अपडेट 57
अपने होठो को ऐसे चूसे जाने से बिना का शरीर कंपनी लगा, शिव उसके मुँह में अपनी जीभ दाल कर उसकी जीभ से खेल रहा था, वो चिप छिपा एहसास, उसके मन मस्तिक को बहोत भ रहा था. उसने डरते डरते अपनी जीभ को भी आगे कर दिया तो शिव उसकी जीभ को अपने होतो से चूसने लगा. ये किस तरह का खेल शिव उसके साथ खेल रहा था, वो शिव को क्यों रोक नहीं प् रही थी. उसके होठो को काफी देर चूसने के बाद जब शिव उसकी और देख रहा था तो वो अपनी नज़ारे उठा नहीं प् रही थी. एक और तो उसे लग रहा था की शिव रुक क्यों गया, वही दूसरी और उसको इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से आंख भी मिला नहीं प् रही थी.
शिव : (मेने उन्हें देखा तो वो नज़ारे झुकाये कड़ी थी, न उन्होंने मुझे डांटा न गुस्सा किआ, वैसे भी वो बहोत hi सुन्दर थी, उनकी वो शर्मीली मुस्कान मुझे अपनी और खिंच रही थी. पता नहीं मुझे क्या हो रहा था, में उनकी और खींचता hi जा रहा था. साड़ी से झक्ति उनकी कमर पर मेरी नज़ारे चिपक गयी, वो मखमली गोरी त्वचा मुझे जैसे आमंत्रित कर रही थी. मेने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी कमर को थम लिए.
बिना : (अपनी नंगी कमर पर शिव के हाथ का स्पर्श पते है वो शहर gayi)Nahi Shiv...(Mene उनकी बात नहीं सुनी, में अपने हाथ को पीछे की और ले जा कर उनकी नंगी कमर पर हाथ फिरने लगा, मेरे दबाव से वो और मेरी तरफ खिसक aayi)Nahi Shiv...(Wo न तो कह रही थी पर मुझे रोक नहीं रही थी, वो मेरे इतने करीब थी तो मेने उनकी गर्दन पर अपने होठ लगा दिए, )Shhhhhhhhhh nahiiii(Meri हिम्मत बढ़ती जा रही थी, उनकी चिकनी कमर को सहलाते हुए मेने अपना हाथ निचे सरकाया और उनके उभरे हुए मस्त गोल पहाड़ को सहलाने laga)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह Shiiiiiv(Bina अपने कूल्हों पर शिव के हाथ को महसूस कर कैंप गयी, शिव उसके साथ ऐसा भी करेगा उसने सोचा नहीं, उसके इतने निजी अंग को शिव सेहला और दबा रहा था, उसका ऐसा करना उसे बहोत अच्छा लग रहा था पर वो शर्मा रही थी, वो उसे रोकना चाहती थी, वो उसका स्टूडेंट था, वो उसके साथ ये सब नहीं कर शक्ति थी, पर उसका दिल उसे रोकने नहीं दे रहा था, अपने कूल्हों पर घूम रहे उसके हाथ से उसके शरीर में हलचल सी होने लगी थी, उसे लग रहा था की उसकी झंगो के बिच में चिप छिपा रास निकल रहा है, वो अपनी झांघो को आपस में सत्ता कर उस रास को रोकने का प्रयास कर रही थी, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया, वो उसकी आँखों में देख रहा था, पर वो शर्म के मरे अपनी नज़ारे नहीं उठा प् रही थी, वो कुछ समझती उस से पहले शिव ने उसे अपनी गॉड में उठा लिए, वो इतनी दर गयी की उसने अपनी बहे शिव के गले में दाल दी. वो हैरानी से शिव को देखने लगी तो वो बड़ी बेशर्मी से उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, वो उसे उठाये अंदर रूम में ले जाने लगा, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो सोचने लगी, क्या शिव उसके साथ वो सब करेगा, वो उसे बिस्टेर पर ले जा रहा है तो इसका मतलब तो वही होता है, उसका दिल अभी भी मर्यादा के बंधन से आज़ाद नहीं हो प् रहा था, एक और तो उसे लग रहा था की जैसे नव्या अपने देवर के साथ मज़े ले रही है, तो वो क्यों नहीं ले शक्ति, पर फिर भी उसके संस्कार उसे इसकी इजाजत नहीं दे रहे थे, कई बार उसने शिव के साथ ये सब करने की सोची भी थी पर अभी जब वो वक़्त आया है तो उसकी हिम्मत जवाब दे गयी थी. वो अपने खयालो से तब बहार आयी जब शिव ने उसे बिस्तर पर बिठाया, उसने एक बार शिव को देखा पर वो ज्यादा देख न पायी, उसने अपनी नज़ारे निचे झुका ली, अपने घुटने मोड कर वो बिस्टेर पर ऐसे बेथ गयी जैसे अपने आपको वो समेत लेना चाहती हो. अचानक उसे याद आया की अपनी सुहागरात पे भी वो ऐसे hi बैठे अपने पति का इंतजार कर रही थी, ये सोचते hi उसके शरीर से एक लहर गुजर गयी. वो हलके हलके कंपनी लगी. उसने तिरछी नजरो से शिव को देखा, जो उसे hi देख रहा था)
शिव : (मेने देखा की वो किसी सोच में डूबी है, मेने घुटनो पर रक्खे उनके हाथ पर हाथ रक्खा और उनके पास बेथ गया)
बिना मैडम : (धीमी आवाज me)Nahi शिव.
शिव : क्या नहीं?
बिना मैडम : वो hi जो तुम करने जा रहे हो.
शिव : क्या करने जा रहा हु?
बिना मैडम : में कोई स्कूल जाती बच्ची नहीं हु, जो समाज न सकू.
शिव : (मुस्कुराते hue)Par लगती तो वैसी hi हो.
बिना मैडम : क्या? (मुझे अपनी और ऐसे देखते प् कर वो शर्मा गयी)
शिव : सच कह रहा हु मैडम, आप बिलकुल एक बच्चे जैसी प्यारी लगती हो.
