Adultery Kundali Bhagya - Page 9 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट तो रेडी था पर कोई वेट नहीं कर रहा था तो नहीं दिया, अप्प ने कहा है तो आप के लिए दे दूंगा पर शाम को.
 
अपडेट 44

रंजन, शिव को सब बताने का निश्चय कर लेती है.

रंजन : में तुजे सब बतादूंगी पर तुम्हे पहले वडा करना होगा की तू कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं करेगा. ठन्डे दिमाग से इससे sambhalega.(Wo ये बोल कर उसकी आंखोमे देख रही थी की शिव क्या जवाब देता है)

शिव : मेने कहा न पहेलियाँ मत बुझा, जो कहना है साफ़ साफ़ कह.

रंजन : पहले वडा कर. (वो अपना हाथ आगे बढाती है)

शिव : तो तू वडा लिए बिना बात नहीं बताएगी?

रंजन : ऐसा नहीं है, अगर तू चाहे तो वडा मात कर, में फिर भी तुजे सब बताउंगी, पर वडा इस लिए लेने चाहती हु की ये सब तुम्हारी मेरी और सबकी जिंदगी से जुड़ा हुआ है. तुम्हारा एक गलत कदम तुम्हे नुकशान पंहुचा शक्ति है. और में ये सहन नहीं कर शक्ति.

शिव : (उसकी आँखों में देखते हुए में सोच रहा था, में इतना तो समाज गया था की बात गंभीर है) ठीक है में वडा करता hu(Mene अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया)

रंजन : चल मेरे साथ, में तुजे कुछ दिखती हु, पर आवाज मात करना और वो सब देखने के बाद भी कोई जल्दबाजी मात करना.

मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था. उसने मेरा हाथ पकड़ा और अनाथालय के पीछे की और ले जाने लगी. दूसरे सब कमरों की लाइट बंद थी पर ऑफिस की लाइट चालू थी. उसने मेरी और चुप रेहनेका इस्सर किआ और वह बानी खिड़की को आहिस्ता से खोलने का प्रयत्न किआ, तो वो खुलने लगी. उसने सावधानी से अंदर झाका. में समाज नहीं प् रहा था की वो ऑफिस में ऐसे क्यों देख रही है. अंदर का नज़ारा देखने के बाद उसने मुझे वह देखने का इस्सर किआ. में भी बिना आवाज किए खिड़की के पास पंहुचा और अंदर देखने लगा. अंदर का दृश्य देख कर मेरे होश उद्गाये. मैनेजर निचे से नंगा था और उसकी गन्दी काली गांड दिख रही थी, वो जिस तरह से हिल रहा था उस से साफ़ पता चल रहा था की वो किसी को छोड़ रहा है. वो जो भी था वो उसके शरीर के पीछे था तो मुझे वो दिख नहीं रहा था. इस वक़्त हमारे अलावा यहाँ कोई नहीं होता तो ये कोण है जिसे मैनेजर छोड़ रहा है. मेरे दिमाग में तूफान उठा हुआ था. मेने थोड़ी देर देखा पर वो एक hi पोज़ीशन में छोड़ रहा था तो मुझे वो लड़की दिखी नहीं. यहाँ ऐसा कोण है जो अभी मैनेजर के साथ है. मेरे दिमाग में एक hi नाम आ रहा था पर में वो सोचना नहीं चाहता था. में वह से हैट गया और निचे बेथ गया.

रंजन : (शिव के चेहरे के हावभाव देख रही थी, उसके चेहरे पर उल्जन साफ़ दिख रही थी, फुसफुसाते हुए उसने पूछा) क्या हुआ शिव.

शिव : (मेने उल्जन से उसकी और dekha)Wo लड़की कोण है?

रंजन : तुम खुद देख लो.

शिव : उसका चेहरा नहीं दिख रहा है. तुम जानती हो है न? मुझे बताओ कोण है वो.

रंजन : अगर उसका चेहरा नहीं दिखा तो में बता दूंगी पर में चाहती हु तुम खुद देखो.

मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था तो में फिर से खिड़की से अंदर देखने लगा. थोड़ी hi देर में ये खेल ख़तम हो गया, मैनेजर अपना लुंड पोछते हुए वह से खड़ा हो गया. अब उस लड़की के कूल्हे दिख रहे थे, एक कूल्हे के ऊपर गिरा हुआ मैनेजर का माल दिख रहा था. वो लड़की सीधी होने लगी और अपने कपडे ठीक करने लगी, पीछे से देख कर hi मुझे अंदाजा हो चूका था की वो कोण है पर फिर भी में पक्का करने के लिए वह खड़ा रहा. जब वो लड़की घूमी और मैनेजर की और देखने लगी तो उसका चेहरा मेरे सामने था. वो सरितादिदी hi थी. मेने उनके चेहरे को ध्यान से देखा तो उनका चेहरा दुखी लग रहा था. मुझे साफ़ पता चल रहा था की अभी जो कुछ भी हुआ उस से उनको कोई ख़ुशी नहीं थी.

सरितादिदी : अब में जाऊ, बच्चे अकेले है.

मैनेजर : है जा, वैसे भी अब तेरा कोई काम नहीं.

वो अपना चेहरा पोछते हुए वह से निकल गयी. मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा था, मेने रंजन की और देखा, उसने मेरे हाथ पकड़ा और खींचते हुए मुझे वह से दूर ले जाने लगी. में चुप चाप उसके साथ वह से निकल गया. थोड़ी दूर जा कर.

रंजन : देखा?

शिव : पर वो..., वह... वो ऐसा क्यों कर रही थी, वो भी उसके साथ. और ये तुम मुझे क्यों दिखाना चाहती थी.

रंजन : तूने क्या देखा, दीदी का चेहरा देखा.

शिव : है.

रंजन : तो तुजे उनके चेहरे पर क्या दिखा, काया वो खुस थी इन सब से, नहीं न. वो मज़बूरी में ऐसा कर रही थी.

शिव : ऐसी क्या मज़बूरी है उनकी.

रंजन : ये मैनेजर एक नंबर का कमीना है, सरिता दीदी पहली लड़की नहीं है जिसके साथ उसने ऐसा किआ है. और भी कई लड़कीओ के साथ वो ऐसा कर चूका है. तुजे याद है न की पहले कितने लोग यहाँ रहते थे. (मेरे जहँ में कई चेहरे गुजरने लगे जिन्हे मेने पहले देखा था) वो सब इस्सकी वजह से hi अनाथालय छोड़ कर चले गए या फिर उनके साथ कुछ न कुछ गलत हुआ. उन्होंने सरितादिदी का भी फायदा उठाया, उनको डरा धमका कर उनके साथ कई सालो से वो ये कर रहा है. वो ये सब किसी और के साथ न करे इसीलिए वो ये सब सेह रही है. वो जानती है की अगर वो ऐसा नहीं करेगी तो वो मैनेजर किसी और के साथ ये सब करेगा. तुम समाज रहे हो न?

सरितादिदी के अलावा तो अब बड़ी लड़कीओ में लतादिदी, रंजन और विणा hi थी. ये सोच कर hi की वो इन सबके साथ ऐस बुरा कर शक्ति है मेरा खून घुलने लगा, गुस्से की वजह से मेरी सांसे तेज होने लगी. मुझे उस हरामजादे पर बहोत गुस्सा आने लगा में अनाथालय की और मुदा और अपने कदम बढ़ाये hi थे की रंजन ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, वो मुझसे लिपट गयी.

रंजन : रुको शिव, नहीं....

दूसरी और जूही शिव को छोड़ कर सीधे पवन सर के घर पहुंची थी, उसने घर की बेल्ल बजायी, थोड़ी देर बाद स्नेहा ने hi दरवाजा खोला. इस वक़्त जूही को देख कर उसे अस्चर्य हुआ, उसके चेहरे पर गुस्सा देख कर उसे ताज्जुब हुआ.

स्नेहा : अरे जूही तुम इस वक़्त.? आओ, अंदर आओ.

जूही: पवन सर है?

स्नेहा : नहीं, वो अभी नहीं aaye.(Juhi के चेहरे पर गुस्सा dekh)Kya बात है जूही? कुछ हुआ है क्या?

जूही : अब इतनी भोली मत बनो, मुझे पता है जितनी भोली तुम दिखती हो उतनी हो नहीं. तुम जो ये कर रही हो, क्या पवनसीर को पता है?

स्नेहा : (स्नेहा को कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो क्या बात कर रही hai)Kis बारे में बात कर रही हो? और ये क्या तरीका है बात करने का?

जूही : देखो मुज से तो ये नाटक मात करो. में शिव के बारेमे बात कर रही हु.

स्नेहा :(मुस्कुराते hue)Shiv के बारेमे? कहना क्या चाहती हो? कुछ समाज आये ऐसा कहो.

जूही : ज्यादा बनो मात, तुमने जो शिव को फसाया है उसकी बात कर रही हु.

स्नेहा : (हस्ते hue)Kya कहा शिव को फसाया है? मैंने... कैसे?

जूही : ज्यादा नौटंकी करने की जरुरत नहीं, अपनी हवस के लिए तुमने उस बेचारे को फसाया है, में उसकी बात कर रही हु.

स्नेहा :(उसकी बात सुन कर स्नेहा थोड़ा सीरियस हो गयी, उसने जूही के चेहरे को गौर से देखा और अपने आपको सँभालते हुए पूछा) तुम ये कैसे कह सकती हो?

जूही : मुझे शिव ने बताया.

स्नेहा : (स्नेहा के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये, वो ऐसा सोच भी नहीं शक्ति थी की शिव ने ये कहा की उसने उसे फाशय है, गंभीर होते हुए उसने puchha)Kya उसने ये कहा की मेने उसे फसाया है?

जूही : (अब जूही के चेहरे का गुस्सा उतरने लगा क्यों की शिव ने ऐसा तो नहीं कहा था की स्नेहा ने उसे फसाया है, फिर भी उसने संभल कर kaha)Nahi, उसने ऐसा नहीं तो कहा पर में उसके जैसी नादाँ नहीं हु जो समाज न सकू.

स्नेहा : पहले अंदर आओ और बेथ जाओ फिर बात करते है.

जूही : में यहाँ बात करने नहीं आयी हु, तुम्हे जगह करने आयी हु की शिव से दूर रहो.

स्नेहा :(वो समाज चुकी थी की शिव कभी उसकी बदनामी नहीं करेगा, और वो जूही का गुस्सा भी समाज रही थी, उसने मुस्कुराते हुए kaha)Aur अगर उस से दूर न राहु तो?

जूही : (गुस्से में उसे घूरती है, उसे कटाई ऐसी उम्मीद नहीं थी की स्नेहा इतनी बेशर्मी से पेश आएगी, उसने सोचा था की वो दर जाएगी, क्यों की ऐसी बातो से लोग अक्सर दर जाते है, पर ये तो बेशर्मी से मन कर रही है, उसने झुंझलाते हुए kaha)To....to में तुम्हे बदनाम कर दूंगी.

स्नेहा :(स्नेहा को अंदाजा था की जूही ऐसा क्यों कर रही है तो उसने स्माइल के साथ कहा) और उस से तुम्हे क्या मिलेगा?

जूही : उस से मुझे कुछ मिले न मिले शिव तुम्हारे चंगुल से जरूर छूट जाये गए.

स्नेहा : और अगर शिव hi न छूटना चाहे तो?

जूही : तो.... to....me...me....

स्नेहा : तुम कुछ नहीं कर सकती Juhi.(Muskura कर उसका हाथ पकड़ कर उसे खींचते हुए सोफे पर बिठाती है, जूही के जिस्म में जैसे कोई ताक़त hi न बची थी, वो खींचती चली गयी और स्नेहा के हलके धक्के से भी वो धाम से सोफे पे बेथ gayi)Tumhe क्या बताया शिव ne?(Juhi उसकी आँखों में देखती है और उसे सब बता देती hai)Hmmm, शिव ने तो ऐसा कुछ नहीं कहा की मैंने उसे फसाया है. अच्छा एक बात बताओ, मैंने ऐसा क्यों किआ वो जान न नहीं चाहोगी?

जूही : अपनी हवस मिटने के लिए और क्या?

स्नेहा : शिव ने इतना सब बताया फिर भी तुम्हे यही लगता है? अभी तुम बच्ची हो जूही. मेरे जिस्म की आग मिटने के लिए मेरे पति है और वो काफी है मेरे लिए.

जूही : (सवालिया नजरो से देखते hue)To फिर क्यों तुमने ऐसा किया?

स्नेहा : एक बात बताओ मुझे, तुमने कभी सेक्स किआ है? वैसे में जवाब जानती हु पर फिर भी तुम्हारे मुँह से सुन न चाहती हु.

जूही :(ऐसे सीधे सवाल से जूही थोड़ा चौंक गयी और हड़बड़ा भी gayi)Is से क्या लेना देना है इस बात का?

स्नेहा : क्या लेने देना है वो तुम्हे पता चल जायेगा. पहले बताओ तो, क्या तुमने कभी सेक्स किआ है? अगर तुम्हारा जवाब है है तो भी में तुम्हारे बारे में कुछ भी गलत नहीं सोचूंगी. में बस तुम्हे कुछ संजना छह रही हु इसी लिए पूछ रही हु.

जूही : (ऐसे सवाल पर वो नरम हो गयी और नज़ारे झुका कर धीमी आवाज me)Nahi.

स्नेहा : तो तुम कभी ये नहीं समाज सकती जूही. में तुम्हे अपनी दोस्त मानती हु इस लिए में तुमसे सच hi कहूँगी. है ऐसा कह शक्ति है की मेने शिव को फसाया था अपने साथ सेक्स करने के लिए. पर उसकी वजह हवस नहीं थी, कुछ दिक्कतों के चलते में माँ नहीं बन प् रही थी. मुझे शिव पसंद आया और में चाहती थी की उस से अगर मुझे बच्चा होगा तो वो उसके जैसा hi सुन्दर होगा. में टेस्ट तुबे का भी सहारा ले शक्ति थी पर तब मुझे पता नहीं होता की मेरा बच्चा कैसा होता. शिव हैंडसम है और मेने जितना जाना है वो अच्छे दिल का भी है, तो यही सोच कर मेने उसे बुलाया था. पर फिर मुझे अपने आप पर घिन आयी की में अपने स्वार्थ के लिए ऐसे किसी मासूम लड़के का इस्तेमाल नहीं कर शक्ति. इस्सलिये मेने उसे सब कुछ सच सच बता दिया. उसने भी इस बात को एक्सेप्ट किआ और मुज से रिलेशन बनाये. अब बात आती है शिव की. मैंने तुम्हे इसी लिए पूछा था की तुमने सेक्स किया है की नहीं, क्यों की ये वही समाज शक्ति है जिसने सेक्स किआ हो. शिव के साथ ऐसे सम्बंद बनाकर के जो मुझे सुख मिला सच कहु तो मेरे और पवन के बिचसे वो कही खो सा गया था. है शुरुआती दिनों में मुझे पवन ने खूब प्यार दिया और अब भी देते है, पर शिव जिस तरह से सेक्स करता है सच कहु तो ये कहना की वो सेक्स करता है ये कहना hi गलत होगा, शिव जिस तरह से प्यार जताता है उसकी तुलना किसी से नहीं की जा शक्ति. उसके साथ मुझे इतनी ख़ुशी मिलती है इतना मज़ा आता है की में बयां नहीं कर शक्ति. तुम कह रही थी न की मुझे बदनाम कर डौगी, पर उसके साथ ये सुख पाने के लिए तुम मुझे बदनाम कर दो तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अब बात करते है तुम्हारी. मुझे एक बात बताओ तुम क्यों शिव के लिए यहाँ लड़ने चली आयी?

जूही : वो.... वो में...

स्नेहा : रहने दो, में जानती हु जो भी तुम कहोगी वो जूथ hi होगा. असल बात ये है की शिव का ऐसे किसी और के साथ सम्बन्ध तुम बर्दास्त नहीं करपायी. क्यों की कहना कही तुम भी उसे चाहती हो. है न? (जूही मूर्ति बानी आंखे फाडे स्नेहा को देख रही थी, उसके मुँह पे जैसे टाला लग गया tha)Tum चाहे कुछ भी कहो पर ये तुम्हारी आँखों में दीखता है की में जो कुछ भी कह रही हु वो सात प्रतिसत सही है. अगर तुम मुझपर इल्जाम लगा रही हो की मैंने शिव को फसाया है, तो तुम क्या करना चाहती हो? अगर तुम ये कहो की तुम उस से प्यार करती हो तो ये में भी कह शक्ति हु की में भी उस से प्यार करती हु. है मुझे अपने पति से भी प्यार है पर में शिव से भी ऊंट्ना hi प्यार करती हु. और अब तो वो मेरी कोख में पल रहे बच्चे का बाप भी है तो मुझे उस से बहोत प्यार हो गया है. वैसे भी शिव तो तुमसे छोटा है तो अपने रिलेशन को क्या kahogi?(Juhi की आंखे आंसू बहाने लगती है, स्नेहा उसकी मनोस्थिति समाज रही थी, वो उसके पास बेथ गयी और उसका हाथ पकड़ kar)Shhhh, इसमें रोनेवाली कोई बात नहीं है जूही, प्यार करना हमारे बस में नहीं है वो तो हो जाता है, किसी से भी. और सच कहु तो शिव है hi ऐसा, उसमे में कुछ खास है, वो किसी को भी अपनी और खींच लेता है. तुम सिर्फ प्यार कर शक्ति हो इस से ज्यादा कुछ नहीं, बाकि सब किस्मत पर छोड़ do.(Sneha, उसको गले लागलेटी है और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगती है) में जानती हु तुम शिव का भला hi चाहती हो और यकीं मनो में भी सिर्फ शिव का भला hi चाहती हु. पर उसे बांधना, न मेरे बस में है, न तुम्हारे. है ये अलग बात है की वो, तुमसे बांधना चाहे. अब छोडो ये सब चलो आज साथ में खाना कहते है. पवन भी आते hi होंगे, तुम जा कर अपना चेहरा साफ़ करो वर्ण पवन क्या kahenge(Wo उठने लगती है ki)Aahhh...

जूही :(स्नेहा की आवाज में दर्द झलक रहा था, जूही को उसकी चिंता hui)Kya हुआ तुम्हे?

स्नेहा : (स्नेहा वापस सोफे पर बेथ गयी और अपने आपको सँभालने लगी, फिर मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, शिव के प्यार का नतीजा है.

जूही :(जूही को बात समाज में नहीं आती) तुम्हे दर्द हो रहा है और तुम कह रही हो शिव के प्यार का नतीजा है.

स्नेहा : (मुस्कुराते हुए वो जूही को देखती है) ये तुम्हे अभी समाज नहीं आएगा पर याद रखना एक दिन तुम्हारी भी यही हालत होनेवाली है. (अब जूही की बत्ती जाली, वो एक दम से शर्मा गयी, अचानक स्नेहा को कुछ याद aaya)Ha याद आया, शिव मुझसे ये पूछ तो रहा था की किसी लड़की के साथ पहलीबार सेक्स करते है तो कैसे करते है, अब समाज आया शायद वो तुम्हारे sath....(Usne बात अधूरी छोड़ दी और जूही को देख कर मुस्कुराने लगी)

जूही: (जूही तो शर्म के मरे पानी पानी हो रही थी, शर्म के मरे उसका चेहरा भी लाल हुआ जा रहा tha)Kya तुम भी.

स्नेहा : चल जा, मुझे न बना. तेरा चेहरा hi बता रहा है की तुजे कितनी छह है उसके निचे लेटने की.

(जूही इतनी शर्मजाति है की मुस्कुराते हुए अपना चेहरा छुपलेटी है. स्नेहा को उसे छेड़ने में बहोत मज़ा आ रहा था तो उसने चालू rakkha)Par एक बात कह देती हु या यु कहो की जगह कर रही हु, उसके निचे लेटना इतना भी आसान नहीं, जान हलक में आ जाती है. पर शायद तुजे ज्यादा फर्क न पड़े.

जूही : (उसकी हालत तो ऐसी थी की काटो तो खून न निकले, पर स्नेहा के ऐसा कहने पर उसने शरमाते हुए उसकी और देखा, उसका चेहरा hi बता रहा था की वो पूछना छह रही है की क्यों मुझे फर्क नहीं पड़ेगा.

स्नेहा : वो इस लिए कह रही हु, क्यों की तू है भी उसके टक्कर की. वो भी खम्भे जैसा और तू भी खम्भे जैसी लम्बी hi है, ऊपर से एथलीट भी है, तो तू आसानी से सेह लेगी uska.(Juhi की हालत ख़राब हो रही थी, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, स्नेहा उसके मजे ले रही थी.)

फिर स्नेहा खाने की तैयारीअ करती है, जूही बाथरूम में जा कर अपना चेहरा धोती है, स्नेहा की बातो को सोच कर वो बार बार मुस्कुरा रही थी. जब वो बहार आकर बैठी तब भी स्नेहा उसकी खिंचाई कर रही थी. जूही को ये सब बहोत अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर में पवनसीर भी आ गए. वो जूही को देख कर सरप्राइज हुए पर स्नेहा ने कहा की वो उस से ऐसे hi मिलने चली आयी थी. फिर सब ने खाना खाया. स्नेहा अब कुछ बोल तो नहीं रही थी पर जूही की हिम्मत hi नहीं तो रही थी स्नेहा की और देखने की. वो शिर झुकाये खाना खाने लगी. शिव की वजह से दोनों आपस में जुड़ चुकी थी और उनकी दोस्ती और गहरी हो चुकी थी.
 
अपडेट 45

शिव : रंजन, मुझे छोड़.

रंजन : मेने कहा था न ठन्डे दिमाग से काम ले.

शिव : पहले मुझे chhod(Shiv ने ये बहोत शांति से कहा था तो रंजन ने उसे छोड़ दिया, शिव ने उसे अपने आगे खड़ा किआ) अब मेरी बात गौर से सुन, में गुस्से में अंदर नहीं जा रहा हु. मुझे पता है में क्या कर रहा हु, सामजी.

रंजन : पर तू क्या करने जा रहा है?

शिव : तुजे, मुज पर भरोसा है की नहीं?

रंजन : (थोड़ा हिचकिचाते हुए) है तो सही पर...

शिव : अगर भरोसा नहीं है तो तू भी चल मेरे साथ.

रंजन : पर, कहा?

शिव : (उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए उसे अंदर ले जाने laga)Tu चल तो सही, बस सवाल पे सवाल पूछे जा रही है.

वो शिव के साथ अनाथालय में दाखिल हुई, शिव सीधा मैनेजर की ऑफिस में hi गया, रंजन का दिल जोरो से धड़क रहा था, पता नहीं शिव क्या करनेवाला है. पर अब तीर कमान से निकल चूका था.

में सीधा मैनेजर की ऑफिस में गया. वो बैठा बैठा सिगरेट पि रहा था, अभी भी वो ऊपर से नंगा hi था. रंजन के अंदर आते hi मेने ऑफिस का दरवाजा बंद कर दिया. हम दोनों को देख कर मैनेजर सवालिया नजरो से हमें देख रहा था.

