Adultery Kundali Bhagya - Page 2 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

होश वालो को खबर क्या...

बेखुदी क्या चीज़ है...

इश्क़ कीजिये फिर समजिये...

ज़िन्दगी क्या चीज़ है...
 
अपडेट 5

मेने देखा की दीदी ख़यालोमे खोयी बैठी है. मेने एक दो बार पुकारा पर उसने न सुना. तो मेने सामने घुटनो के बल बेथ कर उन्हें कंधे से हिलाया तब जेक उसे होश आया. अपने सामने शिव को देख कर वो हड़बड़ा गयी. वो फ़ौरन कड़ी हो गयी. शिव भी खड़ा हो गया.

लता : (हड़बड़ाहट में) तू कब आया?

शिव : (उनको जवाब न दे कर मेने उनके दोनों कंधो पर हाथ रख कर सवाल kia)Kya हुआ दीदी?

लता : (अपना सर उठाये शिव आँखों ने देखने लगी, कैसे वो उसकी परवाह कर रहा था फिर उसे सरिता वाली बात याद आ गयी तो उसने शर्माकर मुस्कुराते हुए अपना सर झुका लिया और धिरे से boli)Kuchh नहीं.

शिव : (मेने भी आगे कुछ न पूछा, में इस प्यारे से मुस्कुराते चेहरे को देख रहा था) चलिए सोना नहीं है क्या.

लता : चल में बिस्तर लगाडेति हु. फिर उसने बिस्तर लगा दिया.

शिव को पता था किसी बात पर दीदी असहज है तो. उसने बिस्तर पर लेट ते hi अपना एक हाथ खोल्दिया.

शिव : दीदी आप मेरे साथ में सो जावा.

लता ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए उसके हाथ पर अपना सर रख कर उसके साथ लेटगयी. शिव ने तुरंत उनको अपने आगोस में ले लिया. लता का दिल तो जैसे धड़कन hi चूक गया. ऐसा नहीं था की वो पहले कभी इस तरह सोई नहीं थी पर आज कुछ बात अलग थी. वो शिव की तरफ मुद कर लेती थी तो उसका चेहरा शिव की गर्दन के पास था. उसकी गरम सांसे शिव के गले से टकरा रही थी. शिव को भी ये आनंद दे रहा था तो उसने और लता को अपनी बहो के घेरे में कास लिया और लता भी अपने नाम के मुताबित किसी lata(bel)ki तरह उसके साथ लिपट गई. कमरे में सन्नाटा छाया हुआ था पर दोनों को एक दूसरे की सांसे सुनाई दे रही थी. लता आंखे बंद किये हुए शिव की महक को महसूस कर रही थी और अनजाने hi अपनी नाक शिव की गर्दन पर होल होल रगड़ रही थी. शिव का भी हाथ उनकी पीठ को सहलाने लगा. शिव प्यार से दीदी की पीठ को सेहला रहा था पर ऐसा करने से उसके शरीर में तरंगे उठने लगी थी. लता दीदी का गरम गरम बदन उसके अंदर हलचल पैदा कर रहा था. लता को भी ये स्पर्श उत्तेजित कर रहा था, उसने भी अपना हाथ शिव पे दाल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगी. शिव के शरीर की गंध उसके अंदर मादकता भर रही थी. उसकी आंखे नशे में बंद हो चुकी थी. दोनों काफी देर से एक दूसरे को सेहला रहे थी. शिव ने महसूस किआ की उसका निचे का अंग खड़ा हो चूका है. उसे दर लग रहा था कही लता दीदी को पता न चल जाये. लता उस कड़े अंग को भलीभांति महसूस कर रही थी, उस कड़े अंग की चुभन उसे आनंद दे रही थी और उसकी छूट चिपचिपा रास बहा रही थी. वो अंग उसकी छूट से थोड़ा ऊपर छू रहा था. एक अजीब सी बेचैनी उसके अंदर भर रही थी. उसे वो चुभन इतनी प्यारी लग रही थी की वो छह रही थी की वो चुभन और थोड़ा निचे हो जहा उसकी छूट पानी बहा रही थी. वो जवान हो गयी थी और इन बातो को थोड़ा थोड़ा समझने लगी थी. पर उसे ये एहसास ऐसा आनंद देनेवाला होगा इसका अनुमान न था. दोनों के शरीर अपनी प्रकृति अनुसार अपना काम कर रहे थे, दो no का दिल छह रहा था की कुछ करे पर दोनों को समाज नहीं आ रहा था की क्या kare.Dono को एक अंजना पर्दा रोके हुए था. दोनों का एक दूसरे को यु सहलाना किसी भी तरह से भाई बहन वाला प्यार नहीं दिख रहा था. सांसे भी बढ़ने लगी थी, दोनों यही क्रिया दोहरा रहे थे. इस से आगे कुछ करने की दोनों की hi हिम्मत नहीं हो रही थी. ऐसे hi जब काफी वक़्त गुजरा और दोनों को पता न चला कब वो नींद की आगोस में चले गए. सुबह जब लता की आंख कुली तो उसे अपने ऊपर कुछ महसूस हुआ जब उसे महसूस हुआ की ये क्या है तो उसकी जैसे सांसे hi थम गयी.