बिना मैडम : (अपनी नज़ारे झुकाते hue)Juthe कही के, 27 साल की हु में, तुम्हे बच्ची लग रही हु.
शिव : जूथ नहीं कहूंगा मैडम, आपका चेहरा सच में एक लड़की जैसा hi है, है ये अलग बात है की निचे सब...
बिना मैडम : (उसकी बातो का मतलब समाज रही थी पर उसे ये सब सुन न अच्छा लग रहा था) क्या सब?
शिव : आप फिर मुझे मारेंगी.
बिना मैडम

निचे देखते hue)Nahi मरूंगी, बताओ.
शिव : अगर बुरा लगे तो पहले से सॉरी बोल देता हु, आप का चेहरा एक स्कूल की लड़की जैसा hi है पर आपका ये शरीर एक भरपूर nav-yovna जैसा है. आप में वो सबकुछ है जो किसी भी लड़के को आपकी और खिंच शक्ति है.
बिना मैडम : (मंद मंद मुस्कुराते hue)Tumhe शर्म नहीं आती, अपनी hi टीचर से ऐसी बाटे करते हुए. तुम भी दिखने में कितने भोले लगते हो, पर हरकते देखो पुरे मावलीओ जैसी.
शिव : ऐसी क्या हरकत करदी मेने.
बिना मैडम : अभी क्या कर रहे थे, शर्म नहीं आती, ऐसे मेरे होठो ko...(Wo बोलते बोलते रुक गयी)
शिव : तो और क्या करू, आप के होठ कितने मीठे है, ऐसा लग रहा था जैसे गुलाबजामुन खा रहा हु.
बिना मैडम : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Badmash, शर्म नहीं आती क्या तुम्हे.
शिव : शर्म करूँगा तो इतनी खूबसूरत मैडम को कैसे प् शाकुंगा.
बिना मैडम : कुछ नहीं मिलनेवाला तुम्हे, अब जाओ.
शिव : उसके लिए सॉरी, अभी फ़िलहाल में अप्प की बात नहीं मान शक्ति. अभी और मुझे गुलाबजामुन खाने hai.(Me उनके ऊपर झुकता चला गया, वो बिस्टेर पर लेट टी गयी.)
बिना मैडम : नहीं शिव, ये ठीक नहीं है. (में उन पर झुकता गया और जब वो पूरी निचे लेट गयी तो मेने फिर से उनके होठो को अपनी गिरफ्त में ले liya)Ummmmmm (वो बोलना छह रही थी पर उनके सब्द उनके मुँह में hi रह गए, मेने उनके एक बड़े उभर को अपनी हथेलीमे कास लिया, मैडम मेरा हाथ हटाने लगी तो मेने दूसरे हाथ से उनके दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें उनके शिर के ऊपर कर दिए, वो छूटने की कोशिस कर रही थी पर मेरी पकड़ के सामने उनकी एक न चली, थोड़ी देर छटपटाने के बाद वो शांत हो गयी, में उनके भरे हुए स्तन को बरी बरी दबाने लगा और साथ में उनके होठो का रास पिने laga.)Ummmmmm उम्मम्मम्म. (में उनकी कमर को सहलाते हुए अपना हाथ निचे ले जाने लगा, वो अपनी कमर को हिलने लगी, वो मुझे रोक नहीं प् रही थी तो वो छटपटा रही थी, पता नहीं क्यों पर में पूरी बेशर्मी पर उतर आया था, शायद अब में लड़कीओ के नखरे समाज रहा था, उनके दिल में है हो फिर भी वो नखरे करती है है, मेने उनकी कमर से हाथ को फिसलते हुए उनकी झांघो के बिच रख दिया, उन्होंने अपनी कमर हवा में उठा दी, वो किश तोडना चाहती थी पर मेने उनके होठो को चूसना चालू रक्खा, उनकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, वो अपनी आंखे फाडे मुझे देख रही थी, उनकी आंखे कह रही थी की मात करो, पर में उनकी छूट को मसल रहा था, साड़ी, पेटीकोट और पंतय के होते हुए भी मुझे छूट के होठो का आभास हो रहा था. वो अपनी झांघो को आपस में सताने की कोशिस कर रही थी, उनकी छटपटाहट की वजह से उनकी साडी और पेटीकोट थोड़ा ऊपर हो गया तो मेने उसे उठा दिया, और उनकी छूट पर अपना हाथ रक् दिया, अब मेरे हाथ और उनकी छूट के बिच सिर्फ पंतय hi थी. उन्होंने झटके से अपना शिर घुमाया, और मेरे होठो से अपने होठ छुड़ाए) छोडो शिव.
शिव : (में उनकी और देखने laga)Kyu?
बिना मैडम : तुम पागल हो गए हो, छोडो मुझे.
शिव : आप भी तो यही चाहती है.
बिना मैडम : (थोड़ सख्ती se)Nahi ! में ऐसा कुछ नहीं चाहती.
शिव : तो फिर अपने उस दिन मेरा वो क्यों पकड़ा था, और आज आप मुझे यहाँ क्यों ले कर आयी?
बिना मैडम : (वो थोड़ी नरम आवाज me)Wo सब मेरी गलती थी, पर में, ये नहीं कर शक्ति.
शिव : क्यों?
बिना मैडम : पता नहीं, पर में ये सब नहीं कर शक्ति.
शिव : में जनता हु की आप भी यही चाहती है, अब इतना सब होने के बाद में नहीं ruknewala(Mere हाथ में उनकी छूट थी, मेने अपने हाथ को उनकी पंतय में दाल दिया और उनकी नंगी छूट को अपने हाथो में भर लिया)
बिना मैडम : (छूटने का प्रयास करते hue)Shiv छोडो मुझे. में चिल्ला दूंगी.
शिव : ठीक है, चिल्लाइये.
बिना मैडम : तुम ऐसा क्यों कर रहे हो शिव?
