मेने अपने आप को कण्ट्रोल kia)Thik है मैडम आप तैयार हो जाइये, में आप को स्कूल छोड़ देता हु.

बिना मैडम :(बिना अब नहीं रुक शक्ति थी, तो शरमाते hue)Abhi पंद्रह मिनट है Shiv(Jaise hi मैंने उनकी आंखोमे देखा तो शरमाते और मुस्कुराते हुए वो दूसरी और देखने लगी, मेरा भी अब रुकना मुमकिन नहीं था, मेने सोचा जल्दी से करलेता हु, मैं उनकी टंगे फैलते हुए बीचमे बेथ गया, वो बार बार कनखियों से मुझे देख रही थी, मैंने लुंड को छूट पर घिसा तो लुंड का टोपा चुतरस से भीग गया, (बिना अपनी छूट पर लगे उस लैंड से मचलने लगी, ऐसे सुखद अनुभव के लिए उसने अपनी मर्यादा लाँघ दी थी, अपनी आंखे बंद किये आनेवाले पल के लिए वो तैयार हो गयी, शिव ने उसका अंग उसके छेड़ पर टिका दिया, उसकी झंघे पकड़ते हुए उसका वो अंग, छेद को फैलते हुए अंदर उतरने लगा,





उसे दर्द का एहसास हुआ तो उसने शिव का हाथ जोर से pakadliya,)Aaiiiiiiiiii, shhhhhhhh.(Mera लुंड उस गरम, चिकनी, कासी हुई गुफा में उतरने लगा, में उनके ऊपर झुक गया और उनके होठो को चूसने laga.)(Bina उसके किश का कोई जवाब नहीं दे प् रही थी, उसका पूरा ध्यान अपनी छूट में अंदर जा रहे उसे बड़े से लुंड पर hi टिका हुआ था, उसे दर्द भी हो रहा था और एक शुकुन भी मिल रहा था. उसने सख्ती से शिव की बाह को पकड़ लिया पर शिव को रोका नहीं. आहिस्ता आहिस्ता कर के आधा लुंड उसकी छूट में समां गया, उसने एक रहत की साँस ली. उसकी छूट पूरी तरह से फ़ैल गयी थी, वो इतनी फ़ैल गयी थी की अब जरा सा भी फैलती तो फैट जाती, वो आंखे बंद किये हुए लुंड को महसूस कर रही थी. उसके अंदर की औरत इस एहसास को जी रही थी, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी. वो एक समझदार पढ़ी लिखी औरत थी, वो जानती थी की ये सम्बन्ध गलत है, पर वो इस एहसास इस आनंद के आगे बेबस थी. वो अपनी आंखे मूंदे शिव के जिस्म को सहलाने लगी, उसका रोम रोम इस मरदाना जिस्म से मिल रहे आनंद को महसूस कर रहा था, वो लुंड की नशो में हो रहे खून के कम्पन तक को महसूस कर रही thi)(Muje पता था की ज्यादा टाइम नहीं है तो मैंने लुंड आगे पीछे करना सुरु कर दिया) आईईईई मायआ शहहहहह,( मैडम की आवाज बता रही थी की उन्हें दर्द है पर में जनता था ये जल्द hi ख़तम हो जायेगा. मैंने उनके स्तन को और निप्पल को चूसते हुए धक्के लगाने लगा, रफ़्तार काम hi थी पर एक ले में लगा रहा था)





बिना :(अपनी टंगे फैला कर लुंड को रास्ता दे रही थी, हर धक्के पर उसे कुछ हो रहा था, दर्द के साथ मिल रहे आनंद से वो पिघलती जा रही thi)Ahh, अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ahhh(Shiv के कूल्हों पर हाथ रख कर उसे दबा रही थी, उसे इतना मज़ा आ रहा था की उसकी कमर अपने आप hi आगे पीछे हो रही थी. उसे सही से सेक्स के बारे में पता चल रहा था, क्यों लोग इस सुखद एहसास के पीछे पागल है वो उसे समाज आ रहा था. वो जानती थी की वो एक अध्भुत बदन की मालकिन है पर पहले ये उसके लिए बेमानी था. अब जा के उसे अपने बदन का सही हक़दार मिला था. अपनी छूट को छुड़वाने में उसे बहोत मज़ा आ रहा था, शिव के धक्के उसके बदन में सरसराहट पैदा कर रहे थे, उसके अंदर नजाने किस प्रकार की सुखद अनुभूति हो रही थी, वो उसे और अपनी और खींच रही थी, वो उसके सख्त कूल्हों को पकड़ कर अपनी और खींच रही थी, जैसे धक्के बढ़ रहे थे, उसे दर्द भी हो रहा था पर जल्दी तो करनी hi thi.)Shhhh, अह्ह्ह्ह सीईव, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह, कहा चले गए थे, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह में क्यों इतना याद कर रही थी तुम्हे, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव :(में बेथ गया और उनके दोनों स्तन कपड़ कर दबाते हुए छूट में लुंड पेलने लगा. वो मेरी टीचर थी तो एक अजीब तरह का आकर्षण था मुझे. उनकी छूट से इतना रास बह रहा था की मेरा पूरा लुंड चमक रहा था, मेरी कमर के धक्के जोरसे लगने लगे थे, में जनता था मुझे जल्दी करनी है तो मेने रफ़्तार बढ़ा दी, टीचर को पूरी तरह अपने निचे दबाये धक्के लगाने लगा, लुंड धीरे धीरे और अंदर और अंदर जा रहा था.)

बिना मैडम :अह्ह्ह अह्ह्ह उईईईईई मा अह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शिईयिव ahhh(Meri छूट से इतना पानी बह रहा था, वो लुंड मेरी हालत ख़राब कर रहा था पर एक अजीब सा आनंद आ रहा था, आखिर कर वो अंग मेरी बच्चे दानी की दीवाल पर ठोकरे मर रहा था, मैंने अपनी टंगे शिव की कमर पर कास के लपेट दी. मेरा पानी निकलने वाला tha)Ahhh अह्ह्ह्ह शिव अह्ह्ह शिव अह्ह्ह में गयी, अह्ह्ह में गयी अह्ह्ह्ह मुंईईई अह्ह्ह्ह ऊह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह मुंईईई शिव अह्ह्ह्ह जल्दी अह्ह्ह जोर से अह्ह्ह्ह शिवववव ahhhh(Me शिव को चूमने लगी और उसको अपनी और खींचने lagi)Shiv बस अह्ह्ह शिव अह्ह्ह्ह मुंईईई शिव अह्ह्ह में झाड़ गयी शिव, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह रुक जाओ शहहह बस्सस अह्ह्ह्ह बस शिव ाःह अह्हह्ह्ह्ह बस करो अह्ह्ह्ह.





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शिव : थोड़ी देर मैडम हम्म हुम्म्म हम्म्म्म अह्ह्ह थोड़ी देर और मैडम, अह्ह्ह्हह

बिना मैडम : ओह शिव अह्ह्ह्ह में पागल हो जाउंगी शहहह अह्ह्ह्हह शिव अह्ह्ह्ह तुम्हे ऐसा करने में मज़ा आ रहा है, अह्ह्ह अह्ह्ह मेरे साथ करने में अह्ह्ह शहहह.

शिव : हम्म्म्म हम्म्म अह्ह्ह्ह भोत अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आप कमल हो अह्ह्ह्ह, आप को मज़ा आ रहा है

बिना मैडम : (पशीने से भगचूकि thi)Ha शिव, अह्ह्ह शहहह मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा है, अह्ह्ह , में दोपहर को छूती ले कर आ जाउंगी, अह्ह्ह तुम आओगे?

शिव : अह्ह्ह अह्ह्ह्ह मुझे तो आना hi है, में इसी लिए तो आया था. अह्हह्ह्ह्ह मेरा निकलने वाला है, मैडम.

बिना मैडम : (शिव को जकड़ते hue)Ahhh भर दो अह्ह्ह अह्ह्ह्हह भर दो शिव, निकल दो मेरे अंदर अह्ह्ह्ह.

शिव :(मुझे समाज नहीं आ रहा था की मैडम ऐसा क्यों कह रही है, अगर बच्चा हो गया तो, पर जब वो कह रही है तो मुझे क्या प्रॉब्लम hogi)Ahhh अह्ह्ह मैडम आप को छोड़ने में बहोत मज़ा आता है.

बिना मैडम : (मुस्कुराते hue)Gande कही के, ऐसी गन्दी बात मत करो अह्ह्ह शहहह

शिव : अह्ह्ह अह्ह्ह मैडम छोड़ने को छोड़ना नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे.