ये शिव का हाथ था जो उसके दाहिने स्तन को थामे हुए था. शिव के हाथ का पंजा काफी बड़ा था तो उसका पूरा स्तन उसकी पकड़ में था. हलाकि शिव ने पकड़ा हुआ नहीं था बस उसके ऊपर हाथ रखा हुआ था. पर लता की हालत hi ख़राब हो गयी. उसकी समाज में नहीं आ रहा था की क्या करे. उसने अपनी नज़ारे तिरछी करके शिव की और देखा तो वो चैन से सोया हुआ था. उसको ये भी ध्यान आया की शिव का एक पेअर उसके ऊपर है और उसका घुटना बिलकुल उसकी छूट पे दबा हुआ है. ये उसके बर्दास्त के बहार था. आज उसे पहली बार किसी पुरुष के कारन अपने शरीर में हो रहे बदलाव महसूस हो रहे थे. अपने स्तन को यु शिव के हाथो में महसूस कर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी और उसके शरीर ने इस रोमांच का स्वागत करते हुए अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. उसके यौवन कुंड में रास भरने लगा और उसकी सांसे बढ़ने लगी. उसकी धड़कन तेज चल रही थी और उसकी निगाहे शिव पर hi तिकी हुई थी. शिव का चेहरा उसे आकर्षित कर रहा था उसकी इच्छा हुई की वो उसे होठो को चुम ले पर हिम्मत न जूता सकीय. वो उसके होठो के इतने नजदीक थी की वो अपने होठो पर उसके नाक से निकल रही गर्म सांसो को भी महसूस कर रही थी. कुछ देर यु hi गुजर गया और शिव यु hi सोता रहा तो उसने अपना हाथ उठाया और शिव के हाथ के ऊपर रख दिया जो स्तन पर रखा हुआ था. वो दर रही थी और उसकी निगाहे शिव पर hi तिकी हुई थी. कुछ पल ऐसे hi गुजरे. जब शिव की और से कोई प्रतिक्रिया न हुई तो उसके हलके से शिव का हाथ दबाया जिस से उसका स्तन भी दबने लगा. उसका आनंद दोगुना हो गया. वो बार बार यही क्रिया दोहराने लगी. उसकी आँखों में नशा सा छाने लगा था और उसकी छूट गीली होने लगी थी. उसको ये अहसास, की शिव उसकी चूचिया दबा रहा हे, पागल बना रहा था. पर ये ज्यादा देर न चला क्यों की शिव ने थोड़ी हलचल की और लता दर गयी और उसने फ़ौरन अपनी आंखे बंद कर ली और अपना हाथ हटा लिया. लता के हाथ दबाये जाने पर शिव की नींद टूटने लगी. जब शिव की नींद पूरी तरह टूटी तो उसने आंखे खोली तो वो भी चौंक गया. वो लता के ऊपर अपनी एक तंग चढ़ाये सोया था और उसका हाथ उसकी एक चुकी के ऊपर था. उसको जतका लगा और उसने फ़ौरन अपना हाथ हटा लिया और अपनी तंग भी और लता की और देखने लगा. लता सोने का नाटक कर रही थी तो शिव को लगा की वो सोई हुई है.

शिव : (मान me)Bal बल बचा, दीदी ऐसे उसे देख लेती तो न जाने क्या होता.
 
में लता दीदी को गौर से देखने लगा, में उस प्यारे से चेहरे में खो सा गया. वो उनके साथ बचपन से था, उसने छोटी लतादिदी को भी देखा था और अब एक पूर्ण परिपक्व हो चुकी लतादिदी को देख रहा था. अब वो खुद जवान हो चूका था तो उसके अंदर कुछ नयी भावनाये उभरने लगी थी. वो लड़कीओ की और आकर्षित हो रहा था. हलाकि उसे पता न था की लड़कीओ के साथ करते क्या है पर कुछ अजीब सा वो महसूस कर रहा था. जब उसकी नजर ऊपर निचे हो रहे स्तन पर गयी तो वो उन्हें बड़े गौर से देखने लगा. उसको याद आया के कैसे वो कुछ देर पहले लतादिदी का एक स्तन पकड़े हुए था तो उसके दिल में हलचल होने लगी. एक तो वो पहले hi रंजन के उभारो को देख के बावला हुआ पड़ा था और ऊपर से अभी ये स्कीन. जब उसने देखा की लतादिदी सोई हुई है तो वो उनके स्तनों को देखने लगा. उनके भरे हुए स्तन उसको आकर्षित करने लगे.

में ऊपर निचे होते हुए उन उभारो को तक ताकि लगाए देख रहा था. बार बार मेरी नजर लतादिदी की आँखों की और जा रही थी. मुझे ये दर भी लग रहा था की अगर दीदी जाग गयी तो क्या होगा. ऐसे hi कुछ समय बिता, में ने देखा की दीदी गहरी नींद में खोयी हुई है तो मेने दोबारा अपना हाथ जैसे था वैसे उसके स्तन पर रख दिया. अपने पंजो के निचे वो नरम नरम एहसास अजीब लग रहा था. मेरा शरीर गरम होने लगा और लैंड अकड़ने लगा. मेने फिर लतादिदी की और dekha.(Lata अपने भाव को बड़ी मुश्किल से छुपाये हुए सोने की एक्शनग कर रही थी. उसे ये अपेक्षा hi नहीं थी की शिव ऐसा करेगा पर जब शिव ने दोबारा उसके स्तन पर हाथ रक्खा तो वो और उत्तेजित होने लगी. उसको अपनी सांसो को संभालना भी मुश्किल हो रहा था.) मेने दबाये बगैर हलके से उसको थम कर उसके आकर का जायजा लिया. में लतादिदी को hi देख राटा था. मुझे लतादिदी बहोत पसंद थी, ीा दुनिया में वही थी जिसके सहारे वो इतना बड़ा हुआ था. ये ख्याल आते hi मुझे एहसास हुआ की में किसके साथ ये कर रहा हु तो मुझे ग्लानि हुई और मेने फ़ौरन अपना हाथ हटा लिया और बिस्तर से निकल कर बाथरूम में चला गया.