मैनेजर : इस वक़्त तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे ho?(Jab हमने कोई जवाब नहीं दिया तो )बकोगे भी, क्या करने आये ho?(Manager बड़ी फेफिकरि से पूछ रहा था, उसे अंदाजा भी नहीं था की उसके साथ क्या होनेवाला है, वो दोनों के चेहरे को गौर से देखने लगा, रंजन के चेहरे पर परेशानी साफ़ देखि जा शक्ति थी पर शिव एक दम शांत tha)Abe बोल चूतिये, मुँह में जबान नहीं है kyaaaaa....(Wo अपना वाकया पूरा करता उस से पहले उसके गाल पर एक झनातेदार थप्पड़ पड़ा, उसके मुँह से सिगरेगे उड़ के दीवाल से टकराई और बुज गयी, झापड़ इतना जोरदार था की मैनेजर का गाल अंदर से फात गया और उसे अपने मुँह में खून का स्वाद महसूस होने लगा.) Ma**r Ch*d tuneeeee....(Shiv ने उसको गले से दबोच कर कुर्शी समेत पीछे दीवाल से चिपका दिया, अपने गले पर इतनी जोरदार पकड़ से उसके सब्द उसके मुँह में hi रह गए, वो शिव के पंजी को अपने गले से हटाने के लिए दोनों हाथो से म्हणत करने लगा, पकड़ इतनी मजबूत थी की वो सिर्फ छटपटाता रहा, जॉब शिव ने काफी देर तक दबाये रक्खा तो मैनेजर की साँस दाम तोड़ने लगी, उसे अपने सामने मौत दिखने लगी, रंजन भी बहोत दर गयी थी की शिव ने उसका गाला छोड़ दिया, जैसे hi सैंड अंदर गयी मैनेजर को खांसी चढ़ी और वो खासते हुए जोर जोर से सांसे लेने लगा, टेबल पर पड़ी चीजे भी निचे गिर गयी, जैसे hi वो थोड़ा संभाला फिर से वो शिव की और लपका) सेल haramiiiiii(Shiv फिर से तैयार hi था, एक घुसा उसके जबड़े पर पड़ा तो वो लुढ़कता हुआ जमीं पर गिर पड़ा, वो जैसे तैसे खड़ा हुआ तो शिव ने उसका गिरेबान पकड़ा और एक और घुसा उसके चेहरे पर मारा, मैनेजर के आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, वो अपने पैरो पर खड़ा न रह शका और वही घुटनो पे बेथ गया., शिव शांति से सामने पड़ी चेयर को खिंच कर उस पर बेथ गया)

शिव : अब बोल, अभी भी मुज पर हाथ उठाना है या गली बकनी hai?(Manager की हालत ख़राब थी, वो समाज गया था की अब ये वो शिव नहीं रहा जिसे वो बचपन में मारता था, अब इसके हाथ की मर खायेगा तो वो ऊपर पहुंच जायेगा. उसने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस शिव को देख रहा था, उसे ये समाज नहीं आ रहा था की आज अचानक शिव उसे क्यों मार रहा है) रंजन, इसके लिए पानी ले आ तो जरा.

रंजन : (शिव का ऐसा रूप, उसने सोचा भी नहीं था, वो हड़बड़ाते hue)H...ha...(Wo दौड़ती हुई बहार निकली और पानी ले कर वापस आयी, उसने मैनेजर को दिया, मैनेजर ने रंजन को भी दर कर देखा, उसने पानी piya)(Shiv ने फिर से उसका गिरेबान पकड़ा और उसे खड़ा किआ, मैनेजर दर रहा था की अभी पड़ी अभी पड़ी, पर शिव ने उसे सामने कुर्शी में बिठाया)

शिव : में अगर पहले बता देता तो बात तेरी समाज में नहीं आती. पर अब तेरे दिमाग के सरे तार सही से काम करने लगे होंगे. तू सोच रहा होगा की में तुजे मार क्यों रहा हु, है na?(Manager ने डरते हुए है kaha)Ranjan जरा यहाँ आ तो. (रंजन भी डरते डरते वह आ गयी) ये तुजे हवस मिटने का सामान लगती है? (शिव का चेहरा इतना शांत था की मैनेजर अंदर तक हिल गया,) बता बे कमीने, क्या ये... tuje...hawas मिटने का सामान लगती है?

मैनेजर : (वो समाज रहा था की रंजन ने शिव से उसकी शिकायत की hai)Nahi....Nahi शिव... ऐसा कुछ नहीं hai...Ranjan तू बोल न... मेने कभी तुम्हारे साथ कुछ गलत kia...(Manager को ऐसे गिड़गिड़ाते देख रंजन अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी)

शिव : (अपने दन्त चबाते hue)Me सिर्फ रंजन अकेली की बात नहीं कर रहा हु, में यहाँ रहनेवाली सब लड़कीओ की बात कर रहा hu.(Shiv की आवाज में अब थोड़ा गुस्सा दिख रहा था)

मैनेजर : नहीं शिव, तुम्हे कोई ग़लतफहमी हुई है, मेने किसी के साथ कुछ भी नहीं किआ...

शिव : (अपनी कुर्शी से उठ कर फिर से उसका गाला दबोच लेता hai)To कमीने , अभी थोड़ी देर पहले सरितादिदी के साथ क्या कर रहा tha(Ye सुन कर बहार कड़ी सरिता की आँखों से आंसू बहने लगे, वो थोड़ीदेर पहले hi आयी थी, उसने रंजन को दौड़ते हुए किचन में जाकर पानी लाते देखा था, उसने देखा की वो ऑफिस में गयी तो उसका दिल घबरा गया था की कही मैनेजर इस के साथ भी कुछ कर न दे, पर यहाँ आकर उसे शिव की आवाज आयी तो वो कड़ी सुन रही थी, शिव ने उसे मैनेजर के साथ देख लिया था, ये सोच कर की शिव उसके बारे में कैसा सोच रहा होगा, उसके आंख से आंसू बह nikale)(Shiv ने गाला इतनी जोर से दबोचा था की उसकी आंखे बहार निकलने लगी, रंजन दर गयी, उसने फ़ौरन शिव का हाथ पकड़ा)

रंजन : शिईयिव, छुड़ उसे , वो मर jayega...Shiiiiv, तुजे लतादिदी की कसम chhoood.(Shiv ने हाथ छोड़ दिया, मैनेजर फिर से खस्ने लगा)

शिव : (मैनेजर का गिरेबान पकड़ते hue)Ye पहली और आखरी चेतावनी है, आज के बाद किसी भी लड़की के साथ कोई भी बदसलूकी की तो जान से मार दूंगा tuje.(Manager को शिव की आँखों में मौत दिखाई दे रही थी, उसने डरते डरते है का इस्सर kia)Ranjan,

रंजन : है, शिव.

शिव : तू ध्यान रखना इसका, तुजे तो दर नहीं लगता न इसका.

रंजन : में क्यों डरूंगी इस से, मुझे कोई दर नहीं इसका.

शिव : और ये बात अभी हम तीनो के बिच hi रखना, किसी को बताना मात. (मैनेजर ko)Ek आखरी मौका देता हु तुजे. समाज में aaya.(Manager बस आंखे फाडे उसे देखता raha)Chal रंजन.

वो दोनों बहार निकले, सरिता पहले hi वह से निकल गयी थी.

शिव : चल, जा अब सो जा, किसी से डरना नहीं.

रंजन : (शिव को गले से पकड़ कर कूद कर उसकी कमर पर चढ़ gayi)Me क्यों डरूंगी, मेरे साथ मेरा शेर है uuuuummmmmmmmaaaaah(Usne मेरे होठो पर जोर से किश कर दी)

शिव : ये क्या कर रही है, कोई देख लेगा तो.

रंजन : (मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में देख kar)Abhi तो तूने कहा की किसी से डरना नहीं.

शिव : (उसे किश karke)Nautanki, चल जा सो जा.

रंजन : चल न मेरे साथ सो जा न. दीदी तो सो गयी होंगी, चल न.

शिव : मार खायेगी, चल जा अभी.

रंजन : वो मैनेजर डरता होगा तुजसे, में नहीं डर्टी, चल न मेरे कमरे में, तुजे जितनी मारनी है, मार लेना.... meri.(Wo खिल खिलाकर हसने लगी)

शिव : चल जा अभी, bye.

रंजन : (निचे उतरी और अपना मुँह बिगड़ kar)Bye.

शिव : पागल (उसे अपने शाइन में दबोच liya)Bye.

रंजन : (मुस्कुराते hue)Bye. (वो मुस्कुराती हुई अपने कमरे में चली गयी और में अपने)

जब में रूम में आया तो दीदी सो रही थी, मेने भी कपडे निकल दिए और उनके पास लेटगया.

मेने दीदी को देखा तो वो सुकून से सो रही थी. में भी उनको देखते हुए लेता रहा, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. दीदी को बहो में लिए बगैर मुझे नींद आती hi नहीं थी. में उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था इस लिए मेने उनके ऊपर सिर्फ हाथ रक्खा पर तुरंत उन्होंने आँखे खोल दी.

लता दीदी : हो गया सब?

शिव : है didi.(Unko अपनी और खींचते hue)Aap बहोत सुन्दर हो दीदी.

लता दीदी :(शर्माती hai)Tu भी तो है.

शिव : आप तो सो गयी थी न.

लतादिदी : तेरा इंतजार करते हुए आंख लग गयी थी.

शिव : आप काम भी कितना करती है, थकजाति होंगी, सो jaiye.(Wo मेरी आगोस में सामने लगी, उनको बहो में भरने से मेरा लुंड खड़ा हो गया tha.(Mera लुंड उनकी छूट से सात गया जहा उन्होंने पद पहना हुआ tha)Ouchh...

शिव : (में जनता था की क्या हुआ firbhi)Kya हुआ didi(Muskura kar)Kisi कीड़े ने काटा क्या?

लता दीदी :(शर्मीली मुस्कान के sath)Kida नहीं बहोत बड़ा जानवर है.

शिव : तो मर के भगा दो.

लता दीदी : नहीं, वो बहोत प्यारा है.

शिव : (आज में भी कुछ और hi मूड में था, तो मेने kaha)To उस से प्यार करो. (लता आश्चर्य से शिव को देखती है फिर शर्मा के मुस्कुराने लगती है) क्या हुआ दीदी? अगर वो प्यारा है तो उस से प्यार करना चाहिए न?

लता दीदी : (उसको गौर से देखते हुए समझने की कोशिस करती है, की वो सच कह रहा है की मज़ाक कर रहा है, पर उसका चेहरा शांत hi था, उसे लगा की शिव मज़ाक तो कतई नहीं कर रहा तो क्या वो चाहता है की me...Thodi देर उसे देखने के बाद आखिर उसने पूछ hi लिया )क्या तू सचमुच चाहता है में उस से प्यार करू?

शिव : (लता दीदी की आँखों में देखते hue)Ha दीदी, अपने हाथ से उसे प्यार करो na.(Uske ऐसे खुले निमंत्रण से लता शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका ली, वो सचमे दुविधा में फंस गयी थी, उसका दिल तो छह रहा था की वो सबकुछ करे पर शर्म अभी भी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी. उसने नज़ारे उठाकर एक बार शिव के सामने देखा, तो उसने फिर kaha)Pleeeease.

(Shiv)Mene भी सोच लिया था की अगर दीदी को इसमें खुसी मिलती है तो क्या बुराई है. वैसे भी आज के हादसे के बाद मुझे इतना तो पता चल गया था की यहाँ रह कर इन लड़कीओ ने भी कितना सहा है, हम सब बिना maa-baap के सहारे ऐसे hi रह रहे थे, ऊपर से जिसे देखभाल करनी चाहिए वो hi लुटेरा निकला. मेने सोच लिया था की में इन्हे वो साडी खुसी दूंगा, चाहे ये कुछ भी चाहे, में इन्हे कभी निराश नहीं करूँगा. (लता को अब विस्वास हो गया था की शिव चाहता है की वो उसके लुंड से प्यार करे, ये सोच कर hi उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा था. उसने सोचा नहीं था की शिव उस से ऐसा भी कहेगा. वैसे तो वो बहोत खुस थी की आखिर कर उन दोनों के बिच की शर्म की दिवार टूट रही थी. वो इन्ही सब सोचमे डूबी थी की शिव उसका हाथ पकड़ कर निचे अपने लुंड की और ले जाने लगा तो उसकी सांसे बेकाबू होने लगी. जब उसके हाथ ने उस कड़क हो चुके उभर को छुआ तो उसकी धड़कन hi चूक गयी, वो गरम गरम लुंड की छुअन से वो कैंप गयी. वो देख तो शिव की आँखों में रही थी पर उसका पूरा ध्यान अपने हाथ पर लगे उस अंग पर था.)

लता : (मान me)Ye क्या हो रहा है मुझे.( शिव ने अपनी अंडरवियर निचे खिसका दी और मेरा हाथ अपने खड़े लुंड पे रख दिया, मेने कपट हाथ से हलके से उसे थम लिया. वो बहोत गर्म था, ऊपर की खाल तो नरम थी पर अंदर से वो लोहे जैसा सख्त था. उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर उसका दिल छह रहा था की वो आगे बढे, उसने अपने आप को संभाला और लुंड पकड़ के सहलाने लगी उसकी लम्बाई महसूस करके उसके मुँह से अनायास hi निकल gaya.)Kitna लुम्बा है ये शिव.

शिव : (मुझे उनका हाथ मेरे लुंड पर बहोत अच्छा लग रहा था, मेने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, उनके कोमल हाथो का स्पर्श मुझे बहोत सुकून दे रहा tha)Ha दीदी ऐसे hi करो मुझे बहोत अच्छा लग रहा है.

लता : (मान me)Mera ऐसा करने से उसको मज़ा आ रहा hai(Usne और अच्छे से लुंड को पकड़ा और अच्छे से उसके लुंड को उप्पर नीचे हिलने लगी. उसने अपने शिर को शिव की छाती पे रखदिया, अब उसकी नजर के सामने उसको वो लुंड नजर आने लगा, वो उसे देखते हुए सहलाने लगती है, उसकी छूट से पानी निकल रहा था पर पीरियड्स की वजह से वो कुछ कर नहीं सकती थी. उसे छूट में एक अजीब सी सरसराहट हो रही थी, वो उसे छूना छह रही थी पर शिव के सामने अपनी छूट को छूने में उसे शर्म आरही थी. (पर शिव ने शायद उसके मान की बात पढ़ ली और उसने अपना हाथ लता की छूट की और ले जाने लगा. लता ने उसका हाथ पकड़ लिया.)

लतादिदी : अभी वह गन्दा है शिव, एक दो दिन रुक जाओ.

शिव : (मुस्कुराते हुए) और उसके बाद?.

Latadidi:(Sharmate hue)Jo चाहे कर लेना.

शिव : सच दीदी, क्या आप चाहती हो की में आप के साथ वो सब karu?(Latadidi ने अपना शिर है में हिलाया और मेरी छाती से लिपट गयी).

लतादिदी: (मेरे लुंड की और इस्सर करते hue)Par अभी इससे कैसे शांत करू?.

शिव : (उनकी पीठ को सहलाते हुएकोई) जरुरत नहीं है दीदी. वो हो जायेगा अपने आप शांत.

लतादिदी : में करू उसे शांत?

शिव : कैसे?

लतादिदी : मुझे पता है, कैसे करते है. पर तू अपनी आंखे बंद कर ले.

शिव : आंखे क्यों बंद करू दीदी?

लतादिदी : मुझे शर्म आ रही है.

शिव : तो रहने दीजिये न दीदी.

लतादिदी : मुझे करना है शिव, मेरा बहोत मान कर रहा है, पर अभी शर्म आ रही है, आज अपनी आंखे बंद कर ले, बाद में आंखे बंद करने को नहीं कहूँगी.

शिव : ठीक है didi.(Mene अपनी आंखे बंद कर ली)

लता ने देखा की शिव ने अपनी आंखे बंद कर ली है तो वो बेथ गयी. उसने एक बार शिव के चेहरे को देखा जो अपनी आंखे बंद किये लेता हुआ था. उसने लुंड को देखा जो पूरी तरह से तना हुआ था. उसे शर्म तो आ रही थी पर शर्म की इस दिवार का टूटना जरुरी था, अगर ये दिवार टूटेगी तभी उनका ये सम्बन्ध आगे बढ़ पायेगा. उसने कांपते हाथो से लुंड को फिर से थम लिया, एकदम शख्त और गरम गरम था. आज वो खुलकर उसको देख रही थी. शिव के आंख बंद कर लेने से उसको बहोत रहत थी. वो लुंड को देखते हुए हिलने लगी.

शिव :(सूखे लैंड को हिलने से मुझे दर्द hua)Ahhhhh

लतादिदी : (शिव के मुँह से दर की आवाज सुन कर लता दर गयी की उसने कुछ गलत तो नहीं कर diya)Kya हुआ शिव? मेने कुछ गलत कर दिया.

शिव : नहीं दीदी वो सूखा है तो थोड़ा दर्द हुआ.

लतादिदी : तो क्या करना चाहिए?

शिव : आप तो कह रही थी की आप को पता है क्या करना है.

लतादिदी : (शर्मा जाती hai)Pata है मतलब सुना है, किआ थोड़ी न है. तू बता न क्या करते है.

शिव : (उनके ऐसे भोलेपन पर मुझे बहोत प्यार आ रहा था, मेने मुस्कुराते हुए) पहले अपने थूक से उसे गिला करदिजिये.

शिव ने उसे थूक से गिला करने के लिए कहा था पर लता को लगा की शिव उसका लुंड चूसने के लिए कह रहा है. (उसे पता था ये कभी न कभी तो करना hi पड़ेगा, सरिता भी कह रही थी की लड़को को ऐसा करना बहोत अच्छा लगता है. उसने मान बना लिया, एक बार उसने शिव को देखा जो अपनी आंखे बंद किये था. वो थोड़ा सही से बेथ गयी, एक बार उसने लुंड को देखा. उसे ये बड़ा अजीब लग रहा था पर वो शिव की ख़ुशी के लिए कुछ भी कर शक्ति थी. वैसे भी शिव का ये अंग उसे अपनी और आकर्षित कर रहा था, उसके हाथ में फुदकता वो लुंड उसके अंदर हलचल पैदा कर रहा था, उसकी छूट में से रास जोरो से टपक रहा था. उसने हिम्मत बटोरी और वो झुकी और अपना मुँह खोल कर लुंड के सुपडे को अपने छोटे से मुँह में भर लिया. उसका मुँह पूरा भर गया था, कुछ अजीब सी फीलिंग हो रही थी पर जो भी था वो उसे अच्छा hi लग रहा था.

शिव : (दीदी ने मेरा लुंड अपने मुँह में ले लिया तो में चौक गया, मेने थूक लगाने को बोलै tha)Ahh दीदी, आप ये क्या कर रही है.?

लतादिदी : (लता को समाज नहीं आया, वो तो वही कर रही थी जो उसे शिव ने कहा था. उसने लुंड को मुँह से बहार निकला और सवालिया नजरो से शिव को देखने lagi)Tune hi तो कहा.

शिव :(मेने मुस्कुराते हुए kaha)Mene थूक लगाने को कहा था दीदी, आप उस पर हाथ से या सीधे थूक दाल कर उसे गिला कर शक्ति थी.

लतादिदी : मुझे laga...(Wo इतनी शर्मा गयी क्या कहे, उसने देखा की शिव की आंखे बंद hi थी, वो अपने आप पर हसने लगी की कैसी बेवकूफ हु, पर जैसा सरिता ने बताया था की लड़को को ये अच्छा लगता है, पर शायद मेने गलत तरीके से किआ होगा, तो वो जानना चाहती थी) मेने ऐसा किया तो तुजे अच्छा नहीं लगा?

शिव : अच्छा, सच कहु तो बहोत अच्छा लगा didi(Uski बात से वो खुस हो गयी), में तो ये कह रहा था की आपको ऐसे एकदम से ये सब करने की जरुरत नहीं है.

लतादिदी :(वो बहोत शर्मा गयी थी, फिर अपने आपको शम्भल kar)Wo, वो.... mera.....bhi .....मान कर रहा था.

शिव :(मुस्कुराते hue)To फिर ठीक है दीदी, मुझे तो अच्छा hi लगा था. आप को जैसे करना है वैसे कीजिये.

लतादिदी : (शर्मा कर धीमी आवाज में) और क्या क्या करते है इसके साथ, तू मुझे बता न कैसे करते है सब? तू मुझे जैसे शिखायेगा वैसा में करुँगी.

शिव : ठीक है दीदी में बताता हु. जैसा की मेने पहले कहा था, आप इस पर थूक लगा कर हाथ से हिला सकती है. दूसरा जो अभी आपने किया वैसे मुँह में ले कर भी करते है, तीसरा इसको पूरा ऊपर से निचे तक चाट ते भी है, चूमते है. आप को जो अच्छा लगे वैसे hi करिये दीदी, ऐसा कोई नियम नहीं है की ऐसे hi करना है.

लता, शिव के साइड में बैठी हुई थी. उसने अपने हाथ में थूक लिया और उसको पुरे लुंड पर लगा दिया और लुंड को हिलने लगी. लुंड पूरा चमकने लगा था, लता को शर्म के साथ साथ मज़ा भी आ रहा था. वो लुंड को देखते हुए उसके ऊपर हाथ चला रही थी. उसकी उंगलिया, अंगूठे से नहीं मिल रही थी. वो इस बड़े से अंग पर अपना प्यार जाता रही थी.

लतादिदी : ऐसे शिव, में ठीक कर रही हु न?

शिव : शहहह हा दीदी, ऐसे hi.

वो बिच बिच में सीधा लुंड पर थूक रही थी और उसे गिला कर रही थी. वो थोड़ी सहज हो गयी थी और उसे भी उसके लुंड से खेलना अच्छा लग रहा था. वो दूसरे हाथ को शिव की छाती पर घूमने लगी, उसके निप्पल से खेलने लगी. शिव का तो खुसी का ठिकाना नहीं था. उसने भी अपना हाथ बढ़ा कर लतादिदी के कूल्हे को सहलाने लगा, लता ने अपने कूल्हे शिव की और करते हुए, लुंड को अपने मुँह में भर लिया. वो अपना मुँह ऊपर निचे कर रही थी, वो काफी देर तक ये सब करती रही.

शिव : दीदी अब मेरा निकलनेवाला है.

लतादिदी : (लता को समाज नहीं aaya)Kya निकलने वाला है शिव?

शिव : (में Muskuraya)Abhi पता चल जायेगा आपको. थोड़ा जल्दी जल्दी हाथ चलाओ didi(Usko अपनी दीदी के भोले पैन पे बहोत प्यार आ रहा था, वो ये सोच कर hi बहोत उत्तेजित था की उसकी लतादिदी उसके साथ ये सब कर रही है)

लता ने देखा की शिव अह्ह्ह अह्ह्ह कर रहा है, वो अपने हाथ तेज तेज चलने लगी, वो बड़े गौर से लुंड को देख रही थी. शिव ने कराहते हुए अपना पानी छोड़ दिया. लता ने देखा की एक फवारा सा निकला शिव के लुंड से. वो काफी ऊपर तक उडा और उसके पुरे हाथ पर फ़ैल गया. वो गौर से निकल रहे सफ़ेद तरल को देख रही थी.

शिव : बस दीदी, अह्ह्ह हो गया.

लतादिदी : (अपने हाथ पर फैले उस सफ़ेद तरल को देखते hue)Ye क्या है शिव.

शिव : ये वीर्य है दीदी. इन सब के अंत में यही निकलता है. अगर ये स्त्री के शरीर के अंदर जाये तो बच्चा होता है.

लतादिदी : क्या सच me.(Wo सोचने लगी की अगर वो शिव के साथ करेगी तो क्या उसको बच्चा होगा?, वो दुविधा में पद गयी thi)(Maan में ‘सरिता से पूछना पड़ेगा’)

उन्होंने कपडे से अपना हाथ पूछा और मेरे लुंड को भी साफ़ किआ. फिर वो मेरे बगल में लेट गयी तो मेने उनके चेहरे को पकड़ लिया और उनके होठो को चूसने लगा, लता भी अपने नाम की तरह शिव से लिपट गयी. काफी देर वो दोनों प्यार जताते रहे और आखिर वो सो गए.

अनाथालय में अभी भी दो लोग जाग रहे थे. एक था मैनेजर, वो सिगरेट पे सिगरेट पि रहा था. वो सोच रहा था की इस शिव को कैसे रस्ते से हटाया जाये. क्यों की अब वो समाज गया था की उसके रहते अब वो कुछ नहीं कर पायेगा. वही सरिता बैठे बैठे रो रही थी. उसे ये सोच कर hi रोना आ रहा था की शिव ने उसे मैनेजर के साथ देखा है. वो क्या सोच रहा होगा उसके बारे में. क्या अब वो उस से नफ़रत करेगा. वो कैसे उस से आंख मिलाएगी. वो ये सोच सोच कर hi रोये जा रही थी.
 