शिव : अगर आप को नहीं करना था तो मुझे यहाँ क्यों ले कर आयी थी आप, और ये इतनी गीली क्यों hai.(Mene उनकी छूट को दबा कर कहा)
बिना मैडम : शीइइइइइव.
शिव : अगर आप को मजा नहीं आ रहा था तो फिर ये यहाँ चिकनाहट क्यों है?
बिना मैडम : (वो एकदम शांत हो गयी थी, वो कुछ बोल नहीं रही थी, में उनकी बाजु में लेट गया)
शिव : ठीक है अगर आप अभी रेडी नहीं तो में वो सब नहीं करूँगा, प्रॉमिस करता हु, पर मुझे भी पता है की आप वो सब चाहती है, अगर न चाहती होती तो उस दिन आप वैसी हरकत न करती. ज्यादा नहीं तो थोड़ा hi सही, मुझे प्यार करने दीजिये, आप जब भी कहेंगी में रुक जाऊंगा, प्रॉमिस. अपने दिल पर हाथ रख कर कहिये की आप को कुछ भी मज़ा नहीं आ रहा था. अगर आप कहेंगी तो में यहाँ से चल जाऊंगा, फिर कभी यहाँ नहीं आऊंगा.
बिना मैडम : मेने ऐसा तो नहीं कहा, क्या तुम ऐसे hi नहीं आ शक्ति?
शिव : रसमलाई सामने हो और रोज उसको सिर्फ देखकर चला जाऊ, ऐसा बेवकूफ तो नहीं हु.
बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए) बहोत बदमाश हो तुम.
शिव : बहोत भूख लगी है मैडम, क्या में थोड़े गुलाब जामुन खा lu(Wo शर्मा कर मुस्कुराने लगी, में भी मुस्कुराते हुए उनके होठो को चूसने लगा, थोड़ी hi देर में वो मेरे बालो को सहलाने लगी, उनको चूमते हुए में उनके स्तन को सहलाने लगा तो वो एक दो सेकंड के लिए रुकी पर फिर वो मुझे चूमने लगी, में इत्मीनान से उनके स्तन को सहलाते हुए दबाने लगा, वो मेरे बालो को सहलाते हुए खींचने लगी)
बिना मैडम : (ये लड़का मुझे ऐसे चुम रहा है की मेरा रोआ रोआ खड़ा हो गया है, ऐसा एहसास तो मुझे अपने जीवन में कभी नहीं हुआ, सच में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, मेरे बदन में तरंगे उठ रही है, मेरे स्तन को दबाते दबाते वो मेरे ब्लॉउज के बटन खोलने लगा, एक बार मेरा हाथ उसे रोकने के लिए बढ़ा पर मेने उसे रोका नहीं, अपनी छाती पर रेंगते उसके हाथ को, महसूस कर के में उत्तेजित हो रही थी, वो सच hi कह रहा था की अगर मुझे मज़ा नहीं आ रहा तो मेरी झांघो के बिच इतना ऋषव क्यों हो रहा है, मेरा दिमाग उसे रोकने को कह रहा था पर शरीर साथ नहीं दे रहा था)
शिव : (बिना मैडम की बड़ी चूचिया ब्रा में कैद थी, ब्लॉउज की परत हाथ चुकी थी, उस नगम गोलों को सहलाते हुए में उनके आधे बहार नंगे भाग को चूमने लगा, मैडम का हाथ मेरे शिर को सेहला रहा था, वो मुझे रोक नहीं रही थी, निप्पल को ब्रा के ऊपर से hi चूसते हुए मेने एक हाथ से पंतय में कैद छूट को दबोच लिया, पंतय आगे से पूरी तरह गीली होचुकी थी. अब आगे बढ़ने की बरी थी तो में थोड़ा ऊपर हुआ और मैडम को देखने लगा, उन्होंने एक बार मेरी और देखा फिर अपनी नज़ारे दूसरी और कर दी, में अपने शर्ट के बटन खोलने लगा, वो तिरछी नजरो से मुझे देख रही थी, मेने शिर और बनियान दोनों निकल दिए, में ऊपर से पूरा नंगा हो चूका था, मैंने अपना पंत भी निकल दिया, अब में सिफत अंडरवियर में था.)
बिनामदं : (शिव को अपने कपडे उतारते देख रही थी, वो सोच में पद गयी की अभी तो वो कुछ भी करने से मन कर चूका था, फिर क्यों अपने कपडे उतर रहा है, वो तिरछी, नजरो से उसे कपडे उतारते हुए देखती रही, अब उसके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था, उसका वो अंग उसे साफ़ साफ़ दिख रहा था, उसकी सांसे तेज चलने लगी, वो वापस उसके बाजु में बेथ गया, उसकी आंखे उस खड़े अंग से हैट hi नहीं रही थी, शिव ने उसे साइड में पलटा तो वो बगैर किसी विरोध के पलट गयी, वो उसके ब्रा के हुक खोलने लगा, उसने उसका ब्लॉउज भी उतरदिया, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी पर फिर भी न जाने क्यों उसे रोक नहीं प् रही थी, उसने ब्रा और ब्लॉउज पुरे निकल दिए, वो उसकी नंगी पीठ पर अपने होठो से चूमते हुए चाट रहा था, ये किस तरह का प्यार जाता रहा था? आज तक उसे ऐसा अनुभव नहीं हुआ था, उसके शरीर से ऐसा प्यार तो उसके पति ने कभी नहीं किआ था. वो उसकी पीठ को चूमते हुए निचे खिसका और उसके बड़े उभरे कूल्हों को सहलाते हुए मसलने लगा, उसकी ये बेशर्मी, उसे बहोत अच्छी लग रही थी, वो अपना शिर टिकाये इस सुखद स्पर्श का मज़ा लेने लगी. उसका दिल जोरो से धड़कने लगा जब वो उसके पेटीकोट के नदी को ढूंढने लगा. उसे रोकने की बजाये उसने अपनी गांड उठा कर उसके हाथ को रास्ता दिया जिस से वो नाडा धुंध पाया और उसे खिंच कर ढीला कर दिया. शिव जैसे hi उसका पेटीकोट शरक़ने लगा, बिना की शर्म ने आवाज दी तो उसने पेटीकोट को पकड़ लिया. शिव ने हलके से उसके हाथ को छुड़ाया तो उसने छोड़ भी दिया. वो शर्म से मरी जा रही थी पर ये एहसास उसे और भी उत्तेजित कर रहा था. शायद उसके पति ने भी उसे इस अवस्था में नहीं देखा होगा. अक्सर वो ये सब अँधेरे में hi करते थे. ऐसे दिन के उजलेमे वो अपने hi स्टूडेंट के साथ इस अवस्था में थी. वो शर्म के मरे पानी पानी हो रही थी. वो सिर्फ पंतय में नंगी लेती हुई थी. वो शिव के हाथ और होठो को अपने कूल्हों पर महसूस कर के पागल होने लगी, उसने चद्दर को अपनी मुट्ठी में जकड लिया. वो उसके कूल्हों को ऐसे चुम रहा था जैसे उसे कोई मन चाही चीज मिल गयी हो, उसे गुड़ गुड़ी भी हो रही थी, वो अपने कूल्हों को छुड़ाने की भी कोशिस कर रही थी पर फिर वो उसे उसकी मन मणि करने दे रही थी. वो उसे रोकती तो वो रुक भी जाता, पर उसका दिल hi नहीं कर रहा था की वो उसे रोके. जब शिव ने उसकी पंतय के शिरो को पकड़ा तो उसने चद्दर को जोरो से पकड़ लिया और अपनी आंखे जोरो से बंद कर ली. वो पूरी नंगी होने जा रही थी.)