जब शिव चला गया तो लता ने आंखे खोली और शिव जिस और गया था उस और देखने लगी. उसे शिव की पीठ hi दिखयी दी. वो भी असंजस में थी की क्या hi रिएक्शन दे. भले खून का न सही पर वो उसका भाई था. पर पता नहीं क्यों पर उसको ये अच्छा लगा था, जिस तरह से शिव ने उसके शरीर को छुआ था वो उस एहसास को पसंद करती थी . उसने फिर से आंखे बंद कर ली और वो ऐसे hi सोई रही. शिव बाथरूम से निकला और कपडे पहन ने लगा क्यों की उसको गयम जाना था. ये सब आवाज सुन कर लता ने आंखे खोली और वो बिस्तर पर बैठ गयी. जब मेने लतादिदी को जगा हुआ पाया

शिव: गुड मॉर्निंग दीदी.

लता :(कड़ी होते हुए) गुड मॉर्निंग Shiv,Tu तैयार भी हो गया.

शिव : है दीदी. थोड़ी देर हो गयी है, दौड़ते दौड़ते जाऊंगा तो टाइम से पहुंच जाऊंगा.

लता : ये दौड़ तेरी ख़तम hi नहीं होती. बचपन से देख रही हु, हमें स्कूल जाना होता था तब भी हमे दौड़ कर जाना पड़ता था. अभी भी तेरा ये हाल है और अब ये गयम के लिए.

शिव : ऐसी बात नहीं है दीदी, वो हमें मज़बूरी में दौड़ना पड़ता था पर ये में इस लिए करना चाहता हु की सुबह सुबह दौड़ना सेहत के लिए अच्छा होता है और शरीर भी मजबूत होता है.

लता : (मुस्कुरा kar)Aur कितना मजबूत होगा. देख खुद को खम्भे जैसा लम्बा हो गया है और शरीर कितना सख्त हो चूका है.

शिव : वो तो करना hi होगा, मुझे इस काबिल बन न है की मई मेरी दीदी को वो हर ख़ुशी दे सकू जिसकी वो हक़दार है.

लता : (शिव की बातो से वो भावुक हो जाती है, वो उसके गले लग जाती है और शिव भी उसे अपनी बहो में समेत लेता hai)Muje कुछ नहीं चाहिए, मुझे तू मिला है ये hi मेरे लिए सब कुछ है. मुझे और किसी चीज की जरुरत नहीं.

शिव : में तो हु hi आपके साथ पर में आपको ऐसी जिंदगी देना चाहता हु जहा आपके पास हर प्रकार का सुख और सुविधाए हो.

लता कुछ नहीं बोलती वो उसका प्यार महसूस कर रही थी. वो और उसकी बहो में सिमट जाती है. सच में जब से उसके जीवन में शिव आया था तब से उसे लगता था की जैसे उसकी जिंदगी का मक़सद मिल गया हो.

शिव : (उनके माथे को चुम कर) में चलता हु दीदी, कही लेट न हो जाऊ.

लता : (उसके गाल को चुम kar)Thik है, संभलकर जाना.
 
में वह से निकल गया. सुबह का वक़्त था और आसमान अब हल्का हल्का रोशन होने लगा था. हलाकि सड़क की बत्तिया अभी जल रही थी और रस्ते पे ekka-dukki वहां भी नजर आ रहा था. वो बैग को अपने कंधे पे लटकाये दौड़ना सुरु करता है. अब उसके लिए दौड़ना जैसे चलने के बराबर था. बचपन से दौड़ते दौड़ते वो अब इतना मजबूत हो चूका था की वो आराम से लम्बी दौड़ लगा सकता था. ऐसे hi दौड़ते दौड़ते में गयम के नजदीक पंहुचा hi था की एक स्कूटर ने उसको ओवरटेक किआ और गयम के पास रुका. ये जूही मैडम थी. में उनके पास पंहुचा और गुड मॉर्निंग मैडम कहा. उन्हों ने भी स्माइल के साथ गुड मॉर्निंग शिव कहा.

जूही मैडम: तुम दौड़ क्यों रहे थे शिव?

शिव : वो बस ऐसे hi, सुबह सुबह एक्सेरसिस हो जाती है और जल्दी से गयम भी पहुंच जाता हु.

जूही मैडम: सही कहा तुमने, वैसे किस तरफ रहते हो तुम.

शिव : जी जानकीदास अनाथालय में.

जूही madam:Kya? तुम अनाथालय में रहते ho?Sorry, मुझे पता नहीं था.

शिव : आप क्यों सॉरी फील कर रही है मम, मुझे कोई शिकायत नहीं है जिंदगी से. जिस हल में हु अच्छा हु.

जूही मैडम: That’s ग्रेट. सच में ख़ुशी हुई तुम से मिल कर.