बिना मैडम :(मुस्कुरहर और गहरी हो gayi)Gande गंदे, अह्ह्ह अह्ह्ह

शिव :एक बार आप भी कहिये न.

बिना मैडम :(में महसूस कर रही थी की वो ऐसा बोलते वक़्त और गरम हो रहा था, मुझे भी कुछ अजीब से फीलिंग्स हो रही थी, मैंने उसके कान में धीरे से kaha)Ahhhh ष्ठीववववव अह्ह्ह मुझे और चुदोऊ अह्ह्ह्ह जोर से चुदोऊ मुझे भी मज़ा आ रहा है ahhhh(Mere ऐसा कहने से शिव की रफ़्तार और बढ़ गयी, उसके झटके इतने तेज हो गए की मुझे दर्द होने लगा, पर में जानती थी वो जल्दी छूट jayega)haaa अह्ह्ह ऐसे hi चोदूओ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह और जोर से चुदोऊ मुझे अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शिव छोडोऊ मुझे चोदूओ भर दो मेरी भोस अह्ह्ह्ह मुझे तुम्हारा ऐसा करना बहोत पसंद है और करो छोडोऊ मुझे अह्ह्ह्ह (वो और सेह न पाया और उसके लुंड से पूछ पूछ कर ते हुए वीर्य निकलने लगा और मेरी भोस में भरने लगा, वो गरम गरम एहसास, अह्ह्ह्ह क्या आनंद देता है, वो और धक्के लगते हुए अपना पूरा लुंड जड़ तक घुसाए मुज से लिपट गया, मैंने अपनी टैंगो से उसे जकड लिया, में तृप्त हो गयी थी., में इस लड़के की दीवानी होते जा रही थी, कितना मज़ा देता है ये, मेरे शरीर को ये एहसास बहोत पसंद आ रहा था. में उसके गाल को उसकी छाती को उसके होठो को चूमे जा रही थी. अचानक मुझे याद aya)Shiv schoooool.(Mene शिव को हटाया वो एक और लुढ़क कर बिस्तर पर लेट गया, में कड़ी होने लगी तो )अह्ह्ह्हह mumiiiiiiiii(mere अंदर दर्द हुआ, ये लड़का मेरी जान लेकर रहेगा, मेरी छूट के अंदर दर्द होने लगा था, मुझे खड़े होने भी प्रॉब्लम हो रहित hi)ahhh शिव, में कैसे स्कूल jaungi(Me वापस लेट gayi)mumiiii, मेरा फ़ोन दो शिव.

शिव : (मैंने उनको फ़ोन दिया और में बाथरूम में चला गया, जब में वापस आया तो वो टॉवल डेल लेती हुई thi)Kya हुआ स्कूल नहीं जाना?

बिना मैडम :(बनावटी गुस्से me)Tumne जाने लायक छोड़ा है? मैंने फ़ोन कर दिया की मेरी तबियत ख़राब है.

शिव : सॉरी मैडम, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, पर में क्या करता, सब आप की hi गलती है.

बिना मैडम : मेरी गलती, वो कैसे, एक तो मुज पर टूट पड़े और कहते हो की मेरी गलती है.

शिव : वही तो कह रहा हु, आप को ऐसे देखा तो रहा नहीं गया, आप ऐसी लग रही थी की में अपने आप को कण्ट्रोल hi नहीं कर पाया.

बिना मैडम : पागल कही के, एक तो खुद ये सब किआ और अब इल्जाम भी मुज पर hi दाल रहे हो.

शिव : क्यों आप को मज़ा नहीं आया?

बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए उसे देखने लगी और उसका चेहरा सहलाने लगी)

शिव : (उनके बाजु में लेट ते hue)Iska मतलब आप को मज़ा आया, तो एक बार और हो जाये.

बिना मैडम :(मुस्कुराते hue)Marungi, क्या हालत है मेरी तुम्हे पता है. अह्ह्ह्ह कितना दुखता है वह.

शिव :(सीरियस हो kar)Sorry मैडम.

बिना मैडम :(शिव को सीरियस dekh)Pagal, मुझे अपनी और खींच कर मुज से लिपट गयी. दुखता है पर मज़ा भी बहोत आता है, पागल, में ठीक हु, सीरियस मत हो. अब थोड़ी देर आराम करने दे. और बता तू क्या कह रहा था, क्यों आया था यहाँ.

शिव : अरे बाप रे, में तो भूल hi गया था, आप न मुझे पागल कर देती है.

बिना मैडम :(मुस्कुराते hue)Me कर देती हु, या तू कर देता है?

शिव : आप को ऐसे देख में अपने आप को रोक नहीं पता hu(Maine उनकी तंग अपने ऊपर चढ़ा ली और उनके बड़े से कूल्हे को मसलते हुए उनके होतो को चूमा.

बिना मैडम : अह्ह्ह्ह, शहहहहह ऐसा मत करो शिव. अभी अभी तो किआ है. और नहीं.

शिव : उसकी बालो की लत सही करते हुए, अगर अभी काम न होता तो में आप की एक न सुनता. पर वह जूही मैडम मेरा इंतजार कर रही होगी, पक्का आज तो दन्त पड़नेवाली है. दरअसल हमे आपके कंप्यूटर का काम था, तो में इसीलिए आया था की आप स्कूल जा रही है तो आपके घर की चाबी ले लू, ताकि हम आपके कंप्यूटर का इस्तेमाल कर शेक.

बिना मैडम :(अपनी छूट पर हो रही लुंड की चुभन उन्हें विचलित कर रही थी पर फिर भी अपने आपको सँभालते hue)Kyu? क्या काम था?

शिव : (थोड़ा सीरियस हो kar)Wo मैनेजर तो पकड़ा गया, अब अनाथालय कैसे चलेगा इस बारे में हम सोच रहे थे, अनाथालय के लिए रेगुलर तो पैसे मिलने लगेंगे पर, और बेहतरी के लिए लोगो से डोनेशन लेना है तो जूही मैडम ने कहा की हम अनाथालय पर वीडियो बनाएंगे और उसे एडिट करने के लिए आप का कंप्यूटर चाहिए था. उस वीडियो के जरिये हम लोगो से डोनेशन मांगेंगे.

बिना मैडम : बात तो उनकी सही है, पर अगर पैसे चाहिए तो मुज से ले लो.

शिव : ये एक दो दिन की बात नहीं है और अनाथालय में बहोत सरे बच्चे है, खर्चा भी बहोत है. आप से तो मई आलरेडी पैसे ले चूका हु.

बिना मैडम :(पैसो से उनको याद aaya)Ek बात पुछु, तुमने मुझसे पैसे लिए फिर उस गयम की ओनर क्या नाम था है स्नेहा, उनसे भी पैसे लिए, क्यों?.

शिव :(बिना मैडम को देखते hue)Me आप से पहले उनसे पैसे ले चूका था, में आप से पैसे नहीं लेना चाहता था पर आपने जोर दिया तो ले लिए, क्यों की दो और लड़कीअ भी थी जिनका यूनिफार्म लेना था. पर जब लेने गए तो यूनिफार्म के सरे पैसे स्नेहा मैडम ने hi दे दिए तो मेरे पास सरे पैसे ऐसे hi पड़े थे उसी का फायदा मैनेजर ने उठाया. अगर आपको पैसे वापस चाहिए तो में दे दूंगा.

बिना मैडम :ऐसा क्यों कह रहे हो? में तो ये कह रही थी की अगर ज्यादा पैसे चाहिए थे तो मुज से कह शक्ति थे, उनसे लेने की क्या जरुरत थी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Muje लग रहा है वो भी शामे तो शामे यही कहनेवाली है मुज से. जैसे आप अच्छी है वैसे भी वो भी अच्छी है. सच कहु तो मुझे hi कुछ करना होगा जिस से मुझे किसी से पैसे न लेने पड़े, न आप से न उनसे.

बिना मैडम : मैंने ऐसा तो नहीं कहा. में ये कह रही हु की अगर तुम्हे जरुरत हो तो बिना किसी हिचकिचाहट मुज से मांग लिया करो. में गैर तो नहीं हु.

शिव :(मुस्कुराते hue)To कोण हो?

बिना मैडम :(शरमाते hue)Tumhare साथ अभी जिस अवस्था में हु, फिर भी कुछ कहने की जरुरत है.

शिव : नहीं मैडम, में तो सिर्फ मज़ाक कर रहा था, सच कहु तो इसी लिए में आप से पैसे लेने में हिचकिचाता हु, मुझे ऐसा लगेगा जैसे में आप का फायदा उठा रहा हु.