अपडेट 46

सुबह उठकर में बाथरूम में फ्रेस होने चलागया. जब में बहार निकला तो विणा दिखाई दी. मेने उसे स्माइल दी तो उसने भी स्माइल दी और शर्माकर बाथरूम में घुस गयी. में वह से जाने लगा पर फिर कुछ सोच कर रूक गया. मुझे थोड़ी hi देर में वो शह्ह्ह्ह की आवाज सुनाई दी. पता नहीं क्यों पर मुझे ये आवाज बहोत पसंद आ रही थी. जब आवाज बंद हुई और मुझे लगा की विणा निकलने वाली है तो में वह से जल्दी से निकल गया. (विणा जब बहार आयी तो उसे शिव जाता नजर आया. उसे पता चलगया की शिव अभी अभी वह सेगया है. वो सोचनेलगी, वो क्यों रुका था. जैसे hi उसे समाज आया वो शर्मा गयी, पर चेहरे पर शर्मीली स्माइल जरूर आगयी. वो अंदर hi अंदर बहोत खुस हो रही थी, मुस्कुराती हुई वापस अपने बिस्टेर में लेट गयी.) में तैयार हो कर जूही मैडम के घर पहुंच गया. आज भी मुझे उस भीगी हुई जलपरी के दर्शन हुए. सचमुच जूही मैडम कमल थी. एक तो इतनी लम्बी थी ऊपर से लम्बी टंगे बिलकुल नंगी. टॉवल इतने ऊपर था की अगर वो झुक टी तो उनका सब दिख जाये. में ये सोच hi रहा था की पता नहीं क्यों पर जूही मैडम वह ड्रावर से कुछ निकलने के लिए सचमुच झुक गयी. मेरा कलेजा तो मुँह में आगया. चौड़े कूल्हे आधे से ज्यादा दिखने लगे और उनकी भीगी हुई पंतय चिपकी थी जो छूट के फुले हुए होठ स्पस्ट दिखा रही थी. मेरी आंखे फ़ैल गयी और में एक तक उसी नज़ारे को देखने लगा. (जूही ने अपनी नजर तिरछी करके शिव को देखा जो उसके इस जानलेवा नज़ारे में खोया हुआ था. उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी. बिना पीछे मुड़े वो सीधी हुई और कमरे में चली गयी.) में अभी भी मूर्ति बने उसी नज़ारे को अपने दिमाग से हटाने की कोशिस कर रहा था पर वो हैट hi नहीं रहा था. जब जूही मैडम दूध का गिलास लिए मुझे पुकार रही थी तब जाकर मेरी तन्द्रा टूटी. में हड़बड़ा के जूही मैडम के चेहरे को देखने लगा. वो कुछ बोल रही थी पर मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था. (जूही ने उसके कंधे को पकड़ कर हिलाया.)

जूही मैडम : शिव.... सीईव.

शिव : (हड़बड़ाते hue)hhhhh हा मैडम.

जूही मैडम : क्या हुआ? ऐसे क्यों बैठे हो?

शिव : Wo....wo...(apne आप को सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं मैडम.

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Lo दूधपीओ.

शिव :हहहह हआ.

मेने एक hi साँस में सारा दूध ख़तम कर लिया. (घर से बहार निकलते hi वो अपने कोच वाले रोले में आ गयी, गयम जाते वक़्त उसने शिव को स्कूटी पर बिठाया नहीं, उसे अपने साथ में दौड़ाया. वो स्कूटर उसके साथ hi चला रही थी और उसकी नज़र अपने स्पीडोमीटर पैर थी. उसने शिव को गयम में भी कसरत करवाने लगाई).

लता परेशान थी की सरिता अभी तक आयी क्यों नहीं. उसने देखा की ऑफिस भी बंद है. मैनेजर भी सुआबाह सुबह चला गया था. उतने में रंजन वह आयी, वो स्कूल के लिए तैयार हो रही थी.

लता : रंजन, सुन तो.

रंजन : (उछलती कूदती वो दीदी के पास pahuchi)Ha दीदी, बोलो.

लता : देख तो, सरिता अभी तक क्यों नहीं आयी.

रंजन : जी दीदी.

वो सरितादिदी को देखने उनके कमरे में गयी, वो सोई हुई थी, उनके चेहरे पर साइड में आंसुओ के बहने से नीसाण बने हुए थे. वो समाज नहीं प् रही थी की दीदी रोइ kyu.(Use थोड़ी न पता था की सरिता ने रात को सब सुनलिया था)

रंजन : दीदी ो दीदी (उसने सरिता को छुआ तो उसका बदन तप रहा था, वो फ़ौरन बहार aayi)Didi, वो सोई हुई है और उनको तेज बुखार भी है.

लता : है है, ऐसे कैसे उसको बुखार आ gaya(Wo फ़ौरन सरिता के रूम में गयी, रंजन भी उनके साथ hi gayi)Sarita, ो सरिता, (उन्होंने उसे हिलाया तो सरिता ने बड़ी मुश्किल से आंख खोली)

सरिता : शिईयिव, शीइइइइव.

लता : सरिता, में हु, क्या हुआ, शिव को क्यों बुला रही है. (सरिता को थोड़ा होश आया, उसने लता और रंजन को देखा, फिर से उसकी आँखों से आंसू बहने लगे, उसने सहारा दे कर उसे अपनी गॉड में लेटाया )रंजन जा तो पानी ले आ. (रंजन दौड़ते हुए पानी ले आयी. लता ने उसे सहारा दे कर उसे पानी पिलाया.) क्या हुआ सरिता, तू रो क्यों रही है.

सरिता : शिईयिव (वो फिर रोने लगी)

लता : क्या हुआ, कुछ बताएगी भी.

सरिता : कल रात, शिव ने मुझे ...(वो फिर रोने लगी, रंजन ये सुन कर चौक गयी, उसे पता चल गया की सरिता दीदी को सब पता चल गया है)

लता : क्या हुआ कल रात, क्या किआ शिव ने तेरे साथ... बता muje.(Lata का दिल जोरो से धड़क रहा था, ऐसा क्या करदिया था शिव ने) आने दे उसे, में खबर लेती हु उसकी.

रंजन : नहीं दीदी, शिव ने कुछ नहीं किआ, आप सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है.

लता : तू जानती है?

रंजन : (शिर झुका kar)Ha दीदी.

लता : (गुस्से se)To बक न फिर, क्या हुआ था. (रंजन ने साडी बात दीदी को बता di)He भगवन, ये क्या किआ शिव ने, अब वो राक्षस उसे यहाँ रहने नहीं देगा. ये लड़का भी कुछ भी सोचता नहीं. (रंजन से) तूने कहा की तुम दोनों सरिता के जाने के बाद ऑफिस में गए थे तो फिर ये क्यों रो रही है.

रंजन : वो पता नहीं दीदी.

सरिता : मेने बहार से सब सुना था. वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में, में जीना नहीं चाहती लता, में मर जाना चाहती हु.

लता : एक झापड़ लगाउंगी तुजे. रंजन, जा तो वह डिब्बे में दवाइया रक्खी है उसमे से बुखार की गोली ले aa.(Ranjan दवाई लेने गयी)

सरिता : लता, उसने मुझे वैसी हालत में देखलिया है, वो मुज से नफ़रत करेगा लता. में कही की न रही, मुझे मर जाने दे.

लता : चुप, एक भी सब्द निकला तो सच में मरूंगी. ऐसा कुछ नहीं होगा. उसे आने दे में बात करती हु उस से. (रंजन दवाई ले aayi)Le पहले दवा खा ले.

रंजन : दीदी में स्कूल से छुट्टी ले लू.

लता : है रंजन, अगर तू ऐसा करेगी तो बहोत अच्छा होगा. जा तो जरा उन बच्चो का सब देख, में आती हु. (सरिता रो रही थी, लता उसका शिर सहलाते हुए उसे सुला रही थी, थोड़ी hi देर में वो फिर सो गयी)

गयम से जब में घर पंहुचा तो विणा और रंजन को किचन में काम करते देखा. मेने पानी पिटे हुए पूछा.

शिव : आज तुम दोनों स्कूल नहीं गयी.

रंजन : सरिता दीदी की तबियत ख़राब है, तो नहीं गयी.

शिव : क्यों, क्या हुआ उन्हें.

रंजन : (वो शिव के नजदीक गयी और धीरे से कहा) कल रात उन्होंने ऑफिस वाली बात सुनली थी, वो रात से रो रही थी, उन्हें बुखार हो गया है, लता दीदी वही है, उनके कमरे में.

शिव : में देखता हु.

रंजन : (उसका हाथ पकड़लेति है) तू दीदी को गलत समझता है?

शिव : पागल है क्या तू, में उन्हें क्यों गलत समझूंगा, कल तूने hi तो बताया था की दीदी के साथ कितना गलत हुआ, फिर में क्यों उनके बारे में ऐसा सोचूंगा.

रंजन : (उसके चेहरे पर स्माइल आ gayi)Muje यकीं था तुज पर, वो ये सोच सोच कर रो रही है की तू उनसे नफ़रत करेगा. जा उनसे बात कर और समजा उन्हें.

शिव : (में उनके कमरे में चला गया, लता दीदी वही बैठी थी और सरिता दीदी का शिर सेहला रही थी) दीदी.

लता : खड़े होते हुए, शिव, ये क्या किआ तूने, तूने मैनेजर को मारा, पागल हो गया है तू, वो तुजे अब यहाँ रहने नहीं देगा. ये क्या किआ तूने.

शिव : ऐसा कुछ नहीं होगा, आप उसकी चिंता छोडो. दीदी कैसी है?

लता : अभी सोई है, तुजे याद करके रो रही थी. शिव...

शिव : आप चिंता मात करो, रंजन ने मुझे सब बता दिया है, में संभल लूंगा. आप जाइये में हु यहाँ.

लता : शिव को गले लगा कर, संभल लेना उसे, वो बहोत दुखी है.

शिव : आप चिंता मात करो, में संभल lunga.(Lata दीदी बहार चली गयी, जैसे दीदी, शिर सेहला रही थी वैसे hi में भी उनका शिर सहलाने लगा.

सरिता : (जैसे वो अपने शिर पर शिव के हाथ को पहचान गयी, उसने आंखे खोली, शिव को देख कर) शीइइइइव, मुझे माफ़ karde(Wo कड़ी होने लगी, और रोने लगी, मेने उनको सहारा दिया और वो बिस्तर पर बेथ gayi)Shiv, मुझे माफ़ कर दे, में बहोत बुरी हु, मुझसे नफरत मात करना, शिव (मेने उन्हें गले से लगा लिया, और उनकी पीठ सहलाने लगा, वो थोड़ी देर रोटी रही फिर वो शांत होने lagi)Shiiiv.....

शिव : शहहहहह, कुछ नहीं हुआ, आप शांत हो जाइये.

सरिता : मुझे छोड़ मत देना शिव, मुझे माफ़ करदे, me...me वो...

शिव : शहहहहह शांत हो जाइये, आप को कोई सफाई देने की जरुरत नहीं है. आपने पहले hi मुझे बता दिया होता तो ये सब कब का बंद करवाडेटा. मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है.

सरिता : रट हुए, में वो अपनी मर्जी से nahi...muje माफ़ करदे शिव, में बहोत दर गयी थी.

शिव : अगर अब भी आप रोटी रही तो में आप को छोड़ दूंगा.

सरिता : (अपने आंसू पोछते hue)me नहीं रोउंगी शिव, में नहीं रोउंगी, बॉस तू मुझसे नाराज मात होना. में नहीं roungi.(Wo अपनी साड़ी से अपना चेहरा बार बार साफ़ कर रही थी)

शिव : दीदी, आप हस्ती कूदती और उधम मचती hi अच्छी लगती है, इस रोटेड दीदी को तो में जनता hi नहीं था.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Tu मुझसे नफ़रत तो नहीं करेगा न शिव. मुझे माफ़ करदेगा न.

शिव : आपने मुझे न बता कर गलती तो की है, और उसकी सजा भी मिलेगी.

सरिता : (उसे गले लगा kar)Tu जो सजा कहेगा मुझे मंजूर है शिव. बस मुझसे दूर मात जाना.

शिव : (सरिता दीदी के कूल्हों को दबाते hue)Soch लो दीदी, फिर मात कहना मुझे.

सरिता : (शिव को अपने कूल्हों को दबाते महसूस कर के वो ख़ुशी से भर उठी, और साथ में उसके इरादे भी समाज गयी) तू जो कहे मेरे भाई, में सब करुँगी तेरे लिए. आज के बाद मेरे इस बदन को तेरे अलावा कोई छुएगा नहीं. मेरा सब कुछ तेरे लिए hi है शिव.

शिव : (मज़ाक करते हुए) न बाबा न, ऐसे मेरे गले मात पदों. में पूरी जिंदगी झेलनेवाले नहीं.

सरिता : क्यों? में अच्छी नहीं लगती तुजे.

शिव : अच्छी तो बहोत लगती हो पर, अगर पूरी जिंदगी मेरे अलावा किसी को छूने नहीं डौगी तो मेरे जीजाजी खफा हो जायेंगे.

सरिता : (उसकी आँखों से आंसू बहने लगे) शिव...

शिव : है दीदी, आप चिंता मात करो और मुज पर भरोसा रखो.

सरिता : (शिव को गले लगा kar)Tuj पर पूरा भरोसा है मुझे शिव. पर वो होगा तब होगा, तब तक तो में तेरे साथ hi रहूंगी.

शिव : और जीजा जी को क्या डौगी फिर.

सरिता : में जैसी हु वैसी अगर उन्हें चाइये होगी तो ले जाये, वर्ण में अपने भाई के साथ hi खुस हु.

शिव : ठीक है, जैसा आप कहो, चलिए मुझे स्कूल भी जाना है. देर हो रही है.

सरिता : कड़ी होते हुए, तू तैयार हो में तेरे लिए खाना बनती हु.

शिव : पर आप बीमार है न.

सरिता : नहीं में कोई बीमार नहीं हु, अगर यकीं न हो तो मुझे छू कर देख le(Mene उन्हें छुआ तो उनका शरीर सच में ठंडा हो चूका था) देख लिया, तू मेरे साथ है तो में मौत को भी अपने पास भटकने न दू. चल तू जल्दी से तैयार हो जा.

हम दोनों हाथ पकड़ कर बहार आये तो हमे देख लतादिदी के भी आँखों में आंसू आ गए. उन्होंने सरितादिदी को गले लगा लिया, में मुस्कुराता हुआ तैयार होने चला गया.

में स्कूल पहुंच गया, मेने देखा की वैस्वी का स्कूटर वह था. में अपने दोस्तों के पास चला gaya.Wo दोनों बाते कर रहे थे.

महेश : यार वो देख सफ़ेद और पिंक ड्रेस्सवली क्या मस्त लगरही है न.

शिव :(उस लड़की की और देखते hue)Yu दूर दूर से वो मस्त है, वो अच्छी है ये करने से कुछ नहीं होने वाला. अगर कोई पसंद है तो जा कर बात कर.

हर्ष :(जोरो से हस्ते hue)Ye क्या बात करेगा, लड़की के पास जाने के नाम से hi इसकी इसकी फैट टी है.

महेश :तो तू जाना, दिखादे तेरे में कितना दम hai.(Harsh की हुसी रूक जाती है)

शिव : ये सब छोडो और पढ़ाई में ध्यान दो. चलो क्लास चलते है.

हर्ष : यार ऐस कब तक सूखे सूखे रहेंगे, कोई तो पत्नी पड़ेगी न.

शिव : तो जा पटना, किसी ने रोका है क्या.

हर्ष : है तू तो कहेगा hi न, तूने तो पता ली है, हम hi रह गए.

शिव : किसकी बात कर रहा है.

हर्ष : संयम और कोण. (उसने महेश को ताली दी)

शिव : देखो दोस्तों, ऐसे किसी भी लड़की को बदनाम नहीं करना चाहिए, वो मेरी दोस्त है, जैसे तुमलोग हो.

हर्ष : एक लड़क और लड़की कभी दोस्त नहीं होते, ये तो पर्दा hai....Kya था महेश आगे.

शिव : (एक शिर पे मरते hue)Apni फ़िल्मी नौटंकी बंद कर और क्लास में चल, वह मैडम तेरे डायलॉग सुनेगी.

हम सब हस्ते बाते करते हुए क्लास में आगये. जब हम तीनो क्लास में एंटर हुए तो मेरी नजर वापस वैस्वी और संयम की और गयी. पहले वैस्वी के साथ एक सेकंड के लिएनज़ारे मिली, मेने संयम को देखा जो मुस्कुरा रही थी तो मेने भी स्माइल की और अपनी डेस्क की और मुद गया. थोड़ी देर बाद बिना मैडम आयी. सब ने खड़े हो कर गुड मॉर्निंग कहा. सब को बैठने का इस्सर करने के बाद, उन्होंने साडी क्लास में एक नज़र दौड़ाई और शिव को देखा. जैसे hi उन्दोनो की नज़ारे मिली शिव ने नज़ारे ज़ुका ली. बिना को समाज नहीं आ रहा था की कैसे शिव से बात करे. आखिर वो थी तो उसकी टीचर, वो ऐसे hi तो उसे साथ बात नहीं कर शक्ति थी. पता नहीं क्यों पर बिना की नज़र अपने आप झुक गयी. वो पढ़ते हुए भी बार बार शिव को देख रही थी पर जब भी उनकी नज़र टकराती शिव फ़ौरन अपनी नज़ारे झुका लेता था. (शिव) मुझे थोड़ा अजीब लगा की मैडम बार बार मुझे hi क्यों देख रही है पर मेने पढ़ाई में ध्यान देना hi बेहतर समजा. शाम को छुट्टी हुई तो महेश और हर्ष निकल गए और में भी दौड़ते हुए निकल गया. रस्ते में वैश्वि और संयम ने स्कूटर पैर मुझे ओवरटेक किआ, संयम ने स्माइल के साथ हाथ भी हिलाया , मेने भी हिलाया, फिर वो दोनों निकल गए. में जूही मैडम के घर पहुंच गया. वो ट्रैक पहने रेडी थी. उन्होंने शिव को दूध दिया फिर हम दोनों निकल गए. वो मुझे लेके एक मॉल में पहुंची.
 
अपडेट 47

जूही मैडम मुझे ले कर मॉल आयी थी. शायद उन्हें कुछ लेना होगा. उन्होंने मॉल के पार्किंग में अपना स्कूटर पार्क किआ. जब हम मॉल की और चलने लगे तो मेने पूछ hi लिया.

शिव : मैडम हम यहाँ क्यों आये है?

जूही मैडम : तुम चलो में बताती हु.

हम दोनों अंदर गए, बहोत बड़ा मॉल था, अंदर कई लोग घूम रहे थे, कुछ के हाथ में शॉपिंग बैग्स थी, कुछ बच्चे यहाँ से वह दौड़ रहे थे. मेने देखा की वह सिडिया अपने आप उप्पर की और जा रही थी और दूसरी तरफ निचे की और आ रही थी. मेने कई बार इस मॉल को देखा था पर बहार से, कभी अंदर नहीं आया था. वैसे भी अंदर आ कर में क्या करता. वो ऊपर चढनेवाली सीधी पे कड़ी हो गयी और ऊपर जाने लगी, में थोड़ा दर रहा था तो में वही खड़ा रह गया, थोड़ा ऊपर जा कर जूही मैडम को ध्यान आया की में साथ में नहीं हु तो उन्होंने पीछे मुद कर देखा. मुझे वही खड़ा देख उन्होंने ऊपर आने का इस्सर किआ. और भी दूसरे लोग उस सीधी पर चढ़ रहे थे तो उन्हें देख कर मेने भी अपने पेअर वह रख दिए, में थोड़ा लड़खड़ाया पर मेने रेलिंग पकड़ ली. मुझे कुछ अजीब सा एहसास हो रहा था, में खड़ा था और ऊपर अपने आप जा रहा था. जब में ऊपर पंहुचा तो वो मुस्कुरा रही थी, में जैसे hi सीधी से उतरा तो मेरा थोड़ा बैलेंस बिगाड़ा तो जूही मैडम ने मुझे पकड़ लिया.

जूही मैडम : क्या कर रहे हो, पहली बार आये हो?

शिव : है मैडम, में पहली बार hi आया हु.

जूही मैडम : अच्छा ठीक है, चलो, (वो मेरी कलाई पकड़ कर चलने लगी, तो में उनके पीछे खींचता चला गया.) हम दोनों एक स्पोर्ट्स की दुकान में गए, वह कई तरह के कपडे थे, शूज थे और बहोत साडी चीजे थी. एक सेल्स गर्ल आयी.

सेल्स गर्ल : व्हाट कैन ी दो फॉर यू मैडम. (में आप के लिए क्या कर शक्ति हु मैडम)

जूही मैडम : ी वांट सम क्लोथ्स एंड शूज फॉर हिम. (मुझे इनके लिए थोड़े कपडे और शूज चाहिए)

सेल्स गर्ल : थिस वे प्लीज. (इस तरफ आइये)

उनकी बातो से में थोड़ा चौक गया, वो मेरे लिए आर्डर दे रही थी. मेने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने अपने होठो पर ऊँगली रखकर चुप रहने का इस्सर किआ. मुझे समाज नहीं आ रहा था की क्या कहु तो में चुप hi रहा.

सेल्स गर्ल : व्हाट स्पोर्ट दो यू नीड क्लोथ्स फॉर madam.(Aap को कोनसे खेल के लिए कपडे चाहिए मैडम)

जूही मैडम : फॉर रनिंग रेस.

उस सेल्स गर्ल ने मुझे ऊपर से निचे तक देखा फिर वो कुछ कपडे निकल कर दिखने लगी. उन्होंने दौड़ के लिए खास प्रकार के कपडे और जुटे पसंद किए. फिर उन्होंने एक ट्रैक पंत और t-shirt भी ख़रीदा. हम वो सब ले कर बिल देने काउंटर पर गए. मेने देखा की बिल ामौँत बड़ा था, इतने तो पैसे भी मेरे पास नहीं थे. उन्होंने बिल दिया और हम बैग्स लेकर बहार आगये.

शिव : मैडम आप ने ये क्यों लिया?

जूही मैडम : जो चीज जरुरी है वो लेनी hi पड़ती है शिव, और मेने तुम्हे क्या कहा, चुप मतलब चुप.

शिव : पर में ये पैसे कैसे लौटाऊंगा मैडम.

जूही मैडम : जब बड़े एथलीट बन जाओ तब चूका देना, अब चलो.

हम स्टेडियम पहुंच गए. उन्होंने मुझे वो शूज और कपडे दिए.

जूही मैडम : ये कपडे लो और बदल के आओ, शूज यही ट्रैक पर hi पहन न.

में चेंजिंग रूम में गया और मेने कपडे पहने, कपडे मेरी बॉडी से चिपक गए थे. मेने निचे देखा तो मेरे लुंड वाला भट साफ़ दिख रहा था. मुझे थोड़ी शर्म आने लगी की ऐसे कैसे में बहार जाऊंगा. पर जाना तो था hi, में वह से निकल कर ट्रैक की और जाने लगा, अगर कोई सामने आता तो में अपने हाथ से अपने लुंड को छुपा लेता था. कुछ लड़कीअ मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी. में जूही मैडम के पास पहुंच गया, में वह भी अपने हाथ धक् कर खड़ा था. वो मुझे ऊपर से निचे देख रही थी, वो मुझे ऐसे देख रही थी तो मुझे शर्म आने लगी. उन्होंने मेरे हाथ को देखा जो लुंड वाले भाग को छुपाये हुए था. वो मुस्कुराने लगी.

जूही मैडम : (मुस्कुराते हुए) लो ये शूज पहन लो, और ये हाथ हटाओ, क्या लड़कीओ की तरह शर्मा रहे हो. वो देखो लड़कीअ, उन्होंने भी तो ऐसे कपडे पहने है न. वो तो नहीं शर्मा रही.

शिव : पर मैडम.

जूही मैडम : अब ये शर्माना छोड़ और दौड़ पे ध्यान दे.

में और कर भी क्या शक्ति था. मेने शूज पहने. दो चार कदम चल कर देखा. वो बहोत hi ज्यादा अच्छे थे. फिर हम दोनों वार्म उप के लिए दौड़ने लगे. आज में शूज पहन कर दौड़ रहा था, तो ट्रैक पर सचमुच काफी अच्छी गृप मिल रही थी. रेस के दौरान भी मेरा टाइम और काम हो गया था. दो तीन लड़कीअ जूही मैडम के पास आयी.

लड़कीअ : मैडम हम भी आप के साथ प्रैक्टिस करे?

जूही : है है, क्यों नहीं.

हम सब साथ में प्रैक्टिस करने लगे, थोड़े देर में दो लड़के भी हमारे साथ जुड़ गए. हम लोगो ने साथ में रेस भी की, जिस से अच्छी प्रैक्टिस हो रही थी. फिर हम सब साथ मिल कर स्ट्रेचिंग करने लगे. वह सब निपटाकर हम गयम आगये. फिर हम उनके घर चले गए. उन्होंने जुटे और कपडे वही उतरने के लिए कहा.