शिव : मैडम के कूल्हे बहोत बड़े और चौड़े थे, सच में औरतो का ये अंग मुझे अपनी और आकर्षित करता था, वो पंतय में भी बहोत आकर्षक लग रहे थे पर मुझे उन्हें नंगे देखने थे, मैडम मुझे बिलकुल रोक नहीं रही थी, मेने पंतय को थोड़ा खिसकाया तो कूल्हों की दरार दिखने लगी, मेरा लुंड ये देख कर hi कूदने लगा. जैसे जैसे पंतय निचे खिसक रही थी वो दरार लम्बी होती जा रही थी, कूल्हों का उभर ऊपर की और बढ़ता जा रहा था, आखिर कर एक जगह पहुंच कर वो उभर फिर से घटने लगा, उनके कूल्हे पुरे नंगे थे. मेने कूल्हों को देखते हुए पूरी पंतय निकल दी.)

क्या नज़ारा था, बिना मैडम पूरी नंगी लेती हुई थी, उनके उभरे हुए कूल्हे जानलेवा थे, इतना कुछ होने पर भी उन्होंने मुझे रोका नहीं था तो मुझे यकीं हो गया था की अब वो मुझे नहीं रोकेगी. मेने अपनी अंडरवियर भी उतर दी. मेने देखा की मेरा लुंड पूरी तरह तन कर खड़ा था. मैडम को देख कर मुझे इच्छा हुई की जा कर सीधे hi उनके ऊपर चढजो. पर मेने अपने आप को संभाला, उनके पास बैठते हुए मेने उनके कूल्हों पर हाथ घुमाया, मैडम के शरीर में कम्पन हुआ. उनकी पीठ पर फैले बालो को मेने साइड में किआ और उनकी गर्दन पर चुम्बन करते हुए उनके कूल्हों को मसलने लगा. मैडम के मुँह से हलकी हलकी सिसकरिअ निकल रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी. उनकी पीठ का चुम्बन करते हुए में निचे की और जाने लगा. मेने दोनों कूल्हों को मसाला और उन्हें चूमने और चाटने लगा.

बिना मैडम : शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसा मात करो शिव, शहहहहह मुझे कुछ हो रहा है.
शिव : मैडम, आप के ये कमल के है, (अपना चेहरा रगड़ते हुए) में बता नहीं शक्ति की, इन्हे देख कर मुझे क्या हो रहा है मैडम. (में उनके पैरो के ऊपर बैठते हुए उनके कूल्हों को फ़ैलाने लगा, मुझे गांड का छे और छूट का थोड़ा सा भाग भी दिखने लगा, मैडम ने फ़ौरन अपना हाथ पीछे करते हुए उसे छुपाने का प्रयास करने लगी, उनका हाथ पकड़ते hue)Please मैडम, मुझे देखने दीजिये.

बिना मैडम : मुझे शर्म आ रही है शिव, में तुम्हारे सामने ऐसे...
शिव : मुझे बहोत अच्छा लग रहा है मैडम, आप को ऐसे देखना तो जैसे एक सपना ho.(Mene उनका हाथ साइड में हाथ दिया, और झुक कर दरार को फैला कर दरार पर अपनी जीभ फिराई)
बिना मैडम : शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव, वह मुँह क्यों लगा रहे हो, वो गन्दी जगह है.
शिव : मुझे तो नहीं लग रही, (उनकी गांड के छेद को पूरी तरह से कहते hue)Kitna मजेदार है.
बिना मैडम : (उसने सपने में भी कभी ऐसा सोचा नहीं था, जो चीजे उसे गन्दी लग रही थी उसी में उसे मजा आ रहा tha.)Shhhhhh शीइइइइइइव ये कैसा खेल है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : आप को अच्छा लग रहा है न मैडम.
बिना मैडम : हाआआआ शहहहहह ये किस तरह का अनुभव है, shhhhh(Mene उन्हें सीधा किआ तो उन्होंने अपनी छूट और अपने बूब्स पर एक एक हाथ रख दिया, उसे लगा शिव उसे छोड़ने जा रहा hai)Nahi शीइइइइइइइव.
शिव : क्या नहीं मैडम, मुझे देखने दीजिये.
बिना मैडम : शिव, मुझे बहोत शर्म आ रही है.