बिना मैडम : पागल जैसी बात मात करो, इस थोड़े से वक़्त में तुम मेरे इतने करीब आ चुके हो जहा तक कोई नहीं पहुंच पाया. और अपने अपनों के काम नहीं आएंगे तो कोण आएगा. या फिर तुम्हे ऐसा लग रहा है की में तुम्हे मेरे साथ ये सब करने के लिए पैसे दे रही hu(Kehte कहते उनकी आँखों में आंसू चालक ए)

शिव :(में उनके प्यार को महसूस कर रहा था, उनकी आँखों में आंसू देख कर मेने उन्हें गले से लगा liya)Sorry, मेरे कहने का ये मतलब नहीं था.

बिना मैडम : तो मुझसे वडा करो की दोबारा ऐसा नहीं करोगे, अगर जरुरत हो तो मुज से मांग लेना. किसी और से मांग ने की जरुरत नहीं है तुम्हे में खुद कमेटी हु, ये मेरे पैसे है.

शिव : (अब में क्या कहु आप को, आप जैसा कह रही है स्नेहा मैडम भी यही कहती है, फ़िलहाल तो में आपको नहीं बता सकता की वो भी मेरे लिए उतनी hi एहम है जितनी आप. पर एक दिन जरूर आपको bataunga)Thik है, में मांग लूंगा, पर मुझे जरुरत होगी तब, अभी जरुरत अनाथालय की है.

बिना मैडम : ठीक है, चलो में भी चलती हु तुम्हारे साथ, वैसे भी मैंने स्कूल से छुट्टी ले hi ली hai.(Kehte कहते वो उठने लगी par)ahhhhhh (उन्होंने अपनी आंखे बंद कर ली, चेहरे पर दर्द छलकने लगा)

शिव : आप ठीक हो?

बिना मैडम : (शरमाते hue)Pehle दर्द देते हो फिर, फ़िक्र करते हो.

Shiv:(Mazak में, सीरियस होने का दिखावा करते hue)Thik है फिर में आप को दोबारा दर्द नहीं दूंगा.

बिना मैडम : जान न लेलु तुम्हारी जो मेरे साथ न किआ to(Unko एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी तो वो शर्मा गयी)

शिव :(में मुस्कुरा diya)Par अब आप आराम कीजिये, हम कर लेंगे.

बिना मैडम : नहीं, में आ रही हु, इतना भी दर्द नहीं hai.(Wo कड़ी हो गयी और टॉवल लपेट कर अपनी टंगे फैलते हुए बाथरूम की और चलने लगी, निचे वीर्य की बुँदे टपक रही थी, मुझे हंसी आ गयी, मेने उन्हें गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया. मेरी मुस्कराहट देख वो और शर्माने लगी, मेने उन्हें वह उतरा पर वो मुझे देख रही थी.)

शिव : क्या हुआ? कर लीजिये.

बिना मैडम : बदमाश, बहार जाओ.

शिव : पर मुझे भी लगी है.

बिना मैडम : तो पहले आ जाते, ठीक है तुम कर लो, में दूसरी और घूम जाती हु.

शिव : अब क्यों शर्मा रही है, (में वही कमोड के बाजु में जगह थी तो पेशाब करने लगा, वो अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी पर अपनी कनखियों से मेरे लुंड से निकल रही पेशाब की धार को देख रही थी. वो भी कमोड पर बेथ hi गयी और मुझे दिखा नहीं पर पेशाब की आवाज आने लग, उन्होंने एक पल मुझे देखा फिर अपनी नज़ारे झुकाये मुस्कुराने लगी. में भी मुस्कुरा दिया. मुएज भी लग रहा था की में कितना बेशरम हो गया हु. पर मुझे मज़ा आ रहा था, मेरा पेशाब ख़तम हुआ पर मेरा लुंड अकड़ गया, मेने उन्हें हाथ दिया तो वो कड़ी हो गयी, वो नज़ारे नहीं मिला रही थी, मेने उनका चेहरा उठाया तो भी वो मुझे नहीं देख रही थी, मेने उनके होतो पे अपने होठ रक्खे और उन्हें चूमने लगाम मेरा मान कर रहा था पर मेने अपने आप पर कण्ट्रोल किआ. मेरा लुंड उनकी झांघो के बिच छूट पर चला hi गया था, मेने उन्हें देखा तो वो बस मुझे देख रही थी, वो इंतजार कर रही थी की अभी अंदर गया अभी गया.

शिव : अभी टाइम नहीं है वर्ण...

बिना मैडम : (धीमी आवाज में) अगर मान है तो कर लो, थोड़ी देर होगी तो क्या.

शिव : ऐसा मात कहिये मैडम मेने कैसे अपने आप को रोका है ये में hi जनता hu(Mene उनके होठो को जोर से चूसा ,मेने उन्हें उठाया और बहार ले आया, में कपडे पहन ने लगा, वो थोड़ी देर मुझे देखती रही फिर उन्होंने भी कपडे पहने, जब हम निकल रहे थे तो मेने उन्हें दिवार के सहारे पकड़ कर किश किआ, फिर दोनों एक दूसरे से लिपट गए, जैसे तैसे हमने कण्ट्रोल किआ और जूही मैडम के घर की और चल्दीए.)

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वह स्कूल में रंजन और विणा एक कोने में बैठी थी.

विणा : एक बात पुछु, क्या वो मैनेजर हमारे साथ वो सब करनेवाला था?

रंजन : और नहीं तो क्या, शिव नहीं होता तो वो बरी बरी हम सबके sath...Issiliye तो में तुम्हे कह रही थी की कोई दूसरा मेरे मज़े ले इस से पहले में शिव को hi अपना मज़ा देना चाहती हु.

विणा : वो कैसे?

रंजन : सुरु सुरु में हमारी छूट बहोत संकरी होती है तो लड़को को बहोत मज़ा आता है. तो वो मज़ा में शिव को देना चाहती हु.

विणा : फिर बादमे? क्या उनको मज़ा नहीं आता? और पहली बार दर्द होता है उसका क्या?

रंजन : बादमे भी मज़ा hi आता है, पर पहलीबार का मज़ा कुछ अलग hi होता है, और दर्द तो होना hi है, ऊपर से इसका है भी बड़ा.

विणा :(शर्मा gayi)Tuje शर्म नहीं आती ये सब उसके साथ करते हुए.

रंजन : शर्म तो मुझे भी आती है पर वो बचपन से हमारे साथ है तो थोड़ी काम आती है. तुजे याद है कैसे हम बचपन में साथ में नंगे नहाते थे और खेलते खेलते साथमे मूतने भी बैठ्जाते थे. आमने सामने बेथ कर मूतना और एक दूसरे को देखना कितना मज़ा देता था. बचपन में हम दोनों छुप कर उसकी नुन्नी से खेलते भी थे. उस टाइम हमे समाज नहीं थी की मूतने की ये जगह हमारी ऐसी क्यों है और उसके पास वैसा क्यों है, तो हम उसे छू कर देखते थे, वो भी तो हमारी छूटा था, तेरी भी छूट को वो छूटा था की नहीं.

विणा :(वो याद कर के शर्मा gayi)Us टाइम तो हम बच्चे थे.

रंजन : वही तो, जिसके साथ बचपन से खेलते आये है उसके साथ कैसी शर्म, किसी अनजान से तो वो लाखगुना बेहतर hi है.

विणा : तेरा अच्छा है, उसके साथ तेरा हो gaya.(Thodi मायूस हो गयी)

रंजन : तू क्यों उदास हो रही है, क्या तुजे करना है उसके साथ.

विणा :क्या? क्या कह रही है तू, और क्या वो karega(Apne कहे पर वो खुद hi शर्मा गयी)

रंजन : (मुस्कुराते hue)Matlab तू तो रेडी hai.(Vina और शर्मा गयी)

विणा : पर उसका तो तेरे साथ चल रहा है न.

रंजन : हम दोनों क्या अलग है. जितना मेरा है वो उतना hi तेरा भी है. अगर तुजे भी पसंद है तो मुझे कोई ऐतराज नहीं.

विणा :(खुस हो कर )क्या सच में.

रंजन : ए है, देखो तो कितनी खुस हो रही है, लगता है अगर वो यहाँ होता तो अभी चढलेति अपने ऊपर.