जूही मैडम : जब भी इसकी जरुरत होंगी में स्टेडियम ले aaungi.(Mene हामी भरी) फिर में घर चला गया. रात को खाने के बाद पढ़ाई की. जब में रूम में आया तो दीदी बिस्तर लगा रही थी.

शिव : क्यों दीदी अभी तक बिस्टेर नहीं लगाया था.

लता दीदी: है वो शारिता से बाते कर रही थी तो टाइम का पता hi न चला. जा तुजे नहाना है तो नाहा ले. वैसे भी गर्मी कितनी बढ़ गयी है और अभी तक बारिश भी नहीं आयी.

शिव : (मेने उनको पीछे से अपनी बाहोंमे भरलिया, उनके नरम मुलायम पेट को कास के पकड़ते हुए )आप नहीं चलोगी.

लता दीदी : (मुस्कुराते हुए मेरे गाल पर अपना गाल रगड़ते hue)Maine नाहा लिया है. जा तू नाहा ले.

शिव : (मेने उनके गाल प् किश kia)Thik है दीदी.

में नहाने चला गया. मेने देखा की ऑफिस की लाइट जाली हुई है. मुझे पता चल गया की मैनेजर आया हुआ है. मुझे फ़ौरन सरिता दीदी का ख्याल आया. में उन्हें देखने गया तो वो अपने रूम में नहीं थी, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा. मुझे गुस्सा भी आने लगा, में ऑफिस की और जाने लगा तो मुझे बच्चो के कमरे से सरिता दीदी की आवाज आयी, में वह गया तो वो बच्चो को कहानी सुना रही थी. मुझे देख कर वो मेरे पास आयी.

सरितादिदी : क्या हुआ शिव (मेरे हाथ में तौलिया देख kar)Nahane जा रहा है?

शिव : है दीदी. वो मैनेजर आया हुआ है.

सरितादिदी : नहीं, आज तो वो नहीं आया.

शिव : ऑफिस की लाइट चालू है?

सरितादिदी : शायद मुज से रह गयी होगी, में अलमारी की चाबी धुंध रही थी, पर दिखी नहीं, शायद वो अपने साथ hi रखता hoga.Kyu क्या हुआ?

शिव : नहीं, मुझे लगा की शायद वो आया है, और आप अपने कमरेमे नहीं दिखी.

सरितादिदी : तू मुज पर शक कर रहा है? मेने कहा न अब वो मुझे छू भी नहीं पायेगा.

शिव : में शक नहीं कर रहा, मुझे आप की चिंता हो रही थी.

सरितादिदी : तू चिंता मात कर, में ठीक हु. में चालू नहाने तेरे साथ.

शिव : अभी नहीं, आप पहले ठीक हो जाओ फिर.

सरितादिदी : में ठीक hi हु शिव.

शिव : आप को बुखार था सुबह. एक दो दिन ठहर जाओ दीदी.

सरितादिदी : (थोड़ी भावुक हो कर) सच सच बताना शिव, कही तू मुज से कतरा तो नहीं रहा न शिव?

शिव : (बच्चे थे तो मेने उन्हें बहार की और खिंच लिया, दीवाल से लगा कर उनके होठो को अपनी गिरफ्त में लिया और उसे चूसने लगा, वो भी मुज से लिपट गयी और मेरे किश का जवाब देने लगी, थोड़ी देर किश करने के बाद) मिल गया जवाब.

साररितदिदी : (मुस्कुराते हुए उन्होंने अपने होठो को अपने पल्लू से पोछा और मेरे होठो को भी pochha)Ha मिल गया.

शिव : अब में जाऊ?

उन्होंने मुस्कुराते हुए है कहा और में बाथरूम की और चला गया. नाहा कर अपने रूम में पहुंच गया. मेने देखा की दीदी लेती हुई थी, मेने दरवाजा बंद किआ और टॉवल निकल कर उनके साथ लेट गया. उनकी चद्दर हटाई तो वो सिर्फ पंतय पहने थी. उनके चेरे की मुस्कराहट बता रही थी की वो मेरा hi इंतजार कर रही थी. दीदी को खींच कर अपने आगोश में ले लिया और उनको अपने से चिपका लिया. लतादिदी ने आंखे खोलकर मुझे देखा और मुस्कुराते हुए मुझसे चिपक गयी. थोड़ी देर बाते करने के बाद दोनों सो गए. सुबह उठकर जब वो बाथरूम पंहुचा तो बाथरूम से कोई निकल रहा था. उसने देखा की रंजन थी तो उसने उसे वापस बाथरूम में धकेलते हुए अंदर घुस गया.

रंजन : (शरमाते hue)Kya कर रहे हो? कोई आजायेगा तो.

शिव : (उसके गाल से उसका चेहरा थमते hue)Tum जाना चाहती हो?

रंजन ने शिव की आंखोमे देखा और फिर मुस्कुराते हुए “न” में गर्दन हिलायी. मेने उसको दीवाल से सत्ता दिया और उसके होठो को चूसने लगा. रंजन भी उसकी पीठ को सहलाते हुए उसका साथ देने लगी. किश करने के बाद वो मुस्कुराते हुए चली गयी. में तैयार हो कर जूही मैडम के घर दौड़ते हुए पहुंच गया. जब दरवाजा खुला तो जूही मैडम ट्रैक पहने रेडी थी.

जूही मैडम : गुड मॉर्निंग शिव, आओ.

शिव :(आज वो खूबसूरत नज़ारा न देखने पर में थोड़ा मायूस हो gaya,Mayusi se)Good मॉर्निंग मम.

जूही मैडम : (उसको मायूस देख kar)Kya हुआ शिव?

शिव :(अपने आपको सँभालते हुए फीकी मुस्कान के sath)Kuchh नहीं मम.

जूही मैडम : तो तुम्हारा चेहरा क्यों लटक गया है?

शिव : नहीं तो ऐसी तो कोई बात नहीं.

जूही मैडम : ठीक है तुम baitho.(Fir दोनों ने दूध पिया और बहार आगये.) शिव तुम्हे स्कूटर आता है?

शिव : नहीं मैडम. साइकिल आती है.

जूही मैडम : अगर साइकिल आती है तो स्कूटर तो आसानी से आ जायेगा. ठीक है में सीखा दूंगी. चलो अभी चलते है. हम ने कसरत की. उनका टाइम हुआ तो वो निकलने लगी.

जूही मैडम : चलो में चलती हु, शाम को मिलते है. शाम को खाना मेरे साथ खाओगे?

शिव : वो क्यों मैडम?

जूही मैडम : बस ऐसे hi, वैसे भी अकेले कहती हु तो साथमे खाएंगे.

शिव : ठीक है मैडम.

फिर वो bye बोलकर चली गयी. में भी अपना काम निपटा कर घर लौट आया. एंटर हुआ तो सामने सरिता दीदी मिलगई. वो मुझे देख कर मुस्कुरायी तो में भी मुस्कुराया.

सरिता दीदी : आ गया. चल जल्दी तैयार हो जा खाना रेडी है.

शिव : जी दीदी.

फिर में तैयार हो कर खाना खाने बेथ गया. निकलते वक़्त मेने दीदी को बतादिया की में शाम को जूही मैडम के घर खाना खा कर आऊंगा . फिर में स्कूल के लिए निकल गया. जब मेने संयम को देखा, तो मुस्कुराते हुए उसके पास पहुंच गया.

शिव : गुड मॉर्निंग. क्यों अकेले कड़ी हो, नाज़िआ दीदी नहीं आयी?.

संयम : (मुस्कुराते hue)Good मॉर्निंग, नहीं वो काम कर रही थी तो नहीं आयी.

शिव : वैस्वी नहीं आयी अभी तक.?

संयम : स्कूटर से जल्दी पहुंच जाते है तो वो थोड़ा लेट hi आती है. वो देखो, वो आ गयी. (हमे वैस्वी आती दिखाई दी)

शिव : तुम लोग आओ में निकलता हु.

संयम : वैस्वी से तो मिल लो.

शिव : नहीं वो वैसे भी मुज पर भड़की हुई है, तुम आओ में निकलता hu.(Maine दौड़ लगा दी)

वैस्वी : (एक नजर मेरी और देखा, फिर संयम की और बढ़ गयी )गुड मॉर्निंग, चल निकलते hai.(Usne जैसे बे मन से कहा)

संयम : पीछे बैठते हुए, है चलो.

में दौड़ते हुए जा रहा था और उन्होंने मुझे ओवरटेक किआ, संयम ने हाथ हिला कर bye कहा तो मैंने भी वैसा hi किआ. वो लोग आगे निकल गए.

संयम : (थोड़ा आगे जा kar)Tuje क्या हुआ है?

वैस्वी : क्यों क्या हुआ है?

संयम : तू इतनी बेरुखी से क्यों बोली, क्या तुजे कोई दिक्कत हुई मुझे लेने आने में?

वैस्वी : अरे नहीं, में तेरी वजह से नहीं, सॉरी यार तुजे ऐसा लगा हो तो.

संयम : तो क्या शिव की वजह से?

वैस्वी : कितना अकड़ू है न, मुझे देखते hi वह से निकल लिया.

संयम : तेरी प्रॉब्लम क्या है, जब वो बात करता है तो तू सीधे मुँह उसे जवाब तक नहीं देती. वो तो ये बोलकर निकल गया की तू उसको देख कर भड़केगी

वैस्वी : तो भड़कूँगी न, क्या समझता है वो अपने आप को, और मुझे उस से कोई बात hi नहीं करनी, न सीधे मुँह न उलटे मुँह. वो तेरा दोस्त है, मेरा नहीं. और वैसे भी मुझे ऐसे लड़को से बात करने में कोई इंटरेस्ट नहीं.

संयम : ऐसे लड़के से तेरा क्या मतलब है?

वैस्वी : देख संयम वो तेरा दोस्त है अगर तुजे अच्छा लगता है तो तू बात कर मुज से क्यों उम्मीद करती है ऐसी.

संयम : साथ में पढ़ते है तो ढंग से बात तो कर hi शक्ति है.

वैस्वी : छोड़ न उसको, कोई और बात कर.

संयम कुछ नहीं कहती. दोनों क्लास में आ जाते है. थोड़ी देर बाद शिव मंडली भी आजाती है. शिव, संयम को स्माइल देता है पर जैसे hi उसकी नजर वैस्वी पर पड़ती है तो वो उसे अजीब नजरो से घर रही थी तो उसकी स्माइल बंद हो जाती है. वो नज़ारे घुमा कर अपनी बेंच पर जाकर बेथ जाता है. बिना मैडम की क्लास सुरु होजाती है. रेसस्स में जब संयम और वैस्वी लंच के लिए निकलते है तो एक जगह शिव और उसके दोस्त बैठे खा रहे थे.

संयम : चल उनके साथ बैठते है.

वैस्वी : तुजे जाना है तो जा.

संयम : ठीक है, चल अलग hi बैठते है.

शिव ने दोनों को देखा था पर वैस्वी की वजह से उन्हें बुलाया नहीं.

महेश : यार पढ़ाई से दिमाग ख़राब हो जाता है. कितना पकाते है न ये टीचर्स?

हर्ष : है यार सच में.

शिव : वो पकाते नहीं पढ़ते है, अगर ध्यान डोज तो समाज ायेगाना. जब देखो लड़कीओ को घूरते रहते हो.

हर्ष : तू तो रहने hi दे सेल. आस पास ऐसी खूबसूरत परिया होंगी तो देखेंगे न. वैसे अपने स्कूल की सबसे खूबसूरत दो लड़कीओ में से एक तो तेरे साथ लगी हुई है.

शिव : अगर तू संयम की बात कर रहा है तो मेने पहले भी कहा है, वो मेरी दोस्त है, जैसे तुम दोनों. तो ऐसी बात न करो. और दूसरी लड़की कोण, किसकी बात कर रहे हो?

महेश : उसी की सहेली वैस्वी और कोण. दोनों कितनी खूबसूरत है, और लम्बी भी. दोनों हमारे जितनी तो होंगी hi. पर तेरी वजह से लाइन नहीं मर शक्ति.

शिव : मेरी वजह से क्यों?

महेश : तेरी वजह से पहचान हो गयी है तो ऐसे उन्हें देखना अच्छा नहीं लगता. तो अस्स पास की दूसरी लड़कीओ को देख कर अपनी आंखे सेक लेते है.

शिव : ये तुम्हारा अजीब लॉजिक है. अगर तुम्हे कोई पसंद है तो उसे जान पहचान करो. उस से बात करो तभी तो बात आगे बढ़ेंगी.

हर्ष : इस मामले में अपनी फैट टी है. इस से यही अच्छा है की उन्हें दूर से देख कर खुस हो जाओ.

शिव : और उस से क्या मिलेगा.

हर्ष : दिल में एक अजीब तरह की ख़ुशी मिलती है.

शिव : क्या फालतू की बकवास है. चलो अब खाना ख़तम हो गया हो तो क्लास में चले.

स्कूल में आज एक नोटिस आयी की अगले हफ्ते स्कूल खेल महोत्सव है. जिन को जिस इवेंट में भाग लेना है वो अपना नाम लिखवा दे. मेने सोचा की एक बार जूही मैडम से बात कर के फिर अपना नाम लिखवाऊंगा. शाम को में दौड़ते हुए जा रहा था तो वैस्वी, संयम को छोड़ कर जा रही थी. संयम ने मुझे देखा तो वो रुक गयी, में भी उसके सामने जा के खड़ा हो गया.
 
अपडेट 48

शाम को स्कूल से छूटने के बाद में दौड़ते हुए जा रहा था तो वैस्वी, संयम को छोड़ कर वापस जा रही थी, एक पल के लिए हमारी नज़ारे मिली. संयम ने मुझे देखा तो वो रुक गयी, में भी उसके सामने जा के खड़ा हो गया.

शिव : Hi,

संयम : Hi, ये वैस्वी के साथ तुम्हारा कोई झगड़ा है क्या?

शिव : नहीं यार, मेरा क्यों उस से झगड़ा होनेलगा. और वो तुम्हारी सहेली है तो तुम्हे तो पता hi होगा.

संयम : वही तो, मुझे उसका कुछ समाज नहीं आता. वो तुमसे ऐसे क्यों बेहवे करती है? शायद पढ़ाई में तुम उस से आगे हो ये उसे पसंद नहीं.

शिव : इसमें में क्या कर शक्ति हु?

संयम : वो भी सही है. छोडो उसे, चलो आज मेरे घर तक चलो.

शिव : नहीं मुझे स्टेडियम भी जाना है.

संयम : मैं तुम्हे रोकूंगी नहीं, पानी पि कर चले जाना.

शिव : ठीक hai.(Hum दोनों उसके घर गए. उसने दरवाजा खटकाया तो एक महिलांए खोला. सर पे पल्लू लिए वो हम दोनों को देख रही थी. संयम के साथ किसी लड़के को देख उन्हें ताज्जुब हुआ था.

संयम : अम्मी ये शिव है.

संयम की ामी : (खुस होते hue)Oh, ये शिव है, आओ आओ बीटा. अच्छा हुआ तुम आये. मुझे तुमसे मिलना भी था और तुम्हारा सुक्रिया भी ऐडा करना था. मेने कई बार इस लड़की को बोलै की तुजे ले कर आये.

शिव : नहीं आंटी अभी नहीं, में फिर कभी अंदर आऊंगा. और आप को सुक्रिया कहने की कोई जरुरत nahi.(Tabhi नाज़िआ दीदी की आवाज आयी)

नाज़िआ दीदी : ऐसे कैसे, पहलीबार हमारे घर आये हो अंदर तो आना hi पड़ेगा.

संयम : आप, इससे स्टेडियम जाना है, ये तो आ hi नहीं रहा था, मेने कहा की पानी पि कर चले जाना तब आया है.

नाज़िआ दीदी : तो मेने कहा रोका है, दो पांच मिनट लेट जायेगा तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा. (मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर खींचते hue)Ander आओ.

में उनको मन नहीं कर पाया तो में अंदर चला गया. उन्होंने मुझे सोफे पर बिठाया और संयम को सरबत लेने भेजा. संयम की अम्मी भी मुस्कुराती हुई वह बेथ गयी.

स की अम्मी : बीटा तुमने संयम की मदद की इसके लिए तुम्हारा सुक्रिया तो बनता है. और नाज़िआ बता रही थी की रोज़ तुम इसका ध्यान भी रखते हो. इसके अब्बू को अगर पता चलता तो वो इसका पढ़ना hi रुकवा देते. इसे पढ़ने का बहोत शौक है तो जिद कर के पढ़ाई कर रही है.

शिव : आंटी इसमें सुक्रिया जैसी कोई बात नहीं, ये तो मेरा फ़र्ज़ है. और वो सचमे पढ़ने में होशियार है, आपको इसे पढ़ने देना चाहिए.

संयम : (संयम हाथ में सरबत लिए आ रही thi)Ammi ये पढ़ने में मुझसे भी ज्यादा होशियार है, क्लास में सब से ज्यादा इसके hi नंबर आये है.

अम्मी : नज़र न लगा बच्चे को, बहोत खुसी हुई ये सुनके बीटा. तुम्हारे वालिद बहुत खुशनशीब है जिन्हे तुम्हारे जैसा बीटा मिला.

संयम : (अम्मी की बात सुन कर संयम ने थोड़े दुखी स्वर में kaha)Ammi ये अनाथ है और अनाथालय में रहता है.

अम्मी : या खुदा, मुझे माफ़ करना बीटा मुझे पता नहीं था.

शिव :(मायूसी se)Nahi कोई बात नहीं आंटी.

अम्मी : मेरे खुदा, ये क्या सितम ढाया है तूने, ऐसे हिरे जैसे बच्चे पर जरा भी रेहम न आया तुजे. बीटा तू दिल छोटा मत करना. इससे अपना hi घर समझना. जब भी दिल करे बे झिझक यहाँ आजाना.

शिव : सौकरिया आंटी.

नाज़िआ दीदी: (मुझे शरबत देते hue)Aur है ागलीबार टाइम निकल कर आना, साथ में खाना भी खाएंगे. जब भी आना हो तो संयम को पहले से बता देना ताकि हम अच्छे से खातिरदारी कर पाए.

शिव : जी didi.(Aaj दीदी ने बुरका नहीं पहना था, वो सचमे काफी खूबसूरत थी, घर में सब का रंग बहोत गोरा था, शरबत ख़तम कर ke)Achchha में चलता हु मुझे स्टेडियम भी जाना है.

अम्मी : बीटा टाइम निकल कर फिर जरूर आना.

शिव : जी आंटी जरूर आऊंगा, में चलता हु, bye संयम, bye दीदी.

नाज़िआदिदी : में रह देखूंगी, जल्दी आना.

शिव : जी दीदी.

फिर में वह से निकल कर जूही मैडम के घर आगया. वो रेडी थी.

जूही मैडम : आओ शिव, जाओ फ्रेश हो जाओ में तुम्हारे कपडे देती हु. में फ्रेस होने बाथरूम में चला गया. वह शावर लगा हुआ था और गर्मी की वजह से शरीर चिप छिपा हो गया था, तो मेने सोचा जब कपडे बदलने है तो थोड़ा नहलीअ जाये. तो में सिर्फ पानी से फटाफट नाहा लिया और शरीर पोछ कर टॉवल लपेट लिया. मेने जूही मैडम को ंदर से hi आवाज दी

शिव : मैडम कपडे?

जूही मैडम : बहार आ जाओ अंदर बैडरूम में रक्खे है.

मेने वापस अंडरवियर और बनियान पहन ली और टॉवल लपेटे बहार आगया. वो सामने hi कड़ी थी. वो मुझे ऐसे देख कर उपरसे निचे तक देखने लगी तो मुझे शर्म आयी और मेरा चेहरा लाल हो गया.

जूही मैडम : (मुस्कुराते hue)Aise शर्मा रहे हो जैसे लड़कीअ शर्माती है. Aao.(Me उनके पीछे पीछे बैडरूम में गया जहा मेरे कपडे बीएड पर रखे हुए the)Ye रहे तुम्हारे कपडे, पहन कर बहार आजाओ में दूध बनती हु.

मेने कपडे पहने और बहार आ गया. फिर हमने दूध पिया और स्टेडियम चले गए. अब हमारे साथ कुछ लड़के लड़कीअ भी मिल कर कसरत करते थे. हम सब मिलकर एक्सरसाइज करते रहे और फिर रेस भी लगायी. मेरी दौड़ से सब प्रभावित थे. फिर हम गयम गए. मुझे वह छोड़ कर वो मुझे घर आनेका बोल कर चली गयी. सब के जाने के बाद जब में अपना काम कर रहा था तो स्नेहा मैडम आ गयी. मेने उन्हें आते हुए देखा तो उनको स्माइल दी. वो आते hi मेरे होठो को चुम कर मेरे गले लग गयी. मेने भी उन्हें अपनी बाहोंमे भर लिया.

स्नेहा मैडम : (मेरी आँखों में देखते hue)Kaisa है मेरा बॉयफ्रेंड.?

शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha हु, आप कैसी है?

स्नेहा मैडम :(मुँह फूलते hue)Tuuuuum.(Me भूल जाता हु की हमारे बिच तय हुआ था की में उन्हें तुम कह कर hi बुलाऊंगा)

शिव : (मुस्कुराते हुए उनका गाल चुम kar)Tum कैसी हो?

स्नेहा मैडम :(खुस होते hue)Bahot अच्छी हु और बहोत खुस भी. मैंने डॉक्टर से कंसल्ट कर लिया और उन्होंने कन्फर्म किआ की में प्रेग्नेंट हु.

शिव : (खुस हो कर उन्हें गले लगते hue)Congatulations.

स्नेहा मैडम : तुम्हे भी. (मुझे स्नेहमड़ाम के प्रति एक अलग hi फीलिंग आ रही थी, वो मेरे बच्चे की माँ बन ने वाली थी)

शिव : (उनको एक बेंच पर बिठाते हुए उनके बाजु में बेथ gaya)Sir को बताया.?

स्नेहा मैडम : है बता दिया. वो भी बहोत खुस है. उन्होंने घर भी फ़ोन कर के सब को बता दिया, वो सब भी बहोत खुस है. (मेरा हाथ पकड़ते hue)Ye सब तुम्हारी वजह से हुआ है शिव, थैंक यू, थैंक यू सो मच.

शिव : (नाराजगी से )थैंक यू कह कर तुम मुझे पराया कर रही हो. लगता है अब मेरा काम ख़तम हो गया है तो...

स्नेहा मैडम :(मेरे मुँह पर हाथ रख कर वो कड़ी हुई और मेरी गॉड में बेथ जाती है और मेरे गले में बहे डालते हुए मुझे देखती है, लग रहा था अभी रो degi)Tumhe ऐसा लगता है शिव?

शिव : तो फिर थैंक यू क्यों? क्या हमदोनो के बिच इसकी जरुरत है?

स्नेहा मैडम :(मुस्कुराते hue)Tum भले छोटे दीखते हो पर तुम्हारी बाते और तुम्हारा बर्ताव एक परिपक्व इंसान जैसा है.

शिव : जिंदगी सब सीखा देती है और कहा से में तुम्हे छोटा दीखता हु?

स्नेहा मैडम : (शरमाते hue)Ha ये तो सही है, तुम कही से भी छोटे नहीं हो पर तुम्हारा ये भोला सा मासूम चेहरा, एक छोटे बच्चे जैसा hi है. इसीलिए मुझे तुम्हारे जैसी hi संतान चाहिए शिव.

शिव : क्यों मेरे जैसी क्यों? तुम भी तो कितनी प्यारी हो जैसे कोई आसमान की पारी, वो चाहे मेरे जैसा हो या तुम्हारे जैसा या हम दोनों का मिलाजुला रूप, वो अच्छा hi होगा. अब तुम उठो मुझे सब काम ख़तम कर के जूही मैडम के घर जाना है.

स्नेहा मैडम : (मेरे कंधे पर अपना शिर रखते hue)Thodi देर बैठो न, वैसे भी मिलते नहीं हो, और जूही के घर क्यों जाना है?

शिव : उन्होंने आज मुझे खाने पर बुलाया है, इसीलिए जाना है.

स्नेहा मैडम : मेरे साथ तो खाना कहते नहीं और उसके साथ खाना खाने जा रहे हो, लगता है मुझसे भी अच्छी लगने लगी है वो.