शिव: कुछ नहीं होगा, में सिर्फ देख रहा hu.(Mene उनकी छूट वाला हाथ हटा दिया, उन्होंने शर्म से अपनी आंखे बंद कर के अपना मुँह साइड में कर दिया, उनकी छूट मेरे सामने थे, में गौर से देख रहा था, हलके बल से सजी हुई छूट के होठ आपस में चिपके हुए थे, छेड़ भी बड़ी मुश्किल से दिख रहा था. में सोच में पद गया. मैडम शादीशुदा है तो ये कैसे हो शक्ति है. अब में चूड़ी हुई छूट और कुवारी छूट में फर्क समाज शक्ति था. अभी भी मुझे विस्वास नहीं हो रहा था, मेने हलके से छूट के होठो को सहलाया तो मैडम ने मेरी कलाई पकड़ ली)
बिना मैडम : shhhhhhhhhhh. (मैंने उनसे हाथ छुड़ाने की कोई कोशिस नहीं की, में उंगलिओ से hi छूट की दरार को सहलाने लगा, छूट पूरी तरह से भीग चुकी थी, मेरे ऊँगली फिरने से होठ भी चिप छिपे होने lage)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह shhhhhhhhh(Bina इस नए अनुभव से बहोत उत्तेजित हो रही थी, एक और उसे शर्म आ रही थी तो दूसरी और उसे बहोत मज़ा आ रहा था, ये खेल उसकी कल्पना से भी कही अधिक मज़ेदार था. ऐसे दिन के उजाले में वो अपने hi स्टूडेंट के सामने नंगी लेती हुई थी, अगर सब कुछ सामान्य होता तो वो कभी भी ऐसी परिस्थिति में न होती. पर वो अब समाज रही थी की असल में सेक्स क्या होता है और शायद उसने आज तक सेक्स किआ hi नहीं था. एक न एक दिन तो ये होना hi था तो उसने अपने आपको समाज लिया था और वो ये मज़ा पाने की कोशिस कर रही थी. शिव उसकी छूट के होठो को फैलते हुए उसकी छूट का छेड़ देख रहा था, उसके पति की तो बात hi क्या करे, आज तक उसने खुद उस छेड़ को नहीं देखा था. उसे लगता था की ये सब गन्दी चीजे है तो कभी उसने उसे गौर से देखा hi नहीं था. शिव की उंगलिअ उसे छेड़ को सेहला रही थी, उसके शरीर के अंदर ऐसी तरंगे उठ रही थी की उसकी कमर झटके खा रही थी, वो अपने मुँह से निकलती सिसकारिओ को रोकने का प्रयास कर रही थी पर वो रोक नहीं प् रही थी.)
शिव : (जैसा मुझे लग रहा था, मैडम की छूट बहोत छोटी थी, क्या वो कुवारी है, पर ये कैसे हो शक्ति है, कई सवाल मेरे जहँ में घूम रहे थे, मेने ऊँगली को थूक लगाया और उसे हलके से छूट के छेड़ में डाला, अभी ऊँगली एक इंच भी अंदर नहीं गयी थी की बिना मैडम ने मेरा हठ पकड़ लिया)
बिना मैडम : अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव, दर्द हो रहा है.
शिव : (अब मुझे यकीं हो चूका था की वो कुवारी hi है, मेने उस कुवारी छूट के होठो पर अपने होठ लगा दिए और उसके छेड़ में जीभ डालते हुए उसे चूसने लगा)
बिना मैडम : Ahhhhhhhhhhh shhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh, (वो लैप लापति झीब उसकी छूट के छेड़ में महसूस कर के बिना मचलने लगी, उसकी टंगे और फैलने लगी, वो अपनी छूट को शिव के मुँह पर दबाने लगी, ये एहसास उसे पागल कर रहा था, जिस छूट को वो दुनिया भर से छुपाये रहती थी उस छूट को शिव बड़ी सिद्दत से चूस रहा था, वो चिप छिपा एहसास प् कर वो पागल होने लगी, उसने अपने दोनों हाथो से शिव के शिर को पकड़ लिया. वो कभी उसके शिर को धकेल रही थी तो कभी खिंच रही थी, शर्म और मज़े का ये मिला झूला एहसास उसे दीवानी बना रहा tha.)Ye क्या हो रहा है शिव, शह्ह्ह्ह मात करो अह्ह्ह्हह में पागल हो जाउंगी, शहहहहह ahhhhhhhhhh. (उनकी बात सुने बगैर में अपना काम कर रहा था, मुझे भी छूट को चाटने में बहोत मज़ा आ रहा था, मैडम ज्यादा सेह नहीं पायी और अपने हाथ को दांतो में दबाते हुए झटके खाने लगी और उनकी छूट से रास की धरा बहने लगी, मेने बगैर मुँह हटाए, उस रास को चाट रहा था, आखिर कर वो शांत हो gayi)(Bina के शिर से जैसे hi सेक्स का नशा काम हुआ उसे अपनी स्थिति का आभास होने लगा, वो शर्म से पानी पानी होने लगी, वो पूरी नंगी थी और शिव उसके बेहद hi निजी अंग को अपने होठो में बारे हुए था, वो शिव को हटाना चाहती थी, वो साइड में होने लगी)
शिव : (मेने उन्हें साइड में होने नहीं दिया, और ऊपर जाते हुए उनके पुरे ऊपर हो गया, मेरा लुंड उनकी छूट को छूने लगा था, वो अपने आप को और ऊपर करना चाहती थी पर मेने उन्हें पकड़ लिया, वो मेरी आंखोमे देखने से भी कतरा रही थी)
बिना मैडम

उन्होंने नरम आवाज में kaha)Chhodo मुझे शिव.
शिव : क्यों?
बिना मैडम : बस शिव, अब और नहीं.
शिव : (में कोहनी के बल हुआ और उनके चेहरे को पकड़ कर मेरे चेहरे के सामने kia)Kya हुआ?