विणा :Dhatt!(Itni शर्मा गयी की उसने अपना मुँह धक् लिया)

(यहाँ जूही madam)Kafi देर हो गयी थी शिव अभी तक नहीं आया था. वो बोल कर भी नहीं गया था की कहा जा रहा है. ये सब वो सोच hi रही थी की उसे स्कूटर की आवाज सुनाई दी. उसे पता था ये शिव hi होगा तो वो भाग कर गयी और दरवाजा खोला. शिव के साथ बिना मैडम को देख कर वो थोड़ा चौंक गयी. वो दोनों आ रहे थे तो बिना मैडम थोड़ा संभल कर चल रही थी पर उनकी चल में थोड़ी लंगड़ा हैट थी.

जूही मैडम : (वो सोचने लगी ये क्यों लंगड़ा रही है.?
 
अपडेट 68

काव्य और भार्गवी पुलिस स्टेशन में बैठे हुए थे.

काव्य म : क्या हुआ भार्गवी? कुछ परेशान लग रही हो?

भार्गवी : वैसे तो परेशानी की बात नहीं है, पर पोलिसवाले को गिरागतार करना है, तू बहोत परेसुरे है, ऊपर से वो सीनियर इंस्पेक्टर है, पुलिस विभाग में बहोत हड़कम्प मचनेवाला है, एक इंस्पेक्टर तो आलरेडी गिरफ्तार है और अब दूसरे की बरी है. मुझे अनाथालय जा कर उस लड़की का बयां भी लेने होगा और उसके सिग्न भी.

काव्य म : उसकी क्या फ़िक्र है, अभी चलिए, उसका बयां भी ले लेते है और सिग्न भी.

भार्गवी : मुझे उसकी फ़िक्र नहीं है, पर में शिव के बारेमे सोच रही हु, वो क्यों इस तरह के खतरे उठा रहा है, आप नहीं जानती, वह रेडलीगत एरिया में जाने से पोलिसवाले भी कतराते है, अगर किसी ने हिम्मत कर के किसी को गिरफ्तार भी कर लिया तो भी कुछ नहीं होता, थोड़ी सजा या फिर जुरमाना भर के छोड़ दिया जाता है. और वैसी जगह में ये अकेला चला गया था. पागल है क्या वो?

काव्य म : (मुस्कुराते hue)Ha, पागल hi कह शक्ति है, अनाथालय में पला बड़ा है तो अनाथालय में लोगो को hi अपनी फॅमिली मंटा है, और उनके लिए वो कुछ भी कर शक्ति है, या यु कहु की वो किसी के लिए भी कुछ भी कर शक्ति है, वो दिल का सच में बहोत अच्छा है, जिसे वो अपना मान ने लगता है उसके लिए वो अपनी जान भी दे देगा.

भार्गवी : पर उसे अपना भी ख्याल होना चाहिए की नहीं, उसे अपनी जान की कोई फ़िक्र नहीं?

काव्य म : शायद इस मामले में भी वो लकी है, हम अक्सर क्यों डरते है, क्यों की हमारे ऊपर हमारे परिवार की जिम्मेदारी होती है, शायद वो इस लिए इतना बेफिक्र है क्यों की वो अनाथ है, उसे किसी बात का दर नहीं है, वो कही भी, किसी के लिए भी लड़ने तैयार हो जाता है.

भार्गवी : अजीब लड़का है, ठीक है आप चलिए, में थोड़ी देर बाद अनाथालय चली जाउंगी.

(यहाँ जूही madam)Kafi देर हो गयी थी शिव अभी तक नहीं आया था. वो बोल कर भी नहीं गया था की कहा जा रहा है. ये सब वो सोच hi रही थी की उसे स्कूटर की आवाज सुनाई दी. उसे पता था ये शिव hi होगा तो वो भाग कर गयी और दरवाजा खोला. शिव के साथ बिना मैडम को देख कर वो थोड़ा चौंक गयी. वो दोनों आ रहे थे तो बिना मैडम थोड़ा संभल कर चल रही थी पर उनकी चल में थोड़ी लंगड़ा हैट थी.

जूही मैडम : (वो सोचने लगी ये क्यों लंगड़ा रही है.? कही शिव ने? नहीं नहीं ऐसा नहीं नहीं हो शक्ति, वो उसकी क्लास टीचर है, (बिना को चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी तो उसने शिव की ब्याह पकड़ ली, वो दोनों मुस्कुराते हुए बाते करते आ रहे थे, जैसे hi बिना की नजर जूही पर पड़ी, उसने शिव की बाह छोड़ दी, जूही ये सब नोटिस कर रही थी, जब वो नजदीक आये तो) आइये मैडम आप शिव के साथ? स्कूल नहीं गयी? और आप ये लँगड़ाके क्यों चल रही hai?(Juhi देख रही थी की हर सवाल के साथ बिना मैडम के चेहरे पर भाव बदल रहे थे.)

शिव : इनके पाव में मोच आयी है तो वो स्कूल नहीं गयी और में इनके घर hi गया था क्यों की इनके पास कंप्यूटर है, जब उन्होंने सुना की हमें कंप्यूटर का क्या काम है तो वो खुद hi मेरे साथ चली आयी, मेरी मदद karne.(Usne सवाल बिना मैडम को पूछा था पर जवाब शिव ने दिया, जूही को कुछ समाज नहीं आ रहा था, पर उसने मुस्कुरा कर उनका स्वागत किया. बिना मैडम और जूही मैडम वीडियो के बारे में बात करने लगी, कैसे बनाएंगे, किस तरह के शूट करेंगे, वगैरह वगैरह, और में उनको सुन रहा था. उनका ये वार्तालाप काफी देर तक चला. फिर हम अनाथालय के लिए निकले. अब सवाल था की हम तीन लोग जाये कैसे)

बिना मैडम : हम रिक्शा कर लेते है.

शिव : आप दोनों स्कूटर पर चलिए में दौड़ते हुए आता हु.

बिना मैडम : ऐसे कैसे, हम रिक्शा में चलते है.

जूही मैडम : नहीं शिव ठीक कह रहा है, मैडम आप एक काम करिये, आप पीछे बेथ कर शिव की वीडियो बनाइये और कुछ फोटोज लीजिये, ये हमे काम लगेंगी.

बिना मैडम : है ये तुम्हारी सही बात है. (फिर में दौड़ने लगा और बिना मैडम मेरी वीडियो और फोटोज लेने लगी. ऐसे hi हम अनाथालय पहुंच गए. वो दोनों स्कूटर से उतर गयी. हम तीनो अंदर गए,)

सरितादिदी : लो आ गया, कहा रह गया था तू, सुबह से निकला है, तेरा कोई अटपटा nahi(Sarita की नज़र शिव के साथ आ रही दो लड़कीओ पर पड़ी तो वो चुप हो गयी.)

शिव : दीदी काम था, आप जूही मैडम को तो जानती हो, ये बिना मैडम hai,meri क्लास टीचर.

सरितादिदी :(पता नहीं उनको क्या सूजी to)Me जानती हु इन दोनों को, पर ये तेरी है ये मुझे नहीं पता था, में सामजी पुरे क्लास की क्लास टीचर है.

शिव :(उनकी बात पर बिना मैडम झेप गयी, फिर थोड़ी शर्मा भी गयी, और ये सब जूही मैडम की नजरो से न बच saka)Kya दीदी, हमारी क्लास टीचर है, मुझे पिटवाओगी क्या.

सरितादिदी : अरे में तो मज़ाक़ कर रही थी, (बिना मैडम ko)agar आप को बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहती हु.

शिव : मैडम, सरितादिदी को मज़ाक करने की आदत है और खास कर के मेरी तंग खींचने की.

बिना मैडम : कोई बात नहीं. मुझे बुरा नहीं लगा. और तुम्हे यु शरारत करते देख अच्छा लगा, उस हादसे से तुम सब उभर आये ये बहोत अच्छी बात है.

शिव : आईये मैडम, (में उन्हें मैनेजर वाले ऑफिस में ले गया, क्यों की वही बेथ ने की व्यवस्था थी)

लतादिदी : (धीमी आवाज me)Shiv, तूने खाना खाया, सब तेरी रह देख रहे है.

शिव :(धीमी आवाज me)Nahi दीदी, अभी नहीं खाया.

जूही मैडम : (उसने सुन लिया तो उसने कहा) भूख तो मुझे भी लगी है अगर में आपलोगो के साथ खा शकु तो....

शिव : है है क्यों नहीं मैडम.

लतादिदी : (धीमी आवाज me)Kya, पागल हो गया है तू, ये हमारा खाना कैसे खाएंगी, मैंने कुछ अच्छा बनाया भी नहीं सिर्फ भट और सब्जी hi है. पहले बोलता तो कुछ बना देती.