फिर वो मेरे बारेमे पूछ ने लगी और बताता गया उतने में पवन सर भी आ गए तो हम लोग अपने अपने काम में लग गए. ज्यादातर औरते hi थी और दो तीन लड़कीअ जो शायद अपना वजन घटना चाहती थी. जूही मैडम उनकी हेल्प कर रही थी और वो उनके कहे अनुसार कर रही थी. ज्यादातर का ये रूटीन हो चूका था तो जूही मैडम फ्री hi होती थी तो वो भी कसरत कर लेती थी और बिच बिच में दुसरो को गाइड कर रही थी. जूही मैडम भी एकदम शेप में थी. और चुस्त कपड़ो में उनके सरे कटाव दिख भी रहे थे. एक लड़का होने के नाते लड़कीओ को देखना सायद स्वाभाविक hi था. मेरे मान में और कोई भावना नहीं थी. तो में वह पड़ी किताबे भी पढ़ लेता था. वह पर मस्सगे टेक्निक्स कर के किताब भी पड़ी हुई थी तो में वो पढ़ रहा था. ऐसे hi फिर लड़को की बरी भी आयी और वो भी ख़तम हुआ और में सब ठीक कर कर घर निकल गया. दोपहर में, रंजन और विणा पढ़ाई करने बैठे. रात को फिर मई लता दीदी के साथ चिपक कर सो गया. ये जैसे रोज का रूटीन बन चूका था. मैनेजर कभी कभी दीखता था और ज्यादा ता गायब hi रहता था. रंजन से भी कोई खास बात न हुई थी वो दूर दूर hi रह रही थी. ऐसे hi वो दिन भी आ गया जब हमारे स्कूल चालू हो रहे थे. 11 बजे का स्कूल था तो में दौड़ कर घर और फिर तैयार हो कर स्कूल निकल गया. मेरा स्कूल अलग था और रंजन और विणा का स्कूल अलग था. मेरे स्कूल में सिर्फ ग्यारवी और बारहवीं के छात्र और छात्राये थी. सहर में ये काफी जाना मन स्कूल था और अच्छे घरो के ladke-ladkia यहाँ पढ़ते थे. ऊपर से ये साइंस स्ट्रीम थी तो ज्यादातर अच्छे और होसियार लड़के लड़कीअ hi एडमिशन लेते थे. में जब स्कूल पंहुचा तो चारो तरफ काफी भीड़ थी. कई लड़के लड़कीअ अपने ma-baap के साथ ए थे क्यों की आज उनका पहला दिन था तो वो उन्हें छोड़ ने आये थे. कुछ साइकिल पे तो कुछ तवो व्हीलर ले के आये हुए थे. कही जगह लड़कीअ तो कही जगह लड़को का ग्रुप बना हुआ था. तो कही जगह इकट्ठे खड़े थे. वैसे भी मेरे दोस्त थे नहीं और ऊपर से अब रंजन और विणा भी अलग हो चुकी थी. कुछ जाने पहचाने चेहरे और कुछ अनजाने चेहरे नजर आ रहे थे. स्कूल अच्छी और शांत जगह पे था और स्कूल के आस पास काफी हरिया ली और पेड़ थे. एक तरफ बड़ा मैदान और एक और छोटासा गार्डन भी था. में अपना क्लास धुंध ते धुंध ते अपने क्लास में चला गया. अभी बहोत काम लड़के लड़कीअ आये हुए थे. जितने भी बैठे थे वो अपना ग्रुप बना कर बैठे थे तो में एक बेंच पे जा कर बेथ गया. थोड़ी देर में बेल्ल बजी तो और लड़के लड़कीअ क्लास में दाखिल हो गए. दो लड़के मेरे साथ में आ कर बेथ गए पर सायद वो दोस्त थे तो वो अपने में hi लगे हुए थे. में ऐसे hi नज़ारे घुमा रहा था और नए चेहरों को देख रहा था. कुछ लड़कीअ भी थी तो मेरी नजर वह भी चली गयी. कुछ ठीक थक थी तो कुछ अच्छी दिख रही थी और अभी पहला दिन था तो सब रंगबिरंगे कपडोमे थे तो और भी अच्छे लग रहे थे. में अपने सादे कपड़ो में था क्यों की हमारे पास ज्यादा कपडे नहीं होते थे. जो होते थे वो भी कोई न कोई अपने पुराने कपडे दान दे जाता था तो वही हमारे पास होते थे. पर जो भी थे उनमे से जो अच्छे थे वो पहन कर आया था. थोड़ी देर में टीचर भी आगयी. ये हमारी क्लास टीचर थी. उन्होंने अपना ित्रो दिया तो पता चला की उनका नाम बिना मैडम है. दिखने में ज्यादा उम्र की नहीं लग रही थी और सच कहु तो खूबसूरत भी थी. वो हमको फिजिक्स पढ़ने वाली थी. फिर सब का इंट्रोडक्शन चला और किसने 10तह में कितने परसेंट मिले है वो सब ने बताया. जब मेरी बरी आयी तो मेने मेरे परसेंटेज बताये तो सब मेरी तरफ ध्यान से देखने लगे, क्यों की सबसे ज्यादा मेरे hi परसेंटेज थे. मैडम के कहने पर सब ने तालिया भी बजायी.

एक लड़की जिसका नाम वैश्वि था जिसके सेकंड मोस्ट मार्क्स थे. पर वो आगे बैठी हुई थी तो में ठीक से देख न सका. उसने कोई महंगी ड्रेस पहनी हुई थी . रेसस्स के दौरान जो लड़का मेरे पास में बैठा था उसने मुझसे बात की.