बिना मैडम : (अपना चेहरा घूमना छह रही थी, पर मेने घूमने नहीं diya)Tumne प्रॉमिस किआ था शिव.
शिव : है किआ था, पर मेने ये नहीं सोचा था की हमारे बिच इतना कुछ होगा. सच कहु तो अब में नहीं रुक शक्ति मैडम.
बिना मैडम : (मेरी आंखोमे देखते hue)Tum ऐसा नहीं कर शक्ति शिव. में जानती हु तुम अपना प्रॉमिस नहीं तोड़ोगे.
शिव : एक बात पुछु? सच सच जवाब देंगी?
बिना मैडम : पूछो?
शिव : आप अभी तक कुवारी क्यों हो?
बिना मैडम : ये क्या बकवास है, मेरी सदी को दो साल हो चुके है.
शिव : पर सरीर से अभी भी आप कुवारी हो.
बिना मैडम : पागल होगये हो तुम, ऐसा कुछ नहीं है.
शिव : आप ने सेक्स किआ है?
बिना मैडम : है, कई बार, तुम पागल हो गए हो शिव, तुम्हे कुछ पता नहीं है.
शिव : मुज पर यकीं कीजिये, एक बात बताइये, मेरे ऊँगली डालने पर भी आप को दर्द हुआ था की नहीं?
बिना मैडम : है हुआ था. (वो सवालिए नज़रो से शिव को देख रही थी)
शिव : मेरा यकीं करो, आप अभी भी कुवारी हो. अगर आप नहीं चाहती की में आपके साथ ये सब करू और अप्पके कौमार्य भांग करू तो ठीक hai.(Me उठने लगा)
बिना मैडम : (वो पूरी तरह से उलझ गयी थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की ये कैसे हो शक्ति है, शिव उठने लगा तो उसने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे रोक लिया) रुको Shiv(Me रुक gaya)Ye कैसे हो शक्ति है?
शिव : वो मुझे नहीं पता, में आपकी उसको देख कर इतना hi कह शक्ति हु की आप अभी कुवारी हो.
बिना मैडम : (मुस्कुराते hue)Tuje बड़ा अनुभव है. एक नंबर के बदमाश हो तुम.
शिव : (में मुस्कुराते हुए झुका और उनके होठो को किश kia)Ab क्या िर्रादे है.
बिना मैडम : (शरमाते हुए,) आगे बढ़ने का.
शिव : आप को दर्द होगा.
बिना मैडम : क्या बहोत ज्यादा होगा?
शिव : Nahi(Juth).
बिना मैडम : ठीक है.
वो सच में समाज नहीं प् रही थी, उसे यकीं नहीं हो रहा था, उसके पति उसे निचे से नंगी कर के कई बार उसके पारो के बिछ आये थे, वो धक्के भी लगते थे, है ये बात अलग है की उसे कभी कुछ खास महसूस नहीं हुआ, अक्सर उसकी छूट वाले भट पर कुछ नरम नरम छूइज होती थी, वो कई बार उत्तेजित भी जो जाती थी, पर फिर एक दो मिनट में hi वो सो जाते थे. वो कभी समाज hi नहीं पायी थी. आज शिव की बहो में अपनी छूट पर हो रही चुभन को वो साफ़ साफ़ महसूस कर रही थी, वो अंग एकदम सख्त था. वो उसकी छूट के होतो को फैलाये छूट को रगड़ रहा था. उसने शिव को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, उसे शर्म तो आ रही थी पर अब प्यार आने लगा था, उसने शिव को अपनी और खिंचा और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया, ये उसके जीवन का पहला किश था जिसे वो खुद कर रही थी, वो उसके होठो को पूरी तरह निचोड़ने लगी, अब उसे पता था की आगे क्या करना है तो वो अपनी जीभ उसके मुँह में दाल कर उसके जीभ से खेलने लगी. वो अपने आपको बहोत ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रही थी, वो शिर की जीभ को अपने होठो से पकड़ कर चूसने लगी.

मेने महसूस किआ की वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी है, और यही सही मौका है, मेरा लुंड छूट के रास से पूरी तरह भीग चूका था, मेने लुंड को छूट के छेड़ पर रख diya.(Bina ने महसूस किआ की शिव ने उसकी छूट के छेड़ पर लुंड को रख दिया है, उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव को किश करने लगी, अचानक वो बड़ा अंग उसकी छूट के नाजुक होठो को चीरता हुआ अंदर घुस गया, एक तेज दर्द उसे महसूस हुआ, वो चीखना चाहती थी पर शिव ने उसके होठो को अपने होठो से दबा दिया,
उसकी आंखे फ़ैल गयी थी, वो कुछ संभालती उस से पहले hi दोबारा वो अंग उसकी छूट को चीरता हुआ और अंदर उतर गया, उसे इतना दर्द हुआ की उसने शिव को पूरी ताकत से धक्का दिया पर शिव और भी ज्यादा ताकतवर था, वो जरा भी न हिला. वो छटपटा रही थी की तीसरी बार उसे तेज दर्द हुआ, उस से सहन नहीं हुआ और उसकी आंखे बंद होती चली गयी. क्या हुआ कैसे हुआ उसे कुछ पता न चला. थोड़ी देर बाद उसे शिव की आवाज सुनाई दी, वो उसके गाल पर थपकिअ मर रहा था.
शिव : मैडम , मैडम. (शिव ने काफी देर उन्हें नहीं जगाया था, वो बेहोश हो गयी थी, वो चाहता था की बेहोशी में hi उनका दर्द काम हो जाये, इस लिए वो रुका रहा, काफी देर बाद भी वो न जगी तो वो उन्हें जगाने लगा)
बिना मैडम : अह्ह्ह्हह्हह, शीइइइइव, छुडो मुझे, अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआ.
शिव : (उनका शिर सहलाते hue)Shhhhhhh शांत हो जाईये, शह्ह्हह्ह्ह्ह.
बिना मैडम : मुझे बहोत दर्द हो रहा है शिव, शठ बहार निकालो उसे.