जूही मैडम :(हमारी बाटे उनके कानो तक पहुंच गयी thi)Aap चिंता मात कीजिये, और जो खाना आप कहते हो क्या वो हम नहीं खा सकते.

लतादिदी: वो मैडम ऐसी बात नहीं है, खाना saada(simple) hi है, इसने बताया नहीं की आप लोग आनेवाले हो, आप थोड़ी देर रुकिए, में कुछ बना देती हु.

जूही मैडम : नहीं लता, कुछ बनाने की जरुरत नहीं, और भूख भी लगी है, जो है वही खाएंगे, क्या कहती हो मैडम.

बिना मैडम : है, सही कह रही हो. भूख तो मुझे भी लगी है.

सरितादिदी : शिव, इनको हाथ मुँह धुलवा दे में खाना लगाती हु. रंजन और विणा का भी आने का वक़्त हो गया है.

हम सब खाना खाने बेथ गए. विणा और रंजन भी आ गयी तो वो भी बेथ गयी. गायत्री दीदी ने सबको खाना परोसा. रंजन बार बार दोनों मदमो को देख रही थी. जूही ने सबके कहते हुए भी कुछ फोटो लिए. खाना ख़तम कर के.

जूही मैडम : सब के साथ खा कर बहोत मज़ा आया, में तो हमेशा अकेले hi कहती हु तो आज सबके साथ बेथ कर खाने में मज़ा आ गया.

बिना मैडम : सही कहा, मेरी भी वैसी hi हालत है. सच में आज खाने से पेट और जी दोनों भर गए.

जूही मैडम : और तुम कह रही थी की सादा खाना है, इतना टेस्टी खाना तो कितने दिनों बाद खाया है. तुम क्या नाम है tumhara(Ranjan को)

रंजन : जी रंजन.

जूही मैडम : तू क्यों हम दोनों को कबसे ऐसे घर रही है?

रंजन :(झेपते hue)Nahi मैडम, वो तो आप दोनों कितनी खूबसूरत है, और आप तो कितनी लम्बी है, (शिव की और इस्सर karke)muje तो लगता था की यही एक है जो खम्भे जैसा लम्बा है.

जूही मैडम :तो में खम्भे जैसी हु.

रंजन :(झेपते hue)Nahi मैडम, मेरा वो मतलब नहीं. वो तो... वो तो

जूही मैडम : रहने दे, मुझे आदत हो गयी है, सब मुझे ऐसा hi बुलाते है. अब लम्बे है तो है, क्यों शिव.

शिव : सही कहा मैडम, अब लम्बे है तो हम क्या कर शक्ति है. मुझे तो लगता है इससे जलन हो रही है की वो इतनी लम्बी nahi.(Sab ऐसे hi हंसी मज़ाक कर रहे थे)

जूही मैडम : अब हंसी मज़ाक तो होता रहेगा, पहले जिस काम के लिए आये है वो तो कर ले.

लतादिदी : क्या काम है मैडम.

जूही मैडम : में तुम्हारी मैडम नहीं हु लता, उम्र में हम एक जैसे hi है तो तुम मुझे जूही hi कहो. और काम में ऐसा है की हमे कुछ फोटोज लेनी है, यहाँ की और तुम सबकी. किसका एक प्रेजेंटेशन बनाएंगे और सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे.

सरितादिदी : हमारी फोटो? अरे वह, तो हम तैयार हो जाये?

बिना मैडम : नहीं ऐसे hi रहो, हमे वही दिखाना है जो यहाँ है, और साथ में हमे ये भी दिखाना पड़ेगा की क्या क्या दिक्कते है, अगर लोगो की सहानुभूति मिलेगी तभी लोग डोनेशन देंगे.

जूही मैडम : अरे वह, लगता है तुम ने सब प्लानिंग कर ली है.

बिना मैडम : है.. वो.. सब दिमाग में आ रहा है... मुझे शोख भी है फटॉग्रफी का

जूही मैडम : ये तो बहोत अच्छा हो गया. तुम बताती जाओ क्या करना है, कैसी फोटोज लेनी है, में सब तैयार करती हु.

हम अभी बात कर hi रहे थे की पुलिस की जीप आ कर कड़ी हुई, सब के चेहरे पर टेंशन दिखने लगा, अंदर से भार्गवी मैडम बहार निकली, उन्हें देख दोनों हवलदार खड़े हो गए और सेलुटे करने लगे. वो सीधे अंदर आ गयी.

शिव : कैसी है मैडम, आप यहाँ.

भार्गवी : में गायत्री का बयां लेने आयी हु.

शिव : है जरूर, गायत्री didi.(Mene उन्हें आवाज दी)

भार्गवी : (गायत्री se)Mera नाम भार्गवी है, तुम ठीक तो हो न?

गायत्री : जी मैडम, में ठीक हु.

भार्गवी : डरना नहीं, सामजी, है वैसे शिव है तो वैसे भी तुम्हे दर नहीं lagega.(Bhargavi मैडम और गायत्री दीदी दोनों मेरी और देखने लगे तो में झेप गया)

गायत्री : सही कहती हो मैडम, ये है तो मुझे किसी बात का दर नहीं, इसकी वजह से hi तो में उस नर्क से आज़ाद हुई हु. कहिये मुझे क्या करना है?

भार्गवी : कुछ खास नहीं, बस तुम्हे उनके खिलाफ बयां देना है जिन्होंने तुम्हारे साथ ये किआ, यहाँ और जब जरुरत हो तब कोर्ट में.

गायत्री : में तैयार हु मैडम, आप जहा कहेंगी, जब कहेंगी में आ जाउंगी. में चाहती हु की उन दरिंदो को उनके किये की सजा मिले और ये इस लिए भी जरुरी है ताकि वो किसी दूसरी गायत्री पर जुल्म न कर शेक.

भार्गवी : वैरी गुड, गायत्री, हम सब तुम्हारे साथ है. (उन्होंने अपना काम किआ और फिर वो चली गयी)

फ्री से जूही मैडम और बिना मैडम अपने काम में लग गयी, दोनों मिलकर हमारी फोटोज लेने लगी. दीदी और लड़कीओ की काम करते हुए, छोटे बच्चो को खाना खिलते हुए, उन्हें सुलाते हुए, बर्तन, कपडे धोते हुए, मेरी भी बहोत साडी फोटो ली, लकडिया काट ते हुए, पढ़ते हुए, रंजन और विणा की भी. ऐसे hi उन्होंने बहोत साडी फोटोज ली. जूही मैडम और बिना मैडम ने भी मेरे साथ फोट खिचवाई. ये सब तक़रीबन दो घंटे चला. दीदी ने मुझे पूछा की ये सब ये क्यों कर रही है. तो मैंने उन्हें समजा दिया की ये हमारे अनाथालय के लिए डोनेशन के लिए है ताकि हमे लोगो की मदद मिले. ये सुन कर वो भी खुस हो गयी.

लतादिदी :(सरिता se)Teri बात सही थी, शिव सब संभल लेगा.

सरितादिदी : वो तो मुझे पता है पर अब टेंशन भी होने लगी है.

लतादिदी : टेंशन? कैसी टेंशन?

सरितादिदी : तू इन्हे देख नहीं रही, कैसे शिव के लिए दोनों सब करने को आ गयी है.

लतादिदी : तो क्या हुआ, ये उसकी मदद के लिए आयी है, इसमें टेंशन की क्या बात है?

सरितादिदी : अभी थोड़े दिन पहले तक तो ये इन्हे जानता भी नहीं था और अभी देखो कितना घुल मिल गयी है शिव से. तू माने या न माने इस शिव में कोई तो जादू है.

लतादिदी : नज़र न लगा मेरे शिव को.

सरितादिदी : मई क्यों नज़र लगाउंगी उसे, पर मुझे लग रहा है ये अपनी जादू की छड़ी हर जगह घुमा रहा है.

लतादिदी : तुजे तो वही लगता है. देख नहीं रही वो कितनी खूबसूरत और अच्छी है, वो तो बस भली है इस लिए हम अनाथो पर मेहरबानी करने चली आयी है..

सरितादिदी : वो दोनों खूबसूरत है तो क्या, हमारा शिव भी काम थोड़े न है, और तू मने या न मने ये मेहरबानीवाला कोई चक्कर नहीं है, ये और hi कुछ है.

शिव :(में उन दोनों की और गया जहा वो बाते कर रही thi)Didi, में इनके साथ जा रहा हु. अगर देर हो जाये तो आप खाना खा लेना में बहार खा लूंगा.