लड़का : Hi, मेरा नाम हर्ष है और ये महेश है.

शिव :(हाथ बढ़ाते हुए) मेरा नाम शिव hai(aur महेश से भी हाथ milaya)Hi महेश.

हर्ष : तुम्हारा नाम तो शायद सभी को पता चल गया होगा, क्लास में टोपर जो हो.

शिव : (है कर) ऐसा कुछ नहीं है दोस्त.

महेश : अरे भाई सच कह रहा हु, वैसे अच्छा लगा के हमारे साथ में टोपर बैठा हुआ है पर में ये बता दू की हम पढ़ाकू नहीं है.

शिव : मैं भी पढ़ाकू नहीं हु, ये तो बस ऐसे hi मार्क अच्छे आ जाते है.

महेश : चलो कैंटीन चलते है कुछ खाएंगे और बाते भी करेंगे.

शिव : नहीं यार तुम लोग हो आओ में यही बैठा हु में टिफिन लेकर आया hu.(Aab उन्हें कैसे बताता की कैंटीन के लिए पैसे भी चाहिए होते है. और वैसे भी दीदी ने टिफिन बना कर दिया था)

महेश : ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी.

वो लोग चले गए. में वही बैठा रहा. ये छोटी रेसस्स थी तो जल्द hi ख़तम हो गयी वो दोनों भी लोट ए. मेने वैश्वि की और एक दो बार देखा पर उसका पीछे का भाग hi दिखा. खैर फिर दूसरे लैक्टुरे शुरू हुए और फिर वही दौर चला. ऐसे hi बड़ी रेसस्स भी हुई. वो दोनों कैंटीन चले गए और कई लड़कीअ भी चली गयी thi.Khair मेने अपना नास्ता किआ और में बाथरूम भी हो आया. मैंने ध्यान दिया की वो लड़की अपनी जगह नहीं थी शायद वो भी बहार गयी हो. वापस आकर में अपनी जगह बेथ गया और रेसस्स भी ख़तम हो गयी. हर्ष और महेश भी आ गए और हम ऐसे hi बाटे करने लगे. ऐसे hi स्कूल ख़तम हो गया. 5 बजे स्कूल छूटा तो घर की और निकल गया, कपडे चेंज किए और सबसे थोड़ी देर बाते की उसके बाद गयम पहुंच गया. वह भी सब निपटा के रात को 8:30 को घर पंहुचा. दीदी रोज की तरह आज भी मेरा इंतजार कर रही thi.Dono साथ मिलकर खाना कहते है. और स्कूल की बाते करते है. ऐसे hi दो तीन दिन निकल गए.

ऐसे hi एकरात को खाना खा कर हम तीनो पढ़ने बैठे थे. रंजन अभी भी ज्यादा बात नहीं कर रही थी. थोड़ी देर तो हम तीनो पढ़ाई कर रहे थे की तभी विणा ने रंजन के कान में कुछ कहा तो रंजन ने ना में इशारा किआ. मुझे कुछ समाज नहीं आया पर फिर विणा उठकर बहार गयी.
 
योर कमैंट्स प्लीज???
 
अपडेट 6

ऐसे hi एकरात को खाना खा कर हम तीनो पढ़ने बैठे थे. रंजन अभी भी ज्यादा बात नहीं कर रही थी. थोड़ी देर तो हम तीनो पढ़ाई कर रहे थे की तभी विणा ने रंजन के कान में कुछ कहा तो रंजन ने ना में इशारा किआ. मुझे कुछ समाज नहीं आया पर फिर विणा उठकर बहार गयी.

शिव : कहा गयी वो?

रंजन : (उसने मेरी और देखा और फिर शर्माकर नज़ारे नीचे कर li)Aa रही है वो, थोड़ी देर me(Wo पेशाब करने गयी थी).

शिव : तुम क्यों ऐसे बिहावे कर रही हो? (रंजन ने मेरी और देखा, फिर अपनी नज़ारे झुका ली, मेने उसके हाथ पर हाथ रक्खे hue)Wo सब अचानक हो गया था, तुम्हे शर्मिंदा होने की जरुरत नहीं है. हम बचपन से साथ है और हमने कई बार ऐसे एक दूसरे को देखा है फिर...

रंजन : (आज रंजन को शिव का यु हाथ पकड़ना कुछ अजीब लग रहा था, उसका शरीर कंपनी लगा था, उसने मेरी और नज़ारे उठायी और धीमी आवाज me)Us वक़्त हम बच्चे थे.

शिव : तो अभी कोनसा बड़े हो गए है. तुम वो सब छोडो और नॉर्मली रहो जैसे पहले रहती थी सामजी. तुम hi तो हो जो मेरे साथ खेलती हो बाते करती हो, अगर तुम यु दूर दूर रहने लगोगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा. तो वो सब भूल जाओ और मेरे साथ सहज तरीकेसे hi रहो.