शिव : तुमने कभी बुलाया मुझे?

स्नेहा मैडम : क्या तुम्हे बुलाना पड़ेगा? अभी तो पूछ रहे थे की में पराया हु क्या? तो क्या अब पराये हो गए? तुम्हारा जब भी मान करे आ जाओ.

शिव : और सर?

स्नेहा मैडम : उनको क्या परेशानी होगी? वो थोड़ी न खाना बनाते है. तुम वो सब न सोचा करो जब भी तुम्हारा मान हो आ जाया करो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है. अब उठो और मुझे सब काम ख़तम करने दो.

फिर में काम करता रहा और हम दोनों बाते करते रहे. फिर वो मुझे जूही मैडम के घर के पास छोड़ कर चली गयी. मेने बेल्ल बजायी तो जूही मैडम ने दरवाजा खोला. उन्होंने एक सुन्दर सलवार सूट पहना था. उनकी लम्बाई और परफेक्ट फिगर की वजह से वो किसी मॉडल जैसी लग रही थी. उन्होंने हल्का मकूप भी किआ हुआ tha.Unka ऐसा रूप देख कर, में तो वह खड़े खड़े देखता hi रह गया.

जूही मैडम : बहार hi खड़े रहने का इरादा है क्या?

शिव : Ha....wo...nahi...wo ...(में क्या बोल रहा था समाज hi नहीं आ रहा था तो में जल्दी से शिर झुकाये अंदर दाखिल हो गया)

जूही मैडम :(मुस्कुराते hue)Kya हुआ?

शिव : ककककक ..कुछ नहीं. Aaap...aap बहोत खूबसूरत लगरही है.

जूही मादाम :(मुस्कुराते hue)Thank यू. जाओ फ्रेश हो जाओ और कपडे अंदर रक्खे है.

शिव : जी (कहते हुए में बाथरूम में चला गया, मेने हाथ पेअर धोये पर मेरे जहँ में जूही मैडम hi चल रही थी, सच में बहोत hi ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. में जब बैडरूम में गया तो वह मेरे स्कूल के कपडे थे जो मैंने सुबह पहने थे. वो मैंने पहन लिए और में बहार आ गया. उन्होंने दिंनिंग टेबल पर खाना रक्खा हुआ था)

जूही मैडम : तुम non-veg कहते हो न?

शिव : जी मैडम कभी कभी.

जूही मैडम : खाना चाहिए, शरीर के लिए प्रोटीन जरुरी होता है. (फिर वो मेरे बाजु की चेयर पर बेथ गयी और मेरेलिए खाना परोसने लगी)

शिव : आप तकलीफ मात कीजिये, में ले लूंगा.

जूही मैडम : ऐसी कैसे. में दे रही हु na.(Sab परोसने के बाद) चलो अब सुरु करो.

सचमुच बहोत स्वादिस्ट खाना था. खाने के बाद उन्होंने मुझे स्वीट भी खिलाई.

शिव :मैडम स्कूल में कॉम्पिटिशन है और उसके लिए नाम लिखवाने है.

जूही मैडम : ये स्कूल लेवल पर है और तुम्हारे लिए ये आसान है तो तुम जितनी भी दौड़ की इवेंट है उन सब में भाग लो. 100म, 200म एंड 400 म. यहाँ तुम्हे जितने में कोई परेशानी नहीं होगी पर याद रखना तुम्हे सिर्फ जितना नहीं है तुम्हे अच्छे टाइम के साथ जितना है ताकि जब तुम्हारी कपरिसों हो तो तुम सब की नज़र में आओ. पहले स्कूल लेवल पे अपने अपने स्कूल में कॉम्पिटिओं होंगे फिर जो अच्छे है उनके बिछ इंटरस्कूल hoga.(Thodi देर और वो मुझे सब समजती रही)

शिव : मैडम एक बात पुछु?

जूही मैडम : है पूछो?

शिव : आप क्यों नहीं दौड़ती?

जूही मैडम :(थोड़ी देर मेरी आँखों में देख रही थी) फिर कभी बताउंगी, चलो में तुम्हे छोड़ देती हु?

शिव : (उनका हाथ पकड़ते hue)Please.

जूही मैडम : (थोड़ी देर वो फिर शिव को देखती रहती है) में 16 साल की थी तब में स्टेट चैंपियन बन गयी थी. सब बहोत खुस थे, मेरे घरवाले, पहचान के, स्कूल में. स्टेट लेवल कम्पलीट काने के बाद नेशनल के लिए ट्रेनिंग करनी थी तो में कैंप में गयी. वह एक लड़की थी तान्या. वो भी अच्छी रनर थी. पर मेरे जितनी नहीं. कोच सर हमेशा मुझे पनिश करते रहते थे, पर में कभी हरी नहीं. एक साल बहोत मेहनत की. जब नेशनल होनेवाले थे तब हमारा फिजिकल चेक उप हुआ तो मेरे खून में प्रतिबंधित ड्रग की मात्रा पायी गयी, में हैरान थी क्यों की में कभी वैसा करती नहीं थी, न मेने कभी कोई ड्रग ली थी. हमारे जो कोच थे उन्होंने मुज पर बहोत गुस्सा किआ. में रो रही थी, उन्होंने कहा की यहाँ से निकल जाओ, अगर मेने तुम्हारे डोपिंग टेस्ट की रिपोर्ट दे दी तो तुम पर 4 साल के लिए प्रतिबन्ध लग जायेगा और तुम्हारे स्टेट लेवल के मैडल पर भी सवाल उठेंगे. इस से अच्छा है की तुम खुद दौड़ से दूर हो जाओ, और जो तुमने स्टेट लेवल क्लियर किआ है उसी के मुताबित नौकरी कर लो. में रोटी हुई वह से चली गयी. बाद में मुझे एक सहेली से पता चला की मेरे खाने में उन्होंने hi कुछ मिलाया था. उन्होंने ये सब उस तान्या के लिए किआ था, वो किसी पहुंचे हुए आदमी की बेटी थी, मेरे रहते वो नहीं जीत शक्ति थी तो मुझे ऐसे फंसा कर उन्होंने मुझे बहार निकल diya.(Unki आँखों में आंसू थे) तीन साल हो गए उस बात को.

शिव : (मुझे जूही मैडम पर बहोत तरस आ रहा था, उनको दुखी देख कर मेरे दिल में दर्द उभर आया, मैंने उन्हें गले लगा लिया, वो भी मुझसे लिपट कर रोटी रही, में उनकी पीठ सेहला कर उनको दिलासा दे रहा था. थोड़ी देर बाद वो शांत hui)Kya आप फिर से दौड़ नहीं शक्ति? और जैसा आपने बताया की उस कोच ने आपके खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं दी तो अगर आप वापस भाग लिंगी तो किसी को क्या दिक्कत होंगी. और इतने सालो बाद वो कोच भी कुछ नहीं कर पायेगा. (वो मेरी और सवालिया नजरो से देख रही थी) क्या ऐसा हो शक्ति है?

जूही मैडम : (सोचते hue)Ho तो शक्ति है? पर...

शिव : पर क्या मैडम ?

जूही मैडम : अब इतने साल हो गए है, मैंने कम्पेटेशन जैसी प्रैक्टिस भी नहीं की है, अब में प्रैक्टिस किए हुए दूसरे खिलाड़िओ का मुकाबला नहीं कर पाऊँगी, प्रैक्टिस की वजह से वो लोग काफी बेहतर हो गए होंगे.

शिव : तो इसमें कोनसी बड़ी बात है, आप अभी भी कितनी फिट है, और में आप को मैडम मैडम बुलाता हु तो कही आप अपने आपको बुद्धि तो नहीं समाज रही है? आप अभी भी एक लड़की hi है वो भी छोटी सी, samji.(Juhi मैडम मुस्कुराती है, और सचमे वो एक खूबसूरत लड़की hi तो थी, वो तो मुज से थोड़ी बड़ी है और फिर मेरी नौकरी पर सीनियर है और अब वो मेरी कोच भी है तो में उन्हें मैडम बुलाता हु वर्ण वो मेरे जितनी hi दिखती है) आप कर पायेगी na?(Unhone मुस्कुराते हुए है kaha)Ye हुई न बात, तो फिर कल से आप की भी ट्रेनिंग suru.(Wo खुस हो कर मेरे गले लग गयी, मेने भी उन्हें कास के पकड़ लिया, थोड़ी देर ऐसे रहने पर मुझे उनके शरीर का एहसास होने लगा, शायद उनको भी हो रहा था, उनकी खुसबू और उनके शरीर के स्पर्श ने मुज पर जादू सा कर दिया और मेरा हाथ खुद बा खुद उनकी पीठ पर कस्ते चले गए, उनकी भी बहे मुज से कस्ती चली गयी, वक़्त जैसे वही थम गया था, मेरे कंधो पर उनकी सांसो की गर्म हवा महसूस हो रही थी, दिल छह रहा था की उनको किश कर लू पर मेने अपने आप को रोका,) (जूही की भी वही हालत थी, वो आगे बढ़ना छह रहे थी पर पता नहीं क्यों वो बढ़ नहीं प् रही thi)(Kuchh लम्हे बस ऐसे hi गुजरे, मेने अपनी पकड़ ढीली की तो उनकी पकड़ ढीली हुई, मेने अपने हाथ हटा लिए, में उनसे थोड़ा दूर हुआ तो वो नज़ारे झुकाये बैठी रही, में उनके बदलते हावभाव को देख रहा था,)

जूही मैडम : (धीमी आवाज me)Chalo चलते है.

शिव : में चला जाऊंगा madam.(Wo नहीं मणि और हम बहार आ gaye.Raat काफी हो चुकी थी तो रस्ते पर बहोत काम लोग नजर आ रहे थे)

जूही मैडम : शिव तुम स्कूटर चलाओ.

शिव : पर मैडम मुझे नहीं आता.

जूही मैडम: में हु न और इसमें डरने वाली कोई बात नहीं. जब भी ऐसा कुछ लगे तो अपने पेअर निचे रखदेना.

शिव : (डरते hue)Ji मैडम.

फिर में आगे बेथ गया वो मेरे पीछे बेथ गयी. वो मुझे बराक और एक्सेलरेटर दिखा रही थी पर उसके लिए वो मुझसे पीछे से चिपक गयी थी और उनके बूब्स मेरी पीठ में चुभ रहे थे, बार बार मेरा ध्यान उस नरम गोले के स्पर्श पर hi जा रहा था.

जूही मैडम :(मेरा ध्यान तब टुटा जब उन्होंने puchha)Samaj गए , अब आहिस्ता से एक्सेलरेटर को घुमाओ और बराक पे हाथ रख न. अगर लगे की ज्यादा हो गया तो तुरंत बराक लगा देना.

शिव :जी madam.(Jaise hi स्कूटी थोड़ा आगे हुआ मैंने बराक लगा दी तो मैडम मेरी पीठ से टकरा कर चिपक गयी, ऐसा एक दो बार और हुआ, उनके स्तन मेरी पीठ पर डाब रहे थे जिनका एहसास मुझे हो रहा था)

जूही मैडम : क्या कर रहे हो शिव, आगे तो जाने दो, दर क्यों रहे हो.

शिव : वो एक दम से आगे जाने लगता है.

जूही मैडम : वो तो जायेगा hi, चलो ध्यान से करो और अभी बराक मात lagana(Maine धीरे धीरे स्कूटी को आगे बढ़ाया, हलाकि अपने पेअर रोड पर hi रक्खे हुए थे. थोड़ी देर में मुझे समाज आ गया और में स्कूटर चलने laga.)Ha ऐसे hi चलाओ, देखा कोई मुश्किल नहीं है.

शिव :(उन्होंने भी रस्ते पर अपनी नज़ारे गड़ाई हुई थी तो वो मुज से एकदम सात कर बैठी हुई थी. और उन्होंने अपना हाथ मेरी झंघ पर रक्खा हुआ था अगर और कोई वक़्त होता तो जरूर मेरा लुंड खड़ा हो जाता, पर दर के मरे मेरा लुंड सोया हुआ hi था, जैसे तैसे हम अनाथालय पहुंच गए)

जूही मैडम : (निचे उतारते hue)Dekha कितना इजी है.

शिव :आप को इजी लग रहा होगा मेरे तो पशीने छूट गए.

जूही मैडम : (हस्ते hue)Pehli पहली बार ऐसा लगता है. तुमने अच्छा चलाया, जल्द hi तुम सीखजाओगे. चलो अब उतरो में जाती हु.

शिव : (उतारते hue)Ander नहीं आएंगी.

जूही मैडम : नहीं अभी रात बहोत हो गयी है फिर कभी.

वो चली गयी और में अंदर आ गया. सब अपने अपने कमरे में थे. मेने देखा की विणा और रंजन भी सो गए थे तो में अपने रूम में आ गया जहा लता दीदी और सरिता दीदी दोनों बाते कर रही थी. मुझे देख कर

लता दीदी : आ गया. खाना अच्छे से खाया न की अभी खाना है?

शिव : नहीं दीदी, पेट भरा हुआ है. में फ्रेश हो कर आता हु. (में अपने कपडे ले कर बाथरूम चला gaya)Jab वापस लौटा तो सरिता दीदी जा चुकी थी.

शिव :क्या बाटे हो रही थी?

लता दीदी : कुछ नहीं बस ऐसे hi.

शिव : (अपने कपडे उतारते hue)Sona नहीं है क्या?

लता दीदी : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे झुकलेटी hai)Hmmmm.

शिव : क्या हम्म्म्म, कपडे?

लता दीदी : (लतादिदी ने धीमी आवाज me)Tu hi उतर दे.

में आश्चर्य से दीदी को देखने लगा.
 
अपडेट 49

एक शहर में मैनेजर किसी के साथ बैठा हुआ था. हाथ में दारू का गिलास था और सिगरेट पि रहा था. आमने बैठा सख्स भी वही कर रहा था. ये एक इंस्पेक्टर है जो पहले शिव वाले सहर में था. अभी ट्रांसफर के बाद वो इस सहर में रहता है. उसका नाम शेखर मिश्रा है.

इंस्पेक्टर : तो, देवीलाल, यहाँ कैसे आये. कोई काम था क्या.

देवीलाल : क्या काम साहब, आप गए तब से कभी मिलना नहीं हुआ तो मिलने चला आया.

इंस्पेक्टर : जा बे हरामी, किसी और को ये पट्टी पढ़ना, इतने सालो में तो कभी आया नहीं, चल बता क्या काम था.

देवीलाल : आप थे तो कोई दर नहीं था, आपकी वजह से बिना डरे कितने काण्ड कर दिए. आप है नहीं तो अब दर लगता है.

इंस्पेक्टर : कमीने कही के, तुजे कैसा दर, जब भी अपना उल्लू सीधा करना होता है तो अपने अनाथालय की लड़कीओ के सहारे सब कर तो देता है.

देवीलाल : वो टाइम अलग था साहब, अब तो गिनीचुनी लड़कीअ hi रह गयी है. अगर वो भी चली गयी तो मुझे अनाथालय संभालना मुश्किल हो जायेगा. ऊपर से एक लड़का है शिव, साला ऐसे चिपक कर बैठा है की जाने का नाम hi नहीं लेता. उसकी वजह से साली सब लड़कीअ भी उड़ने लगी है.

इंस्पेक्टर : (सिगरेट का लम्बा कास खिंच कर) तो इसमें टेंशन की क्या बात है, सेल को निकल बहार कर और लड़कीओ के पर काटना तो तुजे अच्छे से आता है.

देवीलाल : नहीं साहब, ये मेरे बस की बात नहीं है, वो कमीना शरीर से बहोत ताकतवर है, ऊपर से सब लड़कीअ उसके साथ जुडी हुई है, अगर मेने उसे निकल दिया तो वो भी उसके साथ hi चली जाएगी. कुछ समाज नहीं आ रहा क्या करू.

इंस्पेक्टर : तो ये बात है, तभी तू मेरे दरवाजे पर आया है, कमीना कही का. बिना मतलब के तो तू अपने बाप को भी बाप न कहे. चल तू भी क्या याद रक्खे गए, तेरा ये प्रॉब्लम भी में दूर किये देता हु. तुम्हारे सहर में अभी जो इंस्पेक्टर है वो भी मेरी तरह hi है, कलिओ का सौखीन. में उस से बात करता हु.

देवीलाल : बॉस साहब आप ये काम करवादो, आप जो कहेंगे में करूँगा.

इंस्पेक्टर : तुजे तो पता hi है मुझे क्या चाहिए. (उसकी और देख कर अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराता है)

देवीलाल : (वो भी मुस्कुराता है) है साहब, आप के मतलब की दो लड़कीअ है, एक में उन साहब को दूंगा और दूसरी आप को. एक दम कोरी कच्ची कालिया है. (मान में और में लता की कोरी जवानी का माज़ा लूंगा) पर साहब ये होगा कैसे.

इंस्पेक्टर : तू चिंता मात कर, जैसे तू बता रहा है की अगर वो लड़का अनाथालय छोड़ कर जायेगा तो सब लड़कीअ उसके साथ चली जाएगी पर अगर वो जेल गया तो...

देवीलाल : (उसकी आँखों में चमक आ गयी) जेल में तो वो पीछे पीछे जा नहीं पायेगी, पर ये सब होगा कैसे साहब.

इंस्पेक्टर : मेने सब सोचलिया है, तू बस देखता जा. सेल को ऐसे केस में फसाऊँगा की वो एक दो साल तक फिल्मे सड़ेगा. क्यों चलेगा न.

देवीलाल : अरे बहोत है साहब, जब तक वो जेल से छूटे गए तब तक तो में...

इंस्पेक्टर : चल अब ज्यादा ख्वाब मात देख, मेरा पेग बना.

देवीलाल : अभी बनता हु, sahab.(Wo मुस्कुराता हुआ पेग बनाने लगा, उसका कांटा जो निकलनेवाला था)

इन सब से अनजान शिव और लता अपने कमरे में सोने की तयारी कर रहे था

शिव : (अपने कपडे उतारते hue)Sona नहीं है क्या दीदी?

लता दीदी : (शरमाते हुए अपनी नज़ारे झुकलेटी hai)Hmmmm.

शिव : क्या हम्म्म्म, कपडे पहन कर सोनेवाली हो आप?

लता दीदी : (चेहरे पर उलजन थी, उन्होंने धीमी आवाज में कहा) तू hi उतर दे.

शिव : (में अपनी अंडरवियर उतर ते उतर ते रूक गया, दीदी की और आश्चर्य से देखते hue)Kya कहा आप ने?

लतादिदी : (नज़ारे झुकाये हुए) Tu....utar दे.

शिव : आप ऐसा क्यों कह रही हो दीदी? (लतादिदी पता नहीं आज बहोत शर्मा रही थी)

लतादिदी : क्यों तुजे कोई दिक्कत है?

शिव : पर दीदी में आपके कपडे कैसे उतर शक्ति हु?

लतादिदी : में रोज तेरे साथ ऐसे hi तो सोती हु न, फिर क्या दिक्कत है?

शिव : दीदी वो बात अलग है, आप ऐसे सोती हो क्यों की गर्मी होती है, पर मेरे ऐसे आपके कपडे उतरना...

लतादिदी : क्यों तेरे कपडे उतरने से क्या हो जायेगा?

शिव : दीदी अब में आप को कैसे संजो.

लतादिदी : बता तो सही, मुझे भी पता चले.

शिव : दीदी... एक लड़का एक लड़की के कपडे तब उतरता है जब...

लतादिदी : जब...

शिव : अब में आप को कैसे संजो दीदी...

लतादिदी : में जानती हु शिव, की ऐसा प्यार करने के लिए किआ जाता है.

शिव : (में उनके पास बेथ गया था) जब आप जानती है तो फिर क्यों?

लतादिदी : क्यों की में यही चाहती हु.

शिव : (मुझे यकीं नहीं हो रहा tha)Par दीदी...

लतादिदी : (शिव की आँखों में देखते hue)Kyu तू मुझसे प्यार करना नहीं चाहता?

शिव : चाहता हु पर दीदी...

लतादिदी : चल छोड़ इस बात को, मुझे लगा था की तू भी मुझसे वैसे प्यार करना चाहता है जैसे में चाहती हु. तू मुझसे वैसा प्यार नहीं करना चाहता तो कोई बात नहीं, चल सोते है, सुबह जल्दी भी उठनहै.

में दीदी को देखने लगा, वो सच में सोने के लिए लेटने लगी, वो दूसरी तरफ मुँह करके लेट गयी, में मूर्ति बना उनको देख रहा था, हमारे बिच इतना सब हो चूका था की मुझे उनके साथ ऐसा करने में झिझक होनी नहीं चाहिए, पर फिर भी उनके साथ ऐसा करने का सोच कर hi मुझे क्या होने लगता था पता नहीं. स्नेहा मैडम के साथ भी मेने किआ है, सरिता दीदी के साथ भी में कर चूका हु. लतादिदी के साथ नंगा सोता हु, पर लतादिदी के साथ क्या में वैसा कर शक्ति हु. सच कहु तो वो मेरे लिए सबकुछ थी, वो मेरी बहन थी, माँ थी, दोस्त थी. अगर वो न होती तो पता नहीं अभी में किस हल में होता. आज वो मेरे साथ एक लड़की थी, वो छह रही थी की में उन्हें एक लड़की समाज कर प्यार करू. वो ऐसे रूत कर सोई थी की मेरा दिल घायल हो गया. काया में उनकी खुसी के लिए इतना भी नहीं कर शक्ति. मेने अपना मान बना लिया. मेने दीदी को कंधे से पकड़ा और मेरी और घूमना चाहा पर वो नहीं घूमी.

शिव : दीदी मेरी और देखिये न.

लतादिदी : तू सो जा शिव.

शिव : (मेने उन्हें थोड़ा जोर लगा कर मेरी और घूमना चाहा तो वो भी जोर लगाने लगी, पर वो मेरी ताकत के सामने कहा टिक पति, वो घूम गयी और मेरी आँखों में देखने लगी) दीदी, ऐसा क्यों कर रही हो, आप जैसा चाहती है वैसा में करता हु, आप नाराज़ मात होइए.

लतादिदी : नहीं शिव, उसकी कोई जरुरत नहीं है, तू ऐसे कह रहा है की मेरेलिए तू ये सब करने के लिए राज़ी हुआ है, तेरी ऐसी कोई भी इच्छा नहीं है. शायद मुझे hi धोखा हुआ था, मुझे लगा था की तू भी मुझसे वैसा hi प्यार करना चाहता है. में जानती हु में उतनी खूबसूरत नहीं की तुजे वैसा प्यार करने की इच्छा हो. में नाराज़ नहीं हु, तू सो जा.

शिव : तो आप को लगता है आप खूबसूरत नहीं हो, और आप को लगता है की आप को देख कर मुझे कुछ नहीं होता. (वो मेरी और देख रही थी और मुझे समझने की कोशिस कर रही थी, में उनके होठो की और बढ़ने लगा तो उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रख कर मुझे रोका, मेने उनके दोनों हाथ पकड़ लिए और साइड में दबा दिए, वो मेरी आंखोमे देख रही थी, मेने उनके फड़कते होठो को देखा और उनकी और बढ़ने लगा, वो मेरी आँखों में hi देख रही थी, उन्होंने अपने हाथ छुड़ाने की कोशिस की पर वो छुड़ा नहीं पायी)

लतादिदी : छोड़ मुझे शिव, मुझे कुछ नहीं करना है.