शिव : क्या बहार निकलू मैडम? (वो उन्हें बातो से बहलाना चाहता था, ताकि उनका ध्यान भटके)
बिना मैडम : (घूरते hue)Apna वो बहार निकालो.
शिव : वही तो पूछ रहा हु, क्या?
बिना मैडम : मजाक नहीं शिव, मुझे बहोत दर्द हो रहा है, प्लीज निकल लो न.
शिव : (उनका चेहरा सहलाते hue)Abhi सब ठीक हो जायेगा, सबके साथ होता है, आप समझती हो, है न?
बिना मैडम : मेने सुना था शिव, पर इतना दर्द होगा, ये पता नहीं था.
शिव : अब तो यकीं हुआ न की आप कावेरी है.
बिना मैडम : (मेरे शाइन पर मुक्का मरते hue)Thi.
शिव : जो होना था वो हो चूका, अब तो मुझे अपनी सेक्सी टीचर को प्यार करने दो, (में उनके होठो को चूसते हुए उनके स्तन को मसलने लगा)
बिना मैडम : (मुस्कुराते hue)Gande, अपनी टीचर को ऐसा बोलते हो, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : (बरी बरी दोनों चुचो से खलेते हुए उनके निप्पल को चूस रहा था, मेरा लुंड जो इतनी देर में थोड़ा नरम हुआ था वो वापस अपनी औकात में आने लगा, सच में उनकी छूट ने मेरे लुंड को बड़ी जोरो से जकड रक्खा था, मेने थोड़ा लुंड हिलाया तो...)
बिना मैडम : अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव.
शिव : (उन्हें देखते hue)Jyada दुःख रहा है?

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बिना मैडम : (शरमाते hue)Thoda thoda...(Mene उनके होठो को चूसना सुरु किआ और हलके हलके लुंड को आगे पीछे करने लगा)
(बिना को दर्द हो रहा था पर उस से भी ज्यादा वो उत्तेजित हो रही थी, आज वो अपनी छूट में लुंड को साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, उसे पता चल रहा था की कुछ उसके शरीर के अंदर है, ये एहसास उसे और उत्तेजित कर रहा था. आज उसे पता चला था की सच में सेक्स होता क्या है, अपनी छूट में हो रही सरसराहट को वो महसूस कर के उत्तेजित हो रही थी, वो रगड़ उसे बहोत अच्छी लग रही थी, शिव का अंग बड़ा था जिस की वजह से उसे दर्द हो रहा था पर वो जानती थी की लड़की को एक बार तो ये दर्द सेहन करना hi पड़ता है. उसने ये कई बार सुना था पर कभी उसे वैसा महसूस नहीं हुआ था, वो इतनी अंतर्मुखी थी की उसने इस बारे में कभी किसी के साथ बात नहीं की थी. उसने सिर्फ छोटे बच्चो का hi देखा था तो उसे मर्दो के इस निजी अंग के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी. आज पता चल रहा था की जब एक लड़का पहली बार किसी लड़की के साथ सेक्स करता है तो कैसा लगता है, उसे अपने दर्द से ज्यादा इस बात की ख़ुशी थी की आज वो लड़की से औरत बन गयी थी. उसे हो रहे दर्द के बावजूद उसने शिव को अपनी बहो में भर लिया, वो उसके धक्को को सेह रही थी. लगातार अब दर्द काम होता जा रहा था, दर्द की जगह उसे सरसराहट महसूस हो रही थी. वो अपनी उस संकरी गली में अंदर बहार हो रहे उस बड़े से अंग को महसूस कर रही थी, वो उसका आगे का शिरा साफ़ साफ़ महसूस कर प् रही थी, वो अंदर कही एक खास जगह पर छू रहा था तो उसके अंदर एक कम्पन पैदा कर रहा था. उसने शिव की और देखा तो वो उसकी छूट की और देखते हुए धक्के लगा रहा था. उसे थोड़ा ताज्जुब हुआ तो उसने अपना शिर उठा कर निचे देखा तो वो शर्मा गयी, शिव का बड़ा लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था, वो ये दृश्य देख कर शर्माने लगी, उसे अपनी आँखों पर यकीं नहीं हो रहा था की इतना बड़ा अंग उसकी छूट में अंदर जा रहा है. वो ये देख रही थी की उसे लगा की शिव उसे देख रहा है, उसने उसकी और देखा तो वो सच में उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, वो इतनी शर्मा गयी की उसने वापस बिस्तर पर अपना शिर रख दिया और अपना चेहरा हाथो से छुपा लिया.
शिव : (मैडम का ऐसा शर्माना कितना प्यारा लग रहा था, मेने उनके हाथ हटाए और उनकी आँखों में देखने लगा, वो भी अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देख रही थी) कैसा लग रहा है?
बिना मैडम : (शरमाते hue)Muje नहीं पता.

शिव : मुझे तो बड़ा अच्छा लग रहा है.
बिना मैडम : है, तुम्हे तो अच्छा लगे गए hi, ये नहीं देखा की मेरी क्या हालत हो गयी थी, जान निकलते निकलते बची है.
शिव : उसके लिए में माफ़ी मांगता हु. अभी कैसा है, अच्छा लग रहा hai.(Unhone मुस्कुराते हुए है में जवाब दिया, मेने धीरे धीरे स्पीड बढ़ने लगा, उन्हें छोड़ते हुए उनके स्तन से खेल रहा था)
बिना मैडम : शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह.
शिव : (बहते बैठे उनकी टंगे फैला कर धक्के लगाने laga)Hmm हम्म्म हम्म्म हम्म्म.
बिना मैडम : अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह शःह्हीीिव आठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह.
शिव : अच्छा लग रहा है ?
बिना मैडम : हआ शठ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहोत अच्छा अह्ह्ह अह्ह्ह धीरे शिव अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह.