उसने सिर्फ है में गर्दन हिलायी. उतने में विणा के वापस आने की आहत हुई और मेने अपना हाथ हटा लिया. फिर विणा आ गयी और हमने फिर से पढ़ना सुरु किआ. रात को में अपने कमरेमे गया तो दीदी बिस्तर पर लेती हुई थी. मेने एक नजर उन्ही देखा और न चाहते हुए भी एक बार मेरी नजर उनके उभारो पर चली गयी जिसे शायद दीदी ने भी देखा. में उनके बाजु में जेक लेते गया. थोड़ी देर हम दोनों में छुपी छायी रही. में उन्हें hi देख रहा था और वो मुझे. अब मुझे दूर दूर रहना अच्छा नहीं लगता था तो मेने अपना हाथ फैला दिया जैसे उन्हें आमंत्रण दे रहा हु और वो भी समाज गयी और खिसक कर मेरे नजदीक आ राई और मेरी बाजु पर अपना शिर रख दिया तो मेने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया और उन्होंने भी अपनी बहे मुज से मेरे इर्दगिर्द लपेट दी. उन्हें यू आगोश में लेने से मेरे दिल को सुकून मिल रहा था, ये क्या था मुझे नहीं पता.

शिव : अब मुझे ऐसे hi नींद आती है दीदी, आप को कोई दिक्कत तो नहीं है न ?

लता : (मुस्कुराते हुए शिव को और कास के पकड़ती है, उसका दिल भी शिव की बहो में रहने का करने लगा था, वो भी एक पूर्ण जवान लड़की thi)Nahi शिव, और शायद सच कहु तो अब मुझे भी ऐसे hi अच्छा लगता है.

शिव :(मेने उनकी पीठ को सहलाना सुरु किआ, वो नरम नरम एहसास मुझे बहोत पसन् आ रहा tha)Didi आप बहोत नरम नरम हो.

लतादिदी :(मुस्कुराते हुए उन्हों ने भी मेरी पीठ पे हाथ चलना शुरू कर diya.)Aur तू सख्त है, तू कितना बड़ा हो गया है न, तेरे सामने में कितनी छोटी लगती हु. (वो अपनी नाक और गाल शिव के गले पे रगड़ रही थी और वो भी अपना गाल उनके साथ रगड़ रहा था. उनकी गर्म सांसे लता अपने जिस्म पर महसूस कर रही थी, उसके बदन की वो गर्माहट और उसके सांसो की गर्मी, लता को पिघला रही थी)

शिव : (दीदी को ऐसे अपनी बहो में बर्न से मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और उनको भी शायद मेरा ऐसा करना अच्छा लग रहा था, उसके गर्म जिस्म को सहलाने से मेरे अंदर कुछ हो रहा था. उनकी पतली उंगलिया मेरे सख्त जिस्म पर जादू कर रही थी, इस रगड़ से मेरा लुंड खड़ा होने लगा था और दीदी मुझसे निचे से भी चिपकी हुई थी तो मेरा लुंड उन्हें टच कर रहा होगा. में सोचने लगा की क्या दीदी को पता होगा, पता नहीं पर मुझे एक अजीब सा आनंद मिल रहा tha)Meri प्यारी didi(Mene उन्हें अपनी बहो में कास लिया)

Latadidi:(Lata भी शिव के लुंड की चुभन भांप चुकी थी और उसके शरीर का तापमान भी बढ़ रहा था. उसका जवान शरीर इस अंग को शायद पहचानता था, उसके अंदर हलचल सी हो रही थी, उसे अपनी योनि में सरसराहा महसूस होने लागि, वो अपनी कमर आगे करते हुए उस कड़क अंग पर और दबाव बढ़ा रही थी, वो इस चुभन को और ज्यादा महसूस करने के लिए अपनी कमर का दबाव लगातार बढ़ा रही थी, उसकी आंखे खुमारी में बंद होती जा रही थी, वो शिव को कास के अपनी बहो में भर रही थी. उनके हाथ का दबाव भी शिव की पीठ पर बढ़ रहा था.)

अब ये खेल उन्हें मज़ा देने लगा था, तो दोनों मज़े से खेल रहे थे. उन दोनों में थोड़ी जीजाक काम हो गयी थी तो दोनों इत्मीनान से ये सब कर रहे थे. ऐसे hi ये खेल आधा घंटा चलता रहा, करीब आधे घंटे बाद शिव को लगा की दीदी सो गयी है और लता को लगा शिव सो गया है. पर दोनों अभी भी जग रहे थे.