सरितादिदी : है है, तू बिंदास जा, हमे कोई चिंता नहीं तेरी, हम जानते है, बहार भी तेरा ख्याल रखनेवालिया बहोत है. तू आराम से जा.

शिव :(लतादिदी ने सरितादिदी की ब्याह पर एक चपत lagayi)Kya दीदी आप भी.

जैसे आये थे वैसे hi हम जूही मैडम के घर पहुंच गए. उन्होंने हमे सरबत पिलाया. सरबत पिटे पिटे हम आगे क्या करना है उसके बारेमे बाते करने लगे.

जूही मैडम : अब हम इन फोटोज का उसे करके एक अच्छी सी कहानी बनाएंगे, और लोगो को दान देने के लिए कहेंगे. हम सब आपके घर चलते है, वही कहानी सोचेंगे.

बिना मैडम : अभी सबकी जरुरत नहीं है, में थोड़ा प्रिपरेशन कर लू, थोड़ी बहोत ेडींग कर लू, फिर साथ में बेथ के करेंगे. वैसे भी शिव रहेगा मेरे साथ क्यों की वो कंप्यूटर सिख रहा है तो उसे बहोत कुछ सिखने को मिल जायेगा.

जूही मैडम :(मान me)Lagta है मैडम के मान में कुछ और hi खिचड़ी पाक रही है. अब मुझे यकीं हो गया है की सुबह वो सब करके hi आयी थी. पर अगर वो करके आयी थी तो क्या फिर से वो... लगता है अभी मान नहीं भरा. ये लड़का ऐसा तो क्या जादू चला रहा है. वो शिव की और देख रही थी, उसे बुरा भी लग रहा था की शिव उसके साथ कुछ भी नहीं कर रहा, क्या में उसको पसंद नहीं hu?(Udas मान से उसने बिना मैडम को kaha)Jaise आप kahe(Shiv se)Gym तो जाओगे न?

शिव : है, वो तो जाऊंगा hi.

जूही मैडम : गयम से यही आ जाना, खाना साथ खाएंगे.

शिव : ठीक है मैडम.

में और बिना मैडम उनके घर के लिए निकल गए. वो एक तरफ पेअर करके बैठी थी और अपना एक हाथ मेरी झांग पर रक्खा हुआ था. रस्ते की भीड़ की वजह से वो ज्यादा चिपक के तो नहीं बैठी थी पर फिर भी उनके उभर की नोक मेरी पीठ में चुभ रही थी. रस्ते में मुझे ऐसा भी लगा की वो मेरे लुंड वाले भाग पर हलके हलके से छू रही है. उनकी इस हरकत से मेरा लुंड खड़ा होने लगा था पर मैंने रस्ते पर ध्यान देना hi उचित समजा. हम दोनों उनके घर पहुंच गए. दोपहर का वक़्त बिट चूका था, सोसाइटी में कोई भी बहार नहीं था. उन्होंने टाला खोला और हम अंदर आ गए. वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी और शर्मा भी रही थी. उनकी मुस्कान बहोत कुछ कह रही थी.

बिना मैडम : (अपनी नज़ारे झुकाये hue)Tum बैठो में पानी लेकर आती hu.(Wo अंदर गयी तो में उनके पीछे पीछे अंदर चला गया, वो पानी निकल रही थी तो मैंने पीछे से हाथ डालते हुए उनके दोनों स्तनों को थम liya)Ahhhhhh, shhhhiiiiiiiiv.(Me उनके स्तनों को हलके हलके दबाने laga)Shhhhh (मादक आवाज me)kya कर रहे हो अह्हह्ह्ह्ह रुकुओ टूवू. Shhhhhhhhhhh.

शिव : आप रस्ते में क्या कर रही thi.(Unke गाल पे अपने होठ रगड़ते हुए)

बिना मैडम : शहहहहह अह्ह्ह्हह क्या कर रही थी? अह्ह्ह्ह मेने तो कूऊउउउच अह्ह्ह्हह्हह नहीं किआआआ शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : (मुझे लगा शायद मुझे समझने में गलती हो गयी, मैंने उन्हें छोड़ diya)Sorry, मुझे कुछ और hi लगा था.

बिना मैडम :(शिव का उसे यु छोड़ देना उसे अच्छा नहीं लगा, शिव की और घूम कर उसे देखा तो उसके चेहरे पर शर्मिंदगी के भाव थे, उसने मुस्कुराते hue)Tum शर्मिंदा क्यों हो रहे हो? अच्छा बताओ तुम्हे क्या लगा था?

शिव : कुछ नहीं, मुझे लगा था शायद आपका hath.....(Me शर्मिंदगी से निचे देखने लगा)

बिना मैडम :(मुस्कुराते हुए, शर्मा के निचे देखने lagi)Tumhe सही लगा था Shiv.(Me आश्चर्य से उनको देखने लगा. उन्होंने नज़ारे उठायी फिर शर्माकर वापस झुका ली, शरमाते हुए वो घूम गयी, मेरी और पीठ कर ली unhone)Tumhe पता है शिव, जब में तुम्हारे साथ होती हु तो अपने आप को रोक hi नहीं पति.

शिव :(मुस्कुराते हुए उनकी कमर में हाथ दाल के उनके पेट को सहलाते hue)To आप को रुकने के लिए कोण बोलता है.

बिना मैडम : ये अच्छी बात थोड़े hi है, कितनी बेशरम होते जा रही हु me.(Me उनके गाल पर अपने होठ रगड़ने लगा तो उनका चेहरा मेरी और घूमने लगा, में उनके होठो के कोने तक पहुंच गया था, मेने अपनी जीभ निकल कर उनके होठ के कोने को छठा, वो पूरी घूम गयी और मेरे शिर को पकड़ते हुए मेरे होठो पर टूट पड़ी, में उन्हें बहो में ले कर उन्हें चूमने लगा, हमारी जुबान आपस में भिड़ने लगी, सांसे चढ़ने लगी, दोनों के होठ भीग ने lage)Shiv... श्रुणुप श्रुणुप अह्ह्ह्ह में पागल हो जाउंगी शिव, अह्ह्ह मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किआ, श्रुणुप अह्ह्ह तुम मुझे पागल बना रहे हो, शरूप में अपनी मान मर्यादा भूलने लगी हु, अह्ह्ह श्रुणुप. मेरा शरीर मेरा मान अपने बस में नहीं रहा. अह्ह्ह्हह ये कैसा नशा है, शरूपपप.

शिव : आप को दर्द हो रहा था न?

बिना मैडम : वो दर्द कुछ भी नहीं है, इस आनंद के सामने.





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किचन से सुरु हुआ हमारा ये संसर्ग काफी लम्बा चला था,





शिव दो बार झाड़ा था पर में काफी बार झाड़ चुकी थी, आखरी बार का होने के बाद थोड़ी देर मेरे ऊपर रहने के बाद शिव साइड में लेट गया. में उलटी लेती अपनी छूट में से बहार बह रहे वीर्य को महसूस कर रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने अपने कूल्हे पर शिव के हाथ को महसूस किआ, वो मेरे कूल्हों को सेहला रहा था. मेने मुस्कुरा कर उसकी और देखा.

बिना : (मान me)Ye लड़का थकता hi नहीं, उसके सख्त हाथ से कूल्हे मसले जाने से में दोबारा गर्म होने lagi.(Shiv से) अभी मान नहीं भरा तुम्हारा.

शिव : क्या करू, इन्हे देख कर रहा नहीं जाता.

बिना : रहा तो मुज से भी नहीं जा रहा, पर अभी और नहीं, मुझे इम्पोर्टेन्ट काम भी करना है. और तुम्हारे यहाँ रहते वो होना असंभव है.

शिव : तो आप मुझे जाने के लिए बोल रही hai.(Apna मुँह बना लिया)

बिना मैडम : (सीधी हो कर शिव की बहो में घुसते hue)Mera भी मान कर रहा है की तुम यही रहो मेरे पास, पर तुम्हारे रहते ये काम होने से रहा, और वो ज्यादा जरुरी है.

शिव : ठीक है, चलो पहले वो काम करते है.

बिना मैडम : (मेरे होठ पर एक पप्पी देकर मेरे शाइन पर अपना शिर रखते hue)Tum यहाँ रहोगे तो वो नहीं हो पायेगा.

शिव : में कुछ नहीं करूँगा अब, सच में.

बिना मैडम : मुझे पता है पर मेरा क्या, में अपने आप को नहीं रोक प् रही हु, उसका kya.(Mera लुंड पकड़ते hue)Muje देख कर ये ऐसे hi खड़ा रहेगा और में इससे देख कर अपने आप को रोक नहीं पाऊँगी. इस लिए कह रही हु, तुम जाओ.