शिव : (उनके दोनों पैरो को पकड़ कर छूट में धक्के मर रहा था, में देख प् रहा था की खून बह कर चद्दर पर फ़ैल गया है, मेरे लुंड पर भी खून लगा हुआ था, में समाज सकता था की ये तो होना hi था. मेने मैडम की और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी, उनकी आंखे नशीली हो चुकी थी, वो बिस्तर पर आगे पीछे हिल रही थी, साथ में उनके स्तन भी उछाल रहे थे, में लगातार उन्हें छोड़ रहा था और वो भी आह्ह्ह भरते हुए चुद रही थी, में निचे झुका और फिर उनके होठो को चूसने लगा तो वो अपनी बहे मेरे गले में डालते हुए मुज से पूरी तरह लिपट गयी, मेने महसूस किआ की उन्होंने अपने पेअर भी मेरी कमर पर लपेट दिए थे, मुझे पता चल रहा था की उन्हें बहोत अच्छा लग रहा है, मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था, में अपनी hi टीचर को छोड़ रहा था, सच में यकीं कर पाना मुश्किल था, मैडम सच में बहोत प्यारी दिखती थी, लड़कीअ अपने निजी पालो में कितनी बदल जाती है, सामान्य समय में सीधी और शर्मीली दिखने वाली लड़कीअ, ऐसे पालो में कितनी खुल कर साथ देती है, में उनकी गर्दन को अपनी नाक से सहलाते हुए धक्के मार रहा था)

बिना मैडम : शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह बॉस शठ सीईव सुनो शह्ह्ह्हह्ह रुको अह्हह्ह्ह्ह.
शिव : क्या हुआ मैडम?
बिना मैडम : (वो शर्मा रही thi)Ahhhhhh शह्ह्ह्हह्ह बस्सस अह्ह्ह्ह अब और नाहीईईई शह्ह्ह्हह्ह.
शिव : थोड़ी देर मैडम.
बिना मैडम : (आखिर उनसे रहा न gaya)Shhhhh अह्ह्ह संजो शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मेरा अह्ह्ह्ह मेरा पेशाब निकल जायेगा अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : (मुझे पता था उनका स्खलन होनेवाला hai)ho जाने दीजिये.
बिना मैडम : नहीं शीइइइइव यहाँ नाहीई शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह रुक जाओ शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह मुम्मीईई अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह निकल जाएगी शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव बाससस rukoooooo.(Mene उनकीबाट सुनी नहीं और उन्हें धक्के लगता गया, अब मेरा भी होनेवाला था)
शिव : कुछ नहीं होता मैडम, हो जाने दीजिये, शहहह मेरा भी होनेवाला है, कहा निकलू?
बिना मैडम : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मुझे नहीं पता शह्ह्ह्हह्ह में गयी, मेरा निकलनेवाला है, aaaaaaaaaaaaaaaaaaa mumiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii(Wo झटके खाने लगी)
शिव : (मेने भी सोचा की ये उनका पहली बार hi है तो अंदर hi करता हु, में लगातार धक्के लगा रहा था, में भी बेहद करीब था)
बिना मैडम : बुस्स्सस्स अह्ह्ह्ह अब नहीं शह्ह्ह्हह्ह रुको शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : दो मिनट मैडम बस मेरा भी होनेवाला है, अह्ह्ह हम्म्म ह्म्म्मम्म हम्म्म्म.
बिना मैडम : अह्ह्ह्हह ममी शहहह अह्ह्ह धीरे शिव धीरे अह्ह्ह धीरे अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhh(uske धक्के इतने तेज लग रहे थे की बिना अंदर तक हिल रही थी, उस से सहन नहीं हो रहा था, ये दर्द नहीं था पर उत्तेजना का चरम था जिसे वो सेहन नहीं कर प् रही थी, अचानक शिव ने एक जोर का धक्का मारा और उसके अंदर कुछ गरम गरम भरने लगा, वो इस सुखद एहसास से भर गयी और अपनी आंखे बंद किये वो शिव से चिपक गयी, शिव दो तीन बार और धक्के मरे और हर बार उसे वो गरम गरम एहसास हो रहा था, वो सोच में पद गयी की इस खेल में कितने प्रकार के सुख है, इसी लिए नव्या कह रही थी की एक बार जिसने ये महसूस किआ वो रह नहीं शक्ति., वो शिव के पशीने से भीगे शरीर को सेहला रही थी, वो आंखे बंद किये हुए अपने अंदर समाये उस बड़े से अंग की हलचल को महसूस कर रही थी.
काफी देर में, मैडम के ऊपर hi लेता रहा. आखिर कर उनके ऊपर से उठा और साइड में सीधा लेट gaya.Mene देखा की मैडम अपनी टंगे फैलाये, आंखे बंद करके लेती हुई है. मुझे यकीं नहीं हो रहा था की मेने मैडम के साथ सब कुछ कर लिया. मेने उनके स्तन पर हलके से हाथ रक्खा और उसे सहलाया. मैडम ने एक बार मेरी और देखा और शर्मा के दूसरी और अपनी गर्दन धुंआ दी.
बिना मैडम : (धीमी आवाज me)Shiiiiiv. तुम इस बारे में किसी को बताओगे तो नहीं.?
शिव : में क्यों बताने लगा.
बिना मैडम : अगर किसी को पता चल गया तो में किसी को मुँह दिखने काबिल नहीं रहूंगी शिव.

शिव : (उनका चेहरा मेरी और करते hue)Me किसी से कुछ भी नहीं कहूंगा, आप को भरोसा नहीं मुज पर.
बिना मैडम : (वो मेरी और खिसकी तो मेने उन्हें अपनी बहो में भर liya)Muje यकीं है शिव, शायद इसी लिए मेने तुम्हे ये सब करने दिया.
शिव : आपको अच्छा लगा?
बिना मैडम : ह्म्म्मम्म, तुम्हे?
शिव : मुझे तो बहोत अच्छा लगा, आप सच में बहोत कमल हो.
बिना मैडम : (मुस्कुराते हुए उसके शाइन में घुस gayi)Badmash!!!!!!!!