शिव : (मेने अपनी आगोश से लतादिदी को निकला और दीदी को सीधा किआ और उभे देख ने लगा.)( लता आंखे बंद किये लेती थी.) (में प्यार से लतादिदी के चेहरे को देख रहा था, प्यारा सा चेहरा, पतले गुलाबी होठ, सीधी सदी दिखने वाली एक खूबसूरत लड़की, मुज से रहा न गया तो मेने जुक कर उनके माथे को चूमा.) (लता अपने माथे पर शिव के गरम होठो को महसूस कर रही थी, उसे शिव का ऐसा करना बहोत अच्छा लगा. वो मान में मुस्कुरा रही थी.) (मेने एक बार उन्हें देखा और मेरी नजर उन प्यारे से होठो पे चली गयी जो एक दूसरे से चिपके हुए थे. आज पता नहीं मुझे क्या सूजी की में उन होठो की और बढ़ चला (जब शिव के होठ लता के होठो के नजदीक पहुंचे तो लता को उसकी गर्म सांसे अपने चेहरे पर महसूस होने लगी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसके शरीर से तरंगे उठने लगी, जवानी अपना असर दिखने लगी, उसके होठ भी फड़कने लगे जैसे उनको चाहत हो किसी चीज़ की.) मेने एक बार उनकी बंद आँखों को देखा, मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था, उनके होठ मुझे अपनी और खिंच रहे थे, मुझे क्या हो रहा था पता नहीं, मेने कभी ऐसा पहले महसूस नहीं किआ था, में झुकता गया और अपने होठ हलके से उनके होठो से चिपका दिए. (लता को यकीं नहीं हो रहा था की शिव ऐसा कर रहा है. शिव उसके होठो पे अपने होठ रखे हुए है, वो अपने होठो पे शिव के होठो का स्पर्श प् कर मचलने लगी, उसकी टैंगो के बिच उसे चिकनाहट महसूस होने लगी, वो अपनी टैंगो को आपस में सताने लगी.) में ऐसे hi थोड़ी देर रहा, दीदी के नाक से जैसे आग निकल रही थी, वो गर्म हवा मेरे होठो को जला रही थी, मेरे अंदर एक रोमांच पैदा हो रहा था, मेने देखा की लता दीदी सोई हुई है तो में धीरे धीरे उनके होठो को अपने होठो से पकड़ ने लगा. मुझे ज्यादा कुछ तो आता नहीं था पर कहते है न की ये बाटे किसी को शिखानी नहीं पड़ती ये इंसान के अंदर होती hi है. किसी बच्चे को दूध पीना सीखना नहीं पड़ता. मेरे होठो से निकल रहे रास से दीदी के होठ भीगने लगे, वो चिकना हैट मुझे और उत्तेजित करने lagi(Lata अपने जिस्म में उठती इन तरंगो को महसूस कर मचल रही थी, उस को भी लग रहा था की वो भी ऐसे hi उसके होठो के साथ करे पर उसे शर्म आ रही थी, जिसे तैसे अपने आप को सँभालते हुए वो ऐसे hi लेती रही. शिव ऐसे hi उसके होठो को चुम रहा था और उसके अंदर न जाने क्या क्या हो रहा था.). थोड़ी देर में ऐसे hi दीदी के होठो से खेलता रहा पर मेरे अंदर से आवाज आयी की” ये क्या कर रहा है”. तो में झटके से दूर हो गया. मेरे चेहरे पर पशीने की बुँदे उभर आयी, में लतादिदी के चेहरे को देखने लगा. ऐसी प्यारी और भोली सूरत की, किसी का भी दिल आ जाये. मुझे अपने आप पर शर्म आने लगी. में ये क्या कर रहा था वो भी अपनी दीदी के साथ. मेरे दिल ग्लानि से भर गया.

शिव : (धीमी आवाज me)Sorry दीदी, में अपने आप को रोक नहीं पाया. में कितना घटिया हु न, में आपके साथ ये कैसी हरकत कर गया.

कंटिन्यू....
 
ये कह कर में उठा और बहार निकल गया. में सीधा बाथरूम गया और फिर वह से किचन में पानी पिने चला गया. जब में वापस लौट रहा था तो उसे सामने से सरिता दीदी आती दिखाई दी. Ast-wyast कपडे और बल भी थोड़े बिखरे हुए थे. जब उन्होंने मुझे देखा तो वो थोड़ा ठिठक गयी और थोड़ा सा दर भी गयी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

सरिता : (अपने आपको सँभालते hue)kkkKuchh नहीं? में तो पानी पिने जा रही थी.

शिव : पर आप ऐसी हालत में?

सरिता :(अब वो क्या बोले की वो मैनेजर से छुड़वा कर आ रही है, बात को सँभालते hue)Woooo, अरे कोई इंसान नींद से उठेगा तो ऐसी hi हालत में होगा न. वो छोड़ तू क्या कर रहा है?

शिव : मैं भी पानी पिने hi आया था.

सरिता : ठीक है, में भी पि लेती हु. तुजे नींद नहीं आ रही है क्या?

शिव : नहीं तो, आप क्यों पूछ रही है ऐसा?

सरिता : अरे में तो इस लिए पूछ रही थी की अगर नींद नहीं आ रही तो थोड़ी देर मेरे साथ बात hi कर ले. वैसे भी तुम्हे कभी मेरे लिए टाइम तो मिलता नहीं तो सोचा अभी सही.

शिव : (सरिता दीदी को पानी पिटे हुए देख रहा tha)Aisa क्या कहती हो दीदी, में यही तो होता हु, और आपसे बात भी तो होती hi है.

सरिता : (पानी का गिलास रखते hue)Chal छत पर चलते है, यहाँ गर्मी भी बहोत है, छत पर ठंडक होगी तो अच्छा लगेगा.

शिव : ठीक है दीदी चलिए.

दोनों छत पर आ जाते है. छत काफी बड़ी थी. आसमान टिमटिमाते तारो से भरा हुआ था और चाँद की मद्धम रौशनी में सब दिख रहा था. छत पर चारो और 3 फ़ीट की बाउंडरी बानी हुई थी जिस पर अपनी पीठ टिकते हुए सरिता दीदी कड़ी थी और में उनके बगल में वैसे hi खड़ा हो गया.

सरिता : और ! कैसा चल रहा है सब, तेरा स्कूल और नौकरी?

शिव : सब ठीक hi है दीदी?

सरिता : मेरा मतलब है कोई स्कूल में गर्लफ्रेंड बनायीं की nahi?(Kehte हुए वो मुस्कुराती है)

शिव : (थोड़ा शर्मा जाता hai)Kya दीदी, अभी अभी तो स्कूल चालू हुआ है और में किसी को ठीक से जनता तक नहीं. और गर्ल फ्रेंड की बात कर रही हो, आपको पता तो है की कोई फ्रेंड तक नहीं बनता हम जैसो का.