शिव : आप को पता है जब आप मेरे साथ ऐसे नंगी हो कर सोती है तो मेरी क्या हालत होती है. में कैसे अपने आपको रोकता हु. में जिसे इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता हु, वो मेरी बाहोंमे पूरी नंगी लेती हुई है, आप सोच भी नहीं शक्ति की मेरी क्या हालत होती है. और आप क्या कह रही हो की आप खूबसूरत नहीं हो, इस दुनियामे आप जैसी कोई खूबसूरत है hi नहीं. खूबसूरत सिर्फ शरीर नहीं होता, नहीं चेहरा होता है, खूबसूरत होता है प्यार, खूबसूरत होनी है नियत, खूबसूरती होती है उसकी आपके लिए परवाह. अब बताओ इस पूरी दुनिया में आप से बढ़कर कोई है जो मुझसे ऐसा प्यार करता हो. मेरे लिए इस दुनिया में आप से खूबसूरत कोई भी नहीं दीदी. (मेने उनके होठो पे अपने होठ रख दिए तो उनकी आंखे बंद हो गयी, में उनके होठो को प्यार से चूसने लगा, मेने उनके हाथ छोड़ दिए और उनके चेहरे को सहलाते हुए उनके होठो का रास पिने लगा, (लता, शिव के ऐसे प्यार को प् कर अंदर तक भीग चुकी थी, उसने उस बलिष्ठ शरीर को अपनी कोमल बहो में भर लिया, वो उसके बालो में हाथ फिरते हुए उसे किश का जवाब देने लगी, उसकी नंगी पीठ पर अपने हाथ की उंगलिया कस्ते हुए उस सख्त शरीर को महसूस करने लगी, दोनों का दिल hi नहीं कर रहा था की ये किश कभी बंद हो, एक दूसरे की जीभ से खिलवाड़ करते हुए दोनों के चेहरे पर एक असीम आनंद था, ये ऐसा अद्भुत अविस्मरणीय पल था जहा दोनों एक दूसरे को भूल गए थे, दोनों जैसे एक जान लग रहे थे. काफी देर किश करने के बाद मेने दीदी की आँखों में देखा, उनका चेहरा खुसी से चालक रहा था, साथ में शर्म ो हाय का मिला झूला मिश्रण, मेने एक बार फिर उनके होठो को पूरा निचोड़ दिया, जब में उन्हें देख रहा था तो वो लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी)

शिव : अब कहो दीदी, कुछ नहीं करना है? (वो शर्माने लगी) दीदी आप दीदी जितनी कमल हो उस से भी कमल एक लड़की हो. दीदी से तो बहोत बार मिला हु आज में उस लड़की से मिलने जा रहा हु. आप को कोई एतराज तो नहीं न. (वो शर्मा कर मुझे देख रही थी) दीदी आप नहीं जानती, ये लड़की है न लता वो बहोत hi कमल की है, चेहरा तो इतना प्यारा की आप उसे देखे बगैर रह hi नहीं शक्ति, दिखती नाजुक सी है और बलखाती बिलकुल Lata(Bel)jaisi है. (उनके गाल सहलाते हुए में अपने हाथ को उनके उभारो के ऊपर तक ले आया) दीदी, कुदरत ने उन्हें दो अनमोल रत्नो से नवाजा है, ऐसे तन कर खड़े है जैसे पत्थर के बने हो पर छुओ तो जैसे rui.(Mene एक स्तन को अपने हाथ में भर लिया और उसे दबा diya)(Shiv के हाथ की सख्ताई अपने स्तन पर महसूस करते hi लता का शीना अपने आप hi ऊपर उठ गया और मुँह से एक जोर की सिसकारी निकल गयी)

लतादिदी : Shhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धीरीईईए shiiiiiiiiv.(Mene उनके स्तन को दबाते हुए उनके गले पर अपनी जीभ फिरते हुए चाटने लगा) ओफ्फफ्फ्फ्फ़ शीइइइइइइइव.

शिव : दीदी, क्या आप चाहती है में इस लड़की के साथ ऐसे पेश औ.

लतादिदी : (लता के तन बदन में आग भड़क गयी thi)Shhhhhh,Tuje जो करना है कर ले.

शिव : (दीदी पूरी तरह समर्पित दिख रही, दोनों की सांसे तेज चलने लगी थी. मेने देखा की ब्लॉउज के हुक आगे की और hi है, उन्हें खोलने से पहले मेने उनके कड़क हो चुके निप्पल को ब्लॉउज के ऊपर से hi मुँह में भर लिया)

लतादिदी : ओह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव. (दीदी के उन्नत उरोज की घाटी नजर आ रही थी, मेरी भी हालत ख़राब होने लगी थी, में उन गोलाइओ की शुरुआत को चूमने लगा, दीदी अपने हाथ मेरे बल में घूमते हुए मुझे दबा रही थी. में ब्लॉउज के हुक खोलने लगा. मेरे हाथ हुक खोलते हुए भी उनके नरम स्तन हलके हलके से डाब रहे थे, दीदी के शरीर में बार बार कम्पन हो रहा था. जब सरे हुक खुल गए तो ब्लॉउज साइड में लटक गया और उनके सफ़ेद ब्रा में कैद स्तन मुझे ललचाने लगे.)

शिव : दीदी इन्हे देखा तो कई बार है पर आज मुझे ये अपनी और खिंच रहे है. (में ब्रा के ऊपर से hi उनके स्तन दबाने लगा.

लतादिदी : अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह ये तुजे अच्छे लगते है शिव.

शिव : है दीदी, बहोत अच्छे लगते है, आज में इन्हे अपने मुँह में भर कर चूसूंगा, रोज ये मुझे तरसते थे.

लतादिदी : ये तो हमेशा से चाहते थे, तू hi इनसे दूर था, शह्ह्ह्ह, धीरे दबा शिव शह्ह्ह्ह.

शिव : (मैंने उनके ब्लाउज को कंधो से उतर दिया. वो सिर्फ ब्रा में लेती हुई थी जो मुझे उत्तेजित कर रही थी, मेरा लुंड लोहे हैसा कड़क हो गया था. मेने उन्हें पलट दिया तो वो पेट के बल हो गयी, उनकी लगभग नंगी हो चुकी थी, सिर्फ ब्रा की पट्टी थी जो उनके शरीर में धसी हुई थी. ब्रा के हुक पीछे थे तो मैंने हुक खोल दिए और अपने तपते होठ उनकी गर्दन से ले कर पीठ पर रगड़ने लगा.

लता दीदी : ओह्ह्ह्हह शीइइइइव.

शिव :(उनके कान के पास मुँह ले जाते hue)Aap चाहती है न की में आपके साथ ऐसा karu?(Unhone कोई जवाब नहीं दिया, मेने अपने हाथ पीठ से फिसलते हुए निचे ले गया और उनके कूल्हे को दबोच लिया. (लता अपने कूल्हों पर शिव के सख्त हाथो को महसूस कर रही थी, वो उसके कूल्हों को सहलाते हुए दबा रहा था. उसका रोम रोम उत्तेजित हो चूका था.)

शिव : क्या आप चाहती है में ये करू? (मेरे ऐसा पूछने पर उन्होंने फ़ौरन है में गर्दन हिलायी.)

लतादिदी : शहहहहह haaaaaaaaaa शिव, में यही चाहती हु, मुझे प्यार कर शिव में बहोत तरसी हु, शहहहहह मुझे अपनी बना le(Unke कूल्हों को मसलते हुए में उनका पति कोटे उठाने लगा, धीरे धीरे करके मेने उसे कमर तक उठा दिया, मुझे पंतय में कैद उनके कूल्हे साफ दिख रहे थे. में उनके सख्त उभारो को मसलते हुए मुझे बहोत उत्तेजना हो रही थी, में उनकी गर्दन पर अपने होठ रख कर किश करने लगा. और हाथ से कूल्हों की दरार को सहलाने लगा) (लता इस अद्भुत आनंद में डूबने लगी थी, इतने मजबूत हाथो का स्पर्श उसके अंदर रोमांच भर रहा था, उसके गरम होठ उसकी पीठ पर चल रहे थे जिसकी गुदगुदी से शरीर के रोए भी खड़े हो गए the.Wo शिव के ऐसे अद्भुत प्यार को महसूस कर के खुसी से फूली नहीं समां रही थी. शिव ने उसे सीधा किआ और उसकी ब्रा भी निकल दी, एक बार के लिए उसने अपने स्तन को अपने हाथो से छुपा लिया, पर जैसे hi शिव ने उसके हाथ को हटाना चाहा उसने बड़ी आसानी से अपने हाथ हटा दिए. अगले hi पल लता के दोनों स्तन पुरे के पुरे शिव के पंजो में समां गए, वो उसे दबाते हुए निचोड़ने लगा, लता अपनी आंखे बंद किये हुए शिव को सब कुछ करने दे रही थी. आज वो पूरी तयारी करके बैठी थी. आज उसने अपने सरे बाल साफ़ किये थे, पूरा दिन सरिता उसे छेड़ रही थी पर उसे उसकी वो छेड़ छड़ भी अच्छी लग रही थी. उसीने मदद की थी उसकी. उसके सामने नंगी होने में उसे कितनी शर्म आयी थी वो, वो hi जानती थी पर शिव के लिए उसने वो सब किआ था. वो ऐसे तैयार हुई थी जैसे आज उसकी सुहागरात हो और ये सच भी था. आज उसके दिल की होनेवाली थी जो न जाने कब से उसके दिल में बसा था. जब से उसके अंदर एक लड़कीवाले बदलाव आये थे तब से वो शिव के साथ hi थी. उसके लिए लड़का मतलब शिव hi था. आज जेक उसकी वो तमन्ना पूरी हो रही थी.

अब बरी थी उनका peticote(Ghaghra) निकल ने की, वो बहोत शर्मा रही थी और दूसरी और देख रही थी, पेटीकोट का नाडा ढूंढने के लिए जैसे hi मेने उन्हें हाथ लगाया तो उन्होंने चद्दर को मुट्ठीमे कास लिया. थोड़ा सा ढूंढने पर मुझे नाडा मिल गया, उसे खींच कर मेने ढीला कर दिया, अब बरी थी उसे निकलने की. मेने दीदी की और देखा तो वो अपनी आंखे बंद किये मुस्कुरा रही थी, मेने भी अब शर्म को पूरी तरह से छोड़ ने का फैसला किआ. मेने देखा की उनका पेटीकोट झांघो के बिछ अंदर धसा हुआ है जिस से छूट का उभर स्पस्ट दिख रहा था, मेने एक बार दीदी को फिर से देखा, फिर अपनी हथेली उनकी छूट के फुले हुए हिस्से पर रख दी, लता दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया, ‘ओह्ह्ह्ह शीइइइइइव’

शिव: क्या हुआ दीदी, रुक जाऊ?

लतादिदी: (शरमाते हुए न kaha)kuchh nahi?(Unhone अपना हाथ हटा लिया)

वह पद नहीं था, मेने छूट को हलके हलके सहलाया तो दीदी अपनी टंगे आपस में रगड़ने लगी.

शिव : दीदी? पद ?

लतादिदी : मेने बल धो लिए है?

शिव : दीदी में पद का पूछ रहा हु?

लतादिदी : वही तो कह रही हु, मेने बल धो लिए है.

मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, में उनके पीरियड्स के बारे में पूछ रहा था और दीदी अपने बाल के बारे में बता रही है.

शिव : दीदी में आपके पीरियड्स के बारे में पूछ रहा हु और आप बाल दोने की बात कर रही है.

लतादिदी : (वो शरमाते हुए मुस्कुराने lagi)Buddhu, लड़की जब कहती है की बाल धो लिए है, इसका मतलब होता है की पीरियड्स ख़तम हो गए है.

शिव : मुज पर है क्यों रही है, मुझे थोड़ी न पता था की इसका ये मतलब होता है.
 
अपडेट 50

(दीदी के साथ ये निजी पल बहोत hi खास नोट जा रहे थे)

मेने उनके घाघरे का शिरा दोनों और से पकड़ ते हुए उसे उतरने लगा तो लतादिदी ने अपने कूल्हे उठा कर मेरी मदद की. वो जानती थी की अब वो सिर्फ पंतय में है तो उन्हें शर्म आ रही थी, वो दूसरी और hi देख रही थी पर उसका ध्यान मेरी हरकतों पर hi था. फूली हुई छूट, सफ़ेद पंतय में अपना स्पस्ट आकर दिखा रही थी.





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छूट की फैंको के बिच की दरार पर पंतय एक जगह से भीगी हुई दिख रही थी. मेरी नज़र उनकी छूट पर hi तिकी हुई थी. ऐसा नहीं था की मेने दीदी की छूट को नंगा नहीं देखा था पर उस टाइम बात अलग थी, उस समय देखने में भी दर लगता था, ऐसा लगता था की में कुछ गलत कर रहा हु. पर आज बात अलग थी, आज दीदी खुद चाहती थी की में उसे देखु. ये रोमांच hi कुछ अलग था. मेने दीदी की और देखा तो उनके होठो पे मुस्कान थी पर शर्म की वजह से वो अपना चेहरा ढके दूसरी और hi देख रही थी. में छूट के फुले हुए होठो को अपनी उंगलिओ से मेहसुसुस करना चाहता था, मेने एक बार फिर दीदी की और देखा. लतादिदी के घुटने के निचे पैरो पर हलके बल थे, और उनकी बगल में भी बाल दिख रहे थे. सच कहु तो लड़कीओ के इन जगह पे बल मुझे और उत्तेजित कर रहे थे. मेने छूट की और हाथ बढ़ाया और उस पर हलके से हाथ रख कर उसे सहलाने लगा. उनके मुँह से हलकी हलकी सिस्किअ निकलने लगी थी और उसका शरीर बलखाने लगा. में प्यार से उनकी छूट को अच्छे से सहलाने लगा और उसकी दरार पर भी ऊँगली फिरने लगा. जहा ज्यादा गिला था वह मेने अपनी ऊँगली थोड़ी दबायी तो दीदी का शरीर हिल गया.

शिव : (पंतय उनके ऊपर का आखरी वस्त्र था, उसे उतरने से पहले मेने दीदी से पूछ hi लिया) दीदी इससे भी उतरदु?

लतादिदी : (लता की हालत ख़राब थी, शिव का हाथ अपनी छूट पर उस से वैसे भी बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसके मुँह से सिर्फ इतना hi nikala)Hmmmmm

दीदी की सहमति प् कर मेने आहिस्ता से पंतय निचे सरकायी, मेने देखा की पहले दीदी के छूट के ऊपर बल ज्यादा थे पर आज उसे काट कर छोटे करदिये थे ( उनके पास रेज़र नहीं था तो सिर्फ कैची से hi बाल कटे थे).





में अपनी उंगलियों से उन बालो को सहलाने लगा. (लता चुपके से शिव के चेहरे को देख रही थी जो उसकी छूट की और hi देख रहा था. अपने निजी अंग को उसे देखते हुए देख वो शर्माने लगी. शिव ने धीरे धीरे पंतय और निचे सरकायी तो लता ने फिर से अपने कूल्हे उठादिये.) मेने पंतय सरकते हुए उसे पैरो से निकल दी. दीदी पूरी तरह से नंगी थी. बीएड पर लेती वो किसी अप्सरा से काम न था. उस काम की देवी की अतुलनीय काया को में बड़ी हसरत से देख रहा था.





एक बार मेने छूट को देखा फिर लतादिदी को देखा. मेने उनके पैरो को हलके से फैलाना चाहा तो दीदी ने खुद अपनी टंगे फैला दी. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. मेने छूट को हलके से दबोचा तो दीदी ने चद्दर मुट्ठी में कास ली. मेने उंगली थोड़ी सी दबायी तो वो दरार में घुस गयी, मुझे अपनी ऊँगली पर छेद का अनुभव होने लगा था, वो चिप छिपा भी था और गरम भी था. में महसूस कर प् रहा था की वो छेड़ मेरे ऊँगली के बराबर hi है. में उस छेड़ को देखने के लिए मारा जा रहा था, पर अभी भी झिझक थी, मेने दीदी को देखा तो वो आंखे बंद किये मेरे स्पर्श का मज़ा ले रही थी. मेने एक लम्बी साँस छोड़ी और उनकी दो टैंगो के बिच बेथ गया. मेने हलके से छूट और झांघो को सहलाया. फिर में दोनों अंगूठो की मदद से छूट के होठो को फैलाया तो मुझे वो छेड़ दिखने लगा. उस छेद के ऊपर भी दो छोटे छोटे होठ जैसा था. मैंने उसे और फ़ैलाने की कोशिस की तो वो छेड़ थोड़ा फ़ैल गया पर अंदर से वो जुड़ा हुआ था, अंदर कोई भी जगह नहीं थी बस एक गुलाबी मांस hi दिखाई दे रहा था. मेने उंगली से उसे टटोलना चाहा तो दीदी के मुँह से हलकी सी सिसकी निकल गयी.

में सच में बहोत दुविधा में था. (लता कब से शिव के चेहरे को गौर से देख रही थी, उसके चेहरे की परेशानी वो समाज रही थी, दरी हुई तो वो भी थी, पर उसे विस्वास था की सब लड़कीअ सेक्स करलेती है तो फिर उसका भी हो hi जायेगा. पर दर तो लग रहा था, क्यों की किसी का अनुभव सुन न और खुद अनुभव करना दो अलग बाटे होती है, शिव की ुसलजन को देख कर उसने कहा)

लता : क्या हुआ शिव, तू रुक क्यों गया?

शिव : दीदी, ये बहोत छोटी है. ये उसके अंदर नहीं जायेगा.

लता : है जानती हु, पर तू जोर से करेगा तो वो अंदर चलजाएगा.

शिव : अगर मैंने ऐसा किया तो आप जानती है कितना दर्द होगा दीदी?

लता : तो होने दे न.

शिव : नहीं दीदी में आपको दर्द नहीं दे सकता.

लता : पागल ये दर्द तो हर लड़की हस्ते हुए सेहलेति है. कभी न कभी तो ये दर्द मुझे सहना hi पड़ेगा.

शिव : नहीं दीदी अभी में तैयार नहीं हु. में कभी सोच भी नहीं सकता की मेरी वजह से आप को दर्द मिले.

लता : दर्द के बाद सुख भी तो मिलता है, क्या तू चाहता है मुझे वो सुख कभी न मिले.

शिव : अभी रहने दो न दीदी. में आपको ऐसे दर्द में नहीं देख paunga.(Lata उसके प्यार को समाज रही थी, )यहाँ आ, मेरे पास (में उनके साथ लेट गया)

लता :(वो शिव की आँखों में देख रही थी जहा प्यार hi प्यार भरा पड़ा था. वो जानती थी की ये दिन कभी नहीं आएगा, शिव कभी उसे दर्द नहीं देगा, कुछ सोचते हुए वो शिव का गाल सहलाने लगी) शिव, मुझे किश कर na.(Maine हैरानी से उनको देखा, उनकी आँखों में छह थी, तो मैंने हलके से उनके होठो को chuma)Aise नहीं शिव, अच्छी तरह से kar.(Maine उन्हें देखा वो बड़ी ाश लिए मुझे देख रही थी. मुझे भी उनसे प्यार था पर थोड़ी झिझक थी. में उनको किश करने लगा तो वो भी मुझे किश करने लगी, वो मेरे पुरे शरीर को सेहला रही थी, उनका हाथ मेरे अंडरवियर में चले गए और मेरे कूल्हे सहलाने लगे. उन्होंने मेरा अंडरवियर निचे खिसकना चाहा तो में किश तोड़ने लगा पर उन्होंने मेरे होठ छोड़े hi नहीं. उन्होंने अपने हाथ और पैरो की मदद से मुझे पूरा नंगा कर दिया. वो पलट ते हुए मुझे अपने ऊपर खींचने लगी, में उनके ऊपर हो गया. उन्होंने अपनी टंगे फैला दी और मेरी कमर पर लपेट दी. चुदाई की परफेक्ट पोसिटिव थी. दो गरम जिस्म आपस में रगड़ रहे थे. लतादिदी का मुलायम गर्म जिस्म, मेरे ऊपर जादू बिखेरने लगा. मेरा लुंड अपनी पूरी औकात में खड़ा हो चूका था. में अपनी कमर उनसे दूर रखने की कोशिस कर रहा था पर वो बार बार अपने पैरो से मुझे अपनी और खींच रही थी और अपनी छूट मेरे लुंड पे रगड़ रही थी. लुंड से रास निकल रहा था और छूट से भी निकल रहा था. दोनों एक दूसरे को अपने अपने रास से नेहला रहे थे. उनकी छूट के होठ रास से भीग चुके थे. (लता अपनी छूट पर हो रही लुंड की रगड़ से बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी. वो शिव को अपनी और खींच रही थी. वो छह रही थी की शिव अपना लुंड उनकी छूट में दाल दे पर वो दूर रह रहा tha.)(Didi अपनी कमर ऐसे हिला रही थी की मुझे दर लगने लगा की मेरा लुंड अंदर घुस न जाये, क्यों की अगर ये घुस गया तो उनकी क्या हालत होगी ये सोच कर मुझे दर लग रहा था. पर वो मान hi नहीं रही थी)

लतादिदी : शिव ऐसा क्यों कर रहा है, मुझे प्यार कर न, (मेरा हाथ अपने स्तन पर रख कर) शिव मुझे प्यार kar,(Maine उनकी और देखा, वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मुज से विनती कर रही हो, मेने दोनों चुके थम लिए और उन्हें मसलने laga)Ha शिव, आह्ह्ह्ह दबओओओओ इससे, (वो अपनी छूट मेरे लुंड पर घिसने लगी, मेने भी लुंड छूट पर घिसना चालू कर दिया, में छह रहा था की वो जल्द से जल्द स्खलित हो जाये, ताकि वो शांत हो jaye)shiiiiii, सीईई अम्म्मम्म हा शिव, ऐसे hi कर मुझे बहोत अच्छा लग रहा है shhhhhhhh(Kamar हिलाते हुए वो मुझे और खींच रही thi)mmmmmm, सीईई अह्ह्ह्हह शिव मुझे बहोत मज़ा आ रहा hai(Wo मेरी गर्दन को मेरी छाती को मेरे होठो को हर जगह चुम रही थी ), शिव में पागल हो रही हु, मुझे प्यार कर न शिव, ahhhh(Apni छूट को लुंड पर रगड़ते hue)Shiiiiiiv अह्हह्ह्ह्ह, शीइइइइव शहहहहह अह्ह्ह्ह दाल दे न भाई अह्ह्ह्हह शहहहहह क्यों तरसा रहा hai(Kamar जोर जोर से हिला रही thi)Shiv अह्ह्ह्हह शिईयिव, दाल दे न भाई कुछ नहीं होगा, शह्ह्ह्ह. आईईईई , शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह कुछः नहीं होगा shivvvv,(Wo बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, मई अपने आप पर कैसे कण्ट्रोल किये हुए था मुझे hi पता था)

शिव : अह्ह्ह, दीदी मत करो ऐसा डीडीइइइइइ अह्ह्ह्हह आपको दर्द होगा, अह्ह्ह दीदी रुक जाओ

लता : कुछ नहीं होगा शिव, दाल दे मेरे भाई, में छूटने वाली हु शिव दाल दे shiv,(Wo छूटने के कगार पर थी, )अह्ह्ह्ह, सीईव तुजे मेरी कसम अह्ह्ह्ह दाल दे वर्ण में तुज से कभी बात नहीं karungi(Lund छूट के छेड़ पर पहले से सेट था वो पल ऐसा आया की दीदी झड़ने के करीब थी तो उन्होंने निचे से धक्का मर दिया, दीदी ने मुझे कसम दी तो मेने भी हर कर धक्का मर दिया लुंड का सूपड़ा छूट को फैलते हुए फच से दीदी का कौमार्य भांग करता हुआ दीदी की छूट में काफी अंदर तक घुस gaya.)aiiiiiiiiiiiiiiiiiiii, maaaaaaaaaaa (दीदी झड़ने लगी और साथ में दर्द से कराहने लगी,)

शिव : आईइइइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (मुझे भी लुंड पर तेज दर्द महसूस हुआ, और एक जलन सी होने लगी)





दीदी को भी दर्द हो रहा था, मुझे भी मेरे लुंड पर तेज दर्द का एहसास हो रहा था और ऐसी जलन हो रही थी जैसे किसी ने खुले जख्म पर मिर्ची दलदी हो. में समाज नहीं प् रहा था क्या हुआ पर दर्द मुझे भी हो रहा था ऐसा पहली बार हुआ था. ( झड़ने के बाद लता को अपनी छूट में हो रहे अशीम दर्द का एहसास हुआ, वो हफ्ते हुए शांत होने लगी. में भी अपने दर्द को बर्दास्त करते हुए उनसे लिपट कर उनके ऊपर hi रहा. आखिर कर वो शांत हो गयी पर अब उनके चेहरे पर दर्द की लकीरे दिखने लगी. मेरे भी चेहरे पर दर्द की लकीरे थी. मैंने लुंड निकलने के लिए उठना चाहा तो उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली. और अपना शिर हिलाते हुए न कहा. मेरा लुंड बड़ी सख्ती से उस छोटेसे से छेद में फंसा हुआ था. दीदी मुझे देख रही थी और मेरे गाल को सेहला रही थी. उन्होंने मेरा शिर पकड़ा और मुझे अपनी और खींच लिया और मेरे होठो को चूसने lagi.(Lata को अपनी छूट में बहोत दर्द हो रहा था पर वो शिव को दिखाना नहीं चाहती थी. उसे पता था की एक बार तो ये होना hi था. शिव को भी दर्द हो रहा था पर वो लतादिदी को कहना नहीं चाहता था, दर्द की वजह से उसका लुंड थोड़ा सिकुड़ने लगा था)

लतादिदी : तुजे क्या हुआ शिव, क्या तुजे भी दर्द हो रहा है.