शिव : ठीक है.

बिना मैडम : नाराज तो नहीं हो न?

शिव : नहीं, आप मेरे काम के लिए hi तो मुझे भेज रही है, में समझता हु.
 
ी ऍम ों ट्रिप फॉर फ्यू डेज, वे विल मीट सून.

सॉरी फॉर इनकन्वेनैंस.
 
Update 69

मैं बिना मैडम के घर से निकलकर जूही मैडम के घर चला गया बिना मैडम के साथ बिताए हर पल मुझे याद आ रहे थे मुझे समझ में नहीं आ रहा था यह किस तरह का लगाव है मैडम सच में बहुत प्यारी है वह दिल की भी बहुत अच्छी है मैं भी किसी का बुरा नहीं सोचता इसका मतलब यह हुआ कि मैं भी अच्छा ही हूं तो क्या इस तरह के संबंध से हम दोनों बुरे हो जाते हैं क्या वह बुरी हैं क्या मैं बुरा हूं समाज इस संबंध को नहीं स्वीकारता मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सही है या गलत है पर एक बात पता ही है कि यह जो कुछ भी है मुझे बहुत आनंद देता है और साथ में मैडम को भी यह खुशी ही देता है मैं चलते-चलते जूही मैडम के घर पहुंच गया मैंने दरवाजे की घंटी बचाई थोड़ी देर बाद उन्होंने दरवाजा खुला मुझे देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ

जूहीमैडम : इतनी जल्दी आ गए तुम मुझे लगा था शायद तुम सीधे जीम हीं आओगे लगता है जल्दी काम खत्म हो गया आओ अंदर आओ( मैडम के बोलने का ढंग थोड़ा अजीब था मैंने उनकी और देखा और अंदर चला गया) तो कैसा रहा सब अच्छे से हो (गया मुझे अभी भी उनके बोलने का ढंग समझ में नहीं आ रहा था वह किस तरह की बातें कर रही है)

शिव: (अब मैं उन्हें क्या पता था काम तो कुछ भी हुआ नहीं था पर अगर मैं ऐसा कहता तू शायद और भी नाराज हो जाती इसलिए मैंने झूठ बोलना ही उचित समझा ) जी मैडम थोड़ा हुआ है थोड़ा बाकी है.

जूही मैडम:( मैडम शायद मुझे बख्शने के मूड में नहीं थी उन्होंने फिर सवाल दागा) क्या किया जरा खुल के बताओ तो मुझे भी समझ में आए

शिव: ज्यादा तो मुझे पता नहीं है, वही सब कर रही थी वह फोटो को एडिट कर रही थी उसे सब्जेक्ट के हिसाब से एक के बाद एक रखती जा रही थी मुझे इतना कंप्यूटर नहीं आता इसलिए मुझे ज्यादा नहीं पता (जैसे तैसे मैंने अपना बचाव किया, मैडम के चेहरे से मुझे लग रहा था कि वह मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं है फिर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा वह बस मुझे देखती ही जा रही थी मुझे उनकी आंखों में देखना भी मुश्किल लग रहा था शो मैंने अपनी नजरें झुका दी)

जूही मैडम :(मन में ,तुम्हारी आंखें तुम्हारा सच बयान कर रही है वैसे तो यह तुम्हारी जिंदगी है पर मुझे क्यों अच्छा नहीं लग रहा है तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? क्या मैं इतनी बुरी हूं, पहले स्नेहा और अब बिना, क्या मैं तुम्हें नहीं दिखती) खाना घर पर खाएंगे, या बाहर जाकर खाना पसंद करोगे.

शिव :जैसा आपको ठीक लगे मैडम मुझे कोई दिक्कत नहीं है

जूही मैडम: नहीं तुम्हें जैसा ठीक लगे ,वैसे भी तुम्हें शायद मेरे हाथ का खाना पसंद ना आए तुम्हें मेरी कोई भी बात पसंद नहीं है.

शिव : आप इस तरह से क्यों बात कर रही है क्या आपको मेरी किसी बात का बुरा लगा है अगर लगा है तो आप मुझे सीधे कह सकती है इस तरह घुमा फिरा कर क्यों बात कर रही है

जूही: ( जूही का दिल कर रहा था कि वो शिव को सब कुछ खुलकर बता दे पर अभी भी उनके बीच एक पर्दा था, अभी वह एक दूसरे के साथ इस तरह से खुले नहीं थे, हां उन दोनों के बीच एक खास रिश्ता जरूर बन गया था पर अभी भी उनके बीच एक दीवार थी जिसकी वजह से वह शिव को खुलकर यह सब नहीं बता सकती थी इसलिए उसने बात को बदलते हुए पूछा )छोड़ो इन सब बातों को क्या खाओगे यह बताओ मैं खाना बनाती हूं तब तक तुम चीन हो आओ मेरा स्कूटर ले जाना तुम आओगे तब तक मैं खाना बना कर रखती हूं.

मुझे भी यही सही लगा इसलिए मैं वहां से सीधे जिम चला गया, मदन सर के साथ सब लोग निकलने ही वाले थे, उनके जाने के बाद मैंने साफ सफाई की और वापस जूही मैडम के घर चला आया, उन्होंने खाना बना दिया था मैंने देखा कि वह बस जरूरत हो उतना ही बोल रही थी वह ज्यादा बात नहीं कर रही थी.मैं बार-बार उन्हें देख रहा था पर वह मेरे साथ नजरें मिलाने से भी कतरा रहे थे मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि वह ऐसा क्यों कर रही है हम दोनों ने मिलकर खाना खाया फिर मैं जाकर सोफे पर बैठ गया वह बर्तन वगैरह अंदर रखने लगे थोड़ी देर बाद वह भी वहां आ गई और सामने वाले सोफे पर बैठ गए कुछ पल मैं उन्हें देख रहा था पर वह कुछ भी बोल नहीं रही थी मुझे यकीन हो गया था कि उन्हें किसी बात का बुरा लगा है पर किस बात का यह मुझे समझ में नहीं आ रहा था.मैं उनको नाराज नहीं देख सकता था इसलिए मैंने उनके साथ बात करना ही उचित समझा.

शिव मैडम मुझे यह तो नहीं पता कि आप किस बात पर नाराज है पर मैं इतना तो जान ही गया कि आप नाराज हैं अगर आप बताएंगे नहीं तुम मुझे कैसे पता चलेगा क्या हुआ है क्यों नाराज है आप मुझसे प्लीज बता दीजिए

जूही मैडम: (कुछ देर मेरी आंखों में देखती रही उनके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वह दुविधा में है बोले कि ना बोले वह बस मुझे देखे जा रहे थे, उन्होंने अपनी नजरें झुका ली और बोले) कुछ नहीं है.

शिव : नहीं, मुझे पता है कुछ तो है, आपका चेहरा ही बता रहा है कि जरूर कोई बात है प्लीज बता दीजिए

जूही मैडम: (वह कुछ पल मेरी आंखों में देखती रही) मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती ना.

शिव :यह आप किस तरह की बातें कर रही है, मुझे समझ में नहीं आ रहा है.

जूही मैडम: मैंने बस इतना ही कहा कि तुम मुझे पसंद नहीं करते, क्यों सही कहा ना.

शिव: यह आप क्या बोल रही है मैडम मैं आपको पसंद नहीं करता? यह कैसे हो सकता है? आप यह कैसे सोच सकती हैं?

जूही मैडम: (अपनी नजरें चुकाए से झुकाए हुए) मुझे बुरा नहीं लग रहा है, और लगना भी नहीं चाहिए, हर एक की अपनी अपनी पसंद होती है, जरूरी नहीं कि तुम मुझे पसंद करो, मुझे सब पता है, मैं समझ रही हूं फिर भी पता नहीं क्यों मुझे बुरा लग रहा है, मुझे ऐसा नहीं लगना चाहिए मुझे माफ कर दो (उनकी आंखों में आंसू छलक आए) ( मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी.मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है पर मैं उनकी आंखों में आंसू ना देख सका और उठ कर उनके पास चला गया)

शिव :मैडम प्लीज रोइए मत मुझे समझ में नहीं आ रहा है की आप कहना क्या चाहती है आप यह कह रही है कि मैं आपको पसंद नहीं करता पर यह सच नहीं है सच कहूं तो आप इस दुनिया में मेरे लिए सबसे खास है, आप ही तो है जो मेरे और मेरे भविष्य के लिए इतना कुछ कर रही है आप मेरे लिए भगवान की भेजी हुई एंजेल है या यह कह सकता हूं कि आप मेरे लिए भगवान ही है फिर यह कैसे कह सकती है कि मैं आपको पसंद नहीं करता.