सरिता : अरे मायूस क्यों होता है, हमे क्यों किसी की जरुरत पड़ने लगी, हम सब एक दूसरे के साथ है na,fir.

शिव : में मायूस नहीं हु दीदी, में तो बस आप को बता रहा था. और मुझे क्यों किसी की जरुरत पड़ने लगी. आप हो दीदी है, रंजन और विणा भी है.

सरिता : है वो तो है hi, पर फिर भी अगर गर्लफ्रेंड की जरुरत पड़े तो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बना lena.(Kehte हुए वो खिलखिला कर है देती है)

शिव :(झेपते hue)Kya दीदी, आप मेरी खिंचयी कर रही है.

सरिता : (उसके सामने कड़ी हो kar)Me कहा खिचाई कर रही हु, में तो सच कह रही हु. तू अब बड़ा हो गया है तो गर्लफ्रेंड तो चाहिए होगी tuje.(Fir वो मुस्कुराने लगती है)

शिव :(रूठते hue)Didi आप मेरा मजाक उदा रही है में जाता hu(Keh कर वो जाने लगता है)

सरिता : (उसे रोक ने के लिए उसका हाथ पकड़ लेती है और उसको खींचती है तो में लड़खड़ाते हुए सरितादिदी से टकरा गया, दीदी का बैलेंस भी डगमगाता है और वो पीछे खिसक कर बाउंडरी से सात जाती है और में उनके साथ चिपक gaya)Ouchh!(Didi के मुँह से हलकी आवाज निकली)

शिव : सॉरी दीदी, आप को लगी तो नहीं?

सरिता : नहीं लगी.

शिव : आपने hi खींचा था मुझे, ठीक है में जाता हु दीदी.

सरिता : तू तो नाराज हो गया.

शिव : आप बात hi ऐसी कर रही हो फिर.

सरिता : क्या गलत कहा मैंने? तू अब जवान हो गया है, जवानी में अक्सर कुछ करने की इच्छा होती है, क्या तुजे गर्ल फ्रेंड की जरुरत नहीं?

शिव : नहीं, मुझे कोई जरुरत नहीं.

सरिता : क्यों तू लड़का hi है na?(Muskurati है)

शिव : देखा फिर आप मजाक कर रही है.

सरिता : (मुस्कुराते hue)Maine क्या मज़ाक किआ, में तो बस पूछ रही हु की तू लड़का hi है न? क्यों की लड़के जब बड़े हो जाते है तो उन्हें गर्लफ्रेंड तो चाहिए होती है. और तू कह रहा है की हम जैसो को नहीं मिलती तो न तुजे मिलेगी न मुझे कोई मिलेगा. तो फिर क्यों न में तुम्हारी गिलफ्रेंड बन जाऊ तो हम दोनों का फायदा होगा.

शिव : देखा देखा अभी भी आप मेरी खिचाई कर रही हो.

सरिता : नहीं में कोई खिचाई नहीं कर रही, में बिलकुल सीरियस hu.(Me उनके चेहरे को देखने लगा, जो सीरियस था पर दूसरे hi पल वो खिलखिला कर हसने लगी)

शिव : में जाता हु (कह कर में वह से जाने लगा)

सरिता : अरे रुक तो, में अब मजाक नहीं karungi(Keh कर उसके पीछे पीछे भगति है, और उसे सीढ़ियों पर hi पकड़लेति hai)Rook तो.

शिव : मुझे जाने दीजिये, आप मेरी बहोत खिचाई कर चुकी.

सरिता : (शिव को धकेल कर दिवार से सत्ता देती है, यहाँ थोड़ा अँधेरा था, दरवाजे से छान की रौशनी थोड़ा उजाला किये हुए thi)Me भले पहले मजाक में कह रही थी पर अब में मजाक नहीं कर रही शिव, अब सच सच बता क्या तू मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाएगा?

शिव : ये क्या कह रही है दीदी?

सरिता : में तेरी दीदी नहीं हु, में एक अनाथ लड़की हु, और हो सकता है तुजे गर्लफ्रेंड की जरूरत न हो पर मुझे बॉयफ्रेंड की जरूरत है शिव. मेरी आँखों में देख, क्या में मज़ाक कर रही हु?

शिव : पर दी...

सरिता : (उसके होठो पे हाथ रख kar)Muje दीदी मत कह, तू नहीं जनता मेरे साथ क्या हुआ है शिव, पर मैं तुजे इतना बता देती हु की मुझे तेरी जरूरत hai.(Ye कह कर वो शिव के होठो को चूमने लगती है, (में बूट बाना उनके नरम गरम होठो का स्पर्श महसूस कर रहा था. वो मेरे होठो को भिगो रही थी, थोड़ी देर मेरे होठो को चूमने के baad)Sorry अगर तुजे बुरा लगा हो तो. मुझे सच में तेरी जरूरत है शिव. पर अगर तू नहीं चाहता तो ठीक है, सोचकर मुझे बताना. और है ये बात हमारे बिच hi रखना, लता को मात बताना.

ये कह कर वो वह से चली गयी. थोड़ी देर सोच में डूबा में वह खड़ा रहा फिर में अपने रूम में आ गया. जैसे hi में लेता लतादिदी मुझसे चिपक गयी, तो में उन्हें अपनी बहो में भरके सो गया.
 
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