शिव : है दीदी.

लतादिदी : पर तुजे दर्द क्यों हो रहा है Shiv(Wo अपना दर्द भूल कर शिव के दर्द से दुखी होने लगी)

शिव : पता नहीं दीदी.

लतादिदी : क्या पहले भी होता था.

शिव : (अब में क्या कहता दीदी को, मेने दीदी को थोड़ी न बताया था की में सरिता दीदी को छोड़ चूका हु) नहीं दीदी, आज पहलीबार हुआ है.

(दरअसल, शिव आज पहली बार सील पैक छूट को छोड़ रहा था, और उसके लुंड का टंका इस कासी हुई छूट के सामने टिक नहीं पाया और वो टूट गया था. लोग अकसर छूट की सील की बात करते है पर लुंड पर भी सील होती है निस से पता चलता है की ये लुंड चुदाई कर चूका है, है ये बात अलग है की उसे टूटने के लिए खुली छूट नहीं, टाइट छूट चाहिए)

लता दीदी : (मेरे गाल सहलाते हुए मेरी आँखों में देख रही थी, दोनों को दर्द हो रहा था, लता को खुद के दर्द का तो पता था पर वो शिव के दर्द को नहीं समाज प् रही थी, पर उसे इतना तो पता था की उसे दर्द है, तो उसने ध्यान को दूसरी डिसमे ले जाने का सोचा, वो शिव को किश करने लगी, और उसे सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद उसकी आँखों में देखते हुए) तू मेरे अंदर है शिव, मुज से जुड़ा हुआ है. हम दोनों दो नहीं, एक है abhi.(Muje भी एहसास हुआ की मेरा लुंड दीदी की छूट में है और हम दोनों जुड़ चुके है, दीदी आगे बोन लगी) जितनी ख़ुशी अभी मुझे मिल रही है, वो में तुजे बयां नहीं कर शक्ति, आज में तेरी हुई शिव.

शिव : आप तो हमेशा से मेरी hi थी दीदी.

लतादिदी : वो में तेरी दीदी थी, अब में तेरी bi....(Wo बोलते बोलते रुक गयी)

शिव : रुक क्यों गयी दीदी, बोलो न अब क्या हो.

लतादिदी : (शरमाते हुए) आज से इस कमरे में तेरी ... में तेरी bivi...(Wo बोलते बोलते शर्मा गयी और मेरे गले लग गयी) में बहोत खुस हु शिव, ी रॉय लव यू. में तुज से सच में बहोत प्यार करती हु.

शिव : में जनता हु दीदी, और में भी आप से बहोत प्यार करता हु. और आप सच कह रही हो दीदी की अभी हम एक hi है, (में उनके होठो को चूमने लगा तो वो भी मुज से लिपट कर मेरे होठो को चूमने लगी, होठ से होठ और जुबान से जुबान उलझ रही थी, में दीदी के स्तन को सहलाते हुए उन्हें चुम रहा था, उनकी छूट से और मेरे लुंड से खून निकल रहा था, पर जैसे उस से हमे कोई फर्क नहीं पद रहा था, दोनों का खून इकठ्ठा हो कर छूट के किनारो से बहार निकल रहा था)

शिव : दीदी आप खुस हो?

लतादिदी : है शिव, में बहोत खुस हु, आखिर मेने तेरा प्या प् hi लिया.

शिव : पर दीदी हम बचपन से जिस रिश्ते से रहे hai....(Shiv ने बात अधूरी छोड़ दी)

लतादिदी : मुझे नहीं पता, और में समझना भी नहीं चाहती, शिव मुझे बस इतना पता है में तुम्हारी हु, और मेरे दिल में ये जगह किसी और को नहीं दे शक्ति, चाहे जिस रिश्ते से तू मुझे रक्खे पर हमेशा अपने साथ रखना.

शिव : दीदी (मेने उन्हें कास के गले लगा लिया पर ऐसा करने से मेरा लुंड और थोड़ा छूट में उतर गया)

लता दीदी : Aiiii(Unhone अपना हाथ मेरी पीठ पर दबा दिया,)

शिव : सॉरी दीदी.

लतादिदी : जो होना था वो हो गया है शिव, में अब लड़की नहीं रही, तूने मुझे औरत बना दिया मेरे भाई. मुझे तेरा प्यार चाहिए शिव, मुझे एक लड़कीवाला प्यार कर न. में तेरे प्यार के लिए तरस रही हु.

अब में क्या कहता, मेरे लुंड का दर्द भी अब काम हो गया था, लुंड वापस अपनी औकात में आ चूका था. मेरा लुंड उनकी छूट की संकरी गुफा में फंसा हुआ था. उनकी छूट की मांसपेशियों की हलचल में मेहसुसु कर शक्ति था.





शिव : ठीक है दीदी, जैसा आप chaho.(Unke होठो को चूस ने laga)Waise दीदी आप बहोत मीठी ho(Unke चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, मैंने उनके चुके दबाने laga)Didi ये अब बड़े होनेवाले है.

लतादिदी :(शरमातेहुए मुस्कुराती hai)Tereliye hi है, तुजे ये पसंद तो है न.

शिव : मुझे आपका सबकुछ पसंद है didi(Ek निप्पल मुँह में ले कर चूसने लगा)

लतादिदी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, अह्हह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे भाई, अह्ह्ह्हह (मेरा शिर सहलाते हुए वो मुस्कुरा रही thi)Shhh चूस , पर आराम से अह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है ahhhhh.(Lata को अपनी छूट में काफी रहत हो चुकी थी और उसके जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी थी, वो शिव की पीठ और उसके कूल्हों पर अपने नाख़ून रगड़ रही थी, उसने अपनी कमर हिलनी सुरु कर दी. लुंड थोड़ा आगे पीछे होने laga,ye रगड़ उसको मज़ा देने लगी, और उसकी छूट पानी बहाने लगी, उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो शिव के बालो को नोचने लगी और अपनी कमर को हिलाते हुए धक्के लगाने लगी, दर्द तो हो रहा था पर उसके सामने जो मज़ा था वो कई गुना ज्यादा था)

दीदी अपनी कमर हिला रही थी. मेरा लुंड चिकनाहट की वजह से आगे पीछे होने लगा था. मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर से अपनी औकात में आ चूका था. मैंने थोड़ा ऊपर हो कर नीचे देखा तो लुंड दीदी की छूट में आधा घुसा हुआ था. में हलके हलके लुंड को आगे पीछे करने लगा.

शिव : दीदी (उन्होंने मेरी और dekha)Dard हो रहा है?

लतादिदी: हल्का हल्का, पर मज़ा ज्यादा मिल रहा है शिव.

शिव : आखिर अपने अपने मान की कर hi ली.

लतादिदी : (शरमाते hue)To कब तक रूकती, मुझे भी तेरा प्यार चाहिए था. क्यों तुजे अच्छा नहीं लग रहा.

शिव :(मुस्कुराते hue)Muje क्यों नहीं अच्छा लगेगा. पर दीदी आपकी वो बहोत ज्यादा छोटी है.

Latadidi:(Meri बात से वो शर्मा gayi)Kyu तुजे अच्छी नहीं लगी.

शिव : आप जानती है मैंने अपने आपको कैसे रोका हुआ है, मुझे इतना मज़ा आ रहा है की जोर जोर से करने का मान कर रहा है.

लतादिदी : तो कर ले न.

शिव : पागल है क्या आप. आपको कितना दर्द होगा पता है.

लतादिदी : नहीं होगा, मुझे भी मान हो रहा है की तू जल्दी जल्दी कर.

शिव : दीदी दर्द होगा.

लतादिदी : होने दे, मुझे बहोत मज़ा आ रहा है, थोड़ा जल्दी जल्दी कर.





सच कहु तो उनकी छूट इतनी टाइट थी की मेरा लुंड पूरी तरह से फंसा हुआ था. पर ऐसा मज़ा भी आज तक मुझे नहीं मिला था. मेरा भी मान कर रहा था तो में थोड़ा जल्दी जल्दी दीदी को छोड़ने लगा. में आधे लुंड से hi छोड़ रहा था. उनको भी मज़ा आ रहा था.

लतादिदी : अह्हह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह, है ऐसे hi, और कर शिव अह्ह्ह्ह, हआ हआ हआ शह्ह्ह्हह्ह.

शीववव अह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, शहहहहह बहोत मज़ा आ रहा है, और प्यार कर मुझे.

शिव : शठ अह्ह्ह दीदी (उनके स्तन जोरो से मसलने लगा, उनके निप्पल को भी मरोड़ने लगा, लुंड की रफ़्तार थोड़ी बढ़ गयी थी)

लतादिदी : शठ एआई एआई आअह्ह्ह शठ श, इतना सुख तो मुझे कभी नहीं मिला ahhhhh(Unhone मेरा शिर पकड़ कर अपनी बहो में भर लिया था, मेरी कमर पर अपने पेअर लपेट लिए, वो खुद निचे से धक्के लगा रही thi)Ahhhh और तेज सीईव, और तेज कर. कितना मज़ा आता है शिव, अह्हह्ह्ह्ह और जोर से कर, मुझे कोई दर्द नहीं हो रहा, कर ले और जोर से करले.

(मेने उन्हें अपने निचे पूरी तरह से दबोच लिया था, लुंड थोड़ा थोड़ा कर के अंदर और ज्यादा घुस रहा था. हम दोनों अपनी खुमारी में थे, अचानक दीदी दहाड़ती हुई मुज से पूरी तरह से चिपक गयी और एकबार फिर झड़ने लगी. तब जा के मेरा ध्यान गया की मेरा पूरा लुंड उनकी छूट में घुस चूका है)

लता : (अपने अंदर पुरे लुंड को महसूस कर रही थी, दर्द अपनी जगह था पर जो ख़ुशी थी वो बयां नहीं की जा शक्ति थी. वो अपनी छूट को फाडे हुए अपने अंदर घुसे उस मोठे से लुंड को महसूस करते हुए झाड़ रही थी)

मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था. मैंने दीदी को पकड़ा और धक्के लगाने लगा, उनकी संकरी छूट मुझे एक अजीब तरह का आनंद दे रही थी, मेरे धक्के तेज हो गए थे.

शिव :(साथ में मुझे दीदी की चिंता भी हो रही thi)Didi दर्द तो नहीं हो रहा?

लतादिदी : नहीं शिव, तू कर, अह्ह्ह्हह, मुझे अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है, शह्ह्ह्हह्ह, अह्ह्ह्हह मेरे अंदर hi डालना.

शिव :(Chauktehue)Kya कहा दीदी आपने.

लतादिदी : शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अपना वीर्य मेरे अंदर hi डालना

शिव : ये क्या कह रही हो दीदी, अगर कुछ हो गया तो.

लतादिदी : कुछ नहीं होगा, में जानती हु में क्या कह रही हु, अह्ह्ह मेरे पीरियड्स अभी ख़तम हुए है तो अभी सेफ पीरियड है. भर दे अपना वीर्य शिव, मुझे सब कुछ महसूस करना है. मुझे तेरा पूरा प्यार चाहिए.

शिव : आप कमल हो दीदी, अह्ह्ह्ह इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया दीदी. (में और वो दोनों पशीने से भीग चुके थे, सच में इतना मज़ा तो आज तक मुझे नहीं मिला था, मेरी दीदी, मेरी प्यारी दीदी अब मेरी बीबी बन चुकी थी, उनसे इस तरह का प्यार मुझे उनके और नज़दीक ले आया था, उनका शरीर और उनकी छूट तो लाजवाब थी hi पर वो मेरे लिए लाजवाब थी, वो मेरी प्यारी दीदी थी. में उन्हें चूमते हुए, चाट ते हुए, उनके चुके और उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें छोड़ रहा था)

लतादिदी : अहह कर ले मेरे भाई, जितना मर्जी करले, में खुस हु की मैंने तुम्हे ये ख़ुशी दी. में खुस हु की आज तूने मुझे औरत बनाया. में हमेषा से तुज से प्यार करती थी पर आज मुझे एक अलग तरह का प्यार महसूस हो रहा है, मुझे लग रहा है आज में सच में तेरी हो गयी और तू mera.(Chut पूरी तरह से भरी हुई थी और कोनो से लहू की नदिया बह रही थी, लुंड जड़ तक अंदर बहार हो रहा था, दीदी के टंगे उठाने से उनके कोल्हू से थप थप की आवाजे निकल रही थी, मैंने दीदी को पूरी तरह से जकड लिया था,)

शिव : दीदी मेरा अब निकलने वाला है.

लतादिदी : मेरा भी निकलनेवाला है, भर दे मेरी छूट अपने प्यार से.

शिव : (दीदी के मुँह से छूट सुन कर मुझे कुछ कुछ होने laga)Kya कहा दीदी अपने, क्या भर दू.

Latadidi:(Lata को एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी पर अब बोल चुकी थी wo)Meri छूट में शिव, अह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट में अह्ह्ह्ह अपने लुंड से अह्हह्ह्ह्ह

शिव : अह्ह्ह्ह दीदी आप को ये सब भी बोलना आता है. (दीदी शर्मा रही थी) शर्माओ मात दीदी, आप का ऐसा बोलना मुझे अच्छा लग रहा है, आपकी छूट मेरे लुंड को खींच रही है

लतादिदी : (उन्होंने अपनी आंखे बंद की, वो मुस्कुरा रही thi)Use तेरा लुंड अच्छा लग रहा है , उसे तेरा hi लुंड चाहिए शिव, वो तेरे लुंड के लिए बहोत तरसी है, उसकी इच्छा पूरी कर दे, छोड़ ले उसे, अह्ह्ह और जोर से छोड़ मुझे, तेरा लुंड बहोत बड़ा है शिव, मुझे नहीं पता था इतना मज़ा आता है, अह्ह्ह्हह वर्ण में कब से ये करवा लेती.

शिव : दीदी मुझे भी आपको छोड़ने में बहोत मज़ा आ रहा hai.(Meri कमर के निचे का भाग रफ़्तार से चल रहा था, लुंड पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था, छूट फ़ैल कर लुंड से लिपट गयी थी, छूट के अंदर का हर हिस्सा में अपने लुंड पर महसूस कर रहा था

लतादिदी : छोड़ ले शिव मुझे, जितना मर्जी हो छोड़ ले, अह्ह्ह्ह इतना मज़ा.... अह्ह्ह में गयी शिववववव में gayiiiiiiiiiiii

शिव : में भी दीदी

आखरी धक्के जोर जोर से लगने लगे, वो पूरी हिल रही थी, मेने उन्हें कंधो से पकड़ लिया था, आखिर कर में भी अपने चरम पर पहुंच गया और में अपना वीर्य, दीदी की छूट में भरने लगा. वो मुझसे पूरी ताकत से लिपट गयी थी और मैंने भी उन्हें अपनी आगोस में दबोच लिया, मेरे झटके चालू थे और वीर्य की पिचकारियां दीदी की छूट में गिर रही थी अशीम आनंद की अनुभूति हो रही थी. दोनों पशीने से लथपथ एक दूसरे को कास के जकड़े हुए थे. छूट के कोनो से वीर्य और खून निकल रहा था. काफी देर हम ऐसे hi चिपके रहे. कमरे में सांसो का तूफान धीरे धीरे काम होने लगा. जब तूफान शांत हुआ तो मैंने दीदी को छोड़ा और थोड़ा ऊपर उठ कर दीदी को देखा. उनके बल पुरे बिखरे हुए थे, वो अपनी अधखुली आँखों से बस मुझे देख रही थी, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, लुंड छूट में धंसा हुआ था, जब दीदी को अपनी स्थिति का बहन हुआ तो शर्माने लगी, उनको इतनी शर्म आ रही थी की उन्होंने अपनी आंखे अपने एक हाथ से धक् ली. पर उनके चेहरे पर मुस्कान बहोत गहरी थी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

लतादिदी : मुझे बहोत शर्म आ रही है शिव.

शिव : क्यों?

लतादिदी : पता नहीं.

शिव : आपको अच्छा नहीं लगा दीदी?

लतादिदी : (उन्होंने अपना हाथ हटाया और मेरी और देखा, मुझे खींच कर गले लग gayi)Pagal है क्या? मुझे बहोत मज़ा आया, पर अब शर्म आ रही है. अह्ह्ह्हह

शिव : क्या हुआ दीदी?

लतादिदी : अह्ह्ह्ह, अब दर्द का एहसास भी हो रहा है.

शिव : इसीलिए में आप को मन कर रहा था.

लतादिदी : अब दर्द हो रहा है तो होने दे, ये उस खुसी के सामने कुछ भी नहीं जो तूने मुझे दी है. वह एक गोली रक्खी है वो ला दे मुझे.

शिव : कैसी गोली?

लतादिदी : दर्दनिवारक गोली है.

शिव : (मैंने अपना लुंड बहार निकला तो ढेर सारा वीर्य जो लाल रंग का हो चूका था वो छूट से बहने लगा, मुझे सचमे चिंता होने लगी) दीदी आप सचमे ठीक हो न?

लतादिदी : (वो मुस्कुरायी) जा गोली दे, ज्यादा चिंता मात कर. मरनेवाली नहीं हु में.

शिव : मरे आप के दुसमन, ऐसा क्यों बोल रही हो. (मैंने उन्हें गोली दी, पानी के साथ गोली खिलने के बाद मेने उन्हें kaha)To अपने साडी तयारी कर के राखी थी?

लतादिदी : (उन्हें शर्म आयी तो वो दूसरी और देखने लगी, में उनकी बगल में लेट गया और उनके स्तन से खेलने laga)Shiiiiiv , मुझे मत सत्ता न.

शिव: आपकी तयारी से तो लगता है आप सब प्लान बनाकर बैठी थी, है न?

लतादिदी : तो और क्या करती, तू तो कभी करनेवाला था hi नहीं, दर्द होगा दर्द होगा कर रहा था. तो मुझे hi करना पड़ा.

शिव :(उनके स्तन को सहलाते हुए उनके एक निप्पल को चूस kar)App खुस तो है न दीदी?

लतादिदी : भोत ज्यादा शिव. मुझे नहीं पता मैंने ये सही किया या गलत पर में बहोत खुस हु. मुझे हमेशा ऐसे hi प्यार करना शिव.

हम दोनों एक दूसरे के प्यार को महसूस करते हुए काफी देर तक जगे, आखिर कर हम सो गए.
 
अपडेट 51

अगले दिन सुबह उठा तो में और दीदी नंगे एक दूसरे को बहो में लिए सो रहे तेह, मेने देखा तो दीदी गहरी नींद में सो रही थी. वो मुज से ऐसे चिपक कर सो रही थी की अगर में हिलता तो भी वो जाग जाती. में उनके प्यारे चेहरे को देखते हुए थोड़ी देर लेता रहा. मुझे जाना भी था तो में बड़ी सावधानी से उनकी बहोत को हटते हुए निकला. मेरी जगह मेने तकिए रख दिया और उनके ऊपर चद्दर दाल कर में बाथरूम चला गया.

सुबह जब लता न दिखी तो सरिता उसे देखने रूम में चली गयी. आज तक ऐसा नहीं हुआ था, लता सबसे पहले उठ कर काम में लग जाती थी. जब सरिता रूम में पहुंची तो लता चद्दर ओढ़े लेती हुई थी पर जग रही थी.

सरिता : क्यों अभी तक सो रही है तू, कुछ हुआ है क्या? (उसके माथे पर हाथ रखते हुए) तुजे तो बुखार है. मुझे बुला नहीं सकती थी क्या. शिव को पता नहीं है क्या? उसने भी मुझे नहीं बुलाया.

लता : (धीमी आवाज me)Use पता नहीं है, शायद अभी अभी बुखार आया है. में सो रही थी तब वो निकल गया hoga.(Wo कड़ी होने लगी तो उसको अपनी टैंगो के बिच दर्द हुआ तो कराहते हुए वापस लेट गयी)

सरिता :(चिंतित स्वर me)Kya हुआ तुजे? और लेती रह, उठ क्यों रही है.

लता : (उसने सरिता को देखा, वो क्या कहती की कहा दर्द है, उसने शर्मा कर अपनी नज़ारे फेर ली)

सरिता : (उसको अजीब लगा की बीमार है फिर भी शर्मा रही है, अचानक उसके दिमाग में बिजली चमकी)

क्या tune....Shiv के साथ? इतना जल्दी हो भी gaya(Lata बुरी तरह से शर्मा गयी और अपना चेहरा chhupaliya)(Sarita के चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Chalo हो hi गया आखिरकार, इसीलिए तेरी ये हालत hai(Pyar से उसका हाथ पकड़ kar)Jyada दर्द है क्या? (चद्दर हटाने lagi)Muje देखने दे.

लता :(अपनी चद्दर पकड़ते hue)Nahi, वह मात देख, मुझे शर्म आ रही है.

सरिता :(उसका हाथ हटते हुए) अब शर्माना छोड़, मुझे देखने दे, सब ठीक है की nahi.(Sarita ने उसकी चद्दर हटाई तो वो चौंक गयी, छूट एकदम लाल हो गयी थी और फूल गयी थी, खून सुख गया था, चद्दर भी खून से सनी हुई thi)Hai राम, क्या हालत कर दी मेरी फूल जैसी सहेली की. बड़ा बेदर्दी निकला शिव to(Lata को बहोत शर्म आ रही thi)Goli ली थी की नहीं?

लता :उसको कुछ मात बोल, और गोली मेने रात को ली थी.

सरिता : जिसने दर्द दिया, उसकी hi तरफदारी कर रही है? में दूसरी गोली अभी दे देती hu.(Wo गोली ले आयी और उसे खिला di)Sab ठीक हो जायेगा. (मुस्कुराते हुए, उसका हाथ पकड़ते हुए) कैसा रहा, सिर्फ दर्द hi हुआ की मज़ा भी aya(Lata बुरी तरह शर्मा गयी) अब शर्मा क्यों रही है, बता न.

Lata:(Sharmate hue)Pehle बहोत दर्द हुआ था, ऐसा लगा की जान hi निकल जाएगी, पर बाद में दर्द नहीं था और बहोत मज़ा भी आया. ये दर्द तो पता नहीं अभी क्यों हो रहा है.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Jab प्यार का नशा चढ़ा हो तब पता नहीं चलता दर्द का. चल कोई बात नहीं, में बहोत खुस हु की आखिर कर तुमने भी ये ख़ुशी प् hi ली. और सबसे बड़ी बात है की ये ख़ुशी तूने उस से पायी जिसे तू दुनियामे सब से ज्यादा प्यार करती है. तू आराम कर, काम तो में देख लुंगी.

बहार आ कर उसने रंजन और विणा को भी बुला लिया और उन्हें लता बीमार है ये कह दिया और काम में हठबाटने को बोल दिया. सब अपने काम में लग गए.

जब में गयम से लौटा तो सरितादिदी किचन में काम कर रही थी. लतादिदी नज़र नहीं आ रही थी. सरिता दीदी ने मुझे देखा और मुस्कुरायी.

शिव : लतादिदी कहा है?

सरितादिदी : (मुस्कुराते हुए) उसकी कमर में दर्द है तो वो सो रही है.

शिव : (मुझे चिंता होने लगी तो में सीधा अपने रूम में गया, दीदी लेती हुई थी पर जाग रही थी, में उनके पास बेथ गया) क्या हुआ दीदी? सरितादिदी बता रही थी आप को दर्द है?

लतादिदी : (उनका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था, शरमाते हुए hi उन्होंने kaha)Me ठीक हु, मेने दवाई ली है, सब ठीक है?

शिव : आप को रात की वजह से दर्द है दीदी?

लतादिदी : (मेरे चेहरे पर आये ग्लानि के भाव देख kar)Tu क्यों चिंता कर रहा है, मेने कहा न की में ठीक हु. जा तैयार हो जा, स्कूल भी जाना है.