जूही मैडम :( थोड़ा ऊंची आवाज में )मैं कोई भगवान नहीं हूं, ना ही भगवान की भेजी हुई एंजेल हूं, मैं एक इंसान हूं और मेरे अंदर भी इंसानों की तरह ही भावनाएं है, मैं नहीं चाहती कि तुम मुझे भगवान बनाओ, मैं चाहती हूं कि तुम मुझे इंसानों की तरह ही चाहो.( मैं बूत बना उन्हें देख रहा था ऐसा नहीं है कि वह मुझे पसंद नहीं है क्या ऐसा भी नहीं है कि मैं उन्हें एक लड़की की तरह पसंद नहीं करता सच कहूं तो वह बहुत सुंदर है और कभी-कभी मेरा भी मन बहक जाता है परंतु मैं जानता हूं कि वह मेरे जीवन में क्या महत्व रखती है मैं उन्हें किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता या उन्हें दुखी नहीं देख सकता मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या कहूं क्या क्या करूं)

शिव : मैडम ऐसी बात नहीं है मैं यह नहीं कहता कि मैं आपको पसंद नहीं करता, मैं क्या दुनिया का कोई भी लड़का आपको नापसंद नहीं कर सकता पर मैं इस लायक नहीं हूं शायद आपको लगता होगा कि मैं एक अच्छा लड़का हूं पर मैं नहीं हूं मैं इस लायक नहीं हूं.

जूही मैडम :वह सब मैं नहीं जानती मैं बस इतना जानती हूं कि तुम मुझे पसंद हो.

शिव : मैडम आप मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानते इसीलिए ऐसा कह रही है मेरी बात मानी मैं सच कह रहा हूं मैं इस लायक नहीं हूं( अब मैं उन्हें कैसे समझाऊं मेरे जीवन में अभी तक स्नेहा मैडम, बीना मैडम, रंजन, सरिता दीदी और लता दीदी यह सब है.)

जूही मैडम: मुझे कुछ नहीं जानना है, मैं बस इतना जानती हु कि तुम मुझे पसंद हो.

शिव : (मेरे लिए यह एक बहुत बड़ी दुविधा थी मैं मैडम को नाराज नहीं कर सकता था और उनकी बात भी नहीं मान सकता था मैंने उन को समझाने की आखिरी कोशिश की )मैडम इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है पहली बात तो मैं एक अनाथ हूं मैं आपके लिए क्या कर पाऊंगा मेरा खुद का कोई ठिकाना है नहीं तो मै आपके लिए क्या कर पाऊंगा?

जूही मैडम: मुझे यह सब नहीं पता और अभी मैं यह सब सोचना भी नहीं चाहती, पर जिस तरह से तुम मुझे समझाने की कोशिश कर रहे हो मैं इतना तो समझ रही हूं कि तुम मुझसे कैसे भी करके छुटकारा पाना चाहते हो मैं तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहती, ( उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे)

शिव: मेरी और दिखो मैडम.

जूही मैडम: मुझे मैडम कहना बंद करो, क्या मैं इतनी बड़ी हूं कि तुम हमेशा मुझे मैडम मैडम कहते रहते हो. मुझे कोई तुम्हारी मैडम नहीं बनना है.

शिव : (मैने मुस्कुरा कर उन्हें देखा) तो क्या बनना है?

जूही मैडम: वह मुझे नहीं पता पर मुझे इतना पता है कि मुझे तुम्हारी मैडम नहीं बनना.

शिव : ठीक है मैडम (एकदम से मुझे घूर के देखने लगी) सॉरी, देखिए एकदम से मेरे मुंह से आपके लिए मैडम शब्द जाएगा नहीं मुझे थोड़ा टाइम दीजिए.

जूही मैडम: मैं सच कहते हो शिव मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा तभी से तुम मुझे पसंद आ गए थे मुझे नहीं पता यह क्या है पर मैं इतना जरूर जानजानती हू कि यह एक औपचारिक संबंध तो नहीं ही है. मैं तुम पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डालूंगी यह फीलिंग तो अपने आप ही आती है मुझे तुम पसंद हो तो हो अब मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती.

शिव: प्लीज मुझे थोड़ा समय दो.

जूही मैडम: मैं समझती हूं.

क्या कहूं क्या करूं कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं वहां से उठा और अपने घर के लिए जाने की इजाजत मांगी, वह मुझे बड़ी आस लिए देख रही थी मुझसे उनकी यह हालत देखी नहीं गई. मैंने उन्हें गले से लगा लिया वह भी मेरे गले लग गई उन्होंने मुझे कस के पकड़ लिया तो मैंने भी उन्हें कसके अपनी बाहों में भर लिया.थोड़ी देर हम लोग ऐसे ही खड़े रहे मैं उनके दिल की धड़कन साफ महसूस कर रहा था मैंने भी आगे का सब किस्मत पर छोड़ दिया कि अब जो होगा देखा जाएगा. मैं उनसे दूर हुआ.

शिव: बाय.

जूही मैडम: बाय.

जब मैं घर पहुंचा तो सरिता दीदी, लता दीदी और गायत्री दीदी बैठकर बातें कर रही थी और रंजन और वीणा दोनों पढ़ाई कर रही थी. मैंने भी कपड़े बदले और थोड़ी देर पढ़ाई की फिर हम सब सो गए. दूसरे दिन जब मैं सुबह जूही मैडम के घर गया तो वह कपड़े पहनने तैयार मिली मुझे समझ नहीं आया कि आज तक तो वह हमेशा मुझे तोलिए में ही मिलती थी पर आज वह पूरे कपड़ों में थी और वह शर्मा भी रही थी. जब मैं स्कूल गया तुम मुझे मेरे दोस्त मिले समीम और वैष्वी भी मिले मीना मैडम मुझे देख कर मुस्कुराए मैंने भी उन्हें स्माइल दी इतने दिन से मैं स्कूल नहीं आ रहा था जिसकी वजह से काफी पढ़ाई का नुकसान हुआ था रिसेस में मैं समीम के पास चला गया और उससे कहा की वह मुझे अपने नोट्स दे

समीम : सिर्फ नोट्स लेकर क्या करोगे इतने दिन की पढ़ाई नहीं हुई है तो तुम्हें समझने में भी दिक्कत होगी इससे अच्छा है तुम मेरे घर आ जाना वहीं बैठ के नोट्स भी बना देना और अगर कुछ समझ ना आए तो मुझे कुछ भी सकते हो.

शिव : (मुझे समीम की बात सही लगी) ठीक है मैं शाम को आ जाऊंगा.

समीम :ठीक है शाम को हम साथ में ही चलेंगे.

शिव: नहीं तुम साइकल तो लेकर आइ नहीं हो तो तुम चली जाना मैं आ जाऊंगा.

शाम को स्कूल छोड़ने के बाद जब मैं समीम के घर के पास पहुंचा तो वह मुझे वही खड़ी मिली.हम दोनों उसके घर चले गए मुझे देख कर उसकी मम्मी भी खुश हो गई. मैं अंदर गया तो मुझे नाजिया दीदी भी मिली.

शिव: कैसी हो दीदी

नाजिया दीदी : अच्छी हूं तुम कैसे हो

शिव :मैं भी ठीक हूं

उनका चेहरा थोड़ा उदास दिख रहा था मैं समझ रहा था वह इन दिनों जिस परेशानी से गुजर रही है तो उनका परेशान होना लाजमी था. समीम ने उसकी मम्मी को बता दिया कि हम लोग उसके कमरे में पढ़ाई करने के लिए बैठ रहे हैं मैंने जूही मैडम को फोन करके सब बता दिया तो उन्होंने भी कहा ठीक है हम पढ़ाई कर रहे थे की थोड़ी देर में नाजिया दीदी नाश्ता दे गई. समीम थी तो मै ज्यादा तो कुछ पूछ नहीं सकता था इसलिए मैं चुप ही रहा. 2 घंटे तक हम पढ़ाई करते रहे. मैं वहां से निकल गया और जिम पहुंच गया वहां से अपने घर चला गया. दूसरे दिन स्कूल में बिना मैडम ने मुझे बताया कि प्रेजेंटेशन तैयार हो गया है अगर हो सके तो शाम को आकर देख लेना मैंने भी उन्हें हां कह दिया.
 
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