शिव : में नहीं जा रहा स्कूल. आप को ऐसे छोड़ कर में स्कूल जाऊंगा.?

लतादिदी : मुझे कुछ नहीं हुआ शिव, में ठीक हु, तू जा, तेरी पढ़ाई बिगड़ेगी.

उन्होंने बड़े जोर दे कर कहा तो में स्कूल के लिए तैयार होने लगा. जब स्कूल गया तो पता चला की पहले स्कूल का कॉम्पिटिओं होगा जो दो दिन बाद होगा. मुझे उसकी कोई टेंशन नहीं थी. मेरे दिल में तो लतादिदी hi चल रही थी. मेरी वजह से वो दर्द में है, ये सोच कर hi मुझे चैन नहीं आ रहा था. शाम को मेने जूही मैडम से कहा की दीदी बीमार है तो में स्टेडियम नहीं आऊंगा. उन्होंने भी हामी भरी. में अन्थालय पंहुचा और सीधे दीदी से मिलने चला गया. मुझे देख कर वो उठकर बेथ गयी.

शिव : अब कैसी तबियत है दीदी?

लतादिदी : (शरमाते hue)Thik हु. मेने सरिता को बोलै भी पर वो मुझे आराम करने के लिए बोल कर सारा काम कर रही है.

शिव : ठीक hi तो कह रही थी, आप आराम करो में उनकी हेल्प करता hu.(Me सरिता दीदी के पास पहुंच गया. वह रंजन और विणा भी थी.) कहिये दीदी क्या काम करना है, आज में आप की हेल्प करूँगा.

रंजन : तू खाना बनाने में हेल्प करेगा?

शिव : है क्यों, मुझे नहीं आता क्या, बताओ मुझे क्या करना है.

सरितादिदी : तू चिंता मात कर, हम देख लेंगे, जा तू तैयार हो जा, स्कूल भी जाना है.

मैनेजर सहर में आ चूका था. वो सीधे इंस्पेक्टर धनपाल से मिलने चला गया. रात को उसके सामने hi शेखर साहब ने उसे फ़ोन कर दिया था. जब वो वह पंहुचा तो इंस्पेक्टर किसी काम में व्यस्त था तो उसे बैठने के लिए बोल दिया. सब काम निपटा कर उसने देवीलाल को अपने केबिन में बुलाया.

मैनेजर : नमस्ते साहब.

धनपाल : आओ, बैठो. बताओ.

मैनेजर : साहब, वो कल शेखर साहब ने फ़ोन किआ था न.

धनपाल : अरे है, तो वो तुम हो. तो बताओ, तुम क्या करना चाहते हो.

मैनेजर : साहब, शेखर साहब ने जैसा फ़ोन पर बताया था, मेरे अनाथालय में एक लड़का है शिव, उसे रस्ते से हटाना है.

धनपाल : हटाना है से तुम्हारा क्या मतलब है, क्या तुम उसे मरना चाहते हो?

मैनेजर : नहीं नहीं साहब, सिर्फ उसे वह से निकलवाना है. शेखर साहब ने जैसे बताया था वैसे उसे किसी केस में फंसा कर जेल में दाल दो.

धनपाल : (थोड़ीदेर उसने कुछ सोचा, फिर ) ठीक है, दस हजार निकालो.

मैनेजर : (मैनेजर को कुछ समाज नहीं आया) साहब दस हजार?

धनपाल : ये काम करने के पैसे नहीं है, दस हजार में तो में कुछ भी न करू, ये पैसे इस लिए है की तू उस पर दस हजार की चोरी का इल्जाम लगा देना. फिर हमे फ़ोन कर देना. में तलाशी के बहाने उसका सामान चेक करवाऊंगा. ये पैसे उसके सामान से मिलेंगे. फिर हम उसे चोरी के इल्जाम में उसे गिरफ्तार कर लेंगे.

मनगर : उसे कितनी सजा होंगी साहब.

धनपाल : सजा जितनी भी हो, उस से तुजे क्या मतलब, एक बार उसे सजा हो गयी फिर तू उसे अनाथालय में कभी घुसने तो देगा नहीं. वैसे भी वो अनाथालय में चोरी के इल्जाम में फसेगा तो वैसे भी वो वह वापस आएगा नहीं.

मैनेजर : (उसके चेहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी) ठीक है साहब, (उसने दस हजार निकल कर इंस्पेक्टर को दे दिए)

धनपाल : ये तो हो गया, अब ये बता इसके बदले में मुझे क्या देगा.

मैनेजर : साहब, आप उसकी चिंता मात करिये. मेरे साथ सम्बन्ध रखियेगा तो हमेशा फायदे में hi रहेंगे. इस काम के बदले में आप को एक कोरा, कवर और एकदम ताज़ा फूल मिलेगा. जिसे देख कर hi आपकी तबियत खुस हो जाएगी.

धनपाल : (मुस्कुराते हुए) चल ठीक है.

सब सेट कर के मैनेजर वह से निकल गया. आज वो बहोत खुस था, आखिर कर उसका कांटा जो निकलनेवाला था.

स्कूल में रेसस्स में में स्टाफ रूम की और जाने लगा. मुझे कॉम्पिटिओं के लिए अपना नाम लिखवाना था. मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था. में जा रहा था की महेश और हर्ष भी आ गए. वो दोनों भी कहने लगे की हमें भी नाम लिखवाना है. उन्हें देख कर मुझे थोड़ी रहत हुई. में अकेले बिना मैडम से मिलने से दर रहा था पर अब हम तीनो साथ थे तो थोड़ा दर काम हो गया. हम तीनो स्टाफ रूम में पहुंचे. बिना मैडम वह बैठी हुई थी. हम तीनो उनकी परमिशन ले कर अंदर गए. बिना मैडम ने मेरी और देखा तो मेने नज़ारे झुका ली. महेश hi बोलै.

महेश : मैडम, हमे कॉम्पिटिओं के लिए नाम लिखवाना है.

बिनामदं : (एक बार मेरी और देखा, फिर महेश की और देख कर) प्रिंसिपल सर ने डीडे किआ है की सब को पार्टिसिपेट करना है, तो स्कूल लेवल के लिए नाम लिखवाने की जरुरत नहीं है.

शिव : (मुझे पूछना था तो मेने नज़ारे झुकाये hi पूछ लिया) पर मैडम, कोण किस खेल में भाग लेगा, उसके लिए तो नाम लिखवाना पड़ेगा न.

बिनामदं : (उसने शिव की और देखा जो उसकी और देख hi नहीं रहा था) नहीं, सब को सब खेल में हिस्सा लेना है. गोवेर्मेंट का आदेश है की सब को सब खेल में भाग लेना है, क्यों की पता नहीं कोण किस्मे अच्छा हो.

महेश : ठीक है मैडम, थैंक यू.

हम सब वह से निकलने लगे, बिना का दिल कर रहा था की वो शिव को रोके पर वो नहीं कर पायी, वो बस उसे जाते हुए देख रही थी. पता नहीं उसे किस बात के लिए शिव को रोकना था, वो समाज नहीं प् रही थी, पर शिव का उस से नज़ारे चुराना उसे अच्छा नहीं लग रहा था. वो उन सब के जाने के बाद भी काफी देर तक दरवाजे की और देखते हुए अपनी सोच में डूबी रही.

स्कूल ख़तम होने के बाद, में और मेरे दोस्त साथ में निकले, पार्किंग में आने के बाद उन्होंने अपनी साइकिल ली और निकल गए, में जाने की सोच hi रहा था की मेने वैस्वी को अकेले आते हुए देखा. मेने देखा की उसका स्कूटर मेरे पास hi खड़ा था. संयम को न देख कर में रुक गया.( जब वैस्वी ने देखा की में खड़ा हु तो उसने अपनी निगाहे नीचे कर ली और चलते चलते स्कूटर के पास आ कर लॉक खोलने लगी.)

शिव : संयम कहा है?

वैस्वी : (बिना मेरी और देखे, रूखे पैन se)Aa रही है.

शिव :तुम ऐसे क्यों बात करती हो मुझसे?

उसने गुस्से से मेरी और देखा. मुझे तो कुछ समाज नहीं आया तो में बस उसे नॉर्मली hi देख रहा था. उसने वापस अपने काम पर ध्यान देते हुए सामान डिक्की में रखने लगी. में चुपचाप उसे देख रहा था. इतने में संयम आते हुए दिखी.

संयम : Hi शिव.

शिव : Hi संयम, कैसी हो.

संयम : में ठीक हु, तुम क्यों खड़े हो.

शिव : वैश्वि अकेली थी, तुम दिखी नहीं इस लिए में तुम्हारे बारे में पूछ रहा था.

संयम : (वैश्वि स्कूटर चालू कर चुकी thi)Are रुक न.

वैस्वी : (रूखे पैन se)Muje जाना है, चल जल्दी.

संयम : ठीक है, bye शिव.

शिव: bye(Wo दोनों निकल गयी)

शिव : इसकी क्या प्रॉब्लम है समाज नहीं आती?

फिर में जूही मैडम के घर चला गया. मेने जूही मैडम को बताया की आज में स्टेडियम नहीं आ रहा, दीदी की तबियत ख़राब थी तो मुझे जल्दी घर जाना है. में गयम बंद करने चला जाऊंगा. तो उन्होंने कहा की वो मदन सर से बात कर लेगी. में सीधा घर चला गया. मेने दीदी को मिलने सीधा उनके पास चला गया.

शिव : कैसी हो दीदी?

लतादिदी : (बैठे बैठे कपड़ो को ठीक से रख रही thi)Aa गया तू, में ठीक हु, तू इतना जल्दी कैसे आ गया.

शिव : आप बीमार थी तो मेने छुट्टी ले ली और आ गया.

लतादिदी : में ठीक हु शिव, तू चिंता मात कर.

शिव : कैसे चिंता न karu(Me उनके दर्द के लिए पूछ न छह रहा था पर मुझे भी वो पूछते हुए शर्म आ रही थी पर पूछना तो था hi) दीदी, wo...apka दर्द कैसा है?

लतादिदी : (मेरे ऐसा पूछने पर वो भी शर्मा गयी और अपनी नज़ारे झुका कर धीरे से खा) सब ठीक है.

शिव : सॉरी दीदी, मेरी वजह से...

लतादिदी : में ठीक हु कहा न, और तेरी वजह से कुछ नहीं हुआ. तू ज्यादा सोच मात, जा फ्रेश होजा और खाना खा ले.

शिव : दीदी में थोड़ी देर से खाऊंगा दीदी. एक दो दिन शायद में बिजी हु तो लकडिया आज hi काट देता हु.

लता दीदी : ठीक है तू जा में रंजन को भेजती हु.

में कपडे बदल कर लकडिया काटने चला गया. थोड़ी देर में रंजन भी आ गयी. आते hi वो मेरी और बढ़ी तो में लकडिया काट ते काट ते रुक गया. वो मेरे शाइन से लग गयी.

शिव : क्या हुआ, चल काम ज्यादा है, पहले काम करते है, स्कूल में कॉम्पिटिओं है तो फिर दो तीन दिन टाइम न मिले.

रंजन : पता नहीं क्यों, पर मेरा दिल बहोत घबरा रहा है.

शिव : ऐसा क्या हो गया जो तुजे दर लग रहा है.

रंजन : कुछ भी नहीं हुआ है, पर पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की कुछ बहोत hi बुरा होनेवाला है.

शिव : ऐसे hi घबरा रही है, (उसके होठ चुम कर) में हु न, तू चिंता मात कर.

फिर हम लकडिया काटने लगे. अंदर होने तक मेने लकडिया कटी. जब हम दोनों अनाथालय के दरवाजे पर पहुंचे तो मुझे अंदर से मैनेजर की आवाज सुनाई दी. वो चिल्ला रहा था. में सोच में पद गया की ये क्यों चिल्ला रहा है, लगता है उस दिन की मार भूल गया. में जल्दी से अंदर गया.
 
अपडेट 52

में जब अनाथालय के अंदर पंहुचा तो मेने देखा की मैनेजर सब पर चिल्ला रहा था. रंजन, विणा और सरिता दीदी वह खड़े थे.

मैनेजर : पैसे किसने लिए है, मुझे बता दो वर्ण अच्छा नहीं होगा.

सरितादिदी : सच में, मुझे कुछ पता नहीं है.

मैनेजर : तो मेरे ऑफिस की चीजे इधर उधर क्यों थी, सीधे सीधे बता दे warna...(Saritadidi रोने लगी, मैनेजर की नज़र मुज पर पड़ी और उसने मुझे आवाज दी.) ै कामचोर इधर aa.(Uski आवाज इतनी जोर की थी की अंदर लता ने भी ये सुना तो वो घबरा gayi.)Tu जनता है पैसो के बारे में?

शिव : (उसकी आवाज में जरा भी दर नहीं था, में समाज नहीं प् रहा था की ये अचानक कैसे बदल gaya)Kaise पैसे?

मैनेजर : मेरी ऑफिस में से दस हजार रुपया गायब हुए है, तूने तो नहीं चुराए.

शिव : में नहीं जनता, मेने कोई पैसे नहीं लिए.

मैनेजर : मेरे साथ अकड़ के बात करता है, अपने आपको बहोत बड़ा तिस मर खा समाज रहा है, हरामी साला, मेरे पर हाथ उठाया था न, अब देख में तेरी क्या हालत करता हु. (सरितादिदी को) ऑफिस की चाबी तेरे पास hi रहती है न, तो तूने hi पैसे चुराए होंगे.

सरितादिदी : (रट हुए) मेने कोई पैसे नहीं लिए, मुझे कुछ पता नहीं है.

लतादिदी : (वो भी वह आ gayi)Ye ऐसा कुछ नहीं कर shakti(Dari हुई आवाज में.)

मैनेजर : तो तू भी आ गयी. में भी सोचु ये महारानी अभी तक क्यों नहीं दिखी.

शिव : आप दीदी से ऐसे बात मात करिये.

मैनेजर : क्या! क्या कहा बे? मुझे आंखे दिखा रहा hai.(Mera गिरेबान पकड़ते hue)Kya कर लेगा तू?

लतादिदी : (अपने हाथ जोड़ते hue)Use माफ़ कर दीजिए, वो अभी बच्चा है.

मैनेजर :(लतादिदी को धक्का देते hue)Hat Sali.(Muje गुस्सा आया तो मैंने मैनेजर का गिरेबान पकड़ liya)Mera गिरेबान पकड़ ता hai(Muje एक झपट mara)Sale बहोत चर्बी चढ़ी है, मुझे मारा था न, चल आज मर के dikha(Sab लड़कीअ दरी हुई थी)( उसने मुझे और दो तीन मर दिए, में समाज नहीं प् रहा था की ये अचानक कैसे बदल गया, उसकी मर का मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा था पर, उसके ऐसे बर्ताव को में समझने की कोशिस कर रहा था, इसमें अचानक इतनी हिम्मत कहा से आगयी, आखिर ये करना क्या चाहता है, वो मुझे क्यों उकसा रहा है की में उसे मरू, अपने आप को सँभालते हुए मेने सामने हाथ नहीं उठाया) क्यों क्या हो गया, मार न, मार मुझे.

लतादिदी : उसे माफ़ कर दीजिये, वो बच्चा hai(Lata दीदी भी रोने लगी)

मैनेजर : बच्चा है, ये बच्चा है, सेल तुम सब मिले हुए हो, सीधे सीधे बता दो पैसे किसने लिए है वर्ण में पुलिस को बुलाऊंगा. (मेरी और देख kar)Ya तो पैसे तूने लिए है या सरिता ने, सच सच बता दे, कहा है पैसे.

शिव : (मेने शांति से जवाब दिया) मैंने कोई पैसे नहीं लिए, में कुछ नहीं जनता.

मैनेजर : तुम लोग ऐसे नहीं मानोगे, रुको में पुलिस को hi बुलाता hu(Apne प्लान के मुताबिक, मैनेजर ने इंस्पेक्टर को फ़ोन कर दिया, थोड़ी hi देर में पुलिस की गाड़ी वह आ गयी, एक इंस्पेक्टर (जो की 50 साल के करीब का होगा, भरी शरीर और 6 फिट के करीब की हिघ्त, रंग शवला था और मोती मुँछोंवाला,) और दो हवलदार अंदर आये)

इंस्पेक्टर : किसने फ़ोन किआ tha(Wo जनता था, फिर भी उसने पूछा)

मैनेजर: मेने किआ था साहब, मेरी ऑफिस में से किसी ने दस हजार रुपए चुराए है.

इंस्पेक्टर : तुम कैसे कह शक्ति हो की पैसे चोरी हुए है?

मैनेजर : साहब, मेने खर्चे के लिए पैसे टेबल की ड्रावर में रक्खे थे, जब में वापस आया तो वह नहीं थे.

इंस्पेक्टर : ऑफिस खुली होती है?

मैनेजर : नहीं साहब, उसपे टाला लगा होता है पर चाबी इसके पास होती hai(Saritadidi की और इस्सर करते हुए)

इंस्पेक्टर :(सरितादिदी की और गया, वो उसे ऊपर से निचे देखने लगा, वो दूसरी लड़कीओ को भी देख रहा था, उसके मुँह में पानी आने लगा था, उसका लुंड भी हरकत कर रहा था, उसने अपने आपको संभाला और नाटक जारी rakkha)Tu क्या कहना चाहती है? क्या तूने पैसे लिए है, सच सच बताना वर्ण मुझे और भी तरीके आते है.

सरितादिदी : (रट हुए) नहीं साहब, मेने कोई पैसे नहीं लिए, मेने सफाई की थी तब भी वह कोई पैसे नहीं थे. में सच कह रही हु. (इंस्पेक्टर ने मैनेजर की और देखा)

मैनेजर : ये जूथ बोल रही है साहब.

इंस्पेक्टर : (सरितादिदी se)Tune चाबी किसी और को दी थी, चाबी कहा रहती है.

सरितादिदी : (वो कैसे कहती की उसने चाबी शिव को दी थी, और उसे पूरा विस्वास था की शिव कभी पैसे नहीं लेगा) नहीं, मेने किसी को नहीं दी, और चाबी मेरे कमरे में hi तंगी होती है.

मैनेजर : आप सब की तलाशी लो साहब, अभी पता चल जायेगा.

इंस्पेक्टर : (रोबीली आवाज़ me)Muje मात समजा की मुझे क्या करना है. कोण किस कमरे में रहता है?

मैनेजर : (इससरए से बताते hue)Wo कमरा, इस लड़की का hai(Sarita की और इस्सर करके), वो कमरा इन दो लड़कीओ का hai(Ranjan और विणा की और इस्सर करके), और वो कमरा इस लड़के और उसका hai(Meri और लतादिदी की और इस्सर करके)

इंस्पेक्टर : हवलदार, तुम दोनों उस दो कमरों की तलाशी लो, में इस कमरे की तलाशी लेता हु, और कोई भी यहाँ से हिलेगा nahi.(Inspector शिव के रूम में गया, उसने आस पास नज़र दौड़ाई और पैसे कहा रखने है वो जगह ढूंढने लगा, उसे एक कबत दिखाई दिया, उसने खोला उसमे एक ड्रावर भी था, जैसे hi उसने खोला उसे पैसे दिखाई दिए, उसकी आंखे चमक उठी, वो मान में सोचने लगा की चलो उसे पैसे नहीं रखने पड़ेंगे, उसने वो पैसे उठाये और बहार आ गया)

इंस्पेक्टर : पैसे मिल gaye.(Sarita दीदी चौकते हुए पैसे देखने लगी, उन्हें पता नहीं था की शिव के पास पैसे है)

शिव : (मेने kaha)Ye मेरे पैसे है.

इंस्पेक्टर : तेरे पैसे, कहा से आये ये पैसे?

लतादिदी : (वो जानती थी की ये शिव के पैसे है जो वो लाया था, वो बीचमे बोल padi)Ye उसी के पैसे है, वो जहा नौकरी करता है वह से लाया है.

इंस्पेक्टर : कितनी पगार है तेरी?

शिव : ढाई हज़ार.

इंस्पेक्टर : कितने टाइम से नौकरी कर रहा है?

शिव : एक महीने से?

इंस्पेक्टर : ढाई हज़ार पगार और अभी एक महीना hi हुआ है, ये पैसे दस हजार के करीब है.

शिव : मैंने इनके पैसे नहीं लिए. ये मेरे पैसे है. मैंने कोई पैसे नहीं चुराए.

इंस्पेक्टर : अब ये सब पुलिस स्टेशन में कहना. पकड़ लो इस्को.

सब रोने लगे थे. लतादिदी इंस्पेक्टर से हाथ जोड़ कर मुझे छोड़ ने के लिए कह रही थी. में सब से यही कह रहा था की मैंने पैसे नहीं चुराए पर कोई मान hi नहीं रहा था. मुझे पकड़ कर उन्होंने जीप में बिठा दिया.

मैनेजर :(धीमी आवाज में इंस्पेक्टर se)Yahi है वो कांटा, आज हाथ में आया है, अच्छे से खातिरदारी करना.

इंस्पेक्टर: (तुम भी अपना वडा याद रखना)

मैनेजर : आप बेफिक्र रहिये. बस ये बहार न आने पाए.

पोलिसवाले : तुम उसकी फ़िक्र मात करो. वैसे भी ये अनाथ है, कोण इसकी फ़िक्र करेगा, में केस बनाकर इससे अंदर कर hi दूंगा. (पुलिस मुझे लेकर चली गयी. मैनेजर अनाथालय के अंदर आया.)

मैनेजर :(लता se)Ab तो वो गया लम्बे टाइम के लिए. तू तयारी करले.

लतादिदी : (बहोत दर गयी thi)Use छोड़ दीजिये, उसने कुछ नहीं किआ है.

मैनेजर : (धीरे se)Me जनता हु उसने कुछ नहीं किआ, मेरे रस्ते में आ रहा था साला. और तू चाहती है की वो वह भी सलामत रहे तो मेरी बात मन जा.

लता अपना चेहरा छुपा कर जोर जोर से अपनी किस्मत पर रोने लगी. मैनेजर पुलिस स्टेशन की और चला गया. रंजन, विणा और सरितादिदी सब लतादिदी के पास बेथ गए.

सरिता : (सरिता को समाज नहीं आ रहा था की शिव के पास पैसे कहा से आये) लता ये पैसे?

लता : वो इन लोगो को यूनिफार्म लेने थे तो उसने, वो जहा नौकरी करता है वह से मांगे थे.

सरिता : पर उनके यूनिफार्म तो आ भी गए, अगर उसके लिए पैसे लाया था तो वो खर्च हो जाने चाहिए, तो फिर अभी तक उसके पास पैसे कैसे है?

लता : तू उस पर शक कर रही है?

सरिता : नहीं, तू गलत समाज रही है, में इस्सलिये ये समझने की कोशिस कर रही हु ताकि शिव को कैसे बचाया जाये वो सोच सके.

रंजन : यूनिफार्म के पैसे वो अपने साथ ले कर आया था पर उसके साथ एक मैडम थी जिन्होंने उसे वो पैसे देने नहीं दिए, बिल के पैसे उस मैडम ने hi दिए थे.

सरिता : कोण सी मैडम ने दिए थे?

रंजन : उसने बताया था की वो वही मैडम थी जहा वो काम करता है.

सरिता : लता, वो कहा काम करता है?

लता : ठीक से तो पता नहीं पर कोई बड़ा सा गयम है.

रंजन : कोई कांटेक्ट नंबर या और कुछ है दीदी?

लता :पता नहीं उसके बैग में या उसे ड्रावर में कुछ हो तो.

रंजन : में देखती हु दीदी( रंजन ने सब ढूंढा पर कुछ नहीं मिला. वो याद करने लगी, उस मैडम का क्या नाम बताया था शिव ने (वो अपने दिमाग पर जोर दाल कर याद करने लगी, अचानक उसे याद आया) है, स्नेहा madam.(Wo बहार aayi)Didi अंदर तो कुछ नहीं मिला पर मुझे उस मैडम का नाम पता है, में जाकर ढूंढती हु.

लता : इतने बड़े सहर में कहा ढूंढे गई.

रंजन : दीदी, यहाँ ऐसे बड़े गयम बहोत नहीं है, मिल जायेगा, हमें तरय तो करना hi होगा.

लता : ठीक है, अकेले मात जा. विणा को भी साथ ले जा.

रंजन : ठीक है दीदी, चल विणा.
